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कलम से हत्या - 08

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जी खराब हो जाने से परेशान किरण को खुद पर गुस्सा आ रहा था कि वह स्वयं ही ड्राइव करके क्यों चली आई । किसी ना किसी को तो साथ नहीं आना था । अब गाडी खराब हो जाने के कारण उसे किसी से लिफ्ट लेनी होगी क्योंकि यहाँ पर तो नेटवर्क भी नहीं है कि किसी को फोन करके ही बुला ले । अंततः किरण को उम्मीद की किरण नजर आई और आती हुई कार से सहयोग के लिए इशारा करने लगी आप नीरज ने कहा रोकते ही आश्चर्य से पूछा । नीरज की कार को रोककर किरण असमंजस में पड गई । उसने तो सोचा ही नहीं था कि नीरज से फिर सामना होगा और उसे कहना पडा जमा चाहती हूँ । मुझे मालूम नहीं था कि आप हैं आप प्लीज चाहिए । किरण ने कहा इसमें क्षमा मानने वाली कौन सी बात है आपकी गाडी खराब हो गयी । शायद था कुछ ऐसा ये पर आप जाइए । नीरज जी मैं कुछ और व्यवस्था देखती हूँ । कितनी भी नाराजगी ठीक नहीं है की रंजीत वक्त आने पर तो गधी को भी बात बनाना पडता है या फिर दुश्मन के घोडे पर भी सवारी की जाती है और यदि मैं गलत नहीं हूँ तो ना तो मैं दुश्मन हूँ और ना ही गता । मतलब हाँ कितनी भी ना समझ नहीं है की रंजीत कि मुझे ये बताना पडे कि मैं आपको आपके गंतव्य तक छोडने का प्रस्ताव दे रहा हूँ । लेकिन मैं माना कि पत्रकारों से नाराजगी आपकी पर इसमें गाडी का क्या कसूर कहते हुए किरण गाडी के बाजू में बैठते हुए सीटबेल्ट लगाने लगी । मुस्कुराती हुई अच्छी लगती हैं आप धन्यवाद् कहाँ जाना है? नीरज ने पूछा किसी केस के सिलसिले में निकली थी पर अब मुझे थाने तक छोड दीजिए । किरण ने कहा यदि आपको गलत ना लगे तो मैं आपको वहाँ तक ले जा सकता हूँ जहाँ आपको जाना हैं नहीं । नीरज जी मुझे जंगल की ओर जाना और हो सकता है वहाँ मुझे ज्यादा समय लग जाए । आप तकल्लुफ बहुत करती है कि रंजीत मैं भी देखना चाहता हूँ कि जिस काम पर पहले सिर्फ पुरुषों का ही वर्चस्व रहता है उसे आपकी कुशलता से निभाती है और फिर आप की सोच के अनुरूप कार्य नहीं हुआ तो फिर मीडिया में हमारा मजाक उडाएंगे किरण की बातों में सकती थी हूँ चिरंजी प्लीज आप कुछ समय के लिए भूल जाइए कि मैं पत्रकार हूं । गुलाब के पेड पर स्थित कांटे को बोलने की बात कर रहे हैं । किरण ने कहा, मैं इस समय सिर्फ आपका ड्राइवर हूँ । आप जिधर इशारा करेंगी उधर ही चल पडूंगा । नीरज ने कहा आप जैसे करोडपति मेरे ड्राइवर किरन ने मुस्कुराते हुए कहा, बस यही से दायें मुड जाइए जंगल की ओर और प्लीज तेज चलाइए । क्या करें? नीरज जी संभाल के ये किसी आवाजाई और अपने गाडी रोक क्यों दी? पता नहीं क्या हुआ? मैं देखता हूँ कहते हुए नीरज कार से उतरकर देखते ही चीज उठा ओ माई गॉड क्या हुआ? नीरज जी जो नहीं होना था । नीरज ने माथे पर हाथ फेरते हुए कहा पेड की चोट में जाकर कार फंस गई है । मैं पीछे करता हूँ । कहकर नीरज पुना कार में बैठ गया । आई आई पीछे बहुत जगह हाथ का इशारा करते हुए किरण ने कहा अब ठीक है, आइए बैठे हैं आगे बढते हैं । नीरज के कहने पर किरण कार की ओर बढते हुए ठिठक गई और कह रही थी ये पानी का हो रहा है । ऍम पानी नहीं है तो पेट्रोल हैं । लगता है फोन से टकराकर पेट्रोल टंकी फट गई है । सॉरी करंजी हमें वापस जाना होगा, कोई बात नहीं । चलिए आप मन से हमारे साथ नहीं आ रही थी शायद नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा, ऐसी तो कोई बात नहीं पर मुझे लग रहा कि आज का दिन मेरे लिए ठीक नहीं रहा और मेरे साथ आप भी परेशान हो गए । आप की कार डाॅग पर मैं तो खुश हूँ आपकी कार खराब भी इसलिए या वापस जाने के कारण आप हमेशा नकारात्मक के सोचती है । मेरी खुशी का कारण है आपके साथ आना । मुस्कुराते हुए नीरज ने आगे कहा, आपकी मजबूरी सही पर आपने मेरे साथ सफर किया हूँ । अब क्यों रुक गए अचानक गाडी रोकने पर किरण ने पूछा हर्षो का नहीं गाडी अपने आप चुकी है । अब क्या हुआ? किरण ने पूछा देखता हूँ हो तो विकट समस्या है क्या हो गया? पेट्रोल खत्म हो गया है कि रंजीत ही भगवान क्या करेंगे । किरण ने आकाश की ओर देखते हुए कहा, अब तो पैरों को ही तकलीफ देना होगा कम से कम हाइवे तक । नीरज ने कार को लॉक करके चलती हुए कहा तो किरन भी उनके पीछे ही होली इस तरह मातम वाली खामोशी के साथ चलेंगे तो सफर अधिक कष्टप्रद हो जाएगा । नीरज ने नियताः को चीरते हुए कहा, आज का पूरा दिन व्यतीत कर के हँसी लाया है । शून्य किरण ने कहा, आप काम के अतिरिक्त कभी कुछ और नहीं सोचते हैं । क्या मुजरिम छूटना जाए? इसलिए मैंने आपके साथ आने में भी परहेज नहीं किया । हर कोई सफलता हाथ भी नहीं लगी और आपको मजाक सूचना किरण ने नाराजगी प्रकट की । मैं तो बस बुरे वक्त को खुशियों के साथ व्यतीत करने की कोशिश कर रहा हूँ । नीरज ने आगे कहा, अच्छा बताइए अम्मा कैसी अपना ये घिसापिटा सवाल करने में बहुत देर लगा दिया । आपने सही कहा आपने? आप का साथ पाकर मैं सब भूल गया । नीरज ने हाजिर जवाब दिया क्या मतलब आपको किरण चलते चलते ही रुक गई हरी आप नाराज होगी । मैंने तो मजाक किया । नीरज ने तत्पर्ता से जवाब दिया, लेकिन मुझे ऐसे बेहूदा मजाक पसंद नहीं । किरण में कदम तेज करते हुए कहा वहाँ पे आप इतना तेज चलेंगे तो मैं पीछे छूट जाऊंगा । नीरज ने दौडते हुए आगे कहा, आपका तो पेशा है पर मुझे गरीब का ख्याल रखी । देखिए मैं कैसे हाफ रहा हूँ । मेहनत के काम में शारीरिक तकलीफ तो होती हैं । नीरज जी पर चौबीस घंटे काम और कडी मेहनत कर के भी हम उतना नहीं कमा पाते हैं जितना आप एक झूठी खबर में पा लेते होंगे । किरण ने कहा, सिर्फ कडवाहट से जिंदगी बोझ बन जाएगी । किरण जी कुछ मिठास भी जरूरी है । नीरज ने कहा मेरे जीवन में चीनी अगर कम है ये तो हम पर निर्भर करता है कि जिंदगी को हम कैसे जीना चाहते हैं । जीवन है तो सुख दुःख तो लगा ही रहेगा पर इन सुख दुख को साझा करने के लिए एक साथ ही का भी होना जरूरी होता है । नीरज ने कहा हमारे ऊपर पहुंच गए और वो देखिए एक प्रकार है । अच्छा होगा कि हम एक दूसरे का गुरू बनने की जगह गंतव्य तक पहुंचने की व्यवस्था करें । किरन ने कहा

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