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Transcript

कलम से हत्या - 01

आप सुन नहीं ऍम इस कहानी का नाम है कलम से हत्या जिसे लिखा है उमेश्वरी नूतन ने और आवाज दी है सुरभि और आशुतोष ने । हलो किरण जी हैं हाँ ऍम बोल रही हूँ आपको मैं केजीएम अस्पताल से डॉक्टर सुलेमान बोल रहा हूँ जी डॉक्टर साहब कहीं क्या बात है? आज फिर किसी लडकी पर तेजाब से हमला किया गया । ये कोई मासूम फिर दरिंदगी का शिकार हो गई । नहीं किरण जी आज इन बातों के लिए नहीं बल्कि इसलिए फोन किया कि आपकी माँ, माँ, माँ को आप कैसे जानते हैं क्योंकि वह इस समय हमारे अस्पताल में हैं क्या? ऍम और अस्पताल में क्या हुआ? उन्हें घबराने की कोई बात नहीं है । बस मामूली सी चोट आई है पर ये सब हुआ कैसे? किरण जी आप परेशान ना हूँ, अस्पताला जाएंगे की की डॉक्टर साहब क्या ये सब कैसे हुआ? हाँ किरण ने माँ के पास पहुंचती ही पूछा हरे बंगली तू रोक हो रही है मुझे कुछ नहीं हुआ है । बेटा मैं बिल्कुल ठीक हूँ । वो तो एक सज्जन मुझे जब करके अस्पताल ले ही आए वरना बुजुर्गों के साथ तो ऐसी घटनाएं सामान्य बात है । लेकिन ये सब हुआ कैसे? माँ सब्जी खरीदकर लौटते समय स्कूटी पर सवार कोई स्कूली बच्चा सामने से आती कार को देखकर घबराकर मुझे तो कर मार दी तो वो ये बच्चे बिना हम कितना समझाते हैं कि नाबालिग बच्चों को बाइक ना दें पर समझते ही नहीं । और आप बीमा मैंने कितनी बार कहा की यहाँ की सडकें सुरक्षित नहीं है । देखो ना सिर्फ इतना खून बह गया और इतना अधिक चोट लगने के बाद भी कह रही हैं कि कुछ नहीं हुआ । आप को कुछ हो जाता तो मेरी बहादुर बेटी होकर तुम रो रही । किरण के आंसू सोचते हुए उसकी माँ ने आगे कहा, और तुम मेरेन बहारी जख्मों पर आंसू बाहर ही बेटा जबकि दिल पर लगे फफोले के साथ भी तो हम जिंदा है ही ना तो माँ फिर वही बात । अब आप उन बातों को बोल क्यों नहीं जाती? माँ मुझे बोलने को कहने से पहले खुद के मन को तो टटोलकर देख ले बेटा कि क्या तुम अपने पिता के अपमानित मृत्यु को एक पल के लिए भी भूल पाई हूँ । मैं बोलना चाहती हूँ वहाँ पर क्या करूँ? बोल नहीं पा रही हूँ अपने लिए नहीं तो अपनी माँ के लिए ही सही पर अब सब कुछ भूलकर उम्मीद सामान्य जीवन जीने की कोशिश करो । बेटा करती उमा बहुत कोशिश करती हूँ पर परवर कुछ नहीं । केरन तुमें सनत के बारे में भी सोचना चाहिए । अचानक सनत की बात क्यों? माँ उसने आपसे कुछ कहा है क्या? हाँ बात तो की है । उसने पर कुछ कहता नहीं । तब में उसे वक्त देना चाहिए । मतलब मेरी शिकायत की है । सनत नहीं । प्रेम में प्रेम पानी की शिकायत करना भी प्रेमी होता है । बेटा तुमने देखा नहीं । मेरे हर शिकायत पर तेरे पापा मुझ पर कैसे रीड जाया करते थे । आप लोगों की बात अलग सीमा लेकिन मुझे तो बिलकुल भी अंतर नहीं दिखता है । हमारी तरह सनक भी तुम्हारे पापा के दोस्त के बेटे हैं और तुम्हारी भी अरेंज मैरिज होने वाली है । सच कहूँ तो माता पिता के द्वारा किए गए रिश्ते में प्यार अधिक होता है । पहले शादी और फिर प्यार । पर मैं आपसे सहमत नहीं हूँ । क्यों? क्योंकि सनक मेरे पापा की तरह बिल्कुल भी नहीं है । लेकिन उसने तो मुझसे कहा है कि वह तुमसे बहुत प्यार करता है और तो मैं हमेशा खुश रखेगा पर मुझे तो ऐसा कभी महसूस नहीं हुआ । ये तुम क्या कह रही हूँ? किरन सनद से नाराज हो गया । किरन की मांग के स्वर में चिंता थी । नाराजगी का तो प्रश्न उठता ही नहीं, क्योंकि उसके लिए अपना पन या आपसी प्रेम की जरूरत होती है । ये तुम क्या कह रही हूँ कि रन हाँ सडक मुझ से प्रेम नहीं करता है? ऐसा नहीं कहते बेटा, उसने खुद मुझसे कहा है कि कहने और प्रेम करने में बहुत फर्क होता है । हाँ, किरण ने माँ की बातों को बीच में ही करते हुए आगे कहा, कई मुलाकातें हो चुकी है हमारी और मुझे कभी नहीं लगा कि हम एक दूसरे को प्रेम करते हैं । मैंने सुना है कि प्रेम स्वयं में पूर्ण होता है, उसकी मिठास निराली होती है । पर सनत से जितनी भी मुलाकात हुई है उसमें अधिकार और रॉक का कडवापन अधिक महसूस किया है । मैंने क्या मैं अंदर आ सकता हूँ? हाँ ऍम किरण ये नीरज यही जित करके मुझे अस्पताल ले आया । नीरज को आता देख किरण की माँ ने आगे कहा, नीरज! ये मेरी बेटी है किरण नमस्ते नमस्ते । नीरज के अभिवादन का जवाब देते हुए किरण ने आगे कहा, किन शब्दों में आपका धन्यवाद करूं, समझ नहीं पा रही हूँ किस बात पर नीरज ने पूछा अपने माँ को अस्पताल तो पहुंचाया ही साथ ही उपचार भी शुरू करवा दिया । वरना हमारे जमाने की भीड भरी और व्यस्त दिनचर्या में किसी के पास किसी के लिए समय कहाँ रहता है । अनुभवों के आधार पर हो सकता है आप सही हूँ पर मैं नहीं मानता कि अम्मा जी की सहायता करके मैंने कोई एहसान किया है । इसलिए धन्यवाद की कोई जरूरत नहीं है । मैंने वही किया जो हर इंसान को करना चाहिए । कैसे तब थे हमारी आपकी? नीरज ने उनके पास आकर खडे होते हुए पूछा ठीक हूँ ठीक हो कहने से काम नहीं चलेगा । डॉक्टर ने आते ही आप के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाकर देखते हुए कहा सिर से खून अधिक बह जाने के कारण कमजोरी बहुत है । इसलिए दवाई के साथ साथ खान पान का विशेष ध्यान देना होगा । इन्हें आपकी समझा ये डॉक्टर साहब मेरी तो सुनते ही नहीं है । कब से जूस लेकर बैठी हूँ पर पीने को तैयारी नहीं । किरण ने कहा सुने ही कैसे आखिर माडॅल यदि नहीं मान रही हैं तो आपको इनकी माँ बनना पडेगा की रंजीत आपकी काॅफी होगा । किरण ने कहा चल पगली कहीं की लाख पी लेती हूँ

कलम से हत्या - 02

मेरी जी आप आइए बैठे अम्मा कहाँ गई? नीरज ने इधर उधर नजदीक घुमाते हुए पूछा सत्रह नंबर कमरे में परिचय की किसी मरीज से मिलने गयी हैं । मतलब एक मरीज दूसरे मारी से मिलने गयी है । नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा, माँ मरीज नहीं रही । वो ठीक हो गई । उन्हें लेने आई हूँ । आप बैठे मैं उन्हें बुलाकर लाती हूँ । हम आपको अच्छा लग रहा है तो उन्हें मिलने दीजिए । तब तक हम बात कर लेते हैं । नीरज ने बैठे हुए कहा, लेकिन मैं तो आपको ठीक से जानती भी नहीं हूँ । फिर क्या तो आप जान लेते हैं । नीरज ने मुस्कुराते हुए आगे कहा, दरअसल मैं जुगनू नामक दैनिक पत्रिका के लिए महिला दिवस के लिए उन महिलाओं का इंटर्व्यू संकलित कर रहा हूँ जो आत्मनिर्भर होने के साथ ही उन क्षेत्रों में काम कर रही हैं जिन पर पहले सिर्फ पुरुषों का एकाधिकार रहा है । मतलब आप पत्रकार हैं । जी पत्रकारिता मेरे लिए समाजसेवा का एक माध्यम है । योग है की यथाशक्ति दबे कुचले लोगों की आवाज बनने की कोशिश में लगा रहता हूँ । बहुत खूब सच में आपके विचार प्रशंसा के योग्य है । पर माफ कीजिएगा, मैं आपकी तारीफ नहीं करूंगी क्योंकि मेरी नजर में कोई पत्रकार प्रशंसा का हकदार हो ही नहीं सकता । ये आप क्या कह रहे हैं कि रंजीत वही जो कडवा तो है पर सच छोडी । इन बातों को लीजिए । माँ भी आ गई । किरण ने अपनी बातों को बदलने की कोशिश की तुम कब आई? नीरज बस अभी पहुंचा वहाँ केरल नीरज के लिए सेब का दो माँ की बातों में अपना पन था नहीं, हमारा घर से भोजन करके निकला हूँ । आपको पूरी तरह से स्वस्थ देखकर अच्छा लगा । वैसे मैं आज सिर्फ आपसे मिलना ही नहीं बल्कि किरण जी का इंटरव्यू में लेने आया हूँ । पर मैं आप के किसी भी सवाल का जवाब देने वाली नहीं हूँ । फिर खडी हो गई केरल थोडा शांतिपूर्वक बात करो । बेटा बैठो तो सही मुझे गुस्सा मत दिलाओ माँ की आपको मालूम नहीं था कि ये महादेव जी पत्रकार मालूम था पर फिर आपने मुझे अभी तक क्यों नहीं बताया । इसलिए बेटा की तुम कहीं नीरज को बुरा भला ना कहता हूँ और मैं ये नहीं चाहती हूँ कि किसी व्यक्ति के अजान के बदले में हमने कडवी बातें कहेंगे । फिर आप बैठे अपने एहसानमंद व्यक्ति के साथ मैं अस्पताल से छुट्टी की प्रक्रिया पूरी करने जाती हूँ । चिरंजीवी सुनिए तो सही जाने दो बेटा गुस्से में वो किसी की नहीं सुनती पर तुम उसकी बातों का बुरा मत मानना । उस की ओर से मैं शमा चाहती हूँ नहीं हमारी ऐसा मत कीजिए । बच्चों के सामने बडे हाथ जोडे ये अच्छी बात नहीं है । पढा इस बात का दुख अवश्य है कि किरण जी को संभव पत्रकार शब्द से ही नाराजगी है जो कि निश्चित रूप से गलत है तो मिट्टी की समझा बेटा पर इसमें किरण की कोई गलती नहीं । पत्रकार और पत्रकारिता के प्रति हमारे मन में घृणा अकारण ही नहीं है बल्कि इसके पीछे आप जैसे कोई पत्रकार ही हैं । मतलब आप भी लेकिन क्यों? क्योंकि पत्रकारों ने ही माथुर साहब अर्थात किरण के पिता जी की हत्या की है । माथुर साहब नहीं, आप प्रोफेसर माथुर सर की बात नहीं कर रही हैं । ऍम कॉलेज के प्रिंसिपल थे और जिन्होंने पिछले दिनों आत्महत्या कर ली थी । नीरज ने पूछा हाँ हम लोग नहीं माथुर के परिवार हैं । मैं भी उनका विद्यार्थी रहा हूँ और उन्हें अपना आदर्श भी मानता था । नीरज मायूस हो गया और अब उन्ही प्रोफेसर के लिए तुम्हारे मन में गुस्सा और दिल में रहना होगी । किरण की मां की आंखों में आंसू भर आए । उनके प्रति अब मेरी क्या भावनाएं हैं जी तो मैं व्यक्त नहीं कर पाऊंगा । बढा अखबारों के माध्यम से जब उनके बारे में पढा तो मुझे आश्चर्य अवश्य हुआ कि किसी भी व्यक्ति की कथनी और करनी में कितना अंतर होता है । मैं उनसे मिलकर बात भी करना चाहता था । फिर मालूम हुआ कि उन्होंने आत्महत्या कर ली । वैसे भी इस युग में आदर्श की बातें करना जितना आसान है, उसे निभाना उतना ही मुश्किल होता है । आदर्श जैसे शब्द का उपयोग करके उस जब को गंदा क्यों कर रहे हो? किरण ने प्रवेश करते हुए कहा, देखिए की रंजीत आपको इंटर में नहीं देना है, मत दीजिए नहीं । आज सवाल जवाब के लिए आया था । अपनी बेज्जती करवाने नहीं अम्माजी और आपसे पिछले तीन दिनों में मुझे अपना पन मिला । उसके लिए धन्यवाद । नीरज बेटर रुको तो सही नहीं । हम बहुत हो गया । अब और नहीं । मेरा जमीर मुझे यहाँ नहीं रुकने देगा । तो आज मुझे मालूम पडा कि पत्रकारों का जमीन होती है । किरण में जले पर नमक छिडक दिया । देखिए किरण हो आप अपनी सोच को अपने पास ही रखे । आप किस के लिए क्या सोचती हैं इससे मुझे कोई फर्क नहीं पडता । अम्मा ने मुझे बेटा कहकर संबोधन किया था तो उन की इज्जत करते हुए मैं चुपचाप यहाँ से जा रहा हूँ, वरना बोलना मुझे भी आता है ।

कलम से हत्या - 03

किरण मेरी बात सुनो तो सही नहीं सनात मुझे कुछ नहीं सुनना है । मैं तुम से प्रेम करता हूँ कि रहे इसलिए तुम्हारी परेशानियों को बांटना चाहता हूँ इस तरह में पीछा करके तो मेरी परेशानी बात नहीं रहे । उस ना बढा रहे हो तो क्या करूँ किरण मिलना जुलना तो तुम्हें छोड ही दिया है और फोन तो उठाती नहीं हूँ तो जैसे साथ ही होने से तो अच्छा है कि मैं जीवन भर अकेली हूँ । ऐसा क्या कर दिया मैंने । किरण मेरा हाथ छोडो तुम जानती हो रहे हैं मैंने हाथ छोडने के लिए नहीं था है हाँ और साथ में ये भी जानती हूँ कि मेरे अलावा तो और भी दोस्त है तो भारी जैसी समझदार लडकी को ऐसी बातें शोभा नहीं देती है । किरण तुम जानती होगी हमें जाने की जरूरत की मुझसे मिलने के पहले भी लडकियों से तुम्हारी अब बनने मित्रता रही और तुम्हारी कथानुसार उनसे तुम धोखा खाने के बाद मुझसे दोस्ती तो मेरे दोस्त नहीं मेरा प्यार हो कर रहा हूँ । मैं भी अब तक किसी धोके में थी । तुम जैसा सोच रही हूँ ऐसा बिल्कुल नहीं है । किरण आप फ्री मेरे बचपन की दोस्त और पडोसी है । उसे मेरी मदद की जरूरत थी इसलिए मैं उसके साथ गया था । पापा की मौत के बाद तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत मुझे भी सनत जानता हूँ । पर साथ में ये भी जानता हूँ कि तुम बहुत बहादुर हो और मेरी अपनी भी हो, जिन्हें मेरी मजबूरियों की परवाह है और रोकने पर तुम्हें मना सकता हूँ । कहकर सनत ने किरण का हाथ थाम लिया । क्या कर रहे वो लोग देख रहे हैं तो चलो कई कॉफी पीने चलते हैं । सडक ने तपाक से कहा नहीं मेरा इंतजार कर रही होगी, मुझे घर जाना है ।

कलम से हत्या - 04

आज हमारी छुट्टी का आखिरी दिन है । चलो किरन मंदिर चलते हैं । इतने दुख और अपमान के बाद भी उस पत्थर की मूरत के सामने झुकना ही चाहते हैं । तो चली मैं आपका साथ देने जरूर जाऊंगी । भगवान के लिए ऐसी बेकार की बातें नहीं करते बेटा । अच्छे और खराब की परिभाषा तय करने वाले अपने भगवान से आज पूछी लेना मैं की नहीं कि का रास्ता खाई में जाकर ही क्यों खत्म होता है । अब यहाँ क्यों रुक गई? मंदिर के सीढी पर किरण को रूप से देख उसकी माँ ने पूछा समझाओ हाँ मैं यही थी । भगवान के दर पर आकर बिना दर्शन की लौटना ठीक नहीं होता है । बेटा चल रानी बेटी की तरह चुप चाप मेरे पीछे हो । आपकी यही बात मुझे अच्छी नहीं लगती है । मैं अपनी बात हर हाल में मनवा ही लेती हूँ । कहती हुई किरण माँ के पीछे चलने लगी । बातों बातों में मैं तो अगर बत्ती पकडना बोली गई भगवान की मूरत के सामने पूजा करती हुई माने कहा आप परेशान ना हो, मैं भी बाहर जा कर ले आती हूँ । किरण ने पूजा की थाली माँ को देते हुए कहा जो कुछ भी हम ईश्वर को अर्पित करते हैं, सब नहीं कर तो दिया हुआ है । मच्छी वैसे भी भगवान के दर पर श्रद्धा से माथा टेकना ही सबसे बडी पूजा है । फिर भी यदि अगर बत्ती जलाना ही है तो ये लीजिए । नीरज ने अगर बत्ती माँ की ओर बढाते हुए कहा नीरज तो कहते हुए किरण की माँ खुश होते हुए अगरबत्ती लेने के लिए हाथ बढाने लगी । माँ किरण ने माँ को हाथों की शाहरुख से अगर बत्ती का पैकेट लेने से मना किया, जवाब भी माने मुस्कुरा दिया और अगर बत्ती लेते हुए नीरज से आगे कहा पूजा की सामग्री है पैसा लेना होगा ठीक है हाँ, पैसे ले लूंगा । फिलहाल तो पूजा पर ध्यान दीजिए । कहते हुए नीरज बाहर निकल गया । आप जा रही है परमाणु तो कहा है कि आपको पैसा वो मैं मंदिर के बाहर ले लूंगा । आप लोग आराम से पूजा कीजिए । किरण तुम पुजारी जी से प्रसाद लेकर आओ । मैं बाहर तुम्हारा इंतजार करेंगे । टी कॅश किरन की माँ मंदिर की सीढी पर ही नीरज के बाजू में बैठते हुए कहा की रंजीत तो आई हैं वह तो मेरी जिद के कारण मतलब उन्हें ईश्वर पर भी विश्वास नहीं है । नीरज ने पूछा दो साल पहले तक था पर अब नहीं फॅालोइंग बातों को उस दिन अस्पताल में किरण द्वारा किए गए दुर्व्यवहार के लिए मैं तुमसे क्षमा प्रार्थी हूँ । आप फिर से वही बात कर रही हैं अम्मा मैंने पहले भी कहा है कि बडे हम से क्षमा की बात करेंगे, मुझे बिलकुल पसंद नहीं है । नीरज ने कहा मेरी किरण दिल की बुरी नहीं, वो जिस विभाग में काम करती है वो तो तुम पत्रकारों का भी कार्य क्षेत्र होता है । इसलिए मेरा निवेदन है कि किरण के लिए मन में कोई पिछली बातों को मत रखना । ये आप क्या कह रही है? हाँ जी, इस घर पर खडे होकर तो सिर्फ उस जगह पिता के सामने ही हाथ जोडना है । कहते हुए नीरज ने माँ के हाथों को नीचे करते हुए आगे कहा बेटे के सामने अम्मा विनती नहीं करते हैं । रही बात अस्पताल वाली तो हाँ उस समय मुझे बुरा लगा था पर अब किरण जी की बातों पर चिंतन कर रहा हूँ । ऐसा चिंतन यही कि आपने जिस काम को मैं समाज सेवा करने का माध्यम समझता हूँ उसे किसी ने गाली क्यों दिया? इतना तो मैं भी जानता हूँ कि सामान्यता मनुष्यों की तरह हर पत्रकार की अलग अलग सोच होती है । पर इसका मतलब ये नहीं कि पत्रकारिता की मूल भावना ही प्रभावित हो, पर सच कहूँ तो किरण जी ने मुझे इस बात पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि पत्रकारिता का क्या कोई ऐसा स्वरूप भी है जिससे लोग नफरत करते हैं और इसीलिए मैं आप लोगों से मिलना भी चाहता था । ये तो अच्छा हुआ कि हमारे यहाँ मुलाकात हो गई, नहीं तो आज मैं किरण जी से मिलने थाने जाने वाला था । अच्छा हुआ कि नहीं गए और कभी थाने जाना भी नहीं । मैंने कहा क्यों? नीरज ने पूछा क्योंकि तुमसे ही नहीं बल्कि किसी भी पत्रकार से बात करना किरण को पसंद नहीं है । मैंने कहा ये तो गलत है । मैं जानती हूँ पर मैं किरण को कुछ कह भी नहीं सकती । मान ने आगे कहा तो हम से मिलना चाहते थे । माथुर सर के बारे में कुछ जानना चाहता हूँ । नीरज ने आगे कहा, मैं उलझन में हूँ और मेरे मन में उठते सवालों का जवाब ही मेरी उलझन को सुलझा सकता हैं और मुझे विश्वास है कि मेरे सवालों का जवाब आप अवश्य देंगे । चाहे वो बात कितनी भी गन्दी और कडवी ही क्यों ना हो तो मैं ये कैसे सोच लिया कि माथुर साहब से संबंधित बातें गंदी भी हो सकती हैं । उस दिन तो नहीं कह रहे थे ना बेटा कि वे तुम्हारे आदर्श थी । फिर अपने ही दिल से पूछो की क्या वे कुछ गलत कर सकते हैं? समाचारपत्रों में जो भी माथुर सर के बारे में पढा था उस से मन बहुत व्यथित है । पर उस दिन किरण जी के द्वारा पत्रकारों के प्रति आक्रोश को देख कर और जितना मैं माथुर सर को जानता हूँ, उसके बाद फिर प्रिंट मीडिया एवं अखबारों की बातों ने मुझे उलझा दिया है । तभी तो आप लोगों से संपर्क करने की कोशिश कर रहा था और संयोग देखिए आप से मुलाकात भी हो गई तो तुम अपने माथुर सर के बारे में क्या सोचते हो? नीरज कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ । जब भी एक और मान सकता है तो दूसरा पहलू ज्यादा सही लगने लगता है । नीरज ने कहा मतलब अब मात्र साहब तुम्हारे आदर्श नहीं है । माँ की आवाज में गंभीरता थी, ऐसा तो नहीं है पर तो मैं आज माथुर सर को आदर्श मानने पर पछतावा नहीं तो तुम सही हो नीरज मानने का । पर हमारे साथ विडंबना है की जो हकीकत है वो सबको हमारे द्वारा रचाई गई कहानी लगती है और जो झूठी बातें परोसी गई हैं, वहीं जमाने के लिए सच तो हो सकता है । तो में भी ऐसा ही लगे क्योंकि इस घटना ने हमें इतना तो जरूर सिखा दिया है कि झूठ की चमक इतना आकर्षक होती है कि उसके चकाचौंध में सच लुप्त होने लगता है । आप मेरी ओर से निश्चिंत रहिए । पत्रकार होने के नाते सच और झूठ की परख है । मुझे रात में छुपी हुई चिंगारी जिस तरह हवा लगते ही सुलग उठती है, उसी तरह नीरज के द्वारा पत्रकार होने के कारण सच को परखने का दावा करने पर दीवार कि वोट में खडी किरण का दिल दादा कोठा । उसने कहा, ऐसे ही सच्चाई पर उसने का दावा करने वाले पत्रकारों के हाथ मेरे पापा के खून से रंगे हुए हैं । उसके बारे में क्या करेंगे आप? माथुर सर का खून लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट तो मैंने स्वयं देखी है, जिसमें स्पष्ट रूप से आत्महत्या लिखी हुई है । जी नहीं, पापा ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उनकी हत्या की गई है । हत्या हाँ आप जैसे इमरान पत्रकारों ने मिलकर पापा की हत्या की है । कलम से हत्या अभी अभी आप कह रहे थे कि पत्रकार होने के कारण आप में सच्चाई जानने की क्षमता है आप पत्रकारों में ये गुण होता तो मेरे पापा के बारे में आपके अखबार जुगनू सहित अधिकांश समाचारपत्रों में पापा के बारे में जो झूठी खबर छपी थी वो नहीं होता और ना ही मेरी माँ का सिंदूर उजडता । पर आप लोगों को इन सब से क्या मतलब? आप लोगों को तो चाहिए अखबार के लिए सर्वाधिक चटपटी खबरें फिर चाहे वो खबरें झूठी क्यों हो? ऐसा नहीं है कि रणजी हम लोग जो भी खबरें छापते हैं, पहले उसके तह तक जाने का प्रयास होता है । वही तो मैं कह रही हूँ । पत्रकार महोदय की प्रयास करते हैं पर न पहुंच पाए तो सबसे पहले खबर पहुंचाने की जल्दी में समझौता भी कर लेते हैं । क्योंकि आपके लिए खबरें था अपना तो रोज का काम होता हूँ । फिर उन खबरों से किसी का घरों डरता है तो जुडे उसके बारे में आप की सोचेंगे । आप क्या कहना चाह रही? किरन जी मैं समझ नहीं पा रहा हूँ और कभी समझेंगे भी नहीं नहीं रंजी क्योंकि दर्द का एहसास तो तब होता है जब खुद को चोट पहुंचती । वैसे भी चाहती किसकी ओर क्यों छलनी हुई? इस बात का पता किसी बंदूक को कैसे हो सकता है । ये तो बंदूक चलाने वाले को सोचना चाहिए । आप लोगों के लिए समाचारपत्रों की लोकप्रियता ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है । फिर किसी की इज्जत या जीवन की परवाह क्यों करेंगे आप लोग? ऐसा नहीं होता है की रंजीत आप अवश्य ही किसी गलतफहमी की शिकार हुई है । आपको भी पहले अपने स्तर पर वास्तविकता का पता करना चाहिए । नीरज ने कहा हाँ, वही गलत फहमी तो सिर्फ नहीं हो सकती है क्योंकि हम इंसान जो ठहरे आप लोग तो भगवान है इसलिए जो लिख देते हैं वही सबसे बडा सच होता है । हम इंसानों की किस्मत लिखने वाले बन गए । आप लोग इस तरह व्यंग के बाढ मत चलाइए । किरण जी जो कहना है सीधे सीधे और साफ शब्दों में कही । तो सुनिये समाजसेवा और देश सेवा कर चोला पहनकर ब्लैकमेलिंग का जो धंधा आप लोग खेल रहे हैं इसे बंद कर दीजिए और अपने परिवार को बहुत उत्सुक साधन देने का कोई दूसरा और ईमानदारी का रास्ता ढूंढ ले वरना कोई हम जैसा आप लोगों का सताया हुआ व्यक्ति किसी दिन अपना आपा को बैठा तो आप लोगों के लिए बहुत मुश्किल हो जाएगी । भगवान के लिए जिंदगियों से खेलने का ये गोरखधंधा बंद कर दो और हम गरीबों को भी जीने दें । कहते हुए किरण आसुओं को रोक नहीं पता और आगे बढ गई । किरण जी ने इतना कुछ कह दिया की अब तो आपको बताना ही होगा । हाँ कि माथुर सर ने आत्महत्या क्यों कि ठीक है? नीरज आज मैं तुम्हें माथुर साहब की वह सारी बातें जरूर बताउंगी जो सच है । पर हमारी सच्चाई पर विश्वास करना या न करना तुम पर है । माथुर साहब उस दिन फिर तो आप आते रहना माँ मुझे खाने जाना है, मैं जा रही हूँ लेकिन आप कुछ बताना शुरू करें । इससे पहले आपको याद दिला दूँ की ये महोदय भी पत्रकार ही हैं जिन्हें सच झूठ से नहीं बल्कि सिर्फ अखबारों के लिए खबर से मतलब होता है कहते हुए किरण जाने लगी । किरन की बातों का बुरा नहीं मानना । बेटा किरण के जाते ही उसकी माँ ने कहा तुम्हारी इसी सोच के कारण मेरा मन कर रहा है की तो मैं सच बताना चाहिए । किरण का ये चिडचिडापन सुभ आवत नहीं है बल्कि परिस्थितियों ने उसे बदल दिया है । किसी के भी आक्रोश को मुस्कुराते हुए झेल जाने वाली मेरी बेटी उस वज्रपात को नहीं सह पाई जो हमारे ऊपर उसके पापा के अकस्मात मौत के रूप में गिरा हूँ । एक के बाद एक माथुर साहब और मनीषा की अचानक हुई मौत ने हमें स्तब्ध कर दिया है । इसका सबसे ज्यादा असर किरण के मन पर पड रहा है । हस्ती खेलती मेरी बच्ची का जीवन तो जैसे तूफानों से गिर गया है । माथुर और मैंने हमेशा किरण को आदर्श जीवन की राह दिखाई । विषम परिस्थितियों में भी सच के साथ चलने की प्रेरणा देने वाले उनके पापा को चंद रुपयों के लिए कुछ लोगों ने बदनामी की ऐसी गहरी खाई में धकेल दिया जहाँ से वे उबर ही नहीं पाते और यही किरन की सबसे बडी पी रहा है । मैं तो उसे समझाते समझाते थक गई । कहते हुए किरण की माँ वासियों को लुढकने से पहले ही आंचल में समेटने लगी । नीरज चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाया और कुछ देर तक गहरी खामोशी छाई रही । फिर किरन की माँ ही कहना शुरू किया करीब साल भर पहले की बात है । हमारे घर में खुशियां ही खुशियां थी । पूरे शहर में प्रोफेसर साहब का मान सम्मान था । कॉलेज स्टाफ में वे सब की प्रिया होने के साथ साथ महाविद्यालय परिवार के चहेते भी थी । सभी वर्गों से अच्छे तालमेल होने के कारण इस छोटे से शहर में उनकी लोकप्रियता इतनी अधिक रही कि उनके करीबी लोग नौकरी से इस्तीफा देकर चुनाव लडने की सलाह देने लगे थे । बहुत सारी अच्छाइयों के साथ जून में ये बुराई भी थी कि वे खुले दिल के व्यक्ति थे और सबको अपने जैसे ही समझते थे । लोग क्या कहेंगे इस बात की परवाह उन्होंने कभी नहीं की और भावुकता एवं दयालु पंथों ने विरासत में मिली थी । इसी बीच कॉलेज में एक नई महिला प्रोफेसर की नियुक्ति हूँ और वह महिला जिसका नाम मनीषा पटेल था, विधवा थी और अपने सास के साथ हमारे घर पर ही ऊपर वाले हिस्से में किराए पर रहने लगी । संयोग से तीन महाबाद ही रक्षा बंधन का पवित्र त्यौहार आया और मनीषा ने माथुर साहब की कलाई पर रेशम की डोर बांध कर भाई बहन के रिश्ते में बंद गई । और तब संबंधों की घनिष्ठता में भीगी पलकों के साथ मनीषा ने अपना दुखडा सुनाया कि इस भरी दुनिया में सास और एक विवाहित मेहनत के अलावा उनका कोई नहीं । दो साल पहले कार दुर्घटना में उसके माँ पिताजी पति हुआ । तीन साल की बेटी की मृत्यु हो गई थी । जब की दुर्घटना के समय उसी कार में सवार होते हुए भी उसे जीवन दान मिल गया और तब से उनकी सांस की नजरों में वो अपने पति को खा जाने वाली डायन बन गई और अब साथ रहने वाली उसकी सास कम जासूस ज्यादा थी हमारे सामने भी जब तक उसकी सास मनीषा को गंदे उन्हाने देने में पीछे नहीं रहती थी । इस तरह दुखियारी मनीषा अपने अच्छे स्वभाव के कारण हमारे परिवार के सदस्य की तरह हो गई । किरण उस समय पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में थी जब छुट्टियों में आई तो वो भी मनीषा से बहुत प्रभावित हूँ । इन्हें अपने पन्नो नजदीकियों के कारण अब मनीषा टैक्सी की जगह मात्र साहब के साथ ही कॉलेज आना जाना करने लगी और इस तरह मनीषा से हमारी नजदीक किया । जगजाहिर तो हुई लोगों की नजरों में भी चढ नहीं लगी । भाई बहन के पवित्र रिश्तों को छोटी सोचने कलंकित रूप दे दिया । कुछ लोगों ने तो दबी जुबान में यहाँ तक कह दिया कि प्रॉफेसर माथुर ने अपनी पत्नी की नजरों में धूल झोकने के लिए मनीषा से राखी बनवाई जबकि पवित्र बंधन की आड में रंगरेलियां मनाई जा रही है । मनीषा का किराए पर रहने वाली बात को भी औपचारिक बताते हुए कुछ संकीर्ण मानसिकता के लोग मानवता के रिश्तों को तार तार करते हुए वासनाओं के दलदल में एक दिए मैंने लोकापवाद की ओर जमा तो साहब का ध्यानाकर्षण किया तो उन्होंने कहा तुम्हारी यही बात मुझे बिलकुल भी अच्छी नहीं लगती कि लोग क्या कह रहे हैं । उस पर झट से विश्वास करने लगती होगी क्या तुम मुझ पर भरोसा नहीं है? ऐसी बात नहीं है । जी पर कभी कभी लोग अपवाद पर ध्यान नहीं देना भी जीवन पर भारी पड जाता है । इसलिए लोगों का क्या है? उनका तो कम ही है कुछ भी कहते रहना विषेशकर वे लोग जिनके पास कोई काम नहीं रहता है । इसीलिए तो खाली दिमाग को शैतान का घर कहा जाता है कि हाँ कर मेरी बातों को फसते हुए टाल दिया । एक दिन कॉलेज से आने के बाद रोज की तरह मैं मात्र आपको चाय के साथ नमकीन पर उसका काम वाली के साथ रसोई में चली गई और आधे घंटे बाद जब मैं प्रोफेसर साहब के पास बातचीत के लिए गए तो अभी तक मेरे द्वारा पडोसी हुई सामग्री जैसे का तैसा रखा दे । मैंने पूछा अरे आप की चाय तो ठंडी हो कि आपने पी यानी जवाब नहीं मिलने पर उनके कंधे को पकडकर जब जोडते हुए मैंने पुना कहाँ क्या हुआ मैं आपसे पूछ रही हूँ । हाँ, तो मैं कुछ कहा की सोच में डूबे हो । कॉलेज में कोई बात हुई है क्या? मैंने पूछा प्रोफेसर ने इतना ही कहा आप बहुत परेशान लग रहे हैं । बताइए क्या हुआ हो? कोई खास नहीं । ऐसे कैसे रहने दो । बहुत परेशान लग रहे हैं । तुम्हारी ऐसी जिद करना अच्छा नहीं लगता है मुझे मुझे डाटते हुए ॅ आगे कहा किसी बात के लिए पीछे पड जाती हूँ । जाने बिना पीछा ही नहीं छोडती हूँ और छोडूंगी भी नहीं । आपकी नाराजगी सह सकती हूँ पर मैं आपको कुछ छुपाने नहीं दूंगी । आपका ये परेशान चेहरा मुझे डर आ रहा है । मैंने कहा ऑफिस की बातें में वहीं छोड आता हूँ । पर आज बात कुछ ऐसी हो गई कि मन व्यथित हो गया । वहीं तो मैं जानना चाहती हूँ कि हाँ बताई तो रहा हूँ परेशानी में खुद के बालों पर उंगली घुमाते हुए प्रोफेसर साहब ने आगे कहा, आज कुछ पत्रकार आए थे । कह रहे थे कि पुस्तकालय के लिए सात लाख की पुस्तकें जो खरीदी गई हैं उस पर आपने जो कमीशन का खेल खेला है वो हमें सब पता है । मैंने कहा जब कमिशनखोरी हुई नहीं तो हम जानते थे कि आपका यही जवाब होगा एक पत्रकार ने आगे का जब आरटीआई के तहत आप लोगों को जवाब मिलना ही है तो यहाँ आए हैं । इसलिए प्रोफेसर साहब की हम आपकी बहुत इज्जत करते हैं । कमाल करते हुए बेईमान कहना इज्जत करना होता है क्या? आप तो नाराज हो गए सर चलिए हम मुद्दे पर आते हैं और सौदा कर लेते हैं । उनमें से एक ने कहा कैसा सौदा? मैंने पूछा इस तरह ना समझ बनकर बातें करेंगे तो बात बिगड सकती है सर । दूसरे ने चमचागिरी करते हुए आगे कहा, मैं लोगों को यहाँ लेकर आया हूँ कि कुछ लिखने से पहले आप से बात कर लेते हैं तो बात करूँ किसने रोका आपको? माथुर सर नहीं कहा आजकल तो भ्रष्टाचार शिष्टाचार बन चुका है । सर पर अकेले खाएंगे तो पकडे जा सकते हैं सर जी फिर वही बात ऐसी बातें ना मुझे करनी है और नहीं सुननी ऍम और कहने लगी आप लोग ये स्पष्ट जानने की पुस्तक की खरीदी समिति के माध्यम से पारदर्शिता के साथ हुई है । कहीं कोई कमीशन नहीं लिया गया है । समिति बनाने की औपचारिकता तो सभी निभाते हैं । सर या तो नाममात्र की होती है या फिर पूरी समिति ही मिल बांटकर खाती है । मैं तो कहता हूँ कि समिति बनाने की औपचारिकता नहीं होनी चाहिए । एक पत्रकार ने कहा क्योंकि अब समिति से भी क्यों परेशानी होने लगी? माथुर नहीं पूछा परेशानी हमें नहीं है । सर संस्था के दृष्टिकोण से उचित नहीं है क्योंकि जब कमीशन अधिक लोगों के बीच बढेगा तो सामान की गुणवत्ता पर भी तो फर्क पडेगा ही । उस पत्रकार ने बेशर्मी से कहा आप लोग स्वयं को पत्रकार कहते हो, नेताओं पर तो पहले से ही भ्रष्टाचार की होड लगी हुई है । उस पर पत्रकारिता के नाम पर तुम लोग भी हिस्सेदारी की बात कहकर कमिशनखोरी को बढावा दोगे तो इस देश का क्या होगा? प्रोफेसर ने कहा देश की चिंता बाद में कर लेना । सहर इस समय अपनी बात की थी । खुद को पत्रकार कहकर पत्रकारिता को क्यों बदनाम कर रहे हो और कान खोलकर सुन लोग ये ब्लैकमेलिंग का धंदा कहीं और जाकर करो । मेरे कॉलेज में कोई कमिशनखोरी नहीं होती है और फिर आपने तो आरटीआई लगवाइए ना । तो जवाब आने तो गलत फहमी दूर हो जाएगी । हिस्सेदारी नहीं देना चाहते तो कोई बात नहीं । हम दोनों को दस दस हजार रुपया दे दीजिए । हमारा समय खराब न करें । एक ने निर्लज्जतापूर्वक कहा समय मेरा खराब कर रहे हो । तुम लोग निकल जाऊँ, मेरे कमरे से छोडी भी । उनमें कार की बातों को भूल जाइए । उनकी गन्दी सोच के कारण आपकी उतना मन खराब कर रहे हैं । वर्तमान में जो बातें प्रचलन में हैं उसके अनुसार उन लोगों ने आपको भी मेरे समझाने के बाद किरण कि पापा उन बातों को भूलकर सेमिनार की तैयारी में जुट गए । पर उनकी सत्यम शिवम सुंदरम की इस प्रवृत्ति ने कुछ मानसिकता से ग्रसित लोगों का मनोबल तोडा नहीं, बल्कि झूठे अहंकार में डूबे उस लोगों की धारणा ने विभत्स रूप धारण कर लिया था और प्रोफेसर साहब को सबक सिखाने की जिद में उस कार्यक्रम में वे लोग भी वहाँ चले गए जहां उनका व्याख्यान चल रहा था, जिसमें उन्होंने गुलेरीजी की उनसे कहा था का जिक्र करते हुए निस्वार्थ प्रेम को परिभाषित करने की कोशिश की और यही व्याख्यान हमारे लिए मुसीबत बन गई । कैसी मुसीबत अम्माजी नीरज ने पूछा । कार्यक्रम के अंत में उपस् थित पत्रकारों द्वारा अन्य लोगों के साथ साथ माथुरजी से भी कुछ सवाल जवाब होने लगी । इसी बीच माथुरजी से कॉलेज से मिलने गए पत्रकारों में से एक ने पूछा कि जब उसने कहा था प्रेम की प्रकाष्ठा की बात आप करते हैं आप पूछना क्या जा रहे हैं, मैं समझ नहीं पाया । माथुर साहब की इस जवाब पर गुप्टिल, हसी के साथ दूसरे ने कहा आप बखूबी समझ रहे हैं प्रोफेसर कि हम किसके बारे में कह रहे हैं । फिर भी आप की मासूमियत भरी अनभिज्ञता को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट कर देता हूँ कि ये सवाल मनीषा मैडम और आपके प्रेम संबंधों को लेकर उठाया गया है । इस तरह के सवाल करने से पहले आप लोगों को संबंधों की प्रतिष्ठा के बारे में सोचना चाहिए । मनीषा मेरी छोटी बहन की तरह और उनसे हमारे पारिवारिक संबंध है । हम भी वही कह रहे हैं कि मनीषा जी देखिए मेरे परिवार या उससे संबंधित बातें मेरा व्यक्तिगत मामला है तो आप कुछ और सवाल कर सकते हैं । सवाल करने का हक हमें सवाल उचित है या नहीं, यह बात अब हम पर छोडने तो ठीक रहेगा । प्रोफेसर साहब इस तरह आप हमारे सवालों से बचने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? जी नहीं, मैं आपके किसी सवाल से भाग नहीं रहा हूँ । बस व्यक्तिगत प्रश्न का उत्तर नहीं देना चाहता हूँ । जब आपके व्याख्यान समाज को मार्गदर्शन देने वाला होता है तो आपके व्यक्तित्व का भी तो समाज पर प्रभाव पडेगा । सर इसलिए मैं समझता हूँ कि समाज के सामने आपकी वह व्यक्तिगत बातें भी आनी चाहिए जिसका गलत प्रभाव समाज में पड सकता है । ऐसी कौन सी बात है जिसका जिक्र होना चाहिए । उस पत्रकार को तो जैसे माथुर साहब के इसी प्रश्न का इंतजार था । उसने कहा मनीषा मैडम और आपके ना जाए संबंध । ये बेशक निजी मामला हो सकता है, पर आप लोगों का इस संबंध और उसका खुलापन, कॉलेज की छात्र छात्राएं जो की युवा हैं, उनके मन पर और दिलो दिमाग पर बुरा असर डालेगा, ऐसा कुछ नहीं होगा । कैसे नहीं होगा सर? जब की आपकी प्रेम के किसी घर की दीवार लांघकर गली मोहल्ले से होते हुए आप दोनों के कार्यस्थल तक पहुंच गए हैं तो क्या आप लोगों को अपने रिश्तों पर पुनर्विचार नहीं करना चाहिए या फिर रिश्ता रखना ही है तो इस रिश्ते को कोई नाम ही दे देते हैं । मुझे आजकल तुम जैसे बच्चों की सोच और बेच जब सब कुछ कह देने की बेशर्मी को अपनी क्षमता का नाम देकर कुछ भी पूछना और उसका उत्तर जानने को अपना अधिकार समझने पर मुझे तरह चाहता है । बात को टाल ये नहीं प्रोफेसर हूँ । हम अपने वाजिफ सवाल का जवाब मांग रहें आपसे सलाह नहीं । उस पत्रकार ने हद पार करते हुए कहा, तो ठीक है, मुझे आप के किसी भी सवाल का कोई जवाब नहीं देना है । कहते हुए माथुर जी बाहर निकल गए । लेकिन वह दोनों पत्रकार प्रोफेसर साहब का पीछा करते हुए घर तक आ गए और मुझसे कहने लगे कि माथुर डर से का ये कि हम से बात कर ले । इसी में सब की बनाई है । मैं कुछ जवाब दे पा । तीस से पहले मनीषा का आना हुआ और वे लोग उसे रोककर पूछने लगे । मनीषा कुछ कहती इस से पहले ही मात्र साहब ने आते ही कहा मनीषा तुम भी डर जाते हैं और आप लोगों को मेरी चेतावनी है कि मेरे निजी मामले में दखलंदाजी ना करें । ऍम सुनिए तो सही । तथाकथित पत्रकार लोग कहते रहे कि प्रोफेसर साहब सुनिए तो सही और उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया । इधर मनीषा की सास ने पूरे घर को सिर पर उठा लिया और कहने लगी मैंने तुम्हें बार बार कहा कि तुम्हारे ये लक्षण मुझे पसंद नहीं है । तब तो तुमने भाई बहन के रिश्ते की ओट में अपने गुनाह को छुपा लिया । लेकिन अब जब कि तुम्हारे रंगरेलियों की जानकारी पत्रकारों तक पहुंच चुकी है तो रोते बैठी हूँ । मैंने तुमसे पहले कहा था कि यदि फिर से घर बसाना चाहूँ तो हम तुम्हारा साथ देंगे । लेकिन पिता की उम्र के आदमी के साथ चीन आप जो समझ रही है, ऐसा कुछ नहीं है । तुम्हारे इनासियो में मैं बहने वाली नहीं । रोती हुई मनीषा को उसकी सास ने आगे कहा, अब जो सफाई देना हो अपने माँ पिताजी के सामने ही देना । मैं उन्हें बुला देती हूँ । उन्हें भी तो पता चले कि उनकी विधवा बेटी यहाँ क्या क्या गुल खिला रही है । नई माॅस्को क्यू बेकार में परेशान कर रही है । वो अपने माता पिता की परेशानी का बहुत ख्याल तो और मेरे सामने खुलेआम बेशर्मी कर रही हूँ । मनीषा की सास ने कहा, जैसा सोच रही ऐसा तो कुछ भी नहीं है । मनीषा ने कहा तो फिर पत्रकार लोग तुम्हारे चरित्र पर प्रश्न क्यों कर रहे थे? मनीषा की सांस ने पूछा । मैंने बताया तो की उन्हें कोई गलतफहमी हुई है? मनीषा ने जवाब दिया तो तुम तो सच बता सकती थी उन्हें । मनीषा की सास ने कहा वे लोग मान नहीं रहे तो मैं क्या कर सकती हूँ । मनीषा की भी सहनशक्ति जवाब देने लगी थी तो तुमने मुझे बेवकूफ संजय तुम पर भरोसा कर लुंगी पत्रकार लोग तुम्हारे संबंधों पर शंका कर रहे हैं । इसके पीछे कुछ तो कारण होगा । जहाँ तक मैं जानती हूँ कोई भी पत्रकार जब कोई बात कहता है तो जिम्मेदारी के साथ ही कहता है । मनीषा की सास ने कहा आप कहना क्या चाहती है स्पष्ट कहीं मनीषा की सास तो ऐसे ही सवाल की राह देख रही थी । उसने कहा अब कहने को कुछ रह किया गया है । सरेआम एक अधीर आदमी के साथ मुंह काला कर दी थी, रही है और मेरे सामने सती सावित्री बनने का नाटक करती है । इस तरह मनीषा को उसके साथ ने बहुत बुरा भला कहा । माथुर साहब और मेरे समझाने पर भी उन्हें पत्रकारों की बातों पर ही भरोसा रहा हूँ और उसके चरित्र पर लगे दाग को परिवार और समाज के सामने ले जाने की धमकी देती रही । अनंतता रोती बिलखती मनीषा किसी प्रकार की सफाई देना छोड कमरे में खुद को बंद करके अवसाद की स्थिति में खुद के दुपट्टे से पंखे से लटक किरण की माँ की आंखें बाहर आने से वे कुछ देर के लिए कुछ भी बोल पाने में समर्थ नहीं रही । मैं भी चाहती हूँ कि तुम्हें सभी बातें बताऊँ । कहते हुए किरन की माँ ने आगे कहा, मनीषा की आत्महत्या ने जैसे झूठ पर सच की मुहर लगा दी और वे पत्रकार जब तक महत्व साहब से आपने तथा कथित बीजेपी का बदला लेने के लिए मौके की तलाश कर रहे थे, उन्हें अवसर मिल गया । दूसरे दिन ही एक आदर्शवादी प्रोफेसर ने किया मासूम लडकी का पहले शोषण और फिर की आत्महत्या के लिए मजबूर । इसी तरह मिलते जुलते शीर्षकों के साथ कुछ अखबारों में खबरें छपने से पुलिस भी हरकत में आई और पूछताछ के लिए माथुर साहब को थाने ले जाया गया है । मैंने पुलिस वालों के समक्ष सच बताने की कोशिश की तो उन्होंने मुझे डांटते हुए कहा, ये दिया पूरा सब जानती तो अपने पति की तरफ दारी नहीं करती हैं और जिस सच की बात कह रही हूँ उसके बारे में पत्रकारों को बताना था । हमने बताया था सर पर पत्रकारों ने हमारी बात नहीं मानी । मैंने गिडगिडाया आपके पति के कारण एक महिला की जान चली गई है और आप मामले पर लीपापोती करने में लगी हुई है । यदि पत्रकारों ने आप की बात नहीं सुनी तो इसके पीछे कुछ तो कारण रहा होगा । पुलिस ने कहा और फिर प्रोफेसर साहब को थाने नहीं ले जाने के लिए मैंने पुलिस से मिनती की ओर दो पत्रकारों द्वारा पिछले कुछ दिनों से ब्लैक मेल किए जाने की बात भी बताई पर किसी ने हमारी एक न सुनी । फिर प्रोफेसर सात के मित्रों के पास जाकर मैंने सहायता मांगी तो सब ने यही कहा और तब मैं अकेली ये थाने गई । पर पुलिस ने कहा कि जब तक मनीषा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक प्रोफेसर को पुलिस कस्टडी में ही रखने की बात सुनकर मैं घर लौट आई । दूसरे दिन नाश्ता लेकर जब थाना गई तो पता चला कि माथुर साहब के किसी मित्र की जमानत पर उन्हें रात में ही छोड दिया गया था । अब तक किरन भी आ चुकी थी और हम दोनों माँ बेटी मिलकर सारा दिन रिश्तेदारों मित्रों से माथुर साहब के बारे में पूछते रहे पर उन्हें ढूंढ नहीं पाए । उसी दिन शाम को एक मैसेज वायरल हुआ कि ट्रेन की पटरी के पास एक लाश पडी है जिसका सर दर्द से अलग हो चुका है । किरण के मोबाइल पर इस मैसेज को देखकर हमारे होश उड गए । माथुर साहब भी थे कहते हुए किरण की माँ से सब पडी सॉरी अम्मा, मैंने आपको रुला दिया । नीरज ने कहा तुम की हो सौरी बोल रहे बेटा ये आज तो हमारे साथ ही बन चुके हैं । गाल पर बहे आंसुओं को समझाते हुए किरण की माँ ने आगे कहा माथुर साहब की जेब में हमें एक पत्र मिला जिसमें मुझे संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा था मुझे क्षमा करना किरण की मां मैं हार गया । मैं इस भ्रष्ट दुनिया के लायक नहीं होगा । सोचा था जिस तरह अब तक सच्चाई की ताकत से झूठ का मुँह काला कर के आया हूँ, वैसे ही इस बार भी सब कुछ ठीक हो जाएगा । लेकिन इस बार मुकाबला झूठ से नहीं बल्कि छोटी दुनिया से था जहाँ पर पैसा ही सब कुछ है । चंद रुपयों के लिए मुझे ब्लैक मेल करने वाले पत्रकारों से मैं लड लेता हूँ पर मनीषा की आत्महत्या ने मुझे किसी लडाई के लायक ही नहीं छोडा । पैसे उस बेचारी की भी गलती नहीं है । पवित्र रिश्ते पर कालिक और उस पर अपनों का भी वह वह सहन नहीं कर पाई । थाने से निकलने के बाद मैं घर की ओर ही बढ रहा था तभी उन्हें पत्रकारों से फिर मेरा सामना हुआ और उन्होंने मोटी रकम की मांग करते हुए रुपयों के बदले में आज छपी हुई झूठी खबरों का खंडन करने का प्रस्ताव रखा । उनकी बात ना मानने की स्थिति में मनीषा की मौत को हथियार बनाकर इस तरह की बातें लिखी जाने की बात कर रहे थे जो एक जवान बेटी के बाप के लिए बहुत ही शर्मनाक और जीते जी मरने के सम्मान होता है । मैंने उन ब्लैकमेलरों का घटियापन देख लिया । उन के कारण मनीषा को आत्महत्या करनी पडेगी पर मैं किरण और तुम्हें किसी खतरे में नहीं डाल सकता । इसलिए तुम दोनों से बहुत दूर वहाँ जा रहा हूँ जो दुनिया सच और झूठ से परे हैं और जहाँ कम से कम पत्रकारों का नकाब ओढे इन ब्लैकमेलरों से तो छुटकारा मिल जाएगा किरण का ख्याल रखना और उससे कहना कि मेरे आदर्श को ना अपनाकर इस दुनिया के अनुसार चले अपना ख्याल रखना । तब से आज तक किरण को समझाने की कोशिश कर रही हूँ कि हमारे आंसू प्रोफेसर साहब की जब पर लगे दाग को नहीं हो सकते हैं मेरी कातर किरन ने अपने आंसू तो पोस्ट नहीं पर अपनी आत्म पर लगे गांव को खुला छोड कर सूखने नहीं दे रही है । और इस तरह अपने कुकर्मों से डरने की बात कहने वाले मात्र साहब ने झूठी बदनामियों के सामने घुटने टेक दिए और पत्रकारिता के नाम पर ब्लैकमेलिंग करने वालों की जीत हो गई ।

कलम से हत्या - 05

प्रॉफेसर की मौत का किस्सा सुनाते हुए किरण की माँ इतना और सुबह चुकी थी जिसका हिसाब लगाना मुश्किल था । फिर भी नीरज है की उन ब्लैक मेल पत्रकारों की भूख एक नारी का उजडा हूँ । सिंधु किसी बेटी के सिर से पिता के साया का उठ जाना और इस कलयुग में बहुत एक सुख सुविधाओं का सामान जुटाने की होड में विलासी लोगों द्वारा दौलत कमाने के जुनून में भागते लोग इन सब को मिलाकर उन आंसुओं का हिसाब लगाने की कोशिश कर रहा था । नीरज मंदिर आया था मन की शांति के लिए लेकिन प्रोफेसर माथुर की मौत का सच जानकर उसका मन अशांत हो गया था । पत्रकारिता को समाज और देश सेवा का माध्यम मानकर दैनिक पत्रिका के बाद अब एक प्रतिष्ठित न्यूज चैनल का मालिक होने पर जितना गौरवान्तित हो रहा है, आज किसी ने उसके देश प्रेम पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया था और ये बात नीरज के लिए बहुत ही कष्टप्रद है । उसकी कानून में बार बार किरण की वह आवाजें गूंजने लगी । क्या अधिकार है आप लोगों को किसी की जान लेने का कोई अदिया पत्रकारों के एक सवाल का भी जवाब न दे तो खुद की बेज्जती समझने वाले आप लोग किसी की इज्जत की परवाह क्यों नहीं करते हूँ । आप जैसे किसी पत्रकार नहीं मेरे पापा और बुआ की हत्या की है । वहाँ हत्या हुई है । मेरे पापा की न तीन सेना तलवार से कलम से हत्या की गई है । नीरज को कॉलेज का वह दिन भी अनायास याद आ गया जब प्रोफेसर माथुर कहा करते थे कि खुदकुशी करने से बडा कोई पाप नहीं होता है । मुश्किलें चाहे जितनी भी बडी हूँ, उसका सामना करते हुए सूझ बूझ से काम लेते हुए जीवन पथ पर आगे बढना ही मानव का पहला कर्तव्य होता है । कोई भी बीमारी हो उसका इलाज जरूर मिलेगा । बस जरूरत इस बात की होती है कि आप उस रोग का निदान कितनी शिद्दत से ढूंढते हैं । जिंदगी को जीना सीखो, जिंदगी से लडना सीखो । जिंदगी से भागते हुए किसी भी हालत में मौत की शरण में जाना उचित नहीं । जिसमें हमें जीवन दिया है उसे से लेने का अधिकार है । हम तो बस सफर की यात्री हैं जिन्हें हर हाल में चलते रहना है । महत्व सरकार लेक्चर याद आते ही नीरज के होठों पर विषाद कि मुस्कान फैल गई और ये बुदबुदाने लगा दीपक तले अंधेरा कई छात्रों को अवसाद से बाहर निकालकर आत्महत्या के निर्णय से वापस लाने वाले स्वयं भी आत्महत्या कर लिए । पत्रकार को पत्रकारों के अलावा आप स्वयं भी अपनी मौत की जिम्मेदार है । सर बहरहाल नादानी करके आपने मेरे काम और समाज के लिए कुछ कर गुजरने के माध्यम को दागदार कर दिया है । सर और अपने वजूद पत्रकारिता पर लगे इसका आपको मैं सहन नहीं कर सकता हूँ । ये सच है कि एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है । पर मैं उस मछली को जल्दी ही ढूंढकर तालाब से निकाल, फिर कुमार और अपने गुरु के साथ हुई ज्यादतियों का हिसाब भी चुकता करना । ये मेरा मुझसे वादा है और इसके लिए मैं आज ही पहला कदम उठाते हुए उन पत्रिकाओं पर मानहानि का केस दाखिल करूंगा, जिसमें प्रोफेसर साहब के बारे में गलत बातें लिखी गई थी । मैं अपनी पत्रिका को भी नहीं छोडूँगा । किरण का इंटरव्यू लिया, नहीं नहीं । किसी पुस्तक पर उलझे हुए नीरज ने जवाब दिया, मैंने तो पहले ही कहा था कि उससे मिलने से कोई फायदा होने वाला नहीं है । उस तक पर नजरें जमाए ही । नीरज ने कहा, मतलब मैं सही थी कि ये इंटरव्यू उससे मिलने का बहाना था । ये तुम क्या कह रहे हो वही जो पिछले कुछ दिनों से बेकरियों महियां क्या देख रही हूँ, बनाओ मत भैया, मैं आपकी आंखों में वो बेचा नहीं देख रही हूँ जिसे देखने की चाहत कई सालों से थी । पर मैं खुश नहीं हूँ क्योंकि क्योंकि वो लडकी आपके प्यार के लायक नहीं है । तुम ने कुछ ज्यादा नहीं कह दिया । नहीं पहली बात तो ये कि प्यार व्यार मुझे छोड भी नहीं सकता हूँ । और रही मेरी बेचैनी का कारण तो वो है मेरे आदर्श प्रोफेसर पर हमारे ही साथी द्वारा की गई ज्यादतियां तो फिर किरण का इंटरव्यू लेने आपने किसी मुलाजिम को भेज देते । आप स्वयं क्यों गए? भैया? बताया तो था कि माथुर सर से मुझे अधिक लगाव रहा है और किरण जी की बातों में पत्रकारों के प्रति नाराजगी थी जिसका कारण मैं जानना चाहता था लेकिन हासिल किया हुआ भी खाली हाथ लौटे हूँ । मैंने तो आपको पहले ही बताया था कि वो घमंडी ऍम नहीं देगी लेकिन तुम्हें कैसे मालूम था? लगदी पुस्तक को किनारे रखते हुए नीरज ने पूछा इसलिए कि मैं उसके बारे में बहुत कुछ सुन चुकी हूँ । क्या सुनी होगी? यही की वो लडकी ना सिर्फ घमंडी है बल्कि थानेदार होने का आप कुछ ज्यादे दिखाती खुद को हरिश्चंद्र की औलाद समझती । अखबारों ने उसके पापा का कच्चा चिट्ठा खोल दिया था तो पत्रकारों से नाराज होने का नाटक करते हुए अपने पापा की झूठी जॅान पीती रहती है । और पिछले दिनों थाने में हुए किसी एक एफआईआर के बारे में किसी पत्रकार ने पूछा तो उसने साफ शब्दों में कहा था कि उन्हें किसी पत्रकार से कोई बात नहीं करनी है क्योंकि पत्रकार तो सिर्फ मनगढंत बातें लिखते हैं । अच्छा इतना कुछ कह दिया गया और हमारे पत्रकार साथ ही चुप रह गए । वो इंस्पेक्टर तो किसी की बात सुनती नहीं है और उसे समझाने से भी कोई फायदा नहीं था । शायद यही उन लोगों की छुट्टी का कारण होगा । लवली ने कहा, आजकल पत्रकारों की खूब जानकारी रखने लगी हूँ । नीरज मुस्कुराने लगा जो बात आप मुझ पर व्यंग करते हुए कह रहे वो सच है भैया, आपकी बहन हो तो आपके क्षेत्र की जानकारी भी रखना जरूरी है और इसलिए मुझे पता है कि उसने आपको भी बुरा भला जरूर कहाँ होगा गिर जाता । मुझे लगता है लवली की तुम एमबीए छोडकर मुझे ज्वाइन कर सकती हो । आप फिर मेरा मजाक उडा रहे भैया तो उडा लीजिए पर मुझे तो ये भी पता चला है कि आपने झूठ को सच में बदलने के लिए और अपने पिता की इज्जत पर पर्दा डालने के लिए वो इंस्पेक्टर अपने पद का दुरुपयोग करने से भी पीछे नहीं रहती है । अपनी बात की विश्वसनीयता पर तुम पूर्णता आश्वस्त हो लगली तुमने जो भी अभी अभी मुझसे कहा क्या वो सब सच है? मुझे छोटी कबसे समझने लगे भैया लवली ने सवाल का जवाब भी सवाल से ही दिया । मैं मजाक के मूड में बिलकुल नहीं हो लबली गंभीरतापूर्वक । नीरज ने आगे कहा, तुम सोच समझकर जवाब दो कि माथुर सर और उनकी बेटी के बारे में जो कुछ भी कह रही हो क्या वो सच है? तुम साबित कर सकती हूँ सबूत ठहाका लगाते हुए लवली ने आगे कहा, पिछले कुछ दिनों का अखबार उठाकर देखो भैया अच्छा हूँ । जिंदा माथुर सर की खबरें सुर्खियों पर थी । उन दिनों यूरोप गए हुए थे । शायद इसीलिए आपको नहीं मालूम कि उन की खबरें हमारे एक बार में भी तो लग गई थी । जहाँ तक सबूत की बात है तो फिर मात्र सर को जानने वाले शहर में किसी से भी पूछ लो । उनकी रंग, गलियों के किस्से और फिर मनीषा में हम की आत्महत्या करने के बाद खुद ही ट्रेन से कट जाने की बात कोई भी बता देगा । अच्छा और क्या जानती उनके बारे में? नीरज ने लवली से पूरी बात तो बलवानी के लिए पूछा । जानती तो बहुत कुछ तो बता ही तो और क्या क्या जानती हूँ यही की प्रोफेसर मात्रा मनीषा के गहरे तालुका थे । कॉलेज, लाइब्रेरी, बाजार सब जगह हो ले, हम साथ साथ आना जाना था । उनका बातें तो यहाँ तक बढ गई थी कि मनीषा में हम माथुर करके घर पर ही रहती थी । आपने बेमेल रिश्ते को छुपाने के लिए और लोगों का मोहन करने के लिए उन्हें किरायेदार बताया गया लगता है । मन लगाकर तुमने माथुर सर के प्रकरण का अध्ययन किया है । नीरज ने कहा, आप फिर मेरा मजाक उडा रहे भैया । लवली ने शिकायत की अच्छा चलो ये बताओ कि तुमने कभी उन दोनों को साथ साथ देखा था और देखा था तो कहाँ? नीरज ने पूछा नहीं नहीं, मैंने तो नहीं देखा पर फिर तुम इतने विश्वास के साथ उनके संबंधों के बारे में कैसे कह रही हूँ? उनके परिवार से मिली थी क्या? तुम लगती नहीं भैया, मुझे तो उनके घर का पता भी नहीं मालूम । फिर ये सब बातें तो मैं कैसे पता चली । कुछ तो कॉलेज में सहेलियों से सुना था और कुछ समाचार पत्रों के माध्यम फिर वही समाचार पत्रों वाली बात है । नीरज ने नाराजगी प्रकट करते हुए आगे कहा, क्या तो मैं ऐसा नहीं लगता । लवली की व्यक्तिगत संबंधों के मामले में तो मैं और तुम्हारी सहेलियों की तरह पत्रकार लोग भी धोखा खा सकते हैं जब नींद खुद की आंखों में रहती है । फिर सपना हम किसी और की आंखों से कैसे देख सकते हैं? सीमित दायरे में रहकर इस दुनिया को समझ पाना संभव नहीं है और फिर तुमने तो पत्रकारों के एक पहलू को ही देखा है जबकि हमारी दुनिया में सच और झूठ के बीच बस थोडा सा ही फासला होता है । आप कहना चाहते हैं या मैं तो मैं बताना चाहता हूँ कि जिस रेगिस्तान में दूर रहने से पानी का एहसास होता है लेकिन पास जाने पर सच्चाई पता चलती है कि असल में तो वो पानी है ही नहीं बल्कि सूरज की किरणे हमें भ्रमित कर रही थी । किसी तरह दूर स्थित चीजों को पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर जब हम देखते हैं और उन बातों पर तर्कों का तडका लगाते हैं तो हमारा भ्रमित होना स्वाभाविक है । इसीलिए किसी भी बात को हमें तब तक सच नहीं मानना चाहिए जब तक हम उसे पर रखना लें । विषेशकर पत्रकारिता के क्षेत्र में तो ये सावधानी बहुत जरूरी है । मतलब आप ये कहना चाह रहे भैया की हाँ मैं यही कह रहा हूँ कि माथुर परिवार भी चमकीली झूठ का शिकार हुआ हूँ और दूर से देखने के कारण हम झूठ को ही सच मान बैठे हैं । नीरज ने कहा लेकिन वहीं मनीषा कान से पहले तो माथुर सरकार शहर में बडा नाम था । लोग उनकी प्रशंसा करते थकते नहीं थे और अखबारों में भी उनके व्याख्यान सहित व्यक्तित्व की बहुत सराहना होती थी । चर्चा तो यह भी रही कि राजनीतिक पार्टियां भी उनकी लोकप्रियता को देखते हुए अगले चुनाव में प्रत्याशी बनाना चाहते थे । यही तो समझना है कि जहाँ प्रशंसा होती है कमियाँ वहीं ढूंढते हैं और आदर्श का प्रतीक होना ही तो माथुर सर के लिए घातक हुआ । इस दुनिया की रीत है कि जब कोई आदर्श और सच्चाई के रास्ते पर चलकर समाज में अपना अच्छा स्थान बना लेता है तो कई शैतानी दिमाग उनमें गलती निकालने का मौका ढूंढते रहते हैं । और इस तरह के चूहे बिल्ली के खेल में कई बार यात्रा व्यक्ति को अपने आदर्शों के साथ समझौता करना पडता है या झूठी बदनामी का सामना करना पडता है । आप कहना चाह रहे भैया की मात्र सर किसी साजिश का शिकार हुए हैं पर क्यों? पर कैसे लवली ने पूछा क्योंकि पैसों की लालच इंसान को अंधा बना देती है और दौलत की चाहत ही षडयंत्र का उत्पादक होता है । जब की एक इज्जत यार जब की है कि जतदार व्यक्ति के लिए इज्जत ही उसके जीवन भर की पूंजी होने के कारण वो इंसान की कमजोरी बन जाती है । दौलत के पुजारी की पहली पसंद पैसा ही रहता है । माथुर सर के मामले में मुझे लग रहा है की दौलत की तेजधार तलवार इज्जत की कमजोरी पर भारी पड गई है । हो सकता है भैया का नजर सही हूँ लेकिन माथुर सर जैसे आदर्शवादी और गंभीर व्यक्ति को आत्महत्या का कदम उठाने की जगह कथित पत्रकार बने ब्लैकमेलरों को बेनकाब करना चाहिए था । लोगों को इस बात से अवगत कराना था कि उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश की जा रही है । कुछ लोग अपने प्रति अर्जित विश्वास का मूल लगा रहे हैं । माथुर सर की इसी गलती की सजा तो उनका परिवार बोल रहा है । नीरज ने कहा, गलती नहीं हुई है बल्कि माथुर सर में चतुराई से काम लिया भैया क्या मतलब है तुम्हारा? नीरज ने पूछा, माथुर सर मनीषा मैम के साथ अपने रिश्ते के सच को परिवार वालों से छुपा कर रखना चाहते थे, जो कि भेद खुलने से परेशान हो गए और फिर जवान बेटी के सामने आदर्शवादी पिता बने रहने का एक ही रास्ता दिखाओ । ने आत्महत्या का खोजी पत्रकारिता का सामना न कर पाने पर समर्पित पत्रकारों पर अपनी की जूता ना कहां का इंसाफ है भला तुम्हारा तर्क भी सही है । लवली और पुख्ता भी है और मैं महसूस कर रहा हूँ कि तुम्हारा तर्क पत्रकारों की भांति है । तो अब ये भी बता दो कि किस पत्रकार ने बताई है तो मैं ये सब बातें नीरज ने पूछा जिसने भी बताई है उसकी सच्चाई पर मुझे भरोसा है भैया और जिस दिन किरण के झूठे दावों के अलावा कुछ सुनने की मानसिकता में आ जाओगी, उस दिन आपको उस पत्रकार का नाम भी बता दूंगी । लवली ने आत्मविश्वास के साथ कहा, पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए । लवली कि माथुर सर से हम दोनों ने शिक्षा ली है और प्रोफेसर सर हम दोनों की आदर्श रहे हैं । नीरज ने कहा, हम उन की शिक्षा को जानते हैं । भैया व्यक्तिगत जिंदगी के बारे में नहीं । लवली ने कहा, मैं तो सोचता हूँ कि जो व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में आदर्श प्रस्तुत करता है, उसका निजी जीवन भी खुली किताब की तरह होता है । आपके बोले बन का तो माथुर परिवार नाजायज फायदा उठाने की कोशिश कर रहे भैया, मैं तो कहती हूँ कि पूरा मात्र परिवारी गलत । लवली ने कहा, जो इंसान अब इस दुनिया में नहीं है, उनके साथ उसके परिवार के लिए भी इस तरह की बातें करना ठीक नहीं है । और फिर माथुर सर की कमजोरी को गिनाकर हमें अपने पत्रकार बिरादरी की गलतियों पर पर्दा नहीं डालना चाहिए । प्रोफेसर साहब तो अब नहीं रहे तो सच का पता लगाने का काम अब हमें ही करना होगा । ऐसे लोगों का पर्दाफाश करना ही होगा जो पत्रकारिता के नाम पर कलंक है और किरण जैसे लोगों को ये बताना होगा कि यदि कुछ पत्रकार ब्लैकमेलर होते हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि सभी पत्रकारों पर उंगली उठाई जाए । अधिकांश पत्रकार ईमानदार और समाज के प्रति वफादार होते हैं । आप मेरी बातें सुनना ही नहीं चाहते हो तो मैं क्या कर सकती हूँ । पर इतना जरूर कहूंगी भैया की आप बहुत बडी साजिश का हिस्सा बनने जा रहे हैं और माथुर परिवार आपकी सरलता का फायदा उठा रहे हैं ।

कलम से हत्या - 06

जब आग नहीं लगी थी तो कैसे उठा होगा भैया? शायद लवली कि उक्त बाते भी सही हूँ । हो सकता है माथुर सर और मनीषा मैम के अंतरंग संबंधों की जानकारी किरण एवं उसकी माँ को ना रही होगी । इतने दिनों की पत्रकारिता का मेरा अनुभव तो यही एहसास करा रहा है कि अखबारों में छपने वाली खबर पूर्ण तो सही न होने पर भी आंशिक सत्यता के साथ जरूर होती है । भूल रहे हो नीरज सच और झूठ के भवन में फंसे नीरज को जवाब देते हुए उसके ही अंतर्मन ने आगे कहा, वर्तमान समय विडंबनाओं को साथ लेकर चलने वाला है । आज जमाना बदल गया है । सगे भाई बहन भी साथ चले तो लोग उंगलियां उठाते हैं । आधुनिकता के इस दौर ने सच्चे रिश्तों को ताक पर रख दिया है । सगे भाई बहन के रिश्तों को भी सिर्फ घर वाले और परिचित ही जानते हैं । फिर प्रोफेसर साहब और मनीषा महम तो राखी की डोर से बंधे भाई बहन थे । किस उलझन में कोई हो तो पूरा नाम तुम कब आएगा? कितनी देर से तो मैं आवाज लगा रहा हूँ पर पता नहीं तो कहाँ कोई हुए हूँ मुझे तो मैं जब छोडना पडा । कोई मिल गई क्या जिसके खराब में कोई हुए थे नहीं । ऐसी तो कोई बात नहीं बैठो, बोलो क्या होगी? चाय या कॉफी मुझे कॉफी के लिए पूछ रहे हो । मतलब लवली सही कह रही थी क्या कह रहे थे लवली? नीरज ने पूछा यही कि तुम बदले बदले से लग रहे हो? सच में तो मैं प्यार तो नहीं हो गया । फिर वही बात जिस शब्द से मुझे छेड । बार बार उसी शब्द को मेरे सामने क्यों परोस रहे हो? पूरा क्योंकि तुम में प्रेम रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं । ऐसी फालतू की बातों के लिए समय नहीं है । मेरे पास तुम कॉफी पी हो । मैं तैयार होकर आता हूँ, फिर साथ में ऑफिस चलेंगे । कहते हुए नीरज बातों में जाते ही चार चालू कर के नीचे खडा हो गया । किरण के द्वारा छोडे गए तीखे शब्दों के बाद नीरज के मन मस्तिष्क को कौन रहा था और तमतमाये हुए उसके चेहरे से नीरज का बदन भी तपने लगा था । पर तपते शरीर पर जब ठंडा पानी कहर बनकर बिखरा तो नीरज किरण की मुझ से बाहर आया और अब उसे पूरक के द्वारा कही गई बातें याद आ गई कि कहीं तो मैं किसी से प्यार तो नहीं हो गया है । एक बात तो है कि पत्रकारों से नफरत करने वाली किरण की मुलाकात मुझसे ही क्यों हुई? पत्रकारिता मेरे लिए सर्वोपरि होने के बाद भी मैं किरण के द्वारा पत्रकारों पर लगाए जाने वाले आरोपों का जवाब क्यों नहीं दे पाया? सारी दुनिया झूठी और अकेली किरण की बातें हैं । मुझे सच्ची क्यों लगने लगी हैं? क्या ये सिर्फ मेरे द्वारा पत्रकारिता को पर रखने की चाहे या कुछ और भी है? क्या पूरब सही कह रहा था की मुझे किसी से प्यार हो गया है? हाँ, मुझे किरण के बेबाकी पन से प्यार हो गया है । नीरज स्वयं को जवाब देने लगा । नीरज के मन में किरण इत्र में सुगंध की तरह समाने लगी थी । इसके साथ ही नीरज की ये छह शक्ति दृढ होती जा रही थी की किरण के मन में बसे पत्रकारों के प्रति दुर्भावनाओं को उसके मन से निकालना ही होगा । नीरज जल्दी आओ बेटा नाश्ता ठंडा हो रहा है । हाँ हाँ आई रहा हूँ । नीरज ने बातों से ही कहा अरे ये क्या आराम से यार नास्ता कही भागे नहीं जा रहा है । पूरब नहीं कहा अभी तक तुम कह रहे थे कि देर हो रही है इसलिए तो हाँ हमें देर जरूर हो रही है । पर नाश्ता आराम से करो तो मैं तो तैयार होने में कुछ ज्यादा ही देर कर दी । पूरब सही कह रहा है । बिता तैयार होने में कुछ ज्यादा ही देर कर दी । मैंने कहा आज मेरे मन में कुछ बातें बार बार आकर मुझे परेशान कर रही है । हाँ, ऐसी क्या बात है जिससे तो मुझे में हूँ, उलझन में था पर अब मैं निर्णय पर पहुंच गया हूँ । कोई लडकी पसंद आ गई है क्या? नहीं बात आप तो बस यही सब सोचते रहते हैं । कैसे नहीं सोचूंगी बेटा तुम्हारे सभी दोस्तों ने घर बसा लिया है और पिता भी बन गए तो ठीक है । हाँ मैं चलता हूँ हरे पूरा नाश्ता तो करते हो गया । हाँ मुझे भूख नहीं है । पता नहीं क्या हो गया इस लडके को आज तक कभी ऐसे नहीं हुआ की थाली में अनाथ छोडे पर अब बढिया बदल गए । हाँ, इसलिए अब तक जो नहीं हुआ उन सब बातों के लिए तैयार हो जाइए । लवली ने कहा तो मैं ऐसा क्यों कह रही हूँ? क्योंकि भैया एक झूठी लडकी की बातों पर भरोसा करने लगे हैं । ये तुम क्या की और यू लवली नीरज जो कि लडकियों के नाम से कोसों दूर भागता है वह हाँ भैया एक लडकी की बातों में आकर खुद के विचारों पर भी सवाल उठाने लगे हैं । कौन लडकी किरण नाम की एक पुलिस इंस्पेक्टर है जो अपने स्वर्गवासी पिता की बदनामियों पर पर्दा डालने के लिए भैया को उलटी सीधी पट्टी बढा रही है । पर मेरे नीरज को गुमराह कर पाना संभव नहीं । नीरज की माँ ने आत्मविश्वास के साथ कहा ऐसा हम सोचते हैं वहाँ पर आज की ताजा खबर ये है कि भैया उस लडकी की झूठी कहानी के घेरे में फस चुके हैं । क्या ये बात पूरा आपको पता है? हाँ मैंने पूरा आपको सब बता दिया और सारा दिन भैया के साथ ही रहने के लिए भी मैंने कह दिया ।

कलम से हत्या - 07

आप ने मुझे बुलाया सर ऍम धन्यवाद सर, क्या तुम प्रोफेसर माथुर को जानते हो? सर उसी माथुर के बारे में पूछ रहे ना सर जिन्हें पिछले साल उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सम्मान मिला है और अब सरकार पर उस सम्मान को उनके मरनोपरांत वापस लेने की चर्चा भी चल रही है हूँ । मैं उन्हीं की बात कर रहा हूँ । फिर तो मैं कहना चाहूंगा सर की आपका सवाल ही गलत है, क्या मतलब आपका क्षमा चाहता हूँ । पर जिस समय माथुर सर एवं मनीषा की मौत का कांड हुआ था उस समय ये खबर सबसे ज्यादा सुर्खियों में थी और अधिकांश पेपरों के मुख्य पृष्ठों पर ये खबर लगी थी । मनीषा मैम की रहस्यमय मौत और फिर माथुर सर की सर कटी लाश की खबर ने करीब एक सप्ताह तक अखबारों पर कब्जा कर रखा था । आपको भी तो हमने इस खबर की जानकारी दी थी । सर मुझे जानकारी दी मुझे कब जानकारी दी? नीरज ने आश्चर्य से पूछा याद कीजिए सेफ जब आप यूरोप के दौरे पर थे तब मैंने आपको फोन पर बताया था । आप मीटिंग में थे तो आपने मुझसे कहा था कि जो तो मैं सही लगे छाप तो और तब प्रोफेसर साहब ने खून से रंगे अपने हाथों से लाल रंग मिटाने के लिए अपनी जिंदगी ही खत्म कर दी है । इस लंबी शीर्षक के साथ माथुर सर और मनीषा मैम के संबंधों के बारे में हमने विस्तार से जो समाचार प्रकाशित किया था उसे सबने सराहा था और लोग अखबार की प्रति प्राप्त करने के लिए हॉकरों पर कूद पडे थे । अच्छा ये बात है तो अब मेरी बात जरा ध्यान से सुनो कि अब से माथुर सर और मनीषा मैम की खबर जब भी लगाना हो तो मेरी अनुमति के बिना कुछ भी नहीं छापोगे । ऐसा क्यों कह रहे सर? सरल ने पूछा क्योंकि किसी की निजी जिंदगी पर दखलंदाजी करना हमारा काम नहीं है । नीरज की बातों में रूखापन था, आप मुझसे नाराज लग रहे सर पर क्यों? क्योंकि तुमने माथुर सर की सच्चाई छापने की गलती की है । लवली ने प्रवेश करते हुए कहा लवली प्लीज इस समय हमें डिस्टर्ब मत करो । मुझे सरल से अकेले में बात करनी है और वो बात क्या है सर सरल ने आतुरता से पूछा हूँ इससे पहले की नीरज कुछ कहीं लवली ने झट से कहा । बात ये है कि आप के साथ साथ जितने भी लोगों ने माथुर सर के बारे में लिखा था वो सब खबर झूठी थी या अपने क्या कहते अलग लीजिए । मेरी बात पर आपको विश्वास नहीं हो रहा है । ये आश्चर्य हो रहा है तो ये आपकी गलती है । पर सच्चाई यही है और ये बात मेरी नहीं बल्कि मेरे बडे भैया जी का कहना है क्या? लवली जी सच कह रही सर हाँ, आपने सुना सरल जी, अब तो भैया ने यहाँ कह दिया । लवली तो इस तरह मुझ पर ताना मारकर मुझे सबसे विचलित नहीं कर सकती । मैं जानती हूँ भैया इसीलिए तो सरल जी को बता रही हूँ कि उनके द्वारा पूर्व में छापी गई खबरें झूठी थी । लवली ने गुनाह क्या? आप दोनों क्या कहना चाहते हैं? मेरे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि साल भर पहले जो समाचार छपकर निकल चुका है उसके बारे में हम आज क्यों बात कर रहे हैं? सरल ने पूछा क्योंकि वो खबर झूठी थी । नीरज ने कहा, आप कहना चाह रहे हैं कि सभी अखबारों की खबरें हाँ भैया यही कह रहे हैं कि माफ कीजियेगा सर पर ऐसा कहकर आप हमारा अपमान कर रहे हैं । सरल की स्वर्ग गंभीर थे । मैंने भी इस विषय की सच्चाई जानने से पहले ऐसे ही अपमानित होने की बात कही थी । अपना स्थान छोडकर चहलकदमी करते हुए नीरज ने आगे कहा, परन्तु जब सच का सामना हुआ तो शर्म से खडे जा रहा हूँ कौनसा सच सरल ने पूछा । यही मात्र सर एवं मनीषा मैम सचमुच में भाई बहन नहीं थे लेकिन तुम पत्रकारों ने उनके रिश्ते को विकृत करके दुनिया के सामने परोसा है । आप लोगों ने सुनी सुनाई बातों को अखबार की सुर्खियां बनाकर मनीषा और माथुर सर के साथ अन्याय किया है और अब अखबारों द्वारा उन खबरों का खंडन नहीं किया गया तो मेरे भैया अकेले ही इसका प्रायश्चित करेंगे । फिर इसके लिए इन्हें अपनों से क्यों ना लडना पडे क्योंकि लोग झूठे हैं । पत्रकार झूठे हैं, कॉलेज में चलने वाली कानाफूसी छुट्टी है । मैं झूठी हूँ, आप झूठे हो । यदि कोई सच्चा है तो सिर्फ इंस्पेक्टर किरण और उसकी मां जो ये बता रही हैं कि माथुर सर निर्दोष थे और मनीषा की हत्या नहीं हुई बल्कि उसने आत्महत्या की है । लवली के द्वारा व्यंग्यात्मक शब्दों से छोडे जा रहे बाढ से नीरज का मन छलनी होता रहा और बार बार उत्तेजना पैदा होती रहे । पर वह अपने गुस्से पर काबू करते हुए लवली की जुबान रूपी तेजधार वाली तलवार के वार को खामोशी से सहन कर रहा था और सरल वो तो नीरज को ऐसे टकटकी लगाए देख रहा था जैसे आज पहली बार देखा हूँ । पर किरण और उसकी माँ की बातों को आप तक किसने पहुंचाया? सर सरल ने पूछी लिया उन दोनों माँ बेटियों ने स्वयं भैया को अपनी सच्चाई बताई है । लवली ने कहा अब की बार लवली की बात सुनते ही सरल हस पडा और उसने कहा लगता है सर कि इंस्पेक्टर किरण और उनकी माँ ने खुद के द्वारा रचाई गई झूठी कहानी अब आपको भी सुनाई । झूठ पर सच का पर्दा डालने के लिए किरण जी गुस्सा हुई होंगी और उनकी माँ समझाते हुए थोडा सुभाई होंगे । उन दोनों माँ बेटियों के बारे में मुझे भी मालूम हुआ है कि बहुत चालाक और शातिर हैं बातों का जाल । बुनकर ऐसे निशाने पर फेंकती हैं की सामने वाला उनके जाल में फंसी जाता है । पर मुझे लगता है सर कि हम बेकार की बातों में पढकर अपना कीमती समय करवा रहे हैं । सरल ने टोकते हुए कहा अच्छा तो आप ये कहना चाह रहे हैं कि मेरे पास इतना फालतू वक्त है कि सर आप तो नाराज हो रहे हैं । समय की बात मैंने अपने लिए कही । सरल नहीं जवाब दिया हाँ, तो फिर अपना समय बर्बाद न करते हुए बताइए कि कैसे आना हुआ जी सर, मैं ये कहने आया था कि आज कल कुछ क्षेत्रों में वनवासियों की आमद अधिक हो गई है । दिनदहाडे चोरी और लूटपाट की बातें आम हो गई । पिछले दो महीने से चले आ रहे इस आतंक में अब तक दो लोगों की जान भी जा चुकी है । उन आतताइयों ने लोगों की नींद हराम कर रखी है परंतु पुलिस घोडे बेचकर सो रही है तो मैंने एक समाचार लिखा है जिसमें पुलिस की लापरवाही पर विशेष जोर दिया गया है । ठीक है आपने उस क्षेत्र के थानेदार से बात की है कि नहीं करने की कोशिश की थी, सर पर भी उपलब्ध नहीं थे । सरल ने कहा तो फिर पहले बात कर लेंगे । फिर इस खबर को आगे बढाएं । संभव नहीं ऐसे क्यों? क्योंकि उस थाने कि थानेदार किरण मत हो रहे जो कि पत्रकारों से बात ही नहीं करती है । अरे तो ये बात आप ने पहले क्यों नहीं बताई? कौन सी बात सर यही की अब तक आप जिस क्षेत्र के समाचार को लिखने की बात कह रहे थे, उस क्षेत्र के थाने में किरण जी की पोस्टिंग ये मैंने जरूरी नहीं समझा सर । सरल ने कहा तो अब आप जान लीजिए कि इंस्पेक्टर किरण के संबंध में कोई भी बात लिखने से पहले भैया की अनुमति जरूरी है । मैं सही हूँ ना भैया । लवली ने फिर व्यंग्य में कहा । लवली के प्रश्न पर नीरज की चुप्पी के साथ पूरे कमरे में कुछ देर के लिए सन्नाटा पसर गया । पर फिर नीरज ने महसूस किया कि शायद उसने प्रोफेशनल नहीं बल्कि भावनाओं में बहकर कोई बात कह दी है और उसने कहा लवली । कुछ नाश्ते की व्यवस्था खराब हो गई ।

कलम से हत्या - 08

जी खराब हो जाने से परेशान किरण को खुद पर गुस्सा आ रहा था कि वह स्वयं ही ड्राइव करके क्यों चली आई । किसी ना किसी को तो साथ नहीं आना था । अब गाडी खराब हो जाने के कारण उसे किसी से लिफ्ट लेनी होगी क्योंकि यहाँ पर तो नेटवर्क भी नहीं है कि किसी को फोन करके ही बुला ले । अंततः किरण को उम्मीद की किरण नजर आई और आती हुई कार से सहयोग के लिए इशारा करने लगी आप नीरज ने कहा रोकते ही आश्चर्य से पूछा । नीरज की कार को रोककर किरण असमंजस में पड गई । उसने तो सोचा ही नहीं था कि नीरज से फिर सामना होगा और उसे कहना पडा जमा चाहती हूँ । मुझे मालूम नहीं था कि आप हैं आप प्लीज चाहिए । किरण ने कहा इसमें क्षमा मानने वाली कौन सी बात है आपकी गाडी खराब हो गयी । शायद था कुछ ऐसा ये पर आप जाइए । नीरज जी मैं कुछ और व्यवस्था देखती हूँ । कितनी भी नाराजगी ठीक नहीं है की रंजीत वक्त आने पर तो गधी को भी बात बनाना पडता है या फिर दुश्मन के घोडे पर भी सवारी की जाती है और यदि मैं गलत नहीं हूँ तो ना तो मैं दुश्मन हूँ और ना ही गता । मतलब हाँ कितनी भी ना समझ नहीं है की रंजीत कि मुझे ये बताना पडे कि मैं आपको आपके गंतव्य तक छोडने का प्रस्ताव दे रहा हूँ । लेकिन मैं माना कि पत्रकारों से नाराजगी आपकी पर इसमें गाडी का क्या कसूर कहते हुए किरण गाडी के बाजू में बैठते हुए सीटबेल्ट लगाने लगी । मुस्कुराती हुई अच्छी लगती हैं आप धन्यवाद् कहाँ जाना है? नीरज ने पूछा किसी केस के सिलसिले में निकली थी पर अब मुझे थाने तक छोड दीजिए । किरण ने कहा यदि आपको गलत ना लगे तो मैं आपको वहाँ तक ले जा सकता हूँ जहाँ आपको जाना हैं नहीं । नीरज जी मुझे जंगल की ओर जाना और हो सकता है वहाँ मुझे ज्यादा समय लग जाए । आप तकल्लुफ बहुत करती है कि रंजीत मैं भी देखना चाहता हूँ कि जिस काम पर पहले सिर्फ पुरुषों का ही वर्चस्व रहता है उसे आपकी कुशलता से निभाती है और फिर आप की सोच के अनुरूप कार्य नहीं हुआ तो फिर मीडिया में हमारा मजाक उडाएंगे किरण की बातों में सकती थी हूँ चिरंजी प्लीज आप कुछ समय के लिए भूल जाइए कि मैं पत्रकार हूं । गुलाब के पेड पर स्थित कांटे को बोलने की बात कर रहे हैं । किरण ने कहा, मैं इस समय सिर्फ आपका ड्राइवर हूँ । आप जिधर इशारा करेंगी उधर ही चल पडूंगा । नीरज ने कहा आप जैसे करोडपति मेरे ड्राइवर किरन ने मुस्कुराते हुए कहा, बस यही से दायें मुड जाइए जंगल की ओर और प्लीज तेज चलाइए । क्या करें? नीरज जी संभाल के ये किसी आवाजाई और अपने गाडी रोक क्यों दी? पता नहीं क्या हुआ? मैं देखता हूँ कहते हुए नीरज कार से उतरकर देखते ही चीज उठा ओ माई गॉड क्या हुआ? नीरज जी जो नहीं होना था । नीरज ने माथे पर हाथ फेरते हुए कहा पेड की चोट में जाकर कार फंस गई है । मैं पीछे करता हूँ । कहकर नीरज पुना कार में बैठ गया । आई आई पीछे बहुत जगह हाथ का इशारा करते हुए किरण ने कहा अब ठीक है, आइए बैठे हैं आगे बढते हैं । नीरज के कहने पर किरण कार की ओर बढते हुए ठिठक गई और कह रही थी ये पानी का हो रहा है । ऍम पानी नहीं है तो पेट्रोल हैं । लगता है फोन से टकराकर पेट्रोल टंकी फट गई है । सॉरी करंजी हमें वापस जाना होगा, कोई बात नहीं । चलिए आप मन से हमारे साथ नहीं आ रही थी शायद नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा, ऐसी तो कोई बात नहीं पर मुझे लग रहा कि आज का दिन मेरे लिए ठीक नहीं रहा और मेरे साथ आप भी परेशान हो गए । आप की कार डाॅग पर मैं तो खुश हूँ आपकी कार खराब भी इसलिए या वापस जाने के कारण आप हमेशा नकारात्मक के सोचती है । मेरी खुशी का कारण है आपके साथ आना । मुस्कुराते हुए नीरज ने आगे कहा, आपकी मजबूरी सही पर आपने मेरे साथ सफर किया हूँ । अब क्यों रुक गए अचानक गाडी रोकने पर किरण ने पूछा हर्षो का नहीं गाडी अपने आप चुकी है । अब क्या हुआ? किरण ने पूछा देखता हूँ हो तो विकट समस्या है क्या हो गया? पेट्रोल खत्म हो गया है कि रंजीत ही भगवान क्या करेंगे । किरण ने आकाश की ओर देखते हुए कहा, अब तो पैरों को ही तकलीफ देना होगा कम से कम हाइवे तक । नीरज ने कार को लॉक करके चलती हुए कहा तो किरन भी उनके पीछे ही होली इस तरह मातम वाली खामोशी के साथ चलेंगे तो सफर अधिक कष्टप्रद हो जाएगा । नीरज ने नियताः को चीरते हुए कहा, आज का पूरा दिन व्यतीत कर के हँसी लाया है । शून्य किरण ने कहा, आप काम के अतिरिक्त कभी कुछ और नहीं सोचते हैं । क्या मुजरिम छूटना जाए? इसलिए मैंने आपके साथ आने में भी परहेज नहीं किया । हर कोई सफलता हाथ भी नहीं लगी और आपको मजाक सूचना किरण ने नाराजगी प्रकट की । मैं तो बस बुरे वक्त को खुशियों के साथ व्यतीत करने की कोशिश कर रहा हूँ । नीरज ने आगे कहा, अच्छा बताइए अम्मा कैसी अपना ये घिसापिटा सवाल करने में बहुत देर लगा दिया । आपने सही कहा आपने? आप का साथ पाकर मैं सब भूल गया । नीरज ने हाजिर जवाब दिया क्या मतलब आपको किरण चलते चलते ही रुक गई हरी आप नाराज होगी । मैंने तो मजाक किया । नीरज ने तत्पर्ता से जवाब दिया, लेकिन मुझे ऐसे बेहूदा मजाक पसंद नहीं । किरण में कदम तेज करते हुए कहा वहाँ पे आप इतना तेज चलेंगे तो मैं पीछे छूट जाऊंगा । नीरज ने दौडते हुए आगे कहा, आपका तो पेशा है पर मुझे गरीब का ख्याल रखी । देखिए मैं कैसे हाफ रहा हूँ । मेहनत के काम में शारीरिक तकलीफ तो होती हैं । नीरज जी पर चौबीस घंटे काम और कडी मेहनत कर के भी हम उतना नहीं कमा पाते हैं जितना आप एक झूठी खबर में पा लेते होंगे । किरण ने कहा, सिर्फ कडवाहट से जिंदगी बोझ बन जाएगी । किरण जी कुछ मिठास भी जरूरी है । नीरज ने कहा मेरे जीवन में चीनी अगर कम है ये तो हम पर निर्भर करता है कि जिंदगी को हम कैसे जीना चाहते हैं । जीवन है तो सुख दुःख तो लगा ही रहेगा पर इन सुख दुख को साझा करने के लिए एक साथ ही का भी होना जरूरी होता है । नीरज ने कहा हमारे ऊपर पहुंच गए और वो देखिए एक प्रकार है । अच्छा होगा कि हम एक दूसरे का गुरू बनने की जगह गंतव्य तक पहुंचने की व्यवस्था करें । किरन ने कहा

कलम से हत्या - 09

ये सब क्या है? किरण गुस्से से तमतमाते हुए सनत ने आते ही किरण के सामने अखबार लहराते हुए कहा क्या हुआ बेटा? किरण की मां सनत की तेज आवाज सुनकर रसोई से बाहर आकर पूछने लगे मुझसे क्या पूछ रहे है आंटी जी इन सब के पीछे आपका प्रोत्साहन भी तो है । अब क्या हो गया? मुझसे शिकायत है तो मुझे कहीं इस तरह वहाँ से बात करने का कोई हक नहीं बनता है । किरण ने कहा पहले तुम बैठो तो सही और लो पानी पी लो । किरण की माने सनक को बिठाकर पानी देते हुए कहा अब बोलो तुम्हारे गुस्से का क्या कारण है? बताना क्या आंटी जी खुद ही पढ लीजिए । सनत ने अखबार आगे बढाते हुए कहा । सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम पत्रकारों पर ब्लैकमेलर होने का आरोप लगाने वाले अकेले में दोस्ती करते दिखे । उप शीर्षक के साथ लिखा था कि इस शहर में पिछले दिनों रही बहुचर्चित खबर माथुर कांड को शायद ही लोग अभी भूल पाए होंगे । समाज के लिए पथ प्रदर्शक समझे जाने वाले प्रोफेसर माथुर स्वयं ही कलंकित निकले उम्र का भी खयाल नहीं रखते हुए अपने इश्क के भवन में मासूम मनीषा को भी ले डूबे थे । इस प्रकरण का पर्दाफाश अखबारों के माध्यम से होने के कारण माथुर की पुत्री किरण जो कि पेशे से थानेदार हैं, नहीं, आवश्यक जानकारी मांगने पर भी पत्रकारों और पत्रकारिता से घृणा करने की बात कहते हुए बात करने से भी मना करती आई हैं । पर आज की ताजा खबर यह है कि एक अखबार के मालिक के साथ शहर से लेकर जंगल तक घूमते हुए देखी गई । जैसे पिता वैसी पुत्री जब प्यार किया तो डरना क्या के लहजे से खुलेआम इश्क की नुमाइश कर रही थी । हम मानते हैं प्रत्येक व्यक्ति को अपनी निजता होती है और प्यार करना कोई बुरी बात नहीं है । पर यदि कोई सरकारी नौकरी के समय में या जिम्मेदारी का निष्पादन करना हो तब निजी स्वार्थ पर समय बर्बाद उचित नहीं होता । और सबसे बडी बात तो ये है कि जिस पत्रकारिता की बुराई करते हुए वो कभी थकती नहीं थी, उस से जुडे व्यक्ति के साथ घूमते फिरते देखे जाने से पत्रकार जगत हैरान हैं कि आपने झूठ को सच में परिवर्तित करने का कहीं उनका कोई नया तरीका तो नहीं माना कि उनके साथ देखे गए पत्रकार कर्मठ हो संवेदनशील है पर हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि वह महोदय जी भी युवा है । और इन दिनों माथुर साहब के बारे में छपी पूर्व खबरों को लेकर शोध कर रहे हैं । मैं तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूँ । सनद अखबार के किसी कोने पर छपी इस खबर को पढने के बाद उसे कोने में रखते हुए किरण की माँ ने कहा, जिस बात को जानकर मेरे तनबदन ने आग लगी हुई है, उस खबर को पढने के बाद किरन से सवाल करने की जगह मुझे चाय के लिए पूछ रही थी । क्या अखबार के टुकडे पर तो भरोसा कर सकते हो क्योंकि तुम मेरी किरण को ना तो जानते हो और नहीं समझती हूँ और ना ही अखबारों के झूठ को तुमने होगा है । पर मैं किरण की मां हूँ, उसे अच्छी तरह से जानती हूँ और अखबारों में छपने वाली झूठी खबरों को भी मैं जानती हूँ । इसलिए जो तुम कहना चाह रहे हो वैसा मैं सोच भी नहीं सकती और तुम्हें भी अखबार के इस टुकडे पर ध्यान नहीं देना चाहिए । मेरे मंगेतर के बारे में इस तरह से उल्टी सीधी बातें लिखी हूँ और मैं कुछ नहीं करूँगा । मैं प्यार करता हूँ किरन से फिर ऐसी बातें कैसे बर्दाश्त कर सकता हूँ । सडक ने कहा तो जाओ जिसमे लिखा है उसका कॉलर पकडो किरण ने कहा, सुंदरियां आंटी जी अपनी करनी पर शर्मिंदा होने की जगह मुझे चुनौती दे रही है । सनत में किरण को घूरते हुए कहा । किरण सही कहती हैं कि क्या सही कहती है । सनद के बीच में टोकते हुए कहा, आप माँ के साथ इस तरह से ऊंची आवाज में बात नहीं कर सकते हैं, नहीं तो क्या कर लोगी । सरल ने किरण के समूह जाते हुए कहा बेटा सनत तो मैं इस समय जाओ । यहाँ से तुम्हारा गुस्सा शांत हो जाए फिर बात करेंगे । किरन की माने समझाया नहीं आती है । बातें तो अभी होंगी और आप भी बता ही दीजिए कि किरण क्या सही कह रही थी । मेरे बारे में सनत नेसू पेपर धसते हुएकहा । मैंने कहा है कि आप से मेरे विचार बिल्कुल भी नहीं मिलते हैं और आज आपने सबूत भी दे दिया । किरण ने कहा कैसा सबूत समझ झल्लाया मुझसे अधिक विश्वास आपको इस अखबार में लिखी गई बातों पर है । वो भी तब जबकि आप जानते हैं कि ऐसे ही अखबार में छपी झूठी खबर मेरे पापा की मौत का कारण बनी है और इन अखबार वालों ने मेरे पापा की मौत के बाद भी उनकी आत्मा पर कीचड उछाला है । किरण ने कहा, तो क्या ये बात गलत है कि तुम कल किसी पत्रकार के साथ घूमते फिरते देखी गई हो? सनत ने पूछा उस समय में किसी सैर सपाटे पर नहीं थी, बल्कि ड्यूटी पर थी । अच्छा तो ये भी बता दीजिए कि रंजी कि वीरान जंगल में किसी युवा पत्रकार के साथ कौन सी ड्यूटी कर रही थी आप सनत नहीं पाँच क्या मुझे आप कैसे वाहियात सवालों का जवाब नहीं देना और ऐसा बेहुदा सवाल पूछने का कोई हक नहीं है । आपको मंगेतर हूँ मैं तुम्हारा और मैं प्रोफेसर माथुर नहीं हूँ, जो अपनी जब की परवाह नहीं करते हैं और अब मेरा फैसला भी उन लोग बहुत हो चुकी । आप लोगों की मनमानी और मातम के नाम पर, शादी में लेटलतीफी पर अब और नहीं मैं आज ही घर जाकर पापा को यहाँ भेजता हूँ । शादी में देरी अब मुझे मंजूर नहीं । सडक में एक ही सांस में सारी बातें कह दी । इस तरह आवेश से रिश्ते नहीं चलते । बेटा आपके रिश्ते की बात कर रही है । हाँ, बातों को बीच में ही काटते हुए किरण ने आगे कहा, रिश्ते प्यार और विश्वास से बनते हैं । क्या मतलब है तुम्हारा? क्या मैं तो मैं प्यार नहीं करता है । सनत ने पूछा प्रेम कहने की चीज नहीं, एक ऐसा है जिसे तुम कब समझोगी? किरण मेरे प्यार को मैं तुम से प्रेम करता हूँ । इसीलिए तो किसी के साथ तो मैं अकेला देखकर बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूँ । हमारे प्यार के बीच में मैं किसी को भी बर्दाश्त नहीं करूंगा । तुम ऐसे मेरे अत्यधिक प्रेम में जलन कह सकती हूँ, पर नहीं । संजीव अब बस बहुत हो चुका । आपसे मुझे कोई शिकायत नहीं पर हम एक दूसरे के लिए अनुकूल जीवन साथी नहीं बन सकते । ये तुम क्या कह रही हूँ? किरण माने पूछा साॅस मेरे प्यार की परिभाषा के अनुसार प्रेम में प्रेम के अतिरिक्त कुछ भी नहीं होना चाहिए । जबकि इनके अनुसार प्रेम में जलन, अधिकार, अविश्वास और न जाने क्या क्या । मैं यहाँ फिल्म के डायलॉग सुनने वाला कोई दर्शक नहीं, तुम्हारा मंगेतर हूँ । किरण और आप आंटी जी किरण को ये पूछने की बजाय कि वह कल किस लडके के साथ थी, मुझे बनाने की कोशिश कर रही है । सनत ने कहा इस समय तुम आवेश में उस गलत? हाँ, मुझे कुछ सहारा है कि आप माँ की जिम्मेदारी नहीं नहीं बाबा रही है । पर मैं अपनी जिम्मेदारियों से नहीं भाग सकता । बस सेना बहुत हुआ । तुम इसी समय जाओ यहाँ से तुम्हारा गुस्सा शांत हो जाए फिर बात करेंगे । किरण ने कहा तुम घोष में तो वो किरण संगत में आश्चर्य से पूछा । देर से ही सही पर मैंने सही कदम उठाया । ना सिर्फ इस घर से बल्कि आपको अपनी जिंदगी से भी जाने के लिए कहती हूँ । किरण ने तमतमाते हुए कहा सनत के चले जाने से बात खत्म नहीं हो जाती है । किरण मेरे लिए ये जानना जरूरी है कि क्या अखबार में लिखी हुई बात सही हैं? ये सवाल आप कुछ नहीं यहाँ जो अखबारों कि असलियत जानती है । मुझे सवाल के बदले सवाल नहीं चाहिए । किरण मैं जानना चाहती हूँ की क्या तुम किसी युवक के साथ सुनसान जंगल में अकेली थी? हाँ पर वो मेरी मजबूरी थी । किरन ने कहा और वो लडका कौन था? मानी पूछा नीरज जी किरण में जवाब दिया कौन वही नीरज के साथ ही तो माँ ने आश्चर्य से पूछा ये महज उत्पाद थमा पर तुम तो मुझे नीरज से बात तक करने से मना करती रहती हूँ । फिर कहाँ नामा की मजबूरी थी । मेरी जीत खराब हो गई थी । देखो किरण तो मैं इस नौकरी में जाने से पहले ही कहा था कि मर्दाना नौकरी है इस नौकरी के कारण तुम्हारी निजी जिन्दगी पर कोई प्रभाव नहीं पढना चाहिए और आज वहीं हुआ सनद से में बात करके तुम्हारे रिश्ते को संभाल लुंगी पर अब मुझे लग रहा है कि सब की नाराजगी गलत नहीं थी । आप ऐसा कैसे कर सकती हूँ जो तुम्हारे लिए सही है? वहीं कह रही हूँ सनद तुम्हारा मंगेतर है और तुम्हारे काम में ऐसी स्थिति से उसे परेशानी हो रही है तो ये नहीं बात नहीं है और गलत भी नहीं है आपको सडक का इस तरह से मुझ से बात करना सही लग रहा है तो जमा जाती हूँ । हाँ मैं आपसे सहमत नहीं हूँ और रही बात मेरी शादी की तो जब तक मैं अपने पापा की इज्जत को दागदार करने वाले लोगों को बेपर्दा ना कर लूँ तब तक मैं शादी नहीं करूंगी । इस तरह तुम अपनी मनमानी नहीं कर सकती । किरण हर जगह बहुत अच्छा नहीं होता है । जिस भवन से फसकर तुम्हारे पापा की जान गई है वैसे किसी भवर की ओर में तो मैं नहीं हो सकती तो किसी अखबार में झूठी खबर में लिख देने से तुम मुझ पर अविश्वास कर रही हूँ । किरण परेशान हो गई । सवाल मेरे विश्वास या अविश्वास का नहीं है । बेटा तुम जानती हूँ कि लोग अखबार क्यों पडते हैं । माने प्यार से कहा क्यों पढते हैं? हाँ, क्योंकि विश्वास करते हैं माने का तो आप क्या चाहती है? माँ सनत और उसका परिवार हर दृष्टिकोण से इस अच्छम है । तुम्हारी शादी करके मैं तो में सुरक्षित करना चाहती हूँ । मैं आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेकर बैठी हूँ और आप कह रही हैं की मेरी सुरक्षा के लिए शादी जरूरी है । मैं थानेदार किरन की नहीं बल्कि अपनी बेटी के लिए चिंतित हूँ । आप मेरी सुरक्षा की बात तो कर रही हूँ और मेरी इच्छा की परवाह नहीं कर रही है । क्या है तुम्हारी अच्छा? मैं समझ से शादी नहीं करना चाहती । माँ अब विधिवत मुझे उससे मुक्ति दिला दीजिए । इस बारे में हम पहले भी बात कर चुके हैं । तुम्हारे पिता के द्वारा किए गए रिश्ते का हमें सम्मान करना चाहिए । बेटा मैं भी इसीलिए अब तक सब कुछ देखते हुए भी आंखे बंद करके बैठी थी । हाँ, पर मुझे लगता है कि आज भी पापा होते तो वे भी मेरे निर्णय से सहमत होते हैं । ऐसा क्या कर दिया है? सनत नहीं माने । पूछा उसने जो भी किया है वो मेरी आंखों देखी है । हाँ क्या देखा है तुमने मुझे कहते हुए अच्छा नहीं लग रहे हैं पर आपको ये सच बताना ही होगा । माँ की सनक मुझसे शादी तो करना चाहता है पर वो हमारे रिश्तों का सम्मान नहीं करता है । कई बार वह अन्य लडकियों के साथ अपने रिश्तों को स्वीकार कर चुका है और विवाह के बाद मुझे समर्पण के नाम पर इस नौकरी को छोडने की बात तो करता है । पर साथ में ये भी कहता है कि शादी के बाद भी उसे अपनी महिला मित्रों से मिलते जुलते रहने की आजादी होनी चाहिए । उसने साफ शब्दों में मुझसे कहा है कि एक व्यक्ति को अपनी खुशियों के अनुसार जीवन यापन करने का हक है पर उसका मतलब सिर्फ पुरुषों से है जबकि मुझे ऐसा जीवन साथी चाहिए जो सिर्फ मेरा हो । ऐसा कैसे हो सकता है? उसने मुझे स्वयं कहा है कि तुम से शादी होने का दिन वो बेसब्री से इंतजार कर रहा है । मैंने कहा संगत मुझसे प्यार करता है इसलिए शादी नहीं करना चाहता है । बल्कि ये शादियों ने अपने सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के लिए और अपने वर्ष को आगे बढाने के लिए चाहिए । वो इस शादी के माध्यम से ये आदर्श भी समाज में प्रस्तुत करना चाहता है कि उसके पापा ने जिस लडकी को उसके लिए पसंद किया है, वही उसकी जीवन संगिनी होगी । आप ही बताइए माँ की ऐसे व्यक्ति से मैं कैसे शादी कर लूँ । ठीक है सडक के बारे में भी हम बाद में बात करेंगे । पर अखबार में छपी खबर का क्या? उन्हें जो लिखना है लिखें । हम परवाह नहीं करते । बिल्कुल यही शब्द था तो तुम्हारे पापा का और परिणाम तुमने देखा है तो आप क्या चाहती है? हाँ ठीक है, तुम कुछ मत करो । मैं नीरज से बात करूंगी की इस खबर का खंडन करें । माने कहा ।

कलम से हत्या - 10

बहुत सोच विचार के बाद किरण ने निर्णय लिया कि वह उन अखबारों के कार्यालय जाएगी जिसमे उसके और नीरज के संबंधों को लेकर ऊलजलूल बातें लिखी हैं । पर इससे पहले नीरज से मिलकर पूछना जरूरी है कि हमारे साथ होने की बात कहीं उसने तो नहीं बताइए कहाँ जारी हो? किरण इंस्पेक्टर कि ड्रेस की जगह साडी में जाते हुए देख तो माने पूछा नीरज से मिलने किरण के जवाब में रूखापन था नीरज से तुम नहीं मैं बात करूँगी । मैंने कहा नहीं हम इस मसले में मैं आपको बीच में नहीं घसीटना चाहती । किरण ने कहा मैं समझती हूँ कि तो मैं नहीं बल्कि मुझे नीरज से बात करनी चाहिए । मुझे पता था माँ की आप ऐसी जिद्द करेंगे । इसीलिए तो मैं बताए बिना जा रही थी । किरन ने कहा मुझे भी यही आशंका थी आज तक मुझे बताया पूछे बगैर तो में कदम भी नहीं निकालती थी और आज ऐसे व्यक्ति से मिलने जा रही हो जिसके कारण तुम्हारे चरित्र पर बात आ गई है । और फिर अब तक तो मेरे से बात करने पर भी ये कहकर मुझसे नाराज होती रही होगी । वो पत्रकार है । फिर आज आज तक आप ने भी तो मुझसे कभी इस तरह व्यवहार नहीं । क्या माँ क्या गलत किया है मैंने तुम्हारे साथ मेरे लिए सबसे बडी दुख की बात तो यही है कि आज मुझे आप की सबसे ज्यादा जरूरत है तो आपको अखबारों की बातों पर मुझसे ज्यादा भरोसा हो रहा है । किरण ने कहा आज की युवा पीढी के साथ यही सबसे बडी परेशानी है । हम जब तक तुम्हारे हाँ में हाँ मिला कर चलते हैं तब तक तो सब ठीक रहता है । लेकिन जब हम गलतियों की ओर ध्यान आकर्षित करने लगते हैं तो बुरे बन जाते हैं । मुझसे नाराज हो वो तो ठीक है पर सजा अपने पेट को क्यों दे रही हूँ । नाश्ता तो कर लो मुझे भूख नहीं है । हाँ पर मुझे तो बुक है और तुम जानती होगी । तुम्हारे साथ ही नाश्ता करने की आदत है । मेरी मान्य नाश्ता लगाते हुए आगे कहा ऍम नाश्ता कर आपका पापा तो मेरी नौकरी की जो इस पर हमेशा गर्व करते आए हैं । तो फिर यही तो तुम्हे समझाने की कोशिश कर रही हूँ । किरन कि तुम्हारे पापा की तरह कभी न कभी मैं भी तुम्हारा साथ छोड ही जाउंगी । फिर वहीं मरने जीने की बातें । किरण ने नाराजगी से कहा तो मैं समझना चाहिए । किरण कि विवाह एक समझौता होता है जिसमें सामने वाले के विचारों को महत्व देना भी जरूरी होता है और सामने वाले का कर्तव्य नहीं बनता है । हाँ कि वो हमें भी समझे । किरण ने पूछा हूँ, सनद तुम्हें जरूर समझेगा पर तुम उसे समझने का मौका दोगी । तब ना क्या मतलब आपका सडक में मेरी शिकायत की आप से शिकायत नहीं किया है बल्कि दुखी हो रहा था कि तुम ना तो उसकी कोई बात सुनती हूँ और ना ही समय देती हूँ । मैं चाहती हूँ कि रन की तुम सडक से बात करूँ और उसे अपने साथ समय गुजारने का मौका दो । लेकिन हाँ लेकिन लेकिन कुछ नहीं । किरण अच्छा ठीक है, मैं कोशिश करूंगी । किरण ने माँ से बहस करने से अच्छा उनकी बात मान ली । एक बात बताओ किरण पूछो माँ किरण ने कहा तुम नीरज से क्यों मिलना चाहती हूँ? अखबार में छपी खबरों के सिलसिले में हाँ हाँ, तो फिर मत जा, उसके पास ना मैं नहीं तो कोई नहीं जाएंगे । नीरज के पास यदि खबर झूठी है तो वे स्वयं खानदान कर देगा । और यदि ऐसा नहीं हुआ तो किरण ने पूछा तो भी हमें नीरज के पास नहीं जाना है । मानी सकती से कहा कि वहाँ क्योंकि जो हो गया सो हो गया । भूल जाऊ उन बातों को इस बात को ऐसे कैसे जाने दूमा किसी ने मेरे बारे में गलत लिखा है । यही तो समझाने की कोशिश कर रही हूँ बेटा कि हमें इस सब में नहीं उलझना है तो अपनी ड्यूटी के साथ साथ जीवन में आगे बडने के बारे में सोचूँ अखबार में लिखी बातें लोग पढेंगे और भूल जाएंगे पर तुम इन बातों को कुरेद होगी तो बेकार में बात बढेगी जिसमें अनंतता नुकसान हमारा ही होगा । पर इस तरह चुप बैठ जाने से झूट पर सच की मोहर लग सकती है । हाँ सच क्या है यह तुम्हारी अंतरात्मा जानती है ना बेटा फिर किसी को जताने की जरूरत नहीं है हमें और फिर पापा की तरह झूठ के पाषाण तले अपने आत्मसम्मान को दर्जा ने धुमा तेरे पापा के साथ जो हुआ उसकी पुनरावृत्ति न हो इसलिए तो मैं नीरज से मिलने से मना कर रही हूँ । ऐसा करके तुम उन रूटों की सहायता ही करोगी । कभी कभी चुप रहना भी ऐसे मर्ज की दवा होती है । माने समझाया मेरा मन तो अभी उन झूठी खबर छापने वालों को कठघरे में खडा करने का है जिसके लिए नीरज जी से मिलना जरूरी था । पर आप की बात मानकर अब मैं अपने काम पर चली जाती हूँ । साडी में माने पूछा बहुत देर हो चुकी है तो यूनिफॉर्म साथ ले जाती हूँ । थाने में बदल लूंगी । किरण ने कहा

कलम से हत्या - 11

क्या हुआ? गाडी के रूप उस कार में बैठे सर ने रुकने का इशारा किया । ड्राइवर ने जवाब दिया मुझसे पूछे बिना इस तरह गाडी नहीं रोकनी चाहिए तो मैं चलो आगे बढो बाजू में नीरज की कार देख किरण ने डाटा बीमार कहकर ड्राइवर निकल पडा । किरण की इस बेरुखी से नीरज के होठों पर मुस्कुराहट बिखर गई । उसे किरन कि पत्रकारों के प्रति नाराजगी का स्मरण हुआ आया और अब जब की फिर से अखबार में किरण की खबर छपी है । अब तो निश्चित ही किरण का गुस्सा सातवें आसमान पर होगा । किरण तो मेरी सूरत भी नहीं देखना चाहती होगी । पर क्या ऐसा संभव है? मेरे दिल में उठता हुआ किरण के प्रति प्रेम क्या एकतरफा है? किरण के मन में मेरे प्रति कोई सकारात्मक भावनाएं नहीं और यदि ये सच है तो मेरा मन क्यों किरन की ओर खींचे चला जा रहा है? नीरज खुद के सवालों का खुद ही जवाब देने लगा । अब क्या हुआ? गाडी के रोक दी । गाडी रोकने पर किसी पुस्तक पर नजरें जमाए किरण ने पूछा जी मैडम वो ड्राइवर की घबराहट पर किरण ने नजरे उठाई तो देखा चारों ओर गाडियाँ खडी हैं और कुछ लोग ड्राइवर का दरवाजा खटखटा रहे हैं । क्या हुआ क्या बात है? किरण ने कार से बाहर निकलते हुए कहा अब तुम हमारे साथ चलोगी । कहते हुए तीन चार लोगों ने किरण को जबरदस्ती अपनी कार में बिठा लिया छोडो मुझे क्या बता दीजिये तुम जानते नहीं में कौन बहुत अच्छी तरह जानते हैं । मैडम की धारीदार साडी में लिपटी तुम सिर्फ खूबसूरत बना ही नहीं हूँ बल्कि लोगों को सुरक्षा देने वाली असम निभानेवाली इंस्पेक्टर किरण हो तो तुम लोग ये भी जानते होगे की इस गलती के लिए मैं तुम लोगों को छोड भी नहीं । इस तरफ पड पढाना से कुछ नहीं होने वाला है मैडम जी हम जानते हैं कि तुम एक दो से संभालने वाली नहीं हूँ इसलिए हम भी पूरी तैयारी से आए हैं । मैं कह देती हूँ की ये सब तुम लोग ठीक नहीं कर रहे हो । किरण ने उनके चंगुल से छूटने की कोशिश करते हुए कहा हमारे खिलाफ डायरी तैयार करते समय तो बडे मजे से धाराएं लगा रही थी । अब हमें भी मुझे लेना है । तुम्हारे इस खूबसूरती का बहुत बचता होगी । किरण छटपटाने लगी तुम जैसी हसीन और तेज तर्रार हसीना के साथ कुछ पल बिताने के बदले मौत भी मिले तो कोई गम नहीं तो लोग मरने के लिए तैयार हो जाऊँ । अचानक ही किसी ने प्रकट होते हुए कहा यादव तो एकदम सही समय पर आई हूँ । पकडे इन सबको कोई भागने ना पाए । जिसे ढूंढने में हमने अपना बहुत समय खराब किया वो लोग आज स्वयं ही हम तक चल कर आ गए हैं । कहते हुए किरण ने दोनों हाथ पकडे हुए गुंडे को जोर का धक्का देकर यादव के पास धकेलते हुए अन्य पुलिस कर्मियों से कहा पकडे इन सबको कोई भागने ना पाए आप ठीक ऍम पर जरा संभल के लिए जो इन बदमाशों को बहुत शातिर है ये लोग और ध्यान से कोई ना छोटे । किरण ने कहा जी मैडम, आज तो उनकी खैर नहीं पर मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि तुम लोग क्या कैसे आए । उन सामने हमें फोन करके बताया । मेरे को यादव ने दूर खडी कार की ओर इशारा करते हुए कहा आप यहाँ कार के पास पहुंचते ही । किरण ने आश्चर्य से कहा अब तो कम से कम धन्यवाद बनता है कि रंजीत नीरज ने कहा पर आपको कैसे मालूम हुआ कि बहुत सवाल करती हैं इस सब में कहीं आपका यहाँ तो नहीं? किरण ने पूछा मुझे आपसे ऐसे ही किसी सवाल की उम्मीद थी । नीरज ने हसते हुए आगे कहा, शक्कर ना तो आपका पेशा है पर कभी अपने काम से बाहर आकर भी सोच लिया करें । क्या सोचूं किरण के स्वर में रूखापन था । यही की यदि इस समय आपकी सहायता के लिए आपके साथ ही नहीं आती तो क्या होता है? आपकी नौकरी के प्रति आपका समर्पण तो ठीक हैं पर आपको सावधान भी रहना चाहिए । नीरज ने गंभीरतापूर्वक आगे कहा हो तो अच्छा हुआ कि आज मुझे आप से बात करनी थी । इसलिए मुझे नकारने के बाद भी मैं आपके पीछे आ रहा था और यहाँ का नजारा देखकर आपके थाने में फोन कर दिया । नीरज ने कहा, सौरी और धन्यवाद भी । किरण ने हाथ जोडकर मुस्कुराते हुए कहा । आपके साथ ही तो अपराधियों को लेकर चले गए तो अब हम भी चलेंगे । नीरज ने कार में बैठी हुई कहा आप जाइए यादव मुझे लेने आ जाएगा । मतलब यादव के आने तक में आपको इस वीरान जगह पर अकेले छोड दूँ । नीरज का हो । आप समझते क्यों नहीं? आप इस तरह परेशान मत हुई है । मुझे अच्छा नहीं लगता है अपना दोस्त नाम आने ना सही पर मैं दुश्मन भी नहीं हूँ । बात दोस्ती दुश्मनी की नहीं है । नीरज जी कल अखबार में छपी बातों को लेकर परेशान है । आप परेशानी की तो बात ही है पर उससे ज्यादा शिकायत है । किरण ने कहा, मैं आपसे सहमत हूँ पर मुझे पत्रकारों से अधिक आपसे शिकायत है । किरण ने कहा मुझसे क्यूँ मैंने क्या किया? नीरज के प्रश्न में बोला था, आपकी बिरादरी ने झूठ लिखा और अपने विरोध तक नहीं किया । झूठ नहीं की रंजीत आधा सच लिखा गया है कौनसा सच? किरण ने पूछा वहीं प्रेम वाली बात? नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा, आप किस चीज की बात कर रहे हैं? मैं नहीं जानती । वास्तविकता यही है कि उस दिन की हमारी मुलाकात सिर्फ सहयोग था और पूरा सच जानने के बाद भी आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? नहीं मुझे भी तो आधा सच्ची मालूम है । किरण जी मतलब पत्रकार कह रहे हैं कि हम प्रेम करते हैं जबकि मैं सिर्फ अपने मन की बात जानता हूँ, आपके मन की नहीं । नीरज ने कहा इसका मतलब ये है की वो खबरें आपके द्वारा प्रायोजित हैं । किरण ने कहा, पुलिस में होने के कारण शक करना अच्छी बात है । पर जहाँ गुंजाइश न हो वहाँ ऐसी आशंका क्योंकि रंजीत क्योंकि आपकी मर्जी के खिलाफ कोई कुछ कैसे लिख सकता है । गलत फैमी मैं आपकी रंजीत मेरे प्रतिद्वंदियों की लिस्ट बहुत लंबी है जो मेरी किसी भी गलती का इंतजार कर रहे हैं । नीरज ने कहा, आप ऐसा करेंगे तो कैसे इन खबरों का खंडन होगा जब की माँ के लिए हमें ये करना ही होगा । किरण ने कहा माँ के लिए मतलब? नीरज ने पूछा । मैंने कहा है कि यदि हमारे बीच कोई प्रेम प्रेम नहीं है तो खबरों में छपी बातों का खंडन करना चाहिए । कम से कम प्रेम सबको तो प्रेम से बोली किरण जी, मैं परेशान हूँ और आपको मजाक सोच रहा है । फिर ठीक है । मेरे गंभीर प्रश्न का उत्तर दीजिए । अम्मा ने अखबार में लिखी बातों को सच कैसे मान लिया? कहीं ऐसा तो नहीं कि उन्होंने अपनी बेटी की आंखों में सच्चाई देखती हूँ? नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा क्या मतलब आपका मतलब तो आप भी जानते हैं क्या माँ तो मात्र सर के बारे में छपी झूठी खबरों के बारे में जानती है । फिर अपनी बेटी के बारे में लिखी गई बातों को सच क्यों मान रही है? यही तो माया है । आप पत्रकारों कि झूठ इतनी सफाई से लिखते हैं कि कोई भी धोखा खा जाए । किरण ने कहा, और मैं यदि ये कहूँ कि अम्मा पत्रकारों के माया जाल में नहीं फंसी हैं बल्कि पत्रकारों की झूठी बातों का सच अपनी बेटी की आंखों में देख ली हैं तो कौन सा सच? किरण ने रूखेपन से पूछा प्रेम का सच है, हमारे प्रेम का सच है । नीरज ने भी तुरंत जवाब दिया क्या बक रहा हूँ, बस नहीं रहा हूँ, अपने प्रेम का इजहार कर रहा हूँ । नीरज ने किरण की आंखों में जाते हुए कहा मैं तुमसे प्रेम नहीं करती । किरण ने झट से कहा थोडा रुको । मैंने तुमसे पूछा नहीं कर रहे हैं । बताया है कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ और मैं तुमसे अभी पूछूंगा भी नहीं क्योंकि मैं जानता हूँ कि अभी तो तो मैं खुद ही नहीं मालूम कि मुझसे प्यार करती हूँ । पर हाँ उस दिन का मुझे बेसब्री से इंतजार रहेगा जब काम स्वयं मेरे कंधों पर सिर रखकर अपने प्यार का इजहार करोगी । ये संभव है किरण ने मुंह फेर लिया क्यों? क्योंकि मेरी सगाई हो चुकी है? किरण ने जवाब दिया, मैंने प्रेम की बात की है । सगाई शादी की तो नहीं? सीने में अकस्मात गिरे वजन सा किरण की सगाई की बातों के प्रहार से संभालते हुए नीरज ने कहा, इसका मतलब क्या मैं ये समझूँ कि मेरी कर्मठता का नाजायज फायदा उठाकर आपने अपने पत्रकार मित्रों से झूठी बात लिखवाई । किरण सकती थी । मैंने कहा तो ये आपकी गलतफहमी है । नीरज ने जवाब दिया, तो फिर चलिए और मेरे सामने आपके पत्रकार साथियों को सच बताइए कि उस दिन का हमारा साथ मेरी गाडी खराब होने के कारण था । किरण ने कहा, जख्मों को कुरेदने से और गहरा होता है इसलिए अच्छा होगा । इसी बातों को खरीदने की जगह हाथ बांधकर बैठ जाना । ऐसा ही मेरे पापा ने भी किया था । नीरज जी जिसका दुष्परिणाम मैं देख चुकी हूँ, आप अपना सब जानती है ना । फिर क्यों परेशान हो रही है । किसी के लिख देने से तो आपका सच बदल नहीं जाएगा । और जो समाज और परिवार की उंगलियां मुझ पर उठ रही हैं उसका क्या किस समाज की बात कर रही हूँ? किरन यदि उनकी बात कर रही हो जिन्हें लोगों की व्यक्तिगत बातों को पढकर मजा आता है या गौर अच्छा लगता है । मैं उनकी परवाह नहीं करता हूँ और आपको भी नहीं करनी चाहिए । अच्छा तो मुझे अपनी माँ की भी परवाह नहीं करनी चाहिए । मैंने ऐसा तो नहीं कहा । नीरज ने जवाब दिया तो फिर मेरे घर चलकर मेरी माँ से कह दीजिए कि हमारी मुलाकात का गलत अर्थ नहीं निकाले । हम प्यार नहीं करते हैं, ये नहीं हो सकता हूँ । नीरज ने कहा क्यों किरण को गुस्सा आया क्योंकि मैं अम्मा से झूठ नहीं बोल सकता हूँ । नीरज ने आगे कहा, जीवन में पहली बार मुझे प्रेम का एहसास हुआ है तो मैं स्वीकार कर सकती हूँ पर मेरी जुबान पर सिर्फ मेरे दिल की बात ही होगी । आप तो जानते हैं नीरज जी मेरी माँ मेरा सब कुछ हैं, उनकी नाराजगी में नहीं ले सकती । वो मेरी बातों पर विश्वास नहीं कर रही है । इसलिए आपको मेरे साथ चलकर माँ को सच बताना ही होगा । किरण ने विनम्रता से कहा, हाँ, अपने बच्चों को अच्छे से जानती है और आपकी माँ तो सारा दिन सिर्फ आपके बारे में ही सोचती रहती है । इसलिए उन्होंने वो सब जान लिया है जो आप नहीं जान पाई या जानना नहीं चाहती हैं । टाल रहे आप मुझे टाल नहीं रहा हूँ । अम्मा के सामने झूठ बोलने से बच रहा हूँ । किरण को दागी गई होली के निशाने पर नीरज के आ जाने पर उनकी कंधे के पास गोलियाँ लगी । किरण तत्पर्ता से गोली चलने की दिशा में दौडने लगी । पर तभी नीरज के करहाने की आवाज ने जैसे उसके पैरों में बेडियां जल्दी हूँ गोली लगी है खून मेरा और आप मुस्कुरा रहे हैं । खून बहते हुए जगह पर अपना रुमाल रखकर नीरज को सहारा देते हुए कार्की । पिछले सीट पर बिठाते हुए किरण ने कहा जो भी होता है अच्छे के लिए होता है । नीरज की होठों पर मुस्कुराहट अब भी विद्यमान है । आपको गोली लगी है, ये अच्छी बात है । किरण ने नीरज की पीठ के नीचे कुशन को रखकर कंधे को विपरीत दिशा में झुकाने की कोशिश करते हुए कहा, आपकी बाहू का सहारा मिल गया । इस वक्त मेरे लिए तो यही सबसे बडी और अच्छी बात है । बातें मत कीजिए । शांति जी कहते हुए किरण ड्राइविंग फीट की ओर बढने लगी । इतनी भी ज्यादती ठीक नहीं हो रहा है । चाहने वाले की बात तो कम से कम सो नहीं लेनी चाहिए । इस समय बातें करना ठीक नहीं है । आपका मुंह सूखेगा क्या पता अब जिंदगी साथ देखा ना दे इसलिए मुझे अपने मन की बात पहले नहीं तो कर रहे हैं । मुझे तुमसे प्यार हो गया है और अब मुझे मौत का डर नहीं है । पर हाँ तुम्हारे साथ जीना चाहूँगा । गहन चिकित्सा कक्ष से निकलते ही किरण ने पूछा खतरे से बाहर है । अच्छा किया कि आपने यहाँ लाने में तत्परता दिखाई वरना केस बिगड भी सकता था । एक गोली तो आर पार हो चुकी है पर दूसरी अभी भी मौजूद है जिसके लिए ऑपरेशन करना होगा । इनके घर वालों को सूचना दे दिया आपने जी, डॉक्टर साहब, किरण ने जवाब दिया । शोरगुल सुनकर किरण ने बाहर जाकर देखा तो अस्पताल के बाहर शुभ चिंतको एवं पत्रकारों का जमघट दिखाई दिया । नीरज को गोली लगने की खबर शायद पूरे शहर में आग की तरह फैल गई थी । किरन ने सोचा कि अब यहाँ ठहरना उचित नहीं है और वह पिछले दरवाजे से निकल गई । जुगनु के संपादक एवं मालिक पर जानलेवा हमला, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ ऊपर प्रहार प्रसिद्ध पत्रकार और संपादक की किसी ने जान लेने की कोशिश की । जैसे शीर्षकों के साथ सोशल मीडिया एवं प्रिंट मीडिया पर खबरें चलने लगी । नीरज जी के साथ ये हादसा कैसे और कहां हुआ? किसी पत्रकार ने नीरज के पापा से पूछा नहीं जानता है इस संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है । अभी तबियत कैसी है? नीरज जी की पत्रकारों ने डॉक्टर से पूछा, मरीज अभी खतरे से बाहर है । एक गोली आरपार हो गई है, पर दूसरी गोली अभी भी उनके कंधे के बाजू में धंसी हुई है, जिसके लिए ऑपरेशन करना होगा । नीरज जी के घरवाले पहुंच नहीं वाले हैं, उसके बाद ही हम अगला कदम उठाएंगे । डॉक्टर ने जवाब दिया धायलों मोबाइल में माँ का नंबर देखते ही किरण ने कहा कहाँ किरन तुम घर पहुंची रही हूँ । नीरज और तुम साथ थी । घर में कदम रखती ही माने पूछा आराम की मुद्रा में पैर पसारकर किरण सो पेपर दस गई तो मेरी बातों का जवाब क्यों नहीं दे रही हो? किरण ऐसे बंदूक तानकर पूछ होगी तो क्या जवाब दुमा । किरन ने कहा इस तरह तुम सच को छुपाने पाऊंगी । किरण कौन सा सच वही जो मैं तुम से पूछ रही हूँ । पानी का अगला सामने रखते हुए मानेका मेरे साथ होने वाली दुर्घटनाओं से ज्यादा में आपके सवालों से सहम जातियों कहते ही किरन ने पानी से भरा क्लास एक ही साथ में पीलिया ऐसा क्या सवाल कर दिया है मैंने आपके सवाल ने नहीं बल्कि उसके ढंग ने मुझे अकेला कर दिया है । हाँ, मुझे अपने सवाल का जवाब जानने की आतुरता इसलिए है कि मेरी शंका शंका ही रहे । सच ना हूँ । मान ने स्पष्ट किया आपके सर्च का जिक्र कर रही है । हाँ देखो किरण पहली मत बुझाओ । नीरज को गोली लगने की खबर सुनकर मैं पहले ही बहुत परेशान और तुम जातियों की मैं सिर्फ इतना ही चाहती हूँ । माँ की पहले की तरह हर परिस्थिति में सात देने वाली मेरी माँ मुझे लौटा दूं । किरन की आंखें बहराइच मैं भी तो यही चाहती हूँ कि मुझे मेरी बेटी लौटा दूं जिसे इंस्पेक्टर किरन ने छीन लिया है । मैं आपकी वही किरन हुमा कहते हुए मां से लिपटकर रोते हुए किरन ने आगे का नीरज जी ने आज मेरी इज्जत और जान बचाई है वहाँ पर प्लीज आप मुझसे नाराज मत होना क्यों मुझ पर विश्वास नहीं करती हूँ और नाराज हो जाती हूँ? हाँ, क्योंकि तुम मेरी एकमात्र हो और मेरी सारी खुशियां तुमसे हैं तो मैं कुछ हो जाता तो माँ भी सिसक नहीं लगी । अच्छा जिस बेटी के सिर पर माँ का साया और आशीर्वाद हो उसका कोई कुछ नहीं बिगाड सकता माँ माँ के आंसू पोछते हुए किरण ने आगे कहा, आओ बैठो मैं तो में सब बात बताती हूँ । कहते हुए किरण माँ को पूरी बात बताने लगी । मेरा मन बहुत घबराना है । बेटा तेरे पापा के जाने के बाद अब मुझे ज्यादा सहनशक्ति नहीं बची है । मैं चाहती हूँ किरन कि वीरान और अंधेरी गलियों में भटकते रहने से अच्छा है कि रोशनी की ओर कदम बढा । ऐसा कुछ नहीं है । हाँ, मैं ठीक हूँ । मेरे बारे में ज्यादा सोच करा परेशान मत हुई । माँ होते थे । इतना तो हक बनता है कि तुम्हें अंधेरे से निकालकर उजाले की ओर ले जाओ । क्या चाहती हूँ तुम? हाँ किरण माँ की दोनों बाहों को पकडकर प्यार से बिठाते हुए पूछा तुम शादी कर लो? किरन लेकिन हाँ नहीं किरण अब कोई लेकिन लेकिन नहीं चलेगा । तुम्हारे हाथ पीले हो जाए और तुम अपनी नई दुनिया में खो जाओ । बस मैं इतना ही चाहती हूँ । मैं आपको अकेले छोडकर कई नहीं जाने वाली । उमा तो मेरी चिंता मत करो । किरण सडक के पापा आए थे । उन्होंने कहा कि हम सब सात शर्मा अंकल यहाँ थे तो इसमें आश्चर्य की बात क्या है? किरण सनत के साथ तो महाराष्ट्र पक्का हुए दो साल से ऊपर हो गया है । बेटा तो उनके पिता का ये पर तो बनता है कि अब विवाह के बारे में सोचें । मैंने आपको बताया तो है वहाँ की मुझे थोडा समय चाहिए ये तो गलत है । किरण तो मैं टालमटोल नहीं करनी चाहिए । सदस्य रिश्ता करने से पहले हमने तुमसे पूछा था तब तो तुमने हमारी इच्छा पर मुहर लगा दी थी और फिर तुम्हारी इच्छा का सम्मान करते हुए ना चाहते हुए भी सिर्फ तुम्हारी खुशी के लिए सनत और उनके परिवार ने पुलिस इंस्पेक्टर की नौकरी करने की तुम्हारी बात को मान लिया था और हमारी ट्रेनिंग के चलते विवाह स्थगित करना पडा । फिर तेरे पापा की असमायिक मृत्यु हो जाने से वे लोग अब तक चुप रहे । पर अब फिर से उनकी ओर से शादी का प्रस्ताव आया है तो हम मना कैसे कर सकते हैं । लेकिन हाँ अभी मुझे पापा के हत्यारों को चेहरा समाज के सामने लाना है । बस भी करो बेटा बहुत हो गया । ये पागलपन अपने पापा की मौत के जिम्मेदार पत्रकारों को मानती हो तो ये भी जानती हो कि तुम्हारे पापा भी अपनी मौत की जिम्मेदार हैं । उनकी कार्यरता से अपनाई गई मौत ने हमें दागदार बना दिया है और इन सब के बाद भी शर्मा जी तो मैं अपनी बहु बनाना ही चाहते हैं । यह उनकी महानता है । पापा को गुजरे हुए बहुत समय हो गया है पर मुझे अभी भी ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात हो । मुझे कुछ समय और चाहिए । माँ किरण ने माँ के घुटनों पर सिर रखते हुए कहा तुम्हारे पिता नहीं रहे तो मैंने भी तो अपना जीवन साथी खोया है । किरण मेरा तो सब कुछ लुट गया है । बेटा पर प्रकृतिक आइयां अटल नियम है कि मरने वाले के साथ कोई नहीं मरता है । माना कि तेरे पापा के साथ पत्रकारों ने अच्छा नहीं किया पर तुम्हारे पापा ने भी तो हमारे बारे में नहीं सोचा । मार कर तो वह मुक्ति पागल पर उनके ऊपर लगे कलंक को तो हमें ही बोलना पड रहा है । पापा के बारे में असहमत का ये माँ मेरे पापा बस किरण रहने दो, फिर वही कहानी मत दोहरा हूँ । बहुत मातम बना लिया है हमने । अब हमें जीवन में आगे बढना होगा । तुम्हारा पूरा जीवन पडा है । मुझे उसके बारे में सोचना है । भूत के लिए भविष्य को दांव पर नहीं लगा सकती । मैं इस समय मेरे लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण तुम हो । आप मेरी खुशियों की बात कर रही है पर इस बात को क्यों नहीं समझ लीजिए माँ की इस शादी से मैं खुश नहीं रह पाऊंगी । क्यों किरण ऐसा क्यों सोच रही हूँ क्योंकि मन से रिश्ते के लिए तैयार नहीं उमा तुम कहना चाहती हूँ कि तुम्हारा मन अब नीरज मैंने ऐसा तो नहीं कहाँ? तो मैं कहने की जरूरत क्या है? अपनी बात कहने के लिए तो तुमने टीवी और अखबारों तक अपनी बात पहुंचा दी है । माँ आवेश में कह गई क्या कहा जा रहे समाचारों में माँ किरण माँ की गोद से छिटक कर बोली प्रश्न उठा रहे हैं कि जो किरन माथुर थानेदार होने के बाद भी पत्रकारों को आवश्यक जानकारी देने से कतराती रही है और जरूरी हुआ तो अपने अधीनस्थों के माध्यम से ही कोई भी जानकारी पत्रकारों तक पहुंचाती रही है और हमेशा पत्रकारों से दूरी बनाए रखने का कारण उनकी अविश्वसनीयता को बताने वाली थानेदार साहिबा का आखिर एक पत्रकार से लगा के ऊपर आपको बता दूँ कि आज किरण जी को बहुत बडी सफलता हाथ लगी । शहर के नामी बदमाश को गिरफ्तार करने में उन्हें सफलता में लिए और इस सफलता का कारण प्रसिद्ध पत्रकार नीरज जी को माना जा रहा है । ये सारी बातें सच है । माँ कितनी निर्लज्जता से सच को बता रही हूँ किरण इसमें ला जाने वाली क्या बात है? हाँ, किरण ने निश्चल मन से जवाब दिया कल जब अखबारों में नीरज से तुम्हारी नजदीकियों की बातें छपी थी । तब तो तुम आवेश में थी कि अखबारों में लिखी हुई बातें झूठी है और अब जो झूठ था उसे मैंने झूठ कहाँ पर जो सचिव से नकारने का तो सवाल ही नहीं उठता । तो इस सच के साथ तुम ये भी स्वीकार रही हूँ की मेरे मना करने के बाद भी तुम नीरज के पास गई थी और अपने काम में उससे सहयोग भी लेने लगी हूँ । ये सच नहीं । मैं नीरज जी से मिलने नहीं गई थी । किरण में दृढतापूर्वक कहा तो फिर नीरज तुम्हारे साथ कैसे आया? तल्ख सवाल जवाब होने लगे वो सिर्फ एक संयोग थमा तो मैं ये याद होना चाहिए । किरन कि ऐसे सहयोग तुम्हारी और सडक के रिश्तों पर बुरा असर डाल सकता है । सनद की इच्छाओं का सम्मान करना भी तुम्हारी जिम्मेदारी है । आप सदस्य नक्की मान सम्मान के बारे में सोच पीएम मेरे बारे में क्यों नहीं? किरण भावुक हो गई । तुम्हारे बारे में ही सोच रही हूँ बेटा इसलिए सडक की बात कर रही हूँ तुम समझ क्यों नहीं रही हूँ? किरण अब सनद की खुशी में ही तुम्हें अपनी खुशी ढूंढनी चाहिए और मेरी खुशी माँ मैं तो समझती हूँ कि सनक की खुशी में ही तुम्हारी खुशी छिपी है । पर ऐसा नहीं है । माँ सनत के साथ हमारे विचारों में तालमेल नहीं है । तो क्या नीरज के साथ तुम्हारे विचार मिलने लगे हैं? माने गुस्से से कहा । फिर वही बात माँ किरण परेशान होने लगी और उसमें आगे कहा मैंने बताया तो है आपको की नीरज जी के प्रति ऐसी कोई भावनाएं नहीं है मेरे मन में तुम भी कई अपने पापा की तरह धोखा तो नहीं दे रही हूँ । किरन कहते हुए वे रो पडी ये अपने क्या कर दिया? हाँ, किरण ने आश्चर्य से पूछा क्या गलत कह रही हूँ? मैं तो अटूट विश्वास करती रही तेरे पापा के ऊपर पापा ने आपका विश्वास तो ये आप कैसे हो सकती है? हाँ आपको उनकी किसी बात पर शक है क्या? किरण व्याकुल हो गई नहीं जीवन भर वो मेरे सामने खुली किताब की तरह रहे । प्रत्येक कार्य मुझसे सलाह लेकर ही करते रहे । मेरी भावनाओं का हमेशा सम्मान भी किया । पर पर की हम आप किरण किसी अनजान बातों से आशंकित होती हैं । मैं मानती हूँ कि तुम्हारे पापा मेरे साथ धोखा नहीं कर सकते हैं और ये भी जानती हूँ कि मनीषा के साथ उनका रिश्ता पवित्र था । पर जिस तरह उनके रिश्तों को लेकर कई अखबारों में खबरें लिखी गयी हैं, उनके तर्क के सामने कभी कभी मेरा विश्वास भी डोलने लगता है । मान ने कहा यही तो माया है मीडिया की की सच को झूठ और झूठ को सच बनाते जिसे चाहे हीरो बनाती और पलभर में ही इंसान को अर्श से फर्श पर गिरा देती । आपके विश्वास को डोलते देखकर तो पापा पर लगे दाग को धोने की दृढता अब और प्रबल हो गई है । हाँ तो मैं जानती हूँ किरण इसलिए तुम्हारी बातों पर मुझे विश्वास है । कोई कुछ भी कहे या लिखे मुझे तुम पर भरोसा है । और आज ये जानकर मुझे अच्छा लगा कि नीरज के लिए कोई विशेष भावनाएं नहीं है तुम्हारे मन में । पर मुझे संतुष्टि तभी मिलेगी जब तुम सलत की बातों पर ध्यान दोगे और अब ऐसा कोई सहयोग नहीं होने दोगी जिससे तुम्हारा नाम नीरज के साथ जोडा जाए । माँ की बातें भागों पर कडक थी, मैं आपको संतुष्ट करने की कोशिश करूंगी । माँ किरण ने कहा

कलम से हत्या - 12

आपको नीरज जी के बारे में पूछ रही थी वहाँ पर आप हैं कौन? मैंने पहले कभी नहीं देखा आपको । हम पहली बार मिल रहे हैं । नीरज जी की तबियत कैसी कमाल की है? सवाल पर सवाल किये जा रही है । पहले आप बताइए कौन है आप? ॅ किरण वो तो आप ही है वह महान हस्ती जिसमें भैया को अस्पताल पहुंचाया है । लवली ने कहा जी, अब तो बता दीजिए कि नीरज जी कैसे हैं? खुद ही आकर क्यों नहीं देख लेती है । लवली ने मुंह फेर लिया । मैं अस्पताल जाऊंगी । अब डॉक्टर साहब से फोन पर बात करूंगी तो फिर बात का बतंगड बनेगा । इसलिए प्लीज मुझे बताइए कि उनके शरीर से गोली निकाली गई कि नहीं और अभी वो कैसे हैं । किरण ने आतुरता से पूछा हूँ बडी सयानी है की रंजीत तो लवली ने व्यंग किया ऐसा क्यों कह रही हूँ तो अब भोलेपन का नाटक भी । लवली ने कुटिल मुस्कान के साथ आगे कहा पता नहीं क्या क्या झूठ के अगर भैया को अब तक अपने आगे पीछे चक्कर लगाने के लिए मजबूर करती रही और अब सहानुभूति बटोरने घर तक चली आई आप गलत समझ नहीं है मुझे और फिर ये सब इन सब बातों के लिए उचित भी नहीं । आपको मेरा आना अच्छा नहीं लगता । मैं चली जाती हूँ पर मैंने आपसे सिर्फ एक बार पूछे । इसमें नाराज होने वाली कोई बात नहीं है । किरण ने कहा, अच्छा तो आप मुझे ध्यान देने लगी । मैं नीरज की बहन हूँ और जानती हूँ कि उनके बारे में किसी जानकारी देनी है या नहीं देना है । मुझे सिखाने की जरूरत नहीं है । जाओ और कुछ रुपयों के लिए गुंडे बदमाशों के पीछे दौड लगा या खडी रहकर हमारे आंगन को अपवित्र मत करूँ । लवली ने घूमते हुए कहा, देखिए, अब आप हद से आगे बढ रही है । किरण को भी गुस्सा आया, मुझे आप सिखाओ गी । लवली ने तमतमाते हुए आगे कहा, कानून की जरूरत तांडव करने वाली तुम जैसे लोगों से कुछ नहीं सीखना है मुझे और हाँ, एक बात और जान लो कि पत्रकारिता से नफरत का मुखौटा लगाकर भैया को लुभाने की कोशिश में तुम कभी सफल नहीं पाओगे । आप जैसा कह रही है वैसी कोई गलतफहमी न हो । इसलिए मैं अस्पताल न जाकर आपसे नीरज जी की तबियत के बारे में जानकारी लेने आई हूँ । आवेशित होते मन को संभालते हुए किरण में आगे कहा, आपको जानकारी नहीं दे, नहीं तो न दें पर इस तरह से बिना सोचे समझे कुछ भी कहना उचित नहीं । मेरे घर का सुख चैन छीन कर मेरे पापा और भैया के बीच में दरार बनकर मेरे दरवाजे पर खडी होकर तुम मुझे उचित अनुचित कपाट पढाओ लवली ने कहा आप तो अर्थ का अनर्थ निकाल रही है । मैं तो बस चली जाओ यहाँ से और फिर कभी मेरे घर की और नजर उठाकर भी मत देखना । और हाँ भैया से तो दूर ही रहना वरना पुलिस को धमकी दे रही हूँ । किरण ना चाहते हुए भी हो गई पुलिस को नहीं उस लडकी को चेतावनी दे रही हूँ जो पत्रकारों से नफरत के नाम पर मेरे भैया को ब्लैक मेल कर रही झूट कह रही हूँ आपके मन कब्र हमें ये किरण ने तेज आवाज ने कहा आवाज नीची करो वरना सिक्योरिटी को बुलाकर बार पिटवा दूंगी और मुफ्त में एक सलाह सुनती जाओ कोई बराबरी वाला लडका देख कर घर बस आलू हमारी ऊंची हवेली फायदे होगी तो इसी तरह बेज्जत होती होगी । लवली ने कहा मैं तो सिर्फ उस व्यक्ति का हाल पूछने आई थी जिसमें मेरी जानना चाहिए और इसीलिए इतनी देर तक आपको सहन भी कर रही हूँ पर आपको कहाँ से कहाँ चली गई तरह आ रहा है । मुझे आप की सोच पर हाथ की तरह अपने पिता के पैसों पर रॉक दिखाने वालों में से मैं नहीं हूँ । मैं आत्मनिर्भर महिला हूँ जो हर खबर अपने दम पर देखती है । किरण अंततः फूट पडी अच्छा कदम मुस्कान के साथ । लवली ने आगे कहा, तुम भी तो अपने पिता की विरासत को आगे बढा रही हूँ । उन्होंने अपने उम्र का लिहाज नहीं किया और तुमने अपनी हैसियत का मेरे पापा पर मत जाओ हूँ । इसकी शुरुआत तुम नहीं की है तो मैं अपने पापा से नाम जोडने पर शर्म आती होगी मुझे नहीं । लवली ने किरण की बातों को बीच में ही काटते हुए आगे कहा, हाँ, मुझे अपने पापा, अपने भैया और अपने खानदान पर गर्व है क्योंकि मैं इज्जतदार घर की बेटी हूँ । आपकी तरह नहीं की । आपके पिता की काली करतूतों को छुपाने के लिए मेरे भैया जैसे सुप्रसिद्ध व्यक्ति पर डोरे डालते फिर हूँ बोल रही हो तो याद दिला दूँ कि जिस माथुर सर को अपनी गंदगी छुपाने के लिए आत्महत्या करनी पडी थी कहीं उसी तरह तो मैं भी जान के लाले ना पड जाए । पत्रकारों की मनमानी को मेरे पापा की गंदगी कहकर उन्हें अपमानित करने की जरूरत । तुम जैसे मीडिया के ठेकेदार परिवार के लोग ही कर सकते हैं । बहुत हो गया । भाड में जाये तो तुम्हारा भाई कहकर किरण तेज कदमों से निकल पडी । ठीक है दूध जैसी सफेद कार में घूमने वाले और धरती माता से दूरी बनाए । जमीन की जगह कालीनों पर पैर रखने वाले सफेदपोश लोग विचारों से इतने गंदे होते होंगे ये तो मैंने सोचा भी नहीं था । विचारों की गहराइयों में गोता लगाते हुए किरण के मन में आया कि नीरज जी के बारे में ऐसी भावनाएं मेरे मन में आई ही नहीं जिसका महल बनाकर ये लोग तो उस के बोझ तले दबे ही जा रही है और मुझे भी उसी मलबे में दफन करने की कोशिश कर रहे हैं । इन लोगों से बार बार ऐसी बातें सुनकर कहीं मुझे भी यही ना लगने लगे कि मैं नीरज जी से प्रेम करने लगी हूँ । माँ थी कहती है, मुझे अब शादी के बारे में सोचना चाहिए । हाँ, यही सही रहेगा । किरण खुद की बातों का समर्थन करने लगी । किरण तुम इस तरह अचानक आकर सचमुच मुझे अचंभित कर दिया । सनत ने कहा तुम मुझसे बात करना चाहते थे इसीलिए आई हूँ । इस तरह से किसी अपराधी की तरह नजरें चुका है । क्यों खडी हो आओ आराम से बैठ कर बात करते हैं । फिर उस दिन आवेश में यदि मैंने कुछ गलत कह दिया हो तो कृपा करके मुझे जमा कर दीजिए । किरण ने कहा ये सब क्या है? किरण मैंने तो मैं कभी भी इस तरह हारे हुए से नहीं देखा है । तुम्हारी ये बातें मुझे अजीब लग रही है । क्या हुआ मेरे आने के बाद? एंटीजेन तो मैं कुछ कहा है क्या? नहीं ऐसी कोई बात नहीं है । बस ऐसी तोडा मन विचलित हो गया था । पर अब ठीक हूँ । आपने मुझे माफ कर दिया है ना । मैं तो सारी बातें कब का भूल चुका हूँ और वैसे भी मैंने महसूस किया है कि तुम अपने स्थान पर सही हो बल्कि गलती मुझसे हुई है । किस समय पर तुम्हारे साथ नहीं दे पाया हूँ और अखबार में छपी खबरों को लेकर मैंने कुछ ज्यादा ही कह दिया है और आंटी जी से भी बदतमीजी कर बैठा । पर मैं क्या करूँ तो में अपना मानता हूँ तो किसी और के साथ किसी भी प्रकार से तुम्हारा नाम जोडे जाने पर अपना आपा खो बैठा हूँ और फिर गुस्से में क्या क्या बोल देता हूँ । खुद कोई पता नहीं रहता है । सन आपने कहा तुमने माँ को बुरा भला कह दिया था । उसके लिए मुझे जरूर हुआ था । पर क्या करें पूरी थोडी बातों में मैं आंटी जी से भी क्षमा मांग लूंगा । सनत में किरण की बात पूरी होने से पहले ही कहा इन सब बातों को बोली जाना हम दोनों के लिए अच्छा होगा । वैसे भी माँ को तो आपकी कोई भी बात बुरी लगती नहीं । किरण ने कहा वही तो आंटी जी मुझे अपने बेटे की तरह मानती है और मैंने जो हो गया सो हो गया । अब अपनी गलती सुधारते हुए साथ चलेंगे । चलिए कुछ और बातें करते हैं । किरण ने कहा मैं तुम से प्रेम करता हूँ । सनक ने कहा ये बात तो पहले भी कहते रहे हैं । किरण ने मुस्कुराते हुए कहा शायद तुम्हें मालूम नहीं कि मेरे कहने पर ही पापा ने तुम्हारे साथ रिश्ते की बात आगे बढाई है । अच्छा ये बात तो मैं सच में नहीं जानती थी । किरण ने कहा मैंने सच्चाई से कई बार तुम्हें अवगत कराना चाहता हूँ और बात ही नहीं बनी । अच्छा हुआ कि आज तुमने मुझे अपने दिल की बात कहने का मौका दिया । सनत की आंखों में जमा को भराई बातों से पेट भरने वाला नहीं । चलो कुछ खालो सडक की माने का हूँ । हाँ ठीक कह रही है पता चला है कि तुम ने घर पर भी कुछ नहीं खाया है तो चलो कुछ खा लेते हैं । फिर आराम से बैठ कर बात करेंगे । मेहनत नहीं कहा । माँ से बात हुई क्या? किरण ने पूछा हाँ और उन्होंने ही बताया कि आजकल तुम खान पान पर ध्यान नहीं दे रही हूँ । सनद की माँ ने खाने की टेबल पर बैठते हुए कहा माँ है इसलिए कुछ ज्यादा चिंता करती है पर ऐसा कुछ नहीं चिंता तो हमें भी रहती है । हमारी मंगेतर जो कहते हुए सडक में किरण को कुछ परोसना चाहूँ ये सब रहने दीजिए, मैं बस चूस लेती हूँ । ब्लॅक उठाते हुए किरण ने कहा किरन एक बात पूछना था सनत की माँ की बातों से शहर टपक रहा था । हाँ जी हाँ जी मैं जानती हूँ आपका सवाल आप तारीख निकली मैं शादी के लिए तैयार हूँ । किरण ने कहा ये तो अच्छी बात है । किरण पर मैं भी विवाह के संबंध में नहीं बल्कि कुछ और जानना चाहती हूँ और जब की तुमने शादी का मन बना लिया है । अब तो बात करना और भी जरूरी हो गया है । सनत की माने का हूँ और क्या कहना चाहती है आप? कहीं किरण ने सहजीव पूछा इस मर्दानी नौकरी से तुम तो नहीं जाती हूँ किरण सनत की माँ ने आखिर पूछ लिया मैं समझी नहीं । किरण ने जूस पीना छोड दिया । मेरा मतलब ये है कि यदि तुम्हें काम ही करना है तो सडक के साथ उसके व्यवसाय में हाथ बता सकती हूँ । वैसे भी सडक को अपने काम के लिए किसी विश्वासपात्र की जरूरत है और जब सडक विदेश दौरे पर होता है तो उसके कारोबार को उसी की तरह चलाने के लिए किसी अपने के होने से वो भी निश्चिंत रहेगा । मैं ठीक कह रही हूँ ना सडक सनत की माने का हाँ माँ का सोचना भी गलत नहीं है । सनत ने कहा मतलब आप चाहती हैं कि शादी के बाद मैं नौकरी छोड दो । किरण ने आश्चर्य से पूछा तो ठीक समझ रही हूँ किरण सनथ ने अपनी माँ की बातों का समर्थन करते हुए आगे कहा, याद करो मैंने तो मैं पहले भी इस नौकरी के लिए मना किया था क्योंकि माँ को अपराध और अपराधियों के बीच रहने वाला तुम्हारा ये काम पसंद नहीं है । तुमने एकदम से चुप्पी साध ली । किरण हमारी बातें पसंद नहीं आई क्या? सडक की माँ ने पूछा पापा के साथ मिलकर बचपन से सपना देखा था मैंने इस नौकरी का किरण निराश हो गई । परिवर्तन के इस दौर में मुझे यही सब बिलकुल भी पसंद नहीं । सडक की माँ ने आगे कहा, मुझे समझ में नहीं आता कि आधुनिकता के नाम पर कुछ लडकियाँ पुरुषों को या पुरुष जैसे कार्यों का ही चयन क्यों करती है । लेकिन मुझे ये नौकरी तो सगाई के बाद मिली है । तब तो अपने को यात्रा नहीं किया । सुनो किरन सनद कुछ कहने वाला था तुम जाॅब और नहीं माने । कडक स्वर से आगे कहा सच यह है किरण की अब तक में चुप्पी का कारण सन था । मैं समझी नहीं । किरण ने तपाक से कहा हूँ । उस समय सनक ने मुझसे कहा था कि मैं किरन से प्रेम करता हूँ और यदि समय हम नौकरी का विरोध करेंगे तो हमारे रिश्तों पर प्रभाव पडेगा । जब कि किसी भी कीमत पर किरण को पाना मेरा लक्ष्य है तो क्या अब समझ जी मुझसे प्यार करता हूँ । किरण पर तुम्हारे मन में शायद मेरे लिए कोई भावनाएं नहीं है । सनत ने कहा आप ऐसा कैसे कर सकते हैं? किरण ने पूछा, यदि तुम्हें सडक से प्रेम होता तो मर्दों को चुनौती देने वाली नौकरी को तुम तुरंत ही छोड देती । समझ की माँ ने आगे कहा, समझने की कोशिश करो किरण सडक का काम ऐसा है कि उसके पास समय ही नहीं होता है । ऐसे में तुम भी चौबीस घंटे व्यस्त रहोगी तो घर का काम व्यवस्थित कैसे उपाय का और जब बच्चे हो जाएंगे तब उनका क्या होगा? जवाब नहीं है हमारे पास । किरण को खामोश देख सनद की मान ही कहा कुछ ऐसी बात नहीं है पर वो तो तो फिर तुम्हारा चुप रहना ही उचित रहेगा । किरण सनद की माँ ने आगे कहा, देखो किरण सनन हमारी इकलौती संतान है और हमारा फैला हुआ कारोबार तो तुम देख ही रही हूँ । जी आंटी जी किरण के दिमाग में प्रत्युत्तर था पर अपनी माँ की भावनाओं का ख्याल करके नहीं कह पाई । आर्थिक दृष्टिकोण से हमसे कमतर स्थिति में होने की बात कहने पर सडक के पापा ने मुझे समझाया था कि हमारा सनत किरण को पसंद करता है । इसलिए सनत की खुशी के लिए मैंने आर्थिक असमानता को भी दरकिनार कर दिया । सनत की माँ ने एहसान जताया हूँ । हाँ, ये सब बातें अभी क्यों? संगत ने कहा, अपनी होने वाली बहू से किसी भी समय बात कर सकती हूँ तो मुझे मत रोको । सडक आंटी जी ठीक कह रही उन्हें अपने मन की बातें कह लेने दें । किरण ने कहा, वैसे भी हमने एक आदर्शवादी व्यक्ति की पुत्री के साथ रिश्ता क्या था? पर माथुर साहब तो इसके विपरीत निकले । फिर भी हमने कोई शिकायत नहीं की । सनद की माने का प्लीज आंटी जी आपसे निवेदन है कि पापा के बारे में कुछ न करें । किरण ने कहा चलो मैं तुम्हारा कहाँ मान लेती हूँ? पर तुम्हें भी तो हमारी बातें सुननी चाहिए । किरण सनथ की माने का की मैं विचार करके बताऊँ । किरन ने मर्यादा रखने के लिए कह दिया । इसमें विचार करने जैसी कोई बात मुझे तो नजर नहीं आ रही है । देखो किरन तुम जानती हो कि हमारे पास पैसों की कमी तो है नहीं । फिर भी हमने अपनी बराबरी के घर की लडकी क्यों नहीं? उन्होंने जानती हो तो सडक की माने का आपने बताया । किस्मत के द्वारा मुझे पसंद करने के कारण किरण ने भी हाजिरजवाबी की वो तो कारण है ही साथ ही संगत की । पापा का ये मानना है कि सामान्य घर की लडकी आएगी तो घर को भी संभालेगी और मान मर्यादा का भी ख्याल रखेगी । उनकी नहीं बातों के कारण मैंने तो मैं अपनी बहु के रूप में स्वीकारा है और आज जब की सारी दुनिया माथुरजी के नाम पर तू तो कर रही है तब भी हम अपने निर्णय पर अडिग है । ये सब बातें किरण को क्यों बता रही है? माँ सडक में आगे कहा, किरण का इस समय हमारे घर में उपस् थित होना इस बात का संकेत है कि वो हमारी भावनाओं का सम्मान करती है और वो सब समझौता करने को राजी है जो इस घर की बहू बनने के लिए चाहिए । और फिर अच्छा भी हुआ की किरण ने की नौकरी करके देख लिया क्या मतलब है तुम्हारा संगत की माँ तो नहीं गई । मैं कहना चाहता हूँ वहाँ की शायद किरण को पहले नहीं मालूम था कि इस शानोशौकत वाली नौकरी में मुँह, मर्यादा, समय और संतुष्टि कुछ भी नहीं है । मैंने ऐसा तो नहीं कहा । किरण ने कहा कहाँ नहीं पर समझ हो गई हो ना? सनक परेशान हो गया । तुम चुप रॅाक मुझे पहले नहीं तो फोन की घंटी बजते ही किरण दूर जाकर बात करने लगी और फिर लौटकर कहने लगी अभी मुझे जाना होगा । जरूरी काम आ गया । यही सब हमेशा चलता रहेगा । इसीलिए मैं चाहती हूँ कि शादी से पहले ही नौकरी छोड देना उचित होगा । कहते हुए माँ भी चली गई और सनत अकेला पड गया । क्या हुआ मैडम आप परेशान लग रही हैं । बस यूँही सिर में थोडा दर्द हो रहा है । बार इतना शोर क्यों हो रहा? यादव किरण ने पूछा कुछ पत्रकार लोग थाने के बाहर खडे हमारे आप से मिलने की जिद कर रहे हैं जब कि आपके आदेशानुसार हमने उन्हें मना कर रखा है । यादव सुनिश्चित करो कि कोई भी पत्रकार थाने के भीतर ना पाए और हाँ कह दो की बदमाशों को पकडे जाने के संबंध में शीघ्र ही प्रेस कॉन्फ्रेंस किया जाएगा । जी मैडम यदि अनुमति हो तो एक बात पूछना बोलू नीरज जी को क्या आपने बताया था कि बदमाशों ने आप को अगवा कर लिया है? यादव ने पूछा कैसी बात करते हुए यादव यदि मुझे बताने का मौका मिलता तो मैं तो मैं फोन करती, उन्हें क्यों तकलीफ देती? फिर उनकी उपस् थिति उसी का जवाब तो मैं भी ढूंढ रही हूँ । यादव क्योंकि तुम्हारी तरह मीडिया और रिश्तेदारों का भी मुझसे यही सवाल है । कारण चाहे जो भी हो मैडम पर नीरज जी के कारण आप आज सुरक्षित है । तुम्हारा मतलब यादव कि मैं वहाँ से बच निकलने में सक्षम नहीं थी । सौरी मारे यादव सहम गया । वैसे तुम्हारा सोचना में गलत नहीं । यादव किरण ने मुस्कुराते हुए आगे का यदि किसी तरह खुद को बच्चा भी लेती तो तुम्हारी उपस् थिति के बिना उन शातिर बदमाशों को पकडना संभव नहीं था और नीरज जी हमें कॉल नहीं करते तो हमारा पहुंचना असंभव ऍम अच्छा यादव नीरज जी के स्वास्थ्य के बारे में कुछ खबर मिली क्या किरण ने मौके का फायदा उठाया? हाँ, टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज चल रहा था । मैडम की क्या? किरण ने आतुरता से पूछा । वो अनजान भय से घबरा गई । डॉक्टरों ने विज्ञप्ति जारी की है कि नीरज जी की स्थिति अब स्थिर बनी हुई है । फाॅरवर्ड तुमने तो मुझे दवाई दिया था । यादव किरण ने राहत की सांस ली । मैंने ऐसा तो कुछ नहीं कहा । मैडम यादव ने अजीब सा मुंह बनाया हो गया । तुम्हारे कहने का मैंने गलत अर्थ निकाल लिया था । किरण ने माथे पर आए पसीने को पूछते हुए कहा मतलब आपने ब्रेकिंग ने उसका मतलब सोचा कि नीरज जी की जान को खतरा है? यादव ने पूछा छोडो यादव ऐसी गंदी बातें हमें मन में लाना ही नहीं चाहिए था कि नीरज जी के स्वास्थ्य की अगले विज्ञप्ति का इंतजार करते हैं । किरण ने कहा, आप ठीक कह रही है मैडम नीरज जी जैसे अच्छे इंसानों की इस दुनिया को बहुत जरूरत है । उन्होंने अपनी जान पर खेलकर आपकी जान बचाई ।

कलम से हत्या - 13

किरन ने रात भर टीवी चालू रख था । इस इंतजार में की नीरज के स्वास्थ्य की कोई नई खबर मिले पर पुराना समाचार ई दोहराया जाता रहा हूँ और किरण कमन भर और भावनाओं के थपेडे में झूलता रहा । एक ओर सनत जो मेरे मंगेतर हैं उसने मुझसे पूछा तक नहीं की ये घटना कैसे हुई और उन बदमाशों को पकडने में मैं सफल कैसे हुई? सन अपने सवाल जरूर किया पर सभी उसकी अपनी संतुष्टि के लिए मेरे साथ हुए हादसे का उन्होंने जिक्र तक नहीं किया । जैसे उन्हें मेरी कोई परवाह ही नहीं हूँ । जब की दो चार मुलाकातों की पहचान जिनसे हुई थी उसने मेरी जान बचाने के लिए खुद की जान की परवाह नहीं की । मैं जिस व्यक्ति को हमेशा खरीखोटी सुनाती रही वो गोली लगने के बाद भी मेरे सुरक्षित होने के बारे में पूछते रहे । समझ जो कि मेरे जीवन साथी बनने वाले हैं उन्हें इस घटना में सिर्फ मेरी नौकरी में बुराई दिख रही है । जबकि होश होने से पहले तक बदमाशों को पकडने के लिए बधाई देते हुए नीरज जी मेरी बहादुरी की बात करते हुए मेरा मनोबल बढाते रहे । मोबाइल की घंटी बजने से किरण का ध्यान टूटा, ये सब मैं क्या सोच रही हूँ और सडक से नीरज की तुलना क्यों? किरण अपनी सोच का जवाब स्वयं ही देने लगी तो हूँ । नीरज का नाम स्क्रीन पर देखते ही किरण ने मोबाइल उठा लिया । किरण कहाँ हो तो नीरज द्वारा तुम शब्द का अपनापन पाकर किरण निशब्द हो गई । क्या हुआ तुम चुप चाप क्या हूँ सब ठीक तो है ना । नीरज ने पूछा हाँ नीरज जी मैं ठीक हूँ, घर पर हूँ । आपकी आवाज सुनकर अच्छा लगा आप कैसे हैं? किरण ने पूछा तुम्हें तो इस बीमार को मरने के लिए छोड दिया । ये क्या कह रहे हैं? आप की तो है ना? किरण ने पूछा तुम जो आ गई हूँ मेरी जिंदगी में तो मुझे तो ठीक होना ही था । अभी अभी होश आने पर डॉक्टर ने पापा से कहा की मैं खतरे से बाहर हूँ और कौन कौन है? आप के साथ खुलकर बातें करते देख किरण ने कहा फिलहाल तो अकेला हूँ । डॉक्टर द्वारा मुझे आराम करने के लिए अकेले छोडने की हिदायत देने पर मम्मी पापा बाहर गए हैं । नीरज ने कहा तो आराम कीजिए, बाद में बात करते हैं । आप तो उन बदमाशों से भी अधिक बेरहम है कि रणजीत ऐसा क्यों कह रहे आप? किरण ने कहा, हम यहाँ जीवन मृत्यु से जूझ रहे हैं और तो घर पर आराम कर रही हूँ, ऐसी बात नहीं है । नीरज जी मैं आपको डॉक्टर की सुरक्षित हाथों में सौंपने के बाद आपकी घरवालों के आने तक वहीं थी और फिर अखबारों के लिए जुटी और मसालेदार खबर न बन जाऊँ । इस डर से चली आई आपने जो मेरे लिए क्या है, उसके लिए धन्यवाद । बहुत छोटा शब्द है पर फिर भी कम से कम धन्यवाद तो कहना ही होगा । घायल पर भी प्रहार करने का मौका नहीं छोड रही हो तो हमारा भी तो एक ही बार में दो दो तीर चला दिए । नीरज को किरण से बातें करते रहना अच्छा लग रहा था । अब मैंने क्या कर दिया? किरण ने आश्चर्य से पूछा । पत्रकारों से डर की बात कहना तो मुझ पर तीर दागने के सामान हुआ । मुझे तो यही लग रहा है । नीरज ने कहा आपको मेरी बातों को बुरा लगा तो शाम चाहती हूँ नीरज जी पर क्या करूँ आपकी बिरादरी से मुझे इतनी गहरी चोट लगी है की हवा लगते दर्दो भर जाता है । इन्हीं तकलीफ फोन से तो बनना है तो नीरज ने कहा आपने तो दो तीर चलाने की बात की थी तो मेरी दूसरी गलती किया है, ये भी बता दीजिए । किरण ने पूछा, क्योंकि मैंने तो तुमसे बात करने के लिए फोन किया है, धन्यवाद लेने के लिए नहीं । पर तुमने धन्यवाद लटका दिया । अच्छा तो ये बात है । आपने तो मुझे डर ही दिया था । देखो मैंने सब को डराने वाली इंस्पेक्टर साहब को डरा दिया । नीरज ने हंसते हुए कहा, गलतफहमी में मत रही है । किरण भी हंस पडी । वैसे धन्यवाद के बदले इस मरीज को देखने आ जाती तो बडी मेहरबानी होती हैं । नीरज ने मन की बात कहीं क्यों चुप क्यों हो गई? किरण उत्तर ना पाकर नीरज ने आगे कहा, खबरों में आने के डर से मुझे बेचारे का हाल भी देखने नहीं होगी । बोलो ना, कुछ तो बोलो । डॉक्टर ने आपको आराम करने के लिए कहा है । किरण बात को बदलने की कोशिश की । डॉक्टर ने तो ये भी कहा है कि तुम से बात करूंगा तो जल्दी ठीक हो जाऊंगा । नीरज ने कहा तकलीफ के समय में भी आप मजाक कर रहे हैं । किरण ने कहा, हम मजाक नहीं कर रहा हूँ । ये तो मेरे मन की बात है । किरण यदि अब तक तुमने महसूस नहीं किया है तो चलो मैं ही बता देता हूँ कि तुम से मिलने के बाद मेरा तो जीवन ही समझ गया है । कल तक जो दुनिया बेगाने से लगती थी आज अपनी हो गई है । जागती आंखों में नींद और नींद में रंगीन सपने सजने लगे हैं । फोन रखती हूँ । मुझे कहीं जाना संभव होगा तो थाने से लौटते वक्त आपको देखने आउंगी । कहते है किरण ने फोन काट दिया । किरन की इस अदा पर नीरज के होठों पर मुस्कान फैल गई । तुम सोई नहीं, नींद नहीं आ रही है । डॉक्टर साहब नीरज ने जवाब दिया वही तो नर्स ने बताया कि तुम बातें कर रहे थे जी डॉक्टर साहब नींद नहीं आ रही थी तो पर ये कैसे हो सकता है । तुम्हें तो नींद का इंजेक्शन दिया गया है । किसी दवा में इतनी ताकत नहीं होती है । सर की प्रेम की अवहेलना कर सके । नीरज ने कहा मतलब तो मैं किसी से प्रेम हो गया । किरण की माँ ने प्रवेश करते ही कहा आप तो ऐसे खुश हो रही हैं जैसे कोई अनोखी बात हो गई हूँ । आप सही कह रहे डॉक्टर साहब नीरज को किसी से प्रेम होना अनहोनी से कम नहीं है पर वो खुशनसीब कौन है? नीरज बेटे की घायल अवस्था में भी माँ अपनी खुशी छुपा नहीं पाई । पहले खुद को तसल्ली हो लेने दो । माँ फिर बताऊंगा । लगता है ईश्वर से आज कुछ और भी मांगती तो वह भी मिल जाता है मानने । नीरज के बालों पर हाथ फेरते हुए कहा क्या मिल गया है मैं आपको? नीरज ने पूछा तेरे चेहरे पर मुस्कान और होठों पर प्रेम की बातें । ये तो मेरी मन मांगी मुराद मिल गई । माँ की खुशी का ठिकाना नहीं रहा । नीरज ने कहा पर मेरी पसंद के बारे में पहले जान तो लोमा तुम्हारी पसंद ही मेरी पसंद होगी । बेटा बस भगवान से अब यही बनती है कि वह तुम्हें मिल जाएगा और तुम्हें जीवन साथी मिलने की खुशी मुझे मिल जाए ।

कलम से हत्या - 14

क्या हुआ? मैडम बेचा लग रही हैं । लगातार चहलकदमी करते दे । सुचिता ने पूछा क्या करूं? कुछ समझ में नहीं आ रहा है । किरण ने बैठते हुए कहा आप ही तो कहती है मैडम की जब कुछ समझ में ना आए तो सब कुछ समय पर छोड देना चाहिए । पर यहाँ बात समय की नहीं है । सुचिता दिल और दिमाग के बीच द्वंद्व छुपी हुई है । किरण फिर खडी हो गई । यदि बात व्यक्तिगत है तो बिल कि सुनिये मैडम अपनी और घूरकर देखे जाने पर सुचिता सहम गई और फिर आगे कहा सौरी मैडम, मैंने तो ऐसी कह दिया था घबराओ नहीं, तुम ने सही कहा । मुस्कुराते हुए किरण ने आगे कहा चलो आज माँ की जगह तुम्हारी बात मान लेते हैं, कहीं जा रही है मतलब टोपी पहनते थे । एक सूचिता ने पूछा तुम्हारी बात मानकर एक बीमार को देखने जा रही हूँ । कोई जरूरी काम है तो फोन करना जी मैडम माँ के मना करने के बाद भी मेरे से मिलने जाना क्या ठीक रहेगा? किरण के अंतर्मन से ये आवाज आती है उसके पहले ब्लॅक ऍम कोई जवाब नहीं मिलने पर सुचिता ने आगे का शायद आप अभी भी असमंजस में पर मैं तो कहती हूँ कि दिल की बातें कभी कभी दिल खोलकर मान लेनी चाहिए । आज का दिन तुम्हारा है । सुचिता तुम्हारी बातों पर आगे बढ रही हूँ । कहते हुए अंततः किरन ने नीरज को देखने जाने का मन बना ही लिया कैसे हैं । अब किरण ने प्रवेश करते हैं । कमरे के कोने पर रखे फूलदान का फूल बदलते हुए पूछा किससे पूछ रही हूँ आपसे फॉर किस्से पूछूँ हम दोनों के अलावा इस कमरे में और कौन सीधा फूलदान की ओर बढ गई तो मुझे लगा कि फूलों से बात हो रही है । नीरज मुस्कुराया आप अकेले घर से कोई साथ में नहीं है । किरण ने पूछा तो आ गई अब किसी की जरूरत नहीं है । नीरज ने कहा ऐसी बातें क्यों करते हैं आप? किरण परेशान हो गई । अपने मन की बात कह रहा हूँ । तुम्हारी तरह छुपाता नहीं हूँ । सच कह रहा हूँ किरण पिछले तीन दिनों से मुझे देखने आने वालों का तांता लगा रहा है । पर हर आहट पर मेरी नजरें सिर्फ तुम्हें ढूंढ रही थी । ऐसी बातें करेंगे तो मैं चली जाऊंगी । किरण ने खडे होते हुए कहा तो जाओ । नीरज ने किरण की कलाई पकडते हुए आगे कहा मेरा हाथ झटक दो । मेरी मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं । अपनी कलाई से नीरज का हाथ अलग करने के बाद बैठते हुए किरण ने कहा, कैसी मजबूरी क्यों कर रहे हैं आप? नीरज जी किरण ने बात को बदलते हुए कहा तो नहीं जानती नीरज ने आंखों में आंखें डालकर का नहीं और मुझे जानना भी नहीं । किरण ने नजरिए पे रहते हुए आगे कहा, पहले से ही हमारे संबंधों को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है और आप हैं कि इसे हवा देने पर तुले हुए हैं । चलो अच्छा है । बताने से पहले ही लोगों ने मेरे मन की बात जान ली । नीरज ने कहा, आप स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं रहे हैं । नहीं जी तो तुम भी जानती हो पर मान नहीं रही हूँ कि मैं तुमसे प्रेम करने लगा । नीरज ने कहा, कुछ नहीं जानती में किरण मैं झटके से कहा तो फिर बता ही देता हूँ कि तुम्हारी इसी अदा पर मुझे प्यार आया है । तुम पहले दिन से ही मुझे दुश्मनों की तरह मिली और मुझे तुम्हारी दुश्मनी से ही प्यार हो गया । मैं कितनी परेशान हूँ और आप कुछ भी कहीं जा रहे नहीं जी, मैं जानता हूँ कि मेरी ये बातें तो में भी अच्छी लगती हैं, पर तुम स्वीकारना नहीं चाहती हूँ और इसीलिए मुझे देखने भी नहीं आ रही थी । गनीमत है मेरे बुलाने पर आ गई । मुझे आपके स्वास्थ्य की चिंता थी । नीरज जी पर हाँ, मैं मीडिया को और उन लोगों को कोई मौका नहीं देना चाहती थी जो हमारे बारे में उलजलूल बातें कर रहे हैं । क्या बातें कर रहे हैं किरण नीरज की बातें गुलाब की पंखुडी पर टपक थी । उसकी बूंद की तरह थी । अब मैं क्या बताऊँ आपको? किरण सहन सी गई वही ना कि क्या मैं तुम से प्रेम करता हूँ । कोमल भावनाओं के साथ बातें भी कोमल हो जाती है । हाँ, जो मैं नहीं चाहती हूँ की ऐसी बातें प्रचारित हो । किरण में तत्पर्ता से कहा तो तुम ही बता दूँ कि क्या चाहती हूँ नीरज की बोली में । जैसे मिश्री की दलील भूल गई थी, कुछ भी नहीं चाहती हूँ । किरण प्रेम के अमृतकुंड में गोता लगाने की कोशिश कर रही थी । पर इतना सब होने के बाद तो पत्रकार चुप नहीं बैठेंगे । कुछ न कुछ तो लिखेंगे । नीरज ने कहा आप सही कह रहे हैं पर उन्हें क्या बताएँ? किरण ने कहा वहीं जो सच है नीरज ने किरन की आंखों में आंखें डालकर का मतलब आप पत्रकारों के सामने भी कहेंगे कि मुझ से प्रेम करते हैं । किरन की सांसें अटक गई तो तुम से प्रेम की बातें उजागर होने से कोई परेशानी नहीं है ना । नीरज ने कहा नहीं मैंने तो ऐसी कह दिया किरण में जीते हुए निगाहें झुका ली । तुम्हारी झुकती, निगाहें और सफेद पढते हुए चेहरे ने तुम्हारे मन की बातें बता दी है कि नहीं पैसे ये बातें तो मैं पहले ही जान गया था । जब तुम ने मुझे तुम कहने से नहीं रोका था, लेकिन आप भी अच्छा नहीं कर रहे हैं । कहते हुए किरन खडी हो गई, अरे यार, नाराज की होती हूँ । मैंने तो मजाक किया था गंभीर होकर । नीरज आगे कहा, मैं तब तक अपने प्रेम को और उनके सामने नहीं करूंगा जब तक तुम नहीं चाहोगी और मैं ऐसा कभी नहीं जाऊंगी क्यूँ नीरज तडक उठाओ क्योंकि मेरी सगाई हो चुकी है । ये तुम पहले भी बता चुकी हूँ । नीरज ने आगे कहा, मैंने तो तुम्हारे सामने प्रेम का प्रस्ताव रखा है, सगाई का नहीं । जीवन में पहली बार जो एहसास तुमसे मिलकर हुआ है उसे मैं जीना चाहता हूँ । वैसे तुम्हारी पसंद अच्छी है और बंदा तो मैं चाहता भी बहुत है । आप किसके बारे में कह रहे हैं । किरण ने पूछा, सनत के बारे में आप सर को जानते हैं कैसे? किरण को आश्चर्य हुआ । वो मुझसे मिलने आया था और अपना परिचय देते हुए कहकर गया है कि तुम से दूर रहूँगा । तो आपने क्या कहा? शरीर को आत्म से दूर रहने की बात कहने वाले को क्या कहता है? सिर्फ मुस्करा दिया । ये आपने गलत किया । किरण ने कहा तो सही किया है । नीरज ने पूछा सच तो यह है कि आज से पहले हमारी जितनी भी मुलाकात हुई हैं, सहयोग होता रहा हूँ और ये बात आपको सनत को भी बतानी चाहिए थी । गलतफहमी में हो किरन नीरज ने आगे कहा, और झूठ बोलना मुझे पसंद नहीं है । मैं आपको झूठ बोलने के लिए कह भी नहीं रही हूँ । नीरज जी क्या यह सच नहीं है कि हमारी मुलाकातें इत्तेफाकन थी? किरण ने कहा तुम्हारी नजरों में नीरज ने कहा, मतलब मतलब ईश्वर की कृपा से होने वाली हमारी मुलाकातें हमारे प्रेम को पोषित करने के लिए हो रही हैं । मैंने तो जगत पिता के आशीर्वाद को स्वीकार लिया है और अब तुम्हें भी नहीं छुपाना चाहिए । मैं तुम्हारे मन की बातें जानता हूँ कि रहे फिर भी तुम्हारे मुझसे सुनना चाहता हूँ । क्या तुम्हें मेरा प्रेम निवेदन स्वीकार है? बात स्वीकारने या नकारने की नहीं । नीरज जी, मैं अपने पापा की बहुत इज्जत करती हूँ और उनके द्वारा किए गए रिश्ते को पहले ही स्वीकार चुकी हूँ और हम इतने भी न समझ नहीं है कि प्यार के नाम पर परिवार को अनदेखा करते हैं । उम्र चाहे जितनी हो जाए, पर जब तक दिल किसी पर आया ना हो तब तक शैशवास्था में ही रहता है । और तुम तो बच्चे की जान लेने पर तुली हो । तीस पार हो गए तो क्या हुआ? हमने तो पहली बार किसी को दिल दिया है । दिल तो बच्चा है जी । नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा मुझे चलना चाहिए । किरण जाने लगे चली जाना पर फिर कहता हूँ कि मैंने सगाई या शादी का नहीं बल्कि प्रेम का प्रस्ताव रखा है और उसका जवाब तो देती हूँ । नीरज ने कहा मैं चलती हूँ वरना तो प्रेम की व्याख्या भी करने लग जाएंगे तो मैं क्या कर रही हूँ? लवली ने किरण को नीरज के कमरे से बाहर निकलते देखकर पूछा, कोई जवाब दिए बिना ही किरण आगे बढने लगी तो लवली का अब एज भी बढने लगा । वो उनके पीछे पीछे जाती हुई बोली क्यों आई थी दुनिया नीरज जी को देखने किरण ने छोटे से उत्तर दिया । उस दिन तो बडी शराफत बडी बातें कर रही थी कि अस्पताल नहीं सकती । नीरज जी कैसे हैं? बता दीजिए वगैरह वगैरह आज भी नहीं आना चाहती थी । मैं आप जैसे लोगों से सामना हो ऐसा मैं भी नहीं चाहती हूँ । किरन ने भी जैसे को तैसा जवाब दिया हूँ तो फिर आई क्यों? लवली तमतमाई ये बातें जाकर अपने भैया से पूछो । किरण ने कहा उनसे तो मैं पूछूंगी पर तो मैं एक बात कान खोलकर सौ लोग आप कभी भी मेरे भैया से मिलने की कोशिश भी मत करना । क्या कर लोगे तो किरण ने लवली की ओर पलटते हुए कहा हो आ गई आखिरकार अपनी पुलिसिया औकात में किरण को घूमते हुए लवली ने आगे कहा इस बुलावे में मत रहना, पत्रकारों से बनाओ टी नफरत के नाम पर भैया से थोडी नजदीकियां हो गई है तो तुम्हारी जीत होगी । परियों की लाइन लगी हुई है भैया के पीछे । पर अब तक उन्होंने किसी के भी विवाह और प्रेम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है क्योंकि उन्हें लडकियों से लगाव ही नहीं अच्छा कहकर मुस्कुराते हुए कितना आगे बढ हो गई पर उसका मन पीछे की बात सोचकर बेचैन हो गया कि ईश्वर की ये कैसी माया है कि नीरज जी को लगा हुआ भी तो मुझ से जो कभी उनकी नहीं हो पाएगी । ये तो रैलियां क्यों आई थी भैया? लवली ने प्रवेश करते ही पूछा कौन? मैंने तो किसी चुडैल को नहीं देखा । मैं किरण के बारे में पूछ रही हूँ । लवली ने कहा हूँ पर तुम तो किसी चुडैल का जिक्र कर रही थी । नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा बातें मत बनाओ भैया और इस किरण के नाम की बला से दूरी रहो । आज इसके कारण आपकी जानकर बनाई थी । मैंने पहले भी कहा था कि किरण अपने पिता के चरित्र पर लगे दाग को मिटाने के लिए आप के करीब आने की कोशिश कर रही है । अस्पताल में भी मुझसे लडने का मन बना कर आई हो गया । नीरज ने बात को बदलने की कोशिश करते हुए कहा लडने नहीं आई हूँ पर किरण को यहाँ से निकलते देखकर मुझ से रहा नहीं गया । आपके लिए माने हाथों से बनाकर सूप भेजा । कहते हुए लवली पर उसने लगी अभी नहीं लवली रहने दो, बाद में पी लूंगा । क्यों मैं बस अभी मन नहीं । नीरज ने कहा आप परेशान लग रही हूँ । दर्द हो रहा है कि अब भैया डॉक्टर को बुलाओ । लवली ने भैया के पास आकर कहा नहीं उन की जरूरत नहीं है । तो फिर किरण ने फिर कुछ कहा क्या? लवली ने पूछा नहीं रहे तुम क्यों बिचारी के पीछे पडी हो? नीरज की बातों में सरलता के साथ अपना पन भी जलक रहा था । किरण और बेचारी आप उसके बारे में कुछ नहीं जानते । भैया अपराधियों के बीच में रहने वाली दूर हूँ । लवली ने भी थान लिया था की किरण नाम की बला से आज अपने भैया को मुक्त कराएगी । फिर वही बात इस समय मुझे अकेला छोड दो । लवली मैं आराम करना चाहता हूँ, चली जाऊंगी भैया पर कोई और भी आपसे मिलने आए हैं और आप से मिलने की अनुमति चाहती हैं कौन? नीरज में पूछा वही आपकी कंपनी ऍम मित्र की बेटी और आपके बचपन की दोस्ती अनन्या आई है? नीरज ने आगे कहा तो वह बाहर क्यों खडी है? उसे लेकर आओ लेकर नहीं होंगे । भैया भेज रही हूँ मुझे कबाब में हड्डी नहीं बनना कहकर मुस्कुराते हुए लवली जाने लगी । कैसे हो? अनन्या ने पूछा ठीक हूँ पर अब जाकर समय मिला है तो मैं । नीरज ने कहा पहले भी आई थी । पर तब तुम बेहोश थी और मुझे तुम्हारी वो हालत देखी नहीं जा रही थी । पर भी लगातार तुम्हारे स्वास्थ्य में सुधार की जानकारी भी मिल रही थी । और फिर तुम तू जुगनू में व्यस्त रहते हो तो मुझ पर काम का बोझ भी तो बढ गया है । हाँ, वही मैं तो भूल ही गया था कि तुम्हारा तो काम से भी हो चुका है, उसके बिना रह नहीं सकती हो । नीरज मुस्कुराया आपको ये भी बता दूँ कि आज भी मैं आई नहीं हूँ बल्कि भेजी गई हूँ । अनन्या ने कहा भेजी गई हो किसने भेजा? नीरज ने आश्चर्य से पूछा हम दोनों की पेरेंट्स ने कुछ विशेष बात है क्या आनन्या हाँ नीरज बात तो महत्वपूर्ण है । तुमने जिस तरह से किरण के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दिया था, उस घटना ने तुम्हारे अपनों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है । क्या सोच रहे हैं सब लोग? नीरज ने पूछा किरण से हो रही तुम्हारी निरंतर मुलाकातों नहीं हमारे पेरेंट्स को परेशान कर दिया और इस समय तो तुम ज्यादा परेशान लग रही हूँ । तुम सही कह रहे नीरज और कारण किरण ये तुम कैसी बातें कर रही हो ना नया देखो नीरज में पत्रकार नहीं हूँ और तुम अपने पत्रकार साथियों को क्या बताना और क्या छुपाना चाहते हो यह तुम जान और सच को तो किरण ने हम सबको बता ही दिया । अनन्या ने कहा कि सच की बात कर रही हूँ । नीरज ने पूछा । किरण ने तो में अस्पताल लाने के तुरंत बाद ही फोन कर के बता दिया था कि तुम्हें गोली कैसे लगी? अनन्या ने कहा ठीक है अपने घर वालों से मैं भी कुछ नहीं छिपाऊंगा और तुम से । पर तुम में से कोई भी पत्रकारों को कोई बात नहीं बताएगा । जो कहना है मैं स्वयं कहूँगा । नीरज ने कहा और तुमने क्या कहने को सोचा? अनन्या ने पूछा तुम तो जानती ही हो की इस समय पत्रकारों के बीच किरण की जो छवि बनी है उस पर यदि मैं पत्रकार साथियों को सब सच बता दूँ तो कई प्रकार के सवाल उभर कराएंगे । नीरज ने कहा, सवाल तो मेरे मन में भी उठ रहा है, नहीं रचते कैसा सवाल । अनन्या यही कि आपके व्यवहार में अचानक इतना बदलाव क्यों हो गया? अनन्या ने पूछा ऐसी कोई बात नहीं आना तो ठीक है । अब हम स्पष्ट बात करेंगे और आज के अनुसार भी । अनन्या ने कहा मैं तो समझता हूँ कि खुली किताब की तरह हूँ, फिर कौन सी बात स्पष्ट करना चाहती हूँ । नीरज ने पूछा मैं तो मैं तो बात बताना चाहती हूँ । नीरज जिसके लिए मुझे भेजा गया है । बीस जब बोलू नीरज ने कहा हमारे बडों ने मिलकर तय किया है कि अब हमारी सगाई और फिर शादी होनी चाहिए । अनन्या ने आखिर ही दिया ये तुम क्या कह रही हूँ ना तो तुम्हारे कॅरियर होने से मैं हैरान । नीरज तुम क्यों हैरान होने लगेगा? नहीं मैं अचरज में हूँ । क्या मैच में पसंद नहीं हूँ? नीरज सवाल पसंद ना पसंद का नहीं है ना मैंने तो मैं पहले भी कहा है कि हम सिर्फ दोस्त हैं । इससे आगे मैंने तुम्हारे बारे में कभी सोचा ही नहीं है । तो अब सोच लो नहीं है । अन्य नी अपनेपन के साथ कहा ये संभव नहीं है । नीरज की बातों में पतझड का सूखा बनता है । मैं तो बचपन से पसंद करती हूँ और तुम्हारे साथ ही जीवन बताने का सपना देखती हूँ । नीरज अरन्या इंकार की तेज वाला से आहत हो गई । पर मैंने तो मैं कभी भी इस नजरिए से नहीं देखा या ना नहीं तो तुम्हारे घर वाले भी चाहती है कि हम साथ साथ जीवन बिताएं । अनन्या ने उम्मीद का दामन थामे रखा जानता हूँ पापा हमेशा तुम्हारी प्रशंसा करते थे । बेशक तुम बहुत अच्छी लडकी हो और तुम्हें मुझसे भी अच्छा लडका मिल जाएगा । नीरज ने नम्रता रूपी जल का छिडकाव कर अपनी मना ही की तपन को काम करने की कोशिश करते हुए कहा जानती हूँ । अपने आत्मसम्मान को बचाते हुए अनन्या ने आगे कहा, और मैंने से तुम्हारे साथ जीवन बिताने का सपना देखा है । तुम्हारा ये संदेश माँ के माध्यम से मुझ तक पहुंचा था ना और तब माँ के द्वारा सात साल पहले ही मैंने बता दिया था कि फिलहाल शादी के संबंध में मैंने सोचा नहीं है तो क्या तुम शादी ही नहीं करोगे? अनन्या ने पूछा हुआ मैंने गलत प्रश्न तो नहीं पूछ लिया? नीरज ये मेरे सवाल का तुम जवाब ही नहीं देना चाहते हो । नीरज की खामोशी से अनन्या नहीं कहा नहीं ऐसी कोई बात नहीं । हम अच्छे मित्र हैं तो तुम जो चाहे पूछ सकती हो और तुम्हारे किसी सवाल की मैं बेलना भी नहीं करना चाहता हूँ । पर सच तो यह है कि तुम ने ऐसे सवाल पूछ लिया है जिसका जवाब मुझे भी नहीं मालूम है । नीरज ने कहा ये तो अजीब बात है । मैंने तुम्हारी शादी के बारे में तुम्हारा विचार पूछा, अन्य और सहज होने की कोशिश कर रही थी । संभावना तो यही है कि मैं शादी करो । हिना नीरज ने कहा, तो फिर मैं तब तक इंतजार करूँ जब तक तुम किसी नतीजे पर ना पहुंचा । अनन्या ने अपना समर्पण प्रदर्शित क्या सौर्य अनन्या मैं तो मैं इसकी अनुमति नहीं दे सकता हूँ । क्यों नीरज अनन्य तडप उठी? क्योंकि विवाह की स्थिति बनी भी तो तुम से नहीं कर पाऊंगा । नीरज ने स्पष्ट किया, मतलब लवली सही कह रही थी कि किरण को लेकर आप गंभीर है । ना चाहते हुए भी अनन्या की जुबान फिसल गई । नीरज मुस्कुराने लगा बे को नीरज में औरों की तरह तुम्हारी मुस्कुराहट या अन्य किसी हरकत से अंदाजा नहीं लगाना चाहती हूँ । तुम्हारे मुँह से सुना होगा क्योंकि मैंने मित्र मना है तो मित्रता निभाते हुए बता ही देता हूँ । हाँ, मैं सिर्फ किरण से ही शादी कर सकता हूँ जो कि संभव नहीं । नीरज ने ही दिया क्यों संभव नहीं है? अनन्या को आश्चर्य हुआ क्योंकि किरण राजी नहीं है । वो बेवकूफ है क्या? अनन्या ने आगे कहा, खुशियाँ उसके पीछे और वह पलट कर देख भी नहीं रही है । यही तो विशेषता है किरण की और उसकी इसी अदा पर मैं कुर्बान हूँ तो मैं ये भी बता दूँ अनन्या की किरण का बेबाकी पन और खुलेपन ने मेरा मन मोह लिया है । प्रेम प्रस्ताव पर मैं कभी आकर्षित हो ही नहीं पाया । पर किरण ने मेरे सामने मेरे ही काम की असलियत ऐसे निडरता से रखी की उसकी नफरत से मोहब्बत हो गई तो मैं समझना भी मुश्किल है । अनन्या ने गहरी सांस लेते हुए कहा सही कहा तुम ने किरण से मिलने के पहले तक मुझे भी नहीं पता था की मुझे क्या चाहिए । नीरज ने कहा, और अब तुम्हारी चाहते तो में मिलने से रही । अनन्या ने कहा तुम ने सही कहा पर में इतना तो जानता हूँ कि किरण मुझे मिले ना मिले मेरा प्यार उसके लिए कभी काम नहीं होगा तो इस दुनिया में जी रहे हो । नीरज तुम्हारी इसी दुनिया में हुआ नहीं, जमाना चाहे कितना भी आगे निकल जाएगा । हम चाहे जितना भी विकास कर लेंगे पर प्यार भी इस दुनिया में रहेगा ही । और निश्चल प्रेम को इस नई दुनिया का स्वास्थ्य कभी छोड भी नहीं सकता । तुम्हारी बात मेरी समझ से बाहर है । नहीं प्रेम को समझने के लिए उसमें डूबना पडता है न अन्य तो मैं भी जब कोई ऐसा मिल जाएगा जिससे तुम्हें प्रेम हो जाएगा तब तुम भी सब समझ होगी ना बाबा यदि प्रेम इंसान को तुम्हारी तरह अकेला कर देता है तो मुझे नहीं करना । ऐसा प्रेम प्रेम अकेला नहीं करता है बल्कि परिपूर्ण और परिपक् को बनाता हैं । नीरज ने कहा पर इस समय तो तुम्हारे सभी अपने से शिकायत है कि तुम अचानक से बदल गए हो । अपनों के साथ तो हो ही नहीं । तुमने सच में मित्रता निभाई है ना । नीरज ने कहा ऐसा क्यों कि अरे वो नीरज सच में मैं किरण के प्यार में इस कदर हो गया हूँ की ये भूल ही गया था की मेरी इस बदलाव से अपनों को बुरा भी लग सकता है । बराबर नहीं । मैं शिकायत का मौका नहीं दूंगा । नीरज ने कहा तो क्या? हाँ इससे पहले कि तुम कुछ करूँ मुझे अपनी बात पूरी कर लेने दो । ये मेरी गलती थी की प्रेम के प्रवाह में बहते चले जा रहा था । मैं भी क्या करता । किरण से मिलने के बाद मैं खुद को भूल बैठा था पर तुमने अपनों की बात कहकर मुझे उनका स्मरण करा दिया है । ये सब तुम क्या कहे जा रहे नीरज तो मैं आश्वस्त करना चाहता हूँ कि ये दीवाना अपने घर वालों की भी अपेक्षा में खरा उतरने की कोशिश करेगा । बल्कि किरण से प्रेम होने के बाद मुझे हर रिश्ते से अधिक लगाव होने लगा है । मुझे चलना होगा । नीरज नहीं तो तुम्हारे प्रेम की व्याख्या मुझे बहाने लग जाएगी । अनन्या मुस्कुराते हुए खडी हो गई ।

कलम से हत्या - 15

ये सब कैसे हुआ? नीरज जी अन्य पत्रकारों के साथ प्रवेश करते ही सरल ने पूछा । पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड में फस गया था और ये दुर्घटना हो गए । नीरज ने जवाब दिया, और आपकी गाडी पर तो गोलियों के कोई निशान नहीं और ना ही कांच टूटे हुए हैं । तो मैंने कब कहा कि मुझे गोली लगाते समय में कार के भीतर था । नीरज पत्रकारों के सवालों के तरीके से अच्छी तरह से परिचित थे और खुद पत्रकार होने के कारण जवाब देना भी जानते थे । फिर ये गोली कैसे लगी? सरल ने पूछा, किसी परिचित को देखकर उससे मिलने के लिए मैं कार से उतर ही रहा था कि फाइरिंग का शिकार हो गया और वह परिचित इंस्पेक्टर किरण थी । किसी अन्य पत्रकार ने पूछा, ऐसा आप कैसे कह सकते हैं? नीरज ने सवाल के बदले सवाल नहीं किया क्योंकि आपको अस्पताल पहुंचाने वाली किरण दी हैं । एक पत्रकार ने कहा, जब की हमने किरण जी से बात करना चाहा तो हमेशा की तरह हो । उसी तेवर के साथ उन्होंने कहा कि मुझे झूठे पत्रकारों से कोई बात नहीं करनी है । दूसरे ने तुरंत ही कहा मतलब पुलिस और पत्रकारों के बीच गोलीबारी अभी भी चल ही रही है । नीरज के होठों पर मुस्कुराहट फैल गई और हमारा प्रश्न अभी भी वहीं का वहीं है । नीरज जी कि उस दिन बाहरी क्षेत्र में आप क्या करने गए थे? एक पत्रकार ने पूछा ये तो मेरे साथ ज्यादती हो रही है । मेरे भाई मेरे भी व्यक्तिगत कार्य हो सकते हैं जिसका जिक्र करना मैं उचित नहीं समझता हूँ । अच्छा ये तो बता दीजिए कि वहाँ गोली क्यों चल रही थी । दूसरे पत्रकार ने पूछा बताया तो था पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड चल रही थी तो किरण जी आपको अस्पताल लेकर के आई । तीसरे ने पूछा कमाल करते हो? नीरज ने हसते हुए आगे कहा, किरण जी उस क्षेत्र कि थाना प्रभारी हैं । उनकी उपस् थिति तो स्वाभाविक है और फिर पुलिस बल का नेतृत्व स्वयं किरण जी ही कर रही थी । इसमें विशेष क्या है? कहीं इंस्पेक्टर किरण की साजिश तो नहीं? पत्रकार नहीं पूछा लेकिन वो मेरे खिलाफ साजिश क्यों करेंगे? नीरज मुस्कुराने लगा क्योंकि वो पत्रकारों से नफरत करती हैं । सरल ने झट से कहा ऐसी कोई बात नहीं है । मेरे भाई सहयोग की बात है । नीरज ने कहा आपकी महानता है नीरज जी जानलेवा हमले को भी आप संयोग बता रहे हैं पर हम लोग चुप नहीं रहेंगे । चौथा स्तंभ कहा जाता है मीडिया को । इसीलिए आप जैसे धीर गंभीर पत्रकार पर हमला चिंता का विषय है । पत्रकार ने कहा, अरे यार, ऐसे कब तक हम अपने मुंह मियां मिट्ठू बनते रहेंगे । मुझे गोली लग नाममात्र दुर्घटना है । इसे और किसी नजरिये से देखने की कोशिश मत करो । मैं भी पत्रकारिता को जानता हूँ । पर प्लीज क्या बाल की खाल निकालने की कोशिश ना करें । आप तो बडे पत्रकार है । नीरज जी पत्रकारिता की नस नस को जानते हैं तो फिर मुझ पर भरोसा कीजिए । मुझे गोली लगना मेरी गलती का परिणाम है । सामने वाली की बात को बीच में ही करते हुए नीरज ने आगे कहा, हमें राज्य का चौथा स्तंभ माना गया है । तो आइए आज हम सब मिलकर आज ये संकल्प लें कि हम अपने अस्तित्व को कायम रखते हुए इस स्तंभ को और मजबूती प्रदान करें । नीरज ने कहा, हम भी तो यही कह रहे हैं । नीरज जी की आप पर हमला चौथे स्तंभ पर प्रहार है, जिससे हमें गंभीरता से लेना चाहिए । आप जैसे धीर गंभीर पत्रकार के द्वारा चिंतन जरूरी है, पर तब जब स्थिति स्पष्ट न हो पर यहाँ ऐसी बात नहीं है । पत्रकारिता में आपको में अपना गुरु मानता हूँ । इसलिए आप की तरह ही में किसी भी प्रोपेगेंडा से दूरी बनाए रखना चाहता हूँ । मेरी बात मानी सर की मेरे साथ कोई हादसा नहीं हुआ है । सिर्फ संयोग की बात है । गुरु का सम्मान दिया है तो मैं चाहता हूँ कि आपने पत्रकार साथियों के सामने एक बात और स्पष्ट कर दो नहीं रहे हैं । कौन सी बात है यहाँ पर उपस्तिथ कुछ लोगों का मानना है कि तुम सच छुपा रहे हो । आप कहना क्या चाहते हैं देख नहीं रहे हैं यहाँ पर उपस् थित लोग सिर्फ पत्रकार नहीं बल्कि तुम्हारी शुभचिंतक भी हैं । मैं जानता हूँ सर ये मेरे परिवार की तरह है तो अपने परिवार से कुछ मत छुपाइए सर । सरल ने आगे कहा लोगों तक क्या बात पहुंचाना है ये आप के अनुसार ही होगा पर हमें वास्तविकता से दूर मत रखी है । मैं तो यही नहीं समझ पा रहा हूँ की आप लोग के सच की बात कर रहे हैं । नीरज ने कहा ये लोग नहीं कह पा रहे नहीं रचते मैं बताता हूँ सबका यही मानना है कि किरण पत्रकारों से बदला लेना चाहती है और इसी कडी में तो मैं धोखे में रखते हुए तुम्हारी जान लेने की कोशिश की गई है । आप भी ऐसा मानते हैं सर नीरज मुस्कुराया अभी हम बाहर बैठे थे तब इस बात को लेकर जो तर्क उतर चल रहा था उसके आधार पर ही पूछ रहा हूँ । हमारी बिरादरी की यही एक बडी समस्या है सर कि जब स्थिति हमारे सामने स्पष्ट हो तब भी हम अपने हिसाब से उस मौके का उपयोग करना चाहते हैं । आप सबसे निवेदन है कि मुझ पर भरोसा करें और इस मामले को सीधे नजरों से वैसा ही देखें जैसे मैं बता रहा हूँ । मुझ पर हमला किसी पत्रकार पर नहीं बल्कि आम इंसान के साथ होने वाली दुर्घटना मात्र है । मेरी जगह पर जो भी वहां पहुंचता निश्चित ही उसके साथ में ये घटना हो सकती थी । इसीलिए आप सबसे मेरा निवेदन है कि आप लोग अपने चैनल में वही दिखाएँ और अखबारों में वही लिखें जो सही है । मेरी मसाला डाल करना । पडोसी अब समय आ गया है कि हम पत्रकारिता का मूल धर्म निभाएं और इस पवित्र गंगा को और प्रदूषित न करें बल्कि सफाई अभियान चलाये और खुद भी कोई गंदगी ना फैलाएं । नीरज ने कहा, नीरज सही कह रहा है । हम यदि खुद को देश और समाज का चौथा स्तंभ मानते हैं तो हम सबको इसकी गंभीरता को समझना होगा । टीआरपी की होड में तर्कों कुतर्कों का तडका लगाने से अच्छा होगा कि हमें उन खबरों को लगना होगा जो सच में खबर बनने लायक है । वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, आपने ऐसे कह दिया सर की पत्रकारिता में गन्दगी मेरा मोहम्मद खुलवाया । नीरज ने अपने पत्रकार साथी को टोकते हुए आगे कहा, मैं भी आप लोगों के बीच का हूँ और जानता हूँ कि कई खबरों के पीछे पैसों का खेल कैसे चलता है । नीरज ने कहा, आपसे स्तर की बातों की उम्मीद नहीं थी, नहीं रखते । सब जानते हैं कि आप बहुत बडे उद्योगपति भी हैं और नफे नुकसान को अच्छी तरह से समझते हैं । आदर्शवादी भूखे जन्म लेते हैं और भूखे ही मर जाते हैं । किसी ने कहा ये तो गलत है किसी और पत्रकार द्वारा नीरज की बातों का विरोध करते देख वरिष्ठ पत्रकार ने आगे कहा, नीरज का मतलब है कि उनका मतलब हम लोग भी समझ रहे हैं । पर नीरज जी को भी ये समझना चाहिए कि हम सब ये काम सिर्फ समाज सेवा के लिए नहीं कर रहे हैं बल्कि रोजगार के रूप में भी करते हैं । आपकी बातों को मैं समझ रहा हूँ सर और मैं मानता हूँ कि भूखे भजन न होई गोपाला पर हमें भोजन उतना ही करना चाहिए जितना हम बचा सकें । आवश्यकता से अधिक कोई भी चीज अच्छी नहीं होती है और पाचन क्षमता से अधिक भोजन दुनिया के सभी लोगों को आमंत्रित करता है । वरिष्ठ पत्रकार ने कहा आप कहना क्या चाहते हैं सर? सरल ने पूछा सिर्फ तुमसे ही नहीं सभी पत्रकारों से कह रहा हूँ की इस नई दुनिया में समाचार को भी मनोरंजनात्मक बनाने के लिए हम सब अंधीदौड के साथ आगे निकलने की होड में बढते जा रहे हैं जो हम पत्रकारों के लिए और मीडिया के लिए ठीक नहीं है । मैं जानता हूँ कि मेरी बातों का आपको बुरा लग सकता है । फिर भी आपने पूछा है इसलिए सुनु हम पत्रकारिता की मूल भावना से हटकर परिवर्तन के नाम पर जो ग्लैमर पर उस रहे हैं अब जनता हूँ, उसे खूब दी जा रही है । यदि समय रहते हमने स्थिति को नहीं संभाला तो वह दिन दूर नहीं जब राजनेताओं की तरह लोग हम पर भी विश्वास करना छोड देंगे । माना कि अभी हमारा समय चल रहा है और हमें इस समय का सदुपयोग करना चाहिए पर अपनी विश्वसनीयता की कीमत पर विलासिता की सामग्री जुटाने ठीक नहीं है । कहीं ऐसा ना हो की पैसे की भूख लोगों के विश्वास का ही कत्ल करते हैं । नीरज जी का घायल होने से इन सब बातों का क्या मतलब है? लेकिन हम लोग नीरज जी को घायल होने की खबर को नकार भी तो नहीं सकते । सरल ने कहा, मैं आपसे सहमत हूँ । गलत अफवाहों से अच्छा है कि मेरी दुर्घटना की खबर लोगों को मीडिया से लग जाएगा और मैं चाहता हूँ कि बिना लाग लपेट के सच छापा जाए जो सिर्फ आप ही बता सकते हैं । नहीं रखते आपने ठीक है सर और सच यही है कि मुझे गोली लगी है जिससे मेरी जान भी जा सकती थी । पर ये घटना किसी पत्रकार के साथ नहीं बल्कि एक आम आदमी के साथ घटी है । किरण जी ने समय पर मुझे अस्पताल पहुंचाकर मेरी जान बचाई । वो उस समय किसी ऑपरेशन पर थी । इसके अतिरिक्त किरण जी का इस दुर्घटना से कोई लेना देना नहीं है । बल्कि मैं तो ये कहूंगा कि मुझ पर अधिक समय देने की जगह आप सब लोगों को समय का सदुपयोग करते हुए जरूरतमंदों की खबर देश के सामने लाने में जुट जाना चाहिए । नीरज ने कहा, आप लोगों की बात हो गई हो तो प्लीज पेशेंट को अकेला छोड दीजिए । डॉक्टर ने प्रवेश करते ही कहा

कलम से हत्या - 16

शमा करें मैंने आपको पहचाना नहीं । किरण की माँ ने दरवाजा खोलती ही कहा जी मेरा नाम पूरा है । मैं नीरज का मित्र हूँ । आप किरण की महिना हाँ पर किरन तो घर पर नहीं, मैं आप से मिलने आया । पूरब ने कहा ठीक है आओ बैठो क्या पी योगी चाहिए कॉफी किरन की माँ ने पूछा लाइट कॉफी चलेगी आंटीजी पूरब ने कहा किरन की मांग कॉफी बनाते समय सोचने लगी । अजीब इंसान ने न जानना पहचान और कॉफी पीने के लिए भी तैयार हो गया और फिर नीरज के मित्र को भला मुझसे के काम हो सकता है । आंटी जी मैं कॉफी का इंतजार कर रहा हूँ । पूरब ने आवाज लगाई आ रही हूँ । पूरब की आवाज से किरन की माँ का ध्यान टूटा तो उसने देखा कि दूध उबल कर आपको बुझा दिया है । बहुत देर कर दिया । आंटी जी हमें कॉफी बनाने में पूरा अपनी कॉपी की । जिसकी लेते हुए कहा दूध में उफान आने से हाँ बुझ गई थी । किरण की माँ ने जवाब दिया, दूध को अमृत माना गया है । अमृत की यही विशेषता होती है कि तापमान अधिक होने लगे तो आप को ही बुझा देता है । पूरब ने कहा आप कहना चाहते हैं । आप तो माँ है आंटी जी और हर माह इस बात को बखूबी समझती है कि उसका बिहार बच्चों के लिए अमृत के समान होता है । पूरब ने कहा बात तो सही कहीं है आपने पर फिर कहती हूँ कि आपकी बातें मुझे समझ नहीं आई । मैं किरण जी और आपके रिश्तों के बारे में कह रहा पूरब नहीं कहा । अभी अभी तुमने बताया कि नीरज का मित्र हूँ और अब किरण की बात करने लगे । किरण की माने का मैं जानता हूँ आंटी जी मेरा आना और इस तरह से आप से बातें करना । आपको अजीब लग रहा है । फिर भी में आपसे वो बातें कर ही जाऊंगा जो कहने आया आपके आने का । मुझे तो कारण ही समझ नहीं आ रहा है । आ जाएगा आंटी जी पहले तो मैं आपको बताना चाहूंगा कि नीरज और मैं हम दोनों लंगोटी आ रहे हैं और माथुर सर हम दोनों के ही आदर्श रहे हैं । जब वो हमें प्रेम के दर्शन समझाते थे तब हमारी पूरी कक्षा में सन्नाटा छा जाता था । सब मुक्त होकर सिर्फ माथुर सर्किट चेहरे को ही ताकते रहते थे । जैसे हम दुनिया के सबसे हसीन चेहरे को देख रहे हैं । हूँ । किरण की माँ को हंसी छूटते प्रेम का रस ऐसा ही होता है । शायद पूरब ने आगे कहा, और उस पर माथुर सर जैसा व्यक्तित्व समझा रहा हो तो फिर क्या क्या? तो मैं नीरज ने मुझे ये समझाने तो नहीं भेजा है की महत्व साहब के प्रेम के बारे में छपी खबरें सही थी किरण की माने का नहीं । पर हाँ ये सही है कि मैं भी पत्रकार माथुर सर के बारे में छपी खबरों के बारे में ये दावे से कह सकता हूँ कि गलत था । पूरब ने कहा तुम इतना दावा कैसे कर सकती हूँ? किरन की माने पूछा क्योंकि माथुर सर आपकी अतिरिक्त किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकते । ये बात हमने उनके व्याख्यानों से महसूस किया था और इसकी पुष्टि नीरज की आप लोगों से मुलाकात के बाद हो गई । बहुत अच्छा लगा यह जानकर की प्रोफेसर साहब की आप जैसे शिष्य भी हैं किरन की माँ की आंखें भर आईं । सौरिया थी मैंने आपको दिला दिया पर नीरज सही कहता है । क्या कहता है नीरज किरण की माँ ने पूछा यही कि माथुर सर का परिवार उनकी तरफ बहुत अच्छे हैं । पूरा ने आगे कहा और अब आप से मिलने के बाद लग रहा है कि किरण कैसी होगी और नीरज क्यों बोलते? बोलते ही रुक क्यों गए? किरण की माँ ने पूछा कहना तो पडेगा हैं पर कैसे करूँ? पूरब ने इधर उधर ताकते हुए कहा जब ही गए हो तो बोलने में जी जब क्यों किरन की माँ ने पूछा नीरज किरण से प्रेम करने लगा है । पूरब ने ही दिया क्या तुम यही के नहीं आयी हूँ? हांथी क्योंकि नीरज मेरा प्रिय मित्र है और जब मुझे पता चला कि तब तो मैं ये भी मालूम होगा कि किरण की इस बारे में क्या राय है । किरण की माने जैसे कुछ जानना चाह, उनकी नकारात्मक बातों के कारण तो मुझे आना पडा । पूरब नहीं कहा कैसी नकारात्मक बातें नीरज के अनुसार किरण को भी नीरज से ऐसा हो ही नहीं सकता । किरण की माँ ने पूरा आपको टोकते हुए आगे कहा तो मैं और नीरज को शायद मालूम नहीं कि किरण की सगाई हो चुकी है और शीघ्र ही शादी भी होने वाली है । हमें मालूम है और मैं इसलिए आपके पास आया हूँ ये बताने की किरण जी खुद को धोखा दे रही है । उनका कहना है कि वह सडक से ही शादी करेंगे । पूरब ने कहा तो इसमें स्वयं के साथ धोखा करने वाली क्या बात है? किरण की माँ ने कहा क्योंकि किरण भी नीरज से प्रेम करती है । पूरब नहीं कहा । किरण ने ऐसा कहा है किरण की मां तुनक गई नहीं, पूरा कुछ सहम सा गया तो फिर इतने विश्वास के साथ इतनी बडी बात मेरी बेटी के लिए कैसे कह दिया तुमने? किरण की मां अपना गुस्सा छुपाने में असमर्थ थी । नीरज ने मुझे बताया तो क्या? नीरज नहीं तो मैं यहाँ भेजा है । किरण की माँ ने पूछा नहीं ऐसी बात नहीं है । मुझे नीरज की चिंता है इसलिए आप से मिलने आया हूँ । पूरब ने कहा तो मैं तुम्हारे मित्र की खुशी के लिए किरण के पापा द्वारा किए गए रिश्ते को तोड तू किरण की माने का ये निर्णय तो आपको लेना होगा । मैं तो सिर्फ ये बताने आया हूँ की किरण के लिए नीरज से अच्छा जीवन साथी कोई हो ही नहीं सकता हूँ क्यों किरण की माँ ने पूछा क्योंकि नीरज किरण से बहुत प्यार करता है और किरण लेकिन किरण को अपने प्यार से ज्यादा आप लोगों के द्वारा किए गए रिश्ते से लगाव है क्योंकि उसके लिए अपनी खुशियों से ज्यादा माता पिता का सम्मान कह रहा है । पूरा अपने सारी बातों को एक ही सांस में कह दिया और खडे होते हुए आगे कहा ठीक है आंटी जी हमें चलता हूँ हाँ जी!

कलम से हत्या - 17

आपको मैं पूरे घर में ढूंढ रही हूँ और आप यहाँ बैठे मेरे कमरे में, पर अंधेरे में क्यों कहते हुए किरण बिजली के बोर्ड की ओर बढे रहने दो किरण मुझे अब रोशनी से डर लग रहा है । क्या ओबामा बस तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी? मैंने कहा मैंने आपको कहा तो था कि फालतू की बातें सोच कर परेशान होने से कोई मतलब नहीं । अब फिर कौन सी बात लेकर बैठ गई? कोई बात नहीं बेटा, तुम्हारे लिए टेबल पर खाना रखा हुआ खालू आप मुझसे नाराज है क्या? किरण ने माँ का हाथ थामते हुए कहा नहीं किरण बेटा मत उनसे नाराज नहीं हूँ बल्कि खुद पर ग्लानि हो रही है क्यों? हाँ मैंने सुबह तो मैं बुरा भला कह दिया था तो तो तुम सुबह की बात को लेकर बैठी हूँ पर मैं तो सब बातें उसी समय भूल गई थी । किरन ने कहा तुम तो चली गई और काम में व्यस्त हो गई होगी । पर मैं सारा दिन सोचती रही कि जिस बेटी को हमने अच्छे संस्कार दिए हैं और जिस पर खुद से भी ज्यादा भरोसा किया है, जिसने हमेशा माता पिता के संस्कार और भरोसे का सम्मान किया है हूँ उस पर शक करके मैंने अच्छा नहीं तो वहाँ तुम बिना कुछ भी सोच कर परेशान होती रहती हूँ । तुमने जो भी कहाँ, मेरी भलाई को ध्यान में रखकर ही तो कहा । बाद में मैंने आपकी बातों पर विचार किया तो मुझे एहसास हुआ कि आप सही कह रही थी हमेशा की तरह अभी वही होगा जो तुम चाहती हूँ । क्या ये तुमने क्या कह दिया? किरण हाँ, तुम्हारी इच्छा अनुसार आज मेहनत के घर गई थी । क्यों मानी पूछा क्योंकि तुम ने सही कहा है माँ की मुझे सडक से मिलते जुलते रहना चाहिए और मैंने आज सडक से झगडा भी नहीं किया है । लगता है अपनी माँ से अब भी नाराज हो तुम? नहीं हाँ ऐसा बिलकुल भी मत सोचो । तो फिर मैं जो भी पूछ होंगी उसका सही सही जवाब होगी । ठीक है हाँ पूछो अब तक तुम सडक को ना पसंद क्यों करती रही हूँ? बेटा माननीय प्यार से पूछा ऍम, अब इन बातों का कोई मतलब भी तो नहीं है । मैंने तुमसे पहले ही कहा है कि यदि अपनी माँ से नाराज नहीं हो तो मेरे सवालों का सीधा सीधा जवाब देंगे । माने का रहने दो ना माँ, अब सडक जैसे भी है, मेरे हैं । मैंने उन्हें अपना मान लिया है । आप सही कहती हैं कि विवाह एक समझौता ही तो है । तो फिर जैसा अन्य महिलाएं करती हैं मैं भी कर लुंगी और समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा । लेकिन मैं नहीं चाहती किरन की तुम भी शादी के नाम पर समझौता करूँ । मानी कहा पर सुबह आपने ही तो कहा था कि कह तो रही हूँ कि मेरी मति मारी गई थी जो मैंने इस तरह की बातें की थी । मैं सिर्फ समाज के कहने पर चलने वाली जिद्दी माँ बनकर तुम से कुछ भी कहती रही और तुम ने रानी बेटी बनकर अपनी माँ की बातों पर चलने का निर्णय भी ले लिया तो क्या करती हूँ । अब तो आपकी मेरी माँ और पिता दोनों है । आपकी बातें मेरे लिए सलाह ये और आदेश भी इसी बात की तो ग्लानि हो रही है मुझे कि तुम ने तो मुझे पिता का भी स्थान दे दिया । पर मैं अपनी बेटी की हर जिद पूरी करने वाला पिता नहीं बन सकी । मैंने तो वापस से भी कभी कोई जिद नहीं किया । हाँ, किरण ने कहा क्योंकि तुम्हारे पापा हमेशा तुम से चर्चा करके ही किसी निर्णय पर पहुंचने रहे हैं और कभी भी तुम्हारी कोई बात अनसुनी नहीं करते थे । पर मैं चूककर गई और सनत से तुम्हारी तकरार का कारण पूछे बगैर ही अपना निर्णय मनाने के लिए बाध्य करने लगी जो सही नहीं है । मैं तो इतना चाहती हूँ माँ क्या परेशान ना हो तो फिर मेरी परेशानी दूर करूँ । माने का बोलो मैं क्या करूँ? संस्कार के नाम पर अपनी बात टूटने वाली मानहिं बल्कि बेटी की हर बात को समझने की कोशिश करने वाले पिता बनकर पूछ रही । मुझे पूरा सच जानना है तुम तो जानती उमा की जो पापा और आपने मेरे सामने सनत के साथ विवाह का प्रस्ताव रखा तब दूर दूर तक भी मेरे मन में विवाह की बात नहीं थी । माँ की गोद में सिर रखते हुए किरण में आगे का पर मैं जानती हूँ की मेरे लिए क्या अच्छा होगा । ये बात मुझसे अधिक आप लोग जानते हैं इसलिए मैंने आपके प्रस्ताव पर मंजूरी दे दी । हमने तो तुम्हें कहा था बेटा की हमारे निर्णय पर मुहर लगाने से पहले तुम सडक से मिल लूँ । मैंने कहा आपने मिल लिए थे तो जरूरत ही नहीं थी माँ और फिर समय आने पर मुलाकात तो हो नहीं थी । और जब सडक से मिलना हुआ तो मुझे आप लोगों की पसंद पर गर्व हुआ । फिर अब टकराव की स्थिति की ओमिता पापा की मृत्यु के समय जब हम अकेले पड गए थे और पत्रकार लोग हम पर हमलावर रहे थे तब मैं चाहती थी कि सनत आगे बढकर हमारी समस्याओं के साथ खडे रहे । सच कहूँ तो पापा के मृत्यु संस्कार में सनत की नहीं आने से मुझे बहुत दुख हुआ । फिर ये सोच कर मन को मना लिया कि विदेश दौरे पर थे तो अभी तो संभव नहीं था । मैं तुमसे सहमत हूँ । केरन उस समय मेरी निगाहें भी । सनत कोई तलाश रही थी । पत्रकारों से गिरने के बाद तो ऐसा लगता है कि सनत को फोन करके बुला ही ले । मैं तुम्हें स्थिति को संभाल लिया । इन सबके अतिरिक्त भी कुछ बातें ऐसी है माँ जिसने अधिक परेशान किया । किरण विचलित हो गई और क्या बाते हैं? किरन खुलकर बोलो बेटा । मैंने कहा मुझे उम्मीद थी कि सडक जब भी लौटेगा, हमसे मिलने तुरंत ही आएगा । पर पता चला कि संदेश लौट आया है और हम से मिलने भी नहीं है तो मैंने फोन पर उससे बात की । उन्होंने बताया, वे आ तो गए हैं पर किसी काम से क्लाइंट के साथ होटल में रुके हैं और व्यस्त है । हाँ, तो फिर क्या हूँ? माने किरन कि अचानक इच्छुक हो जाने पर पूछा उत्सुक्ता में मैं उनसे मिलने होटल चली गई । तब मुझे पता चला कि वे किसी काम से नहीं बल्कि अपनी विदेशी महिला मित्र को कंपनी देने के लिए होटल में ठहरे हुए थे । ये तुम क्या कह रही हूँ? किरण क्या? तो मैं पक्की जानकारी है की हाँ इतनी गंभीर बाद मैं विश्वास के साथ तभी तो आपसे कह पा रही हूँ । तो तुमने सडक से इस बारे में चर्चा नहीं । माँ भी विचलित हो गई । आंखों देखी बात को पूछने से अच्छा मैंने खुद को समेट लिया । फिर माननीय पूछा फिर क्या करूँ? कुछ दिनों बाद सडक मेरे पीछे आते रहे और अंतत आपका ख्याल करके मैंने सब कुछ भूलकर साथ चलने का मन बना लिया । पर पिछले दिनों फिर से एक नहीं बात सामने आई है । अब क्या हूँ? जब भी सदस्य मैंने फोन पर बात नहीं हो पाती थी तो वो मुझ से बात करने थाने आते रहते हैं । हालांकि मैंने उन्हें कई बार मना किया है कि उनका इस तरह से खाने आना अच्छी बात नहीं । कार्यक्षेत्र में मुझे किसी की दखलंदाजी पसंद ही नहीं है । फिर भी सनत अपने मन की करते रहे । तुमसे प्यार करता है इसलिए खुद को मिलने से नहीं हो पाता रहा होगा मान्य किरन कि दोस्त बनकर उनके रिश्तों की गहराई को ना आपने की कोशिश की । मैं भी यही समझती रही । माँ और सनक भी मुझ से बार बार यही बात दोहराता रहा और हो सकता है वो मुझे चाहते भी होंगे । पर थाने आने का कारण कुछ और ही था । क्या पता न जा रही हूँ । मुझे तो समझ में ही नहीं आ रहा है । किरण की माने का सूचित ने मुझे बताया कि सडक कई बार जानबूझकर मेरी अनुपस्थिति में भी थाना आते रहे हैं और उसे विदेश घुमाने ले जाने का प्रस्ताव रखते हुए प्रेम प्रस्ताव भी रखता रहा है । तुम्हारी वो कांस्टेबल झूठ नहीं बोल रही । मैंने भी यही सोचा था और इसीलिए उससे कहा कि अब जब भी फोन पर बात करना चाहे तो बात अवश्य करना और माइक ऑन करके करना तू क्यों सूचित ने ऐसा किया । माने पूछा हाँ दूसरी ओर से आने वाली आवासन की ही थी । वो कह रहा था देखकर सुचिता डर नहीं, सबको अपना जीवन अपने हिसाब से जीने का अधिकार है । मनुष्य जीवन बहुत कठिनाइयों के बाद मिलता है । इसमें जितनी खुशियाँ जब जैसे मिले समेत लेनी चाहिए । तुम बहुत सुन्दर हो और तुम्हारा साथ पाना मेरा सौभाग्य होगा । किरण से डरने की जरूरत नहीं है । हम विदेश घूम कर आ जाएंगे और उसे पता ही नहीं चलेगा । लेकिन सर सूचिका ने कहा अरे यार तुम मिडिल क्लास लडकियों की यही परेशानी है अगर मगर बहुत करती हूँ । अच्छी सनम ऐसा लडका है तो सूचिता ने क्या कहा? मैंने पूछा मेरे कहने के कारण सुचिता बात करती रही और फिर जो बातें हुई उसका जिक्र मैं कर भी नहीं सकती । और इसके बाद भी तुम सडक से विवाह करने की बात कर रही हूँ । अब तो ये रिश्ता मैं स्वयं तोड कराऊंगी । कहते हुए किरण की मां अचानक से चुप हो गई । उन्हें पूरक की बात याद आ गई की किरण को अपनी खुशी से ज्यादा प्यार माता पिता के द्वारा किए गए रिश्ते हैं का क्या हुआ वहाँ खडी होने की कोशिश करती हूँ । माँ के पुना बैठ जाने पर किरण ने पूछा कुछ नहीं बेटा थोडी बेचैनी हो रही है । मैंने तो सोचा भी नहीं था कि सनत ऐसा लडका निकलेगा । मैं तो किसी गलतफहमी में रही की सब और संपन्न परिवार में लडकी को रिहा कर निश्चिंत हो जाऊँ क्या वहाँ पे क्या हो रहा है आपको? किरण दिमाग को थरथराती देखकर का सीने में बहुत दर्द हो रहे बेटा चल मुझे जल्दी से अस्पताल ले चलते । आपात चिकित्सा कक्ष के सामने बैठी किरण डॉक्टर के बाहर आने का बेसब्री से राह देख रही हूँ । अंतर था उसका इंतजार खत्म हुआ । माँ को क्या हुआ? डॉक्टर किरन ने पूछा हार्ट अटैक आया था जान का खतरा तो चल गया है पर जब तक होश नहीं आ जाता तब तक उनकी स्थिति के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता हूँ । डॉक्टर ने जवाब दिया किरण मनी मान कहने लगी सडक के बारे में कुछ बातें जानकरी तुमने दिल से लगा लिया माँ जबकि उसके रंगीले मिजाज के अन्य किससे तो मैंने तुम्हें बताया ही नहीं । किरण जी जी डॉक्टर साहब किरण खडी हो गई माँ को वो शादी असर क्या मैं उनसे मिल सकती? हाँ मिल सकती हूँ पर पर क्या डॉक्टर साहब आप चुके होंगे? किरन घबराई देखेगी रंजीत आप हिम्मत से काम लीजिए पर माँ को हुआ ऍम किरण माँ के पास जाने के लिए दौडी किरण जी रुकिए अभी वह हो रही हैं तो बताइए ना । डॉक्टर साहब आप चुप क्यों है? किरण गिडगिडाई उनको पक्षाघात हुआ है । डॉक्टर ने कहा पक्षघात मतलब किरण को कुछ समझ नहीं । आपकी माँ के शरीर का दायां हिस्सा काम नहीं कर रहा है कि वो और कैसे किरन की आंखें भर आई । आप घबराइए नहीं किरण जी हिम्मत से काम लीजिए । मैं मानता हूँ कि आपकी माँ की तात्कालिक स्थिति ठीक नहीं है, पर हमने अभी उम्मीद नहीं छोडी है । मैं पूरी तरह ठीक हो जाएंगे । डॉक्टर किरण के मन में उम्मीद जांच हाँ जी और नहीं आप क्या कह रहे हैं, मुझे समझ में नहीं आता डॉक्टर साहब किरण ने कहा, हमें लगता है कि जिस तरह दिमाग पर लगे एक झटके से उनके शरीर का एक हिस्सा काम करना बंद कर दिया, उसी तरह अचानक आए सुख या दुख उन्हें ठीक भी कर सकता है ।

कलम से हत्या - 18

पूरे घर को खामोशी ने निकल रखा था । घर में पसरा अकेलापन नहीं किरन को तोड दिया था । फिर भी वो खुद को संभालने की कोशिश कर रही थी । तभी दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई । किरण ने दरवाजा खोला तो सामने सनक खडा मिला । वहाँ के बारे में सुनकर दुख हुआ । किरण सनत नहीं कहा दुख की बात तो है और क्या कर सकते हैं । भगवान की मर्जी के आगे हम सब नतमस्तक है । आप बैठे मैं आपके लिए पानी लाती हूँ । औपचारिकता नहीं किरण आओ बैठो कुछ बातें करनी है तुमसे सनत नहीं कहा कि कितना अब आगे के लिए क्या सोच रही होगी रहे हैं । इस संबंध में आंटी के इलाज के लिए सनक पूछा । माँ का इलाज तो चल ही रहा है । किरण में कहा वो तो मैं भी जानता हूँ । पर पापा ने कहा है कि हम उनका इलाज किसी बडे अस्पताल में कराएंगे । ये तो उनका बडप्पन है । पर मैं माँ को दूर नहीं भेजना चाहती हैं और फिर यहाँ के डॉक्टर के इलाज से मैं संतुष्ट हूँ । उन्होंने माँ की जान बचाइए लेकिन पापा चाहते हैं की अब चुके होंगे सनक । बताइए पापा क्या चाहते हैं? किरण ने पूछा तुम हर बात को अन्यथा ले लेती हूँ । इसलिए बोलने में झिझक हो रही है । पर पापा का संदेश है तो कहना तो पडेगा ही । सनत ने कहा ऐसी क्या बात है जिसे बोलने से पहले भूमिका रखी जा रही है । किरण ने कहा माँ का ख्याल हम दोनों को मिल कर रखना चाहिए । सनक ने कहा, पर आपने अभी अभी पापा के संदेश का जिक्र किया था तो उनका क्या कहना है वो तो पहले बताइए । किरण ने कहा पापा की भी यही इच्छा है की माँ की देखभाल करना अब तुम्हारे अकेले के बस की बात नहीं है । इस समय हमें सात होना चाहिए । सनत ने कहा ये तो अच्छी बात है । चली पापा के समय ना सही, माँ के लिए आपको जिम्मेदारी का एहसास हुआ । किरण ने राहत की सांस ली, तुम तो जानती हो किरण मुझ पर काम की भी बडी जिम्मेदारी है । इस तरह अलग अलग रहकर आंटी की सही देखभाल नहीं कर पाएंगे हम लोग । सनक ने कहा क्यों नहीं कर पाएंगे । जहाँ जहाँ होती है वहाँ रह अभी अवश्य निकल आती है । किरण ने कहा पर मुझे लगता है कि हम साथ रहकर ही तुम्हारी माँ की अच्छे से देखभाल कर पाएंगे । आप कहना क्या चाहते हैं मैं समझ पाउँगा । मैं जानता हूँ कि शादी के बगैर तो मैं साथ रहना मंजूर नहीं होगा । इसलिए पापा चाहते हैं की सादगी से ही हमें शादी कर लेनी चाहिए । अच्छा तो तुम्हारा मतलब ऐसे साथ रहने से था और इस समय मेरे पास आप शादी का प्रस्ताव लेकर आए हैं । किरण समझकर भी सनत की बातों पर विश्वास नहीं कर पा रही थी इसलिए सडक द्वारा पुष्टि करना चाह रही थी । हाँ, सडक में आगे का और मुझे लगता है कि हमें साथ में देखकर माँ को संतुष्टि मिलेगी जिससे उन्हें जल्दी ही स्वास्थ्य लाभ भी मिल जाएगा और तुम माँ को अधिक से अधिक समय देता हूँ कि मैंने वैसे भी माँ की देखभाल करने के लिए अवकाश लेने का मन बना लिया है । किरण ने कहा पिछली बार पापा के लिए लंबी अवकाश पर रहे हैं और फिर परिवार के लिए तो ये सब करना ही पडता है । किरण में सरहद की बात पूरा करने से पहले ही कहा तो क्या तो मैं अवकाश मिल जाएगा । सनक ने पूछा क्यों नहीं मिलेगा? मैंने तो आवेदन में दे दिया । किरण ने कहा पर मैं तो कह रहा हूँ कि रन कि बार बार छुट्टी लेने की झंझट से ही मुक्त हो जाओ । हमेशा के लिए छोड दो ये सरकार की गुलामी और ये सलाह भी आपके पापा की ओर से ही होगी । किरण को गुस्सा आया । सिर्फ पापा ही नहीं मम्मी और पूरे परिवार सहित मैं भी यही चाहता हूँ । संता ने कहा माँ की बीमारी के बहाने मुझसे नौकरी छुडवाना चाहते हो । किरण को गुस्सा आया इसमें कोई नई बात तो नहीं है किरण सनक ने आगे कहा, मम्मी ने तो तुम्हारे पास पहले भी ये प्रस्ताव रखा था और मैंने पहले भी आप लोगों को ऐसे प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं दिया था । किरण ने कहा, पर अब तो अपनी माँ के लिए तो मैं हमारी बात माननी पडेगी । सनत ने अधिकारपूर्वक कहा, मैं अपनी माँ की देखभाल करने के लिए सक्षम और किरन ये समय करने का नहीं, समझदारी से काम लेने का है । ऐसे समय पर रिश्ते नाते ही काम आते हैं । सनत ने कहा, मैं आपको बहुत पसंद करती है । कम से कम इसी बात की जब रख लेते हैं । किरण नहीं कहा मैं जानता हूँ और इसीलिए चाहता हूँ कि आंटी का अच्छी जगह इलाज और उचित देखभाल हो । सनत ने कहा, कुछ समझ में नहीं आ रहा कि आपके इस दिलेरी को माँ के प्रति प्रेम मानो या मौके का नाजायज फायदा उठाने वाला अवसरवादी किरण फेरकर आसमान की ओर ताकने लगी, यही परेशानी है । किरण तुम्हारे साथ रिश्तों में भी पुलिसिया तर्क को तर्क करने लगती हूँ । सनत नहीं । चहल करनी करते हुए आगे कहा, मैं मम्मी को क्या करूँ तो उन का प्रस्ताव मंजूर है । नहीं नहीं । किरण ने दूर से कहा तुम समझती क्यों नहीं हो किरण कि मैं तो मैं खोना नहीं चाहता हूँ । अब कोने और पानी का सवाल कहाँ से आ गया? किरण ने सनत की ओर पीठ किए हुए ही पूछा । सनत का जवाब नहीं मिलने पर किरण ने पीछे मुडकर देखा तो सनत जा चुका था । सनत की प्रेम के दावे और अपने मंगेतर की ऐसी जिम्मेदारी देख किरण दुख से मुस्कुराते हुए अस्पताल जाने के लिए निकल पडी आप यहाँ अस्पताल में माँ के पास । नीरज को देखकर किरण ने कहा, तुम ने तो बताया नहीं, पर जब मुझे मालूम हुआ कि अम्मा बीमार है तो मैं खुद को रोक नहीं पाया । लेकिन नीरज जी अभी तो आपके गांव भरे भी नहीं है और आप चलकर यहाँ तक पहुंच गए । किरण ने कहा अरे मैं तो मैं बता नहीं भूल गया । आप मेरी माँ है और माँ ये है किरण । नीरज ने कहा मैं तो देखते ही समझ गई थी कि यही किरण है नीरज की माने का पर कैसे तुम्हारी आंखों से उसकी तस्वीर देखिए । मैंने नीरज की माने हसते हुए आगे कहा माँ हूँ मैं तुम्हारी नीरज और उसकी माँ की वार्ता लाभ से किरण परेशान होकर अपनी माँ की ओर देखने लगे जिनकी आंखे किरण को देखकर मुस्कुरा रही थी । हाँ ये नीरज जी की माँ है । किरण ने माँ के पास जाकर का तुम परेशान मत हो रहा है । अम्मा से मैंने माँ का परिचय करवा दिया है । नीरज ने कहा और इस समय आपको यहाँ नहीं आना चाहिए था । किरण ने कहा मैंने भी इससे यही कहा था । नीरज की माँ ने आगे कहा पर इसकी जबकि आगे मुझे झुकना ही पडा । गौर यहाँ लेकर आ गई । किरण कुछ कहने को तत्पर हुई तो किरण की माने उसका हाथ पकडकर इशारों से बताया कि पिछले एक घंटे से ये लोग मेरे पास ही है । चलो मैं आपको कुछ खिलाडी । किरण ने कहा महाने अम्मा को किसी भी खिला दिया है । किरण को खाने का डब्बा खोलते देख नीरज ने कहा हाँ किरन, नीरज और तुम्हारी माँ को मैंने एक साथ खिला दिया । नीरज की माँ ने नम्रतापूर्वक आगे कहा किरण तुम्हारा काम अधिक जिम्मेदारी वाला और चुनौतीपूर्ण है और छुट्टी लेकर बैठना भी ठीक नहीं है । नीरज के साथ मैं तुम्हारी माँ के साथ भी रह लूँ । अस्पताल प्रबंधन से कहकर हमने माज्जूकी कमरे में ही नीरज के लिए भी कमरा ले लिया है । किरण की मां की आंखों की चमक बता रही थी कि वो भी नीरज की माँ से सहमत है । खेरेश्वर तेरी लीला भी अपरंपार है । एक ओर तो मेरे मंगेतर और उसका परिवार है जिसने मेरी सहायता करने के लिए शादी के मजबूत रिश्ते में बनने की शर्त रखी है और दूसरे ये लोग हैं पर आये होकर भी बिना कुछ कहे मेरी सहायता किए जा रहे हैं । किरण ने मन ही मन कहा

कलम से हत्या - 19

मैडम आज का अखबार देखा आपने नहीं क्या विशेष यादव आपकी बहादुरी और कामयाबी का डंका सभी अखबारों में बज रहा है मैडम जी सूचना ने कहा किस बात के लिए? किरण ने फाइल पर नजरें गडाए हुए ही पूछा, हमने पिछले दिनों दिन चार इनामी बदमाशों को पकडा है । उसके लिए सभी तरफ आपकी वाहवाही हो रही है । मैडम जी यादव ने कहा पर पत्रकारों तक खबर किसने पहुंचाई? किरण ने पूछा वो हूॅं वो वो क्या कर रहे हो तो नहीं बताया क्या? यादव जी मैडम वो वो वो यादव तो इतना डर क्यों रहे हो मैडम जब मैं चलान लेकर कोर्ट गया था तब पत्रकारों ने मुझे घेर लिया था तो मुझे बताना पडा । यादव ने कहा ठीक है । मैंने पत्रकारों को अनावश्यक जानकारी नहीं देने के लिए कहा है । एकदम से माना ही नहीं । उन का काम है समाचार एकत्रित करना । वो तो अपना काम करेंगे और फिर उन के माध्यम से हमारे भी तो बहुत सारे काम आसान हो जाते हैं । मस्त ध्यान रहेगी, व्यक्तिगत बातें प्रचारित हूँ ऐसी खबर हमें नहीं देना है । उन बदमाशों के पकडे जाने की बातें जनमानस तक पहुंचाना भी जरूरी है जिससे लोग उसके भय से मुक्त हो सके । आप पढना चाहेंगे । मैं पहली बार किसी पत्रकार से बात करने पर किरण द्वारा सकारात्मक बातें किए जाने पर यादव की जान में जान आई और उसने कहा और ये क्या? इसमें तो लिखा है कि हमने उन बदमाशों का पीछा करके पकडा । क्या तुम ने पत्रकारों से ऐसा कहा था? किरण ने अखबार को पढते हुए ही पूछा नहीं मैडम जी, मैंने तो बताया था कि आप को अगवा करने की कोशिश की गई थी । यादव ने हर बढाते हुए जवाब दिया किरण ने मुस्कुराते हुए आगे का अखबार वालों की माया भी अजीब है । जब जिसे चाहे अर्श से फर्श पर पटक दिया और जब जिसे चाहे फर्श से अर्श पर पहुंचाते । फौरन की यही बातें मुझे अच्छी नहीं लगती । मैं चाहती हूँ कि पूरा सच लोगों के सामने आना चाहिए । उसके लिए तो आप जैसे लोगों को पत्रकारिता करनी पडेगी । मैडम जी यादव ने हिम्मत जुटाकर कहा ये हुई ना तो मुस्कुराते हुए अच्छे लगते । यादव डरकर बातें करते हो तो मुझे लगता है कि या तो तुम गलत हो या फिर मैं तानाशाह हूँ । चलो कोई बात नहीं, अच्छा सुनो ये अखबार में लेकर जारी हूँ । मेरे आने तक तुम कहीं मत जाना । थाने की जिम्मेदारी तुम पर है कहते हुए किरण खडी हो गई तो ये खबर आपके द्वारा प्रायोजित किरण ने उसकी तारीख में लिखी गई खबर वाले अखबार के पन्ने को मोडकर नीरज को दिखाते हुए कहा, नहीं तो मुझे इन खबरों के बारे में कुछ भी मालूम नहीं है । यादव ने मुझे अगवा करने की बात कुछ पत्रकारों को बताई थी । इसके अतिरिक्त आप और मैं ही हूँ जिससे पत्रकारों को जानकारी मिल सकती है और मेरी किसी से बात हुई नहीं तो फिर हाँ पत्रकार साथी मुझसे मिलने आए थे । तब उनसे बात हुई थी । नीरज ने कहा तो मेरा शक सही था की इन खबरों के पीछे आप ये किरण ने जोर देकर कहा देखिए इंस्पेक्टर साहिबा । इस तरह पुलिसिया अंदाज से मुझे डर लगता है । मैं तो प्रेमी होगा और सिर्फ प्रेम की भाषा जानता हूँ । नीरज मुस्कुराया इसीलिए तो मुझे पत्रकारों पर भरोसा नहीं है । किरण ने आगे कहा, पत्रकारों से परहेज करने वाला ये अंदाज ठीक रहेगा । किरन भी हंसने लगी नहीं मैं तो आपका ये स्वरूप मजाक में भी देखना नहीं चाहता हूँ । नीरज के आगे कहा, इसलिए तुम्हारे नाराज होने से पहले ही बता दूँ कि मेरे पत्रकार साथ ही मुझसे मिलने आए थे । मुझ पर हुए हमले को गंभीरता से लेते हुए कहने लगे कि नीरज जी ये गोली आप पर नहीं, समाज के चौथे स्तंभ पर दागी गई है । फिर मजाक इस खबर को लेकर में अभी भी गंभीर नीरज जी मुझे सब जानना है । किरण ने कहा, सच्ची तो बता रहा हूँ कि मेरे पत्रकार साथ ही चिंतित होकर पूरी घटना की जानकारी मुझसे मांग रहे थे । तब मैंने अपने साथियों से कहा था कि मुझे गोली लगना दुर्घटना मात्र है और उन लोगों ने आपकी बात मान लीजिए । किरण ने पूछा मानते कैसे नहीं? नीरज ने कहा, तो आप ने उन लोगों को मुझे अगवा करने वाली बात क्यों नहीं बताई? किरण ने पूछा, क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि तुम्हारी अनुमति के बिना तुम्हारे बारे में कुछ लिखा जाए या कोई पत्रकार उस मामले को लेकर तुमसे कोई व्यक्तिगत सवाल जवाब करेंगे । नीरज ने कहूँ तो बात यही हुई कि अखबार में की गई मेरी तारीफ का कारण आप ही है । किरण ने कहा, हाँ और इसमें कुछ गलत भी नहीं है । नीरज ने कहा, आप लोगों की मायानगरी का भी कोई जवाब नहीं । अजीब चलाना आपकी मीडिया की दुनिया के हैं । किरण ने कहा, ठीक है तो लिखा है बिल्कुल उतना ही जितना जरूरी था । नीरज ने अखबार को पढने के बाद समेटते हुए कहा, आप से जुडने का फायदा देखिए, आपके साथियों ने तो मुझे हीरो ही बना दिया । मुझे पुलिस पदक दिए जाने की बात कर रहे हैं । किरण ने कहा, सही तो कहा गया है कि ऋण तुमने उसके लायक बहादुरी का काम भी तो क्या है? तुम्हारी कर्मठता पुरस्कार के लायक है तो आप ने अपने साथियों को आधा सच क्यों बताया? उनसे ये क्यों नहीं कहा कि मेरी इस कामयाबी के बीच आपका महत्वपूर्ण योगदान है? किरण ने पूछा क्योंकि मैं वहाँ पुलिस का सहयोग करने नहीं तो भारत पीछा करते हुए गया था । मेरा पीछा करना, माँ की देखभाल ये सब क्या है? नीरज जी कह तो दिया है मैंने और जितनी बार पूछ होगी कहता ही रहूंगा की प्रेम करता हूँ तुम से और मैंने भी बताया की तुम्हारी तुम जाने पर मैं तुमसे प्यार करता रहूँगा । ये मेरे मन की बात है और मेरे मन की बात मानने से तुम भी मुझे रोक नहीं सकती और फिर मैं तुम से कुछ मानते नहीं रहा हूँ । हो सके तो बस इतनी मेहरबानी कर दो कि जिससे मुझे खुशी मिलती है मैं वो कर रहा हूँ और तुम इसमें रुकावट डालने की कोशिश मत करूँ । नीरज ने कहा पुलिस को धमका रहे हो । किरण के होठों पर मुस्कान फैल गई । इसे धमकी नहीं प्यार कहते हैं । खैर छोडो प्यार मोहब्बत की बातें तो मुझे समझ नहीं आएंगे । मैं तो मैं विश्वास दिलाता हूं कि रन की मेरी मोहब्बत में कभी रुसवा नहीं करेगा और ना ही सनक और तुम्हारे रिश्तों को प्रभावित करेंगे । ये तो जाती है नियर जी ज्याति नहीं बेटा इसे ही प्यार कहते हैं । नीरज की माँ ने प्रवेश करते हुए आगे कहा, अपने बेटे की चेहरे पर जिस चमक को देखने के लिए मैं दर्ज गई थी वह चमक मैंने जख्मी होने के बाद देखिए वहाँ नहीं नीरज मुझे चुप रहने के लिए मत करो बेटा तेरी खुशी के साथ खुश होने का अधिकार मुझे भी है । फिर किरण के बालों पर हाथ फेरते हुए उन्होंने आगे कहा, नीरज ने मुझे सब बता दिया है और मैं नीरज की इस बात से सहमत दी हूँ कि जरूरी नहीं कि हम जिस से प्रेम करते हैं वो भी हम से प्रेम करें । प्रेम तो सिर्फ प्रेम होता हैं । इसमें लाभ हानि या आदान प्रदान नहीं देखा जाता हूँ । मैं सोचती थी कि आज के जमाने में दार्शनिक प्रेम की बातें नीरज जी कैसे कर रहे हैं । पर आपसे मिलकर पता चला कि नीरज जी ऐसे क्यों है । किरण ने कहा दिख कुमार किरण की प्रतिभा को हमारे ऊपर हमारी प्रशंसा करके हमारा वो बंद करने की कोशिश कर रही है । नीरज ने कहा, पर मैं तो कहूंगी । नीरज की माँ ने आगे कहा तुम तो सचमुच प्यार से भरी प्यारी हो । किरण मेरी भी बेटी है और मैंने उसे भी नीरज की तरह ही संस्कार दिए । पर उसे तो अपने पापा की तरह दुनिया की चकाचौंध ही पसंद है । तुम जैसी बेटी तो किस्मत वालों को मिलती है । किरण निशब्द हो गई । अच्छा तुम लोग बातें करूं मैं तुम्हारी माँ को भोजन करा देती हूँ । किरण कहकर नीरज की माँ जाने लगी नहीं आप रहने दीजिए, मैं तो माँ को खाना खिलाने ही आई हूँ । अच्छे बच्चे बडो की बात नहीं टालते । नीरज की माने डिफरेंस किरण का हाथ अलग करते हुए आगे कहा, हम उम्र वालों के साथ समय बिताने का भी अपना अलग मजा होता है तो हम माओ को भी कुछ मजा कर लेने दो और तुम दोनों भी अपनी उम्र की बातें करो । मैंने कुछ बातें करने के लिए कहा है और तुम हो की ऊपर ताला लगाकर बैठे हो । नीरज ने कहा, एक ही दुनिया में रहने वाले लोगों के बीच इतनी अधिक भिन्नता देखकर में अचंभित हूँ । इसी का नाम दुनिया है । मैं जानता हूँ कि तुम किस परिपेक्ष्य में कह रही हूँ । पर मैं भी तुमसे मिलकर यही सोचते रहता हूँ कि तुम जैसी लडकी भी आज के जमाने में होती है, जिनका जीवन माता पिता को समर्पित है । कोई मौका नहीं छोड दिया । बहुत मुश्किल है आपसे बातें कर पाना । किरण ने कहा पत्रकारों की बुराई करना हो तब तो पानी पी पीकर कोसती हूँ । नीरज ने मुस्कुराते हुए आगे कहा, जबकि अभी आपके सामने पत्रकार है और बात तक नहीं कर पा रही हूँ क्योंकि मैं किसी पत्रकार से नहीं मेरी जान बचाने वाले एहसानमंद व्यक्ति के पास बैठी हूँ । किरण ने कहा ये तो खुशी की बात है फिर तो तुम कुछ भी कह सकती हूँ । हम नतमस्तक है । नीरज ने सर झुकाते हुए कहा । वही तो समझ में नहीं आ रहा कि क्या बात करूँ । जो तुम्हारा मन कहे वही करूँ । नीरज ने का वो तो नहीं कह सकती । किरण ने अचानक ही कह दिया मतलब नीरज के दिल की धडकने तेज होने लगी । जी जी कुछ नहीं किरण जीत गई, कोई बात नहीं । जब तुम्हारा दिल कहे तभी मन की बात कर लेना । अभी ये तो बता दो कि पत्रकारों से तुम्हारी शिकायत दूर हुई कि नहीं । नीरज ने पूछा नहीं और कभी होंगे भी नहीं । किरण हो गई ये तो गलत है क्या सही गलत? मैं नहीं जानती पर जब भी पत्रकार या पत्रकारिता का जिक्र होता है मुझे आपकी अपमानजनक मृत्यु ज्यादा जाती है । शायद तुम्हारा सोचना भी सही होगा । पर इस बात पर भी तुम्हें गौर करना चाहिए कि जिस तरह तुम्हारे पुलिस विभाग में सभी पुलिस वाले बेईमान नहीं होते हैं, उसी तरह सभी पत्रकार भी सिर्फ पैसों के पीछे भागने वाले या ब्लैकमेलर नहीं होते हैं । अब ठीक रहनी दर्जी विषेशकर आपसे मिलने के बाद पत्रकारों के प्रति अपने मन में बैठी कडवी भावनाओं को दरकिनार करना चाहती हूँ और फिर मेरे सामने पापा का वह निष्कलंक चेहरा सामने आ जाता है जिस पर पत्रकारों ने कालिख पोत दी थी । जिन ब्लैकमेलरों ने पत्रकार का मुखौटा लगाकर मेरा अच्छी पापा को बुरी और असमायिक मौत दी है, उससे मैं बोल नहीं पा रही हूँ । उन दरिंदों को सजा दिलाकर ही शायद मेरे मन को शांति मिल सके । मैंने मन बना लिया है कि किसी वकील से बात करके मानहानि की याचिका दायर करूँ । किरण ने दृढतापूर्वक का मैं भी यही चाहता हूँ जिससे हमारी बिरादरी में छुपे शेर की खाल हो रहे भेडियों को पहचान सकें । नीरज भी दृढ थी पर किसके पास जाओ समझ नहीं आ रहा । किरण ने कहा ये भी अच्छी बात है की हमें सजा दिलवाने के लिए हमें गुनहगार साबित करने के लिए तुम हम से ही सलाह ले रही हूँ । नीरज ने कहा क्योंकि आप पत्रकार बाद में है, पहले अच्छे और सहयोगी मित्र है । किरण ने कहा और उससे भी पहले तुम्हारा दीवाना हूँ जब हमारे लिए कुछ भी कर सकता है । नीरज ने कहा इस तरह की बातें बार बार क्यों करते आप? किरण अब हो गई । ठीक है बाबा अब कोई मन की बात ही नहीं सिर्फ काम की ही बातें करूंगा प्लीज तुम अपना नाम मन मत खराब करूँ । नीरज नहीं कान पकड लीजिए । अब बताइए भी किस वकील के पास जाना चाहिए मुझे । किरण ने पूछा विक्रम शर्मा को जानती हूँ कौन? वो शालीमार बाग वाले हाँ मैं उन्हीं की बात कर रहा हूँ । नीरज ने कहा उनके बारे में मैंने भी सोचा था पर उनकी व्यस्तता और फीस के बारे में सुन कर चुप रह गई । मेरी सलाह है कि उनसे एक बार मिल लो । नीरज ने कहा, पर उनकी फीस बहुत मेरे लिए वहन कर पाना संभव नहीं है । मैंने कहा तो मैं एक बार उनसे मिल तो लोग । वो हमारे पारिवारिक वकील हैं । फीस के बारे में बाद में देखेंगे । नीरज ने कहा ठीक है पर पहले घर जाकर उन पुराने अखबारों की प्रति ले लेती हूँ । किरण ने कहा वो सब बाद में देख लेना । पहले उनसे मिल तो लोग । नीरज ने जोर देते हुए कहा ठीक है भी चली जाती हूँ । किरण ने कहा आपने आने में बहुत देर कर दी की रंजीत क्योंकि ये बात तो आप भी जानते हैं कि मानहानि की याचिका दाखिल करने के लिए समय निर्धारित होता है तो क्या कुछ नहीं हो सकता । किरन निराशा के समुन्दर में गोते लगाने लगी । आपने समय गंवा दिया है कि रंजीत पुलिस में रहकर भी इतनी बडी चूक कैसे कर दिया तो मैं चलती हूँ । वकील साहब किरन नहीं कहा । बैठे तो सही वकील ने मुस्कुराते हुए एक फाइल किरण के सामने बढाते हुए आगे कहा इससे पडेंगे । अरे आपने तो जनहित याचिका पहले से ही दाखिल कर रखा है । किरण की खुशी का ठिकाना नहीं रहा । मैं नीरज जी का पारिवारिक वकील हो । उन के कहने पर ही मैंने यह याचिका दाखिल की थी और इस मानहानि के केस को पिछले डेढ सालों से खींच रहा हूँ । नीरज जी इस विश्वास पर मुझे तारीख बढवाते रहे कि आप एक ना एक दिन मुझसे मिलने जरूर रहेंगे । पर अब और तारीख बढाना सही नहीं होगा । हमें आपकी एवं आपकी माँ की सहायता की जरूरत है । वकील ने कहा बहुत बहुत धन्यवाद वकील साहब, मैं धन्यवाद नहीं फीस लेता हूँ की रंजीत जब मुझे नीरज जी से मिल रही है । हाँ, अगली पेशी पर आपकी उपस्थिति जरूरी है । आपके सहयोग पर ही इस केस की जीत निर्भर है ।

कलम से हत्या - 20

लवली सरल तुम दोनों एक साथ नीरज को आश्चर्य हुआ । हाँ भैया सरल आपसे मिलने आ रहा था तो मैं भी साथ आ गई । लवली ने जवाब दिया, अब कैसी तबीयत है आपकी सर । सरल ने गुलदस्ता बीट करते हुए पूछा, ठीक हो रहा हूँ? नीरज ने आगे कहा, तुम चुनाव काम कैसा चल रहा है? काम की चिंता मत कीजिए सर मैं होना आप निश्चिंत रहिए और स्वास्थ्य लाभ लीजिए । सरल नहीं कहा यही तो समस्या है । सरल की मैं निश्चित नहीं हो पा रहा हूँ । ध्यान रहे सरल मेरे चैनल के समाचारों में या मेरे अखबार जुगनू में कोई झूठी खबर नहीं आनी चाहिए । नीरज ने कहा बिल्कुल नहीं सर, आपने पहले ही जिस तरह के आदेश आपको दे रखे हैं, सब वैसे ही काम कर रहे हैं । सरल ने कहा मैं स्टाफ की नहीं तुम्हारी बात कर रहा हूँ । नीरज ने कहा ये आप क्या कह रहे हैं सर । सरल ने कहा आपको सरल पर विश्वास नहीं भैया । लवली ने पूछा मैं सरल से बात कर रहा हूँ । फॅमिली तो बीच में मत बोलो क्यों बोलू भैया । अब एक ओर तो आपने टीवी चैनल और अखबार की जिम्मेदारी देकर सरल को अपना बनाते हैं और दूसरी ओर अविश्वास जताकर उन्हें अपमानित भी करते हैं । ऐसी बातें मुझे अच्छी नहीं लगती है । लवली ने कहा, तुम्हें क्या अच्छा लगता है और क्या नहीं, इस बात से हमारी पत्रकारिता प्रभावित नहीं होगी । लवली हमने समाज सेवा के लिए अखबार और प्रिंट मीडिया को माध्यम बनाया है तो जिम्मेदारी भी बडी है और जिस उद्देश्य को लेकर हम इस क्षेत्र में कदम रखे हैं, उस उद्देश्य पर खरा उतरना भी जरूरी है । इसलिए हमें सजग रहना है । मुझसे कोई गलती हो गई है । कैसा सरल, घबरा गया, देखो सरल मैं ये सब बातें तो डराने के लिए नहीं कह रहा हूँ बल्कि सचेत कर रहा हूँ क्योंकि तुम पहले भी मैं गलती कर चुके हो भाई, आप फिर से । मैंने तो मैं बीच में बोलने से माना कि अलग ली । नीरज ने आगे कहा, परिवार चलाना और अखबार चलाने में फर्क होता है । इसलिए हम एक दूसरे से जब अपने चैनल या अखबार में चलने वाले समाचारों पर चर्चा करेंगे तो हमें ध्यान रखना होगा कि हमारा मूल उद्देश्य पारिवारिक रिश्तों या भावनाओं के कारण प्रभावित न हो । नीरज ने कहा, मैं आपकी इस बात से सहमत हो गया, पर प्रोफेसर माथुर की खबर को ध्यान में रखकर आप सरल पर बार बार अविश्वास करते हैं तो मैं चुप नहीं रह सकती क्योंकि मैं जानती हूँ की मात्र सर वाली खबर को लेकर आपकी सोच पहले से ग्रसित है । वो कैसे लवली नीरज में पूछा किरण के आस पास होने के कारण उसकी बातों और उसकी सोच के असर के बारे में कह रही हूँ मैं । लवली ने कहा फिर तुमने किरण को बीच में ला दिया । नीरज ने नाराजगी प्रकट करते हुए आगे कहा, मैं इस समय काम की बात करना चाहता हूँ । बहस नहीं लवली प्लीज तुम चुप रहूं । सरल ने आगे कहा सर हमने अपने चैनल पर मुख्यमंत्री से भेंट कार्यक्रम की जो योजना बनाई थी उस पर क्या करना है थोडा आगे बढा देते हैं क्योंकि उस कार्यक्रम में सवाल ही नहीं रहना चाहता हूँ । नीरज ने कहा लेकिन सर आपके दुर्घटना से पहले हम लोगों ने उस कार्यक्रम के लिए विज्ञापन समय अगर निश्चित कर लिए हैं तो ये बात तो है । नीरज ने कुछ सोचते हुए आगे कहा, दरअसल मैं चाहता हूँ की अन्य चैनलों की तरह हम सिर्फ सरकारी विज्ञापन या टीआरपी की उम्मीद में अपने उद्देश्य से ना भटके । हमारा काम है सरकार और जनता के मध्य सामंजस्य बनाना । इसीलिए तो आपके आदेशानुसार इस कार्यक्रम में आम लोगों के पत्रों को अधिक से अधिक शामिल करना है जिससे उनकी समस्याओं से शासन को अवगत कराया जा सकते हैं और समाधान की ओर अग्रसर हो सके । सरल ने कहा वो तो ठीक है पर विशेष ध्यान इस बात पर देना कि किसी भी परिस्थिति में हम अपने उद्देश्य से भटक न जाएं । नीरज ने कहा, पर सवाल यदि जटिल हुआ या मुख्यमंत्री जी की पसंद का ना हुआ तो हमें दिया हुआ समय वापस भी ले सकते हैं । सर और फिर सरकारी विज्ञापनों से पैसा भी अच्छा आता है । सरल ने कहा, मैंने तुमसे पहले भी कहा इस तरह की हमें खबरों में, ग्लैमर पर उसका टीआरपी की दौड में शामिल होकर पत्रकारिता के मूल उद्देश्य को नहीं छोडना है और ना ही विज्ञापन के पीछे भागना है । लेकिन भैया पापा ने तो कहा कि लवली ने कहा पापा एक उद्योगपति हैं इसलिए उनके लिए लाभ हानि ही सर्वोपरि है, पर मेरी सोच थोडी अलग है । तुम जानती हो लवली कि मैं पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने के बाद भी अपने व्यवसाय को भी साथ साथ क्यों चला रहा हूँ । जानती हूँ कि समाज सेवा करने के लिए आप ने मीडिया को जो अपना माध्यम बनाया है उसके लिए जरूरत पडने पर अपने अन्य व्यवसाय से पैसा लगा सके । लवली ने कहा फिर पापा के लाभ हानि की नीति मुझे क्या सिखाने लगे? नीरज ने कहा कि भैया अब से पापा की बातों के लिए माध्यम नहीं बनाऊं । ये वादा रहा आप से पर आप भी मुझ से वादा कीजिए । लवली ने कहा कैसा वाला? नीरज ने पूछा अपनी व्यस्तता थोडा काम करें । आपको इतने व्यस्त हो गए की खुद को भूल गए । हर शादी करने के लिए भी समय नहीं । लवली हसने लगी । हमारा काम है सरकार की कमियों की ओर उनका ध्यान आकर्षित करना, चमचागिरी करना नहीं । लवली की बातों को ध्यान नहीं देते हुए नीरज ने आगे गा मैं जब तक अस्पताल में हूँ सरल तुम्हें फिर से आगाह करता हूँ कि मेरे उद््देश्यों एवं आदर्शों से किसी के भी कहने पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए । रही बात लाभ हानि की तो मुझे विश्वास है कि आज के दर्शक उस चैनल को खोजते रहते हैं जहाँ सच दिखाया जाता हूँ और जिनका आम जनता से वास्तविक सरोकार होगा । आज लोग जब मेरे पास आकर कहते हैं कि नेताओं और पत्रकारों से भरोसा उठ चुका है फिर भी आप के पास बडी उम्मीद लेकर आए हैं तो मेरी ताकत बढती है और दबे कुचले लोगों को साथ लेकर चलने की मेरी मुहिम को बल मिलता हैं । मैंने आपके पास आकर ही पत्रकारिता के सही मायने को जाना है । ऐसा मैं मानता हूँ कि पहले अनुभव के अनुसार काम करने के कारण मुझ से कुछ गलतियां हुई होंगे । पर अब मैं आप के अनुसार ही चलना चाहता हूँ । आपने मेरी गलतियों की ओर मेरा ध्यान आकर्षित करने के साथ ही मुझ पर विश्वास भी किया है । इसके लिए मैं सदैव आभारी रहूंगा । सरल ने कहा ठीक है सर फिर मैं तुम्हें अनुमति देता हूँ । मुख्यमंत्री से मिलिए कार्यक्रम को निर्धारित समयानुसार कल की पहली कडी की शुरुआत कर दूँ पर ध्यान रहे हैं सरकार के पास अपने कार्यक्रम के प्रचार हेतु हूँ । अपनी व्यवस्था होती है उसमें हमें उतना ही योगदान देना है जो आम लोगों के लिए जरूरी है । लोकप्रियता की अंधी दौड में शामिल होने से अच्छा है कि हम आंख कान खोलकर रखें और कार्यक्रम की मौलिकता और उत्कृष्टता के साथ कोई समझौता न करें । नीरज ने कहा जी सर, मैं चलता हूँ और तुम भी चल रही हूँ । लबली की तरफ रुख कर के सरल ने कहा तुम चलो पीछे आ रही हूँ । लवली ने कहा, आपने सरल को कुछ ज्यादा ही उपदेश नहीं नहीं दिया है । भैया लवली सरल के जाते ही नीरज पर टूट पडी । मैं जानता हूँ कि तुम्हारे लिए सरल दुनिया का सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति है और इसीलिए उस पर सख्ती करके उसे सही दिशा देने की कोशिश कर रहा हूँ । वरना सरल को तो कब का बाहर का रास्ता दिखा देता है । ये आप क्या क्या है भैया की आपको सरल की योग्यता पर शक है । योग्यता पर नहीं । लवली उसकी नियत ठीक नहीं है । ऐसा क्या कर दिया सरल ने लवली ने पूछा पत्रकारिता की मर्यादा का उल्लंघन किया है उसने । नीरज ने कहा, और आप जो कर रहे हैं वो ठीक है भैया क्या किया है मैंने । नीरज ने पूछा पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने नाम का रौब दिखाकर अपने साथियों को सच्चा अपने से मना किया है आपने । लवली ने आखिर ही दिया कौन सा सच? किरण के द्वारा बदमाशों को पकडने के बारे में अखबारों में वही छपा है जैसा आपने जहाँ है और किरण वाहवाही लूट रही है । लवली ने कहा इसमें छूट गया है । नीरज ने कहा पूरी खबर झूठी है भैया । आज को विख्यात बदमाश को पुलिस गिरफ्तार कर पाई है तो उसका कारण आप हैं वो किरण नहीं । लवली ने कहा, हाँ मैंने पत्रकारों को अपनी उपस्थिति दर्शाने से रोका है क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि सरल जैसे पत्रकार मेरी उपस् थिति को प्रॉपगैंडा बनाकर प्रस्तुत करें । नीरज ने कहा, आपने फिल्म सरल पर आरोप लगाया है भैया ये ठीक नहीं है । लवली ने कहा मुझे पता है कि सरल के बारे में तुम कुछ भी नहीं सुन सकती हैं और मैं तुम्हारी भावनाओं को आहत करना भी नहीं चाहता हूँ । पर तुम्हारा भाई होने के कारण ये चाहता हूँ की प्रेम के वशीभूत होकर सरल की कमजोरियों को अनदेखा मत करो । अपनी बात आप मुझ पर थोप रहे भैया किरन आपकी कमजोरी का फायदा उठा रही है । आपको प्रेमजाल में फंसाकर मौत के मुंह तकलीफ गई थी । उसकी योजना अनुसार काम नहीं हो पाने के कारण आखिरी समय पर उसने आपको अस्पताल पहुंचाकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश की और अभी आप उसे हरिश्चंद्र की औलाद मानते हुए सरल कोई दोष दे रहे हैं । मातोंडकर की खबर चाहते समय भी सरल सही था और अभी भी वो कुछ गलत नहीं करेगा । लवली ने दृढतापूर्वक कहा ये तो वही बात हुई कि औरों की तरह हम भी अपनी सुविधानुसार पत्रकारिता को स्वरूप प्रदान करने में लगे हुए हैं । नीरज ने कहा, मैं तो पत्रकार हो नहीं इसलिए आपके द्वारा कही गई बातें आप पर ही लागू होती है । भैया लवली ने अभी भी मैदान नहीं छोडा था । रहने दो लवली इस संबंध में मुझे तुमसे बात ही नहीं करनी चाहिए थी । नीरज ने इस बात को यहीं पर खत्म करने के लिए कहा । यही तो मुश्किल है भैया की जहाँ किरण की बात आती है आप सच्चाई से मुंह फेर लेते हैं । आपको समझना होगा भैया की किरण आपकी भावनाओं के साथ खेल रही है और नाजायज फायदा उठा रही लवली ने कहा अच्छा तो क्या फायदा उठा रही है ये भी बता दूँ । ये तो आप भी जानते हैं कि माथुर सर की जिस बेटी को पत्रकारों में ब्लैकमेलर और अपराध दिखता रहा है आज उसी पत्रकार से मेलजोल बढा रही है जिसका परिणाम भी उसके सामने हैं । लवली ने कहा वही तो पूछ रहा हूँ, कैसा फायदा कौनसा परिणाम नीरज गुंजाया मात्र सर की जिस इंस्पेक्टर बेटी पर आज तक पत्रकारों को निकम्मापन, घमंड और रमन सत्ता दिखती है उन्हें पत्रकारों द्वारा आज किरण की मेहनत, लगन और कर्तव्य परायण होने की बात कहते हुए पुलिस पदक दिए जाने की बात नहीं की गई है । ये परिवर्तन आपके आस पास होने के कारण ही तो आया है । किरण के बारे में आज जो बातें अखबारों में लिखी गयी हैं, उसका कारण खुद किरण है । उसने लगन और मेहनत से अपनी पहचान बनाई है । उसकी चर्चा होनी चाहिए जो की हो रही है । पर मुझे तो ऐसा नहीं लगता । लवली ने कहा, ऐसा है लवली की । हम जिस रंग का चश्मा पहनते हैं, सामने स्थित प्रत्येक चीज हमें उसी रंग की दिखाई देती है । तुम भी किरण को शत्रु की बात ही मत देखो । फिर तो मैं भी उसके अच्छाइयाँ नजर आएंगे । नीरज ने का मेरा नजरिया किरण के लिए कभी नहीं बदलेगा भैया क्यों? नीरज ने पूछा क्योंकि वो माथुर घर की बेटी है उस व्यक्ति की जिससे अपने स्वार्थ के लिए मनीषा मैडम के अकेलेपन का फायदा उठाया और मौत के मुंह में धकेल दिया । चलो मान भी लेते हैं लवली की माथुर सर के बारे में तुम सच कह रही हूँ तो फिर इसमें किरण का क्या दोष? नीरज ने कहा दोस्त तो है ही भैया । जब हम अपने माता पिता की अच्छाई का प्रतिफल मिलता है तो उनके कुकर्मों की सजा भी भुगतनी होगी । लवली ने कहा, अच्छा तो ये भी बता दूँ कि किरण के लिए तुमने या तुम जैसे लोगों ने कौनसी सजा तय की है । नीरज ने बेमन पूछा, सामाजिक चेतना का शोध बनने मात्र सर के झूठे परिवार पर उसके परिवार को कोई क्या सजा देंगे ये तो मैं नहीं बता सकती । पर हाँ इतना अवश्य कहूँगी कि उस कलंकित परिवार की लडकी हमारे खानदान की बहू नहीं बन सकती । पहली बात तो ये किरण को तुम्हारे खानदान में कोई दिलचस्पी नहीं है, पर तुम्हें हमारे खानदान की इज्जत का इतना ही ख्याल है तो किरण पर उनकी उठाने के बदले खुद की पसंद पर पुनर्विचार कर लो । नीरज ने कहा, मैं जानती हूँ भैया की सरल चाहे कितना भी अच्छा काम कर ले, पर आप उसे पसंद नहीं करेंगे । पर मैंने पहले ही कह दिया है कि सरल के विरुद्ध मुझे कुछ नहीं सुनना है । आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद भी सरल में ईमानदारी और सच्चाई कूट कूट कर भरी हुई है और आपको तो खुश होना चाहिए कि वह आपकी तरह ही पत्रकारिता के माध्यम से समाज और देश की सेवा करना चाहता हूँ और ये क्या हो रहा है? लवली दुनिया बीमार को देखने आई हूँ या फिर अपने मन की भडास निकालने उसकी माँ ने कमरे में आते ही कहा लोग माँ भी आदि अबकी के दोनों माँ बेटे बैठकर किरण नाम करजात करूँ मैं चलती हूँ कहते हुए लवली चली गई । तुम दोनों भाई बहन का इस तरह से तकरार कब तक चलता रहेगा? बिता माने चिंता व्यक्त की आप का चिंतित होना स्वाभाविक है । पर मैं क्या करूँ? लवली समझने की कोशिश नहीं करती है । उसकी आंख पर तो सरल के प्रेम की पत्ती बनी हुई है और लवली ने सरल की । पत्रकारिता के उसी स्वरूप को जाना है जो उसने अपने आस पास देखा है । अर्थात मेरी पत्रकारिता के उगली रूप से ही वो परिचित है जबकि सरल नहीं । अब तक पत्रकारिता को सिर्फ धनोपार्जन का जरिया ही मना है । ऊपर से अधिकारिक धन कमाना चाहता है, चाहे उसके लिए कुछ भी करना पडे । सरल इस तरह का लडका है । मान ने पूछा हाँ नीरज ने जवाब दिया मुझे भी सरल की कुछ बाते अच्छी नहीं लगी पर क्या कर सकते हैं लबली कि जिसको तो तुम जानते ही हूँ, पापा की बेटी है । जिस चीज पर उंगली रख दी मतलब वहीं सबसे अच्छा है । आप चिंतित न हो । मैं कोशिश कर रहा हूँ कि सरल को अपनी गलतियों का एहसास होगा । मैं उसे समझाने की कोशिश कर रहा हूँ कि पत्रकारिता को चमकाने के लिए मानवता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए । अपनी छोटी बहन के लिए तो मैं ये करना ही होगा । नीरज माने सहमती जताई, मैंने सरल को करीब से जानने की कोशिश की है और मुझे लगता है कि सरल ने वही सीखा है जो उसने अपने आस पास देखा है । पहले उसके कार्यस्थल ने उसे पत्रकारिता कम और ब्लैकमेलिंग ज्यादा सिखाया है । पत्रकारिता उसका उद्देश्य नहीं बल्कि मजबूरी रही है । तुम क्या कह रहे हो? मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है । बेटा सरल ने पत्रकारिता को सिर्फ रोजगार के रूप में स्वीकारा था । दो तीन कामों में असफल होने के बाद उसके ही जैसे किसी पत्रकार साथी की नजदीकी नहीं, उसे भी पत्रकार बनने के लिए प्रेरित किया और इस तरह सरल ने पत्रकारिता को ऐसे रोजगार के रूप में अपनाया जिससे शीघ्रतापूर्वक धन और लोकप्रियता दोनों कमा सकें और प्रारंभ में उसे सफलता भी मिली । पर हमारे साथ जुडने के बाद अब शायद उसे इस बात का एहसास होने लगा है कि अब तक जो बुक कर रहा था, वो तो पत्रकारिता थी ही नहीं, सरल किया था मुझे उससे मतलब नहीं है । मैं तो बस ये चाहती हूँ । बेटा की सरल को तुम सही रास्ता दिखा हूँ । मैं इसी प्रयास में होगा और जिस तेजी से सरल मेरी बातों को समझ रहा है, मुझे उम्मीद है कि उसका भविष्य उज्ज्वल है । पर इससे पहले यदि कोई गलती हुई होगी तो उसकी सजा तो उसे भुगतनी ही होगी । ऐसी कोई गलती सरल ने की है । क्या माँ का मन घबराया ये तो समय के साथ ही मालूम होगा और प्रकृति का नियम है कि यदि हम किसी को अनावश्यक रूप से नुकसान पहुंचाएंगे तो उसका प्रतिफल मिलेगा ही । यदि सरल के लिए ऐसी स्थिति बनती है तो क्या तुम भी ऐसी स्थिति से निपटने में सक्षम नहीं हो? नीरज अब परेशान ना हो ना जो होगा देखा जाएगा । नीरज ने कहा

कलम से हत्या - 21

आपको स्वस्थ देखकर अच्छा लग रहा है । अपनी जान की बाजी लगाकर मेरी जान बचाई । आपका ये एहसान मुझे जीवन भर याद रहेगा । आपको बिस्तर पर देख कर मैं अपराधबोध महसूस कर रही थी तो इस तरह आंसू बहाते हुए बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती होगी रहा । नीरज ने कहा नहीं तो खुशी की आज सुबह नीरज जी अच्छा तो ये भी बता दूँ की खुशी इतना अलग हो रही है ये भी कोई पूछने की बात नहीं है । जी आप पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं ये कारण कम तो नहीं वो तो ये बात है । अब ये भी बता दूँ कि मेरे स्वस्थ होने पर तुम्हारे चेहरे पर इतना निखार क्या क्योंकि बोलो चुकी होगी क्योंकि आप जो सुनना चाहते हैं वो मैं कभी भी नहीं कहता हूँ । किरन की मौत पर उदासी की बदली छा गई क्यों? नीरज ने पूछा क्योंकि मैं सडक को एक मौका देना चाहती हूँ । विचारों में अंतर होने के कारण नाराजगी तो ठीक है पर मैं अपने पापा के द्वारा किए गए रिश्ते का सम्मान करती हूँ और उसे निभाना चाहती हूँ तो फिर उदास मन सके । नीरज ने आगे कहा, सनत को खुशी से स्वीकार तभी तो तुम दोनों खुश रहता हो गया और सनत के साथ न्याय होगा या आप कह रहे हैं । किरण ने आश्चर्य से पूछा हम और ऐसा सिर्फ मैं ही कह सकता हूँ क्योंकि हम जिनसे प्रेम करते हैं उसके हर एक निर्णय का सम्मान भी करना चाहिए और उसकी खुशियों की परवाह भी करनी चाहिए । वैसे भी प्रेम में पानी की जिद नहीं, सामने वाले की खुशी अधिक महत्वपूर्ण होती हैं । नीरज ने कहा, आपका हृदय जितना कोमल है उतना ही विशाल और निर्मल भी हैं । नीरज जी किरण की बातों में गहरा अपनापन था । तुम स्वयं निश्चल हो इसलिए ऐसा कह रही हूँ पर तुमने नजरिए क्यों चुका? लेकिन तुम जैसे मित्र पर तो मुझे गर्व है जिसमें आत्मसम्मान को बचाए रखने की क्षमता तो है पर साथ में बडों के लिए आदर भाव भी है । यदि तुम्हारा साथ मिलता है तो मेरा जीवन भी धन्य हो जाता है । पर कोई बात नहीं । तुम्हारी दोस्ती भी मुझे अजीब है । अच्छा ये बताओ अम्मा कैसी है । उनकी हालत स्थिर बनी हुई है । डॉक्टर बार बार यही दोहरा रहे हैं कि कोई बडी खुशी और दुखों जिससे उनके हृदय को अतिरिक्त दबाव में ले तो अचानक की कभी भी ठीक हो सकती हैं । वैसे जो संभव है । इलाज जारी है, पढाई कर रहे हैं । जब मैं तुम्हारे बारे में सोचता हूँ तो दुखी हो जाता हूँ कि इतनी कम उम्र में भी देखो की आंधी के घेरे में खडी हो तो आपकी ये सोच आपकी अच्छाई का प्रतीक है । किरण ने आगे कहा, पर जब मैं स्वयं के बारे में सोचती हूँ तो मेरे होठों पर मुस्कान पर जाती है । ये तो अजीब बात है । नीरज ने अजीत समूह बनाया । मुसकुराहट का कारण नहीं पूछ होगी । किरण ने कहा यदि है तो बता दो क्योंकि विपरीत परिस्थितियों में गिरने के कारण ही मुझे आप जैसा मित्र मिला है । किरण ठंडी आहें भरते हुए कहा तो इतना अच्छा भी बोल लेती हो । नीरज गदगद हो गया । आप की संगत का असर है नीरज जी और तुम्हारी संगत में रहकर नीरज बिगडते जा रहा है । नीरज और किरण दोनों आवाज की ओर मुडे और नीरज ने अपने पापा का परिचय कराते हुए कहा किरण जी मेरे पापा हैं प्रणाम सर । किरण ने हाथ जोडकर कहा पापा ये इंस्पेक्टर किरण है । पापा की रौबदार आवाज गूंजती जानता हूँ । मिल चुका हूँ । इससे काम लेते पाता । फिर किरण की ओर नजरे घुमाकर नीरज ने कहा, तुमने बताया नहीं कि कैसे बताते हैं कि हमने इसे बेइज्जत करके घर से निकाल दिया था । किरण से पहले नीरज के पापा नहीं जवाब दे दिया । क्या कह रहे पप्पा नीरज को तो अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था । मुझे जाना चाहिए कहते हुए केरन जाने लगी । रुको किरण नीरज ने जोर से आवाज लगाई उसे जाने दो नीरज । वैसे भी ये समय उसके ड्यूटी का है तो फिर यहाँ क्यों रहे और किरण तुम तो उस दिन बहुत कर्मठ बन रही थी । फिर अभी यहाँ क्या कर रही हूँ? नीरज के पापा ने कहा पापा तुम तो चुप रहो । नीरज हर बात पर अपनी मनमानी करते हो । पापा ने गुड की लगाई । मैंने ऐसा क्या कर दिया? पापा सोचा था एमबीए करके मेरे कारोबार को संभालो पर विदेश जाकर पढाई करने की जगह वहाँ पत्रकारिता विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया । पता नहीं कहाँ से तुमने मार्च की डिग्री लेकर खोजी पत्रकारिता का भूत सवार हो गया और अपने पुराने कारोबार को छोडकर अब टीवी चैनल और अखबार के मालिक बन बैठी हूँ । पर मैं कारोबार की जिम्मेदारी भी तो निभाई । राहुल पापा तो मैं ऐसे जिम्मेदारी निभाना कहते हो, जिस समय तो मैं बोर्ड की मीटिंग में होना चाहिए था । उस समय तो मैं किरण की सुरक्षा का दायित्व निभा रहे थे और परिणाम देखो पिछले कई दिनों से अस्पताल में पडे हुए हैं तुमसे कितनी बार कहा है कि किसी बडे अस्पताल में चलते हैं पर नहीं तो मैं तो इस लडकी के आस पास ही रहना पसंद है । आप मुझे कुछ भी कहीं पापा पर किरण को अभी तो मैंने इसे कुछ कहा ही नहीं । पापा ने किरण की ओर इशारा करते हुए आगे कहा हूँ इस की चालाकी देखो तो तुम्हारे कमरे के बाजू में ही अपनी माँ को मिली आई ठीक है फिर तुम जाओ अतिग्रह । नीरज के कहते ही किरण वहाँ से निकल गई तो हम समझ क्यों नहीं रहे? हो नहीं रहा वो लडकी तुम्हारे लायक नहीं है । अपने पिता की काली करतूतों पर पर्दा डालने के लिए तुम्हारा उपयोग कर रही है । वैसे भी पुलिस किसी का मित्र हो ही नहीं सकती । इतनी कडवाहट मन में लिए किसी को देखोगे तो कैसे कोई अच्छी लगेगी पापा? नीरज ने कहा तो मुझे मत सिखाओ, नहीं रचा जिस मध्यम परिवार की लडकियों को अच्छे से जानता हूँ । लच्छेदार बातें करना और बडे बडे सपने देखना इनकी आदत होती है । आपकी इज्जत करता हूँ इसलिए सिर्फ इतना ही कहूंगा पापा किरण वैसी लडकी नहीं है । कैसा आप सोच रहे हैं तुम्हारी बातें सच हुई तो मैं खुश होंगा । लेकिन मैं जानता हूँ कि किरण को लेकर तो गलतफहमी में हो बल्कि मुझे तो सरल की बातें ही सच लग रही है । सरल ने किरण के बारे में कुछ कहा है । पापा सरल का नाम सुनते ही नीरज बौखला गया हूँ । मुझे सब सच बता दिया है । सरल नहीं वो सच ही तो जानना चाहता हूँ पापा जो सरल ने कहा है । नीरज ने कहा सबको जानकर भी तो मुझे सुनना चाहते हो तो सुनो । किरण के पिता के काले कारनामों की खबर तुम्हारे अखबार में भी छपी थी । इसलिए उसने तो मैं प्रेमजाल में फंसाकर सही मौका पाकर तुम पर जानलेवा हमला करवाया है । उसे लगता है कि ऐसा करके अपने पिता के कालिक लगे चेहरे को रखने में कामयाब हो जाएगी । पिता के जीवन में लगे दाग को धोने के लिए तुम जैसे पत्रकारों के खून की प्यासी है वह और जब तुम्हारी जान बच गई तो अपने कर्मों पर पर्दा डालने के लिए सहानुभूति जता रही हैं । फिर तो आप गलत नहीं है । पापा नीरज ने लंबी सांसे भरती हुए आगे कहा, सरल ने तो बहुत अच्छी कहानी बनाई है, एकदम वैसे ही जैसे उसकी आदत है । अखबार में लिखने की सरल और तुम्हारे बीच क्या चल रहा है ये मैं नहीं जानता हूँ और मुझे तुम्हारी चिंता है । नहीं । आप अपनी जगह सही है पर पर अपने बेटे पर भी भरोसा कीजिए कि वह जो भी करेगा, आपकी प्रतिष्ठा को ध्यान में रखकर करेगा । नीरज ने कहा मुझे तुमसे यही उम्मीद है नीरज

कलम से हत्या - 22

पत्रकारिता महाविद्यालय में अगले मौसम िनारे भैया व्याख्यान के लिए आपको आमंत्रित किया गया है । निमंत्रण कार्ड देते हुए लवली ने आगे कहा, इस बार मैं भी आप के साथ जाना चाहती हूँ, भैया नहीं तो ऐसा सोचना भी नहीं । नीरज ने कहा क्यों भैया, तुम पापा का कार्यालय संभालते हैं और पत्रकारिता से तो खुद को दूर ही रखो । नहीं तो पापा कहेंगे कि मैंने तुम्हें भी अपने साथ काम पर लगा लिया । मैं पापा के साथ ही थी । कुम्भ भैया, आपको जॉइन करने का मेरा कोई इरादा नहीं । लवली ने कहा फिर सेमिनार में क्यों आना चाहती हूँ? नीरज ने पूछा वो तुम को बताना चाहिए । नीरज की पत्रकारिता से लगाओ, भले ही ना हो पर पत्रकार से तो लगाव है । माने मुस्कुराते हुए कहा तो आखिर लवली की पसंद ने इस घर के सब लोगों के दिल में जगह बना ही लिया । हाँ भैया, आप के लिए तो दोहरी खुशी की बात है कि इस घर में एक और सदस्य आपके कार्यक्षेत्र में होगा । तुम लोग बातें करूं । मैं अभी आई कहकर मार चली गई । मैं जानती हूँ भैया की आप सरल को पसंद नहीं करते हैं इसलिए मैं आपसे कुछ बातें करना चाहती हूँ । लवली ने कहा, तुमने सही का अलग और कोई बात नहीं । धीरे धीरे हम सब एक दूसरे को समझने लग जाएंगे । नीरज ने कहा, समझने के लिए जरूरी है भैया की पुलिस वालों से हम सब दूर ही रहे हैं । उसे अपने आस पास मंडराने का अवसर ना दे । लवली ने मन की बात कही थी तो हमारा मतलब किरण से हैं । नीरज ने पूछा हाँ भैया फॅमिली, तुम लोग उस बेचारी के पीछे पडे हो । नीरज था खार कर पूछ लिया क्योंकि किरण पत्रकारों से नफरत करती है इसलिए आप से प्यार नहीं कर सकती । सिर्फ प्रेम के नाम पर आपसे धोखा कर रही है । भैया अपने पापा की ड्यूटी इज्जत का दम भरने के लिए आपके अपनेपन का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है । लवली ने कहा वहाँ पे इतना बडा षड्यंत्र चल रहा मेरे खिलाफ हूँ और मुझे नहीं पता क्योंकि मैं तो बेवकूफी ठीक कह रहा हूँ । नीरज ने पूछा इस तरह तंज कसकर मेरी बातों को हवा में मथुरा भैया हम आपके अपने हैं इसलिए हमें आपकी चिंता है मेरे अपनों । तुम सबसे मेरी विनती है कि मुझ पर भी भरोसा करो । मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि अचानक ही तुम सबको मैं बेवकूफ क्यों लगने लगा हूँ । तुम सब लोग का एक ऐसी सीख देने लगी हो जैसे मैं तो छलकपट की भाषा को जानता ही नहीं हूँ । नीरज ने कहा ऐसी बात नहीं है भैया । यदि आप को इस संबंध में बात नहीं करनी है तो कोई बात नहीं । अच्छा ये तो बता दो, मुझे सेमिनार में ले जा होगी कि नहीं । लवली ने कहा मैं स्वयं नहीं जा रहा हूँ । नीरज ने सपाट शब्दों में जवाब दिया क्यों मैं वहाँ जाकर झूठ नहीं बोलना चाहता हूँ । नीरज ने कहा पर आप झूठ क्यों बोलेंगे? लवली ने पूछा क्योंकि तुम्हारी तरह मेरे साथ ही भी सच को पचा नहीं पाएंगे । सच को आने में निहार पाना हर एक के बस की बात नहीं होती । नीरज ने कहा ऐसा कौन से सच्चे भैया जिससे सब डरने लगे हैं हम पत्रकारों का वो सच जिसके कारण किरण जैसे न जाने कितने लोगों को दुखों का सामना करना पड रहा है । तो आपने ये मान लिया कि किरण ही अंतिम सत्य है । शेष सभा सत्य है । मानना के फॅमिली सच हर हाल में सच ही होता है । पर अब तक तो आप भी पत्रकार को सच का पर्याय मानते रहे हैं । भैया हाँ मानता रहा पर मुझे यह स्वीकारने में कोई सुविधा नहीं है कि मेरी आंखों पर भी काली पट्टी बंधी हुई थी । पर अब पत्रकारों का भी कलंकित सच मेरे सामने हैं और सब जानकर में सेमिनार में जाकर पत्रकारों की झूठी तारीफ नहीं कर पाऊंगा । जबकि सच कहने पर लोग तुम्हारी तरह ही सोचेंगे । इस सच को स्वीकार ना मुश्किल होगा कि सब जन चुका हूँ । क्या जान चुके भैया यही की पत्रकार भी झूठे हो सकते हैं और अखबारों में भी गलत खबर छप सकती है । नीरज ने कहा, और इसका कारण है । किरण लवली ने कहा नहीं कारण हमारे कुछ पत्रकार साथ ही है, जिन्होंने आम जनता के साथ विश्वासघात किया है । तो अब आप अपनी ही पत्रकार साथियों को कटघरे में खडा करेंगे क्या? लवली तो नहीं गई । हाँ, जो भी पत्रकार का नकाब पहनकर जनता के साथ धोखा करेगा, मैं उन सबको बेनकाब करूंगा । पत्रकारिता के नाम पर ब्लैकमेल करने वाले कलंक से पत्रकारिता को मुक्त कराने का प्रयास करूंगा । मैं भी । इसने काम में तुम्हारा मनोबल बढाने के लिए साथ हो । नीरज पापा आप भी नीरज अचंभित हुआ । मैं तो ठहरा व्यापारी तुम्हारी जैसी पत्रकारिता की बारीकियों को नहीं जानता हूँ । पर नीरज मैं तुमसे पूछना चाहता हूँ कि जिन पत्रकारों को झूठा बताकर तो उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाया है, उन पत्रकारों के बारे में क्या जानते हो हूँ? तापा नहीं पूछा मैं समझा नहीं पापा, आप क्या जानना चाह रहे हैं? नीरज ने आगे कहा, मैंने बताया तो कि व्यापारी हैं तो आमदनी के बारे में पूछ रहा हूँ । पापा ने जवाब दिया, मैं कैसे जान सकता हूँ? इसलिए कहता हूँ कि हर बात के पीछे पैसा होता है और हमें किसी भी व्यक्ति के लिए सजा या पुरस्कार की व्यवस्था करने से पहले उसकी आर्थिक स्थिति के बारे में अवश्य जान लेना चाहिए । पापा ने कहा, मतलब आप जानते हैं कि सरल सहित अन्य पत्रकारों के खिलाफ माथुर प्रकरण में मैंने जनहित याचिका दिलवाई है । नीरज ने कहा, आखिर बात होते रहे हो तो बताइए पापा की आपकी खुफिया जानकारी उन लोगों के संबंध में क्या कहती है? नीरज ने उत्सुकता से पूछा सरल के बारे में जानकारी लेने की कोशिश में मुझे मालूम हुआ कि अखबारों में खबर अंदरूनी इलाकों से भी मिल सके और अखबार का क्षेत्र विस्तार हो सके । इसके लिए छोटे शहरों से लेकर बडे शहरों के मोहल्लों तक मैंने पत्रकारों को नियुक्त किया है । ये तो तुम जानते ही हूँ । हूँ और खबरों की प्राप्ति के लिए जरूरी भी है । नीरज ने कहा, तो ये बताओ तुम लोग ऐसे पत्रकारों को वेतन कितना देते हैं? पापा ने पूछा ऐसे सबको वेतनभोगी रख पाना संभव नहीं है पापा तो फिर ये लोग तुम्हारे लिए काम क्यों करते हैं काम करने का सब का उद्देश्य तो रुपया ही होता होगा या फिर उन्हें और उनके परिवार को भोजन की आवश्यकता नहीं होती है । पापा ने पूछा, सब पत्रकारों को वेतन तो उपलब्ध नहीं हो पाएगा, पर अखबार में इनके द्वारा लाए गए विज्ञापन में कमीशन और अखबार के विक्रय पर कमीशन उनकी आमदनी का साधन होते हैं । नीरज ने कहा, क्या तुम दावे के साथ कह सकते होगी? इससे उन्हें पर्याप्त आमदनी हो जाती है । पापा ने पूछा शायद हाँ, नीरज ने कहा और नहीं भी तापा । नहीं कहा ये आप कैसे कह सकते हो । क्योंकि मेरे व्यवसाय में ऐसे पत्रकारों से मेरा सामना होता ही रहता है । ये लोग किसी भी बहाने से विज्ञापन लेने मेरे पास आते ही रहते हैं । पापा ने आगे कहा, एक दिन हमारी फैक्ट्री में उनके सामने ही एक मजदूर के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर आई तो विज्ञापन के लिए प्रेमपूर्वक पैंतरे आजमाने वाले पत्रकारों ने ये कहा किसान घायल के उपचार की तुरंत समुचित व्यवस्था कराइए । साथ ही उसके परिवार वाले एवं हमारे लिए भी खर्च की व्यवस्था करवा दीजिए । मैंने उसे डांटते हुए पुलिस को खबर करने की बात कही तो मुझे समझाने लगा आपकी इच्छा से । मैंने तो आपके और हम सबके भले के लिए सुझाव दिया था और फिर दोहराता हूं । पुलिस की कार्यवाही से ज्यादा जरूरी है कि घायल को त्वरित उपचार की व्यवस्था हो । वैसे भी आपको तो ये करना ही होगा । उसके परिवार जनों को मुआवजा भी कानून देता ही है । अदालत का खर्च अलग से देना होगा । वो सब तो ठीक है पर मैं तुम्हें पैसा करूँगा । मेरे सवाल पर उसने हाथ जोड दिया और कहा यदि मुझे कुछ नहीं देना चाहते हैं तो कोई बात नहीं सर, पर बिन मांगे सलाह की फीस तो मिल नहीं चाहिए । देखिए सर पत्रकार होने के कारण हमारा मान सम्मान तो है पर परिवार चलाने के लिए रुपयों की भी आवश्यकता होती है और इस दुर्घटना की खबर छापने का हमारा एक ही उद्देश्य होगा कि पीडित को न्याय दिलाना जो समझौते से भी हो सकता है तो मैं वेतन नहीं मिलता । क्या मैं आवेश में आ गया? कहाँ मिलता है सर वेतन तो बडे बडे पत्रकारों को मिलता है । हम तो विज्ञापन के सारे पेट पाल लेते हैं । वो मायूस हो गया तो क्यों काम कर रहे हो? छोड दो । मैंने सलाह के रूप में आदेश दिया बेरोजगारी के कारण कमी सही कुछ तो मिल रहा है, यही सोच कर काम कर रहे हैं । सर चलिए कोई बात नहीं मैं चलता हूँ । रुको मैंने अब की बार सहानुभूति से आदेश क्या? सच कहूँ तो कठिन परिस्थिति में उसने मुझे झंझट से बचाने का रास्ता सुझाया था । इसलिए मैंने उसे इनाम दे ही दिया । आप क्या कहना चाहते हैं? पापा, आपकी अवैतनिक होने के नाम पर पत्रकारों को ब्लैकमेलिंग की छूट दे देनी चाहिए । मैंने ऐसा तो नहीं कहा । नीरज पर मतलब तो वही हुआ पापा । मैं कहना चाहता हूँ कि यदि तुम्हारे अनुसार माथुर सर के साथ अन्याय हुआ है तो तुम जैसे प्रतिष्ठित मीडिया मालिकों को चाहिए कि छोटे से छोटे पत्रकारों के लिए भी आय का निश्चित साधन उपलब्ध हो ताकि भविष्य में किसी माथुर के साथ ऐसा नहीं हूँ । आप ने बहुत अच्छी बात कही है । पता है मैं अपने संगठन में ये प्रस्ताव अवश्य रखूंगा । लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है नीरज जिससे भी मेरा आए दिन सामना होता रहता है कि किसी के लिए पत्रकारिता भ्रष्ट तरीके से अपार धन कमाने का माध्यम होता है । ऐसे पत्रकारों से प्रभावित होने वाले लोगों का पर्दाफाश करने के लिए भी हम संगठन में व्यवस्था बनाएंगे और ब्लैकमेलरों का पर्दाफाश करने में भी सहयोग करेंगे । क्योंकि मैं नहीं चाहूंगा कि पत्रकारिता जो समाज का चौथा स्तंभ माने जाने वाली ये संस्था बदनाम हो या किसी भी व्यक्ति के साथ खिलवाड करेगी ।

कलम से हत्या - 23

पापा के बारे में छापी गई झूठी खबर के विरुद्ध आज अदालत में सुनवाई थी । नीरज जी हाँ वकील साहब ने बताया मुझे नीरज ने कहा तब तो आपको मालूम ही हो गया होगा की हमें अपनी बातों को साबित करना होगा वरना हमारा केस खारिज हो जाएगा । किरण नहीं कहा आज शर्मा जी ने बताया मुझे तो आप क्या करेंगे नीरज जी किरण ने पूछा तो नहीं बता सकती हूँ कोई ऐसी स्थिति या व्यक्ति जिससे हम उन पत्रकारों को ब्लैकमेलर साबित कर सकें । मैं क्या बताऊ? नीरज जी जिन पत्रकारों ने ब्लैक मेल किया था वो दोनों पापा और मनीषा बुआ तो अब इस दुनिया में नहीं है । एक माँ है जो उन लोगों को पहचान सकती थी वो इस हालत में नहीं है की कुछ बयान दे सकें । तुम परेशान मत हो कर रहा हूँ मैं कुछ सोचता हूँ की क्या किया जा सकता है । हाँ हो सकता है कहते हुए नीरज किसी को फोन लगाने लगा । ऐसे अचानक क्यों बुलाया सर कोई परेशानी क्या सरल में प्रवेश करते हैं । पूछा मुझे तुमसे मदद चाहिए सर । नीरज ने कहा कहीं सर मैं क्या कर सकता हूँ तो मैं तो मालूम ही होगा कि माथुर सर के बारे में छपी खबर पर मानहानि की याचिका लगी हुई है । जी सर, मुझे भी नोटिस आया है । सरल ने जवाब दिया जानते उस तरह की जनहित याचिका शर्मा जी ने किसके कहने पर दाखिल की है? नीरज ने पूछा नहीं सर, सरल नहीं कहा मेरे कहने पर ये आप क्या कर रहे हैं? सर, स्वयं के अखबार पर ये आपने मानहानी का दावा किया है । सरल को तो जैसे नीरज की बातों पर विश्वास ही नहीं हुआ । हाँ सर, मैंने ये पूरा काम किया है लेकिन सर का हूँ । सरल ने धीरे से कहा अब कोई सवाल नहीं रहता है । सिर्फ मुझे जवाब चाहिए । जिन तीन पत्रकारों ने माथुर सर पर दबाव का खेल खेला था क्या तो उनमें से थे नहीं सर झूठ नहीं मुझे सब जानना है सर । देखो तुम ने मुझसे वादा किया है कि लवली के लिए तुम बदलोगे जी तो समय आ गया है सर खुद को साबित करने का । नीरज की बातों से सरल सहन सा गया । मैं सच के अवसर माथुर सर से खरीदी पर कमीशन के लिए मैं कॉलेज नहीं गया था । मतलब तुम जानते हो कि माथुर सर से कमीशन की मांग की गई थी । हाँ सर फिर आगे क्या हुआ नीरज ने पूछा । सर ने कहा कि खरीदी करना कोई अपराध नहीं है । मैं कॉलेज की आवश्यकताओं को तुम जैसों से डरकर नकार नहीं सकता हूँ । लेकिन ना मैं किसी को एक भी पैसे का कमीशन दूंगा और ना ही लूंगा । ज्यादा दबाव बनाने पर माथुर सर ने धमकाया था कि वह पुलिस की सहायता लेंगे । अभी तुम ने कहा कि माथुर सबसे तुम्हारी कोई बात नहीं हुई । फिर मैं तो ऐसे नहीं मिला था । सर सरल नहीं कहा तो फिर ये सब बातें कैसे जानते हूँ? नीरज की पूछा मेरे साथियों ने बताया था सर और फिर उन्हें साथियों के कहने पर तुमने माथुर सर्किट चरित्रहनन करने वाली खबर भी छापी थी । नीरज कराया जी सर सरल नहीं नजरे झुका ली तो हमारे साथियों का नाम क्या है? नीरज ने पुलिस वालों की तरह पूछा क्षमा चाहता हूँ सर, मैं उनका नाम नहीं बता पाऊंगा । सरल ने मुश्किल से कहने की हिम्मत जुटाई और तुरंत ही वहाँ से निकल गया । तुम कब आई दीदी घर पहुंचती ही अपनी दीदी को देख सरल ने पूछा । सरल मैं तेरी राह देख रही थी भाई कहते हुए उस की दीदी गले लगकर रोने लगी । क्या हुआ दीदी, बताओ तो सही मुझे नौकरी से निलंबित कर दिया गया है । भाई कहते ही वह फूट फूटकर होने लगी । पहले चुप हो जाओ और अब आराम से बताओ क्या हुआ? तुम तो जानती हो भाई कि तुम्हारे जीजा जी के मरनोपरांत अनुकंपा में मिली हुई ये नौकरी ही मेरे जीने का एकमात्र सहारा है । किसी के सहारे में अपने दोनों बच्चों के साथ खुश थी । पर खेर होने लगी । दीदी बताओ तो सही की तुम्हे निलंबित क्यों किया गया है? स्कूल में पढाते समय मैंने देखा की एक लडकी का ध्यान पढाई में नहीं है तो उसके पास जाने पर पता चला की वो मोबाइल पर किसी से चैट कर रही थी । सब के सामने एक लडकी को डाटना ठीक नहीं होगा । ये सोचकर मैंने उसे बाहर मिलने के लिए बुलाकर कहा देखो तुम जो कर रही हूँ, ठीक नहीं तुम्हारे माता पिता यहाँ पडने के लिए भेजते हैं क्योंकि उनका भरोसा हम शिक्षकों पर होता है कि हम तो में शिक्षा तो देंगे पर साथ ही अनुचित कार्यों से भी दूर रखेंगे और तुम हो कि मैंने मेरा मोबाइल वापस कर दीजिए । उस लडकी ने कहा नहीं अब तो ये मोबाइल तभी मिलेगा जब तुम अपने पिताजी को लेकर आउंगी । प्लीज मैडम दोबारा ऐसी गलती नहीं होगी । ठीक है पहली गलती मानकर छोड रही हूँ । अब इन चीजों की जगह पढाई पर ध्यान दो । परीक्षा भी नजदीक है । ठीक है कहते हुए मुझे मोबाइल लेकर चली गई और घर जाकर मेरे खिलाफ शिकायत कर दी की मैंने मेरा किसी गलती की उसकी पिटाई की है । उस लडकी का भाई स्थानीय अखबार का पत्रकार है । उसने लडकी के द्वारा स्वयं बनाए हुए खरोचों की फोटो के साथ लिख दिया की शासन के द्वारा बच्चों को अनुशासन के नाम पर शारीरिक प्रताडना नहीं देने के स्पष्ट निर्देश के बाद भी एक छात्रा की पिटाई की गई है जो कि कानूनन अपराध है । तो क्या अखबार में लिखने मात्र से ही तो में निलंबित कर दिया गया? दीदी सरल ने पूछा हाँ भाई अखबार में खबर छपने के कारण अधिकारियों का एक दल तुरंत ही स्कूल पहुंचा । वो लोग मेरी एक नहीं सुनी । कहने लगी किसी पत्रकार की बहन पर तुम ने हाथ उठाया । मामला उच्च स्तर का हो गया है । हर फिर लडकी के झूठ को सच मानते हुए मुझे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया । मैंने उच्चधिकारी के पास लिखित में सारी सच्चाई रख दी तो उन्होंने कहा कि हमें कॉलेज के स्टाफ से आप के बारे में पता चला कि आप एक कर्मठ और व्यवहारिक शिक्षिका है । फिर भी मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई जाएगी । क्योंकि बात चाला परिसर से बाहर निकल कर अखबार तक पहुंच गई है । इसलिए तत्काल कार्रवाई तो करनी ही होगी । जांच की रिपोर्ट आते तक तो मैं निलंबित किया जाता है । कौन है वो? पत्रकार? सरल ने आवेश से पूछा पत्रकार का तो मुझे नहीं पता भाई पर हाँ मैं लडकी के घर का पता बता सकती हूँ । ठीक है दीदी मुझे उस लडकी का ही नाम और पता बता दूँ ।

कलम से हत्या - 24

क्या और नीरज जी आप बहुत परेशान लग रहे हैं । क्या बताऊं? चिरंजीवी मैं तो अब आपको मोदी खाने के लायक भी नहीं रहता है । ऐसी बात हो गई । किरण ने पूछा सारी किरण मैं तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं कर पाए । कल सबूत के अभाव में हमारी जनहित याचिका खारिज हो जाएगी और माथुर सर के बारे में झूठी बात लिखने वाले ही सही हो जाएंगे । इस तरह वो बातें जैसे हम लोगों के सामने झूट कहते आए हैं । उस पर सच की मुहर लग जाएगी कोई बात नहीं । नीरज जी हमें तो इन्हें झूठ के दाग के साथ जीने की आदत पड गई पर दो किस बात का है कि सत्यमेव जयते इस सब से भरोसा उठ जाएगा । आप पत्रकार होकर भी अपने ही साथियों की खिलाफत करते हुए मेरा साथ दे रहे हैं और मेरे कारण बहुतों से पंगा मोल लिया है । पापा को कलंकित करने वालों के विरुद्ध लडाई में आप का साथ पाकर मुझे तो एक सच्चा मित्र मिल गया पर आप हर तरफ से सिर्फ नुकसान में ही रहे हैं । सर सरल मैंने तुमसे कहा था कि तुम से मुझे कोई बात नहीं करनी फिर भी तुम पीछा करते हुए यहाँ तक आ गए चलो किरण कहीं और चल कर बात करते हैं कहते हुए नीरज जाने लगा सर्कल में अदालत में स्वीकारना चाहता हूँ कि हमने माथुर सर को ब्लैक मिलकर के पैसों की मांग की थी और फिर अच्छा तुम सच करें । नीरज को जैसे आपने कानून पर विश्वास ही नहीं हुआ । हासिल मैंने मन बना लिया है । सरल ने कहा पर तुमने तो कहा था कि माथुर सर के घर पर तुम नहीं गए थे । नीरज ने कहा झूट कहा था सर, पहचाना कि परिवर्तन किया । नीरज ने आगे कहा, कल तक तो बडे हुए थे कि आप की बात ना सुनकर मैंने गलती की है । कल हुई घटना ने मेरी आंखें खोल दी है । सर कैसी? घटना? नीरज ने पूछा । मेरी दीदी भी जब झूठी पत्रकारिता की शिकार हुई तब मुझे मालूम हुआ कि थोडे पैसों के लिए या अहंकार के कारण लिखी जाने वाली झूठी खबर किसी के लिए कितना दुखदायी हो सकती है । क्या हुआ है दीदी के साथ? नीरज ने आशंका के साथ पूछा उन्हें नौकरी से निलंबित कर दिया । टीवी की बात सुनकर मैंने कलेक्टर मोटे से संपर्क किया तो उन्होंने कहा, आप जैसे किसी पत्रकार ने ही खबर अखबार में लिखी है । अब यदि हम कोई कार्यवाही नहीं करेंगे तो आप लोग हम पर उंगली उठाएंगे । फिर मैंने संबंधित लडकी के माध्यम से उस पत्रकार को ढूंढ निकाला जिसने दीदी के खिलाफ लिखा था और सच डलवाया । कैसा सच नीरज ने पूछा । उस पत्रकार ने अधिकारी के समक्ष ये माना कि पत्रकार होने के कारण मोहल्ले में उसका दबदबा है । ऐसे में उसकी एकलौती बहन को मोबाइल लाने जैसी छोटी सी बात के लिए उसकी शिक्षिका ने अनुशासन का पाठ पढाते हुए डांट लगाई तो बहुत बुरा लगा और फिर वो शिक्षिका को सबक सिखाने के लिए झूठी बातें लिखकर फसा दिया । फिर क्या हुआ? नीरज से पूछा । मैंने जैसे तैसे करके उस छुटभैया पत्रकार को कलेक्टर साहब के सामने प्रस्तुत किया । उस पत्रकार ने अपनी बहन के साथ सच कहते हुए क्षमा मांगने पर मेरे दीदी का निलंबन वापस ले लिया गया । अच्छा तो ये बात है । नीरज ने कहा हाँ और अब मैं भी आपसे एक सामान्य आया हूँ । आपने मुझे हमेशा से ही समझाने की कोशिश की । निष्पक्ष एवं सकारात्मक सोच के साथ पत्रकारिता करनी चाहिए । आपने मुझे ये भी कहा था कि हमें देश और समाज का चौथा स्तंभ माना जाता है तो हमें ये गरिमा बनाए रखनी चाहिए । लोगों को समस्या में डालना हमारा काम नहीं है । लोगों की समस्याओं को शासन प्रशासन तक पहुंचाना हमारा उत्तरदायित्व हैं । समस्याओं के लिए समाधान का रास्ता दिखाने का काम करने की जगह मैंने भी औरों को समस्याओं के घेरे में फंसाने का काम किया है । किसका मैं प्रायश्चित करना चाहता हूँ? अब मुझे जिंदगी का फंडा समझ में आ गया है । सर की पैसों की अतिरिक्त भी दुनिया है और ब्लैकमेलिंग कहीं से भी पत्रकारिता का हिस्सा नहीं हो सकती । ठीक है सर, कल मैं तुम्हें अदालत लेकर जाऊंगा । तैयार रहना दस बजे लेने आऊंगा । नीरज उत्साहित हो गए । तीन साल पहले प्रोफेसर की आत्महत्या के मामले में कोर्ट में नया मोड आया । इस शीर्षक से या इसी से मिलते जुलते शीर्षक के साथ अधिकांश अखबारों में ये खबर छपी की प्रोफेसर माथुर आदर्शवादी व्यक्ति रहे हैं जबकि शहर में पनपती उनकी लोकप्रियता को भुनाने के लिए कुछ स्वार्थी पत्रकारों द्वारा उन्हें ब्लैक मिल किया गया था । फॅमिली में सफल नहीं होने पर किसी आए हुए पत्रकारों ने माथुर सर के लिए ऐसा चक्रव्यू रचा की जिसमें प्रोफेसर साहब फसते ही चले गए और अभिमन्यु की तरह बाहर निकलने के रास्ते से अनभिज्ञ होने के कारण प्रोफेसर साहब की जान चली गई । पत्रकारों द्वारा रचित चक्रव्यूह ने न सिर्फ इंस्पेक्टर किरण माथुर कोई अनाथ किया बल्कि माथुर सर की मुंह बोली बहन को भी जान गंवाना पडा । इस तरह पैसों के लालची पत्रकारों के कारण दो इज्जतदार लोगों की जीवन लीला तो समाप्त हुई साथ ही मरनोपरांत उनके चरित्रहीन होने के दाग से पूरा परिवार कलंकित होता रहा । उपरोक्त बातों का खुलासा आज अदालत में उस समय हुआ जब ब्लैकमेलिंग में सम्मिलित सरल ने शपथपत्र के माध्यम से आज अदालत में हलफनामा दाखिल किया जिसमें सारी बातें लिखी हुई थी । अब तक झूठी खबरों के आतंक से गिरी हुई इंस्पेक्टर किरण किसी भी प्रकरण में पत्रकारों से कोई भी बात साझा नहीं करती थी क्योंकि उनकी नजरों में पत्रकारों का ब्लैकमेलर चेहरा ही रहा । अनिवार्य होने पर अपने अधीनस्थों को पत्रकारों के समक्ष भेज देती रही पर स्वयं अब तक पत्रकारों का बहिष्कार करती आई हैं । उम्मीद है किरण माथुर जी की भी शिकायत पत्रकारों से दूर हो गई होगी और अब पत्रकारों के प्रति उनका नजरिया भी बदलेगा । वैसे किरण जी एवं उनके जैसी सोच रखने वालों से कहना चाहते हैं कि जिस तरह उनके विभाग में सभी कर्मचारी रिश्वत लेने वाले नहीं होते उसी तरह सभी पत्रकार भी ब्लैक मिला नहीं होते हैं । किसी तरह अपने पाठकों से भी हम निवेदन करते हैं कि यदि कभी आपके विरुद्ध कुछ ऐसी बातें अखबारों में छप जाती है जिससे आप सहमत नहीं है तो उसका खंडन करने का आपको अधिकार होता है । अखबार में छपी खबरें पत्थर की लकीर नहीं होती है और यदि किसी व्यक्ति विशेष के द्वारा कभी आपको ब्लैकमेल किया जाता है तो उस पत्रकार की शिकायत लेकर आप संबंधित अखबार ये टीवी चैनल के मालिकों तक पहुंचे । फिर भी बात न बने तो अदालत का दरवाजा सबके लिए खुला है । जीवनमूल्य इसे किसी के अच्छा या बुरा कहने पर खत्म करने का अधिकार संवैधानिक नहीं है । अखबार को पढते पढते किरण की आंखे भराई वो तुरंत ही माँ के पास अस्पताल पहुंची और अखबारों की प्रतियां दिखाते हुए पडने लगी । अखबार पढते पढते ही किरण ने देखा कि माँ का पूरा शरीर थरथराने लगा है । घबराकर चिल्लाने लगी डॉक्टर साहब ऍफ फिर तुरंत ही बेहोश हो जाने पर किरण के साथ उपस् थित नर्स भी आवाज लगाते हुए डॉक्टर की ओर दौड लगाई । अब माँ की तबियत कैसी है? डॉक्टर साहब गहन चिकित्सा कक्ष के बाहर खडी । किरण ने पूछा आप के लिए खुशखबरी है । किरण मरीज के पूरे शरीर में रक्त का संचार होने लगा है और ऐसे रिएक्ट कर रही हैं जैसे उसे कुछ हुआ ही नहीं था । डॉक्टर ने कहा हूँ

कलम से हत्या - 25

नीरज जी मुझे घबराहट हो रही है । इंस्पेक्टर किरण घबरा रही है यह विरोधाभास क्यों? नीरज ने पूछा कोई सवाल किए बिना मेरे साथ अदालत चलिए । किरण ने अधिकारपूर्वक कहा अदालत ने तो कल का समय दिया है तो फिर आज क्यों जाना चाहती हूँ क्योंकि मैं नहीं चाहती हूँ की सरल को कोई सजा मिले । किरन ने कहा लेकिन किरण मैं जानती हूँ की सरल पर गैरइरादतन हत्या का एक एफआईआर होने का आदेश हो सकता है । यदि ऐसा हुआ तो मैं खुद को कभी जमा नहीं कर पाउंगी क्योंकि मेरा उद्देश्य था पापा के बारे में जो गलत फहमी दुनिया वालों के सामने परोसी गई थी । उसका खंडन हूँ जो हो गया है और इस खबर से मेरी माँ को नया जीवन भी मिल गया है । अब मैं नहीं चाहती कि सरल पर कोई दोष अदालत में सिद्ध हो इसलिए हमें अब ये केस वापस लेना है । सरल लवली का मंगेतर है इसीलिए तो ये करना चाहते हो ना किरण आप जो कह रहे हैं वो भी कारण है और मुख्य बात ये है कि अब मेरे मन में पत्रकार और पत्रकारिता के लिए कोई नाराजगी नहीं सरल जैसे पत्रकार का प्रायश्चित कर लेना ही बडी बात है । समाज को एक और ईमानदार पत्रकार मिल गया है । यही मेरी सफलता है । ठीक है किरण तुम जैसा चाहती हूँ वैसा ही होगा । मुझे तुम पर गर्व है । गौरवान्तित तो मैं आपको । किरण ने कहा वो ये अब चलो भी । नीरज ने खडे होते हुए कहा आपको मुझसे और कोई बात नहीं करनी है । किरण अपनी सीट पर ही जमी रही । किस बात की ओर इशारा कर रही हूँ । नीरज ने पूछा सच में नहीं जानते हैं आप की मैं क्या कहना चाह रही हूँ । किरन की नजरों में शरारत थी बतावे तो नीरज ने बैठे हुए कहा आप कुछ बोल नहीं रही है? किरण ने कहा नहीं, मुझे कुछ याद नहीं आ रहा है कि आपको सच में याद नहीं है की मैंने कहा था कि पापा को जिस दिन हिंसाब मिल जाएगा उस दिन में आपको अपने दिल की बात बताउंगी । किरण में जो डाला अच्छा तो ये बात है तो बताना ही चाहती हो तो चलो बता दूँ । नीरज ने कहा इतनी नहीं रस्ता से पूछोगे तो कैसे बता पाऊंगी वो मत बता । नीरज मुस्कुराया कितने गंदे हुआ मेरी फुदकती हुई भावनाओं की भी परवाह नहीं कर रहे हो । किरण ने मुझे बुला लिया । मुझ से प्रेम करती हो, यही बताने वाली होना है । क्योंकि मैं जानता हूँ तो औरों की तरह मेरे मुझसे स्वीकारोक्ति नहीं चाहिए । किरण ने आंखों में आंखें डालकर का तुम्हारी धडकनों की बातें में नजरों की जुबानी सुनते आ रहा हूँ । बहुत बार प्रेम का इजहार कर चुके हैं । नीरज ने हसते हुए कहा, ये तो गलत बात है । मुझे जीवन भर इस बात की कमी खलेगी कि मैंने अपने मन की बात तुम से नहीं कहीं खुद के लिए केरल से तुम का संबोधन से नीरज के शरीर को जैसे किसी नंगे तार में छू लिया और उसने कहा क्या कहा तुमने? अभी तो मैंने कुछ कहा ही नहीं । अब कह रही हूँ क्या? तो मुझे अपना जीवन साथी बनाना चाहोगी । किरण ने ही दिया ये कैसा मजाक? किरण मैंने तो सोच लिया है कि अब शादी ही नहीं मजाक नहीं सच कह रही हूँ । लेकिन तुमने तो कहा था की सनद हो तो आप अभी तक सडक को बोले नहीं तो मैं तो आपको एक बात बताना भूल ही गई । कौन सी बात नीरज के दिल की धडकने तीव्र हो गई थी । उसने तत्पर्ता से पूछा सनद की अधीनस्त एक महिला कर्मचारी थाना आई थी रिपोर्ट लिखाने के लिए कि उसने शादी की बात कहकर उसका शोषण किया है । मैंने उसे समझाया कि कानून समय तो जेल चला जाएगा पर तो मैं क्या मिलेगा? तो उसने कहा मुझे भले ही कुछ ना मिले पर मैं चाहती हूँ कि उसकी भी शादी ना हो । और जब मैंने बताया कि जिससे सनत की शादी होने वाली है वो मैं ही हूँ और मैं सनत को तुमसे शादी करने के लिए राजी कर लूँ तो यही तो मैं चाहती हूँ क्योंकि मैं सडक को प्यार करती हूँ । उस लडकी ने कहा हो तो उसके कहने पर मैंने सडक से बात की और सरल की तरह सनत ने भी अंतर था सही रास्ता अपना और अब सडक उसी लडकी से विवाह करने वाला है । अरे यार तुम भी कमाल करती हो इतनी महत्वपूर्ण बात तुमने मुझसे छुपाई । कहते हुए किरण को बाहों में भरकर आगे का कुछ गरीब खुद कितना बताया है तुमने? किरण का तन मन सिहर उठा । आज से मालूम हुआ कि मित्र और प्रेमी में सच में बहुत अंतर होता है । एक बात और है नीरज किरण ने कहा और क्या क्या बातें राज रख रखी है यार अच्छा सभी बातें जल्दी जल्दी बता दूँ । नीरज ने किरण को खुद से अलग करके माथा चूम लिया । राज की बात नहीं है बल्कि मैंने एक निर्णय लिया है जिसपर तुम्हारी राय चाहिए । किरण ने कहा तो बताओ ना जल्दी बताओ धीर गंभीर नीरज की चंचलता देख किरण को अप्रत्याशित सुख मिल रहा था । आज तुम्हारा ये रूप देखकर बहुत अच्छा लग रहा है । तुम्हारा दिन तो सच में बच्चा ही है । देखो किराना ज्यादा परेशान मत करो क्या बताना चाहती थी बताओ देखो मेरा दिल की इतनी जोर से धडक रहा है । तुम जो कहना चाहती हूँ वो बात मेरे पक्ष में तो है ना, है भी और नहीं भी । किरण मुस्कुराई अब और नहीं आप बताओ जल्दी मैंने सोचा है कि मैं तुम्हारे साथ काम करूंगी तो तुम्हारा मतलब है कि तुम पत्रकारिता हाँ और इसमें आश्चर्य की क्या बात है? किरण ने आगे का सिर्फ जीवनी नहीं बताना है बल्कि मैं तुम्हारे साथ साथ ही काम भी करना चाहती हूँ और तुम्हारी नौकरी मेरी नौकरी पर मुझे गर्व है और अब तक मैंने पूरी निष्ठा के साथ निभाया भी है । पर अब इस्तीफा देना चाहती हूँ क्योंकि रहे मैंने अपने छोटे से जीवन में दो महत्वपूर्ण बातें महसूस की है । मेरे पास पति पत्नी के बहुत से झगडे आते रहे हैं जिसमें मैंने पाया कि अधिकांश जगहों का मुख्य कारण एक दूसरे के साथ काम समय व्यतीत करना और दोनों का कार्यस्थल के साथ साथ कार्य के स्वरूप में बिंता होने के कारण ही दूरियाँ होती है । आपस में प्रेम न होना भी तो झगडे का कारण हो सकता है । नीरज ने कहा, तुम्हारा कहना भी कहीं ना कहीं सही हो सकता है पर मैंने जो देखा उसे भी नकार नहीं सकती । इसलिए मैंने सोचा है कि यदि तुम्हारी सहमती मिले तो साथ ही काम करना चाहूंगी । किरण ने कहा तुम्हारे आने से मेरे जीवन में तो बाहर ही आई है और सात काम करने से मेरा कार्यक्षेत्र भी सजीव हो जाएगा और मुझे जिस विश्वसनीय व्यक्ति की खोज थी वो तलाश भी पूरी हो जाएगी और सबसे बडी खुशी तो इस बात की होगी कि तुम्हारे द्वारा पत्रकारिता को सम्मान मिलेगा । मुझ पर विश्वास करने के लिए धन्यवाद कहते हुए किरन ने नीरज को गले लगा लिया । तुमने दो कारणों का जिक्र किया था तो दूसरा कारण क्या है? ये भी बता दो । नीरज ने पूछा अभी तक सब की बातों का सम्मान करने के कारण दूर रहकर तो मैं बहुत दुःख पहुंचाया है पर अब अधिकारिक समय तुम्हारे आस पास ही रहना चाहती हूँ । किरण ने नीरज के घुटनों पर अपना सर रखते हुए कहा तुम्हारी प्यारी बातें ये पाल और ये समय सब मुझे किसी अनहोनी की तरह लग रहा है । मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि आज की लडकियाँ भी इतनी समर्पित और प्यार करने वाली हो सकती हैं । मेरी किरण का मेरे जीवन में और जुगनू पत्रिका में स्वागत है । आज माँ का इंतजार भी खत्म हो जाएगा तो उनसे मिलवाकर कहूंगा की आखिर मुझे मेरी पसंद की सर्वगुण सम्पन्न लडकी मिल ही गई ।

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