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कलम से हत्या - 15

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ये सब कैसे हुआ? नीरज जी अन्य पत्रकारों के साथ प्रवेश करते ही सरल ने पूछा । पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड में फस गया था और ये दुर्घटना हो गए । नीरज ने जवाब दिया, और आपकी गाडी पर तो गोलियों के कोई निशान नहीं और ना ही कांच टूटे हुए हैं । तो मैंने कब कहा कि मुझे गोली लगाते समय में कार के भीतर था । नीरज पत्रकारों के सवालों के तरीके से अच्छी तरह से परिचित थे और खुद पत्रकार होने के कारण जवाब देना भी जानते थे । फिर ये गोली कैसे लगी? सरल ने पूछा, किसी परिचित को देखकर उससे मिलने के लिए मैं कार से उतर ही रहा था कि फाइरिंग का शिकार हो गया और वह परिचित इंस्पेक्टर किरण थी । किसी अन्य पत्रकार ने पूछा, ऐसा आप कैसे कह सकते हैं? नीरज ने सवाल के बदले सवाल नहीं किया क्योंकि आपको अस्पताल पहुंचाने वाली किरण दी हैं । एक पत्रकार ने कहा, जब की हमने किरण जी से बात करना चाहा तो हमेशा की तरह हो । उसी तेवर के साथ उन्होंने कहा कि मुझे झूठे पत्रकारों से कोई बात नहीं करनी है । दूसरे ने तुरंत ही कहा मतलब पुलिस और पत्रकारों के बीच गोलीबारी अभी भी चल ही रही है । नीरज के होठों पर मुस्कुराहट फैल गई और हमारा प्रश्न अभी भी वहीं का वहीं है । नीरज जी कि उस दिन बाहरी क्षेत्र में आप क्या करने गए थे? एक पत्रकार ने पूछा ये तो मेरे साथ ज्यादती हो रही है । मेरे भाई मेरे भी व्यक्तिगत कार्य हो सकते हैं जिसका जिक्र करना मैं उचित नहीं समझता हूँ । अच्छा ये तो बता दीजिए कि वहाँ गोली क्यों चल रही थी । दूसरे पत्रकार ने पूछा बताया तो था पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड चल रही थी तो किरण जी आपको अस्पताल लेकर के आई । तीसरे ने पूछा कमाल करते हो? नीरज ने हसते हुए आगे कहा, किरण जी उस क्षेत्र कि थाना प्रभारी हैं । उनकी उपस् थिति तो स्वाभाविक है और फिर पुलिस बल का नेतृत्व स्वयं किरण जी ही कर रही थी । इसमें विशेष क्या है? कहीं इंस्पेक्टर किरण की साजिश तो नहीं? पत्रकार नहीं पूछा लेकिन वो मेरे खिलाफ साजिश क्यों करेंगे? नीरज मुस्कुराने लगा क्योंकि वो पत्रकारों से नफरत करती हैं । सरल ने झट से कहा ऐसी कोई बात नहीं है । मेरे भाई सहयोग की बात है । नीरज ने कहा आपकी महानता है नीरज जी जानलेवा हमले को भी आप संयोग बता रहे हैं पर हम लोग चुप नहीं रहेंगे । चौथा स्तंभ कहा जाता है मीडिया को । इसीलिए आप जैसे धीर गंभीर पत्रकार पर हमला चिंता का विषय है । पत्रकार ने कहा, अरे यार, ऐसे कब तक हम अपने मुंह मियां मिट्ठू बनते रहेंगे । मुझे गोली लग नाममात्र दुर्घटना है । इसे और किसी नजरिये से देखने की कोशिश मत करो । मैं भी पत्रकारिता को जानता हूँ । पर प्लीज क्या बाल की खाल निकालने की कोशिश ना करें । आप तो बडे पत्रकार है । नीरज जी पत्रकारिता की नस नस को जानते हैं तो फिर मुझ पर भरोसा कीजिए । मुझे गोली लगना मेरी गलती का परिणाम है । सामने वाली की बात को बीच में ही करते हुए नीरज ने आगे कहा, हमें राज्य का चौथा स्तंभ माना गया है । तो आइए आज हम सब मिलकर आज ये संकल्प लें कि हम अपने अस्तित्व को कायम रखते हुए इस स्तंभ को और मजबूती प्रदान करें । नीरज ने कहा, हम भी तो यही कह रहे हैं । नीरज जी की आप पर हमला चौथे स्तंभ पर प्रहार है, जिससे हमें गंभीरता से लेना चाहिए । आप जैसे धीर गंभीर पत्रकार के द्वारा चिंतन जरूरी है, पर तब जब स्थिति स्पष्ट न हो पर यहाँ ऐसी बात नहीं है । पत्रकारिता में आपको में अपना गुरु मानता हूँ । इसलिए आप की तरह ही में किसी भी प्रोपेगेंडा से दूरी बनाए रखना चाहता हूँ । मेरी बात मानी सर की मेरे साथ कोई हादसा नहीं हुआ है । सिर्फ संयोग की बात है । गुरु का सम्मान दिया है तो मैं चाहता हूँ कि आपने पत्रकार साथियों के सामने एक बात और स्पष्ट कर दो नहीं रहे हैं । कौन सी बात है यहाँ पर उपस्तिथ कुछ लोगों का मानना है कि तुम सच छुपा रहे हो । आप कहना क्या चाहते हैं देख नहीं रहे हैं यहाँ पर उपस् थित लोग सिर्फ पत्रकार नहीं बल्कि तुम्हारी शुभचिंतक भी हैं । मैं जानता हूँ सर ये मेरे परिवार की तरह है तो अपने परिवार से कुछ मत छुपाइए सर । सरल ने आगे कहा लोगों तक क्या बात पहुंचाना है ये आप के अनुसार ही होगा पर हमें वास्तविकता से दूर मत रखी है । मैं तो यही नहीं समझ पा रहा हूँ की आप लोग के सच की बात कर रहे हैं । नीरज ने कहा ये लोग नहीं कह पा रहे नहीं रचते मैं बताता हूँ सबका यही मानना है कि किरण पत्रकारों से बदला लेना चाहती है और इसी कडी में तो मैं धोखे में रखते हुए तुम्हारी जान लेने की कोशिश की गई है । आप भी ऐसा मानते हैं सर नीरज मुस्कुराया अभी हम बाहर बैठे थे तब इस बात को लेकर जो तर्क उतर चल रहा था उसके आधार पर ही पूछ रहा हूँ । हमारी बिरादरी की यही एक बडी समस्या है सर कि जब स्थिति हमारे सामने स्पष्ट हो तब भी हम अपने हिसाब से उस मौके का उपयोग करना चाहते हैं । आप सबसे निवेदन है कि मुझ पर भरोसा करें और इस मामले को सीधे नजरों से वैसा ही देखें जैसे मैं बता रहा हूँ । मुझ पर हमला किसी पत्रकार पर नहीं बल्कि आम इंसान के साथ होने वाली दुर्घटना मात्र है । मेरी जगह पर जो भी वहां पहुंचता निश्चित ही उसके साथ में ये घटना हो सकती थी । इसीलिए आप सबसे मेरा निवेदन है कि आप लोग अपने चैनल में वही दिखाएँ और अखबारों में वही लिखें जो सही है । मेरी मसाला डाल करना । पडोसी अब समय आ गया है कि हम पत्रकारिता का मूल धर्म निभाएं और इस पवित्र गंगा को और प्रदूषित न करें बल्कि सफाई अभियान चलाये और खुद भी कोई गंदगी ना फैलाएं । नीरज ने कहा, नीरज सही कह रहा है । हम यदि खुद को देश और समाज का चौथा स्तंभ मानते हैं तो हम सबको इसकी गंभीरता को समझना होगा । टीआरपी की होड में तर्कों कुतर्कों का तडका लगाने से अच्छा होगा कि हमें उन खबरों को लगना होगा जो सच में खबर बनने लायक है । वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, आपने ऐसे कह दिया सर की पत्रकारिता में गन्दगी मेरा मोहम्मद खुलवाया । नीरज ने अपने पत्रकार साथी को टोकते हुए आगे कहा, मैं भी आप लोगों के बीच का हूँ और जानता हूँ कि कई खबरों के पीछे पैसों का खेल कैसे चलता है । नीरज ने कहा, आपसे स्तर की बातों की उम्मीद नहीं थी, नहीं रखते । सब जानते हैं कि आप बहुत बडे उद्योगपति भी हैं और नफे नुकसान को अच्छी तरह से समझते हैं । आदर्शवादी भूखे जन्म लेते हैं और भूखे ही मर जाते हैं । किसी ने कहा ये तो गलत है किसी और पत्रकार द्वारा नीरज की बातों का विरोध करते देख वरिष्ठ पत्रकार ने आगे कहा, नीरज का मतलब है कि उनका मतलब हम लोग भी समझ रहे हैं । पर नीरज जी को भी ये समझना चाहिए कि हम सब ये काम सिर्फ समाज सेवा के लिए नहीं कर रहे हैं बल्कि रोजगार के रूप में भी करते हैं । आपकी बातों को मैं समझ रहा हूँ सर और मैं मानता हूँ कि भूखे भजन न होई गोपाला पर हमें भोजन उतना ही करना चाहिए जितना हम बचा सकें । आवश्यकता से अधिक कोई भी चीज अच्छी नहीं होती है और पाचन क्षमता से अधिक भोजन दुनिया के सभी लोगों को आमंत्रित करता है । वरिष्ठ पत्रकार ने कहा आप कहना क्या चाहते हैं सर? सरल ने पूछा सिर्फ तुमसे ही नहीं सभी पत्रकारों से कह रहा हूँ की इस नई दुनिया में समाचार को भी मनोरंजनात्मक बनाने के लिए हम सब अंधीदौड के साथ आगे निकलने की होड में बढते जा रहे हैं जो हम पत्रकारों के लिए और मीडिया के लिए ठीक नहीं है । मैं जानता हूँ कि मेरी बातों का आपको बुरा लग सकता है । फिर भी आपने पूछा है इसलिए सुनु हम पत्रकारिता की मूल भावना से हटकर परिवर्तन के नाम पर जो ग्लैमर पर उस रहे हैं अब जनता हूँ, उसे खूब दी जा रही है । यदि समय रहते हमने स्थिति को नहीं संभाला तो वह दिन दूर नहीं जब राजनेताओं की तरह लोग हम पर भी विश्वास करना छोड देंगे । माना कि अभी हमारा समय चल रहा है और हमें इस समय का सदुपयोग करना चाहिए पर अपनी विश्वसनीयता की कीमत पर विलासिता की सामग्री जुटाने ठीक नहीं है । कहीं ऐसा ना हो की पैसे की भूख लोगों के विश्वास का ही कत्ल करते हैं । नीरज जी का घायल होने से इन सब बातों का क्या मतलब है? लेकिन हम लोग नीरज जी को घायल होने की खबर को नकार भी तो नहीं सकते । सरल ने कहा, मैं आपसे सहमत हूँ । गलत अफवाहों से अच्छा है कि मेरी दुर्घटना की खबर लोगों को मीडिया से लग जाएगा और मैं चाहता हूँ कि बिना लाग लपेट के सच छापा जाए जो सिर्फ आप ही बता सकते हैं । नहीं रखते आपने ठीक है सर और सच यही है कि मुझे गोली लगी है जिससे मेरी जान भी जा सकती थी । पर ये घटना किसी पत्रकार के साथ नहीं बल्कि एक आम आदमी के साथ घटी है । किरण जी ने समय पर मुझे अस्पताल पहुंचाकर मेरी जान बचाई । वो उस समय किसी ऑपरेशन पर थी । इसके अतिरिक्त किरण जी का इस दुर्घटना से कोई लेना देना नहीं है । बल्कि मैं तो ये कहूंगा कि मुझ पर अधिक समय देने की जगह आप सब लोगों को समय का सदुपयोग करते हुए जरूरतमंदों की खबर देश के सामने लाने में जुट जाना चाहिए । नीरज ने कहा, आप लोगों की बात हो गई हो तो प्लीज पेशेंट को अकेला छोड दीजिए । डॉक्टर ने प्रवेश करते ही कहा

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