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कलम से हत्या - 14

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क्या हुआ? मैडम बेचा लग रही हैं । लगातार चहलकदमी करते दे । सुचिता ने पूछा क्या करूं? कुछ समझ में नहीं आ रहा है । किरण ने बैठते हुए कहा आप ही तो कहती है मैडम की जब कुछ समझ में ना आए तो सब कुछ समय पर छोड देना चाहिए । पर यहाँ बात समय की नहीं है । सुचिता दिल और दिमाग के बीच द्वंद्व छुपी हुई है । किरण फिर खडी हो गई । यदि बात व्यक्तिगत है तो बिल कि सुनिये मैडम अपनी और घूरकर देखे जाने पर सुचिता सहम गई और फिर आगे कहा सौरी मैडम, मैंने तो ऐसी कह दिया था घबराओ नहीं, तुम ने सही कहा । मुस्कुराते हुए किरण ने आगे कहा चलो आज माँ की जगह तुम्हारी बात मान लेते हैं, कहीं जा रही है मतलब टोपी पहनते थे । एक सूचिता ने पूछा तुम्हारी बात मानकर एक बीमार को देखने जा रही हूँ । कोई जरूरी काम है तो फोन करना जी मैडम माँ के मना करने के बाद भी मेरे से मिलने जाना क्या ठीक रहेगा? किरण के अंतर्मन से ये आवाज आती है उसके पहले ब्लॅक ऍम कोई जवाब नहीं मिलने पर सुचिता ने आगे का शायद आप अभी भी असमंजस में पर मैं तो कहती हूँ कि दिल की बातें कभी कभी दिल खोलकर मान लेनी चाहिए । आज का दिन तुम्हारा है । सुचिता तुम्हारी बातों पर आगे बढ रही हूँ । कहते हुए अंततः किरन ने नीरज को देखने जाने का मन बना ही लिया कैसे हैं । अब किरण ने प्रवेश करते हैं । कमरे के कोने पर रखे फूलदान का फूल बदलते हुए पूछा किससे पूछ रही हूँ आपसे फॉर किस्से पूछूँ हम दोनों के अलावा इस कमरे में और कौन सीधा फूलदान की ओर बढ गई तो मुझे लगा कि फूलों से बात हो रही है । नीरज मुस्कुराया आप अकेले घर से कोई साथ में नहीं है । किरण ने पूछा तो आ गई अब किसी की जरूरत नहीं है । नीरज ने कहा ऐसी बातें क्यों करते हैं आप? किरण परेशान हो गई । अपने मन की बात कह रहा हूँ । तुम्हारी तरह छुपाता नहीं हूँ । सच कह रहा हूँ किरण पिछले तीन दिनों से मुझे देखने आने वालों का तांता लगा रहा है । पर हर आहट पर मेरी नजरें सिर्फ तुम्हें ढूंढ रही थी । ऐसी बातें करेंगे तो मैं चली जाऊंगी । किरण ने खडे होते हुए कहा तो जाओ । नीरज ने किरण की कलाई पकडते हुए आगे कहा मेरा हाथ झटक दो । मेरी मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं । अपनी कलाई से नीरज का हाथ अलग करने के बाद बैठते हुए किरण ने कहा, कैसी मजबूरी क्यों कर रहे हैं आप? नीरज जी किरण ने बात को बदलते हुए कहा तो नहीं जानती नीरज ने आंखों में आंखें डालकर का नहीं और मुझे जानना भी नहीं । किरण ने नजरिए पे रहते हुए आगे कहा, पहले से ही हमारे संबंधों को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है और आप हैं कि इसे हवा देने पर तुले हुए हैं । चलो अच्छा है । बताने से पहले ही लोगों ने मेरे मन की बात जान ली । नीरज ने कहा, आप स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं रहे हैं । नहीं जी तो तुम भी जानती हो पर मान नहीं रही हूँ कि मैं तुमसे प्रेम करने लगा । नीरज ने कहा, कुछ नहीं जानती में किरण मैं झटके से कहा तो फिर बता ही देता हूँ कि तुम्हारी इसी अदा पर मुझे प्यार आया है । तुम पहले दिन से ही मुझे दुश्मनों की तरह मिली और मुझे तुम्हारी दुश्मनी से ही प्यार हो गया । मैं कितनी परेशान हूँ और आप कुछ भी कहीं जा रहे नहीं जी, मैं जानता हूँ कि मेरी ये बातें तो में भी अच्छी लगती हैं, पर तुम स्वीकारना नहीं चाहती हूँ और इसीलिए मुझे देखने भी नहीं आ रही थी । गनीमत है मेरे बुलाने पर आ गई । मुझे आपके स्वास्थ्य की चिंता थी । नीरज जी पर हाँ, मैं मीडिया को और उन लोगों को कोई मौका नहीं देना चाहती थी जो हमारे बारे में उलजलूल बातें कर रहे हैं । क्या बातें कर रहे हैं किरण नीरज की बातें गुलाब की पंखुडी पर टपक थी । उसकी बूंद की तरह थी । अब मैं क्या बताऊँ आपको? किरण सहन सी गई वही ना कि क्या मैं तुम से प्रेम करता हूँ । कोमल भावनाओं के साथ बातें भी कोमल हो जाती है । हाँ, जो मैं नहीं चाहती हूँ की ऐसी बातें प्रचारित हो । किरण में तत्पर्ता से कहा तो तुम ही बता दूँ कि क्या चाहती हूँ नीरज की बोली में । जैसे मिश्री की दलील भूल गई थी, कुछ भी नहीं चाहती हूँ । किरण प्रेम के अमृतकुंड में गोता लगाने की कोशिश कर रही थी । पर इतना सब होने के बाद तो पत्रकार चुप नहीं बैठेंगे । कुछ न कुछ तो लिखेंगे । नीरज ने कहा आप सही कह रहे हैं पर उन्हें क्या बताएँ? किरण ने कहा वहीं जो सच है नीरज ने किरन की आंखों में आंखें डालकर का मतलब आप पत्रकारों के सामने भी कहेंगे कि मुझ से प्रेम करते हैं । किरन की सांसें अटक गई तो तुम से प्रेम की बातें उजागर होने से कोई परेशानी नहीं है ना । नीरज ने कहा नहीं मैंने तो ऐसी कह दिया किरण में जीते हुए निगाहें झुका ली । तुम्हारी झुकती, निगाहें और सफेद पढते हुए चेहरे ने तुम्हारे मन की बातें बता दी है कि नहीं पैसे ये बातें तो मैं पहले ही जान गया था । जब तुम ने मुझे तुम कहने से नहीं रोका था, लेकिन आप भी अच्छा नहीं कर रहे हैं । कहते हुए किरन खडी हो गई, अरे यार, नाराज की होती हूँ । मैंने तो मजाक किया था गंभीर होकर । नीरज आगे कहा, मैं तब तक अपने प्रेम को और उनके सामने नहीं करूंगा जब तक तुम नहीं चाहोगी और मैं ऐसा कभी नहीं जाऊंगी क्यूँ नीरज तडक उठाओ क्योंकि मेरी सगाई हो चुकी है । ये तुम पहले भी बता चुकी हूँ । नीरज ने आगे कहा, मैंने तो तुम्हारे सामने प्रेम का प्रस्ताव रखा है, सगाई का नहीं । जीवन में पहली बार जो एहसास तुमसे मिलकर हुआ है उसे मैं जीना चाहता हूँ । वैसे तुम्हारी पसंद अच्छी है और बंदा तो मैं चाहता भी बहुत है । आप किसके बारे में कह रहे हैं । किरण ने पूछा, सनत के बारे में आप सर को जानते हैं कैसे? किरण को आश्चर्य हुआ । वो मुझसे मिलने आया था और अपना परिचय देते हुए कहकर गया है कि तुम से दूर रहूँगा । तो आपने क्या कहा? शरीर को आत्म से दूर रहने की बात कहने वाले को क्या कहता है? सिर्फ मुस्करा दिया । ये आपने गलत किया । किरण ने कहा तो सही किया है । नीरज ने पूछा सच तो यह है कि आज से पहले हमारी जितनी भी मुलाकात हुई हैं, सहयोग होता रहा हूँ और ये बात आपको सनत को भी बतानी चाहिए थी । गलतफहमी में हो किरन नीरज ने आगे कहा, और झूठ बोलना मुझे पसंद नहीं है । मैं आपको झूठ बोलने के लिए कह भी नहीं रही हूँ । नीरज जी क्या यह सच नहीं है कि हमारी मुलाकातें इत्तेफाकन थी? किरण ने कहा तुम्हारी नजरों में नीरज ने कहा, मतलब मतलब ईश्वर की कृपा से होने वाली हमारी मुलाकातें हमारे प्रेम को पोषित करने के लिए हो रही हैं । मैंने तो जगत पिता के आशीर्वाद को स्वीकार लिया है और अब तुम्हें भी नहीं छुपाना चाहिए । मैं तुम्हारे मन की बातें जानता हूँ कि रहे फिर भी तुम्हारे मुझसे सुनना चाहता हूँ । क्या तुम्हें मेरा प्रेम निवेदन स्वीकार है? बात स्वीकारने या नकारने की नहीं । नीरज जी, मैं अपने पापा की बहुत इज्जत करती हूँ और उनके द्वारा किए गए रिश्ते को पहले ही स्वीकार चुकी हूँ और हम इतने भी न समझ नहीं है कि प्यार के नाम पर परिवार को अनदेखा करते हैं । उम्र चाहे जितनी हो जाए, पर जब तक दिल किसी पर आया ना हो तब तक शैशवास्था में ही रहता है । और तुम तो बच्चे की जान लेने पर तुली हो । तीस पार हो गए तो क्या हुआ? हमने तो पहली बार किसी को दिल दिया है । दिल तो बच्चा है जी । नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा मुझे चलना चाहिए । किरण जाने लगे चली जाना पर फिर कहता हूँ कि मैंने सगाई या शादी का नहीं बल्कि प्रेम का प्रस्ताव रखा है और उसका जवाब तो देती हूँ । नीरज ने कहा मैं चलती हूँ वरना तो प्रेम की व्याख्या भी करने लग जाएंगे तो मैं क्या कर रही हूँ? लवली ने किरण को नीरज के कमरे से बाहर निकलते देखकर पूछा, कोई जवाब दिए बिना ही किरण आगे बढने लगी तो लवली का अब एज भी बढने लगा । वो उनके पीछे पीछे जाती हुई बोली क्यों आई थी दुनिया नीरज जी को देखने किरण ने छोटे से उत्तर दिया । उस दिन तो बडी शराफत बडी बातें कर रही थी कि अस्पताल नहीं सकती । नीरज जी कैसे हैं? बता दीजिए वगैरह वगैरह आज भी नहीं आना चाहती थी । मैं आप जैसे लोगों से सामना हो ऐसा मैं भी नहीं चाहती हूँ । किरन ने भी जैसे को तैसा जवाब दिया हूँ तो फिर आई क्यों? लवली तमतमाई ये बातें जाकर अपने भैया से पूछो । किरण ने कहा उनसे तो मैं पूछूंगी पर तो मैं एक बात कान खोलकर सौ लोग आप कभी भी मेरे भैया से मिलने की कोशिश भी मत करना । क्या कर लोगे तो किरण ने लवली की ओर पलटते हुए कहा हो आ गई आखिरकार अपनी पुलिसिया औकात में किरण को घूमते हुए लवली ने आगे कहा इस बुलावे में मत रहना, पत्रकारों से बनाओ टी नफरत के नाम पर भैया से थोडी नजदीकियां हो गई है तो तुम्हारी जीत होगी । परियों की लाइन लगी हुई है भैया के पीछे । पर अब तक उन्होंने किसी के भी विवाह और प्रेम प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है क्योंकि उन्हें लडकियों से लगाव ही नहीं अच्छा कहकर मुस्कुराते हुए कितना आगे बढ हो गई पर उसका मन पीछे की बात सोचकर बेचैन हो गया कि ईश्वर की ये कैसी माया है कि नीरज जी को लगा हुआ भी तो मुझ से जो कभी उनकी नहीं हो पाएगी । ये तो रैलियां क्यों आई थी भैया? लवली ने प्रवेश करते ही पूछा कौन? मैंने तो किसी चुडैल को नहीं देखा । मैं किरण के बारे में पूछ रही हूँ । लवली ने कहा हूँ पर तुम तो किसी चुडैल का जिक्र कर रही थी । नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा बातें मत बनाओ भैया और इस किरण के नाम की बला से दूरी रहो । आज इसके कारण आपकी जानकर बनाई थी । मैंने पहले भी कहा था कि किरण अपने पिता के चरित्र पर लगे दाग को मिटाने के लिए आप के करीब आने की कोशिश कर रही है । अस्पताल में भी मुझसे लडने का मन बना कर आई हो गया । नीरज ने बात को बदलने की कोशिश करते हुए कहा लडने नहीं आई हूँ पर किरण को यहाँ से निकलते देखकर मुझ से रहा नहीं गया । आपके लिए माने हाथों से बनाकर सूप भेजा । कहते हुए लवली पर उसने लगी अभी नहीं लवली रहने दो, बाद में पी लूंगा । क्यों मैं बस अभी मन नहीं । नीरज ने कहा आप परेशान लग रही हूँ । दर्द हो रहा है कि अब भैया डॉक्टर को बुलाओ । लवली ने भैया के पास आकर कहा नहीं उन की जरूरत नहीं है । तो फिर किरण ने फिर कुछ कहा क्या? लवली ने पूछा नहीं रहे तुम क्यों बिचारी के पीछे पडी हो? नीरज की बातों में सरलता के साथ अपना पन भी जलक रहा था । किरण और बेचारी आप उसके बारे में कुछ नहीं जानते । भैया अपराधियों के बीच में रहने वाली दूर हूँ । लवली ने भी थान लिया था की किरण नाम की बला से आज अपने भैया को मुक्त कराएगी । फिर वही बात इस समय मुझे अकेला छोड दो । लवली मैं आराम करना चाहता हूँ, चली जाऊंगी भैया पर कोई और भी आपसे मिलने आए हैं और आप से मिलने की अनुमति चाहती हैं कौन? नीरज में पूछा वही आपकी कंपनी ऍम मित्र की बेटी और आपके बचपन की दोस्ती अनन्या आई है? नीरज ने आगे कहा तो वह बाहर क्यों खडी है? उसे लेकर आओ लेकर नहीं होंगे । भैया भेज रही हूँ मुझे कबाब में हड्डी नहीं बनना कहकर मुस्कुराते हुए लवली जाने लगी । कैसे हो? अनन्या ने पूछा ठीक हूँ पर अब जाकर समय मिला है तो मैं । नीरज ने कहा पहले भी आई थी । पर तब तुम बेहोश थी और मुझे तुम्हारी वो हालत देखी नहीं जा रही थी । पर भी लगातार तुम्हारे स्वास्थ्य में सुधार की जानकारी भी मिल रही थी । और फिर तुम तू जुगनू में व्यस्त रहते हो तो मुझ पर काम का बोझ भी तो बढ गया है । हाँ, वही मैं तो भूल ही गया था कि तुम्हारा तो काम से भी हो चुका है, उसके बिना रह नहीं सकती हो । नीरज मुस्कुराया आपको ये भी बता दूँ कि आज भी मैं आई नहीं हूँ बल्कि भेजी गई हूँ । अनन्या ने कहा भेजी गई हो किसने भेजा? नीरज ने आश्चर्य से पूछा हम दोनों की पेरेंट्स ने कुछ विशेष बात है क्या आनन्या हाँ नीरज बात तो महत्वपूर्ण है । तुमने जिस तरह से किरण के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दिया था, उस घटना ने तुम्हारे अपनों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है । क्या सोच रहे हैं सब लोग? नीरज ने पूछा किरण से हो रही तुम्हारी निरंतर मुलाकातों नहीं हमारे पेरेंट्स को परेशान कर दिया और इस समय तो तुम ज्यादा परेशान लग रही हूँ । तुम सही कह रहे नीरज और कारण किरण ये तुम कैसी बातें कर रही हो ना नया देखो नीरज में पत्रकार नहीं हूँ और तुम अपने पत्रकार साथियों को क्या बताना और क्या छुपाना चाहते हो यह तुम जान और सच को तो किरण ने हम सबको बता ही दिया । अनन्या ने कहा कि सच की बात कर रही हूँ । नीरज ने पूछा । किरण ने तो में अस्पताल लाने के तुरंत बाद ही फोन कर के बता दिया था कि तुम्हें गोली कैसे लगी? अनन्या ने कहा ठीक है अपने घर वालों से मैं भी कुछ नहीं छिपाऊंगा और तुम से । पर तुम में से कोई भी पत्रकारों को कोई बात नहीं बताएगा । जो कहना है मैं स्वयं कहूँगा । नीरज ने कहा और तुमने क्या कहने को सोचा? अनन्या ने पूछा तुम तो जानती ही हो की इस समय पत्रकारों के बीच किरण की जो छवि बनी है उस पर यदि मैं पत्रकार साथियों को सब सच बता दूँ तो कई प्रकार के सवाल उभर कराएंगे । नीरज ने कहा, सवाल तो मेरे मन में भी उठ रहा है, नहीं रचते कैसा सवाल । अनन्या यही कि आपके व्यवहार में अचानक इतना बदलाव क्यों हो गया? अनन्या ने पूछा ऐसी कोई बात नहीं आना तो ठीक है । अब हम स्पष्ट बात करेंगे और आज के अनुसार भी । अनन्या ने कहा मैं तो समझता हूँ कि खुली किताब की तरह हूँ, फिर कौन सी बात स्पष्ट करना चाहती हूँ । नीरज ने पूछा मैं तो मैं तो बात बताना चाहती हूँ । नीरज जिसके लिए मुझे भेजा गया है । बीस जब बोलू नीरज ने कहा हमारे बडों ने मिलकर तय किया है कि अब हमारी सगाई और फिर शादी होनी चाहिए । अनन्या ने आखिर ही दिया ये तुम क्या कह रही हूँ ना तो तुम्हारे कॅरियर होने से मैं हैरान । नीरज तुम क्यों हैरान होने लगेगा? नहीं मैं अचरज में हूँ । क्या मैच में पसंद नहीं हूँ? नीरज सवाल पसंद ना पसंद का नहीं है ना मैंने तो मैं पहले भी कहा है कि हम सिर्फ दोस्त हैं । इससे आगे मैंने तुम्हारे बारे में कभी सोचा ही नहीं है । तो अब सोच लो नहीं है । अन्य नी अपनेपन के साथ कहा ये संभव नहीं है । नीरज की बातों में पतझड का सूखा बनता है । मैं तो बचपन से पसंद करती हूँ और तुम्हारे साथ ही जीवन बताने का सपना देखती हूँ । नीरज अरन्या इंकार की तेज वाला से आहत हो गई । पर मैंने तो मैं कभी भी इस नजरिए से नहीं देखा या ना नहीं तो तुम्हारे घर वाले भी चाहती है कि हम साथ साथ जीवन बिताएं । अनन्या ने उम्मीद का दामन थामे रखा जानता हूँ पापा हमेशा तुम्हारी प्रशंसा करते थे । बेशक तुम बहुत अच्छी लडकी हो और तुम्हें मुझसे भी अच्छा लडका मिल जाएगा । नीरज ने नम्रता रूपी जल का छिडकाव कर अपनी मना ही की तपन को काम करने की कोशिश करते हुए कहा जानती हूँ । अपने आत्मसम्मान को बचाते हुए अनन्या ने आगे कहा, और मैंने से तुम्हारे साथ जीवन बिताने का सपना देखा है । तुम्हारा ये संदेश माँ के माध्यम से मुझ तक पहुंचा था ना और तब माँ के द्वारा सात साल पहले ही मैंने बता दिया था कि फिलहाल शादी के संबंध में मैंने सोचा नहीं है तो क्या तुम शादी ही नहीं करोगे? अनन्या ने पूछा हुआ मैंने गलत प्रश्न तो नहीं पूछ लिया? नीरज ये मेरे सवाल का तुम जवाब ही नहीं देना चाहते हो । नीरज की खामोशी से अनन्या नहीं कहा नहीं ऐसी कोई बात नहीं । हम अच्छे मित्र हैं तो तुम जो चाहे पूछ सकती हो और तुम्हारे किसी सवाल की मैं बेलना भी नहीं करना चाहता हूँ । पर सच तो यह है कि तुम ने ऐसे सवाल पूछ लिया है जिसका जवाब मुझे भी नहीं मालूम है । नीरज ने कहा ये तो अजीब बात है । मैंने तुम्हारी शादी के बारे में तुम्हारा विचार पूछा, अन्य और सहज होने की कोशिश कर रही थी । संभावना तो यही है कि मैं शादी करो । हिना नीरज ने कहा, तो फिर मैं तब तक इंतजार करूँ जब तक तुम किसी नतीजे पर ना पहुंचा । अनन्या ने अपना समर्पण प्रदर्शित क्या सौर्य अनन्या मैं तो मैं इसकी अनुमति नहीं दे सकता हूँ । क्यों नीरज अनन्य तडप उठी? क्योंकि विवाह की स्थिति बनी भी तो तुम से नहीं कर पाऊंगा । नीरज ने स्पष्ट किया, मतलब लवली सही कह रही थी कि किरण को लेकर आप गंभीर है । ना चाहते हुए भी अनन्या की जुबान फिसल गई । नीरज मुस्कुराने लगा बे को नीरज में औरों की तरह तुम्हारी मुस्कुराहट या अन्य किसी हरकत से अंदाजा नहीं लगाना चाहती हूँ । तुम्हारे मुँह से सुना होगा क्योंकि मैंने मित्र मना है तो मित्रता निभाते हुए बता ही देता हूँ । हाँ, मैं सिर्फ किरण से ही शादी कर सकता हूँ जो कि संभव नहीं । नीरज ने ही दिया क्यों संभव नहीं है? अनन्या को आश्चर्य हुआ क्योंकि किरण राजी नहीं है । वो बेवकूफ है क्या? अनन्या ने आगे कहा, खुशियाँ उसके पीछे और वह पलट कर देख भी नहीं रही है । यही तो विशेषता है किरण की और उसकी इसी अदा पर मैं कुर्बान हूँ तो मैं ये भी बता दूँ अनन्या की किरण का बेबाकी पन और खुलेपन ने मेरा मन मोह लिया है । प्रेम प्रस्ताव पर मैं कभी आकर्षित हो ही नहीं पाया । पर किरण ने मेरे सामने मेरे ही काम की असलियत ऐसे निडरता से रखी की उसकी नफरत से मोहब्बत हो गई तो मैं समझना भी मुश्किल है । अनन्या ने गहरी सांस लेते हुए कहा सही कहा तुम ने किरण से मिलने के पहले तक मुझे भी नहीं पता था की मुझे क्या चाहिए । नीरज ने कहा, और अब तुम्हारी चाहते तो में मिलने से रही । अनन्या ने कहा तुम ने सही कहा पर में इतना तो जानता हूँ कि किरण मुझे मिले ना मिले मेरा प्यार उसके लिए कभी काम नहीं होगा तो इस दुनिया में जी रहे हो । नीरज तुम्हारी इसी दुनिया में हुआ नहीं, जमाना चाहे कितना भी आगे निकल जाएगा । हम चाहे जितना भी विकास कर लेंगे पर प्यार भी इस दुनिया में रहेगा ही । और निश्चल प्रेम को इस नई दुनिया का स्वास्थ्य कभी छोड भी नहीं सकता । तुम्हारी बात मेरी समझ से बाहर है । नहीं प्रेम को समझने के लिए उसमें डूबना पडता है न अन्य तो मैं भी जब कोई ऐसा मिल जाएगा जिससे तुम्हें प्रेम हो जाएगा तब तुम भी सब समझ होगी ना बाबा यदि प्रेम इंसान को तुम्हारी तरह अकेला कर देता है तो मुझे नहीं करना । ऐसा प्रेम प्रेम अकेला नहीं करता है बल्कि परिपूर्ण और परिपक् को बनाता हैं । नीरज ने कहा पर इस समय तो तुम्हारे सभी अपने से शिकायत है कि तुम अचानक से बदल गए हो । अपनों के साथ तो हो ही नहीं । तुमने सच में मित्रता निभाई है ना । नीरज ने कहा ऐसा क्यों कि अरे वो नीरज सच में मैं किरण के प्यार में इस कदर हो गया हूँ की ये भूल ही गया था की मेरी इस बदलाव से अपनों को बुरा भी लग सकता है । बराबर नहीं । मैं शिकायत का मौका नहीं दूंगा । नीरज ने कहा तो क्या? हाँ इससे पहले कि तुम कुछ करूँ मुझे अपनी बात पूरी कर लेने दो । ये मेरी गलती थी की प्रेम के प्रवाह में बहते चले जा रहा था । मैं भी क्या करता । किरण से मिलने के बाद मैं खुद को भूल बैठा था पर तुमने अपनों की बात कहकर मुझे उनका स्मरण करा दिया है । ये सब तुम क्या कहे जा रहे नीरज तो मैं आश्वस्त करना चाहता हूँ कि ये दीवाना अपने घर वालों की भी अपेक्षा में खरा उतरने की कोशिश करेगा । बल्कि किरण से प्रेम होने के बाद मुझे हर रिश्ते से अधिक लगाव होने लगा है । मुझे चलना होगा । नीरज नहीं तो तुम्हारे प्रेम की व्याख्या मुझे बहाने लग जाएगी । अनन्या मुस्कुराते हुए खडी हो गई ।

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