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भाग 05

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‘कहानी एक आई.ए.एस. परीक्षा की’ में पच्चीस साल का विष्णु अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भ्रम से बाहर निकलने तथा शालिनी को शादी के लिए मनाने के तरीके ढूँढ़ता है। हालात तब और भी दिलचस्प, हास्यास्पद और भावुक हो जाते हैं, जब विष्णु ‘माउंट IAS’ पर विजय पाने निकल पड़ता है। अपनी पढ़ाई और अपने प्यार को जब वह सुरक्षित दिशा में ले जा रहा होता है, तब उसे IAS कोचिंग सेंटरों की दुनिया में छिपने का ठिकाना मिल जाता है। क्या शालिनी अपने सबसे अच्छे दोस्त के प्यार को कबूल करेगी? क्या विष्णु असफलता की अपनी भावना से उबर पाएगा? क्या हमेशा के लिए सबकुछ ठीक हो जाएगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
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भाग पांच ये आ गए आई श्रीवास्तव फॅमिली को कक्षा में प्रवेश करते देख अशोक ने टिप्पणी किए । यहाँ उनके नाम का अक्सर है । विष्णु ने पूछा, नहीं ये आईपैड और आईफोन की तर्ज पर आई श्रीवास्तव है तो ये तकनीक के गुरु होंगे । इन्हें ट्रांजिस्टर और एक्सॅन फोन के बीच का अंतर नहीं पता है । तब यहाँ नाम क्यों? विष्णु ने उत्सुकता से पूछा ये पृथ्वी ग्रह और उसके आगे होने वाली हर चीज के लिए खुद कुछ नहीं देते हैं । अशोक ने कहना शुरू किया लेकिन इससे पहले कि वहाँ अपने पूरे विचार प्रकट कर पा धा । श्रीवास्तव बोले, उन्नीस सौ बहत्तर में यूपीएससी सिलेबस में जो बदलाव आया था उसके लिए मैं जिम्मेदार था । देखो मैंने तुमसे कहा था ना । अशोक ने गर्व की भावना के साथ कहा क्योंकि श्रीवास्तव के बारे में उसका विश्लेषण सही साबित हो रहा था । अभी ये कहेंगे कि यूपीएससी के चेयरमेन को इन्होंने खुद ही नियुक्त किया था । विष्णु ने कहा, अशोक बेकाबू होकर हसने लगा । लेकिन जितना ये आई श्रीवास्तव है उतना ही ये के श्रीवास्तव है क्योंकि ये अपने विषयों, इतिहास और भारतीय राजनीति के बहुत अच्छे जानकार है । कॅाल के पास इनका अपना कोचिंग सेंटर भी है । जहां ये वैकल्पिक विषय इतिहास पढाते हैं । ये ग्रेड माइंड सिर्फ सामान्य अध्ययन, इतिहास और राजनीति बढाने आते हैं । विनोद ने श्रीवास्तव का बचाव करते हुए कहा आई श्रीवास्तव ही टेस्ट से पहले कॅाल के माध्यम से अपने खुद के प्रश्नपत्र बेचने का क्रांतिकारी विचार भी लेकर आए थे और उस से ये एक अच्छी खासी राशि कमा लेते हैं । अशोक ने कहा, शनिवार को मैं आप सबको दिल्ली सल्तनत के दिनों में ले गया था । आज हम मुगल साम्राज्य देखेंगे । यहीं बैठे बैठे और वहाँ भी मुफ्त में आई । श्रीवास्तव ने अपने हमेशा की आई बुद्धि के साथ कहा मजाक है शायद विष्णु ने अपने आगे बैठे लडकों को टिप्पणी करते सुना । इस बीच पहली पंक्ति में नासा मदन के बगल में बैठा वेंकट श्रीवास्तव की आई बुद्धिजीवी नोट करता जा रहा था क्योंकि उसे लग रहा था की उससे उसे यूपीएससी के साक्षात्कार में मदद मिलेगी । वह मान कर चल रहा था की उससे वह खुद को एक स्वाभाविक हास्य की भावना रखने वाले व्यक्ति के रूप में चित्रित कर पाएगा और उसे दूसरों के ऊपर एक बढत मिल जाएगी । पहली पंक्ति में दीप्ती हुई थी जो सफाई से नोट्स लिख रही थी । वहाँ पहली बनती में बैठी लडकी देती है । विष्णु ने पूछा हार दीप्ती तुम उसे कैसे जानते हो? अशोक ने पूछा वह मेरे ही स्कूल से हैं । विश्व में जवाब दिया वो स्कूल में कैसी थी । यहाँ यहाँ तो ऐसा जताती है जैसे परीक्षा में पहली रैंक पहले से ही आरक्षित है । इसके लिए अशोक में अपने विशिष्ट व्यंग्यात्मक लहजे में कहा था, इसने सच में बाहर बोर्ड की परीक्षा में स्कूल में टॉप किया था । विष्णु ने कहा, यहां दिलचस्प हैं । चलो इंतजार करते हैं और मजा देखते हैं । अशोक बोला, विनोद कक्षा में हमेशा की तरह ईमानदारी से बैठा था और एक साथ दो काम कर रहा था । एक तरफ वहाँ नोट्स लिख रहा था और दूसरी तरफ सुपर बेस्ट कोचिंग सेंटर में बगल की कक्षा में बैठी नीना को ईमानदारी के साथ खिडकी से नहीं हार रहा था । विनोद पार्टी पुस्तकों के सब कुछ देखने कुछ बोलने वाले लोगों में से एक था । इस तरह तुम परीक्षा में भी लुढक जाओगे और नीना को भी खोज हो गए । अशोक ने विनोद को अपनी और खींचते हुए चेतावनी दी क्योंकि कक्षा पूरे जोर से चल रही थी । इस बीच आई श्रीवास्तव इस बारे में बात कर रहे थे कि किस प्रकार वही थे जिन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम तैयार किया था । लेकिन दुख की बात है कि उनके विचार को सरकार ने झटक दिया और उन्हें श्रेय नहीं दिया गया । मोहित ने ईमानदारी से यह बात भी लिख ली और उसे एक मारकर पहन से रेखांकित भी कर लिया । आई श्रीवास्तव उन्हें क्लास की शुरुआत मुगल साम्राज्य के बाद से की थी, लेकिन देखो अब ये कहाँ गए नरेगा । विष्णु ने हैरानी से कहा, आइए अब मुगलों की और लौटते हैं । नरेगा केवल आपको एक मानसिक विराम देने और औरंगजेब का सामना करने से पहले आराम देने के लिए था । आई श्रीवास्तव ने कहा, जैसे कि उन्होंने विष्णु की बात सुन ली हो, जल्दी ही कक्षा समाप्त हो गई तो यहाँ मुगल साम्राज्य समाप्त होता है । इस व्यवसाय में मैं अकेला व्यक्ति हूँ जो पूरे मुगल साम्राज्य को एक घंटे में कवर कर सकता है । आई श्रीवास्तव उन्हें गर्वीले स्वर में कहा और बाहर चले गए तो अधिकारिक रूप से शिक्षण अब एक व्यवसाय बन गया है । विष्णु ने दुःख के साथ अपने कंधे उसका आते हुए कहा, उनकी अगली कक्षा अर्थशास्त्र की थी जो गीता यादव पढाती थी । उनकी कक्षा में प्रवेश करते ही गंभीर सन्नाटा छा गया । शुक्रवार आपका सामान्य अध्ययन का पहला टेस्ट होगा और मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सबको याद होगा कि जो लोग पहले तीन टेस्टों में से दो में चालीस प्रतिशत से कम स्कोर करेंगे उन्हें कोचिंग सेंटर से हटा दिया जाएगा । जी मेम पूरी कक्षा ने एक साथ सिर हिलाया । आज से आठ महीनों के बाद आप सब अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा लिख रहे होंगे । इसलिए मैं उस की तैयारी में आपके जीवन के सबसे कडे प्रयास की अपेक्षा करती हूँ । यहाँ वास्तव में मेरे जीवन की सबसे बडी परीक्षा है और इसके आगे कोई जीवन नहीं है । विष्णु ने अपने आगे बैठे एक लडके को बुदबुदाते सुना पांच पूरे जोश के साथ आगे बढ रहा था । हालांकि पूरी कक्षा में एक तनाव और दबाव की भावना प्रबलता से व्याप्त हो गई थी । जल्दी ही लेक्चर समाप्त हो गया । हाई विष्णु इतने समय बाद तुम्हें देखकर अच्छा लगा । वे कक्षा से निकल रहे थे तो दिप्ती ने कहा हाई देती मैंने तो मैं यहाँ देखने की आशा नहीं की थी । विष्णु ने अश्चर्य से कहा यह बात तो मुझे तुमसे कहना चाहिए । बैकबेंचर स्कूल में तुम्हें पढाई से कोई मतलब नहीं था और अब देखो हमेशा आखिरी वाली बेंच पर बैठकर हस्ते रहते थे । मुझे सच में हैरानी हुई तो मैं यहाँ ऐसे गंभीर और समर्पित वातावरण में देख कर मुझे यकीन है तुम्हारे मॉम डेड में इस क्लास में आने के लिए तो मैं मजबूर किया होगा । तुम्हारे याददाश्त अच्छे देती है, पूरी जिंदगी टॉपर रही हूँ । याददाश्त तो अच्छी होनी है हूँ तो मैं कोई नोट्स वगैरह की जरूरत हो तो बताना मिलते हैं । वे सडक पर पहुंचे तो विष्णु मुस्कराया कहाँ मिलते हैं? आखिर हम फिर से क्लासमेट है । एक घंटे बाद विष्णु अपने घर के अंदर प्रवेश कर रहा था कि उसका फोन बजने लगा । तो लगता है अब तुम फिर से दीप्ती के अच्छे दोस्त बन गए हो क्या? तो शालिनी साडियां बीतने के साथ समय बदल गया है । एक के बाद एक संचार के नए नए तरीके उभर कर आ गए हैं । फिर भी आदमी के पास चाहे कितने ही संचार के साधन है, सोशल मीडिया तक पहुंच हो, लडकियों के वर्ग ऍम उसे कहीं बात को कोई नहीं हरा सकता । विश्व बोला यह बहुत अच्छा मजाक है । क्या है मजाक? जो भी तुम कह रहे हो, वहाँ तुम थे जिसने उस से बात की और अब तो स्मार्ट बन रहे हो हूँ । अच्छा और क्या ऐसा लग रहा है कि तुमने कोचिंग सेंटर में दाखिला सिर्फ उस से मिलने के लिए लिया है । आगे तो मैं पता चल गया कि मैं एक नए कोचिंग सेंटर में जाने लगा हूँ । दीप्ति का शुक्रिया । देखो तुम अभी कैसे बात कर रहे हो और कल रात कैसे बात कर रहे थे । एक ग्राहक सेवा अधिकारी की तरह तुम भी तुम भी ऐसे बात कर रही थी जैसे किसी स्पोकन इंग्लिश कोर्स के लिए आरंभिक भाषण दे रही हो । विष्णु ने पलट कर जवाब दिया तो अब क्या? रितिका ने पूछा अब क्या? कुछ नहीं बस मैं अपनी छोटी से व्यक्तिगत जगह में रह रहा हूँ और अपने सपने तक पहुंचने की पूरी कोशिश कर रहा हूँ और कुछ नहीं । मैं इसके साथ जुडी किसी और कहानी, पटकथा या संवाद के न तो पक्ष में हूँ न विरूद्ध । दूसरी ओर केवल चुप्पी थी और वहाँ सिर्फ तुम्हारी और उसके साथ हुई तुम्हारी लडाई की वजह से था की मुझे उससे बात करना बंद करना पडा । सहयोग से वहाँ उसी कोचिंग सेंटर में पढ रही है जिसमें मैं पढ रहा हूँ । यहाँ भी मुझे आज मालूम पडा उसे वहाँ से जाते देखा और थोडी बहुत बात कर ली । बस ये हमने बहुत लंबे समय बाद इतनी बात की है । एक बार फिर दीप्ती को शुक्रिया । मुझे कुछ काम है । चलो बाय विष्णु ने साली नहीं के जवाब का इंतजार किए बिना फोन काट दिया । वहाँ अभी भी सोच रहा था कि कैसे पुराने दोस्तों से बात करने की छोटी सी खबर इतनी जल्दी उसकी गर्लफ्रेंड पहुँच गई । वास्तव में विष्णु ने अगले कुछ मिनट गम्भीरता से अपनी जेब में इस बाइक अहमियत किसी ट्रैकिंग डिवाइस की तलाश में बिताए । लडकियों के बाद जीटॉक से ज्यादा तेजी से सफर करती है । उसने निष्कर्ष निकाला सुबह ग्यारह बजे थे । विष्णु अपनी किताबें लेकर बैठा था, लेकिन आज जाने क्यों उसका मन नहीं लग रहा था । उनका पहला आकलन टेस्ट अगले दिन के लिए निर्धारित था । विश्व दोपहर में अपने दोस्तो, अशोक और विनोद से मिलने जाने का फैसला किया । वे अशोक पैराडाइज में बैठे थे और पढाई में पूरी तरह डूबे थे । चाहे हम कितना भी पढ लें, कुछ न कुछ छूट ही जाएगा । अशोक खुल रहा था हाँ, हम हमेशा वो छोटी छोटी बेवकूफियां कर देते हैं जो हमें नेगेटिव मार्किंग की ओर ले जाती है । विनोद ने शर्मिंदा होते हुए सहमती जताई, हाँ बिल्कुल सही । विष्णु ने अंदर आते हुए कहा, इसलिए मैं हमेशा अपने प्रीलिमिनरी एग्जाम की तुलना टेस्ट क्रिकेट में बैटिंग करता हूँ । विष्णु बोला कैसे, कैसे कैसे विनोद और अशोक उत्सुकता से भर गए टेस्ट क्रिकेट में एक बैट्समेन को सफल होने के लिए इस बात का आकलन करना सीख नहीं की आवश्यकता होती है कि उसे कौन से बॉल को मारना है और कौन से बॉल को छोडना है । यदि वहाँ अनावश्यक रूप से अच्छे बॉल को छोडेगा तो आउट हो जाएगा । यही बात हमारे प्रिलिम्स पर भी लागू होती है । हमें बहुत से प्रश्न मिलते हैं, कुछ के जवाब में आते हैं । कई के जवाब शायद नहीं आती । लेकिन अगर हम प्रश्नों की कठिनाई का आकलन करने की आदत डालने और उन्हें प्रश्नों के उत्तर ली है, जो हमें आते हैं और मुश्किल प्रश्नों को छोड देते हैं तो हम निश्चित रूप से सफल होंगे । बहुत अच्छी बात है, वास्तव में समझ में आती है । विनोद ने कहा, हाँ, लेकिन सिर्फ एक बात है की अच्छी संख्या में प्रश्नों के उत्तर देने के लिए हमें कम से कम न्यूनतम जानकारी होनी चाहिए । अशोक ने अपनी विशिष्ट मुस्कान के साथ कहा, फिर तीनों अपने अपने किताबों के साथ बैठ गए और वहां पूरी तरह से शांति छा गई । तुम्हारे अंदर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के लिए एक स्वाभाविक रुझान है । विशेष रूप से यह देखते हुए कि तुम एक इंजीनियर रह चुके हो और पिछली बार तुम्हें वैकल्पिक विषय के रूप में मैकेनिकल इंजीनियरिंग लेकर परीक्षा दी थी । विनोद ने टिप्पणी की, हाँ, वहाँ मेरी गलती थी । जहाँ तक सिविल सर्विस एग्जाम के बाद है । योजना बनाना और सही विकल्प का चुनाव करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि एग्जाम के लिए पढाई करना । शुक्र है मुझे मेरे गलती का एहसास हो गया और अब मैं सही रास्ते पर हूँ । मैंने उस विषय का चुनाव के आज जो मुझे पसंद है, बजाये एक विषय केवल इसलिए चुनने के क्योंकि मैंने उसमें ग्रेजुएशन किया था । विष्णु ने जवाब दिया, सही बात है अपनी खुद की कमियों को पहचानने और फिर उन्हें सुधारने की क्षमता आपको सफलता की राह पर ले जाती है । विनोद ने कहा, तुम दोनों ज्ञान की ये सारी बातें फाइनल एग्जाम पास कर लेने के बाद कर लेना । अभी के लिए वास्तविकता में आ जाओ और कल की तैयारी करो । पढाई में डूबे अशोक ने कहा, बाद में कृष्णा टी स्टाल पर अदरक वाली चाय पीने के बाद विष्णु घर चला गया । यहाँ उनकी पहली कक्षा मूल्यांकन परीक्षा का दिन था । सुबह उनके वैकल्पिक विषयों की परीक्षा थी और दोपहर में सामान्य अध्ययन का टेस्ट लिया गया था । वहाँ एक और पहली बेंच वाले थे नासा, मदन, टॉपर, दीप्ती, कार्बन कॉपी मुहित और अन्य जो यह आभास दे रहे थे कि केवल वही परीक्षाओं को उतरन करने में सक्षम थे । फिर दूसरी बंदी थी जिसमें पहली पंक्ति में बैठने वाले और टॉपर बनने की चाहत रखने वाले उम्मीदवार थे । उसके बाद पूरी तरह से उदासीन उम्मीदवारों का एक छोटा सा समूह था जिन्होंने केवल माता पिता के दबाव के कारण ग्रेट माइंड्स में दाखिला लिया था । फिर एक और समूह था जिनके मन में इच्छा थी लेकिन उसके लिए कभी काम नहीं किया था । वे दिन भर कल्पना करते थे कि वे डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर बन जाएंगे और लाल बत्ती वाली वीआईपी गाडियों में सूट पहनकर घूमेंगे । लेकिन उन्होंने इस सपने को पूरा करने के लिए कभी गंभीरता से काम नहीं किया था । प्रभु इस समूह का हिस्सा था । वह कक्षा में कोने में बैठा था और खिडकी से झांककर बगल की रक्षा में एक पेपर को देख रहा था । वहाँ बिना सोचे उस व्यक्ति के पेपर से निकल कर रहा था और उसे अहसास भी नहीं था कि वह सुपर बेस्ट कोचिंग सेंटर के बो गोल का टेस्ट दे रहे छात्र के पेपर की निकल कर रहा था । प्रभु केवल अंतिम परिणाम चाहता था प्रतिष्ठित आई । एस । में प्रवेश पाना लेकिन अपने सपने को हासिल कैसे करना है, इस पर उसमें कभी ध्यान नहीं दिया था । केवल प्रभु ही नहीं था, वहाँ बहुत सारे प्रभूत है । संख्या के संदर्भ में प्रभु जैसे उम्मीदवार शायद विनोद जैसे उम्मीदवारों के बाद दूसरे स्थान पर थे । अत्यधिक परिश्रम में और अत्यधिक हताश उम्मीदवार जो सिविल सेवा परीक्षाओं को बहुत गंभीरता से लेते थे, शायद जीवन से भी अधिक गंभीरता से । वास्तव में एक बेहद चिंतित विनोद परीक्षा के पहले घंटे में अपने दसों उंगलियों के नाखून जब आ चुका था, जिसे देखकर विष्णु ने अपना बायां हाथ अपनी जेब के अंदर रख लिया । जहाँ तक विष्णु की बात थी, वह अंतिम पंक्ति में विनोद के साथ बैठा था और ऐसे लिख रहा था जैसा यहाँ उसके जीवन की कई परीक्षाओं में से एक थी । विष्णु एक बार में एक कदम ले रहा था और पर्याप्त आत्मविश्वास के साथ तैयारी की पूरी प्रक्रिया का आनंद उठा रहा था । हालांकि वह प्रीलिम्स में आपने पिछले प्रयास में असफल रहा था । इस प्रकार जिस तरीके से उम्मीदवार अपनी पहली मूल्यांकन परीक्षा तक पहुंचे उस से काफी हद तक उनके मानसिक ढांचे और चुनौतियों और जीवन के प्रति उनके रवैये का पता चल रहा था । कुछ ही देर में टेस्ट समाप्त हो गया । मदन और मोहित ने अपने उत्तर मिलने भी शुरू कर दिए थे । दीप्ती ने भी वास्तव में दीप्ती ने अपने पडोसी से बहस करना भी शुरू कर दिया था जिस पर वहाँ अपने उत्तर नकल करने का आरोप लगा रहे थे । अशोक की शानदार प्रेम निवेदन की कहानियों से प्रेरित होकर विनोद ने उस दिन नीना को अपने प्रेम का इजहार करने का फैसला किया । इसलिए अशोक और विनोद मीना की तलाश में सुपर बेस्ट कोचिंग सेंटर चले गए । गुडलक विनोद विश्व शुभकामनाएं दी । गुडलक किसलिए? अशोक ने पूछा नहीं ना से प्रेम निवेदन के लिए यहाँ परंपरा या एक साल से निभा रहा है । वहाँ जाता है, उसे घूमता है और वापस आ जाता है । मुझे यकीन है आज भी ऐसा ही होगा । यहाँ तक कि ऐसे घूमने के लिए भी महामहिम विनोद को साथ चाहिए । अशोक बोला तीनों अच्छे लगे और बाहर निकल आए । विष्णु ग्रेड माइंड से बाहर निकला और सडक पर चलने लगा । जब उसे परिचित आवाज सुनाई दी । लिफ्ट चाहिए । अपनी स्कूटी पैर पर बैठी शालिनी ने पूछा क्या हुआ? मुझे लगा टेस्ट खत्म हो चुका था । विष्णु बुदबुदाया सौरी विष्णु मैंने उस दिन फोन पर तुम से बहुत रूखेपन से बात की तो मुझे किसी और से ज्यादा जानते हो । हाँ यही तो समस्या है । मैं तुम्हें अच्छी तरह जानता हूँ । टेस्ट कैसा हुआ? हमेशा की तरह ठीक था । बढिया तो तुम्हारे ठीक था का मतलब है तो तुमने अच्छा किया । विष्णु मुस्कराया । शालिनी ने भी जवाब में अपनी चिरपरिचित मुस्कान दी । वह उसकी स्कूटी पर बैठ गया । तो अब कहाँ चले? शालिनी ने पूछा आपने हमेशा वाली चिटचैट की जगह विश्व में जवाब दिया । बीस मिनट की ड्राइव के बाद वे अपने हमेशा को मिलने के स्थान पर पहुंचे, जो शहर के सबसे व्यस्त ढांचे के नीचे था । हजरतगंज चौराहा, जिसके ऊपर एक विशाल फ्लाईओवर था, हजरतगंज चौराहे को हजारों वाहन पार करते थे । फिर भी विष्णु और शालिनी ने फ्लाईओवर के नीचे एक एकांत स्थान ढूंढ लिया था, जहाँ पे एक दूसरे के साथ एक क्लासिक शहरी पल का आनंद ले सकते थे । हजरतगंज फ्लाईओवर के नीचे का छोटा सा वॉकवे दोनों अंडर ब्रिज सडकों के नीचे जो दो वर्षों से अधिक समय से निर्माणाधीन थी । अब उनके अपने स्थान में प्रवेश करने का मार्ग प्रशस्त करता था । वे साइड रेल में मौजूद अंतर के माध्यम से सडक से उतरकर वहाँ पहुंच गए । वे स्कूटी से कूद गए और निर्माणाधीन दीवार पर बैठ गए । कुछ देर में वे खुशी से एक दूसरे को देख रहे थे जबकि उनके सिरों के ऊपर पूरा शहर हलचल कर रहा था । तो ऑफिस कैसा चल रहा है? विष्णु ने पूछा हमेशा की तरह मैं बहुत गोपी पर चिल्लाता है । गोपी बद्री पर से लाता है । बद्री हम लोगों पर चिल्लाता है । लक्ष्य लक्ष्य और लक्ष्य हाँ, मुझे तुम्हारे ऑफिस की इकोलॉजिकल फुटबॅाल पारिस्थिति खाद्य श्रृंखला समझ में आ रही है । गेंद साहब को खाता है । साहब मेंढको खाता है है । शालिनी हसने लगी । इस बीच चाय वाला निर्माण श्रमिकों को चाय देने आया । विष्णु जाकर उससे दो कप चाय ले आया । अगले एक घंटे तक दोनों दीवार के नीचे खुशी खुशी चाय की चुस्कियां लेते और बातें करते बैठे रहे । आखिरकार उन्हें किसी भी और चीज से ज्यादा एक दूसरे के साथ रहने में आनंद आता था । जल्दी ही अंधेरा हो गया और विष्णु को उसके घर छोडने के बाद शालीनी अपने कमरे में चली गई ।

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‘कहानी एक आई.ए.एस. परीक्षा की’ में पच्चीस साल का विष्णु अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता और भ्रम से बाहर निकलने तथा शालिनी को शादी के लिए मनाने के तरीके ढूँढ़ता है। हालात तब और भी दिलचस्प, हास्यास्पद और भावुक हो जाते हैं, जब विष्णु ‘माउंट IAS’ पर विजय पाने निकल पड़ता है। अपनी पढ़ाई और अपने प्यार को जब वह सुरक्षित दिशा में ले जा रहा होता है, तब उसे IAS कोचिंग सेंटरों की दुनिया में छिपने का ठिकाना मिल जाता है। क्या शालिनी अपने सबसे अच्छे दोस्त के प्यार को कबूल करेगी? क्या विष्णु असफलता की अपनी भावना से उबर पाएगा? क्या हमेशा के लिए सबकुछ ठीक हो जाएगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
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