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Part 8

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लंबे कोमा से जागने के बाद दमन को पता चलता है कि वह एक जबरदस्त कार हादसे का शिकार हुआ था, जब उसके साथ एक लड़की भी थी, जो उसे मरा हुआ समझकर हादसे के फौरन बाद वहां से गायब हो गई। अजीब बात है कि उस लड़की का धुंधला चेहरा, सम्मोहित करनेवाली आंखें और उसका नाम श्रेयसी दमन को अब तक याद है, जबकि उसकी याददाश्‍त जा चुकी है। उसने सपने में देखी अपनी और श्रेयसी की कहानियों को जोड़ना शुरू किया, और फिर उसे अपने जबरदस्त लोकप्रिय ब्लॉग में ढाल दिया। कुछ समय बाद दमन अपने ब्लॉग को एक उपन्यास के तौर पर प्रकाशित करने का फैसला करता है। तब एक खूबसूरत लड़की, जो श्रेयसी होने का दावा करती थी, दमन का पीछा करने लगी और धमकाया कि दमन को अपना जमीर बेचने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी तथा अपना बदला लेने के लिए वह किसी भी हद तक जाएगी। दमन उससे निपटता, इससे पहले उसे मालूम करना था : क्या वह सच में वही है, जैसा दावा कर रही है? उसे अब उससे क्या चाहिए? अगर उस लड़की की बात नहीं मानी तो उसके साथ क्या होगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी। Author - Durjoy Dutta
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ऍम वो जयंती रघुनाथ ने एक ही सप्ताह में सभी तैयारियां कर ली हूँ । सोशल मीडिया के लिए वोस्ट मीडिया इंटरव्यू कार्यक्रम स्थल पर बैनर और अखबार के लिए छोटे विज्ञापन डम ने अपनी जलती हुई आंखे बंद किया और बिस्तर पर लेट किया तो वहाँ पर पूरी रात रखा था और उसके सुबह का एक बडा भाग पाठकों की निजी मेल का उत्तर देने में गुजरा तो एक सप्ताह की शुरुआत में अपनी के कहने पर वे दिल्ली कि ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर पर मेरे सपनों की लडकी पुस्तके लोकार्पण कार्यक्रम में जाने के लिए तैयार हुआ था । वो आप भी नहीं कहा था तो मैं वहाँ जरूर जाना है । लोगों को तुम्हारी के दम और दोनों तुम मी पसंद आये । वो केवल कुछ ही लोगों का पुरानी शहर ही पसंद है । जयंती कह रही थी कि पुस्तक लोकार्पण में जाने से किताब की बिक्री मैं सहायता होगी और तुम जानते हो अपनी ने उसकी पैसों की तंगी का जिक्र करने के बजाय अपने कुमार हो टोका, उसके गाल पर हराया और जंबल ले लिया । अभी अभी कोई किताब को बुरा कहेगा तो उसे ठीक करने के लिए मैं वहाँ मौजूद होंगे । ठीक है लेकिन इस समय तो मैं थोडा आराम देती हूँ ये कहते हुए उसने अपना हाथ उसकी जीत के अंदर डाल दिया । इसके बाद उस रात के बारे में बता नहीं ओवर क्या रहे जाता है । उसमें कुछ देर अच्छी नींद नहीं ॅ तब तक अपनी ऑफिस जा चुकी थी और उसके फोन पर उसकी माँ ही तो टाॅल पडी थी । उन्हें साथ ही लंच करना था तो मैं जल्दी से उठा और नहाने के बाद साफ टीशर्ट पहनकर अपने घर की ओर रवाना हो गया । माता पिता के घर जब उसके जवान पर चढ गया था सिर्फ छह हाँ पहले तक ये उसका भी घाटा हूँ । उसका ॅ ऍम मिनट ही ही दूरी बढ था पर काफी देर तक दरवाजे के बाहर खडा रहा हूँ । उसकी मान्यता दरवाजा खोला और जैसे ही उसने घर में प्रवेश किया वहाँ पकाए गए भोजन और पैसा की असहमती की गंध उस तक पहुंच गई हूँ तो ऐसे खेलते देखोगे यहाँ है उसकी माँ ने कहा और उसके गालों को चूम लिया तुमने सुबह से कुछ नहीं खाया ना । उसकी माँ ने पुछ को को पुकारा जोकि दमन की बहन थी । उसकी उम्र तेरह साल थी हैं । दौडती हुई आई और दमन के गले से लग गई । उस नंदवान से कहा कि घर में उसकी कमी गलती है और उसे उत्तर ना देने के लिए झटका मैं देख रहा था कुछ को तो ज्यादा तो कहने का मतलब ये कि जे के रोलिंग और जी आर आर मार्टिन कई दिनों तक अपने फोन को हार नहीं लगाते । बच्चा ठीक है मगर मुझे माफ कर दो । कहते हुए उसने पूछ के घायल कीजिये और कुछ कोने उसके हाथों को हटा दिया हूँ । तो आप कोई बच्ची नहीं थी जैसा कि दमन मानता था । क्या तुमने मेरी किताब पढी? उसको ने अपना सिर हिलाया तो मुझे पडने को मना किया था । मेरे कुछ मित्रों ने पडी है । वो कह रहे थे की किताब बची है । उन्होंने तो फेसबुक पर मैसेज भी भेजे थे और क्या था लेकिन तुम ने उन्हें अब तक कोई उत्तर नहीं दिया । मुझे समय नहीं मिला तो मेरा भाई बडा आदमी बन गए है । हमारे अभी आई है । ऐसे नहीं नहीं । उसकी माँ ने उसे डाइनिंग टेबल पर बैठने को कहा । खाना ठंडा हो रहा था । दमन के विकास सोफे पर से उठे और डाइनिंग टेबल पर बैठ गए । उनकी नजरें अब भी अखबार बढी थी की थी कुछ को और दमन भी बैठ गई । अगले दस मिनट तक ऍम खाना खाते रहेंगे सकता हूँ । मेरी पुस्तक का लोकार्पण हैं । मैं चाहता हूँ कि आप सभी लोग आएंगे तो जानती हो कुछ । मैंने कहा उसने अपनी माँ की ओर देखा । मैं चली चाहूँ क्या फॅमिली फॅर जाओ मैं अच्छा लगेगा । अरे अपने दोस्तों का भी लेते हैं तो हमने कहा बिता जी ने अखबार टेबल पर रख दिया तो कोई जरूरत नहीं । ऍम तो तुम्हारी परीक्षा है तो मैं अपनी ट्यूशन नहीं छोडनी चाहिए । ॅ सिर्फ एक दिन की तो बात है । कुछ तो उन्हें विरोध किया । धवन के कटाने पहले पाँच को बोल रहा हूँ । उसके बाद अमन को नहीं जाएगी । ठीक है जैसा आप चाहे तो लेकिन ये कैसे बात करता है । अपने पिता से बात करने का क्या है? सही तरीका है । अरे आखिर हम सभी ने तुम्हारे लिए ही तो किताब पढी । उसकी माँ के घंटे जुड गए । घट आशा में वे भी प्लेट की और देखने लगी और बातचीत के खत्म होने का इंतजार करने लगी । केवल एक ही दिन की तो बात है आप अतार्किक हो रहे हैं और आप ये बात अच्छी तरह से जानते हैं । धवन नहीं रहा हूँ । मैं तो तर्क कर रहा हूँ तो कह रहा हूँ ये देखो तुम्हारा लडका क्या क्या कह रहा है । इसी बकवास के लिए तुमने अपनी नौकरी छोडी थी । फिर तुमने महंगी कार खरीद ली जिसकी तो मैं कोई जरूरत नहीं थी और आप तो मैं इसमें अपनी बहन को खीच रहा हूँ और मुझे अटार की कह रहे हो । मैं तो मैं ऐसा कटाई करने नहीं दूंगा की चौतीना आपको मेरी कार से क्या समस्या ऍम बोला दमन नहीं सुना था की जिस दिन उसकी नई कार की डिलीवरी हुई थी उस दिन बाबा अपनी बैगनार कार के टायर लेकर उसकी नई कार को तोडने के लिए घर से निकल गए थे । कुछ और उसकी माँ ने बडी मुश्किल से समझाया था । दुर्घटना के बावजूद पिता और पुत्र के बीच दूरियां बनी रहीं । उसके तथा का मानना था की दमन को अपना नया जीवन सहमत हूँ और परंपरागत रूप से व्यतीत करना चाहिए जबकि कमल अपने जीवन को बिल्कुल व्यर्थ नहीं जाने देना चाहता था । उधर घटना और अंतहीन थेरेपी के बाद उसके पिता के कुछ अपने दुस्वप्न अत है बाबा मेरी किताब हिट है भारत जगह अखबारों में इसकी चर्चा है । अगर आपने अखबार में छपने वाली बकवास के साथ इस किताब के बारे में छपा समाचार भी पढा होता तो बेहतर होता दो । क्या आज ये समाचार था? कल नहीं होगा? इन अखबारों को बैंक में जमा कर दो और उनसे पैसे देने को कहूँ । ॅ तो मैं पता है की तुम्हारी समस्या क्या है? यह है कि तुम अपने जीवन को बहुत हल्के में लेते हो । तुम्हारे कमरे में इसलिए लगता है खाने में कोई कमी नहीं है और रहने के लिए एक से बढकर एक कपडे हैं । इसीलिए तो मैं हर चीज को हल्के में लेते हो तो अपने जीवन को ही हल्के में लेते हो । धवन ने अपनी आंखें घुमाई देखा । दमन की माँ की ओर देखते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा ही करता है हम लोगों ने इसके लिए क्या क्या नहीं किया । और इसमें तो धवन अपने मन ही मन में बताया जो घटना में मारे जाना चाहिए था वो दमन के पिता ने मेज पर से जोर से हाथ पटका । इससे पहले की धवन की माँ कुछ बीच बचाव कर पार्टी दमन के पता नहीं झापड रसीद कर दिया तो कुर्सी से गिरने के कारण उसके मुँह खोला गया । उसने अपने गाल पर हाथ फेरा उसकी आंखों से आंसू बहने के लिए और कान लाल हो गए । उसके पिता उसे घोलते रहे । दमन कोठा और कमरे से बाहर चला गया । यही ऍसे बचा सकता था । मैं अपने पुराने कमरे में चला गया और बिस्तर पर लेटकर अपने आंसू पहुंचने लगा होना नहीं चाहिए था मेरे होने में उनकी जीटॅाक क्यूँ पिछली बार उसके पिता ने उसे उस समय पीता था जब उसने बताया था कि लेखक बनने के लिए उसने नौकरी छोड दी है । बाबा ने उसे इस बेवकूफी के लिए घर से निकल जाने को कह दिया था । होता घर छोडकर चला गया था । किसी और वजह से नहीं बल्कि इसी अक्खडपन के चलते हैं । उसने महंगी सी कार खरीदी । उनके रिश्ते की यही सच्चाई थी । एक क्रोधी वह आक्रामक था और एक जुनूनी विद्रोही पत्र तमिल था । वैसे ऐसा नहीं होना चाहिए था । वो तो हमेशा उनसे क्षेत्र हैं । क्यों बात करते हो दरवाजे के पास खडे पूछ को को देखने के लिए थोडा वो दरवाजा बंद करते हुए अंदर आ गई । मैं फॅालो उसको वो सठिया गए तो खुद पर नियंत्रण क्यों नहीं रख पाते । तो ये क्यों नहीं समझते कि मैं वो नहीं करना चाहता तो जानती हो मुझे क्या करना चाहिए? मुझे जाकर अपनी जॉब ज्वाइन करनी चाहिए और एक सोसाइड नोट लिखना चाहिए कि तनाव और अप्रसन्नता की वजह से मैं मौत को गले लगा रहा हूँ और उसके बाद अपनी तेज रफ्तार कार किसी काम में से टकरा देना चाहिए और मेरी कोशिश होनी चाहिए कि इस बाहर में सही सलामत जिंदा नाम बच्चों है तभी होने सबका मिलेगा तो बाहर मत कहना और तुम कोई पहली बार कार नहीं चला रहे थे । धवन ने उसकी बात कार्ड भी उसने त्योरियाँ चढा ली हूँ । बात हमेशा याद रखना हूँ । उसने गंभीरतापूर्वक कहा मैं जानता हूँ ऍर नहीं था ना तो तुम थे और यदि में कार चला रहा होता तो मैं पूरी गाडी ही तोड डालता हूँ । खैर क्या तो माँ अपनी ट्यूशन नहीं छोड सकती । मैं व्यवस्था के लोकार्पण कार्यक्रम में ले जाऊंगा । बाबा को पता भी नहीं चलेगा । बाबा को यदि पता चल जाएगा तो मेरी खाली ही चलेंगे । तो तुम्हारे जाने के बाद उन्होंने घर को कैदखाने में तब्दील कर दिया हूँ । तो मेरे पैरों में बडी बेटी नहीं दिखाई थी थी । अगर उन्हें पता चल गया कि मैं हमारे घर में बैठी हूँ तो बहुत गुस्सा करेंगे । सारा जैसे कोई इसमें घटिया कहाँ चला रहा हूँ? सामान संभालो । दादा ठीक है, ठीक है मुझे माफ करो तो मैं कार्यक्रम का वीडियो भेज दूंगा । ठीक है वो मुझे करती है तो मुझे वीडियोकाॅॅॅन मुझे अपने ऍसे मिलने के लिए पहले से समय लेना पडेगा । भरे शर्मिंदा ना करूँ ऍम मेरे दोस्त इतने अच्छे राज में है कि मैं तुम्हारी हो । यहाँ तक कि मुझे मेट्रो में भी तुम्हारा एक फॅमिली थी बहुत समय की पर मुझे याद आया कि आजकल तो अपनी को डेट कर रहे हो और मैंने उसका फोन नंबर भी नहीं लिया । तो पूरी तरह तुम्हारे प्रेम में पागल थी तो मुझे ऐसे क्यों देख रहा हूँ हूँ झूठ नहीं बोल रही हूँ । आपको बताया था क्या तुमने उसे किताब के साथ देखा था? नहीं उसने मुझे पहचाना अपने दोस्तों के साथ ही और वह मेरे पास आकर बात करने लगी । उसने कहा कि वह मुझे इसलिए पहचानती है क्योंकि तुम ने हम लोगों की तस्वीर पोस्ट की थी फिर करो फॅारेन तो कितना प्रभावित हुए ॅ तो मैं क्यों ना मुस्कुराओ जाओ या करिए बात बाबा को बताओ कि उस लडकी ने किताब के बारे में क्या कहा? अरे क्या मुझे सहमत हूँ कि तुम झूठ बोल रहे हो? मैं सोचा भी छूट नहीं बोल रही ऍन नहीं थी । हमने त्योरियाँ चढा ली तो वो किसकी फैन थी? हैं । मेरे द्वारा लिखी गई पोस्टों की ठीक है । दे छोटा मत करो । दादा तुम्हारी बहुत बडी फॅमिली मैं तो बारे में बात करना चाहती थी । मेरे साथ घंटे तक आई थी और मुझे यहाँ तक बोली कि वह तुमसे उस तक के लिए माफ करने को तैयार है । क्या होती? कौन है? मुझे किसी बात के लिए माफ करने वाली भरे उसने किताब खरीदी और पडेगी । इसमें मेरी कोई गलती नहीं धमन बोला । उसको ये देखकर अचरज में थी कि दमन ने इस बात को दिल पर ले लिया था । मैं उसके पास आकर बैठ गईं । दमन ने उसे गले से लगा लिया । तब जाकर उसे महसूस हुआ कि वे अपनी झगडालू और दे । अकल बहन की कितनी कमी महसूस करता है, उसका कोई नाम था हूँ । मैंने पूछा नहीं ॅ जानती है । मुझे जानती हैं कैसे? उसने बताया था कि तो मुझे गोवा में लेते बुझ उन्हें धीरे से कहा हूँ क्योंकि वो गोवा की बात करने से बचना चाहती थी । धमान के घर में इसके बारे में अक्सर बात होती रहती थी । दमन ने त्योरियाँ चढा ली । गोवा के बारे में दमन की स्मृति कुछ धन लिखी थी गोवा ॅ हाँ, उसने यही कहा था । मुझे तो ऐसा याद नहीं आ रहा कि मैं वहाँ किसी लडके से मिला था । हमने कहा उसको उन्हें दमन की । वहाँ को अलग करते हुए था तो किसी से तो मिले थे । इसी के अलावा हम अपने घर में उसका नाम नहीं लेते । ऍम भी सब लोगों की तरह बात मत करना । काम ने विरोध करते हुए कहा चाहे जो भी हो मैं उसका नाम नहीं लूंगा । लेकिन मैं तो मैं कुछ बताना चाहूंगा । कुछ को तो यहाँ देना मैं बाबा वर्मा तो हीरो स्कूल जाते समय क्या कहाँ करते थे । आप परिचितों से मिठाई मत लेना । यदि कोई कहे कि उसे तुम्हारे मम्मी पापा ने भेजा है तो उस पर यकीन मत करना । किसी के साथ चली मत जाना । ऍम उनकी आंखों में मत देखना । उनसे बात ही मत करना । मैं जानता हूँ कि तुम तेरह साल की हो गई हो लेकिन फिर भी मैं तो मैं याद दिलाना चाहूंगा । यदि कोई भी कोई भी उस लडकी के तहत हमारे पास आए । अगर बात करें तो उसे एक या दो वाक्य से अधिक बात मत करना । उसे धन्यवाद करूँ और आगे बढ जाता हूँ । तो मेरी बात सुन नहीं हूँ । मैं कोई बच्ची नहीं हूँ, यहाँ नहीं हूँ लेकिन तुम काफी देर तक एक अजनबी से बात करती रही हो तो मेट्रो स्टेशन से यहाँ तक की थोडी जानती हूँ । कोई कुछ भी कर सकता था । मेरे कहने का मतलब यही है कि तुम अजनबियों से बात नहीं करो किया और तुम्हारी शंकाओं के बावजूद तुम्हें किसी नदी से लिपटी तमन्ने, अपनी आंखें, दवाई तो मच्छर सीखो और वैसा न करो जैसा मैंने किया । तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और उनकी माँ लडाई उन्होंने कुछ कुछ खाना खाने को कहा और अगर पिताजी का को चाहिए तो देने को कहा हूँ । उसको उन्हें हामी भरी और चली गई । नाम बनने आते समय अपनी माँ के पैरों को घूरकर देखा तो अपने पिता से बहस करना बंद कर ॅ । इसलिए मैं नहीं जानती हूँ कि इस की गलती थी । क्या मैं इस घर में एक दिन भी शांति से नहीं रह सकती? मुझे माफ कर दीजिए उस की माने से नहलाया और साडी के छोर से अपने आंसू पहुँचे इतने बडे प्यार से दमन के चेहरे पर हाथ फेरते हुए उसके माथे को जो मुस्कुराते हुए उसने पूछा खास नहीं कैसी है और उसकी जान के ही चल रही है । ठीक है क्या? तो मुझ से हम लोगों को नहीं मिलते होंगे । यदि तोमर वो अगर ऐसा है तो मुझे तुम्हारी चिंता कम होगी । जब सही समय आएगा तो मैं तो मैं अवश्य में जाऊंगा तो अपने काम में व्यस्त रहती है तो मैं एक साल से उसके साथ रिलेशनशिप में हो और अब तक सही समय नहीं आया हूँ । ये क्या बताऊँ? मैं हाँ ठीक है, ठीक है तो ज्यादा सही जानते हूँ ठीक है मैं उसे जल्दी ही तुम से मिलना होगा क्योंकि उसकी माने से हराया । डाॅ । ऐसा नहीं हो सकता है कि तुम अपनी पुरानी जो भी करते रहो और लेखन भी करते हूँ । हमारे बाबा दमन नियति माँ घोलकर देखा और उसकी माँ ने अपने शब्द वापस ले लिए । दिन का बाकी समय दमन ने मुझको के साथ उन्हें खेलते हुए और बैगन भाजा खाते हुए गुजारा हमको उसने पुछ को उसकी कोचिंग पर छोडा और उसे बुस तक लोकार्पण का वीडियो भेजने का वायदा किया । उसने घर खेले रिक्शा लियां तभी उसका फोन बज उठा । ऍम फोन उठाया हूँ हो कोई उत्तर नहीं आया । दस सेकंड के बाद उसने कॉल कांडी और फोन दोबारा बजाओ ऍम हो

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लंबे कोमा से जागने के बाद दमन को पता चलता है कि वह एक जबरदस्त कार हादसे का शिकार हुआ था, जब उसके साथ एक लड़की भी थी, जो उसे मरा हुआ समझकर हादसे के फौरन बाद वहां से गायब हो गई। अजीब बात है कि उस लड़की का धुंधला चेहरा, सम्मोहित करनेवाली आंखें और उसका नाम श्रेयसी दमन को अब तक याद है, जबकि उसकी याददाश्‍त जा चुकी है। उसने सपने में देखी अपनी और श्रेयसी की कहानियों को जोड़ना शुरू किया, और फिर उसे अपने जबरदस्त लोकप्रिय ब्लॉग में ढाल दिया। कुछ समय बाद दमन अपने ब्लॉग को एक उपन्यास के तौर पर प्रकाशित करने का फैसला करता है। तब एक खूबसूरत लड़की, जो श्रेयसी होने का दावा करती थी, दमन का पीछा करने लगी और धमकाया कि दमन को अपना जमीर बेचने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी तथा अपना बदला लेने के लिए वह किसी भी हद तक जाएगी। दमन उससे निपटता, इससे पहले उसे मालूम करना था : क्या वह सच में वही है, जैसा दावा कर रही है? उसे अब उससे क्या चाहिए? अगर उस लड़की की बात नहीं मानी तो उसके साथ क्या होगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी। Author - Durjoy Dutta
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