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PART 6 (A)

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एक रहस्य भरी कहानी, सुनिए कैसे एक छोटी सी ताली, खतरों के ताले खोलती है writer: रमाकांत Script Writer : Mohil Author : Ramakant
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भाग है । करीब पंद्रह मिनट बाद खुश का जहाँ नाश्ता तैयार कर लाये पुष्पा पांच कलाम में दक्ष है बढ जाए के प्रति मेरे मन में कोई उठा नहीं हुआ तो हमारे मन से मैं चाहे पी गर्ब्याल ही रहा था कि अचानक मोबाइल बजट था वो मुझे जहाँ है बिजली का करेंट हो गया । मिस्टर संजय उधर से कडी आवाज आई । उसी का टेलीफोन था जिसका सोच रहा था यानी चंदा नहीं । उसने कहा ऍम है मुझे आपका या ज्यादा ठीक का हो तो आप की मिसेज का सन्देश में लिया । मैं इससे बेहतर जवाब नहीं दे सकता था । शायद पुष्पा ज्यादा अच्छी बात कर सकती हूँ । आप ही बात करेंगे की मिसेज मुझे बता दीजिए । जवाब कहना चाहते हैं । मैंने बडी मुश्किल से कहा ओके, जरा ध्यान से सुनिएगा का झंडा नहीं । नहीं कहा तो मुझे आपका यानी आपके मैसेज का प्रपोजल मंजूर नहीं और मैंने पहले जो ऑफर किया था उसे भी वापस लेता हूँ लेकिन ताली आपको देनी पडेगी । सुन लिया ना आपने? मैं आप का मतलब नहीं समझा । क्या तालियाँ जबरदस्ती ले लेंगे? उधर से चंदानी की आवाज आई हूँ । उसने गुस्से में फोन का चोंगा रख दिया तो लाइन कटने की क्लिक की आवाज मुझे ऐसी लगी जैसे मेरे ही दिमाग की कोई नस टूट गई हो । मेरा सिर संज्ञाशून्य हो गया । आखिर है जबरदस्ती ताली कैसे लेगा? क्या कर स्टेशन की दुर्घटना के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराते हुए पुलिस को खबर देगा, इस बारे में सोचना नहीं चाहता था । पर इसके सारे परिणाम मेरे दिमाग में एक साथ चक्कर काटने लगे हूँ । वो कटमा तबाही और कौन जाने जेल और अगर छूट गया तो नौकरी नहीं रह जाएगी । पुलिस केस में वह भी हत्या के मामले में फंसे आदमी को कोई नौकर नहीं रखता हूँ । लेकिन चंदानी ने जो किया वो है इससे भी कहीं भयानक और जाली माना था । पुछ बेहद घबराई हुई थी और मुझे देखते ही कटे पेड की तरह मेरे ऊपर गिर पडी है । बुरी तरह हो रही थी और उसकी हिचकियां बन गईं । छुट्टियों के बीच में उसने क्या कहा ये मुझे साफ समझ नहीं आया । सिर्फ एक शब्द समझ में आ सका । वो हो ऍम मेरा जल्दी बच्चे की तरह काम ऍम पीटी उषा । बातचीत होने लगी तो बताओ पुष्पा क्या हुआ? पाॅड मैंने दिल खडा करके पूछा । अपने ऊपर का वो रख पाना मुश्किल लगाया था । फॅमिली को कुछ कर दिया क्या उन्होंने उसे दिल की इस कर दी । बात को मानने के लिए तैयार नहीं होता था तो गलती से उसके स्कूल जाओ । खुश पानी क्यों के बीच बताया नजदीकी गाडियाँ कर चली गई ही उसमें नहीं थी । उस से दो घंटे पहले कोई औरत अपने साथ दिवाली गई तो ॅ उसके स्कूल । पता नहीं कौन? कल ही लिवा ले गए उसे । स्कूल हमारे घर से करीब दो किलोमीटर दूर पडता है ऑटो रिक्शा लेकर मैं जल्दी जल्दी स्कूल की ओर बढा । आठ मिनट में स्कूल पहुंच गया । अपने बच्चे और अध्यापिकाएं जा चुकी थी । हेडमिस्ट्रेस मिसिज मित्रा अपने ऑफिस में एक सहायक अध्यापिका के साथ बैठी कुछ काम कर रही थी । मुझे देखते ही उन्होंने पूछा क्या फॅमिली लग रहे हैं? मेरी बेटी का ऍम तो लंच के कुछ देर बाद ही चली गई । चली गई किसके साथ? मैसेज? मित्रा ने अपनी सहायक रिशपाल की ओर देखते हुए कहा संजय बाबू, हम अपने बच्चों का तो ख्याल रखते हैं । बिना किसी गाजन या जिम्मेदार अभिभावक के । हम किसी के साथ बच्चों को स्कूल टाइम दे, बाहर जाने की इजाजत नहीं देते । क्यों ऍम से पूछ ले ये उनकी क्लास टीचर हैं । भाजी मैसेज मैं ही कह रही हो, लेकिन कौन ले गया उसे आपकी बहन और कौन मैसेज मित्रा नहीं रुखाई से कहा मेरी बहन मेरे हैरानी से कहा मेरी बहन तो मुंबई में रहती है और वहाँ आई भी नहीं शॅल थी, हुई है । अपने इस पालने सहानुभूति है कहा लेकिन जो औरत यहाँ आई उस पर शक करने की कोई वजह नहीं थी । रहे बडी का आई थी । बहुत ही संभ्रांत महिला थी और फिर सीधे मेरे दफ्तर में नहीं । यहाँ से बात मैसेज मित्र ने पकडा नहीं हूँ । मुझे उसने अपने को आपकी बहन बताया और कहा कि आप लोग घूमने जाने वाले हैं इसलिए मैं अपनी भतीजी यानी मम्मी को लेने आई हैं । उसने बताया कि आप लोग कार्य में व्यस्त हैं इसलिए वहीं चली आई हैं । लेकिन हुआ क्या है? क्या कोई खास बात हो गई? वॅार घर नहीं पहुंची और मेरी कोई बहन यहाँ नहीं आई । संजय बाबू ऍम नहीं था । ऍम इतना घबराए हुए स्वर में बोली अब मामले की गंभीरता और अपनी गलती समझ चुकी थी । उन्होंने कहा आप हमारी पोजिशन को भी थोडा समझे । कोई बडे घराने की औरत कार में पिछले वर्दी पहले ड्राइवर चला रहा हूँ । हमारे पास आती है तो अपने को आपकी बहन बताती है । उस की बातचीत चालढाल और व्यवहार में कुछ भी ऐसा नहीं था जिस पर शक किया जा सके । फिर हम उसके कहने पर अविश्वास करें भी तो कैसे? मैसेज मित्रा को मेरी बेटी की चिंता नहीं थी, जितनी की आपने तो उसकी गायब होने की जिम्मेदारी से छुटकारा दिलाने की थी । उनका औपचारिक दफ्तर के बाबू जैसा स्वर मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा । इस वक्त मुझे जरूरत थी मानवीय सहानुभूति की, लेकिन हर जगह वही ठंडी औपचारिकता मिलती है । कहीं भी लोग आप से जुडते नहीं तो मैंने कुछ रुखाई से कहा लेकिन ऍफ का पहचानती थी ये तो आपने गौर किया होता । अब आप बता रहे हैं तो खाया ला रहा है । हमने उस औरत को पहचानती नहीं थी । लेकिन उस वक्त हम इस बात पर गौर नहीं कर सके क्योंकि उसने बडे ही प्यार से पम्मी को अपनी बाहों में भरते हुए कहा मुझे पहचान नहीं रही है तो अपनी बुआ को हाँ कैसे पहचान होगी । जब एक साल की थी तब दिनभर मेरी गोद में रहती थी तो उस वक्त ही बच्चे याद के से होगी । फिर हमें भी उस सहिल मिल गई ऍम नहीं कहा अरे रबर की गुंडा भी नहीं, नहीं नहीं उसे देखते यूज पर लट्टू हो गई थी और जब उसने अपनी कार दिखाई तो हमें खुद ही उसे बुआ जी बुआ जी कहती हुई कर में घुमाने की जिद करने लगी थी । क्यों? मैसेज मित्रा यही कहा था ना? उसने? हाँ यही तो मुझे याद आ रहे हैं । उसमें पानी को गोद में उठाकर उसे आपने कहा दिखाते हुए पूछा था पानी में घूमने चलेगी, कैसी कार थी वह? मैंने पूछा हूँ ठीक से नहीं देखा, नहीं लिया खाली झंडा यानी कि यहाँ मैंने दो कार्य देखी थी । दे गाली और दूसरे नीली काली कार में तो मैं खुद ही बैठ कराया था । नीली कार रही होगी । रहे तो क्या माधुरी आई थी यहाँ? मैंने सोचा फिर पूछा दे औरत कैसी थी? देखने में पढी लिखी लगती थी । ढंग साफ था पर बहुत नहीं साधारण सी थी । बहुत खूबसूरत न बदसूरत था बहुत कीमती आसमानी रंग की साडी पहनी हुई थी नाॅट मित्रा ने का ब्रेक काफी सुंदर थी और गोरी थी । मैं इस पाल का चेहरा उतर गया । वे अपनी चीज की बात का प्रतिवाद करना चाहती थी पर चुप नहीं । मैं कुछ समझ नहीं सका । पहले में सोच रहा था कि शायद चलाने की कार में माधुरी आयो और मम्मी को बहकाकर ले गई होगी । लेकिन मैं साल के कथन से लगता था कि जय नहीं आई थी क्योंकि माधुरी तो सुंदर और खूब गोरी थी । लेकिन दूसरी ओर मैसेज मित्रा भी ये कह रही थी कि वह काफी सुंदर और गोरी थी । होलिया माधुरी के बारे में लागू हो सकता था लेकिन फिर ऍम रही थी कि वॅार नहीं थी ऐसा मैं सब कुछ समझ गया । नेपाल जवान और खूबसूरत थी । कुछ नदी नहीं, बहुत खूबसूरत राशि हुए ॅ, पुष्ट डॉल, अंग डाॅक्टर, रंग रूप और यौवन तो यही बात ही जिसकी वजह से मैं कॉल को माधुरी खूबसूरत नहीं लगी होगी । फिर भी इसके आधार पर मैं किसी निश्चित नतीजे पर नहीं पहुंच सका । अगर मान भी लें कि माधुरी आयु होगी और ताली के लिए मेरे ऊपर दवाब डालने के उद्देश्य से पम्मी को भय का अगर अपने साथ ले गई तो आखिर कवाई कैसे आई? चंदानी की यहाँ से जनना चला था । तब घर में ही थी और उसने यह काम खाली पानी में जगह की असफलता के बाद ही किया होगा । लगता है मेरे घर से निकलने के बाद जघन्य चंदानी को मोबाइल किया और तब चंदानी ने पानी को गायब करने की योजना बनाई । चंदानी ने टेलीफोन पर मुझे धमकी भी दी थी कि फॅमिली ले लेगा । मैं इन सब बातों को सोच रहा था कि तभी मिसेज मित्रा ने पूछा संजय हूँ, आपको ठीक मालूम है कि क्या आपकी बहन यहाँ नहीं है । तो मेरा मुझे अच्छी तरह मालूम है कि मेरी बहन यहाँ नहीं है । आती है तो मेरे पास ही रहती हैं और मैं तीन बजे से घर में ही हो । उसके आने पर मुझे ना मालूम होता । ये नामुमकिन है । ऍम मुझे और आप सबको बेस को बनाया गया है । आप का मतलब है पाॅल, मैं यही खयाल है । तब हमें पुलिस को खबर करनी चाहिए । आप देखना कर रहे हैं पुलिस एक्शन के लिए मैं घबरा उठा । यही थी मेरी कमजोर नस जिससे चंदानी समझता था तो मैं समझता था कि मैं पुलिस के पास जा नहीं सकूंगा और वाह वाह पर किसी भी तरह की जोर जबरदस्ती कर सकता है । पर मैंने अपनी घबराहट को जाहिर होने नहीं दिया और कहा हाँ मैं जरूर रिपोर्ट करनी चाहिए । वो मैसेज मित्र ने टेलीफोन की ओर हाथ बढाया । अभी तक मैं पुलिस के पास जाना नहीं चाहता था पर अब तो मेरी बेटी खतरे में थी । इसके आगे मुझे अपने खतरे की कोई परवाह नहीं थी । फिर भी मैं सारी बातों पर सोचने के लिए समय चाहता था । फॅसने कहा आप तकलीफ न करें, मैं खुद खाने जा रहा हूँ । ठीके संजय बाबू मैसेज मित्रा ने कहा किसी तरह की मदद की जरूरत हो तो बताइए । गांॅव बडे अफसर है । जरूरत पडेगी तो मैं उनसे भी पुलिस ॅ होंगी । पुलिस कोई ढिलाई नहीं दिखाएगी हूँ । मैं सच मित्रा को धन्यवाद देकर चला गया । पर मैं सीधे थाने नहीं गया आपने थाने जाने के बाद मैंने इसलिए कहीं थी कि कहीं मैसेज मित्रा टेलीफोन कर दें । लेकिन ये मैंने तय कर लिया था कि अगर कुछ नहीं हो सका तो मैं जरूर पुलिस में रिपोर्ट कर दूंगा । मेरे साथ होना होगा होगा । मुझे अपनी परवाह नहीं थी । स्कूल से भी सीधा मैं घर आया । मन में कोने में हल्की सी उम्मीद थी कि शायद पानी अभी आ गई होगी । राष्ट्रीय में अपने साथ ही किसी लडकी के साथ उतर कर खेलने लगी होगी । लेकिन कितनी वेस्ट फूफी की बात है । अभी थोडी देर पहले मैसेज मित्रा ने बताया था कि एक औरत उसे ले वाले गई थी । फिर भी मैं सोच रहा था कि शायद वहाँ गई होगी तो मैं सचमुच आई नहीं थी और पुष्पा उसी तरह बैठे हो रही थी । जैसा मैं उसे छोडकर गया था । मुझे अकेला वापस आया, देख कर रहे । समझ गए कि पाँच ही नहीं मिली वो और भी फफककर रो पडी में कुछ समझ नहीं पा रहा था की क्या घरों को मेरी बेटी गायब हो गई थी और पत्नी बैठे आज सुबह रही थीं चाहे सकता दोषी नहीं था । मजबूरी की हालत में शायद अपने आप को दोष देना आदमी का स्वभाव होता है । पर यहाँ सवाल स्वभाव का नहीं था । सचमुच ये हालत मेरे ही पैदा किए हुए थे । ना मैं अपनी जान के डर से भागा होता और न ही हालत पैदा होते हैं । और कौन रोता देखकर आदमी अपने आप को मजबूर अनुभव करता है? नहीं पुष्पा के पास गया और उसे अपनी बाजुओं में भरकर साफ ना देने लगा तो वो नहीं पुष्पा मैंने कहा मैं अपने शब्दों को निरस्त पडता महसूस कर रहा था तो फिर जैसे शब्द अपने आप निकलते चले जा रहे थे तो वो नहीं ऍम इससे छोटा होता जा रहा है । जो नहीं सब ठीक हो जाएगा । लेकिन मैं सिर्फ कह रहा था मैं नहीं जानता था कि सब कुछ कैसे ठीक हो जाएगा । जैसा कि मुझे विश्वास हो चला था । पब्लिक को मातृ ही लिवा ले गई थीं लेकिन कहाँ नहीं गई होगी? कहाँ रखा होगा? उसने पान नहीं हूँ, ये सब मुझे पता नहीं था और अगर मुझे पता ही हो कि कहाँ रखा है तो कैसे उसे ले जाऊंगा । ये भी तो नहीं सोच पा रहा था ना मैं चांदनी और उसके साथियों को पता था कि मैं पुलिस के पास नहीं जा सकता था और जब पुलिस के पास नहीं जा सकता था तो अकेले मेरे बोलते कि ये बात नहीं थी कि चंदानी के गुंडों के चंगुल से अपनी बेटी को छुडा लाया था । मेरी एक कमजोरी समझकर उन्होंने ये किया था वो सचमुच मैं कमजोर था और चंदानी का कुछ नहीं बिगाड सकता था । अपनी इस कमजोरी का एहसास कर में मन ही मन अपने आपको अपमानित अनुभव करने लगा हूँ और पुष्पा को ढांढस बांधने में भी मेरी हिम्मत अंदर से ना रह गई । हम जैसे कमजोर लोग इसी तरह अपमान सहते हुए जिंदा रहते हैं । लेकिन ऐसा मुझे लगा कि मैं कमजोर नहीं हूँ तो एक अमित का नहीं हुआ था । सारी बातें नहीं होने से मेरे दिमाग में बैठने लगी । चंदानी और उसके साथियों से गलती हो गई थी । उन्होंने अपने सारी योजना गलत हिसाब के आधार पर बनाई नहीं । सबसे पहले तो उन्हें यह पता नहीं था कि ताली मेरे पास सचमुच नहीं । मैं गायब हो चुकी है, ये भी नहीं जानते थे और अगर उन्होंने पम्मी का अपहरण डाली के लिए किया था तो मैं ये तालियों ने किसी भी तरह नहीं दे सकता था । इसलिए ताली के आधार पर मैं उनसे किसी तरह की सौदेबाजी करने के बजाये हम नहीं कोई छुडाने का कोई और उपाय करूंगा ये उन्होंने नहीं सोचा था । दूसरा उपाय सिर्फ पुलिस की वजह लेना हो सकता था । इसके अलावा ऐसा कोई रास्ता नहीं था जिसे अपना सकता । पम्मी का अपहरण चाहे किसी ने भी क्या हो जाए । चंदानी ने चाहे मान सिंह के भाई ने हैं, मैं यही सोचता था कि मैं पुलिस के पास जाने की हिम्मत नहीं कर सकता पर उन्हें नहीं मालूम था कि मैं मम्मी से कितना प्यार करता था और यही उनकी गलती थी । हर चीज को ताकत के आधार पर आंकने वालों ने भी ये नहीं सोचा था कि प्यार की ताकत हर ताकत से बडी होती है और पुष्पा मेरी सारी दुनिया थी और यह दुनिया मुझे अपनी सेहत और जान से ज्यादा प्यारी थी । उनका ये सोचना सरासर गलत था कि अपनी जान बचाने के लिए अपनी बेटी को उनके हाथों में बडा रहने दूंगा और पुलिस के पास नहीं जाऊंगा । ऍम उठकर कमरे में चहलकदमी करने लगा । सारी बातों पर विचार कर लेने के बाद मैंने पालने के गायब होने की रिपोर्ट पुलिस में लिखवाने का पक्का निश्चय किया । तब मैंने कुछ ना कुछ के बारे में बताया तो जरा ठंडा रखा । बैठाने जा रहा हूँ । अब होने से काम नहीं चलेगा । थोडी हिम्मत और सब्र से काम लेना पडेगा तो छत तक कुछ ना कुछ नहीं बोली । फिर उसका होना हो गया । सुनी सुनी आँखों से मेरी ओर देखते हुए उसने पूछा वो स्थान पर क्यूँ मम्मी को किसी तरह भी छुडवाया नहीं जा सकता हूँ । लेकिन थाने जाना क्या ठीक होगा हूँ, ठीक क्यों नहीं होगा? अब मुझे इस बात का कोई डर नहीं है कि मेरे साथ क्या होगा । अवल तो मैं सिर्फ बनने के गायब होने की रिपोर्ट करूंगा लेकिन अगर जरूरत पडी तो मैं सारी बातें बता दूंगा । जो होगा देखा जाएगा । मेरा ये मतलब नहीं । पुष्पा ने कहा मैं सोच रही थी कि मम्मी के हाथ में ये ठीक हो गया नहीं । क्यों नहीं होगा कहीं उसके लिए कोई खतरा ना पैदा हो जाये । खतरा अरे कैसा खतरा मैंने सुना है । बच्चों को गायब करने वाले रुपये की मांग करते हैं, अखबारों में ही पडा है मैंने वहाँ से सब मैंने कहने को कह दिया और पुरुष को की बात में वजन था । उसका कुछ नाराज हो गयी । तानाशा मारते हुए उसने कहा, जब मैंने तुमसे पुलिस में रिपोर्ट लिखा देने के लिए कहा तब तो आगे पीछे सोचते रहे । अब जब बेटी की जान पर बनी हुई है, पुलिस में खबर कर देने से बेटी की जान जाने का खतरा है तब तो मैं बहादुरी सोच रही है । मैं फिर बेचैनी से कमरे में चहलकदमी करने लगा । अभी थोडी देर पहले पुलिस में रिपोर्ट कर देने को मैंने जो पक्का निश्चय किया था वो दिखता मालूम हुआ । फिर यह तय करने की कोशिश करने लगा कि क्या करूँ । तभी पुष्पा की आवाज सुनाई थीं । सुनो हम इंतजार करना चाहिए किसका जिन लोगों ने ॅ क्या है उन का हमें इंतजार करना चाहिए कि अखिर में क्या करना चाहते हैं । लेकिन क्या ठिकाना कि वह हमें खबर करेंगे । अगर वे हमसे कुछ चाहते हैं नहीं तो फिर मम्मी को गायब क्यों? क्या पुष्पाणि कहा मैं जरूर खबर करेंगे पुष्पा के बाद शंकर मुझ से कुछ उत्तर देते नहीं बना । मुझे तो उकसा हुआ की इस हालत मेरी पुष्पा कैसे शांत और सुव्यवस्थित ढंग से सोच रही थी । है । सभी औरतों के बारे में नहीं जानता । लेकिन शायद जहाँ पुष्पा की बुद्धि काम नहीं करती, वहाँ करते हमेशा शांति चित्र होकर सोच सकती । फिलहाल पुलिस में रिपोर्ट लिखाने का इरादा हम ने छोड दिया । ऍफ गायब करने वालों के संदेश का इंतजार करने लगे । जाडे के शाम जल्दी ही गहरा गई । मेरा धैर्य खत्म हो रहा था । रह रहे कर मुझे पम्मी का खयाल आ रहा था । उसके बिस्तर के पास उसके खिलौने जैसे उसका इंतजार कर रहे थे । जब भी मेरी नहीं रहा, उन खिलाना थी और पडती मैं आशंका ऐसी होता कि कहीं उसके लिए कोई खतरा ना हो जाए जो उसमें लगभग इसी समय घर आया करता था । घंटे बजाते ही कमी आकर मेरे पैरों से ले पड जाती है और उस चक्कर मेरी गोद में आ जाती है । आज ये घर उसके बिना सुना सुना लग रहा था । उसे बचाने के लिए मैं कुछ भी कर सकता था । अगर कोई कहता कि उसे बचाने के लिए हत्या करना जरूरी है तो शायद नहीं, अभी कर बैठा हूँ । लेकिन ऐसा कोई था नहीं तो जो यह बताता की मुझे क्या करना था । बस अनिश्चय, वार पन्नी का अपहरण करने वालों के संदेश का इंतजार शाह गहरी और अंधेरी होती जा रही थी । मैं उठ खडा हुआ हूँ । कुछ न करने से कुछ करते रहना बेहतर था । दबी मोबाइल बज उठा है ।

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एक रहस्य भरी कहानी, सुनिए कैसे एक छोटी सी ताली, खतरों के ताले खोलती है writer: रमाकांत Script Writer : Mohil Author : Ramakant
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