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Part 5 in Hindi

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5 K Listens
AuthorAditya Bajpai
यह उपन्यास उन तमाम लोगों के लिए है जिन्होंने अपनी जिंदगी में कभी-न-कभी किसी मोटे आदमी का मजाक उड़ाया है। न पढ़ा, न लिखा, न कुछ सीखा, वो अब खोटा हो गया। उसकी जीभ हर पल लपलपाई, वो बेचारा मोटा हो गया। writer: अभिषेक मनोहरचंदा Script Writer : Mohil Script Writer : Abhishek Manoharchanda
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भारत पडेंगे । खाना खाने के बाद चिंटू बिस्तर पर लेटा होता है और ब खुद भी डखार लेता हुआ आता है । मैं जैसे ही लेता है चिंटू उस तरफ कोने में दब जाता है क्योंकि बकर जब भी पलंग पर लेता है तो एक टी आई जगह की जरूरत उसे लगती है । फॅमिली में दवा हिंदू ब खुद को धक्का देकर हिलाने की असमर्थ कोशिश करते हुए बोला मैं एक दम किनारे पर सोया हूँ । चिंटू उधर किसका तो गिर जाऊंगा तो खुद देख ले । बस खुल नहीं हल्का सा रखते हुए कहा । वर्षों पहले हम आधे आधे पलंग पर सोते थे । भैया पर आज मैं उस आधे के आधे में भी नहीं हो पा रहा हूँ । चिंटू ने बच्ची जगह देखते हुए बोला चिंटू तो सो जा चुकी हूँ मगर नहीं । नाराज होते हुए कहा भैया, आपसी जरूरी बात करनी थी, क्या है अगर नहीं आंखे बंद करते हुए कहा एक बात बता हूँ मैं अगर पापा को ये बता दूँ की आप किसी कोरियर कंपनी में नहीं बल्कि बैंड में काम करते हो तो क्यूँ ठाकुर सुनते ही अचानक खोलते हुए बोला नहीं बस ऐसे ही पूछ रहा था । चिंटू ने हसते हुए बोला यार चिंटू तुझे मालूम हो गया है तो तू ऐसा करेगा । अपने भाई के साथ अगर मालूम होता कि तेरे दोस्त की शादी है तो मैं ऊपर कपडा बांधकर बजाता, बस कुछ नहीं मासूम भाव से बोला हो तो मैं एक बार आज में गाने वाले को बोलने गया कि काला का हुआ कार्ड खाएगा गा तो तभी आप पार महीने से पड गई । चिंटू ने थोडा एट में कहा चिंटू देख अगर तुम्हें पापा को बताया तो समझ लेना मैं तो मारी जाऊंगा और पापा को तो जानता ही है । बस कुर्ने डरे भाव में चिंटुओं से कहा ठीक है तो फिर आपको मैंने दो काम करने पडेंगे भैया । हिंदुओं ने हमेशा की तरह किसी बात को छिपाए रखने के बदले में शर्त रखी । बोला भाई न करने तुरंत बडे प्रेम से कहा एक तो मुझे पचास रुपए की जरूरत है और दूसरा कल आपको मेरे साथ मेरे कॉलेज में पापा बन कर चलना पडेगा । पचास रुपए तक तो ठीक है लेकिन मैं पापा बंटा चलूंगा तरह दिमाग खराब हो गया है क्या भैया कॉलेज वालों ने पापा को लेकर आने को कहा है और जब तक पापा नहीं जाएंगे मुझे कॉलेज में नहीं जाने देंगे लेकिन वो पापा को क्यों बुला रहे हैं । अरे हमारी कॅाल है । उसने जाकर शिकायत कर दी की मैंने उन्हें देख कर सीटी बजाई तो उन्हें मैडम को देख कर सीटी क्यों मचाई? बकूल हैरान होकर पूछता है रुक मैं पापा को बोल के आता हूँ । बखुद उठने की कोशिश करते हुए बोला ठीक है चलो मैं भी बोल देता हूँ आपके बैंड के बारे में । चिंटू भी साथ में उठने लगा । तुझे पता है अगर पापा को भूल से भी पता लग गया तो क्या करेंगे? पर तूने मैडम को सीटी कैसे मरी? मूर्ख बस कुर्ने चिंटू को उठने से रोकते हुआ पूछा । अरे मैडम को सीटी नहीं मारी भैया माॅस् में मैं उसे कुछ बोल रहा था । ऐसे करके तो सिटी निकल गई और मैंने देख लिया तो उन्हें लगा कि उन्हें मारी है तेरी गर्लफ्रेंड भी है । चिंटू ये कैसे? कैसे बुरे काम में पढाई तो पढाई करने जाता है तो तो पापा को बताना ही पडेगा । हिंदू उसकी ओर देखता है । बकौल फिर चुपचाप बैठ जाता है । आप ये बताओ कि आप कल पापा बनकर साथ में चल रही होगी नहीं वरना आज पापा को दोनों की बातें बता देते हैं । ऍम तो तू तो जानता है । मैंने लोगों के सामने बोलना तो दूर खडा तक नहीं हो पाता हूँ । घबराहट होती है मुझे फिर मैं क्या बोलूंगा? वहाँ आपको बोलना कुछ नहीं है । वे बस मेरी बुराइयाँ करेंगी । आपको वह सुनना और थोडा बहुत जब बोले मैं रास्ते में सीखा दूंगा । बस हिम्मत से उतना करके बोल देना यार और कोई रास्ता नहीं है । क्या आपने किसी अपने किसी दोस्त को बना लेना? पापा आप के अलावा मेरे पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है । आप कोई बनना पडेगा तभी पलंग के नीचे से हूँ की आवाज आती है सर गायत्रीदेवी दौड करती हैं और उस पलंग के नीचे झांककर देखती हैं । ये बिल्ली पलंग के नीचे कैसे आ गई और इसके लिए ये पानी तक कटोरा और खाने के लिए रोटी किसने रखी? हाँ थ्री देवी ने थोडे गुस्से में बकुवा चिंटू से पूछा हाँ तुम तो जानती और कौन कर सकता ये काम किसी जानवरों पर दो हर दया आती है । हिन्दू नेबर तुर की तरफ इशारा करते हुए कहा डकोर पिछली बार भी मना किया था ना तेरी उस दिल्ली में भी घर के कोने कोने में उल्टियाँ कर दी थी और पूरा घर कितना बदबू मार रहा था । पढाई ना दो दिन होते रहे थे और न जाने कहाँ कहाँ कि गंदगी के होते हैं । इनके महाने बक और पर चलते हुए ॅ पानी पिलाने के लिए लाया था । कल सुबह बार छोड दूंगा । नहीं कहा घर में अगर इसने गन्दी की की तो तुम साफ करोगे हैं । पहले स्वयं को संभालो फिर जानवरों का सोचना और खबरदार फिर से अगर कुत्ता बिल्ली घर में लाया तो जगह नारायण ने दूर हॉल में बैठे बैठे ही भारी आवाज में कहा जगह नारायण के बाद फिर घर में और कोई भी नहीं बोलता । गायत्रीदेवी झाडू लाती हैं और बिल्ली को पालन के नीचे से ज्यादा लो दिखाकर भगाती हैं, फिर जाकर होती है ।

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यह उपन्यास उन तमाम लोगों के लिए है जिन्होंने अपनी जिंदगी में कभी-न-कभी किसी मोटे आदमी का मजाक उड़ाया है। न पढ़ा, न लिखा, न कुछ सीखा, वो अब खोटा हो गया। उसकी जीभ हर पल लपलपाई, वो बेचारा मोटा हो गया। writer: अभिषेक मनोहरचंदा Script Writer : Mohil Script Writer : Abhishek Manoharchanda
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