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Part 5

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लंबे कोमा से जागने के बाद दमन को पता चलता है कि वह एक जबरदस्त कार हादसे का शिकार हुआ था, जब उसके साथ एक लड़की भी थी, जो उसे मरा हुआ समझकर हादसे के फौरन बाद वहां से गायब हो गई। अजीब बात है कि उस लड़की का धुंधला चेहरा, सम्मोहित करनेवाली आंखें और उसका नाम श्रेयसी दमन को अब तक याद है, जबकि उसकी याददाश्‍त जा चुकी है। उसने सपने में देखी अपनी और श्रेयसी की कहानियों को जोड़ना शुरू किया, और फिर उसे अपने जबरदस्त लोकप्रिय ब्लॉग में ढाल दिया। कुछ समय बाद दमन अपने ब्लॉग को एक उपन्यास के तौर पर प्रकाशित करने का फैसला करता है। तब एक खूबसूरत लड़की, जो श्रेयसी होने का दावा करती थी, दमन का पीछा करने लगी और धमकाया कि दमन को अपना जमीर बेचने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी तथा अपना बदला लेने के लिए वह किसी भी हद तक जाएगी। दमन उससे निपटता, इससे पहले उसे मालूम करना था : क्या वह सच में वही है, जैसा दावा कर रही है? उसे अब उससे क्या चाहिए? अगर उस लड़की की बात नहीं मानी तो उसके साथ क्या होगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी। Author - Durjoy Dutta
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धार पांच मेरे सपनों की लडकी के लेखक दमन राय के हाथों में जयंती रघुनाथ का गला था । उसने उसे बालों से पकडकर उसके केविन की कांच की दीवार पर जोर से दे मारा और तब तक मारता रहा जब तक चटके हुआ कांच की दीवार खून सेलेक्ट पता नहीं हो गयी । उसका शरीर जमीन पर पडा था और हाथ पैर काम रहे थे । धमाल उसके सर पर तब तक मारता रहा जब तक कि उसका चेहरा विकृत नहीं हो गया । उस की किताब में बदलाव करने की यही सजा थी । मैं अपने डिवास वक्त से बाहर निकला । मैं जयंती के केबिन की टूटी हुई कांच की दीवारों को हो रहा था । जयंती अपनी कुर्सी पर बैठकर मुस्कुरा रही थी और दमन के कुछ बोलने का इंतजार कर रही थी । इस रूम में दुर्गंध क्यों आ रही है? दमन ने पूछा हम सीधे मुद्दे पर आए तो जयंती ने उत्तर दिया, तुमने तो कहा था कि सभी लोग नहीं ऐसी का प्यार करेंगे लेकिन बेहतर उससे नफरत कर रहे हैं तो मन कर रहा हूँ । तुम क्या कर रहे हो? इसका तो कोई अंदाजा नहीं हूँ तो मुझे उनका रहो । जयंती ने आगे झुकते हुआ था । उसके बने हुए हाथ किताब के फिर उसके ऊपर जो जिन्हें अभी पेंट में जाना था उसकी मेज पर कॉफी के तीन खाली कपडे थे । उसकी मैच के चारों ओर सैकडों किताबें एक के ऊपर एक रखी हुई थी । उसके चारों ओर ज्ञात्वा अज्ञात लेखकों के लाखों शब्द बिखरे हुये थे । जयंती ने अपनी की ओर देखा उससे थोडा शांत होने के लिखा हो अवनी ने दमन की वहाँ पर चिकोटी काटी डाॅ गया मैं बोली जयंती तो हजार कर रही हूँ लोगों को मेरी किताब पसंद नहीं आ रही है । जाओ जाकर ऑनलाइन समीक्षा देखो । तुम ने जिस श्रेयसी को तैयार किया है मैं उससे नफरत कर रहे हैं । ऐसा चरित्र बनकर रहे गई है जिसे किताब का नायक प्रेम करता है और उसके साथ सहवास करना चाहता है । उसे इससे ज्यादा होना चाहिए था और मैं उत्तर देते देते थक गया हूँ क्योंकि किताब का मुख्य पात्र में ही हूँ । मैंने तुमसे कहा भी था कि हमें किताब के नायक को कोई और नाम देना चाहिए था मेरा नहीं । हम इस पर आगे और कोई चर्चा नहीं करेंगे क्योंकि हमने तुम्हारे नाम का इस्तेमाल किया । लोग ऐसा सोचेंगे की ये सत्य घटना है और लोग सत्य घटना पर आधारित उपन्यास था तो हाथ लेते हैं तो ये पता होना चाहिए है ना सत्य घटना पर आधारित फिल्मों के मामले में भी ऐसा ही हो जाए । या तो ऐसा मानते हो कि वे फिल्में सच में सत्य घटना पर आधारित होती हैं । छोडो यार स्प्रिंग में जाने के पहले दमन ने किताब में कई परिवर्तन सुझाए थे पर मैं चतुर जयंती से पार नहीं पा सका । मैं तो मैं समीक्षा पढकर सुनाती हूँ । चेहरो कहते हुए जयंती रघुनाथ इन्टरनेट पर मेरे सपनों की लडकी के समीक्षा खोजने लगी । मैं बढकर सुनने लगी । ये किताब एक क्लासिकल रोमांस है । मुझे किताब का अंतर पसंद आया । ए । सी के प्यार में डूबा हूँ मैं किताब पढ घर कई बाहर होया हर्ट इमोजी ड्राइंग इमोजी कहानी मेरे दिल को छू गई तो क्या बात कर रहे हो । ज्यादातर समीक्षा शानदार है । कहते हुए उसने अपना लाभ टॉप किनारे कर दिया । दमन ने अपनी आंखें घुमाई, अपनी नहीं लाभ तब अपने पास किया और समीक्षा पडने लगी हूँ । समीक्षा जबरदस्त हैं लेकिन सिर्फ यही समीक्षा नहीं थे । पिछले कुछ दिनों से दमन अवनी को हार बुरे औसत समीक्षा ईमेल करता रहा था । विषेशकर वे समीक्षा जिनमें श्रेयशी को रीड विहीन तरस, कमजोर तथा दमन को औसत लेखक बताते हुए इस किताब को पुरानी बोतल में नई शराब बताया गया था । सबसे कटु आलोचक हुए लोग थे जिन्होंने फेसबुक पर धवन की श्रेयसी को पढा और चाहा था । उस समय तक दमन ने किताब के अनुबंध पर हस्ताक्षर नहीं किए थे । उसने इस सारी असफलता का दोष जयंती के अतिरंजित संपादन को दिया । सिर्फ दमन ही जानता था की जयंती के सुंदर शरीर और आकर्षक आंखों के पीछे एक अलग ही चेहरा था । दमन के गुस्से को सबसे ज्यादा अपनी नहीं झेला । खुद थी जो उसे बर्बाद होने से रोके हुए थे । जयंती ने बोला जारी रखा देखो दमन मुझे नहीं पता की तुम इस किताब से क्या चाह रहे हो । लेकिन किसी नए लेखा की किताब की पहले तीन सप्ताह में पंद्रह हजार प्रतियां बिक जाना एक बडी सफलता है । तो इस बात पर ध्यान देना बंद करो कि कुछ लोग से इसी के बारे में क्या राय रखते हैं । अपना नजरिया बडा करो । ये किताब हिट है बल्कि इसने टाइम्स फॅार सूची में अपना स्थान बना लिया । तो तुम अपने सिर पर एक टट्टी क्यों नहीं लगा देती? दमन ने झड का मैं नहीं जानती कि तुम्हारी शिकायत की इस बारे में है । अन्य नवोदित लेखक तुम्हारी जगह लेने के लिए मारे जा रहे हैं । इन की पढाई में ध्यान दे अपनी नहीं कहा । धवन ने अपनी की और गुस्से से देखा क्या मैं हमारे लिए ताली बजा हूँ? जयंती उसने उसका मजाक उडाया । लोग मुझे दूसरा कार्तिक अय्यर कह रहे हैं जो किसी काम सुनंदा मान । तुम उस समय फेसबुक नोट्स लिखा करते थे जब मैंने तुम्हारी प्रतिभा को पहचानकर इस पुस्तक को लिखने का प्रस्ताव दिया क्या तो ऐसा कहना चाह रहा हूँ कि मैंने तुम्हारा करियर बर्बाद कर दिया । यदि तुम ध्यान से देखो तो पाओगी की मैंने तुम्हारा करियर बनाया है । तो मैं याद है कि तुमने मुझे खोजा था तो मेरे पास आई थी । तुमने मुझे किताब लिखने का प्रस्ताव दिया था क्योंकि तुम्हें ऐसा लगता था की ये किताब हाथों हाथ देखेगी । कोई ऐसा नहीं किया था तो वो मुझ पर तुम जानती थी कि फेसबुक पर मेरे तमाम फॉलोवर्स हैं । जो किताब वहाँ तो हाथ खरीदते हैं तो मैं पता था कि मेरी किताब में दम है । जयंती जोर से हस्ती है । पाठक ऑनलाइन लाइक ऍम फेसबुक ट्विटर पर फॉलोअर्स होने का कोई मतलब नहीं होता । धवन लाइक और शेयर करने में कोई पैसा नहीं लगता । किसी किताब को बेचने के लिए तुलनात्मक रूप से अच्छी किताब, मार्केटिंग, प्लाॅन, स्मार्ट संपादक, स्मार्ट प्रकाश की आवश्यकता होती है । लोग फेसबुक पर गरीब लोगों के दूर दर्जा को दिखाते हुए फोटो और वीडियो शेयर करते रहते हैं और ये बताते हैं कि ये दुनिया कितनी वाले में । लेकिन मैं उन गरीबों की दशा में सुधार करने के लिए एक भी रुपया खर्च करना नहीं चाहते हैं । उन लोगों से अपनी किताब के लिए कैसे धन निकल रहते हैं? हाँ, मैं कर रहे हैं, डाटा फ्री नहीं है । जयंती हाँ, तुम सच में बहुत मजा किया होता मन से तो मैं पीछे और उस तक में क्योंकि इस्तेमाल करते हैं आग नहीं किसी टेनिस मैच के दर्शक की तरह उन दोनों को एक दूसरे का मजाक उडाते देख रही थी । अवनीस केबिन में एक बार पहले भी आ चुकी थी । उस दिन दमन ने इस किताब के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किया था । इस अनुबंध से उसका जीवन बदलने वाला था । उस दिन उसने जयंती को बडी सी आरामदायक कुर्सी के पीछे उन किताबों का ढेर देखा था जिनका संपादन जयंती नहीं किया था । जयंती ने एक दशक लंबे करियर में उसने इनकाे बेस्ट सेलर किताबों का संपादन किया था । दस सालों में लगभग तीस किताबें सफलता के प्रतिशत को देखकर अपनी का दिमाग घूम गया था । अगर दमन की किताब इतने लोकप्रिय नहीं हुई तो लेकिन आज उसका बहुत सफेद चार पेपर से पूरी तरह ढका हुआ था । मुझे कुछ कराना है । जयंती ने स्पष्ट करते हुए कहा, उसके केबिन में सिर्फ यही बदलाव नहीं था । उसका डेस्क नया लग रहा था । यहाँ तक कि प्रिंटर, लापटाप और कारपेट भी काफी हद तक अप्रयुक्त लग रहे थे । कांच की दीवार में इसका राज पडे हुए थे और कमरे में विचित्र सी महंगा रही थी । जैसे किसी सडक हुए । चूहे की दुर्गंध को दबाने के लिए जोरदार स्प्रे किया गया हूँ । बहस के दौरान ही अवनी की नहीं रहा । उसकी घडी पर गई बॅान्डिंग के साथ उसकी बैठक आधे घंटे में शुरू होने वाली थी । अगर मैं ट्रैफिक में फंस गई तो किसी कीमत पर समय पर नहीं पहुंच पाएगी । दामन रुकना चाह रही थी पर मुझे जाना होगा । उसने कहा । जबकि वो कहना चाहती थी तुम्हारे और मेरे लिए अपने चारों ओर देखो । दमन कितने सारे लेखक है और उनमें से कुछ ही उसके बोर्ड पर स्थान बना पाए । जयंती की ओर से मिला एडवांस लगभग खर्च हो चुका है । अगर तुमने कारना खरीदी होती अगर तुमने अपनी नौकरी नहीं छोडी होती, मुझे काम करना होगा । आज तुम निरीक्षकों, जयंती और दमन दोनों ने उसकी और देखा । उसने घडी की ओर इशारा क्या जमाने समझाते हुए ऐसे रेल आया, अपनी उठ खडी हुई और उसे गले से लगाया । कान में धीरे से बोली । शाह रहना और वहाँ से चलती अपनी के जाने के बाद जयंती बोली । इसमें कोई संदेह नहीं कि तुम एक अच्छा लेगा हूँ । लेकिन तो मैं अभी भी बहुत कुछ सीखना है । दमन तो पता है कि तो मेरे द्वारा किए गए सभी परिवर्तनों पर राजी क्यों हुए? ऐसा इसलिए क्योंकि तो मुझे डरे हुए थे तो मैं डरता की कहीं पोस्टर न चली तो इसलिए तुमने मत से लडाई की लेकिन ज्यादा नहीं । इसलिए तुम असहमत थे लेकिन जाता नहीं क्योंकि ऐसे संत है कि समय पर तुमने अपनी संपादक पर भरोसा किया तो तुम्हारी तुलना में इस इंडस्ट्री में काफी लंबे समय से हैं । हाँ पर तुम पर भरोसा करना डाला था । तुमने मुझे स्कूल बनाया, मैंने अपनी नौकरी छोड दी और तुम्हारे अनुबंध के चलते अपने माता पिता का घर भी छोड दिया और इसके बदले तुमने मुझे क्या दिया । इस तरह डीआईटी प्रतिशत और तुम जैसा संपादक किसी और ने तुम पर अनुबंध करने के लिए दबाव नहीं डाला था तो मुझे ऐसी को लेकर खडे रह सकते थे । लेकिन तुम ने ऐसा नहीं किया और बदले में तुम्हें पर्याप्त धन और एक बेस्ट सेलिंग किताब में लिए हो सकता है । यदि तुमने अपने लिए कार खरीदने में पैसा खर्च नहीं किया होता तो मैं इतने नाराज न होते हैं । अच्छा तो आप तो मेरी वित्तीय सलाहकार बन रही हूँ । आगे क्या? अब तो मुझे बताओगे की मुझे क्या खाना चाहिए और क्या नहीं । धवन ने उपहास पूर्वा कहा बस बस बहुत हुआ दमन । मुझे अपने लेखों से बकवास सुनने की आदत नहीं है । अगर तुम प्रतिभावन न होते तो मेरी सूची में न होते । दमन ने उसके गुड स्वायल स्वर्ग पर ध्यान नहीं दिया और उसी बीच में ही तो कर बोला चाहे जो भी हो जा । जयंती सच्चाई ये है कि मेरे नाम से किताब है जिसमें एक साडी अच्छा चरित्र है जिसका नाम से ऐसी है अगर स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होने वाला । जयंती ने कल बेरोजगार तो मालूम है क्या नहीं बदलने वाला ये कि तुम एक लेखक हो सकते हो की तुम लंबे समय था, किताबें बेच सकते हूँ । यदि मुझे कुछ हस्तक्षेप करने दो तो मैं दोबारा अपनी इंजीनियरिंग जॉब में जाने की जरूरत नहीं होगी और ये बात कई लोगों के लिए बहुत मायने रखती है । जयंती ने कहा कि तुम जानते हो कि भारत में ऐसे कितने लेखक है जो सिर्फ लेखन से अपना जीवन यापन कर सकते हैं । बहुत कम कार्तिक आई है । अनुज भगत, करन तलवार, गुरप्रीत कौर और मैं सूची में तुम्हें भी डाल सकती हूँ । यदि तुम अहसानमंद नहीं हो तो तुम दूर तक नहीं देख पा रहे हो और सोनू ये काम में बहुत समय से कर रही हूँ । किताब को सुपर हिट कराना और ये काम में बहुत अच्छे से भी करती हूँ । तभी जयंती के कैबिन के दरवाजे पर ऑफिस बॉय ने दस्तक दी और उसे मीटिंग के लिए याद दिलाया । उसने धवन की ओर देखा और कहा, चलो इंडियां, जब तुम घर वापस जाओ तो इस बारे में सोचना की है । किताब तुम्हारे लिए क्या कर सकती है और जब तो मैं ये अहसास हो जाए कि मैं तुम्हारे भले के बारे में सोच रही हूँ तो तुम दूसरी किताब लगना शुरू कर देना और हम एक नहीं किताब के लिए अनुबंध करेंगे । खटाई नहीं । दमन बोला हम सभी पैसा कमाना चाहते हैं । दमन मैं जानती हूँ की तुम ने अपनी पहली किताब से हुई कमाई उडा दी है । मेरे साथ ये क्या? पहले मेरी बात सुनो तो मेरे सपने की लडकी के लोगो का पान पर जाने से मना कर रहे हो । बिना प्रचार की कब तक एक किताब टिक पाएगी । इसलिए तार्किक रूप से सोचो इसी बिगडैल बच्चे की तरह नहीं । एक दो किताब लाकार्पण कार्यक्रमों में जाओ और उसके बाद नहीं किताब पर काम करना शुरू कर दो । ये मत भूलो दामन की हम एक बेहतरीन टीम है । हम सभी तुम्हारे लिए काम कर रहे हैं तो मैं से सबसे ज्यादा फायदा होगा । धामन मैं तुम्हें पसंद करती हूँ तो मैं जोश है जो मुझे पसंद है लेकिन तो सहज जाकर कुछ अब जाना है । उसने कहा और खडी हो गई । तुम्हारे लिए निर्णय का इंतजार होगा । उसने हाथ मिलाने के लिए अपनी बाहें खोली । जयंती से हाथ में लाये बिना दमन चुप चाप वहाँ से चला गया और जयंती उसे जाते हुए देखती रही । जिस कारण से मैं दमन को पसंद करती थी । उसी कारण सिर्फ है । उससे नफरत करती थी । जोशीला था लगभग पागल पन की सीमा तक और इसकी झलक उसके लेखन में भी मिलती थी । इसमें संदेह है उस किताब में झलके । जोश को काबू में करना उसकी जिम्मेदारी थी । उसे दमन की गुस्से से भरी आंखें अब तक याद हैं । जिस दिन उसने उसे मेरे सपनों की लडकी की लेख की प्रति सौंपी थी । एक पल के लिए वेटर गई थी । ऐसा लगा था जैसे वह मदिरा की बोतल उसके सर पर मार देगा और सौभाग्य से ऐसा नहीं हुआ और पार्टी बिना किसी बाधा के चलती रहे । केवल उसकी गर्लफ्रेंड ही उसे नियंत्रण में रखती थी । जयंती को ऐसी आशा थी कि वह उसे थोडा संयंत्र बनाएगी । उसने आसपास देखा और राहत की सांस ली । किसी ने एक सप्ताह पूर्व उसका कैबिन तोड दिया था । उसको उस पैटी नहीं, उसकी डाॅक्टर और अन्य कई चीजों को छति पहुंचाई थी तथा उन पर स्प्रे पेंट कर दिया था । घुसपैठियों ने उसकी कुर्सी भी कांच की दीवार से बाहर फेंकने की कोशिश की थी । उसे वो चीजें बदलनी थी लेकिन सबसे घृणास्पद थी वह दुर्गंध । कमरे की जमीन पर मानव मल बिखरा दिया गया था और पानी का छिडकाव कर दिया गया था । भयंकर दुर्गंध के कारणों से पूरा ऑफिस दो दिन के लिए बंद करना पडा था । परफ्यूम छिडकने के बावजूद जैन दी को दुर्गंध महसूस होती रहती थी । जिसने भी घुसपैठ की थी उसने किताबों पर सिर्फ ही नहीं किया था । उनमें से कुछ को जला भी दिया था और उनमें मेरे सपनों की लडकी की जयंती की प्रति भी थी । सौभाग्य से पानी के छिडकाव के कारण आग पर फैलने के पूर्व नियंत्रन कर लिया गया । ऍम सीसीटीवी कैमरे में कई दिन पहले से खराब पड ऍम कई दिन पहले से खराब है । एक दीवाने प्रशंसक ने भी घुसपैठ की थी और कार्तिक की किताब की एडवांस प्रति चुरा ले गया था । ऐसे दीवाने प्रशंसक इस इंडस्ट्री का एक हिस्सा है । पारियाँ जयंती भी स्वीकार करती है कि इस बार तो अति हो गई । उसने अपना लाभ तब उठाया और समीक्षा पेजों को बंद किया । जैसे ही रह निकलने को हुई उसकी नजरें सबसे चार पेपर की ओर गई जिससे उस ने कपडे के बोर्ड को ढाका था । चार पेपर के पीछे जयंती द्वारा इतने वर्षों में संपादक की गई किताबों के कवर पर लाल रंग के बडे बडे अक्षरों में लिखा था दमन को अकेला छोड दो

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लंबे कोमा से जागने के बाद दमन को पता चलता है कि वह एक जबरदस्त कार हादसे का शिकार हुआ था, जब उसके साथ एक लड़की भी थी, जो उसे मरा हुआ समझकर हादसे के फौरन बाद वहां से गायब हो गई। अजीब बात है कि उस लड़की का धुंधला चेहरा, सम्मोहित करनेवाली आंखें और उसका नाम श्रेयसी दमन को अब तक याद है, जबकि उसकी याददाश्‍त जा चुकी है। उसने सपने में देखी अपनी और श्रेयसी की कहानियों को जोड़ना शुरू किया, और फिर उसे अपने जबरदस्त लोकप्रिय ब्लॉग में ढाल दिया। कुछ समय बाद दमन अपने ब्लॉग को एक उपन्यास के तौर पर प्रकाशित करने का फैसला करता है। तब एक खूबसूरत लड़की, जो श्रेयसी होने का दावा करती थी, दमन का पीछा करने लगी और धमकाया कि दमन को अपना जमीर बेचने की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी तथा अपना बदला लेने के लिए वह किसी भी हद तक जाएगी। दमन उससे निपटता, इससे पहले उसे मालूम करना था : क्या वह सच में वही है, जैसा दावा कर रही है? उसे अब उससे क्या चाहिए? अगर उस लड़की की बात नहीं मानी तो उसके साथ क्या होगा? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी। Author - Durjoy Dutta
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