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PART 4

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एक रहस्य भरी कहानी, सुनिए कैसे एक छोटी सी ताली, खतरों के ताले खोलती है writer: रमाकांत Script Writer : Mohil Author : Ramakant
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भारत क्या है? घर पहुंचने के पहले तक मुझे पता नहीं था कि घटना एक दूसरा ही मोड ले चुकी थी । इस बीच कुछ पढना जाने कहाँ से आ गई थी और दरवाजे के सामने हैरान सी खडी थी । दरअसल हुआ ये है कि जब मैं ताली ना मिलने के बारे में जगन को बताने के लिए जा रहा था तो दरवाजा बंद करना भूल गया । लौटने पर पुष्पा को दरवाजा खोला मिला तो मैं ये सोच कर हैरान हो रही थी कि बीच में कौन दरवाजा खोल गया था । तभी उसने मुझे देखा एक तो दफ्तर से मेरा इस वक्त घर लौट आना नहीं बात थी । दूसरे मेरी हालत देखकर है और हैरान ओटी घबराकर उसने पूछा क्या है जी तो हरी तब तो ठीक है । वो तो ठीक है पर तुम कहाँ गई थी? मैं भी आकर फिर जरा बाहर चला गया था तो दरवाजा तो हूँ । उस ने राहत की सांस लें । फॅमिली हालत क्या बना रखी है थोडी पर खून की ऐसा ऐसा बाद में पूछना । पहले ये बताओ तालिकाएं फॅमिली उसने पूछा वही जिसके लिए मैंने तो टेलीफोन किया था उसे तुमने कहा रख दिया है आपने पर इसमें तो रख कर नहीं चली गई नहीं हैरानी मुझे देखती रही । फिर बोली क्या है इतनी से हो रही है ऍम यहाँ आया हूँ लेकिन मैं कहाँ? मैंने कहा घर में तो मैंने ऍम में रख दी थी, उसमें तो नहीं है ना घर में और ना कहीं पहले तो सारा छान मारा और मुझे इतना हर्ट हो रही थी । आप ही के मिलने लगी? पुष्पा नहीं तो झल्लाकर कहा तो भी कोई चीज मिलती भी है क्योंकि सामने चीज रहेगी मिलेगी नहीं । तुम्हारी तो आदत बन गई है कि हर चीज तुम्हें में ही उठा कर दो । मैं झटके से अपनी ड्रेसिंग टेबल के बाहर गए और तैश में आकर पूरी दराज ही बाहर की नहीं ऍम यहाँ मैंने पहले ही देख लिया था । ताली सचमुच उसमें नहीं । पुष्पा नहीं दूसरी दराज खोली । वो वहाँ पे डाली नहीं थी वो भी ताज्जुब में पड गई हो रखी थी । उसने कहा फिर हो रही है यहाँ तो नहीं तो मैं थोडा पुठा पुष्पाणि हूँ कर मेरी ओर देखा तो वहीं इकाई क्या हो गया है? इस तरह तो तुम कभी नहीं बोलते । जो मैं पूछ रहा हूँ वो बताओ । तालिकाएं दो किस तरह चला रहे मुझ पर मैंने बताया फॅमिली के ही रख दी थी कॅश यहाँ तो नहीं ऍम पुष्पा का चेहरा बीस वक्त हो गया । कडी आॅफ ने कहा तो से इसी तरह बोल रहे हो तो सब सब बताओ कि हुआ क्या है? क्या मुझे इस तरह मत बोलो? बर्दाश्त करने की भी होती है । मैं अपना सिर पकडकर सोफे पर बैठी हूँ । अब मैं चारों ओर से जैसे पेट चुका था । जगन चंदानी, मान सिंह के भाई और अपने दफ्तर के गांगुली बाबू से धक्के खाकर मैं पिटे हुए आदमी की तरह और कर बरस रहा था । मुझे पुष्पा को शुरू से ही सब कुछ बता देना चाहिए था । अखिल मेरे ना बताने पर भी पूछ मैंने भर्ती लिया कि कोई खास गडबडी थी, इसलिए वहाँ छिपाने की कोशिश बेकार थी । मेरे अंदर इतनी ताकत भी नहीं रह गई कि मैं सारी बातें अपने अंदर ही छिपा रहा हूँ । मैंने पुश्ता को सारा किस्सा कह सुनाया । इस बाहर मैंने कोई बात नहीं छोडी, नई जगह की और न चंदानी से अपनी मुलाकात की । यहाँ तक कि माधुरी की बात भी मैंने नहीं नहीं पाए । जब मैंने अपनी बात खत्म कर ली तो उसने मुझसे पूछा तो मैं सारी बातें सच सच बताई है । आॅवर बोल रहा कहीं ये क्या नाम है उसका? चार कसमें वाली सुंदरी के पीछे दीवाने होकर किस से तो नहीं कर रहे हो? क्या मतलब? मतलब ये कि तुम ऐसे बच्चे तो नहीं कि वह अपनी उंगली पकडकर जहाँ तो मैं चाहे ले जाएँ । तुम ना चाहते तो चलाने के पास भी नहीं चाहते । मैं तुम्हारा क्या कर लेती हूँ, लेकिन जरूर तुम्हारे ऊपर उसका जादू चल गया होगा । तभी तो गए तो और तुम्हें क्या पिछला ले बैठी । मैंने कहा हो इसका फैसला बाद में कर लेना । पर इस वक्त सवाल तालिका है । थाली क्यों? उसका मसला क्या है? क्या मैं सारा किस्सा फिर बयान करूँ? पंद्रह बीस मिनट में जगन ताली के लिए फिर आ धमके । गांव अगर तुम ने ना दी तो तो वो लोग कुछ भी कर सकते हैं । उनके लिए कुछ भी नाम उन की नहीं है तो नहीं । कितने घबरा रही हूँ । उन्होंने लाकर में जो कुछ भी रखा हूँ उसके लिए तुम जिम्मेदार नहीं तो नहीं । ताली चुराई तो नहीं । किसी और के लाकर की ताली रखना चोरी के बराबर है । उनके पास के असर होती कि तली तुमने रखी है है । तुमने कहा जिरहा में वक्त बर्बाद कर रही हूँ । मैंने कहा हमें जल्द से जल्द ताली की खोज कर लेनी चाहिए । घोषणा बेकार है । पुष्पा ने कहा मुझे आती की मैंने ताली कहाँ रखी थी? उस ड्रेसिंग टेबल की जो हर मैं तो उन्हें देखा और मैंने भी लगता है कोई उठा कर ले गया होगा । मान सिंह के भाई ने तुमसे टेलीफोन पर कहा था ना कि तुम से मिलेगा । हो सकता है वही इसी बीच जाकर ले गया हो हूँ । लेकिन तुम घर में ताला बंद करके क्यों नहीं नहीं थी? मैं पडोस में ही वकील साहब के घर गई थी और उसमें जाती हूँ तो कभी ताला बन नहीं करती । फिर मुझे क्या पता था कि ताल इतनी जरूरी थी पर तू खबर आती क्यों? अगर वे आएंगे और कोई गडबडी मचाएंगे तो हम पुलिस को बुला लेंगे और फिर मैं भी जेल की हवा खाऊंगा ऍसे कहा क्यों उनकी खाओगे जेल की हवा । इसीलिए तो यह साबित करना मुश्किल होगा कि मैंने मान सिंह को नहीं खेला । दूसरा ये कि अगर मुझे ताली मिली थी तो मैंने कल ही रिपोर्ट क्यों नहीं की? आज अब तालिक हो गई तो मैं रिपोर्ट कर रहा हूँ और अगर कहीं डाली के पीछे कोई साजिश हुई जैसा की मुझे लगता है तो फिर मैं भी उसमें शामिल मान लिया जा सकता हूँ । नहीं, मैं पुलिस को इस मामले में रिपोर्ट करने की हालत में बिल्कुल भी नहीं हूँ । इस पर कुछ भी सोच में पड गई ।

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एक रहस्य भरी कहानी, सुनिए कैसे एक छोटी सी ताली, खतरों के ताले खोलती है writer: रमाकांत Script Writer : Mohil Author : Ramakant
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