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क़त्ल और देशद्रोह के इलज़ाम में सीक्रेट सर्विस का देशभक्त जासूस जावेद खान जेल की सलाखों के पीछे पहुँचता है. इस गुत्थी को सुलझाने निकले अमर और जॉन के सामने आती है एक ऐसी साजिश जो भारत के नक़्शे को बदलने की क्षमता रखती है. क्या थी वो साजिश? और कौन था उसका...मास्टरमाइंड? writer: शुभानंद Author : Shubhanand Voiceover Artist : RJ Hemant
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हूँ । कुछ देर बाद दो फोरेंसिक एक्सपर्ट के साथ हेमंत भी वहाँ पेश हुआ । उन लोगों ने जूतों के निशान उठाते हुए इस बात की खोरी तौर पर पुष्टि की कि ये निशान उन दो निशानों में से एक थे जो जावेद के घर से मिले थे । मिल गया ना कनेक्शन जॉन हेमंत को देखते हुए बोला, कुछ देर बाद वो लोग वहाँ से रुखसत हो गए । दूसरे दिन पंकज के कत्ल और हथियारों के मामले में कोई नई बात पता नहीं चली । पर शाम तक हथियारों वाली घटना न जाने कैसे मीडिया तक पहुंच गई और फिर देखते ही देखते इस पर तरह तरह की राजनीतिज्ञ और पत्रकार चर्चा करने लगे । जावेद के मुसलमान होने के कारण कुछ पार्टी के नेता ये बोलने लगे की शक्तियां उसने किसी आतंकी गिरोह के कहने पर अपने घर में उन हथियारों को पनाह दी होगी । अरे आजकल यही हो रहा है । एक नेता नेशनल चैनल पर बोल रहा था इन लोगों को जरा सी पावर मिल जाती है तो उसकी आड में ये यही सारे काम करते हैं । मैं कहता हूँ इतने संगीन इल्जाम के बावजूद क्यों पुलिस ने अभी तक उसे गिरफ्तार नहीं किया । किसके इशारे पर ऐसा हुआ? रोलिंग पार्टी के सिवा और कौन हो सकता है? तो क्या अगर मैं कहूँ कि रोलिंग पार्टी भी इन कामों में लिप्त है तो गलत होगा । पर जावेद खान का बैग्राउंड बेहद अच्छा है । उसने तो हमेशा देश की अटूट सेवा की है । न्यूज एंकर बोला पहले वो आर्मी में थे और देश पर हुए कई हमलों में इन्होंने आतंकवादियों को मुंहतोड जवाब दिया था । देखिए मैं ये नहीं कह रहा कि वो जानबूझ कर ये काम कर रहा है तो उस पर किसी किस्म का प्रेशर हो सकता है । वो जो भी हो मैं उत्तर प्रदेश सरकार से ये जानना चाहता हूँ कि उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई । माना कि उसके आतंकी होने की संभावना बेहद कम है पर अगर वो वाकई आतंकी हुआ तो क्या उसे खुला घुमने देना सही होगा? भारत एक लोकतंत्र है तो क्या आतंकी को भी यहाँ खुलेआम घूमने की आजादी मिलेगी? न्यूज एंकर हजार आप तो अरे इसलिए तो हमारी जनता परेशान है । जिसका बैग्राउंड कमजोर होता है उसे तो तुरंत उठाकर जेल में डाल दिया जाता है और इन जैसों पर हाथ डालने में इतना संकोच मुझे जवाब चाहिए । आखिर कब तक हमारे देश में इस तरह की दोगली परंपरा चलेगी । इस तरह माहौल इस बहस से गर्म होता चला गया । अगले दिन शाम को अब भर अभय कुमार को गोपीनाथ का फोन आया । मुझे ऊपर से ऑर्डर मिले हैं । जावेद को अरेस्ट करना होगा । ये सब एक साजिश है । गोपीनाथ कुछ ही समय में हमें पुख्ता सबूत अवश्य मिलेंगे । देखो मुझे पूरी उम्मीद है अब है । पर फिलहाल जावेद को रेस्ट करना ही होगा । अब है चुप हो गया इस ऑर्डर के आगे मैं बात हाँ अब है । हताश स्वर में बोला हुआ है ना । कुछ ही देर में जावेद को अरेस्ट कर लिया गया । मीडिया का जत्था उसके घर से लेकर पुलिस स्टेशन तक पीछा करता रहा है । हालांकि पुलिस ने कोई बयानबाजी नहीं की । एक बार फिर जावेद लॉकप में था । रात भर किसी को भी उस से मिलने की इजाजत नहीं मिली । सुबह अमर और जॉन कोतवाली पहुंचे । बाहर पत्रकारों का मेला सा लगा था । भीड को चीरते हुए वह अंदर पहुंचे और इंस्पेक्टर हेमंत से मिले । अमर बोला, जावेद के घर पर हुई जांच पडताल की रिपोर्ट मिली नहीं । अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है । शायद शाम तक आ जाए । हेमंत ने कहा ठीक है हम लोग खुद फोरेंसिक लैब चले जाएंगे । फिलहाल क्या हम जावेद से मिल सकते हैं । उसने लॉकप की तरफ इशारा कर दिया । जॉन और अमर जावेद के पास पहुंचे कैसे हो? अमर ने पूछा आप तो यहाँ रहने की आदत से पढ रही है । जावेद मुस्कुराकर बोला सब ठीक हो जाएगा तुम सरकारी मेहमान नवाजी के मजे लोग मैं और जॉब ढूंढ के निकालते हैं उस पार्टी को जो तुम्हारे पीछे पडा है । मुझे लगता नहीं इतना आसान होगा जावेद सलाखों को पकडकर बोला । फॉरेंसिक रिपोर्ट में कुछ पता चला । रिपोर्ट आई नहीं है अभी यहाँ से हम लोग सीधे फोरेंसिक लैब भी जाएंगे । ओके जभी बोला एक काम और करना मैंने अपने घर के सामने चाहे वाले गंगा राम अमर ने पूछा । हाँ उसे मैंने पता लगाने को कहा था कि किसने मेरे कमरे के सामने कचरे में रात के वक्त वो सबूत प्लांट किए थे । उसका फोन अभी तक तो नहीं आया था और अब मेरा फोन जमा हो गया है । ठीक है हम पता लगा लेंगे । मेरे खयाल से सहने की घडी की भी जांच करनी चाहिए । जावेद ने कहा एक मैं करूंगा । जॉन बोला तो तुम्हारा सोचना सही है । इन घटनाओं के तार सानिया और उसकी घडी से जुडे हो सकते हैं । आखिर शुरू तो सबकुछ उस घडी से ही हुआ था । ओके तुम लोग चलो । फिर जावेद ने कहा, अमर और जॉन फिर जिस तरह आए थे उसी तरह पत्रकारों की भीड को चीरते हुए वहाँ से रुखसत हो गए । जॉन साहनी से मिलने उसके ऑफिस पहुंचा । साहनी अपने कैबिन में रिवाल्विंग चेयर पर बैठा था । जॉन उसके सामने बैठा हुआ था । जान ने कहा, मिस्टर साहनी ऑफिस में आपके काम के बीच किस तब तो नहीं करना चाहता था । पर मुझे आपसे कुछ और पूछताछ करनी थी । ऍन आपको पता ही होगा । जावेद कि अरे इसके बारे में वो तो मुझे मालूम हुआ था । पुलिस कुछ भी करती रहती है । पर अच्छा हुआ कि उसे छोड दिया गया । हाँ पर कल रात उसे दोबारा रेस्ट किया गया है । बट ऍम सहानी विस्मित रह गया । जॉन उसे ध्यान से देखने लगा । आखिर पुलिस करके आ रही है । असली मुजरिम को पकडने के बजाय जासूसों के ही पीछे पड गई । मेरे कारण ही वो इस मुसीबत में फंस गया है । आप के कारण? हाँ नहीं, मैं उसे अपनी प्रॉब्लम के लिए इंगेज करता । ना तो इस चक्कर में पडता है आप फिक्र मत करिए । वो बोला मुझे बताइए कि आपको उस घडी वाली परेशानी से मुक्ति मिली फॅस दो दिन से वो घडी सही चल रही है । हुआ जॉन मुस्कुराया यानी पंकज के खत्म के बाद से वो एक बार भी नहीं होगी । हाँ, मुझे वो घडी जांच के लिए चाहिए । आपकी अजय करेंगे । मैं पहले भी घडियों के स्पेशलिस्ट के पास ले जा चुका हूँ । मैं उस की फॉरेंसिक जांच करवाऊंगा । अगर आप के घर में कोई है तो क्या आप उसे बोल देंगे ताकि मैं अभी यहाँ से निकलकर उसे कलेक्ट कर लो । वो सोचने लगा कोई दिक्कत है क्या? जॉन ने धीरे से पूछा नहीं नहीं दिक्कत क्या हो सकती है? हैं । मैं तो बस सोच रहा था कि अभी घर पर कोई होगा या नहीं । कोई ना कोई तो होगा ही । दरअसल पंकज के कपिल के बाद मैंने सबको छुट्टी दे रखी है । वैसे भी वह सब दहशत खाये हुए थे । मैं भी नहीं चाहता हूँ । मेरी वजह से किसी का नुकसान होगा । इसलिए अभी सिर्फ कार्ड से और आम तौर पर वो घर के अंदर नहीं आते हैं । अब आपको इतनी तकलीफ तो करनी ही होगी । क्यों नहीं बत्तीस ऍम वो घडी मेरे लिए बेहद अजीज है शर्ट फिर जॉन ने साहनी से इजाजत ली, अमर फॉरेंसिक लैब में था तो क्या सबूत मिले? हैं । उसने रामधारी नामक एक्सपर्ट से पूछा, आरडीएक्स, ए के फोर्टी, सेवन रॉकेट्स, ग्रेनेड्स ये सभी आतंकवादियों के काम में आने वाले जाने माने हथियार हैं । इतनी जानकारी मुझे भी है । अमर बोला और उस पर कोई फिंगरप्रिंट, सिया कोई ऐसे सबूत मिले जिससे पता चले कहाँ मैन्युफेक्चर हुए कहाँ से भेजे गए वगैरह । राइफलें अफगानिस्तान में बनी है और ग्रेनेड वगैरह किसी फैक्ट्री में बने लग रहे हैं । कहना मुश्किल है कौन सी? जाहिर है ऐसी फैक्ट्री गैरकानूनी होती है क्योंकि अब ये बताओ इन्हें गायब करने का क्या हो गया है वो चौका । अमर ने आंख मारी । अरे मजाक कर रहा था ऐसे मजाक नहीं करें । रामधारी गमगीन स्वर में बोला नहीं करेंगे । अमर बोला और कुछ मिला जावेद के घर कोई नया फिंगरप्रिंट नहीं, कोई और सबूत नहीं । रामधारी अब उसके सवालों से साफ भुगताया दिखाई दे रहा था । फिर अमर लैब से बाहर निकला । कार में बैठकर उसने जॉन को फोन किया । अभियान जॉन की आवाज आई इधर पहुंचा सहानी के घर घडी लेने जा रहा हूँ कहकर उसने संक्षिप्त में साहनी से हुई मुलाकात के बारे में बताया । ये सहानी का बच्चा बहुत गहरा मालूम पडता है । सुनकर अमर बोला मैं माइंड तो क्या पता चला । अमर ने कहा तो ये और टीचर मैं सानी के बंगले पर पहुंच गया हूँ । बाद में बात करते हैं ठीक है । अमर ने फोन रखा । फिर खुद से ही बोला मिशन गंगा राम चाय वाला कुछ देर में वो जावेद के घर के सामने स्थित चाय वाले के पास पहुंच गया । गंगा राम मौजूद था और चाय छानने में मजबूत था । जावेद के कारण वह अमर को भी पहचानता था । कैसे हो गंगा राम तब बढिया सर पर ये जावेद साहब के साथ क्या चल रहा है? पुलिस ने उन्ही को अरेस्ट किया । कोई बडी साजिश चल रही है । जल्दी ही सब पता चल जाएगा । खैर तुम यह बताओ? जावेद भाई ने तो मैं कुछ काम दिया था । उसका क्या हुआ जी मुझे पंचर बनाने वाले लडके से पता चला कि एक आदमी आधी रात को जावेद सर के घर के बाहर कूडेदान में कुछ डाल रहा था । वो अच्छा जॉन बोला कैसा था देखने में क्या हो लिया था उसका अंधेरे के कारण ये सब तो नहीं देख पाया । पंचर वाला आधी रात को क्या कर रहा था? अमर भी पूछा वो अक्सर देर रात तक काम करता है ये तो उसने और क्या देखा । बस यही है कि वो आदमी रात को कहा से उतरा और इधर उधर देखने के बाद कचरा डाला और फिर जल्दी से वहाँ से निकल गया । उसे उसका चेहरा नहीं दिखा । कार तो देखी होगी । मैंने पूछा की गाडी का नंबर बगैरा देखा पर उसे ठीक से याद नहीं था । बस इतना बताया की गाडी पुरानी मारुति जयंती और राजस्थान पासिंग की थी । अच्छा राजस्थान की गाडी यूपी में वो पंचर वाला है कहाँ है मैं उससे बात करना चाहता हूँ । वो लडका शाम को ही आता है । सर अच्छा और कोई बात बताई थी उसने नहीं बात से इतना देखकर को अपने काम में लग गया । उसे लगा किसी को दारू की बोतल बोतल फेंक नहीं होगी इसलिए जल्दी में फेंक कर भाग गया । ठीक है उस लडके से बोलना कि शाम को यही मिले, मैं आऊंगा । उस से बात कर रहे हैं । ठीक है सब । फिर उसने गंगा राम से विदा ली । जॉन ने साहनी के घर से घडी हासिल की और सीक्रेट सर्विस हेडक्वाटर की तरफ चल दिया । कार ड्राइव करते हुए हुए चौराहे पर रेडलाइट पर रुका । कुछ पलों में लाइट ग्रीन हो गई पर उसके सामने लगी कार्य आगे नहीं बढी । उसने हॉर्न बजाया पर कुछ फर्क नहीं पडा । वह झुंझलाकर कार से उतरा और अगली गाडी के ड्राइवर के पास पहुंचा । जॉन ने उसकी खिडकी पर दस्तक दी । उसने शीशा नीचे गिराया तो वो बोला अरे आगे बढो भाई कोशिश कर रहा हूँ गाडी बंद पड गई है क्या करूं? ड्राइवर झुंझलाता हुआ बार बार चाबी घुमाकर इंजन को जगाने की कोशिश कर रहा था । तब तक उसके पीछे वाले अपनी गाडियां बैठ कर के अगल बगल से आगे बढने लगे । जॉन वापस अपनी गाडी में पहुंचा और फिर उसी तरह उसने भी कार बैक की और आगे निकल गया । कुछ देर में वो सीक्रेट सर्विस हेडक्वाटर पहुंचा और पार्किंग में कार लगाने लगा । अभी वो घडी लिये दरवाजे की तरफ बढी रहा था कि उसे अपने पीछे किसी कार के टायरों के चीखने की आवाज आई । उसने पलट कर देखा । अमर हर बढाते हुए कार से उतर रहा था और इसमें बडी जल्दी उसे देखकर जॉन ने कहना चाहता पर उसके वाक्य के पूरा होने से पहले ही अमर नहीं उसके हाथों से घडी छीन ली । अरे वो बोला अमर ने पूरा जोर लगाकर घडी दूर खाली मैदान में उछालती जॉन चीज ये क्या किया तो पागल हो गया क्या? अमर कुछ बोला नहीं बल्कि मैदान की तरफ देखता रहा । घडी मैदान में घास के नीचे जा गिरी थी । कुछ बोलेगा जॉन में अमर का कंधा हिलाया । तेरी कार में घुसकर घडी चेंज की गई है । जरूर वो बम या कोई और खतरनाक चीज हो सकती है । हाँ पर उन वो चौराहे पर हाँ मैं इत्तेफाक से तो पीछे ही था । तो जैसे ही कार से उतरा एक आदमी तेरी कार में आया और घडी बदल कर निकल गया । तब से तो जो कॉल कर रहा हूँ पर तू है कि फोन ही नहीं उठा । तो जॉन में मोबाइल चेक करते हुए कहा फोन साइलेंट पर था, क्या करें अलर्ट कर सकते हो । फिर जॉन सीक्रेट सर्विस में फोन करके सबको अलर्ट कर चुका था । पुलिस को फोन कर दिया गया और बम निरोधी दस्ता उस तरफ निकल चुका था । सीक्रेट सर्विस वालों ने घडी के क्षेत्र को चारों तरफ से कवर कर लिया ताकि कोई उस तरफ ना जा सके । अभी तक घडी सही सलामत थी । सब बेचैनी से उसी तरफ देख रहे थे । कुछ देर में बम निरोधी दस्ता पहुंचा और उन्होंने घडी की जांच पडताल शुरू की । अमर जॉन का शव ठीक निकला । वह टाइम बम था, बम निरोधी दस्ते नहीं उसे बिना ज्यादा दिक्कत के निष्क्रिय कर दिया । उन्होंने बताया कि बम अपने आस पास के लोगों को मारने यह गंभीर रूप से घायल करने लायक शक्तिशाली जरूर था । बम निरोधी दस्ते की वहाँ से निकलने के बाद उस एरिया का पुलिस इंस्पेक्टर अमल जॉन वह सीक्रेट सर्विस के अन्य कर्मचारी आपस में चर्चा करने लगे । जॉन ने पूरा मामला बताया । ये जरूर साहनी का ही काम है । जॉन बोला और अगर साहनी ने ऐसा किया तो घडी बदलने की जरूरत के ऊपर है । वो सीधे ही तुझे बम पकडा सकता था । अमर बोला ऐसा होता तो वह फंस जाता ना । उसने जानबूझ कर इस तरह की दूसरी घडी ली और उसमें बम फिट करवा दिया । पर इतने कम समय में उसने उस घडी जैसा बम कैसे तैयार कर लिया । अमर बोला बम पहले से तैयार करके रखा होगा उसने जो भी इनकी साजिश है उसके तहत इन्हें पता ही होगा कि देर सवेर उसके ऊपर शक किया जाएगा । इसलिए उन्होंने पहले से ऐसी घडी तैयार कर रखी होगी । अब वो ओरिजिनल घडी भी गायब हो गई जिससे हमें कोई सुराग मिल सकता था । हुआ ना एक तीर से दो निशाने अचानक इंस्पेक्टर बोला चौराहे पर जो कहा आपके आगे रुकी थी, उसका नंबर याद है आपको नहीं । मैंने इतना ध्यान नहीं दिया । जॉन बोला मैंने भी नहीं । अमर ने कहा उस ड्राइवर की शक्ल याद होगी । इंस्पेक्टर ने पूछा हाँ उसे तो देखा था चलिए फिर कम से कम उसका स्क्वैश तो बन ही जाएगा । तभी जॉन कुछ सोचते हुए बोला और एक बात मैंने ध्यान दी तो पुरानी सी मारुती कार थी और उसका नंबर शायद आरजे । कुछ तो था वो राजस्थान अमर की मुझ से निकला । हाँ यानी वही कार थी जिसमें बैठकर कुछ लोग जावेद के घर के बाहर पंकज के मॉडर के एविडेंस प्लांट करने आए हैं । अमर ने कहा सभी ने चौकर उसकी तरफ देखा । अमर ने विस्तार से गंगा राम से हासिल हुई जानकारी के बारे में बताया ऍम तुम कुछ और करो ना करूँ पर फौरन से फौरन शहर में घूम रही राजस्थान पासिंग की पुरानी मारुति जान तलाश करवानी शुरू कर दो । ठीक है और कार का पूरा नंबर नहीं है । क्या पता होता तो बताइए देते यार फिर भी ऐसी कोई बहुत कार्य भी नहीं होंगी । शहर में मैं अभी वायरलेस से सभी को सूचित करता हूँ कहकर वह अपनी जीत की तरफ चला गया । जिस तरह की घटनाएं हो रही हैं । मुझे तो लग रहा है कि ये किसी आतंकवादी संगठन की हरकत है । जॉन बोला जावेद के घर से मिले हथियार भी इसी तरफ इशारा कर रहे हैं । अमर ने सहमती में सर हिलाया, चीज को इन्फॉर्म करना चाहिए । जॉन बोला ऍफ अभी ऑफिस में नहीं है । एक कर्मचारी बोला चलो अंदर से फोन करते हैं । अमर ने कहा फिर वो लोग हेड क्वार्टर के अंदर चलती है । अमर और जॉन को विश्वास था कि पुरानी जानकार अपराधियों ने अवश्य किसी डीलर से सस्ते दामों में हासिल की होगी । इसके लिए उन्होंने अपने आदमियों को काम पर लगा दिया । राजस्थान की ऐसी पुरानी का नहीं । पिछले कुछ समय में ज्यादा बिकी होने की संभावना कम थी । उनका ये अनुमान भी ठीक निकला । अंतत है उनके सहकर्मियों ने दो ऐसे डीलर पता लगाए जिन्होंने पिछले कुछ दिनों में ऐसी कार भेजी थी । इत्तिफाकन दोनों ही जगह से रन की कार भी की थी । जो हमने जो कार देखी थी वह भी रन की थी । एक डीलर से तो खरीददार का पता मालूम चल गया क्योंकि उसके नाम पर गाडी ट्रांसफर उसी ने करवाई थी । जबकि दूसरे डीलर लकी कार्स ने बताया कि खरीदने वाले ने सिर्फ बेचने वाले के साइन लिए थे और कहा था रजिस्ट्रेशन वो खुद करवाएगा । उसने अपना जो एड्रेस लिखवाया था वह फर्जी निकला है । इससे उनको कामयाबी मिली नजर आई । अब कम से कम उनके पास गाडी का नंबर था । उन्होंने पुलिस को तुरंत वो नंबर बताया । अब कहा की तलाशी तेजी से शुरू हो गई । दूसरी तरफ साहनी ने जॉन को फोन किया । बोलियाँ मिस्टर साहनी साहनी की आवाज में उत्तेजना नहीं । मैंने आपसे कितने रिक्वेस्ट की थी कि वह घडी मेरे लिए कितनी है और फिर भी आपने उसे गुमादी । जॉन ने मन ही मन उसे कोसा पर प्रत्यक्ष में बोला एम सोरी! अब तो मेरा पुलिस और जासूसों पर से ही विश्वास टूट गया है । वो गुस्से में बोलता गया, आपसे घडी नहीं संभाली गई और सरकार सोचती है कि आप लोग पूरे देश की सुरक्षा संभाल सकते हैं । मैं ऐसा नहीं ये मामला बहुत सीरियस है जिसमें आतंकवादियों के शामिल होने का भी शक है । आप को अपनी घडी की पडी है । अब ये क्यों नहीं सोच कर बताते हैं कि आप ही की घडी को बम बनाकर किसी हमें क्यों दिया । आप की घडी में ही ऐसा क्या खास है कि उसके चारों तरफ कितनी घटनाएँ घटती चली जा रही है । अब ये भी मैं पता कर के आपको बताऊँ और और आप लोग क्या करेंगे? अपने घर में बैठ कर आराम से टीवी पर आई पी एल । देखेंगे देखिए हम से जो हो रहा है हम कर रहे हैं । अपराधी हाथ आएंगे तो आपकी घडी भी मिल जाएगी । आप आराम से घर पर बैठे हैं तो तो मुझे घर पर बैठोगे मैं मैं तुम लोगों पर केस कर दूँ । जरूर करना कहकर जॉन ने फोन कर दिया । फिर उसने श्रीनिवासन को बुलाया । ऍन सर, मुझे मिलना शमी के मर्डर की फुल स्टडी करनी है । अच्छा ऍम पर वो मॉडर्न नहीं आत्महत्या के केस के नाम से बंद है । श्रीनिवासन शान के साथ बोला वही अर्जेंट जॉन ने उसकी तरफ आंखे तरेर कर देखा । बहुत क्योंकि हम चीज घर से परमिशन लेकर पुलिस से फाइल मंगवा लेता । ऍम नहीं नौ प्रॉब्लम सर । शाम तक फाइल श्रेणी ने उसके डैड तक पहुंचा दी । ऑफिस तकरीबन खाली हो चुका था । जॉन ने कॉफी तैयार की और फाइल पडने लगा । फाइल पढते पढते वो नोट्स बनाता जा रहा था । पूरी फाइल पढने के बाद उसने घडी पर नजर डाली । रात के दस बज गए थे । उसने अंगडाई ली नोट्स बैग में डाले और घर जाने के लिए तैयार हो गया । वो जल्द से जल्द कुछ करना चाहता था । अमर कार को ढूंढने में ध्यान लगा रहा था और चीफ नहीं । उसे साहनी पर ध्यान देने के लिए कहा था । रात हो चुकी थी । सभी अपने अपने घरों में थे । सडकें लगभग सुनसान हो चुकी थी । अमर सडकों पर योगी कार घुमा रहा था । अगर कहीं पुलिस की नाकाबंदी दिख जाती तो वो उनसे कार की बाबत पूछ लेता था । हालांकि जवाब अभी तक सकारात्मक नहीं मिल सका था । वो गंभीर था । उसे जावेद की चिंता सता रही थी । जिस तरह के इल्जाम उस पर लगे थे उनसे छुटकारा पाना आसान नहीं था । उसे बताया था कि अब जावेद की बेगुनाही तभी साबित हो सकती है जब उसे फंसाने वाला पकडा जाएगा । जॉन साहनी के पीछे लगा था पर अमर को ऐसा महसूस हो रहा था कि इसमें साहनी का हाथ नहीं है बल्कि कोई और ही है जो इस तरह से षड्यंत्र कर रहा है कि जावेद फंसे और शक सहनी पड जाए । तभी अमर का फोन बजा बोल मेरी जान । फोन को स्पीकर पर डालते हुए उसने कहा हुसैनगंज की तरफ कष्ट मारना । राजस्थान पासिंग की एक पुरानी कार किसी ने उधर देखिए बाहर का मेक और मॉडल तो पता नहीं लॉन छोडने पर ट्राय किया जा सकता है । ठीक है मैं उस तरफ देखता हूँ । कहकर अमर ने कॉल समाप्त की और एक्सीलेटर पर दबाव बढा दिया । कुछ ही देर में वह हुसैनगंज पहुंचा । वहाँ रात के इस समय एक्का दुक्का लोग ही दिखाई दे रहे थे । अमर धीरे धीरे उस इलाके की सडकों पर कार घुमाने लगा । तभी उसका ध्यान सडक के किनारे एक अंधेरी पडी गली की तरफ आकर्षित हुआ । उस अंधेरी गली से उसे कुछ अजीब सी आवाजें सुनाई दी । वो आवास कूडेदान में खाना ढूंढने वाले कुत्ते बिल्ली की भी हो सकती है । पर अमर का मन किसी अज्ञात भावना से शंकित होता था । उस आवाज को अनसुना नहीं कर सका । उसने कार सडक किनारे लगाई और रिवॉल्वर हाथ में लेकर सावधानी से उस तरफ चल दिया । गली के पास पहुंचकर उसने देखा की गली में कई ट्रक, लॉरी वगैरह खडे थे । पर किसी इंसान के उधर होने का कोई चिन्ह नजर नहीं आ रहा था । वो सावधानी से गली में प्रविष्ट कर गया । उसे उस आवास के स्रोत को ढूंढना था । उसे पूरा यकीन था की आवाज गली के अंदर से ही आई थी । गली में कुछ अंदर आने के बाद उसे अंधेरे में जो भी एक पुरानी इमारत दिखाई दी, गेट खुला था । अमर बिना कोई आवाज निकाले अन्दर प्रविष्ट हो गया है । उसे बात करने की बेहद हल्की आवाजें और बीच बीच में कुछ खटखटाहट की आवाजें आ रही थी । अमर इमारत के अंदर एक राहदारी में आ गया । वहाँ घुप अंधेरा था । आवाज की दिशा में वो आगे बढता गया । राहदारी के अंत में वो पानी मुडा । वहाँ एक दरवाजा था । अमर ने दरवाजे पर खान लगा दिया । आवाज उसी के अंदर से आ रही नहीं करना क्या है उसे खत्म कर देते हैं । फिर लाश ठिकाने लगाने बाहर निकलना पडेगा तो लगा देंगे । रात को पुलिस कष्ट पर रहती है । ये काम इतना आसान नहीं है । तो हम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे काम हम पहली बार करेंगे । बहुत बार किया है और किसी सिलसिले में आज जगह जगह पुलिस की चौकसी है । लग रहा है किसी को ढूंढ रहे हैं । हमें तो नहीं बोल रहे हैं । हो सकता हूँ अब एक ही जा रहा है इसे यहीं खत्म करके ये जगह ही छोड देते हैं । ये है ये ठीक रहेगा । फिर खटखट की आवाज आई ये बात उछल कूद रही हैं । भरने से पहले मुर्गी उछल कूद मचाती है तो मैं ऐसे हलाल करूँ । विडियो बनाता हूँ, वीडियो बनाना है क्यों नहीं बनाकर हुजूर को भेज देंगे? वो सोशल जाएंगे हो गया चला जा करके फिर ऐसा लगा जैसे किसी को घसीटा जा रहा हूँ । अमर ने धीरे से दरवाजा खटखटाया और फिर दूर भाग गया और राहदारी में एक गंभीर के पीछे छुट गया । कुछ मिनटों तक कमरे की तरफ से कोई हलचल नहीं हुई । वो इंतजार करता रहा । फिर उसे बेहद धीरे से दरवाजा खुलता दिखाई दिया हूँ । अंदर से एक नकाबपोश बाहर निकला जिसके हाथों में एक ये फोर्टी सेवन वो राहत आरी में जांच पडताल करते हुए आगे बढने लगा । अमर छिपा रहा है उसके राहदारी से बाहर की तरफ जाने के बाद अमर धीरे धीरे कमरे की तरफ चल दिया । फिर उसने कमरे में सावधानी से झांक कर देखा । उसने देखा कमरे में एक लडकी थी जिसके हाथ पाँव पर नहीं थे । ऊपर भी कपडा बंधा हुआ था । वो घुटनों के बल बैठी हुई थी । तभी दरवाजे के बगल में छिपा एक नकाबपोश उसपर झट्टा उसने अमर को अपनी गिरफ्त में ले लिया । अमर खुद को छुडाने का भरसक प्रयास करने लगा और उसकी पकड बेहद मजबूत थी । फिर अमर ने अचानक उसे दीवार की तरफ धकेल दिया । उसकी पकल कुछ खेली हुई तो अमर ने उसके सीने में कोहनी मार दी है । वो उसकी पकड से बाहर निकल आया । अमर को लगा वो उसे दोबारा पकडने की कोशिश करेगा । पिछले कूदकर दूर हट गया पर उसे पकडने की बजाय बेहद अप्रत्याशित ढंग से उसने दरवाजे की तरफ दौड लगा दी और देखते ही देखते कमरे से बाहर निकल गया । अमर उसके पीछे बाहर आया । दोनों राहदारी में दौड रहे थे तभी सामने से दूसरा नकाबपोश आया और उसने अमर की ओर फायरिंग शुरू कर दी है । अमर खंभे की आड में हो गया । अमर ने रिवॉल्वर निकाली और फायरिंग रुकते ही उनकी तरफ फायर करने लगा । नकाबपोश की तरफ से फिर गोलियों की बौछार हुई फिर शांति छा गई । फिर अमर को गेट की तरफ से आवाज आई । उसने देखा वह दोनों गेट खोलकर भाग रहे हैं । अमर उनके पीछे दौडा पर जब तक वो गेट पर पहुंचता उससे मोटर साइकिल की आवाज आई । वो दोनों भाग रहे थे । अमर ने फायर किया पर मोटर साइकिल तब तक गली से मुख्य सडक की ओर मुड चुकी थी । उसने मोबाइल फोन निकाला और तुरंत हेडक्वार्टर और पुलिस को अलर्ट किया । फिर वो वापस उस इमारत के अंदर आया । इस बार उसकी नजर अंदर एक कोने में खडी । कार पर कहीं वो उसके पास पहुंचा और फिर उसका ध्यान उसकी नंबर प्लेट पर सोता ही चला गया । वो वही कार थी । पुरानी मारो तीस और उसका नंबर राजस्थान का था । तभी उसे राहदारी की ओर से वो लडकी आती नजर आई जो अभी अंदर बंद ही हुई नहीं । अमर ने आश्चर्य से उसकी तरफ देगा । उसे हैरानी हुई कि उसने इतनी आसानी से अपने हाथ का कैसे खोली है । वो घबराई सी इधर उधर देखने लगे । अमर ने उसे ध्यान से देखा । वो देखने में शहरी कॉलेज जाने वाली लडकी नजर आ रही थी । वो घबराई हुई जरूर थी, पर उसके चेहरे पर तेज तर्रार भाव थे । उसका ध्यान अमर की तरफ गया तो उसके पास पहुंचे । वो दोनों भाग गए । लडकी ने पूछा था उन्होंने क्या किया था तुम्हारा? अमर ने पूछा उसका ध्यान अभी तक कमर पर ठीक से नहीं गया था । वो चारों तरफ देखते हुए कुछ घुसाकर बोली ऐसे खडे मंत्र हूँ । उनके साथ ही आस पास हो सकते हैं किनके उसने जवाब देने की जगह अमर का हाथ पकडकर खींच लिया । मजबूरन अमर को भी उस की तरह झुककर कार के पीछे छोडना पडा कोई नहीं है । इधर मैंने किया ज्यादा हीरो मत बनाओ तो मैं पता नहीं किस चक्कर में पड गए हो उसकी बातों से अमर को अब उसके कॉलेज कल होने पर संदेह होने लगा था । कौन सा चक्कर चल रहा है? अमर ने अनजान बनते हुए पूछा जिन्होंने मुझे पकडा था वो टेरेरिस्ट वो खतरनाक है । बहुत खतरनाक है वो लोग अच्छा तो मैं कौन हूँ । लडकी का ध्यान अमर की रिवॉल्वर पर गए पुलिस में हो गया ।

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क़त्ल और देशद्रोह के इलज़ाम में सीक्रेट सर्विस का देशभक्त जासूस जावेद खान जेल की सलाखों के पीछे पहुँचता है. इस गुत्थी को सुलझाने निकले अमर और जॉन के सामने आती है एक ऐसी साजिश जो भारत के नक़्शे को बदलने की क्षमता रखती है. क्या थी वो साजिश? और कौन था उसका...मास्टरमाइंड? writer: शुभानंद Author : Shubhanand Voiceover Artist : RJ Hemant
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