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Part 15B

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अंधेरी रात में, धमाकों के बीच, अपने ही साथियों की आंख में धूल झोंक कर गंथर भाग निकला… चलने-चलते उस ने पे-मास्‍टर सार्जेंट को घायल कर दिया और रूपयों की तिजोरी अपने साथ ले ली। लेकिन गंथर ने ऐसा क्‍यों किया? एम जर्मन सैनिक की सच्‍ची कहानी जिस ने अपनी सेना के विरूद्ध जिहाद छेड़ा। Publisher - Vishv Books Writer - Ganther Bahneman
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मेरा ट्रक छह चुका था, सामान भी उसी में था । इसमें रेगिस्तानी नक्शे सम्मेलन थे और दिशा जाने के लिए कुतुबनुमा यंत्र भी था । पानी आवश्यक वस्तु थी । फिर भोजन तथा सवारी की भी समस्या थी और मुझे पता था कि मैं रेगिस्तान में पैदल अधिक दूर तक नहीं जा पाऊंगा क्योंकि सैनिक ट्रकों तथा मोटर साइकिलों पर मेरा पीछा कर रहे होंगे । अब एक बात तो निश्चित थी कि मेरी पुर्तगाल पश्चिमी अफ्रीका जाने की योजना पर पानी फिर चुका था । मैं वहाँ कभी नहीं पहुंचाऊंगा हूँ क्योंकि सामान अलोवा में छोड चुका था । अब मेरे पास की वस्तुओं की सूची बनाना इकट्ठे नहीं था । एक कमीज, एक हस्बैंड, एक जोडी वोट, एक फॅसने, तीन मैगजीन भरे हुए कार्य दोस्त है और एक महीन हॉस्टल में कुछ शेष कारतूस । इसके अतिरिक्त एक बंडल सॉली रोके नोटों का था जो कि इस समय बिल्कुल अनावश्यक था क्योंकि यहाँ कुछ खरीदने का प्रश्न ही नहीं उठता था । निश्चय ही मशीन पिस्टल मेरी समस्या को हल कर देगी । मैं गाडी तथा अन्य वस्तुएं भी इसके द्वारा प्राप्त कर सकता हूँ । ऐसा विचार मेरे मन में आया । सूर्य दूर पहाडों की चोटियों के ऊपर था । अचानक इंजन की ध्वनि आकाश में योजना लगी एक विमान पहाडों की दिशा से आ रहा था । एक सेकंड में वो मेरे स्तर के ऊपर आ गया और उसी समय मैं भी एक चट्टान पर लेट गया । विमान बहुत नीचे उडान भर रहा था और चालक भूमिका द्रश्य देखा था । मेरे ऊपर से होता हुआ आगे निकल गया और अलावा कर चक्कर लगाने लगा । मुझे मालूम हो गया कि वह विमान से मेरा पीछा कर रहे हैं । परंतु मैंने अनुमान लगाया कि उनको मेरे भागने की दिशा का पता नहीं है । निश्चय ही रात में इटालियन ओकी भयंकर शती हुई है जिससे उन्होंने विमानों का प्रयोग किया है । ये बात स्पष्ट थी । अब मुझे विश्वास हो गया कि गांव के प्रत्येक मार्ग पर पहरा बिठा दिया गया होगा और गश्तीदल मुझे ढूंढने भेजे जा चुके होंगे । अन्य इटालियन दूरबीनों से इन चट्टानों का निरक्षण कर रहे होंगे क्योंकि वैसे कार्यों में नहीं पढते । अब तो मुझे वोट पहने ये होंगे सूजन हो या न हूँ पर ये असंभव प्रतीत हो रहा था । निरंतर प्रयास करने पर भी जब पैर बोर्ड की अंदर नहीं गए तो मैंने एक तेज पत्थर से चमडा काट दिया और दर्द महसूस होते हुए भी मैंने पोर्ट पहली तीन घंटे सतर्कता से बढने के बाद मैं फिर अलावा गांव के संतरी की झोपडी से जहाँ मैं कल संतरी से बातचीत कर रहा था, दो मील की दूरी पर पहुंच गया । मेरा अनुमान था कि इटालियन ये जानते हैं कि मैं बाहर से से आया था और अलावा में इसी मार्ग से ज्यादा अथाह मेरे विचार से मुझे डेरना वाली दिशा में खोज रहे होंगे क्योंकि उनका विचार होगा कि मैं उसी दिशा में भागता हूँ । मैं सोच भी नहीं सकते थे कि भागने वाले दोबारा गांव के निकट भी आने का साहस करेंगे । अब मैं उसी सडक के किनारे छुपा हुआ था जिससे मैं कल गया था । मुझे याद आया कि नीचे एक बहुत ही भयंकर मूल हैं जहाँ पर ड्राइवरों को अत्यंत धीमी रफ्तार से गाडियां चलानी पडती है । विशेष करके ट्रक तो वहाँ पर बिना रुके और आगे पीछे घुमाएंगे रहे, बिना आगे बढ ही नहीं सकते । जिस स्थान पर मैं छुपा हुआ था वहाँ से अलग आवाज साफ दिखाई पड रहा था और वह भयंकर मोड भी निकट ही था । दूसरी ओर सिद्धि रूहल फाया का तालाब दिखाई देता था । पहाडों पर चक्कर लगाते गश्तीदल की दृष्टि मंच पर नहीं पढ सकती थी क्योंकि मैं चट्टानों की आड में था और मेरी ओर आते आते व्यक्ति की वोटों की आवाज का मुझे दूर से ही पता लग सकता था । अब मेरे पैरों का दर्द बहुत कम हो गया था । परसो जान कुछ अधिक हो गई थी । मुझे संध्या था की कहीं है सुनना पड जाए । फिर भी मुझे बूट उतारने का साहस नहीं हुआ क्योंकि उनको दोबारा पहन लेना, असंभव ता । इन तीन घंटों की यात्रा से मुझे प्यास लगने लगी परंतु पानी पीने का प्रश्न ही नहीं उठता । मक्खियाँ भी मुझे बहुत बता रही थी । मैं उनसे तंग आ गया था । काफी समय बीत गया । सम्भवता दो घंटों से मैं यहाँ बैठा था कि दूर सामने धूल के बादल उडते हुए दिखाई दिए । कुछ मोटरें मेरी हो रहा रही थी । लगभग बीस मिनट के बाद चौदह जर्मन मोटरों का काफिला मुझे नीचे की सडक पर दिखाई दिया । उनके बीच में बहुत कम अंतर था और उन के कारण वायुमंडल धूल सेडा किया था । उनकी पानी की बडी बोतलें बाहर लटकी हुई थी । मैं इस पानी की प्राप्ति के लिए किसी को भी प्रसन्नतापूर्वक गोली से मार सकता था । एक घंटे के बाद कुछ और ट्रक सडक पर से गुजरे जो अलग आ जा रहे थे, परन्तु काफिलों पर आक्रमण करने का प्रश्न ही नहीं उठता था । अब अल और बाकी दिशा से एक डाक ले जाने वाला सैनिक मोटर साइकिल पर आया । मुझे उसको गोली से मार देने की इच्छा हुई क्योंकि मैं प्याज से तलब रहा था और मुझे भागने के लिए मोटर साइकिल भी मिल सकती थी । यद्यपि ये बडी सरलता से किया जा सकता था परन्तु मैं ऐसा नहीं कर सका । यदि वह मुझ पर पहले गोली चला देता तो मामला बिल्कुल उलट जाता । इस दिशा में मुझे मशीन पिस्टल से गोलियां चलानी पडती और शोर मचाता । मुझ में मानव प्रेम की भावना बहुत कम रह गई थी । मैं भगौडा था जिसके पास पीने को पानी तक नहीं था और इस अवस्था में न्यासंगत कार्य करना कठिन था । आवश्यकता पडने पर रक्तपात करना मेरे लिए साधारण बात थी परन्तु फिर भी डाँट ले जाने वाले सैनिक को मारने की मेरी इच्छा नहीं हुई । बहुत समय बीत गया पर कोई आता दिखाई नहीं दिया । सूर्या आकाश से भयंकर गर्मी बरसा रहा था । मैं चट्टान की छाया के साथ साथ इधर उधर खिसक रहा था और मेरी प्याज पडती जा रही थी । इतने में मेरी उत्सव आंखों ने दूर धूल उडाती देखी । मैं पछता रहा था कि मैंने डाक ले जाने वाले सैनिक को क्यों छोड दिया? कम से कम उस की पानी की बोतल तो मेरे हाथ लगी जाती । एक भावना मेरे मन में आई की कुछ मील चलकर अपने परिचित संतरी से उसकी झोपडी में मिलूं क्योंकि बिना गोली चलाए उस से भेंट होने की आशा थी । परन्तु नंगे सिर्फ और घायल पहले से मुझे वहाँ तक पहुंचने में संजय था और ये कोई सरल कार्य भी नहीं था क्योंकि आती जाती गाडियों तथा सैनिकों से भागकर छिपना अनिवार्य था । इसके अतिरिक्त यदि वहाँ कुछ तनाव उत्पन्न हो जाता, गोली चलाने के सेवाएं मेरे पास कोई और चारा नहीं था और तब गांव की पूरी डायमंड कंपनी मुझे घेर लेती और मैं वहाँ से निकल नहीं सकता था । अच्छा मैंने ये विचार त्याग दिया । संतरी की पानी की बोतल मैंने कल लटकती देखी थी और बार बार रहे बोतल मेरे विचारों में कौन रही थी परंतु उसको प्राप्त करना असंभव ता । इसलिए समय का यही तकाजा था कि बिना देर किए मैं किसी ट्रक या मोटर साइकिल पर अधिकार कर लो । मुझे ज्ञात था कि यदि एक घंटे के अंदर अंदर मुझे महीने का पानी नहीं मिला तो मैं प्यास और पीडा से अच्छे हो जाऊंगा और नाटक समाप्त हो जाएगा ।

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अंधेरी रात में, धमाकों के बीच, अपने ही साथियों की आंख में धूल झोंक कर गंथर भाग निकला… चलने-चलते उस ने पे-मास्‍टर सार्जेंट को घायल कर दिया और रूपयों की तिजोरी अपने साथ ले ली। लेकिन गंथर ने ऐसा क्‍यों किया? एम जर्मन सैनिक की सच्‍ची कहानी जिस ने अपनी सेना के विरूद्ध जिहाद छेड़ा। Publisher - Vishv Books Writer - Ganther Bahneman
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