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भाग - 6.1

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सात वर्षों से चला आ रहा एक तरफा प्‍यार क्‍या दोनों तरफ होगा या अधूरा रह जाएगा? क्‍या दोस्‍ती प्‍यार में बदल सकती है या सिर्फ दोस्‍त ही बना जा सकता है? प्रेम और अंतरंगता के ताने-बाने में बुना बेहद रोचक उपन्‍यास है। Writer - Arvind Parashar
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सूरज की आखिरी किरण भी धुंधली हो चुकी थी । वैसे भी उसमें पिछले आधे घंटे थे । उसमें वो तेज नहीं रह गया था । हवा में प्रणय के कुछ तो खोलने के बाद बारिश रुक गई थी । ताड के पेडों ने बारिश की बूंदों को अपने आलय में उसी तरह थाम रखा था जैसे बादल पानी को कम कर रखता है और फिर भी उसके हरे पत्तों से भी रहे थे । ये अद्भुत दृश्य था । सामान्य लोगों के लिए बाहर का मौसम भी सामान्य हो गया था । यह एक सुखद संबोधन था । मैंने उस मंदा तैयार का आलिंगन क्या ठहरे हुए आसमान से कितना ही पानी की छोटी छोटी बूंदों को छू मा मैनाटाड को और बारीकी से देखने लगा । मैं उससे बात कर रहा था । इस बार ताड के साथ चल रहे मेरे प्रणय कल आपको बाधित कर दिया । ये मेरे उस दिन के क्रिया कलापों में संगीत खुल जाते जैसा था । देखो तो कौन आया है तो लोग कब आई? मैं तो कितनी देर से तो मैं दरवाजा खोलने को कह रहा था, मगर लग रहा था कि तुम खोले हुए थे । मेरे विचार से मौसम में सचमुच ये मौसम तो मेरी जान लेकर ही मानेगा । मैंने टॉम और रितेश री दोनों का आलिंगन क्या? नहीं? नहीं अरे मैं तो ऑटो में आई और ऍम अपनी मोटर साइकिल लेकर आया है । हम दोनों तो बस ऊपर एक साथ है । संजोग बस श्री तुम तो बिल्कुल गौरी की तरह बात करती हूँ । अब तो हमारी दोस्ती को सोलह साल हो गए और संगत का इतना तो हो गई । ये तो मेरे और नील की दोस्ती से भी लंबा समय है । हम दोनों की दोस्ती को अब एक दर्शक हो गया है और हम दोनों तो एक प्रकार से बात नहीं करते और तुम दोनों का बताओ भी बिलकुल भिन्न है । या फिर ये बात सिर्फ लडकियों के मामलों में ही सच होता है । वैसे मुझे ये मालूम है कि जब एक लडका और एक लडकी एक साथ रहते हैं तो उन दोनों में एक दूसरे को आ जाते हैं । लडकियों ने स्वतः ही बातचीत से खुद को अलग कर लिया । वे एक दूसरे के कानों में बात कर रही थी । मैं उन्हें सुन नहीं पा रहा था । मैं एक प्रकार से बिल्कुल आश्वस्त था की इतिश्री कौर इसे मेरे बारे में ही पूछ रही होंगी । मुझे इस बात का जरा भी ऐसा ही नहीं हुआ कि अनजाने में ही सही मगर मैं उन दोनों की ओर देखता था । मालूम है उनकी बातचीत का हिस्सा बनना चाह रहा था । फिर अचानक मुझे मेरी माँ नहीं एक बार मुझे क्या समझाया था । जब तो लडकियाँ आपस में बात कर रही हूँ तब उनके बाद शुक्कर नहीं सुननी चाहिए । ये कौन है इससे कोई फर्क नहीं पडता । खैर माने मुझसे ये बात इसलिए नहीं गई थी क्योंकि वो मुझे अनुशासित या दूसरों का सम्मान करना सिखा रही थी । ऐसा बिल्कुल भी नहीं था । उनका मानना था की आपस में बातचीत कर रही दो औरतों की बातों में छिपकर सुनना एक ओछी हरकत होती है । क्योंकि यदि वो बात आप से संबंधित हो या आपको मसालेदार प्रतीत हो रही हो तो अंतर तो वो बाद आपके कानों तक पहुंच जाएगी । फिर वो बात एक राज नहीं रह जाएगी । मुझे वो बात तो याद आ गई मगर इसके बावजूद मैं उन दोनों की ओर देखता रहा । मालूम है अपने ही बारे में सब कुछ भूल गया था तो हम ने मुझे को नहीं से धक्का दिया और सावधान । क्या मैं इस प्रकार पीछे मुड गया? मालूम कुछ हुआ ही नहीं था । मैं और ऍम बालकनी में चले गए । एक बेहतर विचार था लडकियों को एकांत में रहने दो । हम बातचीत करते रहे और थोडी देर बाद दोनों लडकियाँ भी हमारे पास आ गई । अरे तो दोनों लडकी यहाँ के लिए क्या कर रहे हो? हम भी है । हाँ तो हमें बुलाया क्यों नहीं? और जहाँ पे भी तो तुम दोनों आपस में ही व्यस्त थी । हाँ और हम तो कोई उत्तर रक्षा सौदे की बात कर रहे थे तो उसमें रुकावट नहीं डाल सकते थे । वहाँ भी हमारे पास आकार बैठो । इतिश्री वहाँ खडी रही जबकि गौरी अंदर चली गई तो हम उसकी मदद करने उसके पीछे चला गया । इतिश्री और मैंने हल्के फुल्के अंदाज में बातचीत शुरू की । उससे बात करना बडा ही अच्छा अनुभव लग रहा था । गौरी के जन्मदिन पर उससे बात करने का ज्यादा मौका नहीं मिला था । तो हम तो हमारे बारे में बात कर रहे थे । भगवा मैंने मन ही मन कहा । मुझे लग रहा था तुम हम पर नजर रख रहे थे । हाँ नहीं नहीं मैं तुम दोनों के छुप होने का इंतजार कर रहा था ताकि मैं तो मैं बालकनी में बुला सकते तो आप हाँ तो इसीलिए गौर ये तुम्हारे बारे में इतनी अच्छी बातें करती है । वो कितने सालों से तुम्हारे प्यार में पागल है मगर मैंने महसूस किया है कि अभूत बहुत संयमित हो गई है । जब से तुम ने उसका प्रस्ताव स्वीकार किया है, वो इतनी संतुष्ट हो गई है । अब वो अच्छा सुनु अब मेरे बारे में इतनी अच्छी बातें भी मत करो कि मैं बचा ही ना पाऊंगा । वो वाकई एक बहुत अच्छी लडकी है । वैसे ये बताओ कि आगे क्या कार्यक्रम है? हम कहाँ जाते हैं? जहाँ तक दौरे को मैं जानती हो ना वो कुछ निराला ही करना चाहेगी । शायद तुम ये अभी तक नहीं जान सके होंगे । मगर वो बिल्कुल खिलाडी लडकों जैसी है । मैंने उसे सुना । हालांकि मैंने उसकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया । मैं तो गौरी के विचारों के भवन में खींचा चला जा रहा था । इससे पहले मैं उस खबर पूरी तरह खुश पाता । टॉम हाथ में कोसी और मेज लेकर बाहर आने लगा । उसके पीछे गौरी मुस्कुराती हुई आ रही थी । उसके हाथों में मॉकटेल काजू चिप्स का बाद और पकडे थे । गरमागर्म को भी प्याज और मृत्यु के पकौडों की बात ही कुछ और है । यह तय हो चुका था कि आज का दिन हम भरपूर तरीके से जीने वाले थे । उसके मुझे एक और बात का एहसास हुआ कि दोस्ती एक बहुत ही जरूरी चीज है और यही वह बात थी जो मेरे और आलिया के बीच गलत हो गई थी । पूरे समय बस हम दोनों ही थे और कोई भी रही । हालांकि मुझे दोनों की तुलना नहीं करनी चाहिए मगर फिर भी मुझे महसूस हो रहा था कि दोनों में विशाल अंतर है । और हाँ, आज हम सब एक साथ थे । ये बस जुनून नहीं बल्कि दोस्ती की वजह से था । यही वो कारण था कि टॉम आर्या को उन दिनों से कभी पसंद नहीं करता था और मैं ये समझ चुका था की अब मुझे और अधिक सोचने का मौका नहीं मिलेगा क्योंकि गौरी ने खुलासा करना शुरू कर दिया था कि वह क्या करना चाह रही थी । वो गाडियों की रईस लगाना चाहती थी जोडों में । असल में वह एक ऐसे दिन में करना चाहती थी जस्टिन बारिश हुई हो वही से लेकर बहुत ही उत्साहित थी । रेस और मौसम दोनों को लेकर चलो भी यही तो असली मजा देगा । टीचर से बडी सर के पानी वो तीखे मूल और वे भडकती हुई भावनाएं हाँ हाँ, मैं तो अभी से अपनी भावनाओं में रोमांच महसूस कर रहा हूँ बल्कि मैं तो रोमांचित हो चुका है । मेरे अंदर तो ट्रेन लीन दौड रहा है । मगर मैंने अपने जीवन में कभी भी ऐसी रेस नहीं लगाई है । मैं उनसे अभी कह देता हूँ तुम जीत गए भाई । ये एक अनायास यंग था क्योंकि मुझे पता था कि मेरी माशूका इन सब को लेकर कितनी गंभीर थी । हूँ । समर्पण मत करो, बिना लडे ही हार मत मानो । हाँ, जैसे मैंने आज दोपहर के खेल में कर दिया था । ये तो लडकों का खेले । तुम्हें तो इसके बारे में बहुत खुश होना चाहिए । ये तो एक अप्रत्यक्ष ललकार है । नहीं नहीं ये खुली ललकार है । चलो चलते हैं चलो ऍम विदेश श्री ऐसे डरकर चुपचाप अॅान तय करते हैं । कुछ ही समय में हम सडक पर थे । पथ मार्ग तक की सडक बिलकुल खाली ही थी । ये सप्ताहंत की छुट्टी की वजह से था । हम जितना सोच रहे थे उस से कम समय में ही वहाँ पहुंच गए थे । इसमें कुछ हाथ इस बात का भी था कि हम दौड के भाव में आ गए थे । हालांकि ये बिल्कुल अलग बात थी कि गौरी और इतिश्री हम से बहुत पहले ही वहां पहुंच गई थी । जैसा कि अनुमान था, दिन खत्म हो रहा था । वो रेस जिसमें मुझे हिस्सा लेना था । अपनी प्रेमिका के साथ वो रेस जिसके बारे में वो बहुत रोमांचित थी । वो ड्रेस जिसमें शायद उसके आत्मविश्वास को इतना ऊंचा कर दिया था कि शायद वो अगले साल होने वाली रैली में भी भाग ले लेती । वो रेस जिसे मैं निश्चित रूप से हारने वाला था । एक स्थानीय लडके ने झंडी दिखाकर रेस्को शुरू किया । मैं एक दम से खुल गया । मैंने जितनी चीजें सिनेमा देखकर देखी थी मैं उसके हिसाब से सब कुछ करना चाह रहा था । उस पल में पूरा का पूरा हॉलीवुड मेरी ट्रकों में दौड रहा था तो हम को झटका लगा और मिल गया । वो मेरे ऊपर बिल्कुल चढ गया । उसने मुझे कुछ कालिया थी मगर ये कोई बात नहीं थी । गौरी गायब हो चुकी थी । वह अदृश्य हो चुकी थी । एक दम से लगता वो वर्तमान का वो अदृश्य हो गई है । मैंने तो उनसे कहा एक बार फिर वो अदृश्य हो गई है, कोई उकसावा नहीं । फिरौती के लिए कोई फोन नहीं, कोई सुराग नहीं । एक सोच थी कि वो मेरे साथ लुका छुपी खेल रही है । बार बार बन में आना जाना कर रही थी । हालांकि मैं कुछ भी नहीं पूछना चाहता था और इसके तो संभावना ही नहीं थी कि मैं किसी अनहोनी घटना के विषय में सोचूँ । मैं ये उम्मीद लगाए बैठा था कि अभी वो मेरे दरवाजे से निकलकर सामने आ जाएगी । बाप पीछे कारण हमारे तरफ से मैं साझा में था कि वो आकर मुझसे कहेगी । यह कृष्य होने वाला खेल कुछ लंबा खींच गया । उम्मीद का इंतजार ही अब आखिरी उम्मीद थी । वो भी तुम भी होती जा रही थी । इससे मुझे असहजता हो रही थी । हाँ, चिंता के विराट अब और भी ऊंचे होने लगी थी । ये मेरे खुद के पोषित विचारों से बन रही थी । और भी आती हूँ । अब तो और भी अधिक टूटकर बिखरने लगा था । मैं घटना नहीं चाहता था । मैं बहुत ज्यादा घबरा गया था । मैं पीछे इतना भी खोले लगा था । वो जा चुकी थी । हर गुजरते घंटे में, हर घुसे हुए । लम्बे में मैं और भी ज्यादा दुखी होता जा रहा था । उस पर में मैंने तमाम नकारात्मक विचारों को अपने मन में आश्रय दे दिया । ठंडी की आवाज भी नहीं सुनाई दे रही थी । पिछले कुछ पंद्रह मिनट से वह सुनाई नहीं दे रही थी । मुझे शौचालय से टॉम का चिल्लाना सुनाई दे रहा था कि दरवाजे की घंटी बज रही है । मैं उनको सुन पा रहा था शहर अब मैं इस विचार से और असहज नहीं हो पा रहा था कि अब कोई और मुझसे आकर मुलाकात करें । एक बार फिर मैं ये सोच रहा था कि क्यों हर कोई मुझ से दूर होता जा रहा है । नहीं सकता हुआ दरवाजे तक पहुंचा सामने आर्या खडी थी, मैं कहाँ रहा था इसलिए जब उसने मुझसे हाथ मिलाया तो वह बिल्कुल ठंडा था । मैं उसके आरपार देख सकता था । मैं उसे ठीक प्रकार से नहीं देख पा रहा था । नहीं, मैं अपने मन में उसकी आकृति बनाता रहा था । मैं बात तो कर रहा था मगर वो मैं अपने आप से ही कर रहा था । मैं क्या कह रहा हूँ वो समझ नहीं पा रही थी । मेरी बातों का कोई मतलब ही नहीं था । ना तो मेरे लिए और ना ही उसके लिए मुझे पता था । मगर मैं खुद को नियंत्रित नहीं कर पा रहा था । मैं अपने अंदर एक खालीपन महसूस कर रहा था । एक ऐसा खालीपन क्योंकि एक बंद हो चुके दिमाग में वो पचता है । उसके मेरे अस्तित्व के न होने के विचार को और हवा दे रहा था । मैं मर जाना चाहता था । मुझे लग रहा था कि शायद गौरी के पास पहुंचने का अब के ही एकमात्र रास्ता है । अगर जीवन में नहीं तो शायद दूसरे चंद्र में मैं उसके साथ अपने सपनों को छह होगा । अनिश्चित्ता कुछ लंबू में बहुत ज्यादा दर्द दे देती है, ये तो तय है । यदि आप दीवानेपन की सीमा को लांघ गए तो ये आपको अपनी जान देने के लिए भी व्यवस्था कर सकती है । नहीं, मुझे उसके बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ । मेरे ख्याल से तुम्हें इस वक्त अकेले नहीं रहना चाहिए । नहीं, मैं अकेला नहीं हूँ । हाँ जरूर मैं तुम्हारे साथ हूँ । नहीं नहीं मेरा मतलब है तो हम यही मेरे साथ है । इसलिए मैं अकेला नहीं हूँ । तुम सुन रही हूँ और मेरा क्या? क्या आप तुम्हारी जिंदगी में मेरी कोई जगह नहीं बची है । मुझे लगा था दोस्त बन गए । हाँ क्यों नहीं अभी जो परिस्थिति है और जहाँ तक मुझे याद है उस समय पहले ही तो मुझे बिल्कुल अकेला छोड गई थी । अब क्या लेने आई हो या मैं फिर से कह रही हूँ क्या हमने यह तय नहीं किया था कि हम दोस्त बन कर रहेंगे और हम बात में ये मई में फिर मिले भी तो थे । तुम ऐसा जी प्रकाश खूब करते हो । मैं फिर से कह रहा हूँ, शायद ऐसे तुम्हें ये बात समझने में आसानी हो । इसीलिए दूसरे शब्दों में समझाता हूँ । आज का हर दिन हर दिन से अलग हैं । आज मैं मैं नहीं हूँ । आज तुम तुम नहीं हूँ । आप सब कुछ अजीब है । हाँ, आज है दी ही तो भारी हालत तो सच मुझे बहुत खराब है । तो मैं मेरी जरूरत है । बापू हाँ, हार या मेरे कर ही बात नहीं । उसने मुझे गले लगाया क्योंकि मैं मरणासन्न हुआ जा रहा था । मैं बिलकुल टूट चुका था । मैं रो रहा था । मैं खुद को समझने की कोशिश कर रहा था जब उसने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया । मेरी नाक बह रही थी और उसने फौरन अपना रुमाल निकालकर उसे साफ किया । मुझे खुद पता नहीं चल रहा था कि मेरे साथ आखिर हो क्या रहा है । मगर के बिलकुल राहत जैसा था । मैं कौन था? मैंने आप को पीछे धकेल दिया । मैं उस पर चिल्लाने लगा । मैं थोडी काल किया भी देने लगा था । मेरी प्रतिक्रिया और सामान्य थी । मुझे खुद को नियंत्रित करना पडा और फिर आत्मक करूंगा के भाव में जाने के लिए गई । मुझे खुद से घृणा होने लगी । पता साधारण शब्दों में कौरी के लापता होने के लिए मैं उसे जिम्मेदार ठहराने लगा था । मेरा ये नया रूप निसंदेह आर्या को पसंद नहीं आया । मगर इन परिस्थितियों में उसके वो प्रतिक्रिया नहीं थी जैसे कि उसे देनी चाहिए थी । और इसी प्रकार मैं भी आ गया के इस स्वरूप से परिषद नहीं था । वो एक बार फिर मेरी तरफ आई और मुझे गले लगा लिया । वो बार बार अपने शब्द तो हर आती रही कि मुझे अपना गुस्सा और अपनी भावनाएं बाहर निकालते नहीं चाहिए । मुझे अपना सारा गुस्सा, सारी झुंझलाहट उसपर व्यक्त करते नहीं चाहिए । उसने अपने दोनों बही खोलती हूँ और भूतकाल में मेरे साथ किए गए अपने व्यवहार के लिए माफी मांगती रही । मेरे लिए वो सच कह रही थी । टॉम के बारे में मैं नहीं जानता था । मेरे दिमाग में किसी के लिए भी कोई निर्णय लेने की क्षमता नहीं बची थी । मैं वो देख रहा था, उसी पर विश्वास कर रहा था । ऍम इस परिस्थिति में था कि वह अपनी पर्यवेक्षण और इंसानों की समझ की बदौलत कोई निर्णय ले सकता था । इससे पहले की वौइस् नहीं व्यवस्था का हिस्सा बन पाता जहाँ दो भूतपूर्व प्रेमी एक दूसरे के प्रति अच्छाई का प्रदर्शन कर रहे थे । आर्या ने आपने मुझसे कुछ ऐसे शब्द कहे जिन्हें सुनकर मेरे पूरे शरीर को एक झटका लग गया था । देखो नहीं मैं जानती हूँ की तुम गौरी से प्यार करते हो । इससे मुझे कोई समस्या नहीं है । मैं तो यहाँ भी बताने आई हूँ । मेरे बस में जो भी होगा वो मैं करूंगी । मैं तुम्हें तुम्हारी प्रेमिका से मिलने के लिए मैं कोई भी कसर बाकी नहीं रहने दो । तुम्हारे प्यार को ढूंढने के लिए मैं किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हूँ । अपने दोस्त गौरी को ढूंढने के लिए वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त बन गई थी । मुझे उसके लिए और तुम्हारे लिए बहुत बुरा लग रहा है । मैं भी इस जांच का हिस्सा बनेंगे । जरूरत पडी तो यात्रा भी करूंगी । चाहे कोई भी समय हो दिन ज्यादा । मैं तुम्हारे बुलाने पर आज होंगी तो बस एक बार आवाज से देता हूँ मुझे इन सब से बाहर बच्चे को बस इसीलिए चुकी तो मैं ऐसा लगता है कि मैंने तो छोड दिया था । क्या तुम ने ऐसा ही नहीं किया था? इस वक्त आर्या जो भी कह रही थी मैं वो सब सुन रहा था । उसकी बातें मुझे बहुत ही शांतिदायक प्रतीत हो रही थी । हालांकि उसका आखिरी बात किए एक प्रकार से मेरे मन में घर कर गया था । इसलिए मैंने खुशी खुशी सबकुछ भुला दिया और उसे सबसे आगे रख दिया । मुझे बस ये समझ नहीं आ रहा था कि जब उसने ये कहा कि उसने मुझे नहीं छोडा था तब उसके कहने का मतलब क्या था? उसने बिल्कुल वही किया था । मुझे याद है उसका पेश ढीला था । मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से तुम्हें चोट पहुंचे । मुझे मालूम था कि मैं तुम्हारे लायक नहीं । मुझे मालूम था कि मैं तुमसे हर वक्त बस कुछ ना कुछ मांगती रहती थी । मैं ये भी जानती थी कि जीवन में कभी भी मैं खुद को जब्त में बदल नहीं हूँ । इसीलिए अच्छा यही था कि तुम खुश रहो । प्यार में कभी कभी ऐसे फैसले लेने पडते हैं जो पसंद नहीं आते हैं । मगर इलाका साफ होता है और मैंने विचार से यही प्यास है । शायद मैटर कर पीछे हट गई थी । अगर ऐसा है तो ऐसा ही सही । कम से कम आज तो मंदिर से खुश हूँ । याद रखा मैं हमेशा तुमसे प्यार करते होंगे, चाहे हमारा कोई रिश्ता हो या ना हो । ऍम लगता है तो मेरे दोस्त को अपने प्रेमजाल में फंसाने की कोशिश कर रही हूँ और फिर से उसके साथ ऐसा करने की कोशिश मत करो । तुम ने का मुझे पता था ऍम की क्या प्रतिक्रिया होगी । मगर फिर भी एक प्रकार से आर्या के बाद मुझे समझ आने लगी थी । दोस्तों के बीच किसी बात पर बता रहे तो उसी सकते हैं । मेरे हिसाब से वो सही थी । अगर वो चाहती तो मेरा भरपूर इस्तेमाल कर सकती थी । मैंने उसे कभी नहीं छोडा था पर नहीं छोडने की मंशा रखता था । ये तो जब से गौरी मेरे जीवन में आई थी तब से मुझे ऐसा लगने लगा था कि जो भी होता है वो अच्छे के लिए ही होता है । जो भी होता है उसके पीछे कोई कारण जरूर होता है । टॉम जाने दो आर्या सही कह रही है एक बात तो मैं अच्छी तरह जानता हूँ । यार यहाँ उन लडकियों जैसी नहीं है जो पैसे और ऐशोआराम के लिए लडकों को फंसाती हैं । हाँ, हम दोनों एक दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं और शायद उसे ये अनुमान हो गया था कि कुछ वर्षों के बाद हमारे जिंदगी कैसी होगी और इसलिए वह मुझ से दूर चली गई तो तुम उसे माफ कर देना चाहते हो

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