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भाग - 04

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सात वर्षों से चला आ रहा एक तरफा प्‍यार क्‍या दोनों तरफ होगा या अधूरा रह जाएगा? क्‍या दोस्‍ती प्‍यार में बदल सकती है या सिर्फ दोस्‍त ही बना जा सकता है? प्रेम और अंतरंगता के ताने-बाने में बुना बेहद रोचक उपन्‍यास है। Writer - Arvind Parashar
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वो एक सुंदर और खुशनुमा दिन था । हवा में थोडी सी ना भी थी जो इस बात का संकेत दे रही थी कि शायद शाम में बारिश हो सकती हैं । मैंने उनसे वक्त के बारे में पता करने के लिए किया था । उसने मुझे सात बजे आने को कहा । साथ ही मुझे सावधान भी किया । शाम में बारिश हो सकती हैं जिसके ट्रैफिक जाम से बचने के लिए मैं थोडा चलती हूँ । मैंने उसकी बातों का मान रखा और ठीक सात बजे उसके घर पहुंच गया । उसने और उसकी सहेली हिस्ट्री ने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया । गौरी आई और आकर मेरे पास में बैठ नहीं । उसने मुझे आर्या के बारे में सब कुछ पूछा । मैं भी उसके साथ खुलकर बात करने लगा । मैंने उसे आर्या के साथ मेरी जिंदगी के बारे में बात करना शुरू किया । हमारे बीच में जो अल्पकालीन संबंधता उसके बारे में आर्या मेरे जीवन में आने वाली पहली लडकी थी । हम लगभग तीन महीने साथ में रहे । ये समय इतना कम था कि इससे किसी प्रकार का संबंध कहना ठीक नहीं होगा । वो तीन महीने तो शायद किसी सकते की तरह थे । उसके लिए शायद जनता से शब्द ठीक रहेगा । कुछ लोग ऐसे दिनों को यदि छोड दें जो बहुत बढिया नहीं थे । बाकी तो बस जीवन था । वो लडकी मुझसे पागलों की तरह प्यार करती थी । बडा ही मजा आ रहा था । ऐसा मजा जो आपको कॉलेज में आता है । वैसे तो मुझे हॉस्टल में रहना था मगर हमारे प्रेम ने मुझे घर किराए पर लेने के लिए विदेश करदिया ताकि हम साथ में रह सकें । मुझे आलिया के साथ हुई हमारी बातचीत बात अच्छी तरह याद है । मुझे ये जगह बहुत पसंद है । नहीं कुछ ये बात पसंद है कि तुम्हें ये जगह पसंद है । मुझे जगह इसलिए पसंद है क्यों नहीं यहाँ काम और मैं एक साथ रहेंगे और मैं अत्यंत रोमानी हो चुके थे । मैंने घर लिया । आर्या ने सजावट की । जब बता रहे हैं मैंने सामान खरीदें । उसने उनको इस्तेमाल में लगाया । बिल्कुल जीवन की तरह हमें ऐसा जीवन की रहे थे जिसकी कल्पना बडी उत्साह से हम दोनों ही करते थे । उसने मेरे जीवन को एक मतलब दिया । कॉलेज में लोग हमें विस्फोटक छोडा कहते थे आ गया । कोई सामान्य लडकी नहीं थी । वो हमेशा कहती थी कि एक साधारण स्टार के नीचे की जिंदगी जीने योग्य नहीं होती और वो हमेशा इसी का अनुसरण करती थी । एक एक सर्वोत्तम शुरुआत थी जिसका की एक दोषपूर्ण झटके से अंतर हुआ । जो शुरू तो काफी पर हुआ और खत्म वोट का । पर ये कुछ भी तुम्हारे लिए मेरे प्यार को बदल नहीं सकता और खत्म शायद यही प्यार है पर हुआ वही बहुत नाटक किए था । तीन महत्वपूर्व हम दोनों को एक साथ बारिश में भीगना बहुत पसंद था । एक बार हमारे कॉलेज के उत्सव के बाद हम दोनों ने ट्राइ पर लोना पाना जाने का कार्यक्रम बनाया । शायद ये पहली बार था जब मैंने अपने रूम रूम में प्यार की अनुभूति की थी । हम दोनों मेरी बिल्कुल नई हुंडई सेंट्रो में सवार हुए । हिस्ट्री दिया । उस मौके के लिए बिल्कुल सही करना था । मैंने उसका आने का अपना ही संस्करण करना शुरू कर दिया । मैंने ढलान पर गाडी रूकती हम बाहर नहीं काम नियर टू क्लोज आॅर ओवर टोमॅटो फ्री लिलोथिया खोल ऍम हमदिया घन क्लाॅक महीने सिंगिंग में फॅमिली मैं डाॅन युवा दुनिया और उसके गाने के मेरे संस्कारण पर कुछ भी नहीं कहा । उसने तो बस मुझे कसकर पकडा गया और उसकी पकड और मजबूत होती रही । बीस वर्ष की उम्र में ये आपको मारते होने का एहसास दिलाती है । बीस वर्ष की उम्र में सडक के ऊपर जब दिन के उजाले में बारिश भेजते हुए कोई लडकी आपको कसकर करने लगा रही होती है तो ये आपको मार तो होने का एहसास दिला रही होती है तो मुझे बोलना बनाते हो । मैं भी महसूस कर रहा हूँ तो मुझे पागल कर देते हो । मैं तुम्हारे दिल की धडकन महसूस कर रहा हूँ । काश ये इसी तरह चलता रहे नहीं । बारिश में तुम जैसे देखती हूँ मुझे बहुत प्यारा लगता है । ये हमारे अपने ही वाक्य थे । हमारे अपने अंदाज में हम क्या कह रहे थे कुछ पता नहीं चल रहा था । ये बहुत ही केंद्रित था । हम दोनों का ध्यान एक दूसरे पर ही था । पूरी तरह से वो मुझ पर केंद्रित थी और मैं उस पर हमने वापस काली में जाने का फैसला किया । अब तो स्पेस बिहार बच रहा था । अब मेरा ध्यान खाने की बोलों पर बिल्कुल भी नहीं था । मगर मेरी धूमिल हो रही छेत्र में मैं अभी भी उसके संदीप को महसूस कर रहा था । इतना की वो मुझे और तरंगित कर रहा था । फिर हमने एक दूसरे की आंखों में प्यार और आकर्षण से देखा । उसे एक बार फिर मेरे होठों को छोड दिया । ये प्रेम का एक बहुत खास लम्हा था, बिल्कुल बिल्कुल सच्चा । हम इस लम्बे को जाने नहीं देना चाहते थे । फिर कुछ पास हम बाहर निकले । बारिश में फेंकने के लिए ये किसे बेहतरीन संताजी से कम नहीं था । हमने इसे वास्तविकता में किया था । ये जोखिम से भरा और साहसिक था । यह प्रेम था संपन्न प्रेम को जिस किसी ने भी सबसे पहले ये कल्पना की होगी क्या महसूस किया होगा कि जब आप सब कुछ प्रेम में होते हैं तब आप अपना होश खो देते हैं । वो वाकई सही था । आप वाकई अपना सब कुछ भूल जाते हैं । हम दोनों एक दूसरे के लिए आ सकते हो चुके थे, अंतत था । उसने मुझसे कहा मैं तो भारत बिना अच्छी नहीं सकती । अपने प्रेम संबंध में हम दोनों बहुत तेजी से आगे बढ रहे थे । बिना एक दूसरे को ज्यादा समय दिए । हम अंतरंग हो चुके थे । ऐसा लग रहा था मालूम हमारे विपरीत व्यक्तित्व का कोई औचित्य नहीं रह गया हो । मुझे आज भी याद है कि कैसे एक बार मैंने उससे कहा था । यदि मैं इस इंडिया को भी देखो तो उसके बारे में सोच नहीं सकता हूँ । मुझे लगता है कि जब कोई लडका किसी लडकी के प्यार में पागल होता है तो यही सब कहना बहुत ही सामान्य हैं । वो किसी और के बारे में सोच ही नहीं सकता हूँ । सपने में भी नहीं । दुनियाभर की यही रहा है । मैं इससे बिल्कुल सहमत हूँ । मैंने कभी धोखा नहीं दिया और नहीं दूंगा । ये सादा एक सकते रहेगा । यदि मैं आर्या के साथ बिताए अपने जीवन के बारे में संक्षेप में कहूं तो मैं कभी भी उसे छोडना नहीं चाहता था । उसके अंदर कुछ तो बात थी जो से निर्विरोध रखती थी । वो सर्वश्रेष्ठ थी । वाकई में सबसे को नहीं लडकी थी । उसमें कुछ ज्यादा ही चमक थी । वो बाहर वहाँ की थी । वह सनकी थी । उसमें ढेर सारा साहस था । उसमें बहुत सब कुछ ढांचों मेरे अंदर नहीं था । वो पनीर में मलाई तलाश थी । मैं तो एक कच्चा माल था । मुझे कभी ये अहसास नहीं हुआ कि मुझे कम थी । उसने कभी मुझे नहीं बताया । इसका अंदाजा मुझे घटनाक्रम के बारे में मेरी समझ से हुआ था । उसने मुझे बगैर किसी चेतावनी के अचानक ही छोड दिया । उसने मुझे न सिर्फ छोड दिया बल्कि उसने मुझे फेंक दिया । अखिल कौन ऐसे अपने साथी को छोड देता है वो भी इतनी चलती ये अकल पर नहीं था । अखिल वो क्यों हो गई । क्या परेशानी थी उसे? क्या वो सामान्य नहीं थी? आखिर विलक्षण की सही परिभाषा होती है । इन सवालों ने मुझे बात में खेत दिया । अगले दिन हम दोनों एक पब में मस्ती करने गए । वहाँ का संगीत बहुत ही पसंद आया । वहाँ एक उत्सव का माहौल था, जो बिल्कुल साफ झलक रहा था । मैं नशे में था और आर्या भी कम ना हो । खेती तो बिल कम मानना ओ केस में काम किन हॅूं? हाउ ऍम ऍम टुनाइट पि ऍफ आया तो लाइट बीमो फिल्म ऍम काम मानता हूँ ऍम कम मोहन कमान खाॅ हम और कम आॅन हाॅल । हाँ ऍम लेट शेट ऍम मूड हो वो ऍम । मुझे मालूम था कि मेरे की हमेशा आर्या के भीतर छुपी अंतरंगता की कहते पटल कुछ भेज देते थे । वो संगीत और गीत के बोलों से इतनी वशीभूत हो गई थी की वो मुझे खींच कर के किनारे गई । उसके बाद हम ने वहाँ बहुत ज्यादा समय नहीं बिताया । हम वापस अपने घर में आ गए । अब बस मुझे सोने के लिए छात्र में पहुँचता ही बाकी था । नाइटलाइन पे बंद कर दिया गया । तीस गति से चलने वाली जिंदगी भी एक दिन हम चाहती है । मैं वास्तव में एक साहसी सनकी नहीं था । मैं उनमें से नहीं था जो बाहर ही घूमता फिरता रहे । ये मेरे निर्माता निर्धारित सेटिंग नहीं थी इसलिए हमारा व्यक्तित्व बिल्कुल विपरीत था । मैं अभी ढूंढ कर रहा था और करता ही जा रहा था । मैं कभी भी किसी लडकी से टकरा जाता हूँ और कोई प्रतिक्रिया नहीं देता हूँ । मैं ऐसा ही था । अच्छा आर्या के आने से मेरे अंदर जो भी साहस या चुकी भरे थे, वे सब कमोबेश क्षणिक थे । वो भी इसे जानती थीं । जैसा कि मैंने बताया सब कुछ बहुत तेजी से हो गया । पता है जब भी मैं बाहर जाने से मना करते था, उसे अच्छा नहीं लगता । अक्सर ये उसके को को निमंत्रित कर देता हूँ । अब प्रेमी छोडो के साथ तो ऐसा होना सामान्य है । विषेशकर नए जोडो के साथ जो भी शुरुआती दौर पे है उसमें आकर्षण तो होता ही है । हालांकि मैं शांत था । वो अपने अंदर बसे खानें नकारात्मक भावनाओं का दर्शन करवाती रहती थी । वही पुरुष की तरह व्यवहार करती थी । मैं आज भी एक पालक ही था । हम पाटन की ओर अग्रसर थे, प्यार थी, देती थी, गायब हो रहा था । ये बुलबुला फूटने वाला था । सबसे बुरा तो तब हुआ जब उसने मुझे आश्चर्यचकित करने के लिए एक योजना बताएंगे । सप्ताह के अंत में महाबालेश्वर जाने का कार्यक्रम मुझे बात विवाद के लिए तैयारी करनी थी । ये अंतर कॉलेज, बातें बाद और महाबालेश्वर के बीच एक बंद था । ये संस्थान बनाम प्रेम बन गया प्रतिष्ठा बनाम प्यार । मगर इन सबसे ज्यादा ये मैं बनाम वो बन चुका था । इस विवाद की शुरुआत गुरुवार शाम को पांच बजे हुए । नेल तुमने पिछले दो हफ्तों में कितनी बार सब कर बंद कर दिया है ना मेरी पसंदीदा मूवी के लिए न दिया की पार्टी के लिए । और अब जब मैं तुम्हारे लिए ये योजना बनाई तब भी तुम ऍम ये हम क्या होता है भगवान के लिए कुछ बोलो के भी देखो ऐसा है अच्छा तो तुम्हें लगता है कि तुम कुछ कहने की स्थिति में हो भी देखो । आर्या बाबू सारा समझने की कोशिश करूँ वहाँ नहीं वहाँ अब तुम इतने ढीठ हो चुके हो कि बोल भी रहे हो । और तो और तो मुझे ये बता रहे हो की समस्या मेरी समझ में है । देखो मुझे माफ करता हूँ इससे क्या होगा? काम चाहती गया तो कुछ भी नहीं हो । वो पल जब की कोई विकल्प कर देता है जा चुका था पर ये अब एक मनोवैज्ञानिक परीक्षा थी । वो तथा हाँ और उसके साथ कुछ और कह सकती थी । मगर उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया । वो पहले ही एक बात नकारी जा चुकी थी फिर भी ऐसा नहीं चाहती थी । इस परिस्थिति में यदि मैं न कह देता जैसा की उसे लग रहा था तो चीजें बिल्कुल भी ठीक नहीं रहती हूँ । खैर मैंने हाँ ही कह दिया, मगर वो ना कहती रही । परिस्थिति बदल चुकी थी । उसके बाद परिस्थितियां लगातार बदलती रही और ये सब बहुत तेजी से हो रहा था । बिलकुल हमारे प्यार की शुरुआत की तरह । और अब हम भी घर रहे थे । शायद मैं कुछ ज्यादा ही सोच रहा था, अभी नहीं । इस पडाव पर तो बिल्कुल नहीं । मुझे पूरा यकीन भी नहीं था । उसका ऍर या बहुत तेज तक रोती रही । वो इस संबंध में एक जंगली पुरुष नहीं थी । शायद वो अभी भी एक बच्ची थी और वैसा ही बर्ताव कर रही थी । मामला बिल्कुल साफ था । एक बालक कोई किशोरी को संभालना था । कोई भी किताब इसके लिए पथ प्रदर्शित नहीं करती है । सब कुछ पुरुषों और महिलाओं के लिए बना होता है । किसी ने ये नहीं बताया की लडकियाँ शुक्रग्रह से आती है । वो जब महिला बन जाती है तब जाकर इसका के अनुकूल होगा । आती हैं । जब तक ये एक लडकी होती हैं तब तक तो वे कुछ और ही होती हैं । कुल मिलाकर मेरा जीवन अस्तव्यस्त था । डरावना क्योंकि अब ये बिखर रहा था । मैं सोच में डूब रहा था । अगले सुबह गया ने सूचना दिल की उसे बुखार है । मैंने अपनी चिंता जाहिर की । उसके लिए सूप बनाया । फिर उसे चाय की पेशकश की । वो खामोश रही और जितनी बार मैंने उसके लिए कुछ किया, उस ने मेरा शुक्रिया अदा किया । मेरी लाख कोशिशों के बावजूद वो डॉक्टर के पास जाने को तैयार नहीं तक परेशान । मैं डॉक्टर से समय लेने के लिए बाहर निकल गया । मैं घंटे के बाद वापस आया । वो घर पर नहीं थी तो अच्छा चुकी थी । उसने खाने की मेज पर एक चिट्ठी छोडी थी । मेरे प्यारे नहीं । मैं तो मैं इस तरह छोड कर जाना नहीं चाहती थी । मगर मेरे बुखार नहीं, मेरे शरीर के साथ कुछ कर दिया है और मैं तुम्हें इस तरह छोडकर जाने को मजबूर हो मेरी चिंता मत करता हूँ । मुझे नहीं लगता कि अब हम वापस एक दूसरे के साथ रह सकेंगे । मैं आगे बढना चाहती हूँ । और आशा करती हूँ कि तुम्हारे आगे की जिंदगी बेहतरीन हो । ढेर सारा कॅश उसने बडे ही प्यार से मुझे छोड दिया । मैंने खुद से कहा मैंने अपने मन में उससे ढेर सारी चीजें कहीं और अजीब सा महसूस करने लगा । मनोभावों अभी भी पूरी तरह मेरे अंदर उतरा नहीं था । ये जो भी था मैं बिल्कुल ठीक नहीं था । मैं उस से मिलना चाहता था । मगर वक्त बार बार मेरी आंखों के आगे आ रहा था । मुझे चोट लगी थी । कहने चो, मैं दुखी था । तंत्र दुखी ऍम प्यार में खो चुका था । मैं अकेला था । ये भावना किसी भी प्रकार से वर्णित नहीं की जाती हूँ । मैं उस समय को कोस रहा था जब हम इस संबंध को खत्म करने की तैयारी कर रहे थे । बहुत ही कष्टकारी था । इससे निकलने और आगे बढने का एक ही तरीका था कि मैं खुद से प्यार करते । लगभग मैंने शायद ही पहले कभी ऐसा किया था । कुछ भी लगा । ऐसा करना ही सबसे अच्छी शुरूआत होगी । वस्त्रदान काल में वापस आते हुए हैं । गौरी ने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा हूँ और कहा, अच्छा, मैं तो तुमने बहुत कुछ सही लिया । अब आठ नहीं होना मैं आशा करती हूँ आगे तुम्हें बस खुशियाँ ही मिलेगी । मैंने उसकी ओर देखा और सोचा कैसे वो अचानक बहुत शोर शराबा होने लगा और सब लोग गौरी को खींचकर अंदर ले गए । एक क्रिकट ना था । मैं अपनी जगह पर बैठा रहा हूँ । मैं तो सोच रहा था मुझे कौन की आवाज सुनाई दे रही थी । वो मुझे अपनी बगल में आकर खडे होने के लिए कह रही थी । पहले वैसा ही क्या जन्मदिन की मुबारकबाद के बाद जो हुआ वो एक सुखद समर्पण था । अठारह हो चुकी हूँ । मैं तुमसे प्यार करती हूँ और मैं चाहती हूँ कि तुम भी मुझसे प्यार पर मैं एक पल में ही लाल हो गया । उसने मुझे गले लगा लिया । उसके बाद सारी पाते हैं आप ही हूँ और फिर कुछ बस को राहत ऍम

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सात वर्षों से चला आ रहा एक तरफा प्‍यार क्‍या दोनों तरफ होगा या अधूरा रह जाएगा? क्‍या दोस्‍ती प्‍यार में बदल सकती है या सिर्फ दोस्‍त ही बना जा सकता है? प्रेम और अंतरंगता के ताने-बाने में बुना बेहद रोचक उपन्‍यास है। Writer - Arvind Parashar
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