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फ़लक तलक - Part 5

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बाइक पर सवार एक आदमी हेलमेट से अपना चेहरा छुपाए जंगल में शरीर के टुकड़े फेंकते जा रहा है। दूर खड़े काले लिबास में 12 लोग यह सब देख रहे हैं लेकिन कुछ कर नहीं रहे हैं। कौन हैं ये बारह काले लिबासी? काले लिबासी मरने का रहस्‍य ढूंढ रहे हैं, ऐसा क्‍यों? दूसरी ओर एक आदमी अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में लिखाने आया था। पुलिस और काले लिबासी आपस में टकराते हैं, तो अब क्‍या होगा? रहस्‍य और हैरतअंगेज घटनाओं से भरी इस कहानी को सुनें बिना आप नहीं रह पाएंगे।
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Transcript
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ये मेरा भारत था । ये मेरे लोग थे, ये मेरे दुनिया, यहाँ न कोई हिंदू था, न कोई मुसलमान । यहाँ कोई सिख था न कोई ईसाई, ये मुहाजिर भी नहीं थे और ना ही घुसपैठिए । ये बांग्लादेशी या पाकिस्तानी भी नहीं थे । ये मेरे द्वारा मेरी कहानियों के भारत के नागरिक रात के दो बजे मेरी कहानियां नृत्य कर रही थी । वो गीत गा रही थी । उनके गीतों के शब्दों में मेरी तारीख मेरी वंदना थी । वो मुझे अपना भगवान कह रहे थे क्योंकि मैं उनका रचयिता था । ऐसा लग रहा था मानो नहीं ऊंचे तक पर बैठा हूँ और सामने मेरी कहानियां अपने गीतों से नाचते हुए मेरा अभिवादन कर रही हैं । मैं अपनी सांसों की कमी भूल चुका था । मैं अपनी सारी चिंताओं से इस समय मुक्त था । मैं अपनी इस नई शक्ति, अपनी कहानियों को देख और सुन पाने की शक्ति से मस्त था । उस अंधेरी फुटपाथ पर मैं अपनी कहानियों की नृत्य समारोह का लुत्फ उठा रहा था और फिर जब नृत्य खत्म हुआ तो फल अपने मेरे विचार जानने के लिए मुझसे सवाल किया क्या अभी आप मुझे पेस्ट होगी सिर्फ पचास हजार के लिए? उसके इस प्रश्न पर मैंने उसे गले लगा लिया । नहीं तुम सब लावारिश नहीं मैं तुम सबको बडे पर्दे पर लाने के लिए संघर्ष करूंगा । मैंने जवाब दिया किससे बात करेगा? भाई पलट कर देखा मैंने तो सामने रघु था लोगों को मेरे सिवा कोई नजर नहीं आ रहा है । एक तो कब आया तो जी तो पुलिस ने अरे अपना चौथी में आवन जावन लगा रहता है । ऐसे ही नहीं पुलिस को मामू बोलते हम लोग मामू लोग को बात जिलों की फिकर होती रहती हैं । दो घंटे बिठाए वो लोग अपना हिस्सा लिए और छोड दिया उनको ये तेरे मस्त चिकन राइस नहीं कराया । उसके हाथ में पार्सल था । मेरी तरफ पढाते हुए बोला तो मेरा कितना ख्याल रखता है भाई पार्सल लेकर मैं फुटपाथ पर बैठकर खाने लगा । भूख लगी थी लेकिन साथ ही टेंशन भी थी कि कहीं वो मेरी कहानियों से बात करने वाली हरकत पर कोई सवाल करते हुए ऍम वरना पता नहीं मेरे बारे में क्या सोचेगा? क्या सोचेगा यही कि मैं पागल हूँ तो बातें किसे कर रहा था । आखिरकार उसने फिर से वही सवाल किया जिसका मुझे डर था किसी से तो नहीं । मैंने झूठ बोला कभी कभी बोल लेता हूँ चोट देखा यार आप तो किसी से बड बड कर रहा था । लेकिन सामने कोई था नहीं यार अकेले कभी कभी बड बड करने की आदत है । चिकन राइस के मजे लेते हुए मैंने जवाब दिया वो मुझे खोल रहा था । उसे मुझ पर शक हो रहा था । फिर खुद को खुद ही बनाते हुए उसने अपनी जेब में हाथ डाला और एक्सप्रे की छोटी शीशी निकाल कर मेरी तरफ बढाते हुए उसने कहा ये ले तेरी दवाई । मैं देखते ही इमोशनल हो गया । एक दिन की दोस्ती में कोई इतना ख्याल रख सकता है यार मुझे पता है तेरी दवा खिलाफ हो गई । सांस की तकलीफ मेरे बाप को भी थी, कुछ चला गया दुनिया से अपना पेट भरने के लिए चोरी करता है बचपन से लेकिन आज शपथ आज तक किसी गरीब का जो नहीं आता है । जब भी चोरी किया अमीर लोगों का क्या? अमीर लोग के पास पैसों का समंदर होता है । एक दो लोटा निकालने से उनको घंटा फर्क नहीं पडता है । उसने खुद को एक अलग तरह का ही शरीफ चोर साबित करने की कोशिश की । मैं बस पडा लेकिन साथ ही मेरे दिमाग में आया की ऐसी सच्चे दोस्त से मैं झूठ बोल भले ही वो मुझे पागल समझे, क्यों नहीं कहानियाँ वाली बात मैं उसे बता दूँ । दोनों से ये कह दूँ कि मुझे एक अनोखी शक्ति है । मैं अपनी कहानियों को देख सकता हूँ, उन्हें सुन सकता हूँ, उन्हें छूट सकता हूँ, उनसे मिल सकता हूँ, उनसे बात कर सकता हूँ । राइस खत्म हो चुकी थी और मेरे पेट से आपने चोर दोस्त के लिए ढेरों दुआएं भी निकल ही बात बताऊँ तो हंसेगा तो नहीं नहीं, तेरी बातों में जोक होगा तो हँसी आएगी दवाई उसने हस्कर कहा मैं सोच में पड गया । कैसे बताऊँ उसका मैंने निवाला खाया था । उसने मेरे लिए दवा लाया था । भला मैं उससे इस सच को कैसे छुपाता होगी । तुझे हँसी आए या तो कुछ भी समझे । मैं बताता हूँ देख थोडे टाइम तूने मुझे देखा कि मैं किसी से बात कर रहा था । हाँ देखा तभी तो अपन सवाल किया मैं अपनी कहानियों से बात कर रहा था । कहानियों से बात कर रहा था । मतलब थोडा चौंकते हुए उसने पूछा अब कैसे समझा हूँ तुझे देख मेरे पास ऊपर वाले ने एक अनोखी शक्ति दी हैं । अच्छा तो गौर से सुनने रखा । मैं जो स्टोरी लिखता हूँ और जो पहले से मेरे पास एक दर्जन स्टोरीज हैं वो सब कहानियाँ मेरे सामने इंसान के भेष में आई और उन्होंने मुझसे बात तो फिर से मुझे गौर से देखने लगा । उसे फिर से मुझे शक हो रहा था । क्यूट और सच में एक अंतर ये भी है कि झूठ लोगों को जल्दी समझ में आता है और सच सच जल्दी पल्ले नहीं पडता है । क्या हुआ समझ नहीं आ रहा । मैंने पूछा उसने ना में सिर हिला दिया । मैंने अपना बैक तुरंत खोला और उसमें रखी । आपने दर्जनभर स्क्रिप्ट्स को बाहर निकाला । हर स्क्रिप्ट की । पहले पन्ने पर उसका टाइटल मोटे अक्षरों में लिखा हुआ था । मैंने पहली स्क्रिप्ट रघु के सामने करते हुए कहा ये मेरी कहानी है । फलक सबसे पहले यही मेरे सामने आई । एक खूबसूरत लडकी बनके रघु सर खुजलाने लगा था बल्कि वह डर भी रहा था । मैंने अगली स्क्रिप्ट उसके सामने की और ये मेरी कहानी है । धर्मशाला एक बूढी औरत की कहानी है । ये बढिया भी आई थी । फिर ये देश द्रोही का हीरो आकाश फिर ये जंगल का फिर ये ऍम साबुन थोडा जी था । साबुन की तरह ही झाग फेंक रहा था । पूरा भी नहीं था । एकदम आधा इंसान डरावना बस बस समझ गया वोटर गया था उसने मुझे रोक दिया । क्या हुआ कितना पसीना पसीना क्यों तेरी बातों से अपुन की फट गई है, मालूम फट गई है । मतलब हट गई । बोले तो पूरी फट गई है । अपुन छोरे चिन्दी नहीं नहीं पाई ऍम मालूम मेरे को की तो कितना अच्छा राइटर होगा । लेकिन अपुन दावे के साथ बोलता है कि तुम मेरी कहानियों से नहीं किसी चुडैल से मिला था । इस रोड पे तुलन का एक्सीडेंट हुआ है । सात महीने पहले और भी लोग तब के हैं रोड पे उन्हीं के पूछ से मिला होगा तो समझा अभी बकवास बंद कर और सो जाओ । अपनी जगह लेटे हुए वो आगे बुदबुदाया सालाना आज अपुन को नहीं आएगी भी नहीं । कोई चुनावी कोई छोडे नहीं थी । हो रहा हूँ । मेरी कहानी थी । मैंने उसे कन्विंस करने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ तो आंखे बंद करके सोने की एक्टिंग करने रहा । शायद भूत प्रेतों पर बहुत विश्वास करता था इसलिए वह डर गया था । कॉलेज का वो दिन याद है मुझे जब मेरी उम्मीदों का इम्तिहान था, मेरी सोच की आजमाइश थी । प्रोफेसर मुझे फिल्म राइटिंग फील्ड में न जाने की सलाह दे रहे थे । दरअसल पिताजी ने मेरे कॉलेज में मेरी शिकायत करके मुझे कहानियों से भटकाने की कोशिश की । पिताजी के ही इशारे पर कॉलेज का टीचर कुछ दिन मेरी क्लास लेने पर उतारू था । फिल्म राइटिंग में क्यों जाना चाहते हैं? डॉक्टर बनो, इंजीनियर बनो बेकार लाइन है कुशल छोटा सा ब्रीड दिया मैथ के प्रोफेसर इसी बीच एक और प्रोफेसर खुद पडे हैं हर गली हर मोड पर आज एक राइटर मिल जाएगा । एक ऑटो वाले के पास भी कोई ना कोई कहानी होती है । जिसे देखो वही राइटर है । देखो फिल्मों में जाना बहुत जोखिम भरा है । रिस्की लाइन है जानता हूँ फिर भी मैं लिखना चाहता हूँ । मैं लोगों की दुख सुख की कहानियाँ लिखना चाहता हूँ । मैं उस बुढिया के दुखडे लिखना चाहता हूँ जिसके बेटों ने उसे बुढापे में धोखा दिया और धर्मशाला में छोड दिया । मैं अनाथ बच्चों की कहानी लिखना चाहता हूँ जो सिग्नल पर भीख मांगते हैं और जिनकी भीग से चाइल्ड ट्रेफिकिंग माफियाओं की अय्याशियां चलती है । मैं उस आदिवासी औरत की कहानी लिखना चाहता हूँ जिसके सामने उसका घर सरकारी अफसरों ने तहस नहस कर दिया । उजाड दिया किसी विधायक के । मैं उस किसान की दुख भरी दास्तान लिखना चाहता हूँ जो लोगों की पेट भरता था । लेकिन एक दिन खुद भूखा प्यासा आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गया मैं उस मुसलमान की कहानी लिखना चाहता हूँ जो अब्दुल कलाम, अब्दुल हमीद और अशफाकउल्लाह बन सकता था । लेकिन दूसरे कट्टरपंथियों की घटना, तिरस्कार और धर्म की गंदी राजनीति ने उसे जिहादी बना डाला । मेरा मोनोलॉग सुनकर सब चौके हुए थे । प्रोफेसर और स्टूडेंट्स सब मौजूद है । कुछ देर के लिए शांति छा गई और सब मुझे एकटक निहार रहे थे । अपनी बात कहकर मैं भी लोगों की रिस्पॉन्स का इंतजार करने लगा था । सब चुके हैं, लेकिन अचानक एक लडकी ने ताली बजाना शुरू किया । ये दिशा थी कुछ पूरे क्लास में वो अकेली ही थी जिसकी तालियाँ मेरे लिए थे और वह तालियाँ कह रही थी कि मैं सही हूँ, मेरी सोच सही है । उस खूबसूरत लडकी की तालियाँ रात को सोते वक्त भी मेरे कानों में गूंज रही थी । मैं लडकियों से शर्म आता था इसलिए मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं । ऐसा नहीं है कि मुझे कोई कमी थी । खूबसूरत, स्मार्ट और सबसे इम्पोर्टेन्ट चीज डीसेंट फॅस लडकियों की काफी इज्जत करता हूँ । उस खूबसूरत लडकी की तालियाँ और चेहरा मेरे सामने आने लगा था । दो दिनों तक मैं उसके बारे में ही सोचता रहा और फिर तीसरे दिन मैंने कुछ सोचा । मैंने फैसला किया कि उस लडकी को एक कहानी बनाऊंगा, उसे कागज पर उतार होगा । उसे रोज लिखूंगा । कहानी लिखने की मेरी अपनी एक खासियत है । लिखता तो काल्पनिक है, लेकिन वह हकीकत के इर्द गिर्द होती है । मेरी कहानी झूठी नहीं होती । अगर मैं उस लडकी को कहानी बनाऊंगा तो मेरे पास एक उद्देश्य होगा उससे मिलने का, उसे जानने का, उसे समझने का । और वैसे भी उसे मेरे लिखने का जुनून ही तो पसंद आया था । मैं उससे मिलकर उसकी कहानी पूछूंगा और उसे लिखूंगा । दिक्कत यही थी कि मैं कहानी लिखने का आदि था, मेरी नहीं । मेरे पिता और भाई की नहीं करते । वो चाहते थे कि मैं सिर्फ पढाई पर ध्यान और पढाई में मुझे कहानी दिखाई देती थी । जब पिताजी की कॉलेज में शिकायत वाली चाल कामनाएँ तो उनसे रहा नहीं गया और एक दिन डाट फटकार की । मुझे बारिश हो गई तो लिखने का शौक है तो लिख लेकिन पहले ये लिख के तो एक नालायक बेटा है । लिख तो अपने पिता की नाफरमानी करता है । लिख तो अपने पिता को गलत समझता है । लिख तू की अपने बाप से भी ज्यादा ज्ञानी । उनकी डांट में दर्द था तो मुझसे प्यार करते थे । इसलिए मेरी भलाई में मुझे डांट रहे हैं लेकिन सच यह भी था कि वो सही नहीं थे । ये सही है कि मुझे पढना चाहिए । लेकिन ये तो सही बिल्कुल नहीं है कि मुझे लिखना नहीं चाहिए । मेरे दिलो दिमाग से कहानियाँ नहीं निकल सुविधा चाहिए । मुझे लेखक बनना है और लेखक बनने के लिए कोई समय फिक्स नहीं किया जाता है । अच्छा तुझे ज्यादा पता है । फिल्मों में जब कल तुझे काम नहीं मिलेगा तब तो क्या करेगा? अरे पगले कल यही पढाई यही डिग्री काम आएगी । कोई नौकरी करेगा तो घर चलेगा नौकरी मैं नौकरी क्यों करुँ? मुझे नौकरी नहीं करना हूँ । मुझे आजाद राइटर बनना है । स्टोरी बाजी से बर्बादी के सिवा कुछ हासिल नहीं होगा । पर्सन आखिरी वार्निंग दे रहा हूँ ये फालतू गिरी छोड देंगे वरना कॉलेज छोडा दूंगा और किसी कराज में लगा दूंगा । धमकी देकर गुस्से में निकल गये पिता जी मैं हैरान था । मेरे सपनों पर पाबंदी खुद मेरे पिताजी लगा रहे हैं । उस पर कमाल ये था कि मेरे भले के लिए । खैर मुझ पर उनकी बातों का असर इसलिए नहीं होना था क्योंकि आपने लक्ष्य को चुनना मेरा अपना फैसला था और इसका मुझे हत्था क्योंकि मैं कोई बच्चा नहीं था । मेरे भाई नकुल के हाथ में उस दिन मेरी एक अधूरी कहानी साबुन थी तो बडे ध्यान से पढ रहे थे । घर पर कोई नहीं था ना मैं ना पिताजी भाई एक प्राइवेट बैंक में काम करते थे । उन्हें मैग्जीन पडने का शौक था । लेकिन उस दिन उन्हें पता नहीं क्या सूझा कि वो मेरे हाथ की लिखी कहानी ही लेकर बैठे । पढते पढते हो पढ नहीं लगते हैं । एक बनने के बाद दूसरा बनना हो फिर तीसरा हूँ । साबुन कहानी भी मेरी कोई फंक्शन नहीं थी । वो भी एक सच्ची घटना से दी गई थी । एक खूबसूरत बच्चा जो अनाथ था तो इस दुनिया में अकेला हूँ नहीं सर पे छत थी न सोने ओढने का कोई हिंसा हूँ, कभी मंदिर तो कभी किसी मजार पर कुछ खा लेता हूँ । सिर्फ सात साल का था । शायद इसीलिए उसे कुछ पता ही नहीं था कि वह धरती पे क्यों हैं? किस मकसद से उसे क्या इस धरती पर ऐसे करोडों लोग हैं जिनकी पूरी उम्र गुजर गई । फिर भी नहीं, ये एहसास ही नहीं है कि वो इस धरती पे क्यों हो? सैनाथ की भी यही प्रॉब्लम थी । लेकिन उसे एहसास जरूर था कि उसे पता करना चाहिए कि वह पैदा क्या हुआ है । वो इस बात की बिल्कुल फिक्र नहीं करता था कि वो अनाथ क्यों है और उसके माता पिता कौन हैं? उसे चिंता थी कि आखिर उसे जन्म क्यों दिया गया है । उसे जीवन में आखिर क्या करना है? एक बार उसे पता चल गया कि क्या करना है तो जीने के रास्ते वो खुद बना सकता है । सडकों पर दिनभर भटकना, दूसरे बच्चों को स्कूल जाते ताकना, लोगों को बसों, ट्रेनों के लिए दौडता, भागता देखना कहीं कुछ मिल जाए तो बे झिझक बिना शिकायत खा लेता हूँ और रात को कभी किसी गार्डन तो कभी किसी बस अड्डे पर सो जाना । यही उसका डेली रूटीन था । कुछ खास बदलाव नहीं आ रहा था उसके डेली जीवन लेकिन वो इसी उम्मीद में रोज होता था कि किसी सुबह कुछ अलग होगा किसी दिन दिन के उजाले में । उसे उसकी होने की वजह मालूम चलेगी किसी दिन वो जरूर जाने का कि वो धरती पर है । क्या उसके जन्म का उद्देश्य क्या है और वह किसी दिन वाला दिन एक दिन सुबह उसे कोई उठा रहा था । रेलवे स्टेशन पर सोया था हूँ । किसी ने उसे जगाया तो अंगडाई के साथ जमा ही लेते हुए गंदा सब खुबसूरत बच्चा फट बैठा । सामने एक लगभग चालीस वर्ष का एक आदमी था आंखों के मोटी एनर्जी उसे देख कर इसमें कुर्सी छोड नहीं । अरे रुको रुको तुमसे बात करने के लिए जगह है माफ करना । तुम्हारी नींद खराब की उस आदमी ने बडी शफकत और सभ्यता से बात शुरू की । बच्चा हैरान था । शायद पहली बार किसी ने उसे प्यार से बात की थी और नींद के लिए सौरभी का । आज के दौर में जहाँ लोग इस तरह गंदे से दिखने वाले बच्चों को छिडक देते हैं, वो शख्स प्यार से बात कर रहा है । क्या नाम है तुम्हारा कुछ भी कोई छोटू कोई छोटे बुलाता है । क्यों क्या हुआ अच्छा तोहरे माँ बाप का पता नहीं रहते । कहाँ हूँ मुंबई मुंबई में तो इस समय हम दोनों ही हैं । मुंबई बहुत बडी है । मुंबई में कहा मुंबई में मुंबई बडी मासूमियत से वो बच्चा जवाब दे रहा था । मेरा मतलब है कि मुंबई में कहाँ? घाटकोपर, दादर, अंधेरी, मुंब्रा थाने या और कहीं घाटकोपर के बस अड्डे पर जोगेश्वरी के डिपो में कभी अंधेरी के प्लेटफॉर्म नंबर आठवें कभी राॅकी गराज पे कभी पाटिल चाचा के जिनका वाकर केंद्र में उसने बोलना शुरू किया तो बीच में साथ मैंने रोक दिया वो क्योंकि मैं समझ गया । अच्छा देखो मैं टीचर है, स्कूल जाना चाहोगे । स्कूल के बारे में सुनते ही उसकी आंखों में चमक आ रही थी । होठों पर मुस्कान तैर गई थी । वो टीचर उस बच्चे के भाव को समझ चुका था । देखो मेरी ट्रेन आ रही है तो मुझे कल यहीं मिलना । मैं बांद्रा में एक स्कूल में टीचर हूँ तो मैं स्कूल ले चलूँगा । और हाँ तुम बस कल के लिए अपने कपडे साफ कर लेना । बाकी में संभाल होगा । नए कपडे, किताबें और रहने का कोई ठिकाना क्योंकि मैं चलता हूँ कल पक्का मिलना । सांताक्रूज स्टेशन पर एक प्लेटफॉर्म पर ये दोनों बात कर रहे हैं । लोकल ट्रेन आकर रुकी और वो टीचर उसमें सवार होकर चला गया । बच्चा उस ट्रेन को तब तक देखता रहा जब तक वो ओझल नहीं हो गई । कुछ छोटे को अपने कपडों की सफाई की चिंता थी । उसने तय कर लिया था कि कल वो टीचर को साफ सुथरा मिलेगा । कपडों की सफाई की उसे काफी टेंशन थी । किसी टेंशन में वह घूम रहा था । उसे प्राइवेट गुसलखाने का पता मालूम था जहाँ वो अक्सर जाकर नहा धो लेता था । लेकिन आज आज उसे अपने कपडों के दाद के लिए साबुन की जरूरत है । पैसे थे नहीं तो साबुन का इंतजाम कैसे होता है । कोई दुकान से गुजरा और अचानक रुक गया । उसकी नजर किराने की एक स्टोर में रखी साबुन की त्रेपन । कई तरह के साबुन थे और उसे सिर्फ एक चाहिए था लेकिन मिलेगी कैसे? पैसे तो दे रही है, क्या चाहिए चला गया से दुकानदार ने उसे भिखारी समझकर छोड दिया । साबुन साबुन चाहिए, साबुन चाहिए । कौन सा पैसे हैं? बच्चे ने कोई जवाब नहीं दिया । अच्छा जैसे सुबह सुबह कहाँ से चले आते हैं । दुकानदार ने भगाया लेकिन उस बच्चे की नजर साबुन वाली ट्रेन से हट नहीं रही थी और वह भारत सरकार की तरह एक इंच भी पीछे हट नहीं रहा था । लगातार वो बस उस नीले साहब उनको देख रहा था, गरीब था वरना वो खरीद लेता हूँ । उसने कभी चोरी भी नहीं की थी और उसे पता भी नहीं था की कोई चीज दुकान से लेकर भागने को चोरी कहते हैं । इस समय उसके मन में उस साबुन की टिकिया को लेकर भागने की ही तिरासी दुकानदार भी कुछ कुछ भाव रहा था कि शायद ये बच्चा कुछ करेगा और वही हुआ । छोटे ने तेजी से हाथ मारा और अगले ही पल उसके हाथ में एक नीला साहब था साबुन लेकर वही तरफ दौड पडा । दुकानदार छोडने वाला कहा था साबुन चोर साबुन चोर चलाते हुए उसके पीछे दौड गया । सांता क्रूज की सडक पर एक साबुन चोर बच्चे के पीछे । अब करीब दर्जनभर लोग चोर चोर चिल्लाते दौड रहे थे । छोटे मियां की दौड भी कमाल थी । आती जाती गाडियों के बीच में वो दौड रहे थे । कुछ छोटे को पता था कि पकडा गया तो क्या होगा । बाहर की उसे फिक्र नहीं थी साहब । उनके छिन जाने का उसे खौफ था इसलिए वह भागा जा रहा था । दुकानदार भी कितना कंजूस और खडूस था जो उस मासूम को एक साबुन के लिए माफ नहीं कर रहा था । भागते हुए उसके साथ एक व्यक्ति ने पूछा पैसा चुराया क्या नहीं? साबू लेकर भागा वह दौडते हुए जवाब दिया । दुकानदार अरे फिर जाने दो बच्चा है वो । तुम तो हम को भी साथ ले लिए । कोई माल्या तो है नहीं । वो आज छोड दिया तो कल वो माल्या ही बनेगा । दुकानदार जिद पर था । कुछ लोग उसका साथ छोडकर रुक गए थे । लेकिन उस बच्ची के पीछे दौडने वाले अब भी चार पांच लोग थे । बच्चा दौडते हुए पलट पलट कर देखा था और इसी पलट पलट कर देखने में उसने वो नहीं देखा जो देखना बहुत जरूरी था । दौडता दुकानदार मुस्कुराने लगता । बच्चा दुकानदार को पलट कर मुस्कुराता देख हैरान था और बच्चा किसी से टकरा गया । ध्यान गया तो उसने देखा सामने पुलिस वाला था । सडक के बीचोंबीच पुलिसमैन करेंगे । कुछ हवलदार भी थी । इंस्पेक्टर नीरज नहीं मैच लगा ये शख्स बच्चे को गौर से देखा था । उसने दुकानदार को भी देखा । दो सेकंड में आपको पूरी कहानी समझ चुका था । साफ छोरे है दुकान के पैसे और साबुन चुराकर भाग है । दुकानदार ने पैसों का झूठा इल्जाम बच्चे पर डालना चाहिए । क्यों जरूरी समझा? शायद उसे इस बात की खुन्नस थी कि एक हाथ के लडके ने उसे काफी दूर तक थोडा क्या? बच्चा पैसों की बात सुनकर हैरान था । पैसा नहीं लिया । साबुन लिया । बच्चे ने सफाई दी । इंस्पेक्टर ने उस सात साल के बच्चे के कान पकडे बच्चा चीज पडा है । चोरी चोरी करता है । दुकानदार मुस्कुरा दिया उसे जाने क्यों इस मासूम के दर्ज पर अच्छा फील हो रहा था । पास खडा एक हवलदार फुल पडा वो जाऊ क्या साहब बच्चा है, गरज होगी, साबुन की है तो काम कर अपना मेरे को सिखाता है । हवलदार ना साहब नहीं बनने का मेरा बच्चे लोग को छोटे में ही ठीक कर दो तो फ्यूचर में क्रिमिनल होंगे नहीं समझा डांट दिया पुलिस वाले हवलदार एक तरफ खामोश होकर क्या हो गया पुलिस वाला बच्चे की तलाशी लेने लगा । उसे पैसे नहीं मिले पैसे उसने फैक्ट्री साहब रास्ते में है । हम लोग ने जब दौड लगाई तो पैसे फेंक दिया या गिर गया होगा साबुन हाथ में उसके दुकानदार ने फिर बोला वो जान गया था कि उसका झूठ पकडा जा सकता है । इंस्पेक्टर ने दुकानदार को घूर के देखा । हवलदार बच्चे को गाडी में डाल और इसको भी लेक्चर दुकानदार और बच्चे को पुलिस वालों ने गाडी में डाला और पुलिस स्टेशन के लिए पुलिस जीप और वैन आगे बढ गई । एफआईआरदर्ज की जा चुकी थी । दुकानदार ने बढा चढाकर शिकायत लिखा दीदी एफआईआर में बच्चे का नाम साबुन लिखा गया था । बच्चे से उसका नाम पूछना भी इन लोगों ने जरूरी नहीं समझा । पूछते तो शायद वो कहता कि उसका नाम छोटे हैं । हवलदार जानता था कि दुकानदार झूठ बोल रहा है लेकिन इंस्पेक्टर नीरज के डर से उसे लिखना ही पडा । ऐसे झूठे आरोप के कारण से भी बच्चे आगे चलकर मुझे बनते हैं । इसका ऐसा समझदार महात्रे को था, लेकिन उस खडूस पुलिस वाले नीरज को नहीं । इंस्पेक्टर नीरज को बच्चे में इतना क्यों इंटरेस्ट था, ये भी हवलदार म्हात्रे को पता था और इसीलिए महात्रे को उस बच्चे की बहुत ज्यादा फिक्र हो रही थी । आखिर ऐसा क्या करने वाला था? इंस्पेक्टर पुलिस स्टेशन के कमरे में एक कोरी में डरा सहमा बैठा हुआ हूँ । हाँ, अब उसका एक नाम था जो पुलिस के कंप्लेंट रजिस्टर में दर्ज हुआ था । एक तरफ पीला बल्ब चल रहा था । एक तरफ टेबल और कुर्सी थी, कुर्सी पर था । इंस्पेक्टर नीरज और टेबल पर रखी थी । साबुन की वही थी क्या जो मासूम चुराकर भागा ना? साबुन की जिंदगी का ये सबसे भाई से भरा था । सिर्फ एक साबुन के लिए तो चोर बन गया था । यहाँ तक कि वह खुद साबुन हो गया था । क्यों चाहिए था तेरे को सब साफ सफाई के लिए उसका क्या जो तेरी जिंदगी पर दाग लग गया वो किसी साबुन से साफ होगा क्या? नीरज ने बोलना शुरू किया । बच्चे के पास कोई उत्तर नहीं था । एक कोने में बैठा बस उस काले भत्ते पुलिस वाले को देखा था । इंस्पेक्टर नीरज उठा और कमरे का दरवाजा बंद करने लगा । बच्चा और ऍम वो अंजान था की आने वाले समय में उसके साथ क्या होने वाला है तो बहुत छोटा था लेकिन वो ये जानता था कि पुलिस चोर को मारती है । दरवाजा बंद करके पट्टानी बच्चे के सामने आया उसने एक उंगली साहब उनके चेहरे पर गिरे हुए बालों कि लटको एक तरफ क्या बच्चे की चमकती आंखों में डर साफ लिखा था खामोश और सदमे में डूबा चेहरा हूँ इंस्पेक्टर ने अब उंगली बच्चे के होठों तक लाया । हल्के गुलाबी और पतले होठों पर उसने कुंडली रखती है वो हरामी पुलिस वाला बच्चे को मॉलेस्ट कर रहा था । कितना क्यूट ऍम कपडे का पूरी तरह हैरान हो गया था । ऐसा हुआ उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था उसने पुलिस वाले की आंखों में वह गंदगी झांकरी जिस गंदगी को बच्चा जानता था नहीं था लेकिन महसूस कर सकता हूँ अच्छे तुरंत नाम ऐसे रहना नहीं हूँ । नहीं सब आज से तेरा नाम साबुन नहीं और तो चोर है । चोर वही करेगा जो पुलिस कहेगा । पुलिस कौन मैं चौंक ऑॅटो हूँ हूँ ऍम अपने हाथों से इंस्पेक्टर नीरज ने बच्चे के शर्ट को खोलने की कोशिश की । बच्चे ने अचानक ही धकेल दिया । पुलिस वाला संभाल नहीं सका और वह फर्श पर गिर गया । साहब उनको समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें । पुलिस वाला उठने की कोशिश कर रहा था । लेकिन ये क्या? साबुन की नजर टेबल पर रखे साबुन की टिकिया के बगल में नीरज कीट रिवॉल्वर पर बच्चा इतना डरा हुआ था कि उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें । साबुन के एक हाथ में काम तो दूसरे हाथ में साबुन की टिकिया थे । पागल है, क्या गोली चल जाएगी । पुलिस वाला अपनी जगह खडा तो था, लेकिन उसके पैर काम रहे थे, क्योंकि सात साल के साबुन ने एक साबुन के लिए पुलिस वाले की गन पुलिस वाले पर ही कम देते । साबुन की आंखों में क्रोध था । पुलिस वाला चिल्लाने लगा था । एक मात्र पात्र किधर मर गया तो मात्र गुलदार के साथ । पुलिस स्टेशन के बाकी लोग भी चौंक गए थे । सब की नजर उस कमरे पर थी, मात्र दरवाजे की तरफ लगता था । दरवाजा अंदर से बंद था और अंदर अंदर साहब, उनकी उंगली । अब घर पर इंस्पेक्टर नीरज पूरी तरह डरा हुआ था । इस ऍम दिवाली की बन्दुक नहीं हैं । बिटप फायर हो जाएगी । लॉक नहीं देखो दबाना मत । दरवाजा पीटा जा रहा था । इतनी जल्दी जल्दी क्राइम की सीढी नहीं चलते बेटा आज ही चोरी और आज ही मर्डर तुझे साबुन चाहिए ना कितना चाहिए मैं दिलाऊंगा । इंस्पेक्टर उस बच्चे को लालच देने लगा था । अपनी जिंदगी की डील कर रहा था क्योंकि बाजी अब बच्चे के हाथ में थी । एक कदम आगे बढाने की कोशिश रुक रुक अब बच्चे ने ललकारा पुलिस वाला तब बाहर तक आवाज गई मात्र और दूसरे पुलिस वाले भी है । मात्र नहीं । कान दरवाजे पर लगा दिया । अंदर का मामला सुनने के लिए कोशिश कर रहा था वो । क्योंकि मैं रुक गया । बस खुश देखो गन रखते हैं । तुझे जाने दूंगा रखते रखते हो कांटेबल पर तो मेरा कपडा क्यों खोल रहा था? बच्चे ने गुस्से में सवाल किया क्योंकि शायद वो जानना चाह रहा था कि पुलिस वाले का इरादा क्या हैं । ऐसी ऐसी बेटा तो सीरियस हो गया । इतनी सी बात पर बताओ बच्चा बडका काम गया । पुलिस वाला बाहर महात्रे । पूरा मैटर सुनकर समझने की कोशिश कर रहा था तो तो बहुत सुंदर है । मैं देखना चाह रहा था कि तू बिना कपडों के भी इतना ही सुंदर है । क्या बच्चे की आंख अच्छा लग गई? पुलिस वाले नहीं । जैसे अपना इरादा जाहिर किया । बच्चे ने ट्रिगर दबा दिया ही चली गई । बाहर म्हात्रे और उसके साथ ही परेशान हलचल सी मच गई । गोली नीरज के बगल से निकलकर कमरे की दीवार में घुस गए थे । नीरज की हालत पतली हो चुकी थी । बाल बाल बचा था, लेकिन कितनी देर बचेगा उसे पता नहीं था । दो फुट का है तो लेकिन बडा हरामी है तो नीरज निकली थी साबुन को फिर से गुस्सा आया मैं हरामी हो साले, तुम हरामी हो और इस बार बच्चे ने कुछ इरादा कर लिया था । उसकी आंखें चमक गई थी । नीरज कंफ्यूज था । वो बच्चे के चेहरे के भाव को पढने की कोशिश करने लगता है । क्या करेगा तो नहीं नहीं ये मात्र बच्चा है । मेरे को चिल्लाया नीरज लेकिन बच्चे ने गोली चला दी । इस बार गोली दीवार के नहीं इंस्पेक्टर के सीने पर लगी थी । ठीक निकली और वो वहीं ढेर हो गया । पूरा पुलिस स्टेशन कोहली की दूसरी आवाज थे । सन था मात्र और उसके साथ ही दरवाजा तोडने लगे थे । कुछ देर में ही दरवाजा खुल गया । जैसे ही खुला सब अंदर का मंजर देखकर हैरान इंस्पेक्टर नीरज मरा पडा था । एक और दूसरी तरफ साबुन खडा था । गल्ली इन पर भी तान दिया । उसने ये जी क्या कर दिया तूने बच्चे ये मेरा कपडा क्यों खोल रहा था? हरामी अब भी वो क्रोध में था तीन हवलदार दरवाजे के पास बच्चा अब भी गंदा नहीं हुए थे । बच्चे बच्चे गन रखते हैं मुझे जाने दो मुझे कपडे धोना है मुझे कल स्कूल जाना हैं आंखों में आंसू लिए बोल रहा हूँ हवलदारों के पास दरवाजा छोडने के सिवा कोई रास्ता नहीं था । एक तो पहले गन रखूं हम है ना हम सब मिलकर कुछ सोचेंगे मात्र मुझे जाने दे नहीं तो गोली चला दूंगा देख उसको वैसा ही लेट जाएगा तो घंटा नहीं हुई । दरवाजे की तरफ पडने लगा और कुछ ही पल में तो सात साल का लडका साबुन अपना साबुन लिए गन की नोक पर एक कत्ल करके उस पुलिस स्टेशन से फरार । उस दिन बस वो भागा जा रहा है पुलिस उसके पीछे । चारों तरफ साबुन की तलाश में पुलिस की नाकाबंदी । हर एक न्यूज चैनल पर कातिल बच्चा हैडलाइन आ रहे थे । हाँ, टीवी एंकर उस बच्चे को शातिर खूनी घोषित कर चुका है । बच्चे की तलाश पूरे शहर में हो रही है । वो दुकानदार जिसके यहाँ से साबुन ने साबुन चुराया था, उसने भी न्यूज देखा था । डर के मारे उसने तो दुकान ही बंद कर देंगे और घर चला गया । भैया स्टोरी पढ रहे थे लेकिन आगे की पन्ने पूरे ब्लेंक थे । भाई ने पन्ना पलट कर साबुन की आगे की कहानी पढना चाहिए लेकिन अधूरी कहानी रुक गई थी भाई । थोडे विचलित हुए तो साबुन से शायद इमोशनली जुड गए । वो जानना चाहते थे कि क्या हुआ था उन का बिस्तर पर लेटे हुए मेरी स्क्रिप्ट का आनंद उठा रहे थे, लेकिन उसका आनंद खराब हुआ ये सोचकर की कहानी तो अधूरी है । कुशल नहीं खानी अब तक पूरी क्यों नहीं अपने आप से बढाकर स्क्रिप्ट एक तरफ रतियां भाई ।

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बाइक पर सवार एक आदमी हेलमेट से अपना चेहरा छुपाए जंगल में शरीर के टुकड़े फेंकते जा रहा है। दूर खड़े काले लिबास में 12 लोग यह सब देख रहे हैं लेकिन कुछ कर नहीं रहे हैं। कौन हैं ये बारह काले लिबासी? काले लिबासी मरने का रहस्‍य ढूंढ रहे हैं, ऐसा क्‍यों? दूसरी ओर एक आदमी अपने बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में लिखाने आया था। पुलिस और काले लिबासी आपस में टकराते हैं, तो अब क्‍या होगा? रहस्‍य और हैरतअंगेज घटनाओं से भरी इस कहानी को सुनें बिना आप नहीं रह पाएंगे।
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