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Chapter 7

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उल्लास से भरे सुहाने मौसम में कांटे की चुभन ने नमिता को उसका बीता हुआ कल याद दिला दिया , और नमिता अपने जीवन के बीते हुए पल में गोता लगाने लगी writer: ओमेश्वरी 'नूतन' Voiceover Artist : RJ Saloni Author : Omeshwari 'Nootan'
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ऍम आई एम आजी नाश्ता कर लेते हैं । पूनम ने परोसते हुए कहा मुझे कोई नाश्ता वास्ता नहीं करना है । सास ने कहा आॅड इतनी भोली बनने की जरूरत नहीं है । पूनम मैं सब समझती हूँ । सास ने कहा क्या वो मामा जी मुझे कोई गलती हो गई क्या? आज बच्चे को लेकर मुझे किशोर से बात करनी थी तो बडी चलाकी से तुमने उसका नशा नहीं था, कर दिया । नहीं । मुझे ऐसा बिल्कुल नहीं है । पुणे देर हो रही थी । उन्होंने सफाई दी, बस बस रहने दो । अब तुम से मेरा भरोसा उठ चुका है । तुम्हारी किसी भी बातों पर मुझे विश्वास नहीं रहा । चार सालों से मैं पोते का वो देखने के लिए तरस रहे और तुम मीठी मीठी बातों से मुझे फैसला कर रही । अब तक इतना बडा सच मुझे छुपाकर रखा कि तुम बांझ हो और पंजाब जमीन में कोई फसल ही नहीं सकती । मेरी किस्मत छोटी थी जो मेरे बेटे में तो उससे प्यार किया । मुझे हर हाल में होता चाहिए और इसलिए किशोर से बात करके उस की दूसरी शादी करवाकर होंगे । चाहे तो इसके लिए राजी हो या ना हो तो करवा दीजिए अपने बेटे की दूसरी शादी । हम भी अपनी दीदी को लेकर चले जाएंगे और दूसरा विवाह करवा लेंगे । अब तक दरवाजे की ओर में खडी नमिता सास बहु की बातें सुन रही थी लेकिन जब सुनना मुश्किल हो गया तब उसने घर में प्रवेश करते हुए कहा, नमिता ये क्या कर रही हो? तुम चुप रहो । पूनम ने डाटते हुए कहा एक क्या कम थी जो दूसरी भी आ गई? मांझी प्लीज अपना मिता की बातों को दिल से मत लगाइए । कहते हुए पूनम ने नमिता का हाथ पकडा और खींचते हुए अपने कमरे की ओर पड गई । हाँ ले जा अपनी लाडली बहना को अपने कमरे में और बता दो कि तुम्हें हम लोग बहुत दुख देते हैं । पूनम के साथ ने कहा दी थी आप ये ठीक नहीं कर रहे हैं । कमरे में घुसते ही हाथ छुडाते हुए नमिता ने आगे कहा, मुझे तुम पर तरह सारा दीदी कितना अपमान? तुम चुपचाप सहन क्यों कर रही हो और क्या जीजा जी को ये सम्मानों में नहीं । उन्होंने कहा तो फिर आने दो जीजा जी को जो कुछ मैंने सुना है वो सब जरूर बताउंगी । नमिता ने कहा नहीं नमिता तो ऐसा कुछ भी नहीं करो कि पूनम ने कहा क्यों नहीं बताउंगी दीदी जरूर बताउंगी और तुम जो कॉलेज में लडकियों के साथ होने वाले छोटे छोटे भेदभाव पर पूरा कॉलेज सर पर उठा लेती थी । तो फिर आज खुद पर होने वाले अन्याय का जवाब क्यों नहीं दे रही हो? जीजा जी से सन्यास को छुपाने का कारण क्या है? दीदी मान ही बन पाना कोई गुनाह तो नहीं । नमिता के द्वारा एक साथ कई सवाल खडे करते हुए नारे के लिए न्याय की बात करने वाली पूनम को जगाने की कोशिश करने पर पूनम की आंखों में आंसू भर गए । उसने कहा नमिता तो इन सब बातों को छोडो ये बातें अभी तो मैं समझ में नहीं आएंगी । आप कुछ ना समझ कह रही है । दीदी मेरे सवालों से भाग रही हो । नमिता ने कहा प्लीज जमता मुझे मेरे हाल पर छोड दो । तुम अपने भविष्य के बारे में सोचता हूँ । नमिता के द्वारा मूव है लिए जाने पर पूनम ने आगे कहा, तो तुम कहते हो नमिता किशोर को सब सच बता दो । ठीक हैं । कहते हैं कि उन्हें फिर उसके बाद क्या होगा । सोचा है तुमने क्या होगा दीदी नमिता ने पूछा किशोर आज भी मुझ से उतना ही प्यार करते हैं जितना शादी से पहले करते थे और ऐसे में यदि किशोर को इस बात का पता चलेगा कि बच्चा नहीं होने के कारण मुझे सास उमा ताना देती हैं तो घर में बवाल मच जाएगा । इस तरह मांझी ने मुझे अपने घर की बहू बनाकर इस घर को स्वर्ग बनाने का जो सपना देखा था वो सपना चूर चूर हो जाएगा । पूनम ने कहा तो क्या तो इसी तरह न्याय को सहती रहोगी दीदी और कोई चारा भी तो नहीं है । बहन पूनम ने नजरे झुका लें तो अशोक से बात करते हैं दीदी नमिता ने कहा नहीं अशोक से भी कुछ कहना ठीक नहीं होगा । वो सिर्फ मेरा देवर ही नहीं बल्कि भाई जैसा है । एक बार के लिए किशोर मेरी आंखों में आंसू देखकर कारण पूछेगा लेकिन अशोक वह कारण नहीं बल्कि आंसू देने वाले का नाम जान कर तुरंत सजा देने की कोशिश करेगा । अब तू ही बता ऐसे में यदि हम अशोक को माँ की बातें बता देंगे तो क्या होगा । इस घर की बहू होने से मेरा भी कुछ फर्ज बनता है और मैं नहीं चाहती नमिता कि मेरे कारण मेरे घर में अशांति उत्पन्न हो या माँ बेटों के प्रेम में दूरियां पैदा हूँ । जिस माने जवानी में विधवा होने के बाद अपने बेटों के लिए जीवन का कीमती समय काम में ही गुजार दिया । उसमें का मेरी वजह से किशोरिया अशोक सेल का हूँ । ऐसा मैं कभी नहीं चाहेंगे तो फिर बिना किसी दोष के इसी तरह दुख से ही रहूँगी । नमिता ने कहा तो कहती हूँ नमिता की मैं दोषी नहीं हूं । मैं दोषियों नमिता और अपना दोष मानती भी हूँ । ठीक है तो कहती है कि वह नारी इज्जत की हडताल नहीं होती है । जिसकी कोक सुनी हो उस औरत को ससुराल में इज्जत और अधिकार क्यों मिले? जो बंजर भूमि की तरह हूँ । उस बहु के लिए किसी को हमदर्दी क्यों हो? ये अपनी सास की एकमात्र शिक्षा की भी पूछती ना कर सकें । सच तो यह है नमिता की मुझे भी बिना संतान के बहुत अकेलापन महसूस होता है । जीने का मन भी नहीं करता है भी फिर भी मुझे जीना होगा । मैं किशोर के लिए जीना चाहती हूँ । नमिता सिर्फ किशोर के लिए नहीं दी थी, ऐसा मत करूँ । नमिता खुद को रोकना सके और पूनम से लिपट कर होते हुए कहने लगी, मांग के जाने के बाद तो भी मेरी माँ बडी । बहन और सहेली सबकुछ दीदी मुझे इस बात की खुशी है कि भगवान ने तो में असीमित सहनशक्ति दी है । पर दो किस बात का है कि तुम निर्दोष होते हुए भी खुद को दोषी मान रही हूँ और मुजरिमों की तरफ बेजुबान बनकर अन्याय को सह रही हो जिससे सामने वाले की हिम्मत बढ रही है । मैं नहीं जानती थी कि तुम जैसी उच्च शिक्षित होकर भी कोई बेगुना खुद को दोषी मानते हुए जीवन कैसे व्यतीत करेगा और ऊपर से मुझे कुछ कहने से रोक रही हूँ । ठीक है दीदी तुम्हारी खुशी यदि सास के ताने में है तो हमें तो मैं खुश देख कर खुश रहेंगे लेकिन ससुराल के नाम पर मुझे डर लगने लगा है कि कारण चाहे जो भी हो पर संतान नहीं होने पर ताने तो औरत को ही सुनने पडते हैं । और इस कारण से एक महिला को पति की अनुपस्थिति में भला बुरा सुनाते हुए मालकिन से नौकरानी बना दिया जाता है । सच कहती थी ये समय तुम्हारी सास सौतन लाने की धमकी दे रही थी । उस समय खुद को मैं बहुत मुश्किल से रोक पाई हूँ । वरना मेरा तो मन कर रहा था कि उनकी जवान ही खींच लो और कहूँ कि महिलाओं की सारी समस्याओं की जड कोई समाज या पुरुष नहीं बल्कि तुम जैसी और कही होती है । पूनम नमिता के हाथों को अपने हाथ में लेते हुए बोली नहीं मैं ऐसा फिर कभी मत कहना । किशोर मेरे जीवन साथी ही नहीं मेरे परमेश्वर हैं और उनकी खुशी में ही मेरी खुशी है जबकि किशोर की जान उनकी माँ में बस्ती है । इसलिए मैं तुमसे विनती करती हूँ कि फिर कभी ऐसी बातें मत कहना हूँ, लेकिन दीदी तो मेरी का समय ना में था । किशोर से इस बारे में कुछ मत कहना कहकर गानों के बहे आंसुओं को पूनम पूछने लगी । तभी बाहर से किशोर की आवाज आई पूनम वो पूनम कहाँ हूँ । किशोर की आवाज सुनते ही दौडते हुए कमरे से बाहर निकले और किशोर के हाथ से बैग लेते हुए इसने कहा, आज का दिन कैसा रहा? बहुत सफल रहा । आज का सफर पूरे चालीस करोड का ऑर्डर मिला है और जल्दी मुझे फ्रांस भी जाना होगा तो बताऊँ घर में सब ठीक है । हाँ यहाँ तो सब ठीक है । एकदम वैसा ही जैसे तुम छोड कर गए थे । हम नमिता आई हुई है तो उन्होंने कहा अच्छा कब आई कहाँ है? किशोर ने कहा अभी थोडी देर पहले आई सो रही है, कोई बात नहीं । सोने दो साल से तो कल भी मिल सकते हैं । आज मुझे घरवाली से मिलना है । शरारत भरी नजरों के साथ किशोर ने कहा ऍम अपने कमरे की ओर बढ गई तो किशोर भी पीछे चल पडा हूँ हूँ ।

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उल्लास से भरे सुहाने मौसम में कांटे की चुभन ने नमिता को उसका बीता हुआ कल याद दिला दिया , और नमिता अपने जीवन के बीते हुए पल में गोता लगाने लगी writer: ओमेश्वरी 'नूतन' Voiceover Artist : RJ Saloni Author : Omeshwari 'Nootan'
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