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रेल कार हत्याकांड

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इंसान के हाथों होने वाले अपराध की सच्‍ची कहानियों को बयां करता यह उपन्‍यास रहस्‍य और रोमांच से भरा है।
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फॅमिली इसका जो चल रहा था, बोलती महायुद्ध का संघर्ष चक्र पूरी तेजी से घूम रहा था । जापानी भारतीय सीमाओं के बहुत निकट आ गए थे, इसलिए लोगों में बहुत घबराहट फैली हुई थी । देश में थी के यूरोपीय सैनिक अधिकारी गर्मी की इन्शुरन्स आने वाले महीने बिताने के लिए पहाडी स्थानों पर चले गए थे । ऐसे ही अधिकारियों का एक दल शिमला में एक पखवाडा बिताने के बाद अपनी अपनी पोस्टिंग के स्थानों पर लौटने की योजना बना रहा था । बीस जून की शाम को ये दलित कालका जाने के लिए प्लेटफॉर्म पर पहुंचा । फॅार बहाउद्दीन ने चौदह नंबर सरकार की मोटर कर निरीक्षण किया तो रेलकार में बारह यात्री थे । उनमें से आठ उच्च सैनिक अधिकारी थे, दो अर्द्धसैनिक व्यक्ति और दो इस लिया थे मेरे सब यूरोप ये थे छह बजे ये रेलकार शिमला से कार्य का के लिए चलते हैं । रात के दस बजे जब ये रेल का अच्छा और कालका के बीच घोडे के नाम के आकार की गुफा में घुस रही थी तो लगा जैसे रेलवे लाइन पर पत्थर रखे हुए हैं । यहाँ से कालका रेलवे यार्ड दिखाई देता था और जब कार की दाई और गोली चलने की आवाज सुनाई दी तो ड्राइवर में एकदम से रोक दिया । इसकी बात कहीं गोलियों के धमाके मुझे और इसके पहन के रेलकार यात्री ये समझ पाए कि ये क्या हो रहा है । उसका ड्राइवर और तीन यात्री ॅ विमॅन और उनका ऍम ये सब इतनी तेजी से हुआ कि बाकी लोगों के एकदम स्तंभित रहेंगे । गोली चलने बंद हो गई और बाईं ओर का सामने वाला दरवाजा एक झटके से खुला । फॅमिली के साथ बैठ कर देने वाला धमाका सुनाई दिया और लेफ्टिनेंट जेटली घायल होकर गिर पडा । खुले दरवाजे के रह एक व्यक्ति तेजी से भी तरह गया । उसका चेहरा एक कपडे से डाला था । केवल आंख दिखाई दे रही थी । उसके हाथों में एक बंदूक थी जो इसके लिए तैयार देखती थी कि कोई भी जरा ऍम उसकी इधर उधर दौडती तेज खोने, व्यक्तियों को गिना और वो बारी आवाज में चिल्लाकर बोलना ऍम ऍम यात्री पुतलों की तरह खडे हो गए और कार से बाहर आ गए हैं । उसे न कहाँ पोशाक, तैयारी की आवाज, गोची मनी और फॅमिली ने अपना बंद हुआ निकाल कर फेंक दिया । दूसरे ने भी यही किया । लूट कमाल इकट्ठा कर वो व्यक्ति जिससे रहस्यमय ढंग से आया था, उसी तरह घने जंगलों में विलीन हो गया । वो ॅ जीटॅाक कालका की ओर भाग रास्ते में कुछ गांव वाले मिली जो ने कालका बजा लेते हैं । वहां उन्होंने टैक्सी ली और लगभग साढे दस बजे रेलवे स्टेशन पहुंचे । तेल में पुलिस के सार्जेंट रेडी को इस घटना का समाचार दिया । सहायता के लिए एक रेलकार को घटनास्थल की ओर रवाना करके लोकोशेड में दुर्घटना का अलार्म बजा दिया गया । जब पुलिस तल दो पहाडियों से घिरे घटनास्थल पर पहुंचा तो मिस्टर मॉर्टन कोरेल कहाँ से पचास गज दूर कालका की ओर टोमॅटो के पास घायल पडे पाया । बोल ऍम यूबी तथा ऍम रेलकार में घायल पडे थे और कर्नल ऍम मरे पडे थे । घटनास्थल पर यात्रियों से की गई थोडी से पूछताछ से एक महत्वपूर्ण बात पता चाहिए । नकाबपोश हत्यारे के साथ एक नाटे कद का दुबला पतला आदमी और था । वो भारतीय था । उसके सिर पर कपडा बंधा हुआ था और वो भी बंदूक नहीं होता । फॅमिली विवाद में अंबाला कि ब्रिटिश मिलिट्री अस्पताल जा रही है । लेफ्टिनेंट जॅानी बच गए । कोली से छह व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी और दो घायल हुए हैं । पुलिस ने खोज शुरू की । पुलिस के पास कोई सूत्र नहीं था । कालका आने जाने वाले यात्रियों से जांच की गई और पूछताछ के लिए रोका गया । आसपास का इलाका छान मारा गया, पर कोई सूत्र नहीं मिला । अब केंद्रीय गुप्तचर विभाग के अधिक निपुण अधिकारियों को बुलाया गया । उन के आने से सराहत कालका जिला जैसे अधिक सक्रिय होता था । अनेक व्यक्तियों से घंटों पूछताछ की गई गई । सूत्रों पर चला किसी कार्रवाइयां की गई, पर कुछ पता नहीं चल सका । ऐसे संबंधी जुलते हत्याकांडों कि पुराने रिकॉर्ड निकले गए सब क्रांतिकारियों और कम्युनिस्टों की फैमिली देख डाली गई । उनकी बीस जून तक की गतिविधियों के वो भी लेने के कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को पूछताछ के दौरान काफी यंत्रणाएं भी दी गई । सीआईडी अधिकारियों ने खोजबीन के दौरान कुछ ऐसी अमर्यादा भारती की सम्मानित व्यक्ति भी उनके सामने आने से कतराने लगे । मामला सिर्फ छह व्यक्तियों की हत्या का ही नहीं था, ये भी महत्वपूर्ण था कि वो सब वही जीरो पीते थे । लेकिन इतनी सरगर्मियों के बाद भी हत्यारों की एक अपर्याप्त और स्पष्ट होली के अतिरिक्त और कोई जानकारी नहीं मिल सकें । क्या इसे दो सिरफिरों का दुस्साहसपूर्ण पागलपन कहा जा सकता था? या दो दशक पहले जिस आतंकवादी आंदोलन का दौर था, वही फिर शुरू हो गया था । अंतिम रात को अधिकांश ने सही माना । उन दिनों का वातावरण भी किस्मत को पुष्ट करता हुआ लगता था । राष्ट्रीय नेताओं ने अरबी सरकार के युद्ध प्रयत्नों में सहायता देने से इंकार कर दिया था और सुभाषचंद मोशन भारतीय युवकों को जोश की आग में भडका रहते हैं और इस दुर्घटना के शिकार सब व्यक्ति यूरोप किए थे । इससे भी दूसरी धारा को ही बल मिलता था । खैर हत्यकांड का चाहे जो भी उद्देश्य रहा हो, हत्यारी कोई भी रहे हों, पर पुलिस इस मामले को नहीं सुलझा सकें । शिमला कालका रेल का हत्याकांड को अपरचित व्यक्तियों का कारनामा कहाँ गया और छह व्यक्तियों की हत्यारे पर आखिर है चार नवंबर को भटिंडा में एक दूसरा हत्याकांड हो गया । रामचंद्र वकील अपने दो मित्रों के साथ उधर के किनारे घूम रहे थे कि अचानक गोली चली और वो गिर पडे हैं । वो बुरी तरह घायल हो गए । उनकी दोनों साथ ही पुलिस को खबर करने दौडते हैं । जब पुलिस आई तो उसने वकील को मृत पाया । पैरों के निशान तथा कुछ सूत्रों के सारे पुलिस वहाँ स्थिति मील दूर बने छोटे से मकान के पास पहुंच गए । वो मकान लम्बे लम्बे पेडों से घिरा एक खुली जगह में बना हुआ था । पेडों ने ऐसे काफी छुपा रखा था । दरवाजे और खिडकियां अन्दर से बन्द थी । बाहर से देखने पर उसमें कोई हलचल मालूम नहीं पडती थी । खोजी दल के नेता इंस्पेक्टर देश आज ने मकान को चारों ओर से घेरने का आदेश देखकर मकान में रहने वालों को बाद में करने के लिए आवाज लगाएं । मकान में जरा भी हाल चल रहे थे । देश शायद ने दोबारा आवाज लगाई और इस पर उसे जवाब मिल गया । फिर की जगह से खुली और गोलियों की बहुत चार बाहर आए । इस पर अध्यक्षा छलनी होकर गिर पडा और तुरंत मर गया । तब पुलिस ने भी जवाब दिया । कुछ देर तक दोनों ओर से गोलियां चलती रहे । थोडी देर बाद मकान में से गोलियाँ आनी बंद हो गए । जम्मू को मुख्य आ गई तो पुलिस जबरदस्ती मकान में घुसकर अंदर एक पुरुष मृत्यु पडा था । उसकी बंदूक उसके पास थे । एक स्त्री बुरी तरह से घायल में उस आदमी का नाम अब्दुलकरीम था । उसके शरीर में लगे गांव को देखने से पता चला कि उसने आत्महत्या की थी । घर की तलाशी में कहीं छिपे हुए हथियार भी मिले । घायल स्थिति अब्दुलकरीम की पत्नी थी । इस संसार से विदा होने से पहले करीम ने उसे भी गोली मार दी थी । कुछ दिन बाद धीरे धीरे उस औरत की हालत सत्तर की और उसमें कुछ ऐसी महत्वपूर्ण सूचनाएं दी जिनसे आगे की खोज में पुलिस को काफी सहायता नहीं हैं । अब्दुलकरीम के कालका वाले घर की भी तलाशी हुई है । पहले मकान में जो हथियार मिले थे उनमें से दो बंदूकें रहते हैं । ये हाथ की बनी हुई थी और इन्हें कालका रेलवे वर्ग अपने लोग हैं की कतरनों से बनाया गया था । ये बात एक रहन से ही देरी की इन्हें बिना किसी की नजर पडे कैसे बना लिया गया । आखिर मु मामला जिसे सत्रह महीने पहले हंसोड कहकर फाइल कर दिया गया था । दूसरे केस की जांच पडताल के समय फिर भराया यद्यपि इस दूसरे मामले का उससे कोई संबंध नहीं था । बंदूक मिलने से तथा अब्दुलकरीम की भी दुआ द्वारा कुछ बातें बताने से पुलिस को लगा कि इन दोनों हत्याकांडों में कुछ संबंध जरूर है । उसने सोचा की संभावना यही अब्दुलकरीम रेल कर हत्याकांड का दोषी था लेकिन बहुत देर हो चुकी थी । अब्दुलकरीम पुलिस की पकड से दूर जा चुका था । जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि अब्दुलकरीम बहुत क्रोधी स्वभाव का व्यक्ति था । रामचंद्र वकील से मेहनत आने के प्रश्न पर उसका झगडा हो गया था । इसी के लिए उसने उसे मार डाला । ये भी पता चला की वो एक लडकी के प्रेम में पड गया था । लडकी कबाब ये रिश्ता नहीं चाहता था इसलिए अब्दुलकरीम लडकी को किसी दूसरे शहर में ले जाकर शादी करना चाहता था और इस काम के लिए उसे पैसे की जरूरत थी । रेलकार को रोकने की योजना उसने पैसे के लिए ही बनाए थे । इस अद्भुत रहस्य उद्घाटन से पुलिस चौकी एक औरत को पाने की खत्म, उसने छह हत्याएं कर डालें । उच्च सैनिक अधिकारियों, एक वकील और एक पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या कर के बहुत से व्यक्तियों को घायल करने के बाद खुद ऐसी जगह चला गया था जहां पुलिस उसे तो अकड सकती थी ना कोई जान तो उसे दंड दे सकता था । लेकिन क्या रेल कार्ड कहती में उसकी सहायता करने वाला कोई और नहीं था? यदि था तो कौन और पुलिस पूरे जोडो शोरों से उस दूसरे अपरचित व्यक्ति की खोज में लग गए । घोष के बाद पता चला कि अब्दुलकरीम का अब्दुल रही नामक भाई था जो डेरा इस्माइल खान में रहता है और काम करता था । जून उन्नीस सौ बयालीस में अब्दुलकरीम अपने भाई के साथ कालका के एक रेलवे क्वार्टर में रहता था । उन्होंने वो भी कार्यकाल के एक रेलवे वर्क शॉप में काम करता था । बाद में उसका तबादला कर दिया गया और भटिंडा में हुए हत्याकांड की तारीख में वो डेरा इस्माइल खान में काम कर रहा था । उस पर संदेह होना स्वाभाविक था । आठ नवंबर को वहाँ की पुलिस को तार भेजा गया कि वो से गिरफ्तार करके कालका ले आए । लेकिन शायद वहाँ उसे टेलीग्राम को समझने में कुछ गलती हो गए । कोई जवाब दबाकर तारीख को दूसरा तार भेजा गया कि क्या अब्दुलरहीम गिरफ्तार कर लिया गया है । दब उसे गिरफ्तार करके कालका लाया गया । सत्रह नवंबर को डेरा इस्माइल खान में उसके मकान की तलाशी ले गए । हथियारों के हिस्से एक फॅमिली और दो खत्म हैं । पत्र से कई महत्वपूर्ण तथ्य पता चला है कैंसिल की सिनाख्त के लिए कि ये उस रेलकार कि एक यात्री की है । अब्दुल रहीम ने उसे अपने घर का बरामदा होना स्वीकार कर लिया । उन पत्रों से ये पता चला कि अपराध का उद्देश्य क्या था । इसके बाद उसे हत्या और सशस्त्र डकैती के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और उसकी जमानत भी नहीं हुई । जेल के सीखचों के पीछे बंद हो जाने पर बडी बडी हिम्मती अपराधियों में अजीब परिवर्तन आ जाते हैं । जेल की कोठरी का एकांत अपराधी के मन को इतना कमजोर बना देता है कि वो अपने अपराध का भार सहने लायक नहीं रह जाता है । अब्दुलरहीम के साथ भी यही हुआ । उसने कहा कि वह अपना अपराध स्वीकार करना चाहता है । इस पर उसे शिमला के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट हरबंससिंह के सामने पेश किया गया । अब्दुलरहीम मुझे कल का में दुर्घटनास्थल पर ले गया और हत्याकांड से संबंधित स्थान दिख रहा है । रिलाइंस से कुछ दूर पर उसने वो स्थान दिखाया जहाँ और उसके भाई गाडी में गोलियां चलाते समय लेते थे । उसने कहा कि उन्होंने दिल्ली लाइन पर पत्थर रख दिए थे और फिर लेटकर रेलकार का इंतजार करने लगे हैं । जब गाडी पत्थरों से टकराकर रुक गई तो उन्होंने हमला दोनों गोलियां चलानी शुरू करते हैं । यात्रियों को इस तरह घबराहट में डालकर उसका भाई रेलकार में घुस गया और वो बार पहले पर रहा । माल इकट्ठा कर के कल का में अपने मकान में चले गए हैं । अपराध का उद्देश्य बताते हुए उसने कहा कि इसका भाई एक लडकी से शादी करना चाहता था । उन लोगों को लडकी को भागने के लिए मजबूर होना पडा था इसलिए नकद पैसे की जरूरत पडी और वो उनके पास नहीं था । जल्दी बाजी में कुछ पैसे जुटाने के लिए ये सब किया गया था । अदालत में सुनवाई के दौरान वो ये कहते हुए अपने पहले बयान से मुकर गया की पुलिस के अत्याचार से बचने का यही तरीका उसके पास था । लेकिन एक गवाही में उसके पहले बयान को सही प्रमाणित कर दिया । कृशन अब्दुलकरीम का पडोसी था । बीस जून की रात को आपने क्वार्टर के बाहर था क्योंकि गर्मियों में वो क्वार्टर के बाहर सोया करता था । उसने कहा कि लोकोशेड में खतरे की घंटी बजने से कोई आधा घंटे पहले उसने करीब और उसके भाई रहीम को रेलवे अस्पताल की तरफ से आते देखा था । किशन की गवाही में प्रमाणित कर दिया कि हत्याकांड की रात को साढे दस बजे करीब और उसके भाई घटनास्थल की ओर से आ रहे थे । अब्दुलकरीम के मुकदमे की सुनवाई शिमला के एक सेशन जज की अदालत में हुई । इस दौरान साठ दवाइयाँ और जोडी ने घटनास्थल देखने की इच्छा जाहिर की । उसे वो जगह दिखाई गई है । लम्बी रोमांचक जिला के बाद जोडी के सदस्य निर्णय पर विचार करने के लिए उठते हैं । उसकी वृद्ध ये बाधित हैं । बी जून की रात को कालका में अपराध होने की । कुछ देर बाद किशन ने उसे उसके भाई के साथ आते हुए देखा था और मोदी घटनास्थल कीदिशा उसके घर से बरामद हुई । प्रोफाइलिंग पेंसिल उसी रेलकार के एक यात्री मिस्टर बोस्टन ने अपनी बताया था । वो इस बात का कोई उत्तर नहीं देख पाया था कि वो उस रात बाहर क्यों गया और वो कहाँ से आ रहा था । उसके घर से बरामद हुए हथियार और साझे तथा उसकी स्वीकरोक्ति और उसके घर में मिले हुए पत्रों ने सारी बात स्पष्ट कर दी थी हत्या का उद्देश्य बता दिया था । दूसरी ओर ये भी था की रेलकार के बच्चे भी यात्री उससे नहीं पहचान पढे थे । केवल एक गवाह ये कह सकता था कि उसने रहीम को दो साल पहले दुर्घटना की रात को देखा था जो पहचानने में गलती भी कर सकता था और फिर उसने अपनी स्वीकरोक्ति से इनकार भी कर दिया था । तो प्लाइंग कैंसिल का उसके पास से बरामद होना इस बात के अलावा और कुछ प्रमाणित नहीं करता कि वो उसके अधिकार में थे । ये भी संभव है कि उसके भाई ने उसे वो पेंसिल हो और उसका भाई उस हत्याकांड में शामिल था । इस पर से यह सिद्ध नहीं होता कि उसने भी निश्चित रूप से उसमें हिस्सा लिया था । जूडि के चार सदस्यों ने से अपराधी घोषित किया और तीन में निर्दोष । उन तीनों में से एक अंग्रेज भी था जिसमें बहुमत मना और उससे फांसी की सजा संगठित है । लाहौर की हाईकोर्ट ने भी सजा बहाल रखें और जब उसने इंग्लैंड की प्रिवी काउंसिल में अपील की तो छब्बीस फरवरी उन्नीस सौ छियालीस को वहाँ से भी वो रद्द कर दी गई । कुछ महीने बाद अंबाला जेल में फांसी पर लटका दिया गया । इस मामले की सबसे अद्भुत बातें इसका उद्देश्य रहें । एक औरत के लिए इतने निर्दोष व्यक्तियों की हत्या हुई थी हूँ ।

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