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Five is Not Just a Number - Part 4

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सुनिए मेरी प्यार की कहानी कैसे मैं एक आज घराने का लड़का अपने प्यार को पाने में क्या-क्या मुश्किलों से गुजरता हूँ, सुनिए पूरी कहानी| Author : Abhishek Thapliyal Voiceover Artist : Navneet Atul
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पहली बार जब मैंने उसे गूगल पर सर्च किया था, उसके नाम के अर्थ को जानने के लिए तो उस समय सफलता हाथ जरूर लगी थी और आज नहीं क्योंकि मैं उसके नाम के हर चेहरे को फेसबुक पर ढोल चुका था और मुझे वहाँ नहीं मिली । सोचा था अगर फेसबुक पर उसे कुछ बात होती है तो अच्छा है क्योंकि मैं अभी एक तरफ ही आज की में नहीं नहीं सकता हूँ और मुझे यह भी मालूम था कि वो कभी दिलचस्प नहीं होगी । मुझे मैं अच्छी तरह जानता था कि उसका तबका मुझ से ऊपर है । वह मेरे बारे में कभी सोच भी नहीं सकती हूँ । मैं ये भी अच्छी तरह से जानता था । ॅ और इन फालतू का में ध्यान देने का समय नहीं, उसके पास है । इसलिए वहाँ इसकी तीसरी शताब्दी में भी फेसबुक चलाने से वंचित है । मुझे मालूम था केवल अपने सपने के साथ कोई ढील नहीं करना चाहती हूँ । उसके लिए शायद उसके घर वाले और उसका मेडिकल कॉलेज ही सब कुछ है । मैं तो कहीं दूर तक नहीं था । उस पेड में मैंने सोचा और अपने से एक वादा किया था कि आज के बाद नहीं, कभी क्लास में उसे देखूंगा और ना ही उसके बारे में सोचूंगा । यहाँ तक की डायरी में भी उसका जिक्र नहीं करूंगा हूँ । रोज की तरह मैं आज भी कोचिंग गया पर मैंने लाॅन्च को नहीं देखा । आज मैंने लेक्चर के बीच में नजर चुराकर पीछे नहीं देखा और रात को अपनी डायरी से उसका जिक्र ही नहीं किया । सब अच्छा चल रहा था । रात को नींद में मुझे एक सपना आया और सपने में और करती थी । मैं उठा और इस जिक्र को अपनी डायरी में कैद गया । उस समय घडी में रात के तीन सत्रह बज रहे थे । अब मैं अपने से किया वादा तोड चुका था । मैंने आखिर उसका जिक्र कुछ डायरी में कर ही दिया और शायद कल कोचिंग में जाते ही सबसे पहले में उसे देखता हूँ । और हुआ भी कुछ ठीक ऐसा ही मैंने कोचिंग में जाकर सबसे पहले उसे देखा । ऍम ऍम हर पंद्रह दिन में हमारे टेस्ट होते हैं और हर रोज की तरह वहीं एक लडकी तो पर होती और अंदर नहीं । मेरा प्यार फिजाओं में था । इक्कीसवी शताब्दी की एक एक तरह का प्रेम की कहानी जिसकी बुनियाद में और उन्नति, संसार के गैजेट, फेसबुक, राहम, तहलका, ॅ आदि भी मेरी इस प्रेम कहानी में मेरी मदद नहीं कर पा रहे थे । इसलिए मैं अपने प्रेम को एक हाईटेक प्रेम तो नहीं करूँगा । ऍम में अब और नहीं देना चाहता हूँ । बस मुझे अब नहीं रहा जा रहा था । मैं चाहता था कि मैं उसे बताऊँ कि मैं उसके प्रति कैसी भावनाएं रखता हूँ । मैं उसे बताना चाहता था कि कैसे छुट्टी की घंटी बजते ही सबसे पहले बस्ता उठाकर मैं नीचे मेन गेट की ओर भागता हूँ और आहिस्ता सीढी से उतरते हुए रोज देखता हूँ । कुछ तो अलग बात थी उसमें कभी छुप के तो मैं मेन गेट उसके पीछे पीछे जाता हूँ और कभी चुपके से सीधा घर को निकल जाते हैं कि कहीं उसे कोई शक ना हो जाए । पर क्या करें कच्ची उम्र की मोहम्मद अक्सर लोग भूल जाते हैं । मैं उस से कितना प्यार करता हूँ ये बात कहने की उसमें हिम्मत नहीं थी और अंदर ही अंदर इस बात को दफन करने की मेरे भीतर काबिलियत भी नहीं फॅार बताना चाहता था की कितनी खास है वो मेरे लिए कि मैं उसका हाइड्रोकार्बन और वो मेरी बेंजीन रिंग बन चुकी है । नहीं मेडिकल कॉलेज वाले रखने की चिंता जो थी मुझे पर मैं ये बात उससे साझा करना चाहता था कि मैं कितना पागल हो उसके बीच और मुझे मालूम था कि उसके सपने के अलावा उसके लिए कुछ भी इम्पोर्टेन्ट नहीं क्योंकि रोज उसकी आंखें बता रही होती थी कि पूरी रात किताबों के साथ दिखा कर आई हूँ । किसी भी शर्त पर अपना मेडिकल कॉलेज का सपना नहीं तोडना चाहती थी । शायद इन प्यार जैसी चीजों में विश्वास भी ना कर दिया । और मैं भी हार मानने को तैयार नहीं था । का एक बात है मेरा प्यार मेरे सपने के बीच कभी नहीं आएगा । उल्टा मुझे और पढने की ताकत मिलती थी । पर जो भी हो पहले सर के पूरे जीव विज्ञान के विषय में मेरा सबसे पसंदीदा ऍम माना फिर है । सर ने बताया था कि मानव फिर शंक्वाकार, मीजो डर्मल, खोखला मुट्ठी के सम्मान होता है किन्तु मेरा हिरदय तो मानो खोखली बेबुनियादी भावनाओं से बनाऊँ और किसी पर पडता है कि वह मुट्ठी के सम्मान होता हूँ । क्योंकि जितनी भावनाएं मैं संजय चुका था वो एक मुट्ठी में तो क्या शायद बयां करने को एक समुन्दर भी कम पड जाएगा । ऍम सब मानव कहीं दूर चले गए और बस अगर कुछ देने में रह गया हो तो बस वही है कोई बात नहीं । हर पखवाडे में होने वाली टेस्ट में मैं पहले यहाँ पर हूँ ताकि इसका ध्यान मुझ पर जाए कि राहुल नाम का कोई लडका भी है । क्लास में पर लाख कोशिशों के बावजूद भी मैं कभी पहली रन तो कभी अंडर पांच भी नहीं आता हूँ । एक दिन बडे काजू की बातें पिक्चर अपना इलेक्शन दे रहा था और उसने अरुंधति को डांट लगाई और फूट फूटकर रोने लगी । उसकी आंखों में पहली बार आपको देश में मुझे सब देखा नहीं जा रहा था । उसके हासू रुक नहीं रहे थे । अच्छा उसके एक एक वासियों को भी जाना चाहता था । मैंने आज तक उसे कभी हस्ते नहीं देखा था । पर आज ना मेरे सामने हो रही थी और शायद धरती की सबसे प्यारी लडकी उस समय मेरे सामने रो रही नहीं । लेकिन जो भी हो तो होते वक्त कई चौ खेला गया । मैं क्लास में अच्छा बैठकर कभी मन ही मन मुस्कुराने लगता है । मुझे मालूम था कि इसकी एक बडी निशानी होती है कुछ सोचते सोचते ही मुस्कुरा देना । मैं उसके इसके समंदर में कुछ इस कदर डूबा था नहीं उसे कहकर में इससे ऊपर आ सकता था और नहीं ये बात मन में रख पा रहा हूँ । हर मजे की बात तो ये थी कि वह इन सब चीजों से अनजान थी । मैं बडा ही बोला इंसान साथ साथ बातें करना चाहता हूँ । बातें मुझे घुमानी आती नहीं । मेरी सोच भी मेरी तरह सीमित थी । अपने बारे में तो कहता हूँ मैं बचपन से ही मूडी स्वभाव का व्यक्ति हूँ । अपने घर का अंधेरे का उजाला यानी एकलौता बेटा था । हर सपने पूरे किये मेरे माता पिता ने में और मैं परिवार में कुछ भी कमी नहीं थी । मैंने अपनी दसवीं कक्षा फर्स्ट डिविजन के साथ और बारहवीं सिक्सटी नाइन प्रतिशत से पास करी थी । मुझे मोटिवेशनल स्पीकर के लेक्चर सुनना अच्छा लगता था क्योंकि जोश से भर देते थे । मुझे देश में धर्मवादी बहुत बडा कारण निकल कर आ रहा है । मैं जानना चाहता था कि लोग अपना बंटवारा धर्म के नाम पर कर रहे हैं तो हिंदू मैं मुसलमान तो इसाई इसलिए मैं जानना चाहता था कि अखिल सच्चाई क्या है? आखिर कौन है सच्चा परमेश्वर है? इसको जानने के लिए मैंने विचार बनाया कि मैं सभी धर्मों का अध्ययन करूंगा । सिर्फ ध्यान ही नहीं अभी तो अपने जीवन में भी उसमें कहीं गई बातों को लागू करूंगा । पवित्र बाइबल का अध्ययन करूंगा और सिर्फ अध्ययन ही नहीं है बल्कि ईसाई धर्म के पूरे नियम और सिद्धांत का भी पालन करूंगा । तो मैं नियमित बाइबल का अध्ययन करता हर रविवार गिरजाघर यानी चर्च में जाता प्रार्थना करता हूँ और ठीक उसी तरह से उस धर्म का पालन करता जैसी जैसी बातों को मानने को उसमें कहा गया है । मैंने बाइबल का गुड अध्ययन कर लिया था । मैंने पूरी बाइबल दस बार कडी और पूर्ण रुपए जहाँ तक मुझे बना, उसका पालन भी किया मैंने इसे आशा ही परिवार में पैदा हुआ । इसके बावजूद भी मैं जीवन के आलोकिक सत्य को जानना चाहता था । मैं पवित्र कुरान का अध्ययन करना चाहता था और कुछ बातें थीं पवित्र बाइबल में, जिनके बारे में अभी भी अनजान था । मैं शिमला में भी एक चर्चित हो चुका था जिसका नाम दर्ज था हूँ । मैं हर रविवार को चर्च जाता हूँ और एकांत में प्लास्टर से खूब सवाल करता हूँ और ऍम भी मुझे बडे प्यार से मेरे प्रश्नों का उत्तर देते हैं । मैं अरुंधति को एक बार अपने साथ चर्च में ले जाना चाहता था । मैं उसे वास्तविकता से रूबरू कराना चाहता था पर उसे अपनी पढाई से फुर्सत हो । तब ना बस जब देखो पडती ही रहती है । न जाने कैसा स्वास्थ्य उसे अपनी किताबों में पर पूरे कोचिंग की टॉपर थी । मुझे अपने आप पर गर्व था की मैं ऐसी लडकी को अपना जीवन साथी चलना चाहता था जो पूरे कोचिंग टॉपर थी । यह जनवरी का महीना चल रहा था । बिहार का नहीं हूं फरवरी पास । मैंने सोचा क्यों ना फरवरी में प्यार दिवस यानी ॅ दिन उसे प्रपोज किया जाए । क्यों ना उसे उस दिन बताया जाए कि यह आशिक कितना पागल है । उसके पीछे क्यों ना उसे बताया जाए कि तुम धरती की सबसे प्यारी लडकी हो और मैं तुम्हारे साथ ही बाकी की जिंदगी गुजारना चाहता हूँ और मालूम था मुझे कि वो कभी हो नहीं सकती । मेरी और सिर पर एक शौक सवार था । उसके पीछे जिंदगी गुजार नहीं । मुझे ये भी मालूम था कि नीट की परीक्षा आने वाली है । सिर्फ चार महीने बचे थे, हमारे पास नहीं । तैयारी भी लगभग जोरों पर थी । मैं खूब पढा करता था ताकि मेरा सलेक्शन मेडिकल कॉलेज के लिए हो जाये और मैं अपने आगे के सपने को पूरा कर सकूँ । मैं उसके साथ आगे की जिंदगी गुजार रहा तो चाहता था क्योंकि अब चार महीने बाद हम अलग अलग होने वाले थे । उसके बाद हर रोज की तरह मैं उसे नहीं देख सकता था क्योंकि उसके बाद मैं कहाँ जाती है, क्या करती है कुछ पता नहीं । इस बारे में मुझे सोचने पर भी डर लगता हूँ । इन सभी बातों को भूलकर मैं आखिरी के चार महीने अपनी कोचिंग की आदेश समेटने में लगना चाहता था कि जब आज से बीस साल बाद मैं आज के समय में सोचूँ तो आंखों में आंसू हूँ और चेहरे पर एक धीमी सी मुस्कान क्योंकि वह बहुत बलवान होता है और कभी लौटकर नहीं था । बस अगर कुछ रह जाता है तो सिर्फ यादें और मैं उन्हीं को मनाने में लगा था । और मजे की बात तो ये थी कि मेरा प्यार और उन्नति के प्रति जोरों पर था । फिर कुछ ऐसा हुआ एक बार मेरे साथ जो रोज के लिए मेरी जिंदगी बदलने वाला था । मेरा ऐसा कुछ ऐसा जिसकी मैं आशा तो करता था पर कभी उम्मीद नहीं । यह मेरे लिए एक सपने के समान घर पर जो भी था, अच्छा था हूँ ।

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