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सातवाँ फेरा -06

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हर लड़की के जीवन में वो पल आता है, जब उसे जीवन साथी को चुनना होता है और निर्णय करना बेहद मुश्किल होता है। उमा के सामने भी यही एक बड़ा प्रश्‍न था कि सामने विकल्‍पों की कमी नहीं थी, लेकिन किसे अपना जीवन साथी चुनें? जहां जय के पास प्‍यार देने के लिए अलावा और कुछ नहीं था, वहीं शंकर था जो बिजनेसमैन था और उसके पास शानो-शौकत, दौलत बेशुमार थी। उमा किसे अपना जीवन साथी चुनेगी? उमा की कसौटी पर कौन खरा उतरेगा जय या शंकर? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
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भारत छह राजेंद्रबाबू बूढे हो चले थे । सिर में सफेद बाल बढ गए थे । अक्सर वो घूमते रहते हैं और नंदा अनिल एक एक करके उनके सफेद बालों को चुनता रहता । उसे एक सफेद बाल निकालने पर एक पैसा मिलता है । वो अपना काम तेजी से करता । जब कभी सफेद बाल के साथ काला बाल भी घर जाता हूँ तो राजेंद्रबाबू बल्कि झपकाकर बडबडाते मैं कहता हूँ सिर्फ सफेद और एक दिन सिंगापुर में इसकी बडी शीशे में जब वो अपना चेहरा देख रहे थे तो उन्हें ये जानकर बहुत ही आश्चर्य हुआ कि उनके सिर के बाल तेजी से झडते जा रहे हैं । सफेद बाल और अधिक निकल आए हैं । उन्होंने सफेद बालों को निकलवाना बंद कर दिया । अनिल को इससे बडी निराशा हुई । राजेंद्रबाबू अब अपने को बूढा महसूस करने लगे थे । राजेन्द्र बाबू ने प्राण के बारे में सोचा । सोचते सोचते उन्होंने प्राण की जीविका का खयाल आया नौकरी को वो गुलामी समझते थे । नौकरी तो दास्तां है वो अक्सर कहते नौकरी सरकारी हो या किसी बडी फोन की अथवा कोई छोटी मोटी, किसी में अंतर ही दासता की पीडा सभी जगह एक सी होती है । सहानुभूति के अभाव में नौकरी करना बहुत मुश्किल हो जाता है । ईमानदारी से काम करने वाले दुख उठाते हैं और चापलूस उन्नति कर जाते हैं । इसीलिए उन्होंने सबसे बडे लडके प्राण के लिए कुछ और सोचा था । प्राण जवान था और शहरी जीवन को पसंद करता था । वो ना बहुत देखी बुद्धि वाला था और ना ही काम । अकल उसने यूनिवर्सिटी की परीक्षा सेकंड डिवीजन से पास की थी । राजेन्द्र बाबू ने उसे कुछ जमीन खरीदने की ताकि वो खेती बाडी कर सके । अब एक ट्रैक्टर की आवश्यकता थी जिसके लिए राजेंद्रबाबू ने हजार रुपये कर से लिए थे भूमि । उन्होंने सस्ते दामों पर एक मित्र से खरीद ली थी । प्राण खेती का काम ठीक कर रहा था । गांव में रहने के लिए उसके पास केवल एक झोपडी थी । बारिश के दिनों में जब पानी बच्चे चुरा तो उसे अपना सामान उठाकर तत्त्पर रखना पडता हूँ । इसके अलावा वो वहाँ अपने को खेला भी महसूस करता था । गांव भर में कोई ऐसा नहीं था जिससे वो बातचीत कर सके है । लोग अशिक्षित थे और उनसे दोस्ती हो सकता ना मुश्किल थी । प्राण अपने को एक कैदी सा अनुभव करता हूँ । उसका बाहरी दुनिया से संपर्क सिर्फ बैटरी के रेडियो द्वारा ही था । इसके जरिए वो खबरें तथा फिल्मी गाने सुनता प्राइम बेहद ऊब गया था । रात के समय गहरे अंधेरे में वो लालटेन की रोशनी में खाना खाता हूँ । बडी मजबूरी में वो ऐसा जीवन बिता रहा था । रेलवे स्टेशन से सौ मील दूर उदास, निराश और अकेला वह जिंदगी के दिन गुजार रहा था । प्राण का पत्र आया तो राजेंद्रबाबू से पढकर परेशान हुए । उनका विचार था कि खेती बाडी का धंदा एक आदर्श कार्य है । उनकी कुछ मित्रों ने भी इसकी सलाह दी थी । एक प्रचलित कहावत के अनुसार खेती बारी श्रेष्ठ ठंडा है । व्यवसाय मध्य कोटी का और नौकरी अत्यंत नियमन को टीका कार्य है । इनकी तुलना भीक मांगने से की जा सकती है । इसलिए जब प्राण का पत्र आया तो वह बडे ही दुखी हुए । आपने परेशानी पर काबू पाने के लिए उन्होंने अपने कुछ मित्र को रात के भोजन पर आमंत्रित किया । आने वालों में जज साहब करेंगे । एक सिविल सर्जन और कुछ उनके वकील मित्र थी । भोजन मेज पर लगा दिया था । सभी कुर्सियों पर बैठ गए । जब जहाँ में कानून की बात की मेरे जमाने में जो बोले वकील दिन रात पढा करते थे । मगर अब तो लोग सिर्फ धन कमाने के पीछे पडे हुए हैं । वकील शमशाद अस्पताल के अपने अनुभव बताने लगे मैं कुछ दर्द महसूस कर रहा था । डॉक्टर ने दवा भेजने का वादा किया लेकिन जो दवा मेरी उसकी डेट एक्सपायर हो चुकी थी । सिविल सर्जन ने डॉक्टरों का पक्ष लिया । एक डॉक्टर को बहुत से मरीज देखने पडते हैं । अगर वह सभी का बारीकी से मुआयना करने लगे तो कयामत तक का अपना काम खत्म ना कर सकेगा । लोग तो ठीक और मामूली से खराश पडने पर भी अस्पताल की तरफ दौड पडते हैं । मैं एक ऐसे आदमी को जानता हूँ जो अस्पताल में केवल इसलिए ढाकियों से किराये पर कमरा ना मिल सकता था । डॉक्टर आखिर कर भी कह सकते हैं । हो सकता है ये सच हूँ । शमशाद ने प्रभावित हुए बिना कहा लेकिन कोई भी डॉक्टरों की लापरवाही से इनकार नहीं कर सकता । इसके अलावा गरीबों और जरूरतमंदों के प्रति इतनी विनम्र नहीं होते जितना हो नहीं होना चाहिए । शमशान भाई तो कम्युनिस्टों की तरह बातें कर रहे हैं । नहीं मैं तो सिर्फ हकीकत बयान कर रहा हूँ । शमशान ने जोश में कहा हकीकत सिर्फ हकीकत मैं ये नहीं कहता कि अच्छे डॉक्टर है ही नहीं लेकिन वे बिरला ही हैं । करेने ग्लास पानी पीकर अपना गला साफ किया जो कुछ शमशाद जहाँ कहते हैं केवल डॉक्टरों पर ही लागू नहीं होता । उसने कहा, सच्चाई तो यह है कि हम सदा एक दूसरे को दोषी ठहराते हैं । हम अपनी जिम्मेदारी को नहीं समझते । मैं कहता हूँ पडोसी की फिक्र किए बिना पहले आप अपना दृष्टि करन ठीक कीजिए । दूसरों की आलोचना करने के बजाय हमें अपने घर में नजर डाली चाहिए । मैं समझता हूँ कि इससे काफी सुधर होगा । मेरा मतलब तो सच्चाई की तरफ इशारा करना था । शमशाद ने धीमे स्वर में कहा, मेरा यही मतलब था करेंगे कहा मेरा उद्देश्य किसी पर चोट करना नहीं था । ऐसी बाढ पहले कभी नहीं देखी थी । अब तो करीब करीब हर साल आने लगी है । डॉक्टर ने कहा बाढ के दिनों अजीब अजीब बातें पता चली करेंगे । व्यंग भरे स्वर में मुस्कुराकर कहा कि आपने शराब को ईंधन की जगह इस्तेमाल करते सुना है नहीं सुना होगा । मगर मेरे एक दोस्त ने ऐसा ही किया । बिजली बंद हो गई थी । मिट्टी के तेल की एक बूंद रही थी और वह मुसीबत में फंसा था । उसके पास बिना स्क्रिप्ट के एक प्लान था । बच्चे को दो देना था तो उसने शराब का इस्तेमाल किया हूँ । शराब का कैसा गलत इस्तेमाल करने होटों पर जबान फेरी हाँ, बाढ में तो सबको चकित कर दिया । श्रीधर वकील ने तेज स्वर में कहा मेरे एक रिश्तेदार को मकान छोडना पडा । पानी के उतरने पर जब वापस आए तो उन्होंने खिडकी से देखा कि काला साहब दरवाजे पर बैठा है । जैसे ही कोई दरवाजा खोलने को आगे बढता वह फुंफकारता हुआ उसकी और बढता । बडी मुश्किल से वो लोग मकान में गए । भोजन खत्म हुआ तो मिठाई की प्लेट आई । सबने प्लेट अपने आगे कर ली । तभी डॉक्टर ने देखा कि राजेंद्रबाबू कुर्सी से बीच टिकाई बैठे हैं । उन्होंने पूरा भोजन भी नहीं लिया था और काफी देर से चुप थे । हालांकि वह काफी बोलने वाले व्यक्ति थे । डॉक्टर ने खडे होकर उन्हें हिलाया और वह जोर से चिल्ला पडा । चारों तरफ शोर मच गया । सभी उठकर उनके ईर्द गीत खडे हो गए । उमा और वीना कमरे से भाग टी । वी आई राजेंद्रबाबू बेहोश हो गए थे । उनकी पीठ कुर्सी से लगी हुई थी और सात रुक रुककर चल रही थी । डॉक्टर के कहने पर उन्हें वहां से हटाकर बिस्तर पर लेटा दिया गया । डॉक्टर ने उनका जल्दी से निरीक्षण किया और अस्पताल से एंबुलेंस मंगवाई । लगता है दिल का दौरा पडा है । उसने कहा अस्पताल की गाडी आई और उन्हें धीरे से अंदर लेटा दिया गया । वीणा ने जल्दी से कुछ चीजें बांधी और गाडी में बैठे हुए बोली ग्रहण को टार दे देना । अस्पताल में राजेन्द्र बाबू को होश आ गया लेकिन अब ना वह बोल सकते थे और न ही हिलडुल सकते थे । वो आपकी बात इशारों में ही कह पाते थे । उन्हें गहरा आघात लगा था और उनकी शरीर का बायां हिस्सा हो गया था । वीना उनके पास रहती ये घटना उसके और बच्चों के लिए गहरी चोट थी । राजेन्द्र बाबू का रक्तचाप तेजी के साथ बढ रहा था । अक्सर उनका मन डूबने लगता लेकिन वो अपनी तकलीफ किसी से कम ही । यह बातें बीमारी का ये संकट अप्रत्याशित था । वो बहुत ज्यादा कमजोर और भावुक हो गए थे । जब कभी कोई उनसे मिलने आता तो उसे देखते हैं और रो पडते । डॉक्टर इस संबंध में निश्चित नहीं थे की कब तक हो । चलने फिरने और बात करने लगेंगे । बाहर के मिलते ही प्राण आ गया था । समाचार पाते ही उसे बहुत सदमा पहुंचा था । वो बहुत दिनों से बाहर था और पिता की बीमारी के विषय में उसे बिलकुल बताना था । राजेंद्रबाबू ने संबंध में उसे कभी देखा भी नहीं क्योंकि उन्हें यह था कि वह चिंतित हो उठेगा । अब वो और उसकी ही मांग राजेंद्रबाबू की तीमारदारी कर रहे थे । बीमारी का समाचार जब रिश्तेदारों को मिला तो उन्होंने आने शुरू कर दिया । उमा को उनके भोजन आदि का प्रबंध करने में बडी मुश्किल हो रही थी । ये भी कैसे जी बात है । उसने सोचा जब कभी ऐसी नौबत आती है तो प्रश्न भोजन बनाने का पैदा होता है । विवाह के अवसर पर बडी बडी भट्टियां बनती हैं । उन पर गन्दी गाली लंगोटिया पहले हलवाई कढाई चाहते हैं और पूरियाँ चलते हैं और मिठाइयाँ बनाते रहते हैं । यही दृश्य किसी की मृत्यु पर भी देखा जा सकता है । बिहार को न्योता दो और सारे बिरादरी को भोजन कराओ । दोनों में आखिर अंतर क्या है? कैसी विडंबना है कि दुखी मन को मीठे पकवान बनाने पडते हैं । बहुत के खयाल से उमा का आप उठी । वीना के लिए हर एक घंटा पहाड की तरफ बोझ था । वो हर वक्त काम में जुटी रहती लेकिन उसे लगता कि मानव वो स्वप्नावस्था में है । वो राजेंद्रबाबू के बिस्तर की चादर बदलती, उन्हें पंखा करती हूँ और पत्र पत्रिकाओं से दिलचस्प कहानी पढकर सुनाती ताकि उन का ख्याल बीमारी की ओर से बता रहे प्रायर वो अपने बच्चों के बारे में सोचती अनिल अभी बच्चा था । उमा अविवाहित थी और प्राण काम में ठीक से नहीं लग पाया था । हालांकि राजेंद्रबाबू की हालत पहले से कुछ अच्छी थी लेकिन पूरी तरह स्वस्थ होने में काफी समय लगने की संभावना थी । उनके मुवक्किल भी दूसरे वकीलों के पास चले गए थे लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वे उन्हें चाहते थे । उन्होंने अपनी तरफ से पूरा पूरा सहयोग और सहानुभूति दिखाई थी । उन्होंने ये कहकर मुकदमे की पेशियों की तारीख की बदल वाली थी कि उनका वकील बीमार है । मगर जल्दी ये स्पष्ट हो गया कि राजेंद्रबाबू तो महीनों तक ठीक हो सकेंगे । इसलिए उन्हें मजबूरन दूसरे वकीलों के पास जाना पडा । वीना आमदनी के संबंध में बडी चिंतित थी । राजेंद्रबाबू ने शाही ढंग से जिंदगी गुजारी थी । वो फिजूल खर्च नहीं थे । हालांकि कंजूस भी ना थे । उन्होंने पैसा जोडा नहीं था । उनका बैंक बैलेंस नहीं के बराबर था । उन्होंने उमा के विवाह पर देने के लिए बीमा कंपनी से कॉल इसीलिए रखी थी । जो कुछ था वो धीरे धीरे खर्च हो गया था । जमा पूंजी का अधिकांश भाग कीमती दवाइयों और अस्पताल के बिलों की भेंट चढ गया था । नौकरों की छुट्टी कर दी गई थी क्योंकि परिवार वैभव के इस बोझ को अब सहन नहीं कर सकता था । फिर कार्य भी दिख गई । वीणा ने भेजी आ घुसे ये सब कुछ होते देखा था खुशियों भरे वो दिन थे जब प्राय हर रविवार को सहारा परिवार पिकनिक मनाने जाता था । तब टोकरी में अन्य चीजों के साथ ही राजेंद्रबाबू के लिए बियर की बोतल भी जाया कर दी थी । अब तो ये बातें समिति मात्र बनकर रह गई थी । उमा के चेहरे की कांति खत्म हो गई थी । मसालों के पसीने तथा वर्तनों की सफाई की वजह से उसकी हाथ रूप है और कठोर हो गई थी । भाग दौड करने से उसकी एरिया फट गई थी । इसके अलावा वो ये भी महसूस कर दी थी कि उसकी शादी का ख्याल माँ बाप के लिए चिंता का विषय बन गया है । लग रहा है ये सोच सोच कर दुखी होती की लडकी होना भी एक अभिशाप है । प्रवीण ने खेती बाडी का काम छोड दिया था । खेती बाडी का प्रबंध एक पुराना विश्वसनीय नौकर करता था । लेकिन जब नौकरी ने देखा की उस पर नजर रखने वाला कोई नहीं है तो जो कुछ उसके हाथ लगा वो लेकर रफूचक्कर हो गया । ट्रैक्टर जंग लग कर खराब हो गया था । बीज नहीं बोली जा सकते थे । खेतों में कांटेदार झाडियां उगाई थी वेना को । ये तमाम बातें परिवार के एक ऐसे परिचित से पता चली जिसके खेत प्राण के खेतों के पास ही थे । अंत में वीणा ने जमीन और ट्रैक्टर बेचने का फैसला कर लिया । जमीन बेच की गई लेकिन बेचने पर लागत का कुल पांचवां भागी मिल सका क्योंकि मशीनों को जंग लग चुका था और सौदा बडी जल्दी में किया गया था । ये भारी नुकसान था । बंगले की चमक दमक खत्म हो गई थी । मालिक आना बंद हो चुका था और फूलों की पत्तियां झड झडकर बिखर गई थी । ड्रॉइंग रूम का गलीचा मिला हो चुका था । रिकॉर्डर एक कोने में पडा था । उमर जब कभी उसे देखती तो गुस्से से बरून्दनी । वो उसे बीच आ जाती थी । मगर ये सोचकर रुक जाती कि वह उपहार में दिया गया था । उसका मन करता है कि वो उसे तोडकर टुकडे टुकडे करते । ये एक मनहूस उपहार था जो अपने साथ दुख लेकर आया था । जैक बलरामपुर अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में बैठा था । उसे राजेंद्रबाबू की बीमारी का समाचार एक मित्र से मिला था जो लखनऊ से आया था । जब लखनऊ पहुंचा तो वीणा ने उसे सब कुछ बताया । गंभीर हो गया । उस क्षण परिवार की शौचं स्थिति को देख कर उसका मन भर आया था । वो रीना का मुरझाया चेहरा और उदास आके सब कुछ कह रही थी जय वीना की रोके उसी बालों पर नजर डाली । वो खुद मुसीबतों का शिकार था । मगर इस परिवार की दयनीय स्थिति से तो बेहद परेशान हो गया । तो फिर इतने दिनों तक रहे कहाँ? वीना से बोझा फिशन भर रुककर बोली एक युग बीत गया तो नहीं देखे हुए मैं यही तरह बदलाव के लिए अपने गांव चला गया था । जब मैंने कहा तो कभी बताया नहीं । वो बोली जल्दी में जाना पडा । उसे सफाई थी । फिर रुककर पूछा कार्य कहाॅ बिना दुखी स्वर में कहा तो बहुत पहले बेच दी थी तो बॉम्बे बेच दिया जय खुद धक्का साला काम उसने तो कभी सोचा भी नहीं था की स्थिति इतनी खराब हो जाएगी । उसी उमा का ख्याल आया हूँ उसका जी जहाँ की वो फॉरेन उमा के पास जाए और सहानुभूति प्रकट करें । बिचारी । उमा पर ई के कितना बोझ पड रहा था उसे । विक्टर होटल की उस दिन की घटना याद आई । वो नाराज होकर चला गया था । वो जितना उसके बारे में सोचता अपने को ही दोषी पाता तो सारी बात स्पष्ट करके उसे माफी मांग लेगा । उसे दुख हुआ कि वो तो चला गया था । वो क्यों मुसीबत के समय उसके साथ नहीं दे पाया हूँ । सहसा वीना की आवाज भी उसी चौका दिया । वो कह रही थी घर पर तो ब्रांड से मिलने जरूर जा रहा हूँ । जैन धरती दिल से जाने पहचाने गेट की ओर कदम बढाए । बंगला एकदम बदला हुआ नजर आ रहा था । बेंच पर नौकर नहीं बैठे थे । मुस्कुराते रंग बिरंगे फूल नजर नहीं आ पा रहे थे । चारों और सुना और उदासी छाई हुई थी । जैनी कालबेल का बचे दबाया लेकिन दूसरी शर्ट उसे एहसास हो गया कि बैल काम नहीं कर रही । कॉल बैल के नीचे लगा रहने वाला शीशा उतर चुका था । तभी जैन अनिल को तीन पहियों वाली साइकिल चलाते देखा । अनिल ने उसे देखते ही आवाज लगाई । ज्यादा बोल साइकल से उतर पडा और जय दादा जय दादा कहता हूँ अन्दर की तरफ भागा । कुछ देर बाद दरवाजा खुला । सामने उमा खरीदी थी । जैन ने दोनों हाथ जोडकर नमस्ते कहा । पल भर को दोनों ने एक दूसरे को निहारा हूँ । उमा के चेहरे से मुस्कुराहट खत्म हो चुकी थी । सादा चिंतायुक्त रहने वाले चेहरे पर गंभीरता और उदासी छा गई थी । उसकी आगे उदास हो गई थी । उसके गालों में गड्ढे पर चुके थे । कभी यही चेहरा भरा भरा रहता था और गालों पर जवानी का गुलाबी रंग बंदा था । उसने चिंताग्रस्त मुख को दोबारा देखा । माथे पर बल पडने लगे थे और सिर्फ टीके का निशान था । बाल बिक्री हुए थे । ना हाथ में घडी ढीला । सोने की चूडियां । एक सफेद साडी उसने पहन रखी थी, जो विद्वान जी को तो ढेर लग सकती है, मगर एक युवती को नहीं । उमा से आंखें मिलते ही मैंने इन तमाम बातों को भाग लिया । ऐसा तुमने बीट भेली और आंखों में चमकते दो बडे बडे आसूओं को साढे के किनारे से पूछ डाला हूँ । बोलना चाहता था, लेकिन शब्द उसके गले में फंस गए । वो कुछ नहीं कह सका । सिर्फ उसके चिंतित मुख को टकटकी लगाए देखता रहा भी । कुछ देर बाद वो कह सकता हूँ, मुझे अफसोस है कि ये सब कुछ हुआ । मैंने तो सोचा था कि उनकी सेहत ठीक होगी । तुमने सिर्फ उसे देखा कुछ कहा नहीं । मुझे अपने गांव जाना पडा । उसके स्वर में क्षमा याचना का भाव था । पटना में बहुत पहले हो गया होता । मुझे तो कल तक भी इस बारे में मालूम नहीं था, लेकिन तो गए क्यों? ढेर उसने भर्राए स्वर में कहा, मैंने उस फॅमिली में जो कुछ कहा, उसके बाद तो मुझे नफरत करने लगे । नहीं नहीं । उसने कहा मैं तुमसे कभी नफरत नहीं कर सकता, में आना चाहता था । लेकिन ये सोचकर मुझे ग्लानि महसूस होती थी कि मैंने तुम्हारे दिल दुखाया । मैं अपने गांव चला गया था, लेकिन वहाँ भी तुम से दूर नहीं रह सका । कम से कम तो हम लोगों को बताना तो चाहिए था कि तुम जा रहे हो । उमा बोली जैसी जैनी को मुस्कुराते हुए देखा । उसे लगा कि बीते दिन वापस लौट आए हैं । हस्ती हुई और उसके हाथ में हाथ देकर बगीचे में घूमने वाली उमा कितनी बदल गई थी । उसे वो दिन याद है जब बगीची में मालिक टहनियों से लटक के दशहरी आमों पर कडी नजर रखता था । मगर जब लू चलने लगती तो वह कच्चे फलों की खोज में निकलने पडता । बूढा माली सोया होता जय चोरी छिपे इधर उधर देखता और झुकी टहनियों पर लगे आमों को तोडकर हवा से खडखडा दी । तीन के शेड के नीचे भाग जाता । वहाँ उमा खडी बेचैनी से उसकी प्रतीक्षा कर रही होती । हम ऊपर नजर पडती वो वोट ऊपर जवान फिल्मे लगती है । फिर वो उसकी जेब से चाकू निकालकर कागज की एक छोटी सी पुडिया में रखा नमक निकालती और तब दोनों कच्चे आमों की पार्टी को नमक लगाकर खाने लगते हैं । आमो के खट्टी स्वाद से उनके चेहरे पर अजीब अजीब मुद्राएं बनती । दूसरे दिन बूढा माली आमों को देखता तो उमा के पिता से शिकायत करता । वो उस पर नाराज होते हैं तो दिन पर दिन निकम्मे होते जा रहे हैं । जब तुमने सडक पर ही पकडकर दो चार हाथ आम तोडने के लिए आए लडकों के क्यों नही जवाब दिए । जब वह चढकर आम तोड रहे होंगे तो जरूर सो रहे होंगे । जब वो शर्मा मांगे लगता हूँ वो अपनी लाठी को जमीन पर पटक के हुए कहता अब की बार नहीं तो फिर मजा चखाऊंगा और वह बडबडाता हुआ चला जाता है कि वह उन्हें कैसे मजा चखा आएगा । मैं तुम्हारे लिए, चाहे मैं बनाती हूँ । उसने होते हुए कहा ऍसे रोक दिया, उन तकलीफ मत करो, मैं चाहे बीच बैठे रहो । और हाँ राजेंद्रबाबू को दिल का दौरा कैसे पडा के ये सब अचानक हुआ । मैं आखिरी बार जब उनसे मिला था तब तो वह अच्छी खासी थी । ब्लैक प्रेशर भर जाने की वजह से ऐसा हुआ । डॉक्टरों ने उन्हें सतर्क भी कर दिया था । लेकिन तुम तो जानती हूँ कि वो कितनी लापरवाह उसने अपने हाथ गोद में रखे थे । वो कुछ रुककर बोली तो भारी पुस्तक का क्या हुआ कि अब प्रगति हैं । तू आ रहे हैं । अगले वर्ष के शुरू में निकल जाएगी । फिर छोडो वह बात बदलते हुए बोला ये बताओ कि घर का काम ठीक चल रहा है । घर का सामान और पिताजी के लिए दवाइयाँ कौन लाता है? कोई नौकर तो नजर आता नहीं, प्राण ही करता है । काम तो बेच दिया इसलिए काफी दिनों से वो इधर ही है । अब वो क्या करना चाहता है? जैन ने पूछा मुझे मालूम नहीं । उमा बोली वो शर्मिला और शांत प्रकृति का है । मेरा ख्याल है कि नौकरी करना ही ठीक रहेगा । लेकिन मुश्किल यह है कि वो सिर्फ सेकंड क्लास है और कॉम्पिटिशन बहुत हार्ड होते हैं । इसी वक्त दरवाजे पर एक स्कूटर की रुकने की आवाज आई । हेलो प्राणी स्कूटी से उत्तर टोकरी कोई कुर्सी पर रखते हुए कहा, हमने आपको मुद्दे से नहीं देखा । मैंने सुना है कि आप कविता करने लगे हैं । अनिल भागता हुआ आया और ऊंची आवाज में बोला तो नहीं । मेरे लिए क्या लाए हूँ? प्राण नहीं ट्रॉफी का पैकेट टोकरी में से निकाल कर उसे दे दिया । अनिल उसे लेकर भाग गया । बच्चों को कभी कोई फिक्र नहीं सका । दी प्राण ने कहा ये जीवन के सुनहरे दिन होते हैं, कह नहीं सकता हूँ । मैंने गंभीरता से कहा बच्चों की भी अपनी समस्याएं होती हैं । अगर आप उसके लिए ट्रॉफी नहलाते तो ना जाने अनिल को कितनी परेशानी होती है । पर यही है कि उनकी चिंताएं हमारी चिंताओं से भी होती है । अब तो बैठे मैं भी आई । उमा नहीं होते हुए कहा अब आप क्या काम करना चाहते हैं? जैन प्राण से पूछा मैंने अभी तक इस बारे में कुछ नहीं सोचा । मैं तो आजकल भाग दौड में ही लगा हूँ । किसी फर्म जगह खोजिए । जैनिक बम वाले अच्छी तन्खा देते हैं । कोई व्यवसाय भी किया जा सकता हूँ । लेकिन उसके लिए रूपये का सवाल है की आपको फांसे कुछ नहीं मिला मिला लेकिन बहुत कम बाबू जी के इलाज के लिए हमें रुपयों की सख्त जरूरत थी । इसलिए जल्दी में बहुत सस्ते में बेचना पडा । कुल बीस हजार रुपये की रखने मिली । अभी काफी कर्ज लोगों का बाकी है । मेरी समझ में नहीं आता कि ये सब कैसे होगा । पे हर आदमी व्यवसाई भी तो नहीं कर सकता । जैन ने बात को टालने के उद्देश्य से कहा, आजकल तो ये वही मानो तथा मक्कारों का पेशा बन गया है । इसके अलावा इस झंडे के लिए काफी चतुराई और व्यहवहार कुशलता की जरूरत होती है । आप तो बहुत छह मिले हैं, मैं आपको बदल सकता हूँ । उसने कहा मैं व्यापार पसंद करता हूँ । आप जैसा सोचते हैं बाद पैसे नहीं है । इसमें काम ही काम है और अनगिनत चिंताएं ऊपर से एक महीने की बीमारी सबकुछ बर्बाद कर सकती है । फिर ग्राहकों से निपटना भी कोई मजाक नहीं । किसी की मर्जी के खिलाफ कुछ किया भी नहीं जा सकता । गीता का कथन है कि अपने कर्तव्य का निर्वाह कर दूसरे के कामों की और मत देखो चाहे वो कितने ही अच्छे क्यों ना हो । विमल को देखो । प्राण ने कहा मैं अभी उस से मिल कर आ रहा हूँ । वो कितना मालदार है तो जीवन के पास क्यों गए थे वो? मैंने कमरे में दाखिल होते हुए प्राण की बात को सुन कर पूछा । क्रोध की लालिमा उसके चेहरे पर समझने लगी थी तो उसके पास जाना हमें विमल से क्या लेना देना है । लेकिन उॅची कहा तो उसे इतनी नाराज की हो । मेरा ख्याल था की तो उसे पसंद करती होगी । परसों और उसे तो गुस्से में बोली हो । यहाँ मैं एक विक्की को पसंद कर सकती हूँ, लेकिन उसे जैन इस संबंध में तर्क करना उचित ना समझा । उसे डर था कि उमा कहीं भरना उठे । वो दोबारा उससे संबंध बिगाडना नहीं चाहता था । विमल की जब जब चर्चा चली उन्होंने यही रुख अपनाया था । ग्रहण स्कूटर अंदर रखने के लिए चला गया । मेरे बारे में क्या ख्याल है? जय के होठों पर शरारत भरी मुस्कुराहट फैल गई । मुझे माफ कर दिया गया या मुझे भी विमल की श्रेणी में रखा गया है । वो तो उससे बिल्कुल अलग हो । वो बोली किस तरह? अब तो मुझे तंग करने पर क्यों तुले हुए हो । उसमें लग जाते हुए कहा तो बाहर है उसका मुकाबला । मैंने कभी तुम्हारी उससे तुलना करने के बारे में सोचा भी नहीं तो पूछूंगी की ऐसा क्यों? लेकिन मैं नहीं बताउंगी । उसका चेहरा लाल होने लगा था । कुछ देर बाद जय चला गया तो बहुत खुश था । उमा उसको प्यार करती है, इसमें शक नहीं था । यदि पी उसने इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा था तो भी उमा के मन की बात का उसी पता चल चुका था । चमकीली धूप एक कंबल की तरफ फिर कर एक एक वस्तु को अपने में लपेटकर गर्माहट दे रही थी । खुली हवा ने उसके सारे शरीर में ताजगी भर दी थी । उसका मन खुश था । निकला आकाश तेज हो और खुली वायु उसे सोचा । वास्तव में शरद ऋतु प्यार और जीवन की प्रतीक है । मीना ने अपने सामने खडे एक लडकी को देखा जो खूबसूरती की जीती जागती तस्वीर थी । उसकी भूरे रंग के काटे बात आगे को पहले थे । स्कर्ट के नीचे चमक टीवी उसकी गोली टांगे बडी खूबसूरत लग रही थी । उसकी कोमल अंगुलिया और कटे ना खुल बडे ही दिलकश नजर आ रहे थे । अगली बार सादा मगर कीमती था । मीना को दाल में कुछ काला नजर आया । वो संदिग्ध इस्वर में बोली आपके अपना नाम क्या बताया था? सीमा लडकी ने मीठे स्वर में कहा में सीमा क्या बैठे ही नहीं । मैं सीमा उसी सीमा को तेजी नजर से पूरा मैं पता करती हूँ अगर वो आप से मिल सके । लडकी आराम से कुर्सी पर शांत भाव से बैठ गई । भेज बोली तीस पता कीजिए उन्ही मेरी प्रतीक्षा है । मीना अंदर गई भारी खूबसूरत लडकी बैठी है । उसने अपना नाम सीमा बताया है । ये क्या मामला है कि आप नहीं सेक्रेटरी रखना चाहते हैं चीज । मीना ने कहा, विमल मुस्कुराया, हूॅं सिर्फ फॅस तो इस मामूली बात के लिए पागल मत बनो । जल्दी से जाकर उसे अंदर भेज दो । मैं सुराग से देखेंगे कि आप उस से कैसे पेश आते हैं । ने बाहर जाते हुए कहा, समझे उदास वन थी । वह अपने टाइपराइटर के पास जाकर बैठ गई और ऊंची एडी की सैंडिल पहने भीतर जाती हुई सीमा को देखने लगी । उसने टाइप मशीन पर एक जलती हुई नजर डाली । विमल ने सीमा से हाथ मिलाया और उसे आरामदेह कुर्सी पर बैठाया । उसके दफ्तर की सभी कुर्सियां आराम नहीं थी । उन पर बैठने से सुख का अनुभव होता था और बातचीत ढंग से की जा सकती थी । सिगरेट, विमल सिगरेट आगे बढाया, धन्यवाद । मेरा ख्याल है कि आपको पहलगाम मिल गया होगा । उसने एक सिगरेट डब्बे में से निकालकर फोटो में दबाते हुए पूछा हूँ । हाँ कहकर विमल ने सीमा का सिगरेट चलाया और बोला, मैं तो आप ही का इंतजार कर रहा था । विमल शराब की एक बोटल दो गिलास से । मैं तो डेली सोडा मिलाते हुए उसने कहा अगले और हुसैन उसने अपना ग्लास उठा हमेशा एक साथ रहे हैं । जब कभी आपको अपनी खूबसूरती के बचाव तथा जवानी की सुरक्षा की जरूरत महसूस हो तो मुझे आज कहीं मैं इस मामले में बहुत होशियार हो । कहाँ है कि ये चोर को अगर पकडना हो तो दूसरे को उसके पीछे लगा दो । सीमा बोली विमल ने दारू पी से और अपना सिगरेट चुराया । उसने सोचा है कोई तो ऐसा है जो उसे समझता है । वो लोहे की एक अलमारी के पास गया । उसे खोला और अंदर से एक चौकोर बडा खेला निकाला । ये तुम्हारे लिए एक उपहार है । अब तुम नहीं कह सकती कि मैं दरियादिल नहीं हूँ । कहते हुए उसने पैकेट उसके हवाले कर दिया । पैकेट सफेद बदले का अगस्त में लिपटा था । धन्यवाद सीमा ने खुश होकर कहा कि आप हर महिला के प्रति ऐसी उदारता से पेश आते हैं । मेरा मतलब है कि जो बाहर बैठी हैं उसने मीना के कमरे की तरफ इशारा किया । मुनासिब यही है कि ज्यादा पूछताछा करूँ । विमल ने कहा, इससे दिल को चोट पहुंचेगी । सीमा ने पैकेट को बैग में रखा और गिलास खाली कर दिया । आपकी स्वीकृति व्यवहारकुशल नहीं लगती । सीमा ने उठते हुए कहा, मेरी बजाय उसको अपनी सुरक्षा के लिए किसी की ज्यादा जरूरत है । उसकी चेहरे का गुस्सा बता रहा था कि वो किसी लडकी को आपने बहुत से मिलाना पसंद नहीं करती । उसका एशिया करना सुभाव इक है । विमल ने उसकी भूरी आंखों में झांकते हुए कहा वापसी भर संभलकर जाना एक एशिया आलू और ऐसे निपटा बहुत मुश्किल होता है । धन्यवाद मैं उसे खुश करके होंगे । सीमा ने जवाब दिया और उठ गई । विमल जाती हुई सीमा की पतली कमर और गठीले बदन को देखता रहा । वह चकित था कि अदायें क्यों मक्कारी से भरी होती है । एक सच्चे दिल की पवित्र लगेगी, अत्यंत रूपवान हो सकती है । उस की सूझबूझ तीखी हो सकती है मगर वो किसी की दिल को बेकरार क्यों नहीं कर सकती । जब कभी औरत अदाएं दिखाती है, पुरुष उसका शिकार हो जाता है । ऐसे लडकियों को देख कर ही तो विमल ने एक आ हमारी धन के महत्व से इंकार नहीं किया जा सकता है । रुपैया रुपया है । इससे कुछ कार्यों की पूर्ति होती है और कुछ नहीं । इससे प्यार तो खरीदा जा सकता है मगर भाग्य को नहीं बदला जा सकता । फिर भी अधिकांश कार्य को रुपये के बल पर पूरा किया जा सकता है । जय के लिए ये बहुत ही खुशी का दिन था क्योंकि उसके हाथ में पुलिस इंस्पेक्टर के पद का नियुक्त पत्र था । इसके लिए उसे बहुत मेहनत करनी पडी थी । अपनी नई वर्दी पहनकर वह भावविहल हो रहा था । जब राजेंद्रबाबू को अपनी नियुक्त का समाचार देने गया तो खुशी से चीज पर उसने वर्दी पर लगने वाले पीतल के तमगों पर बराबर अमूल्य फेरी और अनेक बार सेल्यूट किया तो गरम मिजाज इंस्पेक्टर साहब की तारीख होनी चाहिए । ऐसा ना हो कि वो आना ही बंद करते । उमा ने मुस्कुराते हुए व्यंग्य किया, अब वर्दी में बडे रोबीले दिखाई पडते हैं । प्राण नहीं कहा । अब मैं लाल बत्ती की परवाह किए बिना स्कूटर चला सकता हूँ । गिरफ्तार के नियमों को तोड सकता हूँ और जहाँ चाहो अपना स्कूटर खडा कर सकता हूँ । जैन राजेंद्रबाबू के पास पहुंचकर उनकी चरण हुए । वो अस्पताल से वापस आ चुके थे मगर इधर उधर घूम नहीं सकते थे । बोलने के लिए भी उन्हें बडी कोशिश करनी पडती थी । ये जय है । वीणा ने राजेंद्र बाबू को बताते हुए कहा पुलिस इंस्पेक्टर बन गया है । राजेंद्र बाबू ने मुस्कुराने की कोशिश की । पुलिस इंस्पेक्टर उन्होंने सोचा ये तो बहुत अच्छा हुआ । बेटा तो कब से अपना काम शुरू करोगे । बिना बोले ड्यूटी पर हाजिर होने से पहले मुझे ट्रेनिंग लगी है । ये काम बहुत मुश्किल है और उसके बाद प्राण ने पूछा उसके बाद मेरी किसी जगह ड्यूटी लगा दी जाएगी । मुझे यकीन दिलाया गया है कि लखनऊ में ही रखा जाऊंगा । पहले मनपसंद जगह पर ही ड्यूटी लगाते हैं तब तो बहुत अच्छा होगा । प्राण बोला उमा मुस्कुराती रही । वह जय को बार बार देखती रही । आखिर उसकी मन की मुराद पूरी हो गयी थी । वो सोच रही थी ये सब देखकर शंकर और विमल अवश्यक्ता अजूबे पड जायेंगे । चलो इस खुशी में एक पार्टी तो हो जाये । प्राण ने कहा हाँ हाँ जरूर चलो । सब विक्टर चलते हैं । जय ने कहा अब नहीं नहीं जब तुम्हें पहली तनखा मिल जाएगी तब हम सब एक शानदार पार्टी लेंगे । उमा ने कहा दोगे ना! और यहाँ कहीं पर भी मगर विक्टर में नहीं । वित्तीय की याद अभी तक उसके दिमाग में ताजा थी और वो उस घटना का समर्थन मात्र करने से रोमांचित होती थी । चलो चलें । जय ने कहा अगले माह की पहली तारीख को तो तनख्वाह मिल ही जाएगी । तब मैं सबको डिनर दूंगा । मगर अभी तो कुछ ना कुछ तफरी हो ही जाएगा । अगर उमा विक्टर में जाना नहीं चाहती तो दिलाई चलते हैं । वहाँ भी बडा अच्छा खाना बनता है ।

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हर लड़की के जीवन में वो पल आता है, जब उसे जीवन साथी को चुनना होता है और निर्णय करना बेहद मुश्किल होता है। उमा के सामने भी यही एक बड़ा प्रश्‍न था कि सामने विकल्‍पों की कमी नहीं थी, लेकिन किसे अपना जीवन साथी चुनें? जहां जय के पास प्‍यार देने के लिए अलावा और कुछ नहीं था, वहीं शंकर था जो बिजनेसमैन था और उसके पास शानो-शौकत, दौलत बेशुमार थी। उमा किसे अपना जीवन साथी चुनेगी? उमा की कसौटी पर कौन खरा उतरेगा जय या शंकर? जानने के लिए सुनें पूरी कहानी।
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