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प्यार की वो कहानी अध्याय -07

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सभी लड़कियों के लिए, खासतौर पर वो जिनमें सपने देखने और जिन्दगी को अपनी शर्तों पर जीने का साहस है और उन तमाम प्यार करने वाली लड़कियों एवं लड़कों के लिए जो शामिल हैं मेरी जिन्दगी में । Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Pankaj Kumar
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अध्याय सात सुबह पांच बजे थे और सुबह टहलने वाले उत्साहित होकर जितना तेज चल सकते थे चल रहे थे । सडक के एक तरफ जंगली बेर और पौधे लगे हुए थे और माइलस्टोन शेयर करने वालों की ये जानने में सहायता कर रहे थे कि वे कितना दूर चल चुके हैं । सडक के सीधी तरफ एक तालाब था क्योंकि आम तौर पर लोगों द्वारा प्रयोग में नहीं लाया जाता था इसलिए ज्यादातर लोगों को नहीं पता था कि कितना गहरा था । लेकिन यह आम धारणा थी कि तालाक प्रीता बाधित था क्योंकि कुछ लोग जिन्होंने इसके अस्तित्व को चुनौती देते हुए इसमें नहाने की कोशिश की तो या तो इस में डूब कर मर गए या फिर अपनी मृत्यु से बाल बाल बचे । नतीजतन ये उजडा हुआ लगता था । इसके चारों और घने और रेंगने वाले पौधे निर्वाह रूप से बढ रहे थे । अचानक अमर में आगे बढना बंद कर दिया । हालांकि उसके समूह के दूसरे लोग उसे पीछे छोडते हुए आगे बढ गए । वो तालाब के किनारे पर स्थित पत्थर पर बैठ गया । सुबह की हवा बहकर उन लोगों को फ्रेश कर रही थी जो कि खुले स्थान पर थे । लेकिन अमर को ये हवा अतीत में ले जा रही थी और उस घटना की याद दिला रही थी जो उसके साथ एक बार वहाँ घटित हुई थी । जब कोई एक स्कूल का छात्र था वो निरोध साहपूर्वक उसपर मुस्कुराया और उन दृश्यों को अपने दिमाग में एक एक करके आने देने के लिए अपनी आँखें बंद कर ली । एक शाम को जब स्कूल से लौट रहा था तो कुछ छात्रों के साथ दौडते हुए उसका संतुलन बिगड गया और वो सडक के किनारे खीचड से भरे हुए गड्ढे में गिर गया । उस की चिंता किए बगैर दूसरी लडकी उस पर हसते हुए आगे निकल गए लेकिन रोहिणी उसे उस स्थिति में देखकर रुक गई । ये देख कर के उसके जूते और कपडे की जड से भरे हुए थे । उसने उसे खीचड को पास के तलाब में धोनी की सलाह दी और उसके साथ तालाब तक गई । जब वो अपने जूते धो रहा था उसे हाथ के पास एक मछली दिखाई दी और वो इसे पकडने की अपनी लालसा को नियंत्रित नहीं कर सका । इसलिए उसने इसे पकडने की कोशिश की लेकिन उसके हाथ के उस तक पहुंचने से पहले ही मछली धीरे से गहरे पानी में चली गई और तब उसने उसके पकडने की छतरी हो गई । इसलिए वो तालाब में कूद पडा लेकिन उसका प्रयास व्यर्थ गया क्योंकि मछली उसकी पहुंचे दूर चली गई थी । वहाँ पानी बहुत गहरा था इसलिए उसके पैर तली तक नहीं पहुंच पाए और इसका परिणाम बहुत खतरनाक साबित हुआ क्योंकि वो इसमें डूबने लगा था । जितना ज्यादा वह किनारे तक आने की कोशिश करता, उत्तर गहरा वो टूटता जाता । दूसरी तरफ रोहिनी इन सब चीजों को देखकर सन्न थी । उसे स्वयं को उसके लिए कुछ भी करने में असमर्थ पाया । इसलिए वो सहायता के लिए जोर जोर से रोने लगी और कुछ मजदूरों ने उसका रोना सुना क्योंकि अपने काम से लौट रहे थे बे उसकी तरफ दौडे और बिना एक्शन गवायें उनमें से एक उसे बचाने के लिए तालाब में कूद गया । जब अमर सामान्य हुआ तो एक घंटा बीत चुका था । उसने देखा कि वह कुछ लोगों से घिरा हुआ था और रोहिणी ठीक उसके पास बैठी हुई थी । वो डर और दुख से सुबह रही थी । उसका झोला उसके पास था । उसने कुछ समय के लिए कुछ नहीं कहा और तब वो उठा जिसे देखकर हर किसी के चेहरे पर खुशी का भाव आ गया । अचानक रोहिणी मुस्कुराई लेकिन उसका पूरा चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था । वहाँ उपस्थित लोगों ने उसकी मूर्खता के लिए उस से कुछ नहीं कहा । उन्होंने केवल उसका पता पूछा, एक रिक्शा किराए पर ली और उसे और रोहिणी को इसमें बैठा दिया । पूरे रास्ते रोहिणी बीच बीच में सुबह होती रही लेकिन अमर ने उस से कुछ नहीं कहा । उसने उसे शांत करने की कोशिश की लेकिन वो स्वयं भी उस दर से पूर्णत्या छुटकारा नहीं पा सका जो उसे उस समय लग रहा था जबकि वह तालाब के किनारे तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहा था । रोहिणी का घर अमर से पहले पडता था । इसीलिए जब वो रिक्शा से उतर रही थी उसने उसकी जल्दबाजी की शिकायत करते हुए उसकी तरफ देखा लेकिन उसने उससे कुछ नहीं कहा । ये अमर था । किसने कहा प्लीस अपने माता पिता को इस बारे में मत बताना क्योंकि उसने सिर हिलाया, तुम कल स्कूल आओगी ना । मैंने पूछा हाँ मैं होंगी । उसने उत्तर दिया पर चली गई । जो अमर अपने घर पहुंचा उसकी माँ जो कि चिंतित होकर उसका इंतजार कर रही थी क्योंकि वह बहुत लेट हो गया था । उसे गीले कपडों में तथा रिक्शा में देख कर आश्चर्यचकित हो गई तो एक बार में उसके पास आई और उससे इसका कारण पूछा लेकिन वो उस अपराधी की तरह अपना से नीचे झुकाए हुए खडा रहा जिसमें चुप रहकर अपना अपराध स्वीकार कर लिया हो । रिक्शा चालक ने अमर के साथ हुई घटना का वर्णन किया और इसे सुनकर उसकी माँ के है । इंडिया में गहरा आघात लगा इसलिए उसने उसे प्यार से गले लगा लिया और रिक्शा चालक को किराए देने के बाद वो उस घबराहट के साथ घर के अंदर ले आई । वो दो दिनों के बाद स्कूल गया और देखा कि उसके बहुत ही सह पार्टियों और दूसरे छात्रों को उसके साथ कोई अनहोनी के बारे में पता चल गया था । उसी स्कूल में देखकर रोहिणी अचानक से बदल गई । ऐसा लगा कि उसे वह मूल्यवान चीज मिल गई है जो उसे एक बार खो गई थी । प्रार्थना के तुरंत बाद उसके पास आई और शिकायत की तुम दो दिनों से क्यों नहीं आ रहे हो? माननीय अनुमति नहीं । उसे जवाब दिया तुम कैसा महसूस कर रहे हो? बेहतर उसे जवाब दिया और वहाँ से जाना चाहता था लेकिन रोहिणी ने उसका हाथ पकड लिया और सहानुभूति भरी ने कहाँ से कहा, भगवान के लिए अपना ख्याल रखो, अमर उत्तर नहीं दे सका । इतना ही उसके अनुरोध में छिपे अर्थ को ही समझ पाया । उसके कुछ मित्रों ने उसके साथ छेडछाड की लेकिन उसने उन्हें कोई भाव नहीं दिया । अचानक उसका दीप का स्वप्न सरीखा सुहाना संसार गायब हो गया क्योंकि उसे ऐसा लगा की किसी ने अपनी हथेली उसके कंधों पर रखती हूँ और ये जानने के लिए कि वह कौन था, उसने अपना सिर्फ घुमाया और देखा कि रवि था जो कि उसे वहाँ बैठे देखकर मुस्कुरा रहा था तो यहाँ से कर रहे हो । उसने पूछा और फिर लगभग उससे अपने साथ चलने के लिए खींच लिया । जब तालाब के पास से गुजर रहे थे उसने कहा, अमर तो नहीं है । एक बार तुम इसमें डूबने वाले थे लेकिन कुछ लोगों ने तुम्हें बचाया और ये रोहिणी की मदद के लिए चिल्लाने के कारण हुआ । मैं कैसे भूल सकता हूँ । उसने जवाब दिया, लेकिन अब तो मैं भूल जाना चाहिए । उसने कहा, और अब मैंने उसे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो उसके साथ चल रहा था लेकिन उसके चेहरे के भाव से ही साफ दिख रहा था कि उसका दिमाग कहीं और चल रहा था । रवि तुमने कभी जिंदगी के बारे में सोचा है? अमर ने सवाल किया, नहीं मेरे प्यार है । मैंने इसे किसी भी रूप में स्वीकार किया । उसने उत्तर दिया क्यों? क्योंकि मनुष्य ईश्वर की रचना है और इसलिए वह मनीषियों को उसकी इच्छा के विरुद्ध कुछ भी करने की अनुमति नहीं दे सकता है । रवि का उत्तर था तो निश्चित रूप से सही हो लेकिन क्यों खुद की सृष्टि को नाखुश बनाता है? रहस्य है हैना अमर तुम जानते हो, मैं स्कूल में पढाई में अच्छा नहीं था, ना ही मैं तुम्हारी तरह विश्वविद्यालय तक पहुंच सका । इसलिए मुझे तुम्हारा दार्शनिक चिंतन समझ नहीं आता । लेकिन मैं तो मैं एक सलाह देना चाहता हूँ क्या? अमर ने ज्यादा महत्व दिए बगैर पूछा तो मैं रोहिणी को भूल जाना चाहिए । उसने कहा और चलना बंद कर दिया । उसने उसे सडक से अपनी तरफ खींचा और पास के टूटे हुए ईटों के खंबे पर अपने पास उसे बैठाया । इस पर बैठकर अमन ने पूछा क्या तुम्हें लगता है मुझे वो याद है? हाँ तो में याद है और तुम उसे जब तक नहीं बोल सकते जब तक तू शादी नहीं कर लेते । उसने कहा लेकिन कोई लेकिन नहीं । अमर तो किसी की पत्नी है । उसे एक सामान्य जीवन जीने तो और ऐसा ही तुम्हें भी करना चाहिए । मैं क्या करूँ? उसने पूछा यदि तुम उसे इसी तरह याद करते रहे तो वो तो मैं कैसे भूल पाएगी और यदि तुम दोनों एक बार फिर मिल लेते हो, तुम दोनों के बीच की सभी सीमाएं खत्म हो जाएंगे । तब तुम दोनों वो करोगे क्योंकि अपेक्षा से परे हैं । उसने कहा, और आगे चलने के लिए उठ खडा हुआ । जब अमर अपने घर वापस आया तो उसने अपनी बहन को देखा जो उससे मिलने अपने पति के साथ आई थी जो कि माँ के साथ बैठा था और उन दोनों ने प्रसन्नता से उसे देखा । सुजीता बिना किसी उत्साह से खडी हुई, उसके पैरों को छुआ और अश्रुपूरित आंखों के साथ अपना सिर झुकाए वही खडी रही । अमर ने उसका सिर अपने सीने से लगा लिया और उसका सर थपथपाती हुए । सारा प्यार उस पर उडेल दिया तो तुम कब आई? उसने पूछा केवल कुछ घंटे पहले उसने उत्तर दिया और तब दोनों माँ के पास बैठ गए तो सब्जी खेल रही थी । उन्होंने एक दूसरे से भिन्न भिन्न प्रकार के सवाल तथा उन का जवाब देते हुए प्रसन्नतापूर्वक बातें की । कभी कबार माँ भी उनकी बातचीत में दखल दे रही थी और उनका हस्तक्षेप सिटी को और ज्यादा सुखद बना रहा था । अचानक उनकी सुखद बातचीत के दौरान सुजीता ने पूछा तो जल्दी क्यों नहीं आ सके? वास्तव में में बहुत व्यस्त था और दूसरी तरफ मैंने शहर में अपनी सारी रूचि खो दिए है । लेकिन मुझे तुम सब के बारे में जानने के लिए आना पडा लेकिन कोई तुम्हारे ली और ज्यादा चिंतन होकर इनके साथ कर रहा था और तुम्हारे न आने और ना ही कोई संदेश भेजे जाने से उसके जीवन को पूर्णत्या बदल दिया तो जीता पूर्वक बोली ये सुनकर वो ऐसे चुप हो गया जैसे किसी ने उसके बोलने की शक्ति छीन ली हो । वो उसे कुछ उत्तर दिए बिना ही अपने कमरे में जाने के लिए खडा हो गया । मान्य स्थिति को समझा इसलिए उसने कुछ नहीं कहा और उसे वहां से जाने दिया । वो जान गई थी कि उसे उसकी लापरवाही से गहरा धक्का पहुंचा था लेकिन उसी समय वह समझ गई थी कि वह क्यों नहीं आया था । ऐसा इसलिए था क्योंकि रोहिणी ने एक बार स्वयं ही उन्हें बताया था कि उसके अपने व्यवहार से अमर को दुखी कर दिया था इसलिए वह से नाखुश था और लौटना नहीं चाहता था । लेकिन दूसरी तरफ उसने निश्चय कर लिया था कि वो उसके लिए जितना इंतजार कर सकती है करेगी और उसने किया भी । इसलिए उसने सुचिता को उसे रोकने के लिए मना कर दिया । उस दिन अमर पूरे दिन बाहर नहीं गया यह बहाना बनाते हुए कि उसके सिर में दर्द था । लेकिन सच यह था कि रोहिणी की याद उसे उस दिन पहले से अधिक सता रही थी । ऐसा शायद सुचिता के कारण था जिसकी उपस् थिति ने उसे उस सारे अतीत की याद दिला दी थी जो उसने रोहिणी के साथ अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों के दौरान बिताया था । यदि पी उसे अच्छी तरह से पता था कि अतीत उसके लिए कोई महत्व नहीं रखता था, फिर भी वो एक एक करके उन दोनों के बीच की सारी यादव को अपने दिमाग में लाया ताकि उसे कुछ आनंद तथा शांति मिल सके । लेकिन इसके बजाय उसे तनाव और आंसू मिले । उसका गाल आसो से भीड गया । वो अपने कमरे में उस बच्चे की तरह हो रहा था क्योंकि चंद को पानी की आपकी इच्छा पूरी नहीं कर सका । अपने कमरे में आया और बुरी तरह से हो गया हैं ।

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सभी लड़कियों के लिए, खासतौर पर वो जिनमें सपने देखने और जिन्दगी को अपनी शर्तों पर जीने का साहस है और उन तमाम प्यार करने वाली लड़कियों एवं लड़कों के लिए जो शामिल हैं मेरी जिन्दगी में । Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Pankaj Kumar
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