Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

प्यार की वो कहानी अध्याय -05

Share Kukufm
प्यार की वो कहानी अध्याय -05 in  | undefined undefined मे |  Audio book and podcasts
1 KListens
सभी लड़कियों के लिए, खासतौर पर वो जिनमें सपने देखने और जिन्दगी को अपनी शर्तों पर जीने का साहस है और उन तमाम प्यार करने वाली लड़कियों एवं लड़कों के लिए जो शामिल हैं मेरी जिन्दगी में । Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Pankaj Kumar
Read More
Transcript
View transcript

अध्याय पांच रोहिणी को अपने घर पहुंचे हुए दो दिन बीत गए थे लेकिन वो कॉलेज की जिंदगी की यादों को भुला नहीं पा रही थी । जितना ज्यादा वो बोलना चाहती थी उतना ही ज्यादा वो उन घटनाओं को सोच कर दर जाती थी जो उसके साथ वहाँ घटित हुई थी । इसलिए वो सामान्यता दुखी मन से या तो अपने पलंग पर सोई रहती थी या फिर कोई पुस्तक पड रही होती थी । उस दिन उसने पढने के लिए डॉक्टर ऍफ द्वारा रचित उपन्यास वूमेन इन लव लिया और पढने से पहले वो बिना जाने इसके पन्नों को पलटने लगी और इसके अंदर एक पत्र को पाकर आश्चर्यचकित हो गई । उसने जल्दी से इसी खोला और देखा कि ये अमर की द्वारा मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षा से केवल तीन दिन पहले लिखा गया था । उसने उत्साह से पूरा पत्र पडा और इस दौरान उसके चेहरे का भाव कई बार बदल गया । उसने पढना पूरा खत्म भी नहीं किया था कि उसने वहाँ पडी हुई दूसरी पुस्तकों में कुछ ढूंढना आरंभ कर दिया । उन पुस्तकों में जो उसने अमर के साथ कॉलेज में पढते हुए प्रयोग किए थी, अचानक उसकी खुद समाप्त हो गई और उसे एक फोटो मिला जिसमें वो फूलों से भरे हुए पौधों के बीच कॉलेज गार्डन में खडी थी । उसे अभी भी याद था कि उसने उसे खींचा था और उसके बाद उसने गार्डन से तोडकर एक गुलाब उसे भेंट किया था । लेकिन उसने उसे आधी मुस्कान के साथ मूव प्रतिक्रिया दी थी । इसलिए उसने फिर से कुछ चीजें खोजी आरंभ कर दी और जल्दी उसे वो सूखा गुलाब मिला क्योंकि किताब के पन्नों के बीच दबकर स्मत हो गया था । उस समय वो बहुत ज्यादा इसका अर्थ नहीं समझ चुकी थी । लेकिन अब वो पूर्णत्या इसका मतलब समझ गई थी । तो मुस्कुराई और फुसफुसाई तो बहुत शर्मिले हुआ मतलब में बता देना चाहिए था । तुम केवल मेरे मित्र नहीं हूँ लेकिन उससे कुछ ज्यादा तब उसने वो फोटो देखा जो उसके प्रति अमर के प्यार को प्रकट कर रहा था । इसलिए उसने स्वयं की तस्वीर को चूमा और दोबारा से दोनों चीजों को किताब के पन्नों के बीच में रख दिया । ये सोचते हुए कि वे उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण थे, अमर का मुस्कुराता हुआ चेहरा उसके दिमाग में आया और वो सुखद अनुमति के साथ अपनी मुस्कुराहट नहीं रोक सके । उसी क्षण उसकी माँ वहाँ आई और उसने पूछा कि वह क्या कर रही थी? कुछ नहीं । कुछ पुरानी किताबों को खोज रही थी । उसे जल्दी में उत्तर दिया । तब वो अपनी माँ के पास आई और उत्सुकता से पूछा । अमर कहा है मम्मी उसकी मानें । उसकी तरफ एक पक्ष वाचक दृष्टि से देखा और कुछ दिनों के बाद उसे सवाल में जवाब दिया क्यों मैं उसे देखना चाहती हूँ । उसने उत्सुकता से कर दिया तो मैं ऐसा नहीं कर सकती । लेकिन क्यों? उसने फिर से पूछा वो यहाँ नहीं है और उसके परिवार के सदस्यों के विचार से उसकी यहाँ से जाने का मुख्य कार्य तो ये सही है कि उसके तुम्हारे एडमिशन के समय हमारी सहायता की थी । लेकिन बाद में हम उस राशि को लौटाने के लिए राजी थी । उसकी माँ ने अपनी ना पसंद की दिखाते हुए कहा वो अपनी माँ की तरफ आश्चर्य से देखते रहे और जवाब में कुछ भी नहीं कहा । लेकिन तेजी से चलते हुए वह कमरे में घुसी और स्वयं को बिस्तर के हवाले कर दिया । तब उसने तक की से अपना चेहरा ढका और अब बुरी तरह से रोना चाहती थी । दिल से हसना चाहती थी लेकिन वो उन दोनों में से कुछ भी नहीं कर सके । वह एडमिशन के लिए पैसे कहाँ से लाया । क्या उसके सोने की चेन नहीं हुई थी । निश्चित रूप से उसने इसे बेचा था । ये सब विचार उसके मन में आए और उसने पछतावे से अपनी आँखे बंद कर ली । एक दिन वो चुपके से अमर के घर पहुंची उससे जीता थी जिसने दरवाजा खोला लेकिन उसे देख कर उसके चेहरे का भाव बदल गया और उसने उसे अंदर आने के लिए कहने की बजाय उसकी तरफ नफरत से देखा । लेकिन वो उस की अनुमति का इंतजार किए बगैर ही घर में घुस गयी । सुजीता एक तरफ को हो गई और उसे अंदर आने दिया । वो उसके पीछे ड्राइंग रूम तक गई जहां उसकी माँ अकेली बैठी थी । उसे देखकर उसकी मां आश्चर्यचकित रह गई लेकिन कोई भी अप्रिय शब्द नहीं कर पाए । उनके पैरों को छूकर रोहिणी कुछ सवालों को सुनने के इंतजार में उन के बगल में बैठ गई । लेकिन उन्होंने कोई सवाल नहीं पूछा । तब रोहिणी ने ये पूछते हुए स्वयं की बात आरंभ कर दी । अमर कहा है आंटी वो हमें कुछ कहे बिना ही शहर छोडकर चला गया । रोहिणी लेकिन क्यूँ उसने ऐसा क्यों किया? रोहिणी ने उत्साह से पूछा केवल तुम्हारी प्यार के लिए रोहिणी सुजीता ने ना पसंदगी के भाव से कहा लेकिन क्या? लेकिन तुमने उसे धोखा दिया और जब मेरे पिता नहीं उसे किसी से शादी करने के लिए बाध्य किया तो उसने घर छोड दिया । बिना हमें बताए कि वह कहाँ जा रहा था । तब सब कुछ समय के लिए शांत हो गया । रोहिणी उनसे कुछ कहना चाहती थी लेकिन स्थिति को देखते हुए उस साहस नहीं कर पाई । उसके बाद वो अपने घर जाने के लिए उनकी अनुमति चाहती थी । लेकिन अमरीकी माँ की एक कप चाय की सलाह ने उसे कुछ समय और रुकने के लिए बाध्य किया । सुजीता अनिच्छा से उसके लिए एक कप चाय लेने चली गई । उसके जाने के बाद मान ने पूछा, सुजीता ने तो में चोट पहुंचाई? रोहिणी नहीं । उसने जवाब दिया, परिस्थितियों ने उसे तुमसे इस तरह बात करने को विवश किया, नहीं तो वह तुम्हारा सम्मान करती है । उसने कहा, मैं समझती हूँ । रोहिणी ने से हिलाकर उत्तर दिया । अब तुम क्या करोगी? कुछ नहीं । रिजल्ट आने के बाद में यहाँ प्रैक्टिस करने की सोच रही हूँ । उसने इनमें बिना ज्यादा रूचि लेते हुए जवाब दिया । जब सुजीता ड्राइंग रूम में आई तो उसने देखा कि रोहिणी वहाँ नहीं थी । इससे वह आश्चर्यचकित हुई और उसने प्रश्नवाचक में कहाँ से अपनी माँ की तरफ देखा । उसकी आंखों से पूछे गए सवाल को समझ गई और उसके कुछ कहने के पहले यूज ने कहा वह जल्दी में थी इसलिए मैंने उसे जाने दिया । ट्रीम एज पर रखते हुए उसे अपना मूड बनाया जी दिखाने के लिए कि उसके जाने से उसे कोई फर्क नहीं पडा । तुम्हे उसे उस तरह से नहीं कहना चाहिए था से जीता । उसकी माँ ने कहा कि आखिरकार उसके दोस्त थी । ये सुनकर सुचिता ने अपना मूड कुछ इस तरह से बनाया मानव उसने कोई कडवी चीज में गल्ली हो । रास्ते भर रोहिणी सुचिता के अशिष्ट व्यवहार के बारे में सोचती रही लेकिन वो उसके लिए नफरत का भाव नहीं ला पाई । ये सोचते हुए कि वह सही थी वास्तव में वो अमर के प्रति अपने पुराने व्यहवार के कारण स्वयं को ना पसंद करने लगी थी । जितना ज्यादा वो स्वयं को ना पसंद करती उसके प्रति उसका प्यार उतना ज्यादा मजबूत हो जाता था । जब घर पहुंची तो उसने अमर के घर जाने पर उसकी माँ का दुख से गुस्से से भरा हुआ चेहरा देखा । कुछ समय के लिए उसकी माँ ने कुछ नहीं पूछा लेकिन वो ज्यादा समय तक उनकी नाराजगी नहीं झेल सकती थी तो में अमरीकी घर नहीं जाना चाहिए था । उसने कहा क्यों? हाँ हम अच्छे दोस्त हैं । हम नहीं है हम थे । उस ने गुस्से से कहा कि समाज में उनका स्थान बढ गया था । उनकी सात रिश्ता रखना उसके लिए अच्छा नहीं था । ये सुनकर रोहिणी आश्चर्यचकित रह गए । उसे एक पर के लिए भी ये विश्वास नहीं हुआ कि उसकी माँ ऐसा कह रही हैं । एक ऐसा भी समय था जबकि वह उसकी तथा उसके परिवार की प्रशंसा करते हुए नहीं थक दी थी । जब भी उसे इसका मौका मिलता था अमर के परिवार के प्रति अपनी माँ की राय ने उसी दुखी कर दिया था और वो अपने आंसू नीचे गिरने से नहीं रोक पाई । एक भी शब्द का उत्तर दिए बिना भारी है दिया और कदमों के साथ अपने कमरे में चली गई । समय बीतने लगा और दो और साल बीत गए । लेकिन अमर तथा जहाँ वह रह रहा था उसकी कोई खबर नाथी उस अवधि के दौरान बहुत सी चीजें बदल गई । सुचिता का विवाह हो गया और वो अपने पति के घर चले गए । हालांकि हालांकि रोहिनी को आमंत्रित नहीं किया गया था । वो उस दिन उस की शादी में हिस्सा लेने गए और सुजीता उसे देख कर बहुत भावुक हो गई और उसने उसके साथ अशिष्टता का व्यवहार करने के लिए माफी मांगी और उसकी मां जो की अमर के न होने पर चेहरे से बहुत उदास की ने भी उसके प्रति अपना प्यार दिखाया । सुजीता और रोहिणी दोनों एक दूसरे के लिए भावुक होकर हुए और एक बार उन्होंने फिर से अपनी दोस्ती को बहाल कर दिया क्योंकि स्कूल और कॉलेज के दिनों में उनकी बीच थी । उन्होंने एक दूसरे को नाम खोलने का वादा किया । उस दिन से रोहिणी ने थोडा तनावमुक्त रहना शुरू कर दिया लेकिन जब भी उसे अपने काम से फुर्सत मिलती है तो अपने अतीत में चली जाती और दुखी हो जाती । हर दिन वह ईश्वर से अमर को एक बार भेजने की प्रार्थना करती जिससे कि वो उसे पूरी तरह भावुक होकर देख सके और उस दिन घर से आई चुकी उसे एक जटिल के सुलझाना था इसलिए वह थकी हुई भी थी । लेकिन जब घर पहुंची उसने ड्रॉइंग रूम में कुछ अपरिचित लोगों को बैठे हुए देखा और उनकी देखने के अंदाज से उसके दिमाग में शक का बीच बोल दिया था । इसलिए उनसे कुछ कहे बिना ही वो अपने कमरे में चली गई । लेकिन शीघ्र ही उसकी माँ उसके कमरे में घुसी और उसकी अनुमति की आशा लिये हुए आई । तेलुगु दिल्ली से आए हैं । वो बहुत धनी परिवार से हैं और लडका भी डॉक्टर है । उसने उत्साह से और अपनी प्रसन्नता प्रकट करते हुए कहा, रोहिणी ने अपनी माँ की कहे बिना कोई रूचि दिखाए उसकी तरफ देखा और कहा तो मैं क्या कर सकती हूँ? वित्त में देखने आए हैं । वे मुझे देख चुके हैं । जब मैं आ रही थी उसने जवाब दिया । तब उसकी माँ ने कहा वे तुम्हारी शादी की बात करने आए हैं । माँ तो अच्छी तरह से जानती हूँ कि मेरी शादी में कोई रूचि नहीं है । उसने अपनी परेशानी दिखाते हुए कहा लेकिन रोहिणी हमारी इज्जत का सवाल है तो में कम से कम उन से बात करने के लिए तो आना चाहिए । उसे विनती करते हुए कहा । ये सुनकर वो एक मिनट के लिए चुप रही और तब कहाँ उसके उसकी माँ अपने चेहरे पर विजयी मुस्कान लिए हुए कमरे से चली गई । जब रोहिणी दुबारा से ड्राइंग रूम में आई उसके हाथ में कब और प्लेटों से भरी एक रही थी । उसने मुस्कुराते हुए एक सच्ची भारतीय लडकी की तरह अपने हाथ मोडते हुए उनका अभिवादन किया । मेहमान बहुत खुश हो गए और उन्होंने उसे उसी तरह प्रतिक्रिया दिखाते हुए अपनी प्रसन्नता प्रकट की । विशेष रूप से उस नवयुवक नहीं क्योंकि महंगी सूट में था तो बार बार उस की तरफ देख रहा था । मानव नजरों के द्वारा उसे मापना चाहता था जिसे रोहिणी समझ गई और सतर्क हो गई । उसने अंदाजा लगाया कि शायद वो मुख्य अतिथि था जो से देखने आया था । उसने उसमें ज्यादा रूचि नहीं दिखाई और अपने विचारों को दूसरों के साथ बांटते हुए स्वयं को व्यस्त रखने की कोशिश की । जो औरत उसके साथ आई थी वो नरम सुभाव वाली थी । उसकी बातें करने का तरीका आकर्षक था और जीवन के चालीस के दशक के अंतिम पडाव में होते हुए भी वह प्रभावशाली और बहुत लग रही थी । ये पूरा स्पष्ट था कि वो उस टीम की नेतृत्वकर्ता थी । रोहिणी ने ज्यादा बातें नहीं, उसी की वहा या ना में उत्तर दिया । अचानक उस महिला ने कहा प्रकाश तुमने रोहिणी से कुछ नहीं पूछा है । मुझे लगता है तो मैं पूछना चाहिए । ऐसा सुनकर वो मुस्कुराई और सिर हिलाया । तब कमरे में चुप्पी थी । हर कोई प्रकाश के सवाल का इंतजार कर रहा था । रोहिणी का दिल धडकने लगा । वो नहीं सोच पाई कि वह क्या पूछने जा रहा था । उसकी परेशानी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी । उसने उसको उत्तर देने के लिए खुद को तैयार करने के उद्देश्य से अपनी साढे से अपने चेहरे को पूछा । मुझे कुछ नहीं पूछना है । मुझे उसके चेहरे को देख कर ही मेरा जवाब मिल गया है । ये भी उसे कुछ पूछना है तो वह ऐसा कर सकती है । उसने संतुष्ट होकर कहा, ये सुनकर रोहिणी नपुसंक बन गई । उसने कभी नहीं सोचा था की स्थिति इस तरह से बदल जाएगी । उसकी माँ ने उसे वहाँ से दूर चले जाने का इशारा किया । इसीलिए वह कप और प्लेट इकट्ठा करने के बाद उससे के भाव के साथ वहाँ से चली गई । एक घंटे के बाद तीस तक चले गए । उसके माता पिता यह सोचकर बहुत खुश थे कि उन्हें अपनी पुत्री के लिए एक अच्छा जीवन साथी मिल गया है । लेकिन दूसरी तरफ रोहिणी जलन से उबल रही थी । उसने स्वयं को दोषी ठहराया की उसने उनके सामने नहीं जाना चाहिए था । नहीं नहीं वो किसी से शादी नहीं करेगी । वो फुसफुसाई और अपना चेहरा तकिए पर रख लिया । कुछ समय बाद उसने महसूस किया कि कोई आया और उसके पलंग पर बैठ गया । तब उसने अपने सिर पर प्यार भरी छुअन महसूस की । तभी वह मुडी और देखा कि उसकी माँ वहाँ बैठी हुई थी । सब कुछ ठीक हो जाएगा । वो ही नहीं समय एक मजबूत मरहम है । उसने प्यार पसन्द यहाँ से कहा लेकिन माँ मैं किसी से शादी नहीं कर होंगी । उसने कहा तब तुम अपना समय कैसे व्यतीत कर होगी? उस ने सवाल किया, मैं काम करती हूँ, मैं किसी पर निर्भर नहीं हूँ । उसने विश्वास के साथ उत्तर दिया, जीवन केवल पैसे के सहारे नहीं बताया जा सकता । कुछ और भी जरूरतें होती हैं । उसने उत्तर दिया और आगे कहा कि उसे ये तब महसूस होगा जब उसकी भावनाओं की नींव समय के साथ उखड जाएंगे । मैं कुछ नहीं जानती । प्लीज मुझे अकेला छोड दो और मुझे खुद निर्णय लेने दो क्योंकि मेरी जिंदगी सिर्फ मेरी है । उसने उसकी शादी करने के फैसले के खिलाफ अपनी नफरत दिखाते हुए कहा था, तुम्हारी जिंदगी सिर्फ तुम्हारी है लेकिन जिसने तुम्हें ये जीवन दिया है । क्या मेरा तुम पर कोई अधिकार नहीं है? क्या मैं तुमसे प्यार नहीं करती? क्या मैं तुम्हारी दुश्मन हूँ? ये तुम्हारे पिता तो में दुखों की घाटी में धकेला चाहते हैं । हमने हमेशा अपनी तुलना में तुम्हारे जीवन और खुशी को महत्व दिया है । रोहिणी लेकिन अब भी अगर तुम हमारी आज्ञा का पालन नहीं करना चाहती हो और उस आदमी के लिए इंतजार करना चाहती हो जिसमे कभी तो मैं अपने प्यार के बारे में नहीं बताया और किसी को नहीं मालूम कि वो कहाँ है, वो क्या कर रहा है और वो कैसा है तो इंतजार कर सकती हूँ लेकिन याद रखो की समय लौट कर नहीं आता है । यदि वह यहाँ होता तो मैं तुम्हारी शादी उसे करवा देती क्योंकि हम तुम्हें प्यार करते हैं और केवल तुम्हारी खुशी के लिए हमने दो लम्बे साल उसके लौटने का इंतजार किया । लेकिन वो इतना कहकर उसके उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना रोती हुई कमरे से बाहर आ गई । सुबह को रोहिणी देर से उठी और उसने महसूस किया कि घर में हर तरफ एक चुप्पी थी । उसके पिता कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे और वहाँ नाश्ता बनाने में व्यस्त थी । उसने उसमें कोई रूचि नहीं जब वो रसोई में ये जानने के लिए खुसी की वो क्या पका रही थी । स्थिति को देखते हुए वो चुप रही और वहाँ से जल्दी लौट गई । और अपने क्लीनिक जाने के लिए तैयार होना शुरू कर दिया । जब वह बातों से बाहर आई तो उसे उसके कमरे में अपना लंच बॉक्स दिखाई दिया और मेज पर उसका नाश्ता रखा था क्योंकि वह कमरे में नहीं थी इसलिए ही ढका हुआ था । उसे थोडी देर के लिए सोचा और बिना कोई गुस्सा या पछतावा दिखाए बिना चुपचाप नाश्ता कर लिया । जब क्लिनिक पहुंची तो देखा कि कुछ मरीज पहले ही आ चुके थे । तब उसने उनकी जांच पडताल आरंभ कि लेकिन जब तीसरा रोगी उसके सामने आया तो वह आश्चर्यचकित रह गई और उसे रिसीव करने के लिए उठे । आंटी आप हाँ, मेरे बच्चे मेरे पैर की उंगलियों में दर्द है । उसने उत्तर दिया और उस से बैठने के लिए कहा । वास्तव में वो उसे अपने क्लीनिक में देख कर बहुत ज्यादा खुश और रोमांचित हो गई थी । उस ने उनकी जांच की और उसके बाद उन्हें कुछ तबाह मुफ्त ही दे दी । शुरू में उसने संकोच किया लेकिन उसके ऐसा कहने पर आंटी यदि अमर आपका बेटा तो क्या मैं आपकी कुछ नहीं रखती है? वो उसी स्वीकार करने के लिए विवश थी । रोहिनी क्या मैं एक बात पूछ सकती हूँ? अमर की माने कहा था क्यों नहीं? तुम अमर के लिए कब तक इंतजार कर होगी तो तुम्हारा फर्स्ट तुम्हारे माता पिता के प्रति भी है । जिंदगी कभी नहीं रुकती । ये हमेशा आगे चलती रहती है । किसी पता है कि इन सालों के दौरान उसके साथ क्या घटित हुआ । मैं स्वयं को बहुत भाग्यशाली समझती यदि तुम मेरे घर एक बहु की तरह थी । लेकिन समय को ये मंजूर नहीं है । हम क्या कर सकते हैं हम लोग? मेरे बच्चे कठपुतली की तरह है जिसकी डोल भगवान के हाथों में है और हम उसकी इच्छा के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते । भावनाएं किसी का भाग्य नहीं बदल सकती है । एक समझदार व्यक्ति भाग्य की द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलता है । मैं तुमसे प्यार करती हूँ लेकिन उसने भराई आवास में कहा और उसे गले लगाने के लिए अपना हाथ फैला दिया । तब रोहिणी ने मात्र प्यार से मिलने वाली शांति प्राप्त करने के लिए अपना सिर उनके सीने पर रख दिया । दोनों चुपचाप रोते रहे और अमरीकी माँ उसी सांत्वाना देने के लिए उसकी पीठ सहला रही थी और तब उसने उसे इस तरह से चूमा जैसे कि एक माँ जो होती है । उसके बाद वह रोहिणी को देखते हुए बिना कुछ कहे ही कमरे से बाहर आ गई क्योंकि उसके पास ऐसा करने का साहस नहीं था ।

Details
सभी लड़कियों के लिए, खासतौर पर वो जिनमें सपने देखने और जिन्दगी को अपनी शर्तों पर जीने का साहस है और उन तमाम प्यार करने वाली लड़कियों एवं लड़कों के लिए जो शामिल हैं मेरी जिन्दगी में । Voiceover Artist : Sarika Rathore Author : Pankaj Kumar
share-icon

00:00
00:00