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5. Nitasha Ki Nirasha

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The Five W in Stammering यानी हकलाहट के पाँच "क" यह किताब हकलाहट की समस्या के विषय को समर्पित है । अपनी इस किताब में मैने पाँच "क" , क्या ,क्यों , कब , कहाँ , कैसे यानि हकलाहट की समस्या क्या है । हकलाहट की समस्या क्यों पैदा होती है । हकलाहट की समस्या कब पैदा होती है । हकलाहट की समस्या कहाँ सबसे ज़्यादा यां कहाँ सबसे कम पैदा होती है । हकलाहट की समस्या को कैसे क़ाबू में किया जाए । इन सबका वर्णन करने की कोशिश की है । और इसके साथ हकलाहट के जीवन पर आधारित कुछ लोगों की कहानियाँ हैं। इन कहानियों में से कुछ कहानियाँ काल्पनिक हैं और कुछ सत्य जीवन पर आधारित हैं। और यह सब कहानियाँ हकलाहट के पाँच " क " को ध्यान में रख कर लिखी गई है। और साथ में इनके ज़रिये यह बताने की कोशिश की गई है की हकलाहट की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के जीवन कौन कौन सी समस्याएँ आती हैं और इस समस्या को कैसे क़ाबू में किया जाए । Voiceover Artist : Ashish Jain Script Writer : Rohit Verma Rimpu
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अध्याय पांच निताशा की निराशा आपके द्वारा की गई हर नई शुरुआत को तीन चरणों में से गुजरना पडता है । पहला पहले चरण में लोग आपका मजाक उडाते हैं । दूसरा दूसरे चरण में लोग आप का विरोध करते हैं । तीसरा तीसरे चरण में लोग आपसे वाय सहमत हो जाते हैं । जब मैंने हकलाहट के अध्यापक के तौर पर कार्य शुरू किया तो मेरे मित्रों और निकट संबंधियों ने मेरे कार्य का काफी मजाक उडाया । इसका कारण शायद ये था कि हकलाहट की समस्या को समाज में हसी मजाक की दृष्टि से देखा जाता है । कई शुभ चिंतकों ने तो मेरे सारे का जमकर विरोध भी किया परंतु अब मेरे इस कार्य से पूर्णतया सहमत हैं और समर्थन भी करते हैं । इसलिए दोस्तों दुनिया की परवाह ना करो । मेहनत और ईमानदारी के साथ अपनी कार्य में लगे रहो । टकराहट के अध्यापक के तौर पर मैं अपने इस कार्य को व्यवसाय के रूप में नहीं बल्कि एक समाज सेवा मानकर करता हूँ । मेरा ये मानना है कि अगर हकलाहट की समस्या को जड से खत्म करना है तो इसके लिए हकलाहट के प्रति हमारे समाज की सोच को बदलना होगा क्योंकि हकलाहट की समस्या से पीडित कोई व्यक्ति अगर समाज में हकलाने लगता है तो पूरा समाज उसकी हकलाहट की समस्या को लेकर उसका मजाक बनाने लगता है और विभिन्न विभिन्न प्रकार से उसकी खिल्ली उडाने लगता है । इस काम को करने के लिए मैं हकलाहट के विषय पर लेख लिखकर समाज के समक्ष रखता हूँ । हकलाहट के विषय पर लिखे अपने इन्हीं लेखों की सहायता से मैं हकलाहट को समस्या से पीडित व्यक्ति की जिंदगी का डर और उसके व्यक्तिगत अनुभवों को लिखने की प्रयास करता हूँ । हकलाहट की समस्या लडकियों की अपेक्षा लडकों में ज्यादा पाई जाती है । लडके तो किसी ना किसी इस समस्या के साथ अपना जीवन गुजार लेते हैं । वहीं दूसरी तरफ लडकियों के लिए समस्या के साथ जीवन बताना बहुत मुश्किल होता है । निताशा की कहानी हमें उसके जीवन में हकलाहट की समस्या के कारण पैदा हुई मुश्किलों और परेशानियों से रूबरू करवाती है । एक दिन की बात है मैं अपने कमरे में बैठा फेसबुक चला रहा था कि तभी मुझे एक मैसेज आया । मैसेज निताशा नाम की लडकी की तरफ से था । मैंने उसे उसके मैसेज का जवाब भेजा और हमारी बातचीत शुरू हो गई । अपनी बातचीत में उसने बताया कि वह बचपन से हकलाहट की समस्या से पीडित है जिस वजह से वो अपनी मौजूदा स्थिति से बहुत निराश और असंतुष्ट है । अभी हमारी बातचीत चल ही रही थी कि मुझे किसी काम से बाहर जाना पडा जिसके लिए मुझे फेसबुक बंद करना पडा । मैंने निताशा को अपने किसी निजी काम से बाहर जाने का हवाला देकर फेसबुक को बंद करने की सूचना दे दी और साथ ही यह बोल दिया कि वह अपनी हकलाहट की समस्या और उसके कारण उसके जीवन में पैदा हुई मुश्किलों को विस्तारपूर्वक लिख कर मुझे मैसेज कर रहे हैं । फेसबुक बंद करते ही मैं सोच में पड गया यह प्लाॅट की समस्या के साथ जीवन गुजारना एक लडके के लिए अगर इतना मुश्किल है तो किसी लडकी के लिए कितना मुश्किल होगा । शायद निताशा की तरफ से मुझे कोई भी मैसेज नहीं आया । लगभग तीन सप्ताह गुजर जाने के बाद मैंने उसे मैसेज किया जिसमें ये लिखा कि आॅप्रेटिंग फ्री और मैं मेरे मैसेज भेजने के दो दिन के बाद निचार शाका जवाबी मैसेज आया जिसमें उसने लिखा आप मेरे जीवन के बारे में जानकर क्या करोगे? सभी हस्ते हैं, आप भी हंसना चाहते हैं । निताशा की तरफ से इस तरह का मैसेज आने से मैं हैरान रह गया और एकदम चुप सा हो गया । उसके मैसेज में एक तरह की शिकायत साफ झलक रही थी । समाज के द्वारा उसके साथ किए गलत पड ताव की तरफ इशारा कर रही थी जिस वजह से वह मुझे भी गलत समझ रही थी और अपनी समस्या मुझे बताने में इस की जा रही थी । मैं उसकी मानसिक स्थिति को कुछ कुछ समझ पा रहा था । इस वजह से मैंने उसकी सब बातों को एक तरफ कर उसकी मदद करने की ठान ले और उसे वापस पैसे क्या देखो । नताशा पहली बात तो ये कि मैं हकलाहट की समस्या को एक विषय के रूप में लेता हूँ और जैसा की तुम जानती हूँ विषय कोई भी हो उसे पूरी तरह से बढकर और उसको अच्छी तरह से समझकर उस पर आगे की कार्रवाई की जाती है । और दूसरी बात तुम अपने दिल से ये खयाल निकाल लो मैं तुम्हारी हकलाहट की समस्या का मजाक बना रहा हूँ । मुझे तुम्हारे साथ दिल से हमदर्दी है । शायद इसलिए क्योंकि जिस परिस्थितियों से तुम गुजर रही हूँ, मैं बहुत पहले ही खुद उस परिस्थिति से गुजर चुका हूँ । तीसरी बार हकलाहट की समस्या को जड से मिटाने के लिए मैं पहले उसकी चढो को ढूंढता हूँ । यानि मैं जिस किसी को हकलाहट की समस्या होती है और वो मुझ से मदद मांगता है । सबसे पहले मैं ये पता लगता हूँ उसी घबराहट की समस्या कब शुरू हुई और वह कौन कौन से कारण थे जिनसे उसके अतराहट की समस्या में बढोतरी हुई है । क्योंकि मेरा मानना है हकलाहट की समस्या का होना एक बात है और इस समस्या का बढना दूसरी बार और फिर समस्या चाहे कोई भी हो । जब उसके बढने के कारणों का पता चलता है तो समस्या का हल निकालने में आसानी हो जाती है । वो कुछ ऐसे काम करता है जैसे हमारे घर के नल में पानी नहीं आ रहा । एक बात है हमारे घर में नल में पानी हर रोज नहीं आ रहा ये दूसरी बात है । पानी लाने के लिए हमें पानी के न आने के कारणों का पता लगाना होता है और जब उसके कारणों का पता चलता है तो उन कारणों को समाप्त किया जाता है । हकलाहट की समस्या को हल करने के लिए मैं सबसे पहले उसके बढ्ने के कारण का पता लगाने की कोशिश करता हूँ और फिर उन के अनुरूप उन कारणों को खत्म करने की कोशिश करता हूँ । इसलिए नेता शाम तो मुझे अपना भाई मानकर या एक दोस्त मानकर अपनी समस्या के बारे में खुलकर बात करो तो भरी बातों में समाज या किसी व्यक्ति विशेष के प्रति शिकायत नजर आती है जिसका तो हमारे मन में बोझ है और शायद ये तुम्हारी हकलाहट की समस्या के बढने का कारण भी हो सकता है । अगर ऐसा कुछ है तो तुम उन की शिकायत मुझसे करके अपने दिल का बोझ हल्का करूँ क्योंकि ये तुम्हारी हकलाहट की समस्या को हल करने का एक रास्ता भी हो सकता है । मेरा मैसेज पडने के बाद निताशा ने जवाबी मैसेज भेजा जिसमें लिखा था कि वह मुझ से अपनी हकलाहट की समस्या और इस समस्या से होने वाली परेशानियों के बारे में बताने को सहमत है । परंतु इसके लिए उसे कुछ करना चाहिए और ये भी बताया गया की वह कुछ ही दिनों में मुझसे संपर्क करेगी । आखिरकार कुछ दिन इंतजार करने के बाद उसका जवाबी मैसेज आया । इसको पढकर मैं सन्न रह गया । मैं एक लडकी के जीवन में हकलाहट की समस्या से पैदा हुई परेशानियों के बारे में जितना सोचता था तो परेशानियाँ उससे कहीं बढकर थी । निताशा ने अपना ये मैसेज मेरी ईमेल आईडी पर भेजा था जिसमें उसने लिखा मेरा नाम निताशा धवन है । मेरी उम्र चौबीस साल है । मुझे घबराहट की समस्या बचपन से शुरू हो गई थी । परंतु इतनी छोटी सी उम्र में मैं हकलाहट हमसे बिल्कुल अंजाम थी । यानी हकलाहट क्या होती है मुझे बिलकुल पता नहीं था । हाँ, अगर कुछ पता था बस इतना कि मैं बोलते समय रूप चाहती हूँ । मेरे मुंह से कुछ आवाज नहीं निकल पाती जिस वजह से मैं अपनी बात पूरा नहीं कर पाती थी । अपनी बात पूरा करने के प्रयास की वजह से मेरा मूड और हो हर धराने लगते हैं, आंखे बंद होने लगती है और पूरा का पूरा चेहरा टेडा मेडा होने लगता है । जो भी मेरी ऐसी स्थिति देखता मेरे ऊपर हसने लग जाता । मेरे परिवार वाले मेरी ऐसी स्थिति पर चिंता व्यक्त करते थे परंतु तो मेरे ऊपर ज्यादा ध्यान भी नहीं देते थे । शायद इसका कारण ये था कि जब भी मुझे किसी डॉक्टर के पास ले जाते हैं और उसे मेरी समस्या के बारे में बताते हैं तो वह यह कहकर अपना पल्ला झाड देता । अभी आपका बच्चा काफी कमजोर है और सब उसी कमजोरी के कारण हो रहा है । धीरे धीरे उम्र बढने के साथ साथ सब कुछ सामान्य हो जाएगा । लेकिन ये बात मेरे ऊपर हटने वालों या मेरी समस्या का मजाक बनाने वालों को कौन बताए? मेरी सहेलियों को कौन समझाये कि मैं भी उन जैसी एक सामान्य लडकी हूँ । जब मैं पांचवी कक्षा में पडती थी, मेरी एक अध्यापिका मेरी हकलाहट का मजाक बनाने के लिए मुझे कक्षा में खडी कर दी और जानबूझ कर मुझ से कुछ न कुछ पूछती रहती है । और जब मैं हकलाने लगती तो पूरी कक्षा के साथ वो भी मेरे ऊपर हस्ते लगती । मैं कई बार उनके पास गई और उन्हें अपनी समस्या के बारे में बात की और उनसे आग्रह किया कि वो मेरे साथ ऐसा बर्ताव न करें परन्तु नहीं मानती और उल्टा मेरे को ही बोलती जा जाकर जिसको बोलना है बोल दे । मैं किसी से नहीं डरती हूँ । उस की ऐसी बातें सुनकर मेरा दिल करता था कि मैं उसका खून कर दो, उसे जान से मार दिया । मैं उसकी शिकायत अपने परिवार वालों से करना चाहती थी परंतु वो भी मुझे आज कल करते रहते हैं और झूठी तसल्ली देते रहते । अंत में मैंने स्कूल के मुख्य अध्यापिका से उसकी शिकायत करना ठीक समझा परन्तु अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से उनके पास जाने और उनसे बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई । एक्टेंड मैंने कागज पर आपने अध्यापिका के बारे में सब कुछ लिखा और उसके दफ्तर में जाकर उन्हें दे दिया । उन्होंने वो कागज पडा और मेरी तरफ देखने लगे । मैं उस समय हो रही थी । उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और मुझे चुप कराने लगे । उन्होंने चपरासी के हाथ संदेशा भेजकर मेरी उस अध्यापिका को बुलवाया और तुरंत ही उसे स्कूल से निकाल दिया । मुख्याध्यापिका के इस कदम से मुझे थोडा साहस तो आया परंतु ये साहब ज्यादा देर ना रह पाया क्योंकि मेरा ये स्कूल केवल आठवीं कक्षा तक था । आगे की पढाई के लिए मुझे नए स्कूल में जाना था और इस नए स्कूल में जाने के डर से मेरा हाल पागलो जैसा कर दिया गया था । मेरी मानसिक दशा को समझने वाला कोई नहीं था । मैंने अपने परिवार वालों से इस बारे में बात करना बंद कर दिया था क्योंकि मैं अकेली रह गई थी । नई स्कूल में मेरा स्वागत एक नई नाम से किया गया और ये नया नाम मेरी हकलाहट की समस्या को मद्देनजर रखकर छुकछुक रखा गया है । इस छुप छुप नाम से मेरी काबिलियत और होशियारी को ढक दिया गया । किसी को मेरी मानसिकता से कोई लेना देना नहीं था । सभी मेरे हकलाहट की समस्या के कारण मेरे साथ भद्दा मजाक करते थे, न एक लडकी थी शायद इसलिए किसी का मुकाबला नहीं कर पाती थी परन्तु फिर भी उन सब का डटकर विरोध करती । स्कूल में पडे मेरे छुकछुक नाम के कारण लडकों को मुझे छेडने और मुझसे बत्तमीजी करने का जैसे मौका समय जाता । मैं जहाँ भी जाती लडके मेरे साथ बदतमीजी करने लगते हैं । धीरे धीरे मेरा छुकछुक नाम सत्तर फैल गया और ये सब मेरी हकलाहट की समस्या के कारण था । मैं जानती थी इसमें मेरा कोई दोष नहीं है परन्तु में कर भी कर सकती थी । कहीं बार मैं अपनी जिंदगी से तंग आकर आत्महत्या करने की कोशिश की परंतु मैं कर नहीं पाई । शायद मैं इस दुनिया से लडना चाहती थी । अब जब की मेरी पढाई खत्म हो गई है, मेरे घर वाले मेरी शादी को लेकर चिंतित हैं लेकिन मैं शादी नहीं करना चाहती थी क्योंकि मैं जानती हूँ अगर मेरी शादी होगी गई तो ये ज्यादा देर तक टिकने वाली नहीं है । और मेरी शादीशुदा जीवन की इस नाकामी की वजह मेरी हकलाहट की समस्या ही होगी । और अगर ऐसा कुछ हुआ तो मुझे आत्महत्या करने से कोई नहीं रोक सकता । अब आप मेरी कुछ मदद करना चाहते हैं तो ठीक है वरना मैं तो अपनी जिंदगी किसी न किसी तरह गुजार ही लूंगी । निताशा की छोटी सी आत्मक आता नहीं, मुझे अंदर तक झकझोर दिया । निताशा के केस मुश्किल हकलाहट की समस्या को बढाने के लिए कसूरवार कौन था? क्या वो अध्यापिका जिसने बार बार उसका मजाक बनाया था या फिर उसके साथ पार्टी जिन्होंने उसका नाम छुकछुक रखा? निताशा की हकलाहट की समस्या बचपन से ही रुक जाती । अगर हमारे समाज की मानसिकता हकलाहट की समस्या के प्रति सकारात्मक होती । अगर समाज उसके हकलाहट की समस्या को अनदेखा कर उसके आगे बढने में उसका साथ देता तो आज समाज के साथ वह कदम से कदम मिलाकर चल सकती थी । परन्तु अफसोस बात ये है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ । अब सवाल यह उठता है कि अगर मैं उसकी कुछ मदद कर भी दो तो वह मेरे दिए गए कोर्स की सहायता से अपनी हकलाहट की समस्या पर काबू पा लेती है । फिर उसके घर वाले उसकी शादी कर भी देते हैं । तो क्या वो अपने भावी पति से अपनी पिछली जिंदगी छुपा पाएगी? लोग तो उसे छुकछुक का पति ही कहेंगे ना । और क्या पता उसकी पिछली जिंदगी उसके और उसके पति के शादीशुदा जीवन में दरार का काम करें और तलाक का कारण बने

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The Five W in Stammering यानी हकलाहट के पाँच "क" यह किताब हकलाहट की समस्या के विषय को समर्पित है । अपनी इस किताब में मैने पाँच "क" , क्या ,क्यों , कब , कहाँ , कैसे यानि हकलाहट की समस्या क्या है । हकलाहट की समस्या क्यों पैदा होती है । हकलाहट की समस्या कब पैदा होती है । हकलाहट की समस्या कहाँ सबसे ज़्यादा यां कहाँ सबसे कम पैदा होती है । हकलाहट की समस्या को कैसे क़ाबू में किया जाए । इन सबका वर्णन करने की कोशिश की है । और इसके साथ हकलाहट के जीवन पर आधारित कुछ लोगों की कहानियाँ हैं। इन कहानियों में से कुछ कहानियाँ काल्पनिक हैं और कुछ सत्य जीवन पर आधारित हैं। और यह सब कहानियाँ हकलाहट के पाँच " क " को ध्यान में रख कर लिखी गई है। और साथ में इनके ज़रिये यह बताने की कोशिश की गई है की हकलाहट की समस्या से जूझ रहे व्यक्ति के जीवन कौन कौन सी समस्याएँ आती हैं और इस समस्या को कैसे क़ाबू में किया जाए । Voiceover Artist : Ashish Jain Script Writer : Rohit Verma Rimpu
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