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This book is a compilation of short stories studded with several morals, thoughts filled with immortality and experience that should be passed on to every generation. The book will be eagerly sought after for its literary value as this is really a paragon of virtue. The compilation of many ingredients makes the book worthful so let’s taste with great relish. The title implies a strong connection between the permanent knowledge and reader’s mind. Based on reason , fact and logic, a great synchronization of radiance of different gems will make one’s life valuable. Voiceover Artist : RJ Bhagyashree Author : RK Dogra
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चॅू बारह महीने का राशन राम नगर में सूखा पडा था और फसल मारी गई थी । सभी लोग पिछले साल के बच्चे हुए अनाज से काम चलाने के लिए विवश थे । इन लोगों में बासुकी नामक गरीब किसान भी शामिल था । उसके घर में जो अनाज था वो केवल महीनों के लिए ही पर्याप्त था । उसकी चिंता बढती जा रही थी तो मैं सोच रहा था कि साल के आखिरी महीने में वो के परिवार का भरण पोषण इस तरह करेगा । उसकी पत्नी से उसकी चिंता देखी नहीं गई । उसने आकर बासुकी से पूछा कि वह किस बात को लेकर इतना परेशान है । बासुकी ने उसे सारी बात बताई । पत्नी पति की बातें सुनकर थोडी चिंतित हुई लेकिन उसने उससे कहा कि वह चिंता छोड दें और आप निश्चिंत रहे । कुछ ना कुछ प्रबंध हो ही जाएगा । धीरे धीरे समय बीतने लगा । बारह महीना भी गुजर गया । नए साल में मॉनसून अच्छा हुआ और पैदावार भी अच्छी होने की उम्मीद थी । बासुकी ने पत्नी से पूछा कि उसने ये चमत्कार कैसे क्या पत्नी ने उसे बताया की अनाज तो वास्तव में उतना ही था जिससे कि ग्यारह महीने तक पूरा परिवार भरपेट भोजन कर सके । लेकिन जिस दिन उसके पति ने अपनी चिंता उसे बताई । उसने उसी दिन से रोज मात्र एक मुट्ठी अनाज अलग निकालना शुरू कर दिया । एक मुट्ठी अनाज इतना कम था कि किसी को पता भी नहीं चला । लेकिन ग्यारह महीनों में ये बजट इतनी अधिक हो चुकी थी कि महीने में पूरे परिवार का भी आराम से भर गया । बासुकी ने ये बात सुनी तो दंग रह गया । उसे अपने पत्नी की समझदारी पर बहुत गर्व महसूस हुआ । सारांश धोडी से बचत भी गाडी समय में जीवनदायनी साबित हो सकती है । इसलिए छोटी बचत को मामूली नहीं । हमेशा बडा समझे । फॅमिली टाॅस, बेटावर, डॅालर्स वाइल्ड फॅस हूँ । चार्टर सिक्सटी टू ओंकार एक रास्ते के किनारे एक साथ रहता था । जो भी राहगीर उधर से गुजरता साफों से काट लेता तथा यात्री मर जाता था । सहयोग से उधर से एक साधु गुजरा । साफ साधु को भी काटने ही वाला था कि साधु ने सात से कहा पिछले जन्म के बुरे कर्मों के कारण ही तो ये साफ की जून मिली है । इससे पीछे कहाँ जाओगे जहाँ आप लोगों को काटना बंद कर दो । साफ लिख काटना बंद कर दिया तथा भविष्य में नहीं काटने का प्रण किया । साधु अपने रास्ते चला गया । कुछ दिनों पर शाह साधु लौटा तो स्थान पर पाउंट अटक गए साफ दिखाई नहीं दिया थोडा आगे बढकर नजर दौडाई थोडा आगे बढकर नजर दौडाई तो थोडी दूरी पर साफ अधमरा सा दिखाई दिया । साधु सबसे ये की हालत बना रखी है । था महाराज ई सब आप के कारण हुई । आपके निर्देशानुसार मैं किसी को काटे बगैर चुप चाप लेता रहता तो लोगों ने मुझ पर पत्थर मारने शुरू किए । मार सहते सहते मेरा यही हाल हो गया है । साथ हो मैंने तो काटने से मना किया परंतु आप अपने बचाव के लिए ओंकार तो मार सकते थे । मैंने फोन कार मारने से तो मना नहीं किया । सारा क्रोध तीन प्रकार के होते हैं जैसे के नाम से एक राज्य से बस सात्विक जैसे भोजन के तीन प्रकाश । यहाँ साधु ने सात्विक रोज के बारे में ज्ञान दिया । डर भी और हानि भी नहीं । चैप्टर सिक्सटी थ्री बाजी मारी । एक घोडे को जुकाम हो गया । उसका मालिक घोडों के डॉक्टर के पास गया तथा घोडे के लिए दवाई मांगी । डॉक्टर ने एक तोडिया पाउडर की थमा दी तथा समझाया कि ये पाउडर एक नली में भर कर घोडे को मुंह में रखकर जोर से फूटबाल देना दवाई पेट में चली जाएगी तथा घोडा ठीक हो जाएगा । अगले दिन घोडे का मालिक डॉक्टर के सामने हाजिर हुआ जो काम से मालिक का बुरा हाल था । ना आँखों से पानी बह रहा था तथा आवाज मारी गई थी । डॉक्टर ने पूछा कि ये क्या हुआ? इस पर उस मालिक ने बताया कि आपके आदेशानुसार दवाई नाली में डालकर तथा घोडे के मुँह में रखकर मैं फूक मार नहीं वाला था कि घोडे ने पहले ही फूक मार दी । दवाई घोडे के पेट में ना जाकर मेरे पेट में चली गई । तभी से मेरा ये हाल है । सारांश जीवन में भी कई अवसर आते हैं क्योंकि अक्सर हम आजकल आजकल करके खो देते हैं फिर बच जाते हैं । स्माइल स्माॅल ऍम चाॅस ऍम है वो ऍम सो ही फॅस ऍम रिकॅार्ड ऍम ऍफ किलोमीटर ऍम ऍम फॅस ऍम ऍम ऍम इस बात ऍफ फिनिशिंग लाइन टोमॅटो दे बोसॅन लिया ऍम भी इंडिविजुअल ब्रिलियंट ऍम युगल रूप वाली ऍम कमेंट ऍम प्लेटिंग ऍम कॉम्पिटेंसी फॅार कोर्ट कॉम्पिटेंसी बोलिंग ऍम नवग्रह वापस ऍफ आई संघर्ष एक व्यक्ति जंगल में लकडी तोडने गया । पेड पर उसे रेशम के केरे का कुकून देखा । कुकून के ऊपरी भाग में एक छह दिख रहा था था । वो कीडा अच्छे से बाहर आने के लिए कडी मेहनत कर रहा था । कुछ देर बाद उसने प्रयत्न करना छोड दिया । शायद थक गया हो । उसने केले की सहायता करने की सोची । जेब से चाकू निकालकर शेष कुकून को काटते का कीडा बाहर आया तो पाया कि इसका शरीर बेडोल है । उसके पंख भी छोटे तथा कमजोर है, वहाँ की है । उडना सका तथा असहाय ढंग से देखने के सिवा कुछ नहीं कर सका । जबकि दूसरा कीडा संघर्ष करके बाहर निकला तथा उड गया । अब वो आदमी सोचने लगा कि दया वर्ष उसने जल्दबाजी की है । अब वह समझा कुकून का उस छेद से निकलने का संघर्ष कीडे के पंखों को मजबूत बनाने का प्रकृति का एक उत्तम तरीका है । इस संघर्ष में शरीर का द्रव्य पंखों तक पहुंचता है । अंक मजबूत होते हैं जिसके कारण कुकून से मुक्त होने पर केडे को उडने की शक्ति मिलती है । सारांश मनीष जीवन भी इसी प्रकार का है । इसके संघर्ष, वक्त, परेशानियाँ अर्थ ही नहीं है । हर विपरीत होने वाली घटना के पीछे हमारा ही थी, होता है । अज्ञानता के कारण हम घटनाओं को समझ नहीं पाते । एक्सॅन योगा, मेक और बॉडी ब्लॅक, रिलेशन टू टोन, आॅडी ऍम समय का देखता रोम में समय के देखता के चित्र में दर्शाया गया है कि उसके आगे की ओर बालों का कुंडल है और पीछे से बिल्कुल साफ है । इसीलिए समय को समय रहते सामने से पकडो अन्यथा कुछ भी हाथ नहीं आएगा । फिर से ऍम चाचर सिक्सटी सिक्स आत्मबल बात बहुत पुरानी है । एक जवान लडकी बाजू ऊपर करके अंगडाई ले रही थी कि अचानक उसके बाजु ऊपर ही रह गए । बहुत प्रयत्न किया परंतु बाजू नीचे नहीं आए । वेदों व कई जानकारों को दिखाया । बातों बातों में पता चला कि अमुक गांव में गुडिया बहुत गुरु वाला वह समझदार है । वो कुछ कर सकता है, मरता क्या न करता । एक तौर जाती दूसरे शादी को थोडे दिन शेष गुडी को मिले । अधीर उमर देखते ही समझ गया तथा बोला चिंता ना करें परंतु ठीक करने के दो हजार रुपए पहली शर्त तथा दूसरी शर्त की लडकी का इलाज बंद कमरे में करूंगा । चाहे ठीक है । वह चिल्लाए, उसकी सहायता मेरा विरोध करने कोई नहीं आएगा । सब मान गए । लडकी को अंदर करके अंदर से गुडी ने चिटकनी लगा दी । बाहर लोग सोच रहे थे के अंदर क्या हो रहा है । पर अंदर गुडिया ने लडकी की थोडी ऊपर उठाए तथा कहा क्या संदर्भ चेहरा है तथा क्या छरहरा बदल रहे हैं । दिल करता है कहते कहते गले से चुन्नी खींच ली । लडकी बेवसी देखती रही । बाजों पर थे ही वो लडकी की कमी को ऊपर उठाने का उपक्रम करते हुए कहने लगा राम कसम आज तो जीवन का आनंद आ जाएगा । परंतु ये क्या? लडकी ने पूर्ति से इस गुडिया को पकड लिया तथा कहा कि जीवन का आनंद तो मैं तो में अब दिखाउंगी तो भी गुडियां बोला बेटी आपका काम हो गया । आप ठीक हो गई हो वो दोनों हस्ते हस्ते बाहर आया हूँ । लडकी बिल्कुल ठीक हो गई थी वो दो हजार भी उसने लडकी को दे दी तो सारांश अपनी सोई हुई शक्तियों को जगह और सारा संसार आपकी जेब में मादा हिरण अपने बच्चे के लिए शेर से टक्कर लेकर बच्चे को छोडा भी लेती है । हम तो इंसान हैं । आसमान पर नजर सीढियाँ बनी है । उनके लिए जान छत पर जाना है । आसमान पर हो जिनकी नजर उन्हें तो रास्ता खुद बनाना है । ऍम शमादान जापान में एक राजा रहता था । उसे चीनी मिट्टी के फूलदान इकट्ठे करने का बडा शौक था । उनमें देश विदेश के देश कीमती फूलदान भी थे । देखभाल के लिए बीस कर्मचारी भी लगा रखे थे । एक दिन सफाई के दौरान एक कर्मचारी के हाथ से एक फूलदान टूट गया । बात राजा तक पहुंचे । आगबबुला राजा दौडता हुआ उस कक्ष लगाया और फूलदान तोडने वाले कर्मचारी को पेश करने को कहा । बूढा सेवा करते हुए उपस् थित हुआ और माफी मांगने लगा । राजानी सेवक को सुने बगैर ही मौत की सजा सुना दी तथा कहा इस दंड से बाकी की सेवक अपने अपने काम के प्रति सजग रहेंगे । बूढी सेवक ने सारी बात सुनी । उसके बाकी साथी उसे बेवस होकर देख रहे थे और फुसफुसा रहे थे कि कल को गलती हमसे भी हो सकती है । राजा को इतना कठोर दंड नहीं देना चाहिए । इनकी सोच का संदेश बूढे सेवक ने भी सुना । इससे पहले कोई कुछ समझ पाए, उसी सेवक ने टावर तोड बाकी के बचे उन्नीस फूलदान भी तोड दी । राजा मंत्री दरबारी वाणी सेवक देखते रहे गए । गुस्से तथा शरीर राजा ने पूछा की तो मैं ऐसा क्यों किया? बूढे सेवक नहीं जवाब दिया । मेरा मारना तो तय है परंतु बाकी के फूलदान तोडकर बाकी की उन्नीस साथियों की जान बचाई है । राजा ने बूढी सेवा के साहस वह समझ की प्रशंसा की और उसे छोड दिया । सारांश राजा समय क्रोध ना करके धैर्य से काम नेता तथा बूढे को शमा कर देता तो बाकी की उन्नीस फूलदान से हाथ न गँवाता । जो काम करता है गलती भी उसी से होती है । अतः बिना विचारे जो करे सो पांच छे बचता है काम बिगाडे आपना जगह में होता साइड ठंडक अभी नहीं । कितनी भी प्रचंड क्यों ना हो पेड को तने तक ही जला सकती है । परंतु पानी कितना भी ठंडा क्यों ना हो वो उसी छूट करने को जड से उखाड देखता है । चक्कर सिक्स एट बच्चे महान आत्माएं चीन में एक शिक्षक था । वो बच्चों को बडे प्यार, लगन, ईमानदारी से पढाता था । जब भी वो कक्षा में प्रवेश करता तो बच्चों की ओर मु करके दोनों हाथ जोडकर बस्तर झुकाकर प्रणाम करता । सभी हैरान होते की ये शिक्षक ऐसा क्यों करता है । अंत में किसी शिक्षक ने उस शिक्षक से पूछ लिया कि आप इन बच्चों को प्रणाम क्यों करते हो? वैसे तो उन बच्चों को चाहिए कि आपको सादर प्रणाम करें तथा अब से आशीर्वाद प्राप्त करें । इस पर शिक्षक ने बताया मैंने जो बनना था बन चुका हूँ । जहाँ पहुंचना था, पहुंच चुका है । मेरे सामने जो बैठे हैं, कोई महान वैज्ञानिक है, कोई महान डॉक्टर, कोई महान नेता व कोई महान दार्शनिक तथा अनेक महान आत्माएं हैं जो कि कल का भविष्य है । अतः मैं तो उन महान आत्माओं को सर झुका का नाम न करता हूँ जो इन बच्चों में है । कल को यही बच्चे महान वैज्ञानिक की दर्शन एक डॉक्टर शिक्षा को वसंत त्यारी बनेंगे । मेरी ऐसे आचरण से इनमें आत्मबोध की भावना भी बन देगी । सारांश आओ सभी प्रणली की आज से हम भी बच्चों को अपने पढाई कभी भी दुनिया तो का संबोधन नहीं करेंगे तो या तुमसे वे अपने आप को ही मत उच्च समझने लगते हैं । अच्छे आचरण बच्चे संबोधन से अच्छे विचारों, बडप्पन की भावना को पनपने दें । आप भी बच्चों को संबोधन के साथ जी अवश्य लगाएं । बच्चों को वो आप कोई गलत अनुभूति होगी । मित्रता दो पानी की मित्रता तो टूट है और जब जाहिर है दूध को जब गृहणी ने आग पर रखने से पहले उसमें पानी डाला तो दूध में पानी को अपने सारे गुण दे दिए । दूर जब गर्म होकर जलने लगा तो पानी ने दूध को नहीं चलने दिया बल्कि स्वयं जला और जलकर भाव बनकर बाहर को जाने लगा तो उसकी जुलाई दूध से नहीं सही गयी । वो भी अपने मित्र के पीछे बाहर निकलने के लिए झलने लगा । गिरनी ने जब दूध में पानी का छोटा दिया तो पानी को पारकर दूध शांत हो गया । सज्जनों की मित्रता ऐसी ही होती है हूँ चैप्टर सिक्सटी नाइन दृष्टिकोण कुछ तथ्य आधा ग्लास को देखकर उतर नकारात्मक गिलास आधा खाली है । सकारात्मक गिलास आधा भरा हुआ रचनात्मक ग्लास पूरा भरा हुआ है । आधे में से पानी तथा बाकी आधे में हवा है । महात्मा गांधी से कुछ लोगों ने शिकायत की कि आश्रम का एक व्यक्ति शराब खाने में शराब बीते देखा गया । लोग इस बात की हंसी उडा रहे थे । खद्दरधारी व्यक्ति शराब पी रहा है । इस पर गांधी जी बोले, सकारात्मक, यह तो बडी प्रसन्नता की बात है कि शराबी व्यक्ति हुई खद्दर पहनने में रूचि ले रहा है । आज उसने खादी कपडे पहनना पसंद किया है तो कल शराब छोडने का विचार भी उसके मन ने पैदा हो जाएगा । जिसमे अच्छाई को पकडना वा ग्रहण करना आरंभ कर दिया है । वह ज्यादा समय तक बुराई को पकडे वह धारण किए नहीं रह सकता । एक इंटरव्यू में प्रश्न पूछा गया आप सैल के लिए गए हैं और सैर करते समय आप एक तालाब के पास पहुंचते हैं । शाम का समय है । तालाब के किनारे एक लडकी नंगी नहीं आ रही है और आप शेयर करते उधर से गुजरते हैं तो आप क्या करोगे हूँ? उत्तर नकारात्मक मैं चुपचाप आंखें नीचे के चलाऊंगा । दूसरा आदमी मैं पीछे मुड आऊंगा । तीसरा आदमी मैं खासकर सावधान कर दूंगा । इसी तरह और भी उत्तर आ जाते हैं । सकारात्मक मैं आगे बढकर उसको बोध में उठाकर पूछूंगा की आप इस समय अकेले यहाँ कैसे हैं । आप के माता पिता कहा है सारांश हमारी सफलता और असफलता हमारे दृष्टिकोण पर ही निर्भर है । जब हमारे दृष्टिकोण में असफलता विराजी है तो सफलता कहाँ से आएगी? अच्छा अपने दृष्टिकोण में सभी विचार सकारात्मक ही रहें । जैसे कि मुझे पास होने की आशा है, मुझे सफलता जरूर मिलेगी । मैं संभव को भी संभव बना सकता हूँ । स्वर्ग गिरी स्वर्ग पाना है तो मरना पडेगा । बहुत मेहनत करो यानी की इतनी मेहनत करो और वो भी तन मन धन से की हालत मर जाने जैसी हो जाए तो स्वत ही स्वर्ग मिल गया । ऍम चक्कर सत्तर चिंता बस स्टॉप पर एक हट्टा कट्टा व्यक्ति बडी अकड के साथ बस में चढता है । कंडक्टर के टिकट पूछने पर बोला पीटर बस में टिकट नहीं खरीदता । नया कंडक्टर सकपका गया तथा बेबसी से आगे बढ गया यह रोज का काम था । कंडक्टर की उलझन बढती गई और वह चिंता में घुलने लगा । पीटर हीटर, हीटर, हीटर के नाम सुनते ही उसका तनाव बढ जाता करे तो क्या करे? एक जन मन में विचार आया क्यों ना मैं भी अपने शरीर को पीटर की तरह बनाकर पीटर को ललकारो । अतः शारीरिक बयान से कंडक्टर का आत्मविश्वास बढा । एक दिन हर रोज की तरह पीटर चढा तथा कहा पीटर बस में टिकट नहीं खरीदता । अब कंडक्टर ने आंखों में आंखें डाल अकडकर पूछा क्यों नहीं खरीदता? पीटर क्योंकि ये पास जो है उसने पास दिखा दिया । कंडक्टर आंखे नीचे किए आगे बढ गया और सोचने लगा क्या इसी को चिंता कहते हैं इसीलिए मुझे तनाव में डाल रखा था । सारांश यदि उलझन का समाधान हो तो चिंता नहीं करनी चाहिए और यदि उलझन का समाधान न हो तो भी चिंता नहीं करनी चाहिए । चिंता करने से कोई लाभ नहीं क्योंकि चेता तो मुर्दे को चलाती है परंतु चिंता जिंदे को ही जला डालती है । चिंता चिंता वाकी कीजिए जो अनहोनी हुई तो नहीं तो हो कर रहे अनहोनी ना हुई तो

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This book is a compilation of short stories studded with several morals, thoughts filled with immortality and experience that should be passed on to every generation. The book will be eagerly sought after for its literary value as this is really a paragon of virtue. The compilation of many ingredients makes the book worthful so let’s taste with great relish. The title implies a strong connection between the permanent knowledge and reader’s mind. Based on reason , fact and logic, a great synchronization of radiance of different gems will make one’s life valuable. Voiceover Artist : RJ Bhagyashree Author : RK Dogra
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