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धन नहीं तो क़द्र नहीं Producer : Kuku FM Voiceover Artist : maya Author : Sukhendra Kumar Pandey Voiceover Artist : Maya S Bankar
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आज सुन रहे हैं फॅमिली नहीं । जो मन चाहे धन नहीं कदर नहीं लेखक सुखेंद्र कुमार पांडे है, धन के मालिक बनो । जिस प्रकार मनुष्य के मन के संबंध में जो संतों ने कहा है कि मान के मालिक बनो, उसके गुलाम नहीं, उसी प्रकार धन के संबंध में भी यही बात लागू होती है । लेकिन आज के आधुनिक समाज में ठीक उल्टा हो रहा है । वितरीत हो रहा है । मनीष धन का गुलाम बना हुआ है । वो धन के पीछे भाग रहा है । मेरे कहने का तात्पर्य ये हैं कि धन उतना ही अर्जित करना चाहिए जिससे रात में सुकून पूर्वक नींद आ जाये । उस धन की रक्षा करने के लिए नींद चली जाये, बेचैनी हो तो इसका यही अर्थ है कि आप धन के गुलाम बन चुके हैं । जबकि धन के संबंध में ये बात सही है कि जिस धन से परिवार में कलह हो, जब तीसरे खून से रहे, उसकी रक्षा करने के लिए चिंतित ना हूँ, वहीं धान सही है । धन के संबंध में आपको एक छोटी सी कहानी बताता हूँ हूँ । एक राजा अपने मंत्री के साथ राज महल के बगीचे में टहल रहा था । थोडी ही देर में कुछ दरबान दौडते हुए राजा के पास आए और उन्होंने कहा कि महल के एक छोर में भीषण आग लग चुकी है जिसे जल्दी से न बुलाया गया तो सारे राज महल को ये आप जलाकर यागकर देगी लेकिन राजा के माथे पर कोई शिकन तक नहीं आई और ना ही वह जरा भी डगमगाया बल्कि जिस साल से वो बगीचे में पहल रहा था उसे चार से मंत्री से बात करने लगा । मंत्री अचंभित हुआ, राज महल में आग लगी है और जाजा की चाल में जरा भी परिवर्तन नहीं आया । नहीं आग लगने की वजह से वो चिंतित ही हुए हैं । तो उसने हिम्मत करके राजा से पूछा कि राज में चल रहा है और आपको कोई फर्क नहीं पड रहा? राजजीत राजा ने उत्तर दिया, जो राज में जल रहा है उसकी जिक्र क्या करना, जब वह जल्द ही रहा है तो उसे जलने दिया जाए । आज अपने पुरुषार्थ से कई राज महल तैयार हो जाएंगे लेकिन इस वजह से मैं अपनी चाल के मतलब धान तो आता जाता रहता है । फिर किस बात की चिंता और ऐसे धन की क्या आवश्यकता जिससे मन की चाल बदल जाए उसका गुलाम हुआ जाएगा । ये कहानी एक सूचक कहानी जब बताती हैं कि मनुष्य को धन का मालिक होना है न कि उसका गुलाम जिससे उसके व्यवहार में कोई परिवर्तन ना आए । लेकिन हमने बहुत से लोग ऐसे हैं किसी ने धन के मिल जाता है, उनकी चार ही बदल जाती है । वह कर जाते हैं जिससे साथ पता चलता है कि उसे धन का अभिमान हुआ है । वो धन की गिरफ्त में आ चुका है । जब की जो धन मिला है वो एक साधन के तौर पर है जिससे वो अपना जीवन यापन कर सकता है । लेकिन जरा धन के मिला ठीक ढंग से लोगों से बात तक नहीं करते । लोग और ये पता होना चाहिए कि जो धन आज मिला है कल वो खुद ही सकता है । लेकिन थोडी देर के लिए उसे ऐसा अभिमान हो जाता है कि मुझ से बडा कोई नहीं । वो दूसरों को पैसे से बोलने लगता है, उसकी आकाश बताने लगता है जबकि ये सब कुछ मूर्खतापूर्ण कार्य हैं । थोडा अगर धन के संबंध में विचार करें तो पता चलेगा की अंतिम समय में धन का नहीं आता है जिसके लिए उसने जिंदगी भर इतनी मेहनत की है और अंत में पछतावे के सिवाय कुछ नहीं बचता और वो सोचता है कि नाहक उम्र भर परेशान रहे । मेरे साथ नहीं जाएगा । उसके लिए लोगों से संबंध तोडे गए और वह यही सोचते हुए मैं जाता है । इसीलिए मैं आपसे मात्र इतना ही कह रहा हूँ कि धन उतना ही अर्जित की जितनी की आपको जरूरत है । आप उसके मालिक बन सकूँ । मैं दिन रात उसकी फिक्र में लगे रहो । रातों की नींद चली जाए, परिवार में कलह हो जाए तब फिर ऐसे दिन का कोई महत्व नहीं जिसके कारण आपका जीवन दुर्भर हो जाए । भारतीय विश्व के हर देश में ऐसा नहीं की जिसके पास धन नहीं है वे ही लोग आत्महत्या कर रहे हैं । जिनके पास आवश्यकता से अधिक धन है वो लोग भी आत्महत्या कर रहे हैं या मारे जा रहे हैं जिसका मूल कारण यही धन है क्योंकि धन कमाया और गुलाम बन गए जिसकी वजह से सामाजिक द्वेष उत्पन्न हो गया और मनुष्य का जीवन दुर्भर हो गया । लोग धन की प्रतिस्पर्धा इसीलिए करते हैं कि वह दूसरों को नीचा दिखा सकी की कोई उनकी तारीफ करें कि उनके पास बहुत धन है, वो बडा आदमी है । इसी कारण जीवन में बहुत सी परेशानियां बिना बुलाए ही आ जाती हैं । इसके साथ साथ धन की प्रतिस्पर्धा करने का मूल कारण ये भी है कि लोग एक दूसरे से जलने लग जाते हैं । जब मैं खुद ही पॉलिटेक्निक कॉलेज में था । वहाँ एक प्रोफेसर जिनका नाम श्री आरके श्रीवास्तव था वहाँ में शाम उसे ही बात कहते थे । इन लोगों के जलन का कारण ये है कि मुझे इस बात का गम नहीं है कि मेरे पास स्कूटर है । मुझे इस बात का दुख है कि उसके पास कार है । इसी जलन की वजह से लोग आवश्यकता से अधिक कमाएँ चले जा रहे हैं थे । उसके बाद तकलीफ में पड जाते हैं कि इस धन का कहाँ उपयोग करूँ, क्या करूँ, किसे कह भी नहीं सकते कि इतना धन कमा लिया है । बडे बेटे रहते हैं । ये धन कमाने का सही तरीका नहीं । धन कमाने का सही तरीका ये हैं कि जीवन में वही धन उपयुक्त हैं । स्वयं या दूसरों को काम आ सके । जिंदगी सुकून से गुजर बसर हो सके, लेकिन बहुतों को धन कमाने कि आदित्य पड जाती हैं पर उसे खर्च नहीं कर पाते । दिन रात इसी गुणा गणित में लगे रहते हैं कि दो का चार हो जाए, चार का आठ गुना हो जाए । बस इसी गणित में लगे रहते हैं और धन कमाने की चाह में आदमी खुद के साथ साथ दूसरों को भी भूल जाता है । इसलिए आज से कह रहा हूँ कि धन के मालिक बनो, गुलाम नहीं क्योंकि जिंदगी में बहुत थोडे लोग ही धन पाकर सुखी हो जाते हैं । वो लोग जो धन के मालिक है बाकी तो बडी तकलीफ में जी रहे हैं जो धन के गुलाम बने बैठे हैं । मैं धन कमाने के खिलाफ नहीं कि बिना धन कमाए खाली हाथ बैठे रहूँ । मैं आपसे बस इतना कह रहा हूँ कि धन चाहे आप जितना कमाएँ, उसे कोई गुरेज नहीं । बस ये सोच कर कि आप इसके मालिक है और इसकी फिक्र न करनी पडे कि धन आपको न जाएं बल्कि आप धन को नहीं चाहिए, उसका साधन के रूप में उचित सदुपयोग कर सके ।

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धन नहीं तो क़द्र नहीं Producer : Kuku FM Voiceover Artist : maya Author : Sukhendra Kumar Pandey Voiceover Artist : Maya S Bankar
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