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Transcript

01 हौसला -लाली

आप सुन रहे हैं तो कोई ऍम किताब का नाम है । हौसला इसके लेखक है श्री मनमोहन भाटिया । आर्चे मनीष की आवाज में कोई ऍम सुने जब मन चाहे लाली नाम रामलाल उम्र साठ पुराने बाजार में किराने की छोटी सी दुकान चलाते हैं । आपने गुजारे के लिए कमा भी लेते हैं और थोडा सा भविष्य के लिए बच जाता है । दुकान पर सब लाला कहते हैं और नाम लाला पड गया । उनकी धर्मपत्नी भी उन्हें लाला कहकर पकाती है । पत्नी का नाम रामपति जब पत्नी लाला कहती है तब लाला ने पत्नी को लाली कहकर पुकारना शुरू कर दिया । वर्षों से आपको चक के लिए लाला और लाली बन गए तो दोनों का शांत हो । खाली समय भक्ति में व्यतीत करते हैं । लाली देवर के बेटे चिंटू को बहुत अधिक प्रेम करती है । एक साथ रहते हैं । अपनी हालत ना होने पर सारा प्रेम और वात्सल्य चिंटू पर बनाता है । लाला और लाली दोनों के भाई बहनों के तीन तीन चार चार बच्चे हैं । बस लाला और लाली निःसंतान रह रहे लाला ने अपना उत्तराधिकारी चिंटू को घोषित कर दिया और भाई दोनों के प्यार से चिंटू बिगडैल बच्चा बन गया । पढाई में ध्यान लगता नहीं है । जैसे तैसे बारह जमात पड गया । तैंतीस प्रतिशत अंक लेकर तो फूला नहीं समा रहा है । लाला ने उसे दुकान पर बिठा दिया । फिल्म देखना यार के साथ घूमना यही दिनचर्या चिंटू की हो गयी । दुकान पर एक आध घंटा मुश्किल नहीं रहता है । एक दिन लाली ने लाला कोटोकी दिया लाना चिंटू सारा दिन तो यारों के साथ घूमता रहता है । दुकानदारी कर सीखेगा निकलेगा । लाली अच्छी उम्र है, धीरे धीरे दुकान में भी रह जाएगा । शुरू में ऐसा ही होता है । लाला ठीक है परन्तु आप तो एक साल भी दिया । चिंटू को दुकान जाते हुए मुश्किल से एक आठ घंटे दुकान पर दिखता है । मुझे उसका लक्षण सही नजर नहीं आ रहे । फॅमिली सब ठीक हो जाएगा । खेलने की उम्र है । उन्नीस का तो मुश्किल से हुआ है । दिल नहीं देते हैं । तीन धीरे दुकानदारी के सारे गुण से खाते हैं । ये लाला का प्यार है, जिसमें चिंटू को खुली छूट दे रखी है प्यार और छूट का । चिंटू ने खूब लाभ उठाया, लेकिन दुकान बंद करने के बाद लाला घर के लिए निकले । दुकान से घर की दूरी कुछ खास नहीं । लाला पैदल ही कर जाते हैं । रास्ते में लाला को बेचैनी महसूस हुई और पैदल चलने में दिक्कत होने लगी । लाला सडक के किनारे पिछले के खम्बे को पकडकर खडे हो गए । रिक्शेवाले ने डाला को बेचैन देखकर रिक्शे पर बैठने को कहा । लाला रिक्शे पर बैठा हूँ घर छोड देता हूँ । रिक्शेवाला लाला की दुकान का सामान ग्राहकों के घर छोडने का काम भी करता है जिस कारण रिक्शेवाला लाला को पहचानता है डाला रिक्शे पर बैठ गए लाला उठो घर आ गया । घर के नीचे रिक्शा खडा करके रिक्शा वाले ने लाला से कहा आई छुट्टियाँ चलने की हिम्मत नहीं हो रही है तो सहारा देकर ऊपर घर तक छोड दो । रिक्शेवाला लाला को सहारा देकर सीढियाँ चला रहा है और आवाज देकर कहने लगा लाले, आज लाला की तबियत ठीक नहीं है । डॉक्टर को घर बुला लो । हालांकि बिगडी तबियत एक लाली घबरा गई । टिंटो घर में नहीं था, वो सिनेमा देखने गया था । लाली ने लाला को पानी दिया । उसने रिक्शा वाले से डॉक्टर को घर बुलाने को कहा । लाला स्तर पर लेकर लाला की पहचानी अधिक हो गई और उसने दम तोड दिया । रिक्शा वाला डॉक्टर को बुलाकर अपने साथ ले आया । डॉक्टर ने लाला की मृत्यु पर मुहर लगा दी । घर में हाहाकार मच कर सभी नजदीकी रिश्तेदार एकत्रित हो गए । चिंटू का कोई अता पता नहीं था । मित्र जंग सिनेमा देखने गया था । रात एक बजे घर लौटा । लडखडाते चिंटू को देखो । उसकी माँ उसको अंदर ले गई की हालत बना रखे हैं । स्तर पर रहते हुए चिंटू ने कहा क्या वहाँ लाला मर गया और तेरा कोई अता पता नहीं कहाँ मटरगश्ती कर रहा था । कर के सो जाओ । सुबह कोई नाटक नहीं होना चाहिए । उसकी माँ ने उसके हाल पर पर्दा रख दिया तो अगले सुबह लाला का अंतिम संस्कार कर दिया । लाला की मृत्यु के पश्चात लाली ने चिंटू को दुकान संभालने के लिए बेमन जिंडो दुकान पर बैठ तो गया लेकिन उसका मन उसके दोस्तों के साथ घूमने में लगता था । दुकान चलती बंद कर के दोस्तों के संग सिनेमा देखने निकल जाता है और फिर दारू पीने जाता । एक तरफ दुकान चलती बंद करने के कारण बिक्री बढ गई । दूसरी तरफ मौज मस्ती पर रुपए खर्च होने लगे । चिंटू ने लाली के हाथ में रुपये रखने बंद कर दिए हैं । अब दुकान की सारी कमाई वो स्वाइन की मौज मस्ती पर उडाने लगा । एक दिन ऐसे ही सुबह के समय उठा लाली ने चिंटू से अपने देवर देवरानी के सामने दुकान के बारे में बात की लाली चिंटू अब दुकान पर पूरा ध्यान दिया करो । कैसे लालच किया करते थे । अलसाई हालत में फॅमिली फॅार बचाना शुरू कर दिया । लाली दुकान चलती बंद कर देते हो घर में रात को एक बजे से पहले आती नहीं हूँ । मेरे हाथ में रुपये रखते नहीं हूँ । अखिल दुकान की कमाई का करते क्या हो? खाली की बात सुनकर देवर देवरानी थोडे नाराज हो गए । लाली बच्चा खेलने के दिन सब ठीक हो जाएगा । दुकान जा रहे और संभाल भी तरह माँ बाप के समर्थन मिलता है । टेन टू का हौसला दोगुना हो गया । थोडे दिन बाद उसने लाली को रुपये देने एकदम बंद कर दी है । खर्च बंद होने पर एक दिन उसका फैसला और सब्र जवाब दे रहे हैं । लाली रात को चिंटू के आने का इंतजार कर रही थी । लगभग दो बजे शराब के नशे में धुत लडखडाता हुआ । चेंज तो आया लाले अब तो शराब पीने लगाए । उन्होंने अपनी क्या हालत बना रखे हैं, अपने आप खडा भी नहीं हो सकता है । चिंटू कौनसा तेरह आपके कमाई से पे रहा हूँ खुद का मानता हूँ मैं मुझे रूपये देता नहीं सब शराब में उडा रहे । शायद नहीं आती तो तो वो कितने मर रहे भरपूर खाना मिल रहा है । रहने की जगह भी है और क्या चाहिए? बुढिया तुझे एनसीपी ने भी नहीं दे दी । जलज फॅमिली को चाहता है पतली दुबली लाली गिर पडी । लाली ने शोर मचा रहा अब तो मुझे मारने लगाए हूँ तो करते हैं पर देवरानी भी उठ गए । दोनों एक फर्म लाली रात को सोने भी नहीं दे रही । शोर मचा रखा है । प्लानिंग चिंटू को देखो और संभाल लोग इतनी छोटी उम्र में रोज शराब पीता है । दुकान के इस कमाई शराब में उडा रहे । मुझे रुपये नहीं देता हूँ । ऐसे तो खजाने भी खत्म हो जाते हैं । देवरानी लाली तो खजाना मध्य अपनी उम्र देख क्या बानकर ऊपर ले जाएगी? लाली राम राम राम क्या कह रही है तो लाला ने मेहनत करके दुकान बनाई । पूरे बाजार में लाला के नाम से दुकान चलती है और चिंटू लाख के नाम पर बट्टा लगा रहा है । देवरानी बढिया तो चुप कर जा, तेरे को भूखा नहीं मारेंगे । हम चिंताओं से सब हिसाब लेते हैं तो चिंटू को खाता पीता नहीं देख सकती । देवर तो जाकर सोचा इसका होना तो खत्म नहीं होगा । देवरानी चलो तमाशा देखने में मजा आ रहा है । नहीं खराब करदी बढिया रहेगा ना खुद होती है ना हमें सोने दे रही है । चलो कमरे में मेरा क्या देख रहा हूँ । सभी अपने कमरे में चले गए । लेकिन लाली चुप चाप वहीं फर्श पर लेटी आंसू बहा दिया पर लाला को याद करते रहे । लाला तो मुझे अकेला छोड गए । साथ ले जाते हैं फॅार लाली घटनाओं पर अवलोकन करती रही और सुबह अपनी सोच नहीं थी । खुद कहाँ और कपडे का पूरी रात चलती रहे । सुबह उठकर देवर देवरानी लाली पर भडक पडे लाली ये नौटंकी बंद कर लाला ने खुद दुकान चिंटू को दिया । अब उसकी मर्जी जैसे दुकान चला दो वक्त की रोटी मिल रही है । भूख ही नहीं मारेगी । पहली चुपचाप उठकर अपने कमरे में चले गए । चुप चाप स्तर पर लेते हुए दीवार को देखते रहे हैं । अगला वाला को याद करते हुए बडबडाती रहे हैं । किसी निराली की सुन नहीं उसने दो दिन तक कुछ नहीं खाया तो आप अपना शरीर कमजोर पहले ही था । अब उसमें जान भी नहीं रही है । लगभग बेहोशी की हालत में लाली बडबडाए जा रहे थे । लाली की बिगडी तबियत देखकर देवर देवरानी के होश उड गए । किसी पूरियाँ टपक गई तब उनके माथे सारा दोष माना जाएगा । डॉक्टर को बनाया गया डॉक्टर ने फौरन अस्पताल में भर्ती करवाया । नली द्वारा तबाह और खाना दिया गया । दो दिन बाद लाली की तबियत स्थिर हूँ और लाली करा है । घर में देवर देवरानी लाली पर कर्म हो गए । लाली भूखी रहकर हमें धन के मतलब हम तो भारी इन हरकतों से डरने वाले नहीं तो दिन अस्पताल में पैंतीस हजार रुपए का मिला गया । कोई खबर है कि नहीं, रुपए कौन भरेगा? फॅमिली कुछ नहीं बोले, बस दोनों का मुद्दा दे रहे हैं । देवर बोल मेरा मूड क्या देख रही है । बोल अस्पताल का बिल कौन भरेगा? लाली जबसे लाला मारा है मुझे कितने रुपये दिए और कितने अपने पास रखें, मुझे नहीं मालूम हूँ । कुछ बस इतना मालूम है कि पिछले दो तीन महीने से एक छोटा रुपया नहीं दिया तो आपकी सारी कमाई तो हूँ मुझे चिंटू की चिंता इस छोटी उम्र में इतना शराब पीना अच्छी बात नहीं है । उसे समझाओ हूँ । मेरी फिक्र करना छोड दूँ । बस एक काम करता हूँ । कुछ हरिद्वार की बस में बिठा दो और थोडे रुपये थे तो अब बच्चे दिन हरिद्वार में प्रभु का चिंतन करोगे वरना तो चक्कर का लाला के साथ हमारा बैंक में खाता है । चार लाख रुपए जमा कर रखे हैं । हमें बताया तक नहीं । हवा दिखाई ॅ लग जाएगी । हमने कोई रुपए नहीं देने । पासबुक मेरे हाथ लग गई । तब मुझे मालूम हुआ अस्पताल का खर्चा भी हमारे पालने डाल दिया हूँ । लाली ने धीरे से जवाब दिया होते थे । दो चार दिन बाद तबियत ठीक हो जाएगी । मैं हरिद्वार चले जाएंगे । अब मेरी चिंता छोड तो बस समय रहते । चिंटू को संभाल देवर देवरानी तीव्र गति से उसके कमरे से बना हुआ है और लाली सोचने लगे डाला इस आपका पडता था । उसने मेरे साथ बैंक में जॉइंट अकाउंट खोला हूँ और एक टाइम क्लॉक, अरविदा, दुकान और बैंक के काम लाला खुद करता था । मुझे तो कभी काम आरॅन ले जाता है । लगा हमेशा कहता था घर और बच्चे और अब संभाले है तो खान मार्ग संभाले । जो मानती थी, लाला देता था । कुछ दुकान देखने की कभी जरूरत ही नहीं पडी । खिला भी कभी रसोई में नहीं जाता था । अगले दिन लाली ने देवर से बैंक पासबुक मांगी । देवरा ने अस्पताल में खर्चे में रुपये का तकाजा किया । लाली ने तो कह दिया अस्पताल का खर्च उठाकर तुमने कोई ऐसा नहीं किया । लाला हमारे पांच महीने हो गए और दुकान की सारी कमाई तुमने अपने पास रखे ऍम उस हिसाब में मेरे अस्पताल का खर्च भी लिख लो । देवरानी लाली का मुख देखती रह रहे हैं । फिलहाल ही में इतनी हिम्मत कैसे नहीं? लाली ने पहुंचाकर अपने खाते की जानकारी ली । बचत खाते में चार लाख रुपए ऍम भी चार लाख रुपए । हरिद्वार यात्रा के लिए कुछ रुपए बैंक से निकाले । लॉकर खोलकर देखा । घर में दुकान के कागज और कुछ नहीं । कागज निकाल कर खाली लाकर बैंकों वापस कर दिया । अगले सुबह सबसे पहले तडके पांच बजे लाली ने बिना किसी को बताए घर से रुखसत लिए । दिल्ली से बाहर आने पर उॅचे जाने के लिए रिक्शा लिया । दस मिनट में लाली बस घंटे पढती है । पहली बस पकडकर हरिद्वार के लिए रवाना हो गई । पांच घंटे बाद लाली हरिद्वार पहुंच गए । बस ऐसे रिक्शा पकडकर भवन पहुंची है । लाली लाला के संग हर वर्ष हरी द्वारा दी थी । पिछले भवन प्रबंधक लाली को जानता था । लाली ने कमरे में सामान रखा और आराम कर के सफर की थकान मेदारी शाम को भगवन के मंदिर में लाइट प्रभु वजन गुनगुनाने लगे । प्रभुजी एहसान तुम्हारे का घंटे चल नहीं था तो मैं कैसे पतला चुका हूँ । क्या है जन्म? जन्म से भटक रही बन माया का दास शर्म आ गए । फॅमिली भजन में मांगना है । उसके समीप एक युवा छोडा भाग घर बैठ गया । कुछ देर बाद लाली ने आंखे खोली । उसी वहाँ छोडे को देखकर फॅमिली मांॅ मतलब प्लाॅन भी आए हैं । कल सुबह मसूरी जाएंगे प्लानिंग आजकल कहा हूँ मंदिर लॅा मैं नोएडा गया हूँ । लाली पहले बंगलौर में देना मनना अब नोएडा में अच्छी नौकरी मिल गई है । लाली तो तरक्की कर रहा हूँ । ईश्वर बरकतें लाली ने मान लो और उसकी पत्नी को डेरों आशीर्वादी मंडल लाली की बहन का पुत्र अगले दिन फोटो मसूरी चले गए । पवन प्रबंधक श्री राम और लाला दोनों बचपन के मित्र के एक साथ स्कूल बनाना करते थे । स्कूल की पढाई के पश्चात लाला दुकान खोली और श्रीराम भवन का प्रबंधक बन गया है । श्री राम परिवार सहित भवन में रहता था तो काम रेशन काम के परिवार को स्थाई रूप से आवंटित है । श्री राम और लाला परिवार के हर सुख और तक आपस में बांटे थे । श्री राम ने लाली को दो दिन तक चाहते पूछा तब लाली की आंखों से आंसू निकलने लगे । लाली की प्रथा सुनकर श्री नाम क्या है चलाते है ऍम गलत कर रहे हैं । लाली हाला के बाद उन दोनों की नजरें बदल गई हैं । मैं तो चलता क्या जाता हूँ । किसी का फायदा उठा रहे तो महात्मा कहते दौडता था आज शराब पीकर आॅथोरिटी देने मालूम निकल भी बंद करते हैं । सत्तर रुपया उनका तीन धर्मात्मा ही बात है ऍम पहली बार देखें ऍम कुछ समझ में नहीं आता क्या करूँ समस्या का महीना समाधान बच्चा भी समझ नहीं आना । लाली कुछ तो करना पडेगा नहीं तो फॅमिली ईश्वर ही कठिन दिन दिखाता है । वही नया रास्ता बताता हूँ । मालूम नहीं वो दिन कब आएगा? श्री राम ऍम मैं कुछ सोचता हूँ तो इतनी भक्ति कर देशभर करी सहायता अवश्य करेगा । चाहते बात मान लो । मसूरी से बात है और लाली से कुछ दिन उसके साथ नोएडा में कुछ करने का अनुरोध किया । श्री राम के कहने पर लाली ने अनुरोध स्वीकार कर लिया ऍम लाली अकेले जीवन का अच्छा बहुत मुश्किल है तोडे तनमन ओके संग्रह हूँ और दूसरे रिश्तेदारों से भी जिस के संबंध हमें बाहर हूँ, कुछ माहौल बदलेगा तब प्रचार कर रहे हैं पर सकारात्मक सोच से नहीं ऊर्जा उत्पन्न होगी फॅार कुछ सोचता हूँ और तुम्हारे दीवार से पानी पी करूँ । मनाली बन्दों के साथ नोएडा चली गई । श्री राम की सलाह लाली को रह जाएँ । मान लो और उसकी पत्नी मार भी दोनों नौकरी करते थे । सुबह आठ बजे घर से निकलते थे और वापस रात आज बच्चे आ गए । लाली उनके लिए खाना बनाती और घर के कुछ काम भी करने लगे । मनो और मानवीय से लाली को फॅमिली, लाली आंटी लालियां अंडे कहते हुए डाली । आंटी के कौन सबके सामने कहते जिससे संचालिका सीना एक तरफ से फूल जाता है । लाली को रुपये तो नहीं देते । पतला ली का पूरा खर्च वहन करते । लाली मन्ने और मानवी के संग रहकर खुश है । सोचने लगी एक तरफ देवर देवरानी ने उसका जीना दोपहर कर दिया था । सब कुछ उनका ही तो था तो कान और उसकी कमाई । चिंटू कही तो महीना था । मेरा क्या खर्च? सिर्फ दो समय करने वाला और तो जोडी कपडे उन्होंने फोर्टी पसंद नहीं आया । चिंटू को पत्र की तरह वाला और एक है कि उसकी बहन का पुत्र और उसे अपनी माँ से भी बढकर दे रहा है । जहाँ तक मिले नहीं रहना चाहिए । दुकान लाला के नाम थी जिसमें उसने खरीदी थी । मकान किराये का था जिसमें लाली देवर देवरानी के परिवार के साथ रहती थी । किरायानामा तेवर के नाम था लाली सात आठ महीने बाद फिर से हरिद्वार गयी । भवन में श्री राम ने उसका कुशलक्षेम पूछा । लाली श्री राम भाई आपने नहीं दुनिया में जी रही हो । देवर देवरानी ने चीन के ऊपर कर दिया था । मंडोर मानवी ने इराक पर बैठा लिया । सब सब होता तब ध्यान रखते हैं । श्री ना डाली फिर भी चौकस रहना दोनों नौकरी करते हैं इसलिए उन्हें घर संभालने के लिए तुम्हारी जरूरत है । लाली खिलाना भाई मैं समझते हैं मेरी बहन उनके साथ नहीं रह सकती है । एक चीज और छोटे बच्चों की देखभाल करनी है । वो कोई भर्ती मेरी बहन बन्दों के साथ नहीं रह सकती है । मैं तो रह सकती हूँ मेरे पास कोई काम नहीं जब देवर देवरानी रखते नहीं है जिस चिंटू को बेटा मना उसने आंखें दिखाई पहन के बच्चे मेरे बच्चे हैं क्षेत्र हम भाई मेरे अपने बच्चे होते हैं तब भी मैं आपका कर और बच्चे समझते हो । प्रकृति का नियम है कुछ पाने के लिए कुछ देना पडता है कुछ प्यार पाने के लिए कुछ प्यार तो देना पडेगा श्री राम बुरा मत मानना बहुत कम लाली श्री राम भाई पेज जब कहूँ श्री नाम तो के पास रह रही हूँ तो कान लाला की खरीदी हुई है तुमने उसे चलाना नहीं तो बीस लाख मानो उसको भेज कारॅपोरेट करके ब्याज की रकम से आपने गुजारा करता हूँ । किसी पर महाराज नहीं बनोगी और तब सब तुम्हारी बात करेंगे तो फॅमिली श्री राम तो हरी रायॅल सही है इसमें तो मेरी मदद करनी होगी । दुकान का खरीददार टून्ना और फिर सौदा कर रहा था । काम ले नहीं ये सपने अकेली जान नहीं कर सकते । श्री राम ने हामी भरी है और दिल्ली में अपने परिचय जनों को दुकान बेचने का सेम हूँ । जबसे लाली ने घर छोटा था देवर देवरानी ने उसकी कोई खोज खबर नहीं क्योंकि जब उन्हें मालूम हुआ की लाली मन्नू के पास रह रही है तब निश्चिंत हो गए कि कोई उन पर उंगली नहीं उठाएगा की लाली को उन्होंने घर से निकाला । अब उन्होंने स्वाइन रिश्तेदारों में बात फैला दी की लाली ने खुद मनो के साथ रहने के लिए घर छोडा । चिंटू की गलत आदतों के कारण दुकान पर कम ध्यान देता हूँ । नशे में लाभ और पूंजी खत्म हो गए । दुकान में नया सामान आया नहीं जिस कारण ग्राहक धीरे धीरे काम होते हैं और दुकान बंद हो गई । लाली के सुन कर सन्न रह गई की दुकान पिछले चार महीने से बंद है और उस पर ताला पडा है । ताली को बाजार में पडोसी दुकानदार जानते थे । उनकी गवाही में दुकान के ताले की दूसरी चाबी बनवाई । दुकान खुली और खाली मिले थाली दुकान देखकर लाली को पडे जिस दुकान पर लाला ने अपनी संत के आप जान लगा दी थी उसको उसी के चाहे दिल आॅटो जैसे अपने बेटे से भी अधिक मारा और समझा उसमें हर को सब अंडे देने वाली मुर्गी को हलाल कर दिया । श्री राम की मदद से लाली ने दुकान बेचती और प्राप्त रकम को बैंक आॅफ करती हूँ । इस तरह लाली ने अपने भविष्य को सुरक्षित कर लिया । लाली की देवर देवरानी को जब दुकान बैठने की खबर मिली तब बहुत देर हो चुकी नहीं । अब स्थायी रूप से लाली मनोहर मानवी के साथ रहने लगी । चार छह महीने बाद हरिद्वार और ऋषिकेश जाकर कुछ समय व्यतीत कर दी और फिर वापस मनमोहन जी के पास लौटा नहीं । लाली का जीवन ईश्वर भक्ति और मान लो मानवी के साथ प्रेम से भी नहीं लगा हुए हैं । जब से शरण तुम्हारी खुशी की घडियां मना रहे हैं करे बयान कैसे तुम्हारी जवान में डाले पडे हैं सुना था जैसा वैसा ही पाया तो खुशी बहुत भारी है हमको तो रहेंगे छत मत में हम हमेशा यही दिलो में उठाने हुए हैं लिया मोहब्बत में नाम तुम्हारा तो हुआ है रोशन ये तेल हमारा मेरे घर में जहाँ रोशन जिधर भी देखो वो जमा कर रहे हैं बाहर गुलशन की है तो हो सकता है हमारी शौहरत है तो मुझ से इसी वजह से आप कार्यस्थल पर तुम्हारे घर पर खडे हुए हैं की है शहर की नजर जो होता है निसार जिंदगानी हो तुम पर तुम्हारे कदमों पर मेहरबान सर चुका है बडे हुए हुआ है हस्ती जहाँ पे सारी जो ना कि उलफत तुम्हारे उन्हीं के देखो इस जहाँ में जहानों के लाले पडे हुए हैं करेंगे हर तब हम याद कर रहे हैं अगर इनायत हो तुम्हारे दस बचता है कृष्ण प्यार है में अचार्य सुना रहे हैं कोई है जबसे शरण तुम्हें खुशी की घडियाँ मना रहे हैं करे बयान क्या सिर्फ एक दम आ रहे हैं जब आप डालेंगे बडे हुए हैं

02 हौसला -जुड़वा

हूँ । जुडवा हूँ कॉलेज में तृतीय वर्ष का प्रथम दिन है । गर्मी की छुट्टियों के बाद शायद आज पूरे कॉलेज में रहना चाहिए । विद्यार्थी रंग बिरंगे और नई फैशन के कपडे पहने कॉलेज में अति उत्साह के साथ हूँ । एक दूसरे से मिल रहे हैं क्या ने हालांकि तरह के वर्ष में प्रवेश लिया है भी थोडी डरी सहमी कॉलेज पहुंचे उसे ट्रैकिंग डालेंगे । प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की जमकर राइटिंग हो रही है । इसलिए क्या भी आशंकित क्योंकि पहली बार कॉलेज आई है । पहले दो वर्ष दूसरे शहर के दूसरे कॉलेज से किए अपनी नानी के घर रहकर स्कूल और कॉलेज के प्रथम दो वर्ष बढाएगी । नानी के निधन के पश्चात अभी एक महीने पहले अपने घर आई और कॉलेज में तृतीय वर्ष में दाखिला लिया तो कॉलेज में नहीं है और पहली बार कॉलेज आई है । बताए उसे ट्रैकिंग का डर सता रहा है । कॉलेज पहुंचकर सीधे अपनी कक्षा में बैठ गई । कक्षा में भी और कोई नहीं । फॅमिली सबसे आगे वाली गैस पर बैठकर सोशल लगी । आज कॉलेज का पहला देना मालूम नहीं, पढाई भी होगी या फिर वरिष्ठ विद्यार्थी नए विद्यार्थियों की रैंकिंग में व्यस्त रहेंगे । अभी अभी सोच रहे थे कि कुछ विद्यार्थियों ने एक साथ कक्षा में प्रवेश किया । विद्यार्थियों के पीछे पीछे फॅसने भी कक्षा में प्रवेश किया । गाॅव का अभिवादन किया । ऍम ऍम ने विद्यार्थियों को तृतीय वर्ष के विषयों के बारे में समझाना आरंभ किया । तभी एक लडकी तेजी से कक्षा में प्रवेश करके चैनल को हल्के से अभिनंदन कर दिया के साथ गैस पर बैठकर कान में बस बताइए । आइडिया फॅार तेरह हजार करती रही । लडकी का नाम नहीं आता है । उसको तिहास बाद करता देख लक्ष्य रहने, इशारे से चुप रहने को कहा हो गई या नेहा को देखकर सोचने लगी कि वह पहली बार उस से मिली है, पर वो से क्या क्या कह रही हैं? कक्षा समाप्त होने पर दूसरी कक्षा के फॅमिली के नाम से इन दस मिनट में नेहा और दूसरे सहपाठी दिया के व्यक्तिगत एकत्रित हो गए । आइस भी थी । पहले तो ये बता कि तूने मेरा फोन पे क्यों नहीं किया और मेट्रो स्टेशन पर बेटा होने की मेहनत किया के कंधे पर हाथ रखकर पूछते हैं टीआई हो गई ये लडकी कौन है और मेरे से अपनी फॅमिली के हो रही है । मैं चुप रहे । आइस हुई थी । ऍम क्या हुआ? कुछ बताया तो सही कॅरियर छिपता आते हैं । नहीं किया के दोनों हाथ अपने हाथों में लिए और उसके हाथों को किस किया । यहाँ के किस्से क्या परेशान हो गयी उसके माथे पर पसीने की पूरे चला जाएगा । और क्या क्या तुम तो देखो माथे पर पसीना यहाँ के कहते ही फॅसने दिया को चारों ओर से घेर लिया लगता है । आज क्या हम फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स की रायटिंग करने के मूड में हैं? साइलेंट रह रह गए सभी फ्रेंड्स चहचहाने लगे क्या सोचने लगी है सीनियर उसकी रैंकिंग कर रहे हैं तो चुप रहे और उसके चेहरे पर सफर दस्त गंभीरता के भागते हैं । पिया को फिर चुप देखकर नहीं के साथ बाकी सहपाठियों ने भी दिया से उसके चुभ रहने का कारण पूछा । आप सब मुझे बतिया क्यों कह रहे हैं? मेरा नाम तो दिया है याने मासूमियत से जवाब दिया आये पे भी आज पूरे मजाक के मूड में तो फॅस आज जरा बचके रहना सब के साथ आज रिया पे भी तृतीय वर्ष में हमारी रेटिंग तो अवश्य करेगी । ऍम का पूरा समूह खिलखिलाकर आज पडा । तब ॅ और उनके आदेश सभी अपनी अपनी सीटों पर बैठ गए । आज पहले दिन क्या क्लास में परेशान रही कि सब कुछ एरिया क्यों कह रहे हैं कि मेरी ट्रैकिंग तो नहीं हो रही थी । दूसरी तरफ रिया के स्कूल के समय से गहरी सहेली नेहा परेशान थी कि रिया क्या शरारत कर रही है । कक्षा समाप्ति पर नहीं आने दिया । पकड लिया मैं भी । आज तो किसी परी शरारत के मूड में है । चल ऍम नहीं आज मुझे घर चलती जाना हैं । यानी यहाँ से पीछा छुडाने के इरादे से कहा स्वीटी घर की जल्दी क्यों है? वो भी चलते हैं ना? आंटी को फोन कर देते हैं । पहले मूवी देखते हैं फिर मॉल घूमते शाम को घर पहुंचेंगे । यहाँ क्या का हाथ पकडकर कैंटीन की ओर चलने लगी । नया का हाथ छुडाकर दिया । समीर खडी ऑडी कार में बैठ गई । क्या के कार में बैठ रही ड्राइवर ने कार चला रहे हैं? हाँ चक्की में हाँ ऑडी कार को कॉलेज के गेट से बाहर निकलते चुप चाप बहुत बनी देखते रहे हैं । दुनिया के दूसरे सहपाठी भी क्या को ऑडी में जाते देख हो गए । एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार की मेरा और रिया कभी ऑडी की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं । क्या की लंबी पडी ऑडी कार देकर नहीं विचलित हो गई । रिया अपने यहाँ मेट्रो से कॉलेज आती जाती है । यहाँ के परिवार में पुरानी मारुति वैगनआर कार जबकि रिया के परिवार में स्कूटी और एक भाई है । दोनों के पिता नौकरी करते हैं और माता ग्रहणी प्रिया के पास ये अधिकार कहाँ से अगर यहाँ गमन कॉलेज बनी लगा और थोडी देर बाद रिया के घर पहुंची दिया की मान्यता दरवाजा खोला । अल्जीरिया कहाँ है? आज तो उसके रखने खत्म नहीं और मेहनत अंदर आते हुए प्रश्न पूछा उस की तबियत ठीक नहीं है पापा को आप इससे बुलाया है और पैसे आते होंगे तो कॉलेज में उसके रवैये से लग रहा था । आज उसने मेरी तो ऐसी ऐसी करती है । फॅमिली फॅमिली कॉलेज क्या बात कर रहा हूँ । कल रात से उसे तेज पर हैं । सुबह से बिस्तर पर बेसुध पडी है । दवा से कोई फर्क नहीं पड रहा है इसीलिए पापा डॉक्टर को लेकर घर आ रहे हैं । क्या बुखार आंटी की बात सुन देने आज चौक कर दिया के कमरे में बात कर गई क्या तेज बुखार से तप रही है? बिहार को तेज चोर हैं और घर पर पे सुबह तो कॉलेज में कौन थी? कौन अधिकार में बैठ कर गई । यहाँ की उधेडबुन समाप्ति नहीं हो रही थी । नहीं मैं सोच रही थी की नहीं वो रिया का भूत नहीं था । भूत सोचते हैं नया के पतन में चोट चोरी हुई प्रक्रिया के पापा डॉक्टर के साथ है । डॉक्टर ने यहाँ को देखकर इंजेक्शन लगाना हो सकता है कि रिया को टाइफाइड हो । इसके लिए मैं ऍम कर देता हूँ । थोडी देर में खून पेशाब के सैंपल ले जाएगा । डॉक्टर के साथ आप अभी ऑफिस दोबारा चलेगा । उनको ऑफिस में सर्वाधिक काम था । नेहा दिया के पास रुपये उसने अपने घर फोन कर दिया कि वो रिया के घर रहेगी । दोनों घनिष्ठ सहेलियाँ और अक्सर एक दूसरे के घर पढने के लिए पहले आया करती थी । अभी देर बाद लैब सहायक हूँ और पेशाब के सैंपल ले गया । इंजेक्शन के असर से रिया को नींद आ गई । रिया के सोने के बाद प्रिया के मम्मी और नया आपस में बातें करने लगे हैं । नहीं तुम कॉलेज की क्या बात कर रही थी । ऍम भी तेज कर के कारण कॉलेज नहीं गई तो बिस्तर पर पडी है । लेकिन कॉलेज में क्या नाम की लडकी आई है बिल्कुल किया की जैसी थी मुझे क्या समझ रहे थे । शक्लोसूरत का काठी रंग नैन नक्ष बिल्कुल एक जैसे ऍम कॉलेज में रिया का व्यवहार देखकर हम सब यही सोच रहे थे ऍम कर रही है घाटी वो बिल्कुल जुडवा लग रही थी जैसे जुडवा में अंतर करना मुश्किल होता है । ठीक वैसे कोई भी रिया छुट्टिया में अंतर नहीं बता सकता हूँ । मैं क्या बाकी सभी मित्रों सेरिया समझ रहे थे और वो हम से बात ही नहीं कर रही थी । हम तो रिया की शरारत समझ रहे थे लेकिन वो अधिकार में कॉलेज आएगी और कार भी ड्राइवर चला रहा था । नहीं हाँ तो क्या बात कर रही है । जुडवा की बात सुनकर माँ भी अचंभित हो गई । ऍम चक्कर में हूँ कि सारा माजरा क्या तभी तो भागी भागी आपसे मिलना ही हूँ । कहाँ रहती है वो? मैंने पूछा हूँ मुझे क्या मालूम हूँ । आज पहला दिन है अब उसके तहकीकात करनी पडेगी । प्रिया की मां भी ये सुनकर हैरान हो गए । रात को डिनर के समय रिया का बुखार होता है । नेहा और रिया के बहाने उस के बदन को गीले तौलिये से पहुंचकर उसके कपडे बदले यानी दिखाई । रात के समय दिया के पिता रमेश कुमार मारा था । नहीं यहाँ से पूरी बात समझी और हैरान हो गए । उन्होंने डॉक्टर से बात की और इंटरनेट पर जानकारी खंगालें । एकदम शक्ल सिर्फ गुडगांव की मिलती है या फिर बच्चों की माँ बाप से मिलती है । मिलती जुलती शक्ल वाले को इंसान होते हैं लेकिन शक ले के साथ जिसमें कदर रंगरूप तो केवल गुडगांव का ही मिलता है । टाइफाइड बुखार के कारण रिया कॉलेज नहीं जा सके । नहाने कॉलेज के ऑफिस से पूरी जानकारी प्राप्त कर लेंगे । क्या ने इसी वर्ष दाखिला लिया तो दिल्ली के वसंत विहार में रहती है जो दिल्ली का पहुंचना है । उसके पिता बहुत बडे उद्योगपति यहाँ और रिया दिल्ली के मध्यमवर्गीय कालानी रोहिणी में रहते हैं । जानकारी प्राप्त करने के पश्चात नेहरिया के घर पहुंची और सब कुछ पता है उनके परिवार को उससे मिलने की हो सकता हूँ । नहाने अगले दिन क्या कोरिया के घर चलने को कहा लेकिन उसने ये कहकर मना कर दिया कि बहुत ही इस शहर में नहीं आई है और उसके घर वालों ने अभी अकेले कहीं भी जाने से मना किया । क्या का दर्शन कर यहाँ तो बहुत निराशा हुई नहारिया कि स्वस्थ होने की प्रतीक्षा में थी कि जब दोनों एक दूसरे को आमने सामने देख कर क्या कहेंगे । पंद्रह दिन बाद रिया पूरी स्वस्थ होकर कॉलेज पहुंचे दिया और मैं यहाँ कॉलेज जल्दी पहुंच गए थे । दोनों केट के बाद टहलने लगी । कुछ देर बाद क्या की? ऑडी का कॉलेज में प्रवेश किया, कार को देखकर नहीं और रिया कार की तरफ लिख के दिया कार से उतरकर सीधे क्लासरूम की और चलती क्लासरूम के रास्ते में नहीं हाँ और रिया ने दिया को पकड लिया ऍफ का हाथ अपने हाथ में लेकर उसको देखा तो फॅमिली कुल में नहीं हूँ क्या? क्या मुझसे निकला रहे हैं मैंने क्या बोला था मैं बीच में पाॅड बी आपको सामने देख कॅलेज के पहले दिन यहाँ से अधिक कर दिया । समझे थी ये बातों से । अब समझाए कि अभी रिया को देखकर अचंभित हो गई । तीन कक्षा में नहीं गई और कैंटीन की ओर चल पडे । कैंटीन में दिनों बातें करने लगी और एक दूसरे के परिवार और अपने बारे में जानकारी का आदान प्रदान किया । यानी टिया को अपने घर आने और अपने परिवार से मिलने का निमंत्रण दिया । क्या ने कहा वहाँ पर शहर या के परिवार से मिलेगी लेकिन आज नहीं कर पांच कर दिया । ने अपनी मान मीना को रिया के बारे में बताया और मोबाइल में खींच एरिया की फोटो भी दिखाई । फोटो देखकर नहीं ना भी हैरान हूँ । ॅ एकदम छुडवा लग रहेंगे । रात के समय नहीं न बिस्तर पर करवट बदल रही नहीं उसके मुँह होते हैं । मीना तीस वर्ष पीछे चले गए ऍम ऍसे अपने सीने में दफन करके बैठी है । तब तक वो छोटी बातों को सच मानते रहेंगे । बीस वर्ष बाद सच्ची जब सामने आ ही गया तब सब मीटर होकर सच्चाई कबूल कर लें । पूरी रात खयालों में चलती रही और समय तेज बुखार के संग नहीं लाए तो दिन नहीं ना तेज ॅ और कभी कभी अर्धचेतन अवस्था में बडबडाती टिया के पति निवेश अपने कारोबार में व्यस्त रहते एक बहुत बडा व्यापार का साम्राज् जाए । घर में नौकरों की कमी नहीं पीना के स्वास्थ्य की देखरेख के लिए अस्पताल से नर्स बुलवा नहीं किया । महासंघ रही डॉक्टर सुबह और शाम के समय नहीं ना के चक्कर के लिए आगे दो दिन बाद हूँ । आपको की चिंता है तो मुझे बताया नहीं ना । बहुत पढाती थी । मुझे कुछ समझ में नहीं है । इतना समझ सकता हूँ क्या कुछ पहुँच महसूस कर रहे हैं । याने माॅस् बताते हुए पूछता हूँ क्या क्या तो मैं क्या का घर मालूम है? मुझे बाॅर नहीं जानती हूँ क्या कोई खास बात है क्या ने पूछा ऍम करके उसका बता दूँ? उसके माता पिता से मिलकर दिल का बहुत हल्का करना चाहती हूँ ऍम कल चलते हैं अभी आपका नाम करूँ नहीं किया मैं ठीक हूँ, कार में चलना है । ड्राइवर को कहूँ तैयारी है ऐसी कौन सी बात है? कल सुबह चलता है नहीं चलता है तो फोन करके उसके घर का पता मालूम कर टीहर या को फोन करके उसके घर का बना लेती है और डॉक्टर को आदेश देती है कि ड्राइवर को सूचित करते हैं कि अभी दस मिनट में चल रहा है । नौकर वापस आ कर बताता है कि ड्राइवर छुट्टी पर हैं और दूसरा साहब को एयरपोर्ट छोडने गया । हाँ पापा ने आज मुंबई एक जरूरी मीटिंग के लिए जाना है । रात को डिनर की मीटिंग कोई बात नहीं है । पापा को छोडकर आएगा तब हम चलेंगे । शाम के छह बजे ड्राइवर वापस आता हूँ । शाम के समय ट्रैफिक के कारण बसंत बिहार से रोहिणी पहुंचने में दो घंटे लगता है । रिया के पता रमेश कुमार भी ऑफिस से घर आ चुके थे । महासंघ दिया उनसे मिलने आने वाली है ये उनको क्या ने फोन पर पहले बता दिया था । रिया के परिवार से मीना और क्या का मिलना बहुत आत्मीयता के साथ हुआ है । मीना राधा संकरे लग कर प्रवासी हो गयी । कुशल सेम के बच्चा तो ना परिवार दिया । पट्टिया के एकदम छुडवा होने पर बातचीत करने लगे । कहीं कुंभ के मेले में तो रियलिटी अभी चल रही हूँ और एक राधा आंटी को और दूसरी मीना आंटी को मिल गई हूँ । नहाने वातावरण को हल्का करने के लिए कहा । तीन महीने आप को समझाते हुए कहा ऍम काम के मिलने से भी अधिक बडी बात है । दादा जी मैं आपसे तो प्रश्न पूछती हूँ । पहला प्रश्न है कि रिया की जन्मतिथि किया है और दूसरा प्रश्न उसका चंद्र कहा हुआ था । दोनों प्रश्न के उत्तर सुनकर नहीं ना की आंखों में आंसू आ गए हैं । ऍम प्रिया और क्या जुडवा बहनें हैं ऍम सनसनी कर रही है और सब आश्चर्य से एक दूसरे का मुंह देखने लगे । सब शून्य में एक दूसरे को देखने लगे लेकिन कुछ बोल नहीं सके । वातावरण में सन्नाटा छा गया । कुछ देर की शांति के बाद कलाम साहब करते हुए रमेश कुमार पूछता हूँ ये कैसे संभव है? ऍम सब कुछ संभव है । अमन देना पंजाबी बाग में रहते थे । मेरे जुडवा बच्चे होने थे मैंने नर्से पहली बात कर ली थी कि यदि मेरे एक लडका और एक लडकी हुई तब कुछ बात यदि दोनों लडकियाँ हुई और उस समय किसी और का लडका हुआ है तब मेरी एक लडकी उस लडके से बदल देना आप क्या कह रहे हैं तो था और रमेश अचंभित रहेंगे ना बिल्कुल सही कह रहा हूँ उसे अस्पताल में मेरे साथ आप डिलेवरी के लिए थे मेरा सवाल था क्या नाम था भी उन को लडके की जहाँ पे क्योंकि हमारे परिवार में लडकियाँ बहुत पडेगा बार के उत्तराधिकारी के लिए एक लडके की चाहते है मेरे पति निवेश नहीं उस समय नर्स कुछ काम के लिए एक लाख रुपए दिए थे मेरी दोनों लडकियों के चंद के समय नर्स चुप रही और आपके बच्चे के चंद का इंतजार कर दे रहे हैं । आपके लडके कचन दस मिनट बात हुआ नस में मेरी एक लडकी आपको दे दी और आपका लगता मुझे आपके एरिया मेरी है और मेरा रोहन आपका है ना की आंखों में आंसू थे जिन्हें वो अपनी साडी के पल्लू से पहुंच रही थीं । तो फॅमिली की बात है इस बात की कभी पहना की नहीं लगी आधार रमेश कुमार ने एक लंबी आ करते हुए एक स्वर में कहा हालांकि हम एक ही शहर में रह रहे थे लेकिन आत्मग्लानि से अंदर ही अंदर घुटते रहे हैं और मेरी तबियत पिछले कर गए ऍम अपने मायके बहुत अधिक समय रही और तो हम और क्या की परवरिश नानी के घर हैं । नानी की मृत्यु के पश्चात दिया मेरे पास आ गई तो हम अहमदाबाद में पढाई कर रहा है । जब दियान एरिया के बारे में बताया तब से मैं आपसे क्षमा मांगने के लिए आते ही है । अब मेरे सीने पर रखा हुआ पहुँच आज आ रहे हैं । नहीं नहीं चुप हो गई लेकिन सभी के मन में सुनामी आ गए लेकिन रिश्ते को स्वीकार करें रिया नहीं ना को मामा नहीं जिसमें जन्म दिया है । क्या आता था और रमेश कुमार कमाना दामाने जिन्होंने उसके बाद बारिश अपनी बेटी समझ करके क्या सोच रही है कि रिया को अपनी बहन माने जा सके और रमेश कुमार सोच रहे कि रोहन को अपना पुत्र माने यार या कोई अपनी पुत्री माने । अंचल से सभी प्रचलित और तब थे कि क्या करें इस परिस्थिति का कैसे सामना करें और भविष्य में क्या करें तो दिन रात निवेश मुंबई के तोर से वापस आएंगे । तब उन्होंने उन्हें एरिया के बारे में बताया क्या सोच रहा हूँ? सेना ने एकदम चुप बैठे पति से पूछा तीन तो मैं पहुंचाकर सबकुछ बताने की क्या जरूरत थी? गंभीर निवेश नहीं पत्नी नहीं ना से पूछा मैं भी छाती पर बडे पोर्च कौन बर्दाश्त नहीं कर सकती हूँ । नहीं हमने उनके लडके को सब कुछ दिया जो को नहीं दे सकते हैं मैं फिर मेरी एक लडकी उन सब से वंचित क्यों रहे हैं? हिमेश मुझे बताओ, उसका क्या कसूर है तो सब कुछ मिलेगा और रिया को कुछ भी नहीं । लेकिन आज बीस साल हो गए मेश्रम एक लडका लेकर अपनी लडकी भूल गए । लेकिन मैं आज तक नहीं बोलियों जैसे मैंने जन्म दिया है उसे अपने स्वार्थ के लिए किसी दूसरे को दे दिया । निवेश मेरिया को पूरा देना चाहती हूँ । तुम चुपके हूँ । जब काम समर्थ हो तो क्यों रिया को उसके हक से वंचित रख रहे हो? नहीं रहा यदि कोई पुलिस केस बन गया, कोई लफडा हो गया तब देश अपनी प्रतिष्ठा की जनता थी । निमेष बहन से बात करती हूँ । ऐसा कुछ नहीं करेंगे मेरे साथ । उनके घर चलो सब कुछ स्पष्ट कर रहते हैं । आपके दस बज रहे थे । क्या अपने कमरे में थी निवेश और नीना प्रिया के घर की ओर रवाना हुए । फिर रात के समय एक घंटे में भैया के घर पहुंच गए हैं । क्रिया के घर भी गंभीर वातावरण था । प्रिया के मन में अनेक प्रश्न थे, लेकिन उनको अपने माता पिता से पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं । क्रिया इतना परेशान हूँ तो मेरे मन में है बोल दिया । अपने मन का बोझ हल्का करते हैं । राधा ने दिया कुछ जोडा मैं क्या सोचूँ क्या करूँ? रिया मां से लिपटकर होने लगी । पकडे तो होती है । राजा ने दिया कमाता चुना कि क्या सुनामी आ रही है? दो सीरिया के कंधे पर रमेश ने हाथ रखा क्या? बीस वर्ष से तो हमारी बेटी है । हमारी रहेगी तो विचलित मत हो अपने को । समाज हम तेरह तो हमारी है तो हमारे से कोई नहीं कर सकता । हुआ तो मैं सोच तभी नहीं । मैंने डोरबेल बजाए इस समय कौन होगा? आपके ग्यारह बज रहे हैं । रमेश ने की खुला सामने मिनट और निवेश को देखकर रमेश कुछ नहीं हो सका । उसने रास्ता छोडा । निवेश और मीना अंदर है ऍसे माफी मांगी । मैं आपका नहीं हूँ । अब से माफी मांगता हूं । जो हुआ उसकी भरपाई को तैयार । बस एक शर्त है कि आप मुझे महान कर दीजिए । तारा और नब्बे लेना और निवेश और चुपचाप देखते रहे हैं । नीना ने स्थिति को संभाला । आप सिर्फ या कुछ छीनने नहीं आई । मैं सिर्फ रिया को उसकी दूसरी माँ का प्यार देने आई । प्रिया को आपने पलायन ही आपकी तो या पर देवकी का कोई हक नहीं है तो यशोदा की रहेगी । ऍम रमेश नहीं । निवेश और नीना को बैठने को कहा । रमेश मीना ने जुडवा को जन्म दिया लेकिन दोनों ने ना के पास नहीं रहेगा । अभी आपके पास रही और दिया अपनी नानी के बाद आएगा । अब क्या हमारे पास आई है तब मैं ईश्वर के फैसले को दिल से स्वीकार करता हूँ । मैं यहाँ रिया को उसका हफ्ते में आया हूँ । उस को किसी से खींचने नहीं आया । बस आप मुझे माफ करते हैं । गलत ईश्वर क्या चाहता है? मैं नहीं जानता हूँ । जो मेरे पास में है मैं उसी में खुश हूँ । रमेश बस इतना ही बोल सकता हूँ आप कल मेरे घर आइए । मुझे आपको आपके पुत्र रोहन से मंगवाना है । निवेश ने रोहन को फोन करके अगले ही दिन अहमदाबाद जब तत्काल बुलाया और रात के खाने पर रमेश कुमार दादा रख दिया के साथ यहाँ अपने घर आमंत्रित किया । बाकि बातें कल करेंगे निमेष ने रमेश को निश्चिंत क्या तुम बहुत किस्मत वाली हूँ तो मैं दो माँ का प्यार मिलेगा । नीना नहीं रिया को करले लगाया अगले दिन रोहन दिल्ली आ गया । सबसे पहले निवेश ने रोहन को जन्म पर बच्चों की अच्छा बनने के बारे में बताया कर रहा था और रमेश से मिलता है । फॅमिली ये बता सकते हैं कि मैंने अपनी एक लडकी आपको देकर आपका पुत्र क्या आप के मन में कई प्रश्न होंगे । मैं उनका तक नहीं दे सकता हूँ । समय के चक्कर नहीं, हमें आपस में मिला दिया, आपसे माफी मांगने योग्य भी नहीं । फिर भी इतना कहूंगा कि जैसे आपने मेरे दिया की अपनी कोख से जन्मी हालत समझकर पर बारिश की है, ठीक उसी तरह मैंने रोहन की परवरिश क्या मैंने स्वास्थ्य के कारण ऐसा क्या? रोहन को जिस तक के लिए मैंने अपनाया तो उसे हर हाल में मिलेगा क्या का हक बराबर हैं? प्रियर्सन मैंने नाइंसाफी लेकिन अब मैं उसे अपनी ऍम और आज से उसका हक भेज दिया के बराबर का होगा । मेरे पास धन का कोर्ट भंडार है । मैं किसी को भी उसके हक से पंचक नहीं करूँगा । आज से मेरे दो नहीं तीन बच्चे हैं । दिया क्या और रोहन को पूरी आजादी है कि वे कहाँ रहना चाहते हैं । हालांकि मैं चाहता हूँ कि जो जहाँ रह रहा है वही रहे ताकि जिस परिस्थितियों में रहे हैं उनसे बात हो । आज से सभी को पूरी आजादी है कि बेरोकटोक एक दूसरे के घर आ जा सकते हैं । हर सुख और दुःख में हम सभी बनाकर के सहयोगी रहेंगे । विमॅन सभी की शंकाएं झट गई और सभी हर्षित तोड है । प्रिया छुट्टियाँ गले लगकर रुआंसी हो गए और उन दोनों ने एक साथ निर्णय लिया कि अब से दोनों एक साथ रहेंगे । एक सप्ताह फसल बिहार और एक सप्ताह रोहिणी में रहेंगे । मंजूर है जिस पर एक साथ सभी के घंटे से निकला । रमेश और राधा के दिल में एक तीसरी अवश्य रह गई कि काश ये सच्चाई मालूम ही नहीं होती तो अच्छा होता है । ये ठीक है । केरिया रातो रात अमीर बन गई । उनके सामर्थ्य में नहीं था । उन्होंने इसकी कभी ख्वाहिश नहीं की थी । उन्होंने रिया कोई अपना मना कभी लडका ना होने का नाम नहीं था । अब लडका पानी की उन्हें कुछ खुशी नहीं होती । रोहन निवेश मीना को भी अपना महारात मानता रहा और रहेगा दिया ने तो इस दिन विवाह के बाद डोली में बैठ पढाई घर जा रही है । हमेशा राधा ने तो खेला हो नहीं अभी से अकेले हो गए । ये कौन से नहीं आती है । खुशी अवश्य मिलेगा अब रिया के साथ क्या ने भी उनको अपने माँ बाप का दर्जा दिया ऍम आप मेरी आंटी नहीं मेरी माँ हो रमेश और आधा के आखें नहीं थी प्रभु तेरी सृष्टि है निरानी हम जानना सके आज तक तेरे मन में क्या है इतना जान सके आज तो देता है हमें स्वीकारा प्रसाद समझ हाँ ।

03 हौसला -डॉक्टर चंदन

डॉक्टर चंदन डॉक्टर चंदन के क्लीनिक पर मरीजों की लाइन लगी हुई है और डॉक्टर चंदन बहुत धैर्य से बारी बारी से सब को देख रहे हैं । रात के ग्यारह बज रहे हैं लेकिन मरीजों की लाइन अभी समाप्त होने का नाम भी नहीं ले रहे हैं । उनका सहायक कंपाउंडर पे साढे नौ बजे चला गया । तब डॉक्टर चंदन में दस मिनट का खाना खाने के लिए अवकाश खाना खाने के बाद डॉक्टर चन्दन की पत्नी चांदनी ने कंपाउंडर का स्थान ग्रहण करके मरीजों को दवाई देने का काम संभाला । वैसे तो आमतौर पर डॉक्टर चंदन रात साढे नौ बजे क्लिनिक बंद कर देते हैं लेकिन जब मरीज हो तब खडी की सोई पर नजर नहीं डालते हैं । सभी मरीजों को देख कर ही क्लीनिक बंद करते हैं । कम्पाउण्डर के जाने के पश्चात चांदनी मुस्तैदी से काम संभाल लेती है । बरसात के मौसम के बाद कुछ बीमारी अधिक फैल जाने के कारण हर दूसरे व्यक्ति को कुछ ना कुछ तकलीफ हो जाती है । जिस कारण तो तीन दिनों से डॉक्टर चंदन को मरीज देखते हुए रात के बारह बज रहे हैं । बिना किसी शिकन के हंसते मुस्कराते हर मरीज का इलाज करते रहते हैं । उनके क्लीनिक में मरीजों की अधिक भीड के दो कारण है । पहला हर किसी से हंसकर बोलना और दूसरा बहुत कम तीस लेना । गरीबों को अक्सर मुफ्त में दवाई दे देते हैं । आज रात के एक बजे तक डॉक्टर चंदन ने मरीज देखें । फिर चंदन और चांदनी ने मुस्कराकर एक दूसरे को देखते हुए क्लीनिक बंद किया । दो मंजिल के मकान में भूतल पर क्लिनिक बना हुआ है और प्रथम तल पर डॉक्टर चंदन का कर रहा हूँ जहाँ पे छाननी और दो छोटे बच्चों संग्रह गया बच्चे रात के बारह बजे हो गए थे चंदन अब चामी भी बिस्तर पर लेटे ही निमकी कोर्ट में लडका है । अगले दिन रविवार है । रात को देर होने के कारण और रविवार की छुट्टी होने पर चंदन और चांदनी देर से उठे । हालांकि रविवार को चंदन क्लिनिक बंद रखते हैं लेकिन आपातकाल में मरीज अवश्य देखते हैं । साढे नौ बजे एक चोटिल बच्चा आया जो पतंग पकडने के चक्कर में छत से गिर पडा और पैर की हड्डी टूट गई । चंदन के क्लीनिक मैं एक्सरे मशीन भी है । फॅसने के बाद चंदन ने लडके के पैर पर प्लास्टर था । क्लिनिक खुला देखकर चार पांच मरीज भी आ गए हैं । तभी जनधन केक लेने के बाहर एक चमचमाती अधिकार रखी । मरीज देखने के बाद चंदन एक क्लीनिक बंद किया और ऊपर घर जाने के लिए पहली सीढी पर पैर रखते है । उसकी कानों में आवाज चंदन आवाज को जानी पहचानी थी । मुड कर देखा तो उसके पीछे उसका मित्र प्रभात करता था जो अधिकार से निकलकर अपने ड्राइवर से बात कर रहा था । फॅालो प्रभात कैसे हो? चंदन तो बताओ कैसा है बडी मुश्किल से तेरा पता मालूम हुआ पुराना मकान छोड दिया बहुत दिनों से तुझे ढूंढ रहा हूँ । प्रभात ऊपर चल कर बात करते हैं । चंदन तो रविवार की भी छुट्टी नहीं रखता । क्या प्रभात को इस बात पर हैरानी हुई है क्योंकि आज कल हर डॉक्टर रविवार छुट्टी रखता है, छुट्टी रखता हूँ लेकिन आपातकालीन मरीजों के लिए लेनी खोलता हूँ । अच्छा तो बताया अधिकार में आया ऍफ चल रही है मेरे यार की चंदन मेरे यार में एक विशेष उद्देश्य से आया हूँ मेरे साथ हाथ मिलाने तेरे जैसे डॉक्टर की मुझे सकते जरूरत है । प्रभात ने चंदन क्यों राहत पढाया जिससे गर्मजोशी से चंदन अस्वीकार किया तभी चांदनी चाय के साथ आती है । प्रभात भाईसाहब बडी मदद के बाद मिलना हो रहा है था तेज पिछले छह महीने से आपको ढूंड रहा हूँ । अपने मकान बदल लिया । फोन नंबर भी नहीं लगा । आपके एक मरीज का मेरे अस्पताल में ऑपरेशन हुआ । तब उसके केस हिस्ट्री में आपके एक लेने का पर्चा और ड्रेस मिला । प्रभात ने चंदन और चांदनी को चाहे पीते हुए बताया किसका ऑपरेशन कर दिया? प्रभात उन्हें अपने अस्पताल में जहाँ तक मुझे याद आता है, मैंने अभी किसी मरीज का ऑपरेशन के लिए कहा ही नहीं । चंदन सोचने लगा कौनसा मरीज हो सकता है जिसे ऑपरेशन के लिए बोला हूँ । चाय की चुस्कियों के साथ मुस्कुराते हुए प्रभात ने कहा, चंदन ऑपरेशन की सलाह नहीं दी तो क्या हुआ? हमने तो कर दिया चमचमाती अधिकार का रहस्य तो आप समझ में आ गया और बताओ । प्रभात बीजी बच्चे कैसे हैं? आजकल कहाँ हूँ चंदन एक झटके में सब समझ गया सब मजे में । मैं तो पता है कि मेरी ससुराल आगरा में हैं । असर के देहांत के पश्चात सारी संपत्ति मेरे साले की हो गयी । अब मेरी पत्नी और पैसा साला सिर्फ तो भाई बहन और करोडों अरबों की संपत्ति अब संपत्ति को भी तो संभालना था । मैं उस संपत्ति को संभालने के लिए आगरा रहने लगा हूँ और साले के संग अस्पताल खोल लिया । बाकी तुम स्वयं समझ लो समझ तो मुझे आ रहा है । तुम्हारे रातों रात अमीर बनने का रहते हैं । अब इस बात का भी खुलासा कर दूँ कि मुझे ढूंढ रहे चंदन भी मुस्करा दिया । यहाँ तुम्हारे पास जो अनुभव है वह किसी दिन लेके पास होता है । आमिर करी भार वर्ग के मरीजों का इलाज करते हो । एक दिन में तुम दो तीन सौ मरीजों का इलाज करते और सब तुम्हारे व्यवहार और इलाज की प्रशंसा करते सकते नहीं । तुम्हारी इस कला और निपटा के कारण मतलब अपना पार्टनर बनाना चाहता हूँ वो मांग के पैसे और सुविधा प्रभात ने खुला प्रस्ताव चंदन के आगे रख दिया । प्रभात का प्रस्ताव सुनकर चांदनी ने चन्दन की ओर देखा और चंदन ने से नहलाकर नहीं का संकेत दिया । संकेत मिलता ही चांदनी के सारे संदेह मिटकर प्रभात अकेले आए ताबिज और बच्चों को भी ले आते हैं । एक दो दिन साथ रहेंगे । पुराने दिन ताजा हो जाएंगे । चांदनी ने प्रभात से कहा आप प्रभात यह ठीक रहेगा । दिल्ली आगरा चार घंटे का तो सफर है । यही बुला लो तो मिले तो पुराने दिन याद आ रहे हैं । मजा आएगा जब मिल बैठेंगे पुराने यहाँ मैं कल का मजा आएगा । चांदनी की बात का चंदन ने समर्थन किया जरूर चंद्र एक साथ जरूर रहेंगे, लेकिन अभी नहीं । मुझे थोडा कम है । एक तो मेरा प्रस्ताव स्वीकार कर लो तो फिर एक साथ आगरा में रहेंगे । प्रभात ने चंदन को कहा प्रभात यदि तुम्हारा प्रस्ताव चार वर्ष पहले आया होता तब बिना सोचे पिना देने की है । फौरन स्वीकार कर लेता हूँ । लेकिन अब मेरे लिए संभव नहीं । चंदा ने प्रभात का लुभावना प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया । ऐसी कौन सी बात है जिस कारण संभव नहीं? प्रभात को उत्सकता हुई प्रभात हम एक उम्र के हैं । एक साथ स्कूल से पढते हुए डॉक्टर बने । एक ही अस्पताल में पहली नौकरी किया । उस समय हमारे सपने एक जैसे थे । बडा नामी डॉक्टर बनना है जिनसे नेता अभिनेता इलाज करवाए । बहुत अमीर और प्रसिद्ध डॉक्टर बनना चाहते थे । लेकिन चाहत से कुछ नहीं होता है । कभी कभी नियति कुछ और चाहती है और हम समय और नियति के आगे नतमस्तक हो जाते हैं । चंदन ने विराम लिया, चंदन तुम दार्शनिको जैसी बातें कर रहे हो, पहले तरह बनाते हैं प्रभात को हैरानी हुई प्रभात कभी कभी एक घटना जीवन में अनोखे बदलाव ले आती है । उसको ना तो हम सोच सकते हैं और न ही हमें उसका पूर्वाभास होता है । तुम्हारे ससुर के देहांत के पश्चात तुम्हारे जीवन में बदलाव आया है तो मैं उनकी अकूत संपत्ति मिली पर अपना अस्पताल खुला जो बहुत अच्छा चल रहा है । डॉक्टर की यही इच्छा होती है । तुम्हारी इच्छा पूरी हुई । लेकिन मेरे ससुर की मृत्यु के पश्चात मेरे जीवन में भी अभूतपूर्व बदलाव आया है तो रात में नहीं भूल सकता हूँ । मेरे ससुर थोडे बीमार थे । आप चांदी उनको देखने गए थे । उनको अस्पताल में भर्ती होकर टेस्ट करवाने की मैंने सलाह दी थी । उन्होंने कहा कि दो दिन बाद देखेंगे । मैंने दस दिन की छुट्टी ले रखी थी । शाम के समय मेरा और चांदी का शहर से दूर एक रिसॉर्ट पर दो दिन आराम से छुट्टियाँ बिताने का मूड हुआ और कार से हम दोनों दो घंटे बाद पहुँच पहुंच गए । बिल्कुल एकांत में प्रेम में डूबे हमने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया । सुबह दस बजे जब मोबाइल खोला तब हमने दर्जनों में सॉल देखे जो मेरे ससुराल से आई थी । ससुर जी की गंभीर हालत के संदेश देखकर हमने तुरंत फोन किया तो उसी का देहांत रात को हो चुका था । फोन पर उन्होंने सब तबियत खराब बताई और तुरंत आने को कहा । जब हम घर पहुंचे तब हमें पता चला हूँ की रात तबियत बिगडने पर डॉक्टर से संपर्क किया लेकिन रात को डॉक्टरों ने आने से मना कर दिया । अस्पताल लेकर गए लेकिन वहाँ वरिष्ठ डॉक्टर नहीं खडा ही प्रापॅर्टी पर तैनात जूनियर डॉक्टर्स को फोन पर निर्देश देकर मरीज डॉक्टरों ने अपनी तीसरी समझे ससुरजी नहीं बचेगा । ये सुनकर मेरी आत्मा ने मुझे कहा की डॉक्टर होकर में अपने परिवार के महत्वपूर्ण सदस्य को नहीं बचा सका । यदि मोबाइल फोन बंद नहीं करता तब मैं दो घंटे में घर पहुंच कर सोची की प्राथमिक चिकित्सा कर सकता हूँ और अस्पताल में परिष्ठ डॉक्टरों से फोन पर बात करके समुचित इलाज की व्यवस्था करवा सकता था हूँ । उस घटना ने मुझे पूरा चेंज छोड दिया । पिछले अब मैं दुनिया राहत नहीं देखता । जब भी कोई मरीज आता है उसे मैं अवश्य देखता हूँ । मेरे जीवन का उद्देश्य अब बदल गया । अभी लोगों से अधिक पीस लेता हूँ । गरीबों से कम पीस लेता हूँ और जरूरतमंदों को मुफ्त में इलाज करता हूँ । अपने समय नहीं देखता हूँ और ना ही किसी मरीज को खडी देखकर वापस भेजता हूँ । इसलिए हमारा प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर सकता हूँ । चंदन में प्रभात की ओर देखा प्रभात चुपचाप चन्दन की बातें सुनता रहा और चंदन को उसकी कर्तव्यनिष्ठा पर शुभकामनाएं तो हूँ । तुमसे विनती करता हूँ कि हो सके तो मरीजों के जीवन से खेल पाटनकर अस्पताल चलाने के लिए फीस लोग अमीरों से अधिक गरीबों से कम लोग, किसी मरीज को अस्पताल से वापस मत भेजो अगर उसके पास पर्याप्त पीस नहीं । चंदन ने प्रभात को व्यवहारिक सलाह देते हैं । जब चंदन ने उसका लुभावना प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो प्रभात का वहाँ रुकने का कोई औचित्य नहीं रहा । वो सेवाभाव वाला डॉक्टर नहीं है । वह कुशल व्यापारी हैं तो सिर्फ अपने लाभ की योजना ही देखता है । कुछ देर रुककर प्रभात चला गया, लेकिन उस पर चंदन कि व्यक्ति का कोई असर नहीं हुआ । अधिकार में बैठते ही उसके मुख्य निकला पागल हो गया चंदन एक नंबर का प्रयोग होता है पागल और बेवकूफ । चंदन घर के दरवाजे पर खडा दूर जाती प्रभात के अधिकार को देखता रहा । तभी उसके मोबाइल पर फोन आया । डॉक्टर साहब पिताजी की तबीयत बिगड गई है कि आप मिलेंगे तो बनता है ना आपको क्लिनिक पर मैं अगर मुस्कुराते हुए चंदन ने क्लीन खुला

04 हौसला -पगली

पगली कैंसर जब संधि देना पर बच्चे पास गिर गया । पिछले एक वर्ष से गिरती सेहत से परेशान रीना के मुख्य शब्द भी नहीं निकला । बस आंखों से गंगा जमना बहने के लिए एक वर्ष काट कर अलग कर देने के बाद कीमोथेरेपी और रेडिएशन में लगभग एक वर्ष का समय लगेगा । पक्ष को बचाया नहीं जा सकता है ताकि ऑपरेशन नहीं करते होंगे । मुझे मरना मंजूर है । ऍम को बहुत समझाया पर देना पडेगा रहे हैं । राकेश में अपन होकर नहीं जी सकती है । पक्ष नारी का अभिन्न हिस्सा है । तारीख की सुंदरता पक्ष से हैं । मैं बिना वक्ष के जीवित नहीं रह सकते । सेना जीवन अनमोल है, उसे कवाना नहीं । जब कैंसर के इलाज संभव है तब मन से नकारात्मक विचार दूर करके सिर्फ इलाज के बारे में सोचना चाहिए । अभी उम्र कितनी है सर पचास बच्चों का साहब हमने रीना अपने हाथों से करना है । डॉक्टरों की सलाह मानकर इलाज शुरू करता हूँ । क्या तो मुझे एक के साथ स्वीकार करोगे ना । चौबीस के उम्र में बिता हुआ तन का मिलन और आकर्षण विवाह के लिए अब तक मैं जीवन के लिए आवश्यक है तो दूसरी ओर मनका चढाव और एक दूसरे पर जीवन न्यौछावर तो आपका सबसे बडा मंत्र है । तन का मिलन उम्र के साथ काम होता है और मन का मिलन पडता है । अब तक मेरे अच्छे खराब समय में चट्टान की भांति तुमने सहारा दिया है । आपने बताये ते किस मुश्किल समय में चट्टान की भांति मैचों में सहारा दो काम जैसी थी । मैंने स्वीकार किया था और जैसी होगी स्वीकार है । तंत्र आकर्षण पर की उम्र में काम होता है । अग्नि के समक्ष हर हालत में एक दूसरे का सहारा बनने की शपथ ली है । उसको मत बोला हूँ । सुख में मैं तुम्हारे साथ था । आज तक से तो मैं एक बार ना मेरा धर्म करता है । एक महीने के कठिन प्रयास के पश्चात रीना ने कैंसर के इलाज की अनुमति दी । ऑपरेशन से पहले रात को अस्पताल में देना कमसम कमरे की दीवार पर टकटकी लगाकर आंखों से गंगा जमना बढा रही थी । राकेश ने उसके माथे पर हाथ रखा और उसका हाथ अपने हाथों में लिया । अचानक उसकी नजर सेना के हथेली पर पडे बातों पर सामान्य रेखाओं के स्थान पर कटी फटी रेखाओं का जाल था । राकेश हो गया और चलने जैसे घटना बंद कर दिया की हाथ की देखा है । क्या दर जाती हैं कोई अनहोनी? राकेश को कुछ नहीं सोच रहा था । खुद को नियंत्रित करके रीना को सांस बनाती है । पतले चिंता मत करना । तुम नित्य प्रभु वंदना करती हूँ । ईश्वर हमारा रखवाला तो भला ही करेगा । रीना कुछ नहीं बोली । राकेश के हाथ से वो टक्कर होती हैं । अगली सुबह ऑपरेशन सफलता तेरा दो दिन बाद करवा बजाई । राकेश ने रीना का हाथ देगा । अंधेरी से कटे फटे रेखाएं गायब थी और पहले की तरह सामान्य दिखाई थी । राकेश किसी पूरी संभावना से मुक्त हो गया । घर पर राकेश और बच्चे रीना की हर जरूरत का ख्याल रखते हैं । राकेश केस नहीं लेना की सोच परिवर्तित कर दी । एक सप्ताह बाद रीना ने घर के काम धीरे धीरे करने आरंभ कि कैटरीना में आराम की जरूरत है । काम हम कर लेंगे ताकि तुम्हारे सहारे खडी हूँ । काम से मतलब समझ से करेंगे । डॉक्टर ने भी बिस्तर पर आराम नहीं बुलाया होगी । नहीं तो अपना करता है । पूरा कर रही हूँ मुझे अपने कर्तव्य से मुख्य नहीं बोलने तो एक महीने बाद कीमोथेरेपी शुरू हुई । बाल झडने पर चलने से साठ कर रखती है । घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था देना कि दुनिया घर और अस्पताल तक सीमित थी । टेक केयर में क्या मतलब पी के दिन सुबह खाना बनाती और दोपहर वापस आने पर स्वर्ण राकेश को खाना परोसते है कि मुझे भी और रेडिएशन में एक वर्ष भी दिया । रीना जी आपका कैंसर का इलाज समाप्त हुआ । आपको हर छह महीने बाद चेकअप के लिए आना क्यों की आवश्यकता हो तो पहले भी आ सकते हैं । डॉक्टर की शर्त सुनकर रीना मुस्कुरा दी रात के समय राकेश किताबों में एक मुद्दत के रात सिमट कर लेना ने आज तो विश्वास से आंखों में आठ डालते हुए पूछा कैसे लग रही है? किए एक वर्ष कठियार गंजी पत्नी रीना के कल पर एक नंबर अंकित करते हुए राकेश ने कहा अगले तो इतने अच्छे क्यों? क्या जरूरत थी मेरा इलाज करवा के अच्छा करवाने क्या? क्योंकि तुम पतली हो । पागलों का विशेष ध्यान रखा जाता है तो नाम बस पता नहीं लगी ।

05 हौसला -भाग गया

कहाँ गया? हरिद्वार से दिल्ली वापस आते हुए तो लडकी से आगे हाईवे के किनारे बने ढाबे पर खाना खाने के लिए रुक गया तो बहर का समय हो रहा था धावे पर तीन चार कार्यकारी देख कर उन लोग ने भी उसी ढाबे पर कम होगी हूँ । ढाबे के एक और ट्यूबवेल चल रहा हूँ । ट्यूबेल और ढाबे के बीच खेत का रास्ता था । मोटे पानी की धार बीच बहुत पर गिरकर नाली के सहारे खेत में जा रही थी । लोग उस दृश्य को देखा रहा हूँ । बाबू हूँ क्या लोगे? ढाबे वाले की आवाज सुनकर तो चलो कुर्सी पर बैठ के और बात करने लगा ये खेत आपका अब खेत अब नहीं है । पीछे आम के बाग है । लगता हम लगाओ आदमी तोडने गया थोडी देर को तो बढिया लंगडा आम भी लेकर जाना याद रख हो गए आप कैसा हो गया? क्या मिलेगा अंदर खेत में से ताजी गोभी और मूली, थोडी गोभी की सब्जी और मोली का पराठा पसंद हो तो वो खा कर देखिए अभी बनवाता हूँ हमारा रसोइया एकदम बढिया खाना बनाता है । बडे बडे होटलो खाना भूल जाओगे । पानी बेलकपी कर रही हूँ । एकदम ठंडा और मीठा पानी आप बोतल का पानी बोल जाओगे । ठंडे पानी से होकर तरो ताजा हो जाइए, तब तक खाना बनाता हूँ । ढाबे वाले ने अपने कसीदे गाती है जो बिल्कुल ठंडा पानी पी करते । लोग कच्चे प्रसन्न हो गया है । होकर तरोताजा होकर सफर की थकान मिट गई । खाना का करते लोग जाने लगा तब ढाबे वाले ने रोक लिया । दस पंद्रह मिनट रख सकते हो तो आप भी देख लीजिए और वो भी लगता है तो लोग की कमजोरी है तो काम की खातिर रुक गया हूँ । दस मिनट के बाद आम की टोकरी आने लगी । छोटे साइज की नहीं, बडे साइज का बताऊँ । ऐसे तो दिल्ली में खूब मिलता है । जब आप के बाद मैं गया तो लजीज आम दीजिए । उन लोग ने सर्वश्रेष्ठ आम कि फरमाइश की । आप अपनी पसंद के चलिए तो कभी खुद बनाई और हमें याद रखें । बस यही आप की दुआ चाहिए । ढाबे वाले नेतृत्व को आम चुनने की खुली छूट दे दी है तो लोग बडे साइज के लगभग नाम छांटने लगा । और तो टोकरियां बनवाई लोग आम कि पेमेंट करके तो क्यों को कार की डिक्की में रख बाहर आना । तभी एक आदमी आम की तो क्या लेकर आया और ढाबे वाले से बोला आज के सारे हमारे गांव तो मंडी के लिए आम की पेटियां बना ले । उस आदमी की आवाज सुनकर तो लोग थोडा क्या आवाज कुछ सुनी जानी पहचानी से लग रही थी । लोग ने पीछे बढकर देखा । उस आदमी की तारीफ बडी हुई थी । कपडे पहले पुराने आदमी आम की पेटियां बनाने लगा तो आपने देखने के बाद से लोग ने आवाज दी इंडो टीटू नाम सुनकर साथ मिले तो लोग को पहचान दिया । लोग को बाहर देख कर ली तो तेजी से सडक की और भाडा तो लोग को भागता हुआ देख उसका पीछा करने लगा । पकडो पकडो की आवाज सुन कुछ लोग और भी भागे और को पकडकर ढाबे में ले आए हैं । डी टू तो यहाँ क्या कर रहे हैं पूरा घर परेशानी चल घर चल मेरे पास कार है बैठ कर में घर चलते हैं । लोकनीति टोको कहा मैं घर नहीं जा रहा हूँ तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया । क्यों नहीं जा रहा? त्रिलोक ने पूछा बस कह दिया नहीं जा रहा है तो भी गया हूँ घर में सब तेरी राह देख रहे हैं । कोई कुछ नहीं कहेगा मेरे साथ चलना । उन लोग ने टीटो से कहा टीटू घर जाने के लिए तैयार नहीं हुआ । मौका देखती तो फिर भागने में सफल हो गया । सडक पार कर दूसरे खेत में कहीं गायब हो गया और लोग के हाथों से निकल गया । टीटो को ढूंढने की कोशिश में सफलता नहीं मिली है । थक करते लोग चारपाई पर बैठ गया । टीटू नाम से उसको बुला रहे हैं । हमें उसने अपना नाम इंद्रजीत बताया हुआ है । हम सब उसको जीत कहते हैं । तो कौन है वो? आप जानते हैं क्या? उसे ढाबे के मालिक ने लोग से पूछा यहाँ कब से है? रोकने ढाबे वाले से पूछा । करीब एक साल से टीटू लगभग ढाई साल से घर से भागा हुआ है । आपके पास एक साल से है तो उससे पहले डेढ साल कहाँ होगा? उन लोग ने स्वयं से प्रश्न किया आप कैसे जानते हो? जीत को भी ढाबे वाला तो लोग से पूछने लगा मेरा रिश्तेदार हैं । देखो किस्मत के खेल इसके खुद के यहाँ नौकर है । वह दूसरे के यहाँ मजदूरी कर रहा है । अच्छा खासा बडे बाहर है तो कम है । रुपये पैसे की कोई कमी नहीं । घर से भाग गया और तरह ठोकरे खा रहा है । कुदरत का करिश्मा है जो हाथों की लकीरों में लिखा है होकर रहता है तो लोग ने ढाबे वाले को बताया तो घर से भागा क्योंकि ढाबे वाले को भी हो सकता हुई कि एक अच्छे परिवार का लडका घर से भाग पूरी संगत में पडकर नशा करने लगा था । कॉलेज में बिगड गया पढ भी नहीं सका तो का अंतर बिठा दिया पर करने से पैसे निकालकर नशे का सामान खरीद था । नशे में दुकान पर बैठा रहता । दुकान का कोई अता पता नहीं होता । आप ने पैसे देने बंद कर दिए और दुकान पर जाना बंद करवा दिया । नशे की लत के लिए पैसे चाहिए । एक दिन तिजोरी सर कम साफ करके घर से भाग गया लगता पैसे खत्म हो गए होंगे । तभी मजदूरी कर रहा है । अच्छा एक बात बताओ । ज्ञान आशा करता था तो आपने ढाबे वाले से पूछा मजदूर तो नशा करते हैं, काम पूरा करता था । आपको शिकायत नहीं रात को पुडिया खाकर होता था । इस पर मुझे कोई ऐतराज नहीं हुआ । ढाबे वाला बडा लोग टीटो के घर फोन लगाया और पूरी बात बताएं । तीनों के पिता ने सिर्फ इतना कहा कि अपनी हालत है, वापस आता तो गले लगा था । नहीं आ रहा तो क्या कर सकता हूँ, जा रहे सुखी रहेगा उसके नशे की लत । छोटी लोग के पास इसका कोई जवाब नहीं था तो लोग नहीं छापे के मालिक अपना फोन नंबर दिया । अगर टी तो आए तो खबर कर रहा हूँ । लोग कार में बैठकर चला गया । मेरी सोच समझ और अनुभव कहता है की जीत तो बारा या नहीं आएगा । चिडिया नहीं पेपर बैठेंगे ढाबे का मालिक मन ही मन में खुद को कह रहा था ।

06 हौसला -अनुप्रिया

अनुप्रिया अनुप्रिय पढने में होशियार थी । हर वर्ष स्कूल में प्रथम स्थान पर रहती थी । पढाई के प्रति उसकी लगन कॉलेज में भी कम नहीं हुई । उसकी इच्छा दिल्ली के सबसे अच्छे और प्रतिष्ठित कॉलेज में पढने की थी । लेकिन परिवार ने घर से दूर पढने की अनुमति नहीं दी । ना चाहकर भी उसे सोनीपत के स्थानीय कॉलेज में पढना पडा । मनपसंद कॉलेज में दाखिला मिलने के बावजूद परिवार ने उसका दाखिला नहीं करवाया । लडकी जाता है और उस चार से पांच घंटे तो आने जाने में लग जाएंगे । इस कारण घर के पास कॉलेज में उसका दाखिला करवाया । कॉलेज में जहाँ छात्र मौज मस्ती में रहते थे वहाँ अनुप्रिया सादा पुस्तको संग्रह दी थी । उसको ढूंढना होता क्लास या फिर लाइब्रेरी में देखिए जहाँ अनुप्रिया पुस्तकों मिंटू भी रहती थी । प्रथम वर्ष की परीक्षा के कुछ दिन पहले जहां छात्रों ने पुस्तकों को हाथ लगाया वहाँ अनुप्रिया ने एक मीठी मुस्कान केसन पुस्तकों को फिर आंदिया । परीक्षा के बाद शायद लगभग डेढ महीना परीक्षाफल आने तक अनुप्रिया ने घर के काम सीखें बरसात में देते हैं वर्ष की पुस्तकें पडनी शुरू कर दी । आखिर परीक्षा भला गया । अनुप्रिया ने किसी को निराश नहीं किया । वो कॉलेज में ही नहीं बल्कि पूरे विश्वविद्यालय में प्रथम रही है । अनुप्रिया का हौसला बढता गया । द्वितीय और तृतीय वर्ष में भी अनुप्रिया प्रथम रही । अनुप्रिया आगे और पढना चाहती थी लेकिन उसका परिवार उसके हाथ पीले करने के सपने देख रहा था । बी ए के बाद उसको आगे नहीं बढने दिया । परिवार की निगाह में लडकी का विवाह जितनी जल्दी हो उतना ही अच्छा । ये तो अनुप्रिया के पढने की धन्ने उसके परिवार को भी ये तक रोक लिया । पढना उसके परिवार में चाचा ताऊ की लडकियों की शादी स्कूल की पढाई के फौरन बाद ही हो गई थी । उसके परिवार को चिंता होने लगी कि यदि अनुप्रिया पडती रही तब कहीं दूसरे धर्म क्या चाहती । मैं स्वयं भी वाहन अगर बैठे हैं इसलिए उसके परिवार में उसकी एक नहीं सुनी और ऍम दही उसका विवाह कर दिया दी होती । उसने सोचा अब आगे बढने का उसका सपना अधूरा ही रह जाएगा और गृहस्थजीवन में बंदी बच्चों तक ही उसकी जिंदगी से बढ जाएगी । विवाह के पश्चात कुछ दिन अनुप्रिया अपनी ससुराल पानीपत में रहे और उसके बाद पति आनंद के संघ दिल्ली रहने हटाएंगे । आनंद दिल्ली में कह रहा था सोनीपत के अपने संयुक्त परिवार और बडे मकान के बाद पानीपत ससुराल में संयुक्त परिवार और बडे मकान में कुछ दिन रहने के पश्चात् दिल्ली में एक छोटे से फ्लाइट में रहना । अनुप्रिया को अजीब लगा । डीडीए का एक छोटा सा ऍम फ्लाइट शुरू होने से पहले ही समाप्त हो जाता है । दरवाजा खोलते ही छोटी सी बैठक उसके पीछे छोटा सा मैं हूँ बॅाल बैठ के अतिरिक्त सिर्फ कपडे रखने की अलमारी ही है । एक छोटी सी रसोई और छोटा सा बात हूँ । पानीपत से दिल्ली आते आते रात के आठ बच गए थे । रात का खाना आनंद पानीपत से पैक करवा कर रहा था की देर रात पहुंचने और थकान के कारण खाना कौन बनाएगा? ढाबे होटल के खाने से घर का खाना अच्छा है । थकान के कारण खाना खाने के पश्चात आनंद और अनुप्रिया ने थोडी देर बाद देगी और कर एक दूसरे की बाहों में सिमट गए । कुछ काम का हो क्या करूँ कुछ भी जो अच्छा लगे क्या करूँ अपने दिल की करूँ क्या करूँ आनंद ने अनुप्रिया के होठों पर कोर्ट रखती है श्रीमती जी ये आपकी क्या कहूँ? मैं पूरी रात बीत जाएगी और कुछ होगा भी नहीं । अनुप्रिया सिर्फ आंखें मूंदकर उसको खाती रहेगी आनंद ने जो वहाँ पर ऑफिस से छुट्टी ली थी उनमें से अभी एक सप्ताह के और छुट्टियाँ बाकी थी जो उसने अनुप्रिया के संग एकांत में बिताने के लिए पहले से भी आरक्षित रखे थे । अगले सुबह आनंद फ्लाइट के समीप बाजार से फल सब्जी ले आया और अनुप्रिया की गृहस्ती आरंभ हो गए । अनूप तुम तो रसोई कला में भी माहिर हो । सबसे हडताल एकदम बढिया स्वादिष्ट आनंद ने अनुक्रिया के हाथ की जमकर तारीफ की । लगता है कुछ अधिक तारीफ कर रहे हो मैं कोई बहुत बडी काॅपर तो होने । अनुप्रिया ने मुस्कुराते हुए आनंद के गले में बाहें डाल दी । नहीं होगा एकदम दिल से अच्छे खाने की तारीख में लिया झूठ नहीं कह रहा हूँ । एकदम लजीज स्वादिष्ट उंगलियों को चाहने वाला खाना है । आनंद ने अनुप्रिया को पापो में जगह लिया । कुछ कुछ समय बाहों में लेने का उन्होंने आनंद की बाहों में से निकलकर का प्रेम के लिए एक कान का हर पल उपयुक्त होता है कहकर आनंद ने अनु को फिर से बाहों में जगह लिया एक मैं हूँ तो तो मैं तो सिर्फ मेरे हूँ मेरा जीवन दम पदार्पण तुम मेरे हूँ मेरे साथ चलो तुम मेरे हो मैं तुम्हारी तो मेरे यहाँ हूँ एक दम दिल्ली में आनंद और अनुप्रिया का पहला दिन तो प्रेमालाप में बीत गए । अगले सुबह आनंद अभी नहीं में था । अनुप्रिया उठकर घर के कामों में व्यस्त हो गई । उसने अपने सूटकेस खोलकर कपडों को समेटने के लिए जैसे अलमारी खोली तो स्तब्ध रह गए । आधी अलमारी में आनंद के कपडे और आधी अलमारी में पुस्तके थी । वो लेकिन करके पुस्तकें देखने लगी । आईएएस परीक्षा की तैयारी की पुस्तकों के साथ अर्थशास्त्र, इतिहास, वाणिज्य, हिंदी, अंग्रेजी और कानून की पुस्तकों के साथ रामायण, गीता, आध्यात्मिक और उपन्यास से आधी अलमारी भरी हुई थी । अनुप्रिया पुस्तकों में उलझी हुई थी । आनंद की नींद खुली और उसने अनुप्रिया को बाहों में लिया । पुस्तकों की ढेर संगठनो आनंद के ऊपर लुढक गए । पुस्तकों के बीच दोनों फिर खिला के हंस पडे हैं । ये सब आपकी पुस्तकें हैं । अनुप्रिया ने उत्सुकता से पूछा मेरी हैं आनंद मुस्कुराकर अनुप्रिया के कार्यों पर नंबर अंकित करते हुए कहा मुझे तो किसी ने बताया नहीं कि आप कितने पडते थे । बस बढा को पढते तो हम गए थे लेकिन विश्वविद्यालय में कभी प्रथम नहीं हैं । लेकिन अनुक्रिया उच्चतम पूरे विश्वविद्यालय में प्रथम आई तब आगे की पढाई क्यों नहीं की? आनंद ने अनुप्रिया के होटल पर एक और चंबल अंकित किया क्योंकि आपकी श्रीमती जी जो बंदा था और ढेर सारे चम बन्दे ने अनुप्रिया ने भी होट आनंद के होटों पर रखे अनुम मजाक छोडो सच में बताओ पढाई क्यों छोडी अब आनंद थोडा गंभीर था तेरा पटना घरवालों को पसंद नहीं था हमारे परिवार में क्या पूरे गांव में पडने की परंपरा ही नहीं है । बिरला लडकी कॉलेज पढने जाती है मैं परिवार के विरुद्ध नहीं जा सके पितरों करने की कभी हिम्मत ही नहीं हुई है । अनुप्रिया ने आनंद को कारण बताया आगे पढना चाहती हूँ मेरे चाहने से क्या होगा आगे पढाई होगी और क्या क्या ये संभव है अनुप्रिया की आंखों में आश्चर्य के भागते अनूप इस वक्त तो विश्वविद्यालय में न खिला नहीं हो सकेगा । समय निकल चुका है अगले वर्ष अपने मनपसंद विषय में दाखिले की कोशिश करना क्या पूछ के पढने तो बिल्कुल पडने दूंगा । सच्ची में बिल्कुल अच्छा मच्छी आगे पढने की अनुमति मिलते ही अनुप्रिया खुशी से झूम गए और आनंद से लिपट गए । अच्छा अध्यक्ष बारे में कुछ बताया नहीं कि कितना पडेगा और कहाँ काम करते हैं । अनुप्रिया के इस प्रश्न पर आनंद हैरान हो गया । कमाल है तुम्हारे घर वालों ने कुछ नहीं बताया । सच्ची में कुछ नहीं बताया मुझे बताया था कि लडका अच्छा कमाता है और देखने में सुंदर है । मैं तो मैं देख रहा था तब पूछ लेती हूँ क्या पूछते हैं अकेले में मिलने ही नहीं दिया । पूरे घर वालों के सामने क्या बात कर दी । ये बात तो है हमारे घर वाले पुराने खयाल क्या मुझे भी तुम्हारे साथ बात नहीं करने देते हैं? आनंद ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की तो फिर पसंद क्यों किया? तुम देखने में ठीक ठाक ओ और विश्वविद्यालय में प्रथम रही तभी तुम्हारे संघ के बाहर की हामी भरती । अनुप्रिया को बाहों में लेते हुए आनंद ने कहा और पूछा हमने घर वालों ने पहले ही कह दिया था कि लडके के बारे में सभी जानकारी जुटा ली है । शरीफ लडका है, अच्छा काम आता है । शराब सिगरेट पीता नहीं और देखने में तुम्हार से अधिक सुंदर है । डर कहाँ बोले तो झट से हाँ बोल देना । वैसे एक बात तो है दिखने में मेरे से अधिक संदर्भ हमारे साथ जहाँ भी जाऊंगी मेरे व्यक्तित्व में भी लिखा रहेगा । अच्छा बस पढाकू सुबह ऍम बनानी होगी या श्रीमती थोडा कष्ट करेंगे । आनंद में अनुप्रिया के गाल पर चुंबन अंकित कर दिया । श्रीमान आनंद जी करच्छम बनवा जी बंद कर हो तब थोडा क्या श्रीमतीजी पूरा कष्ट करेंगे । चाहे नाश्ता, लंच और डिनर श्रीमतीजी की जिम्मेदारी है । चाय पीते हुए अनुप्रिया ने आनंद से उसके पुस्तकों के बारे में पूछा । बी कॉम के बाद कानून की पढाई की । एलएलपी के साथ प्रतियोगिताओं की भी तैयारी की लेकिन असफल रहा । पी काॅपी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की लेकिन सभी एंट्रेंस परीक्षाओं में असफल रहा । एलएलबी के बाद एलएलएम में भी प्रथम श्रेणी में पास हुआ । परिवार पर कब तक पहुंच बनकर रहता । ऍम के बाद लाॅरी करली । सोचता हूँ थोडी रकम बचा लूँ । फिर वकालत की प्रैक्टिस शुरू करता हूँ । हम तो मालूम ही नहीं है । हमारे संयम वकील साहब अनुप्रिया कब आनंद के व्यवसाय का पता चला । अभी तो मेरे पास तलाक के केस है । किसी सही लिया रिश्तेदार का तलाक करवाना होता । कम तीस में मुकदमा कर दूंगा । अनुप्रिया खिलखिलाती एक सप्ताह प्रेम के साथ गृहस्ती जमाने में बता दी । छट्टियां समाप्त होने के बाद आनंद ऑफिस जाना शुरू कर दिया । अनुप्रिया ने छोटे से फ्लाइट को दो दिन में चकाचक चमका दिया । अलमारी में अपने और आनंद के कपडे व्यवस्थित करके बैठक में पुस्तकों के लिए बाजार से कल मारी को खरीद लिया । पत्नी ग्रहणियों तब वहाँ के बाद घर पर बन जाता है । अकेला रहता था । कभी घर को व्यवस्थित करने की जरूरत नहीं समझे । सुबह जाना और रात को आना । रविवार को पूरे सप्ताह के कपडे धोना, साफ सफाई या तो दो दिन में घर की नई शक्ल निकल आई है । आनंद ने अनुक्रिया की तारीफ की । देखो ये तो रहने का करता है । इसमें तारीख की कोई आवश्यकता नहीं । मुझे आपके मार्गदर्शन की जरूरत है । बताओ किस मुद्दे पर सलाह ले? नहीं वकील हूँ । सलाह की भी लगी । आनंद ने अनुप्रिया को बाहों में जगह लिया । कौनसी और कितनी फीस लोगे । अनुप्रिया के होटल आनंद के होट के पास आए । पति पत्नी का प्रेम ही फीस है आनंद । अनुप्रिया के ऊपर अपना होटल हटा लिया और पाऊँ में कैद करते हुए कहा तो आप तो आप सुबह नौ बजे चले जाते हो और रात आठ बजे वापस आती हूँ । घर का काम दो घंटे में समझ जाता है और विश्वविद्यालय के अगले सत्र में अभी आठ महीने मुझे क्या करना चाहिए? आपकी क्या रहे हैं? अरे मैं तो आई एस और चूडी श्री दोनों में सफल रहा । हो सकता है मेरी किस्मत में शायद वकालत लिखी है । तुम पढने में होशियार हो । हम पढाई करके तुम विश्वविद्यालय में प्रथम रहे । यही चाहूँगा तो घर बैठ कर आईएएस की तैयारी कर सकती हूँ । मुझे यकीन है कि तुम बिना कोचिंग सफलता प्राप्त कर सकती हूँ । हीरो पुस्तके अलमारी में रखी हुई हैं और क्या जाएंगे? सप्ताह के छह दिन आनंद चाॅस होता । तब अनुप्रिया पुस्तकों में अगर जाती हूँ । हालांकि आनंद प्रतियोगिताओं में असफल रहा, लेकिन उसका अनुभव अनुप्रिया के बहुत कम आया । आनंद अनुप्रिया का अध्यापक कोच पर करो बनकर मार्ग दर्शन करने लगा । पति पत्नी का रिश्ता सिर्फ रविवार की छुट्टी वाले दिन तक सीमित हो गया । रविवार को दोनों दिल्ली घूमते और बाहर खाना खाते हैं । छह महीने तक अनुप्रिया नहीं दिल्ली के सभी पर्यटक स्थल देखिए और पढाई में भी बहुत आगे निकल गए । अनुप्रिया का अपने मायके से भी संपर्क बहुत कम हो गया । उसके बाद पिता को चिंता सताने लगी कि जब से दिल्ली का ही है मैं क्या नहीं नहीं हुआ । दिवाली पर भी नहीं आई फोन पर भी कुछ सचिन ही बात कर दिया । स्थिति का जायजा लेने के लिए पूरे परिवार ने अनुप्रिया के घर बिना बताए छापा मारा । घर पर अनुप्रिया पाॅल हुई थी । जिस परिवार ने आगे उसे पढने नहीं दिया उसे उसके पति ने आगे बढने के लिए प्रेरित किया । अनुप्रिया के परिवार को इस बात की कतई उम्मीद नहीं थी कि आनंद अनुप्रिया का पति काम और अध्यापक, गुरु और ऍम अधिक हैं । अनुप्रिया ने दो टूक अपने परिवार को कह दिया कि उसका मकसद कुछ बनना है जिसमें आनंद का भरपूर सहयोग है । अपने मायके कुछ बंद कर ही आएगी तो ये क्या कहते है डर के मायके से संबंध कैसे तोड सकती है । लडके परिवार से अलग होते हैं लेकिन लडकियां अपने मायके से जुडी रहती है । उसके परिवार में उसे समझाया मैं आपसे दूर कहाँ हो रही हूँ तो सर कुछ बनने के लिए कान पर पढना चाहती हूँ । आपने जमाई खुद जांच बनाकर चला है और उसी महीने पहले ही दिन मेरी प्रतिभा को जांच क्या है? अनुप्रिया ने आनंद की तारीख के साथ उनको आनंद की रजामंदी भी बताऊँ । अनुप्रिया का परिवार वापस चला गया और अनुप्रिया पढने में व्यस्त हो गई । उसके जीवन में सिर्फ पढाई समाई हुई थी । माडॅल दोनों छोटे छोटे ऍम भी रहती है । अडोस पडोस से भी कोई मतलब नहीं । पडोसी पडोसी और रिश्तेदारों ने अनुप्रिया को पागल घोषित कर दिया हूँ । एक नवविवाहित युवती सर पडने में अपना सिर्फ अब आ रही है उसके साथ आनंद को भी चोरों का गुलाम घोषित कर दिया की वो भी अनुप्रिया को संरक्षण दे रहा है । अच्छी नौकरी बदल खाये कैसे रहते हैं नवविवाहिता से पढाई करवाने की सारे रिश्ते तोड दी है । इससे मेल मिलाप नहीं । आनंद और अनुप्रिया दुनिया की नजर में पागल और मानसिक रोगी थे और उनकी नजर में दुनिया भाॅति तबीयत थोडी खराब हुई है । डॉक्टर के पास चेकअप के लिए गए तो खुश खबरी मिल गयी । अनुप्रिया कर भरती थी आनंद अब पढाई में रुकावट आ जाएंगे । अनुप्रिया ने चिंता जाहिर किस बात की फॅमिली पे प्रभाव कर पूछा मेरा मतलब है कि थोडा आराम करना होगा और बहुत परहेज रखना पडता है की चिंता क्यों करती है । घर का काम होता है कितना ऍम दो जन हैं । अगर तुझे तकलीफ होगी तब हाथ बढाने के लिए मैं किसी सहायक की जरूरत हुई तो नौकर रख लेंगे । पढाई तो बिस्तर पर बैठे लेट कर ही होनी है । हराम और ज्ञान एक साथ कर दी जाएगी तो और अधिक ज्ञान मंत्री हो सकता है कि ये ना पुरानी तो मैं तुम्हारी मंजिल पर पहुंचाते हैं । मुझे लगता है कि अभिमन्यु होगा गर्दन में ही सारी पढाई सीख जाएगा । आनंद की बात सुन करा नौकरियाँ मुस्कुरा दी तो टाॅप सोचने लगी । तब आनंद प्यार मजाक के मिश्रण में कहा है लेकिन यह भी सत्य है कि बच्चा उधर हमें बहुत बच्चे ज्यादा है तो ये कैसे कह सकता हूँ । अनुक्रिया ने आनंद की ओर आंखें मूंदकर पूछा । घर इस विषय को छोडकर तुम आराम और पढाई कर लूँ । आनंद अनुप्रिया के होल्ड पर एक नंबर लिया तो चुंबन बाजी मत किया करो । पढाई में मन नहीं लगता है । अनुप्रिया ने भी चंबल का जवाब चुंबन से दिया । दिन भी देख रहे हैं । अनुप्रिया की परीक्षा का समय आ गया । गरीब के आठवें महीने परीक्षा शुरू हो गए । डॉक्टर ने परीक्षा छोडने की सलाह दी लेकिन आनंद ने अनुप्रिया को परीक्षा में बैठने की सलाह दी । आनंद अनुक्रिया की हर परीक्षा में साढे की तरह था । अनुप्रिया के परीक्षा केन्द्र के बाहर से आनंद बेताबी से इंतजार करता रहेगा । परीक्षा केंद्र पर हर मेगा अनुप्रिया पढ लिख दी की इस हालत में उसे परीक्षा देने की क्या जरूरत है । उसे जोखिम नहीं लेना चाहिए । आनंद की सोच थी कि जब अनुप्रिया की तैयारी पूरी है वो स्वयं पर भरोसा कर रही है तो अब एक वर्ष का और इंतजार नहीं करना चाहिए । किसी परीक्षा में असफल रहती है तब देखा जाएगा । उसे भरोसा था कि वो जो नहीं कर सका उस मकान को अनुप्रिया अवश्य हासिल करेगी तो प्रिया की लगन, जोश और जज्बे को मंदिर नहीं करना चाहता था । उसे डर था कि कहीं एक बार जोश ठंडा हो गया तो दोबारा नहीं आएगा । उसके साथ भी ऐसा ही हुआ था । बार बार असफल होने पर उसका उत्साह ठंडा हो गया था । वो अनुप्रिया के पढाई के उत्साह को किसी भी हालत में काम नहीं देखना चाहता था । हूँ । आज अनुप्रिया का अंतिम था । उसमें पढते ही उसको अपनी तबियत ठीक नहीं लग रही थी । अब कभी भी तो सब का समय आ सकता है । आनंद प्रेम से उसका उत्साह बढाया है और परीक्षा भाग ले गया । अनुप्रिया ने ईश्वर की स्थिति करके पेपर देना शुरू किया । उसकी लगा नहीं थी कि वो पेपर सम्पन्न कर सके । परीक्षा केंद्र से सीधे डॉक्टर के पास जाना पडा तो पेपर कैसे हुए? डॉक्टर ने चेकअप करते हुए पूछता हूँ अनुक्रिया हूँ बस दे दिए ऍम देते थी । अनुप्रिया आनंद पेपर मिल पाती है । ॅ डॉक्टर और तुमने दे दी है । अनुप्रिया था डॉक्टर ऐसा पति नसीबों से मिलता है न प्रिया कभी लडना नहीं है । उसके हर बात पाना । डॉक्टर की वासन अनुप्रिया मुस्कुराती इस खुशी में अस्पताल में भर्ती हो जाऊँ । मैं घर नहीं भेजोगे । दस दिन की बात है, कोई जोखिम नहीं । डॉक्टर ने आनंद को बुलाया था और स्थिति से अवगत कराया हूँ । आनंद अपने और अनुप्रिया के परिवार को सूचित किया, लेकिन नाराजगी के चलते अस्पताल कोई नहीं आया । आनंद सारा दिन अस्पताल ही रहता है और अस्पताल से ही लेपटॉप पर ऑफिस का सारा काम करता रहा था । मौसम से आनंद को पूरा सहयोग मिला और घर से काम करने की अनुमति दे दी । चार दिन बाद अनुप्रिया ने एक सुंदर से गोलू मोलू बच्चे को जन्म दिया । बच्चे के जन्म की खबर सुनकर भी दोनों के परिवार नाराजगी रहे हैं । उनकी सोच थी कि जब दोनों स्वयं ही सक्षम हैं तो बच्चा पालने हम क्यों जाएँ । अब तक खुद ही अपनी सरकार है । सबकुछ जैसा रहना चाहिए, तब रहे हैं । हमें के बुला रहे हैं । आनंद और अनुप्रिया तो अकेले बच्चे के साथ घर हटाई । दोनों कथित अशांत था । सोचने लगे कि क्या कसूर है उनका । सिर्फ पिता के अपने हाथों को पाने का सब का देखा था । क्या पढना है । बच्चे ने अपनी मुस्कान से दोनों को खुद अकेले जीवन की राह पर चलने की प्रेरणा देती है । आनंद ने अनुप्रिया और बच्चे के लिए सहायता रख ली है और ऑफिस जाना शुरू कर दिया । अनुप्रिया ने पुस्तकों को आराम दे दिया और बच्चे की परवरिश में व्यस्त हो गए हैं । कुछ समय पश्चात आज सुबह से ही अनुक्रिया काॅन् था । आज रिजल्ट आने को जो है आनंद ऑफिस में और अनुप्रिया ने घर से रिजल्ट देखा । अनुप्रिया उत्तीर्ण हुई । दोनों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था । आनंद ऑफिस से तुरंत कराया और खुशी से अनुप्रिया को बाहों में भरते हुए कहा अनूप आज मुझे तुमसे भी अधिक खुशी है । मालूम है आनंद बाहुबली छोडते हुए अनुप्रिया ने का तो मेरा सपना पूरा किया है तो मैं नहीं कर सका । उसे मेरे जीवन साथी नहीं किया । इसका श्रेय सिर्फ तो नहीं जाता है । पता मास्टर्स डिग्री के लिए पढना चाहते थे । तुमने मेरा मार्गदर्शन किया । मुझे सफलता का अनुपात था । तुमने सफलता पर निशाना साधा में मंच पर इतना यकीन कैसे हुआ तो तुम्हारी आंखों में पढाई की चाहत और निष्ठा देखकर तो मैं प्रेरित किया । तानाशाही तो तुमने की कौन सी करके न वे महीने पेपर दिलवा क्या था? कितनी मुश्किल से अंतिम पेपर दिया था । ये तानाशाही नहीं प्रेम था । पहले तभी सारे पेपर में तुम्हारे साथ हूँ । धोनी की आशंका रहती थी लेकिन तो भी बताया नहीं । हमारी आंखों को मैं हर रोज पडती थी । अब ट्रेनिंग पर जाना है तो बच्चे की परवरिश । मैं होना बहुत मुश्किल है । बच्चे को छोडकर ट्रेनिंग हो जाना । कोई बातें सब ठीक होगा । तुम चिंता मत करो । मेरे क्लास में तुम्हारा स्थान पारवा । बेफिक्र ट्रेनिंग पर जाओ । थारी मन से अनुक्रिया दूध पीते बच्चे को छोड ट्रेनिंग पर गए । अनंतता और माता दोनों की भूमिका निभाने लगा । ऑफिस में उसकी बैठा देख उसके साथियों ने सोशल मीडिया पर आनंद और अनुप्रिया की कहानी को शेयर किया । सोशल मीडिया पर आनंद और अनुप्रिया के लाभ ऍम फाइनल हो गई । बात आनंद और अनुक्रिया दोनों के परिवार तक पहुंचे । दोनों परिवारों का अहम अनुक्रिया की सफलता पर टूटा । अनुक्रिया के माता पिता बच्चे की देखभाल के लिए आनंद संग रहने लगे । दोनों परिवारों को आनंद और अनुप्रिया का पढाई के धन में उनसे कुछ समय के लिए कटने का महत्व समझ आने लगा । अनुप्रिया की ट्रेनिंग के दौरान अनुप्रिया के माता पिता ट्रेनिंग सेंटर के समीप कमरा किराये पर लेकर रहने लगे ताकि अनुक्रिया बच्चे से दूर हैं । आनंद और अनुप्रिया की तपस्या रंग लाई थी । ट्रेनिंग के पश्चात अनुप्रिया को आईपीएस अधिकारी बनने पर देहरादून में पहली पोस्टिंग मिली । आज दोनों परिवारों ने अनुप्रिया की सफलता पर जश्न मनाने के लिए पार्टी का आयोजन किया । आनंद और अनुप्रिया ने मुस्कुराते हुए एक दूसरे की आंखों में देखा तो सपना पूरा हुआ आनंद रास्ता तुमने दिखाया था चलो तुम थे हाथ हमेशा तुमने पकड रखा था अब तक तुम्हारा होता मेरे से ऊपर हो गया है । श्रीमती श्री मांझी पत्नी का बहुत हमेशा पति से ऊपर ही रहता है तो कर नहीं होगा आप । श्रीमतीजी ऐसे नहीं सिर्फ ऍम दोनों प्रेम में मतलब हो गए ।

07 हौसला -वीरांगना

वीरांगना तो लगभग शाम का समय हो रहा है । एक बाइक तेज रफ्तार से चली आ रही है । चालक युवक की उम्र लगभग अठारह के आसपास और पीछे उसकी बहन जिसकी उम्र पच्चीस वर्ष बैठी हुई है । अंधेरा होने से पहले युवक का एक ही लक्ष्य है की वो अपनी बहन को उसके सवाल पहुंचाते । अंधेरा होने के बाद असामाजिक आपराधिक तत्वों की गतिविधियां अधिक हो जाती है । किसी दुर्घटना से पहले सही सलामत बहन को ससुराल पहुंचाने के एकमात्र लक्ष्य की पूर्ति के लिए माइक की स्पीड अधिक कर दी । बहन के हाथ में कटआॅफ जिसमें कहने और कीमती सामान रखा है कुछ कहने युवती ने पहन रखें मुख्य राष्ट्रीयराजमार्ग से कस्बे की सडक पकडने के साथ वाहनों की भीड का साथ छूट गया । अब तो इक्का दुक्का वाहन ही नजर आ रहे हैं भाई स्पीड काम करो मैं ठीक तरीके से बैठ भी नहीं सक्रिय सडक खराब है । उबर खबर सडक पर चल जाती हूँ और पीछे कर सकते हैं युवक ने बाइक की रफ्तार काम के जो ऍम भागती हुई मैं किसी पर ठीक से बैठे युवक ने फिर बढा दी शाम की काली माने रात को जन्म दे दिया सडक पर स्ट्रीट लाइट नहीं थी बाइक की हेडलाइट अंधेरे कुछ करने में असमर्थ थी । अंधेरे में एक बडे से पत्थर से तेज रफ्तार की बाइक टकरा गए । बहन और भाई दोनों बाइक से गिर गए । बाइक एक पेड से टकरा गई । बहन और भाई तो चोटिल हो गए । लगाते हुए युवक बाइक का निरीक्षण करने लगा । पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी । बाइक की हेडलाइट टूट गयी । हैंडल बाइक से अलग हो गया । आगे का बंपर टूट गया । तेल भी निकल गया । भाई और पहनने पूरी परिस्थिति का निरीक्षण किया और एक दूसरे का मुंह देखने लगे । क्या क्या करें भाई की कमी ऍम फट गई थी । पहन कि साडी भी पूरी तरह से पड गई । उसने पट्टी साडी को लपेटकर अपना कांदा का । एक बडे पत्थर पर दोनों बैठे हैं । तभी पुलिस की जीप वहाँ से कुछ नहीं टूटी । फूटी माइक को देखकर जीत रुकी । जीत में सब इंस्पेक्टर खुर्शीद के साथ तो सिपाही मुन्ना और माइकल थे । तीनों ने बहन भाई की हालत देखी । क्षतिग्रस्त बाइक और फटेहाल जख्मी । भाई बहन को देखकर खुर्शीद ने कडक की आवाज में पूछा क्या ना मैं महेंद्र यह व्यक्ति अपना नाम बताया? छोरी तेरह युवती की और खोलते हुए खुर्शीद ने पूछा करने का युवती ने अपना नाम बताया कहाँ जा रही हूँ नवगांव महिंद्रा ने उत्तर दिया अंधेरे में जाते डर नहीं लगता है मालूम नहीं क्षेत्र अपराधियों का गढ ऍम भी रात में सफर कर रहे माइकल ने पूछा । देखो क्या सामान इनके पास खुर्शीद मुन्ना को कहा । कर्नाटक देखकर बोला ऍम उसमें घर का सामान है । कनिका ने कहा राज्य को खोल कर रहे खडा खडा शक्ल क्या देख रहा है? खुर्शीद ने मुन्ना को कहा चाबी दयाधर खुद खोलकर देखा था । कहानी घर का सामान है माइक ऐसे ऐसे सवाल जारी कनिका ने जवाब दिया । ऐसी बातें सुनते हो गया तोड ताला देखा था चीज खुर्शीद ने कडक आवाज में कहा मुन्ना माईकल फॅमिली उसमें कहने और कीमती सामान देखकर खुशी से उछल पडे । जब आप ये तो तगडा कैसे माली माली घर से भागने का कैसे कहने कीमती सामान चना बंद कर देते हैं । दोनों को खुर्शीद ने सामान का निरीक्षण किया । बनना शर्तिया प्यार चार का मामला है पकडकर थाने ले चल बाकी वही देख लेंगे लगाने पांच साधारण है । ये सुनकर महेंद्र आगबबूला हो गया । हम दोनों भाई बहन हैं । मैं बहन को ससुराल छोडने जा रहा हूँ । फॅमिली लेकर जाएंगे पे करना कर महेंद्र खडा हुआ लडखडाते हुए खुर्शीद के पास पहुंचकर गिनती की । जनाब आप पुलिस वाले तो नागरिकों की रक्षा और मदद करते हैं । हमारी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई । हमें नवगांव जाना है । यदि हाथों में वहाँ तक पहुंचाने तो मेहरबानी होगी । भरवानी की बात करता है । एक लडकी भगाकर ले जा रहे । ऊपर से मदद की बात करता है । थाने ले जाकर सुताई कर खूब मदद करेंगे । बनना लाभ दोनों जीत में टैंकर खुर्शीद ने जीत में रखी शराब की बोतल खोली और मुझे लगाकर कनिका की तरफ खोलकर लंपट पर ऐसे देखने लगा । कल लडकी पढा रहा है आज तो मजा आ जाएगा करने का । खुर्शीद की बातों में लंपटता भाग गई । उसकी साढे फटकर अस्त व्यस्त हो चुकी थी । उसने अपने वालों को ठीक किया और खडे होकर अपनी साडी संभालने लगी । कनिका सडक के किनारे बडे पत्थर की आड में खडी हो गए । उसका दल तारक रहा था । सोच रही थी तीन हट्टे कट्टे मुस्टंडे पुलिस वालों से कैसे निपटा जाए । रात के अंधेरे में दूर दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था । मदद के लिए किसको आवाजें जो पुलिस मदद के लिए बनाई गई वही पुलिस उस पर बुरी नजर डाल रही थी । आसपास नजर दौडाई बहुत सारे पत्थर बिखरे पडे थे उसने बैठकर आस पास पत्थर इकट्ठे की है खुर्शीद की आंखों में अवस्थी पुलिस जीप में रखी शराब की बोतल से जरूर ला रहा था वही मुन्ना माईकल महेंद्र की पिटाई करने लगे मुझे मार रहे महेंद्र अपने रहन के बीच मांगी सब ले हरामखोर एक लडकी को भगा रहे ऊपर से कहता पिटाई न करें दे रहा था कहना पिछाड हो जा रहा है क्या करेगा पूरी जिंदगी किस पुलिस से पाला पडा है तथा लडकियों के फोटा देखना भी बंद कर रहेगा कहकर दोनों खिलखिलाकर हंसने लगे उनकी हसी खिलखिलाहट में क्रूरता अभी बहुत सताती हम भाई पहले महेंद्र किरकिर आने लगा एक कह रहा भाई बहन है अपनी शक्ल तो देख तो क हालत अमरीका पिछला है सर वह कोरी चिट्टी पता था कहाँ से भाई बहन हो तो ये तो बता की पढाई कैसे हो रहा है फिर से शांत वातावरण में पहुँच गई । कनिका किसी अनहोनी से निपटने के लिए सोच रही थी कि नशे में धुत खुर्शीद कनिका के नजदीक आने लगा । खुर्शीद को पास आता देख एक मोटा सा पत्थर हाथ में मजबूती से पकड लिया करने का निपटान कर लिया कि किसी भी हालत में वो इस लंपट पुलिस इंस्पेक्टर खुर्शीद को अपनी पर हाथ ना रखने देगी । खुर्शीद पास आया और कनिका को खोल के देखते हुए हैं । उसके जिसमें का पूरा मुआयना करने लगा कि आपका है हरी जवानी घटे कपडे अंग अंग अपने आप ही बता दे रहा है । आज तो ईद मनाई जाएगी । मोडकर मुन्ना माईकल को आवाज लगाई ऍम लगता है नाना वजह ये माल तो पूरा मेरा है । जो जान निर्दलीय खुर्शीद का लगाने लगा । किसन करने का संदेह रह गए । खुर्शीद मनना और माइकल से बात कर रहा था । उसके पीठ कनिका की ओर थी । कनिका के हाथ में जो पत्थर था तो एक झटके से खुर्शीद के सर पर निशाना लगाकर बढेगा । निशाना सटीक रहा । जोर का प्रहार पीछे से खुर्शीद के सर पर लगा । खुर्शीद के सर से खून निकलने लगा । आप जैकब धाम से कटे पेड की तरह गिर पडा । जहाँ गिरा वहाँ एक और नुकीला पत्थर उसके ऊपर लगा । घर के पिछले हिस्से से खून का फव्वारा छूट गया । मुझे भी खून निकलने लगा । खुशी तब अपने लगा । खुर्शीद को तरफ का देख करने का में जोश आ गया । उसने दो तीन और पडे पत्थर खुर्शीद, केसर और पैरों पर मारे । खुर्शीद चीखने लगा । उसकी चीख सुनकर मुन्ना माईकल खुर्शीद को बचाने महेंद्र को छोड दौडे निकले । दोनों को आता देख अपने दोनों हाथों में पत्थर रखा है और उनकी ओर फेंके एक निशाना माइकल के पैर में लगा तो लडखडाकर गिरा । दूसरा निशाना चूक क्या महिंद्रा ने भी दो पत्थर उठाकर मुन्ना माईकल की ओर लेंगे । एक पत्थर मुन्ना के बीच पर लगा और वो के रहना माइकल उठाओ कनिका की ओर बढा अब की बार तो पत्थरों से लगे महिंद्रा का फेंका पत्थर उसके सिर पर लगा और करेगा का फेंका । पत्थर माइकल की छाती पर लगा । वो गिर गया । अब भाई बहन पत्थर उठा उठाकर फेंकने लगे । ताबडतोड पत्थरों की बारिश होने लगी । शरीर के हर अंग पर पत्थरों की मार से मुन्ना माईकल चित गिरे पडे थे अधिक खून बहने से खुर्शीद के प्राण पढ चुके थे । मुन्ना माईकल लड रहे थे तुम कैसे हो? ठीक है यहाँ से चलो से चले बाइक टूट गई । घर चला लो की कोशिश करता हूँ थोडी बहुत सीखी है यहाँ से चलो कोशिश करूँगा । महेंद्र पुलिसटीम स्टार्ट की भाई बहन दोनों जीत में नवगांव पहुंचे पडे हाल देख करेगा कि ससुराल वालों ने खैरियत पूछे । कनिका पति की बाहों में रहने लगी । महेंद्र पूरी बात बताई कनिका के ससुर ने गांव वालों से सलाह विमर्शकिया पुलिस के साथ मुठभेड छुपाई नहीं जा सकती । सरपंच ने सलाह दी कि कलेक्टर के पास जाकर पूरी बात करते हैं करने का । अपनी इज्जत बचाने के लिए पुलिस से लडे उसने कोई गुनाह नहीं किया । अगर बच्चो बैठे रहते तो हो सकता है कि पुलिस तंग करें और पतला ले । पूरा गांव रात में एकत्रित होकर कलेक्टर के निवास की ओर पहुँच कर गया । नवगाम का हर व्यक्ति बच्चा बडा पुरुष और और ट्रैक्टर पाइक और कारों के जत्थे में कलेक्टर से मिलने जा रहे थे । रास्ते में दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया और कुछ वहाँ वहाँ रुक गए । खुर्शीद की लाश पडी थी मुन्ना माईकल पता नहीं में जब भी हालत में कहीं और चले गए क्षत खाने गए होंगे बाकी कलेक्टर के घर रात के बारह बजे पहुंचे । नारे लगाते का वासियों को देखकर कलेक्टर सकपका गया । बात की नजाकत को समझ कलेक्टर गांव वालों के साथ दुर्घटनास्थल पर निरीक्षण के लिए पहुंचे थे । पुलिस को बुलाकर मुन्ना माईकल की खोज की गई । दोनों जख्मी हालत में नर्सिंग होम में पाएगा । कलेक्टर और पुलिस के उच्च अधिकारियों के साथ गांव वालों की पहुंच देखकर दोनों ने अपना गुनाह कबूल किया कि खुर्शीद के कहने पर ही महेंद्र को पीडा खुर्शीद की कनिका पर बुरी नजर थी । मुन्ना माईकल को पुलिस से निलंबित कर मुकदमा दायर किया । अगले दिन सभी समाचारपत्रों के मुख्य पृष्ठ पर करने का के फोटो थी । उसे विरांगना की उपाधि से सम्मानित किया । टीवी न्यूज चैनलों पर कनिका छाई रहीं । वीरांगना तरीका को राज्य सरकार ने बहादुरी और वीरता के लिए सम्मानित किया । एक वर्ष के बाद वो सफल खूबसूरत बार बन गया । पी रंगना स्थल के नाम से मशहूर एक पर्यटन स्थल आज दिन रात गुलजार रहता है ।

08 हौसला -वो ओटोवाला

वो वाला ऍम फोन की घंटी तो पुरानी हो गयी शायद बाबा आदम के जमाने की आजकल का समय । मोबाइल फोन का मोबाइल फोन भी आजकल नहीं कहते हैं । कहते हैं स्मार्ट पहुंचते हैं । स्मार्ट फोन की घंटी नहीं होती है, होती है संयुक्त बडी, सुंदर, सुंदर, कर्णप्रिय अपनी पसंद का कोई भी रिंगटोन लगाए फिल्में धार्मिक कुछ भी जो आपको पसंद हो अच्छा मैं पुराने जमाने की हो गई हूँ । शायद की कोई गुंजाइश नहीं रखनी होगी । जब बच्चे बडे हो जाए और माँ को टोकने लगे तो समझ जाना चाहिए कि पूरे नहीं । पूरा शब्द अच्छा नहीं है । पुराना कहना उचित होगा । पचपन साल पहले पैदा हुए है । पचपन साल तक पुराने जमाने की बात हो गई है तो भी क्यों नहीं? तो उस जमाने में मोबाइल तो दूर की बात है । फोन भी रही तो उनके घर में होते थे । उस जमाने में तो टेलीफोन की घंटी बजा करती थी । पर अब मोबाइल की सिंह तो जिसका जैसा टेस्ट पैसे दिन तो पुराने जमाने के जब हो ही गए हैं तो शर्म किस बात की? रिंगटोन को घंटे कहने में सबके हाथों में मोबाइल देखकर आखिर पतिदेव से मोबाइल की फरमाइश कर ही थी । पत्नी को खुश रखना । हर पति का घर में अटैक महंगा स्मार्टफोन लिया इसका क्या करूँ? उन को हाथ में लेते हुए पति देव से पूछा मोबाइल है ऍम सब कुछ पहुंॅची जो आधुनिक युग की नारी हो । सब कुछ एक जाऊँ । पतिदेव ने स्मार्ट फोन की खासियत बता दी है । इतना खर्चा करने की क्या जरूरत थी? एक सस्ता सब होनी काफी था तो उसके सिस्टम भी समझ नहीं आ रहे हैं । हर एक रहने की भांति मैं भी किफायत की ओर सोच रही थी । बस इतना सुनते स्वीट सुनने का ही दिया । मैं कोई गलत बोलता हूँ क्या? आखिर पूरे हो ही गए हो ना? के जमाने में रहते हैं । मोबाइल इस्तेमाल करना नहीं आता है । लोग अभी सिखाता हूँ । बस अब क्या करें तो बोलता गया पर मैं यहाँ हूँ करती रहे । मुझे तो बस फोन करने और सीट करने की विधि समाचार पर वही ठीक है । बात पूरी नहीं सर, पुराने होने की नहीं है तो जरूरत की एक रहने को मोबाइल शॉप के लिए चाहिए । जब सब के पास है तो उसके पास भी होना चाहिए । जब जरूरत होती है तो आदमी चाहे नया हो या पुराना, सबसे ज्यादा है । समय के साथ बदल भी जाते हैं । हम भी स्मार्ट फोन चलाना सीख गए । यू ट्यूब जिंदाबाद ऍम की सारी वीडियो मौजूद हैं । धार्मिक विडियो देखो भजन के साथ फिल्मी की और फिल्म भी मौजूद है । टीवी का चैनल बियर जब मर्जी हो देखो और सूना पा गई । छोटा सा स्मार्टफोन ने मुझे तो पार्टी बना दिया क्या का आदमी समय के साथ सीखता बदलता ही भगवान छोडना बनवाया । दुनिया बदल जाए, लेकिन एक काम कभी नहीं बदल सकती है । चाय सुनामी आ जाया । प्रलय सुधारना तो दूर की बात है । मुझे ये प्रतीत होता है कि दिन प्रतिदिन और अधिक बिजराल होती जा रही है । ये काम भारत के हर महानगर में तो भाव में मिलती है । हम सबको तन करने के लिए आम नागरिक परेशान । उनको सुधारने के लिए हमारी सरकार कुछ भी नहीं करती है । हम सब आ जाये हैं उसको हम को नहीं पहचान पा रहे हैं । कोई बात नहीं । क्या आपने कभी रेल या बस से सफर किया है । जैसे आप रेलवे स्टेशन है, बस अड्डे पर सामान के साथ उतरते हैं । एक आवाज आपके कानों से टकराती है । ऑटो ऑटो । मैं ऑटो रिक्शा चालकों की कॉम की बात कर रही है । स्टेशन पर ऑटो की आवाज सुन आप पूछेंगे रोहिणी जाना है जब मिलेगा जनकपुरी कोई इस काम से पूछे जब जाना जनक पूरी है तो सब को परेशान करने की क्या जरूरत है । ऑटो जनकपुरी की आवाज भी लगा सकते हैं आपके गंतव्य का और तो मिलेगा तब रेट डबल ट्रिपल कोई कुछ नहीं कर सकता है । स्टेशन की बात छोडें । घर ऑफिस से बाहर निकलकर ऑटो पकडना हो तब भी यही नजारा शाहदरा जाना होगा । ऑटो वाला मालवीयनगर बोलेगा मीटर से तो कभी चलेंगे ही नहीं । मीटर से अधिक रेट पर आपको शॉर्ट कट से ले चलेंगे । मीटर से चलने पर तो पूरी दिल्ली दर्शन करवा देंगे और दिल्लीवासी समस्या से ग्रस्त थे । लेकिन अब बाद हर जगह होते तो वैसे ही इस काम में भी है । तभी फूले भटके कोई शरीफ ऑटो रिक्शा वाला मिल जाता है और आप चाहते हैं कि हर बार शराफत का पतला मिले । लेकिन संसार का नियम ही यही है । जो हम चाहते हैं वो नहीं मिलता है । और छोडी ऍम कुछ दिन पहले की बात है । दोपहर का खाना खाकर हो गई तो क्यों गई हूँ? एक रहनी दोपहर को सोने की लग्जरी रिपोर्ट कर सकती है । तभी मोबाइल की घंटी ऍम देखा तो पति देव का फोन था अच्छे पति का धर्म है की पत्नी को दोपहर के सोने के समय परेशान ना करें । इसलिए मेरे पति देव कभी भी दोपहर को फोन नहीं करते हैं । जरूर कोई काम होगा । अचानक ऑफिस का टोर बन गया । दो दिन के लिए चेन्नई जाना है । सुबह की फ्लाइट पिछली कपडों का तैयार करना था । टूर की तैयारी में ऑफिस से घर आने में तेरह हो सकती है । ये ऑफिस वाले भी कभी व्यवहारिक नहीं हो सकते हैं । सुबह छह बजे की फ्लाइट पकडने का मतलब है चार बजे घर से निकलना जिसका सीधा मतलब तीन बजे उठना । रात ऑफिस से देर पूरी रात कर रहा है । नौकरी है तो चाकरी करनी होगी । पति देव तो चेन्नई के लिए रवाना हो गए । बच्चे बडे हो जाए तो रहने क्या करें । इसका सदुपयोग मायके जाकर हो सकता है । एक शहर में मारेगा हो तो फायदा तो बहुत बच्चों को नाश्ता करवाने के बाद ऑटो पकडकर मायके रवाना हुई । कुछ दिन सौभाग्य से सोसाइटी के के ऊपर ही ऑटो मिल गया । किसी हमारे को छोडने आया था । वे तय किया ताकि शॉर्टकट से जल्दी मायके पहुंचकर लेकिन समझाता हूँ पर हवाई जहाज की स्पीड हो तो चलाने लगा । एकदम रफ तरीके से वो बैटिंग करते समय भद्दी गालियां निकालता रहा । मनी मनी सोचती रही । किसका मुंह देख कर कर से निकले थे । मायके पहुंचकर चैन की सांस ली की सही सलामत वन पीस पहुंच गए । किराया दिया तो बाहर दिया छूटता नहीं है । खुल्ले पैसे तो खोलकर खुलने दिए । इस चक्कर में घर के मेनगेट की चाबी ऑटो में रह गई । मैं से अंजान थे । शाम को जब घर पहुंची तो सोसाइटी के गार्ड ने घर की चाबी देकर कहा अच्छा भी ऑटो में भूल गई थी । रिसॉर्टों में आप सुबह गई थी तो पहले में चाभी दे गया की आपको चाबी गुम होने पर परेशानी होगी । हालांकि उसे दूसरी तरफ जाना था फिर भी वो चाभी दे नहीं यहाँ आया । मैं काट कि पाकिस्तान कर एकदम सुंदर रहेंगे । जिससे सुबह कितना होता था उससे अधिक ऑटोवाले का आभार प्रकट किया की संसार में प्रतिमान दारी और बनाएंगे अभी भी कायम है चाहे ऍम शायद इन चंद्र भले आदमियों पर ही दुनिया टिकी हुई है । उससे क्या फर्क पडता था । अच्छा अभी ठीक हो सकता था लेकिन नहीं की दुनिया में अभी भी कायम है । जीता जागता सबूत वो ऑटो वाला था । दस किलोमीटर ऑटो तो बढाकर सिर्फ चाबी वापस करना है उसको आभार भी प्रकट नहीं कर सके । अगले दिन जब पति देव चेन्नई से वापस आए और मैंने इस घटना की बात बताई तो बहुत बडे तुम्हारी बात सही है कि कुछ एक इंसान हर व्यवसाय में मिल जाएंगे और उन चंद में एक भले इंसानों पर दुनिया की धुरी टिकी है । परिणाम प्रतिशत लोग तो छलकपट में विश्वास रखते हैं तो मैं एक नहीं ऑटो वाला मिला कोशिश करोगे तक कभी कभी वो और तो मतलब मिले और उसका आभार प्रकट कर सकते हैं । महानुभव सुखद रहा लेकिन मेरा अनुभव दिल्ली वाला रहा । ऑटोवाले चाहे दिल्ली के हो या चेन्नई के, अब एक जैसे चेन्नई में पहला दिन तो ऑफिस के काम में बीत गया । दूसरे दिन सुबह रोज के अनुसार पांच बजे खुल गई । ऑफिस दस बजे जाना था । ऑफिस होटल के नजदीक था । अपना दल दो तीन मिनट का रस्ता था । चेन्नई के बीच बहुत खूबसूरत है । मॉर्निंग वॉक समंदर किनारे की जाए इस विचार से होटल के रिसेप्शन से पूछा की आस पास कौन सा बीच है? फॅसने बताया कि मरीना बीच पंद्रह किलोमीटर दूर है । ऑटो या टैक्सी से चले जाइए । चाय पीकर होटल से बाहर निकलकर देखा तो दो तीन ऑटोवाले चाय पी रहे हैं । पूछा बीच चल हो गया । एक ऑटोवाले ने कहा बन सकते हैं । मैंने कहा था वापस भी आना और समंदर किनारे घूमने में आधा घंटा तो लगेगा तो आने जाने का किराया कितना होगा? तो फिर बोला बाॅंटी मैं संतुष्ट हो गया की खिलाया गया हो गया । मैं शहर है, कोई जल्दी नहीं होगी । लगभग बीस मिंटो में चेन्नई के खूबसूरत मरीना बीच के किनारे पहुंच गया । सुबह का शांत समय एकदम खाली बीच एक कद्दूकस जलानी नजर आ रहे थे । एकदम सात स्वच्छ समंदर का किनारा आती जाती लहरों का एक दिल खुश । खूबसूरत नजारा तन मन को प्रफुल्लित कर गया । क्षितिज से धीरे धीरे उगते सूरज को कैमरे में कैद करने के बाद बीच में टहलता हुआ आती जाती । लहरों की खूबसूरती में हफ्ता है । मन तो नहीं कर रहा था की समंदर छोडकर होटल जाते लेकिन मजबूरी ऑफिस का काम भी करना है । वापस ऑटो में बैठा तो चार सौ चालीस स्पोर्ट का करारा चेकआउट वाले ने दिया पानी फिफ्टी वापस जाने के ये सुनकर समंदर का सहारा नशा एक्सॅन । अरे ये क्या आने जाने का डेढ सौ हुआ था । अब प्रदेश से फायदा उठाना ऑटोवाले बखूबी जानते हैं । इतने में तीन चार ऑटोवाले घंटे हो गए । उनकी तमिल भाषा मुझे समझ में नहीं आई । मेरे कहने पर की हिंदी या अंग्रेजी में बात करो तो सब एक मत्स्य बोले । बन्द व्यक्ति आना बन सकते, वापस जाना । चारों तरफ से चित मैं क्या करता हूँ? ऍम ठीक है भाई, तीन सौ ले लेना । होटल पहुंचकर काल पर एक थप्पड और लगा बेटिंग ॅ । डेढ सौ रुपए का सफर साढे तीन सौ रुपए में पड गया । पतिदेव की बात सुनकर मैं चौंक गए । चेन्नई के वाले भी दिल्ली जैसे हैं । ऑटो वालों की जो काम है वो एक ही है । चाहे फॅमिली के हूँ या चेन्नई के, किसी भी भारतीय शहर के हो सकते हैं । सब एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं । जब एक से बढकर एक हैं बात तो ठीक है । उस दिन के बाद जब ऑटो में बैठी है मुझे परेशानी झेलनी ही पडती । ऑटो वालों के नखरे और मुंह मांगे रेट लेकिन फिर भी दिल है कि मानता नहीं । जब भी किसी ऑटो में बैठती हूँ, एक पर ऑटोवाले की शक्ल ध्यान से देखती हूँ कि शायद कहीं कभी बहुत पाला मिल जाए और उसका आभार प्रकट कर सकूँ ।

09 हौसला -शिक्षा

शिक्षा मुख्य राजमार्ग सिरकट्टी एक संकरी सडक आठ किलोमीटर के बाद नहर पर समाप्त हो जाती है । नहरपार जाने के लिए कच्चा पुल एकमात्र साधन है । जब शहर में अधिक पानी छोडा जाता है या फिर बरसात में अधिक पानी से पुल टूट जाता है तब नाम से नहरपार जाया जाता है । इस अस्थाई पुल को नहरपार के गांव वाले खुद बनाते हैं । सरकार ने कभी पुल को पक्का करने की नहीं सोची हूँ । नहरपार गांव में करीब परिवारों की संख्या अधिक हैं जिनकी कौन सरकार सुन लेती हैं । आधे छोटे खेतों में फसल होकर को सारा करने वाले हैं और आधे दूध बेचने का काम करते हैं । गाय भैंसे पाल रखी है, जिनका दूध के मुख्य राजमार्ग पर बस शहर और कस्बों में भेजने जा रहे हैं । शिक्षा से गांव वालों का दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं । ऐसा लगता है कि न हर बार आधुनिक सभ्यता नहीं । आपने पहले अभी तक नहीं रखें नहर से पहले गांव में एक स्कूल है जहां नहरपार गांव के बच्चे इसलिए पडने जाते हैं क्योंकि सरकारी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा और दोपहर का खाना मिल जाता है । इसके अतिरिक्त काम वाले अपने बच्चों को पढने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते हैं । जब कोई बच्चा फेल हो जाता है तो स्कूल से निकाल दिया जाता है । सुविधाओं के अभाव में और नहरपार जाने की समस्या के कारण गांव के बच्चे शिक्षा से वंचित है । ये सब के बावजूद कुछ बच्चों पर सरस्वती मेहरबान होती है । प्रकृति चाहती है कि वे पढ लिखकर, सभ्यता में अज्ञानता को दूर करने, ज्ञान का प्रकाश चारों तरफ फैलाएं । मैं ऐसे ही बच्चों में रविंद्र प्रमुख है । गरीब परिवार का रवेंद्र खुद अपने बल बूते पर पडता चला गया । जिस स्कूल का डिसाइड कभी दस प्रतिशत से अधिक नहीं आया रविंद्र दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में पूरे चले में प्रथम आया हूँ । स्कूल के प्रधानाचार्य ने रवींद्र की प्रतिभाग आवलोकन छोटी उम्र में ही कर लिया था तो स्कूल की हर परीक्षा में प्रथम रहता था । जिले में प्रथम आने पर रविंद्र का उत्साह दोगुना हो गया और अधिक लगन से पडने लगा । प्रिंसिपल ने देवेंद्र के लिए छात्रवृत्ति की रहे आवेदन किया और दौड भाग कर दो वर्ष के लिए छात्र टीवी करवाती हूँ । उन हार रविंद्र, जोश, लगन और प्रतिभा के बल पर आगे पडता रहा । पढाई के अंतिम शिखर पर पहुंचकर उसने अपना ध्यान आईएएस की परीक्षा भास्कर एक पडा । अधिकारी बनने पर केंद्रित क्या सरकार मुख्य राजमार्ग पर बसे गांवों का अधिक रन करने लगी और एक औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हुई हूँ । छोटे उद्योगों के साथ एक विदेशी कंपनी ने कार बनाने के लिए जमीन खरीदी । कार बनाने के कारखाने का निर्माण शुरू हो गया । ये बडी परियोजना थी । गांव के करीब परिवारों को मजदूरी मिलते हैं । दो साल बाद कारखाना तैयार हो गया और गांव के सभी नौजवानों की भर्ती कार बनाने के कारखाने में हो गई । बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा समाप्त हो गई और रिजल्ट आने में दो महीने का समय था । कारखाने में भर्ती पूरे जोश में थी । गांव के दूसरे नौजवान कारखाने में भर्ती हो रहे थे लेकिन रविंद्र ने अपना लक्ष्य आईएएस रख लिया था तो नौकरी के लिए तैयार रहता । घर में खाली बैठे पुत्रको हूँ । कुछ बर्दाश्त नहीं करता है । उसे घर देखकर माने । पिता से कहा था अजी सुनते हो क्या? उनके सारे लडके कारखाने में भर्ती हो रहे हैं । अपना भी घर पडा है । कुछ बात करो से अपना रवि तो प्रथम आता है पे लडके सारे भर्ती हो गए सुनाए पांच पांच हजार रुपए महीना तनखा मिल रही है इसको अधिक तन्खा मिलेगी तो ठीक कहती हूँ । कल सरपंच भी कह रहा था । जल्दी भर्ती बंद हो जाएगी । ऐसे घर बैठे इतनी बढिया नौकरी के मौके कभी कभी मिलते हैं कहकर आवाज लगाई । रवि सतेंद्र पढने में मस्त था । शायद उसे अहसास था कि पता कारखाने में नौकरी की बात करेंगे । इसलिए पिता की आवाज अनसुनी करते हैं । रविंद्र को पडता देखना बाद दोनों बाहर नवी परीक्षा समाप्त हो गई । अब नौकरी कर लेंगे । कारखाने में सब लडके भर्ती हो गए । सुनहरा अवसर इसको गवाना नहीं । हाँ मैं भी पढना चाहता हूँ । मुझे नौकरी नहीं करनी पढ लेगा तो क्या करेगा । रमाशंकर की आवाज तेज और कडक हो गई । आईएएस अधिकारी बनना चाहता हूँ उसके लिए भी और पढना है एक रवि हम कोई अमीर नहीं हम पढाई का खर्चा नहीं उठा सकते हैं । आप खर्च की चिंता मत कर । प्रधानाचार्य जी ने कहा है कि मेरी छात्रवत्ति की बात करेंगे । देख रवि तुझे घर के हालात तो मालूम है तेरी दो बडी बहनों और भाई की शादी में कर्ज लिया था जो आज तक नहीं चुका पाया । आधा खेत साहूकार पहले अपने नाम करवा चुका है । बाकी आधे खेत से बहुत मुश्किल से घर का गुजारा होता है । साल दो साल बाद छोटी बहन भी शादी लायक हो जाएगी । आखिर कैसे रकम का जुगाड करूंगा । घर बैठे बिठाए इतनी अच्छी नौकरी मिल रही है तो अभी जा और भर्ती हो जाएगा । प्रविंद्र ने लाख समझाने की कोशिश की लेकिन सब का आखिर थककर उसने कारखाने में नौकरी कर ली । रविंद्र को स्टोर में ड्यूटी दी गई । छह हजार रुपये का वेतन पाकर घर वाले तो खुश हो गए लेकिन रविंद्र का मन दुखी था । कंपनी में दो हजार लोगों को रोजगार मिला । रविंद्र स्टोर में बैठा वर्करों की वर्दी के कपडों के लिए स्थान में से ना आपके अनुसार कपडा फाड के बता करता था । इस काम से बताओ की था लेकिन कुछ कर नहीं सकता था तो महीने जैसे तैसे घाटे बारवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट घोषित हुआ । दसवीं कक्षा में नवेंद्र चले में प्रथम आया था । इस बार तो पूरे राज्य में प्रथम रहा है । राज्य सरकार ने आगे पडने के लिए छात्रवृत्ति की घोषणा की जिससे उत्साहित होकर रविंद्र में कॉलेज में दाखिला लिया और नौकरी छोड दी । नौकरी छोडने की खबर मिलते थे रविंद्र के माता पिता दोनों बहुत नाराज हुए तो रहना चाहते को कोसने लगे । लगे ना पीते प्रधाना चाह रहे हैं । रवि की बुद्धि खराब करती है । कैसा नौकरी नहीं करेगा माने । खुद होकर का तो जवाब दे । रमाशंकर खूंखार शेयर की तरह बाहर दे देगा । अभी जाकर हरामजादे की खबर लेता हूँ । अपने को समझता क्या कहकर रमाशंकर तमतमाता हुआ घर से निकला और अपने साथ दो तीन पडोसियों को भी साथ ले लिया । प्रधानाचार्य को स्कूल परिसर में दो कमरों का क्वार्टर मिला हुआ था । जहां ऐसा परिवार रहता था । वहां पहुंचने ही गालियों की बौछार के साथ उसको खूब बुरा भला का । प्रधानाचार्य बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन कोई प्रभाव नहीं पडा । थक हारकर कहा कि आप का लडका है जो आपको जब समझे वही करें । घर पहुंचकर रमाशंकर ने रविंद्र को हिदायत दी कि आगे बढने की कोई जरूरत नहीं है । नौकरी दोबारा शुरू करते हैं । अब इंद्र को कुछ भी नहीं सोच रहा था । प्रधानाचार्य से मिला क्यों से क्या करना चाहिए । यदि वो नौकरी करता है तब पढाई को अलविदा कहना होगा । घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए परिवार के साथ रहकर आगे की पढाई नहीं कर सकता । घर से दूर रहकर अपना जीवन निर्वाह कैसे करेगा । प्रधानाचार्य ने समझाया कि उसकी छात्रवृत्ति पढाई का खर्च सहन कर लेगी । हो अपने परिवार को समझा सके तो उसके भविष्य के लिए उत्तम रहेगा । लेकिन रविंद्र का परिवार अपने फैसले पर अडिग रहा । रवि कान खोलकर सुन लें । आगे पढाई की कोई जरूरत नहीं । नौकरी करेगा तो पैसे कम आएगा । पढाई करेगा तो पैसे खर्च होंगे । जितने साल पडने में लगाएगा तब तक कम से कम दो लाख बचा लेगा । तो पहले क्या है अपने आप हिसाब लगा ले । रोटी घर से निकल आएगी । पूरा वेतन बचाएगा लेकिन मैं आगे नहीं पडता होगा । कारखाने की नौकरी में पूरी जिंदगी क्लर्क बन के रह जाऊंगा तो लाटसाहब बनेगा । रमाशंकर पकडकर बोला आईएएस अफसर बनना चाहता हूँ । उस पागल प्रधानाचार्य की बातों में आकर तो भी पागल बन गया लगता । अपने पैरों पर कुल्हाडी मारने का शौक हो रहा है लेकिन काम खोल करसुले रवि इस घर में रहना है तो पडने का भूत उतारना होगा । रमाशंकर ने धमकी दी लेकिन रविंद्र को पढने के धंधे उसने कॉलेज में दाखिला ले लिया । सुनते ही रमाशंकर आग बबूला हो गया और रविंद्र को फिर धमकाया । आखिरी बार बोलता हूँ घर में रहना है तो नौकरी का ले पर मैं घर से बाहर हो जाऊँ मैं पढूंगा । ये सुनकर रमाशंकर ने रविंद्र का हाथ पकडकर घर से बाहर कर दिया । मान्य दरवाजा बंद कर दिया । रविंद्र अब क्या करें? कुछ समझ में नहीं आ रहा था । रविंद्र को प्रधानाचार्य ने अपने घर पर रहती है । उन्होंने सोचा तो चार दिन बाद रविंद्र के माता पिता का गुस्सा शांत हो जाएगा । लेकिन उसके विपरीत उन्होंने कहा वालों के संग तो जैनाचार्य के घर धावा बोल दिया और खुले शब्दों में चेतावनी दे दी कि वह गांव के बच्चों को भडकाना बंद करते हैं । पडना उसे स्कूल में नहीं रहने देंगे । प्रवेन्द्र अपने घर में नहीं रख सकता है । मजबूर होकर रविंद्र को वहाँ से जाना पडा लेकिन मुखर नहीं किया । सीधे शहर के लिए रवाना हो गया । लेकिन समस्या रहने की थी, जाए तो जाएगा । कॉलेज के पास एक मंदिर था तो वहाँ कुछ देर बैठा रहा । रात को मंदिर बंद हो गया । सारी रात मंदिर परिसर में गुजारती उसकी जेब में फूटी कौडी नहीं बस एक पैंट कमी इसमें घर से निकला था । सुबह मंदिर की घंटियों की आवाज से उसकी नींद खोलेंगे । पानी पीकर गुजारा कर लिया । भक्तों का तांता लगा और कुछ भक्तों के दिए । प्रसाद से पेट की भूख शांत की । कॉलेज खुलने में अभी एक सप्ताह था । वो क्या करे उसको कुछ समझ नहीं आ रहा था । दूसरी रात भी मंदिर में काटी । अगली सुबह मंदिर के पुजारी ने उसे होते हुए देखा और लात मारकर उठाया । ऍम हो रहा है, फॅमिली रखा है । घबराकर रविंद्र उठा और अपनी राम कहानी सुनाते हैं । मैं कैसे मानो की तो सच बोल रहा है । पुजारी ने अपनी शंकर जाता हूँ । रविंद्र कॉलेज में दाखिले और छात्रवृत्ति के कागज दिखाते हैं । तब पुजारी को यकीन हुआ कि रविंद्र सच बोल रहा है । पुजारी मंदिर परिसर में मंदिर के ठीक पीछे क्वार्टर में रहता था । उसने रविंद्र को मंदिर में ठहरने की इजाजत दे दी । लेकिन इसमें उसका अपना स्वार्थ था । पुजारी ने शर्त रखी थी कि उसके दोनों बच्चों को पढाना होगा । मंदिर की सफाई और छोटे मोटे सभी कार्य करने होंगे । प्रवेन्द्र को सब छुपाने की जगह मिल गए और उसने पुजारी की शर्तें मान ले । सुबह चार बजे उठ कर मंदिर की सफाई करने, कॉलेज में पढाई करने और शाम को पुजारी के बच्चों को पढाने के बाद प्रवेंद्र थक कर चूर होकर मंदिर के एक कोने में सो जाता था । उसे मंदिर के धार्मिक कार्यक्रमों में भी काम करना पडता था । लेकिन उसकी आईएएस की लगन में कोई बाधा नहीं आई । अपने स्कूल प्रिंसिपल से बराबर मिलता रहा जो उसका मार्गदर्शन करते रहे । हौसला बढाते रहे कॉलेज में वो सिर्फ पढाई में ध्यान लगातार जब कोई क्लास नहीं होती तो लाइब्रेरी में रहता था । सारे कॉलेज में मिस्टर पढाकू के नाम से मशहूर हो गया । उसका कोई दोस्त नहीं बना । जहाँ कॉलेज के लडके ऍम के कपडों में नजर आती और चमकती कारोबारी को में घूमते वहीं दो जोडी पुराने कपडों में उसका नाम दर्ज लगता था पैदल आता जाता था जिसके कारण कोई उसे अपने पास नहीं आने देता हूँ फॅार ही उसके साथ ही थे । तमाम मुश्किलों के बीच उसके स्कूल के प्रिंसिपल और कॉलेज के प्रोफेसर उसे लक्ष्य बताकर कठिन नगर पर चलाते रहे जिसका परिणाम पहले वर्ष ही नजर आ गया । पूरे कॉलेज में प्रथम रहा और उसके जितने अंक कॉलेज के इतिहास में किसी के नहीं आए थे । इसके बाद पढने वाले छात्र उसके नजदीक आने लगे और दोस्ती करने लगे । पुजारी के नालायक बच्चे भी अच्छे नंबरों से पास हुए । रविंद्र जिस कार्य को करता पूरी लगन से करना चाहे खुद पडने का हो या पुजारी के बच्चों को पढाने का सुबह पूरे मंदिर की सफाई कर चमका देता था जिस कारण मंदिर की रौनक दोबारा लौट आए । भक्तों की संख्या बढ गई और पुजारी की आय भी बढने लगी पडने की लगन से वो पूरी यूनिवर्सिटी में प्रथम रहा और आईएएस की परीक्षा पहली कोशिश में मेरिट के साथ पास की । कभी नहीं । आज तुमने अपने नाम को सार्थक कर दिया । जैसे सूरज सारे जगत को प्रकाश देता है । वैसे रवि तुमने पडने में नाम रौशन किया है । इस राह पर हमेशा चलते रहो, यही मैं चाहता हूँ । कहकर स्कूल प्रिंसिपल ने रविंद्र को गले लगा लिया । हमेशा सत्य की राह पर चलते किसी रूकावट से मत करना यही मेरी शिक्षा है और तुम्हें आशीर्वाद है । कुछ रुककर प्रिंसिपल ने रविंद्र से फिर पूछा अपने माता पिता से नाराज हूँ । नहीं प्रिंसिपल लेकिन मैं वहाँ ट्रेनिंग के बाद जाऊंगा । मैं चाहता हूँ कि मेरे पास होने की खबर आप उन्हें ट्रेनिंग के बाद जहाँ बाकी आईएएस अफसरों ने विकसित शहरों में अपनी पोस्टिंग चाहिए । रविंद्र ने अपना पिछडा जला चुना । पहला काम उसने नहर पर पुल बनाने का क्या? तपेंद्र के माता पिता खुशी से फूले नहीं समाए लेकिन इस चिंता में डूब गए कि उनका अभी मिलने क्यों नहीं आया? क्या वो नाराज है? आज तुम्हारा बेटा जिले का कलेक्टर बन गया है । अगर तुम्हारी बात मानकर कारखाने की नौकरी करता हूँ तो अभी तक कलर की ही कर रहा था । आज वो पूरे जिले का मालिक बन गया । इससे पहले के स्कूल प्रिंसिपल और अधिक कुछ कहते पिता ने बात काटती है । हम तो मोर हैं तभी तो आप की बात नहीं समझ सके । हमने आपके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया । हमें माफ करता हूँ तुम गांव निवासी अज्ञानता का पता उतार तो पढाई की महिमा को समझो । यही मेरा सपना है । यही मेरी माँ है । नहर पर पुल का काम तेजी से चल रहा था और गांव वालों को अपने रवि से मिलने की बेताबी थी । आखिर वो घडी आ ही गई । पुल का उद्घाटन राज्य के मुख्यमंत्री ने किया । आज पांच साल बाद रविंद्र अपने गांव जा रहा था । जी धीरे धीरे पुल से गुजर रही थी । प्रविंद्र की आंखें नम होती जा रही थी । पूरा गांव रविंद्र के स्वागत में खडा था । प्रिंसिपल सब की अगुवाई कर रहे थे । उन्होंने आगे बढकर रविंद्र को गले लगाया । उसके बाद माता पिता ने अपने बेटे को गले लगाया । कोई कुछ नहीं कह सका । तीनों की आंखें नम थी । माँ होती रोधी बस इतना ही बहुत बता सके । मेरा भी

10 हौसला -होंसला

हौसला कश्मीर में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए जंगबहादुर घायल हो गया । डटकर मुकाबला करते हुए उस ने तीन आतंकियों को अकेले फेर करदिया । दो दिन तक चली मुठभेड में छह आतंकियों को मार गिराया । सेना का एक जवान भी शहीद हुआ । छह में से तीन आतंकियों को अकेले जंगबहादुर नहीं आमने सामने आरपार की लडाई में ढेर किया फॅार को बाएं हाथ और पैर में कई गोलियां लगी थी । मुठभेड समाप्त होने पर चल बहादुर को तुरंत सेना के अस्पताल ले जाया गया । मई और पक्षाघात के इलाज के लिए जान बहादर को फिर दिल्ली में आर्मी के बेस अस्पताल में लाया गया । टेन बहादुर के पिता भी सेना में सिपाही थे और अब से रिटायर जिंदगी अपने गांव में व्यतीत कर रहे थे । जान बहुत डर के घायल होने की खबर सुनकर माता पिता दिल दिया गया । उसकी बहन और बहनोई दिल्ली में कार्यरत हैं और दिल्ली में उनकी रिहाइश देंगे । माता पिता वही रुक गए । अभी एक वर्ष पहले जंगबहादुर का विवाह हुआ था । पत्नी माया मायके रहने गई थी जब बहादुर के घायल होने की खबर सुनकर माया, उसके भाई बहन, माता पिता सभी आ गए । पूरा परिवार चिंता में डूबा तनाव में था । एक और सभी को जंगबहादुर की बहादुरी पर गर्व था । सेना ने जान बहादुर को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया । दूसरी ओर बहादुर बाई ओर से पक्षाघात के कारण बिस्तर पर सीमित हो गया और आवाज भी चली गई । डॉक्टरों के मुताबिक लंबे इलाज के बाद जंगबहादुर ठीक हो जाएंगे । कीर्ति चक्र से सम्मानित जंगबहादुर जिंदगी की लडाई से जूझ रहा था । एक महीने तक सब अस्पताल में डटे रहे । फिर काम के बहाने सब धीरे धीरे अपने स्थानों पर चले गए । बहन पीना और बहनोई मेरे तो दिल्ली में रहते थे । कभी कभी मिलने अस्पताल चले जाते हैं । माता पिता भी काम चले गए । सिर्फ माया रहेगा जो पीना वीरेंद्र के घर रुकी हुई थी और दिन में अस्पताल में रूकती और रात में घर आ जाती है । दो महीने बाद एक दिन माया सुबह अस्पताल के लिए निकली तो अस्पताल नहीं गई और अपने माइके चली गई । जब मैं रात को घर वापस नहीं आई तब पीना ने माया को फोन किया पीना अभी आप कहाँ हूँ, घर कब तक आओगे? माया दीदी मैं नहीं होंगे मेरा क्या हुआ पाया दीदी मैं अपनी मम्मी के घर आ गई । मैं और जंग के साथ नहीं रह सकती है । बिना अभी क्या हुआ है । किसी ने कुछ कहा क्या? हाँ कौन क्या कहेगा? अब सारा दैनिक बेजान लाश के साथ नहीं गुजार सकती है । बिना अभी तुम क्या कह रही हूँ? मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा हूँ । लाया तो मुझे सब समझ में आ गया । चंदा बिक लाश बन गया । दो महीने से बिस्तर पर पडा है । कब ठीक होगा कुछ नहीं पता । डॉक्टर कुछ ठीक से बताते नहीं पूछ रहे के जवाब मैं समय लगेगा । कितना समय मैं बर्दाश्त नहीं कर सकती है । पाया था ये उत्तर सुनकर बिना रह गई । उसके समझ में कुछ नहीं आ रहा है तो उसने धीरेंद्र से बात की । बिना मामला गंभीर है । माया का ये निर्णय बहुत दुखता है में उसके साथ और उसके परिवार से बात करनी पडेगी । उसकी महत्वपूर्ण के रूप बिना ने वीरेंद्र से कहा । ये बात फोन पर कर रहे कि नहीं उनके घर जाकर करनी पडेगी । अभी तो रात हो गई है । कल ऑफिस से छुट्टी लेकर चलते हैं । जितनी जल्दी हो सके चलेंगे । तीन घंटे का सफर समझकर चलते हैं । नरेंद्र मीणा को का वी नरेंद्र की बात से सहमत हूँ । पूरी रात में ना माया के बारे में सोचती रही पे जानी से रात काटी सुबह साढे पांच बजे बिना और वीरेंद्र कार से माया के मायके के लिए रवाना हो गए । लडके! खाली सडक पर ना के बराबर ट्राफिक होने पर दो घंटे में दूरी तय कर ली । पीना और वीरेंद्र के आगमन पर माया और उसके मायके वालों ने न तो कोई आदर सत्कार किया और न ही उन्हें कोई खुशी हुई । उनके रूखे व्यवहार पर पीना और नरेंद्र को बहुत दुःख हुआ । माया उनको देखकर दूसरे कमरे में चली गई । बिना माया के पीछे उसके कमरे में गई । अब दिन बताए कल यहां चली रही हूँ । क्या हुआ हूँ बिना नहीं । भाभी माया से कारण पूछा देखो दी थी । मैंने कल फोन पर बताया था अब मैं उनके साथ नहीं रह सकती है । कोई कब आएगी और मैं पूरी जिंदगी उसके साथ नहीं रह सकती हूँ । वो किस तरह से हिल नहीं सकता हूँ और मेरी जिंदगी उसके मलमूत्र साफ करने के लिए नहीं है । मैंने दो टूक पीना को अपने मन की बात स्पष्ट करते । अभी जंग ठीक हो जाएगा । डॉक्टर कहते हैं बिना ने माया को आश्वस्त करने का प्रयास किया । पता नहीं कब ठीक होगा, कब अपने पैरों पर खडा होगा । कब वैवाहिक टाइप निभाने लायक होगा । मेरे भी कुछ हो जाते हैं । सारी जिंदगी में कपाही के साथ नहीं बन सकती हूँ । जब की देखभाल के लिए आप किसी नर्स का प्रबंध करने मैंने अपना निर्णय बिना को समझा दिया, तभी पति के प्रति कुछ जिम्मेदारी और पत्नी के दायित् होते हैं । मैं समाज की दकियानूसी विचारों से सहमत नहीं हूँ । कोर्ट भी एक अपाहिज के साथ रहने को मजबूर नहीं कर सकती । मुझे धर्म और समाज की दुहाई मत दीजिए । पिछले दो महीने से इस विषय पर सोच रही हूँ । अब अंतिम निर्णय यही है की जंग और मेरा कीर्ति जगह आपको मुबारक हो । मेरी मांग और इच्छापूर्ति ना चंद्र पूर्णि कर सकता है । और नहीं मैं मैंने अपना अंतिम निर्णय सुना दिया । तलाक सुनकर की ना और वीरेंद्र पर एक पहाड गिर पडा । उन्होंने माया की माता पिता से बातचीत की लेकिन कुछ फायदा नहीं होगा । सभी की एक राय थी और उनका संयुक्त निर्णय था । एक वीर सेना के जवान के निजी जीवन में उजाला जाएगा । इसके किसी को उम्मीद नहीं थी । बिना और वीरेंद्र मायूस घर लौट आए । माया के निर्णय से पूरे माता पिता भी रहेगा । बस परिवार ने आंसू छलकने नहीं दी है । आर्मी के अस्पताल में जंगबहादुर का इलाज होता है डॉक्टर और नर्स उसका परिवार बन गया । बिना ने माता पिता को अपने पास बुला लिया और बारी बारी से जब की सेवा में जुट गए । एक फौजी जिसने आमने सामने की लडाई में तीन आतंकी ढेर करती है तो जिंदगी की लडाई कैसे हार सकता है । कदापि नहीं । उसका हाथ से एक दिन अपने पैरों पर घर से खडा करेगा । इस बात पर डॉक्टर और नर्सों को पूरा यकीन था । आज एक साल बाद जंगबहादुर ने बोलना शुरू किया । थोडे थोडे टूटे शब्दों से शुरुआत की और शरीर के बाएं हिस्से में हरकत हो गई । ऍसे दुश्मनों को मार गिराया । वैसे ही जीवन की जंग भी चीज थी । अगले वर्ष बहत्तर अस्पताल से घर आ गया । माया के बारे में उसने किसी से नहीं पूछा तो समझ तो तभी गया था जब मैं उसे अंतिम विदाई दी गई थी । जानता हूँ मैं जा रही हूँ, अब नहीं होंगे वो समय वह उत्तर देने योग्य नहीं था परंतु से बोध पूरी तरह का सेना मुख्यालय में अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने पर उसके चेहरे पर वैसा ही हर्ष और गर्व था जब उसने तीन आतंकी ढेर किया है । ड्यूटी ज्वाइन पर जंगबहादुर के माता पिता और बहन बहनोई के चेहरों पर चमक थी और आंखों से रुके हुए खुशी के आश्रम आप चलते हैं

11 हौसला -अस्तित्व

अच्छा अस्तित्व पच्चीस जवानों का एक समूह अपने अधिकारी के नेतृत्व में कश्मीर सीमा के एक चौकी की ओर बढ रहा था । ठंड का मौसम था जवानों की टुकडी ने अगले तीन महीने तक वहीं रहना था । रात का समय था उनकी इच्छा चाय पीने की हो रही थी । होना चाहिए कि एक दुकान नहीं है परन्तु रात के समय मकान बनाती है । दुकान बंद देखकर एक जवान ने जो अधिकारी सर आप की अनुमति होता हूँ दुकान का ताला तोडकर चाय बना सकते हैं । तनिक आराम करके चाय पीकर तरोताजा होकर हम चौकी की ओर हो सकते हैं तो काम का ताला तोडने के निर्णय पर अधिकारी सोचना लगा कि अनुचित और अनैतिक दोनों है । फिर कुछ सोचकर उसने अनुमति दे दी । ताला तोडकर दुकान खोली और जवानों ने चाय बनाई । एक बिस्किट खाकर तरोताजा हूँ । चलने से पहले जब उन्होंने अधिकारी से पूछा की चाय तो पी ली परंतु भुगतान कैसे करें? क्योंकि छोड नहीं कि ताला तोडकर चोरी करें । किसी भी अनुचित कार्य के लिए सेना अनुमति देगी नहीं । अधिकारी ने एक हजार रुपये चीनी के कनस्तर के नीचे कुछ इस तरह से रखे कि दुकानदार जब सुबह दुकान खोले तो रुपए आसानी से नजर आ जाए । अब कोई अपराध बहुत जवानों के मन में नहीं था । उन्होंने दुकान का दरवाजा बंद किया और ताला लटका कर अधिक उत्साह से चौकी की ओर रवाना हुए हैं । तीन महीने भी थे, अब नहीं टुकडी ने चौकी संभालने अधिकारी अपनी टुकडी को लेकर दिन के समय वापस बेस के लिए रवाना हो रहे । रास्ते में उसी चाय की दुकान पर रुके । दिन का समय था इसलिए चाय की दुकान खोली थी और उसका मालिक मौजूद था । कोई गरीब वृद्ध था । मालिक एक साथ सेना के पच्चीस जवानों को देख कर खुश हो गया कि आज एक साथ ही बिक्री से अच्छे पैसे मिल जाएंगे । सभी न चाय की चुस्कियों के साथ एक बिस्किट खाए । सेना के जवान उस वृद्ध से बातचीत कर रहे थे और अपने अनुभव बता रहे थे । रिद्धि की बातों से एक बात स्पष्ट अच्छी लगती थी । वो बात थी उसकी परमात्मा मिट्ठी अटूट विश्वास । एक सिपाही ने वृद्ध को उकसाते हुए पूछा कि यदि भगवान जैसा कोई है तब आप इतनी ठंड में चाय की दुकान नहीं चला रहे होते हैं तो आपको घर बैठाकर खिला सकते थे । इतना सुनकर भृत्य बोला ना बाबू, बडे बोलना बोल वो है, उसका अस्तित्व है । अभी तीन महीने पहले की बात है । मेरा बेटा दुकान पर बैठा था । आतंकवादियों ने उसे अधमरा कर दिया था । मेरा समझकर दुकान की सारी रकम भी लूट गए । लडके को अस्पताल में भर्ती करवाया । जरूरी दवाइयों के लिए भी पैसे नहीं थे । सुबह स्नान करने के पश्चात भगवान से मदद की विनती की । रात को दुकान बंद की । सुबह आकर देखता हूँ की दुकान के दरवाजे का ताला टूटा हुआ है । मैं समझा कि आज तो पूरा किया लेकिन चीनी के जलस्तर के नीचे एक हजार रुपए रखे थे । किसी न चाय बनाई थी और उसकी कीमत से कहीं अधिक रुपये रख कर चला गया । ये तो सिर्फ परमात्मा ही कर सकता है जिसने मेरे पर्याप्त सुन ली और तकलीफ में मेरी मदद की है । रुपए मेरे बहुत कम है । जिन समय जरूरी दवाइयाँ खरीद सकते उन रुपयों की बदौलत मेरा लडका मौत के मुंह से बाहर आ सका । आज वो बिल्कुल ठीक है । मैं आपको बता नहीं सकता कि उस दिन मुझे रुपयों की कितनी जरूरत थी । आप समझ सकते हैं ये केवल परमात्मा की असीम कृपा थी और परमात्मा ने ही किसी के मतलब रुपये रख पाए । मेरा परमात्मा में अटूट विश्वास है और आप से भी अनुरोध करता हूँ की आप उसके अस्तित्व पर कोई प्रश्नचिन्ह ना लगाएं । उस पूरे आदमी की आंखों में अटूट विश्वास था । वो पच्चीस जवान कुछ कहें । उनके अधिकारी ने इशारा किया और सब समझ गए । अधिकारी कि आपके इशारे ने सब जवानों को चुप कर दिया । पेमेंट करने के पश्चात अधिकारी ने कहा, अब बिल्कुल सही कह रहे हैं । परमात्मा का अस्तित्व हैं । जब हम उसके अस्तित्व पर कोई प्रश्नचिन्ह लगाते हैं तो हमें अपना रूप दिखाकर हमें उसके अस्तित्व पर अटूट विश्वास करने पर मजबूर कर देता है । वृत्ति कि आखिर थी जवानों की टुकडी पेट्स की ओर रवाना हो गई ।

12 हौसला -आकर्ति

आकृती खिडकी खोलकर सामने देखा । हल्की बरसात हो रही थी । साथ में भी नहीं हवा चल रही थी । दो दिन बुखार के कारण नकल बिस्तर पर से मिलता हूँ । बुखार एक सौ तीन तक चला गया । अब बुखार उतरा तब थोडी हिम्मत शरीर में लेकिन कमजोरी बहुत अधिक थे । खिडकी खोलकर वापस बिस्तर पर लेटकर बारिश की फुहारों को देखना लगा । घर के सामने पेड हवा में हेल्प आए थे । बिस्तर के पास दूध का गिलास और बाॅधकर मीना बाजार फल और सबसे लेने गई बरसात में छतरी से भी पूरा बचाव नहीं हुआ । कमर से नीचे भी कोई नहीं लाने । घर में प्रवेश किया । रसोई में सामान रख कमरे में आएगी । नकुल के माथे पर हाथ रखा बुखार नहीं लग रहा है । कैसा महसूस कर रहा हूँ । ॅ कर गई थी, लेकिन नहीं दो नहीं होगी तो कमजोरी दूर कैसे होता है? इतने सारे प्रश्न एक्सॅन निकल से पूछते हैं । जवाब में नकुल सिर्फ मुस्कुरा दिया । उस कराने का मतलब मैं समझ गई । पहले दूध पिलाओ । श्रीमती जी के आदेश का पालन करने में नकुल नहीं थी । श्री समझे और दूध पीने लगा । नकुल का दूध पीते देख बिना रसोई में काम करने लगे हैं । नकुल ने समाचार पत्र पडा और थोडी देर बाद स्नान किया । पाकिस्तान के पश्चात प्रभु स्मरण किया ये कोमल हाथ फिर ये छोटे पैर में रहे हमेशा रखते खयाल मेरे रक्षा करते हाथ तेरे कठिन जोखिम से भरी जिंदगी आसान करते हाथ दे रहे हैं उधर काम पांच पार कर चाहूँ मैं सहारा देते हाथ मेरे कुछ पर लगभग दस तक रहूँ । सदा के ईश्वर चरणों में रहूँ दे रहे हैं । भजन गन को लाने के बाद नकुल खिडकी के पास कुर्सी पर बैठा बाहर पेडों को देखने लगा । बरसात रुक गई थी परंतु हवा मध्यम से तेज चल रही थी । अब आप विवेक से पेडों के पत्ते चल रहे थे । बच्चों का हिलाना नाॅट लुभा रहा था । नकुल की नजर पेडों के ऊपर गई । भाज पेडों में कुछ अलग से आकृति देखने लगी । कुछ अजीब से उधर आपकी सेवा करती रही हूँ कुछ क्या क्या उसका नाम है क्या सच में बेड पर आपने से लग रहे हैं पेड पौधों से नकुल नहीं ना । दोनों को विशेष लगाव था । बिना को फलदार पेड सुनाते थे जिनपर फल लगे रहे हैं । अपने शौक को पूरा करने के लिए अपने घर के आगे अमरूद और पपीते के पेड लगाए हुए थे । ॅ घर की दीवार के साथ सटे हुए थे । ऍम को देखकर थोडा डर गया तो पेड बडी और खडे थे और सोसाइटी की दीवार के पास लगे थे । बिल्कुल नहीं पीना से पेडों को देखने के लिए कहा । देना ने पेड देखकर कहा बरसात में पेड खडे हो गए । ध्यान से देखने पर आकृति से देखती है और हम तो वैसे भी नहीं कि कोई डर जाए । आप की तबियत ठीक नहीं हूँ । इस कारण आपको डरावनी आकृतियां लग रही है । आप खिडकी बंद करके आराम कीजिए ना बेटों की तरफ सोचना छोड दीजिए । अभी आप इतना अच्छा भजन गुनगुना रहे थे । अखिलेश्वर पर आज था तब क्यों का बना रहे हैं लेना नहीं । नकुल को आराम करने को कहा । नकुल के दिमाग में पेड की आकृति सब गए । नकुल आराम करने के लिए स्तर पर लेट किया और उसे नींद आ गई । अचानक खिडकी खुली और एक डरावनी शक्ल का आदमी खोतकर निकल के बिस्तर के पास खडा हो गया । कुछ पल नकुल को खोलता रहा । फिर वो आदमी नकुल को हाथों में उठाकर खिडकी से बाहर फेंक देता है । बिल्कुल की चीज निकलती है नहीं खुल के दोनों हाथ पकडकर छोड दिया नॅान सपना देखा गया नकुला खुलता है उसका बदन पसीने से तर बता रहा हूँ । बिना के प्रश्न का उत्तर सर हिलाकर देता है । बिना बिस्तर के पास रखे जब से एक गिलास पानी भरकर नकुल को देती है । नकुल धीरे धीरे पानी पीता है और पानी पीने के बाद उठकर रहता है ना कुछ ठीक नहीं लग रहा है । फॅमिली दिखाई थी और सपने में वही आकृति खिडकी खोलकर कमरे के अंदर आती और मुझे उठाकर खिडकी से नीचे फेंक देती है ना मुस्कुराकर जवाब दे दिया है । आप की तबियत ठीक नहीं है । तेज मार के कारण आपको कमजोरी हो गई । एक बात क्या आप रोज की दिनचर्या से हट गए? तीन दिन से ऑफिस नहीं रहे । बुखार के कारण सोचने और कुछ करने की शक्ति नहीं रहेंगे । इन कारणों से जब अपने घर की के बाहर पेट देखा तब घने पेड पर जो आकृति नजर आई तो आपको कुछ हटकर अजीब सी वॉटर आपने लगी यही सोच कर आप सो और नींद में वही डर आपने आकृति आपके सपने में आई ऍम मीना तो इतनी जानकारी कैसे हैं? पढी लिखी बीवी का बहुत फायदा होता है । श्रीमान दया फूल रहे हैं कि मैं दर्शनशास्त्र में ग्रेजुएट हो । हम नहीं किये सब कॉलेज में पढा है । आप चिंता मत करो । दो दिन बाद जब आप होंगे और ठक्कर रात को घोडे बेचकर सो जाओगे, तब कोई सपना नहीं आएगा तो कैसे कह सकती हूँ । आज तक हम ने कभी ऐसा सपना नहीं देखा ना । इसलिए शाम को डॉक्टर से मिलने पर नकुल ने डरावनी आकृति और सपने का जिक्र किया है । डॉक्टर ने वही दोहराया टेन इन्होंने कहा था, डॉक्टर ने एक बात और गई जब सोचते हैं अक्सर वही सपने में आता है । देशभर में हमारे दल के साथ मान भी अस्वस्थ होता है । बुखार दूसरे दिन उधर जाए तब स्वस्थ रहता है । यदि तेज लंबे समय तक चार पांच दिन क्या अधिक रहे तब हम चिंतित हो जाते हैं कि कहीं कोई बडी बीमारी ने घेर तो नहीं लिया । ये उधेडबुन हमारे मन को विचलित कर दिया । अब चिंतित मत हुई है । हम आपकी देखभाल के लिए तत्पर हैं । आजकल हम अपने शरीर था, अधिक ध्यान नहीं देते हैं और ऑफिस में आवर तोड काम करते हैं । जब शरीर घर जाता है तो बुखार के रूप में विश्राम मिलता है । तो दो दिन बाद जब नकुल पूरी तरह स्वस्थ हो गया, मीना ने उसे खिडकी से बाहर पेड देखने को कहा । बेटा और उसके प्रति कैसे लग रहे हैं । बेड खाना है और आकृति भी है । लेकिन अब डर नहीं लग रहा है । पीछे रह रही है । जब तबियत ठीक नहीं थी तब आपको डरावना लगा था । अब नहीं लग रहा हूँ यानी साहब की तबियत चंगी हैं । नकुल मुस्कुरा दिया । पीना नकुल के पीछे हट गई और दोनों हाथ निकल के हाथों के बीच से निकालकर छाती पर रखें । जब भी जनाब को डर लगे मेरे समीप आ जाएगा । पति पत्नी जितना समीर रहते हैं अगर उतना दूर रहता है ।

13 हौसला -किसके लिए

किसके लिए पांच सौ गज की आप कहते मंजिला कोठी जिसके आगे शानदार लॉन है और पीछे शानदार बनाता है उसको ठीके लोहन में आज उसके वर्ष के मालिक अनिल राय है । अकेले कुर्सी पर बैठे हैं । सामने सफेद रंग की गोलमेज है । मौसम नवंबर का है और शाम के साढे छह बजे । बल्कि गुलाबी ठंड में अनिल राय नेशनल छोड रखी है । पत्नी और बच्चे बाहर पार्टी में गए हैं और घर में सिर्फ अनिल राय और एक डॉक्टर दर्शन है । कुछ दिन से मिल रहे हैं, आसपास चल रहे हैं जिसकारण ऑफिस भी नहीं जा रहे हैं । तीन दिन अस्पताल में भी रहे । अब तीन दिन से घर पर आराम कर रहे हैं । बडा कारोबार है जिससे बच्चे देख रहे हैं । व्यापार की जनता रही हैं आज पर अचानक से एकांत घर में अनिल राय विचलित हो गए । पिछले चालीस वर्षों से अनिल राय कारोबार में व्यस्त रहे । तभी खालीपन का एहसास तो छोडो खाली समय से वास्ता ही नहीं पडा । कारोबार में डूबे रहने वाले अनिल राय आज लॉन में बैठे शाम को रात में परिवर्तित होते देख रहे हैं । आसमान काला सा हो गया है । अर्धचन्द्र उनकी आंखों के सामने आ गया है । कहीं कुछ तारे टिमटिमा रहे हैं । कहीं से कुछ बादल आए और कुछ पल के लिए जान को रख दिया । कुछ देर बाद बादल आगे चल दिए और चंद फिर खिलखिला दिया । प्रकृति के इस तरह को देखकर अनिल राय मुस्कुरा दी है । वर्षों बाद आज खुले में बैठने का अवसर मिला । पढना वर्षों तक ऑफिस के बंद कमरों में ही सारा दिन बीता । अनिल वायको अपना बचपन और कॉलेज के दिन याद आ गए हैं । कैसे वो खुले में पिछले किया करते थे । काम में उलझा मिलवाए प्रकृति में विचरण छोडकर बंद कमरों में समझ गए । आज चाहे नरम तबियत के चलते मजबूरी में खुले वातावरण में बैठना पडा लेकिन बहुत अच्छा लगा । तब आठ बजे अनिल राय थोडी थकान महसूस करने लगे । लॉन से उठकर कमरे में आ गए । थोडा खाना खाया तब आई थी और बिस्तर पर आंख मूंदकर लेट करें । थोडी देर में अनिल राय नींद के आगोश में थे । पत्नी और बच्चे जब देर रात आए तब अनिल राय सो रहे थे । सुबह जल्दी उठकर फिर से लाइन में बैठ गए । पत्नी और बच्चे देर से उठे तब तक अनिल राय स्नान करने के बाद नाश्ता करके ऑफिस के लिए रवाना हो गए । थोडी देर ऑफिस में काम देख कर और वरिष्ठ पहले जनों से मिलकर वापस कर आ गए । पत्नी क्या बात है, जल्दी घर आ गए । पति को जल्दी घर देखकर पत्नी विचलित हो रही है । अब बच्चे कारोबार संभाल रहे ऑफिस में दुख कर भी क्या करते हैं? अनिल राय कुर्सी पर बैठे हुए बोले मतलब कह कह रहेगा तो पहले करते थे वही करो और क्या मैं जो करती रही हूँ वही कर रही हूँ । पत्नी ने अनिल वैसे कहा तो किट्टी पार्टी में सारा समय बिताती हूँ । उसमें अब आराम करना चाहता हूँ । अनिर्वाय ने अपने दिल की बात पत्नी को गए । मतलब मुझे बहुत करोगे । पत्नी नहीं चाहती थी कि अनिल राय घर पर समय बिताया नहीं तो मैं पूरी आजादी है । कैसे रहना है, तुम रह सकती हूँ । मैं किसी के निजी जीवन में कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहा । ठीक है मैं जारी पार्टी में तुम आराम करो कहकर पत्नी में ड्राइवर को आवाज दी और कार में बैठकर पार्टी में सम्मिलित होने जल्दी अनिर्वाय । घर में अकेले परिस्थिति का अवलोकन करने लगे हैं । घर में या तो नौकर हैं । क्या आप इतनी बडी कोठिया निर्णायको कभी भी काटने नहीं दौडे, जो आज भी महसूस कर रहे हैं । पहले सारा दिन काम में व्यस्त रहते थे और घर सिर्फ एक तरह से सोने आते थे । अब सारा दिन घर की दीवारों को देखने लगे । दो चार दिन से कही सिलसिला चल रहा है । थोडी नरम, कभी अब के कारण कुछ आराम करते हैं या फिर सो जाते हैं । अब एक दिन छोडकर उतर जाते और लंच समय तक वापस घर आ जाते हैं । एक दिन दोपहर के समय पत्नी किट्टी पार्टी में नहीं गई । तब अनिल राय ने पूछा, चलो कहीं घूम कर आते हैं? मैंने रॉय ने अपने दिल की बात कही है, कहाँ चलना है? पत्नी सोच रही है । अनिल राय पहले की तरह किसी फाइव स्टार होटल ॅ की बात कर रहे होंगे । बस कुछ पुराने दिन याद करते हैं । वहीं चलते हैं जहाँ शादी के बाद चले थे अनिल राय के ख्वाहिश । पुराने दिन तो हराने की थी तुम संख्या गए हो । तब हमारी हैसियत नहीं थी कि पंचतारा होटल में किट्टी पार्टी करते हैं तो पास में बैठकर समय व्यतीत करते थे । लेकिन अब हम नहीं जा सकते हैं । हमारे स्टेटस है हम यही सडकों की धूल नहीं हो सकते हैं । पति बिगड गई हम भी किसी का क्या करना है । हमने अपनी खुशी और अच्छा देखनी है । अलग राय अपने पुराने दिन जब उस की शादी हुई थी वो दिन फिर से जीना चाह रहे थे । आप मेरे से ये काम नहीं होंगे । पत्नी ने साफ मना कर दिया । पत्नी के एकदम इंकार करने पर अनिल राय चुप हो गया । कुछ दिन तक चल रहा है । अपने बच्चों की दिनचर्या और व्यवहार पर गौर करने लगा । सब अपने में मस्त फॅमिली ऑफिस, क्लब और होटल में व्यस्त थे । कभी कभी उससे तबियत का पूछते और दो तीन मिनट मुश्किल से साथ बैठना होता है । रात का खाना भी एक साथ नहीं खाना होता होते । पोतियां भी अपनी पढाई और अपने दोस्तों में व्यस्त रहते हैं । अनिल राय ने इतना कभी नहीं सोचा था । बुढापे में तबियत नरम होने पर परिवार का कोई सदस्य उसके समीप नहीं होगा । उसके अर्धांगिनी भी शोभाराम में मस्त होती है तो भी अनिल राय के विचारों से सहमत नहीं थी । अनिल राय की देखभाल के लिए नौकर अवश्य तो समय समय पर खाना दबा दे जाते हैं । अनिल राय को सब का व्यवहार अच्छा नहीं लगा और सोच विचार अधिक करने लगे । एक दिन दोपहर के समय अनिल राय सोचते सोचते दो भाग में हो गए ऍम और दूसरा है अलोन आजकल बहुत सोच विचार कर रहा हूँ । इस उम्र में दिमाग पर अधिक बोझ मत डालो । कहना आसान है लेकिन करना मुश्किल है । कुछ भी मुश्किल नहीं होता । नहीं बता रहा है । मुश्किल होता है । बस संकल्प करना होता है । फिर क्या मुश्किल है ना ऐसे मुझे कुछ समझ नहीं आएगा । कुछ विस्तार से समझा कर करूँ । चलो मैं उदाहरण देकर अपनी बात स्पष्ट करता हूँ । फ्रांस ये ठीक रहेगा । जब तुम स्कूल कॉलेज में पढते थे, तब के इतने अमीर से जितना हो नहीं । तब साधारण मध्यमवर्गीय परिवार का एक मामूली बंदा था । क्या करते थे? तब स्कूल में पढाई कम और खेल कूद मस्ती होती थी । कॉलेज में भी यही सिलसिला रहा । खूब घूमना, कॉलेज के तोर संघ, पर्वत मैदान, समंदर और रेगिस्तान सब देखिए भारत देश का लगभग हर कोने में घूमना हुआ । तब घूमने से पहले कुछ सोचते थे । मस पिताजी से कुछ जेब खर्च मिल जाए तो मिलता और मैं घूमने के लिए उडान हो जाता है । अब तुम्हारे पास अनगिनत पैसे हैं, खुद के मालिक हो, किसी से जेब खर्च नहीं मानना । जब तुम खुद दूसरों को जेब खर्च देते हो तो किस लिए सोचते हूँ, निकल जाओ भारत भ्रमण पर कुछ पल पुराने सोचो और आज दिलखोलकर चाहूँ अपने साथ नहीं दे रही है उसको स्टेटस बता रहा है छोडो उसको एक बार खुदा के लिए निकलो अगली बार खुद वो हमारे साथ आएगी । विभाग के बाद तीन साल तक हम खुद को में उसके बाद व्यापार पडने लगा और उसमें डूब के रह गया । कोई बात नहीं जब जागो तभी सवेरा है उठो और कहीं घूम कर रहा हूँ ठीक है कोशिश करता हूँ कोशिश नहीं आवश्यक हूँ अनिल मुस्कुरा दिया खाना हो अब तक मुस्कुरा दिए तब चलता हूँ मुझे लगने लगा है कि तुम आवश्यक अपने पुराने जवानी के दिनों को फिर से जी हो गया डिस्ट्रॉय नहीं रोक सक ली और अनिल हो गए हैं । अगले दिन सुबह अनिल राय ने पत्नी से साथ चलने को कहा लेकिन उसने अनिल राय को बुड्डा घोषित कर दिया कि बुढापे में अनिल राय की बुद्धि सठिया गई ऍम सोचने लगा कि उसने इतना बडा व्यापार और सम्राज्य किसके लिए खडा किया । जब कोई उसका साथ नहीं दे रहा है तब वो दूसरों की चिंता क्यों करें? अब उसकी पत्नी भी साथ नहीं दे रही है । तब अनिल राय ने अंतिम निर्णय ले क्या के आराम से बेफिक्र होकर अपनी बाकी जिंदगी दिखाएगा । यही सोचकर उसने एक सूटकेस में अपनी दवाइयाँ कपडे रखे और दो दिन बाद सुबह छह बजे कि अजमेर शताब्दी से जयपुर रवाना हो ली है । आपका स्वागत है नहीं । अरे राय तो हाँ तो मैं अकेले एक नए सफर पर चाहते देख अति प्रसन्नता है । अब राय की राय तो माननी पडेगी । रेल मुस्कुरा दिया, तेल चल पडी और पानी की बोतल, समाचार पत्र और नींबू पानी अनिल को मिला । अनिल नहीं वो पानी पीना तुम्हारी सेहत के लिए अच्छा है । मेरा पीछा नहीं छोडो मैं तो तुम हो । पीछा करने का कोई मतलब ही नहीं तो हमारे अंदर समय हुआ हूँ तुम जहाँ मैं तक कहाँ निश्चित समय का इंतजार कर रहा था । अनिल समाचारपत्र पडने लगेंगे सफल उद्यमी अनिल राय सिर्फ हवाई यात्रा और वो भी बिजनेस क्लास में या फिर मर्सिडीज, ऑडी जैसी कारों में सफर करते थे और पंचतारा होटल रिजॉर्ट में रहते थे । आज जयपुर पहुंचकर एक साधारण होटल में रुके थे । कुछ देर आराम किया । शाम को जयपुर के बाजार खुलने निकल पडे । तीन दिन जयपुर के पर्यटक स्थल देखने के पश्चात अनिल राय अजमेर, पुष्कर राज उदयपुर नाम द्वारा जैसलमेर और जोधपुर घूमते हुए माउंट आबू पहुंचे । दिल्ली से निकले पंद्रह दिन हो गए । अलग राय का चाहते सामान्य रहने लगा । डॉक्टर से फोन पर बात की । डॉक्टर ने उन्हें किसी पहाड पर बाकी जीवन जीने की सलाह दी थी । अनिल राय खतम व्यापार की चिंताओं से मत पहाडों के बाकियों का लाॅक आधी बीमारी तो खुश रहने से ठीक हो जाएगी । बाकी आती बीमारियों को तब आइए नियंत्रन में रखेगी आप इस उम्र में कुछ ना कुछ तो छोटी मोटी बीमारी लगी रहेगी अनिल रहने अपनी यात्रा का । फिर फ्रेंड और फोटो फेसबुक पर डाली तो पत्नी ने अनिल राय को फोन किया कहाँ कहाँ इतनी अच्छी जगहों पर घूम रहा हूँ, मुझे लेकर नहीं जा सकते थे । पत्नी ने नाराजगी जाहिर की पडेगा । मुझे बता बोल रही थी और मना कर दिया था । अनिल रहने पत्नी को सुना दिया तो पत्तियों की भाषा आज तक नहीं समझे । अनाडी रहोगे सारी उम्र पत्नी ने ताना मार दिया । चल अगली बार चल देंगे । अब तो मैं वापस आ रहा हैं । अनिल रहने दो दिन बाद घर वापसी के लिए रेल की टिकट आरक्षित करवाएँ । कभी आटो में, कभी रोडवेज की बस में, तभी टैक्सी में, कभी रिक्शा में और कभी रेल में सफर करते हुए । अनिल राय ने लगभग एक महीना सफर किया । मशहूर पर्यटक स्थलों के साथ दूर दराज के क्षेत्र देखें । तमिल अब तुम खुश हो रहा है । मुझे आज पहली बार एहसास हुआ कि मैं अपने लिए जी रहा हूँ । पता नहीं मैं किसके लिए काम कर रहा था और क्यों? अनिल काम तो पहले भी अपने लिए ही कर रहे थे लेकिन पर कितना था के अपने से दूर हो गए थे और अब तक स्वाइन में समय होता है । तुम की कह रहे हूँ अपने मैं जमाने पर पत्नी भी लाइन पढा रही हैं । कह रही है कि अगली पर साथ लेकर चलना अच्छा मिल मैं चलता हूँ । अब कभी कभी मिलना होगा लेकिन क्यों अब तक ऍम से मिल दिया और मैं भी तुम और तुम भी हो । जब फिर स्वयं से जुडा होगे तब मिलने होगा । फायदा है आया नहीं । अनिल और राई एक हो गए अनिल रहा है ।

14 हौसला -भूत कहा

भूत कहा ये जो हम और तुम नौकरी करते हैं ना वो भी अपने घर से दूर ऍम से दूर उनकी बहुत बडी समस्या होती है । कहाँ रहे आप सोच रहे होंगे कि यह था क्या बकवास कर रहे या नौकरी करेगा वहाँ किराये पर काम कर रहा हूँ इसमें पूछने की क्या बात करे? भाई लोगों हम कोई निपट हमारे हैं नहीं जो जहाँ चाहे पडे रहे हैं भाई साहब विवाहित है । एक विवाहित को किराये के मकान में रहने से पहले कई पहलुओं पर गौर करना पडता है कि मोहल्ला शरीफों का हूँ जहाँ हमारी छप्पन चोरी हॉल बदन को कोई छेडे ना और किराया भी कम हो । अब हम काॅपर तो काम कर नहीं रहे कि मोटी सैलरी है । एक अपार्टमेंट किराए पर ले अब कम सैलरी में सब कुछ देखना होता था कि भविष्य के लिए कुछ बचत भी कर लेंगे । हुआ यूं कि दूसरे शहर नौकरी करने जाना पडा । शहर के बाहरी इलाके में हमारी कंपनी का प्रोजेक्ट था । तब थोडी दूरी पर न्यू टाउन में हमें भी उसमें उच्चतर वजीफा रेट पर एक फ्लैट किराए पर मिल गया । अब जो ये प्राइवेट कंपनी वाले पूरन बात सोचते हैं, बहुत करवाते हैं । देर रात तक ऑफिस में बिठा रखे हैं । ऑफिस से घर जाने के लिए कोई सवारी भी देर रात के बारह बजे कहाँ से मिलेगी इसका समाधान कंपनी कहाँ से करवा दिया कि सबके घर पर कार छोड देंगे और ऍम अपने घर ले जाएगा । आप क्या कर जब प्रोजेक्ट को तयसीमा में सम्पन्न करने के कारण ऑफिस से निकलने में अक्सर देरी होने लगी । ऑफिस से घर के बीच भवन निर्माण थोडी थोडी दूरी पर हो रहे थे । ऍफ ऊटी और गड्ढे से लबालब थी । ऑफिस में देर होने पर ऑफिस के साथ घर तक छोडने लगी लेकिन पत्नी की फिर वो तो रहती है । एक दिन ऑफिस में बहुत देर हो गई । रात के साढे ग्यारह बज रहे हैं । हम चार सहकर्मी कंपनी की कार में बैठकर ऑफिस से निकले । मेरा घर अंत में आता था । रास्ते में तीनों सहकर्मी अपने घर पर उधर हैं । सडक संजान थी । निर्माण कार्य चारों तरफ प्रगति पर था । इस कारण स्ट्रीटलाइट अभी लगी भी नहीं थी । कार की हेडलाइट अंधेरे को चीर रही थी । एफएम रेडियों पर पुरानी फिल्मों के गीत बच रहे थे । अंधेरे में ड्राइवर को सडक के गड्ढे की गहराई का अंदाजा नहीं हुआ । कार गड्ढे में फंस गए और कोशिश के बावजूद गड्ढे से बाहर नहीं निकले है । ड्राइवर ने मोबाइल की रोशनी से देखा और हताश होकर बोला तब जेल कार कर दिए तो टूट गया । कॉलेज निकल गया काफी कडे में और इतनी रात कार्यका मिस्त्री भी नहीं मिलेगा । कुछ सोचने के बाद मैंने ड्राइवर से कहा आपका घर यहाँ से कितना दूर है । आप ऍम उठकर मेरे घर का रास्ता है । पैदल आधा घंटा लगेगा और आपका घर चलाने से बाए मुडकर हैं । यहाँ रखने का कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है । कार को यहाँ छोडकर पैदल चलते हैं । ऐसे टूटी फूटी कार कौन ले जाएगा? सुबह ट्रेन से कार पक्ष बाँट ले जाना । मैंने ड्राइवर से कहा साहब आप शहर में नहीं हैं थोडा संभलकर चलना । सुनसान सडक पर रोशनी भी नहीं और कटे हैं । इस समय अंधेरे में चोर लुटेरे मिल सकते हैं । काफी वारदाते होते सुना है । एक बात और साहब जी भी मिल सकते हैं । चोर लुटेरे के नाम पर मुझे कोई असर नहीं हुआ । महीने के आखिरी दिन चल रहे हैं । जेब में एकलौता सौ रुपए का नोट है, क्या मिलेगा ऍम भूत कर हम सुन करना चाहता हूँ । भूत क्या बात करती हूँ । पास आती है तो इंसान जगह पर ही भूत मिल सकते हैं । रात का समय इसी समय बहुत विचरन के लिए निकलते हैं । ड्राइवर ने खुलासा किया क्या तुमने कभी देखा है भूत ऍम करने को कहा? शहर में तो नहीं देखें पर गांव में बहुत होते हैं । ड्राइवर की बात सुनकर मैंने उससे पूछा भूत शहर में क्यों नहीं होते हैं आपके शहर में हम आदमी को तो रहने की जगह मिलती नहीं । भूत कहा रहेंगे । ड्राइवर की बात में दम दिखाएंगे । आधी रात को समय व्यक्त करने से बेहतर घर चलने में मैंने भलाई समझे । चौराहे ॅ और मैं भाई मुड गया । आसमान काला से आता है । ऊपर देखा कोई तारा नहीं और चंद भी बता रहे हैं । इसका मतलब आज अमावस की रहते हैं । दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा । मुझे ड्राइवर की बात याद आ गई । अमावस की रात खूब विचरन करते हैं । थोडा घबरा तो रहा था लेकिन कोई और चारा भी नहीं था । शुक्र रहा कि उस समय आवारा कुत्ते नहीं थे । क्या भरोसा नहीं काट ले । धीरे धीरे घर के चलने लगा । सुनसान सडक पर चौदह रहने का फायदा नहीं हुआ । पाॅवर कि भूत वाली बात दिमाग में शायद कुछ गई थी । सन्नाटे में हल्की हवा का भी अधिक शोक लगने लगा । ऐसा प्रतीत होने लगा । शायद कोई पीछा कर रहे हैं । हाथ जोडकर देखने की हिम्मत नहीं हुई । कुछ हुआ तो कदम कुछ और हो जाते हैं । दिल की धडकन तेज हो गई । डर के कारण कदमों की भी कभी पड गई । मध्य पर हल्के पसीने की पूंजी डपटने लगी । तब ये ऍम कब तारकिशोर से दिल धडक कर बैठ गया हूँ । डरने तेज पैदल की गति को दौड में परिवर्तित कर दिया । सुनसान सडक डरावनी प्रति होती है । कदम कुछ और हो जाते हैं । मन का डर है जो सुनसान जगह पर कुछ और अधिक हो जाता है । अमावस की अंधेरी रात में दूर से रोशनी नजर आधी देख हिम्मत पडती है । उम्मीद सकती है और गंतव्य पर पहुंचने की हिम्मत बढाती है । पौष्टि अपनी कॉलोनी के मकानों की थी । आखिर में पंद्रह मिनट बाद घर पहुंच गया । पत्नी इंतजार कर रही थी तो कोई नहीं । मैंने प्रश्न किया आपको क्या हुआ हूँ? उसी ने भी आ रहे हैं । तबियत ठीक है ना? पति थोडी चिंतित हो गए तो कार खराब हो गई और पंद्रह मिनट पैदल चलना पडा । इसलिए पसीना आ गया । हो जाती है । मैं तो अभी कुछ दिन और देर से कपडे बदलकर मैं भी स्तर पर ले क्या संबंध नींद नहीं आती है कहकर पत्नी और निकट हो गए ड्राइवर की बात सोचते हुए अपनी छप्पन चोरी पत्नी की ओर देखकर मुस्कुरा है कि शहरों में आदमियों को रहने की जगह नहीं है भूत कहाँ रहेंगे डर मन का पहनती मांगा अकेलापन ही होते हैं अब जब छप्पन चोरी पत्नी आगोश में हो तब डर किसका अच्छा पासको दिल मचल जाता है प्रेम पुजारन हो विधायक पे आ जाता है अब जब प्रेम से देखती हो समय हो जाता है तो दूर होती हो तब्दिल धडक चाहता है अब भूत का सिर्फ प्रेम के बारे मैं

15 हौसला -रात

रात के आठ बजे अमरनाथ ने भोजन किया और उसके बाद घर के बाहर तस्वीरें । टहलकर अपने बिस्तर पर लेटकर साढे आठ बजे अमरनाथ में हैं तो उस की यही दिनचर्या है । साढे आठ बजे तक सो जाते हैं । अमरनाथ की उम्र लगभग नब्बे वर्ष की है तो वर्ष छोटे भी हो सकते हैं और बडे भी । उस समय कोई जन्म प्रमाणपत्र तो बनते नहीं थे फिर भी उम्र के आसपास अवश्य शरीर कमजोर हो गया है तो उम्र का तक आता है । चुस्ती फुर्ती अब रही नहीं लेकिन मन अब भी शक्तिशाली है । तो ऊंचा सुनने लगे पर हवास एकदम कडक है । दो घंटे की नींद के पश्चात अमरनाथ साढे दस बजे के आसपास उठते हैं । बच्चों के रात के खाने का समय टीवी चल रहा है और डाइनिंग टेबल पर खाना लगा हुआ है । कुछ डाइनिंग टेबल पर बैठकर खा रहे हैं और कुछ सोफे पर बैठकर खाना भी खा रहे हैं और साथ टीवी भी देख रहे हैं । अमरनाथ बाथरूम जाकर तो सौ करते हैं और डाइनिंग रूम जाकर बच्चों से पूछते हैं कि कौन सा टीवी सीरियल देख रहे हैं । उन को मालूम है कि बच्चे सीरियल देखते हैं, अमरनाथ सीरियल नहीं देखते हैं । उन्हें न्यूज चैनल देखना पसंद है । उनकी उंगलियों पर देश प्रदेश के सब समाचार होते हैं । सारा दिन हिंदी और इंग्लिश के सारे न्यूज चैनल देखते हैं । हाँ, एक बात और उन्हें खेलों का भी अच्छा शौक है । मैच कोई भी हो, चाहे क्रिकेट का या हॉकी का । टेनिस, बैडमिंटन, कुश्ती सारे खेल देखते हैं । खेल में विशेष रुचि के कारण बच्चों के साथ पौत्र पौत्रियों के साथ अच्छी पडती है । बच्चों के साथ टीवी पर मैच देखना और उस पर चर्चा करने से उन का समय आसानी से व्यतीत हो जाता है । आखिर और कोई काम भी तो नहीं है इसमें आपने वर्ष की उम्र में करने के लिए तो मैं कैसे काटा जाए । इनके यही सबसे बडी समस्या होती है । बच्चे तो ग्यारह बजे खाना खाने के पश्चात शयन कक्ष में चले जाते हैं और अमरनाथ एक बार फिर बिस्तर पर ले जाते हैं । दो चार करवट बदलने पर नींद आ जाती है । नींद भी कितनी है दो घंटे या तीन घंटे फिर रात के दो बजे उठ जाते हैं । ये समय एकदम शांत और एकांत का होता है तो घडी टिक टिक की आवाज सुनाई देती है जो रात के फिर आने से युद्ध करती प्रतीत होती है । अमरनाथ पात्रों सुसू करने जाते हैं । आपस बिस्तर पर बैठ कर थोडा सा पानी पीते हैं । पानी का जगह क्लास बिस्तर के पास छोटी सी में इस पर रखा रहता है । क्या करें? अकेले अमरनाथ कोई बातचीत के लिए नहीं । पत्नी पहले ही सत्तासी बन चुकी है । जब पत्नी थी तब भी रात को तीन चार बार होते थे । तब पति डांट के लहजे मैं कहती खुद तो होते नहीं, दूसरों को भी नहीं होने देते हैं । वो तो खडे भेजकर होती थी । कोई उसकी नींद में खलल डाले । उसको बिल्कुल पसंद नहीं था । जब होती थी तब भी कोई भी बच्चा उसके कमरे में नहीं घुसता । तरह से भी खटपट कोई और नहीं खुली तब शामत समझे । ऍम नहीं क्या? तो में अमरनाथ अपनी रात बिस्तर पर लेटे हुए बिता देते हैं । सुबह के साढे चार बजे हमारे साथ कि नहीं एक बार फिर खुलती है । प्रभात पहला का समय अब अमरनाथ बिस्तर छोड देते हैं । बाथरूम जाते हैं । नित्यक्रिया के पश्चात एक गिलास पानी पीते हैं । पांच बज रहे हैं । सुबह शहर के शौकीन पार्क जाने के लिए निकल रहे हैं । कमरे की खिडकी खोलकर बाहर जाते हैं । रात की कालिमा अभी है । पढने के शौकीन अमरनाथ के कमरे में एक अलमारी में पुस्तकों का भंडार है । धार्मिक, अध्यात्मिक कहानियां और उपन्यास । सबकुछ उपलब्ध है तो बच्चे भी अक्सर पडने के लिए अलमारी खोलकर अपनी पसंद की पुस्तक ढूंढते हैं तो प्रभात मिला के समय रामचरितमानस पडने लगेंगे । कई बार पढ चुके हैं । अब तो अमरनाथ रामचरितमानस खोलते हैं । जो भी प्रश्न खुलता है वहीं से पडने लगते हैं । आधे घंटे के पश्चात रामचरितमानस बंद करके गीता खोलकर पडते हैं । आधा घंटा गीता पढने के बाद अमर रात बिस्तर पर ले जाते हैं और आधे पौने घंटे की जबकि फिर से ले लेते हैं । बच्चे अब एक एक कर उठते हैं । छोटों ने स्कूल कॉलेज आना है और बडों ने ऑफिस होने चाहे बनाकर आवाज दें । आपाजी चाहे बहु की आवाज सुनकर अमरनाथ होते हैं और अपनी पसंद के बिस्किट बिस्तर के पास में इस पत्र के दो तीन पत्तों में से निकालते हैं और बिस्किट को चाहे होकर खाते हैं चाहे मैं तो बोलने से बिस्किट नरम हो जाते हैं । अब गिनती केदार मुंबई नर्म चीज दिखा सकते हैं । चाय पीने के बाद अमरनाथ घर के बाहर आकर टहलते हैं वो और धीरे से समीप के मंदिर की ओर पडते हैं । प्रतिदिन की दिनचर्या है अपने आप सब कुछ होता है । रास्ते में परिचित मिलते हैं उनसे नमस्ते और राम राम होती है । मंदिर में दर्शन के बाद आधा घंटे तक पढते हैं । कुछ वार्तालाप पुजारी से और कुछ श्रद्धालुओं से अमरनाथ की हो जाती है । सभी प्रतिदिन के आने वाले हैं । एक दूसरे से हालचाल भागते हैं । मंदिर से वापस लौटते हुए सबसे फल वालों के पास रखते हैं । कुछ मोल भाव करके सबसे असफल खरीदते हैं । मजाल है कि कोई गलत सब्जी फल अमरनाथ को पकडा देते । कभी सब्जी वालों को चुनकर खरीदते हैं तो कांदा स्वयं भी अमरनाथ को कह देते हैं बाबू जी आपके मतलब की नहीं है । सब्जी और फलों की गुणवत्ता पर अमरनाथ ने कभी समझौता नहीं किया । श्रेष्ठ सबसी असफल ही खरीदते हैं खराटे थोडा विश्वास किया स्तर पर लेकर ही नहीं आ गयी । नाश्ता के घर से पुत्रबधु ने आवाज लगाई है । पापा जी नाश्ता आवाज सुनकर अमरनाथ होते हैं । नाश्ता करने के बाद टीवी देखते हैं । समाचार समाचारपत्रों पर चर्चा और बहस अमरनाथ चौक से देखते हैं । कुछ देर बरामदे में समाचार पत्र और पुस्तकों के साथ रहते हैं । पडोसियों से कुछ देर बातचीत करके समय व्यतीत होता है । दोपहर के खाने के पश्चात आराम करने के लिए स्तर पर लेते हैं । दोपहर की नीम शाम की चाहिए कि समय खुलती है जब एक पर फिर पुत्रवधू आवाज देती है । आबाजी जाए पुत्रवधू से सीमित वार्तालाप होता है । खाना, चाय और नाश्ता सर पे नहीं के अंतर्गत अमरनाथ का पुत्रवधू से वार्तालाप होता है । रात के खाने के पश्चात फिर वही तन्हाई और अखिला पैसे तो जीवन साथी के चले जाने पर तन्हाई कुछ अधिक हो गई । दिन में तो थोडी बहुत बातचीत अडोस पडोस और मंदिर में हो जाती है । रात को सोते जागते करती है । नींद खुलती और पुरानी बातें और मित्र संघ के साथ ही याद आती हैं लेकिन करके सभी साथ छोड रहे हैं । जीवन साथी के जाने के पश्चात जीवन सोना हो जाता है । जीवन साथी के साथ दिल की बातें होती है । अब यादव के सहारे अमरराम जी रहे हैं । अमरनाथ इन दिनों कुछ अस्वस्थ है । एक बार दोपहर को खाना खाने के बाद सोचे तो काफी देर तक सोते रहे हैं । कुछ ठंड हल्की हल्की पडने लगी । बादल छाए हुए थे, अंधेरा छा चुका था । जब पुत्रवत होनी चाहिए की आवाज लगाई तब अमरनाथ ने पूछा आज जल्दी उठ गए । अभी तो दिन भी नहीं निकला है । पुत्रबधु ने बताया कि सुबह नहीं शाम का समय शाम की चाय के लिए आवाज लगाई है । मैं समझा कि सुबह हुई है । काफी देर तक सोता । पुत्रबधु सिर्फ मुस्कुरा दी । रात को अमरनाथ सोचने लगे कि आज उन्हें सुबह रात का अंतर नहीं मालूम हो । ये क्या किसी बात का कोई संकेत है? अमरनाथ की बात में दम है । शर्तिया एक संकेत है पूर्ण रात्रि का । अब अक्सर अमरनाथ कुछ ऐसा सोचते हैं किस होने के पश्चात हो जाते हैं क्या दिन है ग्यारह हो तब भी क्या करें? उम्र भी नब्बे के ऊपर है । खाने की रुचि भी कम हो गई है और हम अधिक करते हैं । शाम के समय पुत्रवधुओं से पूछते हैं कि बच्चे उठे या नहीं । ऑफिस नहीं जाना है क्या कौन सा मैच कल पापा जी कुछ की बातें करने लगे तो समय का अंदाजा ही नहीं होता हूँ । शाम को पूछते हैं के दिन हो गया । बच्चा ऑफिस क्यों नहीं गए? पुत्रवधुओं ने पति और बच्चों को बताया, हर व्यक्ति मुझे कहता है कि बॅायकॅाट पुत्र ने जवाब दिया सुना ये मजाक की बात नहीं है । उम्र अधिक हो रही है, अकेले मंदिर जाते हैं । मुझे डर लगता है । ध्यान तो रखना होगा लेकिन एक बात है फॅमिली भी आपने सबका स्वाइन करते हैं । ये बहुत बडी बात है । अमरनाथ को भी अहसास होने लगा की लंबी राहत आने वाली है । एक दिन जाना तो सबको है उनके मित्र हम उम्र, संगी साथी और पत्नी को एक एक करके अलविदा कर चुके हैं । अब उनको ऊपर मिलने का कभी भी समय आ सकता है । होने वाली रात अब आने वाली है । एक दिन बीमार पडे बुखार एक सौ दो कमजोर शरीर ने साथ छोड दिया । बिस्तर से उठने में दिक्कत होने लगी तो करने उठे और बाथरूम में गिर पडे । गिरने की आवाज सुनकर पुत्र और पौत्र झटपट अमरनाथ को सहारे से उठाते हैं । डॉक्टर को घर बुलाया । जैकब के पश्चात उसने अस्पताल ले जाने को कहा । अंकल की तबियत ठीक नहीं है । अस्पताल में उपचार संभव है । जो घर में हम नहीं कर सकते हैं । अमरनाथ उठने की हालत में नहीं ऍम अस पता ले गए । डॉक्टर जांच करने लगे तो लगता है हूँ अब जाने का समय आ गया है । अमरनाथ अपने पुत्र को अस्पताल में कहा पापा जी ऐसा नहीं कहते हैं । डॉक्टर इलाज कर रहे हैं । दो तीन दिन में घर चलेंगे । पुत्र ने सब को जानते हुए भी दिलासा दिया । सपने कहीं जाना ही है । अमरनाथ ने फिर दोहराया, उत्तर को भी अहसास हो गया कि अमरनाथ ने सत्य कहा है । डॉक्टर भी कह रहे हैं उम्र का रखा जाए जी ने को दस दिन या तार दस वर्ष । अगले दिन सुबह पुत्र नहीं । जब अस्पताल की कमरे की खिडकी का पर्दा हटाया तब अमरनाथ पूछा, सडक कहाँ जा रही है? इस सडक पर? कभी नहीं नहीं जगह लगती है । अमरनाथ की बात सुन पुत्र समय रहेगा । अस्पताल का कमरा तीसरी मंजिल पर है । बिस्तर से कोई सडक भी नहीं रखती है । पापा क्या कह रहे हैं, किस तरह चले, किस स्थान की बात कर रहे हैं । क्या था निकट जैसे दिया पूछने से पहले अधिक तेजी से टिमटिमाता है । ठीक वैसे अमरनाथ अगले दिन ठीक से बैठा लिया । उन्होंने पुत्र से घर और ऑफिस के बारे में पूछा । घर के हर सदस्य का हाल चाल पूछा । पुत्र को पिता के स्वास्थ्य में सुधार देखा और अमरनाथ अस्पताल से घर आ गए । अमरनाथ का कराना केवल एक औपचारिकता ही रही है । दो दिन बाद आखिर ॅ गई । रात को सोते और एक अनजान सडक पर लंबी शहर को चल पडे । अपनी धर्म ही मित्र और सगे संबंधियों से मिल रहे हैं । हाँ,

16 हौसला -रोमांच

रोमांच रात के समय होने से पहले तृप्ति ने अपने पति तरुण को कहा सुना बन रहा हूँ । तरुण का पूरा ध्यान टीवी के सीरियल पर था । पति को टीवी में रामा देख तृप्ति ने झट से रिमोट पर कब्जा किया और टीवी बंद कर दिया । टीवी बंद होते तरन समझ गया कि कोई बात आवश्यक है तो तुम कुछ कह रही थी । तरुण नेतृत्य अपनी बाहों में लेकर कहा कुछ तुमने कहना है प्रियतम सुनने को बेताब खुद दिया था मेरा जीवन सार हो तुम प्रियता, मेरा आधार होता क्या था तब मैं कुछ नहीं किया था । तुम मेरी जान हो गया था । इस तरह की शायरी सुनकर तृप्ति ने अपने होटर उनके होठों पर रख दिया । चुनाव जितनी भी तारीफ मत किया कीजिये प्रेम है आपका । हम एक्ट्रीम रहने दीजिए । छोटी तारीख करके प्रेम को काम मत कीजिए । पत्नी है मैं आपकी खुदा का ज्यादा मत कीजिए । श्रीमती दिया तो शायरा बन गई । मजा आ गया । आपके मुख से फूल निकलते देखकर श्री मांझी पहले के भटकाने वाली बातें छोडी और मुद्दे पर आएंगे । तृप्ति ने तरफ से कहा ओके मालूम वो काम कीजिए । मैं आपका ताबेदार आपके होटल का गुलाम हो । तरुण ने तृप्ति की आंखों में जाकर पहले तो टीवी देखना बंद कीजिए फिर बातें होती रहेंगी । ये सीरियल अधिक जरूरी नहीं है । कल ऑफिस में टीवी सीरियल पर टेस्ट होने वाला है तब बताई वरना मेरी बात ध्यान से सुने । सीरियल बाॅस तो धर्म होता है ऍफ हो जाए बस आपको तो कीजिए तरुण थोडी नाराज व्यक्ति को मस्का लगा है । ओके मस्का लगाना बंद करो । पहले ये बताओ और सब मिल गई । आपको ऍम को मुस्कुराते हो जाएगा हूँ और साथ ही बरसात है । कल सुबह ऑफिस जाने तक तुम बस आदेश करूँ । ताबेदार सेवा में हाजिर है । तृप्ति के लिए ऐसा होता तो हम कब के पहाडों पर घूम आए होते हैं? तरुण श्रीमतीजी को पहाडों पर जाना है, रखती है । सारी दुनिया पहाडों पर घूमने जाती है और एक हम है कि आज तक नहीं गए । तुम तो व्यवहार से पहले पहाड पर रहती थीं । पच्चीस वर्ष पहाडगंज पर रही तरुण ने मजाकिया अंदाज में कहते हुए व्यक्ति के गानों पर चंबल अंकित कर दिया । इस्तेमाल आप छोड कर मुद्दे पर हूँ । कब ले चलो पार पार निफ्टी ने भी चुंबन पर चुंबन अंकित कर दिया । तरुण पहाडगंज पहले दो चार दिन रखती श्रीमानजी । आपका सामान्य ज्ञान सुधार तो मेरा मायका मुल्तानी ढांडा में है । तरुण मुल्तानी ढांडा है तो पहाडगंज में थी अब नाम के नाम पहाडी धीरज आनंद परिवार, नाम पहाडों वाले और इलाके तंग गलियों वाले पता नहीं दिल्ली वालों ने क्या सोचकर नाम रखें पहाडगंज पहाडी धीरज आनंद पर बात अब मजा छोडो और गंभीर मुद्दे पर आ जाऊँ । तब हम कहाँ चलो? कहीं भी रोमांटिक जगह जहाँ भीड ना हो चर्च में और तुम तरह फॅस के साथ अगर रोमांच भी हो जाए तो कहीं भी ले चलो । चलो तो सही इस पहाडगंज से तो बाहर निकलो । तरुण ने ऑफिस में छुट्टियों के लिए आवेदन किया । सहकर्मियों ने सडक के रास्ते ले जाने की सलाह दी । प्रकृति का नजारा देखने के लिए सडक मार्ग से ले जाए और वापस हवाई जहाज से आए । छुट्टियां मंजूर हो गयी । तरुणा का पहला पडाव मनाली था । दो दिन मनाली में रुके । तृप्ति को मनाली बहुत अधिक पसंद आया । सेब के बागों में भी घूमना हो गया । ठंड में तो धूप का आनंद लेते हुए मनाली का हर पल क्राॅस के साथ बिताया तरह वही रुक जाते हैं । रोमांटिक जगह अपना कार्यक्रम मतलब यहाँ दिल लग गया, अब आगे नहीं जाएगा यहाँ का फायदा बाॅल तृत्य नेता उनकी बाहों में मचलते हुएकहा मित्रों से लेने की बहुत तारीफ नहीं । छुट्टियों का पूरा आनंद उठाते हैं । फॅस के साथ तरुण को सडक मार्ग से ले जाने के उत्सकता हो रहे हैं । व्यक्ति का मन आगे रहे जाने का नहीं था लेकिन तार उनके उत्साह के आगे चल गए और तडके सुबह टैक्सी में बैठ लेह की ओर रवाना हो गए । ठंड बढती जा रही थी और साथ ही कुदरत का नजारा शानदार होता जा रहा था । तरफ कार की खिडकी से बाहर का नजारा देखकर मुक्त हो उठा । प्रतिन इतना सत्तर उनके कंधे पर टिका दिया । बाहर के नजारे देखेंगे तुम थोडा आराम करने लगे । चक्कर आ रहा है पहाडों का सफर है खुल खुल सर हम आमदार सडक में चक्कर आ रहे हैं । प्रगति ने पन्ना आंखों में कहा दवा ले लो चक्कर खत्म हो जाएंगे नहीं रहने तो आंखे बंद करके आराम करती हूँ । थोडी देर में ठीक हो जाएगा । तृप्ति ने अपना सर तरुण के कंधे पर दिखा दिया । तरुण कुदरत के नजारे देखा था और तृप्ति आंखे मूंदकर परिणाम कर रहे थे । मध्यम करने से टैक्सी सफर में आगे बढती जा रही है । तीव्र मोड आते और तृप्ति की आपके खुलती तरण से पूछने की नहीं कब आएगी एक तीव्र मोड पर टैक्सी का संतुलन बिगडा और स्थायी की ओर लुढकने लगे । अचानक से क्या हो गया? तृप्ति की ठीक नहीं है । कितनी ऊंचाई से टैक्सी गिरी और कौन सी जगह व्यक्ति को नहीं मालूम । छत्रपति आंखे मूंदकर आराम कर रही थी । एक झटके से उठी टैक्सी किसी के बीच वापसी हुई थी । बाहर कैसे निकले? तरुणतारण की आवाज लगाई । पटना तो तरह से नजर आया नहीं । उसके मुख्य आवास निकलता रही थी । खोलकर सीखना चाह रही थी, परंतु उसकी ठीक बाहर नहीं पा रहे थे । उठकर तरुण को छोडना चाह रही थी । तभी टैक्सी का उसकी ओर का दरवाजा खोला । टैक्सी ड्राइवर अपनी सीट से बाहर आया और प्रभाती का हाथ पकडे और एक झटके में तृप्ति को टैक्सी से बाहर निकालकर आसमान में उडने लगा । सबसे नीचे देखता, उनको पकाती । अब उस तरह टैक्सी की पिछली सीट पर बैठा नजर आ रहा है । टैक्सी भी सडक पर चलती नजर आ रही है । तब भी अपने को हवा में उडता महसूस कर रही है । एक ठीक सोरखी निकलती है । प्रतीक क्या हुआ तब तो ठीक है ना सर हमने प्रतीक अपनी बाहों में जकड लिया । ठंड में तृप्ति को पसीने छूट रहे तरुण ड्राइवर को टैक्सी किनारे रोकने को कहा । कृति ने हाथ खोले । उसने अपने को तरुण की बाहों में पाया करती है । अगर हो रही थी हूँ तुम सुबह रहेंगे क्या कोई सपना देखा? तृप्ति संभालकर सीट पर बैठी है और टैक्सी डैशबोर्ड पर रखी शिव की मूर्ति को प्रणाम कर प्रभु वंदना करती है हूँ । फोन नाम कश्यप और न भविष्य तरण मालूम नहीं, बहुत डर आपका सकता था । मैं चला रही थी पर चेक नहीं निकल रही थी । ऍफ का था छोडना नहीं । तरुण फॅमिली आपने भी कभी सच हुए हैं क्या? बाहर कुदरत की बाहर देखें इग्नो का रोमांच आ रहा है । जब्दी मैंने जो देखा वैसा रोमांच किसी को ना दिखाई थी । तब क्या? क्या उसे भूलना ही बेहतर है? तब भी तरुण से जब पक गए दरं कृति को देख रहा था और तृप्ति तरह क्या हमें डूब गए?

17 हौसला -अकेलापन

ऍम अकेलापन दुबई के साथ बजे सुरेंदर कमरे में समाचार पत्र पढ रहे हैं । उनके पुत्र ने एक वर्षीय पौत्र को सुरेंदर की कोर्ट में दिया । चलो दादू को गुड मॉर्निंग बोलो बहुत शौक है । ज्यादा कहते हुए समाचार पत्र को अपने नन्हें हाथों में लेकर मसल देता है । इस कारण समाचारपत्र फट जाता है । फडे समाचार पत्र को देखकर शौर्य खुशी से उसने लगता है शौर्य के साथ सुरेंदर खेलने लगते हैं और जोर से हफ्ते ठेकेदारी सुषमा पूजा समाप्त करके शौर्य को गोद में ले लेती है । आप समाचारपत्र आराम से पढो मैं इसको संभालती हूँ । अभी सुरेंदर अलग अलग फटे हुए बन्दों को जोडना है । तभी उनकी पांच वर्षीय पुत्री सुहानी आकर सुरेंदर से चिपक जाती है । कॅालिंग सुहानी गुड मॉर्निंग कहकर सुहानी दादा के कंधे पर चढ जाती है ना जो आपके सिर के बाल कहाँ गए तो हनी ने सुरेंदर के सर पर हाथ फेरते हुए पूछा आपने खींचे थे ना? इसलिए सब उठ गए तो उन्होंने मुस्कुराते हुए तो हानि से कहा दादर झूठ बोल रहे हो । मैंने कब खींचे मैं तो कल आई हूँ । बाल तो कल भी नहीं थे । कहकर सुहानी सुरेंदर के कंधे पर चढकर पहुँच जाती है और सर पर हाथ फेरते हुए बाल खींच लेती है । सुहानी बॅाल मत की जो दर्द होता है आप मेरे सिर की चंपी करूँ । सुहानी मस्ती में दादा सुरेंदर के सर की चंपी करते हुए बाल भी खींच लेती है तो अंदर को दर्द होता है । फिर भी मैं सुहानी के साथ मस्ती करते हैं तो इधर अपने पौत्र और पौत्री के संग मस्ती करते हैं तो अंदर की पुत्रवधू सुहानी को डांट कर डाइनिंग टेबल पर दूध पीने के लिए बिठा दिया । जोहानी मस्ती में दूध पीते हुए तब करा देती है, कब टूट जाता है । सुहानी मान से डांट खाती है और होते हुए दादी की गोद में छुप जाती है । नरेंद्र और सुषमा सेवानिवृत्ति के पश्चात अकेले जीवन व्यतीत कर रहे हैं । शादीशुदा पुत्र और पुत्री अपने परिवार संग दूसरे शहर में रहते हैं । वर्ष दो के बाद कभी मिलने आते हैं । अब घर में आना लग जाती है । बढना दोनों पूरे पति पत्नी सारा दिन तिवारी ताकते हुए टीवी देखते आज पोते पोती संग सुरेंदर चहक रहे हैं । स्नान के बाद सुरेंदर पूजा में बैठते हैं तब शौर्य गोद में मस्ती में कभी ताली बजाता है । कभी को दी से निकलने की कोशिश करता है । सुहानी बगल में बैठकर मंदिर की घंटी बजाने ऍम नाश्ता करने के बच्चान सुरेंदर और सुषमा, सुहानी और शौर्य को लेकर बाजार जाते हैं और उनके लिए कपडे और खिलाने खरीदते हैं । दोपहर के समय घर आकर थाने के पश्चाद् आराम करते हैं तो हानि कल कभी बाहर है तो चले अगर दिखाते हैं वहाँ क्या होता है जादू सुहानी उत्सकता में सुरेंदर से चिपक जाती है । आपको शेर, हाथ ही जेब्रा, दरियाई घोडा बंदर और बहुत सारे पशुपक्षी नजर आएंगे । आपको बहुत मजा आएगा तो इधर सुहानी को बताते हैं सुहानी सब सच्ची क्या होंगे? दादू सुना हो तो चुके होंगे जोहानी मुझे डर लगे ज्यादा दो डर नहीं लगेगा क्योंकि एक तो हम आपके साथ होंगे और उनको पिंजडें क्या बाडे में रखा जाता है । हम सब को दूर से देखेंगे तो इंटरनेट सुहानी का डर दूर किया । अगले दिन सुरेंदर सुहानी को चिडिया घर लेकर जाते हैं । अभी तक सुहानी ने चांदर टीवी पर देखे थे । आज उन को सामने देखकर अतिप्रसन्न हुई है । पांच वर्षीय सुहानी कितनी जल्दी थक गई तब सुरेंदर उसके साथ घर वापस आ गए । घर आकर सुहानी खुशी में झूमते हुए सबको बताती है कि उसने शेयर देखा । हर रोज सुबह सुहानी और शौर्य के साथ सभी के पास चाहते सुहानी को छोडा चलाते हैं । एक सप्ताह बीतते पता ही नहीं चला और बच्चों के वापस जाने का समय हो गया । छलकती आंखों के साथ सुरेंदर अपने बच्चों को पैदा किया । बच्चों के जाने के पश्चात सुरेंदर सुषमा अकेले रह गए । बच्चे अपने साथ रौनक ले गए । दुश्मनी सुरेंदर के कंधे पर हाथ रखकर कहा । बालकनी में समाचार पत्र पढते हुए तो इंटरनेट चश्मा समाचारपत्र टेबल पर रखते हुए कहा घर सोना हो गया । खाना बच्चों से होती है । समय पंख लगाकर उड गया । एक सप्ताह फुर्सत ही नहीं मिली और अब करने को कोई काम नहीं है । सुषमा सेवानिवृत्ति के पश्चात समय व्यतीत करने की समस्या था । कोई समाधान नहीं है । बच्चों के साथ संयुक्त परिवार में मन लगा रहता है । अकेलेपन की कोई दवा नहीं है । सूचना पूरे दिन में दो से तीन घंटे का काम है और बाकी समय किताबे पडने और टीवी देखने में बताना पडता है । अब उम्र के इस पडाव में हकीकत से मुंह नहीं मोड सकते । सच्चाई स्वीकार करके प्रभु बंधन करते जीवन बिताना है । सुषमा ने सुरेंदर क्यों देखा हूँ? बच्चों से कभी कभार फोन पर बात हो जाती है तो चेहरे पर मुस्कान आ जाती है तो अंदर का अपने चेहरे के सामने बच्चे नजर आ रहे थे और हाँ के नाम हो गई । एक दिन शाम को बाजार से फल सबसे और रसोई का सामान खरीद कर तो अंदर और सुषमा घर लौट रहे थे तो साइटि क्रिकेट पर भीड जमा हो रखी थी । रिक्शे से वहीं उतर गए । पुलिस में खडी थी और लोग खुसर पुसर कर रहे थे । पूछने पर पता चला कि एक मकान में चोरी हो गई । मकान में रहने वाला परिवार शादी में दूसरे शहर गए थे । दो दिन मकान में ताला लगा था । जब वापस आए तब चोरी का पता चला । सोसाइटी के चौकीदारों पर शक की सुई घूम रहे जिन्हें हर मकान और उनके परिवार के आने जाने की पूरी जानकारी होती है । पुलिस चौकीदारों से पूछताछ कर रही थी तो और सुषमा घर आ गए । चश्मा अब हम दोनों को चौकन्ना रहना चाहिए । दिन दहाडे चोरियां और बुजुर्गों पर हमले हो रहे हैं । चोरी के समय तो सडकों पर कातिलाना हमला अब आम बात हो गई है । सुरेंदर ने चिंता जाहिर की तो अंदर हमारे यहाँ तो कोई नागर भी नहीं है । पढाते में समय काटने के लिए घर के सभी काम अपने हाथों से करते हैं । उत्तर झाडू पहुंचे के लिए एक समय मई आती है । सुषमा ने कहकर सुरेंदर को तसल्ली नहीं अनजान व्यक्तियों को घर में नहीं घुसने देना । मुख्य दरवाजे पर अतिरिक्त सुरक्षा का प्रबंध करते हैं । सुरेंदर ने अपनी राय बताए जो होना है सब अंदर हो ही जाएगा । कितना ही मोटे था ले चलता हूँ उसके लाख पहले के बावजूद कृष्ण सुरक्षित यशोधा के घर पहुंच गए । सुषमा कहेगा रसोई में चाय बनाने लगी । कुछ दिन बाद सुबेंदर और सुषमा बालकनी में शाम की चाय पी रहे थे । घर की घंटे बाजी । दरवाजा खोला तो पुलिस खडी थी तो अंदर आशंकित आना अचंभित हो गया तो पुलिस की शक्ल देखने लगा । पुलिस की वर्दी पर लिखा था अजय दाहिया जी यही है कि आपको मुझसे कोई काम है तो अंदर नहीं । गला साफ करते हुए पूछा । पुलिस को देखते ही सबकी सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती है । कुछ ऐसा ही सुरेंदर के साथ हुआ । मतलब की पांच मिनट लूंगा । अंदर बैठ कर बात करते हैं । सुरेंदर और अजय दाहिया सोफे पर बैठे हैं । सुषमा चाहे पूछ दिया नहीं आती चाहे नहीं, बस पानी तो भी ज्यादा अजंता यानी सुषमा से कहा । पानी पीने के बाद अजय दहिया ने सुरेंदर को संबोधित किया अंकल आजकल शहर में चोरी और पुस्तकों पर हमले की वारदात पड गई है । पुलिस ने एक नई योजना बनाई है जिसमें हम थाना क्षेत्र में अकेले रह रहे बुजुर्गों की एक लिस्ट बना है । हमें आपका नाम, पता और संपर्क नंबर चाहिए तो आप हमें जरूरत के समय इन फोन नंबरों पर फोन कर सकते हैं । आप की तबियत ठीक ना हूँ । आपको डॉक्टर या अस्पताल लेकर जाएंगे, ऍम वाला कर देंगे । समय समय पर थाने से कोई सिपाही आपका हाल चाल पूछने आएगा । अब आप समस्या बताइए जिनका समाधान ढूंढ सके आपकी मदद कर सकें । पुलिस कि पहला और योजना का मैं स्वागत करता हूँ तो ने पुलिस का काम कर दिया । इस योजना को अधिक सफल और बनाने के लिए अब सुझाव दीजिएगा । ऍम पिटाई इस उम्र में आकर अकेले रह रहे हम बुजुर्गों की बस एक समस्या के लेबल क्या मकान अपना है? नान रोटी मिल जाती है । बच्चे दूर हैं, मनोज चाहता रहता है । टीवी भी कितना देखें बार बार सारा दिन वही कार्यक्रम दोहराया जाते हैं । बच्चों का कोई दोष नहीं है । नौकरी और व्यापार के लिए दूसरे देश और शहर जाना पडता है । बच्चों के घर सूना लगता है और काटने को दौडता है । अकेलापन समस्या है । इस उम्र में अधिक काम नहीं कर सकते हैं । ऍफ सुषमा की आंखें नम हो गई । आज सबके साथ यही समस्या है । कहकर अजय भैया ने प्रस्ताव किया । सुरेंदर अपने मोबाइल पर सुहानी और शहर की तस्वीरों को देखते हैं । विचारों में डूब जाते हैं ।

18 हौसला -क्यूँ छोड़ गये

हूँ क्यों छोड गए तो वहाँ साढे पांच बजे उठकर लगातार काम में जो भी रखना को बारह बजे थोडी देर के लिए फुर्सत मिली । बिस्तर पर लेटकर कमरे की थी । बाहर देखने लगे । त्यौहार पर उसके स्वर्गीय पति रासन की फोटो लगी है । पति की फोटो को एक तक देखते देखते कितना क्या हो गई? क्यों छोड गए तो मुझे रहता हूँ की उम्मीद से पहले विदा हो गए । क्यों पगली रो क्यों रही है तो इतना हडबडाकर उठ गई क्या आवाज कांस्य कमरे में उसके अलावा और कोई नहीं कमरे में क्या पूरे घर में के लिए वो घर के प्रत् पति की आवाज नहीं थे, बल्कि उसके अंतर्मन की आवाज की जरूरत अनबन करा रहे थे । तुम्हारे जाने के बाद मेरी जिन्दगी पता हाल हो गई । ऐसा नहीं सोचते हैं, अपना क्या करूँ और कहाँ जाऊँ? कुछ समझ में नहीं आता । आज बहुत उदास और निराश हूँ । बात तो हर रोज किया, लेकिन कभी कभी मन भर जाता है, हालात पर होना था, आंखें हो जाती है । किसी से कुछ कह भी नहीं सकती हूँ । जब मैं था तभी उदास होती थी । तब तो तुम थे उसे बातें बात करते का काम भूल जाती थी । कुछ काम समझाते थे और चित शांत हो जाता था । बच्चों से बातें कर के मन को हल्का और शांत कर सकती हूँ । जो बात पति संग होती है तो बच्चों संग नहीं हो सकती है । पति पत्नी एक दूसरे की भाषा समझते हैं लेकिन बच्चों से ये उम्मीद नहीं कभी कोशिश की नहीं हूँ । अब कोशिश भी छोड देते हैं । बस तो सारा कर रहे हैं । अपनी सोच पता अच्छा तो तब सब अच्छा होगा । कहना आसान है लेकिन घटना मुश्किल मैं तो हर हालात से समझौता करके चुपचाप घर में बैठी हूँ । लेकिन बहुरानी चैन से जीने दे तब कुछ बात बने लडके से बात की है । अब छोडती है । पहले बहुत से बात करती थी तो लडने पर आमादा हो जाती थी । लडका कुछ कहता है तब लडके से लडती है, अपना बच्चा है, उसकी जिंदगी खराब होती है । छोटे तो होती है उनको डराती धमकाती है, मारपीट करती है । सब के हाल देखकर चुप रह जाती हूँ । अगर ऐसा क्यों है मेरे? क्या आजकल हर घर की यही कहानी मुद्दों को नौका समझते हैं । आजकल के बच्चे एक हम भी थे तो ये सारे काम करते थे । कोई नौकर नहीं होता था, कभी जून तक नहीं करते थे ये बात तो है आज कल की लडकियों के सर आसमान पर खडे हुए हैं । कोई जमीन से छोडना ही नहीं चाहती है फॅालो होटल ऍम वालों घर के काम ना बोलो हुआ क्या खुलकर बताना खुलकर क्या बताऊँ आपको देख रहा हूँ मैं तो अपने घर में देख सकता हूँ बाकी घरों में ताकझांक नहीं कर सकता हूँ मैं कहाँ जाता हूँ जब कभी बाजार चाहते है मंदिर जाते मुलाकात होती है तब अपना दुखडा सुनाकर दिल को हल्का कर लेती है कि हम अकेले नहीं सभी बहुओं की बत्ती मैं नहीं रहेगा तो कैसे हमारे समय में गिनती की लडकियाँ नौकरी करती थी आजकल तो फॅमिली करने का हर लडकी नौकरी करती है चाहे हो या नहीं नौकरी नहीं करेंगे तो घर के काम करने पडेंगे । सुबह ऑफिस के लिए निकलती है और शाम छोडो रात के आठ बजे घर में घुसती बाद में दरवाजों से बच्चों पर हुआ ला आराम हो जाता है नवंबर किया या नहीं? दो चार गलती निकाल कर तो था पर भी कर दिए जाते हैं ताकि कोई उसके आगे बोल नहीं पाए । बस साडे पांच बजे उठकर पोते पोती का नाश्ता बनाती हूँ । दो बजे तक दोनों स्कूल चले जाते हैं । उधर लडके और बहुत ऍम हाथ में देना पडता है । आठ बजे से पहले कमरे से बाहर नहीं निकलती । राष्ट्र में चार कमियाँ निकाल देती है । लडका चुपचाप सुनता रहता है । कुछ बोले तो वहाँ जोधाराम ऍम छोड दिया । फिर अपने ऑफिस जाता है । शाम को पहले उसे ऑफिस से लेगा फिर घर आएगा । घर के काम तो होते नहीं मालूम नहीं ऑफिस में क्या करती होगी? मुझे तो इस बात की हैरानी होती है । कुछ काम नहीं करती हैं । सारा दिन का प्रकोष्ठ चलती है क्या कहते हो तो मैं सब मालूम है । मैंने सरकारी नौकरी किया । हमारे समय महिलाएं स्वेटर बुनना और घर के काम करती थी । बात का महिलाएं निष्ठा से काम करते थे । जो महिलाएं उच्च पद पर आसीन होती थी वही काम करते थे । वो महिलाएं हम तो तौबा करते थे । एक तो देरी से आती थी और लाजपत रफू चक्कर हो जाते थे हूँ । फॅमिली नौकरी में तो काम करना पडता है । सरकारी नौकरी से तो अधिक काम होता है । फिर भी इधर उधर समय निकालकर शॉपिंग के लिए भाग जाती हैं । नहीं तो कब तक? गोष्ठी जिंदाबाद अपनी सांसों की बुराई करती रहती है । एक तो सारा दिन घर की चक्की में पिसते ऊपर से बुराई भी सुना आप मॅन बच्चों को देखना रात का डिनर और मिला क्या सिर्फ बुराई ही जिंदगी है रखना । दूसरों की बुराई निकालकर अपने काम करवाते जाओ । हो रहा है छुट्टी वाले दिन क्या होता है । छुट्टी वाले दिन तो और मुसीबत होती है । नौ बजे से पहले उतना नहीं नाश्ता बाजार से आएगा । लंच चार बजे होगा आपका टेनर पहाड । कभी माहौल घूमने का भी शॉपिंग करनी है । यही काम रह गया । तीन दिन की छुट्टी एक साथ आ जाए तब शहर में तो रहना ही नहीं । तीन दिन होटल राॅड ऍम अभी तो मैं आपके साथ नहीं ले जाते हैं । जब बच्चे छोटे थे तब उन्हें संभालने के लिए ले जाते थे । बच्चे बडे हो गए । वो कहते नहीं और मैं जाती नहीं । इस बहाने दो तीन दिन घर में सुकून के साथ रहती हूँ । बहुत जानती रहती हैं । बच्चों से तो घर में रौनक रहती है । वो आप होती के भोले भाले मुखदेव का सब काम भूल जाती हूँ । बालगोपाल है उनका क्या कसूर माँ बाप से छोटी छोटी बातों पर डाट खाते और बैठते हैं । रोते हुए मेरे पास आते हैं और मैं चुप चाप पल्लू से मुंह ढककर होती हूँ । बहुत पीटने से रोकते हो तब मुझे उलटा झा करती है कि मेरे बच्चे हैं । उन को प्यार करते हो तो मारूंगी भी मालूम नहीं किस बात की निराशा जीवन में भरी हुई है तो रास्ता ऐसी छोटी सी बात पर गुस्सा बच्चों पर निकालती है । बच्चे होते हुए मेरे पास आते हैं और मैं उन्हें पुचकार भी नहीं सकती होता है । मुझे एक कारण नजर आता है कि हमारे समय लडकियाँ नौकरी काम करती थी । जब तक आर्थिक मजबूरी ना हो तब तक कोई लडकियों से नौकरी नहीं करवाता था । भाई ये अहम तक लडकियाँ करती थी । साथ घर के कामों में भी पूरा सहयोग देते थे । इसी कारण हमने हर परिस्थिति में गुजारा किया । शादी के बाद छोटे से कस्बे में आपकी पोस्टिंग हुई वहाँ भी खुशी से गुजारा किया था । वो अब हर माँ बाप लडकियों को घर के काम किसी की नहीं देते । पढाई के बाद नौकरी फिर घर के काम क्या तो नौकर करे क्या? हम बडे बुजुर्ग काम की आदत होती नहीं है इसलिए पति और बच्चों की नकेल कसकर रखती है कि उन्हें कोई घर का काम ना करना पडे । छुट्टी वाले दिन होटल ढाबे से लास्ट रहता है की छोले उसके अच्छे होते हैं । तुम्हारी माँ हर रोज क्या तोरी बना देती है? छोले तो तो मैं एकदम पडियार स्वादिष्ट बनाती थी । मैं तो उंगलियां चाटता रह जाता था मैं क्या मेरे पिताजी भी तुम्हारे हाथों के छोले का हर रविवार को इंतजार करते थे । आपकी बहुरानी के रख रहे हैं उसको मेरे बनाये छोले पसंद ही नहीं जबकि पोता पोती आपकी तरह लिया चाहते रहते हैं । अब जब तुम ने छोले की बात किया अब कल बनाकर खिलाऊंगी । आज तो भिंडी बना दिया ऍम आपकी तरह आपके पोता पोती भी मसाले वाली भिंडी खाकर उंगलिया चाहते हैं । खाना तो स्वादिष्ट बनाती हूँ । हमारी माँ भी तुम्हारे हाथ के बने खाने की तारीफ करती थी । साथ सुबह तो बहुत तारीफ कर रहे हैं । बस बहुरानी ही नहीं करती । घटना अपनी सोच से बाहर आती है क्योंकि पोता पोती स्कूल से आकर घर के दरवाजे पर खडे होकर घंटी बजा रहे हैं । रत्ना दरवाजा खोल दिया ताकि आप रोक रही हो तब ठीक नहीं है क्या दोनों पोता पोती एक सफर में पूछ रहे हैं पल्लू से आके पहुंचकर रखना तो सोई मैं चाहती है कुछ नहीं तबियत ठीक है तो महात्मा तो करा हूँ मैं गरम गरम फुलके बनाती हूँ । सब्जी में क्या है आपकी पसंद की भिन्डी और आलू फोन दिखा रहा था हूँ मनपसंद सबसे के साथ खुशी खुशी लंच करते देखा । अपना अपने कष्ट और कठिनाइयों को भूल जाती है । बच्चो संघ लंच करने लगती है बच्चों को कल लंच में क्या बनाऊँ तो छोले बना होना बहुत दिनों से नहीं बनाए । जरूर बनाउंगी । ऍम दादी पूरी बनाना छोले पूरी खाएंगे बिल्कुल कल छोटे पूरी बनाउंगी । बच्चे खुश हो जाते हैं । रतना की आंखों में खुशी के आंसू आते हैं हूँ ।

19 हौसला -रक्षा

रक्षा तो प्लान की तंग गली में नगमा तेज कदमों के साथ और कांटेदार साल से चल रही थी तो हम ने रास्ता रोककर रहमान खडा हो गया । नगमा कुछ नहीं होते हैं । फ्लाइट से निकलने की नाकाम कोशिश की रहमान ने नरमा का हाथ पकडा गया ऍम से इंतजार कर रहे हैं । दिल हथेली पर रखा हुआ है तडपाकर कहाँ चली जा रही हूँ हमारे कदमों के नीचे हमारा नाजुक तिल रखा हुआ है तरह एक कर जाने मंथ नहीं दिल के कपडे हो जाए । रहमान ने नगमा का हाथ छोडकर अपने दल पर हाथ रखा और उसके चट्टेबट्टे ने आपकी आवाज निकली । नगमा कुछ नहीं बोली और मौका पाकर साइड से निकल भागे । भाग जैसे उसके साथ भूल गई लेकिन भागना नहीं छोडा । रास्ते में तीन चार जन से अगर अभी गई घर पहुंचकर चौखट पकडकर खडी होगी । साथ स्कूल हुई थी हारते हुए दोपहर की फिर घर में प्रवेश किया । ऍम डालकर पानी निकाला कर चुकी गई । सलमान आप क्या बना रही थी? इस बार आॅर्डर मिला । खुश थी कि ईद अच्छी बनेगी । नगमा काॅम देखकर पूछा कॉलेज से आ गई क्या खाएगी अभी कुछ नहीं खाना तुम क्या कर रहे हो लगवाने वहाँ से पूछा था इस साल सखियाँ बनाने का बडा ऑर्डर मिला । ये अच्छी जाएगी । बताओ क्या लेगी मैं तो खुश देखकर नगमा अपना दर्द भूल गई तोरी वालान की एक पुरानी हवेली के एक छोटे से कमरे में सब कुछ हमारा भी एक तरफ ॅ पुरानी हवेली में कम से कम बीस परिवार रह रहे हैं । सबके पास एक एक कमरा है । उसके छोटे तीन भाई बहन पहर उछल कूद कर रहे हैं अपना चम्मन को घर परिवार से कोई ताल्लुक नहीं । दिन में जो कमाना शाम को शराब में उडाना पीवी बच्चों की परवाह किये जमाना बीत गया घर का खर्च सलमान छोटे मोटे काम करके बस पूरा कर ही रहती है । रात में जो मन ने घर में प्रवेश क्या क्या हंगामा खडा कर दिया । एक तो शराब का नशा ऊपर से काली के लोगों ने नमक मिर्च लगाकर रहमान का किस्सा सुना दिया । जानती नहीं और रहमान को उससे बोला नहीं, सुई बालान में रहना दूभर करने का क्या देता हूँ । अगर रहमान से कोई पंगा लिया तो चुप चाप बात मान ले । रहमान की चुम्मन को खोज तथा नहीं हमसे चारपाई पर आधा लेट गया । बात की बात सुनकर नगमा का तनबदन आग से सोलह क्या ऐसे बात होते हैं । रहमान एक नंबर का हमारा छोटा हुआ । बदमाश लडकी को छेडता है और आप क्या था उसकी बात मान ले रख कर देना था । एक । उसको तो फॅमिली नगमा ने अपने दिल की भडास निकालते है । सलमान होगा चुप कर लगना सुनने का कोई फायदा नहीं हो पाई । करवाना पडा है । हाँ, बेटी रात को रहमान के बर्ताव पर चर्चा कर दे रहे हैं । नगमा ने तो कह दिया कि वह रहमान के आगे नहीं झुकेगी तो सलमा से पूरा सहयोग चाहती है । उसका सप्ताह पढ लिखकर कुछ करने का है । उसके ने कहा कि बात दिल से ही निकाला है । कम से कम रहमान के बारे में ना सोचे । एक नंबर का छठा हुआ बदमाश है । आसपास की सभी गलियों की लडकियों का चीना दोपर करके रखा है । कल मैं भी सोचने लगे उसको क्या मिला? छोटी उम्र में निकाल कर के कुछ और बच्चों की परवरिश की सारी जिम्मेदारी उठानी है । पति से क्या मिला? तब चार बच्चे हैं । मेरी कुछ बन जाए वही अच्छा । उसका जमाना कुछ और था लेकिन अब तो सलमान परिवारों से भी लडकियाँ पहले करती थी । रिपोर्टर और चैनलस बन रहे हैं । समाज में उनकी इज्जत है । नगमा भी पहले तो अच्छा है तो नगमा को पालने देगी और रहमान कि बुरी नजर से दूर रखेगी । सुबह जुम्मन उठा उसका नशा टूटा लेकिन पडोसियों के कानाफूसी से जरूरत पड गया । कमरे में घुसकर आसमान सिर पर चढा लिया । दो चार लाख जमा कर बर्तन को तहस नहस गया । शोर मचाया । पडोसी बाहर जमा होकर तमाशा देखने लगे । कोई आगे नहीं आया । बस्ता उठाकर तमाशबीन बने रहे हैं लगवाने माँ से कहा अब बहुत घर से चले जाए ऐसे घर का सामान तोडने से उनको ना तो कोई साथ में लेके अपना कोई उनको रास्ता में हिंदी का खिताब देगा । टीवी की कमाई पर शराब पढाने वालों की कोई परवाह नहीं करता या मेरे बारे में कुछ ना बोले । अपना रास्ता मैं खुद बना रही हूँ । अगर मेरे रास्ते में टांग अडाई अच्छा नहीं होगा । कहकर नगमा ने किताबें उठा ही हमें कॉलेज आ रही हूँ । नाश्ता सलमान ने पूछा कॉलेज कैंटीन में कर लेंगे नगमा कमरे से बाहर नहीं नगमा रोकता दस मिनट में नाश्ता बन जाएगा । सलमान आभास नगमा नहीं रुकी कॉलेज की ओर रवाना हुई सुई वालान से जाकिर हुसैन कॉलेज दो किलोमीटर का सफर कूंचे गलियों से पैदल ही पूरा होता है । अब वो की हरकते देख उसका मन गुजारा हो गया । उदास मन से कहाँ छोडकर कैंटीन में एक होने की टेबल पर बैठ गई । ठोक लग रही है लेकिन खाने का दिल नहीं कर रहा हूँ । प्रकाश कैंटीन में नरमा को देखकर उसके पास कोर्से खींच कर बोला आज क्लास नहीं है क्या? नगमा ने अपना दुखडा छुपाकर पढाई की बातें शुरू की । प्रकाशनाथ बाकी क्लास में पडता है । रिहाइश भी सोई वालान के समीप बाजार सीताराम में प्रकाश पढने के साथ साथ ट्यूशन भी करता है । इससे अपनी पढाई का खर्च पूरा करके कुछ घर में आर्थिक योगदान भी कर देता है । प्रकाश को देख नगमा ने भी ट्यूशन करके अम्मी का बोझ कुछ काम करने की धाम नहीं । समस्या हो अब अडोस पडोस के लिए । अब उसने ठान लिया कोई कुछ भी कहे समाज ने सिर्फ ताने मारने है । कहने के अलावा कुछ नहीं करना । उसने अपना रास्ता खुद ही बनाना है । उसने प्रकाश से कुछ ट्यूशन दिलवाने को कहा । पांच दिन बाद प्रकाश है तो छोटे बच्चों की ट्यूशन की बात की है । बच्चे को चपाती राम में रहते हैं । नगमा ने हमें भर्ती शाम को मम्मी से बात की । सलमान ने तो अंधा मिली तो खुद कामकाजी महिला है और अपनी आर्थिक स्थिति को जानती है । अपने पति को भी खूब पहचानते जो कमाई को सिर्फ शराब में ठोकना जानता है । नरमा ने बच्चों को ट्यूशन देना शुरू कर दिया । जब जब मन को नगमा के ट्यूशन वाली बात पता चली तो घर पर खूब बवाल मचाया । कान खोलकर तो माँ बेटी सुनता हूँ मेरे होते मेरी लडकी हिंदू घर में बच्चे पढाने नहीं जाएगी जो मन के शोर मचाने से फॅमिली में सभी पडोसी जमा हो गए । तो अब तमाशा आग में घी डालने के अलावा कुछ विशेष नहीं करते हैं । जब जम्मन का गुस्सा शांत नहीं हुआ तब सलमान ने मोर्चा संभाला जो मन की ओर इशारा कर देगा । आप चुप ही रहो तो अच्छा है । ऑटो चलाते हो । हमारे को पूछकर बिठाते हिंदू है या मुसलमान । मैं कपडे सिलती हूँ कौन बनेगा? मैंने सोचती घर चलाने के लिए राखियां बनाने वो सब जानते कोई मुसलमान नहीं खरीदेगा । मेरा तो चूल्हा जलता है । बाकियों से ये कपडे देखो । भगवान कृष्ण इनको सिलती हो ताकि मेरे घर का चूल्हा जलता रहे । बच्चों की स्कूल फीस जाती रहे हैं । बच्चे पढते रहे तुम तो सारी कमाई शराब थोडा क्या जाते हो । चलना की बात सुनकर चुम्बन की बोलती बंद हो रहे हैं । अब सलमान ने एकत्रित भीड में एक नया को कहा तुम तो पढाई हो कभी किसी हिंदू का काम नहीं किया । पत्र दूसरे में आ जाएगा । तुम सपेरि करते हो कभी किसी हिंदू के घर सफेदी नहीं की । अलमा के प्रश्नों का किसी के पास कोई उत्तर नहीं । सब के सब चलना की बातों में सोलह आने सच्चाई है । जब कमाई की बात होती है तो कोई जात पात, धर्म नहीं सोचता । सोचता है सर रुपयों की रुपया कमाने के बाद दूसरों को धर्म का पाठ पढाया जाता है । नगमा ने ट्यूशन शुरू कर दी । अपनी पढाई का खर्च निकाल कर सलमा के हाथ में बाकी रुपये रखें तो सलमान गदगद हो गई । एक शाम ट्यूशन पढाकर नगमा घर वापस आ रही है । गली में रहना अपने को छठ भाइयों के साथ पनवाडी की दुकान पर खडा रहूँ जमा रहा था । नगमा को देखकर तनकर पापा के आगे खडा हो गया । फिल्मी अंदाज में नगमा का हाथ पकड लिया । चेहरें मेहमान नाम है हमारा रहमा छुट्टियों ने ढाका लगाया भाईजान वाॅल आपने बहुत ही फिल्म के प्रेम चोपडा की याद दिला दी । नगमा भागी किसी डिंपल से काम थोडी है । डाॅॅ शर्मा ने हाथ छुडाने की नाकाम कोशिश की । रहमान ने धर्मा को अपनी और खींचा और सीने से लगा दिया । लग कर मेरे सीने से दिखा दे हो । उसमें के साथ रंग जानेमन कबसे तरफ रहे हैं तरह बदन की गर्मी में जाने के लिए । नगमा रहमान के पंद्रह से छूटने के लिए छटपटाने लगी । छुट्टियाँ ठाकरे लगा रहे थे, गली में भेज थी लेकिन छठे हुए बदमाश रहमान का सामना करने की कोई हिम्मत नहीं करता है । हाँ प्रकाश ट्यूशन खत्म करके वहीं से गुजरा है । भीड को देखकर ठीक थक गया । बेवस भीड को देखकर रहमान की हिम्मत बढ गई । उन लोग कोई बालान वालों आज से नगमा मेरी बेगम शरीके हयात हुई किसी को कुछ कह रहा है रखते कुछ नहीं बनाना । बात सही वाला वालों बाय रहमान शेख की बता रहा था और नगमा पर उसके अकड ढीली हुई । लगवाने बंधन से मुक्त होकर भागने का प्रयास किया । प्रयास असफल रहा । वो गिर पडे । भीड से निकलकर प्रकाश ने कुछ हिम्मत दिखाकर का नगमा का छोड दो क्या मेरी बहन गया ऍम हूँ क्या कर रहे मानने ठहाका लगाया तो उसका छोटे बच्चों ने उसका हफ्ते में साथ दिया । कल मना किया सप्लाई करने के लिए वहाँ से कुछ लगभग अम्मी से निपट गई और पहले में से कराके निकालकर प्रकाश के हाथ पर बांध चित्तौड की रानी कर्णावती ने हमारे को रक्षा के लिए सर तरह की भेजी थी मैंने बांधी नगमा ने हुंकार भरेंगे तेरा हुमा उस कुछ नहीं कर सकेगा अगर फिर से जो तार ढाका लगाया मेहमान कमेंट के नशे में झूम रहा था । हाथ में राखी बांधे प्रकाश में बिजली से भी अधिक तेजी और बनाया गया आपकी किताबों को रहमान के ऊपर देमार अचानक हमले से रहमान संभाल नहीं सका और पास रखेंगे ले से जा टकराया प्रकाश ने दो चार कौन से उसके पेट और ऊपर हमारे बिना किसी प्रतिरोध के रहमान धराशायी हो गया । उसके छत पर ये बगले झांकने लगे । रहमान को चलते एक सलमान नगमा ने भी पिटाई शुरू कर दिया । बहती गंगा में सब होते हैं दो चार राहगीर भी रहमान की पिटाई में शामिल हो गए से के साथ एक छोटा यहाँ खडे हुए हैं । पैमान दर्द से कराहता रहा और कोई उसकी मदद को आगे नहीं है । लगभग और सलमान वीरांगना की तरह डाॅ बताने भरी करी में प्रकाश का हाथ में कहने लगे हमारे भाई इलाज रखी है नगमा सलमा की आंखें नम प्रकाश ने हाथ जोडकर का । मैंने नगमा की बांधी राखी का मान रखा है हूँ

20 हौसला -फ़र्ज़

पर ये भी एक विडंबना है कि पढ लिखकर भी कोई ढंग की नौकरी नहीं मिले । अपना व्यापार शुरू करने के लिए भी थोडी बहुत पूंजी चाहिए । मुझे भी नहीं तो नौकरी ही एकमात्र विकल्प बचता है । उन्होंने जो भी छोटी नौकरी मिली स्वीकार की । अनु प्रताप नाम में पसंद पढाई में भी वजन लेकिन तन्खा में वजन अधिक नहीं हुआ । आज के आधुनिक युग में सबको हर चीज तुरंत चाहिए । माता पिता ने भी ताने दे दिया । भाई बहन, रिश्तेदारों और मित्रों को देखो । सब अच्छे पदों पर बैठे हैं और तुम जो एक छोटी सी नौकरी कर रहा हूँ, कुछ सोचा एक रास्ते का बोझ कैसे उठा हो गए के लिए काम था की नौकरी मजबूरी थी । अधिक तनख्वाह की । नौकरी की कोशिश भरपूर थी लेकिन मिली नहीं । बाहर हो गया और एक वर्ष का बच्चा भी है । बच्चे के प्रथम जन्म दिवस की सबसे अधिक खुशी होती है । बालों और भावना ने जन्मदिवस धूमधाम से मनाया । माता पिता ने ताना सुना दिया कि फिजूलखर्च के आदत, काम करके घर में सहयोग, पढाओ क्या जरूरत है । जानते बस पर खर्च करने की जुटाने के लिए रकम बहुत है । तब अपनी रसोई अलग बनाओ और रहने का किराया दो बच्चे का प्रथम जन्मदिवस मनाने का जुर्माना स्थानों को भरना पडा । माता पिता को पहले भी हर खर्च में सहयोग करता था । लेकिन अपने घर में रहने का किराया, बिजली, पानी और रख रखाव के नाम पर सफल दस्त की वसूली उसे आखिरी और मन की ना हो गया । पति का चुपचाप करते देख भावना ने एक दिन पूछ लिया अगर कब तक खामोश करते रहेंगे अब अपने ही घर में पढाई हो गए हैं आपके होठों से मुस्कुराती गायब हो गई इतने सौतेले व्यवहार की अपने माता पिता से उम्मीद नहीं कसूर इतना है कि परिवार में सबसे अधिक पढने के बाद सबसे कम हमारा मैं समझती हूँ आज के भागते की । अब मैं जब लक्ष्मी की पूजा होती है क्यों को तत्कार ही मिलती है । टाॅम करते हो मैं तुम्हारे साथ हूँ साबित रखने के समझ सात फेरों संग साथ बच्चन भी लिए हैं । पंद्रह दिनों का संपूर्ण निर्वाह होगा ऍम बेहतर नौकरी और तरक्की के प्रयास जारी रख उसमें कमी लाएं । भावना के साथ में बहनों के मुझे मन में चौथी का संचार किया । विकट परिस्थितियों में से मन की रहने उन्नति का मार्ग दिखाया । मेहनत रंग लाई और बेहतर तनख्वा सन नहीं नौकरी मिल गई तो नौकरी दूसरे शहर में मिली । उन्होंने भावना डेढ वर्ष के बच्चे सुहानी संघ नए शहर नई जिंदगी की शुरुआत के लिए कुछ किया हूँ । सामना हमें जीवन की शुरुआत बिल्कुल नहीं इस तरह से करनी है । मकान किराये पर ले लिया लेकिन सफाई कपडा और किसानों की कुछ नहीं । सब सुविधा के नाम पर दो काटा की और ताने नहीं है । तेरे पास आती दे रहा हूँ । ऐसी आजादी भी नहीं चाहिए । लेकिन शायद भाग्य के लिखे को उचित मानकर स्वीकार कर लेते हैं । कर्म ही पूछा है ये पूजा कौन है? भावना ने मुस्कुराते हुए भानु पूछेगा कि ताकि पूजा भगवान कृष्ण की पूजा ये धर्म तुम करो फल अवश्य मिलेगा । अर्जुन इसी संदेश के पश्चात युद्ध में कूद पडा था । उन्होंने दार्शनिक बंद हो जाएगा । कौन सा फल मिलेगा और कब मिलेगा भावना भाग को छोडने लगी । धानो उससे मजा लेने के लिए दार्शनिक बन गया । उनकी नोकझोंक सुहानी के उठने पर समाप्त हो रही है । कानून प्रताप मेहनत करता गया और धीरे धीरे एक सम्मानजनक तन्खा पाने लगा । गृहस्थजीवन के लिए जरूरत की सभी वस्तुएं जो डाली विलासिता से कोसो दूर थे, लेकिन आत्मसम्मान से भरपूर शांति से जीवन विधान लगे । पांच वर्ष बाद भानूप्रताप को तरक्की के साथ अच्छी नौकरी मिल गए । भानु प्रताप ने एक बार फिर से शहर बदला । एक कमरे के फ्लाइट से अब दो कमरों के फ्लैट में रहने लगे । इस शहर में भानु की मांगें मौसेरा भाई रहते थे । अभी बाहर के दिन थानों और भावना रसोई के सामान खरीदने के लिए बाजार निकले हैं । बाजार में भानु का आमना सामना माँ के मौसेरे भाई से हो गया । मौसम से पिताजी के अस्वस्थता का पता चला । पिताजी की हालत ठीक नहीं है । ऑफिस से दो दिन की छुट्टी लेकर भानु और भावना पिताजी से मिलने घर पहुंचे । डर से तलब रहे पिताजी छत पर बने कमरे में एक चारपाई पर लेटे कमरे की दीवारों को दाग रहेंगे । माताजी कमरे के छोड पर पिताजी के लिए कचौडी बना रही थी । एक कमरे में बीमार पिता की देखभाल बूढी मां कर रही है तो चार भाई एक अलमारी के अतिरिक्त गैस का छोला कुछ बर्तन टिपरे देखकर धनु स्थिति भक्तिपूर्वक समझ गया । आश्चर्य उसे इस बात का हुआ कि जान कमाओ फोटो का उदाहरण देकर माता पिता ताने देते थे । उन्होंने बीमार पिताजी को मरन हालत में पटक दिया । भानु और भावना को देख माता पिता की आंखों में आंसू आ गए हैं । लेकिन अपराधबोध के चलते मुख से कुछ नहीं बोले । उन्होंने अपने भाईयों से बात की, लेकिन उन्होंने दो टूक जवाब दे दिया, अमरीका तक आ जाए । डॉक्टर ने जवाब दे दिया क्या इलाज कराये इलाज मेरे काम ढूँढने के लिए हमारे पास खजाने नहीं जाना । सपने हैं । उम्र देखिए बात की उसके भाइयों ने रोखा था । दो टके का जवाब दे दिया । अपनी तरफ से हमें अंतिम सांस था । कोशिश करनी चाहिए । एक उम्र के पश्चात सबने जाना है । लेकिन हम उस पल को डाल सकते हैं तो माता पिता के साथ रहते हो । तुम्हारे फर्स्ट उनके इलाज का बनता है । मुझे तो वर्षों पहले घर से निकाल दिया था पर नहीं मुझे किसी ने खबर की । भानु ने नाराजगी जाहिर की लेकिन उसके भाइयों ने उसे ही नजरिया तेनाली अगर पिता का इतना अधिक हितैषी है तब अपने साथ पिता को ले जाए । ये संथानों तब रहेगा । आपना से मंत्रणा की काफी सोच विचारकर तो उन्होंने पिताजी के इलाज का निश्चय किया । अतीत दुखद रहा, फिर भी पढाते में माँ बाप से विमुख होना उसके जमीन पर थोडे चलाने लगा । उन्होंने आपसे अतिरिक्त छुट्टिया लिया और अपने पारिवारिक डॉक्टर से विमर्श किया । बढती उमर में कुछ तो बीमारी के कारण तक नहीं पडी और कुछ इलाज न करवाने के कारण डॉक्टर ने अस्पताल में भर्ती करवा के सभी टेस्ट और इलाज करवाने की सलाह दी । स्थानों ने ऑफिस के ग्रुप मेडिकल पाॅलिसी में अपने माता पिता दोनों का सम्मिलित कर रखा था जब कि वर्षों पहले माता पिता से ज्यादा हो गया था । पंद्रह दिन अस्पताल में रहकर पिताजी की सेहत में सुधार होने लगा । एक समय निकम्मा घोषित किया । बेटा उनकी सेवा में जुडा हुआ था । ये देख उनको मानसिक सांत्वना मिले । मन चंगा तो तन चंगा । बहुत बेटे की सेवा देख माता पिता प्रसन्न होते हैं । प्रसन्नता के कारण स्वास्थ्यलाभ जल्दी होने लगा । भालू माता पिता दोनों को अपने साथ घर ले गया । अपनी समर्थक के अनुसार बाबू बेटे ने भरपूर सेवा की । चार महीने बाद चलने घर में लायक हो गए । सुबह शाम माता पिता एक साथ शहर पर जाते और वापस आते हुए फल सबसे घर का राशन ले आते हैं । धानोल भावना ने बीमार पिता की सेवा पर समझ करके उन्होंने कभी माता पिता को पूछ नहीं समझा । धीरे धीरे सभी रिश्तेदारों को मालूम हो गया कि भानु और भावना की सेवा से पिताजी ठीक हो गए । जो भी मिलता पिताजी तो भानु और भावना की तारीफों के पुल बांध देते हैं । बहू बेटे की प्रशंसा करते सकते नहीं । मेरे बेटे ने मुझे ठीक कर दिया मुझे जिसकी उम्मीद नहीं थी । बहुत रुपये पैसे को सबसे ऊपर मानता था । लेकिन मेरे बेटे ने प्रेम, प्यार, सेवा, समर्पण से मुझे नया जीवन प्रदान किया । भाइयों के पिताजी को एक मलाल था की उन्होंने अपनी जायदाद दूसरे पुत्रों को दे दी थी जिन्होंने उनको मरने के लिए छोड दिया । जिस पुत्रको निकम्मा निकट तो समझा उसी ने तिमारदारी दिल की बात सुबह अंतर नहीं ला सके कुछ बातें कह नहीं क्या सुनने की नहीं होती समझने की होती है पिताजी के मन की बात थानों और भावना अच्छी तरह समझ चुके थे । माता पिता का सहारा प्रेम होती सुहानी बर्मन था तुम मरते प्रेम थे, करवा लो और भावना मंद मंद मुस्करा देते हैं । पिताजी कब से सबसे कहते हैं हूँ अब मेरा भानूप्रताप है नहीं

21 हौसला -समर्पण

समर्पण दोपहर के साढे बारह बज गए हैं । ऍम लगाकर बंद किया और सोसाइटी के गेट से रिक्शा क्या गेट पर चिरपरिचित रिक्शा वाले खडे हैं । उन को मालूम है कि इस समय देना अपने पौत्र शौर्य को स्कूल से वापस लाने के लिए आएगी । चौदह का स्कूल कोई आधे किलोमीटर की दूरी पर है । चौरे को स्कूल से लेना और वापस कर रहा है । बस पंद्रह मिनट का नियमित कार्यक्रम है । कभी कभी भी ना सोचती है कि उम्र के इस पडाव में बन गई । सोचा था कि कुछ आजाद जिंदगी रहेगी । ऍफ जो सोचता है अक्सर होता नहीं । पुत्रवधू नौकरी करती है अच्छा पौत्र को दिन में संभालने की जिम्मेदारी तीना पर चार वर्ष के छोटे बच्चे को संभालने में कई पार्टी नाच अंजुला जाती है । शौर्य भी नर्सरी में पढ रहा है । उम्र के हिसाब से छह भी करता है और प्रश्न पूछता है कि ये क्या है और कैसे हैं? क्यूँ हैं साठ वर्ष की उम्र में रीना के शरीर में आप उतनी चुस्ती फुर्ती नहीं है कि छोटे बच्चे की चपलता की बराबरी कर सकें । सुबह साढे पांच बजे उठ कर देना कि दिनचर्या होती है । टीना के साथ राकेश बिस्तर छोड देता है । ये प्रक्रिया के पश्चात चाय पीकर स्नान कर रहा और उसके बाद रसोई में सबके नाश्ते के साथ टीफिन भी पैक हो जाते हैं । पुत्र और पुत्रवधू आठ बजे ऑफिस के लिए प्रस्थान करते हैं । देना शाम को स्कूल के लिए तैयार करती है । फिर राकेश साढे आठ बजे और एक स्कूल छोडकर ऑफिस के लिए प्रस्थान करते हैं । तब रीना को थोडी राहत मिलती है । थोडा आराम और थोडा कम समाचारपत्र पडा थोडा ऍम देखा चौदह को स्कूल से वापस लाने के लिए परीक्षा क्या अपेक्षा स्कूल के पार होगा । देना शौर्य की क्लास गई और शौर्य के साथ उसे रिक्शा में बैठकर घर आए । कुल अठारह मिनट लगे लाइट का दरवाजा खोला । ऍम पेपर पटकार और टीवी क्या दादी डोरेमोन वाला चैनल लगाओ । सेनाने चेहरा लगाया शौर्य डोरेमोन सीरियल देख कर प्रसन्न हो पेपर बैठा हुआ है और टीवी में सिर्फ डोरेमोन ही देखता है । उसके सामने कोई दूसरा चैनल रीना भी नहीं देख सकती है । तीन । अन्य लंच की प्लेट शौर्य के आगे रखे ऍम हो गया शुरू करूँ पाँच में क्या बनाया है देखो प्लेट आपके आगे रखी है आप डोरेमोन देखने में मगन हूँ । थोडी नजर प्लेट में में डालो ये कौन सी सब्जी है? तीन अपनी रोटी लेकर आती है और शौर्य की बगल में बैठकर शौर्य के काल जला दी है । आपकी पसंद कि भंडी और बूंदी वाला रायता आद अधिक हिंदी बडी स्वाद बनी है । शौर्य को भिन्डी बहुत पसंद है, इसलिए बिना खाए ही तारीफ कर दी । रीना शौक है को देख उसको रहती है । नन्ने अबोध बालक की बातें एक सुखद अनुभव की अनुभूति देते हैं । बिना किसी छलकपट के बिहारी बातें तन मन की तमाम थकान को पलभर में मिटा देती है । बिना खुद भी खाना खाती रही और शौर्य को कहती रही कि खाना भी खाता रहे हैं, क्योंकि उसे मालूम है कि शौर्य सोच खोकर कार्टून ही देखता रहेगा । शौर्य तो बच गए । अब टीवी बंद करो और सोचा नहीं दादी अभी नहीं नहीं आ रही है । अभी सो जाओ, शाम को आपके फ्रेंड जाएंगे उनके साथ पार्क में खेलने जाना अभी ट्रैन मैंने तो देख लूँ, टेन मिनट बात हो जाना । चौदह दस मिनट बाद टीवी बंद नहीं किया तो मान देखते हुए हो और जोर से हंस रहा था । शौक है । सोने के लिए तैयार नहीं था । अभी दोपहर को शौर्य नहीं सोयेगा तो शाम को नींद से परेशान होगा । उसके दोस्त आ जाएंगे और शौर्य नहीं इनमें झूमेगा ऍम सो जाओ देना कि आवास में तेजी थी । ऍम क्यों रहे हो? कहाँ ऍम मैं हूँ या तुम इतनी जोर से बोल रहा हूँ । मैं नाराज हो गया हूँ । तारीख की बात सुनकर शौर्य ने कहा क्यों नाराज हो गया आपने? डॉक्टर मैंने कपडा आता है होने के लिए कह रही हूँ अभी नहीं सोयेगा तब शाम को परेशान करेगा । चौदह बिस्तर छोडकर खडा हो गया । मैं जा रहा हूँ कहाँ जा रहे हो मम्मी के पास । मम्मी तो ऑफिस में मैं मम्मी को ऑफिस चला जाऊंगा । आपको मम्मी के ऑफिस का रास्ता नहीं मालूम । मैंने मम्मी से बात करनी है और मिला दू बिना फोन के बाद करनी बिना फोन के कैसे बात करोगे । जब मम्मी आएगी तब करूंगा । क्या बात करेगा । आप की शिकायत करनी कौनसी आपने डाडर छोडो चक्कर सोचा । फिर से बात करना भी डांट हो गई । शौर्य थका हुआ था । चर्चे राहत के अंतर्गत पांच मिनट हो गया । दादी पोते का दोपहर का डेढ दो घंटे का आराम शाम के लिए स्पूर्ति भर देता है । शाम के समय शौर्य अपने मित्रों के साथ पार्क में झूला झूलने और खेलने जाता है । उस बीच बिना संध्या पूजा करके राहत के डिनर का प्रबंध कर दी है । सात बजे पुत्रवधु साढे सात आठ बजे पुत्र और सबसे देर से राकेश आते हैं । कभी साढे आठ तो कभी नौ बजे । राकेश ऍसे आने में देर हो जाती है को देखते शौर्य राकेश सच पड जाता है । ऍसे क्यों आए? ऑफिस में थोडा सर्दी कम था इसलिए देर हो गयी । थोडा दाना ज्यादा नहीं था और एक होली चुलबुली बातें सुनकर नाकेश के सारे दिन की थकान मिट जाती है तो ना एक साथ डिनर करते हैं फिर एक साथ स्तर पर लेते हैं । जब तक दादू को नींद नहीं आती तब तक शौर्य दादा से कहानियाँ सुनता है । पूरे दिन की थकान के कारण है । राकेश को साढे दस बजे नींद आने लगती है । अब शाॅट अपने कमरे में जाता है । मुस्कुरा क्यों रहे? रीना ने पूछा ऑफिस में हम और वहाँ के साथ माता बच्चे होते हैं और काम में थकान होती है । घर पर बच्चों के साथ एक घंटे में नहीं स्पोर्ट दिया जाती है । वो तो ठीक है परंतु सारा दिन मैं सात होती हूँ । आगे पीछे घुमाकर थका देता है । आप सुनता नहीं है अपनी बातों को मन माता है । बात ना मानो तब रोड जाता है, कैसा चला जाऊंगा खा जाने की बात करता है । मम्मी के ऊपर जाकर मेरी शिकायत करेगा कि मैं ऍम खरीदना । छोटे बच्चों की भोली भाली बातें मन को लुभाती हैं । अभी चार वर्ष का है तो तीन साल बाद पढने में व्यस्त हो जाएगा । मेरे साथ कम समय बिताएगा । बच्चे बडे हो जाते हैं । उनकी एक अलग ही दुनिया बनती जाती है । तरम बूढा बूढी हो जाएंगे । क्या करोगे तब रिटायर हो जाऊंगा हूँ तब जो प्रभु की इच्छा होगी । क्या सोचा है सबके लिए क्या सोचे? जैसा समय आएगा करते चलेंगे शाम की दहलीज पर मुझे संभाल तो पूरी जिंदगी तुमने मेरे साथ कंधे से कंधे मिलाकर साथ दिया और संकट में पूरे खराब समय में हिम्मत लेकर पर्यटक मंगाते । मन को मजबूती सिर उठाकर संकट का सामना करने की कहाँ दिखाइए हमारे साथ है । फिर मुझे कोई काम नहीं चलो कोई तो मेरी कतर करता है, हमेशा की है । कोई और तो करता नहीं । हम एक दूसरे की करते हैं । पति पत्नी का प्रेम और समर्पण मझधार में पतवार का काम करता है । इसका ये मतलब हुआ तो मुझे नहीं जमा हो मुझे तुम्हारी सेवा कर रही है । इस सेवा नहीं प्रेम होता है । पति पत्नी के बीच ऍम जैसे सिर्फ पति पत्नी ये समझ सकते हैं दुनिया नहीं समझते हैं नियत तमाशा है उसे प्रेम समर्पण नहीं पढाई का मसाला चाहिए छोड ऍम अपना प्रेम और एक दूसरे के प्रति समर्पण रखना है । सांसद प्रेम अधिक होता है कहकर तो हो गए हैं शाम की पहली इस पर पहुंच चुके रीना मुकेश का प्रेम उम्र के साथ पडता गया हूँ ।

22 हौसला -सिरफिरा

सिर्फ मिला । रोशन प्रगति मैदान पर मेट्रो से उतारकर स्टेशन से बाहर प्रतीक्षा करने लगा । खडी देखी और सोचने लगा दस मिनट लगेंगे रानी को प्रगति मैदान आने में शनिवार का दिन ऑफिस में हफ्ते के बाद पुस्तक मेला देखने का माहौल राशन छोड नहीं पाया और पैसे निकलने से पहले पत्नी रानी को फोन किया । तुरानी ने तुरंत पुस्तक मेले के बाद शाम इंडिया के और रात का खाना कनाट प्लेस में कार्यक्रम बना दिया । ऍम प्रगति मैदान, इंडिया गेट और कनॉट प्लेस में शामिल गुजारना याद आ गया । कौशल यादव में खोया मंद मुस्कुरा दिया । कहाँ खोये हुए हो श्री मांझी किसको देखकर मुस्कुरा रहे । रानी ने दर्शन के सभी पाते हो जाएगा तो रोशन यादव से बाहर आ गया तो वह के बाद के दुनिया रह रहे हैं । अब यही प्रगति मैदान के बाद इंडिया गेट कनाट प्लेस घूमा करते थे । रोशन ने रानी का हाथ पकडा और मेट्रो स्टेशन से प्रगति मैदान की तरफ बातें करते करते हैं । पैदल चलने लगा । पुस्तकों की शौकीन रौशन आसानी पुस्तकों देख हो गए । एक बुक स्टॉल के कैश काउंटर पर रोशन पेमेंट कर रहा था । एक आवाज में उसे पीछे मुडकर देखने पर मजबूर किया ऍम आपको भी पुस्तकों का शौक है । आप आज बैंक अधिकारी कविता की थी । उसके हाथों में भी कुछ किताबे थी जिसकी पेमेंट करने के लिए रोशन के पीछे खडे थे । आपने भी वही किताबें खरीदी है जो मैंने लिया । इसका मतलब है कि कम से कम पुस्तकों के मामले में हमारी पसंद हैं । एक ही है कविता ने रोशन के हाथ में वही पुस्तक देखकर का ऍम उसने खरीदी थी फॅस करा दिया । मेरी पत्नी पानी कविता से लाने का परिचय करवाया । नमस्ते कविता ने भी मुस्कुराते हो जाएगा तो ओशन रानी और कविता बातें कर रहे थे । तभी भीड में एक आदमी ने रोशन को जोर से धक्का दिया और तेजी से आगे बढ गया । सोशल लडखडा गया और उसके हाथों से किताबें गिर गए । ऍम देख कर नहीं चलते हैं । कविता ने कहा दानी और कविता ने किताबें उठाई । ऍम को सहारा देकर उठाया । आपको चोट तो नहीं नहीं ना । कविता ने रोशन से पूछा मैं ठीक उनका पिता जी आप अकेले हैं? कौशल ने कविता से पूछा मेरे पति भी आए हैं उनको पुस्तकों का कोई शौक नहीं । पुस्तक मेले में मेरा साथ दे रहे हैं । कहकर कविता खिलखिलाकर हंसते । इधर उधर देखकर ऍम ढूंढती हूँ कहाँ खर्चा आएगा कहकर कविता ने रख सकते हैं । पुस्तक मेले के बाद रोशन आसानी इंडिया गेट के लॉन में हाथ में हाथ डाले पाते करते हुए पुराने दिनों को फिर से दोहराकर जवानी के दिनों को याद कर रहे हैं । तभी एक आदमी नाम रोशन को जोर से धक्का दिया और आगे बढ गया तो सोशल लडखडाकर गिर पडा है । पानी ने सहारा दिया तीन चार युवकों ने राशन का सहारा देकर उठाया । एक ने पूछा अंकल को चोट तो नहीं लगी? ऍम क्या कुछ चोट नहीं लगे थे । दोनों ने युवकों को धन्यवाद कहा । पहले पुस्तक मेले में और अभियान इंडिया गेट ना बोला कर दिया । पता नहीं कौन पागल है । आइए यहाँ से चलते हैं वो खराब कर दिया पता नहीं फिर से फॅमिली ने कहा हूँ आ रहा नहीं चलते हैं क्या खाने का मुॅह बंगाली मार्केट चलकर चाहे गलत पढाया जाए । बहुत दिन हो गए । चार घायल हुए हैं । पुराने दिन याद करके तासा बन का एहसास होता है । रानी ने कहा बंगाली मार्केट में सहयोग से कविता भी होने मिल गए । कविता ने अपने पति कारन से उनका परीक्षा कर रहा ऍसे मिलने के पश्चात कौशल को कुछ ऐसा एहसास हुआ कि कहीं कुछ देखा है काॅल से मुस्कान के साथ गर्मजोशी के साथ रोशन से मिला हूँ । खाने का लुत्फ उठाने के पश्चात वापस घर जाने के लिए रोशन कार का दरवाजा खोल रहा था तो उसके कंधे पर पहुँचे । टक्कर लगे तोडकर देखा करन मुस्कुरा रहा था । कविता कुछ दूरी पर अपनी कार के पास करन का इंतजार कर रहे थे । टक्कर देने के बाद कुटिल मुस्कान के साथ करन चला गया । ऍन आसानी के कानों में कविता की आवाज आई तो करन से पूछ रही थी ऍम को टक्कर की हमारे क्या पुस्तक मेले और इंडिया के एक में भी कौशल को उसने टक्कर मारी थी । हूँ । भ्रष्टाचार के नाते रोशन को टक्कर । उनकी बातें सुनना अच्छा नहीं लगा क्योंकि कविता उसकी बहन करते हैं । ऍम आगे बढा दी बस इतना सुन सकें । करन कह रहा था डालेगी अक्कल ठिकाने लगता है बात करने की उसकी हिम्मत कैसे हुई? करन की बात सुनकर कविता ने उसे चुप रहने को कहा खरण चुप करूँगा । सोशल हमारे ऍम अपनी सडक बंद करूँ । तंग आ चुका हूँ । ऍफ का कोई इलाज नहीं चल रही हैं । सराबोर खराब कर दिया । पता नहीं रौशन कर सोचेगा । किसी हर एक मेरे से बात नहीं कर रही थी तो कंपनी में जनरल मैनेजर फाइनेंस है करोडो ऍफ उसकी कंपनी से बैंक हर रोज करता है और तुमने उसे एक बार नहीं बल्कि तीन बार तक का दिया हूँ । शर्माती मुझे तुम्हारे साथ चलते हुए कोई कामकाज करते नहीं । मेरी सैलरी पर हो गया थोडा और मेरी एक लाइन पर रॉक डाल दूँ । कविता के बातों का कारण पर कोई असर नहीं पडा । वो खेल की करके हस्ता रहूँ । बीच बीच में कहता रहा तुम जानती नहीं उसको पहले भी थी, क्या था अब भी कर दूंगा रास्ते में रोशन और रानी भी करन की बातें करते रहे । उच्चतम जानते हो करण को बहुत ही संदिग्ध व्यक्तित्व का लग रहा था । होटल मुस्कान थी जी चाहता था एक रखकर दुकान करनी चाहिए लेकिन ये नहीं कर सके आपकी बहन कर का पति निकला है आपको धक्के उसी नदी होंगे मुझे पक्का यकीन है पानी नॅशनल को अपने दिल की कहीं मुझे भी ऐसा लगता है लेकिन कहाँ देखा एक रन को नहीं ॅ आपको दबाना होगा । रोशन ने रानी से कहा तोमर सुबह रोशन बैंक पहुंचा करेंगे । बैंक की सीढियों में रौशन कर हजार होगा क्यों बच्चों को हो गया । मुझे ऐसा बेटा था । कॉलेज में याद कर ही शक्ल भूला नहीं हूं । बाद पर चढकर मेरी बीवी के साथ बतियाता है । खबर अगर जो कभी मेरी बीवी सब बात भी है, ऐसी धुलाई करूंगा कि भविष्य में कैसे लडकी से बात करने के लायक नहीं रहेगा । बैंक खुल चुका था । स्टाफ और कस्टमरों का आना जाना शुरू हो गया । करंट रोशन को धमकी देकर चला गया । रोशन सीढियाँ चलने लगा ॅ आपके साथ हुई कविता को लोन प्रपोजल दिया । पायल पढते हुए कविता ने रोशन को कहा ऍम स्टडी कर लूंगी । इसे और पेपर की जरूरत होगी तो मैं आपको फोन करूँगा । रौशन बैंक से बाहर आ गया । नीचे करन ने पार्किंग में रोशन को देखकर कुटिल मुस्कराहट के साथ देखा । कैसे टरका दिया पेट एक कविता मेरी बीवी तो मैं ऍम देखता हूँ की तरह काम कैसे होता है । कहकर एक मुख्य रोशन के ऊपर जमा दिया तो लडखडाकर गिर गया और चश्मा टूट गया हूँ । उसके चर्च में का शीशा टूट गया । अब रोशन का सब्र टूट गया । धीरे धीरे उठा तो करंट फिर एक मुक्का जमा दिया । कौशल ने भी पलटवार में करंट के पेट में मुक्का मारा और करन को धक्का दिया । करन को इसकी उम्मीद नहीं थी, वो भी गिर गया । दोनों में को धान बुड्ढा हो गई और मारपीट देकर भीड एकत्रित हो गए । दोनों के कपडे भी फट गए । पार्किंग के लडकों ने दोनों को पकडकर अलग क्या आते जाते लोग तमाशा देखते रहे और फिकरे कसते रहे हैं । बडे लेकिन अभी गंवारों की तरह कुत्ते बिल्ली की लडाई लड रहे हैं । प्लानस ऐसी पढाई पर रन के अकड मारपीट के बाद भी कम नहीं हुई है और रोशन को धमकाने लगा । रोशन ने भी जवाब दिया कि जो हो सके कर ले अब कोई नहीं रोक सकता हूँ से बैंक का काम तेरी बीवी नहीं तो कोई दूसरा करेगा उसे किसी का डर नहीं । तभी बैंक के दो सिपाही आ गए और थाने चलने को कहा । थाने के नाम पर कारन पिता क्या और अपनी कार के और चलने लगा लेकिन रोशन थाने चलने को तैयार हो गया । पुलिस ने कहा चलो उठा रहे हैं दो दिन से मारपीट कर रहे आज सब फैसला हो जाये । करण ने पुलिस को एक कोने में जाकर कुछ कुछ उसकी और कुछ उसकी जेब में डाला । सरकार में बैठ कर चलता बना पुलिस चल रहा है छोडो उसको आपके कपडे बढ गए अब घर जाकर अपना हो लिया । ठीक करिए एक्सॅन इकलौटे आशिक की तरह बाहर में बैठा । उसकी सांस फूल रही थी । पानी पिया । दस मिनट बाद ऑफिस फोन करके छुट्टी ली और घर रवाना होने के लिए कार्य स्टार्ट की है । बिना चश्मे के रास्ते में दिक्कत होगी । कार्बन कि पार्किंग में ही काम छोड ऑटो से घर पहुंचा । फटेहाल पति को देखकर तनी कमरा नहीं तो ओशन सोफे पर कुछ सोच की मुद्रा में बैठ गया । ये देखा नहीं पिछले थोडी क्या हुआ? कुछ बोलो आपका चश्मा खाएँ आपका ये हाल कैसे हुआ? एक साथ कई प्रश्न सुनकर रोशन ने पूरे घटनाक्रम को बताया तो हब के पीछे क्यों कुछ होगा? रानी ने रोशन से पूछा । सिरफिरा एक तो बीवी की हमारी पर्पल रहे जाता है कि कोई उसकी बीवी से बात ना करें । इतनी चाहते तो घर पर भरके में बढाएंगे । आज के आधुनिक समाज में ऐसे चीज पे बोलते हैं उसके दिमाग मैं दूर भरा है और कुछ नहीं । पीवी बैंक अधिकारी है सबसे मिलना होता है । कहते कहते हैं पौषण अतीत में चला गया चलचित्र की भांति फ्लैश बैक को बडा तो और कारण एक ही कॉलेज में पढते थे रोशन मध्यमवर्ग और करंट अमीर घर से था चार रोशन पढाई तक सीमित था करन पढाई से कोसो दूर लडकियों पर लाइन मारने में व्यस्त रहता । सहपाठी रोशन से नोट्स लेते थे । सभी को रोशन के नोट्स पर यकीन रहता था । उस दिन भी कॉलेज की लाइब्रेरी में रोशन नोट्स बना रहा था । एक लडकी ने रोशन से नोट्स मांगे । कुछ देर तक वो लडकी रोशन के साथ लाइब्रेरी में बैठी रही । करन लाइब्रेरी में शायद उसी लडकी को धोनी आया था । क्या नाम था उस लडकी का? कि आते ही आया रोशन करूँ । जब रोशन लाइब्रेरी से बाहर आया तो करण ने रोशन की कमी इसका कॉलर पकडकर दो घुसे । जमादि तक आया कुमार से रोशन गिर गया । उस दिन भी उसका चश्मा टूट गया था । बेटा अगर लडकियों से बात करते देख लिया तो खैर नहीं नहीं, बढा को पडता रहे । लडकियों से बात मैं करूंगा । कर करन ने तो और जमा दिया गया है । एक ऑफिसर को आता देख करन रोशन को धमकाकर वहाँ से चला गया । कमाल है आपने करण को नहीं पहचाना लेकिन उसे आपकी शक्ल यार रही । आनी ने आशा रह सका । यात्रियों को क्या याद रखना? उस दिन के बाद मेरी उससे बोलचाल बंद हो गए । क्या कर रोशन मुस्कुरा दिया । रानी मेरा पुराना चश्मा देना सबसे पहले तो नया चश्मा बनवाना है । कल से करने मूड खराब कर रहा है । चाॅस चलते हैं कहीं भी पार्किंग में खडी है आपकी पाल कविता के पास है क्या? वो कुछ गडबड तो नहीं करेगी । खानी को चिंता हुई वो एक प्रोफेशनल है बैंक के नियमों के अनुसार काम करेंगे बैंक में करन के नियम नहीं चलते हैं ऑपरेशन के पास राशन चश्मे का फ्रेम सलेक्ट कर रहा था । ये वाले फ्रेंड नहीं चलेंगे । श्रीमान जी मुझे तो आज मालूम हुआ कि जनाब से लडकियाँ नोट्स पि लेती थी । एकदम नए लोग पाला प्रेम चाहिए । रानी ने चिट के लिए ऍम उस करा दिया । लंच कहाँ पर ऍम शाम को घर पहुंचकर चाहे की चुस्कियों के साथ रोशन ने आगे बंद की क्या सोच रहा हूँ सोचना फॅमिली के बारे में पहुंचना नहीं चाहिए । अगले दिन सुबह रोशन बैंक पहुंचा । कविता ने मुस्कुराकर रोशन को हलो कहा और एक लिफाफा रौशन की और पढाते हुए कहा आपका ॅ

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