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Transcript

भाग 01

आप सुन रही है कोई ऍम किताब का नाम है हादसे की रह जिसे लिखा है आमिर खान ने आरजे आशीष जैन की आवाज नहीं कुछ हुआ है सो नहीं चुमन चाहे तीन चलाए वो बुधवार की रात थी जिस रात बेहद सनसनीखेज और दिलचस्प कहानी की शुरुआत हुई । वो एक मामूली ऑटो रिक्शा ड्राइवर था । नाम कुलभूषण कुलभूषण पुरानी दिल्ली के किशनपुरा में रहता था किशनपुरा जहाँ ज्यादातर अपराधी किस्म के लोग ही रहा करते हैं । ये तराशी फुटबॅाल और चेन स्नेचिंग से लेकर किसी का खत्म तक कर देना नहीं उनके लिए यू मजाक का काम है जैसे किसी ने कान पर बैठी मक्खी को उडा दिया हूँ । कुलभूषण इस दुनिया में बिल्कुल अकेला था तब हूँ फिर भी वो थोडा डरपोक भी था । खास तौर पर बिशनपुरा के उन गुंडे मवालियों को देख कर दो । कुलभूषण की बडी ही हवा खुश होती थी तो जरा जरा सी बात पूरी चाकू निकालकर इंसान की अंतडियां बिखेर देते हैं । सारी बुराइयों से पर भूषण बचा हुआ था । सेवायें एक बुराई के शराब पीने की लत थी । उसे उस वक्त भी रात के कुछ सवा नौ बज रहे थे और कुलभूषण किशनपुरा के ही दारू के ठेके देवराज मान था । उसने मेरे से उठाकर दारू की बोतल से लगाई चेहरा छत की तरफ उठाया । फिर पेशाब जैसी हल्के पीले रंग वाली दारू को गटागट अलग से नीचे उतार दिया । उसने जब फट की जोरदार आवाज के साथ बोतल वापस में इस पर्पट की तो वो पूरी तरह खाली हो चुकी थी । ठेके में चारों तरफ गुंडे मवालियों का साम्राज्य कायम था तो हंसी मजाक में ही बदली बदली गालियां देते हुए दारू पी रहे थे और मसाले के भुने चने खा रहे थे । कुछ बेटर इधर उधर घूम रहे थे । कुलभूषण ने नशे की तरफ से ही ट्विटर को आवाज लगाई । क्या है फॅमिली? लगा रहा बलदेई ऍम आदेश दनदनाने के बाद कुलभूषण ने अपना मुंबई की तरफ चुका लिया और फिर आंखे बंद करके धीरे धीरे नेस्ट तक आने लगा । टाॅक जैसे कोई उसके नजदीक आकर खडा हो गया है । बहुत डालेंगे । रखते हैं कुलभूषण में समझा बेटर है और ऍम लेकिन लेकिन उसके पास खडा व्यक्ति एक इंच भी नहीं हिला सुना नहीं गया । झल्लाकर कहते हुए कुलभूषण ने जैसे ही गर्दन पर उठाई, उसके छक्के छूट गए । मेज पडताल लगती उसकी उंगलियां की पूरी तरह कहाँ थी कि वह रज कर अपनी स्थान पर ढेर हो गई सामने रुस्तम सीट खडा था दारू के ठेके कमा लेंगे लगभग पचास पचपन वर्ष का व्यक्ति राहुल सुर्ख आंखें लम्बा चौडा डील डॉल और शक्ति सूरत सही बदमाश नजर आने वाला ऍम से अब कुलभूषण की आवाज थरथरा उठी अब और भूषण कोशिश छोडकर उठा था कॅप्टन उसके कंधे पर इतनी जोर से हाथ मारा कि वह पिचके गुब्बारे की तरह वापस धडाम सकता उसी पर जा गिरा हूँ मैं । मैंने आपको थोडे ब्लाॅक जमानों में तो ना मुझे नहीं बडा ऍफ का एक पर्चा उसके हथेली पर रखा ही है । उधारी काबिल है । रुस्तम सेठ ने पुणे कुराकर कहा है फॅमिली फॅमिली का माल समझकर चढाया जा रहा है । अब तक कुल मिलाकर एक हजार अस्सी रुपए हो गए कुलभूषण ने दाद चमकाये तीसरी बार चुप राॅड किसी बात नहीं है मुझे अपनी अपनी उधारी अभी चाहिए फौरन ऍम थोडा परेशान होकर बोला है तो मेरे देख लो उसमें खाली जब बाहर को पलट दी चेहरे दिखाता है साले जेब दिखाता है । रुस्तम सेठ ने कुछ समझ पाते रवान पकड लिया मुझे अब भी की अभी रोकना चाहिए ऍम लेकिन मेरी मजबूरी समझो सेट समझे मेरी मजबूरी ॅ चला तो लंगडा हो गया है । अब हो गया है ये ये बात नहीं वो तो मालूम मैं कुलभूषण सहमी सहमी आवास में बोला मैं ऍम और पिछले पंद्रह दिन से लेवॅल चल रहे हैं इसलिए ॅ पडा और वो भी कमा ही नहीं हो रही हो । ये बात तो जब आरोपी ने से पहले नहीं सुलझी थी उस काम से टकराया की जब तेरा काम धंधा चौपट पडा है तो तो उधारी कहाँ से चुकाएगा? देखो नहीं तो अब तो तुझे फ्री की दारू नजर आ रही होगी । उसका होगा आपका माल है जितना मर्जी क्यों लेकिन अगर तुम्हें आज उधारी नहीं चुकाई तो तेरी ऐसी चलता ढाई होगी की तो तमाम उम्र याद रखेगा । ऍम तीन वाली उसके इर्द गिर्द आ कर खडे हो गए । कुलभूषण भय से पीना पड गया ॅ उसने गिनती की मत मुझे एक मौका दो हर साल खुल गई । मैं तुम्हारी भाई बारी चुका दूंगा यानी आज तो रुपये नहीं देगा । नहीं बंद है मेरा तुमसे चला ब्लॅक करता इसके हड्डी पसली बराबर नहीं आएँ । कुलभूषण ऍसे की तरफ भागा तीनों वाली चीजें की तरह के पीछे चलते हैं । दो लपक कर हो क्या उठा ली एक फॅमिली को ज्यादा मोचा नई भूषण ने आर्तनाद क्या मुझे ॅ हूँ? मगर उसकी फरहत वहाँ इसमें सुनी थी । दो । हम क्या एक साथ उस पर पडने के लिए हवा में उठी फॅसे बंद कर ले तो उसी क्षण एक तीखा नारी स्वाॅट पूजा हॉकी हवा में ही रुक गए । ऍम कुलभूषण में छत्ते से आके पुलिस हमने मंत्रा खडी थी मंत्रा लगभग पच्चीस छत्तीस साल के इतिहास सुंदर लगती थी । बिशनपुरा में ही रहती थी । सात साल पहले उसके माँ बाप एक एक्सीडेंट में मारे गए थे । तब से मंत्रा बिल्कुल अकेली हो गई थी । लेकिन उसने हिम्मत नहीं आ रही है । वो बी ए पास उसने ऍम करनी है और खुद अपनी जिंदगी की गाडी होने लगी । कुलभूषण जितना डरपोक था, मंत्रा उतनी ही दिले । पिछले एक महीने से किशनपुरा में उन दोनों की मोहब्बत के चर्चे काफी गर्म थे । कुलभूषण जहाँ आपने मोहम्मद को छुपाता तो वहीं मंत्रा किसी भी काम को चोरी छिपे करने में विश्वास नहीं रखती थी । क्या हो रही है मंत्रा अंदर आते ही चलाई क्यों मार रहे हो तुम से मंत्रालय रुस्तम स्टेट भी आखिरी लाल जी करके गुराया । फॅमिली उसके पास की सजा दी जा रही है । लेकिन इसका कसूर क्या है? इस नहीं उधारी नहीं चुकाई । बस ऍम मंत्रा इतनी सी बात के लिए तो उसे मार डालना चाहते हो ये इतनी सी बात नहीं है । बेवकूफ लडकी असम सेट का कहर भरा स्वर्ग आज इसने उधारी नहीं चुकाई । कल कोई और नहीं चुकाएगा । छूट की ऐसी बीमारी है जिससे फौरन रोकना जरूरी होता है । और इस पडती बीमारी को रोकने का एक ही तरीका है इस हरामी की तुराई की जाय सबके सामने इधर ही ताकि सब लोग देखें लेकिन उसकी धुनाई करने से तो फॅमिली जाएंगे । सामान मत चला । मंत्रा अगर प्रोसेस बताया आती है तो उसकी उधारी चुकाने और ले जैसे अच्छा कितने रुपए तुम्हारे एक हजार अस्सी है । मंत्रालय फौरन झटके से अपना पास खोला है और फिर उन्हें फॅमिली पर पढती है । मैं पकड अपनी उधारी । फिर वो कुलभूषण के साथ तेजी से दरवाजे की तरफ पडी । वहाँ पीछे से गुंडा व्यंग्यपूर्वक हजार प्रेमिका हो तो ऐसी जो दारू पिलाया और हेमा भी ले । कुलभूषण एकदम पलट कर उसको को भस्म कर देने वाली नजरों से घूर आॅफ गाली देनी चाहिए । गाली नहीं, गुंडा शेयर की तरह हर उठा गाली नहीं ऍम फिर चलता है । मंत्रालय भी कुलभूषण को छेडता हूँ । चुप चाप खर्चा कुलभूषण खून का घूंट पीकर रह गया जबकि ठेके में मौजूद तमाम गुंडे उसकी बेवसी पर खिलखिलाकर हंस पडे तो क्यों गई थी ठीक है पर अपने घर के कमरे में पहुंचते ही कुलभूषण मंत्रा पर बस बडा क्यों नहीं जाती? कुछ भी नहीं जाती कुलभूषण चलाना बहुत साहब क्या बिगाड लेते मेरा बहुत दिनों से भी डालते धूम डालते मुझे नहीं मालूम वहाँ एक से एक बडा गुंडा मौजूद होता है मंत्रालय हैरानी से कुलभूषण की तरफ देखा ऐसे क्या दिख रही है मुझे? अगर तुझे मेरी जब तक नहीं ख्याल है तो ठीक है पर चाहता हूँ थोडा तो नहीं देता शराब को मंत्रालयों मैं शराब नहीं छोड सकता हूँ क्यों नहीं छोड सकता हूँ ऍम और अगर नहीं छोड सकता तो फिर काम आता क्यों नहीं? ऑटो रिक्शा ड्राइवरों ने ही तो हडताल की हुई है जबकि कमाने के और भी सौ तरीके हैं एक ये कुछ भाषण मार दें, भाषण दे रही हूँ और नहीं तो क्या दे रही है और भूषण चला थोडी सी तुम्हारी क्या चुका दी अपने आप को तो अब समझने लगी अगर ऐसा समझता है तो यही चाहिए । मंत्रा बोली ज्यादा ही हिम्मत वाला है तो जहाँ मेरी उधारी के रुपए मुझे वापस ला कर दे एक मंत्रा मुझे गुस्सा मतलब कुलभूषण आक्रोश मैं बोला नहीं तो क्या कर लेगा तो मेरे रुपये अभी के अभी वापस लाकर दे देगा । कहाँ से लाएगा? रुपए के पेड पर लटक रहे हैं या जमीन में दफन है । कहीं से भी लाकर दो लेकिन तुझे फॅार दे दूंगा । और तब मंत्रालय वो शब्द बोल दिए जो कुलभूषण की बर्बादी का सबब बन गए । जिनकी वजह से खतरनाक सिलसिले की शुरुआत होती थी एक ऐसे सिलसिले की जिसके कारण कुलभूषण त्राहि त्राहि करो था । ठीक हैं । मंत्रा बोली अगर अपने आप को इतना ही धंधा समझता है तो मुझे मेरे रूपये वापस लाकर दे । कुलभूषण फौरन बाहर गली में खडी अपनी ऑटो रिक्शा की तरफ पड गया । मंत्रालयों की रात के दस बजे जा रहे थे इस लेकिन लेकिन इतनी रात को कहाँ जा रहे तो तेरे वास्ते रुपये कमाने जा रहा हूँ । ऍम खोलकर सुन रहे हैं अब मैं बस तेरे रुपए कमा कर ही वापस लौटूंगा । अगले ही पल कुलभूषण की और तो किशनपुरा की ऊपर खबर सडक पर कश्मीर की तरफ भागी जा रही है । पीछे मंत्र तंग खडी है हो चुकी है । ये बात तो मंत्रा की कल्पना में भी नहीं थी कि कुलभूषण इस तरह इतनी रात को रूपए कमाने निकल पडेगा । तभी कॉलेज सत्तर रुपये आसमान पर बादल खेलते चले गए । ॅ आसमान के रक्षण को अपने दम जैसे आवरण में ठान लिया । तेज हो मूसलाधार बारिश हो हत्याका काली घटाओं से घिरे आसमान की तरफ भूल ठाकर बोली हो मेरे भूषण की रक्षा करना भगवान मेरे भूषण की रक्षा करना लेकिन नहीं उसका भूषण तो पल प्रतिपल अपनी परवाह की तरफ अग्रसर हो रहा था अपनी मुकम्मल बर्बादी की तरफ कुलभूषण ने अपने ऑटो रिक्शा कनॉट प्लेस के रीगल सिनेमा के सामने ले जाकर खडी करनी है । जिस हॅारर अच्छा बडी की वहाँ खूब अंधेरा था । सिनेमा पर दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे चल रही थी तो कुछ सोचा है कि वो नाइट शो छूटने पर भरोसे सवारियां ले जाएगा । लेकिन अभी तो सिर्फ सवा दस बजे थे । क्यों छोटे में काफी टाइम बाकी था और भूषण ने सीट की पुष्टि से पीट लगाकर इतना नाम से आखिर बंद कर रहे हैं । मूसलाधार बारिश का बार हो रही थी मस्त बर्फिली हवा ने कुलभूषण पर चढे दारू के नशे को दोगुना कर दिया । लेकिन एक बात चौंकाने वाली थी । इतनी तेज मूसलाधार बारिश में भी फ्लाइंग स्क्वॉड की एक मोटरसाइकिल लाॅकर काट रही थी । मोटर साइकिल पर दो पुलिसकर्मी सवार थे । जरूर चक्कर था हूँ कोई गहरा चक्कर था होगा कुछ फिर कुलभूषण सोर्स अपना दिमाग को झटका दिया उसकी पाला है फिर कब मस्त बर्फानी हवा के नरम नरम रेशमी क्यों कोने कुलभूषण को सुना दिया पता ही नहीं चला ऍम बराबर वाली गली में तू तेज धमाके हुए सब की किसी की हालत बढकर चल रहा है की आवाज भी आधे से ज्यादा करोड उसमें गूंज उठी । ऍम तुरंत उनके पलट सडक पार यू का आकार बनाते हुए तेजी से उसी गली में जाता हूँ । लेकिन कुछ कुछ कुछ होता रहा उसके इतने नजदीक से गोलियां चली, कोई हालत भाड कर चलना है । मोटर साइकिल धडधडाती हुई गली में घुसी । इतना भी हायतौबा मची लेकिन कुलभूषण के कान पर जूं तक नहीं रेंगी । उसकी नींद तो तब टूटी जब आफत बिल्कुल उसके सिर पर आकर खडी हो गई । ऑटो रिक्शा को भूकंप की तरह रिश्ते उसमें चौक कराके खोलिए । उसे हडबडाकर पीछे देखा ऑटो रिक्शा यात्री सीट पर । उस वक्त एक काले रंग का कद्दावर सा आपनी बैठक पूरी तरह हाफ रहा था । उसका शरीर पर नीले रंग की प्लास्टिक की बरसाती पहन रखी थी । सिर पर प्लास्टिक कहीं फॅस कट टावर आदमी के हाथ में है । एक कार्यक्रम का प्रैक्टिस भी था जिससे वो अपनी जान से भी ज्यादा संभालकर सीएस चिपटाए हुए था । हूँ चलती ऑटो बना उस आदमी फॅसने देंगे । कहा तो बेहद खौफ ज्यादा था लेकिन नहीं बहुत भी चिंघाड उठा और उसने बरसाती की जेब से रिवाल्वर निकालकर एक काम कुलभूषण की तरफ तांदी चलती चलती ऑटो स्टार्ट कर पर एक गोली मैत्री खोपडी के पटक छोड जाएंगे । कुछ हो ना हो गए । पलक झपकते हीं उसका सहारा नशा हैरान हो चुका था । फिर उसके हाथ थोडी तेजी से चले ऍम फॅमिली जैसी रफ्तार से भागने लगे । पाॅच चला रहा था, लेकिन उसके दिलो दिमाग में नगाडे बज रहे थे । हीरो नगाडे जहाँ पर आतंकी आनंद था, तभी कुलभूषण को अपने बच्चे किसी वाहन की घरघराहट सुनाई थी । उसने उत्सुकतापूर्वक शीर्षक देखा और कुलभूषण छोटे छोटे हैं । उसका मुझे ठीक से खारिज हुई थी वो पुलिस पुलिस सत्तावन आदमी भी बहुत बडा है । हाँ, पीछे ही है । आप कर रहे हैं बच्ची का और फिर उसने एक झटके से पीछे मुडकर देखा और अगले ठंड उस समय रह गया हूँ । ऐसा लाॅकर उसके चेहरे का सारा खून निचोड लिया होगा । ऍम के पीछे दौडी चली आ रही थी, जिसपर फॅमिली के वही दोनों पुलिसकर्मी सवार थे तो बार बार फसल बजाकर ऑटो रिक्शा रोकने का आदेश दे रहे थे । अच्छा अभी नहीं जल्दी से अपने चेहरे का पसीना साफ किया ऑॅफ बडा फिर वो बोला लेकिन बहस ऍम अच्छा भी रहता है । पहले का वक्त नहीं है । इस संबंध जान पर बनी है । लेकिन अगर मैंने ॅ नहीं रोकते थे । पुलिस मेरी बात ऐसी तैसी कर देगी साहब पुलिस तो मेरी बात ऐसी की तैसी करेगी । बेटा ऍम नहीं लेकिन उससे पहले मैं तेरी अभी अभी इसी वक्त पैसे कैसी फिर दूंगा । ऍम ऊपर होगा हमेशा हमेशा के लिए ऍम हटाया तो कुलभूषण के प्रमाण हालत में आप नहीं कुलभूषण कॅश नहीं तो फिर स्पीड बडा बडा हो अभी बताता हूँ उसके बाद और ऍम फौरन और बुलेट को पछाडकर सडक पर भागी । हाँ यही वो पल था जब उस अजनबी के मुंह से पहली बार कर रहा नहीं है । प्रदूषण भी चलकर देखा उस वक्त वो अजनबी अपना सीखना भी चेक इसी दर्द को जमाने की कोशिश कर रहा था । कुलभूषण ॅ होने के नाते उसे यू तो सभी रास्तों की जानकारी बडे अच्छे ढंग से नहीं लेकिन कहाँ बोलेगा पटता उसकी ऍम, खरगोश और कछुए जैसी दौड में जो बात कुलभूषण के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित हुई वो था कनॉट प्लेस में अच्छा सडकों का । चार कुलभूषण अपने ऑटो रिक्शा को स्टेटमैन तथा सुपर बाजार की पेचदार गलियों में कुमाता हुआ । जल्दी फ्लाइंग स्पोर्ट की मोटरसाइकिल को धोखा देने में कामयाब हो गया । दस मिनट बाद ही ऑटो रिक्शा दरियागंज के इलाके में तोड रही थी । शायद पास अच्छा अभी उसकी सफलता से खुश हुआ । पांच कुलभूषण फिर पीछे मुडकर देखा अजनबी अब सीट पर अगर छोटा सा हो गया था और उसने अपना सिर्फ पीछे टिका लिया था । कुलभूषण उसकी हालत ठीक नहीं दिखाई दी । सब वो कुछ खतरनाक अपराधी था । इस एक सवाल पूछूंगा कुलभूषण थोडी हिम्मत करके बोला पूछो तो हमारे पीछे पुलिस की लगी थी । बोल तो मुझे ये बात नहीं समझते हैं । अच्छा नदी उन्हें पीडा से कराता हुआ बोला ये एक लंबी कहानी है । तू कर रहा हो रहे हो । कोहली लगी है खोली हम सब हट गया । कुलभूषण का दिमाग है । उसके कंड से ठीक सी खारिज हुई । हाँ, ऑटो रिक्शा के हैंडल पर पूरी तरह आप उठे जिसके कारण पूरी ऑटो को भूकंप जैसा झटका लगा । लेकिन इसमें हमारी तो मैं बोली थी । पुलिस ने भी कुछ नहीं बोला । ऑटोरिक्शा भी भी तूफानी गति से सडक पर थोडी जा रही थी तो मैं तो जाना कहाँ है? फॅमिली को कराता हुआ सीट पर कुछ और पसर गया । जमात क्यों नहीं देते? तुम कहाँ रहते हो मैं कुलभूषण ऍम लेकिन तो मैं उससे क्या मतलब है? बताओ तो सही शायद कुछ मतलब निकल आए । नजदीकी आवाज में थोडी नरमी आ गई थी । वो नदी का ही असर था जो कुलभूषण ने बता दिया । मैं किशनपुरा में रहता हूँ हूँ और कौन कौन रहता है तुम्हारे साथ? अच्छा अभी नहीं कराते हुए पूछा खिला रहता हूँ शादी नहीं हुई नहीं माँ बाप वो भी नहीं है तो ठीक है । अजनबी ने बेचैनी पूर्वक पहलू बदला । अगर तुम अकेले रहते हो तो तो मुझे अपने घर ही ले चलो तो उस वक्त वही जगह सबसे ठीक रहेगी । क्या कह रहे हो तुम? कुलभूषण के कंसिस्टेंट गाडी छूट गई उसका धंधा और बिजली सीकर खडा कर गिरी । ऑटो रिक्शा को झटका लगा कितना तेज झटका की उस झटके जो करने के लिए कुलभूषण को फाॅर्स के किनारे सडक पर रोक देनी पडेगी । क्या ऍम कुलभूषण तेजी से अजनबी की तरफ रखकर बोला । जगह तुम किशनपुरा हो गई हाँ, अजनबी ने संजीदगी से कहा सोचता हूँ आज रात तुम्हारे घर पर आराम कर ले लेकिन लेकिन क्यों करोगे मेरे घर पर आ रहा ऍम तुम जहाँ रहते हैं मैं तो वहीं लेकर छोड दूंगा । दिल्ली के आखिरी कोने में भी तुम्हारा घर होगा तो मैं तो मैं वही ले जाकर छोडूंगा । मगर मैं अभी उस वक्त में घर नहीं जाना चाहता । अजनबी इस वक्त भी आॅस्कर अपने सीने से चिपकाए हुए था । क्यों नहीं जाना चाहते अपने घर देख तुम नहीं चाहते । बेवकूफ आदमी ऍम मेरे पीछे लगी है । मुमकिन है कि पुलिस मुझे गिरफ्तार करने के लिए मेरे घर पर भी पहरा बिठा रखा हूँ । पर अगर ऐसी हालत में मैं अपने घर गया तो कब फौरन पकडा? नहीं जाऊंगा । ऍम गया ऍम उसे अब महसूस हो रहा था । एक कितनी बडी आपत्ति हो चुका है । एक लगभग मरा हुआ सांप उसके गले में पडा था तो नहीं जानते हैं? अजनबी बोला तुमने पुलिस से मेरी जान बचाकर मेरे ऊपर इतना बडा ऐसा क्या है? मैं तहेदिल से तुम्हारा आभारी हूँ । मेरे ऊपर एक एहसान और कर दो । सिर्फ आज रात के लिए मुझे अपने खर्चे शरण लेंगे । फॅमिली दिन निकलने से पहले ही तुम्हारे खर्चे चला जाऊंगा और तुम्हारे ऊपर मेरी वजह से कोई पांच नहीं आई । कुलभूषण चुप चाप पहुँच नदी को देखता रहा । जिस तरह के हैं क्या तो भरे पर इसके अलावा और कोई रास्ता नहीं अगर रास्ता होता तब तो मैं तो नहीं क्यों परेशान करता दोस्त बार बार पीडा से करा रहा था गोली का क्या करोगे? कोई बडी समस्या नहीं है नहीं बोला बोली निकालने मेरे पास हाथ का खेल है आज मैं कोई पहली बार थोडी चटनी हुआ हूँ । कुलभूषण कोई फैसला नहीं कर पा रहा था क्या सोच रहे हो हूँ मेरी जब तुम से पूरन पूरी तरह निकल रहा है अच्छा भी लगभग छटपटता हुआ बोला कुछ अपने घर ले चलो ओवर हो नंबर चाहूंगा कुलभूषण फिर चुप तेर मत करो अभी इस बार गिडगिडाया तेरी जिंदगी का सवाल है अगर मेरे ऊपर नहीं तो कम से कम मेरी हालत पर रहम खाओ । कुलभूषण देखा उसकी आंखों में अब सफेदी पुत्र लगी थी हो शुरू होने लगे थे । कुलभूषण कशमकश में उलझा रहा था । फिर कुछ सोचकर वापस ऑॅडिट पर जाना था और उसने ऑटो रिक्शा बिशनपुरा की और थोडा थोडी ही देर बाद जब कुलभूषण ऍम पूरा मोहल्ले में अपने घर के सामने जाकर तो उस वक्त पूरी गली अंधेरे में डूबी थी । बारिश बंद हो चुकी थी और अब सर हल्की फुल्की बूंदाबांदी ही हो रही थी । कुलभूषण नीचे ऊपर कर अपने घर का ताला खोला । अजनबी व्यक्ति भी संभाल संभाल कर चलता हुआ कुलभूषण के पीछे पीछे घर में दाखिल हो गया । अंदर घर में भी गाली जैसा ही खुद अंधेरा था । कुलभूषण ने बल्ब जलाने के लिए जैसे ही सोच स्पोर्ट की तरफ हाथ बढाया तभी वो घटना घटी जिसके बाद कुलभूषण त्राहि त्राहि कर उठा । अच्छा अभी तब तक उस के करीब आ चुका था । तभी एक का एक अजनबी का पूरा शरीर पूरी तरह लड जा उसका मुझे तेज पर आपको भी और झाग निकल पडेंगे । कुलभूषण से संभाल पता उससे पहले ही वो नहीं था । आराम से नीचे फर्श पर जा गिरा । कुलभूषण ने लाॅन क्या सबसे पर जल उठा बाल पे चलता ही कुलभूषण ने जो मंजर देखा उसे देखकर उसके काम से इतनी तेज रिकॅार्ड खारिज हुई है कि वह चीज पूरे कृष्णपुरा में गुंज उठे ।

भाग 02

फॅमिली कुलभूषण की ठीक सुनते ही मंत्रा एक दम उछलकर खडी हो गई । फिर वो आनंद फाइनल में दरवाजा खोलकर बाहर निकली और पेट बना फुर्ती से । पर भूषण के घर की तरफ लगभग पडेंगे । ऍम था मंत्रा दनदनाती हुई भीतर खुसी और नहीं था ही । मंत्रा के काम से भी तेज जी खारिज तो होते बची । वर्ष कब बिल्कुल बीचोबीच? एक लंबे कडियल आदमी की लाश पडी थी । उसकी पड जाती । आधी से ज्यादा खून से लतपत थी । अजनबी की मौत दो गोलियां लगने से हुई थी । उसकी पीठ में धंसी हुई थी । उसके अलावा जो सबसे ज्यादा चौका देने वाली बात थी कोशिश की । अजनबी ने काले रंग के ब्रीफकेस को मरने के बाद कस्टर अपने सीने से चिपका रखा था । तुम क्या क्या लाश को देखते ही मंत्र जिस्म का एक एक रोज खडा होता था मैंने थरा उठा कुलभूषण क्या तुमने उसकी हत्या नहीं थी? ऍम करने लगा । कुलभूषण ऍम बोला मैं तो ये भी नहीं जाता कि कौन है ऍम? कुलभूषण ने बडी तेजी से पूरी घटना बयां कर दी । साॅस हम सब घटना वाकई सनसनीखेज होती है । अगर इसके पीछे पुलिस लगी थी कॅश तब तो संभव है कि पुरुष नहीं से गोलीबारी हो मुझे भी यही लगता है मंत्र की जरूरी से पुलिस ने गोली मारी है । कुलभूषण बोला ये कोई अपराधी है तो पुलिस से बचकर भाग रहा था । इसके अलावा ही पांच और मुमकिन है क्या मौके का फायदा उठाकर हो सकता है इसकी पीजी सहयोगी दही से कोहली मारती हूँ वो क्या सोचने लगी? मंत्रालय ठीक तो सब भयंकर गलती हो चुके भूषण तो फस गया कि क्या कर रही है तो कुलभूषण तो खुश बना हो गए । मैं कुछ कह रहे थे तो दोनों वाकई फंस चुका है और अब इस आदमी की हत्या काॅपर होने वाला है । लेकिन मैं हत्यारा नहीं हूँ । सर तेरे कहने से कुछ नहीं होगा । भूषण है कैसे कुछ नहीं होगा । कुछ फॅस की हत्या की होती तो क्या मैं जुडी इसकी राष्ट्रीय नुमाइश करता हूँ । इसे लेकर अपने घर में आता है और फिर उसकी हत्या गोली लगने से हुई है । सोच मेरी जैसे मामूली आदमी के पास रिवॉल्वर जितना खतरनाक हथियार कहाँ हो सकता है? और अगर रिवॉल्वर जैसा हथियार आ भी गया तो क्या उसे चलाना मेरे बस का है? तो फिर क्या मैं तुझे इतना बडा पागल नजर आता हूँ? कुलभूषण बोला हूँ की तेरी उधारी चुकाने के चक्कर में मैं किसी की हत्या तक करने पर आमादा हो जाऊंगा । गया तो उसी तरह था । मांॅग कहीं से भी लाएगा । किसी का भी गला काटकर लाएगा लेकिन मेरी उधारी जरूर चुकता करेगा । उसको ऍम मुझे खुद मालूम नहीं था कि मैं क्या क्या पक गया हूँ और चंद रुपयों के लिए मैं किसी की हम कैसे कर सकता हूँ । मंत्रा इतना डिलेड दिखाई देता हूँ मुझे अगर मैं नहीं दिल्ली होता ना तो आज शाम रुस्तम सेट उसके कुंडों की ठेके भी ऐसी की तैसी । नागर देता हूँ तो कहना चाहता है मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूँ कि ये हत्या मैंने नहीं की और मैं हत्यारा नहीं हूँ । कुलभूषण ने लगभग आठ नाथ करते हुए कहा महत्वपूर्ण भूषण मंत्र एक एक शब्द चबाते हुए हो । नहीं हर हत्या करने वाला यही कहता है जो तू कह रहा है ऐसी हालत में कौन तेरी बात पर यकीन करेगा तो तू करेगी । मेरी यकीन करने या ना करने से कुछ नहीं होने वाला । मंत्रा बोली असली बात ये है कि पुलिस तरी बहुत पर यकीन करती है क्या? नहीं तो पुलिस देख लास्ट तेरे घर में बडी हैं । मंत्र फॅमिली है और फिर मेरे कपडे भी उनसे समय हुए हैं । पुलिस को तुझे तरह साबित करने के लिए इससे बडा सबूत और क्या चाहिए? अब कुलभूषण की जान अलग मैं आपको उसी एक को लाश अपनी मौत का वारंट लगने लगी और कैसा वारंट जो सहार पर हर लम्हा बर्बादी की तरफ नीचे जा रही थी । तभी घटना नहीं एक और ऐसा नया मोड दिया जिसके बाद कुलभूषण के ग्रह पूरी तरह संकट में गिर गए और भूषण की नजर एक का एक अजनबी के ब्रीफकेस पर पडी तो उसका दबाव में सवालों का धमाका हुआ । फॅर रखा है क्या इसके अंदर इसमें इसी के खास चीज है जो मरने के बाद भी ऍम नहीं हुआ । अब और भूषण का दवा नहीं, घंटियां बजने लगी, तेज घंटियां हूँ उसमें कुछ खास है उस बेहद खासी पार्टियों की आवाज । अब कुलभूषण दिमाग में तेज होती जा रही थी । उसे एक ब्रीफकेस अपना ऍम करता नजर आने लगा । उसे लगने लगा ऍम बन्दे से बचा सकता है । और ये ऐसा होता ही कुलभूषण तुरंत अजनबी की तरफ लगता । डरते डरते नीचे चुका हूँ उसके हाथ अजनबी के शिकंजे से ब्रीफकेस निकालने के लिए जैसे ही उसके सीने की तरफ पडे हैं क्या है तो मंत्र दहशत से चिल्ला उठी लेकिन तब तब कुलभूषण ड्राॅप अकड चुका था होना पकडता ही उसके ब्रीफकेस अपनी तरफ खींचा और फिर वो उसे लेकर यू अपनी पहले वाली जगह भगा मानो पीछे से उस अजनबी द्वारा पकड लिए जाने का खतरा हूँ । मंत्र फौरन उसके नजदीक पहुंचे ऍम अच्छा । कुलभूषण ने प्रीस्टेस नीचे फर्श पर टिका दिया था और फिर उसके ऍसे खोला हूँ की हलकी आवास हूँ । ब्रिटिश में ताला लगा हुआ नहीं था इसके फौरन वो खुल गया और ब्रीफकेस खुलते ही उन दोनों के दिलोदिमाग पर फॅमिली की छह नटराज की मूर्तियां शुद्ध सोने की मूर्तियां जो पढा मूल्यवान थी सोने की मूर्तियां मंत्रा उन मूर्तियों पर नजर पड रही कुलभूषण के आवास खुशी से कपडा उठी असली सूर्य की मूर्तियां सोने की मूर्तियां उन को भी देश झटका लगा हैं ऍम बोर्ड से भी तेज साढे प्रतिरोध उसके शरीर की तमाम हरकत किस तरह फ्रीज हो गई । मान लो बिजली से चलने वाली मशीन कभी में स्वच्छ बंद कर दिया हूँ । हाँ कि शुद्ध सोने की मूर्तियां हैं । कुलभूषण की आंखों में चमक कौन थी? ठीक ठीक इसके नीचे क्या गुदा है जो ॅ सीता कुहाड मंत्रालय मुझसे तेज, संस्कारी छोटी तब तो ये मूर्तियां बहुत कीमती है था । बहुत कीमती मूर्तियां बेहद कीमती पक्का खुद हमारे दिन बदल गए हैं । मतलब करीब ऍम हमारे मन था चुकी हैं तो क्या कह रहे हो? लेकिन भूषण तो दीवाना हो उठा था । उस वक्त वो कल्पना लोग के सागर में गोते लगा रहा था । ठीक कह रहा हूँ उसने खुशी जाॅन ऐसे में ही कहा तो छे अपनी नौकरी करने की जरूरत नहीं और मुझे अब ऑटो चलाने की जरूरत नहीं । हम तो शादी करेंगे । मंत्रालय तो तो रानी बनकर रहेगी । ऍम तू पागल हो गया है । मंत्रालय के छोड डाला अपनी बर्बादी का सारा प्लांड खुद ही बना रहा है उसमें आभूषण भूषण चौकर मंत्रा को देखा हूँ हूँ सपने देख रहा है मंत्रालय गुस्से में उसे थोडे जैसी फटकार लगाई दिमाग ठिकाने पर नहीं दे रहा हूँ, पूरी तरह ठिकाने पर है नहीं है जी की मंत्रा करते रहते ठिकाने पर होता तो ऐसी बहकी बहकी बातें हर गिरजा करता हूँ तो भूल गया है । एक घर में इस वक्त लाश पडी है, फॅमिली में छूट रहा है और ऐसी हालत मुझे अपने नसीब चाहते हुए नजर आ रहे हैं तो अभी करने की बडी है हूँ । कुलभूषण की नजर उन्हें अजनबी केशव पर जाकर अटक नहीं ऍम तमाम जेबों की तलाशी ले डालेंगे । लेकिन उसमें से उसे कोई भी ऐसा ऍम कार्ड नहीं मिला जिससे अजनबी की पहचान हो । पा नहीं । क्या देख रहे हैं । उसमें इसका नाम क्या घर का एड्रेस तलाशने की कोशिश कर रहा हूँ हूँ नहीं कुलभूषण बेहद आकाश भाव से इनकार में गर्दन हिला दी । अगर प्रीत केस में नहीं है तो जरूर उसकी पेंशन की जेब में कुछ होगा । कुलभूषण की नजर फर्राश की तरफ नहीं । उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वह हाॅट में हाथ डालेंगे हूँ । फॅमिली तो नहीं नहीं थी । कुलभूषण ने अपने अंदर का हौसला पैदा किया और एक बार फिर डरते डरते लाश की तरफ पडा है । नीचे चुका नहीं । उसने कपडा बातें हाथों से आज भी की जेबों की तलाशी ले डाली । वहाँ कुछ नहीं था । तमाम खेलों में कागज का ऐसा एक अगर टुकडा तक नहीं था, जिससे उस जगह की पहचान होगा नहीं । क्या है उसकी पहचान के? बालो बात करने की दिशा में कम से कम सूत्रधार का काम तो करता हूँ । काश कुलभूषण नजदीकी उसी हालत से कोई नतीजा निकाला होता । उसी से उससे खतरे का कुछ अंदाजा लगाया होता हूँ । अगर उसकी जेबों में कुछ नहीं था, लेकिन कुलभूषण के दिलों तो वहाँ पर उस वक्त पूरी तरह लालच सवार हो तो फिर मूर्तियों को संजीदगी के साथ देखने लगा । मैंने इस तरह का देख रहा हूँ । मंत्रिमडल थर्ड ठाठ करके बज रहा था छोड दिया नहीं है । मंत्रालय एक ऊपर बडा क्यों नहीं है? क्या चाहिए जी इस वक्त है इस मामले कानून का खजाना है । कुलभूषण खुशी से कब कपालेश्वर में बोला मैंने आज तक सब सुना था । मंत्रा ऊपर वाला जब देता है पर ठार कर देता हूँ । सच आज अपनी आंखो से ब्रेक लिया । ऍर सास है उससे हमारी बंद किस्मत की तरफ से खोल दिया । मंत्रालय तो हो गया है । मंत्रालय गुजरा उठी बहुत बिस्तर पर मंडरा रही है बेवकूफ और तो भगवान का गुणगान कर रहा है तो उस को देखा है । मंत्रालय आपके टिकट आएगा तो उसको चाॅस तेरे घर में से बरामद होगी तो पुलिस वाले तेरी ऐसी ऐसी धुलाई करेंगे की किस्मत के जो दरवाजे हैं तो उस वक्त घूमते नजर आ रहे ना उस सब के सब एक झटके में बंद हो जाएंगे हैं तो मेरा कुछ नहीं बिगाड सकती । कुलभूषण ऍम सब थोडा क्यों नहीं दिखा सकती क्योंकि पुलिस का मैंने ऍम सोच लिया है । कैसा हूँ हूँ पुलिस उसी हालत में तो मेरा कुछ बिगाड सकती है । जब दिन निकलने पर उसे लाश मेरे घर के अंदर से बरामद होगी । लेकिन अगर इलाज की पुलिस को मेरे घर के अंदर से ना मिले तो तो कैसा रहेगा । मंत्रा तो तो कहना चाहता है असम से बातें मंत्रा कुलभूषण में विस्फोट । क्या मैं इस वर्ष को आज रात ही गायब कर दूंगा तो इलाज को गैप कर देगा आमंत्रण अब इस मुसीबत से छुटकारा पाने का सिर्फ और सिर्फ एक यही तरीका है । कुलभूषण का दिमाग इस वक्त बहुत तेजी से चल रहा था । मैं उसको आज रात ही किसी ऐसी जगह है करूंगा जहाँ से बरामद होने पर पुलिस को पहले ऊपर किसी तरह का कोई शक नहीं होगा । एक तू करेगा मूॅग हूँ जी मैं करूंगा । ये सब करने की हिम्मत है तेरे अंदर हिम्मत हो मंत्रा कुलभूषण दृढतापूर्वक बोला लेकिन इस काम को मैं करूंगा जरूर क्योंकि तभी मैं पुलिस से बच सकता हूँ और इस लाख से बचा जा सकता है और आप और क्या और सोने की इन कीमती मूर्तियों को पाया जा सकता है । मंत्री तंग रह गई, एक दम हूँ । आज ना सहूलतें तेरी खोपडी खराब हो गई है । फॅमिली तो सोचता है तो लाश को कहीं भी फेंक कर पुलिस के हाथों से बच जाएगा । मूर्तियाँ इतनी आसानी से हल प्ले का तो नहीं? भूषण कि सिर्फ और सिर्फ तेरा बहन है । पुलिस मुझे तलाशते हुए एक ना एक दिन तेरे तक जरूर पहुंच जाएगी और फिर नहीं बचेगा । फिर तो सिर पटक पटक कर कितनी भी तुम्हारी देगा ये हत्या तूने नहीं थी तो उन्हें नहीं की तब भी पुलिस को तेरे परिषद की नहीं आएगा जो रास्ते पर तो अपने बचाव के लिए बना रहा है । भूषण आने वाले दिनों में वही रास्ते तेरी मुकम्मल तबाही के तेल पर बहुत ही के कारन बन जाएंगे हूँ कहना चाहती है देख मैं सिर्फ ये कहना चाहती हूँ अभी भी कुछ नहीं बिगडा है तो सारी मूर्तियां और लास्ट बस कानून के हवाले करते हैं और पुलिस को सब कुछ सच सच बता देंगे । तेरह कुछ नहीं बिगडेगा ऐसे कुछ नहीं बिगडेगा । कुलभूषण उत्तेजित होता पुलिस का इतनी सीधी है वह खामोशी से मेरी हर बात को मान लेगी तो नहीं मानेगी पहले की और अब की परिस्थिति में बहुत फर्क है । भूषण इस वक्त तेरे पास देश तीन तीन मूर्तियां हैं । अब पुलिस भी ये सोचेगी कि अगर तेरे मन में कुछ छलकपट होता तो तू ये मूर्तियां कानून के हवाले क्यों करता हूँ तो नहीं जानते मंत्रालय कुलभूषण के दिमाग पर लालच पूरी तरह हावी हो चुका था । पुलिस मेरी ईमानदारी का भी कोई नया अर्थ निकलेगी । आजकल अपराधियों ने जासूसी उपन्यास पढ पढ कर कानून की आंखों में धूल झोंकने की ऐसी ऐसी तरकीबें ढूंढ ली है कि किसी के लिए भी सही गलत का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल हो गया है । और ऐसी हालत में मेरी ईमानदारी को भी पूरी तरह शक के घेरे में देखा जाएगा । फॅमिली भूषण को देखने लगी मानो वो आज उसका कोई नया रूप देख रही हो । फिर तो ही सोच मंत्र कुलभूषण धाराप्रवाह ढंग से बोलता चला गया । क्या सब्जियाँ हमारी एक धोखे, नंगे बेघर और गंदे गटर में कुलबुलाते जैसी जिंदगी बसर कर रहे हम । जबकि इस समय हम अलग ही धनवान बन सकते हैं कहने की जरूरत नहीं । आज के समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा का अधिकारी सिर्फ और सिर्फ वही व्यक्ति होता है जिसके पास दौलत है । ढेड सारी दौलत नहीं होता है । हम क्या है और क्या बंद सकते हैं । तमाम जिन्दगी मेहनत करने के बाद भी हमें समाज में वो पोजीशन हासिल रही होगी जो अब हम पलक झपकते ही हासिल कर सकते हैं । अपने तमाम काम पूरे करने का इससे बेहतर मौका हमारे हाथ फिर कभी नहीं आने वाला । मंत्रा तो कुछ तो कर उसे देखती रही । मैंने क्या कुछ गलत कहा लेकिन कर पुलिस को ये सब कुछ पता चल गया । पूछूँ मंत्रा बोली की मूर्तियां हडपने के लिए तूने ही लाश ठिकाने लगाई थी तब क्या करेगा? हूँ ऍम अगर पुलिस को ये किस तरह पता चलेगा और भूषण नहीं एक एक शब्द चबाते हुए पूछा पुलिस को क्या आसमान से आवाज आएगी हूँ? याद में रीगल सिनेमा के सामने एक का एक मेरी ऑटो रिक्शा में आकर बैठ था और उसके बैठे ही मैंने ऑर्डर फुल स्पीड से सडक पर दौडा भी दी थी । पुलिस की मोटरसाइकिल तो बाद में पीछे लगी लेकिन पुलिस कर्मियों नहीं तुझे रीगल के सामने खडे तो देखा होगा नहीं । कुलभूषण प्रफुल्लित मुद्रा में बोला अरे नहीं देखा मैंने ऑटो ड्राइवरों की हडताल के कारण आज अपनी फोटो खुद अंधेरे में खडी कर रही नहीं क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि किसी की नजर मेरे ऊपर पडेगी । आज सचमुच किस्मत पूरी हो, मेरे साथ थी लेकिन तू एक और बडी बात फूल रहा है । पहुंॅच पुरुष कर्मियों ने पीछा करते वक्त ऑटो रिक्शा का नंबर तो नोट किया होगा नहीं नंबर भी नोट नहीं क्या? कुलभूषण खुश होकर बोला । मैंने कहा ना, किस्मत पूरी तरह मेरे साथ थी । मैंने गली में आते ही नंबर पे देखी थी । उस पर मिट्टी पुती हुई थी । जरूर ऑटो रिक्शा का भैया किसी कारण से भर एक घंटे में पड गया होगा और फौरन ढेर सारी मिट्टी उछल कर नंबर पेट भर फट गई होगी । बहरहाल, जो भी हुआ मेरे हक में हुआ । अगर नंबर प्लेट पर मिट्टी होती तो मेरे फंसने की फुल चांस रहते हैं । अब मंत्रा पीछे हो गए । फॅमिली तो चाहे अपनी बात के पक्ष में कितने ही करते रहेंगे । मंत्रालय संसद स्वर में बोली लेकिन मुझे लगता है कि अगर तुम्हें मूर्तियों को हडपने के लिए कोई भी हालत कदम उठाया तो जरूर तो किसी भारी मुसीबत में फंस जाएगा और कोई आपत्ति रुपए टूटकर गिरेगी । उसके अलावा तो एक बात को और नजरअंदाज कर रहा है । क्या याद में शक्ल से ही कोई गुंडा दिखाई देता है? मुमकिन है कि इसमें मूर्तियां कहीं से चुराई होगा । अगर ऐसा हो ना भूषण तो जब तो इन मूर्तियों को बेचने जाएगा तो फस जाएगा । तो मतलब ये सब बाद की बातें हैं । कुलभूषण मूर्तियां हडपने के लिए था । मूर्तियां बेचने के लिए भी कोई कोई ऐसा रास्ता सोच लिया जाएगा जिसमें कोई खतरा ना हो । फिलहाल हमें अपना सारा ध्यान इस बात पर लगना चाहिए किस को किस तरह ठिकाने लगाया जाए । उन दोनों के बीच थोडी देर और बहस चली लेकिन आखिरकार कुलभूषण ने मंत्रा को इस बात के लिए तैयार कर ही लिया । उस लम्बे कडियल आदमी की लाश ठिकाने लगाने में ही उनका भला है । फिर कुलभूषण ने मंत्रा की मदद से उस अजनबी आदमी के शव को घर के भीतर से निकालकर ऑटो रिक्शा में लाख दिया ।

भाग 03

फोन उन दोनों के लिए बडे नाजुक क्षण थे । मंत्री तो लाश को हाथ लगाते हुए भी खबर आ रही थी लेकिन कुलभूषण के बार बार आग्रह करने के बाद पोस्ट काम को करने के लिए राजी हो गई । उस वक्त रात के दो बज रहे थे । पूरा किशनपुरा सन्नाटे में डूबा था । कुलभूषण ऍम आज से पहले वो ये कहते हुए नहीं सकता था कि उस मोहल्ले में बेहद पत्थरदिल लोग रहते हैं । रात को कितनी हाय तौबा मचती है वहाँ कैसी कैसी छत पे होती है ऍम कोई अपने खिडकी में से भी छात्र देख ले वहाँ कोई पडता है तो मर जाए उनकी बला चाहिए । लेकिन आज कुलभूषण के दल से तो निकल रही थी । अगर आज उसकी नगाडे जैसी चीख सुनकर वहाँ मंत्रा के अलावा कोई और अधिवक्ता तो वो गया था तो के भाव फिर वो मूर्तियों का बारिश तो क्या बनना था । उसे उसे हत्या के अपराध में जेल के अंदर चक्की और पीछे नहीं पडती है । बहरहाल अभी तक नसीब उसके साथ था । उसने खून से रंगे कपडे उतारकर नई धुले हुए कपडे पहने । उसके बाद खून चरण कपडों पर केरोसिन डालकर उसने उनमें आग लगा दी और रात को नानी के रास्ते बहा दिया । मंत्रालय भी एक जरूरी काम किया । उसने पहले पानी और फिर पेट्रोल की मदद से फर्श पर लगे खून के धब्बों को अच्छे तरीके से साफ कर डाला । जब कि कुलभूषण ने आनन फानन में अजनबी की जेबों से आपने फिंगर प्रिंट भी मिटा दिए थे । फिर ऑॅडिट पर लगी मिट्टी भी साफ की ताकि उसी एक पॉइंट की वजह से वो कहीं भी होना चाहिए । बहरहाल कुलभूषण जैसे सीधे साधे आदमी से जितनी उम्मीद की जा सकती है, उसमें उससे कहीं ज्यादा काबिलियत का परिचय देते हुए सबूतों को बता दिया । अजनबी ऑटो रिक्शा में लाते वक्त उन दोनों ने अपने हाथों में दस्ताने पहले अजनवी लम्बी चौडी कदकाठी वाला आदमी था । इसलिए टांगे वगैरह मोडकर वो बडी मुश्किल से ऑटो रिक्शा पिछले सीट परसेंट हो गया । भाषा के ऊपर एक मोटा कंबल डाल दिया गया । फिर मंत्रा बेहद खौफजदा मुद्रा में लाश के पहलू में इस तरह बैठ गई, जिससे वो लाश राष्ट्र होकर कोई मरीज और वो उस मरीज की कोई सभी संबंधी ऍम पडा । अब कुलभूषण की आंखों के सामने रात के काजली अंधेरे में डूबी काली कोलतार कि वीरान सडक की जो मूसलाधार बारिश होने की वजह से शिष्य की तरह चमक रही थी और उसकी आंखों में सपने थे । सुनहरे सपने कुलभूषण देखा उसकी और मंत्रा की शादी हो रही है । उनके पास एक बडा सा घर है । शानदार गाडी । आगे छह नौकर चाकर खुश हैं । बेहद खुशी कुलभूषण सपने देखता रहा और ऑटो रिक्शा अपना फासला तय करता रहा । तभी तभी संकट की शुरुआत हुई ऍम पीछे से आती सारण की आवाज को सुनकर कुलभूषण पडा सारे सपने काफूर हो गए । उसके पीछे गर्दन हमारी अवॅार्ड दिया था पुलिस और तो ठीक है ऍम पीछे फॅमिली जितनी सायरन बजा बजाकर ऑटो रिक्शा को रोकने का आदेश दे रही थी । पुलिस हमारा पीछा क्यों कर रही है? मंत्रालय एक आॅफिसों की तरह पूछा मुझे क्या मालूम कुलभूषण के जिस्म का लेकिन वो खडा हो गया सिर्फ सब ये पता चल गया ऍम लेकिन अभी ऐसे पता चल सकता है ये तो वही बेहतर जाने । मंत्रालय कपालेश्वर में बोली मगर ऍम हमारी हरकत के बारे में पता चल चुका है । फॅमिली बोलती थी भूषण इस चक्कर में मत बहुत मत्वपूर्ण फस जाएगा । नहीं तो अमीर बनने का बडा शौक चढा हुआ था । एक मंत्रालय बेकार की बातें मत करो । कुलभूषण योजना था । पहले ही उसका दहशत के बारे बुरा हाल था । उसके जिस्म से पसीने की बहन निकली थी । उसके ऑटोरिक्शा, स्पीड और बडा ऑटो भी तूफान की तरह सडक पर दौडने लगी । उससे भी कहीं ज्यादा तेजी से दिमाग दौड रहा था । उस वक्त अतिभाव जो एक पहले बडी मुसीबत से छुटकारा पाने की कोई नाया तरकीब सोच रहा था । ठीक है कुलभूषण आंदोलित लहजे में बोला हूँ ऍम क्या बात है एक पुलिस से बचने का मेरे दिमाग में एक आइडिया है तो कंबल ओढकर लाश के ऊपर ले जाएं चलती हूँ पसीने छूट गए मंत्रा गई अब क्या कह रहा हूँ मतलब कुलभूषण चिल्ला उठा पुलिस की जितनी नजदीक आती जा रही है जैसा मैं कह रहा हूँ । ऐसा कार्य और बहुत हम दोनों का फसना ते हैं । लेकिन लेकिन लास्ट ऊपर लेने से क्या हो जाएगा? मंत्रा के आंखों में मौत नाच रही थी । उसकी हवा खुश थी । देख लाश के ऊपर लेने के बाद ये भी पता चल जाएगा की क्या होगा । इसलिए जल्दी कर उन दोनों की आपसी बहस किसी ठोस नतीजे तक पहुंच पाती । उससे पहले ही उसके बीवी जिप्सी जोर जोर से सारण बजाते हुए ऑटो रिक्शा के पहलू में से गुजरेगी और फिर सडक के बिल्कुल बीचों बीच वोटों के सामने चाहता हूँ हो गए कुलभूषण के उसने फौरन ब्रेक अप्लाई किया है । फिर भी और ऍम करते हैं । काफी दूर तक कर सकते चले गए और ऍम होते होते बचा हूँ । उसी पल मंत्रा भी हरकत है । वो एकदम दहशत के वशीभूत होकर लाश के ऊपर जा पडी थी । लाश के ऊपर गिरता ही उसने झट से लाश पर बडा कम्बल खींच लिया था और फिर उस कम्बल से अपने आप को और लाश को अच्छी तरह ढक लिया । अब वो लाश के एकदम ऊपर नहीं अजनबी की गोद में उधर जिप्सी के रूप में ही उसमें से थोडा धरती पुरस् करने नीचे को नहीं । उसका कुछ शुरू से ही शक नजर आ रहे थे । नीचे होते ही फॅमिली तरफ बडे कुलभूषण ने देखा उनमें जो सबसे आगे था वो बडे खतरनाक मुखमण्डल वाला सब इंस्पेक्टर की रैंक का पुरुषकर्मी था । जब की उसके पीछे पीछे आने वाले दोनों पुरुषकर्मी हवालदार कुलभूषण ऑटो रिक्शा की ड्राइविंग सीट से कुछ और जब चिपक कर बैठ गया और अपने होने वाले हैं । खौफनाक अंजाम की कल्पना से ही ठंड था, कांपने लगा । तब तक वो तीनों से करीब आ चुके थे । उसके अंदर शाह कुलभूषण हें । मरियम से जवान में पूछा ऍम समझ डॉक्टर के हथौडे जैसी आवाज नहीं सीधे उसका तुम आप पर चोट की बाहर निकाल ऍम था । कुलभूषण हाथ पैर की टीचर करने लगे लेकिन लेकिन क्या है साहेब नहीं हर अभी सब इंस्पेक्टर मच्छी खाते हुए आगे छुपकर उसका निर्वान पकड लिया । समझा नहीं मैं क्या कह रहा हूँ मगर कुलभूषण के मुंह से निकलने वाले आगे के तमाम शब्द एक नंबर ठीक में परिवर्तित हो गए क्योंकि गुस्से मैं बनाते हुए उस सब इंस्पेक्टर रहे । कुलभूषण को न सिर्फ बाहर पकडकर की जाता है बल्कि बाहर खींचते ही उसने धडाधड उसके ऊपर तीन चार ऐसे झापड जड दिए हैं कि वह चीखते हुए घडी के पेंडुलम की तरह दायें बायें छूट गया चलता है । ऐसा अपने बाप से जवान चलता है उससे ये अच्छा पडा और झडा ऍम उसके आंखों के गिर्द अनार पटाखे से छूटने लगे । लेकिन लेकिन मेरा कसूर क्या है ये तो बता दो । कुलभूषण फरयाद की तुझे अपना अपराध नहीं मालूम । साले सब इंस्पेक्टर ने उसे शहर पर बातें हुई नजरों से हो रहा है तो मुझे अपना कसूर नहीं मालूम । खडा हो झापड बडे कसकर उसकी कनपटी पडे । कुलभूषण केरोलाइन छूटते छूटते बच्चे हैं तो उन लोग के पट्ठे सब इंस्पेक्टर उसके बाल पकडकर छोडे इतनी तेज ऑटो रिक्शा चला रहा था । हवाई जहाज बना रखा था । ऐसे और ऊपर से पूछता है मेरा अपराध क्या है? मेरा कुसूर क्या है? सब इंस्पेक्टर ने गुस्से में धान मिलाकर उसके पेट में इतनी जोर से घुटना मारा कि वह हल्का एक कुत्ते की तरह टकराव होगा । सब कुछ पडा कडक पुलिस वाला था पर ये सोचकर कुलभूषण को राहत मिली के मामला स्पीडिंग के चालान का था सुभाष का नहीं लेकिन मेरी क्या गलती है साहब कुलभूषण रूंधे हुए स्वर में चलते हुए बोला अच्छा पिछले तेरी गलती कुछ नहीं ऍम कर देने वाली नजरों से घोडा ऑटो रिक्शा को आंधी तूफान बना रखा था । पुलिस सारण की आवाज भी सुनाई नहीं दे रही थी लेकिन फिर भी तेरी कुछ गलती नहीं ऍम कुलभूषण स्वर में बोला और इसी वजह से मैं ऑर्टोप् आंधी तूफान बनाकर चला रहा था । ऍम फॅमिली साहब एक लडकी की जान खतरे में है । ऍम अपने हाथ में मौजूद टॉर्च का प्रकाश ऑटो रिक्शा की पिछली सीट पर डाला मंत्रिसमूह खोले पडी थी । अलबत्ता कम्बल सोचना लाश को बडी कर ही नहीं से ढक रखा था । हाँ ऊपर टॉर्च का प्रकाश पढते ही मंत्रा दर्द भरे अंदाज से कराएं । उसने इमरजेंसी वाली बात शायद सुन ली थी ऍम लडकी को बीमार हालत में देखा सब इंस्पेक्टर के तेवर कुछ ढीले पडेगी से साहब ने बोला है कि सीरियस ऍम हॉस्पिटल ले जाओ । अब अगर ये बात है तो पहले मैंने बताया ऍम बोलने का मौका ही कहाँ दिया साहब आप तो आप तो एकदम से गिर गए सब इंस्पेक्टर में फिर से आगे लाल पीली की लेकिन मित्रों को ज्यादा ही मोटी नजर आ रही है । वो क्या है साहब कुलभूषण जल्दी से बोला ये मेरे से है ना । इसलिए देखने में अच्छा लगता है हो हो गया सब इंस्पेक्टर मुस्कराया है और उसी के साथ दोनों हवलदार भी हो होकर के हंसने लगे । आपने पहुँचा कुलभूषण ऍम इतना ज्यादा लेट होंगा उतना ही केस बिगड जाएगा थे । गया जाओ और सुना सब इंस्पेक्टर कठोर जैसे में बोला आज तो मैंने तुम्हें इमरजेंसी की वजह से छोड दिया है लेकिन अगर आइंदा फिर कभी तुमने फ्लाइंग स्पॉट के सायरन की आवाज सुनकर भी ऑटो रिक्शा नहीं रोका ना तो फिर तुम्हारी खैर नहीं । जय समझ गया साहब समझ गया हो जाएगा से कुलभूषण तुरंत ऑटो लेकर वहां से नौ दो ग्यारह हो गया । उसे ऐसा लगा मानव चान बची और हो पाएगा । सुबह के पांच बजे का समय ये वो समय होता है जब मॉर्निंग वॉक के लिए लोग अपने अपने घरों से बाहर निकलते हैं । लेकिन उस दिन की शुरूआत बडे ही सनसनीखेज ढंग से हुई । इंडिया गेट के आसपास चहलकदमी करते लोगों का जमघट दिखाए । अमर जवान ज्योति के नजदीक वाली झाडियों के आसपास लग गया था । जमघट लगने का कुछ कारण था घनी झाडियों में एक लाश का पाया जाना । अजनबी की शक्ल शिक्षित लाश को सबसे पहले कॉर्पोरेशन के एक माली ने देखा । सूरज निकलते ही झाडियों की कटाई छटाई के वास्ते वो गाना वहां था । झाडियों में लास्ट देखते उसने कलॅर चलाना शुरू कर दिया । परिणामस्वरूप वहाँ भीड जमा हो गई । ये भी बडी दिलचस्प बात थी कि कुलभूषण उस वक्त सुबह भी वहाँ पुलिस और आम लोगों की प्रतिक्रिया जानने के लिए मौजूद था । ऍम पहन रखा था और उसके हावभाव ऐसे थे मानो वो भी दूसरे लोगों की तरह ही मॉर्निंग वॉक के लिए निकला हूँ और लाश की बात सुनकर चौंक गया हूँ । आॅफलाइन स्कॉर्ट दस्ते का सामना करने के बाद इतना घबराया था की अमर जवान ज्योति के पास सन्नाटा देखकर उसने लाश को वहीं झाडियों में फेंक दिया । कुलभूषण का इरादा तो लाश को किसी ऐसी जगह ठिकाने लगाने को था जहाँ से वो पुलिस को कई हफ्ते तक बरामद होती । कुलभूषण जानता था कि उसने लाश ऐसी जगह है की है जहां सुबह होते ही हर काम पड जाएगा । इसलिए वो खुद भी उस हर काम का नजारा करने के लिए वहाँ मौजूद था । तब एक का एक भीड में शोर शराबा सा हुआ और फिर जोर जोर से सायरन बजाती पुलिस जी घटनास्थल पर आकर होगी ॅ होगी अपने पूरे दलबल के साथ जीतने से कुछ पडा है । इंस्पेक्टर योगी सत्ताईस अट्ठाईस साल का एक हष्ट पुष्ट नौजवान था । उसने दबंग व्यक्तित्व का मालिक था । अंडरवर्ड के बडे बडे गुंडे की उसके नाम से हो करती थी और आपने इसी रॉफ्ट आप के कारण ही वह अभी नया नया ही सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर बना था और फ्लाइंग स्क्वॉड के उस रस्ते से संबंधित था तो सिर्फ हत्या वाले किसानों की । तब भी करता है स्पैक्टर योगी को देखते ही भीड हाई की तरफ फट गई । उसके व्यक्तित्व से कुलभूषण भी प्रभावित हुआ और उसका दिनों के बाद में एक ही सवाल लगाने की तरह बजने लगा । अब क्या होगा अब क्या होगा? उधर योगी जैसे ही अपने सहयोगियों के साथ लाश के नजदीक पहुंचा । तुरंत एक हजार के मुझे निकला । अरे साहब ये तो चीरा पहलवान है फॅस आजाद वही जो पहले अखाडे में जाकर पहलवानी करता था । लेकिन फिर धीरे धीरे जुर्म के पेशे में आ गया और खून खराबा करने लगा । ऍफ का नाम अपने ऊपर । साहब अच्छा नहीं, वही छेना पहलवान तो नहीं इस पर होगी । जल्दी से बोला इसका कई डकैतियों में भी था और सही अंदाजा लगाया साहब वही चीज ना पहलवान है वो स्पैक्टर योगी अब धीरे धीरे स्वीकृति में गर्दन हिलाने लगा । उसके बाद पुलिस ने सबूत जुटाने और पंचनामा बनाने की तैयारियां शुरू कर दी । कुलभूषण जब घर पहुंचा तो वहां मंत्रा बडी बेसब्री से उसका इंतजार कर रही थी तो घबराहट के मारे ऑफिस में नहीं गई । क्या हुआ कुलभूषण को देखते ही उसकी तरफ लडकी है । कुछ खास बात पता चली है हाँ और भूषण गहरी सांस लेता हूँ । कुर्सी पर बैठ गया । उस अजनबी का नाम मालूम पड गया । अच्छा कौन था वो कोई चीना पहलवान नाम का अपराधी था । इसके ऊपर डकैती और हत्या के कई केस दर्ज थे । वो कुछ और पता चला नहीं बाकी तो कुछ नहीं पता चलता है । कुलभूषण ने बेहद सस्पेंस और मुद्रा में कहा अब शाम को जब शांति टाइम्स आएगा शायद उसी से कोई और नई जानकारी मालूम हूँ । उसके पास बडी बेसब्री से संडे टाइम्स का इंतजार शुरू हुआ । वो दोनों नटराज मूर्तियों के बारे में कोई जानकारी हासिल करने के लिए कुछ ज्यादा ही उत्सुक थे । खास तौर पर कुलभूषण तो इस मामले में हद से ज्यादा बेकरार था । शाम को तीन बजे के करीब शांति टाइम्स आया । चीना पहलवान से संबंधित खबर अखबार के कवर पेज पर ही मोटी मोटी हैड लाइनों में छपे थे । लिखा था कुख्यात अपराधी चीना पहलवान की रहस्यमई हत्या, शव बरामद । नई दिल्ली चार जुलाई आज सुबह दिल्ली शहर के कुख्यात अपराधी जीना पहलवान की शब्द लक्षित लाश पुलिस को इंडिया गेट के नजदीक बृहत रहस्यमय हालत में बडी नहीं । मृत्यु का कारण वो दो गोलियाँ बताई जाती है जो छेना पहलवान की पीठ में लगी हुई थी । इस संबंध में गश्ती दल के दो पुलिस कर्मियों का कहना है कि उन्होंने रीगल सिनेमा के नजदीक कष्ट लगाते वक्त तो उन्होंने बारह बजे के करीब गोलियों के दो धमाके सुने थे । गोलियों की आवाज सुनकर तो फौरन आवाज की दिशा में दौडे । जहाँ उन्होंने चीना पहलवान को भागते हुए देखा उसके हाथ में काले रंग का एक केस था तो पुरुषकर्मी चीना पहलवान को पकडा पाते उससे पहले ही वो लीगल के सामने अंधेरे में खडी एक ऑटो रिक्शा में बैठकर फरार हो गया । गश्तीदल के पुलिस कर्मियों ने ऑटो का नंबर भी नोट करने का प्रयास किया था लेकिन उसकी नंबर ब्रेड पर मिट्टी पुती होने के कारण वो अपने मकसद में कामयाब हो सकें । पुलिस का अनुमान है ऑटो रिक्शा ड्राइवर चीना पहलवान का कोई सहयोगी था और इस मामले की तह तक पहुंचने के लिए ऑटो रिक्शा ड्राइवर और चीना पहलवान के ब्रीफकेस की बडी सरगर्मी से तलाश कर रही है । कुलभूषण नहीं की खबर भी बडी और ममता को भी सुनाई । पूरे समाचार में नटराज मूर्तियों का कहीं कोई शक नहीं था । नहीं नहीं बहुत बडी भयानक थी दिल्ली पुलिस ऑटो रिक्शा ड्राइवर का चीन पहलवान से तो संबंध निकाल रही थी । उसने तो दोनों के होश उडा कर रखती है । बडी खबर है ऍम अखबार में छपी खबर को सुनकर मंत्रा के शरीर नहीं अब अभी दौडी क्योंकि भले ही पुलिस तुम्हारी और चीना पहलवान के बीच क्या संबंध निकाल रही है वो तुम्हें उसको कोई सगे वाला समझ रही है । मुझे नहीं समझ रही कुलभूषण कराया । पाॅवर को उसका सगे वाला समझ रही है जो उसे रीगल सिनेमा के पास से लेकर भागा था । लेकिन भूषण मंत्रा की आंखों में हराने की भाव नहीं । वो वॅार पूरी तो था देख रहा हूँ अभी के पास सिर्फ हम दोनों को मालूम है । हम तो और पुलिस के रहस्य नहीं जानती कि वॉटर ड्राइवर नहीं था । ठीक अगर पुलिस अभी इस रहस्य को नहीं जानती तो तो बहुत जल्द कुछ बन जाएगी । मैं उससे पहले कहती थी भूषण चक्कर में मत पड मत, पर फस जाएगा कि नहीं । तब मेरी बहुत तेरह कान पर नहीं देख रही थी क्योंकि तब तो जिस सिर्फ और सिर्फ अमीर बनने का शौक चढा हुआ था एक मिंत्रा अभी ऍम कुलभूषण झुंझला उठा । सच बात तो ये है कि अभी भी हमारा कुछ नहीं बिगडा है । अगर हम ठंडे दिमाग से सारे हालातों का जायजा ले तो खुद हमें भी महसूस होगा कि पुलिस हम तो कभी भी नहीं पहुंच पाएगी । क्यों नहीं पहुंच सकती क्योंकि पुलिस अभी सिर्फ ये जानती है । मंत्रा कुलभूषण एक शब्द चमकता हुआ बोला कोई चीना पहलवान को ऑटो रिक्शा में लेकर भागा शब्दों पर गौर करूँगा कोई अब ये बात मैं कमल अंधेरे में है कि वो कोई कौन था? दिल्ली पूरे सभी न तो मेरे नाम से वाकिफ है और नौ से मेरी ऑटो रिक्शा का नंबर ही मालूम है । कुलभूषण के आवास और ज्यादा रहस्यमय छोटी दिल्ली शहर में ऑटोरिक्शाओं की कोई कमी नहीं है । हजारों की संख्या में ऑटो यहाँ पिछले दिल्ली पुलिस को ये बात इतनी आसानी से नहीं पता चलेगी कि जिस ऑटो रिक्शा में चीना पहलवान रीगल के पास से भागा उस ऑटो रिक्शा ड्राइवर कौन था हूँ और और मूर्तियां मंत्रालय साॅल्वर में पूछा मूर्तियों का क्या होगा? देखो मूर्तियों के संबंध में एक बडी अच्छी बात है । कुलभूषण उत्साहपूर्वक बोला उनके बारे में भी दिल्ली पुलिस को कुछ भी मालूम नहीं है । तो तो कहना चाहते हो देखो मंत्रा हूँ और भूषण कैसे समझाया इस वक्त जो बातचीत पहलवान से हमारा लिंग जोडती है और वह है हमारे पास मौजूद सोने की छह नटराज मूर्तियां । उन मूर्तियों के हवा हमारे पास ऐसा कोई सूत्र नहीं है जो पुलिस के सामने इस बात की शहादत बन सकें कि हमारा चीना पहलवान से जयपुर उसकी लाख से कैसा भी कोई रिश्ता था और फिलहाल हमारे पास सबसे दूसरा ट्रंपकार्ड ये है कि पुलिस उन मूर्तियों की तरफ से भी पूरी तरह अनजान है । इसलिए इससे पहले कि दिल्ली पुलिस ऑटो ड्राइवरों की छानबीन करते हुए मेरे तक पहुंचे उससे पहले ही क्यों ना हम वोट दिया बेचकर दिल्ली से ही फरार हो जायेंगे । क्या कह रहा हूँ मंत्रा चौकी ठीक तो कह रहा हूँ कुलभूषण सनसनीखेज और में ही बोला पुलिस को सभी ऑटो ड्राइवरों की जांच पडताल करने में कम से कम तीन चार दिन का वक्त लग जाएगा और उसमें हम आराम से वो नटराज मूर्तियां भेज सकते हैं । मूर्तियां बेचने के बाद हमारे पास कोई सबूत नहीं बचेगा । लेकिन तो सवाल तो ये भूषण को मूर्तियां देखी भी किस तरह जाएगी? मंत्रालय खुश फोर में बोली देखो मैं पहले ही आशंका जाहिर कर चुकी हूँ । अगर वो मूर्तियां चोरी की हुई तो तो क्या होगा? तो पकडा नहीं जाएगा । नहीं कुलभूषण ने बडे ही विश्वास के साथ इंकार में कर्जन हिला दिया । मैं तब भी नहीं पकडा जाऊंगा । किसी मंत्र ने हैरानी से नेतृत्व फैलाकर पूछा तरह सूचनामंत्री कुलभूषण आइडिया बताया अगर कोई आदमी किसी दुकान पर जाकर चोरी का माल बेचे जो दुकानदार ज्यादातर चोरी का ही माल खरीदता हूँ तो प्रेस ठीक तरह के साथ फिर वो दुकानदार भला पुलिस को इन्फॉर्मेशन क्यों देगा? फिर तो मैं किसी सर आप को जानते हो । मंत्री के मुझे संस्कारी छोटी जो चोरी का सोना खरीदता है । फ्रांस जनता हूँ और आज रात को ही मैं उससे मूर्तियों का सौदा करूंगा क्योंकि इस मामले में मैं ज्यादा देर नहीं करना चाहता हूँ । मंत्रा हैरानी से कुलभूषण को देखते रहते हैं । उस कुलभूषण को तो हर पल एक गहरी पहली बनता जा रहा था ।

भाग 04

दरीबा कला ये जगह दिल्ली में चांदनी चौक के नजदीक ही है । उस वक्त रात के ग्यारह बज रहे थे । सर्राफे कि रिटेल मार्केट के रूप में प्रसिद्ध दरीबा कला की तब तक लगभग हर दुकान बंद हो चुकी थी । सिर्फ अपवाद के तौर पर एक दुकान खुली थी जिसके शटर के ऊपर एक नॉन साइनबोर्ड जल भेज रहा था । उसने ऑनलाइन पर लिखा था सेट दीवानचंद फॅस । सनमाइका के विशाल काउंटर के पीछे सेट दीवानचंद ऍफ का एक्सॅन खडा था । सेल्समैन ने सबसे पहले अपना चश्मा दुरुस्त किया फिर तीक्ष्ण दृष्टि काउंटर पर कोहनी टिकाए खडे कुलभूषण पर डाली और उसके बाद अपनी बेहद पार की नजरों से उस नटराज मूर्ति को देखने लगा । सहित और भूषण ने अभी अभी उसे बेचने की खातिर सौंपी थी । मूर्ति देखते ही स्टॅाफ भरने लगे तो उसने खोर आश्चर्य से पूछा ये ये मूर्ति तुम्हारे पास कहाँ से आई? मैंने चुराई है । कुलभूषण ने बडी दिलेरी के साथ जवाब दिया चुराई है एक पाॅइंट के होश उड गए हाँ अगर ये चोरी की है तो तुम से यहाँ तो लेकर आया हूँ । सिर्फ थोडा बहुत कर बोला आम चोरी कमाल बिल्कुल नहीं खरीदते । संजय कुलभूषण मुस्कराया उसकी मुस्कान ने सिर्फ मैन को और ज्यादा सस्पेंस में फसा दिया तो मुस्कुरा क्यों रहे हो? क्योंकि मुझे सब मालूम है निरादार कुलभूषण बोला जानता हूँ कि तुम और तुम्हारे स्टेट जी रात के दो बजे तक यहाँ बैठ कर क्या करते हो? अच्छा क्या करते हैं? सिर्फ मैंने अपने आखिर लाल पीली की देखो मैं लडाई झगडा करने नहीं आया और भूषण अपनी आवाज नरम की । अगर तुम्हारी इच्छा हो तो मूर्ति खरीदूँ पर ना हो तो मना कर दो । उसके बाद कुलभूषण ने सेल्समैन के हाथ से अपनी इकलौती नटराज मूर्ति ले ली और फिर चलने का उपक्रम करता हुआ बोला वैसे एक बात करूँ तो मेरे जो दोस्त ने मूर्ति बेचने के लिए मुझे यहाँ का एड्रेस दिया था ना वो एड्रेस गलत नहीं हो सकता क्योंकि मेरा दोस्त बहुत भरोसे वाला भी है और उसने अपने जीते जी कभी कोई हालत बाद सामान से बाहर नहीं निकली । वो बात कहने के बाद कुलभूषण जैसे ही जाने के लिए मुडा । चुनाव ऍसे पुकारा कुलभूषण झटका किया है तो अपने दोस्त का नाम बता सकते हो । जिसमें तो मैं यहाँ का एड्रेस दिया अब कुलभूषण सकपकाया उसे एक कोई जवाब नहीं सूझा । बताया नहीं तुमने तुम्हारे दोस्त का क्या नाम है? सेना चीना पहलवान कुलभूषण के मुझसे चीरा पहलवान का नाम बनाया सी निकल गया । चीना पहलवान ने मुझे यहाँ का एड्रेस दिया था । छेना पहलवान उस नाम को सुनकर सेल्समैन के नेतृत्व हूँ । अचंभव से फटे वाॅटर पडेगा एक हम आकर गिर गया हूँ तुम तुम चीनों पहलवान के दोस्त हो ऍसे संस्कारी छोटी हाँ ठीक है अब तो मुझे मूर्ति दिखाओ । ऍम मुद्रा में ही बोला था । मैं अभी अंदर से जी से बात करके आता हूँ । कुलभूषण ने खुशी खुशी मूर्ति उसे सौंप नहीं ऍम मूर्ति लेकर दुकान के अंदर वाले पोषण में चला गया । कुलभूषण नहीं जानता था । अब वो एक और कितनी बडी आफत में फंसने जा रहा है । कितनी बडी मुश्किल उसके सर पर टूटने वाली है । ऍम दो पोषण में पडी हुई थी एक फ्रेंड पोषन जबकि दूसरा फ्रंट पोषण से ही होता हुआ अंदर का पहुँच गया । उसके अंदर के पोषण नहीं । सराफों के शराब सेट दीवानचंद बैठते थे और वहाँ तक सिर्फ सेल्समैन की पहुंचती वहाँ कोई कस्टमर नहीं जा सकता था । वो सर्राफे की दुकान रोजाना रात के दो बजे तक खुलती थी । इतना ही नहीं तब तक वहाँ कुलभूषण जैसे इक्का दुक्का ग्राहक भी आते रहते थे । ऐसे ही कई ग्राहकों को कुलभूषण पहले भी कई मर्तबा अपनी ऑटो रिक्शा में बैठाकर वहाँ लाया था । उनमें से कुछ ग्राहक नशे में पूरी तरह धुत होते और वो ऑटो में बैठे बैठे शर्ट, दीवानचंद को माल बेचकर बस रुपया हासिल होने की बात कहते रहते हैं । कुलभूषण को तभी मालूम हुआ रात के वक्त वहाँ कौन सा धंधा होता है । इस वक्त कुलभूषण फ्रंट पोषण में बिल्कुल अकेला खडा था । झूठ नहीं कि वहाँ जितने भी शोकेस से सब लॉक थे ताकि कोई उनके साथ छेडछाड ना कर सके और भूषण अपने चेहरे पर नकली दाढी मुझे भी चिपकाए हुए थी । उसे वहाँ खडे खडे दस मिनट से भी ज्यादा गुजर गए । ऍम भीतर वाले पोषण से बाहर नहीं निकला । अब मुँह उठा चक्कर गया है कि बाहर क्यों नहीं आ रहा हूँ । कुलभूषण बेचैनी पूर्वक इधर सोता टहलने लगा । पांच मिनट और गुजर गए लेकिन फिर भी बाहर नहीं निकला हूँ । अब कुलभूषण की पहचानी हद से ज्यादा बढ चुकी थी । उसका दिमाग में रह रहकर खतरे की घंटियां भजन लगी हूँ । जरूर को चक्कर है, कुछ कपडा है था बहुत कुलभूषण भाग कुलभूषण कमाते पर पसीने चौहाने लगे एक कुलभूषण बडी फुर्ती के साथ जल्दी शोक से बाहर निकला और नजदीकी बने कॉर्पोरेशन के पेशाब करना चाहता हूँ । पेशाबघर की जालियों के पीछे से जॅाब का नजर अब बिल्कुल साफ देखा जा सकता था । हूँ । तभी तभी घटना एक और नया मोड लिया । कुलभूषण देखा उसके पेशाब । घर में घुसते ही भडा से सेकंड पोषण का दरवाजा खुला था । फिर उसमें से सिर्फ के साथ साथ बुरी तरह गडबडा । एक और हल्दी बाहर निकला हूँ हूँ हूँ । उसे दीवानचंद था । उस की उम्र तकरीबन है । चालीस पैंतालीस के बीच थी गेहूॅं लम्बी चौडी ॅ । साधारण सेठों की भांति उसका शरीर थुलथुला होने की बजाय बेहद तंदुरुस्त था । उसने काले रंग का बंद, गले का कोट और काली पेंट के साथ ही अपने गले में ढेरों किस्म की रंग बिरंगी मालाएं भी पहनी हुई थी । दोनों खातों में रखने चढत अंगूठियां कुल मिलाकर शेष दीवानचंद अपने पहनावे से ही धन कुबेर नजर आ रहा था । लेकिन उसके चेहरे पर ऐसी क्रूरता विद्यमान थी जो ज्यादातर खतरनाक अपराधियों के चेहरे पर ही पाई जाती है । कुलभूषण को जूलरी शॉप के भीतर से गायब देख तो हो चुकी है जी कहाँ गया सॅान्ग की आवाज कुलभूषण के कानों में पडी अरे बडी तेरे को तो मालूम होगा नहीं कहाँ गया दीवानचंद अपनी सिंधी भाषा में बोला मेरे से क्या पूछता है? नहीं लेकिन लेकिन अभी तो यही था ऍम तोडकर जल्दी शौक से बाहर निकला और सडक पर दाएं बाएं देखने लगा रहे । अभी अभी भी वो कहाँ गायब हो गया? पेशाब घर में छिपा कुलभूषण माजरा समझ पाता । तभी उसके देखते ही देखते सेट दीवानचंद की जूलरी शॉप के सामने एक फीएट धडधडाती हुई आकर रुकी । फिर पेट में से एक एक करके जरा दम तीन वाली बाहर को देंगे तो के हाथ में हो क्या थी? और एक के हाथ में साइकिल की चैन नीचे कुछ नहीं । उन्होंने सिर्फ दीवानचंद और ऍम धीरे धीरे कुछ बात की । उनके हावभाव बता रहे थे की चर्चा उसी के बारे में हो रही है । वो तो जरूर इधर गया है । कभी सेल्समैन ने गली में दाई तरफ उंगली उठाई तो देखा था उसे भागते हुए गुंडे ऍम से पूछा नहीं इसमें सकपकाया देखते हुए तो नहीं देखा था । फिर क्या गारंटी है कि वो उसी तरह गया है । दूसरा गुंडा बोला बहुत है वो इस तरफ गया हूँ । उन्होंने दूसरी दिशा में उंगली उठाई ॅ तुम लोग जो लगभग किए जाओगे नहीं ऍम था क्या? फिर तोडकर उस शराबी को पकडो के बीच अरे भाई सब हर तरह फैल जाओ । वो जिस तरह भी भागा होगा अपने आप पकडा जाएगा । दीवानचंद के तरफ में जान फौरन वो तीनों वाली और ऍम अलग अलग दिशाओं में दौड पडे जबकि पेशाब घर में छिपे कुलभूषण का दिमाग इंसान पडी वीरान घाटियां बन चुका था । उसके मस्तिष्क में रह रहकर एक ही सवाल डंके की तरह बजे उठ रहा था । सीट दीवानचंद को उसके पीछे गुंडे लगाने की क्या जरूरत है? वो इस तरह से क्यों ढूंढ रहे थे? क्या चक्कर था? कुलभूषण को लगा जिसे रहस्य का जान हर पल उसके चारों तरफ कसता जा रहा हूँ, सस्ता ही जा रहा हूँ । उसने कुलभूषण चोरों की तरह छिपता छिपाता कृष्णपुरा में दाखिल हुआ दरीबाकलां से वहाँ तक का राष्ट्र वाॅकर पूरा किया था ही नहीं । उसकी सांसे बेहद तेज तेज चल रही थी । आज वो नहीं संकट में फंसते फंसते बच्चा था । ये तो ऊपर वाले की कृपा थी कि वो आज मंत्रा के पास से सिर्फ एक ही नटराज मूर्ति लेकर चला था । ऍम तमाम नटराज मुँह हाथ होना पडता है । किश्नपुरा में आकर कुलभूषण ने चैन की सांस नहीं लेकिन उसे कहाँ मालूम था कि अब चैन उसकी किस्मत से पूरी तरह छिन चुका है । नकली दाढी मुझे पेशाब घर में ही उतार चुका था । अभी उसके साथ एक और घटना घटी । खतरनाक घटना रोजाना की तरह उस दिन भी किशनपुरा में सन्नाटा पसरा हुआ था । एक का एक और भूषण को अपने पीछे सरसराहट सुनाई दी । कुछ कौन तो उन्हें कुलभूषण जैसे ही बौखलाकर पालता, तुरंत उसके मूॅग निकल पडेंगे । एक लंबे फल वाला चाकू बिजली की तरह चमचमाता हुआ । अंधेरे में कौन था फिर उसके बाजू से रगड खाकर गिर पडा । अगर कुलभूषण से पढने में एक लडकी भी देर होती वो चार उसकी पीठ में और पारचा सस्ता था । फॅस कुलभूषण की घोषणा हो गए । अंधेरा होने के बावजूद उसने हमलावर को बिल्कुल साफ साफ पहचाना चाहूँ बाल लेने चलाया था बल्ले यार एक किशनपुरा का नंबर एक गुंडा बल्ले कुलभूषण पर दोबारा हमला करने के लिए उन्हें चाकू के ऊपर चपटा क्या हुआ? क्या हुआ उसी क्षण भर आपसे मंत्रा के घर का दरवाजा पुरा और फिर वो लगभग चीखती चिल्लाती कुलभूषण की तरफ की मंत्रालय द्वारा एकदम से मचाई गई चीखपुकार से घबराकर बल्ले भाग खडा हुआ । क्या हुआ? भूषण क्या हुआ मांॅ भूषण के करीब पहुंची और ऍम बाहों में भर दिया तो भूषण की दहशत के मारे पूरी हालत थी नहीं हुआ क्या? तो बल्ले मुझे चाकू मारकर ढल गया तो पहले था मंत्रालय फॅमिली ही था क्या? तो जल्दी घर जगभूषण लेकिन पास क्या है तो उन्हें सुना नहीं आॅलराउंड चलती घर चल मगर और भूषण के आगे की तमाम शब्द अधूरे रह गए क्योंकि पूरी तरह दहशत ज्यादा मंत्रालय उसकी शर्ट का कॉलर पकडा था और फिर वो उसे लगभग सीट हुई घर की तरफ लेंगे किसी दूसरे के बुरे की तरह उसने कुलभूषण को चारपाई पर पटका और फिर बे पनाह फुर्ती के साथ दरवाजा बंद करते ही बोली थी जहाँ ऍम पुलिस वो शब्द कुलभूषण के दिमाग में इस तरह टकराया । मनोज थाइसे राइफल की गोली लगी हूँ शरीर फ्रीज हाँ पर सुन चेहरे का रंग उड गया । धर टाॅवर में पूछा उसने । लेकिन पुलिस यहाँ तो आई थी तो अच्छे पकडने आई थी । मंत्रालय और भयंकर धमाका किया गिरफ्तार करने आई थी घर कर अब कुलभूषण का जश्न का एक एक रोड खडा हो गया । क्या कह रही है तो मन था वहीं कह रही हूँ बेवकूफ जो सच है । मंत्रालय ऍम पुलिस की पूरी चीज भरकर किशनपुरा में आई थी और वो तेरे बारे में पूछ ताछ कर रहे थे । कोई इंस्पेक्टर योगी नाम का बडा कडक पुलिसिया था । वो बोलता था कि तुम्हें चीना पहलवान का खून किया है हो ऍम खुद कुलभूषण इस तरह थर थर कांपने लगा जिसे ढूंढी का मरीज होता है । उस स्पेक्टर ने मोहल्ले वालों के सामने तेरे घर तक वाला भी थोडा और वहाँ की तलाशी भी ली थी । फिर तो मिले होंगे कुछ वहाँ से अधिक कहाँ से मिलता हूँ ऍम मूर्तियां तो उन्हें तेरे पास छोड रही हैं मैं तेरे से पहले ही बोलती थी कोई भी अपराधी पुलिस के फंदे से ज्यादा दिन तक नहीं बचा रह सकता हूँ । तब देख रहे हैं तो तमाम चालाकियों के बावजूद तमाम योजना के बावजूद पुलिस तेरे तक कितनी जल्दी पहुंच गई । कितनी जल्दी तेरी करतूत का पर्दाफाश हो गया उस हिसाब से नहीं कुलभूषण की खोपडी और ज्यादा फिर रखने की तरह घुमा कर रखते हैं लेकिन मेरी बात समझ नहीं आई और ऍम योगी को इतनी जल्दी ये हकीकत कैसे हो गई कि चुनाव पहलवान की लाश हम तो उन्होंने ठिकाने लगाई थी । हम तो उन्होंने नहीं मतलब दिन की तरफ पारू थी हम दोनों ने नहीं भूषण सिर्फ खुद को बोल मैं तेरे बेहद खतरनाक और जानलेवा चक्कर में नहीं पडने वाली है? ठीक है नहीं सही, लेकिन इंस्पेक्टर योगी को ये खबर हुई कैसे और भूषण विचलित मुद्रा में बोलूँ । उसने ये कैसे पता लगता है कि चीन पहलवान की हत्या में उसकी लाश ठिकाने लगाने में मेरा कैसा भी कोई हाथ था । मुझे क्या मालूम ऍम होगी को किस तरह मालूम हुआ । पुलिस वालों की आपने सोच होते हैं जांच करने का ब्रेक स्टाइल होता है फॅार योगी ने किसी तरह की सारी हकीकत पता लगा ली होगी । अब कुलभूषण कित्ते महत्व धमाके होने लगी । तेज धमाके सारी घटनाएं इतनी सुपर फास्ट स्पीड से घट रही थी जिनकी कुलभूषण नहीं कल्पना भी नहीं की थी । हर झंड चौका देने वाला था । हर कदम रहस्य से भरा हुआ । तभी मंत्रा ने एक और भयंकर विस्फोट किया । जानता है बल्ले कौन है? मंत्रा का संसद स्वर्ण ऍम वो चीज पहलवान का सगा भतीजा है । चीन पहलवान का भतीजा हाँ कुमार है । पहले तो मुझे बहुत मालूम भी नहीं थी । सिर्फ मुझे क्या किशनपुरा में पहले बात किसी को मालूम नहीं थी । मंत्रा बोले एक बात सुनकर तो और हैरान होगा । भूषण चीना पहलवान रहता भी किशनपुरा नहीं था । आगे जो होने वाला मकान है उसी में हो सकता है कुलभूषण के मुझे तेजस बारी छोटी तो अगर अगर चीना पहलवान किशनपुरा में ही रहता था तो वो पहले कभी दिखाई हो रही दिया था । जबकि मैंने पहले उसे किशनपुरा में तो क्या ही दिल्ली में कहीं नहीं देखा था । मैंने खुद पहले कभी श्रीकिशनपुरा में नहीं देखा था । मंत्रा बुरी तरह से वो आधी रात के समय बस कभी कभार इस घर में आता था जिसमें बल्ले रहता है । इसलिए हम में से कोई भी उसे न देख सकता हूँ । तो सब कुछ सारी परिस्थितियां बेहद चौंका देने वाली थी । चौका देने वाली भी और हद से ज्यादा सस्पेंस पुर चीनी पहलवान की लाश का क्या हुआ? वो शाम तक ताबूत बंद शवगृह के अंदर रखी थी । उस वक्त जो भी बता रहा था कि लावारिस लाशों को तीन चार दिन तक इसलिए शवगृह में रखा जाता है कि क्या पता उन्हें कुछ हासिल करने वाला आ ही जायेंगे । और अगर कोई नहीं आता तो फिर उन लावारिस लाशों का सरकार ही तरह संस्कार कर देती है । आज इस्पैक्टर योगी की पालने से मुलाकात होती तो बहुत मुमकिन था कि चीना पहलवान की लाश को भी लावारिस समझकर सरकार ही उसका दाह संस्कार कर देती है । फॅस नहीं था कुलभूषण पहुंॅची ना पहलवान पालने का चाचा है नहीं अगर इंस्पेक्टर योगी इस बात से वक्त होता तो सुबह ही बल्ले को चीना पहलवान की हत्या के इन्फॉर्मेशन ना दे दी जाती है । दरअसल बल्ले हो तो अपने चाचा की मौत की खबर तब दिल्ली डाॅक्टर योगी तुझे गिरफ्तार करने किशनपुर आया था । वो कुलभूषण इकाई मैं भी पुत्र बोला तो तो बल्ले बहुत पड रहा होगा । भडकता ही आखिर उसकी चाचा की हत्या हुई थी । वो इस पत्र योगी के सामने खूब कर्ज कर्ज कर कह रहा था कि अगर कुलभूषण उसके चाचा को मारा है तो कुलभूषण को किसी भी हाल में जमता नहीं छोडेगा, उसे भी मार डालेगा । भूषण के शरीर में झुरझुरी दौड गए । अब सारा माजरा उस की समझ में आया । अब वो समझा कि किशनपुरा में घुसते ही पालने उसके ऊपर जानलेवा हमला क्यों किया था? बल्ले जब कि लालच लाकर मुझे जान से मार डालने के लिए कह रहा था । कुलभूषण अपने होठों पर सामान फिराता बोला तो तो इंस्पेक्टर योगी ने उसे कुछ नहीं कहा । वो क्या कहता हूँ चाचा मारा था बोलने का इसलिए उसका यू गुस्से में गरज ना बरतना चाहिए था कौन सपने की हालत में इस तरह की ऊटपटांग बातें नहीं बोलता एक बात को हम भूषण मंत्रा ने अब पालक उसे देखते हुए कहा क्या जरूर बल्ले बहुत देर से किशनपुरा में तेरे आने का इंतजार कर रहा होगा जो उसने यूँ एक काम से तेरे ऊपर हमला कर दिया । कुपोषण के गले की घंटी चोर सोच नहीं लेकिन लेकिन पूछे थोडी मालूम था । कुलभूषण सकपकाए शहर में बोला चीना पहलवान पालने का चाचा है । चाची ना पहलवान में भी तो मुझे कल रात की बात नहीं बताई कि वह किशनपुरा में ही रहता है । अगर उसने मुझे बात बताई होती तो फिर फिर क्या मत पागल था जो से बोलती हडपने की बात को सोचता है तो ये बहुत बडी अजीबो गरीब है कि किशनपुरा में आने के बाद भी चीना पहलवान अपने घर नहीं गया बल्कि मेरे घर आया सर वाकई एक के बाद एक नए नए माया जाल जान ले रहे हैं । आसपास के पीछे तो एक सॉलिड बच्चा हो सकती है । जो चीज ना पहलवान घर रही गया क्या हो सकती है? मत बोलो जीना पहलवान के पास होने की छह बेशकीमती मूर्तियां थी । मुमकिन है उन बहुमूल्य मूर्तियों को लेकर चीना पहलवान ने अपने भतीजे के पास जाना मुनासिब ना समझा हूँ । फिर उसका भतीजा था तो एक गुंडा ही मवाली क्या पता चीना पहलवान कोई शक हूँ कि अगर वो मूर्तियां लेकर बल्ले के पास गया तो बल्ले उन मूर्तियों को डकार जाएगा । मंत्रा काफी हद तक ठीक कह रही थी । ये बहुत संभव थी । आपने जितनी जल्दी हो सके चाहता हूँ क्यों? फॅमिली मंत्र टाॅपिक्स कटाकर बोली तो नहीं चाहता तो गिरफ्तार करने । यहाँ कभी भी इंस्पेक्टर योगी आ सकता है और फिर बल्ले के सिर पर भी खून सवार है । वो इतनी आसानी से खामोश बैठने वाला नहीं है । एक बहुत उसका बाल खडे चला गया, लेकिन हो सकता है कि उसका दूसरा बार खाली ना चाहिए । कुलभूषण कपूर पोर्क आप उठा इसलिए जितना चल से चलता हूँ मंत्रा बोली यहाँ से चला जाऊँ ऍम कहीं भी जाओ मंत्रालस वर्चस् पार्टी उठा एक अगर तुझे अपनी जान की थोडी सी भी परवाह अपने हाथ पैरों को हिलते डुलते देखना चाहता है तो किशनपुरा में एक सेकंड के लिए भी मतलब वरना तू खामखा अपनी जिंदगी से हाथ धो बैठेगा । कुलभूषण के शरीर सहित पसीने की धाराएं छोडने लगी । कैसे विचित्र हालत हो गई थी उसकी कृष्णपुरा के अलावा उसका कहीं कोई और ठिकाना भी तो नहीं था जहाँ वो जा पाता । अब खडे खडे क्या सोच रहा है । कुलभूषण मारे मारे कदमों से दरवाजे की तरह पडा और कुलभूषण के कदम अटक गए । उस मूर्ति का क्या हुआ जिसे तो बेचने गया था । मंत्रा जल्दी से उसके सामने पहुंचकर बोलिए मूर्ति के नाम कुलभूषण की कर्जन लटक नहीं पता था तो नहीं क्या वो मूर्ति का कहाँ गई नहीं? कुलभूषण में फंसे फंसे शोर में पूरी घटना मंत्रा को बता दी । मंत्रा हैरानी उसे देखते रहते हैं । कोई बात नहीं । निमंत्रण उसकी हिम्मत बनाएंगे । ब्यूटी कई तो कई जिंदगी बची रहनी चाहिए । इंसान की जिंदगी सलामत रहे तो हजार मर्तबा उसके सामने धनवान बनने के मौके आते हैं । कुलभूषण चुप रहा । अब बच्चा और चलती जान तेरह रहना ज्यादा ठीक नहीं है । कुलभूषण पुराना मारे मारे तत्वों से तरफ से की तरफ बढ गया । तभी फिर एक और बेहद हृदयविदारक घटना घटी । कुलभूषण दरवाजे तक पहुंच पाता उससे पहले ही इतनी सोर्स जोर से दरवाजा भर बढाया गया । वाहनों कोई तोड ही हैं ऍम ऍम योगी का एक दम गडबडाता स्वाॅट पुलिस हूँ काम कई कुलभूषण मंत्रा की दोनों तहल उठे सब सब बनने में पुलिस को तुम्हारे ऍम दे दी है । फॅमिली होगी पहले से भी ज्यादा जोर से हालत फाडकर चला है । साथ ही उसने अपने काम थे कि प्रचंड चोट की तरफ से पर मारी टाॅपर चुका था तो पिछले कॅश चलती चलती है । कुलभूषण फौरन क्रिकेट की तरफ पडा फिर की सडक से चार साढे चार फुट ऊपर वो इस झंड के लिए ऍम सभी उस वक्त सहयोगी की खौफनाक आवास उन्हें उसको मस्तिष्क पर हथौडे की तरफ कुलभूषण तुरंत करती से नीचे हो गया । उसके समझ के बच्चे बजा भर बढाए जाने की भी तेज आवाज पडे हैं । लेकिन अब कुलभूषण को मार कर कहाँ देखना था । कुलभूषण में एक बार भागना शुरू किया तो वो ड्रेस थोडे की तरफ भाजपा ही चला गया । कुलभूषण की जिंदगी में एक ऐसे खतरनाक सिलसिले की शुरुआत हो चुकी थी जिसका हम खुद उसे भी मालूम नहीं था । वो शिक्षण को कोसने लगा जब रातोरात धनवान बनने की लालसा में नटराज की मूर्तियों को हाॅल उसके मन में आया था । थोडी देर बाद डीटीसी के बस स्टॉप सेंटर के नीचे खडा था । भागने के कारण उसके साथ रहने की तरह चल रही थी । चित्र पर हवाइयां थी कुलभूषण सोचा वो बच गया नहीं, बच्चा तो तब भी नहीं । उसकी किस्मत में तो पूरी खाना खराबी लिखी थी । वो एक और पडे नरक में जाकर गिरा कुलभूषण की जेब में उस वक्त सिर्फ बीस रुपए वो भी उसने दरीबाकलां जाने से पहले मंत्रालय उधार लिये थे जल्दी बस स्टॉप पर एक बरसाकर होगी और वो उसमें चढ गया इतनी सात के व्यक्ति बस में खूब फिर भारती अगला सतम कुलभूषण के ऊपर खेल टूपकर गिरा की वो जब टिकट लेने के उद्देश्य सेकंड डॉक्टर के पास पहुंचा और उसने पीछे हट डाला तो और उसके होश उड गए । जीत साहब हाँ कुलभूषण के शरीर में थोडी दौड किसी को जेपी मेरी ही काट ली थी । नहीं मिला था उसे । एक जिस भगवान के सामने तो भाई दे रहा था उसमें वन उसके सर्वनाश फुल योजना बना रखी थी और सर्वनाश नहीं सकता है । परंतु नाश्ता भूषण का तभी हो गया बस जैसे आपने अगले स्टॉप पर जा कर रुकी । तभी उसने आगे पीछे सब दो टिकट क्या कर दनदनाते हुए चढ गए । पर नाम कुलभूषण को टिकट लेने के अपराध में बाकी सारी रात हवाला के अंदर गुजारनी पडी । पूरा उसके ऊपर भरी भरी गुजरी । दरअसल रात उसी के साथ साथ हवालात में कब का अपराधी भी बंद हुआ था । वो बडी बडी मूंछों वाला विशाल का जिस्म का मालिक था । उसी जब मालूम हुआ कि कुलभूषण टिकिट न लेने के अपराध में बंद हुआ है तो उसने कुलभूषण पर ड्रॉप काटना शुरू कर दिया । उसे धमकाना शुरू कर दिया । इसका रिजल्ट के निकला कि थोडी ही देर बाद कुलभूषण पुलिस ऍप्स के खास पैर दबा रहा था । आधी से ज्यादा रात उसकी हाथ पैर दबाते हुए मुझे सुबह दस बजे के करीब वहाँ तो पहुंचने बनाए और उन्हें हवालात में से निकालकर उसी थाने के उस ऍम पेश करने के लिए ले गए । वहाँ एक बहुत एक और नई आफत कुलभूषण का इंतजार कर रही थी । उसकी दृष्टि इंस्पेक्टर जोगी पर पडेगा । उस वक्त होगी स्थानीय थानाध्यक्ष के बिल्कुल पहलू में बडी कुर्सी पर बैठा था ।

भाग 05

योगी को देखते ही कुलभूषण के शरीर में भीषण प्रकोप हुआ । महान उसने शिक्षा के अंदर आज के दर्शन कर लिया हो । निश्चय ही उस वक्त योगी ने बडी बडी मूंछों वाले उसका क्योंकि अपराधी को गिरफ्तार किया था और इसी सिलसिले में वो वहाँ मौजूद था । तभी टेलीफोन की घंटी बजी । फोन स्थानीय थानाध्यक्ष निश्चित किया । कुछ देर बडे ध्यान से कोई आदेश सुनता रहा और उन हाँ करता रहा टाॅवर वापस क्रेडल पर रख दिया । किसका फोन था? उस वक्त योगी ने मनपसंद ब्रैंड फोर स्क्वायर के सिगरेट सुलगाते हुए पूछा सर हेडक्वॉर्टर्स फोन था । थानाध्यक्ष ने बताया संग्रहालय से सोने की जो छह नटराज मूर्तियां चोरी हुई थी आज उन्हीं के सिलसिले में दोपहर दो बजे हेड क्वार्टर के अंदर एक मीटिंग है । नटराज नियुक्तियों के नाम से कुलभूषण के कान खडे हो गए । सुना है ऍम बोला उन मूर्तियों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में दो करोड रुपया की गई है पूछ ये सच है थानाध्यक्ष थोडे ज्यादा स्वर्ग में बोला हूँ । और सबसे बडी हैरतंगेज बात ये कि दिल्ली के विभिन्न संग्रहालयों में से ऐसी दुर्लभ यानी एंटीक वस्तुओं की लगभग आठ चोरी हो चुकी है लेकिन चोर आज तक नहीं पकडा जा सका । दिल्ली पुलिस कोशिश तो बहुत कर रही है उसका क्योंकि बोला कोशिश सिर्फ कोशिश । स्थानीय थानाध्यक्ष ने कसैला समूह बनाया । हमारी उन कोशिशों का आज तक कोई भी रिजल्ट नहीं निकल सका । क्या कर सके हम आज तक सेवा ये पता लगाने के तीन दुर्लभ वस्तुओं की चोरी के पीछे जरूरी कोई बडा अपराधी संगठन सक्रिय है को पहुंचना खडा रह गया हूँ । हूँ तो आप फ्री मूर्तियों की कीमत दो करोड रुपए उन्हें संग्रहालय से चल रहा गया है और और दिल्ली पुलिस में ही मूर्तियों को लेकर इतनी हायतौबा मची है । इतना हर काम बचा है । अब कुलभूषण की हवा खुश होगा । यही वो पल था जब स्थानीय थानाध्यक्ष बडी कडक दार आवाज कुलभूषण के कानों में पडेगी क्या? क्या इसमें फौरन कुलभूषण के विचार श्रृंखला टूटी साहब नहीं खडा । खबरदार बोला ये बस में बिना टिकट यात्रा कर रहा था । रात ही पकडा गया है क्यों मैं थानाध्यक्ष खडा बिना टिकट यात्रा क्यों कर रहा था तो पैसे नहीं थे साहब लोग बट थानाध्यक्ष ज्वालामुखी की तरह पडा । ऐसे नहीं थे तो बस में ही क्यों छोडा था । पैदल चलते टाॅयलेट उठती हैं । कुलभूषण चब्बा भी रखा था उच्च सुनता था की वहाँ जेब कटने वाली उसके बाद पर कोई यकीन नहीं करेगा । अगर उसने वो बात अपनी जबान से बाहर निकली तो उसकी प्रभास की जांच पड सकते थे । वो घुटा हुआ मुस्लिम साबित हो जाता है । हम क्या तेरा धान अध्यक्षों से थोडे जैसी फटकार लगाई? कुलभूषण नैक्सट पटाई श्रीनगर योगी पर डाली । उधर क्या देख रहा हरामी थानाध्यक्ष फॅमिली करके चल खडा इधर देख क्या धरा तो कुलभूषण रहता गायब न्यू दिल्ली में अब भूतनी के दिल्ली में कहाँ रहता है? थानाध्यक्ष को रहा । मोहल्ले का भी कुछ नाम होगा आप और भूषण की फॅमिली उसे मालूम था कि इधर उसने किशनपुरा का नाम अपनी जबान से बाहर निकाला । उधर उसमें सहयोगी फौरन हरकत में आ जाएगा । एक काम पहचान लेगा उसे और उसके पास नहीं ऍम जवाब नहीं दिया । थानाध्यक्ष ऍम ऐसा है कुलभूषण जो तो अगले हरामी बोलता नहीं है । कुत्ता समझता है मुझे मुंबई सवाल नहीं लेते रहे आपको उसमें चिंघाडते हुए थानाध्यक्ष कुर्सी सोच चलकर खडा हुआ और फिर बिजली जैसी फुरती सपना ठंडे की तरफ सकता । प्रदूषण का फोर फोर कहाँ था मैं देखता हूँ सूअर थानाध्यक्ष फिर दहाडा मैं देखता हूँ तो कैसे नहीं बोलता हूँ तो आप भी बोलेगा पर अगर आज मैंने बार माल करते ऍम से चमडिया लगना कर दी तो मैं अपने आप से पैदा नहीं । उस समय करते हुए थानाध्यक्ष नहीं झटकर अपना डंडा उठाया । फिर वो जैसे ही उसे मारने के लिए दौडा ॅ नहीं और ऍम क्या क्या नहीं ऍम कुलभूषण खोजत आलम ने बोला मैं बताता हूँ सब कुछ बताता हूँ । चली बता तो किशनपुरा मैं किशनपुरा में रहता हूँ साहब और जिस बहुत कपल ट्यूशन को डर था वही हुआ । किश्नपुरा का नाम लेते धमाका सा हो गया । किश्नपुरा का नाम सुनकर थानाध्यक्ष तो नहीं चौका लेकिन इंस्पेक्टर योगी जरूर मुझे बडा उसकी आंखों में एक का एक अचंभे जैसे भावों भर गए तो तो किशनपुरा में रहता है कुलभूषण तो वही कुलभूषण ऍम योगी झटके से ही छोडकर उठा और पर तेजी से उसकी तरफ बडा । वहीं कुलभूषण जो ऑटो चलता है भूषण की आंखों में बहुत कि छाया डोल गई । उसने अपने हाथ पैर ढीले छोड दिए क्योंकि वो समझ चुका था तमाम कोशिशों के बावजूद वो आखिरकार जोगी के शिकंजे नहीं पहुँच चुका है । जब आप क्योंकि उसका गिरेबान पकडता पूरी तरह से थोडा ऑटोड्राइवर कुलभूषण ही है ना? हाँ कुलभूषण भारी मन से बोला मैं वहीं हूँ और और वो भी तू ही था क्योंकि उत्तेजित हो था जो बुधवार की रात को ऑटो ड्राइवरों की हडताल के बावजूद रीगल सिनेमा के सामने खडा था तो पूर्व नहीं था साहब झूठ बोलता है साले योगी हिंसक लगे में बोला झूठ बोलता है मैंने पूरे टेस्टी खूब अच्छी तरह वेस्टिगेशन की है मेरे पास मौका ए वारदात की दवाइयां और सबूत हैं तो साफ साफ तेरी वहाँ मौजूदगी साबित करते हैं । अब चाहे कुछ भी कहे साहब कुलभूषण धड लहजे में बोला मैं बुधवार की रात रीगल सिनेमा के सामने नहीं था तो नहीं था । फिर पूरे दिल्ली शहर में ऑटो ड्राइवरों की हडताल चल रही है । साहब मुझे अपनी आफत पुरानी थी जो मैं यूनियन के नियम तोडकर तो किस और रीगल के सामने जाकर खडा होता है । यानी तूने नियम नहीं थोडा योगी उससे भस्म कर देने वाली नजरों से पूरा तो बिलकुल नहीं । साहब झूठ बोलता है हरामी योगी ने उसका ऍम और पूरी तरह से थोडा झूठ बोलता है मेरी मेरी क्या मजाल साहब जो मैं आपसे झूठ बोलूँगा आप जैसे बडे सरकारी अफसर से झूठ बोलूँ तुम्हें उस पत्र योगी जहरीले आपकी तरफ कार तू बुधवार की रात वाकई रीगल सिनेमा के सामने नहीं था । कुछ साहब अच्छा फिर तो रात मंत्रा के घर से भगा क्यों होगी? जीतता चला गया अगर तू बेकसूर था साले क्योंकि नौं थोडा तो कुछ नहीं किया था तो रात मेरी आवाज सुनकर तरी हवा खराब हुई हैं । ऍम था कुलभूषण ने पूरे तीस पहले शुरू कर दिया की मैं रात मंत्रा के घर से भागा था मैं मैं कहता हूँ जरूर आपको कुछ गलत हो गये साहब मैं मैं मैं नहीं लगा था । टूट फिर झूट अपरोक्ष में चिंघाडते हुए योगी ने अपने लोग हैं जैसे हाथ का एक ऐसा प्रचंड छाप कुलभूषण के ऊपर माना कि वह गलत धारदर चला था । उसकी आंखों के गिर रंग बिरंगे तारीख हो गए । मुझे झूठा साबित करता है । मेरे से जवान दादाजी करता है । योगी ने धडाधड दो झापड और उसके ऊपर जडे और पर्ची कटा हुआ बोला रात बाल लेने एकदम साफ तौर पर मुझे रिपोर्ट दी थी । उसने तुझे अपनी आंखों से मंत्रा के घर में घुसते देखा है और उसकी रिपोर्ट मिल रही ना फौरन ढाका भगाकर पूरा पहुंचा । लेने जरूर आपसे छूट बोला होगा । साहब कुलभूषण कप कपालेश्वर में बोला वो समझता है कि मैंने उसके चाचा का खून किया है । किसी वजह से वो मुझ से बदला लेना चाहता है । उस पर सहयोगी फौरन फौजदार की तरफ कुमार रात टिकट क्या कर सकते स्वच्छ यहाँ पकड कर रहे थे मतदान सकपकाया हाँ तो क्या बाॅस मुझे नहीं मालूम साहब फिर भी अंदाजन ही कोई साढे बारह और एक के बीच का वक्त रहा होगा । सुना सुना योगी फिर करनी की तरह वापस कुलभूषण की तरफ घूम गया । सुना हवलदार क्या कह रहे हैं? क्या कह रहा हूँ ग्रुप के पत्ते योगी कलमला ये कहता है की टिकट जाकर तो साढे बारह और एक बजे के बीच में यहाँ लेकर आए । यानी उन्होंने साढे बारह बजे के करीब जब उसके अंदर पकडा और बारह बजे के आस पास मैंने बल्ले के इन्फॉर्मेशन पर मंत्रा के घर रेड डाली थी । और इन सभी घटनाओं की टाइमिंग से बात पूरी तरह साबित होती है की तू तू मंत्रा के खर्चे फरार होकर सीधे बस पकडी और तभी तूने बिना टिकट यात्रा करने के अपराध में गिरफ्तारी हुई । पुलिस से बचकर रही भागा अगर तू पुलिस समझ कर नहीं भगा । इस पत्र योगी टाॅपिक करता हुआ बोला तो तूने पाँच तो पकडे तो इतनी रात को कहाँ जा रहा था ऍम ऐसी पकडना अच्छा ऐसी ऍम मेरा थोडा सैरसपाटा करने को दिल चाहा था । इतनी रात गए योगी ने उसे भस्म कर देने वाली नजरों से पूरा इतनी रात गए । तेरह सैरसपाटा करने को दिल चाहता साले जेब में एक पैसा नहीं था और तेरह सैर सपाटा करने को फिर चाहा था । वाह! क्या कहानी है कुलभूषण सब लगाकर दाएं बाएं बगले झांकने लगा । उसकी खामोशी ने योगी के गुस्से पर ही डालने जैसा काम किया । योगी ने आवेश में फुफकारते हुए कुलभूषण के शरीर पर लाख घूसे बरसा डाले । हक कारकर उठा कुलभूषण उसके करुणा ऍसे कक्ष की दीवार दहल गई । लेकिन योगी ने उस पर तरस नहीं खाया । उसका कलेजा नहीं कहा । पास तीन चार मिनट नहीं उसने कुलभूषण की वो दुर्गति का डाली । शायद ही उसके जीवन में पहले कभी हुई हो तो अपने शरीर पर तारतार होकर झूलने लगे । कुलभूषण अब जमीन पर चारों खाने चित पडा । जोर जोर से हिचकियां लेकर हो रहा था । अब भी देखता हूँ साले योगी ने भरा उसके एक लाख जडी और द्वारा अपनी देखता हूँ तो कैसे कबूल नहीं करता कि उस रात रीगल सिनेमा के सामने तो ही था । फिर योगी टेलीफोन की तरफ पड गया । स्थानीय थानाध्यक्ष जो अभी तक वस्तुस्थिति से अंजाम था, उसने जिज्ञासावश पूछा अगर बात होगी क्या किया? उसने इसमें इंस्पेक्टर योगी ने हिचकियों से रोते कुलभूषण की तरफ घालय की तरफ उंगली उठाई । इसने चीना पहलवान की हत्या की है । छुट्टी ऍम वहाँ मौजूद प्रत्येक व्यक्ति का मुझसे चीना पहलवान का नाम सुनकर संस्कारी छूट गई । खास तौर पर थोडी बडी मुछे वाला वो हत्यारा तो सुन नहीं खडा रह गया जिसमें कुलभूषण ऍम सब तुम जब कि कुलभूषण अभी भी सोच जोर से हिचकियां लेकर हो रहा था । इंस्पेक्टर योगी ने कहीं फोन किया उन करने के लगभग पंद्रह मिनट जिस व्यक्ति ने पुलिस स्टेशन कदम रखा उसको देखते ही कुलभूषण के होश होना हो गए । ऍम था जिसने बुधवार की रात कुलभूषण की ऑटो रिक्शा को आईटीओ के ओवर ब्रिज सहित थोडा आगे स्पीडिंग के अपराध नेरोका वहाँ मौजूद हवलदार और बडी बडी मुछे वाला हत्यारा । उस सभी अब कुलभूषण से दहशत ज्यादा नजर आ रहे थे । ऐसा ही होना था फॅमिली आते ही कुलभूषण को पहचान लिया । उसने कहा कि बुधवार की रात उसने जिसपे ऑटो रिक्शा को मंडी हाउस जाने वाले मार्ग पर रोका उसका चौदह वही था । उस ने ये भी कहा किसके ऑटो रिक्शा में बडे मोटे पेट वाली लडकी थी । इसके फौरन बच्चा होने वाला था तो उस लडकी पता जान सकते हो । योगी ने सब इंस्पेक्टर से पूछा सब इंस्पेक्टर थोडा हिचकिचाए? जवाब दो सॉरी सर । उस इंस्पेक्टर की आवाज निराशा में डूबी हुई थी । दरअसल रात गहरी थी फिर सडक पर बिल्कुल करीब कोई रोड लैंपी नहीं चल रहा था । इसलिए मैं लडकी का चेहरा बिल्कुल साफ तौर पर ना देख सका । मैंने तो उसके ऑटो का नंबर भी इसलिए नोट कर लिया था सर क्योंकि सभी ऑटो ड्राइवरों की हडताल चल रही थी । अगले दिन मुझे जब मालूम हुआ कि कोई चीज ना पहलवान को ऑटो में लेकर फरार हुआ है और चीन पहलवान की लाश इंडिया गेट पर पडी गयी है तो मैंने इसकी फोटो का नंबर आपको सौंपना ज्यादा मुनासिब समझा । लेकिन क्रिस ये कहाँ अमित होता है पूरी पांच सुनकर कुलभूषण के अंदर हौसला जा गया । चीना पहलवान को मैं ही रीगल सिनेमा से लेकर भागा था । दिल्ली शहर में हजारों की तादाद ऑटो रिक्शा है साहब । हो सकता है कि जो चीना पहलवान को रीगल सिनेमा के सामने से लेकर फरार हुआ वो कोई और ड्राइवर हूँ । इस घटना से मेरा प्राप्त साबित ही नहीं होता होता है । होता है तरह अपराध भी साबित हुआ । उस पत्र योगी गजब का आत्मविश्वास के साथ बोला था तेरह चीना पहलवान की हत्या में इसलिए अपराध साबित होता है कुलभूषण क्योंकि तो उन्हें बुधवार की रात इन सब इंस्पेक्टर साहब को जिस लडकी के बारे में ये बताया था कि पेट से है वो लडकी हकीकत में पेट से थी ही नहीं । कुलभूषण चौका ये बात आप इतने लेकिन के साथ कैसे कह सकते हैं क्योंकि वो एक बेहद पतली दुबली लडकी थी । योगी धमाके पर धमाके करता हुआ बोला और उस समय वो एक लाख के ऊपर लेती थी । आज के ऊपर कुलभूषण के मुझे ठीक नहीं । हाँ जो भी बडे सहज भाव से बोल लाश के पर इस की लडकियों पर जीना पहलवान की लाश किसकी लाश कुलभूषण के दिल दिमाग पर बिजली सी गडबडा कर गिरे उसके नेत्र हैरत से फैल गए या वो कैसे मालूम वो लडकी चीरा पहलवान कैलाश ऊपर लेती थी ये शब्द कहते हैं कुलभूषण अपना फोर्स उससे गलती हो चुकी थी । भयंकर गलती ये सवाल पूछकर उसने लगभग कबूल ही कर लिया था कि हूँ अपराधी है जबकि मुस्कराया योगी बडी खतरनाक ढंग से मुस्कराया मैं तुझे बताता हूँ । योगी बोला कि मुझे ये बात कैसे मालूम हुई वो लडकी एक लाश के ऊपर लेती है । दरअसल अगर वो लडकी सचमुच पेट से होती है और उसकी हालत वाकई उतने ही सीरियस होती जितनी तू बयां कर रहा था । तो उस लडकी को फौरन किसी हॉस्पिटल के मैटर्निटी वॉर्ड में जरूर भर्ती कराया होता है और होता है नहीं । कुपोषण चुका, उसका दिल दूर जोर से धडकने लगा । यही बात अब उन्हें बुधवार की रात उन सब इंस्पेक्टर साहब के सामने भी कही थी क्योंकि आगे बोला तो उन्हें बेहद बौखलाएं हुए अंदाज में कहा था कि लडकी की हालत काफी सीरियस है । भाई ने कहा है कि अगर लडकी की जिंदगी चाहते हो तो फौरन इसे किसी बडे हॉस्पिटल ले जाओ लेकिन हूँ लेकिन क्या? लेकिन तो उस लडकी को किसी हॉस्पिटल में लेकर नहीं गया । योगी ने झटके के साथ कहा क्या सबूत आपके पास कुलभूषण बोला कि मैं उस लडकी को पीछे हॉस्पिटल में लेकर नहीं गया । सभु सबूत मांगता है । मुझे स्पैक्टर योगी को रह था । उसकी आंखों में खून कराया । सोले मुझे समझ स्पैक्टर से जैसे ही तेरी ऑटो रिक्शा का नंबर मिला तो मैंने फौरन तमाम हॉस्पिटलों की चेकिंग के थे । वहाँ के मेटरनिटी वार्डों की भर्ती रजिस्ट्री चाहती थी और मानव मेरी उस सारी भागा दौडी का क्या नतीजा निकला ऍम मुझे होगा योगी तब पिस्ता हाँ बोला । बुधवार के साथ दिल्ली शहर के किसी भी हॉस्पिटल के किसी भी मेटरनिटी वार्ड में उस समय के आस पास डिलीवरी का कोई भी कोई भी केस एडमिट ही नहीं हुआ था । कुलभूषण शन रह गया एक दम सन वॅाटर योगी को इस तरह देखने लगा मानव साक्ष्य आपको तो मिला और उसके सामने आकर खडी हो गई हो । उसने तो कल्पना भी नहीं की थी कि पुलिस इतने मामूली से प्वाइंट को लेकर इतनी छब्बीस तक पहुंचाएगी । बहरहाल योगी ने उसका तमाम सपनों को तोड दिया था । योगी ने साबित कर दिया था कानून के हाथ वाकई बहुत लम्बे होते हैं जिनसे कोई नहीं बच सकता है । अगर तो अब भी यही कहता है । उस वक्त योगी बडी खबर के साथ बोला की तेरी ऑटो रिक्शा की पिछली सीट पर चीना पहलवान की लाश नहीं बल्कि कर धारण किए हुए कोई लडकी थी कुछ कर सकता है मुझे कोई एतराज नहीं लेकिन फिर तो मुझे हॉस्पिटल का नाम बता जिसमें तुम्हें डर धारण किए हुए उस लडकी को एडमिट कराया था । और क्या इसके अलावा मुझे उस लडकी का भी नाम बता योगी बोला जो गरीब से थी । उस लडकी का एड्रेस बताओ ताकि पुलिस उसके घर जाकर उससे पूछताछ कर सके और अपना एक शक दूर कर सकें कि बुधवार की रात तेरी ऑटो रिक्शा में गर्भ धारण किए हुए कोई लडकी थी भी या नहीं । कुलभूषण फिर जो फिर खाना सिर्फ दहशत ज्यादा आपको सिर्फ और बाढ सबके चेहरे देख रहा था । कुछ बोलता था कि वो बहुत बडी मुश्किल में पहुँच चुका है । इन सब बातों के अलावा इसलिए भी तरह अपराध साबित होता है इस बार फॅर क्योंकि बुधवार की रात फ्लाइंग स्क्वॉड दस्तों ने पूरी दिल्ली में सिर्फ दो बार ऑटो रिक्शा देखी । पहली बार ऑॅयल सिनेमा के पास देखी गई जबकि दूसरी बार मैंने मंडी हाउस के करीब देखो क्योंकि रीगल सिनेमा के पास गश्तीदल के गार्डों ने चीना पहलवान को अपने पैरों से दौड कर ऑटो रिक्शा में सवार होते देखा था तो बात भी खुद ब खुद ही साबित हो जाती है कि चीना पहलवान ऑटो में बैठने के बाद मारा और ऑटो रिक्शा ड्राइवर नहीं उसे इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति के पास है का । इसके अलावा एक सबसे महत्वपूर्ण बात ये सब इंस्पेक्टर ने अपने शब्दों पर पूरी तरह जोर दिया । इंडिया गेट के आसपास गश्त लगाते फ्लाइंग स्कॉट के और दस्तों ने भी तेरे अलावा किसी दूसरी ऑटो रिक्शा को इलाके में नहीं देखा । अगर वो किसी दूसरी ऑटो रिक्शा को देखते तो हडताल होने की वजह से उन का खास ध्यान जरूर उस तरफ जाता और तुझे बच्चन करानी होगी । कुछ हो जाये इंडिया गेट के आसपास कष्ट लगाते फॅमिली ऐसे दो दस से और हैं जिन्होंने बुधवार की रात मेरी ऑटो रिक्शा उस इलाके में देखी और हडताल होने की वजह से उन्होंने तेरी ऑटो रिक्शा का नंबर भी नोट किया । कुलभूषण के माॅ पटाखे छूटने लगे । उसे अपना दिमाग अंतरिक्ष में चक्कर करता हुआ महसूस हुआ लेकिन ये जरूरी तो नहीं कुलभूषण लगभग हथियार डालता हुआ बोला कि चीना पहलवान की हत्या भी उसी ऑटो रिक्शा ड्राइवर ने की हो जो ऑटो रिक्शा में चीना पहलवान को रिगल के पास से लेकर भागा था । बिल्कुल जरूरी है योगी दृढ लहजे में बोला बिल्कुल उसी ऑटोड्राइवर नहीं चीना पहलवान की हत्या की है । क्यों जरूरी है क्योंकि कोई और हत्या कर ही नहीं सकता । योगी पहले की तरह ही तृण लहजे में बोला कोई और प्राइम सस्पेक्ट है ही नहीं । तो जब चीना पहलवान सही सलामत अपने पैरों पर भागता हुआ ऑटो में बैठा तो उसकी हत्या ऑटोड्राइवर के अलावा कौन कर सकता है? फिर उसी ऑटोड्राइवर नहीं चीरा । पहलवान की लाश को ठिकाने भी लगाया । यानी दोनों जगह एक ही आदमी मौजूद था चीना पहलवान की सलामती पर भी और उसके इस दुनिया से कूच कर जाने के बाद हैं । इस सारी हकीकत एक ऑटो ड्राइवर की है और ऍम है सर तो नहीं मैं नहीं हूँ । झूठ बोल रहा है स्पॉटर योगी ने लिखा है उसे इतनी जोर से खुद का कि कुलभूषण ऍम हो गई तो मैं निर्दोष हूं । फिर भी कुलभूषण ने आर्तनाद क्या? मैं बिल्कुल बेकसूर साहब कसूर नहीं, तुम्हें दोष भी नहीं क्योंकि उसे कहर बरपा करती । आंखों से खोलता हूँ । बोला सच्चाई ये है की तो बेहद चालाक अपराधी है तो आतंक मुस्लिम है और मुझे तो ये सोचकर हैरानी हो रही है कि तेरे जैसा दुर्दांत अपराधी आज तक दिल्ली पुलिस की नजरों से बचा कैसे रहा? क्योंकि तेरा नाम तो अपराधियों की लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए था । देखिए आप मेरे बारे में बहुत खतरनाक अंदाजा लगा रहे साहब मैं बिल्कुल भी ऐसा रही हूँ । कुलभूषण धर धर काॅल अच्छा अब मेरे एक सवाल का जवाब तो पूरा वो भी पूछ रीगल सिनेमा के पास वो दो गोलियाँ किसने चलाई जिनकी आवाज सुनकर आप के मुताबिक गश्ती दल के दोनों पुरुषकर्मी गली में दौडते थे । खुद जीना पहलवान ने वो गोलियाँ चलाई थी । योगी ने एकदम से जवाब दिया जिस चीज ऍम कुलभूषण करना बहुत में एक और बम पडा तो पुलिस कर्मियों ने का चीना पहलवान गोलियां चलाते देखा था । नहीं देखा तो फिर फिर आप कैसे कह सकते हैं कि वो गोलियाँ चीना पहलवान ने चलाई थी । ये भी हो सकता है साहब गोलियाँ चीना पहलवान के ऊपर किसी और ने चलाई हूँ । जी नहीं, ऐसा नहीं हो सकता । योगी ने पूरे यकीन के साथ इंकार ब्लॅक नहीं हो सकता था । कुलभूषण की आंखों में रानी के भाव करने लगे थे । हम मुश्किल है क्योंकि अगर किसी ने वो गोलियाँ चीना पहलवान पर चलाई होती तो चीना पहलवान के दृश्यम पर खून के धब्बे तो होते हैं । कुछ निशान तो होते हैं जिनसे साबित होता कि उसे गोलियाँ लगी है जबकि रीगल सिनेमा के सामने गश्तीदल के जिन पुलिस कर्मियों ने पहलवान के शरीर पर खून कर ऐसा भी कोई धप्पा नहीं देखा था और कुछ नहीं संसद खडा रह गया । उसे फौरन याद आया कि चीन आॅटो में आकर बैठा था तो खून के धब्बे उसे भी नहीं दिखाई दिए थे क्योंकि जीना पहलवान ने ऊपर से नीलम की बढ साथी जो पहन रखी थी, जरूर चीना पहलवान ने वो बरसाती गोलियां लगने के बाद ही होगी । कुलभूषण को अपने हाथ पैरों की जान निकलती महसूस हुई । उसे लगा जैसे वो किसी भयानक षडयंत्र का शिकार होता जा रहा है । लेकिन छीना पहलवान ने रीगल सिनेमा के पास वो वो दो गोलियाँ क्यों चलाई थी? जरूर जरूर उसने किसी से काले रंग का वो ब्रीफकेस छोडने के लिए उस पर गोलियां दागी होगी । इसे लेकर वो भगते देखा गया । योगी ने कल्पना की एक नई उडान बडे खूबसूरत ढंग से पेश जब किसी ने छीना झपटी की ऐसी कोई रिपोर्ट कहीं पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई है नहीं अगर किसी के साथ ऐसा हादसा हुआ था कुलभूषण बोला तो उसने रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं कराई और खाद नहीं तो क्या समझते होंगे । फॅमिली किस्म के लोग ऐसी वारदातों की रिपोर्ट पुलिस स्टेशन में दर्ज कराते हैं । यानी आपका मतलब प्रोफेशन चक्कर बोला जिससे चीना पहलवान की झडप हुई । वो भी चीना पहलवान की तरह ही कोई बडा बदमाश था, हिस्ट्रीशीटर वाली था एक शक्ति वो भी कोई वाली ही था । योगी बोला और उस ब्रीफकेस को हथियाने के लिए तुम चीना पहलवान के मददगार के तौर पर उसके साथ थे । चीन पहलवान को ब्रीफकेस छीना था और तुम्हें चीना पहलवान ऑटो में बैठाकर घटनास्थल से फरार होना था । लेकिन लेकिन तुमने मौके पर चीनी पहलवान के साथ विश्वास घात कर दिया । पीछे वो क्यों? दरअसल चीना पहलवान जो प्रीति किसी से हत्याकर भागा था उसमें जरूर कोई बहुत मूल्यवान वस्तु थी । ऍम योगी बोला कोई बडा माल बता था उस मूल्यवान वस्तु को देखकर तुम्हारी नियत खराब हो गई और इसीलिए तुमने उस ब्रीफकेस को हडपने की खातिर सबसे पहले चीज ना पहलवान कि चुप चाप हत्या कर दी है और फिर उसकी लाश इंडिया गेट के सुनसान झाडियों में डालना है और यही वजह है कि वह ब्रीफकेस झाडियों में चीना पहलवान की लाश के नजदीक ना पाया गया और ऍम नहीं पाया जाना ही इस की शहादत देता है । उसके अंदर जरूर कोई खास फर्स्ट थी । प्रदूषण का दिमाग नहीं और तेज धमाके होने लगे जब की उसके बाद इंस्पेक्टर योगी ने कुलभूषण पर सीधे सीधे चीना पहलवान की हत्या का इल्जाम लगाते हुए जो मनगढंत कहानी सुनाई उसने कुलभूषण के रहे सही होश भी फोन कर दिए ।

भाग 06

स्पैक्टर योगी एक एक शब्द चबाते हुए बोला कुलभूषण तो बुधवार की रात को रीगल सिनेमा के सामने उपस्तिथि इसलिए हुआ था ताकि तुम चीना पहलवान को घटनास्थल से भगा कर ले जा सके तो वो चीज ना पहलवान का पक्का हिमायती था । उसका दोस्त था नहीं नहीं तुम दोनों के बीच पहले से ही सांठगांठ थे । उन दोनों को बात एडवांस नहीं मालूम थी की रात के ग्यारह और बारह बजे के बीच में कोई अपराधी मोटा मान लेकर रीगल सिनेमा के पास से गुजरेगा । इसलिए तुम दोनों वहाँ शिकारी कुत्ते की तरह खाते लगाए बैठे थे । उन दोनों की योजना उस अपराधी को लूटने की थी और जैसा की हालातों से जाहिर है तो अपनी योजना में कामयाब हुए । यह बात अलग है कि ब्रीफकेस में मोटा माल देखकर तुम्हारी भी दिया खराब हो गई और तुमने उस मोटे माल को अकेले ही हडपने की खातिर अपने दोस्त चीना पहलवान को भी ठिकाने लगा दिया । मैंने कुछ नहीं किया, कुलभूषण चलाया और जैसी में रीगल सिनेमा के सामने इसलिए मौजूद था ताकि मैं पहलवान की मदद कर सकूँ । अच्छा यानी तेरह जीना पहलवान के साथ कोई संबंध नहीं था । बिल्कुल भी कोई संबंध नहीं था और भूषण को रह कर बोला मैं किशनपुरा में जरूर रहता हूँ, लेकिन मैंने पहले कभी चीना पहलवान की शक्ल तक नहीं देखी थी । ठीक है मान लेता हूँ तेरी बात की तूने पहले कभी चीना पहलवान की शक्ल तक नहीं देखी थी । उस पर प्रयोगी आवेश में नहले पर दहला मारता हुआ बोला तो फिर ये बताना है भाई तो आधी रात के वक्त रीगल सिनेमा के सामने खडा होकर कर कर रहा था । जब ऑटो ड्राइवरों की हडताल चल रही थी तब की इतनी रात को बहुत क्या करने गया था । मतलब कोई तो काम होगा तुझे वहाँ भूषण फिर जो फिर खाना जानता था । उसके उधार चुकाने वाली बात पर योगी जैसा धुरंधर इंस्पेक्टर किसी हालत में यकीन नहीं करेगा और तूने अपनी ऑटो रिक्शा रीगल सिनेमा के सामने अंधेरे में क्यों खडी कर रखी थी? योगी तरकश लहजे में बोला उसके पीछे भी तो कोई वजह होगी । कॅश ये नहीं थी कि तू चीना पहलवान के वहां पहुंचने से पहले गश्तीदल की आंखों से छोडना चाहता था । फॅमिली तूने अपनी फोटो की पिछली नंबर प्लेट पर मिट्टी भी नहीं पुत्र की थी ताकि भागते वक्त गश्ती दल के पुलिसकर्मी थे । ऑटो रिक्शा का नंबर भी नोट ना कर सकें । कई सारी बातें झूठी है । योगी आंदोलित लहजे में बोला क्या इतनी ढेर सारी बातें झूठी हो सकती है? कुलभूषण और अगर ये सारी बातें छोटी हैं तो फिर ये बता कि तेरी ऑटो रिक्शा की नंबर प्लेट पर मिट्टी किसने होती है और भूषण का दमाद में पान ही चलने लगी । समय समय आंधी कितनी बुरी तरह फंस चुका था वो अब कुलभूषण इंस्पेक्टर योगी को कैसे समझौता की? ऑटो रिक्शा के नंबर प्लेट पर मिट्टी उसने खुद नहीं होती थी । वो तो एक ॅ और जरूर इसीलिए खुदबखुद नंबर प्लेट पर बिट्टी फट गई । रीगल सिनेमा के सामने उस ने अपनी ऑटो अंधेरे में भी इसलिए खडी कर रखी थी ताकि यूनियन की हडताल चलने की वजह से गश्ती दल के पुलिस कर्मियों से वहाँ से भगाना नहीं । पर ये बात भी कुलभूषण से बेहतर और किसको मालूम हो सकती थी कि जिन दो गोलियों की आवाज सुन कर गश्ती दल के पुरस्कार भी गली में दौडे थे, वह गोलियाँ चीना पहलवान ने नहीं चलाई थी । बल्कि वह गोलियाँ तो किसी ने छीना पहलवान पर चलाई थी जो बाद में उसकी मौत का कारण बनी । अभी तो भगवान जाने पिछली ना पहलवान ने गोलियाँ लगने के बावजूद डाक्टर भागते इतनी जल्दी प्लास्टिक की बढ जाती है कैसे? पहले कुलभूषण को लग रहा था कि अगर उसमें इंस्पेक्टर योगी को सारी हकीकत बयान कर दी तब भी वो उसकी बात पर यकीन नहीं करेगा । तब भी वही समझेगा कि वह कोई नया षडयंत्र रहा है । फिर कुलभूषण के पास अपनी बात को साबित करने के लिए सबूत भी तो नहीं थे । जबकि योगी के पास जैसे ढेरों तर्क और सबूत थे जिसके बलबूते पर वो मनगढंत कहानी को भी अदालत में सच साबित कर सकता था । कुलभूषण अपनी बेबसी पर चलना उठा । कल रात तक जो बातों से अपनी ताकत नजर आ रही थी वहीं अब उसकी कमजोरी बन चुकी थी । पूरा खेल पूरी कहानी पलट चुकी थी । इस पूरे फॅमिली किसी गलती हुई, कुलभूषण और बडी भारी गलती हुई उसका तो योगी ने अपनी मनगडंत नानी का उसे आखिरी हिस्सा सुना । दरअसल जब तो चीना पहलवान की लाश को किसी लडकी के सहयोग से ठिकाने लगाने जा रहा था । तभी फ्लाइंग स्क्वॉड दस्ते द्वारा रोक लिए जाने पर उन्हें लडकी के बच्चा होने वाला जो ट्रामा रचाना वही ड्रामा वास्तव में तेरी बर्बादी का कारण बना । उसी ड्रामे की वजह से तो उस वक्त गिरफ्तार है तो जब खुद ही लग रहा होगा कि वो नाटक सच में मुझे महंगा पडा । नई दिल्ली भी होने वाली बात बोलता हूँ ना मैं मेटरनिटी वार्डों की भर्ती रजिस्ट्री चेक करता और न तो उस वक्त अपराधी बना यहाँ हम सबके सामने खडा होता । भूषण इच्छा हुई वह दहाडे मार मारकर होने लगे । कितनी खतरनाक उसके गले पड चुकी थी एक अब अगर तो आपने खरीद चाहता हूँ ऍम की थी और चाहता है कि तेरे ऊपर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल न हो । तेरी धुलाई न हो तो सब साफ साफ गंदे एक काले रंग के उस पर इसके इसके अंदर किया था जिसे चीना पहलवान रीगल सिनेमा के सामने से लेकर भागा । वो लडकी कौन सी जितना चीना पहलवान की लाश ठिकाने लगाने में तुझे सहयोग दिया और वो आदमी कौन था जिसने चीना पहलवान ने कॅरोना मैं कुछ नहीं जानता । कुलभूषण पागलों की तरह चिल्ला उठा मुझे कुछ नहीं मालूम मुझे सच में कुछ नहीं मालूम । योगी उसे एक भष्म कर देने वाली नजर से पूरा नहीं मुझे कुछ नहीं मालूम । ऍम योगी ने फौरन लपक कर अपनी फॅमिली मुठ्ठी में उस स्तर के बाल कसकर जगह है । फिर मैं इतना तेज झटका दिया कि कुलभूषण पैसे की तरह टकराव था । उसका मुंह झटके से छत की तरफ फट गया । एक बार योगी अब साक्षा दरिंदा नजर आने लगा था । एक बार फिर बोल कितने तक कुछ नहीं मालूम । मेरी बात पर यकीन करो कुलभूषण ऍम व्यवस्था में गिरा उठा मैं मैं कुछ नहीं तो कुछ नहीं । योगी का गुस्सा अब सातवें आसमान पर था । उसने गुस्सा बच्चे घर तक कुलभूषण पर लाख खुशियों की बारिश का डालेंगे । वो उसे हुई की तरह हमने लगा कुलभूषण की चीजों से पूरा पूरा स्टेशन थर्रा उठा । उसकी ऋद्धये विदारक और करो ना । डाइट ठीक होने, वहाँ मौजूद प्रत्येक व्यक्ति के दलों, दिमाग कुछ जो डाला लेकिन होगी । जो भी होगा नहीं तो बेहद जरूरी अंदाज उसकी ढाई करता रहा । उस सचमुच का धंधा बन चुका था खूनी दरिंदा । तभी पुलिस स्टेशन में बल्ले के कदम पडे और पाल ले के आते ही घटनाक्रम ने फिर एक बडा अजीबो गरीब बोल लिया । बल्ले एकदम ऍम व्यक्ति था । उसके किस्म की सोच रही थी । किसी ने उसके चाही, मंदी हो उस की आपके सुर थी जिसके कॅारिडोर चमकती थी । माना तू चलते हमारे अगर रात के अंधेरे में कोई बच्चा बल्ले को देखने तो उसमें खून शक नहीं । वह सब भूत समझकर चिल्ला उठे शक्ल सूरत में इतना खतरनाक था बल्ले उसे न जाने कैसे ये मालूम हो गया था कि कुलभूषण को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है । थाने में आते ही उसने पडी सनसनीखेज घोषणा की ऍम बाॅंटी का नाम बता सकता हूँ, जिसमे बुधवार की रात मेरे चाचा की लाश ठिकाने लगाने में इसकी इस पर भूषण की मदद की थी । बल्ले के उन शब्दों का इंस्पेक्टर जोगी पर तुरंत असर हुआ । कुलभूषण की दवाई करते उसके हाथ थक गए । उसमें खून कर बल्ले की तरफ देखा । पीडा से पूरी तरह पढाते । कुलभूषण के ऊपर भी बल्ले के वो शब्द क्लास की तरह करें । कौन है वो लडकी जो फॉर्म पूछा उसका नाम मंत्रा है । माॅक ऍम हूँ मंत्रा है ये झूठ बोल रहा है । कुलभूषण आॅलआउट था मंत्रालय साहब मेरे साथ नहीं थी और मंत्रा का पूरा हाथ से से कोई लेना देना नहीं है क्यों? मैं नहीं तो वो बोल रहा है बल्ले में आक्रोश नाॅक फॅमिली के साथ थे तो हम तो उन्होंने मिलकर पूरी घटना का चावल बना टूट है । ये झूठ है कुलभूषण सिंघडा गलत है तो कुलभूषण की तरह बडा योगी पर उसने कुलभूषण टी शर्ट का कॉलर कसकर अपने मुठ्ठी में जगह दिया और बडी खूंखार नजर उसकी तरफ देखा । कहाँ गया कुलभूषण यानी बुधवार की रात वाकई तेरे साथ मंत्र नहीं थी नहीं कुलभूषण का कप पाया स्वर्ग मंत्रा का इस घटना से कोई वास्ता नहीं । अगर तुम मंत्रा नहीं थी तो पर कम थी । योगी कर रहा मुझे उस दूसरी लडकी का नाम बता ऍम मैं तेरे से कुछ पूछ रहा हूँ । कुलभूषण योगी ने शर्ट का कॉलर पकडे पकडो से पूरी तरह से थोडा सवाल तक जमाते हराम सादे और ना फिर अभी तो काम धुलाई हुई है । रिस्पाॅन्स से हड्डियां तक गायब हो जानी है और ज्यादा लडकी का था यूरी बचा सकता बल्ले बोला इससे नहीं बता सकता क्योंकि वो लडकी मंत्रा के अलावा कोई था ही नहीं । इस्पेक्टर साहब बल्ले उपयोजना में भरा हुआ योगी की तरफ घुमा मुझे ही नहीं बल्कि किशनपुरा के हर आदमी को मालूम है कि मंत्रा कुलभूषण के वास्ते कुछ भी कर सकती है । इतनी बडी दुनिया में वही एक ऐसी लडकी है जिसके लिए अपने आपको बडे से बडे खतरे में डाल देगी । ये सब झूठ है । जब का ऍफ और भूषण सहन का बहुत मन कर ली । ये मंत्रा तो वही लडकी है ना । योगी बनने से संबोधित हुआ इसके घर से कल रात फरार हुआ था । आज मैं हूँ वही लडकी मंत्रा है ऍम स्थानीय थानाध्यक्ष का माध्यम से कॉन्स्टेबल को तलब किया । कॉन्स्टेबल का नाम चट्टान सिंह था । परिसर याद है । ऍम सिंह ने आते ही योगी को साॅफ्ट मारकर पूछा ऍम काम करो क्योंकि ना आदेश दनदना किशनपुरा चले जाओ और वहाँ जाकर मंत्रा को अपने साथ ले आओ । उसे बोलना उस पत्थर साहब ने बुलाया । हजार टाउन सिंह ने तो पता के साथ कहा अभी मंत्रा को लेकर आता हूँ लेकिन आप मंत्रा को यहाँ तो बुला रहे साथ कुलभूषण फॅार चला था । वो बुधवार की रात सबको मेरे साथ रही थी । वहाँ पे कसूर है सर होता है बोलता है ऐसा नहीं योगी ने उसे नीचे गिरा दिया और फिर अपने फॅमिली पर थोडा थर्ड सारी प्रचंड टूट जाएगी । सब चलता है । रानी भूषण हाफ कारकर उठा उसके हृदयविदारक ठीक हो से एक बार फिर पूरा आपको स्टेशन दहल गया । ऍम वहाँ पर मंत्रा को लेकर आ पहुंचा । पुलिस स्टेशन में दाखिल होते ही मंत्रा की नजर एक दम कुलभूषण के नाजुक हालत पर पडेगा । उसके तारतार हुए कपडे कानों पर सूख चुके दिख रहे नेपाल और चेहरे से तब तक तो मान पोस्ट किया वो सब बातें कुलभूषण के साथ में जब की चीख चीखकर गवाही दे रही थी था खत्म हो पडा । खुद कुलभूषण तलब कर रह गया था उसे ऐसा लगा मानो मंत्रा की आंसू से चल चलाई आंकडों से कह रही है मैं मैं तेरे से पहले कहती थी ना भूषण चक्कर में मत पर मत पढ फस जाएगा लेकिन नहीं तब तो दौलत ने तेरी आंखों पर लाने की पट्टी बांध दी थी । तब तो मुझे अपनी किस्मत के बंद कपाट खुलते नजर आ रहे थे । तब तो तुझे ऐसा लग रहा था मानो साक्षात लक्ष्मी तेरे दरवाजे पर खडी दस्तक दे रही हूँ । फॅार रह गया उसके दिल में चाहे वो मंत्र ठीक ठीक कर माफी मांगी, वाकई गलती पर था उससे सचमुच भयंकर भूल हुई थी । वो कैसे कहता उसकी जवान को तो उस पर लकवा मार गया था । हमारा नाम मंत्रा है । सब इंस्पेक्टर योगी मंत्रालय संबोधित हुआ जी जी हाँ समय तो मालूम ही होगा । योगी शालीन शब्दों का प्रयोग करता हूँ । बोला हमने कुलभूषण को यहाँ किस अपराध में पकड कर रखा है इसलिए उन बातों को दोहराने से कोई फायदा नहीं । इस तरह से तो मैं यहाँ इसलिए बुलाया गया है क्योंकि ऍम इंस्पेक्टर महोदय ने योगी ने फॅमिली की तरफ इशारा किया । बुधवार की रात कुलभूषण की ऑटो रिक्शा को मंडी हो जाने वाले मार्ग पर को का था और इन सब इंस्पेक्टर महोदय का कहना है कि उस वक्त कुलभूषण की ऑटो रिक्शा में एक लडकी भी थी । किसी पेड से बता रहा था तो मैं सिर्फ एक सवाल का जवाब दे रहा है और सिर्फ देना है क्या वो लडकी तुम हो? मंत्रालय सकपकाई से नजरों से कुलभूषण की तरफ देखा तो भारत कुछ नहीं बिगडेगा । योगी बोला जो बात है बेहिचक बताओ हम तो मैं सरकारी गवाह बना लेंगे । कुलभूषण आहिस्ता से मंत्रा की तरफ इंकार में गर्दन हिलाई साॅस बल्ले चला उठा लडकी का बहकाता है उसे झूठ बोलने के लिए कहता है तेरी मॉम ऍम योगी मैं बीच में छोड दिया गाडी नहीं बल्ले किसी भी लडकी के सामने गाडी नहीं करेगी । अगर ये लडकी को बहकाकर ऐसा फॅार में बोला आंखों ही आंखों में उसे मना करने के लिए उकसा रहा है ये सब मालूम है सब देख रहा है मुझे योगी कुलभूषण को आगने नेत्रों से खोलता हूँ उसको तो मैं बहुत इंतजाम करूंगा । लडकी से सवाल जवाब कर लूँ बल्ले तिलमिलाकर रह गया । देखो मंत्रा योगी मंत्रा के साथ उन्हें बडी शालीनता से पेश मुझे सच बताऊँ । बुधवार की रात तुम कुलभूषण के साथ थी या नहीं और कुछ भी बोलने से पहले एक बात खास ख्याल रखना पुलिस से कोई भी बात छुपाना संगीन जुर्म होता है । इस कानून के जबान में काॅल्स कहा जाता है जिनको करने पर सबसे सब सजा हो सकती है । इस से जो भी बात कहना सोच समझकर कहना चाहता हूँ तो उसके साथ थी या नहीं । मैं नहीं थी । मंत्र बेहिचक बोली सब कह रही हूँ, बिल्कुल सच करेंगे । मंत्र की आवाज होती हैं । एक बार फिर से हूँ । मतलब वार्निंग देता हूँ कि अगर तुम्हारा टूट पकडा गया तो कानून को गुमराह करने के वजह में बडी सब सजा दी जा सकती है । लेकिन मुझे जो कहना था मैंने कह दिया । मंत्र थोडा झल्लाकर बोले मैं अगर बुधवार गिरा कुलभूषण के साथ नहीं थी तो नहीं थी दुनिया की कोई ताकत मुख्य जबरदस्ती कुछ भी नहीं कबूलवा सकती होगी । रानी समंदर को देखता रह गया । फिर मंत्रा चली गई । लेकिन वो रात कुलभूषण के लिए शहर की रात साबित हुई । दिन भर तो योगी दस से कुछ भी नहीं कहा लेकिन रात होते ही वो उसके ऊपर वज्र की तरह पडा । सारे दिन भूखा प्यासा था । कुलभूषण फिर ऊपर से वो भयानक प्रताडना उसे टॉर्चर हूँ । उल्टा लटका दिया गया । लाख खुशियों से पेपर हमारा भारी भरकम लोहे के रूप से उसकी पिंडलियों को ज्यादा गया । कुलभूषण ठीक तरह देखता रहा हूँ । फॅस रात अपनी मर्जी के मुताबिक उस से भी अपना कबूलवा सका । उस तरह भूषण में पहली बार आपने दृढता का परिचय दिया । इस बात का परिचय दिया कि एक आम आदमी भी हालत हो सकता है । उसके हृदय विदारक ठीक है । पुलिस स्टेशन की दीवारों को दोहराती रही तो क्या ले लेकर होता रहा । न जाने कब तक उस पत्र योगी का कोई उस पर बरसा रहा है । कब तक कह टूटा खुद और कौशल को भी नहीं मालूम था । लेकिन हाँ, उसे सिर्फ अपना मालूम था कि जब इस्पैक्टर योगी उसे मारते मारते हैं, बुरी तरह थक गया तो उसने आदेश में उसे दोनों बाजू में भरकर सर से ऊपर उठा लिया और फिर उस धडाम से नीचे पटक डाला और भूषण के कंड सहित एक अत्यंत कष्ट बातचीत नहीं, फिर उसकी चेतना युक्त होती चली गई । अगला दिन महत्वपूर्ण था । उसका प्रयोगी ने एफआईआर के आधार पर कुलभूषण को लोअर कोर्ट में पेश कर दिया । कोर्ट कि दर्शकदीर्घा उस दिन दर्शकों से खचाखच भरी थी और भूषण विटनेस बॉक्स में खडा था । उस पत्र योगी ने रात भर उसकी ऐसी जमकर धुनाई की थी कि इस वक्त शक्ल सूरत से ही कोई चोर उचक्का मालूम पड रहा था । आंखों के पपोटे सूच सूजकर मोटे हो गए थे । पूरे शरीर और दर्जनों जगह खरोंच के निशान थे । शिव बडी हुई हूँ और बेहतहाशा कमजोरी के कारण आंखों के गिर्द काले गुल जान दायरे रखते हुए टांगों में इतनी अधिक पीडा और कम्पन था की खुद को विटनेस बॉक्स में खडा रखने की कोशिश में ही उसके भूंसे बार बार कर रहा निकल रही थी । तभी एक बेहद राॅयल्टी वाला जज अपने चैंबर से निकलकर कुर्सी पर आकर बैठ गया । उसकी आयु चालीस पैंतालीस के बीच थी । कुर्सी पर बैठे ही उसने भरपूर दृष्टि कुलभूषण पर डाली । पहली नजर में उसे कुलभूषण की तेज पीडा का एहसास हो गया । कुलभूषण हूँ शायद इसीलिए जब उससे थोडा सहानुभूतिपूर्वक पेशा क्या तुमने कोर्ट आॅफ करने के लिए कोई वकील क्या है? नहीं मिला कुलभूषण ऍम खिला नहीं अगर तुम अपने डिफरेंस प्रस्तुत करने के लिए कोई वकील चाहते हो, जज ने अपना ऍम किया तो सरकारी खर्चे पर तुम्हारे लिए डिफेंस काउंसिल की व्यवस्था हो सकती है । कुलभूषण का कपडो पासवर्ड मुझे ऐसी मेहरबानी की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि जैसी तुम्हारी छत जज ने अपने कंधे उसका है । फिर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर यानी सरकारी वकील से संबोधित होकर बोला ऍम पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने जज के सामने सम्मानपूर्वक गर्दन झुकाई और फिर कोर्ट को बुधवार की रात से शुरू होने वाले उस बेहद सनसनीखेज घटनाक्रम के बारे में बताना शुरू किया, जिसमें हर पल नए नए मोड आए थे । बेहद सनसनीखेज और चौका देने वाले मोड पूरे कोर्ट रूम में सन्नाटा छा गया । सनसनीखेज सन्नाटा सब स्तब्ध उसी मुद्रा में बैठे शुरू से अंत तक घंटे उस घटनाक्रम को सुनने लगे । पूरा घटनाक्रम कितना दिलचस् और रोमांचकारी था कि लोग बल्कि तक झपकाना भूल गए । दर्शकदीर्घा की प्रथम पंक्ति में इंस्पेक्टर योगी और बल्ले भी मौजूद थे, लेकिन मंत्रा कहीं नजर नहीं आ रही थी । पूरा घटनाक्रम सुनने के बाद पब्लिक प्रॉसिक्यूटर खामोश हो गया, लेकिन कोर्ट रूम नहीं अभी भी होता था । सब मंत्रमुग्ध से बैठे थे । मिस्टर कुलभूषण, पूरा घटनाक्रम और उस पर लगाए गए सभी आरोप सुनने के पश्चात जज नहीं कुलभूषण की तरफ देखा । क्या तुम अपना अपराध कबूल करते हो? चीना पहलवान की हत्या तो महीने की नहीं दर्द से बुरी तरह कराते होने के बावजूद कुलभूषण ने जज के सवाल का जोरदार शब्दों में खंडन क्या चिकना पहलवान की हत्या मैंने नहीं बेगुनाहो निर्दोष तो अगर तुम निर्दोष हो, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर पिक्चर परिचित अंदाज में गलत फाडकर चला । अगर तुमने सचमुच चीनो पहलवान की हत्या नहीं की तो तुम हादसे वाली रात यानी बुधवार की राम इंडिया गेट के इलाके में क्या कर रहे थे? जहां फ्लाइंग स्पोर्ट की तीन गश्तीदल गाडियों ने हडताल होने की वजह से तुम्हारी ऑटो का नंबर नोट किया । इसके अलावा एक सब इंस्पेक्टर ने उस रात स्पीडिंग के अपराध में तुम्हारी ऑटो रिक्शा को रोका भी । मिस्टर कुलभूषण ये बात अलग है कि तुम उस एक लडकी के पेट से होने का खूबसूरत धोखा देकर वहाँ से भाग निकलने में कामयाब हो गए । और क्या है ऐसा नहीं है कि जिस रहस्यमय लडकी को तुम पेट से बता रहे थे वो लडकी वास्तव में पेट्स थी ही नहीं । सच्चाई ये है कि वो लडकी एक लाश पर लेती थी और ऍम ताकत से अपना हाल थोडा चीना पहलवान की लास्ट एमिलॉइड चीना पहलवान किलाड सब झूठ है फॅसा कुलभूषण भी चलना था क्यूट है मुझे जबरदस्ती चीज पहलवान की हत्या का इल्जाम में फंसाया जा रहा है । अगर हम तुम्हें चीना पहलवान की हत्या के अंजाम में जबरदस्ती तो जा रहे हैं मिस्टर कुलभूषण अगर हम सब झूठ बोल रहे हैं तो ठीक है तो मैं बता दो भाई की आखिर सच्चाई क्या है? क्या है वो हकीकत जिसे तुम अभी तक हम तमाम लोगों से छुपाए हुए हो चाहिए है? कुलभूषण अपनी आवाज में यकीन पैदा करता हूँ । बोला बुधवार की रात मेरी ऑटो रिक्शा में सचमुच घर धारण किए हुए एक लडकी बहुत छूट थी । वो लडकी जिसकी फौरन डिलीवरी होने वाली थी । ऍम किसी हॉस्पिटल में भर्ती कराने के लिए ले जा रहे थे । ऍम योगी जो केस के आॅफिसर हैं उनकी इन्वेस्टिगेशन तो ये बताती है लॉर्ड उन्हें कल आप फाडकर चलाया । बुधवार की राल दिल्ली शहर के किसी भी हॉस्पिटल के किसी भी मेटरनिटी वार्ड में उस वक्त के आस पास डिलीवरी का कोई भी केस भर्ती ही नहीं हुआ । और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है मिलार्ड कि विश्व कुलभूषण कानूनको उस लडकी का नाम बताने से भी परहेज कर रहे हैं जो बुधवार की रात इनकी ऑटो रिक्शा में थी । क्या इसी एक पॉइंट साबित नहीं हो जाता कि मिस्टर कुलभूषण जो कुछ भी कह रहे हैं वो सिर्फ और सिर्फ झूठ का एक पुलिंदा है । बकवास है मिश्रा कुलभूषण ने इस मंदिर कहानी की रचना ही इसलिए कि ताकि ये कानून को धोखा दे सकें, अदालत की आंखों में धूल झोंक सके । जबकि सच्चाई ये है मिल ऑॅल भूषण इस बात को जानते हैं कि अगर इन्होंने उस लडकी का नाम अदालत को बता दिया तो वो लडकी भरी हुई अदालत के सामने इतने बडे झूठ को किसी भी हालत में कबूल नहीं करेगी कि उसके कोई बच्चा होने वाला था । क्योंकि लडकी चाहे कोई भी हो, किसी भी धर्म की हो, किसी भी जाती हूँ, लेकिन वो अपनी जब पर कैसा भी को झूठा दाग लगाना पसंद नहीं करेंगे । कुलभूषण खामोश खडा सुनता रहा । पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की जवान से निकला एक एक शब्द उसके कानों में पिछले हुए सीसे की तरह कर रहा था । कुलभूषण फॅमिली वाला जैसे एक बार घर कुलभूषण से मुखातिब हुआ । अगर तुम किसी खास वजह से लडकी का नाम गुप्त रखना चाहते हो तो मैं कम से कम उस हॉस्पिटल का नाम तो जरूर ही अदालत को बताना पडेगा । जिसके मेटरनिटी वार्ड में तुमने उस रात लडकी को एडमिट कराया था । मैं उस हॉस्पिटल का नाम भी अदालत को नहीं बता सकता हूँ । लॉर्ड पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अब खूब से चला था । मुल्जिम जबरदस्ती इस केस को समझाने की कोशिश कर रहा है । मलाड क्योंकि पूरा कॅश है, इसलिए अदालत का मुझे उनसे ये पूछा जा रहा हूँ कि बुधवार की रात उसने लडकी को किस हॉस्पिटल में भर्ती कराया था? बिल्कुल बेतुका है । पर खेल है क्योंकि मिलावट दिल्ली पुलिस के बेहद काबिल इंस्पेक्टर मिस्टर योगी पहले इस बात की खूब जांच पडताल कर चुके हैं कि बुधवार की रात मेटरनिटी वार्डों में उस वक्त के आस पास कहीं कोई भर्ती हुई ही नहीं थी । हॉस्पिटल का या उस लडकी का नाम ना बताकर मुझे खुद बार बार ये कबूल कर रहा है कि वह झूठा है । उसके बयान में कोई जान नहीं । जज खामोशी के साथ कुर्सी पर पहले ब्लॅक योगी के इन्वेस्टिगेशन की वजह से पूरा केस आईने की तरह साफ हो चुका है । इसलिए अब मैं अदालत से रिक्वेस्ट करूंगा कि वह मुल्जिम के शब्द जाल में फंस कार अपना बहुमूल्य समय नष्ट करने के बजाय उन ढेरों सवालों की तरफ ध्यान दें, जिनका अभी तक मुल्जिम कोई जवाब नहीं दिया है । जैसे सवाल नंबर एक चीज पहलवान ने जिससे रीगल सिनेमा के सामने ब्रीफकेस टीना वो व्यक्ति कौन था? सवाल नंबर दो उस ब्रीफकेस के भीतर किया था । सवाल भर्ती वो रहस्यमय लडकी कौन थी जो मंडी हाउस के इलाके में मुझे ऑटो रिक्शा के अंदर देखी गई और जिसे मुलजिम ने पेट से बताया मैं बताता हूँ रहस्यमय लडकी थी तभी वो रूम में गश्ती हुई । आवाज गूंजी, बिल्कुल अजनबी आवास उस आवास में सबको चौका दिया । सबकी निगाहें खुदबखुद गेट की तरफ चली गई और अगला ठंड और धमाके का अच्छा था । उस पूरे प्रधानत में एक के बाद एक चौका देने वाली घटनाओं का नए सिरे से जन्म हो रहा था । वो रूम के दरवाजे पर उन सब लोगों ने जिस व्यक्ति को खडे देखा उसे देखकर सब के सब पहुँच चुके हो गए । सब शरीर का प्रत्येक अंग यूँ फ्रीज हो गया मान उसे लकवा मार गया हूँ कोर्ट रूम के दरवाजे पर । उस वक्त दिल्ली शहर का सबसे प्रसिद्ध सबसे बडा वकील यश राज खन्ना खडा था । यशराज की उम्र सिर्फ तीस बत्तीस साल के आस पास ही । लेकिन पिछली कम आयु में ही उसने दिल्ली जैसे महानगर में अपनी वकालत के खूब झंडे गाड दिए थे । यश राज खन्ना का फिल्म अभिनेताओं जैसा व्यक्तित्व बरबस ही हर व्यक्ति का मन मोह लेता था । इस समय भी यश राज खन्ना ने अपने छह फुट लम्बे कसरती शरीर पर सफेद शर्ट, सफेद ॅ और ऊपर से काले रंग का चौका पहन रखा था । जिसमें वो विरोध खन्ना की तरह काफी स्मार्ट तक रहा था । उसकी आंखों पर चढा था सोने के फ्रेंड वाला कीमती आॅल के साथ खन्ना को जिस तरह से वकालत की दुनिया में रातोरात प्रसिद्धि मिले वो उसके केस लडने का एक स्टाइल था । जब शांत खन्ना का रिकॉर्ड रहा था की वो अपने जीवन में तो भी कोई केस नहीं हरा । उस ऑफलाइन बेगुनाहो या गुनगा जस्ट राज खन्ना कोर्ट में पूरे केस को इस तरह तोड मरोडकर पेश करता था तो स्टॉप लाइन हर हालत में अदालत से बात जब बडी हो जाता था । ये बात अलग है कि यशराज खन्ना अपने क्लाइंट्स भूमा की फीस लेता था । दिल्ली का सबसे महंगा वकील था वो । बहरहाल उस वक्त यश राज खन्ना को कोर्ट रूम में देखकर सभी चौंक पडे । सबका चौंकना वाजिब भी था । ऍफ खन्ना जैसा तो अंदर वकील किसी भी केस को आसानी से हाथ लगता कहाँ है और जब साथ लगता है तो करिश्मा होता है । करिश्मा आपको उस रहस्य में लडकी के बारे में जो कुछ भी कहना है मिस्टर खन्ना जज भी उसके व्यक्तित्व से प्रभावित होकर बोला प्राॅक्टर कही सौरभ मिलावट मैं इस वक्त कोर्ट रूम में गवाह की हैसियत तो पसंद नहीं हुआ हूँ बल्कि मिस्टर कुलभूषण के डिफेंस काउंसिल या नहीं बचाव पक्ष की हैसियत से यहाँ पर हूँ ऍम हम सागरा कोटू में चारों तरफ सनसनी दौड गई । इंस्पेक्टर योगी और बल्ले भी ये सोच कर हैरान रह गए कि कुलभूषण जैसे मूली ऑटो रिक्शा ड्राइवर नहीं यशराज खन्ना जैसा महंगा वकील कर कैसे लिया । खुद कुलभूषण भी इस सुखद परिस्थिति पर हैरान था । विटनेस बॉक्स में खडे खडे वो अपने अंदर एक नई स्पूर्ति अनुभव करने लगा । दर्शक दीर्घा में मौजूद तमाम लोग अब सजग होकर कुर्सियों पर बैठ गए । उन्हें ये समझते देर न लगी की चल रही है कि इस कोई नया रोमान्चकारी बोर्ड लेने वाला है । जबकि ये राज खन्ना नहीं कुलभूषण हस्ताक्षर कराने के बाद अपना वकालत नामा जज की तरफ पडा दिया था । जज नहीं गौर से वकालातनामा देखा । फिर कहा आप डिफरेंस काउंसर की हैसियत सही ये मुकदमा लड सकते हैं । मिस्टर खन्ना ऍम पब्लिक प्रोसिक्यूटर ने चैलेंज भरी दृष्टि डिश राज खन्ना प्रणाली जबकि यश राज खन्ना हल्के से मुस्करा दिया

भाग 07

मुकदमा फिर पहले की तरह ही गर्मजोशी के साथ शुरू हो गया बल्कि अब उसमें पहले से भी ज्यादा गर्मी थी । मिलावट किस राजेश खन्ना ने अपना काला चोगा दुरुस्त करके बोलना शुरू किया । सबसे पहले तो मैं मिस्टर कुलभूषण के बचाव पक्ष का वकील होने के नाते ये कहना चाहूंगा कि मेरे बेहद कादल और सही दो पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और इंस्पेक्टर योगी ने मिलकर मेरे क्लाइंट पर चीन और पहलवान की हत्या का जो इल्जाम लगाया है तो बिल्कुल बेतुका और झूठा है । मिला जस्ट राज खन्ना ने अपनी आवाज थोडी तेज की । सच्चाई ये है की अभी तक मेरा भोला भाला और निर्दोष लाइन अदालत के शब्दजाल से बचने की कोशिश नहीं करता रहा, बल्कि मेरे काबिल दोस्त, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर साहब खुद इंस्पेक्टर योगी की गलत इन्वेस्टिगेशन के कारण दिशाभ्रमित होते रहे हैं और ऍम पब्लिक प्रोसीक्यूटर आदत के मुताबिक हाल फाडकर चलाया । खन्ना साहब इंस्पेक्टर योगी जैसे बेहद कर्तव्यनिष्ठ इंस्पेक्टर की काबिलियत पर उंगली उठा रहे हैं । वो इस्पेक्टर योगी जो दिल्ली पुलिस में एक मिसाल है, एक आदर्श है । किसी देखकर दिल्ली पुलिस के दूसरे जवान प्रेरणा लेते हैं और कल्पना करते हैं कि काश वो भी इंस्पेक्टर योगी की तरह ही बन जाए । ये बडे अफसोस की बात है । मिलावट खन्ना साहब उसी स्पेक्टर योगी कि कर्तव्य निष्ठा पर इल्जाम लगा रहे हैं । ऍम बिल्कुल गलत है । यश राज खन्ना ने बिना उत्तेजित हुएकहा मैंने इंस्पेक्टर योगी कि कर्तव्य निष्ठा पर कोई इल्जाम नहीं लगाया । मिला सच्चाई तो यह है कि मैं खुद इस बात को तहेदिल से कबूल करता हूँ । सब इंस्पेक्टर योगी जैसे बेहद कर्मठ और ईमानदार पुलिस अफसर हमारी दिल्ली पुलिस में कुछ एक ही है और जो चंद है वह दिल्ली पुलिस की नाक है । लेकिन मैं ये भी नहीं बोलना चाहिए मिलावट राज खन्ना ने फौरन चाल चली इंस्पेक्टर योगी एक कर्तव्य पाॅवर होने के साथ साथ एक इंसान भी हैं इंसान जिससे हमारे शास्त्रीय वेद पुराणों में गलतियों के पुतले की संज्ञा दी गई है । कहा गया है कि बडे बडे तपस्वी और ऋषि मुनियों से भी जाने अनजाने कोई ना कोई गलती अवश्य हो जाती है और ऐसी गलती इंस्पेक्टर योगी से हो चुकी है मिलावट उन्होंने इस पूरे ऍम तो पूरी लगन और मेहनत की लेकिन वो सबूत इकट्ठे करना है बस थोडा सा धोखा खा गए लेकिन नहीं पब्लिक प्रोसीक्यूटर अपनी बात पूरी कर पता उससे पहले ये शायद खन्ना ने उसकी बात कर दी और प्रभावपूर्ण ढंग से आगे बोला मालूम है पब्लिक प्रॉसिक्यूटर साहब की आप क्या कहना चाहते हैं? वही ना मेरे पास इस बात का क्या सबूत है कि इंस्पेक्टर योगी ने जो इन्वेस्टिगेशन की वो गलत है? उसके जवाब में मैं सिर्फ ये कहना चाहूंगा प्रोसीक्यूटर साहब, मैं भी एक वकील हूँ और कम से कम इतना जहीन भी हूँ की अदालत में ऐसी कोई बात अपनी जबान से नहीं निकालूंगा जिसका मेरे पास कोई जवाब ना हो । जहाँ तक इंस्पेक्टर योगी द्वारा मेरे क्लाइंट पर लगाए गए बेबुनियाद इल्जामों का सवाल है तो मैं अभी अभी चंद मिनट बाद उसका सबूत भरी अदालत में पेश करूंगा और अगर मैं सबूत पेश न कर सकूँ तो मेरे काबिल तो सिर्फ मेरे ऊपर ऑब्जेक्शन लगातार ही खामोश ना बैठे बल्कि वह खुशी खुशी मेरे ऊपर इंस्पेक्टर योगी की तरफ से मान खाने का मुकदमा भी दायर कर सकते हैं और ऍम जरूर । जज ने फौरन ही पब्लिक आॅक्शन प्रस्ताव खारिज कर दिया । ऍम प्रश्वास खन्ना ने जज के सामने चल चुका है जब की पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अपनी पहली ही पराजय पर पूरी तरह से तिलमिला उठा । हाँ तो मिलावट प्रशांत खन्ना ने थोडा रुककर पुराना शुरू किया । मैं कह रहा था कि मेरे काबिल तो पब्लिक प्रॉसिक्यूटर साहब खुद इंस्पेक्टर योगी की गलत इन्वेस्टिगेशन के कारण सहमत हो रहे हैं । जबकि सच्चाई ये है कि फ्लाइंग स्क्वॉड दस्ते के सब इंस्पेक्टर ने जब बुधवार की रात को मंडी हाउस जाने वाले मार्ग पर कुलभूषण की ऑटो रिक्शा रोकी तो उसमें सचमुच चीना पहलवान की लाश नहीं थी, बल्कि उसके अंदर वास्तव में एक लडकी थी जो पेट से नहीं । लेकिन सवाल यह है खन्ना साहब अपनी पराजय से बुरी तरह चलाया पब्लिक प्रॉसिक्यूटर फिर चला उठा । अगर ऑटो रिक्शा में उस वक्त लडकी थी तो वो लडकी कौन थी? फिर अगर वास्तव में ही पेट से भी तो मिस्टर कुलभूषण ने उसे किसी हॉस्पिटल के मॅन में भर्ती क्यों नहीं कराया । और इन सब से बडा सवाल तो यह है मिस्टर कुलभूषण उस लडकी का नाम बताने से अतरासी क्यों कर रहे हैं? फॅस राज खन्ना प्रॉसिक्यूटर्स अहा फॅस करना गंभीरतापूर्वक बोला देखिए हर खामोशी के पीछे ना कोई ना कोई वजह होती है । फर्क सिर्फ इतना है कि कोई उस खामोशी के आवाज को सुन लेता है और कोई नहीं चल पाता । इस मामले में मैं शायद आपसे ज्यादा सौभाग्यशाली हूँ तो मैंने खामोशी की वो आवाज सुन ली है । मिलावट यश राज खन्ना जज की तरफ कुमार मैं कुलभूषण की खामोशी की वजह बया करने से पहले अदालत से प्रार्थना करूंगा कि वह प्रोसिक्यूटर के ही एक गवाह बल्ले को विटनेस बॉक्स में पेश करने की इजाजत दें । इजाजत है दर्शकदीर्घा में बैठे वाले भर रात बल्ले का दिल का पूरी तरह खडा था । हालांकि वो काफी ऍम था लेकिन यश राज खन्ना जैसे धुरंधर वकील के सामने खडे होने की कल्पना मात्र से ही उसकी पिंडलियां कपडा उठी । पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और इंस्पेक्टर योगी की भी कुछ ऐसी ही हालत हुई । नहीं समझ पा रहे थे कि अब आखिर होने वाला है । कुछ होने वाला था । कुछ बडा मरता क्या ना करता है । ऍम बॉक्स में जाकर खडा हुआ । फिर उसमें सबसे पहले गीता पर हाथ रखकर सच बोलने की कसम खाएंगे । उसके बाद कुछ औपचारिक अदालती सवालों के बाद यश राज खन्ना ने बल्ले को घूमते हुए पहला प्रश्न पूछा डबल क्या यह सच है कि तुम कुलभूषण की गिरफ्तारी के बाद पुलिस स्टेशन गए थे? आप भले ने कप कपालेश्वर में कहा ये इस सच है । वहाँ तुम स्पैक्टर योगी से भी मिले । हाँ, ये भी सच है और ये ये भी सच है कि तुम ने पुलिस स्टेशन में घुसकर स्पेक्टर योगी के सामने ये घोषणा की थी कि तुम उस रहस्यमय लडकी को जानते हो तो हादसे की रात कुलभूषण के साथ मंडी हाउस जाने वाले मार्ग पर देखी गई बाल लेने अब सब पकाकर योगी की तरफ देखा । उधर मत देखो चल रहा है । जिस राज खन्ना मेरी था मेरी तरफ देखो पल लेने फॉर्म योगी की तरफ से नहीं हटा ली । जवाब तो क्या तुमने पुलिस स्टेशन में पहुंचकर ऐसी ही घोषणा की थी? हाँ, मैंने यही कहा था मुस्कराया यश राज खन्ना । फिर तो तुमने स्पेक्टर योगी को उस लडकी का नाम भी जरूर बताया होगा । हाँ नाम बताया था क्या नाम बताया था भले ने बेचैनी पूर्वक पहलू बदला । इतना तो समझ चुका था कि यह शायद खन्ना उसके ही चलाया तीर से कोई शिकार करना चाहता है । डबल है क्या तुम्हें उस लडकी का नाम अदालत के सामने दोहराने से कोई ऐतराज है? नहीं । मुझे बोला क्या हो सकता है तो फिर बोलते क्यों नहीं है? क्या नाम तो उस लडकी का मंत्रा मंत्रा नाम था जी नाम नोट किया जाए में लौट । जिस राज खन्ना बिजली जैसी तेजी के साथ जज की तरफ घुमा और चला ये नाम अदालत की कार्यवाही में खासतौर पर दर्ज किया जाए । उसके अलावा मैं अदालत को एक बात और बताना चाहूंगा कि मंत्रा नाम की लडकी किशनपुरा में ही रहती है और एक ऑफिस के अंदर टाइप इसके तौर पर काम करती है । दर्शकदीर्घा में सन्नाटा था । ऐसा सन्नाटा की अगर वहाँ कोई स्वीट भी गिरे तो आवाज हो वो नाम अदालत की कार्यवाही में दर्ज कराने के बाद यश राज खन्ना दोबारा बल्ले की तरफ खुल गया था । चारा बल्ले उसे ऐसा लग रहा था मानो आज वो किसी शेर के जबडे में आप ऐसा होगा मुझे बल्ले । यश राज खन्ना बोला अब मैं तुमसे ये पूछना चाहूंगा की तुमने स्पेक्टर योगी के सामने जाकर मंत्रा का ही नाम क्यों लिया? किश्नपुरा में तो और भी दर्जनों लडकियाँ रहती है । तुमने उनमें से किसी का नाम क्यों नहीं लिया? क्या मतलब बच्चों का मतलब बिल्कुल ऍम? क्या तुमने बुधवार की रात मंत्रा को अपनी आंखों से चीना पहलवान की लाश के ऊपर लेते देखा था? नहीं जशरथ खन्ना चला उठा । फिर तुमने पुलिस स्टेशन में जाकर ये घोषणा किस आधार पर कि उस रात मंत्रा कुलभूषण की ऑटो रिक्शा में थी । तुमने सिर्फ मंत्रा का ही नाम क्यों लिया? जबकि तुमने मंत्रा को कुलभूषण ऑटो रिक्शा में देखा तक नहीं था और एक्शन मिलार्ड पब्लिक ऍम कर रहे हैं तो उससे उलझन और गहरी पेशोपेश में डालकर होस्टाइल करार देने की कोशिश कर रहे हैं । और ना इन तमाम सवालों का केस से क्या था? लोग हैं, ताल्लुक है में लौट ताल्लुक है । यश राज खन्ना ने बिना विचलित हुए अपनी बंद मुट्ठी हवा में लहराए मेरे तमाम सवालों का कुलभूषण की उस खामोशी से गहरा ताल्लुक है जो बेगुना होकर भी विटनेस बॉक्स में एक अपराधी बना खडा हुआ है । आखिर कौन सा राज है जिसे भोलेभाले इंसान ने अपने सीने में दफन कर रखा है । आप सब लोग चिल्ला चिल्लाकर उस पर एक झूंठा इल्जाम लगा रहे हैं कि बुधवार की रात उसके ऑटोरिक्शा के अंदर चीना पहलवान की लाश थी । इतना बडा झूंठा इल्जाम लगने के बावजूद वो चुप है । आखिर क्यों चुप है? क्या है इस खामोशी की वजह से अब विटनेस बॉक्स में खडे कुलभूषण की आंखों में भी हराने के निशान उभरे, उसे भी लगा की यश राज खन्ना सब मुझे कोई गेम खेलने वाला है । दरअसल में बल्ले से जो भी सवाल पूछता हूँ मिलावट उन सवालों का जवाब न सिर्फ कुलभूषण की खामोशी को तोडेंगे बल्कि वह पूरे केस को भी एक ही झटके में हाल कर देंगे । ठीक है आप सवाल पूछ सकते हैं फॅस यशराज खन्ना ने एक बार फिर जज के सामने आदर से गर्दन चुकाई और पुनः बनने से संबोधित होकर बोला हाँ तो डबल है । तुमने बिना देखे ये अंदाजा कैसे लगाया कि तीन जुलाई की रात कुलभूषण की ऑटो रिक्शा में मंत्रा रही होगी । लेकिन जवान इस तरह की घोषणा करने के पीछे कोई तो वजह होगी । बल्ले पागलों की तरह इधर उधर देखने लगा । मैं तुमसे कोई सवाल पूछ रहा हूँ । मिस्टर बल्ले करना थोडा गुस्से में बोलेंगे? जवाब दो एक मैं क्या किश्नपुरा में रहने वाला कोई भी व्यक्ति ये अंदाजा बडी आसानी से लगा सकता है कि वह मंत्रा रही होगी जो ऐसा अंदाजा क्यों लगा सकता है क्योंकि कुलभूषण और मंत्रा एक दूसरे से बेहद प्रेम करते हैं । जान छिडकते हैं, दूसरे पर फिर भला मंत्रा के अलावा और कौन लडकी इसकी मदद कर सकती है । तो ये कहना चाहते हो कि कुलभूषण और मंत्रा एक दूसरे के लिए कुछ भी कर सकते हैं । जी हाँ मैंने इन दोनों के विषय में एक बात और भी सुनी है जिस राज खन्ना का तो एक का एक बेहद है । इस समय हो उठा और बल्ले के थोडा करीब पहुंचकर बोला मैंने सुना है ये दोनों अपने अपने घर में रहते भी अकेले हैं । आपने बिल्कुल ठीक सुना है साहब । बल्ले ने इस पर थोडा उत्साह के साथ जवाब दिया । मंत्रा तो बहुत पहले से किशनपुरा में रहती है । शायद बचपन से ही पहले वो अपनी माँ के साथ रहती थी जिनका पिछले साल ही देहांत हो गया । अब घर में बिल्कुल अकेली है । ऍम भूषण भूषण ने तो अभी सिर्फ एक महीना पहले से ही किशनपुर में रहना शुरू किया है । सिर्फ एक महीना पहले से जी साहब और इसे एक महीने में ही कुलभूषण मंत्रा की मोहब्बत इस मुकाम तक पहुंच गई । ये एक दूसरे के लिए कुछ भी कर सकते हैं । इस यकीन नहीं होता । ॅ आप आप गलत समझ रहे है । मिस्टर वकील साहब बल्ले बोला कुलभूषण को किशनपुरा में रहते जरूर एक महीना हुआ है, लेकिन मंत्री और कुलभूषण की दोस्ती तो बहुत पुरानी है । मैंने सुना है कि मंत्रा पहले कुलभूषण ऑटो रिक्शा में बैठकर अक्सर ऑफिस जाती थी । बस तभी से उन दोनों के बीच प्रेम हो गया । फिर तो कुलभूषण को किशनपुरा में घर भी मंत्रा नहीं दिलाया होगा । जहाँ खुशी नहीं दिलाया था वॅार वाकई है काफी जबरदस्त प्रेम है खून अब कुलभूषण की कनपटी पर ठोकरे सी मारने लगा । वो समझ नहीं पा रहा था की जगह राज खन्ना वहाँ उसे बाइज्जत बरी कराने आया है । क्या उसकी इज्जत के परखच्चे उडाने आया है मिलार्ड वैसे मैंने ये भी सुना है किसी ऍम योगी कुलभूषण को गिरफ्तार करना किशनपुरा में पहुंचा । उस वक्त कुलभूषण मंत्रा के घर में था जब गलता कीजिए मिलार्ड एक नौजवान लडका एक नौजवान लडके के साथ घर में बिल्कुल अकेला बंद है । रात का समय है दरवाजे की उन दोनों ने अंदर से सडक नहीं भी चढा रखी है । पूरी डाॅन आपके सामने हैं क्या ये पूरी सिचुएशन इस बात की तरफ इशारा नहीं करती । इन दोनों के बीच सिर्फ प्रेम संबंधी नहीं थे बल्कि शारीरिक संबंध भी कायम हो चुके थे । वैसे भी जब दो हफ्ते हुए जिसमें तन्हाई में दूसरे के कितना करीब हो तो फिर आग लगने से कैसे बच सकती है । ये सब झूठ है । कुलभूषण धाड था । डाॅन और मंत्रा के बीच से कोई संबंध नहीं थे । तुम दोनों के बीच संबंध थे । कुलभूषण शशांक खन्ना उससे भी ज्यादा पहुंॅचा संबंध थे । पता ही नहीं तीन जुलाई बुधवार की रात तुम्हारी ऑटो रिक्शा में जो लडकी देखी गयी वो भी मंत्रा ही थी । सिर्फ और सिर्फ मंत्रालय पूरी को रूम सब दंग रह गए । इसी तरह सन्नाटा स्थापित हो गया । जब से लेकर सरकारी वकील और इंस्पेक्टर योगी तक बेहद पहुंचक की मुद्रा में ये देखते रह गए और सोचते रह गए कि आखिर यश राज खन्ना जैसा धान धान वकील अपने ही क्लाइंट के विरुद्ध हो जा रहा है । क्या वजह है? क्या कारण है? बहुत जल्दी उस कारण का भी पर्दाफाश हो गया । ऐसा जबरदस्त बम विस्फोट यही बहुत बडा शुक्र ता की कोर्ट रूम में मौजूद प्रत्येक व्यक्ति का सस्पेंस के मारे हार्ट फेल ना हो गया तो आप भी ये कबूल करते हैं खन्ना साहब पब्लिक प्रोसिक्यूटर उत्साह में भरकर बोला कि तीन जुलाई बुधवार की रात जो लडकी चीना पहलवान के ऊपर लेटी देखी गयी वो मंत्रा थी । मैंने कहा मैंने ये कब कहा कि मंत्रालय छीना पहलवान के ऊपर लेटी थी प्रॉसिक्यूटर्स हूँ मैंने तो सिर्फ ये कहा है कि बुधवार की रात जब फ्लाइंग स्क्वाड दस्ते ने कुलभूषण की ऑटो रिक्शा मंडी हाउस जाने वाले मार्ग पर रोक की तो उसमें रहस्यमय लडकी कोई और नहीं बल्कि मंत्रा भी जिसका लाश का तो मैंने अभी तक जिक्र भी नहीं किया है । पहले ही कोर्ट में कह चुका हूँ कि ऐसी कोई लाश है, उस वक्त रिक्शा के अंदर नहीं थी । अब सभी के दिमाग में सिर्फ इतनी सी घूम नहीं । इसका मतलब आप ये कहना चाहते हैं कि बुधवार की रात को मंत्रा के सचमुच बच्चा होने वाला था और कुलभूषण उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराने के लिए ले जा रहा था । बिल्कुल कुल ये सच है और यही कहना चाहता हूँ लॉर्ड कुलभूषण ऍम लडकी थी । वो हंड्रेड पर्सेंट मंत्रा थी । इतना ही नहीं उसके पेट में पालने वाला वो बच्चा जिससे हमारा समाज ऐसी परिस्थिति में पापा की संज्ञा देता है, वह आप किसी और का नहीं था । मिलावट जैसा खाना कोर्ट रूम में और पूरी तरह खडा तथा उसने अपनी उंगली भाले की तरह कुलभूषण की तरफ उठाएंगे । वो आप किसी का था कुलभूषण का ये झूठ है । ये छूट है । मिलावट मेरे ऊपर और मंत्रा पर सरासर झूठा इल्जाम लगा रहे हैं । टीशर्ट उछाल रहे हम पर मैं कबूल करता हूँ नॉट उस रात चीना पहलवान की लाश मेरे ही ऑटो रिक्शा में थी । घूमते बोलते कुलभूषण की आवाज जज्बाती उठेंगे । मैं ये भी कबूल करता हूँ कि चीना पहलवान की हत्या मैंने की है और मैं ही हत्या रहा हूँ । लेकिन भगवान के लिए मंत्रा पर इतना बडा झूंठा इल्जाम मत लगाओ, उसकी जिंदगी बर्बाद वक्त करूँ । बोलते बोलते कुलभूषण इस बात विंटर्स बॉक्स में खडा खडा हीरो पडा भरभराकर रो पडा । परंतु कुलभूषण को ये कहाँ मालूम था कि आज उसके सामने यश राज खन्ना जैसा बेहद धुरंधर वकील खडा है तो राज खन्ना ने कुलभूषण द्वारा स्वीकार किए गए हत्या के अपराध से भी फायदा उठाया तो देखा है देखा ऍम देखा इसके दिल में बसे मंत्रा के प्रति बेपनाह प्यार को सिर्फ मंत्रा के ऊपर कोई कालिख ना लग जाए इसी वजह से इसी वजह से ये चीन पहलवान की हत्या का इल्जाम अपने सिर पर लेने को तैयार है और फांसी पर चढने को तैयार है । ये बेवकूफ आदमी हैं उन तरह की जब बचाने के लिए ये इस वक्त वो कबूल कर रहा है जो उसने कल स्पेक्टर योगी के जबरदस्त टॉर्चर के सामने भी कबूल नहीं किया और यही मोहब्बत उसकी खामोशी की वजह से मैं लॉर्ड ये इसी कारण चुकता की कहीं इसकी हकीकत का पर्दाफाश हो जाए । अदालत में सन्नाटा हूँ होर सन्नाटा जबकि हकीकत ये ऍम कि तीन जुलाई की रात न तो इसी कल सिनेमा के सामने खडा था और न ही से चीना पहलवान के बारे में ही कुछ पता था । दरअसल बुधवार की रात को मंत्रा के बच्चा होने की बहुत तेज पीडा हुई थी । किसी हॉस्पिटल में ले जाने के लिए कुलभूषण ने मंत्रा को ऑटो रिक्शा की पिछली सीट पर लिटाया । लेकिन जब ये आईटीओ का ओवर ब्रिज पार करके मंडी हाउस जाने वाले मार्ग पर मुड रहा था तभी इत्तेफाक से तेज स्पीड के कारण फॅस के पीछे लग गया । जबकि सच्चा ये ऍम इसलिए देश चला रहा था ताकि ये मंत्रा को लेकर जल्द से जल्द किसी हॉस्पिटल पहुंच सकें । लेकिन उसकी किस्मत खराब थी जो फ्लाइंग स्कॉट के दस तेरे से बीच रास्ते में ही रोक लिया । दस्ते के सब इंस्पेक्टर से कुलभूषण ने वही का जो संस्था फॅमिली लडकी के बच्चा होने वाला है मगर तब तक देर हो चुकी थी । मिला बहुत देर जस्ट राज खन्ना चीखता चला गया । कुलभूषण ब्लाइंड स्पॉट के दोस्तों से निपटकर अभी इंडिया गेट से थोडा आगे ही पहुंचा था की पिछली सीट पर लेटी मंत्रा के प्रसव पीडा हो गई जहां लौटरी मंत्री की डिलीवरी हो गई उसके बच्चा पैदा हुआ लेकिन जिंदा नहीं बल्कि मारा हुआ । भावनाओं के प्रभाव में बोलते बोलते कुछ ठंड के लिए रुका । यश राज खन्ना उसने अपना सोने के प्रेम वाला एनएच दुरुस्त किया । अदालत में अभी भी सन्नाटा था । सब चुप चाप बैठे थे । जबकि कुलभूषण के नेतृत्व हद दर्जे तक फैल गए थे । उसके पास विश्वास खन्ना ने अदालत में उस कहानी का हिस्सा सुरा को मिलार्ड । कुलभूषण और मंत्रालय मिलकर वो मरा हुआ बच्चा उसी रात यमुना नदी में बहा दिया । उसके बाद दोनों नहीं उस मामले में चुप रहना बेहतर समझा । क्योंकि मामला खुद ब खुद ही खत्म हो गया था तो समाज की उठाना का शिकार होने से बच चुके थे । लेकिन अब से एक्टर फाॅर कुलभूषण की बदनसीबी कहा जाएगा । उसी रात को ऑटोड्राइवर चीना पहलवान को रीगल सिनेमा के पास से लेकर फरार हो गया । इतना ही नहीं फिर उसने छीना पहलवान की लाश पर इंडिया गेट पर डाल दी इन दोनों एक तरफ आपको से एक भयानक रिजल्ट । ये निकला इस्पेक्टर योगी की गलत इन्वेस्टिगेशन शुरू हो गए । योगी कश्यक सीधा कुलभूषण पर जा पहुंचा । जबकि कुलभूषण ने इस डर की वजह से नहीं बच्चा होने वाली बात का राज ना खुल जाएगा । पुलिस से बचने कभी प्रयत्न किया लेकिन आकर का जैसा कि सब जानते हैं लौट वो पकडा ही गया । और यही वजह थी जो कुलभूषण इंस्पेक्टर योगी के इतने खौफनाक टॉर्चर के सामने भी अपनी सुबह नहीं खोली और वो जुबान खोलता भी कैसे, उसे तो कुछ मालूम ही नहीं था । कुलभूषण कैसे बताता की चीना पहलवान के ब्रीफकेस में आखिर था क्या? उस सर्वोपरि किसने छीना? या फिर अगर उसके ऑटो रिक्शा में कोई ऐसी लडकी थी, इसके बच्चा होने वाला था तो कुलभूषण ॅ हॉस्पिटल में भर्ती कराया । आप ही बताइए । ऍफ का नाम बताता हूँ तो हॉस्पिटल तक पहुंचने की तो नौबत ही नहीं आई थी और कुलभूषण कानून के सामने सच्चाई इसलिए जाहिर नहीं करना चाहता था क्योंकि इससे मंत्रा की इज्जत की धज्जियां बिखर जाती है । ऍम स्पैक्टर योगी और अदालत में कुलभूषण की इसी बेबसी को इसी खामोशी को उसका इकबालिया जुर्म मान लिया जबकि बेकसूर ॅ बिल्कुल ब्लॅक हूँ । अगर इसका कोई अपराध है तो वो ये है कि इसे मंत्रा से पनाह मोहब्बत है । वो रूम में अब बेचैनी से फैल गई । अब तमाम लोगों की समझ में आया कि अशांत खन्ना जैसा तो अंदर वकील शुरू में क्यों अपने क्लाइंट के विरुद्ध जा रहा था पब्लिक प्रॉसिक्यूटर हिम्मत करके जैसा खन्ना की तरफ बडा हो । अभी अभी आपने जो कहानी सुनाई, खन्ना साहब उससे सच कैसे मान लिया जाए । जबकि खुद आप क्लाइंट कुलभूषण भी उस कहानी को मानने से साफ इनकार कर रहा है । उसे वो खुद सरासर झूठी कहानी करार दे रहा है । खन्ना मुस्कराया उसका ऐसी थी जैसे मजाक उडाते वक्त किसी के होठों पर आ जाती है । आपने ये बडा बेतुका सवाल पूछा है प्रोसेक्यूटर साहब जो सकपकाया प्रोसीक्यूटर सवाल की जगह अगर आप मुझसे ये सवाल पूछा होता कि मुझे तमाम बातों का कैसे पता चला तो मैं समझता हूँ कि आपकी ज्यादा काबिलियत जाहिर होती है क्या मतलब? जाहिर सी बात ऍम किसी भी काबिल वकील के दिमाग में सबसे पहले यही सवाल कौन रहेगा? जिस कहानी को खुद मुलजिम झूठी करार दे रहा है तो उस कहानी के बारे में मुस्लिम के डिफेंस काउंसिल को किस तरह पता चला? तो इस तरह पता चला है मंत्रा से यश राज खन्ना ने एक और भयंकर विस्फोट कर दिया । मंत्रा ऍम बॉक्स में खडे कुलभूषण का दिमाग देवी मंत्रा का नाम सुनकर थमाकर होने लगे और वो भी तेज हम आ गई । जी हां मुझे सारी कहानी मंत्रा ने बताई थी । जब राज खन्ना एक बार फिर वो टू में गरजता हुआ बुला और इतना ही नहीं उसी मंत्रा को मैं गवाह के तौर पर प्रसाद भी लाया हूँ तो उस वक्त बाहर बैठी मेरा इंतजार कर रही है ।

भाग 08

अदालत में वैसे हलचल मच चुकी थी जैसे कभी छुट्टियों के झुंड में मत जाती है और मंत्रा को कोर्ट रूम में बुलाया गया । ऍप्स में खडे होकर उसके सबसे पहले वही कसम खाई जो प्रत्येक गवाह को कोर्ट में गवाही देने से पहले खानी पड रही है । उसने गीता पर हाथ रखकर कहा मैं जो कहूँगा सच कहूँ सच के अलावा कुछ नहीं करेंगे । बहुत नाम वो सवाल मंत्रा से पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने पूछा था जी मंत्रालय कितना स्वर्गीय देवसिंह हूँ किश्नपुरा कुलभूषण को जानती हो जी हाँ कब से यही कोई एक साल हो गया । सुना है तुम दोनों आपस में प्यार भी करते हो हूँ क्या सच है सर? तैयारियाँ कुछ और भी मंत्र हूँ मेरे सवाल का जवाब तो ब्लॅक तो दोनों से प्यार करते हो या तुम दोनों का प्यार शरीर क्यों सेवाओं को भी लग गया है जिससे ज्यादातर शादी के बाद लगा जाता है । मत भूलों खन्ना साहब मैं तुम पर इल्जाम लगाया है कि तुम कुलभूषण के बच्चे की माँ बनने वाली थी । हाँ मंत्रालय अपनी नजरे झुका ली और वह एक का एक हिम्मत करके धीमे स्वर में बोली । अच्छा वाकई कुलभूषण के बच्चे की माँ बनने वाली थी और क्या यह भी सच है कि बुधवार की रात तुम किसी हॉस्पिटल में भर्ती होने के लिए जा रही थी । हाँ, ये भी सच है । फिर तुम किसी हॉस्पिटल में गई क्यों नहीं? क्योंकि बीच रास्ते में ही मेरी डिलीवरी हो गई थी । ये किस फास्ट है कि मेरे पेट भरे हुए मरे हुए बच्चे ने जन्म लिया । जैसे हमने हमने उसी रात यमुना नदी में बहा दिया । तंत्र कुलभूषण ऑस्ट्रियाई अंदाज में चलना उठा । उसके नेत्र असंभव से फट पडे । ये तो क्या कह रही है मंत्री शायद तरह दिमाग खराब हो गया है । उसके बाद मेरा नहीं तो भारत खराब हुआ है । कुलभूषण मंत्र होटल रूम में पहली बार गला फाडकर चलाएंगे । मुझे अपनी जब की फिक्र नहीं है तो फिर तुम मेरी जब के लिए अपनी जान की बाजी क्यों लगा रहे हो? जो जबरदस्ती फांसी के फंदे पर लटकना चाहते हो? तो मैं इस बात को कबूल क्यों नहीं कर रहे थे कि हमारे बच्चा हुआ था तो कुलभूषण अगर हम एक दूसरे से प्यार करते हैं और प्यार कोई पाप तो नहीं होता । अब कुलभूषण की खोपडी अंतरिक्ष में चक्कर काटने लगे, वो हराम रह गया । पूरी तरह हराने क्या आपको मुझसे कोई और सवाल पूछना है । मंत्रालय पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की तरफ देखा नहीं, कुछ नहीं बोलना मंत्रा विटनेस बॉक्स से निकलकर दर्शकदीर्घा में जा बैठी हूँ । ये यशराज भरना के दिमाग का ही कमाल था, जो पूरा केस पलट चुका था । पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के हौसले पस्त हो चुके थे, लेकिन उसने कुलभूषण को फंसाने के लिए अपनी तरफ से एक आर खरीद चाल और चलेंगे मिलार्ड । इससे पहले की आप इस केस का फैसला सुना है । पब्लिक प्रॉसिक्यूटर जब से संबोधित हुआ, मैं आपसे अंतिम दर्ख्वास्त और करना चाहूंगा, कर सकता हूँ मिला और अभी अभी केस ने जो नाटकीय मोड दिया और मेरे डबल दोस्त जस्ट राज खन्ना साहब जो नई कहानी अदालत के सामने पेश की, उस कहानी के सिर्फ दो चश्मदीद गवाह है । पहला गवाह भूषण और दूसरी गवाह मंत्रा । ज्यादा कुलभूषण का सवाल है । वह मंत्रा के बच्चा होने वाली कहानी को पूरी तरह झूठ का पुलिंदा करार दे रहा है, जबकि मंत्रा उसी कहानी को सच बता रही है । यशराज खन्ना साहब ने कुलभूषण की इंकार के पीछे ये जो दर्द दिया है वो मंत्रा की जब बचाने के लिए झूठ बोल रहा है, मैं मानता हूँ ऐसा हो सकता है, लेकिन एक शब्द फिर भी रह जाता है । मिलावट और वो शक्ति है कि क्या ऐसा नहीं हो सकता कि खन्ना साहब और मंत्रालय मिलकर कुलभूषण को बचाने के लिए बच्चा पैदा होने वाली कहानी गढी होगी? लौट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और बुलंद आवाज में चला । मैं ये कहना चाहता हूँ कि अभी अभी अदालत में जो कहानी सुनाई गई, वह महज एक बेहद काबिल वकील के तेज दिमाग की उपज भी हो सकती है । कानून की आंखों में धूल झोंकने की एक साजिश भी हो सकती है और हकीकत की तह तक पहुंचने का सिर्फ एक उपाय है । मिलावट सिर्फ एक उपाय, कौन सा उपाय जाॅब निकला मेडिकल चेकअप इस बार सचमुच पब्लिक प्रॉसिक्यूटर में भी धमाका कर दिया ऍम ऍम प्रोसीक्यूटर ठीक था, चला गया । मैं मेडिकल चेकअप की बात कर रहा हूँ । मेरी अदालत से दरख्वास्त है कि मंत्रा का किसी लेडी डॉक्टर के जरिए से मेडिकल चेकअप कराया जाए । अगर मंत्रा के सचमुच कोई बच्चा हुआ है, वह प्रेग्नेंट हुई है, तो ये बात मेडिकल चेकअप के द्वारा बिल्कुल स्पष्ट हो जाएगी । कुल मिलाकर दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए इस वक्त हमारे पास सिर्फ एक हथियार बचा है और वो हथियार है मेडिकल चेक करूँ । अदालत जल्द से जल्द मंत्रा का मेडिकल चेकअप कराया और उसके बाद ही इस केस के संबंध में कोई भी फैसला करें । मंत्री के दिल दिमाग पर सन्नाटा सा भेजता चला गया । उसे इस सारी कोशिशें बेकार होती नजर आएंगे । यु लगा, जिसे अब कुलभूषण को फांसी पर लटक में से कोई नहीं बचा सकता हूँ । लेकिन नहीं, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का मुकाबला आज यशराज घन्ना सिद्धा हो । यशराज खन्ना जो प्रॉसिक्यूटर किस बात फॅार अभी विश्व नहीं हुआ मिला । मैं जानता था कि पाॅइंट को जरूर उठाएंगे । अदालत का कीमती वक्त बर्बाद न हो । इसलिए मैंने आज सुबह ही कोर्ट आने से पहले ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट लेडी डॉक्टर मधुसूदन सान्याल से मंत्रा का मेडिकल चेकप करा लिया था । ये है लेडी डॉक्टर द्वारा दी गई वह मेडिकल रिपोर्ट, जिसमें बिल्कुल साफ साफ लिखा है कि मंत्रा पिछले दिनों गर्भवती रह चुकी है । पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने बेहद हैरतअंगेज स्थिति में मेडिकल रिपोर्ट को पडा होगा । उसमें वही सब कुछ लिखा था कि जस्ट राज खन्ना ने बयां किया जाॅन रिपोर्ट पडी मिला, लेकिन पब्लिक प्रोसिक्यूटर भी जैसे आज हार ना मानने की सौगंध खा चुका था । मैं फिर भी मंत्रा का एक बार और मेडिकल चेकअप कराना चाहता हूँ । क्यों? शायद करना ने पूछा आप मंत्रा का दोबारा चेकप क्यों कराना चाहते हैं? क्योंकि मुझे इस मेडिकल रिपोर्ट पर भी शक है मिला और मुझे शक है कि ये रिपोर्ट दे । डॉक्टर और यश राज खन्ना की मिलीभगत का तो का नमूना हो सकती है । आॅर्ट यश राज खन्ना बरतनी जोर से चल रहा कि कोर्ट रूम की दीवार तक गलती से लगे ऍफ सिर्फ मेरे ऊपर ही नहीं बल्कि एक लेडी की ईमानदारी और उसके नोबल प्रोफेशन पर भी इल्जाम लगा रहे हैं । अगर वो सोचते हैं कि ये मेडिकल सर्टिफिकेट डाली है तो खुशी खुशी मंत्रा का दूसरा चेकप करा सकते हैं । मुझे कोई ऐतराज नहीं लेकिन वो एक बात याद रखें अगर दूसरी मेडिकल रिपोर्ट में भी यही बात साबित होती है तो मैं मैं लेडी डॉक्टर की तरफ से प्रॉसीक्यूटर साहब पर न सिर्फ मानहानी का दावा दायर करूंगा, बल्कि इस वक्त उन्होंने अपने जिस पर ये जो काला चोगा पहन रखा है ना उसे भी इसी भरी अदालत के अंदर उतरवा लूंगा । लॉट क्योंकि इन्होंने ऍम डॉक्टर कि कर्तव्य परायणता और उसकी ईमानदारी पर लगा है । इसलिए इल्जाम छमा के काबिल नहीं, माफी के काबिल नहीं । अब पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के छक्के छूट गए, उसकी एक सौ से ऊपर तो दूसरी नीचे रह गई । मिस्टर पब्लिक प्रोसिक्यूटर जज ने सरकारी वकील की तरफ देखा क्या अभी भी मंत्रा का दूसरा मेडिकल चेकअप कराने के इच्छुक है तो जी नहीं बिल्कुल नहीं फॅस । खन्ना के होठों पर विजयी मुस्कान दौड उसके बाद जज ने अपना फैसला सुनाया । मिस्टर कुलभूषण पर लगाया गया कोई भी अपराध अदालत में साबित नहीं हो सकता है । इसलिए या अदालत मिस्टर कुलभूषण को चीना पहलवान की हत्या का इल्जाम से बॉल ॅरियर करती हैं । लेकिन मिस्टर कुलभूषण ने दिल्ली परिवहन निगम की बस में बिना टिकट यात्रा करके जरूर कानून का उल्लंघन किया है । इसलिए या अदालत मिस्टर कुलभूषण को एमवी ऍम की धारा एक सौ अठहत्तर के अंतर्गत बिना टिकट यात्रा करने के अपराध में पांच सौ रुपये जुर्माना पंद्रह दिन बामुशक्कत सख्त कैद की सजा सुनाती है ऍम कोर्ट में जुर्माने की राशि जमा कर दी । इस तरह कुलभूषण कानून के शिकंजे में फंसने के बावजूद पाँच निकला । पहले ही पेशी पर बच निकला मगर नहीं कुलभूषण बच्चा कहा था सच्चाई तो यह है कानून के शिकंजे से निकलने के बाद वो एक और ऐसे बहाना शिकंजे में जहाँ पैसा उस शिकंजे में फंसने से बेहतर तो यही था वो कानून के शिकंजे में फंसा रहता हूँ । बढा कुलभूषण के साथ हृदयविदारक और आश्चर्य से बडी घटनाओं का दौर जारी रहा । आगे भी ऐसी ऐसी सनसनीखेज घटनाएं उसके साथ घटी जिन्होंने उसे लाकर रख दिया । जी जी तुम्हें क्या क्या मंत्रा अदालत के प्रांगण में आते ही कुलभूषण मंत्रा पर बस पढाओ इतना बडा झूठ क्यों बोला तुम? नहीं तो और क्या करती मैं अदालत उन्हें फांसी की सदस्यता देती और मैं चुप रहती खामोश रहती है लेकिन लेकिन इतना बडा झूठ मंत्रा दुनिया क्या कहेगी कितनी उंगलियां उठेंगी तुम्हारे चरित्र पर? मुझे लोगों की परवाह नहीं है मुझे सिर्फ तुम्हारी परवाह है । मैं दुनिया के बगैर रह सकती हूँ अगर तुम्हारे बिना नहीं रह सकती । मंत्रा कुलभूषण की आवाज कम कर पाऊ थी और फिर एक झूठ से जिंदगी कहीं ज्यादा बडी होती है । भूषण लेकिन लेकिन मैं पूरी तरह निर्दोष कहाँ था? कुलभूषण का स्वर्ण आत्मग्लानि से भर गया । कानून से छिपकर लाश ठिकाने लगाना भी तो आखिरकार एक अपराधी है । नहीं है अपराध ऐसे अपराध दुनिया करती है । भूषण तुमने सिर्फ लाश ठिकाने लगाई थी और वो भी दौलत के लिए धनवान बनने के लिए । दुनिया पैसा कौन सा अपनी जो दौलत के लिए बात नहीं करता हूँ । कुलभूषण हैरान निगाहों से मंत्रा को देखने लगा । लेकिन लेकिन तुमने खन्ना जैसे बडे वकील की फीस कहाँ से भरेंगे? मैंने फिर ऍम मुत्र चुकी नहीं तो कितना भरे हैं? कुलभूषण बोला मुझे क्या पता किसने भरी है? मंत्रा की आवाज में साफ साफ है रानी थी मैंने तो उसे ही पैसा भी नहीं दिया । अब कुलभूषण के दिमाग में फिर से धमाके होने लगे । उसे अपने कानों पर्रिकर क्युकी ना हुआ । एक नए माया जाल की शुरुआत हो चुकी थी । ऍम खन्ना खुद मेरे पास किशनपुरा में आया था । मंत्रालय आगे बताया, मैं तो उसे जानती तक नहीं थी । उसने मुझसे कहा कि कुलभूषण को अदालत से रिहा कराने के लिए उसे मेरी गवाही की जरूरत है । मैं फौरन तैयार हो गयी । इंकार का प्रश्न ही नहीं था । उसने तुमसे अपनी फीस वगैरह के बारे में कोई बात नहीं कि कुलभूषण का कौतूहल पडता जा रहा था । नहीं उसने मुझे इस बाबत कोई बात नहीं । ये शायद खन्ना ने मुझे बस इतना कहा कि वह तुम्हारा केस लड रहा है । मुझे तो उस मेडिकल रिपोर्ट के बारे में भी कुछ मालूम नहीं था जिसे यशराज ने अदालत में पेश किया । मुझे गवाह के तौर पर जो बयान देना था । खन्ना ने इस बयान की डिटेल भी मुझे बीच रास्ते में अपनी कार के अंदर बताएंगे । आप कुलभूषण रह गया, बिलकुल सर उसे लगने लगा । कुछ होने वाला है कुछ बेहद चौका देने वाला । तभी कुलभूषण ने यश राज खन्ना को कोर्ट रूम से बाहर निकलते देखा । वो आपने कुछ वकील, मित्रों और प्रशंसकों से घिरा उसी तरह बडा चला रहा था । कुलभूषण उस तरफ तेजी से कदम बढाए । वकील साहब कुलभूषण जैसा खन्ना के सामने पहुंचकर बोला आपने बिना फीस लिए मेरा जो केस लडा, एहसान ना आपका जिंदगी भर नहीं उतार सकता । हाँ, सच मुझ पर रिश्ते हैं । बिना फीस लेके सडक इस राज खन्ना के नेत्र यू हैरानी से बातें मानो उसमें कोई बहुत चौका देने वाली पांच सुन ली हो तो इस तरह का आसान तो मैंने आज तक अपनी पूरी लाइफ में कभी किसी पर नहीं किया । बंद हूँ । आज से पाँच साल पहले जब मैंने जिंदगी में पहली बार वकील का एक काला चोगा पहना था, तभी एक सौगंध खाई थी कि बिना फीस लिए मैं अपने सके, आप कभी किस नहीं लडूंगा और अपने उस फैसले पर मैं तो आज तक अटल हूँ । इसका मतलब आपको फीस मिल गई । कुलभूषण के मुझसे तेज इस बारी छोटी हैं । कुल मिलके बंद हूँ । अगर मुझे फीस मिलती या अगर मुझे कोई तुम्हारे किस पर पॉइंट ना करता हूँ तो मुझे बना तुम्हारा किस लडने की क्या जरूरत थी? है एक क्रिमिनल लॉयर हो बंधु, कुछ समाजसेवक थोडे ही हूँ लेकिन मेरा केस लडने की आपको कितनी फीस मिली? पांच लाख रुपए वो पहुंची हक कुलभूषण के नेत्र ऍसे उबले संभाल के सफल के बंधु पांच लाख का नाम सुनकर शायद तुम्हें मिर्गी का दौरा पड गया लगता है । लेकिन आपको इतनी रकम किसने दी? साहब, इसमें आपको मेरे किस पर क्या एक हमारे तुम्हारे जैसा ही संपर्क आदमी था । उसी ने मुझे तुम्हारे किस पर किया था । कुछ साथ ही का नाम बता सकते हैं । उसके एड्रेस क्या करोगे? उसका नाम और एड्रेस जानकार उसका धन्यवाद अदा करूंगा । साहब उस फरिश्ते को दंडवत प्रणाम करूंगा जिसने मेरी जैसे मामूली आदमी की जिंदगी बचाने के लिए अपने पांच लाख रुपये दांव पर लगा दी । वैसे भी कम से कम एक बार मुझे फरिश्ते की सूरत तो देख नहीं चाहिए हैं । तो तुम ठीक रहे तो बंद हूँ । यश राज खन्ना ने अपना सोने के प्रेम वाला ॅ क्या यही वह पल था जब किसी वाहन का जोर जोर से दो बार हॅालीवुड बेहद खास स्टाइल में बच्चा था । जिस राज खन्ना और कुलभूषण दोनों में चौकर हर उनकी दिशा में देखा । स्पोर्ट के कच्चे प्रांगण में ही सफेद रंग की एक बॉर्डर सिटी कार खडी थी और उसी कार में बैठे व्यक्ति ने जोर जोर से दो बार हॉर्न बजाए थे । खन्ना से दृष्टि मिलते ही वो मुस्कराया लो बंद हो खन्ना के होठों पर भी मुस्कान थोडी थी तो अभी मुझे उस व्यक्ति के बारे में पूछ रहे थे ना जिसमें मुझे तुम्हारे किस पर क्या और फीस के पांच लाख रुपये दी । वो देखो यही हो सकती है कुलभूषण मैं आश्चर्यचकित ने कहा उसको उस व्यक्ति को देखा वो एक हष्ट पुष्ट शरीर वाला कब्जावर किस्म का आदमी था । उस से शरीर पर शानदार थ्री पीस सूट पहना हुआ था और आंखों पर काले रंग फॅस चढा रखा था कुलभूषण के लिए वह बिल्कुल अजनबी आदमी था । उसने जीवन में पहले कभी उसकी शक्ल तक नहीं देखी थी और इस आदमी ने आपको में राकेश लडने के लिए आप क्या हाँ लेकिन मेरा तो उससे कोई वास्ता नहीं । अब राइस से कोई वास्ता ना हो बंद हूँ । अगर हो सकता है कि उसका तो भरे से कोई वास्ता हूँ । कभी कार में बैठो शादी ने फिर सूर जोर से दो बार हॉर्न बजाया जाओ भाई खन्ना ने उसका कंधा थपथपाया वो तो मैं ही बुला रहा है । लेकिन देखो मैं जब जून सवाल पूछता हूँ उसी से पूछा तो भारत सवालों के जवाब वही बेहतर दे सकता है । कुलभूषण मारे मारे कदमों से कार की तरफ पडा । बचाने क्यों से किसी भारी खतरे का एहसास हो रहा था और सुनाओ खन्ना की आवाज सुनकर कुलभूषण की तरफ फिर झटके मैंने तो मैं बचाने के लिए कोर्ट में जो मनगढंत कहानी सुनाई थी । मैं समझता हूँ कि उससे तुम्हारी भावनाओं को काफी ठेस पहुंची है । उसके लिए मैं तुम से माफी चाहता हूँ । लेकिन अगर सच पूछते हो तो तुम्हें बचाने के लिए इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था क्योंकि काफी सबूत तुम्हारे खिलाफ अदालत में इकट्ठे हो गए थे । किस राज खन्ना ने आगे भी कुछ कहा लेकिन वो सब कुलभूषण ने नहीं सुना हूँ क्योंकि तभी उसने बल्ले को बडे खतरनाक अंदाज में लंबे फल वाला चाकू खोलकर खन्ना की तरफ लगते देख लिया था । उसके चेहरे पर हवानी तरस रही थी । वो सच्चा गंदा नजर आ रहा था ना साहब कुलभूषण चीखता हुआ यश राज खन्ना के ऊपर युद्ध की तरह चपटा बच्चों खन्ना साहब लेकिन वो खानदान को बच्चा पता उसके पहले ही बल्ले उसके सिर पडता चढा अगले ही पल बल्ले बच्चा को हमें इस तरह बहुत है जैसे आकाश में बिजली कौन हूँ? और फिर पलक झपकते ही खन्ना के सीधे ऍम ऍम तो पैसे की तरह टकराया । उसके हाथ में मौजूद फाइल छूट गई और उसके अंदर दबे कागज हवा में तितर पता हो गए जबकि बल्ले ने एक ही बार में सफर नहीं किया था । वो बेहद जुनूनी अंदाज में एक के बाद एक खन्ना के ऊपर चाहूँ से पार करता रहा । खन्ना की दहशत बात ठीक है । पूछती रही कोश्ती रही तो कॉलेज साफ ऍम भरता भी जा रहा था । मेरे चाचा के हत्यारे को बचाने के लिए झूठ बोलता है । नहीं छोडूंगा मैं तुझे नहीं छोडूंगा तो कानून का फैसला बदल सकता है । राम ज्यादा ही लेकिन पाल ले कर रही ॅ भीषण गर्जना करते हुए पालने का चाकू वाला हाँ बिल्कुल मशीनी अंदाज में खन्ना के सीधे पर पडने लगा । खून में लगभग हो गया । जब राज खन्ना वो टांगने खडा हर व्यक्ति तब भौचक्का किसी में भी इतनी हिम्मत ना हुई जो आगे बढकर बल्ले को दबोचे उठाना साक्ष्य आपको बुरा ना की तरफ वार्ता हुआ बल्ले धर कुलभूषण की तरफ पालता है उसकी आंखों में खून ही खून था । छूट गए कुलभूषण के जिस्म का ही एक रूम खडा हो गया । अलग हलकट पहले अर्थ विक्षिप्तों की भारतीय चिंदवाडा बात तो छह भी नहीं छोडूंगा नहीं है । कुलभूषण हाय तौबा मचाता वहाँ से अनजानी दिशा में भागा और उसके पीछे पीछे बल्ले लडका सच ऍम सवार था । कुलभूषण को अपना दल दहलता सा लगा उसके रूम फना हो रही थी । मैंने चीन पहलवान का खून नहीं किया । मैं बेकसूर हूं प्रतोष हूँ ऍम धुआधार रफ्तार से दौडती हुई सफेद रंग की वही होंडा सिटी कुलभूषण के नजदीक आ कर रखी फॅार आ जाऊँ साथ ही वही है जब भी शक से लाया था कुलभूषण फौरन लपक कर कार में सवार हो गया । उसके बाद कहाँ किस तरह धुंआदार रफ्तार से दौडती उसके नजदीक आई थी । वैसी धुआंधार रफ्तार से आगे ही चल रही है फॅार देखा तो पाया इस्पेक्टर योगी एक किसी जिंदगी तरह पे बना फुर्ती से दौडता हुआ वोट के प्रांगण में प्रकट हुआ । उधर तो वहशी बल्ले के ऊपर एक कम मित्र की तरह झगडा तो दस मिनट तक सफेद रंग की होंडा सिटी का दिल्ली की विभिन्न सडकों पर दौडती रही कुलभूषण जो फूल देर पहले पूरी तरह हाफ रहा था, बेहद डरा हुआ था । वो भी अब अपने आप को काफी हद तक संतुलित कर चुका था । बहुत कैसे उस के करीब से गुजर गई थी । कैसे वो आज मरते मरते बचा था । कुलभूषण के होश जब थोडे से संतुलित हुए तो उसमें उस अजनबी व्यक्ति को देखा जो वैन ड्राइव कर रहा था । अगर उस अजनबी के शानदार कपडों को नजर अंदाज कर दिया जाए तो वो कोई धनवान कम और कोई गुंडा मवाली ज्यादा नजर आता था । पांच । बिरादर मुझे घूर घूरकर क्या देख रहा है? और जब भी थोडे कठोर ऍम बोला कुछ नहीं फिर भी कुछ तो ऍम मैं याद करने की कोशिश कर रहा हूँ साहब मैंने आपको आज से पहले कहाँ देखा है या फिर हमारे बीच क्या संबंध है? अच्छा भी मुस्कुराये ज्यादा है । कुछ नहीं कुछ याद नहीं आ रहा मैं तुम्हारी कुछ मदद करूँगा । किस मामले तुम्हारी याददाश्त वापस लाने में अपने आप को आइडेंटिफाई करने में हम क्यों नहीं जरूर मदद की जीत तो सुना इरादा तुम खामोखा अपने दिमाग पर जोर डाल रहे हो । खामोखा परेशान हो रहे हो क्यों? क्योंकि निरादर तुम्हारे और मेरे बीच कोई संबंध नहीं है । हम दोनों आज से पहले कभी मिले भी नहीं । फिर ऐसी परिस्थिति में तुम अपने दिमाग पर जोर डालकर हम यहाँ परेशान ही तो हो रहे हो । अब कुलभूषण दंग रह गया । कार अभी भी तूफानी गति से सडक पर दौड रही थी । आपके मेरे बीच सब कुछ कोई संबंध नहीं । कुलभूषण ने पुनः हैरतंगेज स्टोर में पूछा अरे बिल्कुल भी नहीं मिला जाएगा । हमारे भी संबंध क्या खाते हो ना तो आज तुम्हारी सूरत में पहली बार देख रहा हूँ । कुलभूषण की कौतूहलता अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई । अगर हमारे बीच कुछ संबंध नहीं चाहते तो आपने मुझे छुडाने के लिए ये शायद खन्ना जैसे महंगे वकील को अप्वाइंट किया और से पांच लाख रुपए की बडी धनराशि फीस के तौर पर क्यों दी? ब्लॅक ये दुनिया ना बडी निराली है इस दुनिया के दस्तूर पडे निराले हैं यहाँ कब कौन किस पर मेहरबान हो जाए कुछ पता ही नहीं चलता । लेकिन मुझे ये तो मालूम पडे साहब कि आपने मेरे ऊपर वो रकम खर्च क्योंकि अरे अब वजह तो मुझे भी नहीं मालूम । असली वजह तो उस से ही मालूम है जिसने ये सारा इंतजाम किया है क्या नहीं यानी कुलभूषण उछल पडा यानी वो व्यक्ति कोई और है जिससे मुझे आजाद कराया है । इतना अजनबी सहजभाव से बोला वो व्यक्ति कोई और ही है । मैंने यह शायद खन्ना को तुम्हारे केस्पर अप्वाइंट जरूर किया था लेकिन मुझे उसको अप्वाइंट करने का आदेश किसी और से मिला था । इसी तरह मैंने यश राज खन्ना को तुम्हारा तेज लडका के लिए पांच लाख की रकम दी । जरूर ऍम रिजेक्ट से नहीं निकली थी । मैं तो सिर्फ एक जरिया हो । मैंने तो महज एक बिचौलिये की भूमिका निभाई है । कुलभूषण का दिमाग में जोर जोर से कोई चक्कर ही चलने लगा । उसे लगता लगा अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो पागल होने से कोई नहीं बचा सकता । कितना लेकिन फिर वो कौन है साहब? कुलभूषण बुरी तरह लाइफ में बोला उसने मेरी मदद की । इसने मुझे आजाद कराया । सब रख बिरादर सब्र । अभी मालूम हो जाएगा कि वो समाज सेवक कौन है । महान रहनुमा कौन है? यही बोपल था जब आज नवीन ऑर्डर सिटी एक बेहद निर्जन सी जगह पर ले जाकर रोकती । फिर उसने कार के डैशबोर्ड के अंदर से काले रंग की चौडी पट्टी निकालकर कुलभूषण की तरफ बढाये लाओ फॅमिली को अपने आंखों पर बांध और खामोशी से सीट पर ले गया हूँ तो हत्या ऊपर बांध हूँ । कुलभूषण का दिल जोर से घर का था क्यों? क्योंकि जस्ट महान समाजसेवक है, तुम्हारी मदद की है उससे जो भी मिलता है इसी तरह मिलता है । खूब पर पट्टी बांधकर कुलभूषण के नेत्र और ज्यादा हैरानी से पढते हैं । हाँ, किसी से मिलने का ये कौन सा तरीका हुआ? देखो बिरादर बडे लोगों की हर बात अलग होती है । हर तरीका जुदा होता है । उनका ऐसा ही तरीका है । चलो जल्दी से आंखों पर पट्टी बान्धव उस पल कुलभूषण को न जाने क्यों फिर ऐसा ऐसा हुआ कि वह किसी नए चक्कर में फंसने जा रहा है । चक्कर के नाम से उसके रूम बुक आप अब जल्दी करो बिरादर नहीं । कुलभूषण भी शीघ्रतापूर्वक बोला मुझे कालीपट्टी अपने आंखों पर नहीं, बात नहीं । कैसे नहीं बात नहीं पडती । अगर पत्ती नहीं बात हो गई तो समाज सेवक से किस तरह मिलोगे । इससे तुम्हारी मदद की है । नहीं मिलना किसी से कुलभूषण एक कार के डोर की तरफ झपटा । उसने मेरी जो मदद की उसके लिए तुम उनसे मेरा धन्यवाद बोल देना । कुलभूषण डोर खोलकर तार से बाहर हो पाता ऍम उससे पहले ही अजनबी ने उसे बडी मोटी छब्बीस काली बन गया और वहाँ पे अपना फुर्ती से उसको पर यू झगडा जैसे चीन ऍम पडते पडती है । पलक झपकते हीं कुलभूषण की शर्ट का कॉलर अजनबी के फोन भी शिकंजे में था । फिर उसने कुलभूषण के शरीर को झटका दिया तो पीछे ऍम की सीट पर जा गिरा । ऍफ बैठा उसने उसके हाथों को बांध दिया । ऍम तो उस कालीपट्टी को कैसे अपनी आंखों पर नहीं बनता है और मुझे मुझे नहीं बनी पट्टी छोड दो मुझे और हम अच्छी चीज भीड जमा कर लूंगा । वो अजनबी के शिकंजे से मचल उठा, उसमें हाय तौबा मचा डाली । ठीक कभी आवेश में बुरी तरह बनना है । अजनबी का हाथ हवा में लहराया और फिर थोडा से कुलभूषण की खोपडी पर बडा तुरंत ही कुलभूषण की बोलती बंद हो गई । उसके नेत्र दहशत फट पडे और गर्दन ताकि तरफ भडक गई ही तमाशा तो सचमुच अब शुरू हुआ था

भाग 09

कुलभूषण की जितना जब धीरे धीरे लौटने शुरू हुई दुसरे महसूस किया कि उसका शरीर तब के पानी में बडा होने से खा रहा है । उसकी आस्था आस्था पढ के खोल नहीं । फिर वो टब में ही एक काम सोशल कर खडा हो गया तो हम उसके दमाद को झटका लगा । इस शक्तिशाली झटका उसके सामने अजनबी के साथ तो और व्यक्ति खडे थे उन्हें वहां देखकर वह हैरान रह गया । काफी बडा हॉल था इसकी छत डबल हाइट वाली थी और फर्स्ट काले पत्थरों का । उस हॉल के बीचोंबीच वो विशाल तब रखा था जिसमें वो थोडी देर पहले तक किसी लाश की तरह तरह रहा था । हॉल से जुडे हुए ही वहाँ कई सारे कमरे भी थे तो कुछ तुम कुलभूषण शक्ल सूरत से ही बेहद खास नजर आ रहे एक व्यक्ति की तरफ उंगली उठाकर बोला तो तुम तो ऍफ दीवानचंद ऍम होना जिसके पास में उस दिन नटराज की मूर्ति बेचने गया था । ऍम उसकी मुस्कान दिखते आप खतरनाक थी और तुम तक्षण । कुलभूषण ऍम साल के एक अन्य व्यक्ति की तरह होते हैं तुमको तुम सराफों के शराब सेट दीवानचंद होना वो भी तो समझ करा दिया । मैं पूछता हूँ मुझे यहाँ पे क्यों लाया गया है झुंजलाहट में कुलभूषण दौड कर ऍम पकडा दिया और पूरी तरह से जो डाला तो जब हम तो तुम तो मुझे उस व्यक्ति के पास ले जाने वाले थे जिसमें मेरी मदद की कुछ कानून के शिकंजे से छोडा । पश्चिमी ने कुलभूषण के हाथों से अपना गिरावाट थोडा और फिर उसे इतना तेज झटका दिया कि वह सीधा सेट दीवान चंद कदमों में जा गिरा । से दीवानचंद ही वो व्यक्ति है जिन्होंने तो भारी मदद की क्या मतलब रह गया? कुलभूषण ऍम तुम तुमने मेरी मदद की, तुमने मुझे आजाद कराया था क्यों? क्यों तुम में मेरी मदद की? क्यों मुझे आजाद कराया? बडी तू पागल हुआ है? नहीं बडी तो अपने आप को आजाद समझ रहा है । कुलभूषण साई हूँ मतलब बिल्कुल शाहब है साईं तो आजाद हुआ कहा बडी हमारी मेहरबानी से तो सिर्फ जगह बदली हुई है । पहले तो पुलिस का मेहमान था अब हमारा मेहमान है । पेरिस में तेरी मदद कहाँ से आई नहीं कुलभूषण के नेतृत्व शक से फैल गए । यानी तुमने मुझे जहाँ जहाँ कैद करके रखा है । बिल्कुल सिर्फ दीवानचंद के होठों पर मजाक उडाने वाली मुस्कान दौडे । बडे कुलभूषण साइन हमने तुझे ये कैद इसलिए दी है ताकि हम उस से उन सवालों के जवाब दिलवा सकें जिन्हें इंस्पेक्टर योगी भी ना उगलवा सका । ऍम वालों के जवाब ऍम बडी यही कितने चीना पहलवान जैसे धुरंधर आदमी की हत्या क्योंकि नहीं तो उसकी हत्या करने के लिए प्रेरित किया ये काम मेरे जैसा सिंगल सिलेंडर का आदमी अकेले तो नहीं कर सकता । ये अपने हाथ का नाम बताओ जाएँ । बडी उस हराम के बच्चे का नाम बताया जिसने तो उससे ये खतरनाक जुर्म कराया । भूषण के पूरे शरीर में सनसनी दौड वो आतंकित होता था । कहने की जरूरत नहीं कि कुलभूषण एक नए चक्कर में फंस चुका था और जल्दी बोल जाएगी जल्दी जल्दी जवाब दे किसके कहने पर तूने चीना पहलवान का खून किया नहीं । कुलभूषण ऍम था फॅस क्या है वो ही मैं कहता हूँ दीवानचंद ऍम ठोककर कहा बडा कहते हैं लेकिन ये ये सब झूठ है । बहुत । तुम्हारे वकील प्रशांत खन्ना ने अदालत में साबित किया है कि मेरा चीता पहलवान के खून से कोई वास्ता नहीं था और इस संबंध नहीं था । मुझे तो जबरदस्ती स्टेट में फंसाया गया था । है । दीवानचंद की आंखों में शोले लपलपाते मेरी गोली मेरे कोई देता है बडी । यश राज खन्ना ने अदालत में जो कहानी सुनाई वो छोटी थी मनगडंत थी हकीकत यह ऐसा आएंगे बुधवार की राज्य आॅटोरिक्शा रीगल सिनेमा के सामने देखी गयी वो तेरी थी थोडी तो ये चीज ना पहलवान को वहाँ से लेकर भाग तो नहीं उसका खून क्या ऐसा मालूम है कुलभूषण जाएँ गुजरात मंत्रा के कोई बच्चा बच्चा नहीं होने वाला था ऍम मंडी हाउस जाने वाले मार्ग पर रोकी दोस्त ने मंत्रा चीनी पहलवान इलाज के ऊपर लेटी थी सब झूठ है क्यूट है ये सब सच है हरामी के बच्चे सब सच बडी दीवानचंद उससे भी ज्यादा जोर से चलाया था लेकिन लेकिन अगर ये सब सच है तो तो यशराज उन्होंने मेरे लिए अदालत में झूठ बोला । फिर वो तुम्हारा वकील था तुमने उसको किया था ऍम खन्ना ने वो झूठ मेरे कहने पर बोला ना ऍम बडी तभी तो पुलिस की कैसे आजाद होकर हम तक पहुंच सकता था । नहीं चाहे तो सारी हकीकत बुलवाने के लिए ॅ होना बहुत जरूरी था । लेकिन तुम चीना पहलवान की हत्या के बारे में गहन पूछताछ क्यों कर रहे हो? तो भारत से क्या संबंध था? संबन् दीवानचंद का चेहरा का एक धडक ज्वालामुखी बन गया । बडी तो मेरे और चीना पहलवान के संबंधों के बारे में पूछता है । नहीं शाही चीना पहलवान ताकत था मेरी तो मेरा साथ ही था । मेरा दया बाजू था थी चीन ऍम तुम्हारे साथ ही था ना सिर्फ साथी था बल्कि मेरा दोस्त भी था । बडी मेरी हर योजना को कामयाब बताता था । कुलभूषण की आंखों में आतंकी ऍम गई और अब उसे समझते देर न लगी । किस स्टेट दीवानचंद क्यों क्यों चीना पहलवान के हत्यारे के पीछे पडा था । ये बात भी तीन की तरह का दबाव में हलचल मचाती चली गई । किस सेठ ने यश राज खन्ना को पांच लाख रुपए की धनराशि उसके लिए नहीं दी थी बल्कि चीन पहलवान की रहस्यमय मौत की गुत्थी सुलझाने की राह में उसने वो धनराशि खर्च हुई थी । तुरंत ही कुलभूषण के मानस पटल पर उस दिन का दृश्य भी कौन था जब सीना चौडा कर दरीबाकलां स्टेट दीवानचंद के दुकान पर मूर्ति बेचने गया था । उसे कुछ भी याद आएगा जब उसमें सेल्समैन के सामने चीना पहलवान का नाम दे दिया था । चीना पहलवान का नाम सुनते ही उसके शरीर में कैसी बिजली दौडी थी । कितनी तेजी से वो मूर्ति लेकर अन्दर की तरफ भरा था । इसीलिए तब उन्होंने अपने कुछ साथियों को वहाँ बुलाया था क्योंकि उसने चीना पहलवान का नाम लिया था कुलभूषण के शरीर सही पश्चिमी की धाराएं बहने नहीं कितने बडे चक्रव्यू में फसता जा रहा था । वो कैसे इकतेफाक हो रहे थे । उसके साथ मूर्ति भी देखने गया था तो फिर हिमांचल की दुकान पर उसी की दुकान पर जिसका चीनी पहलवान साथी था चाहता हूँ हूँ हूँ । लेकिन धीरे से जी कहाँ साबित होता है कि चीन ना पहलवान का खून मैंने किया है । फॅमिली भूषण साइन बडी ये अदालत नहीं है या कुछ भी साबित करने के लिए दवाओं की जरूरत होती है । सबूतों की जरूरत होती है बडी चाहें हमें जो भी साबित करना होता है ना जिससे जो भी कुछ बुलवाना होता है दो ही झोपडों में कबूलवा लेते हैं । लटके काम पर तो बुलवा लेते हैं । हमजानी और भूषण के पूरे शरीर ऍफ की लहर दौड लेकिन ऐसा कुछ नहीं पडेगा । बहुत अजनबी ने उसके बाद बीच में ही काटते ये बडा गुरुघंटाल आती है जितना शरीर दिखाई देता है ना मौसम अपना चलता पुर्जा है उतना ही खौफ आती है । अच्छा फॅस अगर ये भला मानस होता तो इंस्पेक्टर योगी के सामने ही सब कुछ बता देता हूँ । तो मुझे तो बॉस मैं अभी इसकी ऐसी धुलाई करता हूँ कि सब कुछ बकता हुआ नजर आएगा । रहने दे रहने दें । बडी तू क्यों मार पिटाई करता है । क्यों झगडा पचास करता है और सलाम आना चाहती है । ऐसे ही सब कुछ बता देगा और स्ट्रेस तरह कुछ नहीं बताएगा । ठीक है ठीक है मैं ट्राई करके देखता हूँ । ऍसे कुछ बताया तो फिर तुम इसका जो मर्जी आये करना है तो ऍम फिर सेट दीवानचंद बडी शहर मिश्र जवानों से बता रहा हूँ तुरंत कुलभूषण के गले की घंटी मुँह उसे अपने देवता पूछ करते महसूस दिए और कहा है तो अपनी धुनाई करवाना चाहता ऐसा है जो अपने जिस्म का पलस्तर हटवाना चाहता है । बडी तो कबूल क्यों नहीं कर लेता है कि तुम नहीं चीना पहलवान का फोन किया है, फॅमिली नहीं किया । फॅमिली शुरू हो गया । ऍम चुका था । कुलभूषण चलता था । हाँ कार करता रहा टकराता रहा है लेकिन आज नवीन उसके दुर्दांत ऍम जब कुलभूषण की दवाई करते करते वो पूरी तरह हाफने लगती है तो वह फॅमिली फोन बहुत जैसे शीर्षक के कैबिन के पास ले गया । उस कारण को देख रहा हूँ । ये ऍम है । ऍम के अंदर बम करूंगा तो बहुत मांगेगा । दूस तरह लडते था जैसे रेगिस्तान की गर्म रेत पर मछली पडती है । अजनबी ने वो शब्द कहे और उसके पास कुलभूषण को शीशे का उसी ऍम । इतना ही नहीं उसे टाॅस अभी बंद कर दिया था । ऍफ प्लाइबोर्ड पर एक पैनल भी लगा था । प्रश्न अभी ने पैनल पर लगा एक सोच भी दवा दिया । ऍम के अंदर लगे एक इंच व्यास के दो पाइपों के अंदर से पीले रंग की गैस निकल कर के बाल भारती शुरू हो गई । वो ऍफ थी । कुछ देर बाद कब इनकी स्थिति ये हो गई । उसके भीतर मौजूद कुलभूषण दिखाई जब लगभग बंद हो गया अब ऍफ कैसी गैस दिखाई दे रही थी । कॅश तब ऍम में मौजूद गैस को वापस खींचने लगे थे जितनी तेजी से केवल के अंदर गैस पहली थी । उतनी ही तेजी से वो वापस हटने लगे । जल्दी सारी गैस के दिन के अंदर से गायब हो चुकी थी । और क्या इसके हटते ही केबिन में बंद कुलभूषण नजर आया । उस थोडी सी देर में ही उसकी चीन शीन हालत हो चुकी थी । वो कंट्री से बडा बडा जोर जोर से खास रहा था । डाॅन का दरवाजा खोलकर से बाहर कैसी क्या कुलभूषण जैसे ही बाहर के वातावरण में आया और जैसे ही बाहर के वातावरण में मौजूद ऍम उसके शाॅट करोड था उसे यू लगा मानो उसकी नस नस सुबह उठी हो । अंग अंग चलने लगा हो वो चीखने लगा सचमुच मछली की तरह छटपटाने लगा और अपने किस्म के एक एक अंग को झिंझोडने लगा ऍम कुलभूषण जाएँ बडी । अब तो तेरी अक्कल ठिकाने आईडी या अभी भी नहीं आई तो क्यों अपनी जान का दुश्मन बनता है । ऐसा ही जो अपनी हड्डी पसली बराबर कराता है । बडी अभी भी कुछ नहीं बिगडा बॉल फुटबॉल पड वरना हमारे पास तेरे जैसे मच्छर की जवान खुलवाने के ऐसे ऐसे नया भर सकते हैं कि दूर तो क्या तेरे फरिश्ते भी घबराकर बोल पडेंगे । फिर एक और ऐसी घटना घटी जिसने कुलभूषण को और एक चौका कर रख दिया । दरअसल स्टेट दीवानचंद ने अपनी जेब से एक मूर्ति निकली थी । फिर उसे कुलभूषण की पीडा से छटपटाती आंखों के फिर देखना चाहता हुआ बोला ऍम मूर्ति पहचान नहीं । वो वहीं नटराज की मूर्ति थी जिससे वो हडबडाहट में चोरी शौक पर छोड आया था । वादी शाही तो कुछ बोलता क्यों नहीं पहचानता है इस मूर्ति को हो अब वहाँ ये मूर्ति तेरे पास खांसी आई ऍसे चुराई थी, उन्हें तो नहीं चुराई हूँ हैं । ऍम दीवानचंद राॅकेट कटाए । पडी क्यों तेरी खार मसाला मांग रही है । यू तो मरना चाहता है तो मूर्ति तूने चुराई ऍम तो है तेरे अंदर इतना दम जो तो इस मूर्ति को चुरा सके और भूषण अपना हो सकती भेज दिए । बडी तो यही बात इंस्पेक्टर योगी के सामने बोल देगा । अपने बयान से करेगा तो नहीं तो कुलभूषण बगले झांकने लगा । एक बात बहुत भली भांति समझ चुका था । इससे दीवानचंद सिर्फ दिल्ली शहर के सर्राफों का सराब ही नहीं है बल्कि वो कोई बहुत बडा गैंगस्टर है रैकेटियर भी है ले ऍम उसके बाल पकडकर पूरी तरह से जुडे जिस मूर्ति को तू अपने द्वारा सुनाई गई बता रहा है न बडी वो नेशनल म्यूजियम की चोरीशुदा मूर्ति है और उन मूर्तियों को तूने नहीं चीना पहलवान के साथ मिलकर हमने चुराया था । हमने उन मूर्तियों की संख्या छह थी । कुलभूषण साइन जिन्हें चीना पहलवान हादसे वाली रात हमारे सुपर बॉस डॉन मास्टरों ने को सौंपने जा रहा था । लेकिन बीच रास्ते में ही तूने चीजें पहलवान की हत्या करके उससे वह सारी छह नटराज की मूर्ति ॅ ये बता ऍम कि वह छह नटराज कीबोर्ड क्या कहाँ है ऍम मूर्ति कुलभूषण नेत्र अचंभे से पहले उसे ऐसा लगा मानो स्टेट कोई भारी मजाक कर रहा था एक नटराज मूर्ति तो खुद सेठ के हाथ में थी फिर भी बाकी मूर्तियों की संख्या छह कैसे संभव थी? ऍम बडी जल्दी बहुत छह मूर्तियां कहाँ है था लेकिन अभी भी उन मूर्तियों की सबके अच्छे कैसे हो सकती है? साहब ये बता उन मूर्तियों ऑडिशन के अच्छे कैसे नहीं हो सकती और क्योंकि साहब एक मूर्ति तो तुम्हारे हाथ में ही है ये ये तो जयमूर्ति दिखाई देती है आप अब कुलभूषण के नेतृत्व और ज्यादा हर आने से पहले उसने अपने बल के फडफडाकर मूर्ति को देखा लेकिन वह शत प्रतिशत मूर्ति ही थी । नटराज जी आपने चित्ताकर्षक मुद्रा में विद्यमान वो क्षेत्र की मूर्ति दिखाई देती है साहब फौरन स्टेट दीवानचंद के भारी भरकम हथौडे जैसे हाथ का एक ऐसा झन्नाटेदार झापड उसके ऊपर पडा कि वह खडे खडे फिर इतनी की तरह हो गया उसकी आंखों के गिर रंग बिरंगे टाॅल आउट हैं ऍम जा रहे हैं बडी क्या तेरे को अब भी बोलती नजर आती है हाँ वहीं पूर्ति है है खडा हो छाप और उसके ऊपर बडे कुलभूषण ऍम हम जाते हैं ये नटराज मूर्ति जो तो हमारी जल्द शॉपर बेचने आया था भी तल की मूर्ति है सिर्फ पीतल की इस पर सोने का पानी चढा है । बडी अब ऍम रह गया उसका दल दिमाग पतली सी गडबडा कर दे रही हूँ साॅस क्यों के लिए तो बडा हंगामा हुआ जिनकी वजह से उसकी इतनी धुलाई हुई तो वोट पीतल कीजिए था तो कुलभूषण का दहाडे मार मार कर रोने को दिल चाहता हूँ और एक कुलभूषण साईं अब तो तेरी समझ में आया की मूर्तियों के अलावा भी देर बाद छह और नटराज मूर्तियां कैसे हो सकती हैं? बॅान्डिंग अब सीधे सीधे मुझे ये बताते तो उन्हें असली मोड दिया कहाँ छुपा कर रख छोडी है और ये भी बताया कि तुम्हें ये सारा नाटक किस लिए? क्या इस वास्ते चीना पहलवान से शुद्ध सोने की मूर्तियां हडपकर ये नकली पीतल की मूर्तियां बनवाई फिर उन्हें हमारी ज्वेलरी शॉप पर ही क्यों बेचने आया? पीछे कोई फॅार है बडी ये तरह अकेले का काम तो हर के नहीं हो सकता नहीं जरूर तेरे साथ कोई दुश्मन भी मिला है तुम भूषण साईं तो आज अपनी खैरियत चाहता है अगर तू अपने बॉडी के कलपुर्जों कोटवारा नहीं चाहता हूँ । जब जहाँ चुपचाप सहित मुझे मेरे दुश्मन का नाम बता दे सोने की मूर्तियों का एड्रेस बता दें और ना आज देरी हो नहीं सही फिर तो तू अपनी जिंदगी की किस्ती को डूबा समझ और भूषण है सब सब मिला पड गया उसे दूर दूर तक आपने छुटकारे के आसार नजर नहीं आ रहे थे या तो उन्हें होने की मूर्तियां मंत्रा के पास रख छोडी है नहीं और ऍम खडा हो गया फिर किसके पास रख छोडी है कही तूने उस आदमी के पास तो असली मूर्तियां नहीं रख छोडी जिसने इस पूरे खेल में हमारे खिलाफ देरी मदद की हो जाती नहीं यकीन मानो कोई नहीं है तो फिर ये करिश्मा कैसे हो गया? साइट बडी असली मूर्तिया की डर गई मेरे पास नहीं है हाँ वही तो मैं पूछ रहा हूँ ना चाहिए अगर तेरे पास नहीं है तो किसके पास है? राॅड भूषण ने अपने आपको विचित्र से थोडा मैं कैसा महसूस किया हूँ । मैं आपको बोल करता हूँ कि मैंने चीना पहलवान के ब्लॅक हाथ आई थी लेकिन मैं ईश्वर की सौगंध खाकर कहता हूँ कि मैं उसका खून नहीं किया । मैं खुद ही नहीं हूँ और जो मूर्तियां मेरे चीना पहलवान के ब्रिज कैसे हथियाई थी वह भी यही मूर्तियां थी । ये ये पीतल की मूर्तियां सही हाँ यही नकली मूर्तिया साहब अगर मुझे पहले से इस बात का पता होता कि ये मूर्तियां पीतल की है तो यकीन जानी है । मैं कभी चक्कर में नहीं पडता है । सेट्टी, वांचन सहित सेल्समैन और अजनबी की आंखों में भी अब हिरानी के निशान उभर आए । उन्होंने सवालिया निगाहों से एक दूसरे की तरफ क्यूट देखा । वहाँ वो इस बात की तस्दीक करना चाहते हो कि कुलभूषण की बात पर यकीन किया जाए या नहीं । नहीं तो ये बात तो साबित नहीं करना चाहता बिरादर! इस बार अजनबी बोला असली मूर्तियां तो चीना पहलवान का हत्यारा ले गया और वो असली मूर्तियों की जगह ब्रीफकेस में नकली पीतल की मूर्तियां रह गया । कुलभूषण की आंखों में देश ऍम लेकिन जल्दी उसकी आंखों से उच्च मत भी गायब हो गई । नहीं, ये नहीं उसका क्या नहीं हो सकता हूँ । यही कि जिसने चीज पहलवान का खून क्या वही उन मूर्तियों को भी ले उडा, यहाँ स्टेट दीवानचंद की आंखों में सस्पेंस के भाव पैदा हुए । बडी तेरे को या बात कैसे मालूम की वही उन मूर्तियों को डाले उडा क्योंकि साहब हत्यारे की दो गोलियां लगने के बावजूद भी चीनी पहलवान अपने पैरों पर दौडता हुआ मेरे ऑटो में आकर बैठा था । उस वक्त पूरे होशोहवास में था । अगर हत्यारे ने उसके ब्रीफकेस में से मूर्तियां निकालने की कोशिश की होती तो उसकी तरफ से जबरदस्त विरोध जरूर हो रहा था । फिर तुम लोगों को अखबार के माध्यम से इतना तो मालूम हो ही गया होगा की गोलियां चलने की आवाज सुनते ही फ्लाइंग स्पोर्ट की गश्तीदल गाडी फौरन तूफानी गति से गली के अंदर दौडी थी । अगर ये मान भी लिया जाएगा कि हत्यारे ने मूर्तियों को बदलने की हौसला बंदी दिखाई थी तब नहीं वो इतनी जल्दी तो अपना काम हरगिज भी अंजाम नहीं दे सकता था । गश्तीदल की गाडी गली में पहुंचने से पहले ही उसने मूर्ति अभी बदल दी और वहां से फरार भी हो गया । तीनों हैरतंगेज नजरों से कुलभूषण को देखने लगे । साहब कुलभूषण वातावरण को अपने पक्ष में होते देख गुलाम हत्यारा मूर्तियों को नाले उडा हूँ । इसका एक और पडोस पुख्ता सबूत मेरे पास है तो कैसा सबूत? जब चीना पहलवान मेरी ऑटो में आकर बैठा था कुलभूषण उन्हें एक एक बात अच्छी तरह समझौता हुआ बोला तो उसने ब्रीफकेस बडे तस्कर अपने सीने से चिपका रखा था । अगर हत्यारे उसके ब्रीफकेस के भीतर से असली मूर्तियां निकाल ली थी तो चीना पहलवान को क्या जरूरत थी? कि वह गोलियां लगने के बावजूद भी उन ब्रीफकेस को पसीने से चिपटाए रखता है । लेकिन मैंने खुद मैंने खुद अपनी आंखों से देखा था । साहब ॅ को अपने सीने से चिपका रखा था बल्कि अपने जीवन की आखिरी स्वास्थ तक भी ऍसे चिपटाए हुए था । कुलभूषण की बात सुनकर उस हॉल जैसे बडे कमरे में सन्नाटा छा गया और पूरे घटनाचक्र से तो एक और बात भी साबित होती है । दीवानचंद बोला कौनसी बात ये ही जो मूर्ति को कम से कम छीना पहलवान ने भी नहीं बदला था क्यूँ बडी अगर उसने हो मूर्तियां बनी होती तब उसे भी क्या जरूरत पडी थी जो वो ब्रीफकेस को अपने जीवन की गिरी साल तक बच्चे की तरह चीनी चिपटाए रखता हूँ । उसके द्वारा आखिरी साल तक बीस केस को अपने सीधे से चिपटाए रखना ही इस बात को साबित करता है कि चीन ना पहलवान नकली मूर्तियों की तरफ से पूरी बडे अनजान था । फॅमिली तरफ में वाकई जानते उस तरफ में सभी को प्रभावित किया । अब सवाल यह था कि अगर वह मूर्तियां चीना पहलवान ने नहीं बदली थी तो फिर किसने पतली और पत्नी भी ढंग से की? कितना पहलवान कुश्ती कानों कान भनक तक नहीं हुई और भूषण तभी सेल्सियन कुलभूषण से संबोधित हुआ । एक बात बताएगा मुझे तो बुधवार की रात अपनी ऑटो लेकर रीगल सिनेमा के सामने जो खडा था । जबकि यूनियन की तो हडताल चल रही थी । आप कुलभूषण ने सारा घटनाक्रम बयां कर दिया । सब सच बता दिया । यानी यानी तो वहाँ से इसलिए खडा था ताकि नाइट शो खत्म होने पर तो वहाँ से कुछ हमारी ले जा सके और अपनी उधारी चुकता कर सके । हाँ, इसके अलावा कोई और बच्चे तो नहीं बिलकुल नहीं । अरे बडी तेरे को ये भी मालूम है एक का एक सिर्फ दीवानचंद ॅ कटाकर बोला हूँ कि अगर तेरे को वहाँ खडा ऑटो रिक्शा वाला तेरा कोई भाई बन देख लेता तो यूनियन तेरी क्या दुर्गति होती? प्रदूषण अपने हो इसीलिए ऍम वो हडताल तोड देते । जुलम में तेरे खिलाफ कोई सख्त कदम उठा सकते थे तो यूनियन मेंबरशिप से बर्खास्त कर सकते थे, लाये नहीं । बडी वो तेरह दिल्ली शहर में ऑटो रिक्शा चलाना बंद करा सकते थे, जानता हूँ अरे सबको जानते बूझते भी तूने ऐसा किया नहीं । बता सकता है कि वो बडी क्योंकि मैं उस समय नशे में था और भूषण बोला उसने मुझे मालूम नहीं था कि मैं क्या करने जा रहा हूँ । उस वक्त मेरे ऊपर एक भूत सवार था । मैं किसी भी तरह दारू की उधारी चुकाने ऍम फिर मारने दौडा राॅक दीवानचंद उसे बीच में ही पकड लिया । जानता रहे बॉस ऍम इस साला देखने में जरूर डेढ बस लिखा है लेकिन आपका हरामी और कमीना है नहीं पहले ही कैसी शानदार कहानी गढ के लाया कंजर उसने उस समय चलाते हुए कुलभूषण के पेट में भाग चढ नहीं उन्हें हाल कबाड का टकराया कुलभूषण ऍम भूषण साई बडी में तेरे को आखिरी वार्निंग देता हूँ जो बात है सच सच बता देंगे क्योंकि हमारी निगाह में और कोई ऐसा शक नहीं जो मूर्तियां बदलने की जरूरत कर सकें या जिसे मूर्तियां बदलने का मौका हासिल हो । बडी सारे हालात जी जी कर दुनिया ही अपराधी ठहरा रहे हैं और कह रहे हैं कि असली मूर्तियां अभी भी मेरे पास है वो सब मेरे पास मूर्तियां नहीं है । अगर मेरे पास असली मूर्तियां होती तो मुझे क्या जरूरत थी जो पीतल की मूर्तियां बनवाता फिर मूर्तियों को बनवाकर मैं तुम्हारी जल्दी शौक परदेश में भी जाता है । जो कहना तो साहब कह दिया अगर आप लोग अभी मुझे अपराधी मानते हूँ, अपनी मुझे कसूरवार समझते हो तो लोग मेरा जो मर्जी आये करो फॅालो मुझे कहने के साथ कुलभूषण वही फर्श पर हाथ पैर फैलाकर लेट गया और धीरे धीरे सुबह उठने लगा । तीनों की हालत अजीब हो गई तीनो तब क्या करें चाहें अभिषेक दीवानचंद उसकी पीठ थपथपाई चल खडा हूँ ट्यूशन खडा नहीं हुआ अरे बडी अब खडा भी हो तो नखरे करता है दीवानचंद से जबरदस्ती खडा किया इधर कुलभूषण सुख क्या लेता हूँ अपने स्थान से उठा चल अभी रोना धोना बंद कर और चुप चाप ये बता दू ने इसके साथ की बाकी पांच मूर्तियां कहाँ छुपा रखी है मंत्रा के पास है वो वो छुट्टियाँ हमे ला कर देगा । भूषण सुबह हुए ही स्वीकृति में गर्दन हिला नहीं ये मालूम होने के बाद वो नटराज की मूर्तियां वास्तव में सोने की नहीं बल्कि डिजिटल की हैं । अब उसे उनका करना भी किया था ।

भाग 10

नदी का नाम दुष्यंत पांडे था । दुष्यंत पांडे ही कुलभूषण को सफेद रंग की होंडा सिटी कार में बिठाकर वापस किशनपुरा तक ले गया । गार उसने किशनपुरा के बाहर ही खडी है फिर वो कुलभूषण की आंखों से कालीपट्टी खोलता हूँ बोला क्या मंत्रालय मूर्तियां लेकर आओ मैं नहीं खडा हूँ कुलभूषण बडा हैरान हुआ ऑपरेशन पांडे ने उसके जाने और वापस आने की बात को जैसे फॅमिली के साथ कहीं थी महान उसे इस बात का पूरा भरोसा था कि वो लौट ही आएगा, फरार नहीं होगा । कुलभूषण हैरान से मुद्रा में चुप चाप कृष्णपुरा की तरफ पडा और स्वर्ण कुलभूषण के कदम काट के अगर साले तूने स्टेट जी के संबंध मंत्रा के सामने जब किसी के सामने एक शब्द भी अपनी जबान से बाहर निकाला तो तेरी खैर नहीं चलो अब कोर्ट यहाँ से और जल्दी लौट करा । कुलभूषण तेज तेज कदमों से कृष्णपुरा की तरफ बढ गया । उस वक्त पूरे किशनपुरा में गहन अंधकार व्याप्त था । रात के बारा या एक बजे का वक्त रहा होगा । कुलभूषण मंत्रा के घर के सामने पहुंचा । उसने दरवाजा सब तबाह कौन? अंदर से फौरन मंत्रा की आवाज सुन रही मैं भूषण तुरंत साकल खुलने की आवाज भी और ऍम दरवाजा खुल गया तो अंदर कुलभूषण को देखते ही मंत्राक्षत चेहरा खिल उठा था । कुलभूषण अंदर कदम रखा । पूरे घर में काजली अंधेरा व्याप्त था तो यही है रोशनी का इंतजाम करती हूँ । मंत्र तेजी के साथ अब पेट्रोमैक्स की तरफ बडी और चल ही उसने पेट्रोमैक्स चला दिया । पेट्रोमेक्स चलते ही चारों तरफ रौशनी फैल गई । कुलभूषण एकदम से इतना पढा रोशनी फैलते उसने देखा की मंत्रा के साफ सुथरे कपडों पर आंसुओं की ढेर सारी पूंजी जमी हुई थी । जरूर मंत्रा । उसके वहाँ आने से पहले काफी देर तक रोती रही थी । नहीं इस तरह का देख रहा है । मंत्रा बोली कुछ नहीं कुछ तो टाइम क्या हुआ? एक कुलभूषण विषय बदलकर बोला बाहर तो सब की आ रही है । मंत्र का चेहरा सुख गया । अपनी लाइट नहीं है कि भूषण मंत्रा बोली क्यों आज दोपहर पड गई लाइट कर दी । कुलभूषण इस तरह चौका मानो से बिच्छु काटता हूँ मगर क्यों तो इस बात को छोडना भूषण तो मुझे ये बता क्या सुबह से कहाँ गायब था? मैं सारा दिन परेशान होती रही । देख मंत्रा मैं तेरे हर सवाल का जवाब दूंगा, लेकिन पहले मुझे ये बता की लाइट क्यों कटेगा? कैसे कटती मंत्री थोडा कुपित होकर बोली मैंने पिछले दो महीनों से बिजली का बिल नहीं भरा था । इस बृहस्पतिवार को बिल जमा कराने की आखिरी तारीख थी लेकिन मैं नहीं जमा करा सके । इसलिए आज बिजली विभाग के दो कर्मचारी आए और लाइट काट गए तो बृहस्पतिवार बिल जमा कराने की आखिरी तारीख थी । कुलभूषण के मुँह सारी छोटी था कहीं नहीं तूने बिल की रकम से ही तो मेरी उधारी नहीं चुका दी । मंत्रा मंत्रा नजरें झुकाए खडी रही जबकि कुलभूषण पडा पडा था लेकिन वो तो अपने ऑफिस के साथियों से भी तो रुपए लेकर ब्लॅाक तिथि मंत्रा बहुत मुझे कभी रुपये नहीं देंगे क्यों? क्योंकि आज जब ऑफिस के बॉस को ये मालूम हुआ कि मैं तुम्हारे बच्चे की कुमारी माँ बनी थी तो तो उन्होंने मुझे नौकरी से भी निकाल दिया । ये ऍम कुलभूषण का सीना छलनी होता चला गया । कैसा कहर टूट रहा था उसके ऊपर आपने इन सब बातों को छोड भूषण और मुझे ये बता की अदालत में जब बल्ले ने तेरे ऊपर हमला किया था तो वो जख्मी तो नहीं हुआ । कैसा खतरनाक चंदा बन गया था बल्ले का एक फिर वकील वषाज् खन्ना को तो उसने वहीं चांस मार डाला ना खन्ना पर गया और भूषण के नेत्र दहशत से बातें तुझे क्या लगता है वो इतनी चाकू लगने के बाद भी जिंदा रह सकता था । मैंने खुद खुद उसकी लाश देखी थी और और दिल्ली का क्या हुआ वो तो तभी इंस्पेक्टर योगी को धक्का देकर फरार हो गया था तो पुलिस बल्ले के पीछे लगी होगी । एक बल्लेबाज दोपहर मेरे पास भी आया था तो तुम्हारे पास क्यों होता था? अगर उसने एक हफ्ते के अंदर अंदर तेरह खून न कर दिया तो वो अपने आप से पैदा नहीं और भूषण के शरीर में खौफ की लहर दौड गई । उसके गले की घंटे जोर से ऊपर उछली लेकिन लेकिन जो आदमी तो अदालत से लेकर भारत भूषण तो वो कौन था? और और सारा दिन कहा रहा और भूषण उस दिन की घटना तमाम घटनाएं मंत्रा को बता दूँ । मेरे परमात्मा मंत्रा के नेत्र ऍम मूर्तियां पीतल की गई । हाँ जाॅन मंत्र स्तर पकडकर हम सब वहीं चारपाई पर बैठी हूँ । भगवान हमारी कैसे परीक्षा ले रहा है तो कौन से पापों की सजा दे रहा है । हमें एक मंत्र हूँ । अब इस तरह माता मनाने से कुछ नहीं होगा तो जल्दी से मुझे मूर्तियां लेकर देखो । बाहर दर्शन पांडे मेरा इंतजार कर रहा है तो तो मूर्तियां लेकर वापस स्टेट के पास जाएगा तो पागल हुआ है क्या? तो हो गया तेरा वो भले लोग नहीं अभूषण तो जब वहाँ किसी भी हालत में लौटकर नहीं जाना चाहिए लेकिन जैसा कह रही हूँ मैं सकता । भूषण इसी में तेरी भलाई है । एक बात बोलूँ क्या मुझे तो लगता है जिसे बुधवार की रात से आज तक तेरे साथ जितनी भी घटनाएं घटी है, उस टॉपिक फर्क नहीं । आभूषण जरूर किसी की साजिश का हिस्सा है । कोई किसी चक्र में फंसाना चाहता है तुझे ऍम फांसी का मुझे देख भूषण तो मैं भी नहीं जानती है । लेकिन मेरा तो चीज चीखकर गवाही दे रहा है कि एक के बाद एक ये सनसनीखेज घटनाएं ऐसे ही नहीं घट रही । इन घटनाओं के पीछे जरूर कोई गहरी साजिश है । मुझे तो सारी साजिश मैं सबसे बडा हाथ उस सेट का ही नजर आता है । फॅस हाँ, वहीं तो भूषण सोच में डूब गया । पिछले एक घंटे से यही बात उसके दिमाग से घूम रही थी । लेकिन लेकिन फिलहाल मुझे वो मूर्तियां लेकर तो सेट के पास जरूर जाना पडेगा । जो फॅमिली यहाँ आ जाएगा उसका भी एक तरीका है । क्या हम अभी की अभी किशनपुरा छोडकर कहीं बाहर जाते हैं? नहीं नहीं हो सकता । मंत्रा तो लोगों को नहीं जानती हो । बडे खतरनाक लोग हैं । मैं यहाँ से बहुत चाहे कहीं भी चार्ज हूँ तो मुझे जरूर ढूंढ निकालेंगे । और इतना ही नहीं इस वक्त मेरे ऊपर थोडा बहुत यकीन कर रहे हैं । फिर भी नहीं करेंगे । मंत्रा का जहर हुई की तरह सफेद पड गया । सर क्या करेगा तो मुझे मूर्तियां देने जाना ही होगा । ठीक है अगर मूर्तिया देना इतना ही जरूरी है तो तू ट्यूशन पांडेय को दिया । उसके साथ सिड दीवानचंद के अड्डे तक किसी हालत में बचाना हूँ और भूषण ने मंत्रा की वो बात मान ले और अगले ही पल मंत्रा बरामदे में बडी छोटी सी क्यारी हो जल्दी जल्दी खोदकर उसको से नटराज की मोरदिया निकाल रही थी तो पांचों नटराज की मूर्तियां । कुलभूषण ने अपनी फॅमिली के नीचे अच्छी तरह कसकर बांध नहीं और ऊपर से शर्ट ठक लेंगे । नटराज की मूर्तियां दिखाई दे । नहीं बिल्कुल बंद हो गई है । कुलभूषण ने मंत्रा के घर से बाहर कदम रखा । अब अभी हमारे साथ चलो मंत्रा बोली नहीं तो यही रहे प्रदर्शन पांडेय को मूर्तियाँ देकर अभी तो मिनट में वापस आता हूँ, लेकिन चिंता मत कर मंत्रा मुझे कुछ नहीं होगा और भूषण लंबे लंबे तक भरता हुआ शर्ट पर चल दिया । मंत्रालय से डर ही रही, आंखों से तब तक जाते देखती रही जब तक वो नजरों से पूरी तरह से ओझल हो गया । मुझे बडी हैरानी की बात थी कि बुधवार की रात के बाद से हर पल, हर सेकंड कोई न कोई नई घटना घट रही थी और हर घटना ऐसी होती है जिससे प्रदूषण षड्यंत्र के चक्रव्यू में और अभी को लग जाता हूँ । फिर एक घटना घटी । दरअसल कुलभूषण जैसे ही किशनपुरा की पहली सडक का मोड काटा था तभी उसके शरीर में बिजली से दौडी हो यू कापा मानो किसी शैतान के दर्शन कर लिया होगा । सामने ब्लॅक योगी खडा था हैलो कुलभूषण आप आप इतनी रात को यहाँ क्या कर रहे साहब तो हमारा इंतजार कर रहा हूँ । कुलभूषण मेरा इंतजार मुझे फिर कोई गलती हो गई तो मैं अभी इसी वक्त मेरे साथ पुलिस स्टेशन चला है । लेकिन मेरा अपराध क्या है? साहब कुलभूषण शुष्क लहजे में बोला खीरा पहलवान की हत्या का इल्जाम से तो कोर्ट ने मुझे सुबह ही बरी किया है । मैं तो मैं चीना पहलवान की हत्या का इल्जाम में गिरफ्तार नहीं कर रहा तो फिर मुझे चार मिनट पहले ही टेलीफोन पर गुमनाम से पहले है । मुझे बताया गया है कि दिल्ली शहर में संग्रहालयों की दुर्लभ वस्तुओं की चोरी करने वाला जो हो, सक्रिय है तो उसके रहो के मेंबर हो । मैं भूषण के मुझसे ठीक ही खारिज हुई । मैं इस गिरोह का नंबर हूँ । हाँ और इसीलिए मैं टोमॅटो शक के बिना पर पुलिस हिरासत में ले रहा हूँ ताकि मामले की आगे जांच पडताल कर सकूँ । क्योंकि दुर्लभ वस्तुओं की चोरी का मामला काफी संगीन मामला है और आजकल इस तरह की चोरियों को लेकर दिल्ली पुलिस में काफी हडकंप बचा है और भूषण की जान हलक में आपसे उॅचे बंदी थी । इस और उसके पीछे हाथ धोकर पड गया था । उस वक्त उसे वो मूर्ति ऍम लगे । ऐसा टाइम बॉल जो किसी भी क्षण फट सकता था । साहब जरूर किसी ने आपको गलत टिप दी है । मेरा किसी गिरोह से कोई संबंध नहीं । मैं किसी की रोका मेम्बर नहीं रे ट्यूशन तो जो कुछ कहना है पुलिस स्टेशन जाकर कहना लेकिन ऍम योगी ने उसे जबरदस्त फटकार लगाई । फिर उसके हाथों में हथकडियां पहनाने के उद्देश्य से जैसे ही बुलेट से नीचे उतरा, फॅमिली तूफानी गति से दौडती हुई, सब फॅमिली सीधी योगी के चेहरे पर पडे उसमें प्रतियोगी दुर्घटना का अनुमान लगा पाता उससे पहले ही काम धुआधार रफ्तार से दौडती हुई योगी के ही होगी । आतंकित मुद्रा में पढता हूँ लेकिन वो वहाँ तक हूँ किधर भागता ऍम है जिससे सडक पर कोई पत्थर टकरा गया हूँ । टकराते योगी का शरीर कई फट के ऊपर हवा में चुनाव फिर उत्तेज धोनी करता हूँ । वो सडक पर जा गिरा । नीचे गिरता ही इंस्पेक्टर योगी के पाँच सहित एक ऐसी फॅमिली खारिज होना है ऍम लगा दे की तरह तो दूर हो जी उसी प्रकार के ब्रेक चरमराए उसके पहले देखते हुए होंगे । फिर ठंडा प्रकार का टोमॅटो होते ही भूषण एकदम चीते की तरह तेज जम्प लगा । सरकार के भीतर घुस गया फॅस और को गेयर में डाल दिया तत्काल होंडा सिटी कार बंदूक से छोटी गोली की तरह किशन पूरा सब खडी हुई हैं । उनसे पूरी तरह लगभग योगी की जब बेहोशी टूटी तो खुद कोई चारपाई पर लेटे पाया । उसके पर जगह जगह पट्टियां बनी थी । योगी ने हडबडाकर खडे होने की कोशिश की तो फौरन किसी ने उसकी कहाँ पकडेंगे ऍम डॉक्टर ने थोडी देर का नाम करने के लिए कहा है । योगी की दृष्टि खुदबखुद आवाज की दिशा में उठ गई और अगले ही पल उसके जिसमें करंट प्रवाहित हो गया था तो सामने बल्ले खडा था तो हाँ मुझे देखकर हैरानी हो रही है साहब बल्ले मुस्कराया लेकिन मैं यहाँ आया कैसे? योगी ने पूछा मेरा एक्सीडेंट हुआ था, ऍम हुआ ठीक उसी वक्त मैं क्रिशन पुराने आया था आपको खून से लथपथ सडक पर पडे देखा तो मुझे रहा ना गया । मैं फौरन आपको अपने घर लिया तो तो तो मुझे उठा करना है था लेकिन तुम कानून के मुस्लिम हो, जस्ट राज खन्ना के खोरी हो और उस वक्त पूरी दिल्ली के पुलिस तुम्हारे पीछे है । उसका सहयोगी के चेहरे पर दो हजार के बाहर उभर आए थे । मुझे बचाता समर्थन ने ये नहीं सोचा बल्ले होश बात ही न तो मैं भी कर सकता हूँ सो जाता साहब । सोचा था आपको देखकर मेरे दिमाग में सबसे पहले यही सवाल कौन था? लेकिन आप की हालत इतनी नाजुक थी, उस रहा नहीं गया और मैं आपको उठा कर ले आया । योगी अतिरिक्त से बल्ले को देख रहा था ऍम मैंने यश राज खन्ना का खून जरूर किया है लेकिन आवेश में जरूर मैं और यकीन मानो अभी मेरे दिमाग में जरूर उतरा नहीं है मेरे अंदर आप धधक रही है ज्वालामुखी धधक रहा है फॅार मेरे चाचा का ही खोल नहीं किया बल्कि उसका संस्थान का खून किया है । जिसमें बचपन से आज तक मेरी परवरिश की थी । अपनी कोर्ट में खिलाया था उसने मुझे जी ना पहली बार ही वाॅटर साहब जिससे मेरे माँ बाप के स्वर्गवासी होने के बाद सारी दुनिया करते यार मेरे ऊपर न्योछावर कर दिया । ऍम हर खून माफ कर सकता हूँ, लेकिन जितना पहलवान का कौन बात नहीं कर सकता मेरे अंदर धडक तो यार अब उसी दिन मुझे ऍम मैं कुलभूषण के कौन से अपने हाथ रंग लूंगा । मेरा दावा है ऐसा करने से आप दिल्ली पुलिस पर मुझे नहीं रख सकते हैं । योगी बातें फटे नेत्रों से बल्ले को देखता रह गया । डॉक्टर्स के होश में आने से पहले ही जा चुका था और उस वक्त उस पूरे घर में इंस्पेक्टर योगी और पालने के अलावा कोई था क्योंकि कुछ देर आराम करता रहा । ठीक है वो सस्ता से बस्तर छोडकर उठा मेरी मोटर साइकिल कहाँ है? बाहर ही खडे हैं । बल्ले बोला मैं उसे भी ले आया था । योगी संभाल संभाल कर दरवाजे की तरफ पडा । मुझे गिरफ्तार नहीं करोगे इंस्पेक्टर साहब योगी कदम अटक गए । वो ऍम एक ऍम होने के नाते मेरा फर्ज बनता है बाल रहेगी मैं तो मैं अभी और उसी वक्त गिरफ्तार कर लो ऍम मेरे सामने वकील प्रशांत खन्ना का ग्यारह नहीं बल्कि सबसे के इंसान खडा है । एक ऐसा इंसान जस्ट सीधे में भावनाएं हैं जिस बात है और जिसने अभी अभी एक आदमी की जान बचाई है । मैं नहीं जानता बल्ले कि तुम्हारा ये रोक सकता है या फिर तुम ये कोई नाटक खेल रहे हो हूँ, एक बार जरूर का होगा । मैं तुम्हारे रूप से प्रभावित जरूर हुआ हूँ लेकिन एक बात का खयाल जरूर रखना बाल लेंगे एक योगी की आवाज में चेतावन कपडा गया । आज के बाद तो इंस्पेक्टर योगी कहीं भी मिले बस गलत फॅार किस्मत रहना वो तो मैं पक्ष देगा । इस पर योगी का कहर तुम्हारे ऊपर बिल्कुल उसी तरह टूटेगा जिस तरह किसी अपराधी के ऊपर इंस्पेक्टर का कहना होता है ऍफ एक ही रिश्ता हो सकता है और वो रिश्ता है अपराधी और इंस्पेक्टर के बीच का रिश्ता । मुझे उस पल का बेसब्री से इंतजार रहेगा साहब बाल लेना भी बेखौफ जवाब दिया जब कानून के रखवाले से मेरी मुलाकात होगी । फिलहाल चाहते जाते आपने हमारा नहीं चाहिए हमारे था अब बल्ले वहीँ स्कूल पर रखिए । नटराज की मूर्ति उठाकर योगी की तरफ पढा नहीं । नटराज की मूर्ति को देखते ही योगी के दबाव धमाका हुआ । ये मूर्ति तुम्हारे पास काॅल किश्नपुरा हैं । जिस जगह ॅ वहीँ मूर्ति भी बडी थी हूँ । लेकिन बात किया है आपस मूर्ति को देखकर चौथी क्यों छानते हो? ये मूर्ति के स्थानों की बनी है साइड दस है । किस था तो की है सवाल का जवाब तो मैं नहीं बल्कि तल देश के तमाम अखबारों में छपा मिलेगा । हो सकता है तब तो मैं इस बात कर सकता हूँ । सोचती हूँ कि तुम ने मुझे ये मूर्ति सौंपी है तो क्यों सौंपे? ये शब्द कहने के बाद इंस्पेक्टर योगी मुड गया फिर मूर्ति लेकर तेज तेज कदमों से बाहर खडी बुलेट मोटरसाइकिल की तरफ पड गया लेके होठों पर मुस्कान थी । एक जहरीली मुस्का सेट दीवानचंद के अड्डे पर पहुंचने के बाद नहीं । कुलभूषण कितनी देर तक यूज हफ्ता रहा था जैसे सैकडों मील लंबी मैराथन दौड में हिस्सा लेकर अभी अभी वहाँ आया हूँ । उसकी आंखों में दहशत ही दहशत । कुलभूषण का सबसे पहले ऍसे सामना हुआ । उसका नाम दशक पाटिल था तो पूरा का रहने वाला था और एकदम ओरिजिनल मराठा था लेकिन ऍसे तो दिल्ली शहर में आकर बस चुका रहा और अब दिल्ली के कुछ ऐसे गाढे रंग में रंग चुका था की आपने सभी महाराष्ट्रीयन संस्कारों को भूल चुका था । यहाँ तक कि वह जवान भी अब दिल्ली वाली बोलता था । अब उसकी जिंदगी में आगे की चीज का महत्व था । पैसा, बैसा और पैसा कुलभूषण कितनी बुरी तरह फॅमिली चौका क्या हुआ तो नहीं हो रहे हो । तभी से दीवानचंद के आते ही दुश्मन पांडे ने उन्हें आठ दस पत्ते योगी से हुई मुठभेड के बारे में सब कुछ बता दिया । दीवानचंद के नेत्र आश्चर्य पहले बडी इस बत्तर योगी से गिरफ्तार क्यों करना चाहता था? नहीं तो बोलता था कि दिल्ली में आजकल दुर्लभ वस्तुओं की चोरी करने वाला चक्कर हो सक्रिय है । मैं उस गिरोह का सक्रिय सदस्य हूँ । किसी ने उसे बात फोन पर कम दाम टिप देकर बताई थी । हम और एक फॅमिली तो योगी को भी नहीं मालूम । लेकिन वो शिक्षा ही जो भी है साहब वही सारे प्रसाद की जड है । उसी ने मेरी हस्ती खेलती जिंदगी को यू षड्यंत्र रचकर नरक के हवाले कर दिया है । ऍम चाहिए नीरज रखडी जो आंदोलित होने से परेशान होने से कुछ नहीं होने वाला ये बताऊँ क्या और क्या और क्या लेकर आया की नहीं? आॅडी कुलभूषण पाँचों मूर्तिया निकालने का मकसद से अपनी शर्ट ऊपर की फिर उसकी नजर जैसे ही नटराज की मूर्तियों पर बडी गुस्सा रह गया एक दम सर कैसे? पूर्ति शायद नहीं तो सिर्फ चार क्या है दर्शक बॉटल का मुझे संस्कारी छोटे कुलभूषण परसों से लगभग हो गया । हाँ लेकिन लेकिन मैं मतलब की घर से पांच मूर्ति ही लेकर चला था । बडी फिर एक मूर्ति की तरह नहीं एस आई । एक मूर्ति करते रहो पेट निकल गया नहीं पर हवा खा नहीं ऍम उसी जगह गिर पडी है जहाँ जहाँ पत्थर योगी और हमारी मुठभेड हुई थी । एक था सिर्फ मूर्ति योगी के हाथ अभी तक तो क्या होगा सब के सब तब रह गए । अगले दिन एक ऐसी रिटायर विदारक घटना घटी जिसने कुलभूषण के रहे सही हौसले भी पस्त कर दी । सुबह का वक्त था रात कुलभूषण अड्डे नहीं गुजारी थी । उस अड्डे के बारे में कुलभूषण को अभी सिर्फ ही मालूम हो सकता था कि वो किसी इमारत के बेसमेंट में बडा था । उसने आठ विशालतम हॉल और कमरे थे, बडे बडे गलियारे थे, चार टेस्ट बाथरूम थे । एक बातचीत करने के लिए पडा साॅस । कुल मिलाकर वहाँ सुख सुविधा के तमाम साधन मौजूद थे । ताॅबे वही होते थे जबकि सेट की अशोक विहार इलाके में बडी भव्य कोठी थी । उस वक्त तक सेट दीवानचंद भी वहाँ आ चुका था । तभी अखबार हाथ फॅसा भराया । उसके चेहरे पर हवाइयां उड रही थी । उसको हाल बेहद बुरा था । क्या बात है । बडी घबरा क्यों राय नहीं अब आप ऍम अखबार नहीं पडा । कोई खास खबर छपी एसाई खबर नहीं बल्कि तोप का गोला समझो बॉस जो भी पडेगा उसके चेहरे पर मेरी तरह हवाइयां उडने लगेगी । अरे बडी ऐसी भी क्या खबर चल गई नहीं, मैं भी तो देखो फॅमिली उसे देखकर तीनों वाकई पूरी तरह उछल पडे । अखबार के कवर पेज पर ही मोटी मोटी सुर्खियों में छपा था दुर्लभ वस्तु चोरी करने वाला संगठन का सुराग पता चला और भूषण के पास से एक मूर्ति बरामद । कल आधी रात के वक्त किशनपुरा की एक गली के अंदर स्पैक्टर योगी और कुख्यात अपराधी कुलभूषण के बीच हुई भीषण भिडंत में दिल्ली पुलिस को सोने के नटराज की मूर्ति बरामद हो गई । उल्लेखनीय है कि नेशनल म्यूजियम से पिछले दिनों सोने की छह देश कीमती नटराज की मूर्तियां चोरी हो गई थी, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में दस करोड रुपये कीमत तो नटराज की मूर्ति बरामद हुई । वो सोने की छह नटराज मूर्तियों में से ही एक है । बताया जाता है कि कल रात उस पत्र योगी को टेलीफोन पर एक गुमनाम टिप मिली थी जिसमें किसी अज्ञात व्यक्ति ने स्पेक्टर योगी को बताया कि कुख्यात अपराधी कुलभूषण दुर्लभ वस्तु चोरी करने वाले गिरोह का सक्रिय सदस्य हैं और थोडी देर बाद ही सोने की नटराज की मूर्ति लेकर किशनपुरा से फरार होने वाला है । स्टेप मिलते हैं फॅमिली पूरा पहुंचकर कुलभूषण को ज्यादा होता है लेकिन योगी उसे गिरफ्तार कर पाता उससे पहले ही कुलभूषण अपने एक साथी की मदद से उस पर हमला करके धाक खडा हुआ । सार्वजनिक हैं की विभिन्न संग्रहालयों से दुर्लभ वस्तु चोरी करने वाला यह संगठन पिछले दो साल से दिल्ली शहर में सक्रिय है । इतना ही नहीं ये संगठन अब तक लगभग बाईस करोड रुपये मूल्य की अनेक ऐतिहासिक वस्तुएं चोरी कर चुका है । उसका सहयोगी ने कुलभूषण से बरामद मूर्ति पुरातत्व संग्रहालय को सौंप दी है । ऍसे प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर इस साबित हो चुका है कि बरामद मूर्ति संग्रहालय से पूरी गई असनी नटराज मूर्ति ही है । दिल्ली पुलिस पूरी सरगर्मी से कुलभूषण को तलाश कर रही है और कुलभूषण को गिरफ्तार कराने वाले किसी भी व्यक्ति को एक लाख रुपए का नगद इनाम देने की घोषणा भी पुलिस की तरफ से कर दी गई है हूँ ।

भाग 11

उस खबर को पढकर सभी भाषण दे रहे हैं । कुलभूषण को तो जैसे साहब सुन गया था । उत्तर ऍम एक बात मेरी समझ में नहीं आई । दशक बॉटल बोला क्या ये कैसे संभव है कि पांच मूर्तियां जो कुलभूषण हमे ला कर दी वो पीतल की है, जबकि जो नटराज बोलती स्पेक्टर योगी के हाथ लगी उस होने की है । सब राम निगाहों से एक दूसरे का चेहरा देखते रहेंगे । कोई कुछ नहीं बोला । अरे बडी पांडे शाही फॅस बडी तो जल्दी से वो सभी नटराज मूर्तियां और कसौटी लेकर आओ । ऍम वहाँ से दौड बडा जल्दी जब वापस लौटा तो उसके हाथ में नटराज की मूर्तियां और एक कसौटी थी । दीवानचंद ने एक एक करके उन सभी पांच मूर्तियों को कसौटी पर के साथ लेकिन निराशा खोल निराशा उस सारी की सारी मूर्तियां पीतल की थी मैं । मैं पहले बोलता था साहब कोई मुझे फंसाने की कोशिश कर रहा है । कोई मेरे चारों तरफ जाल बिछा रहा है । ऍम अरे बडी कौन हरामी तेरे को बचाने की कोशिश कर रहे नहीं, बडी कौन तेरे चारों तरफ जाल बिछा रहा है मुझे उसका पता ठिकाना तो बताया और ये मूर्ति वाला करिश्मा कैसे हो गया? कुलभूषण चाहिए अखबार में साथ साथ लिखा है कि बरामद मूर्ति सोने की असली नटराज की मूर्ति है उसमें शक शुभ है की तो कोई गुंजाइश ही नहीं बची । फिर मेरे दिमाग में बता रही हूँ क्या जरूर सब इंस्पेक्टर योगी के पास वो नटराज मूर्ति नहीं है कि पेट के पीछे से निकलकर गिरी थी बडे बडी फिर वो कौन सी मूर्ति है सर जरूर मेरे पास से मूर्ति नीचे गिरने और इंस्पेक्टर योगी द्वारा मूर्ति उठाए जाने के बीच इसलिए देखो मूर्ति बदल दी बडी थोडी तो ये कहना चाहता है की किसी ने पीतल की वो मूर्ति उठा कर उसकी जगह असली सोने की मूर्ति रखती हूँ । मैं बिल्कुल यही कहना चाहता हूँ नहीं लेकिन अच्छा कौन करेगा चाहिए थोडी किसी को भी ऐसा करने की क्या जरूरत पडी है? नहीं जरूरत पडी है साहब की ये हरकत जरूर उसी रहस्यमय व्यक्ति ने की है जिसमें इंस्पेक्टर योगी को मेरे बारे में काम धाम थी और इतना ही नहीं साहब मुझे तो अब एक और रहस्य की गुत्थी भी सुरक्षति दिखाई दे रही है । कैसी होती है? तो जब उस रहस्यमय व्यक्ति के पास होने की नटराज मूर्ति है तो फॅमिली उसी के पास हूँ । इसका मतलब उसी ने वो मूर्तियां हथियाई और उसी रहस्यमय व्यक्ति ने । चीना पहलवान कभी खून क्या ऍम पर तीनों के दबाव धमाके हुए हैं । बहुत दशक बोला मुझे तो उस रहस्यमय व्यक्ति से ज्यादा इस सारे प्रसाद की जड खुद जीत कुलभूषण नजर आ रहा है । जब से इसके कम्बख्त कदम हमारे ठिकाने पर पडे हैं तभी से तभी से हमारे साथ भी अजीब अजीब किस्म के हाथ से हो रहे हैं । फॅस अगर कोई ऐसा रहस्यमय व्यक्ति है भी तो जरूर इससे अपनी पुरानी दुश्मनी निकाल रहा है । हम उसके चक्कर में पडे हैं पहले ही नटराज मूर्तियां गायब होने की वजह से हमें दस करोड रुपए का ठीक लग चुका है । हमारे हक मैं यही अच्छा है कि हम इसे फौरन यहाँ से निकालकर बाहर खडा करें । ये भी ज्यादा का लाख लाख शुक्र है जो अभी हमारे अड्डे का गुप्त रास्ता नहीं देखा । बहुत प्रशाद ही किया था दुश्मन पांडे ने भी दशक बॉटल के बाद के प्रति समर्थन जाहिर किया । इसका अब सतवत यहाँ ज्यादा देर रुकना ठीक नहीं । दिल्ली पुलिस पैसे इसका संबंध दुर्लभ वस्तु चुराने वाले गिरोह से जोड रही है और फिर उसके ऊपर एक लाख रुपये का इनाम भी रख दिया गया है । ऐसी परिस्थिति में ज्यादा दिन पुलिस के शिकंजे से बचा नहीं रहने वाला ये पकडा जायेगा । उससे पहले ही हमें इससे पल्ला झाड लेना चाहिए । ऍम था एक साथ कई सारी बातें उसके दिमाग में कौन थी? अगर इस वक्त लोगों का आसरा उसके ऊपर चला गया तो फिर दिल्ली पुलिस के पंद्रह से दुनिया की कोई ताकत नहीं बचा सकती हैं । उनका डस्ट बाहर निकलते ही उसने पकडे जाना है । वहाँ पे खतरनाक अपराधी साबित हो चुका है । उसके ऊपर एक लाख का इनाम घोषित है । एक लाख फॅमिली में शहर दौड रहे एक लाख का इनाम हासिल करने के लालच में तो दिल्ली शहर का एक एक आदमी उसे पुलिस के हवाले करना चाहेगा । अपनी मौजूदा स्थिति और होने वाले अपने खौफनाक अंजाम की कल्पना करके कुलभूषण का पूरा शरीर कांप उठा । उसमें ऍम की तरफ देखा हूँ । जाॅन पांडे की बात सुनकर किसी गहरी सोच में डूब गया था । बडी दोनों शायद ठीक कहते हूँ हूँ वाकई आप और ज्यादा देर यहाँ रुकना हमारी सेहत के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है । आप क्या कह रहे हैं साहब और ऍम था बडी हम हम सिर्फ क्या नहीं रही बल्कि ये हमारा अटल फैसला है । पांडे तो मैं भी वापस किशन पूरा छोड आएगा । ऍम अगर ऐसी हालत में मेडिशन पूरा पहुंच गया तो समझो में जेल में ही पहुंच गया साहब । वहाँ वहाँ के गुंडा मवाली, बहुत डेंजर है वो नाम की अदालत में मेरे ऊपर । इस तरह हफ्ते की जैसे किसी चीज बॉस के दूसरे पर छुट्टी है । मैं बेहुरा होकर भी मना जाऊंगा पिछले फिर ऊपर रहम करो साहब । फॅमिली लेकिन हम तेरे ऊपर कैसे रहना करें? नहीं । अगर तू ज्यादा दिन यहाँ रहा तो हम सब लोगों का यहाँ बिस्तर बॉल हो जाएगा । नहीं होगा साहब नहीं होगा आप कैसे? किसी का भी यहाँ से बिस्तर गोल नहीं होगा । ऍम करूंगा मैं आप लोगों का गुलाम बनकर रहूंगा, लेकिन भगवान के लिए, भगवान के लिए मुझे दिल्ली पुलिस के मुंबई । थक के अनुसार तो भूषण की आंखों में आंसू अच्छा चला आएगा, जबकि सेट दीवानचंद के चेहरे पर हिचकिचाहट के भाग रहे थे मैं । मैं मैं उस रहस्यमय व्यक्ति के षड्यंत्र का शिकार हो चुका हूँ । साहब मेरे सामने कोई रास्ता नहीं, कोई मंजिल नहीं । मैं अब सिर्फ कानून से भरा हुआ एक खतरनाक अपराधी हूँ । आॅडीशन पांडे की तरफ देखा उन लोगों के चेहरे पर भी हिचकिचाहट के भाव थे । एक ऐसा ही दीवानचंद यू धीरे धीरे गर्दन हिलाई जैसे उस पर बडा भारी एहसान कर रहा हूँ । करके बडी हम सलाह मशविरा करने के बाद कल तेरे बारे में कोई फैसला करेंगे । लेकिन एक चिंता मत दर्शाईं जो होगा अच्छा होगा क्या हराम करके भूषण के चेहरे पर संतोष के भाव भरा है तो उसे कहाँ मालूम था? अभी उसके ऊपर से बुरे ग्रहों की स्कूल छाया हटी नहीं है हर दम हाँ, बहुत और खौफ के साये जिंदगी बसर करते हुए कुलभूषण की वो वहाँ भी रही थी । अड्डे के भीतर ये ऍम रहा था जो स्टेट में उसके लिए खोल दिया था । दशक बॉटल ने उसे बचाने के लिए बताई और तोडने के लिए पतला सा नंबर दे दिया था तो मुझे थे लेकिन कुलभूषण की आंखों में नहीं । इनका दूर दूर तक कोई नामोनिशान ना था तो अपने कमरे में से थोडा सा थोडा सा पडा था और उसकी आंखों के गिर रह रहकर मंत्रा का चेहरा घूम रहा था । मैंने कहाँ कहाँ तलाश कर रही हूँ हूँ कितनी परेशान होगी उसके लिए मंत्रालय उस छोटी सी उधारी चुकाने के दूर नहीं उसे एक कितने बडे जान जान में पहुँचा दिया था । अपनी आवारा कुत्ते जैसी हो चली हैसियत पर गौर करके और भूषण कम्बल थोडे थोडे ही अपने कमरे से निकलकर बाहर गलियारे में आ गया । नींद आने की वजह से उसका थोडा चहलकदमी करने को दिल चाहता था और भूषण चंद कदम ही चला होगा । तभी वो इकाई पूरी तरह चौका काॅल के अंदर से बातचीत करने की आवाज जा रही थी । कुलभूषण लाॅ नजदीक पहुंचा हूँ वो एक बहुत बडा हॉल था । ऑॅल के बीचोंबीच बहुत लंबी आयताकार नहीं पडी थी जिसके ऍम लगभग बीस के करीब कुर्सियां मौजूद थे । पूरे ऍम घर पहला था सिर्फ छह मिनट के एक साठ वॉट के लोग का फोकस के बीचों बीच पड रहा था । कुलभूषण ने बंद दरवाजे की चल रही मैं अंदर का नजारा देखा । ऍम वहाँ मौजूद था । उसके सामने दशक पाटल ऑपरेशन पांडे बैठे थे । वो तीनो उस वक्त प्रकृति की किसी बहुत महत्वपूर्ण योजना पर बातचीत कर रहे थे और भूषण करवाने से कौन लगाकर उनकी वार्ता सुनने लगा । स्टेट दीवानचंद थोडी गर्मजोशी से भरी आवाज में कह रहा था बडे मुझे आज ही सुपर फॅमिली है क्या? प्रशांत पटेल ने पूछा साईं वो नटराज मूर्तियों के आश्चर्यजनक ढंग से गायब हो जाने की वजह से बडी नाराज है । उन्होंने लिखा है कि वह बुधवार को दिल्ली के होटल ऍम छीना पहलवान का बडी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे कि कब मूर्तियां लेकर उनके पास आए । लेकिन सुबह जब उन्होंने चीना की मौत का समाचार चुनाव तो फॉर्म वापस न्यूयॉर्क के लिए पूछ कर गए ऍम उन्होंने ये भी लिखा है कि जिस पार्टी से उन्होंने नटराज की मूर्तियों का सौदा किया था, पार्टी मूर्ति हासिल न होने के कारण बहुत नाराज हो रही हैं । उन्होंने बडी मुश्किल से उस पार्टी को काबू में क्या है और और कुछ लिखा सुपर पहुंॅच, दीवानचंद की आवाज थोडी कम भी रोते थोडी इस बार से ऊपर पहुँच नहीं हमें एक ऐसी डकैती की योजना के संबंध में बताया है कि अगर हम उस योजना में कामयाब हो गए तो हमारे बारे न्यारे हो जाएंगे । बडी उस डकैती में हमारे हाथ इतना मोटा रोकडा लगेगा कि हमारी पचास पूछते बैठकर खा सकती हैं । ऐसी कोई योजना है सौं ऍम कल यानी सोमवार को पूर्व सोवियत संघ के एक घंटा राज्य कजाकिस्तान से किसी महाराजा का एक दुर्लभ ताज दिल्ली शहर में प्रदर्शन के लिए आ रहा है । उस ताज में पचास ऐसे देश कीमती हीरे लगे हुए हैं कि उन जैसे ही नहीं आज पूरी दुनिया में कहीं नहीं है और वो ताज ऐतिहासिक दृष्टि से भी बहुत मूल्यवान है । उस ताज के बारे में कहा जाता है कि वह ताज ईशा से पूर्व कुस्तौर का है । जब इंसान में सफलता की सीढियां चढते ही शुरू की थी । उसी दौर में कजाकिस्तान के एक राजा ने अपने राज्य के बेहतरीन कार्य भरोसे ताज का निर्माण करवाया था । चाहिए बडी उस राजा को ज्योतिष विद्या पर भी बहुत यकीन था । उसके हीरे के गुण दोष के पार किए । कई विद्वानों से शेयर करो हीरो में से वो पचास धीरे चुनवाया । उन विद्वानों का मानना था की वही रहे । राष्ट्र की उन्नति शांति और खुशहाली के प्रतीक थे । बोलते बोलते स्टेट होगा दशक फाॅर्स की बातें बेहद हॉर्स सुन रहे थे जबकि दरवाजे से कम लगाए खडे कुलभूषण की भी एकाएक उॅचा उठी थी । छुप बोझ ने आगे लिखा है कि लीडो से जुडे उस मतलब ताज के बारे में ये कहानी बडी प्रसिद्ध है । जिस दिन से उस राजा ने वो ताज पहनना शुरू किया था जी जिनसे उसके राज्य का विस्तार भी होना शुरू हो गया था । वडा उससे पहले कजाकिस्तान के इलाके में अन्य जंगली कबीले विद्रोह का बिगुल बजाते रहते थे । लेकिन ताज का निर्माण होते ही चारों तरफ शांति और खुशहाली का माहौल बन गया तो सोवियत संघ के टूटने के बावजूद प्रजाति स्थान में आज तक बरकरार है । ऍम थोडा बेचैनी पूर्वक पहलू, बदलाव कुछ भी कहो बॉस दशक बोला एक जैसी बातों पर चुकी नहीं होता ये तो तुरंत खता हूँ जैसे कहानी मालूम होती है । अरे बडी हमें इस बात से क्या लेना देना । नहीं तो ताज के साथ जुडी ये कहानी छत की है कि झूठी बडे हमको तो आपने रोकने से मतलब है ना आपने ना वेश्य मतलब है बडी । आज की तारीख में उस ताज को हासिल करने के लिए दुनिया के बडे बडे देश जी तोड कोशिश में लगे हैं जिनमें बॉडी का सबसे आगे है । समर मौज का कहना है हमें उस ताज के बदले अमरीका सरकार एक अरब रुपये तक दे सकती है । होता है ऍसे संस्कारी छोटे हैं आप बडी ऍम रुपए बडी अब तक तो वो ताज कजाकिस्तान के म्यूजियम में भाडी हिफाजत के साथ रखा हुआ था । उसकी वहाँ सिक्योरिटी कितनी जबरदस्त है इस बात का अंदाजा इससे लगा सकते हो । पूछताज को छुडाने की अभी तक एक दर्जन से भी ज्यादा बार कोशिश हो चुकी है लेकिन हम कोशिश ना था । चोरों को हर बार असफलता का मुंह देखना पडा और जब ताज कितनी जबर्दस्त करती है तो तो हम लोग उसे किस तरह चुनाव पाएंगे । बडी तू पागल है नहीं ऍम । आज से पहले मतलब ताज को छुडाने की जितनी भी कोशिशें हुई वो जब कजाकिस्तान में हुई थी ना ऍम होता है जब वो ताज किसी दूसरे देश में प्रदर्शन के लिए आ रहा है और इसे हमें अपनी खुशकिस्मती समझना चाहिए कि उस दुर्लभ ताज की प्रदर्शनी कहीं और नहीं बल्कि हमारे ही शहर के नेशनल म्यूजियम में लगेगी । अरे बडी वही नेशनल म्यूजियम । यहाँ से हम लोग पहले ही नटराज की मूर्तियां पार कर चुके हैं । ऍम मालूम पाकिस्तान की प्रदर्शनी नेशनल वीजा नहीं लगेगी । फॅसने ये बात अपने मैसेज में लिखकर भेजी है । नहीं मुझे कैसे मालूम होता पर एक बात कुछ मुँह कुछ कुछ तो सुपर बॉस को डाॅॅ बैठे बैठे हर बात कैसे मालूम हो जाती है । अरे बडी अगर मेरे को ये मालूम होता तो तो मैं तुम लोगों के साथ बैठकर अपना दिमाग खराब क्यों करता है? मैं भी तो सुपर फॅमिली की तरह नियोग के किसी आलीशान होटल में पडा अपनी योजना के पत्ते ना फैला रहा होता । दशक ऍम बडे दशरथ अच्छाई हमें इस तरह की बेकार्ड बातों में अपना दिमाग खराब करने की बजाय इस तरफ ज्यादा ध्यान देना चाहिए कि हम उस ताज को जुडाने में किस तरह कामयाब होंगे । बडी हमें दौलत कमाने का इतना शानदार होता किसी भी हालत में होना नहीं है । समझो हमारी किस्मत खुद अपने पैरों से चलकर कजाकिस्तान से यहाँ आ रही है । ऍम तो दृश्यम पांडे बोला उस दुर्लभ ताज को चुराना हमारे लिए इतना आसान नहीं होगा जितनी आसानी हमने नटराज की मूर्तियां चुरा ली थी । क्यों? ऍम क्यों नहीं होगा? तो आपको भी मालूम है बॉस उतार पहली बार किसी दूसरे देश में प्रदर्शन के लिए लाया जा रहा है । ठीक है, बिल्कुल थी, इससे साबित होता है । कजाकिस्तान गणराज्य के नजर में उस दुर्लभ ताज का बहुत ही खास महत्व है । मेरे स्तर को इस बात से भी और ज्यादा बल मिलता है जो इस दुर्लभ ताज को चुराने की कजाक स्थान में ही कई छोटी बडी कोशिश हो चुके हैं । लेकिन हर बार हर बार चोरों को नाकामी का मुंह देखना पडा यानी कजाखस्तान गणराज्य नहीं । उस की सिक्योरिटी का बहुत ही पुख्ता इंतजाम कर रखा है । अगर ऐसा होता तो उसे ना जाने कब के उडा ले गए होते हैं । इस दुनिया में एक से बढकर एक शातिर मौजूद है । बडी तुम कहना क्या चाहते हो? मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ बॉस जिस ताज की सिक्योरिटी का कजाकिस्तान कार्ड राज्य ने इतना पुख्ता इंतजाम कर रखा है वो कजाकिस्तान अपने उस दुर्लभ ताज को ऐसे ही तो भारत नहीं भेज देगा । स्वभाविक सी बात है कि भारत में भी इस बात के जबरदस्त इंतजाम किए गए होंगे । सीट दीवानचंद गंभीर उठा दुश्मन पांडे काफी हद तक सही कह रहा था । फॅमिली बडी तेरी बात में जान है कजाकिस्तान गणराज्य में भारत सरकार की मदद से जहाँ भी सिक्योरिटी के इंतजाम तो जरूर किए होंगे । ऍम नहीं बॉस बल्कि बहुत खास इंतजाम किए होंगे । सिक्योरिटी का इंतजाम दो नटराज की मूर्तियों के लिए भी किया गया था । लेकिन क्या हुआ उस इंतजामकार सारा इंतजाम ढाक के तीन पात की तरह रखा रह गया और हम हम मूर्तियां चुराकर फरार हो गए । देख लेना बॉस भारत सरकार हमारे द्वारा की जाने वाली दुर्लभ वस्तुओं की चोरी से भी भरपूर सबका लेगी और इसलिए उस दुर्लभ ताज का और ज्यादा खास ज्यादा स्पेशल सिक्योरिटी इंतजाम किया जाएगा । मैं मानता हूँ पांडे साई कडी हर बार ठीक है बडी लेकिन फिर भी हम लोगों को ताज को जुडा कर दिखाना है । हमने साबित करना है की बडी बडी सिक्योरिटी को भेजने की क्षमता हम लोगों के अंदर है । उसके लिए हमें सबसे पहले तो ताज को देखना होगा । त्रिकोटी ताज को देखने के लिए म्यूजियम में दर्शकों के एंट्री कब से शुरू होगी पर सोचिए कल वो दुर्लभता कजाकिस्तान से दिल्ली लाया जाएगा । वो फ्लाइट से दिल्ली आ रहा है । ये बात अभी तक पूरी तरह गुप्त रखी गई है । दोनों सरकारों को इस बात का खतरा होगा की अगर कहीं ये बात लीक हो गई तो कहीं अपना जी संगठन उस दुर्लभ ताज को हासिल करने के लिए पूरे प्लेन कोई हाईजैक न कर लेंगे । हाँ, दीवानचंद उस मीटिंग का पटाक्षेप करता हुआ बोला कुछ तो लगता आज को हासिल करने की दिशा में हमारा सबसे पहला काम ये पता लगता होगा कि भारत सरकार नुश्की सिक्यूरिटी के क्या क्या इंतजाम किए हैं । चाहिए सिक्योरिटी के इंतजामों की कोई जानकारी कर लेने के बाद ही हम किसी योजना की रूपरेखा तैयार करेंगे । होगें ओके सर, दृश्यम पांडे और दर्शक पाटिल की कर दे नहीं एक साथ स्वीकृति में ही मीटिंग उसी छत बर्खास्त हो गए । कुलभूषण जो कॉन्फ्रेंस हॉल के दरवाजे से कान लगाने खडा वार्तालाप पर एक एक शब्द चल रहा था । वो हत्या स्थिति में वापस अपने कमरे की तरफ दौडा । कमरे में घुसते ही उसने भीतर से दरवाजा बंद कर लिया और फिर दुबई पर लेटकर लम्बी लम्बी सबसे लेने लगा । उसके होश गुम थे, कानून में घंटियां मार रही थी । दिमाग मानव संसाधन पडी विरान खाडियां बन चुका था जिसमें रह रहकर एक ही आवाज पूछ रही थी हूँ मेरे भगवान, क्या यह सच वो जो पांच को चुराने में सफल हो जाएंगे? दिल्ली शहर में एक और चौका देने वाली वारदात होगी । अगले दिन मुँह ताज के संबंध में एक अखबार के भीतर आधे पेज की प्रचार सामग्री छपे । प्रचार सामग्री ने दुर्लभ ताज का पूरा वर्णन था और उसे शांति तथा खुशहाली का प्रतीक भी बताया गया था । इतना ही नहीं दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अखबार के अंदर कई बडी दिलचस्प बातें भी छपी थी । जैसे अखबार में लिखा था डाॅन नामक जिस राजा ने उस दुर्लभ ताज का निर्माण करवाया वो एक सौ बीस वर्ष का होकर मारा । अपने पूरे जीवनकाल उसे या उसके राज्य को किसी भी परेशानी का सामना नहीं करना पडा । आगे लिखा था वो दुर्लभ ताज अपनी सुरक्षा खुद करता है । जिसने भी उस तरफ ताज को चुराने की कोशिश की तथा साक्षी है कि वह खुद बर्बाद हो गया या फिर मारा गया । ऐसी टेरो किस्म की बातें उस ताज के संबंध में अखबार के भीतर छपी थी । साथ ही बेहद लुभावने शब्दों में लिखा था अब ये रहस्यपूर्ण ताज एक सप्ताह के लिए आपके शहर दिल्ली में पहुंचा है । ताज को देखने का ये शानदार मौका किसी भी हालत में नहीं हुआ । कर मंगलवार से इस दुर्लभ ताज के दर्शन हेतु आप सब नेशनल म्यूजियम के हॉल नंबर चार में पहुंचे । चार नंबर हॉल के खुलने और बंद होने का समय सुबह दस बजे से शाम छह बजे तक । विशेष नौ दर्शक अपने साथ किसी भी तरह का कोई सामान ना लाए क्योंकि ये सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं है । उस प्रचार सामग्री से एक बात पूरी तरह साबित हो गई । मुझे सुपर बहुत डॉन मस्त धोनी ने उस दुर्लभ ताज के संबंध में जो जो बातें आपने मस्जिद में लिखी थी, वो सब सस्ती मंगलवार को सुबह ग्यारह बजे स्टेट दीवानचंद किशन पांडे के साथ उस दुर्लभ ताज को एक नजर देखने और उसकी सिक्योरिटी का मुआयना करने नेशनल म्यूजियम पहुंचा । वहाँ दर्शकों की खासी भीड थी है । लगभग सौ सुरक्षाकर्मियों ने नेशनल म्यूजियम को चारों तरफ से घेर रखा था । दस बारह सुरक्षाकर्मी सेल्फ लोडिंग राइफल लिए म्यूजियम की छत पर अलग अलग दिशाओं में खडे थे । वीजन में प्रवेश करने के लिए लोहे के दो बडे बडे एंटर स्टोर थे । आप उन दोनों में से एक इंटर्न स्टोर सात दिन के लिए सील कर दिया गया था । सिर्फ मुख्य सडक से जुडे एंटर स्टोर द्वारा ही दर्शक आ जा रहे थे । वहीं दो मेटल डिटेक्टर भी लगे थे । प्रत्येक दर्शको उन मेटल डिटेक्टरों के ऊपर से गुजरकर भीतर प्रवेश करना होता था । हालांकि ये विशेष नोट अखबार में ही छाप दिया गया था कि कोई भी दर्शक अपने साथ कैसा भी कोई सामान ना लाए । लेकिन फिर भी कुछ दर्शक भूल से अपने साथ ॅ जैसी साधारण चीजे ले आए थे । ऍम स्टोर पर खडे सुरक्षाकर्मी अब उन चीजों को अपने पास ही जमा कर रहे थे और बदले में उन्हें सिर्फ दे रहे थे । वापसी पर दर्शक मुस्लिम सुरक्षाकर्मियों को लौटा देते और उन्हें उन का सामान मिल जाता । स्टेट दीवानचंद दुश्मन पांडे ने भी मेटल डिटेक्टर के ऊपर से गुजरकर म्यूजियम में प्रवेश किया । ऍम स्टोर के बाद म्यूजियम का मेन के था । वहाँ भी छह सुरक्षाकर्मी खडे थे जो प्रत्येक दर्शक की अपने हाथों से टटोलकर टटोलकर तलाशी लेने के बाद ही भीतर जाने दे रहे थे । दीवानचंद और दुश्मन पांडे की भी तलाशी ली गई । जेबों का सामान निकालकर देखा गया । पीठ और सीने से लेकर पैंट की बैंड और जांग तक को सुरक्षाकर्मियों ने खूब थपथपाकर देखा कि कहीं उन्होंने कुछ प्राणघातक हथियार वहाँ तो नहीं बंदा हुआ है । तलाशी का ऐसा ही एक और सिलसिला म्यूजियम के विशाल गलियारे के भीतर भी चला । फिर हो ना जाने कितने इन्फोकाॅम रोके सामने से गुजर कर कौन नंबर चार में दाखिल हुए । ऑन नंबर चार की महिमा ही अलग थी । वहाँ का सारा माहौल तिलस्मी था । फॉल सिलिंग की छत और लगभग एक फुट चौडी फॅस की परत चढी । दीवार में दो दर्जन से भी ज्यादा रंग बिरंगे बडे बडे हरिजन पर लगे हुए थे । जिनका पीछा प्रकाश आपस में एकाकार होकर माहौल में विचित्र साम माधुर्य बिखेर रहा था । छोटी सी लगी दुनिया के तो पि ऍफ पर शीशे के बॉक्स में बंद वो दुर्लभ ताज रखा था । टॉस से चार चार फुट तू लोहे के पाइप की बैरिकेट्स लगाई गई थीं । उन्हीं ॅ के सहारे आगे बढते हुए दर्शकों को उस बेहद दुर्लभ पांच के दर्शन करने थे । से दीवानचंद और दुश्मन पांडे दर्शकों की बेरिकेट्स वाली लाइन में लग गए । फिर वो हिंदी धीरे आगे बढते हुए उस दुर्लभ ताज को देखने लगे । ऍम पांडे दर्शकों की बेरिकेट्स वाली लाइन में लग गए हैं । वो धीरे धीरे आगे बढते हुए उस तरफ ताज को निहारने लगे । उनकी आंखें पाला उसी ताज पर चिपक कर रह गई थी । क्या लाजवाब चीज थी बेहद अद्भुत, बेहद आश्चर्यजनक वो बात जितना पुराना था, उतनी ही उसमें चमक थी । उसके भीतर जडे पचास देश कीमती हीरे इस तरह जगमगा रहे थे जैसे उन हीरो में लाइटें फिट कर दी गई हूँ । वहाँ गयी वो नायाब चीज थी । दुर्लभ ताज को देखते ही सेट, दीवानचंद और ऍम पानी के भूमि पानी भराया । कितनी देर हॉल नंबर चार में रहे, उतनी थे उनकी एक सेकंड के लिए भी दुर्लभ ताज के ऊपर से नजरे नहीं हटी । दस मिनट बाद वो दोनों म्यूजियम से बाहर निकले । पूरी तरह मंत्रमुक्त थे । उनके मन में यह धारणा और पक्की हो चुकी थी । चाहे कुछ भी हो जाए, चाहे कितनी मुश्किलों का उन्हें सामना करना पडेगा हूँ । उस दोनों पांच को हर हालत में हासिल करके रहेंगे । उसी सीट ने अपनी कार में सवार होकर नेशनल म्यूजियम के आगे से तो चक्कर काटेंगे ये देखने के लिए रात के वक्त वहाँ सिक्योरिटी का क्या इंतजाम रहता है । लेकिन ये देखकर उसे भारी निराशा हुई के अपराध के वक्त वहाँ सिक्योरिटी और बढा दी गई थी । दिन में जहाँ नेशनल म्यूजियम के चारों तरफ सौ पुरस्कर में फैले थे तो वहीं अब दो सौ के आस पास है लेकिन फिर भी सेट दीवानचंद हिम्मत नहीं आ रही ।

भाग 12

अड्डे पर लौट नहीं । उसने कॉन्फ्रेंस हॉल में एक मीटिंग बुलाई । हमेशा की तरह मीटिंग में तीन व्यक्ति शामिल हुए । बहुत से दीवानचंद दाॅये । आपने सर्वेंट क्वार्टर जैसे कमरे में लेता कुलभूषण जो बहुत देर से उसी पल का बेसब्री से इंतजार कर रहा था । वो भी कम्बल ओढ थोडे तभी पाँव दौडता हुआ ऍसे पर जा पहुंचा और फिर वो अंदर होने वाले वार्तालाप बडे ध्यान से सुने लगा । इसमें कोई शक नहीं । शायद वो दुर्लभ ताज वाकई बडे कमाल की चीज है । उस पर एक नजर डालते ही लगता है वह कोई मूल्यवान वस्तु हो सकती है । कुल मिलाकर जितना शानदार वह दुर्लभ ताज है, भारत सरकार ने उतनी ही शानदार उसकी सिक्योरिटी कर रखी है । सिक्योरिटी तो उसकी वैसे भी शानदार होती । बॉस दशक बॉटल बोला अगर भारत सरकार के नाक का सवाल है, अगर कहीं वो दुर्लभता चोरी हो गया तो यहाँ की सरकार कजाकिस्तान के अधिकारियों कब तक क्या भूत दिखाएगी? क्या कहेगी उनसे? अगर लोगों ने यकीन के बलबूते पर ही तो अपनी दीदी महत्वपूर्ण चीज को प्रदर्शन के लिए भारत भेजा है । स्टेट दीवानचंद एका एक होकर के हस्ते लगा ऍर अच्छाई इंडिया की नाक तो अब चटनी ही काट नहीं है तो क्या क्या चाहिए बडी जब ताजी चोरी हो जाएगा तो फिर ना कैसे बची रहेगी ऍम वोटों पर भी मुस्कान टाॅस आई ही क्या बात है वो कैसे खामोश है? नहीं तू भी कुछ बोलता क्यों नहीं ऐसे कोई तो बात जरूर है । साइंस पढना खामोश बैठने वाले आदमियों में नहीं है तो ऍम थोडा ईश्वर में बोला हूँ ऍम मेरा दिल उस जो ताज को चुराने के लिए गवाही नहीं दे रहा है जो दवाई नहीं दे रहा । मुझे लगता है बॉस अगर हमने उस दुर्लभ ताज को चुराने की योजना बनाई तो ये तो ईश्वर जाने की हम अपनी योजना में कामयाब हो पाएंगे क्या नहीं लेकिन हमें और बहुत जरूर हो जाना है । हमारा सर्वनाश हो सकता है है बडी ये क्या बकवास कर रहा हूँ । फॅमिली खराब हो गयी है तेरी ऍम पांडे ने दोबारा खामोशी धारण कर लेंगे पागल आदमी और ये बात मेरे दिमाग में आई भी कैसे पडे तो ये सुजा भी कैसे की अगर हमने शोध ना पर काम किया तो हमारा सर्वनाश हो जाएगा । बडी इंद्रलोक से तेरे को आकाशवाणी हुई या पर जो मुंबई आया बक दिया नहीं मैंने ऐसे ही कुछ भी नहीं पता है फॅमिली दे रहा है कैसे अपने दुर्लभ ताज के उस विज्ञापन तो पढा था बॉस जो अखबार के भीतर छपा था बिल्कुल पडा था बढेगी सबने पडा था तो अपने विज्ञापन में ये भी जरूर पडा होगा कि वह दुर्लभ ताज अपनी सिक्यूरिटी खुद करता है । ऐसी कितनी कहानियां उस चीज के बारे में प्रसिद्ध है कि जब जब किसी ने उस्ताद को चुराने की कोशिश की तबतक ऊपर बात हुआ । बडी तो कहना क्या चाहता है । अच्छा अच्छा बोल मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूँ उसकी हम आज से पहले घटी उन घटनाओं से कुछ सीखना चाहिए । कुछ सबक लेना चाहिए और सबका हम ये साई कि हम उस दुर्लभ ताज को चुराने का खयाल अपने दिमाग से निकाल दें । यही कहना चाहता है बडी हम अपने हाथों से अपनी किस्मत छोड दें । कुल्लाडी चला ले । अपनी गर्दन पर ऍम थोडा बुखार सा नजर आने लगा । नहीं जवाब देना पांडे चाहिए बडी चुप कैसे हो गया? नहीं ऍम इतना कहना चाहता हूँ कि इसमें तो हमारी तभी बदलेगी जब हमारे साथ दुर्लभ ताज लगेगा । कहीं ऐसा ना हो कि हमारे हाथ दुर्लभ ताज भी ना लगे और हम हम बर्बाद भी हो जाए तो खडा है बडी तो एक नंबर का पागल आदमी है । परेशानी तो कजाकिस्तान सरकार द्वारा रचा गया इतना सा नाटक नहीं समझ सका । ॅ बडी आज की सुबह के अखबार में उस दुल्लत ताज के बारे में जो कुछ छपा था वो झूठ झूठ है । बडे किसी प्रोफेशनल राइटर द्वारा लिखी गयी वो एक ऐसी मनगढंत कहानी है । इसे पढकर हर कोई आकर्षित हो सके लेकिन आई नहीं । अगर कोई अपराधी उस दुर्लभ ताज को चुराने की कल्पना करें तो उस सनसनीखे स्टोरी को पढकर उसके होसले पस्त हो सके । वो ॅ नहीं मालूम पांडे शाही आज सुबह के अखबार में जो स्टोरी छपी वो दुर्लभ ताज की सबसे बडी सिक्योरिटी है । ऍम पाने के साथ साथ अर्धशत पाटल की आंखों में भी हैरानी के भाग उभरे । वो कैसे? अरे बडी जब अपराधियों को ये मालूम होगा कि आज तक जिसने भी उस ताज को छुडाने का प्रयास की आपको बर्बाद हो गया तो फिर कुछ दुर्लभ ताज को चुराने का दुशाहड करेगा । कोर्ट ने अरे बडी तेरे जैसे उस बात को सोच सोच कर तो पतलू ढीली कर रहे होंगे । खबर आ रहे होंगे ऐसी परिस्थिति में वो थोडी उस दुर्लभ ताज की सबसे बडी सिक्योरिटी हुई कि नहीं हुई । दशरथ बॉटल और ट्यूशन पांडे दोनों तंग रहे है । दोनों के नेत्र हैरत से फैल रहे कितनी ढूढ की सूजी थी? सेटको लेकिन अहम सवाल अब ये था कि उतनी दूर की कजाकिस्तान के अधिकारियों को भी सोची थी क्या उन्होंने साॅस के बारे में वो भ्रमजाल फैलाया था । लेकिन ॅ एक ऐतिहासिक कॅाल को छोडकर बोला जब किसी ऐतिहासिक वस्तु के बारे में इस तरह का झूठा प्रचार किया जा सकता है, क्यों नहीं किया जा सकता है? अरे बडी वो झूठा प्रचार उस दुर्लभ ताज की सिक्योरिटी के लिए किया जा रहा है उस की हिफाजत के लिए फिर इसमें गलत क्या है? दशक बॉटल चुप हो गया । बात सही थी, वाकई इसमें गलत किया था, कुछ नहीं हो । लेकिन एक आशंका दुश्मन पांडे और दशक पटल का दल में आखिर तक नगाडे की तरह बजती नहीं । अगर वह प्रचारको झूठी कहानी न होकर सच्चाई की जीती जागती तस्वीर हुआ तब क्या होगा? तब क्या वो बर्बाद हो जाएंगे? तब क्या उनका सर्वनाश निश्चित था? उन दोनों सब्जेक्ट पर जितना सोचा उतनी ही उनका तमाह की उलझनें बढती चली गई । अरे बडी साईं बडे तुम दोनों क्या सोचने लगे नहीं उसका मतलब उस तरफ ताज को चुराना पूरी तरह तय टाॅल बोला बडी मैं तुम लोगों को मूर्ख दिखाई देता हूँ । छह । दीवानचंद काले ना की तरफ उपकारा अगर आज छुडाना होता तो क्या मैं तुम लोगों के साथ यहाँ बैठा अपनी रात गाडी करता हूँ । ऍम पकाकर पहलू बदला ऍम ताज चुराना हंड्रेड पर्सेंट ते है बडी । अब हम लोगों को सिर्फ ये सोचना है कि वाह ताज टूर कैसे होगा, उसकी सिक्योरिटी को किस तरह भेजा जाएगा । जब हम लोग ताज चलाने का फैसला कर ही चुके हैं तो हम सबसे पहले ताज की सिक्योरिटी का फुल इंतजाम का पता करें । सिक्योरिटी का बंदोबस्त ऍम वो वो बंदोबस्त था जो पहली नजर में ही दिखाई दे जाता है जबकि वास्तव में हूँ । भारत सरकार ने मतलब ताज की सिक्योरिटी के वास्ते ऐसे कई सीक्रेट इंतजाम किए हो सकते हैं तो हमें पहली नजर में दिखाई नहीं देते । ऐसे कुछ सुरक्षा इंतजाम न सिर्फ ज्यादा शक्तिशाली होते हैं बल्कि हम जैसे अपराधियों के लिए ऐसे इंतजाम ही ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं । बॉस ऍम के चेहरे पर थोडी हिचकिचाहट के भाव है । अरे बडी तो कैसे गुप्ता इंतजामों की बात कर रहा है । नहीं जरा साहब साबुल जिसे जैसे उदाहरण के तौर पर ऐसी जगह सेफ्टी अलार्म लगा दिया जाता है । जैसे ही कोई व्यक्ति गलत तरीके से वहाँ होता है तो वो सिटी आलाम खुद बहुत नजदीक के पुलिस स्टेशन में पुलिस कंट्रोल रूम में क्या पर बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मियों के नजदीक बजता है । तुरंत भाग जाते हैं कि वहाँ अंदर कुछ गडबड है । कंट्रोल रूम से फौरन यही रिपोर्ट ऍम तमाम पुलिस पेट्रोलिंग ॅ कर दी जाती है । इसका नतीजा ये निकलता है कि अपराधी घटनास्थल पर ही क्यों कि तरफ फस जाता है और पुलिस ऍम के हाथों गिरफ्तार कर लेती है । इसके अलावा कीमती वस्तु के आस पास ऐसी वायदे बिछाकर उनमें करंट प्रवाहित कर दिया जाता है ऍफ नजर नहीं आती है । इतना ही नहीं मेरे कहने का मतलब ये है कि भारत सरकार दस दुर्लभ ताज की सिक्योरिटी के लिए और भी ऐसे कई इंतजाम किए हो सकते हैं । इसलिए जब तक हमें तमाम इंतजामों के बारे में पूरी जानकारी हासिल नहीं हो जाते हैं तब तक हमारा उस दुर्लभ ताज को चुराने के बारे में सोचना भी बेवकूफी है । अगर हमें उस बात को जुलाना है तो सबसे पहले हमारा काम ही होना चाहिए कि हम उन गुप्त इंतजामों के बारे में फुल जानकारी हासिल करेंगे । श्राॅफ बॉटल के बातों से बहुत प्रभावित हुआ लेकिन दशा अच्छाई हमें इतनी महत्वपूर्ण जान गाडी हासिल कैसे होगी? नहीं । जानकारी हासिल करने का सिर्फ एक रास्ता है, पहुंॅच था । हमें किसी तरह इनसाइट हेल्प हासिल करनी होगी । हमें नेशनल म्यूजियम के पीछे ऐसे सिक्योरिटी ऑफिसर को अपने साथ मिलाना होगा जो दुर्लभ ताज की फुल सिक्योरिटी की जानकारी रखता हूँ । आप से दीवानचंद के नेत्र भट पडेगी । तेरह माँ तो ठिकाने हैं । साई पडे तो मालूम है तो क्या पकडा है ऐसा भी कहीं हो सकता है । बिल्कुल हो सकता है कैसे मैं बताता हूँ । तभी दुष्यंत बीच में बडे उत्साह के साथ बोला देखो मेरे पास एक ऐसी योजना है जिससे नेशनल म्यूजियम के किसी सिक्योरिटी ऑफिसर से मदद ली जा सकती है । अब सिर्फ दीवानचंद हैरान ने गांव से दुष्यंत को देखा है क्या? क्या क्या योजनाएं चाहिए? अभी बताता हूँ पानी फौरन लगभग कर । वहीं कॉन्फ्रेंस हॉल में एक स्कूल पर पडा । पिछले दिन का समझा टाइम्स अखबार उठा कर रहा है है दुष्यंत उस अखबार का पन्ना खोला जिसपर ऍम छत पे रहते हैं । इस विज्ञापन को बडा ऍम पांडे ने अखबार सेट के सामने रखकर छोटे से विज्ञापन को उंगली से ठंडक आया । विज्ञापन को पड रही सारा माजरा खुद खुद आपकी समझ में आ जाएगा । दीवानचंद के साथ साथ दशक बॉटलनेक उस विज्ञापन को बडी उत्सुकता के साथ पढा लिखा था । आवश्यकता है आवश्यकता है कैसी गवर्नेंस की । छह माह के बच्चे की अच्छी तरह देखभाल कर सकें । शैक्षिक योग्यता जरूरी नहीं लेकिन आवेदनकर्ता की अपना कोई छोटा बच्चा ना होगा । मासिक आय तीन अंकों इच्छुक और क्या लडकी नीचे लिखे पते पर फौरन संपर्क करें । जगदीश पालीवाल, मुख्य सुरक्षा अधिकारी, नेशनल म्यूजियम चार बता सत्रह भी न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, नई दिल्ली उस विज्ञापन को बढकर शीट दीवानचंद थोडी बचत की निगाहों से ट्यूशन पानी की तरफ देखा । बडी इस विज्ञापन में क्या खास बात है? आपको कुछ खास बात नहीं दिखाई थी । नहीं नहीं ये तो इस विज्ञापन से आप समझ गए होंगे कि जगदीश पालीवाल नाम का ये व्यक्ति नेशनल म्यूजियम का जी सिक्योरिटी ऑफिसर है और उसे अपने छह महीने के बच्चे की देखभाल के लिए एक गवर्नेंस की जरूरत है । आप साॅस अगर हम जगदीश पालीवाल के घर में अपनी तरफ से किसी लडकी को गवर्नेंस बनाकर भेज नहीं कैसा रहेगा तो उससे क्या होगा? उससे ये होगा कि हमारे द्वारा भेजी की लडकी सबसे पहले जगदीश पालीवाल को अपने प्रेम चालू हो । उसे अपने संबंध मरीज इस वक्त दीवाना बनाएगी और जब जगदीश पालीवाल उसके इश्क में पूरी तरह गिरफ्तार हो चुका होगा । जब उसे उस लडकी के अलावा इस दुनिया में कुछ नजर नहीं आएगा तब हो उससे बडी सहूलियत के साथ दुर्लभ ताज की सिक्योरिटी के बारे में सब कुछ उगलवा लेगी । बडी लेकिन इस बात की क्या गारंटी है कि बालीवाल उस लडकी की मोहब्बत में गिरफ्तार होगा ही होगा? गारंटी है अगर लडकी को स्वर्ग की अप्सरा हो अलग फॅमिली के हो हो मर्द को फाॅर्स बंद हो उस बिचारे जगदीश पालीवाल की तो मौका ही क्या है? ऐसी लडकी के सामने दो बडे बडे देवताओं का ईमान भी डोल जाता है । ऍम देखता रह गया थोडी साइन तो कहता तो ठीक है लेकिन सवाल यह है कि हमें जन्नत की ऐसी हूँ मिलेगी कहा जो हमारे लिए सब कुछ करेंगे वो हमें मिलेगी नहीं । बहुत बल्कि मिल चुकी है मतलब दीवानचंद के साथ सब फॅमिली चौका । आपने ममता को देखा है । बॉस कौन मंत्र होंगे कुलभूषण की प्रेमिका मंत्रा वहीं मंत्रालयो किशनपुरा में रहती है और जिसके साथ कुलभूषण का बडा जबरदस्त तगडा ॅ चल रहा है । नहीं नहीं मैंने तो नहीं देखा फाॅर्स अगर उस लडकी को देखोगे तो बस इस दे रह जाओगे कि चडने खिला कमल है महलो की वह शहजादी है । इसमें गलती से किशनपुरा जैसी बस्ती में चल ले लिया है । संस्कार बहुत साक्षा स्वर्ग की अप्सरा हक जन्नत की हूर है उसका सर ऊॅट उसका छरहरा बदन उसकी तनी हुई सुडौल सपोर्ट चाहती हूँ । उसके पूरे फॅमिली तरक्की कसम से वहाँ तक गोला गोला बोलते बोलते दुष्यंत पांडे के साथ से तीस देश चलने लगी । कुछ चलती है तो उसके पैरों कि धमक से उसके पूर्व में ऐसी धक्कम पैदा होती है जैसे वो नहीं चल रही हो और कि संगीत की तान बढते रख रही हो । बस बस बस बडी पांडे साइन तुम्हें तो लडकी के जिस्म का पूरा भूगोल ही ना आप डाला नहीं लडकी है ऐसी काॅस्ट ब्रेड पनाह, तारीफ के काबिल लेकिन जब वो इतनी खूबसूरत है तो कुलभूषण के फंदे में कैसे बच गई ऍम इसको भूषण की किस्मत किसी और मामले में तेज हो या ना हूँ लेकिन कम से कम लडकी के मामले में बहुत तेज किस्मत है बढा । अब तो यह चाहता है चाहेंगे कि मंत्री को गवर्नेंस बनाकर जगदीश परिवार के घर भेज दिया जाएगा । बिल्कुल पहुँच और मेरी गारंटी है कि जगदीश पालीवाल उसके प्रेम जाल में फंसे का ही फंसेगा । मंतर को देखते ही उसके समाचार की उच्चता जल जानी है और बस कुत्तों का कुत्ता बन जा रहा है कि वह हथियार है बॉस इसका निशाना किसी भी हालत में खाली नहीं जाएगा । गडबडी पांडे शाइन मंत्री हमारे लिए काम क्यों करेगी? क्यों नहीं करेंगे बॉस? कुलभूषण कहेगा तो वह करेगी हजार बार करेगी । भूषण कहेगा उससे कैसे नहीं कहेगा? ऍम चेहरे पडेगा । एक बडे खूंखार भाव है । उसने नहीं किया तो हमने उसे यहाँ से बाहर नहीं निकाल देना है । फॅमिली को जन्म नहीं पहुंचा देना है । बाॅधकर दिमाग में भरे बडी तो कहता था ठीक है अगर ये बात है तो बुलाकर ला कुलभूषण हो । कुलभूषण जो दरवाजे से कम लगाए खडा सारी पांच चीज चल रहा था एक का एक उसके हाथ पांव फूल गए । सांसियों से अपने फॅमिली महसूस हुई । वापस बडी तेजी से अपने कमरे की तरफ भाडा जल्दी कुलभूषण अपने कमरे में बिल्कुल इस तरह ले चुका था जैसे गहरी नींद हो रहा हूँ । तभी वहाँ दुश्मन पांडे के कदम पडेगी । कुलभूषण फिर भी सोने का आग्रह करता रहा । ऍसे छोडकर उठाया ऍम था मैं जल्दी खडा हो बॉस बुला रहे हैं बॉस लेकिन क्यों पहले का भी आप की कहानी तो जवानी बताएंगे कुलभूषण भीगी बिल्ली बना खामोशी से उसके पीछे पीछे पडा । उसे ऐसा महसूस हो रहा था जिससे वो बली का बकरा हूँ और अब करवानी के लिए ले जाया जा रहा हूँ । कुलभूषण जैसे ही कॉन्फ्रेंस हॉल में दाखिल हुआ तो उसे दीवानचंद की एक भरपूर नजर उसके ऊपर पडेगी । हाँ छोटा कुलभूषण आपने मुझे याद किया साहब, अब मैंने तुम्हें याद किया कुलभूषण चाहिए आवाज तो मेरे पास आओ । कुलभूषण कपकपाती कदमों से चलता हुआ ऍम के नजदीक पहुंचा दवाई टाइम तुमने हम चाहिए विनती कीजिए ना तुम्हें या कुछ दिन के लिए रहने दिया जाए । हाँ सब मैंने गिनती की थी । बडी हमने तुम्हारी ट्वेंटी पर अच्छी तरह सलाह मशवरा किया है । परसाई खूब चला । मशविरा करने के बाद हम लोग इस नतीजे पर पहुंचे कि तुम क्या दे सकते हो लेकिन तो मैं इसके बदले हमारी एक सर पूरी करनी होगी । और ऍम ऐसा लग रहा था जैसे कोई तानव उसके सीने को अपनी मुट्ठी में जकडकर जोर से भेज रहा हूँ । दशरथ अच्छाई दीवानचंद दशक बॉटल की तरफ हुआ । बडी तो इसको शर्त के बारे में बता आप ये बताए से करना क्या है? नहीं दशक ऍम खारा । फिर उसने कुलभूषण को सबसे पहले दुर्लभ ताज की चोरी के बारे में बताया । फिर से ये बताया की स्टोरी में मंत्रा को लोगों की किस प्रकार मदद करने थे और पोषण सकते जैसी स्थिति में खडा रहा हूँ । खून उसकी कनपटी पर ठोकरे से मारने लगा घटिया इंसान थे वो कितने बीच एक लडकी को एक लडकी की आप को वो अपने मतलब के लिए दांव पर लगा देना चाहते थे । कुलभूषण चाहिएँ बडी तूने अभी तक जवाब नहीं दिया तो मंत्रा को गवर्नेंस बनाकर जगदीश घर भेजेगा या नहीं मैं उसे कहीं भी कैसे दे सकता हूँ साहब कुलभूषण डाॅ कहीं भी जाने या न जाने का फैसला तो खुद मंत्राी कर सकती है । बडी बकवास मत कर हम लोग कोई दूध पीते बच्चे नहीं ॅ कुत्ते की तरह घूम रही है तो पुलिस के हत्थे चढा फॅमिली जिंदगी का दिया मुझे इस इस वक्त तेरे ऊपर खडा ही घटना है और ऐसी स्थिति में मंत्रालय खतरे से बचाए रखने के लिए कुछ भी कर सकती है । ऍम मोहब्बत का एक नाटक तो करना पडेगा एक ड्रामा तो खेलना पडेगा और भूषण चुप खडा रहा ऍम अगर तो हमारी छत्रछाया में रहना चाहता है । अगर चाहता है की तो पुलिस के हत्थे ना चढे तो थोडी देर को मंत्रा से कम दो कडाना ही पडेगा भूषण कर चुके हैं सोचने का समय नहीं है पर भूषण इस बार ऍम जल्दी जहाँ ना में जवाब तो करना करते हो तो टाॅप पागल नहीं है तेरे जैसे दिल्ली पुलिस ऍम सुना हुए इश्तिहारी मुजरिम को अपने यहां शरण दे और खामखा किसी बडे छह महीने में फंसे भूषण के कहने पर कशमकश के भाव चाय रहे । वो फैसला नहीं कर पा रहा था कि उसे क्या करना चाहिए ऍम आई ऍम तक पडता से कहा बडी तो जो हम लोगों का भेजा खडा करता है नहीं तो उस कमीने को वापस किशन पूरा छोड खडा हमारे किसी मतलब की दवा नहीं है । फॅमिली नहीं जाऊंगा कैसे नहीं जाएगा दुश्मन पांडे ने अपनी शर्ट की बाहर चढाई और बहुत रूप में उसकी तरफ पडा तेरा तो बात ही जाएगा । शौचालय मास्टर के पूरे शरीर में खौफ की लहर दौड में उच्चतम तथा की वो उनके कई रहस्यों वाक हो चुका है । इसलिए ऐसी परिस्थिति में फॅमिली पूरा नहीं बल्कि कहीं और ही छोडकर आने वाला था । शायद दूसरी दुनिया में ऐसी दुनिया में जहां से वापसी का कोई रास्ता नहीं ऍन उसके बहुत कसकर पकड लीजिए और फिर वो उसे पूरी तरह घसीटता हुआ बोला और विकास बाहर देखा । सोवर के बच्चे ऍम गया मैं मैं मैं तैयार तैयार हूँ । मैं आज ही मंत्री के पास जाकर इस बात की कोशिश करता हूँ कि वह उपगवर्नर बन जाएगा । कोशिश नहीं । बडी कोशिश नहीं तो यह काम का हर हालत में करना है । अगर मंत्रा परिवार के घर गवर्नर्स बनकर नहीं गए तो समझते हैं और हमारा रिश्ता खता बडी । फिर हम तो ये नहीं जानते और तो हमें नहीं जानता हूँ और उसे वहाँ जाकर सिर्फ बच्चा ही नहीं खिलाना है । अभी दशक बॉटल भी कर रहा हूँ, बल्कि उसे वहाँ जाकर बच्चे के आपको भी खिला रहा है । उसकी भी लल्ला लल्ला लोरी करनी है । बच्चे से ज्यादा बच्चे के पास की देखभाल करनी है । उसका तो लगता की सिक्योरिटी के बारे में सारे राज उगलवाने है तो तभी तभी हमारे काम मुकम्मल होगा मैं मैं मैं समझ गया । कुलभूषण ने बेबसी की स्थिति में अपनी गर्दन हॅूं सबकुछ समझ गया । उसके हालत ऐसी हो रही थी जैसे उसने किसी शेर की मुझे पकडा नहीं होंगे जिन्हें होना छोड सकता था और न ज्यादा देर तक पकडे रह सकता था । रात के तकरीबन बारा बज रहे थे । जब कुलभूषण छिपता छिपाता स्टेशन पर आ पहुंचा । कृष्णपुरा में घुसते हुए वो बेहद सावधान था । बल्ले का डर उसके दिमाग में बैठा हुआ था । बल्ले के खौफ की वजह से ही वह मंत्रा के घर में पीछे से खिडकी कूदकर अंदर घुसा । मंत्रा तब खबर पडी हो रही थी कुलभूषण मुँह छोडकर जगाया तो तुम मुंतर कुलभूषण को देखते ही चौक पडी तो और उसकी आंखों से तीन उड गई सब कुछ ठीक रहना मंत्रा तो मैं क्या नहीं आना चाहिए था? भूषण क्यों? उस पर योगी तो हताश करता घूम रहा है । भूषण तो सुबह से दो बार किशनपुरा में आ चुका है और यही हाल बल्ले का है । वो योगी के खौफ की वजह से खुलेआम तो नहीं घूम रहा लेकिन मुझे खबर है कि वो अपने चाकू से तुम्हारे पेट की अंतडियां फाड डालने के लिए बेहद व्याकुल है । उसके अलावा तो हर एक और बहुत पूरी खबर है । भूषण क्या सिर्फ यही दोनों तुम्हारी तलाश में नहीं लगे हुए? बल्कि जब से दिल्ली पुलिस ने तुम्हारे ऊपर एक लाख का इनाम घोषित किया है तब से इनाम हासिल करने के लालच में कृष्णपुरा के कई दूसरे कुंडे भी तुम्हारी तलाश में लग गए हैं । इसीलिए तो मैंने तुमसे कहा तो यहाँ नहीं आना चाहिए था । तुम चाहते नहीं । भूषण आज पूरे दिल्ली शहर में तुम्हारे नाम की चर्चा है । हर गली में, हर चौराहे पर, हर नुक्कड पर तुम्हारे बारे में बातें हो रही है । लोग तुम्हें लॉटरी का टिकट समुद्र है । भूषण हर कोई तुम्हें गिरफ्तार कराकर एक लाख कमाने का इच्छुक है था । दाता कुलभूषण को अपने हाथ पर बर्फ होते महसूस हुए तो दिन बदन कैसे बनाना चालू फसता जा रहा था । भूषण कुलभूषण के अचेतन मस्तिष्क पर हथोडी जैसी चोट पडी सुबह जब यहाँ पर होगी आया था तो उसके साथ पूरी पुलिस पलटन भी थी वो वो तुम्हारे घर का सारा सामान कुछ करके ले गया । यहाँ तक ऑटो रिक्शा भी नहीं छोडी । ये देवा कुलभूषण के मुझसे संस्कारी छोड पडेगी । वहीं कुलभूषण बैठ पर हम से बैठ गया । उसके चेहरे से पसीने की धाराएं बहने लगी । मंत्रा भी उसी के नजदीक ही बैठ गई और बडी अजीब नजरों से उसे देखती हुई शुष्क लहजे में बोली तुम कल से कहाँ थे? तुम्हारे बारे में सोच सोच कर परेशान हो रही थी । सब से दीवानचंद के अड्डे पर ही था वो लोग तुम्हारे सब किस तरह का व्यवहार कर रहे हैं, ठीक ही कर रहे हैं । उन्होंने मुझे वहीं रहने के लिए छोटा सा कमरा दिया हुआ है । अगर ये बात है तो फिर तो खतरनाक जगह पर क्यों आया हूँ । यहाँ तो तुम्हारे लिए मौत ही मौत है कुलभूषण के चेहरे पर । अब जिसकी चाहत के भाव उभरे चाहते तो नहीं देते । मैं एक बडी भारी मुसीबत में हूँ । मंत्रा मुसीबत मंत्र कभी झूठ सूचना कैसी मुसीबात कुलभूषण अपना चेहरा दोनों हथेलियों में छुपा लिया । उसी भक्ति ऐसी है जिससे सिर्फ तो मुझे छुटकारा दिला सकती हो मैं हाँ तुम ऐसी भी क्या मुसीबत आएगी? मंत्रा की आंखों में आश्चर्य के भाव उभरे कुलभूषण उससे फिर भी कुछ कहने की हिम्मत ना हुई । पोषण अगर तुम कुछ बोलते क्यों नहीं? क्या बात है? भूषण ने बेहद लडते लडते सारी पांच मंत्रा को बता दी । उस ने ये भी बताया कि उसने किस तरह गवर्नर्स बनकर जगदीश पालीवाल को अपने प्रेम जाल में फंसाना था और ये भी बताया कि अगर उसने वह काम नहीं किया तो उसका क्या अंजाम होगा?

भाग 13

मंत्रालय सब घर बैठे रह गई । फिर उसके पास थी और खिडकी के पास जाकर खडी हो गई । क्या बात है मंत्रा कुलभूषण फौरन उसके पीछे पीछे खिडकी के पास पहुंचा । क्या तुम मच्छी नाराज हो गई? मंत्रालय अपना चेहरा खिडकी के पल्ले से सटा लिया तो कुछ बोलती क्यों नहीं? मत्रा और भूषण ने मंत्रा का चेहरा झटके से अपनी तरफ क्या? तो उसका तेल दिमाग पर बिजली शिखर खडा कर गिरी रो रही थी । उसका चेहरा आंसू से था । तब पता कुलभूषण जानता हूँ । मंत्रा कॅप्टन दुखता है हूँ । लेकिन तुम ही बताओ मैं क्या करता हूँ? कुलभूषण की आंखों में भी आंसू चलाएगा । कुछ ज्यादा ही मुझे पूरा किया कि मैं ही बात करूँ, लेकिन चिंता मत करो । अब अगर उनकी छत्रछाया मेरे ऊपर से उठती है तो अच्छा मुझे परवाह नहीं । मुझे किसी पास की परवाह नहीं है । नहीं खुश मंत्रालय जल्दी से अपना अभी साफ किए थे । मैं इस वक्त बहुत लोगों की मदद की बहुत जरूरत है । अगर उन लोगों की छाया तुम्हारे ऊपर छूट गई तो तुम नहीं जानते तो कितने बडे संकट में खर्चा हो गया । लेकिन ऍम मांॅ पैसे लगते हैं । हाँ तोहरे लिए काम करूंगी तो भरी खुशियों के लिए बहुत दिन से कहने में बनता है खाना दिल से ही कह रही है रो पडा कुलभूषण मंत्रालय उसके सीढी से लगती धीरे धीरे सुबह रही थी । उस रात कुलभूषण जब वापस स्टेट के अड्डे पर लौटा उसका मन भारी भारी था । उस दिन भी दुष्यंत पांडे ने किशनपुरा में उसकी आंखों पर पट्टी बांधी और तब वो से अपने अड्डे पर लेकर गया । उन लोगों का डब कहाँ है इस राज से कुलभूषण अभी तक अनजान था । उसने कई बार रात को चोरी छिपे अड्डे का गुप्त रास्ता पता लगाने का प्रयास किया लेकिन हर बार उसे अपने मकसद में नाकाम नहीं मिलेगा । बेपनाह कोशिशों के बाद उसे सिर्फ इतना मालूम हो सकता है कि वो लोग कॉन्फ्रेंस हॉल के अंदर ही कहीं से प्रकट होते हैं और फिर वहीं से घायल जनि आने जाने का रास्ता उसी कॉन्फ्रेंस हॉल के भीतर से था । बहरहाल उस रात के बाद से मंत्रा की परीक्षा की घडी शुरू हुए । वो अगले दिन ही नेशनल म्यूजियम चीफ सिक्यूरिटी ऑफिसर जगदीश पालीवाल की कोठी पर जा पहुंची है । पहला झटका तो यही देखकर लगा कि वहाँ उससे पहले ही तीन लडकियां मौजूद थी । मंत्र काॅप करके बजने लगा उसे वो नौकरी किसी भी हालत में चाहिए थी । किसी भी कीमत पर चाहे कुछ भी ड्रामा क्यों ना करना पडे । मंत्र का दिमाग एक काफी तेजी से चलने लगा । एक एक करके तीनों लडकियों को ड्राइंग हॉल में बुलाया गया । सबसे आखिर में मंत्रा की बारी आई । मंत्र डरती डरती ड्रॉइंग हॉल में दाखिल हुई । वो काफी बानवे ढंग से सजा हुआ ऍम था जिसमें सामने दो अलग अलग कुर्सियों पर मिस्टर ॅ पालिवाल बैठे थे । दोनों जवान थे खुबसूरत उनकी उम्र तीस बत्तीस के आसपास थी और शक्ल सूरत से ही काफी सबसे नजर आ रहे थे । माॅल कीबोर्ड नहीं एक पूरा चिट्ठा बच्चा पडा किलो ली से कर रहा था । वो भी अपने मम्मी डैडी की तरह ही खुबसूरत था । समझते हैं । उन दोनों को देखते ही मंत्रा ने अपने हाथ छोड दिए । नमस्ते उन दोनों के हाथ भी नमस्ते की मुद्रा में जुडे बैठो । फिर जगदीश पालीवाल ने कहा मंत्री सिकुडी सिमटी सी कुर्सी पर बैठ गई । तुम्हारा नाम क्या है? पहला सवाल मिसिस परिवार में पूछा । संध्या शर्मा उसने चांद पूछ कर रख ली । नाम बताया हर शादी हो गई जी नहीं वो मिसिस । पालीवाल ने राहत की सांस ली तो किसी छोटे बच्चे के होने का सवाल ही नहीं उठता, कहाँ पर पडी हो? बीए फाइनल और रहती हूँ । यही वो पल था जब मंत्रालय ड्रामा क्या बसेस पालीवाल को सवाल के पूछते ही मंत्र की आंखों में आंसू छह चलाए । उसने दोनों हथेलियों से अपना चेहरा छिपा लिया और जोर से सुबह उठे । हर बडा उठे पालीवाल दंपत्ति जबकि जगदीश पालीवाल तो कुर्सी चलकर खडा हो गया । क्या बात है? हम लोगों ने कोई गलत सवाल पूछ लिया । नहीं साहब! मंत्रालय सुब रखते हुए ही कहा आप लोगों ने कोई गलत सवाल नहीं पूछा, फिर रुक रही हो । जिसकी किस्मत में ही रोना लिखा हो साहब और उनकी लाहौर कर भी कर सकती है । यू तो ये दुनिया इतनी बडी है साहब, लेकिन इतनी बडी दुनिया में मेरा कोई घर रहे कोई ठिकाना नहीं हो सकता है । परिवार दंपत्ति क्योंकि कितनी बडी दुनिया में तुम्हारा ही घर में है । कोई ठिकाना नहीं । ऐसा ऐसा है तो हर बात नहीं नहीं । बहन भाई कोई नहीं जगदीश पालीवाल के स्वर में है । तुम्हें नहीं साहब कमाल है । टिकट यकीन नहीं आता जब भी जब कि नहीं आता साहब मंत्र नौकरी हासिल करने के लिए शानदार ड्रामा करते हुए बोली कि आज से सिर्फ एक महीने पहले मेरे पास कुछ था सब कुछ मेरे मामा, एक भाई चंडीगढ की रहने वाली हूँ साहब वही मेरे पिताजी का कपडे का अच्छा कारोबार था । नीचे दुकान थी और ऊपर मकान उस पूछ रहा हूँ । मैं एक सहेली के घर गई हुई थी, उसके अगले दिन बताने वाली थी और और उसी रात सब कुछ तबाह हो गया । सब क्या हुआ था जगदीश पालीवाल के चेहरे पर अब ऍम । दरअसल इस तरह से उसका पंजाब पुलिस से बचकर भागते हुए दो आतंकवादी हमारे घर में घुस आए थे । उन्होंने जब हमारे घर में शर्म चाहिए तो पिताजी और भैया ने उनका विरोध किया । इसी बात से क्रोधित होकर आतंकवादियों ने मम्मी सहित मेरे पिता जी मेरे भाई की हत्या कर दी है और इतना ही नहीं उन्होंने हमारे घर दुकान में भी आग लगा डाली तो अच्छा पालीवाल दंपत्ति सन्न रह गए । जबकि मंत्रा अब पहले से भी ज्यादा जोर जोर से सुबह रही थी । मंत्रा के इस ड्रामे का मिसिस पालीवाल पर और भी गहरा असर हुआ । वो अपने बच्चे को गोद में उठाए उठाए मंत्रा के नजदीक आ गई और फिर उसकी कंधे पर्स नहीं से हाथ रखा । धीरे धीरे संख्या होगी । इसमें कोई शक नहीं कि तुम्हारे साथ भयंकर दुर्घटना घटती है लेकिन भगवान बहुत बडा है । उस सब की मदद करता है । मंत्रा फिर भी धीरे धीरे से व्यक्ति रही । हमारी सहानुभूति तुम्हारे साथ है । संध्या जगदीश पालीवाल ने भी उसे हौसला बनाया । उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं हूँ । फॅमिली नौकरी देवी साहब क्यों नहीं? और ये नौकरी देकर मैं तुम्हारे ऊपर कोई ऐसा नहीं कर रहा हूँ जो पीछे बोला बल्कि नौकरी कबूल करके तुम मेरे परेशान कर रही हूँ । मुझे अपने आप पे गर्व है कि मैं तुम्हारे जैसी बेसहारा लडकी के काम आ सका । ऍम साहब, मंत्रालय जल्दी जल्दी अपनी आंखों में आंसू पहुंचे और हाँ, तभी मैं इस परिवार बोली आज से कम इसी कोठी मेरा होगी हमारे साथ । अब यही तुम्हारा घर है । लेकिन मंत्रा के चेहरे पर हिचकिचाहट के भाव उभरे । प्लीज संध्या तीन चार मत करना । अब तुम इसी घर की एक सदस्य हो । जी ठीक है वो शब्द कहते हुए मंत्रालय उन दोनों के सामने अपनी गर्दन छुपा नहीं । इस तरह मंत्रा जगदीश पालीवाल के यहाँ नजर गवर्नेंस की नौकरी पाने में सफल हो गई । बल्कि उसी कोठी के भीतर उसे रहने के लिए एक बेडरूम भी मिल गया । जगदीश पालीवाल की जिस बच्चे के मंत्रा को देखभाल करनी थी, उसका नाम गुड्डू था । ये बात मंत्रा को बाद में पता चलेगा कि मिसिस पालीवाल भी कृषि मंत्रालय में सचिव थी । वो अपने कुड्डू बेटे को मंत्रा के हवाले करके उसी दिन सरकारी काम से एक सप्ताह के लिए उदयपुर चली गई । मथुरा का काम और भी आसान हो गया । अब और ज्यादा सहूलियत से जगदीश पालीवाल को अपने फंदे में आ सकती थी और उसी से मंत्रा का खेल शुरू । रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे जब मंत्रा कीरित विधायक ठीक से पूरी कोठी दहल गई । जगदीश पालीवाल उस वक्त तक जाग रहा था और आपने बेडरूम में लेता कमांडर करन सक्सेना सीरीज का एक जासूसी नोबेल पढ रहा था । मंत्रा के हृदयविदारक ठीक सुनते ही उसके ऍम द्वितीय फुर्ती के साथ मंतर के पेट्रोल की तरह सकता ऍम कराता हुआ भीतर दाखिल हो गया । उस जैसे ही अंदर घुसा और मंत्र बेहद दहशत । सवा अवस्था में चीखती हुई उसके शरीर फॅमिली और बचाओ बचाओ चिल्लाने लगी । वो अभी भी नहीं कि आप खुश में थी । संध्या संध्या पालीवाल ने उसे पूरी तरह से छोडा । मंत्रालय चौंकने का सफर बस तब क्या उसके आगे खुली है? वो एकदम झटके से पीछे पडी । उसके पक्ष ब्रेक से ऊपर नीचे उठ गिर रहे थे । सांसों में तूफान था और कपडे अस्तव्यस्त । समय क्या हुआ? संध्या पालीवाल नौ से हैरान निगाहों से देखा तो चिल्लाई क्यों नहीं? जवाब देने की बजाय मतलब हम से पेट पर बैठ गई और ऍम को संतुलित करने का प्रयास करने लगे तो मेरा सपना दिखा रहा हूँ । कैसा सकता हूँ हमारे घर में आग लग रही है । मेरे मम्मी डैडी भाई का खून बहाया जा रहा है । खून के छींटे हो रहे हैं । उनकी चीखें गूंज रही है । मुझे मुझे सपना अच्छा दिखाई देता है । सब और छुट्टी । मैं सपने को देखती हूँ तो इसी तरह फॅमिली हूँ । बोलते बोलते मथुरा के आंखों में आंसू का समंदर कर गया । उसने सोर्स एक सबके लिए धीरज हूँ । जब पालीवाल ने उसे हौसला दिया । वक्त के साथ साथ हम सब मर जाएगा । स्वामी मेरी वजह से आपको इतनी रात को परेशानी उठानी पडेगी । इसमें परेशानी की कोई बात नहीं । वैसे भी अभी तो मैं चाह रहा था । मैं आपसे ठीक हूँ क्यों नहीं जो कहना है देश तो जिस साथ मुझे सपना दिखाई देता है, उस रात अगर मैं अपने कमरे में अकेली सोती हूँ तो ये सपना मुझे कुछ बार बार आता है क्या? मतलब तो फिर आप जा सकते तो आज की रात नाथ की कमरे में होना चाहती हूँ । मैं जमीन पर इस हो जाऊंगी वरना बता साहब के सपना भाजपा मुझे परेशान करता रहेगा । लेकिन जगदीश पालीवाल मंत्री को प्रस्ताव पर हक्का बक्का रह गया । लेकिन क्या साहब पारिवारिक चुके हैं? हूँ आप ऍसे नहीं नहीं आॅक्सी कोई बात नहीं है । वालीवाल को सुजा नहीं । वो उस लडकी को क्या कहेंगे यही सोचा होंगे । अरे नहीं नहीं अगर तुम्हें सपने की वजह से ज्यादा परेशानी होती है तो तो मेरे पेट्रोल हो जाऊँ क्यों? क्यों साहब मंत्र तुरंत जगदीश पालीवाल के बेडरूम में एक चटाई पर जाकर लेट गई थी । गुड्डू तो थोडी देर पहले तक उसके साथ हो रहा था । मंत्रालय अब उसे जगदीश पालीवाल के बिस्तर पर सुला दिया । बेचारा पालीवार वो अपने अंदर अजीब सी बेचैनी महसूस कर रहा था । उस रात लाख कोशिश करने के बावजूद भी उसे नींद नहीं आ सके । वहीं बिस्तर पर लेटा करवट पर करवट बदलता रहा । उसकी आंखें बार बार मंत्र कॅश जाती थी । मंत्रा सतलुज जन्नत की हूर थी, स्वर्ग की अप्सरा थी और आप पालीवाल पर बडी भारी गुजरी मंत्रा करूँ जादू उसके ऊपर चल चुका था और उस रात से नावाकिफ मंत्रा भी नहीं थी वो बंद पलकों की जनवरी में से जगदीश पालीवाल कि प्रत्येक हरकत पर नजर रख रही थी । अगले सुबह के बाद जगदीश पालीवाल नेशनल म्यूजियम जाने के लिए तैयार हो रहा था । तब योजना देखा कि मंत्रा भी गुड्डू को तैयार कर रही है । क्या बात है आज सुबह ही सुबह छपान को दूरा कैसे बनाया जा रहा है । सोचती हूँ साहब थोडी देर के लिए से कहीं बाहर घुमा लाओ फिर तो अच्छा है लेकिन कहाँ होगी हाथ? बताइए ना? कहाँ जाऊँ मैं क्या बता सकता हूँ । फिर भी कोई आईडिया तो दीजिए । पहली बार सोच में डूब गया तुमने ऍम देखा है । एक पालीवाल बोला ऍम नहीं तो मैं म्यूजियम में राउंड पर जा रहा हूँ । जगदीश पालीवाल अपनी ऍम चाहो तो तो बिल्कुल को लेकर मेरे साथ चल सकती हूँ । इसी बहाने सैर भी हो जाएगी । वैसे भी आजकल म्यूजियम में कजाकिस्तान से देश फॅस प्रदर्शन के लिए आया हुआ है । ठीक है फिर वहीं चलते हैं । मंत्रालय उत्साहित होकर कहा वहाँ का साथ ही रहेगा । फिर मुस्कुरा दिया पालीवाल । जबकि मंत्रा भी मन ही मन अपनी सफलता पर प्रसन्न हो रही थी । कुछ देर पश्चात तो जगदीश पालीवाल के साथ कार में सवार होकर नेशनल म्यूजियम पहुंच गयी । वहाँ उपस्थित तमाम सुरक्षाकर्मियों ने फौरन एडियाँ बजा बजाकर परिवार को साइलेंट मारा । फिर पालीवाल ने तीन चार सुरक्षाकर्मियों से सिक्योरिटी के संबंध में कुछ एक सवाल पूछे । उसके बाद वो आगामी आधा घंटे तक राउंड लगाने के साथ साथ मंत्रा को म्यूजियम के अलग अलग हिस्सों में घुमाता रहा । सबसे ज्यादा टाइम उन्होंने हॉल नंबर चार में गुजरा हॉल नंबर चाहिए यानी म्यूजियम का वो हॉल वो कमरा जहाँ दुर्लभ ताज प्रदर्शन के लिए रखा था । उस ताज की भव्यता देखकर मंत्री भी पहुंच चुकी रहे । उसके दिमाग के अंदर से चलने लगे । जबकि जगदीश पालीवाल इस बीच मंत्रा को उस दुर्ग रफ्तार से जुडी अनेक रहस्यमई गाथाएं सुनी होता रहा था । सारा वक्त किसी तरह गुजर गया । लाॅक क्या सोच रही है? संध्या ऍम ड्राइव करते समय जगदीश पालीवाल ने ममता की तरफ देखा जी कुछ भी नहीं कुछ तो दर्शन उस दुर्लभता आज के बारे में सोच रही थी । क्या चीनी की वो कितना सुंदर है, कितना बदलती है तो तुम मूल्यवान भी बहुत होगा साहब एकदम सही । कहा तुमने ऍफ मूल्यवान है बल्कि बेहद मूल्यवान है । जब बीच पालीवाल बोला अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उस दुर्लभ ताज की कीमत कई अरब रुपये कहीं रुपये मंत्रा के नेत्र फैल गए । हाँ तो उसे कोई भी चुराने की कोशिश कर सकता है, बिल्कुल कर सकता है । आज से पहले भी कजाकिस्तान नहीं । कई बार कुछ दुर्लभ ताज को चुराने की कोशिश हो चुकी हैं । लेकिन हर बार चोरों को असफलता कम देखना पडा क्योंकि पांच के बारे में प्रसिद्ध है कि वह ऍम खुद करता है । जिस किसी ने भी इस दुर्लभ ताज को चुराने की कोशिश की वो ताज दोना चुरा सका । हाँ पूरी तरह बर्बाद जरूर हो गया । उदाहरण के तौर पर रूस के एक लास्ट ऍफ नामक नौजवान ने उस ताज को चुराने की कोशिश की थी । वो ताज चुराने में तो कामयाब नहीं हुआ । हाँ, पुलिस के हत्थे जरूर चढ गया । फिर किसी तरह अपने हथकंडों की बदौलत वो पुलिस के शिकंजे से भी बचकर भाग निकला । लेकिन उसी रा जब छिपता छिपाता अपने किसी परिचित के यहाँ जा रहा था अभी रखते । अगले पिछले दोनों पहले उसके ऊपर से गुजर गए । बहरहाल अगले दिन उसका शव विक्षित शव पुलिस को सडक पर पडा मिला । मंत्र शरीर में सनसनी से दौड गए । ऐसी ही एक घटना और सुनाओ । जगदीश पालीवाल कार ड्राइव करता हूँ । बोला दूसरे छोर में भी उस दुर्लभ ताज को चुराने का प्रयास किया था । अपने मकसद में तो कामयाब नहीं हो सका लेकिन असफल होकर जब वो अपने घर लौटा हूँ, उसी रहा । उसके घर में बडी भयंकर आग लगाते हैं । इसमें स्टोर के साथ साथ उसका पूरा परिवार चलकर खास हो गया । मतलब किसी बैठे रहते हैं, होता है, इतना हंगामाखेज है । वो ताज भूषण का होगा तो उसके साथ भी ऐसा ही कोई हादसा पेश आना था । मंत्री के जिस्म का ईट एक रोड खडा हो गया तो आमंत्रण थोडा रुककर पूछा था उस जरूरत आज को चुराने की जैसी कोशिशें कजाकिस्तान में हो चुकी हैं । ऐसी कोई कोशिश इधर दिल्ली शहर में भी तो हो सकती हैं, बिल्कुल हो सकती है । हमें खुद इस बात का पूरा शक है कि ऐसी कोई कोशिश यहाँ होगी । संभव है किसी संगठन इस दिशा में अपनी कोशिशें भी शुरू कर दी हूँ । इसीलिए भारत सरकार ने उस दुर्लभ ताज की सिक्योरिटी के खास इंतजाम किए हैं । तुमने देखा नहीं नेशनल म्यूजियम पर कितने ढेर सारे सिक्योरिटी गार्ड तैनात है । इसके अलावा हर एक विजिटर की कितनी सजगता से तलाशी ली जा रही थी । ऍम इंतजाम हैं क्यों ऍम कम है? नहीं नहीं ये पूछना चाहती हूँ की दुर्लभ ताज के लिए कुछ गुप्त सिक्योरिटी मीटर की गई होगी तो सिक्युरिटी वालीवाल के दिमाग में धमाका हुआ । उसके हाथ कार के स्टेयरिंग पर काम गए क्यूँ हूँ कुछ नहीं वो जल्दी ऍम कुछ तो सही कहा हमें कुछ सिक्योरिटी का बंदोबस्त भी किया है क्या? हाँ ग्रुप सिक्योरिटी के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया जा सकता हूँ क्यूँ क्योंकि हमें ये आदेश भारत सरकार की तरफ से मिले हैं । बडे दिलफरेब ऍम ऍम मुझे पता नहीं कितना पडता है पर पडता है भाई पानी वाले थोडे शरारती अंदाज में उसकी आंखों में झांका हो सकता है कि तुम भी अपराधियों से मिली हुई हो । मंत्रा के मुस्कान से उठते हैं उसको दिल चोर सोचना जबकि कार अपनी रफ्तार से दौडती रही थी । जल्दी कार कोठी के लॉन में जा कर रहे हैं हूँ । नंदी खुड्डे को अपनी गोद में संभाले बाहर निकली थी और उसके पीछे पीछे जगदीश पालीवाल भी कार को लॉक कर के बाहर निकला । संध्या कदम तुमसे एक सवाल पूछना तो भूल ही गया था कैसा सवाल दोहरे पिताजी का नाम क्या था? तीन दयाल दीनदयाल मिश्रा जी तो ऍम लेकिन आपके पिताजी का नाम कुछ हो ही । मधुर स्मृति के लिए मांॅ हूँ कोई और पाँच छह दिन उसी दिन आधी रात ऍम हुआ था । चारों तरफ बहन खामोशी थी । तभी किसी मंत्र के दरवाजे पर पडी संकेतिक काम में तीन बार दस तक ऍम सोशल कर खडी हो गई । उसने लगभग कर दरवाजा खोला पर छत से बोलेगा तो तुम हूँ हम तो हम तो ऍम बोला सब कुछ बताता हूँ । ॅ अंदर कदम रखा हूँ यहाँ से किसी ने देखा तो नहीं । मंत्रालय चलती हूँ, वापस क्या नहीं । नहीं नहीं कुछ फॅमिली को हो । कहीं कुछ कर तो नहीं हो गई । अभी तक तो नहीं हुई लेकिन आने वाले वक्त में हो सकती है । मतलब कुलभूषण का दिल चला तो दूर जाना चाहती हूँ । कैसी गडबड हो सकती है । मंत्रालय की चाहिए तो कुछ बोलती क्यों नहीं? मंत्रालय तभी तभी सवाल भी उसे शाम वाली घटना के बारे नहीं, सब कुछ बता दिया । क्या नहीं भी लेना चाहती होगी । जगदीश पालीवाल को तुम्हारे परिषद हो गया है । इसीलिए ऍम पिताजी का नाम पूछा और नहीं तो क्या होगा? ऐसे भी तो हो सकता है कि ये तुम्हारा बहन हो । फॅमिली वाले बच्चे भी तो बयान की थी । उसने कहा था कि वह मधुर वृद्धि के लिए पूछ रहा है घोषण ये सब बेकार की बातें हैं । ये कोई ठोस वजह नहीं । आॅटो साधारण सवाल के पूछने के पीछे सब कोई महत्वपूर्ण वजह थी । अब और भूषण भी सोच में डूब गया । ऍम मुझे लग रहा है जैसे कुछ बहुत बडा अनर्थ होने वाला है हूँ हूँ हूँ पागल नहीं हुई हूँ लेकिन ये तुम्हारे दिल का बहन भी तो हो सकता है । मतलब जब पालीवाल को कोई आसमान से आवाज तो नहीं आने वाली थी । तुम के लिए अपराधियों से मिली हुई हूँ और कुपोषण के समान से निकलने वाले शब्द पूरे हो पाते उससे पहले ही किसी ने बाहर से दरवाजा थपथपाया । प्रदूषण केशव हालत में ही उड गए । ग्राउंड मंत्रालय कब कपालेश्वर में पूछा मैं हूँ पालीवाल ऍम दोनों के शरीर करंट प्रवाहित होगा । दोनों खबर आउट है । मंत्रालय डरते डरते दरवाजा खोला सामने रौद्र रूप में छुट्टी पालीवाल पडा था । उसकी कनपटी की नजर बनी हुई थी । न सुने फुल पिचक रहे थे और भूषण उसके दरवाजा खोलने से पहले ही बैठ के नीचे जा चुका था । आप जब बीच तालिबान को वो रौद्र रूप देखकर बंदा काम करेंगे । आप इस वक्त पीछे हो ऍम कर पीछे हो गई । उसके हाथ पैर किसी मरीज की तरह काम पे लगे गौरव तो अंदर आते ही परिवार खडा हूँ सत्य समझाऊँ नहीं । जगदीश पालीवाल शहर भरी नजरों से उसे खोलता हूँ । वक्त धीरे धीरे उसकी तरफ पडा तुम संध्या नहीं तो हम समझा नहीं हो सकते हैं क्यों मंत्रालय शरीर ॅ क्यों नहीं हो सकती? क्योंकि तुम किसी अपराधी संगठन की नंबर हूँ । पानी, बातचीत करोड और तुम्हारा नाम भी नकली है मतलब की की रह रहे हैं । उसके दिमाग में भयंकर विस्फोट हुआ जबकि तक दिनेश पालीवाल नहीं उसी छोड आश्चर्यजनक फुर्ती के साथ रिवॉल्वर निकालकर मंत्रा के ऊपर डाल दी थी ।

भाग 14

पसीनों में लगभग होती चली गई । मंत्रा जी छूट है मैं मैं किसी अपराधी संगठन की नंबर नहीं, मैं अपराधी नहीं हूँ । मुझे ॅ जाते हुए मंत्रा के मौके पर रिवॉल्वर रखी है । बहुत ऍम मैं तुम्हारी तमाम हरकतों से पास हो चुका हूँ । चालाक लडकी मुझे मालूम पड चुका है कि तुमने गवर्नेंस की नौकरी भी किसी षड्यंत्र के तहत हासिल की है । ऍम कौन कहता है कि मैंने गवर्नेंस की नौकरी के षड्यंत्र के तहत हासिल की है? नहीं मैं कहता हूँ हालत कहते हैं तो हमारी बच्चों की कहानी बयान करती है जो तुमने मुझे इंटरव्यू के दौरान सुनाई पहुंची कहा नहीं यही कि तुम चंडीगढ के किसी कपडा व्यापारी की लडकी हो । इसका नाम दीनदयान मिश्रा था । इसके परिवार की आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी तो भारी वो तमाम पाते तमाम तरह झूठ है । लडकी सबकुछ मनगढंत है हूँ । बोल रहे हैं आप इस तरह का आरोप लगाकर आप एक निर्दोष और मजबूर लडकी के अकेलेपन का ना चाहे फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं । आप तो उसके हाथ का कॅाल पर पडा । उसके उसी चीज निकल आए आंखों ऍम मेरे ऊपर लगाया तो लेकिन आपके पास इस बात का सबूत है कि मेरी कहानी झूठी है । मनगडंत है सबसे पहला और सबसे बडा तो यही सबूत है । जब फॅार बोला कि तुम ना तो चंडीगढ की रहने वाली हो और ना ही दीनदयाल मिश्रा नामक किसी कपडा व्यापारी की लडकी हो । आपको फॅमिली बताता हूँ सब कुछ बताता हूँ । जगदीश पालीवाल ऍम इसमें कोई शक नहीं कि तुम ऍम पढी शानदार ढंग से रखा था । मुझे शायद सात जन्मों तक भी तुम्हारे पर शक ना हो । बताओ आज सुबह ऍम हद तक तुम्हारी होती का काम पडता फास्ट हो गया क्यूँ? उस वक्त मैंने ऐसा क्या बोल दिया था जो पर्दाफाश हो गया? नहीं याद है फॅमिली दिमाग पर एक ही चीज हावी थी ताज और दुर्लभ ताज । उस बेहद मूल्यवान ताज के बारे में तुमने मुझसे एक ऐसा सवाल पूछा इसमें तुम्हारी हकीकत की सारी कलई खोलती हूँ क्या था तो तो मुझे उस ताकि गुप सिक्योरिटी के बारे में पूछा था और तुम्हारे मुझसे सवाल को सुनते ही ना उछल पडा था । क्यों? क्यों पडे तो क्योंकि आम तौर पर साधारण आदमियों को ग्रुप सिक्योरिटी के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है, वो यही समझाते हैं । जो दिखाई दे रहा होता है वही सिख करती है । इसके पीछे महत्वपूर्ण वजह भी है क्योंकि गुप सिक्योरिटी के बारे में न तो लोगों को कोई जानकारी होती है और न ही इस तरह की सिक्योरिटी की पब्लिसिटी ही की जाती है । पर ऐसी परिस्थिति में एक बेहद सामान्य लडकी के भूसे ग्रुप सिक्योरिटी के पास चंद्र फ्लाॅप पडेगा और मेरे दिमाग में ये बात घरवाली बचती चली गई तो कहीं ना कहीं कुछ गडबड है । जरूर तुम कोई खतरनाक खेल खेल रही हूँ । मैंने फौरन तुम्हारे हकीकत पता लगाने का फैसला कर लिया और इसी दिशा में मैंने सबसे पहले तुमसे तुम्हारे पिता का ना अच्छा मांॅग की निगाहों से परिवार को देखने लगी है । पिताजी पिताजी का नाम पूछा नाम नहीं पता है वो भी बताता हूँ । दरअसल तुम्हारे पिताजी का नाम मालूम करके मैंने चंडीगढ के पाॅवर फोन किया । वहाँ के कमिश्नर को मैंने तुम्हारे पिताजी का नाम बताया और तुम्हारे द्वारा सुनाई गई पूरी कहानी बताऊँ । मैंने वहाँ की कमिश्नर से आग्रह किया था की वो पूरी जांच पडताल कराकर मुझे रिपोर्ट देंगे । लेकिन जब उन्हें मेरे चंडीगढ के सरकार ऍम मालूम नहीं था तो वो मेरे बारे में जांच पडताल कैसे कर सकते थे? एड्रेस पता लगा लेना बहुत मामूली कम है । जगदीश पालीवाल रिवॉल्वर हाथ में ले के लिए बोला तो मैं शायद मालूम नहीं है कि लगभग सभी शहरों में वस्त्र व्यापारी संघ के नाम से कपडा व्यापारियों का एक संगठन होता है और छोटे बडे सभी कपडा व्यापारी उस संगठन के नंबर होते हैं । ऐसा ही एक और ऍम चंडीगढ में भी है । मैंने जैसे ही चंडीगढ के फॅार को तुम्हारे बारे में रिपोर्ट भेजी तो फौरन फौरन हॅारर ने चंडीगढ के वस्त्र व्यापारी संघ से संपर्क स्थापित किया । संघ के पास शहर के सभी व्यापारियों की लिस्ट होती है । सब इंस्पेक्टर में जब तो भरे द्वारा बताया गया कथित दीनदयाल पिछला का नाम संघ के संचालक को बताया तो फोरम तुम्हारे ड्रामे का पर्दाफाश हो गया क्योंकि तीन दयाल मिश्रा नाम के कपडा व्यापारी तो चंडीगढ में कई थे लेकिन उनमें सब कोई नहीं था जिसका परिवार आतंकवादियों के हाथों मारा गया हूँ या जिसके घर दुकान में आतंकवादियों ने आग लगाई हो । बहरहाल थोडी देर पहले ही चंडीगढ के फॅमिली मेरे पास पूरी रिपोर्ट हुई है और इस साबित हो चुका है कि तुम्हारे द्वारा सुनाई गई कहानी पूरी तरह से झूठी है । तंत्र को अपने दिमाग में अनार छूटे हुए देखें उसका चेहरा सुप्रीम छत पड गया और अब अगर अपनी जिंदगी चाहती हूँ । अगर चाहती हूँ कि तुम्हारा ये खूबसूरत जिसमें क्लास में ना बदल जाए । सच बता दो कानों तुम तो मैं यहाँ किसने भेजा है । तभी उस घटना ने बडे अब क्या हमसे करोड पड गई उस लडकी से क्या पूछते और साहब बेडरूम में धमाका सब करती नहीं । आवाज को जी थी मैं बताता हूँ ये कौन है और से यहाँ किसने भेजा है? जगदीश पालीवाल के दिल दिमाग पर बम सा गिरा । वो झटके से उस दिशा में घुमा जिधर से आवाज आई थी अगले पल उसके होश उड गए उसके सामने पौने छह फुट लंबा सामान्यसे वजन वाला कुलभूषण खडा मुस्कुरा रहा था । कुलभूषण के गोदने को डू था किसी कनपटी पर है उसने रिवॉल्वर रखी हुई थी । कॅश जगदीश पालीवाल के मुझसे सिसकारी छोटे दुश्मन का कोई नाम नहीं होता साहब तो किसी भी रूप में सामने आ सकता है । पहले मत बुझाओ साॅस तुम्हारे लिए इतना ही जान लेना काफी है कि मैं संध्या को और सहयोगी हूँ । वो नाटक न जाने कितना लंबा चलता । मिस्टर कुलभूषण बडा इसलिए अच्छा हुआ कि इस नाटक का यही हो गया लेकिन ये नाटक रचा हो गया । वहीं बताने जा रहा हूँ अगर उससे पहले अपनी ऍम अब मेरे हवाले कर दूँ । पालीवाल ऍम बेटे की जान को नुकसान पहुंच सकता है । इसके लिए फिर भाई से मजा नहीं होगा । जगदीश पालीवाल ने अब खून कैसा? खून पीते हुए कुलभूषण को रिवाल्वर सौंपनी । आप भी समझता रहती हो । हमारा अच्छा साथ में देगा तो कोई बात नहीं सुनना चाहता हूँ । ऍम मुझे सिर्फ ये बताओ कि तुम लोग कौन हो वही बता रहा हूँ । पहली बार तुम्हारा ये अंदाजा बाल को सही है की संध्या किसी अपराधी संगठन के लिए काम कर रही है । दूसरी बार तुम्हारा ये अंदाजा भी बिलकुल सही है कि समझा ने तो मैं जो कहानी सुनाई बिलकुल मन खानदान है । तरह से बुक कहानी तो मैं इसलिए सुनाई गई थी ताकि तो भारी हमदर्दी हासिल करके इस कोठी के अंदर घुसा जा सके । लेकिन इस समय के पीछे वजह क्या थी? वजह मुस्कराया कुलभूषण वजह सुनोगे तो फॅमिली नहीं चाहता हूँ । ठीक है तो कुलभूषण के चेहरे पर थोडी कठोरता उभर आएंगे । तुमने दिल्ली शहर में सक्रिय उस संगठन के बारे में तो सुना ही होगा जो दुर्लभ वस्तुओं की चोरी करता है । उस संगठन के बारे में कौन नहीं जानता । ऍम अगर संगठन के बारे में जानते हो तो वही संगठन उस दुर्लभ ताज को भी चुराना चाहता है । लेकिन तुम दोनों को संगठन से क्या संबंध है? हमारा संबंध कुलभूषण आपने करेगा । भूख सरकार हम उस संगठन काॅपर हैं । छत्तीस मालीवाल के नेत्र अचंभित से फैल गए तो तो उस संगठन के मेंबर हो हाँ, लेकिन हम क्या क्या कर रहे हैं? दरअसल हमारे संगठन को दुर्लभ ताज की गुप सिक्योरिटी के बारे में मालूम नहीं है और तुम्हारा संगठन ये सोचता है कि मैं तो फॅस कुल कुलभूषण दृढतापूर्वक कहा हमारे संगठन जो सोचता है वही होता है । अब सोच बेहद अफसोस । इस बार तुम्हारा गलत व्यक्ति से वास्ता पड गया है । किसी भी कीमत पर तो दुर्लभ ताज की सिक्योरिटी के बारे में नहीं बताऊंगा । इस नन्ही सी जान की कीमत पर भी नहीं है क्या मतलब? फॅमिली भाग मतलब ये कि मैं और संध्या फिलहाल तुम्हारे बेटे को प्रोत्साहन लेकर जा रहे हैं । हमारे जाने के बाद पूरी रात तुम्हारे पास होगा तो खूब अच्छी तरह हमारे प्रस्ताव पर गौर करना । अगर तुमने हमें गुप सिक्योरिटी के बारे में बता दिया तो तुम्हारे बेटे को छोड दिया जाएगा । वरना और आ गया और हमारा संगठन सिर्फ इतना करेगा की फॅसे बेटे की गर्दन धड अलग करके तो हर पास भेज देगा । तब तो और हमारी सरकार दो रही उस कटे हुए सिर पर दुर्लभ ताज की ताजपोशी कर सकूँ नहीं नहीं तो वैसा नहीं करोगे । ऐसा ही करेंगे । अभी तो मेरे सर तो बच्चे के बारे में बताया है । ऍम सामने रखा होगा । तुम पर क्या बीतेगी उस समय क्या तुम पागल नहीं हो जाओगे? ठीक नहीं होगी । और तो हरी पत्ती ऍम तो हमारी पत्नी क्या उस दृश्य को देखकर जिंदा रह सकेगी? ऑफिसर नहीं नहीं जगदीश पाॅड उठा तो हो । वैसे हो तो ट्यूशन के फोटो पर उसका खेती नहीं । तलाश हम जा रहे अवसर कुलभूषण सहसपुर में बोला तो तुम सही है । किसी जरिए से संपर्क स्थापित किया जाएगा । तब तक अपना फैसला सोच कर रखना । शुरू शुरू हो । पारिवारिक जी खुदा लेकिन वो नहीं रुके । जाॅब चीखता रहा और वो चले गए उसके गुड्डू को लेकर । अगले ही पल एक सनसनीखेज घटना का फिर से जन्म हुआ । उस वक्त जब उन्होंने बेडरूम से निकल कर कोठी के गलियारे में कदम रखा । अभी उन के खानों में किसी की ताकत कर्मों की आवाज पडेंगे । सिर्फ एक झंड के लिए कुलभूषण की नजर साइपर बडी क्योंकि अगले झंड वो काला साया गलियारे का मोड काटकर अंधेरे में गायब हो चुका था और उसी ठंड में कुलभूषण साइको पहचान गया वो काला भोजन बलेथा मान ले ऍम कुलभूषण शरीर में एक साथ हजारों चिट्ठी आ रही थी । चली गई तो बनने वाले क्या करने आया था तो उसे कैसे पता चला कि वहाँ है कुलभूषण और रानी बल्ले के बारे में जितना सोचा उतनी ही उनकी रोहू काबिल बन रहे हैं । जगदीश पालीवाल की कोठी से निकल कर भागता चला गया । जल्दी वह टेलीफोन बूथ के अंदर जाता था । उससे रिसीवर उठाया और फिर बडी तेजी से कुछ नंबर डायल किए । शीघ्र ही दूसरी तरफ घंटी जाने लगी थी । कुछ देर बॉल बस्ती रही पष्टि रही ऍम हॉल में एक रुपये का सिक्का डाल दिया । मैं बोल रहा हूँ पहचाना मुझे कौन क्या नहीं नहीं पहचाना एक पल के लिए खामोशी छा गई तो बल्ले हो । जो भी की नहीं पूरी तरह हो चुकी थी । ऍम वाकई आपकी तारीफ करनी होगी । साहब जला आपने मुझे सिर्फ आवाज सही बचा लिया, उसमें तारीख जैसी कोई बात नहीं । इस वक्त योगी खुरदुरे ऐसे में बोला हम पुलिस वाले हैं । बल्ले और अपराधियों को सिर्फ आवाज से पहचान लेना ही हमारी सत्रह होती है । ये बताओ अपने रात को अपना मुझे फोन पिछले क्या है जब की जैसा खन्ना की हत्या करने के इल्जाम में अपने आप को कानून के हवाले करना चाहते हो? ना आए आर्गेज्म ना ही मैंने आपको पहले डिकाॅय आज फिर कहता हूँ मैं तब तक अपने आप को कानून के हवाले नहीं करने वाला हूँ । मैं कुलभूषण से अपने चाचा के खून का बदला नहीं चुका लेता । फिर फोन किया है मैं कुलभूषण हमारे ना कोई चौका देने वाली जानकारी देना चाहता हूँ । किसी जानकारी कुलभूषण आजकल एक बेहद खतरनाक योजना पर काम कर रहा है । उसका प्रसाद पाॅकेट क्या? मैंने आपको जो बताना था बता दिया । एक पुलिस इंस्पेक्टर होने के नाते अब आगे की इन्वेस्टिगेशन करना आपका काम है था । मैं ॅ दे सकता हूँ । कैसा हैं मंत्रा भी उस योगदान कुलभूषण की मदद कर रही है । अब बंदे को इजाजत दीजिए, ॅ गया जबकि बल्ले बडे निर्विकार अंदाज में टेलीफोन का रिसीवर हो पर लटका चुका था । उसके होठों पर मुस्कान खेल रही थी उसका जो किसी बेहद चालाक व्यक्ति के होठों पर उस वक्त खेला करती है जब वो अपने दो दुश्मनों को लडाने के लिए कुछ बढिया चाल चल चुका हूँ । सुबह के दस बजे जा रहे थे उस दिन का मौसम पिछले दिन के मुकाबले ज्यादा गर्म था । एक बार फिर सब लोग कॉन्फ्रेंस हॉल में जमाते से दीवानचंद आता करने, इसके एक होने पर ऊंची पुछ वाली रिवॉल्विंग चेयर पर विराजमान था । उसने आज अपने चेहरे को लगता से ढका हुआ था जिसमें से उसके सिर्फ दो आंखें बाहर झांक रही थी । साफ लगता था आज कोई खास बात है कॅाल के अन्य कुर्सियों पर दशक पाटल, गांति पांडे, कुलभूषण मंत्रा और उन सब के अलावा उस दिन का सबसे ज्यादा खास में हमारे जब पालीवाल वहां बैठा था । जगदीश पालीवाल की वहाँ मौजूदगी निसंदेह चौका देने वाली पालीवाल की वहाँ उपस् थिति से एक बात और भी साबित होती है कि उसने अपने मासूम बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए उन शैतानों के सामने घुटने देती हैं । आज उसने अपने उसूलों को अपने आदर्शों की बडी दे दी है । इसके अलावा एक बार और कर भी कर सकता था । सिर्फ एक घंटा पहले की बात है जब बीच पालीवाल उस समय अपनी कोठी के ड्राइंग हॉल में बेचैनी पूर्वक टहल रहा था । उसकी आंखों में आतंकी छाया थी । होट खुश । जब से वो दोनों गुड्डू को अपहरण करके ले गए थे तब से उसका यही हाल था । कभी वह इस कमरे में चलकर नहीं करता तो कभी उस कमरे में सारी ऍफ सिगरेट पर सिगरेट ठोकते हुए गुजारी । कहीं बार उसके दिमाग में यह खयाल नहीं आया कि वो उदयपुर टेलीफोन करके उस घटना की अपनी पत्नी को सूचना दे दे । कितना फिर रुक गया । उसकी सूचना देने से ही क्या होना था तो हर परेशान होती रह रहकर पालीवाल की आंखों के गिर अपने मासूम बेटे का मुख्य चक्कर काट जाता । एक बाप की बेटा बाहर अपने जिगर के टुकडे को कल जैसे लगाने के लिए मचल उठी थी और तभी गर्म लोहे पर चोट हो कार में सवार होकर ट्रॅफी कोठी पर पहुंचा था । जगदीश पालीवाल को एक टाइप शुभा पत्र दिया जिसमें सिर्फ चंद लाइनें लिखी थी । अगर अपने बेटे की जिंदगी के लिए हमारी शर्त मंजूर है तो फौरन पत्रवाहक ऍम में बैठकर आ जाओ । इसी में तो भारी भलाई है तो हमारे बेटे का शुभ चिंतक गुमनाम संगठन पत्र पढते ही जगदीश पालीवाल ने कुछ से मुश्किल टुकडे टुकडे कर डालेंगे और अगर मैं तुम्हारे साथ ना गया जगदीश पालीवाल नाॅन पकड लिया और हाल कबाड का चलना उठा तो तो तुम क्या करोगे? क्या कर लोगे तो खतरनाक ऍम उसकी मुस्कान खून को बर्फ की तरह जमा देने वाली थी । गढवाल पकडने का उसने सडक सभी बुरा नहीं माना । मेरे साथ ना गए तो हो जाएगा ऑफिसर जिसकी कल्पना भी तुम्हारे लिए दुश्वार है । हर एक लड्डू के फोन के चीजें तो और दूर तक पडेंगे तो दूर दूर पडता है और हमारी ऍम होगे । तब काॅन् परिवार कहाँ से छूट गया? सभी गर्मी निकल गई । वो अपने आप को सौ साल के बूढे की तरह कमजोर महसूस करने लगा । रात भर की बेचैनी और व्यवस्था के कारण उसमें इतना भी साहस ना बच्चा था जो ज्यादा भरोसा कर सकेंगे । वो एक हारे हुए छोडी की तरह निर्जीव कदमों से चलता हुआ तो जहाँ उसके कार में सवार हो गया, उसे आंखों पर पट्टी बांधकर अड्डे पर लाया गया था । वहाँ जब उसकी आंखों से पट्टी खोली गई तो उसने अपने आप को उसी कॉन्फ्रेंस हॉल में पाया जिसमें वो इस वक्त बैठा था । पालीवार साईं बडी हमें बडी खुशी है तुमने ज्यादा हील हुज्जत किए । पिता हमारा प्रपोजल कबूल कर लिया । बडी जम तो बात नहीं और समझदार अभी निकले नहीं तो कहा है जगदीश पालीवाल ने प्रचारी पूर्वक पहलू बदला अडे जायेंगे वो जहाँ हैं कुशल मंगल है और फिर वैसे भी ज्यादा फिक्र नहीं करनी । अखिलेश की देखभाल के वास्ते तुम्हारी गवर्नमेंट जो हमारे पास है ही ये बात कहकर बडे करना ढंग से ऐसा दीवानचंद मैं फिर भी गुड्डू पर देखना चाहता हूँ । जगदीश पालीवाल अपने बेटे को देखने के लिए व्याकुल हुआ जा रहा था । अरे इतनी जल्दी क्या है शायद ही देख लेना । उसे भी बारह घंटे में उसकी सूरत थोडी बदल जाती है । बडे मेल मिलाप का ये सिलसिला भी चलेगा । लेकिन पहले तुम हमें दुर्लभ ताज की सिक्योरिटी के बारे में बता दूँ । तुम हमारी दिलजोई करो, हम तुम्हारी करेंगे । ठीक हो तुम लोग जिसको सिक्योरिटी की जानकारी के लिए अपने व्यापर हो रहे हो । मेरा दावा है की सिक्योरिटी को जानने के बाद भी तुम लोग कुछ नहीं कर पाओगे । ताज को चुराना नामुमकिन है जो है ना मुमकिन क्योंकि इस ताज की सिक्योरिटी बहुत परफेक्ट है । अभेद्य है उसका ॅ सरकार हर ऍम की ऐसी ही परफेक्ट सिक्योरिटी करती है बाढ । सरकार हर बार यही सोचती है कि इस मतलब वस्तु को दुनिया की कोई ताकत नहीं चुरा सकती । लेकिन होता क्या है कोई चाडा अपराधी सुरक्षा विचार तामझाम को रेत के ढेर की तरह भेजता हुआ दुर्लभ वस्तु चुरा ले जाता है । भारत सरकार को तो तब मालूम पडता है कि वास्तव में वो सिक्योरिटी कितनी पड रही थी । कितनी सिक्के बंद थी रे बडी में ठीक कह रहा हूँ या नहीं बिल्कुल ठीक कह रहे हो लेकिन अगर तुम लोग दुर्लभ ताज की सिक्योरिटी को भी ऐसी कमजोर सिक्योरिटी समझ रहे हो तो बता देता हूँ । ये तो बहुत बडी भूल है । बहुत बडी गलत है नहीं क्योंकि उसकी सिक्योरिटी वाकई बहुत मजबूत है । अरे बडी हो चाहे कितने भी परफेक्ट सिक्योरिटी हूँ हम उसके बारे में फुल जानकारी चाहते हैं । जी, यही द्वारा ओपन सिक्योरिटी से तो आप लोग वाकिफ होंगे । बडे हम किसी चीज से वाकिफ नहीं चाहिए । तो में हमें जो भी बताना है शुरू से बताऊँ ये सोचकर बताओ कि हम सिक्योरिटी के बारे में ए बी, सी डी कुछ नहीं जानते । इसके अलावा एक बात और अच्छी तरह से उन लोग क्या अगर तुम ने हमारे साथ कोई चालाकी खेलने की कोशिश भी डाल यानि तुम ने हमें पुलिस के किसी पचडे में पहुंचाने का प्रयास किया । समझ लो तुम्हारी खैर नहीं तो हम तुम्हारे साथ साथ तुम्हारे बच्चे की भी ऐसे ढोल ताशे बजाएंगे की तुम तमाम उम्र कल हो गए । तमाम उम्र खून के अब शुरू हो गए एक बार दौड जब तक हम अपनी योजना में कामयाब नहीं हो जाते तब तक तुम्हारा बेटा भी यहीं यहीं हमारे कब्जे में रहेगा । अब छत्तीस परिवार का चेहरा सफेद छब्बड गया हूँ । बडी तो मैं अब जो कडा कहूँ । दीवानचंद बोला सबसे पहले ये बताओ नेशनल म्यूजियम में आज कल दिन में क्या सिक्युरिटी रहती है? पालीवाल ने फॅमिली पूर्वक पहलू बदलाव हालात अच्छे नजर नहीं आ रहे थे । दिन में लगभग ऍम के चारों तरफ तैनात रहते हैं । जगदीश पालीवाल ने खून का घूंट पीते हुए उन लोगों को सिक्योरिटी के बारे में बताना शुरू किया । लेकिन रात के वक्त ही सिक्योरिटी की संख्या बढकर दोगुनी हो जाती है । यानी तो फॅमिली । उसके अलावा नेशनल म्यूजियम के आसपास की इमारतों पर भी चौबीस घंटे लगभग तीस चालीस सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहते हैं । एक एक डीजीएम के आसपास की इमारतों पर सिक्योरिटी गर्ज को पिछली तैनात किया है । अच्छा सवाल है । दरअसल उस जरूरत ताज की सिक्योरिटी करने से पहले भारत में जूरी के मैंबरों की एक मीटिंग हुई थी । बेहद खास । मैंने उस मीटिंग में उन केस फाइलों का अध्ययन किया गया, जिनमें ऐसी ही दुर्लभ वस्तुओं की लूट के बारे में कई रिपोर्ट दर्ज थी । प्रत्येक केस फाइल में ब्यौरा बडे विस्तार से लिखा था कि फल अब्दुल्ला वस्तु काॅस्ट ये था कि उसे अपराधियों ने चुराने के लिए ये योजना बनाई । फिर फिर फिर यूरी के मेंबरों ने दुनियाभर की ऐसी दर्जनों केस फाइलों का अध्ययन किया । उन फाइलों का अध्ययन करने से ये फायदा था कि दुर्लभ ताज की बहुत बाॅंटी की रूपरेखा बनाई जा सकती थी । फाइलों का अध्ययन करते करते ही जूरी के मेंबरों के हाथ में एक ऐसी फाइल लगे । इसमें न्यूयॉर्क के एक सर्राफा बाजार के लूट का मामला दर्ज था । लिखा था सर्राफा बाजार की सिक्योरिटी के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन ने बडे समर्थक सुरक्षा इंतजाम कर रखे थे । सर्राफा बाजार के चारों तरफ सैकडों की संख्या में हमेशा सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहते थे उसके बिना आज्ञा के जो वहाँ तक सर्राफा बाजार में नहीं हो सकता हूँ । लेकिन इतनी पॉवरफुल सुरक्षा के बावजूद सर्राफा बाजार बता कहती पडी और ऐसी डकैती पडी की पूरा सर्राफा बाजार लूट लिया गया । लेकिन बाहर खडे सिक्योरिटी गार्डों को उस डकैती की कानून का धनक तक ना लगे । वो कैसे दशक पाटिल ने हैरान होकर पूछा । दरअसल अपराधियों ने सर्राफा बाजार को लूटने के लिए जो योजना बनाई वो गजब की थी । उन्होंने सर्राफा बाजार को लूटने के लिए उसके बगल की एक इमारत का इस्तेमाल किया । वो सब के सब लूट में काम आने वाला अपना साजोसामान लेकर किसी तरह उसके बगल वाली इमारत की छत पर पहुंच गए । सर्राफा बाजार और उस इमारत के बीच में चार साढे चार फुट चौडी फॅमिली थी । अपराधियों ने उस बगल वाली इमारत की छत से सर्राफा बाजार की छत्तीस लोगों की एक मजबूत चूडीदार वहाँ की करके उसी सीढी पर चलते हुए बगल वाली इमारत की छत से सर्राफा बाजार की छत पर पहुंच गए । ऍम फिर सर्राफा बाजार की छत पर पहुंचने के बाद उन्होंने ड्रिल मशीन की मदद से सर्राफा बाजार की छत में एक बीस इंच व्यास का काफी चौडा छेद बना । फिर वो उसी छेद में से होकर सर्राफा बाजार के भीतर घुस गए । उसके बाद उन्होंने अंदर ही अंदर बडे इत्मीनान से पूरा सर्राफा बाजार रूटा और फिर वापस छेद में से होकर ऊपर पहुंचे और सीडी द्वारा ही दूसरी इमारत की छत पर पहुंचकर वहां से फरार हो गए । अब मैं इतना बडा कांड हो गया कि सर्राफा बाजार पूरा का पूरा छुट गया लेकिन नीचे पहला देते सिक्योरिटी गार्डों के कानों तक तक नहीं रहेंगे । उन्होंने गलत नहीं पडी की क्या हो रहा था । बहरहाल भारत के चोरी मेंबरों ने उस प्रकृति से प्रेरणा ली और नेशनल म्यूजियम के आसपास की इमारतों पर भी इसीलिए सिक्योरिटी गार्ड तैनात कर दिए ताकि कोई अपराधी संगठन बिल्कुल उसी तरह की योजना बनाकर दुर्लभ ताज को ना ले उडे हो । सभी के भूसे संस्कारी छोटी है । सभी सर्राफा बाजार रोकने की शोध से बडे प्रभावित हो गए ।

भाग 15

ऍम केभीतर दाखिल होने के फिलहाल सभी रास्ते पूरी तरह बन हैं । ना तो कोई अपराधी म्यूजियम के मेन गेट सही भी डर हो सकता है और न किसी अगल बगल वाली इमारत को ही जरिया बनाकर । अगर किसी ने नीचे ही नीचे लंबी सुरंग खोद कर भी म्यूजियम के हॉल नंबर चार तक पहुंचने की कोशिश की तब भी वो सफल नहीं हो पाएगा । क्योंकि म्यूजियम में जगह जगह ऐसे इलेक्ट्रॉनिक संयंत्र लगाए गए हैं कि सुरंग खोदने की पोजीशन में एक विशेष धोनी पैदा करके सिक्योरिटी गार्डों को खतरे का संकेत दे देंगे जिससे पुलिस अपराधियों को फौरन पकडेंगे सब तब बैठे रहे । अब आगे से अगर कोई अपराधी जादू के जोर से क्या किसी कश्मीर की बदौलत फिर भी म्यूजियम के अंदर घुसने में कामयाब हो जाता है तो सबसे पहले म्यूजियम के लॉन में पहुंचेगा । वहाँ भी मौत फाडे उसका इंतजार कर रही हो । ऍम में बल्कि म्यूजियम के प्रत्येक गलियारे के अंदर भी हर वक्त बडी संख्या में सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहते हैं । जिनके हर आठ घंटे के बाद ड्यूटी बदल जाती है, वही इसके अलावा और क्या इंतजाम है? और भी कई महत्वपूर्ण बंदोबस्त है । सबसे पहले तो उन्हें सुरक्षा प्रबंधों को भेदकर म्यूजियम के भीतर घुसना नामुमकिन है । लेकिन अगर फिर भी कोई सुरक्षा प्रबंधों को भेदने में सफल हो जाता है तो जैसे ही हॉल नंबर चार की दीवार को छोडेगा तो फौरन उससे कनेक्टेड सिर्फ टी । हालांकि घंटे नजदीक के तीन पुलिस स्टेशनों के साथ साथ पुलिस आॅल्टर में भी सोच से बज उठेगी और घंटे के बच नहीं किया होगा । ऍम लोग जान सकते हो फौरन फौरन पूरे दिल्ली शहर में दौडती पुलिस पेट्रोलिंग बहनों को क्वार्टर से वो खतरे की सूचना सर्कुलेट कर दी जाएगी । पलक झपकते ही पेट्रोलिंग मैंने नेशनल म्यूजियम की तरफ भागने लगेंगे । म्यूजियम के आस पास के साथ रोड ब्लॉक कर दिए जाएंगे । सीमा चौकियां सील कर दी जाएगी और बडी संख्या में पुलिस नेशनल म्यूजियम पर पहुंचकर उसे चारों तरफ से घेर लगी फॅमिली के साथ अंदाजा लगा सकते हैं । इस इसके अलावा बजते ही म्यूजियम के आसपास कितना हंगामाखेज माहौल बन जाएगा । ऐसी परिस्थिति में अपराधियों के लिए वहाँ से तो लगता चुराकर भागना तो बहुत दूर की बात है । उनके लिए खुद की जान बचाना भी मुश्किल होगा । ऍम की जो बेल बजेगी, टाॅपर अच्छी तरह गौर करता हुआ बोला । क्या उसकी आवाज म्यूजियम के अंदर या बाहर खडे सिक्योरिटी गार्डों को भी सुनाई देगी । बिल्कुल सुनाई देगी बडी वो कैसे नहीं । दरअसल दिल्ली पुलिस ने सभी गार्डों को एक खास किस्म की रिस्ट वॉच नहीं है । जब बीच पालीवाल ने बताया और ऍम है । इसलिए अलार्म बजने की वह बहुत तीखी धोनी रिस्ट वॉच पर बिल्कुल साफ साफ सुनाई देगा । एक बात बताओ ऍम कुछ होगा अगर कुछ दिन में हॉल नंबर चार के दीवार को छोडेगा तो क्या सब प्लान बजेगा मैं जगदीश पालीवाल गहरी सांस लेकर बोला दिन के वाॅर्ड रहता है । लेकिन अगर तुम लोग दुर्लभ ताज को दिन दहाडे लूटने की योजना बना रहे हो तब भी तुम्हारी योजना सिरे नहीं चलने वाली । इसलिए क्योंकि दिन में प्रत्येक दर्शक को कडी जांच पडताल के बाद ही भीतर म्यूजियम में घुसने दिया जाता है । यहाँ तक कि दर्शकों को मेटल डिटेक्टर से भी गुजरना होता है । ऐसी परिस्थिति में तुम लोग हथियार लेकर म्यूजियम के भीतर नहीं हो सकते और घुसने की कोशिश करोगे । तभी मैं समझता हूँ कि तुम नाकामी ही हाथ लगेगी । क्योंकि स्वचालित हथियारों से लैस कितने सारे सिक्योरिटी गार्डों का सामना तुम लोग किसी हालत में नहीं करता हो गई फॅार गया सनसनीखेज सन्नाटा सेट दीवानचंद सहित सबके चेहरों पर गंभीरता की बहुत फट गई । मंत्रा के दो सिक्योरिटी के विषय में सुनते ही हाथ पांव फूल गए थे । उसे साफ साफ लग रहा था कि वो लोग अपने मकसद में सफल होने वाले नहीं है । मंत्रालय ही मिनट प्रार्थना करने लगे तो लोगों को सबको दी गई । अकेले की दुर्लभ फॅमिली अपने दिनों से बाहर निकाल देते हैं । लेकिन भगवान भी होगी । कहाँ से देता? उनके दिमाग पर तो लालच में पडता डाल दिया था । अदालत उनका सर्वनाश करने पर बोला था । जगदीश पालीवाल काला खूंखार कर बोला दुर्लभ ताज की जो सिक्योरिटी की गई है । सिक्योरिटी के संबंध मैंने तुम लोगों को लगभग पूरी डिटेल सब कुछ बता दी है । अब इस पूरी सिक्योरिटी के बाद इस पूरे ऍम के बाद एक आखिरी स्वीकृति और है जो मतलब ताज के लिए की गई है । फॅमिली के अभी भी कोई सिक्योरिटी बची है? हाँ जगदीश पालीवाल सहसवार में बोला अभी एक आखिरी सिक्योरिटी और बच्ची है और मैं समझता हूँ कि वो सिक्योरिटी ऍम सिक्योरिटी से ज्यादा परफेक्ट है । ज्यादा सकते बंद है । अरे बाॅंटी है वह उसके बारे में भी बताना उसी के बारे में बताने जा रहा हूँ । दरअसल जूरी के मैंबरों ने दुर्लभ ताज की सुरक्षा व्यवस्था के लिए जो चक्रव्यू रचा है । वो सिक्योरिटी उस चक्रव्यूहों का सबसे आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है । वो तो म्यूजियम में जितने भी सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं वो सब अपने आप में एक काम कम्पलीट है और उन्हें भेद पाना और संभव है ऍम बडे । लेकिन क्या सुरक्षा रूपी चक्रव्यूह के उस आखिरी हिस्से को भेजने की बाबत सोचना मैं समझता हूँ कि पागलपन होगा क्योंकि वहाँ जूरी के मेंबरों ने इतना जबरदस्त माया जाल बिछाया है कि अगर उस माया जाल को भेजने के लिए आज के युग में अर्जुन, अभिमन्यु, भीम, नकुल, सहदेव फॅार जैसे महान श्रद्धा भी आ जाएगा तो उन्हें भी और सफलता का मूड देखना पडेगा । सुरक्षा रूपी चक्रव्यूह का वह आखिरी चरण हॉल नंबर चार है । उस हॉल की सिक्योरिटी ये सोच कर की गई है कि अगर कोई अपराधी किसी तरह तमाम सिक्योरिटी को भेजता हुआ हॉल नंबर चार तक पहुंचने में सफल होता है तो फिर उसके हाथों से दुर्लभ ताज को किस तरह बचाया जाये? किस तरह बचाया जाएगा? नहीं पडी मान ले जो अपराधी तमाम सिक्यूरिटी सिस्टम को भेदकर हॉल नंबर चार तक पहुंचने में सफल होता है, वो अपराधी तुम हो । अब तक मुझे ये बताओ कि वहाँ पहुंचने के बाद तुम क्या करोगी? अरे बडी ओर क्या करता है अंदर घुसने की कोशिश करुंगा नहीं ऍम तो मंदरि घुसने की कोशिश करोगे लेकिन सवाल यह है कि तुम अंदर खुश हो के कैसे क्योंकि हॉल नंबर चार के दरवाजे पर तो बडे भारी भरकम डाले और छोड ताले लगे हुए हैं जिनकी मास्टर की की सहायता से भी नहीं खोला जा सकता । बडे परिवारशाही थोडी अगर ताडा खुल नहीं सकता तो हो सकता है नहीं ऍम दरवाजा टूटी सकता है । नहीं आॅडियो मैं तुमसे बिल्कुल सहमत हूँ बल्कि मैं खुद यही कहना चाहता हूँ कि प्रत्येक अपराधी का उस अवस्था में यही माइंड होगा क्योंकि जितने ऍम को भेदकर हॉल नंबर चार तक पहुंचेगा उसे वहां पहुंचकर खाली हाथ लौटना तो किसी भी हालत में कंवारा ना होगा । चाहे कुछ भी क्यों न करना पडेगा, कैसा भी चाय जाना था । इस तरीका इस्तेमाल क्यों ना करना पडे अपराधी किसी ॅ को ध्यान में रखते है । जूरी के मेंबरों ने हॉल नंबर चार की सुरक्षा व्यवस्था की है हूँ से कोई फिलहाल हाँ बच्चा हो गया है तो उसने वहाँ जाकर देखा ही होगा तो उस हॉल की छत और दीवार फॉल सीलिंग तथा प्लास्टर पेरिस की बनी हुई हैं । जिसकी मोटाई लगभग एक फुट के करीब है । दीवार और छत उतनी मोटाई में डेकोरेट करने के पीछे एक खास कारण है । बडे बडे, वो भी बता दो दीवार और अच्छा दोनों जगह स्वचालित कहने छुपी हुई हैं । कोई भी अपराधी जैसे ही किसी गलत तरीके से हॉल में घुसेगा, तभी दीवार और छत में छुपी हुई स्वचालित गाने हरकत में आ जाएंगे और वह हॉल के हर हिस्से पर हर एंगल पर गोलियों की बौछार करना शुरू कर देंगे । यानी अपराधी हॉल में चाहे किसी भी जगह क्यों ना खडा हो, कोरियाओं से वहीं आकर लगेगी और पलक झपकते ही तलाश में पता चल जाएगा । सिर्फ दीवानचंद सहित सबके चेहरों पर कालिख पता नहीं और अगर अपराधी किसी तरह गोलियों से बच भी गया क्योंकि बिलकुल नामुमकिन है, तब भी वह दुर्लभ ताज को नहीं चुना पाएगा । क्यों दशक पटल का दिमाग पर बिजली से गिरी पाकिस्तान को चुराने में क्या मुश्किल है? बहुत बडी मुश्किल है क्योंकि अपराधियों ताज को निकालने के लिए जैसी उसके शीशे के बॉक्स को छोडेगा, तभी उस बॉक्स के अंदर बंद दुर्लभ ताज बीस फुट नीचे मुझे जैसी कह रही मैं चला जाएगा । अपराधी पाँच से हाथ उठाएगा तो फिर ऊपर आ जाएगा । हाथ लगाएगा तो फिर नीचे चला जाएगा । बस यही नाटकी और बेहद दल । इसमें प्रक्रिया चलती रहेगी । लेकिन दुर्लभ पांच अपराधी के हाथ नहीं लगेगा । बडे साई इसका मतलब तिलिस्मी सिस्टम तो शीशे के बॉक्स में ही फिर हुआ क्योंकि उसे तो हाथ लगाते ही दुर्लभ ताज ऊपर नीचे होता है । बिल्कुल थी । और अगर हम शीर्ष एक बॉक्स को ही तोड डाले तो क्या होगा? कुछ नहीं होगा उस पोजीशन में । उधर लगता बीस फुट नीचे चला जाएगा और फिर ऊपर नहीं आएगा । फिर वही इंजीनियर उस दुर्लभ ताज को बीस फुट नीचे से निकाल सकता है । जिन्होंने उस साॅफ्ट किए हैं । वहाँ उन्हें शमशान घाट जैसा सन्नाटा छा गया । सब स्तब्ध थे । बिल्कुल बॉल फॅस और ये तो वाकई बडा जबरदस्त इंतजाम है । पहले क्या था था? न्यूज दुर्लभ ताज को चुराना आसान नहीं है । उसका ॅ यहाँ मजबूत है । शायद भारत में पहली बार किसी ऍम के लिए इतनी जबरदस्त सिक्योरिटी की गई है । बडे बडी इसमें कोई शक नहीं की सिक्योरिटी वाकई बहुत पावर फुल है । लेकिन एक बात मैं फिर भी कहूंगा क्या देखो ॅ कितनी भी जबरदस्त हो लेकिन उसे तोडा जा सकता है । शाही दिमाग ब्रेड से हर डाॅॅ की कार्ड पैदा की जा सकती है । यानी तो मैं कहना चाहते हो की तो मैं सिक्योरिटी को भेजने की कोई योजना बना लोगे । मैं अभी कोई दावा नहीं कर सकता चाहिए । मेरा ये मानना है कि दुनिया का कोई काम मुश्किल नहीं, असंभव नहीं । जरूरत है तो इंसान के अंदर बच लगन पहुँच ले कि बडे तंदुरुस्त दिमाग की हाँ मुझे तो नहीं लगता कि कोई अपराधी करिश्मा कर पाएगा । थोडी तुम हमें चैलेंज दे रहे हो? नहीं पालीवाल सकपकाया साई अगर तुम हमें चैलेंज दे रहे हो तो हमें तुम्हारा ये ऍम स्कूल है । ठीक है आपसे मेरा चैलेंज समझे क्योंकि मुझे पूरा यकीन है कि इस पर फॅमिली को दुनिया का कोई व्यक्ति भेद नहीं सकता । बढिया बात है बहुत बढिया बडी हम तुम्हें ये करिश्मा लडके दिखाएंगे । उधर वो मीटिंग वहीं पर खास हो गए । जगदीश पालीवाल को जिस तरह आंखों पर पट्टी बांधकर वहाँ लाया गया था उसी तरह वहाँ से विदा कर दिया गया । लेकिन जाने से पहले वो अपने बेटे गुड्डू से मिला और बडे ही जज्बाती होकर मिला । मैं मैं तुमसे गिनती करना चाहता हूँ मैडम फिर उसने जाने से पहले मंत्रा से कहा था कही मंत्र का स्वाॅट उठा तो मैं एक और अब उसमें जानता हूँ । तुम चाहे कितना ही इन अपराधियों से मिली हुई हो, लेकिन फिर भी तुम उतनी कठोर नहीं हो सकती जितना ये सब है । जिससे मैं हाथ जोडकर तुमसे विनती करने की हिम्मत कर पा रहा हूँ । देखो गुड्डू मेरा एकलौता बेटा है । इस की अच्छी तरह देखभाल करना । मंत्री भी जज्बाती होता है । वो एकदम गुड्डू की तरह झपटी और उसे अपनी छाती से निपटा लिया । देख के साथ इसे कुछ नहीं होगा । जब तक मैं सुनता हूँ, कोई आज नहीं आएगी । नहीं मुझे तो पर भरोसा है । हम तो तुमने मुझे धोखा दिया । फिर भी न जाने क्यों मुझे कुछ तुम्हारे ऊपर एक बार करने का दिल चाहता है । तडक उठी मंत्रा, जबकि पालीवाल फिर वहाँ से चला गया । कुलभूषण की जिंदगी और एक बिल्कुल नया मोड दे चुकी थी । कल का ऑटो रिक्शा ड्राइवर हालत की चमकी में दस का पूरी तरह एक अपराधी बन चुका था, से दीवानचंद में उसे अपने संगठन का मेंबर बना लिया था । इतना ही नहीं, उस अड्डे से बाहर आने जाने की इजाजत थी, शीर्ष नहीं दे दी थी । तब भूषण को पहली बार ये मालूम हुआ कि वह अड्डा सेट दीवानचंद की विशाल जुलरी शॉप के नीचे तो खाना बना हुआ था । लेकिन उस अड्डे में जाने का रास्ता तीन मंजिले मकान के भीतर से वो मकान जूलरी शॉप के बिल्कुल पीछे वाली गली में था तो पुराना सा मकान भी सेट की मिल्कियत था । ढाई सौ वर्गगज में फैला और उस मकान के तहखाने से होकर छोटी सी सोनम पार करते हुए अड्डे तक पहुंचा जाता था । वो सुरंग सीधे कॉन्फ्रेंस हॉल में होती थी । दरअसल कॉन्फ्रेंस हॉल में एक अर्द्धनग्न लडकी की विशाल पेंटिंग लगी थी और पेंटिंग के बराबर में एक मन मोहन लाल पता था । जब बटन दबाया जाता तो पेंटिंग किसी स्लाइडिंग दूर की तरह की तरफ से पेंटिंग के पीछे स्टेरिंग व्हील जैसा लोहे का चक्कर नजर आता । इस चक्कर को घुमाने पर ही दीवार का एक बडा संभाल नहीं कर सकता हूँ और तब कहीं सुरंग का बहाना दिखाई देता है । वो थोडा उस विशाल का जुलरी शॉप के नीचे जरूर बना हुआ था । लेकिन घंटे में आने जाने का रास्ता पिछली गली में बना वही पुराना मकान था । कुलभूषण ने जब पहली बार दशक बॉटल के साथ उप रास्ते के दर्शन किए तो पूरे सिस्टम से बडा प्रभावित हो हद से ज्यादा प्रभावित हुआ । ऐसे करिश्मे तो उसने सिर्फ कभी कबार फिल्मों में ही देखे थे । आम जिंदगी में भी इस तरह का कुछ होता है तो उसने सोचा भी नहीं था । बहरहाल, फिर दुर्लभ ताज चुराने के लिए योजना पर काम शुरू हुआ । ऍन दशक, पाटिल और ऍम तीनों पांच को चुराने का दृढसंकल्प ले चुके थे । हालांकि सिक्योरिटी वाकई बहुत होती है, लेकिन वो निराश बिल्कुल नहीं थे । उन्हें लग रहा था कि वह वाकई कोई करिश्मा का डालेंगे । उस सिक्योरिटी को भेजने के लिए उन्होंने खुद दिमाग लडा । अच्छा शाम उन तीनों के बीच वो सब जगह पर एक मीटिंग हुई हैं । काफी देर तक उन्होंने विचार विमर्श किया । नतीजा कुछ नहीं । सारा दिन सारी रात तो सिक्युरिटी को भेजने की कोशिश करते रहे । हर एक दो दो घंटे के बाद उनके बीच मीटिंग होती हैं । इन दो घंटे में जिसमें जो कुछ सोचा होता वो अपना आइडिया एक दूसरे के सामने रखता है । कुल मिलाकर उनके बीच सात मीटिंग हुई । कितना बीज जीरो उनके द्वारा खूब दिमाग बढाकर सोचा गया । आइडिया पूरे काट ढेर साबित हुआ । शनिवार सुबह दस बजे तीनों कॉन्फ्रेंस हॉल में पुनः सिर से सिर्फ जोडे बैठे थे । लेकिन इस वक्त उनके चेहरे पर ऐसी फटकार बरस रही थी जिसे हरीराम किसी ने उनकी जमकर ढाई की कल का उत्साह अब निराशा में तब्दील हो चुका था । कुलभूषण दिन के बीच बिलकुल खामोश काटका उल्लू बना बैठा था । बहुत अब दुर्लभ ताज को वापस कजाकिस्तान लौटने में तीन दिन रह गए हैं । सिर्फ तीन और अभी तक हमारे पास दुर्लभ ताज को चुराने की कोई सॉलिड योजना तक नहीं है । एक बात करुँगी कुलभूषण बोला रेवाडी तू बोल हुई क्यों खामोश रहता है? नहीं उस दुर्लभ ताज की सिक्योरिटी वाकई बहुत मजबूत है । बॉस कुलभूषण बोला हमें उसे चुराने का ख्याल भी अपने दिमाग से निकाल देना चाहिए । रेवाडी तू पागल है क्या? तू क्या समझना चाहिए? अगर अभी तक योजना नहीं बनी तो आगे भी नहीं पडेगी । ऐसा भी कहीं होता है सही मैं निराश से बडी बातें अपने दिमाग में नहीं लानी । इंसान वो होता है जो हारने के बावजूद दिल से अपनी हार कबूल नहीं करता बल्कि वह और संघर्ष करता है और लडाई करता है । बडी ऐसे ही लोगों की जिंदगी में करिश्में होते हैं । ऐसे ही लोगों को फतेह मिलती है । लेकिन दुश्मन पांडे ने कुछ कहना चाहते हैं खडे खडे कुछ नहीं कुछ नहीं सुनना मुझे बडी हमने वो ताज चुराना है । हर हालत में चुराना है फॅस सुख हो गए तभी एक बेहद सनसनीखेज घटना घटी । ऐसी घटना जिसमें से कुछ कर रख दिया लम्बे फल वाला चाकू बडे अपस्मार ठंड से सनसनाता हुआ फॅसा और फिर वो कहता की तेज आवाज करता हॅू बीच जाता था पूछना पडेगा ऍम सब सब बिजली जैसी राॅय बाहर निकलेंगे । इतना गलियारा सुनसान पडा था कहीं कोई नहीं उन चंद पूरा अड्डा छाना लेकिन उस व्यक्ति की कहीं दर्शन नहीं हुए । चाहूँ फेंक कर मारा था घर का थक हारकर ऍम हूँ । बुरी तरह डरे हुए थे वापस कॅश नहीं एक और मौका तेज धमाका उनकी नजर भेज इधर से ऊपर पडी उन्होंने देखा किस चाकू की नोक में कार्रवाई घुसा हुआ है । जरूर किसी ने मुकाबले उन तक पहुंचाने के लिए ही चाकू वहाँ फेंक कर मारा था । डाॅन की तरफ झपटा जल्दी उसने चाहूँ कि नौ पैसा कागज निकाला और फिर उसे खोलकर छुट्टी छुट्टी पडने लगा । जैसे जैसे ऍम उसकी आपके हर से पडती चलेंगे, ऍम तक पहुंचते पहुंचते उसकी आंखें अचंभे की । माँ ने अपनी कटोरियों से बाहर निकलने को तैयार नहीं थी तो पास जो कागज पढते ही दुश्मन पडने खुशी चिल्ला था पास हमें योजना मिल गई तो मैं दुर्लभता चुराने की फॅमिली गई ऍम रहा है ये ये ऍम ऍम सबके सामने लग रहा है उसको खुशी से बुरा हाल ॅ होता लगती है । बडे बडे लेकिन ये योजना आई कहाँ अच्छा ही बडी कितना भेजी फॅस पर लेकिन आपने दो शब्द पडेगी तथा उसके चेहरे पर गंभीरता शामिल क्या हुआ हो गया इस पर ॅ सबके नेत्र घर से फैल गए ऍम पांडे के हाथ से अब ऊॅट लिया फिर एक किस्सा उसमें पूरी योजना पडता चला गया क्यों जो उसने योजना पडी है ठीक उसी अनुपात में उसकी आंखों की चमक पडती चलेंगे पूरी योजना पडते हैं उसकी आंखे भी कई कई हजार वॉट के बल्ब की मानिंद जगमगाने लगी थी । जब सही ऍम ये तो बहुत बडी हूँ योजना है हम उस हाँ इसी दशक बॉटल योजना को पड रहा था अगर अगर हम इस योजना पर काम कडे चाहिए तो तो हमें ताज पुराने से कोई नहीं रोक सकता । बडी फिर तो हमने ऍम ही है अपने को ठीक ऍम में बोला मुझे तो अभी सोच छूटकर हैरानी हो रही है कि इतनी साधारण योजना हमारे दिमाग भी क्यों नहीं आई? सुपर्ब उसके दमाद नहीं क्यों आई ऍम मैं तो पहले ही बोलता था । पहले बोलता था कि इस दुनिया में हर चीज की काट मौजूद है । कोई देखा तो उन्हें देखा जोडी ऍम रहे थे । सिक्के पर समझ रहे थे । सुपर पहुंॅची को भेजने की योजना भी पुरा डाली । अरे बडी जब जूरी के मेरे को ये पता चलेगा कि दुर्लभ ताज इतनी जबरदस्त सिक्योरिटी के बावजूद जो आसानी से चोरी हो गया वो अपना माथा पीट लेंगे । बडे गलत कर रहे जाएंगे । वो शब्द कहते हुए जोर जोर से खिलखिलाकर हंसने लगा । दीवानचंद जोर जोर से ऐसा लग रहा था जिससे उसके ऊपर खुशी का दोनों पड गया होगा ।

भाग 16

थोडी देर बाद ही कॉन्फ्रेंस हॉल में फिर सहित एक मीटिंग । उस मीटिंग में इंडियन म्यूजिक ऍम जगदीश पालीवाल भी मौजूद था । ये सुनकर पालीवाल के दिमाग में बम सफलता की । उन्होंने दुर्लभ ताज को चुराने की कोई मास्टरपीस योजना बना ली है? नहीं चल भी की बात थी, लेकिन योजना क्या है? जगदीश पालीवाल ने उत्सुकतापूर्वक पूछा रीवांचल मुस्कराया उसने इस वक्त भी अपने चेहरे पर नकाब धर्म क्या हुआ था? पारिवार साई बडी हमने सुना है । कल शाम पांच बजे बैंगलोर से हवाई जहाज द्वारा दो ताबूतों में शेर और चीते की खालें दिल्ली लाई जा रही हैं, जिनमें पहले भूसा भरा जाएगा । फिर उन्हें प्रदर्शनी के लिए म्यूजियम में रखा जाएगा । ऍम तो वही सब कैसे मालूम? अरे बडी हमें ये भी मालूम है नी जिन ताबूतों में ये खाडे लाई जाएंगी उन ताबूतों को एयरपोर्ट पर रिसीव करने भी तो होंगे जो हैं गलत है । अरे बडी ये सच है ही हमें सब मालूम है । हम से कुछ नहीं छिपा लेकिन बडी हमें तो ये भी मालूम है । तीन ताबूतों को रिसीव करने का एक फॅमिली भी चुका है । जाॅन लगता हो चुकी सूरत को देखने लगा । लेकिन तुम ताबूतों के संबंधिति छानबीन क्यों कर रही हूँ । कहीं तुम्हारा मकसद उन खालों को चलाने का तो नहीं है? फॅमिली जब तुम दुर्लभता जैसी ब्रिज की चीज आंखों के सामने हो तो चिडिया की बीवी को हाथ लगाना कौन चाहेगा? ऍम के बारे में सवाल हूँ । कर रहे राॅकी दिशा में हमारी बहुत बडी मदद करने वाले हैं । तब वो करने वाले हैं । ऍम बहुत ज्यादा आश्चर्य से फैल गया । वो कैसे ऍम पूरी योजना बताता हूँ । दरअसल कल शाम ठीक पांच बजे दोनों तबू सफदरगंज एयरपोर्ट पहुंचेंगे । ठीक थी उन ताबूतों को रिसीव करने तो इंडियन आॅयल लेकर एयरपोर्ट जाओगे और कुछ स्टेशन वॅार चला रहा होगा । एयरपोर्ट पहुंचते खालो के वो ताबूत बैगन में ला दिए जाएंगे और फॅमिली ना नहीं रूके । म्यूजियम से एयरपोर्ट पहुंचेगी । फिर वो उसी तरह सफदरगंज एयरपोर्ट से वापस इंडियन म्यूजियम पहुंचेगी । छत्तीस ऍम सीट दीवानचंद की एक एक बात सुन रहा था । बडी तभी एक घटना घटेगी स्टेशन वैगन ताबूतों को लेकर अभी सफदरगंज एयरपोर्ट से थोडी ही दूर आएगी कि तभी तुम्हारे सिर में एक बडा तेज दर्द उठेगा । ऍम उठेगा पाॅप टूटेगा अरे बडी तुमने स्पोर्ट पर पहुंचकर सिर दर्द का नाटक करना है नहीं जानबूझ कर स्टेशन वॅार के सामने ऐसा शो करना है । किसी तुम डिसाइड में वो तेज दर्द हो रहा हूँ लेकिन मुझे नाटक करने की क्या जरूरत है क्योंकि यही हमारी योजना है । भाई देखो मैं तुम्हारी किसी योजना पर काम करने वाला नहीं हूँ । एक आॅवर गुस्से में बडा बडे काम तो तुम करोगे नहीं । नहीं करूंगा बडी अगर नहीं करोगे तो तुम्हारी खैर नहीं । तुम्हारे मासूम बच्चे की छह नहीं बच्चे का नाम सुनते ही पालीवाल का सारा को सब काफूर हो गया । तुम लोग जबरदस्ती कर रहे हैं । मुझे तो कुछ दू की जान के पत्र में मुझे सिक्योरिटी की जानकारी मांगी थी और वो जानकारी मैंने तो मैं दे दी । इस वक्त अपना तुम्हारी कोई भी बात मानने के लिए बाध्य नहीं हूँ । बडी तुम्हें अपने बच्चे की जानकारी है कि नहीं । ऍम हो ऍम में बच्चे की चार जारी है की नहीं बच्चे की जांच किसी बीमारी नहीं होती है । बडे अगर उसकी जान प्यारी है वही तो वही तो करना पडेगा तो हम करेंगे यानि हमारी हर बात माननी पडेगी । जगदीश पालीवाल कसमसा कर रह गया बडी अब आगे शुरू तो माॅर्गन के ड्राइवर के सामने भयंकर शिर दर्द कर्नाटक क्या करना है ताकि तुम ड्राइवर को टेबलेट लेने किसी कैमिस्ट की दुकान पर भेज सकते इस पूरे ड्रामे का मतलब सिर्फ इतना है कि ड्राइवर को कुछ देर के लिए स्टेशन वैगन से थोडा दूर भेजा जा सके । पूछूँ कि डाॅ दूर भेजने की क्या जरूरत है? क्या जरूरत है अच्छाई जिस दिन तुम्हारी स्टेशन बैगन सफदरगंज एयरपोर्ट से चलेगी, उसी छत तुम देखोगी कि एक सेंट्रो स्टेशन बैगन के पीछे लगी हुई है । फॅमिली होगी था हमारे आदमी होंगे एक पूर्वनिर्धारित तलाहासी जगह पर पहुंचकर ऐसे ही तुम सिर दर्द का ड्रामा करोगे और ड्राइवर को टेबलेट लेने के लिए भेजोगे । उसको अच्छा उसी झंड सेंट्रो के भीतर से निकल कर हमारा एक आदमी तेजी से तुम्हारे पास पहुंचेगा । बडी हमें तो ये भी मालूम है कि इंडियन म्यूजियम की स्टेशन बैगन दो पोर्शन में बंटी हुई है । आगे वाला जो की ड्राइंग पोषण है सिर्फ चार फुट का है जबकि पिछला मोशन इसे बॉक्स पोर्शन कहा जाता है । उसकी लंबाई पंद्रह फुट है और बॉक्स पोषण नहीं । ताबूत जैसे आइटम रखे जाते हैं और उसके लोहे की मजबूत दरवाजे पर हमेशा ध्याडी भडकम ताला झूलता रहता है है । उस दिन भी दोनों ताबूत स्टेशन रेगन की उसी बॉक्स पोषण में होंगे । उसके दरवाजे पर ताला लगा होगा । लेकिन ड्राइवर ऐसे ही स्टेशन बैगन खडी करके टेबलेट लेने कैमिस्ट की दुकान की तरफ जाएगा ना तभी तभी शाही हमारा आदमी तुम्हारे पास पहुंचेगा और तुमने उसे फौरन बॉक्स पोषण के पहले की चाबी दे दे । नहीं है । ऍम तो फॅमिली मिलते ही हमारा आदमी ऍम का दरवाजा खोल देगा । दरवाजा खुलते ही हमारे और दो आदमी जो सेंटरों में होंगे वो डकैती डालने वाले थोडे से साथ सामान के साथ फुटबॅाल हो जायेंगे । उसके बाद उसके पास हमारे बॉक्स पोषण करना पडा वापस लग जाएगा, चाबी तुम्हें देगा उसके बाद सेंट्रो लेकर पहले की तरह ही सडक पर आगे बढ जाएगा । ये पूरा काम ड्राइवर द्वारा टेबलेट लेकर लौटने से पहले कम्प्लीट हो जाना है । लेकिन तुम्हारे दो आदमी ऍम करेंगे क्या? जगदीश पालीवाल नॅशनल उन दोनों का काम बडा ऍफ है । अरे बडी उन्होंने ही दुर्लभ ताज की चोरी करनी है ना ऍम में पहुंचने के बाद उन दोनों का सबसे पहला काम ताबूतों के अंदर घुसना होगा । बडी इस बात से तो तुम भी अच्छी तरह वाकिफ हो गए कि ताबूतों में खास रखे जाने के बाद अमूमन इतनी जगह जरूर बची रहती है तो उस खाली जगह में एक आदमी आ जायेगा । ताबूतों में वो खाली जगह छोडने के पीछे भी एक साइंटिफिक रीजन होता है । बडी ताबूत में वो खाली जगह इसलिए छोडी जाती है भाई ताकि खाली वो हवा सही तरह मिलती रहे और खाडा मसाला लगी होने की वजह से खराब ना हो । जगदीश पालीवाल पूरी योजना बडे देश में से सुन रहा था लेकिन ये तो तुम ने भी बताया ही नहीं कि तुम्हारे वो दोनों आदमी ताबूतों में घुसकर करेंगे क्या? ऍम ये बात भी तो योजना में आगे चलकर मालूम पड जाएगी । तो उन दोनों आदमियों ने ताबूतों में घुसकर क्या करना है, आज तुम्हारे लिए इतना समझ लेना काफी है । बॉक्स पोषण में पहुंचने के बाद उनका उद्देश्य क्या होगा कि वह जल्द से जल्द उन ताबूतों के अंदर इस तरह घुस जाये कि बाहर से देखने पर किसी को इस बात की भनक तक ना मिले । उन ताबूतों के साथ कैसी भी छेडखानी की गई है, फिर बोलता हूँ तो मैं कैसे हो सकते हैं? क्यों नहीं हो सकते हैं? नहीं तो ताबूत सीलबंद होते हैं, पर सरकारी मुहर लगी होती है । अच्छाई हमारे आज भी शील नहीं छोडेंगे, हाथ भी नहीं लगाएंगे । बडी वो ताबूत के नीचे से सकते उखाडकर उसके अन्दर घुसेंगे और अंदर घुसते ही ताबूत के रखते थे । उसी तरह वापस ठोक देंगे जैसे वो पहले चुके थे । इस तरह ताबूतों बी । सी । लगी रहेगी, तालाब भी पडा रहेगा और हमारे दोनों आज भी अपने पूरे साजोसामान के साथ ताबूत के अंदर भी घुस जाएंगे । पांॅच उसके भाग गया होगा । पांॅच पहुंचेगी मीडियम में हाल नंबर चार के साथ साथ कुल छह हाल कमरे हैं हैं । यहाँ एक बात ध्यान देने की काबिल है । म्यूजियम के बाकी पांच हाल शाम के पांच बजे बंद हो जाते हैं । सिर्फ चार नंबर हाल ही एकमात्र हाल है तो शाम के छह बजे तक खुला रहता है । जबकि शेष जीते की खाल के जो ताबूत बंगलौर से दिल्ली आ रहे हैं, उनके एयरपोर्ट पहुंचने का टाइम भी शाम के पांच बजे का ये तुम क्या समझते हो उन ताबूतों को एयरपोर्ट से इंडियन म्यूजिक तक पहुंचने में कितना समय लगेगा । बडी आधा घंटा ॅ बीच रास्ते में भी रुकेगी इसलिए उसका इंडियन म्यूजियम उन्होंने छह बजे तक पहुंचना मुमकिन होगा । ऍम छह बजे इंडियन मुझे पहुंचने के बाद तुम दोनों ताबूत किस हॉल कमरे में रख होगी? नंबर हॉल में ऍम तो हर बंद हो चुका होगा । हाँ वो बंद हो चुका होगा लेकिन हॉल नंबर तीन और चार की चाबियां हमेशा म्यूजियम के हैड सिक्योरिटी गार्ड सरदार गुरचरण सिंह के पास रहती है तो चौबीस घंटे म्यूजियम में मिलता है फॅार सरदार गुरचरण सिंह के नाम अलॉट किया गया है । इसीलिए हो या तो में मिलेगा या फिर आपने क्वार्टर में और बडी बात की । हाल कमरों की चाबियां किसके पास रहती है वो अलग अलग हाल कम लोग के अलग अलग चीज फॅमिली के पास रहती है । यानी अगर तुम कल शाम पुणे छह बजे एकदम से उन हॉल कमरों की चाबी हासिल करना चाहूँ तो क्या दिया तो मैं नहीं मिलेंगे था ऍम अब मैं योजना को दोबारा आगे बढाता हूँ । देखो बडी कल शाम पुणे छह बजे जब तुम्हारी स्टेशन बैगन इंडियन म्यूजियम पहुंचेगी तो सरदार ताबूतों को रखवाने के लिए हाल नंबर दिन का दरवाजा खोलना चाहेगा लेकिन कल उस हाल का दरवाजा नहीं खुलेगा । सही क्यों? पालीवाल का दिमाग में धमाका सा हुआ? ॅ नहीं खुलेगा क्योंकि कल मैं मैं बीजेपी जाऊंगा । अच्छाई और खुद अपने हाथों से हाल नंबर दीन का दादा खराब कर के आ जाऊंगा । वो कैसे बडी कोई बडी बात नहीं । मुझे मालूम हुआ है कि हाल नंबर तीन पूरे म्यूजियम में सबसे ज्यादा बन हर जगह पर है । इतना ही नहीं पेशाब कर भी उसके काफी नजदीक है । मैंने कल किसी भी वक्त पेशाब करने के बहाने उस तरह जगह पर जाकर हाल नंबर तीन के तले में चाय भी डालना है और एक कष्ट कर इधर उधर हिला देना है । वो चाबी क्योंकि उस तारे की नहीं होगी । इसलिए कसकर इधर उधर हिलाने से उस साले के अंदर की दाल पुर्जा ही जाएंगे । और फिर थोडी देर बाद गुरचरण सिंह के खूब कोशिश करने पर भी वह डाला नहीं पडेगा । क्या फायदा होगा बडी सारा फायदा इसी से तो होगा पूर्ण योजना ही इस छोटी की घटना पत्ते की है । इससे बाडी वार्ताएं बडी जब हाल नंबर तीन का दरवाजा सरदार गुरजंटसिंह खुलेगा नहीं और बाकि हाल कमरों की चाय दिया उसके पास होंगे नहीं तो साइन वो दोनों ताबूतों को किस हाल में रख पाएगा । अब फॅमिली योजना उसकी समझ में आ गए । जवाब दोनों ही बडी वो ताबूतों को किस हाल कमरे में रखवा आएगा? नहीं हूँ ऐसी परिस्थिति में तो सरदार गुर्जन सिंह को वो ताबूत और चार नहीं रख माने होंगे । सही बिल्कुल सही कहा तुमने चाहिए और बडी यही नाम लोग चाहते हैं और यही हमारी प्राणी है । पारिवार साही सिर्फ वो ताबूत थी, हाल नंबर चार में बंद नहीं होंगे बल्कि हमारे दोनों आदमी रहेंगे उन ताबूतों के साथ साथ निर्भिक उस हाल में बंद हो जाएंगे उस भाई नंबर चार में जिसकी सिक्योरिटी के इतना जबरदस्त इंतजाम भारत सरकार ने किए हैं । जिस सिक्योरिटी पर जूरी के मेंबरों को खडा है । हमारे दोनों आदमी जिस तरह नीचे से रखते उखाडकर ताबूत में घुसे थे वो हाल बंद होने के बाद उसी तरह सकते हो हार्ड तब तो से बाहर निकल आएंगे अब दूसरी भाषणों ऐसी परिस्थिति में फाल्स सीलिंग की छत और ऍम की दीवारों मच्छी भी स्वचालित करने भी हमारे आदमियों का कुछ नहीं बिगाड पाएंगी क्योंकि वो स्वचालित करे भी उसी वक्त हरकत में आती है जब हाल बंद होने के बाद उसमें कोई गलत तरीके से घुसता है । बिल्कुल यहीं परिस्थिति शीशे के दिल में बाद में बंद दुर्लभ ताज की है । बडी वो पार्ट्स भी ताज को ऊपर नीचे ले जाने वाला करामाती प्रदर्शन कभी दिखाता है जब कोई हाल में गलत तरीके से मुझे और असाधारण स्थिति में वो दुर्लभ ताज अपनी जगह फिक्स रहता है । पारिवार साइन अब तो मन दादा लगा सकते हो कि वो ताज वो वो युगो पुराना कजाकिस्तान का दुर्लभ तार नहीं आसानी से हमारे हाथ लग जाएगा । जगदीश पालीवाल किसी अवस्था में दीवानचंद का लगा आज सुबह ग्यारह देखता रहेगा । उसे अभी भी अपने कान ऊपर चुकी नहीं था । वो यकीन नहीं कर पा रहा था की उन अपराधियों ने इतनी समर्थन सिक्योरिटी को भेजने की कोई योजना बना ली है । वाकई करिश्मा कर रहे हो । बडे ऍम एक ही जगह मान खा गए । उन्होंने नंबर ऍम एक ही लूज पॉइंट छोड दिया कि वो ऍम तभी हडकत में आएगा जब कोई उस हालत देख गलत तरीके से प्रवेश करेगा । कुछ न सबकुछ नारबल रहेगा अगर इस फॅमिली ये लू ज्वाइन होता । शायद हम किसी भी हालत में कुछ दुर्लभ ताज को चुराने की योजना ना बना बात नहीं । लेकिन इसमें जूरी के उन लोगों की भी क्या गलती है । सही बडी उन्हें ये कोई बात थोडी ही चुका होगा कि कोई इस तरह भी हाल में घुस सकता है । जगदीश पालीवाल सकते जैसी अवस्था में बैठा रहा ऍम मुझे अब ये कहने की जरूरत नहीं है । तुमने मुझे जो चैलेंज किया था वो जीत चुका हूँ । बडी इस परफेक्ट योजना से इस हो चुका है । सच में इस दुनिया में कोई भी काम नामुमकिन नहीं । एक बात बताओ परिवार ने बोला आप पूछ पूछ पूछ लूँ मैं मानता हूँ कि तुम्हारे दोनों आदमी इस दुर्लभ ताज को आसानी से चुरा लेंगे लेकिन फिर वो दुर्लभ ताज को लेकर हॉल नंबर चार से किस तरह बाहर निकलेंगे क्योंकि हॉल नंबर चार के दरवाजे पर बाहर से ताला पडा है और ऍम गार्डों का पहला है सिर्फ दीवानचंद ॅ चार से बाहर निकलने की भी योजना बताई वो योजना हॉल में घुसने वाली योजना से भी ज्यादा जबरदस्ती पहली बार हत्या बढ गया है । पूरी योजना में कहीं सूचित ऍम नहीं था । इसमें कोई शक नहीं कि तुम ने इतने मजबूत विश्व स्तर के सिक्यूरिटी सिस्टम को भेजने की मास्टरपीस योजना बना ली है । लेकिन इस योजना को बनाते समय तो मैं बहुत महत्वपूर्ण बात खुल गए । क्या फॅमिली के साथ साथ सब के सब हैरान हुए हैं? ऍम लेकिन उस मतलब ताज के बारे में कहा जाता है कि वो अपनी सुरक्षा खुद करता है और सच भी है कि आज तक जिसने भी इस दुर्लभ ताज को चुराने का प्रयास किया वहीं किसी न किसी दुर्घटना में मारा गया या बर्बाद हो गया । आजकल ऐसी दर्जनों कहानियाँ उस उपलब्ध ताज के साथ चल चुकी है जब अपराधियों ने तुम्हारी तरह ही बडे जोर शोर के साथ उसे चुराने का प्रयास किया लेकिन वो अपने मकसद में सफल नहीं हुए । मेरे बडी इस बार हम सफल होंगे ये सब कहानियाँ सिर्फ कहानियाँ और सच्चाई हकीकत नहीं बडे इन कहानियों कोशिश बिजली अगर आ गया है ताकि हमारे जैसे अपराधियों के दिलों में खौफ पैदा किया जा सके, उन्हें दुर्लभता चुराने से रोका जा सके । परिवार कुछ नहीं बोला तो भाग गया । उन्ही समझाना प्रकार है । वह कोई न कोई गुल खिलाकर रहेंगे और अपने मासूम बच्चे की जिंदगी के लिए उसे भी मजबूरन उनकी सूचना में शामिल होना पडेगा । बहरहाल फिर जगदीश पालीवाल को को जरूरी निर्देश देकर वहाँ से पैदा कर दिया गया । उसे पैदा करते ही शेष दीवान चलने आनन फानन योजना में काम आने वाले सामान की एक लिस्ट है एक्सॅन चार अग्निशमन कर्मचारियों की खाकीवर्दी या ऍम ऍम बेहद उम्दा किस्म ऍम हो रहे हैं जो खतरे के समय में सुरक्षा कवच का काम अंजाम दे सके । दुर्लभ ताज से ही मेल खाता, एक नकली पीतल का ताज, दस दस लीटर वाली केरोसिन ऑयल की तो के नहीं हथौडा कीलें आदि आदि । समर की लिस्ट तैयार होते ही वह सब फौरन सामान जुटाने के काम में जुट गए । शनिवार की रात दस बजे तक उन्होंने लगभग सारा सामान छोटा लिया था । सबसे ज्यादा परेशानी फायर ब्रिगेड बैंक के हासिल होने में पेश आई, लेकिन आखिरकार उन्हें प्राइवेट संस्थान द्वारा बेची जा रही बिल्कुल चालू हालत में फायरब्रिगेड दूर लाख रुपए में मिल गई । अग्निशमन कर्मचारियों का सामान बेचने वाली एक रिटेल शॉप से उन्होंने अग्निशमन कर्मियों की चार सिली सिलाई, वर्दिया, ऍम और हेल्मेट वगैरह सब करेंगे । दुर्लभ ताज से ही मेल खाता हूँ । एक नकली पीतल का ताज उन्हें जामा मस्जिद के बिना बाजार से हासिल हो गया । उसमें थोडी बहुत जो कमी थी, वह ऍम ठीक हैं । बाकी ऍम की हथोडा जैसी बेहद साधारण चीजें भी उन्हें आसानी से उपलब्ध हो गए । तो फिर इकट्ठे हुए इस बार सेट दीवानचंद सबको ये बताया कि किसने क्या क्या करना था । फोन नंबर तीन के तले को खराब करने की जिम्मेदारी स्टेट दीवानचंद खुद संभाल क्योंकि सबसे अच्छा काम था दर्शन पांडेय को एयरपोर्ट से स्टेशन बैगन का पीछा करते समय सेंट्रल ड्राइव करने की जिम्मेदारी सौंपी और सबसे खतरनाक मोहन पर ताबूतों में घुसकर दुर्लभता चुराने का काम दशक बॉटल और कुलभूषण को सौंपा गया । खुद को उतने जोखिमभरे काम पर नियुक्त होता देख कुलभूषण का दल लगाने की तरह आज उठा उसका कलेजा भूख आ गया । वो प्राॅक्टर जैसे छोटे से कमरे में लेता नहीं तो हाँ फॅमिली का अनुभव कर रहा था उसे । ये पता तक मैं चला के मंत्र का उसके नजदीक आकर खडी हो गई हूँ । मंत्रालय ऍम कुलभूषण चुपचाप पढ रहा है । हो जाएगा इस मर्तबा मंत्रालय आवाज देने के साथ साथ उसे झिंझोडा तो चक्कर पडता है तो मंतर को देखकर उसके ऍम तो हूँ क्या सोच रहे हैं कुछ नहीं झूठ बोलते हैं मुझे क्या नहीं जानती कितना क्या सोच रहे हैं । अच्छा क्या सोच रहा तुम कल की योजना को लेकर डरे हुए हैं कि सोच सोच कर तुम्हारी जान निकल रही है कि सेफ्टी वांचन नहीं तो भी कितने खतरनाक काम पर नहीं किया है । नहीं सच नहीं होते हैं । मैं तुमसे बात करते हैं आज तक पूरी जिंदगी में कभी मक्खी तक नहीं मारी तुम नहीं कभी किसी का एक रुपया चुराने तक का हौसला बगल में पैदा नहीं हो सका । कल तो मैं इतनी जबरदस्त सिक्योरिटी में रखा दुर्लभता चुराने के लिए भेजा जा रहा है । ऐसी परिस्थिति में अगर तुम करोगे नहीं तो क्या करोगे? कुलभूषण साहब साहब सहमा हुआ नजर आने लगा । कुलभूषण चुका हूँ । तेरी फॅमिली मांॅ को चुराना तुम्हारे ऍम वाले आदमी के पास का काम नहीं है । मुझे तो पाँच बारी सोचकर हैरानी हो रही है कि सेठ ने इतनी खतरनाक काम को अंजाम देने के लिए तो भारी जैसे डरपोक आदमी को ही क्यों चुना? एक बात हो क्या कुलभूषण का सस्पेंस? पुलिस बार मुझे तो इसमें विशेष की कुछ नजर आती है तो मानो या ना मानो लेकिन मुझे साफ साफ करता है कि वह तुम्हें जरूर किसी नए चक्कर में फंसाने जा रहा है । पर मैं खुद भी तो हाल नंबर चार के भीतर जा सकता था । फॅमिली के साथ ट्यूशन पांडेय को भी तो भेजा जा सकता था । लेकिन नहीं उसने सब कुछ नहीं किया । उसने तो चुनाव तो भी यानि बिल्कुल नए बेहद डरपोक और ना तजुर्बे कर । आदमी को तो मैं चाहती हूँ । मैं सिर्फ ये कहना चाहती हूँ कि अब तुम्हारा जहाँ एक मिनट और भी रुकना खतरे से खाली नहीं है, कुलभूषण तुम्हारी जान चुके में है इसलिए जितना जल्द से जल्द संभव वहाँ से पहुँचा हूँ, नहीं नहीं क्यों नहीं हो सकता है तो अच्छे से बाहर निकलने का रास्ता नहीं जानते हो, सब जानता हूँ । लेकिन ऍम कुलभूषण की आवाज में पीडा कहाँ मुझे दूसरा मिलेगा अपनी जिंदगी और और माँ की खतरनाक खेल में फंस चुकी है । पूरे दिल्ली के पुलिस मुझे इस तरह राष्ट्रीय घूम रही है जैसे भूषण के ढेर में सूर्य तलाश की जाती है । तुम क्या करोगे कर कर सकता हूँ? मंत्रा अब तो मेरे सामने यही एक रास्ता है कि मैं सेट दीवानचंद के आदेश का पालन करना । लेकिन मेरे दिमाग भी अब एक योजना और है । मंत्रालय कितना कैसी हो? मैंने इन श्रद्धालुओं को चुपचाप बातें करते सुना है कि दुर्लभ ताज हाथ में आते ही ये तीनों हिंदुस्तान छोडकर खामोशी से आपने सुपर्ब । उसके साथ अमेरिका भाग जायेंगे और उसके लिए चालीस पासपोर्ट और वीजा वगैरह की भी । तैयारियां पूरी हो चुकी हैं । कहीं टोमॅटो नहीं की, ये तो मैं भी अपने साथ अमेरिका ले जाएंगे । तंत्र मैं इतना बडा पागल नहीं हो जो इस तरह के लोगों से ऐसी उम्मीद पा लूंगा । फिर फिर की योजना है तुम्हारी । कुलभूषण मंत्रा की तरफ छूट गया और धीमे स्वर में फुसफुसाया अब होगा । कभी अमरीका नहीं जा सकेंगे । मंत्रालय क्या कह रहे हो? मंत्र के नेत्र आश्चर्य से फैल गए । ठीक कह रहे हो इस वक्त मेरी कोई बात अच्छी तरह नहीं समझ होगी । लेकिन अब एक बात ध्यान रखना आज तो मुझे डरपोक और बुजदिल समझते खेला तो अब वोटर वो कुलभूषण मर चुका है । आज से कैसा नया कुलभूषण जान लेगा जो आपने आपने बहादुरी की मिसाल होगा । आज तक रुक मेरे खिलाफ षडयंत्र सकते थे । लेकिन अब मैं षडयंत्र कुमार और ऐसा षडयंत्र की सबके छक्का छोटा देगा । बोलते बोलते कुलभूषण की आंखों में खून कराया और हर उस व्यक्ति को तो मैं किसी भी हालत में मौत नहीं करूँगा । मंत्रा इसकी वजह से आज मेरी हस्ती खेलती जिंदगी नरक बन चुकी है । भूषण का चेहरा ज्वालामुखी की तरह देखने लगा और गुस्से से कपकपाने लगे । वो एक ही पल में धंधा बन चुका था साक्षा तरंडा कुलभूषण का । वो रात रूप देखकर उस साइड चले जा सकते की तरह काम था जो छोटे से कमरे के दरवाजे से आंखों कम हटाए खडा उनकी बातचीत सुन रहा था । नहीं बंद तेजी से पडता है । उसके शरीर में फुर्ती समझ गई थी । फिर वो लंबे लंबे डग रखता हुआ कॉन्फ्रेंस कॉल की तरफ पड गया । गहन अंधकार में भी उस के कदम इस पर उठ रहे थे । मालूम वो उस अड्डे की फॅमिली वो बल्ले था । बल्ले

भाग 17

फिर आखिरकार वह महत्वपूर्ण समय आ ही गया जिसका सेट और उसके संगठन के मेंबरों को पिछले कई दिनों से इंतजार था । सब बहुत रोमांचकारी छत थे, रोमांचकारी भी और रहस्य से भरे हुए भी कोई नहीं जानता था अगर कुछ घंटों में क्या होने वाला है । खेल शुरू हुआ, पत्थर बिछाए जाने लगे और रविवार की खून भी हुई । शाम थी । जैसे ही पांच बजे इंडियन ब्लॅक स्टेशन बैगन ताबूत देने के लिए सफदरगंज एयरपोर्ट के विशाल मार की में जाकर रुकी । स्टेशन बैगन में उस वक्त छत्तीस पालीवाल के अलावा छत्रपालसिंह नाम का एक बेहद लम्बा चौडा ड्राइवर भी मौजूद था जो हरियाणा का रहने वाला था और जिससे कंधे पर हमेशा एक दोनाली बंदूक लगी रहती थी तो बंदूक सरकारी थी और म्यूजियम की तरफ से उसे इसलिए हासिल हुई थी ताकि कोई भी खतरा देखते ही वो उसका इस्तेमाल कर सकें । लगभग दस मिनट बाद ही शेर और चीते की खालों के दोनों काबू स्टेशन बैगन के बॉक्स पोषण में रख दिया गए । फिर छत्रपालसिंह के सामने ही जगदीश पालीवाल ने दरवाजे पर पीतल का भारी भरकम ताला लगाकर चाबी अपनी जेब में रखें । उसके बाद स्टेशन ऍम तूफानी रफ्तार से म्यूजियम की तरफ दौड पडे छत्रपालसिंह पूरी तन्मयता ऍफ कर रहा था । वैसे भी वो दिल खुश आदमी था । हमेशा बस रहता, उसकी बराबर में बैठे जब बीच पालीवाल ने रियरव्यू ने देख लिया था । एयरपोर्ट से ही सफेद राॅकी पीछे लग गई है लेकिन अपना फासला तय करती रही वो भी मुश्किल से एक किलोमीटर भी नहीं चली होगी । जगदीश पालीवाल ने एक का एक स्टोर से संस्कारी भरकर अपना सिर पकडा और फिर एकदम से ड्राइविंग सीट पर ढेर होता चला गया तो सीधा छत्रपालसिंह की गोद में जाकर गिरा । सब्जी सब्जी छत्रपालसिंह के हाथ पांव फूल गए । उसने जल्दी से स्टेशन वॅाक, अप्लाई किए के हो या सब्जी पालीवाल कुछ नहीं बोला वो जख्मी स्टार्ट की बहुत ही पूरी तरह हफ्ता रहा तो उस ओर से और कुछ तो बोलो साहब जी के हो गया जी छत्रपालसिंह पूरी तरह दहशत सादा हो उठा था मेरे बिस्तर में बहुत हो रहा । छत्रपाल पालीवाल पीडा से पूरी तरह कर हकर बोला ऍम फटा जा रहा है सिर दर्द में इतनी बुरी हालत साहब जी ये कुछ साधारण सुंदर नहीं छत्रपाल को पीडा से और पूरी तरह छटपटाए कभी कभी फॅसा है तो तुम काम करोगे छतरबर और हुकुम करो, सब हो तो फॅमिली यही प्रॉपर हो जाएंगे । बेचारा छत्रपाल घबरा तो पहले कभी चुका था । उसकी आंखें बडी तेजी से चारों तरफ खून गई । आस पास के इलाके में क्या नष्ट की दुकान तो क्या कैसी भी कोई दुकान नहीं थी । हाँ, पांच छह सौ गज के फासले पर उसी कॉलोनी जरूर दिखाई दी । अगले ही पर को बदहवास स्थिति में पैदल ही कॉलोनी की तरफ दौड पडा । साॅस जो मंथर गति से चलती थी, वैगन से आगे निकल गई थी । छत्रपालसिंह के पूछ कर रही टर्न होकर दोबारा बैगन के नजदीक पहुंची । फिर सेंट्रो में से बेहद आनंद फॅार निकला । जगदीश पालीवाल भी बडी चुस्त व्यवस्था में वापस सीट पर बैठ चुका था । पलक झपकते ही ट्यूशन पांडे ने जगदीश पालीवाल से चाबी हासिल की । फिर उसने तोडकर बॉक्स पोषण का दरवाजा खुला । उसके बॉक्स पोषण का दरवाजा खोलते हैं । सेंट्रो में पहले से तैयार बैठे दर्शक पाटिल और कुलभूषण तुरंत ऍम और डकैती में काम आने वाला कुछ जरूरी साजो सामान लेकर फुर्ती के साथ सेंट्रो से बाहर निकले और फिर चीजें की तरह दौडते हुए बॉक्स पोषण के भीतर घुस गए । उस वक्त दोनों ने अग्निशमन कर्मचारियों के ड्रेस पहन रखी थी । दोनों के बॉक्स पोषण में घुस रही ऍम लगा दिया । चाबी जगदीश पालीवाल को सौंपी गई । उसके बाद वो पहले की तरह ही आनंद फॅार बैठ गया । ऍम ये कई हो गई । मुश्किल से एक मिनट में ही सारा काम हो चुका था । थोडी देर बाद ही छत्रपालसिंह की वापसी हुई । उस साल की तरह रहा था बीच पालीवाल को बिलकुल ठीक ठाक अवस्था में सीट पर बैठे देखकर चौंक गया आपका सिद्धार्थ ठीक हो गया । साहब जी ऍर में है रानी थी । हाँ छतरपुर तो जाते ही सबका धर्म पडे । आश्चर्यजनक हम से ठीक हो गया था मैंने तो पीछे से कोई आवासीय दीदी अच्छा तुमने सुना ही नहीं और तुम फॅमिली आया । छत्रपालसिंह ऍम पालीवाल की तरफ बढा दी । कोई बात नहीं ऍम में रखी है फिर फिर कभी काम आएगी । चल चलती से म्यूजियम चलो अगले ॅ इंडियन म्यूजियम की तरफ भागी जा रही थी । छह बजने में उस समय दस मिनट बाकी थे । ऍम म्यूजियम के विशाल प्रांगण में जाकर रुक गए । जगदीश पालीवाल के लिए वो सबसे ज्यादा नाजुक झडते ऍम सरदार गुरचरण सिंह और छत्रपालसिंह उन दोनों ने मिलकर बैगन के बॉक्स पोषण जैसे वो तो ताबूत उठा रहे हैं, लेकिन ताबूत उतारने में उन्हें अपनी भरपूर ताकत का इस्तेमाल करना पडा । सब चीज छत्रपालसिंह एक ताबूत उतारते ही पूरी तरह आपने लगा कि पक से आते आते थे भारी कैसे हो गई थी? ऍम बढाया पापे सरदार गुरुचरण सिंह अपनी दाढी पर हाथ फेरते हुए बोला ऍम तो नहीं कुछ दिन ऍम छत्रपालसिंह ऍफ पर हंसी छूट गए । पालीवाल हिमेश करा दिया । इस तरह मजाक में ही वो पास आई गई हो गई । दोनों ताबूत उठाकर हॉल नंबर तीन के नजदीक लाए गए । सरदार गुरचरण सिंह थे । हॉल का वाला खोलना चाहता ताला नहीं खुला ऍम भाकर अपने हाथों की कारीगरी दिखाने में सफल हो चुका था सरदारपुर चरण सिंह ने । फिर कोशिश नहीं, लेकिन इस बार भी उसे असफलता ही नहीं क्या हुआ? पांॅच हालांकि ऐसी नहीं खुल रहा है । पता नहीं शाजी गुरचरण सिंह के चेहरे पर उलझनपूर्ण भाव है । पांच बजे जब मैंने ताला बंद किया था तब तो सब कुछ ठीक ठाक था । प्रतिशत भी क्या हो गया? गुरचरण सिंह से एक लाइक कोई जवाब दे देना बना छतार जी छत्रपालसिंह थोडा फॅमिली मेरे को दिखाना जी मैं देखने । सुरक्षा ॅ सरदार गुरजंट सिंह ने चाबी और अच्छा छत्रपालसिंह को सौंप दिया । अगले ही पल जेंडे जैसा शक्तिशाली छत्रपालसिंह पहुँच गया । जबकि पालीवाल के चेहरे पर अब सस्पेंस फुल भाव उभर आए थे । छत्रपालसिंह ने बे इन्तहां कोशिश की चाबी की मूड पकडकर खूब जोर लगाया लेकिन आखिरकार तालाब से भी नहीं खुला क्यूँ छत्तीस फॅमिली चिंता जाहिर की । यहाँ रखेंगे ताबूतों को शाजी एक सरदार गुरचरण सिंह बोला अभी अभी एक काले वाले को बुलाकर लाता हूँ । उसने पाँच मिनट तो खोल देना है । सरदार ने पूरी योजना में एक का एक रिकॅार्ड पानी बच्चों का तो किसी ने नहीं सोचा था । नहीं ऍम ऐसी गलती कभी मत करना । गुरुवचन सिंह जी इस सारे काले वाले एक नंबर के बदमाश होते हैं । उन्होंने एक पर जिस वाले की चाबी बना ली, दोबारा उसी की डुप्लीकेट खुद ब खुद बना लेते हैं तो वो तो मालूम है इस साल में कितना कीमती सामान रखा रहता है । अगर यहाँ कभी चोरी हो गई तो तुम्हारी आफत आ जाएगी ठीक होने साहब । छत्रपालसिंह ने फौरन सहमती में गर्दन हिलाई । हमारे गांव में सब सुनो । एक बिल्कुल ऐसा ही केस हो गया हूँ । फिर क्या करें? सरदार बोला करना क्या है इन ताबूतों को रात भर के लिए किसी भी सुरक्षित जगह पर तो सुबह सॉल्व ताला तोडकर जब मैं ताला लगाया जाएगा । कभी ताबूतों को भी इसके अंदर रख देना जी चंगी जगह तो बस ये ऍम को रात भर के लिए रखा जा सकता है । कौन सी ऍम ठीक छह बच्चे उन दोनों ताबूतों को हॅूं कर दिया गया । इस तरह दशक बॉटल और कुलभूषण सिक्योरिटी के इतने बडे तामझाम को भेदकर सहजीवी हॉल नंबर चार में घुसने नहीं सफल हो गए । वो हॉल में बंद हो गए थे लेकिन किसी को पता तक नहीं था की थोडी ही देर बाद वहाँ इतना बडा हंगामा होने वाला है । फिर योजना का अगला चरण शुरू हुआ । हॉल में बंद होने के बाद सबसे पहले दशक पाटल अपने ताबूत के तख्ते उखाडकर बाहर निकला । फिर उसके पीछे पीछे कुलभूषण भी निकला । जैसा कि स्वाभाविक था फॉल सीलिंग की छत और ऍम दीवारों के पीछे छिपी स्वचालित । उन्होंने उनके ऊपर कोरिया नहीं बरसाई । ताबूतों से बाहर निकलते ही तो दोनों शीशे के बॉक्स की तरफ बढेंगे । उसमें तुम पांच रखा था । उसकी कीमत कई अरब रुपये थे । पलक झपकते ही वह दुर्लभ ताज दशरथ पार्टी के हाथों में था । उसी पर कुलभूषण शीशे के बॉक्स में पीतल का वो नकली ताज रख दिया जिसे उन्होंने जामा मस्जिद के बिना बाजार से खरीदा था । इस तरह बिना किसी मुश्किल के बिना किसी बडे हंगामे के मुताज चोरी हो गया । अब उन्हें उस दुर्लभ ताज को लेकर सिर्फ उस हॉल से बाहर निकलना बाकी था । हालांकि वो काफी मुश्किल काम था लेकिन वो भी हुआ कुशलतापूर्वक । वहाँ से भाग निकलने की योजना रात के दस बजे से शुरू हुई । योजना काफी हंगामाखेज थी, हंगामाखेज भी और चल दहला देने वाली भी । जैसे ही रात को दस बजे ऍम और कुलभूषण ने अपने साथ फ्लाइट फॅसे तेल हॉल के अंदर ही अंदर चारों तरफ छोडना शुरू कर दिया । इतना ही नहीं फिर टाॅक लगा दी । फौरन चार नंबर हॉल के अंदर तो हूँ करके आग लगने लगी तो तेजी से बाहर निकलने लगा । आप आप ऍफ होने की वजह से उस वक्त अपनी चरम सीमा पर दी जब एक का एक चारों तरफ आप आपका भीषण पोला हाल बच गया । सबके इधर से उधर भागने लगे । बाहर तैनात है सिक्योरिटी गार्ड सरदार गुरुचरण सिंह के गानों में भी ऐसे ही उसको ला हल्की आवाज बडी ऍम के अन्दर की तरफ फायदा क्या हुआ? ऍर से पूछा था क्या हुआ तो फॅसने पूरी तरह बौखला हुए कहा तो बहुत बहुत पूरी तरह आग लगी है लेकिन कैसे? गुरुचरण सिंह के भीतर पडेंगे । अरे कैसे लगी आग नहीं सब मगर खुद हो रहा है वो आपकी लगता निकल रही है सब फॅमिली तरफ दौड पडा ऍम था अध्यारोपित भीषण आपकी लगते हैं ऍफ साफ नजर आ रही थी सरदार गुरचरण सिंह को एक का एक न जाने क्या सूझा किसने तोडकर तो सभी वायॅर शुरू कर दी फिर की बदौलत हॅाल बिछाया गया था । बडा ही पूरा सिक्यूरिटी सिस्टम हो गया लेकिन बधावा सीखी आलम ने उठाए गए इस कदम से सिर्फ तीन हजार ऍम शहर ऍम कर दिया गया ऍफ कर दिए गए ऍसे घर भाॅति फाॅर मचाता अन्दर की तरफ होगा । फायरब्रिगेड आ गई तो फाॅर्स बचा रहा था जैसे उत्तर खुशी चली आ रही हो फॅमिली जिनके प्रांगण में आकर रुक गई । फिर उस ऍम के अंदर से दो अग्निशमन कर्मचारी इस फुर्ती से बाहर हो गई और मुझे ही उन्होंने पानी का एक एक मोटा पाइप अपने हाथों में ले लिया । आपकी डर लगी है उनमें से अग्निशमन कर्मचारी हालत फाडकर चला ऍम जल्दी वहाँ पहुंच हूँ जल्दी ऍम कर्मचारी ऍम पडेगा सर पर हॅास्टल लगा होने की वजह से उनको ऍम गया था । पीठ पर ऍम क्या बनी थी उसे ऍम थी । बडी फॅालो चार नंबर हॉल के नजदीक पहुंचकर सिटी वांचन में खडा खडा है पर मैं सबको चलकर रात हो जाना है सरकार । गुरुचरण सिंह जो अनाज खट्टे इस हाथ सबसे बुरी तरह खिलाया हुआ था उसके ऍम दरवाजा खोल दिया । इतना ही नहीं हल्का दरवाजा खोलते ही वो अपनी जान की परवाह किए बिना व्यक्ति का आग में उसके भीतर कूद गया । फिर वो फॅसा हुआ पूरा पास के नजदीक खडा हुआ फॅसने देखा की दुर्लभ बात अपनी जगह पर सुरक्षित मौजूद हैं तो फॅमिली दुर्लभता के पास ये ऍम अगर आज कुछ ताज को चुराने दुनिया की कोई भी ताकत उसके सामने आ गई तो अकेला ही उसे तहस नहस कर डालेगा । अपनी तरफ करने के प्रति पूरी तरह समर्पित भाई गुरचरण सिंह उसमें दुर्लभ बाज को ध्यान से देखा होता तो मालूम पडता ऍम की बाजी लगाकर भाग खडा है तो कभी कर चोरी हो चुका है । उधर सेट दीवान चंद्र दर्शन पांडे वहाँ एक नया ही नाटक खेल रहे थे तो पाइप से निकलते पानी के मोटे धारी को आप पर बरसाने की बजाए इधर उधर वार ऊपर मार रहे थे और यही वजह थी पूछने की बजाय हर पल और भीषण रूप धारण करती जा रही थी । उन दोनों की नजर ऍम कुलभूषण पर भी पड चुकी थी । उन दोनों के चेहरों पर सफलता की चमक विद्यमानता बेहद खुश थे । ऍम जमघट इकट्ठा हो गया । तब अपना खान फोड सायरन बजाती हुई ऍम के प्रांगण ना पर होगा देखते ही देखते हैं बहुत चारों तरफ अग्निशमन कर्मचारी ही कर्मचारी नजर आने लगे तो फॅमिली और ट्यूशन पांडेय को जैसे उसी पल का इंतजार था । वो अग्निशमन कर्मचारियों के भीड का फायदा उठाकर वहाँ से खडे हुए और भूषण और दर्शक पाटिल क्योंकि अग्निशमन कर्मचारियों के ट्रस्ट नहीं थे इसलिए उन्हें वहां से भागने में कुछ खासी परेशानी नहीं हुई । सबने यही समझा कि उनकी फॅार का पानी खत्म हो गया है इसलिए वो वापस जा रहे हैं । बहरहाल सारे सुरक्षा प्रबंध रखे रह गए म्यूजियम के बाहर दिल्ली पुलिस के जब थे कि चलते खडे रह गए और खूब चार पांच सिर्फ चार आते हैं । उनके बीच से उस बेहद मूल्यवान दुर्लभ ताज को नहीं हुए । उससे भी ज्यादा डूब मरने की बात ये थी कि किसी भी उस बाकी कानोकान भनक तक नहीं थी कि वह तो लगता चोरी हो गया

भाग 18

अगले दिन धमाका हुआ । अगले दिन के सारे समाचार पत्र की खबर चलेंगे पडे थे तो बहुत जबरदस्त । सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद दुर्लभ ताजा चोरी इलेवन सिक्योरिटी को आसानी से भेजा गया । हर अखबार समाचार के अलग अलग शीर्षक बनाए थे । उस समाचार को हूँ । मिर्च मसाला लगाकर छापा गया था तो तीन अखबारों ने तो दिल्ली पुलिस की कार्यकुशलता पर व्यंग भी करते थे और फ्रंट पेज पर कार्टून भी प्रकाशित किए गए थे । बहरहाल उस समाचार मैं एक बात बहुत बडी फॅमिली फॅमिली का पता चलता था । उस खबर के मुताबिक दिल्ली पुलिस नहीं दुर्लभ दाद चुराने के इल्जाम में तत्काल ही एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी कर दिया था । वो था इंडियन म्यूजियम आॅफ सरदार । गुरचरण सिंह गुरचरणसिंह का दोषी था कि उसने अग्निशमन कर्मचारियों कहने पर ऑन नंबर चार का दरवाजा क्यों छोडा? फिर उनके आगे आगे आगे क्यों होता है? इस संबंध नहीं । दिल्ली पुलिस के बडे अफसर की टिप्पणी भी अखबारों में छपी जी जो काबिलेगौर थी, ये सब सरदार गुरचरण सिंह की वजह से हुआ । सरदार गुरचरण सिंह अपराधियों का इनसाइट फैल पडता था शुरू । उसी ने हॉल नंबर चार में भीषण अग्निकांड किया था और फिर वो आग में आगे ही आगे कूद भी इसलिए था ताकि दुर्लभ ताज चुराने में अपराधियों की मदद कर सके । बहरहाल गुरचरण सिंह से कठोर पूछताछ की जा रही है । उम्मीद है कि बहुत जल्द चोरी से संबंधित कुछ और है । सकी गुत्थियां भी सुलझेगी । हाँ, बेचारा सरदार गुरुचरण सिंह फंस गया था । खामखां फस गया था । उसी दिन एक आश्चर्यजनक घटना और घटेगा । दोपहर के दो बज रही थी जब सुपर पहुंॅच उनके बड्डे भरा गया । डॅडी को देखकर सब हैरान रह गए । बेहद पहुंचती थी, क्योंकि उसके आने की पहले से कोई खबर नहीं थी । एक बार फिर वो सब कॉन्फ्रेंस हॉल में आॅडिट जमा हुए । आज ऊंची पुष्ट वाली ऍन मास्टरनी बैठा था, जिस पर हमेशा सेट दीवानचंद बैठता था । जबकि दीवानचंद उसके पहलू में ही बडी । एक कुर्सी पर नहीं । दिल्ली सपना बैठा था । अन्य कुर्सियों पर ॅ पांडे और कुलभूषण बैठे थे । मंत्रा भी मासूम गुड्डू को गोद में लिए वही बैठी थी । टॉम मसूरी के सामने तो लगता रखा था दुर्लभ टन जिससे वो हाथों में ले लेकर बडी खास तौर पर इन निगाहों से देख रहा था । डाउन की उम्र लगभग चालीस पैंतालीस के आस पास ही कर लम्बा था । मैं नक्श आकर्षक थे । उसके पास बेहद विशिष्ट अंदाज में पीछे की तरफ बने हुए थे जिससे उसका तो काफी सुंदर बन गया था । ऍन आपने कटे हुए शरीर पर इस समय ब्राउन कलर का सूट पहना हुआ था । डॅडी काफी डेढ साल तुरब । ताज को हसन भरी निगाहों से देखता रहा मुझे तो आपको यह देखकर हैरानी हो रही ऍम ऍम बोला बडी अब फॅमिली खबर कैसे मिल गई कि हमने दुर्लभता चुरा लिया है और आप इतनी जल्दी न्यूयॉर्क से जदली कैसे आ गए है? डॉन मुस्कराया उसके साल सुर फोटो पर बाल जैसी बारी मुस्कान दौडी थी तो वही बात ऍन मसूरी नहीं तो मैं सुबह हिंदी में जवाब दिया मतलब दरअसल तुम लोगों ने दुर्लभता चुरा लिया है । मुझे खबर योग में नहीं पता चली थी तो बोला बल्कि दिल्ली आने के बाद पता चलेगा । मैं कल ही न्यूयॉर्क दिल्ली आने के लिए उडान भर चुका था और आज सुबह जब मैंने दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर कदम रखा तभी एक अखबार के जरिए से मुझे इतने कपडे एक तोफा जरूर हुआ कि मेरे कदम शानदार मौके पर दिल्ली में बडे जब तुम अपनी योजना में कामयाब हो चुके थे, एक संसदीय व्यवस्था में बैठे रहे टोमॅटो पीछे बने वालों पर हाथ फेरा । अब किस काम की बात कर ले । सबसे पहले हम लोग मुझे ये बताओ कि क्या तुम सभी ने अपने अपने पासपोर्ट और वीजा नया करा लिए हैं? ऍम आदर से गर्दन छुपाएंगे । हम सभी के पासपोर्ट और वीजा पूरी तरह तैयार हो चुके हैं और हम सब हिंदुस्तान छोडने के लिए एक तब तैयार हैं । सुजॅय बोला हम लोगों को जल्द से जल्द हिंदुस्तान छोड देना चाहिए । क्या हूँ डॅडी जल्द से जल्द क्यों बडे बडे क्योंकि अब हमारे लिए यहां खतरा खतरा है । बडी ऍम आपको तो मालूम ही होगा । नहीं पहुँच हमने इस पूरी योजना को कामयाब बनाने के लिए इंडियन रीजन के चीफ सिक्यूरिटी ऑफिसर जगदीश पालीवाल की इनसाइट हेल्प हासिल की है । बडी जगदीश देशभक्त जाती है ईमानदार उसने पूरी डकैती में हमारी मदद तीसरे की क्योंकि उसका बेटा गुड्डू हमारे कब्जे में था । लेकिन हमने जैसे ही उसका बेटा उसे लौटाना है सुपर बॉस उसने खुशी छड हमारी शादी करते उसका पुलिस के सामने बंदा फोड कर देना है । थोडी उसने मेरी जरूरत नहीं देखिए लेकिन बाकी सबकी शुरू देखी है । उस सब को पहचानता है । इसलिए इससे पहले कि वो हमारे लिए कोई आपत् पैदा करें, कुछ मुश्किल पैदा करें, उससे पहले ही हम हिंदुस्तान छोड कर भाग जाएगी तो आपके आॅल मैं कुछ बंदोबस्त करता हूँ ॅ होने की आपके फिर दुर्लभ ऍम बाकी । इस मतलब ताज को चुराकर तुम लोगों ने कमाल कर दिया । इसे आज तक कोई नहीं सुना सकता । जिस दुर्लभ ताज के बारे में प्रसिद्ध है, जिसने भी उसे चुराने के प्रयास किया हूँ, मारा गया और उसे दुर्लभ ताज को चुराने का दवा तुम लोगों ने कर दिखाया । ॅ इसमें हमारा क्या कमाल है? सुपर बहुत दर्शक बॉटल मुस्कराकर बोला सारा कमाल तो आपका है । आपके द्वारा बनाई गई अद्भुत योजना का है । दुर्लभ की सिक्योरिटी कितनी परफेक्ट थी कि हम लोग तो लगभग हार मान चुके थे । हमें लगने लगा था कि हम ताज चुराने में कभी सफल नहीं हो पाएंगे । तभी तभी आपने दुर्लभ बात चुराने की मास्टरपीस योजना भेजकर हमारी सारी परेशानियां दूर कर दी । दशक बॉटल की मांग सुनकर तो फॅमिली के नेतृत्व ऍम गए थे । उसके दशक ॅ देखा मानो उसके सर पर सीन होगा, ये हो मेरी मैंने तो लोगों को योजना भेजी । फॅमिली के मुझसे तेज, संस्कारी छोटी जी कैसे हो सकता है? क्या कह रहे हो तो रेबडी पाटिल वही तो कह रहा है कि सच है अगर आपने हमें वो ढांचों, योग दाना भेजी होती बॉस । तो आज हम इस दुर्लभ ताज को चुराने में कैसे कामयाब होते हैं? मैंने तो लोगों को कोई योजना नहीं भेजी । फॅमिली ने एक का एक उन के बीच जबरदस्त विस्फोट कर दिया हैं । कोई योजना बनाकर इस तरीके से? मुझे तो ये भी जानकारी नहीं थी कि इस ताज की इंडियन म्यूजियम में क्या सिक्योरिटी की गई है । सब दंग रह गए । पूरी तरह तंग सबको ऐसा लगा मानो उनके दिमाग में फॅस रहे हो । सब ऍम वो एक हंगामाखेज सस्पेंस था । इसका राज उन लोगों के बीच जाकर हॅाल निकालकर फौरन अपने चेहरे पर चला आए । ढेर सारे पसीने साफ ऍम बोला लेकिन फिर वो वो योजना हमें आपके नहीं भेजी । बहुत हो तो फिर किसने भी जी क्या बता सकता हूँ की वो योजना तो मैं इसलिए बिजली फॅमिली के चेहरे पर भी जबरदस्त साइंस के चिन्ह गए । सबके दिल धारधार करके पसलियों को फूटने लगे तो बॉस ऍम से संबोधित होकर काॅस्ट । इस वक्त उसका शरीर किसी मरीज की तरह थर थर काँप रहा था । बोल हम तो होने वाली ॅ होने वाला है तो मुझे लगता है कि अब हमारे होकर रहेगा बडे बडे । ये क्या पकता है तो पागल हो गया क्या नहीं बहुत पागल नहीं हुआ मैं आपसे पहले होता था बॉस इस दुर्लभ आज को बच्चों मत चुनाव इसमें जिस तरह आज था दूसरे अपराधियों को बर्बाद किया है उसी तरह की हमें भी बर्बाद कर डालेगा और देखो फॅमिली आते ही हमारे ऊपर संकट की शुरुआत हो चुकी है बडे बडी बंद कर ऍम पागल हो गया है नहीं और तू अपने साथ साथ हम सबको भी पागल करके छोडेगा क्या ऍम अभी पूरे भी नहीं हुए थे कितना भी एक आॅल में किसी के सोर्स जोर से खिलखिलाकर हंसने की आवाज को झूठे वहाँ ऐसी ऐसी थी अच्छे से कंपनी में से निकल कुछ जाता हूँ बॉटल ठेके कहता है सेट दीवानचंद एक भयानक आवाज, पूरे फॅमिली सब सब कुछ । तुम सब की बर्बादी का समय शुरू हो चुका है बिलकुल सब सबकी कर देंगे उस भयानक आवाज की दिशा में होनी और अगले ही पल एक और ऍम फट गया बल्कि ऍम से भी खतरनाक कोई ऍम सबके आपने पहले खडा था ऍम बल्ले वो बल्ले किसके हाथ मैं साॅल्वर थी और फोटोकाॅपी कर रही थी तो तो बडी बडी तुम तो नंबर किधर जायेंगे उसे प्राप्त राष्ट्र से आया बल्ले ऍम सबको कवर करता हुआ बोला । इस रास्ते का इस्तेमाल से दीवानचंद गया तो कभी कभार सर कम करते हो । जब फिर तुम्हारे अलावा मेरे चाचा चाची ना पहलवान भी कभी कभी उसको रास्ते का इस्तेमाल किया करता था । जबकि तुम्हारे तो उन्होंने क्या रही प्रशस्त और ऍम कुछ नहीं जानते हैं । ऍम ऍसे फैल गए वाकई इस रहस्य से तो वो भी वाकिफ नहीं थे कि वहाँ कोई और गुप्त सस्ता भी है । खुद से दीवानचंद भी समझता बैठा था उसे अपने ॅ थोडी थोडी इसका मतलब दुर्लभता चुराने की जो मास्टरपीस होता हमें मिली थी वो वो हरकत भी तुम्हारी जीते कितना है कॉलेज भोजन पालने में बडी ईमानदारी के साथ इंकार में करता हूँ मेरी हरकत नहीं जब से जब से मैंने छुपकर हम लोगों की बातचीत सुनी है तब बहुत मेरे दिमाग में भी रह रहे हैं । एक सवाल कौन रहा है कि तुम लोगों के पास हो योजना भेजी तो इसमें भेजी सब अवाक रह रहे ऍम मालूम किसी दुर्घटना के हिसाब से पत्थर की शिला भी तब तीन हो गए तो बडी ये ऍम तुमने नहीं है जी नई सबके हैरानी पडती जा रही थी हूँ । अब तुम लोगों को ये सोच सोच कर परेशान होने की जरूरत नहीं है कि तुम्हें तो योजना भेजी तो किसने भेजे हैं । क्यों कौन बोला परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जो तो लगता है तो उन लोगों की बर्बादी का कारण बन सकता है । उसका आज को मैं अपने लिए जा रहा हूँ । ऍम खडा हो गया तो फॅमिली यहाँ से नहीं ले जा सकते । ॅ बल्ले के चेहरे पर सद्भावों ब्रॅान्ज को आज मुझे यहाँ चले जाने से कोई नहीं रोक सकता । शायद नहीं जानते तो पिछले ॅ इंतजार कर रहा था । मैंने अपने चाचा के बाद पर साधन खाई थी कि अगर अगर मैंने एक सप्ताह के अंदर अंदर कुलभूषण का खून न कर दिया, तब मैं अपने आप से पैदा नहीं और साॅल्यूशन का खून कर सकता था । जानते हैं मैंने अभी तक इसका खून क्यों नहीं किया? क्यों नहीं किया? क्योंकि मुझे मालूम हो गया था ये तुम लोगों के साथ मिलकर तो लगता चलाने के चक्कर में लगा हुआ है और उसी अच्छा फैसला कर लिया कि मैं तीस तो शिकार करूंगा । सबसे पाॅलिस चलाने के लिए तुम सब मारे जा रहे हो । ऍम सादे का खून कर दूंगा । तुम सब की है कि घर पर नजर रखने लगा और देखो हूॅं चलाने के लिए सारी मेहनत हम लोगों ने की फॅमिली जाकर प्रयास किए अब उसी तरह का आजकल तुम लोगों के सामने समय मैं उठा कर ले जाऊंगा तब मुझे भी नहीं सकते क्योंकि अगर किसी ने मुझे रखने की कोशिश के टाॅप होगा हूँ । ऍम जब कि कुलभूषण के शरीर ऍम रही थी उधर मुस्कुराते हुए आगे बढ बल्ले फॅस पर रखा दुर्लभ ताज उठा लिया और फिर वो ताज उठाकर कुलभूषण की तरह घुमा । अब तो हम मरने के लिए तैयार हो जाकर भूषण बल्ले का चेहरा एका एक खून चल थोडा हुआ नजर आने लगा था । उस ऍम फालतू जी चुके हो ऍम अब तुम्हारा मरना तय ऍम हो गया । एक और कुलभूषण नहीं किया जिसकी कोई उस से आम आदमी सकता उतना भी नहीं कर सकता था । बल्ले के रिवॉल्वर गोली उगल पाती उससे पहले ही कुलभूषण कप पौने छह फुट लंबा जिस रबड के किसी खिलौने की बहुत ही हवा में उछल गया, उससे कलाबाजी खाई और फॅमिली के सीने पर पडेगी । ठीक उठा बल्ले ऍम हमें किसी ने गोली चलाई । फॅमिली हल्का एक कुत्ते की तरह टकराता हुआ नीचे गिरा । नीचे गिरता ही उसके प्राण पखेरू उड गए । उसका चेहरा मरने से पहले बेहद भी बहुत हो चुका था । कुलभूषण फॅमिली चलाई गई थी । फॅमिली में चलाई किए और इस वक्त ऍसे पीठ इकाई बैठा बडे ऍम से अपने रिवॉल्वर के नाम भूख मार रहा था । अभी वह बल्ले की अकस्मात मौत भर भी नहीं पाए थे कि तभी घटना क्रम में एक और नया पोर्ट आ गया और सभी ने अड्डे के ऊपर तेज छोडकर आप की आवाज सुनी तो ऐसा लगा जैसे ऍम ढेर सारे लोग आ जा रहे हैं तो बडी ऊपर क्या हो रहा है? कैसे हलचल मची है फॅमिली के चेहरे पर भी पसीने की बूंदें जो चुल्हाई जरूर कुछ कुछ बडा है तो पूरा सब कुछ कपडा मैं ऊपर जाकर देखता हूँ ऍफ की ऊपर की तरह चला गया । उस जाॅब संगठन का ही मेंबर था दशरथ बॉटल्स इंडिया । चक्कर जितनी तेजी से ऊपर गया उतनी ही तेजी से वो वापस ऍम लेकिन उन ऍम नहीं उसकी दशक से बुरी हालत हो चुकी थी । वो पत्ते की भारतीय धर्म थर काँप रहा था मानो उसने साहब की अब मौत के दर्शन कर लिया होगा । बडी क्या हुआ ऍम दिया है । लगता है किसी ने पुलिस को हमारे संगठन के बारे में कितना दे दी है । क्या आप साॅस सबके लिए बढ गए हैं । फॅमिली करना चाहिए बडे बडी जल्दी करो । जल्दी ऍम का एक खडा था उधर ऍम पुलिस है सब पीछे वाले मकान में भी अब तक पुलिस पहुंच चुकी होगी । ऍम मेरे पीछे पीछे आओ हम हम उसको राष्ट्रीय निभाते हैं । इसका इस्तेमाल आज तक सिर्फ और सिर्फ मैं करता रहा हूँ या फिर कभी कभी चीना करता था । अरे बडी रास्ता पीछे वाली कडी में ही बनी बहुत खूबसूरत कोठी में होता है । सब सब के सब बडी सस्पेंस पूरी स्थिति में दीवानचंद के पीछे पीछे लाॅग कमरे में जा पहुंचे । वहाँ इतनी बार पर एक अर्दब लडकी थी । काफी बडी प्रिंटिंग लगी हुई थी तो बडी मोटी मोटी किलो साॅस नजर आ रही है । लेकिन सेट दीवानचंद नहीं । उस पेंटिंग को तिहाड से कैलेंडर की तरफ बार कर रहे हैं । एक तरफ होती है तब हुआ की पेंटिंग में छोटी मोटी खेले लगी हुई नजर आ रही थी । वह दिखावटी थी । पेंटिंग उतरते ही उसके ऍम नजर आने लगा । ऍम आया तो उसके पीछे का हिस्सा स्लाइडिंग दूर की तरह एक तरफ से लग गया । फौरन वहाँ तो फिर हम भी सुरंग नजर आने लगे हैं । तभी फिर एक ऐसी घटना घटी जो अब तक घटी तब हम घटनाओं में सबसे ज्यादा हंगामाखेज नहीं और घटना के बाद सब का खेल हो गया । फ्लाइट इंडोर के हटने के बाद जैसे ही सुरंग का बहाना नजर आया तो कुलभूषण तुरंत दौड कर सबसे पहले स्वर्ग में घुस गया । सुरंग में घुसते ही वो फिर करने की तरह उन सब की तरफ कुमार इन पीस सबके हाॅकी एक पुलिस ऍम भी आ गई थी । ऍम ऍम क्या मजाक है नहीं ये क्या बकवास भाई भूषण नहीं कुलभूषण ऍम बल्कि मुझे कुलभूषण प्राॅक्टर हूँ । ऍम संगत दिल दिमाग पर भीषण बिजली से लडखडाकर गिरी । सब भौंचक्के रह गए । अरे शाही सही तो जरूर मजाक कर रहा है । नहीं, मैं काम सबके साथ मजाक ही कर रहा था और भूषण करता हुआ बडा लेकिन आज नहीं बल्कि आज से पहले तक मैंने मजाक किया था । तीन जुलाई तीन जुलाई के दिन बुधवार की रात से आज तक जितनी भी घटनाएं घटी वो सब नहीं मेरे दिमाग की उपज है । मैं बाकी और ऍम इसलिए बिछाया गया था की तुम सब लोगों को एक साफ रंगे हाथों गिरफ्तार किया जा सके । वो ही सब तुम्हारी वजह से हुआ है । डाॅलर उनकी आंखे भी पडेगा । हाँ ये सब मेरी वजह से हुआ है । यूं ऍम ऍम कुलभूषण भेजी नहीं चला तो आप बाहर क्यों रहे हो? मूर्ख आदमी तो शायद मालूम नहीं कि तुम्हारा सारा खेल खत्म हो चुका है और अब तक हिंदुस्तानी पुलिस के मेहमान हो? नहीं वो अच्छा था । सब इंस्पेक्टर योगी अपनी पूरी पुलिस पलटन के साथ वाॅकर वहाँ भी टाॅपर ही नहीं थे । सारे पुरस्कार में पिछले मकान वाले रास्ते से भी वहाँ आ चुके थे । देखते ही देखते हैं बड्डे में चारों तरफ पुलिस फैल गई । इतनी पुलिस को देखकर डॉॅ । उसके साथियों के रहे सहित कस पाल भी डिले पड गए । फॅमिली ने आते ही कुलभूषण ऍफ मारा और फिर सुंदर जगह बन चुका हूँ । मुझे आपकी पहुँच के बारे में मालूम हो चुका हूँ । कुलभूषण सिर्फ उसको समझना गया जबकि अन्य पुलिस कर्मियों ने मंत्रा को छोड कर बाकी सबके हाथों में हथकडियां बना लिया । मंत्री जो जबरदस्त बहस उद्घाटन पर खुद बहुत हैरान थी । आवाज अगला एक बार फिर समाचारपत्रों धुआधार बिक्री का दिन था । न सिर्फ दिल्ली शहर के बल्कि पूरे हिंदुस्तान के अखबारों में उस संगठन के पकडे जाने कि बडे व्यापक रूप से चर्चा हूँ । सबने कवर पेज पर उस स्टोरी को छापा हम नागरिकों में दिए जाने की तीन क्या सफाई गई कि कुलभूषण डेवलॅप जो जाल बिछाया, जाल किस तरह का था । आम नागरिकों की जिज्ञासा को देखते हुए कुलभूषण ने घोषणा की कि वो आज रात नौ बजे उस पूरे केस का पर्दाफाश करेगा । इतना ही नहीं उस पूरे केस का पर्दाफाश से दीवानचंद के अड्डे में ही बैठकर करेगा । कॉन्फ्रेंस और के ही भीतर और ही बजट । रात के नौ बजते बजते छोटे बडे सभी किस्म के पत्रकारों और प्रेस फोटोग्राफरों कभी एक बडा हूँ ॅ जमा हो चुका था । कल जिस अड्डे चंदू नजर आते थे आज वहाँ भीड ही भीड थी । पुलिस प्रभाव इतना जबरदस्त बंदोबस्त किया गया था की कॉन्फ्रेंस हॉल में ते रखने तक को जगह नहीं बची थी । बडे बडे न्यूज चैनल्स रिपोर्टर्स की कई टीमें वहाँ आई हुई थी । ऍम रही कैमरे लगभग सभी न्यूज चैनल्स आम नागरिकों की जिज्ञासा को मद्देनजर रखकर उस बेहद सनसनीखेज मीटिंग का लाइव टेलिकास्ट अपने अपने चैनल्स पर कर रहे थे । कॉन्फ्रेंस कॉल में काफी ऊपर लकडी का मकान बना गया था जिसपर चैनल्स की टीम अदृश्य अंदार कैमरों के साथ मौजूद थे । विशाल आयताकार देश के पूर्वोत्तर पडी कुर्सियों पर उस वक्त ऑलमोस्ट थोडी सिटी कॅाल बैठे थे । उनके अलावा स्पेक्टर योगी और जगदीश पालीवाल थी, कुर्सियों पर विराजमान थे । तभी उस विशाल हो जून को चीरकर ट्वीट का काला सूट और लाल फूलदार टाई लगाए । कुलभूषण कॉन्फ्रेंस हॉल में स्तर कदम रखा । जैसे रंगमंच पर सबका चहेता कोई अभिनेता प्रकट हुआ हो । हाँ, उसके तो मैं विचित्र सी आभार देदीप्यमान हो रही थी और भूषण को देखते ही सब लोग उसका सम्मान में खडे हो गए । कुलभूषण आज उस रिवॉल्विंग चेयर पर जाकर बैठा जिस पर करीब से फॅसा था । रिवॉल्विंग चेयर पर पेट नहीं, उसने मधुर स्कॅालर फिर भूमिका बांधते हुए अपने सामने रखें । माइक पर बोलने लगा तो मैं जानता हूँ कि आप सब लोग यहां इसलिए उपस्थ हुआ है ताकि स्पेस के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं । इसमें कोई शक नहीं । ये काफी दिलचस्प केस था जिस मध्यम तब भरपूर इस्तेमाल किया गया । इस तरह से सारा ड्रामा तीन जुलाई दिन बुधवार की रात से ही शुरू नहीं हुआ बल्कि हमारा क्राइम ब्रांच पिछले कई महीने से इस ड्रामे की तैयारी कर रहा था । संग्रहालयों से दुर्लभ वस्तुओं की जो चोरी हो रही थी, उसने पूरी दिल्ली पुलिस में हडकंप मचा दिया था । अपराधियों ने दो साल के छोटे से अंतराल में ही बाईस करोड रुपये मूल्य की कई दुर्लभ वस्तुएं चोरी कर रही है क्योंकि काफी सनसनीखेज बात है । लेकिन दुर्भाग्य ये था कि दिल्ली पुलिस इन चोरों को पकडना तो दूर उनके बारे में कुछ सूत्रों तक पता नहीं लगा पा रही थी । तब ये केस हमारी क्राइम ब्रांच में अपने हाथ में लिया और मुझे ऑटो रिक्शा ड्राइवर बनाकर अपराधियों का पता लगाने का आदेश दिया । इस तरह बहरूपिया रूप धारण करने के पुलिस को कई बार बडे फायदे होते हैं जिनमें सबसे बडा फायदा तो यही है कि इस तरह का रूप धारण करने से पुलिस ऑफिसर आम नागरिकों से कोई भी सवाल पूछ सकता है और उसे अपने सवाल का जवाब भी बडा सही मिलेगा । जबकि आम तौर पर किसी पुलिस ऑफिसर के सवालों के जवाब देने नहीं । आम आदमी थोडा कतराते हैं आपने विभाग से आदेश मिलते ही मैं ऑटो रिक्शा ड्राइवर बनकर दुर्लभ वस्तु चुराने वाले संगठन की तो हमें लग गया । बोलते बोलते रुका कुलभूषण पूरी फॅमिली सन्नाटा था । गहन सन्नाटा

भाग 19

अपना गलत हम खाने के बाद कुलभूषण फिर बोलना शुरू किया । मैं सिर्फ नाम के लिए ही ऑटो रिक्शा ड्राइवर नहीं बना था, बल्कि मैं कैरेक्टर को ज्यादा सजीव रूप देने के लिए दिल्ली शहर सवारियां होता था । उसी दौरान मेरी मंत्रा से मुलाकात हुई जो अपने ऑफिस आते जाते हुए कई बार मेरी ऑटो रिक्शा में बैठे हैं । ऍम की कहाँ जाएगा कि जल्द ही मेरी मंत्रा से अच्छी जान पहचान हो गई । बाद में जब मुझे मालूम हुआ कि मंत्रा जरायम पेशा लोगों की बस्ती कृष्णपुरा में रहती है तो मैं उससे और ज्यादा नजदीकी बढाने की कोशिश करने लगा तो मैं जानता था कि मंत्रा कभी भी मेरे लिए सुत्रधार का काम कर सकती है । है । उस विषय हैं ऍम । क्या मंत्रा को ये बात पहले से मालूम नहीं थी कि आप ॅ बिल्कुल भी नहीं । कुलभूषण की गर्दन इंकार नहीं । दरअसल जो ड्रामा में आप सब लोगों के साथ खेल रहा था, वहीं जामा हूँ । मैं मंत्रा के साथ भी खेल रहा था । यह बात अलग है कि कई बार मेरे दिल ने चाहा कि मैं कम से कम मंत्रा को अपनी सारी हकीकत बता दूँ, लेकिन नहीं । हर बार जिस बातों के इस बवंडर को अपने सीने में दफन करके रह गया क्योंकि अगर मैं ऐसा नहीं करता तो ये अपने डिपार्टमेंट के साथ अपने फ्रेंड्स के साथ गद्दारी होनी । सब प्रमुख अंदाज में कुलभूषण की एक एक बात सुन रहे थे । वो हैं कुलभूषण । आगे बोला मैं मंत्रालय संपर्क पढाता ही चला गया हूँ । जब मुझे पहली बार इस बात का एहसास हुआ के मंत्रालय से प्यार करने लगे हैं तो पसंद रह गया मुझे मुझे नहीं कि ऐसी परिस्थिति में मुझे क्या करना चाहिए । तो जिस दिन मुझे मंत्रा के प्यार का एहसास हुआ, उसी तेल क्राइम ब्रांच के दूसरा ऑफिसर कोई भेज मालूम पड गया की दुर्लभ वस्तु चोरी करने वाले संगठन का चीना पहलवान भी एक नंबर है । नहीं नहीं उन्हें ये भी मालूम हो गया कि चीना कृष्णपुरा में रहता है । फॅमिली आया । मंत्री और मेरे संबंधों के बारे में भी उन्हें आश्चर्यजनक ढंग से जानकारी मिल चुकी जी बॉर्डर से मुझे नया आदेश मिला । मैं चीना पहलवान पर नजर रखने के लिए किश्नपुरा में एक किराये का मकान लेकर रहना शुरू करेंगे । विभाग की चीजें मुझे भी चला दी । इस पूरे सिलसिले में मंत्रा मेरी काफी ज्यादा मदद कर सकती है । पूरे फॅमिली नहीं समझता, पूछ रहा था सबकी निगाहें एक ही व्यक्ति पर केंद्र और वो था कुलभूषण अपना एक अजीब उलझन में फस गया था । कुलभूषण एक के बाद एक रहस्य की गुत्थियां खोलता हूँ । बोला एक तरफ मेरी ड्यूटी थी जो मुझे लगातार मंत्रा के साथ ड्रामा करने के लिए मजबूर कर रही थी क्योंकि इसी में पूरे केस भलाई थी जबकि मेरी आत्मा मुझे धिक्कार रहे थे । एक मासूम सी लडकी के साथ धोखा नहीं कभी । लेकिन दोस्तों बोलते बोलते कुलभूषण की आवाज थोडा भारी हो गई । आखिर में जीत फोर्स की हुई कर्तव्यकी मैंने कानून की वेदी पर अपनी आत्म की बडी शराब ऍफ मंत्रा को धोखे में रखा बल्कि उसके साथ प्रेम का नाटक किया और उसी की मदद से मैंने किशनपुरा में एक किराये का मकान हासिल किया और वहाँ रहने लगा । किसी तरह एक महीना गुजर गया दूंगा । एक महीना फिर आई तीन चुनावी गिरा हादसे की वो रात जिस रात से इस पूरे घटनाक्रम की आधारशिला रखी गई सर उस घटना शुरुआत कैसे हुई? योगी ने उत्साहपूर्वक पूछा भाई बता रहा हूँ कुलभूषण बोला । दरअसल इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तो तीन जुलाई की दोपहर से हो गई थी । हुआ यूं तीन जुलाई की दोपहर के वक्त हमारे विभाग को एक मुखबिर द्वारा बडी महत्वपूर्ण सूचना कि जो छह नटराज मूर्तियां इंडियन म्यूजियम से चुराई गई थी, उन्हें चीना पहलवान किसी को सौंपने चार बजे होटल मेरिडियन जाएगा । फौरन हमारे विभाग के एक से एक अंदर जासूस छीना पहलवान के पीछे लग गए । लेकिन इससे बदकिस्मती करूँ आप के नजर में कैसे चीना पहलवान भनक मिल रही, किसका अच्छा किया जा रहा है उसने पुलिस के शिकंजे से भाग निकलने की पे इन्तहां कोशिश और सी भागा दौडी के चक्कर । बच्ची ना पहलवान पुलिस की गोली का शिकार हो गया और घटनास्थल पर ही मारा गया । चीन्ना पहलवान के रूप में दुर्लभ वस्तु चोरी करने वाले संगठन तक पहुंचने की जो उम्मीद की किरण दिल्ली पुलिस को नजर आ रही थी वो भी उसके बहुत के साथ लुप्त हो गई थी । चीन्ना पहलवान इलाज के पास से हमें तो महत्वपूर्ण चीजें हैं । वो महत्वपूर्ण चीज क्या थी? पहली चीज श्री दीवानचंद कॅालिंग कार्ड और दूसरी चीज सोने की वह छह नटराज की मूर्तियां जिन्हें इंडियन म्यूजियम से चुराया गया था आप खून कुछ होने की वो फॅमिली थी उसका तो योगी ने पूछना चक्कर पूछा हाँ तो नटराज मूर्ति हमें मिल गई । कई और दिमागों में भी धमाके से फिर फिर वो नकली ऊॅचाई योगी ने पूछा वो भी बताता हूँ दरअसल चीना पहलवान की हत्या बुधवार कदम दोपहर के तीन बजे हो गई थी, लेकिन क्राइम ब्रांच ने इस बात को पूरी तरह गुप्त रखा । चीना पहलवान मारा गया है । उसकी हत्या के बाद फौरन ही आनंद फाइनल में क्राइम ब्रांच के है । क्वार्टर में एक मीटिंग बुलाई गई और उस मीटिंग में सवाल पर शिद्दत से विचार किया गया की आप किस तरह दुर्लभ बस्ती चोरी करने वाले संगठन तक पहुंचा जाए । काफी सोच विचार के बाद सबका बस योजना तैयार । योजना ये थी कि किसी साधारण नागरिक की जिंदगी बसर करते क्राइम ब्रांच के ऑफिसर को लोगों के सामने शो कर रहा था । जिसे चीना पहलवान की हत्या उसी ने की है । और इतना ही नहीं उसे अब ये भी शो करना था मानव सोने की छह मूर्तियां उसके पास है । धोनी के मेंबरों की राय थी कि जब दुर्लभ वस्तु चोरी करने वाले संगठन को जीना पहलवान की हत्या के बाद में खबर मिलेगी तो वह बौखला उठेंगे । नहीं नहीं वो छिना पहलवान के हत्यारे को भी तलाश करने के लिए सभी आसमान एक कर देंगे । सिर्फ इसलिए भी क्योंकि उसके पास सोने की छह बहुमूल्य नटराज मूर्तियाँ है । हत्यारे को तलाशने किस कोशिश में संगठन के आदमी स्वाभाविक रूप से हमारे जासूस तक पहुंचते और इस तरह संगठन का पर्दाफाश हो जाता । ॅ एक रिपोर्टर बडा प्रभावित होकर बोला, मकई! जूरी के मेंबरों ने संसद में पहुंचने के लिए लाख जवाब योजना बनाई थी । वहां मौजूद तमाम लोग उस योजना से बेहद प्रभावित हुए हैं । उसके बाद क्या हुआ है? पत्रकारों की भीड में से किसी महिला पत्रकार नहीं उत्सुकतापूर्वक पूछा । उसके बाद उस लाजवाब योजना को कार्यरूप देने का काम कुछ हो गया । कुलभूषण धाराप्रवाह ढंग से बहुत से कहा । लेकिन मैंने जूरी के सम्मानित सदस्यों के सामने एक शर्त रखी और कहा कि अगर मैं इस केस पर काम करूंगा तो सिर्फ और सिर्फ एक साधारण ऍम मेरे सामने परिस्थितियां चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों ना आ जाए, लेकिन मुझे इस मिशन के दौरान किसी भी हालत में अपने पद का इस्तेमाल नहीं करना है और नहीं मेरा विभाग मुझे कुछ सहायता देने की कोशिश करेगा । अच्छा चोरी के मेंबरों ने कबूल कर ली । फिर योजना के तहत बेहद आनंद फाइनल में हॉस्पिटल की पांच नकली नटराज मूर्तियां बनवाई गई । पांच ही क्यों? आकाशवाणी के एक संवाददाता ने फौरन कुलभूषण की बात करते हैं । छह क्यों नहीं ये रहस्य भी आप लोगों को आगे चलकर मालूम पड जाएगा । बहरहाल उसके बाद पूरा ड्रामा शुरू हो गया । मुझे अब सबसे पहले चीना पहलवान की हत्या का दोबारा से ड्रामा स्टेज करना था । इसलिए मैंने तीन जुलाई की रात रुस्तम सेट के ठेके में जमकर शराब योजना बनाते समय हमने उन दिनों दिल्ली शहर में चल रहे ऑटो रिक्शा ड्राइवरों की हडताल का भी भरपूर फायदा उठाया । डिफाॅल्ट कि मेरे ऊपर पिछले कई दिन की उधारी बताया नहीं । मुझे मालूम था कि मैं जब उसके ठेके पर बैठकर ज्यादा शराब ऍफ जरूर रहेगी जब रुस्तम सेठ मिलाकर या तो मुझे शराब पीने से रोकेगा या फिर मुझसे उधारी के रुपये मांगेगा । और यही मैं चाहता था । ऐसा माहौल पैदा करना चाहता था जिससे छडप और मुझे ऑटो रिक्शा ड्राइवरों की हडताल होने के बावजूद अपना ऑटो चलाने का बहाना मिल सके । लेकिन रुस्तम सेट और नील छडा कुछ दूर पड पाती उससे पहले ही मंत्रालय वहाँ प्रकट होकर मेरी सारी प्लानिंग पर पानी फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी । मैं झूठ ऍम सेट के साथ खेलना चाहता था । वही ड्रामा मैं नहीं मंत्रा के साथ खेला और ये कहता हुआ ऑटो रिक्शा लेकर उससे मैं निकल पडा अब तुम्हारी उधारी के रुपए कमा कर ही लौटूंगा । किश्नपुरा से मैं योजना के मुताबिक रीगल सिनेमा पर पहुंचा । एक बात हूँ ऑटो रिक्शा की नंबर प्लेट पर मैंने मिट्टी भी पहले ही बोलती थी से दीवानचंद कुलभूषण की एक एक बात पडे गौर सुन रहा था तो पूछे बनाना रहता है । अरे बडी जब जीना पहलवान की मौत बुधवार को तीन बजे हो गई थी । तो वो आदमी कौन था जो रीगल सिनेमा के सामने तुम्हारी ऑटो रिक्शा में अगर बैठा वो हमारे विभाग का ही एक जासूस था और उस वक्त जीना पहलवान का रोल प्ले कर रहा था वो । लेकिन साइन तुमने चीमा पहलवान की हत्या कर्नाटक दोबारा स्टेज करने की क्या जरूरत थी? दरअसल वो नाटक स्टेज करना ही हमारी योजना का मुख्य आधार, मिस्टर दीवानचंद, कुलभूषण हत्या का वो नाटक दोबारा स्टेज करते समय मुझे अपने खिलाफ कुछ सबूत इस तरह छोडने थे जैसे मेरे ना चाहने पर भी दस पांच छूट गए । अगर मैं वो सारा ड्रामा स्टेज न करता तो तुम ही बताओ इंस्पेक्टर योगी को या फिर तुम्हें इस बात का भ्रम कैसे होता? चीरा पहलवान की हत्या मैंने की पुलिस की और तुम्हारी दृष्टि में अपने आपको चीन्ना पहलवान का हत्यारा साबित करने के लिए मुझे कोई ना कोई ड्रामा तो स्टेज कर रहा था । अपने खिलाफ ऐसे सबूत तो छोड नहीं थे जिनको आधार मानकर पुलिस मुझे चीना पहलवान का हत्यारा समझती है । फिर वो ड्रामा रचना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि मंत्रा को मेरे ऊपर ऐसा कोई शख्स है । जबकि सच्चाई ये है कि आईटी ओके ओवर ब्रिज आगे ऍफ का तो वो भी भेज योजना का ही एक अंग था । कैसे कैसे बडी फॅमिली, फॅमिली जैसी को देखकर मैंने जानबूझ कर ऑटो रिक्शा गिरफ्तार तेज कर दी थी तो मैं जानता था स्पीडिंग के अपराध ऍम मेरे पीछे लग जाएगा पर हुआ मैंने फॅार अपने पीछे इसलिए लगाया था ताकि मैं उन्हें मंत्रा के प्रेग्नेंट होने के बारे में बता सकते हैं । इंडिया गेट पर चीना पहलवान इलाज भी मैंने योजना के तहत ही देगी । मैं फॅार को अपनी ऑटो रिक्शा का नंबर रोड करते भी देख चुका था । मुझे मालूम था कि सुबह जब पुलिस को इंडिया गेट पर्ची ना पहलवान की लाश पडी मिलेगी तो स्वाॅट मेरे ऊपर जाएगा । मेरे ऊपर शक जाना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि हडताल होने के बावजूद मेरी ऑटो रिक्शा उस इलाके में देखी गई थी । ऍम योगी ने मेरे खिलाफ एकदम एक्शन लेने की बजाय पहले ब्लॅक किए उसके लिए मैं वाकई उनके दिमाग की ताकि वो बात अलग है कि मिस्टर योगी द्वारा उठाए गए इस कदम से भी आखिरकार मुझे ही फायदा हुआ । चीना पहलवान की लाश इंडिया गेट पर फेंकने के बाद में योजना का सबसे पहला काम था । किसी भी तरह पुलिस के शिकंजे में जान पूछ करता हूँ ताकि मैं दुर्लभ वस्तु चोरी करने वाले संगठन की दृष्टि में या नहीं । आप सब महानुभावों की नजरों में खुल करा सकूँ सर एक सवाल का जवाब दीजिए ना । जब आप इंडिया गेट की तरफ जा रहे थे उस वक्त आपके ऑटो रिक्शा में चीना पहलवान की लाश कहाँ थी? वो तो आपके विभाग का हो जाता था कि चीना पहलवान की हत्या का ड्रामा रच रहा था । दिल्ली पुलिस को इंडिया गेट पर बृहस्पतिवार की सुबह जो असली चीना पहलवान की लाश पडी मिली थी वो वहाँ की चर्चाएँ, वही सिम्पल । इसके लिए बडा साधारण सा तरीका अपनाया गया और बोला दरअसल गुरुवार की सुबह इंडिया गेट पर जो लाश पडी मिली जीना पहलवान उस पश्चिमी लाश को हमारे विभाग के आदमी पहले ही इंडिया गेट की झाडियों में छिपा देते हैं । मैंने जब चीना का रोल अदा करते ऍम तो हमारी दृष्टि से ओझल होते ही वहाँ से पूछ कर गया था । इस तरह गुरुवार की सुबह पुलिस को जो लाश झाडियों से बरामद हुई ऍम असली चीनी पहलवान की लाश नहीं बसपा होगी की आंखों में ब्लॅक हिंसा के भाव को भराई जी सर । तभी आज तक चैनल का रिपोर्टर बोला मेरे दिमाग में बहुत देर से एक सवाल हलचल मचा रहा है । अगर साथ के साथ सवाल का भी जवाब मिल जाए तो कैसा रहेगा । हाँ क्यों नहीं जरुर पूछती हूँ सर । हमारे चैनल पर छेना की मौत की बाबत जो खबर प्रसारित हुई थी उस खबर को मैंने ही तैयार किया था और जहाँ तक मुझे याद पडता है सर । उस खबर में ये लिखा था कि छेना जब रीगल सिनेमा के पास से ऑटो रिक्शा में बैठकर धागा तो उससे पहले बुलेट पर सवार पुलिसकर्मियों ने पास की गली में दो फायर की आवाज सुनी थी । यहाँ की खबर बिल्कुल सही है । फिर वो गोली किसने चलाई? ऍम दरअसल चीना पहलवान का रोल अदा करते हमारे जासूस नहीं दो हवाई फायर किए थे तो भी इसलिए ताकि बुलेट पर सवार पुलिस कर्मियों को योजना के अनुसार अपनी तरफ आकर्षित किया जा सके और बाद में ये साबित करने में आसानी रहे कि चीना पहलवान की हत्या वास्तव में किसी ऑटो रिक्शा ड्राइवर नहीं की थी । ऍम रिपोर्टर बेसाख्ता के उठा बाकी यार खूब योजना ऍम हूँ । मैं आगे की योजना के बारे में बताता हूँ । कुलभूषण थोडा रुककर उन्हें बोला । उसके बाद मैं पीतल की मूर्ति बेच रहे हैं । खासतौर परसेंट दीवानचंद के दुकान पर इसलिए गए ताकि ये मालूम हो सके कि सेट और चीना पहलवान के बीच आपस में क्या रिश्ता था । देखो ये बात में पहले भी बता चुका हूँ । छीनना पहलवान की जेब से हमें सेट दीवानचंद ऍफ का एक विजिटिंग कार्ड मिला था था । इस स्पॉट पर एक करिश्मा शुरू हुआ । करिश्मा दीवानचंद चौका अरे बडी कैसा करिश्मा नी ये क्या काम बडा करिश्मा था । मैं तुम्हारी ज्वेलरी शॉप पर मूर्ति बेचने गया और एक हाथ से तुम भी दुर्लभ वस्तु चुराने वाले संगठन के पहुंचने के लिए जब तुमने मुझे तलाशने के लिए मेरे पीछे आदमी दौड आए थे । मैं तभी समझ गया था कि मेरा निशाना बिल्कुल सही जगह है । इस गोरख धंधे से जरूर तो भारत कोई ना कोई रिश्ता ना उसके बाद मेरे द्वारा छोडे गए लीग प्वॉइंटों की जांच पडताल करते हुए इंस्पेक्टर योगी का मेरे तक पहुंचना और फिर मेरा किशनपुरा से भाग निकलना एक सामान्य घटना थी तो इस बात का भी शक होने लगा है क्योंकि बोला कि किशनपुरा से भागते समय आपकी जो छह कटिंग उसके पीछे भी आपकी कोई चाल थी, बिल्कुल ठीक कहा तुम नहीं और ऍम तरह बस में चढते वक्त पहचान पूछकर एक शराबी से टकरा गया था और मेरी जेब में उस वक्त रुपये थे उन्हें मैंने खुद ही उसकी छह में डाल दिए थे क्योंकि अगर आपने क्योंकि मैं चाहता था कि मैं टिकट लेने के अपराध में गिरफ्तार हो जाऊँ । पुलिस के शिकंजे में चल से चलकर सूट तो लेकिन सर अगर आप को गिरफ्तार होना था तो मेरे आने पर मंत्रा के घर चले आ गई तो गिरफ्तार तो मैं आपको तभी कर लेता हूँ निसंदेह तो मुझे गिरफ्तार कर लेते । लेकिन मैं ये ड्रामा करते हुए गिरफ्तार होना चाहता था । जैसे मैं पुलिस से बचने की कोशिश कर रहा हूँ क्योंकि ऐसी स्थिति में दिल्ली पुलिस का और संगठन के लोगों का शब्द मेरे ऊपर और मजबूत हो जाता है तो वहाँ पे खामोश बैठे जगदीश पालीवाल ने भी कुलभूषण की खुले दिल से आ रही थी । सर आपने ऍम पर काफी बारीकी से काम किया है । वो तो क्या कुलभूषण के फोटो पर मुस्कान देंगे । लेकिन मुझे गिरफ्तार करने के बाद मिस्र योगी ने मेरी जो जमकर धुनाई की वो भारी काम नहीं था । ऍम योगी के चेहरे पर खेदपूर्ण भाव नवा गई । अपने किए के प्रति बहुत शर्मिंदा हुआ । रेस में शर्मिंदा होने वाली कोई बात नहीं होगी । कुलभूषण फॉर्म बोला ऍम रेल ऍम उस वक्त तुम अपनी ड्यूटी कर रहे थे इसलिए सिर्फ मुझे ही नहीं बल्कि पूरे पुलिस डिपार्टमेंट को तुम्हारे ऊपर प्राउड होना चाहिए । ऍम कुलभूषण आहिस्ता से मुस्कुरा दिया । अब अदालत वाला स्पोर्ट आता है । कुलभूषण आगे बोलो ये तो अब आप लोग समझ गए होंगे कि मैं गिरफ्तारी इसलिए हुआ था क्योंकि मुझे यकीन था कि संगठन के लोग मुझे पुलिस के शिकंजे से किसी न किसी तरह जरूर निकाल लेंगे । आपको यकीन होता सर । एक पत्रकार ने पूछा ऍम ऍम मेरे मेरे शकीन का सबसे बडा ठोस कारण ये था कि संगठन के लोगों को मेरे बारे में पता चल चुका था और वो पुलिस की तरह मुझे सिर्फ जीना पहलवान का खूनी समझ रहे थे बल्कि उन्हें इस बात का भी पूरा भरोसा था तो नटराज की मूर्तियां मेरे ही पास है और यही मेरे यकीन की असली वजह थी क्योंकि मैं जानता था कि नटराज की मूर्ति हासिल करने के लिए वो किसी न किसी तरह मुझे पुलिस के शिकंजे से जरूर आजाद कराएंगे । कैसा क्या है, क्या नहीं? डाॅ । खन्ना के तरफ वो अकेला जवाब दे और मैं जीवन में पहली बार किसी टीम से इतना प्रभावित हुआ था । इस तरह संगठन के लोग मुझे अदालत से रिहा कराकर खुद ही अपने अड्डे पर रह गए । उन्होंने अपनी मौत को खुद ही दावत दी । भाई बाहर भी मेरी खूब हुई । पूरे कैरॅल में हसी का हमारा छोड गया और उसके बाद दिल्ली पुलिस द्वारा मेरे ऊपर जो एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था, वो भी हमारे ही योजना थी । उससे के फायदा मिला । आपको बहुत बडा फायदा मिला । उसी घोषित नाम की वजह से मैं स्टेट दीवानचंद की रहनुमाई हासिल कर सका । उनका कृपापात्र बन सका और इन सब से ऊपर मैं उसी घोषित नाम की वजह से संगठन का सक्रिय नंबर बन चुका है । लेकिन आपको इनके संगठन में शामिल होने की क्या जरूरत है? टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में पूछा आपका मिशन तो भी खत्म हो गया था । अपने फॅमिली लोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं करा दिया? मैं बिल्कुल यही कदम उठाता, लेकिन जब मुझे मालूम हुआ कि इनका कोई सुपर पॅन मास्टरों नहीं भी है तो रुक गया । मैंने फैसला कर लिया कि मैं इन सबको रंगे हाथों सुपर बहुत के साथ गिरफ्तार करूंगा हूँ । घटनाक्रम आगे बताने से पहले आपको एक बात और बता देना मुनासिब समझता हूँ वो ये कि इंस्पेक्टर योगिकों जो असली सोने की नटराज मूर्ति बल्ले ने दी, उस मूर्ति को मैंने ही जान बूझ कर घटनास्थल पर फेंका था और मेरे पास मौजूद छह मूर्तियों में से वही एक असली सोने की मूर्ति थी । मैं समझता हूँ कि बात लोगों को ये बताने की जरूरत नहीं कि पीतल की पांच मूर्तियां क्यों करवाई गई? फिर स्पष्ट करता हूँ । दरअसल पीतल की पांच मूर्तियां इसलिए गढवाली गई थी क्योंकि आवश्यकता है तो तुम क्यों कि थी सब उसका प्रभाव से कुलभूषण का देख रहे थे और पूरे घटनाक्रम के बाद दुर्लभ ताज का नाटक रचा गया । यहाँ फॅमिली के नेत्र अच्छे से पढते हैं दोनों ताज का कजाकिस्तान से यहाँ अभी एक नाटक ता । जी हां दरअसल तो लोगों ने इंडियन म्यूजियम से जो दुर्लभ ताज चुराया वो असली नहीं तो असली ताज की जमीन मारता था । सच्चाई ये है कि असली ताज तो कजाकिस्तान से यहाँ आया ही नहीं । वो तो अपनी जगह पर मौजूद है और इस सारा नाटक तजाकिस्तान गणराज्य की सहमती लेने के बाद तो भी गिरफ्तार करने के लिए रचा गया । यहाँ तक कि मिस्र जगदीश पालीवाल की तरफ से अखबार में गवर्नेंस की आवश्यकता के लिए जो विज्ञापन छपा वो भी हमारे ही माया जाल का एक हिस्सा था । मिसिस परिवार को जान पूछ कर एक सप्ताह के लिए उदयपुर भेजा गया । मंत्रा को गवर्नेंस बनाकर भेजना भी हमारी पहले से सोची समझी योजना और ये सारा खेल खेला गया ताकि पूरे ड्रामे को हकीकत का रंग दिया जा सके । इसका मतलब इसका मतलब पालीवाल को ये राज पहले से ही मालूम था । योगी हैरानी से बोला कि आप क्राइम ब्रांच के ऑफिसर हैं । ऐसे ही नहीं बल्कि बहुत पहले से मिस्टर पालीवाल कोई रास् मालूम था । दरअसल वो मेरे बचपन के मित्र हैं । हमारे साथ साथ पडने से लेकर लगभग हर काम साफ साफ किया था । एक काम में मैं उनसे जरूर पिछड गया । इसका मसर शादी उन्होंने मुझसे पहले कर ली । पूरे कॉन्फ्रेंस हॉल ना हसी करते फवारा छूट गया । अंत में मैं एक राष्ट्र और बताता हूँ । इस पूरी कहानी का पटाक्षेप करता हूँ ऍम दुल्लत साथ चुराने की जो मास्टरपीस योजना स्टेट दीवानचंद को सुपर बॉस के आराम से मिली, दरअसल वो योजना भी मेरे ही दिमाग की उपज मंत्रा की मदद से मैंने वो कागज ऍम इस पर फिर रह गए । तो दोस्तों ये थी वो योजना कुलभूषण थोडा रुककर बोला जिसे क्राइम ब्रांच में संगठन को गिरफ्तार करने के लिए रखा था और हमें इस बात की खुशी है कि हम अपने मकसद में कामयाब हुए । इसके अलावा अगर आप में से किसी के भी दिमाग में कुछ सवाल मन जा रहा है तो वो बेहिचक उसका जवाब मुझसे पूछ सकता है । अखबार ऍम बोला, अब पालने के बारे में कोई टिप्पणी करना चाहेंगे जरूर । इस पूरी योजना को अंजाम देते वक्त बल्ले एकमात्र एक एक्टर था तो हमेशा मौत की नंगी तलवार बनकर मिनिस्टर पर लगता था । अगर मैं पूरी योजना में किसी से डरा तो वो सिर्फ फॅमिली था क्योंकि जसराज खन्ना की हत्या उसने जिस तरह देखते ही देखते का डाली थी वाकई उसके जुनून की इंतहा । फिर मुझे भीतर ही भीतर भल्ले से हमदर्दी भी थी क्योंकि वो जो कुछ कर रहा था, भावनाओं में बहकर कर रहा था । मैं बल्ले को बचाने की हर मुमकिन कोशिश करता हूँ, लेकिन फॅमिली जितनी तेजी से उस पर गोली चलाई, उस वो भीषण में कोई कुछ नहीं कर सकता था । एक आदमी सवाल और सर इंडिया टीवी रिपोर्टर थोडा मुस्कुराकर बोला आपने सब के बारे में बता दिया, लेकिन ये नहीं बताया कि मैं इस मंत्रा अब क्या रोल प्ले करने वाली है । थोडा धीरज रखना । बहुत जल्द सवाल का जवाब भी आपको मिल ही जाएगा । ॅ ऍम, नौसर ऍम सब खामोश रहे हैं । फिर उस सनसनीखेज मीटिंग वही पर खास हो गया । डाॅक्टरों नहीं से दीवानचंद दशक पाटिल और दृश्यम पांडे पर अदालत में मुकदमा चला । मुकदमे के दौरान एक बात का और पर्दाफाश हुआ । ये सुपर बॉस डॉन मसरानी माफिया ग्रुप का था और से जितनी भी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल होती थी, माफिया ग्रुप के माध्यम से ही हासिल होती थी । उन चारों को अदालत में उम्र कैद की सख्त सजा सुनाई । जगदीश पालीवाल को अपना बेटा मिल गया और मंत्रालय किशनपुरा स्थित अपने घर में खामोशी से लेटी थी । मंत्रा बूत तकिए में छिपा रखा था और उसके अंतर्मन में उठा ज्वारभाटा उसे हिचकियां ले लेकर रोने के लिए मजबूर कर रहा था और होती जा रही थी । रोती ही जा रही थी । उसकी आंखों के इर्द गिर्द कुलभूषण का चेहरा चक्कर काट रहा था । उसे वो पल याद आ रही थी जब भूषण में उससे बडे अनुराग पूंछ सफर में कहा था मतलब मैं तो बहुत प्यार करता हूँ और कभी कभी एक सपना भी देखा करता हूँ । ऍम मंत्र का दिल धडकने था कि हमारे पास खूब धन दौलत हूँ । पीछे नौकर चाकर, शानदार गाडी हो, खूबसूरत घर हो और ऍम किसी राजकुमारी की तरह हूँ । कुलभूषण के शब्द सुनकर तब मंत्रा का पूरा दस तक हवा में परिवास करने लगा था । उस यू महसूस हुआ था जैसे सारे जहाँ की दौलत से मिल गई हूँ तो फॅमिली साथ समझा क्यों? क्या क्या उसमें तुम्हारे साथ मजाक नहीं? क्या मंत्रालय है? मजाक नहीं तो और क्या था? मंत्रा बुराई क्या अधिकार था उससे मेरे सपनों से खेलने का ये अधिकार दिया नहीं ज्यादा पागल तभी किसी ने इस नहीं से प्रभाव से मंत्रा के बारे में उंगलियाँ फिर ये अधिकार तो खुद ब खुद हासिल हो जाता है । मंत्र एकदम चौक पर पट्टी सामने कुलभूषण खडा था तो तो मंत्रालय बडा उठी । किसी महापुरुष ने सच ही कहा है मंत्रालय हर आदमी की सफलता के पीछे किसी न किसी स्त्री का हाल होता है । आज मुझे जो सम्मान मिला, जो शोहरत मिली है उसकी एकमात्र हकदार तुम्हें तुम ऍम जानती हूँ । कुलभूषण भावुकतावश बोलता चला गया इस केस को सॉल्व करने का मुझे जो सबसे बडा पुरस्कार मिला है हैं तो आमंत्रण ऍम हासिल हो गई । सच्चे दिल से प्यार करने वाली एक पत्नी होती है । पूछे उसी से कुछ सबका लगता है । भूषण नहीं सकता नहीं होता लेकिन मुझे यकीन नहीं आ रहा है । कुलभूषण फौरन अपराधयुक्त वोट मंत्रा के होठों पर रखती है । फॅमिली पाहो में जगह लिया क्या अभी तो ये सब एक सपना ही लग रहा है । मंत्रालय गर्म स्वस्थ होके देखने बोला हूँ उसको शरीर अपने लगा जवाब तो मंत्रा कुलभूषण के आवास में मदहोशी नहीं बेचे नहीं थी हूँ की अभी तो नहीं सब एक सपना ही लग रहा है । वो है मांॅग नहीं सच है फॅार कुलभूषण के सीने से लिपट बाहर एक शानदार गाडी मंत्रा का इंतजार कर रही थी । एक खूबसूरत चंदगी उसका इंतजार कर रही थी । कुलभूषण ने उसे जितने भी सपने दिखाए थे वो आज तमाम सपने पूरे हो चुके थे । तमाम हो

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