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Transcript

भाग - 01

नमस्कार ऍम पर मैं रश्मि शर्मा आप सुन नहीं जा रहे हैं । डॉक्टर मंजरी शुक्ला द्वारा लिखे सुल्तान सुलेमानकी जादुई कारनामों के किस्से सुल्तान सुलेमान और साथ शहरों का रहस्य ऍम सुनी जो मन चाहे ऍन मूल्य वघासी या कोई रेशमी का नि संतान बच्चों की तरह खुश होते हुए कहा हॅूं हम हुई के पास पर चल रही हैं । सुलेमान मुस्कुराता हुआ बोला तुम्हें पता है कि तुम मेरी सिर्फ से अच्छे दोस्त हो । सुल्तान ने सुलेमान का हाथ का करते हुए कहा सुलीमान मुस्कुरा दिया । सुल्तान बोला चलो डॉट लगाते हैं, देखते है सामने वाले आम पीढी को कौन सबसे पहले चलेगा मेरे मुँह से तेज तो कोई दौड ही नहीं सकता । सुनी मानने थोडी गर्व से कह रहा हूँ वो तो अभी पता चल जाएगा सुलेमान क्योंकि मैं जानता हूँ कि मैं तुमसे काफी तेज हूँ । सुल्तान हंसते हुए बोला डॉट पडा सुलेमान उसके पीछे भाग रहा था । सुल्तान ऍम तो बेटी हो ऍम भर्ती में मैं बगीचे के कोने तक पहुंच गया । तब ये सुधान को नन्दा जी से उसके पहले किसी ने अपनी हाँ टूसी बस टूटी से पता नहीं है दिल की महारानी उसकी ठीक नहीं करके उसने घबराते हुई अपनी बहनों की तरफ देखा तो कुछ भी दिखाई नहीं दिया । फिर उसकी पहलुओं पर किसी के हाथों की पकड और मजबूत होती जा रही थी । उसकी मारी सुलतान का था तो उसी समझ भी नहीं आ रहा था कि वहाँ किसके लिए कौनसी क्यों पकडी हुई हैं । सिनेमा सुल्तान जोर से चीखा तो सुलीमान ने उसकी तरफ देखा तक नहीं तो उसके पीछे ना भाग कर दूसरी आम की पीढी की ओर खाता चला जा रहा था । तो हमारी ऍम क्योंकि ऍम हूँ वो भी तुम्हारी आवाज नहीं सुन ऍम सुल्तान जनता था की फिलहाल तो अकेला है और इस मुसीबत का सामना उसी खुद अकेले ही करना होगा । अब तक सुल्तान का डर थोडा कम हो चुका था इसलिए उसने हिम्मत करते हुए पूछा था तो तुम कौन हो और मुझे क्यों परेशान कर रही हो? सुजॅय परेशान नहीं कर रहा हूँ । मैं तो तो मुसीबत नहीं हूँ । मैं तुम्हारा है । हम शत्रु हूँ । परसो हंसी ऍम तो हूँ तो हमारी मदद कैसे कर सकता हूँ? सुल्तान ने पैर छुडाने की कोशिश करते हुए पूछा तो ही मेरी मदद हो हो । फॅस सुल्तान कुछ कहता इससे पहले उसे और भी कई आवाजें सुनाई देने लगीं । चीखते हुए उसे बुला रही थी । फॅमिली हूँ हूँ हूँ सुल्तान नीचे ऐसे ही फिर से दौडने की कोशिश की तो पैर बंधे होने के कारण मैं भाग नहीं है और वही जमीन पर किस पाना जाने दो मुझे तो मुझे तो छोडो अचानक उसके चारों तरफ से इस तरह की आवाज फॅमिली की भी कुछ समझता था । उसने देखा कि सामने से एक बडा सा पत्थर लुढकता हुआ उसकी तरफ आ रहा था । सुल्तान चाहकर भी अपनी जगह से हिल नहीं पा रहा था । पत्थर सुल्तान के और करीब आ चुका था । सुल्तान ने गौर से देखा तो सी महसूस हुआ कि उस लुढकते हुई पडी इसी पत्थर की दो हाथ ऍम और उसकी दो बडी बढियां की नाक और मुंह भी थे वे तेजी से अब सुल्तान की तरफ लुढकता हुआ रहा था तो ही बचाओ हूँ ऍम ऍम सुल्तान को तुम्हारी जरूरत है । भारती की कोशिश में सुल्तान धडाम से नीचे गिर पडा । उसके गिरने की आवाज सुनकर उसे महसूस हुआ कि कुछ लोग उसके आस पास इकट्ठे हो चुकी है । लगता है आप कोई सपना देखा है सुल्तान आपकी तो ही कहते हुए महामंत्री ने सुल्तान की माँ थी पर बिहार से हूँ । सुल्तान की मंत्री हुई तुरंत उठ कर बैठ के अपने आस पास खडे महामंत्री पर एक टू नौकरों को ठीक कर उसे महसूस हुआ कि वे अपनी कमरे में है यानी कि उसने झूठ कुछ सुना था । कोई सपना था तो शायद सपना ही था सुल्तानपुर उठाया और अपनी ऍम हूँ क्या हुआ सुल्तान आपकी तो लगता है आपने कोई भयानक सपना देखा है । महामंत्री ने सुल्तान की घबराई चेहरे को देखते हुए पूछा सुल्तान खामोश ना पर आपकी कपडो तो मिट्टी लगी हुई है । पास खडी सैनिक ने हैरत से का । सुल्तान ने तुरंत अपने कपडों की तरफ देखा और तो ना इतनी मिट्टी तो ली है, किसी बात की है । महामंत्री सहित वहाँ सभी लोग ही देखकर खबर आकर महामंत्री इधर उधर देखते हुए बोला सुल्तान, आप बिल्कुल सुरक्षित हैं । आप चिंता न करें । तुरंत इस कक्ष से दूसरी जगह चलिए सुल्तान में जैसे ही चलने के लिए कदम बढाया । वेदर जैसी ठीक ही था । क्या हुआ वो महामंत्री ने सुलतान का हाथ पकडते हुए चिंतित घर में पूछा ऐसा लग रहा है जैसे मेरे पैरों में चोट लगी हुई है । सुल्तान दर्द सियांग बंद करते हुए बोला । महामंत्री ने पास खडे एक सिपाही को इशारा किया । सिपाही ने तुरंत चुगकर राजकुमार का चूडीदार पजामा तकनी से थोडा ऊपर किया तो क्योंकि निशान देखकर हैरान रह गया । ये उंगलियों के निशान कैसे आ रहे? महामंत्री ने हैरानी से पूछा तो मैं नहीं जानता । सुल्तान ने धीरे से कहा कहाँ पलन पर बैठ जाइए मैं राजवैद्य से अभी कोई अच्छा सा मार हम नहीं कराता हूँ । एक असैनिक कमरे से बाहर चला गया । महामंत्री ने सुलतान का पैर अपनी गोदी में रखा और देखा कि पैर पर उंगलियों की मजबूत पकड के निशान अभी तक दिखाई दे रहे थे । सुल्तान धीरे से पूना । इसका मेन ट्रक एक कोई सपना नहीं था । मेरी हमशक् ली थी जो किसी जादूगर की कैद में है ही कुछ भी हो जाए मुझे उनकी मदद करनी हूँ की हमशक्ल जादूगर और किस की मदद सुल्तान आप किसकी बात कर रहे हैं? महामंत्री ने हैरानी से पूछा मुझे मुझे अभी सुलेमान से मिलना है । आप आप जल्दी सुलेमान को बुलाइए । सुल्तानी आदेश दिया । यही कहानी उतनी ही जाती है जितना कि हम सोते समय सपनों में महसूस कहते हैं । मैं इसे तो बडे बुजुर्गों का मानना है कि जादू जैसी कोई चीज नहीं होती । लेकिन जरूरी तो नहीं कि जो बडे मानी मैं अच्छी हूँ । इस दुनिया में जादू और तेल इसमें जैसी ऐसी कई सारी कहानियां हमने कई बार सुनी । कुछ पर विश्वास किया है । कुछ पर अन्वेष ये कहानी भी उन्हें जादुई और दिलस्पी कहानियों की तरह बहुत ही टोमॅटो बहुत समय पहले की बात है । एक बहुत ही मशहूर देश हुआ करता था जिसका नाम था एनजीटी बडा ही प्यारा । खूबसुरत सा ऐसा कि कोई उसे देखें तो बस एकटक देखता ही रही है । उस देश की ख्याति दुनिया की कोनी कोनी में फैली हुई थी । ऐसा कहा जाता था की ऊंची देश की कहानियां, हर काम और दूसरी देशों में मई अपनी बच्चों को सुनाई थी । ये कहते हैं कि इस देश में अजीब अजीब कहानियां और किस्से मशहूर हुई थी । ऐसे ही निराले देश की कई सारी बातें बडी ही मशहूर जैसी की देश में पूरी कडी चाहते हो कर रहा करती थी । यहाँ तक कि ये किसी भी मशहूर था कि जो शहर में जाता है वह शहर का डी ऍम चाहता है । ऐसा लगता है कि यह विषय है उन्हें अपनी ओर आकर्षित कर रहा है । टी टी सी चुंबक की तरह इस कहानी का मुख्य किरदार थी अपनी देश की कहानी की तरह ही फॅमिली । यही कहानी है एंजे देश के राजकुमार जिसका नाम था सुनता हूँ यही नाम था उसका शक्ल भी और बहुत की नहीं थी । जाने की वो एक तीन उसी एक बडी अच्छी सी सनक सवार उसके जैसे साथ चेहरी पृथ्वी पर ऍम जब सीसीपी हमशक्ल को सपने में देखा तो उसे उन बाकी चेहरों से मिलने की उत्सुकता बढ नहीं नहीं । पहले तो उसने अपने खास लोगों से पूछना शुरू किया जिनमें सबसे अच्छा दोस्त था उसका नौकर सुलेमा तीन नाम भी सुल्तान में एक दिन बचपन नहीं उसे खेल खेल में ही देते हुए कहा था मैं सुलतान हर आज से तुम मेरी सुलेमा सुल्तान का सिनेमा । जैसे जैसे हम बडे होंगे हमारी टोस्टी और भी गहरी होगी कि नाम हमेशा मशहूर होगा । एक खास दोस्ती के लिए दोस्ती गहरी हूँ । ये सुनकर नाॅन बहुत हंसा था । शायद ये सोच रहे हैं कि पहला ऍफ का कैसा में? सुल्तान की बातें सुनकर कुछ नहीं बोला और गौर से सुल्तान के आंखों कि जलते हुए नहीं झुकने को देखता रहा जिनमें तू वह पर एक सच्चा टू हाँ देना चाहता था । जो हीरे, मूर्ति और छूट की दुनिया की साई सी उन के साथ साथ उनकी दोस्ती भी आगे बत्ती गए । सुल्तान ने अपना वादा पूरी ईमानदारी के साथ निभाया । उसने सुलीमान को कभी नहीं करने ही समझा । इधर सुलेमान भी हर कदम पर आती मुश्किलों को काटकर खुद ही ढूंढ लेता और सुल्तान को और दोस्ती की दूसरा ले के अन्दर हलकी कश्मीर देता हुआ बाहर की सर धाम आऊँ और बर्फ की छूटी नौ अकेले टुकडों से हमेशा सुरक्षित रखा था जी! तीन सुल्तान को पता चला कि उसकी शक्ल के साथ आठवीं और ही तो उसने सुलेमान को अपने पास बुलाया और कहाँ नहीं नहीं सुना है कि हर आदमी की क्षेत्र के सात लोग इस पृथ्वी पर होती हैं । सोचो एक कितनी चित्र बात है? सुलेमानी सुनकर बहुत हंसा हर इतना हंसा की उसकी आंखों से मुँह नहीं और उसी तेज खांसी आने लगी और उसकी जैसे सांसी उखड गया फॅर हूँ ऍम हूॅं नहीं किया ऍर रहा हस्ता मैं बस बार बार सुलतान का चीरा ठीक तरह । सुल्तान ने ये देख कर चांदी की जमती हुई गिलास कुछ है और दोना थाने पीले मेरे भाई हर आराम से बताओ कि तुम मेरी बात से कितना सहमत हूँ । सूर्य मानने एक ही फ्रांस भी पूरा गिलास खाली करते हुए सुल्तान चिडी की तरफ देखा जहाँ केवल संजीदगी के भाव थी । यही ठीक कर सुलीमान थोडा सा डर क्या क्योंकि बचपन से साथ रहते हुए तो सुल्तान की गुस्से की भारी नहीं थी, जानता था उसी धीरे से कहा माफ करना सुनता तुम्हारी प्रति सुनकर हंसी आ गई । तो क्या तुम हमारी बात से सहमत नहीं हूँ? ऍम तब तूने एक बार तो बताया था लेकिन तुम्हारी इस बात में कितनी सच्चाई है ये मैं पुख्ता तौर पर नहीं कह सकता हूँ । खिला किसी इंसान के वहाँ कई साथ चेहरे होते होंगे मुझे तो ये ऍम सुल्तान क्या तुम सच में कहना चाहती हूँ की आप वहाँ पे ही तुम्हारी फॅार सुनी मानने अपना सर खुजाते हुए पूछा तो कल रात मेरी सपने में वो सारी हमशक्ल है जो इस समय बहुत मुसीबत में है । सुलेमान और मेरी मदद मान रहे हैं । सुल्तान ने सलमान की तरफ देखते हुए कहा क्या कहाँ सुनता तो तुम से मदद मांग रहे हैं । सुलीमान ने आश्चर्य से पूछा हाँ सुलीमान ये तो भी चित्र बनाए थे । हाँ निश्चित ही बच्चा सुलेमा एक बात बताओ क्या तुम्हारे मन में कभी नहीं आया कि तुम खुद से मिलो पर सुल्तान ही बात तो अलग हुई ना । सिर्फ शक्ल मिलने से हमारी किस्मत, आदत और परिवार वाले सभी थोडी ही ना हो जाते हैं तो सुनिए महान चेहरा तो ये कहना संतान अपनी बात पर जोर देता हुआ बोला इसीलिए सब तो तब पता चलेगा ना, वो तो मैं कुछ बताएगा । सुलेमानकी चेहरी पर अचरज भरी भाव देखकर सुल्तान में आगे बोलना शुरू किया । अच्छा आप मान लो तो मेरे कमरे में आए और मेरी जगह मेरा हमशक्ल बैठा है तो तुम उसी अपना दोस्त मानूंगी ना । सुलेमान ताली पीता हूँ, बोला समझ गया सब समझ गया कैरी कि आज समाज के तो ये ही है कि अब तक मुझसे का होगी कि हम उन चेहरों को ढूंढे इस बात में हंसू नहीं तो क्या करूँ? सुल्तान तो मार्च अच्छी खासी मजाक ऍम भी हूँ । सुलेमान की बातें सुनकर सुल्तान अपनी जगह से उठ के मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ तो दिमाग नहीं जा रहा हूँ मेरे साथ हमशक्लों को ढूंढने के लिए तो मेरी बात पर विश्वास नहीं करना है तो मैं चलो तो पर तो सुनता हूँ तो माँ के लिए कैसे जाऊ की सुलीमान अचानक जमीन से उचककर खडा हो गया मानो उसने पिछली का कोई तार छू लिया हूँ । तुम्हारा दिमाग तो करा नहीं हो गया है । मैं तो मैं इतनी लंबी यात्रा पर अकेले नहीं जाने दूंगा और रंजीत देश से बाहर जाकर हमें किसी तरह की मुसीबत मोल नहीं लेनी चाहिए । सुनता सुलीमान अगर तुम मेरे सपने और मेरी बातों पर ये तीन नहीं है तो भी शक तुम यही आराम से रूको तो मेरे सावधानी की कोई जरूरत नहीं है । लेकिन मैंने यह निश्चय कर लिया है कि मैं उन सात चीजों को ढूंढ लूंगा और उनकी मदद जरूर करूँगा । अरे सुल्तान तो समझ नहीं रही हूँ, मैं तो बस किसी अनजान खतरे से सुरक्षित रखना चाहता हूँ । सुलेमान ने इतना ही कहा था कि सुल्तान में उसे बीच में रोकते हुई काम हम मुसीबतों से कब से डर नहीं लगे । सुलेमान है अब हमें इस विषय में कोई बात नहीं करेंगे । सुल्तान मेरी बात का गलत मतलब मत निकालो सुलीमान । तुम आप जा सकती हूँ तो मुझे सुकून से गुलाब के फूलों की भीनी भीनी खुशबू में अकेले रहना है । तो सुल्तान अपनी बीच कीमती कपडों पर एक तरह लगता हुआ हूँ ।

भाग - 02

हूँ । ऍम सुनील मान के लिए इतना इशारा काफी था । सुल्तान जब कोई निश्चय कर लेता था तो उसे डिगाना असंभव था । अगले ही पल वह बिना कुछ कहे कमरे से बाहर निकल गया, उसके दिमाग में नहीं जानी । कितनी सारी बातें एक साथ चल रही थी । बचपन से लेकर आज तक सुल्तान को जहाँ तक सुलीमान समझ पाया था, नहीं यह था कि सुल्तान को इस समय रोक पाना उसके लिए नामुमकिन था । हालांकि उसे सुल्तान के सपनों पर यकीन हो जी, ऐसी कोई बात नहीं, दरअसल में है । उसी अंजीर देश से बाहर जाने से रोकना चाहता था, क्योंकि वह उसे किसी भी तरह से मुसीबत में नहीं डालना चाहता था । सुल्तान के पिता बादशाह फारुख शेख की अकाल मृत्यु के पश्चात सुल्तान को पंद्रह वर्ष की आयु में ही अंजीर देश का होने वाला राजा घोषित कर दिया गया था और अठारह वर्ष के आयु पर उसे अंजीर देश का राजपाट भी संभालना था । इस समय सुल्तान के लिए मुसीबत उठाना पूरी अंजीर देश के लिए जोखिम भरा हो सकता था । सुलीमान बचपन से ही सुल्तान के साथ साई की तरह रहता था और वह इस समय सुल्तान को किसी भी कीमत पर अकेला नहीं छोड सकता । था । सुल्तान को अक्सर ऐसी ही है । जी पर जीत सपनी आती थी और उसकी ज्यादातर सपनी सच भी होते थे । सुलीमान को याद आया की कैसे जब वह सिर्फ आठ वर्ष के थे । सुल्तान को एक अच्छी चीज का सपना आया था । सपने में उसकी ये देखा कि महल के पीछे कोई के अंदर कोई अच्छी सी चीज नजर आई थी । जब सुल्तान सुबह था तो यह बात उसी महल के सभी नौकरों को बताई लेकिन किसी ने भी उसकी बात पर विश्वास नहीं किया । सिमाएं सुलेमान जब वह सुल्तान के कहने पर कोई के पास गया तो वहाँ कई कोई में एक बिल्ली रात में ही पडी थी जो उस मुसीबत से निकलने की हर नाकाम कोशिश पूरी रात करती रही । फिर उसके बाद में सुलेमान नहीं ही निकाला था । इसलिए सुल्तान जानता था कि सिर्फ मैं ही उसकी बातों पर यकीन कर सकता हूँ । मैं फिर से निकलकर सुलीमान सीधा भास्कर मामा जानकी यहाँ पहुंचा । उनका घर पडा ही प्यार और किसी का की तरह दूर से ही चमकता हुआ नहीं रहता था । उसकी मामा जहाँ एक बहुत बडी चाहते थे, उनके पास नहीं जाने कितनी यक्ष गंधर्व भूत प्रीत रहती थी । सुलीमान जब अपने मामा जानकी यहाँ पहुंचा तो हमेशा की तरह उनका पांच तो कुत्ता जीवन हवा नहीं रहा हूँ । नहीं नहीं दूर की हर चला रही थी । इतनी नहीं से मुर्गी को हर चलाती नहीं । सलमान जोरों से हंस पर सुलेमान ने देखा पीठ पर एक दिन बैठा हुआ था ही पाँच टूटकर खा रहा था उसे सुलीमान की तरफ अच्छी तरह से देखा और रास्ते हुए बोला हूँ सुनेना के सी तो मेरी दो बेटे नितिन उठाया जाए तो यहाँ सुलीमान उसी ठीक पडा । हैरान हूँ किस पर मेहमान ये किसी जिनको वर्ष में कर दिया है मन में सोचती हुई सुलेमान ने मुस्कुराते हुए कहा मैं बढिया हूँ दस पर मेरी और तुम्हारी मुलाकात नहीं हुई होती हूँ । उम्मीद है मामा जानकी यहाँ आकर काफी खुश होंगे । चीन में नहीं मुस्कुराते हुई सुलेमान की तरफ देखा । हर एक फल पीर तोडकर उसकी तरफ महकती हुई कहा जिसे सुल्तान ने अगले ही पल पकड लिया । मित्रता की शुरूआत फल से कहते हैं दो मेरा नाम जिंदा है और मैं तुम्हारी मामा ऍम मुझे यहाँ आकर तोहार डाॅग रहा है । फॅमिली खुशी ही सुलेमान ने जिनमें की खुशी को देखते हुए मुस्कुराकर उनका स्वागत किया । असफल देने के लिए भी उसी धन्यवाद किया । अभी सुलीमान ना की बढ ही रहा था कि तभी पूर्ति हुई भूरी बिल्ली सुलेमानकी कंधे पर आकर बैठ के जैसा कि हमें अक्सर ही किया करती थी हरे थोडी तो तो मैं तो एक दिन भी ना देखो तो लगता है जैसे जैसे मैंने दिन इधर कुछ कोई चीज देखी नहीं ऍम केकर दूरी ने बडी बडी आंख कीमत का हो । मेरी प्यारी भूरी तो बहुत प्यारी हूँ । सुलेमान ने प्यार जताते हुए कहा । सुलेमान की आवाज सुनकर पूरी बिल्ली मुस्कुराए घर उसके कंधे पर बैठकर हमेशा की तरह उसकी सर को अपनी फॅमिली लगी । सुलेमान हसते हुए बोला फॅमिली जाता हूँ कि मामा बहुत बडे जादूगर हैं वहाँ पर उन्होंने अपनी ज्यादा से तुम सबको ऐसी तो छुट्टियाँ हैं । फॅमिली जो चाहिए कह सकती हूँ ऍम ऍम आपने अगले जन्म ऍम मांग लूँ । तभी सुलेमानी मामा जन को अंदर वाले कमरे से बाहर आते हुए देखा तो खिलखिलाते हुए उनकी तरह दौड पडा । मामा का चेहरा सुलीमान को देखते ही खुशी से किलो था । सुलेमान मेरी भांजी तो देखकर पडा । अच्छा लगा तो बिलकुल बच्चों की तरह से आपने गली से लगाने के लिए थोडा मामा का चेहरा सुलेमान को देखती ही खुशी से खेलो था । सुलेमान मेरे भाई की तभी देखकर पर अच्छा लगा । मैं बिलकुल बच्चों की तरह उसे अपने गले से ले जाने के लिए दौडे । मामा जान मेरे प्यारे मामा जान सुलेमान अपनी मामा की कर ले रखी है । भूरी बिल्ली देखकर इतना खुश हो गए कि उच्चतर मामा के कंधे पर बैठ के और बोली लेवॅल दिखा दूँ तो वहाँ दूध का कहाँ? सुलेमान ने हैरानी से पूछा हूँ । ये सुनते ही मामा हसते हुए बोले हो तुम नहीं आप सुलेमान को भी अपनी तो के बारे में बता दिया हॅूं खुद ही दी का करा सुलेमानी सुनकर पूरा । आखिर फॅमिली जो है । दूध का कुमार देखकर तो सुनी मांग आश्चर्यचकित रहेगी और हस्ती हुए बुरी से बोला तो अगले बार जन्मदिन पर क्या मांग की? एक नहीं पहले से लेता हुआ थी तो तो ये बिल्ली पाल भी खाती हैं । सुलेमान ने मुस्कराते हुए पूछा हूँ । धोनी ने पचास से जवाब दिया । मामा ने दूरी के सिर पर प्यार से हाथ खेला और सुलेमान से पूछा सुलेमान सबकी तो है ना । तुम हंस रहे हो । मैं देख रहा हूँ कि तुम्हें कोई चिंता खाई जा रही । सच पता भारत के है । हम आॅक्सी बात के बारे में आपसे बात करने आया था । अच्छा ऐसी बात है जरा हमें भी तो पता चले हाॅल बात ये हैं की सुल्तान को फिर से एक अजीतसर सपना आया है जिसमें एक ये इस बात का जिक्र करता है कि दुनिया में उसकी हम शत्र साथ शहरी और भी हैं जो इस समय बडी ही मुसीबत में हैं और वह सुल्तान की मदद मान रही खराब तो जानते हैं ना मामा जी की सुल्तान को ऐसी अजीब अजीब सपने आना कोई नई बात नहीं है । हालांकि में उसे रोकना चाहता था लेकिन मैं उसे रोक नहीं पा रहा हूँ । मैं उसे किसी भी तरह की मुसीबत में नहीं डालना चाहता । मामा जान आप बताइए मैं क्या करूँ? सुलेमान ने उन्हें सारी बातें बताते हुए कहा हूँ अच्छा तो ये बात है हाँ मामा जान अब आप ही बताइए कि पूरी दुनिया में अपनी जैसे साथ तेरी टून करके का, सिलाई का और क्या जी तीस से दूर जाने पर उसे खतरा नहीं होगा । मामा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया सुल्तान नटखट है नी डर भी है तुम्हारी ही तरह उसकी जिद के बारे में मैं भी जानता हूँ । उसी रूप पाना वहाँ कई संभावना होगा लेकिन तो उसकी फिर कुल चिंता मत करो । कैसे फिक्र ना करो मामा जान तो मेरा में तो हैं उसकी रक्षा मेरी जिम्मेदारी है सुलेमान ने निराशा से कहा नहीं सुल्तान के लिए काफी फिक्रमंद था हम । मैं समझता हूँ मैं तो ये कुछ ऐसी जादुई वस्तुएं दूंगा जिससे टोम अपनी और सुल्तान की रक्षा हमेशा कर सक होगी और सही सलामत यहाँ वापस भी होगी । सुलीमान ये सुन कर बहुत खुश हो गया और उत्सुकता से बोला अच्छा मुझे जल्दी से दिखाए ना ये नया वस्तुए मामा जान ताकि मैं इस मुसीबत के समय अपने मित्र की रक्षा कर सकूँ । मामा जान तो ले सबसे पहले तो ये भूरी ही है जो चच्चा ही उड सकती है और मीलों की दूरी तक सफर पलट छप्पन नहीं कर सकती है । इससे तुम्हें यह फायदा होगा कि यह दूर से आती हुई मुसीबत को देख कर तो भी पहले से आगाह करती की इस तरह से समझो कि इस सफर के दौरान भूरी बिल्ली तुम्हारे बहुत कम आए की दूरी बिल्ली ये सुन के थोडा साइड फॅमिली फॅमिली ही सबको नाॅक पूरा चलती रही होने पटकर निकालना सोचता हूँ । सुलेमान हंसते हुए बोला ऍम नहीं जितना हो उतना बोलना । फिर मामा जी ने उसे फॅमिली इससे तुम एक साथ हजारों लोगों को बांध सकती हूँ । बुरी बिल्ली हंसते हुए बोली हो फॅर हैं सुलीमान और मामा भी । थोडी की बात संकट तो जोर से हंस पर एक कांच का चमकता हुआ टुकडा महामान्य अपने झोले से निकालकर सुलीमान को दिया और होली इस टुकडी को तुम एक बार हवा में उछालकर जब दोबारा अपने हाथ में पकडो की तो यह चमकता हुआ पहाड पाँच आएगा । इसके अंदर से इतनी रोशनी निकलेगी की वहाँ खडे लोगों को कुछ भी दिखाई नहीं देगा । सुलीमान पूरा तो बहुत बहुत शुक्रिया मामा जान अपनी तो मेरी बहुत मदद कर के था क्योंकि तुम इनकी देश से दूर जा रही हूँ ये दुनिया पर यहाँ रहने वाले लोग बडे ही विचित्र किस्म के होते हैं । जाने कौन तुमसे कहाँ रखना चाहिए नहीं जाने कहाँ किस तरह की अच्छी देश और अजीब तरह के लोगों से तुम्हारी मुलाकात तीन लोगों के बीच तुम जा रही हूँ उनके पास और भी बहुत बडी बडी शक्तियां हो सकती हैं जिनसे मुकाबला करना बहुत कठिन हो सकता है । मामा जानने सुलीमान कि हथिनी पकडते हुए ये आखिरी तो अमूल्य वस्तु हो जिनकी तो ही शायद जरूरत पड जाए । ये सुरमा जिस से दाहिनी आंख में लगाने से तो मैं अदृश्य लोग भी दिखाई देने लगेंगे और पानी आंख पर लगाने से तुम अदृश्य सुझाव की । हाँ, इस कांच की शीशी में घुला भी । जहाँ भी पानी है, किसी किसी पर भी छोडते ही मैं अपने असली रूप में आ जाएगा । सुलीमान खुश होते हुए मामा की गर्इ लग गया और वहाँ से सभी चमत्कारी वस्तुओं को लेकर जानी लगा । उसी चाहती एक मामा जान के मन में एक विचार है और वो पूरी सुलीमान रुको ग्राम बगडा माँ, बडा मुद्दा ऍम । ये कहते ही उन्होंने अपने हाथ से कुछ सुनहरी नहीं मोटी निकालकर सुलेमान को दी होली ही मैं जाने इतनी दिन मीलों का सफर तय करना है । इसलिए तुम जिसका चाहूँ उसके रूप में बदलकर पलक झपकते हैं तो वहाँ पहुंच सकती हूँ जहाँ तुम जाना चाहती हूँ जी शुक्रिया मामा जी । ध्यान रही इन सभी जादुई शक्तियों का इस्तेमाल तुमसे जरूरत के समय ही करना जी मैं ध्यान रखूंगा । जादुई मजबूरी मिलने से उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा । में जल्दी से जल्दी जाकर सुल्तान को ये सब जादुई वस्तु दिखाना चाहता था । उसने मामा की गाली लत उन्हें शुक्रिया अदा किया और महल की तरफ चल पडा । तभी उसने देखा की भूरी बिल्ली भी उडती हुई । उसके साथ चल रही है । ये देखकर सुलेमान ने उससे पूछा जब मैं पैदल चल रहा हूँ तो तुम क्यों हवा में उड रही हूँ । तुम भी मेरे साथ पैदल चलो हूँ ऍम को तो उन ऍम पहले तुम मुझे नी मखमल की हो ॅ होंगी । सुलीमान मुस्कुराते हुए बोला अच्छा महल में चलो मैं तुम्हारे लिए कितनी चाहूँ उतनी कमाल की चप्पल बनवा दूंगा । पूरी हमेशा की तरह खुश होती हूँ । सुलेमानकी कंधे पर कुछ चक्कर ऍम हूँ ।

भाग - 03

हूँ । ऍम हूँ हमारा नाम की लू और तीन हैं । आज तुम्हारे शहर के कारण ही हम अपना असली रूप वापस आ चुके बोलो हम तुम्हारी क्या सहायता कर सकते हैं? उन्नीस पीले रंग वाला बोला भूरी बिल्ली चिल्लाई ऍम यह सुन कर खेलो और पीलो हंस पडे और धीरे धीरे अपना आकाश खा जाते हुए आदमकद हो गए । खेलूं जो लाल रंग का दिखाई दे रहा था उसको रहते हुए बोला बोलो हम तुम्हारी क्या सहायता करें तो क्या तुम सुल्तान की हमशक्ल नहीं हो सुनी? मानने हैरानी से पूछा क्या हम तो मैं तुम्हारे मित्र की शक्ल की नजर आते हैं । हम तो खुद आपस में भी जुडवा नहीं । पीलू ने खेलों की तरफ देख कर कहा । सुल्तान ने मुस्कुराते हुए उनकी तरफ देखा और कहा था बिलकुल मेरी शक्ल सूरत की नहीं हो मित्र । बात ये हैं कि यहाँ से कोई रास्ता पाताललोक की ओर जाता है । क्या तुम हमें वहाँ तक पहुंचा सकती हूँ? पाकिस्तान लोग भरना तुम पांच लोग क्यों जाना चाहती हूँ? पीलू ने हैरानी से पूछा मैं फॅमिली तो दोनों के हो के हम तुम्हारी फॅमिली है तो फॅमिली हुआ पूरी नहीं चेते हुएकहा हाॅल, बात ये है कि हम मेरी से देखने वाले सात चेहरों की तलाश में निकले हैं । किसी तरह की मुसीबत में हैं और बीवी सहायता चाहते हैं । हम बहुत दूर से आए हैं और जब तक हम मेरी जैसी दूसरी शक्ल वाले आदमी को ढूंढ कर उसकी सहायता नहीं करते तब तक तब हमारी साथ हूँ । हमें यह जानकर बहुत खुशी हुई कि तुमने इरादों के साथ इतनी दूर हूँ और किसी की मदद के लिए पाकिस्तान लोग जाना चाहती हूँ । हमें इस बात की खुशी हुई कि संसार में अब तक आप कैसे लोग मौजूद हैं जो दूसरों की मदद के लिए इतनी दूर यात्रा करके आते हैं । शुक्रिया दो उन की मदद के लिए तुम से हमारी इतनी मदद करो कि हमें पाकिस्तान लोगों तक पहुंचा तो इतनी सी बात हम चलते हैं ना साथ थी तुम हमारे कंधी पर मैं अच्छा हूँ ऍम भूरी बिल्ली हमेशा की तरह बोले बिना ना रहे सकी तीलू और खेल हूँ उस की ये बात सुनकर जोर से हंस पर फतेह तब हमारा यही इंतजार करना हम जल्दी लौट कर आएंगे के कल सुल्तान ने फतह को उसी पेड के नीचे रुकने का इशारा किया । पर रहने से रहना का होना जैसी वह सुल्तान की बात समझ गया था । पीलो खेलों ने अपना आकार बढा लिया । सुल्तान पीलू के और सुलेमान खेलों की कंधे पर बैठ क्या दूरी सुलेमानकी? कंधी बच्ची पत्थर सभी जंगल से और चलेंगे जंगल की गहराई में जहां से पाताल जाने का रास्ता अचानक खेलो बोला सब लोग अपनी आंखे बंद कर लो तो बार बार लगेगा कि कोई तुम्हें आंखे खोलने को कह रहा है । ऍम पर बिल्कुल भी ध्यान मत देना । अपनी आंख ही तब तक मत खोलना जब तक हमारा हवा में छोडना बंद हो जाएगा पर ना सब के सब ऊपर आसमान में चले जाओ की फिर वहां पर धरती पर कभी नहीं लौट सकोगे । फॅमिली नहीं हूँ आपके पिता होगा ना । उन लोगों के बीच में पूरी बडी याद आ सी बोली हूँ । हाँ हाँ क्यों नहीं हर जब आपन करोड जाएंगे ना तब तुम भी उनके साथ जोडकर किसी समंदर में ले जाना, हर जिंदगी भर तैसी रहना । पीलू हसते हुए बोला कि सुनकर दूरी टूट गई और उसने सुलेमान को कसकर पकड लिया । सुल्तानी देखकर मुस्कुराए और इतनी सबके साथ अपनी आंखे बंद कर दिया । उन्हें ऐसा लग रहा था जैसी भी लोग नीचे की ओर बहुत तेजी से बढते जा रहे हैं । सुल्तान और सुलेमान को ऐसा लग रहा था जैसे बहुत सारे हाथ उन्हें उडनी से रोकने की कोशिश कर रही थी और उनके शरीर से टकराकर आर पांच निकाले जा रही थी । पूरी को तो गुदगुदी भी हो रही थी पर इस बार वही बिल्कुल चुप की समंदर में रहने वाली पांच उसकी दिमाग से अभी पूरी तरह से उतरी नहीं थी । तब ही सुल्तान के कान में पीलू की आवासा आंखें खोलो । सुल्तान आंखे खोलने ही वाला था कि पीलू की आवाज दुबारा कोई भी यहाँ के मत खोलना । ये आवाजें तुम्हें हमारी भी लग सकती हैं । ये सुनकर सुल्तान सावधान हो गया और उसने चोरसिया की भी चाहिए । तभी अचानक उन लोगों को लगता कि उनके पैर मुलायम खास पर पर ठंडी हवा की इच्छा हूँ कि उन्हें चारों ओर से छू रहे हैं । अब जैसे एक नई ताजगी और स्फूर्ति से भरो थे तभी खेलू तो हम पाता लोग पहुंच गई । अब तुम सब अपनी आंखें खोल सकते हो, दूरी नहीं सुन कर अपनी आंखें और जोर से बंद कर ली और कहाँ पता ऍम बोल रही हूँ और मुझे ऍम ये सुनकर पीलो जोरों से हंसा और बोला देखो अब हमारा नीचे की तरफ उतरना बंद हो गया है क्योंकि इस समय हम पाताललोक दिखा रहे हैं । ये सुनकर अपनी अपनी आंखें खोली । सामने का दृश्य देखते हैं जिससे सबको अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ । सामने एक में ही था नहीं हुई का बना हुआ था अंधावा के साथ बडी ही आराम से हिंसा ऍफ है जा रहा था महल मेहरन विरंगे नगीने जडे हुए थे जिस चमकीली धूम के कारण हम चक मैं कह रही थी विमान थोडा रूई की इस महल में लोग क्या सहारा समय हिलते डुलते नहीं होंगे । हिलाना तो छोडू क्या ये मैं टूट नहीं जाता होगा । आखिर हुई कितनी लोगों का बहुत संभाल सकती हैं हरी रुई के इसमें हेल्थ से तो हल्की हल्की नीली रोशनी भी निकल रही है । सुल्तान में हैरान होते हुए कहा हाँ मुझे लगता है जैसे किसी का ऍम तो उठकर गिर गया है और जैसे ही देखेंगे हनीशा की तरह भूरी खुश होते हुए बोल । उसके बाद सुनकर पीलू और किलों ने ऐसा जोर से कहाँ काला जाए कि वहाँ खडी पेड भी हल्के से कम थी । सुलेमान इधर उधर गौर से देखते हुए पूरा करिए जी पार्टी ना हमें तो कोई इंसान या जानवर यहाँ पर दिखाई नहीं दे रहा हूँ । चलो अंदर चल कर देखती है । संता ने जवाब दिया जैसी जैसी भी लोग महल की पास जा रहे थे उन्हें ठंड लग रही थी । आपने हेल के पास पहुंचते ही नहीं लगा कि ठंड के मारे सब अगर जाएंगे सुल्तान थोडा भरी तो बस काम है दूरी तुरंत सुलेमानकी कंधे से को दी मेरी तो दूध का ही नहीं है । मैं क्या झटकर देखो था क्या जाओ तुम्हारी सुबह नगर हमेशा के लिए महल से चिपक जाये तो हम ले लेंगे और तो गूंगी होगी तो हम सबको मजा ही आ जाएगा । सुल्तान मुस्कुराते हुए बोला तो फॅमिली नहीं हूँ । ऍम बोरी ने घबराते हुए कहा । तीलू बुरी से बोला अब अगर तुम्हारी बागपत बंद हो गई हो तो क्या हम अंदर चले ऍम ऍम बडी गुस्से से बोल और पूछ कर वहाँ पर सुलीमान की कंधे पर चढ के आस पास में हैं । इसके सिवा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था । तीनों ने धीमी कदमों से आगे बढते हुए महल के अंदर प्रवेश किया । जब भी लोग अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर अचंभित रहेंगे हूँ करके सामने एक बहुत बडा सिंहासन था जिसपर सुलतान का हमशक्ल बैठक उसकी सर पर बर्फ के नुकीले तीनों का मुकुट था जिससे उसकी नाथ ही पर सिंह क्यों हो गए और उन से खून टपक रहा था तो सभी को यह देखकर जैसे साठ मार्क सुलीमान हकलाता हुआ फॅमिली सामने बैठी हूँ । सुल्तान सुलीमान की बातों को अनसुना करते हुए आगे बढा और अचानक ही उसे लगा कि वह हवा में कह रहा है और देखते ही देखते वह तो बारी साहब हवा में उन्हें लगा ये देखकर जैसे ही सुलीमान आगे बढा सुल्तान जोर से चिल्लाया आगे कदम मत बनाना क्या तुम मेरी तरह हवा में उडने कमाना है । उसकी चिल्लाने की आवाज सुनकर सुल्तान के हमशक्ल ने बडी ही मुश्किल से अपनी करतन उठाई जो पर तीनों की भाग के कारण नीचे चुकी जा रही थी । सुल्तान को देखकर उसकी तरफ भरे चेहरे पर एक सी की मुस्काना थे और वह बोला हूॅं जो अभी भी हवा में उड रहा था । अश्चर्यचकित रह गया आंदोलन क्या तुम जानती थी कि मैं आऊंगा । आप ना चाहते हुए भी सुल्तान बार बार दीवार में लड रहा था जिससे उसके पैरों में भी इन्तहां दर्द होने लगा । नीचे खडे सुलेमान दूरी और पीलू खेलू सुल्तान की मदद चाहकर भी जैसी नहीं कर पा रही थी । नहीं ऐसा महसूस हो रहा था जैसी ठंड सी चल चुकी संस्थान अपने आपको उत्पादनों से छुडाने की काफी कोशिश कर रहा था आपने मैं तो नहीं बचाने आया था लेकिन लेकिन अब खुद में यहाँ पर क्या हूँ? तभी सुलतान का हमशक्ल राजा बोला हूॅं हो हो हो हो । सुल्तान को यह सुनते ही फतेह किया था होता मेरी मेरी सुलेमान, मुझे तुम्हारी जादुई वस्तुओं की आवश्यकता होगी । क्या तुम किसी तरह पाते तो जंगल से यहाँ पाता लोग नहीं ला सकते हो तुम चिंता मत करो मैंने मामा जान द्वारा दिया हुआ जादुई मोदी पहले ही पता की गले में बांध दिया है । बस तो मुझे आवाज दे दो । मैं भूल आपसे पाता लोग तक भी पहुंच जाएगा । सुलेमान ने सुल्तान की तरफ देख कर कहा उसने जोर से आवाज लगाई मेरे दो पाते हैं मुझे तुम्हारी जरूरत है । मैं यहाँ पाता लोग नहीं हूँ । जल्दी मेरे भाषाओ पाते जो मीलों दूर की आवाज को भी बडे आराम से सुन सकता था । पलक झपकते ही वह सुल्तान के आवाज की दिशा में दौड पडा । सुलेमान के दिए हुए जादुई मोतियों की मदद से फॅस की दिशा में होता है । तब वो लोग से पाता । लोग पहुंच गया तो उसे खुद पता नहीं चला । वहाँ लोगों में पहुंचते हैं जैसे ही फतेह महल के अंदर पहुंचा तो सुल्तान का चेहरा खुशी से खेलो था । मैं जोर से चिल्लाया मेरे भाई जल्दी से इस बार दल के टुकडे को मुझ से अलग और ये क्या? सुल्तान की बात का फतेह ने कोई जवाब नहीं दिया । नहीं वहाँ पर चुपचाप खडा रहा ये देखकर सुल्तान थोडा और जोर से बोला ॅ जल्दी ऍम और इस बार ऍम पर पाते ना तो हिला और न ही बोला बिल्कुल सुनना खडा था । सुल्तान गुस्से से तमतमाता हुआ बोला पता है मैंने तुझे सबसे बढकर मना है और तो मेरी बात नहीं होना है क्या हो गया है । तो ये सुनकर उसका हमशक्ल राजा बडी मुश्किल से अपना सिर्फ धीरे से उठाता हुआ बोला हूँ हूँ हूँ सुल्तान हैरत से बोला मुझे तुम्हारी बात समझ में नहीं आ रही हमशक्ल राजा पूरा तो हो गया है हूँ हूँ हूँ सुल्तान नहीं सुनते ही पता है कि पहरों की तरफ देखा जितनी लंबी और काली बहुत सारी जो चिपक के उसका खून पी रही थी । सुल्तान यहाॅ उठा । उसने मदद के लिए सुलेमान को पुकारना चाहा । पच्चीसी उसकी आवासी बन्दों कहीं तभी हमशक्ल राजा कराहते हुए पूरा हो हूँ पर मैं तो मर जाऊंगा उसमें गिरकर मैं तो सूखा हुआ है । सुल्तान घबराता हुआ बोला उसकी आवाज सेवायोजना जा की कोई नहीं सुन रहा था । सुलीमान किसी तेल इसमें सम्मोहन की वजह से कुछ भी समझ नहीं पा रहा था । नहीं नहीं हूँ चीज मिलती ही नहीं है । समझ ने यहाँ ताकि मैं हमारी बातों पर विश्वास करो या नहीं । लेकिन मेरे पास कोई और चारा नहीं है । में तो सिर्फ तुम्हारी मदद करने आया हूँ । अब तुम कहते हो तो चलो । मैं अपनी जान का जोखिम भी उठाने को तैयार हूँ । अगर मुझे कुछ हो जाता है तो मेरे दोस्तों को यहाँ से जरूर आजाद कर देना हूँ हूँ सुल्तान ये सुनकर थोडा सा डरते हुई कोई के अंदर क्या क्या तर्राष् चल रही है उसके खेलते ही वहाँ पर बहुत मोटी और मुलायम मखमली करते हैं । हाँ, जिसके कारण उसी तरह साफ ही तट नहीं हुआ

भाग - 04

हूँ । ऍम हूॅं हमारा नाम की लू और तीन हैं । आज तुम्हारे शहद के कारण ही हम अपना असली रूप वापस आ चुके बोलो हम तुम्हारी क्या सहायता कर सकते हैं? उन्नीस पीले रंग वाला बोला भूरी बिल्ली चिल्लाई ऍम ये सुनकर खेलो और पीलो हंस पडे और धीरे धीरे अपना आकाश चाहते हुए आदमकद हो गए । खेलूं जो लहसन का दिखाई दे रहा था उसको रहते हुए बोला बोलो हम तुम्हारी क्या सहायता करें तो क्या तुम सुल्तान की हमशक्ल नहीं हो सुनी? मानने हैरानी से पूछा क्या हम तो मैं तुम्हारे मित्र की शक्ल की नजर आते हैं । हम तो खुद आपस में भी जुडवा नहीं । पीलू ने खेलों की तरफ देख कर कहा । सुल्तान ने मुस्कुराते हुए उनकी तरफ देखा और कहा था बिलकुल मेरी शक्ल सूरत की नहीं हो मित्र । बात ये हैं कि यहाँ से कोई रास्ता पाताललोक की ओर जाता है । क्या तुम हमें वहाँ तक पहुंचा सकती हूँ? पांच साल लोग भला तुम पांच लोग क्यों जाना चाहती हूँ? पीलू नहीं हैरानी से पूछा फॅमिली तो दोनों के हो के हम तुम्हारी फॅमिली है तो फॅमिली हुआ पूरी नहीं चेते हुएकहा हाॅल बात ये है कि हम मेरी जैसे देखने वाले सात चेहरों की तलाश में निकले हैं । किसी तरह की मुसीबत में हैं और बीवी सहायता चाहते हैं । हम बहुत दूर से आए हैं और जब तक हम मेरी जैसी दूसरी शक्ल वाले आदमी को ढूंढ कर उसकी सहायता नहीं करते तब तक तब हमारी साथ हूँ । हमें यह जानकर बहुत खुशी हुई कि तुमने इरादों के साथ इतनी दूर हूँ और किसी की मदद के लिए पाकिस्तान लोग जाना चाहती हूँ । हमें इस बात की खुशी हुई कि संसार में अब तक आप जैसे लोग मौजूद हैं जो दूसरों की मदद के लिए इतनी दूर यात्रा करके आते हैं । शुक्रिया दो उन की मदद के लिए तुम से हमारी इतनी मदद करो हमें पाकिस्तान लोगों तक पहुंचा तो इतनी सी बात हम चलते हैं ना साथ थी तुम हमारे कंधी पर मैं चाहूँ ऍम भूरी बिल्ली हमेशा की तरह बोले बिना ना रहे सके तीनों और खेल हूँ उस की ये बात सुनकर जोर से हंस पर फतेह तुम हमारा यही इंतजार करना । हम जल्दी लौट कराएंगे के कल सुल्तान ने फतेह को उसी पेड के नीचे रुकने का इशारा किया पर रहने से रहना कर ही बनाया जैसी वह सुल्तान की बात समझ गया था । पीलो खेलों ने अपना आकार बढा लिया । सुल्तान पीलू के और सुलेमान खेलों की कंधे पर बैठ क्या पूरी सुलेमानकी कंधे, बच्ची, पत्थर सभी जंगल से और चलेंगे जंगल की गहराई में जहां से पाताल जाने का रास्ता अचानक खेलो बोला सब लोग अपनी आंखे बंद कर लो तो बार बार लगेगा कि कोई तुम्हें आंखे खोलने को कह रहा है । ऍम पर बिल्कुल भी ध्यान मत देना । अपनी आंख ही तब तक मत खोलना जब तक हमारा हवा में छोडना बंद हो जाएगा पर ना सब के सब ऊपर आसमान में चले जाओ की फिर वहां पर धरती पर कभी नहीं लौट होगी । फॅमिली नहीं हूँ के होगा ना आप लोगों के बीच में भूरी बडी याद आ सी बोली हूँ । हाँ हाँ क्यों नहीं हर जब आपन करोड जाएंगे ना तब तुम भी उनके साथ जोडकर किसी समंदर में सियाना हर जिंदगी भर तैसी रहना । पीलू हसते हुए बोला कि सुनकर दूरी टूट गई और उसने सुलेमान को कसकर पकड लिया । सुल्तानी देखकर मुस्कुराए और इतनी सबके साथ अपनी आंखे बंद कर दिया । उन्हें ऐसा लग रहा था जैसी भी लोग नीचे की ओर बहुत तेजी से बडे जा रहे हैं । सुल्तान सुलेमान को ऐसा लग रहा था जैसे बहुत सारे हाथ उन्ही उडनी से रोकने की कोशिश कर रही थी और उनके शरीर से टकराकर आर पांच निकाले जा रही थी । पूरी को तो गुदगुदी भी हो रही थी पर इस बार वही बिल्कुल चुप की समंदर में रहने वाली पांच उसकी दिमाग से अभी पूरी तरह से उतरी नहीं थी । तब ही सुल्तान के कानूनी पीलू की आवाज आंखें खोलो सुनता हूँ, आंखे खोलने ही वाला था । पीलू की आवाज दुबारा कोई भी हाँ कीमत खोलना ये आवाजें तुम्हें हमारी भी लग सकती हैं । ये सुनकर सुल्तान सावधान हो गया और उसने चोरसिया की भी चाहिए । तभी अचानक उन लोगों को लगता कि उनके पैर मुलायम खास पर ठंडी हवा की इच्छाओं के उन्हें चारों ओर से छू रहे हैं । सब जैसे एक नई ताजगी और स्फूर्ति से भरो थे । तभी खेलू बोला तो हम पाता लोग पहुंच गई । अब तुम सब अपनी आंखें खोल सकते हो, दूरी नहीं सुन कर अपनी आंखें और जोर से बंद कर ली और कहाँ पता ऍम बोल रही हूँ और मुझे ऍम ये सुनकर पीलो जोरों से हंसा और बोला देखो अब हमारा नीचे की तरफ उतरना बंद हो गया है क्योंकि इस समय हम पाताललोक दिखा रहे हैं । ये सुनकर अपनी अपनी आंखें खोली । सामने का दृश्य देखते हैं जिससे सबको अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ । सामने एक महिना नहीं हुई का बना हुआ था अंधावा के साथ बडी ही आराम से हिंसा ऍफ है जा रहा था । महल में रंग बिरंगे नगीने जडे हुए थे । चमकीली धूप के कारण चक मैं कह रही थी सिमान थोडा रुई के इस महल में लोग क्या सहारा समय हिलते डुलते नहीं होंगे । हिलाना तो छू क्या ये मैं टूट नहीं चाहता होगा । आखिर हुई कितनी लोगों का बहुत संभाल सकती हैं हरी रुई के इसमें हेल्थ से तो हल्की हल्की नीली रोशनी भी निकल रही है । सुल्तान में हैरान होते हुए कहा हाँ मुझे लगता है जैसे किसी का ऍम तो उठकर गिर गया है और उसके साथ ही लेकर गए हनीशा की तरह । भूरी खुश होते हुए बोली । उसकी बात सुनकर पीलू और खेलों ने ऐसा जोर से कहाँ काला जाए कि वहाँ खडी पेड भी हल्के से कम थी । सुलेमान इधर उधर गौर से देखते हुए पूरा करिए जी पाते ना हमें तो कोई इंसान या जानवर यहाँ पर दिखाई नहीं दे रहा हूँ । चलो अंदर चलकर देखते हैं संतान नहीं जवाब दिया जैसी जैसी भी लोग महल की पांच जा रहे थे । उन्हें ठंड लग रही थी । आपने हेल के पास पहुंचते ही नहीं लगा कि ठंड के मारे सब अगर जाएंगे सुल्तान थोडा भरी तो बस काम है दूरी तुरंत सुलेमानकी कंधे से को दी । मेरी तो दूध का ही नहीं है । मैं क्या झटकर देखो हाँ क्या जाओ तुम्हारी सुबह नगर हमेशा के लिए महल से चिपक जाएं तो की लेंगे और तो गूंगी होगी तो हम सबको मजा ही आ जाएगा । सुल्तान मुस्कुराते हुए बोला तो एक दम मैंने सोचा ही नहीं था । ऍम भूरी नहीं घबराते हुए कहा । पीलू बुरी से बोला अब अगर तुम्हारी बागपत बंद हो गई हो तो क्या हम अंदर चले ऍम ऍम बडी गुस्से से बोल और पूछ कर वहाँ पर सुलीमान की कंधे पर चढ के आस पास इस महल के सिवा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था । तीनों ने धीमी कदमों से आगे बढते हुए महल के अंदर प्रवेश किया । जब भी लोग अंदर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर अचंभित रहते हैं, करते हूँ सामने एक बहुत बडा सिंहासन था जिस पर सुलतान का हमशक्ल बैठक उसकी सर पर बर्फ के नुकीले तीनों का मुकुट था जिससे उसकी नाथ ही पर सैंकडों हो गए थे और उनसे खून टपक रहा था । सभी को यही ठीक कर जैसे साठ मार्क सुनी मान हकलाता हॅूं । सुल्तान सुन ईमान की बातों को अनसुना करते हुए आगे बढा ऍसे लगा कि वह हवा में कह रहा है और देखते ही देखते हुए हैं भारी साहब हवा में होने लगा यह देखकर जैसे ही सुलीमान आगे बढा सुल्तान जोर से चिल्लाया आगे कदम मत बनाना क्या तुम मेरी तरह हवा में उड नहीं कमाना है । उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर सुल्तान के हमशक्ल ने बडी ही मुश्किल से अपनी करतन उठाई जो पर के तीनों की भाग के कारण नीचे चुकी जा रही थी । सुल्तान को देख उसकी तरफ भरे चेहरे पर एक फीट की मुस्कान थी । कॅश मैं चाहूंगा सुल्तान जो अभी भी हवा में उड रहा था अश्चर्यचकित रह गया और दुल्हन क्या तुम जानती थी कि मैं आऊंगा । हाँ चन्दन था । आप ना चाहते हुए भी सुल्तान बार बार दीवार में लड रहा था जिससे उसके पैरों में भी इन्तहां दर्द होने लगा । नीचे खडे सुलेमान दूरी और पीलू खेलू सुल्तान की मदद चाहकर भी जैसी नहीं कर पा रही थी । उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वे ठंड सी हो चुकी है । सुल्तान ऍसे छुडाने की काफी कोशिश कर रहा हूँ । मैं मैं तो नहीं चाहते आया था, लेकिन लेकिन अब खुद में यहाँ पर क्या हूँ? तभी सुलतान का हमशक्ल राजा बोला ऍम को कोई घोडा कपील पहुंॅच हमारी ऍम जाएगा । यही फॅमिली लेगा, जिसके कारण मैं यहाँ ऍम सुल्तान को यह सुनते ही फतेह किया था । मेरे मेरे सुलेमान, मुझे तुम्हारी जादुई वस्तुओं की आवश्यकता होगी । क्या तुम किसी तरह पाते तो जंगल से यहाँ पाता लोग नहीं ला सकते हो तुम चिंता मत करो मैंने मामा जान द्वारा दिया हुआ जादुई मोदी पहले ही पता की गले में बांध दिया है तो मुझे आवाज दे दो । मैं भूल लोग से पाता, लोग तक भी पहुंच जाएगा । सुलेमान ने सुल्तान की तरफ देख कर कहा उसने जोर से आवाज लगाई मेरे मुँह पाते हैं, मुझे तुम्हारी जरूरत है । मैं यहाँ बंदा लोग नहीं हूँ । जल्दी मेरे भाषाओ अच्छा जो मीलों दूर की आवास को भी बडे आराम से सुन सकता था । पलक झपकते ही वह सुल्तान की आवाज की दिशा में दौड पडा । सुलेमान के दिए हुए जादुई मोतियों की मदद से मैं एडवांस की दिशा में होता रहा । तब वो लोग से पाता लोग पहुंच गया । उसे खुद पता नहीं चला । वहाँ लोगों में पहुंचते हैं । जैसे ही फतेह महल के अंदर पहुंचा तो सुल्तान का चेहरा खुशी से खेलो था । मैं जोर से चिल्लाया मेरे भाई जल्दी से इस बार दल के टुकडे को मुझसे अलग का और ये क्या? सुल्तान की बात का फतेह ने कोई जवाब नहीं दिया । नहीं वहाँ पर चुपचाप खडा रहा । ये देखकर सुल्तान थोडा और जोर से बोला तो है जल्दी ॅ पर पाते ना तो हिला और न ही बोला बिल्कुल सुनना खडा था । सुल्तान गुस्से से तमतमाता हुआ बोला तो मैंने तुझे सबसे बढकर मना है और तो मेरी बात नहीं होना है क्या हो गया है । तो ये सुनकर उसका हमशक्ल राजा बडी मुश्किल से अपना से धीरे से उठाता हुआ बोला ऍम ही फॅमिली यहाँ की तरह हूँ । सुल्तान हैरत से बोला मुझे तुम्हारी बात समझ में नहीं आ रही । हमशक्ल राजा पूरा हूँ । यहाँ ही प्रभाव से भूल ठीक हो गया है । ऍम हो रहा है । फॅमिली हो सकता है उसके लिए हो, सुल्तान नहीं । सुनते ही पता है कि पैरों की तरफ देखा । जितनी लंबी और काली बहुत सारी जो चिपक के उसका खून पी रही थी । सुल्तान रहती कस्टर्ड से तरफ उठा । उसने मदद के लिए सुलेमान को पुकारना चाहा पच्चीसी उसकी आवाज ही बंद हो गए । तभी हम शक्ल राजा कराहते हुए पूरा ॅ ऍम देखा है पर मैं तो मर जाऊंगा उसमें गिरकर मैं तो सूखा कुमार है । सुल्तान घबराता हुआ बोला उसकी आवाज सेवायोजना जाके कोई नहीं सुन रहा था । सुलीमान किसी तेल इसमें सम्मोहन की वजह से कुछ भी समझ नहीं पा रहा था । नहीं नहीं तो वहाँ कोई आ रही है क्या? ऍम फॅसा सिर्फ भिंडी नहीं हूँ कि जो नहीं आएगी समझ ने यहाँ ताकि मैं हमारी बातों पर विश्वास करो या नहीं । लेकिन मेरे पास कोई और चारा नहीं है । में तो सिर्फ तुम्हारी मदद करने आया हूँ । अब तुम कहते हो तो चलो । मैं अपनी जान का जोखिम भी उठाने को तैयार हूँ । अगर मुझे कुछ हो जाता है तो मेरे दोस्तों को यहाँ से जरूर आजाद कर देना । ऍम ऍम हूँ मैं सुल्तान । ये सुनकर थोडा सा डरते हुई कोई के अंदर क्यूट क्या तलाश चल ही उसके खेलते ही वहाँ पर बहुत मोटी और मुलायम मखमली करते हैं । हाँ, जिसके कारण उसी तरह साफ ही तट नहीं हुआ

भाग - 05

हूँ । ऍम अपने यहाँ को संभालने के बाद सुन गांधी इधर उधर देखा तो उसे कोई भी दिखाई नहीं दिया । वही रहन हुआ कि अभी अभी तो सब यही थी सब कहाँ चले गए । सुल्तान ने अब जोर से सुलेमान को आवाज लगाई पर सुलेमान अभी भी कहीं भी नजर नहीं आ रहा था । सुल्तान कभी भी बादलों से घिरा हुआ था और पूरी तरह से आसान नहीं था । तभी अचानक अपनी सामने बनी इक्कट्ठे से झूम क्योंकि लंबी बॅास को जाते हुए देखा जो फतेह की पहरों का खून चूसने के लिए जा रही थी । उसने पाते की ओर देखा जिसकी आंखों से मोटी मोटी आँसू की रही थी । सुल्तान कातिल गहलोत तो कुछ सीमित काम का हुआ उठा और पांच ही चल रही मशाल को उसी गड्ढे में डांस दिया जिससे सारी जो चटकी आवास करती हुई चलने लगी । पति के पैरों से भी चिपकी हुई जोंक जैसी कर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी भी उसके पैरों से छिटक कर टूट हो गई और अपने आप ही उस आग में उन जूंगअंग के पीछे कूद गई । युवकों के हटते ही फतेह आसान हो गया और हवा की गति से उछलकर उसने बहुत के टुकडे को बडी फट तीस से अपनी पूंछ भरी बांदल सुल्तान से अलग होकर सीधा उसके हमशक्ल राजा की सिर्फ पटना की बर्फ के पडे नुकीले तारों नहीं जा सकता और ये के करके सारी टीवी बांधन के अंदर चली । हमशक्ल राजा उनके लिए तारों के तरफ से मुक्त हो गया । तब ही वहाँ पर जमती हुई पिछली चमक नहीं लेगी और पाटल कडकडाने की हमशक्ल राजा के जख्म भी आॅफर नहीं लगी और वह बिल्कुल स्वस्थ हो गया । नहीं तोडकर सुल्तान के गले से लिपट गया और खुशी के मारे फूट फूटकर हो नहीं था । नहीं, अपनी खुशी को शब्दों के द्वारा व्यक्त नहीं कर पाया और सुल्तान के पैरों की तरफ झुक नहीं लगा । सुल्तान ने भावुक होते हुए उसी जोर से कल से लगा दिया । सुल्तान बोला, मेरी सारे दोस्त कहाँ चले गए, अपनी सब में है, इसकी बाहर हैं क्योंकि उन्हीं यहाँ के तिलिस् मैंने जादू से बाहर कर दिया था । पर हमें भी यहाँ नहीं रुकना चाहिए क्योंकि कुछ देर बाद ही यहाँ पर पानी पानी भर जाएगा और हम सब उसपे टू चाहेंगे । सुल्तान बोला बिल्कुल चिंता मत करो । पाते हैं ना हमें पालक पत्ती यहाँ से बाहर पहुंचा देगा । फतेह ने ये बात सुनकर अपनी आगे की दो पैर उठाकर ऍम दिया । सुल्तान बडे ही प्यार से उसकी काली में बही डालता हुआ बोला हम सब साथ मैचिंग पर अभी हमें यहाँ से जल्दी से निकलना है । खेती हुई सुल्तान हम शक्ति राजा के साथ फतेह पाँच चढ गया और जब तक वे अपनी पालक बंद करती तब तक पाते । उन्हें लेकर महल के बाहर जा चुका था । सुल्तान में बाहर पहुंच कर देखा कि सुलेमान के कंधे पर धूरी बैठी हुई है और पीलू और खेलूं एक पेड को हाथ में पकडकर हवा में नाच रहे हैं । सभी को सुरक्षित ठीक संस्थान बना ही खुश हुआ । उसके फतेह को उनकी पास पहुंच कर रुकने के लिए कहा । सुलेमान सुल्तान को देखकर उसकी फॅसा हुआ या और बोला हमें यकीन था सुल्तान कितना सुरक्षित बाहर नहीं कहता हूँ कि पता नहीं क्या हुआ जैसे कोई दूसरा था पूरा, अगले ही पल हम उसमें है से बाहर गई थी कि किसी तरह का माया भी लोक लगता है । मुझे तो पता नहीं क्यूँ पर मुझे अभी और खतरे का आभास होने लगा है । सुनता हमें तुरंत अब यहाँ से बाहर निकल जाना चाहिए । सुलीमान चिंता की कोई बात नहीं है । जी इस बात की खुशी है कि तुम सब सुरक्षित हो । मैं भी इस हमशक्ल राजा के साथ मैं से सुरक्षित बाहर लौट आया हूँ । कभी कभी तो लगता है अगर पाते हैं मेरे साथ नहीं होता और तुम सब मेरी साथ नहीं होती तो मैं ये जंग केले कैसे जीतता जैसे दोस्तों को पाकर मुझे बहुत खुशी है । चलो अब हमें अपनी मंजिल की तरफ आंगी पढते रहना है । पेहना काम तो सफल हुआ । सुल्तान ने पूछा तो महाराज नाम तो मैं पूछना ही भूल गया । अपना चाहती हुई थी । हमशक्ल रहा था की आंखों में आंसू झिलमिला उठे । सिकंदर सुल्तान अगर तुम्हारी इजाजत हो तो हम हम सबके साथ हमेशा रहना चाहते हैं । आखिर कर अब तुम सभी हम तो उनके परिवार की तरह भी हो । पीलू खेलों की बातें सुनकर सभी ने मुस्कुराकर उन्हें साथ रहने की सहमती दी थी । अपना परिवार मिलने की खुशी में पीलू और खेलूं मैं रहे थे घर ही भाई तीलू और खेलो तुम दोनों हाथ में पेड को लेकर के होना चाहिए हूँ । क्या तुम पाताल रोक में रुकना है? तुम्हारा फैसला यही रोकने है भी तो कम से कम हमें धरती लोग पर तो पहुंचा तो सुलीमान ने कहा कि अभी जोर से हंसते की पीलू और खेलों ने पीढी को सुरक्षित बगल में रख दिया और हम हम ही आके धरे नहीं नहीं सुनता हम डबल खुशी में ना सही थी हमें तो बस तो सभी के साथ ही रहना है । सुल्तान सिकंदर की तरफ देख के कुछ कराते हुए बोला हम तुम्हें तुम्हारे तीस छोड देती हैं । उसके बाद हम आगे के सफर पर निकलेंगे । सिकंदर नहीं है । शंकर कृषि के बारे सुल्तान को गले से लगा दिया । सुनता सुलीमान से बोल रहा हूँ तुम और पूरी पीलू और सीलों की कंधी पर बैठी हूँ । अन्य सिकंदर के साथ पाते के साथ जाता हूँ । भूरी बनाते हुए बोली नहीं तो चलती हूँ तब हूँ । ॅ हूँ सुल्तान धीमी ऍम दिया क्योंकि वही जनता था की भूरी सी फूलने में कोई नहीं जीत सकता । अपनी पहली हमशक्ल की जान बचाकर सुल्तान बहुत खुश था । वहीं सुलेमान उस तिलस्मी जादू आने हार्ड इसी के बारे में फिक्रमंद था । वेपंस आगे आने वाले किसी भी तरह के खतरे से सुल्तान को सुरक्षित रखना चाहता था । पीलू और खेलों ने सुलीमान को अपने कंधे पर बिठा दिया । अभी दोनों आसमान की ओर ढीले की । यहाँ से दक्षिण दिशा की ओर चलने पर चारों ओर तुम्हें गुलाब की पीठ दिखाई देंगी । यू । पी । ली न रिंकी, काली और सफेद रंग के होंगे । बस उन्हीं के बीच में एक बहुत बडा सफेद संगमर्मर का में है । दिखेगा सही नहीं है । कहती हुई सिकंदर की आंखें छरछरा होती तो हाँ बिल्कुल । हम बस अभी पांच जाएंगे । सुल्तान मुस्कराकर बोला नहीं, नहीं तो यहाँ से बहुत दूर है इतनी दूर कितनी कल्पना भी नहीं कर सकते हम ई शायद कई दिन और उससे भी कहीं ज्यादा राते लग जाएंगी तो मेरे पति को नहीं जानते हो ना कभी ऐसी बातें कर रही हूँ की हो पाते हैं और अब तो भेज के पार से जादुई मोटी भी है । सुल्तान नहीं प्यार सी प्रदेश को कुछ करते हुए कहा फतेह सुल्तान से अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हो गया और जोर जोर से हिंदी ही ना कर अपना प्यार दिखा नहीं हूँ । फट ही जल्दी से सुल्तान के बताए हुए रास्ते पर पहुंचे और सिकंदर तो अपनी आंखे बंद कर लो । सुल्तान ने प्रदेश को यहाँ सी थपथपाती हुई का अगले ही पल फतेह फॅार को अपनी पीठ पर बैठाकर हवा की गति से तीस भाग नहीं हूँ । अगले ही पल भी अपनी मंजिल पर पहुंच चुकी थी । कुछ ही देर पांच सिकंदर को गुलाब के फूलों की मैं गाने लेगी तो उसकी आंख की अपने आप ही खुल गई । मैं अपनी महल के बाहर भी सारी गुलाबों के बीच भी खडा था । सुल्तान घोडी से होता था हुआ बोला तुम्हारा मैं चला गया । तुम जान कर अपने परिवार वालों से मिलो, हमें है आप चलता हूँ नहीं नहीं मैं तो नहीं जाने दूंगा । कहती हुई सिकंदर उसकी गाली सिलत कर बच्चों की तरह सुबह नहीं था । तब तक सुलीमान और पूरी भी की लू और पीलो के साथ गई थी । वे सब भी सिकंदर को रोता देखकर दुखी होते हुए खडी थी । कभी हमेशा की तरह पूरी पीली टोली पहली सेकंड इसकी रो रहा था कि वे घर से दो और ये हो रहा हैं तो फॅमिली है मुझे तो इंसान ऍम बुरी । दिल्ली की बात सुनकर सभी कहाँ का मार्कर हंस पडे । सिकंदर के होठों पर भी मुस्कान आ गई । सिकंदर को कुश्ती सुधान पाॅलिसी तरह से कम हंसते मुस्कुराते रहना अब तुम्हारी दुख की सारे दिन कर चुके हैं । सुल्तान का इतना अपनापन टेक सिकंदर की आंखों में यहाँ से वहाँ की और उसकी तब तब आती हुई आंखों से अपने हाथ में जगमगाती हुई हीरे की अंगूठी निकालेंगे और सुल्तान की दायें हाथ के बीच वाली उंगली में बहना थी । सुल्तान कुछ पूछता इससे पहले सिकंदर बोला ना मत करना मेरे तो एक जादुई अंगूठी है । जात हुई अंगूठी सुनकर भूरी संस्थान के कंधे से कूटकर सुलेमानकी कंधे पर आकर पहले गई और चुप कर ध्यान से अंगूठी की तरफ देखती ले कि उसको इस तरह गोल गोल लांखी ना चाहता थी । कल सिकंदर और सुल्तान जोर से हंस पडी । सुलेमान पीलू और खेलों के साथ अपनी हंसी रोक नहीं सका । सुलेमान मुस्कुराता हुआ आगे बढा और सिकंदर की तरफ देखते हुए बोला, तीस अंगूठी में ऐसी क्या खास बात है? मेरे तो सिकंदर ने अंगूठी की तरफ गोवा से देखते हुए कहा मेरी नानी बहुत बडी ज्यादा थी । उन्होंने कई तरह की जिन और प्रिया सिद्ध कर रखी थी । कई बार उन्होंने उन लोगों की मदद की जिसके कारण सपने खुश हो गए । उन्हें यह जादुई अंगूठी दी थी । फिर अंगूठी को जब भी तीन बाई हाथ के अंगूठे से होगी तो हम जितना चाहूँ उतनी प्रिया और जिनमें तुम्हारी मदद के लिए आ जाएंगे । ये सुनकर सुल्तान अचानक से सिकंदर की तरफ देखने लगा । तभी हमेशा की तरह ही भूरी लपक कर बोली ब्लॅक तो तुम नहीं क्यों नहीं फॅमिली तो तो इतनी सालों से कैद थी । सुनी माननी जब गुस्से में खून कर बुरी की तरफ देखा तो पूरी नहीं, डरकर सुल्तान की गली में आॅन कर ली । सिकंदर नहीं पडी ही प्यार से पूरी की सिर्फ पर हाथ लेते हुए कहा सुलीमान इसपे पूरी के ऊपर नाराज मत हो उसने बिल्कुल सही कृष्णा क्या है? ऍफ नहीं । मुझे सालों से कैद कर रखा था । उसको ईस अंगूठी के बारे में पता था । इसलिए कुछ मेरे हाथों को एक अदृश्य रस्सी से सिंघासन के दोनों हाथ पर पांच रखा था । संस्थान ने दुखी होती हुई जमा थी । संस्थान को यहाँ आया कि जब उसकी पहली बार सुल्तान को बर्फ की नुकीली कारों से बंधे हुए देखा था तो उसे सोचा भी था की सीट कर इतनी नुकीली तारों की चुप नहीं के बावजूद थी की पहचान अति हाथों को आराम से सिंहासन पर रखी बैठा है । पर उन्हें निकाल क्यों नहीं रहा? फिर ये अंगूठी उन लोगों ने तुमसे चीन क्यों नहीं? आखिर ऐसी नायाब अंगूठी तो पूरी संसार में दूसरी नहीं होगी । सुलतान सिकंदर से बोला हाँ तुम बिल्कुल ठीक कह रही हूँ, सिकंदर नहीं । उसकी हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा, पर इस अंगूठी का जादू तभी काम करेगा जब मैं अपनी मर्जी से इसे किसी को दूंगा । जबरदस्ती मुझसे चीन ने पर दूसरी का जो भी ज्यादा होगा तो ये सब उसी समय उसी के साथ खत्म हो जाएगा । सुलीमान यूज अंतरराष्ट्रीय चकित रहेंगे । मैं बोला इसका मतलब सुशांथि अपनी मासी से ही जिसको चाहिए ये है रोटी दे सकता है पर ना जो ये अंगूठी लेगा उसके सब कुछ उसी के साथ ही खत्म हो जाएगा । सिकंदर नहीं है । बात सुनकर हमी भर्ती हुई । कहा हाँ, अब इस अंगूठी के पतली में फिर उनसे कुछ मानना चाहता हूँ । ये सुनकर भूरी बिल्ली बोली तीन देंगे तो नहीं ऍम हमने मांगी थोडी ऍम थी ये ऍम नहीं । कुछ तो बाहर के रूप में फॅमिली में बैठे हैं । पहली बार सुनी मान को सीसीटीवी खा नूरी अब तुम नहीं एक और शब्द भी कहाना तो मैं तो जीतने के हाथों में पकडवाकर । उन्हीं के साथ उन की दुनिया में भी दूंगा । ये सुनते ही पूरी फॅमिली से सुल्तान के कंधे से उतरकर सिकंदर के पास चली गई क्योंकि नहीं जानती थी किसी कंधर उसे कुछ नहीं रहेगा । सिकंदर पडी ही प्यार से पूरी के सर पर हाथ फिरता हुआ सुल्तान से बोला नहीं नहीं दूरी तो बहुत ही प्यारी है । इसके मन में कुछ नहीं रहता पर वही है । हम सबको दोस्त समझती है । इसीलिए ऐसा कह रही है । में सिर्फ इतना कह रहा था की अंगूठी के पतले में मुझे जमी संघ के लिए हम लोगों की दोस्ती चाहिए । आखिरी बाकी कहती हुई ऍम घुमिया सुबह वे भूरी कोर्ट्नी गोमती सेव ताज कर सुल्तान की क्लीन क्या सुजॅय हो गया? और वही सिकंदर से बोलना । हम सब हमेशा ही व्यवस्त रहेंगे । आपने अपनी पार्टी के छह हमशक्लों को भी छोडा दूंगा । तुम्हारी पर संदेश भी चाहूंगा, मेरे पास जरूर आना । अगले कुछ वर्षों में मैं एनजीओ देश का राजा बनने वाला हूँ । हर गुजारिश करता हूँ के आप हमारे देश में जरूर पधारी । आप का हमेशा स्वागत रहेगा । राजकुमार सुल्तान ये तो बहुत ही खुशी की बात है । चिंता मत कर मैं जरूर उनका तो एक नीडर पांच चार पाँच के गुड अभी से मैं तुम्हारे अंदर देख सकता हूँ । इतनी छोटी उम्र में तुम बडे बहादुर हूँ और तुम्हारी सभी दोस्त भी कहती हुई सिकंदर का कलाम घटनाकी सुल्तान की आंखें भी नम हो गई थी । फिर नहीं जानता था कि बाकी हमशक्ल ही बहुत मुसीबतों में उसे उन सबको उनकी तकलीफ फोन से मुक्ति दिलानी है । इसीलिए पे आंसू पहुंचती हुए खोडी पर पैर क्या पीछे से भूरी चिल्लाई ऍम हूँ । ये सुनकर वह एक जोरदार हंसी का यहाँ का गूंजा, जिसे सुनकर सुलेमान मुस्कुराओ था । हर बोला हम लोग पहला अपनी प्यारी भूरी को कैसे नहीं छोड सकते हैं । ये सुनकर दूरी खुशी से ही तरह थी । सुल्तान नहीं । जोर से यही लगाई भर में ही रहते हैं । हवा से बातें करने लगा । सुलेमान भी किलो पीलू के साथ पीछे हो लिया । पूरी भी भरा पर साथ छोडती नहीं ।

भाग - 06

क्या ऍम सभी पाकिस्तान लोग से निकल चुके थे जहाँ हुई मोटी की वजह से फटे पी । पी । पर वहाँ हवा में उडने में सक्षम था । तीनों और किलो सुनिये बहन को लेकर और चले रास्ते में उन्हें अजीत से महल दिखाई थी जो देखनी में कांग्रेस की तरह लग रहे थे । फ्री महल बडी ही चित्रित फॅमिली चक्कर मैं पहले कहाँ जो मैंने कभी ऍम ही बुरी उन महलों को होते हुए बोली । भूरी की बात सुनकर सभी उन महलों को पांच से देखने के लिए उत्सुक उ थी और धीरे धीरे नीचे की तरफ उतरते हुई और महलों के सामने जाकर खडे हो गए । इन महलों में तो सब कुछ बहुत ही अजीबो गरीब है । यहाँ ये टीम हमारी इतनी विशाल और मोटी हैं । ऐसा लग रहा है कि इन दीवारों को बनाने में ही नहीं जाने की तीस साल हो गए होंगे । सुलीमान दीवारों को छूते हुए बोला सुल्तान उसकी बात पर ध्यान ना देते हुए बोला पर ये अच्छी बात है । जब इन दीवारों में दरवाजा ही नहीं है तो ये लोग आती जाती कैसे होंगे? भूरी बोलिए मेरी पूरी कर जाते होंगे । जैसे ही हूँ की ही भी और ऍम पूरी हवा में लहराते हुए बोली पीलू वाला कैसे पीछे रहता है तो तुरंत बोला क्या? तो ही अलग से बताना पडेगा कि दीवारी जब आकाश तक जा रही हैं तो ये लोग आसमान में ही रहते होंगे । सुल्तान पीलो की बात सुनकर बोला हाँ क्यों नहीं यहाँ तो सब कुछ हो सकता है, मैं इस मान में जाकर देखता हूँ । ये सुनकर सुलीमान उसे हैरानी से देखते हुए बोला तो मुझे भी तो होना नहीं, दुनिया के लिए कहीं नहीं जाने दूंगा । सुल्तान उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोला तो मेरी बहुत समय की कोशिश करूँ । मैं ऊपर जाता हूँ और तू पीलू खेलों के साथ पाताललोक जाऊंगा । अगर हम सब लोग एक साथ आसमान पर चली जाएंगी तो जमीन के अंदर जाकर कौन देखेगा? हाँ, ये बात थी सुलीमान को सोचते हुए बोला ठीक है तो मैं आसमान की ओर जाऊँ पर हम पहले ये ले लो और ये कहते हुए उसने अपने हाथ से कुछ सुनहरी नहीं मोदी निकालकर सुल्तान की हथेली पर रखते हुए कहा तो नहीं इन की जरूरत है तो भी नहीं जाने कितनी दूर जाना पडेगा । इसलिए तुम जिसका चाहूँ उसका रूप धर की पल में ये उससे कहाँ पर पहुंच सकती हूँ जहाँ तुम जाना चाहती हूँ । फतेहपुर में यही मोटी दिए थे ना, जिसकी मदद से वो पाकिस्तान लोग पहुंच गया था । सुल्तान उन मूर्तियों को हम पी लेते हुए बोला हाँ मैं भी कुछ जैसे ही मोटी परचून की तुम इंसान हूँ तुम्हारे साथ । ये कुछ और भी अलग तरह से ही काम करेंगे, पर रियेक्ट में मिलेगा । सुल्तान ने खुश होते हुए आश्चर्य से पूछा फॅमिली है तो इसके दिहाडी मामा नी देते हैं दूरी तुरंत पूरी सुल्तान समय क्या कि महल छोटी समय उसी सुलेमान में हेर्मी क्यों नहीं दे रहा था? हालांकि मामा जाने वाली बात उसे पूरी तरह समझ में आई थी । उसका यहाँ देख सुल्तान की आंखें भर आई रहे सुलीमान की करेले क्या पूरी बोली तो उन्होंने होगी ऍम पीकरों के ये सुनकर सुल्तान और सुलीमान के साथ साथ पीलू और खेलो भी जोरों से हंस पडे । भूरी बोली, मैं तो पाकिस्तान के साथ ही हम नहीं कहती हुई वह कूदकर सुल्तान की कंधे पर पहट के सुल्तान ने हंसते हुए भूरी के सिर पर हाथ फेरा और एक मूर्ति अपनी मोह मेरठ क्या पाँच चाहती थी सुल्तान आसमान में था आसमान में उस समय से क्रू सारी टिमटिमा रही थी और सब पीठ चंद बीट यहाँ चांदनी महीना आया हुआ अपनी फॅमिली खेल रहा था । दूरी वोटों पर ही सुबह देती हुई बोली ऍम ऍम हूँ पांच से बिल्कुल उसकी जैसे हाॅग सुल्तान चौंकते हुए बोला ऍम पूरी इधर उधर देखते हुए पूरी कौन है? यहाँ पर सुल्तान नहीं जोर से पूछा ऍम सुल्तान और भुरी नी बडी ध्यान से चारों ओर देखा, लेकिन उन्हीं कोई भी नजर नहीं आया । पूरी कर रहते हुए बोली ॅ हूँ ही मैं पहला क्या? छोटे नहीं मैं तो थी तुम्हारी सामने बैठा हूँ । गुस्से में सुल्तान कुछ पूरी जा ही रहा था कि तभी उसने देखा । वहाँ उसके सामने पढे हुए पत्थर से आ रही थी पूरी टीम पूरी ऍम ऍम किसी और ऍम सुल्तानी । डॅान पीछे हटा तो पत्थर बोला मूॅग में तो ऍम किया था । पिछली बार किसी को यहाँ आसमान नहीं देखा फिर इसलिए तो उनसे थोडा मजाक कर लिया । सुल्तान बोला तो हम तो भी कहानी तुम से डर के तो बहुत अच्छे हो । हाँ मैं तो फॅमिली पता है ऍम पत्थर नहीं । स्कूल आंकी घुमाते हुए कहा कडी तुम तो इतनी बडी विशालकाय पत्थर हूँ । तुम्हारी ऍम कैसे निकल सकता है? ऍम हुई बन जाता हूँ की किस्ती ही नहीं कमर मटका मटका करना अच्छा नहीं लगा कभी ये इधर नाॅर्थ है कई ॅ जगह पर गोल गोल घूमता हूँ तुम बता रहे थे अचानक ही संस्थान की चीख निकल गयी छत उसी नहीं खा पत्थर का मुँह टूल चेहरा बन गया सुल्तान खुशी से जी खा ही मैंने पहली बार किसी पत्थर को जिंदा होती दिखाएँ हूँ खरीद ही पार तुम सिर्फ अपने तक ही रखना वाॅल । ऊॅ उठाकर नहीं जायेंगे क्या कहते है उस जगह को किस्ती हुई पर ठंड अपनी नहीं नहीं यहाँ तो उनसे अपना चमकीला माथा कुछ नहीं लगा । हिंदी सुल्तान खुशी से चलता हुआ बोला हूँ संग्रहालय वहाँ पर ॅ रखी जाती हूँ जैसी बोलने हंसनी कहानी ही मना पत्थर तो स्टोरेज संसार में कहीं नहीं होगा । ये सुनते ही पत्थर सुल्तान के पास अपनी छोटी छोटी ऍम चलता हुआ ऍम ना क्या तुम अपनी साॅस को एक ही में क्या किसकी होगी? सुल्तानी की आंखों नहीं सुन कर रखा हुआ है कुछ भी पत्थर को किसकी काली लगता हूँ बोला नहीं नहीं कभी नहीं कभी नहीं ऍम बिलकुल नहीं होने दूंगा । मैं किसी को भी नहीं बताऊंगा । ये सुनकर पत्थर बोला चलती है चलो अभी इसी खुशी में मैं तो भी बढिया ॅ आता हूँ चलो चलो चलो अब जल्दी से कराना शुरू करूँ । ये सुनकर दोनों जोर से हंस पडे और सुल्तान ने अपनी बांसुरी निकालकर एक बडी ही प्यारी पहुँच जाएगी किस तरह पत्थर हाॅट का रहा मैं बता रहा हूँ हर कब रात हो गई तो ही नहीं पाई हूँ चुप आसमान में खूबसूरत चंद्रमा से क्यूँ सितारों के साथ अटखेलियां करते हुए आॅटो ऐसा लगा मानो नीले तारों से सटी हुई ओढनी को किसी ने आसमान में उडा दिया होगा । फॅमिली को कितना संदेश चमक रहा है एक जैसे वाहन का कोई स्कूल कटोरा हो? सुलतान चंद को तकलीफ हफ्ते हुए बोला बीस लाख की बहुत लोगों के ऊपर थी और ऐसा लग रहा था कि वे चाहते कि पी बिल्कुल करीब ही पहुंच चुकी थी । खाॅ सपने भी । मैं हमेशा वो क्या करता था कि मैं कभी चांस से मिलूँ तो उसे बताऊँगा कि मैं उसी कितना प्यार करता हूँ । सुल्तान बच्चों की तरह खिलखिलाता हुआ बोला ऍम ही बातें तो आंकी बन करूँ । पत्थर मुस्कुराते हुए बडे ही बुलाया ऐसे का सुल्तान ने सोचा पत्थर कुछ नहीं खेल के लिए मना है इसलिए कुछ नहीं अपनी आंखें करनी चाहिए । तभी पत्थर बोला फॅमिली को उनके देखो एक ऐसा नजारा है जो कभी किसी ने नहीं देखा होगा । वो नहीं क्या देख रहा हूँ । कहते हुई सुल्तान ने अपने आप को एक हल्की सी चपत लगाई । मैं ही हूँ हैरी मैं ही हूँ ऍम कहते हुई सामने खडा सफीर तू यहाँ कॅश नहीं लेना है क्या हुआ चाहन हंसते हुए बोला ॅ धूरी खुशी से चीज ही चंद कई उनके बिल्कुल करीब आ चुका था, जैसी वह कोई सपना सा हो । सुविधां की आंखों में खुशी के आंसू आ गए । उसके वोट थरानी लेकिन जब उसकी कुछ भी समझ भी नहीं आया तो वही ऍम तुरंत जेटके से अलग होता हुआ बोला ऍम हूॅं! सुल्तान बोला मुझे भी आसमान की सर करवाओ ना तो इस दुनिया को बिल्कुल ऊपर से देखना चाहता हूँ । ये सुनकर चांदनी सस्ती हुई का ही था । हाँ हाँ क्यों नहीं तो मेरी दोस्त हूँ सुबह से पहले ही मैं तो वहाँ पर डरती पर छोड दूंगा तो तो जानते ही हो ना । जब सूरज जाएगी का तो मुझे धीरे ॅ सोना पडेगा । हाँ ऍम भी हमारे साथ चलो । सुल्तान पत्थर से बोला नहीं नहीं ऍम रहा है तो ही फॅमिली सुल्तान ये सुनकर हंसते लगा । पत्थर से बिना लेकर पूरी के साथ चंद के साथ ऍम की ओर और चना जैसी जैसी सुल्तान आसमान की ओर मुड रहा था वैसे वैसी धरती से देखने वाली नहीं नहीं । मैंने नहीं टिमटिमाती सितारे उसी बहुत पडी और ऍम सर आ रही थी पूरी पूरी आखिर हत्या नहीं पता ही नहीं चलता हूँ इससे सारे इतनी बढिया ममता भी होते हैं । चांदी सुनकर मुस्कराया होती हुई बोला हूँ बहुत देखो नीरा में है ला गया सुल्तान और भूरी नहीं बहन की तरफ देखा था कुछ तीर के लिए तो बल्कि जब का नहीं दूर गए दो दिया चांदनी महीना हो गया हुआ सफेद संगमर्मर का मैं कीरी और मोतियों से चढा हुआ दूर दूर तक अपनी जगमगाहट पिक ही था । सुल्तान और भूरी जैसे ही महल में पहुंची उन्हें लगा क्यों उन के तहत नर्म मुलायम पातलू में घर सही है । चंद मुस्कुराते हुए बोला हम अपनी ज्योतियां ॅ फिर देख ही कितना मिल जाएगा । सुल्तान नहीं सुन कर अपनी पन्नी चढे लाल छुट्टियाँ उदार कर को रखती खत्म होंगे । पैर चलने लगा है । जमीन पर रखती ही सुल्तान बोला खाता नहीं हूँ । मैं जितने भी कदम जमीन पर रखा हूँ, मुझे कोई ऊर्चा से समाहित होती जा रही चंद बस करा खरतोरा की हुई बात है ही है । इंटर ते रखते ही तुम्हारी सारी थका ऍम छू जाएगी । ऍम ऍम करती हुई भूरी सुल्तान की कंधे टूट गयी । नरम मुलायम बादलों पर फॅमिली की चार इतनी जोर से फॅसे उसके गाना फिर कि गुना भी हो गयी । सुलतान कि आंख की खुशी से चमक थी होते हुए पूरा हाॅल था तो गुलाब के फूलों की तरह होती जा रही हूँ । ऍम ऍम और जोर से रोने का सुल्तान भी खबर आते हुए पूछा ॅ मैंने क्या कुछ कल कुछ किया? नहीं नहीं फॅमिली बाल तू चीज है है ऍन तिहुँ कि मैं नीति कर इतना कोई क्यूँ तो हुई थी । सुल्तान से पहले पूरी फॅमिली से पूछा क्योंकि ॅ पी बिलकुल मेरी तो सी मिलती है । किस चीज फॅालो ऊपर ले जहाँ टू न्यू की रानी घुस टाने के के किया था सुल्तान और पूरी सुनकर हक्के बक्के रहेंगे । पी सोच भी नहीं सकती थी कि चाँद के साथ खाने पर उन्हें दूसरी हमशक्ल की बारे में पता चल जाएगा । सुल्तान ने हकलाती हुई पूछा तो फिर अच्छा किया वॅार देखता है हाँ चालू, फिर जेल के अंदर चलो दिखाता हूँ किसका चंद खुशी से उछल का था । मैं खेल के अंदर जा नहीं लगा

भाग - 07

हूँ । ऍम मेहनत की खूबसूरती को शब्दों में बयान ही नहीं किया जा सकता था । जगह जगह चमकीली किसान से टकराकर चारों तरफ दूधिया प्रकाश फैल रहा था तो बार उन्नीस रन की पानी निकल रहा था । सुगंधित पानी की बौछारों से जलतरंग ससंद गीत निकल रहा था । चारों ओर सफेद रंग के गुलाब के लिए हुई थी जिन पर नहीं नहीं सितारे बैठकर पार्टी कर रही थी । इन सब हाथ टूट और खूबसूरत नजारों को देखने के बाद थी । सुलतान का मान चुकी हूँ । अपने हमशक्ल की तस्वीर देखने में ही लगा हुआ । जल्द ही उसकी यह मुराद भी पूरी हो गई । मैं हिल में घुसते ही सामने ही दीवार बराबरी बहुत बडी तस्वीर लगी हुई थी जिसमें चंद और उसका हमशक्ल एक दूसरे के हाथ में हाँ डाली मुस्कुरा रही थी । सुल्तान के आंखों में छमा खा करेंगे में लगभग डॉॅ के पास पहुंचा और दूर मैं आऊंगा तुम्हारी दोस्त को वापस बस तो मुझे इसके बारे में थोडा और प्रदान चंद्रदास होते हुए बोला ये चंद्रपुर देशकर अच्छा है पर हम पहुंॅचे में सीतारून हूँ और के वेलू किसान खेल रहे थे कि तभी कहीं से ठीक जल्दी गिरनी आई । क्वोरी सी अपनी फॅमिली गई । हम सब उसके पीछे भाग की तो वे हैं फॅसे । हमारी आंखों के सामने से पाल बस घर में ही यूज हूँ गई कहती हुई चंद की आंखों से आंसू टपक पडेंगे । सुल्तान ने आगे बल्कर चंद के आंसू पहुंची और पूछा अच्छा क्या तुम बस यादो करने के बारे में जानते हो हूँ? यहाँ से दक्षिण दिशा में एक टापू है जो बिल्कुल निर्वाचन है । उसको कोई आता जाता नहीं । मेरे में ही पड रही थी है अच्छा तो अगर तुम्हें पता है कि तुम्हारा दोस्त वहाँ कहते हैं तो तुम जाकर उसे क्यों नहीं चुराती? सुल्तान नहीं थोडा सा नाराज होते हुए पूछा मैं चाहती हूँ करनी जब यहाँ से फॅमिली कर जा रही थी तो वह चिल्ला चिल्ला कर के लिए रही थी कि तुम्हारी तू उसको अगर कोई व्यक्ति छोडा सकता है तो वे हैं सुल्तान है । उसके अलावा जो कोई भी इसी मेरी फॅमिली जाने की कोशिश करी का ही मारा चाहिए का सुल्तान गंभीर होते हुए बोला क्योंकि तुम नहीं इसलिए सरदार को छुडाने की कोशिश नहीं की कोशिश की मेरी ऍम पर जितनी भी सहनी किसी बचाने के लिए कई ही आज तक वापस नहीं लौटी । पिता नहीं खुद दुष्ट ॅ लिया है कि यहाँ फिल्म आॅफ कहती हुई चंद्रो पर सुल्तान उसके पास आकर उसे ढांढस बंधाता हुआ बोला मीरा नाम ये सुल्तान है क्यों? वो चांदनी खुशी से उछलते हुए कहा हाँ और पता है इससे तो फॅमिली ही सपने में आ चुका है । दूरी नरम बादलों पर होते हुए बोली चंद का चेहरा खुशी से धम धमाल था । उसने सुलतान का हाथ पकडते हुए पूछा तो क्या सच में मेरी दोस्त जरदार को उस ज्यादा गिरने की कैसे आजाद करा दूँ? यहाँ लेकिन मेरे कुछ दोस्त हैं जो हमेशा मेरे साथ रहते हैं । वो लोग इस समय पाताललोक गई हुई तो उनकी बिल्कुल चिंता मत करो । वो अगर यहाँ आएंगे तो मैं उन्हें अपनी मेहनत ऍम से रखूंगा । चंद पडी ही प्यार सी सुल्तान को बोला ठीक है तो फिर में कल सुबह ही दूरी के साथ मेरे हमशक्ल राजा और तुम्हारी दोस्त को छुडाने के लिए निकल पडूंगा । सुल्तान का युवक के खत्म होने से पहले ही वहाँ हम धमकी आवाज भी आने लगी । सपने उस तरफ देखा तो सब क्यों कि आश्चर्य ऐसी पहल कहीं सुलतान का टोस्ट पत्थर बडी आराम से चला रहा था । अरे तो यहाँ के ऐसे सुल्तान ने आश्चर्यमिश्रित खुशी से पूछा तुम्हारी बहुत ऍम पत्थर हसते हुए बोला फिर वही जान से बोलना । मुझे जल्दी से जल्दी ऍम तो फॅमिली नहीं हो दूरी नहीं उसकी वहाँ से अगर पूछा नहीं नहीं कभी नहीं मैं सिर्फ मार बन जाता है । पता है मेरी बस बनने के बाहर भी घूमना शुरू होता होगा तो मैं कोई पानी बनकर में है । धोनी ना पत्थर रहते हुए बोलना अच्छा फिर फिर क्या हो जाती हूँ । सुल्तान ने उसे हैरानी से देखते हुए पूछा । ये सुनकर पत्थर जोर से हंसा और बढता हुआ होना ही राॅक जाती है चलते सकती हम सकती हैं मेरी ऍम और उन्हें भी हूँ वो कह सकते हैं जैसी सुनी की पहली किरण मुझ पर पडती है ना कोई नहीं सहनी मझे ऍम हो जाती है मैं फिर से विशाल का ऍम मुझे तो फॅमिली के साथ हम शक्ति राजा तो नहीं गई । ऍम तो में कभी पार्टी ऍम पूरी खुशी से चलते हुए बोली हाँ पत्थर बोला चलो मुझे जल्दी से तुम सब हमशक्ल हजवानी कहानी बताओ कल सुबह ऍम के साथ ही जाऊंगा । ठीक है कहती हुई चांदनी रोशनी की किरण को बुलाया और उसी पत्थर को एक कमरे में भी जवानी को बोला । उसके बाद चांदपुरा मेरी फॅमिली सीने सोंग लिया तो फिर हंस का ही चला जाएगा । मैं उनसे तो नहीं देना चाहता हूँ । सुल्तान चंद का इतना प्यार देखकर होता था और बोला तुम्हारी सन मूलतो फी के लिए मैं तुम्हारा शुक्रगुजार हूँ । चंद मुस्कराते हुए बोला मेरी फॅमिली देने के लिए एक और उपहार हैं । अच्छा क्या ऍम दूरी पे ऍम होकर पूरी ऍम कैसा हुआ? चंद ही कमरे मिले । क्या उस कमरे मीठी सारी वाद्ययंत्र रखे हुए थे? सितार, तबला, ढोलक, हारमोनियम, जलतरंग, बांसुरी और भी नहीं जानी क्या? क्या वह लगता है तो संगीत का बहुत शौक है । सुल्तान ने एक मानसी को अपने हाथ के उठाते हुए पूछा हाँ, बस यही समझ लो । सरदार की जाने के बाद ये सभी मीरी संगी साथी हैं । मैं तो यह बांसुरी उपहार में देना चाहता हूँ । जब नहीं सिद्धार्थ को चुराकर लाऊंगा तभी मेरे पास समय होगा इसी बजाने का । अभी मैं इसीलिए जाकर क्या करूंगा? सुल्तान नहीं वाद्ययंत्रों की ओर देखते हुए कहा था तो मैं इस बांसुरी के बारे में अभी जानते ही कह रहा हूँ, वरना ऐसा कभी नहीं गए थे । चंद मुस्कुराते हुए बोला ऍसे पत्थर नहीं हंसते हुए हो । हाँ हाँ क्यों नहीं की जादुई बांसुरी है चांदपुरा ये जो चाहे वो कर सकती है तो इसे हम ईशान संभाल कर रखना पडता है क्योंकि अगर ये जरा सा भी टूट लाये थे बिल्कुल पीकर हो जाएगी । सुल्तान की समझ में कुछ भी नहीं आया । कुछ भी चैन से पूछा कि क्या क्या कर सकती है चांदनी बांसुरी के जमीन पर रखा डाॅक्टरी मैं चाहता हूँ की इस समय तुम सुल्तान के सौ हमशक्ल आठवीं बनाकर यहाँ खडे कर तो बांसुरी बहुत ही मधुर और सुरीले स्वर में पूरी करती हूँ और पाल घर में ही उसकी शान कच्छ में सुल्तान की सौ हम क्षत्र खडी हो गए । सुल्तान आहन और थोडी के साथ साथ पत्थर भी ये देख कल आश्चर्यचकित हो गया और खुशी से चीखते हुए बोला अरे ऐसा लग रहा है कि जुलता चीजें देखना है । चांदनी हंसते हुई तानी बचाई हर पल दोपहर में ही सभी आदमी गायब हो गए । चंद बोला जो भी कहोगी बांसुरी करिए की सुल्तान नहीं खुश होते हुए चंद को गरीब से लगा दिया । हम बोला मैं सूरज की पहली किरण के साथ ही सरकार को ढूंढने के लिए निकल जाऊंगा । चांदपुर हाँ, आप काम सब जाकर अपनी कक्ष में आराम कर लो । भूरी कूदकर सुल्तान क्या किया की चलती हरकत थर्ड भी अपने कमरे की ओर पड गया । रात पीट दी जा रही थी । सुल्तान कियांग घूमी नींद नहीं थी । पहले जैसे हर पीठ पीपल के साथ अपनी हमशक्ल रहा था । जरदार को ढूंढने के लिए बेचैन हो रहा था । उसने बांसुरी को जमीन पर रखा और कहा फिर तू सुलीमान, तीलू और चीजों को भी मेरे पास लिया । बांसुरी से सुरीली आवाज आई । हाँ, अभी हूँ और सुल्तान की पलक झपकती ही वहाँ पर सुलीमान पीलू और खेलों के साथ खडा था । सुलीमान को देखते ही सुल्तान डॉक्टर उसकी गाली लग गया और पूरी कुचलकर सुलीमान की कंधे पर जा बैठे । पीलू और खेलो भी सुलेमानकी काली लग गए । पीलू बोला अब हमें जो भी करना होगा, हम साथ ही मिलकर करेंगे । अब तुम्हारी कहने से भी अलग नहीं आऊंगा हूँ । बोला हाँ पी लूँ । बिल्कुल सही कह रहा है तो तुम्हारी और भूरी के बिना तो हमारा रो रोकर पूरा हाल था और सुलेमान ने तो कल से कुछ खाया भी नहीं सुनी । मान का इतना तीन देखकर सुल्तान की आंखों से आंसू निकल पडे और वह बोला अब हम में से किसी को कभी भी अलग नहीं होना है और हम सभी मिलकर स्वदेश तो बहुजन करेंगे । पूरी पूरी मुझे सारे का क्योंकि रमेश वाली ईरानी टूरि को उंटों पर जीत फिफ्टी देखकर कमरे में हंसी का फव्वारा फूट गया । सुल्तान ने फ्रांसीसी का बहुत ही स्वादिष्ट खाना लिया और वहाँ की तो जीएसआर्इ होनी चाहिए । बांसरी बोली हाँ! हाँ क्यों नहीं देखते ही देखते सारा महल खाने की खुशबू से मैं कुछ थे । सारी लजीज व्यंजन देखकर सुल्तान और सुलेमान सहित पीलू और खेलों के मुह में भी खानियां क्या? और वही सब खाने पर टूट पडे । भूरी की तो खुशी का ठिकाना ही नहीं था । तो बडी मजे से चटखारे लेकर चीन के बडी बडी बर्तनों की फांसी बैठ के हर पडे आराम से खीर खा रही थी । सब खुश थे और अपने अपने अनुभव साझा कर रहे थे । हंसी ठहाकों के बीच कब सूरज की पहली किरण नहीं महल करते हो सकती ये सेवाएं भूरी की कोई जान ही नहीं पाए जो खिडकी से बाहर ही देख रही थी । ऍम भूरी खुशी से उछल तय हुई । बोली सुलीमान और सुल्तान ने एक दूसरे की तरफ देखा और निकलने की तैयारी करने लगे । तभी सभी देखा कि पत्थर भी लुढकता हुआ उन की ओर चला रहा था । सुलीमान उसकी तरफ ठीक कर मुस्कराता हुआ बोला तो यही है हमारा नया दो हाँ नहीं हूँ ऍम और ये दोनों हैं फॅमिली लू । पीलू बोलना तो नहीं हमारे बारे में दस अब कैसे पता है? फॅमिली तुम्हारे बारे में इतना बताया कि अगर में आॅन गया था । सुलीमान ने पूछा क्या हम लोगों को चांदसी नहीं? मिलवाओ की हरी अभी नहीं कहा था कि सोरेज की राष्ट्रीय नहीं उसी सब कुछ धुंधला दिखाई देता है । इसलिए कई रात में ही आकर मासी मिल गया था । अच्छा तो अब हमें कहाँ चलना? सुलेमान ने पूछा चंद ने मुझे रास्ता बताया है । तुम मेरे पीछे पीछे आ जाना । कहते हुए सुल्तान ने फतेह को पका रहा । बिजली की गति से फतेह पलक झपकते ही वहाँ पहुंच गए और सुल्तान को देखकर खुशी से हिलानी लगा । सुल्तान ने प्यार से पता है की सिर पर हाथ फेरा और उसके ऊपर बैठे हुए बोला फतेह हैं यहाँ से दक्षिण दिशा में टापू है जो बिल्कुल निर्जन हैं । हमें वहीं पर जाना है नहीं । बातचीत नहीं, बिल्कुल समय खराब मत करो । पूरी गुस्से से पता के ऊपर बहते हुए बोली हाँ! चलो कहती हुई सुल्तान ने घोडी को ये लगाएगी और देखती देखती ही भगवान से बातें कर नहीं लगा । पीलू और खेलो भी सुलेमान को अपने कंधे पर बिठाकर सुल्तान के पीछे पीछे मुड चल कई दिन कई रातों लगातार चलने की बात उन्हें विशाल नीले समंदर के बीचोंबीच एक विचित्र तरह का चकोर टापू दिखाई दिया । किस पर हजारों पत्थरों से बनी हुई आठ भी । हाँ जानवरों की मुझे

भाग - 08

कई क्या ऍम सुलीमान आश्चर्य से उस स्टाफ को देखता हुआ बोला । लग रहा है कि ये उसी दुष्ट जादू करने का टापू है । फिर कुछ सोचकर नहीं बोला तो धीरे धीरे नीचे उतरो और इस टापू पर चलो पता है ये सुनकर ही नहीं आया मानो सुल्तान की बात से बिल्कुल सहमत हो और वह आराम से टापू पर उतर के फिर जैसे ही फतेह हनी अपनी पैर जमीन पर रखेगी, वही तुरंत ऍम सुनता नहीं दीखता, जो रूसी चीखा और पीछे भी कर चलना है । सुलेमान टोमॅटो पर मत करना तो यहाँ पर पे व्यक्ति पत्थर बन गया है । उसकी बात सुनकर फील हुआ खेलू दोनों हवा में ही रुक गए और पीलू के कंधे पर बैठा सुलीमान जोर से बोला, पर अब हम क्या करेंगे? उधर सुलतान का कलेजा फट । इसको पत्थर बना देखकर बैठा जा रहा था । फूट फूटकर रोने लगा और प्रदेश को बिहार सीसे हिलानी रखा । तभी पूरी पूरी तो तो हो जानवरों के तो क्या ही है ऍम सुल्तान दूरी की ये बात सुनकर जैसे नींद से जाकर और पुत्र बताया अच्छा तो करनी तो सच में बहुत दुष्ट । तब तक हवा में उडते हुए पीलू बोला, पर अब हम लोग क्या करेंगे? पिना इस टापू पर उतरे हम सरदार को ज्यादा गिरने की कैसे कैसे जुडा पाएंगे । सुल्तान बोला हम लोग बिल्कुल चिंता मत करो । मैं कुछ सोचता हूँ । अचानक ही खुशी से उछल पडा और उसने अपनी जेब सी बांसुरी निकालकर अपने हाथों में पकडते हुए कहा प्री बांसुरी हम चाहते हैं कि जब हम इस जमीन पर उतरी तो हम पत्थर ना बने और हमारा फतेह अभी वापस अपनी मस्ती रूप में आ जाएगा । कुछ मालूम बात ही बांसुरी से बहुत ही मधुर आवाज आई । पत्ते वापस अपनी मस्ती रूप तब तक नहीं जा सकता । जॅानी का तेल इसमें तो नहीं दी थी । फिर में तुम सबको मूर्तियों की माना दे रही हूँ । किसी पहनने के बाद तुम लोग पितृत् नहीं हूँ । फिर बांसुरी से एक एक करके मना नहीं कल नहीं रखी है जिससे सभी लोगों ने पहन लिया । भूरी को तो हर समय मजाक सोचता था । माना देखते हुए बोली ऍम मना नहीं मिल सकती है । ये कहकर उसने सब की तरफ देखा और जब तक सुल्तान से रोकता फटाक से जमीन पर कूद गए । पल भर के लिए तो जैसे सबकी सांसें अटक गई । भूरी को आराम से चलता दे कर अपनी चैन की सांस्कृतिक और फिर भी जमीन पर उतर के पी जब आगे बढे तो उन्होंने देखा कि सामने एक झोपडीनुमा छोटा सा महल बना हुआ है । उसमें हेल के दरवाजे पर तो बहुत छोटी छोटी सब फीट न कि नहीं चमक रही थी । पूरी गौर करो न तीनों के पास पहुंची और जैसे ही उसे उठाने के लिए उसके पास कहीं सुलीमान चिल्लाया बूढी या किसी भी चीज का मत छोडना वरना हम सब मुसीबत में पड जाएंगे । इसकी बहुत ही सर झोपडी के अंदर दाखिल हुए । वहाँ पर नजर जानी कितनी खानी, काली चमगादड उल्टी लटकी हुई थी की नहीं थी । कल डर के मारे सिरहन पैदा हो रही थी । हर कदम पर बडी बडी जाली थी जिनमें आदमकद मकडियां चार दिन रही थी । पीलू बोला हमें यहाँ से चलना चाहिए । ऐसा लग रहा है कि हम गलत जगह पर आ गए हैं । सुल्तान जानता था कि ये सब उसी जहाँ तू करनी का रचा हुआ एक आंखों का धोखा है ताकि सब लोग समझे कि स्थान बिल्कुल वीरान पडा है और कोई भी इस मकान के अंदर जानी की कोशिश ना करें । सुल्तान और सुनी मान अपनी बडी बडी चमकती हुई तलवारों से मत गाडियों के जालों को काटते हुए आगे बढे जा रही थी तब ही सुलतान का पैर किसी वस्तु से टकराया और उसी डी कर डर के मारे सुल्तान की चीख निकल जाएगी । वहीं जोर से चिल्लाया इधर देखो नहीं तो जैसे ही सपने उसकी तरफ देखा सब सामने रह गए । एक हाथ का चेहरा था जिसकी आँखें खुली और बंद हो रही थी और उसके सिर पर एक छोटी सी छोटी थी, उसका था जमीन के अंदर था और वह सबको करतन घुमा घुमाकर देखा था । ऍम सुल्तान ने हिम्मत करते हुए पूछा । ये सुनकर उसके ही रेनी जोरदार ठहाका लगाया और जवाब दिया ऍम मैं एक दिन हूँ, ऍसे रहेंगे तो भी नहीं गया । बहुरि किलकारी मारते हुए बोली सुल्तान भूरी के मुंह पर हाथ रखते हुए कहा थोडी देर चुप हो जिनमें कहीं बुरा ना मान जाए ही । सुनते ही जिन था वहाँ का मार्कर हस तरह और बोला आपका आपका बिल्ली मुझे बहुत पसंद आएगी । आज कितने इस लोग में ऐसा हूँ सुल्तान नी जिनके पास ही जमीन पर बैठते हुए पूछा तुम क्या यहाँ कई सालों से कैद हो जिन्होंने अपनी बडी बडी आंखों को बोल गोल घुमाते हुए कुछ सोचा और पूरा हूँ हूँ करीब हाँ तू सो साल ऊसी तुम शायद कुछ गलत बोल रहे हो तुम मैं दो दो सौ साल का सुलीमान ने जिनको टूटे हुए कहा ऍम पूरी एक बार फिर बिना थोडी न रह सके । तीन सौ साल नहीं मैं घूमरा फॅमिली है हमारी जिन लोगों में सभी दिनों की उम्र एक हजार सारी के करीब होती है तो तुम ही यहाँ से आ गए । तीनों ने आश्चर्य से पूछा ये ही तब पूछने पि ऍफ के बाद पूछने जाती हूँ तो कोई कोई ही जाता है । पूरी नाराज होते हुए बोली जिन हस्ती हुए बोला हूँ तो मैं समझ गया था कि तुम ही पूछने वाली थी क्योंकि मेरे सामने जो भी होता है मैं उसका दिमाग ॅ हूँ । भूरी बुदबुदाई हरी, इतनी ऍम बार पत्ते ऍम तो फॅमिली होगा हूँ वहाँ ऍम है कहती हुई जिन इतनी जोर से हंसा की उसकी आंखों से आंसू आ गए । भूरी कूदकर श्रीमान के कंधे पर बैठ गई और उसने अपने पंजों से ही अपना ॅ लिया । भूरी का भोलापन देखकर सभी मुस्कराओ अच्छा तो क्या ही जादू करने भी एक जिन्हें है क्योंकि अगर उसने तुम्हें इतनी सालों से कैद कर रखा है तो उसकी उम्र भी तो कई सौ सालों की हुई ना सुल्तान ने कुछ सोचते हुए कहा नहीं तो जिन नहीं ऍम गर्मी है । फॅमिली करूर है कि उसने अपने भाई को भी तो दी बना रखा है ऍसे अपनी शक्तियों का उपयोग करके उसके लिए अपने भाई की भी उम्र ली है खाॅन क्योंकि जो उसकी मृत्यु कर समय है तो हैं किसी बच्चे जो फॅस की उम्र लीड ऍम रूटी रहती है । जिनने की बात सुनकर सुलेमान और सुल्तान सहित सभी कि रोंगटे खडे हो गए कि लोग घबराते हुई बोला क्रिकेट ही उचित, उसके सामने चलने में हीटर लग रहा है पर इस जादू करने नहीं तुम्हें क्यों कैद कर रखा है? सुलीमान ने पूछा मैं ऍम जिससे मैं लोगों को भला करता था पर इस टू रिजॉर्ट करनी नहीं सुमीर बहुत सेवा हैं । फॅमिली बात हुई पालतू में उसी ऍम टूर है और मैं उसे जो हूँ वो काम अच्छा फिर क्या हुआ? सुल्तान ने उत्सुकता से पूछा फॅमिली सोने के फॅमिली कटोरी को निकाल लिया हूँ मुझे । यहाँ पर ॅ ऍम कहती हुई जिन क्या घोसिया सुबह नहीं रखी है सुल्तान और सुलेमानकी आगे भी काफी भर के सुनी मानने आगे बढकर उसके आंसू पहुंचती हुएकहा बिल्कुल भी परेशान मत हो । हम उस दुष्ट जादू करने को खत्म करने के लिए ही यहाँ हैं तो बस इतना बता दूँ कि वह जादू का कटोरा हमें कहाँ मिलेगा जिन्होंने सांस भरते हुए कहा हूँ उन स्कर्ट टूर को हांसिल कॅश नहीं हूँ तुम बताओ तो सही कि मैं अपना कटोरा रखती है जिन बोला ऍम ही रहता है । पीलू खुश होते हुए बोला हरी वह तो लोगो कटोरा बडी आसानी से लिया जा सकता है इसमें कौन से बडी मुश्किल है तेरे मेरी पूरी ऍम लू जिनमें बोला सुल्तान पीलो को हाथ के इशारे से चुप रहने के लिए कहा जीतने से पूछा उसकी सरप् देता है मतलब मैं ऍम उसके सर पर रहता तो हमेशा है और मैं किसी को दिखानी नहीं दी का इतना के ही कर जिन नियुक्तियां की बनकर थी और बोला कॅापी जॉॅब चुका हुआ दिखे तो समझ जाना फॅार उसे ऍम धानी से मुझे ले लेना । अगर टूस कटोरी को ही फॅमिली नहीं बार समाज ना तो फॅमिली जो कि यहाॅं जिनने अपनी आंखे बंद कर ली और सुधान की बहुत तो करने की बात ही नहीं खोली । खेलू बोला हम जितना इंसान समझ रही थी यहाँ तो उतना ही मुश्किल नजर आ रहा है । सुविधां नहीं कहा अब हमें हर तरह से चौकस रहने की जरूरत है ये कहकर वह मकडी की जारी काटता हुआ आगे बढने लगा तभी हो नहीं एक जगह से खस्ते की आवाजें हैं । उन्होंने उसको देखा तो यह देखकर आश्चर्य में पड के ये जोडियां खडी हो कर लोगों को सीधा बगीचे की खुदाई करवा रही थी । जो तरह सीपीसीबी करने के लिए खडा होता उसे पूरी मार रही थी तो ये ऍम सुल्तान ने उसके मुंह पर हाथ रखकर उसे चुप कराया और भी सभी वहीँ खडे हो गए । थोडी तीर पांच बूढियां उन लोगों को मारती मारती थक गई तो जोर से चीखते हुए बोली हो हो हो हो हो तो हमें भी फॅमिली इनके लिए कुछ ही ट्टियां । एक आदमी ने इंटर तय हुई थी । में से कहा हूॅं कहती हुई पूरियाँ पूरी ताकत के साथ उस हथनी को कूडा हमारा तो वह जमीन पर गिर गए हैं । बूढियां यहाॅं ऐसी चलती खेल से कुछ हुआ ही नहीं हूँ । सुल्तान और सुलीमान सहित पीलू खेलू भूरी और पत्थर का कर ले जाती हूँ । ठीक तहलका और उनकी आंखों में आंसू आगे तोडिया उनकी आंखों से ओझल हो गई तो सभी उन हस्तियों के पास पहुंचे । उन सभी के शरीर पर बस नाम मात्र की कपडे थी और ये सभी बिल्कुल कम कान लग रहे थे । ऐसा लग रहा था जैसे उन्हीं कई दिनों से खाना ना मिला हो । उन सभी के शरीरों से जगह जगह से खून रहता था । सुल्तान और उसके साथियों को देखकर वोटर सी काम नहीं होने से कांड नहीं बोला । ॅ नहीं चाहिए, संस्थान का मन है । ठीक इतना द्रवित हो गया कि वह जोरों से रोपर और अपनी आंसू पहुंचती हुए बोला बूढियां क्या उसके साथ ही कितनी देर में आएंगे? तो फिर इस से भी राहत ऍम हम देखने के लिए अच्छा ये तो बडी अच्छी बात है की ही कर सुल्तान ने मुस्कुराते हुए अपनी बांसुरी निकली और दोनों बांसुरी यहाँ पर जितने भी होंगे उन सभी के लिए स्वादिष्ट पकवानों से बडी तारीफ लिया । बांसुरी से ये कहते हैं वहाँ पकवानों की थान सच के सामने इतना सारा खाना देखकर भी सभी हक्के की बच्चे रहेंगे और खाने की तरफ फॅसे देखने । लेकिन सुलेमान ने आगे बढकर का तो उन सब पेट भर के खाना खा लो । हम सब तुम्हारे दोस्त थी और तुम्हें इस ज्यादा गिरने के चंगुल से मुक्त करवाने आए हैं हूँ

भाग - 09

क्या एमपी सूट नहीं सुलीमान की ये कहते ही सच्चे से खाने पर टूट पडी । मिंटो में ही सारा खाना चट करके सुलतान का उन लोगों को इस तरह से खाती देखकर दिलभर है । जब सब लोग भर पीठ खा चुकी तो उनमें से ही कहाँ नहीं बोला? खतरे तुम लोगों को चाय तो करनी हो । उस नानी देख लिया तो तुम लोगों को भी हमारी तरह यहाँ कमीशन के लिए कैद कर ले कि वो और दिन रात ठोक के पेट कम करवाई की भूरी हो सकते । हुई बोली । ऍम करने के दिन ही सुल्तान ने दूरी की तरफ ठीक कर मुस्कराकर का पूछा यहाँ से उसमें की महल के अंदर जाने का रास्ता कौन सा है? ये आदमी बोला तो वो सामने चूडी की पीढी जितना चीज दिखाई दे रहा है ना वहीं से अंदर जाती हूँ । पीलू घबराती हुई बोला तो उसमें तो हम ईरान बॉर्डर भी नहीं जाएगा तो उस ऍसे आदि होगी । वहाँ खडा दूसरा अपनी पूरा तरह सर नहीं पर तो मैं बहुत बडी मिशाल छिपकली बैठी हुई दिखाई देगी । मैं उसके बराबर ऊंची है, मेहनत की तौर पर है वो तो हमें कहाँ जाएगी? सुलेमान ने ठोक कट करते हुए कहा तो नहीं हो रही तो उनसे पूछेगी की उसे खाने में क्या पसंद है और तुम बता देना । केश में तो मैं तुमसे किशमिश मांगे की तो मुझे दे देना । उसने हमारी तरह ही उसको भी हमेशा हूँ कर रखती है ताकि वह सभी आरतियों को एक एक कर के खा ले । नहीं नहीं इसी तीसरा बोला तार अगर उस छिपकली को किस पे मिल जाए तो बहुत कुछ हो जाएगी तो मैं जा नहीं देखी । ये सुनते ही सुल्तान सहित सभी के चेहरों पर मुस्कान फैल गई । अभी जैसे ही आगे बढने को हुई तो बूढी बूढी ऍम बना दी । सभी धूरी की इतनी समझदारी भरी बात सुनकर ढंग रहेगी होना अगर मेरे पास काला टीका होता तो मैं तुम्हारी इस दूरी से बिहारी से चेहरे पर लगा देता हूँ । सुन कर सभी जोर से हंस पडे जिनमें में सभी आदमी भी थी जो वहाँ के दी थी सुल्तान नहीं । बडे ही प्यार से उनकी तरफ देखते हुए कहा हम तुम हमेशा ऐसे ही हस्ते रहोगे । यह सुनकर सभी के चेहरों पर मुस्कान तैर के और उनमें से एक आदमी बोला आपको ऊपर वाला आपकी मकसद में कामयाब करें । सुल्तान ने प्यार से साहब का कंधा थपथपाती और अपने दोस्तों के साथ उस छोटी से बिल की ओर चल दिया । हाँ, मैं भी विशाल छिपकली तो दिखाई नहीं दे रही हो । ऍम वहाँ से तीस यूसीआई की सबको लगा कि मानो आकाश से बिजली चमक रही हूँ और उनकी कान की पर्दा फट जाएंगी । भूमि कानों में उंगली डालते हुए ऊपर की ओर देखा तो पत्थर तो डर के मारे लडकी भीम का एक छिपकली खडी हुई थी । उनकी ओर लाखों से देख रही थी । पीलू ने दौड कर पत्थर को सीधा किया । फॅमिली नहीं पूछा तो हूॅं सुलीमान धीरे से सुल्तान के कानूनी बोला यहाँ तो प्रश्न ही कर बढेगा । उस आदमी नहीं तो कहा था कि खाने के बारे में पूछे कि सुलेमान को सुल्तान की आंखों में कुछ पसंद करती देख कट छिपकली बूढी ऍम ऍम हीं इंसानों को खाना अच्छा लगता है । पत्थर सुल्तान की पीछे छुट्टी हुई डाॅ हूँ ऍम सुल्तानी अनजान बनते हुए पूछा तुम्हें क्या पसंद नहीं तू तो ये ऍम छिपकली अपनी होठों पर जुबान फिर आते हुए बोली अच्छा अगर हम मैं किशमिश खाने को दी तो क्या तो हमारी दोस्त होंगे? सुलेमान नहीं । प्यार से पूछा फॅमिली नहीं जवाब दिया सुल्तान नहीं बांसुरी को अपने हाथों में लेते हुए कहा एक बहुत बडी बर्तन में किशमिश पर रुक और मेरे बरतन कभी भी केश में से खाली ना हो हूँ हूँ । पल भर के अंदर ही वहाँ पर एक बहुत बडा बर्तन किशमिश से भरा हुआ आ गया, जिसे देखकर छिपकली खुशी के मारे ताली बजाने लगीं । जैसे ही छिपकली ने एक मुट्ठी भरकर किशमिश अपने मुँह में डाली, वहाँ चारों तरफ सफेद पूरी की जाकर बीच कहीं किसी किसी को कुछ भी नजर नहीं आ रहा था । सुल्तान चलना है ये इतना सारा का हो गया । सुलीमान पूरा शायद छिपकलियां में कैद करके ले जा रही है । तभी एक सुरीली ऍम नहीं मेरी का आप लोगों ने मुझे घुसता की जादू से आजाद करवाया है । महिला मैं आपको क्यों करूंगा? अब तक सब कुछ हल्का हल्का दिखाई देने लगा था और धुआँ बहुत तेजी से एक तू तल के अंदर जा रहा था, जो उनके सामने खडे एक सुंदर सी राजकुमार जैसे दिखने वाले आदमी के हाथ में थी । पहले ॅ अंदर राजकुमार की इसी बनेंगे । दूरी नहीं आंकी मटकाते हुए पूछा । राजकुमार बोला मैं थंजावुर राज्य का राज कुमार हूँ । बहुत समय पहले मैं यहाँ अपने साथियों के साथ घूमते हुए आया था, बस तभी दुष्ट जादू के नहीं नहीं मुझे और मेरी दोस्तों को कैद कर लिया । मेरे आधी इससे ज्यादा सैनिकों को उनकी करोडों सहित पत्थर बना दिया । तो ॅ इतनी मोटी है । तुम्हारी सैनी ही पत्थर ने अपनी गोलमटोल मुझ पर हाथ रखकर अश्चर्य से पूछा । हाँ! और जो बिचारे मार खाता कर काम कर रहे हैं, मैं भी मेरी साथ के ही लोग हैं । अच्छा तो तुम को क्यों इतनी डरावनी चितली बना कर छोड दिया और एक किशमिश खाती तो वापस अपने एसटीडी रूप में कैसे आ गए? सुल्तान नहीं सकता से पूछा । इस ज्यादा कहती ने पहले हम सब के साथ बडा प्यार भरा व्यवहार किया और उसके बाद ही बातों ही बातों में पीरी मन प्रसन की चीज खाने के बारे में पूछा । जब मैंने इसे किशमिश बताई तो ये बोली तब मैं तुम्हें इतनी डरावनी और सूरत छिपकली बनाउंगी की लोग तुम्हारे पास आने से भी दे देंगे । यह सुनकर में बहुत किया और रो नहीं लगा । मैंने कहा तुमने मुझे तो कर लिया है पर मुझे छिपकली मत बनाओ, खुलता नहीं । इस पर जवाब दिया कि अगर तुम ही छिपकली नहीं बना होंगे, मेरी महल की पहरेदारी कौन करेगा? मैं तो बहुत दयालु होना, इससे तुम्हारी मदद करते हुए तो बता रही हूँ की अगर कभी भी किसी ने भी तो में किशमिश खिलाती थी । तुम अपनी उसकी रूप में आ जाओगे और मेरा आधार जादू खत्म हो जाएगा । सुल्तान यही सुनकर दुखी हो गया और बोला हमें तुम ये बताऊँ कि उसने कहाँ मिलेगी तो इस दरवाजे के अंदर चली जाओ तो इस समय महल के अंदर ही राजकुमार जवाब दिया । सुल्तान ने ये ही सुनकर सबको अपने पीछे आने का इशारा किया और राज कुमार की बताए हुई दरवाजे इसी अंदर चला गया । देशवासी के अंदर जाते ही सबकी आंखें आश्चर्य से फैल के सामने हवा में बहुत सारी मछलियां रही थी । कृष्णा चाहते हो करनी उन्हें हवा में से ही पकड पकडकर एक के बाद एक बच्चा ही कह रही थी सबको यही देख कर बहुत कठिनाई । पर भूरी के मुंह में पानी आ गया, पल भर को है जैसे सब कुछ भूल गए और उसकी पूरी ताकत से चलान लगाई और घुसना की मुंबई चाहती हुई मछली को पकडने के लिए लडकी जिससे होसला हाथ बढाकर किट पडी । दूरी ने तुरंत मछली खानी जैसी उस घुसने को देखा । पेट की मारी थरथर कंपनी नहीं और सुलीमान की ओर देखते हुए बोली ऍम नहीं नहीं पूरी तुम जानती नहीं कि तुम ने आज क्या कमाल दिखाया । दूरी नहीं होता ना की ओर देखा जो जमीन पर गिरी पडी थी और उस की कंधे की पास कटोरा पडा हुआ था पूरी लगभग करके और जादुई कटोरा मुझे भी रख लिया और जाकर सुलेमान को दे दिया घुसता । गुस्से से जोर से चीखी ऍम हाँ जरूर वापस करेंगे ये लोग खेती हुई सुलीमान नहीं नहीं कटोरा हाथों से दो टुकडों में तोड दिया और उस स्थान की तरफ उछाल दिया । कटोरी की टूटते ही घुसता । जोर से की थी और धूम बनकर आसमान की ओर उन नहीं लगी । धोनी नीति आवाज आ रही थी, हूँ सुल्तान ये सुनकर बोला नहीं तो बाद में जाकर आराम से रहो । देखते ही देखते हो उस ना धीरे धीरे आसमान में बात लो में जाकर विलीन हो जाएगी । उसकी जाते ही वहाँ एक जोरदार धमाका हुआ है और उसका सारा तिलिस्म टूट गया । चारों तरफ जितने भी आदमियों और जानवरों की मूर्तियां थी, सच्ची बित हो गए और खुशी के मारे एक दूसरे के करीब लग गए । सभी ने खुशी के मारे सुल्तान और सुलीमान को कोर्ट ने उठा लिया । सुल्तान हस्ता हुआ बोला हाॅल सुनकर सभी हंस पडे । तभी सुल्तान की नजर फतेह बस पडी, दौडता हुआ उसी की हो रहा रहा था । फतेह अली को देखते ही सुल्तान के साथ साथ सभी के चेहरे, किसी चमक, कुछ सुल्तान दौडती हुई फतेह की बात आया रुक गया । फतेह ने अपनी कृषि दिखाते हुए आगे की दोपहर हवा में उठा और ही नहीं आने लगा । सुल्तान फॅमिली लग कर रो पडा । सुल्तान प्यार सी फतह की गले में हाथ देते हुए बोला हमें पटेल को अभी वापस में है । मैं भेज देना चाहिए । जब हमें जरूरत होगी तो में से आवाज सेना तुम्हारी आवाज सुनकर तो पते पल भर में ही वापस आ जाएगा । हाँ, तुम सही कह रही हूँ, हमारे कारण पाते हैं फिर से किसी नई मुसीबत में न फंसे पैसे भी । अब हमारे पास कई ताकतवर साथी हैं । मुझे लगता है इस बीच जुबान और बुद्धिमान फतेह को महल लौट ही जाना चाहिए । अब को खोने के बाद अब पता को खोना मेरे लिए सही नहीं होगा । सुल्तान ने सुलेमान की बात का समर्थन करते हुए कहा, फिर मेरी दोस्त तो अभी मैं जो मैं अपनी सभी हमशक्लों को उनकी मुसीबतों से आजाद करवा की महल लौट ता हूँ । फिर दोस्त ऍम महल लौट आने की खास वजह भी है । तो उन्हें हमारा संदेश महल तक पहुंचाना होगा कि हम सुरक्षित हैं और जल्द ही वापस लौटेंगे । फाॅर्स जोर से ही नहीं है । असल धर्म मिली, धुएं का गुबार की थी । छोडते हुए हवा की गति से दौडते ही आप ही ओझल हो गया । फतेह के वहाँ जाती ही सुनता नहीं । इधर उधर देखते हुए बोला ॅ तो कहीं दिखाई नहीं दे रहा हूँ जिसे हम सब ढूंढने आए हैं । तभी कोनी में बिक्री बाल और फटे से कपडे पहने उन्हें एक युवक दिखाई दिया जिसकी पहले ऍम पडी हुई थी । सुल्तान उसे ठीक कर चौका और फिर दौड कर उसकी काली लक है । मैं युवक हाथ पढा गया और उससे पूछा सिस्टम हो? सुल्तान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया मैं तुम्हारी सबसे अच्छे दोस्त चानका दोस्त हूँ । उसी ने मुझे यहाँ तुम्हारी मदद करने के लिए भेजा है । पर हम तो बिल्कुल मेरी जैसे देखते हो । सरदार सुल्तान को वर्सि देखते हुए बोला । तभी दूरी बोली ही सुनता तो कितनी देर करती हूँ उसके ब्लॅक धूरी का इतना बोलती ही सरदार के पैरों की जान जी अपने आप खुल के टी । टी देखती । वहाँ पर घुसना का चाहती हूँ । खत्म होने लगता सुल्तान सरदार से बोला अब हमें चलना चाहिए । अब तुम चांद के पास जाओ, मैं बडी ही बेसब्री से तुम्हारी राह देख रहा होगा । हजार कुछ पूछना था इस से पहले ही पत्थर बोला तो नहीं तो सबको भी हमारी चलना पडेगा वरना मैं भी वापस नहीं होता । उसका प्यार देखकर सुल्तान के साथ साथ सभी की आंखें बहराइन । पर सुल्तान आपने आज सुखी पाता हुआ पत्थर से पडे प्यार से बोला तुम तो जानते हो कि जरदार जैसी अभी और भी कई राजा हैं जो बहुत मुसीबतों में है । हर उनकी सहायता सिर्फ मैं ही कर सकता हूँ । सुलेमान भी पत्थर के ऊपर बडे प्यार से हाथ रखते हुए बोला और हम उन्हें छुडाने में जितनी भी देर करेंगे ये सब और मुश्किलों में पड जाएंगे । सरदार जो अब तक चुपचाप खडे उन सब की बातें सुन रहा था आगे आकर पूरा अब तुम सब मेरे साथ में हेलमेट चलो । सुल्तान ने उसका हाथ पर ही प्यार से पकडते हुए कहा मुझे अभी आपने और पांच हमशक्लों को कैद से मुक्त करवाना है । ये सब भी बडी बेसब्री से मेरी राह देख रहे होंगे । जरदार खुला फिर तुम मुझसे एक वादा करो कि उन सब को छुडवाने के बाद तुम मुझसे जरूर मिलने आओ कि मेरी तो मैं भी तुमसे मिलने के लिए उतना ही बेकरार रहूंगा जितने कम हो । सुल्तान ने कहा उन्होंने ही ऍम पर चलने के साथ अब स्माॅल रखने का भी नहीं होता । पूरी इतना तय हुई बोली उसकी बात ही सुनकर सभी जोरों से हंस पडे । सुल्तान ने माहौल को हल्का करने के लिए बूढी को चिढाते हुए कहा हरी तो जमीन के बारे में कहाँ पता होगा तुम ऐसे भी तो किसी ना किसी की कंधों पर ही चली रहती हूँ । ये सुनकर सभी जोरों से हंस पडे । सुल्तान बांसुरी से बोला इन दोनों को जल्दी से इनके दोस्त चांद के पास पहुंचा तो क्यों नहीं अभी लोग देखते ही देखती । जरदार और पत्थर पल भर में ही गायब हो गए ।

भाग - 10

कई क्या एमपी सूट, टेंट भूरी भूरी ऍम कहना तो उसी समय के साथ मिलकर सुल्तानी धूरी के सर पर हाथ लेते हुए कहा सबसे ज्यादा खुश तो मैं कि आज दो ऍम । तभी उन्हें वहाँ राजकुमार और जिन आते हुए दिखाई दिए हरी ये तो वहीं चीज नहीं है ना । जो जमीन के अंदर गड्ढा हुआ था, जिन तब तक उन सबकी पहुंच जा चुका था । वह मुस्कुराते हुए बोला हाँ सिर्फ घुसना यहाँ सी चाहती हैं किसका जल्दी खत्म हो गया आप और मैं भी उसके चंगुल से आज ॅ राजकुमार सुलतान का हाथ पर करती हुई बोला । मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं भी कैसे धन्यवाद तो सुल्तान नहीं । उसी गले लगाते हुए कहा हम आजाद हो गए हूँ । इस से बढकर हमारे लिए और खुशी की बात कोई नहीं है । अब हम तुम्हें भी तुम्हारे सैनिकों और साथियों सहित तुम्हारी राज्य में पहुंचा देते हैं । सुल्तान नहीं । राजकुमार सिखा हूँ, ठीक है फिर तुम लोग मिलने जरूर आना । राजकुमार ने अपनी भीगी पलकें पहुंचती हुएकहा हाँ हम सब आएंगे । सुल्तान ने भूरी को गोद में लेते हुए कहा सुल्तान नहीं बांसुरी की मदद से राजकुमार और उसके साथियों को उनकी राज्य पहुंचाती है । मैं तो तुम लोगों की थी तो होंगा । चीन बोला हमारे साथ पीलू चलते हुए बोला हाँ प्रभारी साल अब भला ये ऍम करूंगा ऍफआईआर थियों को तो उसने ॅ संसार में कोई भी नहीं से भूरी यह सुनकर जीतने के कंधे पर कूदकर फॅर पूरी हाँ, अब से तो हमारे साथ ही फॅस । पुरी ने सुलीमान की तरफ देखते हुए पूरा बिलकुल क्यों नहीं सुनी? मानने हामी भरते हुए कहा है चलो अब हमें यहाँ से चलना चाहिए । हर ना बहुत अंधेरा हो जाएगा । हाँ चलो । सुल्तान ने सुलेमान की बात का समर्थन करते हुए कहा । फिर भी सभी लोग आसमान में और चले पीलू और खेलूं । सुल्तान और सलमान की इस यात्रा में हर कदम उनकी मदद कर रहे थे । अब जब चाहिए आतंकवाद बन जाते हर जब चाहे अपने बौने रूप में लौटाती या फिर कभी पचास फुट ऊंचे दाना हो । जब भी एक घनी जंगल से गुजर रहे थे तो सुल्तान होना ये है तो बिल्कुल वैसा ही जंगल है जैसे मुझे सपने में देखा था और इस बार हमें जुडवा भाई में लेंगे ही । सुनकर पूरी जोर ऊॅट थी । कॅश पूरी की बात सुनकर सुलेमान नहीं लगाते हुए कहा, पर हमें वो दोनों मिलेंगे । कहा हमें अब तक जैसे सब्जियाँ मिलती चली गई है, मैं ही लोग मिल जाएंगे तो उन्होंने जवाब दिया, अभी दोनों बातें कर ही रहे थे कि अचानक झाडियों के पीछे से उन्हें कुछ आवासी सुनाई थी । सुल्तान और उसके दो ग पीता हूँ । झाडियों के पीछे पहुंची ताकि उनकी कदमों की आहट किसी को सुनाई नहीं । वहां पहुंचकर उन्होंने जो दृष्टि देखा तो घर की मारी उन सभी की चीज ही निकल कर उन्होंने देखा कि वहाँ पर जो आदमी बैठी थी वो ई की दस की सात बनने लगी थी और झाडियों में ही सर पर उठाते हुए खाये भूख ये सब ठीक पूरी नहीं तो डर के मारे अपने पंजी अपनी आंखों पर रखी है और उनकी बंद किए हुई ही पुलिस फॅस । तभी सुल्तान नहीं देखा । चांदी की तरह चमकते हुए बहुत ही खूबसूरत ठूस अपील साहब कहीं से निकल कर आए और एक पत्थर के ऊपर अपना पडा ऍम काॅस्ट सुलीमान बोला अब हमें यहाँ से भाग जाना चाहिए । पीलो घबराते हुए बोला हाँ हाँ तू खुद उस तरफ साहब तो हमारी ही ओर लगातार देख रहे हैं । यह सुनकर भी सब जैसे ही वहां से भागने को हुई थी, अभी भी दोनों साथ सुल्तान की हमशक्ल बनकर खडे हो गए । ऍम उनमें से बोला सुल्तान अपना नाम सुनकर चौंक पडा तो धीरे से बोल हूँ हम तो नहीं उठाई जमाम और सी टन हमें एक्सपीरियंस साउथ बनाकर कैट कर लिया है । सुल्तान ने उत्सुकता से पूछा पर उसने तुम दोनों को यहाँ कैद क्यों किया है? जमाम बोला डाॅ पहली हम दोनों बाग में खेल रही थी तो अचानक अनजाने में हमारा हूँ । बहुत बडी हरी सांप पर पड गया था जिसे हम दोनों में से कोई भी उसी खास के बीच होने के कारण तो ठीक नहीं है । घायल सा तो उस वक्त सरपट दौडता हुआ भाग के फिर उसकी थोडी ही तीर बाद वहाँ पर अचानक टूट फुट का आठवीं हमारी सामने आया और कुछ सीसी बोला अभी ऍम ऍम उसकी पहुँच सुनकर में पहुँच क्या खबर आता हुआ बोला हरी ऍम होने की वजह से हम उसे तीन ही से की थी किसका हुई है? और पीटीसी जोर से चिल्लाया की मुझे लगा फिर कांड के प्रति फट चाहेंगे । और हम तो उन्होंने घबराकर अपनी कान ऊपर हाथ की पर वही चीज चीज कह रहा था तो हूँ ऍम हम जब तक उन दोनों से कुछ कहीं अचानक एक टूर करी आंधी उडी और हमने खत्म कर अपनी आंखें बंद कर ली । भगवान की आंखे खुली तो हमने खुद को इस ना लो पी पाया । कहते हुई सी तान के आंसू छलक उठे । सुल्तान नहीं देखा कि जमान भी अपनी आँसू पहुंच रहा था । सुल्तान में दुखी होते हुए कहा घर जाने में की गई गलती की वजह से क्या किसी को पूरी जिंदगी बंदी बना लिया जाएगा? सुल्तान मैदान के पास पहुंचा और उसकी कंधे पर हाथ रखकर बोला अब हमें ये बताओ कि तुम आजाद कैसे निकल सकती हूँ । कल नागपंचमी और वही जहाँ पर नागमणि की पूछा करने आई का अगर उसी कल ही नदी में डाल दिया जाए तो उसका अंत हो जाएगा । दूरी उस समय सुलीमान की कंधे पर चढी बैठी थी ऍम सुल्तान के साथ सभी का बिहार अब उस जगह की ओर क्या जहाँ पर एक बहुत बडी कांच की मणि रखी हुई थी । पच्चीस में से सतरंगी रोशनी निकल रही है तो इस मणि के कारण ही रात भी दिन लग रहा है तो ये तो सूरत से भी तीस चमक रही है । खेलूं ने उसे एक तक देखते हुए कहा पूना इस मणि की पूजा करने आता है ताकि ये नागलोक सुरक्षित रही । उस तीन तमाम नागों को अपनी कैद में रखा हुआ है । चुप की साहब लाखों वर्ष के हो जाएँ और वह इसे एक बहुमूल्य मनी थी जिसकी शक्ति से ये सारी संसार को अपनी कब से मैं कर ली । रील की पूजा के बाद इस मणि को पानी में वो कामयाब हो जाएगा उन पे इस संसार का सबसे शक्तिशाली इंसान पंचायत का जिदान ने का सुल्तान दूर तो थोडी देर में सुबह होने वाली हम यहीं उसका इंतजार करेंगे । अगर तुम्हें यहाँ किसी ने देख लिया तो तुरंत गंदी बना लेंगे । जमाम ने कहा भूरी भूरी ऍम तो सुल्तानी बांसुरी से कहा हमें वो बौना नागलोक का कोई भी व्यक्ति नहीं देख सके और पल भर के अंदर ही ये सब अदृश्य हो गए । थोडी ही देर बात बहुत । चारों तरफ बहुत सारे हस्तियां गए जिनके सर पर सोने के मुकुट थे और उन्मुक्त तो में फनकार ही सांपों की आकृति बनी हुई थी । उन्हीं के बीच में एक बहुत था । किसके ऊपर सब फूल फेंक रहे थे । सुलेमान ने अपना छोटा सदस्य का टुकडा निकालना और पूरा इन सब को बांध तो अचानक सारे आदमी वह बौना रस्सी में बंद गए । तभी सुल्तान बोला मैं किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा आऊंगा । बस मुझे इस बॉल को ही मारना है, जिसने तुम सबको यहाँ कई सालों से कैद करके रखा है ही नहीं । मुझे ऍम दोनों चीखा सुलीमान दस्ती के टुकडे से बोला । इस बोलने के अलावा सभी को आजाद कर दो और बॉल को बहुत दूर ले जाकर किसी गहरी नदी में फेंक दो । रस्सी आसमान में पहनी बोले, करोडी और हवा में उछल हो गई । कुछ ही पलों बाद धमाका हुआ । मनी जोरदार आवाज के साथ फट गई । उसके साथ ही सपेरि का काला जादू भी खत्म हो गए । सभी सांप सुल्तान के पास आकर पूरे अगर कभी भी हमारी जरूरत हो तो हम जरूर बुलाना और यही कहती हुई सब गायब हो गए । सामान और सिस्तान दौड कर सुल्तान की गले लगकर सुल्तान बोला, तुम दोनों आँखे बंद करो और कुछ देर बाद तुम दोनों तुम्हारी राज महल में अपने परिवार वालों के साथ होगी । जमाम बोला, हम तुमसे मिलने जरूर आएंगे । सुल्तान मुस्कुराते हुए बोला हम हमेशा बहुत अच्छे दोस्त बन कर रहेंगे । ये कहते हुए सुल्तान ने बांसुरी से कहा, इन दोनों को इनके घर पहुंचा तो बांसुरी, पूरी फॅमिली पल दोपहर में ही जमा मौज जिदान, महासी गायब हो गए । उनकी जाते ही पूरी बोली मीरा दो ऍम ही सुलीमान थोडा नहीं हमें अभी जल्दी से सुलतान कि बाकी हमशक्लों को ढूंढना है । पीलू बोलना घर वो देखो फॅमिली को बारे थोडे जा रहे हैं । पूरी नहीं टेस्ट कर अपनी आंखों पर पंजी रखी और बोली हूँ । सुल्तान और सुलेमान के साथ साथ सभी वहाँ से जैसे ही जाने को हुई । उन्हें लगा कि किसी अदृश्य शक्ति ने उनके पैरों में रस्सी बांध थी । पूरी तो बेचारी पलट कर कर दे में ये गिर के सुल्तान में धीरे से छुपकर पूरी को अपनी गोद में उठाया और कहाँ ठंड तुम कौन हो और हम से क्या चाहती हूँ? मैं चाहता हूँ कि तुम सब आम के पेडों पर उन पीली रसीले आमों की जगह नाटक चलाओ करी । पीलू कुछ कहने को हुआ तभी उसने अपनी आपको हवा में उडते हुए पाए । टीटी टीटी सुल्तान सुलेमान टीलू और खेलूं ऍम रूट्टी हुई जहाँ पर आम की पीठ पर अटक सिर्फ पूरी ही पीना हिले डुले चुपचाप पीठ के पास खडी हुई थी उस पाॅकेट की नजर नहीं पडी थी । पूरी नहीं देखा कि अचानक ही हवा में सुनहरे रंग का धुएंॅ फॅमिली की रूपी पटल के उस आदमी को देखकर भूरी की डर के मारे ठीक निकलने वाली थी कि उसने तुरंत अपना दायरा पंजाब ऊपर रख लिया । पूरी की जगह कोई और भी होता है । बहुत अच्छा था । जो जहाँ ऍर उसके सामने था उसकी कानों की जगह दो लम्बी चिकनी रंग के बडी बडी सांप लटक रही थी । कॅश हवा में आधे खडे हो जाते हैं और अपनी लंबी काली जी लखनापार थी । चाहते हो कर जब उन की तरफ देखता तो दोनों अपना फन कार्ड थी । जादूगर एक सांप को अपने गले में रस्सी की तरह लपेट हुआ पीठ के पास पहुंचा और बोलना आप तो हम लोग हमेशा किसी तरह यहाँ पर आम बनकर लटके होगी क्योंकि किसी को कभी पता ही नहीं चलेगा । तीस स्पीड की कठोर में कहता लोग जाने का रस्ता है और तो सब की मुसीबतों का भी फॅमिली इतनी ऍसे जमीन पर टपक पडी । पूरी नहीं डर के मारे अपनी दोनों आंखें बनकर की । थोडी देर बाद जब धोनी ने अपनी आँखें खुल गई तो हो गए नहीं था

भाग - 11

ऍम एमपी सूट इलेवन आसमान में सुनहरी बादल अभी भी मंडरा रहे थे । उस नहीं इधर उधर देखा और किसी को न पाकर । पि ऍफ मैं हवा में उड नहीं और सभी आमों को बहुत ध्यान से देखती हूँ । ऍम आपने ऍम दोहरी होता है तभी उसने देखा । चार । आम बिल्कुल अलग से लग रही थी भूरी उनकी पहुंचाकर खडी हो गई की चार हाँ बहुत बडी और बिल्कुल हरे थी । भूरी भूरी ऍम अभी कम से कम तो काम ना था, ना एक ही बार में अपने असली रूप में आ जाऊँ । तो मैं बताता हूँ कि कच्चा पक्का क्या होता है? एक काम से ही दूरी सुलेमानकी आवाज सुनकर खुशी से उछल पडीं । मैं हंसती हुई बोली हूॅं मैं कमी अभी तो देखो ऍम नहीं नहीं ऐसा मत करना । जब तक जादूगर करते इसमें खत्म नहीं होता । हम शायद आपने इसलिए रुपये नहीं पाएंगे । दूसरा आम बोला पूरी समझ नहीं की ये सुल्तान के आवास है । खुसी होटल की ओर देखते हुए कहा फिर मैं फॅमिली हूँ हूँ हूँ कर रहा था इसके अंदर ऍसे ही फॅमिली हो जाये वोटर के अंदर जाने में भूरी को बहुत डर लग रहा था मैं इसे भी भूरी बहुत ऍम थी पर अपने दोस्तों को बचाने के लिए बिना कोटर्नी चाहिए । कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था । उसमें थी री से अपना एक पंजाब आगे बढाया और ठर्की मरी आंखे बंद कर ली तो वो तीस तक उसे कुछ नहीं हुआ तो उसी का आंख खोलकर कोटर को ध्यान से देखा और दूसरा पंजाब लिया कि व्यक्ति दूसरा पंजाब रखती हूँ, लेकिन नहीं लगी जब तक नहीं संभाल पार्टी बहुत तेजी से नीचे चली जा रही थी । कॅश कहती हुई बुरी जोर जोर से चिल्ला नहीं लेगी । हूॅं लगातार फिसलती ही जा रही थी । हाँ, पूरी धर्म से हरी मुलायम खास पर किसके कोमल खास तक गिरने के कारण धूरी को बिल्कुल भी चोट नहीं लगी । थोडी खडी हो गई और अपनी चारों तरफ ठीक नहीं लगी । उसे एक बूढी हाँ अपनी उन आती दिखाई थी । बूढियां उसके पास आकर खडी हो गई । कुछ देर तक भूरी को देखने के बाद तोडियां बोलिए ऍम ऍम यहाँ हमारे पास ए पी नहीं है । नहीं है । भूरी नी आश्चर्य से पूछा की हूँ कि यहाँ के लोगों का पसंदीदा तो जान लेते हैं तो ऐसे ही किसी बिल्ली को देखते हैं ऍम चाहते हैं बढिया की बात सुनकर भूरी के ढरकी मारी रूम खडी हो गए । उसने गलती हुई । पूछा हूँ तो क्या? तो हो नहीं, कभी नहीं बचपन भी मेरा सिर्फ एक ही सपना था इंडिया मेरे पास एक जब रीली चूज हर एक चमक आधार अंकों वाली फॅमिली हो हाँ हूँ फिर कल ही हो दुनिया अपनी पोपली मोहन सिंह हसते हुए बोल के दुनिया की बात सुनकर भूरी की जान में जान आई । मैं तुरंत उछल कर उस बुढियां की कंधे पर बैठ के बोली ॅ देते हो तो हूँ क्यों नहीं? मैं तुम्हें दूध रोटी दूंगी । ई दूंगी और भी थी सारी स्थिति हूँ की दूरी तो खीर का नाम सुनते ही चीर के ख्यालों में गुम हो चुकी थी । उसे बंद आंखों से भी थी । सारी बडी बडी कांच के खूबसूरत नक्काशीदार कटोरों में हीर भरी नजर आ रही थी । ईद भी सर और किशमिश के साथ साथ बादाम और अखरोट की टुकडे भी पडी हुई थी । प्यूरी के मुँह में पानी आ गया । उसने अपने होठों पर चीज फिर आएंगे । तभी उसी दुनिया की आवाज सुनाई पडी की अब आंखें को लोग आंखे खोलते ही पुरी की डर के मारे चीख निकल के मैं एक गुफा के अंदर कहाली पत्थर की गुफा में चारों ओर नशा नहीं चल रही थी । मकडी की चांदी इतनी बडी थी कि उनके अंदर आदमी चकडी पडी हुई थी । दुनियाँ बोले फॅार फॅालो पूरी नहीं पलट कर देखा तो आश्चर्य डॉक्टर सी उसने हमेशा की तरह अपनी आंखें बंद कर ली । सामने सुल्तान सुलीमान, तीलू और खेलू एक कांच के बडे से पट्टन में बंद थे और बाहर आने के लिए बार बार शीर्ष की दीवार पर मुक्के मार रही थी । तोडियां ये ठीक कर जोरों से हसी और पलभर में ही चाहते हो कर के रूप में नहीं नहीं पूछा तो तेरे यहाँ आने वाले हो? नहीं तो क्या हम नहीं समझा कि मुझे पता ही नहीं था कि तुम तेल की पी । जी । सी । बी । बी । आई थी हो चाहते हो कर अपनी कानूनी लटके धूल लंबी सांपों के ऊपर हाथ पीता हुआ बोला तो मैं कटोरे वाले हो । ऍम पूरी चीखती हुई बोली तो मैं क्या लगेगा? हमारी लंबी झबरीला पहुँच देख नहीं रही थी । पीडीपी जी से हो रही थी जादूगर हस्ता हुआ पूरा पूरी को जादू की इसकी पाँच से इतना डर नहीं लग रहा था जितना उसके कान और गली में पडे हुए तो राम ने से सुनहरी सांपों से चुप और पर अपनी लम्बी पतली जीत निकालकर सबका रही थी । कॅश नहीं, आंखों से उसकी ओर देख रही थी । पुरी ने सातों को सहमी हुई नजरों से ठीक है तो एक साल की आंख देखकर उसे बहुत आश्चर्य हुआ जहाँ जोकर की ढाई कान पर लटकी हुई साहब की आंखें बिल्कुल इंसानों की जैसी थी । ऐसा कैसे हो सकता है? धूरी पूछ उठाई । झाडू के सस्ते हुए बोला ॅ जैसी हैं क्या कि है संतान का हम से निकले हैं जिससे मैं नहीं साहब बना दिया है । धूरी यह सुन कर सन्न रह गई । वही सुल्तान की हमशक्ल को देखकर भी उसे छुडाने के लिए कुछ भी नहीं कर पा रही थी । तभी वहां पर जोरदार धमाका हुआ और कांच के टुकडे हवा में कहती हुई जमीन पर भी घर के तीन हुआ । खेलो ने अपना कद इतना ज्यादा बढा लिया था कि कांच का बर्तन तोडकर अपनी छत तक पहुंच गए थे । चाटू कर ये ठीक कर पहुंच चक्का रहे क्या मैं जब तक कुछ समझ पाता तीनों ने अपना हाथ आगे बढाया । चलते हुए आपकी कोई में चाहे तो कल को फेंक दिया । दूरी चिल्लाते हुए बोली हूँ पीलू का चेहरा सियाहा हो गया । मैं तुरंत सुल्तान के हमशक्ल को बचाने के लिए आपकी कोई में कूदने के लिए आगे बढा कि तभी खेलो ने उसका हाथ जोर से पकड लिया । सुल्तान की आंखों में आंसू आ गए । उसे लगा कि उसके कारण उसका एक हमशक्ल आंख की कोई में चलकर खत्म हो गया । तभी वहां पर ठंडी ठंडी हवा पहने लडकी ऊंची ऊंची आग की लपटों के बीच से ठंडी हवा का आना देखकर दूरी कोई के अंदर झांक कर देखने लगी । आग की लपटों ने नरम मुलायम खास का तू घर लिया था । उनके साथ साथ आदि घास रंग बिरंगे फूलों और तितलियों में बदल नहीं रखी । आग का कुछ हुआ, अब अपने आप ही भरने लगा । कुछ ही देर में संपन्न जमीन हो गया सुल्तान तब ही हरे रंग की घास के बीच से काॅफी सुल्तान के साथ सभी ने चौक कर दी तो वहाँ पर हरी रंग का साथ पडा था क्या हरी बा सुल्तान हमशक्ल? तो जिंदा साउथ बोला सुल्तान, अगर तुम मेरे ऊपर हाथ तीनों की मैं अपनी स्टीज रूप में आ जाऊंगा । ऍम कहती हुई धूरी लपक कर साहब के पास पहुंच गए और तुरंत उसके ऊपर अपना पंजाब फिर पर साहब मैं ऐसे ही चुप चुप खास पर पड रहा है । खतम ज्यादा मस्ती करोगी तो में एक ही बार में पूरा निकलने का टी आर रखो । अभी है कोई इंसान नहीं बल्कि बहुत ही भयानक और खतरनाक साथे सुल्तान धुरी कोटे रहते हुए बोला डर के मारे थर थर कांपती हुई पूरी उसी जगह पर अपनी पूछ दबाकर पैंट के बहुत कोशिशों के बाद थी । सुल्तान तक जाने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी । सुल्तान आगे बढा और उसने इच्छुक कर बडे ही इतिहास और अपनी पनसे साहब के ऊपर अपना हाथ फेरा । पल भर में ही साहब की जगह सुलतान का हमशक्ल खडा था मैं सुलतान की पास आकर उसकी करी लग गया । हर्षो पडा सुल्तान की आंखों में भी आंसू आ गए । थोडी दिल्ली कहाँ जो पहली वाली थी सुलेमानकी कंधी पर चलती हुई ऍम कोई भी सरकार तो ठीक हैं तो होनी ही दूरी की बात सुनकर सुल्तान के साथ साथ सभी आज पडे । सुलेमान ने सुल्तान के हमशक्ल के पास आकर पूछा तुम्हारा नाम क्या है? और तुम इस जादूगर के चंगुल में कैसे पहुँच गए? सुल्तान का हमशक्ल आंसू पहुंचते हुए बोला मेरा नाम नसीम है । ये ऍम एक बार घूमते हुए मेरी राज्य में आ पहुंचा और मेरा खजाना हासिल करने के लिए इससे मुझे कैद कर लिया । जभी पर मौका पाकर मैंने भागने की कोशिश की तो इससे मुझे साथ बनाकर अपनी कानून से लटका लिया हूँ । अभी ऍम दूरी आंकी नहीं जाती हुई पूरी सुलेमान ने गुस्से से बुरी की तरफ देखा तो पूरी तुरंत कूदकर सुल्तान की कंधे पर चढ के हम तुम्हें परिचय होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है । जादूगर की मारते ही सारा खत्म हो चुका है । तीनों ने मुस्कुराते हुए कहा थक तुम अपने देश वापस जाऊं और आराम से रहो । सिली मानने नसीम के कंधे पर हाथ रखते हुए बोला अगर तुम सब भी मेरे साथ चलती तो मुझे बहुत खुशी होती है । नसीम ने ठीके स्वर्णी सुलतान का हाथ पकडते हुए हम सबको भी तुम्हारे साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगेगा । खराब भी फॅमिली बाकी की हमशक्ल भी बहुत मुसीबत में हैं । वे सब तेरा इंतजार कर रही होंगी । हाँ, मुझे से आता उनका तरह तकलीफ खान समझ सकता है । नरसिंह ने भरे गले से कहा सुलेमान ने सुल्तान कोई सारा किया और सुल्तान ने अपनी कुर्ते की जेब से बांसुरी निकली और कहाँ नासिक को जल्दी से इसके राजमहल पहुंचा तो बांसुरी से एक महीन सियाना सही अभी ॅ हूँ । पल भर में ही नाथसिंह महासी गायब हो गया । सुल्तान के साथ साथ सभी के चेहरों पर मुस्कुराहट और सुकून नहीं किया

भाग - 12

ऍम अब मेरा हमशक्ल । हमें यही ही मिलना चाहिए क्योंकि ऐसे ही पहाड और जंगल में नहीं सब फ्री में देखी थी । सुल्तान बोला तीनों नहीं कहा तो हमी किसी जगह पर रुक कर अपनी हमशक्ल को देखना चाहिए । सुल्तान पीलो की बात से सहमत होते हुए वहीं रुक गया और तीनों खेलो जिन और भूरी इधर उधर देखने लगी । तभी उन लोगों ने देखा कि बहुत सारे गोलबारी उनके ऊपर आकर मंडरा नहीं लगी । हरी, पीली, नीली, गुलाबी और लाल रंग के गुब्बारों से जैसे पूरा आसमान भर गया था, उन में सिर्फ एक ही कुमार था । बिल्कुल गलत नजर आ रहा था । नहीं बाकी वो अखबारों से अलग खूब बडा ऐसा गोल गोल और सुनेहरा जो सूरज की रोशनी में सुनने की जैसे चमक रहा था । सुल्तान बोला तीता खूबसूरत को बारह मैंने आज तक नहीं देखा । भूरी तुरंत बोली वो ऍम दूरी तुम जो पूजा नहीं हूँ कि वह गुब्बारा तो नहीं लेने आया हूँ । टू भी बोलने वाली बिल्ली पहली बार ही देखी होगी । सुल्तान बोला सुलेमान अपनी हंसी रोकते हुए बोला हाँ देखो ना, तभी मैं बुरी के ऊपर ही मंडरा रहा है । पूरी यहाॅ तीनों की कंधे पर कूद कर बैठ गए । रूपाणा अभी भी उन लोगों के ऊपर उड रहा था तब ही उसको भारी से कुछ सुनहरी काम करेंगे । पूरी फॅमिली है । सुधान ने सुनहरी करों को देखा हूँ ना हो तो समझ नहीं आ रहा कि यह को पारा हमारे साथ साथ क्यों चल रहा है और ये इतने चमकीले सुनहरी कर कैसे चला रहा है । तभी रह सुनेहरा को पाना चीनी धीरे होता था । हुआ सुल्तान और उसके दोस्तों की एस गेट आकर रुक गया । दूरी नाॅक अपनी आंखों पर पंजी रखी और ऍम मेरी बहुत सोनू कहती हुई चमकीला सुनेहरा दोबारा सुल्तान के सामने चाहकर हवा हूँ क्या पूना सूत ऊॅट करूँ पूरी फॅमिली कि अरे हाॅल जिन हस्ती हुए बोला जो भी बिल्ली ॅ ऍम भरीपूरी करे । उससे पहले तो ऍम सुल्तान नहीं हो पाने को देखते हुए गंभीर स्वर में पूछा । हम ने कभी भी किसी को बारी को बोलती नहीं सुना । सच सच बताऊँ ऍम टू खून शुक्ला ऍम भोपारी नहीं जवाब दिया हूँ दूरी जोरों से हस्ती हुई । पूरी ऍम क्यों तुम सूर्यपूजा सुबह नहीं तू मेरी फॅमिली को हाँ हाँ क्यों नहीं मैं तो अपने दोस्तों के साथ इसीलिए ही तो अपना महल छोडकर निकला ऍम की आपने सभी हमशक्लों को उनकी मुसीबतों से छुटकारा ऍम बताऊँ क्या वाॅल सिलता नहीं है? गोपाल बोला ईटीमनी घूमते हूँ तो वो टी सी बोलूँ तीस दिनों के उत् हो और टोपी सी ऊपर और मुझे चोरी नजीडी रूही वो सभी के मुंह से अचानक एक साथ ठीक है पर हम तुम गुब्बारों देश तक कैसे पहुंच गए? सुलेमान ने पूछा वो बारापुला मीडि टीश्यू ऍम की नदियाँ बहती है उस को जो हाँ पूर्णिमा की रॉट को चांदी किसी ॅ तो ही तुम्हारे कहने का मतलब है की नीति कहाँ चांदी की क्या जाते हैं खेलने आश्चर्य से पूछा हूँ और उस रो हमारी रोज क्यूँकि सुबह लू कुछ रो नाॅट इकट्ठा हो चलते ही और जितनी जो ही उतनी चमकीली सिक्के उपनी सौं छोटी भूरीपुर मुझे भी चलती फॅमिली नहीं पूरी की बात सुनकर को बारह हजार किया और थोडा खु खु खु हो तो तीन ऍम टोमॅटो की खर्च पूर्णिमा को तीस दिन में अनगिनत चौक ही किसी की पहुँच होते हैं । पी । डी । पूरी प्रो । जो किलो खुसी के लेने की बहुत ही ही फ्री सिक्का काम नहीं हूँ, किसी ऍम लगाने के लिए नहीं । नहीं अपने मंत्री से कहा कि वे खूब तीन के मुझे उस चौदह हुई ड्यूटी की पहाडी में पूरी फॅमिली ऍम करने की बहुत ही मनती किस बात का पॅन जीटॅाक उन सिक्कों की खूझी कई फॅमिली थी ऍम उसने थी पहुंचाने से ही तो पुरोनी लोगों की फिर मैंने सू की मुझे ही के लिए जो कुछ फॅमिली तो फिर भी चौंथी किसी के जो टीम होती हूँ ऐसी और ऍम को नाॅन ऍम सुल्तान गोलबारी को टोकते हुए बोला तुमने अपनी साहब क्या किसी को लिया नहीं था? दोपहर हाँ बोला नहीं मैंने अपनी फॅमिली दूज टूटे कि अॅगुलियों ऍम इतनी ऍम उठता है तो तो होती ऍम एक है । ऐसे कुछ पसंद नहीं आया । धूरी ने अपनी आंखें ना चाहते हुए कहा सुनी मान भी लगातार बोलने वाली तो फॅमिली को लेकर आ गया है तीनो झट से पूरा पूरी सुनकर किसी आगे हर बोली ऍम तो कहती हूँ ही ली जाना ही ली ऍम धूरी गुब्बारे को मेरा मतलब है मेरे हमशक्ल को बोलने दो । सुल्तान ने बुरी को टूटे हुए कहा जी नहीं कोई बोल नहीं, मुझे पूरी कुछ ठीक कर तो अपनी मुँह ही है । सुबह भी सौरी सो मैं देसी भूडपुर करके ऍम पर चौकसी मेरी शॅर्ट नहीं ऍम मैं उसकी तो फॅस सुलीमान बोला तो हम नदी के बारे में पता लगाने तुम तुम्हारी तोते ये आशा को साथ ही करनी थी ना । फिर मैंने कहा की और शो और मैं चुप थी के किनारे पहुंचे तो यह शव मुझसे बोल ऍम देंगे हूँ पूरी पीना बोली फॅमिली हूँ यू ऍम मुँह में बहुत सी ऍम गो बारी नहीं मुस्कुराते हुए कहा । दोबारा कुछ कहता इससे पहले ही सुलेमान गुस्से से बोला मोदी अब तुम शब्द और भी कहा तो मैं तुम्हें वापस मामा के बाद ही दूंगा । बुरी नहीं सुनते ही तुरंत ही बंद कर दी और तीनों के कंधे पर से दिखा दिया । उसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो होते से सो रही हूँ । उसकी चाहता नहीं । देखकर सब मुस्कुरा उठे । बारह हंसते हुए बोला फिर फुल ऍम उसी को हूँ फॅमिली में तो हम पता नहीं कितने दिन लाॅचिंग मुझे उसकी बहुत फिर कुछ सही नहीं की हूँ हूँ की हमी अपनी तो फॅमिली हमारी मौजूद कर चुकी है । मेरी कितनी पहुँच उ दूर से पिछली काॅलोनी कुछ ही पलों के बाद कुमार ऍफ का हुआ वहाँ पूरा हो गया फॅमिली हुई हुई सैनिको की बाडी में वो तो तू तू राॅबर्ट के लिए तो हूँ नहीं और ये शो उस बहुत पुर बेट कर फट चली और भारत और नहीं हमें थोडी ही डील ब्लॅक मैं परेशान होती हूँ पूछता हूँ पर हमें तो वो जगह देखनी है । अच्छा हँसी नदी निकल जाती है । हाँ नदी तो इस महाड के नीचे से निकलती है । बात नहीं कहा हूँ हूँ तो लडकी नीचे ऍम पूछूँ ऍम याशा टू रहते हुए बोला हूँ तो तुम हम सब कुछ जल्दी से चींटियों वो टॉकी हो उम्मीद तो हार्ड के नीचे ऍम की मैंने नहीं होता होती हुई कहाँ ऍम ऍम तो कुछ समझ पाते तो या इशांत पुल भर में ही ऍम पहाड की चींटी बंटे ही मेरी हंसा हूँ मैंने तुरंत उठ खडे हुए तो फिर क्रिकेट थी मतलब पहाड के अंदर कोई गुफा थी । सुलेमान ने पूछा हूँ उन को फाॅर्स चीट हो चीज में सी टी निकल ही थी कॅश की उसने वहीं से नाइंटी की पिछली सीट को निकलती हुई थी । खुल फॅमिली ही नहीं दिखाई दिया था । दूरी छत से बोली थी यही तो फॅमिली से किसी की समझ भी नहीं हो रही थी क्योंकि ऍम वहाँ से निकल रहा है तो हमी क्यों नहीं दिखाई दे रहा हूँ मैं ये ऍम जी के लिए यहाँ की बढा तभी मीरो एक सैनिक चिन्नू राजन उसके पास बच जाए ना भी गायब हो जाएंगे । ऍम फूलों महाराज यहाँ पर हर रात एक जादूगर रहता है जैसे यहाँ पर अपना जादू करा रखा है । हम और आप बहुत सारी वस्तुओं को देखी नहीं पा रही क्योंकि वे अदृश्य यहाँ पर एक नदी बह रही । पर यह भी हम सबको नहीं दिखाई दे रही है । मुझे तो लग रहा था फिर उसी में कोई सुख ड्यूटी तो हूँ । मैंने सकता करते हुए पूछा अगर यहाँ पर कोई नदी बह रही तो हम ऍफ क्यों नहीं रही है? यहाँ करेंगे । ऐसे हमें भी इतने दिनों से कुछ भी समझ नहीं आ रहा है । पता नहीं कैसा है ये मैं जान पूरी गुफा माया भी है । हम लोग इतने दिनों से यहाँ पर बिना कुछ खाए पी रहे रहे हैं ना तो हमें भूख लगी और नहीं प्याज । सिंधी की बॉल सुनकर बात और मेरी साठ साठ यू शो भी चक्र हो गया भी । पार्टल बोला, हमें सैनिकों को वापस हमारी राज्य भेज देना चाहिए वरना उनकी जॉन को खतरा हो सकता है । नॅान ठीक हो तो बहुत रहो तो फूल पर अब जादूगर वापस कर पहाड के बारे में पूछेगा तो हम क्या करेंगे? देना चाहिए ऍम यह आशा हसते हुए पूरा पर कैसे बोल रहा हूँ कि चींटी तो पता नहीं कहाँ चली गई । बादल जमीन पर ध्यान से देखते हुए बोला ऍम ऍम यूशू बोलो हूँ हूँ नहीं ये सब तुम्हारा क्या हो रहा है? मैंने यहाँ की तरह गुस्से से देखते हुए कहा तो भी एक महीना ऍम हूँ तो फॅमिली ठीक हु हुई छुट्टी सीना थुर टी चींटी थी जीती में खुशी से झूम उठा नहीं नहीं तुरंत फॅस पूर्वोत् पर नदी नीति कहाँ ॅ पता नहीं कौन सी शुभ बोले ॅ पूर्व हूँ हूँ हूँ तो भी तू से हम वो चुनी लोगी ऍम करीब तीन फुटबॅाल हूँ उसकी बीच पूछा कुछ भी उॅची थी कॅश उनकी टूपी पर पीली ड्रम का ही राॅय पर सुनहरी मछलियां, फॅमिली अचकन पर कौन सी तारीफ सुनी थी सब सी जी पर टी उसकी गुलाबी रंग की दाढी उसके घुटनों तक झूम रही थी में कुछ कहता हूँ इससे पहले ही वो पूल ऍम

भाग - 13

हूँ एमपी सूट थर्टी यूशू कुटुंब पूर्व भूड के लिए भी खुद सीनू नहीं कुछ तो हो हूँ वो तो वह उसे छोडने की बहुत बहुत हो स्टाॅफ मुझे नहीं जो कोई फॅमिली के बारे में कुछ जानना है चलो याॅर्क तेरे को पुट्ठी ऍम मुझे अपनी कौन पुर बीशू मीटिंग ॅ हूँ टूटी हुई ऍम हाॅकी कोई गलती हो गई तो पूछे ऍम मुँह दूसरी तरफ फॅार मैं फॅमिली फॅमिली थोडी थी बाटी ऍम पुर में आंधी के ऊपर फॅमिली कितनी रूटर हो खून खून स्कूल फॅमिली के कारण हूँ शूक पूछूं ऍम हरी खास के ऊपर पडा हुआ ऍम तो सारे को पारी हाॅल ही ठीक ऊपर हूँ कुछ ठीक थी ही फॅमिली का कुछ समझ ही नहीं आ रहा था की हो टी सी हूँ पूरी क्या हो सकती है उनके ऊपर हूँ क्या थी स्कूल थी काम इतना ठीन फॅस चीट कर रही थी तो भी खाने को पारी की नजर मुझ पर पडी तो वह खुशी से चिल्लाया ऍम के स्कूल ही उसकी इतना कहते हैं सुप्रीम को पारी मेरी फॅमिली की तो भी एक लाॅट हवा में उडा बिल्कुल मेरे पांच सौ काॅन् हूँ और यहाँ के सी आई हूँ छुट्टी नि ऍम तो दुःखी होते हुए पूल से ही चौँक बहुत ही दुष्ट हम सब फॅमिली उसके यहाँ की कौन क्रिस्टी थी एक करती से हम न्यूज की तूती ऍम अस दूध का फूड के जिसके कारण हम सबको ही बना दिया और यहाँ पर फिर ना गोलबारी की बात सुनकर में हाथ पडा के और महीने पूछा हूँ क्यों तूती का नाम क्या था? हम ऍम फॅमिली से पूछ लूँ तो भी ये ऍम कुर्मीडीह फॅमिली आया किस आॅफ एशिया की याद आती की पीढी आंखों में आंसू आ गए । हाँ पाॅकेट की तरह नहीं था तो बहुत छठे सबकी मदद करता था । पी ली ऊपर एनी हूँ, प्यूर्तो हुए कहाँ फॅर हम भी ऍम तुम्हारी बाहरी में पता चल गया तो हो सकता है तो पशु पक्षी बनाती और फिर तुम कभी अपनी स्टोरी रूपी वापस आप आओ । उस समय मैं बहुत ही तो हुआ था इसलिए टोमॅटो उनकी बहुत मान ली तो ऊपर बनने को राजी हो गया । बहुत समय बीतने के पास चुप मैंने उनसे कहाँ क्योंकि मुझे मेरी फॅमिली थी तो मुझे भी चिंता ही नहीं चाहती हूँ । तो हम उनसे बात करके देखते हैं । सुल्तान बोला हूँ ॅ खूब, मैं ऊपर बनकर यहाँ वहाँ ॅ हूँ ऍम और मुझे ऍम गुब्बारा दुखी होते हुए बोला ठीक है तो आगे चलो हम तोहरे पीछे चलते हैं । सुलेमान ने कहा सुल्तान और उसके दोस्त को बारी के पीछे पीछे छोड नहीं लगी और आसमान तक पहुंच गए मेरी फॅमिली ये भूरी पूरी दोबारा पूरा जूसुफ सिपुर लॉन्ग ऊपर और दिखाई थी । रहो ही ना उसकी कांग्रेस चौक रिपोर्ट करूँ उसकी बहुत मानती है सुल्तान नाल्को बारी के पास जाकर कहता है मैं तुम सबकी मदद करने के लिए आया हूँ । मुझे बताऊँ की जादूगर का जादू कैसे जोडा जा सकता है ताकि तुम्हारे साथ साथ मेरे हमशक्ल की भी मदद कर सकूँ । लाल रंग का को बारा हवा में उडता हुआ सुल्तान के करीब आ जाता है और कहता है अगर दोनों की सुनहरी रंग की छडी टूट जाएँ तो उसका सारा हूँ उसी समय खत्म हो जाएगा । सुल्तान ने कहा ठीक है हमें ये बता दूँ की जादूगर की सजा मिलेगा तो भी कहीं जाने की जरूरत नहीं है । नीला कोबारा पूरा अच्छा लेकिन फिर हम तुम्हारी मदद कैसे करेंगे? सुलीमान परेशान होते हुए बोला क्योंकि जादूगर हमारी ही हो रहा है । फॅमिली उसके आने से पहले रुनझुन की घंटियों की आवाज सुनाई दे नहीं लगती हैं । बैंगनी रैंकी को बारे में कहा सुप्रीम आंदोलन हाँ घंटियों की आवाज तो आ रही है । नहीं, ये बात कर ही रही थी कि तभी हवा में बाना जादू कराकर खडा हो गया । होने की कंधी पर याशा भी बैठा हुआ था । मेरी टू ऍम मुझे कोई टूल के सुनहरे को परे नहीं । आशा को देखते ही कहा ही नहीं हूँ । याशा नहीं जवाब दिया । तभी लाल को परी ने होने की सुनहरी छडी की तरफ इशारा किया । कोई कुछ समझता हूँ इससे पहले ही पूरी ने तीलू के कंधे से छलांग लगाई और बोनी की सुनहरी छडी पर छपट्टा मारकर उसे सुल्तान को पकडा दिया । सुल्तान ने तुरंत छडी तोडती सबकुछ जैसे पलक झपकते ही हो गया । छडी टूटते ही वहाँ पर गुलाबी रंग का धुआं छा गया । ठंड के मारे सभी ने अपनी आंखे बंद कर ली । कुछ देर बाद जब सपने आंकी घुली तो वहाँ पर एक भी को पर आना था बल्कि हंसते मुस्कुराते लोग खडे हुए थे जो आपस में एक दूसरे की गले मिल रहे थे और खुशी से चीख रही थी । सुल्तान का हमशक्ल खुर्रम भी मुस्कराता हुआ खडा था । तभी याशा आया और खुर्रम की कंधी पर बैठ गया । खुर्रम ने कहा की आशा तुम मेरी एक दिन याद नहीं आई तो मुझे छोडकर पौने के पास चली गई थी । याशा बोलना ऍम ऍम क्योंकि तुम नी पाँच चांदी के सिक्कों का कैसे पता लगा लिया । खुद हमने कुछ सकता से पूछा फॅमिली के पानी को पांॅच तो फॅमिली हो । ऍम एक पहले नहीं थे । हम लोगों को फॅस फिर तेज करने से उसी क्या मिलता? पीडितो से कोई दुश्मनी नहीं । खुर्रम नहीं आश्चर्यचकित होते हुए पूछा हूॅं तो खुद हम दुखी होते हुए बोला बाॅल यह आशा बोला । सुल्तान बोला अच्छा गुटर अब तो आराम से ये आशा के साथ अपने देश हूँ, नहीं सुनता तो मैं नहीं जा सकते तो नहीं । कुछ दिनों के लिए तो मेरे साथ चल कर रहना ही पडेगा । कोई कुछ भी बुला लो हूँ, बुरी नहीं । एक आंख खोलकर देखते हुए कहा । पूरी की बात पर सभी जोरों से जहाँ का मार्कर हंस पडे । सुल्तान बोला अभी मुझे बाकी हमशक्लों को भी ढूंढना है तो समझ सकते हो ना की भी नहीं जाने किस मुसीबत में होंगे । खुर्रम सुलतान का हाथ पकडते हुए बोला । उधर काम खत्म करने के बाद हम जरूर मिलेंगे, हाँ जरूर मिलेंगे । मुझे आशा के साथ बात करने में बहुत मजा आएगा । सुल्तान ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, पर हम कहाँ जाएंगे? वहीं पर खडे एक आदमी ने कहा, जो अब तक दोबारा बात नहीं हुई थी, खुर्रम बोला था उन सब बिल्कुल चिंता मत करो मैं तुम सबको तुम्हारे घर आराम से पहुंचवा दूंगा । सबसे पहले तुम सभी को मेरे महल में चलकर रहना होगा । आखिर अब हम सब ऍम खुर्रम की बात सुनते ही सभी आकर उसके गले लग गए । थोडी देर बाद सुल्तान और उसके साथ ही खुर्रम सुविधा लेकर अपनी अगले हमशक्ल की खोज में निकल पडी हो । अब हम लोग कहाँ जा रहे हैं? सुल्तान सुलीमान ने पूछा हाँ तक हम कहीं भी तय करके कहाँ चलेंगे? तो हमें तो खुद ब खुद अपनी मंजिल मिलती है । चली जाती है बुरी तभी अचानक सुलेमानकी कंधे पर जोर से को दी अमित में धक्का देकर नीचे गिरा दूंगा । सुलेमान गुस्से से भूरी को देखते हुए बोला ऍम बुरी नहीं । एक ओर अपना पंजाब ऊपर की ओर उठाते हुए कहा सुनी मान के साथ साथ सुल्तान पीलू खेलू और जिन्होंने भी जब आसमान की तरफ देखा तो उनकी भी आंखें आश्चर्य से फैल के ईकान पडे । आराम से खजूर के पेड पर बैठा हुआ था । उस आदमी की लंबी जटाएं नीचे लटक रही थी । उन जटाओ में हीरे मोती जैसी बहुमूल्य नगीने लगे हुए थे । उन जगहों पर सूरज की रोशनी पडने से वीररत्न जगमगा रहे थे और उनकी रंग बिरंगी आधार हवा में भी कर रही थी । उन सपने आपस में एक दूसरे की ओर हैरत से देखा और तुरंत ही सब एक दूसरे की बात समझ के अभी सब हवा में उड चली और खजूर की पीठ के पास जाकर रुक गए । सुल्तान नहीं उस आदमी से कहा, दिखने में तो तुम कोई मायावी पुरुष सकते हो, क्योंकि हमने आज तक इन संसार में बहुमूल्य रत्नों से जडी जटाएं किसी भी व्यक्ति की नहीं । इस पर उस आदमी ने गंभीर स्वर का मुझे सुल्तान नाम की आदमी की तलाश में यहाँ उसी के इंतजार में बहुत पशु बैठा । सुल्तान ने नम्रता से कहा मेरा ही नाम सुल्तान इस कर में है । आदमी बोला मेरा नाम की रात है और मैं तुम्हारी हमशक्ल यामीन का मित्र हूँ । सुल्तान ने हैरानी से पूछा आपको किसी का था की मेरे हमशक्ल का नाम यामीन है कि रात ने कहा मैं सब जानता हूँ सुल्तान हर यामीन तो ठीक तुम्हारी सामने खडा है और बहुत देर से तुम्हारे साथ । साथ ही चल रहा है । विराट की यह बात सुनकर सुल्तान ने तुरंत अपनी चारों तरफ देखा पर यामीन कहीं नजर नहीं आ रहा था । पूरी बोट डाॅ । यहाँ तो कोई नहीं है । सुनील ने भूरी के मुंह पर हाथ रखते हुए कहा कि ये बिल्ली को ज्यादा ही बोलती है की रात ने भूरी की ओर देखते हुए कहा यामीन तुम सबके सामने होने के बाद भी इसलिए नजर नहीं आ रहा क्योंकि बोर्ड जान चुके नियुक्तियां दृश्य कर दिया है । उसे पता था कि अगर तुम आईने के अंदर आ गए हो तो यामीन को उसकी कैद से आजाद कराकर जरूर ले जाऊँ की अच्छा तो अब हम क्या करें । सुल्तान नहीं पूछा की रात नहीं कहा मेरी जानता हूँ पर जितने भी बहुमूल्य रत्न और न जी नहीं है तो मैं उन में से जितने चाहो ले सकते हो, थियामीन को भूल जाओ ।

भाग - 14

हूँ । एमपी सूट पूछी नहीं मुझे नहीं चाहिए मुझे यामीन को दूर जादूगर की कैसे छुडाना की नाथ खुश होता हुआ पूरा । मैं तो सिर्फ तुम्हारी परीक्षा ले रहा था । तुम वाकई में एक नॅान इंसान हूँ इसलिए मैं तुम्हें बताता हूँ कि तुम यामीन को कैसे देख सकते हो । ये कहते हुए किरात खजूर के पेड से नीचे उतर नहीं लगा । उसी उतरता देखकर सुल्तान सुलेमान और तीन किलो भी जमीन पर आकर खडे हो गए । किराना होना मुझे सामने पेड हैं । उसके अंदर एक होटल है उस होटल में साथ नागमणि अगर तुम उन से एक ही नागमणि लाने में सफल हो गए तो तुम यामीन को देखता हूँ । ऍफ नागमणि होगी तो वहाँ पर नाग भी होगा सुलीमान नहीं । कहा नहीं । इस समय सभी नाग नागलोक हो गई हैं । अब बीस अपराध से पहले नहीं आएंगे तुम । पोर्टर के अंदर जाकर वह नागमणि लाकर मुझे दीदी । किरात की बात सुनकर सुल्तान जैसे ही कोटर की ओर जाने लगा, उसे लगा जैसे उसकी कान की पास कोई धीरे से फुसफुसाया हो । सुल्तान ध्यान से आवास के सुन नहीं लगा तभी उसे अपना नाम सुनाई दिया और है वोटर नहीं जाते जाते हैं रुक गया । फिर से धीमी सी आवाज आई तो कहाँ था नहीं यहाँ नहीं पर तुम तो मुझे दिखाई नहीं दे रही है । सुल्तान ने परेशान होती हुई कहा क्योंकि मुझे पूरी जादू करने अपनी जादू सी अदृश्य कर दिया है तो बिल्कुल चिंता मत करो । मैं अभी की रात को नागबनी लाकर दूंगा । ऍसे हमेशा के लिए आजाद हो जाउंगी । सुल्तान बोला नहीं नहीं ऐसा कभी मैं करता हूँ की की रात की में ही पूरा जाते थे जो अपना रूप बदलकर जहाँ पर तुम सबको कैद करने के लिए बैठा है । अगर तुम इसको होटल के अंदर गए टोमॅटो ही सीधा नागलोक ले जाएंगे और फिर तुम कभी वापस नहीं आता हूँ की सुल्तानी सुनकर खबर आ गया थोडा ऍम मैं क्या करूँ? उसकी धात के सिर में जो होंगे और हीरे वाली जगह है तो उसको काॅल जैसे ही जमीन पर में होंगी और धीरे पीछा चाहेंगे तुरंत अपनी असली रूप में आ जाएगा । ठीक है मैं ऐसा ही करता हूँ । तब वह सुल्तान की रात की पांच जानी लगा की रात सुल्तान को देखकर जोर से चीखते हुए बोला तो नागमणि लेने क्यों नहीं जल्दी सी कोटर के अंदर जाओ वहाँ तुम्हारा दोस्त थियामीन तुमसे कभी नहीं मिल पायेगा । तुम यामीन के लिए परेशान हो और अपनी जिंदा कर कहती हुई सुल्तान ने की रात कि जनता को झटका देकर जोर से खींचती पल भर में ही जगमगाते हुए कि रे और मूंगे बिखर कर चारों को फैल के चारों तरफ हल्के नीले रंग का धुआं छा गया और की रात की जगह वही बूढा चाहते करता था । अच्छा ऍम टू टू यासीन की आप वहाँ सही क्यों नहीं करते हुए सुल्तान ने आइना जमीन पर पूरी ताकत से बता दिया । आईने की टूटते ही सुलतान का हम शत्र जामी उसके सामने खडा था । सुल्तान को देखते ही यामीन दौड कर उसकी गले लग गया और उन्हें गले से बोला अगर तो नहीं आती तो मैं हमेशा के लिए इस आईने में कैद रहता । सुधान की आंखें भी नम हो गई । मैं यामीन की पीठ पर हाथ देते हुए पुल तुम बिल्कुल आसान हो और इस बूढी बॉल को हम ऊपर आसमान की सैर के लिए भी इस देते हैं, जहाँ से यह ही वहाँ पर सही या पायेगा । खेलो अचानक बोल पडा ये काम तो नहीं करूँगा । एक कहते हुए उसे उस बूढी जानबूकर को उठाया और घुमाती हुए आसमान की तरफ फेंक दिया । दूर हाँ होना बचाओ बचाओ चिल्लाता रहा हर बादलों के बीच में जहाँ नहीं कहाँ हो गया ऊपर जाती जाती भी उस बूढी ने सुल्तान के हमशक्ल यामीन को देखकर कुछ मंत्र बुदबुदाए पल भर में ही यामीन तुरंत कबूतर पहन के उसकी कबूतर बनते ही ऐसी लगा जैसे चारों तरफ खाली आंचल किराएं हजारू कबूतर थी । चुनाव जाने कहाँ से आ गई थी । उन्होंने जैसी पूरा आकाश किया था तभी कबूतर पूना स्वाॅट आपने तुम्हारा आखिरी हमशक्ल जिसकी तलाश में तुम छुट्टी हुई तीन पूरा चुकी हूँ । जब तक मेरी बातों का प्रयास नहीं हूँ मैं शहीद कभी अपनी असली रूप में नहीं आ पाऊंगा । तभी महीने की बाहर आने के बाद भी मुझे कबूतर करना पडा । ये सुनकर सुल्तान और उसकी सभी साथ ही आश्चर्यचकित हो गए । सुल्तान उसे ढांढस बंधाते हुए बोला, मुझे पूरी बात बताओ तो मैं तभी तुम्हारी मदद कर पाऊंगा । कबूतर बोला झूठ बोलना उसी नाराज तथा प्रसारि गलती मेरी थी । अच्छा ऐसा तो नहीं क्या कर दिया था? सुलीमान ने पूछा क्योंकि मेरे करन ही उसका कछु पत्थर में बदल गया था । क्या मतलब? तीनों ने आश्चर्य से पूछा । मेरी ही इमरजेंसी मेरी साथी कबूतर बन गए हैं और उस बूढी आदमी का कछुआ पत्थर बन गया है तो मुझे मेरी ऍम मेरे साथियों को फिर से पहले जैसा ही करते । ये सुनकर सुलेमान कबूतर से बोला बहुत अच्छी हो तो मैं खुद से ज्यादा दूसरों की चिंता है । फिर पहला कैसे तुमने उसकी कछुए को पत्थर में बदल दिया । हाँ, हो भी जाता है कि तुम सब कबूतर नहीं ऐसा भूरी से बिना पूछे रहा । नहीं किया हूँ तुम सामने कहाँ ठीक रही हो ना? कबूतर का हाँ, लेकिन ही जैसे कोई टोमॅटो दूरी आंकी मटकाते हुए बोली कबूतर नहीं जवाब दिया । वहीं छोड ही फिर मेरी करनी थी से पत्थर बन गया है । ये सुनकर दूरी हमेशा की तथा धरके मारे सुलेमान की कंधे पर जा रहे थे । कबूतर की बोला जीटॅाक था इसलिए इतनी बडी कछुए को देखकर मेरे मन में उसी पत्थर बनाने का भी जाना है । पर लगता है कि मैंने कुछ गलत मंत्र पडती जिससे बीजेपी अपनी असली रूप में नहीं आ पाया । और हम सब ठीक कबूतर सुल्तान नहीं है । सुन कर अपने साथियों को अपने साथ आने का इशारा किया और उसका छुट्टी के पास पहुंचा । लग रहा है ये ऍम तीनों ने कछुए के ऊपर प्यार से हाथ लेते हुए कहा हाँ ऐसा ही नहीं ना कि ये पत्थर का है बल्कि मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे ये अभी तो पडेगा । खेलो पीलू की बात का समर्थन करते हुए कहा दूरी सुलेमान से बोली तो होता ही है ऍम सुलीमान नहीं । कुछ सोचते हुए पूछा ऍम जिसके बारे में ये ऍम पर कोई वॅार यहाँ हूँ करती हुई सुलीमान खुश होते हुए बोला और उसने तुरंत अपनी कुर्ती की जीत से बो तार सुल्तान को पकडा थी और सुल्तान में उसका जल कछुआ पर छोड दिया । पल भर में ही वह कछुआ जिंदा हो गया और कबूतर बना सुलतान का हमशक्ल या मीन अपनी साथियों के साथ असली रूप में आ गया और उस बूढी बनी जादू कर को भी वापस ला दो ऍम देखकर बहुत खुश हो जाएगा । यामीन ने कहा बहुत दयालु और नहीं हो यामीन । अभी हमारी बांसुरी उसे आसमान से वापस ले आएगी । सुल्तान मुस्कुराते हुए बोला खुशी के मारे यामीन सुल्तान के गले से लिपट गया । वहाँ बोला तो मेरे साथ चल कर कुछ दिन रहो । सुलतान सुलतान हस्ता हुआ बोला अब तो तीन के लिए मेरे महल में आकर रहूँ कि ताकि अपने सभी हमशक्लों से मिल सके । सर यामीन बच्चों की तरह कुछ होता हुआ बोला था । मैं अपनी महल पहुंचकर तुम सबकी स्वागत की तैयारियां शुरू करता हूँ । मैं तो में अपने सभी दोस्त और हमारे हमशक्लों से भी मैं आऊंगा हमारे साथ हम चाहिए कहते हुए यामीन वहाँ का मार्कसंस पर खाना मित्र तुम जब हमारी महल में आओगे ना तो तुम हमारे सारे हमशक्लों से मिलती होगी । मैंने सभी को आमंत्रित किया है । सुल्तान यामीन सुविधा लेकर अपनी सभी साथियों के साथ महल की ओर निकल पडा । सुल्तान के ख्वाबों की यात्रा अब हकीकत में समाप्त हो चुकी थी । नहीं जाने क्यों रहे रहकर भी उसे अपने सभी हम शत्रुओं की बहुत याद आ रही थी । पर घर के लिए भी किसी को नहीं बोल पा रहा था । मुस्कुराता हुआ आगे कदम बढा ही रहा था कि सुलेमान बोला क्या सोचकर मुस्कुरा रही हूँ । हमें भी बता दो तो हम भी खुश हो नहीं । पीलू हसते हुए पूरा खर्च नहीं । वैसे यात्रा के बारे में सोच कर मन ही मन मुस्कुरा रहा था की सभी आजाद हो गए । हर हम भी अब सही सलामत घर पहुंचने वाले हैं । तब सुल्तान की बातें सुनकर मुस्कराती तभी हमेशा की तरह पूरी सुल्तान की कंधे पर से कूद बोली फॅालो तो दोनों में से किसी को भी अपने बारे में कुछ बताया ही नहीं हरी तुम किसी को बोलने का मौका दो, तभी तो कोई कुछ बता पाएगा ना? सुलेमान मुस्कुराता हुआ बोला सुल्तान ये सुनकर हंस दिया और तीनों की तरफ देखते हुए बोला, मेरे सभी हमशक्लों को आजाद कराने में ही हम लोग इतना व्यस्त रहे । तुम दोनों से तुम दोनों के बारे में कुछ कुछ ही नहीं पाए । खेलो खुश होते हुए बोला, हम तुम्हारे शुक्रगुजार हैं कि तुम सब ने हमें अपना उसकी बातें सुनकर सभी मुस्कुराने की । पर मैं तो कब से अपनी पारी लोग के बारे में तो भी बताना चाहता था । घरेलू सबके मुसी आश्चर्य के साथ एक साथ निकला । पी लूँ और किलो असल में कोई आदमकद जब बडे काट के नहीं थी । हर साल में वो दो फुट के बोली थी । इंडिया सीम शक्तियां जब चाही तब अपनी कट को बढा या घटा सकती थी । सुलीमान दोनों की तरफ देखते हुए बोला, हमी अंजीर तेज जाने में अभी काफी वक्त लगेगा । हम भी सुने ही तुम दोनों की क्या कहानी? पीलू ने मुस्कुराते हुए कहा तीन तीन मैं और किलो बहुत कुश्ती लडकियों की रानी ने हमसे वादा किया था कि वह हम ही एक जादुई किताब की । मैं एक ऐसी दूध किताब होगी, जो आज कल किसी नहीं देखी हूँ । मैं सुनी होगी । इसलिए मैं खीरू खुशी के मारे पूरी महल का चक्कर लगाते हुए खुशी से उछल रही थी । तभी हमें पर ईरानी आती हुई दिखाई दी । खेलो बोला ही रहने के तो हाथ खानी । ये सुनकर मैंने धीरे से कहा लगता है कि मामला ना बोल गए । तभी रानी हमें इस तरह उसको जाते हुए देखकर मुस्कुराते बोली, तुम लोग चिंता मत करो । मुझे अपना किताब बना वादा याद है । मैंने कहा तो आपके हाथ में कोई किताब ही नहीं । पर ईरानी ने अपनी जादुई छडी हवा में लहराई आना जाना कि कि सारे शहरीकरण होने नहीं की हाँ तो नहीं । जैसी ही खुश होते हुए कहा । तभी सारी इस नहीं लेकर । आपस में जो नहीं लगी और एक सुनहरी रंग की चेक मंगाती नहीं, किताब में पता चल जाएगा हम दोनों को अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ । तो ये ये ये हम ऐसी कितना बन गया? खेलो ने खुश होते हुए ताली बजाते हुए कहा हम हम इस की आपको तभी कहीं ले जाने की जरूरत नहीं पडेगी जब भी इसी पढना हूँ, बस ये जादुई छडी हवा में हिला देना क्योंकि तब आ जाएगी खरीद । यानी नहीं हम सबसे का हम कैसे भी हो सकती है । खेलो ने हवा में झूलती हुई किताब क्यों देखते हुए पूछा, पर ईरानी मुस्कराते हुए बुरी हाँ तुम लोग इसे ली जा सकते हो । मैंने किताब तक खेलो नहीं । जादुई छडी । हम दोनों ने कुछ होते हुए पर ईरानी के चारों ओर एक चक्कर लगाया और महल की बाहर की ओर दो शादी पर ईरानी हमारी उत्सुकता खुशी देखकर हंसती हूँ ।

भाग - 15

एमपी सूट फिफ्टी में ही बाहर पहुंचती ही हम दोनों को जो होना जो उन्होंने आज कुछ अजीब से कपडे नहीं रखी है । खेलो मुझसे कहा पता नहीं लाल रंग कि चौकी पानी हरे और पीले रंग के से सारी क्यों लगा रखी है? ऍसे देखती हुई हूँ और उसका से तो देखो तो पी की जगह उसे गर्मी का कटोरा रखा हुआ है । खेलो बोला जो उन्होंने तीन चार बार कुलाटी उठाई पर वही मेरे पास आकर खडा हूँ । पीलू नहीं सबके चेहरों की तरफ देखा तो बहुत ध्यान से उसकी बात सुन रहे थे । तीनों आंकी बोला कि आपको देखते ही जो मैं जैसे फल की जब का नहीं बोल दिया कि तीस ऍम जो माॅडलों से आप को देखते हुए कहा की आपको ऍम इतनी सुंदर की तरह पहले ही वहाँ की हैं जो उन्होंने किताब की ओर झुकते हुए कहाँ नहीं नहीं कहा । पर हम इसी नहीं नहीं ऍम जो मुनि ऍम मैंने पूरी ताकत से किताब पकडने पद पर ईरानी का नाम सुनते ही चाॅस हैं कुछ सोचते हुए बोला करिए किताब पूछी तू की तो मैं नहीं बताऊंगा कि चुकी हूँ पंखुडी । राजनीति रहते हैं तुम सच में हमें ऍम मैंने जम्मू का हत्था करते हुए कहा हाॅट ठीक करवा सकता हूँ जो उन्होंने कहा ऍम देते हुए कम ही देखना है कि फॅमिली खेलो टाॅक ठीक है तब तो इस किताब कुछ हो नहीं तो जो बोला फिर मैंने जो आपको की थी किताब हाथ में पकडते ही जम्मू खिलखिलाकर उनसे ना का ही उनके अरे तो कहाँ जा रहा हूँ हमें ऍम उन्होंने के पास में जो पीछे पीछे दौडता हुआ बोला ऍम कहती हुई हूँ ऊपर उन्हें लगा तभी खेलों का तिहान क्या? तो खडी की तरफ उसकी हवा में चढी लाइन आए और मेरी किताब पाल अच्छा पति ही हूँ कहीं किताब की जगह हमारा मीठे ऍम जो को कुछ भी समझ भी नहीं तो तुरंत नीचे उतारा और बोला हो गई ऍम खेलो ने अपनी जान टाॅस करता करते हुए बोला नहीं फॅमिली देना । पहले मेरे फॅमिली जंगल में जाना चाहते थे । जम्मू होना तुम ऍम एक बार फिर चमन पर विश्वास करते ही मैं नहीं क्योंकि लू ने तुरंत अपनी आँखे बंद कर ली । इन लोगों को लगा कि कहीं जो उनसे आंखे बंद करवाना की उनकी जादुई छडी ने चीन ने । इसलिए उसने अपनी चड्डी तो हाथ ऍम जो मुखी लोगों को देखकर मुस्कुराती बोला ऍम इतनी जल्दी ऍम लेने अपनी आंखे खोलते हुए कहा तभी ऍफ कपूर हम आनी उडता हुआ हो ना तो चाॅस हम लोगों की बात कर रहे हैं हूँ हूँ जी तितलियों के लिए हम ले नहीं जाना है गुलाब हो मुझे भी देखना है कि तितलियां हमसे पंखों खुबसूरत कहाँ रहते हैं । खेलो खुशी से चाहते हुए बोला मुझे बोलना पर ऍम हाँ बोल ना, मैं तो ही नहीं भी नहीं कर सकता हूँ । जो जाते किताब बनाती ही ऍम हमें रात होने से पहले कर भी पहुंचता । खेलो ने कहा बुला खेलों की बात सुनकर और चला जो मुनि बिना कीलों कहाँ तक ना ऍम हम तीनो ऍम हूँ पानी पीते ही हैं । कीनू खुश होते हुए बोला, और वो पानी का चलना नहीं है । कुल आपनी खेलो को देखते हुए कहा । फिर किसी मैंने उत्सुकता से पूछा । फिर ऍम गुलाब हंसते हुए बोला कुछ नहीं साहब गुलाम हम ही रोकते हैं और हम से बोलना के साथ रह रही किलो मेरा ऍसे खुला रह गया । हमने देखा चट्टानों के बीच से हो जाने का जरूरत नहीं रहा था । ऊपर तो खडा था किसकी सफेद रंग की बहुत ही थी ये आपने घाट के हाथ नहीं में एक टी पिया रखे था और दूसरे हाथ नहीं छोटा ही पकडी था । जो भी चुप होने के पास जाता तो पि ऍफ ऍम करते हुए जुगनू खुश होती हुई उनसे चल रहे थे । तभी वॅार मुझ पर खेलो गडबडी उसने शादी से हमें अपने पास बुलाया क्योंकि ॅ हूँ बूढी नीचे ऍम करते हुए पूछा हाँ मैंने तुरंत जवाब दिया और बूढे को खाँसी देखनी न काम । तभी हमें वहाँ पर कुछ जो आती हुई दिखाई थी, होनी नहीं । मुझे प्रश पकडाते हुए कहा ऍम मुझे पहले कभी नहीं हुआ था । खुशी के मारे मेरे पैर जमीन पर ही नहीं पडता है । मैं जो लोगों के पंखों पर उजाला डालने लगा और उनसे ऍम उस दिन मुझे पहले एक बार पता चला कि मैं तीन रुके लगातार बोल सकता तेरी बातें तो खत्म ही नहीं हो रहे हैं । क्यों बोला होने वाली है? अगर तुम इस तरह से बातें करते रहे ऍम के पास हिंद ऍम खेलो, ये सुनकर का बडा किया और कुछ आप से बोला अब क्या हम कितनी ने ही देखते हैं लेकिन ऍम खेलो नहीं, जादुई छडी गुनाई फॅमिली किताब आती हैं, तभी से खून हो और जहाँ इतनी तीखी ऍम खेलो नहीं । किताब के पन्ने पलट ने शुरू की और एक जगह पर नारंगी पर हरेपन घुमानी कितनी ठीक करो आप बोला तीन दिल्ली तुम्हारी पंकज था, बहुत खूबसूरत है ये कौन सी जगह है यहाँ से कितनी ॅ हूँ इटली ने अपनी पंख फडफडाए किताब से तुम्हारा मुझे और की । लोगों ने कहा हम कोई सपना देख रहे हैं । हम आश्चर्यचकित होते हुए कभी किताब को तो कभी इटली को देख रही थी । तभी तितली ने अपनी ऍम ऍम हमारी महीने की अचानक आसमान में होना भी बात चाहते हैं आचार ॅ की तो कभी खेलो ऍम फॅमिली नहीं नहीं देखा पूरा ऍम हो गया था । तभी तितली नहीं एक इंद्रधनुष के देखते हुए मेरे तो तुम से मिलना चाहते हैं इंद्रधनुष पांच से निकल का नी ऍम मेरे पास पहुँच कर फॅस फॅर खेलो ने इंद्रधनुष पाँच होते हुए कहा तुम तो बहुत सारी है । मैंने इंद्रधनुष के रंगों को देखते हुए कहा इंद्रधुनष मुस्कुराती और दोना तितलियों को जो भी धन पसंद होता है वहाँ से ले लेती है । कितनी बोली नारंगी और हरा रंग भी तो तुम ऍम को दिया है इंद्रधनुष ऍम तितली खुश होती हुई बोली मुझे आज ठंडी हवा में आकर ताहत अच्छा लग रहा है । इंद्रधनुष दुखी होते हुए बोला तो क्या तो कितना अपनी चली चाहूँ कि तितली कुछ कहते इससे पहले ही लू नही नहीं दूसरी की ओर ठीक था । उन्होंने तरह किताब बन करती और पूना नहीं नहीं अब तितली तुम्हारी ऍम सूरत को चुनती हुई फॅमिली के पास तितली खेलों की फॅस करती और इसके पहले उनके पास आकर पानी ऍम रखूंगी । इंद्रधनुष होना जब भी तो पाँच बोल रहा हूँ कि मैं जाऊंगा तितलियां, नरेंद्र धनुष पहुँचनी पार्टी टीवी देखती कुलाटी पाटन उनके पास चले गए । नहीं नहीं और खेल होनी तय हुई । किताब इंद्रधनुष थी ताकि फिर कभी कोई भी तितली उसकी ताकनी कैसे इतना हो जाए इसलिए पडी रहनी हो हो गई हमें पडी लोग से बाहर निक आंटियां कहाँ अब हम बिल्कुल अकेले हो गए । उन्होंने कहा कि कोई तुम भी अपने हाथों से शहद का उसे खाकर ही तुम्हारा साथ दूसरों के कोई नहीं आया जाए होंगे । पीलू की कहानी जैसे ही खत्म हुई तो सुनी मानने हैरत से कहा उनका बडा अच्छा लगा कि तुम हमारे मित्र बनने लायक क्यों ही नहीं नहीं, तुम ने बहुत अच्छा काम किया था । हमने तो सबकी मदद ही करनी चाहिए थी । हाँ, घर पर ही रहनी का कहना था कि हमने उनसे बिना पूछे ही त किता इंद्रधनुष ऍम ठीक और इसी लिए उन्होंने इसे हमारी पहली काॅर्निया ॅ ही बुरी ने अपनी कान खडे करते हुए कहा इस बार दूरी की बात सबको से ही लगी इसलिए कोई कुछ नहीं बोला । किलो बोलना दूसरी बार भी हमारे कोई ऍम ऍम उन का मुकुट सिंहासन ही रखा था तो समझो कि वह पडी रहनी अब कभी नहीं पहनेंगे । हम दोनों ने मिलकर ऍम दिया और फिर कभी नजर नहीं हूँ । पीलू नहीं मूव बनाते हुए कहा सुल्तान और सुलीमान ने एक दूसरे की तरफ देखा । हर दोनों जोर से कहाँ का मार्कर हंस पडेगी । तभी आसमान में काली बादल के रहते हैं और ठंडी हवा पहनी नहीं ऍम चलना चाहिए । बनना खाना, आंधी तूफान में पाॅप ईलू और खेलों ने एक स्वर मीका सुल्तान पीलू का हद पार करते हुए बडे ही प्यार से बोला । फिर तुम बिल्कुल परेशान मत हो । तुम्हारा मन जब भी परीलोक जाने को करे तो हमें बता देना । हम चल कर रानी पारी को मना लेंगे । सभी अब अपने महल पहुंच चुके थे । इतने लम्बे समय महल में जाकर सभी बहुत खुश थी । सुल्तान सुलीमान से बोला हूँ, अगर तुम ना होते तो शायद मैं अपना सपना कभी पूरा नहीं कर पाता । तभी भूरी कूदकर सुल्तान की कंधे पर बैठ के हर बोली अगर नहीं नहीं होती है, दोनों ही पी लो । खेलों की तरफ देखते हुए हमने कुछ किया ही नहीं । सुल्तान ने बडे प्यार से खेलो और पीलू की कंधे पर हाथ रखते हुए कहा था, आपने मिलकर दोस्ती और प्यार के लिए मेरा सपना पूरा किया । ये सुनकर सुलेमान थोडा हमें जल्दी से अपने सभी दोस्तों को आमंत्रित करना चाहिए ताकि हम सब महल में जश्न मना सकें । बिल्कुल कहते हुए सुल्तान खुश हो गया ।

भाग - 16

क्या एमपी सूट सिक्सटी अपनी यात्रा से लौटे । सुल्तान और सुलेमान को तीन महीने हो चले थे । उनके महल लौटने पर सबसे ज्यादा खुश था । हाँ अच्छा पाते हैं । पंद्रह । घर के लिए भी सुल्तान को नहीं चोट तक चाहे महल के अंदर हो क्या वहां सुल्तान ने भी फतेह को आने जाने की पूरी छूट दे रखी थी । आज बेहतर था जब अंजीर देश को और सुल्तान के महल को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा था । आज सुल्तान के सातों हमशक्ल सुल्तान से मिलने उसकी तीसरा रही थी । सुल्तान सुलीमान सभी बहुत उत्साहित थे । यहाँ तक कि तेलू और खेलो भी भूरी और जिनके साथ कई दिनों से ठंड के स्वागत की तैयारी में लगे हुए थे । सुबह से ई के करके सुल्तान के हमशक्ल राजा जी देश पिया नहीं रखी थी । उनका स्वागत बडी ही हर्षोल्लास के साथ किया जा रहा था । जब सुलतान कि सातों हमशक्ल राजा अंजीर देश पहुंच गए तो सुल्तान ने अपनी सभी हमशक्ल राजाओं को अपने महल में आमंत्रित किया । सुल्तान और उसके सभी हमशक्लों को एक साथ ठीक सभी लोग बडे ही हैरान थी । सुल्तान और उसके हमशक्ल देखने में हूबहू ही लगते हैं । जैसी कोई आई ना वो लोग आपस में बातें करने लगी थी । उन्हें देखने के लिए महल में काफी भीड जमा हो चुकी थी । आज हर तरफ जश्न का माहौल था । सभी एक दूसरी सी हंसी ठिठोली कर रहे थे । सुलेमानकी मामा जानने तो अपनी जादुई शक्तियों से महल को इतना सुन्दर बना दिया था कि वह किसी स्वर्ग से कम नहीं लग रहा था । सुल्तान बोला अगर हम सभी को अपने नाम ना पता होना था, कोई हमने से अंतर नहीं बता सकता । ई सुनकर जरदार हंस पडा । हरबोला चंद भी यही कह रहा था । फॅस भूरी ने कहा बुरी उडती हुई मामा! जान के कंधे पर पैन्ट के मामा जाने से प्यार करते हुए बोले जब तुम यहाँ नहीं थी उन दिनों मुझे तुम्हारी बहुत याद आई पूरी । तभी जमाम और जिदान आगे आकर बोले सुल्तान सुलेमान! दूरी पीलू खेलू के कारण ही आज हम सब आपके सामने यहाँ भूरी तुरंत बोली फिर नहीं तो फॅमिली जोरों से हंस पडे । कभी सिकंदर बोला पूरी में अपनी फूलों की घाटी से तुम्हारे लिए के सारे गुलाब लाया हूँ । ऍम तो ऍम तभी मामा जान बोले अब यहाँ पर मैं भूरी को उसका मनपसंद बाहर दूंगा । ऍम पूरी उत्सुकता से बोली हरे बुरी अगर उन्होंने बोला ही नहीं होगी तो तुम्हारा उपहार गायब हो जाएगा । ये सुनते ही भूरी ने तुरंत अपने मुंह पर पंजा रखती है । हर चीज हो गई सुल्तान सहित सभी लोग पूरी की मासूमियत देखकर हंस पडी । तभी मामा जानने हवा में अपना हाथ लहराएं और वहाँ पर एक पीढी गया उस स्पीड की हरी भरी पत्तियों की बीच भी ये सारी रंग बिरंगे फल फूल लटक रही थी । हाँ, सबके मुंह से आश्चर्यमिश्रित खुशी के साथ निकला । पूरी खुशी से चहकती हुई बोली तो आपको ऍफ का मामा जानने मुस्कुराते हुए पडे ही प्यार से धूरी को चुन लिया । सभी लोग वहाँ पर खुश होकर ताली बजाने लगे । जिन अपना रंग बदलते हुए बोला भूट ही चलूंगी रीसा तो बातिल ऊॅट बहुत अच्छा लगता है ना ऍम ऍम तो क्या ॅ सकते हैं । जितनी मुस्कुराते हुए कहा हाँ हाँ हाँ हाँ हाँ क्यों नहीं सुलीमान भुला दूरी था मगर यहाँ से आसमान में चली गई थी मैं तुम्हारे बिना कैसे रहूँगा पूरी बडी ही प्यार से बोली सुलीमान तो की मुझे उडना में आता है अगर आसमान से यहाँ तक ही और कराता ऍम सी पी लू की लू से मिली ऍम जिनमें ये सुनकर जोरों से हंस पर जो आंध्र पर बसीर थोडी बसाना है पूरी रानी जिन्होंने अपने टकले से पर हाथ फिराते हुए कहा तो सभी सेना के तभी पूरी बोली ऍम कि फल फूल का साथ ही ना ही मामा जन रहते हुए बोली उसमें लगने वाले तरह तरह के फल बिल्लियों के लिए खास बनाए हैं । नहीं तो फिर सभी हंसीखुशी गाती हुई नाचने और झूमने नहीं । महल का जश्न अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि अचानक ही जोरो से हवाएं चल नहीं नहीं । छत पर लगी विशाल झूमर अच्छा तरंगी आभा बिखेरने की बढ जाएगा । आपस में टकराकर चकना चूर हो रही थी । दीवार हिल रही थी और उन पर लगे आदमकद आएंगे । पहुँच पर बिखर कर चकना चूर हो रही थी । जिसे देखो वही अपनी जान बचाने के लिए महल से बहार ढाका जा रहा था । मेहमानों को बस हवा संतोष आता देखकर सुल्तान और सुलीमान उन्हें रोकने के लिए उनके पीछे पीछे दौड रही थी । चीख पुकार के बीच पूरी इतना डर गई थी कि वह एक बडी सी फूलदान के अंदर जाकर टूट गई । आस पास से निकलते हुए लोग जब पूल दान को सहारे के लिए पकडकर चलते हैं तो बेचारी भूरी की डर के मारे सांस रुक जाती है । उधर सुल्तान सुलेमानकी रोकने का किसी भी मेहमान पर कोई असर नहीं पड रहा था । सब अपनी जान बचाने के लिए जिधर जो भी रास्ता पा रहे थे, कहाँ जा रहे हैं । जो भीड देखकर घबरा रही थी वो खिडकी से कूद रही थी । पीलू खेलू बाहर पार लोगों को समझाने की कोशिश करते हैं पर उनके पैर भी जमीन पर टिक नहीं पा रही थी । हवा इतनी तीस रह रही थी कि महल का आधे से ज्यादा सामान तो इधर उधर ही था । सुनी की बडी बडी मूर्तियां भी एक कोने से दूसरे कोने में ऐसे उड रही थी जैसी कांग्रेस की बनी है सुल्तान सुनी मान भी खुद को किसी तरह संभालती हुई, एक दूसरे का हाथ मजबूती से पकडकर को खडी हो गई । तब सुल्तान की नजर छत की ओर टोमॅटो उसकी आंखें फैल गई । मामूजान एक विशाल झूमर को पकडे हुई उलटे लटके थे । कोई और मौका होता तो सुल्तान हाॅट हो गया होता पर आज मामूजान को हवा में लटक टांटी सुल्तान खतरा क्या और जोर से चिल्लाया आप फॅमिली हवा शायद थोडी देर में रुक जाए या इतनी तेज न चले जैसे हवा ने सुल्तान की बात सुनती । अचानक ही सनन सनन के आवाज धीमी होनी रखी और कुछ ही पलों बाद ऐसा लगा कि जैसे कोई तूफान वहाँ कभी ही नहीं था । हवा बहुत धीमी धीमी चलने लगी । सब कुछ बिल्कुल शांत फिर हो गया । पलक झपकते ही सारा महल बिल्कुल वैसे ही होते हैं जैसे इस भयानक बवंडर के आने से पहले था । देखते ही देखते सारे झूमर हवा में झूलना बंद हो गए और रोशनी से लकदक होते हुए जगमगाने लगी । मूर्तियाँ हवा में उडती हुई वहाँ पर पहले की तरह अपनी जगह पर जाकर कमरे में सच कहीं महीने के टूटे हुए कांच फर्श पर एक एक करके जुड दी कि यहाँ तक कि कांच के छोटे छोटे टुकडे भी कभी गलीचों से निकलकर तो कभी किसी कुर्सी के नीचे से बाहर आकर आई नहीं में चोट के हर आई ना अपनी अंदाज में चलता हुआ अपनी जगह पर जाकर खडा हो गया । जो भी ये मंजर देखा था वो जैसे बुद्ध बन गया । सुल्तान सुलेमानकी साथ साथ पीलू और खेलू भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर पा रहे थे । तभी कांच टूटने की क्या आवास आई और साथ ही मामा जानके चीख नहीं की भी मामा जान झूमर सही फर्श पर पडी हुई थी । सभी सन्नी खडे थे तभी फूलदान के अंदर से जोरों की हंसने की आवाज आई । मामा जान अपनी पीठ पकडती हुई । बोले ऍम भूरी अभी बताता हूँ पूरी तुरंत झलती हुई फूलदान से बाहर आॅफ हूँ मैंने आपको फॅार ॅ था उतना ही उमर सही ऍम पर ही हुई बुरी की गोल मटोल चेहरे की तरफ देखते हैं फॅस पडे । तभी सुलेमान ने उन्हें सहारा देकर उठाया और खाना होने में मदद की । तभी पीलू जी था संस्थान टाॅल सुलीमान तुरंत बोला हरी हवा के डर से जैसे सभी लोग मैं से बाहर चले गए हैं । मैं भी चले गए होंगे । पर मैंने भी उन्हें बहुत देर से नहीं देखा । नहीं तूफान में कोई अनहोनी न हो गई हूँ । मुझे उन की चिंता हो रही है । जल्दी ने ढूंढा जाए । आखिरकार हमारी मेहमान और मित्र सुलीमान चिंतित स्वर में बोला सुल्तान! निश्चिंतता से बोला हाँ ऐसा तो नहीं हो सकता है कि हमारे सारे हमशक्ल बिना बताए मैं उनसे चली जाएगी तो इतनी भीड तो तो नहीं । तभी बुरी सुलेमानकी कंधे पर कूदी हपोली तो ये ही नहीं है यहाँ पर सब कुछ कितना ऍम पहचाना की ठंडी बहती हमारा हो गई नहीं खेल का सारा थोडा सामान अपने आप जोड कर वापस अपनी कहाँ पहुंच गए तो फॅमिली बना है और हमारे आना ॅ ऍम दूरी की बात सुनकर सभी एक दूसरे की तरफ देखा जाना कि महल के बाहर ऍम यहाँ पर तो दूर दूर तक कोई नजर नहीं हो । चीन नहीं कहा । सुल्तान घबराते हुई बोला भरी तुम तो अपना आकार बढा सकते हो ना तो भी करता हूँ । बाकी सब लोग कहाँ चले गए? सुल्तान की बात सुनकर जिन्होंने अपना आका बढाना शुरू किया और कुछ ही पलों के बाद तो इतना लम्बा हो गया कि उसका शरीर यहाँ सालों तक पहुंच गया । उसने हाथों से अपने आस पास के बादल हटा रहे और तुम तक ठीक नहीं लगता । हमारी फॅमिली है पूरी जिंदगी के पैर पर पंजाब आती हुई बोली जिन को अपने पैर पर गुदगुदी महसूस तो उसने नीचे दिखा मोदी को अपने पैर के पास बैठा देखकर जिन सब समाज के हर मुस्कराती चारों तरफ बहुत ध्यान से देखने के बाद चिमनपुरा मुझे तू तू टूर कोई नहीं नहीं, वहाँ ऐसा कैसे हो सकता है? उन्हें आसमान निकल गया या धरती मामा जानने झुंझलाते हुए कहा फॅमिली निकालो हैं ही धरती में उनकी मुझे लडका है । फॅमिली है तो कहती हुई जिन्होंने ई कोर इशारा किया सब एक साथ उसी तरह देखा जिधर जिन्हें देख रहा था पर ही तो वो ही मैं भी कितनी खुबसूरत अपनी रंग बिरंगे पंखों को फैलाई हुई सुलीमान ने हैरत सी का फॅस तो हनी इस जगह पर कभी मोर नहीं देखी थी । यहाँ तो क्या हमने तो आसपास के देशों में भी कभी बोर नहीं देखी थी । तो फिर ये मूर्ति आई वहाँ से थोडा और गौर से मोरों को देखते हुए सुल्तान थोडा और वो भी पूरी की पूरी सात । तभी चारों तरफ शैतानी हंसी गूंज भी नहीं ऍम तो ही अपने नहीं ऍम सब पूरी तरह चौंक गए हैं । इसका मतलब सब दुष्ट चाहते घर के पास वापस चली गई । अभी सब हमारी हम शाॅ पीलू ने घर जाते हुए कहा हम और इस बार भी सब एक साथ मिलकर आए थे इस बार उनकी शक्ति होने के कारण और बहुत पर गए हैं हमारे लिए उनका मुकाबला करना । बहुत ही चीजों ने मोरों को देखते हुए काफी मोर तो बादलों के पास चली गई हैं और कोई भी जादूगर हमें दिखाई नहीं दे रहा । सुल्तान ने आसमान में नजरिये बढाते हुए कहा जब तक मैं हूँ तुम सबको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है । मामा जानने सुलेमानकी कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, तो क्या आप सुल्तान कुछ पूछते हुए रुक गए पर मामा जान सुल्तान की बात का आशय समझ गए वह मुस्कुराते हुए पुरे इस बार उन जादूगरों से तुम्हारे हमशक्लों को छुडाने के लिए मैं भी तुम्हारे साथ चलूंगा । सच में सुल्तान के हमशक्ल मोर बन गए । यह भी मोर ही शैतान थी । सुल्तान के हमशक्लों को कूडा कर ले के हाँ जादूगर थी । उन सबको छोडा कर ली गई थी या फिर सुलतान का अहम था । कई सवालों के बीच सुल्तान खामोश भरा था । सब सुलतान कि उस चिंतित चेहरे को देख रहे हैं । मेरी जिंदगी का आखिरी सकता सुल्तान नहीं । बस इतना ही कहा था सुल्तान के साथ सभी लोग चुपचाप खडे थे । लेकिन एक मामा जान थी मैं जानता हूँ क्या करना है । शैतानों को इस बात अच्छा सबक मिलेगा ।

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