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सातवाँ फेरा -01

आप सुन रहे हैं तो ऐसे कहानी का नाम है सातवाँ फेरा जिसे लिखा है प्रेमलता बहादुर, आज ही सारी करके आवाज में फॅस भारत एक जब तक खुली खिडकी से सुबह की धूप झंड करना आने लगती है । उमाप क्या खेलना खोलती? फिर अपनी बिक्री लडकी संभालती हुई वो चेक से बाहर देखती जहाँ उसके पिता राजेंद्रबाबू किसी मुवक्किल से बहस कर रहे होते हैं । वह लखनऊ शहर में वकालत कर देते हैं । बागों की जन्नत कहलाने वाला यह ऐतिहासिक राजनगर बहुत पसंद था । दूसरे शहरों की तरह इस शहर में भी बीस से भरे बाजार और गालियां थी, लेकिन साथ ही इस खूबसूरत नगर में बहुत खुले मैदान भी थे । इसकी एक और खूबी थी कि आपने जैसे और तमाम शहरों से सस्ता था । राजेन्द्र बाबू को अब वकालत करते हुए पूरे पच्चीस वर्ष हो चुके थे और उनके बालों में सफेदी झलकने लगी थी । वकील के तौर पर उनका नाम बहुत नहीं चमका था तो भी वो इतनी आमदनी जरूर कर लेते थे, जिससे आराम से गुजारा चल सके । यानी जीवन की तमाम आवश्यकताएं पूरी होती रहे और सात कुछ ऐशो आराम की भी गुंजाइश रहे । उनका अपना बंगला था जिसके सामने की थोडी सी जगह में एक छोटा सा हम बगीचा था । आपने उस खूबसूरत बजे पर उन्हें बहुत नाराज था और जब भी उनके पास समय होता वो इसमें बोल पति की देखभाल करते रहते हैं । अक्सर राहत चलते लोग इस बगीची को देखकर फाटक पर रुक जाते हैं और इसकी प्रशंसा में उनसे दो चार बातें कर जाते हैं । अपनी बेटी की तरह राजेंद्रबाबू देर तक नहीं होते थे बल्कि सुबह सूर्य निकलते ही उठ जाते थे । फिर हर मोड होकर वो आठ घंटे भारी मुगदर घूमा कर व्यायाम करते हैं । उसके बाद पंखे के नीचे बैठकर अपना पसीना सुखाते हुए गर्म दूध पीते हैं जो उनके प्रिय पत्नी वेर्गा बडी से उनके लिए मेज पर तैयार रखती अपनी साडी का एक पल्लू कमर खोसे हुये वीर का हमेशा ही घर के काम काज में व्यस्त रहती थी । आपने बीस वर्ष लम्बे विवाहिक जीवन में लगातार रसोई की देखभाल, बच्चों की संभाल और घर की सात सवारने उसकी देह को थका कर रख दिया था । लेकिन इस सख्त परिश्रम के खिलाफ आज तक एक बार भी उसके होठों पर कोई शिकायत का शब्द नहीं आया था । तुम्हारा केस मुश्किल है । घूमर अपनी एन के शीशों में से राजेंद्र बाबू ने सामने पडे हुए कागजों की मोटी फाइल को देखते हुए कहा तो चाहिए था कि सामान को अच्छी तरह देख लेते । कानून कहता है कि लेकिन जो नमूना उसने मुझे दिखाया था वैसा माल नहीं दिया । फिर घूमने दलील बहुत गन्दा और घटिया माल दिया । अच्छा ऐसी बात है तो शायद कुछ सूरत निकल सके । राजेंद्र बाबू ने आश्वासन भरे ढंग से कहा । फिर भी वक्त का सवाल है । मियाद बीत चुकी होगी तो मुश्किल है । मैं कुछ नहीं कह सकता । मैं जितना जल्दी आ सकता था आ गया हूँ । कानून में तो काफी मियाद होती हैं । रघुमल मेज पर बडे कागजों की और देखते हुए कुछ आशा भरे स्वर में कहा सेट जमाना । प्रसाद ने वर्षों बाद अपना सारा माल वसूल कर लिया । एक एक पैसा राजेंद्र बाबू को बाद कुछ दिलचस्प लगी । इस बार उन के बजाय उनका मुवक्किल एक पुराने अदालती फैसले के मिसाल दे रहा था । कुछ सोचते वो बोले वो गलत था उसमें मामला ये था कि तभी काराकस फाटक पर रुकी राजेंद्रबाबू ने उधर देखा और उनकी बोले कुछ चढ गयी । वो वकीलों को छोडकर और किसी मेहमान का आना वो पसंद नहीं करते थे । मिलने वाले लोग आकर बेकार अधीन वादों से कीमती समय बर्बाद करते थे । और आपने धूलभरे जूतों से कालीन का सत्यानाश कर देते हैं । लेकिन वो गे तो शंकर था । वो साफ सुथरा लंबा युवक चुस्त खुश पोष शंकर आपने संवेदकों से बहुत भिन्न था । उसमें कोई खराब आदत थी । नमस्ते राजेन्द्र बाबू ने शंकर की नमस्ते का उत्तर देते हुए कहा अंदर चल कर बैठो बेटा उमा ओबामा शंकर आया है और फिर रघुमल की और मूर्ति । वे बोले जमुना प्रसाद का मुकदमा दूसरा था । वो मियाद के अंदर था । तुमने जल्दी से बडे शीशे के सामने खडे होकर अपने चेहरे पर पाउडर का पाॅल और अपनी साढे ठीक की । नमस्ते । उसने बाहर आकर उल्लास से कहा नमस्ते, आपने बेदाग शार्क्स । टीम सूट से एक धूल गरीब झाडते हुए शंकर ने उत्तर दिया मैंने आपकी नींद खराब करदी । मुझे सुबह जल्दी उठना पडता है । आप जानती है कि वक्त पर फैक्ट्री पहुंचना होता है? हाँ हाँ तो वेस्ट आदमी है । उमा ने कुछ शरारत से कहा लेकिन मैं तो अपनी सुबह की नींद पूरी कर लेती हूँ और मुझे अपनी पूरी नींद सोना अच्छा भी लगता है । जिस दिन में जल्दी उठ जाओ दिनभर तबियत बिगडी रहती है । शंकर के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई । मैं चाहता हूँ कि आप भी जल्दी उठा करें । उसने हसते हुए कहा और उदय होते हुए सूर्य की सुंदरता देख सकें । सुबह की सुनहरी के रीनी और सोच शीतल पवन ठहरा हुआ शांत वातावरण जब भी मैं जीवन के उदासीन किसी व्यक्ति से मिलता हूँ तो सुबह उठा करो यही कहता हूँ वो मुझे नहीं मालूम था कि आप कविता भी देखते हैं । तुमने कहा हाथ की बातें सुनकर तो लगता है कि यहाँ सूर्योदय की प्रशंसा में कविता बना रहे हैं । मुझ पर भी शायद जय का प्रभाव पड गया है । जबरदस्ती हसते हुए शंकर बोला आपने देखा होगा वो हमेशा कागज पेंसिल लिए कोई फजूल का खयाल बांधने के चक्कर में लगा रहता है । तो विजय उमा ने कहा और उसकी नजरें कहीं दूर हो गई । उनकी खयाल को फजूल क्यों कहते हैं? इसीलिए की आपके दिमाग में से खाया नहीं आ सकते । शंकर को बात कुछ जो भी लेकिन फौरन ई । उसने अपने दिल का भाव छुपा लिया और मुस्कुराती हुई बोला । ये भी तो हो सकता है कि ऐसे ख्याल में डूबे रहना सिर्फ बेकार समय गवाना ही हो । मैंने उनकी कुछ कविताएं सुनी । तुमने भारी स्वर में कहा और मुझे तो वो बहुत अच्छी लगी हो सकता है । शंकर ने कहा ईमानदारी की बात तो ये है कि मुझे कविता में दिलचस्पी नहीं और ना ही मैं उसे पसंद करता हूँ । ये बात दूसरी हैं । उमा ने नरमी से उत्तर दिया तभी चाय की ट्रे उठाए नौकर आ गया । उमा चाहे बनाए लगी तो उस की साडी का पल्लू सरक कर नीचे आगे रहा और उसके स्वस्थ सुंदर शरीर का आकार स्पष्ट हो गया । शंकर साहस रोके प्रशंसा भरी नजरों से उसी देख रहा था और इसी में चाय का प्याला पकडते हुए चाहे कुछ मिलकर प्लेट में गिर गई । हाई जब की तबियत ठीक नहीं है क्या? उमा ने मुस्कुराते हुए कहा आपके हाथ कुछ काम रहे हैं और आपको ही पता होना चाहिए कि उसने शरारत भरी नजरों से उमा की आंखों में झांकते हुए कहा । गोवा के चेहरे पर शर्म की लाली दौड गई और उसने अपनी नजरे झुका ली । उसका दिमाग परेशान हो गया, हद हो गई । उसने सोचा वो सोचता होगा ये कितनी घटिया लडकी है उसे ये बात कहने का अवसर नहीं देना चाहिए था । उमा को शंकर से प्रेम ही था । सच कहा जाए तो शंकर की बहुत सी बातों से पसंद नहीं थी । उसका गर्भ उसका तेज सुभाव दूसरों को नीचा देखने की उसकी आदत आदि बातें उसको बिल्कुल अच्छी नहीं लगती थी । लेकिन उमा के सुभाव में भी दो रही थी । एक तरह से तो वह सीधी साधी निचल नवयुवती थी । लेकिन दूसरी और उसमें महत्वाकांक्षा भी बहुत थी । कभी किसी तरह की तंगी, ये तकलीफ से वास्ता न पडने के कारण उसे रुपये पैसे की उपयोगिता और उसकी व्यर्थता का कोई भी अनुभव नहीं था । रुपया पैसा उसके लिए जीवन की एक सामान्य वस्तु थी, जैसे सांस लेने के लिए हवा पर पीने के लिए पानी । अगर कभी कोई ऐसा दिन आ जाता है कि उसके पास खर्च ने के लिए कोई पैसा न होता तो वह कभी उस स्थिति की वास्तविकता का विश्वास नहीं कर पाती । चनम से ही उसे कभी कमी का मोना देखा था । अच्छे भोजन, नफीस कपडे और जिंदगी की दूसरी तमाम खूबसूरत चीजों से उसे प्यार था । गरीबी उसके लिए डर की नहीं बल्कि व्यस्त की चीज थी । गरीबों पर उसी तरह से आता था, लेकिन वो अमीरों में ही खुश थी । शंकर ने चाय खत्म जी और उठकर खडा हो गया । राजेंद्र बाबू से एक दो बातें करके उसकी अपनी नई एम्बेसडर स्टार्ट की शंकर में जरा भी हल्का पर या घटिया पर नहीं था । वो पूरी तरह बन ठनकर रहने वाला युवक था । दो वर्ष पहले उसके पास फूटी कौडी भी नहीं थी । वास्तव में उसने कुछ रुपया उधार लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया था । आज भी उसे वो दिन याद था जबकि वह परेशान और निराश हुआ । अपने ख्यालों में डूबा सिर झुका कॉफी हाउस में बैठा था । उसका दिल बुझा था और उसके अंदर एक गहरी हताशा कह रही थी । तभी कॉफी हाउस में उसका पुराना कॉलेज का दोस्त आया था । कहूँगी शंकर तुम तो ऐसे बैठे हो जैसे कोई मुर्दा जला कर आए हो । क्या बात है दोस्त शंकर से उसने कहा, शंकर ने अपनी पूरी हालत उसे बता दी । मेरी आर्थिक दशा बहुत बिगडी हुई है । शंकर ने गमगीन स्वर से उसे बताया, इस पांच के नोट के अलावा मेरे पास एक फूटी कौडी भी नहीं बची । मैं क्या करूंगा? मुझे बताओ? क्या मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ? उसके मित्र नहीं हमदर्दी से पूछा । पुरानी दोस्ती की खातिर उसने शंकर को दो हजार रुपये उधार दिए जो शंकर में उसका एहसान मानते हुए ले लिए । इस रुपये से शंकर ने व्यवसाय शुरू किया था । स्वाभाविक रूप से शंकर में व्यवसाई की तीखी सूझबूझ थी । वो बहुत होशियार और हिसाबी व्यक्ति था । बहुत ध्यान से उसे बाजार का अध्ययन किया था । कुछ बडे लोगों से उसके संबंध भी थे । इन संबंधों से उसने फायदा उठाया । मान सप्लाई करने के उसे कुछ ठेके मिल गए जिनमें उसे काफी नाम हुआ । फिर इसी पूंजी से उसने अपना फौलाद का कारखाना लगा लिया जिसका नाम था शंकर ऍप्स । सौभाग्य से एक दिन क्लब में उसकी भेंट विमल से हुई । विमल दवाइयों और रासायनिक पद्धार्थों का काम करता था । उसने शंकर को ना सिर्फ एक होशियार इंजीनियर ढूंढ दिया बल्कि उसके कारखाने की आवश्यकता का कच्चा माल भी बहुत सस्ती दरों पर सप्लाई किया । विमल की सहायता से शंकर का कारखाना लगातार उन्नति करता गया और धीरे धीरे वो शहर के मुख्य उद्योगपतियों में गिना जाने लगा । जैसी वो अपनी एयरकंडीशन दफ्तर में पहुंचा । उसके सहायक ने उसे नमस्ते की और कागजात उसकी मीट भर्ती । शंकर ने अपना मोटर, सोलह हार्ट और कोट उतारकर खोटी पटांग दिए । वो हमेशा कोट उतारकर बैठना पसंद करता था क्योंकि इस तरह से उसे ज्यादा आराम महसूस होता था । वो कुर्सी पर बैठा ही था कि चपरासी अंदर आ गया और उसे सलाम करते हुए बोला, जैसा हम आपसे मिलने आए हैं साहब हाँ उन्हें अंदर भेज दो । शंकर ने अपने कागजों से नजर उठाते हुए कहा, जय ने दाखिल होते ही कमरे में तैरती हुई सी गाय की धोनी की गंद होता होगा । उसे देखकर शंकर अपनी कुर्सी से उठ दावा बोला का हो जाएगा । बहुत समय के बाद नजर आ रहे हैं । लिखने लिखाने का काम जोर शोर से चल रहा है । चल रहा है ना नहीं । कविता कौनसे लिखी हैं, लोग इसी गाय सुनता हूँ । जिस अनाडी ढंग से स्वीकार सुलगाते हुए जैन ने उसके काश लिए, उसे देखकर शंकर को हंसी आ गई । ये हर काम में अनाडी था । शंकर को याद था कि स्कूल के दिनों में जब वो और जय इकट्ठे पढते थे तो जय कैसे भागता दौडता केमिस्ट्री के क्लास में आता था । केमिस्ट्री के अध्यापक से स्कूल का एक एक लडका बहुत खाता था । एक दिन क्रोध में आकर उस अध्यापक नहीं एक लडकी को उसकी गलती पर लकडी का डस्टर खींच मारा था । उसके बाद समझदार ऍम सारे लकडी के डस्टर वहाँ से हटा दिए थे और कपडे के डस्टर रख दिए थे । जय का ध्यान पढाई में नहीं लगता था । वो हमेशा खोया खोया सा रहता और क्लास में अक्सर देर से आ करता था । अपने हाथों से अपनी लेकर ऊपर खींचता हुआ जिसके बाहर कमीज हर वक्त निकली होती, मुश्किल से बाहों में संभाली हुई किताबों, कॉपियाँ संभालता और सहमी हुई शकल से इधर उधर देखता हुआ जब वह कमरे में दाखिल होता तो उसकी आकृति इतनी हास्यास्पद होती की कठोर से कठोर अध्यापक भी उसे देखकर मुस्कुराने लगता । जय के बचपन में ही उसके पिता की मृत्यु हो गई थी और तब से उसके चाचा ने ही पाल पोसकर उसे बडा किया था । कोई सरकारी नौकरी पाने की इच्छा से वो हर एक प्रतियोगिता में बैठने का उपकरण करता लेकिन उसका दिल जाता था कि ये सब व्यर्थ की कोशिश है । अब तो कोई नौकरी प्राप्त होने की आशा वो लगभग त्याग चुका था । सौभाग्य से अपने घर में वो अकेला लडका था इसलिए जेब खर्च की तरफ से वो निश्चित था कि जब तक कोई कामकाज नहीं मिलेगा तब तक उसका अपना मामूली खर्च घर से मिलता रहेगा । देखने में वो बहुत सुंदर युवक था । निकला हुआ रंग से आए, घने बाल तीखी बदली, नाक पर भरे भरे हो । सभी मिलकर उसके व्यक्तित्व को काफी आकर्षक बनाते थे । तो हिंदी में बहुत अच्छी कविताएं लिखता था । शंकर को जैसे सादा नहीं रहा था । एक बार उसने जय को अपने कारखाने में नौकरी देने का प्रस्ताव किया था । लेकिन मैंने इंकार कर दिया था कि वह इस तरह का एहसान नहीं लेना चाहता हूँ । जानता था की संकर सिर्फ उसकी सहायता करने के लिए ही उसे नौकरी देना चाहता है । लेकिन उसका आत्मसम्मान इस बात को झेलने के लिए तैयार था । फिर भी कभी ना कभी उससे शंकर से कुछ सहायता लेनी ही पडती थी । लेकिन जहाँ जय को कविता लिखने का इतना शौक था वहीं शंकर के लिए ये बिल्कुल निरर्थक सा काम था । शंकर ने स्वयं कभी एक दुख बिना मिलाकर देखी थी इसलिए उसे ये समझ में नहीं आता था कि जो क्यों घंटों घंटों कागज पैसे ले लिए, सिर मारता रहता है । फिर भी पुराने दोस्ती के नाते वो जय की कविताएं सुन तो लेता लेकिन उसका ध्यान कहीं और रहता । जब वो उसी बेध्यानी से प्रशंसा की दो चार शब्द कहता हुआ कविता की पंक्तियों को गलत गलत दोहरा था तो जय को पता चलता है कि उसकी कविताएं शंकर में सुनी ही नहीं थी । फिर शंकर में जय को कभी निरुत्साहित होने का अवसर नहीं दिया था । वो बहुत सब दिया था । जब भी जब भी कविताएं लेकर आया था शक्कर चुपचाप उन्हें झेलने के लिए तैयार हो जाता । अपने दोस्त का दिल रखने के लिए वह कुछ देर खूब लेता हूँ । जैनब की जेब से कॉपी निकली और कविता सुनानी शुरू कर दी । शंकर में एक सांस लेकर अपने हाथ में पकडे हुए कागज मेज पर रख दिए । उसे कविता के बहुत से शक समझ में नहीं आ रहे थे लेकिन फिर भी वो बीच बीच में वह वह किये जा रहा था । पर उसे इस बात का पूरा विश्वास ना था कि वो ठीक अवसर पर ही प्रशंसा कर रहा है । तो ये सब छपवा क्यों नहीं लेते? शंकर ने कविता समाप्त हो जाने पर पूछा मैं कोशिश कर रहा हूँ लेकिन ये आसान काम नहीं है । जैसे उत्तर दिया, जिस प्रकाशक के पास भी इंस्टा हूँ वहीं लौटा देता है । मालूम होता है कि कविता की किताब देखती ही नहीं । इससे तो अच्छा ताकि मैं घटिया चीजें ही लिखा करता हूँ । प्रकाशित भी मजबूर होंगे । शंकर ने हमदर्दी के स्वर में कहा हमें ही देख लो हमें भी सबसे पहले इसी बात का ध्यान रखना पडता है की चीज बाजार में उठेगी या नहीं । प्रकाशकों को भी यही हालत होगी । मैं अच्छे प्रकाशित से परिचित हूँ तो मगर मुझे अपनी कविताएँ देर हो तो मैं उससे बात करूंगा । लेकिन है ये तो अलग बात हुई तो बताओ कि किसी खास काम से तो नहीं आएगा । बात ये है कि मैं कुछ तंगी में होगा । जय ने थोडा हिचकी जाते हुए कहा मुझे कुछ पुराना उधार चुकाना है । अगर वो मैं ना दे पाया तो चाचा जी को पता लग जाएगा और तुम्हें तो मालूम नहीं है कि उधार की वह सख्त खिलाफ है । कोई बात नहीं, मुझे ले जाओ कितने रुपये देने हैं । शंकर ने अभी चेक बुक निकालते हुए कहा चाहिए तो मुझे पांच सौ रुपये । शंकर में पांच सौ रुपये का चैक लिख कर उसकी और सरकार दिया । शुक्रिया जैनी चैट लेकर कहा मैं जानता था कि तो जरूर काम आओगे । ये बहुत आत्मसम्मानी व्यक्ति था । कई देना उसके मन के पूरी तरह खिलाफ था । लेकिन उसका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जहाँ अच्छा खाना कपडा वह शिक्षा भी नहीं मिल सकती । फिर जैसी चीजें जैनिस इन तस्वीरों ये दुकानों में ही देखी थी और अच्छे कपडे से दूसरों के तन पर क्या बाजार की सजी हुई खिडकियों में इसलिए उसका सारा आदर्शवाद और प्रतिभा उसके लिए तकरीबन बेकार सिद्ध हो रही थी और वो अपने मित्र की हम दर्जी के भरोसे जीने पर मजबूर था ।

सातवाँ फेरा -02

बाहर दो । राजेंद्र बाबू की बैठक में जय अपनी नई कविता सुना रहा था तो ये तमाम जब कौन दिशारी मिली मुझे वीना की तारीख पढना मिली । झंकार दीप जिले पर मेरे मन में एक गहन अनुयार बट पाया और मंजिल हुई अच्छाई जाए निशानी बहुत अच्छे । वाकई बहुत अच्छे बिना नहीं कहा जिसे कविताओं में बहुत दिलचस्पी थी । उमर ने सिर्फ प्रशंसा के ढंग में मुस्कुरा दिया हूँ । वह बहुत अच्छी अच्छी थी । जय शब्द बारिश । वीणा ने उठते हुए कहा मैं जरा अनिल के कोर्ट का कपडा दे दूँ । दर्जी आ गया है । उम्र जय को पांच दिया तो उसकी साडी सरक कर कंधों पर आ गई । ये प्रियतमा कौन है? उसने हसते हुए पूछा वाह! वो बस यही मतलब है कि वो बस तुम्हारी जैसी एक लडकी है । उसने कुछ रखते हुए और मुस्कुराते हुए कहा एक बार मैंने उसे सपने में देखा था, बिलकुल तुम्हारा ही रोक थी और तुम्हारी तरह के ही लंबे लंबे बाल थे वह तो मेरी कैसे कैसे सपने आते रहते हैं । उमा ने अपना सिर झटकते हुए कहा मेरा ख्याल है कि सपने देखने के सिवा और कोई काम नहीं आता तो है क्यों? जय के जहर एसे मुस्कुराहट उड गई उमा के शब्द उसे जुड गए थे । उसे हमेशा इस बात का एहसास होता है कि अपनी जिंदगी में उस शंकर की तरह कोई ढंग का काम नहीं कर पाया था । ये ठीक था कि उसने कुछ कविताएं लिखी थी लेकिन वो अभी तक छब्बीस ना पाई थी और जब जाने पर भी वह प्रशंसा प्राप्त करेंगे ये बात भी यकीन से नहीं कही जा सकती । उमा के शब्दों को उसने गंभीरता से लिया । उसने भी महसूस कर लिया था कि जय को उसके बाद से चोट पहुंची है । उसका ये मतलब बिल्कुल ना था । उसने अपने हाथ जय के गंध ऊपर रख दिए । मेरा मतलब तुम्हारा दिल दुखाना नहीं था । सच मानो बिल्कुल भी नहीं । मैं तो सिर्फ ये कहना चाहती थी कि तू आदर्शवादी हूँ, सपनों के संसार में रहने वाले कभी । लेकिन इसमें तो कोई बुराई नहीं । जय ने कुछ मुझे हुए स्वर से कहा बुराई कौन कर रहा है तो मैंने कहा मैं तो साफ दिल से बात कर रही थी और फिर भेज कुछ नहीं । उसकी नजरों से शर्मा कर उन्होंने बाढ डाल दी जहाँ ने उसके हाथ अपने हाथों में ले लिया । उमा उसने भावपूर्ण स्वर में कहा, मैं बिल्कुल उदास नहीं हूँ, कम से कम आप तो बिलकुल भी नहीं । सच में कितना सौभाग्यशाली हूं और ये कहते हुए उसके उमा के नरम हाथ अपनी आंखों से छुआ लिए । उसके मन में बचपन के उन दिनों की याद उभर आई जब दोनों पहलुओं साथ खेला करते थे । न कोई पर वहाँ, ना कोई फिक्र । उसके मन में भावनाओं का एक तूफान उठ गया । वो उसके हाथ थामे हुए कहता रहा, उमा कितना खुश हूँ, कितना खुश हूं । उमा ने धीरे से अपने हाथ छुडाएं । उसके चेहरे पर लाली दौड गई थी । लेकिन मन ही मन अभी तक सोच रही थी कि उसे अपनी भावनाओं को प्रकट न करना चाहिए था । इसमें कोई शक ना था कि वह जैसे प्रेम करती थी वो उसकी सच्चाई और उसके हमदर्दी भरे देर से प्रेम कर दी थी । उसकी कविताओं के संगीत पर, उसकी मधुर मुस्कुराहट पर, भावुक बातों पर यानी सभी चीजों पर मोहित भी । लेकिन जय के पास पैसा नहीं था । जो अभी अपनी जिंदगी चलाने के भी योग्य ना था, वो उसका भार कैसे संभालेगा, वो उसकी आवश्यकताएं कैसे पूरी कर सकेगा? प्रेम सिर्फ दिलों की धडकन सुनता है लेकिन जिंदगी का साथ और बहुत सी चीजें मांगता है और इनके लिए पैसा होना जरूरी है । उमा इन दो पार्टियों के बीच बोलती रहती थी । प्रेम उसे जय की और खींचता था और समझ उसे दूर ली जाती थी । जय जो मा के मन में उठते हुए विचारों से बिल्कुल अनजान था । ये समझा कि वो उसकी बातों से कुछ सब कुछ आ गई और इसलिए खामोश है उमा का ध्यान पर लडने के लिए वो बोला ओबामा तो मैं एक खुशी की बात बताऊँ । शंकर ने मुझे फायदा क्या है कि वो मेरी किताब के लिए प्रकाशक खोज लेगा? मेरी किताब छपी तो मैं उसका ऍम तुम्हारे नाम करूंगा । नहीं नहीं जय ऐसा नहीं करना । उमर ने कुछ खबर आ कर कहा तो जो लोग क्या कहेंगे अच्छा तो मैं उसे शंकर के नाम समर्पित कर दूंगा । वो इसके लिए इतनी कोशिश कर रहा है । वो लेक्चरर की पोस्ट के लिए तुमने अर्जी दी थी उसका क्या हुआ? तुमने पूछा होना क्या था? जैन है उत्तर दिया मंजूर नहीं हुई । बिना सिफारिश की नौकरी कैसे मिलती है? हाँ है तो मुश्किल । उमा का ध्यान कहीं और था । वो शंकर के बारे में सोच रही थी । उसके बाद सिफारिश नहीं थी तो भी वो जिस चीज को हाथ लगता था उसमें सफल होता था । दोनों में कितना अंतर है । उसने सोचा एक आदर्शवादी है सपनो की दुनिया में रहता है । उसके लिए कल्पना में ही हर एक चीज है । वो जिंदगी की वास्तविकता से परे भागता है । आम काम काज में उसे कोई दिलचस्पी नहीं । इसके उलट उधर दूसरा बिल्कुल व्यवहारिक है । हमेशा किसी न किसी काम में व्यस्त रहकर खुश हैं । उसके लिए कल्पना सार्थक तभी है जब कुछ कर दिखाया । काम ही उसकी जिंदगी में सबसे महत्वपूर्ण चीज है और विमल विमल इंटरनॅशनल । कैमिकल वो का मालिक था और इस की देख रेख भी वह स्वयं ही करता था । उसका दफ्तर बदला स्ट्रीट की एक सुंदर इमारत में था । ये इमारत साफ खुली और आधुनिक ढंग की थी । सामने एक पार्टी को था । जमीन के नीचे की मंजिल में उसका गोदाम था । पॉलिटिको सी इमारत में घुसते ही एक तरफ को मेहमानों वाला कमरा था और उसके बगल में विमल का दफ्तर था । विमल के कमरे के बराबर वाले कमरे में उसकी स्वीकृति मीना बैठती थी । विमल का दफ्तर बहुत आधुनिक ढंग से सजा हुआ था । जिस जगह बैठता था वही एक लम्बी चौडी स्टील की । मैं जिसकी पूरी सतह पर शीशा लगा हुआ था और चारों और स्टील गद्देदार चमकती हुई कुर्सियां खिडकियों पर लम्बे लम्बे मोटे पर्दे और इन सब के बीच बडिया शानदार लिबास पहनी और सुनहरी घडी लगाए हुए विमल विमल लंबे कद का खूबसूरत सिंह था । उसकी बदली मुझे और बहुत सावधानी से सवारे हुए बाल पहली मुलाकात में ही अपना प्रभाव डाल देती थी । मीना है एक छरहरी सी उस लडकी थी । उसकी कमर पतली थी और शरीर का कसाव । तनाव बहुत आकर्षक था । वो हमेशा चुस्त निवास रहती थी जिससे उसके खूबसूरत जिसमें की देख आएँ और अधिक स्पष्ट होती थी वो िवल के सिर सेक्रेटरी ही नहीं की । विमल उसके लिए बेहतरीन निवास और कीमती गहने खरीदता था और उसकी तरफ बहुत खींचा हुआ था । मीना को उसके सभी व्यवसायिक व्यक्तिगत भेद मालूम थी और वो भी उसके साथ बहुत लगाव रखती थी । डॉक्टर के बाद वो दोनों अक्सर एक घंटे बैठ कर विस्की पी और बातें करते रहते थे । शंकर के साथ विमल की मुलाकात कैपिटल क्लब में हुई थी और दोनों शीघ्र ही एक दूसरे को पसंद करने लगे थे । व्यापारी होने के नाते दोनों की रूचियां भी मिलती थी । शंकर के साथ विमल ने ये बात तय कर ली थी कि वह शंकर के कारखाने के लिए सस्ता माल देता रहेगा । इस तरह दोनों की दोस्ती और मजबूत हो गयी । विमन को कुछ कानूनी परेशानियां घेरे हुई थी इसलिए शंकर ने उसे राजेंद्रबाबू से मिलवा दिया । तब से िवल भी राजेंद्रबाबू के घर लगातार आने जाने लगा था । राजेन्द्र बाबू भी इस खूबसूरत युवक से बहुत प्रभावित हुए थे, जो हमेशा ढांचे रहता था । पैसे की अदायगी में कंजूसी टालमटोल की आदत विमल में बिल्कुल नहीं थी । उसके माता पिता से भी राजेंद्रबाबू परिचित थे । वह अवध के एक पुराने परिवार का लडका था । जिम्मेदारियाँ खत्म होने से पहले विमल के परिवार के पास बहुत काफी जमीन थी और परिवार की काफी इज्जत थी । उसका पिता सही अर्थों में एक बडा जमींदार था । पुराने जमींदारों की तरह हर वक्त शराब में धुत रहना और नौकर चाकर डाॅयट को गालियां देते रहना उसकी आदत थी । हर इतवार को वह रेसकोर्स जाता था । इस पर भी वह दिल का बहुत ही अच्छा आदमी था । उसके पास कोई मदद के लिए पहुंचा हूँ और खाली हाथ लौट आया हूँ । ऐसा कभी नहीं हुआ था । वो देता भी बिना वापसी का आज से था । इसलिए कोई हैरानी की बात नहीं थी कि राजेंद्रबाबू विमल को बहुत पसंद करते थे और उसी अपने बेटे की तरह चाहते थे । फिर एक बार भी भी की की उमर शादी के काबिल होती जा रही थी । राजेंद्रबाबू आशा करते थे कि विमल और उमा एक दूसरे को पसंद करने लगे और फिर विमल का संबंध उनके परिवार से और भी अधिक गहरा हो जाए । लेकिन उमा विमल की और आकर्षित नहीं थी । पूमा युवा की उसके चेहरे पर एक भोलापन और निखार था । विमल को उसकी खामोशी बडी भली लगती थी । जितना वो विमल से खींची रहती । उत्तर ही विमल उसे अपने और निकट लाने की कोशिश करता । जब विमल ने ये देख लिया कि उमा के साथ ज्यादा तेज तरार तरीके नहीं चल सकते हैं तो उससे अपना व्यहवार बिल्कुल बदल दिया । राजेन्द्र बाबू उसे घुमा के साथ मिलने की काफी छूट देते थे । लेकिन अब वो इस स्वतंत्र दामे जरूरत से ज्यादा खुलने की कोशिश नहीं करता था । इसका नतीजा यह हुआ कि आहिस्ता आहिस्ता घूमा का विश्वास उसपर जमता गया और वो उसे एक मित्र और सलाहकार के रूप में देखने लगी थी । जब भी उसे कोई परेशानी होती, वो खुले मन से उसे सलाह लेती । विमल ने घंटे का बटन दबाया । फोरन ही महीना इठलाती हुई कमरे में आ गयी । वो हमेशा ऐसे मट्टी हुई आती थी, जैसे उसके जूते उसे तंग हो । मीना डीएस एक चिट्ठी लिख लोग विमल ने कहा और मीना अपनी शॉर्ट हैंड खोलकर बैठ गई । विमॅन आवाज में मजबूर बोलने लगा । चिट्टी पूरी करने के बाद उस ने कहा बस ठीक है, अब तो जाकर इसे जल्दी टाइप कर लो और सुनो आज शाम को तुम क्या कर रही हूँ? तो खुशी मीना ने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा तो मुझे ऍम में क्यों नहीं मिलती? मैं वहाँ छियालीस नंबर ऍम में मिलूंगा । आठ बजे के करीब आओ आओगी ना । जी हाँ, मालिक साहब आना ही पडेगा । जब इतने प्यार से बुला रहे हैं तो मीना हसते हुए उत्तर क्या ऍम ऊंचे स्तर की जगह दी और वहाँ के पकवान भी मशहूर थी । पूछे वर्ग के लोगों में इस रेस्ट्रों का नाम था भूलना नहीं । आठ बजे मैं तुम्हारा इंतजार करूंगा । विमल एक बार फिर दोहराया और मीना उसकी तरफ आंख मीचकर चली गई । जय माता पिता गांव में आए हुए थे । एक समय था जब की उसका परिवार काफी संपन्न था । लेकिन ये सब जमींदारी खत्म होने से पहले की बातें थी । देवी जमींदार थे और गांव में उनकी काफी इज्जत थी । लेकिन आजादी के साथ बहुत से परिवर्तन आएगा और अलग अलग लोगों पर उनका असर अलग अलग तरह से पडा था । जमींदारी टूट गई और उनकी जगह अब एक नया वर्ग पैदा होने लगा । वो था खेत का हाल । वह किसान हर अपनी मेहनत पर जीना इस वर्ग का धर्म था । इसके अलावा गांव में और अधिक परिवर्तन कुछ ना हुआ । ये ठीक है कि अब गांव की कच्ची सडकों पर एक दो जीते चलती हुई भी दिखाई दी जाती थी जिनके पीछे अंदर लगे बच्चे तालियां बजाते हुए दौडते या कुछ पक्के मकान बनने लगे थे और खेतों में कुछ नए किस्म के आधुनिक उपकरण भी नजर आने लगे थे । लेकिन इस सबके बावजूद अधिकतर किसान अभी हाल के साथ ही जुडे हुए थे । वही एक जोडी बैल और दो हजार साल से चला आ रहा लकडी का हाल जिसको हाथ कटा हुआ पसीने से लतपथ शरीर एक हादसे बीच डालता जाता था । वहीं छोटे छोटे हरे भरे खेत सूखी हुई पकडाई धरती अनाज फटकारती हुई औरतों के पास से कुर्ता भूसा, वर्षों को तरफ आंखे पाले और बाढ का है । नंगे बच्चे फटी पुरानी मत मिली । साडियो में ढकी अनढके, स्त्रियों के शरीर की चढ गारा और धूल डाकुओं का आतंक लूटमार चुकी हुई छतों वाले पुराने खैराटी और सरकारी दवा, खाने बे असर, दवाइयाँ और बेकार डॉक्टर । स्कूलों में ठीक जीतकर पढते हुए बालक और उम्मीदे हुए अध्यापक ये सब उसी रहा था । इसमें कहीं कोई परिवर्तन न आया था । इस तरह जब जय के परिवार ने देखा कि उनका वगैरह खत्म हो चुका है और अब गांव में उनके लिए कोई भविष्य नहीं है तो ये परिवार लखनऊ में आकर बस गया । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक खूबसूरत जगह है । पुरानी और नई सभ्यताएं यहाँ इस तरह आपस में घुली मिली हुई है कि उसे एक अजीब आकर्षक पैदा हो गया है । शहंशाहों की वक्त की बारादरी, शानदार पुरानी इमामबाडे के चौडी सहन और जंगी फाटक आज भी ईडीएम दूसरे त्योहारों पर रोशनी से जगमगा उठते हैं । रेजीडेन्सी के खंडहरों के चारों और बहते हुए बाग में पडी पुराने जमाने की पहली तेदार तो पे टहलने वालों को अठारह सौ सत्तावन की याद दिलाती है । इन सबसे अलग नदी तट पर एक पहरेदार की तरह अकेला खडा शहीद स्मारक बरबस उन जाने अनजाने लोगों की और ध्यान आकर्षित कर देता है जिन्होंने आजादी के आपको भडकाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान कर दिया था । इन पुरानी यादों के बीच शहर का जहल पहल बहरा इलाका हजरतगंज है । यहाँ तरह तरह की सजी हुई दुकानों, रेस्ट्रॉन्ट तो घर में आर्थिक जाते लोगों की भेज खाते में हार डाले हुए दोस्त चटक रंग लीवासियों वाली युवतियों के झूठ, उन्हें शरारती नजरों से घूमते हुए कॉलेज के छोकरे और बहुत शाइस्तगी सी राहगिरों को आवाज देते हुए कोच ने अजीब रन पैदा कर देते हैं । रात के वक्त लखनऊ के खामोश माहौल में, गोमती से आते हुए, हवा के झोंकों पर, चौक के पास के कोठों से उडती हुई तबलों की थाप और नाचने वाली वाइफ के घूम रूकी छनछन हर बागी रही के मन को हल्का हल्का गुदगुदा देती है । इसी शहर में वे लोग आपसी थे, लखनऊ की तहजीब और बोल डालने जय पर गहरा प्रभाव डाला और वो पूरी तरह लखनवी रन में रह गया । कोई उससे शहर के बारे में एक शब्द भी कहता तो वह तुनक कर उस शायर का शेर पडता जिसने कहा था लखनऊ हम पर फिदा है हम फिदाई लखनऊ क्या है हिम्मत आसमा की जो छुडाए लखनऊ जैन ने अपनी साइकल उठाए और गुनगुनाता हुआ द्वीप सीट की तरफ चल दिया । इस समय वो बहुत खुश था क्योंकि पिछले दिन उसके प्रकाशक से उसे सूचना मिली थी कि उसने जय की पुस्तक स्वीकार कर ली है । उमा को ये बात बताने के लिए वह बहुत था । साइकिल चलाते हुए वो सोच रहा था कि उमा ये सुनकर क्या कहेगी । एक्शन के लिए वो उसके बहुत निकट आ जाएगी और इतनी प्यार से बात करेगी कि जय को उसके प्रेम पर पूरा पूरा विश्वास हो जाएगा । लेकिन फिर आ जाना कि अगले शायद वो उससे इतना परे हट जाएगी जैसे उससे कुछ लगा भी ना हो । बल्कि जैसे वो मजबूरी से जय के साथ बात कर रही हो । जय उमा को समझ नहीं पाता था लेकिन फिर भी उसका मन बरबस उसकी ओर खींचता जाता था । जय जिस समय बंगले में पहुंचा उमा एक फूलदान में गुलाब से जा रही थी । माली कहा है, कुछ ने पूछा क्योंकि ये काम हमेशा माली करता था । वो एक हफ्ते की छुट्टी लेकर गांव गया है । फूल ढांचे जाने में वेस्ट उमा ने उत्तर दिया, कल प्रकाशन ने पत्र भेजा है कि वह मेरी पुस्तक छापने को तैयार है । अच्छा उमा ने नजरे ऊपर उठाते हुए कहा वो ही तो बहुत अच्छा हुआ । मुबारक हो । शंकर की वजह से ही काम हो गया । लेकिन एक बात है मेरी कविताएं भी तो उन्हें अच्छी लगी होगी नहीं तो वो स्वीकार नहीं करते । उमा ने कोई उत्तर ना दिया । अभी तक वो मन में इस बात पर खुश हो रही थी कि आखिर जय अपने सहारे कुछ करने में सफल हो गया है । लेकिन अब जय की बात से उसी ये पता चला की संकर ने इस काम में सहायता दी है तो उसकी खुशी पर जैसे हल्की सी ठीक लग गई तो सोच रही थी कि हर काम में शंकर क्यों सफल रहता है । जय क्यों नहीं तभी जय के उत्साह भरी स्वर्णी उसका ध्यान बदला । उमा क्या ख्याल है आज इस बात का जश्न बनाई जाएंगी । काफी दिन से तो बाहर घूमने नहीं गई हूँ । चलो आज विमॅन नहीं नहीं । उन्होंने कुछ रूखे स्वर में कहा मैं अकेली नहीं जा सकती । बाबा क्या कहेंगे? अगर उन्हें पता चल गया तो वो बहुत नाराज होंगे । कभी कभी की कोई बात नहीं । जैन ने कुछ आग्रह भरे स्वर में कहा और किसी को पता भी कैसे चलेगा? सिर्फ दो और मैं ही तो होंगे । इस बार उमा कुछ नरम पड गई । जैसे उस पर जो डाला तो वह कहने लगी देखते हैं तो बहुत महंगा जाॅन । ऐसी जगह जाकर बेकार में पैसे क्यों बर्बाद किए जाए? नहीं उमा वहीं चलेंगे । ऐसे खुशी के मौके रोज रोज तो आती नहीं । जय ने तर्क क्या? दूसरे वहाँ का मैनेजर मिरक काफी परिचित है । वो मुझे हमेशा अलग कैबिन दे देता है । उसमें हम बेखटके बैठ सकेंगे । आखिर कुछ जी जत्ती हिचकी जाते घुमाने दावत फॅमिली तो पक्का हम जाने जाते हुए पर फिर कहा शनिवार को सात बजे मैं फिर के सामने तुम्हारा इंतजार करूंगा । अच्छे चलता हूँ मुझे किसी से मिलना है । जय के जाने के बाद भी उमर काफी देर तक इसी उलझन में पडी रही कि जय की दावत स्वीकार करके उसने उचित किया या नहीं । अगले दिन अनिल का मुंडन संस्कार होना था इसीलिए राजेंद्रबाबू ने अदालत से छुट्टी कर ली थी । अनिल की उम्र अभी पांच वर्ष की थी लेकिन वह बहुत नटखट लडका था । हर समय किसी ना किसी शरारत में लगा रहता है या कोई चीज तोडना रहता । माँ बाप का बहुत लाडला था इसलिए दोनों उसे उठाये, उठाये घूमते और उसकी कोई जिद ऐसी होती है जिसे पूरा नहीं करते । इस लाड प्यार के कारण वो बहुत सिर्फ चढा हुआ था । पुलिस के सिपाहियों को देखकर अनिल बहुत खुश होता था । जहाँ भी किसी सिपाई को देखता तो पूरा अकडकर उसे सेल्यूट । वार्ता और भी शान से आगे बढकर उससे हाथ मिला था । उसका चाव पूरा करने के लिए राजेंद्रबाबू ने उसे भी खाकीवर्दी सिलवा दी थी । अनिल खाकीवर्दी बहनी खाकी टोपी सिर पर लगा और एक छडी बगल में दबाए, बडे गर्व से घर भर में परेड करता फिरता और जो सामने आता उसे जोर से सलामी देता । उमा रसोई में बैठी चूल्हा जला रही थी । लकडियाँ कुछ सी हुई थी इसलिए धुआं फैल रहा था जिससे उसकी आंखों में पानी भर आया था । आग सुलगाते सुलगाते परेशान होकर वो सोच रही थी कि ये खाना बनाना भी क्या मुसीबत का काम है । कब बकत रसोइयों की भी उस दिन छुट्टी लेने की सोचती है जब उसकी जरूरत हो तो फिर भी गनीमत थी कि महरी छुट्टी पर नहीं थी । नहीं तो अक्सर वो दोनों एक साथ ही छुट्टी लिया करते थे । मेहरी ने आती तो उमा परेशान हो जाती है । फिर तो घर के बर्तन भी उसे ही मांगने पडते । उसे याद था कि एक बार उसे बर्तन मार्च में पडे थे तो उसकी उंगलियां और हथेलिया खुरदरी हो गई थी । उसे लगा कि खाना बनाने का काम भी बाकी बहुत मुश्किल का काम है । इसके अलावा हर एक के खाने का वक्त भी अलग अलग है । जिससे सुबह से रात तक चूल्हा जलता रहता है । ऐसे में तो फिर हर समय रसोई में ही बैठे रहना पडता है । उस पर भी दावत हो तो और मुसीबत बढ जाती है । कोई मेहमान मांस मच्छी का शौकीन होता है तो कोई सिर्फ दाल सब्जी खानेवाला खाने की बात तो एक और रही । उनको अलग अलग बैठाना भी एक समस्या हो जाती है और नौकर जो छुट्टी घर गया तो और परेशानी । उमा इसी तरह की बातें सोचती विचार थी रसोई में व्यस्त थी । उधर घर में भाग दौड मची हुई थी । मुंडन संस्कार पर सभी संगीत संबंधी और जान पहचान वाले आमंत्रित थे । राजेंद्रबाबू काफी परेशान इधर से उधर और उधर से इधर भागे भागे फिर रहे थे । वो इस बात से बहुत चिंतित थे कि कहीं प्रबंध में कोई कमी ना रह जाए । जिससे मेहमानों के सामने उन्हें खुद को छोटा देखना पडेगा । पिछले वह एक के काम के पीछे दौडते फिर रहे थे । मुंडन का समय हुआ तो अनिल को संभालना मुश्किल हो गया । वो किसी तरह भी न्याय के सामने बैठने को तैयार नहीं था । आखिर बडी मुश्किल से उसे बहला फुसलाकर और बिजली से चलने वाली रेल दिलाने का लालच देकर राजी किया गया । रात को मेहमानों की दावत दी । आठ बजे का समय खाने के लिए नियत किया गया था, लेकिन आवाज कट के बाद तक भी अभी कोई मेहमान न पहुंचा था । राजेंद्र बाबू को झुंझलाहट तो महसूस हो रही थी, लेकिन वह जानते थे कि लोग समय पर पहुंचने को कभी महत्व नहीं देते । कई बार तो कुछ लोग उस समय पहुंचते हैं जबकि दूसरे मेहमान विदा ले रहे होते हैं । एक बार की घटना राजेंद्रबाबू को याद आ गई । उन्होंने पन्द्रह जनों को आमंत्रित किया था, लेकिन दावत के वक्त के दो घंटे बाद तक कोई नहीं आया । फिर कुछ लोगों ने टेलीफोन करके शमा मांग ली । किसी कारण वर्ष वे आने से विवश हो गए हैं । शेष को राजेंद्रबाबू ने खुद ही टेलीफोन क्या पता चला कि वे लोग दावत की बात बिल्कुल ही भूल गए थे और खाना खा चुके थे । आखिर उस दिन का सारा खाना बर्बाद हुआ और अजेंद्र बाबू को बहुत निराशा हुई । आधी रात के समय थके हारे अपने बिस्तर पर लेटे हुए उन्होंने कसम खाई कि अब कभी किसी को दावत पर नहीं बुलाएंगे लेकिन वह बात भी धीरे धीरे गुजर गई थी और आज भी राजेंद्रबाबू मेहमानों की प्रतीक्षा करते हुए कुछ रहे थे । आखिर साढे आठ बजे के बाद मेहमानों का आना शुरू हुआ । राजेंद्रबाबू ने कुछ सुख की सांस ली । सबसे पहले आने वाले विमल था और उसके फौरन बाद जय और शंकर भी आ गए । उसके बाद मजिस्ट्रेट गॅाड एक डॉक्टर साहब और फिर राजेंद्रबाबू के वकील मित्र आते गए । राजेंद्रबाबू अधिक मेहमानों भीड इकट्ठी करने के पक्ष में नहीं थे । उनका मत था कि ऐसी दावर में प्रबंध की बडी गडबड होती है । इसलिए इस दावत में भी उतनी ही मैं मानते जो कमरे में आसानी से बैठाई जा सके । सब लोग आ चुके थे तो खाने की मेज लगने लगी । राजेंद्रबाबू ने दावत की व्यवस्था नए ढंग से की थी । खडे खडे ही खाने का इंतजाम था । लोग खाने की मेज के ईद, गेंद, ब्रेड, हाथ में लिए खाते खाते आपस में बातों में छूट गए । सुभाव और रूचियों के अनुसार छोटी छोटी मंडलियां बन गई और आपस में हंसी मजाक, बहस, छींटा, कशी, पूछताछ आदि का वातावरण जम गया । जब जहाँ इस साल आपकी शिकार का क्या रहा कोई शेर चीता हमारा? आपने राजेंद्रबाबू ने गंजी खोपडी वाले गंभीर व्यक्ति से पूछा नहीं भाई राजेंद्रबाबू इस बार तो कुछ हाथ नहीं लगा जब जहाँ कुछ उदास स्वर में बोले एक शेर घात में आ गया था लेकिन उस पर निशारा छूट गया बहुत अब सोच रहा हूँ मचान से सिर्फ बीस गज के फासले पर शेर हो और गोली खाता हो जाए । आप सोच सकते हैं कि शिकारी के दिल को कितनी जोर पहुंचती है । वो दिन ही ठीक नहीं था ये शायद उस शेर के लिए वह दिन बहुत ठीक था जो गोली से बजा रहा राजेंद्रबाबू ने कहा । इस पर मजिस्ट्रेट गन्ने बातचीत में हिस्सा लेते हुए कहा ये दिन ठीक और खराब होने की बात अपनी समझ में आती नहीं । सभी दिन मेरी नजर में एक जैसे होते हैं । दिन ठीक होने की बजाय उस समय अगर जज साहब का निशाना ठीक होता तो शेर जरूर चित हो गया होता हूँ । डॉक्टर साहब जो ध्यान से इस बातचीत को सुन रहे थे, करनी की बात पर बोल उठे भाई की क्या गलत जो भी आप माने लेकिन एक बात तो माननी पडेगी कि कोई ना कोई बडी शक्ति इस संसार में जरूर है जो सभी कुछ अपनी इच्छा से चलती है । गीता में कर्म के पांच तत्वों माने गए हैं । स्थिति करेंगे उपकरण क्रिया और पंद्रह स्थिति इसलिए पंद्रह स्थिता की चाहे बिना कुछ भी नहीं हो सकता । अब ये जब जहाँ भी वही थे जिन्होंने पहले भी कई शेरों का निशाना बनाया था वहीं बंदूक इनके पास जिससे वो बहुत बाढ चला चुके हैं तो भेज क्या बात जो इसी शेर पर निशाना लगाते समय इनकी गोली चुकी थी । लेकिन डॉक्टर साहब के इस तरफ को मजिस्ट्रेट करंट स्वीकार करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी । वो बोले डर से लाभ मामूली बातों को बहुत ज्यादा महत्व दे रहे हैं । मैं पूछता हूँ कि अगर अपने कर्मों की जिम्मेदारी हम अपने ऊपर लेने से इंकार करते तो इसका मतलब ये होगा कि हम तो सिर्फ कठपुतलियां है जिन्हें ना जाने कौन न जा रहा है । इस प्रकार अब ये सिद्ध करना चाहते हैं कि संसार में जो कुछ हो रहा है वो सिर्फ कठपुतलियों का तमाशा है । जो इस बातचीत को सुनकर पास खडा हुआ था वो बोला जी है तो कठपुतलियों का ही तमाशा । संचार के मंच पर जो भी व्यक्ति आया है उसे बस अपनी भूमिका पूरी करनी है और फिर विदा हो जाना है । हम सब गरीब, अमीर, छोटे, बडे, अच्छे बुरे अपने अपने कर्मों में बंधे अपना जीवन बिताकर एकदिन मिट्टी में ही मिल जाते हैं । डॉक्टर साहब इस बार जय की बात से कुछ मतभेद प्रकट करते हुए बोले, नहीं, मैं धर्म की स्वतंत्रता के खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहता हूँ । सोचने और कर्म करने की आजादी मनुष्य को है । अगर ऐसा न होता तो मनुष्य को बुड्ढी क्यों दी गई होती? मेरे कहने का मतलब है कि मनुष्य को अपने हर एक गर्म का फल अवश्य भोगना पडता है । लेकिन मनुष्य का स्वभाव ऐसा है कि इस बात को भूलकर अपने मनमाने कर्म करता रहता है । डॉक्टर साहब कम से कम खाने के मामले में तो मनमोहन कर्म कीजिए ही । ये देखिए गरम पूरी आ गयी है इनकी और भी कुछ ध्यान दीजिए । राजेंद्रबाबू ने हसते हुए कहा खाने के साथ इतनी गंभीर दार्शनिक बातों का मेल नहीं बैठता हूँ । मुझे तो उस आदमी की बात ठीक लगती है जिसने कहा था कि जब तो भारत मूवी चल रहा हूँ तो अपने दिमाग को आज हम दो इसलिए जरा इन नरम नरम दही बडो की तरफ हाथ बढाई । राजेन्द्र बाबू की बाद से लोगों का ध्यान खाने की तरफ का मजिस्ट्रेट करने थोडा सा पुलाव अपनी प्लेट में डाला और उसे चक्कर चटखारा भरते हुए बोले बाप भाई, इस पुलाव ने तो और भूख जगह दी लेकिन जब जहाँ भी ये बात ना सुनी वो पुडिंग कर जायेगा । ले रहे थे । सभी चीजें स्वादिष्ट थी । मेहमानों ने जी भरकर खाया । खाने के बाद सब लोग बैठक में आप बैठे । जहाँ कॉफी का इंतजाम था कॉफी की चुस्कियां लेते समय मजिस्ट्रेट करन की नजरे आतिश दान पर बिछी हुई खूबसूरत चादर पर पडी । उन्होंने प्रशंसा के स्वर में कहा भई वाह! बहुत शानदार कटाई है, किसने कर रहा हूँ? उमा निकाला है । राजेंद्र बाबू ने कुछ गर्व से उत्तर दिया । नारी कला भवन में उसने कशीदाकारी सीखी है । वाकई उमर तुम्हारी कढाई तो ला जवाब है मजिस्ट्रेट करने । एक बार फिर तारीफ करते हुए उमा की और देखा गुवानी सिर झुका लिया । जब जहाँ जो अभी तक हम ओश बैठे कॉफी पी रहे थे । अचानक राजेंद्रबाबू से कहने लगे भाई, एक कॉफी से तो इंग्लिश चीज नजर आता है । बहुत खूबसूरत है लेकिन साहब आजकल तो अस्सी रुपये से कम का नहीं मिलेगा । कुछ साल पहले मैंने भी इस तरह का इंग्लिश सेट खरीदा था । उस वक्त इसकी कीमत से बाइस रुपये थी । हर चीज के दाम आग की तरफ बढते जा रहे हैं । राजेन्द्र बाबू ने भी जब जहाँ की बात का समर्थन करते हुए कहा, जी हाँ, जब जहाँ बाप का कहना बिल्कुल सही है । मुझे याद है एक जमाने में हम गेहूँ रुपये का बारह सेल खरीदते थे । आज रुपये में दो से जो नहीं मिलते हैं । महंगाई तो वाकई भर्ती जा रही है कि खडसे संभालना मुश्किल हो रहा है और सबसे ज्यादा मुसीबत तो महंगाई में मध्य वर्ग के लोगों पर डाली है । सोची जरा बेचारा एक कलर के इस महंगाई में कैसे गुजारा करता होगा? मजिस्ट्रेट करने कहा जय भी चुप ना रहा फॉरेन बोल बडा उस बिचारे की मुसीबत तो उसी का दिल जाता है सो सवा सौ रुपये तक हुआ और ये महंगाई और अगर पांच छह जानी इससे अनुभव में खाने वाले हो तो सोची कि कैसे करती होगी । इस सवा सौ रुपए में तो आज एक गर्म सूट भी नहीं मिलता । क्लर्क की जिंदगी तो ऐसी है कि कभी अपने बच्चों को एक खेलो ना तक लाकर नहीं दे सकता हूँ । इस पर राजेंद्रबाबू अपना खाली प्याला मेज पर रखते हुए बोले अजीत साह हालत तो ऊपर वालों की भी कुछ नहीं है । अब मैं अपनी ही बताऊँ कि वह भी एक जमाना था जब मुवक्किल से मोटी रकम पेश की भी लेते थे और अब ये है की एक भी वक्त है कि मुकदमे वाले एक एक पेशी के लिए सौदेबाजी करते हैं । शंकर अभी तक चुप था । कहने लगा आज व्यापारी भी कुछ अच्छी दशा में नहीं है । इतने कम मुनाफे पर लेन देन हो रहा है कि सब जमा खर्च के बाद मुश्किल से एक साधारण अनुभव जितनी कमाई हो पाती है । जमाना बहुत बुरा आ गया है, इसमें कोई शक नहीं । शैलेंद्र ने कहा, जो किसी समय बहुत माना हुआ वकील था, अब उस की वकालत ढीली पड गई थी । अपनी एनेक् के शीर्ष साफ करते हुए बोला वाह वाह जमाना आ गया है कि तसल्ली की सांस लेना मुश्किल है । जिसे देखो वही परेशान है । इस सब बातचीत में सिर्फ एक विमल था जो बहुत ज्यादा हो रहा था । ये सब बेयरस् बातें सुनता सुनता । वह खामोशी से बैठा हुआ घुट रहा था और सोच रहा था की कोई उठे तो वह भी फौरन इजाजत लेकर यहाँ से छुट्टी पाए । राजेंद्रबाबू से खामोश देख कर भाग गए और बोले विवन तू चुप बैठे हो तो मैं कुछ नहीं कहा । क्या ख्याल है तुम्हारा? इस बारे में विमल एक पी किसी मुस्कुराहट चेहरे पर लाते हुए बोला ऍम मैंने कभी इस तरह की बातों के बारे में कुछ सोचा नहीं । मुझे तो लगता है जिंदगी ठीक है । मुझे लेना चाहिए जमाने को क्या दोष दिया जाएगा । मेरे समझ में नहीं आता । विमल के इस बात में विषय का सिलसिला तोड दिया करण ने अब की घडी में समय देख कर एक हल्की सांस ली और फिर कहने लगा अच्छा राजेंद्रबाबू नहीं हम तो अब आपको धन्यवाद देकर जाने किया गया चाहेंगे आपको बहुत बहुत बधाई लडके कि मुंडन की करण के साथ साथ बाकी मेहमान भी उठ खडे हुए । सब मेहमानों को विदा करके राजेंद्रबाबू जब वापस बैठक में लौटे तो घडी ग्यारह बजा रही थी ।

सातवाँ फेरा -03

भाग टी करंट का परिवार पदमपुर का एक पुराना माना हुआ परिवार था । उसके दादा अंग्रेजी के जमाने में डिप्टी कलेक्टर थे । उसके पिता भी सरकारी अवसर रहे । इसी रीति में वो भी बला और अपनी कुशाग्र बुद्धि के कारण राज्य लोक सेवा की परीक्षा में अच्छी स्थान पर पास हुआ । सुभाव से वो अलग अलग रहने वाला व्यक्ति था इसलिए इस अवसरी में वो पूरी तरह सही कभी न बैठाया और कुछ चिडचिडाहट जी उसके अंदर आ गई थी । उसका विवाह बहुत जल्दी हो गया था और उसे पत्नी भी ऐसी मिली थी जिससे उसका स्वभाव ना मिल पाया । ये उसके चिडचिडे स्वभाव का एक और कारण था । इस बात का सारा दोष उसकी पत्नी प्रमिला को ही नहीं दिया जा सकता हूँ कि वो आपके पति का स्वभाव ना पहचान पाएगा । मगर एक बार जरूर कही जा सकती थी कि उसके स्वभाव में भी काफी रूखा बंद था जिसकी वजह से पति और पत्नी के मन कभी मिलना पाएगा । देखने में प्रमिला बहुत सुंदर और आकर्षक थी । उसके खूबसूरत ढले हुए चेहरे के साथ उसके लंबे लंबे घुंघराले सियाही बाल उसमें एक सहज आकर्षण पैदा करते थे । प्रमिला की एक छोटी बहन शीला थी जो मिला की तरह गोरे रंग की तो नहीं की लेकिन आपने सावली रंग और गठ्ठे हुए उस से कब गार्ड में काफी सुंदर लगती थी । उसकी गहराई सिया है । आंखों में बिजलियाँ चमक दी थी । उसके भरे भरे सुर खोट देखने वालों का ध्यान बरबस अपनी और खींच लेती थी करेंगे । उसे पहली बार उस समय देखा था जब दूल्हा बनाई विवाह मंडप में बैठा था । उसी समय वो अपना दिल उसे देख चुका था । फिर धीरे धीरे वो आकर्षण बढता चला गया हूँ । शीला भी करण को पसंद करती थी लेकिन वह योवन की सीमा पर अभी आकर पहुंची ही थी । इसलिए उसे पुरुष के हर इशारे को समझने का अनुभव था । हूँ । करंट शीला से छह हजार करता हूँ तो शीला की अधिक जागी । भावनाओं में कुछ अजनबी सी कसमसाहट होती है । एक अजीब सा नाशा उस पर सुझाने लगता लेकिन इससे अधिक वो कुछ ना समाजवादी । जब उसकी बहन का विवाह हुआ था तब वह सोल वहाँ पार कर रही थी । स्कूल ले जाने के लिए उसकी बस सुबह जल्दी आ जाती थी इसलिए उसे जल्दी उठकर तैयारी करनी पडती थी । करें हमेशा देर से उठी का आदि था लेकिन जब अपने ससुर के घर आकर अचानक वो रोज जल्दी उठने लगा तो प्रमिला को काफी हैरानी हुई करेंगे । उससे बहाना क्या बेवक्त खाना खाने से नींद कम आने लगी है और यहाँ का पानी भी कुछ ठीक नहीं बैठा हूँ । रात मुश्किल से पलक भर नींद लगती है । करन बाहर बरामदे में होता था । सुबह के समय वह सबसे पहले उठ जाता और दबे पांव कमरे के बीच के गलियारे से गुजरता हुआ रसोई में जा पहुंचता हूँ जहाँ शीला उठकर चाय का पानी अंग्रेजी पर चढा रही होती है । चाहे तैयार करके शीला उसे एक प्याला बना देती और फिर दोनों इकट्ठे बैठकर गरमा गर्म चाय की चुस्कियां लेते और दबे स्वर में बातचीत करते । आप तो कहते थे कि आठ बजे से पहले कभी नहीं खुद ही नहीं लेकिन यहाँ तो आप तडके ही उठ जाते हैं । एक सुबह शीला ने पूछा हाँ तुम कहती तो ठीक हो जहाँ में तडके ही उठ जाता हूँ । लेकिन जानती हूँ इसलिए कहते कहते करें शरारत से मुस्कुराया और शीला की वह पकडकर खींचता वहाँ बोला इसलिए शीला के चेहरे पर सुर्खी दौड गई । उसने करन से अलग होते हुए घबराकर इधर उधर देखा कि घर का कोई व्यक्ति जाकर वहाँ आ जाएगा । वो इस बात से बहुत डरती थी कि कहीं छेडछाड कोई देखना ले लेकिन सभी लोग सो रहे थे । एक दिन करें कोई नई शरारत सूझी । उसने घर से कार्ड ली और झील के पास से होता हुआ शीला के स्कूल के सामने आ गया । स्कूल की छुट्टी का समय हो चला था । वो कार में बैठा शीला का इंतजार कर रहा था तो थोडी देर में छुट्टी हो गई और लडकियाँ किताबे बगल में दवाएं हस्ती चाहती स्कूल से बाहर निकले । शीला भी उन्हीं मेथी करंट को वहां देखकर वह कुछ खुशी और हैरानी से बोल । जीजा जी बहुत यहाँ कैसे बस तो भी लेने के लिए चला आया हूँ । गाडी में बैठा हूँ । करेंगे कहा शीला सहेलियों से अलग होकर कार में उसके बराबर की सीट पर आ बैठे । उसके गालों पर हल्की हल्की लाली झलकने लगी थी । करेंगे का स्टार्ट की और कुछ दूर जाकर कहा शीला चलो रेजेंसी घूमते हुए घर चलेंगे । शीला चुप रही । चढाई उतारों पर दौडती हुई कार जब शहर से कुछ दूर आई तो उसका इंजन झटके खाने लगा करेंगे । गाडी रूकती क्या सरकार को शीला भी चिंतित होते हुए पूछा मेरे खयाल में कार्बोरेटर कुछ गडबडी कर रहा है । कर रनिंग गाडी से नीचे उतरते हुए कहा शीला घबरा गई और कहने लगी हाई ठीक हुई तो क्या होगा? उसकी बेचैनी देखकर करंट हसने लगा । उसे पेट्रोल का चौक लगाकर कार्बोरेटर को एक दो बार हादसे चलाया और फिर दोबारा गाडी के अंदर बैठे हुए बोला हो ठीक हो गई । अब घबराने की कोई बात नहीं है । कार दोबारा चल पडी तो शीला ने तसल्ली की सांस ली करेंगे । कार वापस घुमारली । वो अभी थोडी दूरी गए थे कि बादल गिरने लगे । लगता है बारिश होने वाली है । शीला ने कहा उसकी बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि बूंदाबादी शुरू हो गयी । आकाश में घटाएं छाई हुई थी । कार इस समय उस ढलान के ऊपर थी जो चक्कर खाती हुई शहर की सीमा से जा मिलती थी । उसने एक जगह कार खडी कर दी । यहाँ एक और एक बडी चट्टान थी और दूसरी ओर दूर नीचे झील का पानी लेहरा दावा दिखाई देता था । कार्य के सामने का शीशा बारिश के पानी से धुंधला पड गया था । करण ने खिडकियों के शीशे चढा दिए । बाहर के मनोरम एकांत में कार के अंदर का वातावरण सिमट कर और भारी हो गया करेंगे । धीरे से शीला को अपने पास खींचा । वो सडक कर उसके और नजदीक आ गई और अपना सिर्फ उसकी कंधे पर टिकाकर पर ऐसी हुई बूंदों का मध्यम संगीत सुनने लगी । करन की उंगलिया शीला के नरम बालों से खेलती हुई भटक कर उसकी धडकनों को तेज करने लगी । बारिश के संगीत के साथ सांसों की गति तेज होने लगी । शीला ने एक बार भारी बल को से करन की और देखा जैसे कुछ सोच रही हूँ । करंट का सारा शरीर सिहर उठा । शीला की नजर उससे खेली ना गई और वो संभल गया । अब मेरा ख्याल है कि हमें वापस चलना चाहिए । उसने धीरे से कहा हाँ, शीला की आवाज में रूमानियत थी, करेंगे । उसके तमतमाए चेहरे और गदराई हुए शरीर को एक बार तरफ की नजरों से देखा और फिर कार स्टार्ट करने लगा । बारिश कम हो गई थी । कारब झील के पास से दूसरे रही थी । करेंट सोच रहा था कि घर जाकर वो शीला को साथ लाने के बारे में क्या कहेगा । शीला उसकी परेशानी समझ गई और बोली, मुझे बस स्टॉप के पास उतार दीजिएगा । मैं घर पैदल आ जाओ । उसके बाद चुनकर करन के मन का बोझ उधर गया और वो खुश होते हुए बोला हाँ ये बहुत ठीक रहेगा । मान गए तुम्हारे दिमाग को लोग अब तुम यहाँ से घर चलो और मैं घंटेभर भाग पूछूंगा । ऍम कैसी रही अच्छी? शीला ने कार से उतरते हुए क्या करेंगे? कार को अस्पताल की दिशा में मोडते हुए सोचा कि समय तो है ही, सरना से क्यों न मिल लिया जाए । अस्पताल पहुंचकर कार से उतरते हुए वो सोच रहा था कि अगर सरला को पता चल गया कि वह कहाँ से आ रहा है तो लेकिन वह बेफिक्र इसे मुस्कुराता वहाँ अस्पताल के अंदर दाखिल हो गया । अस्पताल से घर लौटकर करेंगे चुपचाप कार वही खडी कर दी जहाँ से वो लेकर गया था । फिर बिना किसी का ध्यान आकर्षित किए वो घर के अंदर दाखिल हो गया । उसके ससुर का मकान पूरा ने ढंग का था । आगे तीन कमरे और पीछे आंगन करें । गलियारे में से निकलता वहाँ पीछे आंगन में जाकर पहुंचा हूँ । आंगन के फर्श पर पिछले रोज चौक पूरा गया था, जहाँ शीला ने बैठकर अपने भाई के माथे पर टीका लगाया था । रंगोली के हल्के हल्के रंग अभी तक चमक रहे थे । आंकडों के कोने में एक तरफ शीला और उसकी माँ बैठी बातें कर रही थी । शीला ने नीले रंग का फिल्मी सितारे जडा लहंगा और कसी हुई पीली चोली पहन रखी थी । करंट के कदमों की आहट उसे पता चल गया कि वो आ गया है । लेकिन उसने मुडकर करन की तरफ ना देखा में सरला को देखने अस्पताल चला गया था करेंगे । कुछ खेद प्रकट करते हुए कहा सरला काफी कमजोर हो गए हैं । गाडी भी भी गई । ड्राइवर से साफ करानी पडेगी । ड्राइवर शब्द पर उसकी सास ने उसकी और ध्यान दिया और थकी हुई इसी बोले बेटा राशिद को कह दो । उससे ये भी कह देना की गाडी दफ्तर ले जाए और बाबू जी को ले आए हो गया है । इतना कहकर वो टी और शाम की चाय की तैयारी करनी चलेगी । करन की आखिर शीला की आंखों से टकराई तो कुछ जीत गई करेंगे । मुस्कुराते हुए धीरे से पूछा भी तो नहीं गई थी । मैंने कुछ कहा तो नहीं । शीला ने चुप चाप से हिलाकर इंकार कर दिया और उठकर लिट्टी साफ करने लगी करेंगे । कुर्सी पर टांगे प्रसार कर बैठ गया और आकाश की ओर देखने लगा । आकाश में बादल छट चुके थे और निलीमा निखर आई थी । प्लेट साफ करके शीला अंदर कमरे में चले गए । करन भी धीरे से उठा और उसके पीछे पीछे कमरे में आ गया । कमरे की खिडकियां दरवाजों पर पडे भारी भारी पर दो से बाहर की रोशनी अंदर झुटपुटा रही थी । शीला यूही अनमनी सी खडी कुछ सोच रही थी करें धीरे से उसके पीछे जा खडा हुआ । उस को अपने पास पाकर शीला के शरीर में काम कपि सी दौडी और उसने अपना सिर्फ पीछे करन की छाती पर दिखा दिया करेंगे । अपने गाल से उसके देश में बाल सहलाए । बालू से भीनी भीनी महक उठ रही थी । एक दूसरे में खोए हुए वो दोनों मदहोश खडे थे कि अचानक दूसरे कमरे से प्रमिला ने शीला को पुकारा । शीला शीला बेबी का कोर्ट कहाँ रखा है? प्रमिला पूछ रही थी । शीला भागती हुई कमरे से बाहर चली गई और करंट थका थका सा फिर आंगन में जाकर कुर्सी पर बैठ गया । तीन बीती दे गए और एक रोज करण अपनी ससुराल से लौटकर लखनऊ आ गया । दो तीन दिन आराम करके वो अपनी दिनचर्या में लग गया । एक वो सुबह साढे आठ बजे अखबार देख रहा था लेकिन खबरों शीर्षक पढते पर थे । उसका खयाल अपने ससुराल में बिताए हुए सुहाने दिनों की याद में भटक में लगा । अखबार के पन्नों पर उसे शीला की तस्वीर घूमती नजर आ रही थी । उसी गहरी सांस ली और एक बार फिर से अखबार की खबरों को पडने की कोशिश करने लगा । तभी अचानक टेलीफोन की घंटी नहीं उसी चौका दिया । वो थका हुआ था । उठा और टेलीफोन का चोंगा उठाकर बोला हेलो! मैं करण बोल रहा हूँ । कहीं दूसरी तरफ से विमल बोल रहा था । उसने करण को शराब की पार्टी पर अपने घर बुलाने के लिए टेलीफोन किया था । बस हम चारों होंगे । शंकर तुम मैं और मीना मजा रहेगा । वक्त पहुंच जाना । उसे हिदायत देते हुए कहा धमाल ए भाई करेंगे । उत्साह भरे स्वर में कहा मैं जरूर पहुंचूंगा । करन की पुरानी फोड गाडी लॉस टेरिस में विमल के घर के सामने रुकी । िवल उसका इंतजार कर रहा था । हाओ करें हम तुम्हारा इंतजार कर रहे थे । विमान ने उसका स्वागत करते हुए कहा करें, अंदर आकर उनमें शामिल हो गया । करंट, विमल और शंकर तीनों की आपस में गहरी चलती थी । तीनों स्वभाव से हसमुख और मनमौजी थे । शराब और शबाब से तीनों को गहरा लगाव था । करें जाकर एक सोफे पर बैठ गया । पास के सोफे पर मीना खिलाती हूँ । शंकर से बात कर रही थी । उसने कसी हुई उन ना बंगी रंग की कमीज पहन रखी थी जिसमें उसका शरीर और अधिक कटा हुआ लग रहा था । विमल ने सबके गिलासों में शराब उडेलकर अपना जाम उठाया और बोला दोस्तो, आओ आजम शराब का पूरा लुफ्त उठाएंगे । जाने किस रोज इस पर भी कानूनी बंदिश लग जाए । सबके अपने अपने जाम उठा लिए । शंकर ने अपना जाम ऊंचा उठाते हुए कहा, मेरा प्रस्ताव है कि ये पहला जहाँ मीना के नाम पर हो । तेरह उसने शराब का जाम और रुबाइयों की किताब हो तो जन्नत की भी ख्वाइश ना हो । मुझे करण और विमल ने भी अपना जाम हवा में उठाकर एक स्वर में कहा मीना के नाम और फिर चारों ने जाम टकराकर जिसकी अब भाई करेंगे । अपना ग्लास मेज पर रखा और सिगरेट सुलगाते हुए बोला हूँ सुना है शराब पर कानूनी पाबंदी लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये तो बहुत गलत बात है । मुझे तो लगता है कि धीरे धीरे शादी पर भी कानूनी रोक लगा दी जाएगी । विमल ने व्यंग क्या? शंकर बोला अच्छा है जनसंख्या की समस्या तो काबू में आ जाएगी । कुछ और समस्या भी हल हो जाएगी । विमल ने उसकी बाद आगे बढाई । अगर हर विवाह पर जुर्माना लगाया जाए तो फिर कोई और कर लगाने की जरूरत नहीं रहेगी । इस पर सभी नहीं जोरदार कहाँ का लगाया करेंगे । मीना से पूछा अच्छा मेरा तो उनके करोगी जुर्माना दोगी । उसने अपना प्रश्न अधूरा ही छोड दिया । जुर्माना देने की मेरे को एक खास इच्छा नहीं लेकिन मुझे विवाह में भी दिलचस्पी नहीं है । मुझे लगता है की पत्नी बनकर जिलेकी बिताना बहुत घटिया काम है । मीना ने उत्तर दिया । उसकी बात सुनकर करें । हसने लगा । उसने कहा मीना खुशी की बात है कि शादी से पहले तो मैं इस बात का पता चल गया । अक्सर पति पत्नी शादी के बाद ये बात समझकर बच जाते हैं जैसे कि तू । विमल ने मुस्कुराते हुए करन से मजाक किया । सब हंसने लगे और करंट जीत गया । एक बार फिर उसने अपना गिलास भर लिया । भाई सर जल्दी पीओ । विमल ने कहा, इस रफ्तार से तो हफ्ते भर में भी एक बोतल खत्म होगी । एक बार फिर जाम भरे गए । इस बार सोने के लिए शंकर ने इंकार कर दिया । हर मुस्कुराता हुआ बोला मिलावट मत करो भाई, शुद्धि रहने दो, कुछ जरूर तो आए । दौड चलने लगा । करण ने कहा विमल तो तुम्हारे यहाँ हम नहीं है तो हम क्यों जो है विमल बोला करेंगे । उत्तर दिया मुझे जब ज्यादा पसंद है जब मुझे शराब का नशा लेना होता है तो मैं ही पीता हूँ । इस पर विमल ने कहा, दो तरह की शराब मिलाकर नहीं पीनी चाहिए । एक बार मैंने गोंडा की एक पार्टी में शराब मिलाकर पी ली थी । उसने मेरी आती उम्मीद डाली । बहुत कष्ट हुआ था । उस दिन मुझे अच्छा तुम कहते हो तो खोजी चलने दो करेंगे । मुस्कुराते हुए कहा । उसे मुस्कुराते हुए देखकर मीना बोली, क्या बात है तुम्हारी होटल खेले जा रहे हैं? कोई खास बात है क्या करें की मुस्कुराहट और फैल गई और वह कहने लगा ही नहीं । ऐसी कोई खास बात नहीं हुई । मुझे घर से की बात याद आ गई थी । एक बार में और कुछ लोग अपने दोस्ती कार में बाराबंकी की तरफ जा रहे थे । हम सबने खूब बियर पी रखी थी तो तुम जानती ही हूँ । बाराबंकीः यहाँ से कोई सत्तर मिल ही दूरी पर है । जरूर गांव था । बात करते करते मैं अचानक अपने दोस्त की पत्नी के बारे में बताने लगा कि मैंने उसे विक्टर रेस्ट्रो में शराब के नशे में क्या क्या करते देखा था । मेरी बात से मेरा दोस्त इतना नाराज हुआ कि उसने गाडी रोककर हम सब को वही उतार दिया । अभी बाराबंकी चार मील दूर था । हम सबको पैदल वहाँ तक जाना पडा और सारा नशा गायब हो गया । नशा तो जरूर गायब हो गया होगा । शंकर ने हसते हुए कहा, नशे में कई बार अजीब अजीब बातें हो जाती है । एक बार जब में मसूरी में था तो मैंने कुछ ज्यादा जगह खाली बाढ से निकालकर पान खाने के लिए मैं कुछ दूर चला तो मुझे एक महिला नजर आएगा । मैं नशे में उठाई । अचानक मेरी इच्छा हुई कि क्यों नहीं इस महिला को पांच भेंट किया जाए । मैंने फॉर्म उसे पान भेंट कर दिया, जबकि मैं उससे परिचित भी नहीं था । अच्छा हुआ कि मैंने उसे सिर्फ पानी दिया । उसने और कुछ नहीं कहा । लेकिन अगली सुबह तो गजब हो गया । मैं एक मित्र के यहाँ गया तो देखता रहे गए । कल जो महिला मुझे मिली थी तो उस की पत्ती थी, अचानक करेंगे । मेहनत से कहा मीना, अगर कोई अनजान आदमी तो पान भेंट करें तो तुम क्या करोगी? मैं तो तमाचों से उसके होश ठिकाने लगा देंगे । मीना ने तुनक कर कहा, इसपर विमल हस्ता हुआ कहने लगा हूँ और अगर वह व्यक्ति तो मैं अच्छा लगे तो अच्छा लगे । मीना बुराई क्या तुम्हारा ख्याल है कि कोई नशे में धुत आदमी रास्ते में मिल कर मेरे मूह में पांच हो से लगेगा तो मुझे अच्छा लगेगा । मैं तो उसे पुलिस के हवाले कर दूँ । ॅ शंकर आपने गिलास में देखते हुए बडबडा हूँ, तुम्हारा गिलास खाली हो गया है । केवल उसके गिलास में शराब उंडेलते हुए कहा । शराब की बोतल खाली हो चुकी थी । करण और शंकर दोनों नशे में झूमने लगे थे । लेकिन विमल अभी ठीक था । वह अलमारी से एक और बोतल निकालकर लाया और आपने गिलास में उडेलकर चुस्कियां लेने लगा । फिर अचानक वो गुनगुनाने लगा हर शब्द पिया करते हैं । मैं जिस कदर मिले सब पर नशा चाय लगा । सभी अब पीएमटी धुन में कुछ ना कुछ गुनगुना रहे थे । मीना का दुपट्टा एक तरफ जमीन पर ढोलक गया था और वो बेहद लापरवाही से सोफे पर लेटी हुई थी । विमल मीना की और देख रहा था । अचानक उसे कुछ ख्याल आया और वह जोर से बोला सुनो मीना को रूप की रानी बनाया जाएगा । आओ इसी यानी बनाए करे और शंकर ने भी उसकी बात का खुशी से स्वागत किया । लेकिन मीना चौकरी टीवी बोली क्या फिजूल की बात है? मैं कोई रानी नहीं हो हो । कैसे नहीं तुम रूट की रानी हो? करण ने नशे में हकलाते हुए कहा हाँ हाँ । रूप की रानी नन्ही मुन्नी रूप की रानी शंकर ने झूमते हुए कहा । विमल ने उठकर मीना को सलाम किया और बोला, जानी साहब! गुलाब हाजिर है । अरे रानी का ताज कहाँ है? शंकर अभी बहक में चिल्लाया पागल हो गए हूँ । मीना घबराकर कहा, लेकिन उसकी बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया । विमल पुन्नी डार टोपी पास के कमरे से खोज जाया और बोला जानवी के सिर्फ ऍम पहनाएगा करें पहनाएगा । शंकर ने उत्तर दिया । मीना उनकी हरकतों को दिलचस्पी से देख सुन रहे थे, जबकि उसकी और बडे तो वह नकली गुस्से में चलाई । अरे ये क्या कर रहे हो पागलपन की हरकत । लेकिन वह सब पूरी तरह मदहोश थे । उन्होंने उसकी एक ना सुनी । शंकर और विमल मीना को पकडकर उठाया और एक ऊंची कुर्सी पर बैठा दिया जाने गद्दी पर बैठ गई । वो दोनों चलाएगा । करने आकर वो टोपी मीना के सिर पर पहना दी । मीडिया ने काफी विरोध किया लेकिन शंकर और विमल उसे कसकर पकडे रहे । करंट टोपी पहना चुका तो तीनों ने जोर जोर से तालियां बजाई और रूप की रानी मीना की जय के नारे लगाए हूँ । अभी करंट बोला यानी को भेज भी दी जानी चाहिए । और एक ये तो बोली गए थे विमल चलाया उपहार खोजो कोई उपहार रानी के लिए । उसकी बात सुनकर शंकर ने मीचकर बडी बलों की तश्तरी उठा ली और बोला बलों की भेंट चढा पुरानी को । इतना कहकर उसने फलों की तश्तरी मीना के पैरों के पास बुलेट ये देख कर करन भी पीछे ना रहा । उसने फूलदान से फूल निकालकर मीना के पास ढेर कर दिए । फिर क्या था तीनों ने नशे की धुन में ऐसी होड लगाई कि मीना के पैरों के पास कमरे की चीजों का ढेर लगा दिया । आखिर इस कुछ खेलकूद से उनका नशा कुछ ढीला हुआ और वह सब चुप चाप कुर्सियों पर लम्बे हो गए । कुछ देर के बाद नशे की झूक काफी हल्की हो गई थी । शंकर ने जमीन पर पडी हुई मेरी घडी उठाई जो भाग्य से अभी तक चल रही थी । बारह बज चुके उसने समय देख कर कहा कबाल है । पता ही नहीं चला कि कब आधी रात बीत गई । अब घर चलना चाहिए, गाडी चला लोगे ना । विमल ने उनको जाने के लिए तैयार देखकर पूछा मैं तो बिल्कुल ठीक करेंट लूट रहा है । शंकर बोला लेकिन कोई बात नहीं । मैं ऐसे अपनी गाडी में ही इसके घर ले चलूंगा । अच्छा भाई विमल पार्टी के लिए धन्यवाद और हाँ रानी को भी तुम्हारे पास से छोडे जा रहा हूँ । ये शंकर और विमल ने मिलकर करण को उठाया और शंकर के कार की पिछली सीट पर लिटा दिया । इसके बाद शंकर ने गाडी स्टार्ट कर दी । देवल अपने कमरे में लौटकर आया तो मीना जमीन पर बिखरी हुई चीजें उठाकर ठीक जगहों पर रख रही थी । बहुत उजड बन गया है । आज तुम लोगों ने वो विमल को देखकर बोले करंट बिल्कुल होश खो बैठा । सोचती हूँ घर तो ठीक से पहुँच जाएगी । विमल बोला रानी उसे तो शंकर संभालेगा उसकी पर वहाँ मत कर तुम अपनी बात करुँ । आज तो तुम्हारा डू छलका पड रहा है शराब की मस्ती से तुम पर कुछ और ही छत आ जाती है । उसकी बात सुनकर मीना धीरे से मुस्कुराई और बोली बस बस बहुत बातें बनाना छोडो चुपचाप अपने बिस्तर पर चले तो मैं भी अपने घर जा रही हूँ । क्या बात करती हूँ? मीना विमल बोला तो मुझे भी नशे में समझ रही हूँ । मैंने उन दोनों से बहुत कम भी हैं । मैं हमेशा संभाल कर देता हूँ । तुम कहो तो एक एक्जाम और हो जाएगा । नहीं तो फिर नहीं । मीना ने साफ इंकार करते हुए कहा और मेरी मानो तो तुम भी अब और मत दियो । इस पर विमल हस तावा बोला नहीं नहीं डरने की कोई बात नहीं । मैं सिर्फ एक बैग और लूंगा, लेकिन पहले तो मैं घर छोड कराऊंगा । इतना कहकर विमल नहीं मीना की ओर देखा तो वह भी मुस्कुराने लगी । शराब की गर्मी से मीना के हल्के हल्के तमतमाए हुए गाल उस की बडी बडी आंखों में करते हुए रेशमी डोरे और उसके शरीर का कसाब एक एक विमल को अपनी ओर खींचने लगा और वह सरक कर उसके पास हो गया । जानी तुम्हारी बाल के से उलझ गए । उसने मीना के बाल को धीरे धीरे सहलाते हुए उसकी आंखों में छाकर । तुम लोगों ने हुई छाती सिर पर टोपी रखे । मीना ने बनावटी नाराजी जाहिर करते हुए कहा विमल उसका हाथ अपने हाथ में लेते हुए कहा कभी कभी तो कुछ हंसी खेल होना चाहिए ही । मीना ने धीरे से कहा । फिर कुछ देर तक इसी तरह की बातें करने के बाद मीना बोली चलो अब मुझे घर छोडा । काफी देर हो चुकी है । माँ परेशान होंगे । विमल उसे साथ ली गाडी की तरफ चल दिया

सातवाँ फेरा -04

भाग चार उमा बैठक में विमल से कह रही थी, उस दिन की खाने की पार्टी तो बहुत अच्छी रही लेकिन एक बात है लोगों को खाने के बजाय बातें करने में ज्यादा मजा आता है । कुछ दिन में खाने की चीजें ठंडी होती रही लेकिन लोगों की बातें खत्म होने को नई िवली चाय का प्याला मेज पर रखते हुए उत्तर दिया । दरअसल आदत की बात है कुछ लोगों से बिना बोले कुछ खाया नहीं जाता । इस पर उन्होंने कहा, थोडी बहुत बाध्य करने में ऐतराज नहीं है । लेकिन जब खाने की बजाय शास्त्रार्थ होने लगी तो वाकई पूरा लगता है । उसकी नाराज की देखकर विमल मुस्कुराया और बाद पलटते हुए बोला, आप आज कल क्या कर रही? कोई फीस ले रखी है क्या? ऊपर से उत्तर दिया हाँ, इस साल मैंने इंग्लिश लिटरेचर में रिसर्च शुरू की है । ये तो बहुत अच्छा है । अब किस विषय पर रिसर्च कर रही है? विमल ने पूछा मैं बोली मेरे पास इसराइली और राजनीतिक उपन्यास का विषय है । असल में ये मेरे प्रोफेसर साहब का प्रिय विषय है और उन्हीं के सुझाव पर मैंने ये विषय चुना था । सिब्बल ने कहा, अच्छा मुझे ये नहीं पता था कि इंग्लैंड के इस मशहूर प्रधानमंत्रीने उपन्यास भी लिखे हैं । उमा बोली बीस राइली ने काफी उपन्यास लिखे हैं । बात ये हैं कि वह राजनीतिक क्षेत्र में ज्यादा मशहूर हो गया । लेकिन आपको रिसर्च करने की क्या जरूरत थी? दिव्या ने पूछा, डॉक्ट्रेट की डिग्री लेने में आपको कम से कम तीन साल लग जाएंगे और अगर में गलती नहीं करता तो राजेंद्रबाबू आपके लिए अब मेरा मतलब वो किसी दूसरी चिंता में है । उमा के गाल ऊपर हल्की सी लाली दौड गई । उसने अपनी आँख के नीचे जो खाली विमल भैया आप तो हमेशा मुझे जुडा दे रहते हैं । उमा कुछ शिकायत भरे स्वर में बोले मुझे क्या पता पिताजी क्या सोचते हैं? विवन कुछ गंभीर होकर कहने लगा उमा अब तुम बडी हो गई हूँ और अपने बारे में तो मैं खुद सोचना समझना चाहिए । एक दो दिन पहले राजेंद्रबाबू कह रहे थे कि वह इन्हीं सर्दियों में तुम्हारी बात पक्की कर देना चाहते हैं । मेरे ख्याल में उन्होंने तुमसे भी बातें की होंगी । उमा अब संभलकर बोली विमल भैया उन्होंने बात तो की थी । आप तो जानते हैं कि जयपुर में बचपन से ही एक साथ रहे हैं । उसके पिता से मेरे पिताजी की बडी गहरी दोस्ती थी । शुरू से ही लगभग तय था कि मेरी बात जय के साथ पक्की है । ये स्वभाव से भी बहुत अच्छे हैं लेकिन वह कोई काम ठंडा नहीं करते । उन्हें किसी से सहायता लेना भी पसंद नहीं । विमल बोला ये तो ठीक है उमा लेकिन विवाह करके जिंदगी चलाने के लिए तो ही जरूरी होगा । की जाए कोई ना कोई कमाई का धंधा करें । इसके बिना तो गाडी चल ही नहीं सकती । उमा कुछ सोचते भी बोली वैसे तो पिताजी ने शंकर के और भी संकेत किया था । विमल भैया आप मेरे लिए बडे भाई के समान है इसलिए आप से मैं सब बातें कह रही हूँ । मेरे सामने ऐसी दुविधा है कि आप जैसे समझदार व्यक्ति की सलाह से ही शायद कोई रास्ता समझ में आएगा । नहीं नहीं मैं तुम्हारी परेशानी समझता हूँ । बहन विमल ने कहा, मैं तुम्हारे लिए जो कुछ भी कर सकता हूँ उसके लिए तुम बेखटके मुझे कह सकती हूँ । मुझे तुम्हारा बहुत ख्याल है । उसके बाद से कुछ उत्साहित होकर उमा ने कहा, शंकर एक सफल व्यक्ति है । उसके बाद सभी कुछ है । लेकिन अपने ऊपर बेहद घमंड है और वो तडक भडक से रहना बहुत पसंद करता है । मेरे समझ में नहीं आता कि इन दोनों में से किसके पक्ष में मेरा निर्णय सही होगा हूँ । उमा मीरा ख्याल से तो जय बिल्कुल निठल्ला आदमी है । विमल कहने लगा जिंदगी में सफलता प्राप्त करना उसके बस की बात नहीं है । सिर्फ ख्याली पुलाव पका सकता है । विमल की बाल से उमा परेशान होती थी । बोली ये बहुत अच्छा है । उसे अपने ऊपर जरा सा भी गर्व नहीं है । वो सफल नहीं हो पाया तो उसका मूल कारण उसकी करीबी हैं । सही अवसर पर उसे अपने घर वालों से कोई सहायता नहीं मिली । इसलिए वह जीवन में आगे नहीं बढ पाया । विमल अभी असहमती जताते हुए बोला, उमा तुम चाहे कुछ भी कहो लेकिन वो तो केवल सपनो की दुनिया में रहने वाला व्यक्ति है । जिंदगी की वास्तविकताओं से उलझना उसके बस की बात नहीं है । उमा ने तुरंत जवाब दिया देवल भैया, जय की तरह के सपने देखने वाले लोग ही संचार में भलाई के बीच होते हैं । उमा का दम कमाया हुआ चेहरा देखकर विमल मुस्कुराया और कुछ नरमी से बोला मीरा मतलब जय की बुराई करना नहीं था । मैं तो ये कह रहा था कि अगर वो कुछ काम आएगा नहीं तो तुम्हारी योग्य वर नहीं होगा । आपकी ये बात तो ठीक है । उमा ने कुछ उदास स्वर में कहाँ? अगर वह जल्दी ही कोई काम शुरू नहीं करते तो पिताजी उनके लिए कभी राजी ना होंगे । मैं शाम जैसे एक्टर रेस्ट्रों में मिल रही हूँ । मैं उन्हें साफ साफ कह होगी आप उनसे परिचित है । कुछ आप भी उन्हें समझाएँ । उमा के आग्रह पर विमल मनी बनाया था, लेकिन ऊपर से बहुत गंभीर बनता हुआ बोला । उमा बहन तो मुझ पर भरोसा रखो । मैं पूरी कोशिश करूँगा । अच्छा अब मैं चलता हूँ कहाँ? स्टार्ट करते समय विमल के होठों पर चलाकी भरी मुस्कान खेल रही थी । उसे जैसे एशिया हो रही थी, जैसा हब अपना दांव लगा रहे हैं । उस ने सोचा राजेन्द्र बाबू तो शंकर और विमल की और ध्यान लगाए हैं । उधर जय अपना खेल खेल रहा है । अच्छा देखा जाएगा और विमल बनी माने की योजना तैयार करने लगा । विमल जय को पसंद नहीं करता था । उसे जब पता चला कि उमा जैसे प्रेम करती है तो उसकी एशिया और अधिक बढ गई । उसे स्वयं उमा से लगाव नहीं था । वो तो मीना की तरह चटकीली भडकीली लडकियाँ पसंद करता था । उमा जैसी खामोश लग गया । उसे अच्छी नहीं लगती थी । फिर उसे प्रेम जैसी बात भी समझ बनाती थी । स्त्रियों को योग पुरुष का जी बहलाने वाला खेलो ना समझता था । वह ढेड व्यापारी संभावना था और जिंदगी कि सबसे बडी सच्चाई रुपये पैसे को ही मानता था । रुपये से उसके विचार में दुनिया की हर चीज खरीदी जा सकती है । बिना स्वार्थ के किसी दूसरे के दुख सुख की बात सोचना उसकी आदत नहीं थी । विमल जय को निकम्मा समस्या था इसलिए उसके साथ कोई मतलब नहीं रखता था । वो उसे अपने से ही मानता था । लेकिन उमा के मुझसे जय की प्रशंसा सुनकर उसे महसूस हुआ जैसे जय ने उसे नीचा दिखा दिया हो । उसे उमा से भी कुछ नफरत हुआ और वह सोचने लगा कि किस तरह दोनों को नीचा दिखाए जाए । अचानक उसे याद आया कि उमा जैसे ऍम में मिलने वाली है । जैसे उसे विक्टर जैसे महंगे फॅमिली जाता है । वहाँ प्रेम होता है दोनों का क्यों ना शंकर को ये भेद बना दिया जाए । उसे मनी मनी सोचा, उसे इस बारे में शंकर को जरूर बताना चाहिए । वो प्रेमियों की दुनियाँ गुजार देखा जैसी उसने शंकर के अचरज भरे चेहरे की कल्पना कि वो मुस्कुरा पडा । उसे खयाल आएगा कि उसका सच्चा मित्र उसे धोखा दे रहा है । बीज रहा असहाय अनाडी जिसके लिए उसने इतना कुछ किया । मूर्खतापूर्ण कविता लिखने वाला, कभी प्यार और युद्ध में सब चलता है । लेकिन ये प्यार था या युद्ध? यहाँ की दोनों कुछ भी हो दोनों में कोई खास फर्क नहीं । विमल को लडाई पसंद थी, खासतौर से तब जबकि वह बराबर की ना हो और छल से भरी हुई हूँ । जैसे किसी की पीठ में छूरा भोंक देना । पेट में घुसा मायना विमल ने शंकर के हैरत भरे चेहरे की कल्पना कि वहाँ ऐसा और तब तक हस्ता रहा जब तक कि उसके पेट में दर्द होने लगा । अहमद साहब आपसे मिलना चाहते हैं । मीडिया ने फोन पर कहा उन्हें अंदर भी तू हाँ अभी तो और हाँ राम से कहना कि सिगरेट की एक डब्बी दे जाएंगे । अहमद ने मक्खनी रंग का सूट पहना हुआ था । उसकी थोडी पर छोटी सी गाडी थी । उससे चमडे के अटैची के इसको मेज पर रखा और बडे ही तपाक से विमल से हाथ मिला है । विमल मेज पर दो गिरा सके और नीचे की दराज से पियर की दो बोतलें निकाली । उसने अहमद के आटे जी के इसको थोडा सा खोलकर देखा और फिर संतोष से मुस्कुरा खूब बहुत हो । उसने कहा अहमद कभी भूल नहीं करता हूँ । अहमद ने दाडी पर हाथ देते देखा । अगर बुरा ना माने तो काम पहले और तफरी ही बाद में हमेशा की तरह सतर्क और सावधान । विमल ने मुस्कुराकर कहा, पैसा जितनी जल्दी आए उतना ही अच्छा है । अहमद ने दबी हसी के साथ कहा, दौलत को खर्च करने के लिए अहमद के पास हजारों तरीके हैं । ये तो चलती चीज है । इस हाथ आई उस हट गई । विमल ने चेक काटकर आगे बढा दिया । उसने अटैची के इसको एक तरफ सरकाया और गिलासों में बियर उडेलने लगा । अहमद ने जल्दी से बी एस का गिलास खाली कर सिगरेट सुलगाई । वो जल्दी में था । उसने शुक्रिया कहा और लंबे लंबे डग भरता हुआ बाहर निकल गया । विमल घंटे का बटन दबाया, अहमद चला गया । मीना के आने पर उसने पूछा था वो मुस्कुरा रहा था और बहुत खुश था । मीना ने कुर्सी पर एक खास अंदाज से बैठे हुए कहा, जेब भरी होने पर वो हमेशा खुश नजर आता है । विमल बोला गेल जरा इसे लिख हूँ । उसने खत लिखवाया और फिर कहा जल्दी से जाओ और इसे टाइप का डालो वो बहुत जरूरी है । और हाँ, अगर मैं शाम को क्लब ना जाओ तो अकेले ही चली जाना । मुझे कुछ काम करना है । मीना बोली मैं तो नहीं जा सक होगी और उमा विक्टर होटल के नंबर कमरे में बैठे थे । दरवाजे और खिडकियों पर रेशमी परदे लटक रहे थे । ठीक उसी जन का कपडा सोफा सेट पर भी चढा हुआ था । पाँच पर एक मोटा गलीचा बिछा हुआ था जिसपर लकडी की एक खूबसूरत में थी । मेज पर रखा चीनी का गुलदस्ता ताजे दिल्ली के फूलों से सजा हुआ था । पारसी पार्टीशन था और उसके पीछे दो पलंग बिछे हुए थे । अंतिम सिरे पर बाध्य था । हालांकि ये कमरे मुसाफिरों के ठहरने के लिए थे, पर मैनेजर जाएगा पुराना दोस्त था । इसलिए जरूरत के वक्त उसके लिए कोई न कोई खाली कमरा हमेशा खुलवा देता । मेज पर शिकंजी के गिलास तले हुए आलू और ऑमलेट की प्लेट रखी थी । विमान आज सुबह तुम्हारी बुराई कर रहा था । उमा ने कहा उसका खयाल है कि सभी सीधे साधे आदमी रुकता देने वाले होते हैं । विमल बहुत कम किसी की तारीफ करता है । जय बोला, अगर मैं तुम्हारी जगह होता तो उसको गंभीरता से लेना ही नहीं । यू से जो कुछ कहा उसमें सच्चाई है । सीधे साधे आदमी पुख्ता देने वाले इसलिए होते हैं कि वो नहीं जानते, उन्हें कब, क्या कहना चाहिए । दोस्तों के बीच वो परेशान हो जाते हैं और हसी मजाक में हिस्सा नहीं लेते । हो सकता है लेकिन मेरे ख्याल से सादगी थी, बुरी चीज नहीं जो जितना महान है वो उतना ही ज्यादा है । गांधी जी का उदाहरण हमारे सामने हैं, वो अब बात थी जैन गिलास नीचे रखते हुए कहाँ इसके अलावा महान व्यक्तित्व भी तो गुप्ता देने वाला हो सकता है । अक्सर ऐसा देखा गया है तुम बहुत साउथ दिल्ली हूँ । तुमने गिलास में रखते हुए कहा तुम्हें किसी में बुराई दिखाई ही नहीं देती । और हाँ तुम्हारी पुस्तक का क्या हुआ? क्या प्रकाश इतने छपाने शुरू कर दी? हाँ प्रूफ आनी शुरु हो गए हैं । उमा कुछ परेशान होकर बोली तो नहीं पता है पिता जी इन्हीं सर्दियों में मेरी शादी कर देना चाहते हैं । सच जय ने कहा ताज्जुब है कौन खुशनसीब है वो देखो उमर बनावटी गुस्से में आपने हॅूं तो मेरा मजाक उडा रहे हो और कोई भी नहीं । लेकिन लेकिन क्या जैनी पूछा तो मैं कह रही थी कि अब यू तुम ही हो । जय गंभीर हो गया । मैंने सादा यही सोचा था कि राजेंद्रबाबू के दिमाग में शंकर का नाम होगा और अंत में वही होगा जो वो चाहते हैं । यूपी शंकर खूबसूरत है, आमिर है और सहसा उमा का चेहरा क्रूज से लाल हो उठा तो विमल थी कि कहता था वो चिल्लाएगा तुम ना सिर्फ एक कुत्ता देने वाले आदमी हो बल्कि ना समझ भी हो । मैं इतने वर्षों से तुम्हें प्यार कर रही हूँ और तुम होगी । शंकर की सिफारिश कर रही हूँ तो अपने को एक शरीफ आदमी कहती हूँ । लेकिन उमा सुनू तो मैं कुछ नहीं सुना । चाहती हूँ मुझे लाइट मेरी । ये तुम से अंतिम भेंट है । विमल थी कि कहता था कि तुम्हारा कोई आदर्श और सिद्धांत नहीं है । मैं कह रही हूँ कि तुम से प्रेम कर दिया और तो शंकर की चर्चा बैठे । उमा बहुत थक गई थी । उसकी अपनी बीवी सोफी सी टिका दिए । उसकी सांस काफी तेज चल रही थी । जय के मन में दस से का तूफान उठ रहा था लेकिन उस से अपने आप को रोक दिया । ये सब मीठा ही कुछ और है । उसने सोचा मुझे इस मामले में शंकर को बीच में नहीं लाना चाहिए था । अब मेरे कहने का मतलब था । उसने क्षमा याचना के स्वर में कहा जो कुछ शंकर तो नहीं दे सकता है वो मैं नहीं दे सकता । जैसे की तुम ने खुद कहा था कि मैं तो बिल्कुल नाॅक । मैंने तुम्हें हमेशा प्यार किया है और करता रहूंगा । लेकिन तो मैं इस बात को समझती क्यों नहीं पिया है के लिए शादी करना जरूरी नहीं । उमा कुछ शांत हुई तो नहीं जानती की तो कितनी गलती कर रहे हो । उसने कहा कोई भी लडकी करीबी से नहीं डरती बल्कि प्यार का अभाव भी उसे बेहतरीन करता है । फिर तुम कोई काम करते क्यों? नहीं तो चाहूँ तो सब कुछ कर सकती हूँ । ये सब मेरा दोस्त है । जैन अरबी से कहा उसमें कुछ न कुछ व्यवसाय करूंगा । ये नौकरियां कुछ और मैं अपने को तुम्हारे लायक बनाने की कोशिश करूंगा । तुमसे फायदा करता हूँ । उससे प्यार से उसे थपथपाया हूँ । मैंने आज तुम्हारी शाम खराब कर दी । आमलेट तो खाओ, ये ठंडा हो रहा है । उमा मन ही मन खुश हो उठे । वो बडे चाव से ऑमलेट खाने लगी । जैनी नौकरी तलाश करने का वादा कर लिया था । नौकरी होने पर ही वो जैक को प्राप्त कर सकती थी । उसके पिता एक बेकार आदमी से उसकी शादी की कल्पना भी नहीं कर सकते थे । अब तुम क्या सोच रही हूँ? जैन ने पूछा कुछ नहीं । उसने उठते हुए कहा अब हमें चलना चाहिए । काफी देर हो गयी । जी मैंने बेच चुका आया और चले गए । को खुश । खुश कमरे से निकली तो शंकर उन्हें कॉरिडोर की पांच मिल गया । जब से विमल नहीं उसे उमा और जे की भेंट के बारे में बताया था वो बेहद पेजैंट और नाराज था । दिवालियों से कहा था उमा कहती है कि वह तुम्हारी परवाह नहीं कर दी । उसने ये भी बताया कि आज की शाम दोनों विक्टर में मिलने वाले हैं । शंकर गुस्से से तिलमिला रहा था । उसे लगा कि वह व्यक्ति जो विद्यार्थी जीवन से उसका दोस्त था अब इस तरह से दोस्ती निभा रहा था । इसलिए ना कि उसने उसकी सहायता की थी । उसने उसे भूखे मरने से बचाया था । उसे लगा वहीं जब जैसे धोखा दे रहा है उसकी और उसकी प्रेमिका के बीच आ रहा है । उसने इन सब बातों को बीयर की बोतल पीकर भूलना चाहता हूँ । लेकिन बीयर ने उल्टा असर दिखाया । अंत में जब वो अपने को ना संभाल सका तो वित्र को जाने वाली सडक पर चल दिया । वो अक्सर वहाँ आता जाता था और हर आज भी उसे जानता था । पिछले उसने आसानी से मालूम कर लिया कि जयपुर उमा पिछले एक घंटे से कमरा नंबर चवालीस में बैठे हुए हैं । वो उन्हें कमरे से बाहर निकलने देना चाहता था । वो उन्हें बताना चाहता था कि उसे सब मालूम है । वहां कमरे के पास कॉरिडोर में घूमने लगा । जैसे ही उसने उन दोनों को एक साथ देखा उसके हो डिले वे आ रहे हैं । उसमे उनकी खुशी से चमक के चेहरों को निहारा । शंकर को वहां देखकर उमर चकित रह गई । पहले तो उसने इसी मात्र एक संयोग समझा लेकिन शीघ्र ही शंकर ने उसका ख्याल बदल दिया । मैं पिछले एक घंटे से यहाँ हूँ वो गुर्राया । उसने व्यंग करते हुए जैसे कहा तो इस ढंग से तुम अपनी कविताओं का सृजन करते हो । फिर उमा की और देखते हुआ वो बोला मैं अब जहाँ गांव का सवाल है, मुझे मालूम नहीं था कि आप इतनी है । बंद कमरे में एक घंटा इस इस शंकर का चेहरा लाल होगा और शब्द उसके मुंह से नहीं निकल रहे थे । होटल में बैठे कुछ लोग अपने दरवाजे खोलकर बाहर देखने लगे ताकि वह इस हंगामे का कारण जान सके । कुछ दूसरे लोग खिडकियों से ही झांक रहे थे । जयशंकर को शांत करने की कोशिश की । उसने शंकर का हाथ पकडा और उसे खींचकर उसी कमरे की तरफ ले जाने की कोशिश करने लगा जिसमें से वो अभी अभी निकले थे तो हम वहाँ चलकर इस बारे में बात करें । कुछ ने कहा यहाँ है आदमी हमें ही हो रहा है, घूमने तो वो चलाया हूँ, मैं क्या परवाह करता हूँ और तो अब उन के घुटने की इतनी चिंता क्यों कर रहे हो । तब तो तुम ने ऐसा नहीं सोचा जब उमा को यहाँ लेकर आए थे । मैं अगर यहाँ आता तो जरूर शर्म महसूस करता हूँ मेरे साथ जो मैंने कहा वह बहुत दुखी था और लोगों के घूमते प्रश्नवाचक चेहरों ने उसे परेशान कर दिया था । शारीरिक दृष्टि से वो काफी मजबूत था इसलिए उसने शंकर को कमरे में धकेल दिया । उमा व्याकुल से उनके पीछे पीछे चली । जैनी शंकर को पकडकर सोफे पर बैठा दिया और खुद उसके बराबर में बैठ गया । अब शुरू उसे सफाई पेश की तो गलतफहमी के शिकार हो । मेरी पुस्तक स्वीकृत हुई थी । उसी की खुशी में हम यहाँ आये हैं । अब तुम का होगी कि पूरा एक घंटा तो इस बारे में उमा को भाषण देते रहे और मैं यकीन कर लूँ तुम है । मैंने शरीफ समझा तो बाहर इधर उधर का कर्ज चुका तुम्हारी पुस्तक के प्रकाशित कराने की व्यवस्था की । तुम्हें अपना मित्र और ये देशी समझा लेकिन तो, लेकिन तो उसी शाख को खटने पर लगे हुए हो किस पर बैठी हूँ । उसने धमकी भरे स्वर में कहा जय का खून खौल गया । उसने जितना उसे समझाने और शांत करने की कोशिश की वो उतना ही भडकता गया । वो उसकी प्रेमिका के सामने उसका अपमान कर रहा था तो गलत कह रहे हो मैं तुमसे कर्ज लिया है । नहीं नहीं वैसे तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूँ कि जो कुछ मैंने तुमसे उधार के रूप में लिया है उसकी एक एक पैसे का हिसाब मेरे पास मौजूद है तो मैं इसे देख सकते हो । उसे डायरी को मेज परफेक्ट हुएकहा । जहाँ तक पुस्तक के प्रकाशन में तुम्हारी सहायता का सवाल है, प्रकाशक ने खुद कविताओं के महत्व को स्वीकार किया है और इसीलिए उन्हें छाप रहा है । वो खुद एक लेखक है तो भारी साथ मुश्किल यह है कि तुम अपने को मनुष्य के भाग्य का निर्माता समझ बैठे हूँ । उमा खामोशी से उनकी बातें सुन रही थी । उसने अपने कोई कठिन परिस्थिति में फंसा हुआ पाया । उसे डर था कि अगर इस सार्वजनिक स्थान पर कुछ अनहोनी घटना घट गए तो इससे बदनामी होगी । मगर अब वो अपने को और अधिक नियंत्रित न रख सके तो उसने कुछ नाराजगी से उनकी तरफ देखते हुए कहा लगता है कि तुम दोनों मुझे बाजार में बेचने के लिए रखी गई एक ऐसी समझती हूँ इसलिए ऐसे झगड रही हूँ । मुझे अपनी इच्छा से किसी के साथ घूमने फिरने और बात कहने का अधिकार नहीं है । मैं समझती हूँ कि तो मैं इस बात को मानोगी कि मैं कैसी लडकी नहीं जिसे राहत चलते उठाया जा सके । शंकर पहले गुस्से में था । फिर उमा के शब्दों ने जल्दी आग पर घी का काम किया । उसने न सिर्फ उसकी बात को काटा था बल्कि ऐसा करने के अधिकार को भी जताया था । उमा की बात सुनकर शंकर रोज जी तिलमिला उठा और उसे तीखी दृष्टि से घूमते हुए बोला, ठीक है, अब मेरी ओर से तुम्हारी अधिकारों में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा । लेकिन मैं चाहता हूँ कि तुम भी उनका संतुलित उपयोग करूँ । वो व्यंग भरी हसी हजार मेज पर पडी लाल रंग कि बॉकेट जाएगी । पर उसकी दृष्टि गए तो वह जय की तरफ घूमकर बोला, मैं चाहता होगी कर्जे के साथ साथ तुम अपनी गतिविधियों का हिसाब भी रखो । उसी जल्दी दृष्टि से दोनों को देखा और कमरे से निकल गया । शंकर के अंतिम शब्दों के बारे में उमा सोचने लगी, उसके ये कहने का मतलब क्या था कि जय आपकी गतिविधियों का हिसाब नहीं रखता । सीवाई जय के इस मुलाकात की जानकारी किसी और को नहीं थी । वो सोच भी नहीं सकती थी कि विमल भी विश्वासघात कर सकता है । वो सादा उसे अपने भाई और एक सच्चा मित्र समझती आई थी । वो पहली इस दुर्घटना से दुखी थी । फिर विमल की बातें उसे और अधिक निराश कर दिया । उसके दवे गुस्से को राहत मिली और जय उसका निशाना बन गया । मुझे मालूम नहीं था कि तुम इस बारे में हर किसी से बकवास करते फिर होंगे । वो उस पर बरस पडी । जय असमंजस में था । वो मुश्किल से ही उसका मतलब समझ सका । अब तुम इस तरह जाहिर कर रहे हो तो मैं कुछ मालूम ही नहीं । शंकर को हमारे मिलने की इस जगह का पता कैसे चला? निश्चय ही उसी सपना नहीं आया था । जय को बेहद आश्चर्य हुआ । उसने कहा, मुझे शंकर को बताने की क्या जरूरत थी? उसे बताने से मैं कौन सा उद्देश्य पूरा हो सकता था । हो सकता है वहाँ इत्तेफाक से आया हूँ । हाँ और इस कमरे में तुम्हारी मौजूदगी का एहसास उसे देवी शक्ति द्वारा हुआ होगा । आधा घंटा वो इधर उधर चहलकदमी करता रहा ताकि तो भी तलाश कर सके । कैसा अजीब इत्तफाक है? पहले तो तुम शोर मचाते है और फिर अब के दोषियों को मूर्खतापूर्ण ढंग से छिपाते हूँ । घटनाओं की प्रतिकूल का पहले ही जय के लिए रहे थे और अब ये तो उसके अंतिम छूट थी । उमा उसका दोषी ठहरा रही थी कि उसने ही शंकर को सब कुछ बताया है । चलो ठीक है, मैंने ही शंकर से कहा था । उसने निराश स्वर में कहा तो क्या हुआ कि तुम्हारी लिए में अपने दोस्तों से बातचीत करना भी छोड दो तो जिसका मुझ पर विश्वास नहीं, जिसने बिना किसी प्रमाण के मुझे दोषी ठहराया और कारण ही मुझ पर वियन कर रही हूँ । गरीब हूँ लेकिन अभी भी मुझे आत्मसम्मान बाकी है । मैंने सोचा था कि तुम वही बचपन वाली उमा हो स्टेडियम लेकिन तो बिलकुल दूसरी उमा हो तो बदल गई हो तो रुकने महत्वकांशा से ग्रस्त हो तो मैं अपनी मौलिक स्वाभाविकता को खो दिया है । दरवाजा बंद हुआ । उमर जय कि दूर जाते हुए कदमों की आवाज सुनती रही । अंतर की शक्ति नहीं, उसे प्रेरित किया कि वो खडी हो जाए, उसे रोके और कहीं वहीं एक अकेला आदमी है जिससे वो प्रेम करती है । वो उससे कहे की ऐसी छोटी छोटी बातों के कारण एक साथ बिताई । सुखद क्षणों को नहीं भूला जाना चाहिए लेकिन वो कुर्सी से चिपक कर रह गई । जाते हुए कदमों की आवाज हर पल दूर होकर मध्यम होती जा रही थी और तब जैसे बंद फवारा एका एक फूट पडा । उसकी आंखों में आंसू बह निकले । उसने अपना चेहरा खातों में छिपा लिया और उसका समस्त शरीर एक मौन से सबसे कम उठा । विक्टर के बाल रूम में बैठे विमल ने काफी प्रसन्नता के साथ जय कि उतरे हुए चेहरे को देखा । प्रेमी नंबर दो जा रहा है । उसने मन ही मन कहा । वो काफी देर से वहां बैठा हुआ था और अब तीसरे पैर बी पी रहा था । उसने अपनी अंग अंग में एक सफूर्ति दायक गर्माहट महसूस की । तुमने नंबर जवानी बताया ना उसने बाढ के काउंटर पर बैठे व्यक्ति से पूछा । खान जनाब उसने से रहता है । विमल ने बिल पर दस्तखत की और खडा हो गया । सामान्य भाव से कॉरिडोर पार किया और नंबर कमरे के सामने पहुंच दरवाजा अंदर को धकेल दिया । उमा चौक कर खडी हो गई । मैं इस होटल में दो से मिलने आया था । डिंपल ने सफाई पेश की । अभी अभी जैसे मुलाकात हुई, उसने बताया कि तुम यहाँ पर हूँ । ताज्जुब है कि वो तुम्हें यहाँ अकेला छोड गया । आओ मैं तो में घर छोडा हूँ । अरे तुम तो हूँ, बात क्या है और वो सोफे पर उसके बराबर बैठ गया । उन्होंने की मानसिक अवस्था अत्यंत शोचनीय थी । विमल के आने से उसे कुछ सहारा मिला । उस की मौजूदगी में उमा ने हमेशा ही शांति का अनुभव किया था । वो दूसरे लोगों से बिल्कुल भिन्न था । उमा ने जब अपने मन के रहस्यों को किसी विश्वसनीय व्यक्ति से कहना चाह तभी विमल आ गया । बहुत ज्यादा बदकिस्मत । उसने रूमाल सेवइयां की पूछते हुए कहा, पहले शंकर और फिर सब कुछ भूल जाना चाहती हूँ और उसने अपना चेहरा दोनों हाथों में छिपा लिया । विमल ने दी है से उसके हाथों को चेहरे से हटाकर अपने हाथों में ले लिया । जय को हमेशा इतने कम आदमी समझता रहा हूँ । उसने कहा, लेकिन मुझे मालूम नहीं था कि वो इतना गिरा हुआ है । किसी भी लडकी से व्यहवार करने का ही ढंग कितना भद्दा है । ना केवल ये उमा ने करोड स्वर में कहा, बल्कि वो किसी बात को अपने तक सीमित ही नहीं रख सकता हूँ । अगर किसी से जरूर मिलना भी हो तो छत पर चढकर चिल्लाएगा । मैंने अगर उसे मूर्ख कहाँ तो ठीक ही किया । एक काम अभी और विमल ने प्रसन्नता से कहा अगर मैं तुम्हारी जगह हो तो जीवन भर उसकी सूरत देखो । लेकिन मुझे बताओ जयशंकर आपस में वाकई झगडे तो वो उच्च स्वर में एक दूसरे से मछली बेचने वालों की तरह जकड रहे थे । हमें डर के मारे आप रही थी कि कहीं कुछ अनहोनी घर जब किसी तरह बचाव हो जाए तो ठीक समय पर आ गए हो । मैं तो इतने बडे होटल में अपने को एकदम अकेली महसूस कर रही थी । विमल ने उसके लिए कोल्ड्रिंग मंगाई और वो कृतज्ञतापूर्वक चूस किया लेने लगी । राजेंद्रबाबू ठीक हैं । उसके बहुत नम्र भाव से घुमा से पूछा उनका फॅमिली नहीं है । उसने कहा सच बात तो ये है कि पापा को बहुत ज्यादा मेहनत करनी पडती है और ये उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है । तो साडी में बहुत खुबसूरत लग रही हो, तीमल नहीं । ऑपरेशन था कि मैंने आज काफी दिनों बाद में लिबास में देखा है । पूमा का जहर लज्जा से लाल हो गया और उसे नजरी नीची करेंगे । विभिन्न इस तरह की बात पहले कभी नहीं कही थी । उसके शब्दों की ध्वनि अस्वाभाविक थी और वो सामान पूरा नहीं थी क्योंकि जयशंकर के कठोर व्यवहार में उसकी भावनाओं को चोट पहुंचाई थी । इसलिए विमल की इस प्रशंसा से उसी सुखद आश्चर्य हुआ । मगर उसके होठों की मुस्कान तक गायब हो गई जब विभिन्न फुटकर अंदर से दरवाजे की कुछ भी चढा दी तुम्हीं क्यों बन कर रहे हो? उसे टी की आवाज में पूछा मुझे घर से आए काफी देर हो गयी है, वापस चिंतित होंगे कि मैं कहाँ चली गई । अब मैं चलना चाहिए । विमल खामोश था मगर उसकी आंखों में ऐसी जमा को बढाई जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था । उसमें अचानक परिवर्तन आ गया था । पूर्व अत्यंत क्यूँ नजर आ रहा था । उसने उसे सावधान करते हुए कहा हम अभी चलते हैं पर ये मुनासिब नहीं की हम जय के जाने के तुरंत बाद चले । हो सकता है कि हाँ चल वाली शक्कर एक मगर उमा उसके कथन से सहमत ना हुई वो करेंगे । उसने प्रश्न किया अगर वह अभी करें उसने अभी बात पर तो भी तो मैं अपने विमल को कुछ समय तो देना ही चाहिए राजेंद्रबाबू सादा मुझे अपने होने वाले दामाद के रूप में ले दे रहे ऍम मेरा भी कुछ अधिकार है । अब तो मम्मा को लगा कि दाल में कुछ काला अवश्य है । विमल का प्रतीक हावभाव । उसका प्रतीक शब्द इस बात को जाहिर कर रहा था तो दरवाजे की तरफ बडी और बोली अब काफी देर हो चुकी है । मैं जा रही हूँ । तभी विमल तेजी से आगे बडा नहीं तो नहीं जा सकती डालेंगे । उसमें हारते हुए कहा फॅमिली के लिए कुछ कुछ जगह तो जरूर होगी । उमा बहुत ज्यादा डर गई थी । कुछ बाहर जाने दो । वह लाई । मैं यहाँ और अधिक नहीं रुक सकती । मुझे पहले घर से आए तीन घंटे हो चुके हैं । मुझे जाने दो प्लीज और उसने याचना भरी दृष्टि से उसे देखा । लेकिन विमल उसकी तरफ डरावनी नजरों से देखता हुआ बढा । उसके चाल में लडखडाहट थी । लगता था कि उसने शराब भी पी रखी है । उसने उमा की कलाई पकडी और खींचते हुए सोफे की तरफ लिए चला एक घंटा रुपये से क्या फर्क पड जाएगा डार्लिंग? उसने भेद भाव भी आवाज में कहा । उसके शब्दों में नहीं डरता की झलक थी । पसीने की मूल्य उसके माथे पर उभर आई थी और वह जोर जोर से साहस ले रहा था । जैसे यूमा के हाथ आगे बढे । उसने उसी सोफे की तरफ धकेल दिया । वो ही तो क्या कर रहे हो । तुमने भरे गले से कहा और आजाद होने की जी तोड कोशिश की तो फिर कल आई की उमर उड रही हो कुछ ज्यादा तो इस खींचातानी में विमल का पांव फिसल गया । वो संतुलन का एम ना रख सका । बहने उमा को शक्ति उसे विमल को एक और धकेला और एक ही छलांग दरवाजे पर जा पहुंची । फिर उसने दरवाजे को खोला और भाग निकली । कोहरे दूर सूरत पर अंधेरे से भरा हुआ था । उसने तेज तेज कदमों से चलते हुए बरामदा बार क्या टैक्सी सामने से जाती । टैक्सी को देखकर वह चिल्लाई और टैक्सी के आते ही कूदकर अंदर जा बैठी । भंडारी बांध उसी ड्राइवर से कहा तेरे जल्दी जैसी टैक्सी आगे बढी । उसे लगा की साडियों बुरा ना कोई भारी भरकम बोझ उस पर आ गिरा है और वो उस पोछे दबी हुई सीट में धरती जा रही है

सातवाँ फेरा -05

भारत पांच गए बिस्तर पर पडा बेचैनी से करवटें बदल रहा था । नील की गोलियों का अभी तक कुछ असर नहीं हुआ था । उसने दुखी मन से सोचा । दौलत इंसानों को मिलावटी भी हैं और जुडा भी कर देती है । ये कागज के रंगीन टुकडे ये चमक दे फॅस की तरह उन्हें ही जगह लेते हैं जो उनको पैदा करते हैं । ये सिक्के अद्भुत रासायनिक प्रतिक्रिया की तरह अपनी ईगो, प्यार और नफरत, युद्ध और शांति, खुशी और काम में बदलते रहते हैं । उसे लगा कि कुछ गलत किया । उसे एकदम अकेला आने की बजाय उमा के साथ बाहर आना चाहिए था । आखिर उसके हकीकत देखी ली । सिर्फ एक मामूली सी गलत फैमी ने उन्हें ज्यादा कर दिया हूँ । लेकिन वो मैंने उस पर विश्वास क्यों किया था? क्या इसीलिए की वो धनवान नहीं है? उसका कोई सामाजिक स्थान नहीं है । अमीर आदमियों की बातों पर तो कोई विश्वास नहीं करता हूँ । क्लबों में युवा खेलते हैं, गरीबों के मुझसे रोटी का टुकडा छीन लेते हैं, रियो का शीलभंग करते हैं लेकिन फिर भी प्रशंसा की पात्र होते हैं । अगर करीब से मामूली सी भूल भी हो जाए तो उसे पकडकर जेल में डाल दिया जाता है । इंसाफ की खूबियों की कौन परवाह करता है । बहुत बिहार, जय मुस्कुराया बिहार एक रहस्य मैं वस्तु है इसलिए विचार कोने प्रेमी पागल और कवि को एक सा बताया है । उसकी उमा को चाहता हूँ और जवाब में तुमने उसे तुरंत नौकरी तलाश करने की आ गया । दे दी । सचिव प्रेमियों को तो सादा धनहीन चरित्र किया गया है । वे एक दूसरे को प्यार के अलावा और कुछ भेज नहीं दे सकते हैं । लेकिन वास्तविक जीवन में तो प्यार बडे बडे व्यापारियों, ऊंचे सरकारी अफसरों और अमीरों के लिए सीमित हो कर रहे ज्यादा है । उसने सोचा था कि उमस वर्धा भी होगी तो धन की पुजारी नहीं हो सकती, लेकिन यह उसका भ्रम था । जैन अंधेरे में अपनी उंगलियों को आपस में हुआ । फिर उसके मन में एक सवाल उठाने की क्या वो से दोबारा देख सकेगा? इस बारे में उसे शक था । जो कुछ हो चुका है उसके बाद तो यही एक रास्ता बचा है कि उसे तब तक उमा से नहीं मिलना चाहिए जब तक कि वह दूसरे लोगों की तरह उसे जीवन की सुरक्षा और बैंक बैलेंस नहीं दे सकता हूँ । जैसे ही उसने अपने मन में निश्चय किया, उसे हर वस्तु निर्जीव और सुनी सुनी सी प्रतीत होने लगी उससे मत लोग । उससे मतलब लगता है कि ये शब्द उसके कानों में आकर टक रह रहे हैं । उसे कभी नहीं मिलता होगी । शायद कभी नहीं लगा की दीवार पर लगी घडी की टिक टिक घर पर तेज होती जा रही है । रात गहरी और खामोश थी । उसने उठकर घडी के पेंडुलम को रोक दिया । कमरा कालकोठरी की तरह हो गया वो सो नहीं सका । घूमती नदी नगर में सात की तरह बाल खाती हुई बहती है । पूरी के नीचे से गुजरती हुई घाटों से टकराती पुराने मकानों को छूती ये मटमेले पानी के साथ वर्ष भर खामोशी से बहती रहती है । लेकिन जब आकाश में काले बादल छा जाते हैं और बारिश शुरू हो जाती है तो ही बहन कर राक्षसी का रूप धारण कर लेती है । इसकी तूफानी लहरें किनारों से टकराने लगती है और जो कुछ भी इसके मार्ग में आता है बाहर अगर ले जाती है उन्नीस सौ की घटना है कि इसलिए नगर के अधिकतर भाग को अपनी लबेद में ले लिया था । इस नगर के पुराने निवासी अभी तक उन दिनों की घबराहट और कष्टों को नहीं भुला पाए हैं । इस वर्ष बारिश ज्यादा न होने से सूखा पडने का भय था लेकिन सहसा बीच अगस्त में जोरो ही बारिश हो गई । सीतापुरा जिले में जहां से होकर गोमती बहती है, वर्ष का जोर था । लखनऊ में नदी का पानी चढता रहा और उसने स्टेडियम को अपनी लपेट में ले लिया । लोगों ने पानी को रोकना चाहा लेकिन जल्द ही ये महसूस किया जाने लगा कि पुलिस को खतरा है । नदी के पास स्थित यूनिवर्सिटी और सरकारी दफ्तर बंद हो गए । पानी के उतरने का कोई लक्षण दिखाई नहीं देता था । उधर तमाशा देखने वालों का जमघट था । इस तरह की भयंकर बाढ लखनऊ वालों के लिए एक नई बात थी । जब ये समाचार नगर में फैला कि पानी स्टेडियम को पार करके हजरतगंज की और बढ रहा है तो लोगों की भीड इस बाढ को देखने के लिए उमड पडी । नफीस लिबास पहने लोग गली बाजारों में ऐसे घूम रहे थे जैसे पिकनिक मना रहे हूँ । उनके तमाशाई बनकर इधर उधर घूमने से बाढ की रोकथाम संबंधी प्रयासों में अडचन पड रही थी और यातायात में रुकावट पैदा हो गयी थी । खोमचे वाले सौदा बेचने के लिए शोर मचा रहे थे । लोग खुश खुश कारों में चलाते हुए निकल जाते थे । कुछ लोग गली बाजारों में बाढ पीडितों के फोटो लेते भेज रहे थे । इसी बीच एक बहन करता भाई आ गई । नगर की रक्षा करने वाले बटलर बांध में पहले तो सुराग हुआ फिर वो टूटकर बह गया । पानी का एक रेल आया और सामने की हर चीज को बहुत ले गया । हजारों लोग बेघर हो गए और हजारों पानी में गिर गए । पानी में डूबे मकानों की छतों पर बैठे हुए वह परेशानी में रातें गुजार रहे थे । नगर अलग अलग भागों में बढ गया था । जहाँ जहाँ भी में लगा दिए गए थे जन सेवा दल भी कार्य करने लगे थे । बाढग्रस्त क्षेत्रों में खाद सामग्री पहुंचाने और लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की सहायता ली जा रही थी । करण को डालीगंज में तैनात किया गया था । वो इलाका बाढग्रस्त था । सिटी स्टेशन से गाडी में ही वहां पहुंचा जा सकता था । उसने गैरेज पुरानी फोड गाडी निकाली । उसी साफ करवाया रेडियेटर पानी से भरवाया और नौकरों से धक्का लगाने को कहा । फोर्ड में धर की आवाज की और चल पडी । उसने कार स्टेशन पर छोड दी । स्टेशन से डालीगंज की दूरी मुश्किल से तीन मेल होगी लेकिन इस मसले को तय करने में है गाडी में पांच घंटे लगाए । कारण ये था कि रेल के तंग पुल दर्शकों से भरे पडे थे । वे रेल के सहारे रास्ते पर चीटियों की तरफ फैले हुए थे । रास्ता साफ करने में घंटों लग गए । इसके अलावा जिन छात्रों के स्कूल और कॉलेज बाढ के कारण बंद हो गए थे वो गाडी में बैठकर बाढ देखने के लिए पहुंच जाते थे । जैसे ही गाडी चलती वह जंजीर खींचकर उसे रोक देते हैं । सारे रास्ते में पानी काली जाल की तरफ फैला हुआ था । मकान, गालियाँ और बिजली के खंबे इस जाल में फंस कर रह गए थे । दूरी से लो ही का पूर्व टूटा नजर आ रहा था । उसका कुछ भाग रह गया था । एक नई कार उससे टकराई थी और अब उसके किनारे फंसी पडी थी पानी । कार परसिर होकर बहने लगा था । पुल के बीच के हिस्से से नदी का पानी मुश्किल से दो फुट नीचे था और बहुत तेजी से बढ रहा था । करें जब डालीगंज पहुंचा वहाँ की स्थिति बहुत खराब थी । मार्ग के दोनों और जल्दी में बनाए गए शरण स्थलों में बेघर लोग पढे थे । अधिकांश मकान बिना छट चुके थे और थी और बच्चे ऐसा हैं से पढे थे । वापसी पर करण और उसके साथ ही एक ऐसे इंजन पर आए जो लूज शटिंग कर रहा था । स्थिति की बहन करता ने करन को बडी चोट पहुंचाएगी । वो निराश हो उठा । घर पहुंचने पर वो काफी देर तक बैठा शराब पीता रहा । कुछ समय बाद उसने अपने को ठीक अनुभव किया । उसने बिना सोडा मिलाएं काफी शराब पी और होठों पर जवान फेरता रहा । फिर वह खुद अपने से ही कहने लगा उन को ठीक रखने के लिए । पहुँच का जवाब ओवर ढेड में चल रही थी जैसे कोई सपना देख रही हूँ । उसके बाल बिखर गए थे । सोना सकने के कारण उसकी आंखें लाल हो गई थी । वो दुखी और बेचे थी । दिमक जिसे उन्होंने शरीफ समझा था । धोखेबाज और धूर्त निकला । वो सोचने लगी जो लोग अधिक मुस्कुराते हैं ऐसे ही होते हैं । वो अपने से ही पूछने लगी छह कहाँ होगा, क्या कर रहा हूँ । उसे लगा वो उसके सामने खडी हैं और अपनी गलती के लिए माफी मांग रही है । लेकिन अब तो काफी देर हो चुकी थी । उसी जय के अंतिम शब्द दिया जाए । उसने कहा था मैं चाहता हूँ सदासुखी हूँ । लेकिन अब तो सुख का सवाल ही पैदा नहीं होता था । हालांकि हल्का हल्का अंधेरा फैले लिखा था लेकिन प्रकाश के देखा गायब ही हुई थी । लोग वापस जाने लगे थे । पानी उतर रहा था और अब कुछ खास देखने लायक नहीं रह गया था । मंकी ब्रिज की तरफ घूम गई । वहाँ इस समय आस पास कोई नहीं था । पानी अभी तक बहन कर शोर करता हुआ बह रहा था और बल्बों की रोशनी बहते पानी पर चमक रही थी । सीलन तथा घास बात की गंद उसके नथुनों में घुस गए । तुमने जय के साथ बिताए । बचपन के सुख दुश्मनों की कल्पना की । जब उसके पिता अपने मकान बनवा रहे थे, रीत है हाथ में डलवा दी गई थी । उसे याद आया वो दोनों उस पर बैठ जाते थे । उनकी टांगे रेट में धंसकर शीतलता का अनुभव कर दी । कॉरपोरेट के घरोंदे बनाते रहते ये एक तरफ से बनाना शुरू करता और वह दूसरी ओर से और जब उन की सीमाएं आपस में मिल जाती है तो एक दूसरे का हाथ पकडकर विजय भावना से झूम उठते थे । उमा ने बचपन के उन स्वर एकदम दिनों की कल्पना की और एक लंबी सास भरी । अब उसके लिए कौन चिंतित होगा जबकि उसने खुद ही खतरनाक कदम उठा लिया है । शायद उसके माँ बाप चिंतित हूँ लेकिन वो थोडे ही समय के लिए चिंतित होंगे । संचार परिवर्तनशील है । केवल दुखी अटल है । अब क्या होगा इसका विचार करके वो भी ठीक ठीक । क्या इसके बाद उसे हमेशा हमेशा के लिए शांति मिल जाएगी? क्या मूर्खताओं से भरा जीवन दोहराया जाएगा? उससे बहुत से ही सवाल किया । आखिर वो डूब कर मरना ही क्यों चाहती है? उसके सामने एक दृश्य होंगा । एक बार उसे करने की कोशिश की थी और मूवी भरा पानी निकल गई थी । उसकी सांसे टूट रही थी । किसी ने उसकी सांसों से बनते बुलबुलों की सतह पर देखा था । तब उसने उसे बाजू से पकडकर खींचा था और बचा लिया था । पानी उसकी नाक से बहरा था और वो तालाब के किनारे पर पडी थी । तब उस दिन ना करने की कसम खाई थी । एक सिरहन उसके शरीर में फैल गई । उसने सोचा डूबकर मरना बहुत बुरा है और उसने एक लंबी साथ ही ये सोचकर उसे खुशी हुई कि वह अभी जीवित है । पुल के नीचे उतरते हुए वो पांव ऐसे उठा रही थी जैसे सपना देख रही हूँ । पानी का बहाव बहन कर हो गया था और उसके पावों को छोडने लगा था । उसने नीचे देखा और अपने एरिया को मजबूत किया । सहसा उसके सारे शरीर में ए ठंड ही फैल गई । उसके सामने एक नंगी लडकी का मृत शरीर ते रहा था । नारियल के देशों की भांति उसके बाद से ऐसी चिपकी थी । उसकी छातियों पर मृत्यु की पीडा छाई हुई थी । उमा वापस बडी वो लडकी की भर्ती नहीं होना चाहती हूँ । वो उसकी तरह नग्न अवस्था में न बह सकेगी । वो जल्दी जल्दी कदम उठाती हुई ऊपर चढने लगी । उसे सुख की सांस दीपक जान की तरह चमक रहे थे । उसके हो धीरे से हिले मानो कह रहे हो जीवित रहना ज्यादा अच्छा है । दूसरी तरफ एक जोडा एक दूसरे की हथेलिया पकडे खडा था । दोनों एक दूसरे में पूरी तरह से खोले हुए थे । उमा ने उन पर एक उच्च टी ने कहाँ डाली और जल्दी से सडक पार कर गई । हाँ, जीवित रहना ज्यादा अच्छा है । उसने मन ही मन सोचा बहते पानी पर उस लगी लडकी की तरह रहने के बजाय जीना बेहतर है । दिवाली का उत्सव उमा को विशेष लिया था । डीपों का ये उत्सव उसे रोमांचित कर देता था । परंपरा के अनुसार ये पर्व राक्षस राजा रावण पर जाम की विजय तथा अयोध्या को उनकी वापसी की खुशी में मनाया जाता है । निश्चित ही विजेता के स्वागत का ये ढंग बहुत रोका है । अंधेरे में झिलमिलाती दीपों की पंक्तियां अनेक जुगनुओं की तरह रखती है । बिजली का प्रकाश उनका मुकाबला नहीं कर सकता हूँ । छोटे छोटे डीपो से सौन्दर्य आपसी मिली मिला तथा सुख की भावना का बोर्ड होता है । लगता है माना दिवसी का गहरे हो यात्री घर तुम्हारा स्वागत करता है । डीप आनंद में परिवार के प्रतीक है, देते हैं तो आनंद प्रकाश कीर्ति तथ्य जीवन की चिर नवीनता के प्रतीक है । वेदान्त के इस कथन की याद दिलाते हैं सौ साल जीवित रहना चाहते हो तो मुस्कुराते रहो । ये उच्चत इसी बात की सूचना भी देता है कि शरद ऋतु आ रही है । दिन सुहावनी हो गए हैं । पौधों ने हरे पत्तों के साथ खेलना शुरू कर दिया है । बनक्शा के मनहर कोमल फूल खेल पडे हैं । उमा ने आंगन में थोडी सी जगह साहब की फिर उसे गाय के गोबर से पोत दिया और उस पर मिट्टी से लक्ष्मी और गणेश की आकृतियां बना दी । राजेन्द्र बाबू और उनकी पत्नी वीना एक साथ पूजा करने के लिए बैठ गए । उमर वीणा ने उनके माथे पर तिलक लगाया प्राण ऍम तुम कहाँ हूँ कम से कम आज के दिन तो किताब छोडकर पूजा में शामिल हो जाओ । प्राण उमा का भाई था । खेती का काम करता था और दिवाली के अवसर पर घर आया हुआ था । प्राण सीधा साधा युवक था । उसके गाल पर एक काला निशान था । बचपन में जल जाने की वजह से ये निशान पड गया था । जासूसी उपन्यासों में उसकी गहरी दिलचस्पी थी । जब भी उसे समय मिलता वो जासूसी उपन्यास लेकर बैठ जाता । पिता की आवाज सुनकर उसने उपन्यास के उन पन्ने का कोना मोडा और आंगन की तरफ चल दिया । दीए जलाकर गोल्ड हाल में सजाए जा चुके थे । उसी में से उठाकर उन्हें मुंडेरों पर कतार में लगाया जा रहा था । जी जी, मुझे भी फुलझडी दो अनिल से लाया । हमारे डब्बे में से फुलझडी निकालकर चलाई । जब उसकी चिंगारियां सितारों की तरह धरती पर गिरने लगी तो अनिल खुशी से नाच उठा । उमा का चचेरा भाई अपने चार बच्चों के साथ आया था । बच्चों की उछल कूद तथा खेल तमाशे से सारा वातावरण गूंज उठा था । डी । ए जलाकर यथास्थान सजा दिए गए थे । हर कमरे में एक एक दिया रख दिया गया । बच्चे पटाखों के लिए शोर मचा रहे थे कि एक अनार जलाऊं अनिल बोला और हवाई और चरखी जब एक साथ चलाए उमा पटाखों को लेकर बाहर आ गई । बच्चों ने उन्हें ले लिया और शोर मचा देवी चलाने लगे । ऍम उन सब ने शोर क्या? अनाज चला तो उस की रंग बिरंगी चिंगारियां ऊंची उतने लगी । इसके बाद रोशनी का दायरा बनाती हुई चरकी चलने लगी । हवाई अपने पीछे आपकी एक लकीर छोडती हुई आकाश की ओर भाग रही थी । उनमें लगा सूट जलता और प्रकाश फैल जाता । तभी बच्चे खुश बुजुर्ग करने लगे कि अब ऍम चलेगा । इसी वक्त कानों के बढते फाडने वाला धमाका हुआ । ऍम और बच्चे खुशी से नाचने लगे । फॅमिली देखने चलेगा । तुमने पूछा । सबने कहा हम चलेंगे, हम चलेंगे । अच्छा तो देखिए पहले कौन तैयार होता है तो मैंने कहा ऍम । उसने कहा कपडे पहनो, हम रोशनी देखने जा रहे हैं । शहर में रौशनी और रंगों का तूफान आया हुआ था । मकानों पर जलते पंक्तिबद्ध अनगिनत डीपो ने उन्हें परियों के महल बना दिया था । चारों और से पटाखों की फटने की आवाज आ रही थी । दुकानों पर जलते रंग बिरंगे बाल अच्छे लग रहे थे । सडकों पर बेटी दहशत भीड थी । बहुत सारे जो खडी थी वे लंबी जलूस का एक हिस्सा नजर आती थी । वो थोडी दूर चलती और फिर रुक जाती । दर्शकों की भीड रास्ता रोकी हुई थी । बच्चे खुशी से घूमते हुए रोशनी के दायरों तथा प्रकाश स्तंभों को निहार रहे थे तो वहाँ के लिए साइकल समारोह तथा पैदल चलने वालों की भीड में से बाहर निकाल कितना मुश्किल हो गया था । वो शहीद स्मारक के पास कार खडी करके उत्तर पडी और पार्क में गई ताकि नदी के पानी में पढते रोशनियों के प्रतिबिंब देख सके । बच्चे खुशी खुशी संगमर्मर के बने हाथियों पर चढ गए । बच्चों को एक साथ रखने की उमा की कोशिश नाकाम हो गई । एक का एक उमा उठ खडी हुई । तभी कुछ दूरी पर उसने विमल फरमीना को देखा । वे एक दूसरे की बाहों में बाहें डाल घूम रहे थे । मीना मुस्कुराती हुई विमल को देख रही थी । उमा उसके हाव भाव को देखकर ताज्जुब में पड गई । उसने हल्के पीले रंग का जूस ब्लाॅक पहना हुआ था । उसके होठों पर गहरी लिप्स्टिक लगी हुई थी । उसके बाल कटे हुए थे और कुछ आगे को मुझे हुए थे । नजदीक आती जा रहे थे । उमा ने बच्चे को इकट्ठा किया और जल्दी से पार्क के बाहर निकल गई । उसे दुख हुआ कि वो विमल को आज तक समझ क्यों नहीं सकी । उसने विमल को शरीफ समझाता हूँ लेकिन वो चरित्र ही दुष्ट, मक्कार और विश्वासघाती निकला । वो किस मुश्किल से बच पाई थी । ये सब खयाल आते ही उसके शरीर में एक कपकपी सी दौड गई । जब घर लौटी दिए बुझने लगे थे । उसने झिलमिलाती रोशनी में इधर उधर देखा और उसे खयाल आया कि पिछले दिवाली में न चाहते हुए शोलों के सामने वो जय के साथ खडी थी । उन दोनों ने अपने हाथ एक जलते हुए दिए पटक दिए थे और फिर वो एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा पडी थी । हम प्रकाश बंद पड रहा था और अंधेरा फिर से पहनने लगा था । उसके भीतर भी अंधकार छा गया था । वो दुखी और अकेली थी । जैसी एक जलता हुआ दीपक बुझा वो बुदबुदाई तो है ही है । उस तक के परसिर रखा और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे । वो जलते हुए दीपों को के बारे में भी ना सोच सकी । जय नीम के पेड करले खामोश बैठा था । उसके चारों और विस्तृत भूरे रंग के समापन छोटे हुए । खेत पहले थे, खरीफ की फसल के लिए बीच पडने वाले थे । दूर कच्चे मकानों का समूह नजर आ रहा था । उन पर रूस की छत पे पडी थी । जय का पुराना मकान पक्की ईटों का बना हुआ था । ऐसा मालूम पडता था कि मकान मालिक के पास पैसे की कमी बढ गई और उसने उसे अधूरा ही छोड दिया । मकान में एक कमरा बैठक और बरामदा था । बैठक में एक लकडी का तक पढा था जिस पर दरी बिछाकर सफेद चादर फैला दी गई थी । पांसी में किसी जानवर की खाल का एक गोल तकिया रखा था । दोनों और दीवारों पर लकडी के फ्रेम में जडी तस्वीरें लटक रही थी । एक तस्वीर में हनुमान को हथेली पर पहाड उठाये हुए ऊर्जा दिखाया गया था । दूसरी तस्वीर कृष्णा की थी । कृष्ण बांसूरी बचा रहे थे । एक गोपी ने पानी का मटका उठा रखा था और थोडी फैसले पर एक गाय घास पर बैठे घूम रही थी । दीवार में बनी एक अलमारी में पुस्तक की बडी थी । सारे गांव में थोडे से ही पक्के मकान थे । गलियाँ बच्ची थी चार कोई थी जिनमें से केवल दो में पक्की ईंटें लगी थी । गांव के निवासी इन्ही कुओं से पानी खींचते थे । स्त्रियां ऊपर से नीचे तक कपडे पहने हुए इन कुओं पर घाटी पानी बढते ही कपडे उनके शरीर से चिपक जाते गन्दा पानी छोटी सी नाली में से बेहतर है । एक गड्ढे में इकट्ठा होता रहता हूँ और उस गड्ढे में मक्खियाँ और मच्छर भिनभिनाते रहते । मकान मिट्टी के बनी थी जो अंदर से लीप पोतकर साफ कर दिए गए थे । मकानों में प्रायर एक या दो कमरे ही थे । उनके सामने खुला आंगन था । मिट्टी के बडे बडी मटकों में अनाज भरकर कोनों में रख दिया जाता हूँ । कमरे में अंधेरा रहता और वो ठंडी होते हैं । दरवाजे मजबूत लकडी की बनी थी और उनमें लोहे के कूंडे जड दिए गए थे । घर के पीछे कूडा कर्कट और महिला निकलने का रास्ता बना दिया गया था । महिला एक खुले गड्डी में जाकर एक घंटा होता रहता हूँ । केवल एक डिस्पेंसरी थी जहाँ से जय के गांव वाले दवा लेते हैं लेकिन वो भी गांव से छह मील दूर थी । एकमात्र सवारी थी बैलगाडी या एक का अंधेरा हो जाने के बाद वहाँ जाना ना सिर्फ कठिन नहीं था बल्कि खतरनाक भी कुछ दिन पहले की बात है । एक डॉक्टर रोगी को देखने जा रहा था कि उसे रास्ते में लूट लिया था । वह जेब के सब रुपए और घडी से हाँ दो बैठा हूँ । इसलिए लोग तभी डिस्पेंसरी जाते जब उनकी स्थिति शोचनीय हो जाती है । डिस्पेंसरी में एक दर्जन बोतले मिक्सचर की थी । वहाँ रोगियों के लेने के लिए एक पुरानी मेज पडी थी । दवा की कुछ शीर्ष थी और उनमें भरी दवा की दिए जाने की अवधि निकल चुकी थी । अधिकांश ग्राम अपनी चिकित्सा खुद ही अपने देसी तरीके से करते । पत्ते नींबू था और यहाँ तक कि गाय का गोबर भी लोगों में इस्तेमाल किया जाता । जडी बूटियों को भी काम में लाया जाता । बारिश के दिनों में गलियाँ पानी से भर जाती और चलना दुभर हो जाता है । कई बार तो केवल पानी में ही चलना पडता जैनी हुई मन से एक दिन का थोडा और उमा के बारे में सोचने लगा । ऐसा लग रहा था मानो को उमर से कल ही जुडा हुआ हो । जो कुछ हुआ वो इतनी जल्दी में हुआ था कि उसे ये सब एक सपना साला का उसने दिवाली गांव में ही चुप चाप अकेले मनाई थी । ना कोई धूमधाम और न कोई खुशी उसे कुछ एक दिये जलाकर दरवाजे के बाहर रख दिये थे । एक दीया जलाकर वो हनुमान की तस्वीर के नीचे इस आशा से रखा है कि उनके आशीर्वाद से उसके विचार उमा तक पहुंच जाएंगे । सहसा उसे ख्याल आया कि हनुमान दो बाल ब्रह्मचारी समझे जाते हैं । उन्हें प्यार की क्या परवाह, वो किसी ऐसी मनोकामना की पूर्ति क्यों करेंगे? उसके एक अन्य दीया जलाकर कृष्ण और गोबी की तस्वीर के नीचे रख दिया । उसने सोचा गोकुल और वृन्दावन की ये देखता ग्वालिनों को चकमा देने वाली ये कृष्ण भगवान हो सकता है । कुछ कृपा कर दी क्या किया की तेज आवाज सुनकर वह दिवास्वप्न इसी जान उठा । एक काले रंग का आदमी बहनों को हाथ रहा था । बैलों की चाल धीमी हो जाती है तो वो उनके चाबूक मारता और कभी कभी उनकी पूछ भी मरोड देता । मिट्टी के ढेरों पर धीरे धीरे चलता हुआ पाटला धरती को समर्थन कर रहा था । खेत के कोने पर एक स्त्री बैठी बच्चे को दूध पिला रही थी । उसे धोती से अपनी छाती को ढांप रखा था । दूसरा बच्चा खेत में भाग रहा था और वो मिट्टी के ढेले को उठाकर इधर उधर कुछ चल रहा था । समय के साथ गांव नहीं बदले थे । जहाँ जहाँ कच्चे मकानों के बीच एक आद पक्का मकान बन गया था और समय समय पर एक गाडी देश भक्ति के रिकॉर्ड बजाती घूम जाती थी । लेकिन जैसे परिवर्तन की जरूरत थी वो नहीं आया था । सदियों पुराने हल्के पीछे किसान आज भी चल रहा था । आज भी वो पहले की तरह बीच भी खेलता था । उसकी दूती मिली थी । उस की बंडी फटी हुई थी । अभी तक गालियाँ गंदी थी । गंदगी के ढेर इधर उधर पडे रहते हैं । स्त्रियों के कपडों पर पे बिन लगे होते और बच्चे नंगे पांव घूमते रहते । शाम होते ही जय जल्दी आग के सामने बैठ जाता और गांव वालों की बातें सुनता पंजो भाई, तीन शाम जल्दी आपके सामने बैठे । गांव के मुख्य ने कहा तुम इस बार वोट किसी दोगे । पाँच चुकी आंखों में अनिश्चित अभाव था तो बोला मैंने अभी इस बारे में नहीं सोचा । फिर इससे फर्क क्या पडता है? पिछली बार दो को दिया था और उससे पहले बैलों की जोडी को मगर मुझे के अलावा हुआ । जय ने बताना चाहा कि केवल वोट देकर व्यक्तिगत सुविधाएं हासिल नहीं कर सकते हैं के निशान तो अलग अलग पार्टियों के चिन्हे भैया । पंचू ने कहा मैं ज्यादा नहीं जानता मगर इस गांव में रहते हुए लगभग सौ बरस होने को आए हैं और अब तक मैंने गांवों से लेने की आवाज ही सुनी है । देता हमें कोई नहीं । पहले साहब लोग लडाई के लिए चलना मानते थे । अब बचत योजना और दस साल योजना का नाम सुनाई देता है लेकिन क्या तुम दोनों में फर्क नहीं देखते । जैनिक गम्भीरता से पूछा । अंग्रेज एक ऐसे युद्ध के लिए धन मांगते थे, जिसमें हमारी दिलचस्पी नहीं की । लेकिन ये योजनाएं तो हमारी अपनी भलाई के लिए हैं । पाँच उसे झटक कर बोला इनसे हमारी क्या भलाई हुई है? पुराने जमाने में डाकू एक सिपाही तक से डरते थे । मगर अब अब तो सरकारी लोगों को भी लूटा तथा कत्ल किया जाता है । मुख्य ने बीडी निकली मैं तो जिसकी लाठी उसकी बहस में विश्वास करता हूँ । उसने कहा इसलिए मैं हमेशा बैल वाले डब्बे में वो डालता हूँ । मैं तो बस इतना जानता हूँ कि ये गांधी बाबा की पार्टी है । मगर अब जमाना बदल चुका है । जैन अपनी बात पर जोर देते हुए कहा, अंग्रेजीराज में तो हर आदमी डरा डरा सा रहता था । किसी की हिम्मत नहीं थी कि एक शब्द भी जबान से निकाल सके । अकेले में लोग शिकायत जरूर करते थे, लेकिन आज हम कहने सुनने के लिए पूरी तरह से आजाद है । इससे काफी फायदा हुआ है । पंचू ने कहा इस कांस्य सुनना और उसका निकाल देना सबसे बुरी बात है । इससे अच्छा तो ये है कि आदमी सुने ही ना पंचभाई । ठीक कहते हैं एक मोटे ताजे नौ । जवान ने कहा एक जमाना था कि यहाँ उठाने में मजदूर मिल जाता था । मगर अब तो दो रुपये भी कम है । हाँ और क्या पाँच ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया । अभी उसी दिन की बात है । पांडे जी ने मुझे बताया कि वह ढाई रुपये तक देने को तैयार थे, लेकिन कोई नहीं आया । हाँ, पाँच चुकी समर्थन से खुश होकर नौ जवान बोला मेरे समझ में नहीं आता कि ये लोग क्यों हम पर इन ट्रैक्टरों को तोड रहे हैं । इनके लिए तो सबसे अच्छी जगह अजायबघर है । अगले मंदी का रास्ता तो यही है कि भूमि को उसी तरह जोडते जिस तरह हमारे बुजुर्ग जून देते थे । तुमने मेरे मूंग की बात कह दी । पाँच चुनने नौजवान की ओर देखते हुए कहा, तंग लिबास पहनकर हमारे घरों में आने वाली औरतों को तो देखो । उन्हें बात करने के सिवा कोई काम ही नहीं । ना वो गेहूँ पटक सकती है, न चक्की चलाकर आता पी सकती है और न ही इसलिए टूटने की उन्हें समझ । इस पर भी वो हमारी औरतों के सुधार की बातें करती हैं । इनसे तो भगवान ही बचाए । अगर कही उन्होंने हमारी औरतों को भी अपना जैसा बना दिया तो हमें बैरागी बनकर घास फूस पर जीवित रहना पडेगा । कन्हाई भाई ये हमारी और तो को बर्बाद कर रही हैं । ये कहकर की भाई मुझे तो कहते हुए भी शर्म आती है । ये कहती की हालत कम पैदा करो । क्या ये मुट्टी पर छोकरी ईश्वर के नियमों को बदल सकती हैं क्या? खूब कहा पंचभाई । मुख्य ने हुक्का अपनी तरफ खींचते हुए कहा कुछ भी हो हमें अपनी औरतों को बचाना चाहिए । ये सब शहरी लोगों के लिए ही अच्छा है । हम गांव वालों के लिए नहीं, दो अलग अलग संसार थे । शहर के स्तर को गांव में लागू करना, मूर्खता दी । गांव वाले परिवर्तन के विरोधी थे । उन्होंने तो हजारों आदि के लिए बढाई का सहारा लिया था और वही उनके लिए सबकुछ था । गांव के भलाई के लिए अमल में लाई जाने वाली हर योजना के प्रति उनके मन में शंका थी । जय मानने को तैयार नहीं था कि गांवों में कोई सुधार नहीं हुआ । बहुत से गांवों में बिजली पहुंच गई थी और वहाँ स्कूल तथा कॉलेज खुल गए थे । अनेक ग्रामवासी ऊंची ऊंची सरकारी नौकरियाँ कर रहे थे या उनका अपना व्यवसाय था । इस प्रकार गांव की दशा में परिवर्तन तो आया था, लेकिन उसे देखने के लिए सचेत दृष्टि की जरूरत थी । पाँच चुनने मुखिया को कोहनी मारी । इसे देखा तो उस बताया ये जिससे शादी करना चाहता है उसे ताक रहा है । अरे नहीं । मुखिया ने कहा ये तो बाहर से कोई छोकरी लाएगा तो बाहर क्या ख्याल है? कढाई मगर कन्हाई ने सुना नहीं वो सपनों में खोया था और नजर से ओझल होती लडकियों को देख रहा था । शहर में उसका इंतजार करने वाला कोई नहीं था । उस की दृष्टि तो तो उस लडकी पर जमीन थी जिसमें गले में मोतियों की माला पहन रखी थी और जो उसे देख कर उसके बगल से गुजरते समय लाज से मुस्कुराई थी ।

सातवाँ फेरा -06

भारत छह राजेंद्रबाबू बूढे हो चले थे । सिर में सफेद बाल बढ गए थे । अक्सर वो घूमते रहते हैं और नंदा अनिल एक एक करके उनके सफेद बालों को चुनता रहता । उसे एक सफेद बाल निकालने पर एक पैसा मिलता है । वो अपना काम तेजी से करता । जब कभी सफेद बाल के साथ काला बाल भी घर जाता हूँ तो राजेंद्रबाबू बल्कि झपकाकर बडबडाते मैं कहता हूँ सिर्फ सफेद और एक दिन सिंगापुर में इसकी बडी शीशे में जब वो अपना चेहरा देख रहे थे तो उन्हें ये जानकर बहुत ही आश्चर्य हुआ कि उनके सिर के बाल तेजी से झडते जा रहे हैं । सफेद बाल और अधिक निकल आए हैं । उन्होंने सफेद बालों को निकलवाना बंद कर दिया । अनिल को इससे बडी निराशा हुई । राजेंद्रबाबू अब अपने को बूढा महसूस करने लगे थे । राजेन्द्र बाबू ने प्राण के बारे में सोचा । सोचते सोचते उन्होंने प्राण की जीविका का खयाल आया नौकरी को वो गुलामी समझते थे । नौकरी तो दास्तां है वो अक्सर कहते नौकरी सरकारी हो या किसी बडी फोन की अथवा कोई छोटी मोटी, किसी में अंतर ही दासता की पीडा सभी जगह एक सी होती है । सहानुभूति के अभाव में नौकरी करना बहुत मुश्किल हो जाता है । ईमानदारी से काम करने वाले दुख उठाते हैं और चापलूस उन्नति कर जाते हैं । इसीलिए उन्होंने सबसे बडे लडके प्राण के लिए कुछ और सोचा था । प्राण जवान था और शहरी जीवन को पसंद करता था । वो ना बहुत देखी बुद्धि वाला था और ना ही काम । अकल उसने यूनिवर्सिटी की परीक्षा सेकंड डिवीजन से पास की थी । राजेन्द्र बाबू ने उसे कुछ जमीन खरीदने की ताकि वो खेती बाडी कर सके । अब एक ट्रैक्टर की आवश्यकता थी जिसके लिए राजेंद्रबाबू ने हजार रुपये कर से लिए थे भूमि । उन्होंने सस्ते दामों पर एक मित्र से खरीद ली थी । प्राण खेती का काम ठीक कर रहा था । गांव में रहने के लिए उसके पास केवल एक झोपडी थी । बारिश के दिनों में जब पानी बच्चे चुरा तो उसे अपना सामान उठाकर तत्त्पर रखना पडता हूँ । इसके अलावा वो वहाँ अपने को खेला भी महसूस करता था । गांव भर में कोई ऐसा नहीं था जिससे वो बातचीत कर सके है । लोग अशिक्षित थे और उनसे दोस्ती हो सकता ना मुश्किल थी । प्राण अपने को एक कैदी सा अनुभव करता हूँ । उसका बाहरी दुनिया से संपर्क सिर्फ बैटरी के रेडियो द्वारा ही था । इसके जरिए वो खबरें तथा फिल्मी गाने सुनता प्राइम बेहद ऊब गया था । रात के समय गहरे अंधेरे में वो लालटेन की रोशनी में खाना खाता हूँ । बडी मजबूरी में वो ऐसा जीवन बिता रहा था । रेलवे स्टेशन से सौ मील दूर उदास, निराश और अकेला वह जिंदगी के दिन गुजार रहा था । प्राण का पत्र आया तो राजेंद्रबाबू से पढकर परेशान हुए । उनका विचार था कि खेती बाडी का धंदा एक आदर्श कार्य है । उनकी कुछ मित्रों ने भी इसकी सलाह दी थी । एक प्रचलित कहावत के अनुसार खेती बारी श्रेष्ठ ठंडा है । व्यवसाय मध्य कोटी का और नौकरी अत्यंत नियमन को टीका कार्य है । इनकी तुलना भीक मांगने से की जा सकती है । इसलिए जब प्राण का पत्र आया तो वह बडे ही दुखी हुए । आपने परेशानी पर काबू पाने के लिए उन्होंने अपने कुछ मित्र को रात के भोजन पर आमंत्रित किया । आने वालों में जज साहब करेंगे । एक सिविल सर्जन और कुछ उनके वकील मित्र थी । भोजन मेज पर लगा दिया था । सभी कुर्सियों पर बैठ गए । जब जहाँ में कानून की बात की मेरे जमाने में जो बोले वकील दिन रात पढा करते थे । मगर अब तो लोग सिर्फ धन कमाने के पीछे पडे हुए हैं । वकील शमशाद अस्पताल के अपने अनुभव बताने लगे मैं कुछ दर्द महसूस कर रहा था । डॉक्टर ने दवा भेजने का वादा किया लेकिन जो दवा मेरी उसकी डेट एक्सपायर हो चुकी थी । सिविल सर्जन ने डॉक्टरों का पक्ष लिया । एक डॉक्टर को बहुत से मरीज देखने पडते हैं । अगर वह सभी का बारीकी से मुआयना करने लगे तो कयामत तक का अपना काम खत्म ना कर सकेगा । लोग तो ठीक और मामूली से खराश पडने पर भी अस्पताल की तरफ दौड पडते हैं । मैं एक ऐसे आदमी को जानता हूँ जो अस्पताल में केवल इसलिए ढाकियों से किराये पर कमरा ना मिल सकता था । डॉक्टर आखिर कर भी कह सकते हैं । हो सकता है ये सच हूँ । शमशाद ने प्रभावित हुए बिना कहा लेकिन कोई भी डॉक्टरों की लापरवाही से इनकार नहीं कर सकता । इसके अलावा गरीबों और जरूरतमंदों के प्रति इतनी विनम्र नहीं होते जितना हो नहीं होना चाहिए । शमशान भाई तो कम्युनिस्टों की तरह बातें कर रहे हैं । नहीं मैं तो सिर्फ हकीकत बयान कर रहा हूँ । शमशान ने जोश में कहा हकीकत सिर्फ हकीकत मैं ये नहीं कहता कि अच्छे डॉक्टर है ही नहीं लेकिन वे बिरला ही हैं । करेने ग्लास पानी पीकर अपना गला साफ किया जो कुछ शमशाद जहाँ कहते हैं केवल डॉक्टरों पर ही लागू नहीं होता । उसने कहा, सच्चाई तो यह है कि हम सदा एक दूसरे को दोषी ठहराते हैं । हम अपनी जिम्मेदारी को नहीं समझते । मैं कहता हूँ पडोसी की फिक्र किए बिना पहले आप अपना दृष्टि करन ठीक कीजिए । दूसरों की आलोचना करने के बजाय हमें अपने घर में नजर डाली चाहिए । मैं समझता हूँ कि इससे काफी सुधर होगा । मेरा मतलब तो सच्चाई की तरफ इशारा करना था । शमशाद ने धीमे स्वर में कहा, मेरा यही मतलब था करेंगे कहा मेरा उद्देश्य किसी पर चोट करना नहीं था । ऐसी बाढ पहले कभी नहीं देखी थी । अब तो करीब करीब हर साल आने लगी है । डॉक्टर ने कहा बाढ के दिनों अजीब अजीब बातें पता चली करेंगे । व्यंग भरे स्वर में मुस्कुराकर कहा कि आपने शराब को ईंधन की जगह इस्तेमाल करते सुना है नहीं सुना होगा । मगर मेरे एक दोस्त ने ऐसा ही किया । बिजली बंद हो गई थी । मिट्टी के तेल की एक बूंद रही थी और वह मुसीबत में फंसा था । उसके पास बिना स्क्रिप्ट के एक प्लान था । बच्चे को दो देना था तो उसने शराब का इस्तेमाल किया हूँ । शराब का कैसा गलत इस्तेमाल करने होटों पर जबान फेरी हाँ, बाढ में तो सबको चकित कर दिया । श्रीधर वकील ने तेज स्वर में कहा मेरे एक रिश्तेदार को मकान छोडना पडा । पानी के उतरने पर जब वापस आए तो उन्होंने खिडकी से देखा कि काला साहब दरवाजे पर बैठा है । जैसे ही कोई दरवाजा खोलने को आगे बढता वह फुंफकारता हुआ उसकी और बढता । बडी मुश्किल से वो लोग मकान में गए । भोजन खत्म हुआ तो मिठाई की प्लेट आई । सबने प्लेट अपने आगे कर ली । तभी डॉक्टर ने देखा कि राजेंद्रबाबू कुर्सी से बीच टिकाई बैठे हैं । उन्होंने पूरा भोजन भी नहीं लिया था और काफी देर से चुप थे । हालांकि वह काफी बोलने वाले व्यक्ति थे । डॉक्टर ने खडे होकर उन्हें हिलाया और वह जोर से चिल्ला पडा । चारों तरफ शोर मच गया । सभी उठकर उनके ईर्द गीत खडे हो गए । उमा और वीना कमरे से भाग टी । वी आई राजेंद्रबाबू बेहोश हो गए थे । उनकी पीठ कुर्सी से लगी हुई थी और सात रुक रुककर चल रही थी । डॉक्टर के कहने पर उन्हें वहां से हटाकर बिस्तर पर लेटा दिया गया । डॉक्टर ने उनका जल्दी से निरीक्षण किया और अस्पताल से एंबुलेंस मंगवाई । लगता है दिल का दौरा पडा है । उसने कहा अस्पताल की गाडी आई और उन्हें धीरे से अंदर लेटा दिया गया । वीणा ने जल्दी से कुछ चीजें बांधी और गाडी में बैठे हुए बोली ग्रहण को टार दे देना । अस्पताल में राजेन्द्र बाबू को होश आ गया लेकिन अब ना वह बोल सकते थे और न ही हिलडुल सकते थे । वो आपकी बात इशारों में ही कह पाते थे । उन्हें गहरा आघात लगा था और उनकी शरीर का बायां हिस्सा हो गया था । वीना उनके पास रहती ये घटना उसके और बच्चों के लिए गहरी चोट थी । राजेन्द्र बाबू का रक्तचाप तेजी के साथ बढ रहा था । अक्सर उनका मन डूबने लगता लेकिन वो अपनी तकलीफ किसी से कम ही । यह बातें बीमारी का ये संकट अप्रत्याशित था । वो बहुत ज्यादा कमजोर और भावुक हो गए थे । जब कभी कोई उनसे मिलने आता तो उसे देखते हैं और रो पडते । डॉक्टर इस संबंध में निश्चित नहीं थे की कब तक हो । चलने फिरने और बात करने लगेंगे । बाहर के मिलते ही प्राण आ गया था । समाचार पाते ही उसे बहुत सदमा पहुंचा था । वो बहुत दिनों से बाहर था और पिता की बीमारी के विषय में उसे बिलकुल बताना था । राजेंद्रबाबू ने संबंध में उसे कभी देखा भी नहीं क्योंकि उन्हें यह था कि वह चिंतित हो उठेगा । अब वो और उसकी ही मांग राजेंद्रबाबू की तीमारदारी कर रहे थे । बीमारी का समाचार जब रिश्तेदारों को मिला तो उन्होंने आने शुरू कर दिया । उमा को उनके भोजन आदि का प्रबंध करने में बडी मुश्किल हो रही थी । ये भी कैसे जी बात है । उसने सोचा जब कभी ऐसी नौबत आती है तो प्रश्न भोजन बनाने का पैदा होता है । विवाह के अवसर पर बडी बडी भट्टियां बनती हैं । उन पर गन्दी गाली लंगोटिया पहले हलवाई कढाई चाहते हैं और पूरियाँ चलते हैं और मिठाइयाँ बनाते रहते हैं । यही दृश्य किसी की मृत्यु पर भी देखा जा सकता है । बिहार को न्योता दो और सारे बिरादरी को भोजन कराओ । दोनों में आखिर अंतर क्या है? कैसी विडंबना है कि दुखी मन को मीठे पकवान बनाने पडते हैं । बहुत के खयाल से उमा का आप उठी । वीना के लिए हर एक घंटा पहाड की तरफ बोझ था । वो हर वक्त काम में जुटी रहती लेकिन उसे लगता कि मानव वो स्वप्नावस्था में है । वो राजेंद्रबाबू के बिस्तर की चादर बदलती, उन्हें पंखा करती हूँ और पत्र पत्रिकाओं से दिलचस्प कहानी पढकर सुनाती ताकि उन का ख्याल बीमारी की ओर से बता रहे प्रायर वो अपने बच्चों के बारे में सोचती अनिल अभी बच्चा था । उमा अविवाहित थी और प्राण काम में ठीक से नहीं लग पाया था । हालांकि राजेंद्रबाबू की हालत पहले से कुछ अच्छी थी लेकिन पूरी तरह स्वस्थ होने में काफी समय लगने की संभावना थी । उनके मुवक्किल भी दूसरे वकीलों के पास चले गए थे लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वे उन्हें चाहते थे । उन्होंने अपनी तरफ से पूरा पूरा सहयोग और सहानुभूति दिखाई थी । उन्होंने ये कहकर मुकदमे की पेशियों की तारीख की बदल वाली थी कि उनका वकील बीमार है । मगर जल्दी ये स्पष्ट हो गया कि राजेंद्रबाबू तो महीनों तक ठीक हो सकेंगे । इसलिए उन्हें मजबूरन दूसरे वकीलों के पास जाना पडा । वीना आमदनी के संबंध में बडी चिंतित थी । राजेंद्रबाबू ने शाही ढंग से जिंदगी गुजारी थी । वो फिजूल खर्च नहीं थे । हालांकि कंजूस भी ना थे । उन्होंने पैसा जोडा नहीं था । उनका बैंक बैलेंस नहीं के बराबर था । उन्होंने उमा के विवाह पर देने के लिए बीमा कंपनी से कॉल इसीलिए रखी थी । जो कुछ था वो धीरे धीरे खर्च हो गया था । जमा पूंजी का अधिकांश भाग कीमती दवाइयों और अस्पताल के बिलों की भेंट चढ गया था । नौकरों की छुट्टी कर दी गई थी क्योंकि परिवार वैभव के इस बोझ को अब सहन नहीं कर सकता था । फिर कार्य भी दिख गई । वीणा ने भेजी आ घुसे ये सब कुछ होते देखा था खुशियों भरे वो दिन थे जब प्राय हर रविवार को सहारा परिवार पिकनिक मनाने जाता था । तब टोकरी में अन्य चीजों के साथ ही राजेंद्रबाबू के लिए बियर की बोतल भी जाया कर दी थी । अब तो ये बातें समिति मात्र बनकर रह गई थी । उमा के चेहरे की कांति खत्म हो गई थी । मसालों के पसीने तथा वर्तनों की सफाई की वजह से उसकी हाथ रूप है और कठोर हो गई थी । भाग दौड करने से उसकी एरिया फट गई थी । इसके अलावा वो ये भी महसूस कर दी थी कि उसकी शादी का ख्याल माँ बाप के लिए चिंता का विषय बन गया है । लग रहा है ये सोच सोच कर दुखी होती की लडकी होना भी एक अभिशाप है । प्रवीण ने खेती बाडी का काम छोड दिया था । खेती बाडी का प्रबंध एक पुराना विश्वसनीय नौकर करता था । लेकिन जब नौकरी ने देखा की उस पर नजर रखने वाला कोई नहीं है तो जो कुछ उसके हाथ लगा वो लेकर रफूचक्कर हो गया । ट्रैक्टर जंग लग कर खराब हो गया था । बीज नहीं बोली जा सकते थे । खेतों में कांटेदार झाडियां उगाई थी वेना को । ये तमाम बातें परिवार के एक ऐसे परिचित से पता चली जिसके खेत प्राण के खेतों के पास ही थे । अंत में वीणा ने जमीन और ट्रैक्टर बेचने का फैसला कर लिया । जमीन बेच की गई लेकिन बेचने पर लागत का कुल पांचवां भागी मिल सका क्योंकि मशीनों को जंग लग चुका था और सौदा बडी जल्दी में किया गया था । ये भारी नुकसान था । बंगले की चमक दमक खत्म हो गई थी । मालिक आना बंद हो चुका था और फूलों की पत्तियां झड झडकर बिखर गई थी । ड्रॉइंग रूम का गलीचा मिला हो चुका था । रिकॉर्डर एक कोने में पडा था । उमर जब कभी उसे देखती तो गुस्से से बरून्दनी । वो उसे बीच आ जाती थी । मगर ये सोचकर रुक जाती कि वह उपहार में दिया गया था । उसका मन करता है कि वो उसे तोडकर टुकडे टुकडे करते । ये एक मनहूस उपहार था जो अपने साथ दुख लेकर आया था । जैक बलरामपुर अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में बैठा था । उसे राजेंद्रबाबू की बीमारी का समाचार एक मित्र से मिला था जो लखनऊ से आया था । जब लखनऊ पहुंचा तो वीणा ने उसे सब कुछ बताया । गंभीर हो गया । उस क्षण परिवार की शौचं स्थिति को देख कर उसका मन भर आया था । वो रीना का मुरझाया चेहरा और उदास आके सब कुछ कह रही थी जय वीना की रोके उसी बालों पर नजर डाली । वो खुद मुसीबतों का शिकार था । मगर इस परिवार की दयनीय स्थिति से तो बेहद परेशान हो गया । तो फिर इतने दिनों तक रहे कहाँ? वीना से बोझा फिशन भर रुककर बोली एक युग बीत गया तो नहीं देखे हुए मैं यही तरह बदलाव के लिए अपने गांव चला गया था । जब मैंने कहा तो कभी बताया नहीं । वो बोली जल्दी में जाना पडा । उसे सफाई थी । फिर रुककर पूछा कार्य कहाॅ बिना दुखी स्वर में कहा तो बहुत पहले बेच दी थी तो बॉम्बे बेच दिया जय खुद धक्का साला काम उसने तो कभी सोचा भी नहीं था की स्थिति इतनी खराब हो जाएगी । उसी उमा का ख्याल आया हूँ उसका जी जहाँ की वो फॉरेन उमा के पास जाए और सहानुभूति प्रकट करें । बिचारी । उमा पर ई के कितना बोझ पड रहा था उसे । विक्टर होटल की उस दिन की घटना याद आई । वो नाराज होकर चला गया था । वो जितना उसके बारे में सोचता अपने को ही दोषी पाता तो सारी बात स्पष्ट करके उसे माफी मांग लेगा । उसे दुख हुआ कि वो तो चला गया था । वो क्यों मुसीबत के समय उसके साथ नहीं दे पाया हूँ । सहसा वीना की आवाज भी उसी चौका दिया । वो कह रही थी घर पर तो ब्रांड से मिलने जरूर जा रहा हूँ । जैन धरती दिल से जाने पहचाने गेट की ओर कदम बढाए । बंगला एकदम बदला हुआ नजर आ रहा था । बेंच पर नौकर नहीं बैठे थे । मुस्कुराते रंग बिरंगे फूल नजर नहीं आ पा रहे थे । चारों और सुना और उदासी छाई हुई थी । जैनी कालबेल का बचे दबाया लेकिन दूसरी शर्ट उसे एहसास हो गया कि बैल काम नहीं कर रही । कॉल बैल के नीचे लगा रहने वाला शीशा उतर चुका था । तभी जैन अनिल को तीन पहियों वाली साइकिल चलाते देखा । अनिल ने उसे देखते ही आवाज लगाई । ज्यादा बोल साइकल से उतर पडा और जय दादा जय दादा कहता हूँ अन्दर की तरफ भागा । कुछ देर बाद दरवाजा खुला । सामने उमा खरीदी थी । जैन ने दोनों हाथ जोडकर नमस्ते कहा । पल भर को दोनों ने एक दूसरे को निहारा हूँ । उमा के चेहरे से मुस्कुराहट खत्म हो चुकी थी । सादा चिंतायुक्त रहने वाले चेहरे पर गंभीरता और उदासी छा गई थी । उसकी आगे उदास हो गई थी । उसके गालों में गड्ढे पर चुके थे । कभी यही चेहरा भरा भरा रहता था और गालों पर जवानी का गुलाबी रंग बंदा था । उसने चिंताग्रस्त मुख को दोबारा देखा । माथे पर बल पडने लगे थे और सिर्फ टीके का निशान था । बाल बिक्री हुए थे । ना हाथ में घडी ढीला । सोने की चूडियां । एक सफेद साडी उसने पहन रखी थी, जो विद्वान जी को तो ढेर लग सकती है, मगर एक युवती को नहीं । उमा से आंखें मिलते ही मैंने इन तमाम बातों को भाग लिया । ऐसा तुमने बीट भेली और आंखों में चमकते दो बडे बडे आसूओं को साढे के किनारे से पूछ डाला हूँ । बोलना चाहता था, लेकिन शब्द उसके गले में फंस गए । वो कुछ नहीं कह सका । सिर्फ उसके चिंतित मुख को टकटकी लगाए देखता रहा भी । कुछ देर बाद वो कह सकता हूँ, मुझे अफसोस है कि ये सब कुछ हुआ । मैंने तो सोचा था कि उनकी सेहत ठीक होगी । तुमने सिर्फ उसे देखा कुछ कहा नहीं । मुझे अपने गांव जाना पडा । उसके स्वर में क्षमा याचना का भाव था । पटना में बहुत पहले हो गया होता । मुझे तो कल तक भी इस बारे में मालूम नहीं था, लेकिन तो गए क्यों? ढेर उसने भर्राए स्वर में कहा, मैंने उस फॅमिली में जो कुछ कहा, उसके बाद तो मुझे नफरत करने लगे । नहीं नहीं । उसने कहा मैं तुमसे कभी नफरत नहीं कर सकता, में आना चाहता था । लेकिन ये सोचकर मुझे ग्लानि महसूस होती थी कि मैंने तुम्हारे दिल दुखाया । मैं अपने गांव चला गया था, लेकिन वहाँ भी तुम से दूर नहीं रह सका । कम से कम तो हम लोगों को बताना तो चाहिए था कि तुम जा रहे हो । उमा बोली जैसी जैनी को मुस्कुराते हुए देखा । उसे लगा कि बीते दिन वापस लौट आए हैं । हस्ती हुई और उसके हाथ में हाथ देकर बगीचे में घूमने वाली उमा कितनी बदल गई थी । उसे वो दिन याद है जब बगीची में मालिक टहनियों से लटक के दशहरी आमों पर कडी नजर रखता था । मगर जब लू चलने लगती तो वह कच्चे फलों की खोज में निकलने पडता । बूढा माली सोया होता जय चोरी छिपे इधर उधर देखता और झुकी टहनियों पर लगे आमों को तोडकर हवा से खडखडा दी । तीन के शेड के नीचे भाग जाता । वहाँ उमा खडी बेचैनी से उसकी प्रतीक्षा कर रही होती । हम ऊपर नजर पडती वो वोट ऊपर जवान फिल्मे लगती है । फिर वो उसकी जेब से चाकू निकालकर कागज की एक छोटी सी पुडिया में रखा नमक निकालती और तब दोनों कच्चे आमों की पार्टी को नमक लगाकर खाने लगते हैं । आमो के खट्टी स्वाद से उनके चेहरे पर अजीब अजीब मुद्राएं बनती । दूसरे दिन बूढा माली आमों को देखता तो उमा के पिता से शिकायत करता । वो उस पर नाराज होते हैं तो दिन पर दिन निकम्मे होते जा रहे हैं । जब तुमने सडक पर ही पकडकर दो चार हाथ आम तोडने के लिए आए लडकों के क्यों नही जवाब दिए । जब वह चढकर आम तोड रहे होंगे तो जरूर सो रहे होंगे । जब वो शर्मा मांगे लगता हूँ वो अपनी लाठी को जमीन पर पटक के हुए कहता अब की बार नहीं तो फिर मजा चखाऊंगा और वह बडबडाता हुआ चला जाता है कि वह उन्हें कैसे मजा चखा आएगा । मैं तुम्हारे लिए, चाहे मैं बनाती हूँ । उसने होते हुए कहा ऍसे रोक दिया, उन तकलीफ मत करो, मैं चाहे बीच बैठे रहो । और हाँ राजेंद्रबाबू को दिल का दौरा कैसे पडा के ये सब अचानक हुआ । मैं आखिरी बार जब उनसे मिला था तब तो वह अच्छी खासी थी । ब्लैक प्रेशर भर जाने की वजह से ऐसा हुआ । डॉक्टरों ने उन्हें सतर्क भी कर दिया था । लेकिन तुम तो जानती हूँ कि वो कितनी लापरवाह उसने अपने हाथ गोद में रखे थे । वो कुछ रुककर बोली तो भारी पुस्तक का क्या हुआ कि अब प्रगति हैं । तू आ रहे हैं । अगले वर्ष के शुरू में निकल जाएगी । फिर छोडो वह बात बदलते हुए बोला ये बताओ कि घर का काम ठीक चल रहा है । घर का सामान और पिताजी के लिए दवाइयाँ कौन लाता है? कोई नौकर तो नजर आता नहीं, प्राण ही करता है । काम तो बेच दिया इसलिए काफी दिनों से वो इधर ही है । अब वो क्या करना चाहता है? जैन ने पूछा मुझे मालूम नहीं । उमा बोली वो शर्मिला और शांत प्रकृति का है । मेरा ख्याल है कि नौकरी करना ही ठीक रहेगा । लेकिन मुश्किल यह है कि वो सिर्फ सेकंड क्लास है और कॉम्पिटिशन बहुत हार्ड होते हैं । इसी वक्त दरवाजे पर एक स्कूटर की रुकने की आवाज आई । हेलो प्राणी स्कूटी से उत्तर टोकरी कोई कुर्सी पर रखते हुए कहा, हमने आपको मुद्दे से नहीं देखा । मैंने सुना है कि आप कविता करने लगे हैं । अनिल भागता हुआ आया और ऊंची आवाज में बोला तो नहीं । मेरे लिए क्या लाए हूँ? प्राण नहीं ट्रॉफी का पैकेट टोकरी में से निकाल कर उसे दे दिया । अनिल उसे लेकर भाग गया । बच्चों को कभी कोई फिक्र नहीं सका । दी प्राण ने कहा ये जीवन के सुनहरे दिन होते हैं, कह नहीं सकता हूँ । मैंने गंभीरता से कहा बच्चों की भी अपनी समस्याएं होती हैं । अगर आप उसके लिए ट्रॉफी नहलाते तो ना जाने अनिल को कितनी परेशानी होती है । पर यही है कि उनकी चिंताएं हमारी चिंताओं से भी होती है । अब तो बैठे मैं भी आई । उमा नहीं होते हुए कहा अब आप क्या काम करना चाहते हैं? जैन प्राण से पूछा मैंने अभी तक इस बारे में कुछ नहीं सोचा । मैं तो आजकल भाग दौड में ही लगा हूँ । किसी फर्म जगह खोजिए । जैनिक बम वाले अच्छी तन्खा देते हैं । कोई व्यवसाय भी किया जा सकता हूँ । लेकिन उसके लिए रूपये का सवाल है की आपको फांसे कुछ नहीं मिला मिला लेकिन बहुत कम बाबू जी के इलाज के लिए हमें रुपयों की सख्त जरूरत थी । इसलिए जल्दी में बहुत सस्ते में बेचना पडा । कुल बीस हजार रुपये की रखने मिली । अभी काफी कर्ज लोगों का बाकी है । मेरी समझ में नहीं आता कि ये सब कैसे होगा । पे हर आदमी व्यवसाई भी तो नहीं कर सकता । जैन ने बात को टालने के उद्देश्य से कहा, आजकल तो ये वही मानो तथा मक्कारों का पेशा बन गया है । इसके अलावा इस झंडे के लिए काफी चतुराई और व्यहवहार कुशलता की जरूरत होती है । आप तो बहुत छह मिले हैं, मैं आपको बदल सकता हूँ । उसने कहा मैं व्यापार पसंद करता हूँ । आप जैसा सोचते हैं बाद पैसे नहीं है । इसमें काम ही काम है और अनगिनत चिंताएं ऊपर से एक महीने की बीमारी सबकुछ बर्बाद कर सकती है । फिर ग्राहकों से निपटना भी कोई मजाक नहीं । किसी की मर्जी के खिलाफ कुछ किया भी नहीं जा सकता । गीता का कथन है कि अपने कर्तव्य का निर्वाह कर दूसरे के कामों की और मत देखो चाहे वो कितने ही अच्छे क्यों ना हो । विमल को देखो । प्राण ने कहा मैं अभी उस से मिल कर आ रहा हूँ । वो कितना मालदार है तो जीवन के पास क्यों गए थे वो? मैंने कमरे में दाखिल होते हुए प्राण की बात को सुन कर पूछा । क्रोध की लालिमा उसके चेहरे पर समझने लगी थी तो उसके पास जाना हमें विमल से क्या लेना देना है । लेकिन उॅची कहा तो उसे इतनी नाराज की हो । मेरा ख्याल था की तो उसे पसंद करती होगी । परसों और उसे तो गुस्से में बोली हो । यहाँ मैं एक विक्की को पसंद कर सकती हूँ, लेकिन उसे जैन इस संबंध में तर्क करना उचित ना समझा । उसे डर था कि उमा कहीं भरना उठे । वो दोबारा उससे संबंध बिगाडना नहीं चाहता था । विमल की जब जब चर्चा चली उन्होंने यही रुख अपनाया था । ग्रहण स्कूटर अंदर रखने के लिए चला गया । मेरे बारे में क्या ख्याल है? जय के होठों पर शरारत भरी मुस्कुराहट फैल गई । मुझे माफ कर दिया गया या मुझे भी विमल की श्रेणी में रखा गया है । वो तो उससे बिल्कुल अलग हो । वो बोली किस तरह? अब तो मुझे तंग करने पर क्यों तुले हुए हो । उसमें लग जाते हुए कहा तो बाहर है उसका मुकाबला । मैंने कभी तुम्हारी उससे तुलना करने के बारे में सोचा भी नहीं तो पूछूंगी की ऐसा क्यों? लेकिन मैं नहीं बताउंगी । उसका चेहरा लाल होने लगा था । कुछ देर बाद जय चला गया तो बहुत खुश था । उमा उसको प्यार करती है, इसमें शक नहीं था । यदि पी उसने इस संबंध में कुछ भी नहीं कहा था तो भी उमा के मन की बात का उसी पता चल चुका था । चमकीली धूप एक कंबल की तरफ फिर कर एक एक वस्तु को अपने में लपेटकर गर्माहट दे रही थी । खुली हवा ने उसके सारे शरीर में ताजगी भर दी थी । उसका मन खुश था । निकला आकाश तेज हो और खुली वायु उसे सोचा । वास्तव में शरद ऋतु प्यार और जीवन की प्रतीक है । मीना ने अपने सामने खडे एक लडकी को देखा जो खूबसूरती की जीती जागती तस्वीर थी । उसकी भूरे रंग के काटे बात आगे को पहले थे । स्कर्ट के नीचे चमक टीवी उसकी गोली टांगे बडी खूबसूरत लग रही थी । उसकी कोमल अंगुलिया और कटे ना खुल बडे ही दिलकश नजर आ रहे थे । अगली बार सादा मगर कीमती था । मीना को दाल में कुछ काला नजर आया । वो संदिग्ध इस्वर में बोली आपके अपना नाम क्या बताया था? सीमा लडकी ने मीठे स्वर में कहा में सीमा क्या बैठे ही नहीं । मैं सीमा उसी सीमा को तेजी नजर से पूरा मैं पता करती हूँ अगर वो आप से मिल सके । लडकी आराम से कुर्सी पर शांत भाव से बैठ गई । भेज बोली तीस पता कीजिए उन्ही मेरी प्रतीक्षा है । मीना अंदर गई भारी खूबसूरत लडकी बैठी है । उसने अपना नाम सीमा बताया है । ये क्या मामला है कि आप नहीं सेक्रेटरी रखना चाहते हैं चीज । मीना ने कहा, विमल मुस्कुराया, हूॅं सिर्फ फॅस तो इस मामूली बात के लिए पागल मत बनो । जल्दी से जाकर उसे अंदर भेज दो । मैं सुराग से देखेंगे कि आप उस से कैसे पेश आते हैं । ने बाहर जाते हुए कहा, समझे उदास वन थी । वह अपने टाइपराइटर के पास जाकर बैठ गई और ऊंची एडी की सैंडिल पहने भीतर जाती हुई सीमा को देखने लगी । उसने टाइप मशीन पर एक जलती हुई नजर डाली । विमल ने सीमा से हाथ मिलाया और उसे आरामदेह कुर्सी पर बैठाया । उसके दफ्तर की सभी कुर्सियां आराम नहीं थी । उन पर बैठने से सुख का अनुभव होता था और बातचीत ढंग से की जा सकती थी । सिगरेट, विमल सिगरेट आगे बढाया, धन्यवाद । मेरा ख्याल है कि आपको पहलगाम मिल गया होगा । उसने एक सिगरेट डब्बे में से निकालकर फोटो में दबाते हुए पूछा हूँ । हाँ कहकर विमल ने सीमा का सिगरेट चलाया और बोला, मैं तो आप ही का इंतजार कर रहा था । विमल शराब की एक बोटल दो गिलास से । मैं तो डेली सोडा मिलाते हुए उसने कहा अगले और हुसैन उसने अपना ग्लास उठा हमेशा एक साथ रहे हैं । जब कभी आपको अपनी खूबसूरती के बचाव तथा जवानी की सुरक्षा की जरूरत महसूस हो तो मुझे आज कहीं मैं इस मामले में बहुत होशियार हो । कहाँ है कि ये चोर को अगर पकडना हो तो दूसरे को उसके पीछे लगा दो । सीमा बोली विमल ने दारू पी से और अपना सिगरेट चुराया । उसने सोचा है कोई तो ऐसा है जो उसे समझता है । वो लोहे की एक अलमारी के पास गया । उसे खोला और अंदर से एक चौकोर बडा खेला निकाला । ये तुम्हारे लिए एक उपहार है । अब तुम नहीं कह सकती कि मैं दरियादिल नहीं हूँ । कहते हुए उसने पैकेट उसके हवाले कर दिया । पैकेट सफेद बदले का अगस्त में लिपटा था । धन्यवाद सीमा ने खुश होकर कहा कि आप हर महिला के प्रति ऐसी उदारता से पेश आते हैं । मेरा मतलब है कि जो बाहर बैठी हैं उसने मीना के कमरे की तरफ इशारा किया । मुनासिब यही है कि ज्यादा पूछताछा करूँ । विमल ने कहा, इससे दिल को चोट पहुंचेगी । सीमा ने पैकेट को बैग में रखा और गिलास खाली कर दिया । आपकी स्वीकृति व्यवहारकुशल नहीं लगती । सीमा ने उठते हुए कहा, मेरी बजाय उसको अपनी सुरक्षा के लिए किसी की ज्यादा जरूरत है । उसकी चेहरे का गुस्सा बता रहा था कि वो किसी लडकी को आपने बहुत से मिलाना पसंद नहीं करती । उसका एशिया करना सुभाव इक है । विमल ने उसकी भूरी आंखों में झांकते हुए कहा वापसी भर संभलकर जाना एक एशिया आलू और ऐसे निपटा बहुत मुश्किल होता है । धन्यवाद मैं उसे खुश करके होंगे । सीमा ने जवाब दिया और उठ गई । विमल जाती हुई सीमा की पतली कमर और गठीले बदन को देखता रहा । वह चकित था कि अदायें क्यों मक्कारी से भरी होती है । एक सच्चे दिल की पवित्र लगेगी, अत्यंत रूपवान हो सकती है । उस की सूझबूझ तीखी हो सकती है मगर वो किसी की दिल को बेकरार क्यों नहीं कर सकती । जब कभी औरत अदाएं दिखाती है, पुरुष उसका शिकार हो जाता है । ऐसे लडकियों को देख कर ही तो विमल ने एक आ हमारी धन के महत्व से इंकार नहीं किया जा सकता है । रुपैया रुपया है । इससे कुछ कार्यों की पूर्ति होती है और कुछ नहीं । इससे प्यार तो खरीदा जा सकता है मगर भाग्य को नहीं बदला जा सकता । फिर भी अधिकांश कार्य को रुपये के बल पर पूरा किया जा सकता है । जय के लिए ये बहुत ही खुशी का दिन था क्योंकि उसके हाथ में पुलिस इंस्पेक्टर के पद का नियुक्त पत्र था । इसके लिए उसे बहुत मेहनत करनी पडी थी । अपनी नई वर्दी पहनकर वह भावविहल हो रहा था । जब राजेंद्रबाबू को अपनी नियुक्त का समाचार देने गया तो खुशी से चीज पर उसने वर्दी पर लगने वाले पीतल के तमगों पर बराबर अमूल्य फेरी और अनेक बार सेल्यूट किया तो गरम मिजाज इंस्पेक्टर साहब की तारीख होनी चाहिए । ऐसा ना हो कि वो आना ही बंद करते । उमा ने मुस्कुराते हुए व्यंग्य किया, अब वर्दी में बडे रोबीले दिखाई पडते हैं । प्राण नहीं कहा । अब मैं लाल बत्ती की परवाह किए बिना स्कूटर चला सकता हूँ । गिरफ्तार के नियमों को तोड सकता हूँ और जहाँ चाहो अपना स्कूटर खडा कर सकता हूँ । जैन राजेंद्रबाबू के पास पहुंचकर उनकी चरण हुए । वो अस्पताल से वापस आ चुके थे मगर इधर उधर घूम नहीं सकते थे । बोलने के लिए भी उन्हें बडी कोशिश करनी पडती थी । ये जय है । वीणा ने राजेंद्र बाबू को बताते हुए कहा पुलिस इंस्पेक्टर बन गया है । राजेंद्र बाबू ने मुस्कुराने की कोशिश की । पुलिस इंस्पेक्टर उन्होंने सोचा ये तो बहुत अच्छा हुआ । बेटा तो कब से अपना काम शुरू करोगे । बिना बोले ड्यूटी पर हाजिर होने से पहले मुझे ट्रेनिंग लगी है । ये काम बहुत मुश्किल है और उसके बाद प्राण ने पूछा उसके बाद मेरी किसी जगह ड्यूटी लगा दी जाएगी । मुझे यकीन दिलाया गया है कि लखनऊ में ही रखा जाऊंगा । पहले मनपसंद जगह पर ही ड्यूटी लगाते हैं तब तो बहुत अच्छा होगा । प्राण बोला उमा मुस्कुराती रही । वह जय को बार बार देखती रही । आखिर उसकी मन की मुराद पूरी हो गयी थी । वो सोच रही थी ये सब देखकर शंकर और विमल अवश्यक्ता अजूबे पड जायेंगे । चलो इस खुशी में एक पार्टी तो हो जाये । प्राण ने कहा हाँ हाँ जरूर चलो । सब विक्टर चलते हैं । जय ने कहा अब नहीं नहीं जब तुम्हें पहली तनखा मिल जाएगी तब हम सब एक शानदार पार्टी लेंगे । उमा ने कहा दोगे ना! और यहाँ कहीं पर भी मगर विक्टर में नहीं । वित्तीय की याद अभी तक उसके दिमाग में ताजा थी और वो उस घटना का समर्थन मात्र करने से रोमांचित होती थी । चलो चलें । जय ने कहा अगले माह की पहली तारीख को तो तनख्वाह मिल ही जाएगी । तब मैं सबको डिनर दूंगा । मगर अभी तो कुछ ना कुछ तफरी हो ही जाएगा । अगर उमा विक्टर में जाना नहीं चाहती तो दिलाई चलते हैं । वहाँ भी बडा अच्छा खाना बनता है ।

सातवाँ फेरा -07

भाग साथ । आखिर उमा प्राण और जय दिलाई चले ही गए । हल्की नीली रोशनी फैली हुई थी । वो तीनों वहाँ बैठे और केसरा की मधुर ध्वनि सुन रहे थे । वो माता जहरा चमक रहा था और वो बहुत खुश थी । वह जय की सफलता पे मन ही मन झूम रही थी । हल्का हल्का फैला प्रकार है संगीत की स्वर लहरिया और साफ पोशाके पहने लोग । उमा चारों और मुंबई दृष्टि से देख रही थी । उसे हर एक लेना जानता प्रतीत हो रहा था । हसते चेहरे और मुस्कुराते होटों ने वातावरण में उत्साह भर दिया था । उमा अपने ख्यालों में इतनी हो चुकी थी कि वह दूर कोने में बैठे विमल को भी न देख सके । वो तीनों को गुस्से से देख रहा था । क्या ये भयानक सपना है? मीना के साथ बैठा विमल सोच रहा था । वास्तव में ये जय ही था जो पुलिस की वर्दी पहने बैठा था । वो ऊंचा और स्मार्ट नजर आ रहा था । विमल ने उमा के चलते चहरे को देखा और फिर जय को घूमने लगा तो ये निकम्मा अब पुलिस में जा घुसा । विमल मनी मान व्यंग से मुस्कुराया । हजरत पुलिस की खूब सेवा करेंगे । वो बढ बनाया आपने क्या कहा मीना ने उसकी और देखते हुए पूछा, आपकी सूरत से तो ऐसा लगता है जैसे कोई भूत दिखाई दे गया हूँ? भूत नहीं । एक दोस्त को देख रहा हूँ, जिससे में देखना भी नहीं चाहता था । उसने बियर के गिलास के गिर अपनी उंगलियां भी आते हुए कहा तो जय पुलिस अफसर बन गया है बेचारा सीधा साला इंसान, दिन में भी सपने देखने वाला, कभी जय और पुलिस की नौकरी । इस दुनिया में क्या क्या अनोखी बातें होती है? विमल क्रूज तिलमिलाया और उसने एक ही साथ में बीयर के पूरे गिलास को खाली कर दिया । सेटिंग अपनी फूली तो उन पर हाथ फेरा और तीखे स्वर में कहा मुझे अपनी रकम चाहिए बाबा । वकील साहब ने वादा किया था कि वह इसे दिसंबर तक लौटा देंगे तो उनसे पूछ सकती हूँ । दो महीने पहले भी चुके हैं । मैं सिर्फ दो हफ्ते और रह सकता हूँ । ज्यादा नहीं । उसने अपनी हथेली को यू गुबाया जैसे इस मामले में वो और कुछ नहीं सुनना चाहता हूँ । वीना उलझन में फंस गयी । वो राजेंद्रबाबू से इस विषय में चर्चा करके उनकी चिंताओं को बढाना नहीं चाहती थी । उनके स्वास्थ्य के लिए ये चर्चा हानिकारक सिद्ध हो सकती थी । उमा काम पर जाने लगी तो उसी माँ का उतरा हुआ चेहरा देखा हूँ । मम्मी मुझे बताओ तो सही । उसने कहा अगर आप इसी तरह चिंता करती रही तो एक दिन बीमार पड जायेंगे । फिर हमारा क्या होगा? उमर जानती थी कि उसकी बिहार की चिंता ने बाबू जी को खाद पकडा दी थी । वो बोली हूँ क्या आप मेरी वजह से चिंतित हैं? नहीं नहीं बेटी । रीना ने कहा ऐसी बात नहीं है जिस स्टेट से फाइल खरीदने के लिए कर्जा लिया था । वो अपनी रकम वापस मांग रहा है । वहाँ और इंतजार नहीं करना चाहता और मामले को अदालत में लिए जाने की धमकियां दे रहा है । न जाने वो क्या करेगा । अभी उसका कितना बताया है? लगभग बीस हजार बीस हजार तुमने आश्चर्य से कहा हाँ, सबसे बडी मुश्किल यह है कि सीट कहना नहीं चाहता हूँ । खैर कोई ना कोई रास्ता तलाश करूंगी, लेकिन मन ही मन बिना सोच रही हूँ । उसके पास इस समस्या का कोई समाधान नहीं है । उधर राजेंद्रबाबू से ठीक होकर दोबारा प्रैक्टिस शुरू करने की भी कोई संभावना नहीं थी । मियाद की समाप्ति परसेंट आया । वो आवेश में आकर चिल्लाने लगा । प्राण का मन हुआ कि उसकी तोंद पर एक जोर की ठोकर लगाई । मगर लाचारी में गुस्से को पीना पडा । वीणा ने अनु नियम विनय की लेकिन मोटा सीट गुस्से में धमकियाँ देता हूँ चला गया । उमा इस अपमान को सहन नहीं कर सकी । सीट का कर्ज तो किसी ना किसी तरह चुका नहीं चाहिए । कुछ सोचा उसने अपनी देवर गया लेकिन उन से उसे एक दो हजार मिल सकते थे । वो इतनी बडी रकम कहां सिलाई जे ट्रेनिंग के सिलसिले में बाहर था । फिर वो भी क्या ही कर सकता था । उसी शंकर का ख्याल आया । हाँ, संकर सही आदमी हैं । विक्टर वाली घटना के बाद वो नहीं आया था । लेकिन इससे कुछ फर्क नहीं पडता था । निश्चय ही वो कुछ ना कुछ करेगा । वो जितने उसके बारे में सोचती उतना ही आश्वस्त होती जाती है । शंकर उसे तबाह होते खामोशी से न देख सकेगा । जब उसे विक्टोरिया आपके स्थित शंकर के मकान के पास रिक्शा से उतरी । आकाश में काले बादल छाए थे । वह प्लान को पार करके आगे भाई और उसे बैल का बटन दबाया हूँ । थोडी देर के बाद शंकर ने दरवाजा खोला । वो उसे देख कर चकित रहेगा । अरे आप बडी खुशी हुई । उसे उमा को देखकर सुखद आश्चर्य हुआ । अंदर आइए अंदर जाकर उमा ने उसे अपने पिता की बीमारी और फार्म बेचने की बात बताई । वास्तव में मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है । उसने कहा मम्मी का जहरा चिंताओं ने डाक्टर डाला है और सीट रुकना नहीं चाहता हूँ । कर्ज कितना है? शंकर ने पूछा बीस हजार उमा ने बताया बीस हजार शंकर को आश्चर्य हुआ । ये तो बहुत बडी रकम है । तुम्हें कैसे समझ लिया कि मैं इसका प्रबंध कर सकता हूँ, लेकिन तो भी करना होगा । वो आवेश में बोली, मैं जानती हूँ कि तुम कर सकते हो तो मैं खुद ही मुझे बताया था कि तुम पिछले बरिश तीन लाख का फायदा हुआ है । मैं वादा करती हूँ कि तुम्हारा एक एक पैसा लौटा होंगी मगर कैसे है? शंकर मुस्कुराया दस हजार की पॉलिसी है जिसकी रकम शीघ्र ही मिल जाएगी । बाकी में काम करके चुका दूंगी । लेकिन तो भाई दहेज का क्या होगा? डी एस शंकर ने मुस्कुराते हुए कहा पॉलिसी तो तुम्हारी विवाह के लिए है । जानती हो ना? उमा अंदर ही अंदर क्रोन्ये बाल पडी मगर ये समय क्रोध करने हैं । उसने सोचा तो अभी इस बारे में परेशान होने की जरूरत नहीं । उसने अपने पर काबू पाते हुए कहा कि मेरा निजी मामला है । शायद मुझे दहेज की जरूरत ना पडे शायद में शादी ही ना करूँ । खैर छोडो ये बताओ कि तुम मेरी सहायता कर सकती हूँ या नहीं तो कुछ लेने के स्वर में तो बात नहीं कर रही हूँ । शंकर क्या की चमक उठी तो तो मांग के स्वर में बात कर रही हूँ । उमा तो बिल्कुल वैसी ही रही तो हर काम को अपनी मर्जी से कहना चाहती हूँ तुम आॅइल में लाई मैंने सोचा था कि तुम तो वो हकलाने लगे । हाँ मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ लेकिन शायद है । उमर जाने को भी तो शंकर बोला को और मेरी शर्त सुनो मैं तुम्हें रुपये दूंगा और तुम वादा करूँ कि तुम मुझसे शादी करोगी? मैंने जो में हमेशा जहाँ है सच तो नहीं जानती मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूँ । मैं सारा कर चुका दूंगा भी । हम हनीमून मनाने कश्मीर चलेंगे । उन्होंने गुस्से से अपनी हाँ झटके । उसी हमने पर्स उठाया और बाहर निकल आएगा । उसका चेहरा क्रोध से तब रहा था । लोन में से गुजरते हुए उसने सोचा इंसान इतना नीचे भी हो सकता है । क्या वो बीच कुर्सी है जिसे रूपये के बदले खरीदा जा सकता है? विवाह दासता है मगर ये तो उससे भी नीचे बात है, सेट नहीं जब देखा के सारे प्रयास व्यर्थ सिद्ध हुए हैं तो उसने अंतिम तीन चलाया । एक सुबह जब भी ना उदास मंत्री बरामदे में थी तो उसी एक अदालती सम्मन मिला । बीना ने कागज पर हस्ताक्षर की और समय को लेकर पढा । क्लेम सही था इसलिए मुकदमा लडने का कोई प्रश्न पैदा ना होता था । उसने सोचा अगर समय पर कर्ज नहीं चुकाया जाता तो मकान की नीलामी हो जाएगी और वह गलियों में ठोकरे खाते भेजेंगे । उसने घर के सारे जेवरों को इकट्ठा किया । दुकानदार से कीमत पूछे मुश्किल से दो हजार आठ हजार के लगभग पॉलिसी का भी मिल सकता था । मगर जब काम फिर भी कम रहती । सोचते सोचते वीना के चेहरे का रंग पीला पड गया । उमा भी परेशान थी । उसी कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था । दिन गुजर रहे थे और भुगतान की तारीख निकट आ रही थी । एक शाम जब उमा बहुत परेशान थी, उसने विमल से दफ्तर में मिलने का फैसला किया । उसने सोचा ज्यादा से ज्यादा यही होगा कि वह मना कर देगा पर मिलना तो चाहिए । शायद वो सहायता कर सके । रिक्शे में जाते हुए उसकी मस्तिष्क में विचारों की तूफान उमड रहे थे । कई बार उसने सोचा कि वापस लौट जाएगा । लेकिन परिवार की इज्जत, उसकी रक्षा का सवाल बाबू जी की मानहानि की कल्पना करके वो सिहर उठे । रिक्शा इंटरनॅशनल केमिकल वो उसके सामने जाकर रुका । वह धरती दिल से नीचे उतरी और रिक्शेवाले से बोला मुझे थोडी देर लगेगी तो यहीं चेहरों डॉक्टर के सामने का भाग सोना पडा था । एक खाली दिल्ली ने उसका रास्ता काटा । वो डरी काल बेल के नीचे गति पर लिख कर डाला गया था । ये काम नहीं करती । उसे चपरासी को तलाश करना चाहा मगर उसे आस पास कोई दिखाई नहीं पडा । चारों और कब्रिस्तान जैसे खामोशी छाई हुई थी । उमा बरामदे में से गुजरकर जाए । तरफ वाले कमरे में चली आई । एक मेज पर टाइपराइटर रखा था । सहसा उसे सामने वाले कमरे पर पडे पर्दे को देखा । पर्दा जरा सा हिला और उमस तब रह गई । दिवाली एक लडकी को अपने बाजू में जकडी खडा था । उमा ने सोचा कि वह भाग जाए मगर उसके पांव जम से गए थे । उसके लिए पीछे हटना भी उतना ही कठिन हो गया था जितना कि आगे बढना । फिर अगर किसी ने उसे लौटे देख लिया तो वह समझेगा । उमर जासूसी करने आई थी इसलिए उसने यही फैसला किया की कुछ देर तक वही खडे होकर इंतजार करेंगे । वो उस लडकी के बारे में जानने की इच्छुक थी । लिहाजा उसे साहस बटोरा और थोडा सा फायदा उठाकर भीतर झांका । लडकी का चेहरा जाना पहचाना सा लगा । उमा को लगा कि अंदर बैठी लडकी को कहीं ना कहीं देखा है । अचानक उसे याद आया । इस लडकी को उसने शहीद स्मारक के पास देखा था । वो विमल की सिक्योरिटी मीना कुमारी देखा । विमल ने धीरे धीरे मीना के बालों में उंगलियां पहली और उसके वोटों का चुम्बन लिया । उमा का मुख्य लज्जा से लाल हो गया । वो मंत्र मुग्ध खडी उन्हें देखती रही । तभी दोनों पांच वाले कमरे में चले गए और दरवाजा बिना आवाज किए बंद हो गया । उमा की जान में जान आई । अब तक तो सांस रोके । सबकुछ देखती रहेगी । उस लिए पर्दा बराबर किया और आहिस्ता से बाहर निकल आई । स्थान पहले की तरह सुनसान था । एक गायक घास चल रही थी । मीन गेट खुला था । सिर्फ दिल्ली कहीं गायब हो गई थी तो तेजी से कदम उठाते हुए रिक्शे के पास पहुंची और उसे वापस चलने को कहा । उसने सोचा अच्छा हुआ वो ठीक समय पर बाहर निकल आएगा । अब वो कभी नहीं आएगी । कभी नहीं । विमल के प्रति उसका हिंदी ढंग से भराया । उमा की सब कोशिशें नाकाम हो चुकी थी । कोई रास्ता बाकी ना बच्चा था । वो जितना अधिक इस समस्या के संबंध में सोचती उतना ही अपने को असहाय पार्टी रिक्शा में बैठे हुए उसने स्वयं से प्रश्न किया आपने क्या करूँ? जहन ट्रेनिंग पूरी कर ली । रूप से उस कारण पक गया था और वो दुबला दिखाई देता था । अब आप पूरे पुलिस ऑफिसर नजर आती हूँ । उसे देखते ही प्राण बोला लेकिन आपको मुझे भी रखनी चाहिए उमा भेजकर हसी तुम क्यों हस रही हो? प्राण ने पूछा मुझे रखते से कोई मजाक थोडी बन जाता है । मैं भी रख सकता हूँ । उमा पहले से भी अधिक तेजी के साथ ऐसी मैं इन की मुझे रखे जाने की कल्पना भी नहीं कर सकती । तो माने जय की और संकेत करते हुए कहा ये जॉनी वॉकर नजर आएंगे । इंतजार करो जब तक कि मैं शादी करके बूढा नहीं हो जाता । जय बोला तब में गाडी भी रखूंगा । डाॅ । उमा खिलखिलाकर हंस पडी तो हिम्मत नगर सकोगे । अगर मैं सहसा उसे महसूस हुआ कि वो क्या कहने जारी है और लज्जा से उसका चेहरा लाल हो गया? नहीं मैं तब भी नहीं रखूंगा । जने मौके का फायदा उठाते हुए उसे तंग करना चाहा और वह तीनों हस पडेगी । प्राण होते हुए कहा मुझे तो कुछ जरूरी काम से जाना है । आप बैठे उसे स्कूटर स्टार्ट किया और हवा हो गया हूँ । उमा बोली जहाँ मुझे तुमसे कुछ कहना है एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात बोलो । जय ने कहा और फिर सोफे पर बैठ गया । पापा बीमार हो गए और फारम बेचना पडा । उनकी हालत तो जानती हूँ । ना जाने वो कब तक ठीक हूँ, विश्वास रखो सब कुछ ठीक हो जाएगा । हाँ मुझे विश्वास है मगर चिंता की बात उनकी बीमारी नहीं बल्कि कर्जा है । कर्जा कैसा कैसा? जैन ने आश्चर्य से पूछा । पापा ने फारम के लिए कर्जा लिया था तो मैं तो मालूम है की उसे पीसी पर भी कुछ ज्यादा ना मिल सका और कर्ज ना चुका है जा सका । सेट अब अदालत से डिग्री ले आया है । डिग्री जी मैंने कहा इसका मतलब है कि लडा नहीं जा सकता हूँ लेकिन तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया? सब कुछ बहुत जल्दी में हुआ और तुम बाहर गए हुए थे । मैं तुम्हें पत्र कहाँ लिखती । फिर मैंने सोचा था कि शायद कोई रह निकल आएगा । अब या तो सीट को रकम लौटाई जाए नहीं तो तुम जानती हूँ । पापा इस सदमे को सहन नहीं कर सकेंगे । उसमें भर्राए स्वर में कहा जाए तो कुछ करो । मैं तो बहुत परेशान हूँ । जैन हल्के से उसका हाथ दबाया और गालों पर बहते आंसू को पूछा तुम चिंता मत करूँ क्या? मैं तो में गलियों में भटकती देख सकता हूँ क्या? मैं तो में बर्बाद होने दूंगा । लेकिन अभी कुछ दिन पहले तो बताना चाहिए था रुपया देने की आखिरी तारीख कौनसी है । आज से चौदह दिन बाद उमा ने अभी आंकी पहुंची तो उनसे गृह मत करूँ । मैं सब इंतजाम कर दूंगा । अच्छा अब जरा मुस्कुराओ तो सही और तभी घुमा के होटों पर मीठी मुस्कान खेल गई । जे खाट पर लेटा छत की और टकटकी लगाए देख रहा था । गांव से आने के बाद उसके पिता ने ये मकान बनवाया था । तब इसका कोई खास मूल्य नहीं था । मगर अब कीमतें चढ गयी थी । अब इसका दाम पचास हजार से कम नहीं था । जय के पिता साधु प्रकृति देते सुबह उठकर पूजा करते हैं तथा रामायण और गीता का पाठ उनके जीवन का एक अटूट अंग बन चुका था । जय को उनकी पूजा विधि अब तक याद थी । संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण पार्टी दंडवत प्रणाम टी का रूप और फूलों की सुगंध जय अभी तक नहीं बोला था । उसके पिता की मृत्यु फिर गति रुक जाने से हुई थी । वो अभी बच्चा ही था जब उसकी माँ का स्वर्गवास हो गया था । इसीलिए पिता की मौत के बाद जय का पालन पोषण अत्यंत इसने से किया गया था । उसकी जो भी इच्छा होती उसी समय पूरी कर दी जाती है । जैसे लोगों से मौत की चर्चा अक्सर हुई थी मगर उसके मन पर कभी बुरा प्रभाव ना पडा था । जब लोग होती तो उसका मन हसने को करता । लेकिन जब जहाँ ने पिता की लाश को देखा तब उसे जीवन के एक भयानक सत्य का अनुभव हुआ । जीवन की नश्वरता जय के सामने स्पष्ट हो गई थी । ये मकान उसके स्वर्गीय पिता की यादगार था । उन्होंने इसे बडी मन से बनवाया था । जैनी टुकडे प्लस्तर टूटे फर्श पर रोगन हीन दरवाजों और खिडकियों को देखा । उसके भीतर से एक आह निकली पिता की तरफ उसे भी इस पुराने मकान से गहरा लगाव था । नींद से उसकी आंखें भारी हो रही थी लेकिन वह सोना सका । वह काफी रात गए तक जाता रहा । चौदह दिन के अंदर अंदर इतनी बडी रकम का इंतजाम करना था । दो चार हजार तो आसानी से घंटे किए जा सकते थे, मगर बीस हजार का प्रबंध करना कोई मामूली बात ना दी । इसके अलावा वक्त भी बहुत कम था । उसने तमाम दोस्तों के बारे में सोचा, लेकिन उसे किसी से आशा थी शंकर मदद कर सकता था, मगर उसने अभी तक पहले वाला कर जीना चुकाया था । फिर विक्टर वाली घटना ने दो उन दोनों के बीच गहरी दरार डाल दी थी । जैन विमल के बारे में सोचा विमल इस रकम का प्रबंध कर सकता था । जय का मन तो नहीं करता था कि वह विमल से कहे, मगर कोई दूसरी रहा नहीं सुनाई पडती थी । इसलिए जैन ने दिमाग से मिलने का निश्चय कर लिया । उसने सोचा उमा के प्यार के लिए ये कोई बनी तो देने ही पडेगी । कुछ जिस समय विमल के दफ्तर पहुंचा, आकाश में काले काले बादल छाए हुए थे और हवा बिलकुल बंद थी । मीना टाइप कर रही थी । उसने एक उचटती नजर जयपर डाली । आखिर ये नए नए आने वाले बहुत से चाहते । क्या है वह मन ही मन पर पढाई मीना इस मिलने वालों से तंग आ चुकी थी । वो उसकी तरफ जरूरत से ज्यादा घोलकर देखते और उससे उलटे सीधे सवाल कर दे दिए । जय के सीधे साधे कुर्ते और पजामे को देखकर वो जल गई । इस बात में मीना को खिला कर दिया कि जय साइकल पर आया था । उसे गरीबी और गरीब दोनों से सख्त नफरत थी । गरीबों को किसी ऐसे गहरे अन्य कोई में रहना चाहिए जहाँ से उनकी शक्लें नजर ना आए । वो सिर्फ इसी ढंग से सोचती थी । फरमाई मीना ने उसे उपेक्षा से देखते हुए पूछा हूँ, आप क्या चाहते हैं? जैन ने मीना की इस अजीब सी आवाज को सुना । उसी का मानव वो शत्रु की सीमा में दाखिल हो गया । वो नम्रता से बोला मैं डिस्टर्ब करने के लिए माफी चाहता हूँ । मेरा नाम जाए हैं । मैं विमल से मिलना चाहता हूँ । वो मेरे पुराने दोस्तों में से एक है । मीना ने सोचा हाँ, ये दूसरी बात है । बॉस के दोस्तों का यहाँ हर वक्त स्वागत है । मगर वो सोच भी नहीं आ सकती थी कि बॉस के ऐसे दोस्त भी हो सकते हैं । उससे कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए हिचकिचाहट भरे स्वर में कहा, अब आप तस्वीर रखी मैं जाकर मालूम करती हूँ । हो सकता है वो आपसे मिल सके । वो अंदर चली गई और जय इंतजार करने लगा । जय कि विमल से कोई गहरी आत्मीयता नहीं थी । विमल भी जय को कोई खास महत्व नहीं देता था । मैंने सोचा चाहे उसे विमल के सामने गिडगिडाना ही क्यों ना पडे लेकिन वह बीस हजार रुपये हासिल कर के ही रहेगा क्योंकि वो उसके प्रिय उमा की जिंदगी का सवाल था । मीना नहीं लौट कर कहा आप अंदर जा सकते हैं, दरवाजे पे पडे हल्के रंगीन रेशमी पर्दे को हटाकर जो धीरे धीरे कमरे के अंदर दाखिल हुआ वो ऍम तो आज इधर कैसे भूल बडी विमल ने हाथ आगे बढाया । सूरज पूर्व की बजह पश्चिम से भी निकल सकता है । मैं तो सुना था की तुम गांव में रहने लगे हूँ और शहर लौटने का इरादा छोड दिया है । अब कुछ दिनों के लिए गया था जय बोला घूमने भेजने विमल जैसा मैं तो समझता था कि लखनऊ तुम्हारे लिए घूमने फिरने की जगह है क्योंकि मैं तो में खाली गांव का ही समझता हूँ हूँ । विमल का स्वर्ग यंग से भरा था तो यहाँ से गए मगर किसी की जुदाई को बर्दाश्त ना कर सके और जल्दी लौट आए । वो ही कह रहा हूँ ना जैको विमल कर रहे वाले मित्रतापूर्ण लगा वो धीमी से मुस्कुराया और बोला ये ठीक है । गांव में पैदा हुआ था, लेकिन अब तो खाली लखनऊ भी बन चुका हूँ । यही वजह है कि ज्यादा ऐसा में लखनऊ से बाहर नहीं रह सका । ठीक है तुम अपनी हूँ । लगता है कि तुम्हारा बिजनेस कूद चमक उठा है । कमाल है तो मैं अकेली ही सब कुछ करते हो । विमल को ये चापलूसी अच्छी लगी । उसकी आंखों से दुश्मनी का भाव पल भर को खत्म हो गया । बोला काम के मामले में मैं सिर्फ अपने पर ही भरोसा करता हूँ । ये है दी अच्छा लोग इतने धोखेबाज हो गए हैं कि किसी पर आज के जमाने में की नहीं किया जा सकता है । मौका मुनासिब समझते हुए मैंने कहा मैं तुम्हें तकलीफ देने आया हूँ । मुझे फोरेन कुछ रुपया चाहिए । कर्ज के तौर पर तो मैं बहुत जल्दी ही वापस कर दूंगा हूँ । कितना पचास सौ ज्यादा भी दे सकता हूँ । वापस करने की जरूरत नहीं । मैं ये रकम दान खाते में डाल दूंगा । विमल के शब्दों से जय के दिल पर गहरी चोट लगी । वो चुप रहा क्योंकि वो स्थिति अपने अनुकूल बनाना चाहता था । किसी तरह उसने कहा नहीं, मुझे इतना नहीं ज्यादा चाहिए बीस हजार तीस हजार । विमल ने आश्चर्य से कहा तुम्हारा दिमाग तो ठीक है इतनी बडी रकम दो तुम अपनी दस साला मुलाजम मत बिना करवा सक होगी । तुम लडकी तो नहीं हो जिसे आपने दहेज के लिए इतना रुपया चाहिए क्या? नौकरी छोड कर तुम्ही कोई बिजनेस शुरू करना चाहती हूँ? नहीं नहीं वास्तव में मुझे रकम किसी की मदद के लिए चाहिए तो राजेंद्रबाबू को तो जानते ही हूँ । वो लखनऊ का शिकार है । उनका परिवार मुश्किल में फंस गया है । उन्हें रूपये किसी का कर्ज चुकाने के लिए चाहिए । अदालत में उनके खिलाफ डिग्री दे दी है । अब तक विमल हसी मजाक में बाढ डालने की कोशिश कर रहा था लेकिन राजेंद्र बाबू का नाम सुनकर उसके तन बदन में आग लग गयी । वो गुस्से में चिल्लाकर बोला क्या तो मुझे बेवकूफ समझते हो जो इतनी बडी रकम उधार देखो जब तक तुम अपना मकान नब्बे चालू ये रकम कैसे वापस कर सकते हो? मैं तुम्हें बीस हजार दे दूं और तो मौके का फायदा उठाते हुए राजेंद्रबाबू की लडकी से शादी कर लोग मेरी रकम मारी जाए और ऍम अगर राजेंद्रबाबू को रुपयों की जरूरत थी तो उन्होंने क्यों भेजा? वो खुद एक वकील है । अपना केस अच्छे ढंग से पेश कर सकते थे । ये खडा हो गया । अब तक उसने अपने पर काबू रखा था । लेकिन अब असंभव था । ठीक है मैं चला हूँ लेकिन इसलिए तुम्हें अफसोस करना पडेगा तो में उमा का अपमान करने का कोई हक नहीं । जिस दिन मेरा हाथ तुम्हारी गर्दन पर पड गया तो मैं दिन में तारे नजर आ जाएंगे तो दौलत को सब कुछ समझते हूँ । मैं तुम्हें बताऊंगा कि सच्चाई इसके प्रतिकूल है । जैनब नृत्य विमल को देखा और कमरे से निकल गया । विमल जाते हुए जय को यू देखा । जैसे वो उसकी हस्ती को मिटाने पर तुम गया हो । उसकी आंखों में नफरत झलक रही थी । बात हुई थी । मीना ने शोर सुनकर कमरे में आते हुए पूछा कुछ नहीं जो आदमी अभी भी मिलने आया था उसने मुझे गुस्सा दिला दिया । खाना रहेगा वो बुरी सुंदर है । पुलिस सिर्फ मीना को आश्चर्य हुआ लेकिन मुझे तो एक देहाती दिखाई देता था । डी एस देहाती तो वो है ही । तुम भी लोगों को पहचानने में चतुर हूँ । वो एक गांव में पैदा हुआ । वकील राजेंद्रबाबू के मकान पे मेरी उससे मुलाकात हो गई । दोबारा आए तो तुम उसे धक्के मार मारकर बाहर निकाल देना । क्यों नहीं वो इसी का हत्या है जाता है । विमल उसको अपने कई खींच कर उसकी पीठ पर हाथ फेरा और जय गुस्से में भरा घर लौटा । उसे विमल से रुपये मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी । विमल व्यापार में काफी रुपया कमाया था । वो चाहता तो जय की मदद कर सकता था लेकिन उसे रूपये न देकर उसके मकान का जिक्र किया था । उसने तो अभी तक मकान के बारे में सोचा ही ना था । उसके पिता ने वसीहत में साफ लिखा था कि जब तो कोई खास जरूरत ना पडे, मकान न बेचा जाएगा । खुद जय को भी मकान से विशेष लगा था । उसकी ईजी उसे प्यार था । वो उसके स्वर्गीय पिता की आखिरी यादगार थी । नहीं वो इसे हरगिज ना बेचेगा । सारे जाते अंतर धवन में ही गुजर गई । पिछले पहर उसकी आप थोडी देर के लिए लगी । पनीर में भी उसे मकान के सब के आते रहे । उसे लगा कि मकान में भयानक आग लग गयी है जिसमें उसका रेडियो सुपर से तथा दूसरी वस्तुएं जलकर राख हो गई है । अचानक उस क्या खुल गयी? वो बिस्तर पर उठ कर बैठ गया । सुबह के पांच बज रहे थे । पडोस में कोई गांव गांव कर रहे थे । उसकी नजर दीवार पर लटके कैलेंडर पर पडी । केवल दस दिन बाकी थे । इसी बीच कर्ज चुकाना था । उमा के मिलने पर जाने का कोई उम्मीद नजर नहीं आती । विमल ने भी इंकार कर दिया तो समझ में नहीं आता कि क्या करूँ । उमा खुद परेशान थी । यदि भी उस दिन वह विमल से मिले बिना लौट आई थी । लेकिन वहाँ पर जाने का उद्देश्य तो रकम का इंतजाम करना ही था । अब तो वो भी उम्मीद खत्म हो चुकी थी । उसकी आंखों में आंसू तैरने लगे । वो टूट इस्वर में बोली तो कोई रास्ता जरूर निकालो । वह लगने लगी । मम्मी बेहद परेशान है । वो सारी सारी रात चाहती रहती है । उससे ये सब नहीं देखा जाता है । उमा ने अपना चेहरा दोनों हथेलियों में छिपा लिया । वो काम के बोझ से टूट चुकी थी । ये अनमने भाव से उसके सामने बैठा सोच रहा था । उमा क्या करेगी? अपने बूढे बीमार बाप को कहाँ जाएगी? कानून किसी का लिहाज नहीं करता हूँ । वो तो एक मशीन की तरह है । इसके लिए सब बराबर है । कानून की मोटी मोटी पुस्तके, जजों की कठोर चेहरे और झूठ की छाया में सनी वकीलों की बातें । यही आज के कानून कर रूप रह गया है । माँ की गोमती चीखते हुए बच्चे को छीन लिया जाता है । किसी को किसी के दर्ज से मतलब ही क्या है? जमीन को राजेंद्रबाबू की बीमारी और उमा के आवासों से भला क्या सरोकार हो सकता है? सहजा उसके सामने अतीत का एक चित्र उभरा वाराणसी के घाटों पर खडा था । सामने एक चिता चल रही थी जी मैंने सोचा ये है इंसान की आखिरी मंदिर । हर चीज नश्वर है । हमारा शरीर, हमारा मकान, हमारी संपत्ति सब एक दिन रात हो जाएंगे । फिर लगाव और अभिमान किसी और जय का जहरा प्रसन्नता से चमक उठा वो उमा की तरफ देखकर बोला टिकट मत करूँ, एक हफ्ते के अंदर तुम्हे रुपया मिल जाएगा । मैंने रास्ता ढूंढ निकाला है । बस अब खुश हो जाओ तो कैसे इंतजाम करोगी । तुमने संदेह के स्वर में पूछा तुम देखती जाओ ये राज की बात है तो तुम कुछ गलत काम मत करना । उस ने चिंतित स्वर में कहा जाए बोला अब चिंता छोडो बस ऍम । जय के शब्दों ने उमा को धीरज बंधाया । उसने अपने आप सुपोर्ट डाले । लगा की निराशा के बादल छंट गए हैं और आशा का सूर्य निकल आया है उसे जयपुर पूरा पूरा भरोसा था । वो हमेशा अपने वादे को निभाता रहा है । उमा मुस्कुराने लगी । जय की ईमानदारी और सच्चाई पर शक नहीं किया जा सकता था । उसने जिन लोगों को अच्छा समझा वे दूर देखे और जिनको नफरत से देखा वे पूजा की योग्य साबित हुए थे ।

सातवाँ फेरा -08

भारत है । हॉस्टल मैट्रोपोल पहुंचकर जैन ने अपना सामान खोला । उसने टूथपेस्ट और शेव करने का सामान निकालकर ड्रेसिंग टेबल पर सजा दिया । घर बिक जाने का उसे दुख था । उसकी बहुत कम कीमत मिली थी क्योंकि जल्दी में बेचना पडा था । फर्नीचर समेत कुल चालीस हजार मिले थे तो किताबों से भर एक अलमारी अपने साथ ले जाया था । वो इन पुस्तकों को नहीं छोडना चाहता था क्योंकि ये उसके अच्छे और पूरे दिनों की साथ ही थी । मेट्रोपोल हॉस्टल के कमरे काफी बडी और हवादार थे । बाहर बैठने के लिए लौट था इसलिए जय ने उसे चुना था । पहले तो उसे लगा कि वह अपने ही नगर में शरणार्थी बन गया है । मगर धीरे धीरे होटल में उसके कुछ दोस्त बन गए और वहाँ का जीवन उसी अच्छा लगने लगा । अकेले में जब कभी वह उकताहट महसूस करता हूँ, अपने बराबर के कमरों में किसी दोस्त से गपशप करने चला जाता हूँ या फिर बाहर लॉन में बैठक कोल्ड ड्रिंक्स पीता हुआ सिगरेट टूटता रहता । शाम का वक्त था कर इंकार से उतरा । वो बाजार से शॉपिंग करके लौटा था । उसने शीला के लिए चमडे का एक खूबसूरत पर इस खरीदा था । पर मिला ने कहा, कल होली है तो तुम लोग नहीं लोगे । यहाँ मैं तो भूल ही गया था । उसने खोले हुए स्वर में कहा लाभ गहरा लाल और काला रंग खोले ताकि कपडों पर पडने के बाद कुछ दिन तक किया तो रहे । बच्चों ने चाहते हुए कहा उसमें कुछ चुनावी मिला तो ताकि कुछ पक्का हो जाएगा करेंगे । उन दिनों को याद किया जब वो खुद एक बच्चा था तो होली के मौके पर वह कैसे खुशी महसूस करता था । वो तरह तरह के रंग खरीद कर लाता मगर फिर भी उसका मन नहीं भरता था । तब वह दूसरे बच्चों के साथ मिलकर रंग को पानी में खोलता और पकने के लिए अंगूठी पर चढा देता था तो आलू को काटकर दो टुकडे करता हूँ । चाकू से उन का ठप्पा बनाता । उन पर काली सी आई या पक्का रंग लगता और हर मिलने वाले की पीठ पर लगा देता । खुशी के बारे सारी रात उसे नीना दी । सुबह उठते ही वो रंग लेकर पिचकारी में भरता और हर आने जाने वाले पर फेंकी लगता । वहीं बातें जो कभी उसे आनंदित कर दी थी बिलकुल बेकार लग रही थी । जीवन इच्छाओ और प्रेरणाओं का एक नंबर से जिला है जीवन तो सागर की उन लहरों के समान है जो लगातार किनारों से आकर टकराती रहती है और मिट्टी रहती है । होली का त्यौहार पे मिसाल है इस मौके की धूम धाम हसी मजाक और खुशियाँ बेजोड हैं । खोली से एक दिन पहले मोहल्ले में पैसे जमा किए जाते हैं और लकडियाँ खरीद कर सडकों के चौराहे पर टीले की शक्ल में चुन दी जाती है । रात को आग लगाई जाती है । इधर शोले होते हैं और उधर ढोलक बच्चे लगती है । दूसरे दिन जब बात बुत जाती है तो रग से बच्चे बूढे सभी होली खेलते हैं यानी फेंका जाता है । गुलाल उडता है और लोग भांग पीकर खुशी से नाचने गाने लगते हैं । दोपहर के बाद हम खत्म हो जाता है । लोग वापस घरों को लौट पढते हैं । नहा दूर कर कपडे बदलते हैं और मित्रों तथा रिश्तेदारों से मिलने बाहर चल देते हैं । सडकों पर दोस्त एक दूसरे के गले मिलकर बधाई देते हैं । करीब सुबह उठा तो उसका मन उत्साह से भरा हुआ था । बच्चों की खुशी भरी आवाजें मकान में गूंज रही थी । उसने उठकर शेर की और दूसरा हुआ कुर्ता पजामा पहना । ड्रेसिंग टेबल के शीर्ष में अपने चहरे को निहारा । वो करीब चालीस वर्ष का हो चुका था । चाहे इस आयु में ताजगी खत्म हो जाती है । उसे दुखी मन से कनपटियों के सफेद बालों को देखा । अक्सर उस समय की इस गति के बारे में सोचता । उसे लगता समय की गति घडी में लगे छोटे छोटे पहियों के समान है । ना अधिक तेज, ना बहुत सुस्त । हमारा अतीत मूर्खताओं से भरा है करेंगे । एक लंबी सांस ली और बालों में कंघी करने लगा । अभी उसने गंगी मेज पर रखी हुई थी कि ठंडे पानी की बौछार उससे टकराई और वातावरण में एक साथ कई कहाँ कहीं गुंज उठे । उस लिए सफेद कपडों पर रंगों के लहरिये बन गए थे । देखो सफेद कुर्ती पर लाल रंग कि अच्छा लग रहा है । बहुत सुन्दर दीदी जहर नहीं । नहीं नहीं आवाज एक साथ वो जुटी । करन ने अपने बीजी कुर्ते का कातर दृष्टि से देखा और मुस्कुराया । शीला ने शर्मा कर सिर झुका लिया । बच्चे हैं ऐसे लगे करेंगे अपने हाथों पर थोडा सा गुलाल मिला और सामान्य भाव से दरवाजे की तरफ बढा । खुद दरवाजे के पास पहुंचकर तेजी से शीला की तरफ मुडा । उसने शीला को कंधे से पकडा और गुलाल उसके माथे, सिर और गालों पर मार दिया । इसी संघर्ष में शीला की एक चूडी टूटकर करन के हाथ में चुके उसके हाथ की पकडे कुछ ढीली हुई तो शीला अपना हाथ छुडाकर भागने थी । वो पूरी तरह भेज चुकी थी और धूप में खडी काम रही थी । उसकी साडी रंगों में डूब चुकी थी और चेहरा गुलाल कि पर्यटकों के पीछे जीत गया था । बी जे तंग लिबास में से उसके शरीर का एक एक अंक साफ नजर आ रहा था । उसका सिर लाल और हरे गुलाल से भरा था । वह खडी खडी बदला लेने की युक्ति सोच रही थी । तभी उसे लाल रंग से भरे लोटी को मेज पर से उठाया और करन की तरफ बडी वो देख खबर खडा था उसे वह रंग और बाद में गुलाल, उसके चेहरे और कपडों पर माल दिया करेंगे । लंगूर नजर आने लगा । बच्चे शोर मचाने लगे । प्रमिला भी उनमें शामिल हो गयी । गुलाल और रंग तब तक एक दूसरे पर फेंका जाता रहा जब तक कि फर्ज और दीवार भी लाल ना हो गई । होली वीना के लिए खुशी का संदेश लेकर नहीं आएगी लेकिन फिर भी वो इतनी बुरी थी । राजेन्द्र बाबू को जय के एहसानों का पता नहीं था । उनसे सब मामला छिपाकर रखा गया था । वीना जय का सदा सम्मान किया था और अब तो वहाँ से अपनी बेटी के समान समझने लगी थी । कौन इतना किसी के लिए करता है? बिना जानती थी कि जय को अपने घर से कितना लगा था । लेकिन फिर भी वो बलिदान से पीछे नहीं हटा था और जब उसे जय को मकान बेचने पर झटका तो उस लिए शांत भाव से जवाब दिया मैंने अब तक पूरा किया है । सचमुच जय ने अपनी कुर्बानी देकर पूरे परिवार की रक्षा की थी । उसे अपमानित होने से बचाया था । साइकिल के रुकने की आवाज आई तो विचारों में डूबी मीना चौक पडी तुम्हारी लंबी उमर है बेटा । मैं अभी अभी तुम्हारे बारे में ही सोच रही थी । जैरी साइकल खडी की और जेब से थोडा सा गुलाल निकाला । बीना के माध्यम पर गुलाल लगाया और उसके पापा को छुआ । आओ । कुछ खाते लोग बिना ने उसे आशीर्वाद देते हुए इसलिए हम भरे स्वर में कहा जैन ने मना किया नहीं मैं तो पहले बहुत खा चुका हूँ । नाना थोडा जरूर खाओ । उबाने खुद अपने हाथ से बनाया है । मुझे के इनकार की परवाह किए बिना अंदर चली गई । सहसा ठंडे पानी की बौछार उसे टकराई और वो काम उठा । उसने सोचा शायद अनिल ने पिचकारी मारी है लेकिन फिर पानी की दूसरी बोछारों से टकराई । अब वह जिधर भी बचने के लिए भागता उधर से ही रंगीन पानी उसे बीज देती । यही रुकूंगा, रन मेरी आंखों में पड गया है । वो चलाया । तभी प्राण होटों पर विजयी मुस्कुराहट लिए पीछे से निकला । उसके हाथों में पाओ से दबाकर चलाने वाली बडी पिचकारी थी जय चलाया । इस मुसीबत को तो दूर रखो दूर खडी भी उन्होंने हसते हुए जय को निहारा और बोली तुम तो बिल्कुल सर्कस के जोकर नजर आ रहे हो जाये चुप रहा भाग कर उस लिए उमा की कलाई पकड ली । अब नहीं नहीं तुमने बनाया गया में अभी अभी ना अगर आई हूँ लेकिन जय कुछ सुना ही नहीं चाहता था । वो बोला अगर ये बात है तब तो मैं तुम्हें सही वक्त पर पकडा । साफ कपडों पर ही रंग चमकता है । इतना कहकर उसने अपने हाथ की एक छोटी सी बोतल में से गाढा घाटा रंग उस पर उडेल दिया । अब उमा जितनी भी छुडाने की कोशिश करती रही, रंग उतना ही फैलता जाता हैं । उसकी गर्दन और चेहरे पर भी जाम लगा था । अनिल और प्राणी जब उमा को फंसे देखा तो उन्होंने जयपर रंगों की बोछार कर दी । जैने जेब से कागज का लिफाफा निकालकर कहा, रुको पहले मुझे मल्या दुख, उमा, कलाई, छुडाकर भाग नहीं जा दीदी की जैसे उसकी गर्दन और चेहरे पर सुनहरी रंग का गुलाल मार दिया । तुमने जूजू रंगों उतारना जहाँ वो उतना ही गहरा होता गया । जय ने हसते हुए कहा मुझे इतनी आसानी से उतरने वाला नहीं । इसे अभी कुछ दिन लगेंगे । ये तो मैंने खास ढंग से बनाया था । तुम देखते जाओ मैं अभी से साफ करके आती हूँ । उसने अन्दर की तरफ जाते हुए कहा । उसकी जाते ही जैन ने अपना भेजा, कुर्ता सुखाने के लिए उतारा । अचानक उमा कोई शरारत सूची । वह चुपके से आए और उसने काला और लाल रखते हैं । जय के मूव शरीर पर उडेल दिया । जब तक को संभालने की कोशिश करता तब तक उसकी शक्ल ही बिगड चुकी थी । अनिल ने ताली बजाकर कहा हनुमान जी को देखो । अभी सभी ढाका मारकर हस पडेंगे । बिना एक प्लेट में मिठाई और समोसे रखकर लाइन लो बेटा एक दो । मैंने कहा ना कि इसे उमा उसका वाकिया अधूरा रह गया । जब उसकी नजर उमा के गुलाबी चेहरे पर पडी थी । वो मुस्कुराती हुई बोली मैं तो पल भर को भूल ही गई थी कि यहाँ झोली है और उमा अपना जहर साफ करने के लिए अंदर की और भाग गई । अब बाबू जी की तबियत कैसी है? जाॅन पूछा हम बेटा अभी तो ठीक नहीं । वीणा ने निराश स्वर में कहा काफी कमजोर हो गए हैं । डॉक्टर ने कहा है कि दिल पर असर हुआ है तब मैं उन्हें परेशान नहीं करूंगा । जय नहीं कहा । मुझे सुन कर दुःख हुआ की उन की तबीयत ठीक नहीं है । इतना कहकर वह बाहर आया । उसे साइकल उठाई, हाथ जोडकर नमस्ते की और चल दिया दिमाग और शंकर विक्टर में बैठे शराब पी रहे थे । विमल बोला तो नहीं मालूम है जय पुलिस इंस्पेक्टर बन गया । हाँ, मैंने सुना था शंकर बोला नया उसे तब से जानता हूँ जब मेरे साथ स्कूल में बढा करता था । पुलिस ही उसके लिए सही जगह थी । विमल हजार वो मेरे पास बीस हजार की रकम उधार मांगा था ताकि वकील साहब का कर्ज चुका सकें । किया उसने मुझे बेवकूफ समझा था । क्या वो इसके लिए तो भारी पास आया था लेकिन वो इसी के लिए मेरे पास आई थी । क्या तुमने उसे रुपए दे दिए? विमल ने पूछा, शंकर की आंखों में एक अर्थपूर्ण चमक पैदा हुई तो मालूम होना चाहिए की संकर बिना मतलब किसी को कुछ नहीं देता हूँ । ये काम तो मैंने मानवतावादियों के लिए छोड रखा है । मैं सुना है कि वकील साहब का कर्ज चुकाने के लिए जाने अपना मकान बेच दिया है । मुझे तो पहले मालूम था कि इतना रुपये कहीं से ना मिल सकेगा है । वकील साहब पुलिस वालों से सत्य नफरत करते हैं । वो अपनी लडकी की शादी किसी पुलिस इंस्पेक्टर से हरगिज ना करेंगे । तुम्हारा क्या हुआ तो भी तो उम्मीदवार थे । विमल ने पूछा शंकर बोला ना मैं नहीं मेरी तो शोभा से मंगनी हो चुकी है । उसके पिता एक बडे सरकारी अफसर है । दहेज में काफी कुछ नकद मिलेगा । इसके अलावा वो बिजनेस में भी मेरी मदद करेंगे । विमल बोला ये ठीक है । आजकल बिजनेस में जिस चीज की सख्त जरूरत है वह सिफारिश । शंकर ने कहा तो कोशिश क्यों नहीं करते? वकील साहब तो में पसंद करते हैं । इसके अलावा घर में उन्हीं की चलती है तो वहां जाम उनसे मिलने की नहीं चले जाते हैं । होली का मौका है तो मैं देख के खुश होंगे । खयाल तो अच्छा है । विमल बोला लेकिन उमा मुझे नाराज है । मैंने उसके जन्मदिन पर उसे एक टेपरिकॉर्डर भी दिया था । फिर भी वो मुझे हार जाने वाली नजरों से देखती है । आज चलिये हैं? शंकर बोला मैं तो नहीं समझता कि उसका व्यवहार इतना कटु हो सकता है । है तो लडकी से क्या मतलब? तो मैं तो उसके बाप को राजी करना है । विमल को शंकर की बात वजनी लगी । उसने सोचा यदि राजेंद्रबाबू मान जाते हैं तो उमा की क्या हस्ती हैं जो इंकार करेंगे । ये ठीक है कि उसने विक्टर में कुछ अशिष्टता की थी, लेकिन उस घटना को तो काफी समय हो चुका हूँ और सादा से उसकी कमजोरी रही है । उस जब कभी किसी खूबसूरत लडकी को देखता तो अपना मानसिक संतुलन खो देखता हूँ । इसी आदत ने दो उसे चतुर बनाया था । उसने सोचा जैसी उमा उसकी हुई वो उसे धन का महत्व बताएगा जिससे वो नफरत की नजर से देखती है । फिर उसे मीना के विषय में सोचा मीना भला उस हीरो का क्या मुकाबला कर सकती है । वो तो एक मामूली आवारा लडकी है जिसे मतलब निकल जाने के बाद धक्के मारकर बाहर निकाला जा सकता है । लेकिन ओमा की बात दूसरी थी जितना ही वह दूर भागने की कोशिश कर दी । विमल की जहाँ और भडकी जाती चाहे कुछ भी हो वो उमा को हासिल कर के ही रहेगा । कितनी देर तक वो उसे रख सकेगा, ये दूसरी बात थी । हाँ, जब तक वो सुंदर और जवान रहेगी वो उसे रखेगा । शंकर ने ठीक ही कहा था मगर राजेंद्रबाबू रिश्ते के लिए हां कह दी तो उमा उनकी बात न डाल सकेगी । विमल शाम होते ही राजेंद्रबाबू के बंगले पर पहुंचा । उमा के व्यहवार में घटना का भाव था और वीना का वो चढा हुआ था । पर राजेंद्रबाबू नहीं । उसे स्नेहा भरी नजरों से देखा । उन्होंने वीना को कुछ मिठाई लाने का संकेत दिया । वेना माते में बाल डाल कमरे में निकल गई । उसे विमल कभी अच्छा नहीं लगा था । लेकिन राजेंद्रबाबू ने दुनिया देखी थी और वह धन के महत्व को समझते थे । उस सब गुनाह माफ कर सकते थे । मगर निर्जनता उनकी दृष्टि में सबसे बडा अपराध था । लेकिन वीना आज जनवादी थी । अमीरी गरीबी, उसके लिए मामूली बात । ये दीपी राजेंद्रबाबू अधिक ना बोल सकते थे । मगर विमल को आया देखकर वह बहुत खुश हुए थे । ये अकेला विमल था जो इस अवसर पर उनसे मिलने आया था । उन्होंने विमल से शिकायत भरे स्वर में कहा कि वह कभी कबार ई की वो आता है, कोई नहीं जानता कब क्या हो जाए । उन्होंने दुखी स्वर में कहा, बेटा तो मेरी आखिरी उम्मीद हो, ये तुम्हारा अपना घर हैं । आने में हिचकिचाहट मध्य क्या करूँ? और जब विमल जाने के लिए उठा तो उन्होंने उसे प्यार से थपथपाया । जब जा रहा था तो दरवाजे पर उसे उमा मिल गई । विमल ने हाथ जोडकर नमस्ते गी । मगर वो दूसरी तरफ देखने लगी और जल्दी से कमरे में चले गए । विमल के होटों पर एक घंटा भरी मुस्कुराहट डुबरी । उसने कसम खाई और मन ही मन कहा । एक दिन में तो मैं शादी कर के लिए जाऊंगा । तब सब कुछ बदल जाएगा और तुम मेरे सामने गिडगिडा होगी । उसने गुस्से में कार स्टार्ट की और चल दिया हूँ । प्रमिला ने खुला लिफाफा करन की तरफ बढाते हुए कहा कल शाम की गाडी से पिताजी आ रहे हैं । करेंगे जल्दी से पत्र पढा । उसके ससुर दिल के मरीज और डॉक्टर से मशविरा करने आ रहे हैं । शाम के वक्त उससे पुरानी फोर्ड गाडी को ग्यारह से निकाला लिखते हुए रेडियेटर में पानी भरा और टंकी में पेट्रोल डालकर गाडी स्टार्ट कर दी । बडी मुश्किल से वो स्टेशन तक पहुंच पाया । शीला करन मटमेला हो गया था और वह कुछ थकी तथा कमजोर नजर आ रही थी । ये शायद लंबे सफर का असर था । वह काफी खुश थी क्योंकि जल्दी फिर करन से मिली थी सूती सूत्रीकरण क्या खुल गई वह बिना आवाज के शीला के बिस्तर की तरफ बढा । उसे डरते हुए अपना हाथ शीला के माथे पर रखा था । वो देख खबर हो रही थी । करेंगे कुछ बाल तक उसे निहारा और फिर आपने हो उसके हो तो बना दिए । शीला क्या खुल गयी? वो अचकचाकर बोली कौन? अब मैं हूँ तो इसीलिए तो मुझे हर आए थे । उसी करंट को परे हटाते हुए कहा अब मैं तुमसे प्यार करता हूँ तो उस बताया प्यार प्यार मैं ये शब्द बहुत बार सुन चुकी हूँ । क्या ये प्यार करने का ढंग से प्यार का संबंध मन से हैं? ढंग से नहीं करेंगे । दरवाजे की तरह देखा । बराबर वाले कमरे में उसकी पत्नी बच्चों के साथ हो रही थी और यहाँ वो झूठा प्रेम प्रदर्शित कर रहा था । ये तीन हैं क्या? शीला नहीं सच कहा ये मात्र वास्ता है । उसी शीला के प्रश्न का उत्तर देना चाहिए । उसे कहना चाहिए कि मनोज शरीर का आपस में गहरा संबंध है । इन्हें अलग नहीं किया जा सकता करेंगे उसे अपनी बाहों में जब करते हुए कहा दूसरा कोई रास्ता भी तो नहीं मैंने तो पहली बार जब तुम्हें मंडप में देखा था, तभी तो में अपना मंडी बैठा था । वादा करूँ तो मुझे हमेशा प्यार करोगे । हाँ हाँ, उसने अंधेरे में धीमी से कहा अब तुम मक्की बिस्तर पर चले जाओ । अपना वादा याद रखना करने अलग होते हुए कहा । अलग होते ही वो अपने कमरे में चला गया । जयसिंग टेबल पर रखे टाइम पीस में चार बज रहे थे । सुबह होने को थी । वह जल्दी से अपने बिस्तर में घुसकर सोने का प्रयास करने लगा । लखनऊ बागों का शहर है । गली मोहल्ले के बाहर छोटी छोटी पार्क बनी है । बच्चे इनमें उछल कूद करते हैं और बूढी पत्थर की बेंचों पर बैठकर कपडे मारते हैं । दिलकुशा के बाग बगीचे और विंगफील्ड का बार फूलों से भरे रहते हैं । रेजीडेन्सी पार्क भी देखने लायक है । इसके पुरानी दीवारों पर गोलियों के निशान हैं, जो अठारह सौ सत्तावन के स्वाधीनता संग्राम की याद दिलाते हैं । वसंत ऋतु बीत गई थी । फूलों की पत्तियां मुरझाकर बिखर गई थी । घट सूखकर पीली पडने लगी थी । मैंने सोचा मैट्रोपोल हॉस्टल की इस छोटी से कम ड्रीम गर्मियां कैसे गुजरेगी? वह खुले मैदान में खाद डालकर सोने का था । अब उसी नीचे छत वाले घुटे कमरे में सोना होगा । बिजली की पंखी की गर्म हमारा सहन करनी पडेगी । राहते कैसे गुजरेंगे तो एयर कंडीशनर भी नहीं खरीद सकता था । उसके पास इतने रुपये चाहते । वो सोच में डूबा लॉन में बैठा था । तभी बेरी ने आकर कहा साहब आपका फोन है ये हडबडाकर उठा उसी सोचा किसका फोन हो सकता है । वो फोन रिसीव करने लगता । अब पहले मैं बोल रहा हूँ । दूसरी तरफ से प्राण की मर्जी थी । हुई अवाजाही पापा को फिर दौरा पडा है । माननीय आपको बताने के लिए कहा है । तुम कहाँ से बोल रही हूँ अस्पताल से उधर से आवाज आएगी नहीं । मैं पडोस वाले मकान से बोल रहा हूँ । तबियत खराब हो गई थी । अस्पताल नहीं जा ही नहीं सके । मगर डॉक्टर यहाँ गया है । अच्छा पांच मिनट में आया कहकर जहनी टेलीफोन बंद किया और साइकल की तरफ बढा । राजेंद्रबाबू बिस्तर पर सीधी लेते थे । भूल तक ये परसेंट का था । सांस रुक रुक कर आ रही थी । नाक के रास्ते ऑक्सीजन दी जा रही थी । घर के सभी लोग उनके पास खडे थे । शंकर और विमल को भी सूचना मिल गई थी । वो भी आ गए थे । राजेंद्रबाबू ने भर्राए स्वर में विमल से कहा फिर वक्त करीब है मैं जा रहा हूँ वो एक पल रुककर बोले तुम कुछ भी हो, मैं चाहता हूँ तो उमा पाजा करो । उन्होंने हाथ उठाना चाहते । वो नीचे लुढक गया । सेना ने हाथ पकडकर तक कीपर रखा । डॉक्टर ने जल्दी से सिरिंज भरी और इंजेक्शन लगाने लगा । उमा गुमसुम खडी थी । उसके मन को गहरा आघात लगा था । वो बहुत कुछ कहना चाहती थी, मगर शब्द उसके गले में अटक गए । राजेन्द्र बाबू को विमल की मक्कारी और जय की कुर्बानी का पता नहीं था । मगर स्थिति में उन्हें वो सब कैसे बताया जा सकता था? अब तो बहुत देर हो चुकी थी । राजेन्द्र बाबू ने बोलना चाहा मगर आवाज मुझसे नानी की । उन्होंने उमा को अपने पास आने का संकेत क्या उमा पास कर सकता है? उन्होंने सेहत भरी दृष्टि से उसी निहारा और कहा तुम्हारा हाथ अपने हाथ धोना । फिर उन्होंने विमल को अपने पास आने का संकेत क्या ये ही मेरी ये मेरी अंतिम चाय बेटा तो हमेशा इसका हाल रखना । विमल ने सिर हिलाया । उसने अर्थपूर्ण दृष्टि से शंकर को देखा तो शंकर न्यूज की और देखकर आंख हमारी राजेन्द्र बाबू की साथ उखडने लगी । जय वहाँ ऍफ का उसे चुप चाप हो नाटक देखा था । वो कह भी क्या सकता था । वो जानता था कि राजेंद्रबाबू को घुमा के लिए अमीर लडकी की बरसों से तलाश थी और आज वो उन्हें मिल गया था । विमल लगभग था । जैने उमा क्या खुद झुका उसकी हालत घायल हिरनी किसी थी । तुमने पीना की झांकियां को को देखा और फिर शंकर और विमल के चेहरे पर चाय झूठे रेंज को देखा । फिर उसकी नजर अपनी मारते हुए पिता के चेहरे पर गई । पिता के चेहरे पर डर और पीडा की स्पष्ट छाप थी । जय कमरे से निकल कर आया । वह दूसरे कमरे में पहुंचा । उसे घडी की टिक टिक मरने वालों की सांसे के समान लगी । लगा । उसने अभी अभी कोई भयानक सपना देखा है । एक का एक वो चौक पडा । उमा चीख रही थी । राजेंद्रबाबू का बेजान शरीर बिस्तर पर पडा था । शंकर और विमल ने दोनों और से शव को पकडकर धरती पर रखा । सारा कमरा चीखों से गूंज उठा । प्राण व्याकुल था । वीना बेहाल हुए जा रही थी । खुशव की सिर्फ हानि बैठी थी । उस के रोने का स्वर ही दे विदारक था । जब भी आप को नहीं रोक सका उसने सोचा बहुत कितनी भयानक है पल भर पहले जो था वो नहीं । आखिर इंसान कहाँ चला जाता है । कोई नहीं जानता । सुबह हुई शव को नहीं आयेगा । फिर उसे अर्थी पर रखकर एक गर्म चादर से ढाक दिया गया । वीणा ने कलाइयों की चूडियाँ तोड दी । स्त्रियां विलाप कर रही थी । पुरूषों क्या की भी गई थी । अर्थी को उठाकर सडक पर लाया गया । वहाँ संस्कार कानपुर में गंगा किनारे किए जाना था । इसके लिए मोर्चे लाडियों का प्रबंध किया गया था । एक मोटर मलक कर शव को ले गए । शमशान भूमि में पहुंच कर शव को लकडियों के ढेर पर रखा गया और आग लगा दी गई । जहाँ क्राक में जा मिली प्राण बहुत दुखी था । जब उसके बाद से पिता की कपाल क्रिया की तो उसके आंसू निकल आए थे । फिर थोडी देर में सब कुछ राख हो गया था । थोडी देर बाद जब गंगा में नहाकर बाहर निकला तो उसका मन कुछ शांत था । मानव उसके सारे दुख नदी में बह गए थे । रात को सभी थके हारे वापस लौट आए थे । इसके बाद जो मित्रों रिश्तेदारों का आना जाना शुरू हुआ तो प्राण परेशान हो उठा । बीमारी से मौत की घटनाएं उसे बराबर सुनानी पडती । लोग बडी दिलचस्पी से सुनते, जबरदस्ती चेहरों को दास बनाने की कोशिश करते और बनावटी हमदर्दी जताते और फिर चले जाते हैं । जो लोग बाहर से आए थे उनके खाने पीने और रहने का प्रबंध भी प्राण को करना पड रहा था । वह दिनभर सैर सपाटा करते, शाम को वापस लौट आते । प्राण को धार्मिक रीति नीति और क्रियाक्रम का इंतजार भी करना पडा था । पुरोहित के साथ सुबह शाम जाकर उसे पीपल के नीचे दीया जलाना पडता हूँ । धाम को भोजन कराना होता था । घर में हलवाई पूरियाँ चलता और खाने वालों का जमघट लगा रहता । आने जाने वालों का तांता लगा हुआ था । अंत में उसके सिर का मुंडन किया गया । हवन की आंख चली और लोग विदा होने लगे । लोगों ने कहा मौत अटल है, कौन से बच सकता है । मगर लोगों की सहानुभूति उसके दुःख तेरे को काम ना कर सके । उसने सबको धन्यवाद दिया । समय बीतने लगा । धीरे धीरे घाव भरने लगे । अब उसे यथार्थ जीवन जी झूझना था । उमा को लगा दुखों के ये दिन कभी खत्म नहीं होंगे । जीवन दुखों से भरा हुआ है । अब उसे कुछ काम करना चाहिए ताकि माँ के लिए सहारा बन सके । थोडी सी कोशिश के बाद उसे बच्चों को पढाने का काम नगर निगम के एक स्कूल में मिल गया । जब छोटे छोटे बच्चों में घिरी होती हैं । उनकी कहे कहे सुनती तो अपने गम को भूल जाती । जब बच्चों को उछल कूद के देखती तो उसके होठों पर मुस्कान उभर आती । लेकिन घर में वो उदास रहती । वो मनी मनी आंसू बहाती क्योंकि भाग्यचक्र उसे एक ऐसे आदमी के साथ रहने को मजबूर कर रहा था जिससे वह नफरत करती थी । लेकिन वो अपने स्वर्गीय पिता के अंतिम शब्द कैसे भूल सकती थी । एक तरफ कर्तव्य था और दूसरी तरफ क्या है वह दोनों में फंसी थी । पिता की आगे का पालन करने का मतलब था सारी उम्र विमल की गुलामी करना । इस कल्पना से ही वो कब उठी? उसके साथ जीवन गुजारना असंभव था । वो दोनों सफेद और सिया है । रंगों की तरह एकदम अलग अलग थी । उसकी सोचने के ढंग में आकाश पाताल का अंतर था । तुमने जय के बारे में सोचा । उसी सादा भलाई के बदले बुराई मिली थी । वो कैसा बदनसीब था? उमा का मन तडफ उठा । पिता की मौत पर उसी जय का उदास और उतरा हुआ चेहरा देखा था तो उसे अभी तक नहीं भूली थी । उसकी दुनिया उजड रही थी, लेकिन वो चुप था । उसने कुछ भी तो नहीं कहा था । अब भी उनके घर मिलने आता था, पहले की तरह सस्ता था और उन्हें हंसाने की कोशिश करता हूँ ताकि वो राजेंद्रबाबू की मौत के काम को भूल जाएगा । उसने शिकायत का कभी कोई मौका ही नहीं दिया था ।

सातवाँ फेरा -09

भाग हो करेंगे । माथे से पसीना पहुंचा । कितना बुरा मौसम था । कयामत की गर्मी पड रही थी । दिनभर आंधी और धूल धक्कड का जो रहता हूँ पेडों के पत्ते सूख गए थे । हरियाली का कहीं नामोनिशान नहीं था । उसने सोचा लोग शादी के लिए ऐसा नीरज मौसम क्यों चुनते हैं? ऐसा सोचने का भी कारण था क्योंकि उसी तार द्वारा पता चला था कि शीला की शादी पंद्रह जून को तय हुई थी । उस की शादी झांसी के डॉक्टर से हो रही थी । एक अन्य स्थान से भी शादी का निमंत्रण मिला था । वह शीला की शादी में ना जाकर दूसरी में जाना चाहता था । मगर प्रमिला जिद्द कर रही थी । बाद भी ठीक की । उसकी न जाने से प्रमिला के पिता क्या सोचते हैं । सभी दामाद तो वहाँ मौजूद होंगे । ऐसे में उन का न होना सभी को खटकता । प्रमिला को नाते रिश्तेदारों की जली कटी अलग से सुननी पडती । अंतर भी करें । मान गया । उसने मन मजबूत कर तैयारी की और परिवार को लेकर वाराणसी रवाना हो गया । वाराणसी अनूखा शहर है । आधा भाग तंग गलियों और ऊंची ऊंची बिल्डिंगों से घिरा है । दूसरा भाग बडा ही विचित्र है । उसे देखकर शमशान घाट का एहसास होता है । शहर में जगह जगह मंदिर बने हुए हैं । उनमें सादा घंटों का शो रहता है । गलियों में आवारा सांड रहा । चलने वालों से छेडखानी करते हैं और आते जाते वृक्षों को टक्कर मारते हैं । सडकों पर भारी भीड रहती है । सीधा चलना मुश्किल हो जाता है । यहाँ नेकी, बदी और पाप पुण्य में गहरा तालमेल मंदिरों के पीछे अय्याशी के अड्डे हैं । वाराणसी का पान भी कुछ कम मशहूर नहीं । रेशमी गाडियां और लकडी के खिलौने यहाँ की विशेषता हैं । लेकिन वाराणसी के घाटों का जवाब नहीं । उन के किनारे किनारे पुराने जमाने की ऊंची हवेलियां और धर्मशालाएं बनी है । नीचे सीढियों का सिलसिला दूर तक चला जाता है । वे स्टेशन पर उतर पडेंगे । सामान लिख ऊपर रखा और शहर की तरफ रवाना हो गए । घर पहुंचकर करें नहाया और उसके कपडे बदले आंगन में केले की वेदी बनाई गई थी । स्त्रियां रंगबिरंगी साडिया पहने इधर उधर घूम रही थी । घर में खूब चहल पहल थी । शीला वेदी के नीचे बैठी थी । उसकी आगे चुकी थी और जहरा उदास था । उसके चारों तरफ बैठी स्त्रियां उसे उबटन माल रही थी । कुछ एक उसे मेहंदी लगा रही थी । लडकियाँ आकर प्यार से शीला के चेहरे को देखती और मुस्कुराती । फिर शीला को रन दार कीमती साडी बांधी गई । बालों में फूल होते गए और अंदर कमरे में ले जाया गया । कमरा जवान और वो थोडी औरतो से भरा हुआ था । वे शीला को एक नजर देखने के लिए बेच एंड कमरे में दुल्हन के बाल रखती । ढोलक बचने लगी । ऑस्ट्रिया सुहाग गीतकार आने लगी । उनका स्वर बडा मीठा और कोमल था । करण संगीत लहरियों में आनंदित होता रहा । धीरे धीरे उसकी आंखे बंद होने लगी । वो सूफी पर लेट गया । सफर नहीं उसे थका दिया था । आज शीला दुल्हन बनी थी । करण को लगा वह से बहुत दूर चली गई है । कुछ देर बाद उसकी मुस्कुराहटों पर किसी और का अधिकार होगा । वो उसे भूल जाएगी । याद ऊपर अतीत का पर्दा पड जाएगा । संगीत की स्वर लहरियां उसके कानों में चुभने लगी । शीला स्त्रियों में गिरी थी, उससे बात तक करना कठिन था । वो तो उसके बारे में सिर्फ सोच सकता था । भरे करें भैया हाँ अब तक कहा कि शीला के भाई ने पूछा बारात आने वाली है । पापा चाहते कि आप स्टेशन पहुंचकर उसका स्वागत करें । कहाँ? क्यों नहीं आओ मेरे साथ? वो उठा हुआ बोला । वो दोनों बाहर निकले । कारों की एक लंबी कतार लगी थी । वे दोनों जिसका में बैठे उसे फूलों से सजाया गया था । वो कार्ड दूल्हे के लिए थे । वो स्टेशन पहुंचे । गाडी अभी नहीं आई थी । प्लेटफॉर्म पर भेड और शोर था । लोग सामान उठाए । इधर उधर भाग रहे थे । लाउड स्पीकर पर गाडी के आने की सूचना दी जा रही थी । मगर उसकी आवाज भीड के शोर में ठीक से नहीं सुनाई दे रही थी । सारे वातावरण में उमस और उकताहट ठंडे पानी की मशीन के सामने मुसाफिरों की एक लंबी कतार लगी थी । लोग पानी पी नहीं रहे थे बल्कि गले के अंदर उंडेल रहे थे । जैसी गाडी प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी । भीड में भगदड मच गई । हर आदमी बौखलाया, साहब भागने लगा । लाल कमीज पहने कोहली इधर उधर भागने लगा । उसके सिरों पर भारी बिस्तर और सूटकेस रखे थे । खोचे वाले आवाजे लगा रहे थे । गर्म हुई बढिया मिठाई ठेलों पर सामान लादे स्कूली भीड को कुचलकर आगे बढना चाहते थे । लोग कुचल उछलकर अपने को बचा रहे थे । उधर रेल के डिब्बे खचाखच भरे हुए थे । तेल घरने को भी जगह नहीं थी । तीसरे दर्जे के डब्बों में लोग ठसाठस भरे थे । करण को मालूम नहीं था कि बयान किस डब्बे में हैं । वो बारी बारी सभी डब्बे को देखता आगे बढ रहा था । अचानक उसकी नजर एक डब्बे पर पडी । उसमें से बाराती उतर रहे थे । बच्चों के अलावा तीस चालीस पुरुष थे । करण ने एक फ्रॉड व्यक्ति के पास जाकर कहा, मेरा नाम करन है और ये संजय है । हम लडकी वालों की तरफ से आपको लेने आए हैं । ट्रॉट व्यक्ति दुल्हे का बाप था । उसके करण को धन्यवाद दिया और मेहनत में लगी धूल पूछते कहा इससे मिलो, ये मेरा सुनी है । सुरेश के मुस्कराकर हाथ मिला । उसके टेरील, इनकी बुलशिट और सफेद पतलून पहन रखी थी । उसके सिर के बाल बीचोबीच चित्र गए थे । सुरेश शीला का भावी पति था, करेंगे सोचा भलाई इसका और शीला का क्या? मैं क्या दोनों का जोडा अच्छा लगेगा करेंगे । आवाज देकर कुलियों को बुलाया । वे सामान उठाने लगे । करण सुरेश को साथ लेकर बाहर की तरफ बढा । बाहर आकर वो कार में बैठ गए । सुरेश ने कहा मैं पहली बार इस शहर में आया हूँ । चाहता हूँ कि घूम फिर कर इसे देखो । पर फुर्सत शायद ही मिले । हाँ, अबकी कहते हैं शादी की रस्में पूरी करने के बाद अब बहुत थक जाएंगे । करेंगे । जवाब दिया कार्य स्टार होटल के सामने रुकी । बारात को इसी होटल में ठहरने का इंतजाम किया गया था । करेंगे कहा आपको तैयार होने में कुछ वक्त लगेगा । तब तक मैं दूसरी तरफ का इंतजाम देखता हूँ । इतना कहकर उसे संजय को लिया और कार में बैठकर रवाना हो गया । वो बयान आने की सूचना देने चाहता था । घर में चहल पहल थी । सैकडों रंग बिरंगे बिजली के बल्ब रात के अंधेरे में खूब बाहर दिखा रहे थे । एक बडा सा लकडी का गेट बनाकर उसपर स्वागतम का बोर्ड लगवाया गया था । चारों तरफ कागज की झंडियां लगी थी । इस बीच करण सिंह जी को लेकर होटल पहुंचा । वहाँ सभी लोग तैयार थे । बराक चलने लगी । सबसे आगे फिल्मी धुनें बजाने वाला बैंक था । उसके पीछे कारों की लंबी कतार थी । जब घर कुछ दूर रह गया तो सभी कारों से उतर कर पैदल चलने लगे । उनकी आगे बैंड बच्चा चल रहा था । स्वागतम वाले गेट के पास पहुंचकर बारात रुकी । सबके घरों में फूलों के हार डाले गए । करंट सुरेश को लेकर शामियाने की तरफ बढा उपस् थित लोगों ने दूल्हे का स्वागत किया । अब शीला के पिता आगे बढे । वो हाथ बांधकर वेदी के पास बैठ गए । पण्डित मंत्रों का उच्चारण कर रहा था । पंडित सुरेश और उसके भावी ससुर के हाथों पर भूल पांच और चावल रखे । कुछ मंत्र पढे और हवन कुंड में डालने का संकेत क्या बैंड का बजना बंद हो गया? स्त्री या एक जगह खेती होकर स्वाहा गीत गाने लगी । शीला को अंदर से लाया गया । उसे लम्बा घूंघट निकाल कर रखा था । उसकी सही लिया । उसे पकडे चल रही थी । शीला के हाथों में ताजा फूलों का हार था । वो सुरेश के सामने जाकर रुकी । उससे अनमने भाव से हाथ ऊंचे किए और हार उसके गले में डाल दिया । सुरेश ने भी ऐसा ही किया । मेहमानों का तांता लगा था । उन्हें शामियाने के नीचे बैठाया गया । बे सैकडों की संख्या में थे । संजय और करंट उन्हें नमृता से बैठने को कह रहे थे । बैंड दोबारा बचने लगा । महमान मजे से खाने पीने लगे । जब मेहमान खा पीकर चले गए तो करण अंदर कमरे में गया । वहाँ शीला को सजाया जा रहा था । रात को फेरे होने थे । उसे सारी जांच जाता था क्योंकि फेरे सुबह खत्म होने थे । इस गहमागहमी और भाग दौड में करेंगे । ऐसा फंसा हुआ था कि उसे शीला से पल भर को बात करने का अवसर भी नहीं मिला था । वो तो अब किसी दूसरे की ही हो रही है । अब बात करने से क्या मिलेगा? ये विचार भी उसे शीला के साथ बात करने से रोक रहा था । तरह ने दूर से शीला को गुमसुम बैठा देखा । उसका आधा चेहरा घूंघट से छिपा था, जो लडकियों से घेरे बैठी थी । कपडे बदलने के लिए उठ कर चली गई । उसने शीला के चेहरे को देखा । वो दुल्हन के लिए बाजू में बडी आकर्षक लग रही थी । वो धीरे से बोली तो अब तक कहाँ थी? करेंगे? अनमनी भाव से कहा मैं तुम्हारे लिए एक पति का इंतजाम कर रहा था । तुम तो फिल्मों में दिखाई जाने वाली दुल्हन लग रही हूँ । तुम क्या बच्चों जैसी बातें करती हूँ । उससे नीची नजरों से कहा शीला खेला । उसकी कुछ एक सहेलियाँ भागते हुए कमरे में आॅखो घोलकर देखने लगी । अब उसने भी वहाँ रहना उचित ना समझा । उच्च चुपके से बाहर निकल गया । बराटी कुछ देर बाद वापस आकर खाने की मेजों पर बैठ गए थे । करें बाहर आकर खाने की थालिया उनके सामने रखने में और उनकी मदद करने लगा । दूसरे लोग भी उसका हाथ बता रहे थे । पीतल के बडे बडे बर्तनों से तरह तरह के पकवान निकालकर थालियों में परोसे गए तो खुशी खुशी उसे खाने लगे । डिनर के बाद बाराती सुरेश को फेरे की रस्म पूरी करने के लिए छोड कर चले गए । सजीव वे मंडप के नीचे शीला बैठी थी शीला ही होगी करेंगे या नाजा लगाया क्योंकि उसका बदल ऊपर से नीचे तक साढे से ढका हुआ था । उसके पास सुरेश बैठा हुआ था । उसका सांवले रंग का भारी भरकम शरीर बिजली के तेज प्रकाश में चमक रहा था । उसे घेरे हुए मित्रों और संबंधियों का एक झुंड राहत की नीतियां कर शादी की रसम देखने को बैठा था । पुरोहित ऊंचे स्वर में विवाह संस्कार संबंधी श्लोक पड रहा था । ऊपर आकाश के सितारे और सामने दीदी की लपटी और इधर उधर बैठे हुए लोग उनके इस मिलन के साक्षी थी । नीले आकाश और अग्नि से अधिक पवित्र गवाह और कौन हो सकता है ये दो ही तो हमारे अंतिम साथी है । करंट कोइ संस्कार की विधि पर कुछ उत्तेजना से महसूस हुई ये मिलन विवाह का ये बंधन व्यक्ति को इतना छोटा बना देता है कि जैसे सूर्य की रोशनी की आगे की आप उसे पता होता कि जिस लडकी के साथ वो अपनी जीवन की सारी आशाएं बांध रहा है वो किसी दिन पढाई हो जाएगी । करेंट खुद भी तो शादी के बंधन में बन चुका था । जब दोनों के साथ फेरे हो चुके तो उसे लगा कि गर्मी से उसकी सास फट रही है । वह मंडप से बाहर निकल आया । बाहर आ ठंडी थी । बिजली के बल्बों की तेज रोशनी में लोन की हरी घास चमक रही थी । एक और चारपाइयों पर लेते बच्चे गहरी नींद हो रहे थे । वो बाहर खुले आसमान के नीचे लेटकर खामोश सितारों को निहारता रहा तो खोई हुई की तलाश क्यों कर रहे हो? कहाँ पाओगे तुम उसे? एक शाम जब करंट कोर्ट से लौटा तो पर मेरा ने उससे पूछ लिया । प्रमिला के मन में पति के प्रति गहरी श्रद्धा दी । उसने करन की किसी बात में कभी दखल नहीं दिया । पोर्से अपनी मर्जी से रहने दे दी थी । उसने कभी किसी काम के लिए रोका, ना कभी किसी बात के लिए नहीं । कुछ भी तो नहीं खोज रहा करें । झूठ बोल गया । उसकी बदली सच्चाई जानती थी । वह अंधी तो भी नहीं । वो चुप रहती थी तो सिर्फ इसलिए कि वह सब कुछ मौन रहकर सही लेती थी । अगर तू शीला की बात सोच रहे हो तो उसकी आवाज दब गई । हाँ, अगर तू शीला की बात सोच रहे हो, वो फॅमिली बोलने लगी तो वह सुरेश के साथ नहीं आ रही है । लोग की पढ लो उसने उसे तार दे दिया । ये तार अभी अभी आया था । वह ध्यान से एक रन के जहरी की ओर देखती रही । अब उसके चेहरे पर मुस्कान बिखर गई । करन का चेहरा थर्मामीटर के पारी की तरह उसके मन के भावों के उतार चढाव को प्रकट कर देता था । ऍम आ रहे हैं वो फॅसे बोला अब कार तैयार कर लूँ नमस्ते भाई साहब उम्मीद है कि मेरा तार आपको समय से मिल गया होगा । सुरेश ने गाडी से उतरते हुए कहा अब नमस्ते भाभी आप तो कुछ कमजोर दिखाई दे रही है तब तो ठीक है ना । करंट की आंखे उस एयर कंडीशन कोच पर टिकी थी जिससे शीला उतर रही थी । उसका चेहरा देते ही एक्शन के लिए उसकी सांस जहाँ थी वही ठहर गई । वो और दिनों से कई ज्यादा खूबसूरत लग रही थी । यू लग रहा था जैसे उसका पहला शरीर एक नई युवा अप्सरा की दे हमें बदल गया हूँ उसकी जिसमें का एक एक उभार जीनी साडी में से झांक रहा था । तंग ब्लाउज में बंधे हुए उसके उन्नत उरोजों का उभार निगाहें बांधे दे रहा था । उसके चेहरे क्या भाई आज दोगुनी होती लगती थी, उसकी नहीं । विधायक करन के दिल में पेट गई । ये एक नई शिला की तो शीला से बिल्कुल अलग जो उसने आज से पहले देखी थी । जिस ढंग से उसने नमस्ते किया था उसने करन समझ गया कि नया पन केवल बदन में ही नहीं, डीटर तक समाया हुआ है । आज वो भेदभरी नजरों से उसकी और छिप छिप कर नहीं देख रही थी । वो उससे आंखें मिलने की कोशिश करता तो वह अपनी निगाहें भेज लेती । ऐसा लग रहा था मानो वे अतीत के दिनों से अलग किसी नई दुनिया में मिल रहे हो । सुरेश स्कूली उसे सामान उठाने में व्यस्त था । वह करण और भावी को प्रभावित करना चाहता था । जब एक गोली ने एक छोटा सा अटेची के जी से वो खुद उठा सकता था । नीचे उतारा तो उसने कोहली को एक रुपया बक्शीश दे दिया । कोहली ने झुककर सलाम किया । जब करण अपनी फट फट करती, फोर्ड को घुमाकर उनके सामने लाया तो सुरेश ने कुछ ऐसी निगाहों से उनकी और देखा किसी कह रहा हूँ अच्छा तो ये गाडी है कि भाई हमें तो इसमें बैठने की आदत नहीं है लेकिन चलो आज इसी झगडे में से ही शीला तो प्रमिला के साथ कप लडाने लगी । करन गंभीर चेहरा बनाते हुए उदास बैठा रहा । तुम्हारी मेडिकल प्रैक्टिस कैसी चल रही है? घर पहुंचने पर उसे सुरेश से पूछा, अच्छी चल रही हैं । सुरेश ने उत्तर दिया, दो चार लाख रुपये बना लिया है । अब तक । सुरेश ने दो चार लाख कुछ ऐसे लापरवाही से कहा जैसे दो चार रुपये की बात हो । करण उसकी इस बात से बहुत प्रभावित हो गया था । अच्छा हुआ तो वहाँ गए करें । बोला, कुछ दिन मौज में कटेंगे । दो चार फिल्में देखेंगे । मैंने तो बहुत से कोई पिक्चर नहीं देखी । मुझे तो इसमें बहुत मजा आता है । भाई साहब सुरेश बोला, लेकिन कल मुझे डेली जाना है । वहाँ एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस मुझे उसमें भाग लेना है । बहुत अफसोस की बात है । करण बोला, मनी मन खुश हो रहा था कि सुरेश की अनुपस्थिति में दो चार दिन शीला के साथ अकेले रहने को मिलेंगे । डिनर टेबल पर करण ने उनके हनीमून ट्रिप के बारे में पूछ कर शीला को छीनने की कोशिश की तो तुम लोग कश्मीर गए थे । उसने शीला से कुछ शिकायत भरे लहजे में कहा, हाँ, कश्मीर गए थे, लेकिन इसमें ऐसी क्या खास बात है? शीला ने करन के व्यंग की उपेक्षा करते हुए कहा, नहीं, इसे खास तो कुछ नहीं । उससे बाद पूरी की । लेकिन अक्सर नई दुल्हनें घर पर ही रहती है । नरेंद्र को दो चार गीत गाकर सुनाती है । हो सकता है ऐसा करती हूँ । लेकिन मेरा विचार है कि प्रत्येक व्यक्ति जहाँ चाहे वहाँ जाने के लिए आजाद हैं । शीला ने उपेक्षा से कहा, अच्छा भावी जी । सुरेश बोला आज देने के बाद दो चार गीत हो ही जायेंगे । हाँ, ये ख्याल अच्छा है । प्रमिला चाहिए आज पूरनमासी है । चलो कोटियार्ड में चलकर बैठे भींगा उसे नौकर को आवाज बाहर चटाई । बिछाओ वे सब चांदनी में चटाई पर बैठ गए । प्रेमिला तबले को कसकर उसपे थाप देने लगी । कुछ देर सभी चुप रहे । वहाँ एक अजीब सी खामोशी थी । चलो शीला प्रमिला बोली तुम शुरू करो कौनसा गीत गांव दीदी । शीला घबराई हुई बोली मुझे तो याद ही नहीं रहा । अरे कोई भी गांव चलो वही सही वो चंद कल जो आना भाई, जहाँ तक मेरा ख्याल है मेरे लिए सभी की एक से हैं । मुझे तो संगीत से कोई रूचि नहीं । अगर सुनना ही पडे तो सुन लेंगे करने । शीला को घूमते हुए कहा शीला का जहरा गुस्से से लाल हो गया । उसके अपना मूठभेड लिया और गाने से इंकार कर दिया । ये क्या कर दिया आपने? प्रमिला बोली बिचारी को चिढा दिया । चलो शिला गांव । उनकी बात का बुरा मत मानो । लेकिन शीला नहीं मानी । उसके आगे भी गए । वो तो नाराज हो गई हैं । करेंगे । माफी मांगने के अंदाज में कहा । और इससे पहले कोई ये समझ सकता कि वह क्या करने वाला है । उसने झुककर शीला के पहुंच बोलिए । शीला के चेहरे पर हल्का गुलाबी रंग बिखर गया तो तुमने भाई साहब को अपने पांव छूने दी । सुरेश ने कुछ इस अंदाज से से हिलाया जैसे उसे अच्छा नहीं लगा हूँ । सिलाई से और भी घबरा गई । अब अच्छा अच्छा । अब चुप हो जाइए । गी तो असली प्रमिला ने बिजली बात बनाते हुए कहा । चीला चीज की एक बार खा जाने वाली निगाहों से करेंगे और देखा और फिर प्रमिला की ठाक से सुर मिलाकर गाने लगी । वो चंद कल जो आना शीला का मधुर, कोमल, स्वर्ग चांदनी रात के सन्नाटे में तैरने लगा । सात । तबले की मीठी खनक जादू जग रही थी, करेंगे बहुत खुश था । वो खामोश होकर चांदनी में चमक रहे शीला के चेहरे की और देखता रहा । वो खुश था कि उसने शीला का क्रोध ठंडा कर दिया । अपमानित होने के बावजूद भी बहुत खुश था । गुस्से में शीला और दिनों की तुलना में अधिक अच्छा गा रही थी । उसकी निगाहें शीला की आंखों पर जमी हुई थी । मस्ती में झूमता वह । वो उसके मधुर स्वर का रिस्पांड कर रहा था । उस रात करन को नींद नहीं आई । रात भर बिस्तर पर करवटें बदलता हुआ । वो पास वाले कमरे में लेते । सुरेश और शीला की खुसपुसाहट टी सुनने की कोशिश करता रहा । कपडों की हलकी सरसराहट, चारपाई की चरमराहट चुनकर उसके मन में अनेक चित्र उभर आते थे । उसका बदन एशिया से चलने लगता था और उसकी नसे फटने को हो जाती । सुबह जब बिस्तर से उठा तो उसकी आखिल लाल हो रही थी । सुरेश सुबह दिल्ली चला गया । करन की उम्मीद थके हुए चेहरे को देखकर शीला ने पूछा, तब से ही है ना? जीजा जी अब थके हुए लग रहे हैं । हाँ, अब कुछ थकावट है । करन बोला पारसी कमरे में जात भर खुसपुसाहट होती रही तो नींद कैसे आ सकती है? मैं तो जीजा जी पहुॅचकर हुई थी । शायद आप अपनी कल्पनाओं में खुसपुसाहट सुनते रहे होंगे । शीला ने तीखे स्वर में कहा उस रात करेंगे, गहरी नींद हुआ । रात लगभग दो बजे उसकी नींद खुली तो उसने सुनरहाई में से एक गिलास पानी उंडेलकर दिया । आसमान में सितारे जगमगा रहे थे । वो फिर बिस्तर पर लेट गया लेकिन नींद नहीं आई । उसने अपनी चारों और देखा । सभी चुप चाप सो रहे थे । करेंगे । चुपके से उठकर शीला के कमरे का दरवाजा खोला । बाहें फैलाए गहरी नहीं हो रही थी । वो उसकी चारपाई के पास बैठ गया और अपनी उंगलियों से धीरे धीरे उसका माता सहलाने लगा । उसके गाल ऊपर उंगलिया फेरी और फिर उसकी होटों को सहन आने लगा । वो चौक कर उठे बैठे । रात की हल्की रोशनी में उसकी आंखें चमक उठीं । उसने गुस्से से करन की ओर देखा । उसके चेहरे पर ग्रहण का भाव था । करन कुछ कह नहीं सकता । वो कदम पीछे हटाते हुए बोला अब सोच रहा हूँ मैं तुम्हारी नींद में खलल डाल दिया गया । वो तेजी से बीच के दरवाजे से निकलकर अपने बिस्तर पर जाकर लेट गया । अब सब कुछ खत्म हो गया । अब वो हमेशा मुझे घना करेगी । मुझे अपने आप पर संयम रखना चाहिए । मुझे उस से दूर रहना चाहिए । मुझे उस से बोलना भी नहीं चाहिए । उसका मन पश्चताप से भरा है । उसने उठकर बीच का दरवाजा जोर से बंद कर दिया । शीला को यह दिखाने के लिए कि अब वो उस से अपने संबंध तोड चुका है । उसे नींद आएगी । लेकिन फॅमिली सुबह करण ने शीला से निगाहें मिलने की कोशिश की लेकिन उसने उसकी और देखा तक नहीं है । वो ना उससे बोली ना उस की ओर एक बार भी मुस्कुराकर देखा । उसके चेहरे पर गुस्से की लाली छाई रहती करेंगे । इसी यही अनुमान लगा सकता कि शीला ने उसे माफ नहीं किया है । वो उसे बात करने की कोशिश करता तो उठ कर चली जाती है । वो कुछ कहना चाहता तो वह पांच कार्ड देती । कुछ मजाक करता तो मुस्कुराने की बजाय मूड बनाने लगती । धीरे धीरे उनके संबंध फिर पहले जैसे ही हो गए लेकिन उनके बीच दीवार सी बराबर बनी रही । वह पहले की तरह उसकी परवाह नहीं करती थी । करण को इसे बहुत दुःख हुआ । वो कभी सोच भी नहीं सकता था कि वह इतनी जल्दी इतनी बदल सकती है । उस की हर बात अब उसी छुप जाती थी । जो बातें आम तौर पर कोई मतलब नहीं रखती थी । देवी उसके मन पर गहरी चोट कर जाती है । वो जब डिनर टेबल पर उसे दूर बैठे और हमेशा अभी चुराने की कोशिश कर दी है तो उसे बहुत दुख होता था । फिर मुख्य थी, उससे खींचने की कोशिश करता, उससे दूर रहता । कभी कभी उसे अपनी इस तरह के व्यवहार की बेहूदगी का ख्याल आता तो वो भी सहज होने का प्रयत्न करता । वे दोनों इसी तरह दिन बिता दे रहे छोटे बच्चों की तरह झगडते हुए शनशाइन में बदलते भावों के अनुसार बदलती हुए जब कभी से दोनों के लिए होते तो उससे पिछले दिनों के प्यार के बारे में प्रश्न पूछता । लेकिन उस राहत की बात के बारे में वो कभी कुछ कह नहीं सका और आके में उच्च जब उसी घूमता रहता फिर वो दूसरी के अंदाज में कुछ कहता ये देखने के लिए की उसके मन में अभी भी उसके लिए कुछ जगह है क्या नहीं लेकिन उसकी सारी कोशिशें बेकार हो जाती है । उसे लगता है कि उसके मन में अब उसके लिए कोई जगह नहीं रह गई है । उसके मन में फिर वहीं पुरानी कडवाहट भर आती

सातवाँ फेरा -10

बहुत दस । ये चबूतरी के पास से जहाँ झंडा फहरा रहा था, गुजरा अरदली नहीं सावधान की स्थिति में खडे होकर उसे सेल्यूट किया ऍसे कहा मुझे डीआईजी सा हमने बुलाया था, वो अंदर है साहब । अंजली ने कहा वो आपका इंतजार कर रहे हैं । डीआईजी का कद छह था । शरीर स्वस्थ और शक्तिशाली चेहरे पर मासूमियत लेकिन आंखों में गहराई और दृढता वो भी सकती के लिए प्रसिद्ध था । पुलिस सुपरीटेंडेंट भी उसके साथ ही था जैसे लूट कर के बैठ गया । इंस्पेक्टर डीआईजी ने प्रश्न किया जी साहब, हमारे पास तुम्हारी बहुत अच्छी रिपोर्ट आई है । मैं भी सुप्रीटेंडेंट साहब से एक बहुत जरूरी के इसके बारे में बात कर रहा था । वो कह रहे थे कि तुम भी इसके इसके बारे में अच्छी तरह पता लगा सकते हो । धन्यवाद इससे मुझे बडी खुशी हुई । जय बोला । महिला बाद के डाके का मामला है ना? सर नहीं बेटे डीआईजी ने सिगार सुलगाते हुए कहा ये उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है । दरअसल हम ये काम किसी विदेशी सरकार की प्रार्थना पर कर रहे हैं । यहाँ लखनऊ में तस्करी का कोई धंदा चल रहा है । ये अनुमान है कि पूरा गिरोह इसमें लगा हुआ है । इस घरों के आदमी जहाज में फ्रांस जाते हैं और वहाँ से विदेशी माल स्मगल कर के लिए आते हैं । हमें ये भी सूचना मिली है कि यहाँ पे कहीं चले तैयार की जाती है । चरस के बदले में विदेशों से जवाहर यहाँ लाकर बेचे जाते हैं । फ्रांस सरकार ने वहाँ से इंस्पेक्टर जारविस को भेजा है । वो हमारे साथ मिलकर काम करेगा । उसके पास पूरी सूचनाएं हैं । वह विक्टर होटल में सात नंबर कमरे में ठहरा हुआ है तो मुझे मिलकर सब कुछ जान सकते हो । हम चाहते हैं कि तस्कर जितनी जल्दी हट जा सके अच्छा है । पकडे भी जाए तो रंगेहाथों लेकिन तुम्हें सावधान रहना होगा । मैं पूरी कोशिश करूंगा । साहब जैन उठकर सेल्यूट किया । जैन सात नंबर की घंटी बजाई । एक लंबी और दुबली पतली आकृति नहीं दरवाजा खोला फॅस जय ने पूछा जी हाँ नहीं होगा कहीं आपकी मैं क्या सेवा कर सकता हूँ? इंस्पेक्टर जार्विस लंबा और दुबला पतला व्यक्ति था, लेकिन उसका शरीर गठा हुआ था । जैसे हाथ मिलाते हुए वो मुस्कुराया तो उसके सफेद दाग चमक उठे । उसके हाथ में जय का हाथ कट गया । उसकी आंखें दो हीरो की तरह चमक रही थी । ऍम अंदर ऍम जारविस ने दरवाजा खोलकर उसे भीतर बुलाते हुए कहा आप बैठे मैं तब तक गिलास भरता हूँ । धन्यवाद मैं पीता नहीं । जय बोला बिल्कुल नहीं बेटे अच्छा तो मेरे पीने पर आपको किसी तरह का ऐतराज नहीं होगा ना? जानवर से पूछा हरी नहीं बिल्कुल नहीं । ये बैठे हुए बोला मेरा ख्याल है कि जी आई जी ने तुम्हें इस मामले के बारे में बता दिया होगा । यार इसमें शराब डालते हुए कहा हम तो इस सिलसिले में एडी चोटी का जोर लगा चुके हैं लेकिन अब तक सिर्फ इतना ही पता लगा सके हैं कि यहाँ से चरस अधिक मात्रा में बाहर भेजी जा रही है । ये कच्ची अफीम से बनाई जा रही है ना? जैसे पूछा हूँ हाँ, लेकिन इससे बनाना बहुत आसान है । जार्विस खोला थोडी सी टेस्ट की वो और एक दो क्लास को की मदद से ही बनाई जा सकती है । इसलिए तो इसका पता लगाना इतना मुश्किल है । तो मैं शहर तक किस तरह पहुंचे? जैन ने उत्सुकता से पूछा इस मामले में उसकी रूचि बढने लगी । ये दूसरे मामलों से कहीं अधिक रोचक प्रतीत हो रहा था । ऐसी ही जारविस ने कहा ऐसे मामलों में ध्यान से काम करने से कुछ न कुछ सूत्र मिल ही जाते हैं । जैसे हमें पता लगा कि माल पूरब की ओर से आ रहा है तो हमने चेकिंग तेज कर दी । फ्रांस में प्रवेश करने वाली प्रत्येक कार और हर एक यात्री की चेकिंग की जाने लगी । लेकिन फिर भी शत प्रतिशत सफलता संभव नहीं होती । एक सीमा तक तो चेकिंग की जा सकती है लेकिन इससे अधिक नहीं । अक्सर यात्री जल्दी में होते हैं । कई जल्दी में निकल जाते हैं और कौन जाने अपराधी उन्हीं में से कोई हो । वहाँ सिगरेट केस निकालने के लिए रुका सिगरेट लेंगे क्या? उसे जैसे पूछा धन्यवाद मैं सिगार भी होगा । जैन उत्तर दिया उसने किसी कार के से एक सिगार निकालकर सुलगा दिया हो तो मैं कह रहा था कि ये काम कठिन था । इंस्पेक्टर जारविस ने अपनी अधूरी बात पूरी कि बहुत दिन तक दो एक भी सूत्र हाथ लग सका । लेकिन तभी एक सूत्र हाथ लगाओ, ये इतनी सरलता से हो गया कि हम आश्चर्यचकित रह गए । हमने पोस्ट ऑफिस वालों को सावधान रहने को कहा था । फिर एक दिन है पेरिस के एक पोस्ट ऑफिस से । हमें एक खबर में उस पोस्ट ऑफिस में एक पार्सल रोक लिया गया था । इस बार साल में एक किताब थी लेकिन किताब बहुत अजीब थी । इसके तहत की जेल के भीतर पृष्ठ नहीं बल्कि लम्बी लम्बी डंडिया बनी थी और वेज जीफोर्स के फॅस क्या होते हैं जो मैंने पूछा । अफीम पीने वालों के सिगार जारविस ने आंख मारते हुए कहा जिस तरह का सिगार तुम भी रहे हो, इसी तरह का होता है । लेकिन इससे कई अधिक खतरनाक तो ऐसे होते हैं जाॅब कर अपने सरकार की ओर देखते हुए कहा बाद में हमने इस किताब की जांच की तो पता लगा कि इस पर लिखा हुआ पता नकली था लेकिन पोस्ट ऑफिस की मोहर तो ऐसी थी । ये मोहर थी लखनऊ की किताब तो आपके पास होगी क्या मैं देख सकता हूँ । जय ने पूछा । फ्रेंच इंस्पेक्टर ने अपना बॉक्स खोला और चमडे का एक डब्बा निकाला । ये है वो किताब यह देखकर आश्चर्य में पड गया कितना बहुत सफाई से बनाई गई थी उसने पोस्ट ऑफिस की मुहर देखी । बहुत स्पष्ट दिख रही थी मोहर चौक की है चार्जेस बोला ये शहर का कोई ब्रांच पोस्ट ऑफिस से क्या हाँ है तो ब्रांच पोस्ट ऑफिस जय बोला अच्छा वो की एक ब्रांच पोस्ट ऑफिस से पोस्ट किया गया था एक चीज तो ये है ना जिसके सहारे हम आगे बढ सकते हैं इसका व्यापर दिखाएंगे मैं चौक पुलिस थाने के स्टेशन अवसर में मिलेगा और पोस्ट ऑफिस वालों से भी मेरे पास मोहरों की फोटो कॉपी है । मेरा ख्याल है कि इससे कम चल जाएगा । ये ठीक है ना । हाँ हाँ बहुत अच्छा हुआ । फोटोकॉपी को जेब में रखते हुए बोला अच्छा आप यहाँ आराम से तो है ना । हाँ आराम तो है । ये जगह भी अच्छी है । जार्विस बोला कमरा ठंडा है इसलिए दिनभर अंदर ही रहता हूँ । यहाँ गर्मी बहुत है उस अगर ये कमरा ठंडा ना होता तो मैं गर्मी से भूनकर कबाब हो जाता । थोडे दिन की बात और है । जय बोला । गर्मियों के आखिरी दिन है । मॉनसून आने ही वाले हैं । ये उमस और घुटन इसीलिए है अच्छा मैं मैं बोल में हूँ । कमरा नंबर है कभी जी चाहे तो आ जाना । मैं इसके बारे में तुम्हें कल तक बना होगा । क्या एक गिलास पानी मिल सकता है? इन दिनों घर से बाहर निकलते हुए पेट भर लेना अच्छा रहता है । जाॅन से हाथ मिलाया और चल पडा । जैसे रास्ते में सोचता रहा भला हो सकता है लेकिन खुशमिजाज भी उसके मन में कोई छल नहीं है । सुभाव से स्पष्ट और खुले दिल का आदमी है । हम दोनों की खूब पडेगी सडक के पश्चिम की ओर चौक नाम का बहुत पुराना मोहल्ला है । यहाँ की गालियां बहुत संकरी गलियों के दोनों और ईटकी ऊंची ऊंची दीवारें हैं जिनपर हमेशा काई जभी रहती है । इन दीवारों के कारण सूरज का प्रकाश कभी गलियों में नहीं पहुंचा जाता हूँ । शाम ढलते ही चौक की गोटों पर नाच गाने की धूम मचाती है । घुंगरू की झनकार और गाने की सुरीली मधुर आवाज चांदनी में चमक रही खिडकियों से तैरती हुई रात के सन्नाटे में फैल जाती है । कामदार कुर्ते और कढाई की हुई टोपिया पहनी हुए दलाल रह ऊपर से गुजरने वालों की कोटों का रास्ता दिखाते रहते हैं । खिडकी ऊपर दवाई से बैठी होती है । उनके चेहरे पुते हुए होते हैं । उनकी आंखों में हल्की मादकता होती है । मृत्यु से क्या हो सकता है? जयंत चौक से गुजरते हुए सोचा वह आज अचकन पहने हुए था । ये शराब और संगीत की जवान जादू भरी दुनिया है जिसमें खुशी भी मिलती है और जिसमें की गरमाहट और यही यही वह जगह भी थी जहाँ से दूसरे महाद्वीप को मादक द्रव्य भेजे जा रहे थे । जय को पोस्ट ऑफिस वालों से बहुत मदद ना मिल सके लेकिन वहाँ जाने से जय कोई खास बात महसूस हुई । पोस्टमास्टर बहुत नर्म व्यक्ति था । उसने क्लर्क से रजिस्टर में इस पार्सल की एंट्री ढूंढने को कहा । उसका सहित चरण भारी भरकम शरीर वाला व्यक्ति था । उसके माथे पर एक लंबा तिलक लगा हुआ था । दफ्तर में वो खूब जच रहा था । अधिकांश क्लर्क तो दुबले पतले होते हैं, लेकिन चरण लंबा तगडा व्यक्ति था । वो क्लर्क से कहीं अधिक पहलवान व्यक्ति था । अपनी घनी मुझे मटकाते हुए बोला था मैंने सारे कागजा देख लिए है । साहब लगता है रजिस्टर का ही हो गया है या इधर उधर हो गया है । लेकिन पोस्टमास्टर इससे संतुष्ट नहीं हुआ । उसने अपनी ऍम बोला, रामचंद्र! जरा तुम रजिस्टर ढूंड देना चले । नया आदमी हैं, उसे मिल नहीं रहा है । जब ये पार्सल यहाँ से भेजा होगा तो रजिस्टर में दर्ज जरूर क्या होगा? रामचंद्र ने चरण की सारी अलमारी छान मारे । आखिर उसे रजिस्टर मिल ही गया । दस मिनट बाद उसने पोस्टमास्टर को एंट्री दिखा दी । इसमें पैकेट वाला पता दर्ज था, लेकिन हम ये नहीं बता सकते कि इसे भेजा किसने था । वैसे हम भेजने वाले का नाम भी दर्ज क्या करते हैं, लेकिन इस पैकेट पर रहा नहीं होगा और क्लर्क ने भी ध्यान नहीं दिया । पोस्ट ऑफिस से कुछ ही बात मालूम हुई । लगता था आगे का रास्ता बंद हो गया है । आश्चर्य की बात हुई थी चरण रजिस्टर में । पार्सल की एंट्री ढूंढने में सफल नहीं हो सका । क्या इस कारण की वो नया आदमी था या इसलिए कि चरण पर निगाह रखी होगी? जैन सोचा इधर आइए साहब एक दलालने जय के विचारों का काम तोड दिया । बहुत अच्छा माल है साहब जय कुछ देर जैसा खडा रहा जिससे वह भी कुछ निश्चय कर रहा हूँ । जवान है गुलाब सी हसीन है साहब जैन ऊपर की ओर देखा और दरवाजे के भीतर चल गया । स्टेशन अवसर ने उसे लगभग आधा दर्जन मशहूर तवायफों के नाम बता दिए । वो एक एक कर के हर एक के पास जा रहा था । मजेदार नौकरी है । उसने सोचा ऐसी नौकरी कौन पसंद नहीं करेगा । उसने होटों तक आई जम्हाई रोक ली । खूबसूरत जगह थी लेकिन वो कुछ देर सोना चाहता था । जेब कमरे में चला गया । गुलाब जांच दूसरे दौर के लिए खडी हो रही थी । उसने लाल सीमेंट के फर्श पर पाउंट उनका आए तो कमरा घुंगरू की आवाज से गूंज उठा । कमरे के दूसरे कोने में बैठ डबल सी और सारंगी वाले ने सुर से सुर मिला । गुलाब जान मंडलेकर की थी । शरीर स्वस्थ था । उसकी छोटी सी गर्दन में सोने का एक सुंदर नैकलेस लटका हुआ था । सोने का एक गोल पट्टा उसके उरोजों पर झलक रहा था । उसकी कमर अभी भी पतली थी । नेतम, मांसल और दी है कि उभार और कसाब आकर्षक थे । जब वो ना टीवी घूमती थी तो उसके वस्त्र के भीतर उसके शरीर के उभार स्पष्ट झलकने लगते थे । उसने होटों पर हल्की लिप्स्टिक लगाई थी । उसके बाए गाल पर हल्का सा तेल था, जिससे उसके चेहरे पर एक विशेष सलूर आपन उभर आया था । गुलाम जान नागिन की तरह संगीत की धुन पर ही रखती रही । अब वह मोटे ऊनी कालीन पर पांव फैलाकर बैठ गई थी । उसकी देश में कमीज का घेरा फर्श पर फैल गया । जैसे कमल का फूल खेल गया हो । फिर जैसे ही तब ले और सारंगी की धुन तेज हुई, वो उठी और तेजी से नाचने लगी । वो जाएगी और बडी और प्याला उसकी होटों से लगा दिया । जय शर्मा गया । आसपास बैठे लोगों ने ही भरी और उसका मजाक उडाने लगे । नया पंची हैं गुलाब जाना सेट बसंतलाल बोला उसे अपनी बाहों के जान मसालों उडने ना पाए । शरबत और दूध पिलाओ से हरीप्रसाद ने ताना मारा । मैं कहता हूँ उसे शराब पिलाओ । हस्तक था खोरी लाल हसा । गुलाल जानने धीरे से अपनी हथेलियों से उसके गाल मिले और हटकर फिर से नाचना शुरू कर दिया । वर्ड ठुमके दे देकर जांच की । कहीं जैसे उसकी सारी देह उत्तेजित होती हूँ । दोनों हाथों की बडी उंगलियों को गालों पर पलकों के नीचे नाजकी । वो चारों और घूम रही थी सेट बसंतलाल ने कुछ नोट लापरवाही से उसके कदमों पर भेज दिए । फॅमिली जान सीट ने कहा तेरह जवाब नहीं । हर प्रसाद ने उसे अपनी और खींचा और गिलास उसके होटों से लगा दिया । गुलाम जानने गिलास आहिस्ता से उस की तरफ धकेल दिया और बाल खादी हुई । उसकी बाहों से बाहर निकल आई । जैनी सो का एक नोट डॉलर हवा में लहराया और नाजकी हुई उस लडकी की तरफ फेंक दिया । सीट है रस्से । अचकचाकर उस की तरफ देखता रह गया । दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा । उसी यकीन हो गया कि ये सचमुच किसी लखपति की बिगडी औलाद है और उसे अपना पैसा गंवाने का एक अच्छा बहाना मिल गया है । गुलाब जन को मौका भागते देर न लगी । उसने अपना सारा ध्यान जयपर टिका दिया । वो बार बार उसके पास चली आती । कभी उसके गालों पर हाथ फेरती कभी उसकी आंखों में झांकें लगती सात सात । वो अपनी मादक अंगों को उत्तेजित ढंग से मटकाती रही । सीटों को बुरा लगा । उन्होंने एक दूसरे को कोहनी हमारी पर चलने के लिए उठ खडे हुए । यहाँ से उठ कर कहीं और चली । उन्होंने सोचा जहाँ इतनी खींच कितना हूँ सेट बसंतलाल ने कमरे से बाहर निकलते हुए चलती हुई निगाहों से जय की ओर देखा । जैन दूसरा नोट जेब से निकाला, खुला जाने संजीत को जाने का इशारा किया । आप कहाँ के रहने वाले हैं अपनी बही जय के गले में डालते हुए उससे पूछा याद नहीं पडता कि आपको इसके पहले भी कभी देखा है, मैं यहाँ नया ही आया हूँ । जैन ने कहा मेरे पिता सट्टे का काम करते हैं । आपने शायद जेट जीवन राज का नाम सुना हो क्यों आपके वालिद साहब जिंदा है जी, वो तो जिंदा है, लेकिन सच पूछिए तो मैं उनसे नफरत करता हूँ । आप पेरिन अफ्रीका अंदाजा नहीं लगा सकती । उन्होंने मेरे गले एक बदसूरत लडकी बंदा है । मानो उस लडकी का ख्याल आ दही उसके जिसमें झुरझुरी सी हो गई हूँ तो उससे कितनी अलग हो । उसने आहिस्ता से उसकी थोडी ऊपर उठाए और उसकी आंखों में झांकते हुए कहा, क्या मैं जब चाहो यहाँ आ सकता हूँ? मैं अपनी बीवी अपने घर, अपने बाप सबसे बहुत दूर भाग जाना चाहता हूँ । गुलाब जानने अपनी नाजुक हफ्ते उसकी पीठ पर ठीक और फिर बोली आप पीते क्यों नहीं? थोडी सी तो लीजिए नहीं, मैं नहीं देता । कम से कम इस वक्त नहीं होगा । पहले कभी पीता था लेकिन आज नहीं । और इसकी वजह है हो जाए तो अगर तुम्हें बता दूँ तो तुम मुझसे नफरत करने लग होगी । प्यारी तुमसे कौन निश्चित कर सकता है? गुलाब जानने कुछ करते हुए कहा । फिर गुलाब जानने उसके कुर्ते का सिरा पकडकर उसे अपनी और खींचा । उसके अंदर की औरत जाग उठी थी । बताइए तो सही, आखिर क्यों कि आप शराब से तंग आ गए थे? नहीं जैनी कुछ सोचते हुए कहा एक वो भी वक्त था जब मैं शराब की पूरी बोतल पीने के बाद भी अपने होश कायम रख सकता था । लेकिन फिर भी मैंने इसे एक ऐसी चीज की खातिर छोड दिया जिससे मेरी आंखों के आगे एक जादुई दुनिया के दरवाजे खोल दिए । लेकिन और ये कहते हुए उसने ईद गीत सशंकित निगाहों से देखा । लेकिन ये राज सिर्फ मेरी और तुम्हारे बीच रहना चाहिए । खबर आती क्यूँ गुलाब उसके बालों में उंगलियां ख्याति वहीं बोली गुलाब तो तुम्हारी लॉटरी है ताकि वो ऐसी कौन सी चीज थी जिसकी खाद्य तुमने शराब भी छोड दी । बस ऐसा समझो अली फलेरिया का एक ऐसा स्वीकार जो पीने पर इस दुनिया से बहुत पर एक कि कच्चे दूर कही खूबसूरत वादियों में ले जाता है । जय उसकी इतना करीब आ गया था की उस की नरमी छातियां उसे छोडने लगी थी तो उसके कानों के करीब अपने होटल आता हुआ बोला मारीजुआना तो नहीं जानती कि इसमें कितना लूट है । ये कहते हुए उसने अपनी अचकन की जेब से एक डिब्बियां निकली ये रही मेरी मलका मेरी खुशी का राज अरे मुझे क्या मालूम था कि तुम भी हम में से ही हो । उसके करीब अपने बदन को ढीला छोडते हुए गुलाब बोली हाँ तो इतने अच्छे हो लेकिन तुम्हें माल मिलता का कैसे हैं? वहीं से जहाँ से दो मंगाती हूँ जय मुस्कुराकर आंख मारते हुए कहा । और जब पीना बंद कर चुके तो जैन ने उसे दो और टुकडे थमाते हुए कहा फिर कभी के लिए रख छोडो अभी तो मैं बहुत गई हूँ, इतनी जल्दी चले जाओगे । गुलाब जन अपने सिर को अदा से झगडते हुए बोली अभी तो सिर्फ आधी रात हुई है फिर कभी सही जैन जम्हाई लेते हुए कहा आज तो मैं अपनी पत्नी से ये कहकर आया हूँ कि दूसरे शो में फिल्म देखने जा रहा हूँ । अगर देर हो गई तो बेकार में शक करेगी । ये कहकर उसे गुलाब को भी बाहों में दबा लिया । फिर थोडी देर के बाद बाहर चला गया ।

सातवाँ फेरा -11

भाग ग्यारह पहले बारिश की बूंदे धीरे धीरे छत पर पडने लगी । बादल का एक टुकडा आकाश में तब तक फैलता गया जब तक उसने आसमान को कंबल की तरह ढक नहीं लिया । भुआ तेज हो गई । इंस्पेक्टर जार्विस खिडकी खोलकर नाम हवा को न दोनों में भरते हुए कहा शुक्र है फिर बारिश आ ही गई । फिर आज की रात जश्न क्यों ना मनाई जाएगी? जय बोला चौक हो उसने से फटा बढ रहा है और हमारी दिलजोई तो चौक की सबसे खूबसूरत चीज गुलाब जान करेगी । मैंने आपको बताया था कि उसे नशे का चस्का है और मैं पता लगाना चाहता हूँ की वो अपने नशे के लिए मालपानी कहाँ से मंगाती है । जरूर चली जाने से जवाब दिया । गुनाह पेश औरतो को तो और भी ज्यादा पसंद करता हूँ । गुलाब जानने झुककर उनका स्वागत किया । जय ने अपने दोस्त का परिचय कराया जो सफेद अचकन में बिल्कुल छह छबीला लग रहा था । उसने आंख मारी और गुलाब जानने जाने पहचाने अंदाज में सिर हिला दिया । साज बजने शुरू हो गए और गुलाब जाने देखने वालों की तरफ एक मुस्कुराहट उछाली लरजती हुई आवाज में गाती हुई वह कमरे का चक्कर लगाने लगी । कभी किसी का प्याला उसके होटों से लगा देती और कभी किसी को यूँ ही छोड दे दी । इंस्पेक्टर जार्विस नजारे का पूरा लुत्फ उठा रहा था । खाला की गाने के बोल उसकी समझ में नहीं आया । लेकिन वह संगीत की धुन पर मस्त हथेलियों से गुटों पर थाप देता रहा । वक्त बीतता गया । कमरे में तब ले और सारंगी की आवाज गूंजती रही और मेहमान छठे गए । गुलाब जान भी थक गई थी । आखिर उससे जय की तरफ देख कर कहा आउट नीचे चलेंगे, वहाँ कोई नहीं होगा । वो आगे आगे चली और दोनों पीछे पीछे सीडियां करते हुए एक ऐसे ते कहानी में पहुंचे जहां हवा में तो सीलन थी, लेकिन पैरों के नीचे निर्मल कालीन बिछी होने की वजह से जमीन की ठंडक का पता नहीं चलता था । गुलाब जानने पंखा चला दिया और उनसे बैठ जाने को कहा । जैन आपने केस में थी, एक सिगार निकालकर उसे दिया और अपने तथा जार्विस के लिए नकली स्वीकार निकालकर सुलगा दिया । तीनों भी दे रहे हैं तो मैं ये आदत कहाँ से बडी? गुलाब जान जार्विस से बोली ये पहले जहाँ जी था, जय बोला दूर किसी ऐसे जहाज पर जहाँ गैरकानूनी ठंडा होता था और इस हालत में बचना मुश्किल ही था । फॅसने मुस्कुराते हुए अपना सिर हिलाया । वो हिंदुस्तानी बोल तो नहीं सकता था लेकिन इतने टूटे फूटे शब्द जरूर जानता था कि वक्त पडने पर काम चल सके । गुड गुड वहाँ बडा मजा आता था । कश लगाते हुए जारविस में जवाब दिया । उन्होंने सिगार खत्म किये । जय जार्विस के सामने सिगरेट के इस खोलकर पूछा । एक और फ्रांसीसी इंस्पेक्टर बेटर कुल्फी से सिगार उठाया और दोनों ने फिर सिगार सुलझा लिए । दफ्तर में चरण के मेहनती होने की शोहरत थी वो अभी चार महीने पहले यहाँ टैंपरेरी असिस्टेंट बन कराया था । इस थोडे से अरसे में ही वो अपनी स्वभाव के कारण पोस्टमास्टर की निगाह में आ गया था । उसके साथ के दूसरे सभी कलर सारा दिन चाय पीने, गप्पे लडाने या इधर उधर घूमने में बिता देते थे । लेकिन चरण में कभी ऐसा नहीं किया । वो हर रोज ठीक दस बजे दफ्तर पहुंचता और फिर दिनभर कुर्सी पर जमा रहता । उसे कभी किसी ने बोलते हुए नहीं सुना था । उसने कभी भी गप्पबाजी अफवाएं फैलाने में दिन निकालने की कोशिश नहीं की । उसकी मेज पर कभी कम रुकता नहीं था । उसे अपने हर काम के बारे में पूरी पूरी जानकारी रहती थी । एक दिन पोस्टमास्टर न्यू से कहा भी था । चरण बाबू तो कुछ देर लैंड क्यों नहीं ले लेते हैं । लेकिन चरण ने कभी भी लंच की छुट्टी नहीं ली । वहाँ दिनभर वहशी की तरह काम पर जुडा रहता । हमेशा सबसे पहले दफ्तर पहुंचता और सबसे बाद में दफ्तर से निकलता । आज तक उसने कभी एक दिन की बीमारी की भी छुट्टी नहीं ली थी । दफ्तर के दूसरे दुबले पतले लडकों के बीच उसकी भारी भरकम डेढ साल झलक दी थी । उसके बारे में सभी लडकों की एक रही थी कि उसके लिए काम से बढकर जिंदगी में और किसी चीज का कोई महत्व नहीं । लेकिन इस बारे में इंस्पेक्टर जय की जाए इसके बिलकुल विपरीत थी । जिस दिन उस से पहली बार चौक की इस पोस्ट ऑफिस में चरण को काम करते हुए देख लिया । उसी दिन से इस दफ्तर में ऐसा लग रहा था जैसे कोई भेडिया फूलों की दुकान में मूव बनाए बैठा हो । जब चरण रजिस्टर में भरी गई एंट्री को नहीं ढूंढ सका तो जय कसम है और भी पक्का हो गया । पोस्टमास्टर को ये बात अच्छी तरह मालूम थी कि नया आदमी होने पर भी चरण दफ्तर में सबसे अधिक महंती है । इस कारण जब चरण जाएगा उत्तर न दे सका तो उसे भी बहुत आश्चर्य हुआ । चरण बहुत चालाक है । जैन ने सोचा वह जरूरत से ज्यादा चालाक है । अगर चरण की तारीफ करने वाले पोस्टमास्टर को ये बात बताई जाती है कि वह महीनों में पांच सौ रुपये की शराब भी जाता है तो शायद वो कभी ये की नहीं करता । जय ने शहर के सभी होटलों में जाकर इसका पता लगाया था । चरण को कुछ बातों के बारे में सफाई देनी थी, लेकिन वह जय को ये नहीं समझा सकता कि पिछली बार गुलाब जानने इलाही को उसके पास किस लिए भेजा था । दरअसल यह समझाने की जरूरत भी नहीं थी क्योंकि मैंने खुद अपनी आंखों से देख लिया था कि इलाही उसके पास से अफीम का एक भरा हुआ डब्बा लेकर आया था । इंस्पेक्टर जारविस ने भी से देखा था । माल असली ही था । इसके बारे में उन्हें शक नहीं था । जैनी मुस्कुराते हुए अपनी उस चीज को थपथपाया जिसमें चरण की तलाशी का वारंट रखा हुआ था । वो मन ही मन ये सोचकर मुस्कुरा रहा था कि इस वारंट को देखकर चरण के जहरी की जगत कैसी होगी । अब हम पहुंच नहीं वाले हैं । उस जगह के करीब पहुंचने ही जाॅब से कहा गवाह मैंने तैयार कर रखे हैं । सब काम चुप चाप भी कर लेना जिससे शोर शराबा ना हो । ठीक है मुझे तो ये लग रहा है कि चलो नाम का ये आदमी तो साहिब है । इनका लीडर तो कोई और योगा ऐसे मामलों में बाद फैली नहीं चाहिए । अगर असली लीडर को पता चल जाए तो वह बडी जल्दी हाथ से निकल जाता है । मैंने इसलिए ये खबर अखबार वालों को नहीं बताई है । जाने का अच्छा हुआ जो हम जल्दी आ गए । इस इलाके में दस बजे से पहले कोई नहीं जाता जाती हूँ की तुम्हारी वो नकली सिगरेट वाली ट्रिक अच्छी रही लेकिन अगर वो लडकी हमें अपना एक सिगरेट मिलने का जोर कर दी तो क्या होता है? इंस्पेक्टर जारविस ने कहा मैं तो उस वक्त बहुत घबरा गया था जब इलाज हाई वो डिब्बा लेकर आया था तो एक बार भूल रहे हो माॅस् हमारे पास दो नकली सिगरेट थी जबकि उसके पास सिर्फ एक ही असली सीक्रेट बच्ची थी । ऐसी हालत में वो जो डाल ही नहीं सकती थी और अगर उसने फिर भी आग्रह किया होता तो तो तो मजा आ जाता तो मजे से झूमने लगते है । मैंने सुना है उससे तो पर या दिखाई देने लगती है । वहां पहुंचने पर जाने धीरे से दरवाजा खटखटाया । भीतर से चप्पल ओके सर सर आने की आवाज आई और फिर थोडी ही देर में चरण ने दरवाजा खोला । कमरे के फर्श पर दो ईटे और दो लोहे के गोले पडे थे । उनकी आने से पहले चरण कमरे में कसरत कर रहा था । इंस्पेक्टर जय को देखते ही उसके चेहरे का रंग उड गया । ये सब क्या है? आप लोग क्यों आए हैं? उसने पूछा जैन अपनी जेब से तलाशी वारंट निकालकर उसके आगे बढा दिया । बडे सवेरे ही आपको तकलीफ होती है । मुझे इसका अफसोस है । शायद आप मुझे पहचान गए होंगे । मैं अफीम की स्मगलिंग की जांच के सिलसिले में पोस्ट ऑफिस में गया था और आप है आॅल फ्रेंच पुलिस विभाग की और से आए हैं । आप चाहे तो कसर पूरी कर लें । हम तब तक इंतजार कर लेंगे । लेकिन इस से मेरा क्या संबंध है? चले ने कुछ कठोर हो कर रहा हूँ । आप लोगों को किसी ने गलत खबर दी है । मैं नगर तो नहीं हूँ । मैं तो अपने दफ्तर के काम के सिवा और किसी बात से कोई मतलब नहीं रखता हूँ । चरण कोशिश कर रहा था की उसके चेहरे पर घबराहट के निशान प्रकट ना हो लेकिन उसकी आंखों में बह की छाया स्पष्ट दिखाई दे रही थी । बहुत छिपाने बाल भी उसके चेहरे पर परेशानी की रेखाएं उभर नहीं लगी थी । स्मगलिंग नहीं करते तो तो शायद गुलाब जन को भी नहीं जानते हो और भिलाई से भी शायद तुम परिचित हो । पर ये पैकेट शायद तुमने िलाई को नहीं दिया क्योंकि ये कहते हुए जैन नकली पैकेट उस की ओर बढा दिया । जेल तो मैं नहीं कह सकता कि मैं गुलाब जन को नहीं जानता हूँ । वो तो मेरी पडोसन है लेकिन ये इन हाई कौन है इसका तो मैंने कभी नाम भी नहीं सुना । और जहाँ तक इस पैकेट का सवाल है इसी तो मैं अभी देख रहा हूँ । मेरी बात का यकीन कीजिए ॅ साहब मेरी बात चरण की आंखों से साफ झलक रहा था कि वह झूठ बोल रहा है । वह दोनों जन गए कि उसके स्वर की कठोरता के पीछे बहुत छुपा हुआ है हूँ और अब तो ये कहना चाहोगे कि तुम शराब भी नहीं देते और पार्क यू नाम के बारे में तुम्हारा पांच सौ रुपए महीने का हिसाब किताब भी नहीं है । यही कहना चाहते हो ना जान अब अब खेल खत्म समझिए हेड कांस्टेबल और दूसरे सिपाही कमरों में घुसकर तलाशी लेने लगे । फॅस कमरों में इधर उधर खोज करते रहे । साथ ही उसी पार्टियों को वह जगह दिखाते रहे जहाँ माल हो सकता था । दो घंटे तक में कमरे में छानबीन करते रहे । इस बीच चरण चुपचाप कुर्सी पर बैठा हुआ उन की ओर देखता रहा । ऐसा लग रहा था मानो वो सोचता है कि अगर कुछ हो ना ये है तो होने दो । रोकने से क्या हो सकता है । यहाँ तो कुछ भी नहीं है । जाने ढककर कहा लगता है इसके पास माल नहीं लेकिन मेरा विश्वास है कि यहाँ नहीं मालूम है । जरूर इंस्पेक्टर जारविस ने कुछ नहीं कहा । वो विचारों में खोया हुआ चुप खडा रहा । कई दीवारों के बीच में खोखली जगह ना हो देखने के लिए एक एक दीवार को ठोक पीट कर देख लिया गया । कोच भी पूरी तरह जांच ले गए । सभी कमरों का एक कोना ध्यान से देख लिया गया था । यहाँ तक छत को भी ठोक बजाकर देख लिया था । लेकिन माल कहीं नहीं निकला और फिर उसकी निगाह कुर्सी पर बैठे । इस सब कुछ से बे खबर सिगरेट पीते हुए चरण पर जम गयी । अचानक ही उसे एक नहीं बात सूज गई एक ही चीज रह गई है जिसकी और हमने ध्यान नहीं दिया । चरण की और भरते हुए इंस्पेक्टर चार्जिस ने कहा जरा कुर्सी हटाइये तो चरण जार्विस की इस बात पर उबल पडा । तलाशी की भी कोई हद होती है तो उन लोगों ने मेरा सारा सामान उलट पलट कर दिया और अब तो मुझे यहाँ जरा आराम भी नहीं करना देना चाहती । तुमलोग मुझे मेरे घर में परेशान करना चाहती हूँ तो मैं बाद में इसके लिए पछताना पडेगा । इंस्पेक्टर एक नागरिक के रूप में मेरे भी कुछ अधिकार है । इस बीच चरण का रंग बदल गया था लेकिन देर तक उसके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकला था । लेकिन अब अचानक ही वो कुछ परेशान सा दिखाई देने लगा । उसका स्वर भी कुछ कठोर लगने लगा । इससे जाहिर हो गया कि उसका अब तक का सारा साहस बना था । अगर तुम खुद तलाशी लेने में हमारी मदद नहीं करते तो हमें दूसरा तरीका अपनाना पडेगा । मैंने कहा और ये कहते हुए वह चैनिंग की तरफ बढा । चरण ने उस जगह से अपनी कुर्सी हटा ली । वो बहुत परेशान और घबराया हुआ लग रहा था । उस सिगरेट के और तीस कश खींचने लगा अच्छा अच्छा वो बोला अब तुम नाराज ना हो । लेकिन ये बात साफ याद रखना कि मैं ईमानदार नागरिक हूँ । चाहे कुछ भी हो, मैं अपने इस नुकसान को पूरा करने के लिए अदालत में मुकदमा दायर करूंगा । जैन उसकी धमकी की ओर ध्यान नहीं दिया । उसने एक डंडे से जोर से फर्श का होगा । आवाज से मालूम हुआ कि फर्स्ट खोखला है । मेरा ख्याल है तुम्हारा अनुमान थी की है जार्विस जैन हजार वैसे कहा जरा चाको देना । एक कांस्टेबल के पास संगीत थी । जैंसे उससे संगीन लेकर वर्ष के बीच में धंसा दी । सारा फर्श सीमेंट के चौकोर टुकडों का बना हुआ था । लेकिन यहाँ पर संगीन डालते ही स्लैब ऊपर उठ गए । सीमेंट के इसलिए के नीचे वर्ष के भीतर लोहे का एक संदूक बना हुआ था । संदूक मारीजुआना और अफीम की टिक्कियों से भरा हुआ था । माल मिलते ही उन्होंने सारे कागजात तैयार की और गवाहों के दस्तखत ले लिया । जब वे चरण को लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचे तो मुश्किल से सात बजे होंगे । वो भी चलाती की वजह से मारा गया । फॅसने अपनी सिगरेट सुलगाते हुए कहा, वो सोच रहा था कि हम धोखा खा जाएंगे । वो अपने व्यहवार से ये दिखा रहा था कि चाहे कुछ भी हो, हम छिपे माल का पता नहीं लगा सकते । वो बहुत लापरवाह बनने की कोशिश कर रहा था । बस मुझे इसी पर शक हो गया । मैं समझ गया इस तरह लापरवाही का मतलब है माल । उसने अपनी नीचे ही कहीं छिपाया है । पाँच की चार खाने वाली बनावट देखकर निर्दशक पहुँच भी पक्का हो गया । उसने तो पूरी होशियारी दिखाई थी लेकिन अपनी लापरवाही कि दिखावे की वजह से मारा गया । अगर उसे थोडी सी भी घबराहट डर दिखाया होता तो शायद मुझे शक नहीं होता । मगर ये लोग हमेशा कोई ना कोई गलती कर ही बैठे हैं । ज्यादा होशियारी भी गलती ही होती है । है ना अजीब बात मुझे मैंने उससे बात कर ली है । जय बोला और वो मान भी गया है । लेकिन वो ये चाहता है कि वह खुद किसी तरह से साफ हो जाएगा । हमें उसको जाल में लाना ही पडेगा । नहीं तो हम कभी भी मामले की तह तक नहीं पहुंच सकेंगे । जार्विस बोला उसे चारे की तरह इस्तेमाल करना होगा । दूसरी बात ये है कि हमें मिली खबरों के मुताबिक बाहर जो अफीम भेजी जाती है वह पक्की होती है । जबकि इसके पास कच्ची ऐसी मिली है । जरूर ऐसी कोई जगह होनी चाहिए जहां पक्की अफीम बनाई जाती होगी । मैंने पूरी योजना बना ली है । योजना ये है कि जैन मीट पर पडे हुए सिगार बॉक्स में से एक सिगार निकालकर सुलगाते हुए कहा । इस बीच बगैरा बीयर की बोतल लेकर आ गया । जैन ने गिलासों में बीएड डाली । फिर जार्विस के गिलास से अपना गिलास टकराते हुए कहा हाँ तो योजना ये है कि इन बॅाय की एक एक बात ध्यान से सुनता रहा । जब वो अपनी योजना पूरी तरह समझा चुका था तो जार्विस खुशी से उछल पडा । ठीक है बिल्कुल ठीक तो मैं ये विश्वास के चरण बिल्कुल ठीक ठाक होगा । वो बिल्कुल सही है । यू समझो कि वह इस काम में हमारी पूरी पूरी मदद करेगा । जाने विश्वास से कहा चलो अब तो कामयाबी हार आई लगती है ।

सातवाँ फेरा -12

भारत बारहा उमा मनी मनी बीती बातें याद करती रही । पहले तो फारम की परेशानी आ रही फिर पिताजी भी जल पैसे और अब उसे एक ऐसे व्यक्ति के साथ बांधा जा रहा था जिससे वो दुनिया में सबसे अधिक नफरत करती है । माँ को विमल के बारे में किस तरह बताया जाए । उम्र यही सोचती रही तो ये भी अच्छी तरह समझती थी की इस समय माँ के मन में भी संघर्ष चल रहा है । उसको भी देवल पैसे नहीं था लेकिन मृत्युशैया पर लेटे हुए पति की अंतिम इच्छा भी कैसे डाली जा सकती हैं । उसके लिए वह ये सबसे अधिक पवित्रा है । उमा की योग्य पति तो जय था इसलिए उसने विमल के पिता को इस संबंध में बहुत ही अन्य छह से पत्र लिखा था । वो ये सोचकर अपने को सांत्वना देती रहती थी कि विमल का पिता उनके परिवार का बहुत पुराना मित्र हैं और लडका खूब पैसे वाला है । ये बात नहीं थी कि वह पैसे को खुशी से बडी चीज समझती हूँ । दरअसल बिना को धन दौलत से उतनी ही घृणा थी जितनी उसके पति को प्यार था । उसको तो बस इसी बात की तसल्ली थी की उमर को अपने घर में किसी चीज की कमी नहीं रहेगी । ये अपने केस में व्यस्त था । आजकल वो यहाँ बहुत कमाया करता था । इस कार्य नहीं की राजेंद्रबाबू ने उसे अस्वीकार कर दिया था । बल्कि वो चुप चाप से कुछ देखता था । चिंता करना उसका सुभाव नहीं था । उसे विश्वास था कुछ भी हो उमा उसकी ही होकर रहेगी । अगर उनका विभान अभी हो सका तब भी वह दोनों ऐसे प्रेम सूत्र से जुडे रहेंगे जो कभी टूट नहीं सकता । उसकी गहरी गाली आंखों में जैन ने उसकी मन की भाषा पढ ली थी । वो दोनों एक हो चुके थे । अब अगर किसी दूसरे व्यक्ति ने उसका विवाह हो भी जाए तो वो व्यक्ति उसके शरीर को ही पा सकेगा, उसके प्यार को नहीं । बहुत दिन बाद जय को एक शाम फुर्सत मिली हो । साइकल उठाकर राजेंद्रबाबू के घर की और चल पडा । अनिल घर के बाहर ही खेल रहा था । उसे देखते ही वो अपनी तीन पहियों वाली साइकिल से कूद पडा । अनिल भैया चिल्लाओ ने ही जाओ खेलो उभरने अनिल से कहा । और फिर जय की तरफ मुडते हुए बोली कितने दिन कहा रहे तो मिलने को कितना मन होता रहा । तुमसे मैं एक समझा रहा कैसा था? उन्होंने पूछा अरे यहाँ कुछ नहीं । अभी वसीम का एक मामला था छोडो भी हर सुनो मैं कुछ काम से कल वाराणसी जा रहा हूँ । मैं वहाँ करन के पास ठहरूंगा चाहो तो तुम और प्राण भी साथ चले चलो कुछ चेंज हो जाएगा और फिर वहाँ से साल नाथ भी घूम आएंगे । नाव में सैर भी करेंगे । सायना घूमने का तो बहुत मन है । मैंने सुना है कि बहुत ही सुंदर जगह है । जगह तो बहुत सुंदर और प्यारी है तो में माँ से पूछना पडेगा । कल यहाँ चाची भी आ रही हैं । माँ के लिए साथ भी हो जाएगा इसलिए वो मान भी जाएंगे । तभी वेना अनिल को कपडे बदलने के लिए कहनी उस और आने के लिए । अरे जय बहुत दिनों के बाद दिखाई दी । वही कहा रहे । इतने दिन उसे जैसे पूछा हम बस ऐसे ही दफ्तर के एक बहुत जरूरी काम में उलझा रहा । हाँ, अब आप की तबियत कैसी है? ठीक है । वीणा ने कुछ उदास स्वर में कहा अब वो बाहर कहाँ हो सकती है? बेटा सो तो है ही । मांझी इंसान इतनी आसानी से थोडी बुलाया जा सकता है । जैनी रुंडी हुए इस्वर में कहा हाँ मैं सोच रहा था उमा बहुत थकी हुई लग रही है कुछ दिन के लिए कहीं बाहर ुआती तो ठीक रहता । हवा पानी बदलने से उसके स्वास्थ्य और मन में कुछ फर्क पर ज्यादा ठीक कह रहे हो तो कुछ दिन के लिए कहीं बाहर चली जाये तो अच्छा रहेगा । मैं कुछ दिनों के लिए वाराणसी जा रहा हूँ । मांझी उमर प्राण भी साथ चल चले तो अच्छा रहेगा । वहाँ से हम सारनाथ भी घूम आएंगे । मेरा ख्याल है इससे । उमा को भी कुछ आराम मिलेगा । हाँ हाँ क्यों नहीं मैं यही सोच रही थी की कुछ दिन बाहर हुआ आएगी तो अच्छा रहेगा । यहाँ तो बिल्कुल घुल गयी है । करंट उन्हें लेने स्टेशन पर रहा था । उमा को वाराणसी की हर चीज लुभा रही थी । वहाँ की गेरुए वस्त्रधारी साधु गंगा के भव्य घट घाटों पर नहाने वाले लोग सडकों पर फिर रहे । आवारा सांड । गरज ये कि शहर की हर चीज में उसका मन हो लिया । सुबह उठकर वह घाट की ओर पहली निकल गई । बाहर अभी धुप अंधेरा था । गली से निकलते ही उसने देखा स्त्री पुरुषों की गद्दार डर कडारघाट की और जा रही है । अभी सूरज नहीं निकला था लेकिन रात का अंधेरा धीरे धीरे सिमट लगा था । गंगा के पवित्र नाम का घोष करते हुए लोग अपने कंधों पर गमछा लटकाए हुए नदी की और चले जा रहे थे । घाट पर उसे भीड में हर किस्म की लोग दिखाई थी । सडक के किनारे से जहाँ घाट की सीढियां शुरू होती थी, नदी के किनारे तक रास्ते की दोनों और भिखारियों की कटारे थी । लूले लंगडे, अंधे कानी, कोडी सभी किस्म की भिखारी वहाँ थे । वे सब रास्ते घर से गुजरने वाले लोगों को दुआएं देते और भी के लिए अपना बरतन हर गुजरने वाले के लिए बढा देते हैं । उमा थक कर चूर हो जाने तक चलती रही । नदी के दूसरे छोड पर लाल लपटों से घिरा हुआ सूरज का गोला प्रकट होने लगा था । नदी पानी पी लहरी सुनहरी किरणों की आभा में झिलमिला रही थी । धीमे धीमे बह रहे पानी की लहरों में एक अजीब सी खामोशी छाई हुई थी । उमा छुप जाना इस आकर्षक दृश्य को देखती रही । उमा को लग रहा था कि वो पूरी तरह हो गई है । सारनाथ के बोद मंदिर में प्रवेश करने पर जैन ने पांच ही रस्सी से बंधे डंडे से एक घंटा बचाया । तुमने भीतर कदम रखा तो सहमी रह गई । उसकी अपनी सांस रोक थी कि कहीं मंदिर की नीरवता भंग ना हो जाएगा । वाराणसी के ढेरों पुजारियों से घिरे शोरशराबे वाले मंदिरों को देखने के बाद इस शांत मंदिर में आना बडा अच्छा लग रहा था । मूर्ति के सामने तेल से भरा एक कांच का लैंप रखा हुआ था । इस मंदिर में एक भी पुजारी नहीं था हूँ । एक कोने में दान बॉक्स रखा हुआ था । वर्ष साफ कॉलेज किया हुआ था । वाराणसी के मंदिरों की तरह न तो फर्श पर दूध के बहने से फिसलने हो रही थी ना इधर उधर चढावत दिखा हुआ था । उमा कहे दिया उल्लास से भर गया । उसे लगा वो हमेशा के लिए इसी तरह मुस्कुराती हुई बुद्ध की मूर्ति की और देखती हुई अकेले में चुपचाप खडी रह सकती है और लंच के लिए देर हो रही है । प्रमिला बोली सुरेश भी घर पर अकेला बोर हो रहा होगा । जिस रास्ते से उमा घर वापस लौटी उसके दोनों और हरे भरे पार्क और घनी छायादार बात थी । जीएसटू और प्राचीन सवंसा विशेषों की और देखता रहा । उसे उस मूर्ति के चेहरे की मुस्कान याद आई जो उसने संग्रहालय में देखी थी । सात बजने को थे पुलिस की गाडी गली के नुक्कड से करीब सौ गज धूर ठहर गई । सादीवर्दी पहने हुए दोनों इंस्पेक्टर गाडी से उतरे सब कुछ ठीक है ना । इंस्पेक्टर जैन ने हेडकांस्टेबल से पूछा जी हाँ सब ठीक है । गोली चलने की आवाज सुनते ही हम लोग उसकी और दौड पडेंगे । अभी हम लोग यही पर इंतजार कर रहे हैं । ठीक है जहाँ तक हो सके फायर ना करना बहुत जरूरी हो तो ही गोली चलाना समझे । हम उन्हें जिंदा पकडना चाहते हैं । इसलिए अगर फायरिंग करने भी हो तो निशाना नीचे साधना ठीक है ना? जी साहब, तुम्हारे सब आदमियों की राइफले भरी हुई है ना? जी हाँ मैंने देख लिया है । ठीक है सावधान हूँ । अच्छा गुडलक साहब ये कहकर हेडकांस्टेबल अटेंशन की स्थिति में खडा हो गया । चरण चलो चले माल उठाओ । दोनों इंस्पेक्टर ने अपनी जेब में रखे भरे हुए पिस्टलों को थपथपाया और उस और चल पडे । अगर गोलियाँ चल पडी तो अपना बचाव करना । चरण जय ने चरण से कहा हमें तुम्हारी गवाही की जरूरत होगी और फिर मुझे गैर की एक आदमी की लाश । धोनी अच्छी नहीं लगती । तीनों दबे पांव गली के मोड की और बनने लगे । रास्ता बहुत संकरा था । चारों और धुप अंधेरा था । रास्ते के एक और किसी पुराने बाकी ऊंची चारदीवारी थी । दूसरी ओर किसी पुराने नवाबी महल के उजाड खंडर बात की वह चारदीवारी कई जगहों पर बीच बीच टूट गयी थी । जैनी इन दोनों जगहों पर अपने आदमी बैठा दिए थे जिसने निकल भागने का कोई रास्ता खुला ना रहे जाए । रास्ते की दूसरे छोड पर किसी को नहीं बैठाया गया क्योंकि उस और से तस्करों को आना था और जय किसी भी तरह उनके मन में शक नहीं होने देना चाहता था । उस छोर पर आदमी बैठने से हट आईवी चिडियों के और जाने का खतरा था । अगर उन्हें दैनिक भी शक हो गया तो वो भाग जायेंगे और अगर गिरोह का सरदार एक बार हाथ से निकल जाए तो उसे फिर से घेरकर पकडना कठिन होता है । तुमने उसे क्या समय दिया था? चरण सात बजे का हटाना जैनी चरण से पूछा हाँ मैंने तो सात बजे ही कहा था वो हमेशा शाम ढलने के बाद ही आया करता है । उसके साथ और भी कोई होता है या वो अकेले ही आता है । मैंने तो खुद तो उसके साथ कभी किसी को देखा नहीं सुना है कि वह इधर उधर निकलता है तो अपने साथ एक दो होंगे जरूर लगाए रखता है । मुझे तो बस उसे माल देने और अपने पैसे लेने से ही मतलब रहता है । पैसे वो मुझे हमेशा नदी देता है । यू कोई चाहे तो यहाँ पर दो चार आदमियों को आसानी से अंधेरे में छिपाकर रख सकता है । देखो तो चारों और कितना सुनसान है और अंधेरा भी कितना गहरा है । लोगों का कहना है कि ये जगह बहुत गई है इसलिए कोई इस तरफ आता नहीं । चरण गोला खाश वो लोग समझ सकते कि यहाँ किस तरह के भूत प्रेत आते हैं । जारविस ने नियम से मुस्कुराते हुए कहा समय हो ही गया समझो । जैन अपनी घडी के चमचमाते हुए स्टेडियम डायल की और देखते हुए कहा हम लोग तो दीवार से सटकर खडे हो जाते हैं और चरण तुम अपने संकेत स्थल पर जाकर खडे हो जाओ । देखो तुम्हारी जहरी की रंगत नहीं बदल नहीं चाहिए । हमेशा की तरह स्वाभाविक रूप से व्यवहार करना और संकेत भी याद रखना फॅस और जय दीवार की ओट में छिपकर खडे हो गए । चरण अपना चमडे का बैग उठाए रास्ते की मोर की और चल पडा । उसके बैग में अफीम भरी हुई थी । मोर के पास पहुंचकर वो एक अंधेरे कोने में खडा हो गया । चरण जगह तो नहीं करेगा तो उस पर विश्वास है ना? जारविस ने जैसे पूछा हाँ मुझे उस पर पूरा भरोसा है । मैंने उसे खूब अच्छी तरह जांच परख लिया है । सांस रोके हुए दोनों इंतजार करते रहे । ये इम्तिहान की घडी थी । अगर योजना ठीक कामयाब हो गई तो गिरोह का सरदार जाल में फंस जाएगा और अगर किसी तरह निकल भागने में सफल हो गया तो फिर कौन जाने वो कहाँ छुप जाएगा । चरण भी उसे जानता नहीं था बल्कि चेहरे से पहचानता भरथा दोनों ने कभी एक दूसरे से बात नहीं की थी । चरण का उसे इतना ही संबंध था की वह चुपचाप अफीम का भरा हुआ बैंक अपने हाथ से सरकार कर उसके हाथों में थमा देता था । इसके अलावा उनमें कोई संभव या लेन देन नहीं था । घडी की सोनिया पौने आठ बजा रही थी । लगता था कि वो आज आएगा ही नहीं । अचानक चरण के जोर से खासी की आवाज सुनाई दी । ये संकेत था ये दोनों दीवार की ओर से निकलकर उस और दो हर बडे जैन अपनी पिस्टल से एक हवाई फायर किया । चारों ओर से सिपाही दौड पडे । रात की निर्भरता में बूटों की आवाजों का शोर गूंजने लगा । हर चीज में जाना गई दोनों इंस्पेक्टर अपने और चमकाते हुए गली में दौड पडे । उनके पीछे राइफल लिए हुए हेड कांस्टेबल अब्दुल दौड रहा था लेकिन वो लोग गली के रास्तों, मोडो और घुमाओ से परिचित नहीं थे । जबकि तस्करों का गिरोह इसके चप्पे चप्पे से परिचित था । जैन देखा के चरण हाथों में नोटों का एक बंडल थामी चुप चाप खडा है बोलों किधर गए? जैन ने बुद्ध की तरह खडे चरण से पूछा । चरण ने हाथ से एक तरफ इशारा क्या वो लोग उस और गए हैं, तुम्हारे गोली चलाते हैं बल्कि उससे पहले भागने लगे थे । मेरे खास ने से उन्हें कुछ शक हो गया था । वो उसी तरह दौड पडे लेकिन लगता था जैसे तस्करों का गिरोह बज कर भाग निकला हूँ । लेकिन तभी आगे गोलियां चलने की आवाज सुनाई थी । कॅश वो लोग आगे निकल गए हैं । जारविस ने कहा तीनों उसी दिशा में दौड पडे । जैक दौडते हुए अपनी पिस्तौल से गोलियां चलाने लगा । तभी अब्दुल ने पीछे से आकर उसका हाथ पकड लिया । वो तो हमारे अपने आज भी है साहब गोलियां मत चलाइए, अपनी आदमियों को लग जाएंगे । अब्दुल की इस बात से ज्यादा उलझन में पड गया एक्शन के लिए तो उसे अब्दुल पर ही संदेह हो गया । हो ना हो खुद अब्दुल ही दगाकर गया हूँ । कहीं वो खुद ही तस्करों से ना मिल गया हूँ । ये ख्याल आते ही एक्शन के लिए उसके दिल की धडकन ठहर गई । अभी तक उसने एक और ध्यान नहीं दिया था लेकिन अब उसे देखा तो वहाँ पर सिर्फ अब्दुल ही मौजूद था । दूसरे कांस्टेबलों की छाया भी कहीं देखने में नहीं आ रही थी । अब्दुल भी जय के मन की दुविधा को ताड गया था । माफ कीजिए साहब मैंने ये काम अपनी समझ क्या है? आप के जाने के बाद मैंने देखा दीवार के बीच में एक रास्ता है यह रास्ता गली के दूसरी और निकल जाता है । इसलिए मैंने अपनी सभी सिपाई वही पर खडे कर दिए जिससे उनके लिए भी रास्ता बंद हो जाएगा । आपको जाती हैं ये बदमाश दौडने में कितने तेज होते हैं और जब इन पर बनी आती है तब तो इनके पैरों में पंख लग जाते हैं इसलिए साहब मैंने । वो तो हमारे अपने आज भी हैं साहब । शायद उन्होंने बदमाश को पकड भी लिया है । अब्दुल ने जय को भी बात समझाई । दौडने के साथ साथ बोलते रहने से अब्दुल हाफ में लगा था । उन के नजदीक पहुंचकर जैनिक देखा कि अब्दुल की बातचीत की ये तो नहीं है हमारे ये आदमी हैं । जारविस ने कहा, ये अब्दुल बहुत समझदार है । हम से भी ज्यादा समझदार देखो तो इन लोगों ने बदमाश को पकड लिया । सिपाई तीन आदमियों को रस्सियों से बांध लिए आ रहे थे । क्या बात है? इंस्पेक्टर जारविस ने जय की ओर देखते हुए कहा तुम्हारे चेहरे से तो ये लग रहा है जैसे तुम्हें कोई भूत देख लिया हूँ । अब तो खुश हो जाओ । आखिर शिखर जाल में फंसी गया लेकिन जय की पथराई हुई । आगे तो सामने की ओर टिकी हुई थी । उसके चेहरे की रंगत जुडी हुई थी । लग रहा था जैसे कोई बहुत ही अजीबो गरीब सपना देख रहा हूँ, क्या बात है? प्यारे जारविस ने पूछा तुम्हारे चेहरे कर्म फीका पड गया है । तबियत ठीक है ना । वो देख रहे वो आदमी जैन अपनी आवाज ठीक करते हुए कहा वो आदमी हाँ, वही तो है । वही चरण बीच वाले आदमी की ओर इशारा करते हुए बोला तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है । जय देखा वो नहीं हो सकता । वो विमान है, विमल हो या कोई और चरण बोला नाम चाहे जो भी हो है ये वही आदमी बिल्कुल वही मेरी आंखें धोखा नहीं खा सकती । जीवन अपनी जल्दी भी आंखों से जय की और देखा अच्छा तो तुम हो । विमल ने घृणा और क्रोध के साथ उसकी ओर देखते हुए कहा मैं तुम्हें देख लूंगा । शायर के बच्चे मैं अभी वो अपनी कमर से बंधी रस्सी से छूटी की कोशिश करने लगा । उसका चेहरा प्रोजेक्ट तमतमा रहा था । जार्विस ने असमंजस में पडे हुए इंस्पेक्टर की और देखा और मुस्कुराते हुए कहा वो तो जानता है ये बात होते हैं लेकिन दोनों से पसंद नहीं हो । ठीक है ना चलो इससे हमारा काम आसान हो गया है । तुम्हें तो उसका घर देखा होगा । हम सीधे उसके अड्डे पर चलेंगे । पुलिस की गाडी पोर्टिको में आकर रुकी । दफ्तर की चाबियां तुम्हारे पास है ना जैनिक घबराते हुए चौकीदार से पूछा जी हजार दिया तो मेरे पास ही है । चौकीदार दरवाजा खोलकर बत्ती चलाते हुए बोला लेकिन मालिक घर पर नहीं है । कोई गडबडी तो नहीं हुई साहब, तुम प्रभाव मत करो । तुम्हारा मालिक बिल्कुल ठीक है । अब्दुल बोला तुम तो अपने मालिक के पास नहीं जाना चाहते हैं । अच्छा तो बाहर इंतजार करो । हम लोग अभी लौट कराते हैं । घबराया हुआ चौकीदार कमरे से बाहर चला गया । इंस्पेक्टर जारविस ने इधर उधर देखना शुरू किया । सजाया तो खूब है भाई चालीस बोला रूचि तो अच्छी है । आदमी की अच्छा तुम दीवारों को देखो । मैं बोलता हूँ फिर बाकी कमरों की जांच करेंगे ये कहकर जार्विस मेज के दरवाजों को उलटने पलटने लगा । वो लोग माल हारता गया । वो खुशी से चीख पढा । सबसे निचली दराज में से चार मोटी मोटी जिल्द बंधी किताबें उसके हाथ लग गई थी । जिल्द ऊपर तो लिखा था कि वह सामान्यज्ञान की किताबे हैं, लेकिन किताब खोल देंगी । उसके अंदर एक छोटा सा डब्बा निकला देखा तुमने? इसी तरह की किताब मैंने तो में दिखाई थी ना । वो जैसे बोला इधर जय और जारविस मीजो और दीवारों की जांच कर रहे थे और उधर हेड कांस्टेबल अब्दुल और उसके साथ ही फर्नीचर, अलमारियों और कमरों में लगे नलों आदि को टटोलते रहे । लेकिन कुछ भी खाते हैं, लगा जरा इधर आओ । इंस्पेक्टर जैने जावेद से कहा दीवार का ये हिस्सा कुछ अजीब आवाज कर रहा है । जारविस ने उम्मीद से दरवाजा खटखटाया तो कुछ खोखली से आवाज सुनाई दी तो ये तो पैनल है । शायद ये कहते हुए उसने दीवार पर अपनी टॉप्स चमकाई । बहुत खूब बहुत अच्छी तरह और सफाई के साथ फिट की गई है । कभी इतना साफ काम नहीं देखा । उसने अपना छोटा सा जेबी चाकू निकाला और दीवार खरोचने लगा । बीते धातु की पडती थी जार्विस चाकू से टटोला, खुफिया डाला था कुछ देर चाकू से इधर उधर घुमाने के बाद डाला खटाक की आवाज के साथ खुल गया जार्विस । दीवार पीछे खेली तो पैनल पीछे हट गया । देखा अंदर कोई स्विच होगा । जारविस बोला जैनिक टॉर्चलाइट, अंदर घुमावदार सीढियां नीचे किसी तहखाने में उतर गई थी । जैनिस विच देख लिया था । उसी ऑन करके बत्ती जलाई तो सीरिया जगमगा उठी । यही तो मैं ढूंढ रहा था । प्यारे आओ नीचे चले जार्विस बोला जिस विच्चे सीढियों पर प्रकाश पर गया था, उसी से तय खाने में भी रोशनी हो गई थी । ये तो खाने को देखकर आश्चर्यचकित रह गया । एक कोने में एक कोच था उसके पास ही एक बीच की तो दूसरी ओर एक छोटी सी लेब्रोटरी थी । जैसे ही जैसी जैन ने अपने स्कूल में देखी थी, दो बडे बडे प्लॉस थे और और निकालने का एक यंत्र । इस यंत्र पर कुछ शीर्ष की नलिया लगी हुई थी । लेबॉरेटरी में सभी जरूरी चीजें थी सिंह, टेस्ट, ट्यूब, भूस्खलन, बर्नर आदि बहुत छोटी लेकिन बहुत साफ सुथरी लेबॉरेटरी है । ये जार्विस बोला ये आदमी अपने काम में माहिर था । उसे एक बार कमरे को ऊपर से नीचे देखा तो उधर देखो तो दीवार में एक तिजोरी दिखाई दे रही है । इसे खुल वाली इंस्पेक्टर ने अपनी जेब से एक छोटा सा पैकेट निकाल करती जोडी पर रख दिया । फिर उसने पैकेट के एक कोने को माचिस की जलती हुई दिल्ली से सुन लगा दिया पैकेट के आप पकडते हैं । वो पीछे हट गया । एक हल्का सा धमाका हुआ और तिजोरी का ताला टूट गया । उसे पांच जाकर की जोडी खोली । उसके भीतर दो खाने थे । एक खाना नोटों से भरा हुआ था । खजाना जय देखा तो ये देखो जयंती जोडी में से छोटे से पैकेट को उठाकर जार्विस की ओर बढाया हीरी । उसने ये हथेलियों में उठाए तो रोशनी में जगमगाने लगे । लग रहा है जैसे हम खजाने में चले आए हो । और ये क्या है भाई? उस की जोडी के ऊपर के खाने से कागज के बने कुछ पैकेट निकालते हुए पूछा यही तो असली चीज है । मैं यही सोच रहा था कि ये यही होंगे । इंस्पेक्टर जारविस ने पैकेट अपने हाथ में लेते हुए कहा पैकेटों के भीतर छोटी छोटी लकडी की दिव्या थी । इन डिब्बियों में सफेद संकट चूरन भरा हुआ था, जहर है । जारविस ने इसे सफेद चूहे इनको सुनते हुए कहा । जैन ने आश्चर्य से पैकेट की ओर देखा । इंस्पेक्टर जारविस ने पैकेट को वापस िजोरी में रख दिया । यहाँ तो दम घुट रहा है । वो बोला चलो जब तक खोजबीन करते हैं तब तक हम कोच पर आराम करें । फिर हमें यहाँ एक चौकीदार बैठा होगा । जैनी आवाज देकर अब्दुल को बुलाया । एक आदमी बाहर खडा कर दो और बाकी आदमियों को इधर बुला लो तो ये क्या है? जैसे कोच की गद्दी को टटोलते हुए कहा लिप्स्टिक मीना की होगी । शायद मीना को जानती हो ना तो उसकी सेक्रेटरी है । इस समय वो पुलिस स्टेशन में होगी फिर तरीका या एयर होस्टेस सी लगती है । जल्दी से मुस्कुराते हुए उस की और देखा नहीं । ऐसे कामों में हमेशा नमकीन और सेक्सी लडकियाँ ही इस्तेमाल की जाती है । मैं तो जब कभी किसी ऐसी लडकी को जाउंगी ना चाहते हुए देखता हूँ तो समझ जाता हूँ कि इसकी छाया से भी दूर रहना चाहिए । समझते हैं क्योंकि रहते भी हो हाँ हाँ! रहता हूँ । लेकिन जब छाया से जारविस ने मु बताते हुए उत्तर दिया कॉन्स्टेबल कमरे की वस्तुओं की लिस्ट बना रहे हैं । जय उनकी ओर देखता हुआ सोच रहा था कि विमल कैसे इस कुछ उत्र में फंस गया । धोखाधडी और हेरफेर के तो और भी बहुत तरीके होते हैं । लेकिन ये तो बहुत खतरनाक कम है । विमल की जिंदगी खराब हो गयी है । उसे कितनी सजा मिलेगी? जय सोचने लगा दो साल, तीन साल, चार साल जो कुछ भी हो उस की सारी शोहरत मिट्टी में मिल जाएगी । उमर सुनेगी तो कैसा लगेगा उसे वो बाहर बाल बच गई है । अगर ये घटना एक दो महीने बाद पता लगती तो ये ख्याल आते ही जय का बदन का अब उठा । उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाती । इंस्पेक्टर जार्विस और जय मेट्रोपोल में बैठे थे । जारविस ने अपना सिगरेट सुलगा लिया । दोनों ने थोडी देर पहले बीजेपी थी । अब्दुल की वजह से हम कामयाब होगे । जार्विस बोला पहली बार मुझे उसके आगया ना मानने पर उस दिन खुशी हुई । इससे पता लगता है कि समझदार व्यक्ति कुछ भी कर सकता है । मुझे तो समझदार आदमी पसंद है । जो सिर्फ खुद की तामिल करना चाहते हैं वो मुझे पसंद नहीं है । तो आप ने रिपोर्ट तो भेज दी है ना? हाँ रिपोर्ट तो भेज चुका और कल के जहाज में मेरी सीट भी रिजर्व हो गई है । मेरे अवसर ने तो भी धन्यवाद कहा है । तुम्हारी सहायता सही, हम गिरोहों और उसके सरदार को पकड सके । तुम्हारे साथ काम करना मजेदार था । जय बोला तुम्हारे बिना कुछ दिन तो बहुत बुरा लगेगा । मैं जहाँ चाहो तो में शहर घुमा लाओ । गुलाब जान के पास भी चलेंगे । वो बेचारी सोच बडी होगी कि हम क्यों दी? जल्दी उठ कर चले गए । मुझे शहर बहुत पसंद आया । जार्विस बोला खासकर वो खूबसूरत इलाका हाॅल । हजरतगंज हाँ, हजरतगंज डीआईजी से तो तो मिल लेना हो चुका है । वो तुम्हारे का की तारीफ कर रहा था । वो कह रहा था कि नए नए होने पर भी तुम्हें बहुत होशियारी से काम किया है । वो तो कह रहा था कि उसने तुम्हारा नाम पुलिस मेडल के लिए भेजा है । अरे हाँ उस सेक्रेटरी का क्या हुआ? उसने कुछ बताया नहीं । बहुत कुछ लगता है उसका बॉल्स उसे अपने सारे भेद बजाया करता था । भेजी नहीं । और भी बहुत कुछ जॉब इसमें मुस्कुराते हुए कहा हाँ एक भी तो हम भी जाते हैं । याद है उस दिन तय खाने में कोच पर हमें क्या मिला था? ओ हाँ हो लिप्स्टिक मैं तो भूल ही गया था । हमने उसे छोड दिया है । जैन डिनर का ऑर्डर दे दिया । दोनों चुप चाप खाना खाने लगे । खाना खा चुके तो दोनों ने सिगरेट सुलगा ली । विमल था, चला जय बोला । छोटी से कैमिकल वर्क शॉप के पर्दे में ये सब कारोबार करना चालाक आदमी का ही काम है । जो कुछ भी हो वो भी आखिर कानून के जाल में फंसी गया । अब वो हमेशा के लिए नहीं तो कम से कम कुछ सालों के लिए तो बंद हो गया । वैसे लोगों के बारे में कुछ कहना आसान नहीं । कौन जाने कल फिर से वही धंदा शुरू कर दी । लेकिन जहाँ तक होगा हम इसका तो पता लगा ही लेंगे । इसका पूरा विवरण हमने इंटरपोट यानी कि अंतराष्ट्रीय पुलिस को भेज दिया है । अच्छा इंस्पेक्टर है, डिनर के लिए धन्यवाद । मैं चलू । मैं ठीक नौ बजे तुम्हें लेने विंटर में बहुत जाऊंगा । तुम्हारा प्लेन पौने दस बजे चलेगा । हाँ जाएगा तो पौने दस बजे ही । लेकिन तुम क्यों तकलीफ करते हो? फर्स्ट भेज देना । तकलीफ की क्या बात है? मुझे तो अच्छा लगेगा । फिर कल सुबह मुझे काम भी कुछ नहीं है । ऐसा है तो ठीक है तो वहाँ जाना । गुड नाईट, गुड नाईट । ये उदास सा यादव में डूबा हुआ इंस्पेक्टर जारविस को प्लेन पर चढते हुए देखता रहा । उसने हाथ मिलाया और सभी उसकी पालक भी गए थे तो स्वभाव से ही भावुक था । जब कभी उसे किसी से जुडा होना पडता था, चाहे उस व्यक्ति से उसका परिचय थोडी ही देर का क्यों ना हो, उसका दिल भर जाता था । उदास मंत्री वो विमान को पटरी पर दौडते हुए और फिर ऊपर हवा में उडकर आकाश में दूर होते हुए देखता रहा । इंस्पेक्टर जार्विस उसे भला लगा था वो सिर्फ एक योग्य पुलिस ऑफिसर ही नहीं था बल्कि एक अच्छा दोस्त था ।

सातवाँ फेरा -13

भारत ही रहा । बहुत अच्छी बात है । शंकर ने सुना तो चौक कर कहा मुझे तो ये सोचकर कब कभी हुआ आती है कि मैं आज तक एक बदनाम अपराधी के साथ लेनदेन करता रहा । विमल के नजदीक जो लोग थे उनमें से अधिकतर लोगों को ये खबर सुनकर जरा भी अफसोस नहीं हुआ । जो भी उसकी तारीफ करते थे उन्हें उसके पैसे से प्यार था उससे नहीं । अब उसका भेद खुल गया तो उनका प्यार भी खत्म होगा । उमर ये खबर सुनी तो उसे अच्छा भी लगा और कुछ डर भी । उसके मन का बोझ हल्का हो गया । जैसे वो ये सोचकर कांप उठती हूँ कि वो किस तरह बाल बाल बच गई है । उसकी माँ को तो बस ये साल बीतने का इंतजार था क्योंकि शौक वर्ष में शादी बियाह हो नहीं सकते थे और साल बीतने में भी अब थोडा समय ही रह गया था । अगर विमल पुलिस की निगाहों से छह महीने और बच्चा रहता तो उसका जीवन नष्ट हो जाता । लेकिन हमेशा उसके भले के लिए कुछ न कुछ ऐसा हो ही जाता है । ये सोचकर उसके दिल की धडकन तेज हो गई कि उसका जीवन किस तरह जय के साथ जुडा हुआ है । साहूकार के पंजे से उन्हें बच्चा लेने के लिए वह कैसे अचानक ही प्रकट हो गया था और अब उसने उसे बर्बाद होने से भी बचा लिया और फिर भी वो इस तरह व्यवहार कर रहा था जैसे उसने कुछ भी नहीं किया हूँ । शैतान को याद करो और लोग वो हासिल हो गया । प्राण ने बाहर जाएगी । जीत की आवाज सुनी तो बोला तुम्हें बदमाश को बंद करा कर ही दम लिया मैंने नहीं उसकी करतूतों नहीं और मेरे एक साथी फ्रेंच पुलिस अफसर मैं भी उसे विदा कर के आ रहा हूँ । ये सब हुआ कैसे? किसी को शक नहीं हो सकता था की विमल मादक द्रव्यों की तस्करी करता है । ये बडी लम्बी कहानी है तो मैंने अखबार में तो पढ लिया होगा वहाँ कहाँ है वो अपने बच निकलने की खुशी में मौज बना रही होगी । भारी जीती देखो तो कौन आया है उमर कमरे से बाहर निकल कर आई तो तो आप हैं वो अपनी साढे संभालती में बोली तो बरामदे में ये खडे हैं भीतर आइये ना जो भीतर अगर कोच पर बैठ गया वो थका हुआ था चाहे चलेगी मैं अभी हवाई अड्डे से लौट रहा हूँ । रास्ते में चाय पीने का मौका ही नहीं मिला । हाँ, अब तो बडे अवसर हो भाई । बडी बातें हैं । प्राण बोला । अच्छा उस विमल की हालत क्या थी जब तुमने उसे गिरफ्तार किया । फोटो तो में खा जाने वाली निगाहों से देखता रहा होगा । तुम तो जानती हो वो मुझे तो कभी पसंद नहीं करता था । बस एहि सब जो की इतने सारे पुलिस अफसरों में से मुझे उसे गिरफ्तार करना पडा । काश मैं वहाँ होता हूँ । मैं होता तो मजा आ जाता । आजकल तुम क्या कर रहे हो रहा है कुछ भी तो नहीं तो वही कुछ ना कुछ तो करना ही चाहिए । सारा वो जब तुम्हारे कंधों पर है । अनिल छोटा है, मांझी है और ये हुआ है तो उस से तो मैं तुम्हारे बल्लेबाज दूंगा । प्राण जय की और देखता हुआ बोला मैं मजाक नहीं कर अपराध जय बोला अब हमें कुछ करना ही चाहिए । कहीं कुछ देखो मैं भी इसी सोच में बडा हो जायेगा । तुम तो जानती हो पिताजी तो कुछ छोड कर गए नहीं सरकारी नौकरी के लिए मेरी उमर अब नहीं नहीं सोचता हूँ, करो तो क्या करूँ मेरे दिमाग में एक बात है जाने की बोला इंटरनेशनल कैमिकल वर्क सेना जिसका मालिक पहले विमल था, अदालत उसे नीलाम कर देगी । उसके कारोबार का ये भाग पूरी तरह कानूनी और जल्दी खुल रहा है । नहीं विमल की किसी चीज को तो मैं छोडूंगा भी नहीं । लेकिन शुरू से ही ये चीजें सस्ते में नीलाम हो जाती हैं । मेरा ख्याल है पूरी दुकान बीस हजार रुपए में मिल जाएगी । मेरा सुझाव यह है कि तुम खरीद लोग पहले से इसका व्यापार अच्छा चल रहा है । इसलिए तो मैं किसी तरह की कठिनाई नहीं होगी । और फिर मैं तो हुई ये सब तो ठीक है लेकिन इसके लिए पैसे कहाँ से आएगा? फिर से कर तो मैं ले नहीं रहा । यही तो मैं कह रहा हूँ कि कर्ज ले लो । क्या कहा कर्ज ले लो । प्राणी चौकर कहा मैं जो कुछ भी मुकदमा हूँ वो तो तुम जानती हो । मैं जीवन में कभी कर्ज ना लेने का निश्चय किया है । चाहे कुछ भी क्यों ना हो जाए तो में किसी के पास जाने की कोई जरूरत नहीं । जय बोला तुम्हें मैं दूंगा तो लेकिन तुमने तो भी फार्म वाले कर्ज का भुगतान किया है तो किसी भी दोगे मेरे चालीस हजार में मकान भेज दिया था । बीस हजार देने के बाद अभी भी मेरे पास बीस हजार रुपए बचे हुए हैं । ये मैं तो कर्ज होगा । तुम्हारा काम चलने के लिए तो मुझे वापस कर देना दे । बार अच्छा है । आजकल हजारों रुपये सालाना का लाभ है तो मेरा कर्ज आसानी से चुका लोगे तो ये तो नहीं होगा । ज्यादा हम पहले में बहुत तकलीफ देख चुके हैं । अब और कष्ट नहीं देंगे । लेकिन मैं तुम पर कोई एहसान तो नहीं कर रहा । मैं तो शायद लाख की तरह ब्याज सहित एक एक पैसा वसूल कर लूंगा । याद रखूं मैं दहेज नहीं होगा हम अगर तुम कभी विमल की तरह अमीर हो गए तो दूसरी बात है । तब तो मैं तुमसे एक एक पैसा गिन कर लूंगा, लेकिन भी ज्यादा मैं तो उसे फिर से किस तरह पैसे मांग सकता हूँ । बेवकूफी की बातें करूं मैं ये सारी रुपये का करूंगा क्या? अच्छा तो बात हुई । समझो गांव जाने की छुट्टी मिल जाएगी तो वहाँ तो मेहनत तो करनी ही पडेगी । इसी समय उमा चाय लेकर कमरे में आ गई । उसने पूछा तो मैं विमल का भेज कैसे पता लगा? अखबारों में तो इस बारे में कुछ नहीं लिखा । मुझे तो उसके बारे में पता ही कुछ नहीं था । जैनी चाय का प्याला मेज पर रखते हुए कहा । दरअसल उसे गिरफ्तार करने से पहले तो मुझे पता नहीं था कि असली अपराधी वो है । ये तो पोस्ट ऑफिस के एक लडका चरण से पता लगा । उससे में गुलाब जान तक पहुंचा । गुलाबचंद कौन हैं? उमा ने पूछा किसी और एक का नाम सुनकर उसके कान खडे हो गए थे । अरे वो तो चौकी तवायफ है वो तुम तवायफ उसके घर गए थे । हमारे कुछ जॉब से पूछा तो शायद तुमने रात भी वही बताई होगी था । दो तिहाई रात जरूर बिताई हूँ । उमा ने कहाँ पर वो दो तिहाई अभी से एशिया हो गई । जय बोला अरे ये तो ड्यूटी की बात थी और मेरे साथ ट्रॅफी था भाई । बहुत मजेदार ड्यूटी थी । प्राण बोला हाँ तो फिर क्या हुआ? अच्छा वह गुलाब जान ठीक ऐसी खूबसूरत थी क्या? तुमने पूछा एक तरह से खूबसूरत थी लेकिन तुम्हारी तुलना में तो कुछ भी नहीं थी । उमर शर्मा कर नीचे फर्श की और देखने लगी । मुझे तुम पर निगाह रखनी होगी । उसने कहा और फिर जाने की उसे खाया लाया कि वो क्या कह रही है । ये घायल आते ही उसके गाल लाल गुलाब हो गए । अभी तो फेरे भी नहीं हुई । डीडी और तुम जांचने फटकारने लगी अन्य उमा को चुराते हुए कहा जी जी इन दवाइयों से बचाकर ही रहना । ये पत्तियों को बहकाने में बहुत माहिर होती हैं । उमा शर्मा आई हुई फर्ज की और देखती रही । लाख से उसका चेहरा तमतमाया हुआ था । जय ने प्राण को कोहनी मारी और फिर दोनों ठाकर खस पडे । इसी समय अनेक शंकर, ज्यादा शंकर ज्यादा चिल्लाता । वह कमरे में आया । उमा दूसरे कमरे में चली गई । ऍम कर बोला, बडे दिनों बाद दिखाई दिए । शंकर को भी विमल की गिरफ्तारी की खबर सुन कर बहुत धक्का लगा था । वो हमेशा से विमल से एशिया करता आया था । विमल उससे आधी मेहनत करके दस गुना पैसा बटोरता था । विमल उसकी फैक्ट्री को बाजार से सस्ते भावों पर माल सप्लाई करता था । अब विमल की गिरफ्तार हो जाने से उसकी सप्लाई बंद हो गई थी । उसे विमल का जो सही था उसे अफसोस इस बात का था की अब उसे अपनी फैक्ट्री के लिए इतने सस्ते कैमिकल्स नहीं मिल सकेंगे । विमल को गिरफ्तार करके तुम्हें कमाल कर दिया । शंकर ने कहा, इसमें कोई कमाल की बात नहीं कर रहा हूँ । उसे वहाँ देखकर भी बहुत आश्चर्य हुआ था तो मैं तो कतई पसंद नहीं करता था । ये मैं अच्छी तरह जानता हूँ है । ये तो मैं नहीं जानता हूँ । वैसे मुझे उसे गिरफ्तार करने में कोई रूचि नहीं थी । आखिर हम दोनों ही उसे जानते थे । मुझे तो उसे देख कर बहुत अफसोस हुआ । वो बहुत अधिक महत्वकांक्षी था । जो कुछ भी हो वो मेरी फॅमिली, बहुत सस्ते कैमिकल सप्लाई किया करता था । अब वो नहीं रहा तो मुझे नुकसान ही होगा । तुम चिंता ना करो । शंकर जय बोला तुम्हारी सप्लाई में कोई फर्क नहीं पडेगा । मेरे दिमाग में एक स्कीम है । मैं तो मैं बाद में बताऊंगा । ये तो खूब है । मुझे तो अपनी सप्लाई की चिंता होने लगी थी । हाँ, तुम्हारी किताब का क्या हुआ? पिछली बार जब हम मिले थे तो वो प्रेस में थी तो वहाँ मैं तो इस केस के सिलसिले में भूल ही गया था । तो नहीं दिलाया तो जल्दी ही कराऊंगा । छठ चाहे तो एक प्रति मुझे भेंट करना बोलना । उमा कहा है आज इसे देखा नहीं । अंतर कमरे में होगी । उसके सिर दर्द हो रहा है । प्राण रूखे स्वर में उत्तर दिया । शंकर भी उसे पसंद नहीं था । विमल तार इसका सिद्ध हो गया था । शायद शंकर का भी कोई खेर फिर कल प्रकट हो जाये । प्राण किसी व्यक्ति के बारे में अपना निर्णय पहली मुलाकात के आधार पर ही कर लेता है । किसी किसी को तो देखते ही घृणा करने लगता है और किसी को देखते ही प्यार अच्छा । मैं चलूँ शंकर होते हुए कहा शंकर जा चुका तो ब्रांड जाएगी और बडा तुमने उसे क्यों कहा कि उसकी सप्लाई बन नहीं होगी । मैं तो उसके साथ लेन देन करने से रहा । बस बस हमेशा इस तरह भावुक होना ठीक नहीं होता । शंकर घमंडी तो है लेकिन वही मान नहीं है । मैं तो से बचपन से जानता हूँ और फिर वो अपने बच्चे के लिए ढेरों केमिकल्स खरीदता है । इतना अच्छा ग्राहक खोना तो मैं महंगा पडेगा । ये व्यापार है इसके लिए तुम्हें अपने व्यक्तित्व दुराग्रहों को त्यागना पडेगा जाने के लिए खडा हुआ तो प्राण ने रोका । शहरों दीदी को बुलाता हूँ ना उसे तन्ना करूँ । मुझे जाना भी है । एक फॅस फिर किसी समय होगा । गिरोह के बाकी आदमी भी पकडे जा चुके थे । सवाल जवाब के बाद मीना कुछ जाने दिया गया । अब फिर हमेशा की जगह विक्टर के बॉल रूम में दिखाई देने लगी । वैसी खुश होना चाहिए की हुई जय के कार्य की प्रशंसा की गई थी । फ्रेंड्स दूतावास का धन्यवाद पत्र पढकर डीआईजी प्रसन्न हो गया था । बहुत अच्छे इंस्पेक्टर जाए । उसने कहा मुझे तुम पर गर्व है । जेल डीआईजी के कमरे से निकला तो बहुत कुछ था । इंटरनेशनल कैमिकल वर्ड्स बिक चुकी थी । प्राण को कुल उन्नीस हजार देने पडे थे । बोलियां लगाने वाले कम ही लोग आए थे क्योंकि फर्म विमल के मुकदमे की वजह से बदनाम हो गई थी तो मैं बहुत मेहनत करनी होगी । प्राण जयपुर रिवर तो इसकी आड में अफीम का व्यापार करता था लेकिन तुम्हें तो खोई हुई शोहरत भेजे हासिल करनी है लेकिन मुझे कैमिकल्स के बारे में तो कुछ पता ही नहीं । मैं स्वयं को कैसे चलाऊंगा तो में एक अच्छा कैमिस् रखना पडेगा । जाने समझाया तो मैं कंपनी के रिकॉर्ड में कुछ फॉर मिले मिल जाएंगे । इनके कुछ यानी बहुत प्रसिद्ध है । उन्हें ठीक तरह चलाए जाओ । शंकर की सलाह भी लेते रहना उसे काफी अनुभव है । शंकर की सलाह तो ना लूंगा प्राणी नफरत से कहा वो नाम है शंकर पहले से बहुत बदल गया है । मैं तुमसे कहा था ना फिर तुम्हें किसी ना किसी को तो सहायता लेनी ही पडेगी और इसके लिए शंकर से अच्छा कौन मिलेगा । फिर तुम्हारी फॉर्म से उसकी अपनी भी रूचि होगी । वो किसी नई जगह की बजाय तुम्ही माल लेना पसंद करेगा । जय के समझाने पर प्राण शंकर की सलाह लेने के लिए राजी हो गया । मेहनत से काम करने लगा । कौन से तो यहाँ पर काम आसान ही था । अब उसे कम से कम बरसात और कीचड में तो नहीं घूमना पडता था और ना अब लालटेन की रोशनी में काम करना पडता था । उसके बाद छोटा सा साफ सुथरा और अच्छी तरह से जावा ऑफिस था । वह ते खाने को स्टोर के रूप में इस्तेमाल करने लगा । जिस बडे हॉल में विमल के गुर्गे बैठते थे उसमें प्राण ने अपनी लेबॉरेटरी बना ली । मीना का कमरा चीफ गेस्ट को दे दिया । खर्चा बचाने के लिए उसने मैनेजर का काम खुद संभाल लिया । जैकब अक्सर वहाँ आया करता था । अब तस्करों वाले केस के खत्म हो जाने पर उसका जीवन फिर उसी तरह बीतने लगा था । एक दिन वीणा ने उसे अकेले में बुलाया और कहा तो तुम अपना कमरा छोडकर यहाँ हमारे साथ ही क्यों नहीं आ जाते? बेटा ये तुम्हारा ही घर है । यहाँ पर आपके साथ रहना तो मुझे बहुत भला लगेगा । मांझी जैने कुछ सोचते हुए कहा लेकिन बहुत संभव है कि जल्दी मेरी कहीं बदली हो जाएगा । इसलिए एक दो महीने के लिए यहाँ सामान उठाकर लाने से क्या फायदा । फिर हॉस्टल में भी मुझे पूरा आराम है । दरअसल मुझे अकेले कमरे में रहने की इतनी आदत हो गई है कि अब घर पर रहने लगूंगा तो कुछ दिन तो बहुत अजीब लगेगा । ये तो वही बात है । वीणा बोली मुझे नहीं पता था कि तुम्हारी बदली इतनी जल्दी हो जाएगी । मैं समझती हूँ कि तुम लोगों को इधर उधर कभी भेजते हैं । ये तो ठीक है, लेकिन ये मेरी पहली पोस्टिंग है । फिर शायद मेरी तरह की हो जाए तब तो मुझे जाना ही पडेगा । वीना मौन खडी रही । लग रहा था जैसे वह मनी मन बहुत गंभीर प्रश्न पर विचार कर रही हूँ । कुछ देर इसी मुद्रा में खडी रही । फिर जय की और देखते हुए बोली मैं तो कुछ और सोच रही थी । क्या सोच रही थी मांझी जैनी पूछा, उमा के बारे में सोच रही थी । बेटा तुम देख रहे हो । अब वह सयानी हो गई है । मैं चाहती हूँ कि सर्दी में उसे बिहार दो । मैंने तो पहले कर दिया होता, उसका दिया । लेकिन उसने रुमाल से अपने गालों पर ढुलक आए, आंसू पहुंचे । मैं चाहती हूँ जितनी जल्दी हो वहाँ का विवाह हो जाए उतना अच्छा है क्योंकि अब ये साल भी पूरा हो गया है । ये तो राजेंद्रबाबू के अंतिम शब्द याद आए । मुझे अफसोस है कि मेरी वजह से उमा के विवाह में इतनी और चले आए । लेकिन मैं क्या करूँ मेरे पास और कोई रास्ता नहीं । बिना विमल को तो भूल ही गई थी । उसके ख्याल से ही निकल गया था । ये तो अच्छी बात जब जो बेटा की तुमने समय पर उसका पर्दाफाश कर दिया । अगर तुम ना होते तो उमा का क्या होता है? मैं ये बात ध्यान में रखूंगा । वाजी जय बोला, मुश्किल यह है कि मेरे दोस्त बहुत कम है । हम तो जानती हैं । मैं बाहर बहुत कम निकलता हूँ लोगों के साथ हाँ संकर हैं और तुम वीना स्मार्ट पूछ बैठे । अब कुछ कहना ऐसा जाती हूँ ये तो मेरा ही दोष हम जो बेटा चलो पिछली बातें बोलो । मैं तो हमेशा तुम्हें अपने बेटे की तरह समझती आई हूँ । बोलो बेटा हाँ मैं क्या कहूं माजी जैन भीमेश्वर में कहा मैं भी आपको हमेशा की माँ की तरह समझता हूँ । कसम डिप्लोमा जी, तो तुमने मेरी जी खुश कर दिया । बेटे इस पैड पर अपनी चाचा का पता लिख तो मैं कल ही उन्हें पत्र लिखते होंगे । कल से बोट कर पहला काम नहीं करना है । तुम मेरे सिर का बोझ हल्का कर दिया । बेटा बिना खुशी से बोली जैन पेट पर अपनी चाचा का पता लिख दिया । कुछ देर बैठ बिना से बात करता रहा । फिर चलने लगा तो उसके पांव छूने झुका बिना ने उसे आशीर्वाद दिया और गदगद है । जैसे उसके सिर पर हाथ से नहीं लगी । अब तुम पावन छुआ करो । बेटा अच्छा नहीं लगता । वीना बोली, बाहर निकलते हुए उसे उमा मिल गयी । वो अनिल के कपडे लिए हुई थी । बडी देर तक माँ से बातें करते रहे क्या बात हुई उससे? जैसे पूछा तुम्हारी शादी की बात कर रहे थे, मैंने कर दिया तो हमेशा मुझे चिढाते रहते हो । उमा ने मु बनाते हुए कहा तुम जाना नहीं चाहती कि माने क्या कहाँ है मुझे क्या लेना देना? इस बातचीत बडो की मर्जी है जो चाहे करें क्या कहा था माने अच्छा अब एक ही साथ में तू खा भी कह गए और ना भी मेरे को समझ में नहीं आता कि तुम जानना चाहती हो या नहीं । अच्छा भाई लोग मैं तो कुछ बोलती ही नहीं बस जय का मन हुआ । उमा को कुछ गुस्सा चढाई जाए जब उसे गुस्सा आता है तो वह बहुत प्यारी लगती थी । उसकी गान लाल हो जाते । हर आंखों कि डोरी खींची जाते थे । जल्दी में मुझे तुम्हारे लिए कोई लडका तो सोचा नहीं । मैंने शंकर का नाम से जाए बस जैसे विस्फोट हो गया हो । जैन शंकर का नाम जान बूझ कर लिया था । वह जानता था कि उमर उसे पसंद नहीं करती । जब कभी बातों में शंकर का नाम आ जाता तो वह वो बना लेती । शंकर कमरे में आ जाता तो बाहर चली जाती है । अच्छा वो चीज तो मेरे लडके देखते रहो में इसके लिए भी मेडल मिल जाएगा । जैसे विमल को गिरफ्तार करने पर मिला था । खूब जोडियां मिलने वाले हो ना तो हूँ । वोट कर कमरे से बाहर चली गई है । मुस्कुराते हुए उसे जाते देखता रहा । उसे कभी कभी उमा को छुडाने में मजा आता था । बचपन की बहुत सी आदि इस तरह ताजा हो जाती थी । नमस्ते ज्यादा ट्राइसाइकल पर बैठा हुआ । अनिल बोला आप कहाँ जा रहे हैं? हमारे लिए टॉफी लाइए, गाना जरूर लाएंगे । बेटा नॉट कराएंगे तो लाएंगे । अच्छा नमस्ते क्या बात है । उमा उमर के जहरी की ओर देखते हुए वीणा ने पूछा, ऐसा लग रहा है कि तुम हुई है नहीं तो मांझी कुछ भी तो नहीं हुआ । मैं थक गई हूँ । बस और कुछ नहीं । उमा ने अपना चेहरा पूछते हुए कहा ये किसका पता है? हाँ । उमा ने पैड पर जे के हाथ की लिखाई पहचान नहीं थी । जय की चर्चा का मैंने उसे अभी पूछा है क्यों? उसकी वजह से हमारे के संबंध मेरा ख्याल है? वह कानपुर में हैं, ठेकेदार है शायद हाँ, वही है । लेकिन तुम तो जानती हूँ । जय के माता पिता तो है नहीं । उसकी चाचा श्यामलाल ने उसे पाला पोसा है । हाँ नाम तो यही लिखा है । मैं अभी अभी जैसे तुम्हारी शादी की बात कर रही थी । बेटी विमल का तो सवाल नहीं होता । हाँ, उसका तो नाम भी मतलब हाँ, तो मैं कह रही थी कि हम तुम्हारी शादी की बातें कर रहे थे । हाँ, उसने मुझे बताया था उसे तुमसे कहा था तो तुम ने क्या कहा? मैंने कह दिया कि मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहती । मैं विवाह करूंगी ही नहीं, बदली कहेगी । वीणा ने प्यार से कहा तुमने जिस खयाल से भी कहा हूँ, बुरा क्या वो सोचेगा कि हम उसके साथ खेल कर रहे हैं । पहले हमने उसके साथ बुरा बर्ताव नहीं किया । अभी तो मैंने उसे तुम्हारी बात चलाई थी और वो मान भी गया था । इसलिए तो मैंने उसकी चर्चा का पता मांगा था तो कितनी भोली है भला लडकी कितनी देर तक एन । बी । आई । हो सकती है । लेकिन उमर अब सुन कह रही थी । उसके चेहरे का रंग दूसरा ही था । खुशी की एक लहर उसके सारे बदन में सवा गई थी । उसका चेहरा चमक रहा था । श्यामलाल ने अपना मोटा चश्मा पहना और हुक्के का एक जोर का कष्ट अच्छा ठीक है । उन्हें बाहर के कमरे में बैठा हूँ । उनसे कह दो कि मैं काम में लगा हुआ हूँ । उसने पीना मैला कुर्ता झाडा और कान के दबी पेंसिल लेकर हिसाब करने लगा । कालू तुमने छह दिन पूरा काम किया है । एक दिन का भी नागा नहीं है ना तो ये लोग नौ रुपए । उसने अपने सामने पढे हुए नोटों के बंडल में से नौ रुपये निकालकर कालू को थमा दिए । बाहर वाले कमरे में बैठे हुए प्राण के सब का पैमाना छलक में लगा था । उसे इंतजार करने की आदत नहीं थी और फिर यहाँ तो इतनी देर हो चुकी थी । इस अंधेरे कमरे में उसे एक घंटे से अधिक समय हो गया था । उसके साथ उसके मौसा रामदयाल भी थे । विना रामदयाल पर प्राण के साथ जाने के लिए बहुत जो डाला था । ये नौजवान लडके बडी जल्दी मचाते हैं । उसने कहा था मामला बहुत नाजुक है और तुम तो जानते ही होता है कितनी जल्दी नादान हो जाता है । प्रान् उठकर कमरे के बाहर चबूतरे पर चहलकदमी करने लगा । तभी शामलाल ने कमरे में प्रवेश किया । उसे सफेद कुर्ता पहन लिया था । इस कुर्ती में उसका कारण भी गहरा लग रहा था । चश्मा उसकी नाथ में यूनिट का वादा जैसे गिरने को हो । सफेद डोबी में उसका दुबला पतला चेहरा और भी पतला दिख रहा था । मैं रामदयाल हूँ । प्राण के मौसा ने अपना परिचय दिया और ये उमा का भाई है । प्राण हम उमा के संबंध में बात करनी है । आपको मेरा पत्र तो में ही गया होगा । हाँ मिल तो गया था लेकिन आप लोगों ने यहाँ आने की तकलीफ क्योंकि लडका तो आपने फंसाई लिया मेरी क्या जरूरत है उसी तो खुद ही अपनी और से हाँ कर देने की । लेकिन जैन है तो हमें यही लिखा है कि इस बारे में हम आपसे मिले । अगर वो आपकी इज्जत ना करता होता तो ऐसा क्यों लिखता । फिर बाद डर से ये है कि हमें जय के संबंधियों के बारे में कुछ मालूम नहीं है । हम तो उसी के कहे मुताबिक कर रहे हैं । अजी पुराने जमाने में लडके से तो कोई पूछता ही नहीं था कि तुम्हारी शादी कहा करें । कहा न करें ये तो घर के बडे बूढे की इच्छा पर निर्भर होता था । उनके घर में कुछ इज्जत होती थी । आप हमारी बात गलत समझ हमने आपका बान नहीं करना चाहता । रामदयाल ने कहा श्यामलाल सुनी अनसुनी कर बोलता रहा और अब अजी आज तो हर एक झोपडा अपनी शादी खुद ही देख कर लेता है । जब सब कुछ हो जाता है तभी बडे बूढों को बताया जाता है कि वो अपनी स्वीकृति दे दी । लडका तो तुम्हें मिल गया है तो मुझे खुशी बूढे की क्यों पर वहाँ कर रहे हो । आप हमारी बात ठीक तरह नहीं समझे । शाम लाल जी रामदयाल नमृता से कहा हमने अपनी लडकी जय के गले में ही बनी है । बस ये ही समझे कि वह दोनों एक दूसरे परिचित हो गए और फिर एक दूसरे को चाहने लगे । हम तो आपके भाई साहब को भी जानते थे । वो साहब बडे ही सज्जन थी । अच्छा अब ये बताइए कि आप मुझसे क्या चाहते हैं । शामलाल गुडरा कर कहा इसके लिए हमें आपका आशीर्वाद चाहिए । जाम दयाली नमृता से उत्तर दिया में आशीर्वाद का क्या महत्व है जनाब । शाम लाल ने व्यंग से कहा शायद आप ये बात नहीं जानते की मैंने इस लडकी को बचपन से पाला है । मैंने अपने हाथों उसको नहीं लाया है । अपने हाथों से उसे कपडे पहना है और खुद उसी एक एक पाठ पढाया है । आई जो जो कुछ भी बना है मेरी वजह से बना है और आज अब मेरी आंखों में धूल झोंकना चाहता है । मैं उसके किसी मामले में दखल नहीं दूंगा । वो जहाँ चाहे शादी कर सकता है मेरा । उसे कोई तालुक नहीं । मेरे लिए तो हो ही गया समझो । शाम लाल ने गुस्से में अपना से हिलाया और फिर कठोर मुद्रा बनाकर खडा हो गया । रामदयाल समझ गया कि और बात करने का कोई फायदा नहीं । शाम लाल तेल नहीं सकता । उसने इस विवाह का विरोध करने का निश्चय कर लिया था । वह जानता था कि उमा के परिवार वाले अच्छा दहेज ना दे सकेंगे । बिहार में एक लडकी वाले थे जो खूब दहेज देने को तैयार थे । रामदयाल को पता था कि वो लोग तो सोने से बोलने को भी तैयार है । वो समझ गया था कि शाम लाल से बात करना व्यर्थ है । प्राण गुस्से से उबल रहा था लेकिन उसने ये निश्चित किया था कि वो सिर्फ मौसा को ही बोलने देगा । खुद बिल्कुल चुप रहेगा । इसलिए उसने मूंग बंद रखा । अच्छा हम लोग चले । रामदयाल होते हुए कहा मैं अजय को आपकी और अपनी बातचीत के बारे में बता दूंगा । उसी ने हमें आपसे मिलने को कहा था । आपसे मिलकर खुशी हुई । अच्छा नमस्ते नमस्ते । शामलाल बाहर आकर रूखे स्वर में बोला । जब से जय के चाचा ने इस विवाह का विरोध किया था तब से वह बहुत ही असमंजस में बडा हुआ था । वो बिहार वालों की तारीफ करता रहता था । वो बढिया तो मैं क्या देगी उसे जैसे कहा था सिर्फ अपनी लडकी ना जो लडकी मैं बता रहा हूँ उनके पास सब कुछ है । वे बडे जमींदार है और उनके पास लाखों रूपये हैं । उनका परिवार बिहार के धनी परिवारों में से एक है । उस लडकी के लिए इंकार कर के तुम घर आई हुई लक्ष्मी को ठोकर मार रहे हो समझे और फिर वो लडकी भी बहुत अच्छी है । जितना उसे समझाने की कोशिश करता हूँ उतना ही बात पर और और जाता । ये चाहता था संबंधों में कटुता ना आए तो अच्छा है । अगर उसका चाचा शादी में शामिल न होगा तो लोग सोचेंगे । कुछ न कुछ गडबड है । इसलिए उसने अपने चाचा को समझाने की आखिरी कोशिश की । रामदयाल और प्राण को एक बार फिर उसके पास भेजा । कोई फायदा नहीं । प्राण ने लौटकर बताया मौसा जी ने बहुत कोशिश की लेकिन तुम्हारी चर्चा ने सुनी अनसुनी कर दी । जय असमंजस में फंस गया । चाचा की इच्छा के विरुद्ध काम करता है तो उसका मतलब है कि परिवार से पूरी तरह संबंध टूर जाएंगे और फिर श्यामलाल में चाहे कितना ही हो उसे जय का पालन पोषण किया था । जय कोई सब बातें याद की । अगर उसका चाचा नाम आना तो उसे खुद अकेले ही सब काम करना होगा । वो उमा से अलग नहीं हो सकता था और अब उसे पाने का नहीं बल्कि त्यागने का प्रश्न था । उसके उमा के साथ अपनी जीवन की कितनी सपने सजाए थे । इस समय भी वो रात की छाया में उसी तैयारी कर रही थी । वह जैंसे ही उसकी थी । उसका बच पर उसके साथ ही देता था । अब अगर वो उस से अलग हुई तो उसका जीना दुबर हो जाएगा । कई चाचा को चिट्ठी लिख होगा । जैनी सोचा सुबह फूटने लगी तो उसी नींद आ गई । गोमती के बार महानगर नाम की नई बस्ती धीरे धीरे पूरी हो गई थी । पहले एक दो साहसी व्यक्तियों ने रेलवे लाइन के उस बार खाली पडे मैदान में कुछ मकान बनाए फिर और लोग आने लगे । स्कूल खुल गए, एक बाजार भी बन गया । अब तक बंजर पडी इस भूमि में धीरे धीरे मकानों की कतारें खडी हो गई । शहर से दूरी जगह ऐसे लोगों को विशेष आकर्षित करती थी जो बडी शहर के पास मकान बनाना चाहते थे । पहला मकान बेचने पर जो पूंजी मिली थी उनमें से कुछ पैसे जय के पास बच गए थे । उनसे जैनी इस कॉलोनी में एक प्लॉट खरीद लिया था । यहाँ मकान पर काम शुरू हो गया था । नहीं डाली जा चुकी थी और मकान की दीवार लगभग पूरी होने वाले की ये सफेद कमीज और खाकी नेकर बहने तेज टूटने खडा था । जैसे दीवार की ओर ईटे रखी जाती उसके मन में खुशी की खेलो रोटी जो उस की सारी शरीर पर फैल जाती ये उसका अपना घर था । ये सोच कर उसे काफी खुशी हुई । क्या आखिर अब उसका एक अपना घर होगा । डॉक्टर से मिले लोन और अपने पास जवाब थोडी बहुत पैसे के चार कमरे बादलों पर एक बरामदी वाला मकान बन सकता था । यही उस ने चाहा था । बाद में शायद वो कुछ बडा कर लेने से दूर अपने स्कूटर में बैठा हुआ प्राण आता दिखाई दिया । उसने स्कूटर एक पेड के नीचे खडा कर दिया और खुद जय के पास चला आया । बहुत अच्छा बन रहा है भाई मुझे ऐसे बोला छत कब तक बन जाएगी । पंद्रह दिनों में हरीदास तो यही कह रहा है । हरीदास अच्छा मिस्त्री है । प्राण बोला वो ठीक ही गहरा होगा । हमारा मकान भी तो उसी ने बनाया था । तुम्हारा काम कैसे चल रहा है? मैंने पूछा सप्लाई बढा दिया नहीं । उत्पादन कम नहीं होना चाहिए । समझे नहीं काम नहीं होने देंगे । मैंने सारे ऑर्डरों का माल सपलाई कर दिया है । हालांकि हमें डबल शिफ्ट लगाकर काम करना पडा है । मांझी कैसी है? अब तो पहले से अच्छी है । उन्होंने मुझे तो में बताने को कहा है कि विवाह की तारीख पंद्रह अक्टूबर तय हो गई है । रामदयालजी भी मान गए हैं तो मैं पहले से इसलिए बता दिया है कि बाद में तो वे छुट्टी मिलने में दिक्कत ना हो । दैनिक चुपचाप छत पर बैठे मजदूरों की ओर देखा सब ठीक है । है ना तुम्हारा क्या ख्याल है? मुझे अपने मकान में मौजे लगवानी चाहिए । बैठक में तो कम से कम लगवा ही लोग प्राण ने अपना सुझाव क्या किसी डिजाइन के मुझे लगवा लो । इससे तुम्हारा कॉल इनका खर्च बच जाएगा । ठीक कह रहे हो? जैन ने खुश होकर कहा मुझे एक का एक पैसे बचाकर रखना होगा, नहीं तो ये मकान पूरा नहीं हो सकेगा । बाकी कमरों में सीमेंट के वर्ष बना होगा मैं चलो । प्राण ने कहा मैं तो ऑफिस जा रहा हूँ । ये अपने मकान की और देखता हूँ । सोचने लगा एक महीना शायद और लगेगा । फिर वो इसमें आ जाएगा । लखनऊ से जाने से पहले वो कुछ टेनिस घर में जरूर रहेगा । अभी से इसी के आए पर उठाना उसे अच्छा नहीं लगेगा । गृहप्रवेश वो खुद ही करेगा । एक नया घर होगा और नहीं नहीं । पत्नी उसे लग रहा था जैसे वो नई जिंदगी शुरू कर रहा हूँ । अरे रोमा को जल्दी ले आओ । वीणा ने कहा बारात आई गई समझो । उमा के गाल लाल हो गए । निरंतर नजदीक आ रहे बैंड की आवाज को सुनकर उसके दिल की धडकन बढती जा रही थी । शादी के कपडों में वो अब सियासी दिख रही थी । उसका चेहरा चंद को भी बात कर रहा था । जय सफेद अचकन में बहुत सुन्दर लग रहा था । शहरे में से उसकी आंखें चमक रही थी । वो उसके चेहरे पर निगाहें जमाए हुए था । वो घबराई हुई नीचे की और देख रही थी । बहन चुप हो गया था । वेदि को घेरे खडी लडकियाँ जीत करने लगी । वीना नहीं घुमा के हाथों में थोडे से चावल दिए और उन्हें जय की और फेंकने के लिए कहा । उसे ला जाते हुए चावल जय की और फेंकी तो चालू के दाने जयपुर न गिरकर इधर उधर बिखर गए । फिर जाने से झुकाया और तुमने उसे माला पहना दी । सिर पर घडे उठाए पंक्ति में खडी लडकियाँ मुस्कुराती हुई देखती रही । पास खडी औरते दुल्हे का मूड देखने के लिए आगे छुप गई । जय आदमी आहुति डाली और पुरोहित मंतर पडने लगा । मेहमान चले गए तो जैन सहन में शामियाने के नीचे चला आया । यहाँ पर वे दोनों जय और उमा पीने पर बैठे रहे । प्राण अपने कैमरे से हर एक दृश्य का चित्र लेता रहा । लडकियाँ मजाक कर दी रही । वे सब जय को छेडती रही फिर फेरे लगाने के लिए खडे हो गए । उन के पल्लू एक दूसरे से बंधे हुए थे । आखिर सातवाँ फेरा हुआ और दोनों पति पत्नी बन गए । जैनी उमा का घूंघट उठाया और उसकी आंखों में आंखें डाल दी । उस ने भी पलट कर देखा । जिला जाने का समय नहीं था । उसने धीरे से उसका हाथ थामा और घर के भीतर लगेगा । भीतर आकर उसने दरवाजा बंद कर लिया । उमा जय की बाहों में बन गई । उसकी अपनी बही थी जहाँ के बदन से लिपट गई ।

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