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Transcript

Part 1

ऍम किताब का नाम है शिखर तक चलो जिसमे लिखा है डॉक्टर काॅलोनियां ने हर आज भी है आपके ऍम है जब मन चाहे सपने भी क्या कभी आपने हो सकते हैं । उसने आंखें मान मलकर देखा सामने सागर की उत्ताल तरंगे उत्साही उमंगों से साढे संघ अटखेलियां कर रही थीं । हिन्द महासागर किए लहर हैं दूर से इठलाती बलखाती मुँह जुनून में और लगती है फॅस आती है । उनका उफान हल्का सा कम हो जाता था । सफेद फिल्मों से लगभग लहरें बे बहुत लुभावनी लग रही थी । कुछ समय बाद अंशुमाली की अरुणिम आभा से आप्लावित होकर इन गर्मियों में अनोखा आकर्षण पैदा हो जाता था । मध्यान् के तेजस्वी सूर्य की प्रकार तीनों में इन लहरों के उफन टूटे हुए झाग यूँ लगते थे । मानव रत्नाकार ने जदयू को अंबार लगा के रखी हूँ । हवाएं भी मनोविनोद हेतु इनसे मित्र वध हास परिहास कर रही थी कि हाँ, टीवी वाला की तरह लहरों को ठेल कर कभी आगे लाती कभी पीछे नहीं जाती थी । तिरंगे रंग में रंगा हिन्द महासागर का ऐसा रंगीनमिजाज यही दिखाई दे रहा था । दूर सितेश पर आसमानी रंग दिखाई दे रहा था । जहाँ तक दृष्टि पहुंचे वहाँ तक बस महासमुद्र और नीला आकाश एक आकार नजर आ रहे थे । महासागर के मध्य का चल मोर कंट्री रांका था । किनारे के । समीर की जलसंपदा मनोहारी हल्के रंग को धारण की है । झेल भूषण समझ रही थीं । सागर तट पर बसे आलीशान बंगले समुद्र की मर्यादा के साथ ही थे । इन बंगलों के पाशर्व में आकाश छोडने के आकांक्षी अनुपम रक्षा मनभावन राष्ट्रीय प्रस्तुत कर रहे थे । तो बहुत समय से संजोया । सपना साकार देखकर सीमा और सोमेश की खुशियों का ठिकाना आना था । हूँ । अंडमान निकोबार द्वीप समूह के इस विश्व प्रसिद्ध सागर तट पर पहुंचकर सोमेश अपने आप को रोकना पाया और सीमा को खींचते हुए उन लहरों के समीप ले गया । अपने पति के साथ इस शीटर जल के स्पर्श है । सीमा को भी रूम रूम का पहला आदत हो गया । दोनों जल करिया करने लगे जी भरकर जल बिहार करने के बाद जब वर्स्ट परिवर्तन के लिए जाने लगे दवा! अचानक सोमेश को याद आया कि उन्हें महात्मा गांधी मैरीन नेशनल पार्क भी जाना है । हूँ पता शीघ्र अतिशीघ्र तैयार होकर दोनों वहाँ के लिए रवाना हो गए । लगभग पंद्रह छोटे बडे द्वीपों को समाहित करते हुए बना ये मैरीन पार्क दुनिया के उत्कृष्ट समुदायिक उद्यान में से एक था । दुनिया के उत्कृष्ट सामुद्रिक उद्यान में से एक था । यहाँ के गहरे डालिये जल जीवन केस बंधन का अवलोकन भी अपने आप में है । बहुत ही अद्भुत प्रतीत होता था हूँ । इसका पूरा आनंद पाने हैं तो उन्हें महात्मा गांधी मैरी नेशनल पार्क में स्कूबा डाइविंग और स्नोर कालिंग भी करनी थी । इसके लिए वह कई दिनों से विद्युत परीक्षण भी ले रहे थे । कुछ समय पश्चात वहां पहुंचकर दोनों ने तैराकी पोशाक, वहाँ जीवन रक्षा जैकेट पहनी । पानी के अंदर दिखाई देने वाले चश्मे लगाए । ऍम मास्क पहन का कुछ देर उतने जल में स्नोर कालिंग करते रहे और नया ना बेरहम नदी ईश्वर को नितांत निकट के निरंतर निहारते रहे हो । फिर बाहर अगर उन्होंने लाइफ जैकेट उतारी और फिर अपने प्रशिक्षक के संग चल पडे । सिंधु की गहराइयों में घूमते लगाने के लिए सीमा अच्छी तरह थी । तैराकी में स्वर्ण पदक भी उसने प्राप्त किया था की तो इस असीम समुद्र की अतल गहराई में जाते हुए उसे डर लग रहा था । सुमेश उसकी स्थिति समझा दिया था और सीमा का हाथ पकडकर का डुबकी लगाने लगा । कुछ समय पश्चात सीमा सामान्य हो गई । नीचे जाकर उन्होंने देखा कि यहाँ तो अलग ही रंग की रंगीली दुनिया थी । अद्भुत आकार प्रकार की वनस्पतियां जो उन्होंने सिर्फ टेलीविजन में डिस्कवरी चैनल में ही देखी थी । कोई ब्रॉकली का बडा सा फोन लग रहा था तो कोई एलोवीरा और बैंगन बेलिया कम रन दिख रही थी । दूसरी तरफ के नारंगी नीले फूल आर्केट को भी मार दे रहे थे । स्फटिक सदस्य पारदर्शी स्वच्छ जल में तैरती रंगबिरंगी मछलियां इन दृश्यों की वास्तविक नायिकाएं थीं । निर्णय प्रभाव से वे गति कर रही थी । आधुनिक योगी मानव की गलाकाट प्रतिस्पर्धा की भागम भाग से विपरीत उन्होंने सिर्फ चलते जाने का नाम जीवन अशोक जाने का अर्थ मेरे तीन समाज रखा था हूँ मीले पीली डॉॅ । जब सीमा की तरफ आती तो खुशी की हुई थी । एक बडी सी मछली को आते देख सीमा सोमेश के पीछे हो गई । इस प्रकार नहीं मनभावन जल जरूरत है । लोग अच्छे भी खेलते रहे । अचानक सीमा को एक बडी सी । सी । पी । दीजिए । वो उस ओर बढी तो उसे गुलाबी आवाज से चमकता कुछ देखा । उसने हाथ बढाकर उठाया तो देखा एक बहुमूल्य होती था । सीमा ने उसे अपने जाकर की जब वाली पॉकेट में डाल लिया । खुशी से उसका चेहरा भी जमा कटा । सोमेश ने नजरों से कहा चले दोनों धीरे धीरे तैरते तैरते उन हाँ ऊपर आ गए । मछलियों के मध्य समुद्री सादा होने का उनके जीवन का प्रथम रोमांचकारी अनुभव हुआ था । हूँ । सीमा के रोमांच का अंधी ना था । सोमेश भी बेहद प्रफुल्ल था । दोनों ने किनारे पहुंचकर ऍम चश्में सब कुछ बता रहे हैं और वहीं सबसे फेवरेट पर धर्म से पसर गए । गहरी सांसों के संघ विश्राम करते हुए सोमेश ने सीमा का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा प्रिया ऍम, यहाँ तो स्वर्ग है । स्वर्ग सीमा भावुक होकर बोले ऍसे भी फट कर है । कुछ समय पश्चात दोनों हाथ से निकल कर गांधी सामुद्रिक पहुंचे जहां पर आधुनिक जलक्रीडाओं की भरमार थे तो मैं बोला चलो पहले पैरासेलिंग करते हैं । सीमा चलने को गत हुई और दोनों पैरासेलिंग स्टेशन पर पहुंच गए । वहाँ बने प्लेटफॉर्म पर महाराष्ट्र से जुडी हुई कुर्सियों पर उन्हें बैठा आकर जीवन रक्षा जैकेट पहनाकर कमर पेटी बांधी गई । सारा शूप से बंधी रस्सी का एक किनारा हूँ । स्पीडबोट से झगडा हुआ था । इधर बोर्ड का इंजन आराम हुआ । उधर इन्हें प्लेटफॉर्म पर दौडने को कहा गया । दौडते हुए सीमा सुन मैं जैसी प्लेटफॉर्म से उतर हवा में उडे । एक बार तो सीमा घबराकर सोमेश निपट गई । कुछ सेकंड बाद सामान्य होते हुए उसने आखिरी खोली तो नीचे का अनुपम दृश्य देखकर वह रोमांचित होती । अठारह जलराशि को ऊपर से देखना भी अविस्मरणीय अनुभव था । हूँ । मीला मूर्ख अंडी और हरा रंग ली है । उधर दी वियोगी मोर सदस्य लग रहा था जो अपनी प्रिय मोरनी के इंतजार में खूबसूरत बंक फैलाए बढा चला जा रहा हूँ । क्या होगा मिला या फिर वो इतने में ही स्पीडबोट धीमी हुई जहाँ धारा टूट गई । धीरे से इनका पैराशूट समुद्री सत्ता पर गिरा हूँ । पानी से डुबकी लगा दोनों ने बाहर निकले और वोट ने गति तेज कर दी जिनसे इनका पैराशूट हवा से बातें करने लगा । करीब दस मिनट की पैरासेलिंग तो बेहद रोमांचकारी यात्रा रहे हैं । सोमेश अब हाथ पकडकर सीमा को बनाना बोर्ड सवारी के लिए ले गया । तैराकी पोशाक पर जीवन रक्षक जैकेट पहने अन्य पांच सवारियों के साथ सीमा और सोमेश भी केले की आकृति में बनी बोर्ड पर दोनों तरफ पैर फैलाकर बैठ गए । आगे स्पीडबोट से रस्सियां से जुडी बनाना बोर्ड स्पीडबोट के प्रारंभ होते ही तेजी से चल पडी हूँ तथा जलराशि पर खुले में सवारी करना बडे ठीक कर के बाद थी जो जो उनकी बनाना बोट दूर समुद्र के अंदर पहुंच रही थी । सीमा की धडकनें बढ रही थीं, अचानक उसका दिल ढाकरे रह गया । ये क्या? तो मैं उछल कर बोर्ड से नीचे समुद्र में गिर गया । सुमेश हाँ, मैं चलाते हुए है । नया कुछ सोचे समझे अगल सीमा भी बहुत पडी । सहयात्री घबराकर अब क्या होगा? आगे से स्टेट बोर्ड से दो प्राण रक्षा को दे । दोनों तैरकर सीमा और सुमेश तक पहुंचे । उन्हें अपने संघ स्पीड बोर्ड में ले जाकर बैठाया गया । ऍम वोट में बैठे ही सोमेश ने सीमा को गले लगा लिया । फॅमिली मेरे पीछे तुमको खोदी सीमा कुछ बोलना था की तो उसकी आंखें डबडबाई सुमेश की आंखें भी नाम हाँ नहीं हूँ । लगभग दस पंद्रह मिनट तक दोनों इसी ठकारे दो बजे की भावनाओं को सही कह रहे हैं । वो पट्टा किना रहा गया था । उनका गला भी सोच रहा था । अदाह किनारे पहुंचकर दोनों ने नारियल पानी पिया । ऍम तनिक विश्राम के पश्चात सोमेश बोला स्केटिंग करोगी आॅफ पानी में स्कूटर रेसिंग कैसी होती है? सीमा के पूछने पर सोमेश से हाथ फागण कार्य कुछ देव ले गया । यहाँ कॉलेज के कुछ विद्यार्थी समुद्री सत्ता पाए स्कूटर से सरपट दौड रहे थे । उनका एक दूसरे से आगे बढना, जोर जोर से चिल्लाना सीमा को बडा भरा लग रहा था । आज मेरे जीवन का भरपूर आनंद ले लेना जा रही थी । सीमा के चेहरे की रोना को सुमेश नेपालिया आगे बढकर स्कूटर रेसिंग की दो टिकट खरीद ली । सुमेश ने अपने स्कूटर भरोसे बैठा लिया । भारत बता झटका खाकर सीमा नहीं, सोमेश को पीछे ऍम दोनों की सवारी है । चलिए सथा करोड चली । दोनों ओर से उठते पानी की बौछारों में भीगती हुई उनकी विचित्र प्रकार की रोमांच की अनुभूति हो रही थी । अचानक जोश में आकर सुमेश जीटॅाक सीमा चलाने लगी । नहीं, ऐसे नहीं है जितना चलाती हूँ । सुवेश को उतना ही मजा आता आकस्मात सोमेश ने डाइनिंग स्कूटर मोडा इतने में पीछे से आता स्कूटर सवार इनसे तेजी से बडा संतुलन बिगडा और साहब समुद्री सकता पर गिरे हूँ । हेमा को लगा कि आज तो डूबे ही, यही उसकी जलसमाधि बनेगी । सुमेश ने ढांढस बांधते हुए दिलासा देते हुए कहा हर घबराओ नी प्राणरक्षक परिधान पहना है तो होगी नहीं । किनारे से वह काफी दूर पहुंच गए थे । सामने हम दो पति की अच्छा जलराशि को देख सीमा को चक्कर आ रहे थे, लेकिन हिम्मत जुटाकर उन्होंने किनारे की दशा में तैरना प्रारम्भ किया । दूसरे स्कूटर सवार की हालत और खराब थी । से तो करना भी नहीं आता था । ब्लॅड के सहारे एक ही जगह कह रहा था सुमेश उसकी सुरक्षा थी । तरकीब सोच रहा था । कितने में जीवन रक्षक नौका के इंजन की गडगडाहट सुनाई थी । इस समुद्र तटीय पर्यटन स्थल पर सुरक्षा के बडे पुख्ता इंतजाम थे । थिएटर शक सुरक्षा गार्ड ने पहले सीमा फिर सो मैं अन्य सवार को खींचकर बोर्ड में बैठाया । फिर दोनों स्कूटरों में हो । फॅमिली से बोट में बंदा लगभग दस पंद्रह मिनट में सबसे कुशल किनारे पहुंच गए । बोर्ड से उतर कर चलते हुए सोमेश ने मजाकिया अंदाज में पूछा हूँ, चलो की कुछ और ऍम करने है कोई तमन्ना बाकी सीमा तक सामान्य हो चुकी थी । उसको रह कर बोली हूँ, मेरे को इतना बनना बाकी छोडी । खाएँ । मेरी आत्मा तरफ है और कुछ भी नहीं करना है तो जलपान करते हैं तो मेष भी नहीं चाहता था । उससे बडे जोरों की भूख लगी थी । वहीं किनारे पर अन्य पहुंॅच दिया था । उसमें हल्का फुल्का नाश्ता लेकर दोनों साॅस पहुंचे । भूतल पर स्वागत कक्ष के पास बाल देखभाल का था । उसके दरवाजे पर तीन चार वर्ष का एक क्या गोलमटोल बाला खडा था । उस की बडी बडी आंखों में किसी की प्रतीक्षा बसी थी । गोरा रंग गुलाबी गाल झगडा, लेबाज गालों में प्यार से गड्ढे । यह बालक उदास सा एकाकी खडा था । पीछे रनिंग बच्चे खेल रहे थे । सीमा तेज देश चलकर दरवाजे तक पहुंची थी कि वह बच्चा मामा करके सीमा से निपट गया ।

Part 2

सोमेश हम सीमा बाला को लेकर अपने कक्ष संख्या पांच सौ चार में पहुंचे । बालक सौ में श्री गोद में था । सीमा ने कमरे का दरवाजा खोला तो खुशी से लाहोटी का पूरा काम रहा । रंगबिरंगे गुब्बारों से सजाया हुआ था । केंद्रीय मेज पर एक रखा था । उस पर सुंदर लिखावट में लिखा था ॅ तो शिवा । वहीं पर मोमबत्तियां माॅब कर सजा हुआ था । पाशर्व मेज पर पूरा भोजन लगा हुआ था । शिवा पापा के गौर से उतरकर गुब्बारों से खेलने लगा । प्रशंसात्मक प्रश्नवाचक निगाहों से सीमा ने सोमेश की ओर देखा । उसने ज्यादा से सिर्फ करते हुए कहा भूल गयी श्रीमती जी, आज आपके राजदुलारे का चौथा जन्मदिन है । यह है उसे उत्सव की तैयारी है, ऍम मीठा करवाएं । सीमा पति की सचिन था और सह्रदयता पर कुर्बान हो गई । बेटे को गोद में उठाकर मीट तक लाइन दोनों ने शिवा का दाहिना हाथ पकडता करके कटवाया । पहले दोनों ने राजा बेटा तो खिलाया । फिर शिवानी एक हाथ से मम्मी को तथा दूसरे हाथ से पापा को एक साथ के खिलाया और बोला माॅक! सागर की अटल गहराइयों से जो गुलाबी आभायुक्त देश कीमती मोटी सीमा लाई थी तो लाल कपडे में लपेटकर धागे में बांधकर उसके गले में पहना दिया । सीमा ने शिवा को बताया कि आज समुद्र के टाल में मुझे मोटी कैसे मिला था । उस ने ये भी कहा कि अपने गांव जाकर मैं इसे सोने में लॉकेट बनवा देगी । शिवानी माँ के पैर छुए । सीमा ने उसे काले जैसे लगा लिया और बोली इस मोदी की तरह सुंदर शाॅल रैना को वो आगे बढना, माँ बाप का नाम रोशन करना ये मोटी भारी रक्षा करेगा । आपने उसके हाथ में एक प्यारी सी इलेक्ट्रॉनिक घडी पहना दिए, जिसमें सुनियो के पाशर्व में उन तीनों का चित्र ने कहा था हर अपने लाल कर गले से लगाया गया इतने प्यारे वो बाहर बाकर शिवा बेहद खुशी ना खाने खाते हो गए । बालसुलभ जिज्ञासा से शिवा ढेरों सवाल पूछ रहा था । सुमेश उसे आज के मछलियों वाली सारी वोटो दिखा रहा था । शिवा बोला बता मुझे भी देखना है कब लेंगे? सोमेश ने कहा हाँ बैठे हम कलॅर ध्यान चलेंगे कल का पूरा दिन तो मैं कछुए, मछलियां, डॉल्फिन सब दिखाएंगे ऍम आएंगे । वहाँ बहुत सुन्दर सुन्दर पक्षी और तिथियां भी हैं । हम यहाँ पर और भी अच्छी थी । जगह देखने चलेंगे अभी सोचा हूँ कहकर भोजन के पश्चात तीनों रात्रि विश्राम है तो लेट गए शिवा मम्मी पापा के बीच में था । उनका राजदुलारा आंखों का धारा दूसरे दिन रह रहा हूँ । साढे छह बजे के करीब सोमेश की आंखों ली । उसने फटाफट पानी डालकर बिजली की चाय गेटली का स्विच खोला । शिवा और सीमा को उठाया । सीमा ने शिवा का दूध और दोनों की चाय बनाई । तीनों ने तैयार होकर होटल में प्रात शाहकार नाश्ता किया तो घूमने निकल गए । सर्वप्रथम वॅार जेल देखने पहुंचे । ये राष्ट्रीय स्मारक देश प्रेमियों के लिए तीर्थ यात्रा से भी बढकर होता है । स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए दीर्घकाल तक सतत संघर्ष करने वाले और अपने प्राणों को भी भारत माता के चरणों में न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का ये है तो वो ही था । सुमेर स्वयं बंगाल के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी का पुत्र था । उसकी रंगों से भी देश भक्ति का बहुत बढ रहा था । अधिकारियों की जीवन गाथा का एक चलचित्र यहाँ पर चल रहा था । अपनी जान पर खेलकर जिस रूप में उन्होंने मातृभूमि का ऋण चुकाया, उसे सजल नेत्रों से सीमाएँ हम सुमेश देख रहे थे । शिवा बालसुलभ जिज्ञासु दृष्टि से देख रहा था । इस पवित्र भूमि को वंदन करके वे लोग रोज आइलैंड को देखने निकल पडे । तत्पश्चात उन्होंने उत्कृष्ट कोटि के अनेक संग्रहालय देखें । फिर वह लोग चिडिया टापू पर पहुंचे तो यहाँ की रंगीन बिरंगी तितलियों । विभिन्न प्रकार के पक्षियों को देखकर शिवा बेहद प्रसन्न था । यहाँ के प्रसिद्ध डावर राष्ट्रों में भोजन करके उनकी तबियत खुश हो गई । यहाँ से जल ये पहली लेकर फिर वे लोग मधुवन पहुंचे । यहाँ के सर्वोच्च शिखर माउंट हैरियट के दर्शन किये है । अंत में शिवा को मिनी जू दिखाकर पूरा परिवार पुनः अपने होटल लौट आया हूँ । प्राकृ भोजन वही होटल सिटी पायलट नहीं किया जहाँ के करीब दस बजे अपने कमरे में पहुंच गए तो सोमेश टेलीविजन चालू किया । उस पर बच्चों की फिल्म आ रही थी । एक बिहारी सी नहीं मछली चाहनों अपने माँ बाप भाई बहनों के साथ सुन्दर से घर में मजे से रह रही थीं । अचानक दैत्याकार रेल मछली आई । इनको खाने को दौडी बच्चे की माँ अपने बच्चों को बचाने के लिए बीच में आई तो वेल उसे और उसके बच्चों को खा गई । चैनो अपने पापा के साथ घूमने गई हुई थी । लौटते ही उन्होंने देखा रेलने उनके घर को ध्वस्त कर दिया था और परिवार को भी खा गई थी । रे लेने बाप बेटे की तरफ भी छपती । इतने में पानी के तेज लहराई जैनों की जान तो बच गई, पर वे अपने मम्मी और भाई बहनों के बिना ये की कैसी रही है? देखो उदास हो गया सीमा उसका मन बहलाने के लिए गोद में उठाकर स्नानघर ले आई ब्रो रात्रि पोशाक में उसे तैयार करके बिस्तर पर सुमेश के पास बैठा दिया । स्वयं रात्रि पोशाक पहने चली गई तो मैं शिवा के समय पर हाथ फेरकर बोला । वो बाॅम्बे बडे होकर क्या बनोगे? खडा होकर फौजी की तरह सैल्यूट मारते हुए शिवा बोला फॅमिली गटका होकर सोमेश ने उसे काले जैसे लगा लिया । पूछा फौजी बन कर क्या करोगे? देश के दुश्मनों को गोली से उडाऊंगा फॅसने आज से बंदूक चलाने का इशारा किया तो सुमेश ने पूना पूछा तो मैं डर नहीं लगेगा । पापा तो बहादुर बच्चा हूँ आपका बेटा मैं दुश्मनों से नहीं निरॅतर ेंगे सुमेश का सीना अपने होनहार बेटे को देख घर गर्व से फोन गया । कितने में सीमा आ गई और सोमेश स्नान करने चला गया । फिर आज तक मां की लोरी के बिना नहीं सोया था मैं कहने लगा माँ और सुनाओ ना । सीमा बोली पहले हमेशा की तरह नमोकार महामंत्र सुना । शिवानी दोनों हाथ जोडे, आंखे मूंदी और अपनी मिश्री ही बेठे बोली में बोलने लगा नमो ऍम नमो ऍम नमो है जाए हम नाम ऊॅचा हूँ माने उसे बाहों में भेज लिया और बोली बेटा ये और प्रभावशाली महामंत्र हैं । इससे पवित्रता और रोज प्राप्त होता है । इसे कभी भूलना नहीं अपनी संघर्ष क्षमता बढाने के लिए, अपने आप को सशक्त बनाने के लिए एवं वजह प्राप्त करने के लिए सुख दुख में हमेशा सबसे पहले बोलना ये मैंने कहा हम हमेशा याद रखूंगा अब तो थोडी सुना दो ना हेमा धीरे धीरे उसके सर पर हाथ फेरती हुई लोरी सुनाने लगे धीरे से आज जारी अखिया में इंडिया आज ही आ जाएगा धीरे से आशा हूँ मेरे मुन्ना को सुलाझा इंडिया ॅ धीरे से आशा रह जहाँ पेट फिर बनने का वीर बनेगा अधीर बने का पडा हो महावीर पडने का इंडिया फॅमिली आज धीरे से तब पापा के प्राडो से प्यार बम्बई के फिल्कार डोला रहा हूँ चमके बनकर जानते से दारा इंडिया अॅान धीरे से आ गया कि बल्कि लोरी सुनते सुनते बहुत होने लगी । कुछ ही देर में वह गहन निद्रा में चला गया । गुलाबी लिबास में सीमा बाद कमनीय रूप से लग रही थी तो मैं इसका मन मचलता जा रहा था । जिंदगी में एक ऐसे रोमांटिक रोमान्चकारी भावुक बाल आज तक नहीं दिए थे । आज का एहसास ऍम था । कुछ समय पश्चात मदहोश सोमेश बोला चलो सागर तक पर चले सीमा चौकी रात का एक बजाये अभी का जाएंगे । कल चलेंगे । सुमेश का मन मचल रहा था । बोला ॅ यहाँ रात्रि भ्रमण में कोई डर नहीं होता हूँ । समुद्री किनारे सुरक्षित हैं । सीमा ने अंतिम हथियार छोडा हूँ हो गया है किसी करेंगे हो भी व्यवस्था हो जाएगी । तुम तैयार हो जाऊँ । अनमनी सी सीमा ने एक बाढ में दरी डाली । वस्त्र बदले बोल रात्रि ड्यूटी पर तैनात जूनियर मैनेजर केशव को बुलाया । सोमेश ने उसे अपने कमरे की चाबी देते हुए कहा हम लोग सागर तट पर जा रहे हैं । अभी दो तीन घंटे में आ जाएंगे । यहाँ हमारा बच्चा शिवास हो गया हुआ है तो सुबह ही होता है । फिर भी आप कर प्यार चेक करते रहे । केशव ने कहा शराब किसी तरह की चिंता ना करें । मैं अपना बच्चा समझकर इसका ख्याल रखूंगा था । आप अपने सामान को कॅश हमारे भाई हैं । जब हम अपने जिगर के टुकडे को आपको साहब के जा रहे हैं तो बहुत एक वस्तुओं का मूल ही किया है तो मैं आप के विश्वास को बनाए रखने का प्रयास करूंगा । थोडा तूफानी मौसम हो सकता है वह सावधान रहिएगा । हो सके तो जल्दी लौटा हैं । सोमेश बोला यहाँ से कितनी दूर फेंकी । घंटे का तो रास्ता है तो मौसम का में राज्य निकला तो हम तुरंत लौटाएंगे था शिवा का ख्याल आशी रखेगा वो केसर कहता हुआ केशव निकल गया । सीमा शिवा के पहाड कहीं गहरी नींद में सोया है और भी ज्यादा लग रहा था । उसने उसके मस्तक बाॅन अंकित किया तो अनजानी आशंका से उसका ऍम तेजी से लडा था वो उसके अंदर स्टाइल से आवाज आ रही थी शिवा को यूज होता छोड करना चाहूँ सोमेश बेहद रोमांटिक मूड में था । सीमा कितनी देर है कहते हुए उसने पुना कमरे में प्रवेश किया तो देखा सीमा शिवा के पास बैठी भावुक हो रही थी । मैं जो का सोये हुए अपने राजदुलारे के सिर पर हाथ फेरा और बाहों में भरकर सीमा को खींच लिया । क्या ही फॅमिली क्यों सीमा सोच रही थी कि वे अपने प्राणेश्वर के संग जाते हुए हैं । आज उसका हिरदय इतना उद्वेलित क्यों हैं? चहलकदमी करते हुए कुछ समय पर शायद रामनगर बीच पर पहुंच चुके थे तो इस समुद्री तट पर जहाँ दिन में सैकडों जल प्रेमी क्या कर रहे थे वहीं इतनी रात गए तो एक का दुख का गिनती के लोग नजर आ रहे थे । जो समुद्र दिन में गुस्सैल नौजवान की तरह तूफान उफान का जोशीली जवानी दिखा रहा था, वह अभी नवपरिणीता की तरह धीरे गंभीर नजर आ रहा था । नीले रंग के चादर टाने उनींदा उन्हें थोडा सा लग रहा था । वही किनारे दरी बिछाकर दोनों लेट गए । ऊपर देखा तो आसमान दूधिया रोशनी से नहाया हुआ था । आज पूर्णिमा के राज्य थी । आज का चंद्रमा आम दिनों से बहुत बडा एवं बेहद चमकीला नजर आ रहा था । ज्योतिषियों ने इसे सुपर मून का नाम लिया । वैज्ञानिकों का कहना था क्या चंद्रमा धरती के सबसे गरीब आया था? सुमेश और सीमा भी एक दूजे के बेहद करीब हैं । सामने हिन्द महासागर ना जहाँ प्रेम का सागर में चल रहा था । सीमा ने लजाती सी आवाज में कहा सुजॅय हो तो साहब चलो में तुम्हें ही पति रूप में पाना चाहती हूँ । प्रियता मैं मैं तो मैं साहब जन्मों का प्यार अभी इसी वक्त करना चाहता हूँ । सोमेश रसीले स्वर्ग में छोटा सा बोला प्यार मोहब्बत की गुफ्तगू में सीमा और सोमेश ऐसे होते हैं कि उन्हें वक्त का पता ही नहीं चला हूँ । राहत के लगभग ढाई बजे थे । दोनों प्रेमपाश में बडे एक दो बजे मैं समय थे । अचानक तेज गडगडाहट की आवाज सीमा के कानों में पडे जैसे कहीं दूर ज्वालामुखी फटा होऊं । सीमा को वहम लगा । नादान क्या जाने यह बहन नहीं आया । वहाँ सच्चाई थी । आवाज और तेज होती जा रही थीं । जैसे लगातार बिजली गिर रही हो । सोमेश भी चौंक गया । दोनों बैठे । अचानक बदले मौसम के मिजाज को देखकर दोनों हाथ खराब हो गए । आंखे खोलते ही उन्होंने सामने देखा कुछ समय पुर जो शांत समुद्र समस्त विश्व को मर्यादा का संदेश देते हुए देवेंद्र उत्पन्न कर रहा था, वहीं या मर्यादा भंग कर विकराल हो उठा था । सुरक्षा दाएं भयंकर डानगे लहरें सीमाओं को लांघ बडी चली आ रही थी । सुमेश लाया सीमा जल्दी चलो । सीमा इधर बैग उठाने मोडी उधर काली लहर बडी चली आ रही थी । रमेश ने सीमा को खींचा छोडो बाहर निकलो यहाँ से आप देखा ना ताव चप्पल पहने नहीं कर हाथ पकडकर दोनों अपने होटल की दिशा में दौडे । लेकिन सीमा के पहले तो पत्थर तरीके हो गए थे । दोनों ही नहीं जा रहा था । पीछे लहरों का शोरगुल भयंकर ही लग रहा था । जैसे पहले आने वाला हूँ । एक के बाद एक ऊंची लहर उनका पीछा कर रहे हैं । अपनी समस्त जीवनीशक्ति लगाकर सोमेश और सीमा तेजी से दौर पर सोमेश और तेजी से सीमा को खींचने लगा । सीमा भी तेजी से दौडने का प्रयास करने लगी । लगभग आधा रास्ता तय हो गया था । होटल बस कुछ ही फिल्म दूर था । दोनों के जिलों में ढांडा साबन था । चलो जान बची तो लाखों पाए । सीमा मन ही मन सोचने लगी आपका भी शिवा को छोडकर नहीं जाएगी । तभी उनके कानों में लहर का अट्टाहास होना नहीं हैं । और यह क्या है? यहाँ वहाँ फिट ऊंची नहीं! और ये ऍम हैं और ये क्या? आप पच्चीस फीट ऊंची लहरें मानी भूलकर पीछे देखा । कुपित समुद्र साक्षात काल बन नहीं ऍम था बहुत को इतना करीब अगर वैसे तक पडी । सुबह बच्चो ऍम मैं उसके मूड है । ठीक निकली सुमेश मिला करोडा सीमा भी वहाँ प्राण हंता है । मायावी लहर यमदूत बनकर विद्युत गति से आई और दोनों के पैरों के नीचे से जमीन चल गई । बहुत कोशिश की एक दूजे को बचाने की संग संगठित नहीं लेकिन हाय रे बदकिस्मती आज जन्मों तक साथ निभाने के ख्वाब देखने वाला प्रेमी युगल इस जन्म में संगम भी ना सका । उनकी मोहब्बत का ताज महल धराशायी हो गया । खौफनाक लहरों के भयंकर विनाशकारी वेट ने हमेशा हमेशा के लिए सीमा और सोमेश को ज्यादा कर दिया । प्रगति के रौद्र रूप के समय मानवीय शक्तियां होनी हो गई । सुनामी के इस खौफनाक मंजर ने निर्दयतापूर्वक इस द्वीप को तहस नहस कर दिया । समुद्री किनारे का क्षेत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो गया । वहाँ जीवन का निर्माण काचिन भी नहीं बचा । चारों ओर बस जल्द ही जल्द था । समुद्र की अटल गहराइयां अनगिनत मासूमों की समाधि स्थल बन गई । व्यक्ति के सो खाॅ और उल्लास भार्इयों मांगे विशाल और खानदान का रूप ले लेती हैं । कामनाओं का उजाला धूमिल अंधकार में परिवर्तित हो जाता है तो यही है नश्वर संसार की नहीं आती ।

Part 3

होटल सिटी पैलेस के पांचवें तल पर रात्रिकालीन ड्यूटी कर रहे सहायक वो मैनेजर केशव आकाशवाणी से समाचार सुन रहे थे । अकस्मात अपने आपको प्रकंपित पाकर विस्मित हो गए । दृष्टि उठाकर सामने देखा तो उनकी मेज और उस पर रखा सामान भी तेजी से काम पे था । अपने पांवों के नीचे प्रकंपित होती धरती को महसूस कर रहे हैं । भूकंप की तीव्रता को तार गए । काफी दीवार ही किसी भीषण प्राकृतिक आपदा का पूर्वाभास दे रही थी । कुछ सेकेंडों की सनसनी के पश्चात सबकुछ सामान्य हो गया । पुराना केशव का ध्यान रेडियो की ओर गया । अचानक उन के समाचारों में हिंद महासागर के इस समुद्री क्षेत्र में सुनामी आने की संभावना के बारे में सुना । वह चिंतित हो उठा हूँ । टेशन ने तुरंत होटल में फॅस बजा दिया हूँ । इंटर ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम से उद्घोषणा करवा गई की कृप्या सब शीघ्र अति शीघ्र होटल छोडकर दूर दराज में सुरक्षित स्थान की ओर खोज करें । अचानक केशव को ध्यान आया । ॅ अरे शिवा कमरे में अकेला सोया है । उसका तो दरवाजा भी बंद है । फ्लोवर के इस छोर पर लॉबी थी । अंतिम छोर पर कमरा नंबर पांच हजार था । केशव ने उसकी चार ही उठाई तेजी से दौडते हुए कमरे के दरवाजे पर पहुंचा हूँ । ऍम हाथों से दरवाजा खोल ही नहीं पा रहा था । फिर क्षण भर के लिए संयमित होकर उसने जैसे ही चाहती लगाई दरवाजा खुल गया और तभी भयंकर शोर सुनाई दिया हूँ । केशव को लगा हर सब कुछ घटना हो जाएगा । होटल की इमारत खेल उठी थी हूँ । शोर इतना तेज था कि शिवा रीड जब करोड बैठा हूँ उसने देखा के पास में ना मम्मी है ना पापा वी रोने लगा । मम्मी मम्मी केशव ने बिना एक क्षण गंवाए शिवा को गोद में ले लिया । वहीं रखी पानी की बोतल उठाई और लिफ्ट की तरफ दौडा । भूतल पर पहुंचकर पिछले दो बाहर से बाहर भागा हूँ । दौडते दौडते बहुत दूर निकल गया हूँ जो गोल काफी पीछे छोड गया था । हमने एक छोटा सा यात्री निवास दृष्टिगत हुआ हूँ । केशव ने वही शरण लेने को सोचता हूँ । एक दिन बीता दो दिन भी थे । तीसरे दिन भी केशव ने बहुत ढूंडा बहुत खोजा । बची हुई इमारतों में राहत शिविरों में उनके होली का उल्लेख करके भी लोगों से पूछा किन्तु उनकी सारी मेहनत बेकार गई । सीमा एवं सोमेश की कोई खबर नहीं है । ऍम रो रो कर बुरा हाल था तो उसे मम्मी की बहुत याद आ रही थी । इन तीन दिनों में उसने बिस्कुट का एक टुकडा भीमू में नहीं डाला था । बस एक ही रंग बंदी के बाहर जाना है । मम्मी पांच जाना है । किसी तरह बहलाफुसलाकर केशव नहीं थोडा बहुत दूध जबरदस्ती पिलाया । आज थोडी देर के लिए बिजली की सप्लाई प्रारंभ हुई थी । टेलीफोन नहीं नहीं अभी ठीक नहीं थी । मैं सोच रहा था उसके लिए परिवार में सब चिंतित होंगे । लेकिन खबर का तो कैसे करें? कुछ दिनों पश्चात टेलीफोन लाइनें ठीक हुई तो उसने माँ पिता जी से बात की । सबको आपने कुशल छेम के समाचार प्रेषित करके केशव शिवा के बारे में चिंतन करने लगा । अब इसका क्या किया जाए? अभी हफ्ता भर पहले ही उसने अंग्रेजी अखबार में यू । एस । ए । के एक निस्संतान दंपत्ति की अपील रखी थी । वो ऐसा ही बच्चा चाहते थे और इसके लिए हजारों डॉलर पेमेंट करने को तैयार थे । इस समय इतनी बडी राशि उसके लिए बहुत मायने रखती थी । शाम को लेकर मैं अपने स्तर पर आ गया । मैंने देखा ऍम तो थी । केशव ने कहा यहाँ बैठा हो जाऊँ । ऍम मुझे हमेशा लोरी सुनाती थी । उसके बिना आपॅरेशन को याद आया । वो भी तो हमेशा अपनी बडी बहन सावित्री डॅडी सुनकर इस होता था । सावित्री दीदी को बच्चों का बहुत जाता था हूँ । सीजेरियन होने के बावजूद बेटा पाकर बहुत खुश थी, लेकिन दीदी की खुशियाँ क्षणिक थी । ऍम होने से छठे भी नहीं उनका बेटा चलवा हूँ । डॉक्टर ने दोबारा चांस लेने के लिए पहले ही साफ मना कर दिया था, क्योंकि इससे धीरे की जान को खतरा था तो तभी से सावित्री दीदी गहरे अवसाद की शिकार होगा । बीमार रहने नहीं नहीं, शरीर भी सूखकर कांटा हो गया था । जीजा जी भी हालत में अपने व्यापार पर पूरा ध्यान नहीं दे पा रहे हैं । केशव ने सोचा कि शिवा को पुत्र रूप में बात है । सावित्री दीदी कितना खुश होंगी हूँ । अगर उनका बेटा जिन्दा होता तो आज इतनी ही उम्र का होता हूँ । एक तरफ हजारों डॉलर का लालच है । दूसरी तरफ अपनी प्रिय बहन की खुशियाँ ऍम भयंकर अंतर्द्वंद में फंस चुका था । मैं शिवा की मासूम सूरत देखने लगा । देखते देखते उसे अपने बहन की अनुभूति होने लगी । आखिर पैसे पर प्यार की विजय हुई हूँ । केशव नहीं शिवा खो साबित्री डीडी को सौंपने की ठान ली । क्या सारे तेरी दीदी शिवा का सही तरीके से परवरिश कर पाएंगे? क्या शिवार दीदी को अपना पाएगा?

Part 4

अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में आई इस सुनामी से भयंकर विनाश हुआ हूँ । सहस्रों मनुष्यों का अवसान हो गया । हजारों की संख्या में लोग लापता हो गए । एक द्वीप तो दो तिहाई आबादी ही जल सामाजिक हो गया । वहाँ के स्थानीय एयरबेस में वायुसेना के सौ से ज्यादा सदस्य सब परिवार सुनामी की लहरों से तबाह हो गए । भारतीय जाबाज जीवन रक्षा में महारत प्राप्त ॅ क्या इस तरह के विडंबना के हकदार थे? उन्होंने इस प्रकार के भयावह है अंत की तो कल्पना भी ना की होगी वो । वास्तव में मृत्यु एक महान त्रासदी है जो एक क्षण में मनुष्य को मिट्टी की ढेरी बना देती हैं । यहाँ आकर ही जीवन को नश्वरता का बोध होता है । कुशाग्र पर टिके चल कहाँ की अस्तित्व जितना संदिग्ध रहता है, उतना ही संदिग्ध है । मानव जीवन का ऍम काल के क्रूर शहर से खेतानी नहीं । जब भी भी खंडित हो जाते हैं, सुनामी के स्टैंडर्ड से निकोबार द्वीप समूह के कई छोटे छोटे ऍम तूने तैयार चल नहीं हो गए, उन का अस्तित्व ही अद्रश्य हो गया । कुछ द्वीपों का आकार प्रकार बता गया । कई दिलीप दो दो भागों में भी भी भक्त हो गई हूँ । समुद्र के खारे पानी ने आकर यहाँ की कृषि योग्य भूमि को लिया । पानी योग्य मीठे ताजे पानी पीने योग्य मीठे ताजा पानी के स्रोतों को नष्ट कर दिया । हजारों मछुआरों की नावें भी टूट गयी । बडी बडी इमारतें भरभराकर हो गयी, सडके और पंद्रह तक नष्ट हो गए मौतों के इस महा मंजर से महामारी के प्रकोप की आशंका होने लगी । धंस और निर्माण दो विरोधी धाराएं फिर भी सापेक्ष है । महाविनाश के माध्यम एक चमत्कार भी परिलक्षित हुआ तो सुनामी के कारण एक स्थान पर लगभग पंद्रह सौ वर्ष पूर्व का शहर, वहाँ के भग्नावशेष, कुछ मूर्तियां, कुछ आकृतियां भी दस टी कोचर हुई हूँ । समुद्र के दिशा से शहर की सीमा भी विस्तृत हो गयी । काल के इस करिश्में से स्थानीय निवासी विस्मय भी मुक्त थे । वास्तव में काल में परिवर्तन नाम की ऐसी अलौकिक शक्ति विक मान है जिसके कारण रहपुरा तन को नहीं और नवीन को पुरातन में परिणत करता सादा अपना खलित चक्र घूमाता रहता है । इसी काल के वही भूत माउंट हैरियट की तलहटी में शवों के ढेर लगे थे । बचाव दल के सदस्य सेवाभाव है । मौत मैं जिंदगी के अंश खोज रहे थे । राहतकर्मियों ने भी वहां पहुंच कर इस सामूहिक शव संस्कार है तो अगली ग्राहकों अतिशीघ्र ही प्रारंभ कर दिया । अनल किया । तब का स्पर्श पाकर एक शरीर में किंचित हलचल होने लगी । वहीं पास खडे राहतकर्मी की नजर उस पर पडी । मैं घबरा गया । कहीं कोई भूत नहीं । उसने अपने साथ ही कोई शहरा क्या, वे भी आश्चर्यचकित रह गया । फिर दोनों ने मिलकर तुरंत उसे लाशों के मध्य से उठाकर दूर क्या भाविष्य प्राथमिक चिकित्सा हम कर दी । धीरे धीरे उसे होश आने लगा हूँ । पूरी तरह सचेत होते ही मैं आके नफा फाडकर चारों तरफ देख लेना का आसपास के अप्रित कर वातावरण को देख उसकी चेतना लौटी । सीमा से विछोह था, दर्द भरा रहे । उसके मानस पटल पर हराया तो पागलो की तरह तलाक करने लगा । उसकी नाजुक हालत देखकर उस बचाव करनी ने शीघ्र आती है । अगर उसे राहत शिविर मैं पहुंचाया । लेकिन अभी शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से मैं बेहद आश्वस्त था । वहाँ के चिकित्सा से लाभ हो गए तो धीरे धीरे स्वस्थ्य होने लगा हूँ । कुछ दिनों बाद उससे रहा नहीं । क्या गिरते बढते अपनी पत्नी और पुत्र तलाश में निकल पडा तो मैं खोजते खोजते पूछते पूछते किसी तरह सिटी पैलेस होटल के पास पहुंचा तो वहां पहुंचकर मैं आवाक रह गया । होटल की इमारत के धंसा विषय यत्र तत्र बिखरे हैं केशव का कहीं अता पता नहीं था अपनी प्राणप्रिय और आत्मा जी की स्मृति में वॅार होने लगा हूँ वहाँ कोई नहीं था जो उसके अशोक को पूछता हूँ उसके घावों पर सहानुभूति काम पर हम लगातार सोमेश स्वयं ही स्वयं को दिलासा दे रहा था । संभालता आपने आपसे बाल प्राप्त कर रहा हूँ भाषाओं में फिर की सन्निधि ही सबसे बडा संबल होता है । इसी संभाल के सहारे अनेक आरोह अवरोह को तय करता हुआ सोमेश किसी प्रकार अपने गांव नक्सलबाडी पहुंच गया । भरी दोपहर में उसके अपने मोहल्ले में मौत का सन्नाटा छाया हुआ था । घर के मुख्यद्वार पर लगता हल्ला बस से बहुत चला रहा था । मैं सोचने लगा अखिर उसके माँ पिताजी कहाँ गई? कहाल के कराल की करारी थपेडे खाका फॅमिली में मोर हो गया नहीं हो । उसने दोनों हाथों से अपना सिर पकड लिया और वही घुटनों के बल निश्चेष्ट होकर बैठ गया । क्या करें? कहाँ जाए? कुछ समय पर चाहते । उसकी स्वच्छ भारत लौटी । वे अपने पडोसी चटर्जी चाचा हैं । मिलने पहुंचा वहाँ चाचा जी तो नहीं देखे! लेकिन चाची वहीं सुमेश को देखते ही मैं दहाडे मारकर रोने लगी । किसी अनिष्ट की आशंका से उसका अंतर्मन कहाँ उठाओ किंतु पर जा रहे चाची कौन दिलासा दे रहा था यह दुख का दोबारा कुछ कम हुआ । तब चाची ने बताया की उसका सब कुछ लुट गया, बर्बाद हो गया । उसके माँ बाप और इस दुनिया में नहीं रहे । किसी पुत्र को अकस्मात एक साथ माँ बाप का वियोग सहना पडे । इससे फॅमिली क्या होगी? तो मैं इस सत्र में को सहन नहीं कर पाया और दहाडे मारकर होने लगा । गरुड नंदन करने लगा, ऐसा नहीं हो सकता है । ऐसा कभी नहीं हो सकता हूँ । गया ऍम कैसे जा सकते हैं, वो कैसे हो गया? तब तो एकदम अच्छे थे । इलाज करते करते रहते हो होकर वहीं गिर गया । घबराकर जा जी नहीं, चाचा को बुलाया । उन्होंने उसके चेहरे पर शीतल जल के छींटे मारे, किन्तु सोमेश को घोषणा आया हूँ । चाचा ने एक हाथ से उसके दोनों नासाग्र बंद किए । दूसरे हाथ है । उसके मुंह में चम्मच द्वारा जल डालना प्रारम्भ किया । कुछ क्षणों में उसकी चेतना लौटाई होना है । भयंकर विलाप करने लगा । चाचा चाहिए । दोनों साफ बना देते रहे । बीच बीच में उसे दो दो बूंद पानी पिलाते रहे हैं । धीरे धीरे सोमेश की स्थिति में सुधार हुआ । कोई चाहे या ना चाहे मृत्यु, एक सच्चाई है । व्यक्ति को नहीं कि अपरिहार्य रूप में इसे स्वीकारना ही होगा । वो तो मेरे कॅरियर के मुझसे लौटा था । पत्नी और बेटे को खो कराया था । यहाँ तो माँ बाप ना मिले । एक के बाद एक झटके को मैं कैसे खेले है । उनकी मृत्यु का कारण जानना चाह रहा था तो मैं उसे ढांढस बंधा रहे थे । इस समय भी उन्होंने ही उसे साफ मना नहीं संभाला । फिर बडी मुश्किल से उसे चाय भी पिलाई । तब सोमेश स्थिति को सामान्य हुई । चाची उसके घर की चाबी उठा नहीं और उसे देते हुए बोली, तू दरवाजे पर ताला लगाया है । हमने ये भी ले लोग अपना घर संभालो । जब भी कोई आवश्यकता हो बता देना तो सुमेश उठ खडा हुआ तो वे दोनों भी उसके साथ आएँ । सुने घर में प्रवेश करते ही तो मेरे चाचा कहती है लगभग पूरा मिला के उठा हूँ । साफ ना देते हुए चाची ने कहा ऍम लालू तुम्हारा मन लग जाएगा । शब्दों ने जले पर नमक छिडक दिया । सुबह देखते हुए उसने सारी स्थिति स्पष्ट की की किस प्रकार काल के क्रूर अट्टाहास है । उसका परिवार उजड गया । स्थिति की गंभीरता समझ वे भी वहाँ उसके साथ बैठ गए । गमगीन स्वर में सोमेश ने चाचा से अपने माता पिता के देहावसान के बारे में जानना चाहता हूँ । उन्होंने ठंडे सफर में बढाना शुरू किया । पिछले दिनों हमारे शांत नक्सलबाडी कस्बे में भूचाल आ गया । सामाजिक आंदोलन के रूप में एसपीएम पार्टी के कुछ कार्यकर्ता भूमि ही गरीब किसानों एवं जमींदार होता था । रईसों में मुठभेड हो गई । उसके कुछ समय पश्चात ही सिलीगुडी में किसान सभा ने हथियार सहित आंदोलन की उद्घोषणा कर दी । यहीं आदिवासियों ने उग्र होकर एक पुलिस इंस्पेक्टर की तीर मारकर हत्या भी कर दी हूँ । माओवाद से प्रभावित होकर यहाँ के चारों मजूमदार नरेंद्र को गर्म कनु सान्याल है । इस खूनी संघर्ष में खुद पडेगी अपने यहाँ के युवकों का ये आक्रमण । हिंसक रवैया देख हम सभी हाॅल तो किसी में भी इतनी मतलब थी कि उन्हें रोक सके । तुम्हारे पिताजी तो सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी रहे थे तो उनमें अप्रितम साहस था । प्रबल आठ था इसलिए उन्होंने इन माओवादी युवाओं को समझने का बहुत प्रयत्न किया । उनसे हिंसा का रास्ता छोडने की अपील की और कहा कि लूट पाट, रक्तपात, हिंसा और शास्त्रार्थ के सहयोग के बिना अहिंसा क्रांति से भी रचनात्मक सकारात्मक परिवर्तन संभव है । अपने गांव के ये नवयुवक भी उन्हें बहुत सम्मान देते थे । आठ घर से उन्हें सुनते थे । एक शाम नहीं । घर पर उन्हें से संगोष्ठी थी । यह उनकी अंतिम अपील थी । अगली सुबह हमारे माता पिता दोनों गोलियों से छलनी में पाए गए । हमने तो मैं सूचना देने का बहुत प्रयास किया, किंतु तुम से संपर्क नहीं हो पाया । जनकल्याण और देश हित में उन्होंने अपना बलिदान कर दिया । तो सोमेश के नेत्रों से जहाँ अविरल अश्रु पराहित हो रहे थे, वहीं है गाय के अस्तल से है । उनकी महान शहादत को नमन कर रहा था ।

Part 5

सर्दियों की गुनगुनी धूप थी । साबित्री अपने घर के आंगन में बैठी सब्जियाँ साफ कर रही थी । पहले सारे माॅ निकले फिर गाजर का दुकान करने लगी । काम को गाजर का हलवा बनाया था । इतने दिनों की मई उसीसे आज मैं भरी थी । उसका प्रिया भाई के शव जो आने वाला था वो आपने घायालों में जो भी अपने काम में इतनी तन्मय थी कि सत्यवान कब आया उसे पता ही नहीं चला हूँ । सत्यवान ने उसे देखा और देखता ही रह गया । जगह नाता लाल साडी लाल बिंदी कमर तक झूलते चमकीले काले बाल सादा मायूस रहने वाली साबित्री के चेहरे पर आज हल्के से खुशी की रेखाएं देख उसे संतोष की अनुभूति हुई । वैसे हॉल ऐसे वहीं सावित्री के पास बैठ गया । ऍम अचानक पति को आया देख कर रहे चाहे कहीं साडी कहाँ चल संभालते हुए बोली ऍसे हूँ । सट्टे वाहन ने असली बात छुपाते हुए कहा ॅ हो रहा था तो मैं घर चलाया हूँ । सावित्री तुरंत गाजा छोडकर खडी हो गई और बोली चलो में दवाई लगा देती हूँ और अदरक की चाय पिलाती हूँ । अंडा क्या चाहे दो आके सत्यवान को मुंहमांगी मुराद मिल गई । वे अंदर जाकर खटिया पर आंखें मोहन कर लेट गया हूँ । कुछ दिनों में सावित्री बांके शिशी ले आई दैनिक सांगली के तौर पर निकाला और नहीं है । भारत है पार्टी के सिर पर लगाने लगीं पत्नी के कोमल करूँ के स्पर्श ने सत्यवान के अंदर सुलग थी आपको और तेज कर दिया उसने हाथ पकडकर साबित्री को अपनी और ऍम क्या कर रहा हूँ? सावित्री बोली सत्यवान ने उसका हाथ वाले से पकडकर आॅफर रखा । वार बोला ॅ तो यहाँ हो रहा है मेरे पति के मनो भागों को ताड कहीं उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया । महीनों बाहर आज उनके घर में खुशियों का आगमन जो हो रहा था । लगभग रात के नौ बजे केशव उनके घर पहुंचा । अपने भाई के साथ चार पांच वर्ष के बच्चे को देखकर साबित्री अॅान भी नहीं किया था तो यह बच्चा कौनसा केशर उनके मनोभावों को ताड गया और पहेलियां हो जाते हुए बोला दीदी, बच्चा कैसा लग रहा है? फॅमिली ने गहरी नजर बच्चे पर डाली । ऍम सुनता था ऍम मुझ पर नहीं होगा तो किस पर होगा । मुझे पुरानी कहावत याद आ गयी । नर ननिहाल पर होते हैं बता मेरा भांजा मुझे ऐसा लग रहा है । सावित्री भौचक्की रह गई । मैं अपलक उसे देखने लगी क्योंकि वो अपने भाई की खिलाडी बहन थी । अब केशर ने सभी शंकाएं में डालते हुए अपनी बात रखना ही उचित समझा । उसने अंडमान निकोबार में आई सुनामी शिवा का उसके मम्मी पापा से भी छोडना । अमेरिकन दंपति, गौर शिवा को देने का विचार आदि बातों से सत्यवान एवं साबित्री गांव परिचित कराया और अंत में बोला हूँ ऍसे आती इसकी माँ हो सम्भालो अपने शिवा को साबित फ्रीडम भावुक हो गयी । खुशी के मारे उसकी आंखों से आंसू बह निकले तो भगवान के रूप में अपने भाई के शव को समझ रही थी और उसके इसी स्वरूप को अनंत कृतज्ञता ज्ञापित कर रही थी । सब ने मिलकर खुशी खुशी भोजन किया और गांव पेशाब करने रहेंगे । गरीब रात के ग्यारह बजे शिवा को नहीं आने लगी है । बोलने लगा हूँ । फॅमिली दीदी को इशारा किया । साबित ही उठकर उधर ही आ रही थी । आ रहे फॅमिली सुनने लगी । सोचा मेरे ऍम सपनों की पर्याय तुज को बुलाती जान हिंडोला लेकर झुला थी इंडिया यूज कर रहे है तो कहा है तो सोच रहा मेरे राजदुलारी ऍम बार तो शिवाज कच्चा आया तो साबित हुई दीदी की मीठी लोरी से मैं शीघ्र ही नियंत्रणाधीन हो गया । तत्पश्चात ॅ तीनों अपनी बातचीत करते रहे । किसी तरह तीन चार दिन गुजर गया हूँ । बाकी हर छोटी से छोटी बात का सावित्री बडा ख्याल रखती हूँ । बिहार से नहीं लाना । चिडिया कबूतर के किस्सों के साथ मनपसंद भोजन करवाना, दिन में उसके साथ खेलना और विशेष कर रात्रि में मीठी लोरी सुनाकर सुलाना केशव ने देखा । शिवा कभी कभी तो मम्मी के पास जाऊंगा की रेट लगता है तो मगर अधिकांश उसका मन लग गया था । पांचवें दिन मत ध्यान में उसे प्रस्थान करना था । बहन के साथ साथ शिवा से पढाई लेना उसे भारी लग रहा था । किंतु भावनाओं के साथ साथ जिम्मेदारियाँ भी निभानी आवश्यक थी । उसने दीदी से विधान ही तो बहन की आंखे बहुत कुछ कह रही थी । साबित्री से इतना ही बोल पाई कि शाम हमारे ऐसा उनका बदला मैं कैसे चुका हूँ । केशव भी रूम हादसा हो गया हूँ । कुछ नहीं बोल सकता हूँ । आपकी बाकी बारी थी । केशव ने शिवा को गोद में उठाया और बोला हूँ मैं तुम्हारे लिए ऍम खिलोने लाने जा रहा हूँ । तुम अपनी मम्मी के पास क्या आराम से रहना? जीवा बोला ये मेरी मम्मी नहीं है तो आंटी ऍम । तब उसने उसे समझाते हुए पूछा, शिवा ऍम से प्यार नहीं करती । हाँ तो बहुत प्यार करती है । शिवा इतना प्यार करने वाली तो मम्मी ही होती है लेकिन मेरी मम्मी तो सीमा मम्मी थी । शिवान सीमा मम्मी ने ही इन को तुम्हारे पास भेजा जाये । हो सकता है हाँ बेटा कभी कभी ऐसा हो नहीं सकता है । अच्छा अंकल पाॅड भी कर सकते हैं और कोई नहीं कर सकता हूँ । ना बोला था कुछ नहीं पर वो पूरी तरह संतुष्ट भी नहीं हुआ था । केशव में बडी सी चॉकलेट शिवा के हाथ में पढाई अपनी दीदी ऍम जीजा जी के चरण हुआ हूँ । हर गंगे नेत्रों से चुपचार निकल गया हूँ । अच्छा सावित्री बडे दुलार से कह रही थी कि वहाँ खाना खा लो । शिवा टस से मस नहीं हो रहा था । उसे अपनी सीमा मम्मी की बहुत याद आ रही थी । समिति समझ गई । मैं कुछ खेलाने उठा नहीं जो कल ही खरीद कर लाई थी । बेहरा फुसलाकर धीरे धीरे उसे भोजन करवा दिया । फिर उसके साथ खिलौने से खेलने लगी गए । बंदूक से सबसे ज्यादा खेल रहा था । उस की रुचि परखने हैं तो सारे मैंने पूछा इसका क्या करेगा शिवा वो देश के दुश्मनों को इससे गोली मार दूंगा । उसका ऐसा जवाब सुनकर उसने उसे सीने से लगा लिया । दिन प्रतिदिन इन दोनों का नहीं मैं बता रहा हूँ । सत्यवान भी शिवा का घूम ख्याल रखता हूँ । काम आता फिर आता चीजें लाकर देता हूँ । अच्छी अच्छी कहानियाँ सुनाया था, उसे कविताएं सिखाता हूँ । सेवा के प्रतिभा देखकर माँ बाप दो नौ प्रसन्न थे तो उन्होंने अपने घर के पास सर्वोदय विद्यालय में उसे दाखिला जिला नहीं इस प्रकार श नेशन है । वक्त को लडता गया । शिवा इसी परवरिश में पलता बढता जा रहा था । उसी में समानता जा रहा था । वो अपने जन्मदाता को भूल गया और पालन करता ही उसे याद रहे । प्रतिभा का उनमें नये सारे एक भी होता है । किसी का प्रयत्नपूर्वक प्रतिभा । परेश का हर में संस्कारों की भी अहम भूमिका है । वास्तव में जीवन को संस्कारित, बरी, मान जिद करने की प्रक्रिया का नाम ही संस्कार है । वो सत्य संस्कार हमारे जीवन की थाती होते हैं । शिक्षा के साथ संस्कारों का समायोजन जीवन की वास्तविक दिशा को स्पष्टता प्रदान करता है । हटाओ शिक्षा में संस्कारों की अनिवार्यता स्वतः सिद्ध होती है । सब संस्कारों के बिना शिक्षा उसे प्रकार भार भूत बन जाती है । जिस प्रकार गधे पर चंदन का गठन लादने से गधा बाहर का तो अनुभव करता है, सुगंध का नहीं । आपने महाबार की संस्कारी शिक्षाओं की सुगंध को सिरोधार्य । कृषि वहाँ अपने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उन्नति कर रहा हूँ । सीमित साधनों में भी प्रतिभा कैसे विकास कर सकती है, उसने साबित कर दिखाया था । अपने स्कूल में प्रत्येक कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए हैं । आखिर उसने मैट्रिक बोर्ड की परीक्षाएं देती हूँ । अब उसके मस्तिष्क में एक नया चिंतन चल रहा था तो क्या था वो जानता हूँ ।

Part 6

सोमेश की आंखों से नींद कोसो दूर थी । अच्छी थी घटनाएं चलचित्र की भारतीय उसके स्मृति पटल पर एक एक करके उभरती जा रही थीं । उसे अपना बाल्यकाल याद आने लगा । किस तरह माओत्से अपनी ममता की छांव में इसने से वाट साले पूर्वक खिलाती पिलाती बहलाती खेल खेल में अच्छे संस्कार देती और रात में लोरी गाकर सुनाती हूँ अभी भी वो जब तक मैं भोजन नहीं कर लेता माँ खाना नहीं खाते हैं । पिताजी का अनुराग पूर्वक अनुशासन आठ मीयता संपूर्ण मार्गदर्शन रहे रहे कर याद आ रहा था वो अपने आप को सामान्य नहीं कर पा रहा था तो कभी शिवा की बाल क्रीडाएं और उसका पाता पापा कह कर लेकर जाना याद आता बिच्छुओं की अंतिम शाम वाला जन्म दिवस का डाॅॅ उसे बेहद था । वो कर रहा था जिस हाथ आपसे उसने कहा था कि वह बडा होकर फौजी बनेगा । उसे याद करके सोमेश की आंखों से पुनः आँसू बहने लगे और उसके आंसू को पूछे । किसके कंधे पर सर रखकर रहे आप उसे अपनी प्राणप्रिया के अगाध प्रेम की उसके समर्पण की एवम उसके स्नेहिल साहचर्य की यहाँ आने लगी अंतिम रात का मधुर साथ और उसके पश्चात निष्ठुर विडियो कोई आज करके फूट फूट घर उन्हें लगाओ । दीवारों पर सिर पटक ने लगा पागलों की तरह इस कमरे से उस कमरे में चक्कर लगाने लगाओ । ऍम कक्ष में रखे उसकी फोटो को दिल से लगाकर लगता रहा हूँ । इस प्रकार उसकी पूरी रात मिलाप में कट गयी । वो सुबह का हल्का हल्का प्रकाश होने लगा । सीमा की तस्वीर को सीने से लगाए लगाए उसे हल्की सी क्या आ गई? उसे लगा कि उसके दादा अपनी गोद में सुलाकर उसे सांखना भरे स्पर्श है । कब तक आ रहे हैं? आदमी स्पर्श की अनुभूति से उसकी आंखें खुल गईं । उसने देखा सच मुझे किसी बुजुर्ग की गोद में सोया ऍम यह तो उसके मित्र चारु मजूमदार के पता थे । उन्हीं की उम्र के दो तीन व्यक्ति भी उनके साथ एॅफ रह गया और तुरंत छोडकर बोला, अरे आप सब लोग ऍम बोले आज रात का ब्राह्मण है तो जब हमें घर से निकले तो देखा तो महाराज घर खुला हुआ है । सम्भवता तुम लौट आया हूँ । यही सोच कर तो मेरे से मिलने आ गए । बेटा बहुत बुरा हुआ तो तुम्हारे माता पिता जी का अंतकाल सिर्फ तुम्हारे ही नहीं पूरे गांव की अपूरणीय क्षति है । वो तुम्हारी पत्नी और बेटे के बारे में भी सुन कर बहुत दुःख हुआ हूँ । धीरज रखो बेटा भगवान तो मैं जोक सहन करने की क्षमता थे । जहाँ उधो, दीपाकर, सोमेश, पुराना बेला, कोटा रोते रोते उसने पूछा हूँ ऍम चारों के पिताजी हतप्रभ रह गए । उन्होंने कहा कि उसने उन्हें नहीं मारा । ॅ तो अपनी मित्र मंडली के संघ उनसे घंटों मार्गदर्शन लिया करता था । तुम्हारे पिताजी इनके मध्य बेहद लोकप्रिय हो गए थे । उनकी भर्ती है, लोकप्रिय नहीं । उन की जान ले ली । उस दिन सुबह से ही गहन चिंतन मनन पर विचार विमर्श चल रहा था । राहत को सब युवक अपने अपने घर लौट गए । दूसरे दिन प्रात आह, तुम्हारे पिता माता गोलियों से छलनी महत्व पाए गए । कहाँ वालों का विचार है कि जमींदारों ने ऐसा करवाया था? सारे युवक तो ये खबरें सुनकर भी बहुत हुए थे । उनके देव हासन के पश्चात हैं । युवकों को कोई सही मार्गदर्शन देने वाला नहीं रहा हूँ । आटा जो आंदोलन गरीबों, भूमिहीनों एम किसानों के सामाजिक आर्थिक उत्थान के लिए हुआ था । मैं हिंसा गुरिल्ला युद्ध में बदल गया । मेरे बेटे चारों को पुलिस पकडकर ले गईं । तभी मैं आज यहाँ नहीं आया । ऐसा कहते कहते उनकी आंखें भी नम हो गईं । एक नीरव स्थान बताता हूँ और छा गई । अन्य मान सक सो मैं तत्कालिक स्थानियों पर चिंतन करते हुए हिंसा के रूपों के बारे में सोचना लगा । दूसरों के प्रति द्वेष की भावना, उन्हें गिराने का मनोभाव और उनकी बढती हुई प्रतिष्ठा तो रोकने के सारे प्रयत्न भी हिंसा के अंत गर्भित है । हिंसा की स्थिति पैदा करने वाला कोई भी व्यक्ति अच्छा नहीं । जो व्यक्ति एक बार हिंसा के घेरे में उतर जाता है, फॅमिली उस वाला ऐसे बाहर नहीं निकल पाता हूँ । मैं इधर देखता है । उधर हिंसा ही हिंसा दिखाई देती है । इंसा के शक्ति का प्रयोग संसार में कहीं भी हो, उसका दुष्परिणाम समूची मानवजाति को भोगना पडता है । और जब जनतंत्र में जान पीछे छूट जाता है और तंत्र आगे आ जाता है तब हिंसा आवश्यक भडकती है और नहीं नहीं समस्याएँ खडी हो जाती हैं । उसके माता पिता इसे हिंसा का शिकार हो । इस समय प्राण गवा बैठे ऍम क्या करें? माँ पिताजी के हत्यारों का कैसे पता लगाएं और कौन सा रास्ता अपनाएं ऐसा चिंतन करते हुए हैं । उसके मानस पटल पर अपने मित्र चारों का भी चित्रों भराया । चिंतित स्वर में उसने उसके पिताजी से पूछा हूँ हूँ, वहाँ कैसा है और उसे कब तक रिहाई मिलेगी? अपने पुत्र की आज मैं दुख उदासी सुना बनवा इंतजार के अलावा उनके पास सोमेश के इस प्रश्न का कोई भी जवाब था । काफी समय तक सब लोग वहाँ बैठे रहे । फिर एक एक कर के धीरे धीरे चली गईं । इसी प्रकार संवेदनाएं प्रकट करने हेतु लोगों का आने जाने का क्रम गए दिनों तक बना रहा हूँ । सुमेश को लोगों से सभी प्रकार की सूचनाएं मिलती रहती थीं । कभी किसी व्यापारी के पैसे लूट लेना, कभी किसी निर्दोषों की हत्या कर देना तो कभी किसी सरकारी अधिकारी को अगवा करके चारों को छुडवाने की शर्त रखना । कभी कुछ तो कभी कुछ दिशाहीन युवक माओवादी बनकर इस प्रकार के क्रिया कलाप कर रहे थे । एक दिन खबर मिली की पुलिस की हिरासत में चारु मजूमदार की मौत हो गई । उनका साथ ही सान्याल आंध्र प्रदेश भाग गया । आप कुछ ही दिनों में केंद्रीय पुलिस बल की बढती दवेश से अनेक नक्सली नेता या तो मारे गए या कैद कर लिए गए तो अनेक नक्सली नेता समाज की मुख्यधारा से जुड गए तथा कईयों ने राजनीतिक पार्टियों की भी सदस्यता ग्रहण कर ली । इस प्रकार से कुछ समय पश्चात बंगाल में नक्सलवादी आंदोलन ठंडा पड गया हूँ ।

Part 7

सत्रह अठारह वर्ष की आयु में वो पांच चार इंच का गोरा चिट्टा गोलमटोल कुंवर बन गया था जिसके चेहरे पर किसी तपस्वी जैसा तीन आंखों में आत्मविश्वास की कीमत थी । साधा सुरक्षित थोडा लेबाज पहने जब मैं स्कूल में पहुंचा तो एक अनोखी आवासीय अलौकित इस किशोर को वहाँ के पॅाल साहब देखते ही रह गई । उसने दोबारा हो जाता हूँ मैं काॅल साहब ने चित्र लेकिन ठंडा आज मैं जवाब दिया तो मैं उनकी मेज के सम्मुख आकर खडा हो गया । प्रिंसिपल साहब नेशनल यहाँ सिख स्वर में कहा ऍम सामने कुर्सी पर बैठ गया हूँ, क्या नाम है तुम्हारा? प्रिंसिपल साहब ने पूछा ऍम घर में सब मुझे शिवा कहते हैं । किशोर ने और ऍम घर में और कौन कौन है? मेरे पिता जी वा माता जी क्या नाम है तुम्हारे माता पिता जी का? सावित्रीदेवी ऍम श्री सत्यवान जी, पिता जी क्या करते हैं पर क्योंकि एक छोटी सी तो खानी है बोलो यहाँ कैसे आना हुआ? बच्चे क्या चाहते हो? मैंने सर्वोदय विद्यालय से दसवीं की परीक्षा दिए कि आर्मी में आपके विद्यालय में प्रवेश लेना चाहता हूँ । हमारे विद्यालय में ही क्यों प्रवेश लेना चाहते हो सर आपके विद्यालय का भर्ती का परीक्षा परिणाम बहुत अच्छा रहता है । बता मैं भी यही से अध्ययन करना चाहता हूँ ताकि मेरा भी बारहवीं कक्षा की परीक्षा परिणाम हो । श्री शिवधाम रहे और मैं ॅ प्रदेश ले सकूँ । क्या तुम्हारे पिताजी विद्यालय को किसी प्रकार का आर्थिक अनुदान दे पाएंगे? नहीं सर, बेटी मेरी फीस की भी व्यवस्था नहीं कर पाएंगे । फिर शिवाई विद्यालय में पढने का सपना छोड दो । मेरे होने से आपके स्कूल को भी बहुत लाभ हो सकता है तो मिटने विश्वास है ऐसा कैसे कह सकते हो? मैं पढाई में खेल कूद था । अन्य प्रतियोगिताओं में विद्यालय का नाम रोशन करने में आपकी मदद कर सकता हूँ । मैं कैसे प्रत्येक क्षेत्र में प्रथम आकर तुम इतने आत्मविश्वास से कैसे कह सकते हो? आत्मविश्वास ही तो सफलता की सच्ची कुंजी होती है । आत्मा के विश्वास के सारे ही तो इंसान हिमालय की चोटी पर चढ सकता हूँ । महासागरों की गहराई आप सकता हूँ । यहाँ के सम्मोहन से छोड कर एक आॅफर साहब यथार्थ में लौटे तो मैं उस से बहुत प्रभावित हुआ है । उन्होंने शिवास है, उसका पुराना रिकॉर्ड मांगा और उस पर एक नजर डाली ऍम उसका प्रगति विवरण शानदार था । परीक्षा के प्रमाणपत्र देंगे । पहली से लेकर नवी कक्षा में प्रथम चित्र कलाम है । प्रथम कविता पाठ में प्रथम निबंध सुलेख, सामान्यज्ञान एवं भाषण प्रतियोगिता में प्रथम ऊंचीकूद ऍम डाला दौड । इनके अलावा भी अनेक प्रमाण पत्र शिवांगी फाइल में थे । वो कच्छा पांच से आज तक सरकार से उसे नाॅक मिल रही थीं । विवाह से प्रभावित होने के बावजूद प्रिंसिपल साहब ने इंटरव्यूज आ ही रखते हुए पूछा है तो सरकारी विद्यालय था ये प्रथम श्रेणी का विद्यालय क्या तो अपना यथावत रख पाओगे तो सर मैं इससे भी ज्यादा करके दिखाऊंगा । ऍम प्रिंसिपल साहब के पास की कुर्सी पर विद्यालय मैंनेजिंग कमेटी के महासचिव बैठे थे । शिवा की बातचीत के अंदाज से वह काफी प्रभावित हुए । उन्होंने हिरा से पूछा हूँ चाहे ॅ जी मैंने सादगी में उत्तर दिया, धनी वायॅर अभी कुछ की आवश्यकता नहीं है । बस एक ही तमन्ना है इस विद्यालय में प्रवेश प्राप्त करना । मैंने हमारी सारी बातचीत तो नहीं है किंतु हमारी मजबूरी है बिना चंदा लिए यहाँ किसी भी विद्यार्थी को प्रवेश नहीं रह सकते हो कि हमारी सामर्थ्य से बाहर है । उसके बिना भी मुझे मौका देखकर तो देखिए ऍम वास्तव में तुम असाधारण बुद्धिमान हो तो अपने विद्यालय में पढते हुए नंबर लाॅस ओर के लिए विद्यालय परिवर्तन आवश्यक नहीं । सर्वागीण क्षमताओं के प्रस्फुटन के लिए उचित वातावरण भी बहुत आवश्यक है । गुलाब रेगिस्तान में पैदा नहीं हो सकते हैं । हर बीच उचित वातावरण पाकर ही पुष्पित पल्लवित देवम् परिवर्तित हो सकता है । विद्यालय के महासचिव शिक्षा के तार्किक संवादों से बेहद संतुष्ट हुए । उन्होंने प्रिंसिपल को नजरों से इशारा कर दिया । प्रिंसिपल साहब ने कहा ठीक है, हम विचार करेंगे तो अपनी फाइल एप्लीकेशन नहीं छोडती हूँ । कल प्राथा दस बजे आकर स्वागत काक्षी पर मैसेज इतनी बेटी है मैं लेना ऍम कहते हुए शिवा खडा हो गया । फिर खडे खडे ही बोला ऍम! मुझे विश्वास है कि कल मुझे आप की स्वीकृति ही मिलेगी । बाईस कहते हुए है बाहर निकल गया हूँ । प्रिंसिपल ने एक बार पुनः आ शिवा की फाइल पर नजर डाली हूँ तो उन्हें संतुष्टि के पश्चात उस पर अपनी स्वीकृति लेकर प्रशासनिक विभाग में भिजवा दिया । दूसरे दिन नियत समय पर आकर शिवा त्रिवेदी मैडम से मिला । उनसे स्वीकृति पाकर शिवानी स्कूल में प्रवेश की सारी औपचारिकताएं पूर्ण कर दी । उसे ग्यारह ही कक्षा बाॅल नहीं । इस कक्ष में ज्यादातर बच्चे कमजोर थे । एक महीने बाद यूनिट टेस्ट हुए हैं । हिंदी में बीस में उन्नीस नंबर आए । बाकी सब देशों में भी इसमें बीस आॅफ सेवा कक्षा क्या रही है उन ना होकर ग्यारहवीं ए में आ गया । इस कक्षा में सबको शाखा विद्यार्थी थे । स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली क्रीडा बोर्ड की ओर से अंतरविद्यालय टूर्नामेंट आयोजित होने जा रहा था । इसे है तो इच्छुक विद्यार्थी नाम लिखा दें । ऐसी सूचना शिवा की कक्षा में भी पहुंची । शिवानी ऍन टू चार मीटर रिले ऍम मीटर रेस में अपना नाम लिखवाया । वो सभी प्रत्याशियों खिलाडियों को अगले हफ्ते क्वॉलीफाइंग राउंड क्लियर करना था । शिवानी बडी आसानी से चारों पर क्या होता हूँ तो क्वॉलिफाइंग राउंड क्लियर किया । पीटीआई ॅ नियमित रूप से सभी को ट्रेनिंग देते शिवः प्रतिदिन नियत समय से दस मिनट पूर्व पहुंचाता । खूब एकाग्रता है । मन लगाकर अपनी योग्यता बढाता हूँ हूँ । हर दूसरे दिन आपने पहले दिन का रिकॉर्ड तोडने का प्रयास करता हूँ प्रकार अभ्यास करते करते वे दिन आ ही गया जिसका शिवा को इंतजार था हूँ । इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में तू टूर्नामेंट का आयोजन किया गया हूँ । सबसे पहले सौ मीटर रेस का आयोजन हुआ । तीस स्कूलों के प्रतिनिधित्व करने वाले साठ बच्चे भाग ले रहे थे है चाय का ट्रैक बना था हूँ जगह का पांचवी बार में हम बनाया नमस्कार महामंत्र पढकर उसने अपने आप को वहाँ क्या ॅ सभी को पोजीशन लेने को कहा । पापा नियम आॅखो के साथ सीटी बजे और शिवा के पैरों में पंख लग गए । शुरूआती बढत के साथ सब से काफी आगे रहते हुए उसने पहला राहुल जीत लिया । इन दूसरे राउंड में आए बच्चों को भाजपा में बाढ कर सेमीफाइनल राउंड होना था । पहले चरण में पांचवें नंबर पर शिवा खडा था । पूरी तरह से चुस्त अवाॅर्ड फ्री ने तुम्हारे शुरू करवाई ऍम को ऍम ये क्या हो के साथ ही शिहास जोर से अटका उसका सीधे पैर का अंगूठा मोडकर जमीन से टकराया और मैं जोर से लडखडाया । बाकी दोस्तों की यहाँ से रोक नहीं । इतने में देखा शिवा पुनः अपनी ताकत संजोकर दौड रहा था हूँ । सब धावकों को बचाते हुए पुना उसने प्रथम स्थान प्राप्त किया । उसके दोस्त खुशी से चिल्लाने लगे । शिवा शिवा ॅ एक तरफ में आकर देखा तो अंगूठे का नाखून टूटकर अंगूठे की चमडी में ढल गया था और लगातार खून बह रहा था । पीटीआई ने तुरंत प्राथमिक चिकित्सा करके बॅाडी तथा उसे विश्राम करने की सलाह दी । इसी बीच रेस के फाइनल राउंड की उद्घोषणा हो गई । सर ने शिवा से कहा कि अगर तो मैं दिक्कत हो रही है तो स्कूल के दूसरे ढावा को उसकी जगह दौरान ही शिवानी पूरे मनोबल वह आता विश्वास के साथ कहा शहर अपने स्कूल के लिए दौडने की पर्याप्त सामर्थ अभी भी मुझे हैं । कृप्या मुझपर विश्वास करें मुझे मौका नहीं साॅस देखा आठ में विश्वास की आभाष शिवा का मौका ऍफ हो रहा था तो तुरंत उन्होंने उसे दौडने किये जा जाते नहीं हूँ । आगानी ऍम मीटर रेस के फाइनल राउंड की घोषणा हो गईं । सेमीफाइनल के पांचों स्कूलों के बेहद यार थी ट्राय के पास दोनों तरफ अपने दोस्तों का हौसला बढाने के लिए जमा हो गए । सब लडते दिल से भगवान का नाम ले रहे थे । वो पांच बच्चों ने अपनी अपनी पोजिशन ले ली । पैर को इलाज लाकर देखा तो वाकोला का पैर सुनना हो रहा है । वहीं खडा है जल्दी जल्दी पैर को उठाकर कमाने लगा हूँ । दर्द के मारे वो से चीत्कार निकल गई । उसने भगवान से प्रार्थना की भगवान आज मुझे अपने आपको साबित करना है । आप मेरी मदद करें इतने में ही रखती हूँ । यहाँ नहीं तैयार जीटॅाक आपने अपनी अपनी पोजिशन ली । शिवानी भी पूरी शक्ति ऍम था तथा एकाग्रता से गहरा श्वास भरा । इतने में ही रह फ्री बोला ऍन धूप से निकली गोली लक्ष्य पर जाकर ही दम लेती है । ऐसा ही चमत्कार क्या शिवानी पलक झपकते ही शिवा समापन रेखा पर खडा था । सबसे ला रहे थे वहाँ फॅमिली ने नाम है हम समय नोट किया बधाई दी । शिवा एक शिवा भारतीय विद्या भवन दो ऍम स्कूल तेल लगे दिल्ली पब्लिक स्कूल अब भाला फेंक प्रतियोगिता दी । इसके बाद गोला फेक, फिर ऊंचीकूद उसके बाद पुनः ऍम थी । चाहें तो सौ मीटर रिले रेस में शिवा की टीम द्वितीय रही । बाधा दौड में शिवापुर रह रहा हूँ आप बारी थी चार सौ मीटर लम्बी रेस ॅ । अभी प्रतियोगिता शुरू होने में दस पंद्रह मिनट की देरी थी । लक्ष्य सीमा के पास आया और बोला वो मेरा बधाइयाँ । पहले दिन ही इतने मेडल जीतने के लिए ऍम धन्यवाद का लक्ष्य बोला । जहाँ तक मेरा सोचना है, चार सौ मीटर का मैडल भी तो नहीं मिलेगा । फॅमिली की शक्कर लक्ष्य पुणा कहा अगर तुम चाहो तो अभी इसी वक्त एक लाख रुपए कमा सकते हो । कैसे? लक्ष्य ने कहा तो मारेगी पक्की है अगर तुम पीछे हट जाओ तो मैं तो में एक लाख रुपए दे सकता हूँ । दस हजार अभी तुरंत ऍम जितना एक ठंड के लिए सदमे में आ गया उसने तो अपने पूरे जीवन में एक लाख रुपये एक साथ देखी भी नहीं थी । यह एक बहुत बडी राशि थी । घर ही झटका पड रही थी । उसकी मरम्मत करवानी थी । माँ पिछले कई दिनों से लगातार खांसी आ रही थी । उन्हें अच्छे अस्पताल में दिखाना था । पिताजी की घडी खराब हो गई थी । उन्हें नहीं घडी चाहिए थी । इससे उसकी समस्या आवश्यकताएं पूरी हो सकती थी । मैं साइकिल भी खरीद सकता था । शिवा का मन विचलित हो गया । उसने लक्ष्य से पूछता हूँ क्या सचमुच तो मुझे एक लाख रुपए दे दोगे? हाँ क्यों नहीं । उसने तुरंत हजार हजार के दस नोट निकले और उसकी तरह बढाते हुए कहा ऍम तो मेरा विश्वास कर सकते हो । आपको आसमान घूमता नजर आया । जैसे बडी प्रसन्न मुद्रा में गणेश भगवान लक्ष्मी जी रुपये बरसा रहे थे । फॅमिली में समेट रहा है । उसने अपना हाथ आगे बढाया । इतने मैं उसे उसकी माँ की शिक्षा याद आई । जिंदगी में कभी गलत काम नहीं करना । नहीं गलत ढंग से पैसे कमाना । हिमाचल का उसने अपने आप को संभाला और बोला नहीं नहीं लगे मैं अपने स्कूल से घाटा नहीं कर सकता हूँ । मेरी आत्मा ऐसा पैसा लेना स्वीकारती नहीं । मैं नहीं देख सकता हूँ । मैं अपनी पूरी क्षमता से अपने विद्यालय के लिए दौडों का रुपया तुम यहाँ से चले जाऊँ । लक्ष्य पुणा कहा उस लोग हाँ मैंने सोच लिया । नहीं नहीं हूँ अब क्या करें । लगे सिर नीचा करके वहाँ से निकल गया । बितने में माइक पर उद्घोषणा हुई मैं ॅ कृपया ध्यान दें चार सौ मीटर देश की दौड प्रारंभ होने जा रही है । सभी प्रतियोगी ट्रैक पर पहुंचे । जो भी इधर उधर थे वैसा पांच मिनट में वहीं पहुंच गए । रेफरी ने सारे नहीं हम एक बार बोल रहा, सभी को बताएँ । सभी को पोजिशंस लेने का निर्देश दिया । ॅ की आवाज के साथ धावक दौड पडे । लक्ष्य सभी से आगे दौड रहा था । हमारे उसके ठीक भी छह था । शिवा सधे कदमों से धावकों के मध्य स्थिति में था । सौ मीटर बार हुए की शिवा अपने साथ ही धावकों से आगे निकल आया । दो सौ मीटर क्रॉस होते हुए अमन अंकुश से भी आगे निकल गया । किंतु अभी लक्ष्य काफी बढत बनाया था । तीन सौ मीटर आते आते लक्ष्य थोडा सा पीछे रहा और देखते ही देखते शिवा लक्ष्य के समकक्ष पहुंचा । भीड पूरी उत्तेजना से लक्ष्य लक्ष्य चिल्लाने लगी । हूटिंग से उत्साहित होकर लक्ष्य और तेज दौडने लगा । बीलवा गोला कहा उसका चोटे लंगोटा पैर से अलग हो जाएगा । उसने अपनी समग्र शक्ति को एकत्र किया । विनर साइन की ओर देखा और संपूर्ण आत्मा लगा और थोडा वो लक्ष्य के बराबर पहुंचा और है क्या? लक्ष्य को बचाते हुए अगले ही फॅमिली के उस पार था । चार सौ मीटर रेस को भी उस ने जीत लिया तो तुरंत प्रशिक है दौड कराए । उन्होंने शिवा को गले लगाकर खूब सवा ही नहीं । आज की सारी रेंज में शिवानी अपने स्कूल के लिए चार स्वर्ण पदक जीते हैं । शाम को जब घर पहुंचा तो उससे टाइम पैर से चला नहीं जा रहा था । पूरा उठा नीला पड गया था । ऐसा लग रहा था जैसे मान फट गया है । घर पहुंचते घटिया बर्धमान से गिर गया । शिवा ने माँ को आज के बोर्ड देते हुए सारी बातें बताई हूँ । एक साथ इतने स्वर्ण पदक जीतने के लिए माने शिवा को गले से लगा लिया । जब एक लाख रुपए रिश्वत वाली बात बताई तो माँ ने कहा ऍम तुमने मेरा सिर गर्व से ऊंचा किया है । जिंदगी में कितना भी बडा प्रलोभन क्यों ना आएं । हमेशा सत्य ऍम ईमानदारी के रास्ते पर चलना हो । अंतिम विजय तुम्हारी ही होगी । फिर महाने शिवा के अंगूठे पर गर्म पानी से बोरिंग ऐसे डालकर सिखाएगी खाना खिलाया हर आदमी गुडवा गेहूँ के आटे का हलवा बनाकर घर हम गरम ही अंगूठे पर बांध कर फिर आपको सुला दिया । सुबह तक उसे काफी आराम मिल गया । भाई विद्यालय के छुट्टी थी । अगले दिन विद्यालय पहुंचा तो सेखो बधाइयां मिली बॅाल करने । शिवा को अपने ऑफिस में बुलाकर कहा हूॅं, इसे बनाए रखना । विनम्रता से थैंक्यू कहकर सवाल बुल्हा अपनी कक्षा में आ गया । कक्षा में मैदा में कमांडो पूर्वसूचना दे रही थीं । अक्टूबर में स्काउट गाइड कार राष्ट्रीय शिविर होगा । ये प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार आयोजित होता है । जो भी विद्यार्थी भाग लेने के इच्छुकों वे अपने नाम सुनाक्षी मैडम को लिखा दें । योग्यता के आधार पर चुनाव करके स्कूल से बात लडके और चार लडकियों को ले जाया जाएगा । शिवा को रहते है वो माडॅल साहस बडे कारनामें शुरू से पसंद है । मैं चाहता था कि उसे कहीं अवसर मिले तो बर्फीले पहाडों पर चढना सीखे । तूफानी नदियाँ पार करना सीखें । जंगलों में भटके हुए को रास्ता बताएँ । आठ से जलती इमारतों से मनुष्यों को बचाएं । दीन दुखियों की सेवा करें । स्काउटिंग का सहज सहयोग मिला । ऍम साहस को स मारने का मौका मिला । और शिवा का राष्ट्रीय शिविर के लिए चयन हो गया । अगले महीने फॅार ईको उन्हें शिविर के लिए रवाना होना था । स्काउट्स एवं गाइड्स की पूरी स्पेशल ट्रेन बुक थी । पांच लडके तो पांच लडकियों का एक ग्रुप था । उनके साथ एक का और एक अध्यापक इस तरह के पूरे सौ ग्रुप स्पेंड थे । लडकियां खाना बनाती हूँ । लडके दूसरी सारी व्यवस्था करते हैं । टीचर्स देखभाल करते एक तरह से कहा जाए तो ट्रेन ये उनका घर बन गई थी । एक घंटा स्टेशन आता था । बहुत सबूत थे । उस शहर के ऐतिहासिक एवं दर्शनिक सालों का अवलोकन करते पुनः ट्रेन में बैठ जाते हैं और उनकी रेल अगले गंतव्य के लिए रवाना हो जाती । भोपाल और हैदराबाद रेलवे स्टेशन पर इन बच्चों का भव्य स्वागत हुआ हूँ । सबको मालाएं पहनाई गईं, मिठाइयों के पैकेट बांटे गए । कुछ भाषण जलसा भी हुआ । सबको बहुत आनंद आ रहा था । विशाखापट्टनम रेलवे स्टेशन पर इन की स्पेशल ट्रेन रुकी हुई थी । ऍम पर शिवा के ग्रुप की लडकियाँ खाना बना रही थी । बाद में ही संस्कृति पब्लिक स्कूल की लडकियाँ भी खाना बना रही थी । उनके साथ ही लडके वहीँ सामान वगैरा पकडने में उनकी मदद कर रहे थे । तभी वहाँ से कुछ लोकल गुंडे टाइप के लडके निकले । उन्होंने शिवा के स्कूल की लडकियों पर फब्तियां कहीं फिर आगे जाकर संस्कृति पब्लिक स्कूल की लडकियों से छेडछाड करने लगे । उनके साथ ही लडकों से ये बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने मारपीट करके लोगों का लडकों को वहाँ से भगा दिया । लगभग एक घंटे में सबका खाना पीना समाप्त हो गया और ट्रेन पूरी तरह ऍम रवाना हो गई । पर यह क्या रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही खिडकियों दरवाजों पर भयंकर पत्थरों की बौछार शुरू हुई । संस्कृति स्कूल के लडकों ने जिन स्थानीय लडकों को पीटा था अपने साथ गुंडों की पूरी फौज ले आए । जो पत्थर हॉकियां पेट्रोल से भरे कैन हाथ में लगे हुए थे बडी विकट स्थिति पैदा हो गयी थी । पूरी ट्रेन में खिडकियों के शेयर हम शटर तुरंत लगवाए गए । आनन फानन में प्रवेश द्वार बंद करवाए गए । वो शिवा ने एक साथ ही को साथ लिया और दूसरे को कान में कुछ कहकर अंदर ही अंदर ड्राइवर वाली बोगी की ओर दौड पडा । लगभग नौ डब्बे पार करके ड्राइवर का कॅश वहाँ तो आज का शिवानी देखा । ड्राइवर तो एकदम सुरक्षित था लेकिन ट्रेन के सामने बीच पटरियों पर कुछ लडके लाल झंडे लिए ट्रेन को रखवाने की मंशा से खडे थे । ट्रेन चलती रहती तो इनमें से किसी न किसी लडके का कटना भी हो सकता था और अगर ट्रेन रुकती तो वह गुंडे ट्रेन में आग लगा देते हूँ । अपनी प्रत्युत्पन्नमति से बेहद जोखिम भरा निर्णय लेते हुए शिवा ने कहा ड्राइवर अंकल आपको ट्रेन किसी भी हालत में रोकने नहीं । बच्चे लडकों के पास पहुंचते हुए हल्की सी थी, नहीं करियेगा, हम दोनों दोस्त नीचे को देंगे । इन लडकों को पटरी से हटाएंगे और कुनाल ट्रेन में चढ जाएंगे तो ड्राइवर बोला मेरा तुम्हारी जान को खतरा है ट्रेन से खोजते हुए दुर्घटना का तथा इन गुंडे लडकों से मौत का तो मैं होके मत उठाओ । शिवा अपने साथ ही से बोला तो तुम एकता से तीसरे चौथे डिब्बे के गेट हमारे लिए खुलवाने की व्यवस्था करो और अगले पांच मिनट में हम नीचे कूद कर और अगले पांच मिनट में हम लोग के खोज कर इन लडकों की जान बचाने का प्रयास करेंगे । ऍसे हम हटाएंगे, ट्रेन चलती रहेगी । हम फिर जो डब्बा हट आएगा चढ जाएंगे । साथ ही सोचने लगा कि घंटा तो बात है अब क्या किया जाए । आखिर भी शिवा को सहयोग देने के लिए तैयार हो गया । लाल झंडे लिए । ट्रैक पर खडे लडकों से दस कदम ढोल ट्रेन पर ब्रेक लगे । उन शोध ने सोचा कि ट्रेन रूक रही इतने में दोनों ओर से शिवा उसका साथ ही नीचे को दे । वो लडकों को खींचकर रेलवे ट्रैक से अलग फेंका । विद्युत की गति से पुलिस ट्रेन में चढने के लिए दौडे । सेवा के ऊपर से पत्रों की पहुंचा रही हूँ । सामने कम्पार्टमेंट का दरवाजा बंद । एक्शन के लिए शिवा घबराया लेकिन हल्की सी खिडकी खोले । एक लडकी दिल थामकर ये सब देख रही थी तो दौड कर गए । दरवाजा खोलने के लिए हाथ बढाने लगी । इतने में पीछे से एक मजबूत मर्दाना हाथ बाहर निकला और शिवा उसके साथ ही को तुरंत अंदर खींच लिया तो उस लडकी ने पुनः दरवाजा खिडकी बंद कर ली हूँ । इन ड्राइवर नहीं एकदम गति बढा नहीं गुमदेश होते । पीछे छूट गए । अब सब काट रहे थे, बाहर थे । फिर मैंने आंखें खोलकर देखा । उसके अंदर कितने की चाहूँ किया तो उसके अपने सर थे । वो उसे बुरी तरह डांट रहे थे । इतना बडा जोखिम उठाया तुमने । कहीं कुछ हो जाता तो मैं तुम्हारे माता पिता को प्रिन्सिपल सर को कैसे मोदी का था । शिवा ने धीरे से सौं खाना की उसकी बुद्धि, महासभा, विनम्रता ने अध्यापक को मुक्त कर दिया । उन्होंने शिवा को सीने से लगा लिया और बोला हूँ यहाँ मुझे तुम पर कर रहा हूँ । शिवानी ट्रेन ड्राइवर अपने साथियों, उस अनजान लडकी और अपने घर के साथ भगवान का भी शुक्रिया अदा किया जिससे उनकी टीम इस समस्या से निजात पा सके । इस घटना ने शिवा को सब के बीच एक पहचान दिला दी हीरो बना दिया हूँ । लेकिन मैं बढावा दे ही सब कामों में ईमानदारी और मनोयोग से जुडा रहता हूँ । लेकिन खान पान, गाना बजाना, नाचना कूदना, इनमें भी पूरी मस्ती करना आखिरकार तमिलनाडु पहुंच गईं । वहाँ प्रशिक्षण शिविर में तंबू में रहना, खाना स्वयं बनाना, जाटों को जागकर पहरा देना, कैंप फायर में हत्या की संगीत आदि की संस्कृतिक प्रस्तुति देना पुल मिलाकर घंटों लगातार श्रम करता हूँ । सोना तपकर कुंदन बन गया । दिल्ली के एक हजार बच्चों के मध्य शिवा का प्राॅडक्ट में उसने सिर्फ अपने स्कूल का ही नहीं बल्कि अपने राज्य का भी शानदार प्रतिनिधित्व किया ।

Part 8

हरे शैक्षणिक प्रतियोगिता में शिवा प्रथम रहता हूँ । खेलकूद में सर्वाधिक पदक जीता हूँ । साहित्यिक गतिविधियां, कवितापाठ भाषण प्रतियोगिता, निबंध लेखन हो या उत्प्रेरक लेखन होऊं चित्रकला प्रतियोगिता या गीत गाया विवाह सब मैं छाया रहता । पूरे मनोयोग से परिश्रम करके वो सबका प्रेयर विद्यार्थी बन गया था । बाल दिवस वाले दिन विद्यालय का वार्षिकोत्सव आयोजन था, जो शोर से तैयारियां की गई थीं । दिल्ली की राज्यपाल मुख्य अतिथि थे । बहुत भव्य आयोजन था । अनेक सम्मान पुरस्कार बच्चों को दिए गए । चारों तरफ उत्साहभरा उल्लास का माहौल था । अब अंतिम लेकिन महत्वपूर्ण घोषणा बाकी थी सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी कि कुछ लोग बारहवीं कक्षा के टॉपर छह नेता की सोच रहे थे । कुछ लोग ओलंपियार्ड विजेता विशाल के बारे में सोच रहे थे । कुछ का अंदाज क्रिकेट टीम के कप्तान वतन के बारे में था । अचानक सब की सांसें थम गईं । ऍम स्वयं खडे हुए । उद्घोषणा मंच के पास पहुंचे । माइक संभालते हुए बोले, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार है । ब्लॅक ऍम कक्षा ग्यारह के विद्यार्थी शिवमंगलसिंह को प्रदान किया जाएगा । चारों तरफ शोर मच गया । ऍम वहाँ उसके दोस्तों ने उसे घेर लिया । अपने कंधों पर उठाकर मंच तक उसे लेकर आए । गवर्नर महोदय ने स्वयं अपने हाथों से शिवा को प्रतीक चिन्ह, हवा व प्रशस्ति पत्र भेंट किया । प्रशासन ने हिरदय से उसने भविष्य में और अधिक दायित्वबोध के रूप में इस सम्मान को स्वीकार किया । वो मुख्य अतिथि प्रिंसिपल महोदय के पैर होते हुए उस ने कहा है ये तो आपकी विशेष कृपादृष्टि है तो लेकिन शब्दों में शुक्रियादा करूं फॅार भी भावुक होकर बोले तो अच्छे बच्चों के संग हमेशा आशीर्वाद बना रहता है । शिवा खूब आगे बढो और विद्यालय का नाम और रोशन करूँ सब शिक्षकों ने ऍम सहपाठियों ने बदायूं की झडी लगती है ऍफ विकेट लेकर घर पहुंचा । बाहर से ही लाने लगा माँ माँ देखो क्या लाया हूँ फॅमिली दौड कर बाहर आई बच्चे की उपलब्धि देख उसकी आंखों में बनी आ गया भी छह पीछे सत्यवान भी बाहर आ गए । शिवानी माँ के हाथ में ट्रॉफी पकडाई पिताजी को प्रशस्ति पत्र पकडाया और भावुक स्वर में बोला ही तो आपके आशीर्वाद का हाल है । पिताजी हर्षातिरेक से बोले तो हमारा नाम मुझे बहुत क्या है? बता बेटा क्या इनाम लेगा? फॅमिली ने बेटे गम हूँ मीठा करवाते हुए कहा पापा से बडा सही नाम लेना शरारत छह । शिवा बोला मेरा इनाम आपके वह हमारा जब जरूरत होगी पहले लूंगा तीनों हसी खुशी अंदर बैठ गए । सत्यवान ने कहा रेडा बारवीं कक्षा की पढाई है यह तो विद्यार्थी के लिए और कक्षा की महत्वपूर्ण होती है । प्रथम का ख्याल से नहीं कर रहा हूँ ऍम कुछ बडा भविष्य की दिशाएं निर्धारित करते हैं । ये विद्यार्थी जीवन के देखा परिवर्तन बिंदु होते हैं । ऐसी ही है कक्षा बारहा । इसके लिए तो मैं विशेष योजना भग्य परिश्रम करना होगा । साबित नहीं आध्यात्मिक प्रवृत्ति कि पूजा पाठ थी महिला नहीं । उसने कहा कि वहाँ बारहवीं कक्षा की जंग जीतने के लिए तो मैं विशेष ऍम मानसिक क्षमता हूँ की आवश्यकता है मानसिक शक्ति विकास के लिए । मैं तो मैं कुछ विशेष प्रयोग बताती हूँ । सर्वप्रथम तो शिक्षा की अभी शास्त्री, देवी सरस्वती, माँ ऍम की आराधना के लिए इन्हें याद करते हुए प्रतिदिन प्राप्ता एक माला ऍम न वहाँ की करनी है । सब संकल्प ही अपने आप महामंत्र होता है । यह भी तो मैं अध्ययन करने बैठो । वहाँ प्राण हनी का नौ बार उच्चारण करना है । इसके लिए सर्वप्रथम सुखासन में अंतिम पलथी मारकर बैठो । दायां हाथ नहीं थे पाया है तो ऊपर ॅ आपस में मिले हुए भी तो रात मुद्रा आंखे कोमलता से बंद गहरा श्वास भरो और भरे की तरह गुंजन की ध्वनि करते हुए श्वास बाहर निकालो । इसी दौरान अनुभव करना हैं कि तुम्हारे मस्तिष्क के न्यूरॉन्स जाग्रत हो रहे हैं । तुम्हारी स्मरण शक्ति बढ रही है तो हमारी एकाग्रता बढ रही है हूँ ये महाप्राण ध्वनि की एक आवृत्ति है । ऐसी नौ वृद्धियां करते ही तुम्हारे मस्तिष्कीय क्षमता बढने लगेगी । इसी स्थिति में आके मत खोलो बंद आंखों से ललाट पर लिखा देखो तुम भारत में प्रथम आ रहे हो अपने आपको सुझाव दो । यह तुम्हारे अवचेतन और अर्द्धचेतन मस्तिष्क में जाकर स्मृति गोश में जम जाएगा । फिर लक्ष्यप्राप्ति में मस्तिष्क निश्चित रूप है । विशेष जागरूकता से तुम्हारा सहयोग करेगा शिवानी पूरी तन्मयता से माँ के माॅस्को ग्रहण किया वहाँ के बोलेंगे । शारीरिक शक्ति बढाने के लिए तो मैं नियमित पौष्टिक भोजन ग्रहण करना है ताकि है शरीर में आलस्य की बजाय छोडती रहे । मस्तिष्क को भी बराबर को राहत मिलती रहे । वहाँ तो जो भी देगी में कभी न् कार्यक्रम क्या का लूंगा । पर बता तो देख क्या क्या खिलाएगी । सारे ने कहा ताॅबे श्री हल्की काली मिर्च मिलाकर होंगे, अखरोट खिलाऊंगी । दूध का नियमित सेवन करना हैं । रात को उनींदा लगेगा तो ग्रीन टी और कॉफी भी पिलाऊंगी मूल रूप से हरी सब्जियों एवं फलों का ज्यादा सेवन करना है । फॅमिली कहा देगा तो अपने आप ज्यादा की योजना बना सकता है । देखा जी अनुभवी अजीब से जुडकर ही वर्तमान उज्जवल भविष्य बनाने गए । वास्तव में शिवा बडे व्यापक दृष्टिकोण से गंभीर चिंतन करता था । उसी राहत उसने पूरी योजना बना डाली हूँ । संपूर्ण वर्ष में उसे कैसे अध्ययन करना है? प्रतिदिन ओं से कितने घंटे पढना है और क्या पढना है । पूरी दिनचर्या बनाई नहीं माने । उस की पढाई की मेरे इस प्रकार सेट कर दी थी कि बैठते समय शिवा कम हूँ । पूर्व दिशा की ओर रहता हूँ । पेड के पीछे ठोस दीवार थी । सामने खुली जगह थी । सामने की खुली जगह विद्यार्थी के सामने खुले अवसरों को प्रस्तुत करती हैं । शिवानी एक वर्ष के लिए माँ से टेलीविजन नहीं देखने का ब्रेक ले लिया था । अन्य गतिविधियों के बजाये उसने अध्ययन को अधिक महत्व दिया । दोस्त ओकेशन घूमना और गपशप भी एकदम कम कर दिया था । जितने भी बातचीत होती बस पढाई से संबंधित करते करते बाहर देगी । परीक्षाएं नजदीक आने लगी । उसके विद्यालय में भी कभी का कक्षा अध्ययन संपूर्ण समाप्त हो चुका था हूँ । चौथी बार पुनरावृत्ति चल रही थी । हर महीने टेस्ट पेपर होते थे । परीक्षा के बाद बच्चों का काम देख उसकी कमजोरी दूर करने का प्रयास होता था । ऐसी तैयारी बहुत कम स्कूलों में होती है । शिवानी अपने सारे विषयों के नोट्स बना लिए थे । की परीक्षा के पहले दिन क्या क्या पढना है और पेपर से दो घंटे पहले क्या दोहराना है । उसने गत वर्षों के प्रश्न पत्र भी एकत्र किए थे । उन्हें वह समय सीमा के भीतर हाल करके घर में ही बोर्ड की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र हल करने का पूरा अभ्यास क्या करता हूँ, माँ बाप भी कोशिश करते हैं । मैं स्वयं भी पूरी कोशिश करता हूँ कि किसी तरह का तनाव ना रहे हैं । हर दम प्रसन्नचित और हल्का माहौल उसके आस पास नहीं । अपनी क्षमताओं के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का सब उसने संजोकर रखा था ना कि प्रतिशत या सौ प्रतिशत का कराता । सूर्योदय से पूर्व वोट कर प्रतिदिन आधा घंटा है । ध्यान योग, आसन और प्राणायाम आवश्य करता हूँ हूँ । परीक्षा देने जाने से पूर्व अपने फॅमिली लेकर प्रवेश पत्र तक को संभाल कर तैयार रखता हूँ । माता पिता को प्रणाम करके पेपर देने चाहता हूँ । परीक्षा हॉल में भी कोई घबराहट नहीं । मुँह प्रथम नमस्कार महामंत्र को बोलकर पेपर को हाथ लगता । पूरे प्रश्न पत्र को पढकर निश्चित समय सीमा के अंदर उन्हें हाल करता हूँ । ज्यादा नंबरों के प्रश्नों को ज्यादा समय कम अंकों के प्रश्नों के उत्तर को कम समय वो अंतिम साठ मिनट से पूर्व पूरा पेपर समाप्ति करके वह पुनर्परीक्षण में लग जाता हूँ । शांतचित्त से हल्की गई उत्तरपुस्तिका की लिखावट दर्शनीय होती । इस प्रकार परीक्षाएं सानंद संपन्न हो गई हूँ । विद्यालय में बडी हलचल थी । दारजी की परीक्षा का परिणाम आना था । सब बच्चे अपने अपने इस को याद कर रहे थे । ये पर कभी कभार ही लग रहे थे । ॅ अचानक तहलका मच गया । चारों तरफ खुशियां अच्छा नहीं । स्कूल में ढोल बजने शुरू हो गए । भाई विद्यालय के इतिहास का स्वाॅट आप ठाक ना के पैंतालीस वर्षों बाद यहाँ के विद्यार्थी मंगल सिंह ने संपूर्ण भारत में वित्तीय स्थान और पूरी दिल्ली में प्रथम स्थान प्राप्त किया हूँ । गणित में स्वामी सौ अंक ऍम मिक्स में सत्तानबे बिजनेस ॅ अंग्रेजी में पाॅड रहे गए थे और इंडिया टॉप करने में दो नंबर से पिछड । क्या इतने बडे चमत्कार की उम्मीद किसी को नाॅन साहब ने उसे अपने कमरे में बुलाया । प्रवेश करते ही फॅमिली होते उन्होंने उसकी पीठ थपथपाई, कही तुमने अपना वादा पूरा करके दिखाया है हमें तुम पर नाज है । जावेद ऍसे अच्छे कॉलेज में प्रवेश लोग कभी भी हमारे लायक काम हो तो याद कर लेना । मेरे जीवन में यादगार विद्यार्थियों में से तो ऍम कहता हुआ शिवा प्रशंसा सब कुछ आ रहा था । विद्यार्थी जीवन के इस महासंग्राम में विजयश्री का वरण कर गले में माला पहने जगह घर पहुंचा तो वहां का दृश्य देख हैरान हो गया । पूरा घर सजा हुआ था । सारा मोहल्ला इकट्ठा हो गया था । कई मीडिया वाले भी पहुंच गए थे । महान ई आरती की थाली सजा रखी थी । मैंने तिलक लगाया । आर्थिक की पिताजी मिठाई का डब्बा लिए खडे थे तो उन्होंने मिठाई खिलाई । शिवा ने दोनों के चरण हुआ । दोनों ने उसे गले लगा लिया । ऍम वाले दनादन फोटो खींच रहे थे वो नहीं । वहाँ के दोस्तों ने उससे पूर्व घर पहुंचकर सारी तैयारियाँ कर गांधी नहीं तो दूसरे दिन के अखबारों में मुख्यपृष्ठ पर शिवा की तस्वीरें छपी थी । टीवी पर उसका और उसके माॅल का इंटरव्यू भी देखा हूँ ।

Part 9

साधारण परिवार के पालक की असाधारण सफलता एक मिसाल बन गई । बहुत सारे बधाई के फोन भी आ रहे थे । सफलता का आज बिंदु माध्यम हिंदू और चरमबिंदु ऍम शक्ति कहाँ कहाँ है? आत्मा की क्षमता विकसित होने के बाद संकल्प व्यक्ति का स्वभाव बन जाता है और जिसकी संकल्पशक्ति जब जाए उसे शक्ति का अच्छा स्त्रोत प्राप्त हो जाता है । क्योंकि संकल्प का नियमित एवं दीर्घकालिक अभ्यास शरीर और मन पर चमत्कारिक ऍम संकल्पों की जनता से सफलता स्वयं हमारे सामने आ जाती है । वास्तव में संकल्पबद्धता, दूरदर्शिता, ऍम योजना भत्ता से किया गया कार्य जीवन को ज्योतिर्माला कर देता है । शिवा के साथ भी ऐसा ही हुआ । उसको अपना सच होता नजर आया हूँ । बचपन से ही मैं श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में पडने का सपना देखता था । ये महाविद्यालय केवल भारत का ही नहीं एशिया महाद्वीप का नंबर एक वाणिज्य वश्यक ऍम रहा है । वो प्रतिशत से कम प्राप्ति वाले प्रतिशत से कम प्राप्तांक के विद्यार्थियों को तो वहाँ प्रवेशी नहीं मिलता हूँ । उसने श्री राम कॉलेज में अपना प्रवेश काम भर दिया । धो रही दिनों में प्रवेश की सोची लगी तो प्रथम कट ऑफ लिस्ट में ही शिवा का नाम था । वो उसने श्री राम कॉलेज की फीस वगैरह का पूरा विवरण प्राप्त किया । हॉस्टल सुविधा का भी पता किया तो सब कुछ अच्छा आता हूँ । कुलमिलाकर उसे एक साथ अट्ठाईस हजार रुपये की जरूरत थी । उसके पास तो अट्ठाईस सौ भी नहीं थे । कितनी मुश्किल से माँ बाप उसे पढा रहे थे । उस से छिपाना था । अब क्या करें? वह गंभीर जनरल में था । उसे कोई मार कर नजर नहीं आ रहा था । जैसा उसे अपने स्कूल के प्रिंसिपल की आज आई । उसने उनसे मिलने का निश्चय किया । दूसरे दिन प्रातः स्कूल में प्रिंसिपल से मिलने पहुंचा । वजह से मेधावी विद्यार्थी को देखते हैं । उनका रूम रोम पुलकित हो उठा हूँ । अपने स्थान पर खडे होकर स्वागत करते हुए बोले हाँ बेटा आ ओ बैठो कैसा चल रहा है । सब कुछ फॅमिली रहे हो । सब कुछ ठीक है । मैं श्री राम कॉलेज में प्रवेश लेने की सोच ना होता है । एकदम सही हो जाए तो मैं अपने प्रतिभा से इतना अच्छा कॉलेज मिल गया और तो मैं चाहिए क्या? फिर भी कभी हमारे लायक काम हो तो बताना हो और मिलते रहना । फिर ना बोला तो आपके पास एक विशेष कार्य वर्षी आया था । मेरे घर से वाले बहुत दूर पडता है । रोज आने जाने में तो समय तथा पैसे की बर्बादी होगी । इसलिए मैं वहीं हॉस्टल में रहना चाहता हूँ । ऍम तथा हॉस्टल की फीस की राशि मेरे पास नहीं है । वो कितने रुपए चाहिए । रिछफल ने पूछा हूँ आपसे मैं व्यक्तिगत कोई आर्थिक सहायता नहीं चाहता हूँ । मैं सोचता हूँ अभी दस या ग्यारह ही की कोई अच्छी ट्यूशन आप मुझे दिला दें जो मुझे एडवांस रुपये देकर मेरी मदद कर सकें । शिवानी उत्तर दिया शिवा के आशीर्वादी विचारों ने एक बार ॅ आपको अंडरटेक प्रभावित किया । वो गदगद हो उठे । उन्होंने दो मिनट सोचा फिर फोन उठाया फॅालो कुलभूषण नहीं आप खरबंदा साहब की लडकी के लिए अच्छा डाॅॅ मेरे पास है फॅमिली बहुत योग शिक्षक ऍफ बता क्या हूँ कभी जो ॅ ग्यारह बजे ठीक है । ओके भूषण जी दलों ने आपके पास देखता हूँ । फोन रख कर प्रिंसिपल साहब बोले शिवा, पर्यटन मंत्री घर भंडा साहब की पुत्री तो चित्र इस वर्ष दसवीं की परीक्षा देगी । उसका सहायक अध्यापक सुधीर बहुत अच्छा शिक्षक था । अचानक उसके सिर में देश दर्द हुआ और पता नहीं कि ब्रेन ट्यूमर था ऍम स्तिथि मृत्यु से लड रहा था विचारा अब उन्हें बेहद विश्वासी अगर योग्य अध्यापक चाहिए । मैं समझता हूँ तो उनकी अपेक्षाओं पर खरे उतरोगे हूँ । अगर वहाँ तुम्हारी ड्यूटी लग गए तो बारे में आ रहे हैं और तो मैं पैसे की भी कोई कमी नहीं रहेगी । मैं अपने मीटर को बोल दूंगा । हाँ एक और बात मंत्री जी का निवास भी श्री राम कॉलेज के परिसर के निकट है । भगवान ने चाहा तो तुम्हारे समस्या का कल समाधान हो जाएगा । ॅ आप मुझे उनका पता फोन नंबर दे दीजिए हूँ । शिवा खडा होते हुए बोला हूँ प्रिंसिपल साहब ने कल भूषण जी का विजिटिंग कार्ड निकाल कार्य शिवा गौड दे दिया हूँ । आपका इंसान में जिंदगी भर नहीं बोलूंगा । चिभाभा बोला हूँ ऍम कैसा? विद्यार्थियों की मदद करना हमारा कर्तव्य है है । तुम तो भारत के स्वर्णिम भविष्य हो । कभी कभी मिलते रहना । दूसरे दिन प्रातः ग्यारह बजे से दस मिनट पूर्वी सेवा मुक्त पत्ते पर पहुंच गया हूँ । कल भूषण जी बाहर ही मिल गए । शिवा की समय की पाबंदी का प्रथम प्रभाव बहुत अच्छा रहा हूँ । अंडर ले जाकर उसे बैठाया । फिर पूछा आप तो स्वयं अभी बहुत छोटे लग रहे हैं । क्या दसवीं के विद्यार्थी को पढा पाएंगे? शिवा ने पूरे आठ में विश्वास नहीं कहा ही मैं वैसे पढाता हूँ । कुलभूषण जीने पर रखने के हिसाब से शिवा से पूछा हूँ, आपका शिक्षा के बारे में क्या विचार है? शिवा बोला राजनीति का क्षेत्र हो या साहित्य का, समाजविज्ञान का हो या इतिहास का भाषा विज्ञान हो या तकनीकी विज्ञान, शिक्षा के बिना किसी भी क्षेत्र में प्रवेश और गति नहीं हो सकती । साथ ही साथ शिक्षा हो और साधन न हो तो बौद्धिक विकास खतरा बनकर मंडराने लगता है । शिक्षा की सार्थकता, आस्था, संकल्प और आचरण कि यूपी में है । महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि व्यक्ति की अंतर्निहित पूर्णता थी । अभिव्यक्ति ही शिक्षा है । महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि व्यक्ति की अंतर्निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति ही शिक्षा है । शिक्षा व्यक्ति का मौलिक अधिकार है । शिक्षा से ही व्यक्ति ज्ञान विज्ञान के लाभ प्राप्त कर अपना जीवन सुखी बना सकता हैं । शिक्षित व्यक्ति के जीवन शैली, भाषा शैली एवं व्यक्तित्व विशिष्ट प्रकार का होता है तो कुलभूषण अच्छा । परीक्षा परिणाम प्राप्ति के पुरुषार्थ की क्या भूमिका है? तो मेरा मानना है कि पुरुषार्थ की महत्वपूर्ण भूमिका है । विद्यार्थी योजना बद्ध तरीके से सकारात्मक सोच के साथ नियमित अध्ययन करने का पुरुषार्थ करें तो भाग्य भी बदल सकता है । विद्यार्थी श्रेष्ठतम प्रदर्शन कर सकता है । आठ विश्वास से परिपूर्ण शिवा के मधुर वाणी ने भूषण जी पर जादू का असर किया । वो तुरंत उठकर अंदर गए । एक लिफाफे में बीस हजार रुपये रख कर बाहर आए और बोले हूँ ये हो तो मैं उसकी जरूरत ही ना । इस वर्ष का पूर्व भुगतान ऍम हत्प्रभ रह गया । उसको ये राशि तुरंत प्राप्त होने की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी । उसकी आंखों में खुशी से पानी आ गया । दो लाख ऍम इतनी जल्दी भी क्या थी पहले मुझे पर रख कर लेते । कुलभूषण जी बोले हमें एक नजर में आदमी पर रखते हैं । अच्छा है मैं आपकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा । अभी चलो इजाजत है कहते हुए शिवा खडा हो गया । पैसों का लिफाफा वहीं रखा था । कुलभूषण जी भी सेवा को बाहर तक छोडने आए । उसे रुपये वाला लिफाफा पकडाया और कहा इसमें बीस हजार रुपये मंत्री जी के आवास का पता लिखा है । कल से साया चार बजे प्रतिदिन वहाँ जाना । जब रविवार को छुट्टी रहेगी कल वहीं मिलते हैं । सेवा ने करता के भाव से लिफाफा स्वीकार कर लिया तो रुपए लेकर रह । सबसे पहले मंदिर गया जहां भगवान को प्रसाद चढाया फिर बाजार गया । अपनी पहली कमाई से उसने माँ के लिए सुंदर सी साडी खरीदी और पिताजी के लिए कुर्ता पजामा खरीदा । खुशी खुशी घर पहुंचा महावा पिताजी घर पर इंतजार कर ही रहे थे । उसने मां के चरण हुए हैं । हाथों में साडी का पैकेट पकडाया ऍम हुए हैं और उन का कार्य टकराया । बोला अपनी पहली का नहीं से आपके लिए उपाय लाया हूँ । दोनों ने अपने अपने पैकेट से निकालकर देखा तो आंखों में खुशी के आंसू आ गए थे । मैंने कहा बेहद सुंदर साडी है अपनी बहु के लिए रखेंगे मेरे जीवन की प्रथम खरीदी हुई साडी तो माँ ही पहनेगी । फिर अभी बहुत बहुत दूर हाँ सेवा बोला । माने शिवा ॅ पिताजी ने भी उसकी पीठ थपथपाई और कहा बेहद उम्दा डिजाइन है । मैंने तो आज तक इतना महंगा गुप्ता पैजामा नहीं पहना हूँ । सेवा के आंखों में खुशी की चमक और बढ गई । फिर उसने कहा आपका बेटा भी तो अभी काबिल हुआ है तो तब पर शायद उसने अपनी फॅमिली सब के बारे में उन्हें विस्तार से बताया हूँ । दूसरे दिन चार बजे से पांच मिनट पुर सेवा मंत्री जी के निवास पर पहुंच गया । वहाँ स्वागत कक्ष पर ही भूषण जी खडे थे । उन्होंने सुरक्षा अधिकारियों से शिवा का परिचय करवा दिया कि अब ये रोज आया करेगा । फिर शिवा कोंडर ले गए । बात सुचित्रा अपनी मम्मी के संग बैठी थी । शिवा के प्रथम दर्शन नहीं माँ बेटी को बहुत प्रभावित किया । शिवा के पढाने के शहरी और समझाने का तरीका बहुत अच्छा था । उसकी भाषा पर पकड विषय के गहन ज्ञान के साथ धूल आत्मविश्वास से समझाना सुचित्रा को बहुत पसंद आया हूँ । चित्र के अध्ययन के स्तर के साथ कक्षा परीक्षा के अंकों में भी निखार आता जा रहा था । सेवा का बातचीत का साली का इतना गरिमामय था । आपके सुचित्रा अपने अध्ययन विषयों के अलावा भी इनके सामायिक मुद्दों पर उसे चर्चा करती हूँ । अपनी अनेक शंकाओं के विषय में समाधान पार्टी कभी कभी मंत्री जी विश्वास है मिल लिया करते थे । इस प्रकार व्यवस्थित क्रमसे शिवा का अध्यान कार्य चलने लगा । अध्यापन एक बहुमूल्य काला है । ये सिर्फ पार्टी पुस्तको का ही नहीं जीवन की समग्र विधाओं का होता हूँ । अध्यापन के लिए द्राफी लेना बुरा नहीं है । उस की आवश्यकता है किन्तु बुद्धि के साथ सौदा करना भी उचित नहीं हूँ क्योंकि अध्यापक पर बहुत बडा उत्तर डाइट रहे हैं । केवल वेतनभोगी कर्मचारी नहीं अपितु राष्ट्र का सबसे ज्यादा जिम्मेदार ऍम अध्यापक उस व्यक्ति का नाम है जिसका प्रभाव दहेज के राष्ट्र की भर्ती संतति पर पडता है ब्राय यहाँ विद्यार्थी ये नहीं देखते कि अध्यापक क्या कहते हैं बल्कि वह है देखते हैं कि वह क्या करते हैं । तो अध्यापक का जीवन जितना कर्मठ ऍम पन होगा वो विद्यार्थी उतना ही करता ऍम होगा निष् करता हूँ । अध्यापक का दायित्व निभाने वालों में तीन बातें हो लाॅट आवश्यक है गंभीर ज्ञान, पवित्र चरित्र और सेवाभाव ।

Part 10

सुना है जो मेरे को खाने दौड था । निस्तब्धता इतनी थी कि उसे अपनी सांसों के स्वर भी दीवारों से टकराकर प्रतिध्वनित होते थे । सुनाई पडते किसी प्रकार दिन तो लोगों की आवाजाही में कट जाता लेकिन आप बाहर से प्रतीत होती तो प्रिया पुत्र शिवा की छवि आंखों से हटते ही नहीं हूँ । जिस घर में उसकी बालसुलभ किलकारियां पहुंचती थी अब नीरव सन्नाटे में जेंडरों की आवाज सुनाई पडती थी । सीमा के बिना उसके मन का कोना कोना वीरान था । घर का कोना कोना संस्थान था । उन लोगों की खोज करवाने में उसने कोई कसर नहीं छोडी । हिन्दू उसके सारे प्रयास व्यर्थ करें । धीरे धीरे उनके मिलने की आशा भी धूमिल होती चली गई । घर की सारसंभाल काम वाली बाई के जिम्मे थी । कॅश जैसे ही वह भोजन लाकर सामने रखती, सुमेश की आंखों के सामने माँ की मूरत उबर आती, उसका भोजन करना दो बार हो जाता हूँ । आप जबरदस्ती दो जाने वाले जल के साथ कटक ता और उठ खडा होता हूँ । ऍम ना वो अपने आप को बेहद कमजोर वहाँ अकेला महसूस करता हूँ । धीरे धीरे पता लगाने की कोशिश कर रहा था की उसके माँ पिताजी की हत्या किसने की? कौन था है हिंसक संहारक जिसने उसके माँ बाप को मार डाला । अनेक युक्तियों पर उसने विचार किया । अंततः उसे एक तरकीब सूझी रहे । अपने गांव के समीपस्थ किसानों, दलितों, भूमिहीनों एवं आदिवासियों से मेलजोल बढाने लगा । नियमित रूप से वह प्रतिदिन एक निश्चित समय उनके साथ व्यतीत करता हूँ । उनके साथ उठता बैठता उनके साथ बातचीत करता हूँ । उन के साथ खाता पीता और उनकी समस्याएं सुनता । जहाँ भारत की अधिकांश आबादी विकास के सोपान तय कर रही थी, वहीं ये बोले वाले आदिवासी देश की मुख्यधारा में शामिल होने से वंचित रहे गए । इन्हें प्रशासन से प्रोत्साहन तो नहीं मिला, उल्टा वन अधिकारियों का जन्म सेना पडता हूँ । इनकी अपनी खेती बाडी महुआटोला जैसे दैनिक आवश्यकताओं की वनोपज से लेकर झाडियों की ओट में नित्यक्रिया निपटाने जैसे नए सरगेट अधिकारों पर बनने से लगते हैं । यहाँ तक कि अपने पाले पोसे अश्रय डाटा जंगलों में घुसने के लिए भी उन्हें वनकर्मियों के रहमोकरम पर निर्भर होना होता । वो मनमाना वर्षों तक व्यवहार करते हैं । जब से अपने पास से मौत को छोडकर जाते हुए सोमेश ने महसूस किया था, तब से उसका है नया एक्साम बेटन ही हो गया था । प्रशासन से पिसते आदिवासी व्यापारियों से ठगे जाते आदिवासी शिक्षा के अभाव में पिछले आदिवासी विकास से वंचित आदिवासी और चिकित्सा सुविधा के अभाव में मारते आदिवासियों की अवस्था वास्तव में चिंताजनक थी । सोमेश अपनी पी रहा बोल कर उनके दुख दर्द दूर करने लगा । उसकी श्रय दत्ता ने अतिशीध्र उन का दिल जीत लिया । आस पास के क्षेत्र के आदिवासी कबीलों के सरदार उसे अपना सरताज मानने लगे तो सोमेश ने चारु मजूमदार के छोटे भाई राजा को अपना विशेष सहयोगी बना रखा था । गंभीर से गंभीर रोग हो या प्रशासन से परेशानी अथवा अन्य किसी से शिकायत हो, सुमेश तुरंत आदिवासियों की समस्या निपटाने का प्रयास करता हूँ । सुमेश की लोकप्रियता का लाभ उठाकर राजा इन आदिवासियों में राष्ट्रविरोधी माओवादी विचार फैलाने लगा । उन्हें जमींदारों के खिलाफ भडकाने लगा । उसका लक्ष्य था अधिकाधिक आदिवासियों को नक्सलवादी बनाना । वो एक संगठन की संरचना तैयार करके पुलिस से अपने भाई चारों मजूमदार की मौत का बदला भी लेना चाह रहा था । तो मैं जब राजा की इन हिंसा प्रसारण गतिविधियों को देखता तो सोचता ये हिंसा के हथियार क्यों तैयार कर रहा है? संभवतया हमें अहिंसा से भी रास्ता मिल जाए । अगले शर्ट उसके मन में विचार आता हूँ । अहिंसा और सत्य से सुख शांति मिल सकती है, किंतु धन दौलत नहीं फिर हिंसा का रास्ता भी बहुत लंबा आए और ऍम इंसान हिंसा से भी गई । गुजरी होती है वो दुनिया वाले जय पराजय माने, लेकिन अहिंसा द्वारा हिंसा को रोकना अहिंसक कार्य तो क्या वास्तव में हिंसा द्वारा हिंसा का रुख पाना संभव है?

Part 11

सेवा का आज कॉलेज में पहला दिन था । दिल्ली विश्वविद्यालय का ये परिसर क्षेत्र नहीं बल्कि फैशन शो का राम पर नजर आ रहा था । किसी लडकी ने छोटी सी हाॅट गहरे लाल की टी शर्ट के साथ एक कान में बाली पहनी हुई थी तो किसी ने छोटा स्कर्ट छोटा टॉप और बढा सा धूप का चश्मा लगा रखा था हूँ । किसी ने जीन्स शर्ट के साथ एक हाथ में ढेर सारे रंग बिरंगे कपडे डाल रखे थे तो किसी ने स्टाइलिश बैग ले रखा था । रंग बिरंगी हवाई क्या पहले भी नया फैशन लग रहा था? फैशन में लडके भी लडकियों से पीछे नहीं थे । किसी ने चेक के बरमुंडा एवं शर्ट डाल रखी थी तो किसी ने फाॅर्स लोगन की टीचर डाल रखी थी । किसी ने एक कान में बीरसिंह करा रखा था तो किसी ने बाजू पर ड्रैगन का टैटू बनवाया हुआ था । किसी ने बाल के दो लडते ब्राउन करा रखी थी तो किसी लडके ने तीखे लंबे बालों में रबर बैंड लगा रखा था । स्कूल के अनुशासित वातावरण से निकल गए । इस खुली हवा में मानव जी भर के उन्होंने को आतुर हर लडका परिंडा और हर लडकी इटली नजर आ रही थी । वो साधारण तीन बच्चे के शर्ट में सहमा हुआ था । शिवा भी अपनी कक्षा की ओर बढ रहा था । सीनियर्स का एक रूप आया और से घेर लिया । ऍम कांचला विवा चुपचाप वही रोक गया कुछ नहीं बोला हूँ । दूसरा बोला अरे तेरी पारो कहाँ है इतने मैं सामने से सहमी सी सलवार सूट पहने दो पट्टा लगाए । लडकी जाती थी कि उसे भी घेरकर ये घर ले आए । ऍम तो दिखा दे इस बार ओ को दो कैसे गले लगाएगा । शिवा जहां था वहीं खडा रहा हूँ । सीनियर जोर से चिल्लाकर बोले आगे बढता है कि नहीं शिवानी एक नजर चारों तरफ देखा, पंद्रह भी मुझे । डंडे लडके खडे थे । बीच में असहाय भोली भाली लडकी नजर नीचे किए हुए खडी थी शिवा अपनी जगह से टस है । मच नहीं हुआ । तभी एक सीनियर ने लडकी है कहा तेरह देवदास रूठा खडा है तो आधुनिक पा रहे हैं या दो लग गया उसके गले लडकी एक दम घबरा गई । दूसरी दिशा में दो कदम उठाकर चलने लगे । इतने में एक दादा डाइट लडके ने आगे आकर उसके दो पत्ते का एक जोर पकड लिया । लडकी ने अपने हाथ से दुपट्टा पकडे रखा । वो लडका मना नहीं और पूरा खींचते हुए उसे धकेलते हुए बोला ॅ इतनी देर शांत था अब अपना रह सका । आगे बढकर एक हाथ से पूरी ताकत है । सीनियर को धकेलते हुए बोला थोडा ऐसे दूसरे हाथ से लडकी का दुपट्टा छुडवाया और जोर से बोला तुम यहाँ से अपनी क्लास में जाओ । सीनियर बडा कोटे वो लडकी की तरफ झपट्टे । इतने में ही उसने अपने दोनों बाजुओं का फैलाया । सबको रोक लिया । लडकी को निकल जाने दिया । अब तो हालत खतरनाक हो गए । सबके क्रोध का केंद्र बिंदु गया केला हो गया । शिकार को हाथ से निकालता देख तो शिकारियों को तो गुस्सा आना स्वभाविक था । ऊपर से यह लगा कि कल का यह छोरा कॉलेज का फिहर हमें ललकार रहा है । पहले दस दिन तो बडे बडे सूरमा भी संभलकर चलते हैं । ये नाडा दादागिरी दिखा रहा है । बीच में घेर का सब शिला को पीटने लगे । बचाव करते करते शिवा गिर गया । अब तो हाथों से लातों से मारने लगे । इराकी कमी फट गईं । जगह जगह खून आने लगा । लेकिन नरेंद्र को दया का ये भी कोई रैगिंग हुई ऍम है पुराने छात्रों के परिचय का ये कैसा भी ब्रॅान्ज किसी के घर का चिराग हमेशा के लिए बहुत सकता है । देश की कोई बडी भारी प्रतिभा असमय ही समाप्त हो सकती है । किसने प्रारंभ भी है जिन्होंने ऍम प्रथा शिवा को लगा आज मेरी हड्डियां टूटना निश्चित है लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी हूँ । अचानक सामने आक्रमणकारियों को बट करनी देकर पीछे दौडा वहाँ पीपल के पेड का कबूतरा जैसा बना था । उसमें थोडी दूर दो एक पुलिस वाले भी उसे खडे दिख गए । चबूतरे पर खडे होकर उसने जोर से चलाना शुरू किया । मेरे महान अग्रज भाइयों, कुछ लडके आगे बढे । इतने में शिवा बोलना बोला फॅमिली रुक जाओ, आप इतने हो मैं अकेला आप चाहो मुझे अभी जान से मार सकते हो । आज इसी वक्त या कल परसो जब भी मैं कॉलेज में आऊंगा, ॅ ऍप्स में पहला देने हैं । आप तो इसी कॉलेज के सिरमौर लगते हो लेकिन इतने पढे लिखे समझदार पंचनामे प्रतिशत से ज्यादा अंक धारक क्या किसी लडकी का दुपट्टा हटाकर जबरदस्ती गले लगाना हमारी संस्कृति है? क्या ये हमारी सभ्यता का हिस्सा माना कि राइडिंग हसी मजाक द्वारा सीनियर जूनियर परीक्षा का एक नई परंपरा है । पर किसी लडकी की इज्जत का मखौल उडाना कहाँ की गिरता है? कैसे मैं करता है? मैं गलत हूँ तो सौ जूते मार रहे हैं नहीं तो प्लीज आगे से किसी भी लडकी से खिलवाड न करें । कहाँ तो सब लडकों के सिर पर खून सवार था । कहाँ काटो तो खून नहीं ॅ इस बच्चे के साहस पर, इसकी हिम्मत पर इसके बुलंद इरादों पर इतने में ज्यादा टाइप कि लडके ने कहा बडा अच्छा भाषण दे लेता है अपना नाम तो बताओ शिवानी सहजता से संक्षिप्त उत्तर दिया । फिर मंगलसिंह उसमें हाथ बढाते हुए कहा मेरे नाम है राजा मार्च के हमारी दोस्ती पक्की शिवा ने पुणे सतर्कता के साथ हाथ आगे बढा लिया । राजा झटका देकर शिवा को पर रखना चाहता था लेकिन राजा का ऍम अस नहीं हुआ क्योंकि शिवा ने पूरे दम से उसके हाथ को दबा रखा था । हाथ की पकडते शिवा की ताकत का अंदाजा जहाँ जहाँ को हो गया । शिवा दूसरी परीक्षा में भी पास हो गया । शिवानी विनम्रता से कहा हूँ राजाभैया आप अपने दूसरे भाइयों का भी परिचय करवाओ लिए पाॅर्न तुषार रिपोर्ट लोकेश सब के नामों के साथ चेहरों को भी शिवानी अपने जहन मैं अच्छे से बैठा लिया । पुनः पुनः प्रेम प्यार दोस्ताना अंदाज में मिलते रहेंगे के विश्वास के साथ शिवा प्राथमिक चिकित्सा का अगली में चला गया । सब लडके आपस में बात करने लगे । कृष्णाराजा से बोला ऍम बोला हमें से अपनी पार्टी में लाॅस ने कहा हाँ इसको अभी सदस्य बना लेते हैं । ये भविष्य में बहुत काम आएगा । अगर एबीवीपी वालों से बढ गया तो इससे तुरंत अपना लेंगे । इससे हमें हाथ से नहीं जाने देना चाहिए । तो इस प्रकार कुल मिलाकर शिवार सबके दिल में बस गया । अपने दोनों अच्छे व्यवहार के कारण शीघ्र ही शिवा कॉलेज में लोकप्रिय हो गया । कॉलेज में इस महीने के आखिरी रविवार को कवि सम्मेलन आयोजित हुआ । बडे बडे प्रतिष्ठित का भी आए । इनके माध्य प्रथम वर्ष के एक लडके व लडकी को भी स्वरचित कविता बात का अवसर मिलना था जिन्होंने सबसे पहले अपना नाम लिखवा दिया हूँ । करीब पच्चीस विद्यार्थियों के नाम आए थे । शुक्रवार को सबका ऑडिशन हुआ हूँ । हिंदी भाषा पर अच्छा अधिकार मधुर कंठ आठ में विश्वास बारी प्रस्तुति से सहज शिवा का चयन कविता पाठ है तू हो गया । रविवार को प्रातः ग्यारह बजे कॉलेज का ग्राउंड खचाखच भर गया । मंच पर एक से एक मंझे हुए कभी गण विराजित हैं । संचालक कभी महोदय ने उद्घोषणा की अब आपके समक्ष कविता पाठ हेतु आमंत्रित कर रहा हूँ आप ही के कॉलेज के उदयीमान कवि शिवमंगलसिंह को जो आपके ही साथी हैं कृप्या इनका जोरदार तालियों से स्वागत करें । आइए आपका स्वागत है शिवमंगलसिंह जी ऍम मंच पर आया हूँ आदरणीय मुख्य अतिथि महोदय अध्यक्ष महोदय ऍम सभी कौन साड्डा नमस्कार छातियों मैंने अपने दिल की आवाज को शब्दों के साथ साथ दिया है । अगर आपके हृदय तंत्रों के तार जरा भी झंकृत हूँ मैं आपकी तालियों से समर्थन चाहूंगा । मेरी कविता का शीर्षक है बटन के सिपाही, मंदिर मस्जिद, गुरुद्वारों से आती है आवाज यहीं लाल किले की उन दीवारों से आती आवाज यही गंगा यमुना ढल धारों से आती है आवाज यही अमृतसर के गलियारों से आती है । आवाज नहीं अमर शहीदों का लहू बदनाम नहीं होने देंगे । वतन के सिपाही बटन अनिल नाम नहीं होने देंगे जिसके खाते ही प्रताप ने घास की रोटी खाई थी जिसके खाते वीर शिवानी तलवार उठाई थी । जिसके खातिर भगत सिंह ने रंगा बसंती चोला था । फांसी के फंदे को चूम कर बन्दे मातरम बोला था हम अपनी आजादी का कत्लेआम नहीं होने देंगे । गटन कैसे पाहि बटन नीलाम नहीं होने देंगे । जिसके खातिर महावीर ने मैत्री रह दिखाई नहीं बुद्ध शरण नमक अच्छा में संघ संतों की टोली आई थी जिसके खाते टेरेसा करोडों की बेटी दुहाई थीं जिसके खाते बापू गांधी ने सीने पे गोली खाई हूँ । हम उस भारत माँ को बदनाम नहीं होने देंगे । बटन के सिपाही वतन नीलाम नहीं होने देंगे । धन्यवाद जय हिंद । तालियों की गडगडाहट से कॉलेज का ग्राउंड गूंज उठा तो कुछ लोग वन्स मोर वन्स मोर भी चिल्लाने लगे । शिवा ने शालीनता से कहा बहुत बहुत धन्यवाद साथ हूँ आओ आज मिलकर हम संकल्प करें कि जब भी देश को हमारी आवश्यकता होगी हम बटन के लिए ऍम की अंतिम बोन तक हो । अपनी जान लडा देंगे वो लेकिन देश पर आज नहीं आने देंगे । जाहे धन्यवाद धारियों की गडगडाहट ने कॉलेज की सराहना । एलांते संचालक महोदय ने बडे आदर से कहा ब्लॅक आपके कॉलेज के प्रतिभाशाली कभी तो हमें टक्कर दे रहे हैं तो हमें तो अपनी आजीविका खतरे में नजर आती है । सुन कर सभी हंसने लगे । इसके बाद तो शिवा कॉलेज में और प्रसिद्ध हो गया । उसके अनेक मित्र बन गए वो शिवा को हॉस्टल में कमरा नंबर चार सौ पांच मिला । दो विद्यार्थियों के संग रहने की व्यवस्था थी । शिवा का अभिन्न ऍम । उसका कक्ष साथ भी बना । वो भी सर्वागीण व्यक्तित्व का धनी था । यहाँ जहाँ शारीरिक खेलकूद प्रतियोगिताओं में आगे रहता वहीं सुझाई लॉन टेनिस में प्रत्येक चेन्नई जीता स्वदेश की गर्लफ्रेंड सुजाता ने भी राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता में खिताब जीता था । पढाई के अतिरिक्त गतिविधियों का शिवा पढाई पर असर आने नहीं देता हूँ । बीकॉम प्रथम वर्ष में उसने बयासी प्रतिशत अंक प्राप्त किए । अंक तालिका लेकर घर आया माँ पिताजी के चरण छूकर उन्हें दिखाई तो पिता जी ने गले लगा लिया और बोले अच्छा ये सबूत होता हूँ । मैं तो देखती देखती भावुक हो गई और बोली भी दाल विश्वास है । एक दिन तो हमारा नाम बहुत ऊंचा करोगे । बस पेटा पूरा घर दोहरे, बिना वीरान और हर कोना सोना लगता है । हम दोनों नेता अकेले रहते हैं । मेरा तो दिन कटना मुश्किल हो जाता है । क्या बना हूँ, किसके लिए बना हूँ तुम जब आते हो तभी हर दिन तो बाहर होता है । आज मैंने तुम्हारी मनपसंद खीर चलेगी बनाई है । आओ पहले मुहार दो कर खालो शिवा बच्चे की तरह की पटकर बोला हूँ वहाँ भावुक की होती तो मैं कहीं दूर थोडी गया हूँ हूँ नहीं तो जब कभी आ जाये बुला लेना आ जाएगा दूंगा । ॅ कैसी रही हूँ घुटनों का कमर का दर्द कैसा है, ऐसे तो ठीक ही रहता है पूरा ठीक तो जब तो बुलाकर देखा तभी होगा माँ बोली बेटा जब पैदा होता है तभी से मां कल्पना करना शुरू कर देती है । मैं क्या आंध्र जैसी कहो लाऊंगी जो लड्डुगोपाल साहब होता । हे माँ आपको बहु के सेवा खुद सोचता ही नहीं किया ऍम बहुत हो गया बहुत का गुणगान अब जरा पिताजी के भी तो हाल बताओ । रक्तचाप ज्यादा बढा तो नहीं हो ऍम पूछा हूँ ये तो अपने नियम से चलने वाले इंसान है । सुबह पार्क इसे दोस्तों से मुलाकात दिन में दुकान संभालना रात को भोजन के पश्चात थोडा टीवी देखना हाँ शाम को घर आते हैं तब तो मैं बहुत याद करते हैं । ऍम भराया वहाँ भी तो छात्रावास में माँ को कितना याद करता है । यहाँ तो माँ उसकी हर चीज तैयार रखती है । ना कपडे धोने देती है, ना जूते साफ करने देती है तो यहाँ तक कि पानी का इलाज भी नहीं उठाने देती । वहाँ तो सब उसे ही करना होता है । वहाँ कहाँ परिवर्तन वाली सुख शांति है । मैं वही माँ के समीप बैठा ही रहा । फॅमिली उसके सर पर हाथ फेरती रहीं उसका मान किया की माँ बाप को छोडकर कहीं ना जाये । विचारों की तरंगों में तरंगित रहे । जब झोले खा रहा था इतने में उसकी नजर दीवार पर टंगी घडी पर गई ऍम ढाई बज गए । खाना खाकर तीन बजे तक तो निकलता हूँ का सुचित्रा ट्यूशन का इंतजार कर रही होगी । वहाँ रोक लगी है । जल्दी खाना दे शिवा चलाया । इन शब्दों को सुनते ही माँ की बात है खेल गई । मैं कब से तरस रही थी । उसका लाल आए और उसे अपने हाथों से भोजन खिलाए । बडे दिनों बाद वो वहाँ के पास में बैठकर उसके हाथों का बना भोजन ग्रहण कर बाकी आता संतुष्ट हो गई । माँ तेरे हाथों जैसा सवाल तो दुनिया में कहीं नहीं है । अभी मैं ट्यूशन बढाने जा रहा हूँ । छह बजे तक ॅ समय पर मंत्री जी के निवास पहुंचाओ । देखा आठ सौ चित्र के लिए बैठे इंतजार कर रही प्रायास चित्र की माँ या छोटी बहन साथ हुआ करती थी । वैसा कुछ आरटीसी बोली ऍम छोटी बहन की सहेली का आज जन्मदिन है । इंडिया के गई हुई है । माँ धार्मिक प्रवचन सुनने गई हैं । ऍम विल मन में ये क्या है? मैं इस विषय में आपका मार्गदर्शन चाहूंगी कि हमें धर्म कब करना चाहिए । माँ को धार्मिक क्रिया कलाप करते थे । एक में सोचती हूँ कि कि आप थोडा व्यवस्था ही इस के तो उपयुक्त व्यवस्था होती है । शिवानी गम्भीरता से उत्तर देना प्रारंभ किया । मेरा मानना है कि धार्मिक होने के लिए कोई उम्र नहीं होती हूँ । इसके लिए कभी भी ऍम की प्रतीक्षा ना करें । जब शरीर में सामर्थ हो, इन्द्रियाँ परिपूर्ण हो और मान ऊर्जा से भर आओ । कभी धर्म को साधना चाहिए क्योंकि वास्तव में धर्म तो उन्हीं की संपदा है जो चिट सही हुआ है । धर्म बुढापे की औषधि नहीं हैं । भरत युवा होने का दुस्साहस फॅार्म और अध्यात्म जीवन की अंतिम चरण नहीं बल्कि मंगला चरण होना चाहिए । धर्म समय की सीमा से आप ही नहीं हाँ रे जीवन के शासन और कण कण में होता है । धर्म कोई क्रिया नहीं अंतर रखती है जो हर क्रिया से संयुक्त होकर उसे नहीं अर्थवत्ता ऍम प्रयोजनीय ता से मंडित कर सकती है । धर्म सादा सूर्य की तरह प्रकार और चान्द्र की तरह शीतलता प्रदान करता है हूँ । सुचित्रा बोली हूँ सर मैं भी ऐसा ही सोचती हूँ । जानना चाहती हूँ की क्या फ्लैट, पूजा, माला, जप आदि के कर्म कांड के बिना भी धर्म हो सकता है? फॅसा धर्म रूपी पक्षी के दो पर हैं अध्यात्म और नैतिकता तो मैं ऐसे समझो बॅाल आ या जब आदि आध्यात्मिक प्रवृत्तियों से ही सिर्फ धर्म नहीं होते बल्कि धर्म तो व्यक्ति के प्रत्येक रिया कल आपसे दृष्टिगोचर होता है । हम कैसे सोचे, कैसे चले, कैसे उठे, कैसे बैठे, कैसे बोल नहीं । इसी में स्वच्छता हम सावधानी रखकर किसी का आई थी ना का धार्मिक हो सकते हैं । सत्यकि ने व्यक्ति का सत्र की प्रवत्ति का काम ही धर्म है । सुचित्रा ने पुनः अपने जाॅब फिर धर्म के नाम पर दंगे होते हैं । शिवानी समझाया धर्म हमरा भी है और अपील भी । प्रेम और मैत्री के बनियान पर खडा हुआ धर्म अमृत है तो सांप्रदायिक उन्माद से ग्रस्त धर्म अफीम का काम करने लगता है । वो सच कहूँ तो जहाँ विवेक वहाँ धर्म है, जहाँ विवेक नहीं वहाँ धर्म नहीं तो चित्र ने कहा ॅ आज आपने मुझे नहीं देश आती है, वो इस पर चिंता मांॅ अनुसरण करने का मेरा प्रयास रहेगा और अभी वर्तमान भारत विषय पर निबंध लिखना है कर दिया इस विषय पर भी मेरा मार्गदर्शन करें । सुचित्रा ने बोला शिवा ने बोलना प्रारम्भ किया तो चित्र अपनी नाॅट करने लगी । प्राचीन समय के भारत का इतिहास बडा सुनहरा रहा है । सम्पन्नता और समृद्धि की दृष्टि से या देश सोने की चिडिया कहलाता था । अध्यात्म और ज्ञान के क्षेत्र में ये देश सबका गुरु रहा है । ज्ञान की परिपक्वता और अनुभवों कि सर्व खींचता के लिए सभी देशों के लोग यहां आए थे । यहाँ की कला, संस्कृति और शालीनता विश्वविख्यात रही है । अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार यहाँ के खून में वो जीन रहे हैं जो बडों का आदर करना और इज्जत करना सिखाते हैं । लेकिन आज जमाने का विपरीत असर हम पर आ रहा है । यह विज्ञान और विज्ञान तकनीकी में भारत ने आज बहुत प्रगति की है लेकिन जीवन मूल्यों का बडा हाथ हुआ है । आज यहाँ राजनेता, अधिकारी, कर्मचारी, व्यापारी, डॉक्टर, वकील यहाँ तक कि न्यायाधीश और सेना पति तक अपना करता भूलकर विलासिता एवं भ्रष्टाचार के अंधीदौड में लगे हैं । जो राॅक है वे भी भक्षक बनते जा रहे हैं । जो आतंकवादी हमारे देश की जडे खोखली कर रहे हैं वो उनके साथ मिलकर देशद्रोहियों का काम कर रहे हैं । विश्व का युवा देश भारत वर्तमान में पुना विश्वगुरु बन सकता है । कुछ सूत्रों पर त्वरित कार्यवाही हूँ । सुदृढ हो, कानून व्यवस्था, राजनीतिक शुद्धिकरण, ॅ, अनुशासन, समय भटकता, पुरुषार्थ, इमानदारी, प्रत्येक क्षेत्र में पारदर्शिता । वर्तमान में देश की अखंडता सर्वोपरि है । राष्ट्रीय एकता के तीन मुख्य घटक हैं राष्ट्रीय चरित्र, सम्प्रादायिक, सद्भाव और अहिंसा । प्रधान जीवन शैली आज राष्ट्र के लिए सर्वाधिक प्राप्त हैं । कोई वस्तु है तो वह राष्ट्रीय चारित, क्योंकि सबसे अधिक बटन इसी का हुआ है । जब तक राष्ट्रीय हरित का उत्थान नहीं होगा, तब तक कोई भी योजना सफल नहीं हो सकती है । राष्ट्रीय चैरिट को विकासित करने वाली दो शक्तियां हैं कानून और व्यवस्था जिसके द्वारा प्रयत्न, जनहित, जान, जान का विश्वास घनीभूत होकर राष्ट्रीय चरित्र को उजागर कर सकता है । राष्ट्रीय चरित्र निर्माण के महायज्ञ में समस्त भारतवासियों को अपनी आहुति देनी होगी और इस हेतु आज भारत के प्रत्येक नागरिक को अपनी कर्त्तव्य याद रखने की आवश्यकता है । चाहेंगे सुचित्रा इतनी देर तक मंत्रमुक्त सुन रही थीं । प्रभावित होकर बोली तो गई गजब की विश्लेषण क्षमता है, आपकी उतना ही प्रभावी प्रस्तुतीकरण है । आप राजनीति में आना चाहिए तो पिताजी से चर्चा करूँ । शिवानी उत्तर दिया नहीं । सुचित्रा मैं तो भारत माता का छोटा सा पत्र हूँ और मेरी भावना इसी महाभारती सेवा की है । इससे आगे मेरी और कोई महत्वकांक्षाएं नहीं । इतने में शिवा की नजर घडी पर पडी । ॅ आज तो पांच में पता ही नहीं चला । समय बहुत हो गया । ऍम कर रही होगी, चलता हूँ

Part 12

सारे थी अनमनी बैठी थी । शिवा की पसंद का भोजन तो उसने कभी का तैयार कर लिया था जहाँ को जरा भी विलंब हो जाता । दो वाॅटर सोचने लगती आजकल दिल्ली में अपराध कितने बढ गए हैं । रोज हत्या, अपहरण एवं सडक दुर्घटनाओं के कितने किस्से सुनने में आते हैं बार बार प्रवेश द्वार की ओर ताकती माँ को जैसे ही शिवा दिखा ऍम ने कहा बेटा कहाँ था? बडी देर लगती अपनी बाजों की मांसपेशियां मसल्स टिकाता हुआ । शिवा बोला हाँ तेरा बेटा कमजोर नहीं बडी मजबूत जान बनाई है । धोनी फिर क्यों खबर आती है आजकल जमाना बडा खराब है । चिंता होने लगती है । मेरा जी घबरा रहा था । पता नहीं क्यों हो? मैंने कहा ॅ कितनी देर बाद भोजन करेगा । अभी लगा दो नहीं हाँ, पिताजी के शादी करेंगे तब तक आप की दवाई लेने जा रहा हूँ । कुछ देर बाद पिताजी आए । कॉलेज के सारे समाचार पूछे और पोछा हूँ । किसी तरह की परेशानी तो नहीं है ना । रुपये पैसे को चाहिए हो तो बता दो । शिवा ने कहा सब व्यवस्थित काम चल रहा है वो । इसी प्रकार हसी खुशी कैंसे छुट्टियाँ गुजर गई हूँ । द्वितीय वर्ष में भी उस ने अपने अध्ययन को प्राथमिकता देते हुए विशेष महीने तक जारी रखी । किसी के परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष में भी शिवानी नवासी प्रतिशत अंक प्राप्त की है । कॉलेज में फॅस राष्ट्रीय सामाजिक सेवा योजना में वे एक सक्रिय सदस्य के रूप में भी अनेक काम कर रहा था । आईआईटी दिल्ली से आज पश्चात नृत्य में उसकी टीम की प्रतियोगिता थी । उसमें पहला स्वर्ण पदक जीतने के बाद सब दोस्तों ने मिलकर खूब मस्ती की । तक बच्चा शाम की छात्रावास में अपने कमरे में गया तो देखा मुझे बेहद चिंता में था । तो क्या हुआ तो हमेशा गुलाफ्सा खेलता हुआ चेहरा आज मुरझाया कैसे जवानी पूछा सुजेश बता हूँ या ना बताऊँ कि वो हेडफोन में था, उसकी है । हालत देख फिर ना उसके पास बैठा और ऍम फॅमिली है । क्या हुआ? सुजेश बोला सुजाता की तैराकी प्रतिस्पर्धा के लिए यूके जाना कैंसिल हो गया है । फिर मैंने कहा तो इतना होने की कौन सी बात है? हरे अगली बार चली जाएगी । सुझाव बोला मामला होता नहीं है । राष्ट्रीय तैराकी बोर्ड ने उसे पांच वर्ष तक किसी भी तैराकी प्रतियोगिता में भाग लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है रे उसमें ऐसा क्या अपराध किया है जो इतनी कडी सजा मिली है? क्या कहूँ बताते हुए भी की नॅशनल स्विमिंग बोर्ड के चेयरमैन ने उसे स्विमिंग पूल पर देखा था । तब से उसके पीछे पड गया कभी स्विमिंग पूल पर कभी मीटिंग, कभी इंटरव्यू, कभी क्वालिफाइ राउंड के लिए अकेली बुलाता था । उसे परेशान करता हूँ । एक दिन तो हद ही कर दी हूँ अपने ऑफिस में बुलाकर । उसने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया और उसके वस्त्रों से छेडछाड करने लगा । जैसे ही मैं जबरदस्ती पर आमदा होता ही किसी प्रकार छूटकर बाहर निकल भागी । बिफरी शेयर की भारतीय सरे आम उसने धमकी दे डाली कि या तो मेरी इच्छापूर्ति करो, नहीं तो तुम्हारा निलंबन । तब से सुजाता एकदम गहरे अवसाद में आ गई । चेयरमैन का उसने कोई प्रस्ताव नहीं स्वीकारा हूँ । कहाँ उसे निलंबित कर दिया गया हो जाये । अपने आपको निस्सहाय समझ रहा था । इसमें शिवा भी क्या करें हूँ । शिवा का दिमाग झंड आ गया । उसे कानों पर विश्वास नहीं हुआ हूँ । क्या सभी होता है । सब कुछ सामने था । कडवी हकीकत थी । एक तरफ राजबल, धनबल, बाहुबल और शक्ति वन था तो दूसरी तरफ सिर्फ आठ मावल सीमित संसाधानों से शत्रु पर विजय कैसे प्राप्त करें हूँ । विवाह प्रदेश को लेकर अपने सीनियर राजा वा कृष्णा के पास गया । उन्हें सारी वास्तुस्थिति से परीक्षित करवाया । मामले की गंभीरता को देखते हुए राजा ने स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट आलोक को बुलाया । सब गहन चिंतन करके इस निष्कर्ष पर पहुंचे हूँ कि पहले चेयरमैन को सुजाता को पुनर्नियुक्त करने दो, राजनाथ पत्र दिया जाए । अगर मैं मान जाते हैं तो सुजाता के साथ उसकी एक सहेली हरदम रहेगी और वह पहले की तरह अपनी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धाओं में उतरेगी । शिवानी कहा दस प्रतिशत चांस है कि जेरमैन मानी नब्बे प्रतिशत चांस है कि वह नहीं मानेगा । तब हम क्या रणनीति बनाएंगे? राजा ने कहा, हम कानून की मदद ले सकते ऍम कर सकते हैं । आलोक ने कहा हूँ अगर एक सीधी उंगली से ही नहीं निकलेगा तो मिलिट्री कर लेनी पडेगी । ऍम छोटी मोटी आती नहीं है, ऊपर तक पहुंच है । उसकी जंग का अटल नियम है । अगर विजयश्री का वरण करना है तो शत्रु की खूबियों कमियों को जानो । अपनी शक्ति का उसी के अनुरूप उपयोग करो । सेवा बोला आलोक भैया आपने एकदम सटीक आकलन किया है । हमें काम करते हैं । अपनी टीम में काम बाट लेते हैं । सुझाव राजा भैया के मार्गदर्शन में प्रार्थना पत्र कानूनी मदद का काम करेगा । कृष्णा भैया मीडिया का पूरा सहयोग लेंगे । इनके बडे भाई पीटीआई के प्रमुख हैं । वह कृष्णा भैया को मीडिया की पूरी समय है और इनका संपर्क भी तगडा है । आजकल तो सब काम संपर्क के बूते पर ही आसानी से निष्पादित हो पाते ऍम आने आगे कहा हूँ चलो भैया मैं आपके साथ जनजाग्रति अभियान में संग्लन रहना चाहता हूँ । अगर चेयरमैन नहीं माना तो हम सत्याग्रह करेंगे । हडताल करेंगे, जुलूस निकालेंगे, मार्च करेंगे । जरूरत पडी तो गृहमंत्री वा प्रधानमंत्री तक को ज्ञापन देंगे तो आप सोचो की जान में जान आई उसे लगा इस प्रकार अगर उनका अभियान सफल होता है तो सुजाता को नई जिंदगी मिल जाएगी । उसने कहा ठीक है मैं प्रार्थना पत्र लिखकर सुबह राजा भैया को दिखा देता हूँ तो वो कर देंगे । फिर हम प्रार्थना पत्र देने चलेंगे । शिवा ने सबको बहुत बहुत धन्यवाद देकर चलने की जाना चाहिए । ऍर आलोक ने उनकी पीठ आपका पाते हुए कहा हूँ हम सच्चाई के साथ है तो मैं घबराने की कोई जरूरत नहीं है । बस निरंतर खबर करते रहना जुझने । रात को देर तक बैठकर प्रार्थना पत्र लिखा । शिवा को दिखाया । शिवानी पढा एकदम सटीक था पासी शक्ति नगर में सुजाता का घर था प्रात आह लगभग दस बजे शिवा और सुजस वहाँ पहुंचे । पूरे घर में अजीब सी खामोशी छाई हुई थी । सबके हाँ लटके हुए थे । सोचने सुजाता के भाई से पूछा वो की आवाज है सब ठीक ऍफ का है । ये बालक कुछ नहीं बोल पाया । ऍम सुजस को अपने पाऊँ कि नीचे से धरती की शक्ति नजर आई । चक्कर खाकर खडा खडा जैसे ही गिरने लगा, शिवा की मजबूत माहौल नहीं उसे थाम लिया । झकझोरते हुए कहा हो जाए तो उसमें आओ अपने आपको संभालों । सुजाय हमें सुजाता को बचाना है । शिवा के इन शब्दों ने रामबाण का काम किया । सुजॅय चेतना लौटने लगी । शिवा ने उस बाला के आंसू पहुंचे और बोला सुजाता देवी के हम दोस्त हैं क्या हमें उनसे नहीं मिलवा होगे? बालक सुजस को पहचान गया । धूंधी आवाज में बोला ॅरियर खाली थी । अभी सर गंगा राम अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में है । शिवानी पूछा खतरे की तो कोई बात नहीं । अभी कुछ नहीं कह सकते है । चलो भाई गंगा राम अस्पताल चलो वहाँ पे आईसीओ । मैं सुजाता से मिलने पहुंचे । उन्होंने देखा तो पूरी पीली पडी हुई है । हड्डियों का ढांचा लग रही थी । वहाँ ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से शिवा ने पूछा डॉक्टर साहब मरीज कैसी है? डॉक्टर ने कहा भगवान का शुक्र है । समय रहते अस्पताल में आएँ ऍसे लेट हो जाती तो यह कोमा में चली जाती हूँ । मुझे उसकी आवाज सुन का तो जाता नहीं । धीरे से आंखें खोली । शिव आवास अध्यक्ष की जान में जहाँ नहीं चलो जान बची तो लाखों बाॅधना ने कहा तो जाता तुम तो बहादुर हो । यूं हथियार मत डालो । गुनेहगार को सजा मिलेगी । हमने आए प्राप्त कर के रहेंगे तो हम प्रार्थना पत्र पर हस्ताक्षर कर दूँ । सुजाता बोली मुझे कुछ नहीं चाहिए । मुझे मेरे हाल पर छोड तो होता नहीं चाहती फॅमिली आपका नहीं परेशान मत हो और ऍम घरों बडी शिवा वहाँ से एक तरफ हो गया तो जस को हस्ताक्षर करवाने का इशारा किया । सुजाता की स्थिति देख शिवा ने संकल्प कर लिया की समस्या का समाधान करवाकर रहेगा इस लडकी को इसका न्याय दिलाने में पूरी सहायता करेगा । हो जाए तो जाता को साथ ना देने लगा । सहानुभूति पाकर सुजाता के धैर्य का बांध तोड गया । उसके दल का दर्द आंसुओं का सैलाब बनकर बॅाय बढाओ थी । आखिर मेरा कसूर किया है तो मुझे ॅ पिता जी की उम्र का ऍम मेरे पीछे पर आए ॅ के पास इन मासूम सवालों का कोई जवाब नाथन ऍम की बात कह रहा था । हूॅं होगा भगवान के घर देर है अंधेर नहीं । हम पर भरोसा करो । हम निश्चित रूप से सफल होंगे । तुम पहला कदम उठाने में तो सहयोग करूँ । इस प्रार्थना पत्र पर अपने हस्ताक्षर कर दो । छोटी छोटी होती है पर हाथ की नाक में घुस जाये तो प्राण हंता बन जाती है । एक छोटा सा खेत बडे से जहाज को डुबा सकता हूँ । चेयर मैंने तो मैं छोटा समझने की भूल किए । ये उसे महंगी पडेगी । जल्दी स्वस्थ होकर जंग में हमारा साथ तो सुजाता ने उस प्रार्थना पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए । सुजस ने उस प्रार्थना पत्र की फोटोकॉपी करवाकर अपने पास रख ली और प्रार्थना पत्र देने के लिए शिवा एवं सुजॅय बोर्ड के ऑफिस पहुंचे । ऍम ने पहले तो बडी मुश्किल से मिलने का समय दिया । जैसे ही प्रार्थना पत्र दिखाया तो एकदम उखड गया । उसने प्रार्थना पत्र के टुकडे टुकडे कर के फेंक दिए । कौन होते हो तो उसकी तरफ दारी करने वाले मैं उस लडकी का तो ऐसा मजा चखाऊंगा कि वह जिंदगी भर के लिए स्विमिंग पूल भूल जाएगी । वहाँ छुप नहीं रह सका । कृप्या जवान संभाल कर बात करें आप किसी लडकी के भविष्य से इस प्रकार कैसे खिलवाड कर सकते हैं । यहाँ की सलाह ने आग में घी का काम किया और आप तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था हूँ यहाँ से निकालो तुरंत निकल जाओ यहाँ से नहीं तो धक्के मार का निकल जाऊंगा हूँ वहाँ तो जब दोनों खडे होगा ॅर एक बार फिर सोच लीजिए ॅ अगर आत्मसम्मान की आग से निकली चिंगारी भडक उठी तो आपको सर्व राष्ट्रीय कोई नहीं बचा पाएगा । दो डाॅट मैं अभी सुरक्षाकर्मियों को बुलाकर तो मैं निकल जाता हूँ । जैसे ही सुरक्षाकर्मी शिवा सुजस को ढकेलने लगे शिवा एकदम कडक फॅसने बोला तो खबरदार जो एक कदम भी आगे बढाया । हमें छोडने की जरूरत नहीं है । अंतर जा रहे हैं सर देख लेना को बहुत महंगा पडेगा । जाते जाते शिवा बोला वो राठौर बोला तुम नालायकों की धमकी है, मुझे कोई परवाह नहीं है । जहाँ तुम से जो होता है कर लो वहाँ सीधा राजा भैया के पास गया । उन्हें आज की सारी स्थिति बढा दी । राजा ने कहा लातों के भूत बातों से नहीं मानेंगे । अब हम सबको अपना मोर्चा संभालना ही है । प्रधानमंत्री, खेल मंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री को हम ज्ञापन देंगे तो हम पत्र तैयार कर के मुझे विचार विमर्श कर लेना खेवा तुम छात्र संघ के नेता आलोक को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के सारे कॉलेजों में इस घटना को संक्षेप में बता के यह नोटिस लगवा दो की परसों सुबह हम इंडिया गेट से संसद भवन तक मोहम्मद भी मार्च करेंगे । फिर वही जंतर मंतर पर भूख हडताल करेंगे । अब इस क्षेत्र के सांसद और विधायक को भी हमें अपने साथ रखना है । फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी भी आई हुई हैं । वो मेरी मौसी की घनिष्ठ सहेली हैं । उन्हें भी ले लेंगे । कृष्णा को मैं भी सारी जानकारी देता हूँ । मीडिया में कल ही सबको निमंत्रण देने होंगे । सारी जानकारी की एक प्रेस विज्ञप्ति भी तैयार करके कल ही सारे पत्रकारों को दे देंगे । खिमानी पूछा हूँ मेरे मित्र जॉन के चाचा दिल्ली पुलिस के डीसीपी हैं । हमें उन्हें भी सूचना देनी चाहिए क्या? राजा बोला सिर्फ सूचना ही नहीं बल्कि हम पुलिस सुरक्षा मांग लेंगे । फिर कोई हमारे विद्यार्थियों का बाल भी बांका नहीं कर सकता था । इस क्षेत्र के एक दो बडे समाजसेवी संगठनों वह महिला संगठनों से भी तुरंत संपर्क करुँ । मामला संगीन है । राठौर भी बहुत ऊंची पहुंच वाला है । हम उससे भी मुझे पहुंचेंगे तब वह दबाव में आएगा । पूरी बात सुन का शिवा बोला राजा भैया क्या दिमाग पाया? आपने वाकई मुझे गर्व है । ऍम एक आवश्यकता मुझे और महसूस हो रही है । मैं एक चीज और चाहता हूँ कि हम अपनाएं, कानूनी सलाहकार भी रख लें । क्या पुलिस, कानून व मीडिया हमारे साथ होगा? तब प्रशासन को झुकना ही पडेगा । राजा ने कहा ऍम नीति खरे सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट है । मेरी बहन की बहुत अच्छे मित्र है तो मैं उन्हें आज शाम को आमंत्रित कर वस्तुस्थिति से अवगत करवा देता हूँ । राजा ने पूरी टीम का बुलाकर सबको उनके कम उसी वक्त सौंपती । दूसरे दिन गति प्रति की रिपोर्ट भी ले ली । अपनी अपनी जिम्मेदारियां ग्रहण कर बहुत सुलझे हुए तरीके से सबने अपना कार्य प्रारंभ कर दिया । सोमवार की सुबह इंडिया गेट पर विद्यार्थियों का इतना बडा हो जाऊँ आज तक नहीं देखा गया था । सब अनुशासित पंक्ति बहुत चलती मोहम्मद थी । हाथ में कुछ के हाथों में पट्टियां तख्तियां थीं, सुजाता निर्दोष है, सुजाता का निष्कासन रद्द करो, राठौर अपराधी है । राठौर को सजा दो मानव मंडे एडमिशन, अनुव्रत, सेवाभारती, रोटरी इंटरनेशनल ऍम क्लब, मारवाडी युवा मंच जैसे एनजीओ एवं महिला मंडल, महिला मोर्चा जैसे सशक्त महिला संगठन भी जोशीले नारे लगाते हुए उनके साथ थे । वो दिन ओबीसी आउट रोडर ब्रॉडकास्टिंग ऍम जुलूस को कवर करते हुए हैं, साथ चल रही थीं । ऍम मीडिया के बीस पच्चीस लोग भी वहीं थे । शिवानी सबसे आगे रहे । कर जुलूस की व्यवस्था बहुत अच्छे से संभाली । राठौर ने कुछ गलत तत्वों को हिंसा फैलाने के लिए जोर उसमें शामिल होने भेजा । लेकिन शिवा के कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा घेरा इतना मजबूत कर रखा था की उन तत्वों के तुरंग सन चल रही पुलिस के हवाले कर दिया गया । ऐसे वक्त में पुलिस का सहयोग वास्तव में बडा उपयोगी होता है । प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसने मीडिया के समक्ष है राठौर का वास्तविक चेहरा सबूतों के साथ प्रस्तुत कर दिया । वो सारे न्यूज चैनल मोमबत्ती जुलूस को विद्यार्थी सत्याग्रह यात्रा की तरह दिखा रहे थे । तो हर चैनल पर सुजाता का निलंबन रद्द करने की मांग हो रही थी की नहीं चैनलों पर राठौर की गिरफ्तारी के जोर शोर से मान चल रही थी । दूसरे दिन सारे अखबारों में मुख्य प्रश्न िनी समाचारों से पटे पडे थे । प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, खेलमंत्री, राष्ट्रीय महिला आयोग, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारियों को ज्ञापन देता हेवा सुझाव है राजा कृष्णा कालो की बडी बडी फोटो समाचार पत्रों में छापीं । इंसाफ के लिए हुई लडाई में सुजाता को न्याय दिलाने के लिए कई राजनीतिक वह सामाजिक संगठन भी आगे आ गए तो सुजाता का निष्कासन रद्द कराना, उसे न्याय दिलाना और राठौर पर मुकदमा चलाना ही उनका मुख्य मुद्दा था । इन लोगों कि संगठित शक्ति से सुजाता प्रकरण राठौर के गले की हड्डी बन गया हूँ । हाई कमान से नोटिस मिल गया । उसकी कुर्सी हिलने लगी । आखिर राठौर ने कोर्ट में जाकर सजा पाने के बजाय सुजाता को बहाल करने में ही अपनी भलाई समझी । हटा उसने सुजाता को पुनर्नियुक्त पत्र भेज दिया । इतिहास में नहीं होता जो अक्सर उन्हें लिखा जाता है । पाषाणों मैं अकेला जाता है, कथाओं में पिरोया जाता है और कल्पनाओं में संजोया जाता है । अबे तू इतिहास झडों की चाय शब्द या पार्टी अभिव्यक्ति है, जो किसी व्यक्ति, समाज या देश द्वारा जीव डाटासेट ये गए हैं । ऐसे पल प्रबल इच्छाशक्ति से पुरूषार्थ के सही नियोजन द्वारा लक्ष्य के रूप में प्राप्त किए जाते हैं । इसमें ईमानदारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि ईमानदारी व्यक्तित्व का एक अभिन्न कौन है, जो सामाजिक विश्वास का आधार बनता है । इससे सामाजिक जीवन निश्चित रूप से सफल हो सकता है ।

Part 13

परिस्थितियों के गलियारों से उठता हुआ धुआ व्यक्ति को आंख मोदी ने को विवश करता है । किंतु जो व्यक्ति उस धुएं में आखिरी खोले रखने का साहस कर लेता है है, बिना किसी अवरोध के आगे बढ जाता है एक सापुतारा के रूप में । सो मैं अपने माता पिता के हत्यारों को खोज रहा था । इसी उद्देश्य से वे आदिवासियों से हेल्थ मिल गया था । किंतु जब वो उसने आदिवासियों की तय नेता दशा देखी तभी से उसका एक लक्ष्य भर बन गया रह था आदिवासियों को न्याय दिलाना, उनका हक दिलाना आकस्मात । एक दिन राजा मजूमदार खबर लेकर आया कि सोमेश के माता पिता की हत्या सरपंच के दम आठ छेदी लाल ने अपने ससुर के इशारे पर की थी । सुमेश को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ क्योंकि साॅस तो हमेशा सोमेश है, मधुर व्यवहार ही रखता था और दुःख के समय संवेदनाएं प्रकट करने भी आया था । राजा की खबर सौ प्रतिशत नहीं नहीं सोमेश चिंतन में डूब गया । क्या अपने माँ बाप के हथियारों को सजा दे भी अच्छा उनको छमा कर दूँ? समाज में छिपे भेडिये जिन्होंने इन देशभक्तों को अकारण असमय मौत की नींद सुला दिया । क्या देशद्रोही नहीं है? क्या इन्हें जीने का हक है । राजा ने सुमेश के दुविधा को उसके मूक्स एमिटी समझा और छेदी लाल को छलपूर्वक जंगल में ले जाकर उसकी हत्या कर दी । सरपंच के आदमियों ने आदिवासियों के चार मासूम बच्चों को मौत के घाट उतार दिया । नन्ने मुन्ने की दर्शन हत्या से आदिवासी भी अपना आपा खो बैठे और पूरे दल बल के साथ राजा के नेतृत्व में उन पर धावा बोल दिया । भयंकर मार्क आठ मच गई । दोनों पक्षों के अनेक लोग मारे गए । जीत किसी की भी नहीं हुई । गी जगह भी सोमेश इन परिस्थितियों में बहुत असहज था । उसके मन और मस्तिष्क में धंधा चल रहा था, हूँ । मान रवि था, दिल कह रहा था कि संन्यास की ओर प्रस्थान करूँ । दिमाग कह रहा था कि यही उपयुक्त समय नेतृत्व का निर्माण करो । उसी गाठ सुमेश के निवास पर एक अत्यंत गोपनीय बैठक हुई, जिसमें गहन विचार विमर्श करने के पश्चात राजा मजूमदार गुम मुखिया प्रधान बनाया दिया गया । धीरे धीरे राजा के नेतृत्व की सीमाएं विस्तृत होती चली गई । दलित वंचित उत्थान है तो एक राष्ट्रीय संगठन के साथ साथ अनेक क्षेत्रीय संगठनों का निर्माण होता गया हूँ । स्थानीय जनजातियों के त्वरित खेत संरक्षण से मैं उनके हितैषी बनते गए ऍम है इस सुधारवादी आंदोलन की दिशाएं परिवर्तित हो रही थीं । माओवादी विचारधारा हिंसा की अजस्त्र धारा ले कर इसमें समाहित हो गई अराजकता का विस्तार हो रहा था । आक्रामक युवाओं को अनुशासित रख पाना टेढीखीर हो गई थी । वो बेसिरपैर की विचारधारा लादना और सिर्फ फ्री हिंसा करना भी प्रारंभ कर दिया । इनका संगठन राष्ट्रीय विकास कार्यों में भयंकर रोडे अटकाने लगा । सडकें नहीं बनने देना बनाने वाली कंपनियों को धमकाना, उनका सामान जला देना, ऍम कामगारों की हत्या जैसे काम होने लगे । दलित वंचित नाम के इस आंदोलन ने हत्या, लूटपाट, बम विस्फोट, फिरौती और अपहरण का बाना पहन लिया । परिस्थितियों के नियंत्रण है तो पुलिस बल की भूमिका बढती जा रही थी । नक्सलियों को पकडने है तो पुलिस दावा बोलती तो वे आदिवासियों को ढाल बना लेते । बहुत भोले भाले आदिवासियों की होती है और असली अपराधी फरार हो जाते हैं । इन नक्सलियों की गतिविधियां बढ रही थी । उधर पुलिस कार्यवाही भी बढ रही थी । रात को बारह बजे भी उनकी तलाश में पुलिस नागरिकों के दरवाजे खटखटा देती । किसी प्रकार से उपजे संघर्ष में नई नई अपराधों की मौत भी हो गई । एक प्रसिद्ध कॉलेज का मेधावी विद्यार्थी जो राष्ट्र का उज्जवल भविष्य हो सकता था । इस संघर्ष की भेंट चढ गया । उसकी स्मृति सभा में उसके प्रोफेसर नहीं जब उस की आज मैं कविता का पार्टियाँ तो सबकी आंखें नम हो गईं । क्रिया की प्रतिक्रिया स्वरूप पूरी की पूरी कहानी नक्सली बन गई । निहत्थे नागरिकों की रक्षा करने के लिए । तब फंडा गांधी जी के भक्त थे । पक्के अहिंसा हो पुलिस फायरिंग में एक गोली ने उनके प्राण लिए । कार्यक्रम स्वरूप उनका बुधवार नक्सली बढ गया । एक युवक जिस पर नक्सली होने का संदेह था उसे पुलिस ने इतना पीटा कि हिरासत में उसकी मौत हो गई तो उस की मांग अकेले वजवाना पुलिस थाने के न जाने कितने चक्कर लगाए हिंदू से अपने एकलौते पुत्र की लाश चलाने को भी नहीं मिली । इस तरह के परिस्थितियों से या हिंसक आंदोलन आम जनता की सहानुभूति प्राप्त करते हो गए । गहरे तक पेट भर रहा था । बुद्धिजीवियों का भी खुले आम समर्थन मिल रहा था । ये बुद्धिजीवी वातानुकूलित कमरों में बैठकर योजनाएं बनाते सहानुभूति बटोर कर देश विदेश से इस आंदोलन के लिए धन मुहैया कराते हैं । कुल मिलाकर इस आंदोलन की ताकत बढती जा रही थी । पर्दे के पीछे से मास्टरमाइंड योजनाओं को प्रस्तुत करता और राजा मजूमदार मुखिया प्रधान अपने संगठनों के साथ इनको अमलीजामा पहनाता भारत के विभिन्न प्रांतों के आने की जिलों में या आंदोलन जडे जमा चुका था । ऍम भारतीय आकांक्षाएं और परिस्थितियां उद्दीप्त कर रही थी वो इसलिए हर युग में आन्दोलन आवश्यक हैं । जिन आंदोलनों के साथ आध्यात्मकि शक्ति नहीं वो किसी एक व्यक्ति को भी बदलने में सहायक नहीं होते हैं किंतु आध्यात्मिक शक्ति के साथ उपस् थित आंदोलन युग धारा को मोडने सकने में समर्थ होते हैं हूँ ।

Part 14

अपने आंदोलन की सफलता के पश्चात सेवा ने मीडिया से लेकर पुलिस तक अपने सभी सहयोगी को धन्यवाद दिया । आभार पत्र भी भेज जो तो अनेक समाजसेवी संगठन आंदोलन में इसके साथ थे लेकिन मानव मन डर्मिशन वहाँ अनुव्रत सेवाभारती ने विशेष मदद की थी । शिवाय हम समझे उन्हें भी धन्यवाद कहने पहुंचे । अनुव्रत सेवाभारती के अध्यक्ष अब्दुल्लाह साहब शिवास है बहुत प्रभावित थे । उन्होंने कहा देखिए धन्यवाद की कोई बात नहीं है यह तो हमारा करता था समाज के विकृतियों को सुधारने का हमने बीडा उठाया हुआ है और औपचारिकताओं में हमारा विश्वास नहीं है । अगर आप मुझे बता के हैं तो हमारे साथ छोडिए हमारे संग समाजसेवा करिए । शिवा के पास अपनी पढाई टीवेशन और कॉलेज की गतिविधियों के अलावा समय बच्चा ही नहीं था जो एनजीओ की मदद करता हूँ और इस बार बीकॉम ऑनर्स का अंतिम वर्ष था । कैसे होगा सब कुछ नहीं सोचने लगा किन्तु राठौर सजा केस में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए शिवाम् मना नहीं कर सका । अध्यक्ष ने स्वयं कहा की हम आपकी स्थिति बेहतर समझते हैं । बता जहाँ आपकी वास्तविक आवश्यकता होगी वहीं पर आपको आमंत्रित करेंगे वो लेकिन तब आप अवश्य आए का अपनी स्वीकारोक्ति प्रधान करे । शिवा एवं सुजेश वहाँ से निकल गए । तमाम व्यस्तताओं के बावजूद सेवानियम सुमित्रा को ट्यूशन पढाने जाता । इससे सुचित्रा का शैक्षणिक स्तर भी निरंतर घटता जा रहा था । सुचित्र सारी गतिविधियों के बारे में शिवा से पूछती हूँ । रुचि से सुनती उसने कई बार अपनी तरफ से किसी सेवा का भी शारा किया, लेकिन शिवा जैसा आधार शिवा कही मंत्री की पुत्री से आर्थिक एवं राजनीतिक मदद कैसे ले सकता था? अनुव्रत सेवाभारती के पार्ट काजी ने इस शुक्रवार आयोजित सर्वशिक्षा अभियान में मुख्य वक्ता के रूप में शिवा को आमंत्रित किया । उन्होंने कहा तो नहीं आना है अपनी अभिव्यक्ति देकर, चाहे तुम तुरंत चले जाना, बर्फ आना जरूर शुक्रवार को नियत समय पर पाठ का, जी द्वारा दिखाए हुए पत्ते पर शिवा पहुंचाऊं । उसने देखा झुंड के झुंड लोग वहाँ बैठे थे । सब के साथ जो गी झोपडी वाले समाज का वंचित वर्ग जिन हैं, जिन्हें ठीक से दो वक्त रोटी भी पूरी नसीब नहीं होती, उनसे शिक्षा की बात कैसे की जाए । अपने मन को मजबूत कर शिवा ने बोलना प्रारम्भ किया । सेवा भारती के पदाधिकारीगण एवं आजाद भारत के निवासियों हमें गर्व है कि हम स्वतंत्र देश के निवासी है तो यहाँ के संविधान में हमें शिक्षा का मौलिक अधिकार दिया है । भारत के प्रत्येक नागरिक को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है । आप इससे वंचित क्यों? आप सोचते होंगे कि हम शिक्षा ग्रहण करने चले जाएंगे तो दो जो उनकी रोटियाँ की व्यवस्था कैसे होंगी । महानुभावों शिक्षित होकर आपको जी की बेहतर व्यवस्था कर पाएंगे । साठ में अपना जीवन भी उन्नत बना पाएंगे । सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान चला रखा है तो और शिक्षा अभियान चला रखा है । शिक्षा का अधिकार कानून हाल भी बन गया है । छह से चौदह वर्ष तक के हर बच्चे को शिक्षा नहीं नहीं होगी । भाइयों में देख रहा हूँ कि हर सैकडों ऐसे मासूम है जो आपने खेलने पडने के दिनों में दुनियादारी के बोझ तले दबकर रहे गए । स्कूल जाने के बजाय उनका पूरा दिन दो जो उनकी रोटियाँ जुटाने की मशक्कत में ही गुजर जाता है । शिक्षा के सारे अभियान भी आप जैसे लोगों के आगे लाचार हैं परन्तु अब समय आ गया है । जागो बंद हो जादू अभिभावक स्वयं काम करने की आदत डालें । मासूम बच्चों से भीख मंगवाना बेगार कराना छोडे बहुत ही आसान नहीं है ना । इसके लिए भी एक अभियान की आवश्यकता है । तभी हम मासूमों का बचपन बचा पाएंगे । उन्हें प्राथमिक स्कूली शिक्षा दिला पाएंगे । जयहिन्द ऍम में ये कहना चाहूंगा इंसान को इंसानियत से काटा है । सर्वशिक्षा अभियान वृद्धियां विवेक का चिराग चलता है । सर्वशिक्षा अभियान प्रशिक्षण के साथ ही जुडा होता है । प्रयोग का उपक्रम रोजगार से सुखी जीवन बनाता है । सर्वशिक्षा अभियान मेरी शुभकामनाएं हैं कि यहाँ का प्रत्येक बच्चा आवश्यक स्कूल जाकर शिक्षा ग्रहण करें । साक्षर बने ऍम क्योँकि कडकडाहट से आसमान गूंज उठा पाठकर जीने शिवा का आभार प्रकट किया तो भारत की ओर हो गया । सेवाभारती के कार्यकर्ता यहाँ आपको मुख्य सडक तक छोडने आए । अगले हफ्ते अनुव्रत सेवाभारती वालों ने चुनाव वृद्धि अभियान आयोजित किया । उस समय भी शिवा की सेवाएं नहीं । उसने व्यवस्थित एवं योजना बद्ध तरीके से चुनाव शुद्धि अभियान के बीस हजार पर्चे एक दिन में बटवारा दिए । मतदान केंद्र में सार्वजनिक संस्थानों पर मतदाता ध्यान नहीं ऐसे जाग्रति मोलक पोस्टर लगवा दी है । सेवा भारती वालों को आश्वासन दे दिया हूँ कि जब चुनाव नजदीक आ जाएंगे तब मैं अपने साथियों के साथ घोष ठियां, कर्नाटक सभाएं आजी का काम युद्धस्तर पर चलाकर उनकी मदद करेगा । शिवानी वास्तव में फिर उनकी मदद की । इसका परिणाम भी बहुत अच्छा रहा हूँ । अब्दुल्ला साहब ने शुक्रिया अदा करते हैं तो शिवा को अपने कार्यालय में आमंत्रित किया शिव आवाज हो जाए । जब वहाँ पहुंचे तो बेहद स्वागत सत्कार हुआ हूँ । औपचारिकताओं की समाप्ति के पचास साठ फीट का दौड चल निकला हूँ । शिवा ने पूछा ये अनुव्रत क्या है? तब पाठक जी ने बताया कि देश की राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही नैतिक क्रांति के शंखनाद से अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात राष्ट्रसंत आचार्य तुलसी नेशन उन्नीस सौ उनचास नहीं किया । अनुव्रत की इस पृष्ठभूमि ने शिवा की उत्सुकता और बढा दें । उसने अब्दुल्ला साहब से इस विषय में अधिक जानकारी उपलब्ध करने का अनुरोध किया । अब्दुल्ला साहब ने शिवा के जिज्ञासा को समाहित करते हुआ कहा हूँ कि लोग हिट आए । आयोजित इस महायज्ञ के लिए अनुव्रत आचार संहिता भी बनी है । इसके ग्यारह नहीं हम मानव मास्टर के लिए बेहद उपयोगी हैं । ये नियम इस प्रकार है मैं किसी निर्णय, अपराध प्राणी का संकल्पपूर्वक वध नहीं करूंगा, आत्महत्या नहीं करूंगा, भ्रूण हत्या नहीं करूंगा, मैं आक्रमण नहीं करूंगा, आक्रमण नीति का समर्थन नहीं करूंगा । मैं हिंसात्मक, तोड फोड, मूलत प्रवृत्तियों में भाग नहीं लूंगा । मैं मानवीय एकता में विश्वास करूंगा । चाहती रंग के आधार पर किसी को उंच नीच नहीं मानूंगा । किसी को अस्पष्ट नहीं मानूंगा । मैं धार्मिक सहिष्णुता रखूंगा, साम्प्रदायिक उत्तेजना नहीं फैलाऊंगा । मैं व्यवसाय और व्यवहार में प्रमाणिक रहूंगा । मैं ब्रह्मचार्य की साधना और संग्रह सीमा का निर्धारण करूंगा । मैं चुनाव के संबंध में अनैतिक आचरण नहीं करूंगा । मैं सामाजिक कुरीतियों के प्रश्न नहीं दूंगा । मैं टेंशन मुक्त जीवन जी होंगा । मार टक वान, नशीले पदार्थों, शराब, गांजा, हेरोइन, भांग, तंबाकू आदि का सेवन नहीं करूंगा हूँ । मैं पर्यावरण की समस्या के प्रति जागरूक रहूंगा । भरे भरे बेर नहीं काटूंगा । पानी का अपव्यय नहीं करूंगा । कैसे लगे ये नियम तो मैं विवाह कहते हुए अब्दुल्ला साहब ने अपनी बात समाप्त की । लगता है काफी दूर दृष्टि से तैयार किए गए हैं । नियम हूँ निश्चित रूप से अनुव्रत आचार संहिता युवाओं की भी मार्गदर्शक होगी, ऐसा मेरा मानना है । अब तो लास्ट साहब अब अनुव्रत सेवाभारती के लिए मैं अधिक से अधिक समय देने का प्रयास करूंगा । शिवा बोला तो सुजा जो इतने समय से चुपचाप सारा वार्ता लाभ सुन रहा था । बेहद संजीता स्वर में बोला ॅ आपकी बातों को सुनकर तो ऐसा लगता है की अनुग्रह तो मानवीय गुणों का भंडार ॅ । इसके माध्यम से मानवता की सच्चाई सेवा हो सकती है । शिवा के संग मैं भी अपनी संस्थानों, व्रत सेवा भारतीय से जुडना चाहता हूँ । आप तुलना की बाट का जी एवं उपस् थित सभी लोगों के चेहरों पर स्निग्ध मुस्कान छा गई । अनुव्रत सेवाभारती ऐसे कमर कार्यकर्ताओं को पाकर बेहद पसंद नहीं भी । वर्तमान में उनका एक मुख्य मुद्दा नशा मुक्ति अभियान भी था । ये दो रूपों में संचालित होता था हूँ तो बच्चों युवा एवं प्राण को सजेशन मुक्त रहने का बढ दिलवाना, दूसरा नशेडियों का नशा छोडा कर उन्हें जीवन की मुख्यधारा में लाना उनके परिवार की खुशहाली लौटाना था । अनुव्रत सेवाभारती की अद्भुत अभिव्यक्ति कौशल का अपने इस प्रोजेक्ट में भरपूर उपयोग करना चाहती थी । सेवा भारती के मोहम्मद अब्दुल्ला साहब ने भिजवा से पूछा हूँ शिवा क्या तुम किसी तरह का तंपा गोद बाद लेते हो? जर्दा, गुटखा, बीडी, सिगरेट, सिगार या ताडी, दारू राम इत्यादि? शिवा ने कहा सर, मैं मानव शरीर के लिए अनुपयोगी मानता हूँ । ये इंसान के स्वस्थ जीवन के लिए मिट नहीं । वो तो खतरनाक शत्रु हैं । ये धीरे धीरे इन्सान के पूरे जीवन को दीमक के रूप में समाप्त कर देते हैं । नशा स्वयं के नाश का प्रतीक है और समाज के पतन का कारण भी । मैं अक्सर सोचता हूँ कि नशे से आक्रांत और कुंठित प्रतिभाएं देश का हित कैसे साध सकती हैं? हटा लेना तो दूर मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता हूँ । अब्दुल्ला साहब को लगा हूँ सही निशाने पर बैठा है । वो बोले जब तुम्हारी ऐसी विचारधारा है तो तुम जीवन पर्याप्त के लिए फॅालो । किसी भी परिस्थिति में तो व्यसनों के धीमे जहर को नहीं अपना होगी वो? शिवा ने कहा क्यों नहीं? मैं आज से ही रेशन मुक्त जीवन जीने का संकल्प करता हूँ । अब्दुल्ल साहब ने गर्म लोहे पर चोट मारते हुए कहा खिला ऍन मुक्ति कार्यशाला में हम तुम्हारा सहयोग चाहते हैं । प्रथम तो तुम युवा वर्ग को प्रेरित करने वाली संगोष्ठियां आयोजित करने में हमारी मदद करो, क्या कर पाओगे हूँ? मैंने कहा क्यों नहीं? मैं इसी हफ्ते हमारे कॉलेज के ऑडिटोरियम में आपकी कार्यशाला लगवा सकता हूँ । फॅस के हमारे प्रोजेक्ट में इसी कार्यों का विद्यार्थियों की अंक तालिका में भी मूल्यांकन होता है । अच्छा विद्यार्थियों को इकट्ठा करने का जिम्मा हमारा अच्छे वक्ता, अनुभवी डॉक्टर तथा प्रतिभागियों के लिए सर्टिफिकेट वन नाश्ते की व्यवस्था का दायित्व आपका अंधे को केवल चाहिए । दो आंखें भारत ही नहीं, एशिया के सर्वश्रेष्ठ कॉमर्स कॉलेज में रेशन मुक्ति कार्यशाला आयोजन की योजना से ही अब्दुल्ला साहब की पांच खेल गई हूँ । उन्होंने सोचा कि इसी की सफलता में हमारा संगठन हमारी जान लगा देगा । शिवा से उसने कहा हूँ हफ्ते गुरुवार को दोपहर एक से दो बजे का समय तय कर लोग हम बहुत अच्छी तैयारी से आएंगे तो हमारे साथियों को अच्छा ही लगेगा । हाँ, विद्यार्थियों की अच्छी उपस् थिति आवश्य होनी चाहिए कि वह दूसरी मदद तुमसे चाहिए जो कि वर्षों से नशा करते आ रहे हैं । उनका नशा छुडवाने के लिए शिवानी कहा है । इस काम का मुझे कोई अनुभव नहीं । मुझे करना क्या होगा? अब्दुल्ला जी ने बताया हमें ऐसे व्यक्तियों की सूची बनाकर रखते हैं । कई तो शुरूआती दौर में है तो बस बराबर उनसे बातचीत की प्रेरणा है । काम चल जाता है । कुछ बहुत वर्षों से नशे की गिरफ्त में है । उनके स्नायुमंडल में नशा बढ गया है । उन्हें नशा मुक्ति केंद्रों में अच्छे चिकित्सकों की देखरेख में रखा गया है । इन्हीं लोगों के मनोबल को मजबूत करने में तुम जैसे प्रभावशाली वक्ता की सहायता चाहिए ऍम कर सोचा हूँ उसने स्वयं के वजन को टाॅक । उसकी आत्मा ने कहा शिवा बात आगे बढो है । तुम्हारी रूचि का सेवा कार्य हैं । उसने आँखे खोल का सिर हिलाकर अब्दुल्ला शाह को अपनी मौन स्वीकृति दे दी । गुरुवार को नशा मुक्ति कार्यशाला का सफल आयोजन हुआ । अनेक विद्यार्थियों ने नशा मुक्त रहने का रख लिया । कॉलेज के प्रिंसिपल मुख्य अतिथि थे । उन्होंने खुले दिल से अनुव्रत सेवाभारती ऍम सेवा की टीम की सराहना हूँ । दूसरे दिन और सदस् सेवाभारती के कार्यालय गए तो वहाँ अब्दुल्ला साहब के सामने एक बुजुर्ग बैठे थे । तीन ही दुबले पतले वर्षों के बीमार बढी हुई दिहाडी झुकी हुई काॅलोनी आवस्था उनके दुखी जीवन की कहानी बयां कर रही थीं । अब्दुल्ला साहब ने उनसे शिवा का परिचय करवाते हुए बताया ये हरी सेफ नहीं है । पिछले बारह वर्षों से शराब ने इनके स्वास्थ्य को निकाल लिया है । गत वर्ष से मैं के नशे ने रही सही कसर बोरी करदी हूँ । जमा पूंजी व्यापार, जेवर सब नशे की भेंट चढा गए । सिर्फ सिर छुपाने की एक छठी रह गई है, उसे भी है फिर भी रख देते हैं । तभी घर वालों ने इनके अत्याचारों से तंग आकर इन्हें नशा मुक्ति केंद्र छोडकर राहत की सांस ली । छह महीनों सही है युवराज सेवाभारती की देख रेख मैं पूरी तरह से शराब बस मैं को तिलांजलि दे चुके हैं । किंतु इनका परिवार ने स्वीकार नहीं को तैयार नहीं हूँ । अगर ये स्थिति यथावत बनी नहीं तो इन्हें पुराना शराब के गम में डूबने से कोई नहीं रोक सकता कहाँ इनके अपने घर में सम्मानजनक स्थान दिलाने की जिम्मेदारी तुम लो शिवा शायद ये हमें कैसे कर सकता हूँ? शिमला बोला कॅश हमारी व्यवहारकुशलता, तुम्हारी कार्यशैली, वक्तृत्व कलावा सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता से बहुत प्रभावित हूँ । अगर ही नया जीवन मिल सकता है तो सिर्फ तुम्हारे प्रायद्वीपों सेवा, तुम्हारी स्वीकृति या अस्वीकृति पर इनका भविष्य निर्भर है । ऍम के अलावा कोई विकल्प भी नहीं बचा । ऍम पहुंचाना ऍम अब्दुल्ला साहब ने कहा अगर तुम्हारे पास समय हो तो अभी इसी वक्त शिवम ने घडी देखेंगे । दिन की एक बजे थे । उसने उनके घर का पता मांगा और देखा और जिन्हें पुरी निर्धारित दो घंटे आने जाने में लगने थे । उसने मुझसे पूछा हूँ बोले तो कॅश नहीं कहा नहीं की और पूछ पूछ चलो अभी चलते ॅ जी को लेकर दोनों साथ ही एक नए सफर बारे चल पडे थे ।

Part 15

ॅ पांच घंटे में ये तीनों जनकपुरी पहुंच गए हरी स्टेज का । जी स्कूल से भागकर आए बच्चे की तरह उनके पीछे हो छिपाए चल रहे थे । उस ने उनसे पता पूछा और पहुंच गए मकान नंबर भी । एक सौ फॅमिली दरवाजे की घंटी बजाई । ऍम अंदर से मधुर आवाज आई हूँ । ऍम मैं मंगलसिंह शिवा बोला ऍम मंगलसिंह अंदर से पुना उसी आपने बोझा हूॅं दरवाजा खोल लेंगे । तभी तो पता चलेगा ना । इतना अवश्य निश्चित कर लें कि हम आपके दोस्त है दुश्मन नहीं । ये बात बोला इस बात पर तुरंत दरवाजा खोल गया । चेहरे पर गुलाबी रंग की आभा तीखे नाॅक हरे रंग की आंखों वाली पे ज्यादा आकर्षक युवती दरवाजे पर खडी थी । विवादों से देख पाल के जब गाना ही भूल गया । यही स्थिति कन्या की थी । है फीट का गोरा चिट्टा तेजस्वी नौजवान दोनों की हालत देख सुयश ने स्थिति संभाली । ऍम ये शिवमंगलसिंह मैं हो सुजा की अमन गिरा सकते हैं । सम्मोहित हुई सी कन्या ने एक तरफ हो कर रहा हूँ छोडते हुए कहा हाँ क्यों नहीं आई? एक रुपया बैठी है सामने कक्ष की ओर पहले चली बैठक का साफ सुथरा था । बेंड की चार कुर्सियों और एक महज रखी थी एक तरफ यार पाई थी सामने वाली दीवार पर राधा कृष्ण का कॅश दूसरी ओर दीवार पर गडी दो बजे का समय दिखा रही थी । पीछे पीछे भरी सेफ रजिस्टर झुकाया आ रहे थे । युवती की आंखों में एक झड के लिए जमा कराई । दूसरे शहर ही विषाद की रेखाएं उभर नहीं पि ऍफ उनके बोलने से पहले ही शिवा बोल पडा हम अनुव्रत सेवाभारती एनजीओ से आए आप ने केंद्र हैं अब आपके पिता जी कभी भी नहीं रे पदार्थों का सेवन नहीं करेंगे गई युवती ने तल्खी से पूछा आपके पास इसकी क्या गारंटी है? तो देखिए मैं अभी आपके सामने खडा हूँ । अगले पल ही इस शरीर में प्राण होंगे इसकी क्या गारंटी है? क्या गारंटी तो उस अध्यक्ष अलौकिक व्यक्ति की है जो हमें आप बस में किसी नियमित से मिला रही अध्यात्मिक शक्ति का संदेश है कि आपके पिताजी को आबाद की सेवा, सम्मान, सहानुभूति, संवेदना वा विश्वास चाहिए उसके बाद भी कभी आप की ओर कदम बढाएंगे तो मुझे खबर करियेगा तो इन की खबर मैं लूंगा । एक लिखित पर्ची उसकी ओर बढाते हुए कहा तो ये मेरा पडता है और फोन नंबर भी कभी भी आवश्यकता पढेंगे तो बे झिझक याद कर लीजिए का वैसे डर से निकला तो मैं खुदी में लूंगा काम चले की आपकी माता जी से मुलाकात हो सकती है । बेटा जी के काम में माता जी की हालत काफी नाजुक है की छूट गई है । आप क्या है तो मिलने शिवाना सोचा युवती के पीछे दूसरे कक्ष में आए एक बेहद शाली ऍम मिटा की प्रतिमूर्ति महिला ज्यादा रोडे चारपाई पर लेटी थी जिन्हें देखकर उठ बैठी और बोली ये ऍम मांझी नहीं वो शिवमंगलसिंह और ये मेरा मेटर सो जाऊं वहाँ कमजोर सफर में बोल रही हूँ धन्यभागी है मेरे जो आज शिव और मंगल एक साथ मेरे द्वारा आॅक्टा है । अब मेरे पाप कर्मों की काॅपी गई ऍम बेटे शिवाभाई ऍम हुए और बोले माजी हम अनुव्रत सेवाभारती से आए हैं । ये नाम सुनते ही मांझी की आंखें उत्सुकता फैल गई । शिव आगे बोला हम हमारी सेफ जी को लेकर यहाँ आए हैं । उन्होंने दो व्यसनों को हमेशा के लिए छोड दिया है । अब आपका सम्बल नहीं । हवा विश्वास ही इनमें नवजीवन का संचार करेगा । हाँ, कुछ नहीं बोली । अपलक उस देवदूत सरीखे कुमार को देखती नहीं और आशीर्वाद की मुद्रा में हाथ उठा दिया । बेटी से इशारे से बोली वो कुछ खिलाफ मिलाकर भेजना । उसने चाय पानी के लिए पूछा लेकिन युवकों ने इंकार में सिर हिला दिया । दोनों वहाँ से रवाना होने का वो घट हुआ है । युवती को लगा जैसे उसके दिल का कोई कोना खाली हो गया है तो कोई अपना बहुत दूर जा रहा है, उससे रहा नहीं । क्या बोली कृत्या एक बार आपको ना पिताजी को समझा दें कि नशा करके हमें परेशान ना करें । शिवा पुना हरिसेनगंज जी के पास आया और बोला ऍम समझाते हैं । फिर भी मैं कहना चाहूंगा कि जिस व्यक्ति, परिवार, समाज या राष्ट्र में शराब पीने का नशा लग जाता है, वहाँ बहुमुखी बटन का रास्ता खुल जाता है । आदमी को भी जान करने वाली है । शराब वास्तव में शहर के सामान है । ये मनुष्य को राक्षस बना देती है और अंधकार में ले जाती है । कुल मिलाकर शराब बेड में ऐसा बंधन है जिससे व्यक्ति अपने जीवन तथा परिवार को दुःखमय बना लेता है । अब तो भुक्तभोगी है और देखिए इतनी अच्छी पत्नी और पुत्री भाग्यवान । कोई प्राप्त होती ऍम देवियों का अनादर ना करें । इनके सामने मुझसे वादा करिए । चाहे मौत भी सामने आए । आप शराब नहीं पियेंगे भरी सेवा के आगे बढे । युवती के सिर पर हाथ रखकर बोले आज तक मैंने कभी कोई कसर नहीं आएगा । आज इस बच्चे की कसम मैं मर जाऊंगा पर कभी नहीं या नहीं करूंगा । सब संतुष्ट हो गए । युवती की और उन्मुख होते हुए शिवा ने पूछा हूँ क्या मैं आप का नाम जान सकता हूँ? लडकी ने सब कुछ आते हुए कहा मुझे ख्याल नहीं कहते हैं आप । कृपया पिताजी को जरूर देखने आते रहेगा । सेवानी सहमती में से मिलाया और दोनों वहाँ से निकाल कहे । छात्रावास पहुंचकर उसने घडी देखी तो टाइम बहुत हो चुका था । वो हाथ धोकर भोजन के रूप में बस दो विस्फोट ली है और ट्यूशन पढाने निकल गया क्योंकि पूरा खाना खाने जितना समय ही नहीं था । नियत समय पर मंत्री जी के निवास पहुंच गया । आज सचित्रा एक उपन्यास पढ रही थी । सेवा ने देखा । उसका नाम दस सीक्रेट था । शिवम को देखते ही सुचित्रा बजकर चाहकर खडी हो गईं । शिवा बोला ऍम चुनाव के प्रश्न का जवाब न देते हुए प्रतिप्रश्न करते हुए कितना बोली ऍम, कई बार मैं कई विचित्र घटनाएं देखती हूँ । पचास साठ वर्ष तक जिस व्यक्ति का जीवन यह ही रहा हूँ । जिस व्यक्ति का पूर्व अर्थपूर्ण तेजस्वी रहा वही व्यक्ति जीवन के उत्तरार्ध में पतित हो गया नष्ट हो गया मुझे आश्चर्य होता है कि ये हुआ जैसे है । मैं सोचती हूँ कि जो व्यक्ति पचास साठ वर्ष तक यशस्वी और तेजस्वी जीवन ही लेता है, मैं आगे के वर्षों में बंधन की ओर कैसे जा सकता है? शिवा कुछ देर गंभीर मुद्रा में सोचता रहा हूँ । फिर बोला ये घटनाएं अकारण नहीं होती है । ऐसा घटित होने के पीछे भी सूक्ष्म कारण आवश्य होते हैं । अगर हम गहराई से सोचे तो ये तथ्य स्पष्ट होगा कि कभी भी बीच बोया गया था । उसका प्राइस नहीं हुआ तो ऍम दिया । घटना घटित हो गई वो धारण का जिस झंड मन में राग यानी मौका संस्कार पैदा हुआ । जिस जगह दिवेश का संस्कार उत्पन्न हुआ उसे उसे समय तो डाला । प्रायश्चित कर लिया तो वह बताएगा नहीं । प्रायश्चित नहीं होगा तो बीच को कालांतर में अंकुरित हो कर रखे बनने का अवसर मिल जाएगा । उस रखके जडे जम बन जाएंगे । फल लग जाएंगे तो उन फलों को भुगतने के लिए हमें बातें होना पडेगा । इस दार्शनिक चर्चा में स्वच्छता को आज आनंद की अनुभूति हो रही थी हूँ । क्या इन बीजों की बुआई को रोक पाना इंसान के वश में है तो आप क्यों नहीं बडे बडे संत महात्माओं ने अपनी इंद्रियों को वश में क्या है? वहाँ मैं बाहर हूँ तो क्या है? पर क्या हम आदमी ऐसा करने में सक्षम हो सकते हैं? शिवा को भी आज की चर्चा बडी रूचिकर लग रही थीं । उसकी वाणी में सरस्वती नेतृत् हो रही थीं । गंभीर स्वर में वह बोला वो हो क्यों नहीं? ये आध्यात्म का बहुत बडा रहते हैं । हम उस ठंड के प्रति जागरूक रहे जब राग और द्वेष की बुआई होती है । शरीर में दो केंद्र हैं । नीचे का स्थान काम केंद्र फास्ट ना केंद्र है और ऊपर मस्तिष्क ज्ञान केंद्र है हूँ । हमारे शरीर में ऊर्जा का एक ही प्रवाह है । जहां मान जाएगा, वहीं ऊर्जा जाएगी तो वही प्राणशक्ति बन जाएगी । हमारी ऊर्जा का जिसे सिंचन मिलेगा वो फलेगा बोलेगा, बढेगा और पुष्ट होगा । हमारा लॉक एक्जिट, सादा कामना को पुष्ट करता है । हम केंद्र को सिंचन देता है, बलवान बनाता है । जहाँ तुम भलीभांति समझ लो कि मनुष्य के जीवन में जितना कामना का तनाव है, उतना किसी का नहीं है । यह मनोवैज्ञानिक दृष्टि से निरंतर रहने वाला तनाव है । वो जब भी हमारी चेतना काम केंद्र की ओर बढने लगती है तो शहर ही ज्ञान केंद्र की शक्तियां होने लगती है । सुचित्रा ॅ आपको दर्शनशास्त्र का गहरा ज्ञान है । कृप्या मेरी जिज्ञासा का वैश्य समाधान करें । क्या ज्ञान द्वारा इस प्रक्रिया को उलटना संभव है? क्या हमारी चेतना का उधर वहाँ रोहन हो सकता है? वहाँ वही गौर से सुनो, सचित्रा साधना से ही उलटना संभव है । जो साधक जो व्यक्ति अपने ज्ञान का विकास चाहता है, निर्मलता चाहता है, उसे अपनी चेतना के प्रवाह को मोडना होगा । वो हरिद्धार मन को ऊपर की ओर ज्ञान केंद्र के पास ले जाना होगा हूँ । अगर हमारा मन ज्ञान केंद्र में लग गया, साधना में रह गया तो कामना के राहत दुवेश के बीच पहले तो पैदा ही नहीं होंगे और दूसरे अगर हुए भी तो स्वयं ही डाक्टर हो जाएंगे । सुचित्रा मंत्र मुग्ध होकर सुन रही थीं तो तुरंत ही वर्तमान में लौटी है । आप जैसा ग्रुप आकार में तो धन्य हो गई । ये मेरा सौभाग्य है कि मैं रुचि बोले थे क्या सुशिष्या को अध्ययन कराने का तो अवसर मुझे प्राप्त हुआ । आजकल तो अपनी विषय सामग्री की पार्टी पुस्तकें भी विद्यार्थी नहीं पढना चाहते । इस गहन ज्ञान पानी की उत्कंठा तो जिलों में होती है । धन्यवाद ऍम क्यों मेरा मन करता है । आप बोलते रहे मैं सुनती रहूँ । अन्य पार्ट विषयों में भी कोई समस्या है तो पूछ लो आज मुझे थोडा जल्दी जाना है तो क्यों? ॅ सेवाभारती से भरी सेवका जी को घर छोडने का किस्सा बताया । ये भी बताया कि उनकी बेटी शालिनी ने किस प्रकार मावा घर का समुचित प्रबंधन किया हुआ है तो चित्र ने पुनः पूछा हूँ आपको सेवा कार्य में इतना क्या आनंद आता है की आपकी भूख प्यास भी हवा हो जाती है तो चित्र मैं कोई देवदूत नहीं हूँ । इंसान हूँ तो भूख के आज तो समय पर अपना घंटा बजती है पर जब मैं किसी को मुसीबत में देखता हूँ तो मेरी आठवां खडा उठती है तो मुझे लगता है मेरा ही अपना मुझे सहायता हेतु पुकार रहा है । फिर वह से रहा नहीं जाता हूँ । आपके हृदय की पवित्र संवेदनाएं हैं जो प्रत्येक मानव की विपत्ति से आपको जोड देती है । हाँ सुचित्रा मैं सामने वाले व्यक्ति का संकट, उसका दुख हुआ । उसका परिणाम सोचकर सिहर उठता हूँ । कभी कभी सोचता हूँ की मौत के मुंह में पहुंचे व्यक्ति को भी अगर उचित समय पर सहायता मिल जाए तो संभव बताया उसके प्राण पढ सकते हैं । सर ये तो परिस्थितियों पर निर्भर करता है । अगर स्थितियां बेहद प्रतिकूल हूँ तो बचाव करता भी मौत के मुंबई जा सकता है । आज के समय में तो किसी को पे पति से बचाना स्वयं को आपत्ति में डालना है । कभी भी जान को जोखिम हो सकता है । हाँ सुचित्रा तुम्हारे कथन की सत्यता को आंशिक रूप से मैंने भी महसूस किया है । लेकिन मुझे लगता है कि कोई देवशक्ति मुझे ऐसे सेवा कार्य के लिए प्रेरित करती है और वही मेरी रक्षा करती है । सुचित्रा ने मनी मनी शिवा को अपने हृदय कमाल की गहराइयों में बचा लिया था । उसे शिवा बहुत अच्छा लगता हूँ । मैं उसकी ओवर खींची चली जा रही थी । हूँ जब तक नहीं आता ऍसे उसका इंतजार करते हैं । उसके पास बैठा हूँ । उनसे बात करना बहुत अच्छा लगता हूँ । अगर लिखते पढते समय हल्का सा भी शिवा उसे झूम जाता तो उसे शरीर में अजीब ही झनझनाहट महसूस होती हूँ । मैं अकेली बैठी रहती हूँ तो भी शिवा के बारे में सोचते है । नहीं आंखे बंद करके जब है शिवा को धो ले के देश में देखती तो हमको दुलानी के रूप में सोच कर शर्मा जा रही हूँ । मैं शिवा की साज सुखद भविष्य की कल्पना कर के ही रोमांचित हो जाती हूँ, आता हूँ । मैं नहीं चाहती थी कि सिर्फ आप पर दिल मात्र भी आना चाहिए हूँ । इसीलिए ब्राइन प्रपंचों से उस से दूर रहने को प्रेरित करना चाहती थी । उसने बातचीत का रुख मोडते हुए कहा, आप इतने प्रतिष्ठित कॉलेज के स्नातक हैं । आपकी स्वयं की कुछ महात्वाकांक्षाएं होंगी, वहाँ क्यों नहीं? अब विद्यार्थियों की तरह मैंने भी परिसर नियुक्ति ॅ प्लेसमेंट में पंजीकरण करवाया है । आप के माँ बाप भी तो आप से उम्मीद लगाए होंगे । हूँ तो सभी की उम्मीद करते हैं कि उनका बेटा का बडा होकर उन का सहारा बनेगा । वैसे ही मेरी माँ भी आठ लगाए बैठी हैं । घर में चार जी बहु लाने की पिताजी आठ लगाए हैं शानदार आर्थिक सहयोगी । इसीलिए ही मैं सब कंपनियों के साथ साथ कार में भी बैठा हूँ कि माता पिता जी की हसरतें पूरी कर सकते हो । लेकिन सच कहूँ तो चित्र मुझे सच्चे आनंद की अनुभूति सेवा कार्य में ही होती है तो मैं उसमें सुबह बहुत बोलता रहता हूँ । मैं चाहता हूँ सब कुछ अच्छा हो, कुछ मंगल हो, कोई भी भूखा ना तो सब शिक्षित हूँ मेरा समाज मेरा देश तरक्की करें । सचित्रा सोचने लगी जिस उम्र में युवक प्यार मोहब्बत एवं विवाह के आप टिकता है । ये समाजवाद देश की चिंता करता हैं ये लोग । उत्तर पुरुष इस धरती पर कहाँ से अवतार हुआ है है । इसी उधेडबुन में धूप भी थी कि इतने में शिवा की आवाज कानों में पडी ऍम चलता हूँ तो प्राइवसी सुचित्रा हाथ हिलाती रह गईं । उसका दिल चेहरा था, वहाँ इतनी जल्दी क्यों जा रहा है? काश वह रोक पाएं उसकी दबानी तालू से चिपक नहीं हो क्या? ऍम वहीं हो गए तो पूरा शरीर सुन रहे गया । बस उसके कानों में शिवा के ये शब्द अनुगूंजित हो रहे थे । मेरा समाज मेरा देश खूब ही करें ।

Part 16

देश सेवा है तो कुछ राजनेता जनादेश के आधार पर संसद में पहुंचते हैं, जन आकांक्षाओं को समझते हैं । उन्हें पूरा करने का संकल्प समझौते हैं और संकल्प पूर्ति के लिए निरंतर पुरूषार्थ में संगठन रहते हैं । जहाँ ऐसे राजनेताओं की जागृति देश को स्वर्ण भविष्य देख सकती है वहीं कुछ निष्क्रिय राजनेताओं की सुषुप्ति देश को सैकडों साल पीछे ढकेल सकती है । जातिवाद स्वार्थ गार्ड और अर्थवाद से संस्कृत होकर राजनीति वर्तमान को बदनाम कर देती है और राष्ट्र को विनाश के गर्त में डाल देती है । मास्टरमाइंड की योजनाओं से और राजा मजूमदार मुखिया प्रधान के क्रियान्वयन से माओवादियों का प्रभाव लगातार बढ रहा था और नक्सलवादियों की इस भर्ती ताकत से स्थानीय राजनेता परीक्षित थे । प्रतिष्ठन ने रूप में व्यक्ति और सत्ता के लिए नक्सलवादियों की मदद लेते बदले में उन्हें सुरक्षावाद धन मुहैया करवाते हैं । कुछ राज्यों के वर्तमान बाद याने वर्तमान मुख्यमंत्री तक नक्सलियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया प्रदर्शित करते हैं । राजनीतिक दलों के नेता एवं नक्सली नेताओं की बैठकों की खबरें भी आए दिन सुनने को मिलती थी । यहाँ के प्राकृतिक संस्थानों से समृद्ध खनिज संपाद वाले इलाकों में मास्टरमाइंड ने माफिया के संग मिलकर योजना बद्ध तरीके से नक्सलियों को बढा दिया ताकि ये अठारह डालत सरकार की पहुंच से दूर उनके गिरफ्तार में रहे । पुलिस कार्यवाही होती । कुछ लोग मारे भी चाहते हो लेकिन वास्तविकता कुछ और होती । किसी विशेष पक्ष को लाभ पहुंचने के उद्देश्य से ही कार्यवाही होती । नेताओं के फायदे के लिए आदिवासियों को मरवाना भी बडी बात नहीं थी । हर संघर्ष में अंतर ऍम हार स्थानीय निवासियों की ही होती है । उधर अब नक्सली संगठनों में भी एकता नहीं नहीं । एक संगठन सशस्त्र गोरिल्ला बाल बन गया । पूरी तरह से हथियारों से लैस कारण हिंसा इसका खेल था । दूसरा संगठन शस्त्रशक्ति के बजाय सत्ता बाल को पाने को प्रमुखता देता । मास्टरमाइंड इन सारी स्थितियों को देख रहा था । परिस्थितियों को भाग रहा था । उसकी पकड मजबूत थी, जिससे वह थानांतरित नहीं होने देना चाहता था । निरंतर उसका चिंतन चल रहा था । कार्यकर्ता उसने राजा को स्पष्टता समझा दिया था कि सत्ता का केंद्र विकेंद्रित नहीं होगा, वही रहेगा हटा । जो नक्सली सरदार इसमें समाहित होने है तो तैयार है उन्हें समय दे दो, जो चुनौती पुलिस समाप्त कर दो । इस प्रकार आंतरिक संघर्ष में विजय के पश्चात राजा मजूमदार और उनके परामर्शक मास्टरमाइंड की ताकत और ज्यादा बढ गई थीं । परामर्शक का चेहरा किसी ने नहीं देखा था । दोनों से पहचानता नहीं था । उधर शिक्षित ऍन शील व्यवसाई सोमेश समाजसेवी के रूप में बहुत लोकप्रिय हो गया था । ब्राॅन ढंग थे । सर्वदास समाज सेवा हेतु तत्पर रहता हूँ । पहुँचता सबको पता था कि उस की राजनीतिक क्षेत्र में भी बहुत अच्छी पहुंच नहीं । मैं आदिवासियों से बहुत सहानुभूति रखता था । एक बार इस मामले में उसे जेल भी हो चुकी थी । फिर कोर्ट ने ये कहते हुए रिहाई प्रदान की थी किसी नक्सली सहित रखने से कोई नक्सली नहीं बन जाता हूँ । ठीक उसी प्रकार जैसे गांधीवादी सहित रखने से कोई महात्मा गांधी नहीं हो जाता हूँ ।

Part 17

मानवीय चेतना का । अब बुद्ध अनुव्रत का अभिप्रेत हैं । वास्तव में अनूप ॅ रोशनी है जिसमें कई पत्र भोलों ने अपना मार्ग पाया है, जिनके मार्ग में सघन अंधेरा या कोहरा था । मैं अनुव्रत के प्रकाश से झगडा हो गया था । खरीदते कहीं का कुशल शेम जाने के लिए शिवा के पास अनुव्रत सेवाभारती से पाठक जी का फोन आया ॅ अकेला ये जनकपुरी उनके घर चला गया । हरी सेव कर जी ने अपना वादा निभाया था शराब तो उन्होंने कहा छोड रखी थी अब काफी स्वस्थ लग रहे थे । वो अपना काम भी संभाल लिया था । दो पैसे घर में लाने लगे थे । उनकी पत्नी भी बोल देता है स्वास्थ्य शिवा को चाहे उन्होंने ही पिलाई । पारिवारिक सुख शांति का असर दिख रहा था वो शाली का रूप और भी निखर आया था । सब कुछ सही देखकर शिवा को आत्मसंतोष की अनुभूति हुई । ऍम बोलती थी आई है उसका भी शादी कर रही थी । यह है बहुत कुछ कहना चाहती है । अधरों पर संकोच का सेलोटेप लगा हुआ था । शिवा स्वयं शालनी के प्रति खींचता चला जा रहा था । नहीं भी राम रंग रूप कंपनी का आया फॅस की प्रतिमाह देखी थी । एक एक अंग साझे में धारा हुआ हूँ । वह अपने भीतर ही भीतर एक हलचल, एक अजीब सी उत्तेजना महसूस कर रहा था । उससे रहा नहीं गया सन्नाटा तोडते हुए उसने पांच प्रारंभ अब आपके पिताजी कैसे हैं? शालनी बोली पहले से काफी बेहतर है अब हमारा परिवार पेट खुशी है लेकिन शब्दों में आपका आधार व्यक्त करूँ फॅमिली की खनकती सी मगर आज का से होती हुई ऍम में उतर गई उसका मैं झं गलत हो गया न जाने की भावावेश में वह क्या बैठा हूँ कहीं अपनों को भी धन्यवाद किया जाता है हूँ गे रेस नहीं से सरोबार स्वर में फॅमिली आपके अपनत्व का एहसान हम कैसे चुकाएंगे? शिवा शालिनी के इन मासूम सवालों को क्या जवाब देता वॅाक नहीं कर पाया । ऍम निकल रहा था तो सोचा आपके पिताजी के हाल खबर लेता जाऊँ । पिता जी माता जी के साथ अपना भी खाया रखेगा तो अच्छा भी मैं चलता हूँ डालनी के दिल में जब सीखोगे उठ रही थी पर क्या करें किस आपसे कहे ऍसे तक उठ कर गईं और जाते हुए शिवा को ताकता का देखती रही । जब तक मैं आंखों से ओझल नहीं हो गया दिन रात के मिला हूँ पहला साल जो आज उन्हीं भी सीधी भवन भास्कर विश्राम है तो अस्ताचल में जा चुके थे । आंधी व बारिश जैसे माहौल से शाम के आगोश में रात का अंधेरा समझ आ गया था । इतने में उसे किसी लडकी की दबी दबी सी ठीक सुनाई थी । हो उसके अगले कानों पर विश्वास नहीं हुआ । उसने इधर उधर देखा परिसर के पास की सटी हुई सुनसान गली के मुहाने पर सेवा पहुंचा । ऍम अंधेरे में ज्यादा दूर का दर्शन नजर नहीं आ रहा था । उसने पीछे मुडकर, दाने दाने सब तरफ देखा । दूर दूर तक कोई नहीं था । इतने में पुणा दर्द भरी ठीक खानों को चींटी सी टकराई हूँ । केवल सामने की ओर तेज कदमों से बढा तभी एक जानी पहचानी आवाज कानों में आई ऍम वो तो जो लडकी पर अत्याचार करते हो दूसरी किसी शराबी क्या आज लगी क्यों तुझे क्या है? क्या तेरी बहन लगती है क्या आपने रास्ते फिर जानी पहचानी आवाज कडक कर बोली छोडो तो यहाँ से तो ऐसे नहीं मानेगा और ढाई ढाई एक साथ तीन गोलियों की आवाज परिसर का सन्नाटा तोडती चारों और ऍम फॅार कुछ पास पहुंचा तो देखा उसके कॉलेज के प्रोफेसर कुलकर्णी जमीन पर पडे हुए थे खून चलता हूँ उनकी डाॅ । खून बह रहा था । एक लफंगा एक हाथ में लडकी को दबोचे हुए था । उसके दूसरे हाथ में पिस्तौल थी । शिवा का खोल खाल उठा । उसने तुरंत लडकी को खींचकर अलग क्या? लफंगे ने हिवा पर भी गोली चला दी । शिवा की कनपटी को छूती सी गोली निकल गई लेकिन अगले मिशन सेवा ने उसके कलाई मरोड देखो । पिस्तौल उसके हाथ से गिर गयी । वो लौटकर जैसे ही उठाने दौडा उससे पूर्वी शिवा ने तुरंत स्टॉल उठाकर उस पार तांदी लफंगा घबराकर तेजी से सामने की । गली में दौड पडा । गोलियों की आवाज दीवार को पार कर सन्नाटे में पढ रही है जो पास ही गश्ती पुलिस को सुनाई दी । ऍसे उधर का पुलिस कांस्टेबल उसी दिशा में दौडे । लफंगे ने बचाओ बचाओ चलाना शुरू कर दिया । सेवा के हाथ में पिस्तौल देख पुलिस ने शिवा को काटल समझा । ऍम उसके हाथ से लेकर शिवा को पकड लिया । दूसरे हवलदार ने लफंगे को भी पकड लिया । पुलिस इंस्पेक्टर ने आगे आकर देखा कि एक व्यक्ति जमीन पर गिरा है । खून बह रायॅल उसके पास पहुंचे । वहाँ कुछ कहने को वो घट भी हुआ । लेकिन कुछ कह पाता इससे पूर्व ही उसके प्राण तो खेर उड गए । विभागो परिस्थिति की नजाकत का अहसास हो गया था । एक छड के लिए तो भीतर डाल खेल गया । तत्काल अपने आत्मविश्वास को इकट्ठा कर हिम्मत से बोला ऍम मुझे क्यों पकडा है मुझे छोडिये ये लफंगा एक लडकी के साथ अश्लील व्यवहार कर रहा था । प्रोफेसर साहब रोकने लगे तो इसमें गोलियाँ डाल दी । मैं तो इधर से गुजरते हुए लडकी की करोड तो कार प्रोफेसर साहब की ठीक सुनकर पहुंचा हूँ । मैं तो इस लडकी को बचाना चाहता था । इंस्पेक्टर ने पूछा कहाँ है लडकी शिवानी नहर पसारकर देखा लडकी कहीं नहीं देखी । उसे अपनी आंखों के आगे अंधेरा नजर आने लगा । लडकी घबराकर वहाँ से विपरीत दिशा में भागी । परिस्थिति का फायदा उठाकर वो थोडी दूर पर बने एक भवन में छूट गई । उन दोनों लडकों को पुलिस थाने गईं । जहाज का पंचनामा कर पोस्टमार्टम करने को भिजवा दिया हूँ । सारी परिस्थितियां शिवा के विरुद्ध थी । हत्या के लिए प्रयुक्त हथियार के साथ उसे घटनास्थल से गिरफ्तार किया गया था । प्रोफेसर साहब मर चुके थे । लडकी लापता थी । उसकी बेगुनाही का कोई सबूत वहाँ था ही नहीं । पुलिस ने दोनों को थाने में बंद कर दिया । पुलिस स्टेशन पहुंचने ही गृहमंत्रालय से सब इंस्पेक्टर के पास फोन आया हूँ । मैं कहा मंत्रालय से बोल रहा हूँ जिसे आपने अभी गिरफ्तार किया है । मोहम्मद हनी वो हमारे साहब के बेटे हैं । उन्हें तुरंत छोड दें । उनके विरुद्ध कोई एफआईआर दर्ज नहीं होनी चाहिए । ब्रिटिशकालीन डाॅॅ वाले अंदाज नहीं इंस्पेक्टर कह रहे थे ये ऍम अभी सब इंस्पेक्टर हवालात की तरफ आया तो शिवा को लगा शायद इसे सच्चाई पता चल गई है । मुझे यहाँ करने आ रहा है । मैं उठकर खडा हो गया हूँ । लेकिन यह क्या? हवालात का दरवाजा खुलवाकर लफंगे से सामान के साथ बोला आइए बाहर आपको कोई तकलीफ तो नहीं हुई । आपके पिता जी का फोन आया था आप जा सकते हैं तो बाहर आपकी गाडी खडी है । शिवा बोला ऍम साहब आप बहुत बडी भूल कर रहे हैं । एक काटल को छोड रहे हैं इसलिए दिनदाहाडे खुले आम प्रोफेसर कुलकर्णी गा खोल क्या है इस तरह से मार छोडी है सर बहुत बुरा होगा न जाने ये बाहर की दोनों का खून करेगा । ऍम अपना दोष इसके साथ पडता है । चौदह वर्ष जेल में चक्की पहुँचेगा तब अपने आप कल दिखाने आ जाएगी । हनी से बोला ऍम मान जा रहा था जबकि सच्चा बीमा अंडार समाज से ही सजा पा रहा था । शिवा हो काटो तो खून नहीं है तो किंग कर्तव्य में मोडसा सिर्फ अकडकर धर्म में से जमीन पर बैठ गया

Part 18

दूसरे दिन बिजली की तरह पूरे कॉलेज में खबर फैल गई । शिवा ने प्रोफेसर कुलकर्णी का कट कर दिया । जितने भी चुनाव है विश्वास करने को ही तैयार नहीं था । सूरज पूर्व से पश्चिम में निकल सकता था लेकिन शिवा ऐसा नहीं कर सकता हूँ । सेवा के दोस्तों के साथ कॉलेज के प्रिंसिपल स्वयं पुलिस स्टेशन गए । शिवा की रिहाई के लिए सब इंस्पेक्टर ने कहा हूँ शराब आए हैं आपका हम भी बहुत सम्मान करते हैं तो हमारे यहाँ कानून से बंधे हैं । जिस लडकी की इज्जत बचाते हैं तो है दुर्घटना घटती हैं । आप उस लडकी को लेकर आइए फिर तो हम कुछ मदद कर सकते हैं । फिलहाल हम शिवा को नहीं छोड सकते हैं । वो सब वहाँ से हो घर लौट गए क्या जैसे ही शिवा के माता पिता को शिवा की गिरफ्तारी का पता चला, सावित्री तुरंत मूर्छित हो गयी । पानी के छींटे डालने के जैसे जैसे हो शांत शिवा शिवा कहते कहते फिर अच्छे हो जाती हूँ । मातृत्व की ममता ऐसी विलक्षण चीज है कि वह अपनी संतति की सुरक्षा है तो प्रतिपल सतर्क रहती हैं । किसी भी परिस्थिति को सहन कर उसे पोषण देती है । वो अपने बच्चे के अनिष्ठ को झेल पाना वहाँ के लिए सर्वाधिक पुष्कार कार्य होता है । सावित्री के लिए शिवा से प्रिया कुछ भी नहीं था । उसके प्राण तो अब बस सेवा में पढते थे । उसकी हालत देखकर सत्यवान ने सावित्री के भाई के शव को फोन किया । वही केशव था जो अंडमाननिकोबार के होटल सिटी पैलेस में जूनियर मैनेजर था । जिसमें शिवा की एक बार सुनामी से प्राण रक्षा की थी और दूसरी बार सावित्री दीदी के आंचल में सौ का जीवन रक्षा की थी । उसने सारी परिस्थितियों को जाना समझा । फिर बोला मैं सिंगापुर में हूँ नहीं, कंपनी है तो छुट्टी तो नहीं ले सकता । जितनी जल्दी संभव होगा मैं दिल्ली आऊंगा हूँ । वहाँ रुपये पैसे चाहिए तो तुरंत खाते से ट्रांसफर हो सकता है । सत्यवान ने कहा अभी आवश्यकता नहीं जब होगा तो बता देंगे हूँ । केशव कुछ कुछ समय के अंतराल से दावेदारी दीदी से सहानुभूतिपूर्ण बातें कर लिया करता हूँ । साबित्री का मन थोडा हल्का हो जाता हूँ । अनुव्रत सेवाभारती वाले पाठक जी भी खेल पहुंचे लेकिन अपराध बेहद संघीय था । परिस्थिति जन्य साक्ष्य शिवा के विरुद्ध है । राजनीतिक दबाव ने शिवा को निकल नहीं दिया । अंधे कानून को सबूत नहीं मिले । समाज की एक निर्दोष प्रतिभाग जो अपनी जवानी देश पर कुर्बान करना चाहती थी । आज न्यायिक हिरासत में थी । कैसी विडंबना थी भ्रष्टाचार की सुरक्षा शिवा कौन निकल गई? उसके दोस्तों ने बहुत प्रयास की है पर कुछ भी नहीं कर पाए । शिवा को प्रोफेसर कुलकर्णी की हत्या के अंजाम में चौदह वर्ष कैद हो गईं । उसे खूंखार अपराधियों के साथ तिहाड जेल में रखा गया । शान्तिप्रिय शिवा ने सब्र से सब परिस्थितियों में संतुलन बनाए रखा हूँ । उसके चिंतन कीधारा प्रभावित होने लगी । वो सोचने लगा, वास्तव में भ्रष्टाचार में जीवन खपाना जीवित मृत्यु है । यह महामारी है ना हो संक्रामक रोग हूँ । इसके संक्रमण से ही समाज में नहीं नहीं, बुराइयां पैदा हो रही हैं । दूसरे शब्दों में कहा जाए तो भ्रष्टाचार देश का नाश करने वाला दीमक हैं । जब तक मानवीय मूल्यों को प्रतिष्ठापित नहीं किया जाएगा, वो भ्रष्टाचार को नहीं मिटाया जा सकता हूँ । बता आवश्यक है कि सदाचार के आधार विकसित हो । भ्रष्टाचार स्वता समाहित हो जाएगा, ऐसा सोच विचार करते हुए हैं । कारावास में सेवा कार्य करने की योजना बनाने लगा । वो प्रतिदिन दो घंटे अपनी साधना करता हूँ । नमस्कार महामंत्र जब ध्यान योग इत्यादि करता तथा इसके अलावा कैदियों को आसान पढाना, यहाँ वहाँ योग सिखाना । शाम को सबको प्रार्थना करवाना भी उसकी निचे चल गया बन गई । शिवान स्वामी जी के नाम से था । सिद्ध हो गया कैडियम के दादा पंद्रह हत्याओं और दस बलात्कार के संगीन जुर्म में सजा काट रहे कालिया कोई बात नागवार गुजर रही थी । वो अपनी दादागिरी से सबको रात में रखा था । कैदी किसी और की तरह चुके कालिया को बर्दाश्त था । उस दिन सा भोजन लेने के लिए लाइन में लगे हैं । पाकिस्तान ने एक मरियल सा बुड्ढा थी अपनी थाली ली है । खडा था, वजह से ही खाना खाने लगा । इतने में कालिया ने एक हाथ है पकडकर खींच लिया । ॅ तो खाकर क्या करेगा? आए तो तेरह से काम मैं जाऊंगा और उसे जोर से धक्का दे दिया । चलता हूँ शुरू । तुरंत बूढे को संभाला और बोला भाई भी खाने दो । ऍम लिया तो इसी अवसर की ताक में था वैसा । अब कैदियों के सामने उसके स्वामी जी की ऐसी तैसी करना चाहता था । खूंखार दरिंदा अपनी दरिंदगी पर उतर आए तो मानवता धारा जाती है । ऐसा ही तिहाड में हुआ हूँ के साथ लाठी से मारता हुआ खिला पडा बहुत डर लगता है स्वामी जी बनता है तेरी स्वामी गिरी अभी निकालता हूँ । उसने थाली के नुकीले किनारों से मार मारकर शिवा का खोल निकाल दिया हो । सारे कैदी सामने खडे तमाशा देख रहे थे । किसी को भी आगे आकर कालिया को रोकने की हिम्मत नहीं हुई । शिवानी भी स्वयं को बचाना चाहा पर इतने दिनों की कमजोरी और मानसिक टूटन भी थी । अदाह कालिया भारी पडा । शिवा नीचे गिर गया हूँ । अब तो कालिया लातों से, घूंसों से, थाली से और बुरी तरह मारता गया । जब तक मैं मरणासन्न नहीं हो गया, जवाब बुरी तरह से लहूलुहान होकर बेहोश हो गया । सुजाता के इस वाले राठौर साहब ने समाचार पत्र में शिवा के तिहाड जेल की सजा के बारे में पढा । उनसे सुजाता को छेडने वाले मुख्य किरदार शिवा ही था । उन के बदले का उचित अवसर था क्योंकि तिहाड का जेलर उनका परीक्षण था । उन्होंने शिवा के कष्ट बढाने के लिए जेलर को फोन कर दिया था । जेलर ने उसके घावों पर नमक मिर्च छड करा दिया । बुरी तरह छटपटाते हुए है सेवा चित्कार उठा । उसके रोम रोम में असहनीय वेदना हो रही थी । भयंकर दर्द से वह पुना बेहोश हो गया हूँ । मैं और कितनी यातना सहना शिव की किस्मत में लिखा था । जेल में शिवा से मिलने के लिए हरी सेवक ढीलें अनुव्रत सेवाभारती वालों से कह रखा था । जेलर की वजह से बडी मुश्किल से एक दिन मिलने का समय मिला । खरी सेवक जीरा शाहजनी दोनों गए । वहाँ कहा गया था कि कोई एक ही मिल पाएगा । उल्टा बाहरी सेवक जीने । शालिनी को अपने हाथ से पाठ्यपुस्तकों का ठेला देते हुए ये शिवा को दे देना और कहना कि सोचने दिया है इसकी शिवा पढाई करें ताकि उसका ये वर्ल्ड खराब ना हो । करीब पंद्रह मिनट के इंतजार के बाद शिवा को लाया गया । लाडी बढी हुई मुरझाई का आया । गोरे मुखडे पर फंसी हुई दो बडी बडी आंखें दिख रही थी । पूरे शरीर पर पट्टियां बन नहीं हुई थी । उसकी हालत एक साल नहीं था ही नहीं । शिवा ने देखा । शालिनी भी तपस्वी हो गई थी । काफी दुबली लग रही थी । दोनों एक दूसरे को देखते रहे । बस आंखों से भेजती रही । ऍम कीधारा दोनों के शरीर सारी कहानी खुद ही बयां कर रहे थे । इस प्रकार पांच सात मिनट हो गए । मुलाकात करवाने वाले को इनकी हालत पर तरस आया । भोली सिर्फ पांच मिनट बचे हैं । आप कुछ बात तो कर लो । फॅमिली चौक पडी बोली हो गया ऍम अब धर्मों का खेल है तो चिंता ना करना ठीक हूँ लेकिन शालू हो नहीं । क्या हाल बनाया ब्रेन भरी वाणी में आलू संभव है, उनका है तो बहुत हो रही थी तो हाल ऐसे हाथ पकडकर बोली ॅ आपको जीवन साथी मान लिया है तो जल्दी आना । शिवानी भी भाव है वो होगा उसका हाथ पकड लिया तो अगली मैं तो उम्र भर यही रहूंगा तो किसी और का सोचो । चालू ने शिवा के मुख पर हाथ रख दिया और बोली शुक्ला बोलो तो मैं मेरी खाद्यन जल्दी लौटना ही होगा । सारा कॅश है तोहरे दो आप कह रहे हैं तुम निर्दोष वो सुचित्रा जी ने अच्छा वकील किया है । उन्होंने राजा भैया और अब्दुल्ला जी को भी बुलाया है । सब मिलकर सबूत इकट्ठे कर रहे हैं । ऍम कोर्ट में अपील की प्रार्थना पत्र दिया गया है । आपको बहुत जल्दी बिहार करवाने का प्रयास कर रहे हैं । शिवा बोला हूँ मेरे लिए इतना क्यों कर रहे हो? क्या लगता हूँ तुम्हारा मुझे मेरे हाल पर छोड दो । ख्याल ऊॅ घर हो । बडी और बोली तुमने सबको मैं समझा और आज जब अपनों की परीक्षा की घडी आई तो तो उन्होंने पर आया कर रही हूँ ऍम ऍम इंसान हो भगवान के घर देर देर नहीं यह सुनकर शिवा और संजीदा हो गया । वार्डल ने कहा मिलने का समय समाप्त हो गया है । ऍफ कराया और कहा ये ऍम भी जाए आपको अपना अध्ययन जारी रखना है । परीक्षाएं देनी है । फॅमिली नहीं करने ॅ रखा । एक लिखा था उठाया और शिवा को पकडाया तो ली इसमें कागज और कलम है इनका उपयोग करना अपने मन के भावों को लिखना । शिवा बेच लिखा उठा हूँ । चालू ने उसकी आंखों की कोर में दो झिलमिलाते आंसू देख लिए थे । लेकिन कितनी थी अगले ही क्षण निष्ठुर काल की कतार उठीं । निर्दयी वार्डन ने कहा लेने का समय समाज ऍम शिवा को अंदर ले गए । शालू से जाते हुए देखती रही हूँ । फिर मुडकर अपने आंसुओं के सैलाब को रोक नहीं पाईं और फूट फूटकर रोने नहीं हूँ । लेकिन चल गया के काम समाप्त कर जैसे ही शिवा को साॅफ्ट दो घंटे कॉलेज की पढाई करता हूँ फिर अपने विचारों को शब्दों में बाना पहनाता । उन्हें कलम से कागज पर उकेरता हूं, दिन पर दिन ऍम करीब पांच महीने हो गए । शिवानी चार रचनाएं लिखी थी । उनके विषय थे शांति की खोज, बठक पथिक मुक्ति गाडीवान ऍम समक्ष जी का एक दिन किसी तरह से रनो पत्र । सेवाभारती के चेयरमैन मोहम्मद अब्दुल्ला साहब जेल में शिवा से मिलने आए । बोले शॅल अच्छा थोडा सा लगता है तो मेरी यहाँ कराने का हम पूरा प्रयास कर रहे हैं । लेकिन असली काटल बहुत ऊंची पहुंच वाले नेताजी का करीबी रहता है । इसलिए इतनी अडचन आ रही है तो लेस न्यायपालिका सब उस कीजिए । मैं फॅालो बिटिया कह रही थी कि तुम ने कुछ विषयों पर अपने आलेख लिखे हैं, जहाँ मुझे दो मीडिया तुम्हारे समाचार एवं विचार जानने को उत्सुक है । शिवा ने निर्विकार भाव से आपने लिखे प्रश्न अब्दुल्लाह साहब को पकडा दी है और कहा हूँ ये मेरे निजी विचार है । फॅमिली का भला हो तो आपको उपयोग कर सकते हैं । वार्डन ने कहा समय हो गया हूँ । अब्दुल्ला साहब ने कहा ऍम मत रहो । शिवानी नमस्कार किया और मुड गया । अब्दुल्ला साहब उस पर रिश्ते को तब तक देखते रहे जब तक मैं दिखाई देता रहा हूँ । घर आकर अब्दुल्ला साहब ने शिवा की रचनाएं उठाई । शीर्षक पढा मुक्ति का द्वार जब उन्होंने पढना प्रारम्भ किया तो उसे समाप्त किए बिना अपने स्थान से उठी नहीं पढाए वो विपदाओं से मत घबराओ । साहस से आगे बढ जाओ, रही नहीं, बाते जाओ कष्टों को गले लगा । गांव कायकर्ता कभी न लाओ । विश्व को पीयूष बनाऊँ । कठिनाई में भी मुस्कुराओ पक पक विजय गीत गांव ऐसे आगे बढ जाओ कितना ही ताप भरा हो प्राण पर प्राण गुलझरा हूँ संकट चाहे कह रहा हूँ वाणी व्यवहार खराब हो है दिन चमक नहीं पाओ साहब से आगे बढ जाओ संकल्प सर्जन का जागे टूटे स्वार्थों के धागे मैत्री धारा के आगे दुर्जन भी दुर्गुण के आगे चलते चलते मंजिल बाव साहस से आगे बढ जाओ वास्तव में शिवा की लेखनी की ओजने आप तुलना साहब को अब लाॅट कर दिया और अंतिम दो पंक्तियों तो दिल कुछ हो गयी जीवन में आने वाली कठिनाइयों से जीवन में नई ऊर्जा शक्ति का पूरा होता है । शिवा ने इस कठोर कारावास को अपना अध्ययन कक्ष बना कितनी उम्दा रचनाएँ लिख डाली । नहीं तो एक जगह शिवा ने लिखा था हर व्यक्ति का चिंतन और पुरुषार्थ भी इस दिशा में होना चाहिए कि वह निरंतर शुभ और अच्छे भागों में ही है । इसके लिए ग्रहणशीलता भी सहायक होती है, क्योंकि है आदमी को ज्ञानी बना देती है । तो प्रत्येक व्यक्ति को ये सोचना चाहिए कि हमें मानव जीवन मिलाये हटा फेस कर बातों को ग्रहण कर अपने जीवन को सार्थक बनाए । अब्दुल्ला ने चार हो लेखों को चार प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में भेज दिया । सभी पत्रिकाओं ने उन्हें प्रमुखता से छापा हूँ । साथ ही शिवा का संक्षिप्त परिचय छापते हुए हैं । वो जनसाधारण से शिवा के लिए मंगलकामना करने की अपील भी की । उच्च विचार ॅ, सुबोध, प्रवाह, ऍम भाषा शैली संयुक्त आलेखों ने शिवा के पक्ष में चाहूँ और लहर पैदा करती हूँ ।

Part 19

मंत्री जी ने आज का सच पत्रिका की एक प्रति हाथ में लिए भोजन कक्ष में प्रवेश किया जहां सचित्रा अपनी माँ छोटी बहन के साथ पिता जी का इंतजार कर रही थी । मंत्री जी ने सुचित्रा को पत्रिका देते हुए कहा हो इसमें शिवा काल एक आया है शांति की खोज । मैंने अपने आत्मबल को अंत जल्दी में प्रज्वलित रखने का मंत्र भस्म अच्छा नगनी से लिखा है । सर से विनम्रता हूँ और अभय है जनता मिलती है एकता और समनव्यक के लिए न्यायोजित बलिदान भी कम है । अनुव्रत की आस्था अहिंसा में हिंदुस्तान के पास जब तक हिंसा की संपत्ति सुरक्षित है, भौतिकवादी शक्तियां होने पर आज नहीं कर सकती । कितने उच्च विचार है ना इसके सचित्रा वास्तव में यह कातिल नहीं हो सकता हूँ । तुम्हारी कानूनी प्रक्रिया कहाँ तक आगे बढी । सुचित्रा ने कहा, पिता की हमने सेशन कोर्ट में अपील की तथा अनेक सबूत जुटाए । वकील भी हमारा तेज था किंतु असली अपराधी के ऊपर तक पहुंचे इसीलिए ही हमें अब तक सफलता नहीं मिली है । हमारी वह अपील अमान्य हो गई । हमने हाई कोर्ट में भी अपील की वो भी अस्वीकृत हो गई है । वो लडकी भी गवाही देने सामने आने से घबराती है । उसे धमकियां भी मिल चुकी है । पिता जी अगर गुरु जी की शीघ्र रिहाई नहीं हुई तो उनका ये वरिष्ठ खराब हो जाएगा । ऍम की परीक्षाएं आने वाली है अब तो आप को ही कुछ करना पडेगा । मंत्री ही ने पूछा तुम लोगों ने क्या कदम उठाने का सोचा है? सुचित्रा ने कहा हम बहुत ने आशा हमें कोई भी रास्ता नजर नहीं आ रहा है । अभी बताइए हाँ के कैसे बढे? मंत्री जी ने कहा तो चित्र जबसे तुम्हारे शिक्षा के दीवाने आना प्रारंभ किया है तब से मैं उसे जानता हूँ । लडका वाकई निर्दोष है तो मैं कभी गलत का अन्याय का पक्ष नहीं लेता हूँ । कभी किसी की सिफारिश नहीं करता हूँ तो शिवा समाज का भूषण है । उसका जेल में सडना हमारे समाज की व्यवस्था है । तो अब तुम सुप्रीम कोर्ट में अपील करूँ । अपील खारिज हो जाती है तो हम उन अपील करेंगे अगर वह भी अस्वीकृत हो जाती है तो फुलबेंच की अपील करेंगे जिसमें आठ से दस न्यायमूर्तियों के बैंक चिंतन मनन करके अपना फैसला सुनाएंगे । कहाँ बडा मुश्किल है किंतु तुम्हें हिम्मत नहीं हारनी है तो मैं अपने पिता पर भरोसा रखूं जीत सकते की होगी । सुचित्रा को पिताजी की बात से बडा सम्मान मिला । मन ही मन उसका ही अपने पिता जी के प्रति श्रद्धा से झुक गया । खुश होकर वह बोली ॅ कोर्ट में बहुत भीड भाड थी । राजा आलोक कृष्णा सुझाव सुजाता बता कहीं अब्दुल्ला साहब, हरी सेवक जी एवं सत्यवान वो सब मौजूद हैं । थोडी देर में सुचित्रा भी वकील साहब गए । साठ आ गई भी । ग्यारह बजे फुलबेंच की सुनवाई प्रारंभ हो गयी । लगभग दो घंटे बाद उन्होंने अपना ऐतिहासिक निर्णय सुनाया । तमाम सुबूत तो वह गवाहों के आधार पर श्री शिवमंगलसिंह को प्रोफेसर कुलकर्णी हत्याकांड में निरापराध पाया गया है । अदालत होक में देती है कि शिवमंगलसिंह को बाइज्जत बरी किया जाए । अदालत पुलिस को प्रोफेसर कुलकर्णी का असली कातिल तलाशने का भी हो काम देती है । सबके चेहरों पर खुशी का पारावार ना था । सुप्रीम कोर्ट से आदेश लेकर सब तिहाड जेल पहुंचे । वहाँ पहले से ही खबर पहुंची हुई थी । शिवमंगलसिंह को सभी कैदियों ने बडे दुखी है । वैसे विदाई दी । जेल के अधिकारियों ने शिवमंगल को अपने झेल का वातावरण सुधारने तथा कैदियों का हृदय परिवर्तन करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा भाभी जी कभी कभी हमारे जेल में आकर कैदियों को शिक्षा देते रहेगा । वे स्वयं बाहर तक आएँ और आपके समक्ष और सबके समक्ष बोले । इस जेल में ऐसा कैदी पहली बार आया है जिसके जाने से सारे कैदी वाॅ उदास हो रहे हैं । नए जेलर ने भी शिवा के मंगलमय जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं । सोचने सबसे पहले आगे बढकर अपनी जिगरी यार को गले लगा लिया । वो सचित्रा वास हो जाता । नहीं ऍम हूँ । अब्दुल्ला साहब ने माला पहनाई फिरे के करके अपने माला पहना ही और पुष्पगुच्छ भेंट किया । अब सब शिवा के घर पहुंचे । ऍफ पाल के पसारे अपने प्रिय पुत्र का इंतजार कर रहे थे । महाने शिवा को करे जैसे लगा लिया । अश्रुओं की धारा चली बोली बाॅल को किसकी नजर लग गई । अब दुनिया से बचाकर रखूंगी अब नहीं चाहे क्योंकि कहीं सेवाकार्यों में शिवानी माँ पिताजी को प्रणाम किया । सत्यवान ने शिवा को गले लगा लिया । फिर सब अतिथियों बैठने का आग्रह किया । सचित्र आपने साइन मिठाई के डब्बे लाई थी । उसने सबको मिठाइयाँ खिलाई हूँ । शिवा ने पूरी टीम को धन्यवाद दिया । शिवा के माता पिता जी ने सब का बहुत बहुत धन्यवाद किया । विषेशकर सुचित्रा का सबने शिवा की सलामती की दुआ मांगी और अपने अपने घर को निकल पडे ।

Part 20

शिवा की प्रिया मेधावी श्रेया सुचित्रा ने अपने अध्ययन में किसी तरह की गफलत नहीं की थी । विवाह के कारावास काल में विशेष निष्ठापूर्वक स्वयं उसने अपनी परीक्षा की पूरी तैयारियां कर रखी थी । शिवसर को कारावास से मुक्त करवाकर ऍम थे खुशी खुशी वो अपने घर पहुंची तो देखा बाहर मंत्री जी की गाडी भी खडी थी अर्थात वे भी पहुंच गए थे । अंदर घुसते ये सुचित्रा ने पिता जी के पैर छुए । अदा से बोली फॅार अदालत से बाइज्जत बरी होकर घर आ रहे हैं । मंत्री आवाज बेटा हम आपसे यही उम्मीद थी कि हमारी बहादुर बेटियाँ आज अवश्य जीत कराएगी । ऍम लेकिन ये जीत सिर्फ नहीं है । हम जब की जीत है सच्चाई की जीत है, ईमानदारी की जीत है । सबसे बडी बात मेरे पापा की ठीक है । देखो सुचित्रा पहली बात आपके शिक्षक हैं । दूसरी बार मैं एक होनहार सच्चा युवक है । मैंने एक सही कार्य की निष्पत्ति में अपना दायित्व निभाया है । पिता जी आप महान है इसलिए आप राजनीति के कीचड में भी कमल सदस्य स्थापित हैं । हमें घर है अब वो बेटा गर्व तो हमें भी आप जैसे विलक्षण समझदार बेटियाँ पाकर है । तो अब जरा आपके भविष्य के बारे में भी कुछ चिंतन कर लिया जाए । मंत्री जी की पत्नी बोली सचित्रा आपके समझ एक तरफ योगी सुशिक्षित, संदर्भ संस्कारी लेकिन गरीब युवक हो और दूसरी तरफ पर प्रतिष्ठा, पैसा, शिक्षा, चरित्र हूँ तो आप किसका चयन करेंगे? जीवन के साथी के रूप में? हाँ नहीं तो कभी नहीं सोचा । ऍम के बेटी अगर आपकी पसंद पूछी जाए तो आपकी क्या राय होगी? सचित्र असमंजस में पड गई । तब मैं विभाग जैसे गंभीर मुद्दे पर उसने सोचा ही नहीं था । हाँ, उसे मन ही मन शिवा सर बहुत अच्छे लगते थे । उनका आकर्षक व्यक्तित्व, सकारात्मक चिंतन, प्रभावी शिक्षण एवं मृदु व्यवहार से वह बहुत प्रभावित थी । उनका पवित्र आभाव अजय उसे अपनी और खींचता था । भावी जीवन साथी के रूप में उन्हें सोच कर रहे बहुत खुश होती है । किंतु शिवा ने हमेशा मर्यादित व्यवहार किया था । आकस्मात आज माँ पिताजी द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का कोई जवाब ना देख सकें । पुत्री की है । स्थिति देख मंत्री जी ने बातचीत आगे बढाते हो गए । कहा तो फॅर माँ बाप चाहते हैं कि उनकी बेटी बेहद सुखी रहे । इस बात को आगे बढाते हुए उसकी माँ बोली हूँ हूँ । हमारे समझ बहुत अच्छे रिश्ते आ रहे इसलिए हम तुम्हारी पसंद जानना चाहते हैं । वहाँ मुझे कुछ मुक्त चाहिए । ऍम कुछ बोलती । इससे पूर्व मंत्री भी बोले हाँ बेटा क्यों नहीं एक दो दिन में तो मैं आराम से सोच कर अपनी सहमती दे देना । सुचित्रा कुछ बोली नहीं असहमती, मैं सिर्फ हिला दिया ।

Part 21

सब अतिथियों की विदाई के बाद अब सिर्फ भेज तीन ही घर में रहे सेवा पांच वर्ष के बच्चे की तरह माँ की गोद में है तो भाग गया दो लाख माँग मैंने कभी नहीं सोचा था कि जेल की हवा खानी पडेगी । माँ की आंखें भर आई और बोल नहीं बेटा, हमने भी कभी नहीं सोचा था कि हूँ अचानक चले जाओगे तो तुम्हारे जाने के पास सिर्फ घर ही नहीं मुझे तो पूरी दुनिया ही संस्थान लगने लगी थी । भगवान ना करे । हमारे दुश्मनों के साथ भी ऐसा हो । ऍम बोला माँ हमने किसी का क्या भी जाना था जो भगवान ने हमें यह सजा दी । बेटा उन बातों को बोल जाओ ऍम बुरा वक्त था तुम्हारे आकस्मात चले जाने से मैंने घटिया पकड ली थी । यह तो भला हो । सुचित्रा बेटिया का तो मुझे देखने आई हूँ । फिर उसने अपनी सेविका भी थी और अब तुम्हारी रिहाई में भी आखिरकार उसी का प्रयास रंग लाया है । सावित्री संजीदा हो गई । हाँ वहाँ वो लोग बहुत अच्छे सेवा बोला । मैं फिर बोला माँ लगता है मुद्दा से भूखा हूँ । कुछ खाने को दो ना अपने पुत्र को गोद में सुलाई अलौकिक आनंद का अनुभव कर दी । सावित्री इस लोग में लौटी और पांच बैठे सत्यवान को इशारे से बुलाया । उनकी गोद में शिवा का से रख स्वयं भोजन पर उसने चली गई । सत्यवान को अपनी गोद में लेता शिव । वही तीन चार वर्ष का निश्चल बालक लग रहा था । जब केशर इसे लाए थे तब भी सत्यवान ने शिवा को यूँ ही गोद में लेट आया था । उसके घुंघराले बालों को सहलाते हुए उसकी उंगलियां फस रही थीं । आज भी उसकी उंगलियां बालों में पाँच रहीं थीं । आपने पैदा के सुरक्षित गोद में शिवा खोने चिंता महसूस हुई । उसकी बल्कि मुंडन भी चली गई । धीरे धीरे बहने ड्रा दही के आगोश में चला गया । उसे सपने में बेहद ममता नहीं तो जैसी देवी आत्मा की झलक दिखाई थी, जो उसे आखिरकार दे रही थीं । सावित्री भोजन लेकर आ गई थी । उसने आज शिवा की मनपसंद खीर बनाई थी । उसने देखा की निश्चिंतता से अपने पिता की गोद में सोया शिवाय एकदम निश्चल बालक लग रहा था तो उन्होंने कितने दिनों बाद उसे शांति नसीब हुई हैं । जेल के समय के दुःख याद करके साबित्री की आंखों से अश्रुधारा बह चली । शिवा पर गर्म गर्म मासूमों की बूंदे गिरीं और उसकी नींद टूट गई । वे अपने सपने के बारे में सोच रहा था । तभी सामने माँ भोजन लिये तैयार थीं । आता है । वर्तमान में लौट आया और वहीं बैठ गया । माने अपने हाथों से एक एक ग्राहक खिलाफ करके उसे भोजन करवाया । वहाँ के यहाँ से खाना खाकर शिवानी विशेष टीगान भाव क्या पिताजी बीच बीच में उसे दुनियादारी की बातें बता रहे थे । अब पढाई के साथ साथ व्यापार में भी रूचि लेने की सलाह दे रहे थे । मैं जानते थे शिवा जो निर्णय लेगा मैं उचित होगा । फिर भी पिता के दायित्व के अनुसार है । हल्का फुल्का मार्गदर्शन किया करते थे । सेवा को भोजन करवाकर उन दोनों ने भी वही भोजन कर लिया । आज सावित्री का दिल शिवा के पास से हटने का नहीं कर रहा था । सिर्फ शायरी नहीं शक्तिवान की भी यही हालत की के शिवा कहीं फिर छोडना जाए और शिवा वो भी अपनी माँ का आँचल झडकर इधर से उधर नहीं होना चाह रहा था । वहीं सुख दुख की बातें करते करते रात हो गई । सावित्री तीनों के लिए दूध ले आई । भिजवा बोला माँ इतना परिश्रम क्यों करती हूँ? अवसर पाकर सावित्री ने बात छेडी थी । बेटा जब तक तो बहुत नहीं लगता तब तक तो घर का काम करना ही पडेगा । सत्यवान ने कहा हमारी आइए चाय की तुम्हारा विभाग कर दें । फिर बीच में बोला लेकिन पिता जी मेरी पढाई बढाई चलती रहेगी । विवाह कौनसा पढाई में बाधा डालता है । उचित समय पर उचित काम हो जाना चाहिए । सत्यवान ने थोडे दृढ स्वर में कहा शिवा होने से बोला जैसा उचित समझे । शिवा की तरफ से हरी झंडी मिलने से दोनों प्रसन्न हो गए थे । अच्छी लडकी देख वेब शीघ्र विवाह कर देंगे । इस प्रकार बेहद खुश अगर बाहर माहौल में आज वहीं बैठक कक्ष में लगेगा दे पड तीन हो गए किसी का भी अलग सोने का मन्ना था क्या आ रहा उठकर नित्यकर्म पूजा पाठ कर शिवानी सबसे मिलने की सोची पहले पहुँच गया । वहाँ पूरा पाठ्यक्रम बगैरा लिया । परीक्षाओं की जानकारी ली और फिर अपने सभी सहयोगियों का धन्यवाद किया । वहाँ से अनुव्रत सेवाभारती के कार्यालय गया । फिर सुचित्रा से मिलने गया । सुचित्र तो पलक पांवडे बिछाए इंतजार कर रही थी । शिला को देख कर आज उसकी आंखों में विशेष जमा को भराई अतिरिक्त उत्साह से अतिथ्य सत्कार हुआ । शिवा समझ रहा था की जेल से रिहाई के पश्चात प्रथम दिवस की वजह से ऐसा है । उसमें अध्ययन संबंधी चर्चा प्रारंभ करनी चाहिए । उससे पूर्व सुजॅय आपकी अनुपस् थिति में मैंने अध्ययन काम में व्यवधान नहीं आने दिया । कुछ चुनिंदा जाकर है जिन्हें समझना चाहूंगी उससे पूर्व मुझे अपनी सहेली की एक समस्या का आपसे समाधान चाहिए । शिवानी सस्ता से कहा बताओ क्या है समस्या? फॅमिली के माता पिता उसका विवाह ऐसे युवक से करना चाहते हैं जो परिवार, पद, प्रतिष्ठा, पैसा सबसे उनसे किसी है । लेकिन मेरी सहेली किसी और को जाती है । अब उसे क्या करना चाहिए? यह क्या आया था? ऐसा सवाल सुनकर शिवा अचंभित हो गया । आज तक सचित्रा ने उससे इस तरह के मसलों पर कभी बात नहीं की थी । लेकिन अगले ही क्षण उसके दिमाग में बिजली की तरह विचार कौन नाम नहीं है । सुचित्रा की सहेली की नहीं सचित्रा की स्वयं की समस्या तो नहीं सोचने लगा । क्या बोले कैसे समझाएं? कुछ क्षण रुककर उसने बोलना प्रारम्भ किया । सुचित्रा तुम्हारी सहेली जिसे चाहती है मैं क्या करता है वो शिक्षक है । अब तो शिव आकर्षक विश्वास में बदल गया । उसने बात बढाते हुए पूछा क्या वह युवक भी आपकी सहेली को उतना ही चाहता है? सुचित्रा पशोपेश में पड गईं । उसने कहा ये तो मेरी सहेली को भी नहीं मालूम । कहीं तुम्हारी सहेली का नाम सचित्रा ही तो नहीं । उसने ठोस शब्दों के साथ गहरी नजरों से उसकी आंखों में झांकते हुए हो जाऊँ । एक बाल के लिए तो सचित्रा भीतर धकेल गई । फिर अपने आप को संभालते हुए हैं । शिवा के बेहद करीब आ गयी । इतना करीब की दोनों एक दूजे कि सांसदों को महसूस कर रहे थे । टीम में से बोली आपने एक दम ठीक समझा तो आप को बहुत प्यार करती हूँ । इन शब्दों का नहीं ना शिवा पर भी हावी हो गया । उसका तनबदन भी बेकाबू हो रहा था । इतनी प्यारी ही वो धीमान आकर्षक करने और इतना उच्चस्तरीय परिवार शिवा खोला का भगवान जब देता है तो छप्पर फाड कर देता है । अगर ऐसी पत्नी और ऐसा परिवार मिल गया तो जीवन में कहीं कोई कमी रहेगी नहीं क्या आ गए सुचित्रा का प्रस्ताव स्वीकार कर ले । शिवा के अंडर स्माॅल झूठी शनि टेल ओवन में आकर गुरु शिष्य की मर्यादा ही बुला बैठे । क्या यही तुम्हारे उच्च आर्डर हैं? क्या यही तुम्हारे तर्क हैं? क्या यही तुम्हारी समाज सेवा की परिकल्पना है? नहीं नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता हूँ । मैं मन ही मन बोल पडा हूँ । चित्र बेहद अच्छी लडकी है । इसने मेरी रिहाई में बहुत मदद की है । मैं इसका सच्चा गुरु बनकर पट प्रदर्शन करूंगा । उसमें हॉल ऐसे अपना दाहिना हाथ उसके सर पर रख दिया और बोला सचित्रा! मैं भी तुम्हें बहुत पसंद करता हूँ । हमारे मेलन के पहले दिन से ही मैं तुम से बहुत प्रभावित हूँ । ऐसी शिष्य किस्मत वालों को ही मिलती है । गुरु शिष्य के पवित्र रिश्ते की गरिमा हमेशा बनाए रखनी चाहिए । इसी दृष्टि कौन से मेरा तो उनसे कहना है आपके विवाह जैसा महत्वपूर्ण निर्णय तुम व्यवहारिक धरातल पर लोग माता पिता का चंदन तुम्हारे हित में होगा और वही तुम्हारा उज्जवल भविष्य भी होगा । अब सचित्रा अपने आप को संभालना सकें । सेवा के चौडे सीने पर सिर रखकर सफा कोठी हो आप के अलावा किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती । उसके रेशमी बालों को वाले हॉल सहलाते हुए शिवा बोलने लगा सचित्रा तो मैं हमेशा याद रखूंगा तो तुम जैसी सहयोग शिष्य सतह मेरे मानस पटल पर अंकित रहेगी । जब भी तो मैं मेरी आवश्यकता लगे मैं व्यवस्थित हो जाऊंगा किन्तु अभी तो अपने आपको संभालों । जिस वातावरण में एशोआराम में तुम वाली हो, बडी हो, जो तुम्हारे पिताजी का रुतबा है, उसी के अनुसार जीवन साथी स्वीकार होगी तो सदैव सुखी रहोगी । मैं आपकी सब हर स्थिति में सुखी रही होंगी? नहीं सचित्र ऐसा संभव नहीं है । शादी गुड्डे गुडियों का ही रही है । सिर्फ दिल से नहीं दिमाग से फैसला लो । शिवा उसे समझाते हुए बोला और धीरे से उस से जरा सा दूर हो गया । सुचित्रा पुणा उसका हाथ थामते हुए बोली तो इस वजह से दूर ना जाओ । उसकी हालत देखकर शिवा भी दैनिक भावुक हो गया । उसकी हथेली को अपने लगो तक लाया । धीमे से चूमते हुए बोला गया हुआ है अब मुझे जाना ही होगा । सचेतता तो मेरी कसम, श्रेष्ठ जीवन साथी स्वीकार का जरूरत ही वहाँ घर लेना । मम्मी पापा को मेरा प्रणाम कहना । शिवा ने धीरे से दबाकर सुचित्रा का हाथ छोड दिया और भरे है जैसे वो सुविधा मांगी मैं अच्छा मैं चलता हूँ । सचित्रा के नए नौ से गंगा यमुना रहने के लिए सिसकियों के संघ शिवा को जाते हुए देख रही थी । अब शिवा खरीदते वक्त जी के घर पहुंचा । हरी सेवक जी भारी मिल गए थे । पूरे सम्मान से शिवा को भीतर ले गए । हरी सेवक जी की पत्नी भी पानी लेकर आ गई । वहीं पास में बैठकर कुशल छह पूछ है और भविष्य के बारे में बातचीत करने लगे । बात बात में ही उन्होंने बताया कि शालनी तेज ज्वर से पीडित है । शिवानी उससे मिलने की इच्छा जाहिर की तो शालिनी की माँ ने पास वाले कक्ष में ले गई । सेवा को आज होता है । मैं बाहर चली गई । शिवानी देखा कि शालिनी का पूरा चेहरा लाल हो गया है । छुआ धोकनी से तेज चल रही थी । शरीर इतना तेज तब रहा था की उस की गर्मी पास बैठे हुए व्यक्ति को भी पता चलती थी । बिहार मुझे लेती थी हूँ हूँ हूँ शिवानी पुकारा उसकी आवाज सुनते ही शालिनी में आंखे खोल दी । उसकी आंखों में संतोष के भागते ये क्या हो गया? शिवा ने पूछा । बोली कुछ नहीं मैं आपसे मैंने आई थी । उस दिन मैंने मन्नत मांगी थी कि हे भगवान शिवा के सारे दुख मुझे दे दो और उसे सुखी रखो । भगवान उसकी ओवर परीक्षा ना लोग साल नहीं की बात से शिवा अंदर तक हिल गया । बोला तो उन्हें ऐसा क्यों किया? कभी कोई ऐसी भी मन्नत मांगते हैं क्या मैं भी डॉक्टर को लेकर आता हूँ? नहीं नहीं, उस की जरूरत नहीं है । फॅमिली हैं । कल से उन्हीं की दवाइयाँ शुरू किए हैं । मुझे काफी आराम लग रहा है । वाले से शिवा उसके पास बैठ गया और उसका दाहिना हाथ अपने हाथों में ले लिया । उसका स्नेहिल स्पर्श बात और रहे भी भावुक हो गई । उसके नाइन ओके कौर ने दो मोतीझील में लाने लगे और उसने भी अपना बायां हाथ उसके हाथों पर रख दिया । कुछ देर बाद दोनों एकदम शांत थे । उस पर की अनुमति को सिर्फ महसूस कर रहे थे । धीरे से चुप्पी तोडते हुए शिवा बोला अब तो मैं आ गया हूँ तो मैं जल्दी से ठीक होना है । शालू ने आ गया क्यारी बच्चे की तरह सहमती में से दिला दिया । यहाँ के बोला दवाई बराबर लेती रहना और पौष्टिक भोजन भी करना । मैं जल्दी तो मैं देखने वापस आऊंगा । अभी चालू उसने बैठने की कोशिश की किंतु कमजोरी की वजह से ना तुरंत बैठ नहीं पाई । उसकी हालत देखकर शिवा बोलने लगा । अरे अरे रहने दो, तुम लेटी रहो, जब ठीक हो जाओ तभी औपचारिकताऐं निभाना । सब इजाजत दो । चलो उसने कोई प्रतियोगिता नहीं दिया । शिवानी धीरे से उसके हाथों को थपथपाकर छोड दिया और सधे कदमों से निकल गया । हिमा के डर हूँ जो सीरियस वर्ष को याद कर शालिनी अब भी रोमांचक थी । उसकी भाव प्रणब बातों से अभिभूत थी । हमेशा हमेशा के लिए शिवा का प्यार पाने की आकांक्षा के साथ हैं । स्वप्निल दुनिया में खो गई । दूसरी तरफ शिवा भी गहरी उदयपुर में चलता चला जा रहा था । एक और समर्पण के साथ समूह पस्थित साधन संपन्न सुचित्रा दूसरीओर त्याग की प्रतिमूर्ति शालिनी कभी उसका सांसारिक मान विलासिता की ओर मुखातिब होता । कभी उसका वैरागी मन क्या की ओर झुकता? अंत में वह विचारों भवर से निकल ही गया । जैसे जैसे शालिनी के बारे में सोचता हूँ, मैं अपने आप को बेहद प्रफुल्लित महसूस करता जा रहा था । क्या आपको तकिए पर सर रखा तो शालिनी के सलोनी सूरत तो बढाई । उसे लगा कि मैं उसकी ओर खींचा चला जा रहा है । उसका दूसरा दिन कॉलेज की व्यस्तताओं में निकल गया । जी राजन अनुव्रत सेवाभारती के कार्यों की सार संभालने में निकल गया । चौथे दिन पुनः शालिनी से मिलने पहुंच गया । आज मैं स्वस्थ्य दिख रही थी और खेलते हरे रंग के सलवार सूट में काफी आकर्षक लग रही थी । संयोग वर्ष हरी सेवक जी सपत्नीक अपने रिश्तेदार से मिलने गए हुए थे । शालिनी पानी लाने के लिए जाने लगी तो शिवानी मना ही करते हुए कहा तखल्लुस की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन पांच मिनट में ही वह दो कप चाय और कुछ नाश्ता ले आएंगे । चाहे पीने के बाद गंभीर होकर शिवा ने कहा शालिनी मैं तुमसे एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर तुम्हारी राय जानना चाहता हूँ । शालनी में स्वीकारोक्ति में से मिला दिया । शिवा कुछ देर तो असमंजस में रहा । क्या आप मुझे क्या ना पूछे? कैसे पूछे? फिर उसने सीधे सीधे ही पूछ लिया क्या तो मुझसे विवाह करोगी, मेरे साथ जीवन बिताना पसंद करोगी । यकायक शिवा की बात सुनकर शालू सकता आ गई । ऍम के लिए भी तैयारी नहीं थी । तीसरे से बोली सभा होगी नहीं कन्या जिसका हाथ आप थामेंगे । शिवा बोला हकीकत बहुत कडवी है । हमारा आधार एकदम साधारण है । पहले मैंने बहुत बडे सपने देखे थे । एसआरसीसी कॉलेज से निकल कर बहुत अच्छी नौकरी करूंगा या अपना व्यापार करूंगा । मैं अब आपको लाखों रूपये लाकर दूंगा । ऐशोआराम की जिंदगी जी होंगा । जब से जेल से आया हूँ मेरा दृष्टिकोण बदल गया है । अब मेरा जीवन का मूल्य देश है सेवा इसलिए मैंने टीच इंडिया प्रोजेक्ट जॉइन किया है । इससे जीवन यापन लायक अर्थोपार्जन हो जाएगा । साथ ही सेवा कार्य भी होता रहेगा । इस बारे में तुम्हारे क्या विचार है? ध्यान स्वर्ग में शालू बोली साधु अखिल जैन और अपरिग्रही होता है जिसके पास कोई संपदा नहीं होती । मैं मानती हूँ की इसीलिए ही वो तीनों लोगों का स्वामी होता है । ग्राफी कम होने से मेरी नजर में व्यक्ति के व्यक्तित्व की गरिमा कम नहीं हो जाती है । मेरे तो स्वयं का जीवन कितना संघर्ष नहीं रहा है । जीवन यापन के लिए आवश्यक धन संपत्ति के अलावा ज्यादा दौलत की मैंने कभी आकांक्षा भी नहीं कि शालिनी की ओर से शिवा आश्वस्त हो गया । अब उसे अपने माता पिता जी से बात करनी थी । शालनी से विदा लेकर अपने घर की ओर चल पडा । घर पहुंचा तो उसने देखा की माँ पिताजी के साथ एक अधेड सज्जन बैठे थे । ऍम ये ऍम पंडित जी ने देखा कि दो दिया ॅ अच्छी लंबाई भले ही नहीं आज मैं विश्वास, सत्यवक्ता, चेहरा, सुरुचिपूर्ण, पहनावा, शालीन व्यवहार एक नजर में उन्होंने परख लिया । जड का खरा सोना है । पूछा बेटा क्या करते हो? श्री हम कॉलेज से हम कौन हूँ? साथ ही टीम इंडिया भारत सरकार के सारक्षता अभियान से जुडकर उससे आजीविका का माध्यम बनने की सोच रहा हूँ । शिवा की मां चाय नाश्ता लेकर आई । सबने चाइना आएगा क्या? श्रीवास्तव जी खडे होते हुए बोले अभी मैं चलता हूँ आपसे शीघ्र दोबारा मुलाकात होगी । उनके जाने के पश्चात शिवा के पिताजी बोले ऍम है तुम्हारे लिए गुप्ता साहब की बेटी का रिश्ता लेकर आए हैं । तुम्हारे जेल जाने से पहले तो आने लोग अपनी बेटियों के साथ रिश्ता लेकर आते थे तो इतने दिनों में ये पहला रिश्ता आया है कि देखने दिखाने का सिलसिला प्रारंभ करें । शिवा सकुचाते हुए बोला छोडिये ना पिताजी सावित्री बोली बेटा अब तो कर दे जब से जेल वाला चक्कर हुआ है तेरह पिताजी बहुत चिंतित हैं । मैं चाहते हैं कोई श्रेष्ठ कोलिन का नियम हमारे शिवांगी सहगामी बने शिरा शहर चुका है । सुन रहा था तो थोडा सोच गढ धीरे से रहे । वैसे ही बोला बेटा जी आप चिंता ना करें । मैंने एक लडकी देखनी है । ये सुनकर दोनों एक्शन के लिए अब आ रहे गए । उन्होंने सोचा शिवा मजाक कर रहा होगा । फिर भी पिताजी ने कहा किसकी लडकी है? ईरानी उत्तर दिया श्रीहरि सेवक सानिया आज पिताजी ने कहा बेटा ये हमारी जात बिरादरी तो नहीं है । सावित्री सिर पकडकर बैठ गई कहाँ तुम्हारे संस्कार कहाँ उनके संस्कार कहाँ हमारी जाति धर्म ऊंचा कुल कहाँ पे अनुसूचितजाति सेवा ऐसी लडकी लाओ की तो मेरा धर्म भ्रष्ट हो जाएगा तो अपना जीवन नष्ट हो जाएगा । शिवा बोला हाँ ये दकियानूसी मान्यताएं छोड दो । इंसान का धर्म एक ही है है मानव धर्म भगवान महावीर ने सभी जीवों की आत्माओं को एक समान मानना है । मनीष जाती को उप जातियों में बांटने का मैं पक्षधर नहीं हूँ । अनुव्रत सेवाभारती में जो अनुव्रत आचार संहिता हमने ग्रहण की है उसका चौथा नियम है मैं मानवीय एकता में विश्वास करूंगा जाती व रंग के आधार पर ऊंच नीच नहीं मानूंगा । सिर्फ बीमा नहीं ये निर्णय आप छोड ता हूँ । मैं सोचता हूँ आप जो भी उचित समझेंगी करेंगी । शिवा के पिताजी ने कहा अरे भगवान एक बार देख तो ले अपने बेटे की पसंद फिर आगे की सोचेंगे । साल इटली ने बिना मन से हिला दिया । फिर उन्होंने आगे कहा, शिवा परसों त्रयोदशी और गुरूवार है, रहता है । ग्यारह बजे उनके घर चलेंगे, उन्हें सूचना भिजवा दो ।

Part 22

नियत समय पर भरी सेवक जी के हाशिवा उसके पॅाल गमा साबित्री तीनों पहुंचे । द्वार पर हरी सेवक ही ने स्वागत किया । चालू की माँ ने तीनों को अंदर ले जाकर यथास्थान बिठाया । एक छोटा सा लडका पानी रख गया । पांच मिनट बाद ही शालिनी चाय नाश्ता ठीक है ले कर आई । उसने लाल रंग कि बॉर्डर वाली साडी पहनी हुई नहीं ट्रे रखकर उसमें शिवा के माता पिता जी के चरण हुए है । बाहर से वहीं खडी हो गई । सावित्री ने अपने पांच रखी कुर्सी की तरफ इशारा करते हुए कहा बेटा बेटी वे पेड नहीं । सत्यवान ने पूछा नाम क्या है? फॅमिली नी मंदिर की घंटियों से शानों की मीठी आवाज पूरे वातावरण में फैलती हुई । सेवा के माँ पिताजी को झनकट कर उठे । माताजी ने पूछा क्या कर रही हो? बी ए का अंतिम बढ हैं? लालू ने उत्तर दिया शिवा की वाले पुनाह पोछा और दिनभर कैसे गुजरता है? लालू ने कहा प्राकाश घर का नाश्ता वगैरा तथा कॉलेज की पढाई मत ध्यान में लडकियों को लडकों सिखाती हूँ । साढे पांच बजे से सात बजे तक बच्चों की चित्रकला की कक्षाएं लेती हूँ । तत्पश्चात शाम का भोजन बनाकर वहाँ के संग बैठी हूँ । ख्यालो की दिनचर्या में साफ गोई एवं सच्चाई कि सुभाष नहीं । शिवा के माँ बाप इससे बहुत प्रभावित हुए तो दोनों पांच सात मिनट के लिए बाहर गए । फिर आके पटाने पूछा हूँ सावित्री क्या राय है तुम्हारी? सावित्री बोली जैसा हमारा शिवा लाखों में एक है वैसी ही मुझे अल्ली लगी । आपने इसे गंगा जल से नहलाकर शुद्ध कर लूंगी । आपकी क्या राय है? सामने? थ्री ने पति से पूछा । सत्यवान बोले देखो घर से एकदम साधारण है । कल श्रीवास्तव जी जिसका लिखता लेकर आए थे वो तो लगती हैं । अच्छा कारोबार है, बस लडकी मोटी हैं । यहाँ लडकी तो अच्छी है लेकिन घर तो हम से भी गया बीता है । सावित्री ने कहा बडे घर की बेटी तो पता नहीं अपने घर चूला चौका करती है । नहीं करती ये हमारे शिवा को ही हमसे दूर कर दी थी किंतु मेरा मन कहता है ये हमारी अच्छी सेवा करेगी । सत्यवान ने कहा पक्का सोच लो हाँ मैं सोच समझकर ही बोल रही हूँ । फिर आज का शो मोरक् है । हाँ कह देते हैं क्यों नहीं दोनों को प्रफुल्लित । चेहरे से अंदर घुसते देख शिवम ने सोचा कि मामला चल गया है । मैं चुप चाप सिर झुकाए बैठा रहा हूँ । सत्यवान ने हरी सेवक जी से कहा शालिनी लाखों में एक है । वाकई हमारे शिवानी हीरा चुना है । हमें आपकी कन्या पसंद है । हमारे पुत्र के बारे में आप की क्या रहे हैं? हरिसेवा जी बोले हैं मंगल है हमारे लिए तो किसी देवता से कम नहीं है । बाॅस के लिए तेज प्रताप प्राप्त हो ना तो हमारा सौभाग्य है । पुरुषों की दुखता बाद होते ही साबित्री ने शालू की माँ से कहा । जगह रोली, मोली, चावल कलश में डालकर और आर्थिकी थाली तो लाइए । पांच मिनट में आर्थिकी थाली लेकर किसानों की माँ नहीं की आरसे सावित्री ने शालू को खडे होने के लिए कहा तो शालू ने पालू सिर पर रख लिया । सावित्री ने पूर्व दिशा की और मुख प्रभाकर शालिनी को खडा करके रोली का टीका लगाया । आपने पर से निकालकर टॉफी की लाइन सत्यवान ने एक चांदी का सिक्का दिया । खुद सावित्री ने अपने हाथ के कंगन उतारे और शाम को पहना नहीं है । उनकी माँ से बोली आज से ये हमारी अमानत है । शालनी ने सत्यवान वासानी थ्री दोनों के पैर छुए । हरी सेवक ही तुरंत अंदर गए । गणेश जी एक सुंदर से चांदी की मूर्ति और कुछ रुपयों का लिफाफा बनाकर लेकर आए और बोले आप काम नहीं अपने दामाद का अलग करो । कामिनी ने तिलक क्या गुड से मीठा करवाया दोनों ने मिलकर गणेश जी महाराज की मूर्ति वार शगुन का लिफाफा शिवा को दिया नाना करता रहा उन्होंने जबरदस्ती लीजिए मैं डाल दी हैं भेंट के दौली फाॅर्स शिवा की माँ माँ पिताजी को भी होती है हरी सेवक जी अच्छे पंडित से शादी कामो रह दिखवाई शिवा के पेटा बोले सबके चेहरे प्रसन्नता से दमक रहे थे । आधे घंटे गपशप के बाद लालू ने फटाफट स्वादिष्ट भोजन तैयार किया । सावित्री वह सत्यवान ने भोजन की बहुत तारीफ की । शिवा, साबित्री एवं सत्यवान खुशी खुशी घर आ गए । शीघ्र ही शुभ भारत पर एक साढे समारोह में शिवबाबा शालू विवाह बंधन में बंध गए तो चित्र शादी में नहीं सकी थी । उसने उपहार भिजवाया था । फॅस पैकेट को खोलकर देखा तो उसमें हवाई जहाज की दो टिकटे थी कश्मीर आने जाने की और साथ में होटल बुकिंग का वाउचर तो पूरा हनीमून पैकेज था । अपनी शिष्य का ऐसा उपहार पाकर शिवा प्रसन्न हो गया । उसके मन की भगवान ने सुन ली थी हूँ ।

Part 23

चार दिन घर में आराम करने के पश्चात पूरी तैयारी से पांच दिन शिवा और शालो दोनों हनीमून के लिए रवाना हो गए । वे दोनों श्रीनगर एयरपोर्ट से निकल कर बाहर आए तो उन्हें लगा कि एक कदम नहीं दुनिया में आ गए हैं । चारों तरफ दो दिया बर्फी भर । ऐसा लगता था कि बर्फ के ही घर हैं । दोनों तरफ बर्फ के बीच सडक पर उनकी गाडी चल रही थी । आज उनकी बुकिंग एक प्रसिद्ध शिकारा में थी । शिकारा किया था झील में जल पर चलता फिरता घर था । एक बहन का एक बैठाकर है । छोटा सा रसोईघर । दोनों तरफ बरामदे कमरों के दरवाजे पर रेशमी झालर के पार दें । बेड पर कश्मीरी कढाई से सजीव बेडकवर साइड में एक शिकारा के शेप में नई क्लाम । बीच में एक तरफ हीटर लगा था । बेहद आरामदायक था । सब कुछ सामान रखते ही कश्मीरी का न्याय सबसे पहले के हवाले कर आई । दोनों ने अपने कब टकराकर जी एस किया और कहवा का स्वाद लिया । शालू सामान व्यवस्थित कर रही थी । शिवा कक्ष के सामने के बरामदे में खडा होकर बाहर के दृश्यों को निहार रहा था । शिवा के लिए एक एक पल गुजारना भारी हो रहा था । फिर भी मैं प्रतीक्षा करता रहा कि शानू सारा सामान सुव्यवस्थित कर लें । मैं तो एक बार कमरे में झांकिया इस बार झांका तो उसने देखा कि कम रटता से कम संतुलन कर शालू खडी होकर अंगडाई ले रही है । वो अब रुक नहीं पाया तो पाँच कमरे में पहुंच गए । खींच कर दूसरे गले लगा लिया । दोनों दूसरी दुनिया में पहुंच गए । कुछ समय पश्चात दोनों ने आंखे खोली । शालू बोल उठीं वाकई कश्मीर धरती का स्वर्ग हैं । झील के चारों ओर से भूके पेट थे । जिधर देखो उधर हरियाली ही हरियाली पेडों पर लगे से ऐसे लग रहे थे जैसे आसमान में लालकुॅआ हूँ । कश्मीरी सेवों की भीनी खुशबू वातावरण में ताजगी बढ रही थी । झील में थोडी थोडी दूर पर कई शिकायत हैं । शाम के दम इलाके में सब शिकायतें ऐसे लग रहे थे जैसे धरती ने शिकारा छपाई की । सारी पहली हो । शालू दला धडक कैमरे से फोर तक ले कर रही थी । कश्मीर की पल पल बदलती खूबसूरती को कैमरे में कैद कर लेना चाहती थीं । कई दिनों तक प्रकृति की अद्भुत छटा का आस्वादन करने के बाद शिवा बोला चलिए मैडम थोडा विश्राम कर लिया जाए । दिल्ली से इतनी लंबी यात्रा करके आप यहाँ पधारी हैं । पति की रोमांटिक मूड को भांपकर शालू बोली लिए दोनों सहन कक्ष में आ गए । घंटे दो घंटे के विश्राम के पश्चात शाम का भोजन किया । फिर थोडी देर बाद झील की रंगीनी को देखने के लिए बाहर बरामदे में लगी कुर्सियों पर शालू का बैठने का मन था की तो शिवा बोला चलो पहले थोडा चहलकदमी कर ले, फिर बैठेंगे लगभग सौ कदम । चहलकदमी के पश्चात दोनों वहीं आराम कुर्सियों पर बैठ गए । रात्रि के नीरव वातावरण में बाहर की जगमगाती रोशनियां जल ये सतह पर पडती । उनके प्रति छाया आसपास का खुशक बाहर मौसम कुल मिलाकर रोमांटिक महाल पैदा कर रहे थे । दोनों के दिलों में प्रेम का समंदर हिलौरे ले रहा था । शिवा की बेकरारी बढने लगी । चुपके से अपनी मर्जी से उठा और शालू को गौर से उठाया । क्यालू कहती ही रह गई कि क्या कर रहे हो, क्या हो रहा है और वह उसे शहर का कर के बिस्तर पर ले गया । एक शानदार रात के बाद सुबह लगभग आठ बजे उनकी नहीं छोटी आराम से नहीं होकर दोनों तरो ताजा हो गए । धीरे धीरे चलता हुआ शिकारा अभी तक किनारे की ओर बढ रहा था । मैं कहा नौ बजे दोनों ने नाश्ता किया । शिवानी छोटे से पिट्ठू बैग में अपनी पहचान के जरूरी कागज, कश्मीर का नक्शा, प्राथमिक चिकित्सा का सामान, कुछ फल, जेब से पानी की बोतल, छाता, रेनकोट रखा और शालू ने अपने पर्स में कुछ निपाॅल कैमरा रखा । तब तक शिकारा किनारे लग चुका था । कटाह हाथों में हाथ डाले । दोनों पैदल चहलकदमी करते हुए प्रकृति का छठा नहीं हार रहे थे । वास्तव में यहाँ की सुंदरता निराली थी । तभी बाईस तेईस वर्ष का एक कश्मीरी युवक आया । आपको गाय चाहिए, आपका नाम क्या है? राजू शिवा ने पूछा क्या तुम गाइड के रूप में रजिस्टर्ड हो? हाँ, तो शिवानी उसका परिचय पत्र मांगा । राजू वास्तव में कश्मीर सरकार से रजिस्टर्ड गाइड था । सिवानी उसका रजिस्ट्रेशन नंबर नोट कर लिया । ऍम फोन नंबर भी ले लिया । पूरी तरह से संतुष्ट होकर शिवानी श्रीनगर घुमाने हेतु से दो तीन दिनों के लिए वो कर लिया । आज के भ्रमण कार्यक्रम को सुनिश्चित करके आगे बढाने के लिए शिवा ने उसे निर्देश दे दिया । राजू ने सोचते हुए कहा आज हमें काम करते हैं । गुलमार्ग, सोनमार्ग वह पटनीटॉप चलते हैं । तीनों जगह घूमकर आने से दस ग्यारह घंटे लगेंगे । शाम को सात आठ बजे हम लौटाएंगे । कल का कार्यक्रम आज रात को तय कर लेंगे । शिवानी शालू की राय जानी चाहिए । चालू तो पहले ही बहुत ही कॅश साढे थी । बोली आप ने की और पूछ पूछ जहाँ राजूबाई है वहीं के लिए कुछ दूर घूमते हुए हैं । जहाँ पहुंचे बहास लेजिस्लेटिव गाडियाँ थीं क्योंकि ऊपर पहुंचने का बेहतरीन साधन नहीं नहीं था । हटा उन्होंने इस लेट किराये पर ली और रे लोग गुलमर्ग पहुंच गए । नयानाभिराम दृष्टिया वाली अनुपमेय थी । चारों तरफ भर भी भर लेट से उत्तर कारण शिवा और शालू ने आइस बोट और जैकेट किराये पर लिए और वहाँ बर्फ पर मजे से घूमने लगे । लगभग एक डेढ फीट गहरी बर्फ थी । उन्हें पूर्व आनंद की अनुभूति हो रही थी । अचानक चालू जोर से चिल्लाई कुछ आ ओ उसका पहले गड्ढे में पड गया था । लगभग कमर तक गहरी बर्फ में घर चुकी थी । शिवा के मजबूत हाथों ने तुरंत उसे ऊपर खींच लिया । चालू कर रही थी । एक तो ठंड से और दूसरे इस डर से कि अगर शिवा ने उसका हाथ ना पकडा होता तो आज उसकी बर्फ समाधि यहीं हो जाती है । उसने बर्फ पर आधारित एक हॉलीवुड फिल्म देख रखी थी जिसमें ट्रैकिंग के दौरान आएगा, पीछे रह जाती है और भयंकर स्नोफॉल में दब जाती है । नाया को से बहुत हो जाता है किंतु नायगांव से कहीं नहीं मिलती है । अत्यधिक ठोक के कारण मैं आगे की चढाई नहीं कर पाता है और वहीं सिया केलानी चला जाता है । किसी प्रकार उनका एडमिशन अधूरा ही रह जाता है । फिर कुछ वर्षों बाद दोबारा नायक बर्फीली चोटियों पर विजय प्राप्त करने पहुंचता है । चढाई के दौरान एक ऐसी जगह जैसे ही वह हथौडा मारता है, बर्फ वहाँ से हट जाती हैं और उसी खूबसूरती के साथ नायिका का मुर्दा जिस महंगा होता है उस वक्त दर्द भरे एवं भयावह दृश्य को याद करके ही शालू को झंझरी सी आ गई । उसने डरकर शिवा कहाँ तक कर लिया । अब वे लोग पुनास लेट पर बैठकर सोनमर्ग थी और चल पडे वहाँ उन्होंने आइस स्केटिंग बढा अनंद लिया । गाइड राजू उन्हें तरफ ऊंचाई पर ले गया । जहां चारों तरफ बर्फ ही बर्फ देखती थी । वहीं ऊंचाई से नीचे एकदम सपाट बर्फिली सीधी ढलान थी । लालू ने पूछा कि कौन सी जगह है? राज्य ने कहा ये रोलिंग गोइंग है । यह जगह नवविवाहित दंपति को बहुत पसंद आती है । यहाँ ऐसी क्या खास बात है? शिवानी जी की आशा व्यक्त की हाँ ये आपको अभी दिखाता हूँ सर आप दोनों आमने सामने खडे होकर एक दूजे को थाम लीजिए । अब आपको नीचे जाना है । चलते हुए नहीं लेटे लेटे दोनों पोजीशन लोग दोनों ने राज्य के कहे अनुसार क्या हर राजू ने दोनों को धीरे से धकेल दिया । बर्फ पर फैसला सीडी ढलाई एक दूसरे को अच्छी तरह से था । में दोनों गोल गोल घुमाते नीचे लडते गए । दोनों को जीवन में ऐसा रोमांच कार्यनुभव पहली बार हुआ । उन का अंग अंदर स्पंदित हो उठा । इतने में नीचे फिनिश पॉइंट आ गया जहाँ पर लगी रेलिंगों के साथ सोन के गोले । तथ्यों ने उन्हें स्वप्निल दुनिया के यथार्थ मैं लौटा दिया । वो विश्राम करते करते निशाल हूँ ठंड से आपने नहीं उसको जायेगी । तलब हुई तो शिवा ने कहा अभी थोडा टी ब्रेक लेते हैं । पास में ही छोटी दुकान पर राजू है, चाहे मिलने ले गया । तीनों ने चाहे ले लेंगे । राजू ने चाय की चुस्कियों के बीच चाहे वाले की दास्तान बताई कि कभी है खूंखार आतंकवादी हुआ करता था । इसमें सजा भी काटी थी और अब इतना हृदय परिवर्तन हो गया है कि पंद्रह वर्षों से यहाँ चाय की दुकान खोल के चला रहा है । शिवा बोला आतंकवादियों और हिंसकों की कोई जाति नहीं होती । मैं किसी की जाती या किसी वर्ग के हो सकते हैं किन्तु इतना चाहें की आतंकवादी को कभी शांति नहीं मिल सकती है । चरित्र और नीति के प्रति आस्था हीनता से आतंकवाद को प्रश्न मिलता है । मैं किसी निरव रातरानी की हिंसा नहीं करूंगा । इसी अनुव्रत के प्रति आस्था हो जाए तो आतंकवाद की जडें उखाडने में समय नहीं लगता । साथ ही रात रोजगार वा जीवन यापन के अवसर अत्याधिक हो तो शीघ्रता से कोई आतंकवाद की तरफ नहीं झुकेगा । गरीबी कुछ भी अपराध करवा सकती है । इसीलिए आवश्यक है सुदृढ व स्वच्छ प्रशासन में यहाँ पुनः पर्यटन का विकास हो, सुख शांति रहे, युवा वर्ग श्रम के साथ लक्ष्मी का भी वरण करें और हमारा भारत पूर्ण रिक्से देश बनी । जहाँ कहेगी की रेखा से नीचे कोई भी हुई ना देश में कोई भूखा ना सुबह निस्तब्धता को तोड के शिवा की आवाज को सब ध्यान से सुन रहे थे । जैसे ही उसकी बात संपन्न हुई चाहे वाला ताली बजाने लगा । राजू ओवर शालू भी उसके संघ सम्मिलित हो गए । कुछ दिनों के बाद तालियाँ रोककर चाय वाला गोला शायद मैं इंडिया की गहराइयों से आपके विचारों का सम्मान और समर्थन करता हूँ । राजू भी बोला ॅ ऍम अस करती रही उसने चाय वाले को चाय की पैसे देने क्या ही लेकिन चाय वाले ने उन्हें स्वीकारा नहीं । दो लाख आज के चाहे आप हमारी ओर से ग्रहण करें । धन्यवाद । धन्यवाद के साथ चाय समाप्त होने के बाद राजू ने पूछा ऍम शिवा ने शालू की राय जानी चाहिए । आज बस इतना ही स्कूल बाकी कल चलेंगे । लालू ने उत्तर दिया, उन्होंने चारों तरफ देखा । शाम का दिन लगा जाने लगा था । पुनः उसी स्थान पर आ गए जहां से चढाई प्रारंभ की थी । वहाँ से शिवा अपने होटल का रास्ता जानता था । आता था । छुट्टी मानते हुए राज्य बोला शायद कल कितने बढिया हूँ । शिवा ने कहा प्रातः नौ बजे इसी जगह पर आ जाना । हम तैयार मिलेंगे । ओके शहर काजी वहाँ खिलाता हुआ चला गया ।

Part 24

शालू और शिवा वहीं टहलने लगे । हल्का हल्का पाला पडने लगा था । अम्बर से होती तो शहर बृष्टि अति मनोहरी लग रही थीं । सामने से बता रही थी हम पांच के कारण ऐसे देख रहा था जैसे बर्फ की बता रही हूँ । पास में पेड पौधों पर प्रसारित हेमकुंड क्रिसमस डे की याद चला रहे थे । मैं सरगी सुषमा का अवलोकन करते हुए चलते चलते हैं । दोनों अपने शिकारे तक पहुंच गए । शयन कक्ष में जाकर नाम वस्त्रों को बदला । एक एक हूॅं क्या न्यूज चैनल चालू करते ही धमाकेदार खबर थी । आतंकवादियों ने कश्मीर में पुणे हिंसा फैलाने की धमकी दी है । आलू के चेहरे पर आए परेशानी के भाव देखकर शिवा ने शिकारा मालिक को बुलाया और पूछा हूँ हमें क्या सावधानी रखनी चाहिए? शिकारा मालिक बोला ऐसी धमकियाँ तो प्राय आती रहती हैं । कोई घबराने की बात नहीं है । ऍम मैंने कहा मुझे अपनी नहीं अपने देशवासियों की चिंता है । शिकारा मालिक बोला आप चिंता ना करें । हमारी फौज समर्थक हैं । वो सब कुछ संभाल ही रही है । शिवानी पुनः पूछा हूँ हम कल घूमने का कार्यक्रम रखे या नहीं । शिकारा मालिक ने कहा ऐसी चेतावनियां तो यहाँ नहीं मिलती रहती है । बस बस सावधान जरूर रहे कि कोई घबराने की बात नहीं है । काफी के मध्य भाग में हीटर चालू कर वह चला गया । प्रकोष्ठ की उस संताप बडी भली प्रतीत हो रही थीं । शीघ्र ही वे निद्रा तीन हो गए । दूसरे दिन राटा समय पर हिवा ड्रम शानू तैयार हो गए । आज उन्हें घरों सवारी करनी थी । इसलिए विशेष पौशाक में दोनों बेहद आकर्षक लग रहे थे । राजू आते ही बोला शायद घोडे वाला आ गया है । मैं बहुत अच्छे से देखकर घोडे लाया हूँ । एक घोडा सफेट, दूसरा काला । आप दोनों उस पर खूब जचेंगे ही देखा । वाकई घोडों की कदकाठी बडी आकर्षक थी । उसने राज्य को धन्यवाद कहा और दोनों घोडों पर सवार हो गए । कुछ दूर तक रास्ता आसान सा था । फिर मुँह चढाई पर घोडे चल रहे थे । शालू की सांसें अटक रही थी । संकरी सी पगडंडी नीचे हजारों फीट गहरी खाई । बर्फ पर घोडे का हल्का सा पैर चलता तो उन को लगता की बस अभी गए जहाँ हल्की सी चौडाई थी । शिवा का गौडा आगे जाता तो उसका दिल जोर से धडकने लगता । मैं मन ही मन भगवान का स्मरण करने लगती । बेहद साहसिक रोमांच कार्य घुड सवारी करके जब नियत स्थान पर पहुंचे तो दंग रहे गए । सामने घाटी में हरियाली ही हरियाली और चोटियों पर बर्फ ही बरसी । धूप में बर्फ शीशे की तरह चमक रही थीं । सिर पर चमकता नीला आसमान । इतना सुन्दर प्राकृतिक दृश्य शानू ने आज तक नहीं देखा था । उसने प्राकृतिक दर्शियों की तथा शिवा की दो चार फोटो अलग अलग एंगल से की थी । राज्य को कैमरा दे दिया । दोनों की एक साथ फोटो के जाने के लिए राजू ने दोनों के आकर्षक फौज में है । अलग अलग जगह गए । फोटो खींचे । ब्लू जींस सफेद हाई नाॅट लॉन्ग रूट में शालू हॉलीवुड हीरोइन लग रही थी । हॉलीवुड की हीरोइन मर्लिन मुनरो से कम नहीं लग रही थी । वहाँ बहुत सुन्दर बर्फ के गणेश जी बने हुए थे । शिवा ने शालू को वहाँ खडा किया और फोटो खींचा । फिर उसने देखा एक दूसरे किनारे पर खूबसूरत साहब परिद्रश्य था । ऐसा लगता था कि आसमान धरती को छू रहा है । शिवानी कैमरा स्टार्ट किया । इसी बीच चालू बाल्टी करने हट गई । शिवा को कुछ दूर काली आकृतियाँ दिखाई दी । तभी शानू बाढ ठीक करके आ गयी । दीवाने उसकी फोटो ले ली । तुरंत हाथ ऍम किया और दूर तक देखने लगा । वहाँ कुछ आकृतियां दिखाई नहीं जो बर्फ खोज कर उसमें कुछ दबा रही थी । शिवानी उनके फोटो ले लिए थे । ध्यान से देखा ये लोग मुंह पर कपडा बांधे । कंधे पर एके सैंतालीस डाले । संदिग्ध हरकतों के साथ साफ आतंकवादी नजर आ रहे थे । शेरवानी गोपनीयता बरकरार रही । एक तरफ ले जाकर शिवा ने शालू को सारा दृश्य दिखाया । सालों ने कहा ये ऍम लगा रही हैं । हमने कैसे पकडे? दूसरी तरफ उन्होंने देखा कि मिलिट्री की गाडियाँ अपने बीच में टूरिस्ट गाडियों को तथा सामान से लदे ट्रकों को कवर देकर पास करवा रही थीं । ये लेकर उसने तीसरा नेत्र जगाया । शिवा की मस्तिष्क हमें खटका हुआ तो अरे ये काफिला तो उसी दिशा में जा रहा था, जिधर आतंकवादी था । उसे दो मिनट में सारा खेल समझ में आ गया । इन परिस्थितियों में क्या करेंगे? शिवानी शालू से पूछा तो मैं डर तो नहीं लग रहा है? मैं बोली नहीं नहीं, मैं तो सोच रही हूँ । इन आतंकवादियों को कैसे गिरफ्तार करवाएँ और इस स्थिति से निपटने अगर ऐसा नहीं हो पाया तो जैसे ही काफिला उधर से निकलेगा सबकी सफर जाएंगे । दीवानी बेहद साहसिक, कठोर निर्णय लिया शालू इन आतंकियों को किसी ना किसी तरह बातों में बहलाकर तो मैंने रोकी रखों तब तक मैं उस काफिले को रोकता हूँ । राजू को तुम अपने साथ रखो । अच्छा लडका है, मदद करेगा । अभी राज्य आ गया । राजू तो मैडम को उस रास्ते से लेकर शिकारा पहुंचा हूँ । मैं यहाँ दूसरी ओर से होकर आता हूँ । सुनकर एक बार तो राज्य समझा नहीं किंतु स्वर्ग की आदेशात्मक गंभीरता ने उसे शिला की बात मानने पर मजबूर कर दिया । चालू शिवा से यह सुविधा हो रही थी, जैसे आखिरी बार मिल रही हूँ । किन्तु देश प्रेम के दीवाने महाभारती के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने का माद्दा रखते हैं । इनके लिए अपने हनीमून में भी प्राथमिकता राष्ट्र सुरक्षा होती है । चलते चलते शालू ने बात प्रारंभ कि राजू मुझे कश्मीर की वादियाँ बहुत अच्छी लगी नहीं, हर साल आया करूंगी और तो मैं ही गायब रखेंगे वहाँ क्यों नहीं मैं राजू ने जवाब दिया । राजू तुमसे बात जाना चाहती थी । यहाँ की जनता के सच्चे हितचिंतक कौन हैं? सरकार के आतंकवादी शालू ने बडी अदा से पूछा । उत्तर देते हुए राजू बोला मैं चाहता हूँ क्या बताऊँ? आतंकवादियों ने सारा व्यापार खत्म कर दिया । यहाँ के लोगों की सुख समृद्धि आतंकियों के कारण समाप्त हुई है । उन्हें दोस्त कैसे मान सकते हैं? लालू ने पूछा हूँ तो की आ यहाँ की जनता आतंकवाद से छुटकारा चाहती है । सौ प्रतिशत सच्चाई ये बात तब शानू ने सोचा । बंदा तो सही हैं । बोली हैं जिंदगी में कभी आतंकियों से मुकाबले का या उन्हें पकडवाने का अवसर मिले तो मदद कर होगी । राजू एकदम सिनेमाई अंदाज में बोला हाँ हाँ, जरूर करूंगा जय हिंद । उसकी अदा देखकर मुस्कुराते हुए शालू बोली तो देश सेवा का अवसर आगे आये । तैयार हो जाओ । राजू चौंका मैं हूँ क्या? आप सीआईडी से हैं? नहीं । राजू हम बेहद साधारण टूरिस्ट हैं, लेकिन हिंदुस्तान के जागरूक नागरिक हैं । जरा उधर देखो । राजू ने देखा क्या रहे ये दोनों आज भी तो बर्फ में बम लगा रहे हैं । राजीव बोला ऍम सा बहुत क्या करीब? राजू हमें इन्हें फुसलाकर ऐसी जगह ले चलना है जहाँ से ये भागने ना पाएं । इन्हें हम बताएंगे कि मैं फिल्म की हीरोइन हूँ । शूटिंग करते करते रास्ता भटक गई हूँ । तुम गायब हो अभी ले । राज का लालच देकर बहलाना तुम्हारा काम है । राजू घबरा गया ऍम साहब, ये बहुत खूंखार होते हैं । कल को सही में इन्होंने आपको नुकसान पहुंचा दिया तो मैं साहब को क्या जवाब दूंगा जहाँ हमारी रक्षा करने कैसे पहुंच जाएंगे? शालू बोली वो राजू डर नहीं, हम देश सेवा के लिए अच्छा कार्य करने जा रहे हैं । भगवान हमारी सहायता वाशी करेंगे । राजू बेहद संकोच से बोला नहीं नहीं हम साहब आपकी जान जोखिम में नहीं डाल सकता । राजू अगर माँ भारती की रक्षा में शालनी की जान जाए तो और जाने कुर्बान हैं । पर हमें नहीं रोकना है तो मैं किसी भी छोटे राष्ट्रीय से ले चलो । शानू चित करने लगी तो राज्यों ने उसकी बात मान ली । पहली मुलाकात में शिवानी लाल रेशमी स्टार्स चालू को भेंट किया था । वो भी शालू के पास था । उसने उसे पर से निकालकर गले में डाल लिया । फिर मन ही मन योजना बना ली और राजू को भी समझा दिया । आतंकवादियों ने उन्हें कुछ दूरी से देख लिया था । मैंने उन्हें आते देख भाड में छूट गए थे । उनका काम माइंड लगाने का था, जो पूरा हो चुका था । चरमबिंदु के पास पहुंचे तो शालू वासी खेला उठो पानी ऍम नहीं कर जाएगी । कहाँ ले आए तो मुझे मैं साहब थोडी दूर थोडी सी हिम्मत रखें । अभी हम शहर में बहुत जाएंगे और एक खाके मत रखूँ । इतनी हो गई है बाॅधते मुझे तो लगता है मेरा यही बर्फ में कभी बनेगी । आतंकियों को संतोष हो गया, मिलिट्री की आदमी नहीं बल्कि पथ भटके पटेल थे । तभी वो सामने आकर बंदूक दानकर बोले ये ऍम कहाँ जा रहा हूँ? शालू ने घबराने का अभिनय किया और बोली मेरी तो फिल्म की शूटिंग चल रही थी । मैं प्राकृतिक सौन्दर्य में डूबी थोडी यहाँ के निकल गई । अब अपनी टीम से पटक नहीं हुई । ऍम आपने बंदूके क्यों आ रही है हम पर हम तो पहले से ही परेशान है । नहीं फॅालो राजू इनसे पूछो पानी है तो पिलाएंगे । मुझे बहुत प्यास लगी है । मैं तो सीमा जाऊंगी । विशाल उ उत्कृष्ट अभिनय कर रही थी जो वास्तव में हीरोइन नजर आ रही थी । राजू ने कश्मीरी भाषा में उनसे बात की । मैं समझ नहीं पाई लेकिन आतंकवादियों की आंखों में खुशी जमा कर साल उन्हें पानी राजू शाली से बोला । यहाँ पास ही में एक अतिथिगृह हैं । वहाँ पानी जाए । सब का प्रबंध हो जाएगा । फिर हम अपनी टीम को ढूंढ लेंगे । चालू घबराई सी बोली राजू कहीं अंजान जगह मत रखना । जल्दी चलो रात हो रही है । उसने दो कदम जल्दी जल्दी उठाएं । इतने में ऊंची एडी जूतों से टक्कर गिरी । उसने फुर्ती से लाल रूमाल अपनी हेयर पिन से वहाँ कार्ड दिया और लेटे लेटे चार कदम आगे आकर उठने का प्रयास करने लगी तो जो माल उसके हिप्स के नीचे छिपा था, लेकिन फिर भी मजबूत रहे । यह उससे उठा नहीं गया तो राजू ने पास आकर सहारा देकर उठाया । आतंकियों ने पास से शालू पर नजर डाली । उसके जहर की गुलाबी आभा को देख कर उन के दिल में बल्लियाँ उछल नहीं लगी हूँ । काम का हल्का हल्का धुन्ध लगा । फैलने तक वे लोग एक सुनसान अतिथिगृह में पहुंच चुके थे, जहाँ सिर्फ मैंने जान और एक सोया दो ही जने थे । उधर शिवानी कोचवान को घोडा तेज दौडाने का ये कहकर आदेश दिया कि नीचे जो काफिला जा रहा है उसके आगे की गाडी के ड्राइवर से मिलना है । मेरा भाई हैं । रास्ता बेहद खतरनाक था । घुमावदार मोड पर नीचे देखकर छोटे मोटे की तो डर के मारे जान ही निकल जाती है । भगवान का नाम लेते लेते जैसे तैसे समता तक में पहुंचे । काफिले के बराबर चलकर जैसे ही कोचवान चलने लगा, मिलिट्री ने उसे रोक लिया । कौन हो यहाँ क्या कर रहा हूँ, अपनी पहचान दिखाओ । उन्होंने प्रश्नों की झडी लगा दी । शिवा ने कहा आप अपने अधिकारी को बुलाए सिपाहियों को लगाई ऑफिसर पर आत्मघाती हमला करना चाहता है । दो जनों ने उन्हें पकड लिया काफिला चला जा रहा था । शिवाच लाकर बोला काफिले को रोक को आगे बम लगे हैं । आगे माइंड से जिन्होंने शिवा को पकडा था । उन्होंने उसकी तलाशी ली । उसके पास कुछ भी ना था । कोचवान के पास ना शिवा के पास उल्टा उसका पर्स भी पीठू । बैड में शालू के कोचवान के पास रह गया था । शिवा एक ही रट लगाया था । काफी लेकर रोको । काफी लेकर रोको । अधिकारियों को वहन हुआ कहीं रोककर अन्य जगह से इसके साथ ही आक्रमण ना कर लें । दुरभि लगातार रेखा दूर दूर तक कुछ नहीं था । शिवा ने कहा मैं शिवा हूँ । पर्यटक दिल्ली का एक समाजसेवी मेरा हुआ भी ऊपर ही छूट गया है । आप मेरा विश्वास करें । अधिकारी को बुला दें । इतने में अधिकारी स्वयं आ गया । शिवा ने एक साथ में सारी बात बता दी और बोला आगे माइन्स की जगह निशान होना है । एंटी माइंस उपकरण से आप खोज करवा ले । मेरी पत्नी की जान खतरे में है । उसे ढूंढने में भी मदद करेंगे । चाय फोटो ऍम तेजस्वी युवक की आंखों से छलक थे । आत्मविश्वास है अधिकारी को शिवा के गठन में सत्यता प्रतिबंधित हुई । उन्होंने पूरे काफिले को जीरो स्पीड का आदेश दिया । अधिकारी शिवा को लेकर आगे पहुंचे चार खोजी कमांडरों को शिवा के साथ क्या आगे उन्हें ऑपरेशन मूव करने का आदेश दिया । लगभग पांच मिनट में एक कमांडर ने आवाज थी सर यहाँ लाल रूमाल है । अधिकारी ने कहा छोडना नहीं आप मत लगाना जाऊ सेवा कुछ पहचानने लायक है तो देखो सीमा पहुँच गया । उसने देखा लाल देश में मतलब एक कोने में कढाई से लिखा था शिवा । उसने अपने प्रथम उपहार को एक नजर में पहचान लिया । शालों की हेयर पिन भी पहचान गया । उसने भरे गले से कहा सर ये मेरी पत्नी का हेयर पिन और मतलब है । यहीं आस पास कहीं माइंड लगी हैं सर, मैंने अपना कर्तव्य पूरा कर दिया । मेरी पत्नी को बचाने में मुझे आपकी मदद चाहिए । उसके साथ हमारा डाइट राजू भी था । यहाँ से कहाँ गए होंगे? अफसर बोला सिवा तुम चिंता मत करूँ तो तुमने आज अपनी अपनी पत्नी की जान पर खेलकर बहुत बडा हादसा होने से बचाया है । हम पूरी ताकत तुम्हारी पत्नी की खोज में झोंक देंगे । ऑफिसर ने अपने खोजी दस्ते के आठ सिपाही पूरे सात समानवा हथियारों के संग शिवा के साथ कर दिए । उसने कहा ऑपरेशन शिवा ऑपरेशन के कमांडर है मेजर प्रभुजोत । आप इस मिशन को लीड करें तो मुझे बोला क्या सर पूरे टीम ने वहाँ से मुझे क्या योजना बनाकर शिवा को मेजर पर वो जो अपने पास रखे थे तथा अन्य कमांडो भी उन के आस पास थोडी दूर चलते ही उसने कहा देखो ये रानी शान हमें सीधा चलना है । शिवा ने पूछा कैसे? प्रभुजोत बोले ऍफ का टुकडा है इसका वो उधर है । लगभग आधा किलोमीटर आगे बढने के बाद प्रभुजोत बोले अब हमें भाई मुडना है । शिवानी चारों तरफ देखा कुछ भी नहीं था । प्रभुजोत बोले देखो ये झुलते का गहरा निशान । इसका टॉप बाई तरफ तथा मेरी ताई तरफ का इशारा करती है कि हमें उधर मुडना है । बाये मुडकर चलते चलते बर्फ कम हो गई और दो पक्की बनी पगडंडियां नजर आ रही थी । अब इस पर जाएँ । समय बहुत हो चुका था । रात गहरा रही थी । टॉस की तेज रोशनी डालकर देखा तो वे पगडंडी के बीचोंबीच एक लडकी पडी थी । कोई सेव के वृक्ष की सूखी सी डाली प्रभुजोत ने कहा हमें दूसरी पगडंडी से चलना है । शिवा ने पूछा कैसे? तो प्रभुजोत ने बताया रास्ते के बीचोंबीच नहीं डालने का मतलब है इस रास्ते पर नहीं जाना है । उन्होंने दूसरा रास्ता चुना । तोडा साहब के चलते ही वहाँ की है । तुम आई मारा दिखाई थी । प्रभु जोडने, सभी टॉर्च बुझाकर धीरे धीरे उसी इमारत की तरफ बडने का इशारा किया । पूरी इमारत को कवर करने के लिए सभी कमांडो को अपनी अपनी कोलेशन बता दी गई । राजू आतंकवादियों को लेकर इसी अतिथिगृह में कमरा संख्या साठ में ठहरा था । शालू ने बहुत देर तक तो उन्हें अपने लटके झटकों में उलझाए रखा और जाम पर जाम पिलाती गई । अब उन्हें करोड चढ गया । नृत्य दिखाने की स्थित करने लगे । बोले, जो तुम्हें सोलह में डांस किया था, वही दिखा । राजू ने उनका साथ दिया ऍम साहब, ये तो आपके कद्रदान है । प्लीज अब तो वही वाला न शुरू करेगा । शालू अपने स्कूली दिनों में डांस को इन का खिताब जीत चुकी थी । बिना अच्छे साज बाजे के भी उसने ऐसा नृत्य का समा बंदा कि दोनों आतंकी मदहोश होते दिखाई दे रहे थे । शालू मनी मन घबरा रही थी । अब आई परीक्षा की घडी हवाई लंबे वाला एक आतंकी तो अचानक उठकर उसके पास ही आ गया । बहुत हो गया रानी अब स्तर पर चलो राजू मनुहार से उसके हाथ को दो ले जाते हुए बोला ऐसी जल्दी भी किया है, पूरी दाल सामने है । भाई ऐसा गजब का नृत्य कहाँ देखने को मिलेगा । आतंकी ने सिर्फ पैक किया और देखने बैठ गया । जैसे ही राजू से पीछे लेकर गया, जाने कहाँ से कमांडो आया उसने आतंकी की आंखों कामों पर हाथ रखा और पीछे खींच लिया । उसने अपने साथी की ओर देखा । वो भी अपनी जगह से गाया था । राजू भी गाया था । ये सब देख शालू थर थर काँप रहे नहीं । उसने डर से आंखे बंद कर ली थी । समझ में नहीं आया कि पलक झपकते नहीं क्या हो गया । यालों ने कंधे पर जाना पहचाना । सास बडे पाकर धीरे से आंखें खोलीं । सामने शिवा को देखकर घर रेल की तरह नहीं पड गई । आंसुओं की धारा गए चली प्रभुजोत ने दोनों को धन्यवाद दिया । फौजी की एक सलामी थी । राज्यों को रास्ते पर निशान डालने के लिए तथा सहायता करने के लिए विशेष धन्यवाद दिया । राजू ने अपनी पहचान अपना नाम गुप्त रखने की ऑफिसर से प्रार्थना की । दोनों आतंकवादियों को फौजी कैच कर के नहीं गई । राजू ने पूछा ऍम रात काफी हो गई है । यहाँ रोकना तो खतरे से खाली नहीं है । आतंकियों के साथ ही पहुंचने वाले होंगे । हमें तुरंत यहाँ से निकलना होगा । आपको शिकारा पर ले चलो या हमारे घर एक राज का अतिथि स्वीकारेंगे । शिवा ने दोनों स्थानों की दूरियाँ पहुंची । राजू ने कहा, बस किलोमीटर की दूरी है । दस मिनट पहले मेरा जा रहे हैं । फिर शिकारा शिवा ने कहा तब हमें हमारे हाउस बोट नहीं छोड दो । गेस्ट हाउस से उनका हर निशान राजू ने मिटा दिया । गहन अंधकार में तीनों हाथ पकडे नहीं है । आगे आगे राजन पीछे शालू से शिवा पता नहीं कितने मोर कितनी गलियाँ । अब सामने डलझील दिखाई देने लगी थी । पांच मिनट की दूरी पर उनका शिकारा दिखाई दे दिया । राजू ने दूर से विदाई दी और अंधेरे में गायब हो गया । अब क्या था कश्मीर घाटी दहलाने की साजिश न कम हो गई थी । हथियारों का बडा जखीरा बरामद हुआ था । राइफलें, ग्रेनेड, आरडीएक्स, एके सैंतालीस समेत सभी हथियार नहीं थे । सम्भवतया आतंकियों ने महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों एवं भीड भरे संस्थानों पर विस्फोट करने की योजना बनाई हुई थी । सेना के अधिकारी ने उनका धन्यवाद करते हुए सभी नागरिकों से ऐसी जागरूकता की अपील की । अखबारों में शिवाय हम शालू की सूझबूझ बाद लेरी के चर्चे थे । उनके दिल्ली को वजह से पहले उनकी प्रसिद्धि वहाँ पहुंच चुकी थी । दिल्ली एयरपोर्ट पर शिवा शालों के उतरते ही पत्रकारों के समूह ने उन दोनों को घेर लिया । फॅस पढ रहे थे । सवालों की बौछार आ रही थीं शराब आपने आतंकवादियों का कैसे पता लगाया? मैडम आप आतंकवादियों के साथ कितनी दे रहे हैं? क्या उन्होंने आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचाया? क्या आपने उनका चेहरा देखा जाए? कैसे लगते थे? उनको दोबारा पहचान सकती हैं? हम है कोई टिप्पणी नहीं करनी । मैं और मेरी पत्नी अभी बात करने की स्थिति में नहीं था । फॅमिली क्या के शिवा और शालिनी वहाँ से निकल गए । घर पहुंचे तो घर के बाहर ही शामियाना लगा था । पूरा स्वागत का माहौल था । हाँ जी से मिलकर सुचित्रा ने सारी व्यवस्था करवा दी थी । अनुव्रत सेवाभारती के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता पूरी तैयारी से ऊपर स्थित है । राजा भैया आलोक कृष्णा सजग सौ वहीं अपने प्रिय साथी का इंतजार कर रहे थे । शाम तक यही चलता रहा । रात का भोजन सुचित्रा के यहाँ था । कुल मिलाकर आज का पूरा देने उनकी जिंदगी का अभी स्मरणीय दिन रहा । रात को शिवानी शालू से पूछा आज के सारे कार्यक्रम कैसे लगे? बहुत अच्छे थे । सालों ने सादगी से कहा शालू मुझे सब देखकर अजीब सी अनुभूति होती है । मेरे हृदय में ऐसी स्थितियों से विशेष उल्लास अनुभव नहीं होता, बल्कि मेरा मन कहता है इनमें सम्मिलित ही ना हूँ । इसके बजाय मैं चुप चाप समाज सेवा करते रहना चाहता हूँ । शालू पति के उच्च विचारों को सुनकर नतमस्तक थी, लेकिन उसने बुद्धिमत्ता से उत्तर दिया अपनी तरफ से कोई आयोजन नहीं करेंगे । तुम्हारे सद्गुणों की स्थिति करते हुए कोई ऐसे आयोजन करता है तो हमें अवश्य शामिल होना चाहिए क्योंकि इससे दूसरों को भी अच्छे आदर्श कार्यों में अग्रसर रहने की शिक्षा मिलती है । शिवा ने स्वीकारोक्ति मैसेज फैलाया और बातचीत का रुख मोड दिया । दिन भर के इंतजार के बाद अब कहीं जाकर शालू उसके करीब आई थी । उसकी तपेश को महसूस कर वे भी दिखला जा रहा था । इस प्रकार आमोद प्रमोद करते हुए दोनों न जाने कब निद्रा तीन हो गए ।

Part 25

रात्रि के उत्तरार्ध में आलू को सपना आया । जैसे कोई देर से आत्माओं से हरे फलों से भरी टोकरी भेंट कर रही थी । एक सजीधजी हथनी केले के हरे हरे पत्ते ली है । उसके घर में प्रवेश कर रही थी और साथ में आपने घोडे पर सवार झांसी की रानी लक्ष्मी भाई भी आ रही थीं । सजीधजी हथिनी और झांसी की रानी का बेहद आनंदित भाव से स्वागत करने शालू खडी हुई । उसकी नींद खुल रही । उसने देखा वहाँ कोई नहीं था । सुबह के सवा चार बज रहे थे । होना सोई नहीं । उसने अपनी भाषा स्वन रखा था कि शुभ स्वप्न देखने के बाद सोना नहीं चाहिए । बटाहन नेत्री क्रमसे निर्वत होगा । मंत्र जब बार ध्यान में बैठ गई ऐसी बहुत बात कर ली । बाकि माँ अपने आप को धन्य समझती थी । सुन्दर सुघड, शिक्षित दिनेश ई, समयबद्धता के साथ सारे गए कार्य निष्पादित करना साथ ससुर के हर काम को तक पडता से पूरा करना, पूरे आदर सम्मान के साथ शिवा के प्रत्येक कार्य में आवश्यक सहयोग देना । इस प्रकार उनकी गृहस्थी की गाडी माल से चल रही थी । एक दिन शालू को अर्थव्यवस्था का अनुभव हुआ । सास के साथ महिला चिकित्सक के पास गई । वहाँ क्या हुआ? घर में नया मेहमान आने वाला था । शिवा की खुशियों का पानी नहीं था । सैनिटरी ने शालू को अच्छी संतान प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण उपयोगी सुझाव बताते हुए कहा तुम्हारे चलने फिरने, उठने बैठने, सोचने समझने, सुनने, बोलने तथा खाने पीने का घर वास्तव जीव पर बहुत असर पडेगा । पिछले सबसे पहले जरूरी है जाग्रत, छेडना, कटाह प्रति पल जागरूक रहते हुए तो मैं सकारात्मक चिंतन करना है । रास्ता जल्दी उठकर मंत्र जब ध्यान, माला, योग, प्राणायाम आदि सातवें क्रियाएं करनी । भोजन का प्रथम ग्रास सफेद भोजन पदार्थ जैसे बादाम नही । दू द्वारा इसको लादी लेने से संतान का वंश वेट होता है । धरी नारियल का प्रतिदिन उपयोग करने से आंखें बडी बडी होती हैं । बताता भोजन में उपयुक्त सावधानियां रखना । शालू इतनी दोस्ताना साहस करो पाकर बेहर निश्चिंत थीं । उस दिन हमको शिवा महाराणा प्रताप का कैलेंडर लाया था । उसने अपने शयन कक्ष में लगा दिया । राम को सास बहु खाली बैठी होती तो राम की मर्यादा, कृष्ण का गीता का उपदेश, तकलीफ, राज चौहान की धीरटा एवं मीरा की भक्ति भावना जैसे विषयों पर चर्चा करती । नियत समय पर ख्यालों ने अतिसुंदर तेज कन्या से कोमल पर्रिकर जन्म दिया । शुभ दिन देखकर कन्या का नामकरण संस्कार हुआ । पंडित जी ने श्रेष्ठ गुण वाली इसका नया का नाम रखा आलिया । डाटा दादी को एक प्यारा सा खिलाना मिल गया था । शिवा भी अपनी फूल से पुत्री का पार कर प्रसन्न था । किसी ना किसी तरह समय निकालकर उसके संग खेलता उसकी नहीं ऍम किलकारियों से शिवा को अपूर्वा आनंद की अनुभूति होती हैं । सुबह सुंदर पत्नी वो प्यारी सी बेटी के साथ शिवा स्वयं को बहुत भाग्यशाली समझता हूँ । खुशी के दिन पंख लगाकर रखते हैं । आने आप पांच वर्ष के हो गई थी । सावित्री प्रयास सालों से बोलती थी । अब एक और होता करले परिवार को हरा हो जाएगा । इधर बढते बढते शिवा टीज इंडिया प्रोग्राम का मैनेजर बन गया था । चालू नृत्य वार्ड के ट्यूशनों में बहुत मेहनत कर रही थीं । कुल मिलाकर जीवन में जीवंतता का रसास्वादन करके ॅ

Part 26

पिछले कई दिनों से शिवा लगातार व्यस्त रहा । आज उसे कुछ अवकाश था तो पिछले तमाम समाचार पत्र लेकर तसल्ली से पढने बैठ गया । एक त्रासदी के समाचार को विशेष ध्यान से पडने लगा । पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले से सटा गौरीपुर गांव प्रकृति का अनुपम उपहार था । यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य का पान करने । देशी ही नहीं सैकडों विदेशी पर्यटक भी प्रतिवर्ष आते थे । बहुत ऊंची पहाडी पर स्थित होने के बावजूद यहां विकास की रफ्तार बहुत अच्छी थी । स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, सरकारी कार्यालय सब कुछ व्यवस्था था । हाल ही में अचानक इस गांव का आसमान है । आप तो पडी यहाँ के संकरे पहाडी क्षेत्र में धूप के बादलों ने अत्यधिक नमी के कारण सघन रूप ले लिया । ऐसा भयंकर तेज आवाज के साथ ये बादल फट पडे । पहाडों में जबर्दस्त भूस्खलन प्रारंभ हो गया । घर, कार्यालय, विद्यालय, सरकारी इमारतें एवं अस्पताल तक मटियामेट हो गया । जहूर विनाशी विनाश सिर्फ मलबा ही मलबा । ये मलबा मौत बनकर पसारता जा रहा था । हूँ चारों ओर भयंकर चीखपुकार जिधर देखो उधर बस तबाही तबाही । जहाँ थोडी देर पहले डर गांव पडता था, वहाँ अब सिर्फ खंड है ही थे । प्रकृति के इस तांडव से सैकडों लोग कालकवलित हो गए । अंडे नेट लापता हो गए । इस कहने पूरे के पूरे गांव को लिया । शिवानी दूसरे समाचार पत्र में देखा । इस पूरे देश में विषाद की रेखाएं फैल गई । प्रधानमंत्री राहत कोष मृतकों के परिजनों, घायलों को मुआवजा देने की पहल हुई । अनेक समाजसेवी संगठन इसका आपको पुनः जिंदा करने के मकसद से आप जा रहा था । पुनर्निमित आपदा पीडितों की सहायता के लिए आगे आए । मुझे पानी तुरंत अनुव्रत सेवाभारती फोन किया हूँ । अब्दुल्ला साहब ने आपातकालीन बैठक बुलाई । राष्ट्रीय आपदा की इस घडी में सहयोग है तो महत्वपूर्ण योजना बनाई गई । उन्होंने दो रूपों में सहयोग देने की सोची । पहला राहत सामग्री पहुंचाना, दूसरा वहां पहुंचकर सेवा कार्य करना । सारे सदस्यों ने एक स्वर से योजना को पास कर दिया । राहत सामग्री इकट्ठी करने का जिम्मा पाठक जीने संभाला और कार्यकर्ताओं की टीम एकत्रित करने का दायित्व वो शिवा को सौंप गया । इस गांव के आसपास के क्षेत्रों के विद्यालयों के अध्यापकों को प्रशिक्षण भी नहीं । सेवा यहाँ पहले भी पीच इंडिया टीम के साथ आया था । थाउसे इलाके की जानकारी थी । अब्दुल्ला साहब ने कहा परसों कराता हम रवाना होंगे । हमारे पास समय बहुत कम है । सब युद्धस्तर पर तैयारी करें । अपने साथ नौ और समझदार, मजबूत, होशियार, मेहनती, युवा कार्यकर्ताओं को तैयार कर देररात शिवा घर पहुंचा । माँ पिताजी शालू सब इंतजार कर रहे हैं । शिवा को भी भूख लगी नहीं भोजन करके वहीं पांच दस चक्कर लगाए और सब सोने चलेगा । दूसरे दिन ट्राॅमा आपातकालीन आकस्मिक अवकाश है तो वो अपने ऑफिस में प्रार्थना पत्र आया । रास्ते में उसकी ससुराल थी । कई दिनों से हरी सेवक जी से मुलाकात नहीं हुई थी तो थोडी देर वहाँ गया । दूसरे दिन गौरीपुर जाने का कार्यक्रम बताकर सास ससुर को प्रणाम करके रवाना हुआ । शिवा का अभिन्न मित्र हो जाए और सुजाता भी विवाह के पश्चात यही रहते थे । उनका घर भी उसकी ससुराल के पास था । शिवा पांच मिनट उनसे भी मिलता हुआ निकला हूँ । घर पहुंचा तो माँ सामने ही बैठी थी । ईरानी माँ को बताया कल प्रातः आपदा राहत कार्य गौरीपुर जा रहा हूँ । ये सुनते ही मां के कलेजे में लाॅरी उठने लगीं । उनका डाॅन हो गया । गला रूंध गया । बोली है बेटा तुम ने अपना पूरा जीवन समाजसेवा को समर्पित कर दिया है । नहीं नहीं तुझे कभी नहीं रोका । आज न जाने क्यों मेरा दिल बैठा जा रहा है । मजा बेटा इस बार तो मुझे वहाँ पता सफल होने लगी । शिवा माँ के पास जाकर आँसू पोछने लगा और बोला मेरी शेरनी माने हमेशा मुझे प्रोत्साहन दिया था । हाँ, अचानक क्या हो गया वहाँ सिर्फ हफ्ता दस दिन की बात है । बहुत जल्दी लौटाऊंगा । न जाने क्यों शिवा की बातों से भी माँ को दिलासा नहीं मिली । उसका दिल बुरी तरह तरह के जा रहा था । सेवा अपने कक्ष में गया तो देखा शालू आर्या से खेल रही थी । सेवा भी माँ बेटी के उस बच्ची का पकडम पकडाई खेल में शरीक हो गया । डाॅ । मिनट बात आ गया । थक गई तो शायद हूँ । आर्यन को माँ के पास छोडा ही और शिवानी कमरे में आते ही शालू को पकडकर केंजी लिया । कुछ अवसर देकर उसने बताया कल सेवाभारती के सदस्यों को लेकर गौरीपुर जा रहा हूँ । कहाँ तो इतनी प्रफुल्ल थी कहाँ एकदम गमगीन हो गई । उसे लगा उसके पैरों कि नीचे से धरती की सब रही थीं । उसे अपना दिल बैठता सा महसूस हुआ । धीरे धीरे वैसे रखने लगी और बोली तो इसमें जाओ । उसकी हालत देखकर शिवानी उसे सीने से लगा लिया और बोला मेरी बहादुर पत्नी जिसने इससे भी बडे बडे मिशन में मेरा साथ दिया था । हाँ, जिसका मन क्यों का क्या हो रहा है? किसकी लेटे लेटे शालू बोली मुझे आज एक सुबह सुबह बाॅधना सपना आया था । एक खूंखार दे थी आपको जबरदस्ती मुझसे दूर किए जा रहा है । ऍम अंधकार में आपको बेरहमी से खींच जाए । कुछ बहुत डर लग रहा है । आप किसी और को भेज तो बीस मचा हूँ और होने लगी शिवा जो क्या उसकी भी ठप बता रहा हूँ? पांच सात मिनट बात है थोडी शांत हुई । तब उसे समझाते हुए बोला सपना है ऍम कभी सच नहीं होते तो मत घबराओ, मैं जल्दी वापस आ जाऊंगा । नहीं तो शीला बोल रहा था लेकिन मैं नहीं माना । आज उसका दिल भी घबरा रहा था । शालू थोडा समझ नहीं । फिर बोली आप वक्त बेवक्त यहाँ इतना सेवा कार्य करते हैं । मैंने आपको कभी नहीं रोका । टीम इंडिया ऑफिस आपको देश के कोने कोने में बेचती है । मेरे दिल कभी नहीं मिला । आज मेरा मन उदास है । अनजानी आशंकाओं से मेरा हिरदय काम रहा है । उसके सब्र का बांध तोड दिया । वो बच्चों की तरह मिला । छोटी एक झड के लिए शिवा के मन में आ गया । गौरीपुर जाने का विचार त्याग दें । हाँ एवं चटनी सब की बात रह जाएगी । बीमारी का बहाना बना लेगा लेकिन फिर दिल पर दिमाग खराब हो गया । पारिवारिक दायित्व पर सामाजिक दायित्व की जीत हुई । समझाते हुए बोला हूँ हूँ ऐसे कमजोर पडने से कैसे काम चलेगा । अगर कभी अनोहनी हो भी जाए तो तो मैं हिम्मत से काम लेना होगा । माँ, पिताजी, आर्या और घर सब की जिम्मेदारी तुम पर होगी । तुम्हारे कमजोर होने से कैसे होगा? फिर कौन संभालेगा सबको प्लीज मत रो । मुझे खुशी खुशी भेजने की तैयारी करो । स्पीडी अच्छी शालू डायन में सामान पैक कर दो । ठीक चालू का दाल पति को भेजने के लिए गवाही नहीं दे रहा था, लेकिन शिवा रुकने को तैयार नहीं था । उसे जाना ही था । रात रह हूँ । जब पैदा बेला आई तो शिवानी पिता जी के चरण हुए हैं । पिताजी ने कहा यशस्वी भव माँ के पैर छुए तो सजल नेत्रों से बोली चिरंजीवी हो आर्या को शिवानी दुलार क्या आंखों ही आंखों में शालू से इजाजत चाहिए तो भरे दिल से शालू इतना ही कह पाई जल्दी आना । अगर अनुव्रत सेवाभारती के कार्यालय पहुंच चुके थे । नियमित समय पर ट्रक भरकर राहत सामग्री के साथ नौ कार्यकर्ताओं की टीम जीत में गौरीपुर के लिए रवाना हो गई । सब ने अपने अपने इस को याद किया और भारत माता के जयघोष के साथ यात्रा प्रारंभ हुए हैं हूँ

Part 27

दूसरी ओर मन में अपरिमित उत्साह और दिल में मानव सेवा की अस्सी मान ली हैं । अनुव्रत सेवाभारती के सेवावृद्धि आवाज चले जा रहे थे । दिल्ली से गाडी पर आपने लाख की ओर सर्वोदय का शुभ समय सहस्त्र मम्मी की स्वर्णिम रश्मियां सेवा भारती के कार्यकर्ताओं को अपनी सुनहरी आभा के साथ यू स्पष्ट कर रही थीं । मानव समाज सेवा हैं तो शक्ति प्रदान कर रही हूँ । हवाएं होने वाले ऐसे हिलौरे दे रही थी जैसे सेवार्थ ियों को ज्यादा से ज्यादा प्राणवायु पहुंचाकर उनके हॅूं शक्ति संपन्न बनाना चाह रही हूँ । सडक के दोनों ओर लगे पेडों की डालियां झुक होकर सलाम कर रही थीं और मंगलकामनाएं कर रही नहीं ताकि उनका महल सफर हूँ । इस सुरमय वातावरण में सब खोले थे ढोल मंजीरे वहाँ डफली की थाप पर सब शिवा की सही भजन गा रहे थे । थोडी देर पश्चात फिल्मी गानों पर अंताक्षरी होने लगी । वक्त की सोनिया सडक की गईं । गाडियों के पहिए दोनों गति से किलोमीटर नापते गए बताई नहीं चला । कब मध्यान हो गया । रास्ते में अच्छा सा दावा देखकर वे लोग रुकें । हल्का सा विश्राम करके प्रसन्न मुद्रा में सबने भोजन किया और काफिला पुनः रवाना हो गया । जी ड्राइवर बहुत अच्छी ड्राइविंग कर रहा था । इससे ट्रक को भी बराबर रास्ता मिल रहा था । सायंकालीन भोजन के दौरान पाठक जी ने दोनों ड्राइवरों से पूछा हूँ आपकी क्या इच्छा है? रात्रि में कहीं निशान करेंगे या अपनी यात्रा जारी रखेंगे? दोनों ही ड्राइवर बेहद उत्साहित थे । बोले अब तो गाडी पर पहुंच करी, विश्राम करेंगे । जी अन्य सब भोजन कर रहे थे । उतनी देर ड्राइवरों ने भी झटकी ले ली । फिर हल्का सा चाय नाश्ता लेकर दोनों तरो ताजा हो गए । कारवाँ फिर कंट्रोल की और निकल पडा । चलते चलते अनेक राज्यों की सीमाएं पार हो कहीं बिहार भी निकल गया । अब पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर गए । राजकीय करीब दो तीन बजे का समय होगा । अचानक जी ड्राइवर नहीं देखा । सडक के बीचोंबीच एक लंबा सा ट्रोला टेडा होकर खडा था । सडक के दोनों और घडी झाडियां थीं । उसके बगल से जीत निकालने की भी जगह नहीं थी । रख कैसे निकलता हूँ, माजरा क्या है समझने की कोशिश कर रहे थे तभी चालीस पचास लोगों ने दोनों गाडियों को घेर ही हाँ आठ के धोनी लगे में सब के हाथों में राइफलें वापिस तौर चमक रही थीं । शिवा पाटर जी ऍम सबने अपने पांच रखी हॉकियां मजबूती से पकडनें पाठक जी जोर से बोले कौन है हड्डी हमारे रास्ते से उन का लीडर खिलाया हूँ वो ये रास्ता तुम्हारा नहीं हमारा है । यहाँ लाल कानून की सत्ता चलती है । लाल कानून का नाम सुनते ही सेवाभारती के कार्यकर्ताओं के पैरों तले जमीन खिसक गई । मैं समझ गए कि खून का नक्सलवादियों से कहते हैं । उन्हें संकट का तो देखा भी नहीं था । कहाँ सेवा भारती गई है? गिनेचुने कार्यकर्ता और कहाँ? चालीस पचास हथियारबंद आतंकी समस्या विकराल थी । क्या हाथियों के सहारे गोलियाँ बाद बमों से टक्कर ले जा सकती थी? शिमला नहाना भाई ना तो हम कोई बडे नेता है, ना कोई मालदार आसामी हैं, न कोई अवसर हैं । हम तो समाजसेवी हैं । हम अपनी संस्था की ओर से भूस्खलन की त्रासदी से ट्रस्ट गौरीपुर में आपदा में फंसे लोगों की मदद करने जा रहे हैं । हमारा रास्ता छोड दो । हमें जाने दो । उन मुसीबत के मारो तक ही है । चंदे से घटते राहत सामग्री पहुंचाने दो । उनका नेता चलाया हमारे लोग भी बहुत वंचित दलित हैं । यह सामान तो अपनी तक जाएगा । तो उन सब अपनी जान की सलामती चाहते हो तो चुपचाप बैठे रहो शिवा ने पाठक जी की ओर देगा वास्तुस्थिति समझाते हुए पाठक जी ने उसे शांत रहने का इशारा किया । ऍम जो ऍर लोग टेन जो और उसके साथियों ने सभी से भारतियों की आंखों पर काली पट्टी बांधी । आज पीछे करके बंदा है । ड्राइवरों को भी इसी तरह कैदी बनाकर इनके साथ जीत में बैठा दिया । उनकी आदमियों ने ड्राइविंग सीट संभाल नहीं और जी पर ट्रक का रुख जंगल की ओर रख दिया । इस कॉलेज खाते जीत पर ट्रक चले जा रहे थे । चलते चलते लगभग तीन चार घंटे हो गए । तब एक जगह जाकर चीज होगी लेकिन ट्रक नहीं रोका । मैं उसी दिशा में आगे बढता जा रहा था । पंद्रह बीस आदिवासियों ने तुरंत जीत को घेर लिया । सब कैदियों को जीत से नीचे उतार हाथों हालातों से धकियाते हुए चलने लगे । ऐसी हडका रहे थे । जैसे ही इंसान नहीं कर रहे हैं, ऊबडखाबड रस्ते पर चलते हुए हैं । उन्हें सामने बनी झुग्गी में ले आए । पैरों से धक्का देकर उन्हें वहाँ बदबू भरी एक जगह में पटक दिया । हाँ तो पहले से बांधे ही थे । अब पैरों को और बांदिया दो खूंखार आदिवासी द्वार पर उनकी पहरेदारी पर बैठे थे । दोपहर की धूप चढाई थी । प्यास के मारे सबके गले हो गए थे । शिवानी उन्हें आवाज दी उनकी भाषा ही नहीं समझते थे लेकिन वो उठकर आये तो शिवानी होंटों पर जी फेरकर बताया की प्यास लगी है । न जाने क्या सोचकर पहरेदारों ने सबको बारी बारी से पानी पिला दिया । मिट्टी वाला ठंडा पानी था तो भी एक बार में प्यास तो मुझे फिर वे बाहर जाकर दरवाजे पर बैठ गए । युवा समझ गया कि वे इन की भाषा नहीं समझते हैं । उसमें किसी तरह आंख की पत्ती सरकार ली थी । मैं रखते रखते पाठक जी के करीब आ गया । उनके कान में फुसफुसाया पाठक जी ने श्री को रोकती, मैं करता नहीं राजी ऍम शिवानी धीरे धीरे सबको योजना बता दीजिए की रात को हम यहाँ की पीछे की दीवार से बाहर निकलेंगे । हम लगातार पूर्व दिशा की ओर बढते जायेंगे । सब दो दो की टीम बनाकर चलेंगे और जहाँ भी जोखिम लगे बडी सावधानी से कदम उठाएंगे । संभव तैयार तीन चार घंटे बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर हम पहुंचाएंगे । वहाँ से किसी तरह वाहन की मदद से पुनः दिल्ली लौटने का प्रयास करना है । अगली बाहर हमें पूरी तैयारी से पुनाह गौरीपुर सेवा कार्य के लिए आना होगा । आज तो यहाँ से निकालने की तैयारी करें । शिवानी सबको मानसिक रूप से तैयार करते हुए कहा कि मैं स्काउटिंग में रहा हूँ । इसलिए कंपास के साथ साथ जंगल में उपयोगी सारी सामग्री मेरे शरीर पर बंदी है । बता आप लोग पूरे भरोसे से अपने आप को तैयार कर ले । हम आवश्य सुरक्षित अपने घर लौटेंगे । अभी सब थके मांदे, डरे सहमे एवं सुस्त ढीले होने का अभियान करो ताकि ये पहरेदार निश्चिंत हो जाए । शिवा की बातों में सबको दम लगा और ने उम्मीद की किरण नजर आएगा । सब ने वैसा ही किया जैसा शिवा ने कहा था सभी उन्हीं से हो कार्य घर उधर लुढक गए । पहरेदार दो बार अंदर झांक गए । कैदियों की थकी तेरी हालत देखकर वह लापरवाह हो गए । शिवानी अपनी चौकस निगाहों से देखा कि वे दोनों थोडी थोडी दूर में पास में रखी लकडी के हॉकी को सुनते थे । आठ ग्यारह बजे करीब शिवानी देखा दोनों इधर उधर थे । रखते हुए वह वहां पहुंचा और उस होते में एक नशीला पाउडर उडेलकर पुनः सब कैदियों के मध्य पसर गया । शिवानी चोर नजरों से देखा पहरेदारों ने आकर बारी बारी से होगी को सोऊंगा । शिवानी चैन की सांस ली की सुबह बारह बजे से पहले अब इनकी आंखें नहीं खोलेंगे । रात के लगभग एक बजे शिवानी देखा दोनों बेसूध इधर उधर पडे थे । उसने पूरी तसल्ली कर ली की अभी आस पास कोई नहीं है । फिर उन्होंने योजना को क्रिया बनती करना प्रारंभ कर दिया । शिवा को जब धक्के से झुग्गी में डाला गया था, वहाँ प्रदेश के पास निकली लोहे की एक पट्टी से शिवा के वस्त्र फट गए थे । कुछ सोच कर भी सकते हुए शिवा उस पत्ती तक पहुंचा और उसमें अटकाकर । बहुत सावधानी से विधि पूर्वक धीरे धीरे उसने अपने हाथ पैरों के बंडल खोलेंगे । फिर पाठक जी को आजाद किया । अब हम आधा सबके बंधन खुलते चले गए । घने पेडों और जंगली झाडियों के मध्य घोर अंधकार में रास्ता ढूंढ पाना आसान नहीं था । यह तो शिवा का प्रबल आठ बाल था । उसका अनुभव था उसकी हिम्मत ही और उसकी जाग्रत चेतना नहीं, जिसने इन्हें रास्ता सुझाया । अब बस कोई आधा किलोमीटर की दूरी थी । घना जंगल, सघन अंधकार सबसे आगे से हुआ था । पीछे सब ने एक दूसरे के हाथ पकड रखे थे । एक पंक्ति में सब झुक घर दौड रहे थे । कटीली झाडियां भी राहत कार उडा बन रही थी पर सबने हिम्मत बनाए रखी । लगभग दो तीन घंटे चलने के बाद सब छुपते छुपाते निकले । आप शिवा को सामने राजमार्ग पर वाहनों की बत्तियां देखने लगी थी । अपने पीछे वाले सभी साथियों को तेजी से आगे सडक की तरफ धकेलने लगा । शिवा कहता जा रहा था के सामने सडक पर तो मैं जो भी वाहन मिले दौड कर चढ जाना । एक दूजे के साथ हो सके तो निकल जाना कोई भी रुकना मत सामने बहुत से यातायात के साधन चले जा रहे थे । जो भी तुम्हारा सहयोग करें उसी में सवार हो जाना । ऐसा बोलते हुए उसने एक एकड के लगभग सब को निकाल दिया । वो पाठक जी को निकालने ही वाला था । कितने में तेजी से किराया शिवानी पाठक जी को अपनी और खींच लिया । तीन । उनके आगे चल रहे जी ड्राइवर की वहाँ को छोटा हुआ निकल गया । शिवानी पाठक जी को तेजी से आगे था । खेला सामने बस धीमी गति से निकल रही थीं । शिवा चलाया । पाठक जी जल्दी आवाज तुरंत अपनी जेब से विषरोधी दवा निकाल कर दिए । ड्राइवर को लगाई और उसे भी तेजी से निकाला । इतने में उन्हें अपने ट्रक ड्राइवर की ठीक सुनाई दी । लहूलुहान ट्रक ड्राइवर आकर शिवा के पैरों के पास गिरा । उसकी गर्दन में कटाडी लगने से खून के फव्वारे छोटे हुए थे । उसकी हालत कर शिवा चौंक गया । मैं बोलना चाह रहा था पर बोल नहीं पाया उसके मुझसे अस्पष्ट निकला ऍम तुम्हारे पीछे लुटेरे और गर्दन तरफ भडक गई । ड्राइवर की पीठ में जहर बुझा तीर शिवा को दिखाई दे गया मुख्य सडक की और उस ने देखा सब साथ ही निकल चुके थे । बस पाठक उसे दोनों हाथों से इशारा कर रहे थे । बेताहाशा चला रहे थे शिवा जल्दी आओ मेरे बच्चे जल्दी करो । शिवा आजाओ तुम भी आ जाओ जल्दी जल्दी । इतने में पाटा जी ने देखा । नौ दस खूंखार आदिवासियों ने शिवा को घेर लिया । फिर भी शिवा उनको निकालने का इशारा कर रहा था । पाठक जी किंकर्तव्यविमूढ हो गए । शिवा को अकेला छोडकर में कैसे जा सकते थे पर यहाँ रुकना भी खतरे से खाली ना था । निर्णय की स्थिति में भरे का ले जैसे डबडबाई आंखों से पाठक जीने आखिरी बार शिवा को देखा और पीडित विजय से पीछे से आ रही उस बस में सवार हो गए ।

Part 28

उस बस में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ के पंद्रह जवान भी थे । पाठक जी की जुलाई नहीं रुक रही थी । वो सोच रहे थे कि शिवा को कैसे बचाकर लाए । आंसुओं के तरह बटर आंखो पहुँच उन्होंने जैसे ही चश्मा वापस लगाया तो उन्हें बस में केंद्रीय रिजर्व पुलिस के सिपाही बाल दिखाई नहीं है । उन्हें देखकर पाठक जी को तसल्ली हुई । तुरंत उनके मन में शिवा को बचाने की नियुक्ति आई । वे उनके कमांडर से मिले और उन्हें वास्तुस्थिति बताई कि किस प्रकार उनका ग्रुप गौरीपुर रसद लेकर चाह रहा था । नक्सलियों ने उनकी गाडियों और कार्यकर्ताओं का अपहरण कर लिया । उन मासूम कार्यकर्ताओं के अपहरण का उद्देश्य इनके संगठन से मोटी रकम हासिल करने का था और सरकार पर दवाब बनाने का था । पाठक जी ने उन्हें ये भी बताया कि आपने बहादुर जाबा साथी की वजह से ये सभी कार्यकर्ता वहाँ से मुक्त हो गए । लेकिन हमारा युवा साथी जो मेरे पुत्र की उम्र का था वह क्रूर नक्सलियों की कैद में रह गया है । कमांडर ने उसकी सारी बातें ध्यान से सुनी । पाठक जी का पहचान पत्र देखा विश्वसनीयता की परख पर पाठा जीस अच्छे होते हैं ये जवान वास्तव में इसी रोड पर नक्सली इलाकों की खोज करने ही इस बस में सवार हो गए थे । कमांडर ने पाठक जी की मदद करने का निश्चय किया । यहाँ एक तीर से दो शिकार होने की पूरी संभावना थीं । जहाँ एक और वे आम जनता की सहायता कर रहे थे, वहीं उन्हें अपने मिशन की मजबूत कडी मिल गई थीं । वास्तव में ये जवान महाभारती के सबूत हैं । हम हिन्दुस्तानियों के सच्चे खाती हैं । आज देश की जनता अगर शांति से सो पाती है तो सिर्फ इसीलिए की है । जवान जागकर सीमाओं की रखवाली करते हैं । देश को बाहरी दुश्मनों से भी बचाते हैं और देश वासियों को इन आंतरिक दुश्मनों से भी बचाने की आशा बंधते हैं । जवानों की सांसों पर ही सर मुझे राष्ट्र की धडकने निर्भर है । सारी बातचीत होते होते लगभग पंद्रह बीस मिनट लग गए । कमांडर ने पाठक जी से कहा कि उन्हें उनके साथ जाना होगा, तभी सीआरपीएफ उनकी मदद कर पाएगी । पाठक जी तो हर कीमत पर शिवा को बचाकर ले जाना चाहते थे । आता है उन्होंने हामी भरती कमांडर ने कहा, हमें इस बात को रुकवाकर यहीं उतर जाते हैं । फिर उस दिशा में जाने वाले साधन, पास, टैंपो इत्यादि से उधर चलकर वहीं आस पास शिवा को खोजेंगे । कंडक्टर ने उन के कहने पर साइड में करके बस रोक दी । पाठक जी नहीं वो तरकारी एक तरफ खडे हो गए । आशा भरी नजरों से कमांडर की और निहार रहे थे । तभी अचानक भयानक तेज आवाज हुई हूँ । बात के पढते अच्छे उड गए । पाठक जी ने देखा बस के सामने का बडा शीशा टूटकर चक्र की तरह कमांडर तक पहुंचा और उसका श्रद्धा से अलग हो गया । ऐसी दिवस दर्शन उसने आज तक नहीं देखा था । पाठक जी स हम घर पर से विपरीत दिशा में दौडते चले गए । एक बस का शीशा आकर उनके सिर पर लगा । वहाँ से तेजी से खून बहने लगा । उन्होंने अपना रुमाल निकालकर वहाँ लगाया है तो एक पल में ही भी किया । फिर उन्होंने अपनी शर्ट खोलकर सिर पर बनी पाठक जी की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा । तब ये जीत गुजरती । देखिए पता नहीं नक्सलियों की थी या पुलिस की आम जनता की । लेकिन पाठक जी ने हाथ दे दिया । जीव रुकी वो उसमें चढे और सीट पर बैठते ही बेहोश होकर गिर गए । जिस बस में पाठक जी सवाल हुए थे उस बस में चढे सीआरपीएफ के जवानों को संरक्षण निशाना बनाया गया था । इसीलिए बस में जबरदस्त टाइमबम किया गया था । पाठक जी भाग्यशाली थे इसलिए दो बाहर बच गए । पता नहीं अब तीसरी बार क्या होगा । बस में सवार एक भी व्यक्ति जिंदा नहीं बचा हूँ । पंद्रह जवानों के साथ साथ पांच बच्चे, पंद्रह महिलाएं एवं पच्चीस पूर सब एक सेकंड में मौत के भू मैं समझ आ गए । इस मामले में अनुव्रत सेवाभारती केकार्यकर्ता भाग्यशाली रहे । प्रायास अब इसी सडक पर इस बात से पूर्ववर्ती साधनों द्वारा दिल्ली की और निकाल गए थे । सिर्फ एक पाठक जी इस बीच में थे । वे भी विस्फोट से पूर्वी बस से उतर कर कुछ दूरी पर खडे हो गए थे । इसीलिए वे भी बच गए सिर्फ एक ट्रक ड्राइवर की वहाँ पर मृत्यु हो गई थीं । शिवा भी नक्सलवादियों की क्या में रह गया था । पाठक जी पे है छिंटे थे इतना असलहा, बारूद, बम, ॅ और हथियारों का जखीरा आखिर इनके पास आया कहाँ से अपने ही देशवासी भाइयों को वाली चढाते इनकी आत्मा एक बार भी क्यों नहीं? काफी क्या हक था नक्सलियों को इस मेरी हिंसा का मेरा ब्रा जवान वानी हटते नागरिकों ने उनका क्या बिगाडा था? क्यों हो गए जितने क्रूड कैसे होगा ऍम इनके शातिर दिमाग के पीछे असली खिलाडी कौन है? रह रहकर यह सवाल पाठक जी के जहन में बेहोश होने से पूर्व खलबली मचा रहे हैं ।

Part 29

संघर्ष की स्थिति में कायरता का परिचय व्यक्ति की बहुत बडी हार है । हिम्मत के साथ हाथ है को सहन करने वाला सब के लिए आदर्श बन जाता है । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के मुख्य द्वार के समीप ही सडक के दायीं और मध्यम आकार का एक टेंट लगा हुआ था । वहाँ अनुव्रत सेवाभारती ने अपना आपातकालीन कार्यालय बना रखा था । अनुव्रत सेवाभारती के इस कार्यालय पर आज बेतहाशा भीड थी । मुख्य अधिकारी कुर्सियों पर बैठे थे । बाकी सभी कार्यकर्ता एवं आगंतुक सामने दरियों पर बैठे थे । लोगों के इतने हो जून के बाद भी कहीं कोई शोरगुल नहीं था । चारों तरफ नहीं बढता । पतली हुई थी । सभी के चेहरों पर उत्सुकता थीं । गौरीपुर आपदा सहायता अर्थ गई । सेवा भारती की टीम के सदस्य वहाँ मौजूद हैं । एक सवाल सभी के समक्ष उपस् थित था कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो मिस्टर संकल्पी टीम को आधे रास्ते से लौटना पडा । अनिष्ट की आशंका की अफवाह फैल गई थी । उनके परिवार वालों को पता चलते ही अपने प्रियजनों को ले जाने वाले भी पहुंच रहे थे । जी ड्राइवर की पत्नी तो बेतहाशा विलाप कर रही थी । उसके साथ उसकी सहेली थी । मैं उसे समझना दे रही थी । उन्हें देख अब्दुल्ला साहब ने सतीश जी ड्राइवर का हाल चाल ले आने को कहा । जी ड्राइवर को विश्व बुझा तीन लगा था । शिवानी रिश् प्रतिरोधी दवा का तुरंत लेट कर दिया था । इसलिए उसकी जान बच गई । नहीं तो ट्रक ड्राइवर की तरह उसकी भी मौत सुनिश्चित थी । उसके पट्टी बंधी थी, किन्तु है चल फिर सकता था । सतीश के संग लंगडाता लंगडाता ड्राइवर आया तो उसे देख कर उसकी पत्नी ने विलाप करना बंद किया । अब्दुल्ला साहब ने उसकी पत्नी को संबोधित करते हुए कहा प्राथमिक चिकित्सा करके पैर पर पट्टी बांधी गई हैं कहाँ? आप इन्हें साथ ले जाओ और दो दिन पश्चात पुना पट्टी करवाने ले आना । बाटल जी के दोनों पुत्र पुत्री पत्नी भी एकदम घबराए हुए पहुंचे । पत्नी के चेहरे की तो होश उड रहे थे । पुत्र ऍम थे । पुत्री पापा पापा चला घर हो रही थी । बडा पुत्र अब्दुल्ला साहब के पास आया है । अब्दुल्ला साहब ने दुखी मन से कहा अंदर सघन चिकित्सा कक्ष में है । अंदर गए पिताजी की हालत छोटे पुत्र की रुलाई छूट गई । शेर पर बंदी पट्टियां बंद आंखें स्थिर का आया । देख कर एक बार तो बडा पुत्र भी सहन गया हूँ । इस हालत में पाठक जी को देख उनकी पत्नी वा पुत्री फिर सुबह सुबह घर होने लगी । अब्दुल्ला साहब उठकर उनके पास ठंडा मानते हुए आए । बोले उन की कमी से बेहोशी छाई हुई है । भगवान ने चाहा तो शीघ्र ठीक हो जाएंगे । बाकी सभी कार्यकर्ताओं के पारिवारिक जान भी आते जा रहे थे । अपने संबंधियों के कुशल छेम पूछ रहे थे । इस क्षेत्र के पार्षद, विधायक एवं मंत्री जी सभी सांत्वना जताने पहुंच गए । आखिर इतना संगीन मामला जो था । विपक्षी दल के भी कुछ नेता पहुंच गए थे । इस समस्या पर सरकार को घेरना जो था । मंत्री जी ने सेवाभारती को इस छतिपूर्ति स्वरूप लाखों रूपये की राशि सहायता करने की घोषणा की, ताकि उनका ये वोटबैंक यथावत बना रहे हैं । बहुत सारे मीडियाकर्मी उपस् थित थे । उनके प्रमुख समाचारपत्रों के संवाददाता एवं प्रमुख न्यूज चैनलों के पत्रकार उपस्थि थे । विशव वस्तुस्थिति जानना चाह रहे थे कि उनके साथ क्या दुर्घटना हुई है । सेवा भारती के इस सेवा दल के साथ आखिर हुआ क्या? जिस स्थिति से अब्दुल्ला साहब बचना चाह रहे थे, जिसका सामना करते हुए उनकी जो काम रही थी, इस समय आखिर आॅन से कैसे काम चलेगा । उनका बायां हाथ पाठक ही अनिश्चितकालीन बेहोशी में था और दायां हाथ वहाँ न जाने कहां और किन परिस्थितियों अब सामने जो कुछ भी है उसका उत्तरदायित्व तो अब्दुल्ला जी का था । भारी हॅसते स्वर में अब्दुल्ला साहब ने बोलना प्रारम्भ किया । हमारी यात्रा बेहद उत्साहजनक वातावरण नहीं चल रही थी । दिल्ली से उत्तर प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार तक की यात्रा बेहद सुखद थी । बिहार बंगाल के मध्य न जाने कहाँ पर घने जंगलों के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर ही हमारे सेवादल को चालीस पचास हथियारबंद नकाबपोशों ने घेर लिया । हमारे ट्रक जी सर, सारी सामग्री उन्होंने लोट ली । उनके कुछ साथी तो हमें मारने पर आम दाद है, लेकिन उनके मुखिया की योजना हमारे अपहरण के बदले मोटी रकम वसूलने की थी इसलिए हमें ले गए और जंगल में किसी गंदी सी मजबूत दार जगह पर हमें कैद कर लिया । कितना बोलते बोलते उनकी साथ भूल गई थी । काश रखा पानी धोखा किया, फिर बोलना प्रारम्भ किया । हमारी इस यात्रा के मुख्य व्यवस्थापक पाठक जीत है और सह व्यवस्थापक शिवमंगल जी अचानक वो मुझे इस विविधता से हम सब घबरा गए । यह स्वाभाविक ही था । हमारी जगह आप होते तो खबर आ जाते हैं । लेकिन इन विकट परिस्थितियों में भी एक शख्स ऐसा था जिसने बिलकुल भी धैर्य नहीं खोया । हमारे अपहरण से लेकर हमारी रिहाई तक उसने एक्शन का उपयोग किया । अपनी आत्मशक्ति से एक एक को उसने ऊर्जा से भरे रखा हूँ । एक एक श्वास के साथ जागरूक रहा हूँ । खून का एक कतरा देश के नाम कर दिया हो । छोटे कौन है, कहाँ है? अब्दुल्ला साहब ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, भारत के करीब दो अरब आबादी को आज आतंकवाद और नक्सली हिंसा से सबसे ज्यादा खतरा है । बेहद अक्रूर हैं । नक्सली मुझ से काम हथियार से अधिक बात करते हैं । शांति व्यवस्था में बाधा उत्पन्न करें । इंसानों की जान लेना इनके बाएं हाथ का खेल है । कुछ समय पूर्व दंड कारणें, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी का अपहरण किया । अपने चार साथियों को छुडाने के लिए तीन दिन तक जब सरकार से बात नहीं बनी तो उसने अपराध अधिकारी को मौत के घाट उतार दिया । सिर धड से अलग खडे धारा अपनी मांगे लिखा हुआ कागज लटकाकर थाने के आगे शाह फेंक गए । पर हमारा साथ ही जिसके बारे में जानने को आप उत्सुक हैं, मैं उनसे डरा नहीं । उसने विकट स्थितियों को समझा । हिम्मत नहीं हो रही है । एक एक करके सबको निकाल दिया । आज उसी की बदौलत सब साथ ही जिंदा है और सबको निकालते निकालते आखिर में खुद ही फंस गया पे रहम नक्सलियों की क्या ऐज में न जाने में कैसा होगा । अब्दुल्ला साहब ने रूंधी आवाज में अपनी पूरी बात रखी थी । अंत में तो वो भी अपनी रुलाई रोक नहीं पाए और बच्चों की तरह सुबह नहीं लगे । नेताजी विधायक आज ही पारशा जी सब साफ ना दे रहे थे । पत्रकार बंधुओं भी कुछ देर के लिए नमकीन हो गए । कुछ समय पश्चात बुना उन्हें अपने पत्रकारिता धर्म का खयाल आया । पॅन हैं कुछ खोजी पत्रकारों ने शिवा के प्रोफाइल का बता लगाया कि श्री राम कॉलेज के प्रथम वर्ष के विद्यार्थी के रूप में इसने राठौर जैसी बडी हस्ती को पानी पिलाया था और समय सुजाता को न्याय दिलाया था । प्रोफेसर कुलकर्णी हत्याकांड में भी भाई बहुत बडी हुआ था । उन्होंने ये भी पता लगाया कि कश्मीरी आतंकवादियों से शिवा ने सूझबूझ से सैकडों जाने बचाएं नहीं । देर रात तक वहाँ आवागमन बना रहा है । तिन तो रविवार को कोई समाचार नहीं था । व्यथित मन से अगली सुबह अब्दुल्ला साहब एवं पारशा चीजें शिवा के घर जाने का कार्यक्रम बनाया । आज के मुख्य समाचारों में शिवा वर शिवा के कारनामें चाय थे । सब की सहानुभूति शिवा के साथ ही भारत माता का ये सच्चा सबूत बच कराए । सारा ही ऐसी प्रार्थना कर रहा था । क्या शिवा वही पाएगा

Part 30

हर परिस्थिति में हौसला रखने वाला व्यक्ति सही जीवन जी सकता है और अपने दायित्व का निर्वाह कर सकता है । सत्यवान इस समय टेलीविजन पर समाचारों वाले चैनल ही देख रहा था । आज खरीद सेवक ही सब तकनीक आए हुए थे । ऍम बैठक में सब गपशप कर रहे थे । आ गया भी उनके पास खेल रही थी । टीवी कोई नहीं देख रहा था । शालू रसोई में सबके लिए चाय बना रही थीं । अचानक शालू को मुख्यद्वार पर आठ सुनाई दी । उसने बुलाना ध्यान से सुना । कोई दरवाजा खटखटा रहा था । शालू ने दरवाजा खोलकर देखा सामने स्थानीय पार्षद के संघ अब्दुल्ला साहब खडे थे । उन्हें अकस्मात । अपने घर के द्वार पर देखो । कहीं जाने क्यों किसी अनहोनी की आशंका से उसका दिल तेजी से धडकने लगा । उसने नमस्कार किया और बोली आइए भाईसाहब । अब्दुल्ला साहब ने पूछा क्या सत्यवान जी घर पर हैं? सालों ने जो क्या स्व का रोकती में सिर्फ हिला दिया और हाथ से बैठक की ओर इशारा किया । पार्षदजी हम अब्दुल्ला जी बैठक की ओर बढें । अचानक अब्दुल्लाही को देखकर सट्टेबाजी चौकें फिर अभिवादन कर उन्हें बिठाया, लेकिन भारी सेवक जी के चेहरे पर उन्हें देख कर सहज मुस्कान झा गई । दो अस्सलाम के आदान प्रदान के पश्चात उन्होंने सत्यवान जी को सारी घटना संजय में बताई । किस प्रकार नक्सलियों ने राहत सामग्री से भरा उनका ट्रक लूट लिया और किस प्रकार ने सब सेवाकर्मियों को बंधक बना लिया । उन्होंने आगे बताया कि किस प्रकार शिवा ने अपनी बुद्धिमानी एवं बहादुरी से जान पर खेलकर सब साथियों को नक्सली के चंगुल से आजाद कराया । अपने पुत्र की हिम्मत वह साहस के कारनामों को सुनकर सत्यवान एवं सावत्री का सीना घर से फोन उठा आपने जामदा केरेल ता । उन्होंने रोमांचकारी कार्यों की कहानी सुनकर हरी सेवक जी एम काम नहीं भी गौरव बाहर से रोमांचित होते अभी उल्लास है । सारे ही नहीं पूछा अब कहाँ है अब्दुल्ला साहब सोचने लगे क्या बोलो? उन का चेहरा एकदम होता गया और आंखों से तो कहने लगे सावित्री अब्दुल्ला साहब की हालत देख घर ही पथरा गई । किसी अनहोनी की आशंका से उसके पहले जैसे लगते उठने लगीं । वह सुधबुध खो बैठी और अब्दुल्ला साहब का कॉलर पकडकर झकझोरते हुए बोली कहाँ है मेरा बेटा आप उसे साथ क्यों नहीं लाए बोलिये? जवाब दीजिए छत्तीस फॅमिली को संभालते हुए तो वहाँ अब्दुल्ला जी से पूछा हूँ सेवा का है अभी तक मैं क्यों नहीं आया हूँ? अब्दुल्ला साहब कहाँ कलर हो गया । मैं कुछ भी नहीं बोल पाए । स्थिति संभालते हुए पार्षद साहब बेहज सर्दी स्वर में बोले, सब को बचाते बचाते शिवा क्या मैं स्वयं को नहीं बचा पाया हूँ । उसे नक्सली कैद करके ले गए । यह क्या इस कानून नहीं है? सब सकते में आ गए । अचानक सत्यवान की चेतना लौटी । क्या कहा मेरे शिवा को नक्सली कट करके चले गए । साबित नहीं कर रहा हूँ । ऍम मेरे बच्चे का लो चलेंगे । फिर वो तो नहीं है क्या किया? अरे शिवम को जल्दी लौटा मेरी ओर परीक्षण नाले हरी सेवक जी अविश्वास के स्वर में बोले, नहीं नहीं, मेरे बच्चे को कैद नहीं कर सकते हैं । पार्षद बोले तो काश ऐसा होता था । अब्दुल्ला जी अश्रुपूरित नेत्रों से द्रविड सर में बोले ये ऐसा चाय की शिवा नक्सलियों के जाल में फंस कर उनकी कैद में हैं । सत्यवान अपने आप को संभाल सका । उसका आॅव को झेलना सका । उसे हैॅ भयंकर पीडा महसूस हुई । सीने पर हाथ रखे रखे बोला नहीं नहीं, सच नहीं हो सकता और देश होकर जमीन पर गिर पढें हूँ । फॅमिली की हिचकियां बंद नहीं । इधर उसके लाल का कोई पता नहीं था और इधर पति को दिल का दौरा पड गया । अब क्या करें । कहाँ जाएँ चालू चाहे लेकर बैठक में आएगी थी । अंतिम वार्ता लाभ उसके कानों में पडा हूँ । जैसे ही उसने सुना शिवा को नक्सली आतंकियों ने कैच कर लिया । उसे अपना जाॅब सोच हुआ हूँ । उसकी चेतना हो रही थी । तेरे हाथ से छोड गए तब तोड गए चाहे बेघर कहीं धर्म मासी वह भी बेहोश होकर गिर गई । पूरे घर में तो हो रहा मच गया हूँ । पांच वर्षीय बालिका हरया की समझ नहीं आया कि अचानक क्या हुआ । लेकिन दादा दादी वा माँ की हालत देख घर भी जोर जोर से रोने लगी । हरी सेवक जीवा कामिनी की भी जुलाई रुक नहीं रही थी । तब बोला साहब, आप आशा जी किंकर्तव्यविमूढ खडे खडे सोच रहे थे कि हेल्थी संभाले कैसे? किसी तरह पारशा जीवा अब्दुल्ला जी सत्यवान को अस्पताल ले आए । कामिनी शालू को गोद में उठाकर ठंडे पानी के छींटे डालने लगी । एक्शन के लिए होश आया । फिर शिवा शिवा करती बेसुध हो गई । टेलीविजन पर सब चैनल ठीक जी कर नक्सली हिंसा एवं आतंकियों के अत्याचार की कथा कह रहे थे तो यहाँ प्रति चैनल पर शिवा छाया हुआ था । उसके बहादुरी के कारनामों के साथ नक्सली कैट की खबर प्रमुखता से दी जा रही थी जिसने सुना ठंड रह गया । कुछ ही देर में शिवा के घर पर परिवारजन, पडोसी मित्र, गर्म अनुव्रत, सेवाभारती के कार्यकर्ताओं का हुजूम लग गया । छत्तीबांदी अस्पताल में थे । साबित्री में होती हूँ । शिफ्ट हो गई थीं । जैसे ही बेहोशी टूटी वे फिर शिवा शिवा करके बेसुध हो जाता हूँ । कामिनी शालू हुआ, सावित्री कौर संभाल रहीं थीं । हाँ यार हुई जा रही थी । हरी सेवक ही उसे संभाल रहे थे । आशा जी भी सहानुभूति से बात कर रहे थे । अब्दुल्ला साहब सबसे वस्तुस्थिति बयान कर रहे थे । फिर विधायक दर्शिता भगवान ना करे । किसी के घर का जवान बेटा एकलौता छिरहा गए इस प्रकार चला जाए । अब क्या किया जाए? कैसे उसे बचाया जाये? शिला को कैसे वापस लाया जाए । सब इसी विषय पर चिंता कर रहे थे । सेवाभारती के कार्यकर्ता अपने स्तर पर प्रयास कर रहे थे । शिवा के मित्रों ने अपनी कोशिश की । सचित्रा मंत्री जी गवर्नर साहब ऍम कमिश्नर चैतन्य कुमार ने भी प्रयास किया । इन प्रयासों से सरकार पर दवाब बढा । सरकार ने अपनी खोज अभियान पूरी ताकत से प्रारंभ कर दिया । गुप्तचर एजेंसियों की सेवाएं भी लग गई लेकिन अफसोस कहीं से भी शिवा का कोई सुराग नहीं मिला । एकलौते लाल को खोकर साबित्री की दशा मनोरोगी जैसी हो गई नहीं । सत्यवान झंडा वर्ष तो गए थे किंतु ॅ के लिए हृदयरोगी वन शरीर में आधे रहे गए थे । शादियों के धोखा खोर छोड रही ना था । आसु तो सूखने का नाम ही नहीं ले रहे थे । हल्की इसे अल की आहट पर वह चौक पडती है । शायद शिव आ गए । नींद तो से कोसो दूर रहे थे । किसी तरह रह को सीने से लगाकर माताजी पिताजी की सेवा कर जीने का उद्देश्य खोजती । जीवन की राहें उसे पूरी तरह ही नजर आ रही थीं । पर घोर तमस में आती है । किरण चल में ला रहे थे । एक नन्हा सा दीप टिमटिमा रहा था किसानों की कोख में शिवा का आगे बढ रहा था सत्यवान सावित्री वार शानू अब तो बस इसी उम्मीद के सहारे दिन काट रहे थे ।

Part 31

उधर सुचित्रा का विवाह ही मंत्री जी ने आगरा के राजघराने के कुलदीपक राजनीति में सक्रिय गवर्नर साहब के सुपुत्र चैतन्य कुमार है संग कर दिया । इंडियन पुलिस सर्विसेज में चैतन्य कुमार ने इसी वर्ष प्रथम स्थान प्राप्त किया था । कुछ समय बाद उसके एक पुत्र सचिन भी हो गया । सुचित्रा ने जीवन में पूरा सामंजस्य बना रखा था हूँ । मैं ग्रहस्थी की समस्त जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी अध्ययन के लिए समय निकाल ही रही थी । एक दिन अकस्मात वर्तमान भारतीय समस्याएँ विषय रचना पढकर द्रवित हो गई हूँ । उसमें इस प्रकार लिखा था गौरीपुर में बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदा के अलावा मानव निर्मित आपदाएं भी देश को झकझोर रही थीं । भारतीय गणतंत्र के विशाल ढांचे को खोखला करने वाले राष्ट्रविरोधी शक्तियां सक्रिय हो रही थीं । प्राकृतिक संपदा से संपन्न देश भारत का शाॅ विकसित राष्ट्र में तब्दील होना ही नहीं आ रहा था । इन देशद्रोहियों ने स्थिरता उत्पन्न कर अशांति फैलाने हैं तो लक्ष्य बनाया भारत के प्राकृतिक संसाधानों से समृद्ध आदिवासी अंचलों को । भारत में आदिवासियों की संख्या छोटी मोटी नहीं थे, बल्कि लगभग आठ करोड आदिवासी थे अर्थात देश की कुल आबादी का आठ प्रतिशत । कुछ राज्यों के कुल भूभाग में से चौवालीस प्रतिशत वन छह था और वहीं अधिकतम आदिवासी बस्ती रही थी । सम्भवता या देश का सबसे बडा आदिवासी इलाका था इसलिए इस क्षेत्र को चुना इन्होंने सुदूर शांत संचलन होने के कारण प्रारम्भ में यहाँ मीलों तक प्रशासनिक अमला नहीं रहा हूँ । देशद्रोहियों के साथ मिलकर चीन पाक गठजोड ने इसी निर्वाचन शून्य स्थिति का फायदा उठाया और वहाँ भारत विरोधी वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था खडी कर लेंगे । ये ताकतें भारत के विरुद्ध हिन्दुस्तानियों का ही सफलतापूर्वक उपयोग कर रही थी । इस क्षेत्र में चीन की मुझसे तुंग से प्रभावित विचारधारा सत्ता बन्दूक की नली से नहीं करती है या सुनियोजित तरीके से प्रचार किया गया है । व्यापक हिंसक आंदोलन हुए हैं इसलिए इस संघर्ष का नाम पडा नक्सलवाद । गत वर्षों में बारह प्रदेशों के डेढ सौ जिलों में नक्सलवादी फैल गए । उन्होंने बिहार, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ, आंध्र प्रदेश होते हुए कर्नाटक तक एक सघन लाल गलियारा बना लिया । इन राज्यों में ये बहुत बडी ताकत बन रहे थे । श नेशन है दो सौ छत्तीस जिले और बाईस सौ थाने नक्सली इलाके से प्रभावित हो गए । यहाँ करीब बीस हजार के आस पास प्रशिक्षित छापा मार नक्सली और इसके अलावा उनके साथियों की गिनती तो कई गुना ज्यादा हो गयी । लगभग पचास हजार नक्सली एक अरब लोगों को धमकाने की हिमाकत करने लगे । इनके सशस्त्र दस्तों ने देश के मूल्यवान खनिज वन संपदा से संपन्न इलाकों पर घोषित सत्ता कायम कर ली । ये विद्या अध्ययन केंद्रों को बारूद है उडाने में संकोच नहीं करते । संचारतंत्र को ध्वस्त करके अपने विचारों के प्रकार में विश्वास रखने वाले ये सर फिरें नक्सली भारतीय वो गोल में रक्त धमनियों की तरह संचालित रेलवे नेटवर्क को अस्त व्यस्त करके आम आवाम ने दहशत का माहौल पैदा करते थे । नक्सलियों की हिंसा की सबसे ज्यादा घटनाएं चार राज्यों बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ, ओडिसा में दर्ज की गई । ये माओवादी देश के चालीस हजार वर्ग किलोमीटर इलाके में स्वच्छत घूमते फिरते इनके पास धनबल, बाहुबल, शास्त्र, बाल, विदेशी बाल के साथ साथ सामांतर सत्ताबल भी हो गया । जैसा पढते पढते सुचित्रा गहरे सोच में डूब गयीं । उस जैसी संवेदनशील महिला की आंखों में देश प्रेम की अश्रुधारा बाॅस सोचने लगी कि क्या झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह एवं चंद्रशेखर आजाद सरीखे शहीदों ने भारत माँ की इस दुर्दशा के लिए अपना जीवन अर्पण किया था । उसने निश्चय किया कि मैं इस समस्या की तह तक जाकर इसके मूल कारणों की तलाश करेगी ।

Part 32

सुचित्रा के पास किसी तरह के संसाधनों की कमी नहीं थी । उसने पुस्तकालयों से समाचार एजेंसियों से इंटरनेट से इस समस्या विषयक सामग्री एकत्रित करनी प्रारंभ थी किंतु हूँ उसके मात्र इतने से संतोष नहीं हुआ । उसने उन क्षेत्रों के वन हिंदुओं से बातचीत की जो उसके संपर्क में थे । उसने काफी कुछ जाना लेकिन जमीनी सच्चाई तो उसे जमीन पर जाकर ही पता चल सकती थी । क्या उस खूंखार इलाके में जाने की इजाजत उसे मिल पाएगी? सुचित्रा को अच्छे से पता था ना उसके पति और ना ही उसके पिता नक्सली इलाकों में उसे जाने की इच्छा सा देंगे । कटाह चोरी छुपे शतम् वेश धारण कर वे अपनी सहेली के साथ अपने छठी लक्ष्य की ओर निकल पडे । विभिन्न पडावों को तय करती हुई महाराष्ट्र की सीमा से लगे छत्तीसगढ के धनोरा तहसील के दोपहर के दो वजह जब पहुंची तो वहाँ का तापमान पैंतालीस डिग्री था । मकान के टीम की चदरों वाली छतों पर साठ सत्तर लोग काला कपडा बांधे खडे थे । उनमें से कुछ लडकियाँ भी नजर आ रही थी । कुछ ही मिनटों के भ्रमण में सुचित्रा आएगा मुश्किल सहेली पसीने से लगभग हो गई । गर्मी से उनकी हालत गडबडाने लगी । ब्राउन गरीब आदिवासियों के बारे में सोच रही थी जो लगातार इन परिस्थितियों में रहते थे । उसने अपनी आंखों से देखा कि घर चिरौली जिले में नाम आ के स्थान पर चीटियों को पीसकर उनका उपयोग नमक की तरह किया जा रहा था । ऐसे हालत को देख सुचित्रा का मन पे हाथ डाल हो गया । उसके अंतर्मन से आवाज उठी की क्या हिंसा की परिकाष्ठा ही नहीं है । सिर्फ चिडियों को पीस कर खाना ही हिंसा नहीं बल्कि ऐसे हालत पैदा करना हिंसा है । असीम संग्रह नहीं । ऐसे हालात पैदा किए । अत्यधिक शोषण से स्थिति नाजुक बनी । अपने विद्यार्थी जीवन में सुचित्रा अनुव्रत सेवाभारती की सदस्य बन चुकी थी । सोचने लगी कि अपरिग्रह अनुव्रत प्रसार से यहाँ की जनता का भला हो सकता है । अपरिग्रह का आर्थिक ये नहीं होता कि भूखे मारो उत्पादन अथवा क्राॅस करो बल्कि दूसरों का अधिकार छीनना, शोषण कर अब प्रामाणिकता हूँ एवं विश्वास पात्रता को गंवाकर अन्याय से धन संग्रह न करना ही व्यवहारिक अपरिग्रह है । किसी प्रकार अहिंसा अनुव्रत का अर्थ भी मारो नहीं बल्कि मारने वाले को बदलो है । हटा यहाँ की स्थितियों के बदलाव में अनुव्रत सेवा भारतीय जैसी संस्थाएं भी उल्लेखनीय भूमिका निभा सकती हैं । इस तरह से स्थितियों का आकलन करते हुए उसने शीघ्रतापूर्वक अपनी यात्रा संपन्न कर ली । उसी रात उसने नक्सल वाज की समस्या के बारे में अपनी डायरी में ट्रिप पढे लिखे । वही इस प्रकार से थी नक्सलवाद मूल में कोई कानून व्यवस्था की समस्या नहीं बल्कि है । मुख्य रूप से मानवीय, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समस्या लग रही है जो दूरदर्शिता के अभाव में परिवर्तित हुई । सम्भवता नीति गठ भोलों से नक्सलवाद की जडें जमती गई । प्रशासनिक अमले की दखलंदाजी को प्रारंभिक नीति नियंताओं ने संविधान बनाते समय इसलिए सीमित रखा ताकि आदिवासियों के विशिष्ट पहचान बनी रहे हैं । उनकी संस्कृति प्रशिक्षण बनी रहे, उसी का फायदा उठाकर यहाँ राष्ट्र विद्रोहियों ने अलगाववादी हिंसा भावना विकसित कर दी । उग्र आंदोलन बढते गए, खून खराबा होने लगा, विकास की गति रुक गई और ये अंचल पिछडते चलेगा । इसके अलावा भूमिहीनता की समस्या, उचित रोजगार की कमी, जमीन अधिग्रहण से सही नीति न होना और उचित पुनर्वास की स्पष्ट नीति न होने से उठने वाले शांतिपूर्ण आंदोलन और उनका दमन भी आम आदमियों को नक्सलवाद से करीब ले जाता है । जहाँ सही कसूर पूरी करता है भ्रष्टाचार । अगर नीतियां बनती भी है तो भ्रष्टाचार का दानव सब कुछ निकल जाता है । आम गरीब आदिवासी किसान को दो वक्त की रोटी मर्यादा का जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा, हवा सामान्य विकास चाहिए भरते हिन्दुस्तान से ये मांग कोई ज्यादा नहीं है था । ऐसा हो पाएगा ।

Part 33

जन्म देना और जीवन देना ये दो अलग अलग बातें हैं । जन्म देने वाले तो सभी माता पिता हो सकते हैं किंतु जीवन तथा संत संस्कार देने वाले माता पिता मिले होते हैं तो संस्कारी संतान ही व्यक्ति की सच्ची संपत्ति होती है जिस पर उसकी भविष्य की पीढियों का दारोमदार होता है । शिवा के जाने के लगभग नौ महीने पश्चात शालू ने पुत्र को जन्म दिया । खूब हो शिवा की प्रतिकृति नजर आ रहा था ना पालक वैसा ही चौडा लगा हट बडी बडी आंखें गोरा रंग घुंघराले बाल कालों में पडता डिंपल मुस्कुराता चेहरा पतली लंबी उंगलियाँ बेटे को गोद में लेकर शालू सोचने लगी अभी शिवा होता तो कितना उत्साह महोत्सव होता अपने बेटे को देखकर है । कितना खुश होता ढाई दादा दादी सकते वहां हम सावित्री आपने शिवा को इस रूप में पुनः दबाकर प्रसन्न में थे । दिन भरोसे खिलाते रहे थे । शुभ हो रहा देखकर नामकरण संस्कार क्या पंडित जी ने नन्ने मुन्ने का नाम रखा आ रहे हैं गोलू मोलू, नंदकिशोर भाई को पाकर आर्या भी बहुत खुश थी । शाम को शिवा की कहीं ओजस्वी बातें याद आती है कभी मुझे कुछ हो जाए तो माँ बाबू जी आर्या को तो मैं संभालना है वे आंखे मूंद मन ही मन शिवा को साक्षात्कार करती । बस एक ही करती मुझे शक्ति दो, मैं सबको संभाल सकूँ । घंटों है ध्यान की गहराइयों में चली जाती है । भगवान से शिवा की सलामती की शीघ्र सकुशल वापसी की प्रार्थना करती और सोचती रहती की एक ना एक दिन उसका शिवा अवश्य वापस जाएगा । देखते ही देखते पांच वर्ष बीत गए । शिवा की कोई खबर नहीं थी । बेहद कठिनाई से । शालू संपूर्ण परिवार के भरण सोशन का दायित्व निभा रही थी । कालका प्रवाह अपनी गति से प्रगति कर रहा था । आर्या नौ वर्ष के हो गई थी और आर्य सवा चार वर्ष का । शालू पल भर भी बच्चों की खोज खबर ली है । बिना नहीं रह सकती थी । एक दिन उसने देखा की काफी समय से बच्चे देखी नहीं । दोनों बच्चे बिना बताए कहाँ चले गए । घर के साथ कमरों में ढूंढ लिया जब बता हवा सी हो गयी । बाहर पता करने जैसे ही निकलने लगी । उसने देखा । दोनों भाई बहन डालन में तुलसी के पौधे के सामने बैठे थे । आखिर उन्होंने प्रार्थना कर रहे थे । शानू चुपचाप खडी चित्र लिखित सी अपने दोनों प्राण प्यार को देखती रही । उसमें जाने में क्या सोच कर वो भी आप के समीप बैठ गई । आर्या जो मन ही मन बोल रही थी पता नहीं चल रहा था । पर आर्य के बुदबुदाहट शाली को सुनाई दे रही थी तुलसी मैया मेरे पापा को जल्दी वापस ला दो । मैंने तो अभी तक बात आपको नहीं देखा । सब बच्चों के पास आपने स्कूल छोडने चाहते हैं । शिक्षक अभिभावक संगोष्ठी पीटीएम में आते हैं । मेरे पापा नहीं आती तो मुझे अच्छा नहीं लगता । मम्मी को उदास टिकता हुआ रोना आता है । सबसे सुनता हूँ । पापा बहुत बहादुर हैं । मुझे भी वापस से बहादुरी सीखनी है । ऍम जी मेरे पापा को बुलाया दूँ । तीस भगवान जी पाता को मिला तो मासूम की प्रार्थना सहन कर वालों की आगे भी भरा है । लगभग पांच मिनट बाद दोनों ने आंखे खोली । हाँ और समीप देख दोनों ॅ पड गए । दयालु ने पूछा आर्य आज क्या कर रहे थे? आरे बोला हाँ पूजा कर रहे थे । दीदी ने बताया कि तुलसी मुहैया सबकी इच्छा पूरी कर दिए हैं । इसलिए हम दोनों प्रार्थना कर रहे थे कि हमारे बाबा चलने वापस आ जाए । नन्ने आर्य की बात सुनकर शालू के सब्र का बांध तोड दिया । आर्या के पास आई और अपनी फ्रॉक से माँ के आंसू पहुंचकर बोली माँ रो वापस जरूर वापस आएंगे । फॅमिली कराऊंगी उनको छोटी सी बच्ची के शब्द सुनकर शानू और ज्यादा भावुक हो गई और जोर जोर के करोड का नहीं करने नहीं । दोनों बच्चे माँ की ये हालत देखकर उसके दोनों तरफ चिपट कर किलाकोट हैं । काफी देर तीनों मिलकर रोते रहे हैं । अभी सावित्री हॉल से चाय को कहने के लिए निकली । उसको शालू हुआ । दोनों बच्चे घर के अंदर कहीं भी इसी कमरे में नहीं दिखे । उसे चिंता हो गई । आंगन से निकलकर वह खोजते खोजते बाहर ढालान में आई तो तीनों की लहाल आंखें भरवा सी हालत देखकर एकदम से घबरा गई । बाहर से संतुलन रखते हुए शानू को समझाने लगीं, तुम भी बच्चों के बराबर हो जाओगी तो इन्हें कौन संभालेगा? तुम्हारे ससुर जी तो मैं हालत में देख लेंगे तो उनकी तबियत और खराब हो जाएगी । शालू कीमत रखो हर अंधेरी रात के बाद फिर सुबह होती है जिंदगानी मुश्किलों का नाम है हार जाना बुजदिलों का काम है जो गमों के घूंट हस हस पी सके, एक दिन बनता वही शिवधाम है चले अगर इन्सानियत की राह पर बदल जाती भोर में हर शाम है जिंदगानी । मश्किलों का नाम है हार । यहाँ वादा करो आज के बाद कभी नहीं रोके । तुम्हारे आँसू पोंछकर बोला ठीक है ठीक है पर आप हमें बता दो, पापा कहाँ है, कब आएंगे?

Part 34

सुख दुख से निरपेक्ष काल अपनी गति से चलता रहता है । साहस, सूझबूझ एवं पुरुषार्थ संघ निस्वार्थभाव से किए गए कार्य कहा आज चक्र पर अपनी अमिट छाप छोड जाते हैं । आ गया चौदह वर्ष की हो गई मीडिया झाडूं मेहनती वह अध्ययनशील । उस बालिका ने विद्यालय के सभी शिक्षकों का दिल जीत लिया । स्विमिंग हो गया स्पोर्ट्स ऊंचीकूद हो या लंबी कूट बाधा दौड हो या सीधी दौड, आर्या हर क्षेत्र में प्रथम रही थी । उसने स्काउटिंग ग्राइंडिंग में भी प्रवेश ले लिया था । कैंपों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आर्या प्राया अग्रिम पंक्ति में रहती है । उसी के नक्शे कदम पर भाई आर्य चल रहा था । दोनों है कि स्कूल में थे । साथ आते जाते खूब प्यार से रहते हैं । आर्य भी समय समय पर पढाई में चित्र कला है । सुलेख में तथा और भी अनेक प्रतियोगिताओं में अग्रिम रहता था । पिछले वर्ष से दोनों स्विमिंग चैंपियन रहे थे । कुल मिलाकर शालू बहुत अच्छे तरीके से बच्चों की परवरिश कर रही थी । बच्चे भी प्रगति पथ पर अग्रसर थे । सच पूछा जाए तो इन बच्चों के आसपास पांचों अभिभावकों का जीवित केंद्रित हो गया था । इनसे मिलने वाली खुशियाँ ही उनके लिए उत्सव थी । इस बार इनके स्कूल ने एक मनोरंजन पिकनिक का आयोजन किया था । आप लगभग सौ बच्चे दो बसों में सवार होकर हसते खिलखिलाते जा रहे थे । आॅल आगे वाली बस में थे । खाते पीते गाते गुनगुनाते सारा मस्ती कर रहे थे । कुछ बच्चे खेल की से बाहर का दृश्य देख रहे थे । सुंदर बडे बडे पेड डिजाइनर पेड पौधे साफ सुथरी चौडी सडकें इतने में बस यमुनापुल पर आ गयी । दोनों तरफ पानी से उफनती नदी का देख कर तो बच्चे बहुत खुश हुए हैं । पीछे वाली बस जब त्वरित गति से आगे निकली तो उस बस के ड्राइवर ने उससे आगे निकलने के लिए जैसे ही अपनी गति बढाई की भी फेल हो गए । अच्छा नानक यमुना पुल के ऊपर की सडक के किनारे बनी रेलिंग तोडती हुई पश्चिम काबू हो गई । सब काम करें बच्चे होने लगेगा । फिर विदारक चीखों से पूरा वातावरण कंपायमान हो रहा है । हरयानी एकदम कस कर अपने भाई को चिपटा लिया । मत भाई, कुछ नहीं होगा । भगवान को याद कर नमस्कार महामंत्र गिर देश छपाकी आवाज के साथ बात उफनती नदी की सतह से टकराई । बुरी तरह चीख पुकार मच गई । बचाओ बचाओ, खिडकियों दरवाजों से ज्यादा से ज्यादा लोग निकले । थोडे बहुत बच्चों वार शिक्षकों को जिन्हें तैरना आता था । वह किसी तरह किनारे पहुंच गए । जैसे ही आ गया और आप पानी में गिरे । आर्य ने कहा भाई साइकिलिंग करो भाई, हाँ पांच चलाओ । किनारा ज्यादा दूर नहीं था । तैरते तैरते आर्या ने कहा चलो आगे तो मैं किनारे छोड दूँ । मैं और बच्चों की मदद करती हूँ । आरे बोला दी थी मैं भी आपकी मदद करूंगा और दोनों भाई बहन जुड गए । क्रूर काल के निवासी से अपने साथियों को बचाने आर्य किनारे के नजदीक वाले छोटे बच्चों को घसीट घसीटकर खींच खींचकर किनारे ला रहा था । आर्या दूर से बच्चों को खींच खींच कर ला रही थी । कितने बच्चों को बचा सके उन्हें नहीं पता । दोनों बुरी तरह ठाकरे पर हार नहीं मानने आ गया । एक लडकी को किनारे डाल घर लौट रही थी । इतने में उसने देखा आर्य फस्ट हो रहा है । उसकी आंखे बंद हो रही हैं । वे नाक तक पानी में डूबने वाला था । आ गया । तेजी से हाथ पाँव मारती हुई भाई तक पहुंची और डूबते हुए अपने भाई को भेजकर किनारे डालकर लाये । किनारे खडे बडे छोटे सब इस दृश्य को आँखे फाड कर देख रहे थे । सबके रोंगटे खडे हो रहे थे लेकिन फिर भी पानी में कूदकर दूसरों को बचाने की हिम्मत बडे बडे भी नहीं कर पा रहे थे । बस दूर खडे साबित लडकी के साहसिक कारनामे को देखकर स्तब्ध थे । इस बार बच्चे को खींचते हुए हार हैं । को लगा कि अब उसके पैरों में जान नहीं । उसके पैर सही से चल नहीं पा रहे हैं । फिर भी धीरे धीरे पैत्रोवा हाथों की तेज गति से एक और लडकी की किनारे डाल आई । जब पानी में पुणे आ रही थी तो उसे लग रहा था उस से अब और तेरा नहीं जाएगा । अब उसके शरीर में जान कम हो रही है । इतने में छोटा सा लडका उसे डूबता देखा । उसे लगा ये तो मेरा भाई है । उसने अपनी समस्या शक्ति एक्टर की और उसे पीठ पर लाद लिया । पूरी जान लगाकर किनारे की तरफ बढ रही थी । लेकिन इस बार लग रहा था किनारा कितनी दूर हैं । उसके हाथ पैरों ने साथ देना बंद कर दिया । चेतना पर अंधकार का आवरण छाने लगा । यह बच्चा उसे बहुत भारी लगा । एक बार मान ने कहा अगर इसे छोड देगी तो शायद तुम किनारे आसानी से पहुंच जाओगी । किन्तु उसने तय कर लिया । बचेंगे तो दोनों डूबेंगे तो दोनों मैं कुछ दूर और चली । अब अपने यहाँ पर उसका नियंत्रण नहीं रहा । उसकी आंखें मूंदने लगी, बेहोशी छाने लगी और पीठ पर लगा बच्चा दोनों दोडने लगे । पानी ना तक आ गया और ये क्या? वो तो रोक दी जा रही थी । पानी सर के ऊपर था । कहा गया उसने साफ है रोक रखी थी लेकिन आप तो सांस रुकी नहीं पा रही थी । पानी जाएगा पेट में और डूब जाऊंगी । अब मैं डूब रही हूँ । आर्या की कहानी खत्म अर्द्धचेतन व्यवस्था में उसे लगा कि उसके पापा आ गए हैं जो बडे इसने से दुलाहर से अपने हाथों से उठाए किनारे की ओर ले जा रहे हैं और मैं बेहोश हो गई । स्कूल बस के दुर्घटनाग्रस्त होने के दर्दनाक खबर सुनकर तुरंत चारों तरफ खबर फैल गई । तक पर स्थित बचाव दल शीघ्रता से दुर्घटनास्थल पर पहुंच गया । बचाव दल के एक सदस्य ने आरता को डोक्टर देखा और तुरंत उसे सहायता देकर किनारे पहुंचाया । अन्य कई बच्चों को भी उन्होंने बचाया था । दूसरे दिन के समाचार पत्रों के मुखपृष्ठ पर आ गया । वहाँ की फोटो चुकी है । साथ में हेडलाइन थी बहादुर भाई बहन ने अपने चौदह साथियों की जान बचाई । आगे लिखा था, कक्षा नौ की छात्रा आर्या व कक्षा चार के छात्र आर्य ने अपनी जान पर खेलकर आपने चौदह साथियों की जान बचाई । समय पर बचाव दल पहुंचाने से कुल मिलाकर चालीस बच्चों को बचा लिया गया । लेकिन इस दुखद घटना में दस बच्चे बस का ड्राइवर खलासी मैं एक शिक्षक साल के दर्द में संभावनाएं अगर ये बहादुर भाई बहन हिम्मत नहीं करते तो पंद्रह सोलह घरों के चिराग और हो जाते हैं । बच्चों को कई दिनों तक बधाइयां देने वालों का तांता लगा रहा हूँ । शिवा का नाम खूब रोशन हुआ । अब्दुल्ला साहब एवं पाठक जीने अनुव्रत सेवाभारती की ओर से एक भव्य सम्मान समारोह रखा, जिसमें इन दोनों बच्चों को सम्मानित किया । सबकी जवान पर एक ही बात थी बहादुरो शूरवीरों की बहादुर ही संतान होती है । ऍम नगर पालिका, महिला व बाल विकास मंत्रालय आदि आदि ने न जाने कितनी जगह से या दोनों बहादुर बच्चे सम्मानित हुआ । स्कूल के वार्षिकोत्सव बारे ने विशेष पुरस्कार से भी नवाजा गया । शिवा के जाने के बाद आज पूरे परिवार के लिए खुशी का दिन आया । उन्हें सूचना मिली कि इन बच्चों को इस बार के राष्ट्रीय वीरता सम्मान के लिए चुना गया था । भारतीय गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा आ गया आर्य को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा । गणतंत्र दिवस की परेड पर देश के अन्य नन्ने बहादुरों के साथ दोनों भाई बहन भी सजे हुए हाथी पर सवार थे । दर्शक दीर्घा में विशेष कुर्सियों पर बैठे सत्यवान सावित्री भरी सेवक जीवक कामिनी अपना भाग्य सराह रहे थे । निशानों की आंखों में शिवा की आती नहीं । आज शिवा यहाँ होता तो उन्हें अपने बच्चों पर कितना गर्व होता ।

Part 35

परोपकार विशाल राजमार्ग हैं जो व्यक्ति को शांति और सुख की उच्च मंजिल तक पहुंचा जाता है । परोपकारी व्यक्ति समाज के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होते हैं क्योंकि वो समाज के लिए अपना बलिदान करने का उदास बावन रखते हैं । नक्सली कैसे सबको निकालकर सेवा ने संतोष की सांस ली । अब पाठक जी की ओर से नजर हटाकर है । तेजी से दौडने को अवगत हुआ । तभी उसने देखा कि घंटा सी चाकू ढाला । वापिस तौलिए दस बारह खूंखार लोगों ने उसे चारों ओर से घेर लिया था । मैं कुछ सोचता समझता इतने में एक व्यक्ति ने उसकी कमर बढ चाकू की नोक लगाई । दूसरे ने कनपटी पर पिस्तौल लगा दी । तीसरे नहीं गले पर गंडासी रखती । शिवा का हाथ का पड गया । उसकी माँ द्वारा पहनाया गया जीवन रक्षक होती का ताबीज आज उसके गले में नहीं था । उसका दिल धक कर रह गया । अपनी परिस्थिति समाचार तो कुछ बोलता हूँ । इतने में चौथे ने पीछे से पकडकर नाक में कुछ सुनाया । उसकी आंखों के आ गया अंधेरा छा गया । अगले ही क्षण सेवा भेज सदर जमीन पर गिर पडा जाली का बनायेंगे हो रहा था जिसमें शिवा को ढाल का एक आदिवासी ने कंधे पर घटने की तरह डाला और वह सब सघन जंगल की ओर चल पडे । करीब दो घंटे चलने के बाद घने पेडों के नीचे छिपी हुई तो बढिया सी नजर आएगा । वहाँ उनका सीनियर अफसर इंतजार कर रहा था । दहशत का ठक यहाँ पहले ही पहुंच चुका था । कुछ खाद्य सामग्री उन्होंने अपने यहाँ उतारी । बाकी ट्रक में ही रहने दी और अवसर बोला । बॉस का हुक्म है कि सारा सामान लाल चौकी पर भिजवा दिया जाए । सात वाले एक आदिवासी ने वो बेहोश पडे । शिवा की तरफ इशारा किया । इसको भी ट्रक में डालना है क्या? अफसर पास आया । उसने गहरी नजर सेवा पर डाली । नहीं नहीं क्यों? उसके सौम्य व्यक्तित्व ने उसे प्रभावित किया और बोला इसे ट्रक में नहीं डालना है । यही हमारी सुरक्षा में इसे रखो । जब वो देखा जाए तो मेरे पास लेके आना । करीब पांच छह घंटे बाद शिवा को होश आया । उसने आधे खोली तो पाया कि उसके हाथ पैर बंधे हुए थे । सिर उसका एकदम भारी था । अभी पूरी तरह बेहोशी टूटी नहीं थी । पहरेदार ने अवसर को सोचना दी कि कैथी को हो शादिया सेवा को अवसर के समक्ष उपस् थित किया गया । शिवानी सामने वाले की आंखों में झांका और सीधा सवाल किया भाई तुम कौन हूँ? इन घने जंगलों में क्या कर रहे हो और यहाँ केवल आए हूँ । क्या चाहते हो? मुझसे अवसर बोला आज तक मेरे सामने किसी के जवान खोलने की हिम्मत नहीं हुई । तुम धनाधन बोले जा रहे हो तो मैं डर नहीं लगता । शकल सूरत से तुम अमेरिकी लग रहे हो ना चीनी तुम भी भारत माता के पुत्र मैं भी भारतीय का पुत्र आता । हम दोनों भाई वाई हुए । अरे अपने भाई से डर कैसा । अब तुम अपने बारे में भी कुछ बताओ । नाम हमारा होता है । कांग्रेस हमने पूंजीपति, सामंती वर्ग, वह सूदखोर, बनियों के सोशल से बचने का रास्ता आदिवासियों को दिखाया है । इसलिए जनता हमारे साथ है । हिंदुस्तान में इतने जन आंदोलन होते आए हैं । क्या कभी तुमने माओवादी विरोधी जन आंदोलन देखा या सुना है? सच्चे जनसेवक है हम । हमने सीधे सरल ग्रामीणों को पुलिस एवं प्रशासन के उत्पीडन से बचाया है । पुलिस एवं प्रशासन जनता की सहूलियत के लिए होते हैं । खन्ना के उत्पीडन के लिए तो मैं ऐसा नहीं सोचना चाहिए करवाने का अरे मेरे सोचने से क्या फर्क पडता है । वास्तविकता इससे भी बढकर हैं । कुछ दमनकारी कानूनों और विभिन्न राज्यों में लागू इन की धाराओं जैसे छत्तीसगढ स्पेशल पब्लिक ॅ और महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम ॅ की मदद से माओवाद को लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रमुख और चार बना दिया गया । ढाई कम रहे अपना चिंतन व्यापक करो । कानून रक्षक होता है, भक्षक नहीं । कानून जीवन सुधार का हो जा रहे हैं । दला घुटने का हथियार नहीं मैंने करीब से देखा है । सरकार दमनकारी उपायों का विकास की पहल के साथ जोडकर आगे बढाने की बात कहती है । इसी के नाम खुले हाथों फंदे बांटने और प्रशासन को मनमानी की छूट मिल जाती है । ये तो बहुत अच्छी बात है । इसी से आदिवासियों का जीवन स्तर सुधरेगा पर कानून व्यवस्था भी मजबूत होगी । बहुत बोले हो तो इन्हीं कारणों से तमाम जिला प्रशासनों में अपने अपने जिलों को माओवाद प्रभावित घोषित कराने की होड लगी है । उनके निहित स्वार्थों से हमें सीधा फायदा होता है । अरे हम तो आदिवासियों के लिए ऐसा कुछ कर रहे हैं और हम ने स्थानीय जनता को भी अपने हाथ के लिए लडाना सिखाया है । यहाँ तक तो ठीक है, लेकिन देश विरोधी माओवादी विचारधारा क्यों फैला रहे हो, यह काम तो हमें करने की जरूरत ही नहीं पडी । सत्ता के दलालों ने स्वता ही कर दिया । उन्होंने राष्ट्रवादी संगठन जो वास्तव में आदिवासियों में देश प्रेम की भावना जगह रहे थे, उन्हें पसंद भाग पर ला दिया था तथा चर्च के धर्मांतरण अभियान को पोषण दिया तो इसीलिए ही देश के कई इलाकों में माओवादी, नक्सली एवं चर्च का घालमेल आक्रमण नहीं है । इस साजिश को पहचानने की आवश्यकता है । क्या करोगे पहचानकर प्रशासन वा सत्ता पक्ष की सांठगांठ है । कई जगहों में नेता हमारे कमांडरों की मदद से चुनाव जीते हैं । हमारे पास सत्ता की ताकत है, हथियारों की ताकत है । सोचो भाई सोचो, राजनीतिक दल सिर्फ आपका इस्तेमाल कर रहे हैं । मैं भी जनविरोधी नीतियों को आगे बढाने के लिए हम रेड सिर्फ इन ताकतों से लडाई नहीं जीती जाती तो हम समझते क्या हो हमारे बारे में हम प्रतिवर्ष अठारह सौ करोड की उगाही करते हैं । विदेशी आकाओं से पैसा का प्रशिक्षण मिलता है वो अलग । अभी हमने सिर्फ पच्चीस प्रतिशत पर कब्जा किया है । आने वाले वर्षों में पूरी सत्ता हमारी होगी । ये सपना देखना भूल जाओ । इस तरह से घात लगाकर हमले और अपहरण से तुम अपना कार्यक्षेत्र और शक्ति भले ही बडा लो लेकिन सत्ता नहीं मिलेगी । तो माओवादी नए बदलावों के अनुसार नहीं ढाल होगे तो नायक और बलिदान के निजी कारनामों के बावजूद राज्यव्यवस्था तुम्हारा इस्तेमाल करती रहेगी । हम व्यापक आंदोलन के साथ हिंदुस्तान में क्रांतिकारी बदलाव कर देंगे । आप है इस तरह के आंदोलन कंबोडिया, वियतनाम, रोमानिया आधी जिंदगी देशों में हुए हैं । वहाँ अंतत आह कंगाली ही हाथ लगी । माओ और पोल पाठ ने लाखों लोगों की लाशें गिराकर खुशहाली लाने का छलावा किया, लेकिन वो भी आत्मघाती साबित हुआ । भाई क्या? तो मैं इस अराजकता की पुनरावृत्ति चाहोगे । वंचितो दलितो हूँ, आदिवासियों को उनका हक दिलाना और हम अपना अधिकार पाना चाहते हैं, वो पाकर रहेंगे । इसके लिए मारकाट का रास्ता नहीं । दोस्त वार्ता का रास्ता है तो लोकतांत्रिक तरीके से बात रखो, अपनी शक्ति अपने संस्थानों का उपयोग करो उस समूची नीति प्रणाली को खान फेकने के लिए जो आम लोगों की जिंदगियों से खिलवाड करते हैं । इस भूमिका के लिए जिस वैचारिक साहस और राजनीतिक कल्पनाशीलता की जरूरत है, क्या तो माओवादी उसका परिचय दे पा होगी? शायद नहीं । फिर क्यों इस लाल कानून के चक्कर में तुमने अपना घर परिवार, सुख, शांति, अमन चैन सबको दिया । पता नहीं किस गोली पर तुम्हारा नाम लिखा हूँ । ढाई हिंसा से क्या मिलने वाला है? शांति बहाल संविधान में विश्वास करके ही हो सकती है हूँ । तुम भाषण अच्छा दे लेते हूँ मेरा विचार पहले तो तो मैं अपना मुखिया के पास भेजने का था तो मैं काट के फेंक देता हूँ और तुम बहुत पढे लिखे इंसान नजर आते हो । यहाँ कोई स्कूल नहीं है क्योंकि लगभग तीन सौ स्कूलों को हमारे साथियों ने काम से उडा दिया । उन बच्चों को हमने बन्दों के थमा नक्सली प्रशिक्षण प्रारंभ कर दिया । किंतु मैं अपने बच्चों को नक्सली नहीं बनने देना चाहता हूँ । उन्हें सुख भगवान शिक्षित नागरिक बनाना चाहता हूँ । आता था गोपनीय तरीके से मेरे दो बच्चों को तुम शिक्षित करने का जिम्मा लोग तो तुम्हारी जान बचाने की जिम्मेदारी मेरी हाँ यहाँ भी किसी को कानोकान खबर ना लगे । फिरौती वसूलने तो कैदी बनकर यहाँ रहोगे । बोलो क्या इच्छा है तुम्हारी अंडा क्या चाहे तो आंख शिवानी तुरंत हाँ कर दी । अब उसके हाथ पैर बांधकर कैब रखा जाता है । जब भी समय होता बच्चों को एक साथ बुलाकर उसके सामने बैठा दिया जाता है । दोनों बच्चे एवं दस वर्ष की उम्र के थे शिवा । उन्हें गणित की गिनती, वही साहब किताब हिंदी वह अंग्रेजी का ज्ञान देने लगा । अवसर के दो बच्चे के अलावा एक सफाई कर्मचारी का बच्चा भी बहुत जिज्ञासु था । प्रयास करके बहुत अच्छी हिंदी बोलना भी सीख किया था । फिर एक दिन पास आकर बोला आपको ये लोग बांधकर क्यों रखते हैं? आपको लेना चाहोगी आपके हाथ खोल दू । शिवानी इशारे से हाँ कहा तो बच्चे ने हाथ के रस्सी खोल दी । शिवानी पैर की रस्सी भी खोल नहीं । दोनों गुरु शिष्य थोडी सी दूर भाग कर गए । इतने में खूंखार आदिवासी ने दूर से ही देख लिया । तुरंत निशाना लगाकर तीन मारा । एकदम अचूक निशाना वीरशिवा के पैरों में लगा । वो वहीं गिर गया । आदिवासी तुरंत उस बच्चे के पास आया और बोला, किसान से तुम्हें इसके बंधन बोले । जैसे ही उसने हाथ आगे क्या दाया आठ खर्च दरांती एक बार से ही उंगलियां हथेली से अलग हो गई । खून की धारा होती है । बच्चा डर से बिलग उठा, पर उस अत्याचारी पर बच्चे के रखने का कोई असर नहीं था । शिवा को धमकाते हुए आदिवासी बोला फिर कभी भागने की कोशिश करोगे । तुम तो मरोगे ही नहीं । इस बच्चे को भी झांसे मार दूंगा । शिवा मन मसोसकर रह गया । आदिवासी उन दोनों को घसीटते हुए वापस वही लिया । वहाँ पर उसके दोनों हाथों पैरों को बांध दिया तथा शिवा के पैर पर और लडके के काटे हाथ पर जडीबूटी लगाई । फिर धमकाया । आगे से कभी भागने की चेष्टा के तो दोनों की मौत निश्चित है ।

Part 36

अपेक्षा और अपराध के तालमेल से समस्याएं बढती है । किसी भी समस्या का तब तक समाधान नहीं होता जब तक की उसका मोल नहीं समझ लिया जाता । जो समस्याओं के सिर पर पैर रखकर चल सकता है, वही समस्याओं को पछाड सकता है । अपने प्रिय शिवा की खोज खबर लेने के लिए प्रतिदिन नक्सली समस्या से जुडी छोटी से छोटी खबर अब्दुल्लाह साहब एवं पाठक जी पूरे ध्यान से पढते हैं । उन्होंने विभिन्न समाचारपत्रों में देखा और अध्ययन किया की दिनों दिन नक्सलियों के हौसले बढते जा रहे थे । उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के काफिले पर हमला किया । उसके बाद कोरापुर जिला मुख्यालय पर हमला किया और हथियार लूट लिया । इस घटना से अभी उभरे नहीं थे । कितने में जहानाबाद में हमला कर के तीन सौ पचहत्तर कैदी छुडा लिया पर इतने भर से इन दुर्दांत दस्त हूँ का जी नहीं भरा । उन्होंने छत्तीसगढ में रानीबोदली में पचपन जवानों की हत्या कर दी । ये आप सूखे भी नहीं थे कि दिन तेवाडा जेल पर हमला बोलकर तीन सौ पांच कैदी छुडवा ले गए । अब सिर्फ सुरक्षाबल ही नहीं आम नागरिकों को भी उन्होंने निशाने पर ले लिया । राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों को बंधक बनाना उनका खेल हो गया । हिंसा का गहन टांडा रचते हुए हैं । उन्होंने आंध्र प्रदेश पुलिस है । अडतीस कमांडो को उडीसा में मार डाला । गढचिरौली में सोलह पुलिस कर्मियों को उडा दिया । पश्चिम बंगाल के सिल्दा कैंप में चौबीस जवानों को मार गिराया । नक्सली एक के बाद एक हिंसक वारदात कर रहे थे । प्रशासन उन की समाप्ति के लिए सुरक्षा बलों एवं पुलिस को भेजता तेज आवाज जवान शांति स्थापना है तो इन आतंकियों को खत्म करने के लिए जंगलों में अंदर तक घुसते । वहीं योजना बद्ध तरीके से यह जुल्मी जल्लाद देश के रक्षकों को ही भक्षण कर लेते हैं । उनका मूल्यों देश था भाई एवं आतंके वातावरण का निर्माण करना । आम नागरिकों को लगने लगा कि जब हमारे रखवालों का ही है, माओवादी सहार कर रहे हैं तो हम कहाँ तक बचेंगे । इसी विचार से अनेकानेक आदिवासी नक्सली कैंप में शामिल हो रहे थे । फिर अचानक उन्होंने छह सौ नागरिकों को अलग अलग जगहों पर मार डाला । नक्सली सरे आम शिकारी बनकर घूमते और सुरक्षा बलों, पुलिस कर्मियों, वन एरिया नागरिकों का शिकार करते हैं । माओवादी सिर्फ जान माल की दुश्मनी नहीं थे, बल्कि इन क्षेत्रों में सरकार द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों को भी बाधित करते हैं । पिछले दिनों बिहार में चंदौली के निकट निर्माण एजेंसी की मशीनों को नक्सलियों ने जला दिया था । इस भाई से बागमती नदी के दाहीने तटबंध का निर्माण भी ठप हो गया । ये बिहार के शिवहर जिले के डुब्बा घाट से लेकर सीतामढी जिले के अडतीस किलोमीटर तक बनना था किन्तु नक्सलियों के आतंक के चलते इसे रोकना पडा । ऐसा इसलिए कर रहे थे क्योंकि उनका सोचना था कि अगर इसी तरह विकासकार्य होते गए तो उन तक सुरक्षा बलों की सीधी पहुंच जाएगी । सैकडों स्कूलों को तो बम से ही उडा दिया था । कॉलेजों के शिक्षकों से विकास के नाम पर उसके रिटर्न से पच्चीस प्रतिशत राशि का सहयोग मांगा गया । इसका कारण एक ही था कॉलेज बंद हो जाएगा । वीडियो को मारने की धमकी, जिला अधिकारी को मारने की धमकी, सीआरपीएफ पर फायरिंग । यह सब तो उनके रोजमर्रा के काम हो गए । उनकी ही मत इतनी बढ गई कि माइंस ग्रुप वाहनों को उडाने की तकनीक है । उन्होंने प्राप्त कर लेंगे । मुख्य बात यह थी उन्होंने खेल से मिलकर जासूसी ऑपरेशन, शैडो नेटवर्क द्वारा भारतीय गोपनीय दस्तावेजों में सेंधमारी और साइबर जासूसी द्वारा अनेक संवेदनशील सूचनाओं के अलावा नक्सल प्रभावित राज्यों में सुरक्षा हालात और माओवादियों एवम नक्सलियों के खुफिया मूल्यांकन भी उन्होंने हासिल कर ली है । इस प्रकार नक्सलियों ने बेहतर खुफिया अटेंड गोरेला रणनीति के साथ ही आधुनिकतम तकनीक के इस्तेमाल में भी महारत हासिल कर दी । अनेक सुरंगों में प्रेशर बम लगती है । नक्सली अपनी ताकत बढा रहे थे । इस सारी कवायद में मैं अनशन हिंसा के द्वारा सत्ता हासिल करना चाह रहे थे । हिंदुस्तान को माओवादी देश के रूप में देखना चाह रहे थे । देश के अंदर ही मुझे इस धमासान से प्रशासन हिल गया । इस घोषित युद्ध को रखवाने की अनेक योजनाएं बनाई गई । सर्वप्रथम सरकार ने इनके बढते कदम रोकने का प्रयास का श्री गणेश करते हो गए वार्ता का रास्ता अपनाने का भी विचार किया हूँ । लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नक्सलियों से अपील की कि वह सरकार के साथ बातचीत करें । पहले तो नक्सली तैयार ही नहीं हुए । उनका कहना था कि कौन जाएगा सरकार से बातचीत करने । फिर सामाजिक कार्यकर्ता सोमेश की मध्यस्थता पर नक्सली राजी हो गए क्योंकि सोमेश के केंद्रीय राजनीति में भी अच्छी पैठ थी । नक्सलियों के प्रति तो उसकी सहानुभूति थी । गृहमंत्री ने चिट्ठी भेजकर सोमेश चटर्जी से अनुरोध किया नक्सलियों से बातचीत में मध्यस्थता करें । सोमेश ने सरकार का यह प्रस्ताव सहर्ष स्वीकार लिया । उसने नक्सलवादियों के नाम एक पत्र लिखा । उन्हें समझाते हुए वार्ता की मेज पर आने का न्योता दिया । अपने विश्वस्त सूत्रों के साथ उस नहीं है । पत्र माओवादी पार्टी के महासचिव के पास पहुंचा दिया । उच्च शिक्षित बहुत तेज दिमाग के धनी सुमेश के पत्र की शैली बहुत अच्छी थी । सरकारी मुहर लगी थी तो शक की कहीं गुंजाइश ही नहीं थी । महासचिव ने चिट्ठी वार्ता को अपील पार्टी के अध्यक्ष तक पहुंचाना उचित समझा । खुफिया पुलिस निरंतर उसके पीछे थी । फॅमिली मास्टरमाइंट तक पहुंचना चाहती थी । महासचिव पीयूष को अपने पीछे किसी के होने का अहसास हो गया । उसे सतर्क देख खुफिया पुलिस ने उसका काम तमाम कर दिया क्योंकि यह गोपनीय आता है । जुडा मामला था । पीयूष की मौत के बाद वार्ता का दौर थम गया । संवाददाताओं ने जब सोमेश चटर्जी से वार्ता की प्रगति को पूछा तो उसने साफ साफ बता दिया कि जब तक सरकार अपनी विश्वसनीयता साबित नहीं करेगी तब तक मैं उन्हें वार्ता के लिए राजी नहीं कर सकता । सरकार मुझे माध्यम बनाकर माओवादी नेताओं को निशाना बनाना चाहती है, लेकिन मैं ऐसा नहीं होने दूंगा क्योंकि हिंसा चाहे माओवादियों की ओर से हो या सरकार की ओर से, मैं उसका पक्षधर नहीं हूँ । कहा तो सोमेश सरकार का प्रतिनिधि उसका विश्वासी व्यक्ति था जो उनकी एवं नक्सलियों के मध्य बातचीत करके समझाने की ताकत रखता था और अचानक उसका उल्टा हो गया । नक्सलियों से हमदर्दी रखने के जुर्म में उसे सरकार ने पुना कैद कर लिया । राष्ट्रद्रोह के अपराध में उसके साथ ही सुब्रतो राय एवं उसे दोनों को उम्रकैद की सजा हो गई । अब सारा दारोमदार पुलिस एवं सेना पर ही था । नक्सलवादियों पर नकेल कसने है तो एक विशेष सैन्य अभियान ऑपरेशन टेरर हंट का शुभारंभ किया गया । अर्धसैनिक बलों के अलावा राज्य पुलिस को भी सम्मिलित करके कुल मिलाकर पचास हजार जवानों की फोर्स को तैयार किया गया । प्रारंभिक दौर में ऑपरेशन टैरर हंट को छोटी मोठी सफलताएं हाथ लगने लगी । सुरक्षाबलों में आत्मविश्वास बढा केंद्र सरकार वराज सरकार की एक उच्चस्तरीय समन्वय समिति बन गए । उसी के अनुसार नक्सलियों के खिलाफ आक्रमण है तो साझा अभियान चलाया गया । बडे ऑपरेशन हेतु वायुसेना से प्राप्त टोही विमानों के नक्शे के आधार पर रास्ते तय किए गए । खुफिया तंत्र पूर्ण ताहा गोपनीयत विश्वासी मच चुस्त दुरुस्त हो गया । सुरक्षा बल एवं स्थानीय पुलिस सब चौकन्ने थे । पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार यात्री में लगभग दस चालीस पर कंपनी ने मुझे क्या तीन चार किलोमीटर चलने के बाद सघन जंगलों में बहुत सी झोपडियों की आकृतियां दिखाई देने लगी । तूने सावधानी के साथ सुरक्षा बलों ने संपूर्ण क्षेत्र को घेर लिया । अब एक और झोपडीनुमा घर में घुस कोर्स कर सुरक्षाबलों के जवान नक्सली आतंकियों का खात्मा कर रहे थे । तीन ओवर गोलियों के बाहरी प्रतिरोध की बाहरी चक्र संभाल रहा था । इस प्रकार दो तीन घंटे तक अंधाधुंध फायरिंग लडाई चलती रही । शिवा की आंख पहली गोली की आवाज से ही खुल गई थी । उसे लगा होना हो भारतीय सुरक्षा बल के जवान आ गए । उसके दिमाग में आया । बाहर जाकर देखो अपना परिचय तो शायद बन जाऊँ । तुरंत ही दूसरा विचार आया । कौन समझेगा उसकी सच्चाई । वह तो मौत के घाट उतार दिया जाएगा । अब क्या किया जाए? धीरे दी है कि सेट कर मैं हाथ कटे बच्चे तक पहुंचा, उसे उठाया । कान में कुछ कहा । बच्चे ने शिवा को बंधनमुक्त कर दिया । झोपडीनुमा घर के अंतिम छोड तक दोनों झकझोरकर दौडते हुए पहुंचे तो देखा सामने उस नक्सली अफसर की लाश पडी थी जिसके बच्चों को शिवा बढा रहा था । पास ही उसके दोनों बच्चे लहूलुआन अंतिम सात से खेल रहे थे । शिवाल एक्शन के लिए थोडा गया । उसके कानों में अवसर की आवाज पहुंचने लगी तो मेरे बच्चों को शिक्षक करो । मैं उन्हें बाहर भेजूंगा । नक्सली नहीं बनाऊंगा । उस आतंकवादी के हृदय में भी एक आम पिता का दिल था । जब आप अपने बच्चों को आधुनिक सभ्य समाज का अंग बनाना चाहता था, नाकि एक हिंसक समाज का । अगर हिंसा का अंतिम सत्य होता तो अफसर बच्चों को अहिंसक बनाने का परीक्षण क्यों दिलवाता? ये ज्यादा सोच विचार का समय नहीं था, न ही भावुक होने का समय था । शिवा बच्चे के कान में पसंद आया । बच्चे ने वापस शिवाय कुछ कहा । दोनों फुर्ती से झोंपडी के बीच बने चोर राष्ट्र की ओर बढे । बच्चा तुरंत शिवा को वहाँ से निकाल ले गया । थोडी दूर पहुंचते ही उन्हें तेज धमाकों की आवाज सुनाई दी । जैसे अनेक शक्तिशाली बम एक साथ फटते हूँ । पांच घंटे तक चली इस कार्यवाही में लगभग पांच दर्जन नक्सलियों को मार गिराया गया । सुरक्षा बल के पांच जवानों को भी अपनी शहादत देनी पडी । प्रातः सूर्योदय से पूर्व नक्सलियों का या क्या पूरी तरह से तबाह हो गया? निस्संदेह सुरक्षाबलों को एक बडी सफलता हासिल हुई थी । इससे उनके खास ले और बुलंद हो गए थे ।

Part 37

अगर समस्याओं का सामना निडरता से किया जाए तो ऐसी कोई समस्या नहीं जिनका समाधान न हो सके । निर्भय होकर अपनी प्रतिरोधात्मक शक्ति को पारी कृष्ट करने वाला अपने भाग्य का निर्माता बन जाता है । प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अबाध गति से अपना काम करता रहता है । लगभग चार पांच किलोमीटर चलने के बाद शिवा का आज पकडे पकडे गए बच्चा जहाँ पहुंचा वो किसी गुफा का मुहाना था । सामने एक नदी बह रही थी, नदी में है । घुटने तक पानी था तो ये लोग नदी में उतर गए । नदी के बीचोंबीच एक प्राचीन मंदिर बना हुआ था । बच्चा शिव को वहाँ ले गया और बोला ये हमारे कभी लेके कुलदेवता का मंदिर है । यहां स्वयं के खून से तलब करने से भक्तों की इच्छा पूर्ति होती है । शिवानी कुछ पलों के लिए सोचा फिर दृष्टि पसारकर देखा । वहीं देश प्रतिमा के पास एक छोटा सा प्रशंसा खंजर रखा हुआ था । उसने तुरंत वहाँ रखी कटारी से अपने दायें हाथ के अंगूठे में हल्का साथ ही लगाया और अपने रक्त का तिलक मूर्ति के ललाट पर लगाया और फिर सामने आंखें मूंदकर प्रार्थना करने लगा । हमारा देश इस नक्सली आतंक से मुक्त हो जाए और मैं सकुशल अपने घर पहुंचा हूँ । प्रार्थना पूरी घर के शिवा ने आंखें खोलीं तो उसके दोनों दो खूंखार आदिवासी घट में गडांसा लिए खडे थे । जैसे अगले ही शरण है उसकी बलि दे देंगे । शिवा अच्छा गया । मैं कुछ बोलता इससे पहले ही खोलता हुआ शिवा की ओर इशारा करके मैं बच्चा बोला यह तो रूचि है । न जाने उस बच्चे की बातों में कौन से शक्ति थी । दोनों आदिवासी पालतू कुत्ते की तरह तो मैं हिलाते हुए शिवा को साथ ले नदी के दूसरे किनारे की ओर चलते गए । वहाँ करीब दो सौ लोगों की आबादी का छोटा सा गांव था । उन लोगों ने शिवा को प्रधान से मिला दिया तथा उसके रहने की अच्छे से व्यवस्था करवा दी । वह बच्चा भी शिवा के साथ ही रहने लगा । शिवा को शालिनी वह आर्या की बहुत याद आती है । अपने माँ बाप को भी बहुत याद करता हूँ । उसमें मन ही मन सोचा कि शीघ्र मौका मिलते ही मैं यहाँ से भाग जाऊंगा । मैं रातो रात निकल जाने की योजना बनाने लगा । इसी उद्देश्य से उस बच्चे के साथ उस क्षेत्र का निरीक्षण करने निकला । अधनंगे दुबले पतले मेरी आदिवासियों को गरीबी, भुखमरी, पिछडी हुई बुरी स्थिति को देखा । अपनी भावनाओं को तिरोहित करते हुए भागने का विचार हटा दिया । दूसरे ही पल उसके मन में आया कि मैं शिक्षक हूं । अगर इन गांव वालों को शिक्षक करके मुख्यधारा से जोड पाया, इनका विकास कर पाया तथा इनका हृदय परिवर्तन करने में समर्थ हो सका तो यह मेरे जीवन की बहुत बडी उपलब्धि होगी । मन मजबूत करके उसने न केवल आदिवासियों की भाषा सी थी, बल्कि उन का पहनावा भी अपना लिया । उसने पूर्ण प्रतिबद्धता से शिक्षा, चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में आदिवासियों की मदद करना प्रारंभ कर दिया । उन्हें गणित एवं हिसाब सिखाने की प्राथमिकता दी, जिससे उनका आर्थिक शोषण हो । हिंदी अंग्रेजी भाषा का प्राथमिक ध्यान करवाने में भी उसने काफी परिश्रम किया । उन्हीं की भाषा में वे अपनी बात इतने प्रभावी ढंग से रखता की उनका नाम गुरु जी ही प्रसिद्ध हो गया । शिक्षा की बेहतर तकनीक के साथ है, उनके हृदय परिवर्तन का प्रयास करता हूँ । शिवा अपने शिष्यों को अहिंसा एवं देश प्रेम की शिक्षा देता । मैं समझाता की इतिहास गवाह है कि हिंसा या प्रति हिंसा से कोई पक्ष नहीं । जीत सरकार हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हम भारतीय गणराज्य के सदस्य हैं, जहाँ लोकतंत्र का अंतिम सत्य नागरिक होता है । हिंसा नहीं । प्रिय विद्यार्थियों एक बात कान खोलकर सुन लो इस क्षेत्र में गोली चाहे जिस तरफ से चले गिरेगा सिर्फ आपका आदिवासियों का खून क्योंकि सुरक्षा बलों के जवान भी आप ही के क्षेत्र के हैं । कटाह शांत दिमाग से सोच हूँ क्या इतना खून बहाकर तुम सुख चैन से रह पाओगे? क्या कभी देश के मुख्य धारा से जुड पाओगे अटाहडा अपना डलवा दिमाग बदलो हथियार घेराव कलाम उठाओ स्वर्णिम भविष्य तुम्हारे स्वागत को तैयार है । जागो जागो न प्रभात यह जाग्रति का आवाहन करें । भारत माँ के चरणों में हम आज नवल निर्माण करें एक लक्ष्य से एक दिशा में एक साथ अभियान करें । युवा शक्ति के युवा योग है युग नहीं ये शस्त्रीय या क्या करें नहीं पौध के शुभ भविष्य की है हम पर्यटन में तारीख नए सर्जन के की तो उनसे विकसित हो जीवन फुलवा रहें । सही अर्थों में मानव की गरिमा का अब सम्मान करें । छोड सहारों पर जीना हम जी ये विचारों पर आपने सही दिशा में शक्ति नियोजन करें फले सारे सपने संयम बनाए रहा । स्वयं ही चरणों को गतिमान करें । जागो भाइयों नव प्रभात यह जागृति का आह्वाहन करें । शिवा के ऐसे प्रेरक गीत जादू का असर करते हैं । युवाओं का हृदय परिवर्तन होने को आतुर होने लगा । शिवा के प्रयास से धीरे धीरे गांव में अमन चैन से आनंद लेने वाली संख्या बढने लगी । देश की मुख्यधारा से जुडकर आगे बढने का सपना वहाँ के युवक देखने लगे । उन्हें लगने लगा कि अगर हम अपना अमूल्य जीवन नक्सली संघर्ष में लगा देंगे तो हमारे परिवार का हमारे बीवी बच्चों का क्या होगा? अटाहडा उन्होंने नक्सली प्रशिक्षण कैंप में जाना छोड दिया । मंगलकोट के बाद नानूर और उसके पश्चात खाना कोलगांव में गुरु जी का शिक्षण चल रहा था । मुख्य प्रशिक्षक नक्सलियों के नेता ने देखा मंगलकोट, नानूर खाना कुलगांव के युवक प्रशिक्षण कैंपों में नहीं आ रहे हैं । उनकी इतनी हिम्मत कैसे हो गई? पता चला की है तो गुरूजी की कारस्तानी है । आनन फानन में हाई कमान ने शिवा को गिरफ्तार करवा लिया । गांव वालों ने गुरु जी को आतंकवादियों से बचाने का बहुत प्रयत्न किया । उनके सामने हाथ पांव जोडे बहुत अनुनय दे नहीं किया । किन्तु आतंकवादियों के सामने ही इतना चली और वे शिवा को बंधनों में बांध कर ले गए । जिन आतंकियों ने शिवा को कैद किया था उनमें से एक ने पूछा इसे मारकर एक दें यहीं खेल खतम । अरे नहीं मुखिया जी ने इसे जिंदा पकडकर लाने का हुक्म दिया है । इसे जिंदा ही ले चलो, न जाने कितना संघर्ष शिवा की किस्मत में लिखा था इन्सानियत की रक्षा के लिए मानवता की भलाई के लिए जहाँ भी हाथ आगे बढा था, वहीं हिंसक हत्यारे उसे बहुत के मुंबई खींच कर ले जाते हैं । आसुरी वृत्ति और मानुषी व्यक्ति का संघर्ष अनाधिकार से चला रहा है । संघर्ष करने वाले बदल सकते हैं, संघर्ष की शहरी बदल सकती है, संघर्ष के साधन बता सकते हैं किंतु संघर्ष यात्रा था । कभी आप साल हो पाएगा ये संभव नहीं लगता । जिस संघर्ष का विवेक से सामना किया जाता है, रहे अभी नवज्योति देता है । इससे मनोज का वास्तविक करता भी प्रस्फुटित होता है तथा संघर्षों की आग में तपकर सोना कुंदन बनता है ।

Part 38

अपने लिए कुछ कर पाने का अपना आनंद होता है तो दूसरों के लिए कुछ कर सकने की अनुभूति उससे भी मदद होती है । इससे जो सुख प्राप्त होता है उसे हाथ में लेकर नहीं दिखाया जा सकता है । उसका अनुभव किया जा सकता है । हूँ बहादुर बच्चों के रूप में गणतंत्र दिवस पर भारती की सवारी करके आर्या और आर्य को बहुत आना नहाया । दादा दादी, नाना, नानी, माँ आज पांचों ही बहुत प्रसन्न थे । हरी सेवक जी फल मिठाइयाँ समूह से ले आए । सावित्री ने मटर पनीर, दम आलू एवं दाल मखानी की सब्जियाँ बना ली । शालू गरमा गरम रोटियाँ बना रही थी । आ गया उन्हें परोस रही थी सबको खिलाकर अब माँ बेटी भोजन कर रहे थे, फॅार बचा था । इतने में ही आर्या से रहा नहीं गया बोली हाँ, आज पिताजी की बहुत याद आ रही है । अगर आज नहीं होते तो कितने खुश होते हैं । ख्यालो को सुबह से ही अपने पति की बेहद ज्यादा रहे थे । आ रहने जैसी ही उसकी बात छेडी । फिर अपने पर नियंत्रण भारत पाई और बजट पडी है तो मैं कुछ बोल ही नहीं पाए । बहुत तक और मुँह में हाथ का हाथ में रह गया । आरोपी वहीं खडा था । एक तरफ है दूसरी तरफ आ गया । दोनों माँ से चिपट गए । आर्यान वीर बालिका की तरह है । माफिया आँसू पहुंचे और बोली माँ आज खुशी का दिन है और आपको हो रही है । आप एक बहादुर की पत्नी है और हम उनके बच्चे हैं । जब हम यहाँ होते हैं तो उन्हें तकलीफ वहाँ होती है । अटायर होना नहीं है । रास्ता खोजना है । हाँ में बडी होकर पापा को अवश्य वापस लाऊंगी । आरे बोला नहीं दी अभी आप के साथ चलूंगा, नहीं हारे तो मावा परिवार का देखभाल करना । घर पिता जी कल आउंगी । शानू की सुर्खियां रुकने का नाम नहीं ले रही थी । मैं सोचने लगी लेकिन खूंखार नक्सलियों के पास पुलिस जाने से कतराती है तो वहाँ है मासूम लडकी क्या कर पाएगी? दुनिया में प्रतिशत लोग योजनाएं बनाते हैं, सपने देखते हैं लेकिन उन्हें पूरा करने का जोखिम नहीं उठाते, ना ही प्रयास करते हैं । जो दस प्रतिशत लोग सपनों को सच करने के लिए अपना सर्वस्व होम देते हैं, वे ही सफल व्यक्तियों की सोची में नामांकित होते हैं । आर्या ने यूँ ही माँ से नहीं कह दिया था कि वह पिताजी को लेकर आएगी । उसके मन में पूरा भरोसा था कि उसके पिता जी आवश्यक जीवित होंगे और मैं एक दिनों ने आजाद कराएगी । दसवीं की छात्रा आर्या ने इस विषय में गहन चिंतन प्रारंभ कर दिया था । यू तो वह सभी शिक्षकों को प्रिया थी किन्तु कक्षा अध्यापिका सोनाली तनेजा का उससे विशेष नहीं था । आज जब मैं पढा रही थी तो आर्या क्या ध्यान कक्षा में नहीं कहीं और था । कनीजा मैडम ने गौर से उसके चेहरे की आते जाते भागों को देखा । उन्हें लगा कि बच्ची परेशान है । उसकी स्थिति उनसे छिपी नाती अच्छा हाँ । उन्होंने आर्या से कहा हाँ चोली, कल आयुष में मुझसे मिलने आना । अध्यापक कक्ष में आर्या सोनाली मैडम से मिलने पहुंची । गार्डन में पूछा क्या परेशानी है? आर यानी मोटे तौर पर सारी स्थिति का जिक्र मैडम से कर दिया । उसने आगे कहा कि मैं भारतीय सशस्त्र सेना में भर्ती होना चाहती है । बता इस है तो मार्गदर्शन करें । मैडम ने बताया, इसके लिए एनडीए ऍफ का फॉर्म भरना होता है । फिर लिखित परीक्षा होती है लेकिन परीक्षा में पास होने के बाद इंटर भी होता है । उसमें चयनित विद्यार्थी का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है । कुल मिलाकर प्रवेश पाना टेढी खीर है तो पर उससे ज्यादा मुश्किल है ट्रेनिंग की कठोरता को झेल पाना बताओ क्या सोचा है तुमने? मैडम ने पहाडों से टकराने को तैयार सागर की गहराइयों में जाने को तैयार हूँ । अग्नि परीक्षा से गुजरकर फौलाद बनने को तैयार हूँ । मेरे जीवन का एकमात्र लक्ष्य है अपने पिता की खोज । मैं इसके लिए एनडीए अवश्य जॉइन कर होंगी आप । कृपया मुझे इसका फॉर्म एवं अध्ययन सामग्री उपलब्ध करवा दीजिए । मैं सेक्स तनेजा को हारया की आवाज में इस पार्टी इरादों की खनक सुनाई दे रही थी । आर्या ने इसी करियर को अपनाने की मन में ठानी थी । अपनी स्कूली पढाई संपन्न करते ही उसने अनेजा मैडम के मार्गदर्शन के अनुसार एनडीए की लिखित परीक्षा दी । आॅल दो नंबर से रह गई । प्रवासी हो गई लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी । उन्होंने सोनाली मैडम से मिलने पहुंची । उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत करवाया । मैडम ने उसे एक बार फिर एनडीए की परीक्षा देने को कहा लेकिन हर या का मन्ना था । उसने कहा मैडम मुझे और कोई दूसरा रास्ता । सुझाव में कुछ सोचते हुए मैडम ने कहा तुम रेलवे सुरक्षा बल की परीक्षा की तैयारियां पूरे मन से करो और उसका फॉरवर्डू आया । कोई यह बात चर्च गयी । उसने परीक्षा दे दी । उसमें पास भी हो गई । फिर इंटरव्यू में भी गहरे ज्ञान गजब के आत्मविश्वास वह बलिष्ठ का सडती खिलाडियों वाले शरीर के कारण आर्या का प्रथम प्रयास में चयन हो गया । यहाँ अपनी पढाई पूरी करते ही प्रशिक्षण के दौरान उसे आरपीएफ, रेलवे सुरक्षा बल की महिला ब्रेड ब्रेड में जॉब मिल गई । नक्सलियों के बढते प्रभाव, रेल यात्रियों की बढती संख्या एवं अन्य कार्यक्षेत्र को देखते हुए आरपीएफ ने महिला सब इंस्पेक्टरों की नहीं ब्रिग्रेड खडी गए थे । जगजीवन राम रेलवे सुरक्षा बल अकैडमी लखनऊ के साठ गोरखपुर खडकपुर मैं लाली त्रिचिरापल्ली में इस नवगठित महिला बिग्रेट को विशेष प्रशिक्षण दिया । क्या इन्हें आपदा प्रबंधन, आतंकी हमलों से बचाव के साथ कानून की भी जानकारी दी गई? इंडियन रेलवे ऑफ सिक्युरिटी मैनेजमेंट, लखनऊ से आतंकी गतिविधियों से निपटने के विशेष कोर्स करवाएं । कई अन्य देशों से प्रतिनिधिमंडल भी इस प्रशिक्षण में शामिल थे । नक्सलवाद से प्रभावित इलाकों में रेल व्यवस्था की सुरक्षा है तो आरपीएफ में शामिल सौ में से अस्सी युवतियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया । इनमें से उनतीस का चयन स्पेशल कमांडो के रूप में हुआ । हाँ जी अभी उनमें से थी । नक्सल प्रभावित क्षेत्र में जेल से मार्ग की महत्वपूर्ण ट्रेन राजधानी एक्सप्रेस में आर्या को तैनात किया गया । आर्या खुशी से फूली नहीं समाई और मिठाई का डब्बा लेकर सोनाली मैडम के घर गए । उनका धन्यवाद ज्ञापित करते हुए जब उसने उनके पैर हुए तो मैडम के हाथ स्वतः ही बात है तो उठ गए और जयपुर होता उठी । भारत की बेटी की भावना को सलाम है । वास्तव में हिंदुस्तानी बेटियों की रगो में आज भी महारानी पद्मिनी झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का लाहू दौड रहा है । आपने शिक्षा, परीक्षा, सुरक्षा एवं दायित्वबोध में है । मैं पुरुषों से कमतर नहीं बल्कि किसी पडती है । अब आप ने मानसिक एवं शारीरिक तौर पर पूरी तरह अपने आप को तैयार कर लिया था । कडे से कडा प्रशिक्षण लेकर शनः एक्शन है । मैं फौलादी बनती जा रही थी । गोपनीय तरीके से वैधता हैं । अध्ययन कर रही थी । नक्सली इलाकों का, उनकी क्षमताओं का, उनकी परिस्थितियों का एवं उनकी मनोदशा का उसके पास जानकारियों का जखीरा सामान हो गया था । किन्तु हुए के पास जाकर भी मैं प्यासी थी । उसे अपने पिता का कहीं से कोई सुराग नहीं मिल रहा था । बेहज परेशान सीधे बैठी थी । बैठी हुई आकाशवाणी ध्यान की गहराइयों में चली गई । उसे साक्षात डिग्री माता के दर्शन हुए । मैं यह सौ में सुंदर, उस की दादी सावित्री की तरह ममता मई दही अलाके चमक के साथ उपस्तिथ हुई । आर्या ने शीश नवाया । उसने आशीर्वाद दिया । यह शास्त्रीय हार यानी आंखे खोली । वहाँ तो कुछ नहीं था । हाँ, सदाह प्राप्त अनिवार्य नीय आनंद की अनुभूति उसे अभी भी उद्वेलित कर रही थी । मैं सोचने लगी कौन थी ये दिव्यात्मा पर यहाँ के से आई आकर्षण का नियम जीवन का महान रहस्य है । इसके अनुसार एक सामान चीजें आपको आकर्षित करती है । हमारे विचार चुम्बक ही होते हैं । हर विचार की एक फ्रिक्वेंसी होती है । वे सामान फ्रीक्वेंसी की सारी चीजों को आकर्षित करते हैं और लौट का स्रोत सिद्धार्थ हम तक पहुंच चाहते हैं । हम मानवीय ट्रांसमिशन टावर की तरह जो अपने विचारों की फ्रीक्वेंसी प्रसारित कर रहे हैं । हम जिस पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं, वे हमारे जीवन में प्रकट हो जाता है । एक ही वो देश पर अपने समस्त कार्यकलाप केंद्रित कर दिए जाएं अर्थात जिस काम को करें, उसी में लीन हो जाए तो परिणाम आश्चर्यजनक आते हैं । अब आर्या का एक ही उद्देश्य था । अपने पिताजी की खोज एक दिन आ गया । उसी उधेडबुन में अटकी हुई थी कि कहाँ से मिल सकता है पिताजी का सुराग । हाईप्रोफाइल कौन व्यक्ति उसका अपना हो सकता है, जो उसकी मदद कर सकें, सोचते सोचते उसे एक नाम ध्यान में आया । आते ही उसकी पांचवें खेल गई कि हाँ उनसे अवश्य सहायता मिलेगी । पर संपर्क कैसे खोजूं तक पहुंचों कैसे इसी उधेडबुन में अपने कमरे में बैठी थी कि शानू दोनों की चाय लेकर वहीं आ गई । माँ बेटी चाय की चुस्कियों के साथ गपशप करने लगी । आ गया ने कहा मम्मी, मुझे उच्चस्तरीय राजनीतिक पहुंचने वाले व्यक्ति से कुछ व्यक्तिगत कम है । इसमें क्या सचित्रा आंटी से मदद ले सकती हूँ? शालू ने कहा हाँ हा क्यों नहीं? उनके पति भी इतने महत्वपूर्ण पद पर है और उनका स्वयं का प्रभाव क्षेत्र भी काफी विस्तृत है । मैं तो मैं अभी उनका संपर्क सूत्र देती हूँ और एक बार स्वयं फोन कर देती हूँ ताकि रहे तो मैं अच्छे से पहचान लें । मिलने का समय दे और तुम्हारा काम करवा दें । जब तुम्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था तभी हो, नहीं तो मैं देखा था । अभी कुछ दिनों पहले ही मेरी उनसे बात हुई तो है । तोहरे बारे में पूछ रही थी अच्छा तुम जाकर मिल लो, कोई नहीं है । दूसरे दिन सायं पांच बजे समय आर्या सुजॅय से मिलने गए । ॅ गई को हरा गुलाबी रंग छह जैसी बडी बडी आंखें काले घबराने, बाज लम्बा काटते मुस्कराता चेहरा वाह पालकी झटका नहीं बोल गई । एकदम शिवा की प्रतिकृति लग रही थी, आ रहा है तो चित्र ने मुस्कुराकर आर्या का स्वागत किया । अपने पास बैठाया और प्यार से बोली हम तो इंटर आपने पाता बर गई हूँ । थैंक्यू आंटी । मैंने भी मम्मी से आपकी बहुत प्रशंसा सुनी है । आज मिलकर उससे भी ज्यादा अच्छा लग रहा है । सचित्रा ने बेहद अपनेपन से सब कुछ कुशल छह पूछे और उसके आने का प्रयोजन जानना चाहा । आर्या सुचित्रा आंटी के एकदम करीब खिसक गई । उसने धीरे से कान में कहना प्रारम्भ किया । सुनते सुनते उसके चेहरे पर अनेक रंगा रहे थे, जा रहे थे । आर्या की बात समाप्त होने के बाद सुचित्रा ने पूछा, तुम्हारे अलावा किसी और को खबर है? नहीं आंटी आ गया था । जवाब था । सुचित्रा ने कहा सब आज ये गोपनीयता निरंतर बरतनी हैं । मिशन संपूर्ण होने तक किसी तीसरे को भनक ही नहीं पढनी चाहिए । बेटे तो समझ नहीं हो क्या कहना चाहती हूँ । डी टी । आपके मार्गदर्शन के अनुसार ही मैं चल होगी । किसी तीसरे को कानोकान भी खबर ना होगी । हिन्दू आपको मेरी मदद आवश्यक करनी होगी । सुचित्रा ने कहा निश्चित रहे हो तुम समझो तुम्हारा काम हो जाएगा । इस है तो तुम अगले महीने मुझसे मिलने पुनावली । विनम्रता से शीर्ष चुकाकर आर्या वहाँ से निकल गई । सुचित्रा इस लडकी में अजब आकर्षण महसूस कर रही थी । उसे जाते हुए तब तक देखती रही जब तक आंखों से ओझल ना हो गई । आ गया को छोड सचित्रा पुनहाना अंदर आ गई । एक मिनट कुछ सोचा फिर तुरंत अपने शहीन कक्ष में नहीं । अलमारी के अन्दर एक कंप्यूटराइज तिजोरी थी । उसने कोडवर्ड दवाई कोर्ट दिखाया से अपनी आवाज में कुछ बोली तब तिजोरी खोली । उसमें से छोटी सी लाल डायरी निकाली । पन्ने पलटे । एक फोन नंबर देखकर एक कागज में नोट किया । डायरी को यथावत यथास्थान रख दिया । शयन कक्ष के दूसरे छोर पर सेटेलाइट फोन रखा था । उससे वह नंबर मिलाया । एक दम धीमे धीमे स्वर में लगभग दो तीन मिनट बाद के फिर फोन काट दिया । उस नंबर को भी फोन पर से हटा दिया और कागज की पर्ची को एकदम छोटे छोटे टुकडों में फाडा । टॉयलेट में जाकर फ्लैश द्वारा बाहर दिया । ठीक एक महीने बाद आर्य वापस मिलने आई । सुचित्रा ने बडे इसलिए से उसे अपने पांच बैठाया । उसे खिलाने के लिए मेवा में स्थान एवं ताजे फल मंगवाएं । साथ में चार प्रकार के शर्मा भी आए । हरियाणा सिर्फ नींबू पानी दिया । सुचित्रा अत्यधिक अनुरोध करने लगी तब फिर थोडा सेव दिखाया । सुचित्रा उसे अपने शयन कक्ष में लाई गई जहाँ मिठाई का एक डब्बा रखा था । मिठाई की दो परतों के बीच बेहद पतला सा एक कागज था । सुचित्रा ने बाहर निकलकर आर्या को दिखाया । धीरे लिए कुछ बातों और सारी स्थिति समझाती । हरियाणा की आंखों में एक विशेष जमा खबरी । मैं जैसे ही जाने का उधर हुई तो मिठाई का डब्बा पुना पहले की तरह तैयार करके उसे दे दिया । पसंद नहीं है । जैसे पाया आंटी कहते हुए दरवाजे से निकलने लगी तो किसी से टकराते टकराते बची । उसने अपनी नीली आंखों से घनी पलकों को धीरे से अदा से उठाकर देखा । सामने एक बेहद आकर्षक सुकुमार ही वक्त खडा था । उसे देख उसके हिंदी में आज अब साथ कम्पन होने लगा तो अपने आप को बेहद नर्वस महसूस कर रही थी । आता खाने से बोली सारी यू लगाके पूरे वातावरण में सैकडों घंटियां एक साथ बज उठी हूँ । युवाकों से आप लाख देखे जा रहा था । दो जोडी आंखों से चार सौ चालीस वोल्ट की बिजली प्रभावित हो रही थी । वक्त सहरसा गया था खा अचानक आर्या सहज हुई और नजरें झुकाकर धीरे से युवक के बगल से निकल गई । युवकों से जाते हुए देखता रहा । आर्या के जाने के बाद में वर्तमान में लौटा । उसमें सामने देखा महा सामने खडी उन्होंने मंदिर मुस्करा रही थी । एक अर्थव् भरी मुस्कान मैं अपनी जिज्ञासा नहीं पा सका । उसने पूछा माँ ही कौन थी? सचिन बेटे एक महान व्यक्ति की प्रतिभाशाली कन्या है । हम नहीं तो इसे आज ही देखा है । फॅमिली हमेशा अध्ययन में व्यस्त रहती है । आज भी अपने कॉलेज के वार्षिक उत्सव में हमें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने आई थी । आपनी स्वीकृति दे दी । हाँ क्या तुम भी चलना चाहोगी ऍम आपके साथ इनके कॉलेजियम जरूर चलेंगे । अपने पुत्र की आर्या में रूचि सचित्रा को अच्छी लगी । उसकी गोपनीयता बरकरार रखते हुए उसने कॉलेज के वार्षिक उत्सव की कहानी घडी तो जो समयानुसार फिट बैठ गई थी । इस बहादुर बेटी की सफलता के लिए सचित्रा प्रार्थना कर रही थी तो

Part 39

जिन लोगों की आंख हम है, अखंड राष्ट्र का सपना हो, स्वतंत्रता में सांस लेने का संकल्प हो और देश को अस्थिरता से बचाने का लाख हो । अखंडता, स्वतंत्रता और स्थिरता के लिए तब तक संघर्ष करते रहते हैं, जब तक उन्हें यह तृप्ति उपलब्ध न हो जाये । अब्दुल्ला साहब और पाठक जी गहराई से नक्सली घटनाक्रम पर नजर रखे हुए थे । उन्हें साफ साफ दिखाई दे रहा था कि ऑपरेशन टैरा घंटे का प्रथम चरण सफल रहा । पूरे देश ने एकबारगी राहत की सांस ली । सुरक्षाबलों में भी नया जोश जाएगा । आठ विश्वास लौटाने के अब ये जवान जंगलों के अंदर घुसकर भी नक्सलियों से दो दो हाथ करने को तैयार थे । सीमाओं की आंतरिक एवं बाहरी सुरक्षा के लिए प्रहरियों में जोश एवं आठ में विश्वास तो आवश्यक हैं । उसके बिना सफलता हासिल होना संदिग्ध होता है । दिन तो अति आत्मविश्वास बहुधा घाटक भी हो सकता है । शुकराना के जंगलों से नक्सलियों का सफाया करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की एक कंपनी को छत्तीसगढ भेजा गया । चिंतन आर में उन्होंने कैंप रखा । नक्सलियों को इसकी सूचना मिल चुकी थी । पहले तो नक्सलियों ने कैंप सहित कंपनी को नष्ट करने की भी योजना बनाई । जैसे में सियालदह है । बंगाल में कर चुके थे । लेकिन उन्हें अपने मुखबिरों से पता चला कि इस बार कंपनी बहुत ताकतवर थी और आधुनिकतम हथियारों एवम संचार साधनों से लैस थी । इसलिए उन्होंने क्या तो पर हमले का विचार छोड दिया और उन्हें कैंप से निकालकर तहस नहस करने की योजना बनाने लगे । पीजिए पीपुल्स गौरेला आर्मी का वरिष्ठ कमांडर रतन सिंह शातिर दिमाग का निर्णीत कार था । उसने फुल फुल योजना बनाई । सरकारी तंत्र में गहरी घुसपैठ बनाई । अब कैंपस से जवानों को निकल नाम बडी बात नहीं क्योंकि सुरक्षाबल एवं पुलिस के खुफिया तंत्र में वैक्सीन लगा चुके थे । जंगल में नक्सली प्रशिक्षण कैंप चलने की उन्हें झूठी सूचना भिजवा की नहीं । आनंद फाइनल में बिना सुनियोजित रणनीति के आर बिना इलाके की संपूर्ण जानकारी के जवान रविवार को प्रात आह उसके इलाके की तलाशी लेने रवाना हो गए । प्रायः पूरी की पूरी कंपनी एक साथ ही थी । वो जवान दिनभर तथा रात भर जंगलों की खाक छानते रहे हैं । दूर दूर तक नक्सलियों के कैम्प डोंट दे रहे हैं । जवानों ने बहुत मेहनत कि थी पर उन्हें कुछ भी नहीं मिला था । जब वहाँ कुछ था ही नहीं तो मिलता क्या? हाँ अब नहीं उनमें से किसी की शक्ति इंद्रीय नहीं जाऊँगी कि जब यहाँ कोई संगठित है ही नहीं तो कहीं है दुश्मन की चार तो नहीं है । कहीं कोई धोखा तो नहीं है । हमें अतिरिक्त सावधानी अवश्य बरतनी चाहिए । लगभग चौबीस घंटों तक जंगलों की खाक छानते हुए थके मांदे जवान अपने कैंप में वापस लौट रहे थे । सुबह के लगभग छह बजे थे और वे अपने कैंप से सिर्फ चार किलोमीटर दूर हैं । ऊंचा नीचा पथरीला रास्ता था तीन और ऊंची पहाडियां थी । बीच में घाटी की तरह समतल जमीन थी । इस पगडंडी पर पंक्तिबद्ध एक लाइन में जवान चले जा रहे थे । अचानक एक साथ सैकडों गोलियों की बौछार आई और अगले मिशन हर तरफ से फायरिंग हो हूँ । कॅप्टन तेजी से चलाया कंपनी प्रदेशन लोग कहाँ से लेती कंपनी पोजीशन पहाडों पर कम से कम एक हजार नक्सली थे । तीनों तरफ ऊंचाई पर थे । जवान जमीन पर चल रहे थे । बुरी तरह गिर गए थे । गोलियों से बचने के लिए जैसे ही जवान जंगल में पेड की ओट लेने दौडते, वहाँ नक्सलियों ने पूर्वनियोजित योजना अनुसार प्रेशर बम लगा रखे थे और बारूदी सुरंगे बिछा रखी थी । जिसपर पैर पढते ही लगातार भयंकर ब्लास्ट हो रहे थे । जवानों के शरीरों के जितने चिथडे उड जाए । ज्यादा मौतें तो इस प्रकार के दम रास्ते हुई । पलटवार करने का अवसर ही ना मिला । उन्हें फिर भी है । भारतीय जाबाजों ने इन विषम स्थिति में भी हिम्मत नहीं हारी । भीषण प्रतिकूल परिस्थितियों में भी वे डटकर लोहा ले रहे थे । अपने शरीर में खून के अंतिम कतरे तक वे नक्सलियों से जूझ रहे थे । उन्हें मार रहे थे । लेकिन एक साथ चलती सैकडों गोलियों से लगभग हर जवान घायल होने लगा था । हेलीकॉप्टर से सहायता पहुंचाने की कोशिश की तो उस पर भी फायरिंग शुरू कर दी । उन्होंने जवानों तक मदद पहुंचने ही नहीं । एक एक करके चव्हाण दम तोड रहे थे । भारत माता के सपूत हाँ! भारती की गोद में लहूलुहान सराकर चिरनिद्रा में सो रहे थे । नक्सली आतंकवादियों से अपनी धरती को मुक्त कराने की उनकी आशा अधूरी ही रह गई । उन्होंने आखिरकार सीधी गोलाबारी, लैंड माइंस एवं प्रेशर बमों के इस्तेमाल से सभी के सभी जवानों को मौत की नींद सुला दिया और इतनी ताकतवर कंपनी को तबाह कर दिया । अंत में दो मोर्टार सहित सुरक्षा बलों की समस्त हथियार लोडकर नक्सली फरार हो गए हूँ ।

Part 40

क्योंकि नक्सलियों ने ऐसी चार चली जिसके नेशनल होने की संभावनाएं कम से कम थी, वह नक्सली अपने नापाक इरादों में सफल हो गए । आंध्र प्रदेश से आई नक्सलियों की मिलिट्री कंपनी ने अब तक का सबसे घातक नक्सली आक्रमण किया । उन्होंने पूरी तरह रचना करके सीआरपीएफ के जवानों को काम से बाहर निकाला तक आया । फिर मार डाला । भारत की जमीन पर देश के रखवाले जवानों के खिलाफ अघोषित युद्ध में आज तक की ये सबसे बडी क्षति हुई शांतिकाल में तो क्या कभी युद्ध के मैदान में भी एक साथ इतने जांबाज करवा नहीं हुए? नक्सली बने शिकारी जवान बने शिकार बरबर नक्सलियों ने नृशंसतापूर्वक भेड बकरियों की तरह घेरकर इन शेयरों को अच्छा साल में फंसाकर मार डाला । इससे अधिक क्रूर, नापाक, देशद्रोही आतंकी हिंसा क्या होगी? राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सोचा बिना होगा कि अहिंसा से प्राप्त आजादी का हिंसक माओवादी ये उपयोग करेंगे सुरक्षाबलों का अपने ही रक्षक भाइयों का यह काट ले हम करेंगे सरकार के ऑपरेशन टेलर हैंड का भयावह जवाब देकर नक्सलियों ने साबित कर दिया कि उनकी ताकत बहुत बढ चुकी है । हिंदुस्तान की सबसे बडी समस्या नक्सली आतंकी ही है और ये सबसे बडा खतरा है दुर्दांत नक्सली हमले की । खबर फैलते ही उन परिवारों में चिंता वागरा खुलता घर कर गई जिनके बेटे, भाई या पति ऑपरेशन ट्रेनर हंट में शामिल होने छत्तीसगढ गए थे । दिन चढने के साथ साथ पुंछ एक्टर शहीदों के परिवार में मातम फैल गया जो नक्सली हमले में शहीद हो गए थे । उन में से बयालीस जवान तो उत्तर प्रदेश के ही थे । भारतीय वायुसेना के स्पेशल विमान से जब इन शहीदों के शव हवाई अड्डे पर पहुंचे तो पूरा माहौल गमगीन हो गया । राज्यपाल ने जवानों के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की । महान बलिदानी सपूतों के अंतिम दर्शन करने लोगों की धीरजमल पडी थी । पाल रद्द सभी अश्रुपूरित नेत्रों से उन अमर शहीदों को अंतिम प्रणाम कर रहे थे । भारत का देश भक्त मीडिया भी उन शहीदों की शूरवीरता को सलाम करते हुए अपना कर्तव्य निभा रहा था । इस वजह पांच को देखकर पूरा विश्व था । बहादुरों को अंतिम सलामी देने का बिगुल बजते हैं । चारों ओर मायूसी छा गई । टेलीविजन पर नजर गडाए देख रही लाखों करोडों आंखे नम हो गई । वास्तव में जो कुछ हुआ मैं बेहद दुखद एवं दर्दनाक था । नक्सलियों के अब तक के सबसे बडे हमले से देश का आंतरिक सुरक्षा तंत्र ही नहीं । प्रधानमंत्री कार्यालय भी सकते में आ गया । गृहमंत्री की भी आवाज स्पष्ट थी । दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री स्टाप थे । एक साथ इतने सपूतों को इस प्रकार खो देने से चाहूँ बेचैनी का मंजर था । अनेक सवाल बूबानी खडे थे । आधुनिक हथियारों से युक्त शक्तिशाली कंपनी अपनी ही धरती पर इतनी बेचारगी से पूरी की पूरी क्यों शहीद हो गई? इतने भयंकर नरसंहार में देश के बहादुर जवान रखवाले क्यों मारे गए? पूरा देश इन प्रश्नों के जवाब जाना चाह रहा था । जो राज्य सरकारें नक्सलियों से मुकाबले में ढुलमुलपन दिखा रही थी । जो राज्य है, मान कर चल रहे थे कि नक्सली भटके हुए लोग हैं और उन्हें समझा बुझाकर राष्ट्रीय पर लाया जा सकता है तो उनकी भी आंखें खुली की खुली रह गई । वास्ता नहीं । इन्हीं सरकारों के निकम्मेपन नकारापन से नक्सली घर घर में पैदा हो रहे थे । कुछ ऐसी ही स्थिति मानवाधिकार संगठनों की थी । हमेशा नक्सली लोग के पक्ष में आवाज उठाने वाले अपने आप ही स्वयं की गलती महसूस कर रहे थे । नक्सलियों के बुद्धिजीवी समर्थक भी इस बर्बर नरसंहार के पक्ष में थे । कुल मिलाकर ये भांग करता नहीं । एक राष्ट्रीय सर्वसम्मति का अवसर बन गई । समीक्षा कार्य है तो नियुक्त विशेषज्ञों ने अध्ययन के बाद बताया कि मोटे रूप में ऑपरेशन में बुनियादी नियमों का पाला नहीं किया गया था । बिना किसी सर्विलांस हम सुरक्षा बैंक आपके ये कंपनी निकल पडी । सम्भवतया मुकाबेल का भी बिना परखे विश्वास किया गया । जवानों को इलाके की पूर्ण तैयार जानकारी होना । इस इलाके के क्षेत्रों में ट्रेनिंग एवं सुविधाओं की कमी एवं संवादहीनता भी इस कंपनी के लिए जानलेवा साबित हुए । हमारे जवान बदले में टाक में बैठे नक्सलियों के शिकार हो गए । उन्होंने आईईडी के जरिए सुरक्षाकर्मियों की बारूद, सुरंग रोधी गाडी उडाते ड्राइवर को मार दिया । बचाव कार्यों में लगे हेलीकॉप्टर पर भी फायरिंग की गई । कुल मिलाकर नक्सलियों ने सारी हदें पार कर दी थी । अब धैर्य की पराकाष्ठा हो गई और समय आ गया था इन नक्सलियों को परास्त करने का ।

Part 41

इस खूनी घटना के एक बार गुनाह साबित हो गया कि भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए नक्सलवाद एक बहुत बडा खतरा था । सिर्फ हिन्दुस्तानी नहीं, पूरी दुनिया में फैला भारतीय समाज एक बार गई । इस भी बस हिंसा से हिल गया । राष्ट्रपति समेत संपूर्ण प्रशासनिक अमला स्तब्ध रह गया । इस हृदयविदारक घटना के तुरंत बाद गृहमंत्रालय की एक तीन मौके पर छत्तीसगढ पहुंच गई । इसमें सीआरपीएफ के महानिदेशक, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव और कई अन्य अवसर भी थे । सभी शीर्षस्थ राजनीतिक नेता व अधिकारी इस बात पर एकमत थे, की है, कोई छोटा मोटा हमला नहीं था, बल्कि देश के खिलाफ अघोषित युद्ध था । भारतीय लोकतंत्र को पटरी से उतारने के लिए की गई नक्सली साजिश थी । ये दुखद घटना तो नक्सली हिंसा की पराकाष्ठा थी । नक्सलियों ने हिंसा और अराजकता की सारी हदें पार कर दी थी । प्रमुख राजनीतिक क्यों के वक्तव्य इसी आशा को लिए हुए थे कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि सरकार के संग मिलकर नक्सलियों के सफाए का हर संभव प्रयास करने का था तथा मैंने जुलकर इस हिंसा का डरता से मुकाबला करने का था । सरकारी स्वर्ण भी आ रहे थे कि नक्सली अभियान से सख्ती से निपटा जाए तथा तब तक नक्सलविरोधी अभियान जारी रखा जाए जब तक इनका समूल खात्मा न हो जाये । गैन केन प्रकारेण इन निर्मल हथियारों को उचित सजा दिलाने की आवश्यकता सब देश पर भी समझ रहे थे । इस प्रकार साफ दिख रहा था की उन शहीदों की शहादत बेकार नहीं जाएगी क्योंकि सुरक्षा बलों की कुर्बानी का अति संवेदनशील मामला था । हताहत शोकसंदेश संप्रेक्षण के पश्चात गम से उतर कर उभरकर तुरंत आगे की करवाए की प्रक्रिया पर विचार विमर्श किया गया । नक्सलियों से संघर्ष से पूर्व की चुनौतियों के बारे में चिंतन किया गया । ऑपरेशन ट्रैजर हंट थी । आज सफलता की समीक्षा की गई तथा नक्सली हिंसा की तहर में जाकर कारणों की खोज की गई । लाल आतंक का पनपना पालना और बढना इसमें सहयोगी तत्वों का विश्लेषण से कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए । प्राकृतिक संस्थानों से भरपूर मूल्यवान खनिज संपदा युक्त देश का दो तिहाई हिस्सा नक्सली चपेट में था । जंगलों में डर की ताकत से पनपता और पलता ऍम सिद्धार्थ लोगों को धमकाने और आतंकित करने की उनकी क्षमता तथा संगठित वह सुनियोजित प्रचार करने की क्षमता प्रभावित इलाकों में प्रशासन वा पुलिस समय पर गायब हो जाती थी । उनके पास सुरक्षाबलों से छीने हथियार बहुत ज्यादा थे । आम लोगों के हथियार भी लूटे जाते थे तथा वह खुद भी हथियार बनाते थे । उन्होंने आईईडी जैसी खतरनाक डिवाइस भी बनाई एवं अन्य आधुनिकतम हथियार भी थे । चोरी के विस्फोटक गोला बारूद आधी उन आतंकियों द्वारा ले लिए जाते थे । उनके पास पैसों का अकूत खजाना था । एक तरफ तो सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए दिया जा रहा धन उनके पास पहुंच जाता था, दूसरी तरफ होगी । घटनाओं से कमाई पर भी उन्हें कमिशन मिलता था । अकेले झारखंड से नक्सली तीन सौ करोड रुपये सालाना प्राप्त करते थे । उनके बुद्धि जीवी समर्थक थी । जंगलों में ही नहीं, बडे बडे शहरों में बुद्धि जीवी भी बैठे । उनके समर्थक राजनीतिक रणनीतियां बनाते थे । मैं उनके लिए विदेश तक से चंदा मानते थे । नक्सल प्रभावित राज्यों में पुलिस व्यवस्था बेहद कमजोर थी । सैकडों वर्ग किलोमीटर जगह में पहले ग्रामीण इलाके में पुलिस स्टेशन था और वहाँ दस बारह से भाई सिर्फ खानापूर्ति करते थे । मुख्य ताहा इन कारणों से नक्सली हिंसा को पोषण मिलता गया । उपर्युक्त विशेषण से प्राप्त तथ्यों के पश्चात अनेक बैठकें हुईं । इस बात पर गहन विचार विमर्श दिया गया कि वर्तमान नक्सली ताकत को किस प्रकार ऍम किया जाए । ऑपरेशन ट्रैजर हंट ही असफलता की समीक्षा करते हुए प्रशासनिक स्तर पर नीतिगत सुधारों है तो निम्नलिखित जिम्मेदारो बिंदुओं पर भी चर्चा हुई । सरकार को अपना ढुलमुल रवैया छोडना होगा । गृहमंत्री की नीति दूरदर्शितापूर्ण एवं एकदम स्पष्ट हो । ऑपरेशन की आगुआई पर असमंजस न हो । स्पष्ट निर्णय रहे बस शाम राज्य पुलिस बलों के भरोसे केंद्रीय बल को न छोडा जाए । केंद्रीय सुरक्षा बलों को सीधे कार्रवाई के अधिकार दिया जाए । केंद्र और राज्य में विभिन्न मुद्दों पर विवाद ना हूँ बल्कि समनवय हूँ । दृण इच्छाशक्ति से मजबूत स्कूटी नीतिज्ञ निर्णय लिया जाए ।

Part 42

नक्सलियों के क्रूर कारनामे देखकर सरकार की आंखें खुल गई । उसने नक्सली समस्या के समाधान के लिए कमर कस ले । कठोरता से आतंकवादियों, अलगाववादियों एवं नक्सलवादियों के खिलाफ आक्रामक रुख अखित्यार कर लिया । गृहमंत्री का कहना था नक्सलवाद की तुलना कश्मीरी आतंकवाद या उत्तर पूर्व कि विद्रोही घटनाओं से नहीं की जा सकती । उन्होंने सुझाव दिया, इन माओवादियों से अलग तरह से पेश आने की जरूरत है । प्रधानमंत्री की अंतरंग परिषद का काफी चिंतन मनन चला । नक्सल वाज को सशक्ति समूल नष्ट करने के अभियान प्रारंभ करने से पूर्व उन्हें समझौते का एक मौका और देने के लिए कूटनीति का निर्णय लिए गए । कटाह प्रधानमंत्री ने एक बार फिर अपील की कि माओवादी हिंसा का रास्ता छोडकर सरकार से बातचीत के लिए आगे आएं । संवैधानिक प्रक्रिया से समस्या का समाधान निकाले । माओवादियों तक सरकार की युद्ध स्तर की तैयारियाँ की बनक पहुंच चुकी थी । बता खोट नहीं थी, के तहत उन्होंने सोचा कि अगर बातचीत के जरिये ही सत्ता में भागीदारी प्राप्त हो जाए तो खून खराबा करेंगे क्यूँ? इस प्रकार अगर हम सरकार का वार्ता का न्योता स्वीकार कर लेते हैं तो हमारा लक्ष्य प्राप्त हो जाएगा और सम्मान भी बना रहेगा लेकिन हमारी मध्यस्थता करेगा कौन? वार्ता मध्यस्थता बिन्दु पर चर्चा करने से घूम फिर कर एक ही नाम ध्यान आया । सोमेश चटर्जी, सामाजिक कार्यकर्ता कोलकाता वाला छत्तीसगढ न्यायालय ने उसे नक्सली संबंध के कारण कैद की सजा सुनाई नहीं । सुप्रीम कोर्ट ने अभी कुछ दिनों पूर्व से जमानत पर यहाँ कर दिया था । बता हम दोनों पक्षों को वह स्वीकार था । वार्ता हेतु समय, स्थान दिन सब कुछ तय हो गया । दोनों तरफ से कूटनीति की तैयारियाँ हो गई । वार्ता के लिए निश्चित देना आ गया । प्रशासन में शांति वार्ता के लिए पूरी तैयारियां । बस कुछ पलों में नक्सली नेता पहुंचने ही वाले थे । कितने में तेज धमाकों की आवाज सुनाई पडने लगे । पता चला नक्सली नेता मुखिया चंदनसिंह एवं उनका सहायक श्याम वार्ता स्थल से मात्र सौ कदम की दूरी पर थे कि उनकी गाडी में बम विस्फोट हो गया । गाडी और उनके शरीर के परखच्चे उड गए । दूसरों को धमाकों से ठहराने वाले आज स्वयं धमाकों में समाप्त हो गए । ये साजिश किसने रची? पुलिस और प्रशासन तो वार्ता से समाधान चाहते थे । उधर नक्सली स्वयं भी वार्ता में रूचि दिखा रहे थे तो क्या मास्टरमाइंड नहीं है । सब राजा मुखिया से करवाया किन्तु उसे शिक्षा मिलने वाला था । विभिन्न चर्चाएं चलने नहीं । वास्तव में नक्सलियों में ही दो ग्रुप थे । नरम दल और गरम डाल गरम दल वार्ता के पक्ष में नहीं था । चंदनसिंह नरम दल काम किया था । किसी ने उसे मारा तथा दोष किस पर डाल दिया । जिसपर दोष डाला उसे नक्सली कैद में डलवा दिया ताकि पुलिस को सच्चाई पटाना चले । एक घंटे में सारा परिद्रश्य ही पलट गया । प्रशासन वार्ता की मेज पर इंतजार करता रहेंगे । सरकार की ओर से आई शांति वार्ता के प्रस्ताव का हिंसात्मक उत्तर देते हुए उन्होंने नागरिकों से भरी एक बस को जिसमें दस सुरक्षाकर्मी भी थे, हम से दर्शन स्टाफ पूर्वक उडा दिया । अब तो धैर्य की इम्तिहां हो गई । गृहमंत्री ने नक्सल वाज के विरुद्ध बिगुल बजा दिया । उन्होंने कडा रवैया अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया इन देशद्रोहियों ताकत के विरुद्ध लडाई में जो निर्णायक ढंग से पूरी तरह देश के साथ नहीं, उसका सीधा सीधा अर्थ माना जाएगा कि वे भारत के दुश्मनों के साथ हैं । गृहमंत्री ने पूरा दृढता से स्पष्ट कर दिया की अघोषित युद्ध का सामना दृढ इच्छाशक्ति द्वारा ही हो सकता है । बता वर्तमान में राष्ट्रहित है तो राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठने की आवश्यकता है । सरकार की ओर से गृहमंत्री की इस अपील पर आश्चर्यजनक रूप से सभी प्रमुख राजनीतिक दल एवं राष्ट्रवादी संगठन उनके साथ खडे हो गए । संकटकाल में ही एकजुटता और राष्ट्रपति सफलता का मूलभूत र सूत्र बनती है । इसलिए किनी अर्थों में संकटकाल भी उपयोगी होता है जिसके दौरान परिवारों में, समाजों में राष्ट्रों में एक सूत्रबद्ध होने की लहर उठती है । ये एक कल भाव उनके संगठन पक्ष है तो संजीवनी का कार्य करता है । नक्सलविरोधी अभियान में लगे पुलिस बल तथा अर्धसैनिक बलों को रणनीतिक प्रशिक्षण दिया जाने लगा । उन्हें जंगल और गुरिल्ला युद्ध नीति के गुर सिखाए जाने लगे । नक्सलवादियों की शक्ति को अब कम नहीं आंका जा रहा था । सरकार अपना एक भी जवान खोना नहीं चाहती थी । कटाह पूरी तरह से कूटनीतिक तैयारियाँ प्रारंभ हो गई । प्रधानमंत्री की अगुआई में सुरक्षा तंत्र की सर्वोच्च मंत्रणा समिति की बैठक आयोजित की गई । गृहमंत्री, रक्षामंत्री, थलसेनाध्यक्ष, वायुसेनाध्यक्ष, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उस बैठक में उपस् थित थे । सर्वप्रथम यही निर्णय लिया गया कि नक्सलवाद से सख्ती से निपटने के अलावा और कोई चारा नहीं था । नक्सलियों की कमर तोडने के लिए सेना की भूमिका पर भी अनौपचारिक बातचीत हुई है । सरकार के सभी आला ओहदेदार सेना के सीधे उपयोग पर सख्त पा रहे थे तो एक मत है । अपने ही देश के नागरिकों के खिलाफ सेना के उपयोग से बचना चाहते थे । कितने ही बिगडैल हूँ आखिर थे तो आपने ही भाई, वायुसेना, नौसेना एवं थलसेना का की परेड भूमिका पर आम सहमति थी । जैसे राहत एवं बचाव कार्यों के अलावा आपूर्ति मिशन में वायुसेना का सहयोग स्वीकार रहे । सुरक्षा परिषद के विशेषज्ञों ने नक्सली समस्या के समाधान है तो स्वतंत्र रणनीति द्वारा बनाई गई योजना का स्थिति, पिछले आक्रमणों के सबका लेते हुए सैन्य रणनीतिकारों के मार्गदर्शन एवं साधन वा संस्थानों का प्रयोग बढाने की जरूरत पर भी चर्चा हूँ । हथियारों के साथ सर्विलांस उपकरणों की खरीद एवं इस्तेमाल, साउंड सेंसर, नाइटविजन उपकरण इन फॅस जैसे साजोसामान की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए उन्हें सुरक्षा बलों के लिए शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्णय हुआ । उच्च कोटि की गोपनीयता बरकरार रखने के लिए कुछ अलग प्रकार के नियम तय हुआ है । अपने खुफिया टेंटर को सूचना और संचार माध्यमों से विशेष रूप लैस करके बेहतर कार्यक्षमता है तो विलक्षण पर एक्शन देते हुए मुखबिर थी । विश्वसनीयता की परख को प्रमुखता दी गई । इस प्रकार सुनियोजित कुशल रणनीति, फौलादी हौसले, मजबूत मनोबल, डर, संकल्प एवं प्रबल आठ सवाल के साथ समूचा देश एक साथ खडा हो गया । सत्ता प्रतिष्ठानों ने संपूर्ण संसाधन उपलब्ध करवा दिए । ऑपरेशन चाहे हिंद प्रारंभ हो

Part 43

प्रतिकूल परिस्थिति में ही व्यक्ति के संयम एवं संतुलन कम मूल्यांकन होता है । आतंकवादियों ने शिवा के दोनों हाथ पकडकर जानवरों की तरह घसीटते हुए उसे बाहर लाकर जीत में बैठाया । दोनों हाथों में हथकडी बांध कर उसे जीत से ताला लगा दिया । उपर खावा रास्तों पर दो घंटे तक तक के खाते खाते जगह जाकर जीत रुक गईं । आगे इतने सघन जंगल थे कि वहाँ जीत नहीं चल सकती थी । उन्होंने ताला खोला तथा शिव को धक्का देकर उतारा । वहाँ एक मोटर साइकिल सवार तैयार खडा था । हाथों में हथकडियां पहले ही लगी थी । पहरों में लोहे की कडे डालकर मोटर साइकिल से ताला जड गया लेकिन आगे मोटर साइकिल सवार बीच में शिवा पीछे एक आदिवासी इस तरह से लगभग घंटे भर चलते चलते नदी का किनारा आ गया । मोटर साइकिल सवार ने ताले खोलकर शिवा को उतारा और वहाँ खडे घोडे पर घर सवार के साथ बैठा दिया । दो घुडसवारों ओह के साथ नदी पार थी । वहाँ घोडे से उतरे । वहाँ कुछ आदिवासी खडे थे । वो शिवा को घेरकर साथ लेकर पैदल बीहड वन में चल पडेंगे भइया बाल जंगल । चारों तरफ जंगली जीव जंतु पहले हुए थे । आदिवासी सारे रास्तों से वाकिफ थे । इसलिए शिवा को सुरक्षित एक चट्टान के सामने ले गए तो विकसित तरह की ध्वनि उत्पन्न की चट्टान ही रहे है तो आ ही नहीं और खिसक रही इस बार में एक इंसान जा सके । इतना रास्ता खुला फिर आदिवासी पहले गुस्सा उसने हाथ पकडकर शिवा को की जाएगी फॅसा फिर दूसरा आदिवासी अंदर घुसते ही गेट अपने आप बंद हो गया अगर उसके सामने भी पहुंच जाय । सुरक्षाबल तो भी नहीं पता चल सकता कि वहाँ कोई गुफा हूँ । अंदर लगभग आधा किलोमीटर तक का झाड झंकाड वह पथरीला रास्ता था । लेकिन उसके बाद शिवा आश्चर्यचकित रह गया । या तो किसी फाइव स्टार होटल का स्वागत कक्ष लग रहा था । अब उसे वहां के स्टाफ ने अपनी सुरक्षा में ले लिया था । दोनों आदिवासी चले गए थे । मैं उसे एक शानदार स्वीट में ले गए । वहाँ सोफे पर लैपटाप खोल का मास्टरमाइंड के साथ सुप्रीमो राजा मजूमदार एवं मुखिया चन्दन बैठा था । उसने कहा आओ मिस्टर शिवा बैठो शिवा के जिसमें का पार ही नहीं था । वे आगे बोला, शिवा तुम में अपूर्वा संप्रेषण क्षमता है । तुम बहुत कुशल शिक्षा को । इसलिए मैंने तो मैं यहाँ जिंदा बुलाया है । तारीफ के लिए शुक्रिया दोस्त । क्या मैं आप का नाम जान सकता हूँ? मशहूर आतंकी मुखिया चन्दन किसी को अपने कार्यालय में बुलाए और इतना प्रभावित होकर अपना परिचय तक दे दें । ये तो पहली बार हो रहा था । मुझे मुखिया चंदन कहते हैं शिवा तो मैं हिंसा की बातें छोडकर हमारे आंदोलन के बारे में प्रचार करना होगा तो मैं अपनी संप्रेषण क्षमता एवं धक तत्व कला से माओवाद का प्रसार करना है । नगर शिवा बेधडक बोला खडे भाई चंदन पहले आप मेरी बात ध्यान से सुन लें । फिर बोले देखो दोस्त हिंसा अंतिम सकते नहीं, ना ही किसी समस्या का समाधान है । मैं इतने वर्षों से आदिवासियों के मध्य रहा हूँ । यहाँ बुनियादी सुविधाएं जैसे शिक्षा एवं चिकित्सा की बेहद कमी है । मैंने देखा है कि इस आबादी की बहुसंख्य जनता आज भी कुपोषण एवं खून की कमी का शिकार बन रही है । संक्रमण से बचाव की उनकी क्षमता बेहद कम हो गई है । अनेक महिलाएं और बच्चे मलेरिया और टीवी से पीले थे । कितनी कठिनाइयां खेल रहे हैं तो मगर वास्तव में जीतना चाहते हो तो लोगों के दिलों को जीतो । अरे अपने संस्थानों को इस तरह के विकासपथ पर लाओ । फिल्मा के विनाश पथ पर मुखिया चन्दन बोला, गजब! वाकई तुम्हारा आत्मविश्वास प्रशंसनीय है तो मैं हमारी विचारधारा से मैं अवगत करवाऊंगा तब तुम हमारे तरफ स्टार हो जाओगे । अभी अचानक मुझे कहीं जाना है । उसमें किशन को बुलाया और बोला कारागार के बैरक नंबर सात में हमारे अतिथि के रूप में इन की सेवा करना । अभी नहीं ले जाऊँ । उस फाइव स्टार के ले के बेसमेंट में बनी जेल है । शिमला को कैट रखा गया । भले ही हो जान है तो जहान है । लगभग एक हफ्ते बाद जेल में खुसर पुसर सुनने का मिला । आप के मुखिया चन्दन मारा गया । इनकी अपने सुप्रीम मुखिया राजा ने उसे मरवा दिया । जिस पर चंदन की हत्या का आरोप था । उस सोमेश चटर्जी को भी इसी जेल की बैरक नंबर नाम में क्या रखा गया था? कुछ समय देता । एक दिन सुबह बैरक नंबर आठ के कैदी की नजर साथ वाले कैदी पर पडी और नौ वाले को वह पिछले कई दिनों से देख रहा था । मैं एक दम चौंक कर बोला आप दोनों की शक्ल आपस में बहुत मिलती है । चाहता कोई रिश्ता है । शिवानी सुनेश को देखा सोमेश सेवा तो दोनों पहुंचक के रहे गए । एक दूसरे को उन्होंने आज तक ध्यान से नहीं देखा था लेकिन आंख ना कान बार, डी डॉल, बोल चाल में काफी समानता थी । दोनों के दिलों में एक दूजे के प्रति गहरी संवेदनाएं हो पढ रही थी । दोनों की आंखों में गहरे नहीं का सागर हिलोरें ले रहा था । यहाँ था इन दोनों में क्यों एक दूसरे के गले लगने को बेताब हुए दोनों वायुसेना के टोही विमानों ने सारी आवश्यक चित्र खींचकर चिन्हितकर आतंक की असली तस्वीर पेश कर दी । खुफिया विभाग सारी गोपनीय जानकारियों को उपलब्ध कराने में पूरी प्रतिबद्धता मिला । क्या धरण इच्छाशक्ति से सबको एकजुट होकर उस तस्वीर को खाक में मिलाना था? नक्सली हिंसाग्रस्त राज्यों में उद्घोषणा हो गई कि भारतीय प्रशासन ने नक्सलियों को नेस्तनाबूत तन करने का ऐलान कर दिया । हताहत देश के इन भागों में बसे शांतिप्रिय नागरिकों से अपील है कि सुरक्षा के दृष्टिकोण में आत्मरक्षा के लिए सुरक्षित बाहर चले आए । समाचार पत्रों में बडे बडे विज्ञापन इस आशय में छपवाए गए । रेडियो पर उद्घोषणा हो रही थी । टेलीविजन पर न्यूज चल रही थी । नीचे पट्टी भी चल रही थी । क्षेत्रों में पर्चे डालकर तथा स्थानीय स्तर पर लाउडस्पीकरों द्वारा आम नागरिकों तथा ये महत्वपूर्ण सूचना पहुंचाई जा रही थी । शीघ्र यहाँ नक्सली हिंसा के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा । हटा शीघ्र अतिशीघ्र गांव को खाली कर दें । सुरक्षा बलों ने राज्यों की सीमाएं सील करके पोजिशन ले ली थी । गांव वासी आ जा रहे थे लेकिन उन्हें आतंकवादियों को पकडना था । काम साधन क्षेत्रों से अभियान का प्रारंभ हुआ । यहाँ से नागरिक निकलते जा रहे थे । सुरक्षाबल आतंकवादियों को मुठभेडों से माँगे थे जा रहे थे । जिस क्षेत्र से आतंकवादियों का खात्मा हो जाता उन गांवों में पुना गांव वालों को बताया जाने लगा और वहाँ तुरंत युद्धस्तर पर सडकें, बिजली एवं पानी जैसी विकासकार्य हो गए । आधारभूत सुविधाओं का काम प्रारंभ होने के साथ साथ संचार के साधन, परिवहन के साधन, शिक्षा एवं चिकित्सा के साधन उपलब्ध होने लगे । अनेक एनजीओ, समाजसेवी संगठन सेवा कार्य है तो आ गया है किसके साथ ही बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी यहाँ अवसर तलाशने है तो सर्वे करवा रही थी । महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश में सुरक्षा बलों को अपेक्षित सफलता मिलती जा रही थी । उत्साह से सराबोर जवान आगे बढते जा रहे थे । इस बार एक और उल्लेखनीय कदम उठाया गया । मीडिया की ताकत का भी उपयोग किया गया । अभियान से पूर्व शीर्ष अधिकारियों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई । इसमें अधिकारियों ने मीडियाकर्मियों से अपील की कि संघर्ष काल में सुरक्षा बलों, देशवासियों का मनोबल बढाएंगे रखने वाले कवरेज अधिक प्रसारित करें । मीडिया ने भी कमाल कर दिखाया । देशभक्ति से सराबोर प्रसारण के साथ मीडिया भी भरपूर सहयोग देने लगा ।

Part 44

आज तो टेलीविजन के लगभग हर चैनल पर उत्तर प्रदेश के जवानों के उनके परिवारों के साक्षात्कार आ रहे थे । जिन जांबाजों कि ऑपरेशन टेरर हंट में शहादत हो गई थी, उनके भाई उनके बेटे कह रहे थे । हमें अपने रिश्तेदारों पर गर्व है । हम भी तैयार हैं । देश चाहे तो आज ही हमारी सेवाएं ले सकता है । कैप्टन राजीव बहुत होगी जो हमले से बुरी तरह घायल तो मगर जिंदा बचने वालों में से था । बोला जो होना था हो गया । मैं तो अभी ठीक होते ही फिर जाऊंगा । एक एक दुश्मन को चिंचन्कर मारूंगा । बिहार के कॅप्टन मिश्रा लालगढ की मुठभेड में शहीद हो गए थे । पटना के एयरपोर्ट पर भयंकर गेट थी । उनका पार्थिव शरीर पहुंचने ही राष्ट्र के वास्तविक नायक की तरह सम्मान एवं संवेदनाओं का क्रम चला । नजदीकी रिश्तेदारों की आंखें आंसुओं से भरी थी, दिल में डाला था । लेकिन सबकी जवान पर एक ही आवाज थी भारत माता की जय हो । केंद्र सरकार का कडा रुख देखकर माओवाद के हिमायती क्षेत्रीय नेताओं ने नक्सलवादियों पर से अपने हाथ पीछे खींच लिए थे । वैश्विक दवाब से विदेशी आकाओं से मदद पहुंचने भी बंद हो गई थी । अकारण हिंसा के हजारों के सामने आने से बुद्धि जीवी हिमायतियों की भी जवान बंद हो गई । इस प्रकार अपने आप को असुरक्षित पाकर नक्सली पूरी तरह बौखला गए थे । वर्चस्व की लडाई को लेकर दो नक्सली संगठन आपस में ही टकरा गए । एक पार्टी के कार्यकर्ता के घर धावा बोलकर दो ले समेत सात लोगों की हत्या कर दी गई । दूसरे ग्रुप ने उनके एक वाहन को विस्फोट करके उडा दिया । उसमें बैठे सभी पांच लोगों की मृत्यु हो गई । नक्सली उग्रता दिखाते हुए हैं । गांव के नेहरिया नागरिकों को पुणा शिकार बनाने लगे । भाई सेवा आतंक से गांव वालों का पलायन रुकवाकर उन्हें अपनी ढाल के रूप में उपयोग करने लगे । सब उनके मन में ये भावना घर कर रही थी कि मानवाधिकार आयोग एवं संयुक्त राष्ट्र संघ की लताड के डर से प्रशासन कोई भी कदम उठाने से पहले पहुँचेगा । लेकिन मानवाधिकार आयोग एवं संयुक्त राष्ट्र संघ से से गृह मंत्रालय ने पहले ही अनापत्ति प्रमाणपत्र ले लिया था । बता, अब प्रशासन को ऊपर से कोई डर नहीं था । सब पूर्व निर्णय था । चिंतनीय बिन्दु सिर्फ इतना ही था कि नागरिकों को कैसे सुरक्षित शीघ्र अतिशीघ्र निकालना चाहिए । सुरक्षा बल, चहुमुखी व्यू, रचनाकर दवाब बढाते गए जनसाधारण को सुरक्षा मुहैया करवाई गई । पूरी तरह की काट एवं चौकसी के मध्य नागरिक निकाल दिए गए । एक भी नक्सली सुरक्षा जांच से धोखाधडी नहीं कर पाया । अच्छा तीसगढ उडीसा, झारखंड वा पश्चिम बंगाल नक्सलियों के सघन काटते । यही पर इस संगठन ने राज्य कमेटियों के कार्यालय बना रखे थे । उनके अधिकतर कमेटी के सदस्य तथा कमांडर इन्ही राज्यों में रहते थे । उन का केंद्रीय कार्यालय कहाँ था किसी को पता नहीं । उन्होंने अपने हेड क्वार्टर को अत्यंत गोपनीय रखा था । विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र को नक्सलियों ने ललकारा था । जब तक सहन हो सकता था हिंदुस्तान की जनता ने सहा । अब पूरा देश जाग उठा था । एक छुट्टी था अच्छा अब नक्सलियों की खैर नहीं थी । उनके सामने दो ही विकल्प थे या तो विचारधारा बदलकर देश की मुख्यधारा से जुड जाओ अथवा प्राण त्यागने को तैयार हूँ । एक तरफ आत्मसमर्पण का विकल्प था, दूसरी तरफ साक्षात्कार था । सुरक्षाबलों के सहयोग है तो युद्धभूमि में रणचंडी खपर नहीं खडी थी । उन्हें देश प्रेमी नहीं सिर्फ देशद्रोहियों का ही चाहिए था । इस बार लडाई आरपार की थी । नक्सलवादियों और सुरक्षाबलों का आमना सामना था । उच्च कोटि के आठ बाल के साथ सुरक्षाबलों का हर नौजवान तैयार था । किंतु इतना आता था कि भारत माता की ये सपूत निरीहता से अब कहीं और नहीं मारे जाएंगे । कटाह इनके वहाँ सहयोग के लिए बंगाल की खाडी में भारतीय नौ सेना की टुकडियों ने पोजीशन ले ली । वायुसेना के विमान वा हेलीकॉप्टर ऑपरेशन चाहिए हिंदी में महत्वपूर्ण सहयोग को तैयार थे । थलसेना सुरक्षाबलों को स्पेशल ट्रेनिंग दे रही थी । आपातकालीन स्थितियों में सेना सीधा सहयोग देने के लिए भी तैयार थी । सेना कि सात विशेष कंपनियाँ सातों नक्सल प्रभावित राज्यों की सीमा पर तैनात हो गई ।

Part 45

पूरे देश में ऑपरेशन जयहिंद की चर्चा थी । बडे बुजर्ग उधान में त्राता कालीन शहर के दौरान भी इसी विषय पर बातचीत करते हैं । स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, चिकित्सालय, हम ऑफिस तक में लंच के समय यही चर्चित विषय था । गृहणियाँ भी बडी उत्सुकता से टेलीविजन पर खबरें देखती कि सुरक्षाबलों को कहाँ तक सफालता कम मिल रही है । दैनिक समाचारपत्र बुलेटिन पत्र पत्रिका सब ऑपरेशन छह हिंद की भरपूर जानकारी मुहैया करा रहे थे । सचित्र पूरे के पूरे प्रस्तावों पर विषय सामग्री परोस रहे थे । कुल मिलाकर देशभक्ति की लहर चली हुई थी । युवा वर्ग अपने गैजट के साथ देशभक्ति की भावना बाहर रहा था । इसी विषय से जुडे संदेशों का मोबाइलों पर आदान प्रदान होता । फेसबुक ॅ सोशल साइट से ऑपरेशन जाए के समर्थकों की संख्या बढती जा रही थी । सच कहा जाए तो पूरी दुनिया की नजर अभी भारत पर ही लगी थी । पतन के मेटर इस ऑपरेशन की सफलता की दुआएं कर रहे थे । वास्तव में देखा जाए तो चाहूँ और नक्सली हिंसा के विरुद्ध वातावरण निर्मित हो गया था । सेवाके पुत्री आर्या ने भी ऑपरेशन जय हिंद के बारे में सुना । बेहद चिंतित हो गई । इन विषम परिस्थितियों में नक्सली क्षेत्र में किसी के साथ कुछ भी हो सकता था । वह शीघ्र अतिशीघ्र अपने पिता के बचाव के बारे में चिंतन करने लगी । बेहद हो रहा धीर गंभीर बहादुर एवं दूरदर्शी साक्षी आर्या की स्कूली जीवन की अभिन्न सहेली थी । एसपीजी कमांडो ट्रेनिंग में वे अपने बैच में प्रथम स्थान पर रही थी । अभी राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु एक गोपनीय पद पर अपनी सेवाएं दे रही थी । आर्य ने साक्षी से वस्तु स्थिति पर चर्चा करते हुए सशक्ति योजना बनाने में सहायता चाहिए । काफी सोच विचार के पश्चात साक्षी बोली कि हम इतना आसान नहीं है । हमें दो तरफ से मौत का खतरा है । एक ओर तो नक्सली घात लगाए बैठे हैं, दूसरी ओर सुरक्षा बल एवं सेना से भी बचना आएँ । चारों तरफ भयंकर खतरा मंडरा रहा है । परिस्थितियां भी बडी विकट हैं । गंतव्य की दूरी स्पष्ट नहीं है और चहु ओर जोखिम बहुत है । आता हमें अपनी टीम को थोडा विस्तार देना होगा । कम से कम हमें तीन मददगार और चाहिए जिसमें पुरुष सहयोगी आवश्य हूँ । साक्षी का सुझाव आ गया को बहुत पसंद आया किन्तु आएगा कौन । उनके साथ इतने खतरनाक मिशन में जान जोखिम में कौन डालेगा? अरे सोचा कि अपने भाई आरे को ले लो । तत्काल दिमाग ने कहा कि इतने छोटे तो कहाँ नहीं जाएगी । उससे मेरे खयाल आया की सेवा भारती के अब्दुल्ला साहब से बात करनी चाहिए । दूसरा विचार आया की है तो स्वयं घट है । अन्य कोई सामने दिख नहीं रहा है । सबसे बडी बात यह है कि इस अभियान है तो प्रशिक्षित भी नहीं । हताहत अन्य विकल्प पर ही विचार करना होगा । आरपीएफ की प्रशिक्षण की बात मस्तिष्क में आते ही उसके समक्ष नंदिता बसु का चेहरा घूम गया । बेहद तेज तर्रार लडकी ट्रेनिंग में उसके मित्र बनी थी । कुछ समय पूर्व की शादी भी हो गई थी । कोलकाता गए प्रतिष्ठित बंगाली परिवार के इकलौते पुत्र शांतनु घोष से प्रेम विवाह किया था । विवाह कोलकाता में ही हुआ था किन्तु वे अभी दिल्ली ही रह रहे थे क्योंकि दोनों के कार्यक्षेत्र दिल्ली ऑफिस नहीं थे । शांतनु सुरक्षा सेवाओं में इन सब से भी उच्च पद पर आसीन था । आर यानी सोचा कि अगर ये दंपति उसका साथ देने को तैयार हो गया तो काफी मजबूत टीम बन जाएगी । पूर्व निर्धारित समयानुसार साया सात बजे आ रहे हैं । उनके घर पहुंची । इतने दिनों बाद अपनी प्यारी सहेली को देखकर लंजता की पांच खेल गई । दरवाजे पर ही उसने आॅटो गले लगा लिया । फिर भीतर आई तो आप ने देखा कि नंदिता ने उसके स्वागत की कितनी शानदार तैयारी करना की है, जो चॉकलेट के एक बंगाल के प्रसिद्ध गोलगप्पे, कोलकाता की मसाला बूढी हरियाणा की पसंद का पूरा नाश्ता मौजूद था । शांतनु भी समय से घर आ गया था क्योंकि नंदिता ने उस से पहले ही सारी बातें बता दी थी । तीनों ने हसते खिलखिलाते मस्ती से नाश्ता किया । अब नंदिता एवं शांतनु आर्या को अपने अध्ययन कक्ष में ले गए । आर्या के चेहरे पर मस्ती की जगह गंभीरता चाह रही थी । पूर्व वातावरण एकदम शांत था, जैसे तूफान के आने से पहले आती । नीरवता भंग करते हुए धीरे से नंदिता ने पूछा ऍम सब ठीक तो है ना? फॅसने मिश्रित सहानुभूति से सवाल पूछा था । आर्या के रुलाई फूट पडी । अब तक का रखा सब्र का बांध टूट गया । उसने बताया, मैं अपने पापा से बहुत प्यार करती हूँ । उन्हें नक्सलियों ने कैच कर लिया था । खोजते खोजते अभी कुछ दिनों पहले ही उनकी जिंदा होने के समाचार मिले हैं । बटाहर हाल में अपने पिताजी को वापस लानी चाहती हूँ । नंदिता जो चुपचाप सुन रही थी, उसकी आंखों में भी आंसू आ गए । शांतनु उसके करीब जिसका और अपने रूमाल से नंदिता के आंसू पोछे हारया सकपका गई? क्या नंदिता उसके पिताजी को जानती थी जो उनके लिए कम तीन हो रही थी? सच्चाई क्या है? उसने धीरे से पूछा नंदिता क्या उसको नंदिता ने भी लगाते हुए बताया मलकानगिरी जिले के जिलाधिकारी के रूप में कार्य थे मेरे पापा । पिछले वर्ष नक्सलियों ने उनका अपहरण कर लिया था और सरकार से आपने चौदह खूंखार साथियों को छुडाने के एवज में उनकी रिहाई की शर्त रखी थी । मेरे पापा के साथ एक जूनियर इंजीनियर का भी अपहरण किया गया था । उस से तो मैं दूसरे दिन रात को गांव के वहाँ पीपल के पेड के नीचे बेहोश हालत में छोड गए । लेकिन मेरे पापा की तो बहुत भयंकर हालत की थी । ऍम गया था । ऊपर लिखा था फॅमिली सरकारी ऍम नंदिता ईजी से सुबह नहीं लगी, शांतनु से सहलाता रहा । नंदिता ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, एक फॅमिली था क्या ऐसी भी बच्चे मौत के अधिकारी थे । आर्य आनंदिता के पिता की कहानी सुनकर सिहर उठी । मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी ऍम तेरे पापा की रक्षा करना कुछ देर तो होती रही । किसी ने किसी को टोका नहीं । समय हार घाव की मरहम होती है । इतनी देर तक के अविरल अल्लू प्रभाव है । दिल का दर्द आंखों के राष्ट्रीय नमकीन पानी बनकर निकाल गया । धीरे धीरे दोनों सथियों का मन को छलका । हुआ आर्या मैं भी नक्सलियों से भयंकर नफरत करती हूँ । यहाँ तुम्हारी लडाई एक बेटी की अपने पिता को लौटा लाने की लडाई में मैं तुम्हारे साथ हूं । नंदिता ने संजीदगी से कहा शांत उन्होंने स्थिति को संभालते हुए आर्या से आगे के कार्यक्रम के बारे में जानना चाहा । आर्य ने कहा, आज तो बहुत विलंब हो गया है । अब मुझे जाना ही होगा । कल इस बार है । अवकाश का दिन था । कल ही एक मीटिंग रख लेंगे । रिवॉल्विंग रेस्टोरेंट की सबसे ऊंची इमारत पर लंच के समय आर्या, साक्षी, नंदिता, इवन, शांतनु पहुंच चुके थे । इंडियन नेवी का कमांडर विशाल कुछ मिनटों में पहुंचने वाला था । विशाल और शांतनु चचेरे भाई थे । वैसे मेरे भाई का मित्र ज्यादा थे । हाँ, खूबसूरत बात होने । विशाल के आते ही रौनक आ गई । हाँ, सीट हार को के साथ सब ने प्रारंभिक भोजन का आनंद लिया । अब माहौल ऑफिशियल हो गया था । रेस्टोरेंट के कोने की टेबल पर एकांत में बैठाया । ग्रुप धीरे धीरे मंत्रणा कर रहा था । आर्यन एक ओर कागज सामने खोलकर रख दिए थे । विशाल नाकाम में कुछ सिलेक्ट करता जा रहा था । गहरे विचार विमर्श से पूरी रूपरेखा बना लेंगे । आज से ठीक चार दिन बाद पांचवे दिन प्रातः उन्होंने कोच करना था । बेहद समर्पित एवं पुणे तैयार । प्रशिक्षित ये आवाज मित्रमंडली यहाँ शिवा को जीवित यहाँ पाएगी । हाँ ।

Part 46

संसार में जितने अच्छे बडे और महत्वपूर्ण कार्य करने वाले व्यक्ति हुए हैं, वे संकल्पशक्ति के सहारे ही शिखर पर आरोप हो गए हैं । हरियाणा ऑफिस में अपनी बीमारी का डॉक्टरी प्रमाणपत्र लगाकर छुट्टी है । तू अर्जी बजवा दी साक्षी ने अपनी बहन की शादी का बहाना बनाया । शांत दिनों और नंदिता अभी तक हनीमून पर नहीं गए थे । वह उन्होंने हनीमून जाने के लिए छुट्टियाँ मांगी । विशाल ने एडवांस कोर्स परीक्षा है तो छोटे ली अपने अपने घर में । उन्होंने बताया कि ऑफिस की अति महत्वपूर्ण अनिश्चितकालीन गोपनीयत ड्यूटी पर जा रहे हैं । आप लोग चिंतित हूँ । हम समय समय पर आप लोगों से संपर्क कर लेंगे । शुक्रवार टाटा नौ बजे शुभ मुहरत में उनका अभियान आरंभ हुआ । यात्रा के प्रथम चरण में स्थितियों के देश में पांचों पहचाने ही नहीं जा रहे थे । पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार टीम बंगालके सिया हल्दी स्टेशन पर उतरी । स्टेशन के वेटिंग रूम में जाकर यह हिप्पी परंपरागत बंगाली परिवार में बदल गए । नंदिता, शांतनु, विशाल, साक्षी पति पत्नी के रूप में तथा आर्या, शांतनु एवं विशाल के बहन के रूप में तो जो दे भाई भाभी की इकलौती ननद बनी आर्या बनाये न करें दिखा रही थी । इस टीम का एकदम उचित पहनावा था और इनका वैसे ही शुद्ध बांग्ला भाषा का उच्चारण था । अब उन्हें पश्चिमी मिदनापुर जिले के संकरेल गांव में पहुंचना था । उसके लिए उपयुक्त साधन स्थानीय बच्चे ही थी । लगभग डाॅट पश्चात ही उन्हें संकरेल की बस मिल गई तो टीवी छोटी पुरानी कबाडा लगने वाली बस बंगाल सरकार की गरीबी की गाथा कह रही थी । खचाखच अलग करते । किसी तरह साढे चार घंटे में बस संकरेल पहुंची । गांव छोटा था । बस को आगे झारग्राम जाना था । सवारियां कम थी । पता है उन्हें गांव के बाहर ही उतार दिया । वहाँ सिर्फ ये पांच सवारियां ही उतरी । आर्या ने नजर उठाकर सामने देखा ये कहाँ एकदम सुनसान उजडा । अब जबान लग रहा था । कहीं भी जीवन का नामोनिशान नहीं देख रहा था । अचानक उसकी नजर अपनी डाइट तरफ नहीं । सडक के उस पार वह कोई मंडल लग रहा था । पांचो एक मत हो गए । वहाँ चलने को पांच पहुंचने ही पता चल गया था । की है तो दुर्गा माता का प्राचीन मंदिर हैं । अपने यात्रा पत्र के प्रथम पडाव पर डिजिट देवी का मंदिर पाकर आर्या को बेहद सकून मिला । उसे लगा जैसे वो मांगी मुराद मिल गई । अपने साथियों से बात करके आर्या पूजा करने बैठ गई । मंदिर में एक तरफ आसन रखा हुआ था, आ गया । उसे उठा लाये और उस पर बैठ गई । आलथी पालथी, सुखासन लगाकर उस पर दोनों हाथों से जीत राहत मुद्रा लगाई । पानी हथेली ऊपर दायीं हथेली नीचे दोनों अंगूठे आपस में मिले हुए अपनी गोद में ना भी के पास रखे और कोमलता से आंख बंद करके वहाँ के समक्ष ध्यान लगाकर बैठ गई । श्वासों स्वरों की शरीर की मन की मस्तिष्क की संपूर्ण एकाग्रता से माँ को पुकारने लगे । शक्ति देना माँ हमारा मिशन फ्रीडम पूरी तरह से सफल हो । वहाँ फिर आशीर्वाद चाहिए । पूरी एकाग्रता पूरी तन्मयता आकस्मात । हवा का एक झोंका आया और देवी माँ के हाथ का फूल धीरे से उस बच्चे की खुली हथेलियों में आगे रहा । आर्या ने कॉलेज से अपनी आंखे खोली । अपने हाथों में कृपामयी काली माँ का प्रसाद पाकर मैं प्रसन्न हो गई । मंदिर में आते में दो छोटे छोटे कमरे थे । एक काम में ये अपना सामान लेकर करें सबने हल्का फुल्का भोजन । क्या नंदिता वर्षांत रोने बंगाली मछुआरे का वेश बनाया? खार या एवं साक्षी ने मृतक की पोशाक पहनी, विशाल संगीतज्ञ बना इन ऊपरी देश भोसा के नीचे पूरी तरह से हथियारों से लैस कमांडो की बढती थी आ गया एक कागज पर कुछ अंतिम महत्वपूर्ण लिखने पडने वह गन्ना करने में व्यस्त थी । विशाल लैपटाप ऐसे कोई जानकारी निकाल रहा था । शांत दोनों आसपास की कुछ जानकारियां लेने गया हुआ था । यहाँ जंगल की क्या पोजीशन है? बंगाल की खाडी कहाँ से लगती है? अरे नक्सली दबाव कहाँ से हैं और सुरक्षा बलों की क्या स्थिति है? आस पास के क्षेत्र को नंदिता वा साक्षी ने चौकस दृष्टि से देखा तो पाया कि सुरक्षाबल रिहा तेजी से विकास कार्यों को अंजाम दे रहे थे । नागरिक गांव में लौटे तो वह पहले से बहुत ज्यादा सुकून से रह सकें । संभाव कहा इसी वजह से शीघ्रता से काम हो रहा था । शांतनु सबकुछ पता करके लौट आया था । आर्यवत विशाल का काम भी संपन्न हो गया । पूरी टीम आगे के कोच के लिए तैयार थी । अत्यावश्यक सामान, साथ लिए अतिरिक्त सामान मंदिर के पीछे ऐसी जगह छुपा दिया जहां जल्दी से कोई भी नहीं पहुंच सकता । अब आगे की योजना के अनुसार तीन दो भागों में बंट कर आगे मुफ्त करेगी । आर्या साक्षी एवं विशाल जंगलों में पीछे की ओर से कुछ संभावित बिल्डिंग तक पहुंचेंगे । जहाँ आर्या के पिताजी के कैद होने की पूरी संभावना थी, वहाँ से पिताजी को निकाल कर शीघ्र अतिशीघ्र जय लोग पूर्वी दिशा में बंगाल की खाडी की ओर बढेंगे । नंदिता, एरम शांतनु वहाँ मछुआरों की नाव लिए पहले से तैयार होंगे । इस प्रकार जलमार्ग से होते हुए मैं कोलकाता पहुंच जाएंगे । योजना तो सोची समझी थी, लेकिन जोखिम बिना सोचा भी हो सकता था । इंसान की जोखिम उठाने की क्षमता भी जीवन में सफलता के पैमाने ट्राई करती हैं । आ गया कितना जोखिम बर्दाश्त कर पाएगी । क्या उसे अपने पिताजी मिल पाएंगे?

Part 47

योजना के अनुसार उन्होंने अपना अभियान प्रारंभ कर दिया था । सिर मुंडाते ही ओले पडे आर्य और साथ ही अभी सौ का नाम भी नहीं चले थे की उन्होंने अपने आप को सुरक्षा बलों से गिरा हुआ पाया । कम से कम है नौ सिपाही थे जबकि ये दो ही थी । उनकी लीडर ने कहा लडकियों यहाँ क्या कर रहे हो? ने बडी नजाकत से उत्तर दिया हम तो इवनिंग वॉक के लिए निकली है लेकिन हमसे सवाल जवाब मांगने वाले आपको उन्हें लीडर ने उसका प्रश्न अनसुना कर के पुना प्रश्न किया क्या तो मैं यहाँ के हालत पता नहीं क्यों चली? आई हाँ मरने । आर्या ने संभलकर समझदारी बडा उत्तर देते हुए बताया हम दोनों महीने चाचा के लडके की शादी में शरीक होने आई थी । वहाँ तो घर में कोई था ही नहीं । हमारा मूड खराब हो गया तो इधर घूमने निकल पडीं । लीडर को उसके मासूम चेहरे भोली बातों पर भरोसा हो गया । उसने कहा यहाँ भी स्थिति पूरी तरह से तनाव में हैं । कभी भी कुछ भी हो सकता है या था भला इसी में है कि तुरंत लौट जाओ । आओ तो मैं दो सिपाही संग भेज दू आ रहे हैं । एकदम सकपका गई लेकिन ऊपर से सहज होते हुए बोली हमें भी महसूस नहीं हो रहा है । हम चले जाएंगे । आप किसी प्रकार की चिंता ना करें । इतने अच्छे व्यवहार और मार्गदर्शन के लिए शुक्रिया कहकर वापस लौट आई । उनसे पांच नौ फलाण दूर एक पेड की ओट में खडे विशाल की ऊपर की सास ऊपर नीचे की नीचे रह गई थी । जब तक उसने दोनों लडकियों को सुरक्षा बल से धीरे देखा, वहीं पर पोजीशन लेकर सतर्कता तो जैसे ही सुरक्षा बलों को पश्चिम की ओर तथा इन्हें पूर्व की ओर मोडते देखा, तब उसने चैन की सांस ली । पहले उन्होंने अपेक्षाकृत साफ सुथरा रास्ता चुना था, लेकिन अब देखा यहाँ सुरक्षा बल चप्पे चप्पे पर तैनात है । इन की नजरों में धूल झोंकना आसान नहीं । तब सदन जंगल वाला रास्ता चुना दिया । आर्या ने सचित्र आंटी वाला नक्शा एक बार पुनः बाहर निकाला । तीनों ने लोकेशंस एकदम सुनिश्चित कर ली । फिर अक्षय को कुना समेटकर अपनी जेब में रख लिया । बीहड जंगल में नक्सलियों का बहुत खत्म तो था ही, जंगली जीव जंतुओं का खतरा भी बहुत ज्यादा था । रास्ता भटक जाना भी बडी बात नहीं थी, किंतु विशाल वहाँ के चप्पे चप्पे से परिचित था क्योंकि उसने सेटेलाइट से अन्वेक्षण करके उस जंगल का गहरा अध्ययन किया था । कहा तीनों ने ब्लैक टाइगर कामांडो वाली अपनी पोशाके पहले जो ऍफ थी हेलमेट दस्ताने नाइटविजन । ग्लासेस लगाने के बाद तीनों ही आपस में एक दूजे को नहीं पहचान पा रहे थे । उन्होंने अपने वॉकीटॉकी सक्रिय कर लिया और बढ चले छती लक्ष्य की और सघन वन में हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था । आगे बढना मुश्किल हो रहा था । इन्होंने एकता मध्यम रोशनी की टॉर्च का उपयोग करने की सोची । साक्षी ने हाथ पीछे क्या अपनी बैक पॉकेट से टॉर्च निकालने के लिए अरे मेरे हाथ किसने पकडा है । मुड कर देखने लगी तो भयंकर जहरीले नाग ने उसकी कलाई पर लपेटा दे रखा था । क्रोध से धडक थी उसकी आंखें जहर उगलती लपलपाती जीत अगले ही क्षण सीधा चेहरे पर रखने को तैयार । घबराहट के मारे साक्षी ने आंखे बंद कर ली । वो नंबर शिवाय को याद करने लगी । बच्चों की आवाज हुई । उस साक्षी ने डरते डरते आंखे खोली तो देखा उस खूंखार सर्व का मुख्य विशाल ने पकड रखा था उसकी कलाई से हटाकर पूरी ताकत से विशाल ने उस जहरीले ना को दोनों देख दिया था । विशाल ने सामना के साथ साक्षी की ओर देखा । साक्षी भी असीम अनुराग भरी आंखों से विशाल को धन्यवाद कह रहे थे । उनसे कुछ दूरी पर खडी आ गया । सारा माजरा देखकर रोमांचित थी । इस जंगल में साधारण आदमी दिन में घुसने की हिम्मत नहीं करेगा । अभी तो रात का अंधकार गहरा रहा है । बताओ अतिरिक्त सावधानी से दायें बायें ऊपर नीचे देखते हुए ये हमें चलना है । आर्य ने कहा जैसे ही यह कहकर उसने अपना कदम उठाया तो पैर ही नही नहीं टॉर्च की चमक में उसने देखा भयंकर मोटे अजगर की पहुंच उसके पैर पर पडी थी इंसान तो क्या साबुत मगर मच को निकल जाए इतना विशालकाय आज कर था आर्य को लगाई है पलटेगा खोलेगा और आर्य अंदर मौत को इस रूप में सामने देकर वह कहाँ उठी और सोचने लगी करने का काम नहीं है लेकिन पिताजी को कहो ना साथ कराएगा । जहाँ इंसानी शक्तियां झुक जाती हैं वहाँ दैवी शक्ति काम करती है । आर्या ने अपने गले में पहले दिव्या मोदी के लॉकेट को चूमा और आंखे बंद करके नमस्कार महामंत्र ता पूरी एकाग्रता से जब करने लगी किस बार जब करके उसने अपनी आंखें खोली तो दूर जाते । अगर की पूछ दिखाई थी वो भी अगले एक्शन ओझल हो गई । इस प्रकार खतरों का सामना करते करते छिपते छिपाते रात के लगभग दो बजे ऐसी जगह पहुंचे जहां से सामने एक बडी पहाडी नजर आ रही थी । सम्भवता इसके ठिकाने में ही उसके पिता गए थे । जब आ रहा तो गुप्त रास्ता तलाशना था । उसने मन ही मन सुचित्रा आंटे वाला मैं तो हराया । उसमें सब कुछ सही सही निर्देश था पश्चिम दिशा की ओर थोडा सा आगे बढते ही रहेगा । दीवार से टकराई उसने नीचे देखा तो कुएं की मुंडेर थी आ गया । इसी को तो खोज रही थी । पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार अब विशाल की ड्यूटी कुएं की मुंडेर के पास तथा साक्षी की पीछे बैकप और चौकसी की थी । आर्या ने कहा विशाल यहाँ कुएं में उतरने की कोई सीरियल तो है नहीं । एक मात्र रास्ता है इस अन्दरकोट में कूदना क्या करें? तब विशाल ने कहा आ गया तुम अपनी कमर पर रस्सी बांधकर मुझे धमाल हो । अगर तुम्हें कहीं ठेका आने का रास्ता मिल जाए तो रस्सी खोलकर अंदर चली जाना । हमें दो बार टॉर्च जलाकर सहमती दे देना । रस्सी वही रहेगी जब वापस आओ तो कमर पर रस्सी बांधकर तीन बार और चला देना । मैं तो मैं ऊपर खींच लूंगा । मामला बेहद खतरनाक था । जंगल का अंधकूप जल से लबालब भरा भी हो सकता था । जाली है, जान तो भी हो सकते हैं । जहरीली वनस्पति भी हो सकती है, लेकिन आर्या के पैर एक्शन भी नहीं । फिट के दिमाग में सावधानी थी । दिल में जुनून था । आपके पिता जी को हर हाल में बचा कर लाना है । आर्या ने अपना अत्यावश्यक सारा सामान शक्तियां कमर पर मजबूती से रस्सी वानी हाँ छोडकर नमस्कार महामंत्र का उच्चारण किया और खुद पडी उस अंधेरी को मैं मैं नीचे की ओर जाती जा रही थी । जाती जा रही थी । बीस तीस ऍम चालीस फीट की गहराई तक में पहुंच चुकी थी । जल का गहरा जवाब था । मैं चारों और हाथ पास मारते हुए रास्ता तलाश नहीं दी । उसे कहीं भी कोई निशान नहीं दिख रहा था । उसे लगा कि वह गला जगह आ गई है । इस कुएं में उसे कहीं कुछ भी नहीं मिलेगा । मैं शेयर करो । ऊपर की ओर आने लगी । आते आते उसने पुनर्विचार किया कि जली तथा प्रारंभ होने से पूर्व की स्थिति काफी अवलोकन किया जाए । हो सकता है कि कोई सुराग मिले । सोचते सोचते पानी के ऊपर आ गई । हुआ की गहराई अब भी पंद्रह बीस थी तो यहाँ भी उसे कुछ भी नहीं देखा वो बेहद परेशान से चारों तरफ हाथ पांव मार रही थी । तभी उसका बूट लोहे के कडे से टकराया । कोई भी एक तरफ की दीवार से लगभग ढाई फीट लंबा दो फीट चौडा रास्ता खुल गया । आर्या ने उसमें शक्तिशाली टॉर्च की रोशनी जलाकर देखा । मैं कोई लंबी सुरंग लग रही थी । विशाल हुए में झांकी रहा था । तभी आर्य ने दो बार टॉर्च की रोशनी मारी । निशान निश्चिंत हो गया कि नक्सल के अनुसार आर्या को रास्ता मिल गया है । आर्या ने अपनी कमर की रस्सी खोलकर उस कडे पर अटका जी पुनः भगवान का स्मरण का सुरंग में दाखिल हुई । सुरंग की ऊंचाई लगभग पांच सीट होगी । अच्छा रह गया को झुककर दौडना पड रहा था । वहाँ घटाटोप अंधकार था । पता आर्या ने एक्स्ट्रा पावर वाले क्लासेज निकले और आपने नाइटविजन चश्मे के अंदर सेट कर दिया । अब उसे एकदम स्पष्ट दिख रहा था । लगभग एक किलोमीटर बात सुरंग का रास्ता बंद था । वहाँ बारह सिंगा के दो सीगेट लगे हुए थे । आर्या ने दोनों को आपस में नब्बे डिग्री पर घुमा दिया । सामने का पट्टा हट गया । रास्ता खुल गया । सामने वही दिखाना था जिसकी जेल में आर्या के पिता थे । आर्यो ने पुना भगवान का स्मरण किया कि उसके पापा यहाँ अवश्य मिल जाए । भंड आंखों में एक जमा को थी । एक दिव्य आजमा वहाँ बस्ती थी । अगले ही शरद भैया तरह हो गई । आर्या का विश्वास हो गया कि वह यहाँ से खाली नहीं जाएगी । आ गया ते खाने में दाखिल हो गई । दोनों तरफ पैर के बडी हुई थी, जिनमें कैदी थे । यही आसपास ही उसके पापा भी होने चाहिए । अंधकार में वह अपने चश्मे से चेहरे पहचानने की कोशिश कर रही थी । अरे ये क्या? बैरक नंबर पांच में तो वही ईमानदार वन अधिकारी था जो कुछ दिन पहले अखबार में जिसकी बडी बडी फोटो छपी थी । नक्सली इलाके में लापता होने की खबर के साथ अब उसने पुनः अपना ध्यान केंद्रित किया । कल्पना में पिताजी का चेहरा साकार किया और कैदियों को देखते हुए आगे बढने लगी । बैरक नंबर सात के कैदी की तरफ देखा तो मैं देखती ही रह गईं । उन्नत ललाट गोरा रंग तेजस्वी चेहरा आंखे मूंदे बैठा था । बडी दानी मुझमें सन्यासी लग रहा था । आर्या के मन में आपने पनकी भाव उठने लगे । दिल मेस नहीं की धारा फट रही थी । आर्या को आभास हुआ कि यही उसके पिता है । उसने प्लास्टिक कतार निकाला । बैठक के टाले में लगाकर घुमाया । तारा खोले की आवाज से सन्यासी चौका फॅमिली रहकर चुप रहने का संकेत क्या बाहर खडे खडे । उसने आगे झुककर कान में कुछ कहा । दोनों आश्वस्त हो गए । उसी पोजीशन में उन के बंधनों को शीघ्रता से काटा और चलने का इशारा किया आ रहे हैं । उन्होंने समझा दिया था की बैरक के गेट या बाउंड्री लाइन किसी को नहीं छोडनी होने से जम्प करके बाहर आ जाएँ । उन्होंने वैसा ही किया । और अब आर्या के पिता जी आचार थे किन्तु अभी बहुत लम्बा सफर बाकी था । आ गया । पिता के पैर छूने झुकी तो शिवानी झिलमिलाती आंखों से गले लगा लिया । उसने संक्षेप में आपको बताया की उसके दादा सोमेश भी पास वाली बैरक में कहती हैं । आर्या के आशा घाटी का नहीं था क्योंकि उसके दादा तो सत्यवान थे । जी मेरे घर पर छोड कर आई थी । यह समय धर कबूतर का या सोचने विचारने का नहीं था । बता एक सेकंड भी न काम आते हुए मैं दोनों बैरक नंबर नौ पर पहुंचे जहाँ सुनेश गए थे । आर्या ने उसे प्लास्टिक के तार से तारा खोला । सुमेश नींद में थे । आर्या ने बंधन काटे, शिवानी सोमेश को वैसे ही झुककर बाहर से सारी स्थिति बताई और निकल चलने को कहा । आश्चर्यचकित सों में हर बढाकर चलने को उधर हुए तो बैरक की चौखट पर पहले दिया और ये क्या, पूरे टाइम खाने में लाल नई टेन चलने लगी । ऍम बचने लगा । हार यहाँ की बकी रही गई ये क्या हो गया । उसने तुरंत अपने पॉकेट से बॉल के आकार एक स्मार्ट बम निकाला और वहाँ धोने का बम छोड दिया । एक सेकंड में वहाँ होम अच्छा गया ।

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आर्य ने यहाँ का हाथ पकड रखा था । शिवानी सोमेश का आ गया । सुरंग के दरवाजे की तरफ थोडी गहरे धोनी के कारण गये । लोग वहाँ लगे कैमरों की पाखंड में नहीं आएगा । लेकिन शिवा और सोमेश धोनी से बहुत परेशान हो गए थे । उसने बाहर निकलने से पहले ही आंसूगैस के दो गोली और छोड दिया था । सुरंग के गेट पर पहुंचते ही तीनों तुरंत बाहर हो गए । आर्या ने वहाँ एक जबरदस्त बम लगा दिया । इसमें कुछ समय बाद टाइम सेट कर दिया था । अब झोककर सुरंग के दूसरी ओर सब दौडे । सुरंग के किनारे पहुंचते ही उसने अपने पापा के कमर से रस्सी बनी । ऊपर तीन भारत और चलाई । ऊपर से पुनः जवाब नहीं आया तो उसने वॉकीटॉकी में कोर्ट भाषा में बोला । उसे जवाब मिला उसका अर्थ था विशाल वहीं है । धुंध गहरी छा गई थी । इससे टॉर्च की रोशनी देखी नहीं है । तुम बांधो, वो भी खींचता है । शिवा को ऊपर खींचकर विशाल ने फटाफट ट्रस्टी वापस डाले । आर्य ने उसे एक और साथी के बारे में बताया और उनकी कमर में भी रस्सी बांध । विशाल ने सुमेश को भी खींच लिया । साक्षी ने शिवा को कमांडर वस्त्र पहनाएं एवं चेहरे पर मैं कब, क्या साक्षी के पास वर्ष तो अतिरिक्त ना थे लेकिन उसने सोमेश के शरीर पर आवश्यक जडी बूटियां और लगा दी । चेहरे पर जंगलियों जैसा में कब कर दिया । इतने में विशाल ने आर्या को भी ऊपर खींच लिया था । ऊपर आने से पहले आर्या ने वहाँ भी टाइम फिट कर दिया था । सम्भवता नक्सलवादियों ने आपातकालीन प्रयोग के लिए इस सुरंग का निर्माण करवाया था । उसी का उपयोग करके आज आर्या अपने पिताजी को निकाल पाई थी । सुरक्षा के दृष्टिकोण से वहाँ से निकलते ही उसने सुरंग को मटियामेट कर दिया । रस्सी समेटकर ये दल अपने वापसी के राष्ट्रीय चल पडा । वापसी का मार्ग उपेक्षाकृत कुछ सुगम चुना था क्योंकि इस बार दो बुजुर्ग उनके साथ थे । कुछ दूर निकलते ही उनके कानों में गोलियों की आवाज पडी । विशाल ने सबको रुकने के लिए कहा । खुद आगे जाकर देखा तो सुरक्षाबलों के दल और नक्सली दल में भयानक लडाई चल रही है । सुरक्षा बल के महज पांच सात जवान थे और वो भी मरनासन्न स्थिति में थे । उनके पास असलहा बारूद सब समाप्तप्राय दिख रहा था । सामने बीस पच्चीस नक्सलियों थे । वे भारी पड रहे थे । सुरक्षाबलों पर साक्षी ने कहा, हमें पहले भी बहुत विलंब हो चुका हैं । हम दूसरी तरफ से निकाल लेते हैं । आर्या ने विशाल से पूछा कि उस की क्या राय है? विशाल ने भी कहा, हम इन्हें निकाल लाए हैं । अब सुरक्षित ले चलना ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए । आर्य ने अपनी राय रखते हुए कहा, हमने जान पर खेलकर पिताजी को निकाला । उन्हें सुरक्षित घर ले जाना ही हमारा मिशन है की तो अपने देश के लिए भी हमारा कर्तव्य है । यहाँ जो मरनासन्न स्थिति में वी नक्सलियों से लोहा ले रहे हैं, वो भी हमारे भाई हैं । उन्हें बचाना भी हमारा फर्ज है । बोलो विशाल साक्षी क्या राय है? दोनों ने कहा, हम आपके विचारों से सहमत है । अब तय हुआ कि साक्षी सेवा एवं सोमेश को लेकर निकलेगी । विशाल आ गया, नक्सलियों से लोहा लेंगे । शिवा बोले, ऐसी जोखिमभरी स्थिति में अपने बच्चों को छोड कर नहीं जाऊंगा । पिता के प्यार दुलार एवम अधिकार भरे स्वर को स्वर्ण आ गया । भावुक होती इतने वर्षों से पापा के इसी नहीं ऐसे तो प्यासी थी । वह तो बोली ठीक है । पिता जी मैं और विशाल मुख्य मोर्चा संभालते हैं । आप कवर फायर देते रही है । आप और साक्षी जवानों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है । पिताजी की आंखों से प्रवाहित आशीर्वाद के खजाने को सहेजते हुए आ गया और विशाल ने तुरंत पोजिशन ले ली । हिंदुस्तान की सर्वश्रेष्ठ टीम के कमांडोज की गोलियों से नस काल इट आउट हैं । उन्हें लगा कि सीआरपीएफ की बडी बैठक इनके पास मौजूद है । बता नक्सली पीछे धीरे धीरे खिसकने लगे । पीछे उन्होंने नया जाल बोल रखा था । विशाल उनकी मंशा समझ गया । साक्षी और शिवा घायल जवानों को थोडी दूर आड में एक एक करके ले जा रहे थे । सोमेश उनके घावों पर मरहम पट्टी बांध रहा था । किसी को पानी चला रहा था । किसी को पीडानाशक क्या दे रहा था? विशाल ने आर्या से कहा यहाँ तक मोर्चा तोमर साक्षी संभालो । मैं पीछे से उन पर अटैक करता हूँ । दोनों तरफ ऍसे ये बौखला जाएंगे । साढे मैंने कहा ओके साक्षी सुरक्षाबलों का मोर्टार उठा लाई थी । आर्या ने स्टैंड ढंग से विशाल को साइड से कवर फायर देकर निकाल लिया । भरया की तरफ से गोलियों की बौछार में कुछ कमी हो गई थी । नक्सलियों ने राहत की सांस ली । इतने में सामने आया मोर्टार का गोला लोग पीछे दौडे, लेकिन पीछे उन पर हो गए बमों की बारे ढाई तरफ संकरा सा रास्ता ट्रेनों की ओर था । पांच से सात नस काली जान बचाने । उधर भागे । उधर बारूदी सुरंगें फट पडी । अपने ही लगाए जाल में वे खुद भास्कर इस प्रकार चौतरफा वार से नक्सली धराशाई हो गए । उधर साक्षी के बाएं हाथ से खून बह रहा था । उसकी कलाई में गोली लगी थी । भगवान का शुक्र है कि कल आए की मुख्य थोडी से बच गए नहीं तो जान के लाले पड जाते हैं । विशाल के दायें बगल में दो गोलियां लगी थी । जब दौड कर पीछे जा रहा था तभी नक्सलियों ने निशाना बनाया था । उसके भी खून रह रहा था । सबसे ज्यादा हालत हारया की खराब थी । उसकी आंख थोडी सी बच गई थी । उसी के पास सिर्फ को भेज दी हुई । गोली आरपार हो गई थी । खून से सारे कपडे सरोबार हो गए थे । दूसरी गोली दायक अंधे को चीरती हुई निकली थी । आखिरी है गर्दन पर लग जाती है तो अब अत्यधिक ऍफ से आर्या को कमजोरी आ गई और चक्कर आने लगे । बेटी की हालत देखकर शिवा का है प्रभावित हो गया । जल्दी से उसके हाथ पहुंचकर रक्तस्त्राव रोकने वाला स्प्रे किया । गांवों पर दवाई लगाकर मरहमपट्टी की सिर का खून अभी भी नहीं रुका था । आर्या पर बेहोशी छाने लगी थी । आधी बेहोशी की हालत में उसे सचित्रा आंटी वाली जीवन रक्षक दवा याद आई । उसने अपनी कमीज कि अंदरूनी पॉकेट में हाथ डालकर दवाई निकली । इतने में उसके हाथ से दवाई की शीशी टूट गई और गर्दन एक तरफ भडक गई । सब घबरा गए । शिवानी लाडली बेटी को वहीं जमीन पर नहीं गिरने दिया । अपनी गोद में लिटा लिया । उसके हाथ से छोटी दवाई की शीशी शिवानी थाम ली । उसने देखा चांदी की नक्काशीदार देश कीमती डिब्बी थी । उसे खोला । उसमें से एक छोटी सी प्लास्टिक की शीशी थी, जिसपर लिखा था अमृत धारा । जीवन रक्षक रसायन प्लास्टिक के शिक्षिका ढक्कन खोलकर शिवानी आ गया के भूमि पूरी बोटल और है । नहीं देखा । धीरे धीरे उसके शरीर में पुना हलचल प्रारंभ हो गई । घोष में आते ही आ गया । पानी मांगने लगी । साक्षी ने अपनी पानी की बोतल शिवा को पढा दी । उन्होंने बेटी को पानी पिलाया । विशाल ने साक्षी के पट्टी बांधी थी । सोमेश ने विशाल के बगल में मरहमपट्टी करती थी । उन्होंने एक दवा की टिकियां नहीं जो दर्द को दबाने वाली और प्राण ऊर्जा को बढाने वाली थी । पिताजी की गोद में उनके द्वारा अमृत धारा पीकर आर्या ने न केवल जीवन पाया बल्कि असीम आनंद का नया अनुभव भी पा लिया था । इस मोर्चे पर फटा हासिल करके टीम आगे बढे । विशाल के कंधे का सहारा लेकर आया । सट्टे के सट्टे चल रही थी । कुछ दूर पहुंचकर पैरो की । वहाँ से आर्या ने दुरबीन लगाकर पीछे की ओर देगा । हेड क्वार्टर के सामने धमासान चल रहा था । सुरक्षाबल वहाँ तक पहुंच चुके थे । यह तो जैसी लडाई हो रही थी । ऐसा नहीं लगता था की आंतरिक सुरक्षा का मामला है बल्कि लग रहा था की सीमाओं पर दुश्मन देश के सैनिक मोर्चा हटाने खडे हैं । वास्तव में बाहर के दुश्मन से घर का दुश्मन ज्यादा खतरनाक होता है । दोनों तरफ पूरी तैयारी थी न सुरक्षाबल कमजोर पड रहे थे ना नक्सली भयंकर आरपार की लडाई चल रही थी । आ गया ने चिंतित होते हुए पिताजी से कहा मामला बना दे रहा है तो वहाँ दोनों तरफ से बराबर की लडाई चल रही है । अगर इस हेड क्वार्टर के अंदर से नक्सलियों को थोडी और मदद मिल जाए तो ये हाल भी हो सकते हैं । शिवा गोला ये नक्सली बेहद धूर्त और चालाक हैं । ये तो दिखावटी हेडर्क्वाटर है । असली हेलिकॉटर तो यहाँ से लगभग दो किलोमीटर दूर घने जंगलों में हैं । ऐसा मेरे एक विश्वस्त साथ ही ने मुझे बताया है । वो भी वहीं कारागार में कैसा था उपग्रह या विमान? किसी के पास उस हेडर्क्वाटर का फोटो नहीं है । इस पार्टी फौलादी बिल्डिंग बनी रखी है । वहाँ की सुरक्षा व्यवस्था बहुत मजबूत है । बारूदी सुरंगे इतनी बना रखी है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता । उनकी गुप्त योजना ये है कि जब कभी भी भारतीय सुरक्षा बल इस हेड क्वार्टर पर कब्जा कर के जीत का जश्न मना रहे होंगे तभी असली हैड क्वाटर्स से उनकी फोर्स आकर उन्हें नष्ट कर देगी । साथ ही साथ पडोसी पांच राज्यों ने भी तबाही मचाकर सरकार को पुनः अपनी ताकत का अहसास करवा देंगे । आर्या गहन चिंतन में पड गई । उसने शिवा से पूछा पिताजी क्या ये एकदम पक्की खबर है? एकदम सोलह आने सच है । ये बात विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त हुई है । अपनी तकलीफ, अपना डर्ट अपना दुख भूलकर अप्रितम आज में विश्वास है आ गया । हल्का सा लंगडाते हुए चल रही थी । फिर सब से अलग होकर एक पेड की ओट में आकर आर्या ने अपना सेटेलाइट फोन निकाला । सचित्रा आंटी का बताया हुआ चौदह अंकों का विशेष नंबर में लाया । उसका दिल धडक रहा था । पता नहीं है नंबर मिलेगा या नहीं । इतने में उधर से एक खर्राटा आवाज आई जिसने आ गया कि आइडेंटिटी और पर्सनल कोर पूछे । आर्या ने सुचित्रा आंटी द्वारा बताई गई पहचान और संकेत संख्या बता दी । अब उस विशेष आवाज ने मैसेज पूछा कार्यालय ऑपरेशन जय हिंद की स्थिति लोकेशन बताई, नक्सलियों के संघर्ष एवं इस तरफ से घट में की खबर दी और जख्मी जवानों की स्तिथि बताई ताकि उन्हें मदद मिल सके तथा उन के अपने संचार साधन लडाई में तबाह हो जाने की सूचना भी उन्हें दे दी । दूसरी अति महत्वपूर्ण बात को बेहद धीमी आवाज में आर्या ने कहना प्रारम्भ किया अत्यधिक संवेदनशील रहस्यात्मक असली नक्सली हेडर्क्वाटर एवं उसके सुरक्षा प्रबंध के बारे में धीरे धीरे सारी बातें बता दी । ओके ओवर फॅसने फोन बंद करके पुनः अपने पॉकेट में डाल लिया । तत्काल अपनी टीम के पास पहुंच गई । चारों तरफ दृष्टिपात करते हुए विशाल ने कहा जहाँ तो बहुत खाता है अच्छा हमें जल्दी से जल्दी निकलना होगा । सोमेश और साक्षी आर्या और शिवा तथा विशाल सबसे आगे तीनों टीमें हाथ पकडे, पकडे झुककर शीघ्रता से अपने लक्ष्य की ओर दौडती जा रही थी । आॅल्टर की आवाज सुनाई थी । उसने पुना दुरबीन लगाकर देखा तो हेलीकॉप्टर से कमांडो उन जख्मी जवानों को लेने आ रहे थे जिनकी उन्होंने मरहमपट्टी की थी । वास्तव में भारतीय वायुसेना की सेवा सराहनीय थी । आर्या ने दूसरी तरफ गर्दन घुमाया । वहाँ की लडाई में अब भी सुरक्षाबल बारी पडते दिखाई दे रहे थे । नक्सलियों की संख्या लगातार कम हो रही थी । पश्चिमी तरफ के नक्सलियों को काबू करके वहाँ के सुरक्षा बल की कंपनी भी इधर आ गई थी । इन जवानों ने हथगोलों, मोर्टार मशीनगन से हमले तेज कर दिए थे । भारतीय जाबाज देशद्रोहियों को काबू में कर रहे थे । इनका उत्साह देखते हुए लग रहा था कि संभवता सूर्य की प्रथम किरण के साथ नक्सल वाट का अंधकार भारतीय धरती से विलीन हो जाएगा । पुनः दौडते दौडते वह लोग काफी आगे निकल आए । फिर भी पीछे भयंकर तेज धमाके सुनाई दे रहे थे । एक पेड के ऊपर चढकर आर्या ने दुर्बीन से स्थिति का जायजा लेते हुए देखा । एंटी नक्सल अजय फोर्स के कमांडोज भी हेलीकॉप्टर से वहाँ आए थे । सुरक्षाबलों को तकनीक पूर्व सावधानी से पीछे किसका आते हुए उन्होंने हेडक्वार्टर पर बम बरसा दिया । उस मुख्यालय की मटियामेट करके रहे हेलीकॉप्टर अब आर्या के बताया अनुसार दूसरी दिशा में बढ रहे थे । एंटी नक्सल अजय फोर्स किसी कमांडोस जल, थल एवं नब्बे की कार्यवाही में धुरंधर होते थे अर्थात पानी में भी लड सकते थे । आसमान में भी लड सकते थे और जमीन पर भी लड सकते थे । उनकी ट्रेनिंग पूरी करना बहुत कठिन होता था । भारत में इस तरह से प्रशिक्षित केवल पांच सौ कमांडो की फोर्स नहीं क्योंकि इतने ही प्रशिक्षण पूरा कर पाते थे । इस प्रकार विश्व की श्रेष्ठ हम कमांडो टुकडी जो एंटी नक्सल मूवमेंट के लिए विशेष प्रशिक्षण थी उन्होंने अब ऑपरेशन जय हिंद से अपनी कमान संभाल नहीं थी । एक ही देखते धमाकों का शोर बढता गया । एक के बाद एक बम फटते गए । चारों ओर बारूदी सुरंगे फट पडी । तेज हमलों से पूरा इलाका दहल गया था । नक्सलियों का इस पार्टी फौलादी खेला । मुख्यालय नंबर एक भी धराशायी हो गया । ऑपरेशन जायें, हिंदी सफल हुआ, ऑपरेशन जायें । हिंदी की सफलता में अपना महत्वपूर्ण सहयोग देखा । अजय फोर्स के कमांडोस अपने अपने हेलीकॉप्टर से वापस लौटकर सुरक्षाबल वहाँ से घायलों को ले जाने लगे और शवों को हटाने लगे । निश्चित तौर से इसके बाद वहाँ पर भी तीव्र गति से विकास कार्य प्रारंभ हो जाएंगे ।

Part 49

पेड से उतरकर आर्या ने अपनी इलेक्ट्रॉनिक रिस्ट वॉच का बटन दबाया देखा । सुबह के चार बज के पांच मिनट हो गए थे । साक्षी ने कहा कहीं सुरक्षित स्थान देखकर थोडा विश्राम कर ले । विशाल बोला यहाँ एक्शन भी रुकना खतरे से खाली नहीं है । सूर्य उदय होने वाला है । हम लोग, सुरक्षाबल ये नक्सली किसी के भी चक्कर में फंस सकते हैं । पता सब जल्दी जल्दी । यहाँ से चलो । जेल के भोजन पानी से शिवा का शरीर एकदम कमजोर हो गया था । वर्षों के बंधन से जकडे पैरों को चलने की आदत थी । ऍफ का था । ऊपर से उन की वायु वृद्धावस्था अपनी स्थिति देकर शिवानी आर्या से कहा हम नगर से थोडा धीरे चला जा रहा है । तुम लोग निकालो । हम आ जाएंगे । आ गया । भावुक होकर बोली क्या बीच रास्ते में छोड देने के लिए आपको निकाल कर लाए हैं । अब संघ ही चलेंगे । बच्चों की से देख उन्होंने भी अपना मनोबल मजबूत किया और थोडा तेज तेज चलने लगे । कुछ दूर में ही उनकी सांस भूल गई । फिर भी हिम्मत नहीं छोडी चलते रहे । अचानक सोमेश का पैर एक पत्थर से टकराया । ठोकर खाकर पथरीली चट्टान पर गिर पडे । उसे तड तड की आवाज सुनाई नहीं सुनेश को लगा पैर की हड्डी चिटकी है । अब क्या होगा? साक्षी दौड कर आई । उसने उन्हें उठाकर बैठाया । खिलाडी लाकर दोनों पैरों का निरीक्षण किया । डी तो नहीं टूटी सम्भवता मास फट गया था क्योंकि वह दर्द से व्याकुल हो रहे थे । साक्षी ने तुरंत आराम दिलाने वाली वेज नाशक स्प्रे का छिडकाव किया लेकिन फिर भी उन से उठा नहीं गया । ये स्थिति देखकर विशाल पास में आया । नीचे बैठा उन्हें अपनी पीठ पर लाना । पीछे से साक्षी ने सहारा दिया । धीरे से विशाल खडा हुआ और सुमेश को लेकर चल पडा । जल्दी जल्दी ढंग भरते हुए आर्या ने देखा । पिताजी हाफ रहे थे । लडखडा रहे थे । कहीं ये भी ना गिर जाए । उसने साक्षी को इशारा किया । दोनों ने उन्हें बीच में खडा किया । एक आठ आर्या ने कंधे पर एक हाथ साक्षी के कंधे पर डाला । इस प्रकार इस ग्रुप ने भी तेजी से आगे प्रयाण किया । अचानक आर्य ने देखा दो खूंखार नक्सली उनके पीछे दौडे आ रहे थे । शायद उन्हें पकडने ग्रीन तक पहुंचते । तब तक ये नदी किनारे पहुंच चुके थे जहाँ नंदिता मछुआरे नाव लिए तैयार थी । पहले विशाल ने सुमेश को बढाया । तत्पश्चात शिवा को बैठाया । फिर या को सिर्फ वे दोनों में नाव में सवार हो गए । विशाल और नंदिता तेजी से पतवार चलाने लगे । उन्होंने देखा कि नक्सली भी पानी में कूद गए लेकिन उनकी नाम तेजी से चल पडी । थोडी सी दूरी पर गहरे पानी में शांतनु मोटर बोट लिए खडा था । विशाल ने नाव का संतुलन बनाकर रखा था । उन्होंने सोमेश शिवा, नंदिता वह साक्षी को मोटर बोट पर चढा दिया । आर्या चडने ही वाली थी कि इतने में पानी के अंदर से नक्सली भी वहीं पहुंच गए । एक कतार निकालकर आर्या के बाएं पैर पर मारी । वहाँ गहरा घाव हो गया । दूसरा हाथ बढाकर बिहार या को खींच नहीं चाहता था कि आर्य ने तुरंत अपनी पॉकेट से पिस्टल निकाली । अचूक निशाना अगले ही पल दोनों ढेर हो गए । नंदिता ने अपने हाथों के सहारे से आर्या को मोटर बोट में खींच लिया । फिर उसके पैर की चोट पर रहे थे । खून को रोकने के लिए फर्स्ट सॉल्यूशन लगाकर मरहमपट्टी करती । साक्षी ने मोटर बोट से विशाल की ओर हाथ बढाया । विशाल ने तस्कर उसका हाथ थाम लिया । ऍफ को छोडकर मोटर बोट में आ गया । लेकिन साक्षी का हाथ अभी भी पकडा हुआ था । उसने चारों ओर नजरों से देखा । उसने चोर नजरों से देखा उनके पास और कोई नहीं था । चुपके से साक्षी ने उसे अपनी और खींच कर बाहों में भर लिया और बोला आज ये जो हाथ पकडा है उम्र भर निभाओगे । साक्षी बल्कि झुकाकर बोली इस बार और उसकी बाहों से फिसल कर निकल गई । विशाल ने देखा कि सुधर आसमान में हल्की हल्की लालिमा छाई हुई थी । भुवन भास्कर द्वारा सुभाशीष की रश्मियों का शुभागमन हो रहा था । मोटर बहुत तेजी से चल पडी । नंदिता ने आर्या को बताया कि जब शांतनु मोटर बोर्ड की व्यवस्था कर रहा था तब है काली मंदिर से सामान ले आई थी जो इसी मोटर बोर्ड में रखा हुआ था । शांतनु बहुत कुमार फिर आकर उन्हें एक निर्जन से किनारे ले आया । वहाँ से सामने गांव दिख रहा था । वोटर बोर्ड किनारे लगा ली । इस अभियान के अतिरिक्त सामान की आर्या ने पोटली बना ली थी । उसे वहीं जल में प्रवाहित करके वे लोग सामने की ओर बढने लगे । मोटर बोर्ड की मोटर चालू करके उसे पश्चिम दिशा की ओर मोडकर छोड दिया । शांतनु ने पहले ही बता कर लिया था कि भारतीय नौसेना के जलपोत पूर्व दिशा में गहरे जल में तैनात है । किसी भी जा मेले में पडने से बचने के लिए उसने इतनी अतिरिक्त सावधानी बरती थी । उन्हें गांव के बाहर एक शमशान दिखाई दिया । शिवा और सुमेश ने । साधु बाबा का वेश धारण और तीनों लडकियों एवम लडकों ने बंगाली ग्रामीण की देश घोषणा में पूर्ववृत्ति आ गए । पैदल चलकर मुख्य सडक तक ही पहुंचे थे कि देखा वहाँ से बस निकल रही थी । बस पर गंतव्य स्थान का नाम देखा । उन्होंने हाथ दिखाकर रोका और बस में चढ गए । सिंगर के बस स्टैंड पडी उतरे । वहाँ एक छोटा सा होटल था । होटल में पहुंचकर सबने छोटों पर एक बार पुनमाराम पत्ते की शांतनु चाहिए आया था । सब ने चाहे बिस्कुट, पावर रोटी से एक बार पेट पूजा कर ली । आर्या ने दवाइयाँ निकली, सोमेश को दर्दनाशक दवाई नहीं, शिवा को विटामिन की दवाई दी । साक्षी, विशाल एवं स्वयं भी दर्द निवारक और एनर्जी विटामिन गोलियाँ ले ली । अब शिवा और सोमी सरदार जी के रूप में तथा बाकी टीम मल्टीनेशनल कंपनी के एक्जिक्यूटिव की पोशाके में चल रही थी । शांत इन्होंने वहाँ से कोलकाता हवाई अड्डे के लिए किराये पर एक जीत ली और तुरंत रवाना हो गए । लगभग दो तीन किलोमीटर चले होंगे कि पुलिस की जवाब जस्ट ट्रैकिंग चालू हो गयी । लगभग आधा घंटा किलोमीटर पर बैरिकेट लगा रखे थे । बंगाल पुलिस के जवान डंडे बरसाते हुए उनकी जेब की तलाशी लेने आ गए । तलाशी में क्या मिलना था, ऐसा कुछ था ही नहीं तो मिलना क्या? फिर भी पुलिस ने कहा कि परिचय पत्र दिखाऊँ शिवा और सुमेश मन ही मन घबरा रहे थे कि अब क्या होगा । मिशन फ्रीडम के सह संयोजक विशाल ने तुरंत अपना बैग खोला । पांचों के वोटर आइडी उनकी फोटो के साथ वाले को दिखा दिए । पुलिस ने सब की सूरज की । फिर दोनों सरदारों का भी परिचय पत्र मांगा । विशाल ने भी दिखा दिया । उन्हें दिल्ली निवासी समझकर आराम से उनकी गाडी को पांच कर दिया । तब जाकर आर्या की सांस में सांस आई । शिवानी उत्सुकता से पूछा कि हमारा मतदाता पहचान पत्र आपके पास कैसे आया? टैक्सी ड्राइवर की तरफ दिखाते हुए हो तो पर उंगली रखने का इशारा करके शांतन बोला । जल्दी से एयरपोर्ट चलो । फिर उसने कहा उच्च तकनीकी युग में काम बडे जल नहीं होते हैं । विशाल ने आगे बताया माइक्रोसॅाफ्ट सब मेरे छोटे से बैंक में तैयार रहते हैं । संयोग वर्ष पुलिस ने उस बैग की तलाशी भी नहीं ली थी । पूरी टीम विशाल की योग्यता की घायल हो गई थी । साक्षी की आंखों में अपने लिए विशेष अनुराग एवं प्रशंसा के भाव देखकर विशाल का दिल बाग बाग हो गया । सिर्फ खुशाली क्या आर्या की टीम का प्रत्येक सदस्य अपने आप में विलक्षण था । उनकी इन्हें असाधारण क्षमताओं के बलबूते पर उनका मिशन फ्रीडम सफल हुआ था ।

Part 50

एयर इंडिया से एक बजकर चालीस मिनट पर उनके दिल्ली के लिए उडान थी । लगभग ग्यारह चालीस मिनट पर सब एयरपोर्ट पहुंचे । होता से सामान एक्स रे करवाया, अपनी बोर्डिंग पास ली । सुरक्षा जांच करवाकर जब अंडर प्रतीक्षालय में बैठे तब उन्हें उद्घोषणा सुनाई थी कि एयर इंडिया की उडान संख्या नौ सौ ना हो जो एक चालीस मिनट पर दिल्ली को जाने वाली थी । अब दो बज के तीस मिनट पर उडान भरेगा । हरियाणा भी है और घोषणा सुनी । उसने दो तीन मिनट तक चिंतन किया और तुरंत शांत जनों को पास बुलाकर सोमेश और शिवा को तैयार करने का दायित्व सौंपा । साथ ही साथ साक्षी को अपने ग्रुप की फिटनेस का जिम्मा दे दिया । मैं स्वयं फटाफट बाथरूम में चली गई । वहाँ के मुख्यद्वार को अंदर से बंद कर के सेटेलाइट फोन निकाला । सचित्र आंटी को फोन मिलाया ऍम लेकिन ही रिपोर्ट बताएं । ऑपरेशन सफल हुआ । आगे का क्या कार्यक्रम है? पीएमइंडिया नौ सौ नौ दोपहर ढाई बजे । कोलकाता से बहुत अच्छा और कोई विशेष बात सिर्फ आपको पता है और किसी को नहीं है । बेटे करता हूँ हूँ कि ओवरआॅल उसने लाइन काटने के बाद फोन को बंद करके अपने पर्स में डाल लिया । धडी देखी एक बजकर पचपन मिनट हो चुके थे । उद्घोषणा हो रही थी कि एयर इंडिया की उडान संख्या नौ सौ नौ यात्री द्वार संख्या एक से प्रस्थान करें । आर्या ने देखा शान दोनों बहुत अच्छे से अपना काम करके आया है । दोनों के हो लिए । पूरे बदल गए थे । शिवा बेहद आकर्षक । पैंतीस चालीस वर्ष का जवान लगने लगा था । सुने हैं गंभीर चिंता चिंग बुजुर्ग लग रहे थे । विशाल ने सबको द्वार संख्या एक पर बुला लिया हूँ । नंदिता और शांत दिनों की पास पास सीट थीं, जो उमेश शिवा और आलिया की एक साथ ही थी और विशाल साक्षी के पास बैठा था । उसने जानबूझ कर सीट नंबर ऐसे ही डलवाए थे । कभी चॉकलेट के बहाने कभी जूस के बारे मैं साक्षी से हाथ घर बैठने का प्रयास करता हूँ । साक्षी उसकी शरारत समझ गई थी, फिर भी ना समझ बनकर यात्रा का आनंद उठाने लगी । शांत इनोवा नंदिता धीरे धीरे गपशप कर रहे थे । शिवा ने आर्या के सिर पर हाथ फेरकर कहा, बहुत बुद्धिमान, बहादुर और होशियार हो । ऐसी प्यारी सी सहयोग बेटी पर हमें गर्व है । भार्या ने कहा आप जैसे महान पापा की बेटी हो ना । इसलिए फिर सोमेश की तरफ इशारा कर के कहा डाटा आप अपनी कहानी सुनाइए ना? सोमेश इस सवाल के लिए तैयार नहीं था । वॅाच आ गया उसके चेहरे पर एक रंग आ रहा था एक जा रहा था सम्भवता हूँ अतीत की यादव ने उसे उत्प्रेरित कर दिया हूँ । तभी आर्या ने पुनः अनुरोध भरे स्वर में आग्रह किया । बताइए ना गंभीर स्वर्ग में सोमेश ने बोलना प्रारम्भ किया । अंडमान निकोबार भी उस भयावह रात के बारे में जिसमें उसका सब कुछ उजड गया था । लाशों के बीच में चलती आग में स्वयं को पाने के बारे में अपनी प्रिय पत्नी सीमा और शिवा की तलाश में पागलों की तरह भटकने के बारे में फिर धक हारकर अपने गांव नक्सलबाडी पहुंचे और वहाँ माता पिता के हत्या है । दोटे दुखों के पहाड के बारे में बोलते बोलते सो में सिसक सिसक कार रोने लगा हो । शिवा और आर्या भी अपने आंसू नहीं हो पाएगा । कुछ समय पश्चात माहौल हल कासा सामान्य हुआ । तब आलिया ने आगे की बात पर आने के लिए पुनः अनुरोध किया । सुनेश बोला, उन दिनों की व्यथा को मैं आज अभागा बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था । शोक, संताप और सोना पाँच ही मेरे साथ ही थे, किंतु समय हर घास भर देता है । धीरे धीरे मैं समाज सेवा करने लगा तथा सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाना जाने लगा । मीडिया ने इतना सिर आंखों पर बिठा रखा था कि नक्सली समस्या के समाधान है तो वार्ता के लिए भी सरकार ने मुझे आमंत्रित किया । वार्ता के दौर प्रारंभ हो गए । मुझे माध्यम बनाकर सरकार नक्सली नेताओं को मरने लगी । वार्ता में गतिरोध उत्पन्न हो गया । मैंने इसके विरुद्ध आवाज उठाई तो राज्य सरकार ने मुझे जेल में डाल दिया और उम्र कैद की सजा सुना दी । मेरे दोस्तों के प्रयास और मानवाधिकार आयोग की कोशिशों से कोर्ट ने मुझे जमानत पर छोडा तो नक्सलियों ने अपने नेताओं की मृत्यु का कारण मुझे मान का उस खूंखार कैद में डाल दिया जहां से आर्या बेटियाँ निकालकर लाही हरियाणा आत्मसंतुष्टि के कुछ सवाल इस प्रकार सोमेश से करने लगी । क्यों से कुछ महसूस भी न हो आॅखो सच भी पता चल जाएगा । जब पापा से आपको छोडे थे तब इनकी उम्र कितनी होगी? लगभग तीन चार वर्ष हमारे पापा की कोई विशेष बात उस दिन इसका जन्मदिन था जिसके माँ सागर की गहराइयों में एक मोटी मिला था । उसने अपने प्यारे बेटे को पहना दिया था । मैंने एक इलेक्ट्रॉनिक घडी के हाथ में पहनाई थीं । पिता जी आपको कुछ याद है? हाँ, केशव मामा ने जब माँ को मुझे सौंपा था तब मेरे गले में धागे में लाल कपडे में लपेटा । कोई मोटी था माने लॉकेट बनाकर उसे हमेशा मेरे गले में रखा और जब नक्सलियों की कैद में मेरा ध्यान गया तब लॉकेट मेरे पास नहीं था । आर्य ने अपने गले से निकाल कर दिखाया । क्या इस लॉकेट को पहचानते हैं? हाँ तो यही था तो मैं कहा मिला सचित्र आंटी ने दिया । साथ ही उन्होंने बताया था कि आप गाडी पर जाने से पहले उनसे मिलने गए थे । आपकी जाने के बाद उन्हें ये सोफे पर गिरा हुआ मिला था । इस अभियान पर रवाना होने से पहले मैं उनसे मिलने गई । तब उन्होंने मुझे पहना दिया । अपनी मम्मी के हाथ का मोटी अपनी बेटी के गले में देखकर शिवा को बेहद प्रसन्नता हुई । ये संकेत था अब उसकी जिंदगी में तो ना बाहर आने का । आर्या ने अपनी बात जारी रखते हुए सोमेश से पूछा दादा जी क्या आपके पास डालिमा की कोई फोटो है? हाँ, बेटे और सोमेश ने अपनी पॉकेट से लेमिनेशन करवाई एक फोटो निकाल कर दिखाई । बोलते हुए उसकी आवाज भर्रा गई । यही थी तुम्हारी दादी जी शिवा और आ गया दोनों ने हाथ में लेकर फोटो को गौर से देखा हूँ । सही है सूरत जानी पहचानी लगी आर्य ने अपने दिमाग पर जोर डाला कि मैं कहीं तो देखा है, कहाँ देखा है अचानक को ध्यान में आया कि इन से तो मैं दो बार मिल चुकी । पहली दफा अपने स्कूल के बच्चों को बचाते हुए जगह नदी में डूब रही थी । तब और दूसरी बाहर जगह नक्सली लडाई में मरणासन में थी । तब इस तेजी ने मस्तिष्कीय तरंगों में अब तरीक हो कर उसे मौत के मुझे बचाया था । स्वतः आर्या के हाथ जुड गए । वे अपनी दादी माँ के समक्ष नतमस्तक नहीं । मैं आश्चर्यचकित थी उस महान आकर्षण के सिद्धांत के प्रति उस रहस्य के प्रति जिसने उस का साथ यादगार दादी वहाँ से कराया । ऍम ब्रह्मांड की सबसे बडी शक्ति करीब ये मानवीय विपत्ति पर विजय पाने की जबरदस्त ताकत है । प्रेम का भाव में सर्वोच्च फ्रीक्वेंसी है, जिससे मानवीय शक्ति द्वारा प्रेषित किया जा सकता है । परोपकार है तो प्रेम के भाव को जितना ज्यादा प्रेशर किया जाए, ब्रह्माण से उतनी शक्ति का दोहन कर मानवता हितार्थ उपयोग किया जा सकता है । कहीं भी किसी भी रूप में शिवानी भी अपनी जन्मदात्री की फोटो को मस्तक पर लगाकर प्रणाम किया । बचपन से आज तक शेर गाने हमेशा अध्यक्ष शक्ति के रूप में अपनी माँ को अपने पास पाया था । उसने हृदय की समस्त गहराइयों को पुनः माँ की फोटो को प्रणाम किया और पिताजी को हटा दिया । अब शिवा से अपने घर के बारे में जानना चाह रहा था । आर्या ने गमगीन स्वर में बताया आपके कैद होने की खबर सुनते ही दादा जी को दिल का दौरा पड गया था तो दिमाग अर्द्धविक्षिप्त हो गई थी तथा मां भी अपना मानसिक संतुलन खो बैठी थी । मैं भी दिन रात रोती रहीं । ताजा के बाद जाना है । बाबा के बाद जाना है । घर में सारे दिन किसी के भी आंसू सूखते ही नहीं थी । खुद भी समय पर खाना नहीं बनता था । बहुत उदास कहते थे ऍम बल दिया और हमें बहुत साहरा मिला । नौ महीने बाद जब से भाई आर्य आया तो सबकी जिंदगी पटरी पर लौटने लगी । शिवा को जैसे ही पता चला कि उसके एक बेटा भी है तो मन ही मन हर्षातिरेक से उछल पडा । वो सोचने लगा कि कितना सौभाग्यशाली है जो उसे पुत्र रत्न की भी प्राप्ति हुई है किन्तु वह ऊपरी तौर पर सामान्य रहा । अच्छा ही है तो तुम ने बडी अच्छी खबर सुनाई । कैसा लगता है तुम्हारा भाई शिवानी अत्यधिक उत्सुकता से आर्या से पूछा आर्या बताने लगी आपा जब मैं छोटा था ना, तब डालिमा हमेशा यही कहती थी । तीन तवे शिवा जैसा दिखता था । पडा हाइवा खेलकूद में वो हमेशा अव्वल रहा हूँ । एक बार जगह दस वर्ष का था । तब हमारी स्कूल बस नदी में गिर गई थी । तब अपनी जान की परवाह किए बिना उसमें कई बच्चों की जान बचाई थी । जहाँ एक और वह दादा दादी के पैर दबाए बिना नहीं होता, वही माँ के एक इशारे पर हाजिर रहता । अपनी बहन का मेरा भी बहुत आदर सम्मान करता है । मोहल्ले में भी सबका दुलारा है । प्रारम्भ से ही पैसों की कीमत समझता है । जब मैं कक्षा आठ में आया तब तो पहली दूसरी के बच्चों को ट्यूशन भी पढाने लगा था । आज तो सात सात बच्चों के तीन ग्रुपों को ट्यूशन पढाता है । घर में आर्थिक सहयोग तो करता ही है, स्वयं भी बहुत अच्छे नंबर लाता है । उसके सारे क्रियाकलाप देखकर दादी माँ प्राया कहती रहती है कि ये तो अपने पूरे का पूरा अपने पापा का डुप्लीकेट कॉपी है । जिम्मेदारी इतना है कि अभी अपने मिशन पर रवाना होने से पहले इतना परेशान थी । उसने तुरंत भांप लिया और बोला भी दी आप यहाँ की किसी तरह की चिंता मत करो । निश्चिंत होकर जाओ, मैं सब संभाल लूंगा । आप अपने काम में सफल हो कराओ । अपने बेटे के बारे में इतनी अच्छे बोर्ड सुंदर शिवा का दाल प्रफुल्लित हो गया । मन में आनंद की इन्होंने उठने लगी और अपने कलेजे के टुकडे को सीधे से लगा होने के लिए हिरदय से खु खु उठने लगी हूँ ।

Part 51

शिखर तक पहुंचने के लिए लक्ष्य भद्रता । श्रमशीलता धर्ता । इधर आत्मविश्वास के साथ संघर्षों से मुकाबला किया जाए तो सफलता अवश्य मिलती है । सुचित्रा की खुशियों का पारा बार ही ना था । आर्या से बात होने के बाद उसने फोन रख कर घडी देखेंगे तो एक बज के पंद्रह मिनट हो गए थे । समय बहुत कम था । व्यवस्थाएँ ज्यादा से ज्यादा करनी थी । उसने अपने सहायक को वहीं बुला लिया । उसने सबसे पहले शालों से फोन पर बात की कि कोई अति सम्मानीय मेहमान दिल्ली आ रहे हैं । आ रहा उनकी अफगानी में उनके पूरे परिवार को एयरपोर्ट पहुंचना है । तीन बज के चालीस मिनट तक सब तैयार रहे । उन्हें गाडी लेने आ जाएगी । शालू ने शहर से स्वीकृति दे दी । उसने सोचा शायद सुचित्रा के पुत्र के रिश्ते हैं तो कोई लडकी आ रही है । अनुव्रत सेवा भारती के अध्यक्ष अब्दुल्ला जी को कहलवाया की महत्वपूर्ण व्यक्ति आ रहे हैं । अगाह कार्य समिति के सभी सदस्य चार बजे डोमेस्टिक एयरपोर्ट पहुंचे । तीज इंडिया के मैनेजर जॉसेफ को बताया गया अति विशिष्ट व्यक्तित्व आज पहुंच रहे हैं । इसलिए उनका बैंड लेकर मुख्य अधिकारी एयरपोर्ट पहुंचे हैं । सब लोगों को विशिष्ट द्वार के पास एकत्र होने को कहा गया था । सुचित्रा ने सचिन को भी बता दिया था कि नाना जी के परम मित्र आ रहे हैं । अच्छा आज एयरपोर्ट चलना है । सारी व्यवस्थाएँ करके नियत समय पर है । एयरपोर्ट पहुंच गई वहाँ पर स्वागत सत्कार की तैयारियाँ देखकर सुचित्रा को संतोष था तो उन्होंने पांच बजे एयर इंडिया की उडान संख्या नौ सौ नौ के दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंडिंग की । उद्घोषणा हो चुकी थी । सुचित्रा ने एक बार पुनः सबको चेक किया । दाहिनी और इंडिया का बैंड परिपक्त खडा था किसी भीषण धुंध छोडने को तैयार, पास में मैनेजर जॉसेफ फूलमाला ली है तथा बाकी अधिकारी गुलदस्ते लिए खडे थे । उन्हीं के बगल में अनुव्रत सेवाभारती के कार्यकर्ता सफेद कुर्ते पे जाने में महिलाएं केसरिया साडी में तीन रन का गुलाल लिए खरीदी हूँ । किसी भी छान उडाने के लिए तैयार अब्दुल्ला साहब के हाथों में फूल माला थी । पाठक जीवन अन्य कार्यकर्ता फूल के साथ तैयार थे । हरी सेवक जी कामिनी, सत्यवान सावित्री आ रहे हैं और शालू एक पंक्ति में खडे थे । सचित्रा उन्हीं के पास थी । कामिनी ने आर्थिकी थाली पकड रखी थी हूँ । पाँच सात मिनट का इंतजार भी उन्हें बहुत सा लग रहा था । आखिर है पहला गया । इस की प्रतीक्षा कर रहे थे । उत्सुकता सबकी नजरें दरवाजे पर थी हूँ कौन है जी आई टी कौन है? अभी विशिष्ट व्यक्तित्व हूँ अगले ही क्षण आर्या प्रवेश द्वार पढ देखें सुचित्रा ने इशारा किया मधुरिम स्वरों के साथ बीच इंडिया का बैंड स्वागत के धन बजाने लगा । एक जैसी वेशभूषा एक जैसी लड डाल बडा मनोहरी द्रश्य था । आर्या के पीछे शिवा को प्रवेश करते ठीक सब अच्छे थे । ॅरियर आँखे फाड फाड कर देख रही थी की है हकीकत है सपना । शालू ने अपने आपको चिकोटी काटी की क्या है? पूरे जाग्रत अवस्था में है क्या यह सच्चाई है कि शिवा सामने खडा है हूँ । कुल मिलाकर आश्चर्यमिश्रित माहौल के साथ पूरे परिवेश में खुशियां फैल नहीं आ रहे । तुरंत होने पहचान गया हूँ और दौड कर अपने पिताजी से निपट गया । सेवाभारती के कार्यकर्ता तो रंग बिरंगे गुलाल लाने लगे । पाठक जी के साथ सब फूल बरसाने लगे । सुचित्रा ने सम्मान भरी नजरों से अपने गुरूजी का देखा और बेहद खूबसूरत खुशबूदार दोबारा उनका गुलदस्ता भेंट किया । शिवानी बारह तो आसमान में उडा दिया और देखा उन्मुक्त गगन में रंग बिरंगे गुब्बारें ऊंचाइयों पर जाते हुए बडे भले लग रहे थे । सत्यवान और सावित्री आगे आए । सावित्री ने बेटे के मस्तक पर तलाक लगाया । हाथ में मौली का रक्षा कवच बांधा । सत्यवान ने गोलेच्छा बलेडी खिलाकर उसका मुंह मीठा करवाया । शिवा ने आगे बढकर माँ पिताजी के चरण हुए हैं । पिताजी ने उसे गले से लगा लिया तो दोनों की आंखों में आज खुशी के हाँ सोशल मिला रहे थे । हरी सेवक जीवा काम ही नहीं आगे आए । कमीनी है जहाँ माता की आंखों में काजा डाला, पहन के पीछे का गाडी का लगाया ताकि दुनिया की बुरी नजर से बचा रहे हरी सेवक जी ने अपने गले से पवित्र रुद्राक्ष की माला निकालकर उसके गले में डालते हैं । शर्माती, सकुचाती शालू के नाइन्थ से नीर बाहर जा रहा था । फूट भर करा रहे थे । शरीर झनझना रहा था । जैसे ही शिवा करीब आया उससे आपके हाथों से पुष्पमाला गली में डाल दी । शुरू ने अपने सीधे से एक प्रकार के विशेष वाली जो शुभ अवसरों पर उपयोग की जाती है, निकालकर वही माला शालू के गले में डाल दी और उसे ऍम लिया । दिल की धडकने एक दूजे को दिल का हाल बता रही थी । आंखों से बहते आंसू दोनों को भी हो रहे थे । कुछ पल मेरे होश में आए और तुरंत अलग हो गए । अब्दुल्ला साहब ने अजमेर से ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती शाह की धार बार में चढने के लिए आई चादर शिवा को भेंट की । शिवा ने बडे आधार से ग्रहण किया । सिर पर लगाया । शालू के साथ मिलकर उसे स्पर्श किया । फिर बोला आप मेरी ओर से से पीर बाबा के दरबार में चढा दें । सब शिवा को धर्म शाह पुष्पगुच्छ भेंट कर रहे थे । शिवा इन्हें आ रहे हैं तो देता जा रहा था । कार्यालय सब आर्यका पकडाएं खिलाती हुई आगे आई और मम्मी पापा, दादा दादी, नाना नानी सुचित्रा अंटी सबके चरण छूए । रुंधे गले से सत्यवान बोले कितनी बहादुर लडकी है धो तो व्यक्ति का साक्षात् अवतार लगता है । फॅमिली बोली, दादा शक्ति का अधिकार में नहीं, आपके बेटे हैं शिवा जो कुछ कहना है नहीं कही । शिवानी कोराडिया को दूसरी तरफ से आने को अपने से सटा लिया और बोला इलाहाबाद की असली शक्ति उनके बच्चे ही होते हैं । मेरे बच्चे तो मुझे बहुत गर्व होता हूँ । अब तक आ गया की पूरी टीम भी सामान लेकर बाहर आ रही थी । आर्या ने सुचित्र आंटी एवं सबसे अपनी टीम का परीक्षा करवाया । सोमेश को शिवा के पुराने मित्र तथा साक्षी, नंदिता, शांतनु एवं विशाल का अपने दोस्तों के रूप में परिचय करवाया । फॅमिली ने तीन चार या को कीमती उपहार दिया । कुल मिलाकर अपूर्वा पहलाद कार्य अवसर ता हूँ । प्रगति हल्की हल्की फुहारों के साथ बैंड के स्वर में सर मिलाकर मधुर स्वरलहरियां छेड रही थी । वो शीतल बिहार फूलों की खुशबू के संघ मिलकर आस पास के वातावरण को मैं आ रही थी । वहाँ उपास्थित जान अतुलनीय उल्लास है । आप्लावित थे तो चित्र के चेहरे पर भी अद्भुत चमक थी । उपयुक्त अवसर देखकर वह एक तरफ खडे अपने पुत्र सचिन को लेकर आगे आई और बोली यह है हमारा एकलौता सुपुत्र सचिन । सचिन ने आगे बढकर सत्यवान, सावित्री, हरी सेवक जी, कामिनी, शिवा तथा शालू के चरण बढेंगे । सबने देखा गोरा चिट्टा छह फीट लंबा रोबीला नौजवान बहुत मनमोहक एवं आकर्षक लग रहा था । सचित्रा ने बात आगे बढाते हुए गंभीर स्वर्ग कहा । आज इन अनमोल घडियों में एक अलौकिक रिश्ते को लॉकिंग बनाने में आपका सहयोग चाहती हूँ । अपने बेटे सचिन के लिए हार या का साथ मानती हूँ । एक्शन के लिए जब ठहर गया इस अप्रत्याशित मांग की तो कोई संभावना ही नहीं । पिछले तो कोई भी नहीं सोच सकता था । शुभ समय पर सुबह योग से सब शुभ होता है । इतने बडे प्रतिष्ठित मंत्री जी का नवासा गवर्नर साहब का पौत्र कमिश्नर साहब का सुपुत्र सुचित्रा जैसी सहृदय माँ का लाल उच्च शिक्षित एवं कुछ पद पर कार्यरत कामदेव को भी मात देने वाले ऐसे युवक रखने को कौन अपनी बेटी नहीं देना चाहेगा । सचिन कनखियों से चुपके चुपके आर्या कर देख रहा था और हर या अभी कुछ समय पहले तक बहादुर झांसी की रानी छोडी हुई बनकर नजरें दिखाए खडी थी । शालू ने सिवा की और देखा शिवा ने सत्यवान की ओर सत्यवान सावित्री की ओर कुछ पहले बीते नजरो ही नजरों में स्वीकृति मिल गई । शालू होने से आगे बडी पर आर्य का हाथ सचिन के हाथ में थमा दिया । अगले ही शरद तालियों की गडगडाहट से पूरा एयरपोर्ट खून था । सुचित्रा ने शालू एवं शिवा से अनुरोध किया कि आज सा यहाँ उनका अस्तित्व स्वीकारें । उन्होंने अपनी स्वीकृति दे दी । सुचित्रा ने तत्काल वहाँ पर उपस् थित सभी व्यक्तियों को रात्रिकालीन प्रतिभोज पर अपने घर राजभवन में आने हेतु आमंत्रित कर दिया । हरयानी उनसे उसकी सहेलियों को एवं शालू को उनके करीबी रिश्तेदारों एवं मित्रों को भी बुलाने को बोल दिया । तभी आ रहने देखा । इसके बाद ही धीरो पत्रकार धडाधड वहाँ पहुंच गए । पता नहीं मीडिया में कैसे ये खबर लीक हो गई बल्कि एक साथ अनेक फॅमिली उनके चेहरों पर पढ रहे थे । इलेक्ट्रॉनिक कवरेज करने वाले पत्रकार अपने अपने चैनल के लिए इंटरव्यू चला रहे थे । वो आ गया । बेहद शालीनता से सब बातचीत कर रही थी । तभी पुलिस का सारेन सुनाई दिया और लाल बत्ती की गाडी आकर उनके सामने रखी । एक्शन के लिए सबसे रह गए दिल्ली के मुख्यमंत्री स्वयं हवाई अड्डे पर बहादुर बाप बेटी का सम्मान करने का उपस्थि थे । शिवा ने हाथ जोडकर नमस्कार किया और आर्या ने झुककर उनके पैर हुए । मुख्यमंत्री बोलेंगे । मुझे अभी सिर्फ पांच मिनट पूर्व सारी घटना की सूचना मिली । हमें हमारे राज्य के ऐसे बहादुर नागरिकों पर गर्व है । अभी तो हमें बैंगलोर जाना है । वहाँ से वापस आकर आप का एक बहुत बडा सम्मान समारोह दिल्ली सरकार की ओर से आयोजित किया जाएगा । आपको सम्मानित करके जहाँ हम गौरवान्वित होंगे, वहीं दूसरों को भी ऐसे साहासिक देशभक्तों के कार्यों की प्रेरणा मिलेगी । शिवा का परिवार इस नहीं, उपलब्धि आश्चर्यचकित था । प्रसन्न था किन तो हल्का साथ सहवाग जावे था । अभी वे किसी भी प्रदर्शन से दूर सिर्फ अपने परिवार के ही संघ रहना चाहते थे । अब सायंकालीन आयोजन है तो भी बहुत कम समय बचाता हूँ । ऍम सब तुरंत वहाँ से निकल गए । ठीक आठ बजकर दस मिनट पर शिवा के घर उन्हें ले जाने के लिए गवर्नर साहब की गाडी आ गयी । सत्यवान एवं साबित्री हरी सेवक जी हम काम नहीं बेहद गरिमा । मैं पहनावे में थे । खुशी से उनके चेहरे चमक रहे थे । आ गया कि ससुराल जो जाना था शिवा स्वयं किसी स्टेट के जमींदार से कम नहीं लग रहा था । आ गया । आधुनिक पहनावे में काफी जच रहा था । आ गया तो कहानी किस्सों में आने वाली स्वर्ग की अप्सरा लग रही थी । जिस दुरस्त कमांडो की पोशाक में जितने स्मार्ट लगती उससे कई गुना संदर रूपसिंह लाली बनारसी साडी में लग रही थी । शालू पार्टी सुन्दर लग रही थी । वर्षों बाद उसने आज शानदार किया था । खेलवाने असीम अनुराग से परिपूर्ण चाहत भरी दृष्टि से शालू को देखा दोनों क्या चार हुई शालू शरमाकर जमीन में गडी जा रही थी । मैं परिवार से संबंध जुडने की संभावना शिवम को रोमांचित किया जा रही थी । बेहद हर्षोल्लास के साथ मैं गवर्नर निवास पहुंचे । ड्राइवर ने पहले ही फोन कर दिया था गवर्नर साहब के संग । सुचित्रा ने प्रदेश द्वार पर उनका स्वागत किया । उसने अपने दाहिने हाथ से आर्या का दाहिना हाथ पकडकर गाडी से उतारा और उसके साथ सबको सम्मान मंच के पास ले गए । सचिन एवं आर्या को मंच पर रखी राजसी कुर्सियों पर एक साथ बिठा दिया । आज के इस भव्य आयोजन में सिर्फ नजदीकी रिश्तेदारों को आमंत्रित किया गया था । लगभग कुछ ही देर में सब मेहमान पहुंच गए थे । सुचित्र और कमिश्नर साहब ने आर्या को शगुन देने की रस्म अदा की । फिर सचिन ने आर्या को देश कीमती हीरे की अंगूठी पहना दी हूँ । नृत्य संगीत की महफिल के साथ बधाइयों का दौर प्रारंभ हो गया । स्वादिष्ट भोजन के साथ सब ने आयोजन का आनंद लिया । उसने बहुत मान सम्मान के साथ सबको विदा किया हूँ । चलते हुए उसने धीरे से शायद से कहा अब आ रही है, हमारी अमानत हैं, वो संभालकर रखेगा । विशाल तूने मुस्कराकर से ला दिया । फिर भी वैसे सचित्रा से बोली है शादी का बहुत निकलवाकर खबर करियेगा ।

Part 52

आज का दिन शिवा की जिंदगी का यादगार दिन रहा हूँ । घर पहुंचे तो उन्हें लगा कि कहीं हम दूसरी जगह तो नहीं आ गए । पूरा घर झिलमिलाती रोशनी में नहाया हुआ था । घर के अंदर प्रदेश करते ही गुलाब चमेली के ताजे फूलों की खुशबू आ रही थी । शालू एवं शिवा विस्मय भी मुक्त हो गए । उनका शहर कक्ष पूरा फूलों से सजा हुआ था । ये सारी व्यवस्थाएँ हारने अपने मित्रों से कर रही थी । वास्तव में संतानपक्ष से शिवा एवं शालू विशेष भाग्यशाली थे । लाखों में एक थे उनके बच्चे आर्या और ऍम शिवानी आर्य को पास बुलाकर बहुत प्यार दुलार । क्या उसकी पढाई की । दोस्तों की दिनचर्या की सारी जानकारी ली । पापा को वात्सल्य पाकर आर्य भावुक हो गया । उसने तो जन्म के बाद आज ही पिता जी को देखा था और उनका दुलार पाया था । शालों ने सुमेश अंकल की व्यवस्था अतिथि गृह में करने का कार्य आरे को सौंपा था । शिवा कुछ देर अपने पिताजी एवं माँ के पास बैठ गया । तभी रात्रि की पोशाक पहनकर आ रहे अभी वहीं चली आई । वहीं बैठकर दादा दादी, ऍम पापा की बातें सुनने लगी । फिर जी में से बोली पिता जी जहाँ बहुत हो गई है । चलिए सोने चले । पिछले कई रातों से मैं सोई नहीं थे । इसलिए शिवा और आर्या दोनों की आंखें लाल हो रही थी । हटा वह सावित्री बोली जाओ बेटे! अब सोचो शिवा को उनके सहन कक्षा तक छोड कर आ गया । अपने कक्ष में सोने चली आई । शिवा ने प्रवेश करते ही देखा । शालू दुल्हन बनकर घूंघट की उमठ में बैठी हूँ । वैसी ही लग रही थी जैसी विवाह की प्रथम रात में लगी थी । चमकीले चांद का टुकडा । बादलों की ओट में झांकता हुआ उसने धीरे से घुंघट उठाकर उसको अपनी बाहों में भर लिया । वो भी अपने पति के प्रति समर्पित हो गयी । वक्त ठहर सा गया था । न जाने कब निद्रा देवी ने कॉलेज से आकर उन पर अपना जादू चला दिया । अचानक उसकी आंखों नहीं, उसे भयंकर बेचैनी महसूस हो रही थी । उसका दिमाग खटका सोचने लगा, आज तो वर्षों बाद अपने घर आया हूँ । कितना चाहिए इतना सुकून? इतना सुख, कितना सम्मान और इतनी सुखी और इतनी खुशी बात कर तो मैं प्रसन्नता से सोया था । अब तो चाहूँ और शांति है । फिर मेरे मन में या शांति क्यों? कहीं ना कहीं आवश्यक कुछ न कुछ गडबड है । उसने शालों की और देखा है एकदम चैन की नींद सोई हुई थी । शिवा का काला शोक रहा था । कमरे के इधर उधर देखा । वहाँ पानी नहीं था । शायद रखना भूल गई थी । अतिथि कक्ष के उस और रसोई थी । शिखा पानी पीने निकला हूँ । सब तरफ अंधियारा था । अतिथि कक्ष में हल्की हल्की रोशनी थी । मैं दरवाजा खोलने आगे बढा । किन्तु को सोच कर तुरंत आता गया । उसने घेरी से दरवाजे पर कहाँ लगाया? उसे धीमी आवाज में सोमेश का सर्च नहीं दिया । सम्भवता रहे । किसी से फोन पर बात कर रहा था । हाँ हाँ क्यों नहीं निश्चित तौर पर आपको पूरे रुपये कल मेरी जाएंगे । वही पार्टी लेकर आएगी । पूरा का पूरा पेमेंट हाँ आठ से ठीक चार दिन बाद उसी जगह हथियार पहुंचाने चाहिए । हाँ एकदम पक्का । निश्चित तौर पर पूरी की पूरी खेप आधुनिक हथियारों की भेजते हैं । फॅर वार्ता लाभ के एक एक शब्द कोस उनका शिवा स्थान पर रह गया । वह आश्चर्यमिश्रित भागों से सोचने लगा पिता जी हथियारों की बातें क्यों कर रहे हैं? क्या वह भारतीय सशस्त्र सेना से जुडे हैं? हो ना हो कोई मेजर जनरल हैं अथवा सेना के उच्च पदस्थ अधिकारी हैं । तभी तो इतनी महत्वपूर्ण दायित्व निभा रहे हैं । सोमेश के प्रति अगाध श्रद्धा एवं गौरव के भागों से कल्पामृत होते हुए उसने सोचा कि इतने महान पिता का मैं पुत्र हूँ । मेरे लिए अति सौभाग्य की विषय हर्षातिरेक से उसका है फूलना समझा रहा था । वो दरवाजा खोलकर उनके चरण स्पर्श करने का सोच रहा था । इसके तो उसने अपना एक कदम आगे बढाया था की किसी ने पूरी ताकत से उसे पीछे खींच लिया । उसने चलाने के लिए मुंह खोला तो उसके बहुत को अपने हाथ है । उसी ने बंद कर दिया जिसमें उसे पीछे ही चाहता हूँ । उसके बहुत से निकली । ठीक अंदर ही अंदर घट कर रहे गई । मैं क्या क्या उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड नहीं सहमा हुआ । सब सोचने लगा कि इतनी रात गए उन के घर में कौन घुस गया । डरते डरते उसने गर्दन घुमाई, पीछे की और देखकर ध्यान रह गया । उसे रोकने वाला और कोई नहीं । उसकी अपनी बेटी आ रही थी । अपने होठों पर उंगली रखे हुए हैं । नए उसे मौन रहने का संकेत कर रही थी । चुपचाप वे दोनों दोबारा उसी घेरे के पास कटघर खडे हो गए । इतने में ही उसके कानों में सोमेश का स्वर्ग पुना सुनाई पडा हूँ । खान हो के राजा गौर से सुनो जैसे हमेशा तो मेरे बताए अनुसार योजनाओं को क्रियाविंत करते रहे हो, वैसे ही इस बार भी करना है । बहुत जल्दी सिर्फ चार दिन के भीतर आधुनिकतम हथियारों का नया जखीरा भाई पहुंच रहा है । तोरी चौकसी से सावधानीपूर्वक सुरक्षित स्थान पर रखना । पुलिस और सुरक्षाबल दोनों से संभलकर रहना, पूरी तरह सतर्कता एवं चौकन्ने रहकर ओ होशियारी से सारा काम करना है । किसी को कानोकान खबर ना लगे होंगे । ऍम शिवा के मस्तिष्क में भयंकर उथल पुथल मच गई । मैं सोचने लगा जिस नक्सलवादी की समस्या से जूझते हुए हैं, उसने अपनी जवानी लगा दी । जिस नक्सल वाट के खात्मे के लिए उसकी प्यारी पुत्री आर्या ने प्राणों की बाजी लगा दी । किस नक्सलवाद की समस्या को तिरोहित करने के लिए सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी थी । उन नक्सलियों के किले के ध्वस्त होने से पूर्व क्या उनके किसी प्रभावी कमांडर को मैं अनजाने में ही बचाना आया? अभी एक एक शब्द पिछले शीर्षक की तरह शिवा के कानों में उतर रहा था हूँ । पूरी बात समझते सुनते ही शिवा काॅन् गया । मैं बहुत चक्का रह गया । विचारों का भयंकर बवंडर उठ खडा हुआ । ऐसे लगा जैसे उसके दिमाग में सैकडों वाट की पवन चक्कियां एक साथ चल रही है । साया साया करता रेतीला तूफान उसकी आंखों के आगे छा गया हो । उसे लगा कि वह यही गश खाकर गिर पडेगा । बता मैं आ गया कि कंडे पर हाथ रखकर उसी दीवार का सहारा लेकर वहीं खडा हो गया हूँ । उसका दिल ये स्वीकारने को तैयार ही नहीं था कि उसके पिता सोमेश घोर सक्रिय नक्सली हैं, जिन्होंने उसे देश प्रेम का पाठ पढाया । आज मैं देशद्रोही कैसे हो सकते हैं, लेकिन अपने कानों से सुनी बात को भी वह कैसे झुठलाए । उसके मन में गहरा अंतरद्वंद्व चलने लगा । जिस मरणांतक कठोर कारावास से अपने पिता को निकाल कर रहे लाया ये एक पुत्र का करता था, जिसे उसने बखूबी निभाया । लेकिन अब क्या करें? जन्मभूमि के प्रति अपने फर्ज को कैसे निभाएं? संवेदनाओं और संस्कारों की रस्साकस्शी उसके भीतर ही भीतर चलने लगी । वह पसीने से तरबतर हो गया, किन्तु उसे पसीना पोछने का भी घोषणा था । आर्या के चेहरे से साफ झलक रहा था कि वह किसी प्रकार की दुविधा में नहीं थी और मैं अब निष्कर्ष तक भी पहुंच चुकी थी । उससे अपने पिताजी की है । हालत देखी नहीं गई । मैं अधीर हो गई । उसने शिवा का पसीना पहुंचा और हल्के से उनका कांदा थपथपाया । अपनी पुत्री का स्नेहिल स्पर्श पाकर मैं कुछ सामान्य हुआ । अब आर्या ने शिवा का बायां हाथ ऍम और अपने पैर की ठोकर से हूँ । अतिथि कक्ष का द्वार खोला और धीमे से भीतर प्रवेश किया । शिवाय हमारे को अचानक आया देखकर सुमेश हक्का बक्का रह गया । उसके चेहरे का रंग छोड दिया क्योंकि इस स्थिति के लिए तैयार नहीं था । आर्या पूरी बारीकी से उसके भावों के उतार चढाव का अन्वेक्षण कर रही थीं । भर शालीनता से बोली आप अभी तक सोचा नहीं क्या बात है आपको नींद क्यों नहीं आ रही है कि आप की तबियत ठीक नहीं है? सोमेश सहज होने का प्रयत्न करते हुए बोला हाँ बेटे शरीर का पोर पोर दुख रहा है इसीलिए नींद नहीं आई । अच्छा अच्छा ये बात है तो मैं अभी याद का दर्द की दवा देती हूँ । अरे हाँ, आप इतनी रात गए कि से बात कर रहे थे । आर्या ने बडी सादगी से सवाल किया जय संतई मानो सुनेश को साफ सोंग गया हूँ । उससे कोई जवाब देते नहीं बना का कहाँ ऍम कहीं नहीं फोन कर रहा था अब बाहर या असली रूप में आ गईं एकदम ढल स्वर में बोली सच सच बता दो रुपये तुम कौन हो? शिवानी उसे डाटा हमारे यहाँ अपने दादा से इस तरह बात नहीं करते । पिता जी आप इनके बहकावे में आ सकते हैं । मैं नहीं । मैं सत्य का पता लगाकर रहूंगी । उसने शिवा से कहा पुनः सोमेश से पूछा हूँ कृपया मुझे सत्य बता दें । वास्तव में आपका परिचय क्या है? मैं प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी का पुत्र और शिवा जैसे महान देश रेनी का पिता हूँ । सोमेश सडे हुए सर्वे जवाब दिया रिश्तों कि भूल भुलैया में भ्रमित ना करें । मुझे स्पष्ट करें कि आप क्या कार्य करते हैं । आर्या ने पुनः तल्खी से पूछा कहा ना मैं राष्ट्रभक्त अपना साथ समाजसेवी हूँ । मानवता का भला ही करना मेरा जीवन का लक्ष्य है । सोनी बेहद संजीदगी से बोला हूँ, लेकिन अब तो आर्या का पारा सातवें आसमान पर चढ गया हूँ । अपने आपको राष्ट्रभक्त कहते हुए आपकी जुबान दैनिक भी नहीं पसंद थी । हथियारों से होती हुई समाजसेवा लघु का दरिया बहाकर मानवता का भला करने चले हो । मुझे तो आप पर पहले ही शक हो गया था । जब मैंने आपकी कलाई पर तलवार पर लेफ्टिस्ट आपका निशान देखा था । ऐसे ही निशान उस नक्सली की कलाई पर भी था, जिसने इनकम पास में मेरे पैर में चाकू मारा था । आर्या के रुकने से पहले ही सोमेश बोला था कैसा नक्सली निशान मेरी कलाई में कोई निशान नहीं है । आर्या ने तुरंत उनका हाथ पकडकर सुमेश की बाई बाजू पर उठाई और शिवा को दिखाते हुए वाली ये क्या है? वास्तव में वहाँ पर लाल तलवार पर नीला सांप लिपटा हुआ निशान बनाता हूँ । उसका राज खुलते ही असलियत सामने आ गयी । बराब सुमेश पूरी तरह उग्र हो गया । आर्या से अपना हाथ चलो आते हुए आदेश में बोलने लगा । कालकी चौकरी में दैनिक तमीज नहीं है । बडों से कैसे बात करते हैं । ऐसी जगह जहाँ मेरा आदर नहीं, वहाँ मुझे एक्शन भी नहीं रहना । मैं जा रहा हूँ । अभी का भी हो रहे । वहाँ से निकलकर भागने का उपक्रम करने लगा हूँ । आ गया । उसकी चाल भाग गई । उसने साउंड ग्रुप मिस्टर निकली और निशाना लगाते हुए गोली दाग नहीं । उधर प्रदेश द्वार के पास खडा शिवा दौडा दौड कर अपने पिता को बचाने के लिए उनके सामने आ गया । गोली उसके पेट में जाना ही और गरम खून का फव्वारा छोड दिया । ये अघटित घटना देखा आ गया । एकदम प्रस्तर प्रतिमा बन गई । पिस्टल उसके हाथ से छूट गई और उसकी आंखों से अश्रुधारा चलीं । बुदबुदाने लगी हैं पिताजी की आपने क्या किया वो अपने पुत्र शिवा का अपने प्रति आपने क्रम्स में है देख सोमेश तब रह गया । उसने शिवा को जमीन पर नहीं गिरने दिया, अपनी गोद में लिटा लिया और उन्हें स्वर्ग में बोलने लगा और पुत्र तो नहीं ये क्या? क्या वो जैसे अब हम को मर जाने दिया होता । अरे मेरे जैसे निकृष्ट गाडी के लिए तुम ने अपना जीवन बलिदान कर दिया । एक और तो तुम जो जान पर खेलकर अपने पिता को बचाकर लाए और दूसरी ओर मैं नीच अदम जिसने अपने महान पुत्र रत्न की पर प्यारी पोती की कदर नहीं कि मेरी आंखों पर वहशी मौका पर्दा पडा हुआ था । ऐसे स्वर्ग जैसे घर में आकर भी मैं नरकीय प्राणी की तरह रहा हूँ । मेरे इन कुकृत्यों को भगवान भी शमा नहीं करेगा । पर हो सके तो मेरे लाल मुझे क्षमा कर देना । आर्या बैठी है तुम्हारा भी अपराधी हूँ । घोर अपराधी हो सके तो शर्मा कर देना । बेटी शमा करना कहते हुए रहते । ऐसे ही बैठे बैठे नीचे चुका । उधर आर्या के पास हैं । उसमें आ गया के पैर पकडने का प्रयास किया । आर्या ने अपने पैर पीछे हटा ली है । वहीं पिस्टल गिरी हुई थी । सोमेश ने पिस्टल उठाई और अपनी कनपटी पर लगा ली । वह ट्रिगर दवा था । इससे पूर्व आर्या ने उसके हाथ से पिस्टल झपट ली और दौड कर दरवाजे से बाहर निकल गई । एक्शन के लिए उसके मन में शालू को उठाने का विचार आया हूँ । शिवा की हालत देखकर उसने वह विचार त्याग दिया और शीघ्र अतिशीघ्र अपने कमरे से एक दुपट्टा और डिटॉल की बोतल ली । फिर अपने भाई आर्य को उठाने उसके कमरे में गए । उसने देखा उसके पास उसका सकाबी सोया था । वहीं उसकी गाडी की चाबी भी रखी थी । उसने आर्य को उठाने का विचार भी त्याग दिया और चार ही लेकर भागती सी शिवा के पास आई हूँ । उसके पेट से बहते खून को रोकने के लिए डिटॉल की बोतल डालकर अपना दुपट्टा बांदिया और बोली डॉक्टर के पास चलो पिता जी । उस ने उन्हें उठाकर खडा किया और धीरे धीरे सहारा देकर मुख्यद्वार तक ले गईं । सुमेश भी शिवा को दूसरी ओर से थाने हुआ था । बाहर खडी गाडी का दरवाजा खोलकर शिवा को उसने पीछे बता दिया । खुद ड्राइविंग सीट पर बैठ गई । सोमेश जब आगे के दरवाजे खोलकर गाडी में बैठने लगा तो आर्या बेहद गढा, तिरस्कार, शोभ के भावों के साथ ग्रुप नजरों से देखती हुई बेहद बेरुखी से बोली है हमें अपने हाल पर छोड दें । हमें जाने दे आप यही रहे और करपिया घर या दरवाजा अंदर से अवश्य बंद कर ले । आर्या के इस गठन के पश्चात सुमेश की गाडी में बैठने की हिम्मत नहीं हुई, किंतु अपने पुत्र शिवा के लिए उसका दाल बहुत था । मैं पीछे की खिडकी से शिवा को देखने लगा । शिवानी विनम्र भाव से हाँ छोड दिया । सुमेश ने भी आशीर्वाद की मुद्रा में अपना हाथ उठा दिया । तेज रफ्तार से कार रवाना हो गई । अब क्या होगा? बता नहीं शिवा बचेगा या नहीं । गहन ग्लानि भागों में निमग्न । सोमेश की आंखों शॅाप आंसू के रहे थे । दोनों हाथों से आंसू पोंछते हुए उसने मुख्यद्वार को अंदर से बंद किया और थके कदमों से पुनः अपने कमरे में प्रवेश किया हूँ । टूटा हुआ था । वही जमीन पर घुटनों के बल बैठ गया । उसके समक्ष खून ही खून फैला हुआ था । उसका अपना कौन रक्त से सने शिवा करो उसके सामने आ रहा था और लागू की एक एक बूंद पुकार रही थी ही लौटा हूँ । भीषण नरसंहार के चक्रव्यूह में न जाने कितने अपनों का खून बहा है । आपस पीकर आपके माता पिता के हत्यारों से बदला लेने के भेजने पडते क्या एक छलावा है? हो सकता है हत्यारे कभी की कभी मर गए हूँ । अब आप प्रतिशोध, हिंसा, नफरत, खूनखराबा इन सब से निर्वत हो जाओ मैं क्या मूँग की मृगमारीचिका से आज तक विनाशी हुआ है । पूरा का पूरा नक्सलवाद इसी मिथ्या मौकी आधारभूमि पर खडा है । जिस प्रकार आज एक पुत्र का रख देखकर एक बेटा भी लग रहा है नक्सलवाद से ना जाने ऐसे कितने निर्दोष पुत्रों का रख रहा है । उन पिताओं के है वहाँ पर क्या गुजर रही होगी? तो सोचो पिताजी सोच हूँ, चले गए उन्हें हम नहीं लौटा सकते हैं, किंतु भविष्य में तो ऐसा रक्तपात पर लगाम कैसी जा सकती है । तो मैंने एक निर्दोषों को बचाया जा सकता है । पिता जी आप कृपया देश की मुख्यधारा से जुडे अपनी क्षमताओं का राष्ट्र हित में उपयोग करें । देश के जनों को चाटने वाली दीमक नक्सलवाद का संपूर्ण सफाया करने में अपना अमूल्य योगदान दें । शुभ भाविष्य बाहें पसारे आपका स्वागत करने को तैयार रहेगा । पिताजी यहाँ आए हैं कृप्या अपने परिवार में लौटाइए सोमेश ने दोनों हाथों से अपने सर को थाम रखा था । लाहू की तो कार की प्रतिध्वनि के रूप में उसके अंदर अंतस्तल से निकली उसके अंतर्मन की आवाज ने उसे पूरी तरह से हिलाकर रख दिया था । मन मस्तिष्क में गहरा अंतर्द्वंद चल रहा था । पत्थर आई सी आंखों से वह खून के जमीन ठक को को एक्टर देखे जा रहा था । देखते देखते एक बिजली से उसके दिमाग में कौन नहीं । वो तुरंत खडा हो गया । कमरे में फोन के पास कागज और कलम रखी थी । उसने कलम उठाई । कागज पर अपने मनोभावों को अंकित किया । उसे टेलीफोन के नीचे इस प्रकार रखा ताकि वैदिकता भी रहे । कमरे से निकल कर उसने देखा हूँ । ऊपर आसमान में अंशु उधर की अरे नोमी उज्वल आभा अपने स्वास्थ्य स्वर्णिम सुंदर का संदेश दे रही थी । नैनो में नवीन स्वप्न और मन में दृढ निश्चय के साथ सुनील ने हल्के से मुख्यद्वार खोला और निकल पडा नहीं घंटा की ओर । अगली गली में ही उनके पारिवारिक चिकित्सक डॉक्टर शर्मा का निवास था । आर यानी उनके घर के सामने गाडी लगाई । फिर नीचे उतरकर वहाँ से घंटी बजाई । इतनी रात में घंटी की आवाज से चौक कर उठे । डॉक्टर शर्मा ने बरामदे से नीचे जाते हुए पूछा ऍम आर्या ने सहज सर ने कहा ऍम डॉक्टर साहब, मैं गया हूँ, इतनी रात गए कैसे आना हुआ? बेटे डॉक्टर शर्मा ने इसने मिश्रत जिज्ञासा से पूछा डॉक्टर साहब, आपातकालीन स्थिति है । कृप्या अब दरवाजा खोलते । डॉक्टर शर्मा ने ताला खोला और वहीं एक तरफ बने अपने लेने का भी ताला खोलकर बत्ती जलाएंगे । तब तक आर्या शिवा को लेकर ऊपर पहुंच चुकी थी । शिवा को देखते ही डॉक्टर शर्मा चौके अरे शिवा तो तुम कब आए और ये क्या हो गया? शिरा कुछ बोलता उससे पहले ही आ रहा बॅाजीरॅाव बोली लगी है खून बहुत बह चुका है । आप किसी तरह बचा लीजिए, सारी स्थितियां स्वयं आपको बताउंगी । कृपया आप पिताजी को गोली निकालकर उपचार प्रारंभ करिए । डॉक्टर ने गंभीर स्थिति को समझा हूँ । तत्काल अपने सहायक को बुलाया । शल्यचिकित्सा की मैच पर लिटाकर उन्होंने शिवा का निरीक्षण किया । गोली पेट में लगी थी । यहाँ अपनी मुख्य हाथों को फाड का बाहर नहीं निकली थी । ऐसा होता तो शिवा का बच पाना असंभव ता हूँ । लेकिन पास वाली आठ को उसने हल्की सी क्षति पहुंचाई थी । फिर भी अत्यधिक रक्तस्त्राव के कारण उन में व्यक्ति की कमी हो गई थी । हूँ । उताह तत्काल रख की क्या आवश्यकता थी? आर्या ने तुरंत अपने आप को प्रस्तुत करते हुए कहा, मेरा खून जुडा दीजिए । अभी हमें दरवाजा देखना होगा कि आपके रक्त का वर्ग इनमें से किसी से मिलता है या नहीं । सहायक ने आज जैसे कहा आ गया तुरंत बोल उठी मेरा ऍफ है । मैं तो रक्त की वैश्विक डांट आता हूँ । ये मेरे पिता जी के अवश्य लग जाएगा । आप कृपया शीघ्र अतिशीघ्र ऑपरेशन शुरू करिये । सहायक में एक्शन क्या? आर्या का गठन सही था । जब्त की व्यवस्था होते ही उसने शिवा को बेहोश करके चिकित्सा कार्यप्रारंभ कर दिया । गोली निकालना खंडित आठ को पूरी तरह जोडना और स्थानीय त्वचा पर सिलाई लगाने से संबंधित समस्त कार्यों में लगभग टेस्ट मिनट लगे । तत्पश्चात डॉक्टर शर्मा चिकित्सा कक्ष से निकल कर बाहर आए, वहीं आ रहा बैठी थी । उन्होंने बताया, शिवा कॉर्पोरेशन पूरी तरह से सफल हुआ है । अब खतरे से बाहर है । घंटे आठ घंटे में उसे होश आ जाएगा । पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद आर्या ने डॉक्टर शर्मा से कहा, डॉक्टर साहब, पिताजी को आप छुट्टी कर देंगे । डॉक्टर साहब बोले तो एक दो दिन तो इन्हें गहन चिकित्सा कक्ष में रखना होगा । बाकी स्वयं इनकी स्वस्थ होने की क्षमता पर सब कुछ निर्भर है । धन्यवाद डॉक्टर साहब, आप स्वीकृति दे दे तो मैं कुछ देर घर हुआ हूँ । आर्या ने विनम्रता के साथ पहुंचा हूँ यहाँ पे क्यों नहीं यहाँ की चिंता मत करना । यहाँ परिचारिका एवम कनिष्ठ चिकित्सक उनके पास उपस् थित हैं । शिवा की ओर से पूरी तरह से निश्चिंत होकर आ गया । घर पहुंची है । सुबह के लगभग साढे छह बजे दरवाजे पर ही उसे शालू मिल गई । चिंतित सफर में पूछा तो हूँ और तुम्हारे पिताजी कहाँ गए थे? मैं कब से ढूंढ रही हूँ । बस यही पास में प्रातःकालीन भ्रमण को निकले थे । बहना गए, लेकिन पिताजी को उनके मित्रों ने घेर लिया । कुछ देर बाद लौटेंगे । हाँ, मैं दैनिक नित्यक्रिया से निर्वस्त्र होकर आती हूँ । कहते हुए आर्या भीतर चली गई । उसने चोर नजरों से देखा । अच्छी कक्ष का दरवाजा बंद था । अठारह सोमेश भी था । सम्भवता उसकी आंखें लग गई हूँ । दरवाजे के समीप गईं । बिना आवाज के हफ्ता घुमाया और गेट खोलकर भीतर प्रवेश करता ही उसने पूरा दरवाजा बंद कर लिया हूँ । मोडकर बिस्तर की तरफ देखा । वहाँ सोमेश नहीं था । उसने सोचा शायद स्नान रहने होगा । धीरे से बातें उनका हैंडल कमाया । वह भी खोला था । मानव खाली कमरा आ गया को चुनौती दे रहा था । दीवार उसका मखौल उडा रही थी । खुली छह की संदेश दे रही थी । पाँच ही बढ गया । आ रहे हैं तो सोमेश है । ये उम्मीद थी उसके सामने कनपटी पर पिस्तौल ताने सोमेश का चेहरा उभर आया । मैं कहाँ थी कहीं उन्होंने आत्महत्या तो नहीं कर ली? अगर ऐसा हुआ तो वह पिताजी को कैसे संभालेगी? ये अपने पिता से कितना प्यार करते हैं कि उनके लिए मृत्यु का अ लिंकन करने में भी नहीं हूँ । मैं क्या करूँ? कहाँ खोजू नहीं । ऐसा सोचते हुए उसने कमरे में जाऊँ और दृष्टिपात किया । वर्ष पर पडे खून के को देखकर विचारों की दुनिया से निकल व्यवहारिक जगत में आ गई । उसने कक्ष को भीतर से बंद किया और स्नान घर से पानी की पार्टी मांग झाडू नहीं पानी डाल डाल का और झाडू से अगर कर उसने पूरा फर्स्ट क्या पार्टी मगर एवं झाडू पुणा । स्नान घर में रखकर एकदम तेज गति से पंखा चला दिया । खून का कोई निशान वहाँ नहीं रहा हूँ । यहाँ पी रक्तदान के बाद उसे गरमा गरम कॉफी पिला दी गए । तभी उसमें इतनी ऊर्जा थी । फिर भी इस कक्ष की धुलाई के बाद उसे थोडी थकान लगने लगे । हटा विश्राम करने के लिए रहे । वहीं बिस्तर पर लेट गई । उसने अंगडाई लेने के लिए हाथ उठाया तो फोन पर पेटी से उसका हाँ चार टकराया हूँ । उसने मोडकर उसे ठीक करके रखने की कोशिश की तो एक कागज उसके हाथ में आया है । उसे खोलकर पडने लगी हूँ । ऍम शुभाशीर्वाद तुम जैसा पुत्र पाकर मैं गौरवान्वित हूं । मुझ जैसा नाचीज आपके लिए तुमने जो बलिदान दिया है, उसे इतिहास स्वर्ण अक्षरों में अंकित करेगा । मैं ही निर भागी था, जब इतने अच्छे बेटे, बहू, पोता पोती के संघ भरे पूरे परिवार का सुख नहीं ले पाया । सम्भवता परिवारिक सुख मेरी किस्मत में ही नहीं लिखा । शायद यही मेरी नियति है । मेरी भगवान से प्रार्थना है तो मैं अवश्य बचाओगे । शालू बहुत गुणी है । उसने तुम्हारे विडियो मैं बहुत दुख झेले हैं तो उसका पूरा ध्यान रखना । आर्या बहुत प्यारी बच्ची है । उसका विवाह खूब धूमधाम से करना हमारे तो बिल्कुल तुम्हारा ही प्रतिरूप है । उसे छाती से लगाने को बहुत मन कर रहा है । उसे खूब आगे बढाना । शिवा अंत में तुम से सिर्फ इतना वादा करता हूँ कि तुम्हारा बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा । तुम्हारे सपने सच होंगे । मैं जा रहा हूँ तुम लोग मुझे खोजने की कोशिश मत करना । तुम्हारा अभागा पिता सो मैं ऐसे भाव प्रवण पत्र को पढकर आर्या धानुक हो गई । उसके नाइन ओके कोरो में दो मोतीझील मिलने लगे । उसने इन्हें अपने दादा सोमेश को समर्पित करते हुए आंखे पहुंच नहीं पत्र को संभाल कर रख लिया । सबको बताने के लिए एक कहानी बना ली और अतिथि कक्ष का द्वार खोलकर बाहर आ गई । नित्यक्रम की तरह ही हूँ उसने सत्यवान, सावित्री एवं शालू के चरण स्पर्श की है और उन्हें सूचना दी की अति आवश्यक कार्य विश सुमेश अंकल चले गए । पिताजी रात को गंभीर रूप से अस्त व्यस्त हो गए । बताओ ने अकस्मात डॉक्टर शर्मा के यहाँ भर्ती करवाया है । जकाया की है । समाचार सुनकर सबको चिंता हो गई । तीनों वही चलने की जिद करने लगे । भार्या ने बडी मुश्किल से उन्हें रोका और बोलिंग घंटे भर बाद हम सब उनसे मिलने चलेंगे । कुछ देर उन्हें पहला फुसलाकर चुपके से पिताजी के बाद चली गई । तब तक शिवा होश में आ चुका था । उसने शिवा को भी पूरी पट्टी पढा देखो । डॉक्टर शर्मा को भी बातों बातों में विश्वास में ले लिया । इधर से आश्वस्त होकर आ गया दादा दादी एवं अपने माता पिता जी से मिलने आ गई । चिकित्सा कक्ष में शिवा की हालत देखकर सत्यवान, साबित्री एवं शालू अपना आपा खो बैठे । बच्चों की तरह मिला कोठी हाँ ऐसे सब कहाँ संभालने वाले थे डॉक्टर शर्मा को बुलाया नहीं डॉक्टर साहब ने उन को समझाते हुए कहा कि अब स्थिति खतरे से बाहर है । अचानक पेट में भयंकर दर्द उठा था तो पत्नी का ऑपरेशन तुरंत करना पडा तो समय रहते इन्हें आ रहा यहाँ ले आई तो उचित चिकित्सा हो गई । अन्यथा कुछ भी हो सकता था । अब एक दो दिन में पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे । तब आप इन्हें घर ले जा सकते हैं । आप लोग निश्चिंत रहे हैं । डॉक्टर शर्मा के धीर गंभीर वक्त मैंने गहरा असर दिया । सबकी आकांक्षाएं समाप्त हो गई । अगले दो दिनों में शिवा घर लौट आया । उनकी जिंदगी सामान्य रूप से चलने लगी । सचित्रा अपनी बहू आ गया के लिए नीट किए पकवान भेज बातें सचिन जब भी मिलता आर्या को बहनों से लाभ देता । शादी का मोहलत नौ महीने के बाद निकला था किंतु अभी से जोर शोर से तैयारियां चल रही थी । आखिर इंतजार की घडियां खत्म हुई । नियत समय पर शुभ मुहूर्त के आ गया । वह सचिन का विवाह बहुत धूम धाम से किया गया था । वहाँ से लिपट कर रोने लगी । शालू तो फेरों के समय से हीरो जा रही थी । अपनी बिटिया को विदा करते उसका कलेजा फटा जा रहा था । शिवा ही खडा था वो हाँ बेटी दोनों के आंसू पोछने लगा वो पंडित जी कहने लगे नौ हो गया है बेटा घडी में विलंब हो रहा है । बिटिया को शीघ्र कार में बैठा हूँ । आ गया अब अपने माता पिता के सीने पर सर रखकर होने लगी हूँ ये आंसूओं का प्रतिदान अनुदान भी कितना विलक्षण है ना जिससे अपूर्वा आनंद की अनुभूति होती है । बिना कुछ बोले शिवा उसका सार ठंड तो बता रहा हूँ और उसकी आंखों से निकलता नीर भी बिटिया की विधायी में शामिल हो रहा था । फिर या नहीं अपनी मुट्ठी खोलकर चुपके से एक पत्थर शिवा की हाथ में पकडा दिया । शिवा ने उसे यथावत अपनी पतलून की जेल में डाल दिया । सब ने मिलकर आ रहे को विदा दिया । शिवा और शालू वहीँ खडे थे । आर्या की गाडी के पहियों से उडती धूल भी बहुत भरी लग रही थी । ये तरफ असीमानंद था बिटिया को योग्य वर को सौंपने का तो दूसरी तरफ अजीब सा खाली था । फॅमिली के चले जाने का । सारे कार्य को निपटाते निपटाते रात के लगभग तीन चार बज गए थे । सोने की तैयारी में शिवा रात्रि पोशाक पहन रहा था हूँ । अभी उसके हाथ में आ गया का दिया पत्र आया पर हम पूछे पिताजी सादर चरण पढे । आप मुझे आज करके बिल्कुल रोना नहीं हूँ । यहाँ पास ही तो जल्दी जल्दी मिलने आ जाउंगी । आप माँ का पूरा ध्यान रखेगा । उन्हें दवाई लेनी आती नहीं रहती है । कृपया बराबर देते रहेगा । फिर कक्ष में मेरी स्टडी टेबल के ऊपर एक विश्वकोश रखा है, उसमें पीले रंग का ले पाता है जिसमें पत्र हैं जो मुझे सुमेश दादा जी के जाने के बाद मिला था । आप कृपया उसे संभाल कर रख लीजिए । शिवानी थके थके कदमों से आर्या के कक्ष में प्रवेश क्या आ गया कि विधायको मुश्किल से तीन चार घंटे हुए थे, किंतु कमरे में एकदम सन्नाटा छाया था । वहाँ की एक एक चीज बहुत उदासी लग रही थीं । शिवार वहाँ ज्यादा देर खडा नहीं रह सकता हूँ । उसने देखा उसकी टेबल पर मोटा सा विश्वकोश रखा था । उसने उसे खोला तो लिखा था मिल क्या शिरा उसे लेकर अपने कमरों में आ गया । पानी चलने की आवाज से लग रहा था शालू संभाविता बातों में थी । शिवा लिफाफा खोलकर पता पडने लगा । मोदी से लिखावट के साथ दिल से लिखा हर शब्द शिवा के दिल में जाकर दर्द पैदा कर रहा था । उसकी आंखों से आंसू कर रहे थे । उसने पत्र समेटा । पुनः लिफाफे में डाला और अपनी डायरी में रख दिया । वो वहाँ खडा खडा रह जा रहा था । कितने में शालनी भी बातों से निकाल नहीं । शिवा के आंसू उनका देकर उसे भी आर्या की याद आने लगी । पति पत्नी न जाने कितने देर तक एक दूसरे से लिपट कर रोते रहे । कुछ समय पश्चात शिवा को गहरी नींद आ गई । वो अपने लोग में विचरण करने लगा हूँ । सोमेश पुलिस का मुखबिर बन चुका हूँ । सबसे पहले हथियारों की खेप रखवाने के लिए उसने पुलिस मुख्यालय सूचना भिजवा दी । इसलिए आधुनिकतम हथियारों का पूरा जखीरा पकडा गया । जो धनराशि इसके बदले दी जानी थी, उसे अपने पास मंगवाकर उसने गडचिरौली के गरीब आदिवासियों में बंटवा दी । किसी ने घर खरीदा, किसी ने खेत, किसी ने दवाइयाँ ली तो किसी ने अपना धंधा शुरू किया । इसी बीच सोमेश को पता चला कि कोबरा बटालियन भी उसकी क्षेत्र में आई हुई है । उसने अपना दिल मजबूत करके राजा मुखिया की गुप्त सूचनाएं वहाँ तक पहुंचा नहीं । ये राजा मुखिया मास्टरमाइंड का दायां हाथ था, जो नक्सलवाद के द्वारा व्यवस्था परिवर्तन की लडाई लड रहा था । जिसमें केंद्र सरकार को सीधे चुनौती दी थी और नक्सल वाज को सबसे बडा खतरा बताने के लिए केंद्रीय नेतृत्व को मजबूर कर दिया गया था । पिछले पच्चीस वर्षों से वह केंद्र व राज्य सरकारों के खिलाफ देश में अलग अलग नामों से विभिन्न भागों में सक्रिय कर रहा था । राजा मुखिया को पकडने की योजना बनाई गई है । इस हेतु अब लगभग तीन चार हजार ग्रामीण के साथ लेकर बंगाल के जंगलमहल इलाके में दबिश बढाई गई और कोबरा बटालियन के जवानों ने उसे मार गिराया । पुलिस को सोमेश ने कुख्यात नक्सली महिला नेत्री काफिया महत्व का सुराग भी भिजवा दिया । उसे भी स्थानीय ग्रामीणों की मदद से दबोचा गया और कोबरा बटालियन ने उसे मार गिराया । सोमेश ने पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया पीएलएफआई के प्रभावी कमांडर तो डॅडी की सूचना भी सुरक्षा बलों को भिजवा देंगे । मैं अत्याधुनिक हथियारों के संचालन के साथ साथ आधुनिक संचार प्रणाली का क्या आता था? उसके भाषण नए रंगरूटों में जोश पैदा करते थे जिसने लगभग दो सौ मोबाइल टावरों को उडा दिया था । एक के बाद एक सफलता हासिल करते हुए कोबरा बटालियन ने उसे भी मार दिया । इन सब नक्सलवादियों के ऊपर करोडों की नामी राशि थी जिससे उनके क्षेत्रों में हाँ तो हाथ सरकार ने भिजवा दिया । ये तमाम रुपया संबंधित ग्रामीण के विकास है तो उन्हें दे दिया गया पुलिस को सोमेश ने सुदूर इलाकों से नक्सली ठिकानों का पता भी भिजवाया जहाँ सेना का पहुंचना बेहद जोखिम भरा था । भवन अथवा मानवरहित छोटे विमानों से हमले के उन ठिकानों को भी नष्ट कर दिया गया है । यद्यपि ऑपरेशन जय हिंद से नक्सली हेडर्क्वाटर एवं अधिकांश लडाकों का खात्मा हो गया था । इसके अलावा जिन नक्सली नेता लडकों के साथ नक्सलवाद के पुन अपन अपने की संभावना हो सकती थी उनका भी अब खात्मा हो गया था । तो बता एक बार एक तरफ का कार्य लगभग पूरा हो गया था हूँ । किन्तु इससे भी आवश्यक कार्य था उन परिस्थितियों को समाप्त करना जिसने सोमेश मास्टरमाइंड पैदा किया था । कुशाग्र बुद्धि सुमेश के पास सशक्त नेटवर्किंग थी । पूर्व कार्यक्षमताएं थी । उसे नक्सलवादियों की अकूत धनराशि की जानकारी थी । स्थानीय ईमानदारी समाजसेवी कार्यकर्ताओं के माध्यम से उसने विद्यालय, चिकित्सालय, संचार व्यवस्थाएं आधी के काम में शुरू करवा दी । अनेक लोगों को उनकी क्षमताओं के अनुसार रोजगार मिल गए । वहाँ शांति बहाल होने से स्वयंसेवी संस्थाएं भी काम करने लगी । अनेक युवा, चिकित्सक, शिक्षक, प्रशासक आदि अपनी सेवाएं देने वहाँ पहुंच गए । इसका एक कारण और भी था । यहाँ उनका वेतन अनुष्ठानों से सब आया था एक आकर्षण और विधा जो प्रोफेशनल अपने कार्यों से तुरंत अच्छे परिणाम देते एवं उन्हें प्रणाम प्रस्तुत करते हैं तो उन्हें तुरंत बोनस भी दिया जाता हूँ । प्रशासन एवं पुलिस दोनों में कहीं पर भी भ्रष्टाचार की गुंजाइश नहीं रही है । केंद्र का भाई, हर प्रमाणिक ईमानदार अफसरों की नवनियुक्ति ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की राहों में चार चांद लगा दिए है । सोमेश नहीं अपने गांव नक्सलबाडी में अपने स्वतंत्रता सेनानी पिता के नाम पर एक मुख्य सडक का निर्माण करवाया । अपनी माँ के नाम से चिकित्सालय बनवाया और अपनी पत्नी के नाम पर लडकियों की उच्च शिक्षा है तो सोमेश सीमा महिला महाविद्यालय की स्थापना कि अपने पुश्तैनी घर को भी उसने स्मारक बना दिया हूँ । जिसका नाम दिया शिवालय । जहाँ जरूरतमंद कन्याओं को सिलाई बुनाई कढाई का प्रशिक्षण देते हुए अपने पैरों पर खडा होना सिखाया जाता था । जल्दी ही उसका ये आर्या स्वरोजगार केंद्र बहुत प्रसिद्ध हो गया और इस की तर्ज पर आस पास ऐसे अनेक प्रशिक्षण केंद्र खुलते गई हूँ । सोमेश को मालूम था कि सीमा को भीत संगीत से बेहद रखी थी । मैं उच्च कोटि कलाकार थी हूँ । बता उसकी स्मृति में आदिवासी कलाओं को जीवित रखने के लिए सोमेश ने सीमा प्राचीन कला केंद्र की भी स्थापना की । अपने परिवार के नाम पर वे समाज हेतु बहुयामी सृजन कर रहा था । प्राथमिक पाठशालाओं, सुलभ शौचालयों एवं दलित चिकित्सा लाओ के निर्माण एवं सफल संचालन का दायित्व प्रशासन भी बखूबी निभा रही थीं । इन सब प्रयासों से अतिशीघ्र नक्सली इलाके शांत इलाकों में बदलने लगे और आश्चर्यजनक रूप से वहाँ की विकास दर अन्य राज्यों से बहुत तीव्र थी । सुमेश को संतोष था कि उसने देश हित में जितना उससे संभाव हुआ, उसने अपना पूरा प्रयास किया और सबसे बडी बात अपने प्रिय पुत्र शिवा से किया गया । अपना वादा पूरा किया । बस उसका अब अंतिम कार्य विशेष रहा था । क्या था वह अंतिम कार्य फोन की घंटी तीव्रता से घनघना रही थी है । उसकी तेज आवाज से गहन सपने लोग में विचरण कर रहे शिवा कि नहीं तोड गए हैं । सुधा के लगभग नौ बज गए थे, किंतु नींद से बोझिल पलकें खुल ही नहीं नहीं थी । उसने सोचा शालू फोन डालेगी । ऍम घंटी बजती ही जा रही थी । उसने आंखें खोलकर देखा । वहाँ शालू नहीं थी । आखिरकार जबरदस्ती उसने फोन उठाकर हैलो बोला, ऍम! वह मैं सोमेश बोल रहा हूँ । तुम्हारा बेटा सोमेश की आवाज सुनते ही उसकी पूरी नहीं बोल गयी । वो उठकर बैठ गया और अच्छा चाहता सा हो जाता है । नाम पता जी ऍम सुमेश ने कहा हूँ । फिर आगे अपनी में बोलता चला गया । आर्या का विवाह बहुत धूम धाम से हो गया । मुझे बेहद खुशी हुई । उसे मेरा आशीर्वाद कहना । मैं उसी दिन का इंतजार कर रहा था । आज मैं असीम आठवां संतोष का अनुभव कर रहा हूँ । मेरे सभी कार्य संपन्न हो गए । मैंने तुमसे किया हुआ वादा भी पूर्णता निभा दिया । मेरे पुराने कार्यों से तो मैं बहुत दुख पहुंचा है और सके तो मुझे माफ कर देना । बेटा शालू ऍम तो मैं मेरा सी मार्शल बाद है । आज प्रेस कॉन्फ्रेंस है । उसी में प्रशासन एवं पुलिस कमिश्नर के समक्ष मैं आत्मसमर्पण करने जा रहा हूँ । मेरी चिन्ता करके तुम बिल्कुल अधीर ना हो । ना मुझे याद करके कभी भी मत होना । हाँ हो सके तो मुझे छमा आवश्यक कर देना । क्षमा करना बेटा शमा करना ऍम हैं ।

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