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रहस्मय टापू - 01

आप सुन रहे हैं हुआ हूँ । किताब का नाम हैं रहस्यमई टापू जिससे लिखा है रॉबर्ट ऍम और आवाज दी है ऍम तो फॅमिली सुने जो मनचाहे वो गांव का मुखिया । डॉक्टरों मेरे बहुत सारे मित्र मुझ से बार बार समुद्र के निर्जन टापू के खजाने से जुडा किस्सा लिख देने के लिए कहा करते थे । आखिर एक दिन मैंने अपनी लेखनी उठाई और उस रोचक रोमांचक अभियान को कागजों पर उतारने के लिए बैठ गया । मेरे पिता का समुद्र किनारे एक छोटा सा लॉन्च था । वह ज्यादा चलता नहीं था । बहुत कम लोग वहाँ ठहरने के लिए आते थे । मुझे अच्छी तरह से याद है कि एक दिन पूरा मछुआरा वहाँ ठहरने के लिए आया । उसके पीछे कुछ लोग बडी सी की जोडी लेकर आए । वो मछुआरा लम्बे काट का था और उसकी कट घाटी बहुत मजबूत थी । उसके हाथ खुरदुरे थे और उन पर छोटों के अनेक निशांत है । उसके गाल पर तलवार की चोट का कह रहा हूँ । वो लॉज में पडा प्रदर्शन आपकी तरह था और पुराना समुद्री गीत गाता रहता । गीत के बोल कुछ शायद ऐसे थे मुरुद दी की थी । जो भी पंद्रह लोग छत्तीस दारू बूढे आते मौज मुर्गी की तिजोरी पंद्रह लोग छत्ते दारू उडाते हूँ । आते ही उसने मेरे पिता से कहा था मैं यहाँ कुछ दिन रुकूंगा । मैं बहुत ही सीधा साधा । दिल्ली मुझे सादा भोजन और सस्ती शराब चाहिए । मैं यहाँ रहकर आने जाने वाले जहाजों पर नजर रखूंगा और तुम मेरा नाम जानना चाहते हो तो समझ तो मुझे का काम कह सकते हो । ये सब कहने के बाद उसने मेरे पिता के सामने सोने के चार सिक्के साइकिल हुए कहा जब भी एक हो जाएंगे तो मुझे बता देना मैं और सिख के दे दूंगा हूँ । उसकी आवाज बडी हूँ । उसके कपडों पर कई तरह के ताग लगे हुए थे । पडा हूँ बाहर देखता हूँ । मैंने सोचा कि वह किसी किसी जहाज का कप्तान रहा हूँ । सारा दिन वो समुद्र के किनारे बैठा रहता और दूरबीन से आने जाने वाले जहाजों को देखता रहता हूँ । शाम होते ही वो लॉन्च के सामने कमरे में आप जलाकर बैठ जाता हूँ और शराब पीने लगा । दिन भर घूमता रहता हूँ और लौटते ही पहुंचता क्या सडक से कोई नाविक गुजरा था । जब कोई भी नाविक लॉज में आकर रुकता है तो उस दौरान वो चुपचाप अपने कमरे में छूटने की तरह दुख का रहता है । एक दिन मुझे एक और ले गया और मेरे हाथ में चांदी का एक सिक्का हम आते हुए कहने लगा बेटे जरा तुम समुद्र पर मैं चल रखा करो । यदि किसी दिन कोई लांगणा मछुआरा दिख जाए तो? रन मुझे खबर करना । उस दिन से ऐसा हुआ कि मैं उस लग रहे मछुआरे के बारे में सोचने लगा । ऍम छुआरा मेरे सपने में आकर मुझे डराने लगा । जब कभी समुद्र में तो होता है वो लंगडा मछुआरा मेरे चारों पर अभी हो जाता हूँ । इस प्रकार कई महीने गुजर गए । हर महीने एक चांदी कर सिक्का मुझे धमाल था, लेकिन ये सिक्का मुझे महंगा पड रहा था क्योंकि रहे लेकर मेरे ख्यालों में वन लंगडा मछुआरा ही चाहता हूँ । मेरे मन से अब उस कप्तान का भय निकल चुका था । हर शाम वह मुझे गीत सुना था । बहुत सारे समुद्री गीत या आप उसे वो तरह तरह की कहानियां भी सुना था । उसकी सारी कहानियां डाॅ तो बताता है कि उसकी सारी जिंदगी समुद्री डाकुओं और खतरनाक से लोगों के साथ कुछ नहीं है । मेरे पिता के पास उसमें जो रकम जमा की थी वो खत्म हो चुकी थी । किराये और खाने की बडी रकम उस पर चढ गई थी । पर मेरे पिता उससे तकाजा करने का साहस नहीं जुटा पाते थे । एक बार हिम्मत जुटा के जब उन्होंने उससे पैसे की मांग की तो कप्तान आग बबूला हो गया । मेरे पिता डरकर फौरन कमरे में चले आए । जब तक कप्तान लॉज में रहा, मैंने कभी उसे कपडे बदलते नहीं देखा हूँ । उसका कोर्ट बहुत गिर रहा था । जब कभी वह नशे में होता तो आस पास के लोगों से बात नहीं करता हूँ, वरना अपने आप तक सीमित रहता है । लोग उससे बहुत डरते थे । उसके कमरे में रखी तिजोरी हमेशा बंद रहती है । किसी ने उसे खुला हुआ नहीं देखा था । मेरे पिता का स्वास्थ्य निरंतर खराब हो रहा था । एक दिन तो पर बात हमारे कस्बे के डॉक्टर साहब में देख रहे हैं । डॉक्टर साहब अपना काम समाप्त करके बरामदे में पाइप सुलगाकर बैठे थे । एक का एक कप्तान जोर जोर से अपना पुराना गीत गाने लगा । सिर्फ डॉक्टर साहब के पास पहुंचकर टेबल पीटने लगा । डॉक्टर ने आदेश के सर में का शोर नहीं कप्तान आमने आंखे तरेर कर डॉक्टर की ओर देखा तो डॉक्टर ने उसे गुजरते । वो का यदि तुम इस तरह शराब पीते रहे तो इस धरती को तुम जैसे गंदे और बदमाश आदमी से चलती छुटकारा मिल जाएगा । कप्तान का चेहरा गुस्से से तमतमा होगा । वो उछलकर खडा हो गया और जेब से लंबा सा चाकू निकालकर डॉक्टर को घूमने डॉक्टर साहब वहीं खडे हैं । बडे शाम भाव से कहने लगे यदि तुमने तुरंत ये चाहूँ अपनी जेब में नहीं था तो समझ लेना तो मैं फांसी के तख्ते तक पहुंचाने में मुझे अधिक समय नहीं लगेगा । तो मैं मालूम होना चाहिए कि मैं केवल डॉक्टर ही नहीं इस इलाके का मजिस्ट्रेट भी हूँ । आज के बाद मुझे तुम्हारे बारे में कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए वरना तो मैं परिणाम भुगतना पडेगा । ये कहकर डॉक्टर साहब अपने घोडे पर सवार होकर वहाँ से चलेंगे कहाँ कुछ काम से कई दिनों तक कप्तान चुप रहे ।

रहस्मय टापू - 02

उस साल बहुत सर्दी पड नहीं । मेरे पिता की बीमारी बढती जा नहीं जनवरी का महीना था । एक दिन कप्तान समुद्र किनारे पहनने के लिए निकला हुआ था । माँ ऊपर के कमरे में पिता के पास मैं नीचे लॉन्च के नाश्ते के लिए टेबल लगा रहा था । एक एक दरवाजा खुला और एक अजनबी भीतर दाखिल हुआ । उसके चेहरे कारण पीला था और उसके बाएं हाथ की दो उंगलियां गायब नहीं । वो आप ही टेबल पर बैठ गया और मुझे शराब लाने के लिए कहने लगा । मैं जैसी कमरे के बाहर जाने को हुआ । उसने मुझे इशारे से रोका और पूछने लगा क्या मेरा साथी बिल्लू इसी रोज में है? मैंने बताया इस नाम का कोई व्यक्ति यहाँ नहीं देता । पर कप्तान नाम का एक बूढा व्यक्ति जरूर रहता है । इस समय वो बाहर घूमने के लिए गया है । वह कहने लगा हाँ वही उसके गाल पर तलवार के गांव का निशान हैं । मैंने हाल में से हिला दिया । वहाँ अजनबी लॉन्च के प्रवेश द्वार के पीछे छुपकर खडा हो गया जो दिल्ली की तरह चौकन्ना खडा था । जो किसी चूहे की आने का इंतजार कर रही हूँ, वहाँ भी मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता । मैं वहाँ से बाहर की ओर जाने लगा तो मेरा हाथ पकडकर उसने मुझे भीतर खींच लिया और अपने साथ सटाकर दरवाजे के पीछे खडा करेंगे । मैं इस घटना से बहुत डर गया हूँ । सेम से लौटकर कप्तान दरवाजे से भीतर दाखिल होकर अपने कमरे की और बढने लगा है तो वो व्यक्ति चिल्ला बिल्लो उसे देखते ही कप्तान का जयराम फीका पड गया तो उसने इकाई किसी बहुत को देख लेता हूँ बताने का काला होता हूँ । जवाब में मिला कम काला होता हूँ । कप्तान ने उससे का थोडा धीरे हो । आखिर हम लोग किसी समय मित्र थे । हमें पुराने दोस्तों की तरह बातचीत करना चाहिए । काफी देर तक को दोनों बहुत धीरे धीरे बातें करते हैं । मैंने उनकी बातें सुनने की कोशिश की तो उस व्यक्ति ने मुझे डांट दिया । फिर दोनों कप्तान के कमरे में चले गए । काफी देर तक उनकी कोई आवाज सुनाई नहीं । फिर कप्तान की चीखने की आवाज आई । वह कह रहा था नहीं ये नहीं हो सकता हूँ । अमेरिका एक मारपीट की आवाजें सुनाई देने लगी । जनवरी सुनाई और दूसरे ही पल व्यक्ति बाहर की और दौडता हुआ दिखाई दिया । उसके बाय कंधे से खून बह रहा था और कप्तान उसके पीछे पीछे दौड रहा था । कप्तान ने निशाना लगाकर अपना चाहती हूँ जो है कहाँ पर निशाना चूक गया । बाहर सडक पर निकलते काला पिता सरपट थोडा और देखते ही देखते नजरों से हो गया कप्तान था । उसका चेहरा भी पीला पड गया । उसने आदेश के स्वर में मुझसे कहा मेरे लिए शराब लाओ । जब तक मैं कप्तान के लिए शराब और गिलास लाया तब तक मेरी माँ सीढिया उतरकर दौडती वहाँ पहुंच गई थी । तो गुस्से में कहने लगी कितने शर्म की बात है कि सारा हंगामा यहाँ उस स्थिति में क्या जा रहा है जब तुम्हारे पिता पूरी तरह से बीमार है । मुझे लगा कप्तान का चेहरा कर रहा है । मैंने कप्तान के उसमें कुछ शराब डालनी चाहिए और उसके दादा बुरी तरह बीच गए । उसके जबडे लोहे की तरह सख्त हो गए हैं । उसी समय दरवाजा खुला और डॉक्टर साहब हम जनता के लिए वो मेरे पिता को देखने आए । हम चिल्ला डॉक्टर साहब देखी, इससे क्या हो गया है? डॉक्टर ने उसे लिटाया और उसका परीक्षण करने के बाद कहा इसे दिल का दौरा पड गया है तो डॉक्टर में उसकी आस्तीन को फाडकर उसकी बहु को देखा । उसकी पूजा बहुत मजबूत है और जगह जगह गुदी हुई थी । डॉक्टर में मेरी और देखते हुए कहा, तुम्हें देखकर डर तो नहीं सकता हूँ । मैंने का जी जी तो ठीक है या बर्तन पकडो । ये कहकर डॉक्टरों ने चाकू निकालकर कप्तान की बाहर में छोटा सा चीरा लगाया और खून कि दादा बहकर बर्तन में गिरने लगे । इस तरह काफी खून कप्तान के शरीर से निकाला गया । कुछ देर में कप्तान ने आंखें खोलकर चारों और देखा । मुझे पहचानते हुए कहा क्या काला कुत्ता चला गए? डॉक्टर ने उसे डांटते हुए कहा, यहाँ कोई काला कुत्ता नहीं है । सुनो, तुम रख दे रहे थे और तुम्हें दिल का दौरा पड गया है । ज्यादा शराब पी होगी तो मर जाओगे । चालू है । मैं तो मैं बिस्तर पर लेता देता हूँ । इसके बाद डॉक्टर मुझे अपने साफ लेकर पिताजी को देखने के लिए उनके कमरे में चलेंगे ।

रहस्मय टापू - 03

कप्तान अपने कमरे में पढा था तो फिर को मैं दवाई लेकर उसके पास पहुंचा । वो बहुत कमजोर लग रहा था । वो मुझसे कहने लगा देखो जो मैंने तुम्हारे साथ हमेशा अच्छा व्यवहार किया है । हर महीने में तो चांदी का एक सिक्का नहीं रहा हूँ । मैं बीमार । यहाँ पर कोई भी मेरी देखरेख नहीं करता हूँ । क्या आ रही मेरे लिए एक गिलास गर्म लादू लाओ कहना मैंने कहा डॉक्टर साहब मेरी बात काटते हुए बहुत बोला । डॉक्टर को मारो गोली । हम नाविकों और मछुआरों के बारे में क्या जानता है? मैं बहुत खतरनाक सागर हो और अंजाम द्वीपों पर रहे चुका हूँ । उन सब के बारे में डॉक्टर को क्या पता? मैं उन स्थानों पर रम के भरोसे ही रहता रहा हूँ । मदिरा और मास दोनों मेरे लिए बहुत जरूरी है । कुछ देर सुस्ता कर कप्तान ने फिर कहना शुरू कर दिया देखो जब मेरी उंगलियां कैसे कम आ रही है । हमारे डॉक्टर ने भी कहा था कि रम के पैक से मुझे कुछ नुकसान नहीं होगा । कृपया मुझे सिर्फ एक काम का पहला तो मैं तुम्हें सोने का सिक्का दूंगा । हाँ, मैंने जवाब दिया मुझे तुमसे कुछ नहीं चाहिए पर तुम मेरे पिता का बकाया किराया अवश्य दे दूँ । मैं तुम्हारे लिए एक कार्यक्रम लेकर आता हूँ । मैं जैसे ही शराब का गिलास उसके लिए लेकर आया उसमें एक ही साथ में पूरी शराब फॅमिली । उसने कहा जेम तुमने उस मछुआरे को आज यहाँ देखा है । मैंने पूछा कौन वो काला कुत्ता खा, वही काला कुछ । वह बहुत ही बदमाश आदमी है । उसके साथ ही तो उससे भी ज्यादा बदमाश है । वे लोग मेरी तिजोरी हथियाना चाहते हैं । ये तिजोरी मुझे फौजदार नहीं दी थी । मैं पहुँच तार का सबसे पुराना साथी था । जाओ । फौरन डॉक्टर के पास पहुंचकर उसे और विस्तार के बारे में बता दूँ । हाँ और एक बात ध्यान रखना यदि काला कुत्ता और लंगडा मछुआरा फिर से दिखाई नहीं पडते तो उनकी चर्चा भी किसी से नहीं करना । उसकी आवाज कमजोर पड गई थी । मैंने उसे दवाई थी तो तुरंत गहरी नींद टूट गया । मैं सारी कहानी डॉक्टर साहब को सुनाना चाहता था और उसी शाम मेरे ताकि मृत्यु हो गई । मैं उनके अंतिम संस्कार और फिर सामाजिक कामों में जा रहा हूँ । उस दौरान मुझे कप्तान के बारे में सोचने तक की फुर्सत नहीं । दूसरे दिन और नीचे उतर कराया । उसमें बहुत कम खाना खाया । शराब ज्यादा भी किया । पिताजी की शवयात्रा के पहले की रात को भी उसने बहुत शराब पी थी । डॉक्टर उस रात कई भी दूर किसी स्थान पर मरीज को देखने गए हुए थे । मेरे पिता की मृत्यु के समय डॉक्टर हमारे कस्बे में नहीं है । मैं अपने लॉन्च के दरवाजे पर खडा कुछ सोच रहा था । मुझे एक अंदाज भी लॉन्च की ओर आता दिखाई दिया । तलाठी टिक टिक कराने बढ रहा था । उसकी कमर झुकी हुई थी । उसमें किसी पुराने नाविक का कोर्ट पहन रखा था । मैंने अपने जीवन में कभी इतना टाइम व्यक्ति नहीं देखा था । वो लॉन्च के कुछ दूर हो गया और लडखडाती आवाज में कहने लगा क्या कोई भला मनुष्य मुझे बताएगा कि मैं देश के किस भाग नहीं हैं । मैं गरीब दौरन हाथ में अपने देश के लिए लडते लडते मैंने अपनी दोनों आपके गवा दिए और आज दर दर भटक रहा हूँ । मैंने कहा बाबा तुम बस्ती कालापहाड में हो । बच्चे मुझे तुम्हारी आवाज सुनाई दे रही है । क्या तुम आगे आकर मेरा हाथ थामकर मुझे अपने घर ले चलो । ओके मैंने हाथ बढाया जिसे उसने लगभग कर पकड लिया । पल भर में ही मेरी कलाई पर उसकी पकड मजबूत हो गई । मैंने झटका देकर अपना हाथ छुडाना चाहते तो वो बहुत तगडा निकला । मुझे लगा जिससे मेरा हाथ किसी फलादि शिकंजे में फस गया हूँ । मुझे अपने पास खींचते हुए उसने कहा लडके मुझे ऍम के पास ले चल पडना ही होगा । ये कहते हुए उसने मेरी भाव को हल्का सा झटका दिया और फिर दर्द के बारे मेरी चीख निकल गई हो तो कहने लगा हूँ चलो जब जब मुझे कप्तान के पास नहीं चलो उस बंदे आदमी जैसी क्रूर ठंडी आवाज मैंने पहले कभी नहीं । मैं शोरूम से लेकर कप्तान के पास पहुँच गया । कप्तान में उस समय भी भी रखी थी । नशे में उसकी आखिर चढी हुई थी । उस ने नजर उठाकर उस व्यक्ति को देखा । उसे देखते कप्तान का साबा, नशा हिरन होगा । उसने उठने की कोशिश की लेकिन वो कुछ नहीं सकता हूँ । पूरे अधिकारी नहीं सकता । आवाज में कहा बिल्लो जब जब है चाहूँगा, ठीक है, मुझे दिखाई नहीं देता । पर अगर कही घूमने भी मिलती है तो मुझे उसकी हरकत सुनाई आती है । अपने बायें हाथ को आगे करूँगी । मैंने देखा उसने कप्तान के हाथों में कोई वस्तु दवा दी है । अधिकारी कुछ मेरा हाथ छोड दिया और मैं लॉन्च के बाहर निकल कर सडक पर पहुंच गया । उसकी लाठी की आवाज जंतर दूर होते होते है । कप्तान काफी देखता हूँ । फिर उसने अपनी ही खोली है और उसमें रखे कागज के टुकडे को देखते देखते ही वह चिल्लाया उन लोगों ने मेरे नाम काला रुख का भेज दिया है । खाला ग्रुप का या ने बात का ऍम कुछ पल सोचने के बाद अपने आप से कहने लगाते हैं । दस बजे छह घंटे बाद अभी भी समय ये कहते ही वो एक झटके के साथ खडा हुआ । लेकिन एक का एक उसकी सांस उखडती गई और वो हम से फर्श पर गिर पडा । मैं तत्काल उसकी और दौडा लेकिन तब तक सारा खेल खत्म हो चुका था । कप्तान के प्राण पखेरू हो चुके हैं । मुझे वो आदमी कभी भी अच्छा नहीं लगा । पर आज उसकी हालत देखकर मुझे उस पर दया आ रही थी । उसे फर्श पर मारा हुआ पडा देखकर मेरी आंखों से आंसू बहुत है । अपने छोटे से जीवन में मैंने ये दूसरी मृत्यु देखी थी । अभी तो पहले मृत्यु का दुबई मेरे मन में समाया हुआ था हूँ ।

रहस्मय टापू - 04

मैं दौड कर गया और सारी घटना की जानकारी अपनी माँ को सुना है । सोच में पड गई है । हमें लगा कि खतरा सत्रह मान रहा है । हमें ख्याल आया कि कुछ लोग उसकी तिजोरी हथियाना चाहते थे । जरूर उस तिजोरी में अच्छी खासी रकम होगी । काला कुत्ता बंधा अधिकारी उसी रकम के लिए चक्कर काट रहे थे । मैंने सोचा कि डॉक्टर साहब के पास पहुंचकर इस मामले में उनकी मदद मांगी है । पर मैं अपनी आँखों के लिए छोड कर कैसे जाता हूँ और विचार तो पहले ही बहुत कपडा ही हुई थी । पिता के मरने के बाद दुखी भी थी । समझ नहीं आ रहा था की क्या किया जाए । घर पर इस तरह पडे रहना सुरक्षित नहीं था । हमें बार बार वही लग रहा था कि वह बंदा अधिकारी अपने साथियों को लेकर बस पता ही होगा । कुछ देर तक हम दोनों चुपचाप बैठे हैं । फिर मानेका चल दोनों बस्ती की और चलते वहाँ लोगों से मदद मांगेंगे । बस्ती सडक के उस पर थोडी ही दूर पर थे । जब तक हम बस्ती पहुंचे अंधेरा कर चुका था । लोगों के घरों में रोशनी देखकर हमें कुछ अच्छा लगा । हमने लोगों को जाकर सारी बात बता देंगे लेकिन उनमें से कोई हमारी मदद करने के लिए तैयार नहीं हुआ । वो कहने लगे की उन लोगों से बाहर लेना अच्छा नहीं है । बडे खूंखार लोग हैं । बस्ती के लोगों ने हमें बताया कि वह अंधा कोई साधारण भिकारी नहीं बल्कि समुद्री डाकू है । उसका भी रो बहुत खतरनाक है । उस गिरोह के सरगना का नाम है फुलवा मल्ला । कुछ लोगों ने डॉक्टर के घर तक पहुंचने का प्रबंध कर देने की कृपा अवश्य की और उन में से कोई भी डाकुओं का सामना करने में हमारी मदद करने को तैयार नहीं हुआ । उन लोगों के मन में समय डर को देखकर मेरी माँ को साफ किया । वह कहने लगी, तुम सब चुके हैं । यदि तुम लोगों में साहस नहीं है तो मैं और मेरा बच्चा मिलकर उनका मुकाबला करेंगे । हमने अपनी खून पसीने की कमाई उस दुष्ट कप्तान को खिलाई । हम अपना पैसा वसूल करके रहेंगे तुम लोगों को इस मित्र ही बच्चे पर जरा सी भी दया नहीं आई । ठीक है तुम लोग बैठो । अपने घरों में चूडिया पहन कर हम लोग जाते हैं और अपना पैसा वसूल कर कर रहेंगे । माफी बातों का बस्तीवालों पर कोई असर नहीं नहीं । केवल एक लडका सामने आया और कहने लगा वो डॉक्टर साहब के घर जाकर सारी सूचना दे देगा । उस कडाके की ठंड में हम लॉन्च की ओर लेते हैं । मुझे डर लग रहा था चारों और सपना था चंद्रमा धीरे धीरे अपना संस्कार हम चारों और देखते हुए तब देता हूँ । आगे बढ रहे थे । लेकर ही लगता है स्वीट हुआ रहे । लॉन्च के अंदर आते ही हमने दरवाजा भीतर से बंद कर लिया । फिर मेरी माँ एक दिन बत्ती जला कर ली है । कमरे में कप्तान की लाश पडी थी । लाश ऐसी हालत में थी जिसमें हम उसे छोड कर गए थे । उसकी आंखें खुली हुई थी और रात के अंधेरे में और भी ज्यादा डरावनी लग रही थी । उसके पास हमने पहले हुई थी । मैंने झुककर देखा । उसके सौतेली पर कागज का एक ग्रुप का रखा हुआ है । मैंने उसे उठाकर पडा । उस पर लिखा हुआ था तुम्हें रात के दस बजे तक का समय दिया जाता है । कागज के किनारे पर काले रंग का गोल निशान बना हुआ है । शायद इसीलिए उसे काला रुक का कहाँ गया था । मैंने माँ को कागज पर लिखे मौत के वारंट के बारे में बताया । दीवार घडी ने छह घंटे बजाए माँ के होने लगी । अभी भी हमारे पास चार घंटे का समय है । मान ने मुझसे कहा मैं कप्तान की तलाशी लेकर तिजोरी की चाबी की खोज करो । मैंने उसकी सारी जेबी छान मारे और चाबी नहीं मिली । तब माँ ने मुझे कहा हो सकता है चाबी उसने गले में लटका रखी हूँ । फिर मैंने लाख को कटोला । फिर उसकी गंदी और बदबूदार कमीज को फाडकर नीचे देखा तो एक रैली कुछ ही दूरी से बंदी चाबी उसकी गर्दन में लटकी हुई मिली । कप्तान के चाकू से ही मैंने उस दूरी को काटकर छापी लेगी । फिर हम दोनों ऊपर के कमरे की और दौडे जहाँ तिजोरी रखती थी । जिस दिन स तिजोरी वहाँ आई थी वो एक स्थान पर रखी हुई थी । बक्से बहुमत जोरि का ताला खोलने में पीडित हो तो हुई और माने उसे खुद ही हूँ । जैसे ही जोडी ऍम उसमें से बडी तेज कर की जोडी के ऊपरी हिस्से में सावधानी के साथ किए हुए कपडे रखे हुए हैं, उसके नीचे दो स्कूल है एक पुरानी तब वक्त पीने के दो पाई ऍम और समुद्री यात्रा के यंत्रों से बहुत सारी चीजें रहेगी । उसके नीचे पुराना सपोर्ट था । कोर्ट को माने बाहर की चाहिए एक कपडे में बंधे हुए सारे कागज सोने के गिरियों भरा के निवास काॅपर माँ के आपको में जमा कर लेंगे । उसने दिल्ली से भरा फैला उठाया और स्वागत ही कहने लगी मैं ऍम लूंगी । जितनी हमारी फॅमिली है । हमें राम का एक भी पैसा नहीं चाहिए । अपनी बात समाप्त करने के साथ ही मेरी माँ की दुनिया दिन मिलेगी । मुझे माफी साॅस और मच्छी मैंने धीरे हम आपको बताया इस तरह गिनती करने में बहुत लग जाएगी और वो अपनी बात पर अडी की उसे हराम का एक भी पैसा नहीं चाहिए । फिर वो कहने लगी, मेरे पति का जितना पैसा कप्तान किया और निकलता है, मुझे बस इतना ही चाहिए । इसी बीच मुझे बाहर से आवाज सुनाई दी । परिचित सी आवाज सुनकर मेरा कलेजा मुंह को आ गया । भाई से मैं आप उठा ये आवाज उस बंदे की लाठी की नहीं । लाठी के ठक ठक की आवाज के साथ बाहर सीटी की आवाज भी सुनाई थी मैंने माँ की वहाँ आपको धीरे से दबाते हुए दबी आवाज में कहा माँ इस पहले को अपने साथ लेकर यहाँ से निकल चले तो अच्छा है । मैंने फर्श पर बिखरे कागज उठाया और मोमबत्ती को कप्तान की तिजोरी के बाद छोड दिया । प्रस्ताव टटोलते हुए हम अंधेरी सीढियों से उतरकर नीचे पहुंचेगा । दरवाजा खोल कर हम तेजी के साथ सडक पर दौड पडे । अब तक चंद काफी ऊपर आ चुका था इसलिए रोशनी हो गई थी । इससे खतरा भी और बढ गया । हमें बहुत से लोगों के पैरों की आवाजें सुनाई देने लगे । मुझे लगा कि अब मारे गए । अब बच निकलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है । हम और तेल छोडने लगे । सब मुझे अपनी माँ की ईमानदारी पर गुस्सा आ रहा था । उसमें बेकार इतना समय इंडिया गिरने में लगा दिया । मान ने मुझसे कहा बेटे जी पकडो रकम का खेला और उसे लेकर दौड जाऊँ । मुझे तो ही चला जाता है मुझे पडोसियों की शिकायत आप भी बडा गुस्सा आ रहा था जिन्हें डाकुओं का नाम सुनते साहब से गया था । बहुत हमारे दिक्कत आती थी । जीवन और मृत्यु का फासला लगातार से बढता जा रहा है । सौभाग्यवश सामने हमें पुलिया दिखाई दी । मैं आपको लगभग घसीटता हुआ पुलिया तक ले गया । पुलिया के पास पहुंचते ही माने केहरी सांसी और उसका सिर मेरे कंधे पर लुढक गया । पता नहीं मुझे उस समय इतनी शक्ति कहाँ से आ गई थी कि मैं माँ को खींचकर पुलिया के नीचे ले गया तो लिया बहुत नीचे थी इसलिए मुझे घुटनों के बल भीतर से रखना पडा । ये पुलिया हमारे घर के बहुत पास इतनी पास की घर में होने वाली प्रत्येक हलचल में नीचे पडे पडे सुनाई दे सकती थी ।

रहस्मय टापू - 05

मुझे डर तो लग रहा था पर मैं ये जानना चाहता था इस समुद्री डाकू क्या करने जा रहे हैं । मेरी उत्सुकता के सामने मेरा भाई छोटा पड गया था । यही कारण था कि मैं बहुत देर तक दुनिया के नीचे दुबक कर बैठा नहीं रह सका । मैं धीरे धीरे सरक कर लिया के किनारे पर पहुंचा और वहाँ से रैंटा हुआ एक झाडी के पीछे जाकर छूट गया । वहाँ से मुझे अपने लॉन्च के दरवाजे तक जाने वाली सडक साफ दिखाई दे रही थी । थोडी देर में वे एक एक कर उस और जाते दिखाई दिए । बेटे अब एक साथ ही घंटे हो गए थे । कुल मिलाकर में सात या आठ लोग थे । अहमदाबाद में उन के बीचोंबीच खडा था । उस अंधे पर नजर पडते ही मेटल से कम नहीं है । जिसे देखकर कप्तान जैसा मजबूत आदमी भी डर के मारे दम तोड बैठा था हूँ । उसे देख कर मेरा काम अपना स्वाभाविक था । अंधे आदमी से कुछ कदम आगे एक व्यक्ति हाथ में लालटेन लिए खडा था । उस की टोली लॉन्च के दरवाजे के सामने जाकर खडी होगी अंधेरे कडकती आवाज में उनसे कहा दरवाजे को तोड तो उन लोगों ने दरवाजे को लटका दिया है तो पहले से ही खुला हुआ था । ये सब लॉन्च के भीतर चले गए । अंदर उनसे कहना था, जल्दी करो, तुम लोग हो कुछ और आगे बढे और एक आवाज आ रही है । बिल्लो मर गया है, उसकी लाश पडी है, अंधेरे क्यों दिया और उसकी तलाशी लोग बाकी के लोगों पर चले जाओ और उस की जोडी पर कब्जा कर हूँ । मुझे कुछ लोगों की सीढियों पर चलती की आवाज ही नहीं है । उनमें से एक आदमी ने खिडकी में से अपनी कर लो । बाहर निकली और उस बन्दे से कहने लेगा सरदार वे लोग हमसे पहले यहाँ पहुंच गए थे की जोडी खुली हुई है । लगता है उसमें से कुछ सामान भी गायब है । दूसरा भी दरवाजे से निकलकर बाहर आया और जोर से जी तो ये लोग घरेलू की तलाशी पहले ही ले चुके हैं । चाबी गायब है । लगता है अब कुछ नहीं बचाते । खिडकी के पास खडा नहीं चल रहा है । यहाँ एक मोमबत्ती भी चल रही है । नीचे से अंधेरी करते हुए कहा जरूरी स्लाॅट लडता सारा माल पार कर गया होगा । अच्छा होता हूँ । मैं उस वक्त उसके घर के बाहर भी कर लेता हूँ । लेकिन अस्तित्व और उसकी बाबा दूर नहीं गए होंगे । हो सकता है कि वह घर के भीतर ही हो । घर का जब पांच पांच हो देखो वो बच करना निकल पाए । अंदाज भी उससे से चिल्लाता हुआ बार बार सडक पर आपने नहीं बैठ कर रहा हूँ । घर के भीतर तो जैसे तूफान आ गया ब्लू हर चीज को उठा उठाकर पटक रहे हैं । दरवाजे को लाखों से पीट रहे थे । क्रॉकरी तोड रहे थे । कुछ देर बाद में चप्पा चप्पा छान चुके थे और भारत कोई । वो अंधा गुस्से में पागल हो रहा था । लेकिन इसमें सीटी की आवाज आ रही है । सीटी आवाज को पल भर बाद फिर हो पाया गया वो शायद के लिए खतरे की चेतावनी । एक आदमी ने कहा तो वारसी की वजह है हमें यहाँ से फौरन चल देना चाहिए । बन्दे ने गुस्से से चीखते हुए कहूँ कहाँ जाओगे? मूर्खो पहले उसको छोकरा को तलाश हूँ । सोचो इस तरह एक महंगे रहना चाहते हो, क्या बजा हूँ की तरह पेश करना चाहते हूँ । मैं कंधार नहीं कुछ दिखाई नहीं देता हूँ वो भी मैंने दिल्ली को तलाश लिया था । तो मैं कोई ये काम नहीं कर पाया । सडक ॅ जाओ उस छोकरे को कहीं से भर पाकड कर लूँ । अगर मेरी आंखें होती तो कम में चुटकी बजाते कर देता हूँ । चाहो कुत्ते के तीन लोग जाओ धुंधु उस लडके को तो सब समुद्री डाकू डरे हुए लग रहे थे । कहने लगे इस तरह सडक पर चलने में खतरा है तो कि सिपाहियों के आने का संकेत मिल चुका है । इस सब वहाँ से फौरन निकलने की तैयारी करने लगे । उनकी हरकतों से बंदे को शंका हो गई थी कि उसके आदेश का पालन नहीं कर रहे थे । अनदेखा पारा आसमान छूने लगता हूँ । उसने अपनी लाठी से उन को पीटना शुरू कर दिया । डाकुओं के शरीर पर बंदे सरदार की लाठी टाॅल पड रही है हूँ । कुछ लोग लाठी के वार को रोकने की कोशिश भी करते हैं । एक दो ने तो लाठी को पकडकर छोडने की कोशिश भी और किसको अंधे को उसने भी लगे थे । उनकी इस झगडे से मुझे मेरी माँ बडी । मैंने देखा चल इस बहाने कुछ देर क्या तो बच्ची वरना वे लोग में तलाशी लेते हैं । इसी बीच पहाडी की ओर से गोली चलने की आवाज सुनाई की शायद अंतिम चेतावनी थी । इससे सुनते ही समुद्री डाकू भाग खडे हुए । जिससे जिधर जगह देखी वो उधर सिर पर पैर रखकर भागता हूँ । बंदा गुस्से में चिल्लाया जानी काला कुत्ता तुडवानी । क्या तुम अपने सरदार को इस तरह तो खाओगे? सोचो क्या बूढे और अन्य सरदार को इस तरह धोखा देना अच्छा है? उस समय चार पांच कुंवार पार्टी सेंटल दिखाइए चली हुई चांदी में बहुत साफ दिखाई दे रहे थे । उधर पुलिस के थोडे पूरी रफ्तार के साथ ढलान पर उतर रहे सरपट दौडते हुए थोडे सडक तक आपको जीतेंगे अंधा अपने आप को बचाने के लिए एक और को थोडा तो तब तक बात देर एक गोली का पैर अंधी के सिर पर पडा अच्छा और वह चीखता हुआ नीचे मिलते हैं । फिर तो बाकी के तीन चार ही उसे बोलते हुए गुजर गए । अंधे का शरीर राहुल हुआ हूँ । उसने एक बार अपना सर हल्का सा उठाया परंतु पल भर बाद ही वह एक और लुढक गया । मैं झाडी के पीछे से उठकर खडा हुआ और मैंने जोर से घुडसवार को आवाज । उनमें से एक तो बस्ती का नौजवान ही था जो डॉक्टर को बुलाने के लिए गया था । रास्ते में ही उसे पुलिस के कुछ अवसर मिल गए और उनके साथ वो हमारी मदद के लिए लौट आया । इस बीच बस्ती के कुछ लोग भी वहां पहुंचे । उन्होंने बताया कि डाकू समुद्र की ओर गए थे और कुछ दूरी पर एक जहाज भी लंगर डाले खडा है । ये जानकारी मिलते ही पुलिस के अब सर उस जहाज की ओर रवाना हो गए । पुलिस के आने के बाद हमारी जान पर आया संकट टल गया था । लेकिन ये संकट केवल तला ही था । पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ था । राहत की बात ये थी कि अब दस हजार मर चुका हो । इन सारी बातों से मेरी माँ को बहुत सपना पहुंच जाता हूँ । वो खबर आई हुई थी । हम लोग उन्हें लेकर लॉज में पहुंचे और आराम से बिस्तर पर लेटा दिया । जब तक पुलिस की टीम समुद्र के किनारे तक पहुंची तब तक जहाज वहाँ से गायब हो चुका हूँ । शायद बंदे के साथ ही उस जहाज में बैठ कर भाग निकले थे । पुलिस के अवसर लाॅज में पहुंचे तो इस बात को लेकर केंद्र थे कि डाकू भागने में सफल हो गए । उन्होंने हमारे मकान का निरीक्षण किया । घर का सारा सामान उलट पुलट दिया गया था । ऐसा लग रहा था जैसे घर में कोई जाल आया हूँ । एक पुलिस सबसे मैंने उससे पूछा अच्छा जी, ये बताओ कि वे लोग घर में किस चीज की तलाश कर रहे थे । अवश्य कोई मूल्यवान वस्तु रही होगी मैंने उनको सारी बात हैं । इस पर पुलिस अफसर मैं कहा ठीक है सारा पैसा उन्होंने अपने कब से मैं कर लिया । पर जिस तरह उन डाकुओं ने घर का एक एक हिस्सा खंगाला है उससे तो लगता है कि उन्हें किसी ऐसी चीज की तलाश थी जो पैसे से कहीं ज्यादा मूल्यवादी वही चीज कहाँ पर है । मैंने पल भर के लिए सोचा फिर उन्हें बता दिया की जिस चीज की तलाश में लोग कर रहे थे वो मेरे पास है, मेरी जेब में है । पुलिस अफसर चाहते थे कि वह महत्वपूर्ण चीज में उन्हें दे दूँ । पर मैंने कहा मैं उसे डॉक्टर साहब को ही दूंगा क्योंकि वो हमारे इलाके के मजिस्ट्रेट हैं । मेरी बात पर पुलिस अफसर भी सहमत हो गए । उन्होंने मुझसे कहा चलो हम तो में मजिस्ट्रेट के पास में चलते हैं । मैंने माँ के पास पहुंचकर उन्हें सारी बात बता दी । ये भी कह दिया कि अब कोई खतरा नहीं इसलिए वह घबराये नहीं । मैंने वहाँ से कहा कि जब तक मैं लौटकर नहीं आता तो आराम से बिस्तर पर लेटी रहे । मैं पुलिस वाले के साथ उसके घोडे पर बैठकर मजिस्ट्रेट की घर की ओर रवाना हो गया

रहस्मय टापू - 06

हूँ । मजिस्ट्रेट का घर दूर था, इसलिए वहाँ पहुंचने में काफी समय लग गया था । घर के सामने अंधेरा था । पूछताछ करने पर पता चला कि डॉक्टर साहब गांव के जमींदार क्या बोझ पर गए हुए हैं । जमींदार की हवेली वहाँ से ज्यादा दूर नहीं थी । कुछ मिनटों में हम लोग वहाँ पहुंच गए थे । दरबान द्वारा ने अपना संदेश डॉक्टर तक पहुंचाया । जमींदार का एक नौकर हमें एक बडे से कमरे में ले गया । कमरा अच्छी तरह से सजा हुआ था । वर्ष पर गिनती कालीन बिछा हुआ था । फर्नीचर भी अच्छी किस्म की किसी लकडी से बना हुआ था । बहुत सुन्दर था । समझदार की लाॅरी भी बहुत शानदार । दो दीवारों से लगी । अलमारियों में पुस्तकों की कतारें लगी हुई नहीं लगता था जमीदार को कुछ तक उसे प्रेम है । जमीदा और डॉक्टर साहब हमने सामने बैठे पारी बरी से कब उड उडा रहे थे । संविधान का व्यक्तित्व वो मिला था । छह फुट से भी ऊंचा हूँ । चौडी छाती और भरा हुआ बदल मेरे साथ है । पुलिस अफसर का जमींदार ने बैठे बैठे स्वागत किया और इशारे से अपने पास बुला लिया । डॉक्टर सामने मेरी और देखकर मुस्कुराते हुए कहा हूँ, कैसे हो जी आओ बैठो मेरे पास । जमींदार ने पुलिस अफसर से पूछा कहीं कैसे आना हुआ? पुलिस अफसर में संक्षेप में सारी बात बता दी हैं । दोनों उनकी बातें कितनी ध्यान से सुन रहे थे कि हुक्का पीना भी पूरी गए । जब पुलिस अफसर ने बताया कि मेरी माँ सुरक्षित है तो डॉक्टर और जमींदार दोनों बहुत प्रसन्न हुआ । उन्होंने पुलिस अवसर को अंधे सरदार को मार गिराने के लिए धन्यवाद दिया । जमींदार ने शाबासी देते हुए का यह तो बहुत अच्छा हुआ कि आपने समुद्री डाकुओं को खदेड दिया । वांदा तो जहरीला साथ था । सांप का सर कुचल देना ही ठीक रहता है । ये लडका जिम तो बहुत बहादुर हैं । डॉक्टर ने पूछा समुद्री डाकू किस चीज की तलाश में आए थे? पुलिस अफसर मेरी और देखकर मुस्कुराए । उसके संकेत को मैं समझ गया । मैंने अपनी जेब से पैकेट निकालकर डॉक्टर की और बढा दिया । डॉक्टर ने चुपचाप उसे अपने कूट के जेब में रख दिया । जमींदार ने पुलिस अफसर की ओर देखते हुए कहा, देर हो रही है आप चलिए, जिनको यही रहने दीजिए । मैं रात को खाना यहीं पर खा लेगा । पुलिस अफसर अपने घोडे पर बैठकर रवाना हो गया । डॉक्टर में जमींदार की और देखते हुए कहा आप क्या किया जाए? जमींदार नहीं, एक नजर मुझ पर डालते हुए कहा जिनकी पूरी सहायता करना चाहिए । डॉक्टर कुछ देर सोच में पड गए । फिर वो जमींदार से कहने लगे आपने फुलवाडा को के बारे में सुना है? हाँ सुना है । कहते हैं वो बहुत भारतम उसका जिस साल जालिम समुद्री डाकू अभी तक पैदा नहीं हुआ । चारों और उसका आतंक फैला था । लोग उसके नाम से कहते थे मुझे लगता है उस में लूटमार करके बहुत बडा ज्यादा इकट्ठा कर रखा था । समझदार ने कहा शायद फुलवा के खजाने का नक्शा मेरी जेब में है । यदि जिम को आपत्ति ना हो तो मैं उस पैकेट को खोल लूँ । ये कहते कहते डॉक्टर ने जेब से वाॅलेट निकालकर टेबल पर रख दिया । डॉक्टर उड गए और एक किनारे पर रखा अपना बैग लिया । बैंक में से किसी निकालकर उन्होंने पैकेट को किनारे से करता है । पैकेट से उस तक और एक सीलबंद कागज निकला । डॉक्टर में पुस्तक को उठाते हुए कहा सबसे पहले तो हम इस पुस्तक को देखेंगे । उन्होंने पुस्तक खोलकर उसके पन्ने पर लिखने शुरू कर दिए । पुस्तक के प्रारंभिक पृष्ठों पर कुछ लिखा हुआ था । बीच बीच में कुछ संकेत और प्रतीक बने हुए थे । शान शुद्ध निशान स्केचिंग बने हुए थे । कुछ देर तक पुस्तक को देखने के बाद डॉक्टर में निराशा के साथ कहा मेरे पल्ले कुछ नहीं पढा, इसका सिर्फ पैर ही समझ नहीं आता । जमीन सामने लगभग झगडते हुए डॉक्टर सकता हूँ । सब कुछ तो दिन की रोशनी की तरह साफ दिखाई पड रहा है । ये जो क्रॉस के निशान हैं ये बताते हैं कि कहाँ कहाँ पर जहाज डुबाए गए या किन किन ठिकानों को लूटा गया । हार्ड डाकू का वही खाता है जो संख्या लिखी गयी है । वह बताती है कि कि तबाह बाल लूटा गया है । अब समझ में आया इसलिए संख्या लगातार बढती दिखाई दे रही है । अच्छा अब सीलबंद लिफाफे को खोला जाए । देखें इसमें क्या निकलता है । कागज को कई जगह से सील किया गया था । डॉक्टर में बडी सावधानी के साथ एक एक सील को तोडना शुरू किया । उतनी ही सावधानी के साथ नक्शे को खुलकर टेबल पर फैलाया गया । लक्ष्य में छोटे छोटे ऍम पहाडियों और अन्य सारी बातें की पूरी जानकारी दी गई थी । नक्शे में एक टापू तक पहुंचने का मार्ग भी दिया गया था । उस टाइप की लंबाई, चौडाई और ऊंचाई की जानकारी भी उसमें थी । नक्शे के आधार पर वहाँ पानी के जहाज द्वारा पहुंचा जा सकता था । टापू लगभग नौ मील लंबा और पांचवीं छोडा था तो उसके बीचों बीच एक पहाडी थी । वहाँ लाल सही से कुछ निशान बने हुए थे जिसके नीचे लिखा था अधिकांश गसामा यहीं पर है । आप के पास जहाज के लंगर डालने के लिए दो स्थान दिखाए गए थे । नक्शे के पीछे हस्तलिपि में लिखा था, ऊंचा पेड पहाडी दिशा का संकेत, वीरान टापू दस तो सब कुछ मेरी समझ में नहीं आया था और उसे पढकर डॉक्टरों जमीदार खुशी से झूम । जमीदार ने कहा डॉक्टर साहब, तुम तत्काल अपनी प्रेक्टिस छोड सकते हो । हम कभी खजाने की खोज के लिए कुछ करेंगे तो जहाज के डॉक्टर होगे । मैं अपने कुछ आदमियों को साथ ले लूंगा । जिम भी हमारे साथ रहेगा । इस मौसम को देखकर लगता है की हवा का रुख भी हमारे अनुकूल रहेगा । जमीदार साहब मैं आपके साथ चलने के लिए तैयार जिम भी साथ रहेगा । तुम्हारे आदमी भी ठीक है पर मुझे सबसे ज्यादा खतरा तुम्हारी और से लगता है । किसी तो मैं अपनी जुबान पर काबू नहीं है । दूसरी बात ये है कि उन समुद्री डाकुओं को भी पता लग गया है कि खजाने का नक्शा हमारे पास है । वे लोग बहुत खतरनाक है । वे बडे दुःसाहसी भी हैं । खजाने पर कब्जा करने के लिए वो कुछ भी कर सकते हैं । किसी की हत्या करना तो उनके बयान का खेल है । इसलिए हमें पूरी तैयारी से जाना होगा और बहुत होशियार भी रहना होगा । सबसे पहले ये तय करना होगा एक हजार के बारे में हम एक भी शब्द नहीं कहेंगे । कभी भूल से भी किसी की जवान पर खजाने का और उसके नक्शे का नाम नहीं आएगा । ठीक है डॉक्टर इस मामले में मैं आज से कमरे की तरह मौत रहूँ । जमीदार ने कहा ।

रहस्मय टापू - 07

डॉक्टरों, जमींदार दोनों ने नक्शे के बाद लाइब्रेरी से फॅस निकालकर घटना पलटना शुरू कर दिया । कई बार कागज पर बने नक्शे और ऍम के नक्शों में मिलान करने के बाद डॉक्टर ने कहा चलो हो गया । घर जाने वाला कापू अंडमान द्वीपसमूह है । अंडमान में तीन हजार से अधिक टापू है । उसमें से दो सौ पैसठ पर कोई नहीं रहता । ये टापू मानव रहित है । एक स्थान पर पेंसिल से निशान लगाते हुए डॉक्टर ने कहा खजाने का टापू यही हैं । यहां पहुंचने के लिए हमें चेन्नई से एक जहाज में रवाना होना होगा । चेन्नई से टापू लगभग सात सौ मील दूर हैं । अंतर था ये तय हुआ की हम लोग चेन्नई पहुंचेंगे । डॉक्टर को कुछ दिनों के लिए जरूरी काम से बेलूर जाना था तो वो लू सीधे चेन्नई पहुंचेंगे । अपनी अनुपस्थिति में वो बेल्लूर से डॉक्टर को भेजना चाहते थे जो कस्बे के मरीजों की देखरेख कर सके । जमींदार कुछ अन्य लोगों के साथ चेंज नहीं पहुंच गए । मैं कस्बे में ही रहा । बार बार में उस लक्ष्य को देखता हूँ । मेरे मन में तरह तरह के विचार आते हैं । मेरा मन मुझसे पहले उडान भरकर उस टापू तक पहुंच गया था । ऍम चप्पा छान रहा था । मैं सैकडों बार उस पहाडी पर चढा और उतरा जिसमें खजाना छुपा हुआ था । इसी तरह कुछ हफ्ते में एक दिन डाकिया पत्र लेकर आया । पत्र डॉक्टर के नाम था । उस पर लिखा था कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में जिन या जमींदार उसको खोल सकते हैं इसके अलावा और कोई ना खोलेंगे । मैंने बडी उत्सुकता के साथ पत्र को खोला । पत्र चेन्नई के त्रिपलीकेन लेन से भेजा गया था । पत्र में लिखा था तो तो डॉक्टर साहब मैं नहीं जानता कि आप अपने घर पर है या बेंगलुरु में है । मैं ये पत्र दोनों पदों पर पोस्ट कर रहा हूँ । जहाज खरीद लिया गया है और उसे लंबी यात्रा के लिए तैयार भी कर लिया गया है । जहाज इतना बढिया है कि इससे कोई बच्चा भी चला सकता है । दो सौ नाम के इस जहाज का नाम है राजधानी । ये जहाज मैंने अपने मित्र से लिया है । मित्र बहुत भरोसे मत दें और मित्रता ना मैं बंसी लेकिन कुछ लोगों की राय बंसी के बारे में अच्छे नहीं है । इस जहाज के लिए अच्छे चालक तलाशने में बडी कठिनाई हुई । कम से कम बीस लोगों की जरूरत है पर अभी तक केवल आधादर्जन लोगों का प्रबंध हो पाया है । अच्छी बात यह है कि पुराना और अनुभवी नाविक मिल गया है । लंबी दूरी के लिए उत्सुक है । वह लंबू चांदीराम के नाम से जाना जाता है । उसने बताया कि वह पहले नेवी में था । लडाई में उसकी एक दम जाती रही । वो बहुत उपयोगी है । समुद्र के बारे में उसे अच्छी जानकारी है । अंडमान द्वीपसमूह के बारे में वह बहुत कुछ जानता है । देखने में बहुत रूखा मालूम होता है । पर है बहुत बाद । दो । मैंने छह नाविक चुने थे । उसमें से दो चांदीराम को पसंद नहीं है । उन दोनों को उसमें हटवा दिया । मैं बिलकुल ठीक है । पूरी तरह से स्वस्थ लेकिन जब तक जहाज अपनी यात्रा पर रवाना नहीं हो जाता, तब तक मैं चैन से नहीं बैठ सकूंगा । समुद्र की यात्रा मुझे बहुत अच्छी लगती है । लगता है समुद्र मुझे बुला रहा है । यहाँ तो खजाने का भी आकर्षण है । पानी में छुपा हुआ खजाना मुझे चुंबक की तरह नहीं और खींच रहा है । इसलिए प्री डॉक्टर फौरन आजाओ । थोडी सी देर मत करो । जिम से कहो । वो अपनी माँ से मिलकर आए । उसके बाद तुम दोनों तुरंत चेन्नई के लिए रवाना हो जाओ । हमारे पास एक महान सूरी वाला भी है । उसे साफ ले चलेंगे । मजा आएगा । मुझे पता चला है कि लंबू चांदीराम के पास बैंक में कुछ काम नहीं है । उसकी पत्नी का आदिवासी स्त्री है । शायद उसी के डर से वह बार बार घर छोडकर समुद्र की और भागता है । तुम आ रही जेटली रामास्वामि यह पत्र पढते ही मेरे रूम रूम में रोमांचक हो गया । मेरा मन नाथ चुका था । दूसरे ही दिन सवेरे मैं जिम्मेदार के दरबान के साथ अपनी माँ से मिलने के लिए पैदल ही निकल गया । मेरी माँ स्वस्थ और प्रसन्न थी । उस बदमाश कपडा हमने हमारे घर का बहुत नुकसान किया था । पूरी लॉन्च की मरम्मत कराना पडेगा । नया रूम नया रंगरोगन भी कराया गया । माँ ने अपने लिए एक बढिया सी आरामकुर्सी खरीद ली थी । वह उसी में बैठी हुई थी । मान एक लडके को नौकरी पर रख दिया था । मुझे अच्छा लगा । मैंने सोचा मुझे तो अभी बहुत बडे काम पर निकल रहा है । इसलिए लॉन्च का काम देख नहीं सकूंगा । फिर भी उस बेचारी पर मुझे दया आ रही थी । वो इसलिए कि वह बेचारा तुम लॉन्च में रहेगा और मैं खजाने की रोमांचक खोज में निकलूंगा । मैंने दूसरे दिन माँ को अलविदा कहा । मैंने जी भरकर अपने घर को देखा और मनी मनी उसे भी अलवीदा कहा । पता नहीं कब लौट पाऊंगा । लौटूंगा भी की नहीं । मैं कप्तान के बारे में सोचने लगा । वो अपनी दुर्गा लेकर अक्सर समुद्र के किनारे किनारे हर रोज मिलो चला करता था । दूरबीन से समुद्र में आने जाने वाले जहाजों को देखा करता था । मुझे उसके चेहरे पर पडा कहाओ का निशान याद आ गया । बस उन्हीं ख्यालों में डूबा हुआ मैं चलता रहा । लौटने के बाद में तैयारी में जुट क्या शाम को एक कार हमें लेने आ गई । हम लोग कार में पीछे की ओर बैठ गए । एक और उत्तर बांध था दूसरी ओर पूरा सब व्यक्ति । मैं उनके बीच में सडक खराब थी और का बहुत पुरानी थी । फिर भी मेरी आपसे लगते हैं । पता नहीं मैं कितनी देर हो जा रहा है । मेरी नींद तब खुली जब किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखकर मुझे दिलाया हडबडाकर आप खोलते हुए मैंने पूछा हम लोग कहाँ गए? चेन्नई चलो कार से बाहर निकलो । धरवाल ने का हम लोग रामास्वामी के पास पहुंचे । उसने समुद्र के किनारे लॉज में हमारे लिए कमरा ले रखा था । कुछ ही दूरी पर समुद्र में वजह हाथ खडा था जिसमें साफ सफाई का काम चल रहा था । सडक से लॉन्च तक पैदल ही जाया जा सकता था । आस पास और भी अनेक जहाज खडे थे जिनके नाविक अपने अपने कामों में दस थे । तरह तरह के नाविक वहाँ दिखाई दे रहे थे । हम लोग लॉन्च के द्वार पर पहुंच गए । सभी दार साहब यहाँ खडे थे । उन्होंने समुद्री अफसर जैसी नहीं हो रहे हैं और उसमें जैसे रहेंगे । उन्होंने गर्मजोशी से हमारा स्वागत करते हुए था । आओ जा रहा हूँ कल रात डॉक्टर भी आप पहुँच गए । वो भी तब तुम्हारी चर्चा कर रहे हैं । हम लोग पाँच कब करेंगे ऍम बस कल ही रवाना हो जाएंगे । जमींदार ने संक्षिप्त सा उत्तर दिया हूँ ।

रहस्मय टापू - 08

मैंने सुबह नाश्ता खत्म किया ही था कि जमींदार ने मुझे लंबू चांदीराम के नाम एक पत्र दिया । उन्होंने दूर से ही मुझे चांदीराम का ठिकाना भी दिखा दिया । मैं समुद्र के किनारे की भीडभाड को छेडता हुआ उस और बढा । समुद्र में बहुत सारे जहाज लंगर डाले खडे थे । चांदीराम क्लॉस तक पहुँचने में मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई । उसके लॉन्च का नाम का दूर भी है पहचानने के लिए । छत पर एक दूरबीन भी रखी हुई थी तो लॉन्च हाथो छोटा पर सुन्दर था । उसमें सात सुथरे लाल रंग के प्रति लटके हुए थे । लॉन्च के दोनों और लडकी थी और दोनों को लॉन्च के दरवाजे होते थे । वहाँ कुछ ग्राहक भी थे । इनमें से अधिकतर नाविक थे । बीतने तीस और में बातचीत कर रहे थे कि मैं एक बार तो डर ही गया और दरवाजे पर खडा रह गया । इसी बीच एक आदमी बेटर से निकल कर आया । मैं फोरन समझ गया कि यही चांदीराम उसकी हाइट कम कटी हुई थी और बाय कंधे के नीचे एक वैसा की दबी थे । लेकिन बैसाखी के सहारे वो बडी फूर्ति से चल रहा था । विलम्बित गत का और हट्टा कट्टा था । उसके चेहरे का रंग हल्का पीला था जिसपर भेदभरी मुस्कान फैली हुई थी । वह हस्ता खिलखिलाता हुआ हॉल से बाहर निकल रहा था । अपने परिचितों से घुल मिलकर बातें कर रहा था । आते जाते उनके कंधे तब तक आ रहा था जब पहली बार लंबू चांदीराम पत्र में चर्चा हुई थी । तभी से पता नहीं क्यों मुझे उसे डर लगने लगा था । मेरे मन में आ रहा था कि कहीं ऍफ पूरी ना हो, जिसका जिक्र कप्तान क्या करता था । कप्तान ने मुझे लंगडे नाविक के बारे में चेतावनी देते हुए कहा था कि वह बहुत खतरनाक है, लेकिन जैसे ही मैंने लंगडे चांदीराम को देखा, मुझे लगा कि आदमी समुद्री डाकू नहीं हो सकता है । कप्तान अंधश्रद्धा और काला कुत्ता को में देख चुका हूँ । सही मायने में ढकेल खूंखार नजर आते थे । पर ये व्यक्ति वैसा नहीं था । ये बहुत हसमुख और मिलनसार था । व्यक्ति साफ सुथरा और खुले मन का मालूम होता था । साहस बटोरकर मैं उसके पास पहुंचा हूँ । मैंने जमींदार द्वारा दिए गए पत्र को उसकी और बढाते हुए कहा चांदीराम जी नमस्कार । उसने मेरे गाल को प्यार से सब बताते हुए कहा, बेटे, मैं ही चांदीराम दुकान हो कहाँ से आएगा? मैंने जब बताया कि जमीदार साहब ने मुझे भी देकर उसके पास भेजा है तो बहुत खुश हुआ । फिर जोर से मेरा हाथ हिलाते हुए कहने लगा तो तुम हो हमारे नए कैरॅल । दूसरे मिलकर बहुत खुशी हुई । ठीक उसी समय दूर कोने में बैठे लोगों में से एक व्यक्ति इकाई तेजी के साथ था और दरवाजे की और आपका । मैं एक ही नजर में उसे पहचान गया था । उसके हाथ की दो उंगलियां गायब थी । मैंने चांदीराम से का इसे रोको । ये काला कुत्ता है चांदी । हमने अपने साथ ही फॅमिली को पकडकर मेरे पास लाओ । दरवाजे के पास खडा चांदीराम का एक आदमी उसके पीछे दौडा मेरा हाथ छोडकर । चांदीराम ने पूछा क्या कहा तुम्हें क्या नाम बताया इसका? मैंने कहा काला कुत्ता भी समुद्री डाकू इसी नाम से जाना जाता है । क्या आप को जिम्मेदार साहब ने समुद्री डाकुओं के बारे में नहीं बताया? ये उसी की रोक आदमी हैं । चांदीराम ने अपने लोगों को डांटते हुए पूछा, क्या तुम में से कोई नहीं जानता कि ये काला कुत्ता था? सब ने इंकार मैं सर हिला दिया । चांदीराम अपने लॉन्च के सभी लोगों को डाट नहीं लगा । एक कर्मचारी ने बताया, वक्त सर एक बंदे भिकारी के साथ लॉन्च में आया करता था । चांदीराम नहीं का आदमी की ओर इशारा करते हुए कहा, तुम सबसे तेज दौडने वाले हो जाओ । किसी भी तरह काला कुछ को पकडकर हमारे सामने पेश करो, उसे पकडना बहुत जरूरी है । कुछ ही देर में चांदीराम के आदमी खाते हुए वापस लौटे । सिर झुकाए हुए कहने लगे काला कुत्ता भाग निकलने में सफल रहा हूँ, उसे नहीं पढ सके । काला कुत्ता को चांदीराम के लॉज में देखकर मेरा संदेह लौट आया था । मैंने लॉन्च के खानसामे को देखा है । वो भी कुछ विचित्र सा व्यक्ति लगा । चांदीराम के चेहरे पर उदासी छा गई । वह काला कुत्ता के बच निकलने पर बहुत दुखी था । वो कहने लगा, संविधान साहब क्या सोचेंगे, उनको क्या जवाब दूंगा? रामास्वामी क्या सोचेंगे ऍम इस काम में? कृपया तो मेरी मदद करो । मेरे तो कुछ समझ नहीं आ रहा हूँ । मुझे चांदीराम पर दया आती है । हम दोनों बातें करते हुए चलने लगे । चांदीराम बहुत दिलचस्प नहीं था । वो मुझे अपनी समुद्री अनुभव सुनने लगा । उसने अनेक रोचक और रोमांचक घटनाएं मुझे सुनाई । बातें करते करते हम लॉन्च पर पहुंच गए । डॉक्टर और जमीदार ठहरे हुए थे । डॉक्टर रोड जमीदार एक कमरे में बैठे नाश्ता कर रहे थे । मैं कुछ बोलता हूँ उसके पहले चांदीराम ने उन्हें काला कुत्ता वाली सारी घटना विस्तार के साथ सुना । जमीदारों डॉक्टर को काला कुत्ता के बच निकलने पर बहुत दुःख हुआ । अब क्या भी किया जा सकता था । चांदीराम ने अपनी वैसा की उठाई और वापस मिल गया । जमीदार ने कहा, शाम चार बजे जहाज के रवाना होने की सारी तैयारी हो जानी चाहिए । जहाज के खानसामा ने बताया है कि उसकी ओर से पूरी तैयारी हो चुकी है । डॉक्टर से पूरे विश्वास के साथ का ये आदमी हीरा है हीरा आप खुद कहेंगे कि मेरा चुनाव सही था । डॉक्टर ने अपनी बात आगे बढाते हुए कहा, क्या जिनको भी हम साथ रख सकते हैं, जमीदार ने हमें सिर्फ हिलाते हुए का बिल्कुल जी आप हमारे साथ रहेगा । फिर मेरी और देखते हुए जमीदार ने कहा चलो जिम उठाओ, अपना है और कस लो अपनी कमार ।

रहस्मय टापू - 09

राजस् पूरी तरह से तैयार खडा था । उसका पहुंचने के लिए हमें समुद्र में कई जहाजों को पार करना था । कई जगह हमें जोकर आगे निकलना पडा और कई बार बाधाओं को फलाना पडा । आखिर में जब हम अपने राजनीति पर पहुंचे तो उस पर खडे व्यक्ति ने हमारा स्वागत किया । लगता था उस व्यक्ति का जमीदार के साथ अच्छा संपर्क था । दोनों थोडी देर में ही घूमी । मिलकर बातें करने लगे हैं । जहाज का कप्तान सोमनाथ बहुत गुस्से में था । कप्तान बहुत तेज तर्रार व्यक्ति मालूम होता था जहाज के नियम कानूनों का । वह स्वयं भी पालन करता और चाहता था कि हर काम नियमानुसार हो । लेकिन उस वक्त बहुत नाराज एक नाविक ने आकर जमीदार को बताया की कप्तान उससे बात करना चाहता है । जमीदार ने फौरन का कप्तान मुझसे बात कर सकते हैं । मैं उन की हर बात मानने को तैयार है । कप्तान उस केबिन में दाखिल हुआ जिसमें जमीदार सहित हम सब बैठे थे । आते ही कप्तान ने कहा सर मैं चाहता हूँ की बातें साफ साफ की जाए । आपने जो लोग मुझे दिए हैं वो मुझे पसंद नहीं है । खास तौर पर वो ठीक नाक अत का असर तो मुझे बिलकुल पसंद नहीं हूँ हूँ । की इस बात पर जमीदार को भी गुस्सा आ गया तो कहने लगा शायद आपको ये जहाजी पसंद नहीं है । जहाज को तो मैंने अभी तक चलाकर नहीं देखा है इसलिए उसके बारे में कुछ नहीं कह सकता । फिर भी वह मुझे ठीक ठीक ही लगता है वो संभव आपको मालिक भी पता करना हो जिसमें आपको इस जहाज का कप्तान नियुक्त किया है । जमीन सामने तो नहीं कर रहा हूँ बात बिगड सी डॉक्टर ने बीच बचाव करते हुए कहा तो किए इस तरह की बातों का कोई फायदा नहीं होगा । इससे तो कटुता ही बढेगी कप्तान आप बताइए आपको ये सब कुछ कहने की जरूरत क्यों पडी सर मुझे नियुक्ति के समय कहा गया था कि एक बहुत ही गुप्त योजना को लेकर ये यात्रा की जा रही है । यहाँ तक तो ठीक है पर मैं जहाज पर जिससे भी मिलता हूँ मुझे लगता है यात्रा के असली देश के बारे में हर कोई मुझसे ज्यादा जानता है कि अच्छी बात नहीं है हूँ कप्तान आपकी शिकायत उचित है । ऐसा नहीं होना चाहिए । डॉक्टर में सहमती से से हिलाते हुए कहा हूँ, कप्तान ने अपनी बात आगे बढाई । मुझे लगता है कि हम किसी खजाने की खोज में निकल रहे हैं । ये खजाने की खोज वाला काम कुछ अजीब होता है । मैं उसे पसंद नहीं करता और यदि तलाश किसी गुप्त खजाने की हो तो मुझे और भी ना पसंद है । फिर मजे की बात ये है कि ये सारी बातें होती । कोर्स हटा दी गई है । वैसे हर एक को खुलेआम बता रहा है । कप्तान आपका इशारा चांदीराम थी की ओर है । डॉक्टर पूछता हूँ सर एकदम साफ है । मैं घुमा फिराकर बातें करने का आदी नहीं । मैं समझता हूँ कि आप दोनों को नहीं मालूम कि आप करने क्या जा रहे हैं । ये मामला जीवन और मृत्यु का है । डॉक्टर ने कप्तान को समझाते हुए कहा हमें हर खतरे का अभ्यास है । हम उसका सामना करने के लिए तैयार भी हैं । हाँ, आपने एक बात और कही थी की जहाज में जो चालक रखेंगे हैं वो आपको पसंद नहीं है । क्या वे अच्छे नाविक नहीं? कप्तान सोमनाथ ने तुरंत उत्तर दिया, मुझे पसंद नहीं है । मैं कहना चाहता हूँ चालू को का चुनाव मुझ पर छोड देना चाहिए था । मेरे दोस्त हो ना तो ऐसा ही था लेकिन यदि उसमें कोई झूठ हो गई है तो बस यो ही हो गयी इरादातन नहीं की गई । क्या आपको वापस सर क्या नाम है उसका अमर सिंह पसंद नहीं है । डॉक्टर ने देरी से पूछा नहीं मुझे वो पसंद नहीं । इसमें कोई शक नहीं कि वहाँ एक अच्छा नाविक है लेकिन बहुत अच्छा अवसर नहीं बन सकता है । उसे हर किसी के साथ बैठकर शराब नहीं पीनी चाहिए । कप्तान ने कहा, डॉक्टर ने कप्तान से कहा, अच्छा अब इन बातों को छोडिए और साहब साहब बताइए कि आप क्या चाहते हैं? मैं ये पूछना चाहता हूँ की क्या आप लोग इस यात्रा पर जाने के लिए पूरी तरह से गंभीर हैं? बिल्कुल डॉक्टर सचित्र जवाब दिया, अच्छी बात है । आपने मुझे बहुत देरी के साथ सुना होगा । मुझे उम्मीद है कि आप मेरी एक दो बातें और सुनने का कष्ट करेंगे । जहाज पर कुछ लोग अपनी बंदूकों में गोलीबारूद भर रहे हैं और वे लोग जहाज के सामने के हिस्से पर जम गए हैं । उन्हें जहाज के कैबिन के नीचे क्यों नहीं भेज दिया जाए? दूसरी बात ये है कि जो अपने चार आदमी साथ ले जा रहे हैं उनको भी केबिन के पास नहीं बुलाते हैं । और कोई बात सिर्फ एक बात और मुझे बताया गया की आपके पास उस द्वीप का नक्शा भी है जिसमें खजाना दबा हुआ है । यहाँ तक बताया गया की वह द्वीप अंडमान द्वीपसमूह के निर्जन द्वीपों में से एक है । उस द्वीप के अक्षांश और देशांतर तक लोगों को मालूम है । कप्तान ने सभी दार की ओर देखते हुए कहा जमीदार नहीं । गुस्से में लगभग जीते हुए कहा पहले तो किसी को इस बारे में कुछ नहीं बताया लेकिन लोगों को सब कुछ मालूम है । कप्तान ने कहा ये सुनकर संविधान नीचे परिष्टि और देखकर बुदबुदाया । डॉक्टर ये सब तुम नहीं अजीब नहीं बताया होगा । कप्तान ने अपनी बात जारी रखते हुए था साजन हूँ मुझे नहीं मालूम कि खजाने का नक्शा किसके पास है । लेकिन मेरा निवेदन है कि इस स्वयं मुझसे और अमर सिंह से भी गुप्त रखा जाए । वरना आप मुझे इस जहाज की कप्तानी से मुक्त कर नहीं । कप्तान की धमकी मेरी बात सुन कर डॉक्टर कुछ देर के लिए सोच में पड गए । फिर उससे पूछ रहे थे गोलीबारूद से लैस लोगों को जहाज के सामने वाले हिस्से पर जमे हुए देखकर क्या आपको इस बात का संदेह हैं कि वे लोग कुछ गडबडी कर सकते हैं? मेरा मतलब क्या वो लोग विद्रोह कर सकते हैं? कप्तान सोमनाथ ने जवाब दिया, मैं ये तो नहीं कह रहा हूँ की जहाज में बगावत हो जाने का खतरा है । लेकिन जहाज की सुरक्षा को लेकर मैं चिंतित अवश्य जहाज के एक एक व्यक्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी मुझ पर है । मुझे लगता है कि मामला कहीं न कहीं गडबड जरूर है । मैं आपसे यही कहूंगा कि आप पूरी तरह से चौकस रहे सर, मैंने पहले ही कह दिया है कि मैं अपना हर काम नियम के अनुसार करने का आदी । डॉक्टर चुपचाप कप्तान को देखते रहे । उनकी आंखें बता रही थी कि वह कप्तान की बात से सहमत हैं । कप्तान वहाँ से अपने केबिन में लौट गया । कप्तान के जाने के बाद डॉक्टर ने जमीदार की और मुफ्त में कहा प्यार है तो मुझे लगता है तुम्हें तो अच्छे आदमी चुन लिए हैं । एक तो कप्तान सोमनाथ और दूसरा चांदी रहा हूँ । जमींदार ने कुछ दिन चलाते हुए उत्तर दिया, चांदीराम तो सही में ठीक है पर एक कप मुझे बिल्कुल नहीं चढा । कप्तान का व्यवहार अच्छा नहीं है । इसे इस तरह से पेश नहीं आना चाहिए । इसे अच्छे नाविक की तरह व्यवहार करना चाहिए । ठीक है भाई तुम्हारी बात ही मान लेते हैं । लेकिन ये तो समय ही बताएगा कि कप्तान सोमनाथ के बारे में मेरी राय सही है या तुम्हारी डॉक्टर ने अपनी बात को समाप्त करने के दिए से कहा हम लोग जब जहाज के डेक पर पहुंचे तो देखा कई लोग अपने हथियारों और गोलीबारूद सेलेस हो रहे थे । दूर खडा कप्तान उनकी हरकते देख रहा था । थोडी देर में जहाज का रसोइया पहुंचा । वही बंदर की तरह उछलकर सामने आया तो मुझे ऐसी ही हम लोग अपने अपने काम में जुट गए थे । हमें देखकर रसोइया पूछने लगा आप लोग क्या कर रहे हैं? हम लोग अपने हथियारों में बारूद भर रहे हैं । किसी ने जवाब दिया ठीक है, ठीक है भरते रहो लेकिन तुम तो जाकर खाने पीने का प्रबंध करो । कहीं ऐसा ना हो कि लोगों के पेट में कूदते हुए चूहे लपक कर तुम्हारी गर्दन पकडते । एक नाविक ने तो ये का मजाक उडाते हुए कहा, कप्तान ने रसोई को घूम कर देखा और इशारे से समझा है कि वह नीचे जाकर खाना लगाए । वो सोया आप क्या करी? बच्चे की तरह वहाँ से दूसरी घर की और चला गया । डॉक्टरों ने कप्तान से कहा अच्छा आदमी मालूम होता है । तब सामने संक्षिप्त सा उत्तर दिया हो सकता है । फिर आपने चाहते पर काम कर रहे लोगों से कहने लगा आराम से कोई हडबडी नहीं । कुछ पल बाद एक का एक कप्तान मेरी और पलट करके है । लगा उठाओ तुम भी बहुत जाओरा सही के पास । फिलहाल यहाँ तुम्हारी कोई जरूरत नहीं है । ये सुनकर मुझे बहुत बुरा लगा । मैं मनी मनी कप्तान से घृणा करने लगा । मुझे लगा इसके बारे में जिम्मेदार की धारणा ही ठीक है ।

रहस्मय टापू - 10

हमारी यात्रा शुरू हो गई । पहली बात काफी हाल चल रही जमीदार की पहचान के लोग बहुत उत्साह में जमींदार को बधाइयां देते रहे और यात्रा की सफलता की कामना करते रहे । मैं विशेष सभी लोगों के साथ रात भर जाता रहा हूँ । अच्छा लोग उत्साह के साथ गा रहे थे । बहुत सारे लोग अपनी अपनी लालटेन रात के अंधेरे में हिला रहे थे । मुझे सब अजीब लग रहा था पर ये सब नहीं नहीं । बातें मुझे बडी दिलचस्पी लग रही लंबू चांदीराम अपनी बैसाखी के सहारे बडे उत्साह के साथ इधर उधर टहल रहा था । भागने लगा मूलतो कितनी जोरि उस पर पंद्रह की सरबरी और बहुत कलॅर की हो हो बोलते की थी । जो भी बहुत सारी आवाजे उस गाने को दोहराने लगी है । एक का एक मेरी यादों में जब ऍम उसका पुराना गाना खुल गया । वो भी इसी तरह जाया करता था । मुझे लगा कि वह कप्तान भी ये गाना जा रहा है । लेकिन थोडी देर में ही शांत समुद्र की छाती पर चलते हुए जहाज का ठहरा ठहरा संगीत मुझे थपथपाने लगा । पता नहीं कब मुझे नहीं डालेंगे । जहाज बहुत बढिया था । उसके चालक भी आपने डिनर के उसका था । कप्तान सोमनाथ पूरी तरह चौकन्ना था । सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था लेकिन कुछ ही देर बाद गडबडी शुरू होगा । सबसे ज्यादा गडबडी अमर सिंह कर रहा था । कप्तान सोमनाथ को उस पर शुरू से ही कुछ संदेह था । लेकिन अमर सिंह ने तो हद ही कर दी थी । वो पूरी तरह शराब के नशे में धुत था । शराब के नशे के कारण उसका पूरा चेहरा लाल हो गया था और आंखे कामगारों की तरह चलने लगी थी । उन जरूर बातें कर रहा था । रह रहकर लडखडा रहा था की बस चलते चलते गिर पडता था । फिर में से उसके शरीर पर चोटों के निशान उभर आए थे । हमें पता नहीं लग रहा था कि उसे शराब मिलती कहाँ से हैं । हम उस पर पूरी नजर रखते हैं लेकिन कोई भी इस बात को पकडा नहीं पाता लेकिन शराब लाता कहाँ से है । उसने सारे जहाज का वातावरण खराब कर दिया था । दूसरे लोगों पर भी इसका असर पड रहा था । वो अचानक गायब हो जाता हूँ और फिर बहुत देर तक नजर नहीं आता हूँ । कप्तान सोमनाथ उससे सख्त महाराज था । एक बार तो बंदा कर कप्तान ने कह दिया कि इस बार यदि कमर्जी शराब पी तो उससे जंजीर से बांध दो जमीदार समुद्री यात्रा के अच्छे जानकार ने के लिए मैं स्वयं खडे होकर बीच बीच में बताते हैं कि मौसम अब कैसा देवर बदलेगा । हवा का रुख कैसा रहेगा? लंबू चांदीराम अपने कुछ खास लोगों के साथ लेकर अलग चिडी पका रहा था । चांदीराम पिंजरे में बंद करके एक तोता भी अपने साथ लेकर आया था । तोते को कप्तान कहकर बुखार कप्तान सोमनाथ और जमींदार दोनों में अभी तक अनबन बनी हुई नहीं तो एक दूसरे से कतरा रहे थे । पर तो कप्तान अपने काम में पूरी तरह से तल्लीनता के साथ जुडा हुआ था । वैसे अभी तक सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था । जहाज अच्छी गति से आगे बढ रहा था । द्वीपों का समूह सामने दिखाई देने लगा था । कप्तान ने बताया, हवाईअड्डे अनुकूल रही तो हम आज रात को या ज्यादा सादा कल दोपहर तक जाने वाले दिन तक पहुंच जाएंगे जहाँ पर सवार सभी लोगों में उत्साह बारा हुआ था । हमें लग रहा था कि अब हम अपनी मंजिल के बहुत करीब पहुंच गए । सूर्य टल गया था मेरा आज के दिन का काम पूरा हो गया था और मैं अपने केबिन की और पढ रहा था । लेकिन मुझे ख्याल आया की जहाज के डेक पर सेबू से वही जो बेटी रखी है, उसमें से एक दूसरे लेता हूँ । मैं उस और वापस पलट गया । एक बार और दे रहा हो चुका है । देख की निगरानी के लिए तैनात व्यक्ति मुंबई सिटी बजा रहा था । समुद्र की लहरों की आवाज के अलावा बस उसकी सीटी की आवाज सुनाई दे रही है । मैं सेबू की बेटी के पास पहुंच गया । उसे टटोलकर देखा तो वहाँ एक भी से नहीं बच जाता हूँ । तो मैं चुप चाप नहीं और समुद्र की लहरों का और संगीत मैं और सुनने लगा । मेरी आप हैं । नींद से बोझिल हो रही थी । मुझे भी झपकी लगी थी कि पास ही किसी भारी भरकम आदमी के बैठने की आवाज सुनाई । पल भर में ही मेरी नींद गायब हो गई हो गया था । उठकर भागने की तैयारी कर ही रहा था कि वह व्यक्ति कुछ बोलने लगा । मैं फौरन पहचान गया कि ये आवाज लंबू चांदीराम की है । मैं सांस रोककर चुपचाप वही तो बस कर उसकी बातें सुनने लगा । मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना करने लगा कि वह मुझे देखना लेंगे । मैं भी उस की दो चार बातें सुन नहीं पाया था कि मेरा शरीर डर के मारे कांपने लगा । मुझे लगा की जहाज पर सवार सभी लोगों का जीवन खतरे में क्योंकि केवल मुझे इस बात की भनक लग पाई की कोई षड्यंत्र रचा जा रहा है । इसलिए मैं ही लोगों को इसकी सूचना दे सकता हूँ । लेकिन अभी तक मैंने पूरी बात तो सुन ही नहीं थी ।

रहस्मय टापू - 11

लंबू चांदीराम एक नौजवान नाविक से कह रहा था, लगता है भागे इस बार हमारा साथ देगा । कुछ बार जब हम लोग इस टाइप की और रवाना हुए थे तो कप्तान मैं नहीं हुआ था । वही फुलवाडा को जिसके नाम से सारे लोग काम करते थे, तब मैं खुलवा काम आता था । इस बार की यात्रा में चली टोलियों से पीलूराम कि आखिर चली गई और मेरी टांग जाती रही थी । वही पीलूराम आगे चलकर कीरो कांदा सरदार बना था । मैंने उस जहाज को खून मैं नहाते सोने के भंडार के साथ समुद्र में डूबते हुए देखा था, लेकिन मैं बच निकला हूँ । मैंने सोने के नौ सौ सिक्के भी अपने लिए बचा लिया है । तो आज भी बैंक में सुरक्षित । इस बीच नौजवान नाविक ने पूछा हूँ पुलवामा हीरो के बाकी लोग कहाँ है? तेलूराम और कप्तान तो मारे गए । कुछ और मर खप गए । जो बच गए उसे बहुत सारे किसी जहाज पर सवार है । देखिए इस बार क्या क्या करतब दिखाते हैं ये सब हाँ दूसरा मैं कहूंगा कि इस काम में अपनी जी जान लगा देना । मैंने तो खास तौर पर चुना है । मेरे कहने पर चलोगे जीवन भर सुखी रहो गए । चांदीराम ने उस नौजवान से कहा, उनकी बातें सुनकर मेरे तनबदन में आग लग गई । लेकिन उस समय मैं बहुत असहाय था । मनमोहन सिंह उसका चुप रहेंगे । मैं अगर कुछ भी गया था तो वो मुझे वही मार डालते हैं । थोडी देर बाद चांदीराम फिर से कहने लगा देखो जहाज पर सवार नाविकों की जिंदगी बडी कठिन और कठोर होती है । इनका भाग्य भी समुद्र मैं रहते जहाज की तरह डावाडोल रहता है । समुद्र की यात्रा के दौरान ये लडाकू मुर्गों की तरह खाने पीने और मेहनत मशक्कत में जुटे रहते हैं । यात्रा पूरी करके लौटते हैं तो इन है अच्छा पैसा मिलता है पर ज्यादातर लोगों से माडॅल उठा देते हैं । जब जेब खाली हो जाती है फिर किसी मुहिम पर निकल पडते हैं । लेकिन मैं और लोगों की तरह नहीं करता । मैं पैसे बचाकर रखता हूँ । अब मैं पचास वर्ष का हो गया हूँ । इस बार की यात्रा के बाद मेरे पास इतना धन हो जाएगा की सारी उम्र में किस सरदार आदमी की तरह जिंदगी बिता सकते होगा । मैं समय बहुत आराम से रह रहा हूँ । अच्छा खाना सकता हूँ, अच्छे कपडे पहनता हूँ, गरम बिस्तर पर होता हूँ । आप जब समुद्र यात्रा पर रहता हूँ ये सारी सुविधाएं नहीं मिलती कुछ कठोर तब करना पडता है । मैंने जीवन में काफी संघर्ष किया है । शुरुआत मैंने एक साथ नाविक के रूप में की थी । बस समझ लोग ठीक उसी तरह से जिस तरह तुम अपनी शुरुआत आज कर रहे हो । नौजवान ने जवाब में कहा, सच पूछिए तो ये काम मुझे बिलकुल पसंद नहीं है । लेकिन अब आपने जो कुछ मुझे बताया, उस से लगता है कि आप के साथ जुडकर मेरा भी बेडा पार हो जाएगा । मैं जी जान लगाकर काम में जुट जाऊंगा । मैं आपको वचन देता हूँ कि आप के एक इशारे पर जान भी लगा दूंगा । लंबू चांदीराम ने खुश होते हुए था शाहबाज नौजवान तुम पर मुझे पूरा भरोसा है । मुझे विश्वास है कि तुम एक सफल व्यक्ति बंद हो गए तो बहुत दूर के साथ साथ होशियार भी हो । चांदीराम और उस नौजवान ने गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाया । उनकी बातचीत से मुझे भनक लग गई की दाल में कुछ काला है । मुझे विश्वास हो गया कि ये दोनों नाविक नहीं, समुद्री लुटेरे हैं । उनकी बातचीत से भी मालूम हो गया कि कुछ और लोग हैं । उनके साथ हो सकता है कि उनमें पहले भी इस तरह की बातचीत हुई हूँ । ये तो संयोग है कि इस बार उनकी बातचीत मुझे सुनाई पड गई । इस बीच चांदीराम ने सीटी बजाई तो एक आदमी दौडता हुआ इन दोनों के पास आ पहुंचा । चांदीराम ने उस आदमी की ओर इशारा करते हुए कहा, यह है दिन इस जहाज का रस भैया ये अपना खाना साथ नहीं है । युवक में रसोई से पूछा, अच्छा तो ये बताइए कि हम लोग कब तक इस तरह प्रतीक्षा करते रहेंगे । इस कप्तान सोमनाथ को मैं अब और ज्यादा वक्त नहीं हो । मैं जल्द से जल्द उसके केबिन में दाखिल होने वाला हूँ ताकि उसके पास सके बढिया खाने के सामान और महंगी शराब पर हाथ साफ कर सकता हूँ । चांदीराम ने उसे डांटते हुए कहा, तुम केवल सुनोगे और जैसा मैं कहता हूँ, ऐसा करोगे तो अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं करोगे । कप्तान सोमनाथ को हम सबसे आखिर में हार लगाएंगे । मैं कुशल कप्तान है । जल यान को सुरक्षित चलाने का होना उसके पास है । सुना जहाँ पर सवाल डॉक्टर और जमीदार के पास के जाने का नक्शा है । यदि उन्हें संदेह हो गया तो रक्षा कहीं गायब कर देंगे । शायद नष्ट भी कर दे । इसलिए नक्शे के सहारे उन्हें खजाने तक पहुंचने दो । जब खजाना जहाज में लाभ दिया जाए और लोटने की यात्रा आधी तय हो जाए तब हम अपना काम शुरू करेंगे । उन सब पर हम लोग एक साथ धावा बोलेंगे । इस आक्रमण का नेतृत्व मैं करुंगा । सारा काम सोच समझकर और योजनाबद्ध तरीके से करना होगा । रसोई कम हो जाते हुए था तो हम लौटते वक्त उन सबको मानकर जहाज में छोड देंगे । चांदीराम ने तुनक कर उत्तर दिया यह सब तो मुझ पर छोड दो । मैं फुलवाडा को जैसा मूर्ख नहीं कि सब कुछ जिंदा छोड दो । इनमें से किसी को भी जिंदा नहीं छोडूंगा । सब के सब मौत के घाट उतार दिए जाएंगे । तब और कैसे यह सब से ही वक्त आने पर बताउंगा । तब तक अच्छा करोड चुप रहो । अपना बंद रखो । आंखें और कान खुले रखो दिन और उस नौजवान ने चांदीराम को मक्खन लगाते हुए कहा आप असली मध्य सरदार चांदीराम । चांदीराम ने गर्व से सीना फुलाते हुए कहा हूँ बस तुम लोग देखते जाओ । मेरी तो बस एक इच्छा है मुझे वो मुच्छड जमीदार चाहिए । उसकी हत्या तो मैं हाथों से करूंगा हूँ और उसकी मुझे उखाडकर उससे अपने छोटे पूछूंगा हूँ । बडा खाओ देता रहता है अपनी मुझे हूँ अच्छा अब तो मतलब करजा और मेरे लिए सेब लेकर आओ ये सुनकर तो मुझे जैसे साफ किया, आप समझ सकता है कि उस वक्त में कितना डर गया था । दिन उठकर खडे होने को तैयार हुआ था । फिर ठीक उसी वक्त किसी ने उसे रोक दिया । नौजवान ने कहा गोली मारो रूम सडे हुए सेब को इस वक्त बढिया शराब आनी चाहिए । चांदीराम ने दस को आदेश दिया, देखो मुझे तुम पर पूरा भरोसा है । यह लोग शराब स्टोर की चाबी जाओ और फौरन रन की बोतल लेकर वापस आ जाऊँ । मेरे मैंने उसी समय ख्याल आया है कि जहाँ में जो लोग शराब पीकर झूमते नजर आते हैं, उनको शराब चांदीराम के इसको स्टोर से ही मिलती है । मेरे सामने शराब के नशे में धुत अमर सिंह का चेहरा हो क्या? अब मुझे विश्वास हो गया कि उसे चांदीराम भी शराब खिला पिलाकर बर्बाद कर रहा है । दिनु शराब लाने के लिए चला गया । कुछ देर की चुप्पी के बाद उस नौजवान ने चांदीराम के काम के पास अपना मूल ले जाकर कुछ कहा हूँ । उसमें पूरी तरह सुन नहीं पाया और दो चार शब्द जरूर मेरे कानून पढ लीजिए । अच्छा उनसे । मुझे लगा कि जहाँ पर ऐसे लोग भी हैं जो चांदीराम के साथ नहीं चांदीराम को उन पर कोई भरोसा नहीं है । मुझे जानकर अच्छा लगा कि इस अभाग्य जहाज पर कुछ अच्छे और ईमानदार लोग भी हैं । दीनू शराब की तीन बोतले साथ लेकर लौट सब मिलकर शराब के घूम पर हूँ । अपने गले के नीचे उतार नहीं लगे । एक्जाम उन्होंने अपने भाग्य के नाम हो रहा हूँ । दूसरा खुलवाना काकू के नाम और तीसरा बंदे सरदार हूँ । आखिर में नए सरदार लंबू ध्यान दे रहा हूँ । उधर शराब का दौर चल ही रहा था कि आकाश में ऐसा प्रकाश फैल गया हूँ । बादलों की ओर से निकले चंद्रवाल चांदी जैसी होती है । लगभग उसी समय जहाँ पर बहुत सारे लोग एक साथ मिल लो आ गया तापू हूँ ।

रहस्मय टापू - 12

जहाज के डेक पर काफी हाल चल रही है । लोग अपने के दिनों से बाहर निकलकर सामने की और दौड पडे थे । कुछ लोगों का झुंड मेरे पास से गुजरा और मैं लगभग कर उनके साथ होकर खुले देख पर आ गया । बाढ धुंधलका गायब हो गया था । चंद्रमा के प्रकाश में सब कुछ साफ दिखाई दे रहा था । दक्षिण पश्चिम की ओर दो पहाडियां दिखाई दे रही थी । उन दोनों पहाडियों के बीच तीसरे पहाडियों का शिखर कोहरा मेटर का हुआ थोडा थोडा दिखाई दे रहा था । मुझे लगा कि मैं सब कुछ एक सपने में देख रहा हूँ की जहाज पर मैंने चांदीराम की जो बातचीत सुनी थी उससे मैं अभी तक पूरी तरह से डरा हुआ था । इसी बीच मुझे कप्तान सोमनाथ की आवाज सुनाई दी और लोगों को आदेश जारी कर रहा था । हमारा जहाज राजन धीरे धीरे द्वीपों के पूर्वी हिस्सों की ओर बढ रहा था । कप्तान सोमनाथ के आवास फिर सुनाई दी । क्या आप लोगों में किसी ने इस जगह को पहले देखा है? चांदीराम ने कहा जी इससे पहले मैं देख चुका हूँ । मैं एक जहाज में इस और आया था और हमारा जहाज यहाँ से गुजरा था । कप्तान ने पूछा मेरा ख्याल है कि लंगर इसके दक्षिण हिस्से में डालना ठीक रहेगा तो तुम्हारी क्या राय है? ठीक रहेगा सर इस हिस्से को पिक्चर टापू कहते हैं । किसी समय ये समुद्री डाकुओं का विशेष अड्डा हुआ करता था । हमारे पास जहाज में एक ऐसा व्यक्ति है जिसे यहाँ के हर हिस्से का नाम मालूम है उत्तर की और वो जो पहाडी है उसका नाम में अग्रोन्मुखी । वहाँ एक के बाद एक तीन पहाडिया है । जो सबसे बडी और मुख्य पहाडी है । वो उन के बीचों बीच है । इस वक्त वाॅटर की हुई है । उसे समुद्री डाकू दूरबीन के नाम से पुकारते हैं । यहाँ चढकर वह मौसम के तेवर देखा करते थे । चांदीराम ने बताया कप्तान ने एक बडा सा कागज चांदीराम की और बढाते हुए कहा मेरे पास एक चार के देखो क्या इसमें उस स्थल के बारे में कुछ पता चल सकता है । चंद हाथ में लेकर चांदीराम ने गौर से देखा हूँ । चार्ट को लेते ही एक का एक जो चमक उसके आंखों में जोड गई थी वो थोडी देर बाद ही गायब हो गयी । उसका चेहरा उतर गया । उसे जैसी या आप हुआ कि चार टापू में छिपे खजाने का नक्शा नहीं है । उसे भारी निराशा हुई । ये एक तरह से उस नक्शे की नकल जरूर थी, लेकिन वह रक्षा नहीं था जो मैं बिल्लू की तिजोरी में मिला था । लंबू चांदीराम ने बडी चतुराई के साथ निराशा को छुपा लिया । वह कहने लगा, जी हाँ, हम सही जगह पर पहुंच गए हैं या देखिए बस थान जालंघर डाला जा सकता है । यहाँ पर समुद्री तूफानों का जहाज पर कोई असर नहीं पडता । कप्तान ने उसे धन्यवाद कहते हुए चार्ट वापस ले लिया और कहा कि जब भी जरूरत होगी वह उससे फिर सब पर करेगा । जिस देरी और ठंडे दिमाग से चांदीराम ने टापू के बारे में अपनी जानकारी बताई थी, उसे देखकर मुझे बडा हुआ । मैं समझ गया कि ये लंबू बहुत गुस्सा हुआ पी रहे हैं । फिर जब वो मेरे निकट आया तो भीतर ही भीतर में डर से कम होता है । उसकी क्रूरता और दोगलेपन को देखकर मुझे उससे भय लगने लगा था । फिर भी मैं निश्चित था कि उसे इस बात का पता नहीं कि मैंने चुपचाप उसका सारा षडयंत्र सुन लिया है । उसने का एक मेरे कंधे पर अपना हाथ रख दिया और कहने लगा तुम्हारे जैसे लडके के लिए ये जगह बहुत दिलचस्प रहेगी । तुम्हें यहाँ बडा मजा आएगा । समुद्र के किनारे तुम शेयर कर सकते हो, लक्ष्यों पर चढ सकते हो और जंगली बकरियों का शिकार भी कर सकते हो । सच पूछो तो यहाँ आकर मेरा मंदिर पहाडियों पर दौड कर चडने का कर रहा है । मैं भूल गया मेरी एक टन लकडी की है तुम्हारा मान अगर इस टापू पर गई जाने का हो तो इस बूढे चांदीराम को याद कर लेना । फिर मुझे बडे प्यार से थपथपाता हुआ हुआ एक और चला गया । तब तो हम सोमनाथ और जिम्मेदार देख के किनारे खडे होकर आपस में बातचीत कर रहे थे । मैं चांदीराम के बाद डॉक्टर साहब को बताने के लिए आतुर था और मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी कि उन सब लोगों की बातचीत के दौरान में वहाँ बहुत जाओ । मैं खडा खडा । ये सब सोच रहा था कि डॉक्टरों ने मुझे अपने पास बुलाया तो अपना पाई नीचे अपने कैबिन में बुलाए थे और चाहते थे कि मैं जाकर उसे ले आओ । मैंने उनके पास पहुंचने बहुत धीरे से कहा डॉक्टर साहब, मुझे आपसे बहुत जरूरी बात करनी है । कप्तान और जमीदार को केबिन में भेज दीजिए और फिर मुझे किसी बहाने से वहीं अपने पास बुला लीजिए । ये बहुत खतरनाक खबर है । पल भर के लिए डॉक्टर के चेहरे की रंगत बदल गई लेकिन ऍम उन्होंने अपने आप को संभाल लिया । उन्होंने ऐसा भाव दर्शाया जैसे कि उन्होंने कुछ पूछने के लिए अपने पास बुलाया था । फिर मुझे संबोधित करते हुए कहने लगे, धन्यवाद् ये मैं बस इतना ही जानना चाहता था । कप्तान सोमनाथ में सिर्फ पीछे की और माया और पांच ही देख पर खडे लोगों को आदेश के सुर में कहने लगा नौजवानों, जिस टापू की तलाश में हम लोग निकले थे, हमारा जहाज उसके पास पहुंच गया है । जमींदार साहब को मैंने बताया है कि जहाज पर तैनात हर आज भी बडी ईमानदारी के साथ अपना काम करता है । वो आप सब पर बहुत पसंद है । आप की इस कामयाबी पर हम सब जश्न मनाएंगे । आपकी सफलता की कामना के लिए हम लोग नीचे केबिन में जा रहे हैं । इस बीच आप सब के लिए हम यहाँ शराब भिजवा रहे हैं ताकि आप भी जश्न मनाएंगे चलेंगे । इस सफलता पर फोर जाए जोरदार जय घूम है । कप्तान की बात समाप्त होते ही सब ने जोरदार आवाज में जय हिंद का नारा लगाए । इसके बाद लंबू चांदीराम ने कहा, अब एक नारा अपने कप्तान सोमनाथ की जय जयकार के लिए लगाइए । पूरे जोश के साथ आप सब बोले तब तक हम सोमनाथ जिन्दाबाद । मुझे विश्वास ही नहीं हो पा रहा था कि इतने उत्साह के साथ कप्तान सोमनाथ जिंदाबाद का नारा लगा रहे लोगों में ऐसे व्यक्ति भी जो भीतर ही भीतर कप्तान के साथ हम सब की हत्या का षड्यंत्र रच रहे हैं । मैं कैबिन में पहुंचा तो मैंने डॉक्टर साहब को उत्सुकता से अपनी प्रतीक्षा करते हुए पाया । डॉक्टर साहब पाइप से धीरे धीरे कई खींच रहे थे । जमींदार ने मेरी और देखते हुए पूछा बोलो जी तो क्या बताना चाहते हैं? मैंने संक्षेप में उन्हें सब कुछ बता दिया, जो मैंने जहाँ पर चांदीराम और उसके साथियों से सुना था, तीनों बडे ध्यान से मेरी बातों को सुनते रहे । उनमें से किसी ने मुझे बीच में एक पल भर के लिए भी नहीं तो काम शुरू से आखिर तक उनकी आंखे मेरे चेहरे पर जमी रही । किसी ने पालक तक नहीं हूँ । डॉक्टर ने मुझसे कहा ऍम उधर कुर्सी पर आकर बैठा हूँ । जमींदार ने कप्तान से कहा, कप्तान आप सही थे, मैं कलर मैं अपनी मूर्खता पर शर्मिंदा हूं । अब आपका क्या आदेश? कप्तान ने गंभीर और मैं कहा समय को बातों में नष्ट होने नहीं देना चाहिए । तीन चार बातें मेरे दिमाग में है । यदि जमीदार साथ की इजाजत हो तो हूँ । आप जहाज के कप्तान है तो आप कहीं चलेगा । कही जमींदार ने विनम्रता के साथ कहा कप्तान सोमनाथ ने अपनी बात शुरू की । पहला मुद्दा ये है कि हमें अपनी कार्रवाई आगे जारी रखनी चाहिए क्योंकि अब हम वापस नहीं लौट सकते हैं । दूसरी बात यह है कि खजाना मिलने तक हमारे पास वक्त है । तीसरी बात ये है की जहाज पर हमारे विश्वासपात्र कुछ लोग भी है ये होता है की देर सवेरे टकराव होगा ही । हम अब सिर्फ इतना कर सकते हैं कि सही मौके की ताक में रहें और जैसी मिले वैसे ही दुश्मन पर पूरी तैयारी से टूट पडे । मेरा ख्याल है जमींदार साहब के घरेलू करो पर तो हम भरोसा कर ही सकते हैं । डॉक्टरों ने बीच में बोलते हुए का बहुत संभव है । जमींदार साहब जी ने अपना आदमी समझकर साथ लाये हैं । उन्हें चांदीराम ने पहले ही अपने पास लगवा रखा हो । बहुत शातिर आदमी है । इन हालात में तो सबसे पहले जरूरी ये हो गया है कि हम भरोसे की शिनाख्त कर लें । इस मामले में जिम सबसे ज्यादा मदद कर सकता है क्योंकि बहुत लोग इससे बहुत खुले हुए हैं । डॉक्टर में सुझाव दिया मैं अपने आप को इस काम के लिए बहुत असहाय महसूस कर रहा था लेकिन मैं फौरन अपने काम में जुट गया । पूरी जांच पडताल करने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा की छब्बीस में से केवल सात लोग हमारी और है यानी उन्नीस के मुकाबले कुल सात । उनमें भी एक बालक ।

रहस्मय टापू - 13

अगले दिन सवेरे मैं जैसी देख पार पहुंचा । टापू बहुत साफ और एकदम नए रूप में नजर आ रहा था । हवा उस समय हम चुकी थी फिर भी हमें बडी ताजगी का हो रहा था । हम काकू के दक्षिणपूर्वी हिस्से से केवल आधा मील दूर रह गए थे । टापू का एक बडा हिस्सा रक्षियों से ढका हुआ था हूँ । बीच बीच में धरती भी दिखाई दे रही थी । अनेक पहाडीयों पर सुरक्षित है । पर कुछ पहाडियां बिल्कुल नहीं थी गंजे सर की तरह । उनके बीच में पहाडी जिसका नाम दूरबीन रखा गया था । सबसे ऊपर सर उठाकर खडी नहीं । उसकी बनावट बहुत विचित्र हैं । हमारा जहाज राजन समुद्री लहरों के थपेडों से पूरी तरह से हिल रहा था । उसका अंग अंग छटक रहा था । कभी कभी जोरदार नेहरूके थपेडे उसे कुछ तुम उछाल देते । ऍफ के किनारे झाग का हम बार लग गया था । सूर्य तेजी के साथ चमक रहा था और कुछ गर्मी भी हो गई थी । एक का एक मेरा जी घबराने लगा । सच पूछिए तो मुझे टापू में छिपे खजाने से काॅफी होने लगी थी, क्योंकि हवा बिलकुल ही हुई थी । इसलिए जहाज को लंगर डालने के लिए आगे ले जाने में काफी मुश्किल हो रही थी । जहाँ उसको एक जगह खडा करके हमें टापू की धरती पर नौकाओं से पहुंचना था । नौकाएं समुद्र में उतार दी गई । मैं भी एक नौका में सवार हो गया । हमारी नौका के कमांडर का नाम आशुतोष बहुत बुरी तरह से जो लाया हुआ था और ऍम कुछ बडबडा दे रहा था । मुझे लगा अब तक अनुशासित रूप से काम कर रहे लोग आपके सामने आते ही बेकाबू से होते लगे हैं । पहली बार लगा कि चांदीराम इस पूरे इलाके को अच्छी तरह से जानता है जितना कि कोई व्यक्ति । अपनी हथेली की रेखाओं को मैं जानता था कि कहाँ पर पानी कह रहा है कहाँ पर उथला कहाँ पानी के अंदर छोटी बडी चट्टानें हैं । जहाज को जहाँ पर लंगर डालने के लिए ले जाया गया वो सपाट और फॅमिली जगह थी । हमने जैसी भी लगभग है के आप ऊपर भारी हलचल हुई । चिडियों के झुंड फडफडाकर पूर नहीं लगे । वे जुड चिल्लाते हुए दूसरों के ऊपर चक्कर काटने लगेंगे । लेकिन एक मिनट के अंदर ही सारी चिडियाँ फिर अपने अपने ठिकानों पर आकर बैठ गई और चारों शांति छा गई । अच्छा किनारे का हिस्सा भी ऍफ का हुआ था । जमीन सपार्ट थी । दोनों ने दिया वहाँ समुद्री पानी में गिर रही थी । जहाज के ऊपर से देखने पर नहीं नहीं लगता था कि टापू पर कोई आबादी होगी । कहीं कोई मकान है, झोपडी नजर नहीं आ रही थी । हवा इस तरह हमें हुई थी कि एक पत्ता तक नहीं हिल रहा था । जहाज जहाँ पर लाकर खडा किया गया, वहाँ का पानी है ना हुआ था । उसमें गिरकर सडे पत्ते और शिक्षा की शाखाओं से दुर्गंध उठ रही थी । डॉक्टर सारे वातावरण को इस तरह सुन रहे थे जैसे कोई सडे हुए अंडे सुनता है हूँ । डॉक्टर कहने लगे मैं तो नहीं बता सकता कि यहाँ पे एक हजार है या नहीं है । पर इतना जरूर भरोसे के साथ कह सकता हूँ कि यहाँ पर अगर आबादी है तो बुखार से अवश्य होगी । टापू के किनारे उतरते ही लोग अलग अलग झुंड बनाकर बैठ गए । अनेक लोगों को चेहरों से दृष्टता टपक रही थी । उनकी आंखों से षडयंत्र जाते नहीं लगा था । अब ये बात पूरी साफ हो गई थी कि षड्यंत्रकारियों के साथ काफी लोग मिल चुके थे । उनके इरादे खतरनाक लंबू चंदीराम एक एक कर सभी झुंडों से अलग अलग मिल रहा था । उनसे गुपचुप बातें कर रहा था । हर एक से मुस्कुराकर बातें कर रहा था, हम लोगों ने केविन के अंदर पहुंचकर सारे हालात पर गौर किया । सब सामने कहा मामला बहुत बिगड गया है । किसी से कुछ भी कहो तो लडने पर आमादा हो जाता है । लगता है अब तो सिर्फ एक ही आदमी पर भरोसा करना पडेगा । इस पर लंबू चांदीराम पर अब यही रास्ता नहीं किया है । लोग मेरी बात नहीं सुन रहे हैं । इस हालत में उनको यदि में कोई आदेश देता हूँ तो वे उसपर अमल करेंगे नहीं । सीरियल में पलट कर सकती के साथ कुछ करूँगा तो वे हथियार उठा लेंगे । जल्दी मैं चुप रह जाता हूँ और उन से कुछ नहीं कहता । चांदीराम को लग सकता है कि हमें उन के षड्यंत्र की भनक पड गई है । इसलिए हमें चाहिए उसके ऊपर से तो चांदीराम को अपने विश्वास में लेकर चलें और भीतर से सत्तर का है । अब चांदीराम से हम कहेंगे कि वे लोगों को साथ लेकर तापों पर आज के दो पर सैरसपाटा करेंगे । यदि वे सब लोग चले जाते हैं तो हम लोग जहाज की निगरानी करेंगे । मुझे पूरा विश्वास है चांदीराम जिन लोगों को साथ लेकर जाएगा उन्हें वापस भी ले आएगा में सब उसके सामने मिलने की तरह दुबके रहते हैं । इसके बाद हम लोगों ने अपने अत्यन्त विश्वासपात्र लोगों को अपने पास बुलाया । जमींदार के तीन घरेलू व्यक्तियों हंसराज, चुकल और लालचंद को गोली उसे बडी स्कूल दी गई । उन्हें जब लंबू चांदीराम की नियत मैं फट के बारे में बताया गया तो उन को ज्यादा अच्छा नहीं हुआ क्योंकि कुछ लोगों की हरकतों से उन्हें पहले ही हो गया था कि वे कोई गडबड जरूर करेंगे नहीं । उनको सब कुछ समझाने के बाद कप्तान देख पार पहुंचा हूँ । उसने कहा नौजवानों, जहाज के लंबे सफर से तुम सब सूट कहेंगे । तुम में से जो भी चाहे नौकाएं खेकर आपको तक पहुंच सकता है और आज का दिन वाॅकर अपना जी पहला सकता है । सूरज ढलने से आधा घंटा पहले में बंदूक से गोली छोडूंगा उसे सुनकर आप सब वापस लौटाना । इसलिए कर सब लोग खुशी हमारे ठीक पडेगा । उनकी चीजों की आवाज ऍम उसकी अनुकूल से फिर ऍम पर उन्होंने लगी । उनकी खुशी के कारण शायद ये था कि अब सीधे जाने तक पहुंचकर उसे पास जाएंगे । विस समुद्र के पानी में अपनी अपनी नौकाएं उतारने लगी हूँ । कप्तान आदेश देने के पास फौरन ठीक से हट गया ताकि चांदीराम अपनी योजना के अनुसार अपने लोगों को टाप के ऊपर ले जाएगा । मुझे भी लगा कि कब सामने तत्काल वहाँ से हट जाने का जो निर्णय लिया था वो पूरी तरह सही था । ये बात दिन के उजाले की तरह साफ हो गई थी कि लघु चांदीराम ही सही मायने में अब जहाज का कप्तान हो चुका था और अधिकांश नाविक उसके साथ है । यह तो स्पष्ट हो गया था की हम लोगों के प्रति निष्ठावान लोग बहुत कमरे गए थे । मैं सोचकर सिहर उठा की किस तरह षड्यंत्रकारी जहाज के निर्दोष लोगों की हत्या का मन बना चुके हैं । अंतिम बाहर टापू पर जाने वाले लोगों की पार्टी बंदी ते ये हुआ की छह लोग जहाज पर रहेंगे । चांदीराम के नेतृत्व में तेरह लोग जहाज से उतरने की तैयारी करने लगे । उसी समय मेरे मन में विचार आया । ये विचार आगे चलकर हम लोगों के जीवन की रक्षा में बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ । मैंने सोचा यदि चांदीराम ने छह लोगों को जहाज पर छोडा है तो केबिन में हमारे जो लोग हैं उन्हें इन छह लोगों को संभालने में कोई बडी दिक्कत नहीं आएगी । इसलिए मेरा उनके पास रहना बहुत जरूरी नहीं है । मैंने तय किया कि मुझे भी किनारे पर पहुंच जाना चाहिए । मैं चुप चाप सबसे पास वाली नौका में जाकर बैठ गया और लगभग उसी वक्त मौका आगे रवाना हो गई । अन्य लोगों ने मुझे नहीं देखा और नौका के चालक की नजर मुझ पर पडी और वक्त होगा । जेम तुम दिया है हैं अपने सिर को नीचे झुका कर रहे हो उस साल आपकी आवाज दूसरी नौका में बैठे चांदीराम ने सुन नहीं वो एकदम पालता और उसने मुझे पीछे वाली नौका में आते हुए देख लिया । हमारी नौका हल्की थी इसलिए शेष सभी नौकाओं से तीन चलती हुई किनारे के पास थोडा पहले पहुँच गए । पानी की सतह पर लटकी हुई एक विक्षिप्त शाह को पकडकर में किनारे पर पूछ गया । फॅमिली में तेजी के साथ टापू में पहले जनरल की और होगा चांदीराम और उसके साथ ही कभी एक सौ मीटर पीछे ही थे । जोर से चिल्ला को जाॅन मैं रुका नहीं, सीधा जोडता हूँ, जंगल में भेज दिया जब तक मेरी चाहेंगे जवाब नहीं मैं दौडता रहा । अच्छा तो

रहस्मय टापू - 14

मैं उस काॅफी टापू के एक गहने कुछ मैं पहुंच गया लंबू चांदीराम को चकमा दे पाने की सफलता पर मैं बहुत पसंद था । घने वृक्षों के कुछ से थोडा बाहर निकलकर मैं खुले स्थान पर पहुंचा । उस खुली जगह से काफी दूरी पर एक पहाडी नजर आ रही थी । खुली धूप में पहाडी का शिखर चमक रहा था । मैं अपने साथियों को जहाज पर छोड आया था । टापू पर शायद कोई आबादी नहीं थी । केवल कुछ बनने पशु और पक्षी थे । मुझे बडा आनंद आ रहा था । मस्ती के साथ इधर उधर घूमता रहा हूँ । वहाँ ऐसे जंगली पेड पोधे भूल दिखाई दे रहे थे जिनसे मैं अभी तक परिचित नहीं था । यहाँ वहाँ बहुत सारे सांप पूछ दिखाई दिए । एक साहब अपना फन उठाकर मुझ पर जोर से कारण मुझे अब तक नहीं मालूम था कि वह बहुत जहरीला साथ था । शायद ईश्वर ही मेरा रख सकता इसलिए मैं बच गया । उस जगह नीलगिरि के लम्बे लम्बे पुरुषों और बांसों के जो मोटो की भरमार थी तो बहुत हो गई थी कुछ दूरी पर पहले दलदल से वहाँ आप जैसी उठ रही थी एक एक मुझे झाडियों में जल्दी सुनवाई एक पदक ॅ कर दूँ भर बढाकर हो गई । एक एक सारी बस की ओर है । लगी पूरी देर में पदकों का एक बादल ससूर करता हूँ । मेरे सिर के ऊपर मंडराने लगा । मुझे लगा कुछ लोग आस पास पहुंच गए । मेरा अनुमान गलत नहीं था क्योंकि शीघ्र ही मुझे कुछ दूरी पर मनुष्य के धीमे स्वर सुनाई देने लगे । ये स्वर्ग मेरी और बढ रहे थे । मैं भी तो क्या मैं नीचे झुककर घुटनों के बल चलता हुआ गनी छाडि में पहुंच गया और जूही की तरह दुबक कर बैठ गया हूँ । दो लोग आपस में बातचीत करते सुनाई दिए । इनमें से एक आवास को तो मैं तुरंत पहचान गया कि यह आवाज लंबू चांदीराम की थी । बीच बीच में एक और व्यक्ति की आवाज भी सुनाई दे रही थी, लेकिन वो लोग क्या बात कर रहे हैं? मेरी समझ में नहीं आ रहा था । कुछ देर बाद लगा कि वे एक जगह बैठ गए हैं । उन्होंने बातें करना भी बंद कर दिया है । बट के बीच धीरे धीरे दलदल के आसपास अपने ठिकानों पर बैठने लगी थी । मैंने साहस पर थोडा और आगे रखने लगा । मुझे आदत थी उस रात सेब के बेटियों के पास चांदीराम और साथियों की कुछ बातचीत जिसे सुन पाना हमारे लिए वरदान साबित हुआ था । मैंने सोचा यदि में इस बातचीत को भी किसी तरह सुन लेता हूँ, हो सकता है इन लोगों की नई योजना के बारे में जानकारी मिल जाए । बिना कोई आवाज की ये मैं बिल्ली की तरह उस और बढने लगा है जिस और से आवाज सुनाई दी । पूरी सावधानी के साथ बहुत धीरे धीरे रखता हुआ ऐसी जगह पहुंच गया जहां घनी झाडियों के पत्ते कुछ खाते हुए थे । मैंने धीरे से सर उठाकर सामने की ओर देखा । लंबू चांदीराम और एक नाविक आमने सामने खडे थे । वो दोनों बातचीत कर रहे थे । दोनों के चेहरों पर धूप पड रही थी इसलिए साफ साफ दिखाई दे रहे थे । चांदीराम ने अपना तो फांसी नीचे जमीन पर रख दिया था । चांदीराम उससे कह रहा था, हो सारा सोना मिलने वाला है । सोने को देखो, अपने भविष्य को देखो और मैं जैसा कहता हूँ वैसा ही करूँ तो मैं जरा भी ईला वाला किया तो सब लोग उसका परिणाम भयानक होगा । सामने वाले का चेहरा गुस्से से तमतमा था तो कहने लगा चांदीराम तुम सोने चांदी की चमक मैं हो सकते हो और तुम मेरा ईमान नहीं खरीद सकते हैं । मुझे नहीं मालूम किलोमीटर नहीं चोर गिरे हुए इंसान हो । मैं तुम्हारे खूनी षड्यंत्र का भंडाफोड कर दूंगा और तुम्हारे असली जहर को सबके सामने बे नकाब करके रख दूंगा । एका एक दलदल की ओर से भयानक चीज सुनाई दी है । हूँ बच्ची पहाडी उस से टकराकर वापस लौटी । एक बार फिर धीरू पक्षी हर पढाते हुए हवा में उडने लगे । फिर कुछ ही पलों में कहाँ मुझे अच्छा गई । परिन्दे अपने किसानों पर लौटने लगे । उसी समय बनावे कुछ हाल कर चांदीराम की गर्दन मतलब का चांदीराम नहीं खुलती से एक कदम पीछे हटते हुए कडकती आवाज ने कहा नौजवान हूँ उसको रोकने का सबसे बताओ चांदीराम ये चीज किसकी थी? ये चीज थी उस राम विसाल की जो डॉक्टरों जमीदार का खास आदमी है, बहुत समझाया था उसे पर मान नहीं रहा था । कहता है जिसका नमक खाया उस गद्दारी नहीं कर सकता हूँ । अब निभाता रहे वफादारी कयामत तक चांदीराम नहीं देंगे की मुद्रा में कहा हूँ । युवक का चेहरा गुस्से से लाल हो गया । चांदीराम को कहाँ से देखते हुए कहा चांदीराम, तुमने एक ईमानदार और सच्चे इन्सान को मार डाला । तुम्हारे और मेरे संबंध बहुत पुराने पर तुम्हारा असली चेहरा आज उजागर हुआ । मैं तुमसे घृणा करता हूँ । आज से तुम्हारा और मेरा रिश्ता खत्म और ये भी सुन दो कि मैं अपने कप्तान से गद्दारी नहीं करूंगा । मैं जानता हूँ कि तुम बहुत दुष्ट व्यक्ति हो । मैं भी जानता हूँ कि तुम मुझे जान से मार सकते हो । ये जानते हुए भी मैं तुमसे कह रहा हूँ कि मैं तुमसे घृणा करता हूँ । तुम्हें मैंने प्यार एक दूसरे को मार डाला । तुम चाहो तो मेरी जान लेलो पर मैं तुम्हारा साथ नहीं दूंगा । ये कहकर वह बहुत दूर नाविक मुडकर समुद्र तट की ओर बढने लगा । वह भी थोडी दूर गया था कि चांदीराम ने अपनी बगल से छुपा हुआ खंजर निकाला और निशाना साथ कर युवक की ओर फेंका । अब तो हूँ फॅार हवा में चमकता हुआ उस योग की पीठ के बीचोंबीच जाकर खस्ते युवक के हाथ पल भर के लिए हवा में उठे । दूसरे ही पल वह कटे वृक्ष की तरह फैंसी पर गिर पडा । उसके मुँह से बस हल्की सी चीज ही निकल पाई । चांदीराम बंदर की तरह फुर्ती के साथ कूदकर उस योग की पीठ पर चढ गया । उसने दो बार आपने चाकू के भरपूर वर उस पर जान है । विश्वास हो गया तो मर चुका है तो चांदीराम इतने मिलन से उसकी लाश पर से उठाओ उसने अपना हाइट उठाकर सिर्फ था । आपने वैसा की को बाहर के नीचे दबाया है और इस नजर धरती पर पडे उस योग बच्चों पर डाली है । उसके रक्त की धार बहकर धरती पर फैल गई थी । मेरा सिर दुखने लगा । मुझे लगा कि सारा ब्रह्मांड मेरे चारों और चक्कर काट रहा है । जो कुछ मैंने देखा उस पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था । तो मेरी आंखों के सामने एक आदमी का खून हो गया था । एक निर्भर रात कि कत्ल की खबर सुनी थी । दूसरा निरापराध इंसान मेरी नजरों के सामने मारा गया । दो ईमानदार आदमी थोडी देर में मारे गए और मैं कुछ नहीं कर सकता हूँ । चांदीराम ने अपनी जेब में हाथ डालकर एक सिटी निकली । उसमें खास अंदाज से सीटी बजाई । विषय ही ये उसके साथियों के लिए संकेत था । मैंने सोचा अब यहाँ एक बाल भी रुकना ठीक नहीं होगा । मैं रखता हूँ झाडी उसे बाहर निकला और खुले मैदान में बहुत ही सर पर पैर दर्द कर रहा था । मैं अपने जीवन में इतना तेज कभी नहीं थोडा भाई से आपका हुआ । मैं जिधर भी जगह मिली उधर दौडता चला गया । मुझे नहीं मालूम मैं कब किस तरह और बढता चला गया । मुझे भी नहीं मालूम कि कब लौटने का संकेत देने वाली बोली छूटी और कब लोग नौकाओं पर सवार होकर जहाज की ओर लौट गए । मैं तो बस तोड रहा मेरे पास । वो जब तक के तो मैंने देखा में पहाडी की तलहटी में खडा हूँ । उस पहाडी के पीछे तो और बढिया थी आसपास करने प्रकशित खडे थे । उन सुरक्षा से जंगली लताएं लगती हुई थी । मैंने चारों ओर नजर दौडाई तो भाई मेरे सीने में धीरे धीरे उतरने लगा । मुझे लेगा बर्फ की महीन सेमिनार मेरे गले से नीचे उतर कर मेरे दिल में ठंडे नश्तर की तरह चुभ रही है ।

रहस्मय टापू - 15

मैं टापू पर बैठ सकता हूँ । जब पहाडी के पास पहुंचा तो पूरी तरह से हो चुका था । मैं पहाडी के जिस हिस्से में खडा था वहाँ से सीधी चढाई और गणित दुख और पहाडियों से घिरी हुई थी । एक का एक पहाडी से कुछ पत्थर नहीं होंगे जो घने पर हूँ और शाखाओं से टकराने के कारण धीरे धीरे नीचे आने लगे हैं । मैंने तत्काल ऊपर देखा, मुझे लगा ऍफ चीड के बडे से पेड के पीछे छूट गया है । ये कैसा जूना? इसका सही सही अनुमान लगाना मेरे लिए हो । मुझे लगा कि उसके शरीर पर बडे बडे बाल है और वह छोटे भालू जैसा कोई जानता है में पहले से ही थका पर सहना हुआ था । उस वीरान टापू पर उस विचित्र जीजू ने मुझे और भी कोई भी कर दिया था तो कुछ भी चीज मुझे चांदीराम से भी ज्यादा खतरनाक दिखाई दे रहा था । मैं एकदम से पीछे घुमा । मैंने सोचा कि अब यहाँ रहना कि नहीं, इसकी वापस जांच की ओर चल देना चाहिए । मुड मुडकर पीछे देखता हुआ आगे बढने लगा है । मैं भी कुछ दूर चलाई था की वह जो मुझे फिर से दिखाई दिया वो लंबा चक्कर काटकर मेरे सामने से गुजर गया । मैं पूरी तरह से थका हुआ था इसलिए मुझे दौड पाने की हिम्मत नहीं रह गई थी । वह रिक्शे से कूदकर दूसरे रक्षा पहुंचाता । बीच में वो दो टांगों पर दूर ता हूँ दिखाई देता है । मैंने उसे ध्यान से देखा तो मुझे लगा कि हूँ कोई जानवर नहीं बल्कि इंसान होना चाहिए । लेकिन अगर वह कोई इंसान तो निश्चय ही बहुत विचित्र इंसान है । मैं सोचने लगा कि वो मेरा पीछा क्यों कर रहा है? क्या मुझे मारना चाहता है वो चुप चाप एक स्थान पर खडा हो गया । मैं अपने बचाव के बारे में सोचने लगा । तभी मुझे ख्याल आया कि मेरे पास पिस्तौल भी हैं । उससे मेरी मत पडती है । मैंने अपनी जेब से पिस्टल को कटोला और साहस के साथ उसकी और बडा मैं भी कुछ कदम चलाई था की वह छेड के पेड के पीछे से निकलकर सामने आ गया तो कूदकर मेरे सामने घुटने के बल बैठ गया और उसने अधिकारी की तरह अपने हाथ मेरे सामने फैला दिए । मैं रिटर्न कर खडा हो गया । मैंने उससे पूछा तो कौन हूँ और बडी दीनता के साथ कहने लगा मेरा नाम बेनीमाधव । पिछले तीन वर्षों से मैंने किसी मानव को यहाँ नहीं देखा है और नहीं किसी से कोई बात कर पाया हूँ । अपनी बोली सुनने और उससे बात करने के लिए मैं तरस आ रहा हूँ । उसे अपनी भाषा में बोलते हुए सुनना मेरे लिए बडा सुखद विस्मय था । उसके शरीर और चेहरे पर मैल जमी हुई थी, पर फिर भी वो अच्छा लग रहा था । गोरे रंग का था और धूप में तब तब कर उसका शरीर सामने केरंगा हो गया था । उसके होड काले पड गए थे । उसके शरीर पर कपडों के नाम पर कुछ चीथडे लगाते हुए थे । कुछ चीथडे किसी नाविक की पुरानी पोशाक के थे और कुछ जहाज की तालपत्र के टुकडों अपनी कमर में उसने चमडे की बेल्ट बांध रखी थी है । उसकी हालत देखकर उसकी बातें सुनकर मेरा मन पसीज गया । मैंने पूरी सहानुभूति से पूछा जान कहा दुनिया तीन वर्षों से हो क्या तुम्हारा जहाज दुर्घटनाग्रस्त हो गया था? नहीं मेरे धंदे दोस्त मेरा जहाज डूब गया था । तुम्हें कहावत सुनी होगी बेडा गर्क हो गया । बस यही समझ लो कि मेरा भी बेडा गर्क हो गया था । मैं समझ गया ये व्यक्ति समुद्री डाकुओं के किसी गिरोह का सदस्य रहा होगा और वे इसे इस द्वीप पर अकेला छोड गए होंगे । बेडा गर्ग का समुद्री डाकुओं की भाषा में एक अर्थ होता है किसी को भूखा पैसा मरने के लिए किसी विराट टापू पर छोड कर चले जाना । उसने अपनी बात को आगे बढाते हुए कहा मैं तीन साल पहले यहां छोड दिया गया था । तब से मैं जंगली फल, मछलियाँ, बकरी का मांस खाकर जीवित बकरियां स्टाप ऊपर बहुतायत में मिल जाती है । लेकिन तीन वर्षों में मुझे डाल बहादुर रोटी नसीब नहीं हुई है में तरस गया था । अच्छा खाने के लिए अच्छा बताऊँ । क्या तुम्हारे पास परेड का एक टुकडा है? वे कई दिनों से सपने में देख रहा हूँ कि मेरे सामने पनीर परोसा गया है और जब मैं पनीर के टुकडे की और हाथ बढाता हूँ तो गायब हो जाता है । यदि मैं किसी तरह जहाज पर लौट गया तो तुम्हारे लिए ढील सारा परेड लागू होगा । अरे भाई, तुम को जहाँ तक पहुंचने के लिए कौन रोक सकता है ये बताओ तुम्हारा नाम क्या है हूँ । मुझे जिम कहते हैं । मैंने उसे बताया अच्छा जी मैं तुम्हें अपनी राम कहानी सुनाता हूँ । यहाँ जो तीन साल मैंने बिताया बहुत खराब है मैं अकेला इंसान और ये वीरान टापू तुम समझ सकते हो । मैंने एक एक पल यहाँ किस कष्ट के साथ गुजारा होगा । मैं तुम्हारी तरह बालक था तो मेरा चाल चलन बहुत अच्छा था किन्तु उन समुद्री डाकू की संगत में में बिगड गया । लेकिन तीन वर्षों तक इस टापू पर अकेला रहने के बाद मैं पूरी तरह से बदल गया हूँ । मैं आप कभी भी समुद्री डाकू नहीं बनूंगा । ये कहने के बाद उसने अपना मुझे मेरे काम के पास लाकर फुसफुसाते हुए था और जिस मेरे पास अब हो गया है मैं तो मैं बडा आदमी बना दूंगा । तुम पहले व्यक्ति हो जिसमें मुझे इस द्वीप पर तलाशा है । मुझे लगा इस निर्जन द्वीप पर अकेले रहते रहते विचारा समझ गया है । मुझे धनवानों बडा आदमी बनाने की बात कर रहा है । मैं सोच रहा था कि उसने झटके के साथ मेरा हाथ कसकर पकड लिया और कहने लगा जिम सिस्टर्स बताऊँ ये जहाज खुलवा डाकू का तो नहीं मैं समझ गया ये आदमी काम का है और अपना दोस्त बनाने लायक है । मैंने उससे कहा नहीं है ये जहाज खुलवा का नहीं है । सच बात तो ये है कि फुलवा डाकू मर चुका है लेकिन फुलवा के गिरोह के कुछ लोग जहाज पर सवार अवश्य है । वो लंगडा तुम में नहीं है, लम्बा या नहीं । लंबू चांदीराम उसने बडी उत्सुकता के साथ पूछा हाँ, वो जहाँ पर है, अब तो जहाज का नेता भी है । उसके साथ उसका तोता भी है जिससे वो कप्तान फुलवा के नाम से पुकारता है । ये बताने के साथ ही मैंने उसे अब तक की सारी कहानी सुना दी । वो बडे ध्यान से मेरी बातें सुनता रहा । उसके चेहरे पर चिंता उभर आई और वह मुझसे कहने लगा हूँ जी, तुम लोग भारी मुसीबत में फंस गए हो लेकिन चिंता मत करो । मैं तुम्हारी पूरी मदद करूंगा । क्या तुम्हारा जमीदार भला आदमी है? मैंने जवाब दिया समिता बहुत पहले और बहादुर होने के साथ साथ उतार भी है । यदि हमें खजाना मिल गया तो जमीदार साहब उसे सब में बराबर बराबर बांट देंगे । क्या वो मुझे अपने साथ देश वापस ले जाएंगे? उस ने गंभीरता से पूछा क्यों नहीं वो बहुत भले व्यक्ति है । हमें तुम्हारी मदद की जरूरत है । इस जहाज कोई सही सलामत वापस लेकर जाना है । तुम्हारी मदद इसलिए भी जरूरी है की जहाज पर हमारे साथ बहुत कम लोग हैं । मेरी बात सुन कर वह बहुत खुश हुआ । मेरे सर पर हाथ रखकर कहने लगा मैं तो मैं एक और बात बताता हूँ । जब फुलवाडा को इस टापू पर खजाना लेकर आया था तो जहाँ से एक नौका में छह घंटे करते लोग उसके साथ टापू तक आए थे । जब खजाना छुपाने के बाद जहाज पर लौटा तो अकेला हूँ कुछ वो लोग मारकर दफना दिए थे । उन छह स्वस्थ लोगों को उसने किस तरह मारा ये कोई नहीं जानता हूँ । जब जहाँ पर लौटा तो बिल्लू और चांदीराम दोनों ने उससे पूछा कि खजाना कहा है । उसके जवाब में उसने कहा कि तुम लोगों को खजाना चाहिए तो आप ऊपर चले जाओ और उसे तलाशते रहो । लेकिन किसी की बात नहीं है उसकी तीन वर्ष बाद में करने । गिरोह के साथ एक जहाज में जब टापू के पास से गुजरा तो मैंने अपने साथियों को बताया कि फुलवार डाकू का खजाना में यही छुपा कर रखा गया है । मैं और मेरे साथ ही इस टापू के किनारे उतरे । हम लोग लगातार बारह दिनों तो इस टापू का चप्पा चप्पा तलाश दे रहे हैं । पर खजाना हमें नहीं मिला । वे लोग इस से इतना नाराज हो गए । एक सुबह सारे के सारे जहाज की ओर रवाना हो गए हैं । उनमें से एक में मेरी और बंदूक और एक फावडा बढाते हुए कहा बेनीमाधव अब तुम्हारे कर खजाना तलाशने रहो तो अकेले नहीं खुलवा के खजाने के मालिक मैं उनकी मिन्नतें करता रहा । पर वे नहीं नहीं बिल्कुल नहीं मानेंगे । मुझे अकेला छोड कर चले गए । उस की दर्द भरी कहानी सुनकर में राजीव बडा खराब हुआ । मैंने उसका हौसला बढाते हुए कहा कोई बात नहीं । अब तुम्हारे कश्मीर के दिन समाप्त होने वाले हैं । उसकी आंखों से आंसू उसकी आंखों से आंसू चल चला है । वह कहने लगा, तीन वर्ष मैंने यहाँ बिता दिए और एक भी वक्त अच्छा खमा नसीब नहीं हुआ । जहाज पर जाकर जमीदार साहब को बताना कि बेनीमाधव अच्छा आदमी है । उस पर भरोसा किया जा सकता है । लेकिन मैं जहाजपुर पहुंचूंगा कैसे? मैंने उससे पूछा चिंता मत करो । मेरे पास एक छोटी सी नौका है । मैंने उसे वहाँ सफेद चट्टान के पीछे छुपा रखा है । यदि कोई साधन नहीं मिला तो हम उस नौका का इस्तेमाल कर सकते हैं । वो अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि क्या एक सारा द्वीप तोप के गोले की आवाज से गूंज उठा हूँ । सूरज डूबने में अभी दो घंटे का समय बाकी था, इसलिए तो आपसे गोले का छूटना समझ में नहीं आ रहा था । मैंने बेनीमाधव से कहा लगता है उनमें लडाई शुरू हो गई है । आओ जल्दी करूँ और मेरे पीछे पीछे चलते रहो मैं सारी घबराहट भूकर तेजी के साथ उस और बडा जहाँ जहाँ का लंगर डाला गया था भी बकरी की खाल ओढकर तेजी के साथ मेरे बगल में दौडता रहा तो मुझसे कहने लगा ग्यारह जीम बाई और देखो वहाँ शिक्षक जुड के नीचे मैंने पहली बकरी मारी थी । लेकिन अब इस बेनीमाधव के डर के मारे बकरिया यहाँ नहीं आती । उधर जो छोटी छोटी डेरिया दिखाई दे रही है, उन में दफन है वे लोग जो फ्लॉवर डाकू के हाथों मारे गए थे । मैं कभी कभी यहाँ आता हूँ और उन अभाग्य की आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ । वो इस तरह की बातें करता रहा और भागता भागता में उसे सुनता भी रहा है । मैंने उसे कोई जवाब दिया और नहीं उसे मुझसे कोई उत्तर मिलने की अपेक्षा थी । तो आप के गोले की आवाज के बाद बन्दूक की गोली की आवाज सुनाई दी । पांच मिनट बाद मुझे करीब दो फर्लांग दूरी पर अपना झंडा फहराता हुआ दिखाई दिया । झंडा लकडी की एक ढेर पर फहरा रहा था ।

रहस्मय टापू - 16

लकडी के ढेर पर लहराता हुआ झगडा देखकर ऍम डूबा हुआ था और उधर डॉक्टर एक नए संघर्ष में उलझा हुआ था । उनके जहाज राजन से दो नौकाएं करीब डेढ बजे रवाना हुई थी । उसके बाद डॉक्टर जमीन और कप्तान जहाज के केबिन में ही बैठकर सारी स्थितियों पर विचार करने लगेंगे । वे सोच रहे थे कि अब क्या किया जाए । उन्हें मालूम था कि जहाज पर अच्छा लोग ऐसे हैं जो पूरी तरह से चांदीराम के आदमी है । वो तीनों चाहते थे कि किसी भी तरह छह लोगों को ठिकाने लगाकर जांच पर कब्जा कर लिया जाए और फिर इसे लेकर वापस लौट जाएगा । लेकिन हवायें एकदम सहमी हुई थी इसलिए जहाज को चला पाना लगभग असंभव था । दूसरी मुसीबत यहाँ पडी थी । जिम भी अन्य लोगों के साथ टापू पर चला गया था । उसे वहाँ छोड कर जाना संभव नहीं था जिनकी तबियत के बारे में तो किसी को संदेह नहीं था और उसकी सुरक्षा को लेकर तीनों बहुत चिंतित यही सब सोचते हुए हुए जहाज के डेक पर चले गए । चांदीराम के छह बदमाश साथी एक साथ एक कोने में बैठे हुए थे । उनकी नजर टापू के किनारे बंदी दो नौकाओं पर पडी । दोनों में एक एक व्यक्ति बैठा हुआ था । उनमें से एक सीटी बजाकर कोई धुन निकाल रहा था । उनकी समझ नहीं आ रहा था की ऐसे में क्या किया जाए । कप्तान सोमनाथ ने सुझाव दिया डॉक्टर और हंसराज एक नौका में बैठकर आसपास को मई ताकि हालत का जायजा लिया जा सकते हैं । डॉक्टर और हंसराज दोनों तैयार हो गए और नौका में बैठकर टापू की और बढेगा । दोनों में बैठे हुए दोनों समुद्री डाकू ये देखकर चौंक गए । उनमें से जो सिटी कि धोनी निकाल रहा था वो भी गुमसुम हो गया । दोनों ने करीब एक मिनिट तक आपस में कुछ बातचीत की । लेकिन शायद उन को ये आदेश मिला हुआ था कि वे चांदीराम के लौटने तक अपनी जगह से ना मिले । इसलिए उन्होंने कुछ नहीं कहा । एक डाकू फिर से सीटी बजा रहे लगा क्योंकि कुछ ही दूरी पर टापू में एक सीधा घुमाओ था । इसलिए वे दोनों नौकाएं नजरों से ओझल हो गई । डॉक्टर नौका से बूत्ते उन्होंने अपने डूब के नीचे एक बडा देश में गोपाल रखा हुआ था । कमर में गोलियों से भरी पिस्तौल बांध रखी थी । डॉक्टर टापू पर गरीब सौ दस ही चले होंगे कि सामने लकडी की बल्लियों से बना एक किला जैसा नजर आया । डॉक्टर को याद आया की डाकू के नक्शे में लकडियों के उसके लिए का उल्लेख था । उसके पास ही पडी थी जिसमें से साफ पानी का एक छोटा सा चलना पड रहा था । इस पहाडी के निकट करने से लगभग सटे हुए लकडी के उस किले में करीब तीन दर्जन लोकसभा सकते थे । उसके लिए मैं हर और बदली को की नलियों के लिए अच्छे बने हुए थे । कुल मिलाकर उस टापू पर लकडी का वक्त खिला काफी सुरक्षित स्थान था । उसकी ले के भीतर दाखिल हो जाने का अर्थ था कि उसके बाहर लेकर लडने वालों पर भारी पडता हूँ । यदि इसके लिए के भीतर अच्छी मात्रा में खाने का सामान और गोलाबारी भर लिया जाए तो फिर दुश्मनों का मुकाबला डटकर किया जा सकता था की नहीं कि चारों और छह फीट ऊंचा परकोटा बना हुआ था । डॉक्टर लकडी के उस छोटे से किले को देखकर चुपचाप खडे सोच रहे थे । रेकर उनका ध्यान जिम की ओर चला जाता हूँ । पता नहीं कहाँ होगा जिम उसी समय टापू पर एक आदमी की दर्दनाक चीख गूंज थी । ये चीज किसी दम तोडते हुए इन्सान की थी । आप डॉक्टर लंबे समय तक पहुँच में रह चुके थे इसलिए मौत को उन्होंने बहुत नजदीक से देखा था । लेकिन फिर भी इस चीज से डॉक्टर का दिल दहल उठा । उन के दिल की धडकने तेज हो गई । वे सोचने लगे वही ठीक जिनकी तो नहीं तो उन लोगों ने जिनको तो नहीं डाला । डॉक्टर को लगा अब जो भी करना है तुरंत करना चाहिए । एक मिनट बडा कीमती है तो तुरंत आपको किनारे की ओर पलटे और नौका में बैठ कर वापस लौट पडेगी । हंसराज बडी तेजी के साथ सबको चलता हुआ कुछ मिंटो में ही नौका को जहाँ तक ले आया, जहाँ पर पहुंचकर डॉक्टर ने देखा कि उनके साथ ही बहुत घबराए हुए थे । टापू पर दम तोडते व्यक्ति की दर्द भरी जी उन्होंने भी सुन ली थी । डर के मारे जमींदार का चेहरा भी पिला बढ गया था । बहुत दुखी मन से वो चुपचाप बैठे थे हूँ । उन्हें भूल का भरी बस दावा हो रहा था । वो अपने आप को धिक्कार रहे थे कि वह चांदीराम और उसके साथियों को जहाज पर साहब लेकर क्यों आप गए । अपने सभी साथियों पर आई मुसीबत के लिए वो अपने आप को ही दोषी मान रहे थे । कप्तान सोमनाथ ने एक कोने में बैठे चांदीराम के छः आदमियों की ओर इशारा करते हुए था । देखिए एकदम बाई और जो आदमी बैठा हुआ है वो इस काम में बिल्कुल नया है । शायद पहली बार किसी जहाज पर इस तरह के दाम बनाया है क्योंकि उसने जैसी टापू पर एक दर्दनाक की कुछ सुना वो एकदम से हडबड आ गया और जहाँ से जिस समुद्र में गिरते गिरते बचा मेरा ख्याल है यदि उससे बातचीत की जाए तो वो हम लोगों के साथ आ सकता है । डॉक्टर में कप्तान को अपनी सारी योजना समझा नहीं । लालचंद को केबिन और देख के बीच में निगरानी रखने के लिए कह दिया । उसके पास तीन चार बंदूके रख दी गई । हंसा जहाज के पिछवाडे की ओर नौका ले गया । बिल्कुल और डॉक्टर । नाव में बंदूके, गोला बारूद, बिस्किट के टीम, सूखे मेवे, सुख आप कुछ दवाइयाँ और शराब की बोतलें रखने लगा । इस दौरान कप्तान और जमीदार जहाज के डेक कर ही खडे रहे । कप्तान ने दूरबीन लगाकर कब ऊपर नजर दौडाई और फिर गढती आवाज में चांदीराम के छः आदमियों से कहा तुम लोग चुपचाप बिना हिले डुले वही बैठे रहो । देखो हम दोनों के हाथों में गोलियों से भरी दो पिस्तौल है । लालचंद के पास चार बंदूके हैं । बस समझ लोग अगर किसी ने हल्का सा इशारा भी कहीं किया तो अगले बलों से मौत की नींद सुला दिया जाएगा । इस चेतावनी के बाद उन में से कोई हिला तक नहीं । उनमें से किसी ने कोई गडबडी नहीं । जब तक नौका में जितना संभव हो सकता था, जरूरी सामान भर लिया गया । जुगल और डॉक्टर साहब जहाज से उतरकर नौका में सवार हो गए । हंसराज पूरी रफ्तार से नौका को टापू की ओर खेलने लगा । चांदीराम के वे दो आदमी जो एक एक नौका में बैठे हुए थे, चुप चाप उन्हें देखते रहे । सीटी बजाने वाले काकू किसी थी फिर बंद हो गई थी । जैसे ही डॉक्टर के साथ ही आपको के तीखे मोड के पास पहुंचे, उनमें से एक आदमी नौका से पूछ करता आपकी और बडा और देखते ही देखते डॉक्टर के साथ ही की नजरों से ओझल हो गया । नौका जल्दी ही किनारे जा लगी । वे लकडी के उसके लिए नुमा मकान की ओर बडे नौका का सारा सामान । वे लोग उसके लिए नुमा मकान में ले जाकर रखने लगे । जुगल को सामान और किले की निगरानी के लिए छोडकर डॉक्टर और हंसराज नौका में सवार होकर वापस लौटे । नौका में सामान भरकर तीन चार चक्कर उसके लिए तक लगाए गए । दो नौकरों को निगरानी के लिए किले में बिठा दिया गया । डॉक्टर फिर नौका लेकर जहाज की अगर लौटरी जमीदार जहाज के पिछवाडे की खिडकी से झगडा हुआ नौका का इंतजार कर रहा था । उधर फिर से नौका में सामान लादा जाने लगा । खाने के सामान के साथ ही हथियार और गोला बारूद रखा भी बहुत जरूरी था । वहाँ सब नौका में पढ लिया गया था । उन्होंने दूर से फेंककर मारने वाले एक चाकू भी अपने पास रख ली । जो हथियार गोलीबारूद और खाने का सामान भी लोग नौका में साहब नहीं ले जा सकते थे, उसे उन्होंने समुद्र में भेज दिया ताकि चांदीराम के साथियों के लिए कुछ बचाना रहे । लालचंद एक से उतरकर नौका में सवार हो गया । नौ का अब चलने को तैयार थी । उसी समय कप्तान ने उन छह लुटोरों को संबोधित करते हुए ऊंची आवाज में कहा क्या तुम लोग मेरी आवाज सुन रहे हो? उस वर्ष कोई जवाब नहीं आया हूँ । कप्तान ने आवाज कुछ और ही करते हुए का इब्राहिम क्या तो मैं मेरी आवाज सुनाई दे रही है । मैं इस जहाज को छोड कर जा रहा हूँ और इस जहाज के कप्तान के नाते मैं तो मैं आदेश देता हूँ कि तुम भी मेरे साथ आ जाऊँ । मैं जानता हूँ कि तुम दिल के साफ और एक नहीं एक इंसान हो । तुमको हमारे साथ आना चाहिए । मेरे हाथ में खडी है मैं तो मैं तीस सेकंड का समय देता हूँ । उस समय कुछ शोर हुआ, गाली गलोच उठाता वही शुरू हो गई । लेकिन इब्राहिम अपने आपको उनकी बक्कड से छुडाकर कप्तान की और उसी तरह जोड पडा जिस तरह मालिक की सीटी की आवाज सुनकर स्वामीभक्त कुत्ता दौड पडता है । उसके गाल पर ताजा जख्म का निशान था । उससे खून बह रहा था । इब्राहिम ने जहाज के पास पहुंचते हुए कहा सर मैं आपके साथ हूं, आपका हर आदेश मालूम होगा । अगले कप्तान और इब्राहिम नौका में पहुँच गए । डॉक्टर और हंसराज पहले से ही नौका में बैठे हुए थे । नौका तेजी से किनारे की ओर बढेगी लेकिन अभी किनारे तक पहुंच ही नहीं पाई थी की नहीं घटना घट गई हूँ ।

रहस्मय टापू - 17

हूँ । उधर जिम अचरज के साथ लकडी के को देख रहा था और इधर डॉक्टर छोटी नौका में सामान लाख लाख कर आप तक पहुंचा रहा था । नाव के चार खेत तो सही सलामत आ चुके थे । पांचवां खेल कुछ अलग प्रकार का सिद्ध हुआ । पांचवी बार जब नौका को भरा गया तो दो बातें गडबड हो गई । पहली बात तो ये कि नाव में सामान जरूरत से कुछ ज्यादा ही भर लिया गया था और दूसरी बात ये कि ये खेत में जमीदार, लालचंद और कप्तान सहित पांच लोग सवार थे । नाओ इतना सारा बोझ हो पाने में असमर्थ हो रही थी । इन दोनों बातों के अलावा तीसरी मुसीबत ये थी कि हवा विपरीत दिशा में चल रही थी इसलिए नौका को उस स्थान पर नहीं ले जाया जा सका जहाँ सारा सामान उतारकर लकडी के किले तक आसानी से पहुंचाया जा सके । खतरा इस बात का भी था की नाव पर किसी भी वक्त समुद्री डाकू हमला कर सकते थे । नाव स्थान से बहुत दूर नहीं थी जहां चांदीराम के दो साथ ही नौकाओं में बैठकर निगरानी कर रहे थे । इसलिए तत्काल कुछ करना बहुत जरूरी था । नहीं को डॉक्टर चला रहे थे और लालचंद उनकी मदद कर रहा था । डॉक्टर ने कप्तान सोमनाथ से कहा, सर मैं इस को लकडी के किले के पास ले जाने में सफल हो रहा हूँ । समुद्र की लहरें इतनी तेज है, वैसे रह रहे कल झटके के साथ पीछे धकेल रही है । क्या आप इससे किनारे तक ले जाने के लिए कोई तरकीब बता सकते हो? कप्तान ने कहा इस हालत में तो कुछ नहीं किया जा सकता है इसलिए बेहतर यही होगा । इस हम समुद्र में तो बोल दे । हमने सोचा कुछ कोशिश और कर ली जाए । हवा भी कुछ गलती हुई दिखाई दी । हम फिर जोर लगाकर नाव को आगे बढाने लगे । वन नया नाविक भी उन लोगों का हाथ बंटाने लगा जो कप्तान सोमनाथ के कहने पर चांदीराम का साथ छोड आया था । इसी बीच एक का एक कप्तान की आवाज उभरी । उस आवाज में चिंता भरी चेतावनी थी । कप्तान कह रहा था, डॉक्टर देखो जरा पीछे मुडकर उस तो को देखो जहाँ से सामान उतारकर नौका से आपको तक पहुंचाने में तल्लीन । ये सारे लोग भूल गए थे । इस जहाज पर टोक लगी है और उसमें गोला बारूद दिए । उन्हें इतना ध्यान नहीं रहा जहाँ पर सिर्फ चांदीराम के ही लोग रहे जाएंगे तो वो स्कूल का इस्तेमाल उनके खिलाफ कर सकते हैं । जहाज पर पांच लोग थे, वो तो आपके ऊपर लगेगा । इस काम को उतार रहे थे टू बच्ची इसराइल अब तो आप के पास खडा था । ये देखती डॉक्टर में नाव को सीधा सबसे पास के किनारे की और बढाना शुरू कर दिया । लेकिन इस तरह वे सब जहाज के ठीक सामने पहुंचकर टूट के निशाने पर आ गए थे । कप्तान ने पूछा आप लोगों में से सबसे अच्छा निशानेबाज कौन है? डॉक्टरों ने कहा था सभी दस हादसे अच्छा निशानेबाज वाला कौन हो सकता है? कप्तान ने कहा जमींदार आप आप तो के पास खडे उन दो लोगों पर निशाना सादी जमीन सामने बंदूक में गोलियां भरकर निशाना साधना शुरू कर दिया । कप्तान ने आदेश दिया आप सब लोग ध्यान रखें इस जमीदार साहब जिस वक्त कोहली डालेंगे, आप सब अपने हाथ ऊपर उठा लेंगे ताकि नाव स्थिर हो जाए और हिले डुले नहीं । कप्तान ने हाथ खडे किए और बाकी लोगों ने भी डांट चलाना बंद कर दिया । नाव का संतुलन बना रहे इसलिए दो लोग किनारे की ओर झुक गए । उधर जहाज पर चांदीराम के लोग तो आप को खींचकर ऐसी जगह पर ले आए थे जहां से नौ पर गोली देखना आसान था । तूप से निशाना साधने के लिए अब एक व्यक्ति खडा हो चुका था तो आपके पास खडे आदमी के बारे में इब्राहिम ने बताया वो बहुत अच्छा निशानेबाज है । जमींदार ने निशाना साधकर फायर किया और वह भी बहुत चौकन्ना था । वो एकदम से नीचे झुक गया और गोली उसके ठीक पीछे खडे व्यक्ति को जाना नहीं है । उस व्यक्ति की चीज वातावरण में फॅस के साथ ही जहाज के अंदर तो शोर मचा ही, टापू से भी बहुत सारे लोगों की चिल्लाने की आवाजें सुनाई दी । कुछ डाकू पेड के पीछे से निकलकर किनारे पर आ गए । टाकू बहुत पूर्ति के साथ अपनी नौकाओं में सवार हो रहे थे । डॉक्टर ने कप्तानों जमीदार का ध्यान कुछ और आकृष्ट कराते हुए था । देखिए उनकी नौका इसी और आ रही है । कप्तान ने जवाब दिया, यदि हम किनारे तक नहीं पहुंच पाते तो समझ लीजिए सारा खेल खत्म हो चुका है । अब इसमें को डूबो देने के अलावा और कोई चारा नहीं रह गया है । एक नौका उन लोगों की ओर तेजी से बढती दिखाई दी थी । गनीमत ये थी कि एक का एक हवा अनुकूल हो जाने के कारण उनकी नाव भी रफ्तार पकड चुकी थी । इसी बीच एक जोरदार लहर नहीं । डाकुओं की नाव को अच्छा खासा झटका दिया और उनकी रफ्तार कुछ देर के लिए थम गयी । इसलिए उन के नजदीक पहुंचने का खतरा कुछ देर के लिए चल गया था । लेकिन जहाज की दो इस वक्त सबसे बडा खतरा बनी हुई थी तो आपके पास अरे लोग अब फिर से निशाना साध रहे थे । उन्होंने अपने कुछ साथी की ओर देखने की जरूरत जरा भी महसूस नहीं की जो गोली लगने से जहाज पर गिर पडा था तो तो हमारा नहीं था और धीरे धीरे दिन नहीं लगा था । अब ये तय कर लिया गया की ना को उलट दिया जाए । जमीदार ने कहा अब सब तैयार हो जाओ । ठीक उसी वक्त कप्तान ने जोर से चेतावनी के स्वर में कहा रुको एकदम थम जाओ । कप्तान और लालचंद ने पूरी ताकत के साथ नाव को झटका देते हुए कुछ पीछे क्या ठीक उसी यूट्यूब की गोली की आवाज आई । धूप का गोला नाव को नहीं लगा । उन लोगों के सिर के ऊपर से होकर गुजर गया । पर इसका धमाका इतना जबरदस्त था कि सब टहल गए तो आप के गोले से जो कंपन हुआ उससे नाव पलट दिया । लेकिन जहाँ जाओ बंटी वहाँ पानी बहुत निकला था । कप्तानों डॉक्टर वहाँ खडे हुए तो पानी उनके घुटनों तक ही था । उन लोगों को कोई बडा नुकसान तो नहीं पहुंचा था और उन्हें दुख इस बात का था । बहुत सारी खाद्य सामग्री पानी में चली गई थी । उनके पास इतना समय नहीं था कि उसे पानी से बाहर निकालकर लकडी की किले तक ले जाते हैं तो बहुत सा गोला बारूद भी पानी में डूब गया था । उनके पास जो पांच बंदूके थी उन में से केवल दो ही सूची रह गई थी । बाकी की तीन पूरी तरह से हो गई थी इसलिए उनका फिलहाल प्रयोग नहीं हो सकता है । अब टापू के किनारे पर बहुत सारे लोगों की आवाज सुनाई दे रही थी । डॉक्टर जिम्मेदार उनके साथ ही दिल से तो चाहते थे कि कम से कम खाद्य सामग्री तो उसने पानी से निकालने लेकिन खतरे को बाहर हुए । वो जल्दी जल्दी लिखने के लिए की और दो ही उधर विलुप्त खेले की ओर जा रहे थे । उधर उनसे दूर भटकता जिनसे रहा था तो की गोली की आवास का क्या है हूँ ।

रहस्मय टापू - 18

डॉक्टर जमीदार और उसके साथ ही किनारे पर पहुंचने ही सरपट बातें । टापू के तट से लकडी के किले तक एक छोटा सा जंगल था जिससे पार करते हुए उन्हें समुद्री डाकुओं की आवाज सुनाई दे रही थी । वे आवाजे निरंतर इकट्ठा रही थी । तेजी से जोडकर उनका पीछा कर रहे डाकुओं कि पैरो की आवाज भी सुनाई देने लगी थी । डॉक्टर में महसूस किया की इस हालत में कुछ किया जाना चाहिए वरना ये आपको हम सबको ठिकरा में लगा देंगे । डॉक्टर में कप्तान से कहा सोमवार जमींदार साहब का निशाना बहुत चुप । सोमनाथ जमींदार साहब, बच्चों की निशानेबाजी । आप अपनी बंदूक नहीं दे दीजिए । कप्तान ने अपनी बंदूक तत्काल सुविधा को दे दी । डॉक्टर ने भेंटकर मारने वाला छोरा, एक जवान, नाविक कुछ कमा दिया । वे लोग जंगल के आखिरी छोड तक पहुंच गए थे और लकडी का किला सामने दिखाई दे रहा था । विपक्षों के सारे से निकलकर खुले मैदान में आएगी थे कि साल समुद्री डाकू एक का एक सामने प्रकट हो गए । वो कुछ सोच पाते इसके पहले ही जमींदार और उसके साथ ही उन्हें उन पर चार गोलियां दाग दी । एक डाकू गोली लगने से जमीन पर गिर गया और बाकी भाग खडे हुए । उन पर हमला इस तरह अचानक हुआ । उन्हें संभलने और मुकाबला करने का मौका ही नहीं मिल पाया । वे इतनी तेजी के साथ दौडे की कुछ शहरों में ही जंगल में गायब हो गए । डॉक्टर और उनके साथियों ने फिर अपनी बंदूकों में गोलियाँ भरी । वो पैदल चलकर उस स्थान पर पहुंचे जहां एक डाकू गोली लगने से गिरा था । उन्होंने देखा वह मर चुका था । गोली उसके दिल के आर पार हो गई थी । मैं झुककर डाकू की लाज देख रहे थे की गोली सनसनाती हुई । डॉक्टर के कारण के पास से गुजरी और पांच खडे लालचंद की कनपटी में जा घुसी । लालचंद वहीं ढेर हो गया । जमीन और डॉक्टर ने तत्काल उस दिशा में गोलियां चलाई जिधर से लालचंद को ढेर करने वाली गोली आई थी । लेकिन दोनों जवाबी गोलियां बेकार गई । कुछ पल पहले वे लोग अपनी उपलब्धि पर खुश हो रहे थे । अब देखते देखते खुशी मातम में बदल गई । कप्तान और एक नाविक लालचंद की नब्ज टटोल रहे थे । डॉक्टरों ने बताया कि सब कुछ खत्म हो रहा है । लाल चल की सांसें उखड रही थी । सब लोग पुराने निशानेबाज लालचंद की लाश को उठाकर लकडी की उसके लिए नुमा मकान में ले गए । विचारे लालचंद डॉक्टर को बहुत आ रही थी । शुरू से अब तक लगातार काम में जुटा रहा था और सारा काम चुपचाप बिना एक शब्द बोले करता रहा था । डॉक्टर नहीं । चक्कर लालचंद को प्यार से तपाया और हल्के से उसके कंधे को ही लाया । लालचंद कि होटले और वह बुदबुदाया । डॉक्टर साहब क्या मैं जा रहा हूँ? डॉक्टर ने उसे फिर कब तक आते हुए कहा हालाल चलते तो अपने घर लौट रहे हो । जमीदार ने घुटनों के बल झुककर लालचंद का हाथ अपने हाथों में थाम लिया और किसी बच्चे की तरह फूट फूटकर रोने लगे । लालचंद की हो फिर ही लेंगे और वह कहने लगा हूँ की फॅमिली और कुछ देर बाद वो हमेशा के लिए मौन हो गया । इस दौरान कप्तान अपनी जेबों और बेटी से सारा सामान निकालकर बाहर बन रहा था । उसमें भारत का राष्ट्रध्वज, रस्सियों का बण्डल, एक धर्म कर्म, कलम से आ ही एक कोरा रजिस्टर आदि शामिल थे । इनके अलावा तंबाकू और बीडी सिगरेट के कुछ पैकेट भी एक और रखें । कप्तान बडे जतन से सारे सामान की गिनती कर रहा था । पर इस बीच उसका ध्यान लगातार लालचंद की और ही था । जैसे उसने देखा कि लालचंद के ब्रांड उसके शरीर को छोड गए । अपनी जगह से उठा, उसके पास रखे झंडे को खोला और लालचंद काॅपर फैला दिया । उसके बाद कप्तान धीरे से डॉक्टर की वहाँ पकडकर एक और ले गया । कप्तान ने डॉक्टर से पूछा अगर चेन्नई से कुमुक मंगाई जाए तो कितना मांग लग जाएगा? डॉक्टर ने जवाब दिया, मैं नहीं समझता हूँ । हम वहाँ से कोई मदद हासिल कर सकते हैं । अव्वल तो वहाँ तक मदद के लिए खबर भेजना ही मुश्किल है । फिर यदि किसी तरह वहाँ सूचना पहुंचा भी दी जाए तो संविधान साहब ने अपने आदमियों से कहा था कि अगर हम लोग अगस्त के अंत तक वापस नहीं लौट बातें तो हमारी तलाशा मदद के लिए भरोसेमंद लोगों के साथ एक जहाज रवाना कर देना । उसके बाद वहाँ से किसी और तरह से मदद मिलने की कोई गुंजाइश नहीं जाते हैं । कप्तान ने व्यवस्था में हाथ मलते हुए का संकट बहुत गहरा है । अगर नाव की आखिरी खेप यहाँ सही सलामत पहुंच जाती तो शायद बात ही नहीं करती हूँ । उसमें खाने का बहुत सारा सामान था जो समुद्र में डूब गया । हमारे पास हथियार और गोली बार तो काफी है । खाद्य सामग्री ज्यादा नहीं । खाने का तो हटाना पडता लगे । कप्तान की बात अभी समाप्त भी नहीं हुई थी कि धमाके की आवाज के साथ तो आपका एक गोला लकडी के किले की छत के ऊपर से गुजरा तो आपका कोला किले से कुछ दूर आगे जाकर जंगल में गिरा हूँ । कप्तान ने सबको अपना मोर्चा संभालकर फौरन जवाबी कार्रवाई का निर्देश देते हुए कहा की वो इतनी सावधानी जरूर बढते । पूरा गोलाबारूद एक दिन में खत्म ना करते हैं । दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई । लकडी के किले में बैठे लोगों को चांदीराम के गिरोह की तुलना में एक सीधा लाभ भी है था कि वो काफी अच्छी जगह पर बैठे थे । वो काफी ऊंची जगह पर थे इसलिए चांदीराम की ओर तो आपका निशाना ठीक से नहीं लग पा रहा था या तो बोला बहुत ऊंचा चला जाता था या तो किले तक पहुंचने के पहले ही गिर जाता था । किले के चारों और बनी चारदीवारी और भवन के बीच रेल बिछी हुई थी । कई गोले रेट में ही फटकर बेकार हो गए थे । इस बीच डाकुओं ने उथले पानी में डूबी नौका से खाने का सामान निकालकर आपने जहाँ तक ले जाना शुरू कर दिया था । चांदीराम इस काम में भी उनका नेतृत्व कर रहा था । अच्छा की बात ये थी कि हर डाकू के हाथ में इस वक्त कम से कम एक बंदूक शायद उन्होंने पहले से बंदूकों को छुपा कर रखा था । हूँ । कप्तान ने रजिस्टर्ड में डर सामान का हिसाब लगाकर अपने साथियों की गिनती की । फिर वह गुणाभाग करके हिसाब लगा रहे लगा है और इसमें तेज पर जा पहुंचा की उनके पास जो खाद्य सामग्री है वह दस दिनों तक चल सकती है । इसी बीच डॉक्टर का ध्यान चिमकी और चला गया तो सोचने लगा पता नहीं बिचारा खाओ का किस हालत में होगा । पता नहीं जीवित भी है क्या महान डाला गया । डॉक्टर ही सूची रहे थे कि वृक्षों के पीछे से उन्हें आवाज सुनाई । हंसराज ने कहा लगता है उधर से कोई बुला रहा है उधर से बहुत साफ आवाज सुनाई है । अंसार डॉक्टर साहब, जमींदार साहब और कप्तान साहब कहाँ है ये आवाज जिम की थी । सब ने ये जानकर राहत की सांस ली की जिम जीवित है और सही सलामत है । कुछ देर बाद उन्होंने देखा जिम पिछवाडे की चारदीवारी लांघकर उनकी और चला रहा था ।

रहस्मय टापू - 19

उधर टापू पर जिम और बेनीमाधव आपस में बातचीत कर रहे थे । उनकी नजर जहाज पर फहराते, काले झंडे पर पडी काला झंडा इस बात का संकेत था राजहंस पर चांदीराम और उसके साथ ही डाकू कब्जा कर दिया है । बेनीमाधव का विचार था की जहाज पर जिनके साथियों का ही कब्जा है और उन्होंने जानबूझकर चकमा देने के लिए डाक उनको काला झंडा फहरा दिया है । लेकिन जिनको पूरा विश्वास था डॉक्टर जमीन और बाकी लोग टापू पर बने लकडी के की लेफ्ट में पहुंच गए हैं । उसने उस वहाँ इशारा करते हुए बेनीमाधव से कहा मुझे लगता है कि वे लोग उस किले में गए हैं बेनीमाधव ने जिनको बताया की लकडी का वकीला फुलवाडा फूलने नीलगिरी के बडे बडे पेडों को कटवाकर बनवाया था । हुआ बहुत चतुर व्यक्ति था । सारा काम बडी सूझबूझ के साथ करता था । जब वह कभी ज्यादा पी लेता तभी गडबड करता था वरना हर काम बडी होशियारी से करता था । लोगों की परत की समझ भी उसमें थी इसलिए वह चांदीराम से भीतर ही भीतर डरता था । खुलवा की नजर में चांदीराम बहुत ही कपटी और शातिर आदमी था । बेनीमाधव ने जिनसे कहाँ डॉक्टर और जमीदार से मिलकर उसके बारे में बात करेंगे । यदि वे लोग उसकी पूरी मदद करने का वचन देते हैं तो इस टापू पर चांदीराम के खिलाफ लडाई में वह उनका पूरा साथ देगा और उनकी टीम में शामिल हो जाएगा । बेनीमाधव ने जिनसे कहा वह जाकर उन लोगों से मिलने और जब भी जरूरी समझे उसे खबर करते हैं । जिम ने पूछा तुम कहाँ मिलोगे? वहीं पर ठीक उसी जगह पर जहाँ आज मिला था जिनमें जवाब दिया कि क्या मैं समझ गया शायद तुम अपनी तसल्ली के लिए भी कुछ चाहते हो । बताओ तुम किससे मिलना चाहोगे डॉक्टर से या जमींदार से? खैर सूजकर बता देना अभी तो मैं चलता हूँ । उसी समय जोरदार धमाका हुआ तो आपका गोला वृक्षों को चीरता हुआ की लेके बरामदे में जीत पर जाकर गिरा । गोला जहाँ पर जाकर गिरा वह जगह उनसे करीब सौ गज की दूरी पर थी । दूसरे एक्शन जी और बेनीमाधव दो विपरीत दिशाओं में भाग खडे हुए । जीवरक्षा कि आर्मी छूटता हुआ लकडी के किले की ओर बढता रहा क्योंकि वो छुप छुप कर आगे बढ रहा था इसलिए सीधा रास्ता नहीं पकड सकता था । पूर्व की ओर बढा और जमीन पर रेंगता हुआ समुद्र के किनारे तक पहुंच गया । सूजी अभी अभी डूबा था दिन भर की गर्मी के बाद अब हवा में थोडी ठंडक आ गई थी । दूर समुद्र में लहरें अब अंगडाई लिट्टी दिखाई दे रही थी । राजहंस उसी स्थान पर खडा था । उस पर डाकुओं का काला झंडा फहरा रहा था । जिम कुछ देर तक जमीन पर लेटा हुआ चारों और देखता रहा । उसने देखा छोटी नौका समुद्र के किनारे उथलपुथल पानी में पडी थी और कुछ डाकू कुल्हाडी उसे उस पार वार कर रहे थे । दूर नदी के मुहाने के पास बहुत तेज आग भडकी हुई दिखाई दे रही थी । वो बडे से लाल गोले की तरह चमक रही थी । वहाँ वृक्षों से छनकर आग दिखाई दे रही थी । वहाँ से जहाज तक नौका आई । फिर उसी और लोड गई जिन धीरे से खडा हुआ और समुद्र के किनारे की ओर देखने लगा । दूर एक बडी सी चट्टान सीधी खडी थी । ये चट्टान दूध की तरह सफेद थी । बेनीमाधव ने बताया था कि उसी सफेद चट्टान के नीचे उसने एक छोटी सी नौका छुपा कर रखी है । जिम फिर वृक्षों की कोर्ट से झुकता हुआ लकडी के किले के पिछवाडे की ओर बढा । पिछवाडे की छोटी चारदीवारी प्लान कर जब जिम खेले तक पहुंचा तो वहाँ उपस्थित सभी उसे जीवित पाकर बहुत प्रसन्न हुए । जिम ने जब उन्हें बताया इस टापू पर एक आदमी पिछले तीन वर्ष से रह रहा है तो उन्हें बडा हुआ जिनने लकडी के उसके लिए को बडे गौर से देखा । जिला काफी मजबूत था । एक छोटा सा जगह उसकी देखिए । पीछे की ओर से पहाडी से बह रहा था । उसका साफ सुथरा पानी पी ले के प्रवेश द्वार के पास से बढ रहा था । किले को बनाने के लिए लकडियां पहाडी की ढलान से काटी गई थी । लेकिन उसके लिए के बहुत करीबी कुछ ऊंचे ऊंचे पुराने वृक्षमित्र संध्या में ठंडी हुआ धीमी दे नहीं रह रही थी । हवा के झोंके के साथ दालान के महीन रेत के कण पुरकर किले के भीतर आ रहे थे । महीन दुकूल फर्श पर फैली हुई थी । उन सब की आंखों में भी रिलीज चुभ रही थी । दातों में रेत की किरकिरी महसूस हो रही थी । जिले के भीतर दुआ भी भर गया था । धूल के निकलने के लिए छत पर एक चौकोर छेद बना हुआ था । जितना हुआ उस से निकल सकता था । निकल जाता बाकी का किले के भीतर ही घूमता रहता हूँ । धोनी के कारण सबकी आंखें चल रही थी और उन्हें बार बार खास्ता पड रहा था । लालचंद की राष्ट्र दीवार के साथ लेता कर रखी हुई थी जिसपर कप्तान द्वारा उडाया गया दो बज पडा था । इस बीच कप्तान सोमनाथ लगातार अपने काम में जुटा हुआ था । उससे सभी लोगों को अलग अलग दलों में बांटकर काम सौंप दिया था । डॉक्टर जीव और जिम्मेदार साहब की तीन तैयार की गई । सब लोग बुरी तरह से थके हुए थे । फिर भी कप्तान सबसे बराबर काम ले रहा था । उसमें कुछ लोगों को बाहर से जलाऊ लकडी बटोरकर लाने के लिए भेज दिया । दो लोगों को लालचंद के अंतिम क्रिया करने का जिम्मा सौंपा । डॉक्टर को सबके स्वास्थ्य के अलावा खाने पीने की सामग्री बाट देने की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई थी । जिनको किले के द्वार पर निगरानी का काम सौंपा गया । कप्तान हर एक के पास जाकर उसका उत्साह बढा रहा था । जिम दरवाजे के पास तैनात हो गया था । डॉक्टर बीच बीच में ताजी हवा लेने और अपनी आंखों को तो वहीं से बचाने के लिए दरवाजे के पास आता और कुछ देर वहां रुककर लौट जाता हूँ । धोनी से डॉक्टर की आंखें लाल हो गई थी और उनसे पानी बह रहा था । डॉक्टर वहाँ रहकर जिम से कप्तान की प्रशंसा करते हैं । और कहते हैं इस अंधेरे में वर रोशनी की मशाल है । मुझे पूरी आशा है कि वह हमें इस संदेह से बाहर निकाल ले जाएगा । कुछ देर बाद डॉक्टर फिर जिनके पास पहुंचे उससे बातें करते हुए डॉक्टर पूछा अच्छा जी, यह तो बताओ उस बेनीमाधव को तत्काल किस चीज की जरूरत है । जिन ने बताया वह कह रहा था कि तीन बरस हो गए । उसने पनीर का स्वाद तक नहीं चखा । डॉक्टर कुछ देर सोचता रहा फिर कुछ याद करते हुए उसका चेहरा चला था । कहने लगा थोडा सा पनीर मेरे बैग में है । बहुत संभाल कर रखा है उसे । अब तक तो मुझसे बेनीमाधव तक पहुँचा देना । लालचंद की अभी देश की लेकर पिछवाडे बरामदे में कर दी गई । कुछ देर खडे होकर सब ने उसे मौन श्रद्धांजलि अर्पित की । रात को सबने मिलकर एक साथ खाना खाया । जहाँ से जो सूखा मास्को साथ लाये थे इस वक्त बहुत स्वादिष्ट लग रहा था । खाने के बाद सब आपस में बातचीत में तल्लीन हो गए । वे अगली कार्रवाई पर विचार करने लगे । सब के दिमाग में पहली योजना ये थी कि डाकुओं की संख्या कम कैसे की जाए । फिलहाल संख्या में वे अधिक लगभग उनसे तिगुने पहले उन्नीस थे । पर अब पंद्रह रहे गए थे । उनमें से दो जख्मी डाकुओं की तुलना में जिन और उसके साथ ही कुछ बेहतर स्थिति में थे । डाकू खुले आसमान के नीचे खुले मैदान में थे जबकि जिनके साथ ही चारों ओर से घिरे हुए किले में थे । डाकुओं के पास दवाइयाँ भी नहीं थी इसलिए वो शराब के सहारे अपना काम चला रहे थे । जहाँ पर डाकू ने डेरा डाल रखा था । वहाँ आसपास दलदली इलाके से जहरीली जैसे भी उठ रही थी जो डाकुओं दिलो दिमाग पर असर डाल सकती थी । सारी स्थिति पर विचार करने के बाद डॉक्टर ने कहा, उन लोगों की पहली कोशिश तो ये होगी कि वे हम लोगों को ठिकाने लगा देंगे । यदि इसमें वे सफल नहीं हो पाते हुए जहाज देकर भाग जाएंगे । जहाज लेकर भाग निकलने की योजना बनाएंगे । उनकी दोनों योजनाओं को विफल करना आसान तो नहीं पर इसे ना काम करने के लिए इच्छुक व्यूहरचना करनी होगी । कप्तान सोमनाथ के चेहरे पर चिंता की रेखाएं की चीज हुई थी । वह कहने लगा अब तक तो ईश्वर की ऐसी कृपा रही है कि मैंने जिस जहाज की भी कप्तानी की है वहाँ नाटक हुआ है । इतना ही उसे कोई छीन कर ले जा सकता है । अगर वे जहाज को लेकर वापस चले गए या हमें मार डालने में सफल हो गए तो ये मेरे जीवन की सबसे पहली और सबसे बडी पराजय होगी । लोगों की बातचीत चल रही थी की जिम गहरी नींद में डूब गया । शायद बहुत पूरी तरह रखा हुआ था । इंटर जिम के नींद शुरू के कारण खुल गई । लोग कह रहे थे कि वे लोग शांति का प्रस्ताव लेकर आए हैं । लंबू चंदीराम ने खुद सफेद झंडा फहराकर शांति का प्रस्ताव रखा है । ये सुनते ही जिम उछलकर अपनी आंखें मलता हुआ दीवार के भीतर बने, बडे से छेत्र की और दौडा

रहस्मय टापू - 20

हूँ । जिनने दीवार से बने छेद में जाकर देखा । किले की चारदीवारी के बाहर की और दो व्यक्ति खडे हुए थे । उनमें से एक सफेद झंडा लहरा रहा था । दूसरा व्यक्ति स्वयं चांदीराम था जो चुपचाप झंडाधारी व्यक्ति के पास खडा था तो अभी सूरज उदित नहीं हुआ था । हवा में ठंडक थी तो तब से जब से मैं लोग इस टापू पर आए थे तब से अब तक का ये सबसे ज्यादा ठंडा दिन था । कप्तान सोमनाथ ने अपने साथियों को पूरी तरह से सतर्क रहने के लिए कहा । उसने समझाया कि चांदीराम की नई चाल भी हो सकती है । बाहर थोडी हलचल हुई तो कप्तान ने चिल्लाकर कहा हूँ जब चाप जहाँ खडे हो वही खडे हो जाओ वरना गोलियों से भून दिए जाओगे । चांदीराम ने तुरंत जवाब दिया, हम लोग शांति और समझौते का प्रस्ताव लेकर आए हैं । कप्तान किले के दरवाजे के पास पहुंच गया । उसने डॉक्टर से खा वकीले के उत्तर हिस्से पर तैनात होकर पूरी चौकसी बरतें जिनको किले के पूर्वी हिस्से पर तैनात कर दिया गया है और बाकी सब लोगों से कहा कि वे अपनी अपनी बंदूकों में गोलियां भरकर एकदम तैयार हो जाएगा । ठीक सारी व्यवस्था करने के बाद कप्तान ने चांदीराम और सफेद झंडा खा में उसके साथी को गौर से देखा । फिर रोबीली आवाज में उससे पूछा तुम लोग शांति का झंडा दिखाकर हमसे क्या चाहते हो? झंडेवाले व्यक्ति ने का कप्तान चांदीराम समझौते की बातचीत करने के लिए आए । क्या कहा तापतान चांदीराम चांदी हमने विनम्रता के साथ उत्तर दिया । इन विचारों ने मुझे अपना कप्तान चुन लिया है । आपने जबसे जहाज को छोडा है ये लोग मुझे अपना कप्तान कहने लगे । मैं आपसे बात करना चाहता हूँ । कप्तान सोमनाथ ने दृढता के साथ था । मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी है तो तुम अगर बात करने को इच्छुक हो तो यहाँ आ सकते हो । चांदी हमने सिर झुकाकर का । मैं जानता हूँ कि आप बच्चन के पाबंद कप्तान है । मुझे आप पर भरोसा है । ठीक है मैं आप की ओर आता हूँ । चांदीराम ने अपनी बैसाखी को बगल में दबाया और आगे बढने लगा । उसके साथ ही ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन चांदीराम ने हसते हुए उसे एक और कर दिया । वकीले की चारदीवारी की ओर बढा उसने पैसा की और फेंक दी और बडी होशियारी के साथ एक फिर चारदीवारी पर रख कर पूर्ति से उस पर चढ गया । बडी सावधानी के साथ उसने किले के हाथों में छलांग लगाई । धीरे धीरे पूरे आत्मविश्वास के साथ किले के दरवाजे पर पहुंच गया । उसे वहाँ देखकर जिम कप्तान सोमनाथ के पीछे जाकर खडा हो गया । चांदी हमने एक बडा सा लीला कोट पहन रखा था जिसमें सुनहरे बटन चमचमा रहे थे । उससे सिर पर एक नया और कीमती टू था । उसने दरवाजे पर पहुंचते ही कप्तान सोमनाथ को सेल्यूट बजाया । कप्तान ने उसे बैठने के लिए कहा और चांदीराम दरवाजे के सामने रेत के मैदान में बैठ गया । फिर किले के भीतर झांकते हुए चांदीराम कहने लगा, यह तो बहुत अच्छी जगह है । जिम भी यहीं पर है । डॉक्टर भी नजर आ रहे हैं । आप सब लोग यहाँ एक सुखी परिवार की तरह रह रहे हैं । अच्छी बात ये है कि आप सब लोग एक साथ यहाँ है । कप्तान सोमनाथ ने नपे तुले शब्दों में कहा, चांदीराम, तुम यहाँ किस मतलब से आए हो? यहाँ बताओ और केवल काम की बात करुँ । आप ठीक कह रहे हैं । कल रात आपने बडी होशियारी दिखाई । लेकिन इस तरह की होशियारी केवल एक बारी सफल हो सकती है । बार बार नहीं ठीक है पर ये बताओ कि तुम चाहते क्या हूँ? हम सब यहाँ खजाना लेने के लिए आए हैं और खजाना हर हालत में हमको हासिल करना है । आपके पास खजाने का नक्शा है, वह नक्शा हमें चाहिए । मैं एक बात साफ कर देना चाहता हूँ कि मेरा इरादा आप लोगों को नुकसान पहुंचाने का नहीं है । चांदीराम ने कहा, कप्तान सोमनाथ ने पाइप में तंबाकू बुरा और उसके कष्ट खींचने लगा । चांदीराम भी अपना पाइप की नहीं लगा । पाइप को दूंगा छोडते हुए चांदीराम कहने लगा, मुद्दे की बात ये है कि आप लोग मुझे खजाने का नक्शा दे दे और हमारे लोगों पर गोलियां चलाना बंद कर देते हैं । बदले में हम लोग आप लोगों पर हमला नहीं करेंगे । हम आपके सामने दो प्रस्ताव रखते हैं । एक तो ये एक खजाना प्राप्त करने के बाद हम वापस लौटेंगे तो आप लोगों को भी जहाज पर बिठाकर साथ में चलेंगे । उसके बाद हम लोग अपने ठिकाने पर सही सलामत पहुंच जाएंगे तो आप लोगों के लिए भी वहाँ से एक जहाज रवाना कर देंगे । इसके लिए मैं मौजूद और सारे लोग मेरी बात ध्यान से सुन लें । मैं जो कह रहा हूँ वो किले में उपस् थित सभी लोगों के लिए कप्तान सोमनाथ अपनी जगह खडा हो गया । उसने पाइप की रात अपनी बाई हथेली पर जाते हुए पूछा तुम्हारी बात खत्म हो गई? हाँ, मुझे केवल इतना ही कहना था बिजली की कैसा हो? मैं जो कहता हूँ करके दिखाता हूँ । आप लोग अपनी सलामती चाहते हो तो मेरी बात मांग वरना सोमनाथ का चेहरा गुस्से से लाल हो गया । उसने सकती के साथ चांदीराम से कहा, ठीक है, यदि तुम लोग एक एक करके नहीं सकते, यहाँ आकर हमारे सामने आत्मसमर्पण कर देते हो तो मैं तुम लोगों को विश्वास दिलाता हूं । लौट के वक्त सबको सही सलामत ले जाऊंगा और भारत पहुंचकर सबको कानून के सुपुर्द कर दूंगा ताकि तुम्हारे अपराधों के लिए तुम पर मुकदमे चलाए जाए । खजाना तुम लोगों को मिल नहीं सकता । तुम लोग जहाँ से वापस भी नहीं लौट सकते क्योंकि तुम में से किसी को भी जहाँ चलाना नहीं आता हूँ तो तुम लोग हम से लड भी नहीं सकते । बस मेरी तुम लोगों को यही अंतिम और नहीं चला है । तो ये भी सुन लोग तो मगर मेरी सलाह को नजरअंदाज करते हुए वापस लौटे तो मेरी गोली तुम्हारी पीठ बनता खेल हो जाएगी । चांदीराम का चेहरा एकदम पीला पड गया हूँ । उसके आंखे पल भर के लिए बुझ गई, पर दूसरी क्षण उसकी आंखों में कुछ से के लालडोरे तैरने लगे । वो बच्ची लाया बजे उठने के लिए हाथ का सहारा दो लेकिन उसकी पुकार पर कोई हिला तक नहीं तो चीखता हुआ रहित पर रहने लगा । रेंगता हुआ वो चारदीवारी तक पहुंचा और वहाँ खडे होकर कहने लगा मैं एक घंटे के भीतर तुम्हारे इस लकडी के खेलने को जलाकर राख कर दूंगा तो लोग जानते नहीं कि तुम्हारा किससे पाला पडा है । चारदीवारी की उस पार खडे उसके आदमी ने उसे सहारा देकर बाहर खींच लिया । फिर कुछ मिनटों में ही वो अपने साथियों के साथ हमारी नजरों से ओझल हो गया ।

रहस्मय टापू - 21

चांदीराम जैसे ही आंखों से हो जाए हुआ चारों और पहली नजर रखने वाले कप्तान ने देखा कि कोई भी व्यक्ति अपने मोर्चे पर मुझे नहीं था । कप्तान अचानक गुस्से से फट पडा । अब तक किसी ने भी कप्तान को किस प्रकार खुद होते हुए नहीं देखा था । कप्तान ने एक एक करके सभी को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाही बरतने के लिए लगता । यहाँ तक कि जमीदार को भी नहीं बख्शा । डॉक्टर से भी टक्कर ली । सबके चेहरे कुछ और शव से लाल हो गए हैं । कप्तान ने हर एक को अपना अपना मोर्चा पूरी मुस्तैदी के साथ संभालते हुए निर्देश देते हुए कहा, बिहार रखी है, चांदीराम की नियत खराब है । मैंने जो ठीक उस वक्त की थी जब लोहा गरम था । मुझे पूरा विश्वास है कि एक घंटे के अंदर ही अंदर चांदीराम हम पर धावा बोल देगा । मुझे यह भी विश्वास है कि हमने पूरी सूझबूझ के साथ काम लिया तो विजय हमारे ही होगी । हमारे ऊपर खेले का कवच है । इसका लाभ हमको मिलेगा । फिर कप्तान उठकर जिले के भीतर हर हिस्से का निरीक्षण करने लगा । पूर्व और पश्चिम में उसे दो छिद्र नजर आए । चारों दिशाओं में कप्तान ने बडी तत्परता के साथ मोर्चेबंदी कराई । लकडी के लखनऊ को जुटाकर पांच स्थानों पर बैठने के ठिकाने बनाए गए । बीचोबीच हैककर मारने वाले चाहूँ ढेर लगा दिया गया । कप्तान ने जिनको खाना परोसने का आदेश देने के साथ ही कहा कि सबको थोडी थोडी ब्रांडी दी जाए ताकि लोग ठंड का सामना करने के लिए तैयार रहे । डॉक्टर जिम्मेदार और अन्य लोगों को बंदूके संभालने के लिए कह दिया गया । उनमें गोला बारूद भरते रहने की जिम्मेदारी जिम और कप्तान ले ले ली क्योंकि ये दोनों अच्छे निशानेबाज नहीं थे । सूरज पहाडियों और पक्षों कि वोट से जैसे ही ऊपर उठा चारों ओर उजाला फैल गया । थोडी देर में रही दुखने लगी । लोगों ने अपनी जैकेट और कोट उतारकर एक और रख दिए । कमीज की आस्तीन ए ऊपर चढा ली गई । सारे लोग बडी एकाग्रता के साथ अपने अपने मोर्चे पर बैठे हुए थे । इसी तरह एक घंटा बीत गया । हर पल बाहर से हमला होने की आशंका बनी हुई थी पर अब तक कुछ नहीं हुआ था । कप्तान टाॅपर गुस्से से बाहर की और देखने लगा । कुछ क्षणों के बाद भीतर से गोली दागी गई जिसकी अनुगूंज पहाडियों और पेडों से टकराकर चारों और फैल गई । दूसरी ओर से एक साथ कई गोलियां चली जो खेले की लकडी की दीवारों में दस कर रहे गई लेकिन कोई भी उनको भेद नहीं पाई । कप्तान बाहर की ओर से चलाई जा रही गोलियों का अंदाज लगा रहा था । उसने कहा असली खतरा उत्तर की और सही । चांदीराम की कोशिश यही होगी कि किसी भी तरह से उसके लोग की लेकिन चारदीवारी में दाखिल हो जाए । फिर जहाँ कहीं भी कमजोरी नजर आए उसको पूरी ताकत से भेज करके ले के अभी तक कुछ जाए । अभी कप्तान के बाद खत्म हुई थी कि एक साथ बहुत सारे समुद्री डाकू उत्तर की दिशा की और से किले की चारदीवारी पलांदे लगे । उनको संरक्षण देने के लिए जंगल की ओर से एक साथ अनेक गोलियाँ खेले । पर्पस नहीं लगी । एक बुरी दरवाजे से होती हुई डॉक्टर की बंदूक के हफ्ते पर आकर लगी और टूटकर नीचे गिर पडी । समुद्री डाकू बंदरों की तरह चारदीवारी कूदकर पार कर रहे थे । जमींदार और अन्य साथियों ने सात कर निशाने लगाए और कुछ क्षणों में ही तीन डाकू जमीन पर लहूलुहान होकर लूटते दिखाई दिए । उनमें से एक आदमी को शायद चोट ज्यादा नहीं लगी थी । वह दहशत से ही धरती पर गिर गया था क्योंकि थोडी देर बाद था और चारदीवारी फलाण कर जंगल में गायब हो गया । फिर भी चार पांच लोग के लेके आहाते में प्रवेश कर चुके थे और सात आठ अन्य लोग बाहर से गोलीबारी कर रहे थे । साथ ही लग रहा था कि हर एक के पास एक से ज्यादा बंदूके नहीं चार डाकू दौड करके ले की और बडे एक व्यक्ति ने किले के भीतर से मोर्चा संभालने एक नाविक पर कसकर प्रहार किया जिससे वह मूर्छित होकर गिर पडा । एक अन्य व्यक्ति दरवाजे को पलान था, हुआ हाथ में चाकू थामते हुए डॉक्टर की और आपका जिले की भीतरी सुरक्षा चरमराती हुई नजर आई । सभी लोग सत्र के निशाने पर आ गए थे । किले के भीतर दुनियाँ भर गया था । लोगों की चीख पुकार और गोलियों की आवाजों से कोहराम मच गया था । तभी कप्तान की कडकती हुई आवाज सुनाई दी । जवानों बाहर निकला हूँ और इनसे खुले में भीड जाओ जिनने ढंग से एक चाकू उठाया लेकिन इस बीच किसी ने एक अच्छा आपको जिम पर फेंका जो उसके घुटने को छीलता हुआ निकल गया । जिम चाकू थामकर बाहर की और पूरा एक डाकू खर्चा था । मैं डॉक्टर के पीछे दौड रहा था । उसने डॉक्टर पर हमला किया और जमीन पर गिर पडा हूँ । ठीक उसी समय एक डाकू जिम पर पूरा कप्तान की आवाज गूंजी, नौजवानों की ले को घेर हो । कप्तान की आवाज सुनते ही जिम किले की दीवार की और थोडा और उसने पाया कि लम्बा चौडा डाकू ठीक उसके सामने खडा है तो आपको जोर से जी खा और चमचमाते चाकू के साथ उसका हाथ हवा में उठा । जिनके पास बचाव का कोई रास्ता नहीं था वो पूरा जोर लगाकर एक और चला और ढलान की और लुढक गया । इस बीच कप्तान और उसके साथियों ने डाकुओं पर ताबडतोड हमले शुरू कर दिए थे । कप्तान के तीन साथ ही जमीन पर पडे हुए थे । चांदीराम के भी तीन लोग मारे जा चुके थे । डॉक्टर अब तक उठकर खडा हो चुका था । डॉक्टर की आवाज सुनाई दी जो खेले के भीतर है वो दुश्मनों पर गोलियां चलाए और जो बाहर है वो अपनी सुरक्षा के लिए लेट जायेगी । लेकिन डॉक्टर के बाद हंसू नहीं रहेगी क्योंकि किसी ने भी गोली नहीं चलाई । डाकुओं के पैर पूरी तरह उखड चुके थे और वे चारदीवारी फलांग कर भाग रहे थे । तीन चार सेकंड नहीं मैदान खाली हो गया । सुरक्षित बच गए । डाकू जंगल में गायब हो चुके थे । चांदीराम के चार आदमियों की लाशें वहाँ तक के भीतर पडी थी और एक लाख चारदीवारी के बाहर ठंडी हो चुकी थी । डॉक्टर जिम और एक अन्य व्यक्ति सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के लिए पूरी ताकत के साथ दौडेगा । उन्हें अंदेशा था कि जो डाकू बच गए हैं, वे फिर एकजुट होकर किसी भी क्षण उन्होंने दावा बोल सकते हैं । किले के भीतर अब तक दुआ काफी हद तक साफ हो चुका था । खेले के भीतर हंसराज और जयराम नाम के दो नाविक पुरुष पर रखते वंचित पडेंगे । जयराम के सिर के आरपार गोली निकल गई थी । कप्तान भी जख्मी हो चुका था । जमीदार ने उसे कम रखा था । कप्तान ने जिम्मेदार से पूछा, क्या वे सारे लोग बाहर निकले हैं? डॉक्टर जवाब दिया जितने बहुत सकते थे, भाग गए पर उन में से पांच तो कहीं नहीं भाग पाएंगे । कप्तान के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान उभरी और वह कहने लगा अब हम चार लोगों के मुकाबले बदलाव लोग हैं । जी, जब यहाँ आए थे हम लोग साथ और नहीं तेज । शाम को पता चला कि जमीदार की गोली से घायल और आपको मारा गया और इसी तरह अब डाकुओं की संख्या रह गई थी । मात्र आज फिर भी चार के मुकाबले आठ

रहस्मय टापू - 22

हूँ । चांदीराम की साथ ही काफी देर तक लौट कर नहीं है । डॉक्टर अपने घायल साथियों की मरहमपट्टी में जुड गए । बाकी के लोग इस काम में डॉक्टर की मदद कर रहे थे । रात का भोजन तैयार किया क्या? जी और जमीदार की लेके बाहर कहाते में खाना बनाने में तकलीफ हो गए । रह रहकर उन्हें रायडू के तरफ से कराने की आवाज सुनाई दे रही थी । डॉक्टर उन सबको दिलासा दे रहे थे । लडाई में जो आठ लोग धराशाही हुए थे उनमें से तीन अभी तक जीवित थे । एक दो बुरी तरह से जख्मी होकर गिरा था । शेष दो थे हंसराज और कप्तान सुनना । ऍम सोमवार जीवन के लिए संघर्ष कर रहा था पर हंसराज मरणासन्न था । थोडी देर बाद घायल डाकू ने दम तोड दिया । डॉक्टर ने हंसराज को बचाने का यथा सम्भव प्रयास किया और भी अंतर था । दम तोड बैठा । उसकी छाती की हड्डियाँ गोलियों से छलनी हो गई । कप्तान सोमनाथ के खाओ तो काफी कह रहे थे पर डॉक्टर के प्रयासों से अंतर था । वो मौत गिरफ्त से बाहर निकल आया था । उस की कंधे की हड्डी टूट गई थी । डॉक्टर ने बताया कप्तान बन जाएगा पर कई हफ्तों तक वो तो चल पाएगा नहीं अपनी वहाँ को ला पायेगा जिनकी उंगलियों में मामूली सा जख्म पहुंचा था । डॉक्टरों ने जिनकी मरहमपट्टी करके प्यार से उसके काम चीजें रात के भोजन के बाद डॉक्टर और जमीदार कप्तान के पास बैठ गए । थोडी देर बाद डॉक्टर ने चाकू और पिस्तौल उठाएगी । सिर पर हैड कर्व खडा हुआ । खजाने के लक्ष्य को उसने अपनी जेब में रखा । फिर एक बंदूक कंधे पर लटका कर वो उत्तर दिशा की और चारदीवारी को फलांग कर बाहर निकल गया । जी मैं एक नाविक के साथ ले के आखिरी छोर पर बैठा हुआ था । नाविक सिगरेट सुलगाकर उससे कष्ट नहीं रहा था । शिकायत उसे कोई भी इसमें करी दृश्य दिखाई दिया और बहुत होकर वो एकदम से दिखता ही रहा है । बस सिगरेट को हाथ में रखने के बस सामने देखता रहा । नागरिक के मुंह से निकल गया भगवान डॉक्टर क्या कर रहे क्या पागल हो गया है? जिम में जवाब दिया नहीं ऐसी कोई बात नहीं । डॉक्टर के दिमाग में कोई योजना है । मुझे लगता है वह बेनीमाधव की ओर जा रहा है । डॉक्टर को इस तरह जंगल की खुली हवा में सांस लेने और मैंने दक्षिण के नीचे आगे बढता देखकर जिनको से एशियन होने लगी । ऊपर आकाशवाणी चिडिया चाहती हूँ, हो रही हैं और चीन के विक्षोभ की धीमी भी नहीं । कुछ हूँ जिनको अपनी और बुला रही थी तो सोचने लगा यहाँ धूप में अपने से बेहतर है कि डॉक्टर की तरह नहीं निकल जाए । किले में जगह जगह देखा हुआ था । इससे भी जिनका जी खराब हो रहा था जितने पानी से खेले की होकर खून साफ किया । फिर झूठे बर्तन को भी थोडा लेकिन उसके मन में उदासी लगातार बढती जा रही थी । उसे बार बार लग रहा था कि वो उस जगह से भाग जाएगी । उसने अपने कूट की दोनों जी बुआ बिस्कुट घूस करवा लीजिए । फिर उसने दो पिस्तौल उठाई और चुप चाप के लिए से बाहर निकल गया । जिम चाहता था कि वह सफेद चट्टान के पास पहुँच जाए जहाँ बेनी वादों ने अपनी छोटी सी नौका छुपा रखी नहीं । जिम जानता था कि डाकू इसके लिए पर पैनी नजर रख रहे होंगे । इसलिए वह पूर्व की ओर बडी खामोशी के साथ निकला ।

रहस्मय टापू - 23

दोपहर घने लगी थी लेकिन अभी भी मौसम गर्म था । मैं काफी दूर तक ऊंची ऊंची वीक्षक नीचे आगे बढता रहा । बहुत दूर तक चलने के बाद में समुद्र के किनारे पहुंचा । बडी लहरें बाल खाती हुई किनारे की और बढ रही थी और बार बार किनारों की चट्टानों पर ना सर पटक रही थी । मैं दक्षिण की ओर मुड गया । मैं समुद्र के किनारे किनारे चलता रहा । मुझे बडा मजा आ रहा था । बहुत दूर तक चलने के बाद में जहाँ डियों के पीछे घुटनों के बल चलता हुआ किनारे की ओर बढने लगा वहाँ से समुद्र में लंगर डालकर पडा । जहाज राज हम दिखाई दे रहा था उस पर डाकुओं का झंडा फहरा रहा था । जहाज के पास एक और मौका भी थी चांदीराम आपने कुछ लोगों के साथ उसमें बैठा हुआ था । वो लोग आपस में बातें कर रहे थे । मुझे धूल के कारण कुछ सुनाई नहीं दे रहा था । एक एक मुझे एक भयानक चीज सुनाई दी फॅार गया और मेरी जान में जान यह जान कराई कि वह कर्कश आवाज थी उस तोते की जो उस समय चांदीराम की कलाई पर बैठा हुआ था । कुछ पलों में ही उनकी नौका समुद्र के किनारे की ओर बढने लगी । नौका किनारे पर लगी और वे उससे उतर कर जंगल में गायब हो गए । सूर्य धीरे धीरे अस्तांचल की और बढ रहा था । कोहरा गहराने लगा था । मुझे लगा कि यदि मुझे बेनीमाधव की नौका को तलाशना है तो अब जरा भी देर नहीं करनी चाहिए । अच्छा मैं जब तक सफेद चट्टान के पास पहुंचा, रात पूरी तरह से फिर आई । चट्टान के ठीक नीचे हरी घास से घिरी हुई खुजली जगह थी । खोखले स्थान के बीचोंबीच मुझे बकरियों की खान से बनाएगा । छोटा सब संभाल दिखाई दिया । मैं खुद ही जगह में कूद पडा । तंबू का एक और उठाया तो मैं देखता हूँ सामने बेनीमाधव की नदी नौका है । वह लकडी और बकरी की खाल से बनाई गई थी तो खाल के बालों वाला हिस्सा भीतर की और हूँ । नौका इतनी छोटी थी कि मुझे हैरत हो रही थी कि वेणीमाधव जैसा भरा पूरा व्यक्ति इसमें ऐसे बैठता होगा । इस तरह की नौका आज तक मैंने नहीं देखी थी लेकिन इसकी भी हुई थी । ये इतनी हल्की थी कि इससे मैं आसानी के साथ उठा सकता था । मेरे दिमाग में एक विचार कौंधा । मैंने सोचा रात के अंधेरे में चुपचाप जहाँ तक पहुंचा जाए और उसके लंगर की रस्सियां कार्ड दी जाएगी । मुझे लगा आज की सुबह की पराजय के बाद हो सकता है डाकू खजाना हासिल करने का इरादा छोडकर जहाँ लेकर रवाना हो जाएगा और हम लोग हमेशा के लिए किस्त आप ऊपर ही रहे जाए । मैंने निर्णय क्या इन लोगों को ऐसा न करने दिया जाए । मैं चुपचाप बैठकर अंधेरा होने का इंतजार करने लगा । मैंने पेट भरकर बिस्किट खाए । जब घना कोहरा पूरे आकाश पर छा गया और सारा द्वीप अंधकार में डूब गया । मैंने चुपचाप नहीं नौका को अपने कंधे पर उठाया । मैं उस खोखली जगह से बाहर निकला । सफेद चट्टान पर से मुझे दो स्थानों पर रोशनी दिखाई दे रही थी । एक स्थान पर आप जलाकर चांदीराम और उसके साथ ही लेते हुए थे । शायद अपनी हार का गम गलत कर रहे थे । दूसरी रोशनी मध्यम थी, जहाँ से आ रही है, मुझे काफी दूर तक देगी । रेत पर चलना पडा । उतने पानी में चलता हुआ मैं आगे बढता रहा । कई बार घुटनों तक के पानी में फिसलकर गिरा भी । अंतरराज् जल की धारा में पहुंचकर मैंने नौका हो पानी की सत्ता पर रखा और कूद कर उस पर चढ गया ।

रहस्मय टापू - 24

मेरे जैसे कद और बजट के बालक के लिए ये नव बहुत उपयोग लेकिन उसे संभाल पाना मेरे लिए बहुत कठिन हो रहा था । मुझे लगातार उसके पैदल मारना पड रहे थे ना वो यू तो हर दिशा में घूम रही थी और उसे दायें और बॉल पाना मेरे लिए असंभव हो रहा था । दुर्भाग्य नहीं अचानक मेरा साथ दिया और देश लहरों ने मेरी नौका को उस और कॅरियर जिस और मैं जानना चाहता था । मैं आज उसके सामने तब तक मेरा काफी भेज चुका था इसलिए जहाज कारण गहरा काला नजर आ रहा था । मैं चुप चाप जहाज के लंगर के दस से की और बढ गया । मैंने रिस्ट को पकडकर उसका जायजा लिया । वो धनुष की दूर की तरह बना हुआ था । जहाज में रस्से को इस कदर खींच रखा था कि लंगर के कुंदे पर उसका पूरा जोर पड रहा था । मैंने सोचा यदि आपने चाकू से मैं सदस्य को काट देता हूँ तो जहाज नेहरू की दिशा में चुपचाप करने लगेगा । मैं रस्से को काट नहीं जा रहा था की मुझे आता है कि लंगर के तले हुए रस्से को काटना बहुत खतरनाक होता है । व्यवस्था इतने झटके के साथ आठ पार वार कर सकता है कि उसकी चपेट में आने वाले व्यक्ति अपनी जान से भी हाथ हो सकता है । ऐसी स्थिति में ये भी संभव था की व्यवस्था झटके से मुझे मेरी नाव सहित बहुत दूर फेक देंगे । मैं बैठकर हवा का रुख बदलने की प्रतीक्षा करने लगा । कुछ देर बाद दक्षिण शुरू की और बाहरी हवाले अपनी दिशा बदली । हवा का एक दमदार झुका आया और जहाज लहर के बहाव की दिशा से कुछ पीछे कर सकते हैं । इसके साथ ही व्यवस्था भी कुछ ढीला पड गया । मेरा मन खुशी से नाच होता था । मैंने दातों से अपना चाहते खोला और एक एक्टर लंगर के मोटे जैसे कि सुप्रियो को काटने लगा । अब केवल दो सुपैया शेष रह गई थी । तभी हवा फिर समुद्र के बहाव की दिशा की और चल पडी और दो सुतली ऊपर टिका रस्सा बन गया । मैं फिर खामोशी के साथ रस्से के ढीले पडने की प्रतीक्षा करने लगा । अच्छा उसी समय मुझे जहाज के केबिन से कुछ लोगों के जोर जोर से बोलने की आवाज आई । इसमें से एक आवाज को तो मैं पहचान गया । वो इसराइल की थी । दूसरी आवाज जहाज पर बागी हो । ठीक नाविक की थी । दोनों पीए हुए थे और नशे में चूर थे । मुझे लगा कुछ और लोग भी केबिन में बैठे हुए पी रहे हैं, क्योंकि जब मैं उन आवाजों को सुनने में तल्लीन था, इसीलिए कैबिन की खिडकी तुली और खाली बोतल बाहर नहीं थी । वे लोग न केवल नशे में चूर थे, बल्कि गुस्से से आपको बुला भी थे, चिल्ला रहे थे और एक दूसरे को गालियां बक रहे थे । काफी देर प्रतीक्षा करने के बाद हवा ने फिर मेरा साथ अच्छा जहाज कुछ और इसका और ऐसा ढीला हो गया । मैंने शेष बच्ची दोनों सहेलियों को काट दिया । लंगर से मुक्त होकर जहाज बोलने लगा और उससे लहरों में पैदा हुई हलचल से मेरी नाओ लडखडा गई । मैं पूरा जोर मारकर पैडल मारने लगा । मेरी ना हो, किसी भी क्षेत्र जहाँ से टकराकर दूध सकती थी । मैं जहाँ से यथासंभव दूर होने की कोशिश कर रहा था, कुछ देर बाद मैं इसमें सफल भी हो गया । मुझे पानी में तैरता हुआ जहाज का भारत सा दिखाई दिया, जिससे मैंने काटकर लंगर से अलग किया था । मैंने लगभग कर उस रस्से को पता ही लिया । अचानक ऐसा क्यों कर बैठा, जिसमें मेरी समझ में भी नहीं आ रहा था । लेकिन दस से को जब पकडी लिया था तो मेरा मन हुआ कि कैबिन में जहाँ पर देखो कि वहाँ क्या हो रहा है, मैं उसी को पकडकर आगे बढता गया जैसा जहाज के एक सिरे से बंधा हुआ था । मैं रस्से के सहारे ऊपर बढता हुआ कैबिन के क्योंकि पर पहुंच गया । मुझे केबिन का केवल एक छोटा सा हिस्सा दिखाई दे रहा था । उस समय हवा और लहरों के कारण जहाँ तेजी के साथ आगे बढने लगा । मेरी नन्ही सी नौका भी पीछे पीछे आ रही थी । जहाज के डेक पर कोई नहीं था । मैं सोच रहा था की जहाज का चौकीदार कहाँ है । मैं कुछ और ऊपर चढना । अब केबिन का बडा हिस्सा मुझे दिखाई दे रहा था । भीतर इसराइल और उसके साथ ही आपस में लड रहे थे लगभग सभी में एक दूसरे की गर्दन पकड रखी थी । मैं रस्सी के सहारे वापस लौट आया और अपनी नौका में बैठ गया । लगभग उसी समय बडी लहर के धक्के से मिलना एकदम घूम गई और दूसरी दिशा की ओर चल पडी । राजस् दक्षिण की और बहरा था और उसकी गति हो गई थी । मैंने पलट कर पीछे की और देखा तो मेरा दिल जोर जोर से धडक होगा । जहाज बडी तेजी के साथ घूम रहा था । मेरी लाओ नेहरू पर रबड की गेंद की तरफ उछलती हुई जहाज के साथ रह रही थी । एक का एक जहाज को फिर एक लहर का झटका लगा जहाँ से एक के बाद एक लोगों की चिंता भरी आवाज सुनाई दी । मुझे लगा खतरे को देखकर कम से कम दो शराबियों ने अपना झगडा बंद कर दिया है और वे संकट का सामना करने के लिए तैयार हो गए हैं । मैं चुप चाप नाव में लेट गया । मैंने अपने आप को पूरी तरह से भगवान के भरोसे छोड दिया था । थकान और कमजोरी से घिरा हुआ मैं घंटों तक नाव में चुपचाप पडा रहा । पता नहीं मुझे नींद आ जी और मैं सपनो की दुनिया में खो गया हैं ।

रहस्मय टापू - 25

जब मेरी नींद खुली तो उजाला हो चुका था । नाव को लहरों के थपेडों ने आप के दक्षिण पश्चिम की ओर धकेल दिया था । सामने दिखाई दे रही थी वह पहाडी जिसमें खजाना छुपाया गया था । उसके दोनों एक लगभग चालीस पचास फीट ऊंची दो और चोटियां आकाश की ओर सिर उठाए खडी थी । पहले तो मैंने सोचा पैडल मारकर अपनी नौका को किनारे तक ले जाऊँ । तत्काल मैंने विचार त्याग दिया । डर इस बात का था कि समुद्र के किनारे चारों और फैली चिकनी चट्टानों से टकराकर कहीं मेरी नौ का टूटना जाए । खतरा इस बात का भी था की उन चट्टानों से फिसलकर यदि में पानी में गिरता हूँ तो विशाल आकार के गोंगो के झुंड वहाँ दे रहे हैं । समुद्र के सीधे कहे जाने वाले होंगे । यू तो मनुष्य को कुछ नहीं कहते हैं और उन्हें देख कर मैं बहुत बहुत हो गया था । मैंने सोचा उनके पास जाने से बेहतर है कि इस नौका में पडे पडे भूखों मर जाना । एकाएक समुद्र की लहरें ऊपर उठते हुई प्रतीत हुई परन्तु लहरें उग्र नहीं थी । हवा भी धीमी और शाम मैं चुप चाप लहरों पर डगमगाती छोटी सी नौका में पढा रहा । खजाने वाली चट्टानें रह रहकर मेरी नजरों के सामने खुल जाती है । धीरे धीरे मुझमें परिस्थितियों का सामना करने का साहस आता जा रहा था । मैं पूरे साहस के साथ पैदल चलाने लगा परन्तु नौका रह रहकर मेरे नियंत्रण से बाहर होती जा रही थी । ऍम पर उतर गई । मैं बुरी तरह घबरा गया । लहरों की बौछारों से भी गया था । मेरी नाक में भी पानी भर गया था । मैंने अपनी समुद्री टोपी से नौका का पानी उलीच ना शुरू कर दिया । इसके साथ ही में ना को बडी लहरों और बहुत से बचाने की चेष्टा भी करता रहा । कुछ देर बाद नाव समुद्र के उस भाग में पहुंच गई जो अपेक्षाकृत शांत था । मैं कुछ निश्चित हो गया था । बीच बीच में मैं नौकाओं को समुद्र के किनारे की ओर हल्का सा धकेल देता और फिर शांत होकर बैठ जाता हूँ । बहुत देर तक यही क्रम चलता है । ये सब बहुत उबाऊ और थका देने वाला था । जैसे जैसे नौका किनारे की ओर बढ रही थी, पूछे ऊंचे क्योंकि हरी हरी टोपियां ऊपर उठती दिखाई दे रही थी । मैं प्रतीक्षा करने लगा, किसी सुरक्षित और समर्थन स्थान पर पहुंच जाने की ताकि वहाँ जाकर नाव को किनारे लगाया जाए । धूप बढती जा रही थी कुछ गलती हुई । लहरों के कारण मेरे हूँ बार बार भीग रहे थे । समुद्र के पानी से हो खा रहे हो गए थे । मुझे प्याज भी लग रही थी । प्यास निरंतर बढती जा रही थी । प्याज से मेरा गला सिखने लगा । मेरा सिर में दर्द हो रहा था । इसी बीच बडी सी लहर में मेरी नौका को समुद्र में दूर तक खेल दिया । मैंने देखा की दाल और मुझसे लगभग आधा मील की दूरी पर राजहंस लहरों पर हल्के हल्के हिचकोले खा रहा था । जहाज पश्चिम की और बढ रहा था फिर अचानक हवा थम गयी और जहाज स्थिर हो गया । मैंने सोचा लगता है ये लोग फिर शराब पीने में जुड गए हैं और जहाज की किसी को भी सूट नहीं है । उन्हें शायद ये भी नहीं मालूम की जहाज की लंगर की रस्सी कार्ड दी गई है । बीच बीच में जब हवा चलती तो राजस्व जरूर थोडा खिसक जाता है । उसके बाद फिर शांत हो जाता । स्पष्ट हो गया था की जहाज पर किसी भी चालक का नियंत्रण नहीं है । मेरे मन में प्रश्न उठ रहा था कि वे लोग कहाँ है? या तो मैं सब शराब के नशे में धूत है या जहाँ छोड कर चले गए हैं । मैं सोचने लगा काश मुझे जहाँ से लगा था और मैं उस तक पहुंचकर उसे समुद्र के किनारे लकडी के किले के पास नहीं जाता और उसे कप्तान सोमनाथ के हवाले कर देगा । समुद्र का बहाव जहाज और मौका दोनों को लगभग एक ही गति से दक्षिण की ओर ले जा रहा था और उनको स्पष्ट दिखाई दे रहा था की जहाज दिशाहीन होकर केवल बहाव की ओर बढ रहा है । उस पर भीतर से किसी का नियंत्रण भी नहीं है । मुझे लगा यदि मैं पूरी शक्ति के साथ पैडल मारकर आगे बढो तो जहाज को पकड सकता हूँ । मेरी नौका जहाज के निकट पहुंच दी जा रही थी । मुझे जहाज पर कोई भी व्यक्ति दिखाई नहीं दे रहा था । मुझे अब पूरा विश्वास हो गया था कि या तो उस पर सवार लोग शराब के नशे में नहीं ऑन नहीं पढे हैं अथवा उसे छोड कर भाग गए हैं । मेरे भाग्य ने साथ दिया और हवा हम गई । जहाज एक स्थान पर फिर फिर हो गया । ये मेरे लिए अच्छा हो सकता है । तेजी से पैदल मारता हुआ मैं नौका को जहाज की ओर बढाने लगा । नौका जैसी जहाज के पास पहुंची । मैंने उसके पिछले हिस्से को पकडा और फूर्ति के साथ ऊपर चढ गया । के दिन की खिडकी खुली हुई थी । वहाँ टेबल पर रखा लाइन चल रहा था । सुबह का उजाला हो जाने के बाद भी उसे किसी ने नहीं बुलाया था । जहाज के मस्तूल में बंदी एक रस्सी नीचे झूल रही थी । उसे पकडकर में ऊपर चढने लगा । इसी बीच विपरीत दिशा से लहरों ने जहाज को एक झटका दिया । जहाज उस नहीं नौका से टकराया । नौका के लिए ये टक्कर बहुत घातक सिद्ध हुई । नौका तत्काल समुद्र में डूब गए । अब जहाज पर बने रहना मेरी भी वशता उसे छोडकर में कहीं नहीं जा सकता था ।

रहस्मय टापू - 26

मैंने एक मिनट का समय होना भी उचित नहीं समझा । रस्सी पकडकर मैं तत्काल जांच के ट्रैक पर पहुँच गया । हाँ कोई नजर नहीं आ रहा था । एक और एक खादी और टूटी हुई बोतल बडी हुई थी । समुद्र के हिचकोलों से बोतल इधर उधर लुढक रही थी । एक का एक राजहंस तेज हवा के चपेट में आ गया । हवा के झोंके उसे पूरी तरह से जब छोडने लगे थे । मेरी नजर जहाज पर एक और पडे दो चौकीदारों पर बडी उनमें से एक पीठ के बंद पडा हुआ था और उसकी दोनों बाहें फैली हुई थी । उसका मुंह खुला हुआ था जिसमें से उसके दम बाहर की ओर जाग रहे थे । साफ लग रहा था कि वह मर चुका है । दूसरा व्यक्ति स्ट्राइक था । वहीं इसराइल जो का जब का तो अच्छा था । वह एक बैनर पर चुका हुआ था । उसकी दाडी उसकी छाती पर टिकी हुई थी । उसका चेहरा सफेद पड गया था और गहरी पीडा के कारण उसने तियां भीच रखी थी । उन दोनों के आसपास लकडी के फर्श पर खून के छींटे थे । ऐसा लग रहा था कि दोनों में जमकर झगडा हुआ है । उनमें से एक तो निश्चित ही मर चुका था और दूसरा भी मरणासन्न मालूम हो रहा था तो मैं ध्यान से उस ओर देख रहा था और सोच रहा था कि शराब के नशे में धुत उन लोगों में किस बात को लेकर झगडा हुआ होगा । एक का एक स्ट्राइक के शरीर में थोडी हलचल दिखाई दी हूँ और उसके कराने की आवाज सुनाई पडी पीडा में भी हुई । उस कहाँ से मेरा मन पसीज गया परंतु उसी समय मुझे जहाज पर उस रात की वह घटना याद आई जब सेल निकालते समय मैंने चुपके से स्ट्राइक वो चांदीराम की बातचीत सुन लेती हूँ और चांदीराम ने साथ ही इसराइल ने भी हम सब लोगों को मौत के घाट उतार देने का षड्यंत्र रचा था हूँ । किसी भी उसके प्रति जो करूणा मेरे मन में उपजी थी वो तुरंत गायब हो गई । इस साइड में गर्दन मोडी मुझ पर नजर पडती । वो बुदबुदाया ग्रांडी मैं चुप चाप सीढियां उतरते हुए कैबिन में चला गया । वहाँ से शराब के सारे बैरल गायब हो चुके थे । बहुत सारी बोतलें भी गायब थी । सारा सामान देखना पडा था । लगता था वहाँ लोगों में जमकर संघर्ष हुआ है । दर्जनों खाली बोतलें फर्श पर पडी थी और जहाज के हिचकोलों के साथ आपस में टकरा रही थी । डॉक्टर की मेडिकल पुस्तकों में से एक टेबल पर खुली पडी थी । उसके आधे से अधिक पृष्ठ फट गए थे । शायद उन का उपयोग सिगरेट या पाइप्स उठाने के लिए किया गया था । उन सब के बीच अभी तक ऍम चल रहा था । उससे धुलाई हुई । रोशनी किमती मार रही थी । मैं कैबिन के एक और बने छोटे से स्टोर की ओर गया । कुछ देर खोजबीन करने के बाद मुझे बोतल मिली, जिसमें थोडी सी ब्रांडी थी । वहाँ कुछ बिस्कुट भी थे । मैंने अपने लिए बिस्कुट, पानी की बोतल, पानी का एक टुकडा और इस्राइल के लिए ब्रैंडी की बोतल उठा ली । उन्हें लेकर मैं देख कर आ गया । मैंने थोडे से बिस्कुट है और जी भरकर पानी दिया । उसके बाद मैंने ब्राॅन स्टाइल को थमा दी । वाॅयस में बहुत सारी ब्रांडी पी गया । अब उसकी जान में जाना नहीं थी और प्रसन्नता के साथ ठीक है । मैं क्या बातें? बिजली की कसम में स्वस्थ ब्रांडी की बहुत जरूरत थी । मैं तत्काल वहाँ से पीछे किसका ताकि उसकी पकडा से बाहर हो जाऊँ । मैं एक कोने में बैठकर बिस्कुट और पनीर खाने लगा । मैंने उससे पूछा काफी चोट लगी है । उसने जोरदार हुंकार भरी । फिर कुछ देर दम लेने के बाद कहने लगा, यदि वह डॉक्टर यहाँ होता तो कुछ ही घंटों में बिल्कुल ठीक कर देता हूँ । लेकिन मेरी किस्मत ही खराब है तो भी देखो मेरी क्या हालत हो गई है । फिर गर्दन मेरी और घुमाते हुए पूछने लगा तुम यहाँ कैसे आए? अच्छा मैंने गर्व से सीना फुलाते हुए कहा हूँ, मैं यहाँ इस जहाँ पर कब्जा करने आया हूँ । अब मैं इस जहाज का कप्तान हूँ । उसने मुझे आंखे तरेर कर देखा और मुझ से कुछ नहीं कहा । मैंने जहाँ पर फहराते हुए डाकू के काले झंडे को उतारकर समुद्र में फेंक दिया । फिर में लौटकर अपने स्थान पर बैठकर बिस्कुट खाने लगा हूँ । वो बडे ध्यान से मेरी ओर देख रहा था । उसने मुझसे दोस्ती बढाने के लिए कहना शुरू किया । कप्तान जिम ईश्वर आपकी रक्षा करें । मैं समझता हूँ कि आप भी चाहते होंगे की जहाज किनारे पर लगे और आप आप ऊपर पहुंच जाए । बेशक में चाहता हूँ । जितना जल्दी संभव हो हम किनारे पर पहुंच जाएगा । इसराइल का स्वर्ण और भी विनम्र हो गया । वह कहने लगा, पांचवी अच्छा हूँ कि हम एक दूसरे की सहायता करें । आप मुझे कुछ खाने पीने का सामान और गांव पर बनने के लिए कपडा लाकर दे दो । मैं आपको बताऊंगा कि जहाँ आपको किस प्रकार चलाया जाता है । मैंने सहमती में हांक कर दी और साथ ही उसे बता दिया । एक बात स्पष्ट हो जानी चाहिए हम खजाने के पास वाले क्षेत्र में जाकर अपना जहाज खडा नहीं करेंगे । मैं चाहता हूँ कि उत्तर की ओर किसी शांत स्थान पर ले जाकर जहाज का लंगर डाला जाए और वहाँ हम लोग कुछ देर रहे । ऍम कप्तान जीव आप जैसा कहेंगे वैसा ही करने तो मैं विवश हूँ । यदि आप चाहे तो मैं जहाँ को घर की ओर वापस ले जाने में भी आपका सहायक हो सकता हूँ । बिजली की कसम आपको कहीं से कोई भी दिक्कत नहीं आएगी । मैं इसराइल के जख्मों पर बांधने के लिए कपडे की तलाश में कैबिन में उतर गया । मैंने वहाँ की अपनी संदूकची से रेशम का वो बडा सा रुमाल निकाला जो मेरी माँ ने मुझे यात्रा पर रवाना होने से पहले दिया था । लौटकर में नहीं साइड की जान में लगेंगे रहेगा हूँ को माल से बांध दिया । उसके बाद कुछ खाने और ब्रांडी के कुछ शूट करने से उतारने के बाद वह सीधा तनकर बैठ गया हूँ और उसकी आवाज तेज और दमदार हो गई थी । वो एकदम बदला हुआ आदमी नजर आ रहा था । वो हवा पूरी तरह से हमारा साथ दे रही थी । जहाज मछली की तरह तैरता हुआ तेजी से आगे बढ रहा था । हम चार और पहले छोटे छोटे द्वीपों के बीच से निकलते हुए पहाडियों से घिरे टापू के उत्तरी भाग की ओर बढ रहे थे । मैं जहाज की नहीं नहीं कप्तानी से बहुत पसंद था । मौसम उछला योजना और खुला हुआ था । मेरे पास पानी और भोजन भी काफी मात्रा में था इसलिए मैं निश्चिंत था तो मुझे इस बात का दुख अवश्य की । मैं अपने मित्रों को छोडकर आ गया हूँ । पर तो इसे लेकर अब मुझे कोई चिंता नहीं बल्कि इस बात का संतोष था कि उनके लिए मैं राजहंस लेकर जा रहा था । फिर भी रह रहे कर मेरे मन में संशय उतर रहा था । इसराइल क्या लगातार मुझ पर जमी हुई थी? मैं जिधर भी जाता हूँ मेरा पीछा करते हुए मालूम होती है । उसके चेहरे पर एक विचित्र मुस्कान फैली हुई थी । उसकी आंखों और उसके चेहरे से दृष्टता झांक रही थी । हूँ तो जब भी मेरी और देखता हूँ मुझे लगता मन ही मन कोई षड्यंत्र चढा है ।

रहस्मय टापू - 27

हवा का रुख हमारे अनुकूल था इसलिए हमारा जहाज तेजी के साथ आगे बढ रहा था । अब हम आपके उत्तरपश्चिम भाग से उत्तरी किनारे पर पहुंच गए थे । यहीं पर हमें लंगर डालना था तो मैं तो इसका माॅस् किया था । कई बार प्रयास करने के बाद में इसमें सफल हो पाया और जहाज उस स्थान की ओर बढने लगा जहाँ लंगर डालकर हम किनारे की ओर बढ सकते हैं । मैं स्टाइल के पास जाकर बैठ लिया । वो कुछ दूर बडी अपनी साथियों की लाश के और इशारा करते हुए है । लगा यह मेरा पुराना अभी इस मधु जहाज पर ये भी बाहर आ गया । मुझे इसकी लाज से कोई मोह नहीं । आप चाहो तो इससे छुटकारा पाने के लिए इसे समुद्र में फेंक सकते हो । मैंने विचार किया कि मैं अकेला तो ये काम नहीं कर सकता हूँ । मैंने ध्यान से इसराइल के चेहरे को पढने का प्रयास साफ लग रहा था कि वह कुछ सडयंत्र रहा है लेकिन मैं चुप रहा हूँ । फिर उसने कहा जिन तो आपकी बडी कृपा होगी । किसी आप नीचे कैबिन में जाकर मेरे लिए एक वाइन कि वो उतार लेता हूँ । मैंने उसे बताया ऍसे पसंद है वो उसी से कम क्यों नहीं चला लेता हूँ । इस पर वह कहने लगा कि उसके सर घूम रहा है इसलिए ब्रैंडी की जगह वाइन लेना चाहता है । मैं समझ गया कि वह चाहता है कि मैं कुछ देर के लिए एक से उठकर कैबिन में चला जाऊँ । मैं कैबिन की और थोडा लेकिन अपने जूते उतारकर धीरे से ऐसे स्थान की और सडक गया जहाँ से मैं उसे आसानी से देख सकू पर उसकी नजर मुझे करना पडेगा । मैंने देखा तो पूरी ताकत लगाकर एक और सरकार उसने वहाँ पडा, एक लंबा सा चाकू उठाया और अपने कपडों में छुपा लिया । फिर सडक उसी स्थान पर लौट गया जहाँ मैं उसे छोडकर आया था । मैं समझ गया कि उसकी नियत ठीक नहीं है । मुझे लगा कि वह इस हथियार का प्रयोग मेरे विरुद्ध करेगा । मैंने अनुमान लगाया कि मुझ से छुटकारा पाने के बाद वो या तो किसी तरह टापू तक पहुंचने का प्रयास करेगा, अस्वस्थ रूप से गोला दागकर अपने साथियों को वहाँ आने का संकेत करेगा क्योंकि मैंने इस टाइम को सर रखते हुए देख लिया था इसलिए यह बात भी मेरी समझ में आ गई की उसकी हालत पहले से काफी सुधर चुकी है । फिर भी मुझे लगा की जब तक जहाज बहुत ही सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंच जाता, तब तक वह मुझ पर आक्रमण नहीं करेगा । दरअसल हम दोनों की अपनी अपनी विवश पाए थे । हम दोनों यही चाहते थे कि किसी प्रकार हम टापू तक सुरक्षित पहुंच जाएगा । इस विचार न मुझे काफी हद तक निश्चिंत कर दिया । इसके बाद में कैबिन में गया और वाइन की एक बोतल अपने हाथ में पकडकर देख पर पहुंच गया । इसराइल ने बोतल से दूध थी लम्बे खून के लिए और मुझसे कहने लगा कैप्टन चीज । अब मैं आपको जैसा बताता हूँ, वैसा करते चले तो हम जहाज को बहुत जल्दी सुरक्षित ठिकाने पर ले जाने में सफल हो जाएंगे । हमें अब केवल दो मील का फासला तय करना था । उसके बाद ऐसा सुरक्षित स्थान था, जहां दोनों टापू के ऊंचे किनारे थे । जिस स्थान पर हमें लंगर डालना था, वहाँ तीन और घना चन्दन था । स्टाइलो सोच इशारा करते हुए कहा, देखो जिन वहाँ जहाज को किनारे लगाने के लिए कितनी बढिया जगह है । समतल रोहित का किनारा और हर और ऊंचे ऊंचे फूलदार दक्षिण कितने उपयोगी होंगे हमारे लिए? बस जहाज को ना की सीध में आगे बढाते जाऊँ । जैसा जैसा बताता जा रहा था, मैं ऐसा वैसा करता जा रहा था और उस पर निरंतर नजर भी रख रहा था । इकाई जहाज एक दलाम की ओर बढते हुए एक और क्या उन कुछ क्षणों की उत्तेजना में मेरा ध्यान इसराइल की ओर से हट गया । मैं जहाज को संभालने में इतना हो गया कि खतरे के प्रति असावधान हो गया । मैं जहाज को सम्पन्न रीत की ओर बढते देख रहा था यदि में कुछ पल और इसी प्रकार बिता देता को निश्चय ही मारा जाता था । किसी अदृश्य चेतावनी या किसी प्रकार की आवाज के घट के से मेरा सर ऊपर उठा और मुझे लगा कोई परछाई मेरी और बढ रही है । मैंने सर घुमाया इसराइल हाथ में वही लंबा चाकू लिए मेरी और बढ रहा था जहाँ आधा फासला तय कर चुका था हम दोनों की आके पल भर के लिए । मेरी लगभग एक ही समय हम दोनों में से एक ही जीतने के लिए जहाँ मेरी चीख में आतंक और भय का भाव था वही उसकी चीफ में एक हमलावर का गुस्सा था । वो पूरी ताकत से मुझ पर झपटा और मैं पूरी फुर्ती से एक और हट गया । बुधवार को मैं छोड दिया और पलट कर उसकी मूट इसराइल की छाती में लगी । मैं दौड कर खुले देख पर पहुंच गया । मैंने अपनी जेब से पिस्तौल निकाली और स्टाइल पर निशाना साधकर पूरा दबा दिया । लेकिन टिक्की एक हल्की सी आवाज भी स्टोन खाली । मुझे अपने आप पर क्रोध आ रहा था कि मैंने स्टोल में कोलियां क्यों नहीं भरी थी? बिना फॅमिली के सामने एक शक्ति ही बेलने की तरह था । पतवार की मूड के प्रहार से स्टाइल को चोट पहुंची थी, पर वो तेजी के साथ घूमा । मेरे पास इतना समय नहीं ताकि मैं दूसरी पिस्तौल निकाल सकते हैं । फिर भी मैंने तय किया कि उसके सामने समर्पण नहीं करना चाहिए और अंतिम सांस तक पूछने की कोशिश करना चाहिए । मौत मेरे सर पर मंडरा रही थी । आमने सामने की लडाई में वह हर तरह से मुझ पर भारी पडता । यदि में उसकी पहुंच में आ जाता तो इतना तय था कि उसका नौ इंच लंबा चाकू मुझे ढेर कर देगा । मैं पीछे सरकार और विशाल मस्तूल से अपने हाथ टिकाकर उसके अगले उसके अगले आक्रमण की प्रतीक्षा करने लगा । वो आपके है कि मैं उसके बार को चकमा देकर विफल करना चाहता हूँ । इसलिए वहाँ भी सतर्क हो गया । इसी बीच का एक राजहंस क्षण भर के लिए जमीन पर टकराया, फिर बाइयों झुका और जहाज का डेक भी समुद्र की तरफ लचक गया उस पर हम दोनों अपना संतुलन खो बैठे । हम दोनों एक साथ लोगों के देख पर पडी हुई इलाज भी हमारे पीछे । लडकी ये मेरा सौभाग्य था की लाश इसराइल से ज्यादा कराई । मैं हाथ टिकाकर खडा हो गया और रस्सी पकडकर तेजी से मस्तूल पर चढ गया । मेरी फूर्ति ही मेरी जान बचा सकती मैं जब ऊपर चढ रहा था तभी मौका पाकर इसराइल ने चाकू मेरी और ऍम चाकू से केवल छह इंच नहीं चाहकर मस्तूल में दस किया था हूँ नीचे इसराइल बहुत चक्सा मुझे देख रहा था । उसका खुला हुआ था और चेहरे पर निराशा फैली हुई थी । निराशा निशाना चूक जाने की थी । मैंने फटाफट अपनी पिस्तौल में गोलियाँ भरी । मेरा शत्रु देख रहा था कि परिस्थितियां अब उसके विपरीत जा रही थी फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी । वह धीरे धीरे मस्तूल की रस्सी पकडकर ऊपर चढने लगता । उसने चाकू अपने दातों मोटापा रखा था तो लगभग एक तिहाई फासला तय कर चुका था । अपने दोनों हाथों में एक एक पिस्तौल था मैं । मैंने कहा इसराइल अब अगर तुमने एक भी कदम आगे बढाया तो मैं तुम्हारी खोपडी को छलनी कर के रख दूंगा । वह तत्काल रुक गया । बोलने की गरज से उसने अपना चाकू दातों से निकाला और कहने लगा जिम हूँ मैं तुम्हारा काम तमाम कर चुका होता हूँ । जब कम्बख्त जहाज बहन मौके पर दर्ज का खा गया लगता है मेरी किस्मत ही करा है । भाग्य के सामने समर्पण करते हुए मैं तुम से दोस्ती करना चाहता हूँ । मैं उसके शब्दों पर मुग्ध होकर उसका आनंद ले रहा था । मुझे अपने आप पे गर्व हुआ था । मेरा सीना गर्व से फूल गया । बस उसी पर उसका चाकू वाला हाथ उसके कमजोर से ऊपर उठा और हवा में तीन जैसी सनसनाहट सुनाई । मुझे बडी तेज होगी और दूसरे क्षण मेरा कंधा छाप सुविधा हुआ । मजबूरी के साथ चिपक गया पीडा और इसमें किसी बाल में मेरे हाथों की दोनों बोले मेरी फॅमिली । लेकिन इस दोनों के नीचे गिरने के साथ ही किस फाइल के हाथ से रस्सी छूट गई । रूम के बाल समुद्र में गिर पडा

रहस्मय टापू - 28

जहाज एक ओर झुका हुआ था । उसके मस्तूल पानी में झूल रहे थे । मैं अभी गुलेल के आकार वाली लकडी की दो शाखाएं के बीचोंबीच बैठा हुआ था । मेरी नीचे उतना पानी था जो इतना साफ था कि उसके नीचे रेट दिखाई दे रही थी । मुझे नीचे रेट पर इसराइल का शरीर पडा हुआ दिखाई दे रहा था । उस पर एक और चुके जहाज की परछाई पढ रही थी । एक दो मछलियां उसके आस पास बता रही नहीं । एक बार उसके शरीर मैं किसी अंचल हुई थी लेकिन वो एक तरह से मारा हुआ था । लग रहा था कुछ देर में मछलियां उसे अपना चारा बना लेंगे । उसी क्षण मेरे मन में आया । अगर वार नहीं मारा तो हो सकता है उसे कुछ देर में होश आ जाए और वहाँ ऊपर आकर चाकू निकालकर मेरा काम तमाम कर देंगे । इस विचार से मेरे शरीर में कपकपी सी छूट गई । चाहे चाकू केवल मेरी चमडी को भेजकर मजबूरी में दस गया था । इसलिए कपकपी से मेरा शरीर चाकू की पकड से बाहर हो गया । मेरी चमडी का पतला सा हिस्सा शायद अलग होकर चाकू के साथ चिपक कर रहे गया था । लेकिन चाकू से अलग होते ही मेरे खून का बहाव और तेज हो गया । मेरी कमी जोर कोर्ट का कपडा । अभी भी चाकू में ऐसा हुआ था । मैंने झटका देकर अपने आपको चाकू से अलग किया और नीचे उतरकर देख पर पहुंच गया । नीचे केबिन में पहुंचकर मैंने अपने कंधे की मरहमपट्टी की और फिर चारों और देखा । कहीं कोई व्यक्ति नजर नहीं आ रहा था । जहाज पर अब मैं अकेला ही था । एक मर स्कूल के साथ इसराइल के साथ ही थी । लाश देखी हुई थी क्योंकि अब तक मैं बहुत सारी भयावह घटनाओं से गुजर चुका था । इसलिए उस लायक है । मुझे कोई भय नहीं लग रहा था । मैंने साहस जुटाकर उस लाश को कमर से पकडकर उठाया और आठ एक पूरी की तरह से नीचे समुद्र में फेंक दिया । अब मैं हर तरह से अकेला था । सूरज डूबने वाला था । शाम की हवायें चलने लगी थी । जहाज का मस्तूल फिर पडा नहीं लगेगा । मुझे थोडा सा डर लगता नहीं । मुझे खतरे का आभाव होने लगा । तेज हवाओं के कारण जहाँ हिचकोले खा रहा था, मैंने चाकू निकालकर जहाज कोई बडी सी ताडपत्री से बंदी रस्सी को काट दिया । साल पत्री नीचे गिर पडी । उस समय हवा के दबाव से बचने के लिए मुझे ऐसा करना जरूरी लगा था । अंधेरा घिरने के साथ ठंड भी बढ गई । मैंने जहाज के नीचे चारों और जहाँ का बहुत ध्यान से देखने पर मालूम हुआ कि पानी बहुत उठना है । लंगर से बंधी रस्सी अभी तक झूल रही थी । मैं दोनों हाथों से रस्सी पकडकर धीरे से जहाज से नीचे उतर गया । पानी मेरी कमर से भी नीचे था । पानी के नीचे रेट होने के कारण की चढ नहीं था । मैं आसानी से उससे पानी को पार कर के किनारे पर पहुंच गया । मैंने पलट कर देखा । जहाज वहीं खडा हुआ था मैंने सूचना यदि किसी प्रकार में अपने साथियों तक पहुंचने में सफल हो जाता हूँ तो फिर सबको लेकर वापस घर लौट इनकी योजना बनाई जा सकती है । में लकडी के के लिए तक पहुंचने के लिए बॅाल होगा । मैं उन सबको इस बीच इस सारी घटनाओं के बारे में सब कुछ बता देना चाहता हूँ । इस समय मेरा मन प्रसन्न था में उत्साह से भरा हुआ आगे बढता जा रहा था । मेरी बाई और दो पहाडियां नजर आ रही थी । मैं उनको ध्यान से देखता हुआ लकडी के किले की दिशा में बढने लगा । रास्ते में घनी झाडी या नहीं जिनसे गुजरने के लिए कई बार मुझे झुककर कभी कभी लगभग रहते हुए चलना पडा । जहाँ थोडी से साफ जमीन दिखाई देती मैं दौड में लगता है मैं पहाडी के किनारे से मुडकर छोटी सी नदी को पार करते हुए आगे बढ रहा था की एक स्थान पर मुझे किसी रोशनी दिखाई थी । रात और भी गहरी हो चुकी थी । आप सही दिशा भी नहीं सूझ रही थी । झाडियाँ भी बहुत कम नहीं हो चुकी थी । किसी तरह गिरता पडता मैं आगे बढने की कोशिश कर रहा था । हवा सीटियाँ बचती हुई मालूम हो रही थी । अन्य कोई आवाज सुनाई नहीं दे रही थी । अंतिम में किसी प्रकार लकडी के किले तक पहुंच गया । मैंने चुप चाप उसकी चारदीवारी को पार किया । हाथों और घुटनों के बल चलता हुआ । मैं बिना कोई आवाज किए किले के होने पर पहुंच गया । मैं जैसे ही नजदीक पहुंचा मेरा सिर जोर जोर से रखने लगा । वे लोग गहरी नींद में थे । उनके खर्राटों का शोर सुनाई आ रहा था । पिस्टल कितना कहना दे रहा था कि मैं कुछ देख नहीं पा रहा था । मैं अपने दोनों हाथ आगे बढाया । अंधेरे में आगे बढने लगा । मैंने सोचा मैं बेहतर अपनी जगह पर पहुंचकर चुपचाप हो जाऊंगा । जब सवेरे इन लोगों की नींद खुलेगी तो मुझे वहाँ पर कर सबको बहुत अच्छा होगा । तब उनके चेहरे पर पहले जिसमें को देखकर बडा मजा आएगा । अंधेरे में मेरा पैर किसी नरम से वस्तु से टकरा गया । ये किसी की टांग थी तो व्यक्ति धीरे से पालता । उसके मुंह से धीमी सी कर रहा की आवाज थी और वो ज्यादा नहीं । फिर एकाएक अंधेरे में बहुत कर्कश आवाज । स्कूल ड्यूटी दुश्मन दुश्मन चावला दुश्मन दुश्मन ही चांदीराम के तोते किया हूँ मीटर हर काम पाँच गया हुए लोग जहाँ पे चांदीराम ने चीखते हुए ऍम मैं पलट कर दौडा पर अंधेरे में वहाँ पे टिक व्यक्ति से टकरा गया उससे बचकर दूसरी और थोडा तो किसी ने मुझे पकड लिया और कसकर बाहों में बांध लिया । चांदीराम चिल्लाया पाँच से लेकर आओ कुछ पलों में एक व्यक्ति जलती हुई टॉर्च लेकर आ गया ।

रहस्मय टापू - 29

टॉर्च की चौंधियाने वाली लाल रोशनी में मैंने जो कुछ देखा उससे मेरा दिल बैठ गया । केले पर डाकुओं ने कब्जा कर रखा था । खाने पीने का सारा सामान उनके कब्जे में था । मेरे साथियों में से एक भी यहाँ नजर नहीं आ रहा था । मुझे लगा अपने सारे साथ ही शायद मारे जा चुके हैं । डाकुओं में से भी अब वहाँ केवल छह लोग नजर आ रहे थे । उनमें से एक पूरी तरह जख्मी था । उसके सर पर खून से सनी हुई पट्टी बंधी हुई थी । मुझे याद आया कि ये वही व्यक्ति था जिसे संघर्ष के दौरान गहरी चोट लगी थी । पर्व किसी तरह जंगल की और भाग गया था और लंबू चांदीराम का तोता हूँ । उसके कंधे पर बैठक टुकुर टुकुर मुझे देख रहा था । चांदीराम का चेहरा बुझा हुआ था । वो अपने साथियों से कहने लगा, ये भी अच्छा हुआ कि जब हम लोगों से मिलने के लिए यहाँ पहुंच गया । चांदीराम आपने पाइप में तंबाकू बरकर कष्ट खींचते हुए कहने लगा जो तुम्हारे यहाँ से मुझे बडी प्रसन्नता हुई है हूँ दोहराना बडा सुखद रहा तो बहुत दूर लडके हो बचपन मैं मैं तुम्हारी तरह ही अत्यंत साहसी था । बहुत शुरू से चाहता था कि तो हम लोगों के साथ रहो । अगर जो कुछ हाथ लगता उसका एक के साथ उन को भी मिलता है और तो बला बाल हो जाते हैं । कप्तान सोमनाथ अच्छा नहीं है पर जरूरत से ज्यादा कठोर है । अच्छा हो तो कप्तान से दूर हो तो एक बात और बता दूँ । डॉक्टर भी भीतर ही भीतर दोबारा विरोधी है तो हुआ नहीं । खराब मार्क तक नाम बताता है । सस्ता है तो तुम अपने मित्रों के पास नहीं जा सकते हैं हूँ । मैं तो मैं स्वीकार नहीं करेंगे । इसलिए हमारे साथ जुडने के अलावा अब तुम्हारे पास कोई चारा नहीं रह गया है । मुझे सुनकर थोडी राहत मिली । इसका अर्थ था कि मेरे साथ ही अभी तक जीवित है । ये भी पता चला कि किले से मेरे चुपचाप निकल जाने के कारण वो मुझसे नाराज है । फिर भी कुल मिलाकर मैं पहले से कम चिंतित था । चांदीराम ने अपनी बात आगे बढाते हुए कहा तो इस समय हमारे बंदी हो फिर भी तुम्हारे साथ बंदी और जैसा व्यवहार नहीं करूंगा तो मुझे तारा से जो जो लोग यही तुम हमारे साथ आना चाहो तो हम तो मैं रख सकते हैं । देखना चाहूँ तो इनकार भी कर सकता हूँ । पूरी बातचीत के दौरान चांदीराम यही जताता रहा कि वह चाहे तो मुझे मार सकता है । मेरा चेहरा तमतमा उठा था और दिल जोर जोर से धडक रहा था । मैंने काफी हुई आवाज में कहा, क्या मेरा उत्तर देना जरूरी है? चांदीराम ने कहा, जिन हम मैं कोई तो मैं इस बात के लिए दबाव नहीं डालेगा कि तुम तत्काल हमारी बात का जवाब जो तुम्हारा यहाँ रहना हमें अच्छा लग रहा है । मैंने कुछ साहस बटोरते हुए कहा, यदि मुझे किसी दोनों में से एक का चुनाव करना है तो पहले सारी बातें साफ हो जाना चाहिए । मुझे मालूम होना चाहिए कि आप लोग यहाँ कैसे बोझ और मेरे साथ ही समय कहाँ है । एक डाकू ने अपनी आस्तीन चढाते होता, अब इसे बता ही दो, इसके होती का में लगा दी जानी चाहिए । चांदीराम ने उसे रोकते हुए का तो हम चुप रहो । जब तक तुम से कहा ना जाए तुम अपना मुंह बंद रखो । हाँ जी बात इस तरह की है कि कल सुबह डॉक्टर समझौते के लिए झंडा लहराते हुए यहाँ आया । उसने कहा कप्तान जान दे रहा हूँ । अपने लोगों का जहाज कोई उडा कर ले गया है । इस पर हम लोगों ने बाहर जाकर देखा तो पाया डॉक्टर सही कह रहा था । जहाज के गायब होने पर हमें बडा झटका लगा । डॉक्टर मैं सौदेबाजी की पेशकश की । उस सौदेबाजी के आधार पर ये किला और खाने पीने का सारा सामान हमें मिल गया । वे लोग ये जगह ब्रांडी गोरखपुर जलाओ लग रही है छोड कर चले गए । हमें नहीं मालूम कि समय वो कहाँ है । फिर पाइप से कष्ट खींचने के बाद चांदीराम कहने लगा । डॉक्टर ने बताया कि वह केवल चार लोग बचे हैं । उनमें से भी एक घायल है । तुम्हारे बारे में डॉक्टर का कहना था की तुम आ चाहता कहीं गायब हो गए और उसे तुम्हारी रत्ती भर भी परवाह नहीं है । डॉक्टर ने कहा था उस लडके से हवा पूरी तरह से ऊब चुके हैं । बस उन्होंने इतना ही कहा था । मैंने पूछा हाँ बस इतना ही अब तुम होता है करना है कि तुम क्या जाते हो? चांदीराम ने कहा, मैंने बहुत सोच समझकर जवाब दिया, अब जो होना है वो होता है । मुझे इसकी रत्ती भर भी परवाह नहीं है । मैंने इस यात्रा में बहुत सारे लोगों को मारते हुए देखा है लेकिन आपको एक दो बातें बताना जरूरी समझता हूँ । आप लोग भी यहाँ पूरी हालत में हैं । जहाँ जा चुका है । खजाना भी मिलने वाला नहीं है । तुम्हारे बहुत सारे लोग भी खत्म हो चुके हैं । तुम लोगों के पास अब कोई उम्मीद नहीं बची है तो उन सब को शायद मालूम नहीं कि इसके लिए जिम्मेदार कौन था । ये सब मेरी वजह से ही हुआ । मैंने तुम लोगों की उस रात की गुप्त बातचीत सुन लेंगे और उसे अपने साथियों को बता दिया था, जिसके कारण वे सतर्क हो गए थे । उस गुप्त बातचीत में शामिल इस्टाइल अब समुद्र की तलहटी में हैं । रही बात आपने जहाज राजनीति की तो उसकी रस्सी मैंने ही काटी थी । उस पर सवार लोगों को मैंने ही मौत के घाट उतारा था । जहाज को मैंने सुरक्षित स्थान पर लगा दिया है । तुम लोगों में से कोई भी उसे तलाश नहीं कर पाएगा । उसके बारे में केवल मैं नहीं जानता हूँ । इसलिए आप सबकी जान केवल मैं ही बचा सकता हूँ । मुझे तो तुम लोगों की परवाह है और नहीं तुमसे जरा सा बिटर । तुम चाहो तो मेरी जान ले लूँ मैं तुम लोगों को कुछ बताने वाला नहीं है । यही तो मुझे यहाँ से सकुशल निकल जाने देते हो तो मैं वचन देता हूँ की अदालत में जब तुम्हारे खिलाफ मुकदमा चलेगा तो एक महत्वपूर्ण गवाह होने के नाते मैं तुम लोगों को बचाने का यथासंभव प्रयास करूँगा । अब तुम लोगों को तय करना है, चाहो तो मुझे मार दो और उससे तो मैं कुछ हासिल होने वाला नहीं है तो उन लोगों की इच्छा हो तो मुझे जीवित रखो । उस सिटी में मैं तो मैं फांसी के तख्ते से बचाने में मददगार साबित हो सकता हूँ । उत्तेजना में इतना सब कुछ कहे जाने के कारण में हाथ नहीं लगा । मुझे देखकर बडा विस्मय हुआ । मेरी बातों पर उनमें से एक भी व्यक्ति हिला तक नहीं है । सब भेड की तरह बने । मुझे देख रहे थे मेरी हिम्मत कुछ और बडी । मैंने कहा चांदी राम जी, मेरा ख्याल है कि आप सबसे ज्यादा या जिम्मेदार व्यक्ति हैं । यदि बात नहीं बनती है तो शायद आप मुझे मौत के घाट उतार देंगे । रुपया डॉक्टर साहब को बता देना कि मैं एक शायर की मौत नहीं मारा था । चांदीराम ने विचित्र से स्तर में कहा, ठीक है, मैं से ध्यान में रखूंगा । मैं समझ नहीं पाया कि वह मुझ पर हस रहा था या मेरे साहस की प्रशंसा कर रहा था तो ये सब तुम्हारी करामत थी । शुरू से आखिर तक हमारी रह मैं अडंगे पैदा करने वाले तुम जीत है? चांदीराम ने गुस्से से कहा तो फिर इसका काम तमाम ही समझो रहते हुए चांदीराम का एक साथ ही अपने चाकू लहराते मेरी और लपका चांदीराम जोर से जी का जो तुम कौन होते हुए ऐसा भी रहे लेने वाले अब काम नहीं है तो मैं एक कदम भी आगे बढे तो समझ लेना मारे जाओगे तो वही रुक गया । पर सारे लोग मुझे तीखी नजरों से देख रहे थे । चांदीराम ने उन लोगों को चुनौती के स्वर में कहा है तो मैं कोई माई का लाल जो मेरी बात को काट सके तो मैं ऐसे कोई भी ना तो मेरी बराबरी कर सकता है, ना ही मेरे सामने खडा हो सकता है । मैं इस लडके को बहुत पसंद करता हूँ । इससे कोई हाथ नहीं लगाएगा । तो चूहों के बीच यही तो अकेला शेर है । इसके बाद काफी देर तक खामोशी छाई रही । मैं दीवार के साथ सटकर सीधा खडा हो गया । मेरा दिल हथोडे की तरह मेरे सीने के भीतर चोट कर रहा था । चांदीराम भी दीवार के साथ क्या पाइप उसके मूल में लगा था । वो बहुत शाम नजर आ रहा था । उसकी आंखें इधर उधर घूमती हुई अपने साथियों पर पहली नजर रख रही थी । उसमें से एक नजर उठाया । चांदीराम ने तत्काल उससे पूछा तो कुछ कहना चाहते हो, क्षमा कीजिए । आपके बनाए हुए नियम के अनुसार ही हम सब एक साथ एक मुद्दे पर बात कर सकते हैं । आप कप्तान है ये तो सही है पर मुझे भी आपसे कुछ पूछने का अधिकार है । बातचीत के लिए बाहर खडा होता हूँ । ये कहकर व्यक्ति ने चांदीराम को सेल्यूट बजाया और झटके के साथ बाहर निकल गया । एक एक कर सारे लोग बाहर चले गए । चांदीराम ने आपने मुझसे पाई पहला घटाकर कहा, देखो जाए तो मौत के कितना करीब हो । लेकिन मैं पूरी तरह से तुम्हारे साथ हूँ । मेरा मन कहता है कि मुझे तुम्हारा साथ देना चाहिए । बिजली की कैसा हूँ? मैं तुम्हें अपना आदमी मानता हूँ क्योंकि मुझे भरोसा है कि तुम जरूरत पडने पर मेरा साथ हो गए । तुम ही मेरी गर्दन बचा सकते हो । बात मेरी समझ में आने लगी थी । मैंने पूछा तुम्हारा मतलब कि खेल अब खत्म हो रहा है? हाँ और नहीं तो क्या । जहाज गया तो समझ लो गर्दन भी गई । जब मैंने पाया की जहाज नहीं है तो मैं समझ गया खेल अब खत्म हो गया है । जहाँ तक मेरे साथियों का प्रश्न है । वो आपस में बातचीत के लिए बाहर गए हैं । वो नूर और कायर है । मैं उनसे तुम्हारी जिंदगी बचाने का प्रयास करूंगा । उसके बदले तुम्हें भी मुझे फांसी के फंदे से बचाना होगा । मुझे उसकी बात सुनकर बडा विश्वास नहीं है । फिर भी मैंने पूछा मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूँ? उसने कहा यह तो एक हाथ लेने और दूसरे हाथ देने वाली बात है । मुझे मालूम है तो है जहाज को किसी सुरक्षित स्थान पर छुपा रखा है । तुम और मैं एक साथ मिल जाए तो हम दोनों कोई चमत्कार कर सकते हैं । ये कहते हुए उसने एक डिब्बे से थोडी सी ग्रांडी उडेली । उसने मुझसे फ्यूचर टोमॅटो है मैंने इंकार कर दिया । वहाँ ब्रांडी पीने के बाद मेरी और भेदभरी नजर से देखते हुए कहने लगा मेरी समझ में नहीं आ रहा कि डॉक्टर ने मुझे चार क्यों दे दिया । मेरे चेहरे पर अचरज के भाव घायल गए । मैं मन ही मन कुछ सोच नहीं हूँ ।

रहस्मय टापू - 30

डाकू में बाहर काफी देर तक बातचीत चलती है । कुछ देर बाद बोलने से कुछ भी तरह चांदीराम को नमस्कार करने के बाद उनमें से एक ने उससे कुछ देर के लिए टॉर्च मांगी । चांदी राॅकी उसे दे देगी और हम दोनों को अंधेरे में छोड कर वहाँ से चला गया । चांदीराम कहने लगा ऍम ठंडी हवा के हो गया रहे हैं । मैंने उठकर बहुत छेदन कर दिया, जिससे होकर बर्फीली ठंडी हवा रही थी । चांदीराम का व्यवहार अब मैत्रिपूर्ण हो गया था । मैंने छेद बंद करते समय बाहर झांककर देखा । बाहर अंगन के ढलान पर खडा एक व्यक्ति अपने हाथ में टॉस प्रकट कर नीचे चुका हुआ था । बाकी के लोग उसके चारों ओर खडे थे । झुके हुए व्यक्ति ने अपने हाथ में खुला हुआ कागज थाम रखा था । फिर वे लोग एक साथ किले की ओर बढने लगे । मैं तुरंत अपनी जगह लौट आया । मैंने चांदीराम सिक्का वे लोग लौट रहे हैं । ठीक है उन्हें आने दो, तुम चिंता मत करो । मेरी बंदूक में अभी भी एक गोली बाकी है । चांदीराम नाॅट देते हुए था । कुछ देर बाद दरवाजा खुला । पांचू आदमी एक साथ भीतर प्रवेश हुए हैं । उन्होंने एक व्यक्ति को आगे तक केंद्रीय चांदीराम ने चीखते हुए था । आगे बढो नौजवान मैं तो था नहीं जाऊंगा । मैं हमेशा कानून कायदे से चलने में विश्वास रखता हूँ । थोडा आप को आगे बढा हूँ उससे चांदीराम के हाथों में कोई वस्तु धमाल हो । चांदीराम ने उस वस्तु को ध्यान से देखने के बाद का है तो काला पूजा है । कागज में कहाँ से मिला हो? बताते क्यों नहीं? एक मनोज कागज है । मुझे लगता है तो उन सब को फांसी का फंदा नसीब होगा । तो उन लोगों ने यहाँ अगर किसी बाइबल सिखाता है, पैदल किसके पास थी । उनमें से एक ने का बाइबल मेरी थी । आप के लिए मौत के बाद उन के रूप में काला पूजा इस व्यक्ति ने तैयार किया है । इसे पलट कर दी को इसके पीछे क्या लिखा है इससे पडने के बाद ही आप कुछ कह सकते हो । चांदीराम ने उस व्यक्ति को देखते हुए का धन्यवाद । तुम हमेशा कायदे कानून से चलते हो तो मैं देख कर मुझे हमेशा प्रसन्नता होती है । फिर भी बताओ यह है क्या? ये लिखा वार तुम्हारी है ना मालूम होता है तो मैं उन लोगों के नेता रहे हो । मैं समझता हूँ कि तुम कप्तान बनना चाहते हो तो आप मुझे दे दो । मैं कहता हूँ तो दे दो वो व्यक्ति कहने लगा अब तुम अपना खेल खत्म समझो तो हम लोगों को और ज्यादा मुर्गा नहीं बना सकते हैं । चांदीराम ने डरता के साथ का मैं समझता था कि तुम नियम के अनुसार चलों के ये मत भूलो कि अभी भी मैं तुम्हारा कप्तान हूँ । बुनियादी बात तो यह है कि जब तक तुम अपनी शिकायतें सामने नहीं रखते, मैं उसका जवाब नहीं देता । तब तक तुम्हारा या काला पूजा अर्थहीन हैं । उसकी कीमत मिट्टी के ठीक है । जितनी भी नहीं है । पहले अपनी शिकायतें बताओ, उसके बाद हम देखेंगे कि क्या हो सकता है । उस व्यक्ति ने थोडा साहस बटोरते हुए कहना शुरू किया, पहली बात तो ये है कि आप अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में विफल रहे हैं । खजाना अभी तक नहीं मिल पाया है । दूसरी बात यह है कि आपने बिना कुछ हासिल किए ही शत्रु को यहाँ से बचकर निकलने दिया । तीसरी बात यह है कि वे लोग जब जा रहे थे, आपने हमें उन लोगों को मार डालने से रोका । चौथी बात ही है कि ये छोकरा अभी तक यहाँ जिंदा खडा है । चांदीराम ने देरी से उनकी सारी बातें सुनने के बाद शांतिपूर्वक का पास इतराई तो मैं तुम्हारी सारी बातों का जवाब दूंगा । जहाँ तक खजाने की बात है उसे प्राप्त करने मैं क्या मैं ऍम रहा हूँ । बोलो क्या इस मैं तुम सब भी जिम्मेदार नहीं हो । क्या तुमने मेरे आदेशों को मानने से इनकार नहीं किया? तुमने मेरे आदेशों का उल्लंघन किया, मेरी योजनाओं में रख दो । बदल कर आया । अपनी इन्ही हरकतों से तुम जहाज और खजाने से हाथ धो बैठे । बताओ इन सब बातों के लिए दोषी कौन था? इसराइल और उसके साथियों के अलावा तुम स्वयं भी क्या इसके लिए जिम्मेदार नहीं थे । उसके बाद भी तुम्हारी यह हिम्मत की तुम से मुझ पर आरोप लगा रहे हो । उन सबके चेहरों से साफ लग रहा था कि चांदीराम की बात का उन पर गहरा असर हुआ था । चांदीराम जरा गुस्से के साथ कहने लगा तो मैं पहले नंबर का जो व्यक्ति है उससे बात करने में भी मुझे शर्म आती है । बेहद मूर्ख और इस चौथे नंबर के आदमी से मैं पूछता हूँ क्या लडका हमारे पास एक कीमती बंधक नहीं है? क्या इसके बदले हमें बडी फिरौती नहीं मिल सकती? जानते हो इसकी कीमत आई सी लडके को तो महाराणा चाहते हो । अब आता हूँ तीसरे नंबर पर मैं इससे पूछना चाहता हूँ । जब इसके हाथ टूट गए थे तो क्या वह डॉक्टर हर रोज से देखने इसके मरहमपट्टी करने के लिए नहीं आया करता था? यह व्यक्ति अभी छह घंटे पहले तक जोडी बुखार से कम रहा था । रही बात नंबर दो की तो अभी सुन ले कि उन लोगों को यहाँ से इसलिए जाने दिया कि तुम लोग भूखे मर रहे थे । ये जो ढेर सारा खाने पीने का सामान यह कहाँ से मिलता है, यदि उनके समझौते में ना होता और मुझे है? बात केवल इतनी नहीं नहीं, मैंने उनको दस्तावेज के बदले यहाँ से जाने दिया । मैं तुरंत उस बच्चे को पहचान गया । यह बुलवा डाकू की तिजौरी मैं सबसे नीचे रखा हुआ मिला था । मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि डॉक्टरों में खजाने का ये मूल्यवान रक्षा चांदीराम को क्यों दे दिया । समुद्री डाकुओं को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था । मैं सब उस पर ऐसे झपटे जिससे बिल्लियां चूहे पर छपट्टी है । उनमें से एक ने कहा हम यही है ये ये माॅस् पर फुलवा सरदार कॅरियर है । नीचे उसका अपना गुप्त निशान दी है । दूसरा करने लगा ये तो हो गया लेकिन एक बात है कि नक्शा अगर हमें मिल भी गया तो खजाने को यहाँ से हम ली कैसे जाएंगे जहाँ तो हमारे पास है नहीं । एक का एक चांदीराम उछलकर खडा हो गया । उसने अपना एक हाथ दीवार के साथ दिखाते हुए कडकती आवाज में कहा हजार ना कैसे ले जायेंगे? जहाज मैंने नहीं तुम लोगों ने खोया । तुम लोगों की जिम्मेदारी है कि उस जहाज को तलाश कर लूँ लेकिन मुझे ये भी मालूम है तुम में से कोई भी व्यक्ति जहाज को तलाश नहीं सकता हूँ । बिजली की का सामान तो उन लोगों की मूर्खता पर मुझे बहुत गुस्सा आता है । अब उनके सर लग जा से जुड गए थे । एक नहीं धीरे से का क्या? सारा दूसरा हम लोगों का है । चांदीराम फिर करता है । तुम लोगों का ही है । तुमने जहाज को खो दिया और मैंने खजाने का नक्सा प्राप्त कर लिया । अब तो भी बताओ हम में से होशियार व्यक्ति कौन है? हम उस है अभी अभी सुन लो । बिजली की कसम खाकर कहता हूँ कि मैं कप्तान के पद से हट रहा हूँ । तुम लोग अपने में से किसी एक को कप्तान चुन लो, पहला व्यक्ति के नहीं, नहीं ऐसा नहीं हो सकता । फिर सारे डाकू एक साथ चिल्ला कप्तान तो चांदीराम ही रहेंगे । केवल चांदीराम हमेशा हमेशा के लिए हमारे कप पान रहेंगे । चांदीराम तो तुम सब लोगों की यही राय है । सोच लोग अभी भी सोच लो । चांदीराम की इस बात पर सभी ने हमें सर हिला दिया । रात काफी बीत चुकी थी । चांदीराम ने एक व्यक्ति को बाहर निगरानी के लिए भेज दिया । फिर बाकी सारे लोगों के लिए शराब के इलाज करे गए । काफी देर तक शराब का दौर चलता रहा । नशे में धुत होकर सभी गहरी नींद हो गए । मैंने शराब चक्की भी नहीं थी, इसलिए मैं बहुत देर तक जाता हूँ । मेरे मन में अनेक दृश्य उभर रहे थे । इसराइल का समुद्र से गिरना उसके रखते, आस पास का जल लाल हो जाना रह रहे कर मुझे क्षण ज्यादा जाते । जब मैं जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा था, अपनी खतरनाक स्थिति के बारे में सोच रहा था । मुझे लगा कि ये चांदीराम इतना कराया है । इस तरह दोहरा खेल खेल रहा है तो किस तरह सारे डाकुओं को वही टवीट करके एकजुट रखने में सफल रहा है । मजे की बात ये है कि इस समय निश्चिंत होकर स्वयं कितनी कैदी नहीं हो रहा है । इस प्रकार गंभीर संकट से घिरा हुआ भी ऐसे खराटे ले रहा है । मुझे कुछ देर के लिए तो उससे सहानुभूति जी होने लगी थी । उसके चारों ओर उस की जान के प्यासे और खजाने के नक्शे को हथियाने के लिए आतुर डाकुओं और वो घोडे बेचकर गहरी नींद में सोया हुआ है । उसके मन के किसी कोने में निश्चित ये बडे भी होगा कि यदि यहाँ से किसी प्रकार बचकर स्वदेश पहुंच भी गए तो वहाँ कानून की लंबी बात है, उसे तलाश लेगी । फिर भी इतनी निश्चिंतता वही नहीं हूँ ।

रहस्मय टापू - 31

सुबह मेरी नींद भी किले के भीतर सोये हुए अन्य सभी लोगों के साथ ही खुली । मैंने झांककर बाहर की ओर देखा । जंगल की ओर से किले की ओर आ रहे एक व्यक्ति की आवाज में हम सबको जगह दिया था तो वो व्यक्ति कह रहा था किले में सोच हुए लोगों उठो, मैं डॉक्टर हूँ । ये आवाज डॉक्टर की ही नहीं आवाज सुनकर मुझे प्रसन्नता हुई । फिर जब मुझे ख्याल आया कि किस प्रकार मैं डॉक्टर को बताए बिना ही चुप चाप खेले से खिसक गया था । मेरी प्रसन्नता गायब हो गई । फिर में सोचने लगा कि इन लोगों के साथ मुझे यहाँ किले में दिक्कत डॉक्टर के मन पर क्या पूछ रही हूँ । लंबू चांदीराम ने डॉक्टर का स्वागत करते हुए कहा आइए डॉक्टर साहब, आप जब भी आते हैं किसी फरिश्ते की तरह खुशबु का बच्चों का साथ लेकर आते हैं । देखिए ना हूँ आपके आने के साथ मौसम के चुनाव सुहाना हो गया है । कितनी प्यारी हवाएं चल रही है । चिडिया चाहते आ रही है । शब्दों का जाल बोलते हुए चांदीराम ने हमने एक साथ ही वो आदेश दिया कि डॉक्टर साहब को आराम से बिठाने की व्यवस्था करेंगे । फिर वह कहने लगा आज आपको यहाँ देख कर बहुत बडा चर्च हुआ । आपका मरीज तो बहुत अच्छा है । आपको हमारे यहाँ एक धन्ना मेहमान देखकर बडी खुशी हो गई । किसी की नजर नहीं लगेगा । प्रसाद आज तो आप भी बडे जाॅब चला रहे हैं । डॉक्टर अभी किले के द्वार के भीतर कदम रखता हूँ । चांदीराम के नमस्कार के जवाब देते हुए उसने कहा बनने मेहमान से तुम्हारा मतलब जिम से तो नहीं है, यहाँ जीत नहीं है । चांदीराम ने छोटा सा जवाब दिया । डॉक्टर को झटका सा लगा । वह जहां था वहीं खडा रह गया । कुछ देर तक उसके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला हूँ । फिर अपने आप को संभालते हुए डॉक्टर ने कहा ठीक है चलो तुम्हारे बीमार साथियों को देखो । एक्शन बर्बाद डॉक्टर जिले के भीतर दाखिल हो गया हूँ । मुझ पर एक फॅार डालकर डॉक्टर मरीजों को देखने के लिए आगे बढ गया । मुझे बात बहुत घट की थी कि डॉक्टर मुझे देखकर हल्का सा मुस्काया तक नहीं है । डॉक्टर मरीजों की जांच कर रहा हूँ । मुझे लगा कि डॉक्टर किस तरह अपनी जांच दिल्ली पर लेकर यहाँ आता है । यहाँ हर पल उसके सिर पर खतरे की तलवार लटकी रहती है तो फिर भी डॉक्टर के पेशे के दायित्व से बंधा हुआ वो यहाँ चला आता है । डॉक्टर का व्यवहार उन दक्कित मरीजों के प्रति भी उतना ही सहज था जितना कि सामान्य रुपयों के प्रति रहता है । डॉक्टर तीस व्यवहार के कारण ही वो डाकू भी उसके प्रति सम्मान का भाव रखते हैं । वे सब उसे अपना ही डॉक्टर समझते हैं । सब मरीजों का परीक्षण करने और उन्होंने दवाईयाँ देने के बाद डॉक्टरों में था आज का काम खत्म हुआ हूँ । अब मैं उस लडके से बात करना चाहता हूँ । उनमें से एक व्यक्ति जिसको अभी भी दवा पिलाई गई थी, एकदम गुस्से के साथ मिलता और जीते वो वाला नहीं ये नहीं हो सकता हूँ । देखता हूँ कौन उस छोकरे से डॉक्टर की मुलाकात कराता है । चांदीराम गुस्से में जिला ऍम । इसके बाद चांदीराम मेरी और मूत्र कहने लगा ऍम मैं तो वो एक अच्छा लडका मानता हूँ । मुझे विश्वास है कि तो मुझे धोखा नहीं हो गए तो मुझे बच्चन दो यहाँ से भागने की कोशिश नहीं करोगे । मैंने चांदीराम को वचन दे दिया की मैं भागने की कोशिश नहीं करूंगा । चांदीराम ने डॉक्टर से कहा आपकी लेके चारदीवारी के बाहर पहुंची है तो थोडी देर में जिनको लेकर मैं वहाँ आ जाऊंगा तब आप से बात कर सकते हैं । डॉक्टर के रवाना होने के कुछ मिनट बात चांदीराम और मैं बाहर निकल पडेंगे । चांदीराम मेरे कंधे पर हाथ रखकर चल रहा हूँ । वो मुझसे कहने लगा धीरे जरा धीरे धीरे चलो । यदि हम हर बढाते हुए तेजी के साथ चले तो मुझे इस बात का खतरा है कि वह हम पर टूट पडेंगे । जैसे ही मैं डॉक्टर के पास पहुँच गया यहाँ मैं एक दूसरे की बात सुन सकें । चांदीराम रुक गया और डॉक्टर से कहने लगा डॉक्टर आप इस बात का अवश्य ध्यान रखें । इस लडके का जीवन मैंने बचाया है । इससे बचाकर मैंने अपनी जिंदगी जो मैं डाली है, आपका सब कुछ बता देगा । मैं आप से उम्मीद करूंगा कि आप मेरे साथ पूरा न्याय करेंगे । मैं जिन परिस्थितियों में फस गया हूँ उनमें मैं आप सत्य की उम्मीद करता हूँ । चांदीराम इस समय बिलकुल बदला हुआ इंसान लग रहा हूँ । अपने आदमियों से दूर यहां पहुंचने के साथ बहुत ही विनम्र हो गया था । ऐसे जतारा था जैसे हम लोगों पर उसका बहुत अधिक भरोसा है और उसका जीवन अब भी हमारे हाथों में है । डॉक्टर ने उससे पूछा, क्यों ध्यान दे रहा हूँ, तुम भी तो नहीं हो, डॉक्टर में काया नहीं हूँ । लेकिन मुझे आशंका आवश्यक है कि किसी न किसी दिन फांसी का फंदा मेरी गर्दन को जकड सकता है । आप एक नहीं नुकसान हैं । मुझे उम्मीद है की आप इस बात को नहीं बोलेंगे कि मैंने जिम की जिंदगी बचाई है । अब मैं आपको जिनको यहाँ के लिए छोड कर जा रहा हूँ । चांदीराम ने की व्यवस्था के साथ कहा वो एक और हटकर एक जगह जाकर बैठ गया और बैठे बैठे फोर्ड गोल करके सीटी बजा रहे लगा । डॉक्टर ने मुझसे कहा तो जिम तुम अब यहाँ पहुंच गए । तुम जानते हो तो आप किस हालत में हूँ । जैसा तुमने बोला था वैसा ही काटना पडेगा । मैं तो मैं दोस्तो नहीं देता हूँ और इतना आवश्य कहूंगा की जब कप्तान सोमान सस्ते तो तुम वहाँ से नहीं है । जब भी बार थे तो वहां से खिसक ली है । ये कायर का काम है । डॉक्टर की बात सुनकर मैं होने लगा । मैंने कहा हूँ तो हूँ जो कुछ हुआ उसके लिए मैं स्वयं दोषी । मुझे इसका भारी पश्चाताप बिल्लु मुझे मार डालना चाहते थे लेकिन चांदीराम ने मेरी जान बचाई वो पूरी तरह मेरा साथ हूँ । मरने से मुझे कोई भय नहीं पर डर मुझे इस बात का है कि वो लोग मुझे ये ऍम यदि रूम जी यंत्रणा देने । लेकिन तो मेरी बातों और मेरे आंसू से डॉक्टर का मंत्र सीट क्या कहने लगा ये सब मैं नहीं देखा । चलो उछल कर बाहर निकलो और मेरे साथ बचकर भाग निकलो । यहाँ मैंने कहा नहीं डॉक्टर साहब, मैं चांदीराम को वचन दे चुका हूँ । मैं जानता हूँ कि इस स्थिति में यदि आप से हम भी होते तो ऐसा नहीं करते । वचन का मूल्य आप जानते हैं । आप ही नहीं जमींदार साहब, कप्तान सोमनाथ भी ऐसा नहीं करते हैं । मैं भी आप लोगों में से ही हूँ । मैं भी ऐसा नहीं करूंगा । चांदीराम ने मेरी बात पर विश्वास किया है । मैंने उसे वचन दिया है । वो मुझे यंत्रणा देते तो संभव है उन्हें बता दूँ की जहाज कहाँ पर है । मैंने जहाज पर कब्जा कर लिया । वो उत्तर की ओर सक्रिय सी नदी के पास है । उत्तर में जहाँ पानी कुछ उतना होना शुरू होता है, वहाँ पर टापू की ओर जाने वाली नदी के किनारे डॉक्टर ने विश्व के साथ खाना जहाज का सचमुच जहाज अभी तक सुरक्षित है । मैंने जल्दी जल्दी डॉक्टर को सारी घटना बता दी है तो चुपचाप मेरी बात सुन पा रहा हूँ । मेरी बात समाप्त होने पर डॉक्टर ने कहा, जिन हर कदम पर तुमने हमारा जीवन बचाया है क्या तुम समझती हूँ कि हम इस तरह तो मैं मुसीबत में छोड देंगे । खजाने का नक्शा तुम को मिला था । इन लोगों के षड्यंत्र का पता तुमको चला था । आप ऊपर बेनीमाधव की तलाश तुम ने की थी । बेनीमाधव जैसा उपयोगी कोई व्यक्ति इस यात्रा में हमें अब तक नहीं मिला है । इस बीच चांदीराम को आवाज देकर डॉक्टर ने अपने पास बुलाकर का जानकीराम । मैं तो में सलाह देना चाहता हूँ कि खजाने की तलाश में बहुत ज्यादा बडी मत करूँ । चांदीराम ने जवाब दिया सर खजाने की तलाश के लिए तो मुझे हर संभव प्रयास करना चाहिए क्योंकि एक हजार हासिल कर के ही तो मैं अपनी और इस लडके की जान बचा सकता हूँ और डॉक्टर साहब आप भी इतनी मुसीबत झेलकर उसका जाने के लिए ही तो यहाँ आए हैं । सारा जोखिम आप भी तो इसीलिए उठा रहे हैं । आपने मुझे जाने का लगता किस लिए दिया था । मैं तो आपकी हर बात बराबर मूंदकर विश्वास कर रहा हूँ । बतायेंगे आप इसलिए कह रहे कि खजाने की तलाश में ज्यादा हडबडी ना करो । डॉक्टर ने चांदीराम के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, इसमें ना तो कोई रहस्य है और नहीं कोई लुका । छुपी की बात मैं तो मैं सब कुछ बता दूंगा । मैं तो मैं विश्वास भी दिला सकता हूँ । तो मैं बहुत कुछ हासिल होगा लेकिन उसी हालत में जब कि तुम और मैं इस टापू से सही सलामत बचकर निकल जाए । मैं तो मैं विश्वास दिलाता हूँ तुमको कानून की कडी सजा से बचाने के लिए भी मैं हरसंभव प्रयास करूंगा । चांदीराम का चेहरा जमा उठा । वह कहने लगा मुझे आप पर पूरा भरोसा है । आपको मैं सबसे बडा है चिंतन मानता हूँ । डॉक्टर ने कहा इसके साथ ही मैं तुमको और सलाह देना चाहता हूँ कि इस लडके को आपने बहुत करीब रखना और चंपी तो मैं मदद की जरूरत पडे । हमको खबर करना । तुम्हें तत्काल सहायता पहुंचाई जाएगी । अच्छा जी पिता डॉक्टर ने मुझसे हाथ मिलाया, चांदीराम को सिर झुकाकर अभिवादन किया और तेज कदमों से चलते हुए जनरल की और बढ गए ।

रहस्मय टापू - 32

डॉक्टर के जाने के बाद चांदीराम ने कहा, चेंज मैं तुम्हारी ईमानदारी पर बात पसंद था । मैंने देखा डॉक्टर ने तुमसे भाग निकलने का इशारा किया था, पर तुम ऐसा करने से इंकार कर दिया । तुमने अपने बच्चन का पालन करके मेरा मन जीत लिया है । देखो, अब हमें घर जाने की तलाश में निकलना है । तुम को इस बात का ध्यान रखना होगा कि तुम हमेशा बिल्कुल मेरे पांच रहूँ । उस हालत में हम दोनों एक दूसरे को बचाने में सफल हो सकते हैं । उसी समय भीतर से एक व्यक्ति ने हमें पुकारते हुए कहा, नाश्ता तैयार है । उन्होंने एक पशु को बोलने के लिए एक बडा सा लाओ चला रखा था जिसके तहत क्या अगर लपटों से वातावरण बहुत कम हो गया था । उन लोगों ने इतना सारा खाना तैयार कर लिया था कि भरपेट खाने के बाद भी काफी सामान ऍम उन्हें कल की तो चिंता ही नहीं । मैंने अपने जीवन में इतने लापरवाह लोग आज से पहले कभी नहीं देखे थे । प्यास लगने पर हुआ खोदने वाली कहावत उन लोगों पर लागू होती थी । उनकी आदतों को देखकर मुझे लगा कि ये लोग ज्यादा दिनों तक किस्त आप कठिनाई को नहीं झेल पाएंगे । चांदीराम ने भी उनको इस प्रकार की लापरवाही के लिए कभी नहीं तो का था । उसके जैसा चतुर व्यक्ति उन्हें खाना इस प्रकार नष्ट करने से ना तो की इसको मुझे आश्चर्य हो रहा था । स्वयं खाते हुए और अपने कंधे पर बैठे तोते को खिलाते हुए चांदीराम कहने लगा, प्यारे साथियों, एक बार खजाना हाथ लग जाए तो फिर हमें नौकाओं की तलाश में जुट ना होगा । हजार तो आवाज मिल जाएगा । उसके सारे तुम सब मालामाल भी हो जाओगे । जब तक खजाना नहीं मिलता तब तक हमारा ये बंधक भी हमारे कब्जे में रहेगा । यदि यह मैं जहाज का पता बता देता है तो हम इसे भी अपने साथ सुरक्षित वापस ले चलेंगे और खजाने में इसका हिस्सा भी इसको देंगे । चांदीराम और उसके साथ ही इस समय बहुत प्रसन्न और उत्साहित थे परन्तु मैं पूरी तरह से परेशान था । मुझे बहुत डर लग रहा था । मुझे विश्वास था कि खजाना प्राप्त करने के बाद ये लोग कुछ भी कर सकते हैं । ये सब पहुंच हट्टे कट्टे और मजबूत व्यक्ति थे और उनके मुकाबले हम केवल दो चांदीराम की टांग भी नहीं और मैं तो भी बच्चा ही था । शायद ही कारण था कि चांदीराम मुझ पर भरोसा कर रहा था । पर साथ ही डॉक्टर को भी उसने अपना दोस्त बना कर रखा हुआ था । एक बात मेरी अभी तक समझ में नहीं आ रही थी कि डॉक्टरों जमींदार किस कारण से लकडी का किला और खजाने का नक्शा इन लोगों को सौंप देने के लिए तैयार हो गए । हम लोगों का हुलिया अब तक बहुत विचित्र सा हो चुका था । सबके कपडे बेहद गंदे हो चुके थे । लेकिन सब के सब हथियारों से लैस चांदीराम के कंधों पर दो बंदूकें लटक रही थी और कमर में उसने एक चाकू और एक पिस्तौल खोंस की थी । मेरी कमर में चांदीराम ने एक रस्सी लपेट दी थी और रस्सी का दूसरा सीधा उसके हाथ में था । मैं मदारी के इशारों पर नाचने को विवश छोटे भालू की तरह दिखाई दे रहा था । उन पांच लोगों ने हथियारों के अलावा पाउडेड और बिल से भी ले रखे थे । मैंने अनुभव किया कि किले में खाने पीने का जितना भी सामान था, वह इन लोगों ने अपने पास रख लिया था । मैं सोचने लगा कि मेरे वे साथी कैसे रह रहे होंगे? उन्हें खाने पीने का सामान कहाँ मिल रहा होगा? इस टापू पर उन्हें अपनी भूख शांत करने के लिए क्या मिल सकता है । मैं इन्हीं विचारों में खोया हुआ था कि चांदीराम ने खजाने की खोज में कूच का आदेश दिया । सब बडे उत्साह के साथ नक्शे के सहारे आगे बडने लगे । रास्ते में नक्शे को लेकर उन लोगों में कुछ देर तक बहस भी होती रही । नक्शे में खजाने के मार्ग की मुख्य पहचान के रूप में जिस लम्बे वृक्ष का उल्लेख था, अब हम वहाँ पहुंच गए थे । हमारे सामने ही बहुत पहाडी थी जिसे दूरबीन पहाडी के नाम से जाना जाता था । हम आप पहाडी के ऊपर चल रहे थे । पहाडी पर चीड के लम्बे लम्बे पेड खडे थे । उनके बीच में जगह जगह किसी अन्य प्रजाति के उनसे भी चालीस पचास फुट ज्यादा लंबे वृक्ष नजर आ रहे थे । इन लम्बे वृक्ष का उल्लेख नक्शे में था । बीच में हमें घनी झाडियों से गुजरना पडा । उस रास्ते को पार करने में बडी कठिनाई आ रही थी और हम लोगों की चाल बहुत धीमी पड गई थी । रास्ता पथरीला होने के कारण चोट लगने का भी डर था लेकिन कुछ देर बाद हम ऐसे स्थान पर पहुंच गए जहां झाडियां कम करनी थी । ये सुगंधित फूलों वाली झाडी या नहीं । खुशबू के झोंको ने हमारे मन मस्तिष्क में ताजगी भर दी । नीचे धरती पर होगी कोई खास भी पैरों को अच्छी लग रही थी । जब हमारी पार्टी दहलान पर उतरने लगी तो चांदीराम ने मेरा हाथ पकड लिया और सहारा देकर मुझे आगे ले जाने लगा । कई बार मैंने भी चांदीराम को सहारा दिया वरना उसकी लकडी की टांग फिसल सकती थी और वह मुंह के बल गिर सकता था । लगभग आधा मील किसी तरह चलने के बाद हम लोग खजाने वाली पार्टी पर चढने लगे । एक व्यक्ति हम सबसे आगे चल रहा था । इकाई को जोर से जी का ऐसा लगा । वह डर के कारण ठीक रहा । लगातार चिखता जा रहा था । उसकी चीखें सुनकर बाकी के लोग भी तेजी के साथ उसकी और थोडे जब हम लोग उसके पास पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर हमें भी झटका लगा । चीड के बडे वृक्ष के पास एक मनुष्य का अस्थिपंजर पडा हुआ था । उसमें पुराने कपडों के चीथडे जून रहे थे । पल भर के लिए हम सबके रोंगटे खडे हो गए । एक व्यक्ति ने बताया ये अस्थि पिंजर किसी नाविक का लगता है । जी थोडे से पता चलता है कि ये किसी नाविक की महंगी पोशाक रही होगी । चांदीराम ने उस अस्थि पिंजर की कुछ नजदीक पहुंचकर उसे ध्यान से देखा । उस पिंजर के पैर एक निश्चित दिशा की और संकेत कर रहे थे । उसके हाथ उसके सिल्की और उठे हुए थे जो विपरीत दिशा की ओर संकेत कर रहे थे । चांदीराम नहीं कुतुबनुमा निकालकर उस क्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद कहा यह सस्ती पंजाब निश्चित दिशा की और संकेत करने के लिए एक निशानी के रूप में छोडा गया है । मुझे लगता है फुलवाडा कुछ नहीं । यहाँ नजारा छुपाने के बाद अपने एक साथी को मार क्रिया डाल दिया ताकि उसके अस्थि पिंजर को छुपे हुए खजाने की दिशा का पता बताने के लिए एक निशानी के रूप में इस्तेमाल किया जा सके । इसके लम्बी लम्बी हड्डियाँ और पूरे वालों से तो यही लगता है जीएसटी पिंजर अल्लादीन का होना चाहिए । एक व्यक्ति ने तुरंत चांदीराम की बात पर हामी भरते हुए कहा, आप ठीक कह रहे हैं, मैं अलादीन को अच्छी तरह से जानता हूँ, लाश उसी की है । अलादीन ने मुझे कुछ रुपये भी उधार ले रखे थे । ये मेरा चाकू भी अपने साथ ले गया था । दूसरे ने कहा अगर ऐसा है तो उसका चाकू अलादीन के पिक्चर के पास होना चाहिए । क्योंकि फुलवार डाकू का नियम था कि वह जिस किसी का काम करता उसका व्यक्ति के सामान उसके पास ही छोड दिया करता था । चांदीराम ने उस व्यक्ति की राय से सहमती व्यक्त करते होता है तुम ही कह रहा हूँ फूलवा किसी का सामान नहीं लिया करता था छोडो बातों को यह व्यक्ति मर चुका है । ज्यादा आगे बढो कैलाश तुम्हारा पीछा करने से रही । हम लोग उस अस्थि पिंजर को वहीं छोडकर आगे बढने लगे लेकिन सबके मन में एक भाई समझ आ गया ।

रहस्मय टापू - 33

हम लोग एक ऐसे स्थान पर पहुंच गए जहां एक और बडे दक्षिण थे और दूसरी और समुद्र को छूता हूँ । वाॅक की नारा हम लोगों के ठीक सामने वह पहाडी थी जिससे दूरबीन पहाडी के नाम से जाना जाता है । चारों ओर खामोसी दूर से झरने का कल कल करता हूँ । आधी मार संगीत सुनाई पड रहा था । चारों ओर कोई मनुष्य दिख रहा था और नहीं दूर दूर तक समुद्र में कहीं कोई जहाज या नौका नजर आ रही हैं । चांदीराम आपने कुतुब मुंबई को दर्जी पर बजकर आस पास के क्षेत्र को विविध कोनों से देख रहा था । वो स्वागत में बुदबुदा रहा था । भाई और तीन रक्षा दिखाए हैं और सुरक्षा के ठीक नीचे रही । वजह दिन वाली पारी इसका अर्थ यह हुआ कि हम सही ठिकाने के एकदम निकट है । अब हजारे को खोल निकालने में कोई कठिनाई नहीं होना चाहिए । मैं सोचता हूँ पहले खाना खा लिया जाए । उसने प्रश्नवाचक दृष्टि से अपने एक साथी की ओर देखा और फिर कहने लगा यह फुलवाडा को भी कब का था । देखो कंबख्त किस चतुराई पाठकर जाने को छुपाया था । उसका साथ ही कहने लगा मुझे तो लगता है तो वहाँ पे दनके । यही खजाने के आसपास मंडरा रहा होगा । दूसरे साथ ही नहीं टिप्पणी की खुलवा जीतेजी बहुत भयानक दिखता था । ट्रेंड बन के तो और भी भयानक हो गया होगा । चांदीराम ने उसको दिलासा देते हुए कहा हम सबका आपकी बहुत अच्छा है कि वह मर चुका है । उसके जीते जी तो हम लोग यहाँ आने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे । परन्तु चांदीराम के इन शब्दों का उन पर कोई विशेष असर नहीं हो रहा था । जब से उन लोगों ने अस्थिपंजर देखा था तब से उनके मन में भय पैदा हो गया था । एक का एक हम लोगों के दाई और घने पेडों से आवाज सुनाई दी । मोर दे की जोरि पर पंद्रह इंसान शाॅल हिंसा आशा करता हूँ । आवाज सुनते ही उनके चेहरे भाई से सफेद पड गए । मैंने अपने जीवन में इससे पहले कितने वही भी चेहरे नहीं देखे थे । उन छह लोगों में से दो तो ये आवाज सुनते ही वैसे उछल पडेगा । बाकी ने डर के मारे एक दूसरे को पकड लिया । एक आदमी तो भय के मारे बेहोश होकर जमीन पर गिर गया । वो बुदबुदा उठा ये तो फुलवाडा को की आवाज है । उसका प्रेरित यहाँ पहुंच गया । पेडों के पीछे उसकी आवाज एका एक मौन हो गई । चांदीराम ने अपने सीधे फुटों पर्ची फैलते हुए अपने आप को संभाला और अपने साथ ही उसे कहने लगा डॉॅ घबराओ मत, ये आवास विवाह की नहीं है । मैं इस आवास को अच्छी तरह पहचानता हूँ । ये आवाज किसी प्रेत की नहीं बल्कि किसी जीवित मना हूँ की है । दो लोगों को भयभीत करने के लिए ये शरारत है । चलो उठो हजारा प्राप्त करो और सारा जीवन एशोआराम के साथ देता हूँ । चांदीराम की बात का कुछ लोगों पर असर हुआ । बाकी लोग भी उसकी बात को ध्यान से सुनने लगे थे । इसी बीच पेडों के पीछे से फिर वही आवास पूंजी । लेकिन इस बार आवाज धीमी ऐसा लग रहा था कि वह काफी दूर से आ रही है । इस आवाज से चांदीराम के साथियों के पैर धरती पर जम गए और उनकी आंखों में फिर भाई जाकर नहीं लगा । एक डाकू तो डर के मारे जोर जोर से हनुमान चालीसा का जाप करने लगा । भूत पिशाच निकट नहीं आवे । हनुमान ने जब नाम सुनावे परन्तु चांदीराम पर इस बार भी इस आवाज का कोई असर नहीं हुआ था । गुस्से से दाग तीसरा था और अपने साथ ही उसे कहने लगा मैंने कहा ना, ये किसी की शरारत है । मैं यहाँ पर खजाना लेने आया हूँ । इस तरह की शरारत तो इधर कब वापस लौटने के लिए नहीं । जहाँ तक फुलवा डाकुओं का प्रश्न है मैं उससे तब भी नहीं डरा था जब वह जीवित था । यदि उसका प्रेरित भी आ जाता है तो मैं उस से नहीं डरूंगा । चांदीराम के शब्दों का उसके साथ ही ऊपर कोई असर नहीं हो रहा था । उसका एक साथी तो हनुमान चालीसा का जाती किए जा रहा था । चांदीराम कुछ देर तक चुप चाप सोच तारा । फिर अपने साथ ही उसे कहने लगा दस तो मैं समझ गया हूँ । ये आवाज किसकी है? सराय याद करने की कोशिश करो तुम लोग भी समस्या हो गए । ये आवाज पे नहीं हूँ की है । चांदीराम के एक साथी ने तत्काल उसकी हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा ठीक है आप की आवाज भी नहीं बात की है । एक व्यक्ति अभी भी संशय में था । कहने लगा इस वीरान टापू पर इतने वर्षों से बेनीमाधव कैसे रह सकता है । जिंदा चांदीराम ने का ये आवाज बेनीमाधव की है । संभव है किसी प्रकार तीन वर्षों से हो यहाँ जीवित रह बारे में सफल हो गया हो लेकिन बेनीमाधव है । चाहे वो जीवित हो अथवा मुर्दा होने की क्या आवश्यकता है? चांदीराम ने एक बार फिर सब साथियों को ढांढस बंधाया और फिर खडे हो गए । केवल एक व्यक्ति अभी तक घबराया हुआ था । वैसे वो बीमार भी था और बुखार से तब रहा था । धूप और गर्मी के कारण उसका बुखार तेज होता जा रहा था । सब लोग पहाडी पर चढने लगे । कुछ दूर की चढाई के बाद हाल किसी ढलान थी और रास्ता पश्चिम की ओर मुड गया । चीन के रक्षा चारों ओर फैले हुए थे । जी तीन लम्बे सुरक्षों का उल्लेख नक्शे में था । उसमें पहले लिखित पास पहुंचे तो हमने देखा कि उससे कुछ दूरी पर खडा । तीसरा वृक्ष बहुत विशालकाय, लगभग दो सौ फीट ऊंचा उसका तना एक झोपडी के बराबर चौडा था । उस सुरक्षा की घनी छाया चारों और फैली हुई थी । उस विशाल रख चुकी छाया के नीचे ही करोडों रुपये मूल्य का सोना छुपा हुआ था । उस खजाने को प्राप्त करने के रोमांच ने सब का भय दूर कर दिया था । वो तेजी से कदम आगे बढाने लगे हैं । चांदीराम अपनी बैसाखी के सहारे बडी पूर्ति के साथ सबके आगे आगे चल रहा था । मेरी कमर में बंधी रस्सी को झटका देकर आगे की ओर खींचता और बीच बीच में गुस्से से मुझे घूरकर देखता हूँ । उसकी आंखों में क्रोध अब साफ उजागर होने लगा था । शायद खजाने के बहुत पास पहुंच जाने के बाद वह मुझ से किया गया वायदा भूल गया । डॉक्टर द्वारा दी गई चेतावनी भी हो चुका है । मेरे मन ने मुझसे कहा चांदीराम की पूरी कोशिश रहेगी कि वह सारा खजाना जहाज में लाख का आज रात को ही वापस चल पर वह हर हालत में उससे जहाज का पता पूछेगा और जहाज की वापसी से पहले सबको यही इसी टापू पर खत्म कर देगा । तो जहाज में करोडों रुपये मूल्य का सोना अपने सिर पर गुनाहों की कंट्री लाख कर यथाशीघ्र देश वापस लौट जाना चाहेगा । ये सब सोचकर मेरे शरीर में कंपकंपी सी छूट गई थी । मेरे हाथ पैर ठंडे पडने लगेंगे । मैं उन लोगों की रफ्तार से आगे नहीं चल पा रहा था । एक दो बार में लडखडा भी गया । चांदीराम ने रस्सी को जोर से झटका दिया और बहुत गुस्से के साथ मेरी और देखा । उसकी आंखों से आप बरस रही है । हम लोग उस विशाल लक्ष्य के बहुत निकट पहुंच गए थे । चांदीराम के सिर पर तो जैसे प्रीत सवारों किया था । तेजी के साथ अपनी फॅमिली को देखता हुआ आगे की और दौड में लगा चांदीराम के मुख्य जिसमें भरी एक आवाज नहीं कि वहाँ का एक रुक गया । सामने एक स्थान पर खुदाई के निशान थे । एक थोडे का दो टुकडे में होता हुआ हत्या जमीन पर पडा था । लकडी की पेटियों के अनेक टुकडे आसपास बिखरे हुये थे । ये समझने में ज्यादा देर नहीं लगी कि वहाँ कुछ लोग आए थे और सामान पेट में भरा गया था । यहाँ खजाना होने का संकेत आप यहाँ एक घंटा खुला हुआ था । जानें खजाना गायब हो चुका था, अच्छा हूँ

रहस्मय टापू - 34

चांदीराम के चेहरे पर हवाइयां उडने लगी थी । वो बहुत निराश नजर आ रहा था । उसकी वे आंखें जो भी कुछ देर पहले तक कामगारों की तरह दहक रही थी । एक का एक बुझ गई थी । उसके छह साथी गुस्से से आपको बुला हो रहे थे । चांदीराम को खरीखोटी सुना रहे थे । उस पर ताने कस रहे थे । चांदीराम अपने साथ ही उसे अपनी जान का खतरा अनुभव कर रहा था । उसने चुपके से मुझे दोनाली पिस्तौल थमाते हुए खा लो । इसे अपने पास ये लोग कोई गडबडी कर सकते हैं जब उस कोने में जाकर खडे हो जाओ । वहाँ से तुम तो सबको देख सक हो गए, पर कोई तुम्हें नहीं देख पाएगा । उसका व्यवहार बदल गया है । खजाना ना मिलने के कारण तो एकदम असहाय हो गया । मेरे मुंह से धीरे से निकल गया । चांदीराम रंग बदलने में तो किसी को भी मात दे । उसके पास मेरी बात का जवाब देने का समय नहीं था । उसके साथ ही नीचे गड्ढे में उतरकर खजाना तलाशने की कोशिश कर रहे थे । उन्हें मिट्टी में पडी एक खादी कितनी मिल गई तो पूर्व कहने लगेगा लाॅक ऍम यही बच्चे सात सौ करोड के खजाने से इससे बाजार जाकर मिठाई खरीदना और हनुमान जी बहुत चला देना । अरे क्या इसे गिनने के लिया चले आए थे अपने देश से अपनी जान हथेली पर रखकर बडा सरदार बनता है । वह लगना चाहिए । कहाँ करता था जलाओ आप सौ करोड का खजाना है । जीवन भर के लिए मालामाल हो जाएंगे । अपना तो जी करता है । इसकी दूसरी काम भी तोड दी जाएगी । चांदीराम द्वारा दी गई धमकी का उन पर विशेष असर नहीं हुआ । वेकिक कर घटने से बाहर निकले और उसके दूसरी और खडे हो गए । वो छह आदमी गद्दी के उस बार थे और हम दो । इस बार वो हमें गुस्से से घूम रहे थे । उनमें से एक व्यक्ति जिसका नाम मणीराम था, कहने लगा साथियों । इस लंगडे के कारण हम लोग इस हालत में पहुंचाया । कुत्ते का ये पिल्ला हम लोगों की तबाही के लिए जिम्मेदार है । इन लोगों को छोडना नहीं चाहिए । उस व्यक्ति ने आक्रमण के लिए अपना हाथ उठाया । बस उसी समय बाई और से घनी झाडियों में से एक के बाद एक तीन गोलियां छूटने की आवाज सुनाई दी । ठीक गोली मणीराम की कनपटी पर लगी । वो मुँह के बल जमीन पर गिरकर लौटने लगा । बाल भर में ही दो और लोग धरती पर लुढक तक आपने लगे । बाकी के तीन लोग सिर पर पैर रखकर जंगल की और बात करेंगे । मैं भी अलग भी नहीं । जब का पाया था कि वो धरती पर लौटते हुए मणीराम पर चांदी हमने तो और गोलिया डाल दूँ । चांदीराम चिल्लाया बडी राम तुमसे तो हिसाब बराबर हो गया । उसी समय डॉक्टरों बेनीमाधव झाडियों से निकलकर हमारे सामने आ गए । उनकी बंदूकों से अभी तक दूंगा निकल रहा था । डॉक्टर ने अपने साथियों को आदेश दिया दोनों और पूरी ताकत के साथ दौड कर उनसे पहले समुद्र के किनारे पहुंचने की कोशिश करूँ । कहीं ऐसा ना हो के किनारे लगी नौकाओं पर कब्जा कर लेंगे । हम लोग पूरी शक्ति के साथ दौडे । चांदीराम भी कोशिश कर रहा था की हम लोगों के साथ साथ दौड रही । अपनी बैसाखी के साथ वो हर संभव प्रयास कर रहा था कि हम से एक कदम भी पीछे ना रहे । फिर भी जब हम किनारे पर पहुंच गए तो हम से करीब तीस गज पीछे था । चांदीराम जोर से चिल्लाए डॉक्टर साहब, आप तो कहाँ करते हैं कि किसी काम में ज्यादा जल्दबाजी करना अच्छा नहीं । मेरा भी तो ख्याल कीजिए हम लोग पल भर के लिए रुक गए । हमें वे तीनों व्यक्ति समुद्रतट की और भागते दिखाई दी । परंतु उनकी तुलना में हम लोग नौकाओं के बहुत निकट थे । अपने चेहरे का पसीना पूछता हुआ चांदीराम भी अब हमारे पास पहुँच गया था । वह डॉक्टर से कहने लगा, डॉक्टर साहब आपका बहुत बहुत धन्यवाद । आप ठीक उसी समय देवदूत की तरह पहुंच गए जब मुझ पर और जिम पर मौत झपट्टा मार नहीं वाली थी । ये बेनीमाधव भी किसी फरिश्ते से कम नहीं है । मैं समझता हूँ कि बेनीमाधव के कारण नहीं आप यहाँ पहुंचे होंगे । मैं बेनीमाधव का उपकार जीवन भर नहीं भूल पाऊंगा । हम लोग नौकाओं की ओर बढने लगे । बेनीमाधव हमें खजाने की खोज की अपनी दास्ता सुनने लगा । उसने बताया कि टापू पर लम्बे समय तक भटकने के बाद उसने अस्सी पिंजर को देखा । उसी के आधार पर वो खजाने तक पहुंच गया था । उसने भाडे से खोदकर खजाने को निकाला । दो टुकडों में टूटा हुआ जो हत्या गड्डे के पास मिला था वो बेनीमाधव कपडे का ही था । हम लोग टापू पर पहुंचने के दो महीने पहले ही बेनीमाधव ने खजाना निकालकर काकू के उत्तरी पूर्व किनारे पर एक सुरक्षित स्थान तक छिपा दिया था । सारा खजाना वह कई दिनों तक अपनी पीठ पर लाख लाख कर उस ठिकाने तक ले जाता रहा था । बेनीबाद होने जब सारा तथ्य डॉक्टर को बताया तो डॉक्टर समझ गई कि खजाने के नक्शे का अब कोई उपयोग नहीं रह गया था । चुकी बेनी वादों की गुफा में खाने पीने का सामान भी काफी मात्रा में घटना था । इसीलिए डॉक्टर में उसके लिए से निकलकर बेनीमाधव के पास अत्यंत सुरक्षित स्थान पर पहुंच जाना बेहतर समझा । यही कारण था कि डॉक्टर में अपने साथियों सहित लकडी के किले से सुरक्षित निकल जाने के बदले चांदीराम को अकेला और खजाने का नक्शा सौंप दिया था । जब डॉक्टर में उस दिन मुझे चांदीराम के कब्जे में देखा था तो वहाँ से लौटने के बाद जमींदार को कप्तान की देखरेख के लिए छोडकर बेनीमाधव के साथ उस स्थान की ओर कुछ कर दिया । झा नक्शे के अनुसार खजाना रखा हुआ था । डॉक्टर का ये भी अनुमान था कि चांदीराम उसके साथियों से मेरी जान को खतरा है । चुकी बेनीमाधव डॉक्टर से काफी पहले उस स्थान पर पहुंच गया था । इसलिए चांदीराम के साथियों को उलझाए रखने के लिए ही उसमें पेडों के पीछे से दिवंगत फुलवार डाकू का चर्चित वो आपके कई बार दोहराया था अपने उद्देश्य में सफल भी रहा हूँ । जितनी देर तक चांदीराम के साथ ही कुलजन में पडे रहे । उतनी देर में डॉक्टर भी वहाँ पहुंच गए थे । चांदीराम के साथियों के धावा बोलने के ठीक पहले बेनीमाधव और डॉक्टर में निशाना साथ कर तीन लोगों को ढेर करने की उनकी योजना विफल कर दी । ये सुनकर चांदीराम ने डॉक्टर को धन्यवाद देते हुए कहा, डॉक्टर साहब, मेरी जान तो इसलिए बच गई मेरे पास था, यह होता तो मुझे बचाने के लिए कौन आने वाला था? डॉक्टर में हसते हुए जवाब दिया ही कह रहे तो चांदीराम अब तथा तय किया गया कि पहले उस ठिकाने पर चला जाए जहाँ राजस्थान को खडा किया गया था । व्यवस्थान लगभग आठ मिल दूर था । चांदीराम बुरी तरह से रखा हुआ था लेकिन वह तुरंत ही चलने को तैयार हो गया । वो कूदकर एक नौका में सवार हो गया । समुद्र उस समय शाम था । हम लोग अपनी नौकाएं खेले लगे । हमारी नौका जब दो पहाडियों के पास से गुजरी तो हमें बेनीमाधव की गुफा के सामने एक व्यक्ति खडा दिखाई दिया । ध्यान से देखने पर पाया तो वे जमीदार साहब थे । हमने रूमाल मिलाकर उनका अभिवादन किया । चांदीराम इतने उत्साह से हाथ हिला रहा था जैसे कि जमींदार उनका बहुत आदमी हो । अभी लगभग तीन मील का रस्ता ही किया था कि हमें राजस्व अपने आप समुद्र में डोलता हुआ दिखाई दिया । समुद्र में आई बाढ से उसका लंगर टूट गया था । हम लोगों का भाग्य अच्छा था की कोई बडा तूफान नहीं आया वरना वो बहकर हम लोगों की पहुंच से दूर भी हो सकता था । कोई तेज ज्वार यह सूखी रेत पर भी पटक सकता था । उस हालत में हम लोगों के लिए उसे समुद्र में उतार पाना असंभव हो जाता हूँ । हम लोगों ने एक नया लंगर जहाज की ओर फेंक कर उसे खींचा और उसे ऐसे स्थान पर खडा कर दिया जो बेनीबाद ओके गुफा के सबसे निकट पडता था । हम लोग गुफा की और बडे जमींदार साहब हमारे स्वागत के लिए खडे थे । मुझे वो बडे प्यार से मिले और किसी भी प्रकार का कोई गिला शिकवा नहीं किया । चांदीराम ने जब विनम्रतापूर्वक जमीदार साहब को नमस्कार किया तो उन्होंने कुछ गुस्से के साथ का चांदीराम तुम तब आप अखबारों ढोंगी हो उससे कहा गया कि तुमको ना मारा जाए कितनी तरह चार लोग जो लोग तुम्हारे कारण मारे गए हैं वो ब्रेड बंद कर आवश्यक हमारी छाती पर सवार रहेंगे । चांदीराम इतना बेशरम था की जिम्मेदार की इस लताड के बाद भी उसमें उन्हें फिर से नमस्कार करते हुए आभार व्यक्त किया । जमीदार ने उसे गुस्से से जे लगाते हुए कहा कि बहुत वही खडा रहे हैं । हम लोग गुफा के भीतर दाखिल हुए हैं । वह काफी बडी और हवादार साफ पानी का एक ना झरना एक किनारे से नीचे की ओर चल रहा था और एक स्थान पर पानी जमा करने के लिए अड्डा बना हुआ था । गुफा का फर्श रेट का उसके एक कोने में आपका चलाओ चल रहा था जिसके पास कप्तान सोमनाथ लेते हुए थे । उनसे काफी दूर दूसरे कोने में सोने के सिक्कों और बिल्लियों का विशाल ढेर लगा हुआ था । गुफा मेंशन कराते प्रकाश से वह ढेर सोने की पहाडी जैसा चमक रहा था । ये फुलवार डाकू का ज्यादा था । इसे घंटा करने में उसने पता नहीं कितने लोगों का खून बहाया था । कितनी आशाओं का गला घोंटा था, कितने परिवारों को बर्बाद किया था । फुलवा के अपराधों में चांदीराम और बेनीमाधव जैसे भी लोग शामिल थे । ये अलग बात है की परिस्थिति के मार से बेनीमाधव अब सुधर गया था । इस बीच कप्तान सोमनाथ की नींद आ गई । उन्होंने पहले मुझे देखा और मुस्कुरा दिए । फिर उनकी नजर चांदीराम पर पडी वह चांदीराम से कहने लगे तो यहाँ कैसे आ गए? आपकी सेवा के लिए आया हूँ । चांदीराम ने सिर झुकाते हुए जवाब दिया, उस रात हम लोगों ने बहुत अच्छा खाना है । कई दिनों बाद मुझे इतना अच्छा खाना मिला था । हम सब लोग आपके अलाव के आसपास बैठे खाना खा रहे थे और सबसे आखिर में बैठा हुआ चांदीराम भी खाने में जुडा हुआ था । वह सब की हाँ में हाथ मिलाता और जब बाकी लोग किसी बात पर हसते वो भी हस देता है । मुझे देखकर आश्चर्य हो रहा था वो कितनी जल्दी अपना रंग बदल लेता है ।

रहस्मय टापू - 35

अगले दिन हम तडके से ही काम में जुट गए । उस खजाने को लात कर हमें करीब एक मूल समुद्रतट तक पहुंचना था । वहाँ से लगभग तीन मील दूर खडे किए गए अपने जहाज राजन तक का समुद्री मार्ग हमें नौकाओं से तय करना था । हमे थोडा सा खतरा तीन डाकुओं से अवश्य बना हुआ था जो इस टापू में कहीं छिपे हुए थे । हम सब जल्दी जल्दी खजाने का ढेर समुद्र के किनारे जमा करते रहे । जहाँ से हमारे दो साथी उसे नौकाओं में भर भरकर जहाँ तक ले जाते हैं और नौकाएं खाली करके नहीं खेल भरने के लिए लौट आते हैं । मैं गुफा के अंदर सोने के सिक्के और अंडे, डबल रोटी आदि बोलियों में भरने के लिए जुटा रहा । लगभग सारा दिन भी दिया । मैंने अपने जीवन में इतना सारा सोना कभी नहीं देखा था । भारत, इंग्लैंड, फ्रांस, पुर्तगाल, स्पेन और अन्य यूरोपीय देशों की टकसालों में डाले हुए सोने के सिक्के भी एक साथ पहली बार देख रहा था । ऐतिहासिक महत्व के ढेरो पुराने पुराने सिक्के भी उसमें शामिल थे । खजाना इतना विशाल था कि उसे जहां तक लाने और लागने में हमें तीन दिन लग गए । तीसरी रात को मैं डॉक्टर साहब के साथ कुछ देर के लिए गुफा के बाहर टहलने के लिए निकला । दूर से हमें चीखने और गाने की मिलीजुली धीमी सी आवाज सुनाई दी । पल भर के लिए मैं चौंक गया । डॉक्टरों ने कहा जी, ये आवाज और ऍम की है । प्रभु मुझे क्षमा करें । हम दोनों के पीछे पीछे चल रहे । चांदीराम ने कहा सर, वे लोग खूब दिए हुए हैं । पी भी कर यही इसी टापू पर मर जाएंगे । चांदीराम अब पूरी तरह हम लोगों की दया परनिर्भरता इसलिए भी की दिल्ली बना हुआ था । हम सब उसे घृणा से देखते और वैसा ही व्यवहार भी करते हैं । अलबत्ता बेनीमाधव अभी भी उससे डरा डरा सा रह रहा था । बेनी की नजरों में चांदीराम कि खूंखार डाकू वाली छवि अभी तक बनी हुई थी । भीतर ही भीतर चांदीराम से डर तो मुझे भी लगता था क्योंकि उसके कई चेहरे अब तक देख चुका था । डॉक्टर भी चांदीराम से घृणा करते हैं । पर वो इतने अच्छे व्यक्ति है की कभी किसी के बारे में बुरा सोचते ही नहीं । उन्होंने उन भगोडों के बारे में की गई चांदीराम की टिप्पणी पर भी उससे पूछा, वे लोग दिए हुए हैं या तेज बुखार में? फिर आप कर रहे हैं । मैं जानता हूँ । ऐसे को काफी तेज बुखार था । छोडीए सर बुखार में वे मार भी जाते तो क्या फर्क पडता हूँ । डॉक्टर ने घटना के साथ चांदीराम की ओर देखते हुए कहा चांदीराम! लगता है तुम मैं थोडी सी भी इंसानियत नहीं है । मैंने तुमसे बात इसलिए पूछी यदि वो वास्तव में बुखार के कारण प्रलाप कर रहे हैं तो मैं उनके पास जाऊँ । पेशे से मैं डॉक्टर हूँ । मेरे व्यवसाय की नैतिकता का तकाजा है कि अपनी जान जोखिम में डालकर भी मुझे रोगी की मदद करनी चाहिए । चांदीराम ने डॉक्टर से क्षमा याचना करते हुए कहा, जी सर, मैं आपके साथ हूं इसलिए मुझे आपके हित के बारे में सोचना चाहिए । मेरी राय तो ये है कि आपको उनके पास नहीं जाना चाहिए । वो लोग बहुत हरे भी और वही मान है । उनके पास जाने में आपकी जान भी जा सकती है । बहुत सोच विचार के बाद सबने तय किया उन तीन भगोडों की तलाश करना बेकार है । उनके लिए ढेर सारा गोलीबारूद और नमक लगा सूखा मास बेनीमाधव की गुफा में रख दिया गया है ताकि वो भूके नाम, अरे कुछ दवाइयाँ और अन्य आवश्यक वस्तुओं भी उनके लिए टापू पर छोड दी गई जाते । जैसे डॉक्टर ने कुछ कपडे और ढेर सारे सिगरेट भी उन भगोडों के लिए वहाँ रख दिए । दूसरे दिन मौसम खुला हुआ था । हम लोग वापसी की यात्रा पर रवाना हो गए । सोमनाथ एक बार पुनः जहाज के कप्तान थे जहाँ समुद्र की मुख्यधारा की और बढ रहा था । शायद तीन बडे बहुत ध्यान से हम पर नजर रखते आ रहे थे क्योंकि जैसी हमारा जहाज टापू के मुख्य काट के पास से गुजरा, उनकी आवाज हमें सुनाई थी । वे रेत के टीले पर घुटने के बल झुके हुए अपनी बहाये ऊपर उठाकर हमसे दया की भीख मांग रहे थे । कुछ देर के लिए तो हमारे दिल पसीज गए और हम लोगों ने सोचा कि उन्हें भी साथ लिया जाए । लेकिन तभी मन में इस बात का संशय पैदा हो गया कि कहीं लौटते हुए रहा मैं फिर ये लोग कुछ नियंत्र नरज डाले । चांदीराम को मिला के इनकी संख्या चार हो जाएगी । डॉक्टर में जहाँ से हाथ मिलाकर उन को अलविदा कहा और जोर से चिल्लाते हुए उन्हें बताया कि उन लोगों के लिए बहुत सारा सामान गुफा में छोड दिया गया है । जब उन लोगों ने देखा की जहाज रुक नहीं रहा और उन लोगों की विनती खुशामद का हम पर कोई असर नहीं हो रहा तो उनमें से कुचलकर खडा हो गया । उसने अपनी बंदूक का निशाना साधा और गोली डाल दी । गोली सनसनाती हुई चांदीराम के सिर के बालों को छूती हुई गुजर गई । इस घटना के बाद हम सब लोग अपने बचाव के लिए जहाज पर लेट गए । तब तक लेटर है जब तक में हमारी दृष्टि से वो चल नहीं हो गए । दोपहर होते होते वह टापू भी हमारी आंखों से ओझल हो चुका था । कप्तान सोमनाथ अभी भी बहुत कमजोरी महसूस कर रहे थे । इसलिए लेते लेते ही हम लोगों का मार्गदर्शन कर रहे थे । हम लोग संख्या में बहुत कम थे और टापू पर झेली । परेशानी के कारण हमारे शरीर कमजोर भी हो गए थे । इसलिए हमने निर्णय लिया कि सीधे चेन्नई तक लंबी यात्रा तय करने की अपेक्षा रहा । मैं जो भी आबादी वाला तक निकट दिखाई पडे वहाँ लिखकर कुछ मजदूर अपने साथ ले लिए जाए । हमने कुछ दूरी पर रोशनी और मकान देखकर अनुमान लगाया ये दक्षिण भारत का कोई समुद्र तटीय कस्बा होना चाहिए । तीन और से धरती से गिरी हुई । छोटी सी खाडी में हमने जहाज का लंदन डाला । किनारे पर चमक, टीवी, रोशनी और इंसानी चेहरों की हलचल देखकर हमें बडी शांति न्यूज इंटक ऊपर इतने दिन बिताने के बाद हमें पहली बार इतना सुखद दृश्य देखने को मिला । डॉक्टर मुझे साथ लेकर उस नगर में टहलने के लिए निकल गए । जमींदार साहब भी हमारे पीछे पीछे वहाँ पहुंच गए । जहाज पर बेनीमाधव अकेला ही रह गया था । कई घंटे कुछ शहर में बिताने के बाद हम वापस लौटे तो पता चला कि कुछ घंटे पहले चांदीराम चुपचाप अपने साथ सोने के सिक्कों से भरी एक बोरीवली करती चला गया । चांदीराम के इस तरह वहाँ से चले जाने से हम लोगों को खुशी ही हुई । चलो इस बदमास से सस्ते में छुटकारा मिल गया । बेनीमाधव ने हमें बताया, हम लोगों की भलाई को ध्यान में रखते हुए ही स्वयं उसने चांदीराम कोई छोटी सी नौका में गिन्नियों से भरी गोरी के साथ वहाँ से निकल जाने दिया था । हम लोग जब चेन्नई पहुंचे तो जहाँ पर केवल पांच व्यक्त विशेष नहीं गए थे, मैं डॉक्टर साहब, जमीदार साहब, कप्तान सोमनाथ और बेनीमाधव सबके बीच खजाने का बंटवारा किया गया । बेनीमाधव को एक हजार गिनिया दी गई, जो उसमें तीन हफ्तों में ही उडाकर बराबर कर दी । फिर हम लोगों ने इसे छोटा सा लॉन्च खरीद कर दिया, जिससे वह सही तरीके से चला रहा है । वो बडा मनमोहनजी व्यक्ति हर दम हस्ता खेलता रहता है । कप्तान सोमनाथ भी बडी शांति के साथ अपना जीवन बिता रहे हैं । डॉक्टर साहब इतना सारा नहीं मिल जाने के बाद भी अपना अधिकांश समय मरीजों के इलाज में बिताते हैं । जमीदार साहब ने अपनी हवेली के साथ एक सांस्कृतिक भवन बनवा दिया है, जिसमें एक विशाल पुस्तकालय भी है । चांदीराम के बारे में हमें फिर कोई खबर नहीं मिली । मैं सोचता हूँ वह कई आराम के साथ अपना शेष जीवन बिता रहा होगा । मैं भी मजे में हूँ पर उसने एजेंट आपको याद करके आज भी कई बार सिहर उठता हूँ । कभी कभी रात को सोते हुए अचानक चौक कर उठ बैठता हूँ ।

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