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बस यादें 01

हूँ । आप सुन रहे हैं तो कोई ऍम किताब का नाम है रसरंग । जैसे लिखा है श्री मनमोहन भाटिया ने आरजे मनीष की आवाज में कोई ऍम सुने । जो मन चाहे बस या देंगे तो अभी ये क्या हो गया? आतंकी अर्चना कल्पना के गले लग गई और दोनों दहाडे मारकर रोने लगी । भैया चले गए । होते हुए दोनों की आंखें नम हो गई । आवागमन तो सृष्टि का नियम है । जो इस संसार में आया है वो एक निश्चित समय पर अवश्य जाएगा । अंतर ही सत्य कोई इसको झुठला नहीं सकता है । दो मिनट बाद अर्चना और कल्पना दोनों सामान्य हो गई । बैठ अर्चना कल्पना ने अर्चना को कहा । दोनों बिस्तर पर ही बैठ कर बातें करने लगे । हाँ जी चलो अच्छा हुआ कि भाई को मुक्ति मिल गई । कितना परेशान थे । छह महीने तो हो गए थे ना आर्चना कल कमल को बिस्तर पकडे पूरे छह महीने हो गए थे । आज सुबह ही नहीं पापा कल्पना भावी । हमने सेवा में कोई कमी नहीं रखी थी । अर्चना मैंने अपना करता है, पूरा निभाया है । बाकी प्रभु की इच्छा छत्तीस से लिखी थी । कमल ने ले ली । दोनों बातें कर रही थी की कल्पना की बहन पिंदू भी आ गई और वह भी कल्पना से लिपट गए । दोनों बहनें दहाडे मारकर रोने लगे । दो मिनिट बाद शांत हुई और बिस्तर पर बैठ गई । पिछले रविवार को चीजों से मिलकर गई थी । उस दिन तो बहुत खुश है । रोमांटिक बातें कर रहे थे । गाना भी गाया था । चांदसी महबूबा हो पूछे तो लग रहा था कि जो बिल्कुल ठीक हो जाएंगे बिंदु अपनी साडी के पल्लू से आंखों के आंसू उनको पहुंचते हुएकहा लेकिन तुम्हारे जीजू ठीक नहीं है । छह महीने से बीमार थे । पिछले एक महीने से तो छुट्टी पे शाम में एक बिस्तर पर कर रहे हैं । खाना पीना भी ना के बराबर हो । जीने की इच्छा छोड दी थी । कमल कल्पना ने बिंदु से कहा । तभी कल्पना के पत्र कारण और उसके मामा भी कमरे में आ गए । दीदी अर्थी तैयार हो गई है । अंतिम दर्शन कर लो होता संस्कार के लिए श्मशान जाना । कल्पना के छोटे भाई ने कहा । कल्पना और परिवार के सभी सदस्यों ने कमल को भावभीनी अंतिम विदाई दी । राम नाम सत्य है की आवाज पहुंची और सब ने कमाल केशव के साथ शमशान की ओर प्रस्थान किया । अंतयेष्टि के पश्चात सभी घर आ गए । शाम के छह बज रहे थे । कमाल की मृत्यु सुबह के समय हुई थी । नियमानुसर चूल्हा नहीं जलता पडोसी श्रीवास्तव ने सबके लिए चाहे इसके पहले और रात के खाने का इंतजाम कल्पना के भाई नहीं घर के समीप ढाबे से डाल दो सब्जी, रोटी, चावल और सलाद आ गए । सुबह के बोलते थे सात आठ बजे ही सब स्टेनर पर बैठ गए । ढाई खाना कहाँ से बनवाया कल्पना ने अपने भाई से पूछा । बहन करन ने बताया कि मार्केट में ढाबा है । बढिया खाना बनाता है । उसी को स्पेशल खाना बनाकर घर बेचने को बोल दिया था । भाई ने उत्तर दिया ऍम अल को भी तो बहुत ही टेस्टी ढाबे होटल की हाल ही वो भी में कभी स्वाद मियां पर ये तो लाजवाब पहली बार किसी ढाबे की इतनी बढिया बनी आलू गोभी की सब्जी खाई अर्चन अपनी दुनिया चाहती हुई बोली अर्चना इस ढाबे की हर सब्जी लाजवाब रसोइया एकदम घर जैसा खाना बनाता चपातियाँ देखो पतली और नरम कमल तो हर शनिवार और रविवार इस ढाबे में वहीं बैठकर गर्म गर्म खाना खाते थे । कल्पना ने अर्चना की प्लेट में चपाती डालते हुए कहा तेरी जीजू को बाहर खाना खाने का बहुत शौक था । होटल जहाँ पे और यहाँ तक कि हर खोमचे वाले का पता था कि कहाँ कौन सी चीज स्वाद ही मिलती है । बिंदु ने कहा और सपने मिलकर बिंदु के बाद का समर्थन किया । पूरे दिन के सभी थके हुए थे । रात को खाना खाकर जल्दी हो गए । अगले दिन कल्पना साढे पांच बजे उठ गई । रसोई में चाय बना रहे थे । रसोई में बर्तन की आवाज सुनकर बिंदु की नींद खुल गई और रसोई में आकर पूछता हूँ किसी चाहे बना रही हूँ, पीनी बना दूँ । कल्पना ने चार कप चाय बना दी । कल्पना अरबिन्दू चाहे पी रहे थे, तभी अर्चना भी उठकर वहाँ भी चाहे बन गई ऍम अभी ब्रश नहीं किया । शेयर नहीं नहीं कभी प्राइस क्या, जो तो करेगी चाहे भी होता रहेगा । तीनों हंस पडी और चाय पीने लगे तभी डोरबेल बजेगी खानो का तीसरा हूँ । बिंदु ने कहा और उठकर दरवाजा खोला । कमाल के कानपुर वाले चाचा जी आए थे । चाचा जी के हाथ में अटैच थी । उसको पकडे ही कल्पना के आगे खडे होकर रोने लगे । बेटा ये क्या हुआ आपको तो मालूम नहीं है । कमल छह महीने से बीमार थे और पिछले एक महीने से बिस्तर पर ही सिमट गए थे । वहाँ बैठे हो तो फॅमिली चाचा जी अभी तो नहीं रखते थे । फिर करन के कमरे में आप का सामान रख देंगे कहकर कल बनाने चाहेगा कब चाचा जी को पकडा हूँ । चाय की चुस्की लेकर चाचा जी तो फिर हो गए कल्पना मजा आ गया चाहती हूँ डफर की सारी थकान मिट फॅारेन में ये दिक्कत है कि चाय नहीं मिलते स्टेशन की चाहे तो वैसे ही हुआ है घर की लाजवाब चाहे मिल गई आनंद आ गया और अर्चना कैसी हूँ बिंदो बरसवा देख रहा हूँ मोटी हो गई हूँ ऍम फॅालो नहीं जाना चाहिए । कोई मोटी नहीं हुए लगता आपके चश्मे का नंबर बदल गया । होना चाहिए कि जिसकी लेते हो जाएगा तो मानो या न मानो मोटी तो चाचा भी हार मानने वालों में से नहीं थे । चाहे का दौर खत्म हुआ, ऍम भी उठ गए फिर चाहे बनी कर नाश्ता क्या बनेगा ऍम ढाबे में स्पेशल खाने का ऑर्डर गाॅगल हुई थी । आज दूसरा नहीं दूसरा और थी समझे घर ही बैठा है ऍम और शोक प्रकट करने आएंगे । चौथे दिन सुबह फूल चुनाव शाम को बिरादरी का उठाना उठाना होते सब रिश्तेदार अपने घर चले जाएंगे । तब तक घर में रौनक मेला लगा रहेगा । थाना पीना, बातों का सिलसिला दो दिन तो अब यही होना है सांत्वना के दो शब्द बोलने के पश्चात फिर से गपशप शुरू हो जाती है । यही सब कुछ कल्पना के घर हो रहा था । कमाल की तबियत पिछले छह महीने से बिगडी हुई है और एक महीने से कम स्तर पर ही था । कल्पना भी जानती थी कि अंतर निकट है पर जब तक साफ है आदमी को आज रहती है । कमाल की बीमारी के कारण करण ऑफिस जाने लगा था और काफी कम भी संभाल लिया था । अभी उसकी पढाई भी चल रही थी । कल्पना भी काम में सहायता देती थी । कल्पना और कारण मानसिक रूप से कमाल के अंत के लिए तैयार । जब डॉक्टरों ने कह दिया कि या तो एक दिन या घर एक साथ सब ऊपर वाले के हाथ में है । कल्पना ने नियमित ईश्वर वंदना में कमाल के सुखद अंत की चाहिए । ईश्वर ने कल्पना की विनती स्वीकार की । कमल को रात को नींद हैं । अपने पास बुलाता हूँ । नाश्ता करने के बाद कानपुर वाले चाचा जी अपने काम से निकल गए । जाते हुए कहता है कि लंच पर नहीं आएंगे । रात को डिनर पर मिलेंगे । थानीय रिश्तेदार अपनी सुविधा के अनुसार आते जाते रहे हैं और चुनावी शॉपिंग के लिए चली गई हिंदू के अपने घर चली गई । कल्पना अकेला समय भाकर बिस्तर पर लेट गई और उसे नींद आ गया । शाम को करण ने कल्पना को जगाया । करन के छोटे मामा ने चाहे बनाई चाय पीने के साथ साथ कल्पना और करण व्यापार की बातें करने लगे कि आप कैसे क्या करना है । कमाल की तरह देखते हुए हमने करण को व्यापार में डाल दिया था । सुबह कॉलेज जाने के बाद हो जाता है । अब तो कारण नहीं, सब सम्भालना है । मैं तो सहयोग कर लिया हूँ । कल्पना ने भाई को सब कुछ बताया ऍम जीजा दूरदर्शी था । तभी करन को व्यापार कैसा भी कोई सिखा दिया । साले साहब ने अपने दिवंगत चीज की तारीफ की । आइए तो करना जरूरी था जब डॉक्टरों ने अंत कही दिया था । डॉक्टर समय रहते उचित निर्णय ले नहीं पडे । कल्पना ने अपने भाई से बात की । छह बजे कानपुर वाले चाचा जी आपने दिन भर के काम निपटाकर आ गए । कल्पना आज का दिन तो पूरा कैसे बेहता पूछो मत हूँ बस फॅमिली एक व्यापारी से पेमेंट लेनी थी । छह महीने से नहीं दे रहा था । आज पकडना है तो मैंने भी छोडा नहीं । सारा दिन भूखा उसके दफ्तर राॅड एक मिनट भी नहीं छोडा हो । अब छोड देता था वहाँ जाता है मालूम नहीं घर का बहुत में आना बॅाजीरॅाव किस्मत अच्छी रहेगी । पांच बजे का आदमी उसको पेमेंट हो गया और मैंने उसको देख लिया । अब मना भी नहीं कर सकता था की पेमेंट नहीं ऍम दो लाख लेते हैं । अस्सी हजार आता हूँ । कुछ तो आया चाचा जी अपनी बात करते हुए गर्व महसूस कर रहे थे । जैसे एवरेस्ट की चढाई पूरी कर के आया हूँ । चर्चा जी सोफे पर पसर गए । इतना सुनकर कल्पना समझ गई कि चाचा जी को भूक लगी है । चाचा जी खाना खा लो, सुबह से कुछ नहीं खाया । भूख लगी होगी । अगर है तो तो रात को एक बार खायेंगे । चाचा जी के खाने की इच्छा थी परंतु समय देखते हुए थोडा संकोच कर रहे थे । लंच वाली सब्जियाँ भी बच्चे बहुत स्वादिष्ट बनी है । आप हाथ मत लीजिए सबसे अभी गर्म कर देती हूँ । कल्पना ने खाना कम कर दिया । खाते हुए चाचा जी कारण से बोले बेटा क्या तुम्हारे व्यापार में भी पेमेंट की दिक्कत हो गया तो लम्बी उधर चलती है । जब पापा तो हमेशा नकद में काम करते थे । मुनाफा कम होता है । पाॅइंट मरती नहीं है । करन ने कहा हूँ ये बात तो माननी पडेगी की कमल में बुद्धि से काम किया । चाहे काम थोडा करो मगर नगद पेमेंट पर करूँ और चैन की बन से बचाओ कोई टेंशन नहीं क्या चल जी ने कमाल के काम की सराहना की तभी आधे घंटे में एक एक करके सभी रिश्तेदार एकत्रित हो गए । अर्चना बिंदु बडे मामा, छोटे मामा, मौसा मौसी, बुआ, फूफा और बच्चे इस कष्ट की घडी शोक तो चंद पलों का होता है । फिर सारा दिन क्या करें? पुरानी बातों का सिलसिला आराम हो जाता है । जीवन और उसके काम नहीं रखते हैं । कानपुर वाले चाचा जी को देखें । अपनी फॅमिली से पूछा ताजा जी, आपके साले की शादी में मैं कानपुर आया था फिर उसके बाद कभी कानपुर नहीं आना हुआ हूँ । आपके साली बहुत मोटे थी । जयमाला के समय जब स्टेज पर आई थी तब स्टेज की सीढी टूट गयी थी । आपकी साली गिर पडी थी और लगाते हुए चल रही थी । जयमाला फिर नीचे हुई थी मुझे आज भी याद है सबकी शक्लों पर बारह बज गए थे तो मेरे मामा । उस समय तो मेरे ससुर चिंता में पड गए थे कि कहीं शादी में कोई देख लेना पड जाए तो मोटापे के कारण उसकी शादी नहीं हुई थी । ऊपर स्टेज किसी भी तो नहीं तो लडखडाने लगी की लडकी लडकी से शादी ना तो उनके होश उड गए थे क्या बताऊँ मुझे उस समय बडी जबरदस्त वाली टेंशन हो गई थी । खाॅ छेडते हुए पूछता हूँ मामा जी वो तो बराबर की जोडी थी । एक अंधा तो दूसरा कोई चाचा जी के इतना कहते ही सभी ढाका लगाकर हाॅफ निकाला था । एकदम टाॅक । उसे भी मुश्किल से लडकी मिली और हमारी साली को भी मोटापे के कारण मुश्किल से लडका मिला हूँ । जब तो मुश्किलें मिल जाए तब आसानी हो जाती है । इसलिए शादी में कोई देखने नहीं । बडा लडका जयमाला डालने ऍम आपको उल्टी पटना पडा है ऍम वाला डाल दी । अच्छा जी सुना है कि आपकी साली साहिबा को प्लास्टर चलता ना हमारे आपने बिल्कुल ठीक सुना । साली साहिबा को पूरे डेढ महीने का प्लाॅट और आप खुद ही सोचो कि दोनों पर क्या गुजरी होगी? दोनों सुहागरात को तरफ गए थे । डेढ महीने के बाद एक और महीने का प्लास्टर चढ गया । मामाजी उनकी सुहागरात तीन महीने बाद हुई थी । सभी ठहाके मारकर रहते हुए लोट पोट हो गए । सुहागरात तीन महीने बाद आजकल कहा है मोस्टली लखनऊ रहते हैं । मजे की बात यह है कि उसके बच्चे भी उससे मोटापे में काम नहीं है । काले हैं दौरे मामा जी ने चोट के लिए रंग बाप वाला है और मोटापा माँ वाला । अब बात का विषय कुछ बदला मौसा जी ने बाद आगे बढाएंगे । जब हमारी शादी हुई थी तब घूंघट का समाज था । हमारे पिताजी के सामने सब घूंघट करते हैं । जब दुकान चले जाते तब एक सेकंड में घूम गायब हो जाता था । पिताजी को ये मालूम ऍम के छाती की घर की बहुएं घूंघट करें । हमको जब दुकान से आते थे घर के दरवाजे पर एक मिनट रुक कर नकली खांसी करते थे कि सबको मालूम हो जाए कि घूंघट का समय हो गया । हमारी नहीं नहीं शादी हुई थी । हमारी मौसी के साथ फिल्म देखने गया था । ऍम खत्म हुई और चार पकोडे खाने के लिए हम गए ऍम तो उस समय तो कुछ नहीं बोले तो जब हम घर पहुंचे तब मेरे घट खडी कर दी की बहुत घूमी क्यों नहीं किया था पूरी दुनिया में जिसमें जमा हो रही थी हूँ क्या करते हो? बडे जबरदस्त वाली डांट खाई थी उस दिन के बाद जब वे घर से निकलते थे, मन्नत खटका लगा रहता था की कहीं किसी मोड पर पिताजी नाटक आ जाएगा । खाने का समय हो गया और ढाबे वाला खाना लेकर आ गया । अब तो पाजी ने कहना शुरू किया तो बहुत खाना आ गया है । हम सब खाना खाएंगे । दाल मखनी हम सबकी पहली पसंद है । हमारे पिताजी चूल्हे के मध्यम आज पर डाल बनाते थे तो किसी के पास भी समय ही नहीं है । हम सब आपको करना फॅमिली नहीं था और कुकिंग भी नहीं नहीं आई थी । लेकिन पिताजी को तो चूल्हे के मंद आज पर बनाई हुई दाल पसंद थी । हर रविवार को सुबह चूल्हे पर डाल बनने रखते थे । उसके खुशबू पडोस तक जाती थी । बिल्कुल साथ वाले मकान में गुजराती परिवार रहता था । डाल के खुशबू सुंदर पिताजी को कहते थे कि उनके हिस्से की दाल जरूर रखना क्योंकि जो स्वाद चूल्हे के मंद आज परबनी दाल का आता । ना तो किसी होटल, ढाबे, ऍम की दाल में आज भी नहीं । राजीव जी कहते कि दाल खानी है तो घर आकर हमारे साथ हूँ । घर नहीं भेजूंगा वो गुजराती परिवार हमारे घर पर ही खाना खाता था । क्या दिन थे पूरे परिवार के साथ पडोसी में मिलकर एक साथ खाना खाते थे । इसी तरह हँसी मजाक ना पुरानी बातों को याद करते हुए दूसरा और तीसरा दिन भी बीत गया । चौथे दिन बिरादरी का उठाना हो गया और सभी रिश्तेदारों ने डाली । शादी हो या मौत, रिश्तेदार एकत्रित होते हैं, जश्न बनाते हैं और मेरा हो जाते हैं । पर एक सूट ली जैसा है की मौत में नाच गाना नहीं होता । बस चंद पलों का सोच और फिर उस काम वाले पाल को बुलाकर वहीं मस्ती वाली जिंदगी । ये जो इंसान है सब कुछ भूल जाता है और कभी कभी कुछ याद मस्तिष्क करके किसी बंदे ढक्कन से निकल आती है । बस यही हुआ कल्पना के साथ सब हो गए । कल्पना ने अर्चना और बंदों को कहा कि आते रहना ताकि उसे भी मालूम था कि हर व्यक्ति अपने में मस्त है । मैं तो कभी कबार ही होना है । एक रन व्यापार में व्यस्त हो गया । हर कल्पना घर में अकेले रह गए । अब सिर्फ कमाल की यादे रह गई । पहले कमाल की तिमारदारी में व्यस्त रहती थी । ऑफिस का थोडा बहुत काम देख लेती और अधिकतम समय खाली तो गुजर जाते हैं । और कमाल की यादें तो मैं बताती हूँ करवटें बदलते रहते । कट्टी यादव के समय तो

एक वोट 02

एक वोट । किट्टी पार्टी में सोनिया अपने फ्रेंड्स के साथ चहक रही थी । पार्टी सोनिया के घर पर हो रही थी । तब सबके बीच हंसी मजाक और टीवी सीरियल पर चर्चा हो रही थी । तभी सुकन्या आई सोनिया आने में बहुत देर कर दी । कहाँ थी पता नहीं खाने में कुछ बच्चा भी है । कहीं ज्यादा घटना हो गया हूँ । सुकन्या कुछ नहीं होता है चाहे प्लान तो बना लेंगे । आजकल तो चर्चा चाय पर होती है । सभी महिलाएं ढाका लगती है । सोनिया चल सुकन्या तेरी किस्मत में लिखा है समोसा भी है । कचौडी भी । रीता सुकन्या से वैसे तो कहाँ तक गई थी सुकन्या ऍम फिर बताती हूँ चाय पीने के बाद सुकन्या ने बताया की उसका परिवार आजकल बहुत बनाते हैं । थोडे दिनों में नगर निगम के चुनाव होने और इस बार पार्टी ने निर्णय किया है कि वर्तमान पार्षद और उसके परिवार के किसी भी सदस्य को टिकट नहीं मिलेगा । फिर हमारे परिवार का पत्ता साफ, इसपर थोडी गंभीर मथुरा में सुकन्या क्या करें कोई चारा भी तो नहीं । काम करें हम और चुनाव में लडे को यहाँ हमने सोच लिया कि इस बार चुनाव प्रचार नहीं करता है । चाहे हमारी पार्टी का प्रत्याशी हार जाये । सोनिया फिर छोटा नहीं करते हैं तो नगर निगम का चुनाव है । आगे बढकर विधानसभा और लोकसभा की ओर देखो । तुम्हें सुकन्या दूर की नहीं सोच रही हूँ । सोनिया की बात सुनकर सुकन्या के दिमाग ने तेजी से काम करना शुरू कर दिया क्योंकि अभी तक निष्क्रिय था । सुकन्या हूँ तो उन्होंने बात तो पते की की है तो सोसाइटी की पदाधिकारी रह चुकी है इस क्षेत्र की सीट महिला सीटें तुम सोनिया चुनाव के लिए क्योंकि उम्मीदवारों, सोनिया और चुनाव हमारे परिवार का राजनीति से दूर तक कोई वास्ता नहीं तो कला और साहित्य प्रेमी है । किसी और को पकडा कहकर दुनिया हस पडे तो कन्या कि बात का मनाली और रीता ने समर्थन किया । सुकन्या मैं घर में बात करती हूँ । हमें विश्वास पात्र उम्मीदवार चाहिए जो हमारे हितों की रक्षा करें । सोनिया ने सुकन्या की इस बात को गंभीरता से नहीं लिया । तीन दिन बाद रविवार की सुबह सुकन्या अपने पति और ससुर के साथ सोनिया के घर पहुंचकर सोनिया को बधाई देने लगे । सोनिया किस बात की बधाई, कुछ पता तो चले सुकन्या हमने पार्टी हाईकमान में बात कर लिया हमारी से पर सोनिया उम्मीदवार बस अब कल चुनाव का पर्चा भरना है । सोनिया ने पति सुनील की ओर देखा । सुनील की कुछ समझ में नहीं आया तो सुकन्या ने सारी बात विस्तार में बताए तो नहीं ये चुनाव हमारे बस की बात नहीं है । एक बार सोसाइटी के पदाधिकारी बने थे । पूरी मुसीबत मोल ले ली थी । ऐसे ऐसे दो वर्ष का कार्यकाल पूरा किया था । दो सौ मकानों की सोसाइटी में लोगों के ताने शिकायतों ने जीना दूबर कर दिया था । हम अपनी जिंदगी नहीं जी पा रहे थे ये चुनाव आपको मुबारक को इतना बडा क्षेत्र । हमारे बोर्ड में कम से कम दो लाख वोटर होंगे । हमारे बस का चुनाव लडना नहीं । आप किसी और को ढूंढ रहा हूँ । सुनील ने तो मना कर दिया लेकिन सुकन्या का परिवार हार मानने को तैयार नहीं । उन्होंने सोनिया को अपनी लच्छेदार बातों से प्रभावित किया और सोनिया ने सहमती देती है सुकन्या भाई साहब, आपको बिना किसी कारण परेशान हो रहे हैं । काम करने के लिए पार्टी की पूरी टीम है और हमारे परिवार का पूरा सहयोग आपके साथ हैं । सारा काम हमने करना है । सोनिया का सिर्फ नाम होगा काम हमारा । हमारा परिवार पिछले तेईस वर्षों से राजनीति में है । आप चिंता मत कीजिए । शरीर नेताओं के प्रति मेरा दृष्टिकोण अच्छा नहीं है । घोटाले अपराध में लिप्त नेताओं को अच्छी नजर से नहीं देखता हूँ । सुनील चुनाव के लखनऊ में नहीं पडना चाहता था । सुकन्या के पति और ससुर ने सुनील को समझाने की कोशिश की । उनका परिवार मेरा आ गया । कुछ नेताओं ने समस्त राजनीति को बदनाम कर दिया । वरना देश सेवा में बहुत अच्छे नेता हैं जिन्होंने अपना जीवन देश की सेवा में न्यौछावर कर दिया है । हमारा व्यापार है हमें रुपयों की कोई आवश्यकता नहीं । हमारे ऊपर कोई काम भी नहीं है । तुम मिलके नजरिये में कोई बदलाव नहीं आया हूँ । पर सोनिया प्रभावित हुई । अब चुनाव लडने के लिए तैयार हो गए । पत्नी की इच्छापूर्ण करने के खातिर सुनील ने सोनिया का साथ दिया । सोनिया को पार्टी का टिकट मिल गया । नामांकन भर दिया और चुनाव प्रचार के हाथ सुनील ने ऑफिस से पंद्रह दिनों की छुट्टी लेनी घर घर जाकर चुनाव प्रचार किया । सुबह से रात तक सुनील ने सोनिया के चुनाव प्रचार में कोई कमी नहीं छोडे । सुकन्या का पूरा परिवार सोनिया के साथ रहा हूँ । वोट दो वोट दो सोनिया जी को वोट दो के मध्य अंत में चुनाव संपन्न हुए । वोटों की गिनती दो दिन बाद होनी थी । सुनील और सोनिया चुनाव प्रचार में थक कर चूर हो गए थे । दो दिन तो उन्होंने आराम किया । दो दिन बाद सुनील सोनिया सुकन्या का पूरा परिवार काउंटिंग सेंटर पर सुबह से ही उपस्थ था । एक के बाद एक वोटिंग मशीन खुलती और बटन दबा डे रिजल्ट आने लगे । कांटे का मुकाबला ना कभी सोनिया दो वोट से आगे तो कभी सोनिया के प्रतिद्वंदी । तीन वोट से आगे तो घंटे तक सभी के दिल की धडकन तेज होती रही । घंटे के मुकाबले के अंत मैं सोनिया एक वोट से हार गए । सुनील के मुख से एक वहाॅं सोनिया हम एक वोट से हार गए और सुकन्या सोनिया के गले लगकर होने लगी । दोनों तुम्हारे मार्कर हो रही थी । सुनील ने दोनों को सांत्वना दी की किस्मत का खेल है तो होने से हार जीत में नहीं बदलेगी । किस्मत का लेखा कोई नहीं डाल सकता और मीठा भी नहीं सकता हूँ । भाई साहब ये किस्मत का खेल नहीं बल्कि धोखा लगता हैं । हमारे खास आदमियों ने लगता है वोट हमें नहीं दिया अपने पक्के वोटो की मुझे जानकारी थी पर जीत की पक्की संभावना थी । सुकन्या के इतना कहते सोनिया ने सुनील की ओर देखा सोनिया नहीं तुम ने अपना वोट फॅमिली को तो नहीं दिया । मेरे चुनाव के खिलाफ तो शुरू से हैं और वोट भी नहीं दिया । तुम्हारे एक वोट ने मुझे हरा दिया तो मैं नहीं छोडेंगे । तुम खर्चा होगा सुनील दुनिया तो मेरा विश्वास करूँ । मैंने अपना वोट से तो नहीं दिया । मेरा तन, मन और धन सब है । मैं किसी दूसरी ओर सोच भी नहीं सकता हूँ । सोनिया तन मन और धन तो मेरा और तुम्हारा वोट उस कालीन होटल का सोनिया पहर पढ सकते हुई काउंटिंग सेंटर से बाहर आ गए ।

कंजूस की माफ़ी 03

कंजूस की माँ भी जब सृष्टि की रचना हुई तब ईश्वर ने भांति भांति के प्राणियों की उत्पत्ति है । रानियों की एक प्रजाति का कंजूस नामकरण हुआ । ये कंजूस नाम का श्री गणेश प्रथम मार किसने किया कम से कम मुझे नहीं मालूम । हो सकता है कि किसी ना किसी को तो अवश्य मालूम होगा । वैसे मुझे इसकी कोई विशेष जानकारी नहीं है । मैं वैसे भी इन चक्करों में पडता नहीं हूँ क्योंकि हर गली मोहल्ले में इस प्रजाति के पानी बडी संख्या में मिल जाते हैं । मतलब के चक्षो खोलने की दे रहे हैं और कंजूस नाम का प्राणी आपकी नजरों के सामने होगा । विनोद और विपुल एक बहुत बडी कंपनी में कार्यरत है । विनोद उस श्रेणी का प्राणी है जिसका जिक्र मैंने किया । आप समझ कहना कंजूस दूसरा प्राणी ऍम कुछ साधारण प्राणी है । घरेलू टाइप एक विभाग में कार्यरत होने के नाते अक्सर कंपनी के टूर पर भी एक साथ जाते रहते हैं । आप के बाद दोनों कोलकाता के तोर पर हैं । कंपनी के चार दिन के व्यस्त टूर पर विनोद और विफल को कान को जाने के भी फुर्सत नहीं मिली । सुबह नौ बजे से रात दस बजे तक कमर तोड कम करने के पश्चात आज दूर के अंतिम दिन साढे बारह बजे दोनों को काम से फुर्सत नहीं । रात आठ बजे की वापस जाने की फ्लाइट थी तो उन्होंने रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद थोडा बाजार घूमने के लिए एक बजे ऑफिस छोडा । विनोद इस बार तो काम के बोझ के कारण बदन दो क्या ऑफिस के कैफिटेरिया का खाना भी एकदम बेकार होता है । गुणवत्ता पर कोई ध्यान ही नहीं देता । पीपल ने दोनों हाथों को सीधा करते हुए गर्दन का व्यायाम करते हुए विनोद को कहा भाई मैं बोलता हूँ ठीक कह रहा हूँ हम काम करने से पीछे नहीं हटते । कम से कम खाना तो संगठन का हो गया । मेरा आॅडी चलवाकर गाडी खराब करवा रहे कंपनी वाले कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन सुनवाई नहीं है । अब दिल्ली जाकर दो दिन छुट्टी लेकर आराम करूंगा । मैं भी आराम करूंगा । खाना बढिया हो तब काम करने की रफ्तार दो नहीं देखते हो जाती है । चलो अब शाम तक छुट्टी है । किसी अच्छे बढिया रेस्टोरेंट में चलकर खाना खाते बोला । विनोद ऑफिस के समीप ही वातानुकूलित रेस्टोरेंट में जाकर मनपसन्द खाना खाते हैं । कुछ देर तक बातें करने के पश्चात दोनों रेस्टोरेंट से बाहर आए । विनोद अभी ढाई बजे फ्लाइट रात आठ बजे किया । साढे छह तक एयरपोर्ट पहुंचना है । थोडा बाजार घूमता हूँ । बच्चों श्रीमती जी के लिए कुछ खरीदारी करता हूँ कि पालने घडी देखते हुए विनोद से पूछा कि क्या वो उसके साथ खरीदारी करने चलेगा? ऍसे के बारे में भलीभांति ज्ञान था ऍम बिना बाद के जेब ढीली हो जाएगी । मैं नहीं जाता ऍम तू तो पक्का कमजोर है कभी कभी ऐसे मौके मिलते हैं चल ऍफ लेते हैं यार घर में सब कुछ है फोकट में वही चीजों की खरीददारी में कोई फायदा नहीं । मेरी नजर में फिजूलखर्ची है । मैं नहीं जाऊंगा नजदीक में मॉल है वहाँ आराम से बैठकर एयर कंडीशनर के ठंडक में विश्राम करूंगा कि मैं विनोद तो मॉल जा मैं बाजार घूम कराता हूँ । विपुल ने अपनी मंशा जताई कहाँ जाएगा उन का भाई है तो धनतला की न्यूमार्केट जाऊंगा । वहाँ सही दाम में खरीदारी होगी तो बोलने कहते हुए एक टैक्सी कर होगा । कुछ सोच कर विनोद डेवलॅप चल पडा ऍम कर खरीदारी की । पत्नी के लिए बंगाली साडी कटवर्क, पेटिकोट नाइटी, सलवार सूट, बच्चों के कपडे खिलाने और घर के लिए कट, बर्की, बैडशीट, तकिये के खिलाफ पर्दे के कपडे और अपने लिए बंगाली धोती इतने अधिक सामान के लिए विपुल को एक सूटकेस भी खरीदना पडा है । कुछ नहीं खरीदा विपुल इतनी शॉपिंग का क्या करेगा? बहुत भाई ये कोलकाता की स्पेशल वस्तुए हैं । यादगार के तौर पर कुछ आदेश शॉपिंग हो गई भी । बच्चे खुश हो जाएंगे । अब इतनी मेहनत करते हैं । थोडी बहुत शॉपिंग तो बनती है । अब मैं कौन से हर रोज शॉपिंग करता हूँ? विशाल क्यों? मार्केट घूमने के बाद दोनों बाहर निकले । मार्केट के बाहर हादसे खींचने वाले रिक्शा खडे थे । ऍम कोलकाता में अभी भी हाथ से खींचने वाले रक्षा चलते हैं । कमाल है इन को बंद करना चाहिए ये अमानवीय ऍम सरकार को इन्हें साइकिल रिक्शा देना चाहिए । ऐसा आजकल इ रिक्शा का जमाना है । दिल्ली में तब रिक्शा चलते हैं । कोलकाता में अभी भी आज से खींचने वाले रक्षा चलते हैं । पुलिस के साथ फोटो खींचते हैं उन्होंने मुझे हादसे खींचने वाले रक्षा अमानवीय लगते हैं । मैंने फोटो चलाऊंगा तो मेरी फोटो ही ठीक है । विनोद एक रिक्शा में बैठ गया तो पालने विनोद की तीन चार फोटो खींच फोटो खिंचवाने के पश्चात ऍम जाने लगा । तब रिक्शेवाले नहीं । फिर उसको आवाज भी बाबू पैसे किस बात के? मैं ऍम की बात सुनकर बिगड गया दक्षिण लेने जवाब दिया एक्शन में बैठने के बीस रुपए फोटो खिंचवाने के पचास रुपए कुल सत्तर रुपए बनते हैं । सत्तर रुपए सुनकर कंजूस विनोद भडक गया । क्या बकवास करता है बंगाली सत्तर रुपए? दिनदहाडे शराब पी रखी क्या ऍम मेहनत की खाते हैं? रिक्शे वाले ने विनोद को पकड लिया । कौनसी गाली निकाली में कौन सा तेरे रिक्शे पर बैठकर घुमा हूँ मैं तू तडाक मत करो । चुप चार सत्तर रुपए देता वरना पैसे निकालने में भी आती है । बाबू नहीं देता ऍम धक्का लगने से रिक्शा वाला गिर पडा और उसने शोर मचा दिया । रिक्शा वाले के शोर मचाने से चार पांच रिक्शेवाले एकत्र हो गए । उन्होंने विनोद को पका लिया । इतने में गिरने वाला रिक्शा वाला उठकर आया पर अपने पैसे मांगे । विनोद परीक्षा वालों के बीच खेला देखकर पीपल बीच बचाव के लिए आया हूँ । रिक्शेवालों ने पीपल को झगडे से दूर रहने को कहा । बाबू आप दूर रहे हैं, इसको पैसे भी देने पडेंगे और माफी भी मांगनी पडेगी । पैसे मैं देता हूँ । झगडा समाप्त कर कितने पैसे हैं तो बोलने झगडा समाप्त करने के इरादे से रिक्शा वालों को कहा बाबू हम आपसे पैसे क्यों नहीं? हम तो पैसे उसी चलेंगे ऍम इधर कंजूस मुँह पर और उधर रक्षा वाले से झगडा देखकर जनता भी मजा लेने लगी और भीड एकत्रित हो गई । पॉकेट में हमारी फॅमिली देकर जाते हैं आपसे तसर पचास रुपए मांग रहे हैं, चुपचाप निकालो । सत्तर रुपए बीस बैठने के और पचास फोटो खिंचवाने गए । नहीं दिया तो पुलिस को बुलाएंगे । जनता के बीच खुद को घिरा देखकर चुपचाप सुनो तो सत्तर रुपये देने पडेंगे । माफी भी मांगनी पडेगी । रिक्शा वाले के पैर पकडकर माफी मांग अबे रिक्शा वालों ने जबरदस्ती बिना उसको चुका है । विनोद को एहसास हुआ कि यदि उसने माफी नहीं मांगी तो रिक्शेवाले उसका गला ही दबा देंगे । आखिर विनोद है रिक्शा वाले के पैर पकडकर नागरकर कर माफी मांगी । बिना उसके माफी मांगने पर मामला शांत हुआ । शिक्षा वालों ने बिना उसको छोड दिया । जनता की भीड ने माफी मांग के विनोद का वीडियो बना लिया । माफी मांगते भी झट गई । फॅमिली में बैठकर एयरपोर्ट के और चलकर दबाना होगा । बिना तो मैं रिक्शेवाले सोचना नहीं चाहिए था । उसके साथ फोटो खिंचवाई । मात्र सत्तर रुपए के लिए अपनी बेइज्जती करवा लेंगे । तो मालूम है कि बंगाल में यूनियनबाजी बहुत है । बात बात पर हर मिनट लाल झंडा उठाकर सडक पर मारपीट पर उतर आते हैं । हम परदेसी प्रदेशी होने के नाते बाहर जगह किसी से उलझना नहीं चाहिए । फॅमिली में बैठेंगे ना उसको कहा मान मर्यादा इज्जत अपने हाथ में होती है । लाखों रूपये हम शादी विवाह, मुंडन पर खर्च कर रहे थे, लेकिन मात्र सत्तर रुपए के खातिर विनोद हैं । अपनी अनमोल ऍम सरेआम बाजार में लूट वाली क्या जरूरत थी उससे बचने की मात्र सत्तर रुपये सुरक्षा वाले ने मांगे थे । क्या मोल भाव से दस बीस काम भी कर देता हूँ । लेकिन झगडा नहीं करना था । जब आप बोलेंगे कि मैं क्या कह रहा सत्तर रुपए दे देता । कंजूस सत्तर पैसे नहीं हैं । कंजूस की चमडी निकल जाए पर दमडी बिल्कुल सलामत रहनी चाहिए । अरे भाई साहब क्या करोडों अरबों से भी अधिक बहुमूल्य प्रतिष्ठा मान मर्यादा एॅफ लग जाए? मैं उसी तरह तो कह रहा हूँ । कोई जान तो नहीं ले रहा हूँ । ऍफ बोलिये कोई ना कोई नहीं ऍम कोई न कोई ना और कुछ नहीं बोला सर झुकाकर आत्मग्लानि जान आत्मचिंतन करने लगा ऍम गई थी । सुरक्षा वाले से उसके माफी का वीडियो सोशल मीडिया पर घायल चुका था । उसे लग रहा था कि एयरपोर्ट पर हट जाएगा । उसे भेज रही है

04 रसरंग -दर्द

दर्द पहचान एक ऐसी चीज है जिसके गिरफ्त में हर व्यक्ति आ ही जाता है । किशोरावस्था में जो चक्रव्यू में पडता है बुढापे तक निकल नहीं पाता । सुंदर आकर्षक देखना हर किसी की जबरदस्त बारिश रहती है । आदमी हो या भारत काला हो या कोरा, मोटा हो या पतला, खूबसूरत हो या बदसूरत हर शख्स की तमन्ना यही होती है कि दूसरा उसके व्यक्तित्व पर मर मिटे । चाहे भले अपने आर्थिक क्षमता के अनुसार हर व्यक्ति फैशन का दीवाना होता ही है । अनिल अग्रवाल एक सफल और जाने माने उद्योगपति सोशल सर्कल में हमेशा मौजूद रहते हैं और हर कार्य में बढ चढकर हिस्सा लेते हैं । चारों तरफ उनके नाम के चर्चे होते हैं । अच्छा और बढिया कपडे पहनकर घर से बाहर निकलते हैं । घर से बाहर की तो बात निराली घर में भी अच्छे कपडे पहन कर रहे थे । कोई उनके घर आ जाए उन को देखकर यही सोचेगा । शायद उनको अभी कहीं बाहर किसी पार्टी में जाना है । हर व्यक्ति अनिल अग्रवाल के कपडे पहनने के तौर तरीकों और समझ की तारीफ करता है कि कपडे कब, कहां और कैसे पहने । सिर्फ अनिल अग्रवाल से पूछो और कपडों की शिक्षा लोग अपने आप में एक संस्थान हैं । बॅान्डिंग वाले कपडों में अनिल अग्रवाल आगे रहते हैं जहाँ पे निकलते लोग देखते रह जाते हैं । इस दुकान शोरूम से कपडा लेते हैं किस दर्जी से सिलवाते हैं हर कोई जानने का प्रयास करता है । अनिल अग्रवाल सोहनलाल मर्जी से अपने कपडे सिलवाते अनिल अग्रवाल की बदौलत सोहनलाल अब कोई मामूली दर्जी नहीं रहा । एक बहुत बडा शोरूम खोल लिया सोहनलाल ऍम सिर्फ अमीर व्यक्ति ही उसके शुरू में जाने की सोचना, गरीब को छोड मध्यमवर्गी उसके दाम सुनकर शुरू से बाहर आ जाते हैं । कम से कम बीस कार्य कर उसके यहाँ काम करते हैं । परंतु अनिल अग्रवाल के कपडों का नाम सोहन लाल खुद लेते हैं । सोहनलाल के लेकर की बात है कि अनिल अग्रवाल का भरोसा सिर्फ सोहनलाल पर हैं । अनिल अग्रवाल का हर रोज व्यस्त जाता है व्यापार और पार्टियाँ तो छह बजे से रात बारह बजे तक बस रहने वाले सफल उद्योगपति को अक्सर अपने बच्चों से भी बात करने की फुर्सत नहीं होती है । अनिल अग्रवाल में मात्र चालीस के छोटे से उम्र में सफलता की सारी सीढियां चाहिए और छोटी पर राज्य स्थापित कर लिया । पिछले दो दिन से अनिल अग्रवाल की गर्दन में दर्द हो रहा है । समय की व्यस्तता के कारण उसने अधिक ध्यान नहीं दिया । रविवार की सुबह को चार बजे के आसपास दर्द के कारण अनिल और बैठे और बत्ती चलाई । दवाई के डिब्बे से दर्द निवारक को लेने के लिए और खाई आवासन कर पत्नी भी जाकर पति को उठा देख समझे कि उठने का समय हो गया क्योंकि अनिल सुबह छह बजे उठ जाते हैं । पत्नी को उठते देखा मिलने कहा हो जाओ अभी तो चार बजे हैं । आप इतनी जल्दी के उनका गर्दन दुःख रही हैं । गोली खाई ठीक हो जाएगा । माम लगा दु नहीं, दवाई लिया, ठीक हो जाएगा । थोडी देर में दर्द कम हुआ और अनिल को नींद आ गई । आज बहुत वर्षों के बाद अभी बहुत देर तक सोच रहे । लगभग आठ बजे उठते हैं पत्नी अंडे लाने पति अनिल से तबियत पूछे । अनिल ने कहा कि अब तो ठीक है तो चार दिन से कभी कभी हल्का हल्का दर्द महसूस हुआ तब तो आज सुबह बहुत तेज था । आज तक कभी नहीं हुआ तो कोई बात नहीं अब ठीक है । रविवार का देना दिन में कुछ खास काम नहीं है । सात पार्टी में जाना है अभी थोडा आराम कर लेता हूँ । नहाने के बाद अनिल अग्रवाल ने कपडे बदले कुछ लोगों से घर पर मुलाकात की और ऑफिस का काम क्या घर पर एक छोटा ऑफिस बना रखा है और सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक स्टाफ के दो जनों की ड्यूटी लगती है । चाहे रविवार हो या कोई दूसरी छुट्टी का दिन कम से कम एक जन तो घर के ऑफिस में अवश्य उपस् थित रहता है । बारी बारी से उनका साप्ताहिक अवकाश बेहतर ऑफिस में काम करते हुए फिर से गर्दन में दर्द महसूस हुआ । पत्नियाँ जरा से कहा मालूम नहीं आज तक रह रहे करके उठाए इस को नजर अंदाज ना करूँ । मैं डॉक्टर से बात करती हूँ । आप आराम करना ऍम । डॉक्टर को फोन किया । घर आने के लिए कहा । थोडी देर में डॉक्टर काॅप करने के बाद कहा अनिल अभी तो टेस्ट नहीं हो सकेंगे । मैं दवा लिख देता हूँ । तुम सवालों कल सुबह ऍम करवाते हैं । वैसे घबराने की कोई बात नहीं दवा से थोडी नहीं दिखाएगी इसलिए आज की पार्टी रद्द करना और घर बैठ कर आराम करूँ । डॉक्टर दवा लेकर चला गया । दवा के असर से थोडा दर्द कम हुआ नहीं अधिकाई । रात की पार्टी में चैनल का ही नहीं पार्टी मैंने ले । अग्रवाल की अनुपस्थिति से सोशल सर्कल में चर्चा होने लगी की तेज जीवन शैली के कारण अनिल अग्रवाल बीमार हो गए । अब उनका सोशल सर्कल बना लोगों की तो मसाला नमक, मिर्च लगाकर बात का बतंगड बनाने की आदत है । गर्दन में बस दर्द हुआ और सोशल सर्कल में लोगों ने दिल का दौरा तक कह दिया । अगले दिन सुबह पहले ऍम दोनों की रिपोर्ट सामान्य आएगी । रिपोर्ट सामान्य आने के बाद हमारा भी डॉक्टर ने करवाया । उसकी रिपोर्ट भी सामान्य । डॉक्टर ने कहा कि घबराने की कोई आवश्यकता नहीं । जब रिपोर्ट सामान्य है तो करने वाला दवा लेते रहो और साथ में थोडा गर्दन का व्यायाम करने की सलाह दी । पत्नी अगला नहीं होगा कि जलाली और एक योगा अध्यापक की नियुक्ति कर दी । अनिल अग्रवाल योगा भी करने लगे । दवा होगा और गर्दन के व्यायाम से कोई फर्क नहीं पडा । कभी दर्द कम हो जाता तो कभी अधिक तीन महीने बीत गए । दर्द अस्थायी रूप से बिना नहीं हुआ हूँ । जिस कारण अनिल अग्रवाल का सोशल सर्कल छूट गया । सोशल सर्कल में अफवाहों का बाजार गर्म हो गया । केंद्र अनिल अग्रवाल चंद महीनों का मेहमान एक कान का दर्द है जिसकी डॉक्टर कोई वजह नहीं घूम सके । सभी टेस्ट की रिपोर्ट सामान्य आई । लोगों ने उसे प्रत्यूषा या तक पहुंचा दिया । अनिल अग्रवाल के कानों में जब यह बात पहुंची उसे बहुत गुस्सा आया और लोगों की बकवास के कारण उसने सोशल सर के लिए छोड दिया तो सिर्फ ऑफिस और कहाँ तक सीमित हो गए । अमीर की परेशानी देख डॉक्टर ने कुछ दिन आराम करने की सलाह दी की कामकाज की चिंता छोडकर किसी हिल स्टेशन पर जाकर आराम करें । पत्नियाँ मिला को सुझाव अच्छा लगा गर्दन दर्द से परेशान अनिल ने काम के बोझ को छोड हिल स्टेशन पर एक महिला बताने की सोच कब चले तैयारी भी करनी है मिलने पूछूँ अगले महीने पहली से आखिरी तारीख तक पूरा महीना आराम मैं ऍम आॅडियो क्या बात है अनलाॅक के समीप अगर पूछा काम के चक्कर में अपनी जिंदगी ही भूल गए कि हम आज क्या होता है । एक महीना साॅस और कुछ नहीं कहकर अनिल ने मिलाके हो चुकी है अनिल आइस करतन दर्द के कारण बहुत दिन हो गए नए कपडे नहीं सिलवाए कुछ कपडे सिलवा लेता हूँ तुम कल बनने देखो सोहनलाल चलने में आज कल बहुत समय लगा देता है उसको हिदायत देना कि इस बार जल्दी चाहिए अंडे लाने का । अगले दिन अनिल के साथ अनिला बी सोहनलाल की दुकान दुकान पर सोहनलाल नहीं था तो किसी शोक सभा में गया था । दुकान पर सोहनलाल का पुत्र मोहनलाल था । आॅल इस बार बहुत दिनों में आए हैं । कल को देखकर मोहन लाल ने स्वागत किया । सोहनलाल की तरह नजर नहीं आ रहा जी अंकल वह एक शोक सभा में गए हैं । कुछ कपडे सिलवाने अंकल जी मैंने आप ले लेता हूँ । आप अपनी पसंद बताएं । ठीक है इस बार ना तुम ले लो लेकिन तो मैं पता है कि मैं ना और फिटिंग का बहुत ख्याल रखता हूँ । आपकी पसंद के मुताबिक कपडे बनेंगे । मोहन लाल ने अनिल अग्रवाल को निश्चित किया ठीक है लेकिन इस बात का ध्यान रखना की कपडे एकदम फिट और मेरे टेस्ट के मुताबिक होनी चाहिए । अनिल अग्रवाल ने मोहन लाल को सख्त हिदायत ऍम के साथ रहेंगे, कपडे ही बनेंगे । आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा क्या कर मोहन लाल अनिल अग्रवाल के कपडों का नाम ले लेंगे कलेक्शन आप लेते समय अनिल अग्रवाल को दर्द हुआ उसमें क्या वो अंकल? अरे वही गर्दन का दर्द है जिसने परेशान किया हुआ है । आप लेटे लेटे मोहन लाल का हाथ हो । उसने बडे ध्यान से अनिल अग्रवाल के कपडों की बाॅलिंग अंकल बैठे हैं । दर्द के कारण अनिल अग्रवाल कुर्सी पर बैठ गए । दो मिनट बाद मोहन लाल ने अनिल अग्रवाल से पूछते हैं अंकल किस कारण होता है? दुनिया भर के टेस्ट हो गए । कारण आज तक मालूम नहीं ऍम कुछ नहीं आया तो बात करूँ हूँ अंकल आप अपने कपडों का स्टाइल बदले । मुझे लगता है कि कलर अधिकतर थोडा ढीला हो तो फर्क पड सकता है । संग्रालय के कपडा परसों से पहले उनका गले की नसों पर दबाव बढने से दर्द हो सकता है । इस बार आप थोडे ढीले कपडे पहनकर देखिए । हो सकता है पर पडे मोहन लाल की बात अनिल अग्रवाल समझ नहीं सका फॅार वजह मालूम नहीं कर सके तो वजह बताइये और वो भी तो किसी अनिला को मोहन लाल की बातों में वजन लगा सिर्फ एक जोडी कपडे मोहन लाल के हिसाब से थोडे ढीले बनवाया था । हो सकता है इतने वर्षों से तंग कपडों का दबाव गले की नसों पर पडा । जवानी में दर्द नहीं हुआ अब उम्र बढ रही है । हो सकता है वैसे भी दबाव सहन नहीं कर पा रहे होंगे । लोग क्या कहेंगे ढीला हो गया नहीं । अग्रवाल अनिल तुम अपनी सेहत देखो लोग तो पता नहीं क्या क्या कह रहे हैं । इतने ना उसके आज माली एक और से अनिल, अनिल, अनिल पर दबाव डाला । पत्नी की बात रखकर उसने तो जोडी कपडे थोडे ढीले चलने को कहा और बाकी अपने पुराने हिसाब से महीना पीठ के और पहली तारीख आ गई । अनिल और ऍम को पूछ कर रहे हैं आने लाने । अनिल के खान पान के साथ कपडों पर विशेष ध्यान दिया । उसने अनिल को तंग फिटिंग वाली कपडे नहीं पहनने दी है । दर्द है बारह दवाइयाँ कम कर दी । गर्दन के व्यायाम बार बार अनिल से करवा दिया । एक महीने में अनिल के गर्दन का दर्द दूर हो गया । थोडे ढीले कपडों ने कमाल कर दिया और उसकी करन का दर्द दूर हो गया हूँ । मोहन लाल का मशविरा कम कर दिया । अब कैसा महसूस करते हो? झाडू हो गया लगता है । अब दर्द बिल्कुल नहीं होता हूँ वाले ने भी छोड दिया । जो काम डॉक्टर नहीं कर सके, योगा वाले नहीं कर सके तो काम एक दर्जी ने कर दिया । अंडे लाने । अगल के कालों को सहलाते हुए गर्दन पर हाल के साथ भेजा । देखो मेरे प्यारे कोमल हाथों का जादू मुस्कुराते हुए अनिल अनिल को अपनी बाहों के आलिंगन में बांध लिया और अनिला बाहों में झूल गई ।

05 रसरंग -नंगु

लंगूर एक बात तो माननी होंगे । जो छोटे बच्चे होते हैं, उनके हर प्रश्न का उत्तर देना कई बार असंभव हो जाता है । अब उनके जैसे को कैसे शान्त करें, उनका क्या उत्तर देंगे? कुछ ऐसी हालत से बसंत लाल का आमना सामना हो गया । जून का महीना जबरदस्त गर्मी तो पैर का समय जबरदस्त लो चल रही हैं । घर में सिर्फ दो जन हैं । एक दादा बसंतलाल और दूसरा उनका पौत्र शौर्य है । शौर्य के माता पिता दोनों नौकरीपेशा हैं । अपने अपना होते सुबह नौ बजे चले गए । शौर्य की दादी अपने बीमार भाई को देखने अंबाला गई है । दादी ने अभी तीन चार दिन हमारा ही रुकना हूँ । दादा बसंतलाल रिटायर हो चुके हैं । ज्यादा होता की आपस में खूब पडती है । उम्र का अंतर बसंतलाल देखते नहीं और सारा दिन आपने बहुत रश कमरे के साथ में बताते हैं । उसको स्कूल छोडना, फिर दोपहर में स्कूल से लाना, उसके साथ खेलना, शाम के समय बगीचे में जाना और पढाई में शौर्य की मदद करना । बसंत लाल का समय शहर के साथ कैसे बीत जाता है, खुद पसंद लाल को भी पता नहीं चलता । कई बार सोचते हैं केशव के बिना तो रिटायरमेंट के बाद घर की दीवार देखते रह जाते हैं । बच्चों से घर की रौनक होती है । दादा पोते की घनिष्ठता के चलते बसंतलाल के पुत्र और पुत्रवधू निश्चिंत होकर नौकरी पर जाते हैं और पूरे घर का प्रबंधन बसंतलाल और शौर्य के दादी के हाथ में था । दोपहर के खाने के बाद पसंद लाल को झपकी आई । पसवक स्तर पर लेट गए । शौर्य की आंखों में मस्ती लग रही थी । नींद कोसो दूर थी । कुछ देर तक खिलाना के साथ खेलता रहा । फिर टीवी चलाकर चैनल बदले और बंद कर दिया । क्या करें, क्या करें? सोचते सोचते शौर्य तो रूम में घुस गया । कहाँ क्या पडा है सामान्य धरोधर क्या कुछ सामान पलट दिया । कुछ गिरा दिया स्कूल पर चढकर अलमारी के ऊपर वाली दराज में क्या रखा है, देखने लगा । आज से एक डिब्बा गिरा । नीचे फर्श पर खुल गया । पुराने डब्बे में पुराने समय के फोटो पडी थी । गिरकर जमीन पर फैल गई । मैंने देखा कि जब मैं बहुत सारी फोटो तो स्कूल से नीचे उतारा फोटो देखने लगा । आज के डिजिटल युग में कैमरे और मोबाइल फोन में फोटो संग्रह होता है । शौर्य भी मोबाइल फोन में फोटो देखता है । प्रिंट फोटो देखकर शौक है । बहुत सकता हुई और फोटो वाला डिब्बा उठाकर दादा के पास आया तथा ये बताओ ठीक है ज्यादा भजन लाल झपकी लेते हुए हो गए थे । पत्र शौर्य की आवाज से नींद से जागे उम्र के इस पडाव पर दोपहर को थोडा आराम करना और जबकि लेना बसंतलाल की दिनचर्या दी । उन्होंने चश्मा लगाया और पोते शौर्य के हाथ में डिब्बा देखकर पूछा ये क्या उठा लाये बताऊ दादू इसमें क्या है? कहकर फोटोकाॅपी स्तर पर पटका तो फिर से खुल गया और फोटो बिखर गए । वो देखकर दादा ने पूछा इसको कहाँ से लेकर आए? ऍम स्टोर में से बताओ क्या है? ये तो फोटो हैं किस, क्या आपको ऊपर बिस्तर पर बैठा हूँ । देखते हैं किस किस की फोटो है, वो तो पुरानी थी । श्वेत श्याम फोटो हूँ जिन्हें कभी खुद बॉक्स कैमरे से बसंतलाल नहीं की जाती है । कुछ बहुत बसंतलाल के शादी की फोटो थी और कुछ बच्चों की फोटो थे । बसंतलाल और शहर रहे हैं । वो तो देखने लगे छोडो ये देखो ये फोटो तुम्हारे बाबा की है । आप की फॅमिली दबाकर पूछा हमारे पापा हैं ये फोटो महीने की जितनी जब हमारे पापा तुम्हारे जितने छोटे थे । पापा ने क्या पहना है? पापा ने कमीज और नहीं कर पहनी है । किसकी कमी निक्कर पहन दाता आपकी कमीज देखकर पहले देखो कितनी बडी फॅमिली बडे कपडे पहने देखकर पूछा क्योंकि आजकल बच्चे ऍम पहले ऐसे बडे बडे खुले खुले कपडे पहनते थे यहाँ तो देखो इसमें हम सब नहीं आ रहे हैं । कौन कौन आ रहे कहाँ आ रहे हो? फोटो मसूरी के पास कैंप्टीफॉल की है वहाँ बहुत बडा जाना है । हम गर्मी की छुट्टियों में घूमने मसूरी गए थे । इस फोटो में मैं हूँ ये तुम्हारी दादी हैं और ये हमारे पापा है और ये तुम्हारी बुआ । हमने वहाँ पिकनिक की थी और नहाय हैं । देखो पीछे कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलों का क्रेट पडा है । कोल्ड्रिंक्स की बोतल ठंडी करने के लिए पानी के झरने में रखते थे । पानी में ठंडी हो जाती है । इस की जरूरत ही नहीं पडती । यही कुदरती तरीका होता है । बसंतलाल ने शौर्य को समझाया हूँ इसमें तो पापा ने और अपने कपडे नहीं पहन रखें । दादी ने तो साडी पहनी है बुआ ने भी फ्रॉक पहनी है पापा ने नहीं कर पहले और मैंने भी नहीं कर पाते हैं । अब ध्यान से देखो आधा दो ये किसकी फॅर फोटो निकाल कर पूछेंगे वो एक एक फोटो निकाल करता था से हर फोटो की जानकारी ले रहा था । ये फोटो दादा दादी की शादी वाली फोटो है । दादी दुल्हन बनी हुई है और दादा दूल्हा दादी की किस से शादी हो रही है । घाटी की शादी दादा से हो रही है, शादी की हो रही है । विकटतम तो बहुत शरारती हो गया हूँ । सवाल ऐसा पूछा कि क्यों हो रही है ऍफ क्यों मत पूछ बस हो गई ये देखो और फॅार । बसंतलाल ने शौर्य का ध्यान दूसरी फोटो में लगाया और मन ही मन में सोचने लगे कि कई बार बच्चे ऐसे प्रश्न पूछने के जिनका जवाब देना मुश्किल है या बच्चों को जवाब देकर संतुष्ट करना मुश्किल होता है । अब दादा की दादी से करो शादी हुई किसी और से क्यों नहीं होगा? इसका जवाब तो केवल ऊपर बैठ है, नीली छतरी वाले के पास ही मिलेगा । मैं कैसे बताऊँ की हुई है समझ लो की हो गई । आजकल तो प्रेम विवाह होते हैं बसंतलाल के शादी के समय तो अब आपने जहाँ तय कर दिए शादी कर ली राइस फोटो में बच्चा कौन है? फोटो देखकर ज्यादा बसंतलाल ने पोते शौर्य को बताया टेस्ट फोटो में दो बच्चे हैं । ये जो लडका है हमारे पापा है और ये जो लडकी देख रही हूँ । ये तुम्हारी बुआ है की फोटो मेरे छोटे भाई की शादी पर खींची थी ताजा आपका छोटा भाई कौन है? मेरा छोटा भाई आपके पापा के चाचा है । वह कानपुर में रहते हैं । कानपुर कहाँ है? दादू कानपुर बहुत दूर है । ट्रेन से जाते हैं आठ घंटे रेलगाडी में लगते हैं आपको रेल में बैठो । सोचा सुबह सुबह कानपुर आ जाता है । शाॅट और निकली और दादू से पूछा धादू इस फोटो में कौन सा बच्चा है? ये फोटो बहुत खतरनाक थे । फोटो देखकर दादा बसंतलाल चुप हो गए । वोटों को देखते रहे लेकिन चुप रहे हैं । वो तो बहुत पुरानी थी । मोदी थोडी फोटो जो कोने से थोडी फटी हुई थी वो तो मैं छोटा बच्चा सर बनियान पहने एक पेड के नीचे खडा था । हर रोज बच्चे ने नहीं कर अंडरवेअर कुछ भी नहीं पहना ऍम को बच्चा और ये ये फोटो बहुत पुरानी इस बच्चे को पहचानने की कोशिश कर रहा हूँ कि ये बच्चा कौन है ज्यादा आपको तो सब मालूम है कि किस फोटो में कौन है । बताओ ना दादू स्पोर्ट में नंगों बच्चा कौन है जिसने सिर्फ बनियान पहना हुआ निक्कर भी नहीं पहनी । अंडरवियर भी नहीं पहना । बसंतलाल बताने में हिचकिचा रहे थे । थोडा बहुत बसंतलाल के बचपन की थी । घर के बरामदे में नीम का पेड था । ऐसे गर्मियों के दिन थे फॅार घर में नहीं होते थे । दोपहर के समय घर के बरामदे में खेल रहे थे तो उसको करने के लिए निकल उतारी थी । नाली में सुसू करने के बाद बिना निक्कर पहने, पेड के नीचे कंचे खेलने में व्यस्त हो गए थे । ये फोटो बसंतलाल के पिताजी ने की थी । मैं हम साल छोटे से यह बात छुपाना चाह रहे थे कि फोटो उनकी खुद की है । ऐसी बात है । अब अपनी इज्जत का फालूदा काम करवाना चाहेगा की वो बचपन में नंगों घूमते थे । शौक है पता नहीं कौन बच्चा फोटो में हो सकता । कोई पडोस का बच्चा रहा होगा । याद नहीं आ रहा कि कौन सा बच्चा पसंद लाल ने बात छुपाने के लिए असफल प्रयास किया । मुझे याद आ गया । शादी एक दिन कह रही थी दादू के फोटो बचपन की जिसमें दादू नंगों खडे हैं । बताओ ना तो ये फोटो आप क्या ना शौर्य मुस्कुरा रहा था । पसंद लाल चुप रहे परंतु फोटो को देखकर शौर्य कहने लगा दादो नंगों शेम शेम दादू नंगों श्राॅफ ताजा बसंतलाल से मुस्कराते रहे । शौर्य बिस्तर पर नाचता हुआ कह रहा था दादू नंगों से अहमदाबाद उन अंगों ऍम

06 रसरंग -बडा कोन

है । बडा कौन दुनिया का एक दस्तूर हैं । बडे तोता रह गया आदमी होते हैं । एक तो वो जिनके पास अकूत दौलत होती है जिनके कदमों के स्पर्श का दुनिया बेताब रहती है, दूसरे होते हैं जिनके पास लाठी होती है यानी के बल के बूते पर बडे होते हैं, उनकी लाठी से सब डरते हैं । मालूम नहीं कब कमर तोड दें लाभ तोड इस श्रेणी में नेता से पाई भी आते हैं जिनके पास धन और बल दोनों होते हैं मालूम नहीं किसको बंद कर दे एक दिन मुझे एहसास हुआ कि बढेगी श्रेणी में मामूली इंसान भी सम्मिलित है । हर ऐरा गैरा नत्थू खैरा, मामूली इंसान बडा आदमी नहीं होता । मामूली इंसान को बडा बनने के लिए बडा कलेजा रखना होता है । मेरे भाई साहब तो बडे वाला कलेजा हर मामूली आदमी में नहीं होता । कोई कोई मामूली आदमी इतना बडा कलेजा रखता है कि उसके सामने आइसा आप क्या बताऊँ? बडे से बडे उद्योगपति की चांदी हो जाती है । उद्योगपति क्या चीज है? मंत्री संत्री तक के माथे पर पसीना आ जाते हैं । बहुत पडेगा लेने वाले व्यक्ति को कोई कुछ नहीं बिगाड सकता । अमीर गलत सोच रहे कि रुपए के दम पर उनसे काम करवा लेगा । हुआ । यूं गर्मियों के दिन थे और ऊपर से दोपहर का समय । सूरज देवता प्रसन्न मुद्रा में अपने बेटे के साथ छाए हुए थे । गर्म हवा के थपेडे चारों और सब चीज जंतुओं का हौसला पस्त कर चुके थे । जून के महीने में दोपहर के एक बजे सुभाष और सुनील राजस्थान में वातानुकूलित कार में पराठे के साथ चले जा रहे थे । दो युवा मार्केटिंग अधिकारी यानी के जनरल मैनेजर वाली तगडी पोस्ट कंपनी के नई सडक के बाजार में करने से पहले बाजार का शोध करने है तो शहरों, कस्बों और गांवों में जुटे हुए थे । मुख्य राजमार्ग से हटकर एक छोटी सी सकती सडक पर सुनील ने कार कुमारी तो फिर लगता है की कार का इसी काम नहीं कर रहा है । भाई चुनाव वाली बहरे समय तापमान पचास डिग्री होगा । कार में चार ऐसी लग जाए तब भी घर में से छुटकारा नहीं मिल सकता है । सुनील ने कार चलाते हुए अपने माथे के पसीने को पहुंचा पचास डिग्री आर लम्बी लम्बी आप ये मुमकिन नहीं भाषण की गर्दन के पसीने को पहुंचा । अरे हम राजस्थान में घूम रहे हैं जो उनमें यहाँ पचास क्या पचपन डिग्री तापमान भी मामूली बात है तो अपने जिस्म का देख सारे कपडे पसीने से तरबतर हो रखे हैं और तापमान पर शर्त लगा रहे हैं । सुनील ने कहा चलाते हुए तो भाजपा शर्त लगा ले पैंतालीस ऊपर नहीं होगा आ जाएगा । लगा तो सही मैं शर्त कभी नहीं । सुनील ने आत्मविश्वास लगता है । बडा घमंड है शर्त जीतने पर लेकिन मैं भी अनाडी नहीं हूँ । ऐसे शर्त है । बहुत जीती है । सुभाष नुसार अधिक आत्मविश्वास से पलट करेगा । हो जाये हजार रुपए की तो मिलने का बिल्कुल हो जाएगा । सुभाष ने का और दोनों में दोपहर के तापमान पर हजार रुपए की शर्त लग गई । बातों बातों में सुनील भूल गया कि अब राजमार्ग से हटकर एक पतली सडक पर कार ड्राइव कर रहा है जो मलाई के राज चिकनी नहीं बोलते । एकदम विपरीत बडे बडे गड्ढों से भरी हुई है । कुछ आगे जाकर सडक का नामोनिशान ही नहीं था । सिर्फ रेत ही रेत रेत के नीचे गड्ढे में कार का पहिया गया और एक तेज झटके के साथ कार कुछ कुछ ली । सुनील कार्टराइट कर रहा हूँ उसका हाथ कार्य स्टीरिंग पत्थर जिसके कारण वह किसी पर थोडा ही उछाला । लेकिन सुभाष कुछ बेखटके के साथ सुनील से तापमान पर शर्त लगा रहा था । वो सीट पर चला और उसका सिर्फ कार की छत से ज्यादा कराया । सुभाष की आंखों के आगे तारे नजर आने लगे । एक पल के लिए वह बहुत टक्कर रह गया । सर पकडकर भरना कर बोला आरती आप पढ वाले को हर सडक पर चला रहा है । पथरीली चट्टान पर सिर्फ छोड कर दिया ऍम रेलने कार को रोका लेकिन रोकते समय पत्थर पर कार उछल गई । कार एकदम घूम गई । बडी मुश्किल से कार को संतुलित करके सुनील ने रोक कार रोकते समय कर फिर उसी पत्थर से टकराई । पत्थर दो बार कार्य करेंगे । तब से टकराया और रहते तकलीफ हो गया की हर टाइप कर रहे । बाहर निकल के देख क्या हुआ भाषण अपने सर को दोनों हाथों के बीच दबाया हुआ था । भाजपा वो हो गया का बडा हूँ । फॅमिली हो गया । कॉलेज निकल गया । आगे का बंपर टूट गया । सुनील ने कार का निरीक्षण करते हुए पूरा खुला बताया । सुभाष अपना सिर पकडकर बाहर से बाहर निकलकर कार का निरीक्षण करने लगा । कार्य नवंबर को हाथ लगाया तो नीचे गिर गया । अब क्या करें तो मेरा सर फोड दिया और दूसरे कार भी गई । हादसे मुझे नहीं लगता कि अब ये देखने लायक है तो लाइसेंस किसने दिया लाकर बोला जिसमें ऍम चलता हूँ क्या खाक अच्छा चलता है । फॅमिली अब तो क्या करेंगे? करना क्या है? मैकेनिक ढूंढना और कहाँ थी? करवानी है कहाँ मिलेगा मैं नहीं आजकल हर दो कदम पर मैकेनिक मिलते हैं । ढूंढना होगा । हम हाइवे से काफी दूर आ गए इसलिए वापस जाना ठीक नहीं रहेगा । आगे काॅमिक मिलेगा । पहले यहाँ एक बार आ चुका हूँ । वहीं चलते हैं तो पैर हो गई है । खाना भी नहीं मिलेगा तो खेलने का कार्य वो सडक के किनारे कर देते हैं । हो सकता है कि कोई ट्रैक्टर या बस तू के विकार को और ठोककर चला जाए तो उन्होंने कहा तो सरकार कर सडक के किनारे लगा ली और पैदल कस्बे के और चल पडे । गर्म हवा के थपेडे पडते जा रहे थे । वातानुकूलित कार्य में सफर करने वाले चार कदम चल कर परेशान हो गए । हौसला पस्त होने लगा । थोडी दूर जाने के बाद एक काम आया । कुछ गिने चुने घर सडक के किनारे बसे हुए थे । दो चार दुकाने भी बनी हुई थी जो बन्द थी । दोनों का गला सूख नहीं लगा । प्यास से बेहाल एक दूसरे का मुंह देखने लगे । सोचने लगे कम से कम पानी तो मिलेगा तभी एक छोटा दस ग्यारह वर्ष का बच्चा घर से निकलकर बाहर दुकान के शटर को आधा खोलकर अंदर घुस गया । बच्चों का दुकान का शटर खोलते देख उन दोनों की जान में जान आई । गुरु यहाँ काम बन जाएगा । सुभाष ने सुनील से कहा सुनील दुकान के नजदीक जाकर शटर को थोडा ऊपर करके बच्चे से पूछता हूँ मन्ने पीने को पानी ठंडा मिलेगा । बच्चा जो अलमारी से कुछ निकाल रहा था, शटर की आवाज से चाॅस ऍम ना हमारी कार खराब हो गयी है । प्यास लग रही है कुछ पीने को मिल जाएगा । सुनील ने बच्चे से पूछा क्या चाहिए? बोला सब मिलेगा । नाम बोला हूँ । बच्चे होते हुए पूछा पानी मिलेगा ऍम छोटे लडके को नहीं मिलेगा । बच्चे ने तुरंत ना कह दिया आधा गिलास पिला दो । सुनील ने विनती की सुबह पानी नहीं आया । हमने अपने पीने के लिए पानी बचा रखा हैं । शाम को न लाया तो खिला दूंगा । कुछ और भी नहीं तो बोला हूँ । बच्चे ने पलट के जवाब दिया । गला सुख रहा, कुछ भी पिला दो । सुनील ने फिर से विनती की कोई ॅरियर क्या चाहिए सब मिलेगा बच्चे के मुख से बियर का नाम सुनते सुनील उछल पडा हूँ । गुरु ऍम हो गया । सुभाष को आवाज दी खुराक के नाम पर सुभाष अपने सर के भारत को भूलकर तेजी से दुकान के अंदर दाखिल हुआ । फटाफट दौर खोल रहे हैं । सुभाष ने बच्चे को का हूँ ये सुनते पलट कर बच्चन का बाबू मारेगा । अगर मैंने खोल दिया तो समझेगा । मैंने पी ली । बच्चे की आवाज सुनकर बच्चे का पिता जैसे वो बाबू कह रहा था । आकर बच्चे को डांट लगा रही हूँ । अब इस समय दुकान में क्या कर रहा है? ऍम मैं कुछ नहीं कर रहा हूँ । हाॅकी है इनको भी चाहिए । अगर बच्चा आपकी नाक से बचने के लिए नौ दो ग्यारह हो गया । बच्चे के बाद में दोनों को भी और दी । जिस स्थान पर पीने का पानी उपलब्ध नहीं था, वहाँ चल डवेयर आसानी से प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थी । दोनों ने दो दो बियर बोतल पीने के बाद चैन की सांस ली । यहाँ कार मैकेनिक मिलेगा । सुनील ने पूछा आगे कस्बे में मैकेनिक मिलेगा, दो किलोमीटर दूर है । उसका कोई फोन होगा उसके साथ बात कर लेते हैं । सुनील ने पूछा लेकिन फोन नंबर उस दुकानदार के पास नहीं था । दो किलोमीटर का नाम सुनकर तो ना परेशान हो गए । चलने से पहले बियर की दो बोतल खरीदकर रास्ते के लिए रख लीजिए कुछ कदम चलने के बाद कर महावाक्य थपेडों ने दोनों को फिर से पस्त कर दिया । जो कुछ समय पहले तापमान पर शर्त लगा रहे थे एक ही सुर में गर्मी से परेशान कहने लगे लगता है तापमान पचास नहीं सात डिग्री से अधिक होगा ग्रुप पैदल यात्रा कब तक करवा हो गए तो हमारी भी नजर नहीं आ रही सुनील झुंझला के बुला रहा नहीं कहाँ फस गया इस रेट के जंगल में पानी नहीं मिला प्लेयर मिल गई कहाँ गई देश तरक्की पर है इसे कहते ऍम इसी तरह चलता रहा तो अमेरिका को भी पछाड देंगे हमारे का गोली मार वापस उसी गांव चलते हैं शायद कोई हमारी मिल जाए तो वापस पहुंचे एक ऊंट गाडी वहाँ करोगे तो खुशी से उछल पडे चुनाव गाडी वाले पैदा छोड दूँ हमारी कार खराब हो गई है मैं कनेक्ट तक हमें पहुंच जाता हूँ तो की बात सुनकर गाडी वाला बोला छह साढे पर जो टूटी कार खडी है उसी की बात कर रहे हो आप यहाँ िसकर्मी में मैं कहीं नहीं जाऊंगा हूँ आम को जब सूरज ढल जाएगा छह बजे के बाद छोड दूंगा मूड गाडी वाले ने तो इंकार कर दिया । आपको जितने पैसे चाहिए दे देंगे । ऍम छोड दो । दोनों ने उसको रुपयों का लालच किया । आज तक उन दोनों ने रुपयों के बल पर सारे काम होते देखें । चाहे कोई भी मौसम हो या पहले आ जाए तो क्या सब की गाडी दौडा देता है । मैं खुद इतनी बडी कंपनी में कार्यरत है । रुपये के लिए हर कार्य कर रहे हैं । पचास डिग्री तापमान में भी अपनी ऐसी तैसी करवा रहे हैं । ये नहीं कि कुछ पल आराम किया जाए । अपनी जान ज्यादा प्यारी ॅ अगर लू लग गई तब इलाज कौन करवाएगा ना रवाना हमारा नहीं मैं सेहत पहले सेहत होगी तो पैसे कमा लेंगे कहकर वो गाडी वाला घर के अंदर चला गया तो आश्चर्य से एक दूसरे को देखने लगे । यहाँ जमाना आ गया है । पैसे लेकर तेरह हजार की ठोकरे खा रहे हैं । कोई सवारी नहीं मिल रही है । सुभाष चंद्र लाकर बोला आप के भाई साहब मुझे बताओ कि बडा कौन अमीर लोग जिनकी जेब में नोट होते हैं और इस भ्रम में रहते हैं कि छोटे आदमियों के ऊपर चंद्र ठीक कर काम करवा लेंगे । अब यहाँ बढाने के लिए ऊंट गाडी वाला जिसमें कोई लालच स्वीकार नहीं किया और अप्रत्यक्ष रूप से करारा जहाँ पर रुपयों का दम भरने वाले सुनील और सुभाष को दे मना अप्रत्यक्ष जहाँ पर खाने के बाद सुनील ने सलाह दी गुरु यही दोपहर काट लेते हैं तो किलोमीटर्स तपती दोपहर में जाना खतरनाक हो सकता है तो वो वाले बाबा जी सही कह रहे हैं अगर लू लग गई ना तो आफत में आ जाएंगे । दोपहर अगर यहाँ आॅर्ट नहीं पडेगी । कार्ड ठीक करवाने में अभी समय लगेगा । सुभाष ने का पदयात्रा करने में ही भलाई । शोध कब करेंगे? गुरु जी अब तो जीवन की कठिन सच्चाई पर शोध होगा । आज तो मार्केट के बारे में कुछ नहीं सोचना । वो वाले बाबा जी सही कह रहे हैं कहकर सुनील बेमन सुभाष के साथ पदयात्रा पर निकल पडा । गर्म हवा के थपेडों को सहते किसी तरह हिम्मत करके आगे बढते रहे प्याज के साथ भूख लगने लगी । सुभाष ने एक बियर की बोतल सुनील को दी प्याज बुलाओ । गुरु नहीं पीने पहले कुछ खाऊंगा । सुनील ने ताना देते हुए गा मेरा भेजा मत खा बाकी बात कर सुभाष ने बोतल मुझे लगा कर रहा है । एक दूसरे को कहते सुनते कस्बे के और पदयात्रा शुरू की गलते लडते । दो किलोमीटर का सफर तय करते समय ऐसा लग रहा था कि एक जन्म भी दिया । कर भी कस्बा और अधिक दूर होता जा रहा है । पसीने से लथपथ बेजान टांगों के ऊपर जस्टिन का बोझ जैसे तैसे लादकर जब कस्बा आया वो एक ढाबे की चारपाई पर सुनील धर्म से बैठ गया । मुख्य कोई शब्द नहीं निकला । आज के इशारे से ढाबे वाले को बुलाकर पानी का इशारा किया था । पेपर पानी तो था लेकिन ठंडा नहीं । मजबूरन कर्म पानी भी पीना पडा । गर्म पानी के चार गिलास गटककर सुनील ने पूछा आने को क्या मिलेगा? अब ये जो बना देते हैं और आठ के साथ आलू गोभी पनीर की सब्जी खाकर देखिए, उंगलियाँ चाटते रह जाओ । ढाबे वाले ने अपने खाने की विशेषता बताइए । दोनों का भूख से हाल बेहाल हो रखा था और कुछ चौबीस ही नहीं रहा था । जो ढाबे वाले ने कहा वहीं बनाने कहा ठीक है । आलू गोभी और पनीर की सब्जी पराठे के साथ खिलाडी सुभाष ने मरियल से आवास में ऑर्डर दिया । ढाबे वाले ने पंद्रह मिनट में खाना तैयार कर दिया । खाने के बाद सुनील की जान में जान आई बा भाई वाह मजा आ गया । थाना बहुत अधिक स्वादिष्ट था । अब शरीर में जान में जान आई है । सुनील खाने की तारीफ कर रहा था और सुभाष को गुस्सा आया था की कार मैं करने को छोड खाने की तारीफ में समय व्यक्त कर रहे हैं । हमारी कार खराब हो गई । कार पीछे खडी है या आस पास कोई कार मैकेनिक मिलेगा । भाषणा ढाबे वाले से पूछा अब जब भूख से बेहाल हो रहे आप देख नहीं जगह दो दुकान छोडकर जहाँ ट्रैक्टर खडा है वही मैकेनिक की दुकान है, फॅमिली कर रहा है । अब क्या करें डॉक्टर वाला कार्टी करेगा । सुभाष हैरान हो गया साहब जी उसे हवाईजहाज ठीक करवा लो खाने वाले न छाती ठोककर गा गौर अब अगर बात करो ऍम तो इन सुभाष को मैं करने के पास भेजकर चारपाई पर बस हो गया वॅार कार खराब हो गई । ठीक करवानी है क्या खराब है मैं ऍम ठीक करते हुए बिना सुभाष की तरफ देखता हूँ ऍम हो गया हूँ आॅल्टर के भीतर घुसा रखा ना लगभग दो ढाई किलोमीटर पीछे सडक किनारे खडी है आपको चलकर देखना होगा आगे का बम्बर भी निकल गया । भाषण कार की हालत बनाई ऐसा वहाँ जाना मुश्किल है । शाम को जब सूरज ढल जाएगा तभी जा सकते हैं अभी आप गर्मी का प्रकोप देख रहा हूँ अभी तो नहीं जा सकता हूँ ऍफ इंकार कर दिया हूँ । आप रुपये पैसे की चिंता ना करें । जितना कहेंगे डबल देंगे तो भाषा चापलूसी करते हुए चुनाव आपका हाथ लगता ही कार्ड ठीक हो जाती है । वो तो ठीक है लेकिन मैं इतनी गर्मी में वहाँ जाऊंगा नहीं । अपनी सेहत पहले देखनी है । पैसे के पीछे स्वास्थ्य से खिलवाड थोडी न करूंगा । आप शाम तक है आराम कीजिए । ॅ किसी भी कीमत पर जाने को तैयार नहीं हुआ । टक्कर सुभाष ढाबे पर आ गया और ढाबे वाले से पूछने लगा कि कोई और मैकेनिक मिलेगा । तब सुनील ने कहा यही एकमात्र इकलौता मैं कहना क्या? अब कम से कम तो भी दो घंटे आराम कर काफी थक गए हैं । सुनील ने सुभाष को समझाते हुए गा अब भाई साहब एक और बडा आदमी मिल गया ऍम साफ इंकार कर दिया तो पैसा प्रलोभन हो अपनी जेब में । हम तो अपने राजा जैसे बडा कौन ऍम ये देश कभी नहीं करेगा । सुभाषना तो गालियाँ निकाल कर रहा हूँ करो । जब रेट के जंगल में बीयर मिल गई तब तो यही देश अमेरिका से आगे निकल गया था । जब मैं कहने की ने मना कर दिया तब देश पिछड गया । यह सोच ऍम करते हुए बॅाल बाबू सब तुम्हारा क्या हुआ है । इतनी रफ्तार चला रहे कि सारे अगर पंजाब तोड दिया कार के भी और मेरे भी आपसे । मैं कहा मैं चलाऊंगा ग्रुप । मैंने कहा ठीक तो करवा लो । पूरे रास्ते कहा तो नहीं चलाना । पिछली सीट पर आराम से सोता हुआ जाऊंगा । मुझे ड्राइवर समझ रखा है । सुभाष नहीं । उस समय का ड्राइवर ने कार चालक रोजे सुनील ने पलटवार किया । इसी तरह नौ चौक में शाम हो गई । गर्म हवा अभी भी चल रही थी । तापमान में कोई कमी महसूस नहीं हो रही थी । छह बजे मैं निकने खुदा कर कहा ऐसा लगता है कि आपने कहा ठीक नहीं करवानी । आप दोनों तो पिछले तीन घंटे से नोकझोंक मिला गया हूँ । आराम करते तो सारी थकान मिट जाती है । रात को टाइमिंग करते समय नहीं जा सकती है । हाइवे पर रात के समय सभी बिना ब्रेक के गाडी चलाते हैं । वो तेज रफ्तार रहती है । अब बोतल अंदर डालने के बाद जब चलते हैं और ज्यादा से आपके जबकि नहीं और बाकी आपको समझ लो कि दुर्घटना हो गया । कुछ और होगा । इसलिए हम तो रात को कभी ड्राइविंग नहीं करते । ऍम ठीक कर लिया था और उन दोनों के पास चारपाई पर बैठ गया । आप रात को ट्राई भी नहीं करते हैं, दोपहर को भी नहीं करते हैं । तब ड्राइविंग कब करते हैं सुभाष ने वॅार भाई साहब हम ठंडे समय में काम करते हैं । सुबह चार बजे से काम में लग जाते हैं तो दोपहर बारह बजे से शाम छह बजे तक आराम करते हैं । शाम को छह बजे से नौ बजे तक काम करते हैं । इतनी गर्मी में जब सूरज आज छोडता है उस समय घर के अंदर आराम करने में ही भलाई अपनी सेहत अपने खुद के हाथों में होती है । इसलिए आपके पैसों को ठुकरा दिया । आप बडे आदमी है बडी कंपनी में नौकरी करते हैं लेकिन आखिर कहलाओगे तो नहीं कर ही अपने से बडे अफसर की रात जरूर खाओ । मौसम का मिजाज नहीं समझते हैं आप लोग । बस पैसा और काम है आपको नजर आता है हर चीज को पैसों में तो बोलते हैं आप लेकिन रहते गुलाम हूँ आप हमसे आधे कमी रहे लेकिन दल के बादशाह हम है । आप हम पर प्रभाव नहीं डाल सकते । आप सिर्फ मुँह सकते हो । आप डाल के देखो हम काम नहीं करेंगे और आप कुछ कर नहीं सकते हैं । फिर मनी मान गाली जरूर निकाल सकते हो । लेकिन जवान पर मतलब तो वरना शहर से मैं कहने के लाना पडेगा । बताओ बडा आप रुपये वाले हम छाती ठोककर काम करने वाले हैं । मैं कहने का भाषण सुनकर सुभाष का खून खालने लगाओ । मनी मनी कहने लगा जीत जाता साले का गला और दो लेकिन अपने आप को नियंत्रित करके बोला कार्ड ठीक करने में समय लग सकता है । फिर अंधेरा हो जाने पर कार रिपेयरिंग में दिक्कत भी आ सकती है । भाई साहब पदयात्रा तो करनी नहीं है, वो वाले को कहा है बस आने वाला होगा फॅार बदलना दस मिनट बदल दूंगा । अब ये गुणकारी आकर रुकी फॅमिली में डाले और दोनों के साथ चल पडा तो मिलने गाडी वाले को देखकर कहा आप हमें दोपहर को गांव में मिले थे और यहाँ आने से मना कर दिया था । बिल्कुल सही पहचाना आपने वही रुक गया था अब आया हूँ इतनी गर्मी में हम काम नहीं करते हैं । वो मेरी रोजी रोटी है । इस पर मैं न्याय नहीं कर सकता हूँ । मुझे अगर आराम चाहिए तो मेरे को भी चाहिए । अब तरो ताजा हो गया रात तक काम करेंगे आप जहाँ पर मतलब परिवार का एक अहम हिस्सा है ही है जैसे आप अपने परिवार के हर सदस्य का पूरा ध्यान रखते हैं । जैसे हम अपने परिवार के अहम सदस्य टूट का भी ध्यान रखते हैं । मैकेनिक और ओमकारी वाले की बातें सुभाष को भी मतलब का भाषण लग रही नहीं लेकिन चुप चाप सुंदर थोडी देर में कहा तक पहुंच गए । मैं काॅफी होशियार था । पडा बट कार का रेडियेटर बदलाव कार के बंपर को ठोकर बेच लगाकर उसको फिक्स कर दिया । कुलेन डालकर कार स्टार्ट की ऍम गाडी में बैठकर वापस घर पे चला गया और सुभाष ने स्टेरिंग संभाला जी कॅालेज दोनों को गोली मारता हूँ ऍम पूरा दिन खराब कर दिया और जो उनके बातों में दम था । आखिर गुलाम हमें ही हैं तो ऐसा हो गया और अपने अफसरों क्या हम किसी काम के लिए ना कह सकते हैं? बिल्कुल नहीं क्योंकि हमें डर सताता है कि नौकरी से नौ दो ग्यारह कर देंगे । जब स्थिरता से उन लोगों ने काम करने से मना किया की चार है तो जहान है क्या कभी हमने भी अपने बारे में ऐसा कुछ सोचा है? सुनील की बात बीच में काटते हुए सुभाष ने कहा संत सुनील जी अब आपने खता बंद कीजिए । मेरा सर इनके भाषणों से पहले ही चला गया । तब आप चुप रही है । आपको वातानुकूलित ऑफिस मिला हुआ है । आप दोपहर को आराम नहीं कर सकते । हो गया तो आप के बाद भी ठीक है लेकिन उनकी बातों में ज्यादा मैं हम गला मैं मैं अपनी मर्जी से कुछ नहीं कर सकते हैं । हमारी लाइफ में सर भागदौड और वह है दिल के बाद । चार मैं मालूम है की बातचीत बडे होते हैं । आखिर वो बडे निकले और हम छोटे । हमें भी आखिर उनकी बातें सुननी पडेगी, अपने ऑफिस में भी और इनकी भी । गुलामों की तरह । सर झुकाकर मुझे कहते गए सब सुनते रहे । ऑफिस में पहुंची पद भी मिली हुई है जनरल मैनेजर की किसी से हम लोग खुश होते रहते हैं । सान तबाबा सुनील कुमार जी की जय भाजपा जोर से जाएगा लगाया और सुनील धीमे धीमे खास नहीं लगा । सुभाष नाॅट की तो नहीं सोचने लगा बडा कौन है हूँ?

07 रसरंग -पेंटी चोर

ट्वेंटी चोर ये जो सर्दियों के दिन होते हैं ना बडे साले होते हैं, ठंड बढ जाती है और ठंड से बचने के लिए कितने कपडे पहन ले । बंदा ठीक होता ही रहता है । बस सूरज के दो चार करने बदन कुछ हो जाए आनंद आ जाता है । दिल खुश हो जाता है । बाद बात हो जाता है । दिल के अरमान वोटों पर आ जाते हैं किन्तु परन्तु की तो सूर्यदेव है बहुत ऍम जितनी अधिक ठंड होगी उतने अधिक सूर्यदेव की नाराजगी होगी । मालूम नहीं क्यों अधिक ठंड में इतने नाराज हो जाते हैं । कहीं ऐसा तो नहीं कि उनको भी ठंड लगती हूँ और अपने सूर्यदेव के दर्शनाभिलाषी रहते हूँ । मालूम नहीं इसमें कितनी सच्चाई है लेकिन मैं ऐसा मानता हूँ । अब पूरे एक सप्ताह तक लोग लगाई ठंड में ठंड करते रहे और सर्दियों की ठंड के दिनों में श्रीमान सूर्यदेव रुष्ट होकर को भवन में पूरे एक सप्ताह तक बैठ गए । सभी परेशान तो ठंड और ऊपर से कपडे सुखाने की समस्या गीले कपडे घर में पीटर के आगे सोच रहें बिजली का मेल बढ रहा है । अब इस समस्या का कोई समाधान भी नहीं । धूप निकले तब कपडे अच्छे से सूखेंगे । सबसे अधिक समस्या घर के अंदर के कपडों की होती है । कहने के आंतरिक मस्त हूँ जब हम अंडरगारमेन्ट्स कहते हैं वो तो एकदम सूखे चाहिए तो बात होगा इतनी ठंड में गिला आंतरिक वस्त्र पहने नहीं जाते । हमारे पास पैंट कमीज तो नहीं होता परंतु कच्छा बनियान तो गिनती के होते हैं । दो चार अब कोई भी बंदा तो भाव में अंडरगारमेंट्स नहीं खरीद था । कुछ के पास अधिक होते हैं तो जब बात आम बंदे की हो तब उनकी हालत पतली हो जाती है । आज तो मजा आ गया एक सप्ताह के बाद और वो भी रविवार की छुट्टी वाले दिन सूर्यदेव को भवन से बाहर आ गए । मेहरबानी उनकी की सफाई दर्शन दे दी । छुट्टी के कारण रविवार को लोग अक्सर देर होते हैं । जैसे आप खाली सूर्या देखो देखकर सभी के चेहरे खुशी से खिल गए । तब के कपडे मिल गया और तारों रस्सियों पर सबके कपडे सूखने लगे । बनाने भी तमाम कपडे धोकर सूखने डालते हैं । नाश्ता करने के बाद बाल सिखाती पति देव से कहा आज मौसम बहुत अच्छा है । पूरे हफ्ते ठंड के कारण मदन झगडा हुआ था । आज हफ्ते बाद धूप निकली है । चलो पिकनिक पर चले । प्रति निर्मल ने तुरंत हामी भर दी । हुआ कि खाना बना कर दे । फिर लेकर इंडिया गेट पर चलते हैं और शाम तक वहाँ लॉन में बैठ कर खाना चाहते हैं । धूप काॅमिक बनाते हैं । दोपहर एक बजे इंडिया गेट पहुंचे । वहाँ पूरा का पूरा सेना पहला था । कडाके की ठंड में खिली धूप का आनंद लेने सभी पहुंचे हुए थे । कार पार करके हरी घास पर चादर बिछाई और आराम करने लगे । फिर थोडी देर में खोलना था । तब तक खोमचे वाले से चार पकड दिखाई गई के लिए धूप में खूब धंदा चल रहा है । लोग अपने म्यूजिक सिस्टम लेकर आए हैं तो बनाकर सभी मस्ती में झूम रहे बच्चे काॅपी खेल रहे निर्मल चादर पर लेकर धूप सेकने लगा ये क्या हो रहा है पेट के बल लेट निर्मल को निर्मला मैं जो है हम तो करने दें । झुंझलाकर निर्मल ने कहा लेट ने नहीं आएगा । कुछ टिक वाली बातें करूं । निर्मला ने तो टक्कर का पत्नी को नाराज देकर निर्मल फौरन तनकर बैठ गया और बात को पलटते हुए गा । निर्मला एक बात है कि इंडिया गेट हमेशा प्रेमियों की पहली पसंद है और आज भी मॉल कल्चर के बाद भी देखो युवा जोडे, पेडों और झाडियों की ओट में आज की बैठक वो देखो निर्मला एक नहीं हो, तभी तो मैं होते हुए से उठाया है कि कुछ सीख और अपने पुराने दिन याद करूँ कहकर निर्मला निर्मल से सटकर बैठ गई । बच्चे कुछ दूर बैडमिंटन खेलते थे और निर्मल निर्मला एक आदमी कुछ पिछली बातों को याद करते हुए प्रेमालाप कर रहे थे । उनके प्रेमालाप में विभिन्न तब आया जब बच्चे खेलते हुए था और भूख के कारण दौडते हुए हैं । मुस्कुराते हुए निर्मला नेतृत्व खोला । सबने खाना खाया । चार बजे तो दाल करेंगे और निर्मल परिवार सहित घर वापस घर आकर कार से उतरते ही निर्मला ने सबसे पहले घर के बाहर के रस्सी से कपडे उतारे । निर्मल ने घर खोला । बच्चों ने टीवी चालू कर दिया । निर्मला ने कपडे सोफे पर डाले और रसोई में चाय बनाने चली गई । चाय की चुस्कियां लेने के पश्चात निर्मला ने सूखे कपडों को घर में स्त्री करने पर जो भी से इस तरी करवाने के लिए अलग किया और अंडरगार्मेंट्स को अलग किया, क्योंकि उनको बिना इस तरीके पहनना है और एक मेरे अंडरगार्मेंट्स का तो उतारना भूल गई । लाइन तो सारे कपडे थी । एक बार फिर से चेक कर लेते है । निर्मला बाहर गए, परंतु वहाँ कोई कपडा नहीं था । कमाल हैं कहाँ? गए । निर्मला ने अंदर आकर घर कपडे देखे कि कहीं किसी कभी ॅ के अंदर ना रह गए । छोटे से तो होते हैं कहीं भी हो गया हूँ सुना मेरे अंडरगार्मेंट्स देखें क्या कहा है नहीं तो मैं छुपा तो नहीं लिए । इतना सुनकर निर्मल ने तपाक से कहा मुझे क्या जरूरत पडे तुम्हारे अंडरगारमेंट छुपाने की । मैंने तो पहले नहीं है । वहाँ तो ठीक है पर गाये कहाँ? तीन बहन और दोबारा सुखाई दी । सारे कपडे उतारे । बस वही नहीं मिले । कमाल है तुम्हारे बनियान और कच्छा तो है मेरी फॅमिली नहीं है । निर्मला अपना सर्जन चला रहे थे नहीं किसी और ने तो नहीं उतार लिए । कभी कभी गलती हो जाती है । पडोसियों के कपडे हम उतार लेते हैं और कभी पडोसी हमारे कपडे उतार लेते हैं । फिर उसके बाद अदला बदली होती है । निर्मल ने टीवी देखते हुए कर दिया । सबको अपने अंडरगार्मेंट्स की पहचान होती है । हर किसी के पेंटिंग्स अगला होती है । कोई किसी और के नहीं पहनता हूँ । क्या आप किसी और का कच्छा बनियान पहन लो? गे निर्मला ऍम नहीं मैं तो नहीं पहन सकता । वैसे मैं भी नहीं पहन सकती । आजकल इतने महंगे हो गए ऍम पता नहीं कहाँ गुम हो गए निर्मला अपना अंडरगार्मेंट ना मिलने के कारण चिंतिति जब गुम हो गए तब क्या कर सकते हैं । चार दिन बाद मैं बोला कपडे सुखा रही थी तो उसके कुछ महिलाएं भी कपडे सुखा रही थी । आपस में बात करते हुए पडोसन कितने पूछा कल मेरी पैंट और पुराने मिली कहीं किसी के कपडों में मिक्स तो नहीं हो गई । इतना सुनकर निर्मला ने कहा क्या कहा गीता की तुम्हारी ऍम तो सूखने के लिए रखे थे । मिली नहीं आने वाला दो पहले और दो पराठे नहीं मिलेगा । बाकी कपडे अपने स्थान पर थे । कमाल है । रविवार को मेरी तीन ऍम हो गए और आज तुम्हारी कम हो गए । निर्मला कपडे हाथ में लिए गीता के बाद आगे उन दोनों की बातें सुनकर दो तीन पडोसन और एकत्रित हो गए और उन्होंने भी बताया कि हफ्ते दस दिन पहले उनकी भी ऍम सभी महिलाएं हैरान और परेशान हो गए कि सिर्फ लेडीज अंडरगारमेंट्स से गुम हुए हैं । बाकी सभी कपडे सही सलामत है । पहले तो शर्म के कारण किसी महिला ने किसी से कोई जिक्र नहीं किया । अब आपस में बात करने पर मालूम हुआ कि पडोस के लगभग हर महिला की यही शिकायत है कि फॅमिली गायब होते हैं । पुरुषों के कच्छा बनियान गायब नहीं होते । स्त्रियों के अंडरगार्मेंट से गायब हो रहे हैं । गायब करने वाला कौन हो सकता है इस बहस से को जानने की जिज्ञासा । सभी को देख सभी ने अपने पतियों से बात की और सब हैरान हो गए कि ये काम किसका हो सकता है । सब ने तय किया कि रविवार सुबह ग्यारह बजे मीटिंग करते हैं ताकि मिलकर कोई कारगर कदम उठाया जा सके हूँ । रविवार को मीटिंग में आशा से अधिक परिवार एकत्रित हुए । किसी को उम्मीद नहीं थी कि एक गंभीर होता है की समस्या आस पास के पांच छह गलियों की थी । कम से कम पचास परिवार कॉलोनी के पार्क में एकत्रित हो गए । सर्दियों के खाली धूप में चर्चा शुरू हुई । किशोरी नियुक्ति से जवान इस्त्री और और महिला सपने शिकायत की । सर्वप्रथम तो हर कोई चुप रह शर्म के कारण । लेकिन जब सब की समस्या एक ही निकले तब खुलकर महिलाओं ने शिकायत की । कुछ तो बताया कि उनकी कई बार पहनती और बडा हुई है । मीटिंग में सर्वप्रथम कॉलोनी की फेल कर समिति के अध्यक्ष सरबजीत ने अपना सुझाव रखा हूँ कि कहीं के काम किसी दुकानदार तो नहीं हो सकता । वो चोरी करता हूँ ताकि उसकी बिक्री बढेगी । चोरी होने पर महिलाएं अंडरगारमेंट खरीदने उस दुकान पर जाएंगे ऐसा मैंने अनुमान लगाया है । इतना सुनते मीटिंग में हंगामा हो गया । अंडरगारमेन्ट्स दुकानदार चरण जीतने अध्यक्ष सरबजीत की गर्दन पकडते । फॅमिली छोडूंगा तो मेरे ऊपर मिलता है । बडा इल्जाम लगाया तो इतनी मत कैसे हुई? चरण जीतने । सरबजीत को जमीन पर पटक दिया और लाखों से जमा हैं । लोगों ने दोनों को अलग कराया । चरणजीत मैंने तुझे थोडी बोला । सरबजीत खाते हुए बोला और किसको बोला? आपको मालूम है कि कॉलोनी में सिर्फ एक अंडरगारमेंट की दुकान है और मेरी है सीधे सीधे तूने मुझे चोर बोला है । मैंने आज तक अपनी बीवी के अंडरगार्मेंट को आदमी लगाया और अंडरगारमेंट हो क्यों आप लगाऊंगा । रंजीत ने सरबजीत को धमका दिया । मीटिंग में झगडा शांत होने पर एक सज्जन जनकराम शर्मा था बोलने होते और उन्होंने चौंकाने वाले तथ्य बताए कि ये समस्या इस कॉलोनी की नहीं बल्कि विदेशों की भी । उन्होंने इंटरनेट पर शोध किया है की जो इंसान ये काम करता है मनोरोगी होता है और महिलाओं की पाॅच रहता है हमारे गांव यूरोप जहाँ सोसाइटी एक कंपनी है वहाँ भी ऐसे चोर पुलिस ने बाॅंटी चोर ब्रा और पैंटी अपने घर में ही अलमारी में सजाकर इस प्रकार रखते हैं जैसे कोई इनामियां ट्रॉफी हो, गंभीर समस्या है । शर्मा ने जो बात बताई सभी चौंक गए की समस्या केवल उनकी कॉलानी की नहीं अंतर्राष्ट्रीय है । हर जगह ऍम चलाने के बाद बाजार में नहीं बेचने बल्कि घर में सजा कर सकते हैं और इसके जरिये कल्पना की ऊंची उडान भरते ऐसे छोर देखने में बोले वाले होते हैं परंतु जवान बहुत ज्यादा होता है । बहुत सफाई से फॅसा अक्सर कुमार होते हैं । तलाकशुदा शादीशुदा आदमी ऐसी हरकते नहीं करते हैं । सभी लोग शर्मा के मुद्दे बताओ जानकारी की तारीफ करने लगे । शर्मा ने महिमा ही होती है । मीटिंग में निर्णय लिया गया कि महिलाओं को थोडा सतर्क रहना होगा और महिलाएं उस चोर को पार कर सकती हैं क्योंकि पुरुष ऑफिस दुकानों को चले जाते हैं । छोटे बच्चे भी मदद कर सकते हैं क्योंकि वे बाहर खेलते हैं और कपडों पर हजार रख सकते हैं कि कोई पुरूष महिला कपडे उतारता है तो उस पर नजर रखें । मीटिंग के बाद निर्मला ने निर्मल से पूछा क्या तो मैं इस प्रकार के चोरों की जानकारी है । आज पहली बार फॅमिली के बारे में मालूम हुआ है तो आज तक ट्वेंटी चोट नहीं सुने । निर्मल ने भी अपनी अज्ञानता दिखाऊँ मीटिंग के बाद पंद्रह दिन बीत गए और कोई अप्रिय घटना नहीं घटी । किसी की फॅमिली नहीं हुई है । हर महिला सतर्क ठीक है । पंद्रह दिन बाद महिलाओं की चौकसी कुछ भी हुई चौकसी में जरा सी लापरवाही से फिर पेंटिंग राजौरी होने शुरू हो गए । महिलाओं के माथे की लकीरों में चिंता फिर छलकने लगे । एक दिन दोपहर में सलोनी अपने स्कूटर पर कॉलेज से घर वापस आ रही थी । गली के कोने पर स्कूटर की रफ्तार कम की । अचानक से उसके टाॅपर्स रोकते कपडों पर पडी एक मार्क कपडों के समीप नजर आया हूँ । उस आदमी ने तेजी से पेंटिंग अपनी जेब में डाल दिया और दूसरी पैंट पर हाथ साफ कर ही रहा था कि उसकी इस हरकत तो सलोनी ने देख लिया बाॅधकर का जो और जो और ऍफ से निकालकर पास की झाडी में भेज दिया और आराम से आगे चलने लगा जैसे कुछ हुआ ही नहीं । सलोनी ने स्कूटर की स्पीड देश की और उस आदमी को टक्कर में नहीं स्कूटर की टक्कर से वो आदमी लडखडाकर गिर गया । होने की आवाज से दो महिलाएं अपने घरों से बाहर निकली । सबने उस आदमी को दबोच लिया । सलोनी ने स्कूटर को स्टैंड पर लगाया और कहा ऍम डालते देखा मेरे शोर मचाने से फॅमिली में भेज दिया तो महिलाओं ने साथ में को दो तीन लाते जमा थी । जब उसका चेहरा देखा तो हैरान हो गए । वो शर्मा था जो मीटिंग में विदेशों में ट्वेंटी चोरों के किस्सा सुना रहा था । वही कॉलानी का पैंटी चोर निकला हूँ एक महिला जो शर्मा पर लाख उसे जवाब ही थी वो अंडरगारमेंट्स दुकानदार चरण जीत की पत्नी दी शर्मा को देखते उसने शर्मा का गला पकड लिया हूँ तेरे को नहीं छोडना ॅ और बदनाम हो गए हम की बिक्री बढाने के लिए चोरी करते हैं मर जाऊंगा ऍम किसी के काम नहीं है उसकी धुनाई होती रही है सभी महिलाएं एकत्रित हो गए पचास महिलाओं के आगे अकेला शर्मा हो अधमरी हालत में सडक पर आधा गिरा बढाता हूँ

08 रसरंग -बड़े बोल

बडे बोल बडे बडे कहकर थक गए परंतु कोई सुनता ही नहीं है । हर व्यक्ति को अपनी चादर में रहना चाहिए । पैरवी चादर के भीतर रखने चाहिए और न बतला बोलना चाहिए । ये जो नपा तुला बोलने की बात है, ना बहुत महत्वपूर्ण है । कभी भी बडे बोल नहीं बोलना चाहिए । जो बोलेगा उसके दुष्प्रभाव से बचने का कवच उसे स्वयं भी तैयार करना होगा । बचपन में कभी नाई की दुकान नहीं गए । उस समय नाइट घर आते हैं । शिव कटिंग जैसे हजामत कहते थे । सभी को घर पर होती थी । नाईको कहना होता था कि उस दिन आना । फिर घर में सभी के हजामत हो जाती थी । संयुक्त परिवार में ताओ चाचा, पिताजी, सभी भाई और उनके बच्चे लाइन में एक के बाद एक सभी निपट जाते थे । दो तीन घंटे लाइटें लगते थे । नई सिर्फ वाली नहीं कहता था तो हरफनमौला होता था । सभी विषयों पर बात करता था । राजनीति से लेकर व्यापार, सिनेमा और कुछ आपके घर के और कुछ दूसरों के घर की बात करके ही दम लेता था । घर घर जाकर पैनी नजर से सिर्फ बात ही नहीं करते जाते थे । उसके हर उस चीज पर नजर होती थी जहाँ आप सोच भी नहीं सकते । हैं । बच्चे जवानी की दहलीज पर कदम रखते हैं । नई चाचा रिश्तों की झडी लगा देते हैं । आधे रिश्ते तो नई ही करवाते थे । अब वो बात ना संयुक्त परिवार रहे कि नाई घर घर जाकर हजामत बनाए । थक हार का खुद की दुकान खोलने की जिसमें बनवानी हो खुद चलकर उसके पास आएगा दुकान पर रेडियो और टीवी भी रख लिया जो कतार में है रेडियो सुन लें टीवी देख रहे हैं समाचार पत्र नई की दुकान का अहम हिस्सा है । तसल्ली से पढे हैं अपनाई की दुकान मत गई है जनाब सलोन है क्या है चलो नहीं है पर काम वही पुराना हजामत, बाल काटना, शेयर बनाना और चैंपियन क्या क्या चार साल बातों का दौर चलता रहता है । किसी भी विषय पर बात कर लीजिए, पूरे हरफनमौला होते हैं या नाइट समय के अनुसार अब नई बोलना अपराध जनाब उनका भी कोई स्टेटस है आपने बार बार है फॅस नाम आप कुछ भी दे दो । काम वही पुराना है । मैंने एक काम उन के दायरे से निकल गया है और वो काम है रिश्ते जोडने का । अब सोच अब रिश्ते जोडने का काम बेचारे आजकल इंटरनेट ऍम दुकान के बाहर बोर्ड लगा ऍम बोर्ड पर रणबीर कपूर और शाहरुख खान के ऐसे फोटो लगे ऐसा सारे फिल्मी सितारे वही बाल कटवाने आते हैं तो कान में गैर का नेशनल लगा हुआ है । सतबीर दरवाजा खोला और सलोन के अंदर गया तो नाई काम पर लगे हुए हैं । एक नहीं किसी की शेयर कर रहा था और दूसरा एक बच्चे के बाल काट रहा था । एक सज्जन कतार में इंतजार कर रहे थे । सब्बीर खाली कुर्सी पर बैठ गया । कितना समय लगेगा तो उसी पर बैठ के सब ने प्रश्न किया टाॅपर पडी है टीवी का कौन सा चैनल देखना पसंद करते हैं । कोई चला देते हैं बस पांच मिनट आपका नंबर आ जाएगा । नाइन उत्तर दिया सब फिरने । वहाँ रखे अखबार को उठाया और पडने लगा । तभी पांच मिनट बाद जैसा खिलाडी ने कहा था छह बनवाने वाले सज्जन शिव करवाके चले गए और सतबीर कुर्सी पर बैठकर बोला बाल काटने कृषि हाँ ये बता फेशियल करते हो गया जी जनाब, ये सलोन है, आप अपने कीजिए ताबेदार तैयार लाइने सब्बीर को देखते हुए कहा सब्बीर पहली बार बनाया था अगर काम में मजा नहीं आया तो देख लोग पेमेंट नहीं दूंगा कबीर ड्रॉप डालने के लिए वैसे भी सब को ज्यादा बोलने और वो भी बात को बढा चढाकर बोलने की आदत थी इनके का पहाड बनाना उसके बाएं हाथ का खेलता नई ने मन ही मन सब्बीर को दो चार माँ बहन की बत्ती बंदे गालियाँ दी के बडा पेमेंट न देने वाला नई से भी कोई बचकर निकला है । चेहरे के हावभाव से प्रकट नहीं होने दिया । चला अब जैसे आपकी इच्छा पूरी तसल्ली के बाद पेमेंट करना पडा सप्रीम अगर नाइन बाल काटने शुरू की क्या नाम तुम्हारा? सब्बीर ने नई से पूछा समशाद नाइन का मानना पडेगा कि नहीं आज भी हरफनमौला है । बहुत सफाई से बाल भी काट और साथ साथ बातचीत होती रहती है आपका नाम कबीर कहते हैं जब आपको बडा ढाका ना मैं आपका ॅ नहीं है । जैसा नाम वैसा काम जो भी काम करता था कडी करते हैं । कबीर ने अकडकर का जी मैंने तो पहले बहुत लिया था जैसे आपने ॅ बीमारी सभी एकदम ढाकर एंट्री थी । नई शमशाद ने कानून को हाथ लगाते हुए कहा आई झूठ ना बुलवाये साई भक्त लगते हो आपका मालिक ऍम और वो नाम है साईं बाबा कर तो हम देखेंगे मैं तो साडी का पक्का बात जो सब्बीर ने नई शमशाद देगा । आपने पहले देखा नहीं । शायद पहली बार हमारे सलोन पर आए शमशाद ने बाल काटते काटते बातों का सिलसिला शुरू किया । बिल्कुल ठीक पहचाना ऍम में आया हूँ आने वालों पर पैनी नजर रखते हो । सतवीर कुछ व्यंगात्मक अंदाज में कहा सर्च तभी ग्राहकों को हम व्यक्तिगत सेवा देते हैं । आपके इन समय बताइए आपके लिए उस समय कुर्सी का आरक्षण हो जाएगा तो आपके समय पर आपके घर भी आकर आपकी सेवा में तत्पर रह गए । तब ही रखना पडता है शमशाद ने सब्बीर के वालों के कटिंग समाप्त करते हुए गा बाल तो ठीक हूँ अब शेयर करता हूँ ऍम करनी शुरू की अब ये रिहाइश कहाँ रखी हुई है हम साथ में बातों का सिलसिला आगे बढाया ऍम वहाँ तो सर जी बडे महंगे घर हैं मकान कहकर तो वही न करूँ कोठियां ऍम दर्जी वो भी बडी बडी वाली है शमशाद ने चापलूसी पांच सौ दस से कम कोई कोई ही नहीं हुआ सब फिर मैं आपसे कहा बिल्कुल सही पर मारियो सब्जी बडे आदमी वहाँ कोठा खरीद सकते हैं । खास आदमियों के खास कॉलोनी बडे प्यार से बनाएंगे । सरकार में आ जाता है वहाँ से गुजार का । हम तो कोटियां देख कर ही खुश हो जाते हैं और आपको तो वहाँ रहकर स्वर्ग आनंद आता होगा हूँ । बिल्कुल ठीक समझा । ॅ पूरा स्वर्ग । शमशाद ने कहा था ऍम आप ऍम तो करवाना है चलो अब हमारी अच्छा यार कलर करने की आदत कर दूँ । हमारी बात भी मान लेते हैं । काम तसल्लीबख्श कर रहा हूँ । ऍम काम अच्छा करते हो । मजा आ गया । कितने पैसे हुए सब सात सौ पचास ऍम करती है तो शमशाद ने बाकी दो सौ पचास वापस किए तो शर्ट का कॉलर ऊपर करके सतबीर ने कहा कि रख लो इनाम है । काम अच्छा है तो नाम बनता है पूरा गया नाम का काॅलम से बाहर आ गया कितना इनाम । शमशाद को आज पहली बार मिला था । कई सालों से नई का काम कर रहा था । आज पहली बार इतना बडा इनाम मिला । इनाम पाकर शमशाद फूला नहीं समा रहा था । उनके दूसरे नाइंटी सतबीर के बारे में बात करने लगे कि सब बीस करोड ऍम उसको एक बीमारी थी । वो बडे बोल बोल देंगे । अधिक बढा चढाकर बात करने की आदत थी । आपने स्टेटस को बढा बताने में शान समझता था । सब्बीर एक साधारण परिवार से था । गांव में खेती वाली जमीन ऍम काटने के लिए जमीन खरीदने शुरू की तो अच्छे दाम मिल गए पर पूरी रकम सब्बीर को नहीं मिलेगा दो भाई और पिता हूँ चार ऐसे हो गए जमीन रखने से पहले सब फिर खेती में पिता और भाइयों का हाथ बटाना था । जमीन रखने के बाद सब्बीर अपना हिस्सा लेकर शहर आ गया और प्रॉपर्टी डीलर का काम चालू किया । न्यू मॉडल कालोनी शहर की कीमती रिहाइश के रूप में विकसित हो रही थी । यही सब फिरने कोठी की बरसाते मैं किराए पर रहना शुरू किया रहता तो किराये पर था वो भी कोठी की तीसरी मंजिल पर बनी बरसाती पर पर देखा था । ऐसा था की आपने खुद की कोठी जिससे मिलता आपने अमीर होने की छाप छोडती हूँ । छतबीर प्रॉपर्टी डीलर का काम कर रहा था । काम के सिलसिले में जब भी किसी से भी था सबसे पहले अपनी मेरी के चार से करता फॅमिली का पता और ऊपर से ऑडी कार में घूमना बहुत चल सबेर कि अमेरिकी चर्चे चारों तरफ बडने लगे थे । राई का पहाड सब्बीर बहुत बनाया था पहाड का हिमालय पर्वत लोगों ने बना दिया । छतबीर के दो बच्चे हैं एक लडका साठ साल का और एक लडकी बार साल की । दोनों को सब फिर अच्छे महंगे स्कूल में दाखिला करवाया । ऍफ का काम भी चल निकला हूँ । अलग जितना सब्बीर दिखावा करता था उतना सब के पास था नहीं । सतबीर की पत्नी सीमा भी बाद छोडने में सब से दो कदम आगे चल रहे थे । महिला मंडली और आस पडोस और स्कूल में अमेरिकी पतंग बहुत ऊपर चढा दी थी । एक प्रॉपर्टी के सौदे में सब को बहुत फायदा हुआ तो सौदे में तो और ऍम थे पर सब्बीर कांटे के मुकाबले में सौदा हथिया लिया । एक मोटी रकम कल आपने सब्बीर के दिमाग को साथ में आसमान पर पहुंचा दिया । अमेरिकी चर्चे और अधिक होने लगे । संसार में पाए जाने वाले प्राणियों के भिन्न देने जातियां बजा दिया होती है तो एक आपको अनेक मिल जाती है । हो जाती है अच्छी लगती है । कुछ इंसान लक्ष्मी का छुपा कर रखते हैं । जितनी बैठे को किसी को भनक नहीं लगने देते हैं की कितनी लक्ष्मी के स्वामी पांच संभाल कर रखते हैं । ऍम ठीक करते हैं । चंचल स्वभाव के लक्ष्मी का दूसरे के घर चली जाये पता ही नहीं चलता । इसलिए तिजोरी में मोटे मोटे तले लगा कर रखे जाते हैं पूरा हफ्ते के लिए और बच्चों होते पडपोतों के लिए जितनी अधिक लक्ष्मी छोडी जाए कम ही लगती है । खूब पूजा करते हैं । कुछ इंसान इसके विपरीत होते हैं । लक्ष्मी का दिखावा करते हैं । फॅमिली का खूब इस्तेमाल करूँ, कल की चिंता नहीं । किसने देखा अगर जो आज और आज मैं इससे पहले के लक्ष्मी कहीं और अक्सर हो । जो लोग अंत में एक और तो जाती होती है उसमें सब फिर जैसे पुरानी पाए जाते हैं । बल्ले हो या ना देखा वह खूब करते हैं । बढा चढाकर लक्ष्मी का प्रदर्शन करते हैं । आपने बातों चमक धमक से दूसरों को प्रभावित कर देते हैं कि खानदानी आमिर सर हुई है और कोई दूसरा उनका मुकाबला नहीं कर सकता है । से उनके अंदर काम काम नहीं होता तो खोखलापन होता है । झूठी शान में जीना उनका मकसद होता है । क्यों जीटॅाक किसी से नीचा दिखाना नहीं जाते हैं । हर किस से आगे देखना चाहते हैं, उनके बदन में खुजली होती रहती है तो कुछ ले मिटटी अहंकार से छोटी शांत है फिर भी इसे हो चलेगा शिकार ये लोग अपने रिश्तेदारों से दूर रहते हैं क्योंकि उनको उस प्रजाति के अंदर की जानकारियां होती हैं और अपनी छोटी शान की छाप नहीं छोड सकते हैं । या फिर काम से शहर रहने लग गया तो रिश्तेदार नहीं, जो कुछ करेगा दूसरा सच्ची मानेगा । जब तक आप उनको छोटा साबित नहीं कर सकते हैं । उनका हर कथन, सत्य वचन उनके वचनों को आप झूठा नहीं कह सकते हैं और उस प्रजाति का हौसला बढ जाता है और अधिक उन को सच में बदलने के लिए । एक दिन सब्बीर सालो में छह बनवाते समय नई शमशाद के सामने अपने स्वयं का कुछ काम कर रहा है । तभी एक्सॅन और अपनी बारी का इंतजार करने लगे । समाचार पत्र पढते हुए कान में सब्बीर के वजन गूंज रहे थे । सब्बीर जब सलाह से बाहर निकला तब विसर्जन शमशाद की कुर्सी पर बैठा है और बैठने शमशाद से पूछा इस चीज के बारे में विस्तार से बताऊँ कलाम साहब बडे दिनों में दिखाई दिया हम । शायद मैं खुशामद करते हुए पूछा मेरी मत पूछ तो मुझे बताइए । अपना आना जाना तो लगा ही रहता है तो ससुराल जा होता । बाहर की दुनिया से कट जाते हैं । इस चीज के बारे में बताओ । शमशाद ने विस्तार से सब्बीर की खबर बताए । इस बार तो मोटा हाथ लगा हम लंगोट वाले गी । तभी का उनकी भाई हथेली क्योंकि जारी है इस वजन का नाम बंटू है । छठे बदमाशों में गिनती होती है चोरी, डकैती और अपरान् के कई मामले दार ना बन्दों के नाम ऍम इसलिए बन्दों का तकिया कलाम कसम लंगोट वाले की है । अपहरण के एक मामले में छूट कर दो दिन पहले सरसवाल नगर की वापसी हुई है और आते बाई हथेली खुजला गई । बिना सबूत के कोई केस नहीं बना । कौन घंटों के खिलाफ गवाही देंगे जहाँ अपनी बीवी और बच्चों के सबको प्यारी होती है धमकी मिलता है सभी कबाब कर गए आप करा रहे हैं शमशाद सतवीर की पूरी गतिविधियों की खबर चाहिए बाकी मैं देख लूंगा आप ये काम तो कर दूंगा परसन तु त्योहारों के विकास होते हैं या नहीं? अड्डे परवाह होंगे । चाॅस आते हुए ऍम चला गया । अंशदाई के काम के साथ साथ पनटोका मुखबिर था । इलाके की सभी खबरें घंटों तक पहुँच जाता था । पहले भी नहीं हर घर की खबर रखते थे । आज भी हर ग्राहक की जो उनके सलून में आता था । सतबीर की सच्चाई से सतबीर ही जानता था । पाल ले जाने कमतर पर ठाटबाट किसी रही से कम नहीं । हर किसी पर अपनी बेहतहाशा दौलत की छाप छोड रखी थी । ये झाक शमशाद ने बढा चढाकर बन्दों को बताइए । रात शमशाद घंटों के पुराने अड्डे उसके घर गया । घंटों के साथ उस की महबूबा सलमान थी । कॅश लेता था सलमान उसके लिए शराब का पैक बना रही समय लगभग साढे नौ का । तभी शमशाद वहां पहुंचा दरवाजे पर डोरबेल बजाए सलमान से शराब का गिलास लेते हुए बंद होने का बोल दरवाजा शमशाद होगा बहुत यकीन से कह रहा हूँ जो भी कहता हूँ करता हूँ । प्रिया यकीन के साथ पूरे आत्मविश्वास के साथ चलना उठे और दरवाजे के खोल से पहले देखा । जब लेकिन हो गया के शहंशाह दिया तो दरवाजा खोला ऍम अल के लिए रुका पर कर घंटों के पास मुद्दे पर क्या बनाया ऍफ कर रहा हूँ कुर्सी पर आराम से बैठो फिर बात करते हैं हम शायद कुर्सी पर बैठा हूँ हूँ ऍफ बना हूँ मैं साले की आदत जानता हूँ, ऐसा खुलेगा नहीं है । कल मैंने पहले बनाकर शमशाद को दिया शमशाद हुसैन की परिसर ना को देखता रह गया समाचार लगता आज तो अपने आप है बडवानी इतना जोर के मत दायक गौडिया निकाल ऍम साहब के कान मरोडते हुए का जब याद शर्मा गया और किसी अगर बोला मेरी क्या मजाल के चलना बहन को गलत ने कहा से देखो बहुत दिन बाद देखा आज तक कयामत हारी है बस कयामत देख रहा था लौंडे अगर कयामत देखनी हो तो फॅमिली और मुद्दे बनाया जाएगा । जिसके लिए बनाया वो सलमान जी अब क्या बरामद और मेरे में कोई फर्क नहीं इस्काॅन उसके बच्चा उठाने । शमशाद ने सब्बीर के बारे में पूरी बात बताई सब पेट की कोठी और बच्चों के बारे में कैसे स्कूल में पढते हैं कबीर कि अमेरिका चर्चे कुछ बढा चढाकर बताया दुनिया का सोलह दो से तीन के पास बात जाती है तो चलता रहता नहीं छूटना चाहता है ऊपर से सब फॅमिली पहले आया हुआ था अपील के बारे में बातें ऍम शायद को कहा चलना उसके बच्चों का स्कूल दिखा देते हैं घर बता दें उसकी पत्नी की किट्टी पार्टी में सलमान खुद पहुँच जाएगी जो काम सरकार हम तो आपके दावेदार मालिक उधर हाथ प्याज कर कहकर शमशान अक्सर थोडा हो जाए अब एक्सीनॅान चाहिए ऍम बात करते हैं थोडी देर तक शमशाद की आंखों में आंखें डालकर चलना को । आवाज भी जब गर्म यार इसके वरना नियत बिगड जाएगी । इसके दस हजार रहे हैं । बाकी भगवान अगर मोटा निकालेंगे और मोटा दूंगा जनतानगर मंटो ने शमशाद की पीठ होगी दस हजार जेब में होते हुए हल्की मुस्कान के साथ शमशाद ने विदाई भी । शमशाद के जाने के बाद बंटोरने सलमा को अपनी बाहों में भरते हुए का ठीक है कल से अपनी ड्यूटी सवाल हूँ ये काम चल से जल्द करना होगा । बाॅधकर दिया कुछ सालों का प्रबंध सब्बीर करेगा लक्ष्मी चंचल हम जाने उसके घर बनाने का समय आ गया तो जरूरी नहीं बन सकेगी । लक्ष्मी करूँ बॅाल मंद मंद मुस्कराने लगा । सलमान हो गई और बॅाल मुस्कान में भागीदार बन गई । अगले दिन से सलमान ने सब्बीर की पत्नी सीमा से नजदीकियां बढानी शुरू की । सीमा सर पे से दो कदम आगे रहती थी । अपनी पढाई में उसने सब को पीछे छोड रखा रहा । सलमान ने सीमा और उसके दोनों बच्चों की गतिविधियों पर पूरी नजर रखी हुई थी । तब क्या और कहाँ करते हैं । सलमान ने सीमा के साथ दोनों बच्चों के साथ अच्छे घनिष्टता कर ली । ऍम शायद ने सब पर नजर रखी हुई थी । एक महीने बाद दोपहर के समय स्कूल से वापस आने का समय हो गया । छतबीर के कार्य में स्कूल से दोनों बच्चे बैठे । बंटोरने सब्बीर की कार के दो टायर पंचर कर दिया फॅार परेशान । तभी प्लान के मुताबिक सलमान भाई और ड्राइवर को कहा कि वह कार के टायर ठीक करवा ले, बच्चों को वो घर छोड देंगे । सलमान जी को बच्चे आॅफर सभी जानते थे ड्राइवर कार्ड टायर ठीक करवाने लगा । बच्चे सलमा के साथ कार में बैठकर हूँ बच्चे घर नहीं पहुंचे घर पहुंचकर ड्राइवर ने बताया कि बच्चे सलमा के साथ शाम तक सीमा ने कोई ध्यान नहीं दिया और पार्टियों में व्यस्त रही । आपको भी बच्चे घर नहीं आया तो सलमा को फोन मिलाया पर उसका फोन बंद बिना । सलमा का पता सीमा के मित्र मंडली में किसी के पास नहीं था । चारों तरफ हाथ पैर मारने के बाद पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई । सब फिर और सीमा के होश उड गए कि सलमा के साथ बच्चे कहाँ है बच्चे क्योंकि सलमा को जानते थे भी बेफिक्र । प्लान के मुताबिक सलमा बच्चों को दूसरे शहर बन्दों के ठिकाने पर ले गई । बच्चों को पूरी तरह से अवगत मिल रही थी । तीन दिन तक कोई खबर नहीं । चौथे दिन फिरौती का होना है हूँ । पूरे पांच करोड पांच करोड की मांग सुनते सतबीर और सीमा गया हो । दोनों सोच रहे थे कि क्या करें । उनको विश्वास नहीं होता था कि सलमान अपहरण में शामिल है । समाज करोड की तो खाती नहीं थी । हिसाब लगाया तो एक करोड से अधिक जुटानी सकते थे । पुलिस में खबर की तो पुलिस हरकत में आ गयी । फोन कॉल की लोकेशन को पता करने के लिए टेलीफोन कंपनी को कहा । उधर मंटो ने साथ घाट का पानी दिया हुआ था तो तीन घंटे बदल लिया । बच्चे ये सोच कर खुश की आंटी के साथ घूम रहे हैं । बच्चों के अपहरण पर सब फिर आसमान से जमीन पर आ गया कि उसके पास कभी भी इतनी रकम नहीं रही थी । गांव की जमीन पडने पर एक करोड उसके इससे आया । इसमें से काफी रकम अपने खुद को अमीर दिखाने में खर्च हो गई । प्रॉपर्टी की दलाली में कुछ बनाया पर पांच करोड तो खुद को बेचकर भी नहीं जुटा सकता था । शमशाद सतवीर पर पूरी नजर रखे हुए हैं । पल पल की खबर बन्दों को पहुंच जाती थी । बंदो ने सब को धमकी दे की पुलिस को पीठ में डालने पर दोनों बच्चों को खत्म कर दिया जाएगा । पुलिस ने तब तक बाॅधना शुरू किया । बट दो बच्चों को मार कर फिरौती की रकम से हाथ नहीं होना चाहता था । कबीर कि असलियत सबको मालूम हो गए । दोस्त हूँ परिवारजनों और आस पडोस में सपने छत्तीस और सीमा को दोषी कुछ आपने बनाया जाल में फंस गए । परिवार में उसके भाई बहन रिश्तेदारों ने उसे सलाह दी कि पुलिस के चक्कर में ना फंसे नहीं । बच्चों से हाथ धोना पड जाए । अगला फोन आए तो अपनी मरी हालत बताकर बच्चों को छोटे वाले बदहवास हालत में साॅस । कुछ सोच नहीं रहता है । शमशाद एकदम सब्बीर के अगर हालात का मुआयना करने गया । आप आपको बहुत दिनों से देखा नहीं तो ज्यादा वेट का हालचाल पूछता हूँ । सतवीर दहाडे मारकर होने लगा । उसने सबकुछ शमशाद को बताया जनाब पहचान की सलामती चाहता हूँ । कुछ करूँ डूबते को तिनके का सहारा होता है । कुछ तो सलाह दूंगा मुझे अपने दोनों बच्चे चाहिए मेरी मदद करो । शमशाद मेरे सलून पर बंटू आते हैं । अभी अभी ससुराल से बाहर आए हैं । वो तो उन से मिलवा दूँगा । बच्चों को सब पता होता है । एक दूसरे के साथ मिलना जुलना उठना बैठना तो समझ सकते हैं । कब मिल कर सकते हो । सभी उतावला होगी उसकी खोपडी में तुरंत बाद बैठ गई की पुलिस कोई मदद ना कर सकेगी । कोई छोटा बदमाश शायद समाधान कर सके । शमशाद ने सब्बीर की मुलाकात घंटों से करवा दी तो सब देर की आर्थिक स्थिति भाग रहा था और सब फिर एकदम अनजान था कि पंडो नहीं उसके बच्चों का अपहरण किया है । सब फिर भाई ससुराल में बैठकर कई गैंग ये काम करते हैं । पुलिस वाले उनसे मिले में होते हैं । पुलिस तो उम्मीद मत रखना । मैं पता लगता हूँ कि कौन सा गरम इसके पीछे इसमें आप अपहरण एक किलो करता और ये पेट दूसरे को देता है तो तीन तीन, चार चार किलो शामिल होते हैं । आप का ही सहारा है मदद कीजिए । रोते रोते सब्बीर घंटों के पैरों से लिपट कर के रहने लगा । आपका तरफ समझता हूँ । मैं भी शीघ्र मामले की तह तक पहुँचता हूँ । मंटो ने सब का जख्मों पर मरहम लगाएगा । सब फिर करोड रुपये के आॅटो के कदमों में रखते हैं । फॅमिली पकडते हुए सब फॅमिली जाए रखा और उसने ये सुनिश्चित कर लिया के पुलिस सब फिर दूर रह रहा है । तब दो दिन बाद ऍम मैंने सब मालूम कर लिया । ये काम जिस कहने किया बहुत डालेंगे । पुलिस के पास गए तब तो बच्चों को बचाना मुश्किल है । ऍन लेंगे और बच्चे भी नहीं देंगे । नहीं नहीं हम हम हम पुलिस को कुछ नहीं करेंगे । हम हमारे बच्चे चाहिए । सब की राॅड कर गिरगिट आने लगे । पूरी तसल्ली करने के बाद बंट तो शाम को दोनों बच्चों के साथ सतवीर के घर आया । फायदा दिवाली बनाई है । मिठाई खुलवाओ आपके दोनों बच्चे आपके सामने आ गए को वापस पाकर तो ना सब और सीमा के आंखों में आंसू आ गए । अगले दिन सत्तर अस्सी मैं अपने बच्चों के साथ वापस काम चलेगा । दोनों को बडे बोल बोलने का सबका मिल गया । रात का समय था, ऍम में छोड रहे थे तभी डोरबेल बजी आ गया । कबाब में हड्डी होगा । दरवाजा खोल दरवाजा खोलने पर शमशाद अंदर आया और सब चुकाकर कान को जाने लगा । लेकिन बोला कुछ नहीं बोलियो कुछ मत आएगा । पहाड बनाकर मुझे बात बताई । मजा नहीं आया । हाँ सोच रहे हैं । एक मिला तो मैं क्या कर सकता था । फॅमिली हवा उडा कर रखी थी और कोई सच मानता था । समशाद सर झुकाए कान को ज्यादा रहा । ज्यादा नहीं । थोडे में गुजारा फिल्मा हमारी चले । पापा निकालकर नजराना बैठ कर पूरे एक लाख है । अपने लाॅन्च तो रखना ही पडेगा ना । आया है मालिक क्षमता आपके थांबेदार हैं । आगे भी मौका देते रहना कहते शमशाद ने लेवॅल करने लगा । सलमान बन तो एक दूसरे की राहों में कहते हैं और सीमा के बडे बोलों की सजा पूरी जिंदगी तो करते रहे

09 रसरंग -माँ वापस आ गयी

माँ वापस आ गई । सुधीर और सीमा अस्पताल में लेबर रूम के बाहर इंतजार कर रहे हैं । दोनों चुपचाप लेवर उनके बाहर रखे मैच पर बैठे हुए हैं । पुत्रबधु ले पर रूम में हैं तो रुक रुककर एक दूसरे को देख कर मुस्करा देते परन्तु कुछ बोलते रहेंगे । कुछ देर का बस और इंतजार जैसे लेबर रूम का दरवाजा खुलता और नर्स बाहर आती तो एक साथ पैरेंट्स से उठते हैं ना? मुस्कराकर कहती थोडा इंतजार और ऐसे अवसर पर हर व्यक्ति अधीर हो जाता है । कुछ पैसा ये हाल सुधीर और सीमा का भी हो रहा है । बेंच पर बैठे हुए इंतजार करते हुए सुधीर के मस्तिष्क में अनेक विचारकों मरने लगे । कुछ पल के लिए अतीत में चला गया । पिछले वर्ष सुधीर की माताजी का देहांत हुआ और उसके कुछ दिनों बाद पुत्रवधु के गर्भवती होने का समाचार मिला । सीमा को उसने तुरंत कह दिया था कि देखना मावा बताएंगे । सीमा मुस्कुराते धर्म समाज की मान्यता पर सुधीर को उस दिन विश्वास हो गया था की लडकी का जन्म होगा । उसके माँ उसके बेटे की पुत्री के रूप में जान मिलेगी क्या पक्का विश्वास है तो मैं सीमा ने पूछा । संपूर्ण शत प्रतिशत पक्का विश्वास लडकी का जन्म होगा । हमारी माँ हमारे पौत्री के रूप में फिर से इस घर में आएगी होते सुधीर में यकीन से कहा था तो तुम से अधिक प्रेम था इसलिए कह रहे हूँ सीमा ने चोट के लिए कोई बातें पत्नी का धर्म होता है । पति से नौकझोंक करने का मजे ले लो । मेरे से प्रेम कितना था? फिर कोई छुपाता है नहीं, एक छत के नीचे रहे थे । अभी उनकी तरह सुधीर ने बात कहते हुए सीमा का हाथ मजबूती से पंगा लिया । फिर भी पैंतीस वर्षीय छत के नीचे गुजारे । सीमा ने कहा पे बाहर के बाद पैंतीस बार बहुत लंबा समय होता है । तरह तो आज देखता हूँ तो ऐसा लगता है जैसे कल की बात हूँ जब हमारी शादी हुई थी और आज दादा दादी बन चुके हैं । समय पंख लगाकर उड जाता है । हमारे बहन के विचारों में मतभेद थे नहीं, जिंदगी है ये तो माता पिता के साथ वैचारिक मतभेद थे । पति पत्नी भी पूरी जिंदगी लडते झगडते एक साथ बिताते थे । तुम्हारे कहने का अर्थ है कि मैं तुमसे लगती हूँ, रोज नहीं कभी कभी तो धीरे जब सीमा को कहने के बाद देखा था उसके मुंह फुलाकर विरोध प्रकट किया । सुधीर उस कराता रहा कुछ बोला नहीं । हालांकि ये भी एक कटु सकते है कि हर रोज की नौकझोंक के बावजूद पति पत्नी पूरी जिंदगी एक साथ रहते हैं तो माता पिता के साथ वैचारिक मतभेद के कारण सुधीर का अपने माता पिता के साथ काम वार्तालाप होता रहा । एक घर में रहकर भी खास बातों पर ही भूल जाल होती थी । सुधीर शाम तक रहती का था । वो अक्सर सोचता था की उम्र के आखिरी पडाव में मनुष्य को शांत रहना चाहिए । तुरंत अंतिम सांस तक किसी भी मनुष्य का चरित्र नहीं बदलता है तो पैसे का पैसा रहता है और स्वभाव में रत्ती भर बदलाव नहीं आता । माता जी का हट वर्ष के उम्र में भी बरकरार था । उनकी चाहत अभी भी रही थी कि घर में सभी उनको सुबह शाम सलाम करें और हर कार्य की अनुमति नहीं । तरह तो ये संभव नहीं है । हर कोई अपनी इच्छानुसार जीवन व्यतीत करना चाहता है । चाहे वो उनका पुत्र क्या बहुत सभी को स्वतंत्रता चाहिए । अभी तो वर्ष पहले की बात है । सुधीर के पौत्र शुभ का मुंडन होना था । मुंडन कीतिथि निकलने के बाद सुधीर और सीमा माता पिता जी के पास पडपौत्र शुभ के मुंडन की बात करने का अम्मा शुभ का मुंडन हो ना नवरात्रि के शुभ दिनों में उसका मंडन करवाते हैं । सुधीर ने कहा दीक्षित के नीचे रहते उनके कार्यों में ये खबर पहले से भी शुभ का मुंडन होना है और उसके लिए तैयारी हो रही है । लेकिन उनको किसी ने कुछ नहीं बताया । इस बात पर माताजी बहुत नाराजगियों सुधीर पर बरस पडे । मैंने तो अपने हाथों में वाला है आज ज्यादा बन गया है । इसका ये मतलब नहीं कि माँ को भूल जाएगा, उसे पूछेगा नहीं । सारे काम अपने आप करना है तो मेरे पास क्या है? जवाब दे । पहले तो उसका माँ के मुख्य नाराजगी के बाद सुधीर के कलेजे में सीधे उतरे हैं परन्तु अपने स्वभाव के कारण चुका हूँ । अम्मा सबने मिलकर मंडन का आयोजन करना है । मैं अकेले नहीं कर रहा हूँ । मुझसे पूछ कर मुंडन कर रहा है । तीसरे वर्ष में मुंडन होता है । शुभ ढाई वर्ष का हो गया । नवरात्रि के शुभ दिनों में मुंडन करवा लेते हैं । जब सब कुछ पहले सकते हैं तब मेरे पास की वहाँ अम्मा नाराज हो गई । अम्मा बडों के आशीर्वाद के साथ ही शुभकार्य होते हैं । आशीर्वाद तब होता है जब बोलों से सलाह दी जाती है । मेरे से पूछ कर मुंडन कर रहे हैं जो आशीर्वादों माताजी के कटु वचन सुनकर सुधीर की बोलती बंद हो गए । किमाम मुंडन के शुभ अवसर पर टूट गई और को पवन से बाहर लाना तो मुश्किल काम है । सम्मान सब बच्चों ने करना है हमें तो आशीर्वाद देना मैं खुद कुछ नहीं कर रहा घर के पास । मंदिर में हवन के बाद मंडल दोपहर का खाना छोटा सा कार्यक्रम है । अपनी पार्टियां अपने पास रखा है हमने बहुत पार्टियाँ खाई नहीं चाहिए तेरी पार्टी खुद खाओ, सबको खिलाफ हूँ हमने नहीं खानी तरी पार्टी अम्मा सुधीर पर बस गई थी । सुधीर ने सीमा को चुप रहने का इशारा किया और कमरे से बाहर आ गया । बच्चों ने भी पूरी बहस सुन ली थी । कोई कुछ नहीं बोला । सुधीर अपने कमरे में आकर सीमा और बच्चों को संबोधित करता हुआ तय कार्यक्रम के अनुसार तैयारी रखो । पहले नवरात्र को मंडल होगा । रविवार का दिन है । दोपहर के समय लंच पर करीबी मित्रों और रिश्तेदारों को आमंत्रण दे दो । माता जी और पिता जी को बाद में देखेंगे । अभी शांत रहना है । सीमा चिंतित हो गई कि घर के बडे ही शुभ कार्य में सम्मिलित नहीं होंगे तब कैसा लगेगा और लोग क्या करेंगे तो ही रहे सीमा को समझाया कि दोबारा माँ के पास उसके जाने की हिम्मत नहीं तो माँ के साथ बहस नहीं कर सकता । आखिर पोशाक दिन भी आ गया । घर के समीप मंदिर में हवन खानदान के समय माता पिता दोनों उपस्थित हो गए । सुधीर को अच्छा लगा । माताजी रिश्तेदारों के साथ खूब बत्ती आ रही थी । सुधीर फॅमिली के शुभकार्य में माता जी ने किसी को कोई कटुवचन नहीं गए । शांतिपूर्वक मंडल संपन्न हुआ । देवर रूम का दरवाजा खोलते सुधीर वर्तमान में आ गया । नर्स के हाथ में एक नवजात शिशु को एक सीमा सुधीर तो एक साथ पैन छोडकर उठ खडे हुए तो लडकिया गोरी चिट्टी एक झलक दिखलाकर नर्स नवजात शिशु को नर्सरी ले गए । मैंने कहा था ना कि माँ वापस आएगी । सुधीर ने सीमा की ओर देखते हुए कहा अपनी मांगों गोद में खिलाना । सीमा ने हंसते हुए कहा तुम और सीमा बैंक से उठकर कमरे में बैठे हैं । थोडी देर बाद नक्सली गए और डॉक्टर से बात की और दूर से पौत्री को देखा । बच्चा तंदरुस्त है । नदी के घने वालों को देखकर सीमा ने कहा माँ के अंतिम समय तक रहने वाले हैं । सुंदर गौरी भी दी और हटी भी । बाल सफेद हो गए । थे पर मेरे वालों से अधिक घने दे नहीं नहीं सुंदर गौरी है और काले गाने बात होगी । माँ की तरह जरूर होगी । बच्चों की हट अच्छी लगती है । एक दूसरे की ओर देखते थोडा मुस्कराते हुए कमरे में आ गए । पीछे पीछे नर्स नानी को लेकर आई सीमा ने नंदी को कोर्ट में लिया । सुधीर बनने के नए लक्ष्मा जैसे ठीक है मुझे तो माँ की हूबहू कॉपी लग रही है । माँ कहती थी कि उसने हमें पाल के बडा किया है । अब हम उसे पाल के बडा करते हैं तो अभी अपना के रूप में माँ को देख रहा था ।

10 रसरंग -मौसा द ग्रेट

मौसा द ग्रेट आजकल की भागदौड के जीवन में परिवार की शादी में जब सभी रिश्तेदार एकत्रित होते हैं, उसका समय ही कुछ ज्यादा होता है । रमाशंकर और उमाशंकर के मौसेरी बहन की शादी मुंबई में दोनों भाई सब परिवार शादी में सम्मिलित हुए है । हस्ते खेलते नाचते यहाँ संपन्न हुआ है । वहाँ के दो दिन पश्चात रमाशंकर और उमाशंकर ने भी परिवार समेत दिल्ली के लिए प्रस्थान किया । रमा घुमा तो बहुत अच्छा किया । जैसे परिवार व्यवहार में आए । एक लंबे अरसे के बाद तुम से मिलना हुआ । मेरा भी दिल्ली आना नहीं हुआ और तुम्हारा भी मुंबई आना नहीं हुआ । तुम सबसे मिलकर दिल खुश हो गया । मौसा जी ने रमाशंकर और उमाशंकर से विदाई के समय का मौसा जी अपनी बहन की शादी में भाई ना पहुंचे तो भाई पर लाना है । आप तो जानते हैं की आज कल हर किसी की लाइफ रॉकेट की स्पीड से चलती है । शादी में स्पेक्ट्रो कर आपस में जो मिलकर जो खुशी हुई अब मैं सोचता हूँ कि हमें जीवन की गति को थोडा काम करना चाहिए । रमाशंकर ने मौसा जी को का है आ रहा है तेरी बात में दम है तो छह मौसाजी चलते हैं । समय से पहले स्टेशन पहुंचे तो बढिया है । उमाशंकर ने मौसा जी से जाने की अनुमति मांगी । बिल्कुल समय से निकल कर स्टेशन पर पहले पहुंचने में मलाई मुंबई की सडकों पर ट्रैफिक जाम भी रहता है । मौसा जी से गले मिलकर सभी बस में मैंने चालीस आदमियों के लिए स्टेशन जाना है तो बस का प्रबंध किया गया था । मौसा जी भी उन को स्टेशन छोडने गए । रमाशंकर और उमा चलते अन्य रिश्तेदारों के संग राजधानी एक्सप्रेस से मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं । कुल चालीस जनों के दल का आरक्षण दो अलग अलग कोच में हुआ । मौसा जी ने बहुत मेहनत की । शादी में हलवाई लगे हुए हैं । घर का खाना साथ में जाओ, तेल का खाना बेकार होता है । आदेश खाना छोडकर बेकार बासी खाना क्यों खाते हो लेकिन सब ने मना कर दिया हूँ कि पहले सामान बहुत है । चालीस आदमियों के खाने के डिब्बे संभालेगा कौन हैं? मौसा जी ने किसी की नहीं सुनी और खाने का एक बडा गार्डन भी सामान के साथ साथ रेल में और अपनी देख रेख । मेरे चार तरह के सब्जी, दाल, चावल, पूरियाँ, रोटियाँ, चटनी, अचार और मुरब्बा सभी भरपूर मात्रा में रखवाया । कमा घुमा खाना देखेगी । मैं बनाया चार दिन तक खराब नहीं होगा । सफर की थकान हुई जाती है, रेल में नहीं होगा तब घर जा कर खाते हैं । कल खाना बनाने के छोटे कहकर मौसा जी ना किसी की नहीं सुनी और सभी जनों को रेलवे तसल्ली से बैठाकर तेल के प्लेटफार्म पर छोडने पर ही स्टेशन से बाहर है । रेल चल पडी बच्चे एक स्थान पर एकत्र होकर अंताक्षरी खेलने लगे । महिलाएं एक साथ बैठकर गपशप करने नहीं । रमाशंकर हर उमाशंकर सामान को सीटों के नीचे से रख आए थे । सीटें दो कोच में आरक्षित थी लेकिन बैठे एक साथ एक ही कोच में नहीं दूसरे को उसमें सिर्फ उमाशंकर अपनी पत्नी और ऍम खाली सीट पर प्रसार का प्लेट का टिकट चेकर को टिकट भी दिखा नहीं लेकिन चक्कर को सोलह टिकट चक्कर वाली यात्री का उमाशंकर ने स्थिति स्पष्ट की । चौबीस सीट दूसरे कोच में और सभी वहीं रात के समय होने के लिए सभी सीटों पर आएंगे । तब तक यहाँ और वहाँ आना जाना लगा रहेगा । टिकट जाकर शरीफ था उसमें कुछ कहानी और चुपचाप चला गया लेकिन दूसरे कोच मैं जहाँ पूरा परिवार बैठा था वहाँ का टिकट जाकर दूसरा था और दो बहुत खडूस है । चौबीस टिकट पर अडतीस जनों को देखकर बिगड गया । आप चौबीस टिकट पर अडतीस जनता पर नहीं कर सकते हैं । आपको मालूम नहीं है कि बिना टिकट राजधानी एक्सप्रेस में सफर नहीं कर सकते । आप सबको अगले स्टेशन पर उतारता हूँ और बिना टिकट सफर के जुर्म केस दर्ज करवाता हूँ । निकट चक्कर रमाशंकर से रकम ॅ के चक्कर में था तो देना पूरे चालीस दिन की चालीस टिकट चौबीस स्कोच में और सोलह दूसरे कोच में हम एक परिवार क्या शादी के बाद दिल्ली वापस जा रहे हैं । दो महीने पहले टिकट आरक्षण करवाया था । क्या एक साथ बैठेंगे । थोडी देर में सभी अपनी सीटों पर चले जाएंगे । अब बुरे टिकट देखिए रमाशंकर ने बात स्पष्ट टिकट जगह दूसरे चक्कर में था । वो अगले स्टेशन पर उतारकर केस करने की धमकी देने लगा । तब रमाशंकर और उमाशंकर का पारा ऊपर चढ गया । देखिए जाना दूसरे कोच मैं वहाँ के टिकट चेकर पर टिकट दिखा दिया है । उन को कोई आपत्ति नहीं है । तब आपको किस बात की आपत्ति है? मुझे अपनी ड्यूटी करना तो आप पर पुलिस केस बनेगा । अगले स्टेशन पर पुलिस बुलवाता होते हैं । यह सुनकर भाषण करने टिकट जाकर की कमीज का कॉलर पकड ली । अब तो साले तो पुलिस का मिलिट्री बाल वाले हम भी तेरी शिकायत करेंगे । रिश्वत मांगने के जुर्म में तेरे को अंदर करवायेंगे । पुलिस और रेल में होगी उसको हम बुलाते हैं क्या कर उमाशंकर टिकट चक्कर को एक जोर का झापड रसीद करने वाला था कि रमाशंकर ने उसे रोक लिया था । ऍम तू तू मैं मैं सुन कर कोच में सफर कर रहे । दूसरे मुसाफिर भी बीच बचाव आ गए । रमाशंकर पुलिस के दो सिपाही लेकर आया । हंगामा बढता देख और पुलिस के आगे टिकट जाकर शांत होगी और सब अपनी अपनी सीटों पर चलते हैं । उमाशंकर की पत्नी और मिला जमाई लेते हुए इसी पर लेट गए । हम अपने सारा मूड खराब कर दिया । अच्छे बाॅल रंग भंग डाल दिया तो तो मूड खराब बनाकर थोडा आराम कर रहे हैं । मैं भी ऊपर वाली सीट पर लेकर तो साल समझता नहीं । दिमाग खराब कर दिया । भेजा फ्राय कर दिया । टैंकर उमाशंकर समेत सभी अपनी सीटों पर आराम करने लगते हैं । राजधानी एक्सप्रेस के किराये में खाने का मूल्य सम्मिलित होता है । अतः किसी ने मौसा जी का खडा नहीं खोला । रेल का खाना खाने के प्रशाद सभी हो गए थे । रात के सन्नाटे में तेज गति से रेल दौडी जा रही थी । बीच बीच में तेजी से गाडी मिलती थी । अरे सुनो हो गई क्या? प्रफुल्ला ने लेते हुए उमाशंकर को आवाज नहीं सोना है? क्यों नहीं खराब कर रही है? उमाशंकर ने करवट बदलते हुए जवाब दिया कमाल रेलवे में नींद आ जाती है । यहाँ खटर पटर रेल चल रही है । साथ में हिल भी रही है तो हिलती डुलती रेलवे तुम सो कैसे सकते हो? मैं नहीं हो सकती है । रेल तो कुछ नहीं कह रहे । अलबत्ता तो नहीं होने देगी । टाइगर उमाशंकर उपर की सीट से नीचे उतर कर और ऍम अब तुम्हें जगह दिया है क्या करूँ? नाराज हो गए हो कर कहाँ जाऊंगा? उनकी बातें सुनकर उमाशंकर की छोटी बहन वृंदा जाते हैं । भावे नींद नहीं आ रही क्या तेरा भाई होने देता? बना तो मिलने ठिठोली की ननद भाभी दोनों हाथ से उनको हस्ता हुआ देखकर उमाशंकर बोला जब दो महिलाएं एक हो जाए तब चुप चाप कम्बल से मोडक हो जाना चाहिए । वही आपको नाराज हो गए । नहीं नहीं आ रही है ताज निकालो । रेल में समय व्यतीत करने का सबसे अच्छा साधन ताश उमाशंकर और मिला उतरना की बातें सुनकर और रिश्तेदारों चाहते हैं । जबकि शिकायत की तेज रफ्तार से चलती गाडी उससे दुगनी रफ्तार से मिल रही हिंडोले जैसा प्रतीत हो रहा नींद कैसे आएगी सप्ताह खेलने बैठ जाते हैं तीन पत्ती खेलेंगे दस रुपए पॉइंट मंजूर है । सभी एक साथ बोलेंगे । रात के बारह बजे ताज खेलने का आनंद ही कुछ अलग है और मिलने पत्ते फेंकते हुए कहा बिल्कुल अलग है । वहाँ भी खेलते हुए खेलना कोई आसान बात नहीं । परिंदा ने चाल चलते हुए है ऍफ बनाना वो दे नहीं बन रहा है । उमाशंकर ने रामाशंकर को विस्की की बोतल खोलने को कहा उमा भाई बताने की सूटकेस में रखी है ऍम बच्चे सारे बोले बिस्तर रात के समय मत खुलवा । रमाशंकर की बात सुनकर उमाशंकर ने किया ऍम था तब बेकार पत्तों के साथ ब्लाइंड खेल जाता हूँ तुम कह रहा हूँ अगर उमाशंकर ऊपर की सीट पर जाकर कंबल और हो गया । बाकी जान दो घंटे तक खेलते रहे और मिला जीत गई भावी पक्के जो आ रहा हूँ सबकी जेब खाली घर वाली अंदर सबसे अधिक हारी थी तेरे भाई नहीं सिखाया । शादी से पहले तो ताश मेरे लिए काला अक्षर भैंस बराबर था और मिलने जमाई लिए और कम्बल हो गया । धीरे धीरे सब को नहीं आ गई तो मैं की चाय पर सब की नहीं बोलेंगे । भरतपुर पार करने के बाद रेल रुक गई । तेल भारत पर और मथुरा के बीच रुकी हुई थी । गाडी के और उन की किसी को मालूम नहीं था । पता करो गाडी के रुक गई और मिलने उमाशंकर होगा । सुबह का समय चलती गाडी में खेलते हुए हल्का होने में बहुत दिक्कत होती है । इसलिए मुसाफिरों का जंगल पानी करवाने के लिए गाडी शुरू किया । उमाशंकर के इतना कहते हैं सभी ना अठारह का लगाया क्लास या मजदूर किसने जाना है और मिलने चट के लिए और मिला के कहते रेल धीमी गति से आगे बढने लगी । ऍम गाडी चलती है निराश होकर रमाशंकर ने का या गाडी शर्तिया लेट होगी । रिंदा ने जले पर नमक लगाया ऍम करने का रेल टीवी गति से मथुरा स्टेशन पहुंचे । गाडी सिर्फ दो मिनट नाश्ता चढाने के लिए रूकती है लेकिन आधे घंटे रुकी रहेंगे सबका नाश्ता हो गया मुझे ऍम पर मथुरा के पैरों की जमकर खरीदारी स्टेशन पर उपलब्ध सभी पे बैठ गए । गाडी फिर धीमी गति से पढी चली । आज तो पेडों के लिए गाडी रोकी थी और मिलने का वहाँ पांच किलो तो तुमने भी खरीद हैं फॅार उर्मिला को कोहनी मारी सबके लिए एक एक डिब्बा लिया है राहत करेंगे और मिलाके शर्त याद करेंगे । सत्य होगा मथुरा के पेडे तो नहीं बल्कि ये सफर सभी को न बोलने वाला सफर हो गया । रेल पहल गाडी की रफ्तार से चल रही थी । मुसाफिरों का सब्र टूटता जा रहा है । मथुरा से आगे छत्ता स्टेशन पर हो अभी स्थिति साफ हो गई कि आगे दिल्ली से चेन्नई जाने वाली गाडी का एक्सीडेंट हो गया । दो कोच दूसरी पटरी पर गिर गए । सुबह के समय हुई रेल दुर्घटना के कारण रेलों का आवागमन बाधित हो गया है और सभी रैलियां जहाँ तहाँ रुकी बढिया जानमाल का जबर्दस्त नुकसान हुआ । युद्ध स्तर पर बचाव कार्य हो रहे हैं । अप्रेल कब चलेगी इसका उत्तर किसी को नहीं मालूम था । मथुरा से दिल्ली का सफर राजधानी एक्सप्रेस डेढ घंटे में तय करती है लेकिन आज कब पहुंचेगी किसी को नहीं मालूम । मुसाफिरों के सब्र का बांध टूटने लगा । दो घंटे बाद रेल की बत्तियां बंद कर दी गई और एयर कंडीशनर भी बंद हो गए । अब मुसाफिरों चिल्लाना शुरू कर दिया गया । मेरे को उसमें पॅन जाएंगे । राजधानी एक्सप्रेस में सफर कर रहे हैं । कोई मालगाडी में नहीं । क्या मेरे में बैठे रहेंगे कोई दूसरा चारा नहीं था । गाडी का बडे की इसका उत्तर रेल विभाग के पास भी नहीं था । एक अलमस आंसर जिनके पास सामान कम था उन्होंने रेल छोड दी और पैदल हाईवे की ओर चल पडे की आती जाती रोडवेज की बस पकडकर दिल्ली दो तीन घंटे में पहुंच जाएंगे क्या मालूम नहीं कितना समय लग जाए । आधे घंटे में बहुत सारे मुसाफिर गाडी छोडकर हाईवे की ओर रवाना हुए हैं । हाइवे रेलवे स्टेशन से थोडी दूरी पर था । गाडी रोकने और मुसाफिरों का हाइवे पर जाने की खबर सुनते । सुरक्षा और तांगे स्टेशन पर लगता हैं । छोटे परिवार वाले मुसाफिरों ने भी गाडी छोड हाईवे की ओर रवानगी की । आॅल हम भी चलेगा उमा भाई हमारी समस्या अलग है । हम चालीस जने औरते और बच्चे साथ में कहने रकम और जोखिम का सामान भी हमें तो पूरी बस चाहिए । उचित यही है कि हम शांति से गाडी चलने की प्रतीक्षा करें । कमांडर कोच में बैठ नहीं सकते हैं । ऐसा करते हैं कि जोखिम वाला सामान हम यहाँ प्लेटफॉर्म पर अपने साथ रखते हैं । भार करनी अवश्य लेकिन दूसरा उपाय भी देंगे । उमाशंकर की बात मानकर सभी अपना कीमती सामान के साथ प्लेटफॉर्म पर बैठ गए । एक छोटे से रेलवे स्टेशन पर मुश्किल से दो तीन बैच थी । एक बैच के पास वर्ष पर चादर बिछाकर सब गपशप करने लगे । बच्चों को खुला मैदान खेलने और धमाचौकडी के लिए मिल गया । उमाशंकर और रमाशंकर को देखकर गाडी में सफर कर रहे दूसरे परिवार भी प्लेटफॉर्म पर उतर गए । ईरान प्लेटफॉर्म क्रीडास्थल बन गया । रेलवे पटरी पर पडे पत्थर उठाकर पेट तो बना लिया और अपनी गेंद निकालकर पिटठू खेलने लगे । बडे ताज खेलने में व्यस्त हो गए । राजधानी एक्सप्रेस में मथुरा पर नाचता देने के बाद खाने का कोई प्रबंध नहीं होता क्योंकि रेल साढे नौ बजे दिल्ली पहुंच जाते हैं । रेलवे स्टेशन पर चाय के स्टॉल पर धराधर बिक्री होने लगे । चाय और पकोडे देखने लगे और सारा स्टाफ समाप्त हो गया । माॅक कहानी कौन से तेल में बनाए इससे बढिया था अपनी गली के नुक्कड वाला बनाता है । वृंदा बोली मेरे को उसके पकोडे पसंद है मुझे ऍम और मिलने में बनाते हुए फिर भी खाती जरूर परिंदा खिलखिला तेरे साथ देने के लिए खा लेती हूँ । अब यहाँ देख खडी हो जाये भी पीली कोई स्वाद ना निधि शक्कर पानी में खोल रखी है और मिला और रीना की नौकरी देकर उमाशंकर ने का अरे फोक लगने लगी है तो मौसा जी का खाना निकाल लो । वो कब काम आएगा । पूरा कार्टन भरके खाना दिया और भाई लोगों को तंबोली लगता । मौसा जी को पहले ऐसा हो गया था कि सफर में खाने की सख्त जरूरत पडेगी और मिलने उत्साहित होकर उमाशंकरसिंह खडे हुए । बातें कर हो गया । खाने का कार्टून भी निकलना हो गए । रमाशंकर ने खाने का काटा निकाला । सभी ने खाना आरंभ किया । मौसा जी ने तीन दिन का खाना पैक कर दिया था । छोले आलू गोभी की सब्जी, पनीर, साग पुलाव के साथ मूंग दाल का हलवा, चटनी, अचार, मुरब्बा भी रखा हुआ था । रमाशंकर के परिवार के चालीस सदस्यों का छककर खाने के पश्चात भी भरपूर मात्रा में बच्चे खाने को गाडी में सफर कर रहे थे । दूसरे मुसाफिरों ने दिखाया शुद्ध देसी घी में निर्मित लजीज खाने की सभी मुसाफिरों ने जमकर तारीफ की । संकट की घडी में जहाँ भारतीय रेल नहीं आप खडे कर दिए उस संकट की घडी में मौसा जी का खाना संकट मोचन बना । मौसा जी ने भी सौ सवा सौ बन्दों का खाना दिया था । मुसाफिरों के साथ स्टेशन मास्टर ने भी जमकर भोजन का स्वाद लिया । भाई साहब आप के मौसा जी दूरदर्शियों चुकाना आपको दिया । पहले समय में मुसाफिर घर से भोजन साथ लेकर चलते थे । दो तीन दिन का खाना साथ रखते थे रेलगाडी लेट हो जाए तब खाना पीना साथ होना चाहिए । ऍम गाडियों में जो खाना परोसा जाता है आप हर बढिया नहीं होता । पता नहीं किस घी तेल में बनाते हैं । भगवान जाने लेकिन मौसा जी ने शुद्ध देसी घी में खाना बनवाया । सुगंध बता रही है । खाना खाने के बाद देसी घी से लबालब हात मुझ पर फिरते हुए स्टेशन करने का बहुत ताजी दिख रहे हैं । सभी मुसाफिर मौसा जी के खाने की तारीफ करते जा रहे थे । दोपहर के समय तेज धूप से बचने का साधन सिर्फ स्टेशन मास्टर का कमरा था या फिर पेड की छांव । स्टेशन मास्टर उमाशंकर के परिवार को अपने कमरे में ले गया । प्रमोशन करने ताश निकली । फिर जब दो हाथ हो जाए ऍम जो के नाम से स्टेशन मास्टर कपडा गया । जब आप बुलाओगे, आज खेलो लेकिन रुपए के साथ नहीं । किसी ने शिकायत कर दी तो आप हो जाएगी ड्यूटी पर जो आनी बताएगा जाना । यहाँ सभी अपने उमाशंकर ने स्टेशन मास्टर को भी खेल में बिठा लिया । मौसा जी के खाने का कमाल था कि मुझे पर टाॅस स्टेशन मास्टर खेलने लगे । स्टेशन मास्टर खेल के मजे खिलाडी थे । उन्होंने और और तुरंत आज ऐसी पक्की खिलाडियों को मात दे दी । स्टेशन मास्टर ने सबको चित करते हुए दो हजार फॅमिली में कर लिया । शाम के पांच बजे स्टेशन मास्टर के पास सन्देश आया कि रेल की पटरी साफ हो गयी । फॅमिली ट्रेन को हटा लिया गया है । आधे घंटे में रेल यातायात शुरू कर दिया जाएगा । रेल का एयर कंडीशनर चालू कर दिया । मुसाफिर खाडी में बैठ गए । मौसाजी रिक्रेट को हमारा नमस्कार अवश्य कहना । स्टेशन मास्टर ने गाडी में चढते उमाशंकर को कहा तो जरूर जाना । उमाशंकर और रमाशंकर सोच रहे थे कि जिस खाने पर उनको ऐतराज था की जब गाडी में खाना मिलता है तो साथ उठाने की क्या जरूरत है । लेकिन मौसा जी राॅकी खाना जरूर देंगे और बहुत प्यार से खाना काॅप करवा के गाडी में रख पाएगा । संकट में उनका खाना सभी ठीक है । कोच के सभी मुसाफिरों ने जयकारा लगाया । मौसाजी रिग्रेट की जय राजधानी एक्सप्रेस धीरे धीरे आगे बढने लगी । उमाशंकर पर रमाशंकर के होठों पर मुस्कान है । सभी माताजी दिख रहे को धन्यवाद दे रहे थे ।

11 रसरंग -रेखा ओर रेखा

रेखा और रेखा गर्भधारण की डॉक्टर के द्वारा आधिकारिक पुष्टि मिलते ही घर में हर्षोल्लास छा गया । अब परिवार में चौथी पीढी का पदार्पण होगा । दादा दादी, माता पिता, पुत्र, पुत्रवधू के पश्चात अब एक नन्ना प्राणी परिवार का हिस्सा करने के लिए आने वाला है । घर में गर्भवती पुत्रवधू रेखा की हर सुख सुविधा के लिए दो निजी सहायिकाओं की नियुक्ति हो गई । रेखा को अब आराम से नौ महीने विधान पांच सौ बज के भव्य कोठी में अमीर परिवार की बहू रेखा को कोई जानता नहीं हैं तो काम बचाने के लिए तो निजी सहायिकाओं के अतिरिक्त अन्य घरेलू आकर भी है । समय समय पर डॉक्टरी जांच, हर किस्म के टेस्ट दवाइयाँ और भरपूर खुराक रेखा निश्चिंत होकर गर्व के नौ महीने आराम से काटने लगी । पांच सौ गज की कोठियों की कॉलोनी के अंत में एक पेड के नीचे तो भी रखते राम और उसकी पत्नी रेखा की कपडे स्त्री करने की मेज लगी थी । रतीराम कई कोठियों में कपडे धोने का काम करता था और रेखा के साथ कपडों की इस तरी करने का काम भी करता था । धोबन रेखा भी गर्भवती हो गई । नन्ने प्राणी के इंतजार में रतीराम और रेखा दोनों प्रसन्नता धोवन रेखा के भाग्य में डॉक्टरी जांच, टेस्ट, दवाइयाँ और अच्छे खुराक वो तो थे नहीं रोका । सूखा खाकर पति पत्नी प्रसन्न थे । आमिर रेखा वातानुकूलित कोठी में आराम कर रही थी और धोबन रेखा तपती धूम पर ज्यादा और सर्दी में पेड के नीचे तरपाल डाल कर में इस बार कपडों के इस तरी करते हैं । सुबह रतीराम कोठियों में कपडे होता और दोपहर बाद कपडों पर स्त्री करता है रेखा । कपडों का गट्ठर सिर पर बैठकर कोठियों तक पहुंचाती समय बीतता गया आमिर रेखा को डॉक्टर ने बिस्तर पर आराम करने की सलाह दे दी । थोडे दिन बाद डॉक्टरी जांच चाहते फॅमिली धोबन रेखा ने एक दिन भी डॉक्टर का क्लिनिक नहीं देखा । नहीं सरकारी अस्पताल गई, न कोई डॉक्टरी जांच, ना कोई टेस्ट, ना कोई दवा कोठी वाले । पिछले दिन का बच्चा खाना होने दे देते और देखा उसी मैं खुश हो जाती हैं । प्रसव का देना गया आमिर देखा एक पंचतारा अस्पताल के प्राइवेट स्वीट में भरती थी और धोबन रेखा कपडों का गट्ठर से पदक है । एक कोठी से दूसरी कोठी जा रही थी । अस्पताल में पूरा परिवार एकत्रित था । डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी की तैयारी कर रहे थे । रतिराम कपडे स्त्री कर रहा था और लेखक कपडे देने के बाद स्त्री करने वाली में इसका सहारा लेकर खडी हुई और धीरे से जमीन पर पसर गए । क्या हुआ रेखा प्रति राम ने पूछा लगता है टाइम हो गया देखा ना जमीन पर लेते हुए तो मैं तो लेकर आता हूँ । अस्पताल चलते हैं तो लगता है कहीं यहाँ हो जाये प्रति राम ने पडोस की कोठी में काम करने वाली को आवाज देकर रेखा के पास रुकने को कहा और ऑटो लेने सडक के मोड थक गया हूँ । देखा की हालत देखकर आसपास की कोठियों में काम करने वाली सहायिकाएं एकत्रित हो गयी । जतिराम ऑटो लेकर आया लेकिन तब तक सही गांव चादर का पर्दा कर दिया और एक अनुभवी बडी सहायता की देख रेख में रेखा ने एक बच्चे को जन्म दिया । बच्चे के जन्म के पश्चात समीप के नर्सिंग होम में रेखा और बच्चे को दिखाने ले गए और जहाँ दो घंटे बाद ऍम उसे छुट्टी मिल गई । नर्सिंग होम का खर्चा सहन करने का सामर्थ्य प्रति राम और रेखा में नहीं था । उधर पंचतारा अस्पताल में रेखा ने एक बच्चे को जन्म दिया । जन्म के पश्चात डॉक्टरों ने बच्चे को कमजोर बताया और कुछ निकलता हूँ का हवाला देकर नर्सरी में पंद्रह दिन रखा देखा । घर आ गई लेकिन बच्चा अस्पताल में था । घर में दादाजी ने नाराजगी जाहिर की । अस्पताल वालों का व्यापार है । बिल बनाने के चक्कर में अस्पताल जानबूझकर बच्चे को रोक लेते हैं । हमारे समय में ऐसा नहीं होता था । बाबा सबसे बढिया इलाज चल रहा है । हमें कोई जोखिम नहीं लेना । थोडे रुपयों के खाते हम बच्चे की सेहत से खिलवाड नहीं कर सकते हैं । दादाजी को ये समझा कर शांत कर दिया । अपनी अपनी सोच होती है । सामर्थ के मुताबिक सब काम होते हैं । सामर्थ के हिसाब से सोचता होती है । पंद्रह दिन बाद रेखा का बच्चा ऑडी कार में घर आया । चारों और खुशियों का माहौल था । बच्चे के घर आने की खुशी में पंचतारा होटल में पार्टी का आयोजन किया गया । धोबन रेखा चार दिन बाद खुद में बच्चा लिए कपडों की इस तरी करने लगी । पेड के नीचे पुरानी चादर का झूला बना लिया जा । रेखा का बच्चा सोता रहता हूँ या खेलता रहता है और उसे देख रेखा कपडों पर इस्त्री करती रहती है । देखा के बच्चे के लिए तो निजी सहायता इन नियुक्त हो गई और रेखा एक पुरानी चादर में अपने बच्चे को कमर में बांधकर अपने सीने से चिपकाकर देर पर कपडों की गठरी रखकर इस तरीके कपडे लेती और वापस पहुंचा दी है ।

12 रसरंग -शादी

शादी सुनो । आपको याद है ना कि आज शाम को राहुल की शादी में जाना है । टाइम से घर आ जाना । हाँ उसमें शादी है । कम से कम एक घंटा तो वहाँ पहुंचने में लग जाएगा । सुकन्या ने सुरेश को नाश्ते की टेबल पर बैठ रही का मैं तो बोली ज्यादा अच्छा हुआ तुमने याद करवा दिया । सुरेश ना आलू का पराठा तोडते हुए गा । आजकल आप बातों को बहुत बोलने लगे । क्या बात है । सुकन्या ने चाय की चुस्की लेते हुए गा । ऑफिस में काम बहुत ज्यादा हो गया । कंपनी वाले काम सबसे कम कराना चाहते हैं । दम मारने की फुर्सत नहीं होती है । हम सुबह जो कहती ऑफिस में कुछ नहीं सब खुल जाता हूँ । अच्छा सुनो, एक काम करना । पांच बजे मुझे फोन करना । मैं समय से आ जाऊंगा । क्या गया तो पांच बजे फिर घर कब आओगे ऑफिस से घर आने में एक घंटा लग जाता है तैयार । उन्हें फिर आगे शादी में जाना है । उन्होंने आश्चर्य से कहा आज ऑफिस से जल्दी निकलना । पांच बजे तक घर आ जाना । अच्छा कोशिश करूंगा । ऍम उठाते हुए का ऑफिस पहुंचकर सुरेश हैरान रह गया । किस्त आपकी उपस्तिथि नाममात्र की थी । ऑफिस में हर किसी को शादी में जाना था । आधार साफ छुट्टी पर था और बाकी हफ्ते करके लंच के बाद छुट्टी करने की सोच रहा था । पूरा ऑफिस में कोई काम नहीं कर रहा था । हर किसी की जुबान पर बस यही चर्चा थी कि आज शादियों का जबरदस्त जरूरत है । जिसकी शादी का मौका नहीं निकल रहा उसके शादी बिना मदद के आज हो सकती है । इसलिए आज शहर में दस हजार शादिया सुरेश अपनी कुर्सी पर बैठकर फाइलें देख रहा था । तभी मैनेजर वर्मा सुरेश के सामने कुर्सी खींच कर बैठ गए और काला साफ करके बोलते हैं तो सब काम हो रहा है । बनाया क्या? शहर में दस हजार शादियां कोई छुट्टी मांग रहा हैं । लंच के बाद तो पूरा ऑफिस लगभग खाली हो जाएगा । छुट्टी घोषित नहीं कर सकते, हो रही है लेकिन मजबूरी है किसी को रोक भी नहीं सकते हैं । आपको भी किसी शादी में तो जरूर जाना होगा । वर्मा जी आप तो जबर्दस्त ज्ञानी है । आपको कैसे मालूम कि मैंने भी आज शादी में जाना है तो कृष्णा फाइल बंद करके एक तरफ रख दी और वर्मा जी को ऊपर से नीचे तक देखते हुए पूछा कि ये भी कोई पूछने की बात है? आज तो हर आदमी बच्चे से लेकर बूढे तक बाराती बनेंगे । अगर दस हजार शादियाँ है वर्मा जी ने अपनी फॅमिली में कार की चाबी कमाते हो जाएगा । आखिर मैं भी तो आज एक बनाती हूँ । पर मुझे एक बात समझ में नहीं आ रही है कि क्या वाकई में पूरे स्टाफ ने शादी में जाना है या फिर दस हजार । शादियों की खबर सुनकर ऑफिस से छुट्टी का एक बहाना मिल गया । प्रदेश ने बात को आगे बढाते हुए गा लगता है आपको आज कैसे शादी का न्यौता नहीं मिला । घर पर भाभी जी के साथ कैंडल लाइट डिनर करने का इरादा है । अभी इस तरीके की बात कर रहे हो । पढना घर जल्दी जाने की सोच रहे होते सुरेशबाबू शर्मा ने चुटकी लेते हुए नहीं । वर्मा जी ऐसी कोई बात नहीं आदि का नहीं होता तो है लेकिन जाने का मन नहीं है । पत्नी चलने को कह रही है । लगता है जाना ही होगा क्या भावी जी की मायके में शादी है? शर्मा जी ने आंख मारते हुए ऐसी कोई बात नहीं । बाजी पडोसी की शादी में जा रहे हैं । ऊपर वाले फॅालो रहते हैं । उनके लडके राहुल की शादी है । मैंने इसलिए नहीं कर रहा कि बहुत दूर फार्म हाउस में शादी है । पहले तो एक घंटा ऑफिस से घर पहुंचने में लगेगा । घर से कम से कम एक घंटा तो फार्म हाउस पहुंचने में लगेगा । थक जाऊंगा । आप कल की छुट्टी दे रहे हैं तो शादी मैं चला जाऊंगा । खाॅन डरते हैं । आज शादी में जाइए, कल की कल देखेंगे कहकर वर्मा जी चले गए मुझे डर पोक कहता है खुद जल्दी जाने का । चक्कर में मेरे कंधे पर बंदूक चलाना चाहता है । सुरेश मन ही मन बुदबुदाया और काम में व्यस्त हो गया । शाम को ठीक पांच बजे सुकन्या ने फोन करके सुरेश को शादी बचाने का याद दिलाया । सोसाइटी में लगभग सभी को नंदकिशोर शादी का न्यौता दिया है और सभी शादी में जाएंगे । ऑफिस में भी एक के बाद एक करके सभी जल्दी चले गए । सुरेश काम में दोबारा । तब चपरासी ने कहा आप से पूरा ऑफिस खाली हो गया । मुझे भी शादी में जाना है । आपकी तीन दिन तक बैठेंगे चपडासी की बात उनका स्वदेश ने काम बंद कर दिया और हल्के से मुस्कराकर बोला मैंने भी शादी में जाना ऑफिस बंद कर रहा हूँ । सुरेश की बात सुनकर चपरासी का फैसला बुलंद हो गया और हसते हुए बोला सबसे सुनाए आज शहर में दस हजार शादियां इसलिए पूरा ऑफिस इतनी जल्दी खाली हो गया । मैं तो पहली समझाया था कि आपको भी शादी में जरूर जाना है । थोडा पहले याद दिलाते तो तुम्हें जल्दी जा सकते हैं । चपरासी को कहकर सुरेशनगर की रास्ते में सोचने लगा माना कि दिल्ली एक महानगर है और दो करोड से ऊपर की आबादी । लेकिन एक दिन में दस हजार शादियाँ हो सकती हैं । घोडी, बैंड, हलवाई, वेटर, बसों के साथ होटल पार गली मोहल्ले इतना सब इंतजाम मुश्किल लगता है । हफ्ते में ट्रैफिक भी कोई ज्यादा नहीं । अंतिम की तरह भीड भाड ऑफिस से घर की दूरी तीस किलोमीटर तय करने में एक सभा घंटा लग जाता है और लगभग आधे दिल्ली का सफर हो जाता है । अगर पूरी दिल्ली में दस हजार शादियाँ तो आधी दिल्ली में पांच हजार तो अवश्य होनी चाहिए । लेकिन लगता लोगों को बढा चढाकर बातें करने की आदत है और ऊपर से टीवी जनरल वाली खबरें इस तरह से पेश करते कि लोगों को विश्वास हो ही जाता है । खबर पेश करने से पहले सर्वे ही कर लेते हैं कि कहाँ कितनी शादियाँ । बिना टेंडर तो शादी नहीं हो सकती । पूरे रास्ते पचास स्टैंड नहीं मिलेगा । होटल धर्मशाला भी मिला लें तो एक दो हजार तक भी गिनती नहीं हो जाएगी । इन्हीं बातों को सोचते सोचते हैं सुरेश घर पहुंच गया घर पर सुकन्या ने फौरन चाय के साथ समूह से देते हुए गा । ऍम सोसाइटी से सभी शादी में जा रहे हैं । जिनको नंदकिशोर ने बता दिया बच्चे भी चलेंगे । बच्चे बडे हो गए । हमारे साथ कहाँ जायेंगे, हमारा जाना जरूरी है । जाना बहुत जरूरी है तो ऊपर वाले फ्लैट में रहते हैं और फिर नंदकिशोर नहीं तो किटी पार्टी की मैं जो नहीं जाएगा ना कच्चा चबा जाएगी उसे तो डरती हूँ । ऊपर वाले फ्लैट मैं जरूर रहते हैं । लेकिन साल छह महीने में एक दो बारी दुआ सलाम होती है । जाने ना जाने से कोई फर्क नहीं पडने वाला रैशनल चाहेगी चुस्कियों के बीच का अरे मेरी ज्योति मैं डरती । नंदकिशोर नहीं शादी में जाने की तमन्ना सिर्फ इसलिए कि घर में तो आम आदमी की तरह रहते हैं । बातें बडी बडी करती है । जैसे कोई रईस अरब पत्नियों हम सोसाइटी की ओर है तो उसकी शानशौकत का जायजा लेने जा रही हैं । किटी पार्टी का हर मेंबर शादी की हर गतिविधि और हर पहलू पर बारीक से बारीक नजर रखेगा । इसलिए जाना जरूरी हैं । चेक कितना ही आंधी तूफान आ जाएगा । सुकन्या की इस बात को पीती रोहिनी निगाटा आपको मालूम नहीं है । चेंज ऍम की पूरी टीम साडिया पहन कर जासूसी करने में लग गई है । इनके बाहर से कोई नहीं बच सकता है । सुकन्या ने बीच में बात काटते हुए गा । तुम लोगों के खाने का क्या हिसाब रहेगा? मुझे कम से कम बेफिक्र तो क्या? मम्मा अब बच्चे नहीं हैं । हाई पिज्जा और बर्गर लेकर आएगा हमारा डिनर का मैंने तो छोटा सा है आपका तो लंबा चौडा होगा अखिल नंदकिशोर ने के लाडले राहुल बाबा की जो शादी है कहकर रोहिणी खिलखिलाकर हंस पडेगी । फॅमिली ये कहाँ ये साडी पहन होगी नहीं नहीं शादी में नंद किशोर नहीं से लगना ऍफ करती हूँ । कहते कहते रोहिणी ने एक साडी निकली और माँ के ऊपर लपेटकर बोली पापा इधर देखकर करूँ माँ कैसी लग रही है । एक बात तो माननी पडेगी की बेटी माँ से अधिक सयानी हो गई है । नंदकिशोर नहीं तो आजकल खाकर गिर जाएगी । तभी रोहन पिज्जा बर्गर लेकर आ गया । अरे आज तो कमाल हो गया माँ तो दुल्हन लग रही है । पूरी बारात में अलग से नजर होगी । बच्चों की बात सुनकर सुकन्या कर से फूल गई और तैयार होने लगी । दोनों बच्चे रोहिणी और रोहन पीजा बर्गर से पेट पूजा करने लगे । तैयार होकर सुरेश और सुकन्या जैसे ही कार में बैठने के लिए सोसाइटी के कंपाउंड में आए सुरेश करानी के साथ बोल पडते हैं । लगता है आज पूरी सोसाइटी शादियों में जा रही है । सारे चमक धमक रहे हैं । वर्मा, शर्मा, रस्तोगी, सानी, भसी, गुप्ता, अग्रवाल और सभी कार्य निकाल रहे हैं । आज तो सोसाइटी कार वही हो जाएगी । मुस्कुराते हुए सुकन्या ने कहा सारे अलग शादियों में नहीं बल्कि नंदकिशोर के लाडले राहुल की शादी में जा रहे खोलकर ने बता दिया है । नंदकिशोर दिल की मत पूछो तो हम हाउस में शादी का खर्च वधुपक्ष का होगा । इसलिए पूरी सोसाइटी को निमंत्रण दे दिया । अपने घर तो नंदकिशोर नहीं नहीं, किसी को भी नहीं बुलाया । एक नंबर के कंजूस है दोनों पति पत्नी । हम तो से किटी पार्टी का मेंबर बनाने का राजी नहीं होते हैं । जबरदस्ती हर साल मेंबर बन जाती है । किसी ना किसी बात पर उसका मामला है । हम शर्म करके मेंबर बना लेते हैं । जब इसकी भरी होती है, इतनी निकम्मी पार्टी देती है । ऐसा लगता बासी खाना खिला दिया मैं । सुकन्या ने वो बनाकर का कितनी नाराज की भी अच्छी नहीं की मैं कभी खराब हो जाये । सुरेश निकाल स्टार्ट करते हो जाएगा । कितनी देर लगेगी तो हाउस पहुंचने में सुकन्या ने पूछा एक से दो घंटे ये का जवाब हुआ एक से दो घंटे, वही तो ट्रैफिक पर निर्भर करता है । कितना समय लगेगा एक भी लग सकता है । डेढ भी तो भी सीधे जवाब तो देना नहीं घुमा फिरा के बोलने में मजा बाद आता है आप एकदम मजे नहीं लेना सीधी बात कर रहा हूँ अपने आप देख लेना आप से तो बात करना ही करना है छोडो इस बात को मैं ऍम देती हूँ ये कहकर सुकन्या रेडियो चालू किया ऍम अच्छा एकदम लेटेस्ट गाने बजते हैं और साथ में चटपटी मसालेदार गपशप होती हैं । थोडी थोडी देर बाद ट्राफिक का हाल भी बताते हैं । रेडियो स्टेशन पर बैठकर ट्रैफिक का हाल सुनाते हैं । दिल्ली नगरी मैं दिन का अठारह घंटे तो अच्छा खाता पिता ट्रैफिक रहता है । ऍम ट्रैफिक की बात पर सुकन्या खिलखिला के हस्ते सीरियस बातों के बीच फुलझडी छोडने की आदत अच्छी ऍम चलो कुछ तो समझा मुझे अभी रेडियो जॉकी शहर में दस हजार शादियों का जिक्र छेड दिया कि आज हर दिल्लीवासी किसी ना किसी शादी में जा रहा है और चारों तरफ शादियों की धूम । ये सुनकर स्वदेश सुकन्या से पूछा क्या उसे लगता है कि आज शहर में दस हजार शादियां होंगी? आप तो ऐसे पूछ रहे जैसे मैं कुछ पंडितो और पूरे दस हजार शादियों का मोरल मैंने निकाला । अच्छा आप बताओ कितने शादी होंगे । एक बात जरूर है कि आज शादियाँ हो गए लेकिन कितनी पता नहीं था । एक बार पर मैं गाडी को कि दस हजार नहीं होंगे । दो तीन हजार को दस हजार बनाने में लोगों को कोई अधिक समय नहीं लगता । बात का बतंगड बनाने में फालतू आदमी विशेषज्ञ होते हैं । अभी रेडियो टनाटन ने ट्रैफिक का हाल सुनाना शुरू किया । यहाँ जा रहे तो अपना रोड बदलने उनका । सुरेश ने कहा ऍम पर बैठकर कहना आसानी के रूप बदल लेकिन जाए तो कहाँ से । दिल्ली के हर दूसरी सडक पर ट्रैफिक होता है । हर रोज सुबह शाम दो घंटे की टाइमिंग हो जाती है । आराम से चलते ऍम के साथ बातों बातों में कार की रफ्तार धीरे हो गई । सडक पर ट्रैफिक कुछ ज्यादा ही हो गया था । तभी आगे वाली कार हो गई और वाहन चालक ने कहा से बाहर गर्दा निकालकर का फायदा कहाँ थोडी पीछे करना वापस मोरनी आगे ट्रॅफी यही कह रहे हैं उसको देखते ही कई स्कूटर बाइक वाले पलट कर चलने लगे । कार्य वालों ने भी कार्य वापस घुमानी शुरू कर दी । ये देखकर सुकन्या ने कहा आपके देखो जब सब वापस मिल रहे हैं तो आप भी उनके साथ मुझे सुरेशनगर वापस नहीं मोदी उसने वापस मोदी कारों की जगह धीरे धीरे आगे बढानी शुरू की क्या क्या कर रहे हो ऍफ जाएंगे । सुकन्या ने हाथ बढाकर सुरेश की ओर देखते हुए गा कुछ नहीं होगा ये तो रोज की कहानी दिल्ली की सडकों पर चुका है । बाइक वापस लौट रही है । सडक के दूसरी लेन जो इस समय खाली है वहाँ जाएंगे । सडक इसलिए खा लिया कि आगे चौराहे पर ट्रैफिक होगा । ये सब आगे पहुंचकर दूसरी लेन का भी ट्रैफिक जाम करेंगे । धीरे धीरे सुरेश कार को अपनी लेन में रखकर आगे बढाता रहा । चौराहे पर एक तो खराब था जिस कारण ट्रैफिक का बुरा हाल है । यहाँ तो काफी बुरा हाल है । देर हो जाए सुकन्या थोडी परेशान हो गए कुछ नहीं होगा । दस से कमेंट जरूर लग सकते हैं । यहाँ संयम की आवश्यकता है । रेंगते हुए आगे बढ जाएंगे ये जो आगे दो तीन आदमी सीटी बजाकर ट्रैफिक संभाल रहे ये प्राइवेट बसों के हेल्पर कंडेक्टर है जो अपना रास्ता बनाने के चक्कर में लगे । इनके बीच में हम भी आराम से निकल जाएंगे । थोडा सा संयम रखकर इंतजार करना है । ये बात तो रोज मर्रा का हिस्सा है । देश की राजधानी दिल्ली के जीवन का एक छोटा सा इन बातों से परेशान नहीं होना चाहिए । बातों बातों में दस मिनट में चौराहे को भार कर लिया और कार्य थोडी रफ्तार पकडी । थोडी थोडी दूरी पर कभी कोई बारात मिलती तो कार की रफ्तार सुस्त हो जाती तो कहीं बीच सडक पर प्राइवेट बस वाले बस रोककर सवारियों का उतारने चलाने का काम करते मिलेगा । एक बात की दाद देनी होगी । चाहे कोई पीछे से आता हुआ बस को टक्कर मार दें या अचानक ब्रेक मारने बडे हैं । कैसे का एक्सीडेंट हो जाए उनकी बला से । ये तो सडक को अपने बाप की जागीर समझते हैं । जहाँ दिल करेगा वही खटोला बिछा देंगे । कहीं सडक पर खुदाई नहीं, टूटी फूटी सडक, कहीं कोई जलसा जुलूस के कारण ट्रैफिक नहीं है । हम तो कहीं संस्कार कहीं रफ्तार में चलता रहता है । ये तो राजधानी दिल्ली में रहने का टैक्स समझ लो तो होता हूँ वरना दिमाग में टेंशन नहीं । मेरे को तो बिना थकान चिंता के गंतव्य पर पहुंच जाओगे । बातों बातों में फार्म हाउस दिया गया । बारह । कभी बाहर सडक पर नाच रही थी । बारातियों ने अंदर फार्म हाउस ज्यादा शुरू कर दिया । सोसाइटी निवासी पहले पहुंच गए थे और चाट के स्टाल पर मजबूर हैं । लगता है हमें देरी से पहुंचे तो साइटि निवासी तो चले तो हमारे साथ ही थे । लेकिन पहले आ गए । प्रदेश ना चारों तरफ नजर दौडाते हुए सुकन्या सका । इतनी धीरे का चलाते हूँ । जल्दी कैसे पहुंच सकते । इतना कहकर? सुकन्या बोली ऍम वर्मा हाँ तो बहुत अच्छी रही हूँ । अरे कहाँ, तुम्हारे आगे तो सब भी किया । मैसेज घबरा बोली थी । देखो तो कितना खूबसूरत ऍम छोटा जरूर है, लेकिन डिजाइन ला जवाब दे । कितने चमक रहे जरूर महंगा होगा । पहले कभी देखा नहीं । अभी लिया कभी लिया कहाँ से लिया? देखो साॅस मिला? जवाब एक के बाद एक कई प्रश्नों की झडी लग जाती । सभी सोसाइटी महिलाओं ने सुकन्या को घेर लिया । सुकन्या मंद मंद मन में एट लाने लगी थी । केंद्र बिंदु बनी सुकन्या कुर्सी में बैठ गई । बाकी महिलाओं ने चारों तरफ से घेर लिया । महिलाओं के बीच गिरने के बाद सुकन्या व्यस्त हो गई । लेकिन सुरेश एक तरफ कोने में अलग कुर्सी पर बैठकर सोचने लगा । महिलाओं को बात करने के लिए कई विषय मिल जाते हैं । कपडे, गहने में कब के अलावा सैंडल, चप्पल परिसर चैन शुरू हो गई और उसके पास बात करने का कोई विषय नहीं । कोई बात महिलाओं की बात होनी चाहिए । और ये सोचकर सुरेश ने कौनसी थोडी आगे सरकार । तभी रस्तोगी न कंधे पर हाथ मारते हुए काम क्या आॅफ यहाँ चक्कर चुपके से महिलाओं की बातों में कहा लगाकर बैठे । उधर मतलब की महफिल लगी ऍम सुरेश को छोडते हुए कहने लगा होगी मैं पीता नहीं, मुझे पता है क्या करूंगा मैं फिल्में जाकर हाँ तो सही, रक्षा भी सही । मैं कौन सा क्या करूँ? जलजीरा ॅ सबकुछ है । मैं बिल्कुल रोशन करते हैं यार मिलकर कहकर रस्तोगी ना स्वदेश का हाथ पकडकर की जा और दोनों महफिल में शरीक हो गए । वहाँ काम के बीच में ढागे लग रहे थे यार नंदकिशोर ने हाथ लंबा मारा है खुद की हैसियत तो मांग कर पानी पीने क्या तब कुछ लडकी पक्ष वाले कर रहे हैं हम हाउस में शादी खाने पीने का इंतजाम तो देखो । अग्रवाल ने कहा अंदर की बात बताता हूँ । प्यार मोहब्बत का मामला सहानी बोला है और तुम्हारी पहले हमारी समझ के बाहर तरह खोलकर बताओ । गुप्ता ने का कहना मैं नंदू के लडके का साहनी सोचने लगता, उतना बोला ऍम राहुल आगे बोल वो राहुल कॉलेज में एक साथ पढते थे । वहीं बिहार बिहार हो गया । लडका लडकी राजी तो क्या करेगा? काजी अच्छा कार्य कर लडकी का बाप को मानना पडा नहीं । चटकारे लेकर प्यार के किस्से सुनने लगा । किस्से सुनाते मोडकर सुरेश से कहने लगा वहाँ आपको मंद मंद मुस्करा रहे हैं । क्या बात है, कुछ तो करना ही है । मैं ये सोच रहा हूँ क्या जरूरत है शादियों में फिजूल का पैसा लगा देंगे । इससे शादी को देख लो पापा उसको किराया, साज सजावट, खाने पीने का खर्चा, लेन देन और गहने ना जाने क्या क्या खर्च होता है । सुरेश न दार्शनिक भाव से का हो गया । क्या बच्चों की शादी करेगा? था पता चल जाएगा । साहनी ने ठहाका लगाकर कहा था गुप्ता बोला करो यही सब देख लो । अभी से अनुभव ले लो । देखो जो मैं कह रहा हूँ उसे बारीकी से सोचो । लाखों करोडों रुपए खर्च करते हैं । देखा जाए तो फोन देते हैं प्रदेश में समझाते हुए गा साहब जिसके पास जितना धन होता है, शादी में खर्च करता है । बचने की क्या बात है । फॅमिली इसकारण करते हैं । अग्रवाल ने बीच में बात काटते हुए गा नहीं, धन का संचय शादियों के लिए नहीं बल्कि कठिन समय के लिए किया जाता है । भविष्य में कम आएगा । हम शादियों में पैसा अपनी छोटी शान दिखाने के लिए करते हैं । उस धन का उपयोग कर सकते हैं । प्रदेश की बात बीच में काटते हुए गुप्ता बोला देखो लडकी वालों के पास धन की कोई कमी नहीं । समंदर में से दो चार लौटरी निकल जाएंगे । कोई फर्क नहीं पडेगा । ये सोच गलत है । सुरेश ने बात आगे बढाते हुए कहा हम पैसे का दिखावा कर रहे हैं । जितना पैसा शादियों में खर्च करते हैं उस धन को यदि हम भविष्य के लिए वर वधू के लिए बैंक आॅफ में रखते हैं तो उनके पूरे आर्थिक दिनों में काम आएंगे । शादी हम साथ ही से कर सकते हैं । यहाँ जितने वाला भी आए हैं कोई ना कोई नहीं निकाल कर जाएंगे । रिश्तेदारों के जितनी आवभगत करो गलतिया निकालेंगे । कुछ तो लड झगड कर बुराई ही करेंगे । जलन के कारण हराम मूड खराब कर दिया । साहनी ने बीच में बात करते हुए कहा कि आम जश्न कर रहे हैं । स्वामी जाॅन शुरू कर दिया ऍम यहाँ से लाया था । वहीं छोडा प्रदेश में शराबियों से उलझना उचित नहीं समझा और चुपचाप वहां से प्रस्थान किया और सुकन्या को ढूंढने लगा क्या बात है भाई साहब कहाँ ॅ क्या कर रहे हैं? वैसे साहनी ने कहा तो सुकन्या के साथ गोल गप्पे के स्टॉल पर घटना मीठा पानी पी रही थी और साथ में कह रही थी सपने बडा बकवास पानी । इतनी बडी पार्टी और ऍम सुनकर सुकन्या मुस्कराती खाए जा रही और नींद भी कर रही है छोड खाने को मैं तो कुछ नहीं होंगे । मेरे सबको का नहीं रहा जाता । शगुन दिया डबल तो वसूल कर रहे मैसेज साहनी की बातें सुनकर स्वदेश मुस्कुरा दिया । दोनों मियां बीवी एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं । मैं ज्यादा पैर लगाकर होश को बैठा है । किसके साथ क्या बात करनी है और बीवी मीनमेख के बावजूद खाए जा रही है । कुछ लिया गया ऍम सुकन्या साडी को ठीक करते हुए बोली अपना फार्मूला सही है । घर से निकलने से पहले थोडा सा खा लिया जाए तभी ठीक रहता है । गाडियों में ग्यारह बजे से पहले खाना शुरू नहीं करते हैं । ये भी नहीं सोचते कि बारातियों तो अगले दिन काम पर जाना है । ऑफिस ले पहुंचता मालिक नाराज हो जाएगा । खडी देखते बोलेगा शादी तुम्हारी थी जो लेता हूँ डोली निपटाना जरूरी था जल्दी निकल नहीं सकते थे । सुरेश नाॅक खाना शुरू हुआ तो थोडा खा लेते हैं नहीं तो निकलने की करते हैं । इतनी जल्दी क्या है अभी तो कोई भी नहीं जा रहा हूँ । पूरे दिन काम के थकान फिर फार्म हाउस का आने का थकान भरा था पर हूँ और अब खाने का लम्बा सफर बेगम साइबा घर वापस जाने में भी कम से कम एक घंटा तो अवश्य लग जाएगा । चलते हैं राखिन इनसे बहुत हो रही है । ड्राइवर वहाँ पर भी कुछ तरह करूँ तो बच्चों की तरह मचल जाता हूँ । फॅमिली क्योंकि घर चलो घर चलो मैं फिर उधर सोफे पर थोडा आराम कर लेता हूँ । अभी तो वहाँ कोई है नहीं । ठीक ॅ सोसाइटी के अन्य महिलाओं के साथ बतियाने लगी । सुरेश िकांड के लिए कोने में एक खाली रुपए पर आराम से पैर फैलाकर लेता हो गया । आंखे बंद करके कुछ आराम की तलाश में जुटा लेकिन सब दो मिनट बाद एक जोर का हाथ कंधे पर लगा तो बाबू ये अच्छी बात नहीं है । अकेले के लिए सोच रहा हूँ । जश्न मनाने के बजाय सुस्ती फैला रहे हो । प्रदेश में आके खोल कर देगा तो ताजी दम फाडकर मुस्कुरा रहे थे । मैंने मन में दो भद्दी गाली निकालकर बोला साले टोमॅटो ने भी नहीं देते हैं लेकिन हल्के से । फिर मुस्कराकर का गुप्ताजी ऑफिस में कुछ काम की वजह से थक गया था तो सोचा के पांच मिनट आराम करना ही रात हो गई है । अब हमारा हो गया घर में तो इस समय घोडे बेचकर खर्राटे भर रहे होते हैं ड्राइव करके वापस अभी तो घर भी जाना है यही सोच कर रखी । मून कर आराम करने की कोशिश कर रहा हूँ वो हथियार ये मौका जश्न देखने का है, सोने का नहीं है । गुप्ता हाथ पकडकर सुरेश को डीजे फ्लोर पर ले गया जहां डीजे के शोर में उलटे सीधे हाथ पैर मार कर वर और वधू पक्ष के नजदीकी नाच रहे थे । एक किशोर के काम के सुरेश का ध्यान सुकन्या कट होने में था कि किस तरीके से अलविदा कहकर वापस घर रवानगी की जाए । पूरे दिन की थकान के बाद प्रदेश की हिम्मत जवाब दे चुकी थी तो मैंने सोसाइटी के महिलाओं के साथ गपशप में व्यस्त थी तो देश को नजदीक आता देख ऍम हूँ भाई साहब को का हूँ आज तो मंडराना छोडे मारता पार्टी में जाए । बार बार महिला पार्टी में आ जाते हैं वहाँ भेजे कल मैं ऑफिस से छुट्टी नहीं ले सकता हूँ । जरूरी काम है घर पर भी जाना है । खराब की नींद पूरी नहीं होगी तो ऑफिस में काम कैसे करूँगा । अब तो आप सुकन्या को मेरे हवाले कीजिए । नहीं उठा कर ले जाना पडेगा । सुरेश के इतना कहते पूरी महिला पार्टी ठाकरे में होते हैं जहाँ तो कन्या नहीं तो भाईसाहब तेरह अपहरण कर लेंगे क्या बचपना करते हूँ थोडी देर इंतजार करूँ सबके साथ चलेंगे । पार्टी का आनंद उठा फॅमिली है थोडा आराम करूँ मैं भी वहीं आती हूँ वो लडका का सुरेश फिर खाली स्वाॅट लेता हो गया और बीस पच्चीस मिनट हो की नहीं ले ली । फॅमिली तो पैसे नहीं चेक करने लगा और बचने के चक्कर में नहीं खोले । चंद मिनटों की गहरी नींद सुरेश के थकान दूर कर दीजिए और शरीर हल्का महसूस कर रहा था । तभी सुकन्या आई तो बडा अच्छा हूँ भी मार लिया । डीजे के शोर हल्के में नींद आ जाती है । चलो खाना शुरू हो गया । सुरेश ना गाडी देखी । साठ का एक बच्चा था । अमीर आदमियों के चोंचले भी अजीब होते हैं । रात के एक बजे खाना परोस रहे हैं । यहाँ तो रात दस बजे सोने वालों में रात के शादियों में तो शरीर टूट जाता है । कोई सोचता नहीं कि अगले दिन काम पर भी जाना है खाना खाते और फिर मिलते हैं अलविदा लेते ढाई बच गए स्टार्ट करके । सुरेश बोला आज रात लॉन्ग ड्राइव होगी । घर पहुंचते हैं साढे तीन पौने चार बचायेंगे । मैं सोचता हूँ कि उस समय सोने के बजाय चाहे भी जाए और सुबह की शहर की जाए, मजा आ जाएगा तो तो दिए थे । मैं बुरी तरह थक चुकी हूँ । मैंने तो नहीं करोड लेनी है आपके शहर पड जाना । आप इतनी धीरे कार क्यों चला रहे हो? लॉन्ग ड्राइव में कार्य की रफ्तार धीरे रखते हैं ताकि पूरा आनंद मिल सके । सबके साथ चलो इस समय खाली सर के हैं । सब की रफ्तार तेज । हमारी रफ्तार तो पहल गाडी किसी लग रही है । तेज रफ्तार ही दुर्घटना का कारण है । सात की खाली सडकों पर तेज रफ्तार की वजह से ही भयानक दुर्घटनाएं होती हैं तो अखबारों में पढते हैं । सारे बहुचर्चित केस रात के इसी समय हुए हैं । पार्टियों से वापस आते हुए शराब के नशे में तेज रफ्तार के कारण कार को न संभाल पा रही मुख्य कारण है । सडकों पर रोशनी पूरी नहीं होती । सामने से आने वाले वाहनों की आॅनलाइट सहित आंखों में चौदह पडती है । ऍफ नहीं आती । दुर्घटना के हजार अधिक होते हैं इसलिए जब देरी हो ही गई है तो आधा घंटा और से तो सोना और मैंने शहर पर जाना है । धीरे धीरे चल नाॅन ना बडे ऍम हो सकता है कि इस अवतार में मेरी नहीं खुल रही है । तुम्हारे साथ शहर पर चलना पडेगा ये हुई ना । बात अब कार की रफ्तार बैलगाडी से स्कूटर वाली करता हूँ । मैंने चार बजे घर पहुंचे । लाइट खोली तो रोहिणी उठ गई । क्या बात है पापा पूरी रात शादी में बता दी । कल ऑफिस की छुट्टी करोगे क्या? सुरेश ने हंसते हुए कहा कल नहीं आज तो तारीख को बदल गई । आज ऑफिस में जरूरी काम है । छोटे का तो मतलब ही नहीं । अगर आप हो गया तो समझ लो दोपहर से पहले उतना ही नहीं होगा । मैं आपको एक कप चाय पी करते हैं । सुबह की सैर पर जाऊंगा । कपडे बदल लेता था । मैं चाय बनाती रोहिणी ने आके मिलते हो जाएगा काम ऍम हमारी नहीं तो खराब हो गई । मैं बनाती हूँ ऍम नींद खुल गई है तो मैं भी जॉगिंग पर चलते हैं आपके साथ आप चेंज कीजिए मैं चाहे बनाती हूँ ऍम अंग्रेज कब से बन गए अपनी बेटी को बेबी कह रहे हो ऍम तभी हिंदुस्तानी बनाओगे कितने में रोहिणी चाय और बिस्किट लेकर आ गई । तब आप के पीछे लगी रहती हूँ । इसमें बुराई क्या है? चाय पीने के बाद सुरेश सुकन्या आपको ही नहीं सुबह शहर के लिए बाहर गए । आज असली आनन्द आएगा । शहर करने का पूरा बाहर खाते हैं । ऐसा लगता है कि हमारा प्राइवेट ऍम हम आलसियों की तरह होते रहते हैं । सुबह प्रभात मिला मैं शहर का अपना अलग ही आनंद है । जैसे जीवन का रस पा लिया । प्रदेश बाहें फैलाकर गहरी सांस खींचता हुआ बोला आज क्या बात है । बडे दार्शनिक बंद कर बात कर रहा हूँ । बाद दार्शनिकता की नहीं बल्कि जीवन की सच्चाई की है । कल रात शादी में देखा देखा भाई दिखावा ऍम शादियाँ साथ ही से नहीं कर सकते हैं । अगर सच कहे तो सारा शादी खर्च हैं, फिजूल का है, जिसका कोई अर्थ नहीं । तभी रोहिणी जॉगिंग का चक्कर लगाकर सभी पहुंचकर बोले आप बिलकुल ठीक है । शादियों पर सारा व्यर्थ खर्चा होता है । अगर वो आगे बढ गई तो कन्या सुरेश के चाहे को देखते हुए कुछ समझने की कोशिश करने लगे । चौकियों गई शहर करने का आनंद आज कुछ आ लगी है हूँ वो तो है कुछ कुछ समझने की कोशिश कर रही हूँ । इसमें समझने की कोई आवश्यकता नहीं । जरूरत है सिर्फ अमल करने की अमल करना । यही की शादियाँ सर सात की से होनी चाहिए । क्या परिवार के कुछ सदस्यों के साथ शादी संपन्न नहीं कर सकते? बिल्कुल कर सकते हैं । क्या फायदा है शादी में खर्चा करने का । लोग आते हैं खा पीकर शोर मचाकर इधर उधर की बातें कर के चले जाते हैं । कुछ उल्टा सीधा कमेंट पास करके जाते हैं जिनको सुनकर दिल हमारा दुखता है । बाराती तो चले जाते हैं पीछे घर में कलेश छोड जाते हैं । तभी रोहिणी जॉकिंग चक्कर पूरा घर के समीप आई और बोल करता था बिल्कुल सही पापा आदमी से करनी चाहिए शादियाँ मेरी समझ में कुछ नहीं है । आज सुबह बेटी को हो गया गया । बहुत आसान सी बात है शादी में सारे रिश्तेदारों को, यार को, पडोसियों को मिलने जुलने वालों को न्यौता दिया जाता है के शादी में आकर शान बढते हैं । सब आते हैं । आनन्दा कुछ तो करते नहीं । आज के समय सभी चाहते हैं कि उनके लाटसाहब जैसे खातेदारी । अगर राष्ट्रीय पानी में दस मिनट की भी देरी हो जाए तो सारा आसमान सर पर उठा लेते है कि खातिर नहीं हो रही । उल्टा सीधा बोलेंगे । जैसे कि नंदकिशोर के बेटे की शादी में सब बारातियों को देखा । हम सब सोसाइटी के लोग खाये पिए जा रहे थे और कमियां भी निकाल रहे थे । कोई ना ये झूठी शान के लिए बेकार की शादी का खर्चा । तभी रोहिणी, जॉगिंग अधिक और चक्कर पूरा करके सभी भाई और गोल करता हूँ । लगाई बिल्कुल सही झूठी शान है । सब रिश्तेदार तमाशा देखते हैं । शादी नहीं हुई । कोई फिल्म हो गयी समीक्षक बनकर टिप्पणी करते करते हैं यही टिप्पणियां फिर शादी वाले घर में महाभारत के युद्ध का कारण बनती है । कुछ रिश्तेदार नाराज हो जाते हैं । कुछ तो सामान उठा के वापस हो जाते हैं । शादी के टाइम सबको पैसे कपडे लगाते देकर विदा करने का निवास है । जब पैसे दे दो कोई रिश्तेदार खुश नहीं होता । सब खुसर पुसर करते हैं कि फैलाने को ज्यादा दी है हमारे को काम बस इसी बात पर नाराज हो जाते हैं । अपने लगता पर नहीं चलाएंगे की इस साल अच्छा कपडे तो लोग भिखारियों को दे देते हैं । हम कोई मंदिर के आगे बैठे साढे हुए कपडे हमारी सभी रोहिणी चौकिंग का एक और चक्कर पूरा करके सभी पाई और डॉक्टर बोलने लगी तो सुकन्या ने ठोक दिया आपकी कोई विशेष टिप्पणी । ये सुनकर रोहिणी ने हारते हुए गा बाबा ने बिल्कुल सही विश्लेषण किया है । शादी का शादी हमारी बिरादरी को खुश कर देता हूँ । ये कहां की अक्लमंदी है? और तो रही है कि खुश फिर भी कोई नहीं होता है । अगर शादी को हम तमाशा बनाते क्यों? अगर कोई शादी में किसी कारण से नहीं पहुंचा तो हम भी किला रखते हैं कि आया नहीं, कोई किसी को नहीं छोडना । शादी करनी है तो घर परिवार के सदस्यों के साथ ही संपन्न हो जाए । जितना खर्चा शादी में हम करते हैं अगर वह बचाकर बैंक में जमा करवा ले तो बढाते की पेंशन बन सकती है । देखा सुकन्या हमारी बेटी कितनी समझदार हो गयी । मुझे रोहिणी पर गर्व कितनी अच्छी तरह से भविष्य की सोच रही है । हम अपनी सारी जमा पूंजी शादियों में खर्च कर देते हैं । अक्सर तो उधर भी लेते हैं जिस को चुकाना भी कई बार मुश्किल हो जाता है । अपनी चादर से अधिक खर्च करते हैं । क्या बाप बेटी को किसी प्रतियोगिता में भाग लेना है तो वहाँ देने वाले भाषण का अभ्यास हो रहा है । क्या कोई निबंध लिखना है? कहाँ है भारत का हर व्यक्ति मेरे साथ प्रतियोगिता में शामिल हो कितनी बुराइयां दूर हो सकती हैं रिश्ते मुस्कुराते हुए गा । ऑफिस नहीं जाना क्या जाना है? सभी तो नहीं छोड कर शहर पर आया था सरकार चले आवश्यकता प्रतियोगिता में कब जाना है दो प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना कौन सी अपने दो बच्चों के शादी पर प्रतियोगिता क्या

13 रसरंग -अच्छा झूठ

अच्छा झूठ । दोपहर के एक बजे रंजना रसोई समेट कर एक झपकी की तैयारी में थी । अभी दरवाजे पर दस्तक हुई । संजरानी दरवाजा खोला और सामने अचंत खडा था । फटाफट वो घर के अंदर आकर सीधा रसोई में घुसा । दादी क्या बनाया? आज तो कुछ नहीं बनाया । आप वाली दाल बच्ची है, उसका पराठा बना देती हूँ । जल्दी बना तो भूख लगी है । घर में मम्मी नहीं है तभी आया हूँ आपको तो मालूम है दोपहर के समय शॉपिंग या किटी पार्टी उसमें बच्चों का ख्याल कभी रखा है क्या? कहाँ क्या कर रहे हैं बच्चे? सचिन ने जवाब दिया हाँ, रंजना रसोई में पराठा बनाने लगती है और अजंता टीवी में स्पोर्ट्स चैनल देखने लगते हैं । दादी सूटकेस किसका होना है? आया नहीं है । दादा टूर पर जा रहे हैं । कल सुबह छह बजे की फ्लाइट से कोलकाता जा रहे हैं । कितने दिन के लिए चार दिन के लिए ऍम करना । मैं चार दिन रात को सोने के लिए आ जाऊंगा । आपको डरने की कोई आवश्यकता नहीं है । नहीं बेटे, पापा मम्मी गुस्सा होंगे । मैं बत्ती जलाकर सोचा होंगी आप उसकी चिंता ना । अगर मैं आपके साथ होने की बात थोडी बताऊंगा । कांग्रेस और एक घर पढाई करनी है और इस बहाने शौर्य भी यहीं आ जाएगा । रात को पढाई भी हो जाएगी और दादी को डर भी नहीं लगेगा । मम्मी को शक भी नहीं होगा क्योंकि शौर्य मम्मी को फोन करके मुझे अपने घर बुलाएगा । ज्यादा रंजन सत्तर वर्ष के उम्र में भी नौकरी कर रहे हैं । घर के पिछले हिस्से में दादा दादी अपनी जिंदगी चुपचाप बसर कर रहे हैं । बच्चों के साथ मतभेद के कारण अक्सर होने वाले पारिवारिक झगडों से तंग आकर रंजन ने मकान के भूतल पर दो कमरे अपने पास रखकर बाकी मकान बच्चों को दे दिया । मकान के पिछले करी में खुलने वाले दरवाजे का प्रयोग करने लगे । बच्चों से संवाद ना के बराबर है । अचंत बच्चों में सबसे बडा आज पंद्रह वर्ष का अचंत दसवीं कक्षा में पढ रहा है । वोट परीक्षा की तैयारी के लिए शौर्य के घर जाने के बहाने पिछले दरवाजे से दादी के कमरे में रात को आ गया । दादी जल्दी हो गई । दूसरे कमरे में चिंता शहर है टीवी देखते हुए पडने लगे तो घंटे की सख्त पढाई के पचास तो उन्होंने थोडा अवकाश क्या अच्छी बात पूछ रहा हूँ पूरा तो नहीं मानेगा चौरे के प्रश्न पर अचंत कुछ पल चोपडा कुछ तुम चोरी छुपे दादी से मिलते होंगे शौर्य उसमें बुरा मानने वाली कोई बात बचपन में दादी और मम्मी के बीच बहुत झगडा होता था । झगडे के बाद मम्मी ने राष्ट्र में हम बच्चों की पिटाई कर देती थी । एक मेरी बहुत पिटाई हो रही थी । तब दादी और दादा ने मम्मी से पिटाई बंद करने को कहा । लेकिन मम्मी ने उसके बाद मुझे बाथरूम में बंद कर दिया । मेरी उम्र उस समय पांच वर्ष के लिए । उस दिन के बाद दादा दादी मकान के पिछले हिस्से में रहने आ गए तो पापा मम्मी चाचा चाची से बात नहीं करते हैं । हम जब शाम को पार्क में खेलने जाते थे तब दादा दादी हम से चोरी छिपे मिलते हैं । मम्मी की पढाई सेनाधिकारी बार बचाते थे । उसके बाद बाथरूम में बंद करके मुझे सजा दी जाती थी । इस कारण मैं करती से चोरी छिपे मम्मी पापा से झूठ बोलकर बनता हूँ । अच्छा बाहर पडेगा, नींद आ रही है या चाय बनाते हैं । फिर पडेंगे अचंत रसोई मैं चाय बनाने जाता है । बर्तन की आवाज सुन करता दी जाती है । अच्छा तो तुम पढाई करो, मैं चाय बनाती हूँ ।

14 रसरंग -आज की सरकारी शिक्षा

आज की सरकारी शिक्षा वैसे तो लगभग पचास साल पहले भी भारत की राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में यही होता था जो आज हो रहा है आगे भी होता रहेगा ऍम खुद अपने स्कूल में देखा कॉटन अपने स्कूल का नाम नहीं बताया था एक काल्पनिक स्कूल की बात करते हैं कहाँ होना चाहिए उसको नवगांव कर लो अपने गांव का इस बात को छोडो कहीं भी हो सकता है किसी भी राज्य में जो राज्य आपको पसंद हो या फिर ना पसंद नहीं पर नवगाम पैसा लेते हैं पैसे आप नवगांव के स्थान पर कोई और भी लिख सकते हैं जो आपको पसंद है । शहर नवगांव धन सरकारी हाईस्कूल कक्षा बारहवीं अब आप पूछेंगे कि बारवीं कक्षा ही क्यों बारवी इसलिए क्योंकि बच्चे बडे हो जाते पिताजी के साथ इसके बनियान पहनने लगते हैं ऊॅट भी करने लगते हैं इस कारण बारवीं कक्षा उचित है स्कूल के हेडमास्टर के पढाने की ड्यूटी लगी है तो नहीं था उन का पढाने का ऐसे बच्चों का कौन सा दल होता पढने के लिए ना तो पढाने वाले का दिल और नहीं पडने वाला हूँ मजबूरी अहमदाबा पडने में देते हैं स्कूल में हम औपचारिकता भी तो पूरी करनी होती है स्कूल का समय हो गया । बच्चे स्कूल में इधर उधर मस्ती कर रहे हैं । कुछ काम कर रहे हैं स्कूल कम सब्जी मंडी अधिक लग रहा है । प्रिंसिपल हैडमास्टर से कह रहे हैं बारहवीं की बोर्ड परीक्षा असर पडे पढाने के लिए टीचर नहीं ऐसा करो सरकारी नीति के अंदर आठवीं तक तो किसी को फेल करना नहीं ऍम स्कूल की प्रतिष्ठा होती है अब से तुम पार्टी को पढाओ ऍम मुझे ये नहीं होगा । मैं तो छोटी ऍम आठवीं तक पढा सकता हूँ । प्रिंसिपल मैं कुछ नहीं होगा बारह को पढाना होगा ऍम नेताओं वाले काम चला करवा प्रिंसिपल क्या मतलब ऍम नेताओं को क्या अभी वित्त मंत्री तो कभी कोयला मंत्री तो कभी शिक्षा मंत्री हम आम लोग ये काम नहीं कर सकते । आठवीं का मास्टर बारवीं को नहीं पढा सकता है । प्रिंसिपल मैं कुछ नहीं जानता तो आज से हमारे को पढाना शुरू कर दो फॅार भी क्या करें? बारवी क्लास में पढाने पहुंच गए आज की क्लास आरंभ क्लास में टूटी फूटी कुर्सियां और फ्रेंच पिछले स्कूल में हेडमास्टर खडे होकर बढा रहे हैं और विद्यार्थी आसपास बैठे या खडे सुन रहे हैं । बाजार का भेजा प्रिंसिपल से बात करके पहले ही फ्राई हो चुका था बेमन से पढाना नाम क्या है? हेड मास्टर भारत में असभ्य लोग रहते थे । सारे के सारे ऍम किसी को कल नहीं गडबड, गडबड गाया करते थे । उनको लोग भेद कहने लगे सब सब थे । अंग्रेजों ने भारत को सभ्यता सिखाएगी । ज्ञानचंद सब सत्य जब अंग्रेजों का जन्म भी नहीं हुआ था तब से भारत सब हैं । रामायणकाल और महाभारत काल में अंग्रेज कहाँ थे? हमारे वेद शास्त्र, उपनिषद और पुराण भारत की आदिम सभ्यता की घोषणा करते हैं । उधर गवार के अंग्रेजों के देश में नहीं रहते हैं । उनके असभ्यता आ गई थी । मालूम नहीं भाईसाहब भूले भटके पूरे स्कूल में ज्ञानचन्द्र जैसे दो चार पता नहीं कहाँ से पडने आ जाते हैं । देखा जाए तो सरस्वती मेहरबान रहती है और प्रतिभासंपन्न दो चार विद्यार्थियों की बदौलत सरकारी स्कूल बडे घर से कहते हैं कि कौन कहता है कि हम पढाते रहे हैं । आजकल तो माँ बाप बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढाने के चक्कर में रहते हैं । हम तो फ्री में पढाते हैं । पता नहीं आजकल अभिभावक प्राइवेट स्कूलों के पीछे पागल क्यों ऍफ है उससे पीछा छुडाने के लिए कर्मचंद से पूछ लूँ फॅार कितने बंदर है? कर्मचंद बंदरिया बंदरगाह ऍम बंदरगाह यहाँ पे आना मैं के बच्चे अध्यापक की खिचाई कर रहे हैं । अब अध्यापक भी क्या कर रहे जब आठवीं कक्षा के अध्यापक को बारहवीं कक्षा पढाने को दे दी जाए कर्मचारी मैं अपने दिमाग के साथ अत्याचार नहीं कर सकता कि उसे स्टेज के बन्दर याद करूँ जिससे मेरे जीवन को कोई लाभ नहीं । अपने पुस्तकालय में बोल की पुस्तक रखी हुई है उसमें दुनिया भर के बन्दर और बंदरगाह लिख है आप स्वयं पर लेना ऍम रेखा गया ऍम प्रशांत महासागर ऍम अब क्या हो गया ऍम फॅसने मेरे पिता से कह दिया कि मैं आज खेलता हूँ और दो हजार रुपए हर रोज आता हूँ । मैं हार भी जाता हूँ तो उसके बाद के पैसे आता हूँ । मैं आता हूँ तो क्या चला जाता है । उसके बाद का ऍम जमाना अलग अलग बैठ गए । रमेश कहाँ बैठी हूँ कोई फॅमिली से स्कूल में ऐसा करता हूँ कि कल घर है लडाई लेकर आ जाऊंगा । आराम से कोने में बिछाकर लेट होगा ऍम ऍम दिया दिनेश जब मैं ज्यादा की किताब उठाता हूँ तो दिल और देवा आगे की बात कहते हैं फॅस करेगा मेरी यह तो अत्याचार ऐसा ऍम हरी शिक्षा को अत्याचार बताता है । ज्ञानचंद इन सब पाठ्यपुस्तकों को हारकर फेंक देना चाहिए । कुछ भी व्यवहारिक नहीं । हमारी शिक्षा प्रणाली में दिनेश फॅमिली हमारे में से आधे तो बात की दुकानों पर बैठना और बाकी आधुनिक लडकी करनी है । स्कूल में ना तो दुकान पर बैठने की शिक्षा मिलती है और नई क्लर्क बनने की ज्ञानचंद ॅ तो दुकान में कोई मदद करता नहीं । क्लर्की में हम ऍम मास्टर तो लोगों को विद्या नहीं आएगी । तमाम उम्र नालायक रहोगे क्या आंचल विद्यालय कर क्या करेंगे? ऍम सब एक नंबर कॅाम में और पाजी, पाजी और सारे के सारे सभी लडके एक सर में हमारे साथ गाली गलोच कितना अच्छा नहीं होगा ऍम हुआ हूँ । इतना सुनकर सभी लडके हेड मास्टर हाय हाय के नारे लगाते हुए क्लास से बाहर आए । पूरे स्कूल का चक्कर लगाया और स्कूल के गेट पर धरने पर बैठ गए । फॅार हेड मास्टर से बोला पंगा लेने को किसने कहा था पदनाम इसे तो बाहर में जा लडके पढे आना पडेगा हमारे बाप का क्या जाता है अपनी सैलेरी की चिंता करो हर महीने ऍम को गोली मार हूँ ऍम की समझ में आ गया । स्कूल गेट पर धरने पर बैठे लडकों से माफी मांग ली । ऍम में जाकर आराम फरमाने लगा । लडके हुल्लड मचाने लगते हैं कही कैसी लगी आपको अपने स्कूल के दिन याद आयॅल आ गए बहुत बढिया बाबा वह ज्यादा नहीं मैं झूठ लिख रहा हूँ तब तो ये सत्य है कि आप सरकारी स्कूल में बडे ही नहीं अपनी आप बीती सुनाई । आप मना तो सच नहीं तो छूट ।

15 रसरंग -क़िस्सा-ए-कुर्ता पाजामा

किस्सा एक कुर्ता पजामा चुनाव का माहौल है । प्रजातंत्र में चुनाव की हर बात हाथ से उत्पन्न करती है । नेताओं के बोल रंगढंग चुनाव रणनीति में स्वयं ही हाथ से होता है और दूसरा भी होता है । चाहे जाना चाहे किसी भी छोटी सी बात पर हाथ से उत्पन्न हो जाता है । चुनाव अपने अपने जबरदस्त मनोरंजन है । हमारा आप सिनेमा टीवी देखता हूँ जितना नहीं उससे उससे अधिक चुनावों में हस्ते हैं । वो तो वोट दो नेता जी को बोल दो । चुनाव में वोट मानते नेताजी अपने काफिले के साथ एक गांव में पहुंचे । चुनावी रणनीति के तहत ने राजी ने रात गांव में गुजारनी थी और एक गरीब के घर खाना और सोना था चुनावी रणनीतियां जनाब क्या करें ना चाहते हुए भी ये काम करना है । वरना नेताजी पांचतारा की सहूलियत के बिना घर से बाहर निकालते कहा है ये तो प्रजातंत्र जो चुनाव मिलता जी को फाइव स्टार स्कूल छोड गांव में गरीब के घर भी जाना रहना और खाना पडता है । क्या करें आप भी पेट का सवाल है नाम तो पेट का कहते हैं असल तो दुकानदारी है । अनेक प्रकार के पापड बेलने पडते हैं । जितने पापड मिलेंगे उतना अधिक लाभ बिना पापड बेले तो चुनाव जीतना संभव है । तय समय अनुसार नेताजी अपने काफिले के साथ शाम के समय गांव पहुंच गए । सबसे गरीब व्यक्ति कालू के घर पर धावा बोल दिया । ज्यादा कालू हाथ जोड इधर उधर हो रहा है । नेताजी के लोगों ने उसका कच्चे मकान पर कब्जा कर लिया । फोटो पर फोटो खींच गए कि नेताजी करीब के घर राहत गुजारेंगे । फोटो खींच नहीं । सोशल मीडिया पर डाल दिए गए । मीडिया वालों को ईमेल कर दी है । वीडियो बन गए । हर तरह के मीडिया पर नेताजी छाए हुए थे । कह आलू के घर की दाल रोटी नेता जी के गले नीचे नहीं उतर सकती थी । नेताजी का दल पूरी तैयारी के साथ आया था । अजवाइन, दाल मखनी और लच्छा पराठा नेताजी के लिए बनाया । नेताजी के साथ कालू की भी बाल लेवल कच्चे पक्के रोडे खाने वाले कालू ने कभी दाल मखनी दिखाई थी । कालू ने नेताजी को दो आए थे । आखिर उसे भी बढिया खाना मिला, जो कभी काल होने ख्वाब में भी नहीं सोचा था । रात को नेताजी ने घात पर लेकर फोटो खिंचवाई । सोशल मीडिया में तुरंत फोटो डाल दी गई । गरीबों के मसीहा नेताजी गरीब के खर्च हो रहे हैं । वोटों के तुरंत बाद नेताजी अपनी शानदार विलासिता से भरपूर एसयूवी करीब रखना सोये । चुनावी रणनीति के तहत कालू ने भी नेताजी के साथ चुनावी रैली में हिस्सा लेना था । अगले दिन कहाँ गांव खून खून का चुनाव प्रचार करता था । नेताजी ने अपने एसयूवी के गरीब रथ में बने स्नानघर में गर्म पानी से स्नान किया । महान क्या क्या जब जो आप आ गए सभी चले इधर उधर भागते नजर आएगा । नेताजी के कपडे वाला सूटकेस तो घर में रह गया । उसे किसी ने उठाया नहीं । नेताजी चला रहे हैं कपडे का एक का पडेगा । हरामखोर ओने नंगा खडा कर रहे हैं । नेताजी का पारा सातवें आसमान तक चढ गया । जो चेला सामने आया उसी की शाम घर से कपडे लाने में कम से कम चार घंटे चाहिए । आखिर नेताजी का उसका आलू का कुर्ता पजामा पहनना पडता । मैं ताजी की फिर से सोशल मीडिया पर फोटो डालने लगी । गरीबों के सच्चे मसिया नेताजी चुनाव रैली आरंभ हो गए । कालू खुली जी पर खडा हो गया । उसने नेता जी के समर्थन में बोलना शुरू किया । नेताजी बहुत सज्जनपुर है, मेरे घर खाना खाया सो रुपये दिए । नेताजी देखता है, पूरे देता । बोट नेताजी को देना है पीछे से नेताजी का चले चलना है । नेताजी को वोट दो वोट दो वोट दो नेता जी को वोट दो वोट दो वोट दो । नेताजी मंद मंद मुस्कुराते हुए हाथ जोडकर जनता से विनम्रता से मिल रहे थे । अंत में कालू ने कहा वोट नेता जी को दें, बहुत भलेमानस है । इतने वाले मानस है कि नेताजी ने मेरा कुर्ता पजामा पहना है । कुर्ते पजामे की बात सुनकर सभी गांव वाले हंसने लगे और नेताजी बगले झांकने लगे । कालू की कुर्ता पजामा वाली बात सुनकर नेताजी नाराज हो गए और काल को सकते राय दी कि कुर्ता पजामा उसका ये बिल्कुल नहीं बोलना हूँ । अगले गांव में कालू फिर खुले जी पर खडा होकर बोलने लगा । उसने नेताजी के समर्थन में बोल कर वोट मांगे । कालू के वोट मांगने की कला से नेताजी बहुत प्रभावित हुए । अंत में कालू ने कहा वोट नेता जी को देख नेताजी बहुत भलेमानस हैं । हाँ, नेताजी ने जो कुर्ता पजामा पहना है वह नेताजी का नहीं है । अकेले गांव वाले भी ठहाका लगाकर हंसने लगे और नेताजी फिर से नाराज हो गए कि कालू ने ये बोला कि कुर्ता पजामा मेरा नहीं है । कुर्ते पजामे का जिक्र ही नेता जी की छवि खराब कर रहे हैं और कालू हो सकते । हिदायत दी कि कुर्ते पजामे का कोई भी जिक्र नहीं होगा । अगले गांव में कानून है खुली जीप पर खडे हो कर फिर से जनसभा को संबोधित किया और नेताजी के लिए वोट मांगे । अंत में कालू ने बोला था बोर्ड नेताजी को दें नेता जी बहुत ही वाले मना है था । नेताजी ने जो कुर्ता पजामा पहना है अब उसका कोई जिक्र नहीं कर रहा हूँ वो आलू की बात सुनकर ने राज्य के मुझसे रवित नहीं निकला तो ऍम लुढक गए ।

16 रसरंग -मोबाइल लत

मोबाइल जब से कम्बख्त स्मार्ट फोन आए हैं तब से सब की जिंदगी में अभूतपूर्व परिवर्तन आ गए । टपरी कॉल फ्री पता नहीं क्या गया हूँ जिसे देखो ससुरा मोबाइल में घुसा रहता है । बट ठोंको दीन दुनिया की कोई खबर नहीं रहती तो आपकी नहीं तोड गए है ना क्या किया जाए जवान के और उपलब्ध क्या? तो छोटे छोटे बच्चों के हाथ में भी लेटेस्ट मोबाइल रहते हैं । बाकी बचे उसी का असर करो ना । महामारी ने पूरी कर दी । इस महामारी ने स्कूल बंद करा दिए और ऑनलाइन क्लासेज का चलन हो गया हूँ । छोटे छोटे बच्चे भी ऑनलाइन पढ रहे हैं । बच्चों की पढाई भी स्मार्ट फोन पर चल रही है । इसलिए स्मार्ट फोन के विरोध मैं कुछ नहीं बोलूंगा । ये बात लौटा उनसे एक महीना पहले की । चलो आज घूमने चलेंगे तो तभी बात समाचार पीते हुए पीना ने कहा चलो कहाँ चलें अखिलेश ना चाय की चुस्कियों के बीच पूछा आप उस माहौल घूमते हो, मुझे भी मॉल कुमार हो, उसके बाद में लंच करा देना । मेरा ऑफिस मॉल के पीछे हमको मॉल पर ऑटो पकडते हैं । इस कारण मॉल भी घूमना हो जाता है । चलो आज भी मालूम लेता हूँ । राकेश अपने से प्रति बारह बजे राकेश और बिना मॉल के लिए रवाना होते हैं । एक घंटे के सफर के बाद मॉल पहुंचते थोडी देर हॉल में घूमते हैं । रविवार के दिन मॉल में बहुत भीड थी । कुछ खरीदना है । राकेश ने देना से पूछा क्या लें छोडा घूमते हैं । बच्चे बडे हो गए हैं तो अपनी पसंद की खरीदारी कर लेते हैं तो कुछ ले लोग क्या लूँ ऍम खरीदना कुछ नहीं देना ने राकेश की आंखों में आंखें डालते हुए थोडी देर मॉल खोलने के बाद दोनों कोर्ट कोर्ट पहुंचे । वो कोर्ट खचाखच भरा हुआ था । पांच मिनट बाद एक कोने में चार जनों के एक टेबल खाली हुई है ताकि शाॅट गए । तभी एक नवविवाहित जोडा है अंकल तो कोर्से खाली हैं की हम बैठ सकते हैं । आज भीड बहुत है । नवयुवक ने राकेश और रीना से पूछा राकेश और इन्होंने अनुमति दी । लडकी का हाथ छोडे से भरा हुआ था और एकदम दुल्हन की तरह सजी थी । नवविवाहित लडकी और लडका बेहद खूबसूरत है । उनको देखकर ऐसा प्रतीत होने लगा कि भगवान ने तो सिर्फ एक दूसरे के लिए ही बनाया है । फॅस राकेश ऑॅयल के एक और बैठे थे और नवविवाहित छोडा दूसरी हो राकेश और रीना एक दूसरे से पूछ रहे थे कि क्या खाएं? पंजाबी खाना दक्षिण भारतीय या फिर चाहिए? पर दोनों में सहमति बनी चलो थोडा थोडा तीनों का स्वाद लिया जाए । पीना टेबल पर बैठी रही और राकेश रंजन लेना गया । राकेश को दस मिनट लगे । पीना सामने बैठे जोडी को देखने लगे । जब से दोनों देना के सामने बैठे सबसे दोनों अपने अपने मोबाइल में टिक टिक टिक टिक किया जा रहे थे । उन्होंने कोई बात नहीं बस मोबाइल पर मस्त हैं और मुस्कुरा दे दे देना । हैरान हो गए कि ये कैसा नवविवाहित जोडा कोई बातचीत नहीं सिर्फ मोबाइल की दुनिया में मस्त है । कोर्ट कोर्ट में बैठे मोबाइल पर किए जा रहे हैं । क्या खाना है छोडो कोई दूसरी बात भी नहीं की आज के युवाओं को हो क्या गया? रीना सोचने लगे कि जब उस की शादी हुई थी, ढेरों बातें करते थे, हाथ में हाथ डाले घूमते थे और ये तो मोबाइल में मस्त हैं । तभी राकेश ऍम लीना ने राकेश को कोई बीमारी और कान में उस जोडे के बारे में फुसफुसाए । राकेश ने उनको देखा और मुस्कुरा दिया है । खाने के साथ राकेश वासी ना दोनों को देखते रहे हैं । वो दो युवा अपने मोबाइल पर ही मतलब थे सामने बैठे राकेश और सीना उनको लगातार देख रहे हैं । इस बात से भी दोनों अंजाम खाना समाप्ति के पश्चात राकेश मत लेना ने टेबल छोडी सेना ने अब उनको का हम जा रहे हैं टेबल खाली । आप आराम से खाने का लुत्फ उठाते हैं । मोबाइल पर मस्त दोनों ने एक स्वर में कहा ऍम तो ना बेबी मोबाइल पर मस्त है और समोसे का करने का है । मोबाइल में देखी हुई थी । सेना ने बढकर देखा । युवक ने मोबाइल पर से बनाने का है हटाए । पत्नी से पूछा कॅालिंग उसने मोबाइल पर टिकी हुई निगाहों से ही उत्तर दिया तेरे को दस मिनट सेना ने राकेश के हाथों में हार डाला और आगे बढ गए । आकाश कितने वर्ष के हो गए हम बचपन और मैं तारे बन के राकेशमोहन तीस के लपेटे में पी । डी का अंतर है या कुछ और? मालूम नहीं । मुझे तो दोनों मनोरोगी लगते हैं । अच्छा है कि हमारे समय में मोबाइल नहीं । तुम याद करो हम एक दूसरे से कितनी बातें करते थे । घंटों बातें समाप्त नहीं होती थी और एक दूसरे की आंखों में आंखें डालकर इशारे इशारे में सब कुछ कह जाते थे । कितने हसीन दिन रहते थे? राकेश तो भारत वहाँ पे ना वो हमेशा उल्टी दिशा में चलता है । राकेश मुस्कुरा दिया और बात पलटी । तेरह । मैं ऑफिस में भी देखता हूँ । हाँ जितना समय काम करते हैं उससे अधिक मोबाइल पर करते हैं । तीन की छोडकर देखा तो युवा छोडा मोबाइल पर हिम्मत था राकेश और रीना हाथ में हाथ डाले मुस्कराकर आगे बढ गए स्मार्ट फोन पर टिक टिक करने वालों राखियों से भी गोली चलाकर इशारों ही इशारों में कुछ प्रेम प्रेम का इजहार भी कर लिया करो हूँ हूँ वो तो है ही हैं ।

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