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Transcript

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 1

आप सुन रहे हैं क्योंकि वो एफ एम पर किताब मेरे सपने मेरा गांव जिसे लिखा है ओमेश्वरी नूतन ने और मैं हूँ रूबी बारीक आपके साथ ऍम सुने जो मनचाहे । पहला भाग बाबू जी बाबूजी बाबूजी आज मैं बहुत खुश हूँ बाबू जी दोनों हाथों से राकेश के बाबूजी का हाथ पकडकर हिंदी की तरह गोल गोल घुमाते हुए पूजा ने कहा क्या हुआ बहुत खुशी की बात है बाबू जी बहुत खुशी की अरे कुछ बताएगी भी । किस बूढे को ऐसी बच्चों की तरह चक्कर लगवाती रहेगी? राकेश की मैंने कहा क्या बताओ मांझी क्या बताऊँ? आप भी सुनेंगे तो खुशी से उछल पडेगी । कहते हुए पूजा एकदम से उनसे गले मिल गई । धीरे बेटा धीरे गिर गए तो इस बुढापे में हड्डी जोडना मुश्किल होगा । ऐसे कैसे गिर जाओगे? हाँ आपकी बेटी एन आपके साथ और जब दो पीढी साथ हो तो गिरने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता । अच्छा ठीक हैं । अब तो हमें और परेशान मत कर और बता भी दी की कौनसा खजाना लग गया है । तेरे हाथ जो इतनी खुश हैं । हमने जो सपना देखा वह तो पूरा हुआ ही लेकिन अब तक हम लोग जो सोच रहे थे कि काश कोई ऐसा ईश्वर का दूत आ जाए जो हमारी कामयाबी को इस देश के हर किसान तक फैलाती और उनके जीवन में भी खुशियां आ जाए । वह देवदूत आ गया है । हाँ, क्या कह रही है तो मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है । राकेश के बाबू जी ने कहा उन्नत खेती, विकसित गांव, किसानों की समृद्धि का सपना लिए आप मैं माँ नीरज और इस गांव के सारे लोग अथक मेहनत करते हुए जिस तरीके को अपनाकर मिट्टी में सोना उगाया है, उसी तरीके को पूरे प्रदेश के किसानों के लिए लागू करने का फैसला इस प्रदेश के नवनिर्मित मुखिया ने लिया है । बाबूजी सच कह रही हो तो हाँ पर कैसे पूजा बाबू जी ने पूछा, नरवा गरवा गुरुवा बाडी । अपने प्रदेश के चार चिल्हारी इस नाम से हमारी सरकार ने गांव के विकास के लिए एक नया कार्यक्रम शुरू करने की बात कही है कि ये कौन सा फार्मूला है । मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि तुम क्या कह रही हूँ और इससे हमारी तरह हर किसान कैसे खुशहाल होंगे? राकेश ने पूछा आप दो साल के लिए विदेश क्या गए? अपनी मातृभाषा भी भूल गए । चलो मैं बता देती हो, हमारे प्रादेशिक भाषा के अनुसार नरवा का मतलब होता है बरसाती नदी । गरवा के मायने है गाय बैल । जबकि कूडेदानी कचरा फेंकने के लिए बनाए गए निश्चित स्थान को हम लोग गुरुवा कहते हैं और बाडी कहते हैं हमारी इस माँ अन्नपूर्णा को घर से लगी सब्जी की लहलहाती खेती को दिखाते हुए पूजा ने कहा, तो तुमने मायने तो बता दिए पर इससे किसानों को क्या फायदा होगा और कैसे ये भी समझा दे । मैंने कहा इसको समझने के लिए तो हमें तीन साल पीछे जाना होगा । माँ तब जब मेरी मुलाकात आपके बेटे से हुई । हम दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया । ये क्या बात हुई भला तुम्हारे प्रेम से सरकार के किसी कार्यक्रम का क्या संबंध माने? पूछा लगता है माँ अच्छे दिन आने से आप सब कुछ भूल गई है । याद करो वो दिन जब आप उम्र से आगे निकलते अपने बेटे की शादी के लिए परेशान थी और आपका बेटा था जो बेरोजगारी की मार से परेशान हो । रोजगार के नाम पर सरकारी नौकरी के चक्कर में पडा रहता था बेरोजगारी ये एक ऐसा शब्द है जो आज के समय में सबसे अधिक चर्चित होने के साथ ही भयावह भी है और सूरज की तरह मूड है लाई मानव समाज की सुख शांति को निकलते जा रहा है । आतंकवाद, नक्सलवाद जैसी गंभीर समस्या के जड में भी बेरोजगारी ही है तो ये भी समझना जरूरी हो गया है कि आखिर रोजगार के मायने क्या है और हमारे सामने स्थित रोजगार के उपलब्ध साधन को अनदेखा करते पढे लिखे युवा सपनों के पीछे क्यों भाग रहे हैं और क्या किसान होना या किसान की संतान होना सचमुच अभिशाप है जैसा कि आज के कुछ युवाओं की सोच है हैं ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 2

दूसरा भाग मेरी सहेली सरोज ने मुझसे एक दिन बातों ही बातों में बताया की उसका भाई है जिसका बेरोजगारी के कारण तेज की उम्र हो जाने के बाद भी विवाह नहीं हुआ है । पिताजी ने जब कहा कि मैंने खेती बाडी करके ये अपना परिवार चलाया है और तुम दोनों भाई बहन का लालन पालन करने के साथ ही पढाया, लिखाया भी है तो तुम मेरे साथ किसानी में क्यों? हाँ नहीं बताते हो क्योंकि मैं आप लोगों की तरह मार मार कर देना नहीं चाहता । जिंदगी को इंजॉय करना चाहता हूँ । मैं नहीं चाहता की मेरे बच्चों को भी हमारी तरह स्कूल कॉलेज में किसान के बेटे के नाम पर हर समय दूसरे दर्जे से देखा जाये । राकेश ने कहा कि तुम क्या कह रहे हो बेटा कर्ज लेकर ही सही पर हमने तुम भाई बहनों की पढाई में कोई कमी नहीं रहने दी । राकेश की मैंने कहा क्यों पढाई इसीलिए की नौकरी करके हमारे जीवन स्तर को सुधार सकूँ । हाँ पर नौकरी नहीं मिल रही है तो खेती करके भी जीवन चलाया जा सकता है । बाबू जी ने आगे कहा, और फिर बहन का विवाह कर देने के बाद बेटी अपने ससुराल चली जाएगी और उसके बदले में बहुत घर आ जाएगी । हम दोनों बाप बेटे मिलकर उन्नत खेती करेंगे जिससे ना सिर्फ तुम्हारी बेरोजगारी दूर हो जाएगी बल्कि आने वाली पीढियां भी इस बीमारी से मुक्त हो जाएगी । रोजगार के लिए अब दर दर भटक ना छोडकर पूर्वजों से मिली खेती में ही रोजगार ढूंढ ले । पिताजी की इस सलाह पर भैया आग बबूला हो गए और कहने लगे यदि खेती बाडी ही करवाना था तो मुझे इतना पढाई ही क्यों? और अब जब सरकारी नौकरी के सपने को सच करने के लिए रात दिन एक करके प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा हूँ तो आप कहते हैं कि मिट्टी में घुसकर मजदूर बन जाओ । मैं तो में मजदूर बनने के लिए नहीं किसान बनने के लिए के राहुल राकेश बेटा और किसान बनकर आपकी तरह ही जिंदगी भर कर्ज के बोझ तले दबे रहूँ । यही कह रहना अपने पिताजी से ये तुम कैसी बातें कर रहे हो । बेटा राकेश के बारें नींबू का शर्बत देते हुए आगे कहा लेकिन शरबत पीकर तो देवा को ठंडा कर लें । फिर पिताजी की बातों पर विचार करता ये कह रहे हैं तो कुछ तो सोच समझकर कह रहे होंगे आखिरी तुम्हारे पिताजी है, दुश्मन नहीं । आप भी इनका साथ दे रही है । हाँ हाँ, क्योंकि मैं देख रही हूँ कि तुम्हारे पिताजी इन दिनों सिर्फ तुम्हारे ही बारे में सोचते रहते हैं । पिछले एक सप्ताह से जब से तुमारी नौकरी का परिणाम आया है और उसमें तुम्हारा नाम नहीं आने के कारण तुम परेशान हो तब से इन्हें भी तुम्हारी ही जिनका खाए जा रही है । आखिर कब तक तुम सरकारिया बडी कंपनी में नौकरी करने के चक्कर में अपना कीमती समय बर्बाद करते रहेंगे । आप भी मुझे औरों की तरह यही कहना चाह रही हो मा की मैं नालायक हूँ नहीं, हर माह के लिए उसका बेटा आंखों का तारा होता है । लेकिन ये भी तो सचिन के हजार नौकरी के लिए लाख लोग परीक्षा देंगे तो हजार लोग आप लोग मेरा बोझ उठाते उठाते शायद थक गए हो ना? पर मैंने अभी उम्मीद नहीं छोडी है और मैं ये सब अपने परिवार का जीवन स्तर सुधारने के लिए ही तो कर रहा हूँ । मैं चाहता हूँ कि पिताजी को कर्जमुक्त होने में सहयोग कर सकूँ । अब ये झगडा बंद करो । देखो पूजा रही है । आंगन में पूजा को स्कूटी खडी करते देख राकेश की माँ ने आगे कहा हाँ पूजा भरी दोपहरी में अचानक वहाँ आंटी जी बात ही कुछ ऐसी है कि तुरंत आना पडा । मुझे राकेश से जरूरी बात करनी है क्या? बातें पूजा आओ बैठ कर बातें करते हैं । कहते हुए राकेश घर के भीतर जाने लगा तो राकेश की माने पूजा को भी राकेश के पीछे जाने के लिए इंगित किया क्या बात है पूजा उखडी उखडी से लग रही हो तुम तो जानते हो राकेश की तुम्हारी नौकरी के इंतजार में मैं पिछले दो साल से पापा को रोक कर रखी हूँ और आज पीएसी का परिणाम आते ही उनके पूछने पर जब मैंने बताया कि इस बार तो मात्र दो नंबर से फिर छूट गए तो उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि अब और इंतजार नहीं और तुम क्या चाहती हूँ? पूजा मैं तो मैं चाहती हो । राकेश पर पापा की इस बात से भी सहमत हूँ कि अब हमें विवाह कर लेना चाहिए । तुम तो जानती ही हो की पूजा मैं भी बेरोजगार हो । फिर रोजगार तो वह फैलाए तुम्हारे स्वागत के लिए खडा है राकेश तुम्ही उससे विमुख हो कौन सा रोजगार? राकेश ने आश्चर्य से पूछा कृषि ये तो क्या कह रही हो? पूजा मेरी नाकामी पर मुझे ताने दे रही हो । ताने तो परायों का हथियार होता है । राकेश मैं तुमसे प्यार करती हूँ और वहीं का होंगी जो हमारे जीवन के लिए सबसे अच्छा होगा तो तुम भी माँ पिताजी की तरह यही जाती होगी । खेती बाडी में अपना जीवन झोंक दो और माँ की तरह तो मेरी जीवन भर हर ख्वाहिश के साथ समझौता कर के गुट घुटकर जीवन बिताते देखते हो बस यही एक अंतर है राकेश तुम्हारी और मेरी सोच में तो ये लगता है कि खेती बाडी करना मजबूरी है जबकि मुझे लगता है कि ये एक ऐसा व्यवसाय है जो न सिर्फ सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि सम्मानित कार्य भी है और तुम्हारी इस सोच से क्या तुम्हारे पापा सहमत हैं? जब पापा ने मुझे कृषि विषय के साथ स्नातक करने के लिए मंजूरी दी है तो कृषक दामाद को क्यों नहीं स्वीकारेंगे? मतलब दुनिया पढाई नौकरी के लिए नहीं बल्कि खेती करने के लिए कर रही हो । जब हायर सेकेंड्री स्कूल में कृषि विषय का चयन किया था तब तक तो सरकारी नौकरी का ही सपना था लेकिन पिछले दो साल से जब से पापा को मैंने तुमसे मिलवाया है उसके बाद से अब तक तो में नौकरी के लिए यहां वहां भटकते देख पा पानी तुमसे विवाह के बाद मुझे कल ही नौकरी न करके खेती करने की सलाह दी है ताकि मैं अपनी शिक्षा का समुचित उपयोग कर सकूँ । दूर के ढोल सुहावने होते हैं । पूजा जब खेती करके देखोगे तब तुम भी समझा होगी कि ये काम मजबूरी में ही चुना जाता है तो ठीक है । मैं विभाग के बाद अंकल के साथ खेती करूंगी और तो नौकरी की तलाश करते रहना ये संभव नहीं है । पूजा क्यों? क्योंकि हमारी खेती में सिंचाई का कोई साधन नहीं है तो हम लोग बोर उत्खनन करा लेंगे । यही तो सबसे बडी परेशानी है पूजा की । हमारी जमीन पर पानी का श्रोत बहुत गहराई पर है और पानी मिला भी है तो एक एकड के फसल के लिए भी पर्याप्त नहीं है । तो जब तक हमारी नौकरी नहीं लग जाती हम काम में ही गुजारा कर लेंगे । नहीं । पूजा जब तक मैं स्वयं कमाने लायक नहीं हो जाता तब तक विवाह के बारे में सोच भी नहीं सकता । क्या ये तुम्हारी शर्त है तो मैं सही समझा है । पूजा मैं कभी नहीं चाहूंगा की दुनिया में इस गांव में रहे और खेती की कैसी जिद? राकेश प्यार में कोई शर्त नहीं होती है । सामंजस्य होता है सामंजस्य के लिए भी पैसा चाहिए जो मैं नहीं कमा रहा हो तो ये भी बता दो राकेश की पापा को मैं क्या जवाब दू तो मैं कुछ कहने की जरूरत नहीं है । पूजा मैं स्वयं उनसे मिलकर कुछ समय और मांग लूंगा । नहीं राकेश अब तुम पापा के पास नहीं जाओगे क्यों? पूजा क्योंकि पापा ने मुझसे कडाई के साथ ही साफ साफ शब्दों में कह दिया है कि यदि अब भी तो नौकरी के चक्कर में विभाग के लिए तैयार नहीं हो तो वे और समय नहीं दे सकते तो जाऊँ और जहाँ तुम्हारे पापा कहे वहीं शादी कर लो । कहते हुए राकेश कमरे से बाहर निकल गया ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 3

तीसरा भाग आखिर वो दिन आ ही गया जिसके लिए राकेश ने सब अपनों को नाराज कर के भी कुछ पाने की जिद में था । नौकरी तो मिली ही हर वो ऑस्ट्रेलिया के मल्टीनेशनल कंपनी में अब तो खुश हो ना । बेटा माने खेल खिलाते हुए कहा हाँ हर मेरी नौकरी के मिलते ही तुम्हारी दुःख के दिन चले जाएंगे । मैं ये खुशखबरी पूजा और उसके पापा को भी बताकर आता हूँ । सच तुमने तो सच में आज ये साबित कर दिया कि जिद करो, सफलता जरूर मिलेगी । पर नौकरी कौन सी मिली है ये भी तो बताऊँ । पूजा ने राकेश के सीने पर सिर रखते हुए कहा अभी तो सिर्फ सीने से लगी हो । जब ये जानोगे कि नौकरी कहाँ लगी है तो खुशी से बाहों में भर होगी और ज्यादा मत सता हूँ । बता भी दो की नौकरी कहाँ लगी है ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया में खुद को राकेश से अलग करते हुए पूजा ने दोहराया क्या हुआ पूजा तो ऑस्ट्रेलिया जाओगे रागेश मैं तो सोच रहा था पूजा की ऑस्ट्रेलिया की मल्टीनेशनल कंपनी में मेरी नौकरी लगने की बात सुनकर तो खुशी से मुझ पर पकड मजबूत कर होगी । लेकिन ये क्या? तुम तो मुझसे छिटक गई क्योंकि मैंने कभी सोचा ही नहीं कि ये तो हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे इतना अच्छा प्रस्ताव मिला है । तुम जो कह रहे हो, वैसे और महत्वकांक्षा की दृष्टिकोण से सही हो सकता है, पर तुम्हें आंटी अंकल के बारे में सोचा है । मुझे सबसे ज्यादा खुशी तो उन्हीं के लिए है पूजा की । अब उन्हें खेती के भरोसे नहीं रहना पडेगा और सरोज की शादी भी अब धूमधाम से कर सकेंगे । ठीके राकेश तुम घर जाकर भी खुश खबरी सुना । मुझे कुछ काम याद आ रहा है । मैं चलती हूँ । आज तो अपने हाथों से हलवा बनाकर सारे गांव में बात होगी बेटा हमारे गांव से आज तक किसी को विदेश में नौकरी नहीं मिली है । राकेश की माने कहा कब जाना है बेटा? राकेश के पिताजी ने पूछा । कंपनी से वीजा पासपोर्ट आने पर निर्भर है बाबू जी तो में मनपसंद नौकरी मिलने पर मैं भी बहुत खुश हूँ पर सोचता हूँ कि तुम सात समंदर पार चले जाओगे तो मेरे बाद मेरी खेती बाडी का क्या होगा? लोग कहते हैं कि बेटा विदेश जाने पर वहीं का हो जाता है । तुम भी हमें भूल तो नहीं होगी तो चाहे जहाँ भी रह ऊपर हम किसानों के लिए धर दी । पूजनीय होती है ये मत भूलना । बेटा गिरवी पडी जमीन को मुक्त कराना बेचना नहीं ये आप क्या बात लेकर बैठ गए हैं बाबू जी बहुत बडे पैकेज के साथ नौकरी मिली है । मुझे अब हमारी मुफलिसी के दिन गए । इतना पैसा मिलेगा कि इस जमीन को तो कर्ज मुक्त कर ही लेंगे । और भी जमीन खरीद सकते हैं । पर मेरे बाद हमारे खेतों की देखभाल कौन करेगा? बेटा तुम जब की बात तब सोचेंगे । बाबू जी अभी तो आप हैं । हाँ । मैं चाहता हूँ कि ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले पूजा के पापा से मिलकर हमारी सगाई की बाद कर लेते तो हो हाँ! तो आपके चेहरे की रंगत ही बदल गई है भैया । सरोज ने छेडते हुए कहा मैं तो कब से दिन का इंतजार कर रही थी । बेटा रिश्तेदारों को लेकर कल ही तेरे बाबू जी के साथ पूजा के घर चले जाएंगे । राकेश की माँ ने कहा शमा चाहती हूँ आंटी जी पर अब इस की जरूरत नहीं है । दरवाजे पर खडी पूजा ने कहा तो उन का भाई और ये क्या कह रही हूँ । पूजा वहीं कह रहे हो जो कभी सोचा भी नहीं था । लडकी से पहले ही आंसू को समझाते हुए पूजा ने कहा, पर क्यों? पूजा? फिर उसने आतुरता से पूछा क्योंकि पापा अब इस शादी के लिए तैयार नहीं है । लेकिन बाबा ने खुदी मुझसे कहा था कि मैं उन्हें पसंद हूँ और नौकरी लगने पर तुम्हारा हाथ मेरे हाथों में दे देंगे । राकेश की नजरों में उम्मीद थी हार राकेश ये तब की बात थी जब तुम देश के भीतर ही नौकरी ढूंढ रहे थे । तुम्हारा मतलब पूजा की । मेरा ऑस्ट्रेलिया जाना तुम्हारे पापा को पसंद नहीं । बात पसंद ना पसंद की नहीं है । राकेश तुम तो जानती हो कि पापा ने कभी मुझ पर कोई दबाव नहीं डाला । पर मैं उनके इस बात से सहमत हूँ कि अपना देश अपना ही होता है और फिर मैं अकेली संतान हो । उनकी और मैं उन्हें छोडकर विदेश नहीं जाना चाहती हूँ । ये तुम्हारा अंतिम निर्णय है । पूजा मैं फिर कहती हूँ राकेश की मैं अंकल के साथ उन्नत खेती करोंगे और तुम देश में ही नौकरी की तलाश करना तो तो मुझ पर अपनी बात थोपना चाहती हूँ । पूजा नहीं अपना विचार बता रही हूँ मैं । मतलब तू मेरे साथ ऑस्ट्रेलिया नहीं चल होगी । हाँ मेरी तो ये बात उनसे पहले भी कहीं है । मैं तो तहसीलदार की बेटी पूजा के लिए ये सोचता रहा कि आधुनिक सोच रखने वाली इस नए जमाने की लडकी है पर तुम तो गवाहों जैसी बातें कर रही हो । अपनी मिट्टी से प्रेम करना और माँ बाप के बुढापे का सहारा बनने की सोच रखना यदि गवाहों पर है तो मुझे औहदा बी मंजूर है । राकेश हमें किसी साडी में है पूजा और तुम अठारह साडी की बातें कर रही हूँ मैं भी तुम्हारी तरह हाई एजुकेटेड हो और सोच भी इसी सदी के रखती हूँ । इसीलिए तो कह रही हूँ कि हम उन्नत खेती करेंगे इसी सदी के अनुरूप और मेरे सपनों का क्या? राकेश ने पूछा हम दोनों की इस अपने देश में रहकर भी तो पूरा कर सकते हैं । राकेश सुखसुविधाओं में पली बढी दो खयालों की दुनिया में हो पूजा ये गांव ये खेती की बातों में आज इसलिए प्रभावित कर रहे हैं कि तुम कम समय के लिए और घूमने फिरने के लिए यहाँ पर आती हूँ । पर जब बारिश में खीचड भरी गलियों से गुजरी होगी और पंद्रह बीस घंटे तक बिजली गुल रहेगी, गर्मी के दिनों में नदी नाले सूख जायेंगे और बोरिंग से पानी आना कम हो जाएगा । तब तुम दो दिन भी यहाँ गुजार नहीं पाओगे । हमसे पूछो कि गांव कि जिंदगी में कितनी तकलीफ से होती है तो सच कह रहे हो । राकेश कि गांव के जीवन में भौतिक सुविधाएं तो है ही नहीं, साथ ही मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है । तो यही तो कारण है मेरे गांव प्रेम का तुम ही कह रही हूँ पूजा की मुझसे ज्यादा गांव से प्रेम करती हूँ । अब ये कैसा सवाल है? राकेश प्रेम सिर्फ प्रेम होता है, कमियाँ ज्यादा नहीं । मैं तो ये जाती हूँ कि राकेश हमें अपनी कमियों से भागना नहीं है बल्कि उसे दूर करना है । अब ये क्या बात हुई? पूजा कौनसी कमियों की बात कर रहे हो तो वही जो आपने अभी अभी गिनाई है । गांव में सुख सुविधाओं की कमी तुम घूम फिर कर फिर वही आ गई । हम शादी की बात कर रहे हैं, कोई निबंध नहीं लिख रहे हैं और ना ही कोई राजनीतिक भाषण तैयार किया जा रहा है । जानती हूँ राकेश और पडी लिखी हमारी पीढी पर तरस आता है जो जमीनी स्तर के विकास की सिर्फ बातें कर सकती है । विकास नहीं तो अब हमारे घर की खेती के साथ साथ तुम गांव के विकास के बाद करने लगी । पूजा तो ये भी बाजारों कि तुम मुझसे प्यार है या तो बार बार मेरे प्यार पर सवाल की उठा रहे हो । राकेश मैं आपको कैसे विश्वास जिलाओं की आपको ही में अपना जीवन साथी बनाने का सपना देखते आई हूँ तो भी ये सब बातें छोडो पूजा और मेरे साथ ऑस्ट्रेलिया चलो हम यहाँ आते जाते रहेंगे और तुम चाहोगी तो किसी ऐसी जगह फार्म हाउस खरीद लेंगे जहाँ सुविधाएँ हो । हम दोनों की पेरेंट्स भी वहाँ पर साथ रह सकते हैं । मैंने जो सपना देखा था अब वो पूरा होने जा रहा है और मैंने ये सपना हमारे लिए देखा है कि हमारा जीवन स्तर ऊर्जा होगा । हमारे पास पर्याप्त पैसे होंगे और हाँ मैं भी विदेश जाने को उत्सुक नहीं रहा हूँ । पर यहाँ जब नौकरी के लिए ठोकरे खाता रहा तो ऐसे ही ऑस्ट्रेलिया में अप्लाई कर लिया था और हमारी खुशकिस्मती से मुझे नौकरी मिल गई । सपने तो हम दोनों ने ही देखी है । राकेश पर बदकिस्मती से हमारे सपने अलग अलग हैं तो रास्ते एक होना मुश्किल है । माँ बाबू जी को प्रणाम करते हुए अब मैं चलती हूँ कहकर पूजा आंसू पहुंचती हुए निकल पडी

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 4

चौथा भाग इस माह में रिटायर हो जाऊंगा । काम की आदत है घर में रोटी तोडते हुए बैठने से तो मैं समय से पहले ही दुनिया छोड बेकार की बातें क्यों कर रहे हो । जो बात कहना है उसे ही कहूँ । तहसीलदार को बीच में ही टोकते हुए पूजा की । मैंने कहा हाँ ऐसे लड साहब पूजा के पापा होने के कारण आप तो हमारे अपने ही है । कोई भी बात हमसे खुलकर कर सकते हैं । राकेश की माने चाय की प्याली थमाते हुए कहा बात ही है कि हम लोग खेती हर जमीन खरीदना चाहते हैं । आप लोग खेती करोगे मैडम राकेश के माने अश्चर्य से पूछा पहली बात तो ये कि सरोज की माँ होने के कारण आप मुझे मैडम नहीं कहेगी बल्कि मेरे नाम से पुकारेगी और मेरा नाम है सविता । पूजा के माने आगे कहा हाँ हमलोग बेटी के साथ खेती करते हुए अपने जीवन को सुखमय बनाना चाहते हैं । सरकार की नौकरी करते हुए बहुत भाग दौड कर लिए । अब किसी गांव में रहकर सुकून से रहना है । ईमानदारी के साथ नौकरी करने वाले पटेल साहब का यही सिद्धांत रहा है कि मेहनत आना के अतिरिक्त कुछ भी चाहना अपराध है । तहसीलदार ई की तनख्वा से हमने अपनी बेटी को पढा लिखाकर शहर में मकान बना लिए हैं । अब रिटायरमेंट में मिलने वाले रुपयों से खेती खरीदना चाहते हैं । विकसित जमीन की कीमत शायद हम नहीं चुका पाएंगे । अब आप लोगों के गांव में ही आस पास में ही खरीदने का मन बना रहे हैं । सरोज और उसके बाद बाबू जी सविता के विचार सुनकर तीनों एक दूसरे से आंखों ही आंखों में कुछ कहने लगे तो तहसीलदार ने कहा सविता ने कुछ गलत कह दिया गया नहीं वो बात नहीं है अंकल जी सरोज ने तुरंत कहा तो क्या बात है? सविता ने पूछा वह बात ये है कि रुक हो गयी बोलो । सरोज सविता ने कहा हमें भी अपनी जमीन बेचने है । सरोज के पिताजी ने कहा आप जमीन बेच ओके पर क्यों? तहसीलदार ने पूछा वो बात ऐसी है अंकल जी की भैया की पढाई के लिए एजुकेशन लोन लिया था लेकिन पढाई पूरा होने के पांच साल बाद भी जब भैया की नौकरी नहीं लगी तो बैंक से तगादा आने लगा और मामा जी पर बैंक का दबाव बढने लगा क्योंकि वे भैया की जमानत लिये थे । फिर मजबूरन हम लोगों ने साहूकार से पैसे लिए थे जो भी अब ब्याज के साथ दोगुना होने जा रहा है तो उन लोगों ने तय किया है कि जमीन बेचकर साहूकार का कर्ज चुका देंगे । माँ बाबूजी को से निजी की ये देख सरोज ने कहा पर अब तो राकेश की नौकरी लग गई है और अपना देश छोडकर विदेश में नौकरी कर रहा है । पैसा भी अच्छा मिलता होगा । सविता ने कहा हमने अपने बेटे के लिए कुछ नहीं किया तो हमारा कर्ज क्यों भरेगा । कहते हुए राकेश की माँ की आंखें भर आई लेकिन कर्ज तो आपने राकेश की पढाई के लिए ही लिया है ना । क्या राकेश को ये बात मालूम नहीं है । तहसीलदार ने पूछा भैया सब जानते हैं अंकल जी और ऑस्ट्रेलिया जाते वक्त उन्होंने कहा भी था कि अब चिंता की कोई बात नहीं है । मैं प्रतिमाह रुपये भेजूंगा जिससे कर्ज चुकता हो जाएगा और दो महा रुपया भेजा भी । पर अब रुपया मांगेंगे । यही सोचकर शायद हमारा फोन भी नहीं उठाते हैं । उनसे बात की ये भी साल भर हो रहा है । सरोजनी दिल में पत्थर रखकर सब बातें बता दी ही तो बहुत ही दुख की बात है । राकेश को ऐसा नहीं करना चाहिए । सविता ने कहा जो होना था वो तो हो गया । अब मैंने सोचा है कि खेती बेचकर कर्ज चुका दूंगा और बचे हुए पैसों से सरोज की शादी कर दूंगा । मैंने यह बाद पूजा बिटिया को भी बताई है । राकेश के बाबू जी ने कहा हो तो ये बात है इसीलिए जमीन खरीदने के बाद आते ही पूजा ने हमें यहाँ भेजा है । पत्नी की और देखते हुए तहसीलदार ने कहा तो अब आप ने क्या सोचा है? अंकल सरोज ने पूछा अब तो कुछ न कुछ सोचना ही होगा । तो सिलदार ने मुस्कुराते हुए कहा अच्छा, अब हम चलते हैं आपस में सलाह करके कल फिर आते हैं । पति की आंखों का इशारा पाकर खडे होते हुए सविता ने कहा तो मैं मालूम था पूजा की । राकेश के बाबू जी कर्ज में डूबे हुए हैं । हाँ पापा और मैं नहीं चाहती हूँ की उनकी जमीन भी के पूजा ने कहा तो ये बात हमें पहले ही बता देना था ना बेटा उन लोगों को हमारे सामने सब बातें कहने में बहुत तकलीफ हो रही थी । विचारे लज्जित हो गए । बताना चाहती थी पापा पर हिम्मत नहीं जुटा पाई । मैं जानती हूँ की मेरे किसी आग्रह को आप लोग नहीं ठुकराएंगे । पर मैं चाहती थी कि मम्मी और आप जाकर स्वयं उनसे मिले । उसके बाद ही हम किसी निर्णय पर पहुंचे । पूजा ने कहा, और अब तुम क्या चाहती हूँ बेटा मैंने पूछा मैंने इस गांव की खेती देखी है । हाँ और उन खेतों में कैसे और कौन सी फसल उगाई जा सकती है । ये सब प्लान भी कर लिया है और आप लोगों के आशीर्वाद से काम शुरू करना चाहती हूँ । खेती के लिए तो सरकारी योजनाओं के सहयोग से संसाधन जुटा होंगी लेकिन उनके तात्कालिक कर्ज ने मेरी योजनाओं पर पानी फेर दिया है तो तुम चाहती हूँ की उन का कर्ज हम चुकाते । तहसीलदार ने कहा था पापा लेकिन वे लोग स्वाभीमानी है ऐसे नहीं मानेंगे । इसलिए उनकी खेती को किराये पर लेने की बात कहनी होगी । एक बात पूछो बेटा सविता ने पूजा के चेहरे को अपनी और घुमाते हुए कहा हाँ मम्मी पूछो ना ये सब तुम राकेश के लिए कर रही हो ना । क्या तो मैं विश्वास है कि राकेश लौटेगा राकेश पर नहीं । मुझे अपने प्यार पर भरोसा हे । मम्मी और खेती करने का मुझे शौक है । मैंने पिछले चार साल तक कृषि की पढाई करते हुए उन्नत खेती करने का जो सपना देखा है उसे पूरा करना चाहती हूँ । मैं कह रहा था पूछा कि गांव में जाकर धूलधूसरित होने की जगह आगे पढाई करते हुए कृषि वैज्ञानिक बनने में क्या बुराई है? आपकी सोच भी सही है । पापा तो हर कोई भी अपने बच्चे के लिए ऐसे ही साफ सुथरी सोच ही रखेगा । पर मैं आपकी बेटी हूँ और जिस तरह से तहसीलदार के पद पर रहते हुए सैकडों दबाव के बाद भी आपने ईमानदारी नहीं छोडी और जिस दौर में भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बना दिया गया है वहाँ पर खडे रहकर भी आपने ईमानदारी से समझौता नहीं किया । वैसे ही मैं भी किसी डिग्री के पीछे ना भागते हुए खेतों में जाकर कुछ नया करना चाहती हूँ । पूजा ने कहा मुझे तुम पर गर्व बेटा कहते हुए इसके पापा ने गले से लगा लिया । किसानी करने का विचार तो ठीके उसके लिए हम तो मैं मना नहीं करेंगे पर हमें भी अपना फर्ज निभाने का मौका मिलना चाहिए । आप क्या कहना जा रहे हैं? मैं नहीं समझी । पापा एक अच्छा रिश्ता आया है । बेटा लडका प्रथम श्रेणी का ऑफिसर है । सारी बातें पापा के सीने पर सिर रखकर पूजा ने आगे कहा पहली बात तो ये है कि राकेश के अतिरिक्त किसी और के बारे में सोचना मेरे लिए संभव नहीं है । पर इससे भी बडी बात ये है कि मैं मनमानी करना चाहती हूँ । तुम तो मेरी रानी बेटी हो जिससे राकेश को पसंद करने के बाद सबसे पहले मुझे बताई थी । बाद फिर कैसे मनमानी कृषि के लिए जो मैंने सोचा है वैसा ही करना चाहती हूँ । अच्छा ये बात है । तहसीलदार ने पूजा का माधा चून लिया ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 5

पांचवां आधार मैं मानती हूँ आंटी जी की राकेश की माँ होने के कारण आप का उनके लिए फिक्र करना सही है पर इस तरह होते रहने से क्या उन्हें कोई फर्क पडेगा? सरोज भी तो आपकी संतान है उसके बारे में भी तो सोची की इस तरह आप लोगों को दुखी देखकर उस पर क्या बीत रही होगी । परदेश गए बेटे की चिंता में पास खडी बेटी को भुला देना अच्छी बात है गया ये तुमने क्या कह दिया? पूजा माँ बाबू जैसे मुझे कोई शिकायत नहीं है बल्कि मैं स्वयं भी भैया के लिए चिंतित हूँ । खैर हमारी छोडो क्या तुम स्वयं भैया के लिए परेशान नहीं हो? हाँ सरोज मेरे लिए भी राकेश से दूर रहना बिल्कुल वैसे ही है जैसे तालाब किनारे छटपटाती मछली की होती है । फिर भी मैं राकेश की गलती को दोहराने के बजाय उन्हें बताना चाहती हूँ कि उसने क्या खोया है या यह भी समझ लो कि पर उस नालायक के लिए तुम अपनी जिंदगी क्यों दाव पर लगा रही हूँ । पूजा वह तुम्हारे लायक नहीं है । बेटा राकेश की माने आंसू पहुंचती हुए कहा तो फिर आप भी आपने नालायक बेटे के लिए क्यों आज सुबह आ रही है । आंटी जी पूजा ने उल्टा सवाल डाल दिया, मेरा तो कोक जना है, कितना भी हमें दुख दे अपना ही रहेगा पर तेरे सामने तो सारी जिंदगी पडी है और तो जैसी सुंदर सुशील लडकी को तो उससे अच्छा और पैसे वाला जीवन साथी मिल सकता है । बेटा पूजा की हथेली को अपने हाथों में लेते हुए राकेश की मैंने कहा आप तो माँ है जिसके पास प्रेम का कथासागर है और प्रेम क्या होता है कि आप से अच्छा और कोई नहीं जान सकता है । आपने मेरे प्रेम में ऐसी कौन सी कमी महसूस की है की कहते हुए पूजा रो पडी । हमारे आंसू पहुंचते पहुंचते तो खुद रो पडी । अच्छा ठीक हैं । अब हम में से कोई नहीं रोएगा भैया कैसे होंगे हमसे संपर्क क्यों नहीं कर रहे हैं ये सब हम भगवान पर छोडते हुए तुम्हारे अनुसार खेती पर काम करेंगे । ठीक है । सरोज ने पूजा के आंसू पहुंचते हुए कहा कहाँ ये हुई ना बात अच्छा चलो हम सब आज खेत घूमाते हैं । पूजा ने कहा इस समय तो खेत में कुछ भी नहीं है । एक तो गर्मी का दिन ऊपर से भरी दोपहरी में भला क्या देखोगी । पूजा राकेश के बारे पूछा गर्मी की बात आप कह रही है जिनके लिए सावन के बारिश और जेट की गर्मी भी सुखदायी होती है में अपने लिए नहीं तुम्हारे लिए कह रही हूँ पूजा राकेश की मैंने कहा कहते हैं ना कि हम जब कुछ करने के लिए संकल्पित हो जाते हैं तो किसी तपिश में वह बात नहीं होती है कि हमारा रास्ता रोक सके । पूजा ने कहा भरेवा पूजा तुम तो सब कुछ बदल गई हो, हिम्मत वाली हो गई हो । सरोज ने कहा जो सिर पर कफन बांधकर निकलते हैं उनका गर्मी कुछ नहीं बिगाड सकती । जॉनी कहकर पूजा कहाँ का लगाने लगे यहाँ से हमारा खेत शुरू होता है । बेटा राकेश के बाबू जी ने कहा मिट्टी तो बहुत अच्छा है । खेत के बीचों बीच चलते हुए पूजा ने कहा हाँ मिट्टी तो उपजाऊ है पर पानी का स्तर बहुत निचला है । इस क्षेत्र में कुछ लोगों ने सरकारी पहल पर और कुछ लोगों ने स्वयं के खर्चे पर ट्यूबवेल से सिंचाई का साधन बनाने की कोशिश की पर सब फेल हो गए और हरी ये तो नाना है । शायद पूजा ने सरोज को बीच में टोकते हुए कहा यहाँ ये बरसाती नाला है और हमारी जमीन के बीच में पडता है । बारिश का पानी पूरा नहीं होने पर डीजल पंप से सिंचाई करके फसल को बचा लेते हैं । ये डाला तो हम गांव वालों के लिए वरदान है जिसके कारण हमारे गांव में सूखे से फसल नष्ट होने की समस्या नहीं रहती है । राकेश के बाबू जी ने कहा सिर्फ वरदान ही नहीं चमत्कारी भी हो सकता है । पूछा कि चेहरे पर रौनक आ गई । कैसा चमत्कार? बेटा राकेश की बातें आश्चर्य से पूछा इस गांव कि गरीबी दूर करने का चमत्का वो कैसे पूजा देखो? सरोज यहाँ पर कुछ घास भी दिख रही है क्योंकि आठ दस दिन पहले तक यहाँ की जमीन की ली थी । सरोज ने कहा अभी एक वहाँ पहले थोडा थोडा पानी था । अप्रैल के शुरू में ही तो सब गांव वाले मिलकर गड्ढों से पानी निकालकर मछली पकडे थे । फिर उसके बाबू जी ने कहा मतलब अप्रैल तक इस नाले में पानी रहता है । पूजा ने कहा हाँ हाँ तो कह रही थी आंटी की यहाँ देखने के लिए कुछ भी नहीं है । जबकि मुझे तो गडा हुआ धन नजर आ रहा है । पूजा ने गंभीरतापूर्वक कहा गडा हुआ धन चमत्कार की ये सब क्या है? पूजा मेरे दिमाग में एक बाद आई है । सरोज की हम बरसात से पहले इस नाले पर बांध बना देंगे । पूजा ने कहा तेज गर्मी ने तो मैं पागल कर दिया । शायद सरोज ने कहा क्या मतलब है तुम्हारा मतलब ये है पूजा की बांध बनाना । कोई बच्चों का खेल नहीं है और फिर तुम तो पर्यावरण की सुरक्षा के नाम पर सेमिनारों में बडी बडी बातें करती हो कि बांध बनाने से पेडों के कटने से पर्यावरण का नुकसान होता है । लोग बेघर हो जाते हैं । मैं वैसे बडे बांध की बात नहीं कर रही हो । सरोज हमलोग छोटा बांध बनाएंगे और फिर उस बांध का क्या करेंगे? सरोज ने पूछा बांध में एकत्रित पानी से हम लोग फसल एवं सब्जी उगाएंगे जिससे हमारी आमदनी बढेगी । पूजा ने कहा और तुम्हारे इस छोटे बांध के लिए पैसा कहाँ से लाएंगे? सरोज ने पूछा अरे यार ये तो मैंने सोचा ही नहीं पर चलो अब सोचते हैं कोई ना कोई रास्ता तो निकालेंगे ही । कहते हुए पूजा लौटने लगी तो सभी उसके पीछे निकल पडे । चलते चलते ही अचानक रुककर पीछे आती सरोज को गले लगाते हुए पूजा चिल्लाने लगी । मिल गया मिल गया क्या मिल गया पूजा राकेश की माने पूछा बांध बनाने का आइडिया मिल गया । कहते हुए खुशी से सरोज के गालों पर हो रखती है । वो अब छोडो भी वरना दोनों गिर जाएंगे तो मैं याद है भी नहीं कि हम खेत में चल रहे हैं । मैं कैसे भूल सकती हूँ कि हम अपने खेतों में है? पूजा ने आत्मविश्वास से आगे कहा, सच सरोज मुझे अपने देश की मिट्टी से बहुत प्यार है । हाँ हाँ पता है हमें अब बताओ । वीकेएस आइडिया की बात कर रही थी । सरोज ने पूछा हम गांव वालों के सहयोग से नाले पर बांध बनाएंगे । पूजा ने राकेश के बाबू जी के पास आते हुए आगे कहा, बाबू जी आप किसी भी तरह से गांव वालों को इकट्ठा कर ली थी । फिर में उन्हें अपनी सोच बताउंगी । मुझे विश्वास है कि मैं उन्हें अपनी बात समझा पाने में सफल हो जाऊंगी । ठीक है शाम को ही प्रमुख लोगों से बात करता हूँ । ये पूजा है तहसीलदार साहब की बेटी राकेश के बाबू जी ने कहा, वहाँ हम लोग नहीं जानते हैं । गांव के सरपंच शाम लाल ने आगे कहा, पर हम लोगों को क्यों बुलाए हो? भैया जी, मुझे आप लोगों से बात करनी है । इसलिए मैंने आप लोगों को तकलीफ होती है । जवाब पूजा ने दिया पर आपको हमसे क्या काम गांव के पटेल परमानंद ने पूछा काम के लिए नहीं आप लोगों से मुझे सलाह मशवरा करना है । पूजा ने आगे कहा बात ये है कि मैं भी आप लोगों के साथ खेती बाडी करना चाहती हूँ और इसीलिए आज दोपहर में आंटी अंकल जी के साथ खेल देखने गई थी । वहाँ पर नाला देखकर मेरे मन में एक विचार आया है क्या? परमानंद ने पूछा यही कि हम अपने खेतों में दो बार फसल उगा सकते हैं । मैंने प्रयास किया था पूजा जी और इसके लिए तो बोल भी खुद हुआ आया था परन्तु असफल रहा और कर्ज में फस गया हूँ । घनशाम ने कहा हाँ सरपंच भैया के भाई शहर में नौकरी करते हैं तो वहीं थोडा थोडा करके कर्ज हो चुका रहे हैं वरना जीना मुश्किल हो जाता गया । राम ने कहा पर मैं तो ना ही बोहोत करन की बात कर रही हूँ और ना ही किसी प्रकार के कर्ज लेने की । पूजा ने कहा दो फिर बिना पानी के दो फसल कैसे लेंगे? परमानंद ने पूछा आपके खेतों के बीच बहने वाले नाले से आप भी पढे लिखे हो कर कैसी बातें कर रही है? पूजा जी सूखे नाले से कोई सिंचाई होगी क्या जाकर देखिए नाला सूखा पडा हुआ है । यहाँ तो पीने के पानी के लिए तरस जाते हैं । चारा पानी की कमी के कारण जानवरों को भी हम खुला छोड देते हैं । सरकारी बोर भी सूख जाता है और तो और पानी की कमी के कारण रोजी रोटी के लिए हमारे गांव के लोग चार महीने के लिए गांव से बाहर चले जाते हैं । सरकार को भी अपना दुःख बता बताकर थक गए जानती हूँ । इसीलिए तो इस गांव को मैंने अपना कार्यक्षेत्र बनाया है और मैं तो कहती हूँ कि हर काम के लिए हम सरकार की ओर ही क्यों देखें तो हम लोग कर भी क्या सकते हैं । कुछ भी तो नहीं है हमारे पास । सरपंच ने कहा हिम्मत और एकता के बल पर हम लोग चाहे तो बहुत कुछ कर सकते हैं । पूजा ने आगे कहा जिसके पास जो साधन उपलब्ध है वह सहयोग करके नाले पर बांध का निर्माण करेंगे जिससे हमारे खेतों को दूसरी फसल के लिए पानी तो मिलेगा ही साथ ही जानवरों के लिए भी पानी मिल जाएगा और गांव के लोगों का पलायन भी नहीं होगा । आप तो पुस्तके पडे जैसे अपनी बातों को बढा दी है और बांध की बात तो ऐसे कह रही है जैसे आपने इधर कहा और उधर बन गया । ये सब इतना ही आसान होता तो सरकार अब तक बांध बनाने के बारे में सोचती नहीं किया । बबलू ने तमतमाते हुए कहा नाराज के हो रहे हो भाई, हम बात ही तो कर रहे हैं । आप की जमीन तो नहीं छीन रहे हैं । आप तो पढे लिखे भी लग रहे हो तो उसी तरह से सोचो, थोडी थी रजत से भी तो कम लोग हम हर चीज के लिए सरकार की और ही क्यों देखें । क्यों ना हम कुछ ऐसा काम करें जिससे हम सरकार को आइना दिखा सके । पूजा ठीक कह रही है बबलू तुम थोडी देर शांत रहू और सुनो हम बुजुर्ग लोग है ना, कोई भी निर्णय लेने के लिए तो वहाँ पे क्या? तुम बताओ क्या कह रही थी? सरपंच ने कहा मैंने तो सोचा है दादा जी उस पर हम सब लोग मिलजुलकर काम करेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी । शारीरिक मेहनत नहीं कर सकती । इसीलिए यथाशक्ति रुपया मैं भी लगाउंगी और आप लोग भी श्रमदान करना । इस तरह हम सब मिलकर प्रयास करेंगे तो छोटा बांध जैसे स्टाप डेम कहते हैं बना सकते हैं । मेरा चचेरा भाई सिविल इंजीनियर है, उस से भी हम लोग सहयोग ले लेंगे थी के पूजा जी जब आप हमारे लिए और हम गांव वालों के लिए इतना कुछ करना चाहती है तो हम भी आपके साथ है । सरपंच ने कहा

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 6

छठा भाग अब तक तुमने जो कहा हमने मना लेकिन अब जो करने का सोच रही हो वो ठीक नहीं होगा । पूजा सरोज ने कहा, तुम लोग पैसे की बात आने पर मुझे एक दम से पढाई क्यों कर देते हो? पूजा ने नाराज होते हुए कहा क्योंकि तुम पर आई हो पूजा ये तो क्या कह दिया । सरोज सच्ची तो कह रही हूँ पूजा क्या लगती हो तुम हमारी मेरे भैया से तुमने प्रेम क्या होगा पर उन्हें तुम्हारी भावनाओं की परवाह नहीं है । फिर उसके परिवार के लिए इतना कुछ करने की क्या जरूरत है? जरूरत है सरोज क्योंकि ये सब नातो में राकेश के प्रेम के लिए कर रही हूँ और ना ही तुम्हारी दोस्ती के लिए । मैं अपने सपनों को देना चाहती हूँ और तुम्हारे मम्मी पापा के सपनों का क्या पूजा जो तुम्हारी शादी के लिए बचपन से रुपया जोडते रहे तो नहीं कहती हूँ सरोज की अब राकेश मेरा नहीं रहा तो इन रुपयों का मैं क्या करूंगी? प्लेस पूजा रो मत । पूजा के आंसू पहुंचते हुए सरोज ने आगे कहा, मैं फिर कहती हूँ कि भैया से अब तो कोई भी उम्मीद मत रख हो । मुझे राकेश से कोई उम्मीद है ही नहीं । सरोज फिर तुम अपने जीवन में आगे क्यों नहीं बढ रही हो? पूजा मेरी बात मानो भैया का इंतजार न करते हुए तो आपने योग्य किसी लडके से शादी कर लो । नहीं सरोज ये मुझसे नहीं होगा तो फिर मुझे तो मैं सच बताना ही होगा । कौन सा सब? सरोज यही कि भैया तुम्हारे प्रेम के बंधन को तोडकर किसी गोरी मेम के प्रेमजाल में फस चुके हैं । इसलिए वे अब वापस अभी जाएंगे तो मैं जानती हूँ । पूजा ने आंसू देते हुए जवाब दिया जानती हूँ पर कब से और कैसे सरोज को आश्चर्य हुआ । दो वहाँ पहले से राकेश ने खुदी फोन करके बताया था भैया की सरकार से मैं बहुत शर्मिंदा हो । पूजा तो उनकी ऐसा कह रही हो सरोज नजरे तो मेरी जुड गई है कि अवश्य ही मेरे प्यार में कोई कमी रही होगी । कहते है की प्रेम में बहुत ताकत होती है पर मेरे प्रेम में शायद वो बात ही नहीं थी कि तुम बेगार में खुद को दोष दे रही हूँ । पूजा बदनसीब तो राकेश भैया है जो तुम्हारे प्रेम को समझ नहीं सके । पर तुम किस पत्थर की बनी हो की जो एक बेवफा के परिवार की समस्याओं को गले लगाकर बैठी हूँ ली सरोज राकेश के लिए इस तरह गलत शब्दों का प्रयोग मत करो । तुम तो सचमुच पागल हो पूजा जिस इंसान ने तुम्हारी इच्छा का सम्मान नहीं किया, तुम्हारी बातों को महत्व नहीं दिया और जिनकी खातिर तुमने विवाह के लिए आये हुए अच्छे से अच्छे रिश्तों को ठुकरा दिया हर उससे तुम्हारी परवाना करते हुए खुद का घर बसा लिया । उसके लिए तुम बेवफा शब्द तक सुनना नहीं चाहती क्यों? पूजा क्योंकि मैं उनसे अब भी प्यार करते हैं कि ये कैसा प्यार है जिसकी कोई मंजिल ही नहीं । सरोज ने कहा प्यार तो स्वयं में पूर्ण होता है या यूं समझ लो की प्रेम कोई डगर नहीं बल्कि खुद ही मंजिल है । पूजा ने कहा तुम तो इस दुनिया की हो ही नहीं सकती । पूजा मैं इसी दुनिया की हो । सरोज क्योंकि सिर्फ यही दुनिया है जहाँ प्यार जैसी खूबसूरत चीज है । प्रेम ही अनमोल धरोहर है जो किसी इंसान को मिल जाए तो फिर उसे और किसी धन की जरूरत नहीं होती है और हम जैसे प्रेम करते हैं वो हमें मिल ही जाएगा ऐसा जरूरी नहीं होता । सिर्फ मेलन को ही प्रेम नहीं कहते । प्रेम की असली परीक्षा तो दूर रहकर निभाने में होती है । पूजा ने आगे कहा, और मेरे लिए यह क्या काम है कि राकेश भी मुझे प्यार करता है । अब ये क्या बात हुई? पूजा यदि भैया को तुमसे प्यार होता तो भी तो मैं छोड कर नहीं चाहती और चले भी गए तो गोरी मेम को साथ ही नहीं बनाते । यही तो फर्क होता है । प्यार करने वाली और नहीं करने वाली की सोच में जो अंतर आज मेरी और तुम्हारी सोच में दिखाई पड रहा है । पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा मैं चाहती तो प्यार का वास्ता देकर राकेश को विदेश जाने नहीं देती या फिर अपने प्रेम को पाने के लिए मैं अपनी मिट्टी से दूर जाना मंजूर कर लेती । पर मैंने ऐसा नहीं किया क्योंकि प्यार इंसान को सपने दिखा सकता है पर किसी के सपने को तोड ता नहीं है । जबकि राकेश और मेरे सपने अलग अलग थे । रही बात राकेश के प्रेम की तो मेरा दावा है कि वह भी मुझ से बहुत प्रेम करते हैं । इसलिए कैथरीन से शादी की बात मुझे छुपाई नहीं । बहुत बताते वक्त वो अपने आंसू नहीं रोक पाए । हाँ, ये बात तो है मुझे भी बताने में खुश होने की जगह भावुक हो गए थे । फिर बात तो करते रहना चाहिए । सरोज ने कहा कैसे बात करेंगे और क्या बात करेंगे । कभी कभी चुप रहना भी अच्छा होता है । पूजा ने कहा तो अब तुम भी अपना घर बसा लो । पूजा की ये मुझसे नहीं होगा । सरोज मैं उन्हें अपना मान चुकी हूँ पर तुम्हारे सामने तुम्हारी पूरी जिंदगी पडी है । पूजा भावनाओं में बहकर अपना जीवन बर्बाद मत करो । जिसे जीवन समर्पित है उसका परिवार तो है मेरे साथ । फिर मैं अपनी बर्बादियों करू । सरोज बाप रे तुम कितनी जिद्दी हो? पूजा क्योंकि प्यार ऐसा होता है तो अच्छा हुआ कि मुझे किसी से प्यार नहीं हुआ और भगवान से विनती करती होंगी कभी हो बिना भरे पगली प्यार किया नहीं जाता है । हो जाता है और प्यार जैसी पवित्र सौगात तो नसीब वालों को ही मिलती है । किसका फोन है उठालो ना बार बार काट क्यों रही हो? पूजा ने कहा रहने दो । सरोजनी मोबाइल को छुपाते हुए कहा । पर है किसका फोन और मुझे छुपा रहे हो? सरोज वह तुम्हारी बिलासपुर वाले भाई है कौन? नीरज हाँ वही पता नहीं मेरा नंबर उन्हें कहाँ से मिला । बार बार मुझे फोन कर रहे हैं । सरोजनी झेलते हुए कहा तो वो तो ये बात है । ऐसे तुम्हारा नंबर उससे मैंने ही दिया था । क्यों दिया मेरा नंबर? सरोज ने नाराजगी प्रकट की । हरी यार, तुम तो नाराज हो गई । दरअसल मैंने उससे स्टॉपडेम का स्टीमेट बनाने के लिए बात की थी । मैंने उसे अपनी सोच भी बताई थी । मुझ से सहमती जताते हुए हमारे काम के लिए पूरा सहयोग देने का वादा करते हुए तो तुम्हारा मोबाइल नंबर मांगा था । बात कर लो, शायद तुमसे भी बातों की पुष्टि करना चाहता हूँ । नहीं पूजा मुझे उनसे बात नहीं करनी है । तेरी झुकी हुई निगाहें बता रही है की तुम्हारी बात हो चुकी है । पूजा ने कहा हाँ सिर्फ एक बार और बात क्या हुई है? पूजा ने आंखों में झांकते हुए पूछा । वे अच्छे इंसान है ये बात है तो मैं भी उस की खबर लेती हूँ । मेरी सहेली को परेशान करने की जरूरत कैसे की उसने नहीं । पूजा से मोबाइल छीनते हुए सरोज ने आगे कहा, रहने दो बेकार में बात का बतंगड बन जाएगा । मुझे पता चल गया है कि उसका फोन करना तो गया अच्छा लगता है । सरोज की छुट्टी उठाते हुए पूजा ने कहा मैंने ऐसा तो नहीं कहा तो नहीं । तुम्हारी आगे कह रही है अच्छा ये बताओ जो बात हुई थी तब नीरज ने ऐसा क्या कह दिया जो तुम दोबारा कॉल रिसीव नहीं कर रही हूँ? पूजा ने कुरेदा अब छोडो वही इन बातों को कैसे छोड दो सरोज तू तो जानती हो कि अधूरी बातें मुझे पसंद नहीं । बहुत पूरा सच तुम ही बता सकती हूँ । मुझसे दोस्ती करना चाहते हैं । सरोज ने आखिरकार बता ही दिया तो इसमें बुराई क्या है मेरे घर पर जब मैंने तुम दोनों का परिचय कराया था तब तो तुम लोग खूब देर तक बातें करते रहे । तब बात और थी पूजा पर । अब तो मैं उसका फोन करना अच्छा नहीं लगता तो फोन उठाओ और मना कर दो की बात करने की कोशिश ना करें या फिर ब्लॉक कर दो । पूजा ने मुस्कुराते हुए आगे कहा पर तुम तो ऐसा भी नहीं करोगी क्योंकि सच यह है कि उसका फोन करना तुम्हें भी अच्छा लगता है । हाँ अच्छा लगता है पर मैं उनसे बात भी नहीं कर सकती । सरोज की आगे भराई पर क्यों? क्योंकि मैं जानती हूँ पूजा की उनका और मेरा कोई मेल नहीं है तो उन दोनों भाई बहन एक जैसे ही निकले । राकेश में मुझे यही कहा करता था और अब देखो वो विदेशी बन गए और मैं गवार एक जैसी थी । पूजा पर अब नहीं । रोजगार की तलाश में भैया की सोच को बदल दिया है और मैं भैया जैसा होना नहीं चाहती हूँ । मैं बाबू जी के साथ सुख दुख सहकर रहना चाहती हूँ । भैया ने तो हमें कहीं का नहीं छोडा । तुम्हारा साथ नहीं होता तो हमारी जमीन भी बिक जाती । सरोज सही कह रही है राकेश जैसा बेटा रहने से तो अच्छा ही की मेरा कोई बेटा ही ना होता । राकेश के माने प्रवेश करते हुए कहा मैं मानती हूँ आंटी जी की राकेश आपका बेटा है और आप उसके लिए जो चाहे कह सकती है । पर मेरा निवेदन है कि मेरे सामने उनके बारे में ये सब ना रहे । पूजा ने हाथ जोडकर कहा ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 7

सातवाँ भाग आओ । नीरज गांव वालों से मैं तुम्हारा परिचय करवा दूँ आपको घनशाम जी जो कि यहाँ के सरपंच है और आप ये दयानंद जी परमानंदजी मुकेश माधव और आप सब को नमस्कार मैं हूँ । नीरज सिविल इंजीनियर हूँ और पूजा दे देने जो भी योजना बनाई है उसे सफल बनाने में मैं तन मन धन से सहयोग कर होगा । मुझे भी आप लोग इस ग्रामीण परिवार का सदस्य ही समझिए । सरकारी नौकरी में होने के कारण मैं ज्यादा समय तो नहीं दे पाऊंगा पर जिस काम के लिए मेरी जरूरत है उसे अवश्य पूरा करूंगा । ये मेरा वादा है । इंजीनियर साहब हमारे गांव के नाले पर छोटा बांध बनाने से पानी रुके गाना घनशाम चाचा पहली बात तो ये कि मुझ से मेरा नाम लेकर बात कीजिए । रही बात नाले में पानी एकत्रित होने की तो मैं आपको बता दूँ कि कॉलेज से छुट्टी मिलने पर जब भी पूजा दीदी से मिलना होता था तो हमलोग किसानों के लिए नवाचार पर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं किया करते थे और उन चर्चाओं का ही परिणाम है कि आज हम लोग एकत्रित हुए हैं । हमारा सौभाग्य है कि आप सब लोगों का साथ हमें मिल रहा है और मैं आप सभी को विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि हमारी एकता अवश्य रंग लाएगी लेकिन मैं आप लोगों से सहमत नहीं हूँ । शंकर ने कहा तो चुप रहे शंकर हमलोग तुमको पहले बता दिए हैं कि तुम्हारी बात गलत है । घनशाम ने कहा क्या बात है सर पंजी? पूजा ने पूछा कुछ नहीं है, बेकार में विरोध कर रहा है । कैसा विरोध शंकर की बात भी हमें सुननी चाहिए । पूजा ने कहा मैं विरोध नहीं कर रहा हूँ । सच कह रहा हूँ पर कोई बात ही नहीं सुन रहे हैं । शंकर ने कहा क्या कहना चाहते हैं? पूजा ने पूछा यही कि अपने बेटे राकेश की तो ऊंची पढाई करवाकर विदेश भेज दिए और हम लोगों के लिए कह रहे हैं कि गांव में ही रोजगार पैदा करेंगे । हम जैसे यहाँ के पढे लिखे लोगों को कह रहे हैं कि खेती किसानी करूँ । आप तो तहसीलदार की बेटी है और अपनी पढाई का प्रयोग करने के लिए हमारे गांव का उपयोग कर रही है । हम तो चाहते हैं कि आप की तरह शहरी सुख सुविधाओं के साथ जीवन बिताएं । लोग पढ लिख कर आगे बढना चाहते हैं, विकास करना चाहते हैं और आप लोग है जो हमें गवार ही रहने देने की साजिश रच रहे हैं तो गलत सोच रहे हो । भाई गलत नहीं । हम सही कह रहे हैं पूजा जी मैं नहीं जानता कि आप ये सब क्यों कर रही है । पर इतना दावे के साथ कह सकता हूँ कि आप की इस योजना से हमारा कोई फायदा होने वाला नहीं है । शंकर ने कहा, चलो हम मान लेते हैं कि आप के अनुसार इस योजना से फायदा नहीं होगा, पर कोई नुकसान भी नहीं होगा । जबकि मैं आपको विश्वास दिला दी हूँ कि इस योजना के सफल हो जाने से गांव की दशा और दिशा दोनों ही बदल जाएगी और तब शहरों जैसी सुख सुविधा हमें गांव में भी मिलने लगेगी । लेकिन मैं नहीं मानता कि आपकी योजना सफल होगी क्यों? पूजा ने पूछा क्योंकि दूसरी फसल लेने के लिए हम जो भी बीज लगाएंगे उसे इसी गांव के ही गाई बैल चट कर जाएंगे । शंकर की ये बात तो सही है । पूजा बेटियाँ पहला एवं बरसाती फसल गांव के पूरे खेतों में बोली जाने के साथ ही आसपास के सभी गांवों में भी बोली जाने के कारण और हरा चारा भी पडती । जमीन में होने के कारण जानवरों के द्वारा फसल को ज्यादा नुकसान नहीं किया जाता है, पर जब हम लोग सिर्फ अपने ही गांव में सब्जी लगाएंगे तो जानवरों से फसल को बचाने की चुनौती होगी । हाँ निश्चित ही ये एक गंभीर समस्या है पर हर समस्या का समाधान भी होता है तो इसका भी तोड निकल ही जाएगा । हम सब मिलकर सोचेंगे और जिसे भी जिस तरह से इसका समाधान समझ में आएगा । हम सब कल इसी जगह एकत्रित हो गए । अपनी बात साझा करेंगे । पूजा ठीक कह रही है कल फिर हम लोग यही मिलेंगे । रामानंदन ने कहा अपनी योजना को साकार करना हम लोग जितना आसान समझ रहे थे असल में उतना है नहीं, गांव वालों की जाती हैं । नीरज ने कहा पर एक कहावत है ना कि जब किसी काम पर रुकावटें आने लगे तो समझ लेना चाहिए कि काम सही है । फिर लंबी सांस लेते हुए पूजा ने आगे कहा, इंसान के उडने की कल्पना जब बोरवेल राइटी की थी तो लोगों ने भी पागल कहते रहे और आज देखो हवाई जहाज में हम उड रहे हैं । पर सवाल अभी वहीं का वहीं है कि आखिर फसल को जानवरों से कैसे बचाया जाए । पूरे खेतों में तार घेरा करने पर तो कितनी लागत आएगी जिसे पूरा कर पाना संभव नहीं है । रखवाली के भरोसे रहे तो प्रेमचंद जी की पूस की रात जैसी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता । नीरज ने कहा ऐसी बातें कर के तो मुझे डराओ नहीं । नीरज पूजा ने कहा, दैरान ही रहा हूँ, सचेत कर रहा हूँ । वैसे भी हमें काम शुरू करने से पहले सभी पहलुओं पर विचार कर लेना चाहिए । मेरे दिमाग में एक बात आई है क्या? सर्वोच्च पूजा ने पूछा क्यों ना हम पूरे गांव कि जानवरों को किसी एक स्थान पर बांध कर रखी क्या सरोज तुम भी बच्चों जैसी बातें कर रही हूँ । चौबीस घंटे जानवरों को बांध कर कैसे रख पाएंगे भला उन्हें खाने को क्या देंगे? मेरे मन में ये बात इसलिए आई पूजा की पहले हम लोग अपने जानवरों को शाम के समय बांध कर ही रखा करते थे । फिर सुबह पूरे गांव कि जानवरों को एक निश्चित जगह पर एकत्रित करके चरवाही को सौंप दिया करती थी और शाम को घर तक छोडने की जिम्मेदारी चरवाहों की होती थी । तो फिर अब ऐसा क्यों नहीं करते? नीरज ने पूछा क्योंकि ट्रैक्टर से खेती का काम हो जाने के कारण बैलों के लिए ज्यादा काम नहीं रह गया है जबकि गायों की देसी नस्लें दूध कम देती है तो उसे भी घर में रखकर चारा खिलाना संभव नहीं है और गायों से दूध का उत्पादन कम होने के कारण परंपरागत पद्धति बरवाही यानी कि गाय को चराने एवं दूध निकालने के बदले में चरवाही को मेहनताना के रूप में दिए जाने वाली गाय के एक दिन का दूध से इतनी आमदनी नहीं हो पाती है की वो अपने परिवार का भरण पोषण कर सके । यही कारण है कि लोग जानवरों पर अपना हक तो रखते हैं पर घर में बांध कर चारा खिला नहीं पाते हैं और चरवाही की भी व्यवस्था नहीं कर पाते हैं । भरे क्या हो गया? इस तरह लोग सडक की और क्यों भाग रहे हैं? नीरज ने पूछा लगता है कोई एक्सीडेंट हो गया है कहते हुए सरोज भी उस और भागने लगे तो पूजा और नीरज भी पीछे चल दी है । क्या हुआ पूछते हुए भीड के पीछे पैर के अंगूठे के सहारे खडे होकर उचक उचककर देखने लगी । किसी की कार खाई में गिर गई है । भीड से आवाज आई । अरे पर कैसे सरोजनी पूछा दो बैल आपस में लडते हुए अचानक की सडक पर आ गई । उस से टकराकर कार गड्ढे में गिर गई है । ये तो हमारी कार है गड्ढे के और झाकते हुए । पूजा ने जोर से चलाया क्या कह रही हो पूजा खास रोज जेडबी एक साथ पांच तीन, चार दो । ये नंबर तो हमारी कार का है और वापस गांव आने के बाद भी कह रहे थे कहते हुए पूजा कार्की और बढने लगे । भीड को चीरते हुए पूजा के साथ सरोज भी गई और वहाँ पर पहुंचती ही चलना उठी । यहाँ पर तो तहसीलदार साहब और आंटी दोनों है । आप सब लोग देख रहे हैं जल्दी से कार से बाहर निकालिए । देखो कितना खून बह रहा है । पीछे पलट कर देखा तो वहां का नजारा देखते ही पूजा के होश उड गए और वह गिरने लगी । क्या हुआ पूजा कहते हुए सरोज ने उसे बाहों का सहारा दिया और कहा सम्भालो अपने आप को अस्पताल पहुंचने पर पूजा की माँ को मृत घोषित कर दिया गया । पर तहसीलदार जिंदगी के लिए मौत से लड रहे थे । पास बैठी पूजा के रोने की आवाज सुनकर उन्होंने कहा ईश्वर की मर्जी के आगे किसी की नहीं चलती है । बेटा तुम तो मेरी बहादुर बेटी हूँ । रोते हुए तुम बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती हो । हम ठीक हो जाएंगे । पापा आपको मेरे लिए ठीक होना ही पडेगा । मैं आप दोनों के बिना नहीं जीता होंगे । पूजा तडफ उठीं ऐसा नहीं कहते बेटा जीवन मृत्यु तो सिर्फ भगवान ही तय करते हैं और जिसे वह दुख देते हैं उसे प्यार भी बहुत करते हैं । मरने वालों के साथ कोई नहीं मरता है बेटा अपनों को याद करने के लिए किसी अपने का होना जरूरी होता है । मैं भी तुम्हारी यादों में जीना चाहता हूँ । तुम अपने सपनों को पूरा करना । बेटा आप के बगैर में कुछ भी नहीं कर पाउंगी । पापा करना होगा बेटा, जब भी तुम किसी उलझन में रहोगी, आंख बंद करके देखने पर मैं तुम्हें नजर आऊंगा । ऑपरेशन थिएटर ले जाने के लिए हमें मरीज का कपडा बदलना है । आप प्लीज बाहर जाए । वॉर्ड बॉय के निर्देश देते ही पूजा पापा के पैर छूकर कमरे से निकल गई । डॉक्टरों के अथक प्रयास के बाद भी अनंत हैं । ऑपरेशन सफल नहीं हो पाया और तहसीलदार को भी नहीं बचाया जा सका ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 8

आठवा भाग दिखाना आंटी जी तेरह होते ही सब चले गए । कम से कम मामा मामी तो रुक जाते, मेरे पास कहकर पूजा रो पडी । इसी का नाम तो दुनिया है बेटा मन में सारे दुखों को छुपाकर हर व्यक्ति को फिर से काम में लग जाना होता है और अब हमें भी जाना होगा । पूजा सरोज को तुम्हारे साथ के लिए छोड देती हूँ । सरोज की मैंने कहा मैं माँ के बगैर कैसे जी होंगी । आंटीजी कहकर पूजा उनसे लिपट कर रोने लगी है । छोटा वो बडी बात होगी बेटा और मुझे लगता है कि भगवान ने हमें इसी दिन के लिए मिलाया था । तुम खुद को कभी भी अनाथ मत समझना । बेटा अब हम तुम्हारे माँ पिताजी हैं । अब से तुम इन्हें आंटी नहीं माँ कहना और ये गरीब तुम्हारा पिताजी तहसीलदार साहब के सामने तो हम बहुत छोटे हैं । पर ऐसा मत करिए बाबू जी कहकर पूजा राकेश के पिताजी से गले मिलकर भी लगाते हुए कहने लगी आप ही मेरे सबसे करीबी हो, जिसके रहते पापा मम्मी की मृत्यु संस्कार का कार्यक्रम संपन्न हो पाया । मुझे आप लोगों से ज्यादा प्यार कोई नहीं कर सकता । तुम तो मेरी सरोज की तरह हो । बेटा सरोज की मैंने कहा, तहसीलदार साहब की अंतिम इच्छा भी तो हमें पूरी करनी है । यादि की उन्होंने क्या कहा था वो मैं कैसे भूल सकती हूँ । बाबू जी, उनका आशीर्वाद बेकार नहीं जाएगा । मेरे सपनों को वे पूरा होते देखना चाहती थी तो अवश्य पूरा होगा । पर मेरे मन में एक उद्गार उठा है । आप लोगों का भी आशीर्वाद मिले तो मेरी इच्छा है कि बोलो बेटी रुक क्यों गई? सरोज की मैंने कहा कैसे कहूं? पूजा असमंजस में थी जैसे तुम अपनी माँ को कहती । सरोज ने पूजा को सीने से लगाते हुए कहा, अब मैं यहाँ नहीं रहना चाहती हूँ । आपके साथ गांव जाना चाहती हूँ । मेरे मन में भी यही खयाल आया था । बेटा और शहर की सुख सुविधाओं में रहने वाली पर ईरानी गांव में कैसे रहेगी? यही सोच कर कुछ नहीं कह पाई । इसीलिए सरोज को तुम्हारे पास रहने को कह रही थी । सरोज की माँ ने कहा, वैसे भी आजकल सारा दिन तो आप लोगों के पास ही रहती रही हूँ और अब तुम हमारे पास हमेशा हमेशा के लिए रहोगी । राकेश के बाबू जी ने झट से कहा क्या बात है बाबू जी, सरपंच जी एवं रामनंदन जी को आप दरवाजे से ही क्यों लौटा रहे हैं? कुछ नहीं । बेटा मिलो तुम से कुछ बात करना चाह रहे थे तो मैंने मना कर दिया कि अभी उचित समय नहीं है । यही सही समय है बाबू जी पर अभी तो तुम्हारे आंसू में नहीं सूखे है बेटा मैठी को बाबू जी आप उन्हें आवाज दीजिए, मुझे उनसे कम है और आज मैंने नीरज को भी बुलाया है । हमारी चर्चा को अब जल्दी ही कार्य में बदलना है । आपके मम्मी पापा के लिए हमें बहुत दुख है । वास्तव में इस समय हमें काम के संबंध में चर्चा नहीं करनी चाहिए । पर बरसात नजदीक होने के कारण अब भी कह रहे हैं सर पंजी, मैं भी यही चाहती हूँ कि समय गवाये बिना हमलोग कार्ययोजना बनाकर काम की शुरुआत कर दे । उस दिन फसलों को जानवरों से कैसे बचा सकते हैं, इस पर विचार हो रहा था । रामनंदन ने कहा सिर्फ फसलों को ही नहीं रहा कि रूसी और पालतू जानवरों के आतंक से बचाना होगा । कहते हुए पूजा की आंखे नम हो गई । पूजा की बातों से मैं सहमत हूँ । नये व्यक्ति के प्रवेश से पूजा की आंखों में प्रश्न थी । उनका परिचय कराते हुए सरोज ने कहा, आप पूरन सिंह का का है । पिछले सप्ताह ही रिटायर हो कर आए हैं । बॉर्डर पर देश की रक्षा के लिए तैनात थे जय जवान जय के साथ घनशाम ने पूरन सिंह को गले लगाते हुए कहा, और अब जवान और किसान साथ हो जाए तो हर काम सफल होता ही है । पूरन सिंह ने आगे कहा, सेना में भर्ती होने के बाद हाल चलाना छूट गया था, पर इस उत्साह के साथ देश की सीमा में डटा रहा की जिंदगी ने मौका दिया तो फिर से फसल हो गाऊंगा । आपकी इस सोच को मेरा नमन । पूजा ने कहा प्रणाम तो मैं तुम्हारी उस भावना को करता हूँ जिसमें इस गांव का विकास लेकर तुम आई हो । पूरन सिंह ने आगे आकर कहा, गांव में आने पर मालूम हुआ कि तुमने कृषि की पढाई करने के बाद उन्नत खेती करते हुए दूसरी फसल उगाने के लिए भी कार्ययोजना बनाई है तो में खुद को रोक नहीं पाया । हर तुमसे मिलने चला आया । फौज से रिटायर होने के बाद मुझे कुछ रुपया भी मिला है जिसमें से अंशदान भी में साथ लेकर आया हूँ और फौजी हो तो श्रमदान तो करूंगा ही । आपका आशीर्वाद निश्चित रूप से हमारे गांव के विकास में मील का पत्थर साबित होगा । पूजा ने कहा जाता हूँ कि हमारा गांव सबके लिए उदाहरण बने । पूरन सिंह ने कहा, नीरज के आते तक क्यों ना हम जानवरों से फसलों की रक्षा पर बात कर ली । आपने मेरे मन की बात कह दी । पूजा जी मेरा विचार है कि जैसे हम पहले गोठान में गाय बैलों को एकत्रित करके चरवाहा की व्यवस्था करते नहीं, फिर से वैसा ही करेंगे । मनोज ने कहा, पर वो व्यवस्था तब की थी जब हम अपने गाय बैलों को शाम को घरों में बांध कर रखते थे । पर अब ऐसा नहीं करते हैं क्योंकि हमारे जानवरों से हमें अब इतना मुनाफा नहीं हो रहा है कि उसके लिए रात्रिकालीन चारा की व्यवस्था घर में कर सके । इसलिए सब अपने जानवरों को खुला छोड देते हैं । सरपंच ने कहा, हाँ पर मनोज की सलाह भी गलत नहीं है । क्यों ना हम ऐसे गोठान की व्यवस्था करें जहाँ पर जानवरों को चौबीस घंटा रखा जाए । पूजा ने कहा ऐसा संभव नहीं है । सदानंदन ने सपाट शब्दों में कहा क्यों नहीं हो सकता । जब पूजा मीडिया कह रही है तो कुछ तो सोच समझकर कह रही होगी । पूरन सिंह ने कहा, आप ठीक कह रहे हैं चाचा मैंने सोचा है कि हम सामूहिक रूप से जानवरों के लिए चारे की भी व्यवस्था करेंगे और चरवाहों की थी । पर कैसे पूजा सरोज ने पूछा तुमने उस दिन बताया था कि रामनंदन की खेत के बाजू की जमीन सरकारी है, उसे चारागाह बनाया जा सकता है । पूजा ने कहा पर वो जमीन तो बाबू साहब के कब्जे में है । मनोज ने कहा कब्जे में है ना उन की है तो नहीं । सरोज ने कहा क्या तुम नहीं जानती हो? सरोज के बाबू साहब बहुत पहुंच रखते हैं । उनके कब्जे वाली जमीन पर हाथ डालेंगे तो हमारी कोई योजना सफल नहीं होगी । मनोज का कहना भी सही है कार्य की शुरूआत में ही बाबू साहब जैसे पावर फुल लोगों से उलझना ठीक नहीं रहेगा । सदानंद ने कहा इसमें उलझने की क्या बातें? भाई वो जमीन जब उनकी है ही नहीं तो सार्वजनिक उपयोग के लिए क्यों रोकेंगे? पूरन सिंह ने कहा क्या उनके पास इस जमीन के अतिरिक्त और कोई जमीन नहीं है? पूजा ने पूछा बीस एकड जमीन तो पहले से ही उनके पास है और कहते हैं कि कब्जे की इस जमीन गाबी किसान पुस्तिका अपने बेटे के नाम से बनवायेंगे । नियम तो ये कहता है कि जब तक पंचायत का प्रस्ताव ना हो तब तक पंचायत के अंतर्गत आने वाली जमीन का मालिकाना हक किसी को नहीं दिया जा सकता । कोरन सिंह ने कहा क्या पंचायतें प्रस्ताव दिया है? पूजा ने पूछा नहीं हमने तो ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया है । सरपंच ने कहा तो ये सब गांव वाले मिलकर बाबू साहब से बात करेंगे और वहीं पर गोठान बनाएंगे । परमानंद ने कहा पर बाबू साहब को जमीन से हटना मुश्किल है । सदानंद ने कहा एकता में बडी ताकत होती है । हम सब मिलकर उनसे बात करेंगे । मान जाए तो ठीक, नहीं तो हमें भी बनाना आता है । पर वहाँ पर मंगतू और प्रमिला काकी का घर भी तो हैं । सरपंच ने कहा लेकिन मैं तो कोई आपत्ती नहीं कर रहा हूँ । मान तूने कहा परन्तु तुम्हारा घर गोठान के भीतर हो जाने से तो कैसे रहोगे । सरपंच ने पूछा बाबू साहब की खेती में काम करने के कारण मैंने वहीं पर झोपडी बना ली थी पर गांव की भलाई के लिए तो मैं ऐसी कई घर छोड सकता हूँ । मंतू ने आगे कहा मैं तो रोज कमाकर खाने वाला मजदूर हूँ और जब बाबू साहब की फसलें कट जाती है तो रोजी रोटी के लिए दूसरी जगह का सहारा लेना पडता है । जब की पूजा कहती है कि हमारे गांव में जब दूसरी फसल लेने लगेंगे तो हमें साल भर मजदूरी मिलेगी । हर मुझ गरीब के लिए इससे ज्यादा खुशी की बात क्या हो सकती है तो आप सब लोग मेरी और से निश्चित रहे । इसे कहते हैं मेरा गांव मेरा देश । ममता को गले लगाते हुए पूरन सिंह ने आगे कहा भारत माता के सपूत हम जैसे फौजी ही नहीं तुम जैसे लोग भी हो मेरे भाई और जिस माँ की हम जैसी संतानी हो उनका समृद्ध होना निश्चित है । मंगतु की इस दिलेरी का सम्मान करते हुए मैं उसे इनाम देना चाहता हूँ । रामपाल ने कहा जो कि इसी गांव के प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर है क्या इनाम मास्टरजी सरपंच ने पूछा मेरे बेटे और बहू दोनों इंजीनियर है रिलायंस कंपनी में जिनके पास गांव आने का समय ही नहीं रहता है उनके बच्चों को गांव कि धूल मिटटी से एलर्जी होने के कारण वे लोग आना भी नहीं चाहते हैं और आप लोग तो जानती है की एकलौते बेटे के विमुख होने से दिल का मरीज होकर मास्टरनी स्वर्ग सिधार गई है तो मैं बेटे के लिए बनाए हुए मकान के एक हिस्से को मंत्री को दान में दे देता हूँ । मास्टर जी की बातें सुनकर आंगन में खडे नीरज कि आखिर झलक गई पूजा के पास । खाली पडी कुर्सी पर बैठते हुए नीरज ने आगे कहा, ऐसे महान लोग जिस गांव में रहते हैं वहाँ खुशहाली और उन्नति को आने से कोई नहीं रोक सकता । तुम तो बेकार में चिंता कर रही थी । पूजा लेकिन मास्टर जी का घर तो बहुत बडा है । इतने बडे घर का मैं क्या करूंगा? प्रमिला काकी के परिवार के लिए भी पर्याप्त जगह है । ठीक है मैं तुम दोनों को आप ज्यादा हिस्सा बार दूंगा । मास्टर जी ने कहा तुमने सच कहा नीरज कहाँ मेरी सारी चिंताएं दूर हो गई है । पिछले पांच सालों से सरोज और राकेश से मिलने यहाँ आती रही हूँ । पर इस गांव की एकता से तो आज ही परिचित हुई हूँ । पापा मुझे कई बार कह चुके हैं कि ये गांव मेरी कार्य योजना के अनुरूप है । क्यों कहते थे आज समझ में आया ये हमारे बांध का मास्टर प्लान है । मूढी हुए सीट पेपर को फैलाते हुए नीरज ने कहा टेबल पर रखे मास्टर प्लान को देखने के लिए सब नीरज को घेर लिए तो मास्टर जी ने हसते हुए कहा आप लोगों को समझ आ जाए तो मुझे भी बता देना । परमानंद, मनोज, मंगतू सहित सभी लोग झेप कर अपनी जगह पर लौट गए तो पूरन सिंह ने कहा अरे भाई, इंजीनियरिंग का काम है तो इंजीनियर ही समझेगा ना । हम लोग देख कर क्या करेंगे? काम कब से शुरू करना है? सरपंच ने पूछा नेक काम में देरी ठीक नहीं है और मैं छुट्टी लेकर आया हूँ । धाप लोग तैयार है तो कल से ही नीरज ने कहा हम भी यही चाहते हैं । सब ने एक स्वर में कहा हूँ हूँ ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 9

नवाबान आपके पापा की जीपीएफ सहित अन्य पैसों का भुगतान किया जाना है । मेरे अधीनस्थों से मालूम हुआ कि आप अपने पापा के पैसों को लेने में कोई रूचि नहीं दिखा रही है । क्यों? कलेक्टर ने कहा आपने क्यों तकलीफ कि सर बुलावा भेज दिया होता? पूजा की आगे भराई तहसीलदार एवं आपके मम्मी की दुखद घटना के समय छुट्टी पर रहने के कारण आप से मिल नहीं पाया था । इसलिए चला आया । और हाँ आपके पापा ने मुझे बताया था क्या कृषि में कुछ नवाचार कर रही है? मुझे इस संबंध में भी चर्चा करनी थी जी सर, मैं चाहती हूँ कि गांव में रोजगार के अवसर उत्पन्न हो जिससे पलायन रुक जाए और शिक्षित युवा सरकारी नौकरी या बडी कंपनियों में ही सम्मानजनक जिंदगी तलाशने के बदले स्वरोजगार की और भी ध्यान दें । पर शिक्षित युवा गांव में क्या करेगा? जिस तरह व्यापारी का बेटा पिता के व्यापार में ही नई संभावनाएं तलाशता है, उसी तरह किसान का बेटा भी तो इसी क्षेत्र में कार्य कर सकता है । सर गांव की आय बढेगी तो साथ में रोजगार के अवसर भी बढेंगे । तकनीकी विकास करते हुए हम लोग काम देने की और पीठ कर लिए हैं । कामधेनु मतलब कलेक्टर ने पूछा । कृषि पूजा ने कहा वेरी नाइस पर आज का युवा विज्ञान के साथ बहुत एक सुख सुविधाओं का पुजारी है । फिर कैसे संभव होगा? कृषि भी तो विज्ञान है सर और आमदनी बढेगी तो भाविक सुविधाएँ गांव में दिया जाएगी । पूजा ने कहा क्या कृषि में इतनी आय संभव है कि सिर्फ कृषि नहीं सर । उसके साथ कुछ ऐसे कार्य भी करने होंगे जिससे आय बढे और यही हमारा लक्ष्य है । कृषि कार्य में तो बहुत समय देना होता है । फिर उसके साथ साथ क्या दूसरा काम भी किया जा सकेगा । अवश्य किया जा सकता है । सर वर्षति की कम खेती के साथ क्या जाने वाला हूँ? जैसे कलेक्टर ने पूछा जैसी की कुकुट पालन, मुर्गी फार्म, मछलीपालन, उपचारित बीज, डेरी फार्म, कम्पोस्ट, खाद उत्पादन इत्यादि । बहुत अच्छा । मैं आपकी कार्ययोजना से प्रभावित हुआ । मैं आपके साथ हूं जिले के मुखिया के तौर पर और व्यक्तिगत रूप से भी धन्यवाद सर । आप जैसों का प्रोत्साहन ही हमें सफलता दिलाएगा । ये रहा मेरा मोबाइल नंबर जब चाहो मुझसे बात कर सकती हूँ । जी सर, आप से मिलकर बहुत अच्छा लगा । मैं तो मिलने आया था अपने स्टाफ की दुखियारी बेटी से । पर आप तो धरती माँ की लाडली है जिनसे बात करके मैं खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ । आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं सर पूजा ने हाथ जोडकर कहा घर से बार बार फोन आ रहा है सर कलेक्टर के पीएनए कार में बैठते ही मोबाइल देते हुए कहा हलो हामा प्रणाम तेरी यही बातें मुझे अच्छी नहीं लगती है । करन क्या हुआ तो उन्हें तो कलेक्ट्री के चक्कर में माँ का फोन उठाना ही बंद कर दिया है । ऐसी बात नहीं है मैं मैं जरूरी मीटिंग में था । सारा दिन तो व्यस्त रहता ही है । रविवार की रात आठ बजे भी तो हूँ । मीटिंग करते रहोगे तो मैं तो उसे कब बात करूँ तो वही बता दूँ । भाव गुस्सा छोडो मा और कहो क्या बात है तू मेरे लिए बहुला दे बस चाहे कभी बात मत करना । आज पे रिश्ता आया है । लडकी भी बडी अवसर है और बहुत सुंदर भी है । मेरे को बताया तो है की मुझे और बिस्तर या सुंदर नहीं पसंद की लडकी चाहिए और वो कब मिलेगी मिल गई है? हाँ सच कह रहा है सीमा की खुशी का ठिकाना नहीं रहा । हाँ मैं उसी से बात करते हुए भूल गया कि तुम्हारा फोन आने वाला है । कोई बात नहीं बेटा तुम तो मेरा ही काम कर रहे थे । अब जल्दी से मेरी बहु का फोटो भेजो । बहुत इंतजार किया है मैंने । पर अब और नहीं मेरे पास उसकी फोटो नहीं है । हाँ तो फिर ठीक है मेरी टिकट बुक करा दे मैं खुद ही उसे मिल होंगी । आपको मिला दूंगा मा पर पहले ये तो जान लू की उसे मैं पसंद हो या नहीं । अरे मेरे चांस बेटे को कोई रिजेक्ट कर । ऐसा तो हो ही नहीं सकता । ऊपर से ऑफिसर भी है । सभी माँ के लिए उसका बेटा सर्वश्रेष्ठ होता ही है । हाँ पर सच्चाई तो पसंद की लडकी ही बताती है । चल मजाक बन कर और जल्दी से लडकी को दिल की बात बता दें हैं ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 10

देखना । बहुत गोठान बनाने के लिए जमीन तो मिल गई पर कुछ चरवाहे क्या इतने सारे जानवरों को संभाल पायेंगे? नीरज ने पूछा मैं भी इसी सोच में हूँ कि मेरे मन में बात आई है । ऊर्जा को टोकते हुए सरोज ने कहा बताइए । नीरज ने कहा बात ये है कि नीरज के पूछे जाने पर सरोज झेंप गई हो । अब बता भी तो यार । पूजा ने पूछा भूटान के चारों और यदि हम गड्डे खोदे तो कोई भी जानवर आहता को पार नहीं कर पाएगा । बहुत अच्छी बात कही तुमने? सरोज ये सलाह तो इंजीनियर भाई की तरफ से आना था पर तुमने उसे पीछे छोड दिया । पूजा ने कहा तुम ना पूजा मुझे चलेगी, जहाँ पर मैं चढाओ मैं ऐसे ही थी को वो ही कह रही है । सरोज आप मल्टी टैलेंटेड है । मैं सब समझ रही हो । नीरज सुमित ऊपर सरोज की तारीफ करने का मौका चाहिए । बहुत शुरू हो जाते हो । पूजा ने कहा मैं आप लोगों के लिए चाय बनाती हूँ । इससे पहले की पूजा उस की भी खिंचाई कर दी । सरोज ने वहाँ से जाने का बहाना ढूंढ लिया । देख रही हूँ पूछा जब भी कुछ बात आगे बढाने का मौका मिलता है तो सरोज रास्ता नाम लेती है तो अपने मन की बात किया मेरे सामने गा होगी । पूजा ने कहा तो इसमें बुराई क्या है, आप तो वैसे भी सबको जानती हैं । नीरज ने कहा अरे बुद्धू प्रेम बहुत ही नाजुक चीज होती है जिसमें एकाकीपन का महत्वपूर्ण स्थान होता है । इतना भी नहीं जानती की प्रेम गाली अतिसाहस क्रीज आ मेरे को न समाये ही जी गुरु जी । नीरज ने हाथ जोडकर प्रणाम करने की मुद्रा में मुस्कुराते हुए आगे कहा अब काम की बात कर ले ठीक है अच्छा ये बताओ स्टॉप डेम बरसात से पहले बंद हो जायेगा । नीरज पूजा ने पूछा गांव वाले यदि इसी उत्साह से श्रमदान करते रहे तो अवश्य पूरा हो जाएगा और हाँ, कलेक्टर साहब भी काम की प्रगति के बारे में पूछ रहे थे । नीरज ने कहा, कलेक्टर साहब हमारे काम में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं । सरोजनी चाहिए की प्याली थमाते हुए कहा, मुझे भी कुछ ऐसा ही लग रहा है । पूजा ने कहा, यदि जिले का मुख्य हमारे काम पर ध्यान दे रहे हैं तो अच्छी बात है, लेकिन मुझे लग रहा है कि कलेक्टर साहब का कुछ तो स्वार्थ होगा । पूजा ने कहा क्या हो सकता है सरोज ने पूछा मुझे कलेक्टर साहब ने भेजा है । पूजा जैसे मिलने जी मैं हूँ पूजा का ये मैं जिला कृषि अधिकारी हूँ । आप कुछ नवाचार कर रही है, उसी संबंध में चर्चा करनी है । आपका स्वागत है । पर शमा चाहते हुए निवेदन है कि हमें हमारे काम में कोई व्यवधान नहीं चाहिए । पूजा ने कहा कि ये आप क्या कह रही है? हम तो आपका सहयोग करना चाहते हैं । धन्यवाद सर पर आप लोगों का काम में देख चुकी हूँ । पीडित किसानों को बीमा का पैसा, सरकार द्वारा प्रस्तावित मेर मरम्मत एवं खेत सुधार का रुपया तो अब तक किसानों को दिलवानी पाई जो उनके हक का था और सहयोग की बात कर रहे हैं । हमने जो लक्ष्य बनाया है उसके हिसाब से हमें शांति से काम करना है । पूजा जी ठीक कह रहे हैं साहब, हमें अपना काम करने दीजिए । सरपंच ने प्रवेश करते हुए आगे कहा, ऑफिस का कई चक्कर काट चुका हूँ । मैं पर हमारी कोई बात सुनी दी गई और जब पूजा हमारा सहयोग करने आई है तब आप किस काम से आए थे । आप कृषि अधिकारी ने पूछा एक काम हो तो बताओ साहब ग्राम पंचायत में पीने के पानी की समस्या जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था के लिए तालाब निर्माण की मांग, अप्रोच रोड और अन्य पर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई । पिछली बातों को छोडिये और अब बताइए कि क्या समस्या है । कृषि अधिकारी ने कहा, पूजा जी के साथ मिलकर अब अपनी समस्याओं का हल हम खुद ही ढूंढ रहे हैं । बस आप कोई प्रशासनिक अडचन ना डाले । सरपंच की बातों में कठोरता थी । जैसी आप लोगों की इच्छा कहकर जाने लगे तो सरपंच ने कहा चाय तो पी कर जाइए साहब क्या बात है सर पंजी, आप गुस्से में लग रहे हो । हम किसान है तो की हमें गुस्सा नहीं आएगा । पूजा जी सरकारी अनुदान से मिलने वाले डीजल पंप के लिए कई चक्कर लगाए पर इनके पास समय ही नहीं रहता था । हमारे लिए और उनके कर्मचारी लोग हमें कुछ भी कहने से पहले ही डराते रहे हैं कि साहब का मूड ठीक नहीं है । लीजिए पानी बेहतर गुस्सा ठंडा कर लीजिए । चाय बनाओ नहीं । सरोज मैं भी घर से चाय भी करा रहा हूँ । सरपंच ने कहा अच्छा तो उन्हें चाय की गाली दी जा रही थी । सरोज ने हसते हुए कहा चाय की गाली बात दोहराकर नीरज के साथ पूजा भी हंसी को रोक नहीं पाई । एक तो पहले से ही मेरा दिमाग खराब था, ऊपर से कृषि अधिकारी को यहाँ बैठे देख खुद को रोक नहीं सका । घनशाम ने कहा क्या हुआ सर पंजी? नीरज ने पूछा वही जिसकी आशंका थी, पटवारी आए थे, कह रही थी कि गोठ आने के लिए बाबू साहब की ही जमीन क्यों? तो आपने क्या कहा सर? उसके बाबू जी ने अपना हजार किनारे पर रखते हुए पूछा मैं तो बताऊंगा ही, पर आप पता ये पत्थर जोडाई का काम पूरा हुआ कि नहीं भैया घनशाम ने पूछा लडकों का जोश तो तुम देखी रहे हूँ । आज तो जितनी भी की पत्थर जोडने का काम खत्म ही करना है । आज तो मेरा साथ देते हुए पूरन सिंह भी पत्थर उठा उठा कर रखते हुए पत्थर जुलाई में सहयोग कर रहे थे । बस फिर क्या था बच्चों की जोश में चार चांद लग गए । चलो अच्छा हुआ की मुख्य कार्य संपन्न हुआ । पूजा ने गहरी सांस लेते हुए कहा हाँ पर सर पंजी कुछ जिक्र कर रहे थे । नीरज ने कहा मैंने पटवारी से कह दिया है कि और कोई जमीन हमारे पास है नहीं तो वो ठान तो वहीं पर ही बनेगा । फिर उसने क्या कहा? सरोज के बाबू जी ने पूछा, आप तो जानती है भैया की उस ने क्या कहा होगा? घनशाम ने सवाल के बदले सवाल ही किया तो अब क्या करेंगे? करना क्या है? बहुत से लीजिए । उस पटवारी की ज्यादा थी पर अब और नहीं । आप दोनों की बातों को आप दोनों ही समझ रहे हैं । हमें भी तो बताइए । पूजा ने कहा बाबू साहब का खाता है और उन्हें का उल्टा सीधा काम भी करता है । पटवारी तो पूरे गांव का है पर बात ऐसे करता है जैसे तनख्वा उसे सरकार नहीं बल्कि बाबू साहब भी देते हैं । शाम लाल ने कहा कि ये बाबू साहब है कौन? क्या करता है? नीरज ने पूछा नेतागिरी करता है और शहर में पता नहीं क्या काम करता है पर पैसे वाला है । सरोज ने कहा पर अबकी बार उनकी नेता गिरी नहीं चलने देंगे । घनशाम ने आगे कहा, गांव के विकास में जो भी बाधा डालने की कोशिश करेगा उसकी शिकायत कलेक्टर साहब से करेंगे । हाँ तो गुस्से के साथ साथ बडे जोश में हो सर पंजी । पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा, क्योंकि अब तो कलेक्टर साहब भी है हमारे साथ । घनशाम ने कहा हाँ ये बात तो है । सरोज ने कहा पूजा जी आप कलेक्टर साहब को बताइए कि बाबू साहब हमारे गांव में बाधा डालने की कोशिश कर रहे हैं । घनशाम ने कहा ठीक है मैं बात करूंगी । हलो जी पूजा बोल रही हूँ । हाँ हाँ बोलिए । मुझे गोठान की जमीन के बारे में आपसे कुछ बात करनी थी । आप ऑफिस में है क्या? अच्छा? हाँ वो पूजा बोल रही है । सॉरी फोन पर आपकी आवाज पहचान नहीं पाया । इस समय कहाँ पर है आप? मैं भी कलेक्टर ऑफिस से कुछ दूरी पर हो सर, अच्छा किया । आप ने की फोन कर लिया । मैं बस कहीं जाने ही वाला था । अपने दफ्तर आ जाइए जी सर बैठिए! कहते हुए कलेक्टर की घंटी बजाते ही चपरासी सामने आकर खडा हो गया । क्या लेंगे आप चाय या कॉफी? कलेक्टर साहब ने पूछा जी कुछ नहीं ऐसे कैसे कुछ नही पहली बार हमारे ऑफिस आई है । कुछ तो लेना ही होगा । पानी दिलवा दीजिए । बताइए क्या समस्या है सर । बात ये है कि जिस जमीन पर हमने गोठान बनाने का निर्णय लिया है वो कोई बाबू साहब के कब्जे में है और पटवारी के माध्यम से उसने कहलवाया है कि उस जमीन पर गोठान बनने नहीं देंगे । सिर्फ कब्जा है की मालिकाना है कि उसके पास कब जा ही है । सर रसूख के चलते जानता हूँ मैं उन्हें आप निश्चिंत रहिए । मैं उनसे बात कर लूंगा । आपके काम में कोई व्यवधान नहीं आएगा । धन्यवाद सर । पूजा ने हाथ जोडकर कहा और बताइए कैसा चल रहा है आपका काम । आप सब के आशीर्वाद से ठीक चल रहा है सर । उम्मीद है वर्षा से पूर्व बांध का काम पूरा हो जाएगा । बहुत सुन्दर सराहनीय कार्य कर रही हैं । जितनी भी तारीफ की जाए कम होगी । जी धन्यवाद सुना है यहाँ पर आपका मकान बहुत अच्छी जगह पर है । जी यहाँ से पचास मीटर की दूरी पर है । कौन रहता है वहाँ? कलेक्टर ने पूछा खाली पडा है सर किराये पर देना चाहेंगी इस बारे में तो कुछ सोचा ही नहीं है । सर किस के लिए चाहिए? नया जिला बनने के कारण दफ्तर के लिए हमारे पास बिल्डिंग की कमी है । शिक्षा अन्य विभाग को शिफ्ट करना था सोचकर बताओ कि सर पूजा ने कहा ठीक है और जल्दी बताइएगा । ठीक है सर चलती हूँ कहते हुए पूजा दोनों हाथ जोडकर खडी हो गई तो कलेक्टर साहब ने भी वैसा ही क्या । पूजा के जाने के कुछ सेकंड के बाद ध्यान आया कि सामने खडा चपरासी उसे देख रहा है तो मुस्कुराते हुए कलेक्टर साहब भी बाहर निकल गए

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 11

ग्यारह भाग बांध का मुख्य काम तो करीब करीब पूरा होने को है और मेरी छुट्टी भी समाप्त होने वाली है तो दो दिन बाद मुझे जाना होगा । नीरज ने कहा, जी, वैसे भी आपने बहुत समय दिया है हमें किए गांव आपका ये एहसान कबीर बुलानी पाएगा । सिरोज ने कहा और आप? नीरज जी पूछा वैसे तो आपके जवाबों का कोई जवाब नहीं होता है पर जब भी में व्यक्तिगत सवाल करता हूँ तो अब शांत हो जाती है । सरोज को खामोश एक नीरज ने कहा आपकी नाराजगी सही है पर मैं झूठ बोलना नहीं चाहती हूँ और सच कह नहीं सकती हूँ । सरोज ने कहा मैं नाराज नहीं हो रहा हूँ । सरोज पर आपकी खामोशी मुझे परेशान कर रही है । आप समझ रही है कि मैं क्या कहना चाहता हूँ नहीं और आप मुझे समझाने की कोशिश भी मत कीजिए । सरोजनी मुझे लिया । इस तरह मूख्य लेने से काम नहीं चलेगा । सरोज कुछ तो कहीं नहीं कहना है । मुझे कुछ भी नहीं कहना है । चले जाइए यहाँ से । आप जितनी जल्दी हो सके मुझ से दूर चले जाइए । क्यों नीरज तरफ उठा क्योंकि आपके नजदीकी मुझे परेशान करती है । मैं खुद को समझाकर थक जाती हूँ । डर लगता है । किसी दिन मेरा मन मुझसे बगावत नाकर बैठे इतना प्यार करती हूँ, मुझसे खा करती हूँ । बहुत प्यार करती हूँ आपसे पर ये बोलना भी नहीं जाती की मेरा आपका कोई मेल नहीं है । हम एक दूसरे को जाते हैं इससे बडा मेल क्या हो सकता है । मैं जानती थी कि आप यही कहेंगे इसलिए चुप रहती थी । सरोज ने कहा आपकी चुप रहने से क्या होगा? सरोज आपकी लेगा है तो सब बता देती हैं । एक बेमेल प्रेम का नतीजा में देख चुकी हूँ इसलिए कहती हूँ कि जिद मत कीजिए । सरोज ने कहा राकेश की बेवफाई की सजा आपको खुद को क्यों दे रही है? नीरज ने पूछा क्योंकि मैं उसकी बहन हूँ और रात के अंधेरे में जब पूजा की सिसकियां गूंजती है तब राकेश भैया के बेवफाई मेरे सामने आकर खडी हो जाती है । भैया तो चले गए पर मैं उन आसुओं की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकती । पूजा के आंसुओं के समंदर में मैं अपने प्यार को डूबो देना चाहती हूँ जिससे भैया की बेवफाई का मैं कुछ तो प्रायश्चित कर सकूँ । जिस पूजा के लिए आप ईश्वर की सबसे बडी स्वागत प्रेम का गला घोंट रही है । कभी सोचा है कि जब उसे ये बात मालूम होगी तो उसे कैसा लगेगा । मैं तो उसे कहूँगी नहीं और आप भी वादा कीजिए की पूजा से इस बात का जिक्र भी कभी नहीं करेंगे । सरोज ने कहा क्योंकि पूजा तो मेरी बेबी को जो कुछ जानती ही नहीं है । पेड के वोट पर खडी पूजा ने प्रकट होते हुए कहा तो पूजा और तुम तुम कब आई? सरोज हडबडाहट में हकलाने लगे पागल है जो खुशियां बाहें फैलाए घडी है और तो है कि मेरी बदकिस्मती की ओर में छूटने की कोशिश कर रही है । पूजा ने सरोज का हाथ थामकर आगे कहा पिछले दो महीनों से देख रही हूँ कि तुम्हारे विचार कितने मिलते हैं । ऐसे जैसे एक दूसरे के लिए ही बने हो तो वहीं लडकी हो सरोज जिसकी तलाश नीरज को थी । हाँ सरोज अधिकारिक रुपयों की दौड में भागती हुई दुनिया मुझे पसंद नहीं है तो मेरे मम्मी पापा भी बडी कंपनी में इंजीनियर है और मोटी तनख्वाह है । दोनों की आपस में बहुत प्यार भी है । उन दोनों में पर वक्त नहीं है जबकि मुझे भारतीय जीवन शैली पसंद है क्या तो मेरी इस बात से सहमत हूँ । मैंने बताया तो है कि सरोज भी ऐसा ही को चाहती है । पूजा ने सरोज को खामोश देखकर कहा, लेकिन आज तुमसे नहीं । यही बात में सरोज के मुझे सुनना चाहता हूँ । यदि मेरे विचार से आप सहमत नहीं है तो मैं आज के बाद कभी भी आपसे बात नहीं करूंगा । सरोज नही पलट कर कभी आऊंगा कहकर नीरज जाने लगा । सरोज नीरज को खुद से दूर जाते देख भावनाओं के तूफान को रोकना सके और किसी बेल की तरह उसकी पीठ से जा । लिट्टी और आंखों से बहती गंगा जमुना से नीरज की कमी भी गई । तुम्हारा इजहारे मोहब्बत सचमुच निराला है । सरोज नाना कहते हुए रोमेंटिक अंदाज में ही कह दिया तो जाने । बस कराते हुए आगे कहा अब तो खुश हो नीरज । ये भी कोई पूछने की बातें पूजा तो जल्दी चलो । पटवारी आया हुआ है । गोठान की जमीन का सीमांकन करने धरे तो अब तक क्यों नहीं बताया? सरोज ने कहा क्योंकि लैला मजनू फिल्म की शूटिंग देख रही थी । पूजा हंस पडी । घनशाम जी तो कह रहे थे कि बाबू साहब कब्जा नहीं छोडेंगे । फिर पटवारी ही जमीन ना आपने कैसे आ गया । नीरज भी पूछा सिर्फ पटवारी ही नहीं हमें भी आप लोगों के पास ही भेजा गया है । उद्योग अधिकारी ने कहा, आपको क्यों पूजा ने पूछा कल तक हम लोग शहर जा जाकर इन्हें ढूंढते रहते थे, पर आज उद्योग अधिकारी और सहकारी बैंक वाले हमें ढूंढ रहे हैं । परमानंद ने गर्व से कहा, तुम सही कह रहे हो भाई । सरकारी योजना का वास्तविक लाभ उठाने वालों को हम हमेशा ढूंढते रहते हैं । हम तो चाहते हैं कि जितना अधिक हो सके आप लोग सरकारी योजनाओं का फायदा ले । उद्योग अधिकारी ने कहा, लेकिन कमीशन की बात पहले ही सब सब बता दीजिए साहब । मनोज ने कहा ये आप क्या कह रहे हैं? उद्योग अधिकारी सब बता गया सही तो कह रहा हूँ । पिछली बार जब आपके पास बकरीपालन के लिए कर्ज लेने के लिए प्रकरण बनवाया था तो आखिरी समय में आपने बताया था कि कमीशन का पैसा पहले जमा कराना पडेगा । अरे भाई, हमारे पास पैसा होता तो कर्ज क्यों लेते? उद्योग अधिकारी की स्थिति ऐसी हो गई जैसे काटो तो खून ना निकले हैं । उन सब बातों को छोडो मनोज आज की बात करते हैं । परिस्थितियों को संभालते हुए सरपंच ने आगे कहा, हम सब लोग मिलकर एक दिन तय किए थे कि किसी कौन से कार्य के लिए कितना करना चाहिए । उसी के अनुसार में साहब को बता देता हूँ । हाँ, ये ठीक रहेगा । उसके बाद मैं आपको बता दूंगा कि नियमानुसार आवश्यक दस्तावेज कौन कौन से लगेंगे । उद्योग अधिकारी ने कहा हाँ, ऐसा ही कीजिये सर बंजी पूजा ने कहा पूजा जी आपसी एक व्यक्तिगत काम था । पटवारी ने कहा क्या काम है बताइए यहाँ हम सब एक है । पूजा ने कहा आप अग्रवाल जी है, एनजीओ चलाते हैं । पटवारी ने परिचय कराते हुए आगे कहा, आप से कुछ बात करना चाहते हैं । नमस्ते नमस्ते जी कही । पूजा ने कहा बात यह है पूजा जी की । मैं भी आपके कार्य में सहयोग करना चाहता हूँ क्यूँ पूजा ने पूछा क्योंकि यही मेरा काम है । अग्रवाल ने कहा तो अब तक कहाँ थे अब ये क्या बात हुई? पूजा जी हाँ तो नाराज हो गए । ग्रवाल जी नाराजगी की बात ही कर रही हैं । देखिए अग्रवाल जी सीधी और साफ बात यही है कि मेरा उद्देश्य अपना काम खुद करने का है । हम सरकारी योजनाओं का लाभ इसलिए ले रहे हैं कि हमारा हक है । हमें किसानों को सक्षम बनाना है, आश्रित नहीं । पूजा ने कहा लेकिन कलेक्टर साहब ने तो कहा है कि अच्छा तो जिलाधीश महोदय के कहने पर आए हैं । पूजा ने हाथ जोडकर कहा हमें आपकी सेवा नहीं चाहिए । हमारे गांव की तो किस्मत चमक गई । बडे बडे लोग आने लगे हैं । परमानंद ने अधिकारी के जाते ही कहा, ऐसा ही होता है । उगते सूरज को सब प्रणाम करते हैं । ये लोग हमारे लिए नहीं अपने स्वार्थ के लिए आ रहे हैं । पूजा ने आगे कहा हमारी मेहनत पर सहयोग के नाम पर अपनी मुहर लगाएंगे और बदले में सरकार से पैसा और पुरस्कार वसूलेंगे । देखते रहेंगे हम तो लोगों का आना जाना लगा ही रहेगा हूँ ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 12

बारवा भाग हूँ जी सर मैं पूजा बोल रही हूँ, तुम्हारा नंबर है मेरे पास काम ठीक चल रहा है । कलेक्टर साहब ने पूछा जी बांध का काम तो अंतिम पडाव पर है सर मैंने आपको धन्यवाद कहने के लिए फोन किया था । किस बात का धन्यवाद । आप की मदद से हमें गोठान के लिए पर्याप्त जमीन मिल गई । सर पूजा ने कहा ये तो हमारा काम ही है बल्कि सराहनीय कार्य तो तुम कर रही हूँ । धन्यवाद सर, तुम्हारी कार्य की सराहना चारों और हो रही है । धन्यवाद सर जी, तुम्हारे पास धन्यवाद का खजाना है गया । कलेक्टर साहब ने हसते हुए कहाँ शिकायत भी है सर आप से? पूजा ने कहा ऐसी शिकायत एनजीओ भेजकर आपने हमारी कार्यक्षमता पर प्रश्न खडे कर दिए हैं । सर ऐसी बात नहीं है । पूजा फिर अग्रवाल जी को मेरे सहयोग के लिए क्यों भेजा था आपने पूजा की इस मासूमियत ने कलेक्टर साहब के होठों पर मुस्कान ला दी । उन्होंने कहा मैंने अग्रवाल को तुम्हारे सहयोग के लिए नहीं बल्कि नवाचार को देखने के लिए कहा था । पर उन्होंने तो मुझे सहयोग देने की बात की । हमें बच्चा समझकर अपने अनुभव का धौंस जमाने की कोशिश कर रहे थे । पूजा ने कहा हाँ, ये जरूर गलत किया है । उसने यही पर होता है । काम करने वाले और प्रदर्शन करने वाले में उसे क्या पता कि काम के मामले में तुम उस क्या हो? कहीं आप मेरा मजाक तो नहीं उडा रहे हैं? सर नहीं तुम्हारी हिम्मत बढाने की कोशिश कर रहा हूँ । तुम जैसे युवाओं के हमारे देश को सख्त जरूरत है । पूजा के भी बाकी ने कलेक्टर का मन मोह लिया । धन्यवाद सर, फिर धन्यवाद । कलेक्टर ने दोहराया सॉरी सर, समय मिले तो आप हमारा काम देखने आइए । गंग वहाँ जरूर आऊंगा । किसी बात कर रही थी पूजा सरोज ने पूछा कलेक्टर साहब से मैं तो डर रही थी पर बहुत अच्छी तरह बात हुई । तेहसीलदार की बेटी हो तो बात तो अच्छे से करेंगे ही । तुम सही कह रही हो । पापा ना होकर भी मेरे साथ है । पूजा के आगे भराई । सौरी पूजा मेरा मकसद तुम्हें रुलाना नहीं था तो उनकी सारी कह रहे हो । सरोज बाबा की बात करना मुझे बहुत अच्छा लगता है । भूटान के चारों और गड्ढे खोदने का काम भी पूरा हो गया । पूजा जी पर मुझे एक नई समस्या दिखाई दे रही है । शाम लाल ने प्रवेश करते ही कहा अब क्या समस्या नहीं सर । पंजी कल शाम से कुछ जानवरों को इकट्ठा किए हैं । सुबह गया तो गोबर देखने पर ध्यान आया कि चरवाहों के साथ साथ हमें साफ सफाई के लिए मजदूर रखना होगा । सरपंच ने कहा आपका कहना सही तो है पर इससे जानवरों को रखने की लागत पड जाएगी । वहाँ और साथ ही हमें गूगल सहित कचरे को फेंकने की भी व्यवस्था करनी होगी । घनशाम ने कहा उसके लिए तो पुराने पर नदी ही ठीक रहेगी । सरोज की माँ ने कहा कि ऐसी पद्य दीमा पूजा ने पूछा । घरों से निकलने वाला कचरा इवन गोबर के लिए घर के एक कोने में ही गड्डा खोदकर उसमें ही डाल देते थे और ऊपर से मिट्टी से ढंग देते थे और उसे ही खेतों में खाद के रूप में उपयोग में लाते थे । लाख तक की की बात कही है । मानी पर में इससे थोडा बदलाव करना चाहूंगी । सरपंची कैसा बदलाव पूजा जी सरपंच ने पूछा भूटान की चारों कोने में बडे बडे गड्ढे बनाकर उसमें कम्पोस्ट खाद तैयार करेंगे । वो होता है पूजा । सरोज के दाबू जी ने पूछा हम उसे देसी खाद कहे तो ठीक रहेगा । सरोज ने कहा वहाँ देसी खाद ही मान ले और यह खाद रासायनिक खादों से बेहतर होती है । पूजा ने कहा, देसी खाद से तो उत्पादन कम होता है । सरपंच ने कहा ऐसा तो नहीं है । फिर भी हम यदि यह भी मान ले के देसी खाद से उत्पादन कम होगा तब भी कमाई अधिक होगी । पूजा ने कहा कैसे होगा बेटा बाबू जी ने पूछा । पहली बात तो यह है कि देसी खाद, जिसका उत्पादन हमारे द्वारा किए जाने के कारण लागत कम रहेगी और दूसरा फायदा यह भी होगा कि हमारी जमीन की उर्वरक शक्ति में गिरावट नहीं आएगी और फिर गोबर खाद से उत्पादित फसलों का बाजार में बहुत मांग रहती है, जिससे कीमत भी ज्यादा मिलेगी । पूजा ने कहा, तो फिर ऐसा ही करते हैं । खाद खरीदने का पैसा भी बच जाएगा और उत्पादन का दाम भी ज्यादा मिलेगा । सरोज ने कहा, और यदि हमारे उपयोग के बाद कुछ खाद बच गया तो उसे शहर में बेचा भी जा सकता है । पूजा ने कहा, शहर वाले खाद का क्या करेंगे? घनशाम ने पूछा, फार्म हाउस वाले नर्सरी के लिए खरीदते हैं, जिनके घरों में किचन, गार्डन एवं बगीचे के लिए जरूरत होती है । पूजा ने कहा, इससे तो हमें अच्छी खासी कमाई भी हो जाएगी । सरपंच ने कहा, हाँ और खाद में कमाई करने के लिए एक निश्चित तादात के बाद भुरभुरी मिट्टी की पढते डाल देने से खाद की मात्रा तो बढी जाएगी साथ ही खाद की उर्वरकता भी बढेगी और इसी व्यवसाय के तौर पर भी अपनाया जा सकता है । पूजा ने कहा, एक चीज अभी भी छूट रही है क्या सर पंजी? पूजा ने पूछा जानवरों के लिए चारे की व्यवस्था कैसे होगी? उसके लिए तो मैंने सोच रखा है कि गोठान के आधे हिस्से में हरा चारा हो जायेंगे, जिससे पांच महीने तक जारी की व्यवस्था हो जाएगी । शीर्ष समय के लिए हमारे उत्पादन से बने अविशेष को परिवर्तित करके एकत्रित कर लेंगे । जैसे पहले हम लोग घर के पालतू जानवरों के लिए चारा रखते थे । सरोज ने कहा, सर्वोच्च ठीक कह रही है । सरपंच ने समर्थन किया तो आप देख लीजिए सरपंच जी के किसी गोठान की देखभाल के लिए नियुक्त करना है । पूजा ने कहा हाँ जी से कहेंगे । सरपंच ने कहा मैं तो चाहती हूँ कि गांव के लोगों को ही यह जिम्मेदारी सौंपी जाए । इससे उन्हें रोजगार तो मिलेगा ही, साथ ही अपनापन होने के कारण जिम्मेदारी से काम भी करेंगे । आप ठीक कह रही है पूजा जी । सरपंच ने कहा क्या हुआ फौजी चाचा कहाँ कुछ परेशान लग रहे हैं । माथे पर शिकन लिए पूरन सिंह जी को आते देख सरोज ने पूछा तुम सच कह रहे हो? बेटा आज मैं बहुत दुखी हूं और कैसे कहूँ? मैं पहली बार देख रही हूँ कि आप किसी बात को कहने के लिए इतना सोच रहे हैं और आप जैसे हिम्मत की मूर्ति को टूटते हुए भी पहली बार देख रही हूँ । सरोज ने कहा सच मुझे टूट चुका हूँ में कहते हुए पूरन सिंह के आगे भराई । अब मुझे डर लग रहा है । फौजी जांचा बताइए क्या हुआ है मेरा बेटा आज मुझसे रिश्ता तोडकर चला गया । आंसुओं को समेटते हुए पूरन सिंह ने कहा ऐसी क्या बात हो गई और फिर वो तो शहर में रहते हैं सर । उसने पूछा हाँ शहर में नौकरी करता है वहाँ मैंने उसके लिए फ्लैट भी खरीद दिया है । कल शाम से घर पहुंचने ही अपने माँ से लडाई कर रहा था । लडाई कर रहा था पर क्यूँ पूजा ने पूछा रिटायरमेंट में मिला हुआ रुपया मांग रहा था । कहता है गांव के विकास से हमें क्या लेना देना? अपना पैसा गांव में खर्च करने के बदले उन्हें दे दू तो दे दीजिए । फौजी चाचा जिंदगी भर तो देश की सेवा के लिए परिवार से दूर ही रहे हैं । अब जब पास आए हैं तो घर वालों के साथ सुखपूर्वक रहेंगे । बांध के लिए तो पैसों की व्यवस्था कहीं ना कहीं से होगी जाएगी । पूजा ने कहा मैं जानता हूँ कि जिस काम की शुरुआत हो चुकी है वह पूरा होकर ही रहेगा । चाहे मेरा सहयोग रहे या ना रहे पर में अपनी मेहनत का पैसा वहाँ खर्च करना चाहता हूँ जहाँ खर्च करके मुझे संतुष्टि मिले । आपके बेटे ने पैसे मांगे हैं । पूजा ने पूछा कहता है उसके मित्रों के पास बडी बडी कार है तो वो भी महंगी कार में घूमना चाहता है । इसलिए उसे मेरा पूरा पैसा चाहिए । अभी जिस कार में वह घूम रहा है उसे भी खरीदने के लिए मैंने अपने जीपीएफ का पैसा निकाल कर दिया है । हाँ, ये मांग तो उसकी गलत है । सरोज के बाबू जी ने आगे कहा, पर क्या करें? आजकल के लडकों का तो सपना ही ऐसा होता है जिसे पूरा करवाना हम जैसे पिता के लिए मुश्किल होता है । जब तक बच्चों को हमारी जरूरत रहती है तब तक उन्हें अधिकार याद रहता है । माता पिता के हर चीज पर उनका अधिकार होता है । पर जैसे ही माता पिता को उनकी जरूरत होती है को हमें भूल जाते हैं । इसीलिए मैं इस बार अपनी बेटी की जिद के आगे नतमस्तक नहीं हुआ । अपने जीवन की सारी कमाई उसकी पढाई लिखाई और सुख सुविधाओं के लिए ही खर्च करता रहा । उसकी माँ अपनी हर इच्छा को मारकर बेटे को सरकारी नौकरी में देखने के लिए सारा पैसा बच्चों के लिए खर्च कर दी रही । मैं जब भी छुट्टियों में घर आता तो उसने कभी भी अपनी बात नहीं कही । सिर्फ बच्चों का ही जिक्र कर दी थी । विषेशकर बेटे का बहुत ख्याल रखती थी । आज वही बेटा कहता है कि बुढापे में तो इच्छाएँ होनी नहीं चाहिए बल्कि जो भी संपत्ति और पैसा है उसे बच्चों के हवाले कर देना चाहिए । क्योंकि हमारे खेलने खाने के दिन है । जिस गांव में पैदा हुआ वही गांव अब उसे खुद के सामने बौना नजर आता है । ऐसे बच्चे रिश्ता रखे तो ही ठीक है । कम से कम शांति तो रहेगी । अवसाद का हलाहल पीते हुए सरोज के बाबू जी ने आगे कहा, मुझे देखो मैं तो भूल ही गया कि मेरा कोई बेटा भी था । पूजा और सरोज ये दोनों ही मेरी संताने हैं । पर मेरी किस्मत में तो बेटियाँ भी नहीं है । अब की बार कोरन सिंह आसुओं को लडने से रोक नहीं पाए । आपकी बेटी नहीं हो गया । पूजा ने आंसू पहुंचती हुए कहा तुम सिर्फ मेरी ही नहीं बल्कि पूरे गांव की रानी बेटी हो । हर जिसकी तुम जैसी बेटी हो वो तो सौभाग्यशाली है । पूरन सिंह ने पूजा के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा आप लोग बुरा ना माने तो एक बात कहूं कहूँ सरोज क्या बात है? सरपंच ने कहा मुझे लगता है कि फौजी चाचा मास्टरजी या हमारे घर में राकेश भैया से मैं बाबू जी का दुखी होना कोई नई बात नहीं है । आजकल हमारे आस पास ऐसी घटनाओं का अंबार लगा हुआ है जिसके लिए एकतरफा बच्चों को ही दोषी मानना ठीक नहीं है तो हम ने बच्चों को उच्च शिक्षा देकर गलती की है । सरोज उसके बाबू जी ने कहा मैं ऐसा तो नहीं कह रही हूँ बाबू जी उच्च शिक्षित तो मुझे भी किया है आपने । पूजा ने तो न सिर्फ उच्च शिक्षा प्राप्त की है बल्कि यूनिवर्सिटी टॉपर है और नौकरी सहित बहुत सारे आगे बढने का अवसर बाहें फैलाएं । उसका इंतजार कर रहे थे । फिर भी देखिए वो हमारे बीच में है तो तुम कहना क्या चाहती हो सरोच? पूरन सिंह ने पूछा यही कि इसके लिए कहीं न कहीं हमारी शिक्षा प्रणाली जिम्मेदार है फिर उसका असर तुम पर या पूजा पर क्यों नहीं पडा? सरपंच ने पूछा मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए । ऊर्जा ने आगे कहा, परंपराओं के अनुसार या बेटियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए या कोई अन्य कारण भी हो सकता है जिसके चलते हम लडकियों को बचपन से ही जिम्मेदारी का अहसास कराया जाता है । दुनियादारी के लिए ही सही पर का ही रखा जाता है जिससे माँ बाप के मुश्किलों को जानने समझने का मौका तो मिलता ही है । भावनात्मक रूप से भी निकटता बढती है । इसके विपरीत बेटों को अधिक सुख सुविधाएं देते हुए अधिकाधिक धन कमाने के साधन के रूप में देखा जाता है । उच्च शिक्षित बेटा बडी कंपनी में काम करे या बडा ऑफिसर बनीं यह सोच पूरे परिवार की होती है और यही बीज बेटे के मन में भी बोया जाता है जिसे सामाजिक प्रोत्साहन के जलसे सिंचित किया जाता है । इस तरह शिक्षा से लेकर घर तक और सामाजिक ताना बाना भी ऐसा ही होता है जो वर्तमान परिस्थितियों का जनक होता है । कहते है ना कि हम जो होते हैं वही काटेंगे । बहुत सुन्दर तालियों की आवाज के साथ इस शब्द की और पीछे मुडकर देखते हूँ सब खडे हो गए । आप सभी लोग अपना स्थान ग्रहण कीजिए । प्लीज आज में यहाँ डीएम की हैसियत से नहीं पूजा की तरह इस गांव को अपना मानकर आया हूँ । सामने पडी खाट पर बैठते हुए कलेक्टर ने कहा आप की गाडी की आवाज भी नहीं आई । पूजा ने कहा क्योंकि आप लोगों की चोरी पकडने के लिए मैं ड्राइवर को बांध के पास ही छोड आया हूँ । कैसी चोरी? पूजा ने झट से पूछा मजाक कर रहा था मैं सच तो यह है कि उस योजना की चोरी करने आया था जो रोज बैठकर आप सब लोग यहाँ पर बनाया करते हैं । योजना नहीं बनाते हैं । साहब बस चर्चा करने के लिए एकत्रित होते हैं । सरोज ने कहा वह तो मैंने देख लिया पर यदि रोज आप लोग इसी तरह से चर्चा करने के लिए यहाँ पर मिलती है तो मैं ये चोरी प्रतिदिन करना चाहूंगा । आज के मिल गया आपको की वो खजाना मिल गया सरोज जी जिसको में बहुत दिनों से तलाश कर रहा था । साहब ने मुस्कुराते हुए कहा हमारी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि आप कौन सी खजाने का जिक्र कर रहे हैं । पूरन सिंह ने कहा सरोज का अनमोल वचन जो अभी अभी कह रही थी ऐसी तो कोई बात नहीं थी । सर जो मन में आया मेरे कह दिया सरोज जीत गई । यही तो विशेष है कि मन से निकली हुई सच्ची बात ही आपने रही है जो अनुभव की भट्टी में तपकर निखरा हुआ है और सबसे बडी बात की आपने वर्तमान समस्या के लिए अपनों को ही जिम्मेदार ठहराते हुए अपनों से ही समाधान मांगा है । जबकि हमारा युवा वर्ग आज अपनी दुर्गति का ठीकरा सिर्फ प्रशासन एवं समाज पर ही फोडता है और एक नवाचार की प्रेरणा मुझे भी आपके विचार से मिला है । कलेक्टर ने कहा कैसी प्रेरणा? पूजा ने पूछा हमारी शिक्षा प्रणाली में ऐसा नवाचार लाना होगा जिससे ऊंचे पदों के नाम पर बेरोजगारी पैदा होने की जगह अपने संसाधन से ही रोजगार उत्पन्न करने की क्षमता हो, जिसका सटीक उदाहरण है पूजा जी आप सही कह रहे हैं साहब । मास्टर जी ने कहा पूजा जी का काम सिर्फ इसलिए सराहनीय नहीं है की आप लोगों के लिए कुछ कर रही है बल्कि तारीफ इस बात की है कि आपके साथ रहकर कार्य कर रही है । आप सही कह रहे हैं साहब पूजा बिटिया तो हमारे जीवन में वरदान बनकर आई है, पर जिसके माध्यम से हम तक आई वो बदनसीब था जो बाबू जी फिर वही बात । सरोज ने टोकते हुए कहाँ किसकी बदनसीबी की बात कर रहे थे आप? कलेक्टर ने पूछा कुछ नहीं सर, बाबूजी को भैया की याद आ गई । सरोज ने कहा कहाँ है आपके भैया? कलेक्टर साहब द्वारा पूछते ही पूजा वहाँ से जाने लगी तो उन्होंने कहा आप कहाँ जा रही है? जाने दीजिए साहब । सरोज के बाबू जी ने कहा पूजा इस तरह जाने कहाँ चली गई? कलेक्टर ने पूछा । राकेश का जिक्र होने पर उसे अच्छा नहीं बाबू जी कहकर सरोज उनकी और ऐसी देखने लगी जैसे कुछ कहने से मना कर रही हूँ । क्या बात है आप ने बात पूरा करने क्यों नहीं दे रही है? कलेक्टर ने कहा ऐसी बात नहीं है । कहते हुए सरोज भी वहाँ से निकल गई । सरोज के बाबू जी के कंधे पर हाथ रखकर वहाँ से बांध की और जाते हुए कलेक्टर भी पूछा राकेश कौन है? मेरा बेटा है साहब, अभी कहा है ऑस्ट्रेलिया में साहब उसने कुछ गलत किया है गया हाँ साहब बहुत बडा अपराध किया है । राकेश के बाबू जी ने कहा कौन सा अपराध मेरी फूल से बच्ची का दिल तोडा है साहब कैदी हुए राकेश के बाबू जी की आगे भराई सरोज के साथ क्या किया उसने? सरोज रही साहब मेरी दूसरी बेटी पूजा को आंसू दे गया । ऐसी पहेली अगर बुझाओ स्पष्ट का हो । सात शब्दों में ही तो बता रहा हूँ साहब की पूजा मेरे बेटे से विवाह करना चाहती थी और उसने राकेश को बहुत समझाया भी था कि विदेश जा जाए । राकेश को तो बडा बनने का और खुद को साबित करने का जुनून सवार था और वो अपने साथ पूजा को भी ले जाना चाहता था । पर अपने माँ पिताजी को छोडकर दूर देश जाना पूजा को मंजूर नहीं था ही बात पूजा ने राजेश को बताई थी । कलेक्टर ने पूछा बताई थी साहब पर उसे तो माँ बाप, बहन एवं पूजा हम सबसे प्यारा पैसा था । हमसे झूठ बोल कर गया कि कर्ज छुडाने के लिए एवं हमारे लिए पैसा कमाने जा रहा है । प्रदेश छोडते ही हम सब को भूल गया । पूजा से तो बात होती होगी । साहब ने पूछा नहीं उस बेचारी के माता पिता के मृत्यु पर भी नालायक ने सांस बना के दो शब्द भी नहीं रहे और पूजा को देखिए । हमारे लिए अपने सब दुख भूलकर हमारे साथ खडी है मुझे किसानी कर्ज से भी मुक्त करके और बेटे के बदले में बेटी देकर तहसीलदार साहब भी दुनिया से चले गए । कहते हुए राकेश के बाबू जी की आगे भराई इसीलिए आप सब लोग मुझे पसंद है । मैं इस गांव में अपने सपनों के भारत को देखता हूँ जहाँ सिर्फ प्यार ही प्यार है ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 13

तेरे भाग क्या भारतीय पूजा जी आज अकेले ही बैठी हैं । मैंने कहा आज अकेली है । कोई जवाब नहीं मिलने पर डीएम ने प्रश्न दोहराया जी सर, आप कहते हुए पूजा खडी हो गयी । अरे तो घबरा गई, शायद खयालों में खोई हुई थी । मैंने आपकी सपने तो नहीं तोड दिए जी नहीं सर, बस यही मम्मी पापा की याद आ रही थी । पूजा ने कहा आप उन्हें याद तो करती है पर उन की छोडी हुई संपत्ति की परवाह नहीं करती है । ऐसा तो नहीं है सर । पूजा ने कहा बिल्कुल ऐसा ही है । तभी तो शहर स्थित इतने बडे मकान को खंडर होने के लिए अपने योगी छोड दिया है । वर्तमान में उस मकान से ज्यादा यहाँ पर मेरी जरूरत है सर जानता हूँ । इसीलिए तो मैंने आपसे कहा था कि वह मकान हमें किराये पर दे दें । इससे आपका मकान भी सुरक्षित रहेगा और हमारी जरूरत भी पूरी हो जाएगी । हो सौरी सर, यहाँ के काम में इतनी उलझ गई कि ध्यान ही नहीं रहा । आपने सही सलाह दी है । मैं एक हिस्सा अपने लिए रखकर मकान किराए पर दे देंगे तो फिर ठीक है । गलत ही में एग्रीमेंट पेपर तैयार करवा लेता हूँ । जी जैसा आप उचित समझें । पूजा ने कहा आपको यहाँ रहती है फिर शहर में भी यहाँ का सब काम सेट हो जाने के बाद मेरी जरूरत यहाँ नहीं रहेगी । तब तो मुझे अपने घर की जरूरत पडेगी ही । सर पूजा ने कहा लेकिन मैंने तो सुना है कि आप हमेशा हमेशा के लिए यही रहने को आई है । डीएम ने मुस्कुराते हुए कहा हाँ हाँ, बाबू जी तो यही चाहते हैं पर बिना काम के मैं नहीं रहूँगी तो मैंने तो कुछ और ही सुना है । क्या सुना है सर, यही की राकेश के साथ विवाह करके आपने सही सुना है । मेरा भी यही सपना था पर राकेश की शादी हो चुकी है । सर हो जाने सर झुका लिया । ये क्या कह रहे हैं वही जो सच है । ऑस्ट्रेलिया में कैथरी नाम की लडकी से उनकी शादी हो चुकी है । पर राकेश के पिताजी ने तो मुझे बताया कि उन्हें नहीं मालूम है कि राकेश ने शादी कर ली है और वे अभी भी यही मानते हैं कि मैं बहू बनकर हमेशा के लिए उनके पास होंगे । पूजा ने कहा और आपने उन्हें सच से अवगत भी नहीं कराया । कई बार बताने की कोशिश की पर हिम्मत नहीं करवाई । सर अब सब कुछ भगवान भरोसे है । आपने पूछा नहीं की राकेश ने आपके साथ ऐसा क्यों किया । इसमें पूछने वाली कोई बात ही नहीं है सर क्योंकि राकेश के साथ जाने के लिए मैंने ही मना कर दिया था । पूजा ने कहा क्यों? क्योंकि मैं अपनी मिट्टी और माता पिता से दूर नहीं जाना चाहती थी । ये भी इत्तेफाक ही है । डीएम ने कहा कैसा इत्तेफाक यही की मेरा पहला प्यार भी ऑस्ट्रेलिया में ही है और उसने भी वहाँ जाकर किसी और से विवाह कर लिया । हाँ जैसे सफल व्यक्ति को कोई कैसे छोड कर जा सकता है? पूजा ने कहा ये बात तो आप पर भी लागू होती है । डीएम ने तुरंत कहा घट मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं । नहीं पूजा जी सच कह रहा हूँ । आज के समय में आप जैसी सुलझी हुई विचार और प्यार वाले से मिलना असंभव सा लगता है । इस गांव के लिए योजना बद्ध तरीके से जिस तरह से आप काम कर रही है उसका कोई जवाब नहीं है । आप तो मेरी तारीख पर तारीख किए जा रहे हैं । सर ऐसा ही चलता रहा तो काम की ओर से ध्यान हटकर आपकी बातों में सिमट जाऊंगी । पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा यदि ऐसा हुआ तो मैं भी फायदे में रहूंगा । खराब के द्वारा छोडा हुआ का मुझे पूरा करना होगा । मेरे काम को आप क्यों पूरा करेंगे भला क्योंकि बताइए ना रुक क्यों गए? पूजा ने कहा क्योंकि जिले का प्रशासनिक मुखिया होने के नाते मेरा फर्ज बनता है । डीएम अपने मन की बात कहना चाहती थी पर कुछ और ही कह दिए । मतलब हमारे कार्य पर प्रशासनिक साजिश बंद नहीं हुई है । डीएम ने बातों का रूप बदल दिया तो पूजा ने भी राहत महसूस करते हुए कहा कैसी साजिश । डीएम ने पूछा यही कि गांव वालों की मेहनत को प्रशासन का काम बताकर श्रेय लेने का । पूजा ने कहा मैं मानता हूँ कि कुछ अधिकारियों के द्वारा मेरे पास ऐसा प्रस्ताव आया जरूर था की थोडा प्रशासनिक सहयोग कर इस गांव में चल रहे कार्ययोजना को अधिक सफल बनाते हुए समय अनुसार पूरा किया जा सकता है । पर मैंने नकार दिया है क्योंकि मैं आपकी मेहनत, प्रबंधन और गांव से जुडाव का सम्मान करता हूँ और चाहता हूँ कि हर बात पर प्रशासन की और मूत आपने वालों को आपसे कुछ सीख मिले, धन्यवाद सर हो जाने हाथ जोडकर कहा यदि आप अन्यथा नाले तो एक बात की और आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा । जी बताइए सर पूजा ने कहा आपकी पूरी कार्ययोजना का अध्ययन किया है मैंने । आपने नाले को बांधकर छोटा बांध से गांव की खेती को सिंचित करने की योजना बनाई है । पशुओं को एकत्रित करके उनके आतंक से फसलों को बचाने की योजना का तो कोई जवाब ही नहीं है । सीमित खर्च में अधिकतम लाभ लेने में आप सफल होगी । पर योजना बनाते समय आप इस बात को भूल गई है कि पशुओं के लिए चारे के साथ पानी की भी व्यवस्था करनी होगी । गॉड सच में हमसे चूक हुई है । कल छुट्टी है तो नीरज भी आएगा । हम सब मिलकर इस बात पर विचार करेंगे । आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर । हम में से किसी ने इस और ध्यान ही नहीं दिया । पूजा ने कहा धन्यवाद के घेरे से बाहर निकले तो मैं कुछ सलाह देना चाहूंगा । हाँ, तो नाराज हो गए सर । पूजा ने कहा, नाराजगी की बात नहीं है । अब तो हर बात पर हमें ये अहसास करती है कि हमारी दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए या फिर हम पसंद नहीं है । डीएम ने कहा, मैं क्षमा चाहते हो सर, यदि मेरी किसी बात पर आपने उपेक्षित महसूस किया हो तो पर मेरा उद्देश्य आपको हर्ट करना नहीं था । क्या करूँ सर कभी कभी अकेलापन और अनजाने डर से ग्रसित होकर अपने आस पास एक ऐसा घेरा खींच देने की कोशिश करती हूँ कि कोई किसी भी तरह से मुझे भावनात्मक रूप से कमजोर ना कर सकें । पूजा की आंखें भर आई । मैं समझ सकता हूँ कि कम उम्र में इतने बडे काम का बीडा उठाना आसान नहीं है । विशेष कर उस परिस्थिति में जब की आस पास कोई अपना ना हूँ । आप सही कह रहे हैं सर पूजा ने आंसुओं को लुढकने से पहले ही समझाते हुए कहा वैसे तो पूरे गांव का मुझे भरपूर प्यार मिल रहा है पर ऐसा कोई नहीं है जिसके कंधे पर सर रखकर कुछ देर के लिए खुद को भूल सकूँ क्योंकि जिसके लिए आप आई थी वही गांव में नहीं है । डीएम ने कहा ऐसा नहीं है सर की मैं सिर्फ राकेश के लिए ही यहाँ पर आई थी । हाँ ये जरूर है कि मैं अपने पहले प्रेम के आवेग में बहती चली आई और उसी प्रेम ने इस गांव में मुझे काम करने के लिए प्रेरित किया है । पूजा ने कहा, पिछले दिनों मैंने देखा है कि राकेश का जिक्र आते ही आप विचलित हो जाती है । मुझे लगता है कि आप अभी भी राकेश का इंतजार कर रही है । डीएम ने पूछा आप ठीक कह रहे हैं सर की मुझे राकेश का इंतजार है पर अपने लिए नहीं । हाँ बाबू जी के लिए मैं जानती हूँ की राकेश अब किसी और का हो चुका है तो फिर मैं उन से कोई उम्मीद क्यों करुँ? पूजा ने कहा क्या मुझ पर भरोसा कर सकती है? क्या मेरे कांधे पर सिर रखकर आपकी तकलीफ से कम हो सकती है? डीएम ने अनंतर है मन की बात कहती आप कहना क्या चाहते हैं? पूजा एकदम से खडी हो गई । आपको मेरी बात समझ नहीं आई या समझना नहीं जाती हैं । डीएम भी खडे हो गए । मैं जानती हूँ सर की राकेश अब कभी भी मेरा नहीं हो सकता । पर मैंने उसे पाने और खोने के हद से आगे जा रहा है । तो मेरा पहला प्यार और आखिरी प्यार है । जरूरी नहीं कि हम जैसे प्रेम करते हैं वो हम से शादी भी करें । राकेश के मन में क्या है ये तो मैं नहीं जानती पर वो हमेशा मेरा मित्र रहेगा । प्रेम तो ईश्वर का शुरुआत है और भगवान के आशीर्वाद को कोई कैसे ठुकरा सकता है । आपकी इन भावनाओं के आगे में नतमस्तक हो । पूजा और प्यार के प्रति आपके समर्पण को मैं सलाम करता हूँ । मैं तो सोचता था कि आज की पडी लिखी लडकियाँ सिर्फ दिमाग से सोचती हैं, दिल से नहीं । पर आप जैसी प्रेम की मूरत को देखकर समझ में आ रहा है कि प्रेम शब्द कितना चेहरा क्यों हैं । शिक्षा से प्यार प्रभावित होता है । ये आप कैसे कह सकते हैं सर क्योंकि मैं भुगतभोगी हूँ । डीएम ने कहा कैसे मेरी बात के पास आमदनी का एकमात्र साधन मकान का किराया ही था । उसी से हमारा जीवन यापन चलता था और मेरी और बहन की पढाई भी । कॉलेज के अंतिम दिनों में मेरी मुलाकात अनन्य से हुई । हम दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे । मैंने मेरी गरीबी की बात की तो वो प्यार में सबकुछ स्वीकारने की जिद करने लगी । कॉलेज के टॉपर के साथ इकलौती बेटी की दोस्ती से अनन्या के पापा को भी कोई परेशानी नहीं थी । मुझ से मिलकर अनन्या के मम्मी पापा दोनों ही बहुत खुश हुए और मुझे जमाई बनाकर ऑस्ट्रेलिया ले जाना चाहती थी । पर मेरी इच्छा देगी सिविल सेवा परीक्षा पास करके देश की सेवा करो । पर मेरी मजबूरी भी थी । कैसी मजबूरी सर, मुझे तुरंत ही आमदनी का साधन भी चाहिए था, जिसके लिए मैंने अध्यापक की नौकरी कर ली । ये बात अनन्या को बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी । वो चाहती थी कि बहन के उच्च शिक्षा के लिए मैं उससे पैसा लोग और उसके ही पैसे से मैं कोचिंग भी जॉइन कर लूँ ताकि उसके पापा ने मुझ से जो शर्त रखी थी उसे मैं पूरा कर सकूँ । क्या शर्त थी अनन्या के पापा की? पूजा ने पूछा एक ही टाइम तो यदि मैंने आईएएस की परीक्षा निकले तो अनन्या मेरे साथ भारत में रहेगी वरना मुझे उसके साथ ऑस्ट्रेलिया जाना होगा और आप ये शर्त मान गए थे सर । पूजा ने आश्चर्य से पूछा हाँ क्योंकि मैं भी अपने पहले प्यार के लिए कुछ भी कर गुजरने की सोच रखता था और बहन की पढाई और अपने कोचिंग के लिए अनन्या से पैसा लेना मुझे मंजूर नहीं था । इसलिए मैं अध्यापन कार्य के साथ ही आईएएस की तैयारी करने लगा । अनन्या को अपने साथ अपने ही देश में रखने के जुनून में राहत दिन एक करके पढाई की और आईएएस की परीक्षा पहले ही बार में पास कर ली । हाँ, इस बीच अनन्या से मिलना तो दूर बाद भी नहीं कर पाया । वो नाराज हुई तो हमेशा साथ रहने के लिए ये दूरी जरूरी है । ये मैंने उसे कहा था । फिर क्या वसर । पूजा ने पूछा धोखा हुआ मेरे साथ कैसा धोखा सर । अनन्या ने कहा कि वो अपने माता पिता से दूर यहाँ पर नहीं रह सकती । शर्त तो इसलिए रखी गई थी कि उसने सोचा था कि पहले ही बार में आईएएस की परीक्षा में पास नहीं कर पाऊंगा । ये बात अनन्या ने आपसे स्वयं ही कही थी । सर पूजा ने पूछा कहाँ अनन्य अपने मम्मी पापा के साथ मेरे घर आई थी और माँ को भी हमारे प्रेम की दुहाई देकर मुझे ऑस्ट्रेलिया भेजने के लिए राजी भी कर लिया था । पर मेरा दिल उसके धोखे से टूट चुका था और फिर मैंने उसे दोस्ती भी थोडी । फिर उसके बाद किसी लडकी पर भरोसा ही नहीं कर पाया । डीएम भावुक हो गए । बहन की शादी हो गई । सर यहाँ और उसकी एक साल की तैयारी से बेटी दी है । मेरी भी एक बहन है सर सरोज जिसकी शादी कराना चाहती हूँ मैं और उसके लिए आपसे सहयोग चाहिए । पूजा डीएम से बात करने में सहजता महसूस करने लगी थी । कैसा सहयोग ने संकोच कर लीजिए । मेरा चचेरा भाई है नीरज वही जिसने बांध का डिजाइन तैयार किया है । जी सर सरोज और नीरज एक दूसरे से प्रेम करते हैं । पर नीरज की पोस्टिंग दूर होने के कारण सरोज इस सोच में है कि माँ बाबूजी को यहाँ अकेला छोडे बिना नीरज का साथ कैसे दी तो मुझे क्या चाहती हैं? डीएम ने अपने पन से पूछा आपकी तो जान पहचान सरकारी महकमे में बहुत है तो मैं चाहती हूँ कि नीरज का तबादला इसी जिले में हो जाता तो दो प्रेमियों का मिलन भी हो जाता है और मेरी योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए इंजीनियर भी मिल जाता है । पूजा की निगाहों में उम्मीद की किरण झलक रही थी । सोच लीजिए सरकारी मदद ले रही हैं । डीएम ने मुस्कुराते हुए कहा सरकार के नुमाइंदे से नहीं अपने मित्र से सहायता मांग रही हूँ । पूजा ने भी जवाब में मुस्कुरा दिया । हाँ तो मुझे भी आपको धन्यवाद कहना ही पडेगा क्यों? पूजा ने पूछा आपने मेरी दोस्ती जो स्वीकार कर ली । डीएम ने राहत की सांस लेते हुए कहा अभी भी धन्यवाद । मुझे ही कहना चाहिए कि मुझे जैसी साधारण लडकी को आपने दोस्ती का हाथ बढाने की हिम्मत दी है । साधारण मतलब डीएम ने पूछा मैं एनआरआई की बेटी नहीं हूं । गुजारे हसते हुए कहा ऍम गार्ड आप हस्ती भी है । कहते हुए डीएम खुद भी अपनी हंसी रोक नहीं पाए । उन्होंने आगे कहा, पानी की व्यवस्था का जिक्र करने पर आपने नीरज से बात करने की बात कही है । मैं जानता हूँ क्या प्रशासन की सहायता लेना नहीं चाहते । पर करण आपसे कुछ कहना चाहता है कौन? करन सर, मैं तो किसी करन को नहीं जानती हूँ । आपके सामने जो बंदा खडा है उसकी माने बडे प्यार से करन नाम रखा है । मजाक भी कर लेते है सर, आप करण के होटल आयाज की फैल गए मजाक उडा रही है । अब मेरा मेरा नाम पसंद नहीं आया गया । ऐसी बात नहीं है । सर बहुत अच्छा नाम है । यदि सच में नाम अच्छा लगा तो आप हमें नाम से पुकार सकती हैं । आपका भी जवाब नहीं सर । तभी तो एक ही बार में आईएएस की परीक्षा पास कर लिए हैं । हर बात को टालना तो कोई आपसी सीखे । डीएम ने आगे कहा, मुझे उस दिन का इंतजार रहेगा जब आप मुझे मेरे नाम से संबोधित करेगी । बहरहाल, पानी के संबंध में मैंने सोचा है कि बांध पास में ही होने के कारण वही से पाइप लाइन बिछाकर पानी की व्यवस्था की जा सकती है । हाँ, ये ठीक रहेगा सर क्योंकि बोर उत्खनन तो सफल नहीं है । पानी एकत्रित करने के लिए गोठान में कई जगह पर छोटे छोटे सीमेंट की टंकियों का निर्माण करना होगा । डीएम ने कहा जी सर पूजा ने कहा क्या हुआ आप कुछ परेशान हो रही है? नहीं सर, ऐसी तो कोई बात नहीं हैं । पूजा ने कहा यदि में सही समझ रहा हूँ तो पैसों की समस्या आएगी । शायद आप सही कह रहे हैं सर । पूजा ने कहा और सरकारी मदद लेना नहीं चाहती है तो क्या मेरी व्यक्तिगत सहायता भी मंजूर नहीं होगी? डीएम ने पूजा की आंखों में झांकते हुए कहाँ ये सब से सलाह लेकर बताउंगी सर प्लीज आप अन्यथा नहीं लीजिएगा । मैं जानती हूँ की आपके फैसले को पूरा आपने जानता हूँ कि आपके फैसले को पूरा गांव एक मत से स्वीकार्यता पर आपने सम्मान देना चाहती है । मैं आपकी सोच को की सलाम करता हूँ तो जाने मुस्कुराते हुए हाथ जोड ली

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 14

चौदह भाग गोठान का काम तो पूरा हो गया । अब खाद बनाने के लिए भी गड्डे का नाम दे दे दे दो । ये काम भी शुरू कर देते । सरपंच ने कहा हाँ, इसीलिए तो नीरज भी आने वाला है । सरोज ने कहा आने वाला नहीं आ गया । हमें तो बस आपके बुलावे का ही इंतजार रहता है । पर हाँ इस बार अकेले नहीं आई है । खुशखबरी भी साथ लाए हैं । नीरज ने अपना भारी भरकम सामान रखते हुए कहा की तो बहुत भारी लग रहा है । लगता है खुश खबरी वजन दार है । सर बंद नहीं रहा । हाँ सर बंजी चाहने वालों के लिए तो महत्वपूर्ण बात ही है । नीरज ने कहा बता भी दीजिए यहाँ सब आपकी चाहने वाले ही है । कोई भी दुश्मन नहीं है । शरारती निगाहों के साथ । सरोज ने कहा खुशखबरी यह है कि मेरा तबादला इसी जिले के इसी विकासखंड में हुआ है और इसलिए मैं बोरिया बिस्तर सहित हाजिर हो । सच सरोज उछल पडी पर सबकी निगाहें अपनी और ही टकटकी लगे देख शर्म से पानी पानी हो गई । हर सबका ध्यान हटाने के लिए कहने लगी मांग मैं चाय बना कर लाती हूँ । हाथों सर पंजी चाय पीकर गुठान की ओर चलते हैं वो जाने । मुझसे कहा था कि खाद के लिए गड्ढे खोदने का काम भी तो शुरू करना है । आप भी कह रहे हैं मैं भी यही कहने आया था । सरपंच ने कहा एक बात मुझे इंजीनियर साहब सरपंच ने चलते चलते कहा हाँ पूछिए हम लोग इतना मेहनत और पैसा खर्च करके बांध बना रहे हैं । इस बांध में पानी लगेगा ना ये कैसा सवाल है । सरपंची सवाल नहीं, मन का डर है कि हम सफल तो होंगे अवश्य सफल होंगे सर पंजी पर आपके मन में जो भी बातें उठ रही है उसे खुलकर कहिए । मुझे ऐसा लग रहा है कि आपके डर का कारण कुछ और है । बात तो सही है । मेरे दर्गा कारण है कि हमने कम लागत में बांध तो बना लेंगे तो कहीं ये बांध टूट न जाए और आपने ये कैसे सोच लिया कि बांध की लागत कम है । इसलिए इंजीनियर साहब की तीन साल पहले पीने के पानी की समस्या के चलते नेताजी के साथ ऐसे ही छोटे बांध की मांग करने शासन के पास गया था । कहा गया था कि इसे बनाने में पचास लाख की लागत आएगी । जब की मैं देख रहा हूँ वो हमने इस बांध के लिए पंद्रह लाख रुपया से भी कम खर्च किया है इसलिए मुझे आशंका उन्ही की बांध मजबूत बना है कि नहीं हूँ । सरपंच ने स्पष्ट किया अच्छा तो ये कारण है आपकी डर का और सही भी है । देखिए मैं समझाता हूँ आपको । नीरज ने आगे कहा किसी भी निर्माण कार्य में गरीब तीसरे चार प्रतिशत मजदूरी में खर्च होता है जबकि हमारा पूरा काम श्रमदान से संपन्न हुआ है । तो ये मान कर चलिए कि पंद्रह से बीस लाख रुपया गांव वालों की मेहनत ने बचा लिया । सरकारी काम होने पर एक कर्मचारी अधिकारी के पास कई काम होने के कारण कम में समय अधिक लगता है जिससे सामग्री की लागत में संभावित बढोतरी को भी ध्यान में रखकर किसी भी कार्य का बजट बनाया जाता है । जबकि आप सब लोगों ने लगातार कार्य करते हुए निम्नतम समय में कार्य किया है और सबसे बडी बात ठेकेदार का कमीशन और भ्रष्टाचार से भी लागत बढ जाती है । विस्तार से आपके द्वारा सब बाते जानकर अब मुझे अच्छा लग रहा है । कल रात भर इसी आशंका से मैं सो नहीं सका की यदि पानी बढने के बाद बांध टूट गया तो हमारी पहली फसल भी खतरे में पड जाएगी और जिस कमाई से अब तक रोजी रोटी चल रही है वह भी जाता रहेगा । आप लोगों की यही चिंता और कुछ भी होने से पहले की सावधानी ही किसानों की विशेषता है और आप जैसे किसानों की बारीक सोचने ही पूजा को सफलता की और बढाया है । आपका भी तो नहीं स्वास्थ्य साथ मिला है हमें सरपंच ने कहा साठ जरूर दिया है पर जो मेरा भी स्वार्थ है सरपंची नीरज मुस्कुराने लगा के ऐसा स्वर्ग सरपंच ने पूछा आप सचमुच रही जानते सरपंच जी पूजा ने कहा अरे आप करवाई । सरपंच ने पूछा मैं तो बहुत देर से आपके पीछे चल रही हूँ सर पंजी महात् लोग बातों में मस्त थी और बाद भी सुनने और समझने योग्य थी तो मैंने चुप्पी साध ली थी । पर आपने इंजीनियर साहब की बातों पर सहमती क्यों जताई? क्योंकि मैं जानती हूँ की नीरज द्वारा हमारे काम में सहयोग के लिए आने के पीछे सच में स्वास्थ्य है । पूजा ने जोर देकर कहा और वो क्या है? सरपंच ने पूछा बता दू नीरज पूजा ने पूछा कभी ना कभी किसी ना किसी को तो कहना ही पडेगा और दो मेरे रोकने से रुकने वाली तो हो नहीं इसीलिए तो मैं बताना है । तो फिर मौके का फायदा उठा ही लेते हैं । नीरज ने हसते हुए कहा बात ये है सर पंजी की नीरज सरोज से विवाह करना चाहता है । पूजा ने कहीं दिया और सरोज और उसके घर वाले क्या चाहते हैं? सरपंच ने पूछा सरोज भी नीरज को पसंद करती हैं और माँ बाबूजी को छोडकर कहीं जाना नहीं जाती है । जबकि नीरज को गांव कि जिंदगी पसंद आ गई है । मेट्रो शहर की भागदौड और पैसों के पीछे भागती दुनिया में पला बढा नीरज हाथ सब के बीच में रहना चाहता है । क्या नीरज के माता पिता इस बात के लिए तैयार हैं? सरपंच ने पूछा मैं तो वैसे भी उन लोगों की इच्छा के विरुद्ध ये नौकरी कर रहा हूँ क्योंकि उनके हिसाब से जीवन तो सिर्फ शहरों की सुख सुविधाओं में ही होता है । जब की मैं उनसे सहमत नहीं हूँ । फिर भी मैंने अपनी इच्छा और पसंद के बारे में उन्हें बता दिया है और अनंत है उनकी रजामंदी मिल गई है । अब आप लोगों का भी आशीर्वाद मिल जाए तो ही तो इस गांव के लिए बहुत ही खुशी की बात होगी कि आप जैसा व्यक्ति हमारे गांव का जमाई होगा । मैं कल ही सरोज के माता पिता से बात करूंगा । हम आपका ये एहसान कभी नहीं भूलेंगे । सरपंची पूजा ने आगे कहा, नीरज ने उनसे बात करने की जिम्मेदारी मुझे सौंपी थी, पर मैंने सोचा कि आपका बात करना ज्यादा अच्छा रहेगा । ठीक किया आपने की मुझ से पहले बात कर ली । मैं उन्हें बताऊंगा की नीरज का हमारी सरोज से शादी करना और नीरज का हमारे बीच में रहना गांव से पलायन करते युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा । आने वाली पीढी को राकेश और नीरज के रूप में दोनों प्रकार के उदाहरण मिलेंगे और तब उन बच्चों के लिए रास्ता चुनना आसान होगा । सरपंच को नीरज में उम्मीद की किरण नजर आने लगी । लीजिए । बातों बातों में कार्य स्थल तक भी पहुंच गए । गोठान के काम में लगे कुछ लोगों को बुला लीजिए सर पंजी ताकि गड्डों के लिए जमीनों का चिन्हांकन किया जा सके । पूजा ने कहा फिलहाल दस गड्ढे ही बनाए तो कैसा रहेगा पूजा जी? आप ने ठीक कहा सर पंजी, मैं भी ऐसा ही सोच रही थी । जरूरत पडने पर बरसात के बाद फिर से खाद के लिए गड्डी खोद लेंगे । पूजा ने कहा

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 15

चंद्रबाबू भाग बरसात से पहले खेतों में बीज डालने के लिए तैयारी करने में जुटे लोगों ने जब देखा कि आंधी तूफान के साथ बारिश होने लगी है तो बांध की और ऐसी दौडने लगे जैसे भेजने से बचने के लिए घर की और भागते हैं । क्या हुआ मंगतू सब लोग उधर की भाग रहे हैं । नीरज ने पूछा पानी गिरने वाला है तो बांध में पानी देखने जा रहे हैं परन्तु के जवाब से पूजा, सरोज और नीरज तीनों खिलखिलाने लगे । तुम लोग भी पहली बारिश का मजा लो । मैं चलती हूँ कहते हुए तेज बारिश में भी पूजा पेड की छांव से निकलकर जाने लगी । मत जाओ तूफान के साथ पहली बारिश भी होगी तो बीमार पड जाओगी । सरोज ने आवाज लगाई पर सरोज की बातों का पूजा पर कुछ असर पडा ही नहीं । उसने मन ही मन बुदबुदाया । मन के भीतर जो झंझावत चल रहा है उससे तो ये बाहर का तूफान कम ही है और बीते हुए दिनों की यादें उसके मन को झकझोडने लगे । ऐसा ही मंजर था जब पूजा पहली बार इस गांव में रावे के लिए आई थी । रावे को अंग्रेजी में यानी रूरल वर्ग एक्सपीरियंस प्रोग्राम कहते हैं । कृषि में अध्ययनरत आखिरी साल के विद्यार्थियों के लिए कृषि कार्य अनुभव प्रोग्राम जिसमें छात्र छात्राओं के द्वारा किसी गांव में जाकर वास्तविक किसानों के साथ कार्य करना होता है । विद्यार्थी किसानों से परंपरागत पद्धति का अध्ययन करते हैं और वैज्ञानिक पद्धति को सिखाते भी है । आज की तरह ये अचानक आई बारिश उस पर साथियों के जाने के बाद पापा के इंतजार में डरी सहमी पूजा संस्थान राहु पर अकेले ही आगे बढते हुए मन ही मन बुद्ध जा रही थी । मेरे बाबा से कहा भी था कि अन्य साथियों की तरह मैं स्कूटी लेकर होंगे पर अनजाने गांव का हवाला देकर काबा मुझे खुद ही छोड गए । हर अब तक लेने नहीं आए । पूजा बार बार पापा का फोन लगाई जा रही थी जबकि उनका मोबाइल लगातार बंद बता रहा था कि पीछे से किसी की बाइक रुकने के साथ ही आवाज आई, बारिश तेज और अकेले भी है । अब कहाँ जाना है मैं छोड दो आपको नहीं मैं चली जाऊंगी । अजनबी को सामने देख पूजा ने कहा घबराइए नहीं में इसी गांव का रहने वाला हूँ पूजा । बिना कोई जवाब दिए आगे बडने लगे तो बाइक सवार भी उनके पीछे हो लिया । मेरा नाम राकेश है और सामने ही मेरा घर है आप आ जाइए । मैंने कहा ना कि मुझे नहीं जाना है आपके साथ । पूजा ने शक्ति से कहा । राकेश के घर के सामने पहुंचते ही अधेड महिला छतरी लेकर आती हुई कहने लगी अंदर के साथ बारिश हो रही है । ऊपर से के लिए हुआ हूँ । थोडी देर रुककर जाना हूँ । जी चले पर मुझे छतरी उठाने से अभी भी जाएगी आपके बीच चलती हूँ । पूजा ने कहा पूजा तो हूँ उन्हें जानती हो सर्वोच्च उसकी । मैंने पूछा वहाँ ये पूजा है तहसीलदार साहब की बेटी हमारा कॉलेज आमने सामने ही है और पूजा ये है मेरे भैया राकेश जिसने तो में भेजते हुए देखकर माँ को लेने भेजा था, पर तुम यहाँ हमारे गांव में क्या कर रही हो? सरोज ने पूछा रावे के सिलसिले में आई थी तो बाकी सब लोग कहा है । सरोज ने पूछा बारिश की संभावना देखकर सब चले गए । मुझे बाबा ने छोड दिया था तो मैं उन्हें बुलाने के लिए फोन लगा दी रह गई । इतने में मेरे सब साथ ही निकल गए और इधर पापा का मोबाइल भी बंद है, जबकि बारिश भी शुरू हो गई । बातें बाद में करना जो पूजा पहले कपडे बदल लो । सरोज की माँ ने आगे कहा कल जो नए कपडे लाये हो उसे पूजा को दे दो । सरोच ठीक है मैं ये लोमा कडक चाय बना दो । राकेश ने दूध से भरा हुआ छोटा बर्तन देते हुए कहा इतने बरसते पानी में आपको डूड के लिए गए थे । पूजा ने पूछा नहीं हमारे घर पर गाय है । उस से ही दूध निकालकर ला रहा हूँ । चाय तो मैं पीती नहीं हूँ पर दूध देखकर भूख बढ गई है । पूजा ने सरोज से कहा माँ मेरी सहेली पहली बार हमारे घर आई है और शायद उसे भूख भी लगी है । मेरे घर में बेसन हो तो पकौडा बना देती । सरोज रसोई में माँ के कानूनी खुश हो जाती है । मैं भी यही सोच रही थी पर कहनी पाई । कल कडी बनाने के लिए लाया हुआ बेसन तो है । आप के पकौडे तलते तक मैं उसे दूध दे दे दी हूँ । इतना स्वादिष्ट दूध में पहली बार पी रही हूँ । पूजा ने कहा हूँ देसी गाय का ताजा दूध है । सरोज ने कहा पापा सही कहते हैं कि भारतीय स्वाद का मजा तो गांवों में ही मिलता है । सुबह से निकले थे तो सोचा था जल्दी वापस हो जाएंगे । पर देखो शाम हो गई । सच में मुझे बहुत भूख लग रही थी तो लीजिए पकौडे दिखाई । राकेश ने पकौडे से भरा प्लेट थमाते हुए कहा पहली बारिश और तेज भूख उस पर ये गरम गरम पकौडे सच में मजा आ गया । पकौडे खाते हुए पूजा ने कहा आप लोग भी खाइए, मैं अकेले ही खाए जा रही हूँ । इत्मीनान से पकौडे खाती हुई पूजा को महसूस हुआ कि सब उसकी तरफ ही देख रहे हैं तो उसने कहा आपका ये आपके खाने से ऐसा लग रहा है किसी गांव में मिट्टी के हमारे घर में कोई राजकुमारी अगर हमें धन्य कर रही है । राकेश ने कहा राजघरानों के बारे में जानते नहीं है । शायद आप राजकुमारियां ऐसे सडक पर भेजती नहीं रहती है । पूजा ने हसते हुए कहा तो हम जैसे किसान के बेटे के लिए तो आप राजकुमारी ही है । राकेश ने कहा थल ओ फोन बजते ही तुरंत उठाते हुए पूजा ने कहा सौरी बेटा कलेक्टर साहब के साथ एक जरूरी काम में फस गया था । हमलोग नेटवर्क से बाहर थे तुम्हारी मैंने बताया कि तुम अभी तक घर नहीं पहुंची, किसी दोस्त के घर पर हो गया । दोस्त के घर पर तो ऊपर अभी गांव में ही हूँ पापा । पूजा ने कहा अभी तक वहाँ क्या कर रही हो? बेडा यहाँ बहुत बारिश हुई । ये बाबा अरे पर इधर तो सिर्फ तेज हवाएं चली है तो उन सब साथ होना नहीं । बाबा में अकेली हूँ तो तुम दोस्तों के साथ क्यों नहीं आई? आपने तो कहा था कि लेने आएंगे तुम ठीक तो ना? बेटा हाँ बाबा, मेरी एक सहेली इसी गांव कि है । उसके घर पर गरम गरम पकौडे खा रही हूँ । ठीक है बेटा तो वही रुको । मैं आ रहा हूँ । ठीक है पापा । भैया ने में राजकुमारी से संबोधित क्यों? क्या बताऊ? पूजा उसके फोन रखते ही सरोज ने कहा । कुछ कहने से पहले ही नहीं सरोज कहते हुए राकेश ने अपने हथेली से उसका मूड बंद कर दिया । बताने दीजिए । पूजा ने सरोज के मुझसे रागेश की हथेलियों को हटाते हुए कहा । भैया कह रही थी कि तुम अकडू हो । सरोजनी झट से कहा अच्छा मैंने की अगर दिखाई है भला । पूजा ने कहा जी मैंने ऐसी कह दिया । राकेश ने निगाहें निजी करके कहा भैया झूठ बोल रहे हैं । पूजा गहरे दी की भी गई थी पर मेरे साथ बाइक पर बैठना मंजूर नहीं था । सरोज ने कहा ये बात है अभी बताई आंटी जी किसी अजनबी के साथ क्या मुझे बाइक पर बैठ जाना चाहिए था? पूजा ने आंटी के पास बैठे हुए कहा आपने सही किया । सरोज की माँ ने कहा तहसीलदार साहब आ गए घर के सामने का रुपये ही सरोज के बाबू जी ने कहा सरोज की माँ बाबू जी एवं उसके भैया से मिलकर बहुत अच्छा लगा पापा आप ठीक कहते हैं कि गांव में हमारे देश की आत्मा बसती है । इतना अपना बंद तो मुझे मेरे साथ बचपन से पडने वाली सहेलियों के घर से भी कभी नहीं मिला । जितना इन लोगों ने पहली मुलाकात में मुझे अपना लिया और फिर इस अपना तो हमें पूजा अपना दिल दे बैठी । परन्तु जिस राकेश ने अपने परिवार से पूजा को मिलाया था उसी ने अपनी उच्च आकांक्षा के लिए न सिर्फ पूजा को तबाह कर दिया बल्कि घरवालों के प्यार गोभी ठुकराकर गांव तो क्या देश से भी दूर चला गया । धरी हफ्ते भी गई है । पहली बारिश में इस तरह तरबतर होना ठीक नहीं है । तबियत खराब हो जाएगी । आओ जल्दी से गाडी में बैठो । डीएम ने कार का दरवाजा खोलते हुए कहाँ और उनकी आवाज से पूजा कल से आज में आ गई लेकिन सर में भेजी हुई हूँ और बैठने से आपके कार की सीट भीग जाएगी । पूजा ने कहा सीटी तो है भी कि ये ना गाडी बहुत हो नहीं जाएगी । अब तो बारिश भी कम हो गई है । सर और घर भी पास में ही है तो मैं चली जाउंगी । पता था मुझे की ऐसा ही कुछ जवाब मिलेगा । पर डीएम ने आपके लिए दरवाजा खोला है तो इस की तो इज्जत रख लीजिए अब बहुत जिद्दी है । हो जाने बैठने के बाद कार का दरवाजा बंद करते हुए कहा मेरी माँ भी यही कहती है हर कौन कौन है घर में माँ के अलावा पूजा ने पूछा बहन है जिसकी शादी हो गई है उस दिन बताया तो था आपको सौरी मुझे ध्यान नहीं रहा सौरे की बात नहीं है पूजा पर मैं तुम्हें एवं तुम्हारी बातों को जितनी गंभीरता से लेता रहा हूँ आप नहीं ले दी है और मुझे तो ये भी लग रहा है कि मैं कुछ बातें करो । इससे पहले या पूछे बेकार की बातों में उलझाना चाहती हैं । नहीं ऐसा नहीं है । चोरी पकडे जाने पर पूजा जीत गई और कहने लगी सामने का घर ही हमारा है, यही उतार दीजिए । मुझे अपने घर नहीं ले जाएंगे मुझे जी आइये ना ऐसा लगता है जैसे मजबूरी में बुला रही है आप मुझे ऐसी बात नहीं है सर तो क्या बात है? डीएम ने पूछा इस घर ने मुझे अपना लिया है पर मेरा घर नहीं है इसीलिए ये तो गलत बात है । पूजा सरोज की माँ ने अपनी छतरी के नीचे पूजा को लेते हुए आगे कहाँ गरीब की कुटिया में आईएसएसएफ मैं तो पहले से ही भेजी हुई होमा छतरी की जरूरत तो कलेक्टर साहब को है । पूजा ने कहा मैं भी भेजना चाहता हूँ कहते हुए डीएम कार से उतरकर घर की और दौड पडे बैठी साहब । कुर्सी को अपनी बेगम से से पहुंचने हुए सरोज के बाबू जी ने कहा मैं पकोडे अच्छे बनाती है, खाएंगे आप । पूजा ने पूछा पूजा मैं उसे प्रश्न भरी निगाहों से देखते हुए बोली जैसी पकोडा बनाना संभव नहीं है । कल ही तो बेसन लाये थे नामा । पूजा ने कहा बेसन की बात नहीं है पर कलेक्टर साहब क्या हमारे घर खायेंगे? तुम सही कह रही हो ना । पूजा ने कहा ये क्या बात हुई? माँ आप पकोडे बनाइए बिल्कुल वैसे ही जैसे राकेश के लिए बनाया करती थी जी साहब साहब के लिए नहीं बेटे के लिए बनाई है माँ । डीएम ने कहा माँ की आगे भराई और वो रसोई की और बढ गई न मस्ती सर सरोज और नीरज ने प्रवेश करते हुए कहा नमस्ते नीरज, तुम्हारा बांध ठीक तो है नहीं । पहली बारिश में ही सरकारी बांध नहीं है सर । गांव वालों ने बडी जतन से खुद के घर की तरह बनाया है । डीएम की बाद पूरा होने से पहले ही पूजा ने कहा मुझे आप से ऐसे ही बातों की उम्मीद थी । मतलब ये कि नीरज ने जितने भी काम किए हैं वहाँ के बांध जितना मजबूत नहीं होगा क्योंकि नीरज तो ठहरा सरकारी इंजीनियर, डीएमके होठों पर मुस्कुराहट फैल गई मैंने ऐसा तो नहीं कहा असर पूजा झेप गई फिर तो आप का पैमाना गलत है पूजा जी । डीएम ने कहा कि ऐसे हर काम जो सरकारी है उस पर भ्रष्टाचार का तंज कैसी बिना नहीं रहती है और यही बात मैंने नीरज के लिए कही तो आपने पल्ला झाड लिया क्योंकि मैं जानती हूँ सर के मेरा भाई पैसों के पीछे भागने वालों में से नहीं है । इसका सबूत बिना पैसे लिए हमारे लिए कार्य करना तो आप लोगों ने मुझे कितना पैसा दिया है कि ये भी बता दीजिए । डीएम ने कहा पूजा की बात का बुरा मत मानिए साहब, आप नहीं होते तो हमारा काम सफल नहीं होता था । सरपंच ने कहा सरपंच जी आप इस समय पूजा ने पूछा कलेक्टर साहब की गाडी देखी तो साहब को धन्यवाद गहरे चला आया । सरपंच ने कहा कि इस बात का धन्यवाद सर पंजी । डीएम ने पूछा । नीरज ने बताया कि हमारी सुविधा के लिए ही आपने इनका तबादला यहाँ करवाया है । फिर तो इस धन्यवाद के हकदार सरोज भी हाँ हम सबको धन्यवाद दीजिए । पूजा ने डीएमके बाद को बीच में ही काटते हुए कहाँ क्या हुआ पूजा तुम्हारे माथे पर यू अचानक पसीना क्यों कहते हुए सरोज के माँ बाबूजी दोनों ही हस पडे नहीं तो कहते हुए पूजा अपने दुपट्टे से पसीना सुखाने लगे । आप घबराइए नहीं पूजा मैंने सरोज और नीरज के संबंध में सब बातें कर ली है । डीएम ने कहा मतलब पूजा को तो जैसे विश्वास ही नहीं हुआ । मतलब ये है कि बेटा कलेक्टर साहब ने नीरज और सरोज की शादी की बात हम से कर ली है । सरोज की मैंने कहा ये बात है जबकि मुझे ये चिंता खाए जा रही थी की आपसी इनके बारे में मैं कैसे बात करूँ । पूजा ने कहा अब तो स्वीकारती है ना कि नीरज नि स्वार्थ होकर काम नहीं कर रहा है । मल्की इस गांव के बेटे पर इसकी नियत थी । डीएम ने कहा मैं इस बात को दूसरे तरीके से कहना चाहूंगा । साहब की हमारी बेटी ने गांव को ऐसा बेटा दिया है जिसे हमारे गांव की परवाह है । सरपंच ने कहा पर एक बात मुझे नीरज से कहना है कि मैं गरीब किसान अपनी सरोज को दो कपडे के अलावा कुछ नहीं दे पाऊंगा । सरोज के बाबू जी ने कहा जितना मैंने समझा है नीरज को सरोज और आप लोगों के प्यार के अतिरिक्त और कुछ नहीं चाहिए । रही बात सरोज की शादी की तो वो तो बडी धूमधाम से होगी क्योंकि डीएम की बहन की शादी में रौनक न हूँ ये कैसे हो सकता है साहब आप आपकी बेटी मेरी बहन है तो आप मेरे पिता के समान हुए और पिता पुत्र के सामने हाथ जोडी ये हमारी संस्कृति में नहीं है । सरोज के बाबू जी के जोडे हुए हाथ को अपने दोनों हाथों से थामते हुए डीएम ने आगे कहा, सरोज में जानता हूँ कि राकेश की कमी तो मैं पूरी नहीं कर पाऊंगा पर क्या तुम मुझे भाई मानता होगी? सर कहते हुए सरोज ने बाबूजी का हाथ पकडे डीएमके हथेलियों को थाम लिया । सर नहीं अब से भैया करन भैया । डीएम ने कहा ठीके भैया । सरोज ने कहा ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 16

सोलवा भाग मैं अपनी गाय को को ध्यान में नहीं भेजना चाहता । सर पंजी परमानंद ने कहा हूँ क्योंकि मेरी गाय दुधारू है और मुझे अपने बच्चे के लिए दूध की जरूरत है । तो क्या तुम अपनी गाय को खुद चराने जाओगे? नहीं, मुझे भी तो अपनी खेती में एक की जाएंगे । अब दो फसल उगाने है फिर गाय को चराने कैसे जाऊंगा? परमानंद ने सवाल के बदले सवाल ही किया तो फिर वो उठा नहीं भेजने के बाद क्यों कर रहे हो? अरे भाई तो मैं बस इतना ही करना होगा की अपनी गायों को सुबह गोठान तक छोडने जाओ और शाम को वापस लिया हूँ और जो पैसा तुम जरवाही के लिए खर्च करते हैं उससे भी कमियां जो तो में उचित लगे उतना पैसा हमारे गोठान समिति में जमा करवा देना । सरपंच ने कहा ऐसा भी हो सकता है क्या? परमानंद पूछा मतलब ये हुआ कि तुम अभी तक पूजा जी की योजना को समझ नहीं पाए हो सर पानी चने आगे कहा पहली बात तो यही कि गांव में किसी को कोई दबाव नहीं है कि सब अपने जानवरों को गोठान भेजे तो फिर हम सब मिलकर गोठान क्यों बनाये है सर पंजी इसलिए कि आवारा घूमते पशुओं से हमारी फसलों की रक्षा हो सके और दूसरा कारण यह भी है की गली मोहल्ले या रोड पर पशुओं का आतंक हो तो तुम तो जानते हो कि बहनों से टकराकर ही तहसीलदार साहब और उनकी पत्नी की मौत हुई है तो पूजा दी जाती है कि फसलों के साथ साथ इंसानों की सुरक्षा को भी ध्यान में रखते हुए गोठान में उन पशुओं को रखे जो आवारा घूमते रहते हैं । साथ ही हमारे गांव के उन पशुओं को भी गोठान में रखेंगे जो उपयोगी होने के कारण दिन में गोठान में रहेंगे और शाम को उनके मालिक ले जाएंगे । यदि पर्याप्त चारा मिलने लगे तो मेरी गाय से इतना दूर मिल जाएगा, जिससे कि बच्चे के लिए रखने के बाद भी कुछ दूध बेचकर पैसा भी बचाया जा सकेगा । जबकि अकेले चरवाहा रखने में होने वाले अधिक खर्च से भी मुक्ति मिल जाएगी । लेकिन मुझे तो लगता है इन सब के बाद भी जानवरों से फसल को बचाना मुश्किल ही होगा । ऐसा क्यों कह रहे हो? परमानंद सरपंच ने उसकी बातों को गंभीरता से लेते हुए पूछा क्योंकि आस पास के गांव के जानवर भी तो हमारे खेतों में घुस आते हैं । हाँ तो भारी शंकर सही है पर हमने इस पर भी विचार करके निर्णय लिया है कि दूसरे गांव का जो भी जानवर हमारे खेतों में घुसेगा उसे हम गोठान में रखेंगे और जब उसका वास्तविक हकदार आएगा तो निर्धारित जुर्माना लेकर हम उसके जानवर उसे लौटा देंगे और यदि एक महा तक कोई उस जानवर पर दावा नहीं किया तो वह हमारे गांव की संपत्ति माना जाएगा और इस तरह हमारे पास बहुत सारे जानवर एकत्रित हो जाएंगे । तो फिर चारा खिलाने के लिए अधिक पैसों की आवश्यकता होगी । इसकी भरपाई कैसे करेंगे? सर पंजी हमारी गोठान समिति की संपत्ति होने के बाद ही नहीं बल्कि उससे पहले जब तक जानवर हमारे को ठान में रहेंगे तब तक उसका उपयोग समिति करेगी कैसे? परमानंद ने पूछा पहली बात तो ये कि उससे हमें गोबर मिलेगा जिससे निश्चित रूप से खाद में बढोतरी होगी और दूसरी बात ये है कि यदि दुधारू गाय होगी तो दूध समिति का होगा और यदि बैल रहे तो आवश्यकता अनुसार उसका भी उपयोग किया जाएगा । क्षमा चाहता हूँ सरपंची इन सब बातों की जानकारी मुझे नहीं थी । पूजा जी ने तो सच बोच बहुत सोच समझकर सब पहलुओं पर विमर्श करके योजना बनाई है । शमा वाली बात नहीं है परमानंद मैं तो कहता हूँ कि इस पूरे कार्य योजना की सफलता के लिए यह जरूरी है कि जिस के मन में जो भी शंका उत्पन्न हो उसकी चर्चा अवश्य हो । पूजा जी आप यहाँ आइए बैठे सरपंच ने कहा मुझे आपसे कुछ जरूरी चर्चा करनी थी तो चली आई । पूजा ने कहा मुझे बुला लिया होता । सरपंच ने कहा मैंने सोचा कि आप तो आते ही रहते हैं । आज मैं आपके घर आ जाती हूँ । इसी बहाने थोडा गांव का भ्रमण भी हो जाएगा । वैसे मेरा आना आपको अच्छा नहीं लगा तो मैं लौट जाती हूँ । पूजा के वोटों पर मुस्कुराहट फैल गई । नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं है । मैं तो बस आपकी सुविधा को लेकर के कह रहा था । मैं भी मजाक कर रही थी सर पंजी अब आ ही गए हो तो बात तो कर के ही जाऊंगी । कई ऐसे मुझे मालूम है कि आपने जो कुछ भी नया सोचा होगा अच्छा ही होगा । अच्छा बुरा । तो आप तय करेंगे सर पंजी । दरअसल बात ये है कि हमारी योजना अनुसार किसानों की आमदनी बढाने के लिए गांव में साल भर फसल लेना और फसलों को जानवरों से बचाना । इस पहले चरण का काम तो अंतिम पडाव पर है तो क्यों ना हम अब दूसरे चरण पर विचार करें । पूजा ने कहा कौन सा दूसरा चरण मैं समझा नहीं । सरपंच कहा वहाँ भूल रहे हैं । शायद मैंने पहले ही दिन कहा था कि कृषि के साथ साथ हमें ऐसे कार्य भी करेंगे जिसे खेती के काम के साथ साथ ही संचालित किया जा सके और हमें अतिरिक्त आमदनी भी हो । कहाँ याद आया? सरपंच ने उत्साहपूर्वक कहा मैंने कुछ गाडियों की लिस्ट तैयार कर ली है जो आपको दे देती हूँ क्योंकि गांव के लोगों की मानसिकता एवं कार्यक्षमता को आप अच्छी तरह से जानते हैं । आप गांव वालों से चर्चा करके मुझे बताइए कि कौन किस कार्य में रूचि ले रहा है । पूजा ने कहा, इसीलिए तो कहता हूँ कि आप उम्र में भले ही हमसे छोटी है पर संस्कार और विकास की सोच का अद्भुत संगम है । फिर भी सरपंच के बहुते को सम्मान देने के लिए आप मुझे यह सूची दे रही है । जबकि मुझसे ज्यादा तो गांव वाले अब आपसे अपने मन की बातें कहने लगे हैं और आप अच्छी तरह से समझने लगी हैं । ये तो आपका बडप्पन है सर पंजी मेरा नहीं आपका बडप्पन है । पूजा जी, कलेक्टर साहब सही कहते हैं, क्या कहते हैं? पूजा ने तुरंत पूछा यही कि आप हमारे गांव के लिए वरदान बनकर आई है । अच्छा और क्या कह रहे थे तो जा उत्सुकता को रोक नहीं पाई । आप की बहुत तारीफ करते हैं आपकी बातों से । मुझे याद आया कि मुझे मकान का किराया अनुबंध के लिए साहब ने बुलाया है तो आज अब शहर चले जाइए । पूजा जी और में गांव वालों को कल ग्राम पंचायत में एकत्रित होने के लिए कह देता हूँ । सरपंच ने कहा ठीक है सरपंची पूजा बैठो जी सर । पूजा ने बैठते हुए कहा आप नहीं सुधरेगी । डीएम ने फाइल बंद करते हुए सामने खडे हुए चपरासी से आगे कहा पटेल बाबू से कहूँ पूजा जी का किराया अनुबंध वाली फाइल लेकर आए । क्या हुआ असर? क्या कर दिया मैंने । पूजा ने पूछा । मैंने आपसे कितनी बार कहा है कि आने से पहले मुझे फोन कर लिया करो । पांच मिनट लेट होती तो मैं साइट के लिए निकल गया होता । सॉरी सर, आपसे सहेजी मुलाकात हो जाती रही तो मैं भूली गई की आप पर तो पूरे जिले की जिम्मेदारी है । शौरी की बात नहीं है । हमें भी बुरा लगता है कि एक तरफ तो आप मित्रता की बात करती हैं और फिर परायों सा व्यवहार करती है । जैसे आज नहीं आती तो मैं ही फाइल लेकर आपके गांव आने वाला था । फिर तो ठीक तो असर की मैं ही आ गई । पूजा ने कहा क्यों आपके गांव में मेरा आना आप को अच्छा नहीं लगता? क्या नहीं सर, मेरा मतलब है कि आपका समय बर्बाद होने से बच गया । मेरा मतलब कि आपका समय बर्बाद होने से बच गया । मुझ पर तंज कस रही हो । डीएम ने मुस्कुराते हुए आगे कहा, मेरी माँ आई है आपसे वो मिलना चाहती है । क्यों सर आपने कुछ ऐसी वैसी बात तो नहीं कह दी । पूजा को घबराहट होने लगी । ऐसी वैसी बात क्या होती है? मुझे बताओ । हाँ मैंने आपके काम का जिक्र किया था तो वो आपसे प्रभावित हुई है । वैसे माँ भी समाजसेवा के काम में लगी रहती है । वो ये बात है । पूजा ने राहत की सांस ली । दो । आप क्या समझ रही थी? डीएम दिवस कराते हुए कहा सर अन्यथा नाले तो एक बात पूछूं । वहाँ बोलो सर, मेरे मकान का किराया आप ने क्या तय किया है? पूजा ने पूछा अभी तक मुझ पर विश्वास किया है तो बिना देखे दस्तखत भी कर देना । डीएम ने सामने खडे बाबू से फाइल अपने हाथों में लेते ही स्वयं उठकर चलने लगे और पूजा को भी साथ चलने का इशारा करते हुए कहा ठीक है सर लेकिन हम कहाँ जा रहे हैं? पूजा ने कहा मेरे घर ड्राइवर द्वारा कार का दरवाजा खोले जाने पर कार में बैठते हुए पूजा को भी बैठने का इशारा करते हुए कहा शायद लडकियों को समझ पाना संभव नहीं है । मेरे लिए करण ने घर पहुंचने ही कहा मेरे क्या कर दिया सर, अब जैसा कह रहे हैं मैं मान तो रही हूँ । यही तो परेशानी है कि आपने कहीं कोई विरोधी नहीं किया । मैंने कहा कि किराए की रकम जाने बगैर ही दस्तखत गढ दो तो तैयार हो गई । मेरे साथ घर आने के लिए कहा तो भी आ गयी क्योंकि मुझे आप पर भरोसा है सर की आप जो भी किराया तय करेंगे सोच समझकर वही करेंगे जो मेरे लिए सबसे अच्छा होगा । तो पूजा ने कहा राकेश से धोखा खाने के बाद भी आप किसी पर इतना विश्वास कैसे कर सकती है । करंट तडफ उठा आप जैसे आईएस को समझना और समझाना सचमुच बहुत मुश्किल है । यदि आपकी किसी बात का विरोध कर दी तो कहते हैं कि मित्रता पर शक कर रही हूँ और सारी बातें मान रही हूँ तो भी परेशानी है । पूजा ने भी जैसे को तैसा ही जवाब दिया नियमानुसार साठ हजार रुपया प्रतिमाह आपको दे होगा । ग्यारह । वहाँ के बाद दस प्रतिशत की वृद्धि होती जाएगी एवं कम से कम तीन साल तक आप हमसे मकान खाली नहीं करवा सकती । जहाँ पर राइट चेन्नई लगा हुआ है उन जगहों पर दस्तखत कर दो । करण पेपर बढाते हुए कहा मुझे राकेश ने धोखा नहीं दिया है सर बल्कि में उसका साथ नहीं दे पाई । मुझे इस बात का जीवन भर मलाल रहेगा कि मेरे प्रेम में जरूर कुछ कमी रह गई होगी कि राकेश ने मुझे भुला दिया । खराब तो धोखा खाने के बाद भी मतलब मेरी भावनाओं को समझकर भी अनजान बनने की कोशिश करती रही है । मैंने सुना है कि सच्चा ब्रा जीवन में एक ही बार होता है पर समझनी पारियों की यदि मैंने राकेश से और आपने अनन्या से प्रेम क्या है? फिर काम के साथ हम एक दूसरे के साथ बंधती क्यों जा रहे हैं तो उन्हें सही कहा पूजा यही सवाल मेरे मन में भी आता है । पर जवाब की जगह एक प्रैक्टिकल लडकी यानी कि तुम्हारा चेहरा सामने होता है । मैं ही नहीं तुम्हारे काम की तारीफ करने वालों की लंबी सूची है और जब हर तबके के लोगों से तुम्हारी तारीफ सुनता हूँ तो पता नहीं क्यों खुद को गौरवान्वित महसूस करता हूँ । ऐसा लगता है जैसे कोई मेरी तारीफ कर रहा हूँ और सच कहता हूँ । इन अहसासों का कारण मुझे पता नहीं है । मुझे लगता है कि अब मुझे चलना चाहिए । पूजा ने खडे होते हुए कहा इस तरह कब तक मुझसे भागती, फिर होगी पूजा । करण ने नजरों से भी सवाल दागने की कोशिश की । जब तक राकेश को भूल नहीं चाहती जुबान से किए गए सवाल का जवाब तो दे दिया पर नजरों के सवालों से बचते हुए पूजा निगाहें चुकाए वहाँ से निकल गई हूँ ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 17

सत्रह भाग हमलोग मशरूम उत्पादन करने का मन बनाई है । पूजा जी आप हमारे लिए पैसों की व्यवस्था करवा दूँ । गांव वालों से खचाखच भरी ग्राम पंचायत के प्रांगण में महिलाओं के साथ घडी अनीता ने कहा, पर मैंने जिन कार्यों का नाम दिया था उसमें तो मशरूम उत्पादन का नाम नहीं था । पूजा ने कहा, पर हमें तो यही काम करना है क्योंकि मशरूम उगाने के लिए हमारे पास पैरा यानी कि धान की बाली उतारने के बाद बचा हुआ तनाव है । अच्छा मतलब आप लोगों को मालूम है कि पैरा से ही मशरूम का उत्पादन होगा तब तो आपको मशरूम हो गाना भी आता होगा । पूजा ने पूछा नहीं आता है आपसे सीखेंगे । अनीता ने कहा दीदी आप हमें सिखाएंगी । समूह में खडी बारवीं कक्षा की छात्रा सीमा ने कहा आपको कैसे पता कि मुझे मशरूम उगाना आता है? तू जा ने पूछा कलेक्टर साहब ने बताया । सीमा ने कहा तो पैसा हमने ये भी बताया होगा कि इस काम के लिए पैसा कहाँ से आएगा? पूजा ने कहा तुमसे कहा था ना कि मैं बात करूंगी । फिर बीच में तो कलेक्टर साहब का नाम लेने की जरूरत क्या थी? अधिकारी सीमा को डाटते हुए कहा तो क्या पूजा दीदी के सामने मैं झूठ बोलती, सीमा भी भडक उठी घर यारी तुम लोग तो आपस में ही लडने लगे । इस तरह लड होगी तो साथ में काम कैसे करोगी? पूजा ने कहा लगने वाली बात नहीं है । पूजा जी पर जब साहब ने मना किया था कि उनका नाम ना ले तो सीमा को चुप रहना चाहिए । अनीता के इस भोलेपन पर पूजा अपनी हंसी नहीं रोक पाई और पूजा की हंसी के साथ ही सबके होठों पर मुस्कुराहट फैल गई और पूरा माहौल खुशनुमा हो गया । मन में संकल्प हो, कार्य करने का जज्बा हो, गांव में एकता और आप जैसी हमारी शुभचिंतक हो तो फिर लडाई खातों प्रश्न ही नहीं उठता । पूजा के पास बैठे हुए सरोजनी मुस्कुराते हुए आगे कहा, ये लोग तो कलेक्टर साहब के निर्देश का पालन करते हुए झूठ बोलने की कोशिश कर रही थी । परिणाम क्या मालूम कि झूठ बोलना भी तो एक कला है जिसे सिखाने वाले हमारे गांव में कोई नहीं है । तो फिर झूठ का रास्ता दिखाने वाले डीएम साहब से ये कला भी सीख लेते । पूजा ने आगे कहा, जो भी होता है अच्छे के लिए होता है । सूची बनाते समय पता नहीं कैसे मैंने इतनी आमदनी देने वाले कार्य को सम्मिलित नहीं किया । अनीता जी आपके समूह को ऋण मैं दिलवाऊंगी । पूजा ने कहा सच में दीदी कहते हुए सीमा पूजा से लिपट गई । इस तरह बकरी पालन, मुर्गीपालन, सूअर पालन, विभिन्न सब्जियों के साथ साथ दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में काम करने का प्रस्ताव भी पूजा के पास आया और वह आज अपने सपनों को पंख लगते देख रही थी । सीमा को गले से लगाए पूरे गांव के लोगों के होटलों में फैली मुस्कान से पूजा मुक्त थी । मेरा प्रस्ताव है कि इन सब कार्यों को अभी स्थगित रखा जाए । मास्टर जी ने कहा क्यों? नीरज ने पूछा क्योंकि अभी तो हम सब लोगों को खेती के काम में लगना होगा । हमारे गांव में धान की फसल ही मुख्य रूप से उगाई जाती है, जिसकी बोनी का समय आ गया है । मास्टर जी ठीक कह रहे हैं । पूजा ने आगे कहा, इस बार तो मानसून पर निर्भरता भी नहीं रहेगी क्योंकि बांध में पानी रहेगा तो अकाल की डर से मुक्त हो कर के अच्छी से अच्छी पैदावार करने की कोशिश करेंगे और इस बीच में बैंक एवं उद्योग विभाग से संपर्क करके कागजी कार्रवाई करती रहूंगी । मैं कह रही थी की पूजा छोटे स्तर पर ही सही पर दूध उत्पादन का काम गोठान के साथ शुरू किया जा सकता है । सरोज ने कहा, कैसे? सरपंच ने पूछा गांव में कई लोग ऐसे है जिनकी गाय दुधारू है । बच्चों की गांव में दूध की बिक्री की व्यवस्था नहीं है तो दूध निकालने में रूचि नहीं दिखाते हैं बल्कि उतना ही दूध का दोहन करते हैं जितना स्वयं के लिए जरूरी है । कुछ लोग अपनी आवश्यकता से अधिक भी दूध निकालने में रूचि अवश्य दिखाते हैं, पर भी उतना ही जितने का विक्रय संभावित होता है । तो मेरा ख्याल है कि अभी वर्तमान में स्थिति गायों से ही दूध का समुचित उत्पादन और बिक्री के साथ साथ पौष्टिक जारी की व्यवस्था कर दी तो तात्कालिक आय संभव है । सरोज की बातों से मैं भी सहमत हो सर पंजी पर इसमें हम और भी कुछ प्रयास करके निश्चित रूप से आयकर श्रोत बना सकते हैं । पूजा ने कहा, पर इसके लिए सबसे पहले ये जान लेना आवश्यक है कि जिनके पास वर्तमान में दूध देने वाली गायें हैं, क्या वो हमारी बातों से सहमत है? सरोज ने कहा, मेरे पास एक गाय है जिसकी दूध से मेरे घर की दूध की आवश्यकता पूरी हो जाती है । इसलिए दो चार दिन में बच्चा देने वाली जो तीन गाय मेरे पास और है उसे मैंने छोड दिया है क्योंकि सभी जानवरों के लिए मेरे पास जारी की व्यवस्था नहीं है । आप लोग चाहे तो उसे गोठान में रख कर के उसका दूध निकाल सकते हैं । मान तूने कहा मेरे पास तो दो गाय ऐसी है जिसने कल और परसों ही बच्चा दिया है, पर मेरे पास उन गायों को बांधकर खिलाने के लिए कुछ नहीं है । इसलिए मैंने भी ऐसे ही छोड दिया है और मैं तो से कल ही गोठान में भी छोड आया हूँ । आप लोग अच्छा जारा पानी देकर दूध का दोहन कर सकते हैं । मंत्री ने कहा मतलब ये है की यही स्थिति औरों के साथ भी होगी । पूजा ने कहा हाँ मैंने बहुत सारे आवारा पशुओं को देखा है जिसकी या तो कुछ दिनों की बच्ची है या कुछ दिनों के बाद बच्चे देने वाले हैं । पूरन सिंह ने कहा, पर समस्या यह है कि इतने सारे दूध का हम करेंगे क्या? सरोज ने कहा शहर में ले जाकर भेजेंगे । नीरज ने कहा कि ऐसे शहर तो यहाँ से पंद्रह किलोमीटर दूर है । सरोज ने कहा दूध के उत्पादन के अनुसार कोई भी एक दो या तीन लोग प्रतिदिन सुबह शाम दूध लेकर शहर जाएंगे और वहाँ किसी भी कॉलोनी में ले जाएंगे । वहाँ कोई ना कोई तो दूध का खरीददार मिल ही जाएगा और यदि ऐसा नहीं हुआ तो दूसरों से थोडा कम कीमत लेकर होटलो में तो देखी जाएगा । नीरज ने कहा शहर में ले जाने पर दूध के लिए बाजार तो उपलब्ध होगी जाएगा वैसे भी देशी गाय के दूध को बच्चों के लिए अधिक पोष्टिक मानते हुए खरीदने वाले में नहीं जाएंगे । फिर भी अभी दूध के ग्राहक नहीं मिले या तुरंत शहर ले जाने के लिए मुश्किल हो तो दूध का खोवा, पनीर या दही बनाकर उसी शहर ले जाकर के बेचा जा सकता है । पूजा ने आत्मविश्वास के साथ कहा मेरे रिश्तेदार का शहर में होटल है, आप लोग कहे तो मैं उनसे बात कर सकता हूँ । पूरन सिंह ने कहा तो ये कह रहा कि हमारी गाय माँ अपने बच्चों के लिए आई का पहला श्रोत बनेंगे । पूजा ने कहा मेरा बाडी नाला से दूर है पर आप लोग यदि सहमती दे तो में पाइप लगाकर बांध से पानी ले जाऊंगा और केले की फसल लेना चाहता हूँ क्योंकि अभी मेरे बाडी में केले की कुछ पेड है । जो घरेलू उपयोग के पानी से सिंचित होता है उसमें बहुत भला आए हैं तो मैं सोच रहा हूँ कि पूरे बाडी में ही केले की ही फसल होगा हूँ । पूरन सिंह ने कहा क्या हुआ पूजा जी आपकी आंखों में आंसू पूजा के द्वारा मुंह फेरकर आंसू पहुंचते हुए देखकर सरपंच ने कहा खुशी से मेरी आंखे छलक उठी है । सर पंजी देखिए फौजी चाचा ने जिस बांध के निर्माण में सहयोग करने के लिए अपने पुत्र को कार खरीदने के लिए पैसा न देकर पुत्र वियोग को गले लगा लिया वे अपनी बाडी तक पानी ले जाने के लिए हमसे अनुमति मांग रहे हैं । हम लोग कहते हैं कि इस देश के किसान का कुछ नहीं हो सकता क्योंकि अभाव में जीने के आदी हो चुके किसान ही आपने विकास के सबसे बडे दुश्मन है । पूजा ने कहा सच कैरी हो पूजा कथित बुद्धिजीवियों के द्वारा ऐसी बातें अखबारों में पढकर क्या टीवी में देखकर मुझे भी बहुत दुख होता है । अचानक ही चहलकदमी करते हुए सरोज ने आगे आकर कहा कि हाँ हम गांव वालों को अभावों में भी जीना आता है । इन अभावों को हमारे जीवन का हिस्सा बना दिया गया है । पर तुम जैसे जिन्होंने लोग जब भी बिना किसी स्वार्थ के प्रयास करेंगे तो गांव का वास्तविक स्वरूप जिसमें एकता, सहनशीलता और भाई चारों के रिश्ते के साथ सामने वाले के प्रति सम्मान का भाव होता है, सामने आएगा । जिससे हम किसानों का विकास तो होगा ही साथ ही हम भी गौरवान्वित होंगे । यहाँ कितना बोलती भी है । मुस्कुराते हुए ताली बजाते हुए नीरज ने आगे कहा, सरपंच जी सरोज तो नेताओं की तरह भाषण दे रही है । सोच लीजिए आपके लिए खतरा है, भाषण नहीं । सरोजनी तो सिर्फ सच कहा है और रही बात मेरे पद पर बने रहने की तो सरोज बिटिया के लिए तो मैं ऐसे कई सरपंच पदों को कुर्बान कर दूँ । पर फिलहाल तो आपको सोचना है कि क्या अब भी हमारे गांव का जमाई बनोगी सरपंच ने जिसका तीस उसी की तरफ लौट आते हुए कहा हाँ सर बंजी आप सब कोई खुशखबरी देने वाले हैं । सरोजनी लाज से निगाही नीचे कर ली और नीरज भी बगले झांकने लगा तो पूजा ने सरपंच को आंखों से कुछ इशारा करते हुए कहा हाँ पूजा जी सही कह रही है । हम बडे लोगों ने मिलकर तय किया है कि देवउठनी एकादशी के बाद नीरज और सरोज की सगाई और फिर शादी कर देंगे । सरपंच ने कहा क्या इंजीनियर साहब इस के लिए तैयार हैं? मास्टर जी ने पूछा हमारी सरोज में क्या कमी है? मास्टर जी जो नीरज आेंकार करेगा पढी लिखी सुंदर और घर के कार्यों में भी दक्षिण है । पूजा ने कहा बहुत गुण अवगुण की नहीं है । पूजा मैं भी एक इंजीनियर का पिता हूँ और मेरे बेटे के बारे में तो तुम जानती ही होगी । गांव की जमीन बेचकर वह मुझे अपने साथ शहर चलने के लिए कहना था । मैंने मना किया तो देखो एक सौ चालीस किलोमीटर की दूरी पर रहकर भी महीनों हो गए । मुझे फोन पर बात तक नहीं की है । आप कहना क्या चाहते हैं मास्टर जी नीरज ने कहा यही की आज के पढे लिखे युवाओं को गांव या गांव का जीवन शैली अच्छी नहीं लगती है जबकि हमारी सरोज पढ लिखकर भी परंपराओं और मर्यादाओं में रहने वाली है जिसे आजकल के लोग गवार ओपन कहते हैं । मास्टर ने कहा आप पर समय की मार पडी है उसे आप से बेहतर कोई नहीं समझ सकता । मास्टर जी और इसीलिए आपके मन में मेरी रजामंदी को लेकर संदेह पैदा होना भी गलत नहीं है और मेरा बचपन भी बडे शहर में उन भौतिक सुख सुविधाओं के बीच में बीता हुआ है, जिसके पीछे राकेश और आपके बेटे जैसे गांव के लोग भी भाग रहे हैं । तो मुझे विश्वास है कि एक दिन उनके बच्चे भी मेरी तरह वास्तविक खुशी को ढूंढते हुए गांव की ओर लौटेंगे । और रही बात बहुत सुख सुविधाओं की तो वो इंसान का बनाया हुआ है और इंसानी उसका स्थान भी निर्धारित करता है । तो जब गांव में आई के साधन बढेंगे तो सुविधाएं भी आ जाएगी कि जहाँ तक मेरी स्वीकारोक्ति की बात है तो बहुत एक सुख को छोडकर सरोज को अपनाने में ही अक्लमंदी होगी क्योंकि भारतीय सुखसुविधाओं को तो मैं गांव में ला सकता हूँ, पर सरोज जैसी सु संस्कृत लडकी मुझे कहाँ मिलेगी? नीरज ने कहा, हमारी सरोज दो सचमुच खुशकिस्मत है, जिसे नीरज जैसा लडका मिला है । सरोज के सिर पर हाथ फेरते हुए उसके बाबू जी ने आगे कहा, नीरज ने मुझसे कहा है कि सरोज की भावनाओं का सम्मान करते हुए शादी के बाद हमारी और हमारे खेतों की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाएंगे ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 18

अच्छा लगा था । आज पुरी में जगन्नाथ भगवान की रथयात्रा है । वहाँ मुझे मालूम है और ये भी जानता हूँ कि तुम भगवान को नहीं बल्कि आपने नालायक बेटे को याद कर रहे हो । आज के दिन ही उसका जन्म हुआ था । तुम राकेश को बोल क्यों नहीं जाती है? सर, उसकी माँ कैसे भूल जाऊँ? क्या तुम उसे बोलता होगी? सरोज की मैंने कहा सही कहती हूँ । दुनिया से चले जाने पर भी कोई अपने बच्चे को नहीं भूल सकता है । हमारा बेटा तो इसी दुनिया में है फिर उसी कैसे भूल सकते हैं । सिरोज के बाबू जी की आंखें भर आई । आप दोनों उस निर्मोही को याद करके क्यों आज सुबह आ रही हूँ माँ उसे तो हम लोग कितना भी याद नहीं रही की आज के दिन होनी कर लेते । कहते हुए सरोज आंगन से निकल गई और घंटों तक आंसू बहाती हुई तब तक फोन लगाते रही जब तक राकेश ने फोन नहीं उठाया । हेलो फोन मत रखना भैया प्लीज मुझे बात करो । सरोजनी रोते हुए कहा । वही तो कह रहा हूँ तो तुम रो क्यों रही हो? राकेश ने कहा आप भी तो है भैया । सरोज के आंसू अब भी थम नहीं रहे थे । हाँ, मैं ठीक हूँ, तुम लोग कैसे हो? आज आपका जन्मदिन है । मैं बाबू जी आप को बहुत याद कर रहे हैं । भैया मुझे इस बात का एहसास है । कहते हुए राकेश का गला रूंध गया । क्या हुआ भैया, आप परेशान लग रहे हो? कहाँ थी को? फिर बार बार वही प्रश्न क्यों दोहरा रही हूँ । मैं ठीक हूँ और सो रहा हूँ तो मैं मालूम होना चाहिए कि इस समय यहाँ आधी रात है । माँ बाबूजी से कहना कि आपने इस नालायक बेटे को याद ना करें और बेकार में परेशान ना हो । तुम भी अपना ख्याल रखना ठीक है और समय निकालकर में ही फोन कर होगा । तुम दोबारा फोन मत करना रहते हुए राकेश ने फोन काट दिया । जो बात ही नहीं करना चाहता हूँ उससे बात करके क्यों अपनी तकलीफ से बढाती हो । सरोज पूजा ने उसके आंसू पहुंचती हुए कहा । पूजा के लेकर सरोज उसे गले मिलकर फूट फूटकर रो पडी है । भैया की बातों से लग रहा था कि वे कुछ परेशान है । सरोजनी से सकते हुए कहा मुझे यही लगा पर जब तक भी हम से कुछ कहेंगे नहीं, हम कर भी क्या सकते हैं । तुम्हें भी लगा मतलब क्या तुमने भी बात की थी । सरोज ने आश्चर्य से पूछा हाँ मैंने बात की थी और उन्होंने मुझे भी कल बात करने की कहते हुए बाद न करने का बहाना बना दिया । पूजा मायूस हो गई । मतलब तुम आज भी भैया से प्यार रहने दो । सरोज अब इन सब बातों का कोई मतलब ही नहीं रहा । पुजारे बीच में ही टोकते हुए कहा, भैया से मतलब ही नहीं रहा तो उनसे बात क्यों करती हूँ? पूजा क्योंकि मुझे लगा कि मम्मी पापा की दुर्घटना और तुम्हारे विवाह के बारे में बता देना चाहिए तो क्या कहा? भैया ने सरोजनी पूछा । उन्होंने मुझे बताने का मौका ही नहीं दिया । मेरे आंसू पहुंचकर अब खुद ही रोने लगी । पूजा सरोज ने उसके आंसू पहुंचते हुए कहा तो क्या लगा था कि तुम्हारे दुखिया मेरी खुशी से उन्हें अभी कोई लेना देना है? हो सकता है सरोज की वहाँ जाकर राकेश किसी मजबूरी में फस गया है । ये तो मुझे समझा रही हो या खुद को धोखा दे रही हूँ । पूजा ऐसा नहीं है । सरोज मुझे राकेश से कोई उम्मीद नहीं है । मैं तो बस उन्हें हम सबसे जोडी रखना चाहती हूँ । पर भैया को अब हम से कोई मतलब नहीं है । ये तो तुम समझ गई होगी । सिरोज ने कहा क्या समझा रही हो सर्वोच्च पूजा को? नीरज ने प्रवेश करते हुए कहा कुछ नहीं तो बताओ । नीरज बांध पर भीड इकट्ठा हुई थी । पूजा ने पूछा कल रात की दूसरी बारिश के बाद उन सब लोगों को लग रहा था कि बांध में पानी एकत्रित हो गया होगा । कहते हुए नीरज अपनी हंसी रोक नहीं पाया । उत्साह में वे लोग भूल रहे हैं की प्यासी धरती तृप्त होने के बाद ही पानी एकत्रित करती है । सरोज ने कहा सरपंच जी और मास्टर जी सहित कुछ लोग तुमसे मिलने के लिए यही आने वाले हैं । पूजा नीरज ने कहा आने वाले नहीं है बल्कि आ गए हैं । घन जामने प्रवेश करते हुए कहा बांध में तो पानी मिला नहीं होगा, लीजिए पानी पी लीजिए पूजा नहीं । पानी से भरे गिलासों को मास्टर जी के सामने बढाते हुए कहा तुम भी हमारा मजाक उडाने लगे बेटियाँ मुस्कुराते हुए मास्टर जी ने कहा कभी कभी सबकुछ जानकर भी धूल जाने में भी बहुत आनंद आता है जिसे आज मंदिर के कहने पर मैं भी बिना सोचे समझे बांध की ओर पानी देखने के लिए चला गया । पर वहाँ जाने के बाद हम सब को पानी भले ही नहीं मिला । पर पानी एकत्रित होने के बाद हमें क्या करना है ये बात जरूर सामने आई है । वो तो सब जानती है कि बांध में स्थित पानी सिंचाई के काम आएगा । सरोज ने झट से कहा यही तो बात है बेटियाँ की । हमने इसके अलावा भी कुछ सोचा है । पूरण सिंह ने कहा हमने एक और आमदनी का साधन ढूंढ लिया है । पूजा जी बस आप की स्वीकृति चाहिए । घनशाम ने कहा, बात क्या है ये तो बताइए । सरोज ने आतुरता से पूछा हमने सोचा है कि यदि बांध में मछली पालन किया जाए तो कैसा रहेगा? शंकर ने कहा, वाह क्या है ना कि पहले भी नाले से बरसाती मछली निकालते रहे हैं । पूजा को छुप देख घनशाम ने स्पष्टीकरण दिया, मैं आप लोगों की बातों से सहमत हूँ पर ये सोच रही हूँ की मछली उत्पादन के लिए बीज कब डालना उचित रहेगा । पूजा ने कहा इसमें सोचने की क्या बात है? पूजा जी जब ऊपर से पानी का बहाव आना बंद हो जाएगा तब हम लोग मछली बीज डाल देंगे । सुरेश ने कहा, हाँ ये तो सही सोच है । नीरज ने कहा, पूरे गांव को आय का एक और शोध मिलने के लिए आप सब लोगों को बधाई । पूजा ने मुस्कुराते हुए कहा एक और बात बताना है पूजा दे दी बिसाहू राउत ने कहा कहाँ हो? पूजा ने कहा आज करीब बीस किलो दूध गोठान के गायों से मिला है जिसे मैंने सर पंजी के घर छोड दिया है । मैंने आज उस दूध से खीर बनवा दी है जिसे बांध बनने की खुशी में प्रतीक घरों में थोडा थोडा बंटवाने का प्रबंध है । सरपंच ने कहा देसी गायिकी, दूध का खीर मेरे मूह में तो अभी से पानी आ रहा है । पूजा ने कहा आपको की इतनी पसंद है तो मेरे हिस्से की भी आपको दे दूंगा । शंकर ने उत्साह से कहा मेरे घर देने वाली खीर भी पूजा जी को भिजवा देना घनशाम पूरन सिंह ने कहा देख रही हूँ सरोज कि मेरे क्या पाया है और तुम होगी हमेशा मुझे कहती रहती होगी मेरे गांव में आकर तो में क्या मिला पूजा की आगे खुशी से छलक उठी । उसने आगे कहा मैंने भी तक जो भी योजना बनाई सिर्फ किसानों की आय को बढाने की सोच को लेकर आगे बढी और मेरा मानना भी यही है कि मार्टी पुत्र संपन्न होंगे तभी देश की उन्नति होगी और आज देखी दूध उत्पादन के बाद उम्मीद से भी पहले हम आमदनी की ओर बढ रहे हैं । सर पंजी आपसे मेरा निवेदन है कि अपनी अध्यक्षता में एक समिति का गठन कर लीजिए जिसके अंतर्गत गुरूत् उत्पादन से लेकर के उसे होने वाले आय व्यय का पूरा ब्यौरा रखते हुए समिति का संचालन हो सके । पूजा सही कह रही है । मास्टर जी ने कहा अब आप लोगों से मैं उम्मीद करती हूँ कि तात्कालिक फायदा नहीं होने के बाद भी मेरे लिए मेरी एक बात अवश्य मानेंगे । आपका ये तो पूजा जी हमें आपकी हर बात अब बिना सुने ही मंजूर है । हाँ, मीडिया सरपंच जी सही कह रहे हैं हमें पूरा विश्वास है कि तुम जो भी करने को का होगी वो सौ फीसदी सही ही होगा । मास्टर जी सही कह रहे हैं । पूरन सिंह ने कहा मतलब आप सब लोगों ने तय कर लिया है कि आज मेरी खुशी की आंसू थम नहीं चाहिए । खुशी झलकने को बेकरार पानी को समझाते हुए पूजा ने आगे कहा, मैंने इन दिनों देखा है कि नाली के आस पास पहले सरकारी जमीन है उसके बाद ही आप लोगों की जमीन की शुरुआत होती है । हाँ ये तो सच है । सरोज के बाबू जी ने कहा उस जमीन का क्या करेंगे? आप लोगों ने कुछ सोचा गया । पूजा ने पूछा करना भी चाहे तो सरपंच जी कहते हैं कि सरकारी जमीन पर नाजायज कब्जा नहीं करने दूंगा । शंकर ने कहा हाँ पूजा दीदी मुझे भी लगता है कि यदि सरपंच जी की माना ही नहीं होती तो हमारे जैसे लोग वहाँ पर सब्जी भाजी ही होगा लेते । सोमारू ने कहा क्यों आप के पास अपनी जमीन नहीं है क्या? पूजा ने पूछा है तो सही पर पांच एकड जमीन में मेरे बाद तीन भाई और एक बहन है बहन तो चलो बिहार कर चली जाएगी । पर मैं चारों भाइयों के बीच बंटवारा होने पर गुजारा कैसे चलेगा? सोमारू ने जवाब दिया आपका कहना सही है पर वर्तमान समस्या की जिम्मेदार हम खुद ही है । पूजा ने कहा कि ऐसे दीदी सोमारू ने पूछा आप इस सूची भाई की तीन भाई न होगी । यदि आप लोग दो ही भाई बहन होते तो क्या आप के मन में ये बात आती की सरकारी जमीन पर कब्जा किया जाए । नहीं ना । अपने सवाल का जवाब स्वयं ही देते हुए पूजा ने आगे कहा, मैं मानती हूँ की इस बात की जिम्मेदार आप नहीं है पर समस्या का सामना तो आपको करना पड रहा है और इन्सान समस्या से हारता नहीं है तो फिर आपके सामने रोजी रोटी की समस्या का समाधान तो निकाल ही लेंगे पर यहाँ पर उपस् थित आप सभी लोगों से मैं निवेदन करती हूँ कि आप लोग अपने बच्चों के लिए बेरोजगारी की समस्या नहीं चाहते हैं तो आज की ही आज ही सभी नवयुवक यह शपथ ले की आपकी अधिक से अधिक दो संतानें हो । आप सही कह रही है दीदी, मैं तो अपने भाइयों सहित एक एक संतान ही रखूंगा । सोमारू ने कहा तुमने एकदम सही कहा है । सोमारू भाई बहन के बच्चे भी तो अपने ही होते हैं और इस तरह घर जमीन का बंटवारा भी रुक जाएगा और हमारे गांव के किसी भी युवा को बेरोजगारी का सामना नहीं करना पडेगा । सरपंच ने कहा सच में आज का दिन बहुत ही सार्थक रहा । नीरज ने समारोह के गांधी पर हाथ रखकर चलते हुए सबके सामने आकर खडे होते हुए आगे कहा, आज के दिन को इस गांव में हमेशा सोमारू के नाम से याद करेंगे और मैं पुरस्कार के रूप में इसे साइकिल रिपेयरिंग की दुकान खोल कर दूंगा । नीरज ने तालियों की गडगडाहट के बीच कहा, सच में इंजीनियर साहब फिर तो मुझे नाले के पास वाली सरकारी जमीन नहीं चाहिए । सोमारू नीरज के पैरों पर झुकने की कोशिश करने लगा तो नीरज ने उसी गले से लगाते हुए कहा, हम सब एक साथ खडे होकर सुख दुख बांटेंगे और गांव को खुशहाल बनाएंगे । तो आज से हम सब स्वेच्छा से यह निर्णय लेते हैं कि हमारे गांव में एक संतान के बाद ही परिवार नियोजन करवाएंगे । सरपंच ने कहा ऐसा हुआ तो हमारा गांव तो पूरे देश के लिए एक और उदाहरण बन जाएगा । सरोज ने कहा ऐसा हो जाएगा, क्या मतलब? सरोज लगभग पूरा गांव तो एकत्रित यहाँ पर और मुझे तो लग रहा है कि सोमारू के फैसले से सब सहमत है और भी सहमत क्यों ना हो । बच्चा एक ही हो, पर लायक हो और फिर जब एक ही संतान रहेगी तो उसका लालन पालन भी अच्छा होगा । मास्टर जी ठीक कह रहे हैं, हमारे गांव में आज कर इन सोमारू के संदेश के लिए ही जाना जाएगा । पूरे भीड से एक स्वर से आवाज आई । अब तो वे भी पूरी तरह आश्वस्त हो गई कि मुझे भी अपनी सोच पर कामयाबी अवश्य मिलेगी । पूजा ने कहा, पर हमने आपकी बातों को कब नहीं माना है? दीदी शंकर ने कहा भूल गए शंकर की दो फसल लेने की पूजा की बात का तो वही विरोध कर रहे थे । सरोजनी मुस्कुराते हुए कहा, वे तो तक के बाद थी जब हम लोग पूजा दे दी को नहीं जानते थे । शंकर ने झेलते हुए कहा बहुत शायद तुम भूल गए । सरोज की संकर के उस विरोध से ही गोठान बनाने के बाद निकल कर आई जिससे ही पहली कमाई होने वाली है । पूजा दीदी ने सही कहा है अब जब भी कोई मुझे उस दिन की याद दिलाने की कोशिश करेगा मैं उसे अपनी कामयाबी बताऊंगा । शंकर ने गर्व से आगे कहा, और पूजा दीदी ने जिस भी काम के लिए सोचा है उसे भी सब के साथ पूरी लगन से करूंगा । पहले ये तो मालूम पडे की पूजा चाहती क्या है? सरोज के बाबू जी ने कहा, मैं चाहती हूँ कि डाले के किनारे पडी खाली जमीन पर वृक्षारोपण करें लेकिन पूजा नाला तो हमारे गांव के बीचोंबीच रहता है । खाली जमीन भी बहुत ही इतनी अधिक मात्रा में पेड का हासिल आएंगे । सदानंद ने कहा पेट की व्यवस्था के लिए प्रशासन से सहयोग लेंगे पर उससे पहले पेडों को लगाने के लिए गड्ढे खोदने होंगी । पूजा ने कहा, पर यदि पूरी खाली जमीन पर उगाएंगे तो पेड अधिक मात्रा में लगेंगे । मास्टर जी ने कहा तो क्या हुआ, जितने भी पौधे लगेंगे मैं उपलब्ध करा होंगी । पूजा ने आत्मविश्वास के साथ कहा तो फिर मैं आपसे वादा करता हूँ दीदी की आपने युवा साथी के साथ हम लोग गड्डा खोद रहेगा, काम कर देंगे । शंकर ने आश्वस्त किया सूत्रों शंकर एक हजार से भी ज्यादा गड्ढे खोदने होंगे, हम लोग कर लेंगे । सरोज की चुनौती को स्वीकारते हुए शंकर के साथ कुछ और युवकों ने खडे होकर कहा, पर सिर्फ पेड लगाने से ही काम नहीं बनेगा, उसकी देखभाल भी करनी होगी । पूजा ने कहा, क्यों ना हम फलदार वृक्ष लगाए और जो पेड लगाकर उसकी देखभाल करेगा वही उस पेड के फल का हकदार होगा । नीरज ने आगे कहा, इंजीनियर साहब की कह रहे हैं इससे आय का एक ओशो तो गांव के लिए बनेगा ही साथ ही पर्यावरण को लेकर के मेरा जो उद्देश्य है उसकी भी पूर्ति हो जाएगी । पूजा ने कहा, तो आप लोग पौधों की व्यवस्था कीजिए । हमलोग चलते हैं । मानसून से पहले की बारिश हो चुकी है । हमारे पास समय भी नहीं है । हम घर से औजार लेकर सीधा नाले किनारे पहुंचेंगे । शंकर एवं उसके साथियों ने जाते हुए कहा

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 19

उन्नीस भाग कहाँ जा रही हो? पूजा सुबह सुबह तैयार होते थे । माने पूछा बौद्धों की व्यवस्था करने डीएम साहब से बात करने का सोच रखा है । मैंने सरोज को भी साथ लेते जाओ । बाबू जी ने कहा सरोज को नाले की और जाना होगा । मैं चला जाता हूँ पर मुझे ड्यूटी पर जाना है । नीरज ने कहा नीरज थी कह रहा है बाबूजी पौधे होने से पहले गड्डी की खुदाई हो जानी चाहिए और फिर सरोज का जाना इसलिए भी जरूरी है कि दो पेडों के बीच कितनी दूरी होनी चाहिए एवं कौन से पेड के लिए गड्डों का आकार कितना और कैसा होना चाहिए ये बताने के लिए सरोज का वहाँ रहना जरूरी है । पूजा ने कहा कि कि तुम तीनों पहले नाश्ता कर लो फिर जाना । मैंने रोटी सब्जी बना दी है । सरोज की मैंने कहा नहीं माँ, मुझे देर हो गई तो डीएम साहब कहीं निकलना जाए । पूजा ने कहा तुम्हारे पास साहब का नंबर तो है तो फिर फोन क्यों नहीं कर लेती हूँ तुम्हारे आने का? सुन कर तो साहब कहीं जाने वाले भी होंगे तो रोक जाएंगे । नीरज ने मुस्कुराते हुए कहा यह कैसी बातें कर रहे हैं? सरोज ने कहा कि जब की बिना कोई प्रतिक्रिया दिए ही पूजा अपना बैग उठाकर चल पडी । क्या गलत कह दिया? सरोज आप का मतलब है कि कलेक्टर साहब कम से कम मुझे तो ऐसा लगता है कि कलेक्टर साहब पूजा को पसंद करते हैं । नीरज ने आगे कहा साहब की बात नहीं कर रही हूँ । मैं पर पूजा को तो जानती है कि वह भैया के अतिरिक्त किसी और के बारे में सोचती भी नहीं है । नहीं सोचती है तो सोचना चाहिए । सरोज के बाबू जी ने कहा आप भी बाबूजी सरोज ने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा राकेश जब हमारा नहीं हुआ तो पूजा का क्या होगा । इसलिए मैं चाहता हूँ की पूजा राकेश का अब और इंतजार न करें । सरोज के बाबू जी ने कहा चलो उसे रोज तो छोडते हुए ऑफिस निकल जाऊंगा । नीरज ने बाद को बढते कहा सर मेरा निवेदन है कि हमें उद्यानिकी विभाग से पौधे उपलब्ध हो जाएंगे । सर क्या? बातें पूजा आज प्रशासनिक सहयोग की बात आप खुद कर रही हैं । कहते हुए करण के होठ पर मुस्कान फैल गई । आप मेरा मजाक उडा रहे हैं कहते हुए पूजा खडी हो गयी । अरे हम तो नाराज हो गई । मैं सच में मजाक कर रहा था । करण ने कहा, रहने दीजिए, मैं आपसे कोई भीख मांगने नहीं आई हूँ । कोई दूसरी व्यवस्था देख लूंगी । पूजा जाने लगे, बैठो तो सही । पूजा का हाथ पकडकर बिठाते हुए करण ने आगे कहा तो भारी लिए तो जान हाजिर है । करन के स्पर्श ने पूजा को कुछ पल के लिए स्तब्ध कर दिया और कुछ देर के लिए वो करन की विपरीत दिशा में मूंग की ये ही खडी रही । फिर कुछ संभलते हुए कहा, मुझे मालूम था कि आप मुझे निराश नहीं करेंगे, आप की नहीं । मुझे गांव वालों की परवाह है । करण ने भी अचानक प्रदर्शित हुए भावनाओं को छुपाने की कोशिश करते हुए कहा, मुझे अपने लिए नहीं, गांव वालों के लिए ही पौधे चाहिए । पूजा ने कहा सच तो यह है पूजा की पौधे लगाने की तुम्हारी सोच ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया है । पिछली बार जब कुकुट पालन और बकरीपालन के लिए बैंक ऋण के बाद के भी तब भी आपने यही कहा था तो मुझे अपनी मुस्कान रोक नहीं पाई । तुम काम ही ऐसा करती हूँ कि वास्तव में यह तय कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि कौन सा काम बेहतर है तो मैं ऐसी इसके काम की तारीफ करते रहोगे । या अपने मन की बाद भीगा होगी पूजा ये मेरी माँ है अभी अभी ड्रॉइंग रूम में प्रवेश करती अपनी माँ की और इशारा करते हुए करण ने कहा पूजा ने पैर छूकर प्रणाम किया तो उन्होंने गले से लगा लिया और कहा खुश रहो बेटा, चलो साथ में नाश्ता करते हैं । करन की माँ ने अपने पीछे नाश्ता लेकर खडे व्यक्ति को नाश्ता पर उसने का इशारा करते हुए कहा आप लोग रास्ता कीजिए, मैं चलती हूँ । पूजा ने कहा बैठना थोडी देर मुझे तुमसे ही बात करनी है । इस नालायक से तो कुछ होगा नहीं इसलिए मुझे आना ही पडा । करन की माने कहा जी कहिये शिक्षक का आदेश होते ही स्कूली बच्चे जिस तरह बैठ जाते हैं वैसे ही बैठते हुए पूजा ने कहा दारो नहीं बेटा, मुझे अपनी माँ की तरह ही समझो । अरंडी तुम्हारे बारे में मुझे सब कुछ बता दिया है । यदि तुम्हारे पापा मम्मी होते तो मैं उनसे बात करती बेटा, मैं तो उसे बहुत प्रभावित हूँ तो मैं अपने करण के लिए बहु बनाकर मुझे बहुत खुशी होगी । करन की माँ ने पूजा के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा हाँ प्लीज और कुछ मत कहो । झगडे की तरह पूजा के आंखों से आंसुओं की धारा बहती देख मां परेशान हो गई और कहने लगे रोते नहीं बेटा, अब कुछ नहीं कहूंगी । ठीक है पर एक माँ की भी अपनी मजबूरी होती है । करण ने पांच साल पहले मुझे ये कहकर स्तब्ध कर दिया था कि उसे शादी ही नहीं करनी है और जब इसने बताया कि यदि पूजा ने यहाँ कर दी तो मैं अपना निर्णय बदल सकता हूँ । तब से मेरे अरमानों को पंख लग गए हैं । मेरी बातों को अन्यथा मत लेना बेटा मेरे तो सिर्फ होने का फर्ज पूरा किया है । यदि करन के लिए तुम्हारे मन में कोई भावनाएं नहीं है तो मुझे क्षमा कर देना और मेरी बातों को भूल जाना । प्लीज आप माफी मांगे बल्कि मैं क्षमा चाहती हूँ कि मैं इस समय आपको कोई जवाब देने की स्थिति में नहीं हूँ । कहते ही पूजा आंसू पहुंचते हुए बाहर निकल गयी । बेटा तुम पूजा के गांव के लिए पौधों की व्यवस्था कर दोगे ना करन की माने पूछा आप चिंता ना गरिमा कल ही पौधे पूजा के पास पहुंच जाएंगे । प्रशासन तो यही चाहता है कि अधिक से अधिक पेड लगाए जाए पर हमें ऐसे लोग नहीं मिलते हैं जो स्वयं से पेड लगाने के लिए उत्सुक हो तो पूजा की जायज मांग की पूर्ति अवश्य होगी । पूजा जी है कहाँ है आप? कौन से रोज ने पूछा में उद्योगिक ई विभाग से पौधे लेकर आया हो । ठीक है सर, उस तो इनके साथ फील्ड पर जाओ, मैं भी पहुंचती हूँ । पूजा ने कहा नौ सौ नब्बे के करीब गड्डे खोदे गए हैं नाले के किनारे में जबकि पौधे लगाने और उसकी देखभाल करने के लिए मेरे पास नाम लिखवाने वालों की संख्या तीन सौ है तो मैंने सबको एक समान गड्डे वितरित कर दिए हैं । घनशाम ने पूजा को नामों की सूची सौंपते हुए कहा इस सूची का मैं क्या करूंगी? सरपंच थी, इसे आप ही रखिए और मेरी सलाह तो ये है कि ग्राम पंचायत स्तर पर इस सूची को ग्रामसभा की सहमती के साथ पंजीकृत कर दीजिए, जिससे भविष्य में किसी प्रकार के विवाद की स्थिति उत्पन्न हो । पूजा ने कहा आप सही कह रही है पूजा जी ऐसा ही होगा । कहते हुए गंजाम ने सूची को स्वयं ही रखते हुए आगे कहा, क्योंकि कलेक्टर साहब हमेशा हमारे हर प्रस्ताव को स्वीकारते हुए सहयोग कर दे रहे हैं और अभी भी उद्यानिकी विभाग से हमारे लिए पौधों की व्यवस्था करवा दिए हैं । तो ग्रामीण भाइयों की इच्छा है कि पौधारोपण हेतु उन्हें भी आमंत्रित किया जाए । गांव वालों की भावनाओं का आपको सम्मान करना चाहिए । सरपंची डीएम साहब को फोन कीजिए और आमंत्रित कीजिए । मैं नहीं आप फोन कीजिए । पूजा जी आप के कहने पर ही तो बहुत ही मिले हैं । हमें ठीके सरपंची पूजा ने कहा फॅालो हाँ पूजा बोलो । करण ने कहा सिर आप मुझसे नाराज तो नहीं है? पूजा ने पूछा कि दोस्ती में नाराज होने का हक होता है क्या कर अन्य पलट कर सवाल किया होता है । तभी तो पूछ रही हूँ सर । तो फिर ये भी बता दो कि क्यों नाराज हो जाऊँ? करने पूछा धन्यवाद सर पर यदि आप नाराज नहीं है तो हमारा आमंत्रण स्वीकार कीजिए । गांव वाले चाहते हैं कि वृक्षारोपण की शुरूआत आपसे हो । पूजा ने कहा नहीं की और पूछ पूछ । करण ने कहा अपने हिस्से में आए पौधों को रोपित करने वाले निर्धारित स्थान पर रखते हुए ग्रामीण जान बहुत ही उत्साहित थे । अब तो सबको बस डीएल साहब के आने का इंतजार है कि कब वो आए और उन के बाद सब लोग भी पौधारोपन करें । कलेक्टर साहब आ गए । यह शब्द कानों में पढते ही उनकी अगवानी के लिए सब चल पडे नमस्ते सर, इतनी भीड कोई और जाने वाले हैं क्या करने? कार से उतरते ही पूछा नहीं साहब, कोई नहीं आएगा । हम सब तो आपका ही इंतजार कर रहे थे । घनशाम ने जवाब दिया तो क्या ये सब लोग मेरे स्वागत के लिए इकट्ठे हुए हैं? करण ने हसते हुए पूछा इस गलत फैमी में मत रहिये साहब । पूजा ने हाथ जोडकर अभिवादन करते हुए आगे कहा कि पहुंचे लगाने वालों की उत्साही भीड है । आप गलत कह रही है । करण ने कहा ये सब लोग पौधा लगाने के लिए ही एकत्र हुए है साहब । घनशाम ने पूजा की बात की पुष्टि करते हुए कहा मैं आपकी बातों से सहमत हूँ सरपंच चीजे पर । साथ ही मेरा आपसे एक सवाल भी है कि आज से पहले वृक्षारोपण को लेकर के ये उत्साह क्यों नहीं था? करण ने पूछा क्योंकि हमारे पास पूजा देरी नहीं दी साहब । डीएमके बीच चलते हुए शंकर ने कहा हाँ साहब ये बात तो है । पूजा जी के कारण ही हमें ये समझ आई है कि पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए पेडों का होना बहुत जरूरी है और फिर उन्होंने तो इन पौधों के माध्यम से हमें आई का एक और माध्यम दे दिया है । रन जामने कहा इसलिए तो कह रहा हूँ कि ये भीड मेरे लिए नहीं पूजा के लिए है । करन ने कहा आईएस और यहाँ पर आपको पौधा लगाना है और बताइए आप कौन सा पौधा रोकना चाहेंगे? पूजा ने डीएम साहब के आगे आगे चलते हुए कहा, मैं तो जामुन का पेड लगाऊंगा । करण ने झट से कहा फिर तो आप अपने लगाए हुए पेड का फल नहीं खा सकेंगे । सर पूजा ने कहा क्यों मेरी आयु इतनी छोटी है क्या? करण ने कहा मेरा मतलब वो नहीं है सर, मैं तो कहना चाह रही थी की अधिकतम दो साल फिर तो आपका तबादला हो जाएगा । आपका इस गांव में आना जाना नहीं हो पाएगा । पूजा ने तुरंत सफाई देते हुए आगे कहाँ यदि नहीं या भी लगाएंगे तो दो साल में ही आपका पौदा फलदार हो जाएगा । मैं आपकी बातों का मतलब समझ गया था । मैंने तो यही कह दिया था और हम आप सबको बताना चाहता हूँ कि जहाँ भी रहूंगा आपने लगाए हुए इस पेड का फल खाने जरूर आऊंगा । मैं उनमें से हूँ जो आपने द्वारा रोते हुए पौधे पर फल लगने का इंतजार करता हूँ । डीएम ने पौधे रोकते हुए कहा करन, पूजा, सरोज और नीरज ने पांच पांच पौधे लगाई और फिर देखते ही देखते सैकडों हाथ उत्साहित मनसे पौधे रोपने में लग गए । यहाँ का मंजर देखकर ऐसा लग रहा था जैसे पौधे रोकने की प्रतियोगिता चल रही हो । सरोज भी अपने माँ बाबूजी का सहयोग करने के लिए पौधे लेकर जाने लगी तो नीरज भी उसके साथ आगे बढ गया । मैंने तुमसे वो बातें सीखी है पूजा जो मुझसे ट्रेनिंग में छूट गई थी । करण ने अकेले होने का फायदा उठाते हुए कहा कि इस बात का जिक्र कर रहे हैं सर, वैसे तो इतनी बातें हैं कि गिनाने बैठूंगा तो थक जाऊंगा तो गांव के लिए जो भी कर रही हो इस की सफलता और सफलता तो बात की बात है पर खुद को समर्पित कर की इनके साथ चलते हुए इन्हें जिस रास्ते में लेकर चल पडी हो वो सिर्फ तो नहीं कर सकती हो । करण ने कहा छोटी वो बडी बात होगी सर पर मेरा सपना तो है कि इस गांव में हम सब की मेहनत रंग लाई और आप जैसे प्रशासनिक अधिकारी जहाँ भी जाए हमारी कार्ययोजना को आगे बढाए । पूजा ने कहा मैं जहाँ भी जाऊंगा अवश्य ही प्रयास करूंगा पर इसकी सफलता की गारंटी तो तभी होगी जब तुम मेरे साथ होगी । क्योंकि तुमने जितनी सरलता से यहाँ सारी योजनाओं के लिए गांव वालों की सहमती ले ली है, वह हमारे लिए आसान नहीं है । करें ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 20

बीस वा भाग बहुत दिनों बाद हमारी याद आई है । घनशाम एवं पूजा को अपने बैठक कक्ष में आते ही करण ने कहा जी साहब एक तो बारिश का मौसम ऊपर से खेती बाडी के काम में समय ही नहीं मिल पाया । आज सब्जी देने के बहाने आपसे मिलने चले आए । घनशाम ने सब्जियों से भरे दोनों थैलों को बाजू में खडे चपरासी को थमाते हुए कहा लगता है पूरे गांव की सबसे उठा कर ले आए हूँ । करण ने कहा नहीं साहब, इस साल हमारे गांव में सब्जियों का इतना अधिक उत्पादन हुआ है कि गांव वालों के आपस में आदान प्रदान करने के बाद भी बच जा रहा है । मतलब इस साल फसल है । करण ने पूछा हाँ साहब! पूजा जी की सलाह के अनुसार चलने पर इस साल उत्पादन अधिक हुआ है । घनशाम ने आगे कहा, जैविक खाद इवन अच्छे बीच का प्रयोग उस पर पशुओं से नुकसान नहीं होने के कारण तो उत्पादन बढा ही । साथ ही जब लोगों ने देखा कि गांव या बाहर से आए सभी जानवरों को तो गोठान में रखी जा रही है तो टी खेत के बेड में भी कुछ सब्जियाँ होगा लिए । यहाँ तक के नाले के किनारे जहाँ वृक्षारोपण किया गया है उसमें पौधों के बीच स्थित खाली जगहों पर भी कुछ सब्जियाँ लगा दिए हैं तो शहर लाकर बेच क्यों नहीं देते? करण ने कहा बेचेंगे तो अवश्य ही, पर मेरा निवेदन है सर कि यदि इन जैविक सब्जियों के लिए शहर में एक निश्चित स्थान मिल जाता तो अच्छा होता । पूजा ने कहा मुझे मालूम था तुम आई हो तो कुछ ना कुछ नया प्रस्ताव साथ जरूर लाये होगी । करण ने आगे कहा, और हमेशा की तरह तुम्हारा कहना बिल्कुल सही है । मैं तहसीलदार से कह कर के तुरंत ही जगह की व्यवस्था करवाता हूँ । धन्यवाद सर! घनशाम ने हाथ जोडकर आगे कहा ताजा सब्जियों के लिए किसी को हमारे गांव भेजते रहिये सर, किसी को क्यों जरूरत पडने पर हम खुद ही घूमते फिरते चले आएंगे । सरपंची करण ने आगे कहा, छुट्टी का दिन होने के कारण मैंने कहीं जाने का प्लान कर लिया था तो आज मेरा रसोइया भी छुट्टी पर है । वरना आज आप लोगों को भी भोजन करने के लिए कहता । दुख की बात है कि मैं आज ताजा सब्जियों का स्वाद नहीं ले पाऊंगा । कोई मेरा सहयोग करें तो मैं बना दूँ । भाग को खाना बनाना आता है । सरपंच और डीएम दोनों ने एक साथ कहा, अब तो मुझे खाना बनाना ही होगा और वो भी किसी के सहयोग के बगैर ही तो जाने अपने सीट छोड ते हुए कहा ही तो हमारा सौभाग्य होगा पर आप रामू से सहयोग ले सकती है । करण ने रामू को पूजा के साथ रसोई की ओर जाने का इशारा करते हुए कहा, किचन कहाँ है मेरे साथ आइए मैडम कैसे हुए? रामो आगे बढ गया तो पूजा भी उसके पीछे चल पडी । बहुत स्वादिष्ट भोजन बनाया था आपने । मजा आ गया । मैं सही कह रहा हूँ ना । सरपंची करन ने कहा जी सर । गंजाम ने जवाब दिया और पूजा के कानों में कुछ कहने लगा क्या बात सरपंच जी कोई बात है जिसे कह नहीं पा रहे हैं । करण ने कहा आपको कुछ बताना है । पूजा ने आगे कहा, बात ये है कि पिछले तीन महीने में गोठान के खर्चे को काटकर दूध बेचकर हमारे पास बाईस हजार रूपया बचा हुआ है । हम ने सोचा है कि उस पैसे से मछली बीज लेकर बांध के रुके हुए पानी में मछली पालन करेंगे । ये तो बहुत अच्छी बात है । किसानों की आय का साधन बढेगा । करण ने कहा, इसमें कुछ प्रशासनिक अडचनें तो नहीं आएंगी । पूजा ने पूछा नहीं प्रशासन ऐसे किसी भी काम में नियम कायदे की बात नहीं करता जिसमें ग्राम पंचायत की सहमती हूँ । विषेशकर तब तक जब तक कोई नागरिक या ग्राम पंचायत स्वयं ऐसा ना चाहे । करण ने स्पष्ट किया । अब हम लोग निश्चिंत हो गए साहब । पूजा जी नहीं चाहती है कि गलती से भी अब हमसे कोई ऐसा काम हो जिसके कारण प्रशासनिक मुश्किलें खडी हो । घनशाम ने कहा मुझे पूजा से यही एक शिकायती कि वे प्रशासन की और हमेशा ही संशकित नजरों से देखती है । करण ने कहा शमा चाहती हूँ सर पर मैं अपनी कार्ययोजना के लिए कोई भी रिस्क लेने को तैयार नहीं हो । इसलिए हर कदम सोच समझकर उठाना चाहती हूँ । दुर्घटनाओं से सावधानी भली पूजा ने कहा

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 21

किस भाग आठ सरोद के सपनों का राजकुमार घोडी चढकर उसके आंगन में आने वाला है । आर्थिक रूप से संपन्न हो चुके इस गांव में करन की मदद से ऐसे रंगारंग विभाग का समारोह चल रहा है जिसकी कल्पना सरोज ने कभी नहीं की थी । सरोज तो किस्मत वाली है । उसका भाई विदेश जाकर इतना रुपया कमाया की बहन की शादी धूमधाम से हो रही है । सरोज के किसी रिश्तेदार ने कहा विदेश जाकर ही दो साल में इतना रुपया कमाया जा सकता है । यहाँ रहता तो रोजगार ढूंढते ही रहता । भीड के बीच में से किसी ने कहा लेकिन राकेश कहाँ है कहीं दिखाई नहीं दे रहा है । दूसरे ने पूछा कहीं होगा अखिल लडकी का भाई है तो किसी काम में व्यस्त होगा । लेकिन मैंने तो सुना है कि उसने सिर्फ रुपया भेज दिया है और खुद नहीं आया । आपने गलत सुना है चाची शादी में और जो रौनक देख रही है वो मेरे किसान माँ बाबू जी की कमाई और मेरे वो बोले भाई इस जिला के कलेक्टर के कारण है । सरोज ने कहा दो साल पहले ही तो आई थी मैं तब तो तुम्हारी माँ कह रही थी कि इस थोडी सी जमीन की किसानी से बच्चों की पढाई के बाद मुश्किल से घर का खर्च चल पाता है । सरोज की दूर की बुआ ने कहा हाँ दो साल पहले जब मैं यहाँ आई थी तो इतनी रौनक नहीं थी । पर अब तो यहाँ के सब लोगों का घर द्वार और रंग ढंग देखकर ऐसा लग रहा है किसी के पास पैसों की कमी नहीं है । चाची ने पूछा आप सही कह रही है दीदी और इस गांव की उन्नति के बारे में सुन कर ही मैं अपने सगे भांजे की शादी में न जाकर दूर के रिश्तेदार होने के बाद भी यहाँ पर आई हूँ और यहाँ आकर देख रही हूँ तो जितना सुना था उससे भी ज्यादा देख रही हूँ । आप लोग ठीक कह रहे हैं और आप ही नहीं हुआ बल्कि आज यहाँ पर बहुत सारे लोग मेरी शादी के नाम पर हमारे गांव में हुई तरक्की को देखने ही आए हैं । सरोज ने कहा पर ये चमत्कार कर कैसे हुआ, ये है वह चमत्कार । सरोजनी किसी काम में व्यस्त पूजा का हाथ पकडकर सबके सामने लाते हुए कहा चमत्कार नहीं जाती है तो इन गांव वालों की एकता, दूरदर्शिता, विश्वास और मेहनत का प्रतिफल है । पूजा ने कहा ये मेरी सहेली पूजा है । नाले में बांध बनाकर एक फसली गांव को दो फसल की सौगात, आवारा घूमते पशुओं को एक ही जगह एकत्रित करके उससे फसल को बचाने के साथ ही साथ दूध का उत्पादन, बांध में मछली पालन, मशरूम उत्पादन के लिए हमारे गांव की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाने का काम, मुर्गीपालन बकरीपालन साथ में विभिन्न प्रकार की सब्जियों का उत्पादन सब इसकी ही सोच का परिणाम है और बस बस सरोज रहने दे । पूजा ने आगे कहा, मैंने बताया तो चाची की ये सब सुखी इस गांव की मिट्टी से प्यार करने वालों के कारण संभव हो सकता है । एक बात मुझे हूँ हाँ जी । पूजा ने तुरंत कहा तुम इसी गांव में क्यूआई हमारे गांव में क्यों नहीं? आप भी न चाची बाल की खाल निकालती है? पूजा को खामोश देखकर सरोज ने कहा अच्छा तो फिर मुझे राकेश तमिलनाडु में उसी बात करके उसकी होने वाली पत्नी को अपने गांव ले जाउंगी । ये आप क्या कह रही है? चाची ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा आप सोच रही है । मैंने बताया था की पूजा मेरी सहेली है और मेरे लिए ही इस गांव में वरदान बनकर आई है । इस गांव में तो सब के हाथ में रोजगार है और बरसों से हम किसानों की गरीबी तो ऐसे गायब हो गई है जैसे घरे के सिर्फ इसी चाची ने कहा । वहीं तो हमारे गांव को भी कोई पूजा मिल जाती तो हमारी जिंदगी भी समझ जाती । दुआ ने कहा सरोज! देखो तो बेटी कौन आया है । सरोज की माँ की आंखों में चमक और शब्दों से खुशी झलक रही थी भैया, आप माँ के साथ राकेश को देखकर कहते हुए सरोज राकेश के हाथों को छोडने लगी । बडो के हाथ नहीं पैर छूते हैं बेटा । मैं तसल्ली कर रही थी माँ की भैया ही मेरे सामने खडे हैं या फिर मैं सपना देख रही हूँ । सरोज ने कहा मैं तेरा अभागा भाई ही हो रही कहकर राकेश ने बहन का माथा चूम लिया । मेरे साथ आओ भैया पूजा को अपने कमरे की ओर जाते देखकर सरोज भी राकेश का हाथ पकडकर उसके पीछे जाने लगी । देखो पूजा भैया आए हैं । सरोज ने कहा इन्हें मालूम है सरोज राकेश ने कहा मालूम है सरोज ने आश्चर्य से दोहराया हाँ और पूजा के कारण ही मैं यहाँ खडा हो । राकेश ने कहा तुम ने मुझे बताया नहीं । पूजा बूत बनकर खडी हुई पूजा को जोडते हुए सरोज ने कहा उसे परेशान मत करो सरोज पूजा की नाराजगी सही है । पूजा आपसे नाराज भैया । आप कहते हैं कि उसी ने आपको बुलाया भी है । बाहर आज अचानक पूजा के बुलाने पर आप भी गए । ये सब क्या हो रहा है? मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है । सरोज ने कहा आज तुम्हारी शादी है सरोज तो तुम परेशान मत हो । सरोज की दोनों बाहों को पकडकर बिठाते हुए पूजा ने आगे कहा, मैंने सोचा है कि तुम्हारे विवाह में राकेश को होना चाहिए और इसलिए मैंने उन्हें मैसेज करके कहा कि यदि कभी भी बाल के लिए भी आपने मुझे चाहा है तो दो दिन के लिए ही सही पर आ जाए और भैया तुम्हारी बात मान गए जब की दो साल पहले तो आपकी एक न सुनते हुए विदेश चले गए थे । सरोज ने पूछा मान नहीं गए बल्कि टूट गए और प्यारी बहना की शादी की बात सुनकर मुझे फोन करके रो पडे । पर मैंने जब कहा कि यदि बहन से इतना ही प्यार करते हो तो क्यों नहीं जाते हैं तब जाकर अपनी मजबूरी बताई है । पूजा ने कहा कैसी मजबूरी? सरोज ने पूछा माँ बाबू जी की बातों की अवहेलना और पूजा के प्यार की परवाना करने की जो गलती की है उसकी मुझे बहुत बडी सजा मिली है कि ऐसी सजा रहने भी दो । सरोज अभी शादी का माहौल है बाद में पूछ लेना राकेश तो अब यही रहेगा । पूजा ने कहा तो मैं कैसी बातें कर रही हूँ? पूजा मेरे भैया की घर वापसी हुई है और वह दुखी है तो कारण जा रहे बिना मुझे कैसे चलाएगा? राकेश ने फिर कहा सरोज में जिस कंपनी में काम करने गया था, चार माह काम करने के बाद मेरी बदकिस्मती से उस कंपनी में कुछ कर्मचारियों की छटनी करनी पडी जिसमें मैं भी शामिल था । मैं परेशान हो गया कि सबका नो की बातों को अनसुनी करके आया हूँ तो फिर वापस लौटकर कैसे जाऊँ और यॉर्ड भी जाओ तो रोजगार की समस्या से फिर सोचना पडेगा । यही सोचकर दूसरे काम की तलाश में लग गया । मेरे साथ ऑस्ट्रेलिया के निवासी कैथरीन भी उसी कंपनी से निकाली गई थी । उस ने मेरा सहयोग किया और हम दोनों ने मिलकर काम की तलाश की । कम पैसे वाला ही सही पर काम मिल गया । फिर दो महीने बाद ही मेरे सामने एक और समस्या आ गई । अब क्या हुआ? सरोज ने पूछा पिछली कंपनी द्वारा बनवाई गई वीजा की अवधि खत्म हो गई और वर्तमान कंपनी ने वीजा की अवधि नहीं बढाने की स्थिति में नौकरी से निकालने की बात कही । इस बीच परिस्थितियों ने कैथरीन और मुझे बहुत करीब ला लिया था और गैरी ने मुझे अपने प्यार का इजहार करते हुए विवाह का प्रस्ताव रखा । फिर मैंने वीजा की समस्या के समाधान के लिए कैथरीन के कहने पर उस से शादी कर ली । शादी से पहले कैथरी ने मुझसे शर्त रखी कि मुझे भारत नहीं लौटना है । मेरे भी दिमाग में साहूकार के कर्ज से मुक्ति पाने का भूत सवार था क्योंकि ये कर्ज मेरी पढाई के लिए ही लिया गया था । तो मैंने ये सोच करके उसकी शर्त मान ली की चुकी कैथरीन मुझ से प्रेम करती है तो शादी के बाद मेरे माता पिता के प्रति मेरी भावनाओं को समझेगी और मुझे अपने देश आने से नहीं रोकेगी । पर मैं भूल गया कि ऐसा समझौता सिर्फ हमारे देश की लडकियाँ ही कर सकती है । और फिर मैंने जब अपनों के साथ न्याय नहीं किया था तो मेरे साथ भी तो न्याय होना था । कैथरीन ने शादी के बाद घर वालों से बात तक न करने की हिदायत दी और एक दो बार जब तुम से और पूजा से बात हुई तो वो अपना आपा खो बैठे और मेरा पासपोर्ट, वीजा सब पढते हुए कहने लगे कि हम दोनों खुशी से रहेंगे पर यदि परिवार से बात भी की तो महिला उत्पीडन का केस दर्ज करवा कर हवालात भेजने से भी पीछे नहीं हट होंगे । और इतना सब होने के बाद भी जनाब ने हमें कुछ नहीं बताया था । पूजा ने आगे कहा जब तुम्हारी शादी की बात पर रो पडे तो मेरे बहुत जोर देने पर अपनी राम कहानी सुनाई । फिर भैया का आना कैसे संभव हुआ सर । उसने पूछा डीएम साहब के कारण संभव हो पाया । राकेश ने कहा मतलब करण भैया ने सहायता की । हाँ सरोज मैंने डीएम साहब को सारी बातें बताई तो उन्होंने अपने एक वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से जो कि उच्च शिक्षा के लिए इस समय ऑस्ट्रेलिया में हैं राकेश की मदद की और अब वो हमारे सामने हैं और तुम्हारी शादी से पहले पहुंच सको इसलिए स्वयं ही मुझे एयरपोर्ट तक लेने गए थे । राकेश ने कहा अब बातें बाद में करना राकेश तुम जल्दी से तैयार हो जाओ । नीरज एवम बरातियों को लेने एयरपोर्ट जाना है । राकेश के मैंने कहा ठीके माँ तुमने माँ को देखा । पूजा भैया के आते ही उनके चेहरे पर चमक आ गई है । सिरोज ने कहा हाँ ना उम्मीदी के बाद मिलने वाली खुशी कुछ ज्यादा ही प्यारी होती है । वैसी चमक तो तेरे चेहरे की भी बढ गई जबकि दुल्हा तो अभी पहुंचा ही नहीं है । पूजा ने कहा बस पहुंच नहीं वाले हैं तो आप लोग की बातों को विराम देकर तैयार हो चाहिए । करण ने कमरे में प्रवेश करते हुए कहा थैंक यू सर । कहते हुए पूजा उनके गले लग गई तो क्योंकि करण ने मुस्कुराते हुए पूजा के सर पर हाथ फेरते हुए आगे कहा, तुम लोग जल्दी बाहर आओ, मैं चलता हूँ । अब तो मैं क्या हुआ? तैयार नहीं बनाया गया । सरोज को मुझे लेकर बैठते हुए देख पूजा ने पूछा एक बात करुँ पूजा तो मैं बुरा तो नहीं लगेगा ना । ऐसी कौन सी बातें, सरोज डीएम साहब का मेरे विवाह में सहयोग करना और मुझे अपनी बहन बनाने का कारण एवं इस गांव पर प्रशासनिक बहर बाने का कारण कही तुम तो नहीं हो? पूजा तुम कहना क्या चाह रही हूँ? सरोज क्या तो सच में नहीं समझ रही हूँ । पूजा चलो मैं स्पष्ट कहती हूँ कि तुम डीएम साहब से प्यार तो ये समय इन सब बातों के लिए नहीं है । सरोज पूजा ने कहा कि जानती हूँ पर डीएम साहब से तुम्हारा गले मिलना मेरे गले से नहीं उतर रहा है । मैं ये भी जानती हूँ कि तुम राकेश भैया से बहुत प्यार करती हूँ और उनके लिए कुछ भी कर सकती हूँ । पर ये भी स्वीकारती हूँ कि भैया ने तो मैं बहुत दुख दिए हैं, लेकिन अनंत है तुम्हारे ही कहने पर भैया वापस भी तो आ गए हैं । पूजा तो क्या तुम भैया को माफ नहीं कर सकती? अभी मेरे पास तुम्हारे इन सवालों का कोई जवाब नहीं है । सर्वोच्च पर हाँ इतना जरूर कहूंगी कि राकेश के आने की खुशी में साहब को धन्यवाद देते हुए अनायास ही उनसे गले मिलना हो गया । और इतना तो तुम भी जानती हूँ कि डीएम साहब भी मेरी तरह गांव और किसानों के विकास में अपने सपने को साकार करने के लिए हमारी प्रशासनिक मदद कर रहे हैं और उन का तो काम ही यही है । मेरी बातों को तुम अन्यथा नहीं लेना । पूजा पर मैं यही चाहती हूँ कि मेरे गांव में आई खुशहाली हमेशा बनी रहे, जो तुम्हारे बिना संभव नहीं है । अपने मन से डर को निकाल दो सरोज किस गांव में बदहाली अब पलट कर कभी भी आएगी मैं पूर्णतः । मैं आश्वस्त हूं कि मैं तुम नीरज लिया । डीएम साहब के नहीं रहने पर भी इस गांव में उन्नति को अब कोई नहीं रोक सकता, क्योंकि इस गांव के किसानों ने बदहाली के दिनों का दाह संस्कार नई सोच एवं उन्नति की अग्नि से कर दिया है । ऐसा क्यों? गहरी हो पूजा तो मैं तो यही रहना है । तो फिर वही बात तो मैं तैयार होना भी है या नहीं । हमारी बातें तो चलती रहेगी पर आज तुम्हारी सपनों का राजकुमार आने वाला है तो चलो सजना है तुम्हें सजना के लिए ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 22

बाईस भाग इस गांव को देखकर अब तो मुझे गांव के प्रति अपनी सोच को बदलना होगा । नीरज की माने विवाह के बाद भोजन करते हुए कहा तो गांव के प्रति आपकी क्या सोच थी? करण ने पूछा मैंने तो सोचा था कि गांव का मतलब सिर्फ कच्चे मकान, गलियों में घूमते हुए आवारा पशु और उन पशुओं के मूत्र, गोबर से फैली हुई गड्डी की, किसानों के पिचके हुए गाल और माथे पर चिंता की लकीरें और मैली कुचैली घूंघट में लिपटी हुई औरते बिल्कुल प्रेम चंद्रा जी के उपन्यास के हीरो की तरह मेरी हम पर यहाँ तो बहुत आयात पक्के मकान है । गलिया साफ सुथरी और चारों तरफ फैली हुई हरियाली है । गांव के हर किसान के चेहरे पर मुस्कान के साथ चेहरे पर रौनक भी है । आज से पहले तक अपने इकलौते बेटे का वैवाहिक संबंध इस गांव से जोडना हमारी मजबूरी थी । पर अब मुझे अपने बेटे की पसंद पर गर्व हो रहा है । सरोज जैसी सुलझी हुई लडकी और स्वयं के प्रयासों से आर्थिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक रूप से समृद्ध होने के साथ साथ हरियाली की गोद में बैठे हुए इस गांव से जुड कर मैं गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ । आपको ये जानकर के और भी प्रसन्नता होगी कि इस गांव के इस परिदृश्य में आपके बेटे नीरज का भी बहुत बडा योगदान है । करण ने कहा मैं तो अब सबको बडे गर्व के साथ बताउंगी की पहले फिल्मों में हम जिस तरह की सांस्कृतिक और प्राकृतिक समृद्धि का अनूठा संगम देखते आए हैं और हरयाली जिसका कहना हुआ करती थी वैसे ही बल्कि उससे भी सुन्दर यह गांव और इस गांव की परिकल्पना करने वाली पूजा हमारे ही परिवार की लडकी है और पूजा के सपनों को सच करने में मेरे बेटे और बहू दोनों का महत्वपूर्ण योगदान है । नीरज की मैंने कहा लेकिन चाची जी ये गांव तो मात्र एक नमूना है हरी से देख कर अब आस पास के गांव वालों के सपनों को भी पंख लग रहे हैं और मेरा बस चले तो इन सब गांवों में जाकर काम करूँ पर मैं जानती हूँ की ये संभव नहीं है । पूजा ने कहा क्यों संभव नहीं ये पूजा नीरज की माने पूछा क्योंकि पैसों की भी जरूरत पडती है और मेरी जमा पूंजी इस एक गांव में ही सिर्फ आंशिक रूप से सहयोग कर पाई है । पूजा ने कहा सब गांव के लिए तो हम भी सक्षम नहीं है पर मैं इतना कह सकती हूँ कि नीरज की शादी यदि हम अपनी इच्छानुसार करते तो इस विवाह से दस गुना अधिक रुपया खर्च होता । तो आज अपने बेटी की शादी के शुभ अवसर पर मैं किसी एक गांव के लिए आने वाले खर्च को वहन करके मैं भी अपने परिवार की तरफ से मेरे भारत की पहचान गांव को सुदृढ करना चाहूंगी । पर गांव का चयन तुम करना । पूजा फिर सरोज के बाबू जी की और देखते हुए नीरज की माने । आगे कहा, नीरज ने मुझे बताया था कि राकेश ऑस्ट्रेलिया चले जाने के कारण इस गांव को सरोज और साथ में नीरज की भी जरूरत है तो सरोज की माँ बाबू जी के प्रति निष्ठा का सम्मान करते हुए हम सहर्ष तैयार है । पर आज मुझे मालूम हुआ कि राकेश लौट आया है तो भारतीय परंपरा के अनुसार बहुत अपने साथ ले जाने के लिए मेरा भी मन कर रहा है । इसलिए राकेश की वापसी पर आपसे ज्यादा खुशी मुझे हो रही है । माँ बाबू जी ने तो पहले से तय कर लिया था कि कन्यादान के बाद कन्या ससुराल में ही रहेगी । पूजा ने आगे कहा, सरोज के बाद इनके पास मैं तो हूँ पर राकेश के लौटने से मुझे अन्य गांवों को भी अपने सपनों के गांव की तरह बनाने की योजना की ओर बढते रहने का रास्ता मिल गया है और हमने तय किया है कि बडे शहर और आधुनिक जीवन में रहते हुए भी अब हमेशा अपने गांव एवं अपनों के संपर्क में रहेंगे । हमने गांव से विमुख होकर जाना है की दूर के ढोल सिर्फ सुहावने ही होते हैं । अब जब भी हमें छुट्टी बितानी होगी हम गांव ही आएंगे नीरज की मैंने कहा नीरज की माँ से ही कह रही है और मैंने अभी अभी निर्णय लिया है कि अगले साल रिटायरमेंट के बाद मैं अपने पैतृक गांव जाकर पूजा की कार्ययोजना पर काम करूंगा । नीरज की पापा जो अब तक सब कुछ सुन रही थी उन्होंने भी चुप्पी तोड ही दी ।

मेरे सपने मेरा गाँव - भाग 23

भाग आज का दिन तो तुम्हारे लिए बहुत महत्वपूर्ण बनने जा रहा है । फिर ये आंसू क्यूँ? करण ने पूजा की आंखों को आंसू से भरे देखकर कहा मुझे पापा की बहुत याद आ रही है सर तो जा रहे आंसू पहुंचते हुए आगे कहा आज यदि वे होते तो बहुत खुश होते हैं । आज के दिन याद करना तो बनता ही है पर अपनी बहादुर बेटी को आंसू बहाते तहसीलदार साहब को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा । और मैं तो ये मानता हूँ कि आज तो मैं जो पुरस्कार मिलने जा रहा है उसका कुछ न कुछ रे तुम्हारे पापा को भी जाता है । कुछ नहीं सर । अधिकतम श्री उन्हें की आशीर्वाद का फल है । मुझे जानकर अच्छा लगा कि कम से कम कुछ तो तुमने अपनी मेहनत और लगन को भी दिया और ये जरूरी भी है ताकि भविष्य में तुम्हें और भी कुछ अच्छा और नया कार्य करने की प्रेरणा मिले । करण ने कहा बचे हुए श्री के हकदार तो आप और गांव वाले एवं हाँ बाबू जी है सर ये तो तुम्हारे साथ ज्यादती होगी । पूजा नहीं होगी सर । क्योंकि आप भी जानते हैं कि आप नहीं होते तो शायद अब तक में टूटकर दिखा चुकी होती है । और सबसे बडी बात तो ये है कि हमारी सफलता और क्रिया कलाप को शासन प्रशासन की नजरों तक लाने का श्रेय आपको जाता है । जिसके कारण अब मैं उम्मीद करती हूँ कि चाचा चाची जैसे आर्थिक रूप से सक्षम लोगों का गांव की और आकर्षण बढेगा । जबकि माँ, बाबूजी और गांव वालों का साथ नहीं होता तो मैं अपनी कार्ययोजना को मूर्तरूप नहीं दे पाती । पूजा ने कहा तो तुम्हारे इसी समर्पण के भाव ने मुझे सर्वाधिक प्रभावित किया है । पूजा कितनी आसानी से तुमने अपनी मेहनत का श्रेय लुटा दिया । तुम्हारी जगह कोई और होता तो अपनी कार्ययोजना और मेहनत पर बडी बडी बातें करता होता । आज के समय में तुम्हारी जैसी लडकी का मिल पाना कम से कम मेरे लिए तो सपना है । ये बातें अब तक आप उस से कई बार कह चुके है सर और हमेशा की तरह आज भी यही कहूंगी कि आपकी अच्छाई का प्रतिफल है कि मेरी तारीफ कर के मुझे प्रोत्साहित करते रहते हैं तो पूजा ने कहा और अब तो सिर्फ तारीफ भी कर सकता हूँ । मतलब पूजा ने पूछा यही तो मेरी समस्या है पूजा की तुम सारी बातें तो इशारों में ही समझ जाती हूँ पर मैं अपने दिल की बात तो में कभी समझाने पाया और अब तो मैं मेरी जरूरत भी नहीं है । करन की बातों से मायूसी झलक रही थी । अब जरूरत नहीं है का क्या मतलब । तुम्हारा राकेश जो वापस आ गया है । करण ने कहा तो हो तो ये कारण है पिछले दिनों से आपके रूखेपन का । पूजा ने आगे कहा, तभी तो मैं सोच रही थी कि मुझसे क्या गलती हो गई है कि आप बदले बदले से नजर आ रहे हैं । वहाँ मुझे राकेश से एशिया हो रही है । करण ने स्पष्ट शब्दों में कहा तो आपने सिर्फ मेरे कारण हमारी कार्य योजना को सफल बनाने में मदद की है । पूजा ने पूछा ऐसी बात नहीं है पूजा तुम्हारी जगह कोई और भी होता तभी मैं इस कार्य को आगे बढाने में भरपूर सहयोग करता हूँ । करण ने कहा यही बात मैं भी कहना चाहती हूँ की मैं मानती हूँ कि अपने आगे बढकर हमें प्रोत्साहित किया है । पर यदि आपकी जगह कोई और भी कलेक्टर होता तब भी हम गांव वाले उनसे यथा सम्भव प्रशासनिक सहयोग की मांग अवश्य करते । वही तो मैं भी कह रहा हूँ कि अब गांव वाले इतने सक्षम और सुदृढ हो गए हैं । कि पहली बात तो ये कि उन्हें किसी की जरूरत नहीं है और यदि जरूरत पडी भी तो आपने ऐसा कर दिया है कि प्रशासन उसके द्वार तक चल कर आएगा, गांव वालों को नहीं । पर स्वयं के लिए कह सकती हूँ कि मुझे आप की जरूरत है कहते हुए पूजा भावुक हो गई । मतलब करण को तो जैसे बिजली के नंगे तार ने छू लिया । मुझे तुम्हारी आदत पड गई है । करन कहते हुए पूजा ने उनके कंधे पर सिर रख दिया । ड्राइविंग सीट पर बैठे करण को कुछ समझ में नहीं आया और उसने अचानक ही गाडी रोक दी । झटके के साथ कार के रुकते ही पूजा का सेल कंधे से सीने पर आ गया और उसने करण पर पकड मजबूत करते हुए कहा क्या हुआ गाडी के रोक भी कमाल करती हो या ऐसा झटका दोगे तो गाडी तो क्या दिल की धडकने रुक जाएं । गहरी सांस लेते हुए करण ने कहा देखो मेरे दिल की धडकने कैसे बे लगाम दौड रही है । लगाम लगाइए साहब क्योंकि अब हमारी धडकनों को साथ चलना है तो तू जाने । करण के सीने से अपना सिर अलग करते हुए आगे कहा अब चलो भी पिछले ढाई सालों से कल्पना करता रहा कि बांध के ऊपर पानी में पैर फट गाती हुई या मेरे बंगले के बगीचे में खूबसूरत फूलों के बीच क्या हो सकता है? अपने गांव में पहले सरसों के पीले फूलों के बीच मेरे प्रेम का प्रति उत्तर दोगे पर तुमने तो उन कल्पनाओं से भी अधिक खूबसूरती से इजहार ए मोहब्बत किया है । प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान लेने के लिए जाते हुए अपने पापा के आशीर्वाद से सरोबार मेरे बगल वाली सीट पर बैठी हुई पूरे रोमेंटिक तरीके से मुस्कुराते हुए धीमी गति से कार चलाते हुए करण ने कहा तो में अच्छा लगा यह जानकर मुझे खुशी हुई जबकि अब तक मैं यही सोचती रही कि अपने मन की बात कैसे करूँ । मुझे तो मेरी खुशी मिल गई पर राकेश मुझे गलत उम्मीद लगाकर बैठा है । मेरे प्यार को मेरी कमजोरी समझ बैठा है । उसे लगता है कि उसके प्रेम की खातिर मैं उसके माँ बाबूजी का साथ देते रहे और उनका ये सोचना सही भी है । और सच कहूँ तो राकेश को में कभी बुलाया भी नहीं सकती क्योंकि उसके प्रेम ने मुझे महत्वपूर्ण दो चीजे दी है । कौनसी करण ने पूछा । राकेश के माता पिता ने मुझे अपनी संतान की तरह चाहा और दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि राकेश ने अपने सपनों के लिए मुझे ठुकरा दिया तो मुझे भी अपने सपनों को साकार करने की जिद आ गई । हाँ, मैंने उसे दिल से चाहता और हाँ अभी भी वो मेरे मित्र है । पर मैं धरती माँ और माँ नहीं हूँ कि अपने आंसुओं को भूल जाऊँ । बहुत रुलाया है उसने । मुझे गांव में निर्मित बांध का एक एक पत्थर मेरे आंसुओं के साथ ही बने हैं । आपको यकीन नहीं होगा कभी कभी तो मुझे लगता था कि यदि बारिश नहीं भी हुई तो इस बांध के लिए तो मेरे आंसू ही काफी होंगे । बहुत आंसू बहाली पर अब और नहीं कहते हुए करण ने अपना जो माल देते हुए आगे कहा, आंसू पहुंच लोग तो खुशी का दिन है तो हर में पूरी कोशिश करूंगा कि अब कभी भी तुम्हारी आंखों में और सुना है । देखो बातों ही बातों में हम राजभवन भी पहुंच गए । आज के इस सम्मान समारोह में अब राज्यपाल महोदय का आगमन हो चुका है । माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा राज्यपाल महोदय का पुष्प गुच्छ से स्वागत करने के पश्चात मैं प्रदेश के सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने के लिए पूजा को आमंत्रित करती हूँ । वैसे तो पूजा जी किसी भी परिचय की मोहताज नहीं है । उनका गांव और किसानों के लिए बनाई गई कार्ययोजना की सफलता के पश्चात गांव के विकास और किसानों की आत्मनिर्भरता की चर्चा आज सिर्फ हमारे प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हो रही है । पिछले कई दिनों से पूजा जी एवं उनकी सफल कार्ययोजना अखबारों की सुर्खियां बनी हुई है तो किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाने के अपने सपनों को मूर्त रूप देने वाली पूजा को प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने के लिए मैं मंच पर आमंत्रित करती हूँ । मंच से आवाजाही और पूजा सफलता से मंच की और बढ गई राज्यपाल द्वार पूजा को प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान प्रदान करने के पश्चात पूरे हॉल में गूंजती तालियों की गडगडाहट के बीच मैं पूजा को माइक पर आमंत्रित करती हूँ । वो आई और दो शब्द कहे धन्यवाद माइक पकडते हुए पूजा ने आगे कहा, सर्वप्रथम प्रदेश का सर्वोच्च सम्मान देने के लिए मैं सरकार को धन्यवाद देती हूँ और पुरस्कार की संपूर्ण राशि अपने गांव को समर्पित करती हूँ क्योंकि सम्मान के असली हकदार तो मेरा गांव है । मेरे गांव की एकता और मेरे गांव के लोगों की मेहनत है । उस गांव में मुझे अनाथ को ना सिर्फ माता पिता का पिया बल्कि अपनापन और वह विश्वास दिया जिसके कारण आज गांव का हर किसान खुशहाल है । मैं गर्व के साथ आप सब को बताना चाहूंगी कि आज मेरे गांव का प्रत्येक किसान कर्ज मुक्त है और हर हाथ के पास कम है । तालियों की गडगडाहट के बीच कुछ देर की चुप्पी के बाद नम आंखों के साथ पूजा ने पूने कहना शुरू किया । इस खुशी के मौके पर मुझे दुख इस बात का है कि यदि पशुओं को आवारा छोडने की बजाय मेरे गांव की तरह प्रतीक गांव में गोठान बनाकर एकत्रित रखते तो शायद में अनाथ नहीं होती । आज मेरे माता पिता मुझे बहुत याद आ रहे हैं । मैं मुख्यमंत्री जी से निवेदन करती हूँ कि मेरे माता पिता की तरह कोई और दुर्घटना का शिकार ना हो इसके लिए कोई पहल करें । राज्यपाल महोदय को अभिवादन के पश्चात मुख्यमंत्री ने आगे कहा, सबसे पहले तो मैं पूजा जी को बधाई देता हूँ कि इतनी कम उम्र में आपने वो कर दिखाया जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी । मुझे आपके माता पिता के लिए दुख है । मैं उन्हें लौटा तो नहीं सकता पर ऐसी दुर्घटना न दोहराई जाएगी । इसके लिए पूजा जी की कार्ययोजना के मॉर्डल को प्रदेश के गांवों और किसानों के चहुंमुखी विकास के लिए नरवा गरवा गुरुवा बाडी के नाम से पूरे प्रदेश में लागू करने की घोषणा करता हूँ । हॉल में उपस् थित किसानों और बुद्धिजीवियों की तालियों के बीच मुख्यमंत्री जी ने आगे कहा कि नरवा गरवा गुरुवा बाडी के सफल संचालन के लिए मैं आईएस करण को पूजा की कार्य योजना को सफल बनाने में प्रशासनिक सहयोग के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्हें पूरे प्रदेश में इस मिशन का विशेष प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त करने के साथ ही पूजा को मुख्य सचेतक नियुक्त करता हूँ । पूजा एवं करण को नए पद के लिए बधाई देते हुए ये उम्मीद करता हूँ कि उसे गांव की तरह पूरे प्रदेश के गांवों एवं किसानों की समृद्धि के लिए कार्य करें । मेरी शुभकामनाएं एवं मेरी सरकार आपके साथ है ।

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