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मेरा उकाब -1

अच्छा आप सुन रहे हैं कुकू एफएम पर रोहित वर्मा रिंपू की लिखी कहानी मेरा होगा और मैं हूँ ऍम सोने जो मन चाहे पाठे पं काज तो बेटा पंकज बेटा किधर है तो पंकज बेटा पंकज की माँ अपने बेटे पंकज को ढूंढने के लिए आवाज ही लगा रही होती है । वह काफी देर से उसे ढूंढ रही होती है परंतु वो कहीं नहीं मिलता है । आखिरकार थक हारकर वह अंतिम बार जोर से अपने बेटे पंकज का नाम पुकारती है । परंतु पंकज का फिर भी कोई जवाब नहीं आता । उसकी माँ थक हारकर उसे ढूंढते हुए घर की छत पर बने कमरे में देखती है और पंकज वहाँ पर होता है । पंकज वहां बैठ कर अपने गेदार के साथ गायन का अभ्यास कर रहा होता है । पंकज को गिटार के साथ गाते देख उसकी माँ उस पर गुस्सा होती है और कहती है कि ये देखो मैं कितनी देर से पंकज पंकज चला रही हूँ और ये लालसाहब की अपना तंबूरा लेकर यहाँ सबसे छिपकर अपना गला फाड रहे हैं । ऍन अगर एक मिनट के अंदर अंदर तो नीचे नहीं आया तो तेरा ये तंबूरा उठाकर में बाहर फेक देंगे । ये है पंकज यानी कहानी का मुख्य पात्र इससे पहले की कहानी को शुरू करें । हम हम पंकज और जिंदगी के बारे में कुछ बातचीत कर लेते हैं और इस दौरान हम उसके परिवार के बारे में भी कुछ जान पहचान कर लेते हैं । पंकज के परिवार में पंकज के अलावा उसके पिता, उसकी सौतेली माँ और उसका एक छोटा सौतेला भाई चेतन और एक छोटी सौतेली बहन सपना रहते हैं । पंकज के पिता की शहर के मुख्य बाजार में किराने की दुकान है और उसी किराने की दुकान के ऊपर वो अपने परिवार के साथ रहते हैं । पंकज की सौतेली माँ रिश्ते में उसकी दूर की मौसी भी लगती है । दरअसल हुआ यूं कि जब पंकज की उम्र करीब एक साल के आस पास ही तो पंकज की मां काफी बीमार हो गई थी । पंकज के पिता ने उनका बहुत इलाज करवाया लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नजर नहीं आया । एक दिन पंकज की माँ ने उसके पिता से कहा, सुनो जी अभी कुछ समय पहले डॉक्टर साहब यहाँ आए थे और मेरे स्वास्थ्य की जांच करते हुए उन्होंने कहा कि मैं कुछ ही दिनों की मेहमान हूँ । तुम चिंता मत करो । हम किसी और डॉक्टर के पास जाएंगे और तुम्हारा इलाज अच्छे से करवाऊंगा तो जल्द ही स्वस्थ हो जाओगी? नहीं ऐसा नहीं होगा । मुझे पता है कि मैं अब कुछ दिनों की ही मेहमान । आप मेरी एक बात मानोगे पंकज की माँ से ये सुनकर वो खामोश से हो गए । शायद वही सच्चाई को उनसे पहले जानते थे । कुछ समय के बाद उन्होंने उदासी भरे लहजे में कहा, बोलो तुम क्या कहना चाहती हूँ । मेरा बचना नामुमकिन है तो उनका जभी बहुत छोटा है । आप इसकी देखभाल नहीं कर पाओगे । अगर मेरी बात मानो तो आप दूसरी शादी कर लो । ये तुम कैसी कैसी बातें कर रही हूँ । भगवान ने चाहा तो तुम जल्द स्वस्थ हो जाओगी । आप भी जानते हो कि ऐसी बातें मन को समझाने के लिए काफी अच्छी हैं लेकिन असलियत में ऐसा कुछ नहीं होगा । मेरी डॉक्टर से सारी बात हो चुकी है । मैं अब ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं बच्चों की । मैं चाहती हूँ कि मेरे मरने के बाद तो मेरी मामा जी की लडकी तो मन से शादी करेंगे लेकिन लेकिन क्या? लेकिन क्या तो मारे मामा जी इस बात के लिए मान जाएंगे और फिर उनसे इस बारे में बात कौन करेगा? क्योंकि अगर आज मेरे माता पिता जिंदा होते तो ये बात कर लेते हैं । लेकिन तुम तो जानती हूँ कि जब से उनकी मृत्यु हुई है तब से मैं अकेला पड गया । उनके सिवा मेरा इस दुनिया में कोई नहीं था । उनके पर लोग सिद्धार्त एहि मेरे बाकी के रिश्तेदारों ने भी मुझसे मोहन मोड लिया था । वो सब तुम मुझ पर छोड दो, तुम बस हाँ हूँ और बाकी का काम मुझ पर छोड दो । मैं खुद मामा जी से इस बारे में बात कर लेंगे । कुछ देर बहस बाजी के बाद पंकज के पिता शादी के लिए राजी हो जाते हैं क्योंकि पंकज के पिता के माता पिता की मृत्यु के कारण उसके परिवार से इस बारे में बात करने वाला कोई नहीं होता तो पंकज की माँ ही अपने मामा से बात करती है क्योंकि पंकज के पिता के माता पिता की मृत्यु के कारण उसके परिवार से इस बारे में बात करने वाला कोई नहीं होता तो पंकज की माँ ही अपने मामा से बात करती है और आपने रहते अपने पति की शादी की बात अपनी मामा की बेटी से करवा देती है । इसके कुछ दिनों बाद पंकज की मां परलोक सिधार जाती है और जैसा की पहले से तय होता पंकज के पिता अपनी पत्नी यानी पंकज की माँ की मृत्यु के कुछ दिनों के बाद दूसरी शादी कर लेते हैं । पंकज के पिता ने ये शादी अपनी पत्नी की बहन से ये सोचकर की थी कि वह उसके छोटे बच्चे यानी पंकज की देखभाल अच्छे से करेगी । लेकिन सब कुछ उस की सोच से विपरीत होता है । पंकज की सौतेली माँ सच में उससे सौतेले जैसा व्यवहार करती है । शादी के कुछ दिनों तक तो वह पंकज की देखभाल करती है लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया वो उसे अनदेखा करने लगी । पंकज के प्रति उसके व्यवहार में काफी कठोरता थी । बेशक वो रिश्ते में उसकी सौतेली माँ थी लेकिन वो एक रिश्ते से पंकज की मौसी भी थी । लेकिन इस दोहरे रिश्ते के बावजूद वो पंकज को प्यार नहीं करती थी । कुल मिलाकर वो उसे अपना नहीं सकी । इस बात को लेकर पंकज के माता पिता में अक्सर झगडा होने लगा था तो पंकज की माँ बहुत ही गुस्सैल स्वभाव की थी जिस वजह से वो पंकज के पिता से किसी ना किसी बात पर झगडती रहती थी । दूसरी तरफ पंकज के पिता ने उसे समझाने की बहुत कोशिश की । यहाँ तक कि अपनी पत्नी के स्वभाव के बारे में उसके माता पिता यानी अपने साथ ससुर से भी कई बार बात की लेकिन पंकज की मां किसी की नहीं मानती थी । अपने माता पिता के समझाने से वो कुछ दिनों तक तो ठीक रहती है लेकिन उसके कुछ दिनों के बाद ही वो फिर से अपने स्वाभाविक रूप में आ जाती है । पंकज के पिता अपनी पत्नी के इसको सेल स्वाभाव और हर समय झगडते रहने की वजह से बहुत परेशान थीं । समय गुजरता गया पंकज के पिता अपनी पत्नी का स्वाभाव तो नहीं बदल सके लेकिन उन्होंने अपना स्वभाव बदल लिया । उन्होंने अपनी दिनचर्या में बदलाव कर लिया और अपने ही घर में समय कम बिताने लगे और अपने आप को अपनी दुकान के काम में व्यस्त कर लिया । पंकज के पिता सुबह चार बजे के आस पास वोट जाया करते और आधे पौने घंटे में नहा धो कर अपने मंदिर वाले कमरे में बैठ जाया करते हैं और लगभग एक से डेढ घंटा पूजा पाठ किया करते । पूजा पांच के बाद वो अपनी किराना की दुकान खोल लेते हैं और लगभग सारा दिन वही बैठे रहते हैं । वो रात को भी बहुत ही देर से दुकान को बंद करते । दुकान के ऊपर घर होने की वजह से वह चाहकर भी घर नहीं जाते हैं । घर आकर वो बिना किसी पारिवारिक सदस्य से ज्यादा बात किए । कोई मिलाकर वो अपनी पत्नी के गुस्सैल स्वभाव को नजरअंदाज करने की कोशिश करते रहे । लेकिन जब कभी पानी सिर से ऊपर उठ जाता है तो वो अपनी पत्नी का विरोध भी करते थे । पंकज की माँ को उनकी दुकान पर आने की सख्त मनाही थी । वो इसलिए क्योंकि उनकी दुकान शहर के व्यस्त बाजार के ठीक बीचोंबीच थी और पंकज के पिता अपनी पत्नी के स्वभाव को अच्छी तरह से जानते थे । वो नहीं चाहते थे कि उनकी पत्नी दुकान में आकर व्यस्त का झगडा करेंगे जिससे कि उनकी दुकानदारी पर खराब असर पडे । अपनी पत्नी के स्वभाव की वजह से उन्होंने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के घर आना जाना और मेलजोल लगभग बंद कर दिया था और न ही उनके घर में उनका कोई रिश्तेदार आता जाता था । जिस वजह से वो लगभग अकेले पड चुके थे । लेकिन इस बारे में उन्होंने कभी भी भगवान से कोई शिकायत नहीं की । वो इसे भगवान की मर्जी समझकर जिंदगी काट रहे थे । बातों बातों में मैं अपना परिचय देना तो भूल ही गया । दोस्तों मेरा नाम मोहित शर्मा है और मेरा पंकज के साथ दूर दूर से कोई रिश्ता नहीं था । बिल्कुल सही कहा मैंने की मेरा पंकज और उसके परिवार के साथ दूर दूर से कोई संबंध या रिश्ता नहीं है तो फिर हम दोनों दोस्त कैसे बनेगा? हुआ यूं कि बहुत साल पहले मैं अपने माता पिता के साथ रेलगाडी द्वारा हरिद्वार जा रहा था । कुछ देर के बाद एक आदमी अपने परिवार के साथ हमारे डिब्बे में चढ गया । मैं रेलगाडी के डिब्बे के ऊपर की जगह पर बैठा था । रेलगाडी में बहुत भीड होने की वजह से उस आदमी ने अपने दो साल के बच्चे को मेरे साथ बैठा दिया । वो बच्चा कोई और नहीं बल्कि पंकज था । वो बहुत शरारती था जिस वजह से मैंने और पंकज अपने पूरे सफर के दौरान बहुत मौज मस्ती की । पंकज अपने आस पास के लोगों की नकल उतारकर सबका मनोरंजन कर रहा था । कभी वह चाय बेचने वाले लडकों की नकल उतारता तो कभी समोसा वगैरह बेचने वालों की नकल उतारता । पंकज की उन नटखट शरारतों ने वहाँ बैठे सभी सहयात्रियों का मन मोह लिया था और शायद इन्हीं शरारतों की वजह से मेरी दोस्ती पंकज से हो गई । पंकज से मेरी दोस्ती की वजह हम दोनों के परिवार काफी घुल मिल गए थे । संयोग वर्ष हम दोनों परिवार हरिद्वार में एक ही सराय में ठहर गए जिससे हमारी दोस्ती और भी गहरी हो गई । हरिद्वार से अपने घर आने के बाद हम दोनों परिवारों में एक दूसरे को फोन करने का सिलसिला शुरू हो गया । पंकज की मां काफी मिलनसार स्वभाव की थी और उन्होंने हमें कई बार अपने घर आने का न्यौता भी दिया । लेकिन हम अपने निजी जिन्दगी में व्यस्त होने की वजह से बार बार उनके न्यौते को टाल देते थे । एक दिन की बात है हमें एक होना है । मैंने फोन उठाया और कहा चलो जी कौनसा बोल रहे ऍम बेटा क्या मेरी बात मोहित से हो रही है? मैं पंकज का पिता बोल रहा हूँ । हाँ जी नमस्कार अंकल जी बोलिये मैं मोहित बोल रहा हूँ बेटा वो बात ऐसी है कि पंकज की माँ का देहांत हो गया । वो कब हुआ ये अंकल जी बेटा आज सुबह हुआ है और तुम अपने परिवार को भी इस बारे में बता देना । पंकज की माँ की अचानक मृत्यु की खबर सुनकर मैं हैरान हो गया और मैंने फोन पांच खडे अपने पिता को पकडा दिया । क्या हुआ भाई साहब, ये सब अचानक कैसे हो गया? पिता जी ने पंकज के पिता से पूछा कुछ नहीं भाई साहब । पंकज की माँ बहुत दिनों से बीमार थी और फिर भगवान की मर्जी को कौन टाल सकता है । कल सुबह उनका संस्कार है । अगर आप आ सकते हो तो जी भाई साहब, आप चिंता ना करें, हम कल सुबह जरूर आ जाएंगे । पंकज के पिता से बात करने के बाद मेरे पिता ने फोन बंद कर दिया और उदास लहजे से कहा, बेटा ये तो बहुत बुरा हुआ । हाँ पिताजी बुरा तो हुआ है, लेकिन इसमें हम कर भी क्या सकते हैं । शायद भगवान की यही मर्जी हूँ । बेटा तो एक काम कर क्या? बेटा तो अभी के अभी पंकज के घर की ओर रवाना हो जाए और उसे जाकर संभाल । वो क्यों? पिताजी मेरा तो समझ नहीं रहा । बेन माँ के बच्चा है । उसे तो समझ नहीं होगी कि उसके साथ क्या हुआ है । मेरी बात मान और देर मत कर । जल्दी से पंकज के पास पहुंचकर देखो से ठीक है पिताजी लेकिन आप सब बेटा हम कल सुबह पंकज के घर पहुंच जाएंगे । पिताजी के कहने पर मैं तुरंत ही पंकज के घर की ओर रवाना हो गया । कुछ समय के बाद मैं पंकज के घर पहुंच गया और घर पहुंचते हैं । पंकज को उसके पिता ने पकड लिया । उधर, पंकज के घर का माहौल बहुत अजीब सा था । एक तरफ जहां पंकज की माँ की मृत्यु की वजह से मातम का माहौल था, वहीं दूसरी तरफ पंकज के पिता की दूसरी शादी के चर्चे हो रहे थे । पंकज के पिता की शादी उनकी साली से होने जा रही थी । ये बात मुझे कुछ अजीब लगे, लेकिन मैं चाहकर भी इसमें अपनी दखलंदाजी नहीं कर सकता था । वहाँ आए कई लोगों ने पंकज के पिता से मेरे बारे में पूछा तो पंकज के पिता मेरी और पंकज की पहली मुलाकात की कहानी सुनाने लग जाते है । खैर, मैं वहाँ तीन चार दिन तक रुका और पंकज के पिता के साथ रहकर पंकज की देखभाल और वहाँ के काम काज में उनका हाथ बताया तो मैंने अपना ज्यादातर समय पंकज के साथ ही बताया, घर आकर मेरा दिल नहीं लगा और मेरा ध्यान पंकज की ओर ही था । मैं ज्यादातर समय उसके बारे में ही सोचता रहा । उसकी सोच में मैं ऐसा मग्न हो जाता है कि मुझे अपने आस पास की कोई खबर नहीं रहती । एक दिन पिताजी ने मुझे कोई काम बोला तो मैं उन की बात सुन नहीं पाया तो पिताजी मुझे डांटने के लहजे से बोले हैं मोहित क्या हुआ? कहाँ हो? पिताजी की आवाज सुनकर मैच हो गया और कहा कुछ नहीं पिताजी बेटा मैं कब से तो मैं बुलाया जा रहा हूँ, लेकिन तुम मेरी बात ही नहीं सुन रहे । कहाँ खोये रहते हैं वो आज कल कहीं नहीं पिताजी कहीं नहीं से तुम्हारा क्या मतलब? मुझे पता है जब से तुम पंकज के घर से आया हूँ, गुमसुम से रहते हूँ बेटा उसके बारे में सोचना बंद करो और अपने भविष्य के बारे में सोच पंकज की चिंता तो उसके परिवार और भगवान पर छोड दो । उसके भाग्य में जो लिखा होगा वही उसे मिलेगा । तो मैं क्या मैं उसका भाग्य नहीं बदल सकते । लेकिन पिताजी बेटा बात को समझा कर हम उनके परिवार में ज्यादा दखलंदाजी नहीं कर सकते । आखिर हमारा उनसे रिश्ता ही क्या है? पिता जी अब कैसी बातें कर रहे हो? दोस्ती इंसानियत नाम का कोई रिश्ता नहीं होता । बेटा तो मेरी बात को समझ नहीं पा रहे हैं तो मैं भी बच्चे हो । समय रहते तो खुद समझ चाहोगे बाकी पंकज के बारे में मैं तुमसे यही कहूंगा कि जिस परिस्थितियों में तुम्हारा बस नहीं चलता है, उन परिस्थितियों को भगवान के भरोसे छोड आपके कहने का क्या मतलब है? मेरे कहने का ये मतलब है कि पंकज या उसके जीवन के बारे में तुम चिंता करके अपना जीवन बर्बाद मत कर रहे । तुम चाहकर भी इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं । तुम पंकज को भगवान के भरोसे छोड दो और फिर उसका पिता है । उसकी माँ उन्हें उसकी चिंता करने दो परन्तु महत्व सौतेली हैं । सौतेली है तो क्या हुआ? माँ तो माँ है ना । और फिर सुनने में आया है कि वह उसकी माँ बाद में बनी । पहले उस की मौसी थी । मेरा दिल कहता है कि वह जरूर उसका ख्याल रखेगी । तो ये सब फालतू की चिंताएं छोड दो और अपने भविष्य की ओर ध्यान दो । पिताजी ये सब कहकर वहाँ से चले गए और मैं पंकज को भगवान भरोसे छोडकर अपना काम करने लग गया क्योंकि पिताजी अपनी जगह सही कह रहे थे । जिन परिस्थितियों में मेरा बस नहीं चल सकता उन परिस्थितियों को भगवान के भरोसे छोड देना चाहिए । कहानी को आगे बढाते हैं पंकज के पिता जी ये शोर शराबा संकर वहाँ आ जाते हैं और उनसे पूछते हैं क्या है भाई? सुबह सुबह ये तुम दोनों ने कैसा शोर मचाया हुआ है । आखिर बात क्या है कोई मुझे भी तो बता दो । इससे पहले की पंकज कुछ पोलिस पंकज की मां बोलने लगती है ये खुला साथ मैं कितनी देर से बुला रही और ये मेरी बात का जवाब देने के बजाय यहाँ ऊपर छिपकर बैठा है और अपना ये तंबूरा से लेकर गला फाडता । जब इससे कुछ पूछो क्या? बात करो तो पापा करके इसके मुझे आवाज तक नहीं निकलती है और यहाँ पानी की तरह गाना गा रहा है । मैं तो पहले कहती थी ये सब ऐसा बोल कर बहानेबाजी करता है ताकि हमें से कोई काम करने के लिए ना कहें । आप मानो या ना मानो पापा पर सब ड्रामेबाजी है । ये बिल्कुल ठीक ठाक बोल सकता है । बस हमारे सामने ही ऐसी ड्रामेबाजी करता है । ये सब सुनने के बाद पंकज वहाँ से सीधा अपने कमरे की ओर चला जाता है । वो अपने कमरे में जाकर दरवाजा अंदर से बंद कर लेता है और जोर जोर से रोने लगता है । दोस्तों पंकज की हकलाहट की समस्या के बारे में तो मैंने आपको कुछ बताया नहीं । पंकज को हकलाहट की समस्या है यानी वही रुक रुककर बोलने की समस्या और ये समस्या क्या है, ये कैसे पैदा होती है और पंकज को ये समस्या कैसे हुई? आइए इस बारे में कुछ बात कर लेते हैं । हकलाहट की समस्या क्या है इस बारे में तो शायद आपको पता ही होगा । अगर नहीं तो एक बार फिर से बता दूँ कि जो लोग बोलते समय रुक जाते हैं यह किसी भी शब्द को बार बार दोहराते हैं । वो हकलाहट की समस्या का शिकार होते हैं । उदाहरण के तौर पर जब पंकज से उसका नाम पूछा जाता है तो वह डर जाता है और अपना नाम बोलते समय पंकज की जगह तो पसंद बोलता है । पंकज भी हकलाहट की समस्या का शिकार होता है । बात करते हैं कि उसे ये समस्या क्यों? किसी भी व्यक्ति को हकलाहट की समस्या होने कि वजह क्या कारण उस की विभिन्न परिस्थितियों पर निर्भर करता है । पंकज को बचपन से ही अपनी सौतेली माँ की डांट का सामना करना पडता है और इसके साथ साथ उसके पिता का नजरंदाज करना भी उसके जीवन में बहुत असर करता है । पंकज के रिश्तेदारों का उसके घर में कम आना जाना, उसका लगभग सारा दिन अकेला अपनी सौतेली माँ के पास रहना और सारा दिन उसकी बेवजह डांट का सामना करना उसकी हकलाहट की समस्या के पैदा होने का एक बडा कारण माना जा सकता है उसके स्कूल में भी उसका कोई दोस्त वगैरा न होना जिससे की वो अपने मन की बात कर सके और घर में हर समय लडाई झगडे का माहौल होने की वजह से हर समय एक डर के साए में जीने को मजबूर होना । छोटे भाई बहन भी उसका ज्यादा साथ नहीं दे पाते थे क्योंकि वो भी अपनी माँ के गुस्से से डरते थे । वो बेशक उनकी सगी मां थी लेकिन आपने ऍम भाव होने की वजह से तो उन्हें यानी पंकज के सौतेले भाई बहन को भी हर समय बेवजह डांटती रहती थी लेकिन इसके बावजूद वो उनमें पक्षपात जरूर करती थी । यानि सगे और सौतेले में फर्क जरूर क्या करती थी । ऐसी परिस्थिति में पंकज अपना आत्मविश्वास खो देता है और हकलाहट जैसी समस्या का शिकार हो जाता है ।

मेरा उकाब - 2

अध्याय दो मीना से मुलाकात अपनी माँ के ताने सुनकर पंकज अपने घर से निकल पडता है और अपने मोहल्ले में बने पार्क में बैठ जाता है । वो चुप चाप अपनी सोच में मग्न होता है कि तभी वहाँ उसकी बचपन की दोस्त मीना जाती हैं और उसे चुपचाप बैठे देखकर सारा माजरा समझ जाती है । मीना और पंकज दोनों बचपन के दोस्त हैं । दोनों एक ही मोहल्ले में रहते हैं । एक ही स्कूल में एक ही क्लास में पढते हैं । पंकज के ज्यादा करीब होने की वजह से मीना उसकी हकलाहट की समस्या और उसकी पारिवारिक समस्या के बारे में भलीभांति परिचित है । मीना की मां नीलम जिसे पंकज नीलाम आंटी कहता है उसका भी पंकज के साथ बहुत लगाव है । पंकज जब छोटा था तो मीना की मां उसे अपने घर में ले आती क्योंकि वह उसकी सौतेली माँ का व्यवहार उसके साथ देख चुकी थी । हुआ यूं कि एक बार पंकज के घर में कोई घरेलु समारोह था और पंकज के पिता ने सब मोहल्ले वालों को उस समारोह में शामिल होने के लिए बुलाया हुआ था । पंकज की आयु उस समय लगभग तीन साल के आस पास ही उस समय पंकज की सौतेली माँ जो कि रिश्ते में उसकी मौसी भी थी । वो उसके साथ बहुत ही बुरा बर्ताव कर रही थी । वो उसे किसी ना किसी बात पर डांट रही थी । मीना की मां यानी की नीलाम आंटी से ये सब बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने पंकज के पिता से इस बारे में बात की । देखो ना भाई साहब ये उस बेचारी छोटे से बच्चे के साथ कैसा व्यवहार कर रही है । बहन जी आपका कहना बिल्कुल जाए लेकिन आप ही बताया कि मैं क्या कर सकता हूँ भाई साहब, आप उनको थोडा समझा भी तो सकते हो । मैं तो कई दिनों से ये सब देख रही थी लेकिन कभी आपसे शिकायत करने का मौका नहीं मिला । लेकिन आज तो उन्होंने हद ही कर दी । नीलाम आंटी पंकज के पिता को एक के बाद एक शिकायतें लगाए जा रही है । लेकिन पंकज के पिता निसहाय होकर के उन की बात को सुन रहे थे । वो उनकी बातों का कोई भी तसल्लीबख्श जवाब नहीं दे पा रहे थे । वो एकदम चुपचाप उनकी बातें सुन रहे थे । उसके बाद कई दिनों तक नीलाम आंटी ने पंकज के ऊपर ध्यान रखा । उन्होंने सोचा था कि शायद उनके कहने का कोई असर पंकज के पिता या उसकी सौतेली माँ पर होगा लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । पंकज के पिता सारा दिन अपनी दुकान में रहते हैं और उधर पंकज की सौतेली माँ अकेली उसके साथ रहती और उसके साथ बहुत ही बुरा बर्ताव करती रहती । नीलाम आंटी से ये सब बर्दाश्त नहीं होता और वह किसी ना किसी बहाने से पंकज को अपने घर में ले जाते हैं । घर में लाते ही वो उसे प्यार दुलार करने लगती हैं । उस समय मीना की आयु भी पंकज के आस पास वो दोनों हम उम्र थे जिस वजह से नीलम आंटी मीना को पंकज के साथ खेलने के लिए कह रहे हैं । वो सारा सारा दिन नीलाम आंटी के घर रहने लगा । समय बीतता गया पंकज और मीना दोनों साथ साथ बडे होते गए । दोनों एक ही स्कूल में जाने लगे । पंकज का मीना के अलावा कोई और दूसरा दोस्त नहीं था । एक महीना ही ऐसी थी जिसके साथ पंकज अपने दिल की हर बात कर लेता था और मीना पंकज के कहने से पहले ही उसकी हर बात समझ लेती थी । ऍम पंकज अपना सिल नीचे करके उदास बैठा होता है कि तभी मीना उसके करीब आकर उससे कहती है, क्या मेरे रॉक स्टार आज फिर से घर से डांट अगर आया है ये उदास क्यों बैठा? कुछ नहीं कुछ तो है, कोई बात है तो मैं तो पता तो आंटी से फिर कुछ कहा सुनी हो गई मैंने तो मैं कितनी बार समझाया है कि उन की बातों का गुस्सा मत किया कर । उनका तो स्वभाव ही ऐसा है लेकिन अब कोई छोटा बच्चा नहीं रहा हूँ, सब समझ सकता हूँ वो जैसा बर्ताव मेरे साथ करती हैं । क्या वैसा अपने बच्चों के साथ कभी करती है? क्या ये तुम क्या बोले जा रहे हो? उनका तो स्वभाव ही ऐसा है वो जरूर उनसे भी कडवा ही बोलते होंगे । और फिर इसमें अपना पढाई कहाँ से आ गया? तुम भी तो उनके अपने हूँ । मेरे खयाल से आंटी ने कभी तुम्हें पराया नहीं समझा । ये तो उनका स्वभाव भी थोडा करवा है जिस वजह से तुम्हें लगता है कि वह तुम्हारे साथ ही ऐसा बर्ताव करती हैं । नहीं वो सिर्फ मेरे साथ ही ऐसा कडवा बोलती हैं । चेतन और सपना के साथ तो ऐसा क्यों नहीं बोलती क्योंकि वो उनकी अपनी हालत है । खैर छोडो ये सब बातें कुछ और बात करुँ । मीना ने बात बदलने के लहजे से कहा क्या बात करनी हो मेरा तो कुछ भी मन नहीं कर रहा हूँ । मोहित भैया से कोई बात हुई किस बारे में? मेरे कहने का मतलब है कि मोहित भैया से आखिरी बार का बात हुई थी । अभी कल ही तो उन का फोन आया था । क्या कह रहे थे? पता नहीं । उन्होंने जो कुछ भी कहा मेरी समझ से बाहर हूँ । क्या मतलब? मतलब की वो बार बार मुझे वो कहाँ बुक आप कहे जा रहे थे । कहते कि तो मेरा उकाब है, किसी से डरना नहीं वगैरह वगैरह । फिर फिर मैंने उन की हाँ में हाँ मिलाई और बाद को समझने का नाटक करते हुए फोन बंद कर दिया । तो का क्या मतलब है इसका पता नहीं । मेरी समझ तो बाहर ऍम छोडो इस बात को तो ये बताओ कि तुम्हारा गायन का अभ्यास कैसा चल रहा है । पता नहीं पता नहीं कैसे तुम्हारा क्या मतलब है यार सच कहूँ तो मैं अपनी बोलने की समस्या से परेशान हूँ । एक बार मेरी समस्या का कहीं हल निकल जाए तो गाय वगैरह तो मेरे लिए बच्चों का खेल है । बोलने की जैसी समस्या क्यों मजाक कर रही हो तो मैं सब पता है तो फिर जानबूझकर अनजान क्यों बन रही हूँ? अच्छा वो लेकिन तो मुझे एक बात बताऊँ । सच सच बताना तो जब हम कोई गाना वगैरह गाते हो तो क्या? तो मैं वो बोलने वाली समस्या होती है नहीं होती और जब तो मुझ से बात करते हो तो भी ऐसी कोई समस्या नहीं होती । नहीं तो फिर इसका कुछ मतलब समझ में आया क्या कि तुम्हारी ये बोलने वाली समस्या स्थायी नहीं है । ये असाई है । मतलब मतलब कि तुम्हारी समस्या का तुम्हारे वाद्ययंत्र से कोई लेना देना नहीं है । इसका सीधा संबंध तुम्हारे दिमाग से है । तो मैं देखा होगा कि जब तुम कभी डर जाते हो या किसी परिस्थितियों में घबरा जाते हो तो तुम्हें वो बोलने वाली समस्या होती है । लेकिन जब तुम कोई गाना वगैरह गाते हो या किसी परिचित से बात करते हो तो तो मैं ऐसी कोई समस्या नहीं होती । हाँ बिल्कुल लेकिन ऐसा क्यों होता है यही तो पता करना है । अगर तुम्हें इस बात का जवाब मिल गया तो तुम अपनी इस समस्या पर काफी हद तक काबू पा सकते हो । वैसे मेरे पास एक योजना है जिससे तुम्हारी ये बोलने वाली समस्या ठीक हो सकती है । कैसी योजना मेरे ननिहाल के गांव में एक जगह वहाँ एक बाबा जी रहते हैं । वो बाबा जी हर किसी का हाथ देकर यह जन्मपत्री देखकर या फिर उस व्यक्ति से संबंधित कोई वस्तु जैसे कोई कपडा या गहना देखकर उस व्यक्ति के जीवन में होने वाली परेशानियों, यह समस्या के हल के बारे में बता देते हैं । अगर तुम चाहो तो मैं इस बारे में अपनी माँ से बात कर सकती हूँ नहीं तो मैं ऐसा मत करना क्यों इसमें क्या बुराई है? मीना तो मेरी माँ के बारे में तो जानती हो । अगर उन्हें इस बारे में पता चल गया तो मैं पता है कि मेरे साथ कैसा बर्ताव करेंगे । उन्हें तो वैसे भी राई का पहाड बनाने की आदत है । वो ये बात नहीं समझेंगे । तुम ये सब मुझ पर छोड दूँ, मैं संभाल होंगे । मैं अपनी माँ से बात करूंगी तो हम ये सब मुझ पर छोड दो । मैं संभाल लुंगी मैं अपनी माँ से बात करूंगी और वह किसी ना किसी बहाने से तो मैं मेरे ननिहाल उस बाबा जी के पास ले जाएंगे । मैं तुम रहने दो, मैं जैसा हूं वैसा ही ठीक हो । हो सकता है समय के साथ साथ मेरी ये बोलने वाली समस्या खुद बस वो ठीक हो जाए । अगर खुद बा खुद ठीक होने वाली होती तो ये कब की ठीक हो चुकी होती । मैं वहाँ से इस बारे में जरूर बात करोंगे । मीना नहीं मानी और उसने अपनी माँ से पंकज की हकलाहट की समस्या को लेकर अपने ननिहाल वाले बाबाजी के देने के बारे में बात की । मीना जिस बाबा जी के बारे में बात कर रही थी उनका डेरा उसके ननिहाल में था । वहाँ की मान्यता थी कि कोई भी उस बाबा जी के देने में जाता तो खाली हाथ वापस नहीं आता । मीना की तरह उसकी माँ यानी की नीलाम आंटी भी यही चाहती थी की पंकज को एक बार उस बाबा जी के देने में ले जाया जाए ताकि उसकी हकलाहट की समस्या ठीक हो जायेगा । मैं अपना जीवन आराम से बता सकूँ और मुझे कोई परेशानी का सामना ना करना पडे । जब मीना ने इस बारे में अपनी माँ से बात की तो वह पंकज को उस बाबा जी के पास ले जाने के लिए तैयार हो गई । लेकिन इसमें एक समस्या थी । उनको पंकज के पिता से इस बारे में इजाजत लेनी थी लेकिन वो जानते थे कि अगर पंकज की सौतेली माँ को इस बारे में पता चल गया तो वो कभी भी पंकज को उनके साथ में जाने नहीं देंगे । इसलिए एक दिन मौका पाकर नीलाम आंटी पंकज के पिता से उनकी दुकान में जाकर बात करने लगी हूँ । नमस्कार भाई साहब नमस्कार बहन जी और सुनाइए क्या? यालय कैसे आना हुआ? भाई साहब, मैं बिलकुल ठीक हूँ और मैं आपसे किसी बात की इजाजत मांगने आई हूँ । ये बहन जी इस बात की इजाजत मांगने आए हैं भाई साहब, मैं पंकज के बारे में आपसे कुछ बात करना चाहती हूँ । बहन जी कृपया पहेलियां मत बताइए । बात किया है साफ साफ गोलियाँ । आप तो बात करते हुए ऐसे दे रही हैं जैसे कि हम दोनों एक दूसरे को जानते नहीं । आप तो जानती है कि आपके पति मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं और आपके परिवार से तो हमारा मेलजोल काफी पुराना, कहीं क्या बात है भाई साहब, मैं आपसे पंकज की बोलने वाली समस्या को लेकर कुछ बात करना चाहती हूँ । बहन जी सच कहूँ तो उसकी समस्या को लेकर चिंता तो मुझे भी बहुत है, लेकिन मैं मजबूर हूं मैं क्या कर सकता हूँ क्योंकि मुझसे जितना हो सकता था मैंने उसके लिए वह सब कुछ किया । मैंने पंकज को कई डॉक्टरों से मिलवाया और उनसे इस की समस्या के बारे में बात की लेकिन कोई भी डॉक्टर इसकी इस बीमारी का इलाज नहीं कर सका । नीलाम आंटी पंकज की सौतेली माँ के व्यवहार के बारे में सब जानती थी लेकिन फिर भी वह सब से अनजान बनते हुए पंकज के पिता से इस बारे में बात करने लगी । लेकिन सुबह भाभी का इस बारे में क्या कहना है? क्या उन्होंने भी कभी इसको किसी डॉक्टर के पास दिखाया है? बहन जी अब आप से क्या छुपाना? सौतेली माँ तो आखिर सौतेली माँ ही होती है । अगर इस बात को यहीं खत्म करने है तो अच्छा रहेगा क्योंकि मैं सुमन के बारे में और बात नहीं करना चाहता हूँ । आप तो उसके व्यवहार के बारे में अच्छी तरह जानती हैं लेकिन मैंने तो सुना था कि वह रिश्ते में पंकज की मौसी भी लगती है । ये आपने सही सुना है । वो मेरी पहली पत्नी की मामा की लडकी भी है और इस रिश्ते से वह पंकज की मौसी भी लगी । लेकिन मुझसे शादी करने के बाद में उसकी सौतेली माँ बन गई और जैसा की मैंने आपको पहले भी कहा है कि सौतेली माँ आखिरकार सौतेली माँ ही होती है । खैर छोडिये इस बात को आप बताइए । आप मुझ से कुछ कहना चाहती थी । आप क्या कहना चाहती हैं । भाई साहब दरअसल मेरे मायके के गांव के पास एक बाबा जी का दे रहा है और उस देने की मान्यता ये है कि जो भी वहाँ पर आकर माथा टेकता है, उसकी सब परेशानियाँ दूर हो जाती । मैं पंकज को एक बार उस बाबा जी के देने में ले जाना चाहती हूँ । हो सकता है कि उसकी ये बोलने वाली समस्या वहाँ जाकर ठीक हो जाए । भाभी जी मेरी तरफ से तो आपको पंकज को ले जाने की पूरी इजाजत है । आपकी जब भी वहाँ जाने की योजना बने आप पंकज को ले जा सकती हैं, लेकिन लेकिन क्या? लेकिन अगर भाभी जी को इस बारे में पता चल गया तो वह गुस्सा करेंगे । आप भावी जी की चिंता ना करेंगे । अगर सोमन इस बात को लेकर गुस्सा करती है तो इसमें हम कुछ नहीं कर सकते हैं । ये उसका अपना स्वभाव है और मैं किसी के व्यवहार को बदल नहीं सकता है । इसलिए आप इस प्रकार के व्यर्थ की चिंता छोडी है और जब भी आप की योजना बने आप पंकज को अपने साथ ले जाइए । बहुत बहुत शुक्रिया भाई साहब । अभी जी मुझे शुक्रिया कहकर आप मुझे शर्मिंदा कर रही हैं । दरअसल शुक्रिया तो मुझे आपका कहना चाहिए क्योंकि पंकज की माँ के चले जाने के बाद आप ही नेताओं से माँ का प्यार दिया । अब उस की देखभाल आप भी कर रही हैं । मैं आपका ये एहसान कैसे चुकाऊंगा । कुछ देर बातें करने के बाद नीला मानती वहाँ से चली गई । घर वापस आकर वो पंकज और मीना को लेकर अगले ही दिन अपने मायके की ओर रवाना हो गए । अपने मायके में पहुंचते ही नीलाम आंटी पंकज को लेकर उस बाबा जी के देने में चली गई और बाबा जी को पंकज की सारी समस्या के बारे में बता दिया । बाबा जी ने पंकज पर कई प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान किए और अंत में कुछ धार्मिक चिन्ह और प्रसाद देकर उन सभी को विदा कर दिया । नीलाम आंटी को ये विश्वास था कि बाबा के डेरे पर जाकर माथा टेकने से पंकज की बोलने वाली समस्या जरूर ठीक हो जाएगी । लेकिन पंकज की समस्या जियो की क्यों बनी हुई थी और समय के साथ साथ तो बढती जा रही थी । इस बात को लेकर पंकज के अलावा सिर्फ मीना और उसकी माँ परेशान थी । पंकज के पिता अपने गुस्सैल पत्नी के स्वभाव से बचने के लिए अपना ज्यादातर समय दुकान में बिताने लगे थे । जिस वजह से वह पंकज पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे । वो पंकज की समस्या के बारे में चिंतित जरूर थे लेकिन उसकी समस्या का हल नहीं निकाल पा रहे थे । वो मजबूर थे क्योंकि उनके पास समय की कमी थी । वो पंकज को समय नहीं दे पा रहे थे । इधर मेरा ध्यान हर समय पंकज की ओर ही रहता था । मैं हर समय उसी के बारे में सोचता रहता था और इसके बारे में मेरे पिताजी भलीभांति परिचित थे । मुझे कई बार समझाते थे की मोहित बेटा पंकज के बारे में सोचना छोडकर अपने जीवन की ओर ध्यान दो लेकिन मैं चाहकर भी ऐसा नहीं कर पाता । एक दिन की बात है मैं अपने ध्यान में कहीं खोया हुआ था । तभी पिताजी अचानक से पीछे से आ गए । क्या बात है, क्या सोच रहा हूँ? कुछ नहीं पिता जी कोई बात नहीं कोई बात तो है । तो वो जरूर उस पंकज के बारे में सोच रहे होंगे । बेटा मैंने तुम्हें कितनी बार कहा है कि तुम उसके बारे में सोचना छोडकर अपने भविष्य की ओर ध्यान दो लेकिन तो मानते नहीं । पिताजी सच कहूँ तो ना चाहते हुए भी मेरा ध्यान बार बार पंकज की ओर ही रहता है । मैं उसी के बारे में सोचता रहता हूँ कि उसके जीवन में क्या होगा? मोहित बेटा तो व्यर्थ ही चिंता करते हो । अच्छा ये बताओ तुम्हारे चिंता करने से पंकज के जीवन में कुछ सुधार हो सकता है । अगर हो सकता है तो मुझे बोलो । हम दोनों मिलकर उसकी चिंता करते हैं । इसलिए ये व्यर्थ की चिंता है छोडो और अपने काम में ध्यान दो । शायद पिताजी सही कहते थे कि किसी के बारे में चिंता करने से उसके जीवन में कोई बदलाव नहीं आ सकता है । इसका जीता जागता उदाहरण हमारे मोहल्ले की औरत थी । वह कदकाठी में बहुत छोटी थी । रंग सामला और देखने में बच्चों जैसी लगती थी । मोहल्ले के सभी लोग उसे अम्मा कहकर बुलाते थे । वो हमारे मोहल्ले में बहुत सालों से रह रही थी । लेकिन इसके बावजूद उस की कहानी के बारे में बहुत ही कम लोग जानते थे । मैं उसके पास जाने से बहुत डरता था । इसके दो कारण थे । पहला ये था कि जब मैं छोटा बच्चा था तो स्वाभाविक तौर पर बहुत शरारती था । मेरी माँ मेरी शरारतों से तंग आकर मुझे अम्मा का डर दिखा दिया । यानी मैं जब भी शरारत करता तो मुझसे यही कहती हैं कि तुम शरारत मत करो वरना अम्मा आ जाएगी । और यही अम्मा का डर बचपन से मेरे दिल में बैठ गया था । दूसरा कारण यह था कि वह देखने में एक भिखारन जैसी लगती थी जिस वजह से मुझे उनके बाद जाना अच्छा नहीं लगता था । एक दिन की बात है तो हमारे घर में आई और काफी देर बैठी रही है । उनके जाने के बाद मैंने माँ से का माँ आप इन को अपने घर में क्यों बुलाती हूँ? क्यूँ? क्या हुआ? बेटा? अम्मा ने तुझे कुछ कहा क्या? नहीं? कहाँ तो कुछ नहीं लेकिन वैसे ही वो मुझे अच्छी नहीं लगती । मोहित बेटा किसी को जाने बगैर उसके बारे में गलत धारणा नहीं बना सकते हैं तो मैं स्वागत के बारे में नहीं जानते हो । शायद इसीलिए उसके बारे में ऐसी बातें कर रहे हो । पीछे से पिताजी ने कहा लेकिन हाँ इस औरत के बारे में जानने वाला है क्या बचपन से तो मैं उसे देखता हूँ । उसके घर में ना तो कोई आता जाता है और ना ही कोई उसका परिवार वाला । वो ऐसे ही भिखारियों जैसा जीवन गुजारती है । मोहित बेटा मैंने तो मैं पहले ही कहा है कि किसी के बारे में बिना जाने गलत धारणा नहीं बना लेते हैं जिससे तुम भी कारन कह रहे हो तो उसके बारे में नहीं जानते हैं तो उसकी कहानी को नहीं जानते हैं । दरअसल वो शहर के बहुत ही अमीर खानदान से ताल्लुक रखती है । क्या सच में आप सच कह रहे हो? मैंने हैरानी से पूछा हाँ बेटा मैं बिल्कुल सच कह रही हूँ । वो कोई ऐसी वैसी औरत नहीं है । हमारे शहर के बहुत ही अमीर खानदान से संबंध रखती है । लेकिन उसकी ये हालत कैसे हुई? मेरे कहने का मतलब है कि वह इस प्रकार का जीवन क्यों गुजार रही है । बेटा इस औरत की कहानी भी बहुत ही अजीब । कैसी कहानी इस औरत के दो ससुराल और एक मायका होने के बावजूद भी वो अकेली रहती है । दो ससुराल से आपका क्या मतलब है? मैं बताती हूँ ये औरत जिसे हम सब अम्मा के नाम से जानते हैं । इसका असली नाम शकुंतला देवी है । इसकी शादी बहुत अच्छे परिवार में हुई थी । ये परिवार हमारे शहर के जाने माने अमीर घरानों में से एक का शादी के बाद उसके घर में दो बच्चे पैदा हुए हैं । एक लडका और एक लडकी । शादी के कुछ सालों के बाद इसके पति की मृत्यु हो गई और ये अकेली पड गई हूँ । समय बीतता गया और इसमें अपने लडके और लडकी की भी शादी करनी है । इसका समय बहुत ही सुखद गुजर रहा था लेकिन लेकिन क्या इस ने शादी कर ली? आपके कहने का मतलब है कि मैंने दोबारा शादी कर ली । हाँ, लेकिन इन्होंने ऐसा क्यों किया? क्या ये गलत नहीं था? बेटा समाज की नजरों में ये बिल्कुल गलत था । लेकिन अगर अम्मा की नजर से देखा जाए तो उसने बिल्कुल सही किया था । सही किया था वो कैसे? क्योंकि उसकी बेटी शादी के बाद तो अपने ससुराल चली गई और इसका बेटा अपने परिवार में व्यस्त हो गया । इसकी बहुत भी इसका बिल्कुल ध्यान नहीं रखती थी । कुल मिलाकर यह अकेली पड गई थी । लेकिन हाँ मुझे एक बात समझ में नहीं आई । ये दोबारा शादी करने की वजह तो नहीं हो सकती । जरूर कोई और बात होगी । हाँ तुम सही कह रही हूँ । ये दोबारा शादी करने की वजह नहीं थी । इसकी दोबारा शादी करने की वजह असल में कुछ और थी हूँ । वो कौन सी वजह थी? बेटा इनका एक दूर का रिश्तेदार था । मुझे उसका नाम तो पता नहीं लेकिन उसकी कहानी भी बाकी लोगों की कहानियों की जैसी ही थी । उस आदमी के दो बेटे और तीन बेटियां थी । उसने भी बारी बारी से सभी की शादी कर दी थी और सभी अपने अपने परिवार में व्यस्त हो चुके थे । समय बीतता गया और समय के साथ साथ वो नाती पोतों वाला हो गया । तभी अचानक से उसके साथ एक ऐसी घटना घटी जिसका उसे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था । उसकी पत्नी की मृत्यु हो गई । पत्नी की मृत्यु के बाद वो बिल्कुल अकेला पड गया था क्योंकि उसकी तीनों बेटियाँ तो शादी करके अपने ससुराल में चली गई थी और उसके दो बेटे अपने परिवार में व्यस्त हो चुके थे । इस की उम्र भी काफी ज्यादा थी तो अपने आप को संभाल नहीं सकता था । जब कभी वह बीमार पड जाता तो उसकी सेवा करने के लिए कोई भी नहीं आता था । धीरे धीरे दूसरों पर निर्भर होने लगा था तो अभी उसके एक दोस्त ने उसे सलाह दी कि वह शादी कर लें जिससे उसकी जिंदगी का आगे का सफर आसान हो जाएगा जिससे उसकी जिंदगी का आगे का सफर आसान हो जाएगा । पहले तो उसने थोडी आना कराने की लेकिन फिर जब अपनी जिंदगी के बारे में सोचा तो उसने शादी करने का फैसला किया । उस दिन उसकी मुलाकात शकुंतला देवी से हो गई क्योंकि उसके जीवन की कहानी भी उस आदमी के साथ मिलती थी यानी की उसका भी अपना पूरा परिवार होने के बावजूद भी अकेले नहीं । अम् और वह आदमी दोनों एक दूसरे को काफी अरसे से जानते थे और दोनों एक दूसरे की तकलीफ से भलीभांति परिचित थे । दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया । शादी करने का फैसला उन दोनों ने अपना अकेलापन दूर करने के लिए किया था क्योंकि वो दोनों जीवन के उस मोड पर आ चुके थे जहां पर शादी का मतलब जीवन साथी से होता है । शकुंतला और उस आदमी ने शादी कर के एक दूसरे का साथ लेने का फैसला कर लिया । लेकिन उस आदमी के परिवार ने शकुंतला को नहीं अपना । अपने परिवार के विरोध के बावजूद भी उस आदमी ने शकुंतला को अपने घर में एक पत्नी की हैसियत से रखा । उस आदमी के घर में पैसों की कोई कमी नहीं नहीं । अगर कमी थी तो वो सिर्फ उसकी देखभाल करने की जिसको शकुंतला ने पूरा कर दिया । शकुंतला उसके खाने पीने और दवा पानी का ध्यान रखती थी । उधर दूसरी तरफ शकुंतला की शादी की वजह से उसके अपने बेटे ने उसका बहिष्कार करके उससे सारे रिश्ते नाते तोड ली । अपने बेटे से रिश्ता टूट जाने के बाद भी शकुंतला को ज्यादा दुख नहीं लगा है क्योंकि जब वो उसके साथ रहती थी दो तब भी वो उसका कोई ध्यान नहीं रखता था । शकुंतला की हैसियत अपने ही घर में एक नौकरानी के समान थी । दूसरी शादी करने के बाद उसने सोचा था कि उसका आगे का जीवन आसानी से बीत जाएगा यानि उसका बुढापा आसानी से कट जाएगा । लेकिन इंसान जो सोचता है वो ऐसा होता नहीं है । शकुंतला की शादी के लगभग सात महीने बाद उस आदमी की मृत्यु हो गई और उसकी मृत्यु के तुरंत बाद से ही उस आदमी के दोनों बेटों ने उसे घर से निकाल दिया । अब वापस अब वो वापस अपने बेटे के पास भी नहीं जा सकती और उन दोनों के पास भी नहीं रह सकती थी । कुल मिलाकर उसकी हालत धोबी के कुत्ते के जैसे हो चुकी नहीं जो घर का बच्चा था और न घाट का बच्चा था । लेकिन हाँ मुझे एक बात समझ में नहीं आई । शकुंतला आंटी यानी कि अम्मा ने दूसरी शादी क्योंकि वो अपने घर में ही रहती उसका एक बेटा था । उसके साथ ही रहती मोहित बेटा हम किसी के जीवन के बारे में क्या कह सकते हैं । हो सकता है उसकी कोई मजबूरी हो या फिर ये भी हो सकता है कि वह अपने बेटे और बहू से तंग आ चुकी हूँ जिसके लिए उसने ऐसा कदम उठाया है या फिर ऐसा भी हो सकता है कि उसे अपने भविष्य की चिंता सता रही हूँ । क्योंकि जहाँ तक सुनने में आया है उसकी बहु का व्यवहार उसके साथ कुछ ठीक नहीं था । उसने ये सोचकर शादी कर ली होगी कि उसका बढाते का जीवन आसानी से निकल जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं । शकुंतला आंटी यानी कि अम्मा की कहानी सुनकर माँ वहाँ से चली गई और मैं उसके बारे में काफी देर तक सोचता रहा हूँ ।

मेरा उकाब - 3

अध्याय पहली कोशिश कर लो । पंकज चुनाव क्या हाल है? ठीक है । मोहित भैया आप अपना सुनाओ, मेरा भी ठीक है और चुनाव क्या चल रहा आजकल? भैया कुछ खास नहीं । वही रोज की डांट फटकार । मैं तो तंग आ गया हूँ । क्या हुआ अब आपको तो पता ही है तो चिंता मत कर । समय के साथ साथ सब ठीक हो जाएगा भैया आपके होते मुझे किस बात की चिंता है । लेकिन भैया अगर मेरी इस अटक अटक कर बोलने वाली समस्या का कहीं हाल हो जाए तो मेरी जिंदगी की आधी से ज्यादा परेशानी दूर हो जाएगी । कौन सी समस्या यही जो मैं बोलते समय कभी रुक जाता हूँ और अटक अटक कर बोलने लगता हूँ । अगर कहीं मेरी समस्या का हल निकल जाए तो जिंदगी जीने का मजा ही आ जायेगा । तो हम किसी डॉक्टर से क्यों नहीं मिलते हैं? मेरे कहने का मतलब है कि किसी डॉक्टर से इस बारे में कोई सलाह वगैरा ले ले । हो सकता है वो तुझे कोई दवा दें जिससे कि तुम साफ, साफ और बिना किसी रुकावट के बोल सकते । आप ठीक कह रहे हैं लेकिन लेकिन क्या? लेकिन अगर माताजी पिताजी को पता चल गया तो तो क्या होगा? भैया आपको माँ के स्वभाव का तो पता ही है । अगर उनसे बात की तो बिना किसी बात के झगडने लगेंगे । वैसे भी वो हर समय मेरे खिलाफ ही रहती है । उन्हें तो मौका चाहिए लेकिन तुम्हे तो अपनी बोलने वाली बीमारी के लिए डॉक्टर से सलाह ही तो लेनी है । इसमें लडने झगडने वाली क्या बात है और तुम्हारे पिताजी भी तो कुछ नहीं कहते हैं । पिताजी तो ना के बराबर है । मतलब मतलब की वो तो माँ को कुछ भी नहीं कहते हैं और वैसे भी उनके पास समय ही नहीं होता है । वो हमारे उठने से पहले दुकान में चले जाते हैं और रात को हमारे सोने के बाद दुकान से वापस आते हैं । उनसे मुलाकात करनी होती है लेकिन तुम्हारी दुकान तो तुम्हारे घर के नीचे ही है ना तो क्या वो कभी घर नहीं आते जाते । मेरे कहने का मतलब की दुकान के ऊपर ही घर होने की वजह से क्या दिन में कभी उनका घर में चक्कर वगैरह नहीं लगता कभी कभी लेकिन वह ज्यादातर समय दुकान में बताते हैं । अगर कहीं किसी कारण वर्ष उन्हें घर में आना पडे तो वहाँ भी वह ज्यादा समय नहीं गुजारते । जिस काम से आते हैं वो काम करके जल्दी से दुकान में जाने की करते हैं । वो क्यों भैया, आपको माँ के स्वभाव का तो पता ही है । वो किसी ना किसी वजह से पिताजी से झगडा करने लग जाती हैं । शायद वो किसी झगडे में नहीं पडना चाहते होंगे जिस वजह से वो घर में काम वक्त बिताते हैं । इसका क्या कारण हो सकता है? मेरे कहने का मतलब है कि उनके बार बार झगडे की वजह क्या हो सकती है क्योंकि अगर उनके झगडे की वजह पता चल जाए तो उनकी समस्या का समाधान निकल सकता है । ये मुझे नहीं पता लेकिन मैं एक बार जाना चाहता हूँ की माँ को मेरे और पिताजी के साथ झगडने का बहाना चाहिए होता है । वो किसी ना किसी बहाने मुझे डांटती रहती है । तुम चिंता मत करूँ और मेरी बात सुनो । तुम बिना किसी को बताए डॉक्टर से मिले हैं जैसे की चिंता मत करो । जितने पैसे लगेंगे मैं दे दूंगा तुम अपनी इस अटक अटक कर बोलने वाली बीमारी का इलाज करवाऊँ । ठीक है भैया मैं एक दो दिन में ही डॉक्टर से मिलकर अपनी समस्या के बारे में बात करता हूँ । पंकज ने इस बारे में मीना से बात की है तो तुम अपनी समस्या के समाधान के लिए किसी डॉक्टर से बात करना चाहते हो? हाँ, लेकिन तुम इस बारे में अपने पिता से क्यों नहीं बात करते हैं? आखिरकार तो उनकी हालत हो और हम पिता का ये फर्ज बनता है और हर पिता का ये फर्ज बनता है कि अपनी हालत की समस्या का हल ढूंढने मैं किसी व्यक्ति की समस्या में नहीं पडना चाहता है । की समस्या मतलब हाँ व्यर्थ की समस्या पहले से ही मेरे परिवार वाले मुझसे नाराज रहते हैं । माँ को तो मुझसे झगडा करने का बहाना चाहिए होता है और अगर उन्हें पता चल गया कि मैं किसी डॉक्टर के पास जा रहा तो वह बात का बवंडर बनाकर और बात को तोड मरोडकर पिताजी के सामने पेश कर देंगे जिससे कि मेरी समस्या और भी बढ जाएगी । मैं ये सब नहीं चाहता हूँ तो मगर मेरी मदद करना चाहती हो तो बताओ तो ऐसी बातें क्यों करते हो? मेरी नजर में डॉक्टर है जो कि तुम्हारी मदद कर सकता है । कौन है वो? डॉक्टर सुरेश डॉक्टर सुरेश वो कौन है? डॉक्टर सुरेश मेरे पिता के बहुत अच्छे दोस्त हैं । हम उनसे मदद मान सकते हैं । अगर तुम चाहो तो मैं पिताजी से बात कर सकती हूँ । लेकिन लेकिन क्या? लेकिन अगर उन्होंने मेरे घर में बता दिया तो तुम्हें तो पता ही है इस बात को लेकर मेरे घर में बवाल हो सकता है । पंकज वैसे तो मुझे इसमें बवाल वाली कोई बात नहीं लग रही है क्योंकि तुम कौन सा कोई गलत काम करने जा रहे हो । लेकिन अगर फिर भी तुम चाहते हो कि इस बारे में किसी से कोई बात ना की जाए तो तुम इसके लिए बेफिक्र रहो । इस बारे में किसी को पता तक नहीं चलेगा । मैं पिता जी से बात कर लुंगी ठीक है । मुझे इंतजार रहेगा और मीना नहीं । अपने पिता से पंकज के बारे में बात किया और उसके अगले दिन मीना के पिता ने पंकज को अपने घर बुलाया । हाँ तो बेटा जी मीना कह रही थी कि तुम्हें किसी डॉक्टर से मिलना है जी । पंकज ने धीरे से डरते हुए कहा यार तुम डर क्यों रहे हो? आराम से बैठो तो मेरे बेटे सामान हूँ । अगर तुम्हें कोई समस्या है तो उस कार्य में आराम से बात करूँ । अंकल जी मीना ने आपसे बात तो की होगी । मुझे बोलने में कुछ समस्या है । इस बारे में किसी डॉक्टर से बात करना चाहता हूँ । लेकिन मैं अपने परिवार वालों को इस बारे में नहीं बताना चाहता हूँ । ठीक है बेटा जैसा तुम चाहो वैसा ही होगा । मैं डॉक्टर सुरेश से इस बारे में बात कर लूंगा । तुम कल जाकर उनसे मिल लेना । ठीक है अंकल जी अगले दिन पंकज डॉक्टर सुरेश से मिलने उनके क्लिनिक में चला जाता है । उसके साथ मीना भी जाती हैं । नमस्कार अंकल जी आओ मीना बेटी क्या हाल है? सब बढिया है और चुनाव कैसे आना हुआ? अंकल जी वो पिताजी ने पंकज के बारे में आप से बात की होगी । हाँ, कल रात को उसका फोन आया था । अच्छा तो ये है वो पंकज जी पंकज बेटा अपनी समस्या के बारे में खोल कर बताओ अंकल जी, मुझे खुद ही मालूम नहीं कि मेरी समस्या क्या है? क्या मतलब मतलब की मुझे कभी कभी बोलने में बहुत समस्या आती हैं । मैं बोलते समय अचानक से रुक जाता हूँ । वोट कांपने लगते हैं और पसीने में तरबतर हो जाता हूँ और एक भी शब्द मुझसे नहीं निकल पाता । पंकज बेटा तुम्हारी इस परिस्थिति को हकलाना कहते हैं यानी तुम्हें हकलाहट की समस्या है । हकलाहट की समस्या ये क्या होती है? मीना ने पूछा । मीना बेटी, जो शब्द किसी बात को रुक रुककर बोले या बोलते समय अचानक आवाज ना निकले उस स्थिति को हकलाहट कहते हैं । ये स्थिति बात को शुरू करने से पहले या बीच में पैदा हो सकती हैं । हम बोल चाल की भाषा में हम इसे अटक अटक कर बोलना भी कहते हैं । डॉक्टर साहब ये क्या है ये किस बला का नाम है? मैं सबसे बिल्कुल अनजान अगर इसके बारे में मैं जानता हूँ तो बस इतना कि जब मैं कभी कुछ गुनगुनाता हूँ, मतलब कोई गाना गाने लगता हूँ तब कोई समस्या नहीं होती । या फिर अकेले में या अपने किसी परिचित के सामने बात करते समय मुझे कोई समस्या नहीं होती । मतलब कहने का ये है कि मैं अपने घर में और आपने कुछ निकटतम संबंधियों के सामने बडे आराम से बातचीत कर लेता हूँ । वहीं इसके विपरीत याने की घर से बाहर और किसी अंजान व्यक्ति के सामने मुझे बोलने में समस्या होने लगती है । देखो पंकज बेटा हकलाना तुम्हारी मुख्य समस्या नहीं है । अगला आने के बारे में दिन रात सोचकर उसकी चिंता करना ये तुम्हारी समस्या है । हकलाहट की समस्या को दूर करने के लिए सबसे पहले तो मैं उसकी चिंता करनी छोडनी होगी । मैं तुम्हें कुछ दवाइयाँ लिख देता हूँ । ये दवा तुम्हारी चिंता को खत्म करने में तुम्हारी सहायता करेगी । पंकज डॉक्टर से दवा लेकर घर आ जाता है । वो बहुत खुश होता है क्योंकि उसे लगता था कि उसे अपनी हकलाहट की समस्या को खत्म करने के लिए दवा मिल गई थी । जिससे खाकर वह अपनी समस्या से सदा के लिए छुटकारा पा लेगा । परंतु जैसे उसने दवा को खाया तो दवा खाते ही कुछ देर के बाद उसका सिर्फ घूमने लगता है । वो असहाय होकर अपने बिस्तर में गिर जाता है । कुछ देर के बाद पंकज की बहन सपना उसके कमरे में आती हैं और उसे उठने के लिए कहती हैं भैया जो माँ बुला रही हैं क्या काम है? माँ खाना खाने के लिए कह रही है उनको बोलो की मेरे सिर में बहुत दर्द हो रहा है । मैं बाद में खा लूंगा । ठीक है मैं वहाँ से क्या देती हूँ? क्या हुआ आया नहीं । पंकज मानी सपना से पूछा नहीं भैया बोल रहे हैं कि उन के सर में दर्द हो रहा है तो बाद में खाना खा लेंगे । नहीं कहता है तो ना सहित जब लाल साहब को भूख लगेगी तो होता जाएगा । पंकज को दवाई का नशा था जिस वजह से वह हो गया और रात तक सोता ही रहा । इस दौरान उसे जगाने के लिए क्या उसका हाल पूछने के लिए कोई भी नहीं आया? रात को जब उसके पिता आई तो माने उसके पिता से शिकायती लहजे से कहा देखो जी मैं किसी की नौकरी नहीं हूँ जो कि हर किसी के पीछे खाना लेकर घूमती रहूँ । आप क्या हो गया? क्यों चिल्ला रही हूँ? कितनी बार कहा है जब मैं रात को दुकान से घर आ जाऊँ तो यू बेवजह शोर मत मचाया करूँ? हाँ हाँ, मैं तो अब शोर मचाते हूँ तो आपके लार साहब के नखरे जेल हूँ । उसके बाद आपकी जली कटी बातें भी सुना हूँ । अब मैंने ऐसा क्या कह दिया जो तुम इतना बोल रही हूँ? और पंकज ने ऐसा कौन सा पाप कर दिया है कि तुम हर समय उसी बेचारे के पीछे पडी रहती हूँ । तुम्हारा लालसाहब स्कूल से घर आते ही सीधा अपने कमरे में जाकर हो गया है और उसने दोपहर से कुछ नहीं खाया । पिया सपना को तीन बार उसके कमरे में उसे जगाने के लिए भेज चुकी हूँ लेकिन वह है कि उठने का नाम नहीं ले रहा । किसी समय किसी की तबियत भी तो खराब हो सकती है कि वो हर समय उसी के पीछे मत पडा करो । मैं देखता हूँ से उसी समय पंकज के पिता पंकज के कमरे में जाते हैं । पंकज अपने कमरे में सो रहा होता है । वो उसे जगाने की कोशिश करते हैं लेकिन वह उठने का नाम नहीं लेता । गज बैठता हूँ तो क्या हुआ? बेटा हाँ जी पिताजी आप आ गए आपका भाई पंकज धीरे से अपने को बोलता है बेटा मुझे तो काफी समय हो गया । यहाँ हुए । तुम्हारी माँ कहती है कि तुमने दोपहर से कुछ नहीं खाया । हुआ क्या बात हो गई । कुछ नहीं पिता जी तभी कुछ ठीक नहीं चल कोई बात नहीं अबाउट और मेरे साथ खाना खा ले । नहीं पिता जी मुझे नींद आ रही है । मैं सोना चाहता हूँ । चल कोई बात नहीं सोचा । पंकज के पिता उसे सोने के लिए कह देते हैं और उसके कमरे से बाहर आ जाते हैं । क्या हुआ आया क्या तुम्हारा लालसाहब नहीं उसकी तबीयत कुछ ठीक नहीं है । वो होना चाहता है उसे सोने दूँ, एक है आपकी मैं वैसे भी मैं आप दोनों के बीच में नहीं आना चाहती हैं लेकिन वो अचानक से इस की तबियत खराब कैसे हो सकती है? मुझे तो इस पर शक हो रहा है । जवान लडका है, कहीं किसी गलत संगत में ना पड गया हूँ । तुम क्या बोले जा रही हो क्या तुम बोलने से पहले सोचती नहीं हो । इस बात को लेकर पंकज के माता पिता में काफी देर तक लडाई झगडा होता रहा । पंकज की मां के अनुसार पंकज किसी गलत संगत में और उसका देर तक सोते रहना इसी गलत संगत का असर है । लेकिन उसके पिता ये बात मानने को तैयार नहीं थे । दूसरी तरफ पंकज अपनी हकलाहट की समस्या को काबू करने की दवाई का सेवन लगातार बिना किसी को बताए कर रहा था । जिसकी वजह से वो नशे में रहने लगा था । एक दिन दोपहर के समय पंकज की मानी पंकज के पिता को फोन किया और कहा चलो जी एक मिनट के लिए ज्यादा ऊपर घर पर आएंगे क्या? कुछ काम है क्या हुआ क्या काम है आप घर आओगे तो बताती हूँ यू फोन पर बता पाना थोडा मुश्किल है । ठीक है मैं आता हूँ । कुछ ही देर में पंकज के पिता घर में आ जाते हैं और पंकज की माँ से कहते हैं बोलो क्या बात है तो अचानक से क्यों बुला रहे हैं । ऐसे भी क्या खास बात है? देखो आप मुझे गलत मत समझो । मैं जो बात आपको बताने जा रही हूँ उसे ठंडे दिमाग से सुना । ठंडे दिमाग से तुम्हारा क्या मतलब नहीं । वो तुम बात को सुनते समझते नहीं होना जब देखो झगडा करना शुरू कर देते हो । झगडा मैं शुरू करता हूँ तुम करती हूँ । खैर छोडो इस बात मेरे पास तुमसे बहस करने का ज्यादा समय नहीं । जल्दी से बोलो क्या काम है, किस वजह से मुझे बुलाया है । मैं पंकज के बारे में तुम से बात करना चाहती हूँ क्या बात करनी है? मैं कई दिनों से देख रही हूँ कि पंकज स्कूल से आता है और सीधा अपने कमरे में चला जाता है और खाना खाकर सो जाता है और उसके बाद वो रात को कम ही बाहर निकलता है । और जब कभी मैं उसे उठाने के लिए उसके कमरे में जाती हूँ तो उठते ही उसकी आंखें लाल होती हैं । मुझे शक है कि वह किसी गलत संगत में पड गया है । ये तुम क्या कह रही हूँ? मेरी बात का यकीन करो । मैं गलत नहीं बोल रही । मैं उसकी माँ हूँ और मैं झूठ नहीं बोलूंगी । अगर तुम्हें मेरी बात का यकीन नहीं है तो तुम पंकज के कमरे में जाकर उसको देख सकते हो । पंकज की माँ की बात सुनकर उसके पिता तुरंत पंकज के कमरे में जाते हैं । वहाँ पंकज सो रहा होता है । वो उसे जगाने की बहुत कोशिश करते हैं । लेकिन पंकज दवाई खाने की वजह से नशे में होने के कारण जाग नहीं पाता । पंकज के पिता उस पर पानी डालते हैं । अपने ऊपर अचानक से पानी पढते ही पंकज उठ खडा होता है । है क्या हॅूं ये मेरे ऊपर पानी किसने डाला है तो नशा करता हूँ, कौन सा नशा करते हूँ तुम्हें नशा कहाँ से लाते हो? कौन तो मैंने अच्छा दे रहा है । पंकज के उठते ही पंकज के पिता उस पर सवालों की बौछार कर देते हैं । ये आप क्या कह रहे? पिताजी कौन सा नशा? ऐसा नहीं मैं कोई नशा नहीं करता हूँ । आपको कोई गलतफहमी हुई है? मुझे कोई गलत फहमी नहीं हुई है । जाकर अपने यहाँ के लिए कितनी लाल हो रखी है । दो । मेरी बात का सीधा जवाब दे वरना मुझे पूछने के और भी तरीके आते हैं । बता कौन सा नशा करता हूँ और ये नशा कहाँ से लाता है? पिताजी मुझे आप की सौगंध मैं किसी प्रकार का कोई नशा नहीं करता है । अगर तुम कोई नशा नहीं करते तो फिर सारा दिन ऐसे सोच क्यों पडे रहते हो । अगर आप गुस्सा न करें तो मैं आपको एक बात बताना चाहता हूँ बोलो मैं अपनी हकलाहट की समस्या को काबू करने के लिए एक दवाई का सेवन करता हूँ । उस दवाई की वजह से मेरा शरीर हो जाता है और ऐसा लगता है कि जैसे मैं नशे में कौन सी दवाई कैसे? दवाई तो भी दवाई कहाँ से ले रहे हो तो झूठ बोल रहा हूँ नहीं पिता जी मैं बिल्कुल सच बोल रहा हूँ । मैं ये दवाई मीना के पिता जी के दोस्त डॉक्टर सुरेश से ले रहा हूँ । मुझे मेरी बात पर बिल्कुल या कि नहीं चल मेरे साथ अभी चल मेरे साथ अभी उस डॉक्टर के पास चल ठीक है पिता जी अगर आप को मेरी बात का यकीन नहीं तो मेरे साथ अभी चलो । पंकज के पिता तुरंत पंकज को लेकर उस डॉक्टर के पास चले जाते हैं । डॉक्टर के पास जाकर वो उस से पंकज की इस हालत के बारे में पूछते हैं । वो उनसे कहते हैं डॉक्टर साहब क्या आपने इसको हकलाहट की समस्या को काबू करने संबंधी कोई दवाई दी है? जी हाँ बिल्कुल । ये कुछ दिनों पहले मेरे पास आया था और इसने अपनी हकलाहट की समस्या के बारे में मुझसे बात की थी । यहाँ पंकज अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से डिप्रेशन का शिकार हो गया था । उसको डिप्रेशन से उभारने के लिए ही मैंने इसे एंटीडिप्रेशन की दवाइयाँ दी थी और इस की ऐसी हालत की वजह यही एंटीडिप्रेशन की दवाइयाँ कैसी दवाई ये तो मुझे कोई नशे की दवाई लगती है क्योंकि जब ये दवाई खाता है ये सारा दिन नशे में रहता है । भाई साहब है आप चिंता ना करें, सब ठीक हो जाएगा । डॉक्टर साहब, चिंता कैसे ना करूँ । जवान बेटा है और कोई भी व्यक्ति यह नहीं चाहेगा की उसका जवान बेटा सारा दिन नशे में रहे । आप हमें माफ कर दीजिए, हमें आपसे कोई दवाई नहीं चाहिए । पंकज के पिता पंकज को लेकर वापस घर आ जाते हैं और उसे डॉक्टर की दी हुई दवाई खाने से मना कर देते हैं । परंतु पंकज नहीं मानता और वो अपने पिता से दवाई खाने की जिद करता है । पिताजी ऐसा मत कीजिए, मुझे दवाई कराने दीजिए । मैं अपनी हकलाहट की समस्या से निजात पाना चाहता हूँ । मैं जीना चाहता हूँ । मेरी हकलाहट की समस्या की वजह से लोग बडा मजाक बनाते हैं । मैं किसी के मजाक का पात्र नहीं बनना चाहता । बेटा तुम समझने की कोशिश करूँ । हकलाहट जैसी समस्या की किसी प्रकार की कोई भी दवाई नहीं होती हैं । अगर तुम चाहो तो हम तुम्हारी समस्या के समाधान के लिए किसी और डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं । लेकिन पिताजी लेकिन क्या अब इसके आगे कुछ नहीं कहना? पंकज और उसके पिता में दवाई को लेकर काफी देर तक बहस होती रहती हैं । लेकिन पंकज के पिता दवाई खाने के लिए रजामंद नहीं होते हैं क्योंकि पंकज के पिता का मत था कि हकलाहट जैसी समस्या के समाधान के लिए किसी प्रकार की कोई दवाई नहीं बनी है और उस डॉक्टर ने जो दवाई दी है वो हकलाहट की समस्या को काबू करने के लिए नहीं थी । बल्कि वह दिमाग को हकलाहट की समस्या को बुलाने के लिए दवाई नहीं यूँ कह लो कि वह एक प्रकार का नशा था जिस नशे को करके मैं अपनी हकलाहट की समस्या को कुछ देर के लिए भूल जाता था । दूसरी तरफ पंकज का कहना था की वह दवाई का कर अपनी हकलाहट की समस्या से निजात पाना चाहता हूँ क्योंकि उसकी यही हकलाहट की समस्या उसे जीने नहीं दे रही थी । उसके सहपाठी अध्यापक और यहाँ तक कि उसके करीबी मित्र उसकी हकलाहट की समस्या का मजाक बनाते थे । कोई मिलाकर वो किसी ना किसी प्रकार से अपनी हकलाहट की समस्या का समाधान करना चाहता था । लेकिन पंकज के पिता उसे समझाते हैं और उसको लेकर अन्य डॉक्टर के पास जाते हैं । वो उन्हें समझाता है और कहता है कि हकलाहट की समस्या से छुटकारा पाने के लिए किसी प्रकार की कोई दवाई नहीं होती और वह उन्हें ऐसी कोई भी दवाई खाने से मना कर देता है । पंकज को अपनी हकलाहट की समस्या से छुटकारा पाने के लिए जो एकमात्र आशा की किरण वह उस डॉक्टर के कहने के कारण हो चुकी थी, अब वो पहले से ज्यादा डिप्रेशन में रहने लगा था । इसका कारण ये था कि जब वो दवाई खाता था तो भले ही वो उस दवाई की वजह से मैं ऐसे में रहता था परन्तु उसे अपने ठीक होने की उम्मीद थी और इसी उम्मीद की वजह से वो कई प्रकार के सपने बोल चुका था । यानी वो हर समय यही सोचता था कि जब वो अपनी समस्या से छुटकारा पा लेगा तो वो अपने सारे सपने पूरे कर लेगा है । वह सारी दुनिया में अपना नाम बनाना चाहता था । और जो काम वो अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से नहीं कर पा रहा था वो उसे पूरा करेगा परन्तु अब उसके सपने टूट चुके थे ।

मेरा उकाब - 4

अध्याय चाह तू उकाब है । मेरा अपनी हकलाहट की समस्या से निजात पाने के लिए उस डॉक्टर की दवाई ही एकमात्र रास्ता थी । लेकिन जब वह रास्ता भी बंद हो गया तो पंकज काफी उदास रहने लगा । वो पहले से ज्यादा तनाव में रहने लगा । एक दिन मैं अपने घर के सामने बने पार्क में बैठा हुआ था । मीना वहाँ गई और उसकी उदासी का कारण पूछने लगे और ऍम आज फिर उदास होकर मुंह लटकाकर बैठा हुआ है । आज क्या बात हो गई? कुछ नहीं मुझे मत करो और यहाँ से चली जाऊँ । ठीक है चली जाती हूँ । लेकिन ये तो बताओ । आज मूल लटकाकर क्यों बैठे हो? क्या किसी ने कुछ कहा है? होना क्या है वो डॉक्टर सुरेश की दवाई के बारे में घर वालों को पता चल गया और उन्होंने मुझे दवाई खाने से मना कर दिया है हूँ । उन्होंने मना किया क्या वो नहीं चाहते हैं कि तुम अपनी हकलाहट की समस्या से छुटकारा पालो । पता नहीं पंकज तुम्हारे परिवार वाले तुम्हारे दुश्मन थोडी ना है । कोई तो वजह होगी जो उन्होंने तुम्हें डॉक्टर सुरेश की दवाई खाने से मना कर दिया है । हाँ दरअसल वो दवाई ही एकमात्र वजह थी जो उन्होंने खाने से मना कर दिया था । मैं कुछ समझी नहीं । दरअसल वो दवाई खाने के बाद मुझे चक्कर आने लगते हैं और मेरा शरीर सुस्त हो जाता है । जिस वजह से मैं अपने कमरे में लेट जाता और मुझे नींद आ जाती है । घर वालों को लगता है जैसे मैं किसी गलत संगत में पडकर नशे का आदी हो गया हूँ और नशा करने लग गया हूँ । कल पिताजी मेरे कमरे में आए और उन्होंने मेरे सुस्त रहने का कारण पूछा । उनको ये गलत फहमी थी कि मैं किसी नशे का आदी हो गया हूँ जिस वजह से उन्होंने मुझे बहुत डांटा लेकिन फिर मैंने डॉक्टर सुरेश की दवाई वाली बात उन्हें बता दी । फिर उन्होंने मेरी बात का विश्वास नहीं किया और तुरंत मुझे लेकर डॉक्टर सुरेश के पास चले गए । वहाँ पिताजी की डॉक्टर सुरेश के साथ बहुत बहस बाजी हूँ । वो क्यूँ? क्योंकि पिताजी के अनुसार हकलाहट की समस्या को काबू करने के लिए किसी प्रकार की कोई दवा नहीं बनी और उसके बाद और उसके बाद में मुझे लेकर घर आ गए और उन्होंने मुझे इस दवाई को खाने से मना कर दिया है । लगता है अब मेरी हकलाहट की समस्या कभी ठीक नहीं होगी क्योंकि मेरे माता पिता को मेरी हकलाहट की समस्या में कोई दिलचस्पी नहीं है । ये तुम कैसे कह सकते हो कि उन्हें तुम्हारी हकलाहट की समस्या को ठीक करने में कोई दिलचस्पी नहीं है? हाँ, मैं सही कह रहा हूँ अगर उन्हें कोई दिलचस्पी होती तो वह डॉक्टर सुरेश की दवाई को खाने से मना नहीं करते हैं । पंकज तो तुम्हारे पिता हैं और कोई भी पिता अपने पुत्र के लिए बुरा नहीं सोचेगा । तुम्हारे पिताजी कभी नहीं चाहेंगे कि तुम्हारी हकलाहट की समस्या ठीक ना हो । हो सकता है उन्होंने तुम्हारे नशे में रहने की वजह से तो मैं दवाई खाने से मना कर दिया हूँ । देखो पंकज परिवार में ऐसी छोटी छोटी बातें होती रहती हैं परंतु तुम्हें इन सब बातों को नजर अंदाज करना होगा क्योंकि तुम मेरे या इस समाज के जैसे बिलकुल नहीं हूँ तो हम सबसे अलग हूँ । तुम्हारी मंजिल कुछ और है तो मैं अपनी मंजिल को पाने के लिए हरसंभव प्रयास करना होगा । इसके लिए तो मैं ये सब छोटी छोटी बातों को नजरअंदाज करना होगा वरना तुम अपना निर्धारित किया हुआ लक्ष्य कभी नहीं पास होगी । जानती हूँ मुझे बचपन से कविताएं पढने का बहुत शौक है और मैं तो मैं अपने पसंदीदा पंजाबी कभी अवतारसिंह पांच की कविता की कुछ पंक्तियां सुनाती हूँ क्योंकि उनकी इस कविता में उन सब बातों की तरफ इशारा किया गया है जो बातें मैं तुम्हे समझाने की कोशिश कर रही हैं । इसमें कभी ये कहने की कोशिश करता है कि मुश्किलों से रहित जिंदगी मेरे लिए नहीं, ये मेरे तूफानी मन को मंजूर नहीं । मैं तो चाहता हूँ एक ऊंचा मकसद और उस मकसद को पाने के लिए जिंदगी भर कभी ना टूटने वाला एक अटूट सिलसिला । तुम्हारा भी एक मकसद है कि तुम दुनिया के सबसे नामवर गायक बनो । तुम्हारी प्रसिद्धि और तुम्हारी ख्याति दुनिया के कोने कोने में हूँ परन्तु इसके लिए तुम्हें मेहनत करनी होगी । सबसे पहले तो मैं अपने परिवार की ऐसी छोटी छोटी बातों को नजरअंदाज करना ही होगा । मीना और पंकज काफी देर तक बातें करते रहते हैं । पंकज की बातें निराशावादी होती है । मीना और पंकज काफी देर तक बातें करते रहते हैं । पंकज की बातें निराशावादी होती है परंतु इसके विपरीत मीना पंकज से आशावादी बातें करके उसका हौसला बढाने की कोशिश करती हैं । कुछ देर यू बातें करने के बाद पंकज वहाँ से उठकर अपने घर वापस आ जाता है और अपने कमरे में आ जाता है । वो अपने कमरे में बैठकर मीना की कही बातों के बारे में सोचने लग जाता है । खासकर उसकी सुनाई हुई पंजाबी कविता के बारे में सोचता है । मीना की कही हुई बातों से पंकज में एक नया जोश पैदा हो जाता है और उसे अपना मकसद साफ दिखाई देने लगता है । वो एक नए जोश, नई उमंग के साथ अपने मकसद को पूरा करने का निश्चय कर लेता है । वो अपने आप से ये वादा करता है कि चाहे जो भी हो वो अब हार नहीं मानेगा । वो पूरे जोश के साथ आगे बढेगा । वो निराज था परन्तु वो हार नहीं मान रहा था । उसने अपने मन में एक बात ठान ली थी कि एक ना एक दिन कुछ बन के दिखाएगा क्योंकि वो गिटार बहुत अच्छा बजा लेता था और थोडा बहुत गांधी लेता था । वो अपने इसी हुनर को आगे बढाना चाहता था । यानी वो अपनी मंजिल को पाने के लिए अपने सुन्दर को सीढी की तरह प्रयोग करना चाहता था और उसकी मंजिल थी समाज भी उसकी हकलाहट की समस्या की वजह से कोई हुई इज्जत को वापस पाना । इसके लिए उसने गायक बनने का निश्चय किया परन्तु कहते हैं कि किसी भी मंजिल को पाना इतना आसान नहीं होता जितना के इंसान सोचता है । पंकज के साथ भी ऐसा ही हो रहा था । हुआ यूं कि एक दिन पंकज अपने कमरे में बैठ कर अपने गायन का रियाज कर रहा था कि तभी उसके पिता उसके कमरे में आ जाते हैं और उसे गाना गाते हुए देख लेते हैं । परन्तु कहते हैं ना कि किसी भी मंजिल को पाना इतना आसान नहीं होता जितना के इंसान सोचता है । पंकज के साथ भी ऐसा ही हो रहा था । हुआ यूं कि एक दिन पंकज अपने कमरे में बैठ कर अपने गायन का रियाज कर रहा था कि तभी उसके पिता उसके कमरे में आ जाते हैं और उसे गाना गाते हुए देख लेते हैं । अपने पिता के अचानक अपने कमरे में आ जाने से वो कुछ घबरा सा जाता है । उसके पिता उसके पास आकर बैठ जाते हैं । यो गई क्या हो रहा है? कुछ नहीं पिताजी बस ऐसे ही कुछ नहीं से तुम्हारा क्या मतलब है? तुम क्या कर रहे हो तो मैं अपने भविष्य की कोई चिंता है भी या नहीं । पिताजी भविष्य की चिंता है तभी तो मैं ये काम कर रहा हूँ । हमारे कहने का क्या मतलब है? भविष्य की चिंता है और तो ये गाना बजाना कर रहे हैं आखिरकार तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा है? जरा मुझे भी बता दो, मैं तुम्हारा पिता हूँ । तुम्हारे गाने बजाने और भविष्य के बीच क्या संबंध? तुम भविष्य में क्या करना चाहते हो? पंकज के पिता ने पंकज के ऊपर सवालों की बौछार कर दी । इन सब सवालों के जवाब देना पंकज के लिए बहुत मुश्किल था । वो अपने पिता से कहता है, पिताजी मुझे गायिकी का शौक है और मैं अपने इसी शौक को अपने जीवन यापन के लिए साधन के रूप में अपनाना चाहता हूँ । तुम्हारे कहने का मतलब है कि तुम एक गायक बनना चाहती हूँ । जी पिताजी पंकज डरते हुए कहा । पंकज ने डरते हुए कहा । यानी के तुम गिटार हाथ में लेकर माइक के सामने गाना गाना चाहते हैं जी पिता जी हम गाना गाल होगे जी पिताजी । पंकज की बात सुनकर उसके पिता बहुत जोर जोर से हंसी और पंकज का हाथ पकडकर उसे घर के बरामदे में ले आए और जोर जोर से घर के सभी सदस्यों को बुलाने लगे । कुछ ही समय में घर के बाकी सदस्य जिनमें पंकज की मां और भाई बहन थे, पंकज के पिता की बात सुनकर बरामदे में आ गए । क्या हुआ ये शोर मचाया है । पंकज की माने हैरानी से पूछा ये देखो इन लालसाहब से बोला तो जाता नहीं और कह रहे हैं कि ये गायक बनेंगे । अपना गिटार हाथ में लेकर सभी के सामने गाना गाएंगे और उसी के सहारे अपनी रोजी रोटी कमाएंगे । क्या कहा गाना मतलब की ये गायक बनना चाहता हूँ । पंकज की माने का तो अभी मैं क्या किसी और भाषा में बात कर रहा था? सुना नहीं तो मैं मैं तो आपसे पहले कहती थी कि इसका यू आता का चक्कर बोलना । ये सब ड्रामेबाजी है । हम लोगों को बेवकूफ बना रहा है । इसे कोई बीमारी नहीं है । नहीं ऐसी कोई बात नहीं । इसे बोलने में समस्या जरूर है । ये ड्रामेबाजी नहीं कर रहा है । लेकिन मुद्दे की बात ये है कि इससे बोलने वाली समस्या होने के बावजूद भी ये गायक बनना चाहता है । बेटा तुमसे नहीं हो पाएगा तो ये गायकवाड का चक्कर छोडो और जीवन यापन के लिए किसी और साधन पर ध्यान दो । ये गायक बनना तुम्हारे बस की बात नहीं । कहीं गाना गाते समय बीच में रुक गए या अटक गए तो सभी तुम्हारा मजाक बनाएंगे । तुम अपने साथ साथ हमारी भी बेज्जती करवाओगे, तुम रहने दो । पंकज के पिताजी ने पंकज को काफी भला बुरा कहा और उसे गाना वगैरह गाने से मना कर दिया । कुछ समय के बाद पंकज के पिता दुकान में चले गए और पंकज वहीं बैठा रहा । दूसरी तरफ पंकज की माँ को पंकज को डांटने और उसको बेइज्जत करने के लिए कोई मौका चाहिए था । दूसरी तरफ पंकज की माँ को पंकज को डांटने और उसकी बेज्जती करने का तो मौका चाहिए होता है तो ऐसा कोई भी मौका अपने हाथ से जाने नहीं देती । पंकज के पिता के जाने के बाद उसे बहुत देर तक उसके भाई बहन के सामने बहुत जलील करती रही और उसे बहुत भला बुरा कहती रही । ऍम अपने पिता से डांट सुननी माँ और भाई बहन से अपनी बेज्जती करवाने के बाद पंकज अपने कमरे में पंकज अपने कमरे में चला गया और वहां बैठ कर अपनी किस्मत को कोसने लगा । उस समय उसे अपनी माँ की बहुत याद आने लगे क्योंकि वो जानता था कि आज अगर उसकी माँ जिंदा होती तो उसे ये दिन न देखना पडता है । उसकी माँ उसके मन की बात जरूर समझती और वो उसका साथ जरूर देती है । वो किसी भी परिस्थिति में उसका मजाक नहीं बनने दे दी आज अगर उसकी माँ जिंदा होती तो आज उसका जीवन कुछ और ही होता है । उसे अपनी परेशानियों का सामना अकेले नहीं करना पडता है । ऍम इसके बाद पंकज अपनी पढाई में व्यस्त हो गया । उसकी दसवीं कक्षा की परीक्षा नजदीक आ गई थी । वो अपनी परीक्षा की तैयारियों में जुट गया । एक दिन मैंने पंकज को फोन किया फॅालो पंकज क्या हाल है? ठीक है भैया जी आप सुना हूँ मेरा भी थी, गया है, इंडियन हो गए । हाँ भैया जी हो गए ऐसे रहे सब ठीक हो गए तो आजकल तो छुट्टियाँ होंगी । हाँ भैया जी, आजकल छुट्टियाँ तो फिर मेरे पास कब आ रहे हो? जब आपका हूँ कहो तो अभी आ जाऊँ तो मजाक कर रहे हो तो नहीं आ सकते हैं । ऐसा नहीं है भैया दरअसल मेरा भी बहुत मन कर रहा था आपसे मिलने के लिए । तो फिर देर किस बात की अभी आ जाऊँ । ठीक है मैं पिताजी से बात करता हूँ । पंकज ने अपने पिता से बात की और उसके पिता ने उसे हमारे पास आने की अनुमति देती हूँ । और अगले दिन सुबह सुबह पंकज हमारे घर आ गया । आओ पंकज कैसे हो यार, बहुत दिनों के बाद तुम से मिल रहा हूँ आ रहे हैं तो हम तो बडे हो गए और सुनाओ क्या हाल है । ठीक है भैया जी आप सुनाओ मेरा भी ठीक है और चुनाव दसवीं की परीक्षा कैसी रही? जी बहुत बढिया नहीं, घर परिवार कैसा है? सब ठीक है । भैया जी कुछ देर के बाद मोहित की माँ पंकज के लिए चाय वगैहरा लेकर आती है और उससे बातें करने लग जाती है । कुछ देर बातें करने के बाद वो सब वहाँ से चले जाते हैं और कमरे में मोहित और पंकज अकेले रह जाते हैं । कुछ ठीक नहीं है । भैया जी क्या हुआ? पंकज भैया हर तरफ से परेशानी घर में अब मेरा दिल नहीं लगता क्योंकि जब देखो चौबीसों घंटे झगडा लगा रहता है है । झगडा क्यों रहता है? कौन झगडा करता है? झगडा होता है इसके बारे में तो पता नहीं लेकिन झगडते कौन है ये सब मैं जान गया । घर में होने वाले झगडे के पीछे मुख्य वजह मेरी माँ है । वो हर समय पिताजी से क्या हमसे झगडती रहती है । उससे झगडने का कोई ना कोई बहाना चाहिए होता है । पंकज सबसे पहले तो तुम तमिल सभाकर क्योंकि वो तुम्हारी माँ है और उन्हें इज्जत के साथ संबोधित करो । झगडा करना उनका स्वभाव है और तुम उनके स्वाभाव को बदल नहीं सकते हैं । इसलिए तुम्हें उन्हें नजर अंदाज करना होगा और उनकी कही बातों को दिल से नहीं लगाना होगा तो मैं अपने मकसद की ओर ध्यान दो । मैंने सुना है तो अच्छा गा लेती हूँ और क्यों ना तो अपने गायन की तरफ ध्यान दो । हो सकता है की तो मैं एक अच्छे गायक बन । जब भैया जी सच कहूँ तो झगडे की मुख्य वजह मेरा गायन ही हैं । मतलब मतलब ये कि जब भी गाना गाता हूँ या गाने का रियाज करने लगता हूँ तो माँ मुझसे झगडा शुरू कर देती हैं और मुझे गाना गाने से रोकती हैं । वो क्यों तो मैं गाना गाने से क्यों रोकती? आखिर गाना गाने में क्या बुराई है ये तो मुझे पता नहीं क्योंकि उनके अनुसार ये मेरा रुक रुककर बोलना सब ड्रामेबाजी है । वो कहती हैं कि मैं ऐसा जानबूझकर करता हूँ । मुझे हकलाने जैसी कोई समस्या नहीं है क्योंकि जब मैं गाना कहता हूँ तो बिलकुल नहीं रुकता । मैं बडे आराम से गाना गा लेता हूँ । अभी मैं आपसे बात कर रहा हूँ तो बडे आराम से बात कर रहा हूँ । मुझे कोई ऐसी समस्या नहीं हो रही लेकिन पता नहीं किसी के सामने जब मैं बोलने लगता हूँ तो अचानक से उठ जाता हूँ और वो समझते हैं कि मैं ऐसा जानबूझ कर करता हूँ । तो तुम्हारे कहे अनुसार वो तुम्हारी हकलाहट की समस्या को समस्या नहीं समझते बल्कि वह समझते हैं कि तुम ऐसा जानबूझ कर करते हैं । हाँ उन चिंता मत करो, ये उनकी सोच है तो उनकी सोच को धीरे धीरे ही बदल सकते हो । फिलहाल तुम अपनी हकलाहट की समस्या पर ध्यान दो और उसे खत्म करने के बारे में सोचता हूँ । लेकिन मैं अपनी हकलाहट की समस्या को काबू में कैसे करूँ? मुझे ये पता नहीं लग रहा है क्योंकि मैं जब भी किसी डॉक्टर के पास जाता हूँ तो मुझे कोई ना कोई दवाई दे देता है । अभी कुछ महीने पहले की बात है । मैं डॉक्टर के पास गया है और उसे अपनी हकलाहट की समस्या के बारे में बताया तो उसने मुझे नशे वाली दवाई दे दी । उस दवाई को खाकर मैं सारा दिन सुस्त पडा रहता था । इस बात को लेकर भी घर में काफी विवाद हो गया । उसके बाद मैंने अपनी हकलाहट की समस्या को काबू करने के बारे में सोचना बंद कर दिया । अब मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ? पंकज मुझे तुम्हारी एक बात समझ में नहीं आती कि तुम अपनी हकलाहट की समस्या को काबू करने के लिए किसी डॉक्टर के पास क्यों जाते हैं? तो फिर क्या करूँ? कहाँ जाऊँ तो इसके लिए कंप्यूटर के पास भी जा सकते हो । मतलब मैं कुछ समझा नहीं । मतलब ये कि तुम अपनी हकलाहट की समस्या का हल ढूंढने के लिए कंप्यूटर पर इंटरनेट की मदद ले सकते हो । क्या कंप्यूटर में मुझे मेरी हकलाहट की समस्या का हल मिल जाएगा? क्यों नहीं तुम कोशिश तो करो लेकिन लेकिन क्या? लेकिन मेरे पास कंप्यूटर नहीं है । ये कोई समस्या नहीं । तुम अपने शहर के किसी साइबर कैफे में भी जा सकते हैं । हाँ, ये ठीक रहेगा । अच्छा तो ये बताया कि दसवीं कक्षा के बाद आगे क्या करने का इरादा है? भैया जी, सच कहूँ तो अभी तक कुछ सोचा नहीं । तुम जो भी तय करना, सोच समझकर तय करना, अपने मन की सुनना और दिमाग से कम लेकर अपने भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लेना नहीं । वैसे अगर तो मेरी बात मानें तो क्या मैं कुछ अपना सुझाव दो, भैया जी की क्या बात कर रही हूँ, मैं आपकी बात जरूर मानूंगा । आप बताओ मुझे क्या करना चाहिए । उन्होंने बताया कि तू गाना अच्छा गा लेता है तो तू किसी क्षेत्र में । कुछ देख मेरे कहने का मतलब है कि तू गायन की तरफ थोडा ध्यान में और रही बात मेरे माता पिता की तो समय आने पर वह खुद समझ जाएंगे क्योंकि मेरे हिसाब से व्यक्ति को वही काम करना चाहिए जिस काम में उसका मन लगे और तुम्हारा मन गायन की तरफ । तुम गायन को ही अपना जीवन यापन का साधन बना सकते हैं । आपकी बात तो सही है लेकिन मैं दसवीं के बाद क्या करूँ? मेरे कहने का मतलब है कि कौन सी पढाई करूँ तो तुम दसवीं के बाद कोई भी आसान से विषय लेकर अपनी आगे की पढाई कर सकते हैं । ये कोई चिंता का विषय नहीं क्योंकि वैसे भी तुम्हारे पिताजी की किराना की दुकान है और भविष्य में तुमने उसी दुकान पर बैठना है । इसके लिए तो मैं मुश्किल से विषय लेकर अपनी पढाई न करने के बजाय आसान विषय लेकर अपनी आगे की पढाई करनी चाहिए । ठीक है भैया जी और हाँ पढने के साथ साथ तुम जिम जाना भी शुरू करूँ जिससे कि तुम्हारी थोडी बहुत सेहत बन जाए और तुम देखने में भी अच्छे लगते हो क्योंकि अगर तुमने गायन के क्षेत्र में जाना है तो आवाज के साथ साथ तुम्हारा अच्छा देखना भी बहुत जरूरी है । ठीक है भैया जी तो मेरा तो आम परिंदों के जैसे छोटी छोटी उडानों के लिए नहीं बनाया तो लंबी लंबी उडानों के लिए पैदा हुआ है तो जमाने की परवाह मत कर और बेफिक्र होकर अपने पंखों को भला पर एक ऊंची उडान की तैयारी कर तो मेरा वो काम यानी वो काबिया नहीं । किसी की परवाह न करने वाला लोग जो तेरे बारे में बातें कहते हैं उन्हें कहने दे, उनकी परवाह मत कर, उन्हें नजरअंदाज कर अपनी सोचने की शक्ति को पहचान और उकाब जैसी सोच रखा है । जैसे उकाब आसमान में उडान भरता है तो से छोटे परिंदों की चहचहाहट सुनाई नहीं देती थी । किसी प्रकार जब तू अपने मन की सुनकर उडान भरेगा तो तुझे भी लोगों की बेफिजूल और नकारात्मक बातें सुनाई नहीं देंगी । पंकज मेरे पास दो दिनों तक रहा और इन दो दिनों में मैंने जितना हो सके उसे उत्साहित किया है । मैंने उसके दिमाग से नकारात्मक विचारों को हटाने की कोशिश की जिसमें मैं काफी हद तक कामयाब भी रहा है । घर वापस आने के बाद पंकज ने जिम जाना शुरू कर दिया था । वो अपना सारा गुस्सा जिम में व्यायाम करते हुए निकालता था । एक दिन की बात है वो जिम में कसरत कर रहा था । तभी एक लडका जिसका नाम राहुल था वह भी पंकज के साथ कसरत करने लगा और कसरत करते करते अपना टैटू उसे दिखाने लगा । ये क्या बनाया है और कहाँ से बनवाया है । पंकज ने राहुल के टैटू की ओर इशारा करते हुए उसे कहा भी ताजी जाय तो के आते हैं । ये बच्चों का खेल नहीं है क्योंकि इसे बनवाने में बहुत दर्द का सामना करना पडता है । तुम जैसे बच्चों से ये काम नहीं होगा । राहुल ने पंकज की बेज्जती करने के लहजे से उसे कहा । उस समय पंकज को काफी बेइज्जती महसूस हुई क्योंकि राहुल की बात सुनकर उसके साथ कसरत करने वाले बाकी के लडके भी उस पर हसने लग गए थे । अपनी बेज्जती होने के बावजूद पंकज ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप कसरत करता रहा है । लेकिन उसने मन ही मन में ठान लिया था कि वह राहुल को उसकी बात का जवाब जरूर देगा । वो घर आ गया और अपना मन इधर उधर लगाने लगा । लेकिन राहुल और उसके दोस्तों की कहीं बात उसके दिमाग में अभी भी खटक रही थी । पंकज तुरंत अपने घर से निकला और बिना किसी को बताए टैटू वाली दुकान में चला गया । उसने वहाँ एक छोटा सा टैटू बनवाया । टैटू बनवाकर वो अपने घर के सामने बने पार्क में बैठ गया । उसने तुरंत मीना को फोन किया और पार्क में आने के लिए कहा क्या हुआ, क्या काम है, इतनी जल्दी में बुलाने की क्या जरूरत थी? मीना ने कहा कुछ नहीं बस ऐसे ही ऐसे ही से तुम्हारा क्या मतलब? क्या मुझे कोई और काम नहीं है? यह तुम्हारे बेफिजूल की बातें सुनने के लिए आ जाऊँ । अरे आज तुम तो गुस्सा हो गई हूँ । जरा पास बैठो । मुझे तुमसे कुछ बात करनी है क्या बात करनी है । जल्दी बोलो । मैं भी अपना काम छोड कर रही हूँ तो मैं कुछ दिखाना है क्या दिखा रहे हैं? पंकज ने अपनी बाजू ऊपर करके डायटों की ओर इशारा करते हुए कहा ये क्या है? ऍम चाहिए असली वाला कहते हैं हाँ, ये बिलकुल असली वाला टाइट हुए हैं । इस से बनवाते समय बहुत दर्द हुआ होगा ना? हाँ लेकिन उतना नहीं जितना में अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से रोज खेलता हूँ । ये तुम कैसी बातें कर रहे हो । तुम्हारे कहने का क्या मतलब है? तुम्हें तो सब पता है । तुम तो मेरे बारे में सबको जानती हो । मेरी जिंदगी भी क्या जिनकी है हर रोज जिल्लत और बेज्जती । सारा दिन तो अपनी माँ से डांट और अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से सारा दिन अपनी माँ से डांट और हकलाहट की समस्या की वजह से अपने दोस्तों और निकट संबंधियों से भेज दी करवाने में निकल जाता है । सच कहूँ तो मुझे जीने का मन नहीं कर रहा है लेकिन मैं हार भी नहीं मान सकता है । मैं जानता हूँ मुझे बहुत कम मिले थे लेकिन मैं अपनी काबिलियत को सही साबित करना । लेकिन मैं अपनी काबिलियत को साबित नहीं कर पा रहा हूँ तो मैं ऐसे क्यों बातें कर रहे हो? तो मैं भी पता है कि तुम्हारे पास एक ऐसी कला है जिसके बलबूते तो पूरी दुनिया में अपना नाम बना सकते हो । फिर तुम निराशावादी बातें करके अपना मन क्यों छोटा करते हो? क्या ये सब छोडो मुझे ये बताओ कि अब ये टैटू बनवाने के पीछे क्या कारण है? सुबह जिम में गया था और वहाँ एक लडकी ने टैटू बनवाया हुआ था । मैंने तो उससे बस स्टैंड के बारे में पूछा तो वह अहंकार के नशे में चूर होकर मुझसे कहने लगा है कि टैटू बनवाना कोई बच्चे का खेल नहीं । इसे बनवाने में बहुत दर्द होता है और ये दर्द कोई सहन नहीं कर सकता और तुम पागलो की तरह उसकी बातों में आ गए । यही बात हुई थी ना, मीना नहीं । उसकी बात को काटते हुए कहा अब तुम भी मेरा मजाक बनाओगी तो कैसे चलेगा? मैं तुम्हारा मजाक नहीं बना रही बल्कि तुम्हें समझा रही हूँ । मैं मानती हूँ की तुझे बहुत काबिलियत है तो हार नहीं मान सकता लेकिन लेकिन वो हर किसी की बातों को दिल पर लगा लेना अच्छी बात नहीं होती । बाकी रही तेरे टैटू की बात तो सच कहूँ तो टू बहुत छोटा है । तुमने पैसे भी खर्च किए हैं, डर भी सहन किया है लेकिन इसके बावजूद भी आॅटो बहुत छोटा बना है । अगर तुम अपनी काबिलियत को साबित करना चाहते हो, यह बताना चाहते हो कि तुम बहुत दर्द सहन कर सकते हो तो तो मैं इसी टैटू को थोडा बडा सा करवाना होगा । फिर अच्छा लगेगा । ये सब कहकर मीना वहाँ से चली गई और पंकज अपना टैटू देखता रह गया तो उसे भी ये टैटू छोटा लगने लगा था । वो तुरंत टैटू बनवाने वाली दुकान में गया और उसे किसी को बडा करने के लिए कहा । लेकिन दुकानदार ने इस टैटू को में जाकर बडा करने में अपनी असमर्थता जताई और उसने कहा कि इसी टैटू के आस पास हम कुछ और बना दे जिससे किए बडा लगने लगे । पंकज मान गया और उसने अपने बाजू के आस पास काफी बडा टैटू बनवा लिया । अगले दिन वो जिम में जाकर व्यायाम कर रहा होता है । अगले दिन वो जिम में जाकर व्यायाम कर रहा होता है तो उसी समय उसका दोस्त राहुल अपने कुछ साथियों के साथ वहाँ आ जाता है और वह पंकज की बेज्जती करने के इरादे से उसको अपना छोटा सा टैटू दिखाने लगता है । पहले तो पंकज उसकी हरकतों को नजरंदाज कर देता है परन्तु जब उसकी हरकतें हद से ज्यादा बढ जाती हैं तो पंकज उसे नजरअंदाज करते हुए उसकी तरफ देखकर मुस्कुराने लगता है और वह व्यायाम करते हुए उसे टैटू दिखाने के इरादे से अपनी कमीज उतार देता है । कमीज उतारकर कसरत करने के पीछे उसका मुख्य मकसद अपना टैटू बाकी लोगों को दिखाना था । पंकज का टैटू उसके दोस्तों की कल्पना से भी बहुत बडा था । वो सब पंकज का टैटू देखकर भी बहुत छक्के रह जाते हैं । पंकज मन ही मन खुश हो रहा होता है क्योंकि उसने अपना मजाक बनाने वालों को बिना कुछ कहे ही करारा जवाब दे दिया था ।

मेरा उकाब - 5

अध्याय पांच हकलाहट की समस्या का समाधान पंकज जल्दी से मुझे बाद में मिलो । मुझे कुछ काम है । मीना ने पंकज को फोन पर कहा क्या काम है वो तो मैं फोन पर नहीं बता सकती तो तुम जल्दी आओ । ठीक है तो तुम लोगों में अभी आता हूँ । कुछ समय बाद पंकज और मीना पार्क में मिलते हैं । बोलो क्या काम था । कल शाम को मैं अपनी बहन के कंप्यूटर पर बैठी हुई थी । तभी अचानक से मुझे तुम्हारी हकलाहट की समस्या का हल ढूंढने का विचार आया तो मैंने कंप्यूटर पर इस समस्या का हल ढूंढने के बारे में सोचा । तभी मुझे एक संस्था के बारे में पता चला जोकि हकलाहट की समस्या को लेकर काम कर रही थी । उसका मालिक एक चीज को नाम का आदमी था । मैंने इंटरनेट पर काफी देर तक उस संस्था के बारे में पढा । फिर मैंने वहाँ पर दिए एक फोन नंबर पर फोन किया । वो फोन शिखा नाम की और आपने उठाया । मैंने उनसे हकलाहट की समस्या के बारे में काफी देर तक बातचीत की । उन्होंने मुझे किसी भी दिन शाम को मिलने के लिए कहा है । ये तो बहुत अच्छी बात है । मीना उस संस्था कहाँ पर है, कौन से शहर में मैं वहाँ पर जाना चाहता हूँ, उनसे मिलना चाहता हूँ । पंकज हो संस्था हमारे ही शहर में तो क्या कह रहे हो क्या सच में वो संस्था हमारे ही शहर में? हाँ वो हमारे ही शहर में है । मुझे यकीन नहीं हो रहा है । हकलाहट की समस्या से संबंधित इतनी बडी संस्था जो की हमारे शहर में मौजूद हैं और मुझे इसके बारे में पता भी नहीं । खैर काम मिलने जाना है । उनको जब तुम का हो, ठीक है तो आज शाम को ही चलते हैं । आज नहीं कल चलेंगे क्योंकि आज मुझे कुछ काम है और फिर मैं आज उन को फोन करके कल का समय भी ले लेंगे । ठीक है मैं तैयार रहूंगा । हकलाहट की समस्या से संबंधित संस्था के बारे में सुनकर पंकज बहुत खुश होता है । अब उसे यकीन हो जाता है कि उसकी समस्या का हल किसी ना किसी प्रकार से जरूर निकल आएगा और वो अपना जीवन बिना किसी परेशानी के जी सकेगा । अगले दिन शाम को पंकज और मीना दोनों उस संस्था में जाने के लिए रवाना हो जाते हैं । वह संस्था उनके घर से कुछ ही दूरी पर होती है । कुछ समय बाद वो दोनों वहाँ पहुंच चाहते हैं । नमस्कार जी मेरा नाम मीना है और मेरी कल आपसे फोन पर बात हुई थी । आज शाम को आपने मिलने का समय दिया था । मीना ने उस संस्था को चला रही शिखा नाम की औरत से कहा आओ बेटा जी बैठो, ये पंकज है, ये मेरे घर के साथ रहता है । ये मेरा सहपाठी भी है । इसको बचपन से ही हकलाहट की समस्या है । बेटी तुम कुछ देर जरा चुप रहो और अब मुझे पंकज से बात कर लेने दो क्योंकि जब तक मैं उससे बात नहीं करूंगी जब तक मुझे इस की समस्या के बारे में पता नहीं चलेगा । ठीक है आंटी जी आप पंकज से सवाल पूछो पंकज बेटा, तुम अपनी हकलाहट की समस्या के बारे में कुछ बताओ क्या बताऊं? आंटी जी मुझे तो ना जीने का मन करता है और न मरने का मन करता है । मैं अपनी हकलाहट की समस्या से बहुत परेशान रहता हूँ । मुझे काबिलियत होते हुए भी हर समय किसी ना किसी के मजाक का पात्र बन कर रह जाता हूँ बेटा इसमें चिंता करने की कोई बात नहीं । ये हमारे समाज की समस्या है । हमारा समाज हकलाहट की समस्या को समस्या नहीं मानता बल्कि समाज के लिए एक हादसे का विषय हमारी हिंदी फिल्मों में भी जब भी कहीं हादसे पैदा करना हो तो कुछ अभिनेता हकलाहट की समस्या का सहारा लेते हैं । फिर ये सब छोडो इस पर हम कभी किसी और समय चर्चा करेंगे । सबसे पहले तुम यह बताओ कि तुम्हारी हकलाहट की समस्या कब शुरू हुई । मेरे कहने का मतलब है कि तो मैं कब पता चला कि तुम हकलाहट जैसी समस्या का शिकार हो चुके हो । आंटी जी सच कहूँ तो मुझे ये समस्या बचपन से थी । यानी कि जब मैंने बोला यानी कि जब मैंने बोलना शुरू किया तभी से मैं रुक रुककर बोलता था लेकिन मुझे इसका एहसास नहीं था । मुझे इसका ऐसा सब हुआ जब एक दिन में अपनी दुकान में बैठा था और एक ग्राहक ने आकर के मुझसे कुछ सामान मांगा । मुझे उस सामान का नाम बोलने में बहुत समस्या हुई । मैं अचानक से रुक गया और मुझसे उस वस्तु का नाम जुबान पर नहीं आ रहा था और मुझे उस वस्तु का नाम जुबान पर नहीं आ रहा था । मेरे हाथ का अपने लगे थे और फोटो में थरथराहट शुरू हो गई थी । मेरे माथे पर पसीना आ गया था और मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मेरे साथ क्या हो रहा है । उस ग्राहक के जाने के बाद मैं कुछ समय तक चुप चाप बैठा रहा । मैं शायद डर गया था तो उस दिन के बाद से किसी प्रकार रुक रुककर बोलने लगा । बेटा तुम्हारे परिवार में कौन कौन से सदस्य हैं? मेरे परिवार में मेरे माता पिता और मेरे छोटे भाई बहन हैं । तुम्हारी हकलाहट की समस्या पर तुम्हारे परिवार का रवैया कैसा था? मेरे कहने का मतलब है कि तुम्हारे परिवार के सदस्य तुम्हारी हकलाहट की समस्या को लेकर क्या सोचते हैं? सच कहूँ तो मेरी माँ तो समझती है कि मैं ये सब ड्रामेबाजी करता हूँ यानी कि मैं जानबूझ कर रुक रुककर बोलता हूँ जिस वजह से तो हर समय मुझे डांट ही रहती हैं और तुम्हारे पिताजी उनका तुम्हारी हकलाहट की समस्या को लेकर क्या सोचना है? यानी तुम्हारी हकलाहट की समस्या को लेकर वो क्या सोचते हैं? सच कहूँ तो मेरे पिताजी के पास इतना समय नहीं होता कि वह मेरी मानसिकता को समझे हूँ, उनके पास समय क्यों नहीं होता है । वो एक दुकानदार हैं और दुकानदार के पास बहुत ही कम समय होता है । मेरे पिता जी की किराना की दुकान है और किराना की दुकान होने की वजह से वो दुकान सुबह जल्दी खोल लेते हैं और रात को देर से बंद करते हैं । वो सारा दिन अपनी दुकान में व्यस्त रहते हैं जिस वजह से वो मुझे और मेरे बाकी के परिवार के सदस्यों को समय नहीं दे पाते । बेटा ये तो ठीक है कि तुम्हारे पिताजी दुकानदार है और उनके पास समय नहीं होता परंतु क्या उन्हें तुम्हारी हकलाहट की समस्या के बारे में पता है और अगर पता है तो इसके बारे में क्या सोचते हैं? यानी उनकी क्या रहा है? आंटी जी वो मेरी हकलाहट की समस्या के बारे में क्या सोचते हैं ये तो मुझे नहीं पता था । हो सकता है कि जो भी यही सोचती हूँ कि मैं ऐसा जानबूझकर करता हूँ लेकिन उन्हें ऐसा क्यों लगता है कि तुम जानबूझ कर ऐसा करते हो? तो वो शायद इसलिए क्योंकि जब भी मैं गाना गाने लगता हूँ या अपने किसी परिचित से बात करता हूँ तो बिल्कुल भी नहीं रुकता । यानी मुझे हकलाहट जैसी कोई समस्या नहीं होती । लेकिन इसके विपरीत जब मैं कभी किसी अंजान व्यक्ति से बात करने लगता हूँ तो मैं बोलते समय रुक जाता हूँ । मेरी माँ जब भी मुझे कोई काम करने को बोलती है या फिर मुझे डांटती है तो मैं अपना तो मैं हकलाने लगता हूँ बेटा इसमें कोई बडी बात नहीं है । हकलाहट की समस्या की यही फितरत है । जब भी आप कभी डर जाऊँ या कभी चिंता में पड जाते हैं तो ये समस्या उभरकर सामने आ जाती है । लेकिन आंटी जी क्या इस समस्या का कोई समाधान है? हाँ है ना बिल्कुल तो मैं वो कहावत नहीं सुनी क्या की हर समय अपने अंदर उसके हल करने का बीच लेकर चलती है । यानी कि ऐसी कोई भी समस्या नहीं है जिसका कोई हल ना निकाला जा सके । हाँ समय जरूर लगता है हकलाहट की समस्या एक ऐसी समस्या है जिसका हल निकाला जा सकता है और इसका हल वही निकाल सकता है जिससे कि ये समस्या होती है । मैं कुछ समझा नहीं । मैं बताती हूँ मान लो तो मैं साइकिल सीखनी है और तुम मेरे पास साइकिल सीखने के लिए आती हूँ । मैं तो मैं बता देती हूँ कि बेटा ऐसे साइकिल के हैंडल को पकडना है और हैंडल को सीधा करके साइकिल के पैडल को मारना है और धीरे धीरे बैलेंस करके साइकिल को आगे की ओर धकेलना है । तब तुम साइकिल चलाना सीख जाओगे । लेकिन बेटा साइकिल तो तो मैं खुद ही चलानी है, है ना? मैं तो मैं सिर्फ साइकिल चलाने संबंधी दिशा निर्देश दे सकती हैं । किसी प्रकार हकलाहट की समस्या भी एक ऐसी ही समस्या है । मैं तो तुम्हें उस समस्या को हल करने के लिए केवल रास्ता बताओगे, लेकिन उस रास्ते पर चलना तुम्हें स्वयं ही होगा और यह तुम पर निर्भर करता है कि तुम किस प्रकार चलते हो और अपनी समस्या को हल करने के लिए कितना समय देते हो । आंटी जी, मैं आपकी बात बिल्कुल समझ गया लेकिन फिर भी मैं अपनी हकलाहट की समस्या को कितने समय में हल कर सकता हूँ? मेरे कहने का मतलब है कि मेरी हकलाहट की समस्या हल करने में कितना समय लगेगा । बेटा तो मेरी बात को समझे नहीं । अगर समझ गए होते तो मुझसे ये प्रश्न दोबारा नहीं पूछते हैं । मैं तुम्हें एक उदाहरण देकर फिर से समझाते हैं । तुम जिम में जाते हो, हाँ जाता हूँ तो मैं जिम में जाकर एक सुडौल बनाने में कितना समय लगेगा? जी पता नहीं एक साल दो साल या पांच साल भी लग सकते हैं । ऐसा नहीं होता । मैं बताती हूँ जब तुम जिम में जाना शुरू करोगे तो पहले एक महीना तो हमारे लिए बहुत मुश्किल से निकलेगा । उसके बाद तुम्हें इसकी आदत पड जाएगी और लगभग दो या तीन महीने में तुम्हारी मांसपेशियां थोडी बहुत उभरकर आएगी जिसका पता सिर्फ तो मैं ही लग पाएगा । जिम में जाने के लगभग छह महीने के बाद तुम्हारे शरीर की मांसपेशियां कुछ कुछ बडी होने लगेंगे जिससे कि तुम्हारे आस पास रहने वाले लोग महसूस करेंगे । इसके बाद अगर तुम लगातार जिम में जाते हो तो लगभग एक डेढ साल के बाद तुम्हारा शरीर पूरी तरह से बदल जाएगा और तुम एक सुडौल और तंदुरुस्त शरीर के मालिक हो जाओगे । हकलाहट की समस्या में भी ठीक वैसे ही होता है जब तो में समस्या का हल करने की प्रक्रिया को शुरू करते हुए ये तुम मेरे कहे अनुसार चलते हो तो तो मैं पहले एक या दो महीने बहुत समस्याओं का सामना करना पडेगा लेकिन इसके बाद तो मैं इस सब की आदत पड जाएगी । इसके बाद अगर तुम लगातार इस प्रक्रिया को जारी रख होगी तो लगभग पांच छह महीने के बाद तुम अपनी समस्या पर काफी हद तक काबू पालोगे जिसका पता तुम्हारे साथ रहने वाले लोगों क्या तुम्हारे परिवार वालों को लग जाएगा । लेकिन जो तुम्हारे दूर के रिश्तेदार या मित्र हैं जिनसे तुम देर बाद मिलते हो उनको इस बात का अभी पता नहीं चलेगा क्योंकि उनके दिमाग में तुम्हारी पहले जैसी छवि ही रहेगी । लगभग एक डेढ साल बाद जब तुम पूरी तरह से बोलने लग जाओगे तो वह छवि स्वयं धीरे धीरे बदल जाएगी । यानी कि मुझे अपनी हकलाहट की समस्या को हल करने के लिए लगभग एक से दो साल का समय लग सकता है । बेटा ये तो तुम पर निर्भर करता है कि तुम अपनी हकलाहट की समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हो । ठीक है आंटी जी, अब वो प्रक्रिया भी बताएँ जिसको करके मैं अपनी हकलाहट की समस्या को हल कर सकता हूँ । मैं अपनी हकलाहट की समस्या को हल करने के लिए हर प्रकार की मुश्किल से मुश्किल प्रक्रिया को करने के लिए तैयार हैं और इसके लिए मुझे कितना भी समय लगे मैं वो समय जरूर दूंगा बेटा सबसे पहली बार हकलाहट की समस्या को हल करने की प्रक्रिया इतनी मुश्किल नहीं है जितना कि तुम समझते हो । हकलाहट की समस्या को हल करने के लिए चार जरूरी काम है और इन चार कामों को करने से तुम्हारी हकलाहट की समस्या हल हो सकती है । या यूं कह लो ये चार काम हकलाहट की समस्या को हल करने के चार जरूरी सिस्टम है आंटी जी वो कौन कौन से चार काम है । मैं हर प्रकार के काम करने को तैयार हूँ । लगता है तो अपनी हकलाहट की समस्या को हल करने के लिए काफी गंभीर हो । ये अच्छी बात है तो हकलाहट की समस्या को हल करने के चार जरूरी कामों में से सबसे पहला काम तुम्हें ये करना है कि जब भी तुम अकेले हो या कभी अकेले रहने का मौका मिले तो तुम गाना गाना शुरू कर गाना गाने से तो मैं तुम्हारी हकलाहट की समस्या को हल करने में काफी मदद मिलेगी । क्योंकि तुम ने नोट किया होगा कि जब भी तुम गाना गाते हो तो मैं हकलाहट की समस्या बिल्कुल नहीं होती । एनटीजी शायद आपको पता नहीं है कि पंकज बहुत अच्छा गायक है और ये लगभग रोज एक से दो घंटे तक गायन का रियाज करता है । मीना ने कहा, ये तो बहुत अच्छी बात है । अगर तुम रोज एक से दो घंटे तक गाना गाते हो तो तुम अपनी हकलाहट की समस्या को काफी हद तक हल कर सकोगे । ठीक है आंटी जी बेटा, अब तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ जिससे कि तुम अपनी हकलाहट की समस्या को जल्दी से जल्दी हाल कर सकते हो लेकिन ये प्रक्रिया थोडी सी मुश्किल जरूर है । आंटी जी आप बताएँ मैं हर प्रकार की मुश्किल से मुश्किल प्रक्रिया करने के लिए तैयार हूँ । दिन में जब भी तुम्हें कभी समय मिले तो अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद करके आईने के सामने बैठ कर अपने आप से बातें करनी होगी । दिन में जब भी तुम्हें कभी समय मिले तो अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद करके आईने के सामने बैठ कर अपने आप से बातें करनी होंगी । ये कैसी प्रक्रिया है आईने के सामने बैठ कर बातें करने की । इससे हकलाहट की समस्या कैसे हल हो सकती है? मीना ने कहा, बेटी मैं तुम्हें इसके पीछे के सिद्धांत के बारे में बताती हूँ । बेटी क्या तुम वहाँ गए हो जहाँ मृत्यु सिखाया जाता है या अभिनय सिखाया जाता है? या फिर पंकज बेटा तो जिस जिम में जाते हो वहाँ पर लगे आई नहीं देखें । हाँ जी जिस जिम में मैं जाता हूँ वहाँ पर बहुत बडे बडे आने लगे हुए हैं । पंकज बेटा जिम में ही नहीं जहाँ पर अभिनय सिखाया जाता है या नृत्य सिखाया जाता है वहाँ पर भी बहुत बडे बडे आने लगे होते हैं । क्या तुम ने इस बात पर हो और क्या है? आंटी जी मैंने गौर किया है लेकिन इसके पीछे के सिद्धांत के बारे में पता नहीं । बडे बुजुर्ग कहते हैं कि आइना कभी झूठ नहीं बोलता तो मगर किसी से पूछ होगी कि मैं कैसा लग रहा हूँ तो वो तो यही कहेगा कि तुम बहुत सुंदर लग रहे हो लेकिन अगर तुम आईने के सामने जाकर देखोगे और अपने आपसे पूछेंगे कि मैं कैसा लग रहा हूँ तो आइना सच दिखाएगा । वो झूठ नहीं बोलेगा । आईने के सामने जब कोई भी व्यक्ति अभिनय करता है या नृत्य करता है तो इस बात का फैसला वह स्वयं करता है कि अभिनय या नृत्य कैसा कर रहा है । ठीक इसी प्रकार जब तुम आईने के सामने बैठ कर अपने आप से बातचीत करोगे तो जहाँ भी तुम्हें हकलाहट की समस्या होगी तो मुझे समय तो तुम उसी समय पहचान लोगे । तुम अपनी गलती को स्वयं जान लोगे और मुमकिन है कि तुम उसे सुधार लोगे । मनोवैज्ञानिक डॉक्टरों ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि जब कोई व्यक्ति आईने के सामने बैठ कर अपने आप से बातचीत करता है तो उसके आत्मविश्वास का स्तर काफी बढ जाता है । ठीक है आंटी जी मैं ऐसा ही करूंगा । मैं हर रोज आईने के सामने बैठ कर अपने आप से बातें करने की कोशिश करूंगा । पंकज बैठा हूँ, अगर तुम ऐसा करोगे तो विश्वास करो । जल्द ही अपनी हकलाहट की समस्या पर काबू पालोगे । तो अब बात करते हैं हकलाहट की समस्या को काबू पाने के चौथे स्तंभ की हकलाहट की समस्या को काबू पाने का । चौथा संभूत सबसे मुश्किल है लेकिन ये जितना मुश्किल है उतना महत्वपूर्ण भी है । क्या है वो आंटी जी इसके लिए तो मैं हर समय चिंता मुक्त होकर खुश रहने की कोशिश करनी होगी । तुम है इस बात का ध्यान रखना होगा कि तुम किसी अवसाद का शिकार न हो जाओ । तो मैं अपने गुस्से को काबू पाना होगा और अपने व्यवहार में तब्दीली लानी होगी । अगर तुम्हें किसी बात की चिंता है तो उस चिंता को छोडना होगा । लेकिन आंटी जी, हकलाहट की समस्या और इस सब के बीच क्या संबंध है? बेटा बहुत गहरा संबंध है । चिंता, तनाव, अवसाद, गुस्सा ये सब हकलाहट की समस्या को बढावा देते हैं । तुम्हें कभी नोट किया होगा जब तुम कभी चिंता में होते हो या किसी तनाव में रहते हो या फिर जब तुम कभी गुस्से में किसी के साथ झगडा करते हो तो अक्सर हकलाहट की समस्या का शिकार हो जाते हैं । इन सब परिस्थितियों में तुम पहले से ज्यादा हकलाने लग जाते हो । आंटी जी, मैं बाकी गतिविधियों जैसे चिंता, तनाव या अवसाद पर किसी ना किसी प्रकार से काबू पा लूंगा । लेकिन मैं अपने गुस्से को कैसे काबू करूँ? क्योंकि जब भी कोई व्यक्ति मेरी हकलाहट की समस्या की वजह से मजाक बनाता है तो मेरा गुस्सा चरम पर पहुंच जाता है । मैं उस समय अपने गुस्से को काबू में नहीं कर सकता है और कई बार तो उस व्यक्ति को मारने पीटने तक की नौबत आ जाती है । तो तुम्हारे कहने के अनुसार तो मैं गुस्सा बहुत आता है । ये गुस्सा अच्छा भी है तो अपने गुस्से को एक ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकते हो । जी जी मुझे आप की बात समझ में नहीं आई । अब कहना क्या चाहती हैं । अगर तुम्हें गुस्सा आता है तो तुम उस उससे को पालना सीखो क्योंकि तुम्हारा यही गुस्सा तो मैं तुम्हारे मकसद में कामयाब होने के लिए ईंधन का काम करेगा । तुमने बताया था कि तुम जिम जाते हो और कसरत करते हो । तुम अपने गुस्से का इस्तेमाल जिम में जाकर कर सकते हैं । मेरे कहने का मतलब है कि जिम कसरत करते समय कि जिम में कसरत करते समय तुम वहाँ अपना गुस्सा निकाल सकते हो । ठीक है आंटी जी मैं जरूर कोशिश करूंगा बेटा मेरे खयाल से तुम्हें तुम्हारी हकलाहट की समस्या को काबू पाने के चारों संभव के बारे में पता चल गया होगा । अगर फिर भी कोई परेशानी हो तो तुम कभी भी बेहिचक मेरे पास मदद के लिए आ सकते हो । मेरे दरवाजे तुम्हारे लिए सादा खुले शिखर आंटी से अपनी हकलाहट की समस्या का हाल जानने के बाद पंकज और मीना घर की ओर निकल पडते हैं । तो फिर पंकज जी कैसा लगा? श्री कान्ति से मिलकर मीना सच कहूँ तो इस आंटी की बातों ने मेरे ऊपर एक जादू सा कर दिया । उनकी बातों ने मेरे जीवन में नई ऊर्जा का संचार कर दिया । अब मुझे यकीन हो चुका है कि मैं अपनी हकलाहट की समस्या पर काबू पा सकता हूँ और एक आम आदमी की तरह अपना जीवन यापन कर सकता हूँ । अब कोई भी मेरा मजाक नहीं बनाएगा और मेरी बातों को ध्यान से सुनिएगा तो तुम श्री कान्ति के कहे उन चार समूहों पर काम करना शुरू कर दोगे । हाँ बिल्कुल इसमें कोई शक नहीं । मैं शिखर आंटी के कहे उन चार स्तंभों पर आज से ही बल्कि अभी से ही काम करना शुरू कर दूंगा । मैं उनकी बातों को अपने दिमाग में रखकर अपनी हकलाहट की समस्या को काबू पाने में जी जान से जुट जाऊंगा ।

मेरा उकाब - 6

अध्याय हकलाहट की समस्या पर काबू पाना । अपनी हकलाहट की समस्या पर काबू पाने के लिए पंकज ने शिखर आंटी के दिए दिशा निर्देशों के तहत काम करना शुरू कर दिया । पंकज को गायन का शौक पहले से ही था और फिर शिखर आंटी ने भी उसे गाना गाने के लिए कहा था । अब उसे दिन में जब भी कम समय मिलता तो कोई न कोई गाना गुनगुनाने लगता है । हर समय कुछ न कुछ गुनगुनाने से एक तो उसके गायन में सुधार हुआ और दूसरा वो तनावमुक्त भी रहने लगा । इसके साथ साथ उसने किताबों को पढाना भी शुरू कर दिया । उसने शेखावटी के कहे अनुसार किताबों और अखबारों को धीमी गति से और ऊंची आवाज में पढना शुरू कर दिया । इससे उसकी हकलाहट की समस्या में काफी सुधार होना शुरू हो गया । पंकज हर रोज सुबह कॉलेज जाने से पहले अपनी छत पर बने एक कमरे में चला जाता है और अपने आप को कमरे में बंद कर लेता । इसके बाद वो एक आईने के सामने बैठ कर अपने आप से बातें करता रहता है । वो ऐसा पंद्रह से बीस मिनट तक करता । इससे उसका आत्मविश्वास और भी बढ गया । अपनी हकलाहट की समस्या को काबू करने के लिए पंखा जब चिंता और तनाव से दूर रहने की कोशिश करने लगा, लेकिन ये उसके लिए सबसे मुश्किल कामों में से एक था । वो चाहकर भी अपने गुस्से को काबू में नहीं कर पा रहा था । इसके लिए उसने शिखर आंटी के बताए रास्ते पर चलने की योजना बनाई । वो जिम में जाता है और अपना गुस्सा जिम में कसरत करते समय निकालता । वो हर समय शांत रहने की कोशिश करता । वो लोगों द्वारा किए गए मजाक पर कोई प्रतिक्रिया नहीं करता और शांत रहकर अपना काम करता रहता है । एक दिन मीना ने पंकज से प्राप्त में मुलाकात की ऍम तुम्हारी हकलाहट की समस्या वाला कोर्स कैसा चल रहा है? क्या कुछ फर्क पडा? हाँ, काफी हद तक कह सकता हूँ कि मुझे शिखर आंटी के दिए दिशा निर्देश से काफी फर्क पडा है । लेकिन लेकिन क्या? लेकिन कभी कभी मुझे काफी समस्या होती है । मैं कुछ परिस्थितियों में बिल्कुल भी बोल नहीं पाता । इस बारे में मैं शिखर आंटी से बात करना चाहता हूँ । क्या तुम मेरे साथ चल होगी? हाँ बिल्कुल । मैं शिखर आंटी को फोन करके उनसे मिलने के लिए समय ले लेती हूँ । कुछ समय शिखर शांति से फोन पर बात करने के बाद पंकज शिखर आंटी ने शाम को मिलने के लिए बुलाया है क्या तो मैं आज शाम को चल सकते हो । हाँ आज शाम को मेरे पास कोई काम नहीं है । वैसे भी अगर कम होता भी तो मैं उनसे मिलने के लिए समय जरूर निकाल लेता हूँ । ठीक है हम आज शाम को ही उनके पास चलेंगे । पंकज और मीना शाम को शेखावटी के पास जाने के लिए तैयार हो जाते हैं और कुछ समय के बाद वह दोनों उनके क्लिनिक में पहुंच जाते हैं । हाँ तो पंकज बेटा क्या हाल है? ठीक है आंटी जी और तुम्हारी हकलाहट की समस्या कैसी है? जी ठीक है अब तो पहले से काफी कम होती है लेकिन लेकिन क्या किसी किसी समय ये समस्या बहुत बढ जाती है । कब बढ जाती है । मेरे कहने का मतलब है कि वह कौन कौन सी परिस्थिति हैं जिसमें तुम्हारी हकलाहट की समस्या बढ जाती है? जी सबसे पहले तो जब मुझे किसी का फोन आता है तो मुझे शुरुआत में हलो बोलने में समस्या आती है । यानी कि मैं फोन पर शुरूआती बात करते समय हकलाने लग जाता हूँ । ठीक हैं और बताऊँ इसका हल है मेरे पास । पार्टी जी जब मुझे किसी अंजान आदमी से बातचीत करनी होती है तो में बातचीत की शुरुआत में हकलाने लग जाता हूँ । ठीक है और कौन कौन सी परिस्थितियां हैं जिनमें तो महक लाने लग जाते हो । आंटी जी जहाँ कहीं चार पांच लोग इकट्ठा हूँ तो वहाँ मुझे बोलने में परेशानी होती है । उदाहरण के तौर पर जब मुझे अपनी क्लास में अपनी अध्यापिका के सामने बोलना पडता है तो मैं हकलाने लग जाता हूँ । इन तीनों परिस्थितियों के अलावा मुझे हकलाहट की समस्या बहुत ही कम होती है । मैं बिलकुल ठीक ठाक बोलता हूँ । आंटी जी क्या आप मुझे इन तीनों परिस्थिति में सही ढंग से बोल पाने में मेरी मदद कर सकती हैं? बिल्कुल करूँ क्यों नहीं? करोंगे? सबसे पहली परिस्थिति है तुम्हारी फोन पर बात करना । यानी कि जब तुम फोन पर किसी से बात करते हो तो तुम है हकलाहट की समस्या होने लगती है । इस समस्या को हल करने के लिए तो उन्हें किसी अनजान नंबर पर या अगर हो सके तो किसी कंपनी के ग्राहक देखभाल अधिकारी से, फोन पर बात करके तो मैं अपनी हकलाहट की समस्या दूर करनी होगी । आंटी जी मैं कुछ समझा नहीं । किसी कंपनी के ग्राहक देखभाल अधिकारी से बात करके मेरी हकलाहट की समस्या कैसे दूर हो सकती है? इसके पीछे क्या सिद्धांत है? पंकज बेटा इसके पीछे का सिद्धांत बहुत सरल है । तुम्हारी हकलाहट की समस्या के मुख्य वजह तुम्हारी हकलाहट की समस्या की मुख्य वजह तुम्हारा डर है और ये डर पैदा होता है तो तुम्हारी हकलाहट की समस्या की वजह से तुम्हारी बेज्जती का होना । अगर मैं सीधे और आसान शब्दों में कहूं तो जब तो महक लाते हो तो तुम्हें डर लगता है कि सामने वाला मेरी बेइज्जती न कर दें और इस बेइज्जती के डर से तुम और भी हकलाने लग जाते हो । लेकिन आंटी जी मुझे अभी तक एक बात समझ में नहीं आई कि इस बात का किसी ग्राहक कंपनी के ग्राहक देखभाल अधिकारी से बात करने से क्या है । मेरे कहने का मतलब है कि आप के कहे अनुसार अगर मैं किसी कंपनी के ग्राहक देखभाल अधिकारी से बातचीत करूंगा तो इस से मेरी हकलाहट की समस्या कैसे दूर हो पाएगी? पंकज बेटा तो मुझे एक बात बताओ जी आंटी जी, जब तुम किसी कंपनी के ग्राहक देखभाल अधिकारी से बातचीत करोगे तो क्या वो तुम्हें जानता होगा? नहीं, क्या वो तुम्हारी तस्वीर देख रहा होगा? नहीं और क्या तुम उस को जानते हो? क्या वो तुम्हारे बारे में जानता है यानी कि तुम दोनों एक दूसरे को नहीं जानते । तो अगर तुम्हें इस बात का डर नहीं होगा कि अगर मैं उससे बात करते समय हकलाने लग गया तो वह मेरी बेइज्जती कर देगा । तो तुम है हकलाने जैसी कोई समस्या नहीं होगी । बेइज्जती का डर तुम्हारी हकलाहट की समस्या को बढाता है । जब तुम अपने दर को काबू में पालोगे तो तुम अपनी समस्या पर आसानी से काबू पा सकेंगे । आंटी जी में समझ गया, आप जो कहना चाह रही हैं आप के कहे अनुसार जब मैं किसी अंजान व्यक्ति जैसे कि किसी कंपनी के ग्राहक देखभाल अधिकारी से बातचीत करूंगा तो हम दोनों एक दूसरे को जानते पहचानते नहीं होंगे । और अगर उस समय में बातें करते समय रुक गया या हकलाने लग गया तो मुझे सामने वाले से बेइज्जती का डर बिल्कुल नहीं होगा और मैं आराम से बात कर सकूंगा । बिल्कुल सही कहा तुमने और अब उस परिस्थिति के बारे में बात करते हैं जब तुम किसी अंजान व्यक्ति के सामने हकलाने लग जाते हो या किसी व्यक्ति से तुम पहली बार मिलते हो । तब तुम्हें हकलाहट की समस्या का सामना करना पडता है । उस परिस्थिति में तो मैं तुम्हारी हकलाहट की समस्या पर काबू पाने के लिए एक काम करना होगा । इसके लिए जब भी तुम्हें कभी समय मिले तो तुम किसी अंजान जगह में या किसी दूसरे शहर में जाकर वहाँ के किसी अंजान व्यक्ति जैसे कि किसी दुकानदार से जाकर बात चीत करो । ये तकनीक भी ठीक वैसे ही काम करेगी जैसे की तो फोन पर किसी अंजान व्यक्ति से बात करते करते हो । इस तकनीक में भी तुम्हें अपनी बेज्जती का डर नहीं होगा क्योंकि तुम किसी अनजान शहर में हूँ और अजनबियों से बातचीत कर रहे हो । इस परिस्थिति में न तो वो अजनबी लोग तुम्हें जानते होंगे और ना तो उनको जानते होंगे । आसान शब्दों में अगर कहूँ तो वह तुम्हारी हकलाहट की समस्या का मजाक बनाते भी हैं तो तुम्हें कौन सा फर्क पडेगा क्या नहीं तुम्हारी भविष्य में कभी भी उनसे मुलाकात नहीं होगी । उप लोग इन दोनों तकनीकों में तुम्हें तुम्हारी उपरोक्त इन दोनों तकनीकों में तो मैं तुम्हारी हकलाहट की समस्या को हल करने में मदद मिलेगी । अब बात करते हैं तुम्हारी उस परिस्थिति की जहाँ पर चार पांच लोग इकट्ठा होते हैं और तुम्हें हकलाहट की समस्या होने लगती है । या फिर जैसा की तुमने बताया कि तुम्हें अपनी क्लास में अध्यापिका के सामने बोलने में समस्या होती है । इस परिस्थिति में जब भी तुम्हें लगे कि तुम्हें यहाँ इस परिस्थिति में जब भी तो मैं लगे कि तुम्हें चार पांच लोगों के सामने बोलना है । क्या अपनी क्लास में बोलना है तो पहले ही उनको अपनी हकलाहट की समस्या के बारे में अवगत करा दो । आंटी जी मैं आपकी बात को समझा नहीं, मैं तुम है । आसान शब्दों में उदाहरण देकर समझाती हूँ तो मान लोग तुम्हारे घर में कोई फंक्शन है वहाँ पर तुम्हारे रिश्तेदार वगैरह । वहाँ पर तुम्हारे रिश्तेदार वगैरह इकट्ठा होने और तुम्हें उनके सामने कुछ बोलना है तो उन्हें अपनी हकलाहट की समस्या के बारे में पहले ही बता देते हैं । उनसे यू बोल दो की तो मैं हकलाहट की समस्या है, जिस वजह से तो मैं बोलने में परेशानी हो सकती है या बोलते समय किसी स्थान पर रुक सकती हूँ तो कृपया मेरे बोलने का इंतजार करेंगे । परन्तु आंटी जी इससे क्या होगा? मेरे कहने का मतलब है कि ये तकनीक कैसे काम करेगी । इस तकनीक के पीछे एक अलग ही साइंस तुम जब आपने हकलाहट की समस्या के बारे में लोगों को पहले ही बता दोगे तो तुम्हें ये डर खत्म हो जाएगा कि अगर तुम हकलाने लग गए या बोलते समय रुक गए तो लोग तुम्हारे बारे में क्या सोचेंगे । इस वजह से तुम बिंदास होकर आराम से बोल सकेंगे । क्योंकि तुम्हारे मन में ये डर खत्म हो जाएगा कि अगर तुम बोलते समय रुक गए तो लोग तुम्हारा मजाक उडाएंगे । ये आपने सही कहा । डिजीज अब और कोई बात रहे गए हो । पूछने के लिए तो जल्दी से पूछ सकते हो क्योंकि मुझे किसी काम से बाहर जाना है । शिखर आंटी ने कहा, नहीं आंटी जी, आपके लिए इतना ही काफी है । अगर फिर कभी कोई समस्या होगी तो मैं आप को जरूर याद करूंगा । आंटी जी अगर सच कहूँ तो मेरे पास शब्द नहीं जिनके जरिए मैं आपका शुक्रिया अदा करूं । मेरी मदद कर के आप ने मेरा जीवन ही बदल दिया है । बेटा अगर सच में किसी का शुक्रिया करना है तो वह सामने जो तस्वीर लगी है उनको करूँगा । ये कौन है? आंटी जी बेटा ये मेरे पति हैं । इनका नाम है जी को इनके बारे में अगर कुछ जानना चाहते हो तो तुम्हें इंटरनेट से इनके बारे में सारी जानकारी मिल जाएगी । अब मैं माफी चाहती हूँ । मुझे कहीं जाना है । ठीक है आंटी जी अब हमें भी जाने की इजाजत दीजिए । आंटी जी से इजाजत लेकर पंकज और मीना दोनों घर की ओर रवाना हो जाते हैं । घर आकर वो शिखर आंटी के बताए दिशा निर्देशों पर काम करने की कोशिश करने लगा । पंकज मुझ से दूर जरूर रहता था, लेकिन मैं हर समय उसी के बारे में सोचता रहता था । मेरा ध्यान ना चाहते हुए भी उसकी तरफ ही जाता था, जिस वजह से मुझे पिताजी हर समय टोकते रहते थे । वो मुझे मेरे अपने भविष्य की तरफ ध्यान देने के लिए कहते हैं । लेकिन मैं पंकज के बारे में सोचता रहता हूँ । एक दिन शाम को मैं और पिताजी बैठे हुए थे तो पिताजी ने अचानक से मुझसे कहा मोहित बेटा, वो तुम्हारे दोस्त पंकज की कोई खोज खबर नहीं आई । क्या सब खैरियत है? हाँ पिता जी, मेरी पिछले हफ्ते ही उससे फोन पर बात हुई थी और वो बहुत खुश था क्योंकि उसने अपनी हकलाहट की समस्या पर काफी हद तक काबू पा लिया है । चलो ये तो बहुत अच्छी बात है और उसके माता पिता क्या वो अभी भी वैसे ही लडाई झगडा करते हैं या उनमें भी कोई कुछ क्या उनमें भी कुछ सुधार हुआ है? नहीं पिताजी तो अभी भी वैसे ही हैं । जब मेरी पंकज से बात हुई थी तो मैंने पंकज से इस बारे में पूछा । उसने बताया कि वह अभी भी वैसे ही लडाई झगडा करते रहते हैं । कोई बात नहीं । समय के साथ साथ सब ठीक हो जाएगा । लेकिन पिताजी मुझे उनकी एक बात समझ में नहीं आती । वो हर समय लडाई झगडा क्यों करते रहते हैं? क्या उनकी शादी उनकी मर्जी से नहीं हुई थी या फिर पंकज की माँ को उनकी पहली शादी के बारे में पता नहीं था? बेटा जैसा तुम सोच रहे हो वैसे कोई बात नहीं है । पंकज के माता पिता की लडाई की मुख्य वजह पंकज के पिता का अपनी पहली पत्नी को ना भुला पाना है । वो हर समय अपनी पहली पत्नी को याद करते रहते हैं । ये कैसी वजह हुई और आप ये कैसे कह सकते हैं क्योंकि ये मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है । मतलब आपने ये देखा है आपने कभी देखा है बेटा तुम्हें याद होगा । आज से कई साल पहले मैं किसी काम से पंकज के शहर में गया था और मुझे पंकज के शहर में रात रुकना पडा था । हाँ, मुझे याद है तो उस दिन पंकज के पिताजी दुकान बंद करके जल्दी घर आ गए और हम दोनों बैठ कर बातें करने लगे । बातों बातों में वो अपनी पहली पत्नी का जिक्र करने लगे और वो अपनी पत्नी की बातें करते समय इतना भावुक हो गए कि उनकी आंखों में पानी आ गया था । उस समय वहाँ पंकज और उसकी सौतेली माँ मौजूद थे । शायद पंकज की सौतेली माँ को ये सब अच्छा नहीं लगा और वो बिना किसी से कुछ कहे उस हिस्से में वहाँ से चली गई । कुछ देर बाद हम सब खाना खाकर सोने के लिए चले गए । मेरा कमरा पंकज के माता पिता के कमरे के साथ ही था । रात को करीब ग्यारह बजे के आस पास का समय था । मुझे पंकज के माता पिता के कमरे से शोर आता सुनाई दी । जब मैंने ध्यान से गौर किया तो वह दोनों आपस में झगडा कर रहे थे । पंकज की सौतेली माँ बार बार पंकज के पिता से कह रही थी, अगर आप को अपनी पहली पत्नी को ही याद करना है तो मुझसे शादी क्योंकि मेरा जीवन बर्बाद क्यों किया? आप बार बार अपनी पहली पत्नी की बातें लेकर बैठ जाते हो । घर में जो भी मेहमान आता है उसके सामने अपनी पहली पत्नी की अच्छाइयां गिनाने लगते हो और मेरी बुराई करने लग जाते हो कि हमें इतनी बुरी हूँ । अगर मैं इतनी बुरी हो तो छोड दो । मुझे मुझसे क्यों शादी की मेरे साथ क्यों रह रहे हो? मुझे भी तलाक दे दो । मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहती थी । मैं ये सब सुनकर खामोश सा हो गया और चुपचाप जाकर अपने बिस्तर पर लेट गए । मुझे देर रात तक नहीं नहीं आई और मैं पंकज के माता पिता की लडाई के बारे में सोचने लग गया था । मेरे हिसाब से पंकज की सौतेली माँ अपनी जगह पर सही क्योंकि पंकज के पिता अगर मेरे सामने अपनी पहली पत्नी की अच्छाइयाँ करते हैं की अपनी पहली पत्नी की चर्चा करते हैं तो यकीनन वो हर किसी के सामने ऐसा करते होंगे और मुझे इस बात का भी पक्का विश्वास है कि वह अपनी दूसरी पत्नी की बुराइयां भी सभी के साथ करते होंगे । ये बात किसी भी औरत को बर्दाश्त नहीं हो सकती कि कोई पति उसके सामने अपनी पहली पत्नी की अच्छाइयाँ करेंगे । लेकिन पिताजी अगर आपको इस बारे में पता था तो आप पंकज के पिता से बात करते हैं और उन को समझाते उन्हें ऐसा करने से रोकते बेटा मैंने इस बारे में सोचा । जरूर मैंने रात को ये विचार बनाया था कि अगले दिन पंकज के पिता से इस बारे में जरूर बात करूंगा । लेकिन पंकज के पिता सुबह जल्दी अपनी दुकान पर चले गए और मैं अपने घर की ओर रवाना हो गया । मुझे उनसे बातचीत करने का दोबारा कभी मौका नहीं मिला । वैसे भी ये उनके घर का मामला है और मैं उनके घर के नीचे मामले में दखलंदाजी नहीं कर सकता है । हम किसी को बिना मांगे सलाह नहीं दे सकते लेकिन पिताजी ऐसा कब तक चलेगा? मेरे कहने का मतलब है कि पंकज की मां उसके साथ ऐसा व्यवहार कब तक करती रहेगी । वो अपने बेटे के साथ तो बहुत प्यार से रहते हैं लेकिन पंकज के साथ बहुत ही बुरा व्यवहार करती है । मैंने कई बार अपनी आंखों से देखा है बेटा तेरे सवाल का जवाब मैं तो क्या भगवान भी नहीं दे सकता लेकिन एक बात है अगर उसे अपने जीवन में कुछ बनना है या कुछ कर के दिखाना है तो उसे ये सब सहन करना ही होगा । वो जितना ये सब सहन करेगा उतना ही मजबूत होगा । क्योंकि शायद मैंने तुम्हें पहले भी कई बार बताया है कि जिस कोयले पर दबाव पडता है । खीरा वही बनता है और अमर हो जाता है और जो दबाव का और जो दबाव का सहन नहीं कर पाते तो कोयले तो जलकर राख हो जाते हैं और फिर तो उसके बारे में सोच सोच कर अपना समय बर्बाद मत करो । तुम्हारी पढाई पूरी हो गई है और फिर तुम उसके बारे में सोच सोच कर अपना समय बर्बाद मत करो । तुम्हारी पढाई पूरी हो गई है और तुम कोई अच्छी सी नौकरी ढूंढो और शादी कर लो तो मैं तो पता ही है कि मेरी तबियत आज कल कुछ ठीक नहीं रहती । मैं चाहता हूँ की तो में कच्ची से नौकरी करने के बाद जल्द से जल्द शादी कर लो । पिताजी आप चिंता छोडिए, मुझे तो कोई ना कोई नौकरी मिल ही जाएगी । और रही बात शादी की तो मैं अभी शादी नहीं करना चाहता हूँ । शादी के लिए मुझे कुछ समय चाहिए । सबसे पहले मैं अपना भविष्य सुधारना चाहता हूँ । उसके बाद ही मैं अपनी शादी के बारे में सोचूंगा । बेटा मैं मानता हूँ कि तेरे पास समय की कोई कमी नहीं है लेकिन हो सकता है मेरे पास समय ही ना हो । मैं चाहता हूँ कि मेरे परलोक सुधारने से पहले मैं अपने पोता पोती का मूवी देख लेंगे । पिताजी आप कैसी बातें कर रहे हैं? आपने तो अभी अपने पोते की शादी भी करनी है । मैंने मजाक से कहा लेकिन पिताजी मेरे साथ मजाक नहीं कर रहे थे । कुछ दिनों के बाद पिताजी को हल्का सा दिल का दौरा पडा और जिस वजह से उन्हें अस्पताल में दाखिल करना पडा । अस्पताल में डॉक्टर ने इन की हालत काफी नाजुक बताई । कुछ समय के बाद उनको होश आया और मैं उनके पास गया । मुझे देखकर पिताजी बोले, देखा बेटा मैंने कहा था ना मेरे पास समय बहुत कम है । तुम मेरी बात पर विश्वास नहीं करते थे । नहीं पिताजी, ऐसी कोई बात नहीं । आप जो बोलेंगे मैं करूंगा । आप बस स्वस्थ हो जाओ और घर वापस आ जाओ तो मेरी बात मानो तुम शादी कर लो । मैं जानता हूँ मेरे पास समय बहुत कम है । मेरी आखिरी इच्छा यही है कि मैं अपनी पोस्ट की । मैं अपने पोता पोती का मोना सही कम से कम तुम है । दो लाख बने तो देख लो । उसी समय डॉक्टर कमरे में आए और उन्होंने हमें कमरे से बाहर जाने को कहा । हम कमरे से बाहर आ गए । डॉक्टर ने मुझे बुलाकर कहा, देखो बेटा हमारे पिताजी की हालत बहुत नाजुक । अभी तो हल्का सा दिल का दौरा पडा है । भगवान ना करें अगर फिर से इन्हें दिल का दौरा पडा तो हम बचा नहीं पाएंगे । वो जो भी कहते हैं उनकी इच्छा पूरी कर दो । डॉक्टर की बात सुनकर पास खडी मेरी माँ जोर जोर से रोने लगी । उस समय मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ । तभी माने मुझसे कहा बेटा, तुम अपने पिता की इच्छा पूरी कर देते हैं । तुम शादी के लिए यहाँ है तो मैं तुम्हारे हाथ जोडती हूँ । हाँ, लेकिन ये कैसे मुमकिन है? अभी ना तो मेरी नौकरी लगी है और ना मुझे कोई पैसों की आमदनी । और तो और शादी के लिए लडकी की जरूरत होती है । नहीं कोई लडकी हमारी नजर में तो ये सब इतनी जल्दी कैसे हो पाएगा? मेरी तो समझ में कुछ नहीं आ रहा । बेटा ये सब मुझ पर छोड देते हैं तो हम सिर्फ शादी के लिए हाँ बोलो । बाकी का इंतजाम मैं कर देती हूँ । पास खडे मेरे मूव बोले । मामा जी ने कहा उस वक्त मैं कुछ भी कह पाने की स्थिति में नहीं था । मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ । एक तरफ पिताजी अस्पताल में दाखिल थे और दूसरी तरफ मेरे मूव बोले मामा जी मेरी शादी की तैयारियां करने में जुटे हुए थे । आनंद फाइनल में उनके किसी दूर के रिश्तेदार की लडकी को मुझसे शादी करने के लिए राजी किया गया और रातोंरात मेरी उससे शादी करवा दी । एक

मेरा उकाब - 7

अध्याय साथ मेरी शादी हैं । हलो हाँ जी कौन? आप कान जी आपने फोन किया है? आप बताओ आप कौन जी? मैंने फोन मोहित भैया को क्या है? क्या मेरी बात मोहित भैया से हो सकती है? जी बिल्कुल आप कौन बोल रहे हैं जी मेरा नाम पंकज है । अच्छा तो आपका जो नमस्कार पंकज जी नमस्कार जी माफ कीजिए । मैंने आपको पहचाना नहीं आपको जी मैं आपके मोहित भैया की धर्म पत्नी और आपकी भाभी बोल रही हूँ । मुझे मोहित जी ने आप के बारे में बताया था । भाभी ये क्या मजाक है? कौन है? पंकज ने थोडा गुस्से में कहा पंकज जी वो समझ करो । मोहित जी बाजार गए हैं और उनके आते ही मैं उनसे आपकी बात करवा दूंगी । जी, वो तो ठीक है लेकिन आप सच सच बताओ आप कौन हैं? मजाक मत करो । उनका जी में मजाक नहीं कर रही । मैं आपके मोहित भैया की धर्मपत्नी देखिए । आप जो भी बोल रही हैं मुझे नहीं पता । लेकिन कृपया जब भी मोहित भैया आए मेरी उनसे बात जरूर करवाना । मैं इंतजार करूंगा जी बिलकुल । जब भी आप के मोहित भैया आएंगे, मैं आपकी बात करवा दूंगी । जरा एक मिनट रुको तो वही आ गए हैं । आप जरा उनसे बात कर लूँ । जी ठीक है, मैं इंतजार करता हूँ । आप मेरी बात करवाई उनसे कुछ देर बाद हेलो पंकज हो गया । ये मैं क्या सुनाऊँ? आप ने शादी कर ली और मुझे बताया भी नहीं । ठीक है कोई बात नहीं । हम को कौन याद करता है? काम काज तुम्हारा गुस्सा करना जाए । मैं तो मैं गलत नहीं मानता । मैं अपनी गलती स्वीकार करता हूँ, लेकिन जिन परिस्थितियों में मैंने शादी की है, अगर तुम उनके बारे में सुनोगे तो तुम भी मुझे दोषी नहीं मानेंगे । क्या हुआ? ऐसे भी क्या वजह थी कि आपने मुझे बताना भी ठीक नहीं समझा । इसके बारे में मैं तो मैं इसके बारे में मैं तुम्हें फोन पर नहीं बता सकता है । तो जितना जल्दी हो सके मेरे पास आ जाओ । मैं नहीं आ सकता क्यों क्या हो गया लगता है अभी भी मेरे साथ गुस्सा हो । मैंने अपनी गलती मान ली है और इस गलती के लिए कितनी बार तुमसे माफी मांगी लेकिन तुम भैया गलत समझ रहे हैं । मैं इसलिए आपके पास नहीं आ सकता क्योंकि इसके लिए पिताजी नहीं मानेंगे तो मैं इस बात की चिंता मत करो तो मेरे पास आने की तैयारी करो । तुम्हारे पिताजी से मैं बात कर लेता हूँ । अगर ये बात है तो आप अभी पिताजी को फोन करो और उन्हें मुझे आप के पास भेजने के लिए कहूँ । मैं अभी इसी समय आपके पास आने के लिए रवाना होने मैं अभी इसी समय आपके पास आने के लिए रवाना हो जाता हूँ और मैंने तुरंत पंकज के पिता जी को फोन लगाया और उन्हें सारी बात बताई । मैंने उनसे पंकज को मेरे पास आने की इजाजत मांगी । पंकज के पिता ने तुरंत ही हाँ कह दिया और पंकज को मेरे पास भेजने के लिए राजी हो गए । पंकज भी बिना समय गवाएं मेरे पास आने के लिए तुरंत रवाना हो गया क्योंकि हम दोनों का शहर कुछ ही घंटों की दूरी पर था इसलिए आने में ज्यादा समय नहीं लगा । पंकज आते ही मेरे ऊपर गुस्सा करने लगा । ये क्या भैया, आपने तो मुझे पराया समझ लिया । आपने मुझे अपनी शादी के बारे में बताया भी नहीं । ये तो मैंने अचानक से आप को फोन किया और फोन भाभी ने उठा लिया । पहले तो मैं हैरान परेशान हो गया कि आपके घर से ये कौन बोल रहा हूँ । मैंने सोचा हो सकता है आपका कोई रिश्तेदार हो जो मेरे साथ मजाक कर रहा है । मुझे उनकी कही बातों पर यकीन नहीं आ रहा था क्योंकि मैं ये सोच भी नहीं सकता था कि आप मुझे बिना बताए शादी कर लेंगे । खैर कोई बात नहीं अब आप बताइए ऐसी भी क्या मजबूरी थी की आपको इतनी जल्दी शादी करनी पडी हो? पंकज मेरे पिताजी को दिल का दौरा पडा था और वो अस्पताल में दाखिल थे । उनकी इच्छा थी कि वह मरने से पहले मेरी शादी देख लें । इसलिए पिताजी की इच्छापूर्ति के लिए मुझे अपनी शादी का फैसला जल्दबाजी में लेना पडा हूँ । अब अंकल जी का है । फिलहाल तो पिताजी अस्पताल में ही है लेकिन अब उनकी हालत में कुछ सुधार है । डॉक्टरों के अनुसार एक या दो दिन में हम उनको छुट्टी दे देंगे । अब तो आपको अपने भैया से कोई गिला शिकवा नहीं आना । पंकज भैया मेरी पत्नी ने पंकज से कहा नहीं बिल्कुल नहीं भाभी जी । लेकिन मुझे एक बात बताइए कि आप मेरे बारे में कैसे जानती हैं । वो इसलिए क्योंकि आपके भैया ने मुझे आप के बारे में पहले ही बता दिया था । उन्होंने ये भी बता दिया था कि आपका फोन आएगा और वह मुझ पर बहुत गुस्सा करेगा । भाभी जी गुस्सा भी तो अपनों से किया जा सकता है । जहरों से क्या गुस्सा करना ये भी ठीक है? पंकज एक बात तो बताओ । मैंने पंकज से कहा बोलो भैया क्या बात है? पंकज मैं काफी देर से देख रहा हूँ तो मैं हकलाहट की समस्या बहुत कम हो रही है । इसका क्या राज है? क्या तुम अपनी हकलाहट की समस्या को काबू करने के लिए कोई दवाई वगैरह ले रहे हो? नहीं भैया जी ऐसी कोई बात नहीं । मैं इसके लिए कोई दवाई नहीं ले रहा हूँ । हाँ, मैं अपनी हकलाहट की समस्या को काबू करने के लिए एक शिखा नाम की औरत के पास जरूर गया था और उन्होंने मुझे हकलाहट की समस्या संबंधी कुछ दिशा निर्देश दिए । उनके बताए दिशा निर्देश का पालन करके मैं अपनी हकलाहट की समस्या पर काबू पाने की कोशिश कर रहा हूँ । वहाँ ये तो बहुत अच्छी बात है भैया जी! सच बताना क्या आपको लगता है कि मेरी हकलाहट की समस्या पहले से कम हुई है? हाँ, सच में मैं झूठ नहीं बोल रहा तो तुम्हारी हकलाहट की समस्या पहले से बहुत कम हो गई है । अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो मुझे कैसे पता चलता? कितना समय हो गया है तो मैं अपनी हकलाहट की समस्या पर काम करते हुए बढिया जी अभी ज्यादा समय नहीं हुआ अभी तो कुछ दिन हुए हैं । वह सच कहूँ तो महसूस नहीं होता हूँ तो मैं कभी अगला हट की समस्या थी । सिर्फ कुछ कुछ जगह पर तुम्हारी हकलाहट की समस्या महसूस होती है । अब वैसे ही मेहनत करते रहूँ देखना एक दिन आएगा तो अपनी हकलाहट की समस्या पर पूरी तरह से काबू पालोगे पंकज मेरे पास दो दिन रहा हूँ और इस दौरान हम दोनों में उसकी हकलाहट की समस्या को लेकर ही बातें होती रहीं हूँ । शिवकांती से मिलने के बाद पंकज ने अपनी हकलाहट की समस्या को काबू करने के लिए शिखा आंटी से मिलने के बाद पंकज ने अपनी हकलाहट की समस्या को काबू करने के लिए दिन रात एक कर दिया । वो शिखर आंटी के दिए दिशा निर्देशों पर चलकर अपनी हकलाहट की समस्या को काबू करने की कोशिश करने लगा । समय बीतता गया और उसने कुछ ही महीनों में अपनी हकलाहट की समस्या पर काफी हद तक काबू पा लिया था । उसने अपनी दिनचर्या में काफी बदलाव कर लिया था तो सुबह पांच बजे के आस पास हो जाता है और जिम में जाने की तैयारी करने लगता हूँ । उसके बाद सात बजे के आस पास जिम से वापस आकर नहाने और तैयार होने के लिए अपने कमरे में चला जाता । कमरे में बैठ कर वह शिखा आंटी के दिए दिशा निर्देशों के अनुसार किताबें पडता और कुछ देर आईने के सामने बैठ कर अपने आप से बातें करता हूँ । फिर वो कॉलेज जाने के लिए तैयार हो जाता है । कॉलेज से वो दोपहर दो बजे के आस पास वापस आता और आकर अपने पिताजी की दुकान में बैठकर उनका हाथ बटा था । शाम को वो अकेला ही बाहर घूमने निकल जाता है और बाहर जाकर वहाँ अजनबी लोगों से बातें करता है । वह कुछ समय घर के सामने बने पार्क में बिताता और वहां बैठ कर फोन पर विभिन्न विभिन्न कंपनियों के ग्राहक देखभाल अधिकारियों से बात करता हूँ और रात को खाना खाकर सो जाता । इस प्रकार की दिनचर्या नहीं उसकी हकलाहट की समस्या को काफी कम कर दिया था जिससे उसका आत्मविश्वास और भी बढ गया और वह पहले से ज्यादा खुशमिजाज और चिंता मुक्त रहने लगा हूँ । वो अपनी माता की बेवजह डांट की भी ज्यादा परवाह नहीं करता हूँ और ज्यादातर समय उनसे दूर रहने की कोशिश करता हूँ । समय बीतता गया मेरी शादी को अभी चार साल का समय हो गया था, लेकिन अभी तक हमें औलाद का सुख प्राप्त नहीं हो सका । इन चार सालों के दौरान मैंने अपने जीवन में कई उतार चढाव देखे । मेरे पिताजी की मृत्यु हो गई और मैं अकेला पड गया । घर में मैं, मेरी पत्नी और मेरी माताजी रहते थे । मैं सारा दिन नौकरी करता और शाम को घर वापस आ जाता । औलाद न होने के कारण मुझे अपने रिश्तेदारों और निकट संबंधियों के ताने झेलने पडते । हालात प्राप्ति के लिए हमने कई डॉक्टरों से इलाज करवाया । यहाँ तक कि हम दोनों ने अपना डॉक्टरी मुआयना भी करवाया । हम दोनों में से किसी को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं थी लेकिन इसके बावजूद भी हमें औलाद का सुख प्राप्त नहीं हो रहा था । शायद इस वजह से मेरी पत्नी ईशा के स्वाभाव में काफी तब भी लिया चुकी थी । वो गुस्सैल और झगडालू हो गई थी । वह बात बात पर झगडा करती थी और हर समय मुझे ही कसूरवार मानती । वह जल्दबाजी में हुई हमारी शादी का कसूरवार मेरे मामाजी को मानती जिस वजह से वो मेरे मामा जी के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करती थी । एशिया के इस रवैये के बारे में मैंने कई बार उसकी माँ से बात की, लेकिन उसकी माँ भी उसको समझाने के बजाय उसी का साथ देती और बातों बातों में वो इसका सारा दोष और बातों बातों में वो इसका सारा दोष उनकी जल्दबाजी में हुई शादी को देती हूँ । जिस वजह से मैं अपने घर में होने वाले झगडे का जिम्मेदार अपने आपको मानने लगा और मुझे इस बात का पछतावा होने लगा कि मैंने अपने पिताजी के कहने पर जल्दबाजी में शादी क्योंकि लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था । अब पछताने का कोई फायदा नहीं था । एक दिन में पंकज के घर गया आप भैया जी क्या हाल है? स्वागत है आपका और चुनाव? पंकज सब ठीक था जी भैया जी सब बिल्कुल ठीक हूँ, आप सुनाइए कैसे आना हुआ? क्यों भाई मैं नहीं आ सकता । नहीं भैया जी मेरे कहने का ये मतलब नहीं था । आप अकेले आए हो । भाभी जी को साथ नहीं लाये क्यों भाई मैं अकेला नहीं आ सकता हूँ क्या मेरे अकेले आने की मना ही है? नहीं नहीं भैया जी आप ही का तो कर रहे हैं । वैसे भाभी तेरी मायके में गई हुई थी । मैं घर में अकेला था । दिल नहीं लग रहा था तो सोचा पंकज से मिल लूँ हम बहुत देर तक बातें कर रहे थे । बातें करते करते कब रात हो गई, पता ही नहीं चला । मैंने पंकज के घर में ही रात रुकने का फैसला किया । पंकज एक बात बोलूँ सच सच बता ना पूछ भैया जी क्या बात है क्या तुम बियर पीते हो? नहीं लेकिन आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं? क्योंकि मैं पीता हूँ । वीआईपी ने बाहर चले तो भैया जी मैंने कभी बीयर नहीं थी और ना ही में पीना चाहता हूँ । अगर आप ने बीजेपी नहीं है तो मैं आपके साथ चल सकता हूँ । तो मैं मैंने कौनसा बीयर पीने को कहा है तो मेरे साथ तो चल सकते हो ना । हाँ भैया जी मैं आप के साथ जरूर चल सकता हूँ तो चलो । कुछ समय के बाद हम नजदीकी रेस्ट्रॉन्ट में बीयर पीने के लिए चले गए । पंकज बियर नहीं पीता था । वो मेरे पास बैठ गया । मैं बीयर पीने लगा और बीयर के नशे में पंकज से बातें करने लगा । पंकज यार आज मैं अपने दिल की बात तुमसे कहना चाहता हूँ यार मैं बहुत परेशान हूँ क्या हो गया भैया जी क्या परेशानी है मुझे बताओ । पंकज यार मैं अपनी शादीशुदा जिंदगी को लेकर बहुत परेशान हो । जब से मेरी शादी हुई है । मेरी जिंदगी नर्क के समान हो गई । मैं बिल्कुल अकेला पड चुका हूँ । मेरा ना तो कोई भाई है ना कोई बहन और न ही मेरा कोई दोस्त जिससे कि मैं अपने मन की बात कह सकता हूँ । आज मन बहुत उदास था, परेशान था तो मुझे तुम्हारी याद आई और मैंने सोचा की मैं तुम्हारे साथ बैठ कर बात करके अपना मन हल्का कर लूँ । क्या हुआ भैया जी ऐसी क्या परेशानी है? मुझे भी बता हूँ । शायद मैं इसमें तुम्हारी कुछ मदद कर सकती हूँ । पंकज मैं जानता हूँ कि तुम इसमें मेरी कोई मदद नहीं कर सकते हैं । लेकिन फिर भी मैं तुमसे बात करके अपना मन हल्का करना चाहता हूँ । शायद तुम मुझे कोई सलाह मशविरा दे सको । शादी के कुछ सालों तक तो सब कुछ ठीक ठाक चलता रहा लेकिन पता नहीं बाद में तेरी भाभी यानी ईशा को क्या हो गया । उसके स्वाभाव में अचानक से तब्दीली आने लगी । मैं सारा दिन नौकरी करता और थका हारा । शाम को घर वापस आता तो आते ही मेरे ऊपर बरस पडती है । वो किसी ना किसी वजह से मेरे साथ लडाई झगडा करने लगती हैं । पर क्यों भी ऐसा क्यों करती थी? उसके अनुसार उस की शादी बहुत ही जल्दबाजी में हुई थी । उसने अपनी शादी में अपने सारे शौक पूरे करने थे । लेकिन अचानक से शादी होने की वजह से आपको अपने शौक पूरे नहीं कर सके । इस बात को लेकर हमेशा मुझे ही दोष देती रहती है । लेकिन भैया ये तो लडाई करने की कोई वजह नहीं हुई । पंकज मैं जानता हूँ ये लडाई करने की कोई वजह नहीं है । लेकिन अब उस औरत को कौन समझाये तो हर समय किसी ना किसी बात पर मुझसे झगडा करती है । जिस वजह से मेरी जिंदगी नरक के समान हो गई थी । लेकिन अब ठीक है अब ठीक है अब ठीक कैसे? क्या मतलब है आपका? क्या भाभी के स्वभाव में तब्दीली आ गई? नहीं ऐसी कोई बात नहीं, उसका स्वभाव वैसा का वैसा ही है । तो फिर फिर क्या आपने अभी बोला ना? अब ठीक है, आपकी कहने का क्या मतलब है? अब मैंने उससे तलाक लेने का फैसला कर लिया है । हम अभी घटना नहीं रह सकते हैं । क्या आप क्या बात कर रहे हो? आपको ऐसा नहीं करना चाहिए । आप जल्दबाजी में फैसला ले रहे हैं और जल्दबाजी में लिया गया फैसला ठीक नहीं होता । पंकज यह बात तो तुम भी मानते हो ना कि जल्दबाजी में लिया गया फैसला ठीक नहीं होता तो जल्दबाजी में लिया गया मेरी शादी का फैसला कैसे ठीक हो सकता था । मेरी शादी का फैसला भी तो जल्दबाजी में लिया गया था । भैया जी वो परिस्थिति अलग थी और ये परिस्थिति अलग है । दोनों परिस्थितियों में काफी फर्क है । आप तलाक जैसा अपने जीवन का सबसे बडा फैसला लेने जा रही हूँ । इस पर कुछ देर सोच विचार कर लो । पंकज तुम जो कह रहे हो बिलकुल सही कह रहे हैं । लेकिन जिन परिस्थितियों में मैं निकल चुका हूँ उनके बारे में सिर्फ मैं ही जानता हूँ । मैंने चार साल उस औरत के साथ बिताए हैं और मुझे पता है कि वह कैसी है, उसका स्वभाव कैसा है, उसकी मानसिकता कैसी है । अब उसका स्वभाव मेरे बर्दाश्त के बाहर होता जा रहा था । इसलिए अभी परसों ही मैंने उसे उसके मायके में भेज दिया और तलाक जैसा बडा फैसला लेने का निर्णय किया । भैया जी आपके इस फैसले पर भाभी के मायके वालों की क्या प्रतिक्रिया है? पंकज अभी मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता । अभी तो मैं सिर्फ उसे उसके मायके में छोड कर आया हूँ और उन्हें ये बोल कर आया हूँ कि अब हम दोनों ने इकट्ठा नहीं रहना है और मैं जल्दी आपको तलाक का नोटिस भेज दूंगा । ऐसे उसके पिता का तो पता नहीं लेकिन उसकी माँ तो यही चाहती थी । आपके कहने का क्या मतलब है? क्या भाभी की माँ ये तलाक जैसा निर्णय चाहती थी, जरूर चाहती होगी । आप ये कैसे कह सकते हैं अगर वो ना चाहती अगर वो ना चाहती होती तो हमारे शादीशुदा जीवन में दखलंदाजी ना करती । जब भी हमारी कभी लडाई हुई है तो मैं शिकायती लहजे से उसकी माँ से बात करता हूँ । उसकी माँ उसको समझाने के बजाय उल्टा उसी का साथ देती है भैया वैसे तो मैं आपसे बहुत छोटा हूँ लेकिन अगर मेरी बात मानो तो अपनी जिंदगी में ये तलाक जैसा फैसला जल्दबाजी में मतलब हूँ । भाभी मायके में है । कुछ देर उन्हें मायके में रहने तो हो सकता है की आप से दूर रहकर उन्हें आपके प्यार का एहसास हो । वो आपसे बिछडने का डर संसद वो आपसे वो आपसे बिछडने का दर्द समझ सकें और हो सकता है कि समय बीतने के साथ साथ उनके स्वाभाव में कुछ तब भी लिया जाए । आप दोनों ने चार साल का समय घटना बता है और इन चार सालों में कोई समय तो ऐसा होगा जब उन्हें आपसे सच्चा प्यार हुआ होगा । मेरे जीवन में सब कुछ सही हो सकता है तो हमारी भावी वापस आ सकती है और वह बिना किसी लडाई झगडे के अच्छे से मेरे साथ रह सकती है । बस उसकी माँ की दखलंदाजी हमारे जीवन में ना हो । भैया जी जो बीत गया उसके बारे में मत सोच हूँ । अब जो आने वाला समय है आप उसके बारे में सोचता हूँ । मेरी मानो तो आप भाभी को कुछ समय तो हो सकता है । समय के साथ साथ उनका स्वभाव बदल जाए और उन्हें अपनी गलती का एहसास हो जाएगी । आप उन्हें अपने मायके में ही रहने दो । और हाँ, अगर आपने तलाक का केस करना है तो आप कर सकते हो लेकिन आप तलाक लेने जैसा निर्णय कभी मत लेना । तो ये कैसी बात हुई कि मैं तलाक का निर्णय नालू लेकिन तलाक का केस कर दूँ । ये तुम क्या कह रहे हो? मैं बताता हूँ आप उन पर तलाक का केस कर दो और केस क्या है? केस तो चलता ही रहता है । उसके इसको थोडा लम्बा खींच लो । एक साल, दो साल, तीन साल या दस साल तक आप उसको लम्बा खींच लू लेकिन तलाक लेने का निर्णय मतलब आप देखना समय के साथ साथ भावी को अपनी गलती का ऐसा जरूर होगा और जिस दिन उन्हें अपनी गलती का एहसास होगा तो आप के पास जरूर वापस आएगी । लेकिन मैं तलाक को लम्बा कैसे खेल सकता हूँ? मैंने सुना है कि जब भी हम तलाक का केस दाखिल करते हैं तो कोर्ट छह महीने का समय देता है और इस समय के दौरान अगर दोनों में कोई सुलह वगैरा नहीं होती तो तलाक हो जाता है भैया आज के समय में सब कुछ मुमकिन है । आप शायद मेरा इशारा नहीं समझता हूँ । आपका वकील चाहे तो कुछ भी हो सकता है । खैर चलो देखते हैं क्या होता है वैसे तुम्हारी बात में दम है तो जो कह रहे हो सही कह रहे हो तुम्हारी बात पर विचार किया जा सकता है । अब मेरी बात छोडो अब तुम अपने बारे में बताओ क्या चल रहा है? आजकल क्या कर रहे हो और तुम्हारे गाने का रियाज कैसा चल रहा है? भैया जी मेरी बी ए की पढाई तो पूरी हो गई है और मैं अपना ज्यादातर समय पिताजी के साथ दुकान में ही बताता हूँ । गायन के रियाज की बात करें तो गायन का रियाज बिलकुल ठीक चल रहा है । हाँ, ये तो ठीक है और तुम्हारी हकलाहट की समस्या ये तो आप देख ही रहे हैं कि मेरी हकलाहट की समस्या काफी हद तक कम हो गई है । ये तो बहुत अच्छी बात है । यानी अब तुम्हें कभी भी हकलाहट की समस्या नहीं होती । नहीं ऐसी कोई बात नहीं । मुझे कभी कबार हकलाहट की समस्या का सामना करना पडता है । मैं जब भी कभी चिंता में होता हूँ या कभी किसी परिस्थिति में डर जाता हूँ या कभी गुस्से में होता हूँ तो मुझे हकलाहट की समस्या का सामना करना पडता है और तुम्हारा गायन उसका क्या हुआ हूँ? क्या तुम्हारे माता पिता जी तो क्या तुम्हारे माता पिता हूँ? क्या तुम्हारे माता पिता तुम्हारी गायन की प्रतिभा को आगे बढाने के लिए माने की नहीं नहीं अभी नहीं । नहीं नहीं अभी नहीं । अभी तो बस ऐसे ही चल रहा है । बस कभी कभार अगर दिल करें तो मैं कुछ अकेले में गुनगुना लेता हूँ । चलो कोई नहीं तो तुम देखना एक दिन ऐसा आएगा कि तुम्हारे माता पिता तुम्हारे गायन की वजह से तुम पर गर्व करेंगे । काश ऐसा जल्दी हो जाए तो तुम चिंता मत करो । ऐसा जल्दी होगा । कुछ देर बातें करने के बाद मैं और पंकज घर वापस आ गए और उसके अगले दिन में अपने घर की तरफ रवाना हो गया हूँ ।

मेरा उकाब - 8

हाँ अध्याय पहला कदम पंकज के जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा था । उसकी दिनचर्या उसके मुताबिक नहीं थी । वो कॉलेज की पढाई खत्म कर चुका था और इससे आगे पडने की उसकी कोई योजना नहीं । वो सारा दिन अपने पिताजी की दुकान में उनके साथ बैठा और शाम को जब कभी भी समय मिलता है तो वो अपने घर के सामने बने पार्क में आकर बैठ चाहता । वहां बैठ कर वो अपने भविष्य के बारे में सोचने लगता है । वो भविष्य में गायन के क्षेत्र में कुछ करना चाहता था लेकिन उसके पिताजी उसे ऐसा करने से मना कर रहे थे क्योंकि उनके मुताबिक इससे वो सिर्फ अपना शौक पूरा कर सकता है । वो अपना घर नहीं चला सकता । वो उसे दुकान में बैठने से भी मना करते थे क्योंकि वो चाहते थे कि पंकज अपनी पढाई पूरी कर के कोई अच्छी सी नौकरी कर ले । एक दिन रोज मर्रा की तरह पंकज पार्क में बैठा हुआ था और अपने भविष्य के बारे में सोच रहा था । कुछ समय के बाद पंकज की दोस्त मीना भी वहाँ पर आ गई और उसे यू बैठा देखकर उसने पंकज से कहा और ऍम क्या हुआ वो बुलाकर क्यों बैठा? हुआ है? कुछ नहीं । बस ऐसे ही मुझे पता है तो वही अपने गायन के बारे में सोच रही होगी तो अपने परिवार को साथ साथ क्यों नहीं बता देते हैं कि तुम्हें गायक बनना चाहती हूँ । क्या तुम डरपोक हो? तुम अपने दिल की बात उनसे क्यों नहीं कर सकते हैं? क्योंकि वो नहीं समझेंगे तो फिर उन्हें समझाओ । उन से अपने मन की बात करुँ । अगर मैं तुम्हें कुछ कहूँ तो तुम बुरा तो नहीं मानोगे? नहीं मीना मुझे एक बात बताऊँ, मैंने तुम्हारी किसी भी बात का आज तक कभी बुरा मना है । तुम जानती हो एक तुम ही हो जिससे मैं अपने दिल की बात कर सकता हूँ । तो मेरे और मेरे परिवार के बारे में सब कुछ अच्छी तरह से जानती हूँ । तो मैं पता है कि अगर मैं उन्हें अपने गायन के बारे में बता भी दूँ तो वो मेरे दिल की बात कभी नहीं समझेंगे । मुझसे ज्यादा तो मेरे छोटे भाई की मानते हैं । खैर छोडो इस बात को तुम बताओ । तुम क्या कहना चाहते हैं तो पुनर्जन्म में विश्वास सकते हो? ये कैसा सवाल हुआ पहले मेरी बात का जवाब दो । क्या तुम पुनर्जन्म में विश्वास रखती हूँ? नहीं बिल्कुल नहीं । मेरे अनुसार ये जीवन ही एक बार मिलता है । उसके बाद तो कभी भी इस दुनिया में जान नहीं लेना है । मैं तुम्हारी बात से सहमत हूँ और खुश भी हैं क्योंकि जो मैं कहना चाहती हूँ वो इसी से संबंधित है । अब मेरी बात ध्यान से सुनो मान लो तुम्हें सुबह पता चले कि तुम्हारी शाम को मृत्यु हो जानी है तो तुम सबसे पहले क्या क्या काम करना चाहोगे? मीना तुम्हारे सवाल का जवाब देना तो मुश्किल है लेकिन अगर ऐसा हो तो इस बात का फैसला करना मेरे लिए बहुत मुश्किल होगा की मुझे सबसे जरूरी काम क्या करना चाहिए क्योंकि मैं दुनिया में अपना नाम बनाना चाहता हूँ, अपनी पहचान बनाना चाहता हूँ । मेरी हकलाहट की समस्या की वजह से जिन लोगों ने मेरे बारे में धारणा बनाई हुई है मैं उस धारणा को तोडना चाहता हूँ । अगर आसान शब्दों में कहूं तो मैं अपनी औकात से आगे जाना चाहता हूँ और इसलिए मुझे समय चाहिए । मेरी तो भगवान से यही प्रार्थना होगी कि मुझे काफी समय जरूर मिले ताकि मैं भविष्य में लोगों को कुछ करके बताया । मेरी भी दिल से यही प्रार्थना है कि तुम अपने मकसद में जल्द से जल्द कामयाब हो जाएगा । लेकिन जो मैं कहना चाहती हूँ । शायद तुम मेरी बात नहीं समझे तो मैं एक मकसद निर्धारित करके बैठे हो लेकिन मान लो तुम्हारी अचानक मृत्यु हो जाती है तो तुम्हारा मकसद तो शुरू होने से पहले ये खत्म हो जाएगा । फिर पंकज नाम की लडकी को कौन जाने का? जैसा कि तुम ने कहा है कि तुम अपनी औकात से बाहर जाना चाहते हो लेकिन भगवान ना करे । अगर ऐसा कुछ हो गया यानी तुम्हारी अचानक से मृत्यु हो गई तो तुम इस समाज को अपनी औकात से बाहर जाकर कैसे दिखा सकती हूँ? बिना तुम्हारी बात में तो मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया । अब तुम ही बताओ मैं क्या करें? अगर तुम्हारे पास कोई रास्ता है तो बताऊँ एक रास्ता है थोडा मुश्किल जरूर है लेकिन तुम अपने मकसद में जरूर कामयाब हो सकते हो । क्या है वो रास्ता? तुम्हारा मकसद है कि तुम एक गायक बनना चाहती हूँ और अपने गायन की प्रतिमा के और अपने गायन की प्रतिभा के द्वारा इस समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहते हो । लेकिन तुम्हारे इस काम के लिए तुम्हारे परिवार वाले तुम्हारे खिलाफ है । लेकिन अगर तुम मेरे बताए रास्ते पर चलो, ये जो योजना मैंने बनाई है इस योजना के अनुसार चलो तो इससे तुम गायन की प्रतिभा लोगों तक पहुंचा सकती हूँ और तुम्हारे परिवार को इस बारे में पता भी नहीं चल सकेगा । क्या ऐसा संभव है? बिल्कुल संभव है, ऐसा हो सकता है । मैंने तुम्हारे लिए एक योजना तैयार की है । मैं कई दिनों से इस योजना के बारे में तो मैं बताना चाहती थी लेकिन कभी समय नहीं मिला । जल्दी बताओ क्या योजना है तुम्हारी? मुझे क्या करना होगा? तो सुनो तुम गाना गांव के और मैं तुम्हारे गाने का फिल्मांकन करूँ और तुम्हारी इस वीडियो को मैं अपनी सहेली की मदद से यूट्यूब में डाल देंगे और यूट्यूब की मदद से यू ट्यूब देखने वाले सब लोग तुम्हारा गाना सुनेंगे और जल्द ही तुम काफी मशहूर हो जावे । वहाँ बहुत अच्छी योजना है । मतलब तुम मेरे गाने की फिल्म बनाओगी और फिल्म को यूट्यूब में डाल होगी और यूट्यूब से सब लोग देखेंगे और सब लोगों में मेरे परिवार वाले भी होंगे । क्या वो मेरी वीडियो को नहीं देखेंगे? यह योजना कामयाब नहीं । मैं तुम्हारी बात से सहमत नहीं । पंकज मेरी पूरी योजना तो सुनो । यूट्यूब की वीडियो में तुम्हारा चेहरा हम नहीं दिखाएंगे । तुम्हारा चेहरा अंधेरे में रखा जाएगा और तुम गिटार लेकर अपना गाना गांव तुम्हारा नाम भी असली नहीं होगा । हम तुम्हारा नाम भी बदल देंगे लेकिन तुम्हारा फोन नंबर असली होगा ताकि अगर किसी ने कभी संपर्क करना हो तो वो फोन नंबर से तुम्हें संपर्क कर सके । ये ठीक रहेगा, इस पर विचार किया जा सकता है । लेकिन मैं उस वीडियो में अपना फोन नंबर नहीं देना चाहता हूँ । तो मतलब फोन नंबर अगर नहीं देना चाहते तो मत दो लेकिन ये सब करना कहाँ पर हैं? मेरे कहने का मतलब है कि मेरे घर में ये सब संभव नहीं और जहाँ तक तुम्हारे घर की बात है वहाँ पर भी ये नहीं हो सकता । तुम इस बात की चिंता मत करूँ । मैंने ये सब पहले से ही सोच रखा है । तुम्हारे गाने की वीडियो मेरी सहेली रोशनी के घर में बनाएंगे । रोशनी के पास अपना एक कैमरा है और उसके पास अपना कंप्यूटर भी है । हम उसके कैमरे से तुम्हारी वीडियो बनाकर उसी कंप्यूटर के जरिए यूट्यूब पर डाल देंगे । किसी को इस बात की भनक तक नहीं लगेगी । लेकिन मेरे नाम का क्या होगा? जैसा कि तुम ने कहा कि मुझे अपना नाम बदलना होगा तो मैं अपना नाम क्या रखूंगा? तुम्हारा नाम भी मैंने सोच रखा है क्या? तो काम तो काम ये कैसा नाम हुआ तो मैं याद है तो तुम्हारे मोहित भैया ने तो मैं कहा था कि तू मेरा उकाब है । बस उसी से प्रेरित होकर मैंने तुम्हारा दूसरा नाम मैंने तुम्हारा दूसरा नाम मुकाब रखने के बारे में सोचा है । लेकिन उनका भी क्यूँ? कोई और क्यों नहीं? क्योंकि उकाब में और तुम में बहुत समानता है । वो कैसे? वो का पक्षी का जन्म दूर दराज के इलाकों के पहाडों में एक छोटे से घुसने में होता है । लेकिन जन्म के बाद उसे उडने के लिए सारा आकाश भी कम पड जाता है । तुम्हारी सोच भी इसी प्रकार से काम करती है । तुमने एक छोटे से शहर में एक छोटे से परिवार में जन्म लिया है लेकिन तुम्हारी सोच पूरी दुनिया में अपना नाम फैलाने की है । लेकिन मुझे डर लगता है दाल किस बात से तो मैं क्यों डर लगता है । डरता हूँ कि लोग क्या कहेंगे? देखो पंकज मैंने तुम्हारा नाम ओकाब इसलिए डाला है क्योंकि उनका पक्षी जब दूर आसमान में उडता है तो वह छोटे छोटे परिंदों की परवाह नहीं करता हूँ । वो ये नहीं सोचता है कि छोटे छोटे परिंदे उसके बारे में क्या सोचेंगे । किसी प्रकार तुम्हें भी उसी उकाब की तरह सोचना होगा और उसी की तरह अपनी सिफारिशों को और उसी की तरह अपने ख्वाहिशों के पंख फैलाकर आसमान में उडना होगा । मीना तुमने जो कहा है वह सही है लेकिन मुझे इसके बारे में सोचना पडेगा । मुझे कुछ समय दो और मैं तो मैं सोच कर बताऊँगा लेकिन तो मैं समय किस लिए चाहिए । मुझे लगता है कि तुम डर रहे हो? नहीं ऐसी कोई बात नहीं । मैं किसी से नहीं कर रहा है । बस मुझे कुछ दिनों का समय चाहिए । मैं सब कुछ सोच विचार करके और एक पूरी योजना के साथ इस काम को शुरू करना चाहता हूँ । ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी लेकिन एक बार मेरी योजना पर विचार जरूर करना । उसके बाद मीना वहाँ से अपने घर की ओर चली जाती है और पंकज वही बैठा मीना की कही बातों के बारे में सोचने लग जाता है । उसे समझ में नहीं आ रहा था की क्या किया जाए । इसलिए उसने वहाँ बैठे तुरंत मुझे फोन किया । हेलो ऍम हेलो पंकज मेरा ठीक है । तुम अपना चुनाव आज कैसे याद किया । बस ऐसे ही तट में बैठा हुआ था तो सोचा कि आप से बात कर लूँ और सुनाओ । आप के केस का क्या बना? मेरा केस तो चल रहा है । जैसा कि तुमने बोला था कि इस केस को हम जल्दी खत्म नहीं करेंगे तो मैंने वैसा ही करने के बारे में सोचा है । मैं एशिया को तलाक नहीं दे रहा, बस तलाक का केस दायर किया । इसमें समय जरूर लगेगा लेकिन लगता है सब ठीक ठाक हो जाएगा । रिया जी ये आपने बहुत ही अच्छा क्या भगवान करे आपका केस जल्द से जल्द खत्म हो जाएगी और ईशा भाभी आप के बाद वापस आ जाएंगे । शहर मेरी छोडो तुम बताओ कि तुमने आज कैसे याद किया? भैया जी आपसे एक सलाह करनी है क्या आपके पास कुछ समय हाँ बोलो क्या बात है तो हमारे लिए तो मेरे पास समय ही समय है भैया जी, आपको तो मेरे परिवार के इतिहास के बारे में सब पता है । आप मेरी कहानी भी जानते हो । मैं गायक बनना चाहता हूँ लेकिन मेरे परिवार वाले खासकर के मेरे पिता जी इसके सख्त खिलाफ हैं । मैंने अपनी पढाई लगभग लगभग पूरी कर ली है और अब मैं अपने पिता जी के साथ अपनी किराना की दुकान में बैठता हूँ । लेकिन इसके बावजूद मैं अपने गायक बनने की इच्छा को दवा नहीं पा रहा हूँ । मेरी परिस्थिति को देखकर मेरी एक दोस्त ने मुझे सलाह यह दी है कि क्यों ना मैं एक विडियो बना हूँ जिसमें कि मैं अपना लिखा हुआ गीत सुना हूँ और अपने उस गीत के वीडियो को मैं यू ट्यूब पर डाल दूँ । पंकज तो तुम्हारे उस दोस्त की सलाह तो अच्छी है लेकिन इसमें परेशानी हो सकती है । क्या परेशानी हो सकती है । यही की जब इस वीडियो के बारे में यही कि जब इस वीडियो के बारे में तुम्हारे परिवार वालों को पता चलेगा तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी? भैया जी आप इस बात की चिंता ना करें । मेरी इस वीडियो के बारे में मेरे परिवार वालों को बिल्कुल भी पता नहीं चलेगा । ये कैसे संभव हो सकता है । अगर तुम अपना वीडियो बनाओगे तो क्या तुम्हारे परिवार वाले इस वीडियो को नहीं देखेंगे? भैया जी, आपने मेरी पूरी योजना भी सुनी नहीं । अभी वीडियो तो बनाएंगे लेकिन उस वीडियो में मैं अपना चेहरा नहीं दिखाऊंगा । मैंने हाथ में गिटार जरूर पकडा होगा । रिटायर में ही बजाऊंगा । गाना भी नहीं गांव लेकिन मेरे चेहरे को अंधेरे में रखा जाएगा । मेरा नाम भी असली नहीं होगा । याने की मैं अपना नाम बदलकर उस वीडियो को यूट्यूब में डालूंगा पंकज तुम्हारी योजना तो ठीक है लेकिन मुझे एक बात बताओ इस प्रकार से काम करने का तो मैं क्या फायदा होगा? भैया जी फायदे का तो मैं नहीं जानता हूँ लेकिन मेरे गाने गाने का शौक तो पूरा हो जाएगा । अपने शौक को पूरा ना कर पाने की वजह से मेरे दिल और दिमाग में जो उथल पुथल मची रहती है वो तो शांत जरूर हो जाएगी और अपना सही भविष्य में इसका लाभ मुझे जरूर मिलेगा । उनका जगह ऐसी बात है तो मुझे तुम्हारा ये निर्णय बहुत पसंद है । लेकिन तुम जो भी काम करना, सोच समझकर करना मेरी एक बात ध्यान से हमें जिन्दगी एक बार ही मिलती है, दोबारा कभी नहीं मिलती । हमने दोबारा इस दुनिया में कभी जान नहीं लेना । इसलिए हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी में से कुछ समय निकालकर अपने शौक को पूरा करने का पूरा हक है । तुमने और तुम्हारे दोस्त ने जो भी योजना बनाई है, मेरे हिसाब से बिल्कुल सही योजना है । मेरा आशीर्वाद तुम्हारे साथ हैं जो आगे बढो और अपनी इस योजना पर काम शुरू कर दो । ठीक है भैया जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद । पंकज ने फोन बंद करके तुरंत मीना को फोन किया और उसे उसकी बताई हुई योजना पर काम करने के लिए अपनी हामी भर दी । मीना ने इस बारे में अपनी सहेली रोशनी से बात की । आखिरकार तय शुदा दिन मीना और पंकज रोशनी के घर चले गए । रोशनी का भाई विकास फटॉग्रफर का काम करता था और उसके पास एक उच्च क्वालिटी का वीडियो कैमरा था । पंकज ने गाना गुनगुनाना शुरू किया और साथ ही विकास ने पंकज के गाने की वीडियो बनाने शुरू कर दी । कुछ समय के बाद पंकज का गाना खत्म हो गया और उसके बाद उन सब ने पंकज के गाने की वीडियो को विकास के कंप्यूटर पर देखा । वीडियो बहुत ही अच्छी बनी थी और जैसा की तय हुआ था कि उस वीडियो में पंकज का चेहरा नहीं दिखाया जाएगा, ठीक वैसे ही हुआ । पंकज का चेहरा अंधेरे में रखा गया था, लेकिन उसकी आवाज बिलकुल ही साफ सुनाई दे रही थी । कुल मिलाकर ये सारा काम मीना की बनाई योजना के अनुसार बहुत ही अच्छे से संपन्न हो गया । मीना ने उकाब के नाम से पंकज की वीडियो को यूट्यूब में डाल दिया । पंकज की वीडियो बहुत ही अच्छी बनी थी । गाने के बोल भी पंकज ने खुद ही देखे थे । समय समय के साथ पंकज की विडियो यूट्यूब पर बहुत ही हिट होने लगी । धीरे धीरे उसकी वीडियो पर कई लोगों की प्रतिक्रिया आनी शुरु हो गई । अपने गाने पर लोगों की ऐसी प्रतिक्रिया को देखते हुए पंकज फूला नहीं समा रहा था । वो बहुत खुश था क्योंकि वो अपना मकसद पूरा कर रहा था । एक मिनट तुम्हारा बहुत बहुत धन्यवाद । मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मैं किन लफ्जों में तुम्हारा शुक्रिया अदा करूं । आज तुम्हारी वजह से मैं अपना मकसद पूरा कर पा रहा हूँ तो मैं ऐसी बातें क्यों कर रही हूँ । ये तो मेरा फर्स्ट था तो मुझे अपना दोस्त मानते हो और एक दोस्त का ये फर्ज बनता है कि अपने दोस्त की हर संभव मदद करेंगे । तो मुझे एक वादा करो कि तुम मेरा साथ कभी नहीं छोडेंगी । मीना मैं तुम्हारे बिना बिल्कुल अधूरा हूँ । मैं तुम्हारे बिना अपने मकसद को पाने की सोच भी नहीं सकता । इसलिए तो मुझे छोड कर कभी नहीं जाना । ये तुम कैसी बातें कर रहे हो । एक ना एक दिन तो मुझे तो मैं छोड कर जाना ही होगा । नहीं मैं तो मैं बिल्कुल भी जाने नहीं दूंगा । अगर तुम चली गई तो मैं अपने दिल की बात किससे कहूंगा । तुम तो जानती हो कि मेरा कोई दोस्त भी नहीं है । तुम तो जानती हो कि मेरा कोई दोस्त नहीं है जिससे कि मैं अपने मन की बात कह सको । अरे पागल, जब मेरी शादी होगी तब तो मुझे जाना ही होगा । मीना ने पंकज के सिर पर प्यार से चपत मारते हुए कहा तो तो मुझ से शादी कर लो । फिर तो तुम्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं होगी । फिर तुम सारी उम्र मेरे साथ ही रह सकती हो । हम दोनों साथ मिलकर रह सकते हैं । ये तुम कैसी बातें कर रहे हो? मेरी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा । मीना मैंने तो बहुत ही सीधी और आसान लब्जो में अपने प्यार का इजहार किया है । क्या तुम मुझसे शादी करोगी? मुझे तुम्हारे जवाब का इंतजार रहेगा । पंकज मैं तुम्हारा दिल नहीं तोडना चाहती हैं लेकिन अभी मुझे कुछ समय चाहिए । मैं अभी तुम्हारे सवाल का जवाब नहीं दे सकती हूँ । ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी मुझे तुम्हारे जवाब का इंतजार रहेगा । लेकिन मेरी तुमसे एक गुजारिश है क्या? तुम्हारा जवाब चाहिए, हमें हो या ना में हूँ । लेकिन मुझे एक वादा करूँ तुम मेरी दो सादा बनी रहोगे । हम दोनों में दोस्ती का रिश्ता पहले जैसा सादा बना रहेगा । इससे पहले की पंकज कुछ बोलता मीना उसकी ओर देखकर मुस्कुराई और वहाँ से उठ कर चली गई । दूसरी तरफ मेरी पत्नी यानी की आशा मुझे छोडकर अपने मायके में चली गई थी । वो इससे पहले भी कई बार मुझसे झगडा करके अपने मायके में गई थी लेकिन कुछ दिनों के बाद जब मैं उसे लेने जाता तो वो वापस आ जाती थी । लेकिन इस बार वापस आने वाली नहीं क्योंकि इस बार हमारा झगडा बहुत बढ गया था । हमारे झगडे की मुख्य वजह हमारी हालत का न होना था । हमारी शादी को चार साल से अधिक का समय बीत चुका था लेकिन जैसा कि मैंने पहले भी बताया था कि हमें इलाज का सुख अभी तक प्राप्त नहीं हुआ था । इन चार सालों के दौरान हमने कई प्रकार के इलाज करवाए थे । मैंने और मेरी पत्नी ने डॉक्टरों की दवाइयों से लेकर ज्योतिषों के तंत्र मंत्र तक कई प्रकार के इलाज करवाया लेकिन किसी से भी हमें किसी प्रकार का कोई लाभ प्राप्त नहीं हुआ । जिस वजह से एक दिन हमारा झगडा हुआ और हमारा झगडा इतना बढ गया कि वह मुझे छोडकर अपने मायके में चले गए और फिर तलाक की मांग करने लगी । जिसके परिणामस्वरूप मैंने उसे तलाक लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी । मैंने उसे तलाक देने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी लेकिन मैं उसे तलाक नहीं देना चाहता था । मैंने ये बात अपने वकील दोस्त रवि को भी बता दी थी । रवि को मैंने बता दिया था कि वह किसी ना किसी वजह से मेरी तलाक की तारीख को आगे बढाता रहे हैं ताकि मुझे अपने टूटे हुए रिश्ते को बचाने में मदद मिल सके । मुझे विश्वास था कि ईशा को एक ना एक दिन अपनी गलती का ऐसा जरूर होगा और वह मेरे पास लौटकर जरूर आएगी ।

मेरा उकाब - 9

चाॅस सच्ची खुशी का अनुभव आज पंकज बहुत खुश था क्योंकि आज उसे अपनी पहली कैसेट राजेश से प्राप्त होनी थी । पंकज को इसमें छह महीने के लगभग का समय लग गया था और इतना समय इसलिए लग गया था क्योंकि उसे अपने घर से चोरी छिपे किसी बहाने से राजेश के स्टूडियो में जाना पडता था । जब कभी राजेश के पास समय होता है तो पंकज आपने किसी काम में व्यस्त होता और जब पंकज के पास समय होता तो राजेश किसी काम में व्यस्त हो जाता है ऍम अब उसके हाथ में वह कैसे जा चुकी थी जिसका उसे कई सालों से इंतजार था और जिसके वो सपने देखता था । राजेश से कैसे मिलते ही पंकज नहीं । सबसे पहले मुझे फोन किया हेलो भैया जी कहाँ पर हैं तो अंकज में अपने घर में हूँ । बोलो क्या काम है तो मैं आप से मैं वो मैं आपको मिलकर बताऊंगा । मैं आपके पास आ रहा हूँ आप घर में रहना आजाओ में घर पर ही हूँ । पंकज के फोन करने की कुछ देर बाद वो मेरे घर में आ गया लेकिन मेरे घर का नजारा देखकर वह हैरान रह गया । शाम का समय था और मैं अपने घर में बिल्कुल अकेला बैठा था । मैंने घर में कोई रोशनी भी नहीं की हुई थी और अंधेरे में कुर्सी पर बैठकर में सिगरेट पी रहा था । पंकज आया और उसने मेरी इस हालत को देखकर कहा क्या जी क्या हुआ आपको? आपने क्या हाल बना रखा है? क्यों? क्या हुआ? आपने अपना ये क्या हाल बना रखा है? क्या कोई समस्या है? मुझे बताओ लगता है आप किसी परेशानी में हूँ? पंकज जैसे तुम समझ रहे हूँ ऐसी कोई बात नहीं और मेरी बात छोडो तो बोलो कैसे आना हुआ है? भैया जी मैंने आज अपने गानों की कैसे रिकॉर्ड करवा ली है और ये मैं सबसे पहले कैसे आपको भेंट करने आया हूँ? वाह ये तो बहुत अच्छी बात है याने की तुम अपने सपने को पूरा करने में कामयाब हो ही गए जी लगभग अच्छा ये बताओ आंटी जी कहाँ है? वो कहीं नहीं दिखाई दे रही है । माँ पंकज के मुंह से अपनी माँ के बारे में सुनकर में चुप हो गया और मैंने अपनी नजरें नीचे कर ली हूँ । कहाँ आंटी जी क्या हुआ लगता है आप मुझे कुछ छुपा रहे हो तो पंकज ने जब मेरी माँ के बारे में बार बार पूछा तो मुझ से रहा नहीं गया और मैंने पंकज के गले रखकर जोर जोर से रोना शुरू कर दिया । पंकज को मेरी इस हरकत पर शायद थोडा शक हुआ और वो मुझे छोडकर मेरी माँ के कमरे की ओर जाने लगा । वो जोर जोर से मेरी माँ को पुकारने लगा । तभी अचानक से उसकी नजर सामने दीवार पर पडी । दीवार पर मेरी माँ की तस्वीर थी जिसपर फूलों का हर चढा हुआ था । दीवार पर लडकी इस तस्वीर को देखकर वो समझ गया और वो भी जोर जोर से रोने लग गया । कुछ देर के बाद उसने अपने आप को संभाला और मेरी तरफ मोडकर मुझसे शिकायती लहजे से कहने लगा भैया जी ये सब कब हुआ, कैसे हुआ है और आपने मुझे इस बारे में क्यों नहीं बताया? आखिर मेरी भी तो कुछ लगती थी । क्या मेरा इस पर कोई हक नहीं था? मैंने तो उन्हें ये अपनी माँ समझा था लेकिन आपने मुझे पराया समझा । आपने मुझे अपना नहीं समझा । किसी ने ठीक ही रहा है । किसी ने ठीक ही कहा है फोन का रिश्ता फोन का ये होता है । आपसे मेरा खून का रिश्ता नहीं है ना तो अंकज में तुम्हारे दिल की हालत समझ सकता हूँ । लेकिन मुझे भी तो अपनी सफाई पेश करने का एक मौका तो ऐसी सफाई आंटी जी इस दुनिया को छोडकर चली गई हैं और आपने मुझे बताया तक नहीं । इसके पीछे क्या वजह हो सकती है । आप क्या सफाई देना चाहते हैं? तो गज पिताजी के जाने के बाद माँ उन्हीं के गम में डूब गई । उन्होंने खाना पीना काफी कम कर दिया था जिसकी वजह से वो बीमार पड रहा है जिसकी वजह से वह बीमार रहने लगी और एक दिन वो काफी बीमार पडी । मैंने उन्हें अस्पताल में दाखिल करवा दिया । तभी अचानक तुम्हारा फोन आया और तुम ने मुझे कहा कि तुम अपने पहले गाने की रिकॉर्डिंग पर जा रहे हो और मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए । लेकिन मैंने उस समय तो मैं वहाँ के बारे में बताना ठीक नहीं समझते हैं क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि किसी भी वजह से तुम्हारे गाने की रिकॉर्डिंग में कुछ फर्क पडेगा । तीन दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद वो भगवान को प्यारी हो गई । मैंने उस समय भी तुम्हें फोन किया लेकिन तुम्हारी खुशी देखकर मुझे माँ के बारे में तुम से बात करने की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि अभी तुम्हारा पहला ही गाना रिकॉर्ड हुआ था और तुमने बाकी के गाने अभी रिकॉर्ड करने थे । मैं नहीं चाहता था कि किसी वजह से तुम्हारे उन बाकी के गानों की रिकॉर्डिंग में कुछ फर्क पडेगा । इसलिए मैंने ये सोचा कि जब सही समय आएगा तो तुम्हें माँ के बारे में बता दूंगा । उसके बाद मैं चुप चाप अपनी जगह पर जाकर बैठ गया है और पंकज और रोने लग पडा । काफी समय के बाद जब चुप हुआ तो उसने मुझसे कहा लेकिन भैया जी आप यहाँ अकेले में क्यों? मेरे कहने का मतलब है कि आपके बाकी के कोई रिश्तेदार वगैरह । पंकज शायद तुम्हें पता नहीं मेरे माता पिता के अलावा इस दुनिया में मेरा और कोई नहीं । भैया जी मैं आपकी बात को समझा नहीं ये कैसे हो सकता है । मैं बताता हूँ मेरे माता पिता ने अपने अपने परिवार वालों के खिलाफ जाकर घर से भागकर शादी की थी जिस वजह से दोनों के परिवार वालों ने उनके अपने अपने घर उन्हें अपने अपने घर से बेदखल कर दिया था । मेरे माता पिता ने अपने परिवार वालों से मिलने की कई बार कोशिश की लेकिन हर बार उनको जलील करके घर से भगा दिया जाता था । मेरे पिताजी बताते हैं कि उसके बाद फिर वो इस शहर में आकर बस गए और फिर कभी भी उन्होंने अपने घर में जाने के बारे में नहीं सोचा । मेरे माता पिता की शादी के तीन साल बाद मेरा जन्म हुआ है और जब से मैंने होश संभाला मैंने अपने आप को हमेशा अकेला ही पाया । मैंने कई बार अपनी माँ से पूछा था कि मेरे दोस्तों को घर में मेरे दोस्तों के घर में उनके चाचा, मामा और भी रिश्तेदार आते हैं कि मेरे दोस्तों के घर में उनके चाचा, मामा और भी कई रिश्तेदार आते हैं लेकिन हमारे घर में कोई क्यों नहीं आता लेकिन वो मेरी बातों का कोई भी तसल्लीबख्श जवाब नहीं दे पाता हूँ । मेरे माता पिता दोनों स्थानीय कारखाने में मजदूर की नौकरी करते थे और जब ये बात उनके साथ काम कर रहे उनके एक सहकर्मी को पता लगी तो वो हमारे घर में आए और उन्होंने मुझे अपना भांजा कहकर कोर्ट में उठा लिया । उस दिन के बाद मैं उन्हें मामा जी कहने लगा । उस दिन के बाद से मैं उन्हें मामा जी कहने लगा है लेकिन कुछ सालों के बाद मामा जी ने कहीं और नौकरी शुरू कर दी जिससे उन का हमारे घर में आना जाना काफी कम हो गया । मैं फिर से अकेला पड गया था । एक दिन हम हरिद्वार की ओर जाने के लिए ट्रेन में बैठे हुए थे । वहाँ हमारी मुलाकात तुम्हारे परिवार से हुई है । उस समय तुम काफी छोटे और शरारती थे और तुम मेरे साथ काफी घुल मिल गए थे और उसके बाद हमारी मुलाकातों का सिलसिला चलता रहा जो आज तक जारी है । भैया जी मेरा भी तो आपके सिवा इस दुनिया में और कोई नहीं । आप तो मेरे बारे में सब कुछ जानते हैं । मेरी माँ की मृत्यु के बाद मेरे पिताजी ने जब रिश्ते में मेरी मौसी से दूसरी शादी की, आप भी तो मेरे बारे में सब कुछ जानते हैं । मेरी माँ की मृत्यु के बाद मेरे पिताजी ने जब रिश्ते में मेरी मौसी से दूसरी शादी की तो उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि मेरी मौसी मेरे साथ सौतेले बेटे जैसा व्यवहार करेंगे । वो मुझसे ज्यादा अपने बेटे यानी मेरे छोटे भाई चेतन से प्यार करती थी । उसी का पक्ष लेती और उसे की ज्यादा देखभाल करती हूँ । मैं भी सारी उम्र अकेला ही रहा है । मेरा भी आपके सिवा और कोई नहीं । मैं अपने मन की हर बात आपसे करता था । आंटी जी को मैं अपनी माँ के समान समझता था । आज तक जितना प्यार और दुलार मुझे आंटी जी से मिला है, ऐसा प्यार मुझे और किसी से नहीं मिला । मुझे इस बात का अफसोस सारी उम्र रहेगा कि मैं आंटी जी को अंतिम बार नहीं देख सका । पंकज मैं तुम्हारा को लेकर और इसके लिए तुम जो भी मुझे सजा दोगे मैं भुगताने के लिए तैयार हूँ । लेकिन मेरा भगवान जानता है कि मैंने ये गुनाह सिर्फ तुम्हारी कामयाबी के लिए क्या है? मेरी भगवान से दिन रात यही प्रार्थना रहती थी कि तुम अपने मकसद में कामयाब हो जाओ । तुम अपनी पहली कैसे रिकॉर्ड कर रहे थे जो कि तुम्हारी जिंदगी का सबसे बडा मौका था? मुझे ये डर था कि अगर मैं तुम्हें अपनी माँ की मृत्यु के बारे में बता दूँ तो इसका असर तुम्हारे गानों पर पडेगा तो अपने मकसद को वही रोक हो गया । लेकिन भैया जी एक बात बताऊँ क्या भाभी जी को इस बारे में पता है? हाँ पता है एशिया के परिवार वालों को मेरी माँ के बारे में मेरे मुंहबोले मामा जी ने बता दिया था तो क्या उनमें से कोई आया था? हाँ, एशिया और उसके माता पिता वो सभी मेरी मां के देहांत पर आए थे । तो क्या उस समय उनसे कोई सुलह वगैरह की बात नहीं हुई थी नहीं क्योंकि वो मौका ऐसी बातों को कल नहीं क्योंकि वो मौका ऐसी बातों को करने का नहीं था । वैसे जहाँ तक मेरा ख्याल है, एशिया के साथ मेरी सुलह होना मुश्किल है क्योंकि उसकी माँ ऐसा नहीं चाहते हैं । मेरी मां के देहांत पर एशिया अपने माता पिता के साथ आई थी तो उसने अपनी नजर झुकाई हुई थी । उसकी नजरों में मैंने पश्चताप साफ साफ देखा था । उसके पिताजी भी मुझ से हाथ जोडकर मिल रहे थे । लेकिन उसकी माँ के देवरा उन सब से बिल्कुल अलग है । वो पता नहीं किस अहंकार में डूबी हुई थी । उस समय ईशा ने मुझ से कुछ बात करने की कोशिश भी की लेकिन उसकी माँ ने उसे रोक दिया और झट से उसे कार में बैठने के लिए कह दिया । भैया जी, ये बात मुझे कुछ समझ नहीं आ रही हैं । एक मां अपनी बेटी का तलाक क्यों चाहती है? यानी वो अपनी बेटी का घर बसाना नहीं चाहते । पंकज मेरी एक बात हमेशा याद रखना अगर लडकी की मां चाहे तो वो अपनी बेटी का घर बसा सकती है । मेरे कहने का मतलब है कि अगर अपनी बेटी के घर परिवार में दखलंदाजी करना बंद कर दे तो उसकी बेटी का घर बन सकता है । मेरे केस में भी कुछ ऐसा ही हुआ है । ईशा की माँ की दखल अंदाजी मेरे घर में बहुत ज्यादा बढ गई थी । मेरा जब भी ईशा के साथ लडाई झगडा होता तो उसकी माँ ने ईशा को समझाने के बजाय उसी का साथ दिया । लेकिन मुझे एक बात समझ नहीं आएगी भाभी और आप के बीच लडाई झगडे की मुख्य वजह क्या थी? तो मुझे तो पता ही है । हाँ वो तो मुझे पता है कि आपकी शादी को इतने साल हो गए और आपकी कोई औलाद वगैरा नहीं । इस वजह को लेकर आपका भावी के साथ झगडा होता रहता है । लेकिन ये तो लडाई झगडे की कोई ठोस वजह नहीं । मैं इस वजह को आपके तलाक का आधार नहीं मानता । खैर छोडो इन सब बातों को और मुझे अपनी वह कैसे तो दिखाओ जो तुम मेरे लिए लाए हो । मेरे कहने के बाद पंकज ने तुरंत से मेरे कहने के बाद पंकज नहीं तुरंत अपने बैग से वह कैसेट निकली कैसे देखकर मेरी आंखों में पानी आ गया और मेरी आंखें छलक गई । ये खुशी के आंसू थे । पंकज मैं आज इतना खुश हूँ कि मैं अपने शब्दों में अपनी खुशी को बयान नहीं कर सकता । मेरे पास तो शब्द नहीं है जिससे मैं तुम्हें बता सको की आज मैं कितना खुश हूँ । सच में यार तुमने अपना सपना पूरा करके दिखाया है । मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ रहेगा । परमात्मा तुम्हारी हर मनोकामना पूरी करें । मैं कैसेट को देखने लग गया । हाँ पंकज तुम्हारी कैसे तो देखने में बहुत अच्छी लग रही है । इसका नाम मुझे उडने तो भी बहुत अच्छा रखा तुमने धन्यवाद भैया जी भैया जी आपको इसका कवर फोटो कैसा लगा? बहुत बढिया है । ये किसने डिजाइन किया है? भैया जी, शायद आप मेरी बात का यकीन ना करेंगे । इसका मुख्य कवर फोटो मैंने खुद डिजाइन किया है और इस कैसेट में आठ गाने है जिन्हें मैंने खुद लिखा है और इन गानों में इस्तेमाल होने वाला गिटार भी मैंने खुद बजाया है । पंकज की बात सुनकर मैं उसकी तरफ देखने लगा । अच्छा भैया जी, आप इस कैसेट को अपने पास रखो और मुझे जाने दो । मुझे जाना है मुझे देर हो जाएगी । ठीक है पंकज तो मैं तुम्हें नहीं रोकता । तुम जाना चाहते हो तो जब पंकज वहाँ से चला गया और जाते जाते वो अपनी कैसे मेरे पास छोड गया । एशिया के चले जाने और माता पिता की मृत्यु हो जाने के बाद से मैं बिल्कुल अकेला पड गया था । अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए मैंने शराब का सेवन करना शुरू कर दिया था । मैंने शराब का सेवन करना शुरू कर दिया था । जब पंकज चला गया तो मैंने उसकी कैसेट लगाकर शराब पीना शुरू कर दिया । उसके गीत एक से एक बढकर और वो सभी की जीवन में आगे बढने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे । मैंने पूरी रात पंकज के गाये गीतों को बार बार सुना । पंकज के गानों ने मेरी सोच बदल कर रख दी और मैंने अगले दिन सुबह अपने वकील दोस्त शिखर को फोन किया । हलो शेखर मैं मोहित बोल रहा हूँ आम बोलो आज सुबह सुबह कैसे याद कर लिया मैं तुमसे अभी मिलना चाहता हूँ । इतनी सुबह क्या बात हो गई भाई, सब खेले तो है । घबराने की कोई बात नहीं, सब ठीक ठाक है । बस मुझे तुमसे कुछ देर मिलने का समय चाहिए । क्या मैं भी आ सकता हूँ वो ही तो यार ये भी कोई पूछने की बात है तो किसी भी समय आ सकते हो । तुम्हारा अपना घर है । फोन बंद करते ही मैं फोन बंद करते ही मैं तुरंत शेखर के घर की ओर रवाना हो गया और कुछ समय में मैं उसके घर पहुंच गया । मोहित अंदर आ जाओ, स्वागत है तुम्हारा तो क्या काम था है । इतनी सुबह सुबह जो मुझे याद किया मैं तुमसे अपने केस के बारे में बात करनी है । हाँ, वो तो क्या बात करना चाहते हो । मैं अपने केस को जल्दी ही बंद करना चाहता हूँ । ये तुम क्या कह रही हूँ? मैं कुछ समझा नहीं । शेखर अब मैं अपने तलाक के केस को आगे नहीं बढाना चाहता है । मैं चाहता हूँ कि मेरे इस केस का फैसला भी जल्दी हो जाएगा । ठीक है जैसे तुम चाहते हो वैसा ही होगा । लेकिन मुझे ये तो बता दो तो मैं ऐसा क्यों करना चाहते हो? मेरे कहने का मतलब है कि तुम्हारी तो कुछ और ही योजना की शेखर में मानता हूँ की मेरी योजना पहले कुछ और थी । पहले में अपने किसको सालों तक आगे चलाना चाहता था । पहले में अपने किसको सालों तक आगे चलाना चाहता था । पहले मैं अपने किसको सालों तक आगे चलाना चाहता था लेकिन अब मैं चाहता हूँ कि खत्म हो जाएगा । लेकिन अब मैं चाहता हूँ कि ये केस जल्दी से खत्म हो जाते हैं और मैं अपने जीवन में नई पारी की शुरुआत करूँ । लेकिन वो तुम तो जानते ही होगे ना । अगर तुमने केस को खत्म करना चाहा तो तुम्हें उनकी सभी मांगे माननी होंगी । देखा मुझे एशिया के परिवार वालों की सभी मांगे मंजूर है । वो जो चाहते हैं उन्हें दे दो । ठीक है जैसा तुम कहते हो । मलेशिया के परिवार वालों से इस बारे में बात कर लेता हूँ । उसके बाद उन का जो भी फैसला होगा मैं तो मैं बता दूँ । ठीक है मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूंगा । अगले दिन मैंने पंकज को फोन किया हलो पंकज कहाँ पर हो भैया जी में अपने घर में हूँ क्या हुआ? कुछ नहीं था । मैंने तुम्हारे गाने सुने । उनके बारे में ही बात करनी थी । मैंने भी आपसे कुछ बात करनी थी । मैं आपको फोन कर नहीं लगा था कि आपका फोन आ गया । तुमने क्या बात करनी थी? नहीं, पहले आप ही बता दीजिए । आप क्या बात करना चाह रहे थे? नहीं पहले तुम बताओ आपने क्या बात करनी थी? पहले तुम बताओ तुम क्या बात करना चाह रहे थे? नहीं पहले आप बताइए आप मुझसे बडे हैं और फोन भी आप ही नहीं किया है । देखो मैं तुमसे बस यही कहना चाहता था कि मैंने तुम्हारे गाने पूरी रात सुनी है और मुझे ये गाने बहुत ही अच्छे लगे । मुझे सच बताना चाहिए । गाने तुमने खुद लिखें । हाँ भैया जी मैंने ये सारे गाने खुद लिखें । क्यों क्या हुआ? पंकज ने हैरानी से पूछा नहीं घबराने की कोई बात नहीं है । मुझे ये गाने बहुत अच्छे लगे । मैंने कम से कम सात आठ बार पूरी कैसेट को सुना है । तुम्हारी कैसेट का मुख्य गाना मुझे उडने । दो इसे तो मैंने लगभग पंद्रह बार सुन लिया है । भैया जी आप सच सच बताना आपको कैसे लगे और इनमें अगर कोई कमी वगैरह है तो बता दीजिए क्योंकि अब मैं अपनी अगले कैसेट की तैयारी कर रहा हूँ । भैया जी, आप सच बताना कि आपको गाने कैसे लगे और अगर कोई कमी हुई है तो मैं अपनी अगले कैसेट में उसे सुधार लूंगा । तुम्हारी कैसेट में किसी प्रकार की कोई भी कमी नहीं है । बस तुम किसी प्रकार से मन लगाकर अपनी अगली कैसेट की तैयारी शुरू कर दो । फिर छोडा अब तुम बताओ तुम क्या बात करना चाहते थे । मैं आपको आज सुबह की बात बताना चाहता था कौन सी बात भैया आज सुबह जब मैं उठा तो मेरे कानों में मेरे ही गाये गाने की आवाज सुनाई दी । कौन से गाने की मैं तुम्हारी बात नहीं समझा । वही मेरी पहली कैसेट वाले गाने की फिर फिर में अचानक से उठा और नीचे पिताजी की कमरे में चला गया है । क्योंकि वो आवाज उन्हीं के कमरे से आ रही थी । फिर पहले तो मुझे लगा कि पिताजी को मेरी कैसेट के बारे में पता चल गया है, जिस वजह से उन्होंने मेरे गानों को ऊंची आवाज में लगाया है । मैंने तो पक्का सोच लिया था क्या मुझे डांट पडेगी क्योंकि मेरी चोरी क्योंकि मेरी चोरी पकडी गई थी । फिर क्या डांट पडी? क्या उन्हें सच में पता चल गया था भैया जी, पूरी बात तो सुनो । जैसा मैंने सोचा था वैसा कुछ भी नहीं हुआ । दरअसल मेरी ये कैसेट मेरा छोटा भाई चेतन कहीं से लेकर आया था और उसने ही पिताजी को लगा कर दी थी । पिताजी को गाने बहुत अच्छे लगे थे । उन्होंने मेरी तरफ देखा और मुझसे कहा ये होते हैं कि ऐसे गाने लिखे जाते हैं तो जो गाते बजाते हो तुम्हारे सामने कुछ भी नहीं है । ऐसा करके तुम सिर्फ अपना समय बर्बाद कर रहे हो । फिल्म मैं चुपचाप खडा रहा उनकी बातों को सुन रहा था क्योंकि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वो मेरी तारीफ कर रहे हैं या मुझे डांट रहे हैं क्योंकि वो एक तरफ तो गाय की तारीफ कर रहे थे और दूसरी तरफ उसकी तुलना मुझसे करके मुझे डांट रहे थे । वहाँ मजा आ गया । यानी तो हम अपने मकसद में कामयाब हो ही गए । कामयाब कैसे मैं आपकी बात कुछ समझा नहीं । तुम्हारा यही तो मकसद था ना तो हारे होना की वजह से लोग तुम्हारी तारीफ करें । तुम्हारी हकलाहट की समस्या लोगों के बीच जो बन चुकी है तो मुझे छवि को अपनी गायकी के हुनर से बदल सकता हूँ और जहाँ तक मेरा ख्याल है तुम काफी हद तक उसमें कामयाब भी हो चुके हो । अब तुम्हारी छवि बिल्कुल बदल चुकी है । शायद इस बात को छोडो और ये बताओ कि क्या तुमने अपने पिताजी को ये बताया है कि आप जिस गायक की तारीफ कर रहे हैं वो और कोई नहीं मैं ही हूँ नहीं । मैंने उन्हें अभी ये बताना ठीक नहीं समझा क्यों भैया जी दरअसल में सही समय का इंतजार कर रहा हूँ और जब सही समय आ जाएगा तो मैं खुद बता दूंगा, ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी लेकिन तुम्हारी बात सुन कर मुझे बहुत मजा आया । वो कैसे? यही कि तुम्हारे पिताजी तुम्हारे सामने तुम्हारी ही तारीफ कर रहे थे और उन्हें इस बात का पता भी नहीं चल सका । आज सही कह रहे हैं और ये सब आपके ही आशीर्वाद संभव हो सका है । आपके ही आशीर्वाद से आज मुझे सच्ची खुशी का अनुभव प्राप्त हो सकता है । कुछ देर बातें करने के बाद मैंने फोन बंद कर दिया और हम दोनों अपनी अपनी तैयारियों में जुट गए । पंकज अपनी अगली कैसेट की तैयारी कर रहा है और मैं अपने तलाक के केस की तैयारी में जुट गया ।

मेरा उकाब - 10

चाॅस सच्ची खुशी का अनुभव आज पंकज बहुत खुश था क्योंकि आज उसे अपनी पहली कैसेट राजेश से प्राप्त होनी थी । पंकज को इसमें छह महीने के लगभग का समय लग गया था और इतना समय इसलिए लग गया था क्योंकि उसे अपने घर से चोरी छिपे किसी बहाने से राजेश के स्टूडियो में जाना पडता था । जब कभी राजेश के पास समय होता है तो पंकज आपने किसी काम में व्यस्त होता और जब पंकज के पास समय होता तो राजेश किसी काम में व्यस्त हो जाता है ऍम अब उसके हाथ में वह कैसे जा चुकी थी जिसका उसे कई सालों से इंतजार था और जिसके वो सपने देखता था । राजेश से कैसे मिलते ही पंकज नहीं । सबसे पहले मुझे फोन किया हेलो भैया जी कहाँ पर हैं तो अंकज में अपने घर में हूँ । बोलो क्या काम है तो मैं आप से मैं वो मैं आपको मिलकर बताऊंगा । मैं आपके पास आ रहा हूँ आप घर में रहना आजाओ में घर पर ही हूँ । पंकज के फोन करने की कुछ देर बाद वो मेरे घर में आ गया लेकिन मेरे घर का नजारा देखकर वह हैरान रह गया । शाम का समय था और मैं अपने घर में बिल्कुल अकेला बैठा था । मैंने घर में कोई रोशनी भी नहीं की हुई थी और अंधेरे में कुर्सी पर बैठकर में सिगरेट पी रहा था । पंकज आया और उसने मेरी इस हालत को देखकर कहा क्या जी क्या हुआ आपको? आपने क्या हाल बना रखा है? क्यों? क्या हुआ? आपने अपना ये क्या हाल बना रखा है? क्या कोई समस्या है? मुझे बताओ लगता है आप किसी परेशानी में हूँ? पंकज जैसे तुम समझ रहे हूँ ऐसी कोई बात नहीं और मेरी बात छोडो तो बोलो कैसे आना हुआ है? भैया जी मैंने आज अपने गानों की कैसे रिकॉर्ड करवा ली है और ये मैं सबसे पहले कैसे आपको भेंट करने आया हूँ? वाह ये तो बहुत अच्छी बात है याने की तुम अपने सपने को पूरा करने में कामयाब हो ही गए जी लगभग अच्छा ये बताओ आंटी जी कहाँ है? वो कहीं नहीं दिखाई दे रही है । माँ पंकज के मुंह से अपनी माँ के बारे में सुनकर में चुप हो गया और मैंने अपनी नजरें नीचे कर ली हूँ । कहाँ आंटी जी क्या हुआ लगता है आप मुझे कुछ छुपा रहे हो तो पंकज ने जब मेरी माँ के बारे में बार बार पूछा तो मुझ से रहा नहीं गया और मैंने पंकज के गले रखकर जोर जोर से रोना शुरू कर दिया । पंकज को मेरी इस हरकत पर शायद थोडा शक हुआ और वो मुझे छोडकर मेरी माँ के कमरे की ओर जाने लगा । वो जोर जोर से मेरी माँ को पुकारने लगा । तभी अचानक से उसकी नजर सामने दीवार पर पडी । दीवार पर मेरी माँ की तस्वीर थी जिसपर फूलों का हर चढा हुआ था । दीवार पर लडकी इस तस्वीर को देखकर वो समझ गया और वो भी जोर जोर से रोने लग गया । कुछ देर के बाद उसने अपने आप को संभाला और मेरी तरफ मोडकर मुझसे शिकायती लहजे से कहने लगा भैया जी ये सब कब हुआ, कैसे हुआ है और आपने मुझे इस बारे में क्यों नहीं बताया? आखिर मेरी भी तो कुछ लगती थी । क्या मेरा इस पर कोई हक नहीं था? मैंने तो उन्हें ये अपनी माँ समझा था लेकिन आपने मुझे पराया समझा । आपने मुझे अपना नहीं समझा । किसी ने ठीक ही रहा है । किसी ने ठीक ही कहा है फोन का रिश्ता फोन का ये होता है । आपसे मेरा खून का रिश्ता नहीं है ना तो अंकज में तुम्हारे दिल की हालत समझ सकता हूँ । लेकिन मुझे भी तो अपनी सफाई पेश करने का एक मौका तो ऐसी सफाई आंटी जी इस दुनिया को छोडकर चली गई हैं और आपने मुझे बताया तक नहीं । इसके पीछे क्या वजह हो सकती है । आप क्या सफाई देना चाहते हैं? तो गज पिताजी के जाने के बाद माँ उन्हीं के गम में डूब गई । उन्होंने खाना पीना काफी कम कर दिया था जिसकी वजह से वो बीमार पड रहा है जिसकी वजह से वह बीमार रहने लगी और एक दिन वो काफी बीमार पडी । मैंने उन्हें अस्पताल में दाखिल करवा दिया । तभी अचानक तुम्हारा फोन आया और तुम ने मुझे कहा कि तुम अपने पहले गाने की रिकॉर्डिंग पर जा रहे हो और मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए । लेकिन मैंने उस समय तो मैं वहाँ के बारे में बताना ठीक नहीं समझते हैं क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि किसी भी वजह से तुम्हारे गाने की रिकॉर्डिंग में कुछ फर्क पडेगा । तीन दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद वो भगवान को प्यारी हो गई । मैंने उस समय भी तुम्हें फोन किया लेकिन तुम्हारी खुशी देखकर मुझे माँ के बारे में तुम से बात करने की हिम्मत नहीं हुई क्योंकि अभी तुम्हारा पहला ही गाना रिकॉर्ड हुआ था और तुमने बाकी के गाने अभी रिकॉर्ड करने थे । मैं नहीं चाहता था कि किसी वजह से तुम्हारे उन बाकी के गानों की रिकॉर्डिंग में कुछ फर्क पडेगा । इसलिए मैंने ये सोचा कि जब सही समय आएगा तो तुम्हें माँ के बारे में बता दूंगा । उसके बाद मैं चुप चाप अपनी जगह पर जाकर बैठ गया है और पंकज और रोने लग पडा । काफी समय के बाद जब चुप हुआ तो उसने मुझसे कहा लेकिन भैया जी आप यहाँ अकेले में क्यों? मेरे कहने का मतलब है कि आपके बाकी के कोई रिश्तेदार वगैरह । पंकज शायद तुम्हें पता नहीं मेरे माता पिता के अलावा इस दुनिया में मेरा और कोई नहीं । भैया जी मैं आपकी बात को समझा नहीं ये कैसे हो सकता है । मैं बताता हूँ मेरे माता पिता ने अपने अपने परिवार वालों के खिलाफ जाकर घर से भागकर शादी की थी जिस वजह से दोनों के परिवार वालों ने उनके अपने अपने घर उन्हें अपने अपने घर से बेदखल कर दिया था । मेरे माता पिता ने अपने परिवार वालों से मिलने की कई बार कोशिश की लेकिन हर बार उनको जलील करके घर से भगा दिया जाता था । मेरे पिताजी बताते हैं कि उसके बाद फिर वो इस शहर में आकर बस गए और फिर कभी भी उन्होंने अपने घर में जाने के बारे में नहीं सोचा । मेरे माता पिता की शादी के तीन साल बाद मेरा जन्म हुआ है और जब से मैंने होश संभाला मैंने अपने आप को हमेशा अकेला ही पाया । मैंने कई बार अपनी माँ से पूछा था कि मेरे दोस्तों को घर में मेरे दोस्तों के घर में उनके चाचा, मामा और भी रिश्तेदार आते हैं कि मेरे दोस्तों के घर में उनके चाचा, मामा और भी कई रिश्तेदार आते हैं लेकिन हमारे घर में कोई क्यों नहीं आता लेकिन वो मेरी बातों का कोई भी तसल्लीबख्श जवाब नहीं दे पाता हूँ । मेरे माता पिता दोनों स्थानीय कारखाने में मजदूर की नौकरी करते थे और जब ये बात उनके साथ काम कर रहे उनके एक सहकर्मी को पता लगी तो वो हमारे घर में आए और उन्होंने मुझे अपना भांजा कहकर कोर्ट में उठा लिया । उस दिन के बाद मैं उन्हें मामा जी कहने लगा । उस दिन के बाद से मैं उन्हें मामा जी कहने लगा है लेकिन कुछ सालों के बाद मामा जी ने कहीं और नौकरी शुरू कर दी जिससे उन का हमारे घर में आना जाना काफी कम हो गया । मैं फिर से अकेला पड गया था । एक दिन हम हरिद्वार की ओर जाने के लिए ट्रेन में बैठे हुए थे । वहाँ हमारी मुलाकात तुम्हारे परिवार से हुई है । उस समय तुम काफी छोटे और शरारती थे और तुम मेरे साथ काफी घुल मिल गए थे और उसके बाद हमारी मुलाकातों का सिलसिला चलता रहा जो आज तक जारी है । भैया जी मेरा भी तो आपके सिवा इस दुनिया में और कोई नहीं । आप तो मेरे बारे में सब कुछ जानते हैं । मेरी माँ की मृत्यु के बाद मेरे पिताजी ने जब रिश्ते में मेरी मौसी से दूसरी शादी की, आप भी तो मेरे बारे में सब कुछ जानते हैं । मेरी माँ की मृत्यु के बाद मेरे पिताजी ने जब रिश्ते में मेरी मौसी से दूसरी शादी की तो उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि मेरी मौसी मेरे साथ सौतेले बेटे जैसा व्यवहार करेंगे । वो मुझसे ज्यादा अपने बेटे यानी मेरे छोटे भाई चेतन से प्यार करती थी । उसी का पक्ष लेती और उसे की ज्यादा देखभाल करती हूँ । मैं भी सारी उम्र अकेला ही रहा है । मेरा भी आपके सिवा और कोई नहीं । मैं अपने मन की हर बात आपसे करता था । आंटी जी को मैं अपनी माँ के समान समझता था । आज तक जितना प्यार और दुलार मुझे आंटी जी से मिला है, ऐसा प्यार मुझे और किसी से नहीं मिला । मुझे इस बात का अफसोस सारी उम्र रहेगा कि मैं आंटी जी को अंतिम बार नहीं देख सका । पंकज मैं तुम्हारा को लेकर और इसके लिए तुम जो भी मुझे सजा दोगे मैं भुगताने के लिए तैयार हूँ । लेकिन मेरा भगवान जानता है कि मैंने ये गुनाह सिर्फ तुम्हारी कामयाबी के लिए क्या है? मेरी भगवान से दिन रात यही प्रार्थना रहती थी कि तुम अपने मकसद में कामयाब हो जाओ । तुम अपनी पहली कैसे रिकॉर्ड कर रहे थे जो कि तुम्हारी जिंदगी का सबसे बडा मौका था? मुझे ये डर था कि अगर मैं तुम्हें अपनी माँ की मृत्यु के बारे में बता दूँ तो इसका असर तुम्हारे गानों पर पडेगा तो अपने मकसद को वही रोक हो गया । लेकिन भैया जी एक बात बताऊँ क्या भाभी जी को इस बारे में पता है? हाँ पता है एशिया के परिवार वालों को मेरी माँ के बारे में मेरे मुंहबोले मामा जी ने बता दिया था तो क्या उनमें से कोई आया था? हाँ, एशिया और उसके माता पिता वो सभी मेरी मां के देहांत पर आए थे । तो क्या उस समय उनसे कोई सुलह वगैरह की बात नहीं हुई थी नहीं क्योंकि वो मौका ऐसी बातों को कल नहीं क्योंकि वो मौका ऐसी बातों को करने का नहीं था । वैसे जहाँ तक मेरा ख्याल है, एशिया के साथ मेरी सुलह होना मुश्किल है क्योंकि उसकी माँ ऐसा नहीं चाहते हैं । मेरी मां के देहांत पर एशिया अपने माता पिता के साथ आई थी तो उसने अपनी नजर झुकाई हुई थी । उसकी नजरों में मैंने पश्चताप साफ साफ देखा था । उसके पिताजी भी मुझ से हाथ जोडकर मिल रहे थे । लेकिन उसकी माँ के देवरा उन सब से बिल्कुल अलग है । वो पता नहीं किस अहंकार में डूबी हुई थी । उस समय ईशा ने मुझ से कुछ बात करने की कोशिश भी की लेकिन उसकी माँ ने उसे रोक दिया और झट से उसे कार में बैठने के लिए कह दिया । भैया जी, ये बात मुझे कुछ समझ नहीं आ रही हैं । एक मां अपनी बेटी का तलाक क्यों चाहती है? यानी वो अपनी बेटी का घर बसाना नहीं चाहते । पंकज मेरी एक बात हमेशा याद रखना अगर लडकी की मां चाहे तो वो अपनी बेटी का घर बसा सकती है । मेरे कहने का मतलब है कि अगर अपनी बेटी के घर परिवार में दखलंदाजी करना बंद कर दे तो उसकी बेटी का घर बन सकता है । मेरे केस में भी कुछ ऐसा ही हुआ है । ईशा की माँ की दखल अंदाजी मेरे घर में बहुत ज्यादा बढ गई थी । मेरा जब भी ईशा के साथ लडाई झगडा होता तो उसकी माँ ने ईशा को समझाने के बजाय उसी का साथ दिया । लेकिन मुझे एक बात समझ नहीं आएगी भाभी और आप के बीच लडाई झगडे की मुख्य वजह क्या थी? तो मुझे तो पता ही है । हाँ वो तो मुझे पता है कि आपकी शादी को इतने साल हो गए और आपकी कोई औलाद वगैरा नहीं । इस वजह को लेकर आपका भावी के साथ झगडा होता रहता है । लेकिन ये तो लडाई झगडे की कोई ठोस वजह नहीं । मैं इस वजह को आपके तलाक का आधार नहीं मानता । खैर छोडो इन सब बातों को और मुझे अपनी वह कैसे तो दिखाओ जो तुम मेरे लिए लाए हो । मेरे कहने के बाद पंकज ने तुरंत से मेरे कहने के बाद पंकज नहीं तुरंत अपने बैग से वह कैसेट निकली कैसे देखकर मेरी आंखों में पानी आ गया और मेरी आंखें छलक गई । ये खुशी के आंसू थे । पंकज मैं आज इतना खुश हूँ कि मैं अपने शब्दों में अपनी खुशी को बयान नहीं कर सकता । मेरे पास तो शब्द नहीं है जिससे मैं तुम्हें बता सको की आज मैं कितना खुश हूँ । सच में यार तुमने अपना सपना पूरा करके दिखाया है । मेरा आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ रहेगा । परमात्मा तुम्हारी हर मनोकामना पूरी करें । मैं कैसेट को देखने लग गया । हाँ पंकज तुम्हारी कैसे तो देखने में बहुत अच्छी लग रही है । इसका नाम मुझे उडने तो भी बहुत अच्छा रखा तुमने धन्यवाद भैया जी भैया जी आपको इसका कवर फोटो कैसा लगा? बहुत बढिया है । ये किसने डिजाइन किया है? भैया जी, शायद आप मेरी बात का यकीन ना करेंगे । इसका मुख्य कवर फोटो मैंने खुद डिजाइन किया है और इस कैसेट में आठ गाने है जिन्हें मैंने खुद लिखा है और इन गानों में इस्तेमाल होने वाला गिटार भी मैंने खुद बजाया है । पंकज की बात सुनकर मैं उसकी तरफ देखने लगा । अच्छा भैया जी, आप इस कैसेट को अपने पास रखो और मुझे जाने दो । मुझे जाना है मुझे देर हो जाएगी । ठीक है पंकज तो मैं तुम्हें नहीं रोकता । तुम जाना चाहते हो तो जब पंकज वहाँ से चला गया और जाते जाते वो अपनी कैसे मेरे पास छोड गया । एशिया के चले जाने और माता पिता की मृत्यु हो जाने के बाद से मैं बिल्कुल अकेला पड गया था । अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए मैंने शराब का सेवन करना शुरू कर दिया था । मैंने शराब का सेवन करना शुरू कर दिया था । जब पंकज चला गया तो मैंने उसकी कैसेट लगाकर शराब पीना शुरू कर दिया । उसके गीत एक से एक बढकर और वो सभी की जीवन में आगे बढने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे । मैंने पूरी रात पंकज के गाये गीतों को बार बार सुना । पंकज के गानों ने मेरी सोच बदल कर रख दी और मैंने अगले दिन सुबह अपने वकील दोस्त शिखर को फोन किया । हलो शेखर मैं मोहित बोल रहा हूँ आम बोलो आज सुबह सुबह कैसे याद कर लिया मैं तुमसे अभी मिलना चाहता हूँ । इतनी सुबह क्या बात हो गई भाई, सब खेले तो है । घबराने की कोई बात नहीं, सब ठीक ठाक है । बस मुझे तुमसे कुछ देर मिलने का समय चाहिए । क्या मैं भी आ सकता हूँ वो ही तो यार ये भी कोई पूछने की बात है तो किसी भी समय आ सकते हो । तुम्हारा अपना घर है । फोन बंद करते ही मैं फोन बंद करते ही मैं तुरंत शेखर के घर की ओर रवाना हो गया और कुछ समय में मैं उसके घर पहुंच गया । मोहित अंदर आ जाओ, स्वागत है तुम्हारा तो क्या काम था है । इतनी सुबह सुबह जो मुझे याद किया मैं तुमसे अपने केस के बारे में बात करनी है । हाँ, वो तो क्या बात करना चाहते हो । मैं अपने केस को जल्दी ही बंद करना चाहता हूँ । ये तुम क्या कह रही हूँ? मैं कुछ समझा नहीं । शेखर अब मैं अपने तलाक के केस को आगे नहीं बढाना चाहता है । मैं चाहता हूँ कि मेरे इस केस का फैसला भी जल्दी हो जाएगा । ठीक है जैसे तुम चाहते हो वैसा ही होगा । लेकिन मुझे ये तो बता दो तो मैं ऐसा क्यों करना चाहते हो? मेरे कहने का मतलब है कि तुम्हारी तो कुछ और ही योजना की शेखर में मानता हूँ की मेरी योजना पहले कुछ और थी । पहले में अपने किसको सालों तक आगे चलाना चाहता था । पहले में अपने किसको सालों तक आगे चलाना चाहता था । पहले मैं अपने किसको सालों तक आगे चलाना चाहता था लेकिन अब मैं चाहता हूँ कि खत्म हो जाएगा । लेकिन अब मैं चाहता हूँ कि ये केस जल्दी से खत्म हो जाते हैं और मैं अपने जीवन में नई पारी की शुरुआत करूँ । लेकिन वो तुम तो जानते ही होगे ना । अगर तुमने केस को खत्म करना चाहा तो तुम्हें उनकी सभी मांगे माननी होंगी । देखा मुझे एशिया के परिवार वालों की सभी मांगे मंजूर है । वो जो चाहते हैं उन्हें दे दो । ठीक है जैसा तुम कहते हो । मलेशिया के परिवार वालों से इस बारे में बात कर लेता हूँ । उसके बाद उन का जो भी फैसला होगा मैं तो मैं बता दूँ । ठीक है मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूंगा । अगले दिन मैंने पंकज को फोन किया हलो पंकज कहाँ पर हो भैया जी में अपने घर में हूँ क्या हुआ? कुछ नहीं था । मैंने तुम्हारे गाने सुने । उनके बारे में ही बात करनी थी । मैंने भी आपसे कुछ बात करनी थी । मैं आपको फोन कर नहीं लगा था कि आपका फोन आ गया । तुमने क्या बात करनी थी? नहीं, पहले आप ही बता दीजिए । आप क्या बात करना चाह रहे थे? नहीं पहले तुम बताओ आपने क्या बात करनी थी? पहले तुम बताओ तुम क्या बात करना चाह रहे थे? नहीं पहले आप बताइए आप मुझसे बडे हैं और फोन भी आप ही नहीं किया है । देखो मैं तुमसे बस यही कहना चाहता था कि मैंने तुम्हारे गाने पूरी रात सुनी है और मुझे ये गाने बहुत ही अच्छे लगे । मुझे सच बताना चाहिए । गाने तुमने खुद लिखें । हाँ भैया जी मैंने ये सारे गाने खुद लिखें । क्यों क्या हुआ? पंकज ने हैरानी से पूछा नहीं घबराने की कोई बात नहीं है । मुझे ये गाने बहुत अच्छे लगे । मैंने कम से कम सात आठ बार पूरी कैसेट को सुना है । तुम्हारी कैसेट का मुख्य गाना मुझे उडने । दो इसे तो मैंने लगभग पंद्रह बार सुन लिया है । भैया जी आप सच सच बताना आपको कैसे लगे और इनमें अगर कोई कमी वगैरह है तो बता दीजिए क्योंकि अब मैं अपनी अगले कैसेट की तैयारी कर रहा हूँ । भैया जी, आप सच बताना कि आपको गाने कैसे लगे और अगर कोई कमी हुई है तो मैं अपनी अगले कैसेट में उसे सुधार लूंगा । तुम्हारी कैसेट में किसी प्रकार की कोई भी कमी नहीं है । बस तुम किसी प्रकार से मन लगाकर अपनी अगली कैसेट की तैयारी शुरू कर दो । फिर छोडा अब तुम बताओ तुम क्या बात करना चाहते थे । मैं आपको आज सुबह की बात बताना चाहता था कौन सी बात भैया आज सुबह जब मैं उठा तो मेरे कानों में मेरे ही गाये गाने की आवाज सुनाई दी । कौन से गाने की मैं तुम्हारी बात नहीं समझा । वही मेरी पहली कैसेट वाले गाने की फिर फिर में अचानक से उठा और नीचे पिताजी की कमरे में चला गया है । क्योंकि वो आवाज उन्हीं के कमरे से आ रही थी । फिर पहले तो मुझे लगा कि पिताजी को मेरी कैसेट के बारे में पता चल गया है, जिस वजह से उन्होंने मेरे गानों को ऊंची आवाज में लगाया है । मैंने तो पक्का सोच लिया था क्या मुझे डांट पडेगी क्योंकि मेरी चोरी क्योंकि मेरी चोरी पकडी गई थी । फिर क्या डांट पडी? क्या उन्हें सच में पता चल गया था भैया जी, पूरी बात तो सुनो । जैसा मैंने सोचा था वैसा कुछ भी नहीं हुआ । दरअसल मेरी ये कैसेट मेरा छोटा भाई चेतन कहीं से लेकर आया था और उसने ही पिताजी को लगा कर दी थी । पिताजी को गाने बहुत अच्छे लगे थे । उन्होंने मेरी तरफ देखा और मुझसे कहा ये होते हैं कि ऐसे गाने लिखे जाते हैं तो जो गाते बजाते हो तुम्हारे सामने कुछ भी नहीं है । ऐसा करके तुम सिर्फ अपना समय बर्बाद कर रहे हो । फिल्म मैं चुपचाप खडा रहा उनकी बातों को सुन रहा था क्योंकि मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वो मेरी तारीफ कर रहे हैं या मुझे डांट रहे हैं क्योंकि वो एक तरफ तो गाय की तारीफ कर रहे थे और दूसरी तरफ उसकी तुलना मुझसे करके मुझे डांट रहे थे । वहाँ मजा आ गया । यानी तो हम अपने मकसद में कामयाब हो ही गए । कामयाब कैसे मैं आपकी बात कुछ समझा नहीं । तुम्हारा यही तो मकसद था ना तो हारे होना की वजह से लोग तुम्हारी तारीफ करें । तुम्हारी हकलाहट की समस्या लोगों के बीच जो बन चुकी है तो मुझे छवि को अपनी गायकी के हुनर से बदल सकता हूँ और जहाँ तक मेरा ख्याल है तुम काफी हद तक उसमें कामयाब भी हो चुके हो । अब तुम्हारी छवि बिल्कुल बदल चुकी है । शायद इस बात को छोडो और ये बताओ कि क्या तुमने अपने पिताजी को ये बताया है कि आप जिस गायक की तारीफ कर रहे हैं वो और कोई नहीं मैं ही हूँ नहीं । मैंने उन्हें अभी ये बताना ठीक नहीं समझा क्यों भैया जी दरअसल में सही समय का इंतजार कर रहा हूँ और जब सही समय आ जाएगा तो मैं खुद बता दूंगा, ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी लेकिन तुम्हारी बात सुन कर मुझे बहुत मजा आया । वो कैसे? यही कि तुम्हारे पिताजी तुम्हारे सामने तुम्हारी ही तारीफ कर रहे थे और उन्हें इस बात का पता भी नहीं चल सका । आज सही कह रहे हैं और ये सब आपके ही आशीर्वाद संभव हो सका है । आपके ही आशीर्वाद से आज मुझे सच्ची खुशी का अनुभव प्राप्त हो सकता है । कुछ देर बातें करने के बाद मैंने फोन बंद कर दिया और हम दोनों अपनी अपनी तैयारियों में जुट गए । पंकज अपनी अगली कैसेट की तैयारी कर रहा है और मैं अपने तलाक के केस की तैयारी में जुट गया ।

मेरा उकाब - 11

चैप्टर ऍम हलो राजेश मैं नवीन बोल रहा हूँ । हाँ नवीन बोलो कहाँ रहते हो आजकल बस यही थोडा काम में व्यस्त था और चुनाव आज कैसे याद किया? राजेश यार तुम्हारी कंपनी ने कैसेट निकली है मुझे उडने दो के नाम से क्या तो उसके बारे में कुछ बता सकते हो । बोलो क्या पूछना चाहते हो? इसके गायक के बारे में कुछ जानना चाहता हूँ । हाँ हो क्या जानना चाहते हो? मैं अपने यूट्यूब चैनल के लिए उसका एक का इंटरव्यू लेना चाहता हूँ । नवीन मुझे माफ कर दो, मैं इसमें तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता । राजेश मैं तुम्हारी बात नहीं समझा । तुम कहना क्या चाहते हो? मेरे कहने का मतलब है कि जिसका एक के बारे में तुम बात कर रहे हो उसका उसका इंटरव्यू लेना बहुत मुश्किल है । अगर सीधे लखनऊ में बात करूँ तो वो किसी प्रकार का कोई इंटरव्यू नहीं देना चाहता । लेकिन क्यों इसके बारे में कहना मुश्किल है । दरअसल उसने अपने परिवार से चोरी छिपे ये काम किया जिस वजह से वो तुम्हें इंटरव्यू नहीं देना चाहेगा । तुम्हें देखा होगा कि उस कैसेट में उसका एक का असली नाम भी नहीं और न ही उसकी कोई फोटो वगैरह छापी गई है । तो हमारे कहने का मतलब है कि वो अपनी पहचान छुपाना चाहता हूँ । हाँ, ऐसा ही समझो राजेश फिर तो मुझे उससे मिलना बहुत जरूरी है । मैं ऐसे व्यक्ति से जरूर मिलना चाहूंगा । क्या दो मुझे उस से मिलवा सकते हो? नवीन तो मेरे बहुत पुराने दोस्त हो । तुम कहते हो तो मैं कोशिश जरूर करूंगा । मैं एक बार उससे इस बारे में जरूर बात करूंगा और अगर वो मान गया तो मैं तुम्हारी उससे मुलाकात जरूर करवाऊंगा । राजेश मुझे तुम्हारे फोन का इंतजार रहेगा । नवीन के फोन बंद करते ही राजेश ने तुरंत से पंकज को फोन किया । हेलो पंकज मैं राजेश बात कर रहा हूँ । हाँ सर जी बोलिए कहाँ पर हो जी आपके ठीक सामने । राजेश ने जैसे ही सामने देखा पंकज उसके सामने खडा था आओ पंकज मैं तुम्हें ही याद कर रहा था । राजेश जी यही तो प्यार होता है । आप नहीं याद किया और मैं आ गया । कहिए कैसे याद किया बस तुम्हारी कसद के बारे में तुम से बात करनी चाहिए । बस तुम्हारी कैसेट के बारे में तुम से बात करनी थी । क्या बात करनी थी तुम्हारी कैसेट की बिक्री? जितना मैंने सोचा था तुम्हारी कैसेट की बिक्री जितना की मैंने सोचा था उससे भी कहीं ज्यादा हो रही है । वहाँ के लिए तो बहुत ही अच्छी बात है । लेकिन अब श्रोताओं की दो मुख्य मांगे हैं जिन्हें तुम्हें पूरा करना है । कौन कौन सी मांगे हैं? पहली मांग तो ये कि तुम्हें अपनी अगले कैसेट जल्द ही निकाल नहीं ताकि तुम है सुनने वाले तुम्हें याद रख सकें । कई बार ऐसा होता है कि गायक अपनी सिर्फ एक ही कैसेट निकालता है जो की कुछ सालों तक चलती है । उसके बाद अगर सही समय पर वह अगली कैसेट ना निकले तो उसको चाहने वाले और उसको सुनने वाले बहुत जल्दी उसे भूल जाते हैं । इसलिए समय की मांग है कि तुम जल्द से जल्द और जितनी जल्दी हो सके अपनी दूसरी कैसेट की तैयारी शुरू कर दो । राजेश जी, मैं आपकी बात से बिल्कुल सहमत हो । मैंने अपनी दूसरी कैसेट की तैयारी कब से शुरू कर दी है? मैंने उसके तीन गाने लिख दिए है और बाकी के भी लिखने जारी है । जैसे ही वह पूरे हो जाते हैं मैं आपके पास आ जाऊंगा । बंकट ये तो बहुत अच्छी बात है कि तुमने मेरे कहने से पहले ही दूसरी कैसेट की तैयारी शुरू कर दी है और अब मेरी दूसरी बात को ध्यान से सुनो तो मैं अब कैमरे के सामने आना होगा । कैमरे के सामने आने से आपका क्या मतलब है? मैं बताता हूँ मेरा एक दोस्त है, उसका नाम नवीन है । वो पत्रकार भी है और वह यूट्यूब में अपना एक चैनल बनाकर नए नए और उभरते कलाकारों का इंटरव्यू लेकर उसकी विडियो यूट्यूब में डाल देता है । वो जिससे कि नए नए कलाकारों को अपनी प्रसिद्धि पाने में सहायता मिलती है । लेकिन राजेश जी आप तो मेरी मजबूरी को भलीभांति समझते हैं । देखो पंकज मैं तुम्हारी मानसिकता को समझ सकता हूँ परन्तु ऐसा और कितनी देर चलेगा? परन्तु ऐसा और कितनी देर चलेगा । कितनी देर तक तुम अपनी पहचान सबसे छुपाते रहोगे तो अपनी मंजिल के करीब हूँ और अब तुम मंजिल पर पहुंचने से कतराने लगे हो । आखिर तुम्हें डर किस बात का हूँ? कितनी देर तक तुम अपने परिवार वालों से डर डर कर अपना जीवन बर्बाद करोगे? कामयाबी तुम्हारे सामने चलकर खुदा रही है और तो मना कर रहा हूँ । पंकज राजेश की बात को अनसुना कर देता है और वहाँ से उठकर जाने लगता है । तभी राजेश उसे कहता है ठीक है तो तुम जाना चाहते हो तो जाऊँ परंतु भविष्य में कभी भी इस बात का रोना मत होना कि मैं कामयाब क्यों नहीं हुआ । वो मेरे पास आकर बैठो और ध्यान से मेरी बात सुनो । तुमने जैसा चाहिए वैसा ही हुआ है परन्तु अब दुनिया के सामने आने का वक्त आ गया है । तुम्हारे सामने उस नवीन को इंटरव्यू देने का सुनहरा मौका है तो तुम्हारे सामने उस नवीन को इंटरव्यू देने का सुनहरा मौका है जिसके माध्यम से तुम दुनिया वालों पर अपनी भडास निकाल सकते हो । तो मन से ये सवाल कर सकते हो कि आखिर मेरा दोष किया है तो मैं इस समाज से पूछ सकते हो कि अगर तो महक लाते हो तो क्या ये तुम्हारा दोष है? और ये सब प्रश्न तुम कैमरे के सामने टेलीविजन पर पूछोगे दूर से लगभग सारी दुनिया देखेगी । लेकिन आप तो कहते हो कि वह सिर्फ वीडियो बनाकर यूट्यूब में डालता है । नवीन एक पत्रकार है और वो अपने स्टूडियो में नवीन एक पत्रकार है और वो अपने स्टूडियो में और वो अपने स्टूडियो में नए नए उभरते कलाकारों का इंटरव्यू लेता है और उसी इंटरव्यू के वीडियो को वो अपने यूट्यूब चैनल में भी डाल देता है जिससे देश ही नहीं विदेश में बसे लोग भी उसके वीडियो को देखते हैं । राजेश सी अगर आप मेरी बात का होता ना करें तो मुझे इसके लिए कुछ समय चाहिए । मैं अपने दोस्तों से इस बारे में सलाह मशविरा करके आपको बता देता हूँ । ठीक है जैसा तुम का हूँ लेकिन मुझे जल्द ही बता देना और इस बारे में सकारात्मक तरीके से सोचना जरूर कुछ देर बाद देखो । कुछ देर बातें करने के बाद पंकज वहाँ से उठकर घर की ओर चल पडा और घर आते ही उसने मीना को फोन किया और अपने पास आने को कहा । कुछ समय के बाद मीना उसके घर आ गई हो क्या काम है मुझे बुलाया मैंने तो मैं ऐसे क्यों बात कर रही हूँ । अगर मुझे कुछ काम है तभी तो मैंने तुम को बुलाया है हाँ तो मैंने क्या कहा जो तुम इतना भडक रहा हूँ । फिर छोडो इन बातों को मुझे किसी काम से जल्दी जाना है । जो भी बात करनी है जल्दी से करो । मैं राजेश जी के दफ्तर से हो कर आ रहा हूँ और उन्होंने कहा कि मेरी वो कैसेट बहुत ही ज्यादा प्रचलित हो रही है । वहाँ तो बहुत अच्छी बात है । अब तो तुम मशहूर हो गए लेकिन अब एक समस्या आ गई है । कैसी समस्या? राजेश जी कहते हैं कि मुझे अब लोगों के सामने आना होगा और अपने बारे में सभी को बताना होगा । वो कैसे मैं कुछ समझी नहीं । दरअसल उनका एक दोस्त है जिसका नाम नवीन हैं और वह पत्रकार है । वो अपने टीवी प्रोग्राम में मेरा एक इंटरव्यू लेना चाहता है जिसके बाद वो इसे यूट्यूब में डालने का हाँ तो ठीक है । जैसा राजेश जी कह रहे हैं वैसा कर लोग इसमें बुराई क्या है और इसमें समस्या किस बात की है? क्या तुम कैमरे का सामना नहीं कर सकते हैं? अब तो तुम्हारी हकलाहट की समस्या बिल्कुल ठीक हो चुकी है । मेरे हिसाब से अब तो तुम कैमरे का सामना कर ही सकते हो । तुम समझ नहीं रही हो । बात कैमरे का सामना करने की नहीं है । बात ये है कि इंटरव्यू देने के बाद मैं अपने परिवार वालों का सामना कैसे करूंगा । पंकज हूँ अगर तो सारी उम्र ऐसे ही सोचते रहे तो फिर तो तुम कभी भी अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाओगे । अगर तुम अपने परिवार वालों से ऐसे ही करते रहे अगर तुम अपने परिवार वालों से ऐसे ही करते रहे तो फिर छोडो इन सब बातों को तो मैं काम करूँ । अगर तो मैं ज्यादा ही डर लगता है । अगर तो मैं ज्यादा ही डर लगता है तो ये सब छोड दूँ और कुछ और काम धंधा कर लोग क्योंकि ऐसा करना तुम्हारे बस की बात नहीं है तो डरपोक हो । मीना दुनिया कैसी बातें कर रही हूँ । मैं तो तो मैं अपना दोस्त मानता हूँ और अपना दोस्त मानकर तुमसे हर प्रकार की बात कर लेता हूँ और तो मुझे डर वो कह रही हूँ । अगर मैं डरपोक होता तो राजेश जी की कहने पर अपनी कैसे इतना निकालता? मेरे कहने का ये मतलब नहीं है । अच्छा खैर छोडो तो नहीं । एक दिन मुझे बोला था कि एक दिन चेतन ने तुम्हारी कैसेट को घर में लगा दिया था और तुम्हारे पिताजी उसकी बहुत तारीफ कर रहे थे । उसकी तारीफ करने के साथ । साथ में तो मैं भी अपमानित कर रहे थे कि तुम नहीं कहा था कि वो कैसेट के गाय की तारीफ करते करते मुझे कह रहे थे कि गाना ऐसे गाना चाहिए जो तुम गाते हो, वो गाना नहीं है । अगर कुछ सीखना है तो इस गायक से सीखो । हाँ लेकिन लेकिन क्या मेरी बात ध्यान से सुनो हूँ । परमात्मा हर किसी को कामयाब होने और अपने आप को साबित करने का एक मौका जरूर देता है तो तुम्हारे पास तो मौका खुद चलकर आया है ताकि तुम अपने आपको साबित कर सको और तुम ये दुनिया को बता सको की मैं भी किसी से कम नहीं हूँ । तुमने अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से बचपन से जो अपमान सहा है तो मैं उसका जवाब देना होगा । लेकिन क्या मेरी बात ध्यान से सुनो । परमात्मा हर किसी को कामयाब होने और अपने आप को साबित करने का एक मौका जरूर देता है । तो हमारे पास को मौका कुछ चल कराया है ताकि तुम अपने आपको साबित कर सको और तुम्हें दुनिया को बता सकते हो कि मैं किसी से कम नहीं होगा । तुमने अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से बचपन से जो अपमान सहा है तो मैं उसका जवाब देना होगा और बाकी रही तुम्हारे परिवार वालों की बात । मुझे जरूर विश्वास है कि उससे इंटर्व्यू को देखकर तुम्हारे परिवार वालों का रवैया और उनकी सोच तो तुम्हारे प्रति बदल जाएगी । मुझे लगता है कि वह तुम पर गुस्सा नहीं करेंगे । बस इस बात का जरूर ध्यान रखना कि तुम उससे इंटर्व्यू में अपने दिल की हर एक बात दिल से करना ठीक है जैसा तुम का हूँ । मैं इंटरव्यू देने के लिए तैयार हूँ । अब जो होगा देखा जाएगा वहाँ मेरे का ये हुई ना बाद धीरे अब मैं इसका मतलब क्या समझूं । मैंने जो तुमसे इजहार किया था क्या तो उसके लिए राजी हो? पंकज ने मीना को मजाकिया लहजे से कहा, तो भी ज्यादा मतलब समझने की कोई जरूरत नहीं है । कल को तुमने इंटरव्यू देना है और उस की तैयारी करो । ये कहकर मीना मुस्कुराती हुई वहाँ से चली गई । पंकज के इंटरव्यू देने के लिए मान जाने कि बात जैसे ही राजेश और नवीन को लगती है वो इसकी तैयारी शुरू कर देते हैं । राजेश अपने टेलीविजन चैनल और अपने यूट्यूब चैनल पर पंकज का इंटरव्यू का विज्ञापन देना शुरू कर देता है । राजेश के इस विज्ञापन से लोगों में पंकज के बारे में जानने और उस को देखने की दिलचस्पी बढने लगती है । यूट्यूब पर इस बात की चर्चा शुरू हो जाती है कि आखिरकार उस कैसेट को गाने वाला गायक या नहीं होगा । आप कौन हैं? कुल मिलाकर लोगों में उकाब के बारे में जानने की जिज्ञासा बढने लगती है । पंकज के परिवार में भी इस इंटरव्यू को देखने की जिज्ञासा थी क्योंकि पंकज का भाई और उसके पिता को उकाब के गाने बहुत पसंद है । आखिरकार इंटरव्यू का दिन आ ही गया । पंकज इंटरव्यू देने के लिए नवीन के दफ्तर में जाता है । उसके साथ राजेश और मीना भी होते हैं । समाचार चैनल वाले इस इंटरव्यू का सीधा प्रसारण करने की तैयारी करते हैं । पंकज को जहाँ इंटरव्यू देना होता है वो स्टेज तैयार हो जाता है और कुछ ही देर में इंटरव्यू शुरू हो जाता है । पंकज का इंटरव्यू करने वाला शख्स यानी नवीन सबसे पहले अपनी और पंकज के बारे में बात करने लगता है । वह कहता है नमस्कार मेरा नाम नवीन है और आज हम उस शख्स के बारे में बात करेंगे जिसकी कामयाबी की चर्चा तो हर ओर है परंतु से जानता कोई नहीं । उन्होंने बहुत ही कम समय में बहुत बडा मुकाम हासिल कर लिया है । उनकी एक ही कैसेट ने पूरी दुनिया में धूम मचा दी है । अगर हम आंकडों की बात करें तो ये अब तक की सबसे ज्यादा बिकने वाली कैसे थे । कैसेट में गायक ने हर प्रकार के गाने गाए हैं । उनके कुछ गाने उदासी भरे हैं तो कुछ गाने विवाह शादियों में नाच गाने के लिए प्रयोग किए जा रही है । उनका गाना में उडना चाहता हूँ लोगों को काफी प्रोत्साहित कर रहा है । लेकिन हैरानी की बात ये है की इतने प्रसिद्ध होने के बावजूद उनके बारे में कोई नहीं जानता । तो आइए ज्यादा समय बर्बाद न करते हुए सीधा उनसे ही बात करते हैं और इतना कहते ही वह कैमरा पंकज की ओर घूम आते हैं । नमस्कार जी, आपका स्वागत है हमारे शो में सबसे पहले आप हमारे दर्शकों को अपने बारे में बताइए । धन्यवाद मैं बीजी, मेरा नाम पंकज । अपने बारे में कुछ बताने से पहले मैं ये बता दूँ की मुझे बोलने में कुछ समस्या होती है जिसे हकलाना कहते हैं । तो अगर मैं बोलते समय रुक गया या अपनाने लग गया तो कृपया मेरे ऊपर हंसी नहीं क्योंकि इसमें मेरी कोई मर्जी नहीं चलती । ऐसी समस्या कुदरती होती है और रही बात मेरे बारे में जानने की तो आप सवाल कीजिए यानी कि आप मेरे बारे में क्या जानना चाहते हैं? पंकज जी, आपने अपनी हकलाहट की समस्या के बारे में बताकर हमें और भी असमंजस में डाल दिया है । सबसे पहले तो आप हमें अपनी हकलाहट की समस्या के बारे में खुलकर दर्शकों को बताएंगे । यानी ये क्या है? क्यों पैदा होती है और आपने अपनी समस्या पर कैसे काबू पाया? जी नवीन जी, हकलाहट की समस्या क्यों पैदा होती है इसके बारे में तो मैं नहीं जानता परन्तु मेरी हकलाहट की समस्या कैसे बढ गई है ये मैं बता सकता हूँ । जी पंकज जी कृपया बताएं क्योंकि हमारे दर्शक जानना चाहेंगे कि आपकी ये हकलाने की समस्या कैसे बढेगा । जी बात कुछ ऐसी है जब मैंने लगभग तीन चार वर्ष की आयु में कुछ कुछ बोलना शुरू किया तो मैं आम बच्चों के जैसे तुतलाकर बोलता था तो मेरे माता पिता और बाकी के पारिवारिक सदस्य मेरे ऐसे बोलने पर मेरे ऊपर हस्ते थे परन्तु मेरा बालमन उनकी इस गतिविधि को खेल समझता था । धीरे धीरे जैसे ही मेरी उम्र बढी मेरा बोलना जैसा का तैसा ही रहा है । जब मैं लगभग आठ नौ वर्ष की आयु में पहुंचा, मेरी बोलने की समस्या कुछ बढने लगे । मेरी माँ शायद ये सोचती थी कि मैं ऐसा जानबूझ कर कर रहा हूँ । तो जब भी मैं बोलते समय हकलाने लगता है तो वो मुझे डांटने लगती हैं । माँ की डांट से मैं डर जाता था और पहले से ज्यादा हकलाने लग जाता था । वो बार बार मेरे ऊपर सही ढंग से बोलने का दबाव बनाती है । शायद यही दबाव मेरी हकलाहट की समस्या को बढाने के कारण में से एक करन था थोडा बडा हुआ तो ठीक से होश संभालने लगा । अपना भला बुरा समझने लगा । बोलते समय हकलाता था परन्तु पढाई में पहले स्थान पर रहता था । गाने का शौक था और गाता भी बढिया था और भी कई खूबियां चाहिए परन्तु इस समाज ने मेरी उन सब खूबियों को नजरंदाज करके मेरी हकलाहट की समस्या से मेरा मजाक बनाते रहे । समाज मेरे इस प्रकार बोलने की वजह से मेरा मजाक ना बना दे इसलिए मैं बोलने से कतरा नहीं लगा । मैं डरने लगा और यही डर मेरी हकलाहट की समस्या को और भी बढाने लगा । अगर आप बुरा ना माने तो मैं आपसे एक बात पूछना चाहता हूँ । जी पूछिए इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है? पंकज जी, आपको अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से क्या कभी किसी परेशानियों का सामना करना पडा है? नवीन जी बिल्कुल मुझे अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से हर समय किसी ना किसी प्रकार की परेशानियों का सामना करना ही पडता है । मेरी समस्या ने मुझे कई बार समस्या में डाला है । क्या मैं जान सकता हूँ की वह कौन कौन सी समस्याएं नवीन जी अगर एक समस्या हो तो मैं उसके बारे में बात करूँ । यहाँ तो कुछ समस्याएं ऐसी थी जिनके बारे में अगर बात करुँ तो आप यकीन नहीं मानेंगे । कुछ ऐसी समस्या भी थी जिन्हें आम लोग ये जो कहलो की जो हकलाहट की समस्या से पीडित नहीं थे तो उसको समस्या नहीं मानेंगे । पंकज जी, मैं आपकी बात को कुछ समझा नहीं । नवीन जी, मैं आपको एक उदाहरण के द्वारा अपनी बात को समझाता हूँ । मान लोग मैं और आप दोनों एक ढाबे पर गए । हम दोनों एक दूसरे को बिल्कुल नहीं जानते हैं । हम दोनों वहाँ पर कुर्सी मेज पर बैठे हैं । हम दोनों के पास बारी बारी से बेटर आया और हम से खाने का ऑर्डर लेने लग गया । हम दोनों ने ही दाल रोटी का ऑर्डर दे दिया । वो हमारे लिए दाल रोटी ले आया और हम ने खाना शुरू कर दिया । कुछ समय के बाद हमारे खाने में दाल खत्म हो जाती हैं और आप उस वेटर को बुलाकर उसे कहते हैं कि मेरे लिए डालने का वो आप के लिए वो आपके लिए दाल लेकर आता है और आप फिर से खाना शुरू कर देते हैं या नहीं । आपको किसी प्रकार की कोई समस्या का सामना नहीं करना पडा हूँ और आपने अपना खाना फिर से शुरू कर दिया । अब वैसे ही परिस्थिति मेरे साथ होती है । मैं भी खाना खा रहा हूँ और मेरी भी प्लेट में डाल खत्म हो चुकी है हूँ । लेकिन मैं क्योंकि हकलाहट की समस्या से परेशान हूँ इसलिए मुझ से डाल शब्द बोला नहीं जा रहा । मैंने वेटर को इशारा करके अपने पास बुलाया और वो मेरे पास आया । उसने मुझसे पूछा कि आपको क्या चाहिए और मैंने दाल शब्द को अटक अटक कर बोलना शुरू कर दिया क्योंकि मैंने दाल शब्द को हकलाते हुए कहा है । जिससे वहाँ पर बैठे सभी लोग मेरी बात सुनकर हसने लग जाते हैं । तभी उस वेटर के मन में कुछ शरारत सोचती है । उसे पता होता है कि मैं डाल के लिए उसे बोल रहा हूँ । लेकिन वह जानबूझ कर अनजान बनने की कोशिश करते हुए मुझे बार बार डाल शब्द को बुलवा रहा है । अगर सीधे शब्दों में कहें तो वह मेरे मजे ले रहा है । नवीन जी, आप इस परिस्थिति के बारे में क्या कहना चाहेंगे? अगर आप मेरी जगह पर होते तो आप क्या करती हूँ? पंकज जी, आप की बात में मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया है । आप बिलकुल ठीक कहते हूँ । जिन परिस्थितियों का सामना करना हम जैसे लोगों के लिए बहुत ही आसान होता है । वो उन परिस्थितियों का सामना करना आप जैसे लोगों के लिए कितना मुश्किल होता होगा इस बारे में हमने कभी सोचा ही नहीं है । नवीन जी आप बिल्कुल सही कह रहे हैं । अक्सर होता ये है कि हमारी हकलाहट की समस्या की वजह से हमारी काबिलियत या हमारी बुद्धिमता पर कभी भी हो और नहीं किया जाता है । अब उपरोक्त उदाहरण में ही आप देख लो वहाँ बैठे लोग जो मुझ पर हस रहे थे या वो बेटर जो बार बार मेरे मजे ले रहा था । उनमें से किसी ने भी मेरे बारे में जाने बगैर और सिर्फ मेरी हकलाहट की समस्या की वजह से उपहास करना शुरू कर दिया । मेरे ऊपर हंसने वाले लोगों ने कभी भी ये नहीं सोचा कि उनके इस तरह से हंसने से मेरे दिल पर क्या बीत रही होगी । अगर आसान शब्दों में कहें तो उन्होंने मेरी काबिलियत और मेरी पहचान को दरकिनार करके सिर्फ में हकलाहट की समस्या की वजह से मुझे अपने मजाक का पात्र बना दिया । पंकज जी, आपने आपने हकलाहट की समस्या से मेरी व्यक्तिगत जान पहचान करवाई है और यकीन मानो हूँ मेरी सोच समस्या को लेकर काफी बदल गई है । सच कहूँ सच कहूँ तो इस समस्या को पहले मैंने इतने करीब से कभी नहीं जाना था और अब अपने इंटरव्यू को आगे बढाते हुए मैं अपने सवाल को बदलना चाहूंगा । जी बिलकुल आप पूछे और क्या पूछना चाहते हैं? पंकज जी आपने अपने शरीर पर टैटू बनवाया हुआ है क्या? इसके पीछे क्या इसके पीछे भी कोई कहानी देखने में तो ये काफी बडा ऍम और मुझे यकीन है कि इसके पीछे भी कोई ना कोई कहानी जरूर होगी । जी नवीन जी आपने बिल्कुल सही पहचाना तो इसके पीछे भी एक कहानी । ये कहानी मेरी हकलाहट की समस्या पर ही आधारित है । अगर आपकी इजाजत हो तो क्या उसे सुना सकता हूँ? बिल्कुल इसमें इजाजत लेने वाली क्या बात है? मुझे और मेरे दर्शकों को आपकी इस कहानी को जानने में काफी उत्सुकता है । तो नवीन जी बात उन दिनों की है जब मैंने नया नया जिम में जाना शुरू किया था । वहाँ एक लडके ने अपने शरीर पर छोटा सा टैटू बनवाया हुआ था । उस समय मुझे टैटू के बारे में जानकारी नहीं थी । मैंने सिर्फ इसके बारे में सुना ही था । देखा पहली बार था इसलिए मैंने उसके टैटू को करीब से देखने के लिए इसलिए मैं उसके टाइटल को करीब से देखने के लिए उसके पास गया और उस लडके से इस बारे में पूछने लगा हूँ । लेकिन उसने मेरी बेइज्जती करने के लहजे से मुझसे कहा कि ये कोई बच्चों का खेल नहीं है । इसे बनवाने में बहुत दर्द का सामना करना पडता है । इसलिए ये तुम जैसे बच्चों के बस की बात नहीं है । मैं घर वापस आ गया हूँ और मैंने सोचा कि बचपन से मैं अपनी हकलाहट की समस्या की वजह से इतना दर्द सहन करता हूँ । उस दर्द के सामने इस टैटू वाले दर्द की क्या औकात है वह किसी बात को समझने के लिए मैंने अपने शरीर पर बडा सा टैटू बनवा लिया । वहाँ यानी टैटू बनवाते समय आपको कोई दर्द वगैरह नहीं हुआ । दर्द हुआ हूँ लेकिन उस दर्द की औकात पता चल रही हैं । वो दर्द मेरी हकलाहट की समस्या की वजह से । बचपन से सहन किए हुए दर्द के सामने कुछ भी नहीं था । आपने अपनी बाजू पर भी एक टैटू बनवाया हुआ है । इसमें कुछ लिखा है क्या लिखा है जरा पढकर बताना । नवीन जी आप खुद ही देख लो । पंकज ने अपनी बात को आगे करते हुए कहा । इसमें लिखा है फॅमिली अगर आप मुझे मृत पाओ तो तुरंत से मेरा शरीर दान कर दो, इसका क्या मतलब हुआ? नवीन जी, मेरे हिसाब से आपको इतनी इंग्लिश तो आती है कि आप इसका मतलब समझ सकता हूँ । वो तो मैं समझ गया हूँ कि आपने अपनी बाजू में दे । टू के द्वारा कुछ कुछ हुआ है लेकिन मैं ये जानना चाहूँगा कि आपने ऐसा क्यों हुआ है । क्या इसके पीछे भी कोई कहानी नहीं? इसके पीछे कोई कहानी नहीं है । इसके पीछे मेरी एक अपनी सोच है । कैसी सोच नवीन जी एक ना एक दिन तो सभी को मारना है जो कि सत्य है । मैं चाहता हूँ कि मैं अपनी मृत्यु के बाद अपने शरीर में से कीमती जो कि किसी के काम आ सकते हैं उसको उनको दान में देना चाहता हूँ । पंकज जी, आपकी सोच तो बहुत सही है लेकिन इसकी भी प्रक्रिया होती है । मेरे कहने का मतलब है कि अगर आप अपना शरीर दान या अंगदान करना चाहते हैं तो आपको किसी अस्पताल से संपर्क करना होता है और कुछ कागजी कार्रवाई और आपके परिवार के सदस्यों की सहमती के बाद आपका नाम, अंगदान करने वालों लोग, आपका नाम अंगदान करने वाले लोगों की सूची में लिख दिया जाता है । नवीन जी इसके बारे में मुझे सब कुछ पता है और इस की तैयारी मैंने पहले से ही कर ली है । और रही बात मेरे टैटू की जिसमें मैंने अपना शरीर दान करने के बारे में लिखा है । ये समाज को अंगदान और शरीर दान करने के प्रति जागरूक करने का मेरा अपना एक अंदाज है । वहाँ बहुत बढिया पंकज जी सच कहूँ तो आपका यह अंदाज आज मुझे बहुत पसंद आया । जहाँ तक मैं जानता हूँ अंगदान या शरीरदान के प्रति इस प्रकार से किसी ने भी जागरूक नहीं किया होगा । पंकज जी, हमारे दर्शकों के साथ मैं ये जानना चाहता हूँ कि आपने अपना नाम उकाब ही क्यों रखा हूँ? इस नाम का क्या मतलब है और ये नाम आपको क्यों पसंद है? नवीन जी जुकाम नाम मुझे मेरे मोहित भैया ने दिया है । मुझे अक्सर उकाब कहकर पुकारते हैं । जब भी मैं कभी मायूस होता हूँ तो वो मुझे हौसला देने के लिए मुझे कहते हैं कि तुम मेरे उकाब हूँ तो बाहर नहीं मान सकते । दरअसल उकाब एक पक्षी का नाम है जिसका जन्म पहाडों की ऊंची चोटी पर एक छोटे से घोंसले में होता है । लेकिन जब वह बडा होता है तो उसके उडने के लिए ये सारा आसमान भी छोटा पड जाता है । वो आसमान में बहुत ऊंचा होता है जिस वजह से उसे नीचे की दुनिया बहुत ही छोटी छोटी नजर आती है । जिस प्रकार से अपनी उडान के दौरान पर छोटे छोटे परिंदों की परवाह नहीं करता ठीक वैसे ही जब हम अपनी मंजिल की तरफ कदम बढा रहे होते हैं तो हमें भी छोटी छोटी मुश्किलों की परवाह नहीं करनी चाहिए । वहाँ पंकज जी आपने बताया कि आपको बचपन से ही गाने का शौक था परंतु आपने अपने सुन्दर को सबसे छिपाकर क्यों रखा? ऍम मेरा व्यक्तित्व बहुत ही शर्मीले किस्म का है । मैं बहुत ही कम बोलता हूँ । इसके कारण शायद मेरी हकलाहट की समस्या ही थी । इसका कारण शायद मेरी हकलाहट की ही समस्या थी । इस वजह से ही मैंने अपने हुनर को सबसे छिपाकर रखा था । पंकज जी आपकी कैसेट जो बाजार में चल रही है उसके सभी गीत एक से एक बढकर हैं । उसके सभी गीत एक से बढकर एक आप अपनी इस कामयाबी का श्रेय किसी देना चाहेंगे । नवीन दी मैं अपनी कामयाबी का श्रेय इस समाज को विशेष कर अपने परिवार वालों अपनी दोस्त मीना और भैया मोहित को देना चाहूँगा क्योंकि इस समाज में मेरी हकलाहट की समस्या का मजाक बनाया, जिस वजह से मैं अकेला रहना पसंद करने लगा । इस अकेलेपन में रहकर मैं अपने गाने के शौक को पूरा करने लगा । कभी कभी मुझे अपना मजाक बनाने वालों पर होता भी आता था परंतु मैंने अपने खुद से को पाला और सही जगह सही समय पर इस्तेमाल किया । इस बीच जब भी मैं अपनी जिंदगी से निराश हो जाता तो मेरी दोस्त मीना और मोहित भैया मेरा हौसला बढाने के लिए आगे आ जाती हूँ । आज में अगर आपके सामने एक गायक के तौर पर बैठा हूँ तो ये उन्हीं की हौसला अफजाई का नतीजा है । यानी कुल मिलाकर आपने काफी दबाव में जिंदगी व्यतीत कर के यहाँ इस मुकाम तक पहुंचे हो जी नवीन जी, मेरे भैया जी कहते हैं कि जिस कोयले पर दबाव पडता है, वही हीरा बनता है और अमर हो जाता है और जो दबाव को सहन नहीं कर पाते तो कोयले तो जलकर राख हो जाते हैं । वहाँ पंकज जी क्या बात है? पंकज जी एक और बार आप मेरे से बहुत देर से बातें कर रहे हैं परंतु आपको हकलाहट की समस्या न के बराबर हो रही है कि आप हमारे दर्शकों को इस बारे में कुछ बताएंगे । मेरे कहने का मतलब है कि आपने अपनी हकलाहट की समस्या को खत्म कैसे? क्या नवीन जी सबसे पहले मैं आपको ये बता दूँ कि मैंने अपनी हकलाहट की समस्या को खत्म नहीं किया बल्कि मैंने अपनी हकलाहट की समस्या को काबू में क्या है? क्योंकि हकलाहट की समस्या कभी खत्म नहीं होती है । इसको सिर्फ काबू में किया जा सकता है । और रही बात इसे काबू करने की तो मैंने अपने जीने के दौर तरीके में कुछ बदलाव करके अपने इस समस्या पर काबू पाया है । शुक्रिया पंकज जी क्या बता सकते हैं कि आपने अपने जीवन में कौन कौन से बदलाव करके अपनी हकलाहट की समस्या पर काबू पाया? नवीन जी, मैंने अपनी हकलाहट की समस्या पर काबू पाने के लिए जीने के जिन तौर तरीकों को अपनाया उनमें जो मुख्य तरीके हैं उनका वर्णन में जरूर करना चाहूंगा । पहला काम मैंने ये किया कि मैंने अपने गुस्से पर काबू करना सीखा और गुस्से को पालकर सही जगह पर इस्तेमाल किया । मैंने ज्यादातर जिम में कसरत करते समय इसी पाले हुए गुस्से का इस्तेमाल किया । इसका फायदा मुझे दो प्रकार से हुआ । पहला तो ये कि गुस्सा काम करने से मेरी हकलाहट की समस्या में कमी आने लगी क्योंकि मैंने एक बार देखी कि जब मैं किसी बात पर गुस्सा करता था तो मेरी हकलाहट की समस्या पहले के मुकाबले काफी बढ जाती थी । दूसरा ये कि अपने पाले हुए गुस्से कि जिम में कसद के समय इस्तेमाल करने से मेरे कसरत करने की ताकत बहुत बढ जाती है और मैं अपने साथ कसरत कर रहे बाकी लोगों के मुकाबले अधिक कसरत कर लेता । दूसरा काम मैंने ये किया की मैंने धीरे धीरे और आराम से बोलने की आदत को अपनाया । इसके लिए मैंने किताबों का सहारा लिया । यानी मैंने किताबों को धीरे धीरे परन्तु ऊंची आवाज में पढना शुरू किया क्योंकि पहले जब भी मैं जल्दबाजी में कोई बात कहता तो मैं हकलाने लगता हूँ । तीसरा काम मैंने ये किया और अब भी करता हूँ । वो ये कि जब भी मुझे किसी के सामने बोलना पडे तो मैं उससे अपनी हकलाहट की समस्या के बारे में पहले से ही बता देता हूँ । इससे मेरा मन शांत हो जाता है और मेरा दर कुछ कम होने लगता है । आपको याद होगा कि इस कार्यक्रम की शुरुआत में भी मैंने अपनी हकलाहट की समस्या की बात की थी । उसके बाद कई छोटे छोटे काम जैसे अकेले समय में कोई ना कोई गीत गुनगुनाना हर समय प्रसन्नचित रहने की कोशिश करना, किसी की कहीं बात या अपना मजाक बनाने वाले को नजर अंदाज करना । अंत में सब छोटी छोटी बातों को नजरंदाज करके अपना ध्यान अपने लक्ष्य की ओर रखना । पंकज जी, आपने हकलाहट के विषय पर बहुत मूल्यवान जानकारी दी । उम्मीद है आपकी दी हुई जानकारी किसी के काम आएगी और कार्यक्रम के अंत में मैं आपसे एक आखिरी गुजारिश करूंगा तो वो ये कि आप समाज को क्या संदेश देना चाहेंगे? नवीन जी समाज को मैं यही बात कहना चाहूंगा के हकलाहट से परेशान व्यक्ति पहले से ही बहुत परेशान होते हैं । कृपया उनका मजाक बनाकर उन्हें और परेशान न करें हूँ । और हकलाहट से परेशान अपने भाईयों से ये कहना चाहूंगा कि आप किसी से कम नहीं हूँ । क्योंकि विज्ञान में ये बात साबित हो चुकी है कि हकलाहट की समस्या का मुख्य कारण दिमाग का तेज होना है । यानी हकलाहट से परेशान व्यक्ति का दिमाग बाकी लोगों के मुकाबले तेज होता है । तो आप अपने आप को किसी से कम मत समझे, अपने जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करें और उस लक्ष्य को पाने के लिए जी जान से जुट जाएं । बहुत हो पंकज जी और ये थे आपके चाहे थे गाय को कब यानी पंकज जी वो जिन्होंने अपनी पहचान को छुपाने के कारण के बारे में बताया और साथ में हमें और आपको हकलाहट की समस्या के बारे में काफी मूल्यवान भी । और साथ में हमें और आपको हकलाहट की समस्या के बारे में भी काफी मूल्यवान चीजें बताई तो दोस्त हो जाने का वक्त हो गया है । अगले कार्यक्रम में मिलेंगे किसी नए फनकार से तब तक के लिए हमें इजाजत दीजिए, धन्यवाद ।

मेरा उकाब - 12

ऍम पंकज की घर वापसी इंटरव्यू खत्म हो चुका होता है और पंकज को अपने घर वापस जाना होता है लेकिन वो घर वापस आने से बहुत डर रहा होता है । वो डरता है की वो अपने घर वालों का सामना किस प्रकार से करेगा क्योंकि अब तक तो उसके घर के सभी सदस्यों को उसके बारे में पता चल चुका होगा । कुल मिलाकर उसमें अपने घरवालों का सामना करने की हिम्मत नहीं होती और वो मुझे फोन करता है । हेलो भैया जी पंकज बोल रहा हूँ । हाँ पंकज बोलो क्या हाल है इंटरव्यू का क्या बना भैया जी? इंटरव्यू तो बहुत अच्छे से हो गया है लेकिन लेकिन क्या है? लेकिन समस्या यह है कि अब मैं घर कैसे जाऊँ? इसमें समस्या वाली क्या बात है तो मैं आराम से घर जा सकते हो । भैया जी शायद आप मेरी बात समझे नहीं । मेरा इंटरव्यू मेरे परिवार वालों ने भी देखा होगा । समस्या यह है कि अब मैं उनका सामना कैसे करूंगा? पंकज तो अपने घर जाते हैं । मुझे यकीन है कि तुम्हारे परिवार वाले तो मैं कुछ नहीं कहेंगे । नहीं भैया जी आप नहीं जानते हैं मेरे घर में इस समय क्या चल रहा होगा । तुम्हारे कहने का क्या मतलब है तुम्हारे घर में क्या चल रहा होगा । मैं बताता हूँ आप तो जानते ही हैं कि मेरे पिता और भाई आप के बहुत बडे प्रशंसक हैं और उसके गाने यानी मेरे गाने हर समय सुना करते हैं । जब कल रात को उन्हें पता चला क्योंकि आपका इंटरव्यू टीवी पर दिखाया जाएगा तो वो बहुत खुश हुए हैं और मेरे पिता ने छोटे भाई चेतन को कहा कि हम जरूर उसका इंटरव्यू सुनेंगे । अब जब उनको पता चल गया होगा कि उनका जिसके वो बहुत बडे प्रशंसक हैं वो और कोई नहीं बल्कि मैं हूँ तो पहले तो बहुत खुश होंगे लेकिन तभी माता जी कुछ न कुछ ऐसा बोल देंगे जिससे की पिताजी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाएगा । माता जी इस गुस्से में आग में घी डालने का काम करेंगे और उनके गुस्से को और भडका देंगे । रही बात चेतन भाई कि तो वो भी ऐसा ही करेगा । वो मेरा बचाव करने के बजाय मेरे खिलाफ ही बात करेगा । अच्छा तो ये बताऊँ अच्छा तो ये बात है तो में काम कर तुम सीधा मेरे घर आ जाते । मैं अभी बाहर हूँ और कुछ समय के बाद मैं भी घर में ही आ रहा है । मैं खुद तुम्हें लेकर तुम्हारे घर में जाऊंगा और उन्हें इस बारे में समझा लूंगा । लेकिन आप इस समय कहाँ पर है? इस समय में कोर्ट में है और आज मेरी तलाक का अंतिम फैसला होना है । वो तो आपको समय लगेगा नहीं । कोई समय नहीं लगेगा । फैसला हो चुका है । हमने अब तलाक के कागज लेने हैं और उसके बाद हम सीधा घर में ही आ रही है । तुम भी घर के लिए रवाना हो जाओ तब तक मैं भी घर पहुंच जाऊंगा । ठीक है जैसा आप कहें मैं सीधा आपके घर में ही आ रहा हूँ और उसके बाद में मैं आपको लेकर अपने साथ अपने घर पर जाऊंगा । क्योंकि इंटरव्यू के बाद मैं अपने परिवार वालों का सामना नहीं कर सकता तो मैं इस बात की चिंता मत करो । मैं खुद तुम्हें लेकर तुम्हारे घर में जाऊंगा और तुम्हारे परिवार वालों को समझा दूंगा तो मेरे घर में आ जाऊँ । इसके बाद पंकज फोन बंद कर देता है और मेरे घर की ओर रवाना हो जाता है । वो राजेश के दफ्तर से बाहर निकलता है और तभी उसकी नजर के सामने । इसके बाद पंकज फोन बंद कर देता है और मेरे घर की ओर रवाना हो जाता है । वो राजेश के दफ्तर से बाहर निकलता है और तभी उसकी नजर सामने की ओर जाती है । सामने मीना खडी होती है । अरे मीना तो तो यहाँ क्या कर रही हूँ । तुम्हारा इंतजार बहुत देर से तुम्हारा इंतजार कर रही थी ताकि तुम इंटरव्यू देकर बाहर आओ और मैं तुमसे जान सकता हूँ की तुम्हारा इंटरव्यू कैसा रहा, बताओ कैसा रहा? मेरे हिसाब से तो बिल्कुल ठीक रहा । बाकी लोगों की प्रतिक्रिया आने के बाद ही पता चलेगा कि वह कैसा रहा । तो मैं इस बात की चिंता मत करूँ । लोगों की प्रतिक्रिया भी सकारात्मक ही होगी । चल हूँ अब घर चलो नहीं । मुझे भी घर नहीं जाना है कि वो क्या तो मैं कहीं और जा रहे हैं । वहाँ मुझे पहले मोहित भैया के घर जाना है और उनको लेकर फिर मैं अपने घर में जाऊंगा । वो क्यों मैं कुछ समझी नहीं । मीना तुम तो मेरे बारे में सबको जानती हूँ । तुम्हें तो पता ही है कि मैंने ये जो कैसेट वाला काम किया था अपने परिवार वालों से चोरी छुप छुप कर क्या था । उन को मेरे बारे में पता ना चले इसलिए मैंने अपना नाम भी बदल दिया था । लेकिन मुझे क्या पता कि वह मेरे ही प्रशंसक निकलेंगे । वो मेरे सामने मेरे ही तारीफ करेंगे और मेरी तुलना मेरे साथ ही करेंगे । तो तुम्हारे कहने का मतलब है कि वह पंकज की तारीफ आपके सामने करेंगे । हाँ बिल्कुल ऐसा ही है और उनका की तुलना पंकज के साथ करेंगे हो ये तो बहुत ही दिलचस्प बात है । उनको तो ये भी नहीं पता था कि जिस उकाब के बारे में वो अपने घर में दिन रात बातें करते हैं वो कोई और नहीं बल्कि मैं हूँ । अब जब इंटरव्यू में सब कुछ साफ साफ हो चुका है और उन्हें मेरे बारे में पता भी लग चुका है तो मैं उन का सामना नहीं कर सकता हूँ । लेकिन पंकज ऐसा कब तक चलेगा? मेरे कहने का मतलब है कि तुम्हें एक ना एक दिन तो अपने घरवालों को बता नहीं होगा और अपने परिवार वालों का सामना भी करना ही होगा । तो फिर मैंने ये सब बात नहीं भैया से कर दी है । फिर उन्होंने क्या कहा? उन्होंने क्या सलाह दी? उन्होंने कहा है कि मैं उनके पास आ जाऊँ और वो मेरे साथ मेरे घर में चलेंगे और मेरे परिवार वालों से बात करेंगे लेकिन तुमने बताया था ना कि उनके केस का भी फैसला आ जाने वाला है । उनके केस का क्या बना? मेरे कहने का मतलब है कि उनकी केस के बारे में कुछ पता चला हूँ । मेरी उनसे फोन पर बात हुई थी लेकिन केस के बारे में ज्यादा बात नहीं हुई । बस उन्होंने इतना ही कहा था कि उनका केस आज खत्म हो रहा है और वह केस के बाद सीधा घर में ही आ रहे हैं । उन्होंने मुझे भी घर आने को कहा था । यानी उनका केस अब खत्म हो गया है । हाँ लगता तो है लेकिन मेरा केस तो अभी भी चल रहा है । तो ये क्या बात कर रहे हो तो तुम्हारा कौन सा केस चल रहा है है एक ऐसा केस जिसका फैसला अभी तक नहीं हुआ । जिसकी सुनवाई तो कई बार हो चुकी है लेकिन हर बार आगे की तारीख पड जाती है । मीना पंकज की बातों को समझ जाती है कि वह उससे अपने बिहार के बारे में बात कर रहा है लेकिन वो उसके सामने न समझ होने का नाटक करती है तो तुम कोई अच्छा सा वकील कर लेते हैं । शायद केस जीत जाते हैं । ये किसी वकील के बस की बात नहीं है । मेरे इस केस को मुझे खुद ही लगना है और मजे की बात ये है मेरे इस केस में मुझे ही न्यायाधीश है, हो सकता है तुम्हारे न्यायाधीश ने तुम्हारे केस का फैसला सुना दिया हूँ लेकिन तुम्हें पता ना चला हूँ । ऐसा तो कई बार हुआ है लेकिन लेकिन क्या? लेकिन मैं चाहता हूँ कि न्यायाधीश मेरे केस का फैसला यूँ इशारों इशारों में बताने के बजाय साफ साफ लफ्जों में सुना देंगे । ऐसा होना थोडा मुश्किल है क्योंकि ऐसा न्यायाधीश की प्रकृति पर निर्भर करता है । हो सकता है तो महारा न्यायाधीश थोडा शर्म आ रहा हूँ और साफ साफ लफ्जों में अपना फैसला ना सूना पा रहा हूँ । ऐसी परिस्थिति में तो मैं खुद चाहिए की बातों में समय बर्बाद करने के बजाय उसके इशारे को समझो और मेरे हिसाब से तो मैं अब तक ये समझ जाना चाहिए । ऐसा होना थोडा मुश्किल है क्योंकि ऐसा न्यायाधीश की प्रकृति पर निर्भर करता है वो हो सकता है तुम्हारा न्यायाधीश थोडा शर्मा रहा हूँ और साफ साफ लडकियों में अपना फैसला ना सूना पा रहा हूँ । ऐसी परिस्थिति में तो मैं खुद चाहिए की बातों में समय बर्बाद करने के बजाय उसके इशारों को समझो और मेरे हिसाब से तो मैं अब तक ये समझ जाना चाहिए कि तुम्हारा ये मुझे हम जिससे तुम न्यायाधीश कह रहे हो वो इतनी देर से बाहर खडा तुम्हारे आने का इंतजार कर रहा है । क्या तुम्हारे लिए अभी इशारा काफी नहीं । इसके बाद पंकज और मीना दोनों काफी समय तक एक दूसरे की ओर देखते रहे और आंखों ही आंखों में मीना ने पंकज से अपने प्यार का इजहार कर दिया । आज मेरे लिए बहुत ही खुशी का दिन है क्योंकि एक ओर जहां मेरा इंटरव्यू काफी सफल रहा है वहीं दूसरी ओर मैंने अपने बचपन का प्यार भी पा लिया है । मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं अपनी खुशी का इजहार किस प्रकार से करूँ । पंकज ये सब बातें छोडो और सोचो कि तुमने घर में कैसे जाना है? मैंने तो मैं बताया तो की मैंने इस बारे में मोहित भैया से बात की है और अब मैं उन्हीं के पास जा रहा हूँ या मैं भी साथ चल सकती हूँ । हाँ चलो इसमें पूछने वाली क्या बात है हूँ । इसके तुरंत बाद पंकज और मीना मेरे घर की ओर रवाना हो जाते हैं । वो दोनों मोटरसाइकिल में आ रहे होते हैं । रास्ते में पंकज मीना को कहता है बिना तो नहीं जानती कि मैं आज कितना खुश हूँ । मैं भी क्योंकि तुम नहीं जानते मैं तुम्हें बचपन से बहुत चाहती हूँ लेकिन कभी तुम से अपने दिल की बात करने की हिम्मत नहीं कर पाई । अच्छा ये सब छोडो मुझे तुमसे बहुत कुछ पूछना है क्या? क्या तुम क्या पूछना चाहती हूँ तुम सब कुछ मेरे बारे में जानती हूँ? नहीं ऐसी बहुत सी बातें हैं जिनके बारे में मैं बहुत ही कम जानती हूँ । जैसे जैसे वो टैटू वाली बात ये तो तुम जानती हूँ तो मैं शायद बोल रही हूँ । जब मैंने टैटू बनवाया था तो सबसे पहले तो नहीं बताया था । नहीं वो वाला नहीं जिसमें तुमने मरने के बाद अपने शरीर को दान करने के बारे में लिखा है तो उसके बारे में बताना मैंने ठीक नहीं समझा । क्यों कुछ बातें ऐसी होती हैं जिससे बता पाना थोडा मुश्किल होता है । फिर छोडो इन सब बातों को ये बताओ की आगे की क्या योजना है । आगे की योजना मतलब यही शादी की तो मैं शादी के बारे में क्या सोचा है? पंकज मेरे हिसाब से इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं है । तुम पहले अपने परिवार वालों से अपने गायन के बारे में तो बात करूँ । मीना उसकी कोई चिंता नहीं है । वो सब तो आसानी से हो जाएगा । मुझे मोहित भैया पर विश्वास है । वो मेरे परिवार वालों को समझा देंगे तो ये बताओ की शादी कब करनी है? पंकज मेरे हिसाब से इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं है । बाकी अगर तुम चाहते हो तो पहले मेरे परिवार वालों से भी तो बात करनी है क्योंकि मैं चाहती हूँ कि उन्हें मेरे प्रेम सम्बन्ध के बारे में बताना चलेंगे और तुम्हारे पिता मेरे घर में रिश्ता लेकर आए क्योंकि अगर मेरे पिता का मेरे प्रेम सम्बन्ध के बारे में पता चल गया तो वो हमारी शादी के लिए कभी भी नहीं मानेंगे । हाँ, अगर तुम्हारे पिता खुद मेरे घर में रिश्ता लेकर आते हैं तो वो उनकी बात कभी नहीं डालेंगे । वो दोनों अभी बात ही कर रहे थे कि तभी मोहित पंकज को फोन करता है । हेलो पंकज कहाँ पर हो गया? जी में रास्ते में हूँ और मैं आप के घर में ही आ रहा हूँ । पंकज तुम जहाँ पर हो वहीं से अपने घर की ओर निकल जाऊँ और पार्क में जाकर मेरा इंतजार करूँ । मैं कोर्ट से निकल गया हूँ और तुम्हारे घर की ओर ही आ रहा हूँ । क्यों क्या हो रही है और आप के केस का क्या बना? पंकज अमित तो मैं वहीं आकर बताता हूँ । तुम पार्क में मेरा इंतजार करो, ठीक है जैसा आप कहें । पंकज ने फोन बंद कर दिया और मीना उससे कहती है, क्या हुआ क्या कहते हैं मुझे भैया पता नहीं कुछ समझ में नहीं आया । समझ में नहीं आया । समझ में नहीं आया से तुम्हारा क्या मतलब? उन्होंने कुछ तो कहा होगा । उन्होंने मुझसे कहा है कि मैं वापस जाऊं और घर के सामने बने पार्क में उनका इंतजार करूँ । वो वहीं आ रहे हैं, लेकिन उनके केस का क्या बना? क्या उसका कोई फैसला हुआ? फिलहाल तो उसके बारे में उन्होंने कुछ नहीं बताया । उन्होंने सिर्फ यही कहा है कि मैं पार्क में उनका इंतजार करूँ । इसके बारे में हम उनसे वहीं बात करेंगे । ठीक है तो फिर समय बर्बाद मत करो और जल्दी से चलो । इसके तुरंत बाद पंकज अपने घर की ओर रवाना हो जाता है और कुछ ही समय में पार्क में पहुंचकर मोहित का इंतजार करने लग जाता है और कुछ ही समय में मोहित वहाँ बहुत ज्यादा है । वो देखो मोहित भैया भी आ गए । मीना ने पंकज से कहा और पंकज क्या हाल है हुआ मीना भी आई हुई है । नमस्कार मोहित भैया और चुनाव कैसे हो? मैं बिलकुल ठीक हूँ और तुम बताओ तुम्हारा इंटरव्यू कैसा रहा? भैया जी? इंटरव्यू तो मेरी उम्मीद से बहुत ही अच्छा रहा । मैंने ये कभी नहीं सोचा था कि मैं इतना अच्छा जाएगा । मैंने कभी नहीं सोचा था कि इंटरव्यू इतना अच्छा जाएगा लेकिन फिर लेकिन गैर बिना किसी रुकावट और परेशानी के इंटरव्यू बहुत ही अच्छा रहा । आप सुनाओ आप के केस का क्या बना? मेरा केस तो लगभग खत्म हो चुका है और तो उसका फैसला जाएगा क्या फैसला मेरे कहने का मतलब ये है कि फैसला क्या तय हुआ? पंकज फैसला ये हुआ है कि मुझे मीना को उससे लिया । दहेज का सारा सामान पैसा वापस करना होगा और साथ में उसे दस लाख की रकम अदा करनी होगी । उसके बाद मेरा तलाक हो जाएगा । अब मुझे मीना के परिवार वालों से वह सूची मिल गई है जिसमें उसका दहेज का सारा सामान लिखा हुआ है । मुझे कल के दिन में ये सारा सामान इकट्ठा करना है । हूँ भैया जी वैसे एक बात बोलूँ अगर आप गुस्सा ना करें तो मीना ने मुझसे कहा हामी ना बोलो तो भरी बात का गुस्सा कैसा है भैया जी जब से मुझे आपके केस के बारे में पता चला है में आपकी बीवी यानी ईशा भाभी के बारे में ही सोचती रहती हूँ कि वो कैसी औरत है जो सिर्फ पैसों के लालच में आकर अपना घर परिवार सारा बर्बाद कर रही हैं । उनके दिमाग में क्या चल रहा है? कैसी सोचना? उनकी उनकी मानसिकता कैसी है? मैं तो ये सोच कर बहुत हैरान आखिरकार उन्होंने क्या सोचा होगा की आप से अलग होकर आपसे तलाक लेकर वो दूसरी जगह अपना घर कैसे बसा लेंगे? क्या दूसरी जगह उन्हें आपसे अच्छा लडका मिल सकता है? उन्होंने क्या सोचा हुआ है कि दूसरी जगह पर शादी करके वह राज करेंगे, आराम से रहेंगे । यकीनन ऐसी औरतें, बाद में पछताती और सारी जिंदगी धक्के ही खाती हैं । मेना तुम जो भी कुछ कह रही हूँ बिल्कुल सही है । लेकिन मैं अपने इस केस में अपनी पत्नी एशिया को ज्यादा गुनहगार नहीं मानते हैं । हाँ उसका ये कसूर जरूर हो सकता है कि वो अपनी माँ के कहने पर ये सब कर रही हैं तो हमेशा से ही अपनी माँ का कहना मानती आई है और अपनी माँ के पदचिन्हों पर ही चलती आई है । मुझे इस बात का भी यकीन है कि अगर एक बार वह मुझ से अपनी माँ से अलग होकर बातचीत करें तो वो ये तलाक लेने का फैसला बदल सकती है क्योंकि उसकी ऐसी सोच है मानसिकता नहीं है कि वह तलाक जैसा बडा फैसला ले सके । मुझे यकीन है कि वह मुझ से आज भी उतना ही प्यार करती है जितना कि शादी के पहले दिनों में क्या करती थी । मैं मानता हूँ कि हमारी शादी के कुछ दिनों के बाद कुछ नौकझोंक शुरू हो चुकी थी और ऐसा सभी के साथ होता होगा । मेरे कहने का मतलब है कि सभी शादी शुदा लोगों की जिंदगी में कुछ न कुछ नौकझोंक तो होती ही होगी हूँ । यकीनन हर लडकी अपनी माँ से इस बारे में जरूर बात करती होगी । अब उसकी माँ के ऊपर निर्भर करता है कि उसने इस नौ बच्चों को खत्म करना है या इसी नौ बच्चों को और तूल देकर अपनी बेटी के घर में लडाई झगडे को बढाना है । जहाँ तक मेरा ख्याल है ज्यादातर औरते अपनी बेटी को गलत रास्ता नहीं बताते हैं लेकिन उसकी माँ ने उसको हमेशा गलत रास्ता ही बताया जिस वजह से हमारी जिंदगी तलाक के मोड पर आकर ठहर गई । अगर उसकी माँ चाहती तो हमारी जिंदगी में ये दिन आता था लेकिन उसने अपनी बेटी को समझाने की बजाय उसे गलत ही रास्ता दिखाया । कुल मिलाकर अगर ये कहा जाए कि इसमें मेरी बीवी ईशा का काम और उसकी माँ का ज्यादा कसूर है तो गलत नहीं होगा । खैर छोडो इस बात को ये बातें बाद में भी होती रहेंगे । चलो अब हम घर चलेंगे । अभी तुम्हारे घर जाकर तुम्हारे माता पिता को भी तो समझाना है । लेकिन मोहित भैया हमें उनसे क्या कहना है पहले ये तो तय कर ले, इस बात की चिंता मत करो । मैंने सबकुछ पहले से ही सोच लिया है । सबसे पहले तो हमें घर जाकर ये देखना है कि तुम्हारे इंटरव्यू देखने के बाद उनकी प्रतिक्रिया किया है । हो सकता है कि उनका मन बदल चुका हूँ । क्या उनकी सोच तुम्हारे प्रति बदल चुकी हूँ । सबसे पहले हमें तुम्हारे घर का माहौल देखना होगा । उसके बाद ही हम बात करेंगे तो तुम चिंता मत करूँ, मैं देख लूंगा । इसके बाद हम सभी पंकज के घर की ओर रवाना हो गए तो पंकज के घर के पास पहुंचने पर हमने देखा कि उसके पिताजी बाहर ही खडे शायद वो उसी का इंतजार कर रहे थे । पंकज को आते देखकर वो उसकी तरफ देखकर मुस्कुराने लगे और उनको मुस्कुराता देखकर हमारे दिल को थोडी सी राहत मिली । हमारा डर खत्म हुआ और हमें यकीन हो गया कि अब कोई समस्या नहीं होगी । हम उनसे थोडी ही दूरी पर थे की पंकज भाग कर अपने पिता जी के पास गया और उनके पैर छूकर उनसे कहने लगा पिताजी मुझे माफ कर दो । मैं जानता हूँ कि मैंने आपसे बहुत को छुपा है । इसके लिए मैं आप का गुनहगार हूँ । आप मुझे जो सजा देना चाहिए मुझे स्वीकार है । पंकज के पिता ने उसको उठाया और अपने गले लगाते हुए कहा बेटा इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है । दोष तो हमारा है जो हम तुम्हें पहचान नहीं पाए । लेकिन एक पिता होने के नाते मुझे तुम्हारे भविष्य की बहुत चिंता रहती थी । इसी वजह से मैं तुम्हें गायन की ओर जाने के लिए रोकता रहता था । मुझे हर समय यही चिंता रहती थी कि मेरे इस दुनिया को छोडने के बाद तुम्हारा क्या होगा तो तुम्हारा ये गाना बजाना और गिटार तो मैं खाना कमाकर नहीं दे सकेगा । बस इसी वजह से मैं तुम्हें इस रास्ते पर जाने के लिए रोकता रहता था ताकि तुम इसको छोडकर अपनी पढाई पर ध्यान दे सकता हूँ और अपने लिए और अपने भविष्य के लिए कुछ कर सकूं । ये सुनने के बाद पंकज फूट फूटकर रोने लगा और रोते हुए पिताजी को कहने लगा, पिताजी मेरी माता के चले जाने के बाद में बिल्कुल अकेला हो गया था । अब तो सारा दिन अपनी दुकान में रहते थे और मैं मैं घर में अकेला रहता था । मेरे भाई बहन और मां होने के बावजूद भी बहुत अकेला था । मैं अपने दिल की बात किसी को नहीं बता पाता था और अपने दिल की बातों को मैं लिख कर बयां करने की कोशिश करने लगता है । मैं अपने मन में छुपे इन बातों को अपने गानों के रूप में गाने लगता था । मेरा है कि टाइम और गाना बजाना मेरे अकेलेपन को दूर करने में मेरी मदद करता था । आप मुझे ऐसा करने से रोकते थे । मैं समझ सकता हूँ क्योंकि आपको मेरे भविष्य की चिंता थी । एक पिता होने के नाते आप अपना फर्ज पूरी तरह से निभा रहे थे और समय आप अपनी जगह पर बिल्कुल सही थी वो । लेकिन मैं मैं भी गलत नहीं था । अपना अकेलापन दूर करने के लिए ये सब करता था या फिर अपनी हकलाहट की समस्या को दूर करने के लिए गाना गाता था । इसके बाद दोनों बाप बेटे एक दूसरे के गले लगकर बहुत देर तक रोते रहे हैं और तभी एक हज पंकज की कंधे पर आया और उसे अपनी ओर खींचने लगा । वो हाथ पंकज की माँ का था । पंकज की मानी उसको अपनी ओर खींच कर अपने गले लगाया और उससे कहा पंकज पेटा मुझे माफ कर दो । ये सारी गलती मेरी है । मैं तुझे समझ नहीं सकी । मैं तुम्हारी परवरिश अपने बेटे के जैसे नहीं कर सकी क्योंकि मैं तुम्हें अपना नहीं सकी । मैं तुम्हें हर समय पराया समझती थी । इसमें मेरा ही दोस्त था लेकिन मेरे दोषी होने के साथ साथ ये समाज भी उतना ही कसूरवार है क्योंकि इस समाज नहीं मेरे और तुम्हारे रिश्ते के बीच सौतेलेपन की एक दीवार खडी कर दी थी । जब मैं नई नई शादी करके घर में आई थी तो मोहल्ले की एक पडोसन ने तो मैं मेरे गोद में बिठा दिया और कहा कि आज से तुम्हारा बेटा है । मैं उस समय बहुत खुश थी क्योंकि मैं रिश्ते में तुम्हारी मौसी भी थी । मैं तुम्हें और तुम्हारे माता पिता को पहले से ही जानती थी । लेकिन तभी पीछे से दो औरतें आपस में बातें कर रही थी की सौतेली हैं । देखते हैं कब तक इसको सम्भाल पाती है । ये शब्द मेरे कानों में खटकने लगे थे । उसके बाद जब भी मैं तुम्हारे साथ कुछ भी व्यवहार करती चाहे तुम को प्यार करती या फिर तुम को डांट लगती तो मेरे व्यवहार पर सौतेलेपन की मोहर लग जाती है । क्योंकि जब भी मैं तुम्हें क्योंकि जब भी मैं तुम्हें जरूरत से ज्यादा प्यार करती तो लोग यही कहते ये सौतेली माँ है इसलिए मजबूरी में उससे इसलिए मजबूरी में उससे प्यार कर रही है । लेकिन जब भी मैं तुम्हें तुम्हारी किसी गलती पर डाट लगती तो लोग फिर यही कहते कि सौतेली है ना । इसलिए ऐसा कर रही मुझे अपने ऊपर लगे सौतेलेपन की मोहर से चढ होने लगी और जिस से मेरा स्वाभाव काफी बदल गया तो जिस समय मुझे तुम्हारी माँ यानि अपनी बहन के बीमार होने के बारे में पता चला तो मुझे तुम्हारी बहुत चिंता होने लगी थी । मैं ऐसी चिंता में रहती थी कि भगवान ना करें अगर उन्हें कुछ हो जाए तो उसके बाद तुम्हारा क्या होगा? क्योंकि उनके चले जाने के बाद तो तुम्हारे पिता जब दूसरी शादी करेंगे तो घर में आई नई और अब तो मैं एक माँ के जैसा प्यार नहीं दे सकेगी । इसलिए जब तुम्हारी माँ ने मेरे पिता जी से मेरी शादी की बात की तो मैं झट से तुम्हारे पिता से शादी करने के लिए मान गई तो तुम्हारे पिता से शादी करने का मेरा मकसद तो महाराज ठीक ढंग से परवरिश करना था तो तुम्हारी ठीक ढंग से परवरिश करना था क्योंकि मैं तुम्हारा दुख समझ सकती थी लेकिन मैं भी मजबूर थी । मैं समाज के बनाए ताने बाने में अलग सी गई नहीं तो बीत गया । सुबीर क्या मेरे इस व्यवहार के लिए तो मुझे माफ कर सकते हो? माँ जी आप कैसी बातें कर रही हैं? आप मुझसे माफी की मांग रही हैं । जब से मैंने होश संभाला है मैंने आप कोई अपनी माँ मना है । मुझे सौतेलेपन की परिभाषा का पता नहीं था । मुझे लोग ये जरूर कहते थे कि ये तो मेरी सौतेली माँ है लेकिन सौतेली माँ क्या होती है कि ये मुझे पता नहीं था क्योंकि मैं तो सिर्फ माँ को जानता था और ये जानता था की माँ क्या होती है । मेरा भगवान जानता है कि मैंने अपनी किसी भी बात का कभी भी बुरा नहीं माना । मेरा भगवान जानता है कि मैंने आपकी किसी भी बात का कभी बुरा नहीं माना । देखते ही देखते मोहल्ले के सारे लोग बाहर आकर पंकज की ओर देखने लग गए । ये दृश्य देखकर हम सभी हैरान थे । तभी पंकज के पिता उसके करीब आए और पंकज को गले लगा लिया । काफी समय तक दोनों कुछ नहीं बोले । पंकज के पिता की आंखों में आंसू थे और दोनों के बीच एक मूक वार्तालाप होना शुरू हो गया । इशारों ही इशारों में वह पंकज से माफी मांगने लग गए । हमने जो सोचा था वैसा कुछ भी नहीं हुआ क्योंकि ऐसा लग रहा था कि मानव जैसे कि पंकज के परिवार ने अपनी गलती मान ली हूँ और पंकज को स्वीकार कर लिया हूँ । मैंने पंकज की बिना किसी परेशानी से घर वापसी होने पर भगवान का शुक्रिया अदा किया ।

मेरा उकाब - 13

चैप्टर तेरह सुख अदन पंकज की घर वापसी के बाद में अगले दिन अपने घर की ओर रवाना हो जाता हूँ । पंकज की घर वापसी मेरे लिए काफी सुखद अनुभव था । ऐसा लग रहा था कि मानव जैसे बहुत ही लंबी लडाई के बाद को योद्धा युद्ध जीतकर अपने घर वापस आ गया हूँ । अब उसके लिए जो मेरी चिंता थी वह दूर हो चुकी थी । खैर मेरे तलाक के केस का फैसला भी हो जाता है और अदालत ये फैसला सुनाती है कि मुझे अपनी पत्नी ईशा को दहेज का जितना सामान है वह वापस देना होगा । इसी सिलसिले में ईशा को आज अपने माता पिता के साथ मेरे घर में अपना सामान लेने आना होता है । बेटी जल्दी करना हमारे पास समय बहुत करते एशिया की माँ एशिया से कहा ईशा की माँ ने ईशा को कहा ईशा की माने एशिया को कहा एशिया की माँ के पास उसके सामान की सारी लिखित सूची होती है और वो ईशा को वह सारा सामान निकालने के लिए कहने लगती है । मैं घर की बालकनी में जाकर कुर्सी लगा कर बैठ जाता हूँ । तभी वो मेरे पास आती है और मुझसे कहती है मुझे कुछ सामान नहीं मिल रहा । मेरे पास आकर मेरी मदद करूँगा । ये घर तुम्हारा था और जैसा तुम छोड कर गई थी वैसे ही तो मैं जहाँ जहाँ अपना सामान रखा होगा वहाँ पर ही होगा । एक बार तो जाओ मैंने तो स्टोर रूम में जाना है । वहाँ पर मुझे कुछ सामान नहीं मिल रहा है । मैंने एक बार कह दिया तो कह दिया मैं तुम्हारे साथ कहीं नहीं आऊंगा । मैं यहाँ पर ही बैठा हूँ । तो मैं जो कुछ चाहिए वहाँ से ले लो और एक बात और तुम्हारा सामान जहाँ है वहाँ ही होगा । मेरे या मेरी माँ के ऊपर इल्जाम लगाने की कोई जरूरत नहीं है । मेरी माँ तो अब इस दुनिया में नहीं रहे इसलिए अब इस बार उन पर किसी प्रकार का कोई इल्जाम लगाया तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा क्योंकि तुम्हारा और तुम्हारी माँ का हर बार यही काम होता है । किसी ना किसी पर तुम बेवजह इल्जाम लगा देते हैं तो मैं जो कुछ चाहिए मिल जाएगा, बस शांतिपूर्वक यहाँ से अपना सामान लेकर चले जाते हैं । मुझे किसी प्रकार का कोई बवालिया, लडाई झगडा नहीं चाहिए । मैं पहले से ही बहुत दुखी हैं और मैं और दुखी होना नहीं चाहता था । लेकिन मैंने तो बस इतना ही कहा है कि मेरे साथ चलो और सामान निकालने में मेरी मदद करूँगा । इसमें लडाई झगडा यहाँ बवाल मचाने वाली बात कहाँ से आ गई । मैं तुमसे ज्यादा बहस नहीं करना चाहता हूँ और मुझे एक बात बताओ मैं तुम्हारी मदद की इस रिश्ते से करूँ तो महारा मेरा रिश्ता ही किया है तो हमारा मेरा रिश्ता ही किया है जो मैं तुम्हारी मदद करूँगा । हम दोनों के बीच किसी किस्म का कोई भी रिश्ता नहीं रहा तो इसमें मदद करने का कोई सवाल पैदा नहीं होता । क्या सच में हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं रहा? क्या तुम भी इस बात को मानते हो? शायद तुम भूल रही हूँ की तुमने अभी भी कोर्ट से अपना तलाक का मुकदमा जीता है । तुम्हारी माँ के हाथ में जो कागज हैं तो हमारे तलाक के केस के स्वागत है जिसमें साफ साफ लिखा है कि हमारा तलाक हो गया है यानी कि अब हमारे बीच में कोई रिश्ता नहीं रहा है । इसकी एवज में मैंने तुमसे दहेज में जो भी सामान लिया है मुझे वापस करना होगा और अब तुम वो सामान लेकर जा सकती हूँ । वैसे भी हमारा रिश्ता तभी खत्म हो गया था जब तुमने मेरे और मेरे माता पिता के ऊपर इल्जामों की बौछार कर दी थी । आज के बाद हमारा आपस में कोई रिश्ता नहीं रहेगा और मैं तुमसे आशा करता हूँ की भविष्य में हमारी कभी मुलाकात भी नहीं होगी । लेकिन मुझे सारी उम्र इस बात की हैरानी जरूर रहेगी की जितने इल्जाम तुमने मेरे माता और पिता आपके ऊपर लगाए कि जितने इल्जाम तुमने मेरे और मेरे माता पिता के ऊपर लगाए हैं क्या वह सब सस्ते मैं और ईशा दोनों बातें कर ही रहे थे कि तभी पीछे से उसकी माँ ने आवाज लगाई और उसे अपने पास आने को कहा । एशिया मैंने तो मैं पहले भी कितनी बार कहा है कि हमारे पास समय बहुत कम है तो बातों में अपना समय व्यर्थ । मतलब तुम जल्दी से अपना सामान ढूंढो और उन्हें बांधों एशिया की माँ ईशा को बार बार सामान निकालने के लिए बोले जा रही थी लेकिन वह चुपचाप खडी रही थी । वो उसकी बात को अनसुना कर रही हैं और चुपचाप किसी मूर्ति की तरह खडी रहती है । कुछ देर के बाद वह कुर्सी पर बैठ जाती है और अपना सर नीचे करके जोर जोर से रोने लग जाती है लेकिन एशिया की माँ उसे चुप कराने के बजाय उसे उठकर अपना सामान निकालने के लिए कहती हैं । कुछ समय के बाद ईशा अचानक से उठती है और मेरे पास आ जाती है । मुझे माफ कर दो । एशिया के मुंह से यू माफी की लव सुनकर मैं अचानक से चौक जाता हूँ और मैं कुछ न कहते हुए उस की तरफ देखता रहता हूँ । ईशा मेरे सामने हाथ जोडकर खडी रहती है और मुझ से बार बार माफी के लिए गुहार लगाती है । ये देखकर उसकी माँ उसके पास आ जाती हैं और उससे कहती है बेटी है तो क्या कर रही है तो मैं मैंने कितनी बार कहा है कि बातें मत करो और अपना सामान बहन लोग हमें देर हो रही है । बाहर गाडी वाला हमारा इंतजार कर रहा है लेकिन एशिया अपनी माँ की बातों को अनसुना कर देती हैं और मुझे कहती है मुझे माफ कर दो उससे बहुत बडी गलती हो गई । मैं जानती मैं अपनी माँ की बातों में आ गई थी । मैं तुमसे जुदाई बर्दाश्त नहीं कर सकेंगे । तुम्हारे बिना जिंदगी व्यतीत नहीं कर सकूंगी । ईशा की बात को सुन कर मुझे ये पता नहीं लग रहा था कि मैं उसकी बातों पर किस प्रकार की प्रतिक्रिया करेंगे । मैं उसकी बातें सुनकर वहीं खडा रहता हूँ और उसकी तरफ देखने लगता हूँ । कुछ समय के बाद में जोर से हंसते हुए बॉलकनी में खडे होकर बाहर की तरफ देखने लग जाता हूँ । एशिया फिर से मुझसे माफी मांगने लगती है और मुझे माफ करने की गुहार लगाने लगती है । मैं पीछे मुडकर उस की तरफ देखता हूँ लेकिन उसे अनदेखा करते हुए उसकी माँ की तरफ देखकर उनसे कहने लगता हूँ सोनू आंटी जी अब मैं आपको माँ जी तो नहीं कह सकता हूँ तो इसलिए आंटी जी ही करूँगा । आंटी जी सुनो और ये देखो कि आपकी लडकी मुझसे क्या कह रही है । ये आपका और मेरा समय बर्बाद कर रही हैं । कृपया इसे यहाँ से ले चाहिए और अपना सामान बांध कर जितनी जल्दी हो सके अपने घर में चले जाइए । ये सुनकर ईशा की माँ गुस्से से ईशा की तरफ आती हैं और उससे कहती हैं ये तो क्या करेंगे तो मैं उससे माफी की मांग रही हूँ । आप तुम्हारा तलाक हो चुका है तो मैं उससे माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है । ये देखो तलाक के कागज ईशा की माँ जैसे ही ईशा को तलाक के कागज दिखाती है । एशिया अपनी माँ से तलाक के कागज छीनकर रोते हुए उसे फाडने लगती है और अपनी माँ से कहती है मुझे तलाक में ही चाहिए । मैं अपने पति के साथ ही रहूंगी तो ये क्या पागलपन कर रही है तो मैं इसको क्यों भाडा तो नहीं जानती है तो उन्हें ये क्या कर दिया लेकिन एशिया अपनी माँ की बात को अनसुना कर देती है और घुटनों के बल बैठकर जोर जोर से रोने लग जाती है । तभी उसकी माँ पीछे से आती है और उसे डांटते हुए कहती है ये बेफिजूल का रोना धोना, बंद कर और उठो और अपना सामान बहन लोग हमें देर हो रही है । अगर होना ही है तो घर में जाकर जितना मर्जी होरो लेना । अपनी माँ की बात सुनकर ईशा को पता नहीं क्या हो जाता है और वो उठते ही अपनी माँ को जोर से थप्पड मार देती है । ये दृश्य देखकर मैं और ईशा के पिता हैरान हो जाते हैं । तभी ईशा अपनी माँ को कहती है माँ मुझे कहीं नहीं जाना मुझे यही रहना है । अगर उन्होंने भी मुझे नहीं रखा तो मैं मर जाऊंगी लेकिन आपके पास कभी नहीं आऊंगी । मेरी जिंदगी का ये जो हाल हुआ है इसकी जिम्मेदार आप ही है । आपने ही मेरी जिंदगी को बर्बाद किया है । हाँ, आप ही के कहने पर ये सब हुआ है । लेकिन मैं आपसे कहना चाहती हूँ कि अब मैं आपका कहा नहीं मानूंगी, मैं आपके साथ नहीं जाऊंगी । मैं यही अपने पति के साथ होंगी क्योंकि मैं अपना घर बसाना चाहते हैं । मैं अपने पति के साथ रहना चाहती हूँ । बेटी है तो क्या पागलो जैसी बातें कर रही हूँ । तुम शायद भूल चुकी होगी । तुम्हारा तलाक हो चुका है और अब तुम्हारा पति तो मैं स्वीकार नहीं कर सकता । तुम्हारी शादी टूट चुकी है । तुम अपने पति के साथ नहीं रह सकती और फिर ये तो क्या कह रही हूँ कि तुम्हारा जीवन बर्बाद हो चुका है । और इस बर्बादी की वजह मैं मैंने तुम्हारा जीवन बर्बाद नहीं किया । तुमने खुद अपना जीवन बर्बाद किया है । तुम्हारी इस परिस्थिति की जिम्मेवारी तुम हो नहीं, आप झूठ बोलती है । आपने ही मेरे शादीशुदा जीवन को बर्बाद किया है । मेरे शादीशुदा जीवन में शहर खोलने का काम आप नहीं किया है । मैं नादान थी, आपके बताये रास्ते पर चलती रही । भेजा तो हद से ज्यादा बढ रही हूँ । मैंने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे तुम्हारा शादीशुदा जीवन बर्बाद हो जाएगा । अगर तुम्हें लगता है कि तुम्हारी शादीशुदा जीवन को बर्बाद करने की जिम्मेवार मैं हूँ तो यहाँ हम सब बैठे हैं । इन सब में बैठकर साबित करो कि तुम्हारी जिंदगी में जो कुछ हुआ है इन सब में बैठकर साबित करो कि तुम्हारी जिंदगी में जो कुछ हुआ है उसकी जिम्मेदार में हूँ । जब किसी लडकी की शादी होती है तो उसे समझाया जाता है की उसे अपने ससुराल में कैसे रहना है, कैसे अपने साथ घर को संभालना है, कैसे अपने साथ ससुर की सेवा करनी है और कैसे अपने पति की देखभाल करनी है लेकिन आपने ऐसा कभी नहीं किया । आपने मुझे सिर्फ ये बताया कि अपने पति को वश में कैसे करना है और कैसे अपने पति से अपनी हर बात को मनवाना है । आपने ही मुझे सिखाया है कि अपने ससुराल में राज कैसे करना है लेकिन आपने मुझे ये नहीं बताया कि ससुराल भी मेरा घर ही है और मुझे अपने घर में कैसे रहना है । जब भी मेरी अपने पति से कभी लडाई हुई तो आपने उस लडाई को खत्म करने की बजाय उसको और हवा देने की कोशिश की । आप मुझे हर समय यही उदाहरण देती रही कि जिस प्रकार मैंने तुम्हारे पिता को अपने वर्ष में क्या है तो मैं भी अपने पति को अपने वर्ष में करना होगा । फिर तुम अपनी असली जिन्दगी का मजा ले सकता हूँ । लेकिन मुझे ये बात समझ में नहीं आई की अपने पति को अपने वर्ष में करके मैं क्या करूँ । ऐसे कौन से जिंदगी के मजे ले लूंगी । यहाँ तक कि आपने मेरी निजी जिंदगी में भी दखल अंदाजी शुरू कर दी और आपकी इसी दखलंदाजी की वजह से हमें औलाद का सुख प्राप्त नहीं हुआ क्योंकि मैं ससुराल में अपना ज्यादातर समय लडाई झगडे मनमुटाव में ही गुजारती रही । मैंने माँ बनने की ओर कभी ध्यान नहीं दिया । मेरी सासु माँ जो कि अब इस दुनिया में नहीं है उनका ध्यान हर समय यही रहता था की मैं किसी ना किसी प्रकार से औलाद का सुख प्राप्त कर लो । लेकिन आपने कभी ऐसा नहीं सोचा । आपको इस बात की कभी चिंता नहीं होती थी । आपको सिर्फ इस बात की फिक्र होती थी कि मेरा दामाद मेरी बेटी के कहने से कहीं बाहर न चला जाएगा । शर्म आती है मुझे अपने आप पर की । मैं आपका कहा मानती रही । तभी ईशा की बात सुनकर उसके पिता आगे आए और उससे कहने लगे, चलो घर चले अब पछताने से कोई फायदा नहीं है । अब तुम्हारा इससे कोई रिश्ता नहीं तो हम अपनी आगे की जिंदगी के बारे में सोचो । पिताजी पिता जी, मेरी जिंदगी के बारे में चिंता आपको कब से होने लगी? अगर आप को मेरी जिंदगी के बारे में चिंता होती है तो आज हमें ये दिन देखना पडता है । आपने कभी इस बात का विरोध नहीं किया । आपके सामने सब कुछ गलत हो रहा था और आप ये सब देखते रहे । लेकिन आप कभी कुछ नहीं बोले हैं । पता नहीं इस समय मुझे क्या हुआ । शायद ये सब मुझे अच्छा नहीं लग रहा था । मैं वहाँ से उठकर दूसरे कमरे में चला गया और दरवाजे को थोडा सा बंद कर दिया । ये सब देखकर उसकी माँ एशिया कोई बेटी बात को समझने की कोशिश करते । अब तुम्हारा मोहित के साथ कोई रिश्ता नहीं रहा । अब तुम्हारा तलाक हो चुका है । लेकिन मैं इस तलाक को नहीं मानती । तुम्हारे मानने या ना मानने से कोई फर्क नहीं पडता । अब तो मोहित की ओर ही देखो । अगर वो चाहता तो वापस अपनी पत्नी स्वीकार कर सकता था । तुम इतनी देर से हो रही है, उससे माफी मांग रही । लेकिन उसे इस बात का कोई भी फर्क नहीं पड रहा । वोट कर हम से दूर दूसरे कमरे में जाकर बैठ गया है जिससे वो जाहिर हो चुका है कि वह भी तुमसे तलाक ही चाहता है । इसलिए मेरी मानो और सच को स्वीकार करूँ । एशिया अपने माता पिता के साथ बाहर बरामदे में सोफे पर बैठकर गाडी का इंतजार करने लगी । लेकिन एशिया के भीतर मानो जैसे कुछ टूट रहा था, दिल बैठा जा रहा था । वह सुननी पडती जा रही थी । जिस सोफे पर बैठी थी उसे गौर से देखने लगी । कैसे कैसे बचत करके उसने और मैंने वह सोफा खरीदा था । ईशा पूरे शहर में घूमी थी तब ये पसंद आया था । फिर उसकी नजर सामने तुलसी के सूखे पौधे पर गई । कितनी शिद्दत से देखभाल किया करती थी । लेकिन अब उस की गैर हाजिरी में तुलसी का पौधा भी सूख गया था । ऐसा लग रहा था मानो जैसे उसके साथ तुलसी भी घर छोड गई थी । समय गुजर रहा था और इस गुजरते समय के साथ साथ ईशा की घबराहट और बढने लग गई और वह फिर से उठकर भीतर चली गई । एशिया की माँ ने पीछे से पुकारा मगर उसने माँ की बात को अनसुना कर दिया । वो मेरे कमरे की लडाई मेरे कमरे की तरफ आई और उसने दरवाजे को थोडा सा खोला । कमरे में मैं बैठ पर उल्टे पडा था तो उसने फिर से मुझ से बात करने की कोशिश की लेकिन शायद वो दोबारा से बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई । शायद उसने अपने आप को मानसिक तौर पर तैयार कर लिया था । वो जानती थी कि अब तो सब कुछ खत्म हो चुका है इसलिए उसे भावुक नहीं होना है । मैं छुप छुप कर चोरी यहाँ से उसकी ओर देख रहा था । वो चुप चाप खामोश खडी थी और कमरे की दीवारों की तरफ नजर घुमाकर कुछ ढूंढने की कोशिश कर रही हैं । तभी अचानक उसकी नजर कमरे में पडी । हमारी तस्वीर की ओर करके वो तस्वीर को उठाकर देखने लग गई । उस तस्वीर में हम दोनों बहुत ही खुश नजर आ रहे थे । वो तस्वीर को सीने से लगाकर जो ने लगभग शायद उसे मेरे साथ बिताए । वो हसीन पल याद आ रहे थे जो हमने अपनी शादी के शुरूआती दिनों में बताए थे । मुझसे ये दृश्य नहीं देखा जा रहा था लेकिन अब मैं कुछ नहीं कर सकता था । मैं मजबूर था क्योंकि शुरुआत क्योंकि शुरुआत उसी ने की थी । आठ साल हमारी शादी को हो चुके थे और उनमें से हमने शुरुआत के एक या दो साल ही हंसी खुशी का जीवन व्यतीत किया था । बाकी के तीन साल झगडने और रूठने मनाने में लग गए और उसके बाद के चार साल तलाक के केस में गुजारती । तभी अचानक ईशा की माँ उसे ढूंढती हुई मेरे कमरे की ओर आ गई और उसे बाजू से पकडकर बाहर ले गए । बाहर गाडी आ गई थी । सामान गाडी में डाला जा रहा था । एशिया सुंदरसी बैठी थी । गाडी की आवाज सुनकर मुझे पता नहीं अचानक से क्या हुआ है और मैं दौड कर बाहर आ गया । मैं गाडी के आगे कान पकडकर घुटनों के बल बैठकर और नजरें झुकाकर ईशा को कहने लगा मत जाओ माफ कर के तुम्हारे जाने के बाद मैं और भी अकेला पड जाऊंगा । शायद यही वह शब्द थे । शायद यही वह शब्द थे जिन्हें सुनने के लिए ईशा सडक रही थी । वो तुरंत गाडी से उतरी और मुझे उठाकर मेरे सीने से लिपट गई । इस दौरान हम दोनों अपने आंसुओं पर नियंत्रण नहीं रख पाए और काफी समय तक लगातार रोते रहे । इस दृश्य को मेरे मोहल्ले के लोग देख रहे थे और आंखों ही आंखों में हमारे दोबारा से बने इस रिश्ते को और आंखों ही आंखों में दोबारा से बने हमारे इस रिश्ते को अपनी सहमती दे रहे थे । कुछ साल बाद पंकज जब बहुत ही प्रसिद्ध गायक बन चुका था । उसे अपनी गायकी के बलबूते बहुत पैसा, नाम और पंखा जब बहुत ही प्रसिद्ध गायक बन चुका था । उसने अपनी गायकी के बलबूते बहुत पैसा, नाम और शोहरत कमा ली थी । उन पैसों की बदौलत उसने अपना अलग से घर ले लिया था । उस घर में पंकज अपने पूरे परिवार के साथ रहने लग पडा था । तब उसकी माँ उसके साथ गुस्सा नहीं करती थी और उसके पिताजी उसके साथ झगडा भी नहीं करते थे । कुल मिलाकर सब कुछ ठीक हो चुका था । उसके कुछ सालों के बाद पंकज ने मीना के साथ शादी कर ली और अपना अलग से घर बसा लिया । शादी के एक साल बाद उसके घर एक शादी के एक साल बाद उस की बीवी ने एक बच्चे को जन्म दिया । उसने अपनी शिखर आंटी के कहने पर उसका नाम चीज हो रखा है । लेकिन वो आज तक चीकू नाम के पीछे छुपे रहस्य के बारे में जानना सका । उसने कई बार शिखर आंटी से इसके पीछे के रहस्य के बारे में जानना चाहते लेकिन हर बार उसे हस्कर डाल देती और यही कहती कि जब समय आएगा तो वो उसके बारे में खुद बता देंगे । और फिर रही बात मेरी तो मेरा तलाक का केस पहले ही खारिज हो चुका था और मैंने अपनी पत्नी ईशा के साथ फिर से दोबारा अपना घर बसा लिया था । अब मुझे बिलकुल भी झगडा नहीं करती थी और अपनी माँ की दखलंदाजी तो अपने घर में बिल्कुल भी नहीं होने देती थी । वो अपने मायके में जाना पसंद नहीं करती थी । उसकी वापसी के दो साल बाद मेरे घर में भी एक बेटा पैदा हुआ । पंकज को मैं जब भी देखता हूँ तो मुझे उसके जीवन की कहानी याद आने लगती है । अब तो वह पहले जैसा बिल्कुल नहीं रहा था । अब वो बहुत ही आत्मविश्वास के साथ रहता है । सभी से हंस हंस कर बातें करता है । वो पहले की तरह डर डर के नहीं जीता था । सच में वो खुले आसमान में उडने वाला मेरा वो का बन चुका था । मेरा उकाब बडा हो चुका था । वो अपने पंख फैलाकर पूरी दुनिया में उड रहा था । उसकी ख्याति दूर दूर तक फैल चुकी थी । लोग अब उसे जानने लगे थे । उसे पहचानने लगे थे । वो बडी बडी उडान भरने लगा था । मेरा हूँ का सच में बडा हो चुका था ।

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