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Transcript

Part 1

आप सुन रहे हैं फॅार शुभानंद की लिखी किताब मास्टरमाइंड है और मैं हूँ आर्चे हेमंत कुक ऍम सुनी जो मन चाहे अध्याय प्रारंभ दोपहर का समय था, चिलचिलाती हुई धूप जमीन पर कहर ढा रही थी । वो बिहार इलाका था जहां दूर दूर तक किसी इंसान तो क्या परिंदे या पेड पौधे तक का नामोनिशान नहीं था । चारों तरफ धूल पत्थर और कंकड फैले हुए थे । कई छोटे बडे पहाड और चट्टानी दूर दूर तक दिखाई दे रही थीं । हालांकि ध्यान से देखने पर उन सूखे और धूलभरे पहाडों के किनारे धूल पर अपने पांव के निशान छोडता हुआ एक आदमी चला जा रहा था । दूर से वो इसलिए दिखाई नहीं दे रहा था क्योंकि उसने वहाँ की काली मिट्टी के समान काले कपडे पहने हुए थे और उसकी पीठ पर एक बडा सा बोला था जिसे उसने बांध रखा था । उस पूरे का रंग भी एकदम उसके पहनावे पर गया था । धीमी चाल से सूरज की गर्मी में दबते हुए वो आगे बढ रहा है । उसने अपने शरीर के साथ साथ सिर को भी रख रखा था । उसके कपडे धूल से भरे हुए थे । सिर से पसीना बहते हुए माथे पर आ रहा था पर गर्म हवा उसे वहाँ ज्यादा देर टिकने का मौका न देते हुए भाग में तब्दील किए जा रही थी । उसके चेहरे पर हल्की अध्यपक खरीदारी । मुझे आंखें देखकर लगता था कि जैसे महीनों से उसकी नींद पूरी नहीं हुई हूँ । अचानक ही उसे दूर से कुछ आवाज सुनाई थी । उसके कान खडे हो गए । उसने पलट कर देखा । काफी दूरी पर उसे एक साइकिल दिखाई दी, जो की उसी की तरफ चली आ रही है । वो आश्चर्य से उसे देखने लगा । साइकिल काफी दूर है । उसने अंदाजा लगाया कि उसके पास पहुंचने में उसे पांच मिनट तो लग ही जायेंगे । उसने वो पूरा जमीन पर रख दिया । फिर उसने हाथ जेब की तरफ पढाया और एक बीडी और माचिस का पैकेट निकाल लिया । उसने बीडी सुलगाई और इत्मिनान से वही जमीन पर बैठ गया । कुछ देर में साइकिल उसके नजदीक पहुंची । उसे एक अधेड किसान चला रहा था । किसान ने साइकिल रोकी और फिर दोनों के बीच बातचीत होने लगी । बात करते करते किसान साइकिल से उतर रहा है । कुछ तो सब सामान्य दिख रहा था, पर फिर एकदम से उस आदमी ने बीडी एक तरफ फेंकी और फुर्ती के साथ एक शिकारी चाह को निकालकर उसने किशन की गर्दन पर फिर आदि उसकी नस कट गई और खून रिसने लगा । किसानवाग सा खडा उसे देखता रहा । उसका हाथ स्वतः ही अपनी गर्दन पर चला गया है उनको रोकने की और सफल कोशिश करते हुए तो जमीन पर लुढकाया । उस आदमी ने चारों तरफ देखा और चाकू वापस अपने कपडों में कहीं छिपा लिया । उस पूरे इलाके में अभी भी उसके सिवा कोई और नहीं था । उसने किशन की साइकिल जमीन पर लिटा दी । अपना पूरा वही रहने दिया और किसान को खींचते हुए आगे बढने लगा । किसान अपनी अंतिम सांसे गिन रहा था । आज सुबह घर से निकलते वक्त उसे इस बात का इल्म नहीं था कि वह फिर कभी लौटकर नहीं आने वाला । पर अब उसे पता था कि ये सच है । मौत इंसान को ढूंढा करती है और वह था की खुद मौत को गले लगाने । यहाँ पहुंचा लगभग बात बंद होती आंखों से उसे अब जमीन में गुफा जैसी एक जगह दिखने लगी । गुफा को देखकर उसे लगा जैसे कोई भयानक पिशाच मूर्खो ले लेता हूँ । अपने आहार का इंतजार कर रहा है । वहाँ के अंदर दो पटरियां जाती दिखाई दे रही थी जिनपर दो वैगन खडे थे । जिन्हें जंग खा गई थी वो गुफा साफ तौर पर किसी खान का द्वार नजर आ रहा था । क्या यहाँ मेरी मौत लिखी थी? गांव से मीलों दूर खान में वो पूछना चाहता था आपने प्लान हरता से क्यों? वो उसके साथ इतनी बेदर्दी से पेश आया । आखिर उसका कसूर किया था । पर अब बहुत देर हो चुकी थी । उसे ठंड लगने लगी । पर वो काम नहीं रहा था । वो मन ही मना नो किसी शांति का है । सांस करने लगा । अब उसे किसी बात की फिक्र नहीं थी । नहीं किसी बात का मलाल मौत उसे अपने आगोश में समेट ले रही थी और उसे अब वो बेहद सुखदायी महसूस हो रही थी । कितना सुकून मिल रहा था उसे मौत की पाऊँ घुप अंधेरी खान में प्रवेश करते हुए हैं । उसकी आंखों के चारों तरफ ये हमेशा के लिए अंधेरा छा गया । वो रविवार की यह काम सुबह थी जब लखनऊ की महानगर कॉलोनी में स्थित जावेद के दो मंजिला घर के सामने एक आलीशान कार आकर रुकी । कार की पिछली सीट पर एक खूबसूरत नौजवान बैठा था । अपने परिधान से वो एक मॉडन बिजनेसमैन प्रतीत हो रहा था । उसने सफेद पोलो शर्ट वह पूरे रंकी चीनों पहनी हुई थी । उसका जिसमें गोरा और गठीला था जिससे कि ज्ञात होता था । कि वह नियमित रूप से कसरत या कोई खेल जरूर खेलता था । उसकी बगल वाली सीट पर आईपैड और आज की इकनॉमिक टाइम्स की प्रति रखी हुई थी । ड्राइवर को उसने अपने कार्ड सहित अंदर भेज दिया । जावेद से मिलने की इजाजत लेने के लिए कार में इंतजार करते हुए उसने डनहिल का नीले रंग का पैकेट जेब से निकाला और उसमें से एक सिगरेट निकालकर सुरगानी । कुछ देर में उसके ड्राइवर ने वापस आकर बताया कि जावेद उससे मिलने के लिए तैयार है । ड्राइवर को वहीं छोडकर वो गेट खोलकर जावेद के घर के पोर्च में प्रविष्ट हुआ जहाँ जावेद कि सफेद रंग की पुरानी मारुति एट हंड्रेड खडी थी । वो टहलते हुए अंदर की ओर बढा । जावेद उसे बैठक के दरवाजे पर खडा दिखाई दिया । उसने हमेशा की तरह अपनी पसंदीदा सिक्स पॉकेट का वो शॉर्ट्स और टी शर्ट पहनी हुई थी । उसकी मांसल भुजाएं देखकर साफ प्रतीत हो रहा था कि रविवार के दिन भी उसने जिनसे छुट्टी नहीं ली थी । जावेद की तरफ बढते हुए उस व्यक्ति के चेहरे पर ऐसे भाव थे जैसे उसे बरसों से उसकी तलाश थी । मिस्टर फॅमिली जावेद के सवाल से वो जैसे सम्मोहन की अवस्था से बाहर आया यस ऍम मीटिंग में चर्चा उसने अपना हाथ बढाया । मेयर मिस्टर सानी वैसे मुझे आर्मी से रिटायर हुए कई साल हो चुके हैं, कॉल में जा रहे हैं । जावेद ने हाथ मिलाकर उसे अंदर आने का इशारा किया और बैठे है । जावेद ने सोफे की तरफ इशारा करते हुए कहा, साहनी ने सोफे पर आसन ग्रहण किया । बैठते हुए उसकी नजरें स्वतः ही सामने । दीवार से सटी लकडी की अलमारी पड गई जिसमें कई मेडल्स, सर्टिफिकेट और शील्ड दिखाई दे रही थी । जाहिर है साहनी की आंखों में जावेद के लिए प्रश्नात्मक चमक उभरी । कहीं है मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ? जावेद ने पूछा मेरे साथ एक बेहद अजीब वाकया हो रहा है । बात ऐसी है कि उसके लिए मैं पुलिस के पास भी नहीं जा सकता । इसलिए मैंने अपने आर्मी से रिटायर्ड दोस्त मेजर लागत से बात की और उसने आपसे मिलने का सुझाव हाँ राघव ने जिक्र किया था कि बडे हैं पर आपकी प्रॉब्लम के बारे में कुछ नहीं कहा । हाँ, मैं नहीं कहा था कि ना बताया । मैं चाहता था कि खुद आपसे रूबरू होकर बात करना ज्यादा बेहतर रहेगा । तो चलिए अब खुलकर बताइए । जावेद अपने दायें हाथ को सोचने की मुद्रा में थोडी से लगाकर बोला सहनी! दो पल रुका फिर जावेद की तरफ देखते हुए बताने लगा मेरे घर में क्वालकाॅम ऍसे पांच हजार यूरो में खरीदी हूँ । बेहद नाया क्या चोरी हो गई? नहीं चोरी हुई होती तो मैं पुलिस के पास जाने में संकोच क्यों करता है? राइट आप बताइए क्या चल रहा है? अचानक ही दरवाजे की तरफ से आवाज आई । जावेद और सहानी दोनों की नजर उधर गई । उधर अमर खडा था । उसने काले रंग का ट्रैक सूट और सफेद स्पोर्ट्स शूज पहन रखे थे और कान में ब्लूटूथ एयर फोन लगा रखा था । उसके शरीर से पसीना निकल रहा था और वो थोडा हाफ रहा था फिट रहने के लिए । अमर दौडना तैरना वह टेनिस, बैडमिंटन, फुटबॉल आदि खेल खेलना पसंद करता था । जावेद की तरह जिम में वर्जिश करना उसे पसंद नहीं था । जावेद बोला इन से मिलो ये मिस्टर साहनी आरती ट्रेडर्स के मालिक एंड मिस्टर सानी ये हमारे हमारी संस्था में एक जूनियर एजेंट अमर ने साहनी की तरफ हाथ बढाया और बोला जूनियर एजेंट जो बहुत जल्दी ही सीनियर बनने वाला है । नाइस मीटिंग मिस्टर साहनी ऍम अमर बैठते हुए बोला था फॅमिली जी वैसे आप काफी फिट दिखाई दे रहे हैं । लगता है रोज जिम जाते हैं हमारे भाई जान की तरह ऍम जिम के अलावा मुझे स्विमिंग का बहुत शौक है । गुड सुबह तो मैं भी बहुत अच्छी करता हूँ । पर यहाँ के स्विमिंग पूल मिस्टर साहनी अपनी फ्रेंच घडी के बारे में कुछ जरूरी बात बता रहे थे । जावेद बात काटकर बोला था सहानी बोला बाॅन्ड क्या मैं आपका टॉयलेट यूज कर सकता हूँ और अंदर जाकर ले? जावेद ने अन्दर की तरफ इशारा किया । उसके जाते ही अमर बोला क्या बात है आज कल सुबह सुबह बिजनेस टाइकून के साथ मीटिंग कर रहे हो । ना जाने क्या प्रॉब्लम लेकर आए । मेजर राघव ने रेकमेंड किया है इसलिए मना नहीं कर सकता है वरना मैं ऑफिस निकल नहीं वाला था । आज संडे भाई मालूम है और बहुत कम है देश तो छोडो अपने शहर में ही न जाने क्या क्या चल रहा है । ऐसा क्या हो गया? शहर में अचानक ही आईएसआई एक्टिविटी बहुत तेजी से बढ रही है । अच्छा फॅमिली है कि शहर में भारी मात्रा में हथियार लाए जा रहे हैं । यही तो उन का काम है । आईएसआई भारत में रहकर आतंकवादियों दंगाइयों को हथियार, इंटर वगैरह के मामले में पूरा सहयोग करता है । वो तो है आए दिन हथियार पकडे भी जाते हैं । पर इस बार जो खबर मिल रही है अगर उसे सच माने तो हथियार इतने हैं कि जैसे किसी युद्ध की तैयारी चल रही हूँ, क्या बात कर रहे हो? यही तो बात है जिससे फिक्र हो रही है तो मैं यहाँ नहीं इसलिए बता नहीं पाया कि पिछले हफ्ते हम लोगों को एक्टिव मिली थी एक आदमी के बारे में जो एक बार में कुछ इस तरह की बातें कर रहा था । मुझे जब पता चला तो मैं खुद उस बार में पहुंचा । पर मुझे देखते ही वह भाग खडा हुआ । यानी वो तुम्हें पहचानता था । शायद इसलिए मुझे लग रहा है वह आईएसआई वाला था । तभी सहानी वापस आ गया और उनका वार्तालाप वही खत्म हो गया । साहनी सोफे पर बैठते ही बोलने लगा तो बात ये है कि मेरी जो एंटी घडी है, पिछले एक महीने से वह घडी रोज सुबह तीन बजकर पैंतालीस मिनट पर रुक जाती है । यानी घडी खराब है । जब एबोला मिस्टर जावे । आप इतनी सी बात होती तो मैं आपका और अपना समय खराब करके यहाँ नहीं आता । वो खराब नहीं है । मैंने उसे चेक करवाया था । गाडी वाले ने काफी ट्रायल भी ली है और उसके सामने घडी कभी तीन बज कर पैंतालीस मिनट पर नहीं होगी मैं खासकर इसलिए हैरान हूँ की ये समय मेरे लिए काफी अहम है । क्या हुआ था तीन बज कर पैंतालीस मिनट पर मेरा जान हो पर क्या घडी ठीक तीन बज कर पैंतालीस मिनट पर रुकी होती है क्या जब आप सुबह उठकर देखते हो तो तीन बज कर पैंतालीस मिनट के आसपास चल रही होती है । मेरा मतलब मैं समझ रहा हूँ नहीं घडी थी । तीन बज कर पैंतालीस मिनट पर पूरी तरह से रूकी होती है फिर आप उसे दोबारा कैसे चालू करते हैं? मैं नहीं करता हूँ । मैं हिला डुलाकर देखता हूँ । सेल बदलकर भी ट्राय किया है और कुछ नहीं होता । पर कुछ देर बाद घडी खुदबखुद चालू हो जाती है । सही समय पर नहीं । जहाँ रुकी थी वहीं से अच्छा मुझे लग रहा है जैसे कोई इस तरह से मुझे आतंकित करना चाहता है । आपको किस पर शक हैं? नहीं आपके कोई दुश्मन क्या नहीं सकता । बिजनेस करते हुए राइवल्स तो बन ही जाते हैं । मुझे नहीं लगता कोई सा तक जाएगा कोई व्यक्तिगत रंजिश नौ आप के साथ कौन कौन रहता है कोई नहीं मैं अकेला हूँ । बंगले में नौकर चाकर जरूर है । आपके आगे पीछे कोई तो होगा नहीं । मेरे माता पिता की कुछ साल पहले डेथ हो गयी थी । मैं उनका एकलौता बेटा हूँ । हमारा और कोई रिश्तेदार नहीं क्योंकि मिस्टर साहनी मैं आपकी मदद जरूर करना चाहूंगा । तो आप कब मेरे बंगले पर आएंगे? आजकल मेरे पास कई काम है जिन में मैं बहुत ज्यादा मार स्कूल हूँ । इसलिए मुझे कुछ दिन का समय दीजिए । पर अगर आज कल में मुझे कुछ हो गया तो आपकी मदद मेरे किस काम आएगी । मुझे तो अपने चारों तरफ खतरा मंडराता दिख रहा है । मेरे पास पहले ही कुछ मर्डर केस है जिनकी वजह से मैं बहुत मस्त गोल हूँ । आप उन की बात कर रहे हैं जो मर चुके हैं । मैं तो अभी जिंदा हूँ । मेरी जिंदगी बचाना क्या ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं । मैं आपको मना नहीं कर रहा है । बस मुझे थोडा समय दीजिए । मैं कोशिश करता हूँ जल्द से जल्द आपसे मिलने की ऍम अच्छा । मुझे आपका इंतजार रहेगा कहकर वह अमर की तरफ पालता और आपका भी आप इतनी मोहब्बत से बुला रहे हैं तो बंदा आपको परेशानी देने आपके दडबे पर जरूर पहुंचेगा । शुक्रिया साहनी ने मुस्कुराते हुए कहा । फिर उनसे विदा ली है । गुजरात नौ बज कर बीस मिनट पर साहनी को अमर का फोन है । वो उससे मिलने आना चाहता था । साहनी ने खुशी जाहिर की । उसने अमर से उसके घर पर ही डिनर लेने का आग्रह किया, जिससे वो झट से मान गया । बीस मिनट बाद नौकर ने आकर बताया कि मिस्टर अमर पहुंच गए हैं । वह बैठक में पहुंचा । वहाँ अमर मौजूद था और उसके साथ जॉन भी था । हेलो मिस्टर साहनी । अमर ने उसे देखते ही उत्साहित स्वर में कहा, ऍम, आपने मेरी रिक्वेस्ट सीरियस ली और आज आ ही गए । ऍम आप पेट भर के खाना खिला दीजिए, हिसाब बराबर हो जाएगा । साहनी हस दिया फिर बोला मिस्टर जावे, दिखाई नहीं दे रहे हैं । उसे ऑफिस में कुछ काम था इसलिए वो नहीं आ सका । कर्नाट मैं हूँ और साथ में मेरा दोस्त और साथ ही एजेंट मेरी जान यानी जान । जॉन ने इस वक्त टीशर्ट और जींस पहनी हुई थी, जो उसके छरहरे शरीर पर खूब फब रही थी । आपने रिमलेस चश्मे के लेंसों की मदद से वो साहनी को पहनी रखती नजरों से देख रहा था । साहनी में गर्मजोशी के साथ जॉन से हाथ मिला है । फिर डिनर टेबल की तरफ इशारा करते हुए वो बोला आइए बाकी की बातें डिनर करते करते हो जाएंगी । सभी डिनर टेबल पर पहुंचे । बेहरा खाना लगाने लगा । हमारा प्लान है कि आज रात घडी पर नजर रखेंगे । अमर ने फुसफुसाते हुए साहनी से कहा ऍम तो अच्छा है । आप के घर में कुल कितने नौकर हैं । दो रसोई है, एक सफाई वाला है । एक माली और एक दिन का चौकीदार और एक रात का । यानी आप को मिलाकर कुल छह लोग था । ये सभी बंगले में ही रहते हैं । सिर्फ एक रसोइया पंकज और सफाई वाला नहीं है । बाकी अपना काम करके अपने अपने घर जाते हैं । आप काम के लिए काम नहीं करते हैं । मैं ऑफिस रेगुलर नहीं । ज्यादा हफ्ते में एक दो बार या जब कोई खास मीटिंग होती हैं उसके अलावा में अक्सर सुबह सीधे रॉयल क्लब निकल जाता हूँ । वहाँ स्विमिंग, जिम आदि के अलावा गोल खेलता हूँ । क्योंकि खाना खाकर वह लोग बैठक में आ गए । तो ये है वो रहस्यमई घडी । अमर ने दीवार पर टंगी सफेद रंग की एंटी फ्रेंच घडी की तरफ देखते हुए पूछा साहनी नहीं हम इधर आज रात देखते हैं । इसकी करामा अमर घडी को इस तरह देखते हुए बोला जैसे अपने व्यक्तिगत दुश्मन को देख रहा हूँ । कुछ देर वो योगी बातें करते रहे । फिर अचानक साहनी ने सोफे से उठ कर घोषणा की, अब मैं चलता हूँ । मेरी मीटिंग है । रात को ग्यारह बजे जॉन ने घडी पर नजर डालते हुए पूछा, हाँ, वीडियोकाॅॅॅन के साथ वो अच्छा आप निश्चिंत रहिए । यहाँ सब हमारे हवाले छोड दीजिए । अमर ने आश्वासन देते हुए कहा, मैं आपका कमरा लगाने के लिए बोल देता हूँ । हमारा तो यही बिस्तर लगवा दीजिए । घडी के साथ यहाँ लेकिन यहाँ कम्फर्टेबल नहीं रहेगा । यकीन मानी हमने इससे कहीं ज्यादा खराब बिस्तरों में रातें काटी । बस दो गद्दे लगवा दीजिए । मुझे यकीन है मैं इंतजाम करवा दूंगा । मेरी कॉल शुरू होने वाली है । मैं चलता हूँ कहकर वह दूसरी मंजिल पर बेडरूम की ओर बढ गया । जाते जाते उसने अपने नौकर को बैठक में दो बिस्तर लगाने को बोल दिया । बेडरूम में पहुंचकर उसने अपना लेपटॉप फोन किया । उस पर वह बंगले के अंदर और बाहर लगे विभिन्न कैमरों से वहाँ के दृश्य देख सकता था । उस ने बैठक का नजारा देखा । अमर और जॉन सोफे पर बैठे बातें कर रहे थे । उन्हें देखते हुए उसने अपने सिरहाने दो तीन तक क्या लगाए तो उन्हें देखता रहा । शायद अमर जॉन के मजे ले रहा था । रह रहकर जॉन उसपर मारने के लिए झपट रहा था । इस तरह लेटे लेटे उसकी पलकें भारी होने लगी । फिर नींद ने साहनी को अपनी आगोश में ले लिया । सुबह तीन बजकर पचास मिनट पर मोबाइल का अलार्म बज उठा जिससे सहने की नींद टूटी । आंखें मसलते हुए उसने लेपटॉप कीबोर्ड के बटन खटखटाकर उसे भी नींद से जगाया । स्क्रीन पर हॉल का दृश्य उजागर हुआ । उसे देखकर हैरत हुई कि हॉल में पडे गद्दों पर अमरिया जॉन दोनों ही दिखाई नहीं दे रहे थे । हालांकि वहाँ लाइट अभी भी चल रही थी किधर चले गए । उसने घर के बाहर के कैमरे देखने शुरू की । बाहर गार्डन में उसे अमर और जॉन दिखाई दी है । वो सर्वेंट रूम की तरफ बढ रहे थे । देखते ही देखते वह सर्वेंट रूम के दरवाजे पर पहुंच गए । दो मिनट बाद दोनों कमरे से बाहर बदहवास हालत में बाहर निकले । अमर किसी को फोन करते हुए देखा चला जाए । सहानी बैठ के उतरा और उसने जल्दी से चप्पल पहले फिर वो सीढियों से नीचे उतारा और हॉल से होते हुए बाहर गार्डन में पहुंचा गया है । क्या हुआ मैं इस तरफ बाहर बाहर पहुंचते ही उसने पूछा आप गए? अमर ने चौंककर पूछा हाँ, नीचे से तेज तेज बातों की आवाज आ रही थी । सब ही तो है ठीक नहीं है । मिस्टर साहनी अमर गंभीर स्वर में बोला आपके नौकर पंकज का खत्म हो गया है और वो चीख उठा । हाँ अंदर कमरे में उसकी लाश पडी है । बट वाइट साहनी हाथ फैलाकर बोला ऍम आखिर उसे मारकर किसी को क्या मिलेगा तो नो बेचारा पंकज वो पंकज के कमरे की तरफ बढने लगा पर अमर ने उसकी बहन था आप अंदर मन चाहिए बट अंदर कातिल के सुराग मौजूद हैं और ऍम क्या? मैं पुलिस को फोन करुँ । साहनी ने बेसब्री से पूछा मैंने पहले ही कर दिया है पुलिस कुछ ही देर में पहुंचती होगी तो ये कहकर साहनी बेचैनी के साथ कहने लगा मिस्टर साहनी रिलेक्स आप समझ नहीं रहे पंकज मेरा एम्प्लॉय था उसके गांव में उसकी फैमिली है आॅल मैं समझ सकता हूँ पर होनी को कौन टाल सकता है । पर ये हुआ कब? मेरा अंदाजा है कि काफी पहले ही हो गया था शायद हमारे यहाँ आने से । कुछ घंटे पहले बहुत आप का कहना है कि पंकज शाम से हमारा पडा है और किसी ने नोटिस नहीं किया ऍम इलाज को देख कर तो ये साफ पता चल रहा है कि उसकी हत्या भी नहीं हुई है । खून जिस तरह से जमा हुआ है और लाल ठंडी पडी है उससे ये अंदाजा लगाना बेहद आसान है । तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा इसलिए कह रहा हूँ आप टेंशन ना ले । इसे हमारे और पुलिस के ऊपर छोड दीजिए । चाहिए तो उसकी फैमिली को इन्फॉर्म कर दीजिए । कौन कर रहा है? सब बनाते हुए वह अंदर चला गया । कुछ ही देर में वातावरण में पुलिस का सायरन गूंजने लगा । फिर पुलिस कर्मी तेजी से बंगले में प्रविष्ट हुए हैं । इंस्पेक्टर हेमंत सबसे आगे था । अंदर आकर वो सीधे अमर से मुखातिब हुआ । वो अमर को पहचानता था । मिस्टर अमन कदम हुआ है । क्या आप इस तरह पूछ रहे हैं जैसे आपको विश्वास नहीं है कि अब तक हुआ नहीं, ऐसी बात नहीं है । किधर हुआ इधर आइए अमर ने इशारा किया इस कमरे में अभी हुआ है । इंस्पेक्टर हेमंत पर हवलदार अमर जॉन के साथ कमरे में पहुंचेगी । कोई छोटा सा कमरा था जिसमें एक पलंग, एक कुर्सी और एक ही अलमारी थी टॉयलेट था । पलंग पर पंकज नाम के उस रसोइये की लाश पडी थी । उसके सीने में गहरा घाव था और गांव के आसपास खून जमा हुआ था । लगता है काफी देर पहले खत्म हुआ है । के मत बोला आपने ठीक कहा । जॉन ने कहा मर्डर व्यापन भी नहीं दिखा । यानी उसे कातिल अपने साथ ले गए । इसका मतलब पूरी प्लानिंग के साथ मैं ऑर्डर किया गया है । ऐसा ही लग रहा है घर का मालिकों ने । मिस्टर साहनी अमर बोला, वन दरोगा है इस बेचारे की फैमिली को फोन करने । तभी गेट की तरफ से कार की आवाज आई । लगता है जावेद आ गया । अमर बोला मैंने उसे भी फोन कर दिया था । कुछ ही देर में जावेद वहां पहुंचा । उसने नाइट सूट पहना हुआ था । लगता है तो मैं कपडे बदलने का भी समय नहीं मिला । अमर बोला इन कपडों में क्या खराबी है? जावेद ने पूछा फिर कब किसका हुआ है? अमर ने बताया, चाकू मारकर खत्म किया गया और किसी को पता भी नहीं चला । जावेद संदेह प्रकट किया । मेरा ख्याल है कि मक्तूल कातिल को जानता था । जॉन ने तीक्षण दृष्टि के साथ कमरे का निरीक्षण करते हुए कहा, ये सिक्सर कैसे लगाया? मेरी जाते अमर नहीं चौंकते हुए पूछा । कमरे में कोई भी सामान उथल पुथल नहीं हुआ है । यानी इसके और कातिल के बीच कोई संघर्ष नहीं हुआ । दूसरी बार कपिल बिना आवाज के हुआ । कोई चीज भी नहीं निकली । कोई अनजान यू बंगले में घुस आता और मकतूल पर हमला करता तो इतने में ही शोरगुल हो जाता है । कुछ तो संघर्ष में होता है । आखिर मरने वाला देखने में हट्टा कट्टा दिख रहा है । हो सकता है मारने वाला मरने वाले से भी ज्यादा हट्टा कट्टा रहा हूँ । हेमंत जावेद के मांसल बाजुओं को देखते हुए बोला मतलब अमर ने पूछा । कुछ पेशेवर कातिल बहुत ही कुशलता से काम करते हैं । उसने झटके में हमला किया होगा । इस बेचारे को चिल्लाने का मौका ही नहीं मिला होगा । अचानक हुए ऐसे हमले के दौरान इंसान शॉक के कारण चीज भी नहीं पाता हूँ । तब तक साहनी वहाँ वापस पहुंचा । कुछ पता चला, किसने किया ये सब? उसने बचकाना से सवाल किया । आप तो ऐसे पूछ रहे हैं जैसे शेयर मार्केट के हाल चाल का पता कर रहा हूँ । अमर व्यंगपूर्ण ढंग से बोला ॅ साहनी, देश में आ गया रिलैक्स । मिस्टर साहनी जब भी बोला ये पेचीदा मामला है । हमें इस मामले की तह तक अवश्य पहुंचेंगे । आप थोडा सब्र रखिए ऍम पर मैं बहुत घबराया हूँ । इस तरह तो मेरा भी हो सकता था । आप घबराइए नहीं । हेमंत बोला पुलिस आपके प्रोटेक्शन के लिए मौजूद है । फिर वो लोग आपस में बातें करने लगे । क्या हुआ था जावेद ने अमर से पूछा । शुरू से बताओ मैं और जॉन बैठक में बैठे बातें कर रहे थे, नहीं तो आ नहीं रही थी । इंतजार था तीन बज कर पैंतालीस मिनट पर साहनी जी की चमत्कारी घडी के अपने आप बंद हो जाने का । आखिरकार तीन बज कर पैंतालीस मिनट हुए और घडी वाकई बंद हो गए । हम उठकर घडी को देखने लगे । फिर घडी से कुछ दूरी पर जो खिडकी है वहाँ से कुछ झटके की आवाज मैं जॉन के साथ बाहर पहुंचा । वहाँ उस खिडकी के नीचे जूतों के निशान पाए । हमें लगा जरूर ये किसी इंसान का काम जो इस खिडकी तक चल कराया था । जूतों के निशान बहुत नीचे की तरफ जा रहे हैं । जाहिर है बाकी की गीली मिट्टी के कारण ही निशान बनेंगे । फिर निशान आगे सर्वेंट रूम की तरफ गए थे । इस तरह हम इस कमरे में पहुंचे जहां इसकी लाश पडी नहीं । जूते यहाँ नहीं इंस्पेक्टर हेमंत बोला था । अमर बोला मैंने भी देखा अगर पंकज जी खिडकी तक चल कर आया था तो जूते यहीं कहीं बैठ के आस पास होनी चाहिए थी । पर पंकज कैसे चल कर आया हो सकता है । जावेद ने सवाल उठाया वो तो काफी देर पहले से मारा मालूम पड रहा है । हो सकता है मरने से पहले ही आया हूँ । हेमंत बोला वो किस लिए? जावेद बोला शायद घडी से छेडछाड करने के लिए । अमर बोला मैंने देखा है उस खिडकी को उसमें ग्रीन लगी है और घडी बहुत दूर है । खिडकी से इतनी दूर से घडी में कोई गडबड नहीं की जा सकती । करते भी तो आठ नौ बजे से पहले क्यों करते हैं पर अभी तक पता कहाँ चला है की घडी रूकती कैसे है? अमर बोला ये घडी की क्या कहानी है? हेमंत ने पूछा । साहनी ने संक्षिप्त में घडी के बारे में बताया । सुनकर हेमंत ने कोई खास प्रतिक्रिया नहीं थी । फिलहाल हमें ये पता करना चाहिए कि पंकज का खत्म कहाँ और किसने किया? जावेद ने पूछा । हेमंत ने साहनी से पूछा इसके रूम में और कौन रहता है ही नहीं । आपने कहा था कि एक और नौकर घर में ही रहता है । अमर ने याद दिलाया हाँ पर वो इधर नहीं होता, वो बंगले के अंदर ही होता है । छत पर एक कमरे में आपने आखिरी बार पंकज को कब देखा था । हेमंत ने पूछा दोपहर में तो क्या पंकज ने हमारा डिनर नहीं बनाया था? अमर ने पूछा, नहीं, ये नाश्ता और लंच बनाता था और फिर शाम को ग्रोसरी खरीदने बाहर जाता था । दूसरा रसोइया डिनर बनाता है और रात को चला जाता है । रुकता नहीं, वो ये बात है । जावेद कुछ सोचते हुए बोला । हेमंत ने साहनी से पूछा क्या बता सकते हैं कि किसका दूसरी स्टोर से शॉपिंग की जाती थी? चौराहे के पास महानगर सुपर मार्केट से तो के हेमंत चहलकदमी करते हुए सर्वेंट क्वार्टर के पीछे पहुंचा जहाँ बंगले की बाउंड्रीवॉल वो करीब दस फीट ऊंची थी और उसके ऊपर कंटीले तार भी लगे हुए थे । बाउन्ड्रीवाल के दूसरी तरफ गालियाँ ना उसने साहनी से पूछा । आप उसके बाद फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स बंगले पर पहुंचे और जांच चलती रही । सुबह छह बजे के आस पास वो एक हवलदार को वहीं छोडकर फारिक हुए । दरवाजे पर खटखटाहट की आवाज सुनकर जावेद की नींद खुली । उसने चादर एक तरफ हटाई और घडी देखेंगे । दस बज कर बीस मिनट हुए थे । बेडरूम से निकलकर वह बैठक में पहुंचा और फिर दरवाजा खोला । सामने इंस्पेक्टर ही मन था, कुछ पता चला । अंदर आने के लिए रास्ता छोडते हुए जावेद ने पूछा । हेमंत ने जवाब नहीं दिया जावे । बैठक में लगे वॉशबेसिन पर जाकर बहुत होने लगा । जावेद हेमंत कुछ संकोच करते हुए बोला, जरा हमारे साथ चलो कुछ पूछताछ करनी है । जरूर कोई सुराग तुम्हारे हाथ आ गया है । ऍसे मोह पहुंचते हुए जावेद ने कहा, ठीक समझे पुलिस स्टेशन चले तो क्या है? मैं बस दस मिनट में तैयार होता हूँ । कहकर जावेद अंदर चला गया । ठीक दस मिनट बाद वो तैयार होकर आया और हेमंत के साथ चल दिया । थाने पहुंचकर वो इंस्पेक्टर हेमंत के कैबिन में पहुंचा । अब बताओ । जावेद ने कहा, क्या पता चला पहले तुम कुछ सवालों के जवाब दो । हेमंत बोला हैं मुझे क्या पूछना? कल रात आठ से नौ के बीच तुम कहाँ थे? हेमंत ने पूछा उसका इस मर्डर से क्या कहीं तुम मुझ पर बोलते हुए जब जावेद को यह एहसास हुआ कि उसे वहाँ इस तरह लाने का क्या अभिप्राय था? वो उठ खडा हुआ वोट नौं मिस्टर जावेद बैठ जाइए । उसकी बात को अनसुना करते हुए जावेद रोष भरे स्वर में बोला, क्या मैं पूछ सकता हूँ? तो उन्हें ऐसा क्या सबूत मिल गया है कि मुझे ऐसा सलूक किया जा रहा है? हमें मर्डर व्यापन मिल गया है और कीमत बोला और उस पर तुम्हारे फिंगर प्रिंट मिले हैं क्या? जावेद बुरी तरह से चौंक उठा । यही नहीं कीमत सख्ती के साथ बोला तुम्हारे घर के कूडेदान से अब जले कपडे मिले हैं जिस पर पंकज के खून के निशान हैं । जावेद सोच में पड गया । उसके चेहरे पर परेशानी के भाव थे । फिर धीरे धीरे उसके भाव बदले और फिर वो सामान्य दिखने लगा । उसने कहा ठीक है पूछूँ और क्या सवाल है ।

Part 2

हूँ । तुमने अभी तक पहले सवाल का ही जवाब नहीं दिया है । हेमंत ने उससे घूमते हुए कहा, फॅर कल आठ से नौ बजे तक मैं सीक्रेट सर्विस के हेड क्वार्टर में था । कोई इस बात की पुष्टि कर सकता है? नहीं, संडे का दिन था । मैं अकेला था । अच्छा तो पंकज को कब से जानते हो? कौन पंकज जिसका खत्म हुआ है । मैंने अपने करियर में बहुत दिक्कत देखें । उनमें से बहुतों का नाम पंकज था । हेमंत की कनपटी गुस्से से सुरु हो गई । जावेद हो जाया कौन? पंकज जावेद पर कोई फर्क नहीं पडा । मिस्टर साहनी का नौकर पंकज हेमंत परस्ते हुए बोला, उसे तो कभी से नहीं जानता हूँ । जावेद ने उसी तरह शांत स्वर में कहा, ठीक है तो फिलहाल हिरासत में लिया जा रहा है । किसी को कॉल करना चाहते हो था । जावेद ने सीक्रेट सर्विस के चीफ अभय कुमार को कॉल किया । फिर हेमंत ने खुद जावेद को लॉकअप में बंद कर दिया और अपनी डेस्क की तरफ पहुंचा । तभी हेमंत को फोन आया । दूसरी तरफ कमिश्नर गोपीनाथ था । हेमंत अलर्ट हो गया । जी अहिंसा, जावेद शक्तियां निर्दोष औपचारिकता निभाई बगैर कमिश्नर ने कहा, हो सकता है सर और हमें अपनी इन्वेस्टिगेशन जारी रखनी पडेगी । अपराधी काफी दूर है जिसने मॉडर के सबूत जावेद के खिलाफ प्लांट कर दी है । बट सर जावेद ऍम मैं जावेद को काफी अरसे से जानता हूँ । कमिश्नर तेज स्वर में बोला वो एक देशभक्त जासूस है जिसने मरते दम तक देश की सेवा करने का प्रण लिया हुआ है तो हम उसके बारे में इस तरह से बात नहीं कर सकते हैं । पसर ये कोई व्यक्तिगत मामला भी हो सकता है । हेमंत जिद के साथ बोला कमिश्नर कुछ से कई पद नीचे के अवसर की बेबाकी से थोडा झुंझलाया । फिर भी संतुलित स्वर में बोला पहली बात तो ऐसा हो नहीं सकता । अगर होता भी तो वो इतना मूर्ख नहीं की मॉडर करने के बाद आपने फिंगर प्रिंट चाकू पर छोड जाएगा और फोन लगे कपडों सहित अपने घर के सामने वाले कूडेदान में ही फेंके । कुछ तो दिमाग लगाओ । इंस्पेक्टर हेमंत चुप रह गया । ठीक है आॅटो मारे काम में दखलंदाजी नहीं करना चाहता पर घायल रहे जावेद को वहाँ कोई तकलीफ होने पाएगा । कुछ देर में शायद अमर वर्मा उससे मिलने वहाँ उसे जावेद से मिलने देना जी । फिर कमिश्नर ने फोन काट दिया । सहानी अपने बेडरूम में लेटा हुआ था । दस बजे उसकी नींद खुल गई थी, पर वह फिर भी लेटा हुआ सोच में डूबा हुआ था । सब कुछ ठीक ठाक हो रहा है । अचानक वो उठा और बाथरूम जाकर फ्रेश हुआ । फिर नीचे किचन में पहुंचकर उसने चाय बनाई और फिर बिस्किट खाते खाते पीने लगा । अब इंस्पेक्टर हेमंत से बात करनी चाहिए । उसने पुलिस स्टेशन फोन किया । कुछ देर में हेमंत ने जवाब दिया, इंस्पेक्टर स्थानीय बोलिए, सर, कुछ प्रोग्रेस आप यकीन नहीं करेंगे । हमने इस सस्पेक्ट को पकड भी लिया । यानि कातिल मिल गया । कमाल कर दिया आप लोगों ने कातिल तो नहीं कह सकता, पर प्राइम सस्पेक्ट के तौर पर । पर प्राइम सस्पेक्ट के तौर पर हम ने जावेद को अरेस्ट कर लिया है । बहुत इंस्पेक्टर कहीं आपने सुबह सुबह पी तो नहीं ली थी? हेमंत हंसा फिर उसने उन सबूतों के बारे में बताया । साहनी बुरी तरह से चौकर बोला, ऍम पर जावेद पंकज का मर्डर क्यों करेगा? मोदी तो पता नहीं ऍम मुझे नहीं लगता उसने ये ऑर्डर किया होगा । हम छानबीन कर रहे हैं । आप ये बताइए क्या? पंकज कभी जावेद से पहले मिला? हो सकता है हूँ उम्मीद तो नहीं है । अरे कहाँ? पंकज मेरा रसोइया और जावेद एक जासूस यहाँ पहले कभी मिले हैं । जब एसे हाउस घडी के चक्कर में आखिरी घडी का मामला क्या है? मैंने उस दिन आपको बताया था जरा विस्तार से बताई थी । साहनी ने बताया के मन इत्मीनान से सुनता गया । फिर बोला आप इस मामले को पुलिस की नजर में भी ला सकते थे वो । मैंने सोचा काफी उलझी हुई होती है । हो सकता है पंकज के पति का इससे कोई संबंध मैं आपसे मिलूंगा । आज रात पुलिस आपके घर रहेगी । किसी भी तरह की मुसीबत से निपटने के लिए । ॅ सो काइंड ऑफ यू ऍम साहनी ने कॉल समाप्त की । अमर को जैसे ही थी अभय कुमार का फोन आया । वो तुरंत तैयार हुआ और सीधे सीक्रेट सर्विस हेडक्वार्टर पहुंचाया । कुछ ही देर में वह चीज के कैबिन में था । चीफ बोला जब की बात नहीं है हम लोगों के अंदर ना दुश्मन है जरूर उनमें से कोई जावेद को फंसाने की कोशिश कर रहा है । जी आप सही कह रहे हैं पर वो इंस्पेक्टर कल रात आठ से नौ के बीच जावेद नहीं था । एंट्री रजिस्टर की एक कॉपी निकलवाकर मेरे साइन और स्टैम्प लगवा लो । ठीक है सर और एडवोकेट श्रीवास्तव को अपने साथ ले जाना बेल हो जाएगी तो कुछ देर में अमर जब चीफ के साइन लेकर कैबिन से निकला तो उसे जॉन मिल गया मेरी जान । अमर बोला मेरे आम आज सुबह सुबह ऑफिस में कैसे मेरी जान? कभी कभी दिन में भी चांद के दीदार होते हैं । बहुत खूब तो मेरे चंदा ये बता जावेद किधर सुबह से फोन कर रहा हूँ मुझे मॉडर के इसमें मदद चाहिए थी । जावे तो हवालात में मौज कर रहा है । किसी से पूछताछ करने गया गया नहीं । पुलिस उससे पूछताछ कर रही है तो सीधी तरह से बोलेगा या कहते हुए जॉन ने अमर को घूंसा दिखाया । सच बोल रहा हूँ मैं उसकी बेल करवा नहीं जा रहा हूँ तो भी चल कहकर अमर बाहर की तरफ चल दिया । जॉन उलझन भरे भाव के साथ उसके पीछे दौड पडा तो सच करे हाँ, अमर ने कार का दरवाजा खोला । जॉन हैरत भरे भाव लिए कार में बैठ गया । एडवोकेट श्रीवास्तव के ऑफिस जाते हुए अमर ने जॉन को सारी बात बताई हूँ । ये क्या चक्कर है? जरूर कोई जावेद को फंसाने की कोशिश कर रहा है । पर कौन? कहीं सानी ही तो कोई साजिश नहीं रख रहा । मुझे उस की घडी वाली कहानी फिजूल लग रही है । पर हमने खुद उस घडी को तीन बज कर पैंतालीस मिनट पर रुकते देखा था । ये जरूर कुछ साहनी का काम रहा हूँ । हुआ तो उन्हें तो बिना कोई छानबीन करे फैसला भी सुना दिया । एक होमीसाइड एक्सपर्ट से ये उम्मीद नहीं थी । ऐसा सोच कर छानबीन करेंगे तो कातिल जल्दी पकडा जाएगा । नहीं अमर और जॉन वकील के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचेगी । वहाँ से हेमंत और जावेद को लेकर वह मजिस्ट्रेट के सामने पहुंचे और फिर बेल की औपचारिकता पूरी करने के बाद जावेद को छुडा लिया गया । वो लोग कोर्ट से बाहर निकले तो हेमंत सुबह सुबह तो मैं रेस्ट कर के लिए आया था । अमर ने पूछा था मेरे खिलाफ पुख्ता सबूत जो मिल गए थे । युवा राॅकेट श्रीवास्तव बोला हूँ, आपकी जगह कोई आम आदमी होता तो उसकी इतनी आसानी से बेल नहीं हो पाते तो ये कोई आम खत्म नहीं बल्कि तुम्हारे खिलाफ साजिश का हिस्सा था । जॉन बोला मेरे खयाल से तो इस कहानी पर हमें बिल्कुल भी भरोसा नहीं करना चाहिए । जो लोग पार्किंग में पहुंच गए थे, सब के बैठते ही अमर ने कार्य आगे बढाएंगे । श्रीवास्तव को उसके दफ्तर छोडने के बाद वो हेडक्वार्टर पहुंचे । चीज से उनकी मीटिंग हुई । जावेद तुम क्या पहले कभी इस पंकज से मिले हो, अब है । कुमार ने पूछा हाँ क्या अमर चौका पर कल साहनी के घर पर तो तो मैं ऐसा कुछ पता नहीं । उस वक्त मैंने इलाज की शकल पर खास ध्यान नहीं दिया था । मैं उससे एक नहीं दो बार मिल चुका हूँ । कब पहली बार पिछले हफ्ते उस बार में जो अमर मैंने तुम्हें बताया था वहाँ वो कुछ हथियारों से संबंधित बातें कर रहा था और फिर मुझे देखकर भाग गया और फिर शनिवार को दोबारा शनिवार को कहा, आप लोगों को पता ही है कि आजकल हम लोग निरंतर आतंकवादियों और आईएसआई की हरकतों पर नजर रख रहे हैं । कुछ लीड जैसे मिले हैं जिनसे की आशंका बन रही है कि कई बडे आतंकवादी दल मिलकर साउथ ईस्ट एशिया में कुछ बहुत बडा काम अंजाम देने की फिराक में हैं । आईएसआईएस को बैठ कर रही है तो इस बात की संभावना नकारी नहीं जा सकती कि की ये साजिश भारत के खिलाफ ही बनाई जा रही है । इसी सिलसिले में मैं शनिवार को एक टेप मिलने पर गोमतीनगर में बन रहे नए मॉल में पहुंचा । वहाँ लगभग काम पूरा हो चुका है, पर अभी कोई दुकान नहीं खुली है । मैं लिफ्ट में दाखिल हुआ । मेरे पीछे एक और आदमी लिफ्ट में आ गया । जैसे ही लिफ्ट चली उसने मुझ पर चाकू से हमला कर दिया । मैंने उसका मुकाबला किया है । तीसरी मंजिल आते ही दरवाजा खुला और वह भाग खडा हुआ । मैंने उसका पीछा किया पर फिर भी वह एकदम से कहीं मॉल में ही गायब हो गया । इस घटना का पंकज के खत्म से क्या था लोग? अभय कुमार ने पूछा । अभी याद करता हूँ तो लगता है कि वो आदमी भी पंकज जी था । बस शायद थोडे से मैं कपडे हैं क्या? अमर चौका तो मैं पूरा यकीन है । लगभग लिस्ट में सीसीटीवी जरूर होगा । जॉन बोला हमें मॉल जाकर पता करना चाहिए क्या टाइम रहा होगा । उस वक्त शाम के सात बजे थे । कहानी के बारे में क्या खयाल है? चीफ ने पूछा । सब कुछ उसके इर्द गिर्द ही हो रहा है । अमर बोला श्रीनिवासन से उसकी कुंडली निकलवानी पडेगी । ठीक है अमर नी चीज के कैबिन से निकलकर श्रीनिवासन को ढूंढा और इस काम पर लगा दिया । जावेद जॉन के साथ मॉल चला गया । जावेद और जॉन मॉल पहुंचकर सीधे वहाँ के सिक्योरिटी इंचार्ज से मिले । कहिए क्या काम है? इंचार्ज ने पूछा हमें शनिवार शाम साढे छह से साढे सात के बीच लिफ्ट की सीसीटीवी फुटेज देखनी है । जॉन बोला, पर सर, आप तो जॉन ने अपना परिचय पत्र दिखाया तो जरूर जरूर मैं आपको ले चलता हूँ । पर वहाँ पुलिस पहले से ही आई हुई है । आप भी उनके साथ ही तो लेना चाहिए । जावेद चौकर बोला, इंचार्ज को उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया । वो दोनों को मॉल के कोने में छोटे से कमरे में ले गया । वहां उन्हें एक वर्दीधारी कंप्यूटर की स्क्रीन में तत्पर्ता के साथ लिफ्ट का फुटेज देखता दिखाई दिया । एक गार्ड उसका सहयोग कर रहा था । जावेद और जॉन उसके पीछे पहुंचे । अपने पीछे किसी के होने का अहसास होने पर वर्दीधारी पालता इंस्पेक्टर हेमंत जावेद के मुझसे स्वतः ही निकला । हेलो जावेद वो भेदभरी मुस्कान के साथ बोला, अच्छा हुआ तो खुद यहाँ गए क्यों? तो मैं फिर से मेरी तलाश थी । लगता तो कुछ ऐसा ही है । अब तो मेरी बेल हो चुकी है । जावेद उसकी बात हंसी में उडाते हुए बोला हो सकता है वो बेल खारिज हो जाए । हेमंत ने गंभीरता के साथ कहा, क्या कहना चाहते हो? वो टेस्ट देखो समझ आ जाएगा । कहकर वहाँ से परे हट गया और जावेद को कुर्सी पर बैठने के लिए आमंत्रित किया जावेद बैठ गया । वैसे तुम यहाँ क्या खोजते हुए पहुंचे? जावेद ने पूछा मैं तो उन सभी जगह जा रहा हूँ जहाँ जहाँ होने से पहले पंकज गया था । जावेद बेचैनी से फुटेज को रिवर्स करने लगा । हेमंत ने एक सिगरेट निकाली तो जॉन ने उसका दीवार पर चिपके नो स्मोकिंग के स्टीकर की तरफ ध्यान आकर्षित किया । हेमंत ने जॉन को खोलकर देखा । फिर कमरे से बाहर निकलकर सिगरेट पीने लगा । जावेद और जॉन ने देखा । जावेद लिफ्ट में आया और उसके पीछे वो आदमी भी अंदर आ गया । कुछ ही पल बाद उसने जावेद पर हमला कर दिया । दोनों में लडाई होने लगी । कुछ देर में एक चाकू दिखाई दिया जिसका फल उस आदमी की तरफ था । ऐसा लग रहा था कि जावेद उसे चाकू से मारने की कोशिश कर रहा है और वह किसी तरह से खुद को बचा रहा है । ये क्या? जॉन बोला तो मैं उस पर अटैक किया था । नहीं, मैं खुद को बचा रहा था । ध्यान से देखो । हेमंत दरवाजे से ही बोला जाको का फल पंकज की तरफ है । यानि तुम उसे मारने की कोशिश कर रहे हो । तो हम कैसे इतने यकीन के साथ बोल रही हूँ । जावेद बोला होते जितना क्लियर भी नहीं और देखा नहीं । पहले उसने हमला किया था, मुझ पर बाद में है । लडाई के वक्त पहले वो चाकू मेरी तरफ था और खुद को बचाने के लिए मैं उसे अपने विपरीत दिशा में ही तो घुमाऊंगा जरूर जरूर । यही तो मैं समझना चाहता हूँ कि तुम्हारी उससे दुश्मनी की वजह क्या थी? ऐसा किया था कि उसके हमला करते ही तुमने चाकू निकाल लिया । ऍम जावेद उत्तेजित होते हुए बोला, तुमने कब देखा की चाकू मैंने निकाला था, जहाँ आपको तुम्हारा है तो तुम ने ही निकाला होगा । निराचार को? हाँ वही जिससे बाद में इसका ऑर्डर हुआ था तो मैं लॉकप में रखने के बाद तुम्हारे घर की तलाशी ली गई थी । वहाँ एक और वैसा ही चाहते मिला था । तुम्हारे पास दो का था और उनमें से गायब है । ऐसे न जाने कितने चाकू बाजार में मिलते हैं । हाँ पर उन पर तुम्हारे फिंगरप्रिंट नहीं मिलेंगे ना वो तो इसी चाकू पर मिले थे । तुम चाहते क्या हूँ? मैं तो बस पंकज के कातिल को पकडना चाहता हूँ और फिलहाल सभी सबूत तुम्हारी तरफ इशारा कर रहे हैं । मेरी एल इ बाईस साबित हो चुकी है । मैं ऑर्डर के समय की पर इस नए सबूत के चलते साफ पता चल रहा है कि तुम्हारे पास पंकज को मारने की पहले से कुछ तो वजह थी । भले ही बाद में तुमने मर्डर किसी और से करवाया हो तो होश में तो जॉन भडक कर बोला है कुछ भी बोले जा रही हूँ तो मैं खुफिया अधिकारी पर । इस तरह मैं सिर्फ वो भाषा बोल रहा हूँ जो सबूत बुलवा रहे हैं । तो मैं तो ये बात समझनी चाहिए । मिस्टर खुफिया अधिकारी तो मैं भी समझना चाहिए किस धुंधले फुटेज इसमें कुछ भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा । उससे इस तरह के निष्कर्ष निकालना गलत है और मॉडर के सबूत जिस तरह तुम्हें मिले हैं, क्या उसने ये नहीं पता चल रहा कि जावेद को प्रेम किया जा रहा है? हो सकता है जांच पडताल करने के बाद ही ये निष्कर्ष निकाला जा सकता है । फिर तो ठीक तरह से जांच पडताल करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना । हेमंत चुप हो गया । फिर बैठ कर अपनी फाइल में कुछ नोट करने लगा और उसने फुटेज की एक कॉपी पेन ड्राइव में ले ली । जावेद और जॉन ने मॉल के कुछ कर्मचारियों का बयान लिया पर किसी ने भी इस बात की तस्दीक नहीं कि कि उस दिन उन्होंने मॉल में जावेद या पंकज को देखा हूँ । कुछ देर बाद जावेद और जॉन मॉल की पार्किंग में पहुंचे जॉन के बैठते ही जावेद ने कहा आगे बढा दी । जब एक सीट बेल्ट लगाते हुए जॉन बोला मैंने एक बात नोट की ये जो पंकज था शकल सूरत से नौकर चाकर की जगह गुंडा मवाली दिखता था । वो आईएसआई एजेंट हो सकता है । बाहर में जिस तरह की बातें कर रहा था उससे मुझे उस पर शक हुआ था और मुझे याद है जिस तरह उसने मॉल में मुझ पर हमला किया था वो कोई आम आदमी नहीं कर सकता । वो ताकतवर था । मेरे जैसे हफ्ते में आठ घंटे जमीन करने वाले पर भी वह भारी पड रहा था । फॅमिली ऐसा आदमी, नौका वही कुक कैसे हो सकता है । चौकीदार होता तो फिर भी समझ जाता है । हालांकि उसकी हरकतों से मुझे वो आईएसआई वाला नहीं लग रहा है । क्यों उसके काम करने के स्टाइल में कोई इंटेलिजेंस नहीं दिख रही बल्कि काफी लापरवाही दिखाई दे रही है । साहनी ने इसको किसी एजेंसी से ही हार क्या होगा? श्रीनी को बोलता हूँ पता लगाए । कुछ देर में जावेद ने अपने घर के सामने कार रोकी दोनों कार से उतरे और जावेद के घर के सामने स्थित एक चाय की दुकान पर पहुंचे । दो चाहे लेने के बाद जावेद ने चाय बनाने में मशगूल चाय वाले से पूछा गंगा राम जी माले कल रात है, इधर इधर ही थे मालिक । मेरे घर के सामने जो कूडादान है क्या? उधर कोई अनजान लोग कुछ भेजते देखे थे । इतना तो हम ध्यान नहीं दिए । किसी ने तो जरूर देखा होगा । टाइम क्या था वाले दस बजे के बाद हम पता करते हैं । गंगा राम की समझ में जावेद पुलिस में काम करता था । आए दिन अपने एरिया से जुडी गतिविधियों के बारे में जावेद उसकी दुकान से जानकारी लेता रहता था । जावेद का बस एक बार बोलना बहुत था । उसके बाद गंगा राम कहीं से भी खबर निकाल कर देता था । चाय पीने के बाद जावेद ने उसे सौ का नोट देकर कहा, मुझे फोन करना जरूर मालेक चलो । ऍम चाय का गिलास नीचे रखते हुए जावेद ने जॉन से कहा, कुछ देर में दोनों हेडक्वॉर्टर पहुंच गए । मीटिंग रूम में जावेद और जॉन के साथ अमन और श्रीनिवासन भी शामिल हुए । ये लीजिए सहानी की हिस्ट्री श्रीनिवासन एक कागज टेबल पर रखते हुए बोला, फिर दूसरा कागज रखकर बोला और ये पंकज प्रजापति की हमारी आज मुझे ही बता दूँ पढाई लिखाई कौन करेगा? अमर ने कहा जरूर मिस्टर पुलिस सानी एक बढिया बिजनेसमैन स्मार्ट ऍम अभी तक शादी नहीं किया इसलिए सोसाइटी में फॅार कहलाता है । श्री ने फॅार की लिस्ट में उसके बाद तुम्हारा नंबर आता है । अमर आंख मारते हुए बोला जॉन हस्तिया तो उनका तो हमको बीच में टोकता है । श्रीनिवासन नाराज होते हुए बोला काम की बात बताऊँ । जावेद ने गंभीर स्वर में कहा वही बता रहा हूँ सर उसे बैचलर लाइफ पसंद है । आई क्लास मॉडल्स और ऍम के साथ उसका अफेयर चलता रहता है । खास बात ये है कि फॅस पहले उसका एक गर्लफ्रेंड वन मॉर्डल सुसाइड कर लिया था । क्या नाम था उसका? जॉन ने पूछा मिनाज शमी हमको मालूम आप पूछेंगे इसलिए हम पूरा के स्टडी किया । दो साल पहले मिनाज अपने फ्लैट में फोन से बने फोन में पाई गई थी तो इसलिए क्योंकि बात सब में लास्ट था और उसमें पानी और फोन से मिलकर पूरा पहुंच बन गया था । उसकी दोनों हाथों की नसें कटी हुई थी । ब्लेड भी ऑन स्पॉट मिल गया था और उस पर मिनाज का ही फिंगरप्रिंट मिला था । सानी भी उस दिन शहर में मौजूद था । उसका कहना था की फॅसे डिनर के लिए मिला । उसे घर छोडा पर उसके फ्लैट के अंदर नहीं गया और उसके हिसाब से डिनर तक शिवा स्वाइन । उसने सोचा भी नहीं था कि वह सुसाइड करेगा तो पुलिस ने उसे क्लीन चिट दे दी थी । जावेद ने पूछा यस फॅस कुछ और मसाला श्रीनि? अमर ने पूछा उसके अलावा ये कि वह काफी फॉरेन ट्रिप करता है । बहुत और बिजनेस ॅ जावेद ने पूछा ऍम साल में पांच फॅमिली में तो ऑलमोस्ट ऍम हूँ । अमर ने कहा मजा तो पंकज की पोल खोलने में आएगा । बंदा ऐसा है आप ही बता दीजिये ना कहकर श्रीनिवासन बोतल से इस तरह पानी पीने लगा जैसे कई मील दौड कर थक गया हूँ । अमर ने कागज पर नजर डाले बिना बोलना शुरू किया । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पंकज ने कुक की नौकरी साहनी के घर से ही शुरू की थी तो उससे पहले वह क्या करता था? जावेद ने पूछा वो दिल्ली से भागा हुआ एक क्रिमिनल था । मैंने कहा था ना जॉन जावेद को देखते हुए बोला सही कहा होगा मेरी जान अमर बोला । दिल्ली पुलिस को उसकी एक रॉबरी केस के तहत करीब एक साल से तलाश थी और सानी और क्रिमिनल से खाना बनवा रहा था । जॉन व्यंगपूर्ण मुस्कान के साथ बोला, हो सकता है उसने जानबूझ कर एक क्रिमिनल को नौकरी पर रखा हूँ । एक मिनट अमर ने कहा, हम साहनी पर क्यू शक करें क्यों ना करें? जॉन बोला, उसने घडी के बहाने हम लोगों को कॉन्टैक्ट किया । फिर जावेद को फंसाने की साजिश को अंजाम दिया । मेरी जहाँ सोचते हैं उस दिशा में भी फिलहाल मेरे पास तुम्हारे लिए एक सवाल है । पंकज को कैसे पता चल रहा कि जावेद मौल आने वाला? शायद वो जावेद का पीछा कर रहा था तो मॉल गए होते हैं । अमर ने पूछा, मुझे टिप मिली थी, बताया तो था किसने दी थी लेकिन फॉर्मर नहीं । उसका नाम बताओ । नाम फारुख कॉल हिस्ट्री देखो जावेद ने अपने मोबाइल में कॉल हिस्ट्री देखनी शुरू की । फिर कुछ देर में बोला, कोई लैंडलाइन नंबर है ऍम श्योर । कोई पब्लिक फोन होगा । जॉन बोला और ये फोन जरूर साहनी ने करवाया होगा । जावेद ने नंबर श्रीनिवासन को दिया । उसने पांच मिनट में पता लगा लिया कि टेलीफोन नंबर बस स्टेशन के पास का था । मैं फारूख को कॉल करता हूँ, कन्फर्म हो जाएगा । कहकर जावेद ने फारुख नाम के एजेंट के मोबाइल पर फोन किया । स्वरूप ने इस बात की पुष्टि की कि उसने जावेद को ऐसी कोई कॉल नहीं की थी । डाॅ । जॉन मेज पर मुक्का मारते हुए बोला जो साहनी के सेवाओं और कौन कर सकता है साहनी का तो बैग्राउंड ऐसा नहीं लगता कि उसके पास जावेद को फंसाने का कोई उद्देश्य अमर बोला क्या पता क्या वजह है? जॉन बोला और जो भी है उसका इरादा तो यही लगता है और हमें तैयार रहना होगा । उसकी अगली चाल के लिए । इंस्पेक्टर हिम्मत को पंकज के कातिल का पता लगाना था । इस सिलसिले में उसने मॉल के बाहर दुकानों और रिक्शा स्टैंड पर पंकज की फोटो लेकर पूछताछ शुरू की । हालांकि उसे कोई कामयाबी न मिल सके । पुलिस स्टेशन वापस जाने के लिए वो अपनी बाइक पर सवार हुआ और चल दिया । शाम हो रही थी हल्का हल्का अंधेरा छाने लगा था । वो फैजाबाद रोड पर पहुंचकर एक गली में घुस गया । अचानक ही पीछे से किसी कार्ने हॉल देना शुरू किया । उसने पलट कर देखा फिर किनारे हो गया कर आगे निकल आई और फिर अचानक ही उसके ब्रेक लगे के मत को बाइक रोकनी पडी । बडी तेजी से कार में से चार आदमी उतरे और हेमंत पर झपट पडे । उसे सोचने का मौका ही नहीं मिला । चारों ने उस पर घूंसे लात बरसाने शुरू कर दिया । उसे बाइक से उतार लिया गया और बाइक किनारे नाली में गिरा दी गई । हेमंत बेटे हुए भी धमकाने लगा । सालों पुलिस वाले पर हाथ उठा तो वो लोग उसे गाली दे देकर पीते रहे । उस सुनसान सडक पर देखने वाला कोई नहीं था । कीमत निधान होकर एक तरफ गिर गया । उनमें से एक बोला पता चला तुझे हमारे जावेद भाई पर हर डालने का काम साले अगली बार तेरी लाश मिलेगी । घर में समझ रहे हो ऍम जोर उचक्कों को पकड और अपनी अकादमी रहे । उन लोगों ने हिम्मत के पास से उसके नोट्स पेन ड्राइव हासिल की और फिर वहाँ से भाग ले । हेमंत ने देखा कार की नंबर प्लेट पर मिट्टी लगी हुई थी । उसका पूरा बदन दर्द से टूटा जा रहा था । दस मिनट बाद जब एक बाइक सवार उधर से गुजरा तो उसने उससे मदद की गुहार की । जावेद अमर के साथ अभी ऑफिस से निकला ही था । जावेद कार ड्राइव कर रहा था और अमर बगल में बैठा था । तभी चीज का फोन आया । जावेद ने उसे स्पीकर पर डाला ये सर जावेद अभी इंस्पेक्टर हेमंत का फोन आया था और तुम्हारे घर की तलाशी लेना चाहता है तो लेकिन सर हमें मालूम है कि उसकी ये फरमाइश भी फिजूल है । पर उसका कहना है कि उसने सर्च वारंट हासिल किया है इसलिए फिलहाल कुछ नहीं किया जा सकता है तो घर जाकर उसे उसकी मनमर्जी पूरी कर लेंगे । तो बाद में हम देखते हैं । ठीक है सर जावेद ने फोन काटा और कार अपने घर की तरफ मोड दिया । आखिर ये तुम्हारे पीछे के ऊपर गया । अमर बोला पता नहीं शायद उसे कोई और सच तक नजर नहीं आती है । उसे ये सब करने के लिए फीस मिल रही हूँ । ऐसा भी हो सकता है । जावेद ने गहरी सांस छोडें । कुछ देर में वो जावेद के घर पहुंच गए । हेमंत पूरी तैयारी के साथ अपनी टीम के साथ उपस् थित था और उसका ही इंतजार कर रहा था । बोलो हेमंत आप क्या चाहते हो? जावेद ने पूछा मैं तो बस अपनी ड्यूटी निभाना चाहता हूँ । मुझे तुम्हारा घर सर्च करना है । अच्छा वैसे आपको ऑर्डर मिल कहाँ से रहे हैं? अमर ने पूछा क्या मतलब है तुम्हारा? मतलब यही की किसी ने आपको ऐसा करने का ऑर्डर दिया होगा? मैं इस मर्डर केस का ऑफिसर इंचार्ज हूँ । मुझे खुद फैसले लेने की इजाजत है । मैं सिर्फ सबूतों के सहारे आगे बढ रहा हूँ । लगता है सबूतों ने आपकी पिटाई भी कर दिया है । अमर उसके चेहरे पर ताजा चोटों के निशान देखते हुए कहता है, केमंत्री उसे घूरकर देखा पर कुछ बोला नहीं है । वो जावेद की तरफ पालता । अब तुम दरवाजा खोल लोगे । जावेद ने मेन गेट खोला । फिर अंदर आकर बैठक के दरवाजे पर पडा । ताला खोला । हेमंत और उसकी टीम ने तलाशी शुरू की । जावेद और अमर को बाहर ही रोक दिया गया था । एक घंटे बाद हेमंत अपनी टीम के साथ बाहर आया और जावेद को सख्त नजरों से देखते हुए बोला, ऍम कमिश्नर ऑफिस में सीक्रेट सर्विस का चीफ अभय कुमार कुछ ही देर पहले पहुंचा था । उसके चेहरे पर गहन चिंता भरे भाव थे की आवाज का ये सबूत मिले हैं । अब नहीं । चिंतित स्वर में पूछा मुझे खुद विश्वास नहीं हो रहा है पर अब जो मिला है वह सामने हैं और ये जावेद के घर के पास ही मिलाएं । कमिश्नर गोपीनाथ ने जवाब दिया, पर हम जावेद को अरेस्ट किए बिना भी तो कुछ कर सकते हैं । कोई तो तरीका होगा काश ऐसा हो सकता है । पर ये टूरिज्म का मामला है । मैंने थोडी भी ढील दी तो मेरे ऊपर ही नहीं पूरे पुलिस विभाग पर उंगलियां उठेंगे । ऊपर से जावेद का धर कमान गोपीनाथ तुम तो जावेद को जानते होंगे तो मुस्लिम है तो क्या हुआ हूँ उसने कितने टेररिस्ट ऑपरेशंस में भाग लिया । कितने ही आतंकवादियों को पकडा है । मारा है । मुझे यकीन है इसी कारण उसे इस तरह फंसाया जा रहा है । मैं सब जानता हूँ है और मेरे हाथ बंधे हुए कानून को तुम भी उतना ही जानते हो जितना मैं पुलिस फोर छोड कर ही तो तुम सीक्रेट सर्विस में गए थे । अब तुम बताऊँ मेरी जगह अगर तुम होते तो क्या करते हैं । अब है । तनावयुक्त ढंग से परे देखने लगा । मुझे साजिश का पर्दाफाश करने के लिए टाइम चाहिए । इन्वेस्टिगेट पुलिस भी करेगी । पर फिलहाल तो जावेद को छोडा नहीं जा सकता । ऍम ठीक है गोपीनाथ अभय कुमार खडा हो गया तो मतलब फर्ज निभाओ मैं चलता हूँ । कमिश्नर गोपीनाथ अचानक बोला ठहरो अब है अब ठीक टक्कर लोग गया और उसकी तरफ पालता । गोपीनाथ ने उसे देखते हुए मोबाइल उठाया और किसी को कॉल लगाई । दूसरी तरफ से आवाज आती ही वो बोला ऍम वो आवाज हेमंत की थी । जावेद कहाँ है मैं उसे लेकर सब स्टेशन पहुंच गया हूँ सर उसके खिलाफ अभी कोई लिखा पढी तो नहीं हुई जी नहीं बस अब करने वाला हूँ । उस की कोई आवश्यकता नहीं है । जावेद को जाने दो । हेमंत बुरी तरह से चौका पर सर ऍम की नहीं है की जावे । जैसा अवसर आतंकवादी हूँ पर सर उसके घर के अंदर से ही तुम जांच पडताल करते रहूँ और पता लगा उसके घर में ये हथियार कितने रखे हैं । लेकिन इंस्पेक्टर क्या तो मैं कम सुनाई देता है । नौ नौ सौं आॅफरिंग तो जो कहा है वैसा करो । ओके सर गोपीनाथ ने कॉल समाप्त करके अभय की तरफ देखा । अब धीरे कदमों से चलता हुआ उसके पास पहुंचा ऍम गोपीनाथ । उसने कहा अब है । अब हमें बहुत तेजी से साजिश से पर्दा उठाना होगा । आजकल इन बातों को ज्यादा देर दबाना आसान नहीं होता है । आई नो जावेद अमर जॉन ही मेरे बेस्टमैन है । वो पूरी कोशिश करेंगे पर तुम हेमंत को भी बोलो । उनका सहयोग करने के मैं जरूर बोलूंगा क्योंकि मैं चलता हूँ । ठीक है अब है चला गया । उसके जाते ही गोपीनाथ फिर फोन के साथ व्यस्त हो गया । जावेद अमर जॉन उस वक्त हेमंत के सामने ही थी जब उसे कमिश्नर गोपीनाथ का फोन आया । मोबाइल को खोलते हुए हेमंत कुर्सी पर बैठ गया । वो इंस्पेक्टर अमर मुस्कुराते हुए बोला, भेल के अरमा आंसू में बह गए । हेमंत ने तैश में आकर उसे देखा की आइए बात तो मैं पहले ही समझ नहीं आई थी । अमर ने कहा जाता है तो लॉकअप में बंद था तो उसी समय उसके घर हथियार रखवाए गए होंगे । ये किसे पता है कि हथियार उस वक्त वहाँ रखवाए गए या पहले से मौजूद थे । हेमंत जिद करते हुए बोला । जावेद ने अमर को शांत रहने का इशारा किया और बोला ऍम तुम अपनी ड्यूटी निभा रहे थे, मैं जानता हूँ और मैं तो मैं यकीन दिलाता हूँ । ये मेरे खिलाफ साजिश है । आप लोगों को मुझे सफाई देने की कोई जरूरत नहीं है । मैं तो एक बहुत निचले दर्जे का अवसरों, आप लोगों के सामने मेरी औकात ही क्या है? वह साफ तौर पर चढा हुआ मालूम पड रहा था । हेमंत यहाँ कोई कमियां ज्यादा औकात वाला नहीं है । एक बहुत बडी साजिश चल रही है । शहर में आतंकवादी और आईएसआई के एजेंटों के सक्रिय होने की खबर मिल रही है तो हम हमारा साथ दोगे तो हमें भी इन लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी । मुझ से जो होगा मैं जरूर करूंगा । मेरी तुमसे कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है । वही तो अब हम लोग वापस मेरे घर जाएंगे । पुलिस ने घर सील किया हुआ है इसलिए मुझे तुम्हारी मदद चाहिए । ठीक है मैं चलता हूँ । ये हुई ना । बाद अमर खुशमिजाजी के साथ बोला । फिर वो सभी हेमंत के साथ पुलिस जीत में बैठकर वापस जावेद के घर की ओर चल दी है । रास्ते में जॉन ने हिम्मत से पूछा जिस वक्त जावेद लॉकप में था तब उसके घर की चाबी तुम्हारे पास है, मेरे पास नहीं । सब स्टेशन के लॉकर में थी । चाबी किसे सौंपी थी कांस्टेबल को उसका नाम? आप लोग पुलिस पर शक्कर रहें । हेमंत मुस्कुराए शुरुआत किसने की थी? है मान जी अमर बोला ये सब पूछने का मंतव्य सिर्फ ये हैं कि पता लगे कि जावेद के बंद घर में उन्हें एंट्री कैसे मिली? जॉन ने कहा मैं समझ सकता हूँ । हेमंत बोला घर पर ताला लगा हुआ था । यानी जो भी अंदर आया उसके पास चाहती थी । चाभी न होती तो ताला तोडा गया होता है या कोई और रास्ता इस्तेमाल किया गया होता । मेरे घर के अंदर और कहीं से भी घुसना मुमकिन नहीं । जावेद बोला सभी खिडकियों में गृह लगे हैं । दूसरा कोई दरवाजा है नहीं । छत का दरवाजा जॉन ने पूछा वो हमेशा अंदर से बंद रहता है । इसका मतलब जो भी अंदर आया उसके पास जा भी थी । इतने सारे हथियार लाख कराया होगा तो किसी ने देखा भी होगा । अमर बोला गंगा राम शायद कुछ बता सके । जावेद बोला हुआ जरूरी नहीं वो मेन गेट से घुसा हूँ । जॉन ने कहा, तुम्हारे घर की चारदीवारी पर कोई तार भी नहीं है । उसे कूदकर अंदर आना आसान है । चिंता मत करो । हेमंत बोला है मैं पता लगवा लूंगा । जूतों के निशान दीवार पर मिल जाएंगे । घर के अंदर भी होंगे गोल्ड जॉन बोला जावेद के घर पहुंचने के बाद हेमंत ने फोरेंसिक वालों को निर्देश दिए और वह अपना काम कुछ और तेजी से निपटाने लगे । कुछ देर में पता चला कि दो जोडी ऐसे जूतों के निशान अवश्य मिले थे जो जावेद के हरगिज नहीं थे और वो दीवार से होते हुए घर के अंदर बेडरूम तक पाए गए थे । जहां से हथियार मिले थे और वह दीवार से होते हुए घर के अंदर बेडरूम तक पाए गए थे । जहां से हथियार मिले थे । फिंगर प्रिंट सो जावेद की सेवा किसी और की थी नहीं, जिससे यह साफ पता चल रहा था कि उन लोगों ने दस्ताने पहने हुए थे । पुलिस और जावेद अमर जॉन नहीं पुलिस और जावेद अमर जॉन ने घर के चारों तरफ पूछताछ शुरू की, पर कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिल सका । जाहिर है कि काम बेहद सतर्कता के साथ किया गया था । आप आज रात कहीं और बिता लीजिए । हेमंत जावेद से बोला कल सुबह तक आपको आपका घर वापस मिल जाएगा क्योंकि जावे बोला चलो फिर मेरे घर चलकर पार्टी शार्टी करते हैं । अमर जेब से कार की चाभी निकालते हुए हो । जावेद और जॉन उसके पीछे पीछे कार की तरफ चलती है । मैं एक बार जेल चला जाऊं फिर आराम से पार्टी करना जबीबुल्लाह । अरे यार, फॅालो टेंशन नहीं ले रहा हूँ और इतना खुश भी नहीं हूँ कि पार्टी मनाऊं । अरे मेरे आम हमें कुछ करना चाहिए । जॉन बोला अब आगे क्या करना है, पहले सोचना तो पडेगा । अमर कार में बैठते हुए बोला जॉन उसकी बगल में बैठा और जावेद पीछे । अमर ने चाभी एडमिशन में घुमाएंगे । कार स्टार्ट हो गई । साहनी के घर चलते हैं । जॉन ने सुझाव दिया क्यों? जावेद ने पूछा, क्योंकि फिलहाल शक करने के लायक कोई और उम्मीदवार नहीं है । ये भी है । अमर बोला और फिर उसने कार को गेयर में डाला और आगे बढा दिया । साहनी उन्हें बंगले पर ही मिला । बैठक में उन तीनों का स्वागत करते हुए उसने कहा, मिस्टर जावेद । मैंने सुना था कि पुलिस ने आप को गिरफ्तार कर लिया । सही सुना था मुझे पुलिस से ये उम्मीद नहीं थी । उस इंस्पेक्टर का जरूर पेश ढीला हो गया है । जो आपके कातिल होने की बात सोच बैठा । जभी बोला वो अपनी ड्यूटी कर रहा था । आम तौर पर ड्यूटी करते हुए दिमाग इस्तेमाल करने पर तो कोई सरकारी पाबंदी है । नहीं तीनों वहाँ से गैर बताइए मैं आप की क्या मदद कर सकता हूँ? साहनी नहीं मुस्कुराते हुए पूछा । पंकज, आपके घर कब से काम कर रहा था? जॉन ने पूछा कुछ महीने पहले से आई थिंक पांच छह महीने आपने उसे किसी एजेंसी से हायर किया होगा? नहीं वो तो मेरे दोस्त के यहाँ काम करता था । वो यूके शिफ्ट हो रहा था तो उसने मुझसे पूछा कि कुछ चाहिए? मुझे जरूरत थी तो मैंने रख लिया अच्छा यानि उसका आपने कोई बैकग्राउंड वेरिफिकेशन वगैरा नहीं करवाया । जरूरत ही कहाँ है? आपके उस दोस्त का नाम मध्यस् बताएंगे । उसका आप क्या करेंगे? यही सवाल उससे पूछूंगा । ब्राॅन के बारे में अच्छा पर मैं काफी टाइम से उसके कॉन्टेक्ट में नहीं, यू के का ड्रेस तो नहीं है । वो नंबर जो दिया था वो देता हूँ । फिर साहनी नहीं उसे । अंकित सेठी नाम के साथ यू । के । का एक नंबर दिया सैंक्यो । जॉन ने कहा । जावेद ने पूछा क्या आपको कभी पंकज पर शक हुआ? मेरा मतलब उसकी कोई ऐसी हरकत या कोई वाकिया जिस पर आपकी खास समझ हो गई हूँ? मैंने तो कभी नोटिस नहीं किया । आप समझ सकते हैं कि नौकरों पर तवज्जो देने का मेरे पास टाइम ही कहाँ होता है । फिर भी साहनी ने सोचने की मुद्रा में ऊपर देखा । फिर कहा, नहीं ऐसा कुछ भी नहीं आता रहा । क्या हम उसका कमरा देख सकते हैं? जॉन ने पूछा मुझे कोई दिक्कत नहीं है । साहनी कमरे से बाहर निकलते हुए बोला आइए परपुलिस पूरी जांच पडताल करके गई है तो मुझे नहीं लगता वहाँ आप कोई और सबूत मिलने की गुंजाइश होगी । वो आप हम पर छोड दीजिए । अमर बोला बिल्कुल यू नो और ऍम साहनी उन्हें लेकर सर्वेंट क्वार्टर पहुंचा । उन लोगों ने फोरी तौर पर पंकज के कमरे की जांच की । फिर जॉन बोला, बगल वाला कमरा किसका खाली बडा है? कभी कोई और नौ कराया तो वो रह सकता है । वो यानी फिलहाल बंद है । बंद है पर लोग नहीं सहनी उन्हें बगल वाले कमरे के सामने ले आया जिसका दरवाजा पंकज के कमरे के दरवाजे के ठीक सामने था । दरवाजे का कुंडा बंद था पर उस पर कोई ताला नहीं था । साहनी नहीं उसे खोलने के लिए हाथ बढाया ही था की जांची खा रुपये साहनी ने सब पका के हाथ पीछे कर लिया । इस पर फिंगरप्रिंट हो सकते हैं । जॉन ने जेब से रूमाल निकालते हुए कहा, और जब पंकज के कमरे में ही फिंगरप्रिंट नहीं मिले तो साहनी ने कहना चाहा पर जावेद बोला किसी भी संभावना को नकारा नहीं जा सकता । मिस्टर साहनी ऐसे तो कमरे में फिंगरप्रिंट नहीं मिले पर मॉडर व्यापन पर मेरे फिंगरप्रिंट मिले । इसी से पता चलता है कि आपको फंसाया जा रहा है । साहनी ने कहा मुझ पर भरोसा करने के लिए शुक्रिया जावे बोला । जॉन ने रुमाल हाथ में लपेटकर दरवाजा खोल दिया और एक आपको रहनुमा मानकर ही तो मैं मदद के लिए आपके पास आया था । मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूँ । मिस्टर जावे । मेजर राघव ने आर्मी के दिनों की आपके कारनामें बताए थे । मुझे अब आप सीक्रेट सर्विस में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं । ऐसे ज्यादा बेहतर इंसान और कौन हो सकता है? युवा टू का इन मिस्टर साहिल इस बीच जॉनी उस बंद कमरे की लाइट जलाई । अंदर सिर्फ एक पल था । उसके अलावा वहाँ कोई सामान नहीं था । जॉन की नजरें फर्श पर गई । वर्ष पर धूल है । वो नीचे हो गया और दरवाजे के पीछे धूल पर जूतों के निशान हैं । आप लोग बाहरी रुकिए । मुझे लग रहा है कि कातिल पंकज पर हमला करने से पहले यहाँ छिपा रहा होगा । वो लोग बाहर लोग गए इस कमरे की भी फोरेंसिक वालों से जांच करवा लेते हैं । जब एबोला अमर ने तुरंत इंस्पेक्टर हिमंत को फोन किया और फॉरेंसिक वालों को साहनी के घर भिजवाने को बोला पर वहाँ तो जांच हो चुकी है । हेमंत बोला हाँ लेकिन आपने पंकज के सामने वाले कमरे की जांच नहीं करवाई थी पर वो तो बंद पडा था । बंद था पर ताला नहीं लगा था । मुझे नहीं लगता उसकी कोई जरूरत है फॅार साहब, जांच हम अपने एक्सपर्ट को बुलाकर भी करवा सकते हैं । पर क्योंकि केस आपका है । बाद में आप पर ही उंगली उठेगी की आपने जांच में कोताही बरती । अरे मैं सिर्फ ये कहना चाह रहा था कि अभी ये लोग यहाँ बिजी हैं, कुछ नहीं होता । एक दो लोग भेज दीजिए । ठीक है हेमंत नहीं सिर्फ इतना कहा और फोन काट दिया तो?

Part 3

हूँ । कुछ देर बाद दो फोरेंसिक एक्सपर्ट के साथ हेमंत भी वहाँ पेश हुआ । उन लोगों ने जूतों के निशान उठाते हुए इस बात की खोरी तौर पर पुष्टि की कि ये निशान उन दो निशानों में से एक थे जो जावेद के घर से मिले थे । मिल गया ना कनेक्शन जॉन हेमंत को देखते हुए बोला, कुछ देर बाद वो लोग वहाँ से रुखसत हो गए । दूसरे दिन पंकज के कत्ल और हथियारों के मामले में कोई नई बात पता नहीं चली । पर शाम तक हथियारों वाली घटना न जाने कैसे मीडिया तक पहुंच गई और फिर देखते ही देखते इस पर तरह तरह की राजनीतिज्ञ और पत्रकार चर्चा करने लगे । जावेद के मुसलमान होने के कारण कुछ पार्टी के नेता ये बोलने लगे की शक्तियां उसने किसी आतंकी गिरोह के कहने पर अपने घर में उन हथियारों को पनाह दी होगी । अरे आजकल यही हो रहा है । एक नेता नेशनल चैनल पर बोल रहा था इन लोगों को जरा सी पावर मिल जाती है तो उसकी आड में ये यही सारे काम करते हैं । मैं कहता हूँ इतने संगीन इल्जाम के बावजूद क्यों पुलिस ने अभी तक उसे गिरफ्तार नहीं किया । किसके इशारे पर ऐसा हुआ? रोलिंग पार्टी के सिवा और कौन हो सकता है? तो क्या अगर मैं कहूँ कि रोलिंग पार्टी भी इन कामों में लिप्त है तो गलत होगा । पर जावेद खान का बैग्राउंड बेहद अच्छा है । उसने तो हमेशा देश की अटूट सेवा की है । न्यूज एंकर बोला पहले वो आर्मी में थे और देश पर हुए कई हमलों में इन्होंने आतंकवादियों को मुंहतोड जवाब दिया था । देखिए मैं ये नहीं कह रहा कि वो जानबूझ कर ये काम कर रहा है तो उस पर किसी किस्म का प्रेशर हो सकता है । वो जो भी हो मैं उत्तर प्रदेश सरकार से ये जानना चाहता हूँ कि उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई । माना कि उसके आतंकी होने की संभावना बेहद कम है पर अगर वो वाकई आतंकी हुआ तो क्या उसे खुला घुमने देना सही होगा? भारत एक लोकतंत्र है तो क्या आतंकी को भी यहाँ खुलेआम घूमने की आजादी मिलेगी? न्यूज एंकर हजार आप तो अरे इसलिए तो हमारी जनता परेशान है । जिसका बैग्राउंड कमजोर होता है उसे तो तुरंत उठाकर जेल में डाल दिया जाता है और इन जैसों पर हाथ डालने में इतना संकोच मुझे जवाब चाहिए । आखिर कब तक हमारे देश में इस तरह की दोगली परंपरा चलेगी । इस तरह माहौल इस बहस से गर्म होता चला गया । अगले दिन शाम को अब भर अभय कुमार को गोपीनाथ का फोन आया । मुझे ऊपर से ऑर्डर मिले हैं । जावेद को अरेस्ट करना होगा । ये सब एक साजिश है । गोपीनाथ कुछ ही समय में हमें पुख्ता सबूत अवश्य मिलेंगे । देखो मुझे पूरी उम्मीद है अब है । पर फिलहाल जावेद को रेस्ट करना ही होगा । अब है चुप हो गया इस ऑर्डर के आगे मैं बात हाँ अब है । हताश स्वर में बोला हुआ है ना । कुछ ही देर में जावेद को अरेस्ट कर लिया गया । मीडिया का जत्था उसके घर से लेकर पुलिस स्टेशन तक पीछा करता रहा है । हालांकि पुलिस ने कोई बयानबाजी नहीं की । एक बार फिर जावेद लॉकप में था । रात भर किसी को भी उस से मिलने की इजाजत नहीं मिली । सुबह अमर और जॉन कोतवाली पहुंचे । बाहर पत्रकारों का मेला सा लगा था । भीड को चीरते हुए वह अंदर पहुंचे और इंस्पेक्टर हेमंत से मिले । अमर बोला, जावेद के घर पर हुई जांच पडताल की रिपोर्ट मिली नहीं । अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है । शायद शाम तक आ जाए । हेमंत ने कहा ठीक है हम लोग खुद फोरेंसिक लैब चले जाएंगे । फिलहाल क्या हम जावेद से मिल सकते हैं । उसने लॉकप की तरफ इशारा कर दिया । जॉन और अमर जावेद के पास पहुंचे कैसे हो? अमर ने पूछा आप तो यहाँ रहने की आदत से पढ रही है । जावेद मुस्कुराकर बोला सब ठीक हो जाएगा तुम सरकारी मेहमान नवाजी के मजे लोग मैं और जॉब ढूंढ के निकालते हैं उस पार्टी को जो तुम्हारे पीछे पडा है । मुझे लगता नहीं इतना आसान होगा जावेद सलाखों को पकडकर बोला । फॉरेंसिक रिपोर्ट में कुछ पता चला । रिपोर्ट आई नहीं है अभी यहाँ से हम लोग सीधे फोरेंसिक लैब भी जाएंगे । ओके जभी बोला एक काम और करना मैंने अपने घर के सामने चाहे वाले गंगा राम अमर ने पूछा । हाँ उसे मैंने पता लगाने को कहा था कि किसने मेरे कमरे के सामने कचरे में रात के वक्त वो सबूत प्लांट किए थे । उसका फोन अभी तक तो नहीं आया था और अब मेरा फोन जमा हो गया है । ठीक है हम पता लगा लेंगे । मेरे खयाल से सहने की घडी की भी जांच करनी चाहिए । जावेद ने कहा एक मैं करूंगा । जॉन बोला तो तुम्हारा सोचना सही है । इन घटनाओं के तार सानिया और उसकी घडी से जुडे हो सकते हैं । आखिर शुरू तो सबकुछ उस घडी से ही हुआ था । ओके तुम लोग चलो । फिर जावेद ने कहा, अमर और जॉन फिर जिस तरह आए थे उसी तरह पत्रकारों की भीड को चीरते हुए वहाँ से रुखसत हो गए । जॉन साहनी से मिलने उसके ऑफिस पहुंचा । साहनी अपने कैबिन में रिवाल्विंग चेयर पर बैठा था । जॉन उसके सामने बैठा हुआ था । जान ने कहा, मिस्टर साहनी ऑफिस में आपके काम के बीच किस तब तो नहीं करना चाहता था । पर मुझे आपसे कुछ और पूछताछ करनी थी । ऍन आपको पता ही होगा । जावेद कि अरे इसके बारे में वो तो मुझे मालूम हुआ था । पुलिस कुछ भी करती रहती है । पर अच्छा हुआ कि उसे छोड दिया गया । हाँ पर कल रात उसे दोबारा रेस्ट किया गया है । बट ऍम सहानी विस्मित रह गया । जॉन उसे ध्यान से देखने लगा । आखिर पुलिस करके आ रही है । असली मुजरिम को पकडने के बजाय जासूसों के ही पीछे पड गई । मेरे कारण ही वो इस मुसीबत में फंस गया है । आप के कारण? हाँ नहीं, मैं उसे अपनी प्रॉब्लम के लिए इंगेज करता । ना तो इस चक्कर में पडता है आप फिक्र मत करिए । वो बोला मुझे बताइए कि आपको उस घडी वाली परेशानी से मुक्ति मिली फॅस दो दिन से वो घडी सही चल रही है । हुआ जॉन मुस्कुराया यानी पंकज के खत्म के बाद से वो एक बार भी नहीं होगी । हाँ, मुझे वो घडी जांच के लिए चाहिए । आपकी अजय करेंगे । मैं पहले भी घडियों के स्पेशलिस्ट के पास ले जा चुका हूँ । मैं उस की फॉरेंसिक जांच करवाऊंगा । अगर आप के घर में कोई है तो क्या आप उसे बोल देंगे ताकि मैं अभी यहाँ से निकलकर उसे कलेक्ट कर लो । वो सोचने लगा कोई दिक्कत है क्या? जॉन ने धीरे से पूछा नहीं नहीं दिक्कत क्या हो सकती है? हैं । मैं तो बस सोच रहा था कि अभी घर पर कोई होगा या नहीं । कोई ना कोई तो होगा ही । दरअसल पंकज के कपिल के बाद मैंने सबको छुट्टी दे रखी है । वैसे भी वह सब दहशत खाये हुए थे । मैं भी नहीं चाहता हूँ । मेरी वजह से किसी का नुकसान होगा । इसलिए अभी सिर्फ कार्ड से और आम तौर पर वो घर के अंदर नहीं आते हैं । अब आपको इतनी तकलीफ तो करनी ही होगी । क्यों नहीं बत्तीस ऍम वो घडी मेरे लिए बेहद अजीज है शर्ट फिर जॉन ने साहनी से इजाजत ली, अमर फॉरेंसिक लैब में था तो क्या सबूत मिले? हैं । उसने रामधारी नामक एक्सपर्ट से पूछा, आरडीएक्स, ए के फोर्टी, सेवन रॉकेट्स, ग्रेनेड्स ये सभी आतंकवादियों के काम में आने वाले जाने माने हथियार हैं । इतनी जानकारी मुझे भी है । अमर बोला और उस पर कोई फिंगरप्रिंट, सिया कोई ऐसे सबूत मिले जिससे पता चले कहाँ मैन्युफेक्चर हुए कहाँ से भेजे गए वगैरह । राइफलें अफगानिस्तान में बनी है और ग्रेनेड वगैरह किसी फैक्ट्री में बने लग रहे हैं । कहना मुश्किल है कौन सी? जाहिर है ऐसी फैक्ट्री गैरकानूनी होती है क्योंकि अब ये बताओ इन्हें गायब करने का क्या हो गया है वो चौका । अमर ने आंख मारी । अरे मजाक कर रहा था ऐसे मजाक नहीं करें । रामधारी गमगीन स्वर में बोला नहीं करेंगे । अमर बोला और कुछ मिला जावेद के घर कोई नया फिंगरप्रिंट नहीं, कोई और सबूत नहीं । रामधारी अब उसके सवालों से साफ भुगताया दिखाई दे रहा था । फिर अमर लैब से बाहर निकला । कार में बैठकर उसने जॉन को फोन किया । अभियान जॉन की आवाज आई इधर पहुंचा सहानी के घर घडी लेने जा रहा हूँ कहकर उसने संक्षिप्त में साहनी से हुई मुलाकात के बारे में बताया । ये सहानी का बच्चा बहुत गहरा मालूम पडता है । सुनकर अमर बोला मैं माइंड तो क्या पता चला । अमर ने कहा तो ये और टीचर मैं सानी के बंगले पर पहुंच गया हूँ । बाद में बात करते हैं ठीक है । अमर ने फोन रखा । फिर खुद से ही बोला मिशन गंगा राम चाय वाला कुछ देर में वो जावेद के घर के सामने स्थित चाय वाले के पास पहुंच गया । गंगा राम मौजूद था और चाय छानने में मजबूत था । जावेद के कारण वह अमर को भी पहचानता था । कैसे हो गंगा राम तब बढिया सर पर ये जावेद साहब के साथ क्या चल रहा है? पुलिस ने उन्ही को अरेस्ट किया । कोई बडी साजिश चल रही है । जल्दी ही सब पता चल जाएगा । खैर तुम यह बताओ? जावेद भाई ने तो मैं कुछ काम दिया था । उसका क्या हुआ जी मुझे पंचर बनाने वाले लडके से पता चला कि एक आदमी आधी रात को जावेद सर के घर के बाहर कूडेदान में कुछ डाल रहा था । वो अच्छा जॉन बोला कैसा था देखने में क्या हो लिया था उसका अंधेरे के कारण ये सब तो नहीं देख पाया । पंचर वाला आधी रात को क्या कर रहा था? अमर भी पूछा वो अक्सर देर रात तक काम करता है ये तो उसने और क्या देखा । बस यही है कि वो आदमी रात को कहा से उतरा और इधर उधर देखने के बाद कचरा डाला और फिर जल्दी से वहाँ से निकल गया । उसे उसका चेहरा नहीं दिखा । कार तो देखी होगी । मैंने पूछा की गाडी का नंबर बगैरा देखा पर उसे ठीक से याद नहीं था । बस इतना बताया की गाडी पुरानी मारुति जयंती और राजस्थान पासिंग की थी । अच्छा राजस्थान की गाडी यूपी में वो पंचर वाला है कहाँ है मैं उससे बात करना चाहता हूँ । वो लडका शाम को ही आता है । सर अच्छा और कोई बात बताई थी उसने नहीं बात से इतना देखकर को अपने काम में लग गया । उसे लगा किसी को दारू की बोतल बोतल फेंक नहीं होगी इसलिए जल्दी में फेंक कर भाग गया । ठीक है उस लडके से बोलना कि शाम को यही मिले, मैं आऊंगा । उस से बात कर रहे हैं । ठीक है सब । फिर उसने गंगा राम से विदा ली । जॉन ने साहनी के घर से घडी हासिल की और सीक्रेट सर्विस हेडक्वाटर की तरफ चल दिया । कार ड्राइव करते हुए हुए चौराहे पर रेडलाइट पर रुका । कुछ पलों में लाइट ग्रीन हो गई पर उसके सामने लगी कार्य आगे नहीं बढी । उसने हॉर्न बजाया पर कुछ फर्क नहीं पडा । वह झुंझलाकर कार से उतरा और अगली गाडी के ड्राइवर के पास पहुंचा । जॉन ने उसकी खिडकी पर दस्तक दी । उसने शीशा नीचे गिराया तो वो बोला अरे आगे बढो भाई कोशिश कर रहा हूँ गाडी बंद पड गई है क्या करूं? ड्राइवर झुंझलाता हुआ बार बार चाबी घुमाकर इंजन को जगाने की कोशिश कर रहा था । तब तक उसके पीछे वाले अपनी गाडियां बैठ कर के अगल बगल से आगे बढने लगे । जॉन वापस अपनी गाडी में पहुंचा और फिर उसी तरह उसने भी कार बैक की और आगे निकल गया । कुछ देर में वो सीक्रेट सर्विस हेडक्वाटर पहुंचा और पार्किंग में कार लगाने लगा । अभी वो घडी लिये दरवाजे की तरफ बढी रहा था कि उसे अपने पीछे किसी कार के टायरों के चीखने की आवाज आई । उसने पलट कर देखा । अमर हर बढाते हुए कार से उतर रहा था और इसमें बडी जल्दी उसे देखकर जॉन ने कहना चाहता पर उसके वाक्य के पूरा होने से पहले ही अमर नहीं उसके हाथों से घडी छीन ली । अरे वो बोला अमर ने पूरा जोर लगाकर घडी दूर खाली मैदान में उछालती जॉन चीज ये क्या किया तो पागल हो गया क्या? अमर कुछ बोला नहीं बल्कि मैदान की तरफ देखता रहा । घडी मैदान में घास के नीचे जा गिरी थी । कुछ बोलेगा जॉन में अमर का कंधा हिलाया । तेरी कार में घुसकर घडी चेंज की गई है । जरूर वो बम या कोई और खतरनाक चीज हो सकती है । हाँ पर उन वो चौराहे पर हाँ मैं इत्तेफाक से तो पीछे ही था । तो जैसे ही कार से उतरा एक आदमी तेरी कार में आया और घडी बदल कर निकल गया । तब से तो जो कॉल कर रहा हूँ पर तू है कि फोन ही नहीं उठा । तो जॉन में मोबाइल चेक करते हुए कहा फोन साइलेंट पर था, क्या करें अलर्ट कर सकते हो । फिर जॉन सीक्रेट सर्विस में फोन करके सबको अलर्ट कर चुका था । पुलिस को फोन कर दिया गया और बम निरोधी दस्ता उस तरफ निकल चुका था । सीक्रेट सर्विस वालों ने घडी के क्षेत्र को चारों तरफ से कवर कर लिया ताकि कोई उस तरफ ना जा सके । अभी तक घडी सही सलामत थी । सब बेचैनी से उसी तरफ देख रहे थे । कुछ देर में बम निरोधी दस्ता पहुंचा और उन्होंने घडी की जांच पडताल शुरू की । अमर जॉन का शव ठीक निकला । वह टाइम बम था, बम निरोधी दस्ते नहीं उसे बिना ज्यादा दिक्कत के निष्क्रिय कर दिया । उन्होंने बताया कि बम अपने आस पास के लोगों को मारने यह गंभीर रूप से घायल करने लायक शक्तिशाली जरूर था । बम निरोधी दस्ते की वहाँ से निकलने के बाद उस एरिया का पुलिस इंस्पेक्टर अमल जॉन वह सीक्रेट सर्विस के अन्य कर्मचारी आपस में चर्चा करने लगे । जॉन ने पूरा मामला बताया । ये जरूर साहनी का ही काम है । जॉन बोला और अगर साहनी ने ऐसा किया तो घडी बदलने की जरूरत के ऊपर है । वो सीधे ही तुझे बम पकडा सकता था । अमर बोला ऐसा होता तो वह फंस जाता ना । उसने जानबूझ कर इस तरह की दूसरी घडी ली और उसमें बम फिट करवा दिया । पर इतने कम समय में उसने उस घडी जैसा बम कैसे तैयार कर लिया । अमर बोला बम पहले से तैयार करके रखा होगा उसने जो भी इनकी साजिश है उसके तहत इन्हें पता ही होगा कि देर सवेर उसके ऊपर शक किया जाएगा । इसलिए उन्होंने पहले से ऐसी घडी तैयार कर रखी होगी । अब वो ओरिजिनल घडी भी गायब हो गई जिससे हमें कोई सुराग मिल सकता था । हुआ ना एक तीर से दो निशाने अचानक इंस्पेक्टर बोला चौराहे पर जो कहा आपके आगे रुकी थी, उसका नंबर याद है आपको नहीं । मैंने इतना ध्यान नहीं दिया । जॉन बोला मैंने भी नहीं । अमर ने कहा उस ड्राइवर की शक्ल याद होगी । इंस्पेक्टर ने पूछा हाँ उसे तो देखा था चलिए फिर कम से कम उसका स्क्वैश तो बन ही जाएगा । तभी जॉन कुछ सोचते हुए बोला और एक बात मैंने ध्यान दी तो पुरानी सी मारुती कार थी और उसका नंबर शायद आरजे । कुछ तो था वो राजस्थान अमर की मुझ से निकला । हाँ यानी वही कार थी जिसमें बैठकर कुछ लोग जावेद के घर के बाहर पंकज के मॉडर के एविडेंस प्लांट करने आए हैं । अमर ने कहा सभी ने चौकर उसकी तरफ देखा । अमर ने विस्तार से गंगा राम से हासिल हुई जानकारी के बारे में बताया ऍम तुम कुछ और करो ना करूँ पर फौरन से फौरन शहर में घूम रही राजस्थान पासिंग की पुरानी मारुति जान तलाश करवानी शुरू कर दो । ठीक है और कार का पूरा नंबर नहीं है । क्या पता होता तो बताइए देते यार फिर भी ऐसी कोई बहुत कार्य भी नहीं होंगी । शहर में मैं अभी वायरलेस से सभी को सूचित करता हूँ कहकर वह अपनी जीत की तरफ चला गया । जिस तरह की घटनाएं हो रही हैं । मुझे तो लग रहा है कि ये किसी आतंकवादी संगठन की हरकत है । जॉन बोला जावेद के घर से मिले हथियार भी इसी तरफ इशारा कर रहे हैं । अमर ने सहमती में सर हिलाया, चीज को इन्फॉर्म करना चाहिए । जॉन बोला ऍफ अभी ऑफिस में नहीं है । एक कर्मचारी बोला चलो अंदर से फोन करते हैं । अमर ने कहा फिर वो लोग हेड क्वार्टर के अंदर चलती है । अमर और जॉन को विश्वास था कि पुरानी जानकार अपराधियों ने अवश्य किसी डीलर से सस्ते दामों में हासिल की होगी । इसके लिए उन्होंने अपने आदमियों को काम पर लगा दिया । राजस्थान की ऐसी पुरानी का नहीं । पिछले कुछ समय में ज्यादा बिकी होने की संभावना कम थी । उनका ये अनुमान भी ठीक निकला । अंतत है उनके सहकर्मियों ने दो ऐसे डीलर पता लगाए जिन्होंने पिछले कुछ दिनों में ऐसी कार भेजी थी । इत्तिफाकन दोनों ही जगह से रन की कार भी की थी । जो हमने जो कार देखी थी वह भी रन की थी । एक डीलर से तो खरीददार का पता मालूम चल गया क्योंकि उसके नाम पर गाडी ट्रांसफर उसी ने करवाई थी । जबकि दूसरे डीलर लकी कार्स ने बताया कि खरीदने वाले ने सिर्फ बेचने वाले के साइन लिए थे और कहा था रजिस्ट्रेशन वो खुद करवाएगा । उसने अपना जो एड्रेस लिखवाया था वह फर्जी निकला है । इससे उनको कामयाबी मिली नजर आई । अब कम से कम उनके पास गाडी का नंबर था । उन्होंने पुलिस को तुरंत वो नंबर बताया । अब कहा की तलाशी तेजी से शुरू हो गई । दूसरी तरफ साहनी ने जॉन को फोन किया । बोलियाँ मिस्टर साहनी साहनी की आवाज में उत्तेजना नहीं । मैंने आपसे कितने रिक्वेस्ट की थी कि वह घडी मेरे लिए कितनी है और फिर भी आपने उसे गुमादी । जॉन ने मन ही मन उसे कोसा पर प्रत्यक्ष में बोला एम सोरी! अब तो मेरा पुलिस और जासूसों पर से ही विश्वास टूट गया है । वो गुस्से में बोलता गया, आपसे घडी नहीं संभाली गई और सरकार सोचती है कि आप लोग पूरे देश की सुरक्षा संभाल सकते हैं । मैं ऐसा नहीं ये मामला बहुत सीरियस है जिसमें आतंकवादियों के शामिल होने का भी शक है । आप को अपनी घडी की पडी है । अब ये क्यों नहीं सोच कर बताते हैं कि आप ही की घडी को बम बनाकर किसी हमें क्यों दिया । आप की घडी में ही ऐसा क्या खास है कि उसके चारों तरफ कितनी घटनाएँ घटती चली जा रही है । अब ये भी मैं पता कर के आपको बताऊँ और और आप लोग क्या करेंगे? अपने घर में बैठ कर आराम से टीवी पर आई पी एल । देखेंगे देखिए हम से जो हो रहा है हम कर रहे हैं । अपराधी हाथ आएंगे तो आपकी घडी भी मिल जाएगी । आप आराम से घर पर बैठे हैं तो तो मुझे घर पर बैठोगे मैं मैं तुम लोगों पर केस कर दूँ । जरूर करना कहकर जॉन ने फोन कर दिया । फिर उसने श्रीनिवासन को बुलाया । ऍन सर, मुझे मिलना शमी के मर्डर की फुल स्टडी करनी है । अच्छा ऍम पर वो मॉडर्न नहीं आत्महत्या के केस के नाम से बंद है । श्रीनिवासन शान के साथ बोला वही अर्जेंट जॉन ने उसकी तरफ आंखे तरेर कर देखा । बहुत क्योंकि हम चीज घर से परमिशन लेकर पुलिस से फाइल मंगवा लेता । ऍम नहीं नौ प्रॉब्लम सर । शाम तक फाइल श्रेणी ने उसके डैड तक पहुंचा दी । ऑफिस तकरीबन खाली हो चुका था । जॉन ने कॉफी तैयार की और फाइल पडने लगा । फाइल पढते पढते वो नोट्स बनाता जा रहा था । पूरी फाइल पढने के बाद उसने घडी पर नजर डाली । रात के दस बज गए थे । उसने अंगडाई ली नोट्स बैग में डाले और घर जाने के लिए तैयार हो गया । वो जल्द से जल्द कुछ करना चाहता था । अमर कार को ढूंढने में ध्यान लगा रहा था और चीफ नहीं । उसे साहनी पर ध्यान देने के लिए कहा था । रात हो चुकी थी । सभी अपने अपने घरों में थे । सडकें लगभग सुनसान हो चुकी थी । अमर सडकों पर योगी कार घुमा रहा था । अगर कहीं पुलिस की नाकाबंदी दिख जाती तो वो उनसे कार की बाबत पूछ लेता था । हालांकि जवाब अभी तक सकारात्मक नहीं मिल सका था । वो गंभीर था । उसे जावेद की चिंता सता रही थी । जिस तरह के इल्जाम उस पर लगे थे उनसे छुटकारा पाना आसान नहीं था । उसे बताया था कि अब जावेद की बेगुनाही तभी साबित हो सकती है जब उसे फंसाने वाला पकडा जाएगा । जॉन साहनी के पीछे लगा था पर अमर को ऐसा महसूस हो रहा था कि इसमें साहनी का हाथ नहीं है बल्कि कोई और ही है जो इस तरह से षड्यंत्र कर रहा है कि जावेद फंसे और शक सहनी पड जाए । तभी अमर का फोन बजा बोल मेरी जान । फोन को स्पीकर पर डालते हुए उसने कहा हुसैनगंज की तरफ कष्ट मारना । राजस्थान पासिंग की एक पुरानी कार किसी ने उधर देखिए बाहर का मेक और मॉडल तो पता नहीं लॉन छोडने पर ट्राय किया जा सकता है । ठीक है मैं उस तरफ देखता हूँ । कहकर अमर ने कॉल समाप्त की और एक्सीलेटर पर दबाव बढा दिया । कुछ ही देर में वह हुसैनगंज पहुंचा । वहाँ रात के इस समय एक्का दुक्का लोग ही दिखाई दे रहे थे । अमर धीरे धीरे उस इलाके की सडकों पर कार घुमाने लगा । तभी उसका ध्यान सडक के किनारे एक अंधेरी पडी गली की तरफ आकर्षित हुआ । उस अंधेरी गली से उसे कुछ अजीब सी आवाजें सुनाई दी । वो आवास कूडेदान में खाना ढूंढने वाले कुत्ते बिल्ली की भी हो सकती है । पर अमर का मन किसी अज्ञात भावना से शंकित होता था । उस आवाज को अनसुना नहीं कर सका । उसने कार सडक किनारे लगाई और रिवॉल्वर हाथ में लेकर सावधानी से उस तरफ चल दिया । गली के पास पहुंचकर उसने देखा की गली में कई ट्रक, लॉरी वगैरह खडे थे । पर किसी इंसान के उधर होने का कोई चिन्ह नजर नहीं आ रहा था । वो सावधानी से गली में प्रविष्ट कर गया । उसे उस आवास के स्रोत को ढूंढना था । उसे पूरा यकीन था की आवाज गली के अंदर से ही आई थी । गली में कुछ अंदर आने के बाद उसे अंधेरे में जो भी एक पुरानी इमारत दिखाई दी, गेट खुला था । अमर बिना कोई आवाज निकाले अन्दर प्रविष्ट हो गया है । उसे बात करने की बेहद हल्की आवाजें और बीच बीच में कुछ खटखटाहट की आवाजें आ रही थी । अमर इमारत के अंदर एक राहदारी में आ गया । वहाँ घुप अंधेरा था । आवाज की दिशा में वो आगे बढता गया । राहदारी के अंत में वो पानी मुडा । वहाँ एक दरवाजा था । अमर ने दरवाजे पर खान लगा दिया । आवाज उसी के अंदर से आ रही नहीं करना क्या है उसे खत्म कर देते हैं । फिर लाश ठिकाने लगाने बाहर निकलना पडेगा तो लगा देंगे । रात को पुलिस कष्ट पर रहती है । ये काम इतना आसान नहीं है । तो हम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे काम हम पहली बार करेंगे । बहुत बार किया है और किसी सिलसिले में आज जगह जगह पुलिस की चौकसी है । लग रहा है किसी को ढूंढ रहे हैं । हमें तो नहीं बोल रहे हैं । हो सकता हूँ अब एक ही जा रहा है इसे यहीं खत्म करके ये जगह ही छोड देते हैं । ये है ये ठीक रहेगा । फिर खटखट की आवाज आई ये बात उछल कूद रही हैं । भरने से पहले मुर्गी उछल कूद मचाती है तो मैं ऐसे हलाल करूँ । विडियो बनाता हूँ, वीडियो बनाना है क्यों नहीं बनाकर हुजूर को भेज देंगे? वो सोशल जाएंगे हो गया चला जा करके फिर ऐसा लगा जैसे किसी को घसीटा जा रहा हूँ । अमर ने धीरे से दरवाजा खटखटाया और फिर दूर भाग गया और राहदारी में एक गंभीर के पीछे छुट गया । कुछ मिनटों तक कमरे की तरफ से कोई हलचल नहीं हुई । वो इंतजार करता रहा । फिर उसे बेहद धीरे से दरवाजा खुलता दिखाई दिया हूँ । अंदर से एक नकाबपोश बाहर निकला जिसके हाथों में एक ये फोर्टी सेवन वो राहत आरी में जांच पडताल करते हुए आगे बढने लगा । अमर छिपा रहा है उसके राहदारी से बाहर की तरफ जाने के बाद अमर धीरे धीरे कमरे की तरफ चल दिया । फिर उसने कमरे में सावधानी से झांक कर देखा । उसने देखा कमरे में एक लडकी थी जिसके हाथ पाँव पर नहीं थे । ऊपर भी कपडा बंधा हुआ था । वो घुटनों के बल बैठी हुई थी । तभी दरवाजे के बगल में छिपा एक नकाबपोश उसपर झट्टा उसने अमर को अपनी गिरफ्त में ले लिया । अमर खुद को छुडाने का भरसक प्रयास करने लगा और उसकी पकड बेहद मजबूत थी । फिर अमर ने अचानक उसे दीवार की तरफ धकेल दिया । उसकी पकल कुछ खेली हुई तो अमर ने उसके सीने में कोहनी मार दी है । वो उसकी पकड से बाहर निकल आया । अमर को लगा वो उसे दोबारा पकडने की कोशिश करेगा । पिछले कूदकर दूर हट गया पर उसे पकडने की बजाय बेहद अप्रत्याशित ढंग से उसने दरवाजे की तरफ दौड लगा दी और देखते ही देखते कमरे से बाहर निकल गया । अमर उसके पीछे बाहर आया । दोनों राहदारी में दौड रहे थे तभी सामने से दूसरा नकाबपोश आया और उसने अमर की ओर फायरिंग शुरू कर दी है । अमर खंभे की आड में हो गया । अमर ने रिवॉल्वर निकाली और फायरिंग रुकते ही उनकी तरफ फायर करने लगा । नकाबपोश की तरफ से फिर गोलियों की बौछार हुई फिर शांति छा गई । फिर अमर को गेट की तरफ से आवाज आई । उसने देखा वह दोनों गेट खोलकर भाग रहे हैं । अमर उनके पीछे दौडा पर जब तक वो गेट पर पहुंचता उससे मोटर साइकिल की आवाज आई । वो दोनों भाग रहे थे । अमर ने फायर किया पर मोटर साइकिल तब तक गली से मुख्य सडक की ओर मुड चुकी थी । उसने मोबाइल फोन निकाला और तुरंत हेडक्वार्टर और पुलिस को अलर्ट किया । फिर वो वापस उस इमारत के अंदर आया । इस बार उसकी नजर अंदर एक कोने में खडी । कार पर कहीं वो उसके पास पहुंचा और फिर उसका ध्यान उसकी नंबर प्लेट पर सोता ही चला गया । वो वही कार थी । पुरानी मारो तीस और उसका नंबर राजस्थान का था । तभी उसे राहदारी की ओर से वो लडकी आती नजर आई जो अभी अंदर बंद ही हुई नहीं । अमर ने आश्चर्य से उसकी तरफ देगा । उसे हैरानी हुई कि उसने इतनी आसानी से अपने हाथ का कैसे खोली है । वो घबराई सी इधर उधर देखने लगे । अमर ने उसे ध्यान से देखा । वो देखने में शहरी कॉलेज जाने वाली लडकी नजर आ रही थी । वो घबराई हुई जरूर थी, पर उसके चेहरे पर तेज तर्रार भाव थे । उसका ध्यान अमर की तरफ गया तो उसके पास पहुंचे । वो दोनों भाग गए । लडकी ने पूछा था उन्होंने क्या किया था तुम्हारा? अमर ने पूछा उसका ध्यान अभी तक कमर पर ठीक से नहीं गया था । वो चारों तरफ देखते हुए कुछ घुसाकर बोली ऐसे खडे मंत्र हूँ । उनके साथ ही आस पास हो सकते हैं किनके उसने जवाब देने की जगह अमर का हाथ पकडकर खींच लिया । मजबूरन अमर को भी उस की तरह झुककर कार के पीछे छोडना पडा कोई नहीं है । इधर मैंने किया ज्यादा हीरो मत बनाओ तो मैं पता नहीं किस चक्कर में पड गए हो उसकी बातों से अमर को अब उसके कॉलेज कल होने पर संदेह होने लगा था । कौन सा चक्कर चल रहा है? अमर ने अनजान बनते हुए पूछा जिन्होंने मुझे पकडा था वो टेरेरिस्ट वो खतरनाक है । बहुत खतरनाक है वो लोग अच्छा तो मैं कौन हूँ । लडकी का ध्यान अमर की रिवॉल्वर पर गए पुलिस में हो गया ।

Part 4

नहीं । फिर इतनी राहत इधर क्या कर रहे हो? नहीं नहीं आ रही थी तो यही घूम रहा था इस तरफ से आवाजाही तो देखने आ गया । बच रहा हूँ तुम्हारे पास कोई वहीकल हाँ कर है । चलो फिर यहाँ से निकलते हैं । ठीक है । फिर वो गली से निकलकर सडक पर पहुंचे और अमर की कार में जा पहुंचे । सडक के किनारे लगे लैम्पपोस्ट की लाइट में अमर को उसका चेहरा अब कुछ ठीक से दिखाई दिया जो सुंदर थी । रंग गोरा था । आंखे हिलने की तरह खूबसूरत ही बहुत लंबी और आपस में लगभग मिलती हुई उसके चेहरे की रौनक बढा रही थी । बालों का उसने जोडा बनाया हुआ था । पर अमर को यकीन था कि खुले बालों में वो और भी खूबसूरत लगेगी । अब देख कर रहे हो निकालो चलते यहाँ से वो बोली मैंने पुलिस को फोन किया था । आने वाली होगी वो कुछ देर शांति छाई रही । फिर अमर ने पूछा वो लोग तुम्हें मारने वाले थे । हाँ मारकर मेरा वीडियो बनाने वाले थे । पर उन्हें पता नहीं था कि मैं अपने हाथ खोल चुकी थी । वो जिस चाकू से मुझे मारने वाले थे उसे छीनकर मैं उसकी आंख में मारने का फैसला कर चुकी थी । वहाँ हो ट्रेनिंग कहाँ मिले तो मैं मिली है । कहीं तुम बताओ, जिस तरह से तुम उन का सामना कर रहे थे, मुझे लगा तुम पुलिस के आदमी होगी । चलो यही समझ लो । लडकी के चेहरे पर मुस्कान आ गई । नहीं बताना चाहते तो से ही पर मेरी मदद करने का शुक्रिया । नौ । प्रॉब्लम तुम्हारा नाम क्या है? रिकॅार्ड ऍम हूँ । रिंकी मुस्कुराकर बोली, मैंने सोचा नहीं था । उस वीरान इमारत में मेरी मदद के लिए कोई पहुंचेगा । दरअसल हमें अंदर खडी पुरानी कार की तलाश थी । वही उस इमारत तक मुझे खींच लाई । अच्छा कुछ देर में पुलिस आ गई । आतंकवादियों से संबंधित घटना होने के कारण बम निरोधी दस्ता भी साथ में आया था । उसी इमारत और कहा कि अच्छे से तलाशी भी जाने लगे । अमर ने इंस्पेक्टर को सारी बात बताई और फिर कहा उस लडकी का बयान भी ले लो, कहाँ है वो? इंस्पेक्टर ने पूछा हूँ, मेरी कार में बैठे हैं । इंस्पेक्टर ने ध्यान से अमर की कार पर नजर डाली । मुझे तो वहाँ कोई भी दिखाई नहीं दे रहा हूँ । अमर ने मोडकर अपनी कार की तरफ देखा । वाकई वहाँ कोई नहीं था । वो दौड कर कार के पास पहुंचा जिनकी नदारत थी सुबह हो गई थी । ऑफिस पहुंचते ही जॉन नहीं श्रीनिवासन को अपने साथ चलने के लिए कहा । श्रीनिवासन ने पूछा तो उसने बताया कि वह मिनाज शमी के केस पर छानबीन करने जा रहे हैं । बिना शमी का फ्लैट ज्यादा दूर नहीं था । वो गुडविल टावर नाम की हाईराइज सोसाइटी में रहा करती थी । उन्होंने उसके फ्लैट की चाभी उसके पडोसी से हासिल की थी । ये बात जॉन ने वहाँ आने से पहले ही मालूम कर ली थी कि उसकी मौत के बाद से उसका फ्लैट खाली पडा था । उसके मकान मालिक ने उसे अभी तक किराये पर नहीं उठाया था । चाबी से दरवाजा खोलकर जॉन फ्लैट के अंदर आ गया । श्रीनिवासन उसके पीछे पीछे था । जॉन ने कमरे में घुसकर लाइट का स्विच ऑन कर दिया । श्रीनिवासन थोडा परेशान होते हुए बोला, जाने सर अभी आने का क्या बेनिफिट तीन साल हो चुका है । अब तक तो मकान मालिक ने फ्लैट का सारा सामान हटाकर पूरी तरह से क्लीन कर दिया होगा । नया पेंट भी मार दिया होगा । हमको यहाँ पर क्या किलो मिलेगा? जॉन कुछ बोला नहीं वो फ्लैट के अंदर बैठक में आ गया । कमरे में चारों तरफ देखते हुए वो बाथरूम में पहुंचा जहां कथित रूप से मैनाज की लाश पाई गई थी । बाथरूम में सफेद रंग का बास्तब दिखाई दिया जो कि एकदम साफ सुथरा और सूखा था और चमचमा रहा था । उसी टाइम में मिनाज की मौत हुई थी । कभी वो लाल खून से भरा हुआ था । ये सोचकर ही जॉन के शरीर में सिरहन दौड गई । जॉन वापस बैठक में पहुंचा । इस खाली फ्लैट में क्या मिलेगा? श्रीनिवासन बोला जबकि जॉन का ध्यान में इंदूर की तरफ था वो । मैं इंडोर की चिटकनी को देखते हुए बोला, मैनाज को चिटकनी लगाकर घर में रहने की आदत होगी क्या? ऐसा रिपोर्ट में लिखा था सर श्रीनिवासन ने पूछा, नहीं चिटकनी के ऊपर देखो, वहाँ दीवार का चुना कैसा हुआ है? इसका मतलब ऑटोमैटिक डोर लॉक के अलावा तो चिटकनी भी लगती थी, जैसा कि अक्सर लोग घर में रहते हुए करते हैं । राव ऍम लेकिन इस बात से काॅन्फ्रेंस निकलता है रिपोर्ट के हिसाब से जिस रात मिनाज की मौत हुई थी, सात दरवाजे पर अंदर से चिटकनी नहीं लगी थी । तो अगर मिनाज घर में अकेली थी, वो भी रात में और नहीं आ रही थी तो उसने अंदर से चटकनी क्यों नहीं लगाई? आप क्या कहना चाहते हो? हम को तो कुछ भी नहीं । अंदर से हो रहा है श्रेणी मैं बस ये जानना चाहता हूँ की अपनी मौत की रात मिनाज घर में अकेली नहीं थी । अगर अकेली होती तो उसने ढोल लॉक के अलावा अंदर से चिटकनी भी लगाई होती हैं । यस आॅनलाइट लेकिन फिर भी फ्लैट में किसी और के होने के कोई सबूत नहीं मिलेंगे । भूत का क्या असर? उन्हें तो मिटा भी जा सकता है, राइट से नहीं । जॉन ने कहा फिर कुछ सोचते हुए बोला लेकिन सिक्योरिटी गार्ड की गवाही के हिसाब से मिनाज उस रात घर अकेले ही आई थी ऍम कातिल बाद में आया हूँ या पहले से फ्लैट में मौजूद हो मुझे । मैं भी मैं सभी गवाहों से दोबारा बातचीत करना चाहता हूँ । साथ में उसे इंस्पेक्टर से भी मिलना है जिसने इस केस पर छानबीन की थी । श्रेणी तुम उस चौकीदार का भी पता लगा हूँ जो स्वस्थ सोसाइटी में काम करता था । मैंने पूछा तो पता चला की वो कहीं और चला गया । वॅार चौकीदार की एजेंसी से हम ये बात पता करवा लेगा । इसके अलावा रिपोर्ट में मिनाज की एक दो मॉर्डल फ्रेंड का भी जिक्र मैं फिलहाल उनसे मिलने जा रहा हूँ तो हम चौकीदार का पता लगाने अभी निकल जाऊँ हूँ । फिर वहाँ से दोनों अलग अलग रास्ते पर निकल लिए । जॉन मिनास की एक फ्रेंड यहाँ से मिला । वो भी मिनाज की तरह मॉर्डल थी । रिपोर्ट में नहीं यहाँ की गवाही के बारे में भी लिखा था । उस वक्त नेहा घर से बाहर निकल ही रही थी जब जॉन ने उसका रास्ता रोक लिया । आपका नाम नहीं है । जॉन ने पूछा जी हाँ बोलिए । जॉन ने अपना परिचय पत्र दिखाया और बोला सीक्रेट सर्विस फॅार के इसके बारे में आप से कुछ पूछताछ करना चाहता हूँ । यहाँ के चेहरे पर अच्छे से भरे भाव उभर आए । पर ये है तो तीन साल पहले क्लोज हो चुका है । अब आप मुझसे क्या चाहते हैं? मैं अपना बयान पहले ही पुलिस को दे चुकी हूँ । नहीं देखो मैं जानता हूँ कि तुम गवाही दे चुकी हो और मिनाज का केस आत्महत्या का केस बनकर बंद हो चुका है । पर फिलहाल हमारे शहर में कुछ आतंकी गतिविधियां चल रही है जिसके तहत मुझे उसके केस पर फिर से काम करना पडता है । ऍम जॉन के अनुरोध के आगे वह ज्यादा विरोध नहीं कर सकी । वो उसे अंदर ले आई । हॉल में बैठने के बाद जो उन ने पूछा तो कितने साल से मिला, उसको जानती थी ज्यादा नहीं । हम एक ही एजेंसी के लिए मॉडलिंग करते थे । ऍम कुछ छह सात महीने तो अपने बयान में कहा था कि मिनाज डिप्रेस थी क्या? उसने तुमसे कभी डिप्रेशन की वजह शेयर की । उसने मुझे ऐसा कुछ डिस्कस नहीं किया । फिर तो तुमने कुछ डिप्रेशन के सिम्टम्स नोटिस की होंगे । हाँ, यहाँ सोचते हुए बोली अक्सर उदास रहती थी और कुछ और तो कुछ याद नहीं । तो क्या कभी कभी उदास होने वाले लोग डिप्रेशन के मरीज होते हैं? मुझे इस बारे में ज्यादा पता नहीं । पर तुम ने बयान में तो ऐसा बोला नहीं । यहाँ कुछ चलते हुए बोली पुलिस ने मुझसे पूछा तो मैंने बता दिया मैं कोई साइकोलॉजिस्ट तो हूँ नहीं, जो मानसिक बीमारियों को समझेंगे । ऍम बोला अच्छा ये बताओ क्या तुम जानती थी कि मिस्टर पुनीत साहनी मिनाज के बॉयफ्रेंड थे क्या? मैं नाचने तो मैं बताया था । हाँ, वो अक्सर से पिक करने के लिए आता था तो मैंने ये ऍम कर लिया । बाद में उसने कुछ बताया कि वो उसका बॉयफ्रेंड है । क्या तुम है? उनके रिलेशनशिप के बारे में कुछ और जानकारी थी? नहीं, ये सब बातें तो वो मुझसे कभी शहर नहीं करती । थी । अच्छा पर तुम ने अपने बयान में कहा है कि उन दोनों के रिलेशन बहुत अच्छी थी । साहनी उसको बहुत अच्छे से ट्रीट करता था । फिर तुम्हें ये सब कैसे पता चला? अरे ये तो मैंने जैसे देखा वैसा बताया । वो जब भी उसे मिलता था, बहुत प्यार से मिलता था ये देखकर तो मुझे ऐसा लगा कि दोनों के रिलेशन बहुत अच्छे हैं और तुमने पुलिस को भी यही बताया । जॉन ने उसका चेहरा पढते हुए पूछा जी हाँ । नेहा ने कहा । जॉन ने उसके घर में चारों तरफ देखते हुए पूछा तुम्हारा मॉडलिंग का जवाब कैसा चल रहा है? ठीक चल रहा है । जॉन को उसके घर में एक से एक महंगी चीजें दिखाई नहीं ऍम । जो बोला अगर तुम्हें इसके अलावा कुछ और भी जानकारी हो तो तुम मुझे बता सकती हूँ । मैं ऐसे कहीं रिकॉर्ड नहीं करूंगा । नहीं, तुम्हारा कहीं पर नाम आएगा । नेहा उसे ध्यान से देखती रही । फिर बोली नहीं, मुझे जो कुछ भी जानकारी थी, मैंने पुलिस को बता दी थी तो और अगर कुछ याद आए तो मेरा नंबर ले लो । मुझे कभी भी कॉल कर सकती हो, ठीक है । नेहा ने कहा नंबर का आदान प्रदान हुआ । फिर जॉन वहाँ से निकल गया । बाहर पहुंचकर उसने टैक्सी नहीं और फिर अमर का नंबर लगाया । मोबाइल की रिंगटोन ने अमर कि नहीं तोड दी । उसने आंखें मिर्च में चाहते हुए अंगडाई दी । फिर मोबाइल को उठाकर देखा । जॉन कॉल कर रहा था । उसने कॉल रिसिविंग का बटन दबाया और मोबाइल कान से लगा लिया । अभियान दूसरी तरफ से जॉन की आवाज आई अभी तक सोया पडा है । मैं तो कुछ बोला भी नहीं फिर भी तो जान गया जरूर पिछले जन्म में तो मेरी बीवी थी क्या? बता मैं तेरा पति रहा हूँ ना तेरी हरकतें बीवियों जैसी हैं तो क्या नहीं । जॉन लडकियों की आवाज निकालकर बोला । पति देव बताएंगे कि कल रात को क्या कमाई की क्यों नहीं जाने मान वो राजस्थान की गाडी तेरी बताई लोकेशन से मिल गई । आतंकवादी चला रहे थे वो गाडी अब तो पक्का हो गया कि ये पूरा मामला किसी आतंकवादी संगठन से जुडा है । हाँ मुझे पता चला फॅार में यही चर्चा हो रही थी । सुबह सुबह अच्छा उस इमारत और कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट आई अभी नहीं । ठीक है तो मुझे की उठाया की उठाया क्या मतलब ऑफिस नहीं आएगा क्या आऊंगा आऊंगा कहकर अमर ने फोन काट दिया फिर उठा और तेजी से बाथरूम की तरफ बढ गया । पंद्रह मिनट के अन्दर वो तैयार हो चुका था । इमरती लाल ने उसे उठा देखकर कहा अरे बाबू! कबसे नाश्ता बनाए बैठे हैं, कुछ खा पी लो । बाद में खाता हूँ । कहकर अमर ने कहा की चाभी उठाई और तेजी से बाहर निकल गया । अमर और जॉन लगभग एक साथ ऑफिस पहुंचे । मिलते ही अमर ने जॉन को दबोचा और छत पर पहुंचा । अमर ने जल्दी से सिगरेट जलाई और एक लंबा कश मारते हुए बोला, वहाँ दो आतंकी छिपे क्रिस आतंकी ग्रुप के हैं ये तो समझ नहीं आया । पर अब पता चल रहा है कि जावेद के खिलाफ साजिश की जडें किधर है? हाँ ये तो साफ हो गया । उस इमारत में उन्होंने एक लडकी को बंधक बना रखा था । पर वो लडकी कोई आम लडकी नहीं लगी । फिर भी वो कहाँ है? जॉन ने पूछा पता नहीं अमर बोला क्या मतलब पता नहीं । अरे वो गायब हो गई कहकर अमर ने पूरी बात बताई । जॉन ने ध्यान से सुना । फिर बोला मेरे खयाल से वह पुलिस के चक्कर में नहीं पडना चाहती होगी । पर वो आतंकवादियों के चुंगल में पडी कैसे? मुझे क्या पूछ रहा है ये तो तुझे उस लडकी से पूछना चाहिए था जरूर पूछताछ मौका मिलता तो हाँ वो भी है । यानी अब का तो मिल गई । पर गार मिलने का कुछ फायदा जावेद को भी हो । शायद फोरेंसिक रिपोर्ट में कुछ निकले । कुछ देर दोनों शान्त रहे । अमर शांति से सिगरेट के कश मारता रहा । फिर उसने पूछा तो कहाँ गया था? श्रेणी के साथ मिनाज शमी के फ्लैट फिर उसकी दोस्त से पूछताछ करनी है । अच्छा कोई खास बात । जॉन ने सभी बातें बताई । अब क्या करना है? उस पंचर वाले से मिलना बाकी है जिसने जावेद के घर के सामने कचरे के डिब्बे में सबूत प्लांट करने वाले को देखा था । सही कहा चलो रिपोर्ट आने तक हम उसी से मिल लेते हैं । दोनों सीढियां उतर नहीं लगे । कुछ देर में वो जावेद के घर के सामने थे । पंचर वाला लडका रात को ही काम करता था इसलिए उन्होंने उसका नाम और पता मालूम किया और फिर उसके घर पहुंचेगा । वो घर पर सोया हुआ मिला । जॉन और अमर के अनुरोध पर उसकी माँ ने उसे उठाया । वो एक पंद्रह साल का लडका था । जॉन और अमर को देखकर थोडा घबरा गया । अमर बोला डर मत बेटा क्या ना में तेरह राजू वो बोला, बहुत बढिया नाम है । अमर ने कहा, अच्छा बेटा राजू हमको सिर्फ ये बताओ की वो जो आदमी जावेद साहब के घर के सामने रात को कचरे में कुछ डाल रहा था, क्या तुझे उसकी शक्ल यादव नहीं सब बहुत मेरा था, फिर भी देखने में कैसा था, कदकाठी वगैरह आपके जितना ही लम्बा होगा और शरीर की बनावट आपके जितना ही तंदुरुस्त रहा होगा । जॉन ने हस्कर अमर से कहा ऍम! अब तो ही तो मेरा राजु अमर समझाने के ढंग से हाथ उठाकर बोला । ऐसे ही कुछ भी मत बोलो । ध्यान से याद करके बोलते हैं साहब, मैं एकदम सही कह रहा हूँ । ठीक है कुछ और बताओ और क्या बताऊँ मैंने सब तो बता दिया क्या कहा मैं उसके अलावा कोई और भी था या वही गाडी चला रहा था और ड्राइविंग सीट से उतरा था । राजू सोचने लगा । फिर बोला शायद कार में कोई और भी था । हालांकि ड्राइव तो वही कर रहा था और कौन था? अमर ने पूछा वो तो बिल्कुल भी नहीं देखा साहब, अंधेरा बहुत है । मैंने कहा ना, जब बाहर आया कुछ नहीं दिख रहा था तो गाडी के अंदर क्या देखेगा? पर जब गाडी का दरवाजा खुलता है तो गाडी के अंदर लाइट जल जाती है जिससे शायद नजर आया हूँ । राजू अपना फिर खुजाने लगा फिर बोला लाइट तो जाली थी तभी मेरा ध्यान एकदम से उस तरफ गया था साडी कार के दरवाजे के खुलने की आवाज आई थी । शाबाश! अमर बोला तो याद करो जब लाइट चली थी दो अंदर कौन दिखा था? राजू छत की तरफ देखते हुए सोच रहा था । अमर बोला जोर लगाओ हम जो कुछ भी देखते हैं सब हमारे दिमाग में होता है । कभी कभी उन्हें बाहर निकालने के लिए थोडा जोर लगाना पडता है । खान साहब याद आया उसने मेरी तरफ मुड कर भी देखा था । उसका चेहरा एकदम चौसेला आम जैसा था । जाडी मुझे नहीं थी । दोबारा देखा तो पहचान हो गए । शायद उतने अच्छे से शकल नहीं देखी थी न दूर से । फिर अमर और जॉन राजू को ऑफिस लेकर गए और उसके वर्णन के अनुसार एक स्केच बनने लगा । राजू के कहे अनुसार बनवाया स्कैच कारगर साबित हुआ । उस शख्स की चौक के एक पुराने से घर में मौजूदगी की खबर मिली । ये बात पुलिस को बताने की जगह इस बार अमर और जॉन खुद वहाँ पहुंचे । वो शांति से काम करना चाहते थे और उन्हें गिरफ्तार करने की बजाय उनकी हरकतों पर नजर रखने का इरादा रखते थे । दोपहर का समय था । धूप बहुत तेज थी । चौक पहुंचकर कार उन्होंने मुख्य सडक पर ही बात कर दी । कार के ठंडे वातावरण से बाहर निकलते ही उनका सामना गर्म हवा के थपेडों से हुआ । दोनों तंग गलियों से होते हुए उस घर के पास पहुंचे । वो छोटा सा घर था । मुख्यद्वार बंद था । बाहर चार जोडी जूते रखे हुए थे । वो दोनों पासी एक पान की दुकान पर खडे हो गए । अमर सिगरेट पीने लगा और फिर दोनों इधर उधर की बातें करने लगे । करीब बीस मिनट बाद चार आदमी उस घर से बाहर निकले । उनमें से की बडी सी गाडी थी और उसने कुर्ता पजामा पहना हुआ था और बाकी सब ने पेंशन । अमर ने जॉन को इशारा किया और वह उनका पीछा करने के लिए निकल गया । कार की चाभी उसके पास थी । अमर वही बता रहा और उसने पान वाले को एक पान लगाने के लिए कहा । उन चार आदमियों के जाने के बाद घर का दरवाजा एक बार फिर बंद हो गया था । अभी अमर अपना अगला कदम उठाने का इरादा बना ही रहा था । क्या अचानक उसकी नजर उस घर के सामने वाले दो मंजिला घर की बॉलकनी पड गई । वहाँ उसे एक लडकी कैमरे के साथ दिखाई थी । लडकी ने स्तर पर दुपट्टा ओढ रखा था । शायद तेज धूप के कारण और आंखों पर ब्राउन कलर के गौर थे । यहाँ तो पहले से जासूसी चल रही है । अमर ने पान की एक मोटी पिचकारी तो की फिर उस दो मंजिला घर की तरफ बढ गया । उसका मुख्यद्वार खोला था । वो अंदर बढता चला गया । अंदर कोई दिखाई नहीं दिया । उसके ऊपर जाने वाली सीढियां नजर आई । वो सीढियाँ चढता चला गया । फिर वो उस फ्लैट के सामने पहुंचा जिसकी बॉलकनी पर वो लडकी थी । उसने कॉलबेल बजाई । अंदर से आवाज आई कौन है? लडकी की आवाज थी इसलिए उसे लगा वही कैमरे वाली लडकी है । मैं नाम कोरियर वाला आपका पार्सल हैं । अमर बोला, कुछ देर में दरवाजा खुला । अमर को देखकर लडकी चौकी उसने दरवाजा बंद करने की कोशिश की पर अमर दरवाजा धकेलते हुए अंदर आ गया । यह क्या बदतमीजी है । लडकी चिल्लाई था और तुम जो दूसरों के घर में ताकझांक कर रही हूँ वो क्या है? तुम यहाँ क्या करें? अमर अमर ने उसे ध्यान से देखा और बोला नहीं तो हाँ मैं कहकर उसने अपना चश्मा उतार दिया । अमर उसे तुरंत पहचान गया । कल रात ही तो उससे मिला था । वह दिन की थी तो कल कहाँ गायब हो गई थी तो मैं ऐसे कैसे गायब हो सकती हो और अब तुम यहाँ क्या कर रही हूँ? शायद से क्या मतलब? तुम रात को अपना काम कर रहे थे । मुझे लेट हो रहा था तो मैं तुम्हारी कार से उतरकर चली गई । ये क्या बात हुई? मैंने तो मैं कहा था ना, पुलिस को बयान देना होगा अच्छा वो सब छोडो और ये बताओ तो मैं घर की निगरानी क्यों कर रही हूँ? रिंकी मुस्कुराई मुस्कुराते हुए उसके गालों पर गड्ढे पड गए । इतने सवाल पूछो गे कुछ नहीं पडेंगे तुम्हारी हरकते ही ऐसी पूछो और पूछ मैं सोचूंगी । जवाब दे रहा है कि नहीं अच्छा जवाब तो देना पडेगा और आज मेरे साथ थाने भी चलना पडेगा । ऐसे ले जाओगे मुझे । जिनकी प्यार भरे स्वर में उस की ओर हाथ बढाते हुए बोली अमर नहीं उसका हाथ पकडने की कोशिश की पर उसने झट से हाथ हटा लिया । अमर उसकी तरफ लपका वो लहराकर एक तरफ फट गई । इस बार अमर सतर्क होकर उस पर कूद पडा जिनकी कलाबाजी खाकर एक तरफ कोर्ट गई और उसने अमर की पीठ पर लाख जल्दी अमर ने किसी तरह खुद को गिरने से बचाया । फिर वो पलटकर आंखे फैलाकर उसे देखने लगा । तुम हो क्या चीज? अब सच सच बता दूँ क्यों? तो तो मुझे कुछ डलवाना चाहते थे । इतने में ही हिम्मत हार गए हूँ तो माम लडकी तो नहीं हो सकती है । कहते हुए अमर ने रिवाल्वर निकाली या तो मच्छी हो या तुम बुरी हो नथिंग इन बिटवीन । तभी फ्लैट का दरवाजा पूरी तरह से पीटा जाने लगा । दोनों ने चौकर उस तरफ देखा, दरवाजा खोलो, बाहर से आवाज आई जिनकी ने भागकर बॉलकनी से नीचे देखा । वहाँ दो आदमी नजर आए । वो दबे स्वर में अमर से बोली ये लोग नीचे भी हैं, हम लोग फंस गए । अमर ने भी बॉलकनी से देखा फिर मोबाइल निकाला और जॉन का नंबर मिलाते हुए रिंकी से पूछा इस बिल्डिंग फ्लैट का नंबर क्या है? रिंकी ने बताया जॉन ने फोन उठाया । अमर ने उसे बताया कि वो इस फ्लैट में फंस गए । तभी दरवाजे पर जोरदार प्रहार हुआ । दोनों में चौकर उस तरफ देखा । दरवाजा तोडने की कोशिश की जा रही थी जिनकी बोली हम इंतजार नहीं कर सकते । कुछ करना पडेगा अमर सोचने लगा फिर बेल करने की तरफ आ गया । नीचे खडे आदमियों का ध्यान ऊपर नहीं । अमर सिंह जी से बोला हमें छत की तरफ जाना चाहिए पर कैसे रिंग के ऊपर देखते हुए बोली हैं अमर में जिनकी के गले में पडा दुपट्टा खींच लिया और फिर उसके एक छोर पर पत्थर लपेट दिया और फिर छत की रेलिंग की तरफ उछाला । दुपट्टा रेलिंग में फंस गया । फिर अमर ने उसे खींचकर गांठ बना दी और जिनकी को इशारा किया जिनकी दुपट्टा पकडकर पैर दीवार पर टिकाते हुए ऊपर चढती चली गई । कुछ ही पलों में वह छत पर थी । उसी प्रकार अमर भी छत पर पहुंच गया । छत पर पहुंचते ही वह बगल वाले घर की छत पर कूद गए और उसके बाद उसके अगले घर की छत पर पहुंचे । फिर वो उस घर से नीचे उतर आए । कहीं कोई व्यवधान नहीं आया पर गली में वापस आते ही उन दो आदमियों की नजर उन पर पडी हैं । उनमें से एक चलाया रुका अमर और रिंकी उनकी तरफ देखे बगैर विपरीत दिशा में चलते चले गए । अमर और रिंकी उनकी तरफ देखे बगैर विपरीत दिशा में चलते चले गए और फिर उन्होंने दौडना शुरू कर दिया । दोनों आदमी भी उनके पीछे दौडने लगे । अचानक अमर रिवॉल्वर निकालकर पालता रिवॉल्वर देखकर वह दोनों एक तरफ फट गई और फिर उन्होंने भी अपनी जेब से देसी तमंचे निकली है और फिर उनकी तरफ फायर भी कर दिया । अमर एक तरफ आता और जवाबी फायर करते हुए पीछे हटने लगा । दोनों एक घर की ओर में हो गई थी । तभी गली में दो और आदमी प्रकट हुए । उनके हाथों में मशीनगन थी और वहाँ पे अमर के मुंह से निकला और फिर वो और रिंकी सिर पर पहुंचकर भागे । वो लोग उन के पीछे थे । अमर और रिंकी गली गली भागते रहे और बार बार मुडकर उनको छकाते रहे । अंत में वह मेन रोड पर पहुंचे । वहाँ की चहल पहल की वजह से शायद वो लोग आगे ना सके और गली में ही रुक गए । अमर ने अपनी जेब से मोबाइल फोन निकाला और जॉन को फोन किया । कहाँ है मेरे आम? जॉन बोला तो कहाँ है? अमर ने पूछा अरे, मैं तो उसी फ्लैट में हूँ जहाँ तूने मुझे बुलाया था । पर यहाँ तो कोई भी नहीं है । दरवाजा भी टूटा पडा है । तेरे साथ कोई और है । अमर ने पूछा फिलहाल नहीं पर मैंने चीज को फोन कर दिया । स्पेशल कमांडोज पहुंच गए होंगे । हाँ, उनसे कहना पूरे मोहल्ले को सील कर लेंगे । यहाँ कई आतंकियों ने डेरा डाला हुआ है । हमारे पीछे पड गए थे । उनके पास मशीन भी है । अभी फिलहाल हम दोनों मेन रोड पर निकल आए । दोनों कौन? जॉन ने पूछा मेरे साथ वही कल रात वाली लडकी रिंकी वो तुझे कहाँ मिल गए उसी फ्लैट में जहाँ तू खडा है । अच्छा वहाँ क्या कर रही थी? पूछना बाकी है तो तुम वहाँ क्या कर रही थी? अमर सिंह की की तरफ उल्टा पर वहाँ नहीं थी । अरे अमर के मुंह से निकला और वह चारों तरफ खून खून कर उसे देखने लगा । पर रिंकी एक बार फिर गायब हो गई थी । जावेद पर लगे इल्जाम बेहद संगीन थी । मामला आतंकवाद से संबंधित था इसलिए पुलिस इन्वेस्टिगेशन के साथ सीबीआई के पास पहुंचा । सीबीआई ने पूछताछ के लिए जावेद को अपने हेड क्वार्टर बुलवाया । वहाँ जावेद से निरंतर छह घंटे पूछताछ चली । जावेद के पास किसी सवाल का जवाब नहीं था । नहीं तो ये बता सकता कि वह असलाहा उसके पास कैसे आया? नहीं । उसने ये माना कि वह किसी तरह कि टेरेरिस्ट ग्रुप से जुडा हुआ है । पूछताछ के बाद जावेद को वापस पुलिस हिरासत में भेज दिया गया । सीक्रेट सर्विस का चीफ अभय कुमार इस पूरे मामले पर बहुत करीबी नजर रख रहा था । सीक्रेट सर्विस की साख पर सवाल उठ रहे थे जिनका जवाब देना उस पर भारी पड रहा था । इस बीच चौक के मोहल्ले में जब स्पेशल कमांडोज ने रेड मारी तो सभी आतंकी भाग गए । हालांकि एक उनकी पकड में आ गया जो अब तक की सबसे बडी कामयाबी थी । उसे पुलिस हिरासत में लिया गया और पूछताछ शुरू हो गई । उसे पकडवाने में क्योंकि अमर और जॉन का महत्वपूर्ण योगदान था इसलिए उन्हें भी पूछताछ में बढ चढकर हिस्सा लेने का मौका मिला । इस वक्त जलाल नाम के उस आतंकी को पुलिस ने टॉर्चर चेयर पर बैठा रखा था । कमरे में उसके अलावा अमर जॉन, इंस्पेक्टर धीरज, कमिश्नर गोपीनाथ और सीक्रेट सर्विस चीफ अभय कुमार भी मौजूद थे । पूछताछ के साथ साथ उसके फिंगर प्रिंट फोटो वगैहरा लेकर रिकॉर्ड से मैच किया जाने लगा । पूछताछ के वक्त उसने बिना कोई विरोध किया खुद कबूल किया कि वह हाल ही में बने आतंकी ग्रुप आईएसआई के का मेंबर है । आईएसआई के यानी इस्लामिक स्टेट ऑफ इंडिया इन कश्मीर तुम्हारे साथ ही कौन कौन है? कमिश्नर ने पूछा मेरे इतने साथ ही हैं कि मैं पूरा दिन बोलता रहूंगा तो खत्म नहीं होगी । उस ने कहा और हमारे आदमी ऐसी ऐसी जगह मौजूद है जिसे सुनकर आपका दिमाग हिल जाएगा । तुम से बात कर इंस्पेक्टर डंडा लेकर उसकी तरफ बढा फॅार । कमिश्नर ने उसे रोकने का इशारा किया । फिर कहा बताओ हम भी देखे हैं तुम किस तरह हमें चौंकाते हुए वो बोला हमारे आदमी आपके पुलिस आपके जासूसों में भी फैले हुए हैं जिनमें से तो पकडा भी गया । जावेद खान आप सबसे जानते ही होंगे पर आप लोग उसे ज्यादा समय तक पकडकर नहीं रखते होंगे । हम उसे किसी ना किसी तरह से छोडा लेंगे । झूठ बोल रहा है । वापस कराई अमर गुड जाकर बोला काम राउंड अमर इसे बोलने दो । अभय कुमार बोला पर्सनल अमर ने कहना चाहा पर चीफ ने उसे चुप रहने का इशारा किया तो मैं कि नहीं होगा । वो निर्भीक स्वर में बोलता चला गया । पर पहले जावेद कश्मीर में ऑपरेट कर रहा था । उसने पहले हमारे कई साथियों को मारा पर फिर उसकी मुलाकात हमारे हो जोर से हुई । उनसे बात करके उसे एहसास हुआ कि वह काफी हो गया था । इस्लाम के खिलाफ काम कर रहा था । उसे इस बात का मलाल हुआ कि उसने अपने हाथों से अपने ही भाइयों का फोन किया । उसके बाद जब लौटा तो वो आप के लिए नहीं बल्कि हमारे लिए काम कर रहा था । आईएसआई के के लिए काम कर रहा था तो उन लोगों को कश्मीर आजाद कराना है । तो फिर तुम लोग लखनऊ में क्या कर रहे हो? कमिश्नर ने पूछा, हम सिर्फ लखनऊ में ही नहीं पूरे हिंदुस्तान में फैले हुए हैं । आज लखनऊ मिलेगा तो कल कोई और शहर और तब तक हिंदुस्तान की सही ठेलती रहेगी जब तक कि कश्मीर आजाद नहीं हो जाता है । ऐसे किसी तरह बेकार की बातें करता रहेगा । जॉन बोला, हमें इसका मुँह खुलवाना चाहिए ताकि ये अपने असली साथियों का पता ठिकाना बताए । अपना पूरा प्लान बताए । उसके बाद काफी कोशिश की गई पर उसका मुंह खुलवाना नामुमकि निकला । वो मरने के लिए तैयार था पर अपना मुंह खोलने के लिए नहीं । टॉर्चर का उस पर कोई असर नहीं था । वो जब भी मैं खोलता तो इनका भी बातें करता रहता है । इस बीच एक नई उत्पत्ति हुई । पुलिस के पास प्रीतम नाम का एक सफाई कर्मचारी पहुंचा । वो सफाई कर्मचारी जावेद की क्वालिटी में झाडू लगाया करता था । उस ने ये बयान दिया कि उसने एक महीने पहले दो लोगों को जावेद के घर आते देखा था । आधी रात का वक्त था और उन्होंने अपनी गाडी से बडे बडे बैग उतारे थे । उसने उन्हें वह बैग खोलकर खतरनाक तरह के हथियार जावेद के हाथ में देते हुए देखा था । पुलिस और सीबीआई के लिए ये बहुत बडी खबर थी । प्रीतम को तुरंत सीबीआई ने तलब किया और उसका पूरा बयान लिया गया । उसके बयान के आधार पर उन दो आदमियों में से एक आदमी का हो लिया । एकदम पंकज की तरह निकला । अब इस से ये बात मानी जाने लगे की पंकज भी आतंकी था उसका पुराना बैग्राउंड देखते हुए इस बात पर विश्वास करना और आसान था । सीबीआई ने माना कि पंकज भी जावेद का साथ ही था और किसी परिस्थिति के कारण जावेद को पंकज का खत्म करना पडा । जमाल से सीबीआई ने दोबारा पूछताछ की तो उसने इस बात की पुष्टि की कि पंकज भी उनका आदमी था पर वह पुलिस की नजर में आ गया था इसलिए जावेद ने उसे खत्म कर दिया । जावेद के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट बनानी शुरू कर दी । इस दौरान मिनाज के सिलसिले में जॉन इंस्पेक्टर साईराम से मिला जिसने इसके इस पर काम किया था । साईराम ने सब स्टेशन में उसका स्वागत किया । उसकी डेस्क के सामने बैठते ही जो हमने पूछा तो क्या ख्याल है? आपका ऍम की पेशंट थी, बिल्कुल थी । उसके बॉयफ्रेंड यही कहा था । उसकी फ्रेंड ने भी यही बोला था । क्या आपने उसके डॉक्टर से पूछताछ की थी? कौन सा डॉक्टर अगर वो डिप्रेस थी, साइकैट्रिस्ट पेशन थी तो कहीं इलाज भी करा रही होगी । किसी डॉक्टर को तो दिखाया होगा हमें क्या पता हमें तो उसके फ्लाइट से ऐसा कोई सबूत नहीं मिला था । फिर आपने कैसे मान लिया कि वह डिप्रेस थी? साईराम कुछ बोला नहीं, उसे देखता रहा । आपको समझना चाहिए कि बिना मेडिकल जांच के आप किसी को डिप्रेस या कोई और मानसिक बीमारी से ग्रस्त नहीं मान सकते हैं । अब हम को इतने डॉक्टर तो आती नहीं ना । आपको नहीं आती तो आपको पुलिस विभाग के डॉक्टर से पूछना चाहिए था । फोरेंसिक वालों से पूछना चाहिए था । साईराम कुछ नहीं बोला । वो चुप चाप उसे घूरता रहा । फिर कुछ सोचते हुए बोला हूँ कि हम जान सकते हैं कि आप ये तीन साल पुराने केस को फिर से क्यों खोज रहे हैं । सीक्रेट सर्विस अगर ऐसा कर रही है तो इस की कुछ तो वजह होगी । आपको क्या लगता है? जॉन कुछ तेज स्वर में बोला सर हम को तो लगता है आप उसे सोसाइट की जगह मॉडर के समझ रहे हैं । अगर केस की जांच पहले ही ठीक से हुई होती तो रिपोर्ट पढने के बाद मुझे आपके पास आने की जहमत नहीं उठानी पडती । साईराम चुप हो गया तो ये बात तो तय है कि मिनाज मानसिक बीमारी से पीडित थी पर इसका कोई पक्का सबूत नहीं है । सोसाइट करने की कुछ तो वजह होती है । आपने वजह तलाश करने की कोशिश की? साईराम कुछ नहीं बोला तो जॉन झुंझलाया कुछ बोला इस्पेक्टर जो बात हमको नहीं पता उसका क्या जवाब दें? अच्छा ये बताओ तुम साहनी को कब से जानते हो? साहनी उसका बॉयफ्रेंड इंडस्ट्रलिस्ट हमारा तो उससे इसके अलावा कोई काम नहीं पडा । अच्छा फिर उसकी दी हुई न्यू इयर पार्टी में तुम क्या कर रहे थे? साईराम बुरी तरह से चौका उसके चेहरे पर ऐसे भाव आ गए जैसे उसकी चोरी पकडी गई हो । जी उसके मुंह से सिर्फ इतना निकला जवाब दो जॉन आंखे फैलाकर बोला अब पार्टी में बुलाया था तो हम चले गए । इसका मतलब ये थोडी ना कि हमारी उनके साथ कोई सांठगांठ है । पार्टी में केवल तीस लोग इनवाइटेड थे । ज्यादातर बिजनेसमेन जिस तरह तुम बता रहे हो मुझे तो नहीं लगता है कि सहानी के पास तुम्हें एक इंस्पेक्टर को बुलाने की कोई खास वजह होगी । वो ऐसे ही थोडी जान पहचान तो हो ही गई थी । अच्छा जॉन से ध्यान से देखते हुए बोला तो पार्टी में क्या या सीखी थी? अय्याशी बच्चों का हाँ बताओ ना क्या किया था पार्टी में । अरे ऐसे ही पूछ रहा हूँ यार जॉन दोस्ताने भरे अंदाज में हसते हुए बोला मैं भी तो सोनू साहनी की पार्टी में क्या होता है? कुछ नहीं दारू दारू पी थी, खाना खाया था । बस अचानक ही जॉन के चेहरे पर गंभीर भाव आ गई और कुछ भी तो क्या होगा? नहीं । सोया नहीं था वहाँ पर साईराम का चेहरा एकदम से शर्म से लाल हो गया । शादी शुदा है ना तो जॉन का लहजा । अचानक से ऐसा हो गया । मान लो किसी क्रिमिनल से पूछ ताछ कर रहा हूँ । साईराम ने सिर्फ सिर हिलाया फिर भी वहाँ एक बाजारू औरत के साथ हम बिस्तर हुआ था ना साइना साईराम बगले झांकने लगा । उसने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा । इतना था जो क्यों कर रहा है? मुझे सब पता है अब मैं तुझे सीधी बात बोलता हूँ तो आज सोच ले । कल मुझे तो उससे सारी बात सच सच मालूम करनी है कि सहानी ने तो उस पर क्या दबाव डाला या क्या खिलाया पिलाया और कैसे तूने उसके झूठ को छुपाया । अगर तू कल मुझे साफ साफ बता देगा तो ये बात सिर्फ मेरे तेरे बीच रहेगी और अगर ये बात पता करने के लिए मुझे और हाथ पांव मारने पडेंगे तो उसके बाद तो समझ सकता है कि तेरी वर्दी उतरेगी और फिर उस पर केस चलेगा और तेरह नंगा सच में खुद तेरी बीवी को बताऊंगा जिसे जानने के बाद वो तुझे जरूर तलाक देगी । साईराम पसीना पसीना हो गया सर, उसके मुंह से निकला । वो कुछ कहना चाहता है, सुनी है तो और जॉन उठते हुए बोला अब मैं तो उससे कल सुबह में लूंगा । दूसरे दिन साईराम के आग्रह पर जॉन उससे पुलिस सब स्टेशन के बजाय एक रेस्टोरेंट में मिलने को तैयार हो गया । वहाँ उसमें जॉन को बताया कि साहनी नहीं उसे इस केस को दबाने के लिए दस लाख रुपये दिए थे । हालांकि साहनी ने ऐसा कभी नहीं कबूला कि उसने मिनाज का मर्डर किया था । उससे सिर्फ ये कहा कि वह अपने स्टेटस पर सवाल नहीं खडे होने देना चाहता । इसलिए केस को जल्द से जल्द बिना ज्यादा पूछताछ के बंद कर दिया जाएगा । साईराम में भी आते हुए बोला, देखिए अगर हमें लगता की सहानी साहब ने ही उसका फोन किया है तो हम उनसे कभी पैसे नहीं लेते हैं, बल्कि उनके खिलाफ कार्यवाही करते हैं । पर इन्वेस्टिगेशन से हमें उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला था । फिर हमें उनसे फ्री में पैसे मिल रहे थे तो इनकार नहीं कर सके । हमारे तीन बच्चे हैं और जॉन ने हाथ उठाया और बोला मैं समझ रहा हूँ पर कानून के रक्षक होते हुए तो मैं इतना तो दिमाग लगाना चाहिए था कि कोई तो मैं दस लाख रुपए सिर्फ इतने छोटे काम के लिए क्यों देगा? साहनी साहब तो करोडपति इतना बडा बिजनेस है । उनके लिए ये रकम क्या मायने रखती होगी? बिजनेस मैन को अपने हार पैसे की कीमत मालूम होती है । वो अपनी एक भी पाई अकारण कहीं नहीं लगा देता हूँ । और जहाँ तक मैं जानता हूँ सानी बहुत ही चालाक इंसान है । अब मैं तुम्हारा ये सीक्रेट अपने पास सुरक्षित रखूंगा पर इसके लिए तुम्हें मेरे लिए काम करना होगा । जी बोलिये, मैं तैयार हूँ । सांईराम तत्पर्ता के साथ बोला । जॉन ने अपना प्लान उसे बताना शुरू किया । फिर साईराम ने विदा ली । जॉन बेहद खुश था क्योंकि साईराम के बारे में उसे कुछ एजेंट से मिली ये जानकारी कारगर साबित हुई थी । अमर महानगर में घूम रहा था । जहाँ जावेद का था उसके खयाल से जावेद को बचाने का अब यही तरीका था कि कोई सबूत या गवाह मिल सके जो उसकी बेगुनाही साबित कर देंगे । वो वहाँ की बस्ती में पहुंचा, जहां श्रमिक लोग रहा करते थे । उसने प्रीतम नाम के उस सफाई कर्मचारी के बारे में पूछताछ करनी शुरू की जिसमें जावेद के खिलाफ गवाही दी थी । अंततः है उसे ये पता चला की कॉलोनी में एक ऐसा भी घर था जहां प्रीतम साफ सफाई करता था और घर के अंदर भी जाता था और अक्सर काफी समय अन्दर बिताया करता था । अब एक सफाई कर्मचारी का घर के अंदर लंबा काम होना अपने आप में संदेहात्मक बात भी है । अमर उस घर के सामने पहुंचा । घंटे का उत्तर ना मिलते थे । उसने दरवाजा खटखटाया तो पाया कि वह खुला हुआ था । वो अंदर पहुंचा पर अंदर कोई दिखाई नहीं दिया । वापस बाहर आ गया । तभी उसे अपने पीछे से चीखने की आवाज आई उसने पलट कर देखा । एक आदमी अपने बाजू को पकडे बैठक करा रहा था । चाकू उसके बगल में गिरा था और दूसरी तरफ रिंकी डंडा लेकर खडी थी तुम्हारी पीठ में छुरा घोंपने वाला था । ये हम अमर चाकू वाले से ज्यादा रिंकी को देखकर चौका था । तुम बार बार कहाँ गायब हो जाती हूँ । अमर पूछ रहा था कि तभी उस घर के अंदर से एक आदमी निकलता दिखाई दिया जोकि रिंकी पर फायर करने वाला था । अमर ने फुर्ती के साथ रिवॉल्वर निकाला और उस आदमी पर फायर कर दिया । गोली उसके पैर में लगी और वह चिल्लाते हुए एक तरफ गिरा । अमर रिंकी के पास पहुंचा और उसकी आंखों में झांकते हुए बोला क्यों तो मेरे साथ आंख मिचौली खेल रही हूँ । रिंकी कोई कोई नजरों से अमर की आंखों में देख रही थी तो मेरी जान बचाई । रिंकी के मुँह से धीरे धीरे ये शब्द निकले तो उन्हें भी तो मुझे बचाया । अमर बोला पर उसे लगा जिनकी जैसे उसे सुनने की नहीं बल्कि समझने की कोशिश कर रही हूँ । अमर ने जमीन पर बैठे आदमी की तरफ देखा जो फिर से हरकत में आने की कोशिश कर रहा था । अमर ने उसे अपना रिवॉल्वर दिखाकर चेताया वो चुप चाप फिर से बैठ गया । अमर बोला चलो पहले इन दोनों से निपटते हैं फिर बात करते हैं । रिंकी मुस्कुरा दी उन दोनों आदमियों के हाथ बांध दिए और फिर अमर ने पुलिस को फोन किया । उसके बाद वो उन दोनों से मुखातिब हुआ तो तुम दोनों ने उस सफाई कर्मचारी से जावेद के खिलाफ झूठी गवाही दिलवाई थी ।

Part 5

दोनों चुप रहे तो दोनों भी आतंकी ग्रुप आॅफ वो अभी भी चुप रहे । ये ऐसे नहीं बोलने वाले जिनकी ने कहा हाँ मैं जानता हूँ । अमर बोला इनका मुंहतोड टॉर्चर चेयर पर बैठने के बाद भी नहीं बोलता । चलो ये ना सही रेंकी तुम तो कुछ अपने बारे में बताओ । अमर ने कहा ठीक है जिनकी बोली फिर अमर का हाथ पकडकर उन दोनों से थोडा दूर नहीं आई । दरअसल में जो ऑफिसर हूँ कहकर उसने अपना आईकार्ड दिखाया । अमर नहीं सहजता के साथ हामी भरी । तुम्हें हैरानी नहीं हुई । रिंकी ने पूछा ज्यादा नहीं अमर बोला तुम्हारी हरकतों से मुझे इतना तो लग गया था कि तुम कोई अंडरकवर हो तो किस केस पर काम कर रही हूँ । इन्हीं आतंकवादियों के यानि आईएसआई के पर रिंकी बोली मैं क्रिकेट करते हुए कश्मीर से यहां पहुंची हूँ । हम लोग काफी समय से इनकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे । इतना हमें पता चल रहा था की इनका कोई बडा मिशन हैं । परमिशन के बारे में और कुछ भी जानकारी हासिल नहीं हो सकती हैं । ये लोग पिछले कुछ समय में तेजी से लखनऊ में सक्रिय होते थे इसलिए मुझे यहाँ आना पडा । खास बात ये है कि इनके साथ ही आम लोगों में छिपे हैं, जिन्हें हाल ही में रिक्रूट किया गया है । इन सब को देखो ये देखने में कहीं से आतंकी नहीं लगते हैं था । ये आतंकी कम पाए हैं । इनकी गतिविधियों से पता चल रहा है । इसलिए आईएसआई के इनके साथ गठबंधन होने की संभावनाएं भी साफ प्रकट हो रही हैं । युवा राइड अमर तो मैं शायद पता हूँ कि जावेद को इन्होंने किस तरह फसाया, किस तरह फसाया ये तो मुझे नहीं मालूम पर इतना जरूर पता था कि ये लोग पुलिस और सभी भारतीय खुफिया एजेंसियों को टारगेट कर रहे हैं । हमारा एक साथ ही रॉ ऑफिसर भी हाल में इनका शिकार हुआ था । ये लोगों से अपना एजेंट बनाने की कोशिश कर रहे थे । बहुत इनके इतनी हिम्मत । पहले तो हमें यकीन भी नहीं हुआ था पर ये जिस तरह का जाल बोलते हैं उसमें किसी को भी फसाना मुमकिन है । वो एजेंट उनके साथ नहीं मिला पर उसकी फैमिली खत्म हो गई ऍम तभी वहाँ पुलिस की गाडियां पहुंच है । अमर तुरंत रिंकी की तरफ पालता तो फिर तो खैर नहीं होने वाली है । ठीक है तुम कह रहे हो तो इस बार गैर नहीं होती । वो प्यार से अमर को देखते हुए बोले हैं, पर तुम मेरे बारे में पुलिस को नहीं बता सकते हैं । ऍम अमर ने का पुलिस पहुंची और फिर दोनों आतंकवादियों को गिरफ्तार कर लिया गया । साहनी अपने बंगले के हॉल में बैठा था । उसके सामने सोफे पर इंस्पेक्टर साईराम पसला हुआ था । दोनों चाय पी रहे थे । साईराम सूरत से थोडा हैरान परेशान नजर आ रहा था । क्यों? क्या हुआ? साहनी ने उससे पूछा सानी सर, एक बडी समस्या पैदा हो गई है । साईराम चिंतित भाव से बोला । उसने उस पर सवालिया दृष्टि डाली । हुआ ये है कि सीक्रेट सर्विस वाले हमारे पीछे पड रहे हैं । उन्हें कहीं से पता चल गया कि मिनाज शमी के केस में हमने आपकी मदद की है । ऐसा उन्हें किस तरह से पता चल सकता है? साहनी ने तेज स्वर में पूछा, हमें बिल्कुल भी नहीं पता सर, पर शायद उन्हें शक है कि मिनाज का मर्डर हुआ था? नहीं, ऐसा तो नहीं कि तुम ने उन्हें सब कुछ बता दिया । नहीं नहीं, आपके हमें बेवकूफ समझते हैं । हमें अपनी नौकरी प्यारी है । मैं जानता हूँ वो जरूर अमरिया जॉन में से कोई होगा । हाँ जॉब था साला चश्में पर आपको कैसे पता सांईराम हिरानी के साथ बोला अरे वही लोग तो मेरे नौकर पंकज के खत्म की इन्वेस्टिगेशन कर रहे थे । वो बच्चा और उसके लिए तो जावेद खान गिरफ्तार है ना? हाँ है तो और उसके विभाग के लोग उसे दोषी थोडी ना मानेंगे, उन्हें शायद मुझ पर सके इसीलिए वो मेरी हिस्ट्री खोज रहे हैं । अच्छा तो अब समझा साईराम सिर हिलाते हुए बोला लेकिन सर वो बहुत खतरनाक ढंग से आगे बढ रहे हैं । उन्होंने मिनाज के केस में सभी गवाहों को दोबारा टटोलना शुरू कर दिया है और उसकी बातों से लग रहा था कि उसे कोई चश्मदीद गवाह मिल गया है, जिसमें मिनाज का खत्म होते हुए देखा था । साहनी बुरी तरह से चौका कौन है? वह चश्मदीद गवाह उसने हमें नहीं बताया और शायद बताया भी ना, क्योंकि उसे लगता है हम आप से मिले हुए हैं, मिलता है तो मिलना तो मैंने कौन सा मिला आपका फोन किया था जो मैं और एक बात तुम भी समझ लेना । अगर तुम पैसों के लालच के लिए ये सब कर रहे हो तो जान लो तो मैं आप मुझ से कुछ नहीं मिलने वाला । ऍम आप क्या बोल रहे हो? हम ऐसे इंसान नहीं है जो किसी को ब्लैकमेल करें । पहले भी आपने खुद अपनी मर्जी से हमें वो रकम दी थी । हमने तो कभी आप पर कोई प्रेशर नहीं डाला था कहीं की हम झूठ बोल रहे हैं । नहीं तुम ठीक कह रहे मैं बस बोल रहा हूँ कि अगर तुम्हारे दिमाग में ऐसा खयाल आया तो नहीं । नहीं सर, वो सीक्रेट सर्विस वाले हमारे पीछे पडे थे तो हमने सोचा आप को भी आगाह कर दें । अगर आपको हमारा आना बुरा लगा हो तो माफी चाहेंगे । कहते हुए साईराम उठने का उपक्रम करने लगा । बैठ जाओ । साहनी ने आदेश दिया, साईराम रिमोट चलित रोबोट की तरह दोबारा बैठ गया । मुझे यकीन है तो मुझे धोखा नहीं हो गए । पर तुम ये पता लगाओ कि अचानक की चश्मदीद गवाह कौन निकला है । मुझे पूरा यकीन है कोई मुझे ब्लैक मेल करना चाहता है या फिर सीक्रेट सर्विस वाले मेरे खिलाफ झूठे गवाह पैदा कर रहे हैं । ठीक है सर, हम पता करते हैं इस की फीस तुम्हें मिल जाएगी । नहीं सर, प्लीज हमारी तो ही मत करिए । हमें कोई फीस नहीं चाहिए । पता लगते ही हम आपको बताते हैं । उसके बाद साईराम वहाँ से चला गया । रात हो गई थी जिनकी अमर के साथ उस घर में मौजूद थे । आज उन आतंकवादियों से पूछताछ नहीं हो सकती थी । अभी ये तय हुआ था कि जो भी पूछताछ होगी उसमें कमिश्नर और सिगरेट सर्विस की मौजूदगी अनिवार्य होगी । अमर सिंह जी से बात करना चाहता था इसलिए वह अमर के साथ उसके घर आ गई । अमर ने रिंकी को अपना घर दिखाया । फिर अमर के आदेश पर इमरती लाल डिनर बनाने लगा । डिनर से पहले बातचीत के दौरान अमर ने सूप मंगवा लिया । इतने बडे घर में तुम अकेले रहते हो । रिंकी ने पूछा हाँ अभी तक साथ रहने के लिए कोई मिला नहीं । रिंकी हस्ती तुम्हारे पेरेंट्स फॅमिली छोडो वो बात अभी शुभानंद ने मेरे परिजन की कहानी नहीं देखी । जब लिख देगा तब पता चल जाएगा जिनकी खिलखिला उठी । हसते वक्त उसके कंधे स्वता ही उड जाती थी जिससे वो एकदम बच्चों जैसी प्यारी लगने लगती थी । वह दुबली पतली सी मात्र पच्चीस साल के आस पास पर देखने वाले उसे स्कूल गल समझकर धोखा भी खा सकते थे । उसे निहारते हुए अमर बोला उनको देखकर कौन कह सकता है कि तुम रॉकी ऑफिसर हो सकती है? हाँ ये तो है तुम भी नहीं समझ पाए थे ना । जिनकी ने सूप का एक्सेप्ट लेते हुए कहा हाँ पर जिस तरह तुमने हाथ पहुंच चलाने शुरू किए थे । मुझे शक हो गया था वैसे तुम कहां की रहने वाली हो । नाम से नहीं पता चलता हूँ । कोलकाता था कितने साल से में हो तुम अपने बारे में तो कुछ बता नहीं रहे । मुझे सब जानने की उम्मीद कर रहे हो । अमर मुस्कुराया फिर गंभीर होते हुए बोला इस वक्त जावे । जिस मुसीबत में फंसा हुआ है उसमें तुम्हारी दी कोई भी जानकारी मददगार साबित हो सकती है । अमर मैं रॉकी क्लासिफाइड इन्फॉर्मेशन तो मैं नहीं दे सकती है । मैं समझ सकता हूँ और मैं भी एक जासूस हूँ, कोई आम आदमी नहीं । तुम बिन आतंकवादियों के खिलाफ ही काम कर रही हूँ और हम भी तो वही कर रहे हैं । अगर हम एक दूसरे की मदद नहीं करेंगे तो और कौन करेगा? इसके लिए हमें ऑफिशियल ऑर्डर वगैहरा । वो सबका टाइम किसके पास है? ठीक है हमारे मैं तुमसे इन्फॉर्मेशन जरूर शहर करूंगी पर कोई एविडेंस नहीं दे सकती । आॅन नायडू मैं जानती हूँ कि आईएसआई के खुफिया विभाग और पुलिस के कई लोगों को टारगेट कर रहा है । जब भी उन में से एक है जिसकी एक वजह यह भी है कि कई साल पहले कश्मीर में जावेद आर्मी में रहकर आतंकवादियों के खिलाफ कई अभियानों में शामिल हुआ था । अच्छा और और क्या जाना चाहती हूँ? क्या तुम साहनी के बारे में कुछ जानती हूँ? वो एक इंडस्ट्रलिस्ट जिसके नौकर के खून का इल्जाम जावेद के ऊपर है? हाँ वही वो आदमी संदिग्ध तो है लेकिन उसके बारे में मैंने कोई इन्वेस्टिगेशन नहीं ना उसके खिलाफ कोई ऐसा लीड मिला है । मैं तो लगातार आतंकी गतिविधियों पर नजर रखी हूँ । कश्मीर से दिल्ली पहुंची और फिर जब उनका प्लैन लखनऊ का बनने लगा तो मैं यहाँ आ गई । यहाँ तुमने अभी तक ये नहीं बताया कि उस रात तो आतंकवादियों के चुंगल में कैसे पहुंचे । मैंने बताया तो था उन्होंने मुझे किडनैप कर लिया था तो सस्ता बिल्कुल । लेकिन जैसे मुझे उन का वह बंद इमारत वाला अड्डा पता चल गया था । उसी अड्डे को ढूंढते हुए पहुंची थी कि अचानक मुझे उन लोगों ने पकड लिया । मेरे खयाल से वह जगह को छोडने का विचार कर रहे थे । उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं कौन हूँ तो मैंने सिर्फ ये बताया कि मैं अखबार की रिपोर्टर हूँ । जाली आईकार्ड मेरे पास पहले से ही था । जो मैंने उन्हें दिखाया तो उन्होंने मुझ पर यकीन कर लिया । हालांकि फिर भी उन्होंने मुझे मारने का फैसला किया । आगे तुम जानते योग ये लोग लखनऊ में क्या करने वाले हैं क्या तो मैं इसकी कोई जानकारी है । अभी तक की इंफॉर्मेशन के हिसाब से उन्होंने लखनऊ में सीरियल ब्लास्ट की प्लानिंग की है । ऍम जो आतंकी पकडे गए हैं वो तो अपना मुंह खोल नहीं रहे हैं । फिर हम कैसे लोगों को रोकेंगे? इनके छोटे मोटे आतंकियों के पास कोई इंफॉर्मेशन मिलेगी भी नहीं । ये सिर्फ जो काम दिया जाता है उसे करते हैं । हमी ने कैसे रोक पाएंगे? इसका तो मेरे पास फिलहाल कोई जवाब नहीं । पर जिस तरह से तुम्हारी मदद से चौक से हम उनको पहचान पाएगा और एक को पकड भी पाएंगे । अगर किसी तरह काम करते रहे तो शायद ये लोग अपनी प्लानिंग में फेल हो जाएगा । अमर मुस्कुराया तो बेवजह मुझे क्रेडिट दे रही हो तो मैं तो उन का ठिकाना पहले से पता था । तभी तो तुम उन पर नजर रखी थी । अरे नहीं, बेवजह नहीं । तुम भी तो आपने सोर्सेज के हिसाब से वहाँ पहुंचे थे । जिस तरह तुमने मुझे वहाँ पर आतंकियों से बचाया और आज फिर कमान । मैंने कुछ कमाल नहीं किया । जिस आदमी का स्कैच लेकर ढूंढते हुए पहुंचे थे, उसे तो पकडा नहीं पाए कमाल तो मेरे हिसाब से तुमने जरूर किया । रिंकी शोख अदा के साथ बोली वो स्केच मुझे दिखाना । अमर ने उसे उस शख्स का स्कैच दिखाया, जिसने जावेद के घर के पास वाले कूडेदान में सबूत प्लांट किए थे । नहीं, इससे तो नहीं जानती, पर इसका फोटो ले लेती हूँ । शायद कुछ पता चले कहकर जिनकी ने स्कैच की मोबाइल से फोटो ले लेंगे । उसकी नजर अमर की सूत बहुल की तरफ कहीं, जिससे अमर ने छुआ तक नहीं था और एक तुम्हारा तो ठंडा हो गया । अमर ने बहुल पर नजर डाली । फिर दिलफेक मुस्कान के साथ बोला तो उनसे बात करते हुए याद ही नहीं रहा । जिनकी चंचल स्वर में बोली फिर तो मुझ से दूर ही रहना । तुम्हारी याददाश्त खराब हो गई तो सीक्रेट सर्विस के लिए अच्छा नहीं होगा । सो पीने से याददाश्त अच्छी होती है । कहकर अमर ने बाउल उठाया और सीधे मुंह से लगाकर पूरा सूप एक बार में खत्म कर दिया । रिंकी खिलखिलाकर हस्ती तभी इमरती लाल पहुंचा खाना लग गया है । उसने रूके अंदाज से कहा उसने बुरा मोह बनाकर जिनकी पर एक नजर डाली और चला गया । लगता है तुम्हारे नौकर ने मुझे पसंद नहीं किया । झडों से वो बहुत ओल्ड फैशन है हूँ । डाइनिंग रूम में पहुंचकर दोनों ने खाना खाया । उसके बाद अमर नहीं एक कमरा रिंकी के लिए खोल दिया । वहाँ पर रिंकी नहीं । उसके सामने ही टेबल पर लेपटॉप और नजाने कौन कौन से उपकरण निकाल कर सकती है? मैं कुछ तेज लेपटॉप के साथ माथापच्ची करूंगी । शायद कुछ आतंकवादियों के बारे में नई इनफार्मेशन पता चले । तुम्हारे दिए स्कैच की भी जांच पडताल करूंगी । तुम चाहो तो साथ बैठ सकते हो । आॅड अमर उसके पास एक कुर्सी लेकर बैठ गया । कुछ देर लैपटॉप की स्क्रीन पर भारत पाकिस्तान का मैच दिखाई देता रहा और उस पर विभिन्न आतंकवादियों के चेहरे दिखने लगेगी । साथ में रिंकी अपनी मेल चक्कर दी गई, जिसमें कुछ नहीं इन्फॉर्मेशन आई थी । कुछ देर में वो बोली पाकिस्तान से कुछ नए आतंकवादी भारत में दिखाई दे रहे हैं । कमाल है इतना आसानी । इनका पता लगाना तो लखनऊ में क्यों नहीं? चप्पे चप्पे छान डालते हैं । नहीं, उतना ऐसा नहीं है । हालांकि बॉर्डर पर खास नजर रहती है तो डेटा में ये बात निकल कर आ गई । डेटाबेस में सिर्फ वही लोग हैं जो कि पहले से पता है कि आतंकी हैं । नए रिक्रूट के बारे में यहाँ से कुछ भी नहीं पता चलता । बहुत मुश्किल होता है । लखनऊ में काफी कोशिश कर रही थी । तब बडी मुश्किल से वो एक ठिकाना पता चला था । अभी रुको फिर से ट्राई करती हूँ । करीब आधे घंटे तक रिंकी कोशिश करती रही पर कोई सफलता हाथ नहीं आई । फिर रिंकी अपने अनगिनत ऑफिशियल की मिल पडती रही । जहाँ से उसे उम्मीद थी कि शायद कोई लीड मिल सके । रात के एक बच गए । अमर ने अंगडाई लेते हुए बोला कॉफी चलेगी नहीं, अब सोया जाए हूँ तो मैं चल रहा हूँ । गुडनाइट कहकर अमर उठ गया । गुड नाइट हूँ । एक मिनट रिंकी बोलिए, मेरे लिए पानी ला दो । प्लीज हो की कहकर अमर चला गया । कुछ देर में वो लौटा तो उसने पाया कि रिंकी नाईट ड्रेस पहन चुकी थी । गुलाबी रंग की कमर से कुछ ऊपर खत्म होती टीशर्ट और टू बाई थ्री पजामे में वो एकदम क्यूट सी लग रही थी । वो अपने मोबाइल में देख रही थी और अमर अपलक उसे देखे जा रहा था । जैसे ही उसका ध्यान अमर की तरफ गया अमर नजर चुराकर मेज पर पानी की बोतल रखने लगा । एक बात पूछनी थी अमर बोला हूँ पूछना वो वालों को खोलते हुए बोली । उसके बाद खुलकर लताओं की तरह उसके कंधे पर बिखर गए । कुछ आगे और कुछ पीछे जो की उसकी खूबसूरती को और बढा रहे थे । अमर आंखे बंद करके मुस्कुराया जैसे याद कर रहा हूँ क्या पूछ रहे थे? रिंकी ने पूछा मैं पूछ रहा था की तुमने राव में काम करना कैसे? चुनाव अचानक रिंकी के चेहरे पर गंभीर भाव आ गए । फिर वो मुस्कुराकर बोली ऐसी कोई खास वजह नहीं है । देश भक्ति की भावना और देश के दुश्मनों के लिए नफरत इस फिल्म में खींच लाई तो के अंदर मुस्कुराया । उसके बाद अमर गुडनाइट बोल कर बाहर निकल गया । उसके जाते ही रिंकी तेजी से अपने मोबाइल पर झपटी और किसी को कल लगाई हेलो! दूसरी तरफ से एक मरदाना आवाज आई फॅालो तुम कहाँ ही रह गया? कब से फोन ट्राई कर रहा हूँ मैं अमन वर्मा के घर पर बट तो वहाँ क्या कर रही हूँ उसे तुम पर शक हो गया तो नहीं होगा । हमें अमर से फायदा होने वाला है जैसा तुम ठीक समझे पर सावधान रहना तो बेहद चालाक इंसान है दूर तो फिर बहुत करते हो । तुम्हारा खयाल रखना मेरी जिम्मेदारी है । मैं समझती हूँ फोन रखती हूँ बाकि बातें बाद में हाँ रिंकी ने फोन एक तरफ रख दिया और वापस लेपटॉप के साथ उलझ गई । गुजरात के करीब एक बजे इंस्पेक्टर साईराम ने सहानी को फोन किया । बोलो साहनी मीन में था, पर उसका फोन उठाना फिलहाल मजबूरी था । सॉरी सर, डिस्टर्ब किया, पर बहुत जरूरी बात थी । आप बोलो, मैं सुन रहा हूँ । हमें पता चल गया है कि मिनाज के मर्डर का चश्मदीद गवाह कौन हैं? और ये भी पता चल गया है कि जॉन कल उससे गवाही लेने वाला है । अच्छा उस सतर्क होकर बैठ गया । उसकी नींद गायब हो गई । कौन है वो एक न्यूज रिपोर्टर कोई तो चैनल है, पता नहीं कौन सा पक्की बात है । हाँ, उसका नाम है रौनक । कुमार जॉन का प्लान है कि कल वो फोटो से लेकर कोतवाली आएगा और फिर वहाँ से सीधे जज के पास इतनी जल्दी । अरे इन लोगों की पहुंच हर जगह है । सबको सेट करके रखा है, क्या जानता हूँ? साहनी ने पूछा ये जॉन मेरे खिलाफ कोई मनगढंत कहानी बना रहा होगा । सर, हमें वो सब नहीं पता । हमें ये जानकारी अभी पता लगी तो सोचा आप को बता दिया जाएगा । ठीक किया तो कहाँ रहता है? क्या नाम बताया था रौनक कुमार और ड्रेस तो हमें पता है और आप क्या करना चाहते । उससे मिलकर कुछ सेटिंग वगैरह । वैसा कुछ कम से कम पता तो चले । वो कितना जानता है । काश हम आपकी मदद कर सकते हैं । और आप समझ सकते हैं कि अगर इस मामले में पडेंगे तो हमारी नौकरी जाएगी । मैं जानता हूँ ठीक है सर, एड्रेस लिखिए । साईराम ने रौनक कुमार को अब रस बताया । सहानी ने उसे नोटपैड पर लिख लिया ऍम अगर आपको मदद चाहिए तो हम हाजिर हो सकते हैं । पर क्या फिर होगी तुम्हारी? अभी सर ये तो डिपेंड करता है कि आप क्या काम करवाना चाहते हैं । अगर किसी को रास्ते से हटाना है, वैसा कुछ करना है तो फीस अगर किसी को रास्ते से हटाना है, वैसा कुछ करना है तो फिर ज्यादा होगी । अरे आज तो मुझे समझाते गया हूँ मैं कोई ऍम हूँ जो लोगों को रास्ते से हटाना फिर उन्हें सर हम तो बस एक बात कह रहे थे खुद फांसी पर चढने से तो अच्छा है । अपने दुश्मन को रास्ते से हटा दूँ तो मैं फांसी पर नहीं चलने वाला । मैं बस तुम्हारी मदद रौनक कुमार से मुलाकात नहीं चाहता हूँ क्योंकि तुम पुलिस वाले हो तो शायद कुछ काम आ जाता हूँ । ठीक है सर, आप जो समझो दे देना तो छोटा सा काम है । तो फिर आप अभी रौनक कुमार के घर पहुंच रहे हो था । मैं तुरंत निकलता हूँ । ठीक है हम भी पहुंचते हैं । साहनी ने फोन काटा फिर पांच मिनट के अंदर तैयार हो गया । उसने अपना मोबाइल लिया, जेब में रिवॉल्वर रखा और बाहर नहीं किया । उसने अपनी गाडी पोर्च से निकली गेट पर पहुंचा । गार्ड ने तुरंत दरवाजा खोल दिया । वो तेजी से कार को सडक पर लिया । रात का वक्त था इसलिए सडक सुनसान पडी थी । साईराम ने रौनक कुमार को जो एड्रेस बताया था, वहाँ पहुंचने में उसे मात्र बीस मिनट लगे । वो निराला नगर की एक बिल्डिंग थी । उसने बिल्डिंग के सामने कार रोकी और कार में ही बैठा रहा । तभी उसके फोन पर कौन आने लगी । उसने कॉल किसी की जी सर आप पहुंच गए । सांईराम ने पूछा हाँ मैं बिल्डिंग के सामने हूँ । अच्छा हम गेट पर पहुंच रहे हैं । फिर दोनों साथ में अंदर चलते हैं । गार्ड को हम पहले ही समझा दी हैं । ठीक है बोल कर उसमें कौन काटी और फिर गाडी से बाहर निकल आया । साईराम गली में सामने से आता हुआ दिखाई दिया । उसने काले रंग का लेदर जैकेट पहन रखा था और सर पर टोपी लगाई थी । सहानी को सामान्य रूप से शर्ट पेंट में देखकर वह बोला, सर हमारे पास रिकॉर्ड टोपी अगर आपको चाहिए तो काॅन् मैं यहाँ किसी का मर्डर करने नहीं आया । जो अपनी शक्ल छिपाता रहूँ, चलो चलते हैं । वह साईराम के साथ सोसाइटी के अंदर आ गया । इस सोसाइटी में चार दिन थे । ऍम साहनी बोला था । सेना बोला पीछे के साइड है । वो अंदर बढते गए । बिल्डिंग के गेट पर गार्ड ने उन्हें देखा पर साईराम के इशारा करने पर वह कुछ नहीं बोला । सीलिंग की लिफ्ट लॉबी दिखाई दी । दोनों उसी तरफ बढते चले गए । यहाँ से वो दोनों तीसरी मंजिल पर पहुंचे जो रौनक के फ्लैट पर । साईराम ने दस तक भी ऑन अंदर से आवाज आई । पुलिस सांईराम ने कहा, तुरंत दरवाजा खुला है । क्या काम है? इंस्पेक्टर साईराम दरवाजा खोलते ही उसने पूछा । वो छोटे कद का नौजवान युवक था । उसकी आंखों पर चश्मा था । आंखे देखकर लगता था कि उसे रात रात भर जागने की आदत थी तो मुझे जानते हो । साईराम ने पूछा पत्रकार हूँ इतनी जानकारी तो रखनी पडती है । बहुत इतनी रात को क्या काम आ गया । फिर उसकी नजर उसके पीछे खडे साहनी पर गई और वो तुरंत बोला वो तो ये बात है । ऍम साहनी दोस्ती भरे रवैये के साथ बोला हेलो मिस्टर साहनी! आपको जो चीज यहाँ खीजकर ला रही है वो मैं समझ रहा हूँ और आपको उसके बारे में कैसे पता चला ये भी समझ रहा हूँ । उसने साईराम पर नजर फेंकते हुए कहा, पर सच को सामने आने से अब आप रोक नहीं सकते । मैनाज शमी को इंसाफ मिलकर रहेगा । रोनक साहनी का स्वर शांत था । मैं भी दिल से यही चाहता हूँ । मैंने मेरी गर्लफ्रेंड थी तो उसको इंसाफ जरूर मिलना चाहिए । रोनक व्यंगपूर्ण ढंग से मुस्कुराया, किसे बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहा हूँ । बेवकूफ किसी को भी नहीं । तो मुझे लगता है कि मैंने नहीं ऐसा नहीं है । मुझे उस वक्त भी फल जाने की कोशिश की जा रही थी और फिर अब ये फैसला तो कोठी करेगा । अरे भाई, साईराम ने हस्तक्षेप किया । हमें बैठकर कुछ देर बात करने का मौका तो अच्छा । मुझे कोई दिक्कत नहीं और ध्यान रखिएगा आपकी कहीं कोई भी बात में अपनी स्टोरी में इस्तेमाल कर सकता हूँ । कहकर उसने उन्हें अंदर आने के लिए रास्ता दिया । दोनों के फ्लैट में आ गए । अंदर एक मेज पर कंप्यूटर ऑन दिखाई दिया और उसके अगल बगल, चाय के घंटे मांग, बर्गर के पैकेट और कोल्ड्रिंग की कुछ भरी और कुछ खाली बोतलें दिखाई नहीं । वो लोग कुर्सियों पर बैठ गए । जो रौनक कंप्यूटर के सामने पडी, रिवॉल्विंग चेयर पर बैठकर उनकी तरफ पलट गया । अब बोलिए उसने उतावलेपन के साथ कहा, तो हमारे पास क्या सबूत हैं? साहनी ने सावधानी से पूछा ये है सब? उसने अपनी आंखों की तरफ इशारा किया क्या देखा था नहीं और उससे ज्यादा बडा सवाल मेरे दिमाग में ये है कि तुम तीन साल से चुप क्यों थे? मैंने जो देखा वह आपके खिलाफ इस केस को फिर से खोलने के लिए काफी होगा । आप के झूठ का पर्दाफाश होगा । आपको सजा जरूर होगी । अरे भाई, साईराम बोला तो तुम्हारी इनके साथ कोई व्यक्तिगत रंजिश आ गया, जो ऐसा चाहते हो । अच्छा बताओ क्या देख लिया था तुमने? मेरी कोई रंजिश नहीं । सीधी बात ये है कि मैंने कत्ल वाली रात इनको मिनाज के फ्लैट में चाहते हुए देखा था । ऐसा कैसे हो सकता है? उस साहनी की तरफ पालता । आपने मुझसे झूठ बोला था । आपने तो कहा था कि आप उस रात फ्लैट पर नहीं गए थे । साहनी ने तैश में आते हुए साईराम को देखा तो उसने रोनक से बचते हुए उसे आंख मार दी । इसे जरूर कोई गलतफहमी हुई है । तो मैं ठीक से याद है कौन सी तारीख को देखा था मुझे । मैं तो वहाँ अक्सर आता था । मेरी गर्लफ्रेंड थी वो आप वहाँ प्रति वाली रात आए हुए थे । बहुत अच्छे से याद है मुझे आपकी सूरत तारीख तो गलत नहीं हो सकती क्योंकि इत्तेफाक से उस दिन मेरे दोस्त की उसी बिल्डिंग में बहुत पार्टी थी । जरूरत पडने पर वह भी इस बात को पुख्ता करने आ जाएगा तो मैं जरूर किसी और को देखा होगा । आप भाई खामा खाम, साहनी जी को परेशान न करो, वो निर्दोष हैं । लडकी ने सोसाइटी की थी साहनी जी तो क्या उस रात उसके फ्लैट में किसी भी और शख्स के होने का कोई सबूत नहीं मिला था? सबूतो अक्सर बनाया और बिगाडे जाते हैं । वो भेदभरी मुस्कान के साथ साईराम को देखते हुए बोला क्या बोल रहे हो? मैं बोल रहा हूँ कि रात काफी हो गई । मैं अक्सर देर तक जाता हूँ लेकिन इतना भी नहीं अगर बुरा ना माने तो क्या बाप उसका इशारा समझते ही सहानी झट से बोला देखो मैं कोई झंझट नहीं चाहता हूँ । कोर्ट कचहरी के चक्कर काटना मेरे लिए खराब है और मेरे बिजनेस के लिए तो और भी ज्यादा खराब है । तुम अपनी जुबान बंद रखने की कीमत बोला मिस्टर साहनी लगता है सच्चाई को खरीदने की आदत पड गई आप को पर आप क्या करेंगे? अगर इस बार सच्चाई बिकाऊ ना हो । रौनक की आवाज किसी क्रांतिकारी से कम नहीं है । क्या किया जाये? कहानी सर साईराम हाथ मलते हुए अर्थपूर्ण ढंग से बोला हम क्या कर सकते हैं? साहनी उठते हुए बोला अगर कोई देखने को तैयार नहीं है तो हम फिर कुछ नहीं कर सकते हैं । सच्चा तो मैं भी हूँ । देखते हैं किसका सच जीता है उसने । साईराम कोर्ट ने का इशारा किया । आपको तकलीफ देने के लिए माफी चाहते हैं । साईराम ने हैरतंगेज होते हुए साहनी की तरफ देखा, पर उसके चेहरे पर आए भागों में कोई बदलाव ना देखते हुए वो भी झिझकता सा । कमरे से बाहर निकलते ही रौनक ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया । तो अब क्या करना है? साईराम ने साहनी से पूछा कुछ नहीं कर सकते हैं सहानी सपाट स्वर्ण बोला देखते हैं कल क्या होता है । कल जो कुछ होगा उसके बाद कुछ भी कर पाना बहुत मुश्किल होगा । अभी भी सोच लीजिए साहनी बिना कुछ कहे लिफ्ट की तरफ बढ गया । साईराम भी उसके पीछे आ गया । वो सोसाइटी से निकलकर साहनी अपनी गार की तरफ बढ गया । कार का दरवाजा खोलकर उसने साईराम की तरफ एक बार देखा और थैंक्यू बोलकर अंदर बैठ गया । फिर उसने कार आगे बढा दी । कुछ देर साईराम वहाँ खडा उसकी कार को जाते हुए देखता रहा । उसके बाद वह विपरीत दिशा की ओर बढ गया । दो दिन बाद साहनी को उसके ऑफिस से उसके सभी कर्मचारियों के सामने पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया । उसकी गिरफ्तारी के वक्त जॉन भी मौजूद था जिसके चेहरे से खुशी छिपाए नहीं छिप रही थी । क्या मुझे बताया जाएगा कि मुझे किस जुर्म में गिरफ्तार किया जा रहा है? साहनी ने इंस्पेक्टर से पूछा, देखिए आप के ऊपर रौनक कुमार नाम के पत्रकार की किडनैपिंग का इल्जाम है । मैंने ऐसा कुछ नहीं किया । किसने लगाया मुझ पर ये इल्जाम सीक्रेट सर्विस नहीं । उनके पास विश्वस्त सूत्र हैं क्या दो दिन पहले रौनक कुमार नाम के पत्रकार के घर गए थे तो उसके घर जाना जुर्म है । उसके बाद से ही वो गायब है तो उसमें मैं क्या कर सकता हूँ? इंस्पेक्टर साईराम ने देखा था कि आप दोनों को जबरदस्ती धमकाकर अपने साथ गाडी में बैठा कर ले गए थे । बहुत तो ये बात है कहकर साहनी के चेहरे पर जहरीली मुस्कान आ गई । चलिए अब तो मेरे खिलाफ इतने लोग खडे हैं कि उनका सामना करने आगे आना ही पडेगा । पुलिस साहनी को लेकर पुलिस स्टेशन पहुंची । जॉन उनके साथ था । सहानी को लॉकअप में बंद कर दिया गया है । पुलिस स्टेशन में इंस्पेक्टर साईराम भी मौजूद था । कुछ लिखा पढी के बाद जॉन टहलते हुए लॉकप के पास पहुंचा । अंदर साहनी एक कोने में बेंच पर बैठा हुआ था । उसकी नजर जॉन पर गई । जॉन विजयी मुस्कान मुस्कुरा रहा था । बहुत खुश हूँ । साहनी ने पूछा आप मेरे लिए तो खुशी की बात है तो है लगता है मुझे यहाँ बंद करके तुम जावेद को बचा सकते हो ना भी बचा सकता हूँ । फिर भी तो मैं अंदर देखकर कुछ सुकून मिला है । वैसे तुम्हारी दुश्मनी किया है । जावेद कौन बोला मेरी कोई दुश्मनी है जावेद से । फिर तो मैं जावेद के बारे में क्यों पूछा क्योंकि मैं चाहता हूँ की तुम लोग ऐसा समझ रहे हो तो हम गायब हो । अगर तुम्हें कुछ करना है तो साफ साफ खोलकर करूँ । मैं तो सिर्फ अपना डिफेंस करूंगा और यहाँ से निकलने के बाद कुछ ऐसा करूंगा कि तुम्हें अपने किए पर पछतावा हो । आप जाकर कुछ बहादुरी की बातें कर रहे हो, फिर अभी तो तुम्हें सिर्फ ट्रेलर देखा है । पूरी फिल्म देखोगे तो सारी बहादुरी दुम दबाकर भाग जाएगी । सानी सेट अभी तो तुम्हारा सफर शुरू हुआ है । ये सफर अभी फांसी के तख्त पर जाकर ये खत्म होगा । सहानी मुस्कुराया और फिर आराम से बेंच पर लेट गया । जॉन में उस पर एक नजर डाली और फिर वापस चल दिया । दूसरे दिन सुबह सुबह साहनी को जज के सामने पेश किया गया । उस पर लगे इल्जाम को सुनकर जज ने उसे तीन दिन के लिए पुलिस रिमांड में भेज दिया । पुलिस कस्टडी में उससे ज्यादा पूछताछ नहीं हुई । उससे रोना की मुलाकात के बारे में पूछा गया । उसमें सिर्फ ये बताया कि जब उसे रोनक के बारे में पता चला तो वह उससे मिलने गया और उससे पूछा कि वह मिनाज के खतरों के बारे में क्या जानता है, जो रौनक ने बताने से इंकार कर दिया । उसके बाद साहनी को वापस लॉकअप में बंद कर दिया गया । उसे आश्चर्य हुआ कि तीन दिन रिमांड पर लेने के बाद भी उस से सिर्फ एक घंटे ही पूछताछ की गई । अगले दिन साहनी को अपने वकील से इसकी वजह पता चल गई । वजह ये थी कि मिलना सोसाइट केस फिर से खोला जा रहा था । रौनक कुमार की किडनेपिंग से ये अटकलें सामने आ गई थी कि साहनी अपने खिलाफ का वहाँ उठने नहीं देना चाह रहा है । जिससे कि ये शक जाहिर हो गया कि मिनाज मर्डर केस था । आत्महत्या का केस नहीं साहनी के वकील ने सरकारी वकील से मिलने की कोशिश जरूर की पर उससे कोई भी जानकारी हाथ नहीं आई । वो कोर्ट के बाहर किसी सेटलमेंट के लिए तैयार था । पर सैटेलमेंट होता भी तो किसके साथ । अब उसके खिलाफ एक मर्डर केस बन रहा था और सीक्रेट सर्विस चाहती थी कि मुझे उनको सजा जरूर हो । तीन दिन बाद साहनी को फिर से कोर्ट में लाया गया । वहाँ अमर जॉन साईराम सरकारी वकील के साथ मौजूद थे । दूसरी तरफ साहनी का वकील भी आया हुआ था । जज के आते ही कार्यवाही शुरू हुई । जज ने फाइल खोले बिना ही सरकारी वकील की तरफ देकर पूछा । ये केस दोबारा खोलने की वजह से हमेशा के कि पुनीत साहनी ने रौनक कुमार नाम के पत्रकार का अपहरण किया है, जो कि मिनाज मर्डर केस का चश्मदीद गवाह बनकर सामने आ रहा था और मगर तो अभी तक साबित नहीं हुआ है । साबित हो जाएगा सर, क्योंकि सीक्रेट सर्विस ने नए सिरे से इस केस की इन्वेस्टिगेशन की और बहुत से चौंका देने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनसे साफ जाहिर हो रहा है कि मिनाज का मर्डर हुआ था और वह किसी और ने नहीं, बल्कि उसके बॉयफ्रेंड यानि पुनित साहनी नहीं किया था । आपका क्या कहना है? जज साहनी और उसके वकील की तरफ पालता सर, मेरा तो खयाल है कि मेरे क्लाइंट को बेवजह ही टारगेट किया जा रहा है । इन को पहले ही पुलिस बेकसूर साबित कर चुकी है । वो तो है पर पुलिस वो साईराम की तरफ देखते हुए बोला ये भी तो शामिल है केस खुलवाने में न जाने पहले क्या इन्वेस्टिगेशन की होगी । साईराम लज्जित दिखाई देने लगा । हाँ तो बताओ क्या नया सबूत मिला है? जज बेसब्री से बोला । सेना बोला सर मिनाज मर्डर केस के बाद हमें उसकी बिल्डिंग का रात का चौकीदार नहीं मिला था क्योंकि वो कहीं गायब हो गया था । वो अब हमें मिल गया है । उसे हम साथ लेकर आए हैं । कहकर उसने राजेश नाम के उस चौकीदार को बुलाया क्यों भाई? जज ने पूछा दो साल पहले उस लडकी की मौत के बाद कहाँ गायब हो गए थे? सर? दो हाथ जोडकर बोला हम अपनी जान का खतरा महसूस कर रहे थे, इसलिए हम साउथ भाग गए थे । किसी ने तो मैं धमकी दी थी जी सर कौन है वो लोग । कोई तो अज्ञात लोग थे । हमारी तो किसी से दुश्मनी नहीं थी । बोल रहे थे हमको महार देंगे तो हम यहाँ से भाग गए । सरकारी वकील राजेश से मुखातिब हुआ तुमने देखा था ना मिस्टर सहानी को । उस रात मिनाज के फ्लैट से निकलते हुए यहाँ साहेब राजेश तुरंत बोला । साहनी का वकील बोला, सर मेरे क्लाइंट की अगली बार उस वक्त भी सही मानी गई थी और आज भी सही है । बहुत दिन सिर्फ शाम तक मिनाज के साथ था । उसके बाद मिनाज अकेले ही फ्लैट में आएगी । मेरा क्लाइंट रॉयल क्लब चला गया था, जहां पर उसकी एंट्री थी । हस्ताक्षर थे और साथ में दो लोगों ने गवाही भी दी थी कि वह शाम से लेकर रात तीन बजे तक क्लब में थे, जबकि मॉडर मेरा मतलब । आत्महत्या रात को एक बजे के आस पास हुई थी । दो साल बाद अब ये झूठे गवाह लाने का क्या मतलब है? आप की रैली बाई भी तो झूठी हो सकती है । सरकारी वकील ने कहा सर, झूठ का फैसला कृपा करके आप दोनों ना करें । जज ने उन्हें डांटा । सर, मैं गवाह से कुछ सवाल करना चाहता हूँ । साहनी का वकील बोला जल्दी करो । उस रात तुम ड्यूटी पर थे और तुमने किसी आदमी को मिनाज के फ्लैट में जाते हुए देखा । आदमी और कोई नहीं यही थे तो मैं वहाँ काम करते हुए कितना समय हो गया था । सात महीने साहेब वो सोचते हुए बोला तो हम सोचे थे । रात भर ड्यूटी बजाने के बाद दिन में ही सो पाते थे सहित फिर भी नहीं तो आती होगी । रात को नहीं है । अरे छिपाना कैसा है सर । सरकारी वकील बोला तो जज ने साहनी के वकील की ओर इशारा किया । रात को थोडी बहुत नहीं तो आती होगी जी पर उस वक्त हम नींद में नहीं थे । सहानी जी को फोन देखे थे । हम पहले भी उनके फ्लैट में आते हुए उस रात भी आए थे । तुम जाओ । जज ने बोर होते हुए राजेश को इशारा किया और कुछ उसमें सरकारी वकील की तरफ देखा । वकील बोला, सर जब सीक्रेट सर्विस इन्वेस्टिगेशन कर रही थी । तब कई लोगों को बोलते सुना था की मिनाल जबरस्ती और दरअसल किसी डॉक्टर ने ये ऍम नहीं दी । नहीं किसी डॉक्टर से उसका इलाज चल रहा था । आप क्यों नहीं समझते हो? डिप्रेस ये बात में अच्छी तरह से जानता था क्योंकि मैं उसके करीब था । साहनी तेज स्वर में बोला मैं खुद उसे कितनी बार डॉक्टर के पास ले जाना चाहता था पर वो कभी तैयार नहीं होती थी । तो इसका मतलब ये नहीं कि वो डिप्रेस नहीं थी । क्या डॉक्टर है? जॉन ने पूछा नहीं मैं डॉक्टर नहीं हूँ पर ऐसा कहीं नहीं लिखा कि सिर्फ डॉक्टर ही बीमारी समझ सकता है । आप चुका ये जज ने साहनी से कहा । फिर जॉन की तरफ मुडा सर अगर इजाजत हो तो जॉन ने निवेदन के साथ बोला बिल्कुल बोला ऑफिसर आखिर आपका ही कैसे फॅार मेरा सिर्फ यही कहना है कि वह डिप्रेस नहीं थी इसलिए डिप्रेशन के कारण आत्महत्या बोलना बेबुनियाद है तो उसके पास डिप्रेशन की दवा कहाँ से आई जो मौत के वास्ते उसके सिस्टम में मौजूद थी । साहनी का वकील हजार सर दवा पाना आपके देश में कौन सी बडी बात है? अधिकतर दवाएं बिना प्रिस्क्रिप्शन के ओवर दी काउंटर मिल जाती है । बिना उसके शरीर से जो ड्रग्स मिली थी वो पूरी प्लानिंग के साथ उसकी मौत से सिर्फ दो घंटे पहले ही खरीदी गई थी और दवा खरीदने वाला कोई और नहीं । साहनी जी का ही नौकर था । जज के सामने कुछ सबूत पेश किए गए हूँ ।

Part 6

सहानी जी के घर की तलाशी लेते वक्त उनके नौकर के कमरे से उसकी दवा की रसीद मिली है । तारीख कपिल से दो दिन पहले की है । साहनी बोला मेरे नौकर की बीवी को भी कोई मानसिक बीमारी थी । आप चाहे तो उससे पूछ सकते हैं । वो दवा उसने उसके लिए खरीदी होगी । क्या आप बता सकते हैं कि रसीद पर पेशन का नाम लिखा है क्या? ऑपरेशन का नाम तो नहीं लिखा है? जॉन बोला मैं बता सकता हूँ की मेरा नौकर बाहर जाकर क्या करेगा, क्या नहीं करेगा । मैं उस पर हुकूमत थोडी ना करता हूँ । देखिए अगर आप समझ सकते हैं कि ये बहुत महत्वपूर्ण सबूत है । सरकारी वकील ने कहा जॉन बोला एक और महत्वपूर्ण बात मुझे इन्वेस्टिगेशन के दौरान पता चली मैनाज की मौत कलाई की नसों को ब्लेड से काटकर हुई थी । मौत के बाद ब्लेड उसके इलाज के पास से ही बरामद हो गया था । मेरी समझ में यह नहीं आया की एक लडकी होते हुए वो शेविंग रेजर के ब्लेड का क्या कर दी थी । सर ये तो एकदम बेकार की बातें कर रहे हैं । लडकियों को क्या शेविंग ब्लेड घर के और कामों में इस्तेमाल करने की कोई पाबंदी साहनी का वकील बोला, नहीं पाबन्दी दो आदमियों को साडी पहनने पर भी नहीं है पर आप साडी पहनते हैं । जॉन बोला तो सभी को हंसी आ गई । सानी तक अपने चेहरे पर मुस्कान आने से रोक नहीं सका । उसका वकील पूरी तरह झेल गया । जज भी हंस कर बोला ऑफिसर जॉन हैं, अभी एक कमाल की बातें करते हैं । जॉन पूरी गंभीरता के साथ बोला, सर, यहाँ पर मैं बताना चाहूंगा की पुलिस को जो फ्लैट से सामान मिला था उसमें मिनाज का रेजर मौजूद हैं । वो रेजर जो आमतौर पर लडकियां प्रयोग करती हैं । इस बात से मेरे मन में शक पैदा हुआ । अन्यथा मैं ये नहीं सोचता कि शायद वो मर्दाना ब्लेड इस्तेमाल करती होगी । अचानक साहनी बोला, मैं अक्सर उसके घर आता था । मेरा सामान भी वहाँ रहता था । पिछले इन्वेस्टीगेशन में मिला भी था । आप साईराम से पूछ सकते हैं । हाँ मुझे मालूम है । जॉन बोला पर आप तो इलेक्ट्रिक शेवर यूज करते हैं । मेहता सिलेक्टिव नहीं हूँ, जो मिल जाए यूज कर लेता हूँ । चलिए एक बार आपकी बात मान लेते हैं । जॉन बोला मानो उस पर एहसान कर रहा है । सरकारी वकील जल्दी से बोला शायद उसे डर था कि जॉन उसे बोलने नहीं देगा । सर, हम सभी जानते हैं कि शेविंग ब्लेड का पैकेट आता है । उसमें हर एक ब्रेड कागज के अलग अलग पैकेट के अंदर होता है । ब्रेड लाश के पास ही मिला था और वो एकदम नया था । तो फिर बाथरूम में ब्रेड के साथ उसका पैकेट भी मिलना चाहिए था । और दो साल पुरानी इन्वेस्टिगेशन में ब्रेड का पैकेट नहीं मिला था । जबकि वो ब्रेड एकदम नया था । यानी ब्रेड का पैकेट फ्लैट में नहीं था । जज ने पूछा, जी नहीं सर । साईराम बोला इस बात पर मेरा भी ध्यान गया था । पर फॉरेंसिक वालों ने अच्छी तरह से पूरा फ्लैट देखा था, पर उन्हें कहीं भी ब्लेड पर रैप करने वाला कागज नहीं मिला था । कूडादान भी चेक किया गया था तो कृपा करके अब आप बताएंगे आप लोगों ने क्या नया ढूंढ निकाला । जरूर सर । जॉन बोल दरअसल अगर आपने हाथ पर दस्ताने पहन रखी हूँ तो ब्रेड का पैकेट खोलना बहुत ही मुश्किल होता है । आपको एक दम अजीबो गरीब चोरी देते हैं । जरूर विदेशी चैनल्स देखने का शौक रखते हैं । सहानी का वकील हस्कर बोला, मैंने खुद टेस्ट करके देखा है । आप भी कर के देख लो कहकर जॉन ने एक ब्रेड का बंद पैकेट और दस्ताने साहनी के वकील की तरफ उछालती वकील ने हर बढाकर उसे कैच किया और फिर जज को देखने लगा । हाँ करिए, मैं भी तो देखो । जज ने उत्सुकता के साथ ही ज्यादा क्या वकील साहनी की तरफ देखा और फिर दस्ताने पहनकर ब्रेड का कागज खोलने की कोशिश करने लगा । बडी जद्दोजहद के बाद उसने उसे खोला और फिर उसने अंदर का ब्लेड निकाल दिया । इस कार्य को करने में उसे एक दो मिनट लगे । खुल गया । वो बोला इतना भी मुश्किल नहीं था । जॉन ने एक और ब्रेड का पैकेट निकाला और कहा, अब देखिए मैं नंगे हाथों से इसे खोलकर दिखाता हूँ । उसने पांच सेकंड के अंदर कवर खोल दिया और अंदर से ब्लेड निकाल दिया । फिर वो बोला, सर सोचिये जो आदमी मॉडर करने जा रहा हूँ, क्या वो थोडा हाथ बढाएगा? नहीं? क्या वो इतना सब रखेगा? उसने जरूर बिना दस्ताने पहने जल्दी से ब्रेड बाहर निकाला और ऑर्डर करने के बाद जब सारे सबूत छुपाया मिटा रहा था तब उसका ध्यान ब्रेड की तरफ गया । उसे एहसास हुआ कि ब्रेड के रैपर पर उसके फिंगरप्रिंट आ गए जो कि उसे फंसा सकते हैं तो उसे अच्छे से साफ कर देता है । पर फिर भी गलती की गुंजाइश रह जाती है । इसलिए उसने फैसला किया कि कागज को कहीं और ठिकाने लगाया जाए । कहकर एक सबूत जज के सामने पेश किया गया । सर इसमें उस बुलेट के कागज करें पर हैं जिससे मिनाज की मौत हुई थी और इस रैपर पर मिस्टर साहनी के फिंगरप्रिंट्स मौजूद हैं । साहनी जॉन को घूमे जा रहा था । यहाँ पर आपको मिला कहाँ से? जज ने आश्चर्य प्रकट करते हुए पूछा जी सर जॉन ने कहा ये रहे पर मुझे मिनाज के फ्लैट से ही बरामद हुआ है । अब दो साल बाद जी पर फ्लैट में कहाँ से वह बाथरूम की खिडकी के बाहर रेल के नीचे जो जगह होती है उसमें फंसा हुआ था, जहाँ कुछ और भी कचडा था ऐसी जगह जो कभी साफ नहीं की जाती है । अब ये तो मेरी भी समझ में नहीं आया कि इनके जैसे चालाक इंसान ने इतनी बडी गलती कैसे कर दी? क्यों मिस्टर साहनी हाँ तो सबूत बडे आराम से अपने साथ भी ले जा सकते थे । इससे यही पता चलता कि इन्होंने बॉर्डर में हडबडी की और क्यों ना हो । ये कोई पेशेवर मुझे तो है नहीं होते तो आराम से ये सारे सबूत अपने साथ ले जाते हैं । साहनी कुछ बोला नहीं । वह निरंतर जॉन को देखे जा रहा था । सभी कुछ भी आलतू फालतू सबूत उठा कर लिया है । वकील बोला इस बात का क्या सबूत है कि ये सबूत उसी फ्लैट से मिला । दो साल हो गए । बारिश के दो सीजन निकल गए । कागज कब का धुल गया होता? इस बात की क्या गारंटी है कि ये कागज का टुकडा खत्म वाले दिन से वहाँ पडा है या फिर ये खुद ही कहीं से उठाकर नहीं ले आए । सीक्रेट सर्विस ने तो साहनी साहब के बंगले की जांच पडताल भी की है । वहीं से उठा लाए होंगे लोग । जॉन ने साहनी के वकील को इस तरह देखा जैसे उसने बचकानी बात कही है । हाँ, मुझे इतना बेवकूफ समझते हैं । मैंने फ्लैट की शिनाख्त की । मेरे साथ फॉरेंसिक एक्सपर्ट था । जब मैंने फ्लाइट की शिनाख्त की तो मेरे साथ फॉरेंसिक एक्सपर्ट भी था । ये उनकी रिपोर्ट है जिसमें लिखा है कि उन्होंने ये सबूत कब और कहां से उठाया? रही बात बारिश की तो खिडकी के ऊपर शेल्टर इतना लंबा है कि मुझे नहीं लगता कि बारिश में वहाँ पानी की कुछ सीटों के अलावा पानी पहुंचता होगा । वो जगह कोई नाली भी नहीं है कि पानी गिरे और कचरा बाहर आ जाए । मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर उस कचरे में पांच साल पुरानी चीजे भी मिल जाएगा और अगर आप मेरे इन सभी तर्कों को नकार भी नहीं । फिर भी मेरे पास तार के अलावा एक तथ्य भी जिस को नकारा नहीं जा सकेगा हो गया । जज ने चश्मा उतारकर जॉन को देखते हुए पूछा जयपुर पर मिनाज के खून के निशान भी अब बताइए किस पर? पर सानी के फिंगरप्रिंट्स और मिनाज का खून एकसाथ कैसे? जॉन के इस तथ्य को सुनकर साहनी का वकील ला जवाब हो गया । जज ध्यान से फोरेंसिक की वो रिपोर्ट पडने लगे । फिर बोले, मैं क्या आपको किसी को जब की जानकारी हासिल हुई कि सहानी ने लडकी का खत्म क्यों किया? नौं जॉन बोला, फिलहाल तो नहीं मेरे खयाल से यह बात साहनी जी को ही अब बता देनी चाहिए । साहनी धीरे से हजार मुझे पता करना बहुत जरूरी है । जज बोला मुझे पता है पर फिलहाल पता नहीं चल सका है । सरकारी वकील से रहा नहीं गया सर मर्डर साबित करने के लिए मोटिव का होना जरूरी नहीं । आप यहाँ मुझे मत सिखाओ । जज को चढकर बोला । वकील ने नजरे झुका ली । जज कुछ लिखने लगे अपनी नजरें कागज से उठाए बिना वो बोले किसी को कुछ और बोला है । साहनी का वकील तुरंत बोला, सर, मैं तो यही बोलना चाहता हूँ कि मेरे क्लाइंट को बेवजह फंसाया जा रहा है । जज ने नकारात्मक ढंग से सिर हिलाया और बोला होने कहानी के खिलाफ मिले सबूतों और गवाहों के साथ छेडछाड करके इन्वेस्टिगेशन में बाधा डालने की बात को मद्देनजर रखते हुए हैं । उन्हें अगली सुनवाई तक जुडिशियल कस्टडी में रखा जाएगा । फॅस उसने तेज आवाज लगाई । साहनी का वकील सब ऐसा खडा रह गया । हालांकि साहनी के चेहरे पर शिकन भी नहीं थी । जॉन विजयी मुस्कान लिए सहानी के नजदीक पहुंचा । वह शांत लहजे में जॉन से बोला, ऍम थैंक्यू जॉन । पूरी बेबाकी के साथ बोला जेलयात्रा मंगल मय हो । वो पालता और तेजी से अमर के साथ बाहर की तरफ बढ गया । सहनी जेल पहुंच चुका था । उसे छोटा सा सेल मिला था जो उसे एक और कैदी के साथ शेयर करना था । दूसरा कैदी एक बैंक ऑफिसर हुआ करता था जो कि गवन के केस में सजा काट रहा था । साहनी खुशकिस्मत था कि उसे एक पढा लिखा आदमी पार्टनर के तौर पर मिला था । वरना जेल में तो तरह तरह के दुर्दांत मुजरिम सजा करते हैं । उस ने राहत की सांस ली थी । जब पहली बार अपने रूम पार्टनर को देखा था वो शकल से ही कोई पेशेवर मुजरिम नहीं दिख रहा था । हालांकि राजीव नाम का उसका रूम पार्टनर ये जानकर की सहानी एक कत्ल के इल्जाम में अंदर आया है । थोडा बहुत भी जरूर था । साहनी राजीव के साथ बैठकर एकदम प्यार से बोला घबराना नहीं मैंने कोई कत्ल नहीं किया है । मुझे फंसाया गया । जल्दी यहाँ से छूट जाऊंगा । राजीव शांति के साथ साहनी की बातें सुनता रहा । फिर अंत में बोला और कोई यही बोलता है । वोट कर अपने बिस्तर पर बैठ गया और बोला अगर आप खत्म करके भी आया हूँ तो उस से मेरा आपके लिए नजरिया नहीं बदल जाता है । मैं खुद कोई बहुत शरीफ इंसान नहीं, मैंने गडबड घोटाला किया है और मैं जानता हूँ जेल में कोई शरीफ लोग नहीं आते हैं मगर वाकई मैंने कुछ नहीं किया । साहनी जोर देते हुए बोला उसने सहमती में सिर हिलाया । हालांकि ये साफ जाहिर हो रहा था कि उसे सहने की बात पर विश्वास नहीं हुआ । जेल के माहौल में साहनी को अभ्यस्त होने में काफी दिक्कत आ रही थी । उसे इतने छोटे और सख्त बिस्तर पर लेटने की आदत नहीं थी । नहीं इतने छोटे कमरे में रहने की सेल में काफी मच्छर भी होते थे । पहली रात तो उसे एक पल के लिए भी नींद नहीं आई । साथ ही जेल में उससे कोई भी बात करने को तैयार नहीं था । हर कोई उसे अजीब निगाहों से घूमता था । किसी का भी रवैया उसके प्रति अनुकूल नहीं था । हालांकि राजीव सेल के भीतर उससे थोडा बहुत बात करता था पर सेल के बाहर आकर वो भी अनजान बन जाता था । क्योंकि अभी भी वह ज्यूडिशियल कस्टडी में था और सुनवाई बाकी थी । इसलिए भी काफी लोग उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे थे । हालांकि पीठ पीछे उसके बारे में बात तो काफी चलती थी और जेल प्रशासन भी उस पर खास नजर रख रहा था । जेल में तीसरे दिन वो अकेला दोपहर के खाने के लिए बैठा था । जेल की मोटी रोटी बडे यकीन से जब आते हुए अचानक ही उसकी नजर आखिरी बेंच पर गई । जहाँ एक हट्टा कट्टा मुस्टंडे व्यक्ति गंभीर मुद्रा में खाना खाते हुए निरंतर उसी की तरफ देख रहा था । साहनी उसे एक झलक में ही पहचान गए । वो जावेद उसे देखकर पहले वो थोडा सकपकाया । फिर उसने उस पर जिज्ञासा भरी नजर डाली । जावेद उसे किसी भी तरह से परेशान नहीं दिखाई दे रहा था । जेल की वर्दी में वह काफी अलग दिख रहा था । उसने अपनी शर्ट क्या तीन भुजाओं तक चढा रखी थी और उसे देख कर लग रहा था जैसे जेल का खाना बेहद चाव से खा रहा हूँ । उसकी नजरें जावेद समिति जावेद ने कोई भाव नहीं बंदा और उस पर से नजदीक भी नहीं हटाई । तभी साहनी के कंधे पर किसी ने हाथ रखा । उसने पलट कर देखा । एक कैदी मुस्कुराता हुआ आगे जा रहा था । उसका चेहरा गोरा पतला था और उसने आंखों में काजल लगाया हुआ था । उसने अपने बगल बैठक कैदी पर नजर डाली जो तत्पर्ता के साथ उसे ही देख रहा था । दिल्ली आ गया । लगता मोनू भाई का कुछ पर वह अश्लील ढंग से हसते हुए बोला । साहनी ने कुछ जवाब नहीं दिया । उसने जावेद की तरफ देखा पर पाया वो अब अपनी जगह पर नहीं था । उसने बचा हुआ खाना प्लेट में ही छोडा और उठ खडा हुआ । अभी वो पालता ही था कि बुरी तरह से चौका जावेद उसके ठीक पीछे खडा था । साहनी ने उसको देखा और बगल से निकलने की कोशिश की पर जावेद उसके सामने आ गया । क्या हुआ मिस्टर साहनी पहचाना नहीं किया मुझे । जावेद कहते हैं याद है आप मेरी मदद के लिए मेरे घर आए थे । हाँ जावे कैसे हो बस एक लोग तुम्हारी दया से यहाँ तक पहुंच गया । शायद तो मैं भी ये गलतफहमी है कि तुम्हें फंसाने के पीछे में राहत है जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है । इस गलतफहमी के कारण तुम्हारे जासूस साथियों ने मुझे झूठे जाम में फंसा दिया तो मैं इतना बडा खेल खेल रहे हो तो मैं डर किस बात का है । साफ बोलो तुम्हारी दुश्मनी क्या समस्या है इसके लिए काम करते हो तो आईएसआई के किसी के लिए नहीं नहीं मेरी तुमसे कोई दुश्मनी कहकर साहनी आगे बढ गया । जावेद भी अपनी थाली लेकर उसके साथ साथ पढ रहा था । मैंने तो सोचा था कि आतंकवादियों के लिए जेल में एक अलग सेक्शन है । साहनी बोला आतंकवादी होने का सिर्फ काम है मुझ पर अभी कोर्ट ने आखिरी फैसला नहीं दिया इसलिए तो मैं इसी सेक्शन में झेलना पडेगा । मुझे जावे । बोला बुरा मत मानो । साहनी ने सहानुभूति के साथ कहा मैंने तो बस जानकारी के लिए पूछा था । मेरी जानकारी में भी कुछ इजाफा कर दो । इतना तो मुझे यकीन है कि तुम आतंकवादी नहीं, किसी और बात का बदला ले रहे हैं । उसे साहनी चुप रहा । अरे जब तक मुझे बताओगे नहीं तो मैं भी बदला लेने में क्या मजा आएगा? अगर मैंने कुछ गलती की है, कम से कम मुझे पता तो चले । ये बस एक इत्तेफाक है की ये साजिश मेरे इर्द गिर्द बुनी गई । मैं खुद ही साजिश का शिकार हूँ तो इस साजिश के बारे में बताओ मैं कुछ नहीं जानता । यानी सीधी तरह से तुम कुछ नहीं बताओगे । जावेद के स्वर में अब धमकी का पुट आ गया । साहनी बिना कुछ बोले झूठी प्लेट रखकर वापस अपने सेल की तरफ बढ गया । जावेद ने उसका पीछा करने की कोई कोशिश नहीं की । वो उसे जाते देखता रहा । उसके चेहरे पर निर्णायक भाव थे । रोज मेरी स्कूल पांचवी क्लास तक के छोटे बच्चों का एक छोटा प्यारा सा स्कूल था जो कि लखनऊ के अलीबाग नामक रेजिडेंशल कॉलोनी में स्थित था । दोपहर का एक बच्चा था । बच्चा भी लंच करके अपनी अपनी क्लास में बैठे थे । केंद्र की क्लास में पीछे बैठा सिद्धार्थ अचानक ही उठकर बोला, मैडम, बाहर से कुछ आवाज आ रही है तुम्हारा ध्यान की तरह । पीचर ने डांटते हुए कहा मैं क्या पढा रही थी वो बताओ टाइम सॉरी मैडम पर मैं सच कह रहा हूँ । बाहर से कुछ अजीब सी आवाज जा रही है । ऐसा लगता है गोलियाँ चल रही हैं । पीचर जानती थी कि सिद्धार्थ का ऐसा स्वभाव नहीं है कि वह मजा करेंगे । इस बार वाकई बेहद पास सिर्फ वायरिंग की आवाज आई लग रहा था स्कूल के अंदर कहीं फायरिंग हो रही है और अचानक ही टीचर बाहर निकलते हुए बोली समझ अंदर ही बच रहे मेरे क्यूँ टीचर ने बाहर कदम रखा और उन्हें लॉबी में सामने एक युवक राइफल ये टहलता हुआ आता दिखाई दिया । टीचर को सामने खडा देख उसने राइफल उसकी तरफ तांदी टीचर की आंखों में भय की लहर दौड गई । वो वापस क्लास की तरफ भागने को हुई थी कि उसने फायर कर दिया । गोलियां उसके सीने और पेट में समा गयी और वह लडखडाकर क्लास के दरवाजे की तरफ के क्लास में बैठे । बच्चे बुरी तरह से भयभीत हो गए । ऐसा खौफनाक मंजर उन्होंने कभी अपनी आंखों से नहीं देखा था । ऐसे हिंसक दृश्य उनके माँ बाप उन्हें टीवी पर भी देखने नहीं देते थे और अभी उनके आंखों के सामने वास्तविकता में हुआ था । उन का दिल दहल गया । कुछ की आंखों में आंसू आ गयी वो होने लगे राइफलधारी वक्त टहलता हुआ क्लास में आ गया और फिर शांति से बोला धरो नहीं बच्चों सब चुपचाप प्रयास के अंदर ही बैठे रहना । कोई भी बाहर निकलता हुआ दिखाई दिया तो उसे तुम्हारी टीचर की तरह गोली मारनी पडेगी । समझ में आया बच्चों किसी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं नहीं । उनके नाजुक दिल खोल से दहल उठे थे वो व्यक्ति इस बार कुछ क्रोध से बोला समझ में आएगी रहे सभी के सिर धीरे से सहमती नहीं मिलेगी । बहुत बढिया । उसने कहा । और फिर बाहर निकल गया जहाँ उस वक्त ऑफिस में था जब ये खबर हेड क्वार्टर में प्रसारित हुई कि अलीबाग के रोज मेरी स्कूल में आतंकवादियों ने हमला किया है । वहाँ के दो चौकीदार, एक चपरासी और तीन टीचरों की हत्या हो चुकी हैं और सभी बच्चों को बंधक बना लिया गया है । स्कूल के बाहर और अंदर दोनों जगह आतंकवादी फैले हैं । जॉन ने ठीक को फोन किया सर, मुझे यकीन है कि कमांडोज और पुलिस स्कूल की तरफ जा रहे होंगे । आप का आदेश हो तो मैं भी वहां पहुंच हूँ । मैं अभी फोन करने वाला था तो निकल जाओ और किसी फील्ड एजेंट को साथ लेते जाऊंगा । मामला तो पुलिस और कमांडोस हैंडल करेंगे पर तुम लोग बाहर से सभी गतिविधियों पर नजर रखो । ओके सर । जॉन ने कहा और फिर उठ खडा हुआ । उसने नजर दौडाई । वहाँ विनोद नाम का फील्ड एजेंट मौजूद था । उसने उसे निर्देश दिया और फिर दोनों एमिनेशन रूम में पहुंच गए । वहाँ उन्होंने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनी दो रिवॉल्वर अपने पास रखी और फिर तेजी से बाहर की तरफ बढ गए । कुछ ही देर में दोनों स्कूल पहुंचे । गेट के बाहर पुलिस और कमांडोज मौजूद थे । सबने पोजिशन ले रखी थी । हालांकि स्कूल की तरफ से कोई हलचल होती नजर नहीं आ रही थी । कितने हैं जॉन? इंस्पेक्टर से पूछा शायद पांच और भी छुपे हो सकते हैं कमांडोज अंदर जाने वाले हम उन्हें कवर देकर अंदर भेज सकते हैं । लेकिन अभी स्कूल के अंदर से माइक पर चेतावनी मिली है कि अंदर आने की कोशिश पर बच्चों को मारा जाएगा । वो जॉन के चेहरे पर चिंता भरे भाव आ गए । उनकी डिमांड किया है । विनोद ने पूछा, अभी तक तो सिर्फ ये बोला है कि कमिश्नर को लेकर आओ । उसी से बात करेंगे तो आ रहे हो रास्ते में तभी फायरिंग की आवाज हुई जी सर जॉन के मुँह से निकला । हमें कुछ करना चाहिए । कमिश्नर के आने से पहले कुछ नहीं कर सकते हैं । तभी फिर फायरिंग हुई । जॉन इंस्पेक्टर को कहा फोन कर होने परमिशन हूँ । इन लोगों की कोई बीमार नहीं लगती है । इंस्पेक्टर ने तुरंत फोन घुमाया । हम पहुंचने ही वाले हैं । दूसरी तरफ से कमिश्नर गोपीनाथ की आवाज आई सर अंदर से फायरिंग की आवाज आ रही है । हमारे ले के आदेश ऍन में पहुंच रहा हूँ । जॉन ने इशारे से फोन मांगा । इंस्पेक्टर ने उसे अजीब ढंग से देखा पर उसकी आंखों में आए । खतरनाक भाव देखकर वह मजबूर हो गया । जो हमने फोन लिया और बोला कमिश्नर सर, मैं सीक्रेट एजेंट जॉन बोल रहा हूँ । अंदर मासूम बच्चे हैं और लगातार फाइनल हो रही है । कितनी लाशें बिछाने के बाद मुझे नहीं लगता । हमें बात करने के लिए रुकने का कोई फायदा है । लाशें गिराई रहे हैं । अगर आप अभी अनुमति नहीं देंगे तो वक्त रहते उन्हें रोका नहीं जा सकता । लेकिन हम ऊपर क्या जवाब देंगे । अंदर शायद बच्चों की लाशें बिछ नहीं और हम बाहर चुपचाप खडे हैं । अगर ये बात सबको पता चली तो इसका जवाब हम क्या देंगे । आप बताइए । दूसरी तरफ शांति छा गई । फिर कमिश्नर की आवाज आई । फोन इंस्पेक्टर को तो जॉन ने फोन इंस्पेक्टर की तरफ बढा दिया । इंस्पेक्टर ने ध्यानपूर्वक कमिश्नर की बात सुनी फिर फोन रख कर तेजी से बोला । सभी कमांडो एक एक कर के स्कूल के अंदर जाएंगे । हम लोगों ने बाहर से कवर देंगे और फिर कमांडो स्कूल की चारदीवारी फांदकर अंदर आ गए । फिर अपनी अपनी मशीनगन संभाले सावधानी से अन्दर की तरफ बडने लगे । बाहर से पुलिस कर्मी और कुछ और कमांडोज उन्हें कवर देने के लिए तैयार थे । जॉन और विनोद भी उनके साथ निशाना लिए खडे थे । कुछ ही समय में सायरन बजाती हुई गाडियाँ वहाँ आकर रुकी और फिर कमिश्नर उसमें से बाहर निकले । उनके साथ कुछ और ऑफिसर भी थे । अभिषेक कमिश्नर ने तुरंत इंस्पेक्टर से पूछा ऍम सर, कमांडोज अंदर जा चुके हैं । कभी स्कूल के अंदर से लाउडस्पीकर पर आवाज आई, कमिश्नर अपने कमांडो, उसको आदेश जो कि स्कूल से बाहर आ जाएँ । इस वक्त हमारे पास पचास बच्चे गनप्वाइंट पर एक ही क्लास रूम में है । अगर हमें अगले दो मिनट के अन्दर कमांडोस कि स्कूल में होने की मौजूदगी का एहसास हुआ तो हम एक एक करके बच्चों को मारना शुरू कर देंगे । कमिश्नर ने इशारा किया तो झट से एक आदमी लाउड स्पीकर ले आया । कमिश्नर ने उसमें बोलना शुरू किया तो तुम्हारी जो भी विमान है बोलो हम कमांडोस वापस बुला रहे हैं । हमें किसी भी बच्चे की मौत नहीं चाहिए । फिर वो चलाया सभी कमांडो स्कूल से बाहर आ जाए । लाउड स्पीकर बंद करके वो कमांडो से बोला अपने साथियों को निर्देश दो की दो को छोडकर बाकी सब बाहर आ जाए । वो के साथ एक कमांडो बोला और फिर आपने हेडफोन से अपने साथियों को निर्देश देने लगा । कुछ देर में कमांडो स्कूल से बाहर आते नजर आए । उनके बाहर आने के बाद कमिश्नर ने फिर से लाउड स्पीकर पर अनाउंसमेंट किया । हमारे सभी कमांडोज बाहर आ गए हैं । अब अपनी शर्तें बोलो । कुछ देर वातावरण में एकदम सन्नाटा छा गया । सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे । फिर स्कूल की तरफ से आवाजाही । अब हम बात कर सकते हैं । अपनी शर्तें बोलो । कमिश्नर ने कहा कमिश्नर बैन और पेपर ले लो और देखो पुलिस की गिरफ्त में हमारे जो भी साथ ही है उन्हें तो मैं छुडवाना होगा । उनके कपडों में या जस्टिन के अंदर किसी भी तरह का कोई डिवाइस लगाने की कोशिश मत करना क्योंकि हम वह सब चक्कर के उन्हें स्कैन करके ही अपने साथ ले जाएंगे तो पहले हमारे साथियों को जेल से गाडी में बैठाकर यहाँ लेकर आओ । उसके बाद हम अगला निर्देश देंगे । ठीक है अपने साथियों का नाम बताओ । कमिश्नर ने जेब से छोटी डायरी और पेन निकाल लिया । दूसरी तरफ से नाम बोलने शुरू किए गए कमिश्नर नोट करते गए । जॉन बोला ये सभी आतंकी तो अभी कुछ दिन पहले ही पकडे गए । वो दोनों चौकी जब उन्होंने जावेद का नाम भी लिया । हम निर्देश दे रहे हैं । कुछ ही देर में तुम्हारे सभी साथियों को यहाँ बुलवा लिया जाएगा । कमिश्नर ध्यान रहे अगर कोई खेल खेला तो समझ लो ये बच्चे जिंदा नहीं बचेंगे । बच्चों की जान खतरे में नहीं डालेंगे । अम् तैयारियों में थी । दूसरी तरफ दो कमांडो छिपते हुए उस क्लास रूम तक पहुंच गए जहाँ उन लोगों ने बच्चों को कैद कर रखा था । क्लास के अंदर दो आतंकी दिख रहे थे और दो क्लास के बाहर टहल रहे थे । कमांडोस एक्सॅन ऍम पहले जो क्लास के अंदर है उनको पकडना हो । पहले जो क्लास के अंदर है उनको उठाना पडेगा हैं पर वो दिखाई नहीं दे रहे हैं । क्लास के अंदर टहल रहे हैं । लडकी से निशाना लेना पडेगा ध्यान रहे हैं । खिडकी में शीशा है, ग्रिल भी है । निशाना लेना मुश्किल है और कोई चारा नहीं है । दोनों को एक साथ मानना होगा और उसके तुरंत बाद जो बाहर टहल रहे हैं उनको गुड प्लान मुझे अंदर लंबे बाल वाला दिख रहा है । मैं उसे टारगेट करता हूँ । ठीक है मैं दूसरे सफेद शर्ट वाले को ऍम । वो मेरे निशाने पर हैं और मेरे भी वाली जो दोनों की राइफल से बुलेट निकली । खिडकी का शीशा टूटने की आवाज हुई और फिर दोनों आतंकी के सिर फट गए । बाहर के दोनों आतंकी उनकी तरफ मुडे पर तुरंत उन पर भी कमांडो ने फायर किए वह भी लुढक गए । कमांडो सावधानी से उठकर क्लास की तरफ लगे । अंदर सभी बच्चे सहमे हुए थे । वहाँ कोई और आतंकी नहीं था । फिर भी दोनों ने स्कूल में सावधानी से हर तरफ देखा पर कोई और आतंकवादी नहीं मिला । उन्होंने बाहर तैनात अपने साथियों को वॉकीटॉकी से खबर दी और उनसे ये बात जॉन उसके साथ ही और कमिश्नर को पता चली है । सुरक्षाबल के सभी सदस्यों को कुछ इत्मीनान जरूर हुआ पर ये बात अब जाहिर थी कि आतंकवादियों ने शहर में एक मुहिम छेड दी थी और सबके मन में ये सवाल कौन रहा था की अब अगला हमला कहाँ होगा और क्या वो उसे होने से पहले रोक सकेंगे? जेल में आने के बाद से जावेद ने अपनी एक अलग छवि बना रखी थी । ज्यादातर नए कैदियों को जेल के अंदर पहले से रह रहे बडे गुंडों और ताकतवर लोगों के आगे झुककर रहना पडता था । पर जावेद पर ऐसा करना आसान नहीं था । सभी जानते थे कि जावेद गुप्तचर विभाग में काम करता था । सब की नजर में वाकई टेरेरिस्ट था और वो लोग उसके ऊपर दबाव बनाना चाहते थे । उसे जलील करके सताना चाहते थे । पर जावेद के साथ ऐसा करना सरल नहीं था । फिलहाल उस जेल में अजय सिंह उर्फ अज्जू भैया नाम के युवा पॉलिटिशन का दबदबा चलता था । जेल में रह रहे कई कैदी उसके साथ थी और कुछ को उसने अपना साथ ही ये कहकर बना लिया था कि उन्हें वो अपनी पार्टी का कार्यकर्ता बना लेगा और जेल से निकलते ही उनकी जिंदगी बदल जाएगी । इस तरह जेल के अंदर भी वो अपना राजनीतिक दबदबा बनाए हुए था । जेल के अंदर आते ही वो भी उस की राजनीति का मुद्दा बन गया था । ऐसे ही भ्रष्ट सरकारी अफसरों के कारण हमारा देश पदन की तरफ बढ रहा है । सोचिए ऐसे लोगों के हाथ में हमारे देश की और देश के लोगों की सुरक्षा का जिम्मा है । ऐसे में लोगों को अगर नमक हराम कहा जाए तो क्या गलत होगा? मैंने तो पाकिस्तान भेज देना चाहिए । उन्होंने ना सिर्फ अपने पद का निरादर किया बल्कि अपनी कॉम के ऊपर भी काली होती है । कुछ इस तरह की बयानबाजी जूने जेल में ही शुरू कर दी है जो की जेल से बाहर भी पहुंच गई और अखबारों में भी उसने सुर्खियां बटोरी जावे तो पहले ही बदनाम होता चला जा रहा था और भी बदनाम होने लगा । आम जनता में कुछ ही लोग थे जो ये मानते थे कि जावेद किसी षड्यंत्र का शिकार है । अधिकतर लोग यही मान रहे थे कि वह एक देशद्रोही है और ये बात कोई अंदाजा नहीं कह रहा है । बाकायदा ऑनलाइन पोल किया गया था और ये अखबार में प्रकाशित भी हुआ था । इस सब के बावजूद जावेद दैनिक भी नहीं टूटा । वह शाम से जेल में रहता था और उसके रखरखाव और व्यवहार को देखते हुए किसी की हिम्मत नहीं थी कि उसकी तरफ उंगली भी उठा सके । हालांकि और जो जरूर चाहता था कि जावेद को थोडा परेशान किया जाए ताकि उसे और मौका मिले । इस मुद्दे को उछालने का । उस रोज रात्रि भोजन के वक्त जावेद हमेशा की तरह चुप चाप अकेले आखिरी बेंच पर बैठा खाना खा रहा था । कोई भी और कैदी उसके साथ नहीं बैठता था । अभी वो भोजन के बीच में ही था जब स्वराज नाम का एक पुराना सजायाफता मुजरिम उसके सामने खडा हुआ और बोला कुछ शर्मा है । जावेद ने एक बार उसकी तरफ नजर उठाकर देखा और फिर उसे अनदेखा कर के खाना खाने लगा । बेशर्म अचानक ही वो चल रहा है अपने देश को बेचने के बाद भी शर्म नहीं है तो नमक हराम तुझे हक नहीं है । हमारे देश की रोटी पर है तुझे तो मारकर तेरी लाश तेरे मुझे भेज देनी चाहिए । जावेद चुप चाप खाना खाता रहा और उसकी तरफ इस तरह देखता रहा जैसे वो टीवी पर कोई प्रोग्राम देख रहा हूँ और अचानक से बोरिंग एड आ गई । उस पर असर ना होता देख स्वराज बाकी कैदियों को देखते हुए बोला है देखो देखो तो इस बेशरम का सजा मिलने के बाद भी कोई फर्क नहीं पडा क्योंकि ये वाकई गद्दार है । ये गुनहगार है देश का अरे हमने तो कुछ पैसों के लिए मजबूरी में जुर्म किए । इसमें तो पूरे देश को ही भेज दिया । जावेद का खाना खत्म हो गया था इसलिए वो थाली लेकर खडा हो गया । कुछ देर स्वराज को घोषणा रहा फिर थाली लेकर आगे बढ गया । स्वराज मुडकर चलाया । घर जा के अंदर जावे । धीरे से पालता । जावेद ने उसे उंगली के इशारे से पास आने को कहा । उसने घबराकर इधर उधर देखा । फिर प्रत्यक्ष में बहादुरी दिखाते हुए उसके नजदीक आ गया । जावेद ने उसके कान में कुछ कहा । अचानक ही स्वराज के चेहरे पर दहशत भरे भाव आ गयी । वो पीछे हट गया और फिर तेजी से आपने सेल की तरफ दौडता चला गया । सभी इस नजारे को देखते रहेंगे । जावेद उसे देखने के लिए रुका नहीं । वो थाली रखने के लिए आगे बढ चुका धान सभी कैदी हैरान थे । अजय और बच्चों का खाना जेल के स्पेशल सेल में पहुंच जाता था । वो बहुत जरूरत पडने पर ही अपने सेल से बाहर निकलता था । सभी सुविधाएं उसे अपने सेल में मुहैया थी । जब बात अच्छी तक पहुंची तो उसने अपने सेल में स्वराज को तलब किया । उसके आते ही और जो बोला मुझे एक आसान से काम दिया था । वो भी तो उससे नहीं हुआ । ऐसा क्या बोल दिया? उसने तेरह कान में की तो दुम दबाकर भाग लिया । भैया जी माफी चाहते हैं पर वो बहुत खतरनाक आदमी है । हम डर गए थे । अरे ऐसा क्या डरा दिया उसने चाह को दिखाया था । गया नहीं, कटा नहीं, ऐसा तो कुछ भी नहीं था । फिर क्या था जो तेरे कान में बोला और तू कुत्ते की तरह दुम दबाकर भाग लिया । भैया जी मैं तो हैरान रह गया । उसमें मेरे कान में बोला मैं जानता हूँ कि तेरे पेट में चाकू का घाव मैं बस वहाँ पर एक बार करूंगा और फिर वो घाव खुल जाएगा और ब्रेड के अंदर खून बहना शुरू हो जाएगा और इंफेकशन हो जाएगा । और फिर दुनिया की कोई ताकत मुझे बचा नहीं पाई । हॉस्पिटल में भर्ती हो जाएगा, पर इलाज नहीं हो पाएगा । मौत है और जल्दी नहीं आएगी । अंदर से पूरा सर सडकर धीरे धीरे मारेगा और इसके बदले मुझे कोई सजा भी नहीं होगी क्योंकि मैंने तो सिर्फ एक मुक्का मारा और मुक्का मारने के लिए तो इतनी बडी सजा नहीं होती । अब ये किसको पता है कि मुझे जेल में रहने वाले हर एक कैदी की हिस्ट्री पता है, तेरे भी पता है और जानबूझ कर मैंने तुझे ऐसी चोट पहुंचाई जो हैरान रह गया । फिर बोला, साला बहुत हरामी आदमी है तो ठीक है, तू जा हम देखते हैं उसको । उसके बाद पूरे जेल में ये बात आपकी तरह फैल गई । इससे जावेद की भयानकता को और चार चांद लग गए और जो कुछ लोग उस से पंगा लेने की फिराक में थे उनके इरादे भी धराशायी हो गए । वैसे भी जावेद की डील डॉल और जिस्मानी ताकत की बराबरी करने लायक जेल में कोई भी दूसरा व्यक्ति नहीं था इसलिए उस पर दबाव बनाने के इच्छुक लोग हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे । जो कुछ हो सकता था वो उसके खिलाफ एकजुट होकर ही हो सकता था जो की जेल जैसी जगह में अजूकी सेवा और किसी के बस की बात नहीं थी । फिर कुछ दिनों बाद जेल में साहनी आया और अर्जुन को पता चला कि जावेद ने उससे बात करने की कोशिश की है । ये ध्यान देने योग्य बात थी क्योंकि जावेद ने अभी तक जेल में किसी भी और कैदी से आज तक बात नहीं की थी । स्वराज के कान में धमकी फुसफुसाने की बात को छोड कर राजू ने अपने एक साथी जयसिंह को बनाया कुछ सुना है जावेदी नए चिकने से बात करने की कोशिश कर रहा है । ये क्या उसका आ रहे हैं? पता नहीं भैया जी! तो पता कर साहनी एक दिन सोकर उठा तो उसने देखा उसका साथ ही अपना बोरिया बिस्तर समेट रहा था । मेरी समझ में तो अभी तुम्हारी सजा बाकी थी । साहनी बोला वो कुछ बोला नहीं । उसने अपना सामान एक चादर में लपेट लिया था । साहनी उठकर बैठ गया और उसने पूछा अरे बताओ तो सही कहाँ जा रहे हो? मुझे दूसरे सेल में शिफ्ट किया जा रहा है । अच्छा पर क्यों? तो मैं यहाँ रहना पसंद नहीं आ रहा था । ये होटल नहीं है जो मेरी पसंद ना पसंद के हिसाब से कमरा बदल दिया जाएगा । वह रूके अंदाज में बोला जेलर का आदेश है इसलिए मैं जा रहा हूँ । यहाँ पर क्यों? कैसे नहीं पूछा जाता है । जितनी जल्दी आदत डाल लो उतना फायदे में रहोगे । तभी सेल के दरवाजे पर डंडा मारने की आवाजाही एक गार्ड पहुंच गया था । उसने ताला खोला और राजीव अपना सामान लेकर चल दिया । उसमें पलट कर एक आखिरी नजर साहनी पर डाली और फिर तेजी से बाहर निकल आया । गार्ड ने दरवाजा दोबारा बंद कर दिया और फिर उसे लेकर आगे बढ गया । साहनी किंकर्तव्यविमूढ अवस्था में अपने बिस्तर पर बैठा उसे जाते देखता रहा । काफी देर तक वो बैठा सोचता रहा । एक तरह से से खुशी हो रही थी कि अब पूरा सेल उसका अकेला था । ऐसा नहीं था कि राजीव से उसे कोई परेशानी थी पर अकेले रहने का आदि । साहनी अकेला चलने वाला साहनी इससे ज्यादा खुश था । वह फ्रेश हुआ और फिर कसरत करने लगता है । जेल के अंदर रहकर जिम जैसी वर्जिश करना तो असंभव था लेकिन उसे अपनी सेहत का ख्याल रखना था । फिटनेस फ्रीक होने के नाते उसने पुश अप्स एफ वगैरह हर रोज सुबह शाम करनी शुरू कर दी । उस वक्त वो बनियान और शॉर्ट्स में था जब उसे दरवाजे पर से आवाज आई । उसने लेटे लेटे ही अपना सिर उठाया । गार्ड सेल का ताला खोल रहा था । उसके बाद सेल के दरवाजे की तरफ एक भारी डील डाल वाला व्यक्ति उभरता नजर आया । दरवाजा खुला पीछे से उजाला रहा था इसलिए उसका चेहरा सही से दिखाई नहीं दे रहा था । साहनी झटके से उठ खडा हुआ है । उसके सामने जावेद खडा था हूँ ।

Part 7

हेलो जावेद मुस्कुराकर बोला । साहनी की आंखें आश्चर्य से फैल गई । अपने नए रूम पार्टनर को हाई भी नहीं करोगे । जावेद ने बैठ पर बैठते हुए पूछा, साहनी पलकें झपकाना भी भूल चुका था? बैठना जावेद नहीं सहनी की तरफ देखते हुए बोला, कसरत करने के कारण साहनी पहले से ही पसीने में था और अब जावेद के आगमन के बाद उसमें और बढोतरी हो गई थी । साहनी जावेद को देखता रहा । फिर उसने अपनी शर्ट उठाई और पहले तो क्यों मेरे गले पड रहे हो? वो टुकडे हुए स्वर में बोला है । जावेद ने शांति से उसे देखते हुए कहा तो हमने तो मेरे गले में फांसी का फंदा डालने का पूरा इंतजाम कर दिया और मैं तुम्हारे गले भी नहीं पड सकता है । तो कौन सी जुबान समझते हो मैं उसमें ही बोल देता हूँ । मैंने तुम्हें फंसाने के लिए कुछ भी नहीं किया है । तुम बोलो तुम कौनसी जुबान समझते हैं । मैं उसमें समझाता हूँ । जब तक तो मुझे अपने राज नहीं बता देते । मैं तुम्हारा पीछा नहीं छोडने वाला । कौन सा राज कैसा राज? तुम समझते क्यों नहीं और क्या कर लोगे तुम तो मुझे यहाँ टॉर्चर करोगे । धूनों मत, तुम भी एक कैदी हो तो मेरे साथ कुछ उल्टा सीधा करोगे तो मैं तुम्हारी रिपोर्ट कर दूंगा । फिर ये लोग तुम्हें कालकोठरी में डाल देंगे । जावेद दैनिक भी विचलित नहीं हुआ । वो उसी तरह मुस्कुराता हुआ आराम से बैठा साहनी को देखता रहा । उसने पीछे खिसककर दीवार पर टेक लगा ली और हाथ आराम से अपने सर के पीछे रख लीजिए । फिर बोला कितने साल हुए तो मैं इस पेशे में आए हुए हैं । कौन सा पेशा पेशेवर मुजरिमों से मैं आठ साल से जूझता रहा हूँ । उससे पहले पांच साल में आर्मी में दुश्मनों से जूझता था तो मैं डर है । मैं तो मैं यहाँ मारूंगा पीटूंगा, टॉर्चर करूंगा । तुम देखना । मैं तुम्हें छोडूंगा भी नहीं और तुम अपनी जुबान खोल लोगे । बहुत घमंड है ना! तो मैं अपने ऊपर । साहनी ने आंखे फैलाकर पूछा हाँ, बहुत ज्यादा । जावेद इत्मीनान के साथ बोला । सहनीय आराम से अपने बैठ पर बैठ गया और फिर किताब पढने लगा और इस तरह बर्ताव करने लगा जैसे जावेद की वहाँ उपस् थिति ही ना हो । अचानक जावे बैठ पर लेते हुए बोला चिंता मत करो, आज पहला देने हैं, कुछ नहीं करूंगा । आज तो मैं पूरी छूट है । पर कल से साहनी ने एक बार चुपके से किताब पढते नजर उठाकर जावेद की तरफ देखा और फिर किताब में झांकने लगा । हालांकि किताब के शब्द उसके भेजे में नहीं जा रहे थे । उसके दिमाग में सिर्फ ये विचार कौन रहा था कि अब क्या होगा । अगली सुबह पांच बजे के करीब साहनी नींद में कुनमुनाने लगा । उसे लगा जैसे उसके शरीर पर कुछ दिन रहा है । नींद खुलते खुलते जैसे उसे थोडा होश आया तो उसे अहसास हुआ । वाकई उसके शरीर पर कुछ दिन रहा था । वो झटके के साथ उठ कर बैठ गया और उस चीज को उसने अपने शरीर से तेजी से झाडा वाह जी वाह उछलकर दूर जा गिरा । जो उसके शरीर पर रिंग रहा था वह छिपकली थी । साहनी उसे इस तरह देख रहा था जैसे जहरीला कोबरा साहब उसके शरीर पर देख गया । उसे छिपकलियों से बहुत डर लगता था । छिपकली कहीं गायब हो गई थी । साहनी कमन पूरी तरह से घिन से भर गया । उसने अपने कपडे उतार दिए और पीने का पानी लेकर अपने सीने और हाथ पैरों में डाल लिया और फिर तौलिये से पूछने लगा । जब वो कुछ सामान्य हुआ तो उसके दिमाग में ख्याल आया कि ये छिपकली अपने आप आई या फिर उसने जावेद की तरफ देखा वह गहरी नींद में प्रतीत हो रहा था । जावेद के चेहरे पर चादर थी, उसमें चादर खींच ली और चीफ पडा है । ये हरकत तुम्हारी थी ना । जावेद ने एकदम से आंखें खोली । साफ प्रतीत हो रहा था कि जावेद नींद में नहीं था । उसने उसी तरह लेटे लेटे पूछा, कौन सी हरकत? छिपकली तुम्हारे ऊपर रखने वाली हाँ मैंने रखी थी क्योंकि मुझे पता चला है कि तुम छिपकलियों से बहुत डरते हो । अब ये ना पूछना मुझे किस तरह पता चला । जिस तरह तो हम अपने दुश्मन की सब जानकारी रखते हो । ऐसे ही कुछ आदत मेरी भी मेरे तो ना जाने इस दुनिया में कितने दुश्मन है । कहकर जावेद मुस्कुरा दिया । साहनी उसे एक तब देखता रहा । जावेद बोला, ऐसा और सुबह होने की उम्मीद कर सकते हो । छिपकली में कहाँ से लाऊंगा? उसकी चिंता तो मत करना । मैं आज ही तुम्हारी शिकायत जगह से करूंगा । सहनीय गुस्से से बोला जरूर करो, कहकर जावेद मुस्कुराया और फिर उसने उसकी तरफ पीठ दिखाकर करवट लेंगे । साहनी कुछ पल उसे घूमता रहा । फिर आपने बैठ पर जाता था । नींद गायब हो चुकी थी । कुछ देर लेटकर वो यही सोचता रहा । छह बजे जेल में असेंबली का टाइम होता था उस से पंद्रह मिनट पहले जावेद उठ गया और नित्य कार्यों से निपटने लगा । साहनी उसे देखता रहा । असेंबली के बाद साहनी ने जेल के गार्ड को अप्रोच किया । जेलर तो आया नहीं, उसे लगा शायद इस कार्ड से काम चल जाएगा जो की कुछ ऊंचे पद पर लगता था । साहनी ने उसके पास जाकर कहा कि वह उससे कुछ बात करना चाहता है । उसने रूखे स्वर में पूछा क्या हो गया मेरा नया सेल? मेट मुझे परेशान कर रहा है । क्या नाम है उसका? जावेद खान नाम सुनकर उसके चेहरे के भाव पर ले । या तो मैं मारपीट रहा है नहीं फिर मुझे परेशान कर रहा है । तो क्या दूध पीते? बच्चे हो तो मैं परेशान करेंगे तो मुझे परेशान कर दो । बच्चों जैसे यहाँ पर शिकायत मत करना । वाकई में कुछ हो तो बताना कहकर वह एक तरफ बढ गया । साहनी के चेहरे पर निराशा भरे भाव आ गए । फिर उसकी नजर जावेद पर पडी जो एक कोने में आराम से खडा होकर उसकी तरफ ही देख रहा था । साहनी वहाँ से हट गया और नाश्ते की लाइन में लग गया । अभी वो लाइन में लगा ही था की उस की बगल में फिर से वही हिजडे जैसा आदमी खडा हुआ और उसे बडी अश्लीलता के साथ ऊपर नीचे देखते हुए धीरे से बोला, आॅन, ऐसा है कितनी बढिया बॉडी बनाई है तुम्हें? साहनी ने जवाब नहीं दिया । वो चुपचाप खडा रहा । उसे याद आया किसी ने उसका नाम मोनू बताया था । साहनी ने रूखे रवैये से कुछ चढकर मोनू से अपना लहजा बदला और धमकाते हुए बोला, सुनाई नहीं देता क्या चिकने कहानी में तेल डाला हुआ है? जवाब दे क्या चाहिए तो मैं सहानी त्रस्त होकर बोला ये चाहिए । वो अश्लीलता के साथ नीचे देखते हुए बोला । साहनी को गुस्सा आ गया । उसने उसे एक तरफ धकेल दिया । मोनू साहनी के सामने जिस्मानी ताकत में कहीं नहीं ठहरता था । वो एक तरफ जा गिरा । कुछ लोग हंसने लगे । मोनू के चेहरे से ही पता चल रहा था कि वो कितना अपमानित महसूस कर रहा था । वो उठते हुए बोला साले बहुत भाव कर रहे हैं । बताऊंगा तो फिर वो तेजी से एक तरफ चला गया । साहनी ने लाइन में लगकर चाहे और डबल रोटी हासिल की और फिर एक कोने में बैठ कर खाने लगा । आठ बजे तक सभी अपने अपने सेल में वापस पहुंच गए । अब जावेद ने एक नई हरकत शुरू की । सेल में पहुंचते ही जावेद आपने बैठ पर बैठ गया और साहनी को घूमने लगा । कुछ देर तो साहनी उसे अनदेखा करता रहा पर फिर उसने महसूस किया जब भी वह जावेद की तरफ देखता है वो उसे वैसे ही घूम रहा होता था । इस तरह एक घंटा बीता, दो घंटे बीते और फिर बारह बज गए । जावेद अभी भी उसे देख रहा था तो फिर साहनी ने कह दिया अपनी फोटो खींच कर दे तो देखते रहना । जावेद कुछ बोला नहीं । वो उसे उसी तरह देखता रहा । साहनी उसे अनदेखा करने लगा । वो कभी किताब पडता तो कभी कसरत करने लगता है । पर उसे हर वक्त जावेद की नजरें अपने ऊपर तीर की तरह चुकी हुई महसूस होती रही । हालांकि उसका इतना ज्यादा असर नहीं हो रहा था इसलिए वो उससे चिढाते हुए बोला तो ये तुम्हारी नायाब टॉर्चर टेकनिक है । इससे तो बच्चे भी परेशान ना हो । जावेद अभी भी कुछ नहीं बोला । बीच बीच में वह कुछ अपना काम भी करता हूँ । पर उस वक्त भी वह साहनी पर नजर रखे रहता था । रात हो गई । साहनी बेड पर लेट गया । उस वक्त भी जावेद उसे घूम रहा था । साहनी अचानक उठा और फिर जावेद को देखते हुए बच्चे की तरह जीत निकालकर हाथ हिलाते हुए चढाने लगाना । मैं तो आज बहुत बढिया नहीं होने वाला हूँ तो मुझे खोलते रहा हूँ और सुबह अगर मेरे ऊपर छिपकली रखी तो मैं उसे उठाकर वापस तुम्हारे ऊपर डाल दूंगा । जावेद अभी भी कुछ नहीं बोला । नहीं उसके चेहरे पर किसी तरह की कोई भावनाएं । लेटने के । करीब एक घंटे बाद साहनी ने चुपके से हल्की आंखें खोलकर देखा तो पाया जावेद लेटे लेटे अभी भी उसे घूम रहा था । हराम ज्यादा वो मन ही मन बुदबुदाया और फिर आंखें बंद कर ली । सुबह पांच बजे एक बार फिर साहनी को अपने ऊपर गिली गिली चीज के होने का अहसास हुआ । एक बार फिर वो चौक कर उठा । हालांकि इस बार पिछली बार की तरह बदहवासी नहीं थी पर क्योंकि उसे बचपन से ही छिपकलियों का भाई था इसलिए छिपकली के खुद पर होने की सोच मात्र से उसके रोंगटे खडे हो जाती थी । पर इस बार उसका मन गेंद से और भी ज्यादा भर गया जब उसने पाया कि इस बार उसके ऊपर मरी हुई छिपकली पडी थी । उसे उपकारी आने लगी । वो सन्यास की तरफ भागा बोलती कि फिर मोहा दो कर वापस आया वो नफरत के साथ । जावेद को देखने लगा जो इस बार सोने का नाटक नहीं कर रहा था बल्कि उसे उसी प्रकार घूरे जा रहा था । अब इस बात का साहनी अनुमान नहीं लगा पाया कि वह रात भर सोया ही नहीं या फिर अभी उठकर बैठा है । साहनी ने तौलिया उठाया और खुद को साफ करते हुए जावेद को भद्दी भद्दी गालियां देने लगा । जावेद दैनिक भी विचलित नहीं हुआ । उसके चेहरे का कोई भाव नहीं बदला । वो उसे देखता रहा । बोलता क्यों कुछ नहीं ऍम साहनी ला रहा था । मैंने कुछ नहीं किया तेरे साथ और मेरे साथ ऐसी जलील हरकतें कर रहा हैं । हर एक मर्द का बच्चा है तो हाथ उठा मुझे फिर मैं तुझे जवाब दूंगा । जावेद को कुछ भी ना बोलते देख उसे उसी प्रकार घुटने की प्रतिक्रिया से साहनी का गुस्सा और भी ज्यादा बढ गया । उसने जावेद के चेहरे पर तेजी से मुक्का घुमाया । जावेद आराम से एक तरफ हट गया । सानी ने दूसरा प्रहार किया जिससे जावेद ने बडे आराम से अपनी हथेली पर रोक लिया । साहनी गुस्से की जाती के कारण जोर जोर से हाथ नहीं लगा । फिर उसने जावेद पर प्रहार करने का इरादा त्याग और पीछे हट जाना बेहतर समझा । वो अपने पलंग पर बैठ गया । जावेद अभी भी उसी की तरफ देख रहा था । साहनी को नफरत के साथ उलझन भी हो रही थी । कल तक उसे जावेद की हरकतें बचकानी लग रही थी । उससे विश्वास नहीं हो रहा था की अब उसके मन पर इनका प्रभाव पडने लगा था । लंच टाइम तक दिन किसी तरह निकला जावे । दूसरे उसी तरह घूरता रहा नाश्ते के दौरान और सुबह असेंबली के वक्त उसे जरूर थोडी राहत मिली । नहीं लंच टाइम में नया बखेडा खडा होगी । जब प्लेट रखकर आगे बढा तो अचानक मोनो उसके पास पहुंचा । उसने कोई चीज साहनी के पेट से सजा दी और फुसफुसाकर बोला हैं चुपचाप बातों की तरफ वरना ऐसा काटूंगा आती दिखाई देने लगेंगे । साहनी ने महसूस किया कि उसके पेट पर मोनू ने कोई खतरनाक नौ केला हथियार रखा हुआ था । वो इस कदर चोट खाना नहीं चाहता था तो बाथरूम की तरफ चलने के लिए तैयार हो गया । वहाँ पर कॉमन बाथरूम था । साहनी को खुद पर यकीन था कि मोनू नहीं अगर उसके साथ कुछ गडबड करने की कोशिश की तो वो आसानी से उस पर काबू पा सकता था । हालांकि जे लाकर उसे पता चल ही गया था कि यहाँ पर लोग गुड बनाकर रहते हैं और ऐसा होने की पूरी संभावना थी कि मोनू के साथ कुछ और लोग भी हूँ । इसलिए वह सतर्कता के साथ उसके साथ चल रहा था । जैसा कि उसने सोचा था वैसा ही हुआ । मोनू उसे अपने साथ लेकर बाथरूम में पहुंचा । वहाँ पर दो लोग पहले से मौजूद थे । उन्होंने उसे एक बाथरूम के अंदर बंद कर दिया और फिर मोनू बोला, जज आपने कभी होता है । साहनी ने ऐसा कुछ भी नहीं किया । वो उन्हें देखता रहा । उनके साथ एक हट्टा कट्टा विधान उसने सहानी के पेट में घूंसा मार दिया । साहनी टस से मस नहीं हुआ और बोला ऍम! इस तरफ भी खुजली हो रही है । करोगे । मोनो बोला जानेमानी क्यों पंगा ले रहा है मेरा देख आ गया तो उस पर मेरे से दोस्ती बनाकर रख । हम दोनों का फायदा होगा । ठीक है पर तुम करना क्या चाहते हो? साहनी ने अनजान बनते हुए पूछा । बदले में मोनू और बाकी दोनों कैदी भी कह कहा लगा बैठेंगे ऍम अब इतना भी बोला नबल मोनू हसते हुए बोला । साहनी ने अचानक ही मोनू के चेहरे पर वार करने के लिए हाथ घुमाया । हालांकि सहानी के पास ताकत जबरदस्त थी । पर्व मोनू जैसे मुजरिमों की तरह लडाई के दांवपेच नहीं जानता था । मोनू उसके बार से साफ बच गया और उसने अपने हाथ में बांधा हुआ चाकू साहनी की जांघ पर दे मारा है । साहने की चीज दूसरे आदमी के हाथ के नीचे दबकर रह गई । उसके बाद भी सहनी पूरा दमखम दिखाते हुए एक साथ तीनों पर हाथ पांव घुमाने लगा । मोनू ने चालाक लोमडी की तरह होते हुए इस बार चाकू साहनी के बाजू में देख पा रहा हूँ । ऍम बहुत ही कह रही है पूरे शरीर में छेद कर दूंगा । वो कमीनेपन के साथ बोला । तभी बाथरूम के दरवाजे पर जोरदार प्रहार हुआ और दरवाजा खुल गया । चिटकनी टूटकर एक तरफ गिर गयी । वो तीनों पलटे सामने जावेद खाया था । जावेद को देखकर मोनू तो कुछ खास नहीं डरा पर बाकी दोनों कैदियों ने जोरों से ठोक निकला । वो लोग जावेद के बैकग्राउंड से भलीभांति परिचित थे । ऊपर से जावेद का बाहर जैसा शरीर जिसे देखकर ही उनके रोंगटे खडे हो गए । मोनू साहस दिखाते हुए बोला हूँ तो ये गद्दार आया तेरी मदद करने के लिए दो ही रातों में ऐसा क्या जादू कर दिया तो उन्हें इस पर मेरी जान । तो हम तीनों अगर अभी चुप का बाहर निकल गए तो ये तुम्हारी खुशकिस्मती होगी । जावेद सर्द लहजे में बोला, बाद में तुम्हारी टूटी हड्डियों के लिए तुम खुद जिम्मेदार हो गए । जावेद के स्वर में छिपी हिंसा को भागते हुए मोनू के दोनों साथ ही उसे वहीं छोडकर तेजी से जावेद के बगल से होते हुए भाग निकले । मोनू स्तब्ध सा उन्हें जाते देखता रहा । अब उसके सामने जावेद खडा था और पीछे साहनी जो पहले ही दो बार खाने के कारण उसकी गर्दन दबाने के लिए आतुर था । हालात बदलते देख मोनू ने तुरंत रंग बदला और जावेद से खुशामद करते हुए बोला, बारिश जावे सर, गलती हो गई । वो तो जेल में हर कोई बोलता है इसलिए मुझे भी ऐसा बोलना पड गया । आप बहुत बढिया ऑफिसर हूँ । हर कोई जानता है आप पर झूठा इल्जाम । जावेद ने उसे चुप रहकर बाहर जाने का इशारा किया । मोनो तेजी से बाथरूम से बाहर निकल गया । साहनी पीछे से उसपर झपटा पर जावेद ने उसे रोक लिया । अब जावेद और साहनी वहाँ खडे थे । दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी थी । फिर साहनी कृतज्ञ भाव से बोला हूँ । जावेद कुछ बोला नहीं । उसने सहानी को घूरकर देखा और फिर बाहर निकल गया । इस बीच साहनी का वकील जब उससे मिलने जेल आया तो साहनी ने उसे बताया कि उसे यहाँ जान का खतरा है । इसलिए वह कोशिश करे कि उसे किसी दूसरी जेल में ट्रांसफर कर दिया जाए । वकील ने कहा कि वह जरूर कोशिश करेगा । इसके अलावा वह साहनी की कस्टडी में नब्बे दिन होने के बाद सुनवाई की पूरी जोर शोर से तैयारी कर रहा है । पर कहा नहीं जा सकता अगर पुलिस यह सीक्रेट सर्विस इन्वेस्टिगेशन के लिए और समय मांग ले । जज उनका ही पक्ष लेने वाला है । कितना वक्त और बढा सकते हैं । साहनी ने पूछा दो से तीन महीने वकील बोला तीन महीने और तीन और तीन यानी आधा साल साहनी के चेहरे का रंग फीका पड गया तो फिर कम से कम मुझे अकेले का सेल दिलवा दूँ । मुझे और भी सुविधाएं अंदर चाहिए जिस को पटाना है, पढा हूँ, पैसा देना है दे दो पर मैं अंदर किसी मुजरिम की तरह नहीं रह सकता । वकील ने सहमती में सिर हिलाया और बोला मैं पता करवाता हूँ और ये सारा अरेंजमेंट करता हूँ । मैंने पहले ही काफी कोशिश करके आपको सेल दिलवाया था जिसमें दो ही लोग हैं । बाकी आप ने तो देखा ही होगा । वहाँ कितने लोग एक साथ डोरमेट्री में रहते हैं । मुझे पता है सब पैसे का खेल है । मैंने देखा है अंदर तुम जल्दी जल्दी काम करो । सही बोला । वकील उसे आश्वासन देकर विदा हुआ । साहनी वापस वार्ड में पहुंचा । सभी कैदियों के सेल खुले हुए थे । शाम का वक्त था इसलिए सब टहल रहे थे । तभी एक आदमी उसके पास आया और उसके कान में कुछ बोलने लगा । वो बोल कर निकल गया । फिर साहनी ने पलट कर पीछे देखा । उधर अजय सिंह अजुका स्पेशल सेल था । साहनी इत्मीनान से टहलता हुआ अजय सिंह के सेल की तरफ पहुंचा । अजय ने उसे देखा तो उसने इशारे से उसे अंदर बुलाया । साहनी ने उसकी सेल में कदम रखा । उसने देखा अजय सिंह बढिया कुर्सी पर बैठा आराम से अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था । उसके कमरे में चौडा प्लंक, मोटा गद्दा और बढिया तकिया उपलब्ध था । एक तरफ कूलर भी रखा था । एक छोटी सी अलमारी भी थी, जिसमें शायद कपडे थे । टेलीविजन था । कमरे में कोने में ठंडा पानी और शराब की कुछ बोतलें भी रखी दिखाई दे रही थी । आओ बैठो । अजय बोला सहानी उसके सामने बैठ गया और बताइए है साहनी साहब ऐसा लग रहा जेल में यहाँ कैसा लग सकता है । हाँ, मैं समझ सकता हूँ । अज्जु बोला आप जैसा करोडपति इंसान जो हमेशा है तो आराम मिल रहा है । उसे तो यहाँ बहुत दिक्कत आएगी । साहनी ने सहमती में सिर हिलाया । आप किसी मॉडर के इस के सिलसिले में अंदर है ना? हाँ और मुझ पर झूठा इल्जाम है । ठीक हो जाता है । सुना है वो आपकी गर्लफ्रेंड थी । साहनी ने सहमती में सिर हिलाया । अरे कोई नहीं हो जाता है । कभी कभी गुस्से में जोश में गलत फैसले कर बैठते हैं । उसमें क्या है और मेरे साथ ऐसी कोई बात नहीं हुई थी । मेरे खिलाफ साजिश हुई है तो और भी अच्छा है तो आप जल्दी ही बाहर निकल जाओगे । कुछ सोचते हुए साहनी ने पूछा आपने मुझे कैसे याद किया? मैंने सुना है आपको? वो जो आपका सेल मेंटेना, गद्दार जावेद वो आपको परेशान कर रहे हैं । साथ में दोनों से भी आपकी तकरार हुई । हाँ, वह जबरदस्ती मेरे पीछे पडा है । कहते हुए स्वतः ही साहनी का हाथ उसके बाजू पर चला गया । जहाँ अभी भी जख्म था । उसने किसी को सेल में उस बारे में नहीं बताया था । वो तो मैं जानता हूँ वो साला किए हैं । अज्जु बोला बाल मुझे ये नहीं समझ आ रहा है जावेद से आपका क्या लेना देना है? सहानी कुछ पल रुका । वो सोच रहा था कि इसको क्या बताया जाए । मुझे भी नहीं पता । सही बोला न जाने मुझसे क्या उगलवाना चाहता है । उसे लगता है मैंने कोई साजिश की है उसके खिलाफ । जबकि ऐसा कुछ भी नहीं । पर वो मेरी बात सुनने को तैयार नहीं है तो ये बात है । अजय सिर हिलाते हुए बोला देखो साहनी साहब, आप जेल में नहीं हो, आपका केस मैंने सुना है । मर्डर केस है तो आप इतनी जल्दी बाहर भी नहीं निकलने वाले । इसलिए आपको यहाँ रहने की तैयारी कर लेनी चाहिए । आपको अपने तौर तरीके से यहाँ रहना है तभी आप कुछ रहोगे । ये बात तो आप भी समझ रहे हो गया कि दो कौडी के मुझे नाम की तरह से जेल में रहने से आपका मनोबल टूट जाएगा । आपके पास पैसा है लेकिन जेल में सुविधा हासिल करने के लिए पैसे के साथ जुगाड भी चाहिए होता है । अब आप देख लो मेरे पास पैसा नहीं है । फिर भी मुझे यहाँ सब सुविधाएं उपलब्ध है । क्या तो मेरी मदद कर सकते हो । मुझे खुशी होगी आपकी मदद करके और बदले में तो मैं मुझ से क्या हासिल होगा? जो मुस्कुराया बन गया । पूरे बिजनेस में है । सीधे मुद्दे की बात पर आते हैं । देखिए आप के पास पैसा है और हमें चुनाव के दौरान पैसों की जरूरत पडती है । जेल में जैसी सुविधाएं मुझे मैं आपको वैसी ही सुविधाएं मुहैया करवा दूंगा । बदले में बस आप मुझे चुनाव के दौरान कुछ मदद कर देना । मैं नहीं कह रहा कि मुझे करोडों रुपये चाहिए और जो भी आपको ठीक लगे मदद कर देना, आप रकम बोलो । साहनी ने कहा आजी ऐसी कोई रकम मेरे दिमाग में नहीं है । मैं तो बस नहीं हम अभी डिसाइड कर लेते हैं । बाद में मैं कोई बहस नहीं चाहता । ठीक है ऐसे ही सही मेरी कोई डिमांड नहीं । आप बोलो आप कितनी रकम दे सकते हो? पच्चीस लाख साहनी बोला ये तो बहुत कम है । ठीक है तीस लाख उससे ज्यादा मैं नहीं निकाल सकता । मुझे भी शेयर होल्डर्स को जवाब देना पडता है । चलिए ठीक है तो फिर हाथ बढाइए । अजय ने मुस्कुराते हुए हाथ आगे बढाया । साहनी ने कुछ सोचते हुए उस से हाथ मिला लिया । बस अब आप फिक्र करना छोड दो । उस उनकी तरफ से तो पूरी तरह से बेफिक्र रहना बल्कि मैं बोलूंगा । वहाँ आपसे माफी मांगने आएगा । ये जावे थोडा टेढी कि है पर इसको भी लाइन पर ले आएंगे । चिंता मत करिए ऐसे अफसरों को हम लोग उंगलियों पर ना चाहते हैं । अगर हो सके तो आप मेरा सेल जल्द से जल्द बदलवा दो । ठीक है आज ही बात करता हूँ । इन चार दिन के अंदर हो जाना चाहिए । तीन चार दिन साहनी के दिमाग में ये शब्द बिजली की तरह बरसे । उसे अपने सीने पर छिपकली के रेंगने के एहसास ने हिला कर रख दिया । शुक्रवार की शाम का वक्त था । सभी कैदी अपने अपने सेल के अंदर थे । जावेद और साहनी भी आपने सेल में थे । जावेद अभी अभी नमाज पढकर उठा था । साहनी कोई किताब पढ रहा था । उसके चेहरे से प्रतीत हो रहा था जैसे उसकी कोई बडी समस्या हल हो गई होगी । जावेद बोला आज बहुत खुश देख रहे हो । साहनी ने नजदीक किताब से उठाई और उसकी तरफ देखा क्या बात है आज तुम्हारा मन भर गया क्या मुझे छोडने से जो बोल पडे या फिर तो मैं समझ में आ गया है कि ये घुटने बोलने से कुछ नहीं होने वाला । जावेद उसे उसी प्रकार देखता रहा तो हम खुश देख रहे हो । कल तक तुम परेशान थे पर आज नहीं सहनी मुस्कुरा दिया लगता है तो मैं मुझ से छुटकारा पाने का कोई तरीका मिल गया है । बुद्धिमान होने का नाटक मत करो । सही बोला शायद तुम्हें कहीं से पता चल ही गया है और मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पडता । पता चले तो चलता रहेगा । क्या पता चल गया है । जावेद ने पूछा मुझे बोलने की जरूरत नहीं है । मत बोलो, मुझे जाना भी नहीं है । मुझे तो तुमसे मुद्दे की बात जाननी हैं और वह मैं तुमसे सेल से निकलने से पहले गलवा ही लूंगा । साहनी ने अचानक ही किताब एक तरफ की और गुस्से से बोला अगर तुम्हें जरा भी अकल होती तो अब तक समझ चुके होते हैं कि मेरा तुम से कोई लेना देना नहीं है । चिंता मत करो । दूध का दूध और पानी का पानी होने में अब ज्यादा वक्त नहीं है । साहनी उठकर सेल के दरवाजे पर आ गया और उसकी सलाह है पकडकर बाहर देखने लगा । दूसरे से और वॉट से बातों की आवाज आ रही थी । गार्ड चहलकदमी कर रहे थे । कुछ सोचते हुए एकदम से साहनी के चेहरे के भाव बदले । झल्लाहट की जगह चमक में अपना घर बना लिया । फिर वो अपनी वहाँ पर घूंसे मारने लगा । और फिर जांग पर भी जावेद उसकी हरकत को गौर से देखने लगा । देखते ही देखते साहनी ने खुद के ऊपर प्रहारों की बरसात कर दी । साथ में वो चिल्लाने लगा । शोर सुनकर गार्ड उस तरफ दौडते हुए आए । जब पहुंचे साहनी सलाखें पकडे घबराए स्वर में बोला हूँ, बच्चा हूँ मुझे जो शोर मचा रहे हो । गार्ड ने पूछा ये मुझे मारना चाहता हूँ । उसने जावेद की तरफ इशारा किया कौन जावे साहब, वो तो आराम से बैठे हैं । वो तुम्हारा साहब सानी रोष भरे स्वर में बोला । वो गार्ड जावेद को जानता था और उसके कौशल का कायल था । वो उस की बहुत इज्जत करता था । उसे पूरा यकीन था कि जावेद आतंकवादी नहीं है और झूठे इल्जाम में फंसा हुआ है । साफ साफ बोलो क्या हुआ वो सख्त स्वर में बोला हंगामा करने वालों को डंडे पडते हैं । यहाँ ये देखो सहनी अपनी बहुत दिखाते हुए बोला । और फिर उसने जांग दिखाई और बोला इसमें मेरे ऊपर हमला किया है । देखो जख्म हो गया तो निकल रहा है । तो मैं कब विश्वास होगा जब मेरी गर्दन काट देगा । गार्ड ने एक नजर जावेद की तरफ डाली जो अभी भी आराम से बैठ पर बैठा था । फिर उसने फौरन सेल का ताला खोला । अंदर आकर उसने साहनी को एक तरफ खडे होने का निर्देश देकर जावेद से कहा, साहब आप भी इधर आ जाइए । जावेद लापरवाही के साथ उठकर आ गया । किस बात पर मारपीट हुई? गार्ड ने पूछा ये मेरे पीछे पडा हुआ है । सही बोला किसी से पूछो कहाँ कहाँ चोट आई है तो मैं जावेद सहानुभूति दिखाते हुए बोला ये देखो । साहनी ने जोश में अपनी शर्ट उतार दी और अपनी वहाँ के जख्म को दिखाने लगा । वहाँ से खून निकल रहा था । ये तो कटेगा निशान हैं । बहार पिटाई में कटे का निशान कहाँ से बना? गार्ड ने पूछा मुझे नहीं पता इसमें कौन कौन से हथियार छुपाकर रखे । अपने पास आपसे करिए देखो तुम्हारी ये चाल काम आने वाली नहीं । जावेद बोला जेल का डॉक्टर जब ये जख्म चेक करेगा तो उसे पता चल जाएगा । ये ताजी जख्म नहीं हो सकता है । पुराने हो पर तुम ने मुझ पर हमला किया इसलिए मुझे छोटे आई हैं । मामले की गंभीरता को देखते हुए गार्ड के पास कोई और चारा नहीं था । उसने जेलर को इतना करने का फैसला लिया । बाहर निकलकर उसने दूसरे गार्ड को बुलाया और वहाँ रुकने को कहा और खुद जेलर को फोन करने चला गया । जेलर ने फोन पर निर्देश दिया कि सहानी को रात के लिए दूसरे किसी सेल में रख दिया जाए । सुबह वह खुद इस मामले को देखेगा । सेल से निकलते वक्त साहनी ने जावेद की तरफ विजयी मुस्कान के साथ देखा । जावेद उसे जाते देखता रहा । दूसरे दिन सुबह सुबह जेलर जावेद के सेल में पहुंचा । जावेद उसके लिए तैयार था । जावेद ये क्या सुन रहा है? मैंने आपके और सीक्रेट सर्विस के चीफ के कहने पर इतना तो कर दिया कि आपको साहनी के सिल में पहुंचा दिया और मैंने पहले ही कहा था कि जेल में कुछ भी गडबड नहीं की जा सकती है । मेरी नौकरी का सवाल है आप चिंता मत करिए । वो नाटक करता है । मैं उस पर हाथ नहीं उठाया बल्कि दो दिन पहले मोनू के गैंग ने उस पर हमला किया था । मैंने तो उसे उनसे बचाया था । फिर वो क्यों वहाँ पर झूठा इल्जाम लगा रहा है । मैं उसके पीछे जो पढा हूँ आपको बताई है मेरा उसके साथ आपको पता ही है । मेरा उसके साथ रहने का एक ही उद्देश्य उससे इन्फॉर्मेशन निकालना । उसमें कुछ सफलता मिली नहीं, पर कामयाबी मिलने ही वाली है । आप उसको वापस फिल्में भेज दीजिए । एक दो दिन में कम हो जाएगा । जेलर ने नकारात्मक ढंग से सिर हिलाया और बोला नहीं अब ये संभव नहीं । उसने बडा जुगाड लगाया है । जेल सुपरिटेंडेंट उसे अकेला सिल दिलवाने वाला है तो जावेद ना खुश होते हुए बोला हाँ मेरे खयाल से आज शाम तक लिखित आदेश भी आ जाएगा । जावेद सोच में पड गया हूँ, अब मैं चलता हूँ । जेलर बाहर निकलते हुए बोला अभी तक उसने कोई फॉर्मल कंप्लेंट नहीं की है आप के खिलाफ । पर अगर ऐसा कुछ हुआ तो एक्शन लेना मेरे लिए भी मजबूरी बन जाएगी । मैं समझ सकता हूँ जावे बोला जेलर चला गया । जावेद का प्लान बेकार हो गया था । टॉर्चर अपने चरम सीमा पर पहुंचने ही वाला था । पर इस बदलाव के कारण पूरी स्कीम फेल हो गई थी । अब उसे नए सिरे से कुछ सोचना था ।

Part 8

चार दिन बाद जेल सुपरिटेंडेंट की सिफारिश पर सहानी को उसका अलग स्पेशल सेल हासिल हो गया था । अब उसे भी तकरीबन सभी वीआईपी सुविधाएं उपलब्ध थी । जेल में आरामदायक जीवन व्यतीत करने के लिए ये बहुत था । उसके सेल में पंखा था यानी टेबल फैन, मोटा गद्दा, किताबी टेलीविजन और उसे एक मोबाइल भी हासिल हो गया था । हालांकि उसे हिदायत दी गई थी कि मोबाइल का प्रयोग छुप कर ही करें । खाना भी उसको उसके सेल के अंदर ही मिल जाता था । कभी कभार अपनी मर्जी से वो खाने बाहर जरूर निकलता था और ऐसा मौका अक्सर बच्चों के कहने पर ही आता था, जब वह उसके साथ बैठकर उसके सेल में या फिर जेल की कैंटीन में आराम से खाना खाता था । जावेद लगातार उस पर निगाह रखे था । हालांकि उस ने उसे सूचित दूरी बना रखी थी । हालांकि उसने उस से उचित दूरी बना रखी थी । शाम का वक्त था अमर अपने घर की तरफ जा रहा था वो रास्ते में ही उसने रिंकी को फोन किया और उससे मिलने का आग्रह किया । रिंकी ने कहा कि वह देर रात तक उसके घर पहुंच जाएगी । अमर घर पहुंचा और फिर कुछ देर इंटरनेट पर साहनी के बारे में ढूंढने लगा । उसे बस यही पता चला कि पुनीत साहनी अपने माँ बाप की इकलौती संतान थी । उसके माँ बाप पांच साल पहले गुजर गए थे । उसके बाद से वो अकेला ही फैमिली बिजनेस संभाल रहा था । उसके और मिनास के कुछ फोटो थे और उससे पहले कुछ और मॉडल्स और अभिनेत्रियों के साथ भी उसके संबंधों के चर्चे थे । सोचते सोचते उसने एक सिगरेट जला ली और खिडकी के बाहर देखने लगा । ऐसे वक्त में उसे अपनी गर्लफ्रेंड मदिरा की काफी याद सताती थी क्योंकि टेंशन भरे पलों में उसकी बातें उसके दिमाग को ठंडक पहुंचाती थी और सही सोचने में मदद कर दी थी । टेंशन में हो अचानक दरवाजे की तरफ से आवाज आई अमर पालता उसने देखा । वहाँ रिंकी खडी थी जिनकी ने हाफ पैंट और टीशर्ट पहनी हुई थी । पैरों में ऊंची सैंडल थी । बालों में बैंक कलर का हेयर बैंड था और कंधे पर बैग लडका था । उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे स्कूल जाने वाली बच्ची हो । एकदम सही मौके पर पहुंची हो । अमर उसके पास पहुंचकर बोला, दो माइंड रिंकी उसकी सिगरेट की तरफ इशारा करते हुए बोली, अमर ने सिगरेट एक तरफ की और जल्दी से बोला, चलो तुम्हारे कमरे में चलते हैं । रिंकी चाहते हुए बोली हुआ अब तुम्हारे घर में मेरे लिए एक परमानेंट काम रहा है । ऐसे मूड में भी अमर को हंसी आ गई । कमरे में पहुंचते ही रिंकी नहीं अपना लेपटॉप चार्जिंग पर लगा दिया और उसे ऑन कर दिया । साथ में अपने बाकी डिवाइस में इस पर रखती है । पिछले दो दिनों में मुझे काफी कुछ नया पता चला है । रिंकी बोलिए कुछ कुछ उनका प्लैन क्लियर हो रहा है । ये तो बहुत अच्छी बात है । अमर बोला और शायद तुमने सुन लिया होगा कि साहनी भी अब गिरफ्तार हैं । हाँ मैंने न्यूज में देखा था । ये तो बहुत बडी सफलता है । मैं इसलिए तुम्हें याद कर रहा था क्योंकि तुम्हारे पास सभी टेरेरिस्ट की डीटेल आती है । मैं जानना चाहता हूँ कि साहनी के बारे में तुम कितना जानती हो या कितनी जानकारी निकाल सकती हूँ । फ्रैंकली अभी तक तो मेरी लिस्ट में साहनी का नाम कहीं भी नहीं था । ये शायद सबके लिए धमाकेदार खबर है कि एक कितना बडा इंडस्ट्रलिस्ट होनी है । पर जहाँ तक मेरा अंदाजा है वो टेरेरिस्ट नहीं हो सकता । ऐसा क्यों? उसने घडी में बम रखकर जॉन को मारने की कोशिश की थी । उसके काम करने के तरीके से मैंने अंदाजा लगाया कि वह शायद किसी कि मदद कर रहा है । ऍम चीजों के कंट्रोल में नहीं सर । बाकी जानकारी तो मैं धीरे धीरे निकाल ही होंगी । तुम्हें क्या पता चला है? हाँ, दस साल पहले की बात है जब खलीली नामक आतंकी का ग्रुप खाली । वह आईएसआई के वाला हाँ, उस वक्त उसका इतना नाम नहीं था जितना आज है । वो उस वक्त कश्मीर में सक्रिय था । उसके ग्रुप ने एक बार भारतीय मिलिट्री बेस पर हमले की योजना बनाई थी और उन के हमले से पहले भारतीय सेना ने उनके ठिकाने पर हमला बोल दिया था । इस मिशन में जावेद भी शामिल था । अच्छा हाँ, उस वक्त न तो मैं सीक्रेट सर्विस में था ना जाते थे । हाँ, जावेद आर्मी में था और उसने खाली को काफी नुकसान पहुंचाया था । मुझे पता है कि खाली को खासकर जावेद से खुन्नस हो गई थी । वो उससे बदला लेने की फिराक में था पर उसे फिर से मौका ही नहीं मिला । उसके बाद खाली कश्मीर से गायब हो गया और कुछ साल बाद मिडिल । इसमें आईएसआई के नाम आतंकी संगठन का नेता बनकर होगा और अभी तक वहाँ तबाही मचा रहा है । लेकिन तुम ये क्या कहना चाहती हूँ । हाँ, जिस तरह जावेद को व्यक्तिगत तौर पर टारगेट किया जा रहा है, मुझे लग रहा है कि इसके पीछे खलीली ही हो सकता है । वरना टेरेरिस्ट इस तरह से किसी एक को टारगेट क्यों करते हैं? तो मैं जॉन और एजेंट्स और तुम्हारे चीज को क्यों छोड देते हैं? तो क्या खलीली लखनऊ में हो रही आतंकी घटनाओं के पीछे हैं ये तो मुझे नहीं पता पर ऐसा हो सकता है पर वो तो अभी भी मिडल ईस्ट में है । यहाँ पर यहाँ के मिशन का मास्टरमाइंड तो हो सकता है । क्या आतंकियों की कोई लोकेशन पता चली? नहीं कोशिश कर रही हूँ, कब सक्सेस मिलेगी, कह नहीं सकती ये नहीं और बताओ और क्या और ऐसे ही कुछ अपने बारे में रिंकी गाल पर हाथ रखकर भोलेपन के साथ हुई तो जनाब ने इसलिए मुझे यहाँ बुलाया है । अरे नहीं आप मेरे बारे में तो मैं बता चुकी । अब तुम अपने बारे में बताना, हीरो, रिंकी, शर्मीली, मुस्कान के साथ उसे देखते हुए बात करने लगी । अच्छा क्या जानना चाहती हो? जासूसी के अलावा और क्या कर लेते हो? लॉन्ग ड्राइव गर्लफ्रेंड के साथ किसी के भी साथ ही आगे ले भी और लॉन्ग मतलब रियल ऑफ । अगर इंडिया में कहीं भी जाना हो तो मैं ड्राइव करके जाना पसंद करूंगा । वो कौन सबसे लंबी ड्राइव कौन सी थी? लखनऊ से कोच्चि करीब सत्ताईस सौ किलोमीटर सुभाव दो दिन लगे थे । वो वन नाइट हॉल्ट अकेले ही गया था । बहुत जबरदस्त थी । जर्नी, मौसम, कभी चलना मेरे साथ क्यों? मुझे भी गर्लफ्रेंड बनाने का इरादा है । मेरी खुशकिस्मती, अच्छा जी, मंदिरा को फोन लगाओ क्या या मजाक भी नहीं कर सकता । एक नहीं तो मैं मंदिरा के बारे में कैसे मालूम? अमर को डरा हुआ देखकर रिंकी को बहुत मजा आया । वो बोली थी भूल गए मिस्टर मैं एक जासूस हूँ । खूबसूरत जासूस मुझे पता है कि तो वो फ्लर्ट हो । कभी नहीं सुधरने वाले । लगता है अब मुझे गुडनाइट बोल ही देना चाहिए । अमर उठते हुए बोला येस गुडनाइट मिस्टर फ्लर्ट । गुडनाइट अमर ने आंख मारी और फिर कमरे से बाहर निकल गया । सीक्रेट सर्विस के हेड क्वार्टर में गंभीर माहौल था । मीटिंग रूम में विशाल का मेज के चारों तरफ जॉन, अमर और श्रीनिवासन मौजूद थे । जॉन लेपटॉप में व्यस्त था और अमर बार बार टहलता और फिर बैठ जाता था । श्रीनिवासन ने चुप्पी तोडी आप लोग इतना क्यों वही कर रहा है तो थोडा तो फॅमिली आई है और थोडा सक्सेस मिलने से कम नहीं होगा । श्रीनि अमर बोला जावेद भी जेल में उसका मोह नहीं खुलवा पाया । वो मानने को तैयार ही नहीं है कि वह जावेद से बदला ले रहा है । जब तक ये साबित नहीं होता कि साहनी एक आतंकवादी है और उसने जानबूझ कर जावेद को फंसाया है । जावेद को कोई फायदा नहीं होने वाला है । भले ही सानी को मिनाज के मॉडर के लिए फांसी ही क्यों ना चढा दिया जाएगा । उसके किसी काम की हिस्ट्री भी कहीं से पता नहीं चली । जॉन बोला श्रीनिवासन बोला आप हमको आज का टाइम दीजिए, हम उसकी और इन्फॉर्मेशन निकालने की कोशिश करेगा । ठीक है श्रेणी । अमर बोला तुम इसी काम पर लग जाऊँ बल्कि अभी से समय खराब मत करो । बिल्कुल ऑलराइट । श्रीनिवासन ने कहा और उठकर बाहर निकल गया । अचानक अमर ने जॉन से पूछा, मिनाज मर्डर केस का क्या हुआ? जॉन ने लेपटॉप से नजर उठाई और बोला उसका क्या होना है? उसका खाते तो जेल में, पर मुझे लगता है कि उतना स्ट्रॉंग केस नहीं । उसके खिलाफ अमर बोला, सहानी पैसे वाला है, अच्छे वकील और झूठे गवाह ला सकता है । हमें कुछ करना पडेगा पर उसके से जावेद को क्या फायदा होने वाला है? मैं ये कहना चाह रहा था कि हम उस केस पर और काम करते हैं । हो सकता है हमें उससे साहनी के बारे में कुछ पता चले अमर बोला हूँ हूँ । जॉन बोला बात तो ठीक है । सानी के किए अपराध से उसके और रहस्य सामने आ सकते हैं । हाँ, अच्छा । साहनी के घर की तलाशी में कुछ नहीं मिला । मिला वही दवा की रसीद जो जज के सामने पेश की थी । जॉन बोला और कुछ भी नहीं मिला । उसकी फोनकॉल्स मोबाइल जॉन ने नकारात्मक ढंग से सिर हिलाया । कुछ नहीं है । मुझे पूरा यकीन है उसके पास कोई और फोन रहा होगा जो उसने गायब कर दिया । जाहिर है ऐसे लोग दो कदम आगे की सोचते हैं । वैसे तुमने मिनाज के सभी दोस्तों, परिचितों को तो टटोला ही होगा । हाँ, उसकी एक मॉर्डल दोस्त नेहा के बारे में बताया तो था । हो सकता है कि उसने झूठी गवाही दी हूँ । हाँ, उससे बात करते वक्त मुझे भी ऐसा लगा था । पर फिर तेरा ध्यान था साहनी के खिलाफ सबूत और गवाह इकट्ठे करने में अमर बोला हूँ वो ठीक है, लेकिन अब अगर हमें सानी नामक इंसान की पूरी हिस्ट्री खोदकर निकालनी है तो हर एक चीज पर बारीकी से सोचना पडेगा । सही का मेरे आम जॉन बोला हूँ । मैं अपनी डायरी लेकर आता हूँ कहकर जॉन मीटिंग रूम से निकला और कुछ ही पलों में अपनी डायरी लेकर लौटा, जिसमें उसने मिनाज के इसके नोट्स बनाए हुए थे । मिनाज की मॉडलिंग एजेंसी का नाम क्या है? अमर ने पूछा कोई मॉडलिंग एजेंसी वहाँ से मिनाज के बारे में और जानकारी भी मिल सकती है? हाँ, शायद मुझे जितना पता चला था, उस से यही उजागर हुआ कि वो बस में यहाँ की ही फ्रेंड थी । बाकी किसी के इतनी करीब नहीं थी । अमर ने कहा, पर कभी कभी कुछ लोग आपको न जानते हुए भी आप पर नजर रखते हैं । आप के बारे में जानना चाहते हैं । खूबसूरत लडकियों के साथ ऐसा होना तो आम बात है । ऐसे लोगों के पास भी कुछ जानकारी हो सकती है, सहमत हूँ । जॉन ने कहा, इसके माँ बाप रिश्तेदार उन का ड्रेस तो मिला था जौनपुर के किसी गांव का । वहाँ की लोकल पुलिस से मैंने पूछताछ करवाई थी तो पता चला उस पते पर अब कोई और ही रहता था । वो मकान भेज दिया था । दो साल पहले यानि उसका फॅस जो कि उसके सभी डॉक्यूमेंट पर होगा । अमर ने पूछा हाँ, फर्जी भी तो हो सकता है । फर्जी फॅस होना तो खुद मिनाज को शक के दायरे में लाता है । बिल्कुल क्यों नहीं हो सकता है । अगर उसके संबंध साहनी से थे, जो कि हमारे हिसाब से एक आतंकवादी भी हो सकता है । तो ऐसा होना कोई बडी बात नहीं । यानी मिनाज का संबंध भी आतंकियों से जॉन सोचते हुए बोला, हाँ, हो सकता है । फिर साहनी ने उसे क्यों मारा? जॉन हिरानी के साथ बोला, मोटिव तो वैसे भी नहीं मिला है अभी तक चलो । फिलहाल हम उसकी एजेंसी वालों का सिर खाते हैं । अमर ने उठते हुए कहा और फिर उसकी फ्रेंड यहाँ को फिर से टटोलते हैं । ठीक है दोनों हैड क्वाटर्स से अमर की कार में निकले रास्ते में वह पहले नेहा के घर होंगे । वहाँ पता चला कि वह किसी फोटोशूट के लिए दिल्ली गई हुई है । वहाँ पता चला कि वह किसी फोटोशूट के लिए दिल्ली गई हुई है और कल रात तक ही वापस आने वाली है । फिर वो लोग कोई मॉडलिंग एजेंसी पहुंचेंगे, जहां उनकी कुछ खास आवभगत तो नहीं हुई, पर परिचय देने के बाद वहाँ उपस्थित मैनेजर उनसे बात करने को राजी हुआ । दो साल के अंतराल के कारण ज्यादा लोग मिनाज के परिचित नहीं थे । कई लोग बदल चुके थे और कईयों ने मिनाज के साथ कम समय ही काम किया था । जिनके साथ उसने काम किया भी था, वो उसकी व्यक्तिगत जिंदगी से ज्यादा वाकिफ नहीं थीं । अमर ने मैनेजर से सवाल किया, मिनाज के साथ काम करने वाले मेल मॉडल्स के नाम बताइए । ऐसे तो सब कुछ याद रखना बहुत मुश्किल है । कितने शूट होते हैं उसमें से बॅाबी कोई किसी के साथ जाता है, कभी कोई किसी और के साथ? चलिए उसके शूट के फोटो ही दिखा दीजिए । उस से पता चल जाएगा । मैंने चलने कंधे उसका । उसने लैप्टॉप उनकी तरफ कर दिया और एक फोल्डर खोलते हुए बोला इसमें दो तीन साल पहले की कुछ इवेंट के फोटो है । शायद इसमें आपको कुछ पता चले । उन्होंने फोटो देखने शुरू की है । कुछ देर सैंकडों फोटो को देखते हुए अचानक जॉन बोला ये कौन सी बैंक मैनेजर ने देखा । उस फोटो में मिनास और उसके साथ एक हट्टा कट्टा खूबसूरत युवक था । दोनों ने स्विमिंग कॉस्ट्युम पहनी हुई थी । ये ऍम थी यहीं लखनऊ में हुई थी । अच्छा जॉन बोला तो ये कौन लडका है तो इसी के बारे में क्यों पूछ रहे हैं? है कुछ वजह अब जवाब दीजिए । वो कुछ हिचकिचाने लगा क्या हुआ? अमर ने झटका । दरअसल ये मेरा भाई है तो अच्छा तो आप घबरा क्यों रहे हैं? जॉन ने पूछा, नहीं नहीं, ऐसी बात नहीं है । बस मैं नहीं चाहता उसे कोई परेशानी हो । वो एक दम प्रोफेशनल मॉर्डल है । काम पर ध्यान देता है । अभी उसे मुंबई से भी टीवी सीरियल्स के ऑफर्स आ रहे हैं । मिनाज से तो उसने शायद शूट के वक्त कोई इधर उधर की बात भी नहीं की होगी । फिर तो आप को बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है । जॉन ने आश्वासन देते हुए कहा, पर अभी कहाँ मिलेगा आपका भाई? अमर ने पूछा वो तो अभी घर पर होगा एड्रेस दीजिए । अरे नहीं मैं तो यही बुला लेता हूँ । आपने फोन की तरफ लगाते हुए वो बोला प्लीज आप लोग घर ना चाहिए । पापा मम्मी की हो गई है, वो परेशान हो जाएंगे । वो फोन करने के लिए साइड में हो गया । अमर जॉन के कान में बोला मेरी जान ऐसा क्या दिन? क्या तुझे फोटो में जो तूने इसे ही चुना तो नहीं देखा क्या देखो उसमें एकदम सेक्सी मॉडल थी । बेचारी अब नहीं रही । उसको उस नजर से देखना भी अच्छा नहीं लग रहा है । अरे उसे नहीं अपनी आंखों से वासना का चश्मा हर कर देगा । तो ये बात है ठीक है । कहकर अमर ने झूठमूठ चश्मा उतारने का उपक्रम किया । फिर लेपटॉप की स्क्रीन को एकदम नजदीक से देखने लगा । फिर वो बढाया और तेरी फिर जॉन को प्रशंसनीय नजरों से देखते हुए बोला ऍन गया मेरी जाए मेरी पार की नजर और निरमा सुपर दोनों को उस फोटो में मिनाज रैम पर चल रही थी और दर्शकदीर्घा में एकदम फ्रंट रो में साहनी सूट बूट पहने खडा था । कब की फोटो है जॉन फाइल में तारीख देखिए वो अक्टूबर दो हजार की थी । वो बोला यानी ये फोटो शायद साहनी और मिनाज के रिलेशनशिप शुरू होने से पहले या फिर शुरुआती दौर की होगी । पूरी तरह से फिदा था । लगता है अमर बोला हूँ वो लोग इस तरह कुछ देर बातें करते रहेंगे । मैनेजर के भाई के आते ही उनका ध्यान उसकी तरफ आकर्षित हुआ । वो छह फीट लंबा गोरा खूबसूरत नौजवान था । उसकी मांसल गर्दन पर एडम्स एप्पल कुछ ज्यादा ही उभरा हुआ था । जासूसी मंडली को देखकर वह कुछ घबराया । ऐसा लग रहा था उसके भाई ने उसको फोन पर पहले से ही होशियार कर दिया था कि उसको अकस्मात ही किस लिए तलब किया गया है । हलो हलो अमर और जॉन लगभग एक साथ बोले, हाँ, ऍम, उसने बारी बारी दोनों का अभिवादन किया । मैं तो अमर दोस्ताने भरे रवैये के साथ बोला, यही है मेरा भाई रोहन । मैनेजर ने कहा रोहन अमर उसे एल्बम दिखाते हुए बोला, ये वो तो तुम्हें याद होगा ही । रोहन ने ध्यान से वो फोटो देखी । फिर याद करते हुए बोला फॅस तीन साल पहले फैशन शुरू हुआ था लखनऊ में ऍम तुम मिनास को जानते थे । मिनाज उसके चेहरे पर कुछ मायूसी आई । अच्छी मॉर्डल थी बट बट क्या? जॉन ने पूछा, आप लोग तो जानते ही होंगे उसने? सुसाइड हाँ । ऐसा माना गया था । हाल ही में केस फिर खुला और वो बॉर्डर निकला । बहुत वो चौका और उसका मॉडर किसने किया? उसके बॉयफ्रेंड ने तो निशानी हम जानते हैं उसे । जॉन ने पूछा हम उस शो में ही देखा था । उसे वो मिनाज के पीछे पागल हो गया था । ऐसा क्या कर रहा था? तो अगले की तरह ताली बजा रहा था और उसने तो तब हद पार कर दी जब शो के बाद उसने सबके सामने मिनाज को किस किया तो अमर ने कहा, उसने जॉन को देखते हुए मुंह बनाया तो मिनाज ने कैसे? क्या जो अन्य पूछा । फॅमिली बहुत शर्मिंदा हुई थी तो उसे डेट कर रही थी और उसकी इस हरकत से वो नाराज होकर चली गई थी । साहनी उसके पीछे गया था । उसके बाद उनके बीच क्या हुआ, वो जानने की मैंने कभी कोशिश नहीं की । मिनाज ने उसके बारे में कुछ बोला, तुम्हें कुछ सुनाया जाना मुझे तो कुछ नहीं किया । मुझे इन सब गॉसिप में दिलचस्पी भी नहीं थी । मुझे बस इतना लगा कि सानी उसे लेकर बहुत आपसे था । नाॅट तो ऐसे होता ही है । अमर ने कहा, जी पर मुझे वो कुछ सिरफिरा लगा जी और मुझे वो कुछ सरफिरा लगा था । आपने बताया कि उसने मर्डर किया तो मैं सरप्राइज नहीं हुआ । ऐसा क्यों? क्या वो तुम्हें इस हद तक पागल लगा? कोई खास वजह या कोई और ऐसी हरकत की? इसमें नहीं? बस उन्हीं हरकतों से संकिसा लग रहा था । इसके बाद भी तो कई और इवेंट या शो हुए होंगे जहाँ साहनी आया होगा । अमर ने मैनेजर व उसके भाई दोनों की तरफ देखते हुए पूछा, हाँ सर आता था । मैंने जब बोला इसके जैसा रईस शख्स जो आपके फ्रेंड्स में अक्सर आता हूँ, उस पर तो आपने भी खास ध्यान दिया होगा । अमर ने पूछा दरअसल मैनेजर कुछ रखते हुए बोला सानी जी ने हमारी कुछ वन स्पॉन्सर भी की थी तो बगल में छोरा और गांव में ढिंढोरा अमर उसको ध्यान से देखते हुए बोला वो जबरदस्ती हजार आपको तो ये बात पहले बतानी थी । अरे मैं छुपा थोडी रहा था । आपने पूछा नहीं फिर भी मैं बताने ही वाला था । अब तो बताया भी देखिए मेरे उनके साथ बिजनेस रिलेशन थे । बदौर मिनाज मुझे बढिया स्पॉन्सर मिल गया था । बस मेरी उनसे इतनी ही डीलिंग थी हूँ । वो तो ठीक है । जॉन बोला फिर तो आप साहनी के जानकार हुए । आपने कभी कुछ तो देखा होगा । सानी और मिनाज के बीच वो मिनाज के लिए पूरी तरह पागल था । पर पता नहीं मिनाज उसको लेकर सीरियस थी कि नहीं? ऐसा क्यों? वो एक बढिया नौजवान था । करोडपति इंडस्ट्रलिस्ट था । हाँ वो तो है पर मुझे लगता था कि मिनाज की जिंदगी में वो हिचकी जाने लगा, जो भी आपको लगा हो बोल दो सबूत थोडी ना मांग रहे हम । अमर ने कहा, मुझे लगता था कि वह ऑलरेडी किसी के साथ रिलेशन में है । फिर साहनी यानी वो सहानी को धोखा दे रही थी । जॉन उत्साहित होते हुए बोला यानी सहानी के पास मौजूद था । कौन था वो जो पहले से मिनाज की जिंदगी में था । उस बारे में मुझे कुछ भी पता नहीं । ये बात मैं सिर्फ अंदाजे से कह रहा हूँ, मैं समझ रहा हूँ और कुछ तो ऐसी बात आपने गौर की होगी ना । जिससे आपको ऐसा लगा आप अपने विचार बताइए । अमर ने उसे प्रेरित किया । बाकी उस पर इन्वेस्टिगेट तो हम करेंगे । मैनाज को अक्सर कुछ कॉल्स आती थी जिन्हें वो अकेले में बात करने जाती थी और उसके हावभाव देखकर लगता था जैसे किसी पुरुष से बात कर रही हूँ । यानी रोमांटिक अंदाज में जॉन ने पूछा रोमेंटिक तो नहीं पर कुछ अपनापन लीजिए जैसे कोई परिवार वाला हूँ माँ बाप । उसने ना में सिर हिलाया । मिनाज के कॉल रिकॉर्ड फिर से चेक करने होंगे । जॉन अपनी डायरी पर नोट करते हुए बोला । उन तीनों ने कुछ देर और दोनों भाइयों को खंगाला पर कोई और महत्वपूर्ण बात नहीं पता चली । वहाँ से वो दोनों नेहा की खोज में निकले पर उसके घर पर अभी भी कोई नहीं था । फिर दोनों आगे की जांच पडताल के काम को बढाने के लिए हेडर्क्वाटर आ गई । कुछ ही घंटों में उन्होंने मिनाज का पुराना फोन रिकॉर्ड निकलवा लिया । उससे जो जानकारी हासिल हुई उसके हिसाब से अधिकांश कॉल एजेंसी की और फिर साहनी की थी । उसके अलावा एक और नंबर था जिस पर बहुत कॉल हुई थी । श्रीनिवासन ने उस नंबर के मालिक की जानकारी फटाफट अमर जॉन के सामने पेश की । ये रही उसकी फोटो जो उसने सिम कार्ड लेते वक्त दिया होगा । श्रीनिवासन बोला उसके सामने एक सत्ताईस वर्षीय युवक की फोटो थी जिसका चेहरा लम्बा था, बहुत मोटी थी, नाम था लतीफ हुसैन । उसका पता लखनऊ का ही था । ये कौन हो सकता है? जॉन ने श्रीनिवासन के कंप्यूटर पर उसकी तस्वीर देखते हुए पूछा परिवार वाला अमर ने तुक्का मारा हूँ श्रीनी चेक करना कि इसका कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड तो नहीं वॅार ये भी कोई कहने की बात है हम पहले ही सर्च के लिए बोल दिया ऍम मुझे यही लग रहा है ना कि अगर क्रिमिनल रिकॉर्ड ना हुआ तो परिवार वाला होगा । जो हमने पूछा था, हाँ क्यों? मिनाज का परिवार वाला क्रिमिनल नहीं हो सकता । हो सकता है मेरी जान मैंने इनकार कब क्या पर अगर क्रिमिनल रिकॉर्ड ना हुआ तो परिवार वाला मानने में मुझे जल्दी यकीन होगा । इसके एड्रेस पर चले मिनट का तो दूर है यार । अमर अंगडाई देते हुए बोला तुझे तो ड्राइविंग पसंद है, शहर में नहीं शहर के बाहर आउटस्टेशन लॉन राय क्या कहने चलो ड्राइविंग मैं कर लूंगा । ये बिना दोस्तों वाली बात कहकर अमर कूदकर खडा हो गया । न जाने क्यों लग रहा है । कुछ हाथ पहुंच चलाने का मौका मिलने वाला है । अच्छा है शरीर में कुछ दिया जाएगी । श्रेणी जो भी अपडेट हो तुरंत फोन कर देना । जॉन ने उठते हुए कहा । श्रीनिवासन ने हामी भर अमर और जॉन बाहर निकले । कुछ ही देर में जॉन्की का तेजी से सडक पर दौड । कुछ ही देर में जॉन की कार तेजी से सडक पर दौड रही थी । गोमती नगर से होते हुए कुछ ही मिनटों में ही वह फैजाबाद रोड पहुंच गए । फैजाबाद की तरफ जाते हुए मुख्य लखनऊ शहर से काफी बाहर था । चिन्हट ये चिनहट भी क्या नाम हुआ? जॉन बोला नाम जरूर कुछ अजीब है पर ऐतिहासिक जगह जॉन हजार अरे मेरे जान मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ सर । अठारह सौ सत्तावन में जब अंग्रेजों के खिलाफ बगावत शुरू हुई थी तो चिनहट में भी एक लडाई हुई थी । पता है उसमें अंग्रेज फौज में जो भारतीय सिपाही थे, उन्होंने लडाई के बीच अपनी राइफलों का रुख अंग्रेजों की तरह ही कर दिया । ये तो गद्दारी हुई, अपने देश से तो वफादारी हुई ना । फिर कौन जीता कौन क्या भारतीय कोठी जीता । अंग्रेज फौज के सभी सिपाही मारे गए थे । जॉन कुछ बोला नहीं अच्छा अंग्रेज अच्छा अंग्रेज मुझे बुरा लग रहा है । मैं अंग्रेज चालू और थोडी सी सही । अब हम शुरू से गोवा में थे, फॉर होगी । इसके आने के बाद हमने क्रिश्चियनिटी धर्म अपना लिया था । बताया मेरी जान बातों बातों में वह चिनहट पहुंच गए । वहाँ पर सत्रह रोड पर होते हुए वो पोस्ट ऑफिस ढूँढने लगे । पोस्ट ऑफिस मिलने में ज्यादा दिक्कत नहीं आई । एक जगह कार पाक से उतरकर वो पान वाले से पता पूछने लगे हैं । कुछ ही देर में वो उस पते पर पहुंचे । वहाँ बोरी मकानमालकिन से पता चला कि लतीफ वहाँ दूसरी मंजिल पर एक कमरे में किराए पर रहता था और दो साल पहले ही गोरखपुर में अपने गांव वापस लौट गया था । क्या हम उसका कमरा देख सकते हैं? वहाँ उसका कोई सामान नहीं है । बूढी मकानमालकिन उन्हें अंदर नहीं घुसने देना चाहती थी । आज ही समझ सकते हैं । फिर भी एक नजर डालेंगे । अमर बोला कुछ ही चलते हुए उसने उन्हें अंदर आने दिया । जो चक्का था क्या वो वो बढ बढाने लगी? देखने में तो ऐसा नहीं लगता था । अल्लाह जाने आजकल के लडकों आप उसे हम से ज्यादा जानती होंगी । हमें तो बस उसका नाम पता बस यही चलता है । वो उन्हें सीढियाँ चढते हुए ऊपर ले आए । ऊपर एक कमरे का दरवाजा खोलते हुए बोली इधर रहता था । वो कमरे में चारपाई, कपडे, सिलाई मशीन इत्यादि सामान रखा था । ये सब सामान मेरा है । वो इस तरह से बोली मानव से डर हो कि लतीफ का सामान समझकर अमर और जॉन उसे अपने साथ ले जाएंगे । उससे मिलने उसके गांव से कोई आता था । हाँ अमर ने पूछा, नहीं शादीशुदा था । हाँ गांव में रहती थी उसकी बीवी यहाँ नहीं लाया । कभी लाता था कभी कभी नाम क्या था? अरे तुम्हें तो पता ही है लतीफ और क्या जॉन्की हंसी निकल गई । उसकी बीवी का नाम पूछा है हम को क्या मालूम उसकी बीवी का नाम हम कोई उसके साथ थोडी ना लगते हैं । वो गुस्से में बोल कभी तो बातों में सुना होगा माजि अमर प्यार से बोला कुछ था शव नंबर नाम शायद पक्का याद नहीं । तभी अमर की नजर दीवार पर टंगे कैलेंडर पर गयी । वो दो साल पुराना कैलेंडर था । उस पर कुछ फोन नंबर और कुछ नोट्स लिखे थे । ये आपका है । अमर ने कैलेंडर उतारकर पलटते हुए देखा हम क्या करेंगे? कैलेंडर का उसका ही है । वो छोडकर गया । हमने भी लगा रहने दिया । इस पर सीन अच्छा लग रहा था । इसे मैं ले जा रहा हूँ । मकान मालकिन खुश तो नहीं देखी पर फिर उसने विरोध नहीं किया । अमर ने कैलेंडर पर लिखे एक फोन नंबर को अपने मोबाइल के कीपैड पर टाइप किया । तुरंत साहनी का नाम नजर आया । उसने उत्साह के साथ जॉन को देखा, जिसकी नजर भी उसके मोबाइल पर थी हूँ । लगता है सही मुर्गा हाथ आया है । अमर बोला दो नंबर और थे जो अमर की कॉन्टेक्ट लिस्ट में नहीं थी । पर उसने उन्हें फौरन श्रीनिवासन को मैसेज से भेज दिए और उनका पता करने को बोला । शाम को ही अमर को गोरखपुर पुलिस ने तिलादि की । उन्हें लतीफ हुसैन मिल गया है । अमर ने उसे लखनऊ भिजवाने को कहा । पुलिस ने कहा कि कल शाम तक उसे लखनऊ में सीक्रेट सर्विस के हेडक्वार्टर पहुंचा दिया जाएगा । इस बीच जॉन में यहाँ से दोबारा मिला । पर उससे बात करके उसे कुछ खास जानकारी हासिल नहीं हुई । अमर दस बजे के करीब अपने घर पहुंचा । बैठक से होकर किचन की तरफ जा रहा था कि उसे अंदर के कमरे से कुछ आवाज आई । वो उस तरफ पहुंचा । उसके बेडरूम में लाइट जल रही थी । उसने धीरे से दरवाजे को धक्का दिया । फिर दोनों हाथों में रिवॉल्वर था में धीरे से अंदर प्रवेश हुआ । कमरे में जिनकी थी जो उसकी टेबल पर झुकी हुई थी । अमर ने गहरी सांस छोडी और रिवाल्वर नीचे क्या? तो मैं यहाँ क्या कर रही हूँ जिनकी चौक कर पार्टी कुछ नहीं । थोडी देर पहले आई थी । सिगरेट पीने का मन कर रहा था तो तुम्हारे कमरे में ढूंढने आ गई । अमर ने अपनी जेब से पैकेट निकाला और उसकी तरफ उछाल दिया तो मैं अभी तक तो पीते देखा नहीं था । कभी कभार ही पीती हूँ । टेंशन है कोई । मुझे देखकर ऐसा लगता है तो मैं अमर ने उसे देखा । उसके चेहरे पर बच्चों जैसी मुस्कान थी । गालों में गड्ढे उभर आए थे । फिर क्या बात है मेरे कमरे में चलो दिखाती हूँ सिगरेट हाथ में पकडे । वह कमरे से निकली । अब लाइटर कौन देगा? अमर ने चलते चलते लाइटर उसे पकडाया । कमरे में पहुंचकर उसने लैप्टॉप खोला । फिर उसमें से कुछ फोल्डर खोले और फिर एक फोटो स्क्रीन पर प्रकट हुई हैं । स्क्रीन पर एक लम्बा पतला सशक्त था जिसकी घनी लंबी दाढी थी । आंखों पर चश्मा और सिर पर टोपी थी । ये कौन है? अमर उसे ध्यान से देखते हुए बोला अगर तुम गाँव में काम कर रहे होते हैं तो ये सवाल नहीं पूछते हैं क्या कर सकता हूँ । हम तो अंदरूनी दुश्मनों को ही ज्यादा जानते पहचानते हैं । यही खाली है वो अमर ने उस पर फिर से एक नजर डाली । मैंने देखा है ऐसे बाल इस फोटो में पहचान में ही नहीं आ रहा है । तो क्या खबर है इसके बारे में बहुत जल्दी भारत में घुसने वाला है । घोटड धर्म और पिछले कुछ दिनों में कुछ कॉल इंटरसेप्ट की गई हैं, जिनमें ये लखनऊ में कुछ लोगों से निरंतर बात करता रहा है । क्या बात कर रही हूँ, सब कोर्ट में है । समझने की कोशिश की जा रही है पर कुछ जरूर समझ में आया है । मुझे तो मैं भी समझ में आ जाएगा । शेर पिंजरे में फंसा है, किसी सूरत में बाहर नहीं आना चाहिए । शेयर यानी जावेद मेरा भी यही मानना है है क्या हम उन लोगों को ट्रेस नहीं कर पा रहे हैं? वही तो नहीं हो पा रहा । कुछ सोचते हुए अमर बोला लतीफ हुसैन का नाम सुना है तो मैं ये कौन है? अमर ने संक्षिप्त में बताया अच्छा कोई आतंकवादी तो नहीं लग रहा ऍम कल तक वहाँ पहुंचेगा तो तुम उसके बारे में और जान ही जाओगे । हाँ वो तो है जो भी है साहनी से उसका कुछ लिंक तो जरूर है । शायद कर और बताओ कुछ किस बारे में अपने ही बारे में बता दो । रिंकी मुस्कुराई हर बार पूछते हो और हर बार डाल देती हूँ । अब तो मेरे घर में तुम्हारा पाॅइंट कमरा है । एक तरह से तुम मेरी घर वाली हो गई हूँ तो जाने का कुछ तो हक बनता है । रिंकी हंसी क्या जानना चाहते हो तुम जासूस क्यों बनी? अगर तुम्हें लग रहा है कि इसके पीछे कोई दर्दनाक स्टोरी है तो बता देती हूँ । ऐसा कुछ नहीं है । मुझे जिंदगी में कुछ एडवेंचरस काम करना था तो किसी ने कहा ये काम आज गांव एग्जाम दिया । इन सभी हुआ सिलेक्ट हो गई । नौकरी मिल गई बस ऍम हिस्ट्री अमर मुस्कुराया । वैसे तुम बहुत क्यूट लगते हो जासूस कम हीरो ज्यादा लगते हो । अच्छा आप लोग तो मुझे कॉमेडियन या छिछोरा कहते हैं । मुँह मेरे सामने तुमने ऐसी कोई हरकत नहीं की । ज्यादातर सीरियस रहकर यह बात की । ऐसा क्यों? हाँ ऐसा है क्या? पता नहीं रिंकी अमर की आंखों में गहराई से देखने लगी ।

Part 9

तो उससे भी ज्यादा शरारती हो । शायद इसलिए तो मैं ऐसा लग रहा है । अमर बोला पर रिंकी जैसे उसकी आंखों में खो गई थी । वह सरसराते स्वर में बोली नहीं, अमर ऐसा नहीं है । हम दोनों के बीच कुछ तो है हूँ । मुझे नहीं लगता तो मानोगे । पर कहते हुए रिंकी हडबडाई फिर एकदम से चुप हो गयी । वो लैपटॉप में देखने लगी । उसके चेहरे पर उलझन भरे भाव दिखाई देने लगे थे । अमर को उसकी बातें अजीब लग रही थी पर वह और सुनना चाहता था । उसे लग रहा था वो उस से बहुत कुछ कहना चाहती है क्या ऍम रिंकी ने फिर से उसकी आंखों में देखा नहीं । हमारे कुछ नहीं हूँ । अब मुझे अकेला छोड दो । मैं मैं कल चली जाऊंगी । मुझे नहीं लगता मुझे इस तरह तुम्हारे घर पर रहना चाहिए । मैं होटल में रहने की आदी हूँ । हम बाहर ही मिलेंगे । हरियाणा ऍम क्या हुआ? अचानक तुम्हें कुछ नहीं हूँ । अमर ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया जिनकी का रूम रूम का आप उठा तो ठीक हो । अमर ने पूछा ऍम की उसकी तरफ पार्टी उसके हावभाव देखकर अमर हक्का बक्का रह गया । उसकी आंखों में उतर आए । भाव पढना बेहद आसान था जो साॅस अचानक चीखती आवाज अमर के कानों में बडी अमर का ध्यान दरवाजे पर गया । ये बोल उसकी गर्लफ्रेंड मंदिरा के थे जो इस वक्त आंखों में चिंगारियां लिए उस की तरफ देख रही थी । मंदिर अमर का मुंह खुला रह गया । अरे ये ये शरब हो चलाई ये मंदिर है क्या? रिंकी ने भी उसकी तरफ देखा । अमर मंदिरा कि तरफ लपका मंदिरा तेजी से बाहर जा रही थी । अरे मंदिर मंदिरा को ऐसी कोई बात नहीं है । वो तो वो तो वो शराब वो पलट कर चिल्लाई । मैं एक हफ्ते शहर से बाहर क्या गई तो उनसे रहा नहीं । मैं पागल थी जो सोचती थी कि अब तुम पहले जैसे नहीं पर कुत्ते के दो निकले तो तो तो कभी नहीं हो गया फॅस वैसे कुछ भी नहीं है ऍम वो उसका गिरेबान पकडकर बोली तुम बस उसके साथ हो रहे थे पर प्यार तो सिर्फ मुझसे करते हो । मैंने ऐसा कब कहा । ऍम कहते हुए अमर ने अपना गिरेबान छुडाया । वो तो काम के सिलसिले में तो रात को तुम्हारे घर में क्या कर रही थी और मैंने देखे उसके चेहरे के भाव और तुम्हारे भी ऍम मैं कुछ देर बाद नहीं आई वरना ना जाने क्या देखने को मिलता है । मंदिरा बाहर निकली और एक टैक्सी को रोकने लगी । सुनो सुनो तो उससे मैं पागल हो गई हो । वो कुछ बोली नहीं । एक टैक्सी रुकी वो उसमें बैठ गई का शांति से बात करते हैं । अभी इस अमर खिडकी से झांकते हुए बोला उसने खिडकी का कांच ऊपर चढा लिया । टैक्सी धूल का गुब्बार उडाती हुई आगे निकल गई । अमर ने मुझसे ढेर सारा धुआं उगला और खयालों में खोया हुआ सामने देखने लगा । सुबह का वक्त था और वह जॉन के साथ हेड क्वार्टर की छत पर मौजूद था । ये तो बहुत बुरा हुआ । जॉन बोला पर यार तुझे भी उस लडकी से दूर रहना चाहिए था । हमें रिंकी से कितनी जानकारी मिल रही है । वो जावेद को छुडाने में और इन आतंकवादियों की स्कीम का पर्दाफाश करने में कम आ रही है कि नहीं । मैंने का मना किया । मैं बोल रहा हूँ कि तुझे जॉन ने उसके सीने की तरफ उंगली दिखाते हुए कहा उस से दूर रहना चाहिए था तो कहना क्या चाहता है मेरे आम मैं तुझे जानता हूँ और इस सब जानते हैं लडकियों के लिए तो हमेशा भारत और मंदिरा के आने के बाद से ऐसा कुछ नहीं किया मैंने रिंकी को घर में नहीं रखना चाहिए था । अमर चुपचाप सिगरेट के कश लगता रहा । अभी वो कहाँ है? पता नहीं । सुबह मेरे उठने से पहले निकल गई थी । रात को उसने मुझे बस सौरी कहा और फिर कोई बात नहीं की मैं हो गया था । पर मुझे लगता नहीं वापस आएगी । हाँ वो तो है । शायद अब होटल में ही रुके । पता नहीं अब दोबारा मिलेगी भी की नहीं । अमर गहरी सांस छोडते हुए बोला होटल में क्यों? मंदिर तो हॉस्टल में रहती है ना? तो किसकी बात कर रहे हैं । रिंकी हो घट तो रिंकी की चिंता सता रही । अरे मैं मंदिरा के बारे में पूछ रहा था । आखिर जॉन उसके चेहरे को ध्यान से देखते हुए बोला मुझे तो लग रहा है तेरे दिल में भी उसके लिए फिलिंग आ गई हैं । अमर चुप रहा जो हमने गहरी सांस छोडी और फिर भी कि मुस्कान के साथ बोला देख तेरी पर्सन लाइफ है । पर मेरी सलाह है कि ये चिंकी चिंकी के चक्कर में मंदिरा जैसी भरी लडकी को मत खोना । अमर परे देखते हुए सोच में डूबा था । तभी जॉन का फोन वजह उसने अटेंड करके कहा चलो वो लतीफ हुसैन को ले आए हैं अमर ने सिगरेट एक तरफ फेंकी और जॉन के साथ सीढियों की तरफ बढ गया । वो दोनों नीचे पहुंचेगा । एक कमरे में लतीफ हुसैन एक पुलिस कांस्टेबल के साथ मौजूद था । अमर ने कांस्टेबल से बाहर जाने का आग्रह किया । उसके जाने के बाद कमरे में सिर्फ लतीफ, अमर और जॉन थी । टेबल के एक तरफ लतीफ बैठा था । उसके सामने जॉनी कुर्सी संभाली । अमर सामने खडा रहा । लतीफ एक तीस के आस पास एक छोटे शहर का मामूली साथ में दिखाई दे रहा था । उसकी बेतरतीबी से बढी दार ही और मोर्चों से उसके चेहरे पर आए घबराहट के भाव और ज्यादा प्रभाव डाल रहे थे । लतीश नाम है ना तुम्हारा? जॉन ने पूछा जी जी हाँ लतीफ हुसैन मुझसे कुछ गलती हुई है कि असर ब्लॅक हमारे सवालों का ठीक से जवाब देते जाओ । बस तो हम चिन्हट में कब रहते थे? जॉन ने पूछा । अच्छा वहाँ दो साल पहले ही छोड दिया । आयकर थे । दो साल रहा सर वहाँ बेवकूफ लखनऊ में कब आए थे वही सर आज से करीब चार साल पहले दो साल रहा फिर वापस चला गया । अब सवाल का ठीक से जवाब देना । अमर ने कहा ऍम कहानी को कब से जानते हो हाँ, ये कौन है तो मैं जवाब देने हैं । सवाल हम पूछेंगे पर साहेब मैं नहीं जानता ये नाम आप अगर कुछ और बताएँ तो शायद याद आ जाए तो तुम नहीं जानते हैं । आर्थिक ट्रेडर्स के मालिक पुनीत साहनी को उसने ना में सिर हिलाया । फिर उसका फोन नंबर तुम्हारे पास कैसे आया कि ऐसा नंबर सर हमें तुम्हारे सामान में मिला था । पर सर मैं नहीं जानता । उसे पहचानते तो होगे कहकर अमर ने उसे मोबाइल में साहनी का फोटो दिखाया । उसने ध्यान से देखा फिर ना में सिर हिलाया । अमर टहलते हुए उसके पीछे आया और फिर उसकी बगल में पडी कुर्सी पर बैठ गया । लखनऊ में क्यों आए थे जी गांव छोडकर लखनऊ में क्यों आए थे जी साहब? सोचा था बडे शहर में कुछ अच्छा कमा लूंगा । हलवाई की दुकान में काम करके वो भी चिनहट जैसी जगह में किसी भीडभाड वाले इलाके में काम क्यों नहीं किया? हजरतगंज, अमीनाबाद, भूतनाथ मार्केट ही सही । अब हमें जिधर आसानी से काम मिल गया तो वहीं काम कर लिए । साहब उससे अच्छा तो अपने गांव में कमा लेते । हो गई । खर्चे भी कुछ खास नहीं होंगे । शहर क्यों आए आप ना जाने क्या सोच रहे हैं सर । कितने लोग आते हैं और वापस चले जाते हैं । हम भी कुछ खास नहीं कर पाए और वापस चले गए । अमर हाथ पर अमर हाथ मेज पर टिकाते हुए बोला, मान गए भाई बहुत लोग रोज बडे शहरों में आते हैं और बहुत से चले जाते हैं । सही कह रहे हैं आप? हाँ भाई मैं समझ रहा हूँ तुम्हारे हालत और बताओ घर पर कौन कौन है? तुम्हारे अम्मी अब्बू है? और भी उसने इंकार में सिर हिलाया । चार ही नहीं हुई नहीं तीस साल के तो होगे ना जी तीस फिर भी अभी तक शादी नहीं हुई है । हमारे गांव में होते तो अब तक तो तुम्हारे चार बच्चे हो गए होते । वहाँ क्या अमर ने भी हँसी में उसका साथ दिया? जॉन चुप जब दोनों को देख रहा था । हमारे गांव में शादी कैसे होती है देखोगे? अमर अपना फोन निकालते हुए इस तरह बोला जैसे आपने किसी जिगरी दोस्त को कोई मजेदार मैसेज दिखाने वाला हूँ । लतीफ भी तत्पर्ता के साथ देखने लगा । अमर ने वट्स ऐप पर कुछ फोटो दिखाने शुरू किए । लतीश मुस्कुराते हुए देखने लगा । फिर ऐसा लगा मानो फोटो देखते देखते उसके चेहरे से मुस्कुराहट अचानक ही पहुंचती गई हो । अच्छे है ना अमर उसे घूमते हुए बोला, ये ये मेरी जान अमर फोन जॉन की तरफ बढाते हुए बोला । देख तो जॉन ने देखा फोन पर शादी के कई फोटो थे जिनमें दूल्हे को पहचानने में उसे ज्यादा दिक्कत नहीं हुई । शादी नहीं हुई तो ये कौन है? तुम्हारा छोटा भाई जॉन फटकार लगाते हुए बोला, लतीफ कुछ बोल नहीं सका । अमर सोचने की मुद्रा में अभी ये सोचने वाली बात है कि अपनी शादी के बारे में कोई क्यों छिपाएगा? सोचना क्या है? जॉन लतीफ को खा जाने वाली नजरों से देखते हुए बोला ये सामने बैठा है खुद बतायेगा सब लतीफ नजरें झुकाए बैठा रहा । अचानक ही अमर का हाथ घुमा और उसके चेहरे पर बडा झापड इतना जोरदार था कि लतीफ केदारी होने के बावजूद गाल साफ लाल दिखाई देने लगा । बुरा मत मानना टाइम कम है इसलिए जवाब जल्दी जल्दी चाहिए । हमें यहाँ टॉर्चर रूम भी है । अगर वहाँ चलना चाहो तो भी हमें कोई परेशानी नहीं लतीश रोनी सूरत बनाए दोनों को बारी बारी देखने लगा । अमर मुस्कुराने लगा । अचानक ही उसने उसके बाल पकडे और सर टेबल पर दे मारा । लतीफ ठीक उठा ढाई कितने खिदमत करवाएगा? जॉन ने पूछा आसान सा सवाल तो पूछा है शादी तो हुई है तेरी फिर छुपाया क्यूँ मैं अपने घर वालों के लिए कोई दिक्कत नहीं पैदा करना चाहता हूँ । वो रोते हुए बोला खयाल तो नहीं है? अमर बोला असली मार तो वही होता है जो अपने परिवार पर आने वाली सभी दुश्वारियां अपने सर ले लें । पर अपनी शादी छिपाने से तुम्हारी कौन सी परेशानी आसान हो रही है? बीवी कहे तुम्हारी कौन है साहब, वो अभी इस दुनिया में नहीं है । तो ये जानकर बहुत दुख हुआ पर फिर तुम्हें झूठ बोला । वो फिर चुप हो गया । मेरा श्रमिकों जानते हो । अचानक जॉन ने पूछा । उसने चौंककर जॉन को देखा । हाँ क्या रिश्ता था तुम्हारा? उसे हमारे खानदान से थीं । दूर की रिश्तेदार अच्छा कुछ काम रहता था, उससे नहीं कुछ खास नहीं । फोन पर अक्सर बातें होती थी । उसने झिझकते हुई स्वीकारा के सिलसिले में उन्हें अक्सर गांव से कोई काम होता था तो वो मुझे बता देती । नहीं, इतना क्या काम होता था जो इतनी लम्बी लम्बी बातें होती थी । उनका कोई और रिश्तेदार तो था नहीं तो बातें कर लेती थी । अच्छा एक हाई क्लास मॉर्डल हलवाई की दुकान पर काम करने वाले से बात है, क्या करती होगी? मेरी तो समझ से बाहर है । अमर बोला तेरी बीवी का नाम क्या था? जॉन ने पूछा शबनम बहुत कैसे हुई? उसकी बीमारी थी, इलाज नहीं करा पाया । ठीक से अच्छा और मिनाज की मौत के बारे में क्या जानते हो? मुझे कुछ नहीं पता । उसकी मौत के ठीक बाद तुमने लखनऊ छोडा । अमर सोचते हुए बोला इसका कारण नहीं, ऐसी कोई बात नहीं । इत्तेफाक ही है । मुझे भी काफी बाद में पता चला । उनकी मौत के बारे में कभी मिलते थे । बिना से हाँ पर बहुत कम । आखिरी बार कम मिले थे । वो सोच में पड गया क्या नहीं आ रहा शायद उनकी मौत के चार पांच महीने पहले के सिलसिले में उन्हें कुछ सामान गांव भिजवाना था । ऍफ अमर उसका कंधा थपथपाती हुए बोला ये जो सब कहानी तुम बता रहे हो, उसे साबित करने के लिए कोई सबूत भी पेश कर सकते हो । वो दुविधा में पड गया अपनी बीवी का फोटो डाॅट हॉस्पिटल या क्लीनिक की कोई पर्ची? शादी के फोटो में चेहरे वाली फोटो तो नहीं मिली पुलिस को मेरे पास वो सब नहीं है साहब अच्छा अब ये बताओ पुनीत सानी को कैसे जानते होंगे? मैं नहीं जानता हूँ । फिर उसका फोन नंबर तुम्हारे पास कैसे आया? मुझे नहीं पता । आप नंबर दें शायद अभी भी मेरे फोन में हो तो पता लग जाएगा । अमर ने नंबर बोला । उसने अपने फोन पर उसे लिखा कोई नाम उभर के नहीं आया । नहीं साहब, मेरे पास उन का नंबर नहीं है । अमर ने उसका फोन हाथ में लिया और देखा ये फोन तो नहीं लग रहा है । इसमें वैसे भी दो साल पुराना नंबर होने की गुंजाइश कहा मैं सच कह रहा हूँ, मैं उसे नहीं जानता हूँ । ठीक है तो तुम यह बताओ कि तुमने अपनी शादी क्यों छुपाई साहब मेरी शादी छह साल पहले हुई थी भी एक साल बाद ही मर गई थी । इसलिए मैं फिलहाल शादी शुदा नहीं नहीं लगता है । पहले कभी था इसलिए जब आपने पूछा तो मना कर दिया । मुझे क्या पता था आपकी पूछताछ में मेरी शादी की कोई अहमियत होगी । उत्तर तो बढिया है अमर पूरा मैनाज के साथ शादी शुदा होने का एहसास होता था । जी उस सकपकाया हूँ । गलत सवाल किया क्या मैंने इतनी लंबी लंबी बात होती थी तुम्हारे मिनाज से सिर्फ गांव के खानदानी परिचित होने के नाते तो ये मुश्किल है । जॉन बोला सहानी तो तुम्हें पसंद नहीं होगा । अमर बोला मिनाज के इतना नजदीक जो था तो मैं तो पता ही होगा । उनके संबंध बहुत गहरे थे । जॉन बोला, एक बैड पर सात सोने जितने गहरे अमर उसकी आंखों में झांकते हुए बोला, लतीफ के होठ कुछ कहने के लिए फडफडाए पर वो चुप रहा । अमर ने जॉन की तरफ देख कर कुछ इशारा किया और फिर दोनों कमरे से बाहर निकल गए । बाहर आकर जॉन ने पूछा क्या लग रहा हो ना हो? इसका कुछ तो रिश्ता जरूर है मिनाज के मर्डर से । पर फिर ये इतनी आसानी से बचकर कैसे निकल गया? पुलिस के हाथ इस तक कैसे नहीं पहुंचे । ये तो कोई बडे रसूखवाला आदमी भी नहीं यानी किसी और का हस्तक्षेप रहा होगा । हो सकता है अमर बोला । फिर उसके चेहरे पर कुटील भाव आ गए । एक प्लान है । फिर अमर ने उसे प्लैन समझाया । सीक्रेट सर्विस के ऑफिस के बाहर कुछ पत्रकारों ने डेरा डाल लिया था । फिर जब लतीफ को लिए अमर जॉन वह कुछ पुलिस वाले बाहर निकले तो उन्होंने उन्हें घेर लिया तो तरह तरह के सवाल पूछे जाने लगे । सुना है सीक्रेट सर्विस दो साल पुराने मॉर्डल की मौत के केस पर काम कर रही है । क्या सहानी जी के खिलाफ कोई नया सबूत मिला है? क्या लतीफ नामक व्यक्ति मॉडर का नहीं ॅ देखिए । अमर बोला लतीफ को यहाँ सिर्फ पूछताछ के लिए लाया गया था । सर क्या पता चला ऐसे ज्यादा कोई जानकारी आपको नहीं बताई जा सकती है । क्या वह पुलिस हिरासत में रहेगा? क्या उसके खिलाफ कोई सबूत हैं? नहीं उसे हिरासत में रखने का कोई कारण नहीं । बाकी पुलिस अपनी कार्यप्रणाली के हिसाब से काम करेगी । फिर भीड को धकेलते हुए वह लोग लतीफ को पुलिस जीप में ले गए और खुद अपनी कार की तरफ पड गए । फिर दोनों गाडियां वहाँ से कुछ करेंगे । पत्रकार इस मुलाकात से तमाम अटकलें लगाते हुए टीवी पर प्रसारण करने लगे । लतीफ नही के एक सस्ते मद्दे होटल में रुका हुआ था । दूसरी मंजिल के कमरा नंबर पैंतीस में उसका ठिकाना था । वो दो साल बाद लखनऊ आया था इसलिए पहले दिन शहर में खूब इधर उधर घूमा । जैसे कि आपने पुरानी यादें ताजा कर रहा हूँ । दिन भर घूम घाम कर वापस होटल आकर खाना खाता और सोचा था । तीसरे दिन वह चिन्हट गया उस हलवाई की दुकान पर पहुंचा जहाँ वो काम क्या करता था । अपने पुराने मालिक और कुछ साथ काम करने वालों से मिला । वो अपने किराये के घर भी गया जहां मकानमालकिन ने उसे अंदर तो नहीं घुसने दिया पर दरवाजे पर खडे खडे ही कम से कम आधा घंटा हजारों सवाल पूछ पूछकर खूब लगाया । कॉलेज पूछती आई थी तेरे बारे में तो आतंकवादी तो नहीं या कोई और गलत काम करता था । अभी क्या कर रहा है? यहाँ पुलिस ने पकडा क्या तुझे पूछताछ की तो अच्छा धन दे भी लगाए होंगे । इल्जाम के आये तेरे ऊपर क्या गोल खेला रहा था । मेरे घर में रहकर मेरा ही घर मिला था । तुझे रहने के लिए वगैरह वगैरह लतीफ को लगा । उसने वहाँ आकर गलती कर दी । किसी तरह पीछा छुडाकर वहाँ से निकला । इधर उधर भ्रमण करने के बाद शाम तक वापस होटल के कमरे में जा पहुंचा । रात होने पर उसने डिनर कमरे में ही मंगा लिया । किचन से वेटर डिनर लेकर निकला और अभी सीढियाँ चढ ही रहा था कि ऊपर से एक बिना फ्रेम का चश्मा लगाए और बढिया ब्रांड की पेंशन पहनी एक संभ्रांत आदमी उभरता हुआ आया और उससे बोला पैंतीस नंबर के लिए लाया होना भाई मैं भी वहीं आया हूँ, अपने दोस्त से मिलने जाओ । एक हाफ तंदूरी मिली हूँ और ऑर्डर तो अरे अभी मैं आया ना, तो हम दोनों का मोड क्या नॉनवेज का तुम्हारा नंबर नहीं लग रहा था इसलिए मैं किचन में ही आ रहा था । ऑर्डर देने अच्छा साहब मिलाता हूँ कहकर वीटर पालता । अरे जो लाए हो वो तो देते जाओ कैंसिल थोडी ना क्या है लव मुझे पकडा दो और तो फटाफट तंदूरी लिया होगा । ठीक है साहब उसने ट्रे उस आदमी को पकडा दी । उसकी शकल सूरत और पहनावे को देखकर वेटर हिचकिचाया नहीं था । वेटर वापस चला गया और वो आदमी सीढियां चढकर ऊपर आ गया । उसने जेब से एक पैकेट निकालकर उसमें से सफेद पाउडर खाने पर छिडककर चम्मच से मिला दिया । फिर कमरे का दरवाजा खटखटाया । तभी उसे लॉबी के अंत में एक भारी भरकम आदमी दिखाई दिया जो उसे देख कर उसकी तरफ चला रहा था । उसने ट्रेस जमीन पर रखी और सीढियों की तरफ बढ गया । सीढियाँ उतरकर वो नीचे आया ही था कि हाफ शर्ट और पैंट पहने एक नाते से आदमी ने उसका रास्ता रोक लिया । तो यार वो झुंझलाकर बोला बहुत जल्दी है क्या आपका एक वो आगे बढाई था कि नाते व्यक्ति ने उसे पीछे से दबोच लिया । अब छोड अगर है क्या? नाटक के हाथ में अचानक ही कहीं से रिवॉल्वर आ गई तो ऊपर चल आज उठाकर वो बुरी तरह चौंका । फिर उस की बात मानते हुए वापस ऊपर चल दिया । नाटा व्यक्ति उसे पीछे से धकेलते हुए ऊपर ले आया । चल पैंतीस नंबर की तरफ चलता रहे । वह कमरे के सामने पहुंचा । लॉबी वाला व्यक्ति भी पास आकर खडा हो गया । घर घर आ । जल्दी नाते ने उसे धकेला । खटखटाने के कुछ दिनों बाद दरवाजा खुला । खोलने वाला कोई और नहीं लतीफ था । खाना तो नहीं खाया । नाते ने पूछा । लतीफ ने दोनों को ताज्जुब से देखा । अरे खाया कि नहीं नाते ने छिडककर पूछा । लतीफ की नजर उसकी रिवॉल्वर पर गयी । वो खबरा गया नहीं खाया । गनीमत है नाडे का ध्यान बढता देखकर चश्मे वाले ने फायदा उठाया और लगभग कर उसकी रिवॉल्वर वाला हाथ पकडकर उम्मीद दिया । रिवॉल्वर एक तरफ गिरा जिसे उसने जूते की ठोकर से और दूर पहुंचा दिया । दूसरा व्यक्ति उसपर झपटा पर उसे धकेलकर वह सीढियों की तरफ भागा । नाते ने लपक कर पहले रिवॉल्वर आपने कब्जे में ली । फिर सीढियों की तरफ उसके पीछे लगा चश्मे वाला दौडते हुए होटल से निकला । वो पलट पलट कर होटल की तरफ देख रहा था । अचानक उसने सामने देखा तो दो लोग उसे अपनी तरफ खोलते हुए दिखाई दिए । उसने जल्दी से बाहर खडी एक मोटरसाइकल स्टार्ट की । तभी नाटा दौडता हुआ बाहर आता दिखाई दिया है और रुख तो उसके इतना बोलते ही जो दो लोग घूम रहे थे, हरकत में आ गए और सडक की दूसरी तरफ से रोड पार करते हुए मोटर साइकिल की तरफ लपके । तब तक वो से स्टार्ट कर चुका था और उसने एक्सेलेरेटर घुमाकर उसे नचाया और तेजी से आगे भगाया । रोड के बीच में उसे एक ने घेरने की कोशिश की पर वह तूफानी रफ्तार से उसकी बगल से निकला नाटा पास खडी जीत कि तरफ लपका और उसे स्टार्ट किया । बाकी दोनों लोग भी उसमें सवार हो गए । फिर नाते ने फर्स्ट गेयर में ही एक्सीलेरेटर पर जाती की तो जीत तेजी से चिंघाडते हुए आगे लक्की वाइट अगले मोड तक पहुंच गई थी । सडक पर कुछ भीड भी थी । न रही की सडकें वैसे भी तक थी । टूविलर होने के कारण चश्मे वाले को बाइक नही से बाहर हजरतगंज निकालने में ज्यादा दिक्कत नहीं आई पर जीप चालक को बहुत दिक्कत आ रही थी । जब तक जी बाहर निकली वह हजरतगंज मेन मार्केट की चौडी सडक पर बाइक दौडा रहा था । चौराहे की लालबत्ती का उसने खयाल नहीं किया था । नहीं उसके पीछे लगी जी पर सवाल नाते ने अलबत्ता जीप को फिर भी रोकना पडा क्योंकि दूसरी तरफ से गाडियाँ जो चल रही थी । लोग नाते को धिक्कार भरी नजरों से देखते हुए निकल रहे थे । ट्रैफिक पुलिस के पहुंचने से पहले वह भी हजरतगंज की तरफ मुड गए । नाते ने जीत को हवाई घोडा बना दिया । अगले सिग्नल तक पहुंचते पहुंचते जीत नब्बे की स्पीड पर पहुंच गई थी और भाग्य ने साथ दिया की बत्ती भी हरी थी । कुछ और आगे निकलने के बाद उन्हें बाइक सवार नजर आया । वायर करें । एक ने पूछा, नहीं, कभी नाते का फोन बजा । उसने ड्राइव करते हुए ही फोन स्पीकर पर डाला और सामने रखा क्या चल रहा है । दूसरी ओर से अमर की आवाज आई एक चालीस साल का आदमी मुझे रन, सामना, कद, औसत आंखों पर चश्मा, लतीफ को जहर देकर मारने के इरादे से हो चलाया था । उसे हेड क्वार्टर लेकर आओ । वॅार पीछा नहीं किया । अभी पीछे ही कर रहे हैं तो वो तो मैंने एक्शन सीन के बीच कॉल किया । नाटा हजार सुना । एक टू वीलर से उसके पीछे लगा । उसे पकडने की बजाय ये देखो वो कहाँ जा रहा है । बाइक नहीं है । हम तीनों जीत में कुणाल को चीजें जिंदगी में मिलती नहीं है । उन्हें हासिल करना पडता है । मैं समझ गया नाटा जिसका नाम कुनाल था । मुस्कुराकर बोला मुझे मालूम है तो बचपन से ही समझदार हो । अच्छा आप काम पर ध्यान दो । किस एरिया में हो हजरतगंज हो गया कहकर अमर ने फोन काट दिया । कुणाल के साथ ही राशिद ने पूछा ये कैसे होगा? हम में से कोई तुरंत उतरकर बाइक कैसे जुगाड लेगा? उधर कर कोशिश तो करो । उतनी देर में तो गायब हो चुका होगा । अरे मैं पीछे थोडी छोडूंगा ये अमर सर । कुछ भी बकवास करते हैं और तो मान भी लेते हो । कुनाल ने जीत धीमी की और राशिद तुरंत नीचे उतर गया । उतरते ही वह सडक किनारे खडा होकर पीछे से आती सवारियां देखने लगा । फिर उसे एक जवान लडका बाइक पर देखा । उसने उसे रुकने का इशारा किया । वह रुकने के इरादे में न लगा तो वो उसके सामने ही आ गया की आपको अगल पर हैं । तेज चल रही बाइक को किसी तरह रोकते हुए वो लाया । माना फॅस राशिद ने अपनी कमर की बैंड पर लगे पिस्टल की तरफ इशारा किया । उसका लहजा तुरंत बदला । मेरे पास लाइसेंस एसर्स उस पर घर का जैसा है । हाँ, बिल्कुल तो मुझे वो देखना पर और बाइक भी पर क्यों अबे क्यों ऍम काम ऍम? फिर राशिद ने बाइक को जबरदस्त ढंग से दौडाया और दो मिनट में वह जीत के पास पहुंच गया । कुनाल ने उसे आगे निकलने का इशारा किया और फिर जानबूझ कर जीप को दूसरी गाडियों के पीछे लगा दिया ।

Part 10

चश्मे वाले को जी पीछे छूटती देखी और उसे लगा कि अब वो आसानी से भाग सकता है । परिवर्तन चौक से उसने बाइक, बाएं हाथ अमीनाबाद जाने वाली सडक की तरफ कुमारी अब जी पीछे से गायब हो चुकी थी । उसकी दिल की धडकन कुछ सामान्य होने लगी । वो छोटी छोटी गलियों में बाइक घुमाते हुए आगे बढता गया । अब वो जिन रास्तों पर था वहाँ जीत या कोई भी चौपहिया वाहन की पहुंच नामुमकिन थी । उसने एक जगह सडक किनारे बाइक खडी की और फिर बाजार के भीड भाड वाले माहौल में पैदल ही आगे बढ गया । दस पंद्रह मिनट तक वो लापरवाही के साथ घूमता रहा । फिर उसने मोबाइल निकालकर किसी को कॉल किया । तनवीर किधर दूसरी तरफ से बेसब्री से पूछा गया पहुंची रहा हूँ । सलीम यहाँ से निकलने की तैयारी करूँ क्यूँ? क्या गडबड हो गई? मिलकर बताता हूँ पर सब सामान समेट लोग मैं वाले को तय करते हुए ही आता हूँ । ऐसा है तो ठीक है । सामान का क्या है? पांच मिनट का काम है मैं नीचे ही मिलेगा । ठीक है । कुछ देर में वह पुरानी सी इमारत के बाहर पहुंचा । उसे एक ऑटो इमारत के सामने ही मिल गया । वो इमारत के अंदर जाने ही वाला था कि अंदर सीढियों से उतरता हुआ एक व्यक्ति दिखाई दिया । वो उसका हम उम्र प्रतीत हो रहा था । हालांकि उसके बाल और दाढी बेतरतीब से बढे हुए थे । उसके हाथ में एक सूटकेस और कंधे पर एक बैग था । उसने बाहर आकर पैनी निगाहों से चारों तरफ देखा । फिर ऑटो के पास खडे हुए । अपने दोस्त से मुखातिब हुआ । दोनों की नजरें मिली शब्दों के आदान प्रदान की । जहमत किसी ने नहीं उठाई । दोनों आटो में बैठ गए । अलम बात चलो चश्मे वाले ने उसे आदेश दिया ऑटो चल दिया । रास्ते भर उन दोनों ने आपस में कोई बात नहीं की । आलम बाग पहुंचकर वह दोनों एक जगह उतरे । उन्होंने ऑटो का किराया चुकाया और फिर पैदल एक तरफ बढ गए । दोनों अभी भी सतर्कता से अपने आगे पीछे देखते हुए आगे बढ रहे थे । तनवीर दाढी वाले ने बहुत देर लंबी चुप्पी को थोडा हाँ चश्में वाले ने जवाब दिया लतीफ का क्या हुआ? कुछ नहीं हो पाया । वहाँ पुलिस ने सेंध लगा रखी थी । इसका मतलब पुलिस को लतीफ से जरूर कोई ऐसी जानकारी हासिल हो गई है जिससे वो हम तक पहुंच सकती है । लतीफ को ज्यादा कुछ कहाँ पता है । इतना तो पता है कि मिनाज के खत्म के बाद तुम नहीं उसे डराया धमकाया था । सही है वो मुझे पहचानता है सिर्फ शकल से बाकी कुछ भी उसे नहीं पता । पता होता तो वाकई पुलिस अब तक उस से सब कुछ उगल वाले दी क्योंकि वह कायर इंसान है । अपनी बीवी के खत्म के बाद भी दुम दबाकर भाग गया । बातें करते हुए वो दोनों एक गली में प्रविष्ट हो गए । चारों तरफ एक नजर घुमाकर देखने के बाद वो दो मंजिला मकान के अंदर दाखिल हुए । सीढियाँ चढते हुए सलीम बोला तो उसे जिन्दा छोडना गलत था, मानता हूँ । इसलिए तो आज उस गलती को सही करने गया था और उस गलती का फायदा पुलिस ने उठाया और तुम्हारे लिए जाल बिछा दिया । हाँ, अब तो पुलिस ने मेरा चेहरा देख लिया है । वो कोई ज्यादा चिंता की बात नहीं है । मेरी तरह दाढी बढा ले या उससे भी आसान बाल वाल सब काट वाले और भेज बदल ले । वैसे भी अब कुछ ही दिन बचे हैं । अपने मिशन को पूरा होने में तनवीर का ध्यान कहीं और था । वह दोनों दूसरी मंजिल पर एक कमरे में आ गई । फिर तनवीर ने कहा मुझे डर है उसके मुंह खोलने से पुलिस को सीधे तो कुछ पता नहीं चलेगा और उनकी खोजबीन के नए रास्ते खुल जाएंगे । ये जानकर कि मिनाज शादीशुदा थी, लतीफ कि बीवी थी । सलीम ने पूछा हाँ तो मैं नहीं लगता । पता नहीं अब देखा जाएगा । जो होगा फिलहाल उस से दूर रहना ही ठीक है । मिशन पूरा होने तक बेवजह मुसीबत मोल लेना ठीक नहीं होगा । पुलिस जब तक खोजबीन करेगी तब तक तो हमारा काम भी पूरा हो चुका होगा । फिर वो जानना चाहे जानते रहे हमारी सेहत पर क्या फर्क पडेगा । हम तो इस देश से बाहर निकल चुके होंगे । ये बात तो तुम ठीक कह रहे हो । तनवीर बोला और मुझे नहीं लगता कि मैंने कोई गलत कदम उठाया । मैं बोला अगर मुझे ऐसा लग रहा होता तो मैं तो मैं जाने से पहले ही बोलता । फिर छोडो इन बातों को रात बहुत हो गई है । कुछ खाना खा लेते हैं । ठीक है चलो चलें मैं जरा मोहाद बोलो अभी तुम्हारा बाहर निकलना ठीक नहीं होगा तो मैं यही रुको मैं जाकर कुछ खाना ले आता हूँ । सलीम ने उठते हुए कहा ठीक है कहकर तनवीर बातों की तरफ बढ गया । राशिद आलम बाकी उस गली में मौजूद था जहाँ तनवीर और सलीम अभी अभी पहुंचे थे । उसने बाइक गली के बाहर ही एक कोने में खडी कर दी थी । कुछ देर पहले उसने फोन पर अपनी बाकी टीम और अमर को अपनी पोजिशन के बारे में जानकारी दी थी । अचानक उसके कंधे पर किसी ने हाथ रखा । वह चौकर पालता पीछे कुनाल था । राशिद ने इमारत की तरफ इशारा किया जिसमें तनवीर बस सलीम गए थे । कुनाल गली में टहलने लगा । उनके दो और साथ ही वहाँ आ गई और सब अलग अलग कोनों पर खडे हो गए । तभी सलीम ने इमारत के बाहर कदम रखा । राशिद ने कुनाल को इशारा किया । कुनाल आगे बढा राशिद । बाकी सीक्रेट एजेंट्स ने अपने हथियार निकाल लिए थे । अरे भाई साहब, कुनाल इस सलीम को पुकारा, ये नूर मंजिल कहाँ पर पडेगा? सलीम टक्कर रुक गया । फिर उसने कुणाल की तरफ देखा और कहा नूर मंजिल, वो पागलों का अस्पताल । हाँ वही भरे आप तो एकदम गलत जगह गए । नूर मंजिल, आलम बाग में थोडी ना है । यहाँ से जाइए । सीधे लालबाग तुम साथ ले चलो । रास्ता बताते हुए कुणाल उसके पास खडा हुआ था । सलीम ने उसकी आंखों में देखा । उसे खतरा भापते देर नहीं लगी । अचानक ही सलीम ने दौड लगा दी । कुनाल पीछे से झगडा उसने पलटकर लाख चलाई तो कुनाल एक तरफ जा गिरा । सभी तैयार थे पर किसी ने गोली नहीं चलाई । सलीम गली से बाहर निकलना चाहता था । राशिद पहले से तैयार खडा था । जैसे ही सलीम उसके पास पहुंचा, उसने पैर से अडंगे लगाकर उसे गिरा दिया । गिरते ही राशिद उस पर चढ गया और उसकी तलाशी लेने लगा । उसके पास से एक रिवॉल्वर मिला । राशिद ने उसे अपनी जेब में रखा और उसे खडा किया । उसने खुद को छुडाना चाहा पर राशिद ने उसे कसकर दबोच रखा था । कुणाल उसके पास पहुंचा । उसने बाकी टीम को इमारत पर नजर रखने का इशारा किया । क्या भाई मैंने तुमसे थोडी मदद मांगी थी और तुम ऐसे इतराने लगे । सलीम कुछ नहीं बोला । अचानक फायर हुआ । कुनाल हडबडाकर नीचे झुक गया । गोली ने सलीम के सीने में अपनी जगह बना ली थी । वो एक तरफ गिरा । उसकी आंखें उलटने रखी है । वह कुछ बडबडा रहा था । राशिद उसके पास छुपकर बोला हूँ । तुम गलत राह पर चल रहे थे । भाई मरने से पहले बता कर चाहूँ कि तुम लोगों का मिशन क्या है? तुम्हारी रूसे पाप का बोझ हल्का होगा । मिशन हूँ ऍफ होगा । तुम्हारा लीडर कौन है? जवाब देने से पहले ही सलीम की आंखें पलट गई हैं और गर्दन एक तरफ लुढक गई । दूसरी तरफ फायर होते ही कुनाल और उसके साथ ही उस इमारत की तरफ लपके । जहाँ तनवीर था वो उन्हें देखा तो नहीं पर गोली की दिशा से उन्होंने अंदाजा लगा लिया था की गोली उस इमारत की दूसरी मंजिल से चलाई गई थी । सभी धर धर आते हुए सीढियाँ चढते चले गए । पहली मंजिल पर सरसरी निगाह डालने पर कोई नजर नहीं आया । फिर भी एक एजेंट कमरे को तलाशने गया और बाकी छत की तरह कुनाल सबसे आगे था । छत पर पहुंचते ही उसने चारों तरफ निगाह दौडाई छत खाली थी । वहाँ चारों पर कपडे पडे दिख रहे थे और जमीन पर पापड आदि पडे थे । बगल वाली इमारत की छत जुडी हुई थी और उस पर गोदकर जाना कोई मुश्किल काम नहीं था । कुणाल दौड कर छत के दूसरे छोर पर पहुंचा । अचानक ही उसे नीचे अंधेरी गली में तनवीर पाइप के सहारे उतरता नजर आया । ऍम कुनाल ने अपने साथियों को इशारा किया वो लोग वापस सीढियों की तरफ भागे । उन्हें पिछली गली में जो जाना था । इधर कुनाल ने सोचना शुरू किया कि पाइप से भी जल्दी उस गली में कैसे पहुंचा जा सकता है । उसने सामने वाली इमारत की तरफ देखा । उसके बगल में एक और इमारत थी जो उस गली में खुलती थी । कुनाल कूदकर सामने वाली छत पर आ गया और दौडता हुआ पिछले गाली की इमारत की तरफ बढा दोनों इमारतों के बीच में गया था और उसकी छत एक मंजिल नीचे थी । कुनाल ने बिना हिचके छलांग लगा दी और दूसरी इमारत की छत पर आ गया । कूदने में उसके पैरों पर जोरदार झटका जरूर लगा पर उसकी चिंता किए बगैर वो दौडता हुआ सीढियों कि तरफ लपका । सीढियों पर कुत्ता फलाण ता वह नीचे पहुंचाने जैसे ही वह दौडते हुए बाहर निकला । उसकी आवाज सुनकर तनवीर पालता वो पाइप से उतर कर थोडा आगे ही पहुंचा था । कुणाल को देखकर उसने झट से पिस्टल निकाली और फायर कर दिया । कुनाल उसकी मंशा पहले से ही भाग गया था और इसलिए तुरंत गली में खडी एक कार के पीछे हो गया । उसने भी अपना रिवॉल्वर निकाला और फायर करने के लिए हाथ आगे बढाया । पर तनवीर की ओर से गोलियों की बरसात हुई । कुणाल को समझ आ गया कि ये कोई मंझा हुआ खिलाडी है । उसके पास ऑटोमेटिक पिस्टल थी जिसका सेमी ऑटोमैटिक से सामना करना बडा मुश्किल था । वो ट्रिगर दबा रहा था और अनेको गोलियाँ एक बार में निकल रही थी और कुणाल को हर एक फायर के लिए एक बार तो ट्रिगर दबाना ही पडता था । फायर करते हुए तनवीर गली में आगे भागता भी जा रहा था । कुणाल को उसने कार के पीछे से निकलने का मौका भी नहीं दिया । इस बीच उसने अपनी पिस्टल में नई मैग्जीन भी डाली । गोलियों की आवाज से मोहल्ले में हंगामा मच गया था । लोग अपने अपने घरों से झांक रहे थे । जो बाहर खडे थे वह अंदर भाग गए थे । लेकिन हर कोई देखने की कोशिश जरूर कर रहा था । कुछ लोगों ने तो मोबाइल से वीडियो बनाने भी शुरू कर दिए । ये बात और थी कि रात के अंधेरे में उसकी क्वालिटी कोई खास नहीं आने वाली थी । तनवीर दौडता हुआ चौराहे पर आया । वाई तरफ से बाकी के जासूस आते हुए नजर आए । उसने अपना पिस्टल उधर घुमाया और ढेरों गोलियां बरसानी । अप्रत्याशित हमले के कारण जासूस बौखला गए । वो समय रहते झुक गए और कुछ एक तरफ कूद गए । फिर भी एक के पैर में गोली जरूर लग गई । कुनाल ने मौका देखकर पीछे से तनवीर पर फायर किया । तनवीर उछलकर एक तरफ हो गया और फिर सीधे भागने लगा । जासूस मंडली भी संभालते हुए आगे बढी । तनवीर फिर पालता पर इस बार जासूस तुरंत साइड हो गए । उन्हें पता था उसके हाथ में खतरनाक पिस्टल है और न जाने उसकी जेबों में कितनी मैग्जीन भरी है । दौडते हुए तनवीर अचानक ही किसी से टकराया । वो एक बूढा आदमी था । तनवीर के हाथ में पिस्टल और चेहरे पर खूंखार वह । घबराहट से मिश्रित भाव देखकर वह बोला शैतान तो शैतान है जला । तनवीर ने उसे जोर का धक्का दिया । बूढा गली के किनारे जा गिरा । तनवीर फिर तेजी से भागा । कुछ ही मिनटों में तनवीर की तेजी । वहाँ उसके पिस्टल की करामात के कारण जासूस मंडली काफी पीछे छूट गयी । वो मुख्य सडक पर पहुंच गया था । अचानक उसके सामने एक पुरानी सफेद कार आकर रुकी । तनवीर ने देखा उसे एक दारी वाला खतरनाक व्यक्ति चला रहा था । जल्दी हूँ वो व्यक्ति । बोला खजूर का आदेश तनवीर जल्दी से पिछली सीट पर बैठ गया और नीचे झुक गया ताकि बाहर से कोई उसे देखना सके । वो अपनी तेज चल रही सांसों को नियंत्रित करने की कोशिश करने लगा । अब कोई खतरा नहीं है । ड्राइवर बोला हुजूर आ गए हैं क्या? तनवीर ने पिछली सीट पर लेटे लेटे पूछा नहीं । ड्राइवर बोला पर जल्द ही पहुंचने वाले हैं । उन्हें खबर मिली है और वो खुश नहीं है कि तुम लोग को मार नहीं सकते । मेरे से बेवकूफी हो गयी । मानता हूँ । तनवीर खेत भरे स्वर में बोला मसले का ठीक से जायजा लेने के बाद ही उस पर हमला करना चाहिए था । मुझे अंदाजा नहीं था कि उसके जैसे इंसान पर पुलिस आंख बचाई बैठी होगी । मैंने तो यही सोचा था कि पुलिस ने पूछताछ करके उसे छोड दिया । वैसे भी उसके पास कोई खास जानकारी नहीं थी । खास जानकारी नहीं थी तो फिर उसे मारने की कोशिश क्योंकि तनवीर को बोलते नहीं बना । मन ही मन वो यही सोच रहा था कि लतीफ को मारने में उसका व्यक्तिगत लाभ था क्योंकि उसकी गवाही से वह फंस सकता था । भले ही आज नहीं पर आगे कभी एक बार उसका स्कैच बाहर आ गया तो पूरी दुनिया को पता चल जाएगा । फिर भारत, अमेरिका और न जाने कौन कौन उसके लिए मुसीबत बन सकते हैं । और अब तो इस पूरे प्रकरण के दौरान सलीम की भी बलि चढ गई थी क्योंकि वह जासूसों के हाथों मारा गया था । सलीम भी मारा गया । वो शून्य में घूमते हुए बोला, क्या ये तो बहुत बुरा हुआ । मिशन से पहले ही बेवजह एक अहम जाबाज को हमने खो दिया । ड्राइवर ने पलट कर उसे कडी नजरों से देखा । तनवीर चुप रहा हूँ तो लतीफ अभी भी जिंदा है । वो तुम्हारा राज जानता है और मिनाज की मौत का भी देखिए । उससे ज्यादा तो कुछ नहीं पता उसे तो बस ये मालूम है कि उसकी बीवी का कत्ल बहुत बडी इंटरनेशनल साजिश के तहत हुआ है । किसने क्या किया मेरा उसमें क्या रोल है वो ये सब नहीं जानता । वो उसकी बीवी थी । आपको नहीं पता मैं आज ही आया हूँ । मुझे मिशन की जानकारी जरूर है पर उससे पहले आप लोग यानी आईएसआई के नहीं यहाँ क्या गुल खिलाए है? मुझे नहीं पता तो मैं समझा आम मिनाज लतीफ कि बीवी थी । हमें भी ये बाद में पता चला था । शुरू में जब हमने मिनाज को अपने लिए काम करने के लिए तैयार किया तब पता नहीं था कि उसका कोई शौहर भी हुआ करता था । दरअसल उसकी बहुत कम उम्र में शादी हो गई थी । जब सोचने समझने लायक हुई तो वो अपनी उस दुनिया को छोडकर मॉडलिंग की दुनिया में आ गई । अच्छा कोचर से के बाद लतीफ को बीवी का प्यार लखनऊ की चलाया और यहाँ पर वो मिनाज से मिलने की कोशिश करने लगा । हालांकि मिनाज उसे नजर अंदाज करती थी और फिर भी उसने उसे कुछ तो ऐसी पट्टी पढा दी की एक बार फिर से दोनों के बीच संबंध स्थापित हो गए । यानी वो फिर से उसके पति का दर्जा पा गया । कुछ मायने में जरूर पर मिनाज उससे पीछा छुडाना चाहती थी क्योंकि लतीफ उसे वापस अपनी दुनिया में ले जाना चाहता था । पर वो तो लतीफ की दुनिया में वापस जाना चाहती थी और ना उसे अपनी दुनिया में लाना उसे गवारा था । दोनों ही हालातों में उसका करियर खत्म हो जाता है । दूसरा पहलू ये भी था कि वह आईएसआई के यानी हमारे लिए काम कर रही थी । फिर उसके खत्म की नौबत कैसे आई? क्या वो हमें धोखा दे रही थी? आपको तो शायद कुछ भी नहीं पता हूँ नहीं हम तो आए हैं मिशन के वक्त कारनामा करने तुम सुनाओ । किस्सा दिलचस्प हमें तलाश थी एक उद्योगपति खासकर ऐसा जिसके कारोबार में ट्रांसफोर्ट होता हूँ, साथ में उसका रसूख कैसा हूँ की कभी कोई उस पर शक ना करें । इसके लिए हमने मिनाज को पकडा और उसे कुछ लालच और कुछ धमकी देकर इस काम के लिए तैयार किया मिनाज ही क्यूँ काफी जांच पडताल के बाद ही उसे लिया गया था क्योंकि हमें यकीन था कि पैसे के लिए वो ऐसा काम करने के लिए तैयार हो जाएगी । पहली बार में तो तैयार नहीं हुई और फिर जब खुद की और परिवार की जान पर आ गई तो न कैसे कर दी बढिया । फिर कुछ उद्योगपति हमारे टारगेट पर थे और अधिकतर बूढे थे जिनमें ठर्की भी कई थे और फिर भी बात नहीं बन पा रही थी । फिर चली गई उल्टी चार वो क्या शिकार को खुद आकर फंसने देने वाली ऍम शो के बाद होने वाली पार्टी में मिलना जोर शोर से शरीर होती थी । कई अमीर ज्यादे उसके चारों तरफ मक्खियों की तरह भिनभिनाते थे पर वो उस रसूख के लोग नहीं थे जिनसे हमारा काम बन पाता है । वो किसी के चक्कर में नहीं आती तो तो उसको पाने के लिए मर्द और लाइट होते और फिर एक दिन पुनीत सहानी उसके चक्कर में आ गया । वो नौजवान था और आर्थिक ट्रेडर्स का रसूख पूरे भारत में और विदेशों में भी था । यानी हमें तो जैसे सोने की मछली मिल गई । चंद मुलाकातों में ही वो मिनाज का बॉयफ्रेंड बन गया । उसके बाद हम अगला कदम उठाने की सोच रहे थे कि लतीफ का बच्चा लखनऊ आ गया । उसके आने से मिनाज कुछ गडबड हो गई । अपने पुराने पति के कारण वह साहनी के साथ कम समय बिताने लगे । एक बार को मैंने उसे धमकी भी दी कि लतीफ से पीछा छुडा एक बार को मैंने उसे धमकी भी दी कि लतीफ से पीछा छुडाया और वो डर ही नहीं । शायद उसके सिर से अब मौत का भय निकल गया था । वजह क्या थी, पता नहीं क्योंकि उसका पति तो वैसे भी एक कायर आदमी था । उसके साथ से अगर उसे आईएसआई के से लडने का हौसला हासिल हो गया था तो वाकई ये बडी मजा क्या बात है जब हमें मिनाज और उसके शौहर के बीच ताजे संबंधों के बारे में पता चला । हम ने एक नई स्कीम बनाई । मिनाज अक्सर गायब हो जाती थी । फिर मुझे पता चला वह गांव वाली औरत बनकर चिनहट में लतीफ के पास जाती थी और अक्सर कुछ दिन उसकी बीवी शबनम बनकर बिता दी थी । इतनी नजदीकी थी तो जाहिर है मिनाज ने उसे सब कुछ बता दिया था कि सहानी को वो प्यार नहीं करते हैं । सिर्फ दबाव में आकर पढा रही । कहानी का नंबर भी लतीफ के पास था, जिसे उसने गुमनाम नाम से फोन करके धमकाने की कोशिश की । भले कायर आदमी था और फिर अपनी बीवी को गैरमर्द के साथ होने की बात सोचकर ही उसके सीने पर सात लोग गया था । हाँ जाहिर फिर तभी तनवीर का फोन बज उठा । हेलो जी, फिर वो बिना कुछ कहे दूसरी तरफ वाले को सुनता है । बीच बीच में हाँ हाँ हूँ करता रहा । अंत में उसने कॉल खत्म की और फोन अपनी जेब में डाल लिया । फिर क्या हुआ? ड्राइवर ने पूछा । फिर एक रात लतीफ ने मिनाज का खत्म कर दिया हूँ । मैंने लतीफ को ब्लैकमेल किया, पर नतीज जैसा की तुमने बताया कायर आदमी मिनाज का इतनी शादी ढंग से कैसे खून कर बैठा । आपको कैसे पता? उसका खून शातिर ढंग से हुआ था । अरे कितनी बडी साजिश हुई है तो शादी ढंग से ही हुआ होगा और आप तो आज ही आए हो । आप तो सिर्फ मिशन के लिए आए हो । हानियाँ क्यों सुन रहे हो? ड्राइवर की नजर शीर्षक पर गई । उसने देखा । तनवीर ने उसकी तरफ अपनी ऑटोमेटिक पिस्टल तान रखी थी । निशाना सीधे सिर पर था, ये क्या कर रहे हो? उसने गाॅधी आवाज में पूछा आपको कैसे पता शातिर ढंग से खून हुआ है? उसका तनवीर जैसे खुद से बातें कर रहा था । बेवकूफ हथियार नीचे करूँ वरना हुजूर तुम्हें बख्शेंगे नहीं । जोर का ही फोन आया था भी मुझे तनवीर की आंखों में वहशीपन झलकने लगा था । ड्राइवर ने अचानक जोरों से एक्सीलेरेटर पर पांव रख दिया । गाडी चिंघाडते हुए भागी । शहर के रास्तों पर भी उसने रफ्तार सत्तर तक पहुंचा दिया । देखो गोली चलाई तो गाडी का एक्सीडेंट होगा और तुम भी नहीं बचोगे । तनवीर हसने लगा हूँ मरने से कौन डरता है । हम तो मिशन के लिए कभी भी शहीद होने के लिए तैयार है जरूर पर तुम खुद को बचाने के लिए जिस तरह आज मिशन को कॉम्प्रोमाइज कर रहे थे उससे मुझे लगता है तो मैं अपनी जान बहुत प्यारी है । तनवीर कसमसाया बहुत चालाक समझते हो । नाम क्या है तुम्हारा नाम ही हमारे तो सोच लो, किसी मारने की धमकी दे रहे हो । तन्वी रहा था फॅस अमन वर्मा जावे जेल में सड रहा है और अब अमर हमेशा के लिए अमर होने जा रहा है । सीक्रेट सर्विस को तो अब अपने हेड क्वार्टर के पीछे कबिस्तान बनाना पडेगा । बेटे दूसरे की कब्र खोदने से पहले अपने पैरों तले जमीन है उस पर ध्यान दो । मैं सिर्फ आईएसआई का एजेंट ही नहीं बल्कि ट्रेन मिलिटेंट हूँ तो मैं मारने के लिए तो मैं मरने का रिस्क लेने को तैयार हूँ । एक्सीडेंट में क्या पता मैं बच भेजा हूँ और इन गोलियों से तो तुम्हें तुम्हारा बाप दे । उसके मंसूबे समझते ही अमर ने बिना पलटी शीर्षक में देखते हुए बायां हाथ घुमाया और उसकी पिस्टल वाले हाथ को पकडकर नीचे झुका दिया । तनवीर जोर लगाया और अपना हाथ छुडाने की कोशिश की । एक हाथ से यूँ उसे संभालना अमर के लिए भारी पडने लगा और फिर कार का कंट्रोल छोडकर अमर पीछे कूद पडा । तनवीर के हाथ में थामी पिस्टल नहीं छूटी बल्कि उसने ट्रिगर दबा दिया । ऑटोमैटिक पिस्टल से गोलियां निकलती चली गई कुछ कार के दरवाजे से और कुछ अमर की ड्राइविंग सीट से तक रहेंगे । कार बिना चालक के अपनी मनमानी करते हुए सडक किनारे दौडी और एक सब्जी का ठेला उडाते हुए नाले की तरफ लगी । जोरदार आवाज करते हुए कार नाले की कठोर दीवार से टकराई और फिर नीचे जा गिरी । तनवीर और अमर दोनों को जोरदार झटका लगा । दोनों के शरीर आपस में टकराई और फिर सरकार की छत से गिरते ही कार का बाई तरफ का दरवाजा खोल गया और तनवीर उछलकर बाहर की चढ में जा गिरा । कुछ पल शांति रही । कार का इंजन बंद पड गया था । तनवीर उठने की हालत में नहीं था । उसने महसूस किया कि उसके हाथ में फ्रैक्चर हो गया था । अमर कार में ही था और उसका सिर चकरा रहा था । उस की हड्डियाँ सही सलामत ही सिर्फ गर्दन में जोरों की लचक आ गई थी । अमर ने देखा कि तनवीर की पिस्टल कार के अंदर ही गिरी हुई थी । उसने उसे उठाया और अपनी तरफ का दरवाजा धक्का देकर खोला और बाहर निकला । कार का सहारा लेते हुए किचन में किसी तरह पांव बढाते हुए वह तनवीर की तरफ आ गया । तनवीर आराम से किचन में लेटा हुआ था । उसमें अमर की तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखा । मैंने कहा था ना एक्सीडेंट हो जाएगा । अमर बोला तनवीर मुस्कुराया मैंने कोशिश तो की इतने प्यार से । मैं तो मैं गाडी में बैठाकर ड्राइव करके ले जा रहा था तो मेरी जान लेने की कोशिश क्योंकि भाई ऐसा भी कमिशन है । तुम्हारा जावेद को क्यों बजा रखा है । तनवीर ने धीरे से नजर उठाई । वह अमर को देखते हुए मुस्कुरा रहा था । सहानी को फंसाकर तुम लोग क्या करना चाहते थे? और अगर मिनाज का कत्ल लतीफ ने किया था तो फिर साहनी तुम्हारे चक्करों में कैसे पडा है? कट लतीफ ने नहीं किया था तो तुम मुझसे झूठ बोल रहे हैं? हाँ, जैसे ही उस दूर का फोन आया और मुझे तुम्हारी असलियत समझ में आ गई, पर अब इतना कुछ तो मुझे पता चल ही गया है । उससे हमारे मिशन पर कोई फर्क नहीं पडेगा । आखिर तुम्हारा मिशन है क्या? उसकी गोवंश तुम है । जल्द ही सुनाई देगी तो यह है कि तुम लोग ही लगा रहे हो गए नहीं । उसके अलावा तो मैं आता है । क्या है काॅल छुप अगर तुम्हारे अंदर दम है तो हमें चैलेंज करो । हम से युद्ध लडा । आमने सामने होली जनता को क्यों मारते हैं? दुश्मन को अक्सर उस हिस्से में चोट पहुंचानी पडती है जो सबसे कमजोर होता है जिससे उसे सबसे ज्यादा दर्द होता है और नुकसान पहुंचता है । इस नफरत की वजह क्या है? एक नहीं अनेक तो हम हमारे धर्म के लोगों को मारते हूँ । उन पर अत्याचार करते हो । अच्छा तो ये वजह है तो मैं पता है । जावेद का धर्म क्या है? आज इस टीम में तुम्हारे ऊपर हाथ डाला । उसमें से एक बंदा राशिद था । उसका धर्म क्या है मैं नहीं पता होगा क्योंकि तुम्हारा ब्रेन वॉश कर दिया गया है । उनसे धर्म के नाम पर ऐसे काम करवाए जा रहे हैं जिससे चंद लोगों का उल्लू सीधा हो रहा है और कुछ नहीं । कान खोल के सुन लो । जावेद का रशीद का धर्म इंसानियत है और वो सच्चे मुसलमान है जो अमन और सुख चैन मिटने वालों से लड रहे हैं । जो काम तुम कर रहे हो वो कायर और नीच का है । तुम लतीफ को कार बोल रहे थे वो तो गांव का एक मामूली इंसान है जिससे शायद अपना बचाव करना भी नहीं आता और तुम लोग इतने हथियार रखते हो पर उन का इस्तेमाल निहत्थे लोगों पर करते हो । और तो और बच्चों को मौत के घाट उतार ते हो । कायर तुम हो तुम हो गाया है इस तरह पाप करके अगर तुम्हें लगता है कि तुम्हें जन्नत मिलेगी तो ये तुम्हारा बहन है । तुम शौक से मौत को गले लगा पर मौत के बाद तुम्हें कोई जन्नत नसीब नहीं होने वाली है तो मैं सिर्फ दोजख की आग में चलना होगा । बंद कर अपनी बकवास होता कौन है? ये बोलने वाला तो कुछ नहीं पता है । तनवीर चिल्ला पडा है मैंने अपने मुसलमान भाइयों के साथ हाथ मिलाकर काम किया है । मैं जानता हूँ उनकी सोच मेरी तरह है जब कि तुम्हारे जैसा ब्रेन वॉश किया । इंसान कुछ और सोचता है । उसे लगता है उसको जो ट्रेनिंग मिली है वही सच है । बाकी दुनिया का हर इंसान हर मतलब गलत है । तुम्हारी ट्रेनिंग इतनी पक्की हुई है कि तुम्हें अब सही और गलत में फर्क नहीं पता । तेरी पटना का बाहर बर्दाश्त नहीं होती । कहकर तनवीर ने जेब से एक कैप्सुल निकाल लिया । अचानक अमर ने पिस्टल उसकी तरफ तांदी जाओ । तनवीर रुका नहीं । उसने कैप्सूल आपने मूंग की तरफ बढाया पर मोह के करीब लाते लाते । उसके हाथ का अपने लगे वह कैप्सूल मोह में नहीं जा सका । अमर हजार फॅार आदमी तेरी हरकतों से ही पता चल रहा है कि तुझे जिंदगी से बहुत है तो चालाक जासूस जरूर है, जिससे मिलिटेंट ट्रेनिंग मिली है । पर आत्महत्या का हौसला तो इसमें नहीं है । अमर ने आगे बढकर उसे एक लात मार दी । वह पीछे जा गिरा । कैप्सूल कीचड में गिरकर कहीं गुम हो गया । तुम हो गई अच्छी होगे तो हमारी मर्जी से उसका गिरेबान पकडकर उठाते हुए अमर ने कहा अपने प्राइवेट सेल में आने के बाद से साहनी का लाइफ स्टाइल काफी बदल गया था । वो कभी जल्दी उठता तो कभी देर से । फोन पर अक्सर बातें मैसेजिंग करता रहता है । सेल से वो तभी बाहर निकलता था जब बिलकुल ही उगता जाता या जब ताजा हवा ये चहलकदमी का मन होता है । ऐसे दिनों में वो ब्रेक आउट समय में बाहर आ जाता था जो उसे उसकी नजदीकियों के कारण बाकी कैदी उससे डरते थे और उससे दूरी बनाकर रखते थे । जावेद भी उससे दूरी बनाए हुए था पर जब कभी भी वह साहनी को दिखाई पडता है वो उसे अपनी ओर घूरते हुए ही पाता । सोमवार के दिन शाम को ब्रेकआउट टाइम था इसलिए उसके सेल का ताला खुला हुआ था । पर साहनी बाहर नहीं निकला । वो लेट कर कोई किताब पढ रहा था जब अचानक उसे दरवाजे पर जावेद दिखाई दिया । जावेद उसके सेल से कुछ दूर खडा था । हालांकि वह सेल के अंदर नहीं बल्कि सामने राहदारी की तरफ देख रहा था । साहनी ने किताब पर से नजर हटाकर उसकी तरफ देखा फिर जावेद को अपनी तरफ बढते देख वापस किताब पढने लगा । जावेद ने एक बार सहानी को देखा फिर उसने नजरे हटा ली । राहदारी के अंत में एक गार्ड उसी की तरफ देख रहा था । वीआईपी सेल के आसपास आम कैदियों की उपस् थिति भी ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं की जाती थी । उसकी तरफ पलटे बिना जावेद बोला तो मेरे दुश्मन नहीं हो, मैं ये जान गया हूँ । साहनी का ध्यान उसकी तरफ आकर्षित हुआ । उसने किताब एक तरफ रख दी । मुझे पता है कि तुम पोलो खरीदना चाहते थे । पोलो शब्द सुनते ही साहनी पूरी तरह से चौंका । वोट खडा हुआ । जावेद अभी भी उसकी तरफ नहीं देख रहा था । वह चहलकदमी करते हुए आगे बढ गया । गार्ड की नजर उसपर चिपकी हुई थी । पोलूशन भरे भावों के साथ साहनी अपने सेल से बाहर निकल आया । वह जावेद के पीछे चलने लगा हूँ । कुछ रखते हुए उसने पूछा तुम्हें कैसे पता क्या बोलो के बारे में जावेद उसकी तरफ पालता । उसकी पैनी नजर साहनी की नजरों से मिली । कैसे पता चला तुम्हारे लिए ये जानना जरूरी नहीं । पर तुम्हे खुशी होनी चाहिए कि इस खबर से तुम्हारे लिए मेरा नजरिया बदल गया है । सहानी कुछ गुस्से से उसपर झपटा पर उसने जावेद को छुआ नहीं । उसके नजदीक पहुंचकर झुंझलाते हुए पूछा किसने बताया तुम्हें पोलो के बारे में राहदारी के अंत में बैठा गार्ड उठ खडा हुआ और उसने जोर से सीटी बजाएगा । जावेद और साहनी ने हाथ उठाकर इशारा किया कि सब ठीक है, पर गार्ड उतने से संतुष्ट नहीं हुआ । वो चलाया । अपने अपने सेल में वापस जाओ । साहनी ने हाथ उठाकर उसे सांत्वना दी और धीरे धीरे अपने सेल की तरफ वापस बढने लगा । जावेद भी वापस जाने के लिए मोडा और बिना चाहने की तरफ देखे । बोला, ये खुशी की बात है कि तुम मेरे दुश्मन नहीं । अगर तुम आगे बात करना चाहो तो आज डिनर कैंटीन में करना कहकर जावे । तेजी से आगे बढ गया । सानी नजरें तिरूचि करके उसे जाते हुए देखता रहा हूँ । डिनर रात को आठ बजे शुरू हो जाता था । सवा आठ बजे के करीब जावेद खाना लेने के लिए लाइन में लग गया । उसने लाइन में आगे पीछे देखा । चारों तरफ नजर घुमाई पर साहनी कहीं नजर नहीं आया । कुछ देर में उसका नंबर आया । उसने थाली में खाना लिया और फिर हमेशा की तरह सबसे पीछे की बेंच पर अकेला जाकर बैठ गया । तभी मैं उसके दरवाजे पर साहनी नजर आया । उसने अन्दर प्रविष्ट होते ही सबसे पहले जावेद पर नजर डाली । दोनों की आंखें मिली और फिर साहनी खाने की लाइन में लग गया । कुछ कैरी सानी को जिज्ञासा के साथ देख रहे थे क्योंकि वीआईपी स्टेटस पाने के बाद वो शायद ही कभी कैंटीन में खाना खाने आया था । उस वक्त तो लोग और भी घोर आश्चर्य में बढ गए जब सानी थाली लेकर जावेद के सामने जा बैठा । दोनों चुप चाप खाना खाते रहेंगे । दस पंद्रह मिनट बाद लोगों ने भी उन पर ध्यान देना बंद कर दिया । तब सहानी बिना नजर उठाए बोला, मुझे पता नहीं तुम्हें कितना मालूम हैं । पर अगर तुम यह जान गए हो कि पोलो क्या है और मैं तुम्हारा दुश्मन नहीं तो तुम ये भी समझ गई होगी कि मैं निर्दोष हूं । जावेद ने सिर्फ हम कार भरी गुड साहनी ने कहा, मैं शुरू से ही तुम से कह रहा था कि मेरी तुमसे कोई दुश्मनी नहीं, पर तो वही लोग मानने के लिए तैयार नहीं थे । जावेद ने जवाब नहीं दिया । खैर देर आए दुरुस्त आए हैं । अब बताओ तुम क्या चाहते हो? जावेद पानी पिया और बोला देखो तुम्हारी मजबूरी चाहे कुछ भी हो पर मैं यहाँ तुम्हारी वजह से अंदर हूँ और तुम मेरी वजह से मैं जान गया हूँ कि तुम ने किसके इशारे पर मुझे फंसाया था । इतना तो तुम समझते ही होगी कि उन लोगों के लिए मेरे जैसे लोग जान जान दुश्मन है । अगर तुम ये बात मुझे पहले ही खुलकर बता देते तो मैं तुम्हारी मदद करता और आज ये हालात पैदा ही नहीं होते । देखो जो हुआ सो हुआ । मैं जिन हालातों में फंसा हुआ था तो उसमें मैंने वैसा किया जैसा मुझ से करवाया गया । अब तुम बोलो क्या करना है? हम यहाँ बैठ कर ज्यादा देर बात नहीं कर सकते हैं । तुम तो वीआईपी हो । आपने सेल में मुझे बुला लो । देखो वीआईपी पर भी मुझे यहाँ किसी के रहमो करम से हासिल हुई है । हमारी इस मुलाकात की जानकारी उसे शर्तिया हो जाएगी । पर मैं रिस्क लेने के लिए तैयार नहीं हूँ क्योंकि मुझे पता है इस जंजाल से मुझे परमानेंट मुक्ति तुम्हें दिलवा सकते हो । काम आसान है, मेरे खिलाफ फॅसने छुपाए थे । उन का खुलासा करूँ पर मैं ज्यादा कुछ नहीं कर सकता क्योंकि सब कुछ मेरे हाथ में नहीं है । तो तुम्हारे खिलाफ जो साजिश हुई उसमें मेरा एक बहुत छोटा सा रोल था । बहुत सी बातों का मुझे कुछ भी अंदाजा नहीं है । तुम समझ सकते हो । तुम समझ रहे हो ना । मैं किस के इशारों पर नाच रहा था । हाँ मैं जानता हूँ पर फिर भी तुम्हारी गवाही मेरे बाहर निकलने में मददगार साबित होगी । तुम अपने वकील को विजिट के लिए बुलवा मेरा साथ ही अमर भी उसके साथ यहाँ आ जाएगा । तुम उसे बयान दोगे । जितनी भी जानकारी तो मैं पर इस तरह तो मैं दूसरे बच्चों में फस जाऊंगा । मेरे ऊपर तुम्हारे खिलाफ साजिश करने का भी केस चलेगा । ऊपर से आईएसआई वाले मेरी गर्दन काट देंगे क्योंकि तुम्हारी मदद कर के मैं उन का दुश्मन बन जाऊंगा । है ना मतलब जावेद ने अगल बगल देखते हुए सॉरी तो मेरी मदद कर रहे हो इस लिए फिक्र मत करो । सीक्रेट सर्विस या पुलिस की तरफ से तुम्हारे ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होगी और आईएसआई वालों को बिल्कुल भी पता नहीं चलेगा कि तुम हमारी मदद कर रहे हो । तुम हमें जानकारी दोगे और हम उसके आधार पर ऐसा दिखाएंगे कि हमें इन्वेस्टिगेशन से सभी जानकारी हासिल हुई है ना कि तुम्हारे से । हालांकि बैग्राउंड में तुम मेरे फेवर में बयान जरूर होगे पर वो गोपनिय रहेगा । देखो मुझे तो इसमें रिस्की रिस नजर आ रहा है । जावेद ने उसकी आंखों में देखा और कहा तुम्हें फंसाने वालों में तनवीर शामिल खाना सहानी । तनवीर का नाम सुनकर चौका और फिर बोला क्या वो पकडा गया था? कल ही वो हमारी गिरफ्त में है इसलिए तुम चिंता मत करूँ । धीरे धीरे इन सबको हम पकडेंगे । पर तुम है हमारे साथ कोऑपरेट करना पडेगा । बॉल अब तुम्हारे पास में है । तुम या तो वैसा करो जैसा मैं तो मैं बोल रहा हूँ या फिर जेल में सडते रहूँ । मैं तुम्हारा साथ दूंगा । साहनी दृढ स्वर में बोला काॅपर मिनाज के मर्डर केस से तो मैं बस जाऊंगा ना उसकी तुम्हें बिल्कुल भी चिंता नहीं करनी चाहिए । तुम जानते ही हो कि मेरी टीम उसकी भी इन्वेस्टिगेशन कर रही है । अगर हमें तुम्हारे खिलाफ कुछ सबूत मिले भी तो हम उसे दबा देंगे । क्योंकि हमें ये तो मालूम पड गया है कि उसका खून तुमने नहीं किया । साहनी के चेहरे पर कुछ रौनक आई । वो कृतज्ञ भाव के साथ बोला जा रही थी । ऍम मैंने तुम्हें इस मुसीबत में फंसाया । भले ही किसी के दबाव में, पर आखिर मैंने तुम्हारे साथ बुरा क्या फिर भी तुम मेरी मदद कर रहे हो डोंट वरी । ऐसे खेल खेलने का मुझे शौक है । मैं तुम्हारा साथ दूंगा पर इस काम के लिए मेरा वकील नहीं आएगा । आप अपनी टीम को भेजेंगे । आपने सबसे विश्वस्त लोगों को ही भेज दिए क्योंकि मैं किसी और पर विश्वास नहीं करना चाहता हूँ । अपने वकील पर भी नहीं । अच्छा कोई दिक्कत नहीं है । वकील तो मैं सिर्फ इसलिए बोल रहा था था की तो मैं ये ना लगे कि हम तुम्हें तुम्हारा पक्ष रखने का मौका नहीं दे रहे हैं । पर फिर भी वकील को तो तुम्हें बुलाना ही पडेगा । वरना इस तरह तुम्हारा बाहर निकलना आईएसआई के मन में शक पैदा कर देगा । हाँ, क्योंकि हमें किसी को भी ये पता नहीं चलने देना है कि तुम हम से मिले हो तो मैं आईएसआई का ही साथ देते रहना है । तभी हम उन तक पहुंच पाएंगे तो मैं वकील के साथ अलग मीटिंग रखूंगा । कहकर जावेद ने नजर घुमाकर देखा मैं इसमें अब बहुत कम लोग बचे थे । जो बच्चे थे वो उन दोनों को ही देख रहे थे । अब चलना चाहिए जब एबोला आगे का प्लान में कल शाम को ब्रेकआउट टाइम में तो मैं बताता हूँ । फिर दोनों अपनी अपनी थाली लेकर वॉशबेसिन की तरफ पड गए । लखनऊ से एक सौ पचास किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोहनगढ माइंड इस जगह कोयले की खाने हुआ करती थी जो कि बीस साल पहले बंद कर दी गई थी । माइंड के चारों ओर दूर दूर तक कोई आबादी नहीं थी और जो सबसे पास गांव था वह करीब बीस किलोमीटर की दूरी पर था । कोई भी भूले भटके इन माइन्स के आस पास भी नहीं आता था चाहे वह रात का समय हो या दिन का क्योंकि गांव वालों का मानना था की वो खाने प्रेत ग्रस्त हैं और वहाँ पर उन मजदूरों की आत्माएं भटकती हैं जिनकी खानों में दुर्घटना के चलते मृत्यु हो गई थी । इस वक्त दोपहर का समय था और सूखे धूलभरे पहाडों से घिरी उन खानों के क्षेत्र में काली मिट्टी पर अपने पांव के निशान छोडना हुआ । एक आदमी जब अपने पांव के निशान छोडता हुआ एक आदमी चला जा रहा था । उसने काले रंग के कपडे पहने हुए थे और उसके पास एक बडा सा काले रंग का पूरा था जिसे उसने अपनी पीठ पर बांध रखा था । धीमी चाल से सूरज की गर्मी में तपते हुए वह आगे बढ रहा था । उसने अपने शरीर और सर को पूरी तरह से ढक रखा था । उसके कपडे धूल से भरे हुए थे । रह रहकर चेहरे पर पसीना उभर आता था पर गर्म हवा उसे भी सुखा दे रही थी । उस आदमी ने अपना नाम जैदी बताया था जिससे बताया था वो पास के गांव में रहने वाला एक किसान था जो कि उस दिन इत्तेफाकन साइकिल से सोहनगढ खानों के पास से निकल रहा था । जब उसे वो आदमी खान की तरफ चाहता हुआ दिखाई दिया तो वह आश्चर्यचकित रह गया ।

Part 11

उसने साइकिल का रुख उसकी तरफ कर दिया । जैदी भी जमीन पर बैठ कर उसका इंतजार करने लगा । उसने बीडी सुलगा ली । किसान ने उसके पास पहुंचते ही दुआ सलाम की जगह सीधे कहा और एक कौन है तो बाब रे पता भी है किस तरफ जा रहा है । जैदी बोला मेरा कोई घर नहीं है । बाढ में सब आ गया था तो मैं यहाँ कुछ दिन के लिए ठहरा हुआ हूँ । कहाँ से है तू? राजकिशोर नामक उस किसान ने पूछा, बिहार से ही तो कोई चोर डाकू तो नहीं जो यहाँ पुलिस के डर से छुपा हुआ है । अरे क्या बात कर रहे हो? मैं मुसीबत का मारा हूँ, मेरा विश्वास करो । पर राजकिशोर भी जिद्दी किस्म का इंसान था । उसने उसकी कोई दलील नहीं सुनी । उसने कहा अगर वह वाकई मुसीबत का मारा है तो उसके साथ गांव चले । वहाँ पर वह कुछ काम भी कर सकता है । उस की जरूरत नहीं है । जयदीप ने कहा, मैं वक्त का मारा हूँ । मेरा पूरा परिवार खत्म हो गया । अपने गम को मिटाने मैं यहाँ अकेले रह रहा हूँ । सब सही होने के बाद मैं वापस लौट जाऊंगा । तब तो बहुत बुरा हुआ तुम्हारे साथ । अरे ऐसे वक्त में तो अकेले बिल्कुल भी नहीं रहना चाहिए । कहीं तुम कुछ गलत ना कर लो । यहाँ खानों में मर गए तो तुम्हारी इलाज के बारे में भी किसी को पता नहीं चलेगा । ऐसे भी मेरे आगे पीछे अब कोई कहाँ रह गया है । राजकिशोर ने उसकी कोई बात नहीं सुनी । इस कारण से जयदीप तो नहीं पर राजकिशोर को जरूर लाश बनना पडा । जयदीप ने शिकारी चाकू से राजकिशोर की गर्दन काट दी और फिर उसकी लाश खींचते हुए खान के मुख की तरफ बढ गया । जयदीप को यकीन था कि राजकिशोर को पूछता हुआ इस तरफ कोई भी नहीं आएगा । उसकी बातों से उसे पता चल गया था कि वह आम तौर पर इस रास्ते से नहीं आता था पर आज शायद उसकी मौत ही उसे इधर खींच लाई थी । उसके इलाज खान के अंदर ले जाने के बाद जयदीप उसकी साइकिल को वहाँ से काफी दूर एक नदी किनारे इस तरह फेंक आया था जिसे जब गांव वालों ने पाया तो उन्हें यही लगा कि राजकिशोर साइकिल सहित नदी किनारे बने कच्चे रास्ते से गिर गया और नदी में बह गया । साइकिल का नसीब राजकिशोर से अच्छा था जो पीछे रह गई । इस तरह की परेशानी पहली बार जयदीप को झेलनी पडी थी । वैसे तो वो अब करीब दो साल से खान में रह रहा था । कान का मुख देखकर ऐसा लगता था जैसे कोई भयानक पिशाच मुंह खोले लेटा हुआ अपने आहार का इंतजार कर रहा है । मूवी के अंदर दो पटरियां जाती दिखाई दे रही थी जिनपर बाहर दो जन खाए वैगन खडे थे । वक्त की बेरहम मार उन पर साफ दिखाई दे दी थी । वैगन के पास से गुजरते हुए जयदीप खान के अन्दर प्रविष्ट हो गया । वो अंदर करीब सौ मीटर पटरी के ऊपर चलता गया । अंधेरा अंदर अंधेरा था । वह जहाँ रुका वहाँ से आगे जाने का रास्ता बडे बडे पत्थरों के कारण बंद था । वह बाई तरफ परिवार में पत्थरों के बीच कुछ टटोलने लगा । फिर उसने एक पत्थर को सरकाया और उसके नीचे के पत्थर को भी हटा दिया । अब वहाँ एक बडा सुराख उत्पन्न हो गया । उसने लाश अंदर सरकारी और खुद भी उस सुराख के अंदर घुस गया । एक तरह से वो दीवार के अंदर घुस गया था । अंदर आकर उसने पत्थरों को पहले की तरह लगा दिया और फिर एकदम घुप्प अंधेरे में आगे बढने लगा है । बाहर से देख कर कोई सोच भी नहीं सकता था कि खान की उस दीवार के अंदर सुरंग हो सकती है । सुरंग के अंदर चलता हुआ वह काफी आगे निकल आया । करीब दस मिनट निरंतर चलने के बाद एक दरवाजा आया । वो लकडी का दरवाजा था, जो कि कई जमानों पुराना प्रतीत होता था । उसने दरवाजा खोला और अंदर आ गया । अब वह चेंबर में था, जिसमें चारों तरफ लकडियों का बॉक्स बना था । चेंबर के अंत में एक और दरवाजा था । उसने उस दरवाजे पर दस्तक दी । कुछ पल सन्नाटा रहा । उसके बाद दूसरी तरफ से दरवाजा खुल गया । दरवाजे के उस पार एक लंबा सा रास्ता था, जिस पर जगह जगह बल्ब लगे थे । उनसे वहाँ पर्याप्त रोशनी हो रही थी । दरवाजे पर दो काली वर्दी पहने आदमी खडे थे । लाश देख कर उन दोनों ने उससे कुछ सवाल किए, फिर अंदर जाने दिया । कुछ और दूर जाने के बाद वहाँ कई वर्दीधारी चहलकदमी करते हुए नजर आए । कुछ के पास हथियार थे तो कुछ योगी घूम रहे थे । एक दो लोगों ने उसे इस तरह देखा जैसे काफी अरसे से जानते हो । लाश पर सभी की नजर गई, पर किसी ने उसे टोका नहीं । एक आदमी उसके पास आकर रुका और बोला, अलग चर्चा । दंगल तो हाँ बेटा बाहर गर्मी बहुत है । बहुत लंबा चलना पडा । आज सामान भी बहुत था । ऊपर से ये काम और बढ गया । सामान तो बाहर ही छूट गया । किसी को भेजकर मंगवाना पडेगा कहकर उसने लाश वही लिटा दी । उसने उसे नाजुक से देखा । ये है कौन? गांव वाला भाई चक्कर आ गया था कहकर उसने पूरी बात बताई अफजल और हैदर साहब को बताना पडेगा क्या पता ये कोई पुलिस का आदमी हो मैं बता दूंगा । उसके बाद इसे खान के अंदर कहीं फेंक आएंगे । कहकर वह एक तरफ पड गया । खान के अंदर उन लोगों ने रहने के लिए सभी प्रकार का इंतजाम कर रखा था । कुछ और अंदर जाने पर वहाँ कम से कम दो सौ के करीब लोग दिखाई पड रहे थे । जिनमें वर्दीधारियों के अलावा और थे और बच्चे भी थे । हर कोई अपने अपने काम में लगा हुआ था । वहीं पर एक कोने में एक बंकरनुमा कमरा था जिसमें एक भी खिडकी नहीं थी । सिर्फ एक फलादि दरवाजा था जिसके बाहर दो सात फीट के राक्षस सामान वर्दीधारी खडे थे जिन्होंने सर पर धातु का हेलमेट और शरीर पर धातु का कवच पहना हुआ था । उनके कंधों पर मशीनगन थी और कमर पर दो दो पिस्टल देंगे । थे । बंकर के अंदर का नजारा किसी कंट्रोल रूम जैसा था । वहाँ बडी बडी स्क्रीनें लगी हुई थी और एक बडा सा डैशबोर्ड था जिसपर तरह तरह के बटन थे । एक स्क्रीन पर भारत का नक्शा नजर आ रहा था । वहाँ प्लास्टिक की कुर्सियों पर दो लंबे चौडे व्यक्ति बैठे थे । एक के हो अप्रत्याशित रूप से फूले हुए थे और दूसरे की आंखें इतनी बडी थी कि मानव कटोरों से बाहर निकल आएंगी । दोनों ने कुर्ता पजामा पहना हुआ था और उनके सर पर साथ में थे । उनमें से एक बोला हूँ, मुझे विश्वास नहीं होता । फूले होटल वाला बोला यकीन करना मुश्किल है अफजल बडी आंखों वाले ने कहा लेकिन अगर ये हकीकत है वहाँ का ये हम लोगों की खुशकिस्मती होगी । हाँ, वो जोर खुद यहाँ पर हमें फ्रिज मत का मौका दे रहे हैं । कब तक आएंगे? हैदर ने जैसे खुद से पूछा उनका प्लेयर हमेशा सीक्रेट रहता है । उनके नजदीकी लोगों को भी नहीं पता रहता है । इसी तरह तो उनको महसूस रखा जाता है । यानी हमें हर वक्त तैयार रहना होगा । बिल्कुल अचानक ही हैदर के सामने मेज पर रखी एक उपकरण में लाल रंग का बल्ब चलने लगा । कहीं उसकी जुबान लडखडाई बडी बडी आंखें और फैल गई नहीं है । अफजल उठाना । हैदर भी उसके साथ उठा और दोनों बनकर के बाहर निकले । वो तेजी से माइंड के और अंदरूनी हिस्से की तरफ बढ गए । वहाँ हर जगह रोशनी थी और कुछ फैसले पर हथियारों से लैस कार्ड मौजूद थे । उन दोनों को देखकर वह सभी सेल्यूट मार रहे थे । आखिरकार वो एक दरवाजे पर पहुंचे जहां एक गार्ड खडा था । जोर आ गए क्या आपको सिंगल मिला होगा? उसने पूछा हाँ ठहरिये । फिर उसने जेब से एक वॉकीटॉकी निकाला और दूसरी तरफ कुछ बात की तो उसने दरवाजा खोल दिया । उसने दरवाजा खोला और उनके अन्दर प्रविष्ट होते ही दोबारा बंद कर लिया । अब सामने एक सुरंग दिखाई दे रही थी जिसमें जगह जगह बल्ब लगे हुए थे । वहाँ ताजी हवा के कुछ होंगे भी आ रहे थे । सुरंग में पटरी थी जो कि ज्यादा पुरानी प्रतीत नहीं हो रही थी । हैदर और अफजल सामने देखते हुए खडे हो गए । कुछ मिनटों के इंतजार के बाद सामने से रोशनी उत्पन्न हुई । फिर आवाज आने लगी । फिर पटरी पर सामने से चार बैगन आते दिखाई दिए जिसके आगे बाल भी लगे थे । हर एक वैगन में चार लोग खडे थे । सिवाय तीसरे बैगन की जिसमें कि सिर्फ एक व्यक्ति मौजूद था । उसने स्लेटी रंग का चोगा पहना हुआ था । सर पर साफ आ था उसके चेहरे पर सलीके से रखी दारी मुझे थी । उसकी आंखें बडी थी और उनमें वैसी चमक थी । धीरे धीरे सभी वैगन उनके पास आकर रुक गए और उसमें से आगंतुक उतर आए । सबसे अंत में चोगे वाला व्यक्ति उतरा जिसके लिए सभी अदब से खडे इंतजार कर रहे थे । आप के दीदार बागर जैसे जन्नत नसीब हो गया हो । जो अफजल बोला वो मुस्कुराया । फिर बोला हम अपने सभी बहादुर जंगलू से मिलने के लिए बेकरार हैं । इस तरफ आइये हुजुर हैदर ने इशारा किया सभी उनके रैनबसेरे की तरफ बढ गए । दरवाजे को पार करके वह अंदर आ गए । खान के अंदर लोग अपने कामों में मशगूल थे । धीरे धीरे उनकी नजर आगंतुक की तरफ पडी । एक एक करके वो लोग सब रह गए और फिर दौडते हुए उस की तरफ आए और पास पहुंचकर घुटनों के बल बैठकर झुक गए । ज्यादा बुजुर्ग, आधा बुजुर्ग वालेकुम अस्सलाम सभी उठकर खडे हो जाओ । उसने आदेश दिया । लोगों ने आदेश का पालन किया, वो उठे । हालांकि उनके सिर अभी भी झुके हुए थे । मेरे बहादुर जंगजू मिशन का दिन नजदीक आ रहा है । सब तैयार हैं जी जरूर जरूर जरूर । लोगों ने बुलंद नारा लगाया, बहुत हूँ हमारा मिशन दुनिया बदलने वाला मिशन होगा । आज तक ऐसा हमला कभी किसी ने नहीं किया होगा । हिंदुस्तान के लोगों और हुक्मरानों के लिए ये बहुत बडा सबक होगा । और पूरी दुनिया के लिए बडी चेतावनी हमें भी इसके लिए कुछ कुर्बानियाँ देने पडेंगे । क्या आपको कब बोला है? तो बोले हैं लोगों का एक मत जवाब खान की दीवारों से टकराकर गूंज उठा मालिक नाम का वो अधेड भी एक कोने में खडा था । उसका सिर भी झुका हुआ था और सभी की तरह उसका ध्यान हुजूर की बातों की तरफ न हो के हाथ में पकडे मोबाइल फोन की बिना रोशनी वाली स्क्रीन पर था । तनवीर सीक्रेट सर्विस के हेडक्वॉर्टर से दूर एक गुप्त फेसिलिटी में बंद था । अमर ने चीज को उसका पॉलीग्राफी टेस्ट कराकर बयान लेने की मौखिक अनुमति लेनी थी । नियमानुसार उसकी जानकारी पुलिस को भी होनी चाहिए थी । पर अमर का मानना था कि तनवीर का पकडा जाना इस केस में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि थी । वो उनके गुप्त मिशन में एक बडा आधा रखता है और इससे जितनी जल्दी हो सके राज उगल वाले ना जरूरी था । अगर नियम से चलते तो पुलिस को ये टेस्ट करने की अनुमति लेने में न जाने कितना वक्त लगता तो अबतक शायद बहुत देर हो चुकी होती । इसलिए अभय कुमार ने गुप्त रूप से पूरी कार्यवाही करने का निर्देश दे दिया । तनवीर से हासिल हुई मिनाज और साहनी से ताल्लुक रखती सभी जानकारी अमर ने जावेद को पहुंचा दी थी । उसे यकीन था जावेद अब साहनी को शीर्ष में उतारकर जल्द ही जेल से बाहर होगा । अभी वो तनवीर के बयान की प्रतिक्रिया में ही लगा था । दवाओं के असर से बीच बीच में वह गहरी नींद में चला जाता था । इस बीच अमर को रिंकी का फोन आया । उसे अटेंड करने वो बाहर आया । हलो क्या चल रहा है? अमर ने संक्षिप्त में बताया, तो मैं बहुत यानी मेरी जानकारी सही निकली । खाली भारत आने वाला है । ये लोग ऐसा क्या करने वाले हैं जिसके लिए वो खुदियां आने का रिस्क ले रहा है । देखो अभी तक तो इसने मिशन के बारे में कुछ नहीं उगला । दवाओं के असर में भी है । फिर तो इससे भी ज्यादा नहीं पता होगा तुम कहाँ हूँ । होटल में नाम भूल गई मेरे घर में । अब तुम्हारा एक परमानेंट कमरा है । धान और उसकी वजह से क्या हुआ, वो भी नहीं भूलेंगे । ऍम मैं तुम्हारे और मंदिरा के बीच नहीं आना चाहती । देखो तुम ये सब मत सोचो । मैं तुम से मिलना चाहता हूँ । ऍम क्या चीज मुझे तुमसे जरूरी बात करनी है । ट्रीस सिर्फ आधा घंटा जिनकी शांत हो गयी हलो । रिंकी ने गहरी सांस छोडी हैं । ओके होटल अवध रूम नंबर एक हजार सडसठ मैं अभी पहुंचता हूँ कहकर अमर ने फोन काटा और वापस अंदर गया । अंदर कुनाल और जॉन तनवीर के होश में आने का इंतजार कर रहे थे । मैं आधे घंटे में अमर बोला किधर जा रहा है? जॉन ने पूछा, ग्रुप में भी चलता हूँ? नहीं । मुझे अकेले कुछ काम निपटाना है । जॉन ने उसे घूर के देखा । अमर अपनी कोई बात जॉन से छुपाए ऐसा कभी नहीं होता था । अमर उस पर ध्यान दिए बगैर बाहर निकल गया । कार में बैठकर उसने पहले मोबाइल पर नजर डाली । उसने मंदिरा को कई वट्सऐप मैसेज और एसएमएस किए हुए थे । उस की तरफ से आखिरकार एक जवाब आ ही गया था । उसने अंग्रेजी में जो मैसेज डाला था, उसका हिंदी रूपांतर को छह था । मुझे नफरत है उस दिन और उस पल से जब मैं तुमसे मिली । अब हमारे बीच कोई रिश्ता नहीं है । अब मुझे और मैसेज नहीं करना वरना मुझे नंबर बदलना पडेगा । अमर ने फोन एक तरफ रखा और फिर चाभी एडमिशन में घुमाकर इंजन स्टार्ट किया और फिर कार तेजी से आगे बढा दी । दस मिनट में वह अटल अवध पहुंच गया और लिफ्ट से एक हजार सडसठ नंबर कमरे के सामने पहुंचा । बेल बजाते ही अंदर से आहत हुई और फिर दरवाजा खुला । खोलने वाली रिंकी ही थी । उसने पिंक रंग की स्लीवलेस टीशर्ट और लाल रंग के शॉर्ट्स पहने हुए थे । बाल खुले हुए थे और चेहरे पर मोटे फ्रेम का चश्मा था । चेहरे पर कुछ उदासी जरूर थी फिर भी वह बहुत आकर्षक दिख रही थी । अमर को देखते हुए वह कुछ मुझे से स्वर में बोली हाय अमर बोला और बिना इजाजत लिए अंदर आ गया । बैठ पर अमर को उसका लैप्टॉप दो मोबाइल और तीन और तरह के डिवाइस दिखाई दिए जिनके बारे में अमर को भी जानकारी नहीं थी । वाकिंग अमर ने पूछा जिनकी ने जवाब नहीं दिया और टहलते हुए बैठ के पास खडी हुई बैठो, कुछ भी होगी कॉफी । रिंकी ने फोन करके दो कॉफी का ऑर्डर दिया । फिर अमर की तरफ पलटी तनवीर से और क्या पता चला इस बार अमर ने पूरे विवरण के साथ जानकारी दी । सुनकर रिंकी की आंखों में चमक आ गई । अब जाकर तुम्हें काम का आदमी मिला । तुम्हारी बदौलत कम ऑन मैंने क्या किया? तुम्हारी दी जानकारी का इस्तेमाल करके ही मैं उसे फंसा सका तो तुम्हें जैसा कहा था मैं वैसा ही दर्शाने लगा कि मैं भी आतंकवादी हूँ और खाली ले के आदेश पर उसे बचाने आया हूँ । अब देखो ये बात तो तुम से ही पता चले कि ये खलीली को हुजूर बोलते हैं । उसने मिशन के बारे में कुछ नहीं कहा । उगलवाने की कोशिश तो बहुत की पर ऐसा लग रहा है उसे मिशन के बारे में कुछ पता ही नहीं । ऐसा कैसे हो सकता है । तो मैं कहा था कि खुद खाली यहाँ आ रहा है । हो सकता है बहुत बडा मिशन हूँ । इसलिए उसकी कामयाबी के लिए उसने खुद अभी तक आपने सभी आदमियों को सब कुछ नहीं बताया हूँ । ऐसा हो सकता है खाली जैसे इंसान नहीं । फ्रांस और लंडन में बम धमाकों को प्लान किया था । वहीं मास्टरमाइंड था उन आतंकी हमलों के पीछे । पर वहाँ भी वो खुद मौजूद नहीं था । अमर बोला यही तो समझ नहीं आ रहा । तभी कॉलबेल बजी । वेटर कॉफी ले आया था । दोनों कॉफी सिर्फ करने लगे । कुछ देर कमरे में शांति का माहौल कायम रहा करेंगे । अमर बोला कम ऑन अमर रिंकी कॉफी का कप टेबल पर रखते हुए बोली इस सब के बीच तुम्हें इश्क सूझ रहा है । मैंने तो बस तुम्हारा नाम लिया था । मुझे पता है तुम्हारे मन में क्या चल रहा है । क्या इतना आसान है मेरे मन को पढना जिनकी चुप चाप दरवाजे की तरफ देखने लगी या तुम्हारे लिए आसान हो गया है । जिनकी शांत खडी रही वो नजरें चुराने लगी । अमर कॉफी मग एक तरफ रखकर उसके नजदीक आ गया करेंगे अमर पीस तुम बस एक सवाल का जवाब होंगे । रिंकी ने अमर की आंखों में देखा अमर के चेहरे पर आए ऐसे भावुक भाव उसने पहले कभी नहीं देखे थे । क्या तुम्हारे मन में मेरे लिए सॉफ्ट फिलिंग नहीं? रिंकी चुप रही । उसके होट हल्के से भर भर आए तो मैं मेरे साथ अपनापन नहीं लगता । क्या तुम मेरे नजदीक आकर खुद को से फील नहीं करती? खुशी हासिल नहीं करती । अमर अगर तुम्हें यही सब बात करनी है तो मुझे नहीं मंदिरा से जाकर करूँ । जिनकी चीख पडी और फिर जैसे बांध फट पडा । वह चेहरा हाथों में छिपाकर फफक फफककर रोने लगी । अमर सब रह गया । उसने रिंकी से इस तरह के इमोशनल आउट बस की अपेक्षा नहीं की थी । रिंकी अमर ने उसके सर की तरफ हाथ बढाया तो वह ओराई ट्राॅफी अमर कुछ पल उसे देखता रहा । फिर धीरे से वापस पालता और भारी मन से दरवाजे की तरफ बढ गया । डोल नौ घुमाकर उसने दरवाजा खोला ही था कि रिंकी के कोमल स्वरूपे मैं आदतन फ्लाइट रही हूँ । ठीक तुम्हारी तरह सच कहती हूँ । शुरू से मैं तुम्हारे साथ सिर्फ फ्लर्ट कर रही थी । पर पर यू नो जैसे जैसे तुम्हारे साथ वक्त बिताया, न जाने कब तुमने मेरे दिल में जगह बना ली है । ये जानते हुए भी कि तुम किसी और के हो । मैं अपने जज्बातों को कंट्रोल नहीं कर पाई । तुम्हारे साथ बिताया हर लंबा मुझे खुद के साथ बिताए वक्त की तरह महसूस होने लगा तो उनसे बात करती हूँ तो लगता है अपने आप से बातें कर रही हूँ । शायद तुम मेरी सोलमेट हूँ पर मुझे हक नहीं है । तुमसे प्यार करूँ पर क्यों? क्योंकि तुम किसी और के हो । अगर मैं कहूँ कि जिस तरह मेरे बारे में तुम सोचती हूँ वही फीलिंग्स मेरे दिल में भी तुम्हारे ली हैं । अगर कोई और लडकी होती तो शायद अब तक मैं इंटीमेट होने का प्रयास कर चुका होता है । पर तुम्हारे फ्लर्ट करते रहने के बावजूद मेरे मन में तुम्हारे लिए ऐसे खयाल नहीं आए । फॅमिली ये सब बोल कर तो मुझे और दुख मत पहुंचाओ । नहीं मैं सच कह रहा हूँ ऍम की आई लव यू अमर । उसकी आंखों में झांकते हुए गंभीर स्वर में बोला रिंकी सिर्फ उसे देखती रही । देखो मुझे कोई जल्दबाजी नहीं । मैं तुम्हारे जवाब का इंतजार करूंगा । कहकर अमर ने दरवाजा खोला और बाहर निकल गया । रनवीर पलंग पर लेटा हुआ था । कमरे में अमर जॉन राशिद और अभय कुमार मौजूद थे । नारकोटिक्स के प्रभाव के कारण वो काफी व्याकुल दिखाई दे रहा था । उसके बयान के आधार पर सीक्रेट सर्विस को उसके पुराने ठिकानों के बारे में पता चल गया था । वहाँ तुरंत छापा मारा गया और कई ऐसे सबूत हासिल हुए जिनसे पता चला कि दलवीर आईएसआई का एजेंट था । इनमें शामिल थे उसका पाकिस्तानी पासपोर्ट और जाली भारतीय पासपोर्ट और पैन कार्ड । कुछ मोबाइल फोन्स, ढेरों सिम कार्ड, कुछ छोडे हुए कुछ सही सलामत । तनवीर अब है बोला हमें तुम्हारे खिलाफ काफी सबूत मिल गए जिनसे साफ साबित होता है कि तुम पाकिस्तानी एजेंट हूँ और आतंकी हरकतों में शामिल हैं । तुम्हारे ऊपर बहुत से कम साबित होंगे जिनमें भारत के खिलाफ युद्ध छेडने का संगीन इल्जाम भी शामिल होगा । इसकी सजा जानते हो तनवीर उसे एक तक देखता रहा हूँ । इस की सजा सिर्फ एक है फांसी जिससे तुम है दुनिया की कोई ताकत नहीं बचा सकते हैं सर अमर धीरे से बोला वैसे भी ये कोर्ट में कुछ नहीं मानने वाला । हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट में जाएगा, इससे अच्छा तो इसका कोई एक्सीडेंट हो जाए । नहीं । हमारे हम सीक्रेट सर्विस में काम करते हैं ना कि किसी गैंग में । हमें इसका मूंग खुलवाना होगा । बेना नारकोटिक्स के ताकि इसकी दी हुई इन्फॉर्मेशन इसके बाकी साथियों को पकडने में काम आ सके कहकर अब है । तनवीर से बोला अगर तुम हमारा साथ देते और मिशन के बारे में बताओ गे तो हम कोशिश करेंगे कि तो मैं फांसी की जगह उम्रकैद मिल सके । मैं मिशन के बारे में कुछ नहीं जानता तो मैं सीधे खाली से निर्देश मिल रहे थे । ऐसा हो ही नहीं सकता ये सच है पर उससे ज्यादा मुझे कभी कुछ नहीं बताया गया । देखो तुम झूठ बोल रहा हूँ । क्या नार्को टेस्ट में मैंने इस बारे में कुछ बताया? कोई कुछ नहीं बोला । नहीं बताया होगा जो आत्मविश्वास के साथ हो रहा है । क्योंकि मैं नहीं जानता हमारे हुजूर बहुत बडे औदे पर हैं । ये मेरी खुशकिस्मती है की मैं उनसे सीधे संपर्क में रहा । पर मेरी थी औकात नहीं की वो अपना प्लान मुझे बतायेंगे । प्लैन नहीं भी बताया होगा । फिर भी पता तो चल ही जाता है । तो हम लोग लखनऊ में भारी मात्रा में हथियार क्यों ल रहे थे और वो स्टॉक कहाँ जमा किया गया है? ये सच है कि सहानी की कंपनी के ट्रांसपोर्ट से हम हथियार मंगवा रहे थे पर उन्हें हम अपनी पुरानी सरकार से धोकर दूसरी टीम को दे देते थे । फिर वो उसे कहा ले जाते थे, उसका क्या करते थे ये हमें कभी नहीं बताया गया । जॉन ने कहा सर हमने इस से ये सब सवाल पूछते टेस्ट के दौरान पर ये कुछ नहीं बता पाया था । शायद ये सच कह रहा है । अच्छा खाली, खुद यहाँ क्यों आ रहा है? अब मैंने तनवीर से पूछा मुझे नहीं पता तुम कोर्ट में अपना बयान देने के लिए तैयार हो । क्या गारंटी है कि मुझे फांसी नहीं होगी? अगर मोटा बकरा मिल जाए तो फिर मेम ने के शिकार की जरूरत नहीं पडती है । हम तुम्हारे हुजूर को फांसी पर चढाना चाहते हैं । इसलिए तुम हमारा साथ देते रहो तो उन्हें फांसी नहीं होगी । देखिए मैं हुजूर के खिलाफ नहीं जा सकता । अब तुम खुद को उससे आजाद समझो । अब न तो तुम उसके लिए काम करने जा पाओगे और न ही आईएसआई के लिए । तो मैं जेल में ही पूरा जीवन बिताना है । जहाँ तो मैं कुछ नहीं होने वाला । बीस साल बाद तो निकलूंगा ही वो मुस्कुराया धम आपने कल की सोच हूँ, बीस साल बाद की नहीं तो हमारे हुजूर कितनी लंबी उम्र नहीं है कि तब तक तुम्हें मारने के लिए खुद जिंदा रह सकें । वो चुप हो गया । जवाब दो वरना तुम्हारे बयान के बिना भी सबूतों के आधार पर तो मैं फांसी दिलाने में कुछ खास परेशानी नहीं आने वाली । वो चुप रहा तो अब है वहाँ से चलने का उपक्रम करते हुए बोला ये नहीं मानेगा तो लोग इस पर और नार्को करना चाहो तो करूँ मैं चलता हूँ उसकी फांसी का इंतजाम करवाते हैं मैं । तैयार । मौत के भाई ने तनवीर का मोह खुलवाया । शाम के चार बज गए थे । जावेद आज साहनी के सेल में था । साहनी ने अपने वीआईपी स्टेटस का इस्तेमाल करके इस मुलाकात का प्रबंध किया था । जावेद उसके सामने कुर्सी पर बैठा था । उसने सहानी से पूछा, अब पहले ये बताओ तुम आईएसआई वालों के साथ कब से काम कर रहे हो और उन्हें किस हद तक जानते हो? दो साल पहले जब मुझे अपनी गर्लफ्रेंड यानी मिनाज पर शक हुआ कि वो किसी और आदमी के चक्कर में हैं तो पहले मैंने उसके पीछे प्राइवेट जासूस लगाए । फिर जब मुझे इस बात के पुख्ता सबूत मिल गए कि वो दूसरे मर्द के साथ संबंध बनाए हुए थी तो मैं उससे से पागल हो गया और मैंने ठान लिया कि मैं उसे और उसके दोस्त को मौत के घाट उतार हुआ । मैंने उसे मारने के कई तरीके सोचे, कई स्कीम बनाई पर फिर उन्हें भुला दिया । फिर मेरा ध्यान हमारे देश में हुए एक हाई लेवल मर्डर पर गया, जहां एक मंत्री की बीवी को पोलोनियम पहुँच देकर मारा गया था । ऐसा रेडियो ऍम जो कि आम फॉरेंसिक जांच में किसी को पता भी नहीं चलता है । भारत में तो वैसे भी इसके बारे में फोरेंसिक जानकारी ना के बराबर थी । बस ये आईडिया मुझे पसंद आ गया और मैंने पोलोनियम जहर प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन ढूँढना शुरू कर दिया । पहले तो मुझे ये लगा कि भारत जैसे देश में ऐसा जहर कहाँ मिलेगा हूँ । मुझे लगा इससे मुझे विदेश से ही मंगाना पडेगा । पर मैं उस वक्त हैरान रह गया जब ऑनलाइन एक व्यक्ति ने मुझे पोलोनियम दिलवाने का वादा किया । वो भी भारत में रहेगा तो मैं से आराम से नेट पर सब कुछ ढूंढ रहे थे तो मैं पता नहीं है । आईपी एड्रेस वगैरा के इस्तेमाल से तुम्हें ट्रेस किया जा सकता था तो फंस सकते थे । आजकल भारतीय पुलिस और जासूस इतने भी गए गुजरे नहीं रहे हैं कि मैं ऑर्डर में इन बॉल लोगों की इंटरनेट हिस्ट्री चकना करें । देखो चाहे तो मुझे इतना भी मोर, कुमार समझाऊँ टेक्निकल मामलों में मेरी समझ उतनी भी बुरी नहीं है जो नेट में इस्तेमाल करता हूँ । उसके आईपी एड्रेस को अगर कोई ढूढने जाएगा भी तो उसे भारत का एड्रेस लोकेशन नहीं बल्कि यहाँ से हजारों मील दूर किसी और देश का ड्रेस मिलेगा तो वो मुझ तक किसी भी हालत में नहीं पहुंच पाएगा । इतना जुगाड तो मैंने कर ही रखा है । फिर आगे क्या हुआ? बस पर एक मुलाकात हुई जिसमें चेहरे पर मुखौटा लगाए एक आदमी मुझ से मिला । उसने मुझे जहर सप्लाई किया और बदले में कैश हासिल किया । उसके बाद जहर मेरे पास घर में रखा रहा, पर मेरी हिम्मत नहीं हुई कि उसका प्रयोग मिनास पर करूँ । शायद यही फर्क है पेशेवर मुजरिम और आम इंसान में मैं इलाज के लिए असीमित नफरत से भरे होने के बावजूद मैं उसका मैं ऑर्डर करने का हौसला नहीं जुटा पाया । मैंने यही सोचा कि एक दिन उसे सब बोल दूंगा कि मुझे उसकी सभी करतूतों के बारे में पता चल गया है और उसे छोड भी दूंगा । पर मुझे क्या पता था मिनाज आईएसआई वालों के इशारों पर नाच रही थी और उनके दिमाग में क्या भयानक पहन चल रहा था? मुझे तो ये भी नहीं पता चला कि वह जहर जो कि मेरी समझ में किसी अफ्रीकन के जरिए मिला था । दरअसल आईएसआई नहीं मुझे हासिल करवाया था और उस पूरी प्रक्रिया का वीडियो भी बना लिया था । फिर क्या हुआ? जावेद ने पूछा । फिर अचानक एक शाम मैं मिनाज को डिनर पर लेकर गया और उसी रात उसका मर्डर हो गया । दूसरे दिन मुझे जब उस दूसरे दिन जब मुझे खबर हुई तो मुझे समझ नहीं आया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? मुझे इस बात पर तो यकीन था कि उसने सुसाइड नहीं की होगी क्योंकि ऐसी तो कोई वजह मेरी समझ में नहीं थी यानि उसका । मगर आईएसआई वालों नहीं किया बिल्कुल । तनवीर और सलीम ने उसके फ्लैट में घुसकर पहले उसे ड्रिंक में नींद की गोली और पोलोनियम दिया फिर बेहोशी में उसकी कलाइयों की नहीं काटी । आईएसआई वालों से ये सब मुझे बाद में पता चला । जब पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन शुरू की तब आईएसआई वालों ने मुझे वो वीडियो भेजा और धमकी दी कि वह पुलिस को सब बता देंगे कि कैसे मैं उसके मर्डर का प्लान कर रहा था । उन्होंने कहा कि अगर पुलिस अभी मिनाज के ब्लड और विसरा सैंपल की जांच करेगी तो पोलोनियम का रिजल्ट सही आएगा और फिलहाल पुलिस दूर दूर तक ऐसा नहीं सोच रही थी क्योंकि एक आम ॉडल का मर्डर कोई पोलोनियम जैसे जहर देकर कोई पोलोनियम जैसा जहर देकर क्यों करेगा? ऊपर से आत्महत्या का केस साफ दिखाई दे रहा था, पर अगर आईएसआई वाले ऐसी टिप् पुलिस को दे देते तो यह मुमकिन हो जाता है और उसके बाद मेरा फंसना और फिर फांसी पर चढना तय था । यानी आईएसआई वालों ने तुम्हें ब्लैकमैल किया । तनवीर मुझ से मिला था । मैं पूरी तरह घबरा गया । मैंने उस से पूछा कि क्या उन्हें पैसे चाहिए? तनवीर ने कहा कि पैसा तो चाहिए ही साथ में उन्हें मेरा इस्तेमाल करना है । वो कैसे? मेरी कंपनी आरती ट्रेडर्स के कारोबार में हमें भारत के कई शहरों से सप्लाई मंगानी पडती है और आईएसआई वालों को चाहिए था कि वह हमारे ट्रांसपोर्ट को अपने हथियार ट्रांसपोर्ट करने के लिए प्रयोग करें और मैंने उनकी बात मान ली । पिछले दो सालों से आईएसआई वाले अपने हथियार कई बार मेरी कंपनी के ट्रांसपोर्ट के जरिए शहर में पहुंचा चुके हैं । क्या नहीं सहनी तुम जानती हूँ तुम्हें कितनी बडी मूर्खता की तो मैं कितने बडे डाॅट में सहयोग दिया । मेरे पास कोई और चारा नहीं था । तुम बताओ मैं क्या करता हूँ । तुम पुलिस को सब बता देते । वो तुम्हारे साथ रियायत भरते हैं । आखिर खून तो तुमने नहीं किया था ना । अगर पुलिस को पूरी जानकारी मिलती तो वो इन्वेस्टीगेशन करके आराम से तनवीर और सलीम तक पहुंचाते हैं । पर पोलोनियम हासिल करने के चक्कर में तो मुझे जेल जाना ही पडता है शायद पर बहुत कम समय के लिए । अब उससे बचने के चक्कर में जो कारनामे तुम कर बैठे हो । साहनी ने आंखों में दयनीय भाव लिये जावेद को देखा । मैं अपने वादे का पक्का तुम साथ दोगे तो मैं तुम पर आंच नहीं आने दूंगा । साहनी ने राहत की साथ जहाँ पे बोला पोलोनियम रेडियो होता है, वैसे भी कुछ समय बाद उसे ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है । यानी अगर आज उसके ब्लड या विसरा सैंपल को जांच एक तो पोलोनियम का रिजल्ट ठीक से आना बहुत मुश्किल है । मुझे पता है मैंने नेट पर इसकी पूरी रिसर्च की थी । तभी तो उसे मॉडर में इस्तेमाल करने के लिए सिलेक्ट किया था । मुझे तो लगता नहीं आईएसआई वालों ने वाकई में उसे मारने के लिए पोलोनियम का इस्तेमाल किया होगा । पोलोनियम से इंसान की हालत कैंसर के अंतिम स्टेज में मर रहे व्यक्ति जैसी हो जाती है या नहीं । अनगिनत उल्टियाँ, बालों का झडना ऑर्गन फेल होना । उन्होंने उसे सीडेटिव के साथ पोलोनियम भी जरूर दिया होगा ताकि जरूरत पडने पर मुझे फंसा सकें । वो तो बेचारी कैंसर वाले सिम्टम्स तक पहुंच ही नहीं पाई । उस से पहले ही उन्होंने बेहोशी में उसकी नस इकार्डी आगे बताओ जावेद बोला तो तनवीर नहीं, मेरे खिलाफ साजिश रचने को कहा होगा । हाँ, उसी ने मुझे कहा की घडी का नाटक करके तो मैं हूँ । पूरा प्लॉट उन्हीं का बनाया हुआ था । मैं तो सिर्फ उसमें कभी नेता था । पंकज का मर्डर उन्होंने प्लान किया था । वैसे तो पंकज उन लोगों का साथ ही था । खुद एक आईएसआई एजेंट था । मॉडर किसने किया था? सलीम नहीं । प्लान के हिसाब से सलीम पहले से उस दिन मेरे घर पर छिपा था । प्लैन के हिसाब से सलीम पहले से उस दिन मेरे घर पर छिपा था और उसी ने पंकज को मारा था । उन्होंने अपने ही साथी को क्यों मारा? वो मैं नहीं जानता हूँ । मैं जान गया हूँ । पंकज मेरी नजर में आ गया था इसलिए वो मुझे मारने के लिए आमादा था । पर जब मुझे मारने में सफल न हो सका तो उन लोगों ने उसको मारकर मुझे बता दिया । एक तीर से दो निशाने साहनी छुट रहा मेरा चाकू तुम नहीं चुराया था ना मेरे घर से । जिस रोज तो मुझसे मिलने आए थे । हाँ, टॉयलेट का बहाना करके मैं अंदर गया और किचन से तुम्हारा चाकू चुरा लिया । तनवीर ने मुझसे कहा था कि तुम्हारे घर से कोई ऐसा हथियार लाने को जिस पर तुम्हारे फिंगरप्रिंट्स मिल जाते हैं । मेरे घर में हथियार भी तुम्हें रखते थे । नहीं, उस बारे में मुझे कुछ भी नहीं पता । पर इतना तो लगा कि ये आईएसआई का ही काम है । पर समझ नहीं आया कि तुम तो पहले ही मैं ऑर्डर में फंसे हो । फिर इस की क्या जरूरत थी? यही तो मुझे भी समझ नहीं आया । देखो जितना मुझे पता है पहले ऐसा कुछ प्लान में नहीं था । बाद में तनवीर और सलीम को ऐसा करने का ऑर्डर मिला था । जिस वक्त तुम लॉकप में थे, तब इन लोगों को मौका मिल गया तुम्हारे घर हथियार छुपाने का । अब बताओ । आगे क्या प्लान है? मुझे क्या करना होगा? देखो कल अमर आएगा । साथ में सरकारी वकील भी होगा । वो तुम्हारा पूरा बयान लेगा, जिसके बिना पर मेरीबेल हो जाएगी और फिर मैं जेल से बाहर आ जाऊंगा और मेरा क्या होगा । साथ ही हम लोग तुम पर लगाए इल्जाम वापस ले लेंगे । हम खुद दिखाएंगे कि हमने जो इन्वेस्टिगेशन की थी उसमें पाए कुछ सबूत गलत है । साथ में तनवीर की गवाही से भी ये पता चलने की उम्मीद है कि उसने खुद मिनास का खत्म किया और तुम्हें फ्रेम क्या ये बात सामने आ जाएगी तो वैसे ही तुम्हारे केस में ज्यादा कुछ नहीं बचेगा । तुम जैसे ही बाहर निकलोगे आईएसआई वाले तुम्हें फिर से अप्रोच करेंगे । हाँ, शायद तुम फिर भी उन से डरते रहना होगा क्योंकि तुम्हारे खिलाफ सबूत अभी भी उनके पास है । ये बात बाहर नहीं आएगी कि हम जान गए हैं कि तुमने कभी मिनाज को मारने के लिए पोलोनियम खरीदा था । आईएसआई वालों को यही लगेगा की ये रास्ता अभी भी उनके पास सेफ है जिसके तहत वो तुम्हें ब्लैक मिल कर सकते हैं । हूँ तो में उन का साथ देते रहना है और जो भी जानकारी मिलती रहे हमें पास करते रहना जरूरी गुड तो अब कल का इंतजार करूँ । मुझे बेसब्री से इंतजार रहेगा जो से क्या बोलोगे यही की तो मुझसे केस वापस लेने के लिए पैसा मांग रहे हो । जावेद हंसा फिर गंभीरता के साथ बोला सही दिमाग लगाया वो जरूर इस बात पर तुरंत भरोसा कर लेगा । साहनी मुस्कुरा दिया । जावेद की अपील पर तुरंत कार्रवाई हुई और जज ने उसे एक हफ्ते बाद की तारीख दे दी । हालांकि आम तौर पर ऐसा इतनी जल्दी होता नहीं है पर ये एक अपवाद था क्योंकि जावेद एक जांबाज जासूस था क्योंकि जावेद एक जांबाज जासूस था और निष्पक्ष होते हुए भी जज को यकीन था कि ये जावेद वह सीक्रेट सर्विस के खिलाफ आतंकवादियों और आईएसआई ने साजिश की थी और देश की सुरक्षा के हित में यही था की सीक्रेट सर्विस को इन सभी जंजालों से मुक्त किया जाएगा । सानी और तनवीर को बेहद गोपनीय ढंग से जज के सामने पेश किया गया । सीक्रेट सर्विस ने मीडिया को इसे कवर नहीं करने दिया । हालांकि सीबीआई की उपस् थिति वहाँ जरूर थी पर अभय कुमार ने उनके डायरेक्टर को पूरा मामला पहले ही समझा दिया था इसलिए वह भी उनके विरुद्ध नहीं थे । साहनी ने स्टेटमेंट में कहा कि आईएसआई वालों की धमकी में आकर उसने जावेद को फंसाया था । तनवीर ने कुबूल किया कि इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड खाली था जिस के निर्देश पर वह सलीम आईएसआई के कई एजेंट के साथ काम कर रहा था । तनवीर ने माना कि पंकज जावेद की नजर में आ गया था इसलिए उन्होंने उसे कहा कि वह जावेद को खत्म कर दी पर वह सफल ना हो सका । फिर उन्हें खलीली से निर्देश मिले की पंकज को खत्म करके जावेद को उसके कपिल में फंसाया जाए । जावेद के घर में हथियार भी उन्होंने खलीली के निर्देशानुसार रखे थे । तनवीर के मोबाइल में मौजूद मैसेज कॉल लिस्ट इन सभी तथ्यों को सच साबित करने के लिए पर्याप्त थी । हालांकि सबूतों से पोलोनियम से सम्बंधित सभी जानकारी सीक्रेट सर्विस वालों ने गायब कर ली थी, क्योंकि उन्हें साहनी को क्लीनचिट जो दिलवानी थी । दोनों की गवाही और सबूतों को मद्देनजर रखते हुए जज ने जावेद की जमानत की अनुमति दे दी और फिर पांच दिन बाद ही मिनाज मर्डर केस की सुनवाई भी हुई और साहनी की कोर्ट में पेशी हुई । सीक्रेट सर्विस वाले फिर से तनवीर के साथ पहुंचे । उन्होंने कई सबूत दिखाए । मिनाज की गोपनीय बैंक लॉकर की जानकारी, जिसमें दस लाख रुपये थे । तनवीर को बोल क्या की ये पैसा उसने ही मिनाज को दिया था । साहनी को बचाने के लिए तनवीर ने माना कि सीडेटिव खरीदने का आदेश उसी ने पंकज को दिया था । साहनी का इससे कोई लेना देना नहीं था । तनवीर कुबूल किया कि उस रात मिनाज के फ्लैट में वापस आने के बाद देर रात वो और सलीम उस से मिलने पहुंचे । उन्होंने मिनाज को बातों बातों में कोल्ड ड्रिंक में पोलोनियम और सीडेटिव दिया और फिर उसके बेहोश होने के बाद उसे बात तब में लेटाकर उसकी हाथों की नसें काटी । वो अपने साथ साहनी के फिंगरप्रिंट्स वाला ब्लेड का रैपर भी लाये थे । उन का इरादा था कि अगर पोलोनियम वाला आइडिया किसी कारण से फेल हो भी जाए तो सहानी को फंसाने की दूसरी चाल काम आ जाएगा । इसमें वह पर पर मिनास का खून लगाकर अपने पास रख लेते जो बाद में सानी को ब्लैकमेल करने के काम आता है । पर कत्ल के वक्त खलीली ने तनवीर को फोन किया और उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया । उसे डर था कि अगर पुलिस को इत्तेफाक से ब्रेड के साथ पोलोनियम का एविडेंस भी मिल गया तो केस गडबडा जायेगा । आखिर पोलोनियम से मारने का इरादा रखने वाला फिल्म नसें काटकर हत्या क्यों करेगा? पर तब तक सलीम ब्रेड रैपर पर फोन लगा चुका था और फोन पर बात करते हुए ही उसने बेध्यानी में ब्लेड का रैपर खिडकी से बाहर फेंक दिया जो की ग्रिल के नीचे जा गिरा जहाँ से उसे अब उठाना भी बेहद मुश्किल था । तनवीर ने उसे बहुत होता है पर फिर भी उन्हें यकीन था कि ये रैपर पुलिस कभी नहीं खोज पाएगी । और यही हुआ पर जॉन ने अपनी इन्वेस्टिगेशन में वो जगह भी नहीं छोडा । तनवीर ने एक बार फिर कबूल किया कि इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड खाली था । जिस के निर्देश पर वह काम कर रहा था । पर उसका मिशन क्या है, वो इसके बारे में कुछ नहीं जानता था । वो सिर्फ उसके आदेशों का पालन करता था । जज ने तनवीर को पुलिस, सीबीआई और सीक्रेट सर्विस की ज्वाइंट इंटेरोगेशन के लिए चौदह दिन की रिमांड में सौंप दिया । साहनी के खिलाफ केस कमजोर हो चला था, फिर भी उसे अभी बडी नहीं किया गया । पर अब उसकी बेल कराने में दिक्कत नहीं हुई । अब जावेद और साहनी दोनों जेल के बाहर जेल से निकलते वक्त अर्जुन इस साहनी से जावेद की निकटता का कारण भी पूछा था । साहनी ने वही जवाब दिया था जैसा कि उसने जावेद को कहा था और जूना उसे मान भी लिया । उसकी समझ में तो यही आया कि जावेद ने उससे पैसे हासिल किए और उसे बरी करवा दिया । जाने से पहले अर्जुन सहनी को याद दिलाया कि उसने उसे वीआईटी सेवाओं के बदले क्या वादा किया था । साहनी ने उसे भरोसा दिलाया कि वह अपने वादे पर खरा उतरेगा । रात के दो बजे हुए हैं । अमर गहरी नींद में था तभी उसका फोन बजा । फोन को बंद करके उसने एक तरफ फेंक दिया । पर तुरंत ही वो दोबारा बजने लगा । उसने फोन उठाया और बडी मुश्किल से एक खोलकर स्वीन पर नजर डाली थी । जिनकी कॉल कर रही थी उसका नाम देखते ही उसकी सारी नींद उड गई और वो उठकर बैठ गया । उसका मन बेचैन होता क्या पिंकी ने इतनी राहत उसके प्यार का जवाब देने के लिए फोन किया था । शायद यही वजह थी अमर ने महसूस किया कि उसके हाथ काट रहे थे । उसने कॉल रिसीव करने का बटन दबाया और फोन कान से लगाया हूँ । वो धीरे से बोला हाँ हाँ हाँ सौरी मैंने तुम्हे डिस्टर्ब किया । सिंह की फिर होगी बोलो ना क्या हुआ दरसी अमर वो सही प्लीस आज रात मुझे कुछ ऐसे संकेत मिल रहे हैं जिनसे पता चल रहा है कि खाली ले भारत आ चुका है । हालांकि अमर उससे किसी और बात की उम्मीद कर रहा था पर ये बात भी चौंका देने वाली और और और क्या रिंकी अमर ने अभी भी पूरी तरह उम्मीद नहीं खोई थी । मुझे लग रहा है कि मुझे उसकी लोकेशन के बारे में जो इंफॉर्मेशन मिल रही है वो सही है । क्या बात कर रही हूँ । उसे अभी बम से उडा देते हैं ये मुमकिन नहीं । वो किसी सिक्योर लोकेशन पर हैं । सेटेलाइट से उसे देखा नहीं जा सकता है । फिर कैसे पता चला कि वहाँ पर है ये इन्फॉर्मेशन पहली बार उसके टेरेरिस्ट ग्रुप के अंदर से मिली है । वो शायद इंटरपोल का एक एजेंट उसके ग्रुप में है । ऐसा फिर तो हमें दलबल के साथ उस जगह पर हमला कर देना चाहिए । अब तक तो तुम्हें पता चल जाना चाहिए कि वो इस तरह का नहीं करते । फिर तुम क्या चाहती हूँ? हम हर कीमत पर उसे पकडना चाहते हैं । इस तरह हमला करने में वह हमारे यहाँ हमारे कोई गारंटी नहीं । अगर वो बच गया तो फिर दोबारा उसका मिलना नामुमकि नहीं तो मुश्किल जरूर होगा । तुम सोचो अगर उसने हमें तो सोचो । अगर हमने उसे जिन्दा पकड लिया तो ये भारत के लिए कितनी बडी उपलब्धि होगी और तुम्हारे लिए भी जब तुम्हें राष्ट्रपति से मैडल मिलेगा तो मुझे बहुत खुशी होगी । हमारे मैं काम किसी मैडल के लिए नहीं कर रही हैं । मुझे पता है पर वो तो तुम्हें जरूर मिलना चाहिए जो डाॅट देखो अभी तक मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है । चलो ये सब छोडो अब ये बताओ तो मेरे साथ चल रहे हैं तो मेरे साथ चल रहे हो कहाँ? इसकी संभावित लोकेशन पर वो है कहा लखनऊ से एक सौ पचास किलोमीटर दूर सोहनगढ माइंड के आस पास उधर तो सब बंजर बंजर है । वहाँ छूटने की जगह कहाँ है ये तो वहाँ जाकर ही मालूम पडेगा । ठीक है तुम्हारे साथ तो मैं नर्क में भी जाने के लिए तैयार जिनकी खुल के हँसी अपने साथ जॉन को भी ले लो । क्योंकि कबाब में हड्डी खाने का शौक इसे हम मेरा मतलब है । इतना कोवर्ट मिशन है तो हम दोनों ही जाते हैं ना नहीं । मेरे खयाल से तीन लोगों का होना जरूरी है । देखो तुम्हारा जो विश्वासपात्र हो उसे साथ ले लो । विश्वासपात्र तो जॉन और जावे दोनों ही पर जावेद अभी जेल से बाहर आया है और फिलहाल तनवीर की इंटरोगेशन में लग गया है तो हम जॉन को साथ ले चलते हैं । वही सुझाव मैंने दिया था क्योंकि मैं जानती हो तुम उसके बेहद करीब हो । करीब तो मैं और किसी के भी होना चाहता हूँ पर रिंकी खामोश हो गई । कब चलना है? अमर ने पूछा मैं तो तैयार ही वापस अभी इसी वक्त हाँ अभी निकलेंगे तो सुबह होने तक पहुंच भी जाएंगे । ठीक है तो फिर मैं जॉन के घर में करता हूँ फोन करने से तो वह कुंभकरन उठने से रहा उसके सर पर खडे होकर बीन बजानी पडेगी और मैं होटल में ही हूँ । उसे लेकर तुम सीधे नहीं पहुंचना पर

Part 12

हूँ । आधे घंटे के भीतर अमर तैयार होकर घर से बाहर निकला । दरवाजा खोलते ही वह चौंक गया । मेन गेट पर कोई था बिंगो की नींद खुल गई और वह बोलते हुए गेट की तरफ होगा कौन है? अमर ने आवाज दी रात के साढे तीन बजे कौन हो सकता है? वो गेट की तरफ बढा । उसने देखा । बिंगो कूद कूद कर पूछ हिला रहा था । गेट पर मंदिरा खडी थी । उसका चेहरा मुरझाया हुआ था । आंखे देखकर लग रहा था जैसे काफी रोई हो । संयुक्त वो धीरे से बोली मंदिर तो रिश्वत यहाँ ऍम मैंने हम सारी मुझे तुम पर शक नहीं करना चाहिए था । अमर कुछ बोल नहीं सका । वो गेट पकडकर उसे देखने लगा । मैंने बहुत सोचा मैंने बिना सोचे समझे बहुत ज्यादा रिजेक्ट कर दिया । मैं जानती हूँ तुम्हारे जैसा इंसान रिलेशन में आने के बाद किसी को धोखा नहीं देगा । भले ही तुम कितना भी फ्लर्ट कर लो । ऍम अमर को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले । वह इधर उधर देखने लगा । गुस्से की वजह से मेरी अपील पर पर्दा पड गया था और तुम तो समझदार हूँ । तुम्हारा दिल बहुत बडा है कि इस मुझे माफ कर दो । मंदिर देखो ये सब बात करने का ये सही समय नहीं हाँ आई नो इस टाइम मुझे तुम्हे डिस्टर्ब नहीं करना चाहिए था । पर सारी रात सोषौं उससे बीत गए । फिर सोचा तुम्हारे पास आ जाऊं तो उसे बात करूँ और ये सारा कन्फ्यूजन खत्म हैं । बाद टाइम की नहीं समय की है । मैं समझी नहीं । मैं एक मिशन पर अभी निकल रहा हूँ । ए अच्छा तुम लौट कर रहा हूँ । मैं तुम्हारा इंतजार करेंगे । चलो मैं तो मैं तुम्हारे हॉस्टल तक छोड दूंगा । कहकर अमर ने गेट खोलकर कार बाहर निकाली । बिंगो कूदता फांदता बाहर आ गया । उसे अमर ने वापस गेट के अंदर क्या और गेट बंद कर दिया । मंदिरा के बैठते ही अमर ने कार आगे बढा दी । इटली रात तो मई कैसे पेटल इतनी दूर पैदल चलकर नहीं फिश नट्स एफयू जहाँ कह रहे हो, एक कोवर्ट मिशन है तो नहीं बता सकते तो नहीं सही पर कब तक लौटेंगी यह नहीं सकता क्या कि अब वो भी साथ जा रही है । यस उसका नाम रिंकी है । वो इस राह में काम करती हैं । हाँ अच्छा बुरा ना मानो तो एक बात पूछूं । अमर ने सिर्फ सिर्फ हिला दिया है । क्या वो तुम्हें पसंद करती हैं? मंदिरा स्टोरी मैं बस यही पूछ रही थी तो मुझे माफ किया । देखो मंदिर ये सही समय नहीं ई समझ कुछ तो बोल कर जाओ । देखो मुझे नहीं लगता । अब हमारे बीच पहले की तरह रिलेशन रहे सकता है । वो अमर शांत हो गया । मंदिरा ने धीरे से पूछा वजह देखो मंदिर अगर तुम्हें मुझ पर विश्वास नहीं है तो फिर ऐसे रिलेशन का क्या फायदा? शक्कर ना तो औरत की आदत होती है । बीवी तो जरा जरा सी बात पर अपने पतियों पर शक करती हैं । मुझे तो पूरी की पूरी लडकी तुम्हारे घर में मिली थी । इसका मतलब शक करने वाली बीवी को उसका पति छोड देगा । शक करने वाली बीवी क्या सिर्फ शक की बिना पर अपने पति से रिलेशन खत्म कर लेती है? उसी बात का मुझे अफसोस है । उसी के लिए मैं तुम से माफी मांगने आई हूँ । मैंने ओवर क्या आई नो गलत था । मुझे तुमसे इस तरह बात नहीं करनी चाहिए थी । मंदिरा यू नो वाॅलेट ना । अमर की इस बात से कार में सन्नाटा छा गया । मंदिरा के हॉस्टल पहुंचने तक दोनों में से कोई कुछ नहीं बोला । हॉस्टल के गेट के पास पहुंचकर अमर ने कार रोकी । मंदिरा ने कहा से उतरने का उपक्रम नहीं किया । वो सामने देख रही थी । अचानक कुछ सोचते हुए बोली ऍम मंदिरा फ्रीज अमर चढते हुए बोला ऍम मुझसे भी बेहतर शराब अमर चलाया । मंदिरा की आंखों में आंसू आ गए । इसलिए इसलिए अमर उससे से उभरते हुए बोला मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकता, क्योंकि तो मुझे सिर्फ इतना ही समझती हूँ । फॅस हम दोनों के बीच में से कोई संबंध नहीं । पर पर मैं क्यों सफाई दे रहा हूँ तो मैं मुझे उस की जरूरत नहीं । तुम तो पहले ही मुझसे ब्रेकअप कर चुकी हूँ । अब प्लीज तुम अपनी जिंदगी पर ध्यान दो और मुझे मेरे मिशन पर ध्यान देना । भारी मन से अपने आंसू पोंछते हुए मंदिरा कार से बाहर निकली और हॉस्टल के गेट की तरफ धीरे धीरे बढ गई । अमर उसे जाते देखता रहा । मंदिरा ने पलट कर नहीं देखा, मुझे नजरों से ओझल हो गई तो अमर निकाल आगे बढा दी । अमर कार ड्राइव कर रहा था । जवान उसके बगल में बैठकर सो रहा था । बडी मुश्किल से उसे जगाकर अमर ने मिशन के लिए तैयार किया था । रिंकी पीछे बैठ कर अपने जीपीएस डिवाइस से उलझी हुई थी और बीच बीच में अमर को रास्ता बता रही थी । कुछ देर बाद उन्हें हाईवे छोडकर कस्बे की छोटी सडक लेनी पडी । उस पर कुछ दूर जाने के बाद कच्चा रास्ता शुरू हो गया । धोर होने लगी थी और अब धीरे धीरे सूर्य का प्रकाश उस बेहद में छाता जा रहा था जो जगह अंधेरे में भयानक प्रतीत हो रही थी । अब रोशन होते हुए आंखों को लुभाने लगी थी । कुछ देर में पूरब में गुलाबी बादलों के बीच सुरमई रंग बिखरने लगा । सूर्योदय होने लगा था ये नजारे देखकर जिनकी भावविभोर हो गई ऍम है ना । रिंकी बोली हाँ खूबसूरत अमर बोला कच्चे ओवर खबर रास्ते के कारण झटके लगने लगे थे जिसके कारण जॉन की नींद खुल रही पहुंच गए क्या जॉन अंगडाई लेकर चारों तरफ देखते हुए बोला । रिंकी ने डिवाइस की स्क्रीन में देखा बस पांच किलोमीटर और पंद्रह मिनट में उन्हें सोहनगढ माइन्स का क्षेत्र दिखने लगा । चारों तरफ सूखे धूलभरे टीले और बंजर पीली रंगत लिए जमीन एक जगह रिंकी ने रोकने को बोला । वो लोग कार से उतर आए । रिंकी ने अंगडाई ली । इस वक्त उसने घुटनों से ऊपर तक के भूरे रंग के शर्ट वह काला क्यूट टॉप पहना था जिसके ऊपर भूरी जैकेट डाली हुई थी । अंगडाई लेते हुए उसकी ना भी उजागर हो गई थी । सभी के पास बैठता था जिसमें जरूरी सामान और हथियार बन गया था । यह लोकेशन है रिंकी बोली । इधर तो दूर दूर तक कुछ नहीं है । जॉन बोला लोकेशन तो यही है । आस पास देखना होगा । सामने माइंड हैं । अमर इशारा करते हुए बोला जिस तरफ जमीन में कालापन दिख रहा था और गुफा सरीखा खान का प्रवेश द्वार दिख रहा था, आतंकी इतने बेवकूफ तो नहीं होंगे कि यहाँ खान में छिपे हूँ । जॉन बोला क्यों नहीं हो सकता जिनकी बोली ऍम लोकेशन है । जैसे अफगानिस्तान पाकिस्तान में इनके ठिकाने होते हैं । जमीन के अंदर पहाडों में जहाँ सेटेलाइट के बीच नहीं होती पर अभी तक तो हमें ये लखनऊ के भीडभाड वाले इलाके में मिलते आए हैं । अमर बोला देखते हैं अभी तक तो हमें ये भी नहीं पता चला की इनका मिशन क्या है । हम लोगों को यानी सीक्रेट सर्विस वालों को खूब टारगेट किया । ये रणनीति समझ नहीं आई । अमर बोला इन्हें बम ही देखना था तो उसके लिए हमारे पीछे पडने से क्या फायदा हुआ । इस तरह उन्होंने खुद को एक सपोर्ट किया । इनके कई आदमी मारे या पकडे गए । रिंकी सामने देखते हुए दूरदर्शिता के साथ होली यही सब मुझे सोचने पर मजबूर कर रहा है कि इनका मिशन इस बार कुछ और है । कुछ बडा है तुम्हारा सोचना सही है । सिर्फ बॉलिंग के लिए वो सीक्रेट सर्विस को टारगेट करने का रिस्क नहीं ले सकते हैं और ना ही बडी तादाद में शहर में फैले होते हैं । जॉन ने कहा तुम्हें पता चला कल शाम सीबीआई डायरेक्टर को शूट करने की कोशिश की गई थी । रिंकी बोली क्या बात कर रही हूँ? अमर चौका बातें करते हुए वह माइन्स की तरफ बढने लगे जिनकी आगे थी और बीच बीच में वह बायनाकुलर उसकी मदद ले रही थी । कुछ ही देर में वह खान के मुख पर पहुंच गए । पलट जॉन बोला, ऐसी जगह अक्सर चोर डाकू डेरा डाल लेते हैं । उन्होंने अपने अपने हथियार हाथों में ले ली थी । बेहद सावधानी से वह लोग माइन्स के अंदर आए । फिर अंदर जहाँ तक रास्ता पत्थरों से बंद था वहाँ तक पहुंचे । यहाँ तो कुछ नहीं है । अमर बोला । रिंकी ने अच्छी तरह से अंदर नजर घुमाई । फिर वो लोग बाहर आ गए । अमर जंग खाए वैगन का सहारा लेकर खडा हो गया । यहाँ दूर दूर तक कोई नहीं है । वो बोला पर जमीन पर जूतों के पैरों के निशान तो हैं । जॉन बारीकी से देखते हुए बोला तो नहीं तो अभी कहीं डाकू वाली बात । रिंकी बाहर इधर उधर घूमने लगी । उसने अपना फोन देखा, यहाँ तो नेटवर्क ही नहीं आ रहा । मेरा भी अमर ने अपना फोन चेक किया तो अब क्या करना है यहाँ रोकना चाहिए । रिंकी ने कहा आइडिया तो अच्छा है, कैम्पिंग के लिए मस्त जगह है । अमर बोला पर क्या भी हमारे पास मस्ती करने का टाइम है । मुँह में काम करने वालों को थोडा पेशंस के साथ चलना पडता है । सही है तुम से फ्री में बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है तो बदले में मुझे क्या मिलेगा? रिंकी शरारती मुस्कान के साथ अमर की आंखों में देखते हुए बोली जो भी तुम्हारा दिल करें हूँ । जॉन जबरदस्ती गला साफ करके बोला मुझे नहीं लगता यहाँ रुकने से कुछ फायदा होगा । अगर शक है तो हम आर्मी की मदद ले सकते हैं । ऐसी जगहों पर काम करने में वो माहिर होते हैं । पर आर्मी के पास जासूसी दिमाग नहीं होता । रिंकी बोलिए और आर्मी वगैरा यहाँ आएगी तो फिर हो सकता है खाली ली अपनी लोकेशन बदलने तो ये पर हम अभी भी यहाँ रूककर क्या दिमाग चलाएंगे । यह लोकेशन मुझे उनके ग्रुप के अंदर से मिली है । सही होने का पूरा यकीन तो नहीं, फिर भी सच हो सकता है । यहाँ अगर वाकई ऐसा कुछ है तो माइन्स के अंदर ही होगा । धरती के ऊपर तो हम देखे रहे हैं कि कुछ नहीं है पर माइंड तो बंद पडी । कहते हुए रिंकी चुप हो गई । उसके चेहरे पर ऐसे भाव आ गए जैसे कुछ समझ आया हूँ । यानी की जो मुँह वो सिर्फ दिखाने के लिए बंद है । यू मीन उसमें कोई गुप्त रास्ता है । अमर बोला वो भी तो हम बिना बैकअप के अंदर नहीं जा सकते । जॉन बोला हूँ मुझे सिर्फ कुछ संकेत या सबूत मिल जाए तो फिर अगले कदम के बारे में सोचेंगे । जिनकी ने कहा कहीं छिपकर डेरा डालते हैं । अमर बोला अगर वहाँ रहते हैं तो कभी तो बाहर निकलते ही होंगे । फिर वो लोग एक टीले के ऊपर जाकर पत्थरों के बीच छिपकर बैठ गए और उस जगह पर नजर रखने लगेंगे । माइंड के अंदर अफसल और हैदर कंट्रोल रूम में अपनी अपनी कुर्सियों पर बैठे थे । उनके चेहरों पर परेशानी झलक रही थी । खाली सामने चारपाई पर लेटा था । उसकी आंखे बंद थी । ज्यादा ही जेल से बाहर निकला है । अफजल बोला ये हमारे मिशन के लिए अच्छी खबर नहीं । हैदर ने कहा, पता चला है कि उसके बाद सहानी भी चुपचाप बेल पर छूट गया । वो पैसे वाला आदमी है । दो करोड तो तनवीर नहीं उससे निकलवा लिए थे । उसने वकीलों और जजों को बताया होगा । हो सकता है और मुझे समझ नहीं आया । इस मामले को इतना चुपचाप क्यों निपटाया गया? जावेद असानी दोनों ही बिना किसी मीडिया कवरेज के चुपचाप बाहर कैसे आ गए? ऐसा सीक्रेट सर्विस वालों ने क्या होगा? वो जावेद के लिए कर सकते हैं, पर साहनी के लिए क्यों करेंगे? साहनी के पास पैसा है । अफसर हजार तो रही । मीडिया को पैसे से नहीं खरीदा जा सकता । मुझे लगता है जेल में दोनों के बीच समझौता हुआ है । इसीलिए दोनों एक साथ चुपचाप बाहर आ गए हूँ । शायद तुम तो शायद तुम ठीक कह रहे हो । अफजल की बडी आंखें कुछ और फैल गई । फिर क्या किया जाए जोर आप कुछ बोलिए, खाली ली । उसी तरह आंखे बंद कर लेता रहा । फिर उसने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया । अफजल बोला । जावेद पर इतने संगीन इल्जाम होने के बावजूद वह बाहर आ गया । इसी से पता चल रहा है कि साहनी ने जावेद और जज के सामने सारे राज खोल दिए हैं, उसके बिना उसकी भेल होना नामुमकिन थी । तनवीर भी तो उनकी पकड में हैं । उसे किसी गुप्त जगह रखकर उसका बयान लिया जा रहा है । उसके बयान से भी ये मुमकिन हुआ होगा । जोर हैदर तडते स्वर में बोला अभी हमें क्या करना चाहिए? खाली उठकर बैठ गया । उसने आंखें खोली । कुछ देर एकटक सामने देखता रहा । फिर बोला, सहनीय असलियत में कौन है? हमें पता चल गया है । असलियत में जी कुछ समझ नहीं आया । साहनी का असली नाम जानते हो आप का मतलब वो नुकसानी । खलीली ने इंकार में सिर हिलाया और कहा धूर मोहम्मद! अवसर और हैदर ने आंखे फैलाकर उसकी तरफ देखा । नूरमोहम्मद पर पर ऐसे कैसे हो सकता है? हमें भी जब ये पता चला तो बुरी तरह चौके थे । कई साल पुरानी यादें ताजा हो गई थी । पता उस वक्त चला जब हमें सानी यानी नूरमोहम्मद की कश्मीर में अपने पुराने घर में मौजूदगी के बारे में पता चला । वो कश्मीरी हाँ, फिर वो असलियत में है कि अगला बहुत लंबी कहानी है । तभी वॉकीटॉकी पर बाहर खडे सात सीटे गार्ड की आवाज आई । ताइबान नंबर नौ आपसे मिलना चाहता है । कुछ अहम खबर है । आने दो से अफजल ने कहा फिर लोहे का दरवाजा अंदर से खोल दिया । दरवाजे पर एक वर्दीधारी प्रकट हुआ । उसने फिर झुकाकर अंदर आने की अनुमति मांगी । बोलो क्या हुआ? अफजल ने उसे अंदर आने का इशारा करते हुए पूछा । साहिबान माइंस के ऊपर आज सुबह से तीन लोग नजर रख रहे हैं । दो मरने और एक जननी । उनके पास हथियार भी है । यहाँ का कौन पहुंच गया? अफजल बोला उन्हें तुरंत पकडकर अंदर लिया हूँ । हैदर ने आदेश दिया कोशिश करना जिंदा पकडे जाएं जी कहकर वो चला गया । हमारा ठिकाना अभी से नजर में आ जाए ये ठीक नहीं होगा । खाली बोला वो जोर पिछले दो साल से तो कोई आस पास भी नहीं पडता है । इन लोगों को भी हम पकडकर पता करते हैं । इन्हें कितना पता है और कहाँ तक बात करी है । अगर अब लोगों को पता चल भी गया तो हम सब का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं । हम जानते हैं लेकिन सब कुछ प्लान के हिसाब से चले । यही मिशन के लिए ठीक रहेगा । कोशिश यही रहेगी हो चलो आने तो इनको अंदर फिर देखते हैं माइनस के पास जिस पीने पर अमल रिंकी वह जॉन ने डेरा डाला हुआ था । उससे करीब एक मिल दूर अचानक उस बंजर जमीन पर कुछ हलचल हुई । ऐसा लग रहा था जमीन टूट रही हैं । देखते ही देखते जमीन से मिट्टी गलती हुई । चारों तरफ गिरने लगी और फिर एक दो फीट चौडा लोहे का पाइप बाहर निकला है । पाइप के अंदर लोहे की ही सीढियाँ लगी थी । देखते ही देखते उन सीढियों पर मानव आकृति दिखाई देने लगी और फिर जमीन के अंदर से पाइप की सीढियों के सहारे दो काले रंग की वर्दी पहने हुए शख्स बाहर निकल आए । उनके कंधे पर ए के । फोर्टी सेवन तंगी हुई थी । वर्दी में कई जेब थी जिनमें हथगोले, मैगजीन और चाकू अन्य हथियार थे । उनके बाहर आने के कुछ पल बाद पाइप वापस जमीन में चला गया । उन दोनों ने वहाँ उत्पन्न हुए गड्ढे पर मिट्टी डाल दी । फिर वो दोनों हथियार था में होशियारी से आगे बढने लगे । कुछ देर निरंतर चलने के बाद उन्हें पत्थरों की ओर में उनके टारगेट दिखाई दिए । एक ने बेहद सावधानी से एक ग्रेनेड निकाला और उनकी तरफ उछालकर दोनों जमीन पर लेट गए । ग्रेनेड गिरने की आवाज से अमर जॉन वरिंग की चौकी ग्रेनेड के गिरते ही उसमें से सफेद गाह हुआ निकलने लगा ऍम जॉन चीखा दो लोग सामने लेते हुए हैं । फायर अमर बोला । उन्होंने पत्थरों के पीछे पोजिशन ली और फायर करने लगे । दूसरी तरफ से भी जवाबी हमला होने लगा । पर टियर गैस का असर उन पर होने लगा । उनकी आंखों में भयंकर जलन होने लगी । कुछ देर में दिखाई देना मुश्किल हो गया । फायरिंग अब उनके बस की नहीं थी । तभी अमर को महसूस हुआ कोई उसके पीछे । उसने तेजी से कोहली घुमाई पर धुएं के कारण उसे दिखाई नहीं दे रहा था । फिर अचानक उसकी गर्दन पर प्रहार हुआ और उसकी चेतना लुप्त हो गई । कुछ देर में यही हाल जॉन और रिंकी का भी हुआ । दो अब छत चुका था । वो तीनों जमीन पर बेहोश पडे थे । उनके पास खडे दोनों वर्दीधारी वॉकीटॉकी पर किसी से बात करने लगे । सुबह के सात बजे थे कमिश्नर गोपीनाथ खुद अपनी पर्सनल कार ड्राइव कर रहा था । इस वक्त वो साधारण कपडों में था । कार का इसी भी उसके चेहरे पर आ रहे पसीने को रोकने में असमर्थ था । वह बुरी तरह से टूटा हुआ लग रहा था । उसने कहा एक तंग गली में मोडी और दाएं बाएं मकानों को झांक झांककर देखने लगा । आखिरकार मकान नंबर पच्चीस दिखाई देने के बाद उसने कार किनारे लगा ली । फिर इधर उधर देखते हुए मकान की तरफ बढ गया । उसने दरवाजे पर दस्तक दी है । कई बार दस्तक देने के बाद ही दरवाजा खुला । दरवाजा खोलने वाले को देखकर वह बुरी तरह से चौका तो फिर फिर कि मुस्कान के साथ बोला हाँ क्यों नहीं तो ऊपर तो श्रद्धा ही । जेल से बाहर आते ही आप गलत सोच रहे हैं । उसके सामने खडे शख्स ने बोला जो की कोई और नहीं बल्कि पुनीत साहनी था । क्या गलत सोच रहा हूँ पर मैं बता देता हूँ अगर मेरी बेटी को कुछ भी हुआ तो मैं तुम्हें खत्म कर दूंगा । आप प्लीज अंदर आ जाइए । गोपीनाथ ने खुद पर काबू किया और फिर अंदर आ गया । साहनी ने दरवाजा बंद कर लिया । फिर पलट कर बोला आप की तरह मैं भी मजबूर हूँ पर अब तो जावे तुम्हारा साथ दे रहा है । फिर ऐसी कौन सी मजबूरी है तुम्हारी जिस पर काबू नहीं किया जा सकता है । आप भी तो कमिश्नर होते हुए मजबूर होकर इतना बडा कदम उठा रहे हैं । मेरे बेटे की जिंदगी दांव पर लगी है और तुम्हारे तो आगे पीछे कोई नहीं है । देखिए मैं आपको समझा नहीं सकता । मेरी क्या मजबूरी है । मुझे समझने में कोई इंट्रेस्ट भी नहीं तुम जल्दी बोलो क्या करना है आपको जैसा बोला गया था आप मेरे लिए पुलिस की वर्दी लाए हैं? हाँ पर मैं तुम्हारे लिए कोई आइडेंटिटी नहीं बनवा सकता हूँ । इतने कम समय में ये मुमकिन नहीं था । पर आप किसी और का आइडेंटिटी कार्ड तो लाया है ना, जिस पर मैं अपना फोटो लगा सकूँ । हाँ पर किसी ने ध्यान से देख लिया तो फंसोगे आपके होते हुए ऐसा नहीं होगा । इसीलिए तो इन लोगों ने आपको चुनाव तुम लोगों ने आप मुझ पर जी भर के शक कर सकते हैं सफाई देने का ना मेरे पास समय है, न कोई इच्छा और ना ही कोई जरूरत अच्छा । गोपीनाथ ने फिर कि मुस्कान के साथ कहा था आप समझ जाएंगे मुझे वर्दी दीजिए । गोपीनाथ ने अपने साथ लाए बैग से पुलिस की वर्दी निकालकर उसे दीदी साहनी ने उसके सामने ही अपने कपडे उतारती है । अब वो सिर्फ अंदरूनी कपडों में खडा था । गोपीनाथ उसे देख कर बहुत चक्कर रह गया । साहनी में जैकेट पहना हुआ था । उस जैकेट को गोपीनाथ खूब पहचानता था । मानव बम की जैकेट की वह जिसमें लिक्विड विस्फोटक भरा हुआ था । उसे यूँ अपनी तरफ देखते हुए सहानी बोला आज मेरी जिंदगी का आखिरी दिन है सर और मुझे रत्तीभर भी डर नहीं । नहीं कोई काम है जैकेट के ऊपर वो पुलिस की वर्दी पहनने लगा । गोपीनाथ अचरज के साथ निरंतर उसकी तरफ देख रहा था । ऐसी भी तुम्हारी क्या मजबूरी है जिसके लिए तो मरने के लिए तैयार हो गए । ऐसे भी तुम्हारी क्या मजबूरी है जिसके लिए तो मरने के लिए तैयार हूँ । जैसे आपकी कुछ मजबूरी है, वैसे ही मेरी भी है और तुम्हारे तो आगे पीछे कोई नहीं सहानी चुपचाप वर्दी पहनता चला गया । गोपीनाथ के चेहरे के भाव बदले । अब आश्चर्य की जगह नफरत से सहानी को देख रहा था तो मैं एक आतंकवादी हो तो हरी कोई मजबूरी नहीं । अब सब समझ में आ गया मुझे आप जो चाहे सोच सकते हैं । साहनी तैयार हो गया । उसने शीशे में देखते हुए अपने चेहरे पर मुझे और एक मसला लगा लिया । तभी गोपीनाथ का फोन बजाता हूँ । हेलो! तुम ने अपना काम किया । हाँ, मैंने तुम्हारे आदमी को वर्दी दे दी है । शाहबाज अब जैसा तो मैं बोला था तो मैं उसे अपने साथ आज लखनऊ मेट्रो के उद्घाटन में ले जाना है । एक बार सिक्योरिटी पार करवाने के बाद तुम्हारा काम खत्म सब हो जाएगा तो फिक्र मत करूँ मेरी बेटी कैसी हैं? मेरी उस से बात करा दो । गोपीनाथ गिडगिडाते हुए बोला ठीक है कुछ देर बाद एक युवा लडकी की आवाज आई जारी जाॅन मेरी बच्चे तो ठीक है । मैं ठीक हूँ मेरी पर मुझे यहाँ बहुत डर लग रहा है । आप मुझे जल्दी निकली । यहाँ से मेरी बच्ची तो बिलकुल मत डरना तो उसे कुछ नहीं होने दूंगा । अचानक दूसरी तरफ से कडक आवाज आई । कमिश्नर अपना काम पूरा कर अब ज्यादा करते हैं । तेरी बेटी ठीक था, तेरे पास पहुँच जाएगी । हम अपने दुश्मन से भी छूट नहीं बोलते हैं । पर अगर तू मिशन में फेल हुआ तो फिर नहीं । नहीं तो जैसा चाहते हो वैसे ही होगा । शाहबाज दूसरी तरफ से फोन कट गया । गोपीनाथ उद्वेलित साहब फोन को देखता रह गया । उद्घाटन कितने बजे हैं? साहनी ने पूछा तो गोपीनाथ वर्तमान में वापस आया । ठीक दस बजे मुख्यमंत्री योगेश ट्रांसपोर्ट नगर मेट्रो स्टेशन पहुंचेंगे और उद्घाटन दस बजकर पंद्रह मिनट पर संपन्न होगा । बच्चा हमें कितने बजे निकलना है, मैं तुम्हें लेकर वहाँ नौ बजे ही पहुंच जाऊंगा । फिर सिक्योरिटी पार कराकर मैं तो मैं वहीं स्टेशन पर छोड कर वापस बाहर निकलूंगा और मुख्यमंत्री के आने का इंतजार करूंगा । उसके आगे का काम तुम्हारा है । ठीक है अमर और जहाँ एक कमरे में बंद थे जहाँ घुप्प अंधेरा था । रोशनी की एक किरण भी उस कमरे में नहीं थी । मेरी जान धोलाराम मुझे रिंकी की फिक्र हो रही है । हम लोग बेहोश हो गए पर कहीं से कुछ पर कहीं उसे कुछ मुझे लगता है उसे कहीं और कैद कर लिया गया है । क्या उससे पूछताछ कर रहे होंगे ये लोग क्योंकि वो रॉकी ऑफिसर है और उनके अड्डे को ढूंढते हुए यहाँ तक आ पहुंची है हूँ । पर यानी रिंकी को जो इन्फॉर्मेशन मिली थी यानी रिंकी को जो इन्फॉर्मेशन मिली थी वह सही निकली । इन लोगों ने इस बंद पडी माइंड में अपना दाल बना रखा है । सही में ऐसा पहली बार देखा सुना है मैं जाने चक्कर क्या है, न जाने चक्कर क्या है । हमें अभी तक जिंदा रखा है तो जरूर कोई वजह होगी । तभी दरवाजे के बाहर कुछ हलचल हुई । अमर और जॉन फुर्ती से उठ खडे हुए हैं । फिर दरवाजा खुला और दो वर्दीधारियों ने रिंकी को अंदर धकेल दिया । उनके हेलमेट पर माइंड गर्मी की तरह ही बल्ब लगा हुआ था जिससे वहाँ कुछ पल के लिए रोशनी हुई थी । रिंकी के अंदर आते ही दरवाजा फिर बाहर से बंद कर दिया गया जिनकी बदहावास हालत में थी और वह बुरी तरह रोने लगी । रेंकिंग रेंकिंग अमर ने उसका चेहरा टटोलकर हाथों में लिया तुम ठीक हो अमर जिनकी सुबह नहीं लगी ऍम कुछ बोलो तो वो क्यों रही हो? अगर उन्होंने तुम्हारे साथ कोई नीच हरकत की है तो मैं उन्हें जान से मार दूंगा और इस माइंड के अंदर ही जिंदा दफन कर दूंगा । रिंकी ने किसी तरह रोना बंद किया और खुद को संभालते हुए बोली ऐसा कुछ नहीं है मैं ठीक हूँ पर अमर अब मैं जीना नहीं चाहती हूँ । मैं हार गई तो मैं सही कहा था हमें इस तरह की वो अकेले यहाँ नहीं आना चाहिए था । मैं ही बेवकूफ थी जो इस तरह यहाँ आ गई और तुम लोगों को भी फंसा दिया । मैं जाने मेरी बेवकूफी के कारण कितनी जाने जाएंगे । हुआ क्या है? ठीक से बताओ क्या या खाली मौजूद है । जी सर जॉन के मुंह से निकला और उसने पुनीत को फोन करके बता दिया की उसने मुझे यहाँ कैद कर लिया है और अगर उसने इनके बताए निर्देशों पर काम नहीं किया तो ये मुझे मौत के घाट उतार देंगे । किसको बता दिया पुनीत कौन? पुलिस जिनकी चुप रही? रिंकी तो इस बोलो तो क्या कह रही हूँ मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा है । अमर बोला क्या तुम्हारा मतलब? पुनीत साहनी से जॉन ने पूछा हाँ रिंकी भारी मान के साथ बोली पर पर वो तुम्हारी खातिर क्यों ब्लैकमैल होगा उसका तुम्हारे साथ भला क्या रिश्ता बोलते बोलते अमर चौका यानी तुम्हारा जानी से रिश्ता है । हाँ, अमर का दिल मोह को आ गया । वो रिंकी को बेहद चाहने लगा था । वो ऐसा कुछ सुनने की हालत में नहीं था । मौत के मुंह में भी क्या लगता है वह तुम्हारा तो मेरा भाई है और जिनकी ठीक पडी और फिर फूट फूटकर रोने लगी । अमर और जॉन स्तब्ध रह गए । कुछ पलों तक कोई भी कुछ बोलने की स्थिति में नहीं था । फिर जिनकी ने खुद को संभाला और बोली इन का प्लान है ह्यूमन बम से लखनऊ मेट्रो उद्घाटन में ब्लास्ट करना, जिसमें कि मुख्यमंत्री शामिल होंगे । अमर और जॉन ने अपने जहन में झुरझुरी महसूस की, जिनकी आगे बोलिए और युवक बनकर जाने वाला है मेरा भाई यानी पुनीत साहनी हूँ । हमारे पास कितना समय है? अमर ने पूछा अभी रात के दो बजे हैं । कल सुबह दस बजे उद्घाटन है । यानी हमारे पास आठ घंटे हैं । जॉन बोला अगर यहाँ से निकल भी गए तो उन्हें इन्फॉर्म कैसे करेंगे । इन लोगों ने माइन्स के क्षेत्र में नेटवर्क जैमर्स लगा रखे हैं । रिंकी ने कहा अच्छा इसलिए बाहर नेटवर्क नहीं आ रहा था । जॉन बोला वो बाद में सोचेंगे । अमर बोला अगर हम यहाँ से निकल गए तो कुछ तो कर सकेंगे क्या करना है? करना क्या है? जॉन बुलाना रेंकिंग बाहर क्या पोजिशन हैं माइनस में चारों तरफ माइंड में चारों तरफ आतंकवादी हैं । कितने होंगे सौ, दो सौ या और ज्यादा? मैं तो बस यहाँ से कुछ दूर इनके कंट्रोल रूम में गई थी । पूरी माइनस में न जाने और कितने लोग होंगे । ऐसा लग रहा है कि ये लोग काफी समय से यहाँ रह रहे हैं । सोचो अमर बोला पांच मिनट सिर्फ सोचते हैं पांच मिनट के लिए वहाँ सन्नाटा छा गया । अचानक रिंकी बोली इंटरपोल का एजेन्ट कौन? जिससे हमें ये खबर मिली थी कि खाली यहाँ आने वाला है । हम उसे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश करते हैं । अरे पर वह यहाँ कहाँ होगा तो भूल गए । मैंने कहा था ना, वो खबर ही है पर ये तो नहीं कहा था कि वो इनके ग्रुप में शामिल है । मेरा मतलब वही था । वो इनके ग्रुप में शामिल है । वो यहीं होगा । ये तो मस्त खबर पता चली है क्यों मेरी जान ग्रेड ग्रेड जॉन बोला यानी उसे अबतक पता चल भी गया होगा कि हम यहाँ फंस चुके हैं ना? अमर बोला पर हम ये सोच कर बैठे नहीं रह सकते हैं कि वह हमें बचाने आएगा । न जाने उसे कितना पता है और मैं जाने उसका क्या प्लान है । हम उसे कॉन्टेक्ट करते हैं जिनकी बोली पर कैसे हमारे मोबाइल तो उन्होंने छीन लिए । मोबाइल होते भी तो यहाँ नेटवर्क कहाँ है? एक मोबाइल है मेरे पास । रिंकी बोली कहाँ छुपा कर रखा था तुम्हें? जॉन आश्चर्य से बोला मेरे जूते के सोल में और दूसरे जूते में एक छोटा पिस्टल भी हैं । कमाल कर दिया तुमने तो अमर उत्साहित हो गया । अंधेरा बहुत वरना तो मैं किस कर लेता हूँ । रिंकी हंसी अंधेरे में किस करना नहीं आता क्या? तो मुझे तुम्हारे बारे में दोबारा सोचना पडेगा । अमर हस्तिया सीरियस नहीं । जॉन अविश्वास के साथ बोला इन हालातों में भी फ्लर्टिंग । इतने में रिंकी ने जूते से छोटा सा मोबाइल निकाल लिया लेकिन मोबाइल से होगा क्या? जॉन बोला यहाँ वाई फाई है जिनकी बोली मैं जब खाली ले के सामने पेश हुई थी तो उसके साथ ही लगातार मोबाइल पर लगे हुए थे । अगर हम उसका पासपोर्ट ट्रैक कर लेंगे तो फिर और कुछ करने की जरूरत नहीं पडेगी । अमर बोला इतने में मोबाइल ऑन हो गया । रिंकी ने वाईफाई ऑन किया । तुरंत एक नेटवर्क दिखाई दिया जिसका नाम एजेड सात सौ छियासी था । उससे कनेक्ट करके रिंकी पासवर्ड ट्राय करने लगी पर कोई तुक्का नहीं । बडा अमर और जॉन ने भी कुछ सजेशन दिए पर सब नाकाम रहे । अगर मेरा लैप्टॉप होता तो इनका पासपोर्ट ट्रैक कर लेती है । रिंकी ने नाउम्मीदी के साथ कहा कुछ देर वो लोग चुप बैठे रहे । जॉन ने कहा ब्लू ट्राय करो उससे क्या होगा तो तुम्हारा वो इंटरपोल का कभी क्या बता । ब्लूटूथ से कनेक्ट हो पर उसे पहचान होंगी कैसे? ब्यूटूथ पे तो कुछ भी नाम हो सकता है । वो भी है । उसका नाम क्या है? अमर ने पूछा धीरज नेगी वो इंडियन क्यों नहीं हो सकता? ओके चलो कोशिश करो । रिंकी ने ब्लूटूथ ऑन किया । कुछ देर में दो डिवाइस दिखाई दिए पर दोनों के नाम से कुछ पता नहीं चल रहा था कि किसके हो सकते हैं । कनेक्ट करने की कोशिश करो । जॉन बोला रिंकी ने कोशिश की पर दोनों तरफ से कोई रेस्पॉन्स नहीं आया । कुछ देर तक वह कोशिश करती रही पर कामयाबी नहीं मिली । बैठी बचा हूँ । अमर बोला कुछ देर बाद कोशिश करना हो सकता है वो ट्रेन से बाहर हूँ । हम तो बस तो कम आ रहे हैं । जॉन बोला है क्या पता उसने ब्लूटूथ ऑन कर दे रखा है कि नहीं । काफी देर वह लोग यही जमीन पर बैठे रहे । रेंकिंग अचानक अमर ने पूछा साहनी तुम्हारा सगा भाई संसद पर तुम रिंकी सेन हो और वह साहनी ऐसा कैसे? सब बताऊंगी तो मैं इत्मीनान से इतना तो बता दूँ कि सानी जो आईएसआई के चक्कर में पडा था, उसके बारे में तुम्हें पहले से पता था । हाँ पर तुम ने मुझे इस बारे में कुछ क्यों नहीं बताया जिनकी चुप रही । मैं समझ सकता हूँ तुम्हारे पास जरूर कोई वजह होगी । हाँ मस्त हमारी जिंदगी इतनी आसान नहीं रहे हैं । हमने बहुत दुःख दर्द झेले हैं । मैं तुम्हें सब बताउंगी । मेरा भाई बहुत अच्छा इंसान है, किसी का बुरा नहीं चाहता हूँ और उसकी जिंदगी में परिवार के नाम पर सिर्फ मैं बच्चे हैं । इसलिए मेरी इसका तेरे को मरने के लिए तैयार हो गया है । बोलते हुए रिंकी की आंखें फिल्म हो गई । सब ठीक हो जाएगा, कुछ न कुछ हल निकल आएगा । हम कोशिश तो कर ही रहे हैं । आगे भगवान की मर्जी । भगवान पता नहीं भगवान कौन है? कहाँ है? मैंने तो जिंदगी में सिर्फ शैतान देखे हैं, जिनकी कोस्ट भरे स्वर में बोली । अमर ने कुछ देर बाद का चाय करूँ । रिंकी ने मोबाइल की स्क्रीन ऑन की और फिर से ब्लूटूथ ऑन किया । इस बार पिछले दो दिवा इसके अलावा एक और डिवाइस दिखा जिसका नाम टीडीसी थ्री था । जिनकी में उससे कनेक्ट करने की कोशिश की तो इस बार वो कनेक्ट हो गया । वो उत्साहित होती थी । जॉन और अमर की नजर भी स्क्रीन पर हैं । अब ध्यान से चौबोला कोई गारंटी नहीं है कि ये इंटरपोल वाला है, क्या किया जाए? कुछ ऐसा मैसेज भेजो इसे जिसे इंटरपोल वाला ही समझ नहीं जिनकी ने कुछ सोचा । फिर एक वर्ल्ड फाइल पर लिखा है आर यू आई थी ये क्या? अमर ने पूछा आर्यो इंटरपोल जॉन बोला या तो इंटरपोल हूँ बचायेंगे भेज दो जिनकी ने अंधेरे में मोबाइल की रोशनी में चलते दोनों के चेहरे देखिए । हाँ दोनों एक साथ बोले । रिंकी ने ब्लूटूथ के जरिए वफाई भेज दी । कुछ देर तक माहौल तनावयुक्त रहा । करीब पांच मिनट बाद रिंकी को जवाब में एक फाइल आई । लिखा था वाइट डब्ल्यू आ रही है जिनकी तुरंत बोली यानी यस हुआ यूं हाँ तुमको अनु जिनकी ने जवाब लिखा क्रिस्ट पीआरआई एस आ रहे हैं ये क्या? अमर ने पूछा ऍम जिनकी बोली वो समझ पाएगा । जॉन नाउम्मीदी से बोला इंटरपोल वाला होगा तो इतनी तो बुद्धि रखता होगा कहकर जिनकी ने फाइल भेज दी । इस बार जवाब में पूरा वाकया गया । समझ गया मैं तुम्हारे कैसा खाने के पास ही हूँ, कुछ करता हूँ । इस बार पूरा जवाब आया है । अमर ने कहा यानी आप उसे विश्वास हो गया कि हम ही हैं । तीनों के चेहरे पर अब जमाना आ गयी । कैद से निकलने के आसार नजर आ रहे थे । वो लोग फिर इंतजार करते रहे । दो घंटे भी फिर अचानक दरवाजा खुलने लगा । एक वर्दीधारी राइफल लिए अंदर दाखिल हुआ । वो तीनों सावधान हो गए जिनकी ने फोन छिपा लिया था । अंदर आकर वो धीरे से बोला आईएमएपी देखिए जिनकी उत्साह के साथ उठ खडी हुई है । इस वक्त पांच बजे नहीं नहीं कहा अधिकतर लोग हो रहे हैं । यहाँ से निकलने का ये बहुत अच्छा मौका है । तुम लोग वर्दी पहलू और मेरे साथ चलो कहकर उसने तीन काले रंग की वर्दियां उनकी तरफ बढा दी । तुम लोग पहले मैं बाहर हूँ, लेगी, बाहर चला गया और दरवाजा फिर से बंद कर दिया । तीनों ने फटाफट वर्दियां पहली और तैयार हो गई जिनकी ने अपने दूसरे जूते के सोल से पिस्टल निकालकर जेब में रखें । अमर ने उठकर धीरे से दरवाजे पर दस्तक दी हैं । दरवाजा धीरे से खुला है । उसने उन्हें बाहर आने का इशारा किया । जैसे ही तीनों बाहर आ गए मेगी ने फिर से दरवाजा बंद करके बाहर से ताला लगा दिया । मेरी हूँ तो बोला वो आगे बढने लगे । इस वक्त वहाँ सिर्फ कुछ वर्दीधारी पहला देते यह टहलते हुए निकल रहे थे । तभी आवाज आई तो चारों के दिल में भय की लहर दौड गई । वो धीरे से पढी । सामने नाइट सूट पहने अफजल खडा था । सब ने अपने सिर झुका लिए । साहिबान नहीं बोला । कैदियों के सेल पर कोई पहरा देता क्यों नहीं दिख रहा? अब सरप्राइज खाने की तरफ इशारा करते हुए बोला साहिबान, हम कर रहे हैं राउंड लगाते हुए आगे पीछे ये एक जगह खडे होकर क्यों नहीं जनाब चलते फिरते रहने से नहीं नहीं आती है । बाकी आप जैसा हुकुम करें, नहीं तो हमें भी नहीं आ रही । अच्छा सुनो । उसने फिर इधर उधर देखते हुए धीरे से कहा उस लडकी को हमारे कमरे में पेश करूँ । किस लडकी को? जनाब रेवा ये जो क्या मैं और जनाब वो तो तो हम से सवाल कर रहे हो । जब आप की सिक्योरिटी का भी ख्याल रखना है वो एक रॉ एजेंट है । कोई आम लडकी नहीं है । हमारे कमरे में उसकी भी दवा है । वो अश्लील मुस्कान के साथ होगा । जिनकी की मूर्तियां तक गए । उसका हाथ जेब में पिस्टल पर चला गया । अमर ने उसकी मनोदशा समझाते हुए उसकी पीठ पर हाथ थपथपाया । रिंकी ने उसकी आंखों में देखा और किसी तरह संयम बाधा ठीक है ना आप? चलिए मैं उसे लेकर आता हूँ । एक है कहकर अवसर अन्दर की तरफ चला गया और ये चारों वापस कैदखाने की तरह था । पर अफजल की आंखों से ओझल होते ही वो लोग पलट लिए और फिर बाहर की तरफ चल रही है । कुछ मेगी बोला वो इत्मीनान से आगे बढते गए देगी । उन्हें कुशलता के साथ सभी दरवाजे पार करवाता हुआ ले गया । बस अर्चन आई तो अंतिम दरवाजे से निकलते हैं जब वो अंतिम दरवाजा पार करके दिवारी सुरंग के रास्ते की तरफ पढ रहे थे । दरवाजे के गार्ड का ध्यान रिंकी पर गया । उसने उसके नितम्बों की तरफ देखा और बडा है ये तो औरत लग रही है वो कर्जा चारों ठिठककर रुक गए क्या हुआ? नेगी ने पलट कर पूछा है तो हम अपना चारा देखा हूँ । गार्ड राइफल तानकर जिनकी से बोला विंकी धीरे से हाथ अपने चेहरे के नकाब की तरफ ले गए । अचानक ही लेगी की राइफल कर्ज गार्ड ठीक मारते हुए ढेर हो गया तो अमर बोला लफडा हो गया तेजी से चलो नेगी सुरंग में आगे बढते हुए बोला । कुछ ही देर में वह सुरंग से बाहर माइंस के मुख्य में पहुंच गए । गोलियों की आवाज सुनकर कोई ना कोई बाहर की तरफ आता ही होगा । नहीं की बोला तुम लोग इतनी तेज हो सके भाग क्योंकि आप हमारे साथ नहीं आ रहे हैं । अमर ने पूछा है नहीं अभी यहाँ मेरा काम बाकी है पर ये लोग आप पर शक करेंगे । किसने मेरा चेहरा देखा है । मैं फिर से जाकर भीड में शामिल हो जाऊंगा । यूयॉर्क । ये ऍम ऍम कहकर रिंकी ने उसे गले लगा लिया । फिर वो तीनों तेजी से बाहर निकले और भागने लगे । बाहर अंधेरा था । पांच बजने में अभी भी कुछ मिनट बाकी थे । वो लोग दस मिनट तक निरंतर भर्ती रहे । माइंस अब काफी पीछे छूट गई थी । तभी अचानक उन्हें जमीन के नीचे कडकडाहट महसूस हुई । वजह से जमीन को देखने लगे हैं और तभी उन से कुछ ही दूर जमीन से एक लोहे का पाइप बाहर निकला है । ये क्या बना है अमर की मुझ से निकला लगता है लोगों ने यहाँ सुरंगे बना रखी है जिनसे वो बाहर निकल रहे हैं । जॉन बोला, भागो जल्दी सिंह की चीज है । वो कुछ दूर पहुंचे थे कि उन्हें पाइप से एक काला साया बाहर आते दिखाई दिया । ऍम अमर बोला, फांसी पडे । पत्थरों के पीछे उन्होंने शरण ले ली । गनीमत थी कि उन्होंने वहाँ से निकलते हुए राइफलें ले ली थी । पाइप से बाहर निकलता एक और साया दिखाई दिया । जॉन ने तुरंत फायर किया । वापस बाइक में झुक गया वरना उसका सिर अवश्य तरबूजे की तरह फट जाता है । गुड अमर बोला, मेरी जान तो पाइप पर निशाना साधे हैं और किसी को उससे बाहर निकलने नहीं देना । जो साया बाहर आ गया था उसने पाइप के पीछे पोजिशन ले ली । अमर ने पाइप के साइड में फायरिंग करनी शुरू की उस तरफ से कोई हमला नहीं हुआ । शांति छाई रही । अचानक हवा में एक हथगोला उनकी तरफ आया । जब जिनकी बोली और तीनों अपनी जगह से दूर कूदकर लुढकते चले गए । हथगोला गिरा और ब्लास्ट हो गया । इतने में मौका पाते ही पाइप से दो साल और निकल आए । अब दोनों तरफ से रह रहे कर फायरिंग होने लगी । देखते ही देखते पूरब की दिशा में आसमान हल्का नीला दिखाई देने लगा । करीब आधे घंटे की फायरिंग के बाद तीनों हमलावर खत्म हो गए । अपनी अपनी गन संभाले अमर जॉन वरिंग कि धीरे धीरे उल्टे पहुंच चलने लगे । किसी और के पाइप से बाहर आने की संभावना जरूर थी । पर काफी देर तक उन्हें कोई हलचल होते नहीं देखी । कमाल है । इतनी लंबी मुठभेड के बावजूद अभी तक कोई माइंड से बाहर नहीं निकला । जॉन बोला वो लोग काफी दूर कराएंगे । कुछ देर में पाइप आंखों से ओझल हो गया । वो लोग अपनी कार तक पहुंचे हूँ । कार के टायरों की तरफ देखकर अमर के मुँह से निकला । मुझे लग रहा था ऐसा ही कुछ होगा । जॉन बोला हूँ कार के सभी टायरों की हवा निकली हुई थी । पैदल आगे बढने के सिवा और कोई चारा नहीं है । वो लोग कार वही छोडकर आगे बढने लगे । अरे अचानक रिंकी को जैसे हो जाए । भैया को फोन करके बोल देती हूँ कि मैं बच निकली । उसने अपना फोन निकाला पर वो उस वक्त हताश होती जब देखा फोन टूटा हुआ था । तो लगता है मुठभेड के वक्त जो जमीन पर कई बार गिरी थी उसमें फोन टूट गया । खाली स्क्रीन ही नहीं टूटी ये तो पूरी तरह से बंद पड गया है । अब क्या करें? अमर बोला जल्दी चलने के अलावा और कोई चारा नहीं है । जॉन बोला छह बजने वाले हैं उद्घाटन दस बजे से पहले क्या होगा? एक घंटा चलने पर भी शायद हम गांव की सडक पर पहुंच जाएंगे । फिर कोई ना कोई जरूर मिल जाएगा । पर गांव वालों के पास रिंकी बोली आजकल सबके पास फोन होता है । मुझे बहुत डर लग रहा है । मेरा भाई मेरी खातिर मौत को गले लगाने की तैयारी कर रहा होगा । घबराओ नहीं । अमर ने रिंकी का हाथ उठाते हुए कहा देखना हम वक्त रहते उसे रोक लेंगे । हमारे पास काफी समय चुना । अब तुम अपने और अपने भाई के बारे में कुछ बता दूँ । ठीक है जिनकी अमर का हाथ अपने हाथों में कसकर पकडे साथ चलने लगी । जॉन से दो कदम आगे चल रहा था

Part 13

आज से पंद्रह साल पुरानी बात है जब मेरा नाम रिंकी नहीं रजिया हुआ करता था । हम लोग श्रीनगर में रहते थे । हमारे अब्बू शकील मोहम्मद एक कॉलेज के प्रसिद्ध प्रोफेसर थे । उनका कॉलेज ही नहीं पूरे कश्मीर में काफी नाम था । वो न्यूज पेपर में मैगजीनों में कविताएं और लेख भी लिखा करते थे । उनकी अधिकतर रचनाओं की थीम हिंदुस्तान प्रेम, कश्मीर की नाजुक कश्मीर के नाजुक हालत और अन्य समस्याओं को लेकर होती थी । कश्मीरी लोग उन्हें बहुत पसंद करते थे । उनकी बहुत इज्जत करते थे । मेरी अम्मी नरगिस घर संभालती थी । उसने हम दोनों को बचपन से यही शिक्षा दी की हिंदुस्तान ही हमारा देश है और कश्मीर में जो कुछ भी गलत हो रहा है वो हमारा पडोसी मुल्क करा रहा है । उन दिनों में खाली टेरेरिस्ट ग्रुप का एक छोटा लीडर हुआ करता था । उसका काम था कश्मीरी युवा को देश और सरकार के खिलाफ भडकाना । अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसे एक तरकीब सूझी । उसने मेरे अब्बू को अप्रोच किया और कहा कि वो जो कुछ शिक्षा दे रहे हैं और लेख लिख रहे हैं वो इस्लाम के खिलाफ है । आप क्या अनाब शनाब लिखते हैं, कश्मीर मुसलमानों का स्टेट है और सच्चे मुसलमानों की जगह हमारे देश में आपको बच्चों को यही सिखाना चाहिए । अच्छा और आप जो लेख लिखते हैं उससे काफी होने की वो आती है । आपको अपने धर्म को ध्यान में रखकर लिखना चाहिए । मेरे अब्बू भडक उठे । मैं बच्चों को अच्छा इंसान बनने की सीख देता हूँ । यही कुरान में लिखा है और मुझे फख्र है आपने मुसलमान होने पर और हिंदुस्तानी होने पर फिर तुम लोग जो अपने मतलब के लिए न सिर्फ हमारे देश में शांति फैला रहे हो बल्कि दुनिया के सभी मुसलमानों को बदनाम कर रहे हो । अकेले ट्रंप बहुत ज्यादा बोल रहे हो । मुझे सच बोलने से कोई नहीं रोक सकता । तब देखना कल के अखबार में क्या आता है? अगर तुमने ऐसी हिमाकत की तो फिर खुदा के बंदे किसी से डरते नहीं, खाली चला गया । मेरे अब्बू वृद्धि और जुनूनी आदमी थे । उन्होंने रातो नाथ एक आर्टिकल लिखा जिसमें खलीली का नाम भी था । उन्होंने लिखा कि कैसे वो कश्मीर के युवा को भडकाकर अपने मतलब के लिए इस्तेमाल करना चाहता है । दूसरे दिन ही अखबारों में वह लेख प्रकाशित हो गया इसलिए की बहुत चर्चा हुई । अब्बू को अनेकों जगह से बधाई आई । कुछ जगह से धमकियाँ भी आई पर वो हमेशा की तरह बेखौफ अपने काम में लगे रहे । इस घटना के करीब एक साल बाद हम सभी घूमने के लिए गुलमर्ग गए । वहां से लौटते वक्त हमारी बस रोक ली गई । वो आतंकवादियों की टोली थी । उनके पास खतरनाक हथियार से वो बस के अंदर आ गए । हमारे परिवार पर नजर पडते ही वो हम पर झपट पडेगा । हम लोग उन दुर्दांत लोगों का विरोध करने लायक नहीं थी । उन्होंने हमें बस से उतार लिया और बस को जाने को कहा । वहाँ से वो हमें पैदल कई मील दूर किसी घाटी मिले गए । घाटी में पुराना बंद पडा घर था । घर के अंदर हम पहुंचे तो वहां कई और आतंकवादी देखिए, फिर हमारे सामने खलीली उपस् थित हुआ आओ शकीरा हूँ । बहुत वक्त हो गया था । तुमसे मिले खाली तो हाँ मैं तुम्हारा दोस्त, तुम्हारा हमदर्द । मुझे और मेरे परिवार को इस तरह यहाँ लाने का क्या मतलब है? मैं तो बस एक दोस्ताना मुलाकात चाहता था । देखो तुमने जिद में आकर साल भर पहले मेरा कहा नहीं माना । मेरे खिलाफ लिखा पर मैंने सहेलियाँ अभी भी कुछ नहीं बिगडा है । मैं तुम्हें माफ करने के लिए तैयार हूँ । अच्छा हाँ, मैं तुम्हारी तरफ फिर से दोस्ती का हाथ बढाना चाहता हूँ तुम्हारे हाथ में कश्मीरियों का खोल लगा है खाली अब तू तेज आवाज में बोले खाली चुप रहा । अगर तुम अपने बुरे कामों को छोडकर वापस अपने देश लौट जाओ तो हम दोस्त बन सकते हैं । खाली हंसा मजाक अच्छा कर लेते हो । उसकी हंसी किसी दुर्दान्त राक्षस की तरह थी । मैं और नूर सहन कर अम्मी से चिपक गए । सुनो बेवकूफ प्रोफेसर वो कर्जा तो मैं जो अभी तक क्या उसे भूल जाओ और अब जैसा हम बोलते हैं वैसा करो । कॉलेज में वह सिखाओ जो हम बोले और लिखो भी । वह जो एक सच्चा मुसलमान लिखता है, मैं तुम्हारा गुलाम नहीं, वही करोगे जो मैं बोलूंगा । वरना कहते हुए उस की नजर अम्मी पड गई । तुम्हारी बेगम हमारी जीनत बनेगी तो देश तेरी इतनी हिम्मत । अब वो बिना कुछ सोचे समझे उस पर टूट पडे । पर वो एक ट्रेंड आतंकवादी था । उसने उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया तो छटपटाने लगे । मुझे पता था प्रोफेसर तो एक स्थिति आदमी हैं, कभी नहीं मानेगा । पर मुझे लगत हुए खानदानी आदमी है । कम से कम अपने परिवार के बारे में सोचेगा पर नहीं तो फिर फिर है तेरे जैसे लोगों का एक ही अंजाम होता है, कहकर उसने अब्बू का चेहरा अपनी बाजू में कैसा और फिर एक झटके में घुमाकर उनकी गर्दन तोड दी । अब्बू की आंखों के सामने हम तीनों थे । उन्होंने आखिरी बार हम सबकी तरफ देखा और फिर उनकी आंखें शून्य में घुटने लगी । उसने उन्हें किसी मरे जानवर की तरह जमीन पर फेंक दिया । नहीं नहीं नहीं अम्मी अब्बू के शरीर पर झुककर उन्हें जब छोडने लगी और कुछ आपको कुछ नहीं हो सकता है । वो सुरक्षित से प्रार्थना करने लगी, मदद करूँगा । हम तुम्हारी सब बात मान लेंगे । इन्हें अस्पताल ले चलो तो मैं खुदा का वास्ता । उसने अट्टहास लगाया । मेरे बगल ये मार चुका है हमने फिर भी बादलों की तरह अब्बू के शरीर को झंड छोडती नहीं । कुछ देर बाद जब उन्होंने रोना बंद किया और पत्थर की मूर्ति बनी एक तक लाश को देखने लगी । खलीली बोला तो आप फिक्र मत करो । हम तो मैं एक नई जिंदगी देंगे । इसमें तुम्हारा और इन बच्चों का कोई कसूर नहीं तो हम हमारे साथ आजाद कश्मीर चलो । वहाँ हम सब परिवार की तरह रहते हैं तो छोटा मोटा काम कर सकती हूँ और अच्छी जिंदगी व्यतीत कर सकती हो । अम्मी कुछ नहीं बोली । वो सदमे में थी । कुछ देर बाद खाली अपने लोगों से बोला ले चलो ही नहीं आजाद कश्मीर जैसे ही उसके लोग हम लोगों पर झपटे, अम्मी चीख पडी, कहीं नहीं जाना हमें हमें अपने वतन में ही रहना है । मेरे बच्चे जानवरों की दुनिया में नहीं रहेंगे । अच्छा दम इंसान हो और हम लोग जानवर हूँ । जानवर से भी बदतर वहशी दरिंदे अच्छा खाली । उसे घूरता हुआ बोला भेड तो तुझे अब देखना ही होगा । हमारे अंदर का जानवर है । उसके बाद जो हुआ तो आपने अब्बू को मारते हुए देखने से भी ज्यादा बुरा था । वो खौफनाक दृश्य आज पंद्रह साल बाद ही में नहीं भूल सकती हैं और हरामजादे ने हम लोगों के सामने ही हमारी अम्मी के कपडे तारतार कर दिया और वहीं सबके सामने उनकी अस्मत लूट ली । मीना रोहित न सिलाई शायद वो पत्थर बन चुकी थी । हम दोनों को एक आतंकी ने पकड रखा था । काम दोनों भाई बहन एक दूसरे से लिपटकर रोते रहे । अपनी हवस मिटाने के बाद वह शैतान उठा और बोला तो मैं आराम से अपने वतन में रहा हूँ । आतंकी ने हमें छोड दिया । काम दौड कर अम्मी से लिपट गए । नूर ने अपना जैकेट उतार कर अमरीका तन ढक दिया । फिर वो जैसे पागल हो था । खाली के सामने खडा होकर वो चिल्लाया, खाली मैं तो पहचान से मार दूंगा । सब हंसने लगे पर खाली नहीं हंसा वो नूर की आंखों में देख रहा था । शायद उसने फैसला किया की नोट को खत्म करना ही उसके हित में था । वैसे तो मैं बच्चों पर हाथ नहीं उठा था, वो बोला पर ये परिवार सिरफिरों का है । कहकर उसने अपनी मशीनगन भाई की तरफ तांदी । अपने बच्चे को खतरे में देखकर अम्मी ने जमीन पर पडी एक राइफल उठाई और खाली पर दांती खबर था जो मेरे बच्चे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की । खाली ठीक थक गया । अम्मी के चेहरे से पता लग रहा था कि वह कुछ भी कर गुजरने को तैयार है । आपने कल फेंक वरना मैं अभी तुझे खत्म कर देंगे । फिर चाहे मेरा ये मेरे बच्चों का जो भी हूँ वो कर जी उसे जुनूनी होते देख खाली नहीं । उसका आदेश मना । नौं रजिया खाली पर से निशाना और नजरे हटाए बिना वो बोलेंगे । तुम दोनों पहुँचा हूँ नहीं हमेशा हम आपको छोडकर नहीं जाएंगे । मैं बिलख बिलख कर रोने लगी । नोश तुम समझता हूँ अपनी बहन को लेकर यहाँ से निकल जाओ वरना हम सब यही खत्म हो जाएंगे । नूर हौसलामंद था पर था तो एक बच्चा अमीर । तुम भी हमारे साथ चलो नहीं तो भाग मैं उन्हें यही रोककर रखूंगी । नूर असमंजस में था ऍम अमित जी की । जल्दी किसी ने भी उन्हें रोकने की कोशिश की तो मैं बेहिचक तुझे मार दूंगी । नूर ने भारी मन से मेरा हाथ पकडा और मुझे खींचते हुए बाहर भागा । अपना ख्याल रखना मेरे बच्चों अलग तुम पर अपना फसल बनाए रखें । अब मैं अब मैं मैं रोती चीज भी रही । पर नूर मुझे लेकर बाहर निकला । हम भागते गए । बीच बीच में पलट कर उस घर की तरफ देखते रहेंगे । कुछ दूर जाने के बाद गोलियों की आवाज सुनाई दी । उन्होंने अम्मी को माल डाला । नूर नूर की आंखों में भी आंसू थे । पर उसके चेहरे पर सख्त भाव थे । अभी हम कुछ नहीं कर सकते । रसिया फिलहाल हमें यहाँ से निकलना होगा । तभी हम अब मम्मी की मौत का बदला ले पाएंगे । जिनकी ने अमर का हाथ बेहद कसकर पकडा हुआ था । अपनी कहानी सुनाते सुनाते उसकी आंखें नम हो गई थी । उस की दर्द भरी कहानी सुनकर जॉन की आंखे भी भराई । अमर ने रिंकी का कंधा थपथपाया । बहुत बहादुर थी तुम्हारी हम में काम भी अपने पेरेंट्स की तरह जहाँ बात हो वो आज होते हैं तो उन्हें तुम पर नाज होता है । फिर आगे क्या हुआ तो और नूर वहाँ से भाग गए । हाँ, कुछ दूरी पर हमें कुछ आर्मी वाले मिले । हमने उन्हें अपनी दास्तान सुनाई । हम लोगों को सुरक्षित वहीं छोड कर उनकी एक टुकडी खाली ले के पीछे गई । पाला की जब तक वो घाटी के उस घर तक पहुंचे वो लोग वहाँ से भाग चुके थे । उसके बाद हम वापस अपने घर आ गए । कुछ दिन वहाँ रहे हैं पर फिर छोडने कुछ सोचा और कहा कि हम लोगों को यहाँ से कहीं दूर चले जाना चाहिए वरना खलीली के आदमी हमें खोजते हुए जरूर वापस आएंगे । एक रात हम बिना किसी को कुछ भी कहे ट्रेन से दिल्ली निकल गई । कुछ दिन वहाँ योगी भटकते हुए गुजारे । फिर किसी एनजीओ वाले ने हम पर ध्यान दिया और हमें एक अनाथालय पहुंचा दिया । वहाँ हम करीब एक साल रहे । फिर नरेश साहनी नाम के बेऔलाद अमीर इंडस्ट्रिल इसने नूर को गोद ले लिया । एक दूसरे से बिछडना बहुत मुश्किल था । पर नूर ने कहा कि खाली से बदला लेने के लिए अपने पैरों पर खडे होना बहुत जरूरी है और उनके साथ चला गया और उसका नाम अब पुनीत साहनी हो गया । वो बराबर मेरे टच में रहा । कुछ महीनों बाद मुझे एक बंगाली फैमिली ने गोद ले लिया और मेरा नाम रजिया से रिंकी सेम हो गया । नूर बहुत खुश हुआ । हम दोनों के परिवार अक्सर मिला कर दे देंगे । पर कुछ समय बाद नूर की फैमिली लखनऊ शिफ्ट हो गई और मैं दिल्ली में अपने नए परिवार के साथ रह गई । ऍम हम अपनी अपनी फैमिली के साथ जीवन व्यतीत करते गए । कॉलेज पूरा करके मैंने जो में भर्ती होने का निश्चय किया । दूसरी तरफ नूर अपना फैमिली बिजनेस संभालने में अपने पिता का साथ देने लगा । गुजरात में भर्ती होने के बाद से नूर और मेरे बीच नियमित संपर्क होने लगा । मुझे खाली से संबंधित जानकारी मिलती रहती थी । मैं उसे नूर के साथ शेयर करती थी । हम दोनों के दिल में बदले । क्या बुरी तरह से भारत में लगी? फिर मुझे ये जानकारी मिली कि आईएसआईएस हमारे देश में कुछ बडा करने का प्लान कर रहा है और अब उसका लीडर खाली बन गया था । आईएसआई उनके साथ शामिल थीं । उनकी कुछ गतिविधियां लखनऊ में शुरू हुई थी । फिर मुझे पता चला कि उन्हें एक अमीर कैंडिडेट की तलाश है जो उन्हें पैसों की और हथियारों को ट्रांसपोर्ट करने में मदद करेंगे । इसके लिए वो मिनाज नाम की मॉर्डल का इस्तेमाल कर रहे थे । मैंने ये बात नूर को बताई तो उसने कहा कि वह खुद को इस जाल में फंसा लेगा । उसने मिनाज के आगे पीछे घूमना शुरू कर दिया और खुद उसके साथ दोस्ती कर ली । इसके जरिए हम यही चाहते थे कि आईएसआई और खाली के प्लान का पर्दाफाश कर सकेंगे । अपने दुश्मन को इतने अरसे बाद अपने सामने देखकर कैसा लगा? अमर ने पूछा जी कर रहा था कि उसके शरीर में इतना बारूद भर दूँ की जरूरत जरा बिखर जाएंगे । पर नूर को भी हक है उसे खत्म करने का । इसलिए किसी तरह खुद को रोक लिया । चलते चलते वो कच्ची सडक पर आ गई थी पर अभी तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था । हमें और तेज चलना होगा जिनकी गति बढाते हुए बोली कमिश्नर और साहनी दोनों पुलिस वर्दी में थे । नौ बजने से कुछ पहले ही वो ट्रांसपोर्ट नगर मेट्रो स्टेशन पहुंच गए । बिना किसी रोकटोक के कमिश्नर वह साहनी स्टेशन की सिक्योरिटी पास कर के अंदर पहुंच गए । मेरा काम हो गया । कमिश्नर धीरे स्वर में साहनी से बोला । साहनी ने हॉल से रहता है । कमिश्नर उसे प्लेटफॉर्म पर छोडकर आगे बढ गया । साहनी उसे जाते हुए देखता रहा । फिर प्लेटफॉर्म पर टहलने लगा । कमिश्नर बाकी पुलिस कर्मियों से मिला और स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देने लगा । ठीक दस बजे उसे खबर मिली कि मुख्यमंत्री का काफिला बस अब पहुंचने ही वाला है । वो नहीं रिसीव करने बाहर की तरफ चल दिया । उसका दिल जोरों से धडक रहा था । चेहरे पर पसीना आ रहा था । मुख्यमंत्री अपने काफिले के साथ वहां पहुंचे । मुख्यमंत्री के सेक्रेटरी ने कमिश्नर के चेहरे पर परेशानी के भाव भाग ले और पूछा सब ठीक है ना? कमिश्नर कोई परेशानी नहीं सर, सब ठीक है । उसने खुद को संभालते हुए जवाब दिया । सेक्रेटरी को उसके जवाब से पूर्ण रूप से सांत्वना तो नहीं मिली पर फिर किसी और ने उसका ध्यान उस तरफ से खींच लिया । मीडिया का हुजूम मुख्यमंत्री को कवर करने में लगा था । एक पत्रकार कैमरे में देखते हुए बोल रहा था, लखनऊ शहर और उत्तर प्रदेश के लिए आज बडा गौरवशाली दिवस है । देश के सबसे तेजी से कार्यान्वित किए गए मेट्रो प्रोजेक्ट का आज मुख्यमंत्री योगेश उद्घाटन करने जा रहे हैं । मेट्रो ट्रेन ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग रेलवे स्टेशन तक का आठ दशमलव पांच किलोमीटर का सफर तय करेगी । देखते ही देखते मुख्यमंत्री का काफिला स्टेशन के अंदर प्रवेश हुआ । कुछ ही देर में वह नवनिर्मित मेट्रो ट्रेन के बगल में खडे थे । साहनी ने उन की तरफ कदम बढाए और कुछ ही देर में भीड को चीरते हुए मुख्यमंत्री के पास जा खडा हुआ । पुलिस की वर्दी होने के नाते लोगों ने आराम से उसे रास्ता और जगह थी । उसका हाथ पैंट की जेब में सडक गया जहाँ विस्फोटक बेल्ट का ट्रिक था । साहनी का काम था हाथ सख्ती से ट्रिगर पर जम गया और अंगूठा बटन पर पहुंचाने । उसने अपनी आंखें बंद कर लेंगे । उसके मन में अपनी बहन यानि रिंकी उर्फ ऍम । उसके मरने से वह बच जाएगी । वो लोग वादे के पक्के हैं उसे जरूर छोड देंगे । सानी मौत को गले लगाने के लिए तैयार हूँ । उसे पता था ट्रेगर दबाते ही उसके चीथडे उड जाएंगे । उसे पता भी नहीं चलेगा । शायद दर्द महसूस करने का मौका भी ना मिले । इससे आसान मौत और क्या हो सकती है । बच्चा उसने ट्रिगर पर अंगूठा रखा । उसे मन ही मन रिंकी का दिखाई दिया । वो कुछ बोल रही थी और उसे सुनाई नहीं दे रहा था । फिर जैसे अचानक वो चीज ही नहीं बारिश । साहनी को जोरदार झटका लगा और उसने आंखें खोली । उसे लगा कोई उसे खींच लिए जा रहा है । उसने देखा कि जावेद ने उसका गिरेबान पकड रखा था और उसे मुख्यमंत्री से दूर खींच रहा था । अगर मैं जमाना तुम्हारी बहन से उसके कान में बोला, पास खडा एक ऐसी उनके पास आया क्या हो रहा है? जावेद खान सीक्रेट सर्विस जावेद ने जल्दी से परिचय पत्र निकालकर कहा मुझे इंस्पेक्टर को एक केस के सिलसिले में ले जाना पडेगा पर इनकी यहाँ ड्यूटी है । मामला बहुत अर्जेन्ट हो गया । ठीक से ले जाओ । छीनाझपटी क्यों लगा रखी है । कहकर एसपी आगे बढ गया और मंत्रियों पर ध्यान देने लगा । जावेद साहनी को खेलते हुए भीड से दूर ले गया । तुम सच कह रहे हो? साहनी ने पूछा उसका पूरा चेहरा पसीने से तर था था । अभी कुछ ही देर पहले मुझे फोन आया था । रिंकी, अमर और जॉन टेरेरिस्ट की कैसे छूट गए? किधर है वो? मुझसे बात करनी है । ठीक है । कुछ देर में लखनऊ पहुंच गए होंगे । उनके पास वो नहीं है । रास्ते में किसी पीसी उसे कॉल किया था कहकर जावेद उसे घुटने लगा । साहनी उर्फ नूरमोहम्मद चिंता मत करो । साहनी ने सब पकाकर उसे देखा । रिंकी ने सारे राज खोल रहे हैं । जेल में तो मुझे पूरा सच भी बता सकते थे । छुपाने का कारण मेरे लिए यही बेहतर था की मैं खुद को आईएसआई के हाथों में फंसा हुआ दिखाऊँ इतना कि उनके खिलाफ षड्यंत्र रचते हुए तो खाली से बदला लेना चाहते हो । ना तुम खाली से बदला लेना चाहते हो ना वो हम सभी का दुश्मन है तो उसका अंत निश्चित है । मैं उसे अपने हाथों से मारना चाहता हूँ । साहनी अपनी मुट्ठियां तानकर बोला मैं तुम्हारे जज्बात समझ सकता हूँ पर ये धमकी नहीं उसका अंत कैसे भी हो तुम विजेता रहोगे तो मारा बदला पूरा होगा । तभी जावेद का फोन बजा । दूसरी तरफ चीज अभय कुमार था । जावेद जी सर बहुत बडी अमरजेंसी होने वाली है । क्या हुआ भारत युद्ध की स्थिति में है मतलब खलीली ने धमकी जारी की है कि सोहनगढ माइन्स में सेल्फ प्रोपेल्ड ड्रोन पर न्यूक्लियर मिसाइल तैयार बैठे हैं जो कि किसी भी लोकेशन को अपना टारगेट बना सकती है । आ जा रहा है । इसका एंटी मिसाइल सिस्टम भी मुकाबला नहीं कर सकता हूँ । अब एयरफोर्स भी कुछ कर सकती है । हमारी होममिनिस्टर से बात हुई है । प्राइम मिनिस्टर अभी सभी नेताओं के चीफ के साथ मीटिंग में हैं । देखते हैं वह क्या फैसला लेते हैं । साथी लखनऊ शहर में जगह जगह सडकों पर काली वर्दी में आईएसआई के का झंडा लहराती गाडियों में आतंकी बाहर निकल आए हैं और अंधाधुंध गोलियां चला रहे हैं । यानी यानी हमारे देश पर आतंकियों ने जान शर्दी फॅस मुझे लगता है इन का प्लान है शहर को अपने कब्जे में लेने का । धूमने साहनी को तो रोक लिया होगा । ये सब समय नहीं है । कम से कम मुख्यमंत्री तो सुरक्षित हैं । अब मुझे क्या करना है सर, हमारे फोन का इंतजार करो । कहकर अब मैंने फोन काट दिया । फोन हाथों में लिए जावेद साहनी से कुछ बोलने के लिए पालता पर वो अपनी जगह से नदारद था । अमर जॉन वरिंग की एक कार में लिफ्ट लेकर लखनऊ की ओर अग्रसर थे । जावेद ने नूर को रोक लिया होगा ना । रिंकी ने चिंतित होते हुए पूछा यार न्यूज लगाना । अमर ने ड्राइवर से कहा । उसने रेडियो पर न्यूज लगाई । कुछ ही देर में समाचार मिला के मुख्यमंत्री ने मेट को कुछ ही देर में समाचार मिला कि मुख्यमंत्री ने मेट्रो का उद्घाटन कर दिया है । रिंकी ने चैन की सांस ली । तभी रेडियो पर न्यूजरीडर अचानक ही चुप हो गया और एक नया प्रसारण होने लगा । आप सभी को सूचित किया जा रहा है कि अब से कुछ घंटों पहले प्रधानमंत्री ने देश में इमरजेंसी की घोषणा कर दी है । कारण है कि आतंकी गुट आईएसआई के ने देश के अंदर आकर हमला कर दिया है । इस वक्त इस गुटके आतंकी लखनऊ शहर की सडकों पर फायरिंग कर रहे हैं । साथ ही कई सालों से बंद पडी सोहनगढ माइन्स में इनके भारी तादाद में छिपे होने का समाचार है । इन लोगों के पास न्यूक्लियर मिसाइल भी है जिसका इस्तेमाल करने की धमकी दी गयी है । सभी नागरिकों को ये आगाह किया जाता है कि अपने घरों से बाहर न निकलें । अगर बाहर है तो जल्द से जल्द अपने अपने घरों में लौट जाएगा । अगर कोई ऑफिस में है तो वहीं रुक जाए । सडक पर बाहर आना खतरे से खाली नहीं है । आर्मी वायर फोर्स अपना ऑपरेशन चालू करने वाली है । धन्यवाद कार में सभी स्तब्ध से बैठे रह गए । कुछ पल तक किसी के मुँह से कोई बोल नहीं भूटान तो ये था खाली का मिशन आखिरकार अमर ने कहा वो लोग सोच में पड गए तभी सामने से एक काली ऐसी हुई तूफान की तरह भागती हुई नजर आई । उसके बगल से निकलते ही रिंकी चीज होती है तो आप ड्राइवर ने घबराकर ब्रेक लगा नहीं क्या हुआ? जॉन ने पूछा उसका कोन्नूर चला रहा था क्या? अमर चौका ही? शोर हाँ वो जरूर माइन्स की तरफ जा रहा है । खाली जी से बदला लेने, खाली से बदला लेने । हाँ, मुझे भी उधर जाना है । वोट तो पागल हो गई हूँ । जॉन बोला अभी तो हम मौत के मुंह से निकले हैं और अब तो युद्ध की स्थिति है । एयरफोर्स कभी भी माइंड पर हमला कर देगी । जब तक उनके पास न्यूक्लियर मिसाइल है, वही कदम नहीं उठाएंगे । पर रिंकी अमर बोला मैं जानती हूँ गलत होगा । खुद मेरा चीफ इसकी इजाजत नहीं देगा । मैं तुम लोगों की जान खतरे में नहीं डालना चाहती । बस मुझे गाडी चाहिए उस तरफ जाने की नहीं । रिंकी मैं तो मैं सुसाइड मिशन पर नहीं जाने दूंगा । अमर मेरे जीवन का मकसद है फॅमिली की तबाही । वो होने ही वाला है । इतना आसान नहीं है तो फिर भी हुआ तो भाग निकलेगा । मैंने रात में रहकर पांच साल सिर्फ उसके पीछे निकले तो गायब हो गया तो दोबारा मिलने की कोई गारंटी नहीं है । पर रिंकी अगर तुम मेरी मदद नहीं करना चाहते तो से ही मुझे उतरने दो तो नहीं जा सकती । मैं कल ऑफिसर हूँ तो मेरे मिशन में इंटरफेयर नहीं कर सकते हैं । रिंकी मैं तुम्हारे साथ हूँ । जॉन ये गाडी हमारे भी छोड दो । तुम दोनों यहां से लिफ्ट लेकर निकल जाना । मेरे ऍम तो क्या मुझे कायर समझता है? नहीं मेरी जान पर नरेश ने हमारी मदद की है । हमारा फर्ज है कि उसे सकुशल उसके घर पहुंचाया जाए । नरेश ने सहमती में सिर हिलाया वो डरा हुआ था । मेरे दो बच्चे है जनाब आप बस एक बार मुझे घर पहुंचा दो और मेरी जान तो मैं जावेद के साथ बाहर से हमारी मदद करनी होगी और तुम्हारे पास तो फोन भी नहीं है । अरे भाई साहब मेरा फोन किस दिन काम आएगा? नरेश अपना फोन उनकी तरफ बढाते हुए बोला इस बहाने मुझे भी देश की सेवा करने का मौका मिल जाएगा । अमर ने फोन ले लिया । फिर जॉन और नरेश कार से उतर गए । अमर ने ड्राइविंग संभाली जिनकी बाजू में बैठ गई । अमर ने गाडी वापस घुमाई और वो दोनों एक बार फिर सोहनगढ माइन्स की तरफ चल रही है । जावेद साहनी को ढूंढता हुआ मेट्रो स्टेशन से बाहर निकला । बाहर आते ही उसे एक ऐसी भी तेजी से भर्ती हुई नजर आई । उसे साहनी चला रहा था । जावेद अभी उसे जाते हुए देख अपने अगले कदम के बारे में सोच रहा था कि उसके पास एक पुलिस जी तेजी से आकर होगी । जी एक कांस्टेबल चला रहा था । उसके बगल में इंस्पेक्टर हेमंत बैठा था । जावेद को देखकर वह चलाया हूँ । जावेद अख्तर जावेद जीत के पास पहुंचा कैसे हैं जावे? किसी का इंतजार कर रहे थे क्या नहीं । जावेद अभी भी सोच में डूबा हुआ था । फिर वो बोला अगर तुम पुलिस चौकी जा रहे हो तो क्या मुझे साहनी के घर तक छोड सकते हो? बिलकुल छोड सकते हैं । बैठे हैं । जावेद जीतने पीछे सवार हो गया । कांस्टेबल ने जीत आगे बढा दी । कुछ देर बाद हेमंत बोला काफी गहरी सोच में मालूम पड रहे हैं । लगता है तुमने न्यूज नहीं सुनी । आईएसआई के की सुनी फिर भी इत्मीनान से हो । मुझे पता है वो कुछ नहीं कर पाएंगे । कुछ ही देर में उन पर एयरफोर्स व आर्मी काबू पालेंगे । गैर मुझे नहीं लगता । अब उस बात को लेकर गहरी सोच में है । कोई और रहे से आपको उलझाए हुए हैं । और इसीलिए आप साहनी के घर जा रहे हैं । जावेद चुप रहा । फिर धीरे से बोला । उसका असली नाम नूरमोहम्मद है । हेमंत ने चौकर उसकी तरफ देखा । वो कश्मीर में पैदा हुआ और उसके माँ बाप को खाली ने मार दिया था । वो खाली से बदला लेने की फिराक में जानबूझकर खुद को आईएसआई के हाथों फंसाता चला गया था । क्या बात कर रहे हैं? फिर तो वो खुद आतंकवादी बन गया होगा । इस खुलासे के बाद मेरे दिमाग में कई सवाल पैदा हो गए । इसीलिए साहनी के घर जाकर शिनाख्त करना चाहता हूँ । इसीलिए साहनी के घर जाकर शिनाख्त करना चाहता हूँ । फिर तो मैं भी आप के साथ जाऊंगा । आखिर इस केस पर मैंने भी काम किया है । सबूतों के तौर पर आपको जेल भी भिजवाया । ये जानते हुए भी कि आप बेगुनाह तो मानते हो । मैं बेगुनाह हूं बिलकुल सर । अब आपने सहानी के बारे में जो खुलासा किया है उससे तो मुझे यही समझ में आ रहा है कि इस पूरे माया जाल में उसी ने आपको बताया था था । पर आईएसआई के आदेश पर ऐसा उसका कहना है नहीं और आपको शायद यह संशय है कि ये सच है कि नहीं । जावेद ने हामी भरी मुझे भी शक हो रहा है । चलिए देखते हैं । कुछ देर में वह साहनी के बंगले पर थे । सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें रोकने की कोशिश की, पर पुलिसिया और जासूसी रॉक दिखाते हुए हेमंत और जावेद ने उनकी एक नहीं चलने दी । वो दोनों बंगले के अंदर बैठक में पहुंचेगी । पहले उन्होंने बैठक की तलाशी ली, फिर दूसरी मंजिल पर सभी कमरों की फिर वापस नीचे बैठक में आ गए । सानी आईएसआई का साथ दे रहा था तो कहीं तो इस बात का सबूत मिलेगा । हेमंत बोला कुछ विशेष उपकरण जावे । ध्यान से चारों तरफ देख रहा था । मेरे ख्याल से हिमन्त ने कहना चाहा । पर जावेद ने उसे चुप रहने का इशारा किया । ऐसा लग रहा था जावेद कुछ सुनने की कोशिश कर रहा था । सुनाई दिया । उसने पूछा क्या? हेमंत उलझन भरे स्वर में बोला । ठीक ठीक घडी की आवाज पर इधर तो कोई घडी नहीं दिखाई दे रही है । वही तो जब घडी नहीं है तो आवाज कहाँ से आ रही है । मुझे तो अभी भी कोई आवाज नहीं आ रही है । ध्यान से सुनो कहते हुए जावे । बैठक की एक दीवार के पास आ गया और उससे कम हटा दिया । फिर उसने हेमंत को भी वैसा करने का इशारा किया । हेमंत नहीं कान लगाया और बोला पर हाँ आवाज आ रही है तो क्या घडी दीवार के अंदर दीवार के आरपार घडी की आवाज बडा कैसे आ सकती है? आ सकते हैं अगर दीवार मोटे कंक्रीट की जगह पतली लकडी की होगी जावे । दीवार को ठोकते हुए बोला । हेमंत ने पाया जावेद सही बोल रहा था । दीवार लकडी की थी । हाँ कहकर जावेद दीवार के पीछे वाले कमरे की तरफ पड गया । हेमंत भी उसके पीछे पहुंचा । दूसरी तरफ एक छोटा सा कमरा था पर इधर तो कोई खडी दिखाई नहीं दे रही है । हेमंत ने कहा जावेद कमरे से निकलकर वापस बैठक में झांकने लगा और फिर कमरे में आया । फिर ध्यान से कमरे और बैठक के बीच की दीवार को देखने लगा । इस कमरे की दीवार लगभग पांच फिट मोदी है । भला इतनी मोटी दीवार कैसे हो सकती है । लेकिन दीवार होती तो भले ही एक बार मान लेगा । हेमंत ने भी देखा और फिर स्वीकृति में बोला तो आप ठीक रहे । जावेद कमरे के अंदर आएगा । उस दीवार पर वो वार्ड बनाते । उसने उसे खोला । उसके अंदर खूब टटोला । फिर पाया कि वह रोप के अंदर का खर्चा तो दरवाजे की तरह खुल गया जिसके अंदर अंधेरा था । फिर पाया की वॉडरोब के अंदर का खर्चा तो दरवाजे की तरह खुल गया जिसके अंदर अंधेरा था पर आराम से अंदर जाया जा सकता था । जावेद ने टॉर्च निकली और उस गुप्त स्थान में रोशनी डालते हुए अन्दर प्रविष्ट हो गया । हेमंत ने भी उसका अनुसरण किया । अब वह एक आठ चार फुट के गुप्त कमरे में थे । जावेद को दीवार पर एक स्विच दिखाई दिया । उसने बटन दबाया तो वहाँ ट्यूबलाइट का प्रकाश फैल गया । वहाँ कोने में एक एंटी घडी रखी थी और उसके बगल में रखा था एक रिमोट जैसा डिवाइस । जावेद ने वो रिमोट उठाया और उस पर लगा ऑन ऑफ बटन दबाया । बटन दबाते ही घडी रुक गई । उसने फिर बटन दबाया । घडी चल पडते हैं । उसने फिर बटन दबाया, घडी चल पडी । तो ये था घडी के रुकने का राज । हेमंत गहरी सांस छोडते हुए बोला । फिर कोने में पडे लम्बे से बैग को खोला गया और उसमें उन्हें एक से एक हथियार मिले । कमरे से उन्हें एक मोबाइल फोन और कई सिम कार्ड भी हासिल हुए हैं । कुछ ऐसे ही हथियार तो आपके घर से बरामद हुए थे । हेमंत बोल सही फसाया आपको सर मुझे तो ये सारा इंतजाम देख के लग रहा है वो वाकई आतंकवादी था । जावेद के चेहरे पर सख्त भाव मैंने बताया नहीं । पर दरअसल आज सानी मेट्रो उद्घाटन में मानव बम बनकर आए । क्या? हेमंत पूरी तरह से चौका? हाँ, मैं अब तक इसे उसकी मजबूरी समझ रहा था । अपनी बहन की जान बचाने के लिए । उसकी बहन भी है । हाँ, उसकी बहन रॉ ऑफिसर है और ये दोनों खाली से बदला ले रहे हैं । हो उसकी बहन एक लॉ ऑफिसर हैं ये तो कमाल की बात है । पर फिर भी सर कोई आम आदमी ऐसी धमकी के बावजूद एक ही दिन में मानव बम बनने के लिए राजी नहीं हो जाता है । पर अगर वह कई सालों से इस मिशन पर काम कर रहा था तो वो आम आदमी कहाँ हूँ? यकीनन वो ऐसे हालातों के लिए मानसिक तौर से तैयार होगा । आखिर खली जैसे आतंकवादी से बदला लेना चाहता था । मुझे समझ नहीं आ रहा आप उसके फीवर में है या नहीं । मुझे नहीं पता है ये बात तो तय है कि उसने यह सारी साजिश रचने में आईएस आए और खाली का साथ दिया है । पर ये सब उसने उससे बदला लेने के लिए ही क्या अभी भी गारंटी के साथ नहीं कहा जा सकता है तो मानव बम तो वो बना पर आपने उसे फटने नहीं दिया । जाहिर है फिर वो अभी कहा । वो मेट्रो स्टेशन से गायब हो गया । वो मेट्रो स्टेशन से गायब हो गया । उस वक्त ना उसे ढूंढते हुए बाहरी आया था । अच्छा तो फिलहाल क्या करना है? मुझे लगता है वो सोहनगढ गया है खाली ले के पास । हाँ, अगर वह वाकई खाली से बदला लेना चाहता है या उसका साथ ही है तो भी मैं चलता हूँ । पर वहाँ तो अब आर्मी और एयरफोर्स हमला करने वाली होगी । हाँ और अगर साहनी निर्दोष है तो मुझे उसकी मदद करनी होगी । निर्दोष तो वो कैसे भी नहीं है । भले ही उसने अपना पर्सनल बदला लेना चाहता, पर इसके लिए उसने आपके यानी एक सरकारी अफसर के खिलाफ साजिश में साथ दिया और उस मॉर्डल का मर्डर में क्या है? मैं ऑर्डर के बारे में तो मुझे नहीं लगता । मेरी माने तो सारा जाल साहनी का ही बिछाया हुआ है । मास्टरमाइंड तो पोलित साहनी पहले शादी ढंग से आपको फंसाकर जेल पहुंचाया और फिर जब खुद पैसा तो उतनी ही चालाकी से बाहर भी आ गया । अरे सर, मिनाज का फोन इसी ने किया होगा इसलिए बेड करे पर जो वहाँ मिला था उस पर इसके फिंगरप्रिंट मिले थे । ये उसे गलती से उधर फेंका आया था । आपके जॉनसर कुछ चौकीदार को पकडकर लाए थे जिसने गवाही दी थी कि साहनी मिनाज की मौत की रात उसके फ्लैट में था । बाकी रही पोलोनियम की कहानी तो वह सिर्फ कहानी ही होगी जो अपना पक्ष दमदार बनाने के लिए इस ने बनाई होगी । ऐसा कैसे हो सकता है? क्यों नहीं हो सकता है आप बताइए आपको क्या पोलोनियम या उसके सहानी के पास कभी होने का कोई सबूत मिला? जावेद ने सोचते हुए कहा नहीं उसके घर में नहीं है ना मिनाज के ब्लड के सैंपल में मिलेगा वो तो दो साल बाद ब्लड मेट्रेस करना वैसे ही मुश्किल है । बस हेमंत ने चुटकी बजाएंगी इसी बात का तो फायदा उठाया उसने आज की तारीख में चाहकर भी तो आप उसे वेरीफाई नहीं कर सकते इसलिए उसने आसानी से ये कहानी गजाली । जो भी हो मैं सोहनगढ जा रहा हूँ । कमरे से बाहर निकलते हुए जावेद बोला तुम बंगला सील कराकर आगे की कार्रवाई करूँ । तुम बंगला सील करवाकर आगे की कार्यवाही करूँ ऍम जावेद बिना कोई जवाब दिए बाहर की तरफ बढ गया । साहनी ने कार्माइन से काफी पहले रोगी । फिर उसने फोन उठाया और किसी को वह सब कॉल की । मैं उसके पास पहुंच गया हूँ । साहनी बोला फिर कुछ देर दूसरी तरफ से बोलने वाले को सुनता रहा । ठीक है । उसने अंत में कहा । फिर फोन एक तरफ रखकर गाडी से उतरा और पीछे का दरवाजा खोलकर एक बैग उठाया । उसमें काली वर्दी थी । उसने अपनी पुलिस की वर्दी उतारी और काली वर्दी । पहले अंदर विस्फोटक बेल्ट । वो अब भी पहने हुए था । अंत में उसने चेहरे पर नकली दाढी मूंछ लगाई और फिर काला नकाब चढा लिया । अब सिर्फ उसकी आंखें दिखाई दे रही थी । फिर सानी ने डिक्की खोली और एक लंबे से बैठे हुए उसमें तरह तरह के हथियार था । उसने कई हथगोले अपनी पोशाक में उपयुक्त जगह छिपा ली । फिर उसने कुछ पिस्टल जेब में रखी । अंततः एक मशीनगन उठाई और कंधे पर तंग । फिर वो तेजी से माइन्स की तरफ बढ गया । माइनस के मुख के पास उसे तीन वर्दीधारी दिखाई जिनमें से एक इंटरपोल वाला था । उसने आगे बढकर साहनी की पोशाक में छपा एक नंबर पढते हुए पूछा लडाकू नंबर तीन सौ चार जी हाँ, अंदर चलो और रिपोर्ट तो जी

Part 14

साहनी उसके साथ अंदर हो लिया । माइन्स की दीवार के अंदर गुप्त रास्ते से वह अंदर पहुंच गए । नहीं सहानी बोला कहाँ है वो बहुत उताबले हो उससे मिलने के लिए । जिंदगी में किससे मिलने के लिए मैं आज तक इतना उतावला नहीं हुआ । वो लोग कंट्रोल रूम में होंगे और कौन है वहाँ? अब सलवा हैदर हो गया चलो । हिंदुस्तान के सभी लोग उस वक्त टीवी स्क्रीन पर जमे हुए थे । उस की खास वजह थी और वो थी सभी न्यूज चैनल्स पर दिखाए जाने वाला वो वीडियो न्यूजरीडर बोल रहा था । अभी अभी आईएसआई के के लीडर खलीली ने यूट्यूब पर ये वीडियो प्रसारित करते हुए सभी भारतवासियों को धमकी दी है । कृपया ध्यान से देखिए । स्क्रीन पर खलीली का सर्द चेहरा था । उसने अपने आदमियों की तरह काली वर्दी पहनी हुई थी । हालांकि उसके चेहरे पर कोई नकार नहीं था । उसकी बढी हुई दाढी और मुझे उसके चेहरे की क्रूरता में और इजाफा कर रही थी । उसने बोलना शुरू किया । हिंदोस्तानियों वक्त आ गया है कि तुम लोग अपनी बेगैरत और नापाक जीने के धन को छोडने के लिए तैयार हो जाओ तो मैं सीखने के बहुत मौके दिए गए पर तुम्हें कुछ नहीं सीखा । तुमने दूसरे देशों पर हमारा झंडा लहराते हुए देखा पर तुम ने उसे नजरअंदाज कर दिया । इसलिए हमें यहाँ आना पडा तुम्हें मुनासिब ढंग से जिंदगी जीने सिखाने के लिए तो मैं सही राह पर चलाने के लिए तो उन लोगों की भलाई के लिए मैं सब करूंगा । पर इसके लिए तो मैं आईएसआई के को अपनी सरकार मानना पडेगा और मुझे अपना बादशाह । इसके लिए सबसे पहले तुम्हारे वजीरे आला को खुद को हमारे हवाले करना होगा । अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं एक के बाद एक हिंदुस्तान के कोने कोने में न्यूक्लियर हमला करूंगा जिससे हर तरफ तबाही मचेगी । जो मारेंगे वह खुशकिस्मत होंगे क्योंकि जो हमले में बच गए रेडिएशन के जहर से वो अपने आने वाले सालों में धीमे धीमे तडक केसर सडके मारेंगे और उनकी अगली कई पुष्टि आप अंक बीमार पैदा होती रहेंगी । हमारे ठिकाने पर किसी तरह से भी हमला करने की कोशिश पर हमें एक साथ कई मिसाइल छोड देंगे । जान लो कि ये मिसाइल किसी आम मिसाइल की तरह न होकर ड्रोन मिसाइल हैं और इन को काउंटर अटैक करना संभव है । इसलिए हिंदुस्तानी जनता अगर तुम अपनी और अपनी आने वाली पुश्तों की भलाई चाहते हो तो आपने वजीरे आला से कहूँ की खुद को हमारे हवाले कर दे । वीडियो समाप्त होते होते लोगों के दिलों में भय की लहर दौड गई । न्यूजरीडर फिर प्रकट हुआ । इस बीच प्रधानमंत्री कार्यालय ने भारत की जनता से अपील की है कि विपत्ति की इस घडी में धैर्य और साहस से काम लिया जाए । सरकार खाली और आईएसआई के को नेस्तेनाबूत करने की पूरी तैयारी कर रही हैं । हालांकि अपील लोगों को आश्वस्त नहीं कर पाई थी । अमर ने कार को ठीक साहनी की कार के पीछे रोका । जिनकी तेजी से उतरी और उसने कार में झांक कर देखा लगता है वहाँ उसके अंदर चला गया है । इतनी आसानी से नेगी से उसकी भी जान पहचान है । रोज हमें भी अंदर जाना होगा । जिनकी सोच लो तुम साक्षात मौत के मुंह में जाने की बात कर रही हूँ । क्या तुम्हें डर लग रहा है? नहीं तो मैं आगाह कर रहा हूँ । मेरी तो लाइफ का मिशन ही है । उसका खात्मा जिसमें हमारे जीवन की सारी खुशियां छीनने अगर मर भी गए तो क्या परामर्श अभी तुम्हारे सामने पूरी जिंदगी पडी है । मैं जानती हूँ ये सुसाइड मिशन है मेरे कारण तुम ही रिस्क मत । लोग आखिर आखिर हम दोनों कहते कहते रिंकी चुप हो गई क्या कहना चाहती हो रही थी । हम दोनों एक दूसरे के कुछ नहीं लगते । यही ना क्या यही जवाब है मेरे सवालों का जो होटल में मैंने तुमसे पूछे थे क्या? यही जवाब है मेरे सवालों का जो होटल में मैंने तुमसे पूछे थे । रिंकी अमर से नजरें मिलाने का साहस न ला सके । अमर ने उसके कंधे पर हाथ रखा । मैं जानता हूँ ऐसे हालातों में ऐसी बात करने का कोई मतलब नहीं है । पर अब मेरे लिए ये जानना बहुत जरूरी हो गया है । अमर मैंने कहा था तुम शायद मेरी सोलमेट हूँ पर मैं गलत थी । अमर उसे देखता रहा । इस सच्चाई में शायद की कोई जगह नहीं आई । लव यू टू अमर ने उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया । सिंह की मैं तुम्हारा हूँ हमेशा के लिए सोसाइट मिशन में अगर मुझे मौत भी आ गई तो हम नहीं होगा । जिस इंसान ने तुम्हारी आत्मा को चोट पहुंचाई उसके खून से हाथ सुनने की इच्छा मुझे भी है । रिंकी मुस्कुरा दी । उसकी आंखें आंसुओं से डबडबाई उठो चलो अमर पूरे जोश के साथ खोला । कहीं तुम्हारा भाई अकेले ही उसे खत्म कर देंगे । दोनों ने अभी भी वही काली वर्दी पहनी हुई थी । उन्होंने चेहरे पर नकाब चढा लिए और मशीनगन हाथों में संभाले माइन्स की तरफ चल रही है । कुछ ही दूरी पर उन्हें जमीन से निकला पाइप दिखाई दिया । उसके आस पास तीन लाशें थी । रिंकी ने अमर को रुकने का इशारा किया । पाइप के आस पास वैसे ही हालत है जैसे हम छोड कर गए थे । पाइप सुरंग से कनेक्टेड है । वो लोग अंदर छिपे हो सकते हैं । हो सकता है इधर किसी कैमरे से नजर रख रही हूँ । हम लोग उनकी वर्दी में है । उसका फायदा उठाते हैं । इतना आसान नहीं है । अब वो जानते हैं कि हम वर्दी पहन के भागे थे और इस वक्त पाइप के थ्रू अंदर जाने की सेवा कोई और रास्ता मुझे समझ नहीं आ रहा तो ऐसा करते हैं । मैं जाता हूँ तुम यहीं छिपकर मुझे कवर देना । मैं सब चक्कर लूंगा । अगर सब ठीक रहा तो फिर तुम भी आ जाना पर अमर यहाँ हमला कभी भी किसी भी तरह से हो सकता है । उनकी न्यूक्लियर मिसाइल लॉन्चर, जमीन फाडकर बाहर निकल आती है । यहाँ लैंडमाइंस भी तो हो सकती हैं । स्नाइपर छिपे हो सकते हैं, अभी तो लेना ही होगा । वैसे भी मुझे नहीं लगता वर्दी में देखकर वह बिना जांचे हमला करेंगे । पर अमर ने उसका चेहरा हाथों में लिया और आंखों में देखते हुए बोला चिंता मत करो मुझे कवर तो मेरी सेफ्टी अब तुम्हारे हाथों में हैं । रिंकी ने गहरी सांस ली, फिर हामी भरेंगे । उसने वही चट्टानों में छिपकर पोजिशन ले लेंगे । हमारे गार्ड की स्वाभाविक चाल के साथ पाइप की तरफ पड गया । पाइप के पास पहुंचकर अमर ने अंदर झांककर देखा । रास्ता साफ था । नीचे रोशनी भी दिखाई दे रही थी । अमर नहीं । दिन की को उस तरफ आने का इशारा किया जिनकी वहाँ पहुंच गई । पहले अमर सीढियों से बाइक में उतरा और फिर उसके पीछे रिंकी अंतिम सीढी पर बहुत पढते ही अमर की पीठ पर जोरदार प्रभाव हुआ । अंतिम सीढी पर पांव पढते ही अमर की पीठ पर जोरदार प्रहार हुआ । वो नीचे जा गिरा । जावेद ने माइंड से काफी पहले कार रोक दी । यहाँ से छिपते छिपाते पैदल आगे बढना होगा । वो कार से उतर आया । उसके पास एक ऑटोमैटिक राइफल थी । वह कई अन्य गुप्त हथियार थे जो उस की पोशाक में छिपे हुए थे । वो आगे बढने लगा माइंड अभी काफी दूर थी । जावेद के दिमाग में कई सवाल कौन रहे थे? क्या ऐसा हो सकता है कि नहीं? क्या ऐसा हो सकता है कि साहनी अपने माँ बाप के कातिल का साथ दे रहा हूँ । खाली के लेवल का आतंकवादियों का गुरु एक इमोशनली बिगडे हुए इंसान को यू शीशे में जरूर उतार सकता है । पर फिर भी ये बात हजम नहीं हो रही है । ऐसा भी हो सकता है की वो उसके लिए सब कुछ कर रहा हूँ । पर मन में अभी भी उससे बदला लेने का इरादा रखता हूँ । क्या खाली को साहनी कि असलियत शुरू से मालूम थी पर फिर खाली खुद ही ऐसा क्यों लेगा की अपने दुश्मन को साथ मिलकर इतने बडे मिशन पर काम करें । तभी अचानक से तभी अचानक कहीं से फायरिंग हुई जावे । तुरंत जमीन पर गिर गया । फिर देखते हुए सामने झाडियों के एक झुरमुट के पीछे पहुंचा । सामने पहाड से फायरिंग हो रही है । शायद खाली ने स्नाइपर बैठा रखे हैं । तभी जावेद को अपने पीछे से आवाजाही अपनी राइफल जमीन पर रखकर खडे हो जाओ, बदलने की कोशिश मत करना । जावेद के पास कोई और चारा नहीं था । उसने वैसा ही किया । तभी अचानक उसे अपने सिर पर भारी चीज का प्रहार महसूस हुआ और फिर उसकी चेतना लुप्त होती चली गई । कमिश्नर गोपीनाथ तेजी से कार चला रहा था । वह बदहावास दिख रहा था । उसके हाथ काट रहे थे । उसने तीसरी बार मोबाइल पर नंबर घुमाया । इस बार दूसरी तरफ से किसी ने फोन उठाया । बोलो कमिश्नर जैसा तुमने बोला था मैं आशियाना की तरफ आ रहा हूँ । अब बताओ मेरी बेटी कहाँ है? कमिश्नर मुख्यमंत्री अभी भी जिंदा है । दूसरी तरफ से ठंडे स्वर में कहा गया क्या? क्या? तो वो कैसे? दूसरी तरफ सन्नाटा छा गया । उसमें मैं क्या कर सकता हूँ अगर तुम्हारा आदमी काम नहीं कर पाया । जावेद को ये बात कैसे पता चली? मुझे क्या पता? फिर सन्नाटा छा गया । मैं अपनी बेटी की कसम खाता हूँ । मैंने इस बारे में जावेद को कुछ नहीं बताया और किसी को नहीं बताया । मेरी बीवी को भी नहीं पता है कि उसकी बेटी का अगवा हो गया है । मेरी बीवी को भी नहीं पता कि उसकी बेटी अगवा हो गई है । मेरा यकीन करो । सन्नाटा अभी भी छाया था । गोपीनाथ की आंखों में आंसू आ गए । वह रोते रोते प्रार्थना करने लगा । मेरी बेटी मेरे कसूर है । मैंने वह सब कुछ किया जो तुमने कहा । मैंने किसी को कुछ नहीं कहा । फिर दूसरी तरफ से चुप्पी टूटी । ठीक है कमिश्नर तुम्हारी बेटी सेक्टर सी के मकान नंबर पांच सौ तीन है । सोन कट गया । कमिश्नर ने हैरानी से फोन की तरफ देखा । उसके आंसुओं से भरे चेहरे पर रौनक आ रही हैं । पांच सौ थी । पांच सौ तीन बाहर देखते हुए वह बढाने लगा । कुछ ही देर में उसे मकान नजर आ गया । उसने कार साइड में रोकी और उतरा । अभी उसने मकान की तरफ कदम बढा ही थे कि उसके पीछे एक और कार आकर रुकी । उसमें से चार लोग निकले । सबसे आगे काले सूट में एक अधेड व्यक्ति था तो क्या? गोपीनाथ तो बोला अब तो हाँ मैं मेट्रो स्टेशन से तुम्हारे पीछे हूँ । गोपीनाथ उसे देखता रहा । फिर मकान की तरफ झगडा अब है । सीखा पागल मत बनो को बिना तुम्हारी अकल पर पत्थर पड गए हैं तो मैं पुलिस वाले हो, कमिश्नर होगा । ऐसे ही किसी में फंसा हो गए । वहाँ मेरी बेटी है । तुम्हें पता है हमारे देश में इमरजेंसी लगी है । आईएसआई के किसी भी वक्त देश पर परमाणु हमला करने वाला है । अब है । टहलते हुए उसके नजदीक आ गया । और तो मैं ऐसे आतंकियों की बात पर विश्वास कर लोगे । अब मैं ये रिस्क लेने को तैयार हूँ । पर क्या इस मुसीबत की घडी में देश एक एक करके अपने उच्चतम पुलिस कर्मी जासूसों को खोने के लिए तैयार है । अरे बेवकूफ समझो उनके मिशन को । गोपीनाथ ने एक गहरी सांस ली और फिर अचानक अभय को धकेलकर घर के दरवाजे की तरफ भागा । अब है की टीम ने गोपीनाथ की तरफ हथियार कुमार लोग अब है सीखा गोलपार नहीं करेगा । गोपीनाथ दौड कर मकान के दरवाजे तक पहुंचा और उसे खोलकर अन्दर प्रविष्ट हो गया । कंट्रोल रूम के बाहर हमेशा की तरह दोनों साथ फुटे गार्ड्स और उसके अलावा कई और आतंकी तैनात थे । अंदर अफसल और हैदर मौजूद थे । इंटरपोल का आदमी यानी नेगी साहनी के साथ पहुंचा, पर उन्हें बाहर ही रोक लिया गया । हमें तो जोर से मिलना है । नहीं बोला क्यों? लडाकू तीन सौ चार शहर से अहम खबर लेकर आया है । वहाँ हम पर हमला करने की गुप्त रूप से तैयारी चल रही है । यही तो कहकर उसने वॉकीटॉकी पर बात की । फिर उनसे बोला आपने हथियार यही छोड दो । दोनों ने तुरंत अपनी मशीनगन उतारकर वहीं रख दी और अन्दर प्रविष्ट हो गए । अंदर आते ही उन्हें कई कंप्यूटर स्ट्रीम्स और दे स्पोर्ट नजर आएगा । उनके सामने अवसर और हैदर बैठे हुए थे । बोलो उनकी तरफ देखे बगैर । अफसल ने कहा हो जोर कहा है । नेगी ने चारों तरफ देखते हुए पूछा बोलना है हम से बोलो अफसल कडक स्वर में बोला हूँ लेकिन अदब के साथ झुककर कहना शुरू किया । लखनऊ में कुछ ही देर में स्पेशल कमांडो और ऍम होने वाले हैं । फिर वहाँ से स्पेशल मिलिट्री ट्रूप्स के साथ वो लोग मिलिट्री हेलीकॉप्टर से हम पर हमला करने वाले हैं । हैदर के चेहरे पर मुस्कान आ गई । उनके लिए एक मिसाइल काफी रहेगी जी । इसके अलावा फाइटरजेट से एयरफोर्स वाले हमारे लॉन्चर को उडाने के इरादे से आने वाले हैं । आने दो उन्हें बता चलेगा कि किससे मुकाबला कर रहे हैं । अचानक अफसल ने स्क्रीन से नजर हटाई और नेगी की तरफ देखा शहर से तुम आये हो या ये उसने साहनी की तरफ इशारा किया ये आया है तो मैं ऐसे बोलने का मौका क्यों नहीं दे रहे हैं । आप तो जानते हैं हमारे कुछ लडाकू होंगे तो मालिक होना । हैदर ने पूछा जी अपना चेहरा देखा हूँ । नेगी ने बे झिझक नकाब हटा दिया । अब उनके सामने मालिक का चेहरा था जिसकी दारी मुझे बेहतर तीन से बडी थी । आंखें गड्ढों में धंसी हुई नहीं । हाँ हम तो मैं पहचानते हैं । काफी बहादुर हो तो है । माइंड में शुरू से रह रहे हो जी दो साल हो गए बहुत वो अब तुम अपना चेहरा देखा हूँ । उसने सहानी को इशारा किया । साहनी ने नेगी की तरफ देखा हम तुम से बात कर रहे हैं । हैदर तेज स्वर में बोला हूँ । साहनी का दिल उसकी छाती पर धारधार बज रहा था । उसने धीरे से अपने नकाब की तरफ हाथ बढाया । मकान में घुसते ही मकान में घुसते ही गोपीनाथ को कमरे के बीच में उसे उसकी बेटी कुर्सी पर बैठी नजर आई । उसके हाथ पीठ के पीछे बंधे हुए थे । क्या उसे देखकर वह चीखता हुआ अंदर आ गया । पापा आगे बताना तो हर बढाते हुए बोली क्यों? वो कमरे में चारों तरफ देखते हुए बोला यहाँ यहाँ पर कैमरे लगे हुए हैं । अगर उन्हें आप दिख गया मैं यहाँ से हटती हुई देखी तो इस बम को उडा देंगे । कहाँ है हम? कुर्सी के नहीं चाहिए । गोपीनाथ ने देखा वाकई उसकी कुर्सी के नीचे एक बडा सा बम रखा था । उसके आकार से ये साफ पता लग रहा था कि उसके फटने की दिशा में कमरे में किसी के भी जीवित बचने का कोई आसार नहीं है कि उसके फटने की दशा में कमरे में किसी के भी जीवित बचने के कोई आसार नहीं थे । तब तक अब है और उसकी टीम कमरे के अंदर पहुंचे । गोपीनाथ ने अंदर के हालात से उन्हें अवगत कराया । एक एजेंट ने अभय के कान में कुछ बोला । अब मैंने स्वीकृति में सिर हिलाया । क्या हुआ? गोपीनाथ ने पूछा एक रास्ता है वो? फुसफुसाकर बोला कॅलेज कैमरे ट्यूब कैमरे ट्यूबलाइट के पास लगे हैं । एक एजेंट कैमरे की नजर से बचकर उनके पास पहुंचेगा और फिर उसे निष्क्रिय कर देगा । तभी दूसरा एजेंट दौड कर नित्य को कुर्सी से उठा जाएगा । तभी दूसरा एजेंट दौड कर हत्या को कुर्सी से उठा लाएगा । पर अगर कैमरा बंद हुआ तो भी वो बम उडा देंगे और क्या जा रहा है तो कोई आईडिया समझा रहा हो तो बताओ । उन्होंने मुझे वादा किया है कि कहते हुए गोपीनाथ चुप हो गया । उसे याद आया । उन लोगों ने सिर्फ ये बोला था की नित्य इस मकान में हैं । ऐसा साफ नहीं बोला था कि वो उसे छोड रहे हैं से समथिंग गोपीनाथ ने सहमती में से रहे है । अब मैंने तुरंत एजेंट को इशारा किया । वो दीवार से चिपक ते हुए ट्यूबलाइट के नीचे पहुंचा । फिर एक कुर्सी लगाकर उस पर खडा हो गया । फिर उसने कैमरे से छेडछाड शुरू की । वायरिंग देखते ही उसने उसे काटा और अब है की तरफ इशारा किया । गौर अब है कि बोलते ही दूसरा एजेंट नित्य की तरफ थोडा गोपीनाथ का दिल तेजी से धडक रहा था । एजेंट ने लपक कर नित्य की कुर्सी सहित उसे उठा लिया और उसे लिए दरवाजे की तरफ भागा । गोवा को अब है सभी को बाहर भागने का निर्देश देते हुए बोला सबसे पहले नित्य को लिए एजेंट ने मकान के बाहर कदम रखा । उसके पीछे अभय नहीं और फिर कैमरा खराब करने वाले एजेंट नहीं । अंत में गोपीनाथ ने बाहर कदम रखा । ठीक कभी बंभाडा एक कर्णभेदी धमाका हुआ । सभी उछलकर दूर जा गिरे । मकान के अंदर से आपका भाव का बाहर तक निकला और गोपीनाथ उसकी चपेट में आ गया । बम क्या अनगिनत छर्रे उसके शरीर में समा गए थे । सामने से वो सभी को ठीक ठाक दिखा पर जब वो जमीन पर गिरा तो उसकी पीठ और पैर पर आपकी लडते नजर आएंगे । प्यारी नित्य चीखते हुए उस की तरफ लपकी पर एजेंट ने उसे पकड लिया । अभय नहीं जेब से फोन निकाला और तुरंत एंबुलेंस को और फिर फायर ब्रिगेड को फोन किया । गोपीनाथ दरवाजे के पास ही गिरा था और मकान अब आपकी लपटों में घिरा हुआ था, जिसके कारण वह लोग उसके नजदीक भी नहीं जा पा रहे थे । गोपीनाथ सिर्फ घायल हुआ था पर अब वह आग की चपेट में आ गया । उनकी आंखों के सामने वो जलता चला गया । नित्य बादलों की तरह चीखती रही । उसने एजेंट की गिरफ्त से खुद को छुडा लिया । पर फिर अब मैंने उसे पकड लिया । देखते ही देखते गोपीनाथ का पूरा शरीर चलने लगा । उसने अपनी बेटी की तरफ देखते हुए हाथ उठाया । अंकल अंकल फॅमिली को बचाइए । अब है कुछ नहीं बोल सका । वो उससे सख्ती से पकडे अपने एकमात्र दोस्त को जिंदा चलते हुए देखता रहा । उसके पत्र आए हुए चेहरे पर आंखों से लडका आया आंसू चमक रहे थे । गोपीनाथ के चेहरे पर भी आग लग गयी । उसकी चीखें फुफकारती आपकी आवाज में तब कहीं फिर वो घुटनों के बल बैठा और अंततः है । उसका धुंधु चलता हुआ शरीर जमीन पर गिर गया । जावेद को होश आ रहा था । उसने अपने चेहरे पर पानी के छींटे महसूस की । आंखे खोलते ही उसे चारों तरफ काली पथरीली छत दीवार नजर आएंगे । फिर उसको खलीली का चेहरा दिखाई दिया । ऐसे हो मेजर जावेद खान खलीली ने पूछा जावेद उठकर बैठ गया । वो ध्यान से खलीली को देखने लगा । क्या देख रहे हो? जावेद चुप रहा । देखो ध्यान से देखो इस चलेगा तुम अपने शहंशाह को देख रहे हो । हिंदुस्तान यानी आईएसआई के के शहनशाह हो था । इस देश का नया नाम यही होगा इस्लामिक स्टेट ऑफ इंडिया इन कश्मीर इसकी राजधानी होगी । लखनऊ तो मैं पसंद आएगा ना । फिर तुम्हारे राज्य की राजधानी अब देश की राजधानी बनेगी । ऐसा लगा तो मैं इस मास्टरमाइंड का प्लान । अचानक जावेद उसपर झपटा पर वो उस तक पहुंचने में असमर्थ था क्योंकि उसका पैर जंजीरों क्योंकि उसका पैर जंजीर से बंधा हुआ था । जावेद बोला तेरे ये खाप कभी सच नहीं हो पाएंगे । खलीली तो उन्हें भारत की ताकत को गलत आता है तो उन्हें जो हिमाकत की है उसकी सजा तुझे बहुत जल्द मिलेगी । मेरा मिशन खुदा कमिशन इसी में सबकी भलाई है । तू तो समझता है जो काम तूने मिडिल ईस्ट में क्या है वो भारत में भी कर लेगा । क्यों नहीं शुरुआत शहर से होगी । ये शहर मेरे कब्जे में होगा और यहाँ से धीरे धीरे हम अपना दायरा बढाते चले जाएंगे । खुद को मास्टरमाइंड कहते हो और ऐसा कमजोर प्लैन बनाकर उसे खास देख रहे हो तो मैं पता है हमारे देश की आर्मी कितनी बडी है । एयरफोर्स कितनी ताकत पर है । खाली व्यंगपूर्ण ढंग से मुस्कुराया । फिर बोला, जो लोग बात को पूरा समझे बिना ही निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं, वो कभी सफल नहीं होते जैसे कि तुम और तुम्हारी सीक्रेट साॅस । कोई भी मेरे प्लान को नहीं समझ सका और इस बात का फायदा मुझे पहुंचा और मैं आज इस मुकाम पर पहुंच गया तो मैं आईएसआई और हमारी गतिविधियों के शुरू में लेट जरूर मिले थे और मैंने तुम्हें उस दिशा में आगे काम करने का मौका ही नहीं दिया । तुम है और तुम्हारी सीक्रेट सर्विस को मैं कभी पंकज के मर्डर, कभी मिनाज के मर्डर में उलझाए रहा । फिर मैंने तुम्हें अवैध हथियार रखने के जुर्म में फंसा दिया । आखिर तुम हमारी तरफ ध्यान देते भी तो कब? इधर मेरे मुख्य मिशन का काम निर्विघ्न रूप से चलता रहा । न तुम लोगों ने कभी सोचा कि ये पता किया जाए कि सहानी के ट्रांसपोर्ट से हथियार कहाँ जा रहे हैं । इतना ही तो मैं पता चला कि हमने माइन्स में अपना हेडक्वॉर्टर बना लिया है । पुलिस को हम शहर के अंदर आतंकवादी हमलों में उलझाए रहेंगे । हमारे आदमी पकडे भी गए और उनसे वैसे भी कोई जानकारी उगलवाना नामुमकिन था । गूगल बातें भी तो क्या पता लगता मुख्य मीशन के बारे में तो गिनती के सिर्फ चार पांच लोगों को पता था । अब रही बात हिन्दुस्तान की आर्मी और एयरफोर्स की वो कुछ नहीं कर सकेंगे क्योंकि हम लोग शहर की जनता के बीच में भी मौजूद हैं । यही तो खास बात है मेरे प्लान की । अगर हम बॉर्डर पर होते तो भारत बेहिचक हम पर किसी भी तरह का हमला कर देता हूँ । पर वो अपनी आवाम पर मिसाइल नहीं गिरा सकते हैं । इतना यहाँ न्यूक्लियर हमला कर सकते हैं । जबकि हम ये सभी चीजें करने में सक्षम हैं । हिंदुस्तान हमारी धमकी के आधार पर कुछ भी करेगा । पहले तुझे कश्मीर से खदेडा गया और तो बच गया पर अब तो उन्हें यहाँ आकर बडी गलती की है । खाली ले इस बार तुझे भागने का मौका नहीं मिलेगा । तेरी कपडो यही बनेगी । मुझे सब याद है मुझे कश्मीर से खदेडने में और मेरे पास लोगों को खत्म करने में । तेरह अहम हादसा मेजर जावेद खान मुझे पता है उसी बात का बदला लेने के लिए तूने मुझे टारगेट किया है ना खाली लीटर हरा मेरी खाई थी कि तुझे लोग देशभक्त की जहाँ देशद्रोही का दर्जा दे जो अपने ही लोगों के हाथ कुत्ते की मौत मारा जाए और वो तेरी लाश पर ठीक है । खैर भारत के सोचते जुडीशियल सिस्टम के कारण ये तो हो नहीं सका पर फिर भी मुझे यकीन है कि अभी भी लाखों लोग तुझे गद्दार ही मानते होंगे । मुझे बहुत सुकून मिला था जब तुझे तेरे ही देश की जेल की हवा लगी बाकी रही मौत की बात वो ना दे सके तो मैं दे दूंगा । जावेद हंसा हमारे प्लैन में इतना दम नहीं था कि मुझे जेल में रखा जा सकेंगे । भारत के जुडीशियल सिस्टम पर उंगली उठाना तुम्हारी कमजोरी और बेबसी दिखा रहा है । अगर तुमने मुझे कायदे से फंसाया होता है तो मैं जेल से बाहर नहीं आ पाता । हमारा प्लैन ही कमजोर था । मिस्टर मास्टरमाइंड खाली दांत किटकिटाने लगा जावेद खान तो बोलना मेरे प्लान के बारे में जब एक के बाद एक भारत के हर शहर के चौराहे पर आईएसआई के का झन्डा लहराएगा और तेरी राजधानी में बैठी सरकार न्यूक्लियर धमाके में खत्म हो जाएगी । मेरे देश पर बुरी नजर डालने वाले मैं तेरे टुकडे कर दूंगा कहकर जावेद ने पैर में बंदी चीन को पकडा और जुनून के हवाले किसी जंगली हाथी की तरह चिंघाडते हुए उसे एक झटके में उखाड फेंका । सब मुंहबाएं उस दृश्य को देखते रह गए । आजाद होते ही वह खलीली पर झपटा, पर उसके पास पहुंचने से पहले ही काली वर्दीवाले गार्ड ने उसे दबोच लिया हूँ । उसके बाद जावेद पर लाभ घूंसे बसने लगे । पर उसके मुंह से कोई चीज क्या कर रहा नहीं निकली । वो खलीली की आंखों में आंखें डाल उसे घूरता रहा हूँ । जावेद खलीली ने अपने आदमियों को रुकने का इशारा करते हुए कहा, मैं तुझे कैसी बात बताऊंगा कि उसे सुनकर तो मेरा गुलाम बन जाएगा । गार्ड्स ने जावेद को कसकर पकडा हुआ था । फिर भी वो बुरी तरह से बेकाबू हो रहा था । तेरी बीवी और बच्ची जिंदा है और जावेद एकदम से ठहर गया । उसका मुंह खुला का खुला रह गया । सही ना हूँ, मेरी पुरानी आदत है । अपने खास दुश्मन के प्रियजनों पर जरूर हाथ डालो ताकि वो पूरी तरह से टूट जाए । काफी देर तक वहां सन्नाटा छाया रहा । फिर जावेद ने धीरे से पूछा अगर ये सच है तो तुमने मुझे इसी आधार पर ब्लैकमैल क्यों नहीं किया? क्योंकि मैं जानता था इसके बावजूद तो मेरे इशारों पर नहीं नाश्ते अपने शातिर दिमाग का इस्तेमाल करते हुए मेरे खिलाफ ही काम करते हैं । तो अब ये बात बोलने का क्या तुक है तो हम है चढता हुआ देखना चाहता हूँ झूठी सही पर तुम मुझसे भीख मान मेरे सामने जमीन पर नाक रख लो । ऐसा चाहता हूँ जावेद उसे खोलता रहा जानता हूँ इतनी आसानी से विश्वास नहीं करोगे तो हूँ कहकर खलीली ने जेब से फोटो निकाला । सोचा था कभी हिंदुस्तान में पकडा गया तो ये फोटो बहुत कम था । खैर ये नौबत तो आई नहीं । जावेद उसकी तरफ झपटा पर गार्ड की गिरफ्तारी पर गाज की गिरफ्त में उसे आगे बढने नहीं दिया । परेशान मत हो ये फोटो तेरे यही है कहकर खलीली ने फोटो जावेद की तरफ पढा रहे हैं । जावेद ने झपट कर फोटो ले ली और उसे देखने लगा । उस फोटो में कई लोग दिखाई दे रहे थे जो कि समंदर किनारे खडे थे । उनमें उसकी बीवी भी थी और उसकी बच्ची उसका हाथ पकडकर खडी नहीं उसकी फूल सी बच्ची जिसपर जावे जान छिडकता था । उसने ध्यान दिया कि उसकी बच्ची अब कुछ बडी हो गई नहीं । आखिर छह साल गुजर गए थे जावेद की आंखें जब जब आने लगी गले तो आखिर वाले भी होता है । चाहे वहाँ इंसान हो या एक कठोर जासूस । ऍम जावेद बरस पडा कहाँ रखा है तो नहीं? मार्ग का बच्चा है तो ऍम मैं तो सोच रहा था तो मुझे उनके बारे में जानने के लिए हाथ पैर जोडेगा खत्म मैं तेरे और तेरे सारे आतंकवादी भाइयों के टुकडे कर दूंगा । अच्छा सपने देखते रहो तो ठीक है । मैं कुछ देर में आता हूँ । तुझे तो अभी जिन्दा रहना है और भारत के बदलते नक्शे को देखना है । कहकर खलीली ने अपने एक आदमी को इशारा किया । उसने एक इंजेक्शन पीछे से जावेद की गर्दन पर लगा दिया । जावेद चौकर पालता फिर लहराकर गिर पडा । उस पर एक नजर डालने के बाद खलीली कैद खाने के दरवाजे की तरफ बढ गया । साहनी ने हाथ नकाब की तरफ पढाया ही था कि अवसर को वॉकीटॉकी पर सात फूटेगा । आज की भारी आवाज सुनाई नहीं कहाँ हाँ हुजूर आए हैं । बॅाल एकदम से अलर्ट हो गया । अगले ही पल दरवाजा खुला और खाली अंदर दाखिल हुआ । उसे देखकर अफजल हैदर खडे हो गए और एक फॅमिली बैठते हैं । वो पसीने पसीने हो रहा था । एक कुर्सी पर बैठकर वो माल को पंक्ति की तरह हिलाने लगा । आप कुछ लेंगे । हैदर ने अदब के साथ खलीली से पूछा शरबत पी रहा हूँ? हैदर ने खुद उठकर एक गिलास में शर्मा डाला और खाली की तरफ बढा दिया । अब जावेद हमारी कैद में हैं । शरबत का घोट मारते हुए वो बोला वहाँ हैदर खुशी से उछल पडा । उसका फिरने कश्मीर में हमारे लडकों को मौत के घाट उतारा था । उसे हमने मौका दिया था की गलती न करें और भारतीय आर्मी में रहते हुए और भारतीय आर्मी में रहते हुए हमारा जासूस बन जाएगा । बदले में उसने हमारे लडाकों को कटे हुए सिर भिजवा दी हैं और बदले में उसने हमारे लडाकों की कटे हुए सिर भेजवा दिया है । मैं वो मंजर आज तक नहीं भूल सकता हूँ । मेरे सबसे जांबाज और दुर्दांत लडाके थे । वो कहाँ है वह काफी हो । जोश अवसर बोला उसको तरह बात और पाकर मारेंगे । फिलहाल कैद खाने में बेहोश है । तभी खलीली की नजर नेगी और साहनी पर गई । ये दोनों कौन है? उसने पूछा उसके सवाल करते ही नहीं की और साहनी ने अदब से सर झुका लिया तो अपना न का बता रहे थे । अचानक अफजल साहनी से बोला साहनी योगी खडा रहा, अफसल उठा और उसने आगे बढकर खुद उसका लगा बता दिया । तीनों ताज्जुब से उसे देखने लगे । क्या नाम है तुम्हारा अफसर उसे पहचानने की कोशिश करते हुए बोला, नहीं, ये नहीं उससे पहले खलीली पूरा ये नूरमोहम्मद बहुत साल बाद तुम्हारे दीदार हुए हैं । खाली ले । साहनी उसे घूरते हुए बोला, खाली को साहनी में कई साल पुराने नोट का प्रतिबिंब दिखाई दिया तो हम इतने वक्त से आईएसआई के का साथ सिर्फ मुझसे इंतकाम लेने के लिए दे रहे हैं । जाहिर है, वैसे तो मैं मेरी असलियत कैसे पता चलेगा? तो मैं क्या लगता था कि तुम मेरी नाक के नीचे ही काम कर हो गए और मुझे तुम्हारी असलियत के बारे में पता नहीं चलेगा । तो हम अपनी बहन के साथ जब हाल ही में बचपन की यादे ताजा करने कश्मीर अपने पुराने घर चोरी छिपे गए थे तो मुझे पता चल गया था । अचानक साहनी अपनी वर्दी उतारने लगा । ऍम हैदर बोला, क्या कर रहा है? सीधे खडे रहे हैं । पर सहानी रुका नहीं । उसने अपनी शर्ट उतारी । उसके नीचे लिक्विड विस्फोटक से भरी जैकेट नजर आई । इससे पहले की कोई कुछ बोलता साहनी कूदकर खाली ले के पास आ गया और उससे ले पड गया । अफसल और हैदर के हाथ उनके हथियारों की तरफ पडे । खबर नेगी जेब से पिस्टल निकालकर उन पर तानते हुए बोला उनके हाथ रुक गए । खाली साहनी की पकड से निकलने की असफल कोशिश कर रहा था । हर थोडा ना बंद कर खाली नहीं वरना ट्रिगर दबाते ही मेरे साथ मेरे जितने भी उड जाएंगे तो क्या उसका साथ दे रहा है? अफजल लेने की से पूछा नेगी ने जवाब नहीं दिया । उनकी तरफ निशान लेकर खडा रहा । फिर बोला अपने खुदा को याद कर लो । कहकर उसने दो फायर किए और अफजल और हैदर दोनों को मार गिराया । फिर उसने तुरंत पलट कर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया । उसी वक्त बाहर से दरवाजे को पूरी तरह से खटखटाया जाने लगा । नेगी ने अवसर के हाथ से गिरा वॉकीटॉकी जमीन से उठाया और उसमें चलाया जो खडे रहो वरना तुम्हारे हुजूर को मार दिया जाएगा । प्रतिक्रिया में बाहर शांति छा गई । मुझे मारकर तो यहाँ से कभी जिंदा नहीं निकल पाएगा । नूर खाली बोला तो सही कह रहा है । साहनी बोला इसलिए तो हमारे साथ बाहर चलेगा । तभी बाहर से फायरिंग की आवाज आने लगी । आखिरी सीढी तक पहुंचते ही अमर की पीठ पर एक गार्ड ने राइफल के हत्थे से प्रहार किया । वो नीचे जा ही रहा हूँ । अब वो एक सुरंग में था । जहाँ पर्याप्त रोशनी थी । उसकी पीठ बुरी तरह से दुःख रही थी । पर दर्द को भूलकर अमर का ध्यान अपने हमलावर पर था जो की अब राइफल का हत्था अब उसके सिर पर मारने वाला था । अमर एक तरफ पलट कर खुद को बचा ले गया । इतने में रिंकी ने सीढियों से सीधे उस गार्ड के ऊपर छलांग लगा दी । वो कार्ड को लिए एक तरफ जा गिरी । अमर ने मौके का फायदा उठाया और उठ खडा हुआ । उसने चाकू निकाला और गार्ड के ऊपर हमला कर दिया । गार्ड भी कम चालाक नहीं था । उसने झटके से रिंकी को आगे कर दिया । अमर ने किसी तरह चाकू रोका वरना वे के साथ वो उसे ही घायल कर बैठता । रिंकी ने अपने पीछे खडे गार्ड पर कोहनी बीमारी जो उसके पेट में लगी । फिर उसने पलट कर एक एक उसके सिर पर मारी । अब इस बार अमर ने गार्ड को पकडा और चाकू उसके सीने में घुसा दिया । वो उसे तब तक था में रहा जब तक कि उसके प्राण नहीं निकल गए । जब गार्ड ने छटपटाना बंद किया तो अमर नहीं उसकी तरफ देखा । उसकी आंखें पथरा चुकी थी । वोट खडा हुआ ये रास्ता माइंड के अन्दर की तरफ ज्यादा लग रहा है । अमर इशारा करते हुए बोला फिर वो दोनों अपनी मशीनगन हाथों में लिए आगे बढने लगे । कुछ दूर चलने के बाद उन्हें एक सीढी दिखाई दी जो ऊपर की तरफ जा रही नहीं । दोनों सावधानी से ऊपर चढते हैं । अब वो माइनस में पहुंच गए थे । अंदर अंधेरा था । दूर रोशनी दिखाई दे रही थी जो कि शायद किसी बंद दरवाजे बंद करा रही नहीं जो की शायद किसी बंद दरवाजे से ठंड करा रही थी । दोनों दौडते हुए उस दरवाजे पर पहुंचे । उन्होंने दरवाजा खटखटाया कौन अंदर से आवाज आई । लडाकू नंबर एक सौ और दो सौ एक दरवाजा खुला है । खुलते ही अमर ने शिकारी चाकू वर्दीधारी की छाती में व्यवस्थित कर दिया और उसके मुंह पर हाथ रख दिया । वो छटपटाते हुए उसकी बाहों में झूल गया । अब फिर से बडे से अंधेरे सेक्शन में थे । उसके अंत में एक दरवाजा था जो खुला हुआ था । उसके ठीक सामने दीवार भी और बाई तरफ से रास्ता था । उस रास्ते के अंत में उन्हें कमरा दिखा जिसके बाहर कई वर्दीधारी खडे थे । वो दोनों दीवार से सटकर खडे हो गए । उस कमरे के बाहर काफी पहना है । रिंकी बोली जरूर उस कमरे में खाली होगा । क्या करना है? अमर ने पूछा हमला हाँ वही तो फिर दोनों ने मशीनगनों के मुंह खोल दिए । तीन चार गार्ड गोलियों का शिकार हो गए । पर दो साथ फुटे गार्ड्स जो सर से पांव तक लोहे के कवर से ढके हुए थे । उन्हें कुछ नहीं हुआ । वो दोनों उनकी तरफ पलटे और मशीनगन से फायरिंग करते हुए उनकी तरफ बडने लगे । अमर और रिंकी दीवार की ओट में हो गए । इन पर तो गोलियों का भी असर नहीं हो रहा है । जिनकी बोली सात फुटे गार्ड फायरिंग करते हुए उनके नजदीक आती जा रहे थे । ऍम जिनकी चीज थी अमर और रिंकी पीछे होते गए दोनों वापस दरवाजे से होते हुए दीवार के अगल बगल खडे हो गए । अब क्या किया जाए? जिनकी ने पूछा अमर ने जेब में हाथ डालकर बाहर निकाला । अब उसके हाथ में एक हथगोला दिखाई दे रहा था । वो इंतजार करने लगे । जैसे ही उन्हें गार्ड के नजदीक होने की आहट मिली अमर ने ग्रेनेड का पिन निकालकर उस तरफ उछाल दिया । जबरदस्त धमाका हुआ जिसकी गूंज पूरी माइनस में छा गई । उसके बाद सन्नाटा छा गया । उन्होंने देखा दोनों साथ छोटे जमीन पर निश्चल पडे हुए थे । अमर ने रिंकी को आगे बढने का इशारा किया । फिर वो दोनों दरवाजा पार कर के कंट्रोल रूम की तरफ चल दिए । उन्होंने चारों तरफ देखा । वहाँ और कोई नजर नहीं आया । रिंकी ने कंट्रोल रूम का दरवाजा खटखटाया । आपने हुजूर के इलाज देखना चाहते हो गया । अंदर से आवाज आएगी नहीं मैं रिंकी हो तुम्हारे साथ और कौन है? अमर और बाहर खडे गार्ड्स समझ गए । अंदर से दरवाजा खोलने की आवाज आने लगी । अचानक अमर और रिंकी की नजर सामने नहीं । वो दोनों सिहर उठे । सात फुटे घट में से एक जमीन पर लेटा हुआ था और उसकी राइफल का निशाना उनकी तरफ था । अपनी जगह से हिले भी तो माफ नहीं करूंगा । वो तुम्हारा दरवाजा खुला, उसे खोलने वाला नहीं था । अमर रिंकी को हाथ ऊपर करे देखकर वो चौका । उसने दरवाजा वापस बंद करना चाहा, पर साहनी ने उसे रोक लिया । ऍफ दिया तो क्यों यहाँ वापस आई सहानी रिंकी की तरफ देखते हुए बोला तो अकेले बदला कैसे लेने देती भाई, पासा पलटते देख खाली देने उठने का उपक्रम किया । पर नेगी ने चेतावनी भरे लहजे में गन का रुख उसकी तरफ करते हुए कहा जहाँ बैठे हो बैठ रहा हूँ, खाली मुस्कुराया । वो सहानी की तरफ देखते हुए बोला वो अपनी बहन की फिक्र कर वरना उसके मरने के बाद तेरा इस दुनिया में कोई भी नहीं बचेगा । साहनी बेचैन हो था भाई, उसकी बातों में बताना ये लोग खाली की जानकारी कभी नहीं लेंगे । जिनकी बोली सात फूटा धीरे धीरे उठ खडा हुआ उसका निशाना अब सीधे जिनकी के चेहरे पर था तो अपनी ऍम वो अमर से बोला वरना अगर मेरे उंगली हिली इस लडकी के खूबसूरत चेहरे के चीथडे उड जाएंगे । अमर ने हालत की नाजुकता पर ध्यान दिया । गार्ड पूरी तरह से सतर्क था और उसे पता था कि उसके निशाने के चुकने की संभावना लगभग न के बराबर नहीं । अमर ने अपनी राइफल उसकी तरफ उछाल दी और ऍम खाली का इशारा नेगी की तरफ था । अब कंट्रोल रूम से बाहर निकलो गए मजाक अगर इनमें से कोई भी किसी तरह कि चलाकी करते दिखे तो बेहिचक लडकी को गोली मार देना । जो जो गार्ड ने तत्परता के साथ जवाब दिया लेकिन साहनी की तरफ देखा साहनी ने बाहर कदम बढा दिया था । लेगी की आंखों में शातिर चमक थी । उसके चेहरे से पता चल रहा था कि हाथ आई बाजी वो इतनी आसानी से निकल जाने के लिए तैयार नहीं था । साहनी के बाहर निकलते ही नेगी ने झपट कर कण्ट्रोल रूम का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया । खलीली और मुस्ताक दोनों को इस हरकत की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी । मुस्ताक शायद रिंकी पर गोली चला देता पर हालत समझकर वो रुक गया । आखिर साहनी ने उस की आज्ञा का पालन किया था । अपने साथ ही से कहूँ ये पागलपन छोड दें । वह साहनी पर चला है नहीं लगी । साहनी ने दरवाजा खटखटाया ये पागलपन मत करूँ । दरवाजा खोलो पर कंट्रोल रूम के अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई । मुस्ताक को ये बात समझ आई और फिर उसने एक हाथ से राइफल संभालते हुए दूसरे से वॉकीटॉकी निकाला और बोला फॅालो बलो! वॉकीटॉकी पर नेगी की आवाज आई, तुम्हारे हो जोर मेरी कैद में हैं । बाहर किसी पर आज ना आने पाए वरना कहने की जरूरत नहीं की । रेडियो के बाद तो उन्हें अपनी जिंदगी की सबसे बडी बेवकूफी की है । धोनी खुद को अंदर कैद कर लिया है । बाहर निकलते ही तुझे कुत्ते की मौत मारा जाएगा लेकिन कोई जवाब नहीं दिया । ऍम वॉकीटॉकी पर अब कोई आवाज नहीं आ रही थी । सिर्फ बाल के लिए गार्ड का ध्यान पूरी तरह से वॉकीटॉकी की तरफ चला गया और इतने में अमर ने अपनी जेब से रिवाल्वर निकाला और फायर कर दिया । निशाना एकदम साडी था और गोली गार्ड की आंख फोडते हुए मस्तिष्क में प्रवेश कर गई । उसके शरीर का एकमात्र ऐसा हिस्सा जिसके ऊपर कोई कवच नहीं था । हालांकि गार्ड भी मरने से पहले ट्रिगर दबा बैठा है पर रिंकी भी अलर्ट थी । वो तेजी से लहराई । गोली उसके बालों को छूते हुए निकल गई । अमर ने आगे बढकर जमीन पर पडा वॉकीटॉकी उठाया और बोला नहीं गोली की आवाज सुनाई दी । हाँ क्या उसने रिंकी को मार दिया? नहीं, मैंने उसे खत्म कर दिया है । अब कोई खतरा नहीं है । कुछ ही पल में दरवाजा खुला । साहनी अमर वरिंग की तेजी से अंदर आ गए । नेगी ने फिर दरवाजा बंद कर लिया । बारिश सानी चारों तरफ देखते हुए बोला । खली ने कहा है वो भाग गया नहीं । मुझे मन से बोला क्या मतलब भाग गया? अमर ने चौंकते हुए पूछा यहाँ एक गुप्त रास्ता है? नेगी एक कोने की तरफ इशारा करते हुए बोला मेरी आंखों के सामने वो जमीन में समा गया और अब ये रास्ता खुल भी नहीं रहा । वो लोग उस कोने में पहुंचे । वहाँ एक पत्थर का चौकोर हिस्सा अलग दिखाई दे रहा था । इसका कोई बर्तन या लीवर यहीं कहीं होगा । जिनकी दीवार टटोलते हुए बोली दीवार पर नीचे की तरफ एक पैदल जैसा लीवर दिखाई दिया । रिंकी ने उसे दबाया । वो दवा और पत्थर से खट खट की आवाज आई पर वो खुला नहीं । रिंकी ने उसे फिर से आजमाया पर वही नतीजा निकला लगता है खाली लेने लगता है । खाली ने उसे नीचे से बंद कर दिया है । नहीं की बोला ये रास्ता कहीं तो खुलता होगा । रिंकी सोचते हुए बोली ये जरूर सुरंगों में खुलता होगा उसके अलावा और कौन सा रास्ता हो गया साहनी में दिमाग में कौनसे विचारों को जाहिर किया तो चलो भाई रिंकी निर्णायक भाव के साथ होली खाली लंगडाते हुए सुरंग में आगे बढ रहा था । कंट्रोल रूम से गुप्त रास्ते से नीचे उतरते वक्त उसके पैर में मोच आ गई थी । आखिर वह गुप्त रास्ता कुछ और नहीं एक गड्ढा ही था जिससे दस फीट नीचे सुरंग की जमीन थी । कुछ आगे जाने पर उसे दो गार्ड दिखाई दिए । वो दोनों से सहारा देते हुए आगे ले जाने लगे । नाना खोलो नामक उन्होंने धोखे से कंट्रोल रूम पर कब्जा कर लिया है । पर इन नामुरादों को पता नहीं कि हम इन न्यूक्लियर हथियारों को मैनुअली ऑपरेट कर सकते हैं । जी हुजूर, ऊपर निकलते ही हम एक मिसाइल ऑपरेट करेंगे । इस तरह हम बिल्कुल सही टारगेट पर हमला तो नहीं कर पाएंगे, पर फिर भी दिशा और दूरी तय करके हमला कर सकते हैं । खाली गुस्से से उभरता हुआ बडबडाई जा रहा था । कुछ देर बाद ऊपर जाने का रास्ता दिखाई देने लगा । सीढियाँ चढते हुए खाली लीवर दोनों गार्ड बाहर आ गए । सोहनगढ माइंड का वह क्षेत्र अभी भी सुनसान था । हाँ और इस तरह खुले में आना आपके लिए ठीक नहीं । एक गार्ड बोला आप कहे तो हम ये काम काम इतना आसान नहीं है तो नहीं कर पाओगे । फिक्र मत करो तो हम दोनों बस चारों तरफ नजर रखे हुए हैं । हमारे साथ पढते हैं इन शाला ये काम हमारे हाथों होगा । खलीली आगे बढा । गार्ड अपनी राइफलें हाथों में नहीं । गार्ड अपनी राइफलें हाथों में लिए चारों तरफ देखते हुए उसके पीछे चल रहे थे । कुछ दूर जाने के बाद उसने जमीन पर से मिट्टी हटाई तो चांदी के रंग की गोल तस्तरी दिखाई देने लगी । उसने उस तश्तरी को दम लगाकर दबाया तो वह ढक्कन की तरह खुल गया । अंदर दो बटन दिखने लगे । खलीली ने दोनों बटन दबा दिए और फिर पीछे हट गया । कुछ ही पल में जमीन से घरघराहट की आवाज निकलते हुए आठ फीट लंबा बेलनाकार खम्बा सा निकल आया । खाली ने खम्बे पर एक जगह एक और ढक्कन खोला और फिर पैनल पर कुछ बटन दबाएंगे । अब उस खंभे की एक तरफ के पर पूरी तरह से खुल गए और उसमें ड्रोन विमान देखने लगा जिसका की मुख्य आसमान की तरफ था जिससे एक मिसाइल सन लगने थी । निसंदेह को एक न्यूक्लियर मिसाइल थी । खाली ने पैनल पर ड्रोन विमान की दिशा और दूरी निर्धारित किए । अब उसके चेहरे पर एक अनोखी चमक प्रकट हुई । अब उसे अंतिम बटन दबाना चाहते जिसके बाद भारत की धरती पर न्यूक्लियर विस्फोट होना तय था और विस्फोट की चपेट में आए हर तरह के प्राणी का विनाश निश्चित था और फिर खलीली ने उस विनाशकारी बटन को दबा दिया और पीछे हट गया क्योंकि ड्रोन विमान विशेष प्रकार की बैटरी से चलता था । वह बिना ज्यादा शोर शराबा किए धीरे से खम्बे से ऊपर उठने लगा । नीचे हवा के प्रेशर के कारण चारों तरफ धूल उडने लगी । खाली ने ऊपर देखते हुए कम छह से अपना चेहरा ढक लिया । ड्रोन हवा में कई फीट ऊपर उठ चुका था और विमान की तरह सीधा होकर अब गोली की रफ्तार से उडने लगा था । कुछ ही पल में वो उनकी नजरों से ओझल हो गया । अब दिल्ली दूर नहीं खाली खुद से बोला और फिर आसमान में देखते हुए ठहाका लगाकर हंसने लगा । तभी फायरिंग की आवाज हुई । खलीली तुरंत जमीन पर लेट गया । उसके गार्ड जवाब में फायरिंग करने लगे । पर दोनों तुरंत गोलियों की चपेट में आकर ढेर हो गए । खलीली के चेहरे पर अभी भी काम किया था । उसके बाद उसे दो धुंधले अक्स नजर आए । जो यमदूत सामान उसी की तरफ पढ रहे थे उसने गमछा अपने चेहरे से हटाया । सामने मशीनगन य साहनी और रिंकी खडे देंगे । रिंकी के खूबसूरत चेहरे पर वहशियत झलक रही थी । उसने अपने पैर पर बंधा एक शिकारी चाकू निकाला और चीखते हुए खाली पर झपटी । खाली ने बचाव के लिए हाथ फैलाए पर जिनकी को रोक नहीं सका । उसने एक झटके में चाको खलीली की जांघ में घुसा दिया । वो छह लाख उठा । कलेजे में कितनी ठंडक पहुंच रही है भाई बता नहीं सकती तो तुम भी अपना मन शांत करो । साहनी ने रिंकी से चाकू लिया और खाली ले के बाजू में घुसा दिया । सिर्फ घुसाया हो नहीं । गोल गोल घुमाने भी लगा । सिर्फ घुसा ही नहीं । गोल गोल घुमाने भी लगा । वो चीज हाँ और असहनीय पीडा के कारण बुरी तरह छटपटाने लगा । उसने साहनी का हाथ पकडने की कोशिश की तो साहनी ने उसके चेहरे पर कोहनी से जबरदस्त प्रहार किया । खाली की नाक की हड्डी टूट गई । फिर साहनी ने उसके पेट में लाख चलती । वो खास्ते खास्ते मुंह से खून उगलने लगा । बोल खाली बोर सानी । उसका गिरेबान पकडकर चीख रहा था । याद कर हो रहा है । जब तो उन्हें हम दोनों को यतीम बनाया था । जीवन भर ना भरने वाले गांव हमारी अंतरात्मा पर किए थे याद का और कबूलकर क्या सुलझे अपनी करतूतों का पछतावा हो रहा है । खाली ने खून से लथपथ अपना चेहरा उठाया और लडखडाती जुबान से बोला हूँ । मुझे बस टाॅक सिर्फ इस बात का है कि तुम तो उन दोनों को गुजरात खत्म नहीं कर सका । साहनी ने उसके बाल पकडे और उसका सिर जमीन पर पडे एक पत्थर पर देख पा रहा हूँ । उसके आगे के दो दांत टूट गए हो, खून निकलने लगा । रिंकी ने चाकू हाथ में लिया और खाली ले की तरफ पर ही खाली आंखे फैलाकर उसकी तरफ देख रहा था । दो बोल तुझे अपने किए का पछतावा है । लडकी खाली को अपने किए हर काम पर फर्क है और आज खाली ने वो काम कर दिखाया है जिसकी गूंज अब से कुछ देर में हिंदुस्तान के कोने कोने में सुनाई देगी । रिंकी चीखते हुए उस पर खोदी । खलीली ने हाथ बढाकर उसे रोकने की कोशिश की पर रिंकी ने चाकू से उसके आगे बढे हाथ पर हमला कर दिया । नतीजन खलीली की दो उंगली कट कर गिर गई । फॅमिली फौज के साथ अपनी कटी हुई उंगलियों को देख रहा था, जो उसके शरीर से अलग होने के बावजूद अजीब ढंग से छटपटा रही थी । वह जमीन पर गिर गया और जिनकी उसके ऊपर सवार हो गई । मैं मेरे खून की प्यासी हो खाली मेरे देश की मिट्टी तेल, खून की प्यासी कहते हुए रिंकी ने पूरी ताकत के साथ चाकू का फल खलीली के दिल में उतार दिया । खाली ले की आंखें बनाएंगे, उसके मुंह से खून निकला और फिर अंतिम हिचकी के साथ उसके प्राण निकल गए । खलीनी का खून जमीन पर फैलने लगा । रिंग कीमा काली की तरह रौद्र रूप में दिखाई दे रही थी । उसकी आंखें फैली हुई थी । चेहरा होते से तमतमा रहा था और सांसे तेजी से चल रही नहीं । आज उसके हाथों एक राक्षस का संहार हो गया था । काफी देर वहाँ सन्नाटा छाया रहा । फिर साहनी ने रिंकी का हाथ पकडकर उठाया । वह ड्रोन मिसाइल लॉन्च करने में सफल हो गया । साहनी खंभे को देखते हुए बोला शायरी से अभी भी रोका जा सकता है । साहनी ने कीबोर्ड के कुछ बटन दबाएं और उसके छोटे से पैनल पर एक्सेस डिनाइड लेकर आ गया । हमें कंट्रोल रूम में पहुंचना चाहिए । रिंकी बोली दोनों तेजी से वापस सुरंग के रास्ते की तरफ भागे । कंट्रोल रूम में देगी और अमर स्क्रीन के सामने बैठे हुए थे । बेहद खतरनाक मिशन मास्टरमाइंड किया था इसलिए नहीं बोला । आखिर कैसे किया इसने ये सब न्यूक्लियर हथियार कहाँ से पा गया ये अमर ने पूछा । हमेशा तो था ही कि पाकिस्तान के कई परमाणु हथियारों पर आतंकवादी चुपचाप कब्जा कर चुके हैं और ये बात खुद पाकिस्तानी सरकार ने छुपा रखी है । वरना सोचो उनकी कितनी किरकिरी होगी । ऊपर से अगर अमेरिका को पता चलेगा तो इनके सारे परमाणु हथियार उठा ले जाएगा । नहीं बोला पर न्यूक्लियर हथियार पाकिस्तान से भारत कैसे आएगा । टुकडों में धीरे धीरे कुछ राजस्थान की तरफ से कुछ नेपाल से कुछ समुद्र तट की तरफ से और सब यहाँ पर असेंबल किए गए माइंड के अंदर सुरंगे का बनी दो साल पहले से बन रही है । माइनस में हथियार और आतंकियों का आना जाना सुरंग से होता है, जिनके मुख आसपास ही खोलते हैं । मुख्य रास्ते से आने जाने की बजाय उन्होंने ये तरीका अपनाया जो काफी सुरक्षित था । इतनी बडी साजिश तभी स्क्रीन पर ड्रोन की डिजिटल इमेज दिखाई देने लगी । मिसाइल ऍम आवाज आई ये क्या? अमर चीखा ऍफ हो गई और ये तो हवा में है तो हाँ नहीं बोला । इसरो अमर डैशबोर्ड पर नजर फिराते हुए बोला । उसे तलाश थी किसी ऐसे बटन की जिससे उसे रोका जा सके । तभी नेगी के रिवॉल्वर का रुख अमर की तरफ हो गया । अमर ने हैरानी के साथ उसे देखा, अपना रिवॉल्वर जमीन पर रख दो हमारे अमर उसे घोर जा रहा है । तुम किस फिराक में हूँ, जल्दी करो वरना तो मैं मरना पडेगा । उसके बोलने के लहजे में लिपटी चेतावनी को अमर भाग गया । उसने रिवॉल्वर जमीन पर रख दिया लेगी अमर के पास पहुंचा । उसने उसका रिवॉल्वर लिया और उसकी तलाशी लेकर कुछ और हथियार भी निकाल ली । फिर डोरी से उसके हाथ पांव बांध दिए तभी सहानी और रिंकी कंट्रोल रूम में पहुंचे । इस बार दरवाजा इत्तेफाकन बंद नहीं था । अंदर का नजारा देखकर दोनों हैरान रह गए लेगी । लेकिन ये क्या है? रिंकी जी की उसने अमर के पास पहुंचना चाहा तो नेगी ने उसे एक तरफ धकेल दिया । सब ठीक है । मेरी बहन अचानक साहनी बोला तो रिंकी चौकर उसकी तरफ पार्टी तुम हमारे काम में कोई रुकावट मत डालो । भाई, तुम पर तुम कर क्या रहे हो? रिंकी हैरान थी । साहनी ने मुस्कुराकर नेगी की तरफ देखा और कहा आज आईएसआई के को एक नया लीडर मिलने जा रहा है । लेगी गर्व के साथ मुस्कुराया । आईएसआई के के नुमाइंदे मालिक की बहुत इज्जत करते हैं । ये इन का मालिक चर्चा है । जो माइंड में दो साल से रह रहा है । वो इसे लीडर के रूप में स्वीकारेंगे । पर ये नाटक क्यों? रिंकी ने पूछा तो हम नहीं समझो की बहन अरे खलीली ने मिसाइल छोड दी है । पहले उसे रोको एक धमाका होना जरूरी है । साहनी ने कुटिल स्वर में कहा, रिंकी ने अचानक चाकू उठाया और अपनी गर्दन पर लगा लिया भाई मैं खुद को खत्म कर लूंगी । साहनी असहाय भाव के साथ अपनी बहन की तरफ देखता रहा । उसके चेहरे पर कई भाव आए और गिर गए । फिर वो बोला, ऍम, मैं तो मैं बताता हूँ । रिंकी ने धीरे से चाकू हटा लिया । साहनी शून्य में घूमते हुए बोला, मेरा मानना है कि खाली जो काम करने जा रहा था वो पूरी तरह से गलत नहीं है । वो का कश्मीर हमारी जन्म भूमि है । भारत हमारा वजन है और ये दोनों तेजी से पतन की तरफ जा रहे हैं । हमारे देश में कितनी सरकारें आई और कहीं प्रदेश में इतने सालों से चल रहे विवादों का कोई हल नहीं दे सकते हैं । समस्या किसी रोग की तरह बढती जा रही है और इनका इलाज करने की जगह हमारे नेता सिर्फ अपनी ताकत और अपनी जेबें भरने में लगे हैं । हजारों लाखों लोग धर्म के नाम पर युद्ध में आतंकियों के हाथों मारते रहे हैं और मारते रहेंगे और इनके कान पर जो भी नहीं रहती तो इसका मतलब अपने ही देश पर हमला कर दो, किसी का बुरा नहीं करेंगे । अगर जरूरत पडी तो सिर्फ पार्लियामेंट या विधानसभा पर हमला होगा । आम जनता को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा । भाई क्यों क्यों? क्यों तुम आतंकवादी नहीं होगी तो मैं एक अच्छे इंसान हो । फॅमिली की दुश्मनी ने तुम्हें पागल कर दिया है नहीं, हमें इस देश के लोगों को आजादी दिलाएंगे । नेगी के नेतृत्व में सब कुछ ठीक हो जाएगा । मैं इसका साथ होगा तो मगर हमारा साथ नहीं देना चाहती तो न सही, कम से कम अर्चन तो मत बनाओ । तभी नेगी ने रिवॉल्वर का रुख रिंकी की तरफ कर दिया । वजह थी कि उसने रिंकी का हाथ एक बार फिर रिवॉल्वर की तरफ बढते हुए देख लिया था । रसिया हूँ कि इस अपने हाथ से वॉलवर्ड से दूर रखो । मुझे पता है तो मैं अभी भी ये बात समझ नहीं आएगी और थोडा वक्त दो हमारी सोच खलीली से अलग है । जिनकी चीख उठी तुम पागल हो गए हो, काली मर चुका है । हमारा बदला पूरा हो गया तो उसमें हो तभी सिर्फ एक पल के लिए नेगी की नजर साहनी की तरफ घूमी और जिनकी एक तरफ कोर्ट गई नेगी ने उसकी तरफ फायर कर दिया । नहीं सहनी नेगी की तरफ क्रोध के साथ देखते हुए देखा । रिंकी एक सोफे की आड में हो गई । नहीं की कूदकर साहनी के पास आ गया और उसके सिर पर रिवॉल्वर रखकर बोला अपने हथियार फिर तो रिंकी वरना मैं तुम्हारे भाई को खत्म कर दूंगा जिनकी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी । ये मत समझना । ये मेरा दोस्त है, मेरा साझेदार है तो मैं इस पर कोई रहम करूंगा । सबसे ऊपर हमारा मिशन है और उसके लिए मैं कोई भी कुरबानी देने के लिए तैयार हूँ । जिनकी सोफे के पीछे से निकल आई । फिर उसने रिवॉल्वर की नाल पकडकर नेगी को दिखाया और उसे उसकी तरफ उछाल दिया । लेकिन उसे लपक लिया और बोला गुड! फिर नेगी ने रिंकी के हाथ पैर बांधकर अमर के पास बैठा दिया । तुम दोनों के साथ हमारा आत्मीयता का रिश्ता है । रजिया नूर की बहन है इसलिए मैं तुम दोनों में से किसी का बुरा नहीं चाहता हूँ । मैं किसी भारतवासी का बुरा नहीं चाहता हूँ क्योंकि मैं खुद भारतवासी हूँ ना कि खाली की तरह विदेशी आतंकी जो यहाँ का शहंशाह बनना चाहता था । इस देश में बदलाव लाने के लिए कुछ सख्त कदम उठाने बेहद जरूरी है । कहते हुए नेगी साहनी के पास खडा हुआ साहनी उस से पूरी तरह सहमत नजर आ रहा था । तुम दोनों को हमारा मिशन समझने में थोडा वक्त लगेगा । नहीं बोला मैं नूर को बचपन से जानता हूँ । हम दोनों देहरादून के बोर्डिंग स्कूल में साथ में रहे और पढे हैं मुझे तभी नोट ने अपनी आपबीती बताई थी । सुन कर मेरा खून खौल उठा था और उस वक्त न तो वो कुछ कर सकता था और ना ही मैं फिर जीवन में आगे । मुझे भी कुछ इसी तरह के भयावह अनुभव मिले । मेरे पापा, एक आईएएस उन्होंने ईमानदारी से काम करने की कोशिश की । पेट्रोल माफिया के खिलाफ आवाज उठाई तो उनको जिंदा जला दिया गया । जिन भ्रष्ट नेताओं कि शहर में ये हुआ उनके ऊपर आज भी नहीं आई । सिर्फ दिखाने के लिए भाडे के टट्टुओं को सजा दे दी गई और वो भी आराम से वक्त से पहले छूट करेंगे । तब मैंने फैसला किया कि अपने देश के अंदर की गंदगी को उसी तरह से खत्म करना पडेगा जैसे कि घर में घुसे कॉकरोचों को स्ट्रेट मारकर खत्म किया जाता है और ऐसा कुछ बहुत बडा करने से ही होगा वरना साडियाँ भी जाएंगे । कुछ बदलाव देखने के लिए मेरी मम्मी ने दूसरी शादी की और हम लंदन में जा बसे । मैं वहीं पला बढा और फिर जुर्म के खिलाफ लडने के जुनून में मैं पहले पुलिस और फिर इंटरपोल में नौकरी पा गया । मैं हर वो मौका तलाशता रहता था जिससे मुझे भारत आने का मौका मिले और फिर मुझे भारत में हो रही आतंकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गुप्त मिशन पर भेजा गया । यहां चार साल में मैंने खुद को आईएसआई के एजेंट मालिक के रूप में स्थापित किया । वो सब काम किए जो आईएसआई वाले को करने चाहिए । फिर मुझे अफसल ने तलब किया और बताया कि किसी गुप्त मिशन पर काम करना शुरू किया जा रहा है । फॅस में इस गुप्त अड्डे का निर्माण शुरू हुआ । मैं शुरू से यहाँ था । धीरे धीरे यहाँ कई आतंकी आकर रहने लगे और मैं उनसे खुलता मिलता गया । मेरा रूप काफी ऊंचा था । वो सब मुझे मालिक चर्चा बोलने लगे । इस बीच जब मुझे समझ आया कि खाली लेके स्तर का आतंकवादी यहाँ कोई गोल खिलाने वाला है तो मैंने फिर से नोट से बात करना शुरू किया । उसके दिल में सो रही बदले की भावना को जगाया और इस प्लान में शामिल किया । मैं अफजल वगैरा की बातें गुप्त रूप से सुनता था और इससे मुझे मिशन के बारे में पता चलता गया । मैं इन्फॉर्मेशन नूर को देता गया । इसने फिर उन के बिछाए जाल में जानबूझकर खुद को फंसा लिया और उसके जरिए खाली तक आज आ पहुंचा । इसने कब अपनी बहन जो कि एक रॉ ऑफिसर है इस सारे पचडे में उतार लिया । मुझे पता नहीं चला । मुझे जब पता चला तब तक बहुत देर हो चुकी थी क्योंकि बहन भी बदला लेने के लिए उतनी ही लगाई थी । मैंने फिर इस बात का बुरा नहीं माना । इतना बदला पूरा हो गया और मुझे एक मौका मिल गया अपने देश को सुधारने का खाली ये हमला कर रहा था हमारे देश को गुलाम बनाने के लिए और मैं ये हमला कर रहा हूँ हमारे देश को आजाद कराने के लिए । देखना कैसे इसे एक हमले के बाद देश का हर नेता कुछ भी गलत करने से पहले सौ बार सोचेगा । ऍम भाषण बहुत हो गया । अब देखो कैसे में पहले सारे लडाकों को अपने साथ मिलाता हूँ । नेगी ने एक माइक उठाया और उसमें से बोलना शुरू किया । उसकी आवाज की गूंज सुरंगों में सुनाई देने लगी ।

Part 15

जंजू और लडाकों बडे सदमे के साथ ये खबर देनी पड रही है कि हमारे हुजूर दुश्मन के हाथों मारे गए पर इससे हमारे मिशन पर कुछ फर्क नहीं पडेगा । मैं यानी रजा मालिक खुद को आईएसआई के का नया लीडर घोषित कर रहा हूँ । हमारा मिशन बरकरार है और जीत निश्चित है । खान के अंदर आई एसआईटी के मेंबर्स के कानों में ये बात बडी सुनते ही उन्होंने नारे लगाने शुरू किए मालिक चाचा जिंदाबाद मालिक, चच्चा जिंदाबाद । स्पीकर्स के द्वारा उन्हें कंट्रोल रूम से वो नारे सुनाई दिए । नेगी के चेहरे पर गर्वीली मुस्काना गयी । साहनी भी प्रफुल्लित था ये दीवानापन छोड दो भाई तो मैं फिर कब से ऐसा सोच रहे हो । बहुत सालों से कॉलेज के समय से जब मेरी मुलाकात नहीं से हुई थी उस की सोच क्रांतिकारी थी तो ये सब आतंकवादी था तो ये तब से आतंकवादी था और इसमें तुम्हें भी नहीं । ये आतंकवादी नहीं था और नहीं आज है । इसकी सोच थी कि हमें अपने देश को बदलना चाहिए । क्यों हम चंद राजनीतिज्ञों के कारण आपस में मतभेद रखते हैं । क्यों इतने सालों के बाद भी हमारे देश में जहाँ सबसे ज्यादा बुद्धिमान लोग पैदा हुए हैं अभी तक तरक्की नहीं कर पा रहा है । वजह यही है कि यहाँ के राजनीतिज्ञ देश के लोगों को तुच्छ मसलों में उलझाकर रखते आए हैं और करप्शन के जरिए देश की नींव खोखली करते रहे । तो तुम लोगों को मीडिया में काम करना चाहिए था । सुरक्षाबल में काम करना था, हजारों लोग वहाँ कब से काम कर रहे हैं? पर क्या कोई बदलाव आया है? नहीं, बहन नहीं, प्रकृति से सबका लोग जब बदलाव लाना होता है तो वो क्या करती है? एक सुनामी सब साफ, एक भूचाल, सब तहस नहस । हमारे देश को भी जरूरत है ऐसी ही एक सुनामी की, एक भूचाल की । आज जब हम इस देश की बागडोर अपने हाथ में लेंगे, उसके बाद एक नई शुरूआत होगी । अच्छी सोच पर गलत तरीका काफी देर से चुपचाप बैठा मार बोला । यही एकमात्र तरीका है जैसे बदलाव आ सकता है । नहीं की बोला, वरना कुछ सालों में चीन पाकिस्तान मिलकर भारत को खा जाएंगे और तब अफसोस करने का कोई फायदा नहीं होगा । भाई मैं तुम्हारे हाथ जोड दी हूँ कि ये सब मत करो । अभी भी कोई नहीं जानता कि तुम दोनों ऐसा कुछ करने का इरादा रखते हो । खाली मर चुका है । अब देश सुरक्षित है । जो करना है सही ढंग से करना । भले ही हमारी आंखों के सामने वो बदलाव ना आए पर कम से कम हमारी अगली नसल शायद एक अच्छे भविष्य को देख पाएं । हमारी अगली नसल दूसरे देश के गुलाम होगी । नहीं बोला धूल मेरे खयाल से इन दोनों की बहुत बंद रखने पडेंगे । ये दोनों इतनी जल्दी नहीं समझेंगे । इसमें उनकी कोई गलती नहीं है । तुम ठीक कह रहे हो, कहकर साहनी ने दे स्टेट लिया और फिर अमर और रिंकी के मुंह पर चिपका दिया । उसके बाद लेगी । माइक पर अपने लडाकों को निर्देश देता रहा । साहनी की नजर स्क्रीन पर थी जहाँ खान के आसपास का नजारा देखा जा सकता था । साथ में वो न्यूज चैनल्स पर भी नजर रखे हुए था । एयरफोर्स यहाँ हमला करने वाली है । अचानक न्यूज देखते हुए साहनी ने कहा, यही तो बात है । हमारी सरकार की अतुल का इस्तेमाल नहीं करती । उन्हें लग रहा है कि हम गीदड भभकी दे रहे हैं । वक्त आ गया है उन्हें सबक सिखाने का । साहनी खतरनाक लहजे में बोला जब न्यूक्लियर धमाका होगा तब उनकी आंखे खोलेंगे । साहनी की उंगलियां डैशबोर्ड पर लगे बटनों पर घूमने लगी है । एक स्क्रीन पर भारत का मानचित्र दिखने लगा । फिर साहनी ने उसे जूम किया और अब वहाँ दिल्ली शहर का मानचित्र दिखने लगा आना पडेगा । खलीली की सोच को मरने से पहले जो ड्रोन मिसाइल लॉन्च की वो सीधे दिल्ली पर करने वाली है । ऐसे धमाकों का ही असर होता है । नेगी ने सहमती में सिर हिलाया । अब मैं इसकी दिशा पार्लियामेंट की तरफ कर देता हूँ । बस पांच मिनट और फिर साहनी हर्ष के साथ बोला । इधर अमर और रिंकी तेजी से अपने हाथ खोलने की कोशिश कर रहे थे । अमर ने जमीन पर पडे चाको पर हाथों पर बंदी दूरी रखनी शुरू कर दी थी । इस प्रक्रिया में उसके हाथ भी कटने लगे जिनसे कलाइयाँ लहूलुहान हो गई । पर देश को विध्वंस से बचाने के सामने ये बहुत छोटी समस्या थी । जैसे ही उसके हाथ खोले उसने रिंकी के जूते में छिपा पिस्टल निकाला और तुरंत लेगी किसी का निशाना लेकर खडा हो गया । रुक जाने की नेगी ने आश्चर्य से पलट कर एक नजर अमर पर डाली । फिर निश्चिंत स्वर में बोला मैं अभी भी ऍम मुझे मार नहीं सकते हैं, कहकर वह फुर्ती से दे स्पोर्ट की तरफ पालता ये दिशा सब क्यों नहीं हो रही है? अमर ने फायर कर दिया । गोली ने उसका सिर खोल दिया और वह एक तरफ लुढक गया । साहनी ने हैरानी से अमर की तरफ देखा और फिर देगी की तरफ जो अब हमेशा के लिए शांत हो गया था । फिर साहनी स्क्रीन पर देखते हुए तेजी से डैशबोर्ड के बटन के साथ खेलने लगा । अमर ने रिंकी के हाथ खोल दिए । रिंकी ने तुरंत पास पडा एक रिवॉल्वर उठा लिया । भाई रुक जाओ । रिंकी का चेहरा भभक रहा था । उसके स्वर में चेतावनी थी, साहनी ने उसकी तरफ देखा, फिर वापस सिर घुमा लिया और डैशबोर्ड पर काम करते हुए अंत में एक लाल बटन दबाया और फिर अपनी बहन की तरफ पलट कर प्रफुल्लित स्वर में बोला, अब मिसाइल सीधे पार्लियामेंट पर करेगी । एक फायर हुआ । साहनी पीठ के बल डैशबोर्ड पर लुढक गया । गोली ठीक उसे मात्र के बीच लगी थी, रहेंगे । अमर चीखा । ये क्या क्या है? रिंकी सब दसवी तक साहनी के निश्चल शरीर को देख रही थी । अमर चला रहा था, पर उसे जैसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था । सब कुछ जैसे स्लो मोशन में घटित हो रहा था । अमर साहनी की नब्ज जांच रहा था, पर रिंकी को पता था कि उसका भाई अब नहीं रहा । साहनी को एक तरफ हटाकर अमर डैशबोर्ड पर झगडा ड्रोन विमान अब ठीक पार्लियामेंट के ऊपर चक्कर काट रहा था और मिसाइल गिराने ही वाला था । अमर ने ज्यादा कुछ ना समझाते हुए एक लीवर ऊपर की तरफ खींच दिया । स्क्रीन पर ड्रोन भी हवा में ऊपर उठता दिखाई दिया । फिर उसे स्क्रीन पर एक जगह रिलीज कैंसर लिखा दिखाई दिया । उसने झट से कंप्यूटर का कर जरूर उसने झट से कंप्यूटर का कर्सर उधर ले जाकर उसे दबा दिया । स्क्रीन पर बडा बडा लिख कर आया रिलीज कैंसल और उसके नीचे कन्फर्म और कैंसर अमर ने कन्फर्म बटन पर क्लिक किया । अमर ने कन्फर्म बटन पर क्लिक किया । फिर उसने ड्रोन की दिशा हिन्द महासागर की तरफ कर दी । उसे उम्मीद थी अब ड्रोन बिना कोई धमाका की ये मिसाइल को लेकर सुरक्षित महासागर में गिरेगा । इधर जिनकी जमीन पर बैठी शून्य में घूमे जा रही थी । बचपन की यादें रिंकी के मानस पटल पर फिल्म की रील की तरह दिखाई देने लगी जब भाई का हाथ पकडकर स्कूल जा रही थी । जब भाई उसे परेशान करते हुए खुद माँ की गोद में छुट गया था । जब उसे चोट लगी थी और भाई उसे गोद में उठाकर घर लेकर आया था । जब साइकिल के डंडे पर बैठाकर भाई उसे कश्मीर की गलियों में घुमाने ले जाता था । जब उस खौफनाक रात में दौडते दौडते वो थक गई तो भाई उसे पीठ पर लादकर मीलों दौडा था । जब भाई उसकी खातिर ह्यूमन बम बना खुद को खत्म करने जा रहा था । अचानक रिंकी ने पिस्टल का रुख अपनी कनपटी की तरफ क्या उसका इरादा भापकर? अमर उसकी तरफ झपटा ऍम हो ची था । अमर ने छलांग लगाई और उसके ऊपर आगे रहा । ट्रिगर दबा दोनों जमीन पर जा गिरे । अमर को उम्मीद थी कि उसके कूदने से रिंकी का निशाना चूक गया होगा । अमर ने संभलते हुए रिंकी के चेहरे की तरफ देखा । रिंकी की आंखें पथरा गई थी । उसकी नजर उसके सिर में हुए सुराख और वहाँ से निकलते खून पड गई । रिकॅार्ड ऍम वो उसे छत छोडने लगा । पर रिंकी अंतिम शब्द कहे बिना ही हमेशा के लिए जा चुकी थी तो नो अमर की चीखें । कंट्रोल रूम के भीतर गोष्ठी चली गई । आर्मी ने माइंड पर हमला बोल दिया था । अंदर बचे खुचे आतंकवादियों को मार गिराया गया था । कोई भी आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार नहीं था । जो निहत्थे थे, उन्होंने साइनाइड खाकर आत्महत्या कर ली थी । कुछ और थे और बच्चे जरूर जिंदा मिल गए थे । बहुत जल्दी टीवी चैनलों पर खलीली की इलाज दिखाते हुए घोषणा कर दी गई कि भारतीय जासूसों ने खलीली और उसके एक अहम अवसर रजा मालिक को मार दिया । आईएसआई के के न्यूक्लियर हथियार भी अब भारतीय नियंत्रन में थी । इन खबरों के कारण शहर के अंदर कत्लेआम मचाते घूम रहे आतंकवादियों का मनोबल टूट गया । कुछ ने आत्महत्या कर ली और कईयों को आर्मी ने मार गिराया । कई अभी भी छुपे हुए थे जिनको ढूंढा जा रहा था । जॉन माइंस के अंदर पहुंचा पर जावेद और अमर उसे कहीं दिखाई नहीं दिए हैं । हालांकि कंट्रोल रूम में मिली सहानी लेगी और रिंकी की लाशों से उसे ये अंदाजा हो गया की अमर के दिल पर क्या गुजर रही होगी । वो एक आर्मी के कप्तान के साथ था । दोनों कंट्रोल रूम से बाहर निकले । मेरे खयाल से अमर आतंकियों को मारते हुए माइंस में सुरंगों की तरफ गया होगा । जॉन ने कहा जावेद कैद खाने में बेडियों से बंधा जमीन पर बैठा हुआ था । बाहर से रह रहकर फायरिंग और धमाकों की आवाज आ रही थी । ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे युद्ध छिड गया है । कुछ देर पहले उन्हें सलीम द्वारा खाली के मरने और खुद को आईएसआई के का नया लीडर घोषित करने की घोषणा भी वहाँ लगी स्पीकर्स पर सुनाई दी थी । पर उसके कुछ देर बाद हेलीकॉप्टर के लैंड होने की आवाज आई और फिर निरंतर फायरिंग और ग्रेनेड के धमाकों की आवाज में कैद खाने में तैनात चारों गार्ड को विचलित कर दिया । फलोर हलो लडाकू एक्सचेंज एक सौ साठ हैरान परेशान होते हुए एक गार्ड हेडफोन पर बोले जा रहा था । दूसरी तरफ से किसी का भी जवाब नहीं मिल रहा था । हाँ, आ चुकी है । अचानक जावेद बोला तो सब ने अपनी राइफल, उसकी तरफ हमारी जावेद विचलित हुए बिना बोलता गया मैं उस हेलीकॉप्टर की आवाज अच्छी तरह मैं उस हेलीकॉप्टर की आवाज अच्छी तरह से पहचानता हूँ । खुद कई बार जो बैठा हूँ उसमें मुझे पूरा यकीन है कि खाली के बाद तुम्हारा ये सलीम भी अब तक मर चुका होगा । कुछ देर बाद ये दरवाजा खुलेगा और मेरे मुल्क के जांबाज सिपाही यहाँ घुसकर तो मैं भी मार गिराएंगे । इसलिए मेरी राय है कि तुम सब अभी सरेंडर कर दो, जवान को लगाते हैं । एक गार्ड देखते हुए जावेद की तरफ बढा । उसने ए के फोर्टी सेवन की नाल जावेद के सीने पर टिका दी । जब तक तू हमारे पास है तो हमारा कुछ नहीं बिगाड पायेंगे । तलवार को ढाल बनाकर अपना बचाव करना चाहते हो । जावेद उसकी आंखों में एक्टर देखते हुए बोला ये बोल तुम्हें महंगी पडने वाली है और अचानक जावेद ने झपट कर राइफल की नाल पकड ली । गार्ड ने ट्रिगर दबा दिया पर तब तक जावेद उसका मुंह ऊपर की तरफ मोड चुका था । गोलियाँ दीवारों पर टकराने लगी । फिर अगले ही पल जावेद ने राइफल की छीना झपटी में गार्ड की उंगली के ऊपर अपनी उंगली रखी और राइफल का निशाना जमीन पर पडी । बेडियों पर क्या गोलियों के प्रहार से बेडियां टूट गईं? मात्र दो सेकंड में हुए सेक्शन के बदले में बाकी गार्ड्स रिएक्शन देने के लिए तैयार हुए । पर तब तक जावेद ने उस कार्ड को अपनी ढाल बना लिया और बाकी गार्ड की चलाई गोलियां उसके शरीर में घुसती चली गई । जावेद ने राइफल से फायरिंग चालू रखी थी और अगले दो सेकंड के अंदर कैद खाने के अंदर वो अकेला जीवित इंसान बच्चा जावेद ने अपनी फटी हुई टीशर्ट उतारकर फेंक थी । अब वो सिर्फ बनियान और कार्गो पैंट्स में था । बनियान पर जगह जगह खून के धब्बे पडे हुए थे । राइफल उठाकर वो आगे बढा और फिर कैद खाने से बाहर निकल आया हूँ । अब वह राहदारी में था जिसमें जगह जगह लगे छोटे पीले बल्बों से हल्का प्रकाश हो रहा था । राहदारी साफ थी वो आगे बढा । आगे कमरा दिखाई दिया । उसने बेहद सावधानी के साथ उसका दरवाजा खोला । अंदर कोई इंसान तो नहीं दिखा पर वहाँ जावेद को अनेको हथियार दिखाई दिए । जावेद के चेहरे पर ठीक वैसे भाव उभर आए जैसे किसी महिला के चेहरे पर एक शानदार ज्वेलरी शॉप के अंदर पहुंचकर उभर आते हैं । वहाँ एक से एक राइफल थी जिनमें से कई जावेद अपने आर्मी के दिनों के बाद आज देख रहा था । कमरे में आगे बढते हुए उस की नजर एम सिक्सटीन असॉल्ट राइफल पर गई । उसे ऐसा लगा जैसे कोई पुराना दोस्त कई सालों बाद मिल गया होगा । तो उसने आगे बढकर राइफल हाथों मिली । उसे लेकर निशाना लेने की मुद्रा में आया । फिर मुस्कुराते हुए उसे निहारने लगा । एक छह में उसे कई ऍम रखी दिखाई नहीं । उसने ट्रेन में से दो उठाई और अपनी जेब में डाल नहीं । फिर राइफल कंधे पर लटकाकर बाहर निकला । एकदम पुराने दिनों की तरह उसमें राइफल का काटे देखा ऍम यानी छह सौ मीटर तक हाॅट लेने में कोई दिक्कत नहीं आने वाली है । गुड जावे तेजी से राहदारी में आगे बढता गया । वहाँ कोई भी नहीं था । राहदारी खत्म हुई और अंत में उसे एक संख्या सा गड्ढा दिखाई दिया जिसमें नीचे उतरने के लिए सीढियां थी । जावेद ने राइफल पीठ पर डांगी और एक हाथ में पिस्तौल लेकर नीचे उतरने लगा । नीचे उतर कर उसने पाया कि वह सुरंग में था । जमीन पर पटरी भी बनी हुई थी जो दूर तक जा रही थी । माइंस के मुकाबले उसने वहाँ बेहतर हवा महसूस की । सांस लेने में कम दिक्कत हो रही थी । रोशनी कम थी पर उसे लगा इससे कोई खास दिक्कत नहीं आने वाली बल्कि उसके लिए बेहतर ही है । तभी सामने से दौडने की आवाज आई । वो किनारे हुआ और उसने राइफल हाथों मिलेगी । तभी सामने से फायरिंग होने लगी । जावेद लेट गया और उसने राइफल निशाने पर लिए । क्रॉस चेयर पर काले नकाब से ढका सर दिखाई देते ही उसने ट्रिगर दबा दिया । नकाबपोश का सर फट गया और मैं नौ साल बाद इस राइफल से पहला फायर और कोई गलती नहीं । जावेद ने कुछ पल इंतजार किया फिर उठ खडा हुआ और सावधानी से सुरंग में आगे बढने लगा । रह रहकर गोलियाँ चल रही थीं । अमर के हाथों में मशीनगन थी । कंधे पर एक और राइफल, जेब में ग्रेनेड्स और कमर पर कारतूस की लडकियाँ उसके जबडे कैसे हुए थे? आंखों से आग बरस रही थी । उसके सर पर खून सवार था । उसने ठान लिया था कि सुरंग में तब तक आगे बढता रहेगा जब तक एक एक आतंकी को चुन चुनकर नाम आदि । वो रिंकी की मौत का बदला इस तरह लेना चाहता था । सुरंग में लाशें बिछाते हुए वह आगे बढता जा रहा था । तभी सामने से गोलियों की बौछार हुई । वो पत्थरों की ओर में हो गया । वो बुरी तरह से हाफ रहा था । अपनी सांसों पर काबू पाते हुए वह मशीनगन की मैग्जीन बदलने लगा । वो अकेला है उसके लिए स्नाइपर राइफल ठीक रहेगी । अमर ने कंधे से ऑरेगेनो एसवीडी स्नाइपर राइफल उतारी जिससे वह दक्षता के साथ उस दूर छिपे टारगेट को आसानी से खत्म कर सकता था । उसने जमीन पर लेटकर पोजीशन ले ली और फिर हमलावर के सर की एक झलक मिलने का इंतजार करने लगा । सर दिखा और फायर एकदम सटीक निशाना अमर आगे बढने लगा । अब उसकी नजरें लगातार स्नाइपर राइफल पर लगी दूरबीन पर थी । फिर सुरंग के छोड पर एक एक करके तीन काले नकाबपोशों, उसमें तीन फायर और किए और वही अंजाम । अमर ने अब हाथों में मशीनगन ली और आगे दौडना शुरू कर दिया । वह सुरंग के अंत तक पहुंचा । वहाँ सुरंग दाएं और बाएं दोनों ओर जा रही थी । वहाँ पहुंचते ही वह जडवत हो गया । सुरंग में बाई तरफ तीन नकाबपोश ठीक उसके सामने खडे थे । तीनों की गन का निशाना उसके ऊपर था । उसने दायां तरफ देखा । उधर दो नकाबपोश थे । वो हो चुका था । मौत निश्चित थी पर उसे हम नहीं था । वो बहुत जल्द वहाँ पहुंचने वाला था जहाँ रिंकी पहले ही पहुंच चुकी थी । उसने ट्रिगर दबाने का फैसला किया । तभी बाई तरफ खडे नकाबपोश का सर खरबूजे की तरह फटा । उसकी खून की छींटे अमर के चेहरे पर भी आकर गिरी और फिर दूसरा और तीसरा दायां तरफ वालों ने तुरंत ट्रिगर दबा दिया । पर अमर तेज ऍम दिखाते हुए पीछे कलाबाजी मार गया । हालांकि अभी भी वह उन दो नकाबपोशों के निशाने पर था, परन्तु यमराज तो किसी और पर सवार थे । सामने से दो और फायर हुए और वही अंजाम अमर रेंगते हुए आगे आया । उसने बाई तरफ झांक कर देखा दूर ऍम, जिसने बनियान और पैंट पहनी हुई थी और वो धीरे धीरे हाथ की तरह मस्त चाल में आगे बढते आ रहा था । वो चाहता था अमर उठ खडा हुआ । कुछ देर में जावेद वहां पहुंचा तो ठीक हो । जावेद ने पूछा अमर जैसे कहीं खोया हुआ था, उस तरफ सबके रहे । हाँ क्या हुआ तो मैं जावे । ध्यान से उसकी आंखों में देखते हुए बोला अमर चुप रहा । उसने अपनी मशीनगन उठाई और दाई तरफ चल दिया । जावेद उसके साथ आगे बढा । खाली कैसे मारा? उसने पूछा साहनी, रिंकी कहा है । अमर ने संक्षिप्त में सब बताया । साहनी और नेगी के बारे में सुनकर जावे चौका जिनकी कांत सुनकर उसने अमर के कंधे पर हाथ रखा । अमर ने कहा, मैं तब तक शांत नहीं बैठने वाला जब तक के एक एक आतंकवादी को खत्म कर दो । तभी उन्हें सुरंग में पीले रंग की रोशनी दिखाई दी । एक छोटी सी स्वचालित ट्रॉली चली आ रही थी जिसके सामने एक हाईबीम का बल्ब लगा हुआ था । अमर ने निशाना लिया और बाल पर फायर कर दिया । बल्ब टूट कर बिखर गया । तभी ट्रॉली की तरफ से आवाज आई अब मेरे आम ये मैं हूँ । अमर ने जॉन की आवाज तुरंत पहचान जॉन और कैप्टन ट्रॉली पर सवार थे और नजदीक आती जा रहे थे । जॉन चलाया अब खतरा चल चुका है । बाकी का काम अब आदमी संभाल रही है । अमर उसे अनसुना कर के आगे बढने लगा । जावेद ने उसके कंधे पर हाथ रखा पर उसने उसे झटक दिया । अमर अमर नहीं रुका जावे, दौड कर उसके सामने आ गया । मुझे मतलब को अमर के चेहरे पर चाय भाव किसी का भी दिल दहला सकते थे । पागल मत पर हूँ । खाली मर चुका है । उसका मिशन फेल हो गया है । अब हमारा देश सुरक्षित है । जब तक उसका एक भी आदमी यहाँ जिंदा है, हमारा मिशन खत्म नहीं होगा । हमारा मिशन खत्म नहीं होगा । कहकर अमर ने उसे जोरदार धक्का दिया । कोई और होता तो वह जरूर पीछे जा गिरता और जावेद बस कुछ कदम पीछे हो गया । शांत हो जाओ योग कत्लेआम करने से अब रिंकी वापस नहीं आने वाली है । पर मैं तो उसके पास जा सकता हूँ । नहीं, वो ऐसा नहीं चाहेगी । अमर उसे अनसुना करके आगे बढ गया । तभी सामने कोई नकाबपोशो अमर ने फायरिंग शुरू कर दी । गुस्से की ज्यादती के कारण उसने पूरी मैग्जीन उस पर खाली कर दी । इतने पर भी वह नहीं रुका । उसके पास पहुंचकर वह पागलों की तरह राइफल का प्रहार उसके सर पर करने लगा । राम साथ तो मैं को खत्म करूंगा, खुद अपने हाथों से करूंगा । जागएा तेजी से उसके पास पहुंचा और उसने पीछे से उसे एक चलती है । अमर एक तरफ की रहा हूँ । जावेद ने उसका गिरेबान पकडकर उठाया और एक जोरदार जहाँ पर जड दिया अमर का चेहरा लाल हो गया । उसका गुस्सा उतर गया । उसकी आंखों में आंसू भर आए । वो बनाने लगा मुझे मर जाने दे भाई, मुझे मर्ज अनीता मैं सबको मार दूँगा, फिर खुद मर जाऊंगा । खर्चा होश में आओ । जावेद गंड भास्कर जी खा क्या तो इस दुनिया में अकेला है जिसने अपने चाहने वालों को खोया है । अपने प्रियजन के बिछडने का मैं भी अच्छी तरह से समझता हूँ । मैंने अपनी बीवी बेटी को खोया है । मैं जानता हूँ यह हम कभी काम नहीं हो सकता है । पर यकीन हाँ, वक्त के साथ इसे सहने की हिम्मत आ जाती है । उसके बिना जीने का कोई मतलब नहीं । जावेद तो मेरी सोलमेट थी । मेरा जीवन भी उसके साथ खत्म हो जाना चाहिए और उस प्रतिज्ञा का क्या जो तुम्हें सीक्रेट सर्विस जॉइन करते वक्त ली । मरते दम तक देश की सुरक्षा करूंगा । वो प्रतिज्ञा मेरे मरने से नहीं टूटने वाली मैं उसका नाम की बात कर रहा हूँ जिसमें हम कहते हैं कि हम अपने व्यक्तिगत मामले को कभी देश की सेवा के रास्ते में नहीं आने देंगे । अब तू अपने प्यार के लिए एक बे मतलब मौत को गले लगाकर देश की सेवा से भागना चाहता है । अमर चीज पर तो इन की नहीं गलत किया तो उसे कोई हक नहीं था, अपने भाई को मारने का नहीं । उसे हफ्ता खुद की जान लेने का जॉन भी अमर के पास पहुंच चुका था । वो बोला मेरे आम मैं जानता हूँ तेरे दिल पर क्या बीत रही है पर योग पागलपन करके तू क्यों अपनी जान गंवा देना चाहता है । मुझे नहीं पता की आत्मा का कोई वजूद होता है की नहीं । पर अगर दिन की की आत्मा है तो यही चाहेगी की तो निरंतर आतंकवादियों के खिलाफ इस मिशन पर लगा रहे हैं । अपने देश को उनसे बचाता रहे ना कि पागलपन में ही बेवजह ही अपनी जान कमाते । जो रिश्ता तुम दोनों के बीच था वो खूबसूरत रिश्ता था । उनकी याद है तुमसे कोई नहीं छीन सकता । जीना मरना तो हमारे हाथ में नहीं । रिंकी ने मरने से पहले अपने जीवन का मिशन पूरा किया । अब जो काम वो आगे कर सकती थी । उसे जब तो पूरा करेगा तो क्या तुझे गर्व नहीं होगा? खुशी नहीं होगी । क्या इस तरह बेवजह खून खराबा करके वो उद्देश्य पूरा होगा? अमर हताश स्वर में बोला, पहली बार जिंदगी में मुझे सच्चा प्यार हुआ था और वो इतनी खुदगर्ज निकली कि उसने सोचा भी नहीं । उसके बिना मेरा क्या होगा? उसकी आंखें भर आई । जॉन ने आगे बढकर उसे गले लगा लिया । तो नहीं पता है आज मुझ पर क्या बीती जब मुझे पता चला कि सरीना और फलक जिंदा है । जहाँ भी बोला वज जॉन के मुंह से निकला अभी जान और फलक अमर बोला फिर अपने आंसू पोंछते हुए मुस्कुराया । ये तो बहुत खुशी की बात है । मुझे समझ नहीं आ रहा कि खुशी मनाओ हम कहकर जावेद ने जेब से खाली की दी हुई फोटो निकालेंगे । नचाने दुनिया के कौन से कोने में है तो इसका मतलब ये प्लेन आतंकवादियों द्वारा हाईजैक किया गया था । फोटो देखते हुए जॉन बोला अगर खरीद ली जिन्दा होता तो शायद इसके बारे में कुछ और पता चलता था । जावेद अफसोस के साथ हो रहा है फिर भी अभी का तो है । जॉन बुरा । छह साल बाद ये तो पता चला कि वह जिंदा है । चाय प्लेन के सभी यात्री जिंदा है । अब इस बात को ख्याल में रखकर खोजबीन शुरू की जाएगी तो जरूर कुछ न कुछ हाथ आएगा । जावेद ने खामोशी में सर हिलाया । अमर ने जावेद का कंधा थपथपाया, भावी जन और पालक जरूर मिल जाएंगे । तभी सुरंग में आर्मी के जवान दौडते हुए प्रविष्ट हुई । उन तीनों के बगल से निकलते हुए वह सुरंग में आगे बढते चले गए । खाली की बच्चे कुछ सेना का सफाया करने के लिए ।

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