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बर्फ़ख़ोर हवाएँ -01

आप सुन रहे हैं कुछ हॅूं किताब का नाम है बर्फ खोर हवाएं जिससे लिखा है हरप्रीत सिखाने हाँ जी आशीष चैन की आवाज में कुक ऍम तो नहीं जो मन चाहे पर खोर हवाएं स्लो साफ करने जाऊ या नहीं घुटने घुटने पडी बर्फ देख कर एक बार तो कमाल खबरा उठे कैसे साफ करूंगी इतनी बर्फ अभी कुछ समय पहले ही तो ड्राइव वे साफ किया है फिर उतनी ही पड गई वो कुछ पल उसी तरह खडी बाहर की और देखती रहेगी करूँ न करूँ असमंजस में बडी अभी तो पूरा दिन सर पर पडा है शाम को काम पर भी सारी शिफ्ट खडे पांव बतानी है । उसके दूसरे मान ने कहा पर ये तो हटाने से ही हटेगी तो देखते रहने से कुछ नहीं होगा । गुरनूर के जागने का समय भी होने वाला है । इधर उड गया तो वहाँ छूट के से को ठंड में ले जाउंगी । खिडकी में से बाहर देखते हुए कमल दुविधा में पड गई । जब से कमाल की आंख खुली थी, बर्फ के फाहे गिर रहे थे । दोपहर तक धरती पर बर्फ का अंबार लग चुका था । उस साथ ही साथ दो बार अपनी कार निकालने के लिए ड्राइव वेपर से बर्फ हटा चुकी थी । ऐसा करते हुए वो पसीना पसीना हो गई थी, पर उतनी ही बर्फ फिर पड गई थी । खिडकी नहीं देखती । कमल ने अपने टांगों में थकान महसूस की । वही सोफे पर बैठ गई । उसका मन किया कि सामने पडे मेज पर टांगे फैलाकर आराम से बैठे । फिर उसने अपने आप से ही कहा कैसे बैठ जाऊँ आराम से । अभी तो बीस कम पढे हैं करने वाले ये सोचने लगी शाम के खाने के लिए क्या बनाकर रखें बच्चों के लिए उसने सोच लिया कि मैकरोनी बना देगी और गुरचरण के लिए क्या बनाए गुज्जर उनका ख्याल आते ही उसके अंदर एक ग्रुप चाहे घर वो घर वापस नहीं है तो अगर नहीं आएगा तो कहाँ जाएगा? खुदा जाएगा पहले की तरह एक दो दिन मूड खुलाकर ठीक हो जाएगा की सोच कर उसने अपने आप को डाॅ देने की कोशिश के पर अगले ही पाल उसके अंदर गुरचरण का कल शाम को आंटी के घर चले जाना और वहीं से ही सवेरे काम पर चले जाना खतरे की घंटी बनकर बजा । उसके चित्र में आया की आंटी को फोन करके गुरभजन के बारे में पता करें पर उसने अपने आप को ये सोचकर रोक लिया कि शायद गुरचरण ने इस बारे में आंटी के साथ बात ही ना कि हो । फिर उसको गुरचरण के कहीं शब्द याद हुआ है । उस ने कहा था और कितना जलील कराएगी मुझे अब हमारी वजह से जलील होने लग पडा है । तब तो कहा करता था की सहारे की जरूरत है ना बदल जाता है आदमी वो गहरा सांस लेकर उडते हुए बोली बैठे बैठे कैसे काम चलेगा । बहन गुरूर के सोते सोते जितना काम निपटा सकती हूँ, निपटा लो । रसोई में जाकर उससे मैकरोनी को उबालना रख दिया और फ्रिज में से हरी और पीली शिमला मिर्च, टमाटर और मशरूम निकालकर उसके छोटे छोटे टुकडे करने लगी । चल गुरचरण के लिए खंबों की सब्जी बना देती हूँ । उसको सूझा मैकरोनी खाते को पता नहीं क्या तकलीफ होती है । कहता है रोटी के बिना तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता । पूरे परिवार के लिए अलग अलग बनाओ । उसने अपने आप से ही कहा उसके दिमाग में अपने सहकर्मी पाली के शब्द गूंजे । वो कहती है यूपी ना फिर से विवाह के चक्कर में फंस जाना मुश्किल से तो निकली है गुलामी के चंगुल से यू नो वो टाइमिंग फिर उसको पाली की पूछ वाली बात स्मरण हुआ । अभी तक लगाए फिर भी उसकी पूछ उस वक्त कमाल के तलाक को हुए अभी कुछ ही महीने हुए थे । कंपनी के किसी फॉर्म पर दस्तखत करते हुए जब हरकमल बात लिखा तो पानी नहीं वाकी कहा था । कमाल ने हैरानी के साथ उसकी और देखा । उसको पाली की बात समझ में नहीं आएगी । वाली बोली अपने एक्स का लास्ट नाम उतार है कि एक तरफ कमाल ने पहले कभी इस बारे में सोचा ही नहीं था । वो बोली तो फिर अपने पेरेंट्स वाला लास्ट फिर से लगा लूँ । खुद काम आती है, खुद अपने बच्चे पालती है । अपना नाम आप चुन फॅस । कमल को लगा जैसे फॅस कहते हुए पाली की आवाज कुछ अधिक ऊंची हो गई थी । पाली फिर से बोली लाॅस! मैंने अपना नाम खुद चुना है । डबल ने उसके फॉर्म की तरफ देखा । जसपाल पाली देखकर कमल ने गुड फॉर यू कहकर उसका फॉर्म लौटा दिया । पर ये पूछ वाली बात कमाल के दिमाग में आ गई । हरकमल के पीछे बात लिखते हुए उसके दिमाग में पूछ पूछ मुझे लगा । वो सोचती है कि वह भी बास के स्थान पर कमल लगा लें । फिर उसको ख्याल आता कि बच्चों के नाम के पीछे भी तो बात लगा है । इस प्रकार बच्चों से उनका नाम हो जाएगा । बच्चे बेचारे बडे होकर क्या सोचेंगे की पिता तो उनके पास था ही नहीं और माने भी उनसे अलग नाम रख लिया । फिर तो बच्चों का नाम भी अपने नाम जैसा ही बदलने का विचार करने लगती । ऐसा करने के लिए उसने वकील से पूछा भी था । वकील ने उसको बताया कि बच्चों का नाम बदलने के लिए उनके पिता से अनुमति लेनी पडेगी । यदि उसने आज्ञा ना दी तो कोई आधार बनाकर पेश किया जा सकता है । अनुमति और केस के बारे में सुन कर कमल ले चुप्पी धारली ऐसे तो सारी कमाई वकीलों के चक्करों में खत्म कर दूंगी । उसने सोचा और नाम बदलने वाला काम उसने किसी अन्य अवसर के लिए छोड दिया । लेकिन ये ऊंच उसको अक्सर ही तंग करती है और जब कमल ने सुना कि बच्चों का पिता जिन्दर इंडिया जाकर नया विभाग करवाया है तो कमाल के दिल में आया । उसने तो कभी बच्चों से मिलने की कोशिश नहीं की और तलाक के वक्त उसने बगैर किसी हील हुज्जत के बच्चों की पूरी पूरी देखभाल मेरे पास ही रहने दी थी । उसका बच्चों से कोई झूठा भी नहीं तो फिर वो उनका लास्ट नाम बदलने की क्यों ना अनुमति देगा ही । सोच कर कमल ने वकीलों के खर्च से बचने के लिए किसी साझे व्यक्ति के माध्यम से नाम बदलने वाली बात जिन्दर तक पहुंचाई थी । उसका सख्त इंकार सुनकर कमल ने गुस्से में आकर के लडके का इरादा कर लिया । पर थोडी देर बाद वकीलों के खर्च के बारे में सोच कर इस काम को पिछली अन्य उपयुक्त समय के लिए मुल्तवी कर दिया गया । कमल सोचने लगी, उसे कितनी मौज है एक तो बच्चों की कोई चिंता नहीं, ऊपर से नई घरवाली ले आया है और बच्चों के नाम के पीछे अभी भी उसके नाम की पूछे लगी है और मुझे लडना पडेगा । अपने नाम के लिए कमल को खींचने लगी । फिर उसको अपने आप पर गुस्सा आने लगा तो उसने बच्चों की सारी जिम्मेदारी अपने सिर पर ही क्यों ले ले । लेकिन ये गुस्सा कुछ देर का ही था और कमल को उस घर में रहते कलेश का खयाल आ गया और फिर कमल को जिन्दर के साथ बताया अंतिम दिन भी स्वर्ण हुआ । आया लडते तो वो अक्सर ही रहते थे । पर उस दिन जिंदर ने हाथ उठा लिया था और उसका उठा हाथ कमाल की यादों में नासूर बन गया था । कुछ दिन जिंदर ने कहा था आज फिर नहीं लेकर गई बनी एक्सचेंज के यहाँ कमाल ने देखा था कि जिंदर बाहर से आकर पहले अपने माँ बाप के कमरे में गया था और फिर वहां से निकलकर उसने वक्त बोला था मेरे पास अपनी कमाई लुटाए जाने के लिए टाइम नहीं है तो मैंने जवाब दिया था तो में गाडी पर ले जाने के लिए कहा था । कमाई उन्होंने अपनी भेजी है । जितना कमाते हैं इंडिया में वी जी को भेजे जाते हैं और वहां वह नशों में उडाये जाते हैं । यहां हमें कभी एक्सेंट तक नहीं दिया । घर का खर्च पता है कैसे चलती हूँ उन्हें सेंड देने की जरूरत नहीं है । उनके बेटे का घर है । बेटा तो जैसे कमाई करके बैंक भरे जा रहा है । जितना कमाते हो उतने का दशा कर लेते हो । आप को साल ईपीआई को दिया की तरह काटने को दौडता है । मेरे साथ इस तरह बोलने की जरूरत नहीं है । मैं भी इस तरह बोल सकती हूँ देख ले लेकिन बोल कर तो इस तरह सबके सामने मुझे लाती है । तभी तो ये दूसरे नशे करने लग पडा है । अगर अच्छी होती तो प्यार से दारू भी छोडा देती । कमाल ने देखा तो उसकी सास अपने कमरे में से बाहर आते हुए कह रही थी, मम्मा आप मुझे ब्लेम करने लग जाते हो, इसको क्यों नहीं कहते कि काम क्या करें? और अगर मेरे कारण नशे करने लगा है तो फिर जी को तो नहीं लगाया मैंने नशा करने पर सयानी बहुत बडों के सामने आंख उठाकर नहीं देखा करते हैं और तुझे छोटे बडे किसी का लिहाज ही नहीं । कमाल की सांस ने कहा अगर ऐसा समझते हो तो उसके पास चले जाओ जो लिहाज रखती है । कमल बोली हम क्यों जाएँ? हमारे बेटे का घर है तू जा जहाँ जाना चाहती है । बेटा क्या लगता है इससे मैं देती हूँ । कमाल ने अभी बात भी पूरी नहीं की थी कि जिंदर हाथ उठाकर बोला तुझे नहीं करता हूँ । सीधी पर तमल ने उसका उठा हुआ हाथ रहने ही रोक लिया और वो घर बिखर गया । सब्जियाँ काट रही कमल ने सोचा आदमी विभाग करवाकर और तो को अपनी प्रॉपर्टी क्यों समझने लग जाते हैं । जी बेशन और उसकी कमाई पर रहे हूँ ये तो फिर भी कमाई करता है । और वो वो जो चंद्र का विचार आते ही कमाल का हाथ तेज तेज चलने लगा । चाकू उसकी उंगली पर फिर गया । कमल ने दर्द में होर दाँतो तले दवा लिए । उंगली में से खून बहने लगा । कमाल ने खून रोकने के लिए ब्लॅड लपेटकर मूडी । कमल ने एक नजर फिर खिडकी में से बाहर की ओर झांका और वहाँ से रसोई की ओर बढते हुए उसके नेहा दीवार पर टंगी उनकी पारिवारिक तस्वीर से टकरा गई । उंगली को दबाए वो ईद तक तस्वीर की और देखने लगे हैं । गुरचरण के कंधों पर चढे बैठे अर्जुन उसकी अपनी गोद में बैठा गुरनूर दाई और खडी सन्नी का मुस्कुराता मुखडा और फिर गुरचरण का खिला हुआ चेहरा निहारती । कमल ने सोचा तो उसको गुरचरण के नाम बदलने वाली बात मान लेनी चाहिए और चुप चाप बच्चे पालने चाहिए । चुप होकर बच्चे पालने वाला ये विचार कमल को तब भी आया था जब वो अपने मायके में रहती थी । वो मकान जिसमें वजन डर के साथ रहती थी, देश दिया था । अपना हिस्सा लेकर कमल अपने मायके वाले घर में आ गई थी । उसकी माँ ने बच्चों की ओर से उसको बेफिक्र कर दिया था । वो काम पर जितना भी ओवर टाइम मिलता लगती, घर पहुंचने पर माँ के हाथों की पक्की रोटियां भी मिल जाती है । पर वहाँ की छांव उसके भाग्य में अधिक नहीं देखी थी । एक दिन नहाते हुए उसकी माँ गुसलखाने में गिर पडी । उसको जबरदस्त धन हुआ था । पहले अस्पताल में और बाद में बुक केयर होम में पहुंच गई थी । कमल को लगता है कि घर का खास ही गिर गया वहाँ जो पूरे घर की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाए पडती थी को खुद ही सहारे की जरूरत पड गयी थी । बच्चों को संभालने की समस्या पडी थी । कमाल की बेटी सिम्मी तो स्कूल चली जाती थी पर अर्जुन और कमाल के भाई का बेटा अभी स्कूल जाने की उम्र से छोटे थे । तब बल्कि भावी कहती उसको तो बडी मुश्किल से काम मिला था परन्तु भावी को काम छोडना पड गया था । कमल को लगता है कि काम छोडने के बाद उसकी भावी खेल जी चिल्लाई सी रहने लगी थी । कमाल के घर में घुसते ही वो अक्सर कहती है दीदी की अर्जुन बहुत तंग करता है । दिनभर उछलता कूदता रहता है और छोटे बच्चों को उल्टी बातें सिखाता है । मैं तो सारा दिन उसके पीछे पीछे घूम कर थक जाती हूँ । कमल को लगता है कि वह थकी से ज्यादा उगती पडी थी । कमल को अनुभव हुआ कि वह कुछ अधिक की टोकाटाकी करने लग पडी थी तो कभी रोटियां बनाकर हटी । कमाल से कहती दीदी तुम रोटियाँ बनाते वक्त आता पता नहीं तू इतना विकेट देते हो या कभी कहती दीदी बर्तन साफ करते वक्त तुम पानी संग से बाहर निकाल देती हो या कहती दीदी मैंने बडी मुश्किल से कप प्लेट एडजस्ट किए थे तो मैं फिर पहले वाली जगह पर रख दिए । उत्तरमें कमल कहती पहले इतने सालों से कब बोर्ड में रखते थे । आदत पडी हुई है वहाँ रखने की । धीरे धीरे नई कब बोर्ड की आदत पड जाएगी । कमाल के अंदर कुछ साउथ था । उसका मन करता कि कहीं ज्यादा मेर न जाता । मेरा भी उतना ही घर है जितना तेरे पति का । पर वो सब रखती । सोचती कि यदि वो बोली तो घर में कलेश पड जाएगा जिससे उसके पापा को बहुत दो पहुंचेगा । वो तो पहले ही माँ वाले सब में सही ले घूमते थे । कमल अंदर ही अंदर गुस्से को लिए घूमती फिरती रहती है । जब काम पर से लौट थी बच्चे उसके साथ दौड करने पड जाते हैं । कमल महसूस करती है कि जब वहाँ तंदुरुस्त थी तब बच्चों को खयाल भी नहीं होता था कि उनकी मम्मी घर पर है भी कि नहीं और कमल बच्चों को संग लेकर माँ का पता लेने, केयर होम की और तोड जाती वहाँ की खैर खबर लेने आई अन्य स्त्रियां अक्सर ही कह देती थोडे जैसे पडी थी अभी इसको क्या होना था अगर लडकी का दुखने लगता उनकी बातें सुनकर कमल सोचती कि उसमें कौन सा जानबूझकर दुख दिया है । ये भी अच्छा घर मिल जाता तो किस का दिल करता है । घर तोडने को कमल का मन होता है कि वो उनसे दूर भाग जाएगा । जब अपनी माँ को बिस्तर से लगे अपने आप हिलने डुलने में भी असमर्थ देखती तो कमाल के अंदर शायद ये हालत होती है और उसकी आंखें आंसुओं से डबडबाई जाती है । वो सोचती है कि किससे अपना दुख साझा करें । सारी दुनिया उसको बेगानी लगती है । इन्हीं दिनों एक दिन वह काम के टाइम में बाहर गिर रही बर्फ की और तब देख रही थी क्या सोच रही है डबल के कानों में पाली की आवाज पडे यू लगता है जिसे दुनिया भर की सोने अपनी कैलगिरी में ही गिरना होता है और बहुत सी जगह पडी हैं वहाँ नहीं पडती है । कमल नेपाली के हंसने की आवाज सुनी और फिर उसके शव हर जगह के अपने कुल अवगुण होते हैं । इस तरह किलर्स में से कुछ नहीं बनता । इसके साथ तो टक्कर लेनी पडती है तो वो टाइम इन कमल को पाली की ये बात कई बार याद आती है । सब्जी बनाकर हटने के बाद खिडकी में से बाहर की और देखते हुए भी यही बात याद आई । कमाल की निगाह एक आदमी पर पडी तो छोटे से बच्चे को कंधों पर उठाकर बर्फ में बडी सावधानी से पैर रखता हुआ चना चाह रहा था । देख कितनी कठिनाई में पैर रखता है । बेचारा हमने सोचा फिर उसका दिमाग में एकदम अर्जुन का खयाल हुआ । या तो बच्चे की उम्र में अपने नाना के कंधों पर चढ ने के लिए अपने मामा के बेटे से लडाई करता है मेरा ग्रैंड पा है मेरा ग्रैंड पा कहते हुए दोनों आपस में लडते । फिर एक अर्जुन रोता हुआ कमाल के पास आकर बोला था माँ ॅ की साइड लेते हैं, मुझे देगी । बैट राइट नहीं देते । कमाल के दिल में आया की अपनी वापस से कहे कि पक्षपात माँ क्या करें? पर पापा तो पहले ही माँ के कारण दुखी हैं । सोच कर उसने अपने आप को रोक लिया और अर्जुन को चुप करवाने के लिए करीब बैठे अपने भाई की ओर इशारा करते हुए कहा जाए तो अपने मामा के कंधों पर चढ जा । मामा के कंधों पर जडजा जिसे मामा को और कोई काम ही नहीं होता । अपने भाई के रूप में शब्द सुनकर कमल अपने आप को रोक कर सके तो बोली मैं तो सोचती थी कि तो बच्चों को इतना प्यार करेगा क्योंकि गेट की कभी महसूस नहीं होगी । तू तू तू तो बिलकुल लाइक नहीं करता हूँ । लाइक क्या करूँ? इतनी तो गालियाँ सकता है । सारा दिन शैतानियां करता घूमता है और छोटों को भी सिखाता है । नहीं नहीं लडो मत आप वो तुझे उठा लेता हूँ । कमल अपने पापा के शब्द सुनकर शांत हो गई । जब उसका गुस्सा कम हुआ तो सोचने लगी कि आई पहले तो ऐसा नहीं था । मिलने आई सभी को तो वो अपने से एक मिनट के लिए भी झूठ नहीं करता था और उसका भी तो कितना ख्याल रखता था उसके साथ । कई बार जिन्दर द्वारा की जाने वाली जाती को देख वो जिन्दर को पीट देने की बातें भी करता था और वहाँ के समझाने पर समझ जाता था । ये तो माँ के बाद ही पता नहीं सभी को हो क्या गया है । कमल ने एक आह भरी घर में रहते हुए तनाव से तंग आकर कमल अपनी आंटी की सलाह मान ली थी । उसकी माँ की बीमार होने के बाद तो आंटी अक्सर ही कहने लग थोडी जी जो चार पैसे पास में हैं उनसे कोई छोटा मोटा मकान खरीदकर किराए पर चढा देंगे । मकान अपने नाम हो तो रिश्ता जुडने में आसानी रहती है और प्रदेश वरना करेंगे । यदि तेरे पापा को कुछ हो गया तो भाई भाभी तुझे संग कहाँ रखेंगे? अभी कैसे निकाल देंगे घर पापा के नाम है । पापा के बराबर काम करके मॉडगेज की किस्त दी है । मैंने इस घर की तो मालिक छत से जवाब दिया । पर ये बात कुछ दिनों बाद ही सामने आ गई । कमल द्वारा मकान खरीदकर किराए पर चढाने के वक्त उसके पापा ने दस हजार डॉलर अपनी और से कमल को दे दिए थे । इस बात की भनक पडते हैं । उसका भाई भडक उठा था । उसने लकीर खींचते हुए कह दिया या तो ये रहेगी इस घर में क्या मैं ही कौन होता है? मुझे यहाँ से निकालने वाला है । अब अगर आप हो तो मैं भी चली जाती हूँ । कमल बोले मैं तुझे इस तरह कैसे घर से धक्का दे दूंगा तो लोगों को तमाशा ना दिखाओ हूँ । उसके पापा ने कहा और फिर तू रो । बहन भाई की मिन्नत याचना करके कलेश को खत्म किया गया पर वो लकीर नहीं बता सकता था । कमल घर की बेसमेंट में रहने लगी और उसका भाई ऊपरी हिस्से में दिन में उसके पापा अर्जुन को साथ लेकर केयर होम चला जाता । इस प्रकार काम तो पडा था पर तनाव और अधिक घना हो गया था । इस घुटन का शीघ्र ही विस्फोट हो गया । जिस दिन कमाल के वैंकुवर से आए मामा के पुत्र घर में आना था, उस दिन उसको अपने पापा पर बेहद गुस्सा आया । मामा के पुत्र के आने की उसको बहुत खुशी हुई थी । उसके साथ तो बचपन में खेली थी, फंसी थी और उसके साथ उसकी बचपन की बहुत यादें जुडी हुई थी । उसके पापा ने बताया था कि वह पहले घर आएगा तो चाय पानी पीकर वो कमाल की माँ की खबर लेने केयर होम जाएंगे । पर अपने पापा की अगली बार सुन कर बर्तन साफ कर रही कमाल के हाथ वहीं तब गए उसके समझ में नहीं आया कि वह क्या करें, क्या करें? उसके पापा ने कहा था हमारे बेटे तो उसके आने से पहले बच्चों को कोई मूवी वगैरह दिखाने ले जाए या किसी सहेली के घर चली जाए तो मुझे हैरानी के साथ अपने पापा की और देखा । उसके पापा ने फिर कहा, लोगों को क्यों बताना की? बहन भाई एक दूसरे से बोलते नहीं । उससे मैं आई । कमल ने बच्चों को कार में बिठाया और चक्की चीज रेस्टोरेंट में ले गई । जब तक बच्चे खेलते रहे, वो अपने आप पर नियंत्रण किए बैठे रहे हैं । बार बार उसके मन में आता पानी ऊपर रहने वालों को नहीं कहा घर से जाने के लिए मुझे क्यों? जब बच्चों का मन और पेट भर गया तो कार में बैठकर कमल का दिल बुक्का फाडकर होने को हुआ और बच्चों का ख्याल करके उसने अपने आप को रोके रखा । उसके अंदर की पीडा का गुवार मोटे मोटे आंसुओं के रास्ते तब तब करके बाहर आने लगा तो हुई कार को सडकों पर दौडती रही । सिमी ने पिछली सीट से दो बार पूछा भी वह कहाँ जा रहे हैं और कमल ने कोई जवाब नहीं दिया । जब सिविल तीसरी बार पूछा तो उसने कंटेश्वर में कहा हुए बच्ची ने दोबारा कोई सवाल नहीं किया । आंखों में आंसुओं के कारण कमल को सब कुछ धुंधला धुंधला नजर आ रहा था । कमल ने लालबत्ती के बावजूद कार निकाल दी । किसी कार का लम्बा हॉर्न बजा । मम्मा घर चलो कमल को सभी की आवाज सुनाई दी । उसने शीशे में से पिछली सीट की और देखा । सिमी ने अर्जुन को आपने सुन चिपका रखा था तो उनसे घर कमाल के मुझे निकला । अपने घर कहकर अर्जुन जोर से रोने लगा । उसके रोने नहीं कमाल के पहले से हिले हुए दिल में और हलचल मचा दी । पुकार को सडक के किनारे रोककर दोनों बच्चों के बीच बैठ गई । दोनों को अपने से कसकर लगा लिया और रो पडी । बच्चे अपनी माँ से लिपट गए । उन्हें सहलाते हुए कमाल कर उधर धमाल तो उसने अपनी आखिर पूछ कर कहा आज की रात हम तो भरे मामा के घर चलेंगे और कल हम अपने घर जाएंगे । मोहम्मद था । कमल को सिमी के हैरानी भरी आवाज सुनाई दी । हाँ तो मामा कही हर है, क्या हुआ अगर तुम्हारे नाना के नाम है । कमल ने कहा अगले दिन कमल अपना सामान किराए पर दिए अपने मकान की बेसमेंट में रखना शुरू कर दिया । कैसी पागलो जैसी बात करती है । बच्चों को मुश्किल होगी, कैसे गुजारा करेगी, आराम से टिक कर रहा नहीं जाता । यहाँ कमल ने अपने पापा के इन शब्दों कि और अधिक ध्यान नहीं दिया और अपने आप हो जाएगा तो जा रहा हूँ कहकर बात खत्म कर दी है आपने । उन दिनों को याद करते हुए कमल ने सोचा फिर घर टूट गया तो कैसे उस सब में से दोबारा निकलूंगी खुद हो जाएगा जिससे पहले हो गया था उसके दूसरे मैंने कहा पहले तो दो बच्चे थे, अब तीन हो गए वाली कितना मना किया करती थी । फिर उसी चक्कर में फस गई । उससे नहीं दोबारा इस्नर कैसे निकला जाएगा । इससे पहले तो मैं पहले ही ठीक थी, क्या मालूम वो कनाडा आने के लालच में विभाग करवा ले और यहां पहुंचकर किनारा कर लें । कमल ने कहा था जब उसकी आंटी ने इंडिया से आ रहे किसी रिश्ते के बारे में उसकी राय जाननी चाही थी । कमल का तलाक हुए अभी तीन महीने ही हुए थे जब उसकी आंटी ने कहा था कमल विभाग के बारे में क्या विचार है? कमाल के दिमाग में एक विचार आया कि आंटी को माने ही पूछने के लिए कहा होगा । उसने एक दिन पहले ही कमाल के साथ इंडिया से किसी रिश्ते की जानकारी देते हुए बात की थी । कबल को अपनी माँ पर गुस्सा भी आया । कितना सकी बना भी क्या की हर बात ही दूसरे को बता दी जाए । आंटी मैंने तो माँ को बता दिया था कि मुझे ठीक नहीं लगता । कम्बल ने कहा मैं उसकी बात नहीं कर रही है और बहुत से रिश्ते आते हैं तो अपनी मर्जी पता कहाँ से इंडिया से था । कईयों ने पूछा है । आंटी ने बताया कमल का इनकार सुनकर वो बोली अब तो बच्चों में व्यस्त रहती है । जभी जवान हो गए ये अपने आप में मस्त हो जाएंगे । फिर तू क्या करेगी कि अगर आंटी की बात मानकर कोई साथी तलाश लेती तो अच्छी रहती ही । अंकल के पूरे होने पर मैं भी कहती थी की मुझे विवाह नहीं करवा रहा हूँ । अब जब अकेली को घर काटने को आता है तो लगता है की गलती थी मेरी तभी ढूंढ लूंगी साथी । साथ ही तो वो होता है जिसके कंधे से कंधा जोडकर घर बनाया हूँ । बच्चे पालें हूँ । जब सभी बात नहीं नहीं कहते कहते कमल चुप हो गई । सभी तो एक जैसे नहीं होते । अभी कल की लडकी है तो बच्चे पैदा कर सकती है । अपने बच्चों के साथ ही बंदा घर से बनता है । इंडिया से नहीं मंगाना कोई यहीं करवाउंगी । अगर कोई ठीक सा मिल गया । कमल ने कहा यहाँ तो ये कौन लेकर देगा दो बच्चों की मां को । आंटी के इन शब्दों ने कमाल की अंतरात्मा को आग लगा दी । उसको एकदम सोचा ही नहीं कि क्या उत्तर दें तो भीतर ही भीतर सुलगने लगी । फिर की मैं देखती कमल को सामने मकान की चटनी में से निकल रहा धुआं पर ऐसा लगा इतनी बर्फ के होते हुए जित हूँ, उसको हरा नहीं हुई है । वो कुछ पल हराने के साथ निकल रहे धुएँ की और देखती रही । फिर उसके दिमाग में अंग्रेजी का मुहावरा कौन? हाँ यदि मकान की छत पर बर्फ है उसका मतलब ये नहीं कि मकान में घर भी नहीं है । चिमनी पर से निगाह हटाकर कमल अपने घर के सामने खडे सीडर के तरक्की और देखने लगे । बर्फ से ढके इस तरह के नीचे की ओर झुकी टहनियों की और देखकर कमल को अपने कंधों में खिंचाव महसूस हुआ । उसको लगा जिससे उन टहनियों ने अपने आप को टूटने से बचाने के लिए बाहर अकडा रखी हूँ । फिर उसमें देखा जो बर्फ पहनी ऊपर टिक नहीं रही थी, वो नीचे गिर रही थी । ये देखकर उसको अच्छा लगा । अच्छा उसको तब भी लगा था जब एक आदमी हर रोज उसके पीछे पीछे आने लगा था तो शाम के वक्त अर्जुन को स्टॉलर में बैठाकर सिमी के साथ पाक में जाती है तो व्यक्ति उसी समय पार्क में आने लगा था । उसको पीछा करता देख कभी कमल को आंटी का कहा याद आता है । उस ने कहा था बिना आदमी वाली औरत को हर ऐरा गैरा अपना बिस्तर पर ले जाना चाहता है । याद करके कमर की खींच चढ जाती है । एक दिन कमल ने सोचा कि उस आदमी जगहे स्टाॅक्स ऐसा कहने के लिए जब पीछे की ओर मुडी तो उस आदमी के चेहरे पर आई मुस्कान देखकर वो कुछ कह सके और आगे बढ गई । अगले दिन उस आदमी के संघ एक पांच एक साल का बच्चा था । करीब आकर उसने हल्का सा मुस्कराकर हेलो कहा । कमल को उसकी मुस्कुराहट अच्छी लगी । वो बोला मेरा बेटा है, अपनी माँ के साथ रहता है । वीकेंड पर मेरे पास आता है और फिर उसने अपने बेटे से कहा, बेटा, टीवी के साथ खेलो । कमल ने बच्चे की और देखा फिर उसके पिता क्या? वो कह रहा था आपके बच्चे कितने प्यारे हैं? ऍम तो नहीं करते और मेरा सेम टाइम पार्क में आना । बच्चों के फॅमिली कमल ने उसकी और देखा तो बच्चों की और देखकर कहने लगी लाॅक सोकपिट ली यदि आपस में इसी तरह घुल मिल जाए तो मैं उसे अपने पास ही रखता हूँ । क्या करूँ थोडा सस्ता था कमल को कोई उत्तर नहीं पूजा वो फिर बोला आप के बच्चे नहीं जाते अपने डेट के पास । नो ऍम ने कहा कमल को महसूस हुआ । उसके जवाब संक्षिप्त है । उस को भी कोई सवाल पूछना चाहिए और उस से कुछ भी नहीं पूछा गया । लेकिन पाक से लौटते हुए कमल को अपना आप भरा भरा महसूस होने लगा । उस आदमी का मंद मंद मुस्कुराना, धीमे धीमे बोलना और बच्चों में दिलचस्पी लेना । कमल को सबकुछ अच्छा अच्छा लगा । अगले थे । उस जरा समय से पहले ही पार्क पहुंच गई थी और मुड मुडकर उस रहा की और देखने लगी जिस रहा से वो आता था । जब वो आता दिखाई दिया तो कमाल का दल धडका । उसके गरीब पहुंचते पहुंचते कमल का शरीर झूठा पडने लगा । उसके हलो का जवाब कमल ने मुस्कुरा कर दिया और फिर बातें करते हुए कमल नहीं ये सवाल पूछ लिया जो पिछली रात सोचती रही थी । कमल ने पूछा ऍम ऍम! और फिर वो बोला कि हम दोस्त हो सकते हैं कि हम नहीं आई । थिंक दोस्त है तभी तो बात कर रहे हैं । कर कमल हस पडी और फिर यहाँ ऐसी कमाल के अधरों पर हर समय रहने लगी । वो हवा में उडती फिरती । शाम को पार्क में जाने के व्यक्ति प्रतीक्षा कर दी । पर पतझड का मौसम आरंभ हो चुका था । गरम धूप वाले दिनों की जगह ठण्ड उतर आई थी । वो कमाल से कहता हूँ कि बच्चों को घर में छोडकर वो अकेले में कहीं मिले और एक दिन ये जुगाड अपने आप ही बन गया था । कमाल की खुशी का भेद उसकी माँ और फिर आंटी ने पा लिया था । कमल ने बता दिया कि वो आदमी उसको अच्छा लगता है लेकिन मैं कल ही पता कर लेती हूँ । उसकी माँ से मैं कई बार मिली हूँ । हम एक साथ गुरुद्वारे में सेवा करती हैं । आंटी की बात सुनकर कमल ने सोचा कि कहे कि वो खुद ही बात करेगी । फिर उसने सोचा कि इस प्रकार उसके द्वारा पहल करना ठीक नहीं की थी । उसने करीब होने के लिए पहल की थी तो वह विवाह को लेकर भी करेगा । दूसरे दिन आंटी का मुरझाया चेहरा देखकर कमल का दिल धडका पार्टी पंजाबी अखबार का मेट्रोमोनियल पेट्स सामने करते हुए बोली वो तो कुमारी लडकी खोजता पडता है अगर यहाँ ना मिली तो इंडिया जाएंगे । कहते हैं हमने अखबार में भी दे रखा है आते हुए मैं अखबार भी उठा लाये कमल विज्ञापन पडने लगी वो कुछ देर सोचती रही और फिर पतझड की शाम कमल तैयार होकर उसको स्टारबक्स कॉफी होम में मिलने गयी । वो कॅश नहीं जाना चाहता था जहां अपने लोग ना हो और कमल ने कहा कि वह जगह भी उसकी मर्जी की होगी और पैसे भी वही खर्च करेगी । और स्टारबक्स पहुंचकर कॉफी के घूम भर्ती कमल ने पूछा आप कैसी लडकी अच्छी लगती है? कमल धीरे धीरे उसके साथ पंजाबी में बोलने लग पडी थी उसको अपने स्वभाव पर कई बार खुद ही हैरानी होती है कि एक अजनबी से बातें करते हुए खुद ब खुद ही उसके मुंह से अंग्रेजी नहीं करने लगती है और जैसे जैसे निकटता बडती जाती वो पंजाबी में बातें करने लग जाती है । आपके जैसी कमल को उसके जवाब से खींच पैदा हुई । पर उसने अपने आप को जब मैं कर लिया वो बोली शक्ल के स्वभाव में दोनों कमाल ने अपने हाथ पर उसके हाथ का स्पष्ट अनुभव किया । कमाल ने अपने हाथ को यूं ही पढा रहे दिया बोली सुभाव का आपको क्या पता हम कौन सा कहीं डेट पर गए हैं? हम पार्क में बातचीत किया तो करते थे और फिर जिसके साथ दिल नहीं जाए । स्वभाव भी खुद ही मिल जाते हैं । कमाल अपने हाथ पर उसके हाथ का दबाव महसूस किया तो फिर बोला डेट के लिए तो मैं कब से कह रहा हूँ पर आप बिजी रहते हूँ । मेरा तो कब से ना आँखों में गुम होने को दिल करता है । सच आप मौका तो दीजिए कुछ समय के लिए या उम्र भर के लिए? सदा सदा के लिए आप का मतलब शादी करवाने से है । अभी मैं क्या पडा है? पहले शादी का स्वाद देख तो लिया है आपने भी और मैंने भी । कमाल ने आहिस्ता से अपना हाथ उसके हाथ के नीचे से निकाला और अखबार की कटिंग उसके सामने रख दी । कमल उसके चेहरे के उतार चढाव पडने लगी तो कुछ देर बाद बोला तो घर वाले पीछे पडे हुए हैं । उसके बाद कमाल के दिमाग में भी आई थी । जब उसने विज्ञापन देखा था । पूरी बात जानने के लिए ही तो वो उस से मिली थी । कमल बोली और आपके विचार है मैंने आप के साथ कभी कोई विवाह का झूठा वायदा किया है जो आप तीन वेस्टिगेशन कर रहे हैं । अभी अभी तो उम्र भर के लिए आंखों में गुम होने की बात करते थे । दोस्त बनकर विभाग करके क्यों नहीं अपना विवाह सफल हो ही नहीं सकता । क्यों नहीं हो सकता बस फॅमिली अगर होना होता तो तेरह पहला विभाग का सफर हो जाता है ऍम फिर बट ऍम अल को अपनी आवाज ऊंची होती महसूस हुई । समझदार लडकियों के तलाक नहीं हुआ करते हैं । सुनकर कमाल की मुठ्ठियां भेज गए । उसने लंबा सांस लिया । फिर कुर्सी पर से उठकर सीधा उसकी आंखों में झांकते हुए बोलिंग ॅ गैकर । वो हक्काबक्का हुए बैठे उस व्यक्ति को वहीं छोडकर चली गई । रास्ते मूॅग मेरे द्वारा अपने स्तर पर ले जाने वाली बात याद हुआ और ऍफ है इन पुरुषों के लिए उसके दिमाग में आया । पर पानी तो स्वाॅट बनने के लिए कहती है । उसने सोचा उसको पाली के सुझाव से कोर्ट हुई तब भी हुई थी जब पानी ने कहा था तो जवानी बर्बाद कर रही है । बॉडी की अपनी जरूरतें होती है, किसी को दोस्त बना ले । ॅ और नहीं तो क्या आपने बहुत फिरते हैं पीछे पीछे इस काम के लिए अपने आप को सरकारी सान समझते हैं न वो थैंक्यू कहकर कमल ने बात समाप्त कर दी थी । उसको इस सोच से ही कोर्ट होती थी । उसने सोचा कि वह कभी अब जब नहीं बनेगी । स्टारबक्स में से निकली कमल को अपने आप परखी जाएगी कि उसने क्यों अवसर दिया । उस आदमी को अपने बारे में सोचने के लिए उसका अंदर सुलगने लगा । चिमनी में से अभी भी धुआं निकल रहा था । सीडर के तरफ से बढकर कमाल की निगाह चलनी पर चली गई तो कुछ पल के लिए देखती रही । उसने देखा की चिमनी के इर्द गिर्द अन्य जगहों की अपेक्षा कम बर्फ इकट्ठी हो रखी थी के कारण साथ साथ पिघलती जाती होगी । उस ने सोचा फिर वो अपने ड्राइव दे की और देखने लगी । यहाँ भी हीट वाली पाइपें निशानी चाहिए ताकि बर्फ गिरते ही निकल जाए । पर दूसरे ही पल उसने अपने इस विचार को रद्द करते हुए सोचा । फिर तो सारी कमाई हीट का बिल चुकता करने नहीं साफ हो जाएगी । कमाल के अंदर ही जुटी कमाल के अंदर उस दिन भी उठी थी जिस दिन उसकी माँ ने फिर उसको पंजाबी अखबार में छपा एक विज्ञापन दिखाया था । सरसरी दृष्टि डालकर वो बोली थी । क्या है इसमें सभी स्तर इसी तरह के होते हैं । तलाकशुदा लडके के लिए कुमारी और सयानी लडकी चाहिए तो तो यूँ ही भडक होती है पहले पूरा तो पहले उसकी माँ बोली यहाँ पढ लो । आगे तलाकशुदा के बारे में विचार किया जा सकता है । यही लिखा होगा । कौन होता है कोई विचार करने वाला माना तरफ खा रहे हो । कमल को अपना आपको अपमानित महसूस होने लगा था । लंबे लंबे स्वास्थ्य लेती वो योगी अपने आगे रखे उस विज्ञापन की और देखने लगती । उसको लगा इस प्रकार के लगभग सभी विज्ञापनों का एक सही मैटर होता था । फिर उसकी दृष्टि फिसलकर तलाकशुदा लडकियों के माँ बाप द्वारा दिए गए विज्ञापनों पर चली गई । उनके मिलते जुलते मेटर नहीं कमल को हराम कर दिया । बे कसूर तलाकशुदा लडकी के लिए योग्य वर की जरूरत है । ये पंक्तियां उसको इस तरह लगी जैसे रिश्ता मांगने के लिए याचना कर रही हूँ । वो लडके और लडकी के विज्ञापनों का मुकाबला करती । क्रोध तपने लगे तो माल के दिमाग में पहली का खयाल आ गया । उसने सोचा कि पाली ऊबकर ही ऐसा करने लगी होगी, नहीं तो कहीं बार पाली का व्यवहार देखकर वो सोचती कि पानी से थोडा दूरी बनाकर रखनी चाहिए । खासतौर पर उस दिन जिस दिन कमल ने देखा था । जॉय ने वाली के नितम्बों को मुट्ठी में भरकर कहा था फॅार कमल कम हुआ था कि जो आपको खींच कर पढते मारे पर वो पाली का व्यवहार देखकर हक्की बक्की रह गई । पानी नहीं जॉय कि चीन के आगे हाथ मारकर कहा था ऍम कमल वहाँ और अधिक घडी नहीं रह सकती थी । वो सोचने लगी कि पानी से जरा हटकर रहा करेगी । अगले दिन कमल नेपाली से पूछा प्रेशर नहीं, ऐसा करते हैं, उसको आई थी, वैसा करते हैं । अगर आदमी नहीं शर्म करते तो हम क्यों करें? और फिर ये तो मेरा पैट है । इसी से ही खुश हो जाता है जो ॅ और ये पेट वाली बात कमल को कुछ दिनों के बाद समझ में आई थी । जब पाली ने बताया था कि वह वीकेंड पर अपने बेटे को उसके पिता के पास से लेने जाते वक्त जॉय को साथ लेकर जाती है, विशेषज्ञों करती है, मुफ्त की बदनामी लेती है । कमाल ने हैरान होकर पूछा मुझे एक गोरे के साथ देखकर वह चल बन जाता है । पहले बेटा मेरे साथ रहता था । उसका बाप जब वीकेंड पर उसको लेने आता तो अपने साथ नई से नई और तो लेकर आया करता था । लौटते वक्त आंख मारकर जाता । जब हम एक साथ रहते थे तब भी कहाँ करता था कि मैं तो ऐसा ही करूंगा कर ले । जो करना है हर बात की एक लिमिट होती है । एक दिन मैंने डिसाइड कर लिया । ऍम केस करके मैंने बेटा बाप को सपोर्ट कर दिया । अब वीकेंड पर जॉय की बाहों में बाहें डाले उसी तरह आखबार करती हूँ और यहाँ बच्चे पर क्या असर पडता होगा? अगर आप बच्चे के बारे में नहीं सोचता तो सिर्फ ही क्यों सोचे? कमल को वाली की ये बात अच्छी नहीं लगी थी, लेकिन विभाग वाले विज्ञापनों का सामना कर दी । कमल ने सोचा और रती क्यों? बच्चों की सारी जिम्मेदारी उठाएगा बच्चों की जिम्मेदारी औरतों पर फेंक कर आदमी कुंवारी लडकियां खोजते हुए और बच्चे वालियों को स्टाॅल समझ कर उन पर दया करते । विज्ञापन दे ये किधर गन साफ है । फिर कमल को जो अंदर का खयाल हुआ तो तलाक से महीने बर्बाद ही इंडिया जाकर दूसरा विभाग करवाया था । कमल के मन में आया कि बच्चों को जिन्दर के हवाले कराए, उसके भी तो नहीं है । पर जब उसका गुस्सा ठंडा हुआ तो उसको अपनी सोच पर पछतावा हुआ तो सोचने लगी मैं भी स्वार्थी क्यों हो गई हूँ उसके पास छोड जाने की सोच मन में आई भी कैसे? जिसने कभी बच्चों का वो देखने का भी कष्ट ना क्या होगा उसके पास बच्चे गुरबचन कभी भी नहीं छोडेगा । गुरनूर को मेरे पास कमल ने सोचा फिर वोट कचहरियों के चक्करों में पहुंचना पडेगा । सोचती हुई कमाल की नहीं था । खुदबखुद दीवार पर टंगी तस्वीर पर चली गई और वो अर्जुन को गुरूचरण के कंधों पर चढाने हारने लगी । उसको अर्जुन की पिछले हफ्ते की ही की गई । जब स्मरण हुआ जब वो कराटे सीखने जाते वक्त कहने लगा था ऍम ऍम पूछा तो फॅमिली आॅफिस तरह के काम है तो वह खोजता था । कमल के मन में आया । इस बात का शिद्दत से अहसास कमल को उस दिन हुआ था जिस दिन अर्जुन अपनी वस्तुएं अंदर से लाकर सेबी को देते हुए उसके इर्द गिर्द घूम रहा था । उस दिन कमल अपने पापा को डॉक्टर के पास लेकर गई हुई थी । जाते समय वो अपने किरायेदारों को कह गई थी कि वो अपने बच्चों के संग ही से भी और अर्जुन को भी स्कूल से लेते है । वो डॉक्टर के क्लीनिक नहीं बैठी थी । जब से भी कम फोन आ गया वो कह रही थी मॉम अर्जुन इसके किंग में और जब कमल घर पहुंची तो सनी ने बताया कि आज उन्हें रिपोर्ट कार्ड मिले थे । अर्जुन की रिपोर्ट अच्छी न होने के कारण उस कमी को भी अपनी रिपोर्ट भारतर फेंक देने के लिए कहने लगा ताकि मॉम को पता ना चले की उन्हें रिपोर्ट कार्ड मिले थे । सिमी के बना करने पर उस कमी को मारने लग पडा था । अभी तो जरा सा है जब बडा हो गया तो पता नहीं क्या करेगा । कहती कमल ने अर्जुन को पकडकर उसका बूत थप्पडों से लाल कर दिया । कहीं आपने बहुत जैसा नहीं निकल जाए चिंतित हो गई । अर्जुन के ऊपर छपी उंगलियों के निशान देखकर और उसकी आवाज सुनकर उसकी खुद की आंखे सजल हो उठे । फिर उसको सिमी के इर्द गिर्द चक्कर लगातार देखकर कमाल के मन में आया कि वह किसी की खूब तलाश रहा है । किसकी गोद में चाहे बेचारा सोच कर कमल का फिर गला बढाया । उस ने निर्णय किया कि वह भविष्य में बच्चों को मारेगी नहीं बल्कि अपनी दूसरी जरूरतों को काम करके अर्जुन के लिए ट्यूटर रख देगी । पर अर्जुन जब भी कोई ऐसी हरकत करता तो कमाल की चिंता बढ जाती है । कहीं आप जैसा ना बन जाए कभी ये चिंता क्रोध में बदल जाती पर कमल अपने आप को रोक लेती हूँ । कमाल की स्मृति में आया अर्जुन का वही सुर्ख चेहरा तस्वीर में खिला पडा था । वो उस तस्वीर को देखती रही और फिर उसने अपनी दृष्टि तस्वीर पर से हटा ली और बाहर पड रही होगी और देखने लगी । लेकिन फिर उसने तस्वीर की और नजर कवाली उस तरफ देखती । वो सोचने लगी हो सकता है कि जहाँ तक बात नहीं जाए मैं यही फिक्र करने लगी हूँ । चलो रोटी बताती हूँ और रोटियाँ देखते हुए उसके पापा का फोन आ गया । वो कहने लगे बेटी मेरी कल डॉक्टर की अपाॅइनमेंट है यहाँ रहना आप काफी पडी हुई है, मुझे उधर से ही कर लेना । वो के बाबा कहकर कमल ने फोन रख दिया । अब लेने भी वहीं जाऊँ । कई बार कहा है कि मेरे साथ रहूँ पर नहीं । वहीं रहकर ही अपमानित होना अच्छा लगता है । उन्हें या फिर ले जाया करे उन्हें भी अपने साथ अपार्टमेंट पर ले जाने के लिए नहीं देखती हूँ । कमाल के मन में खयाल कमाल ने अपने पापा को बहुत बार कहा था कि वह उसके साथ रहें । तब भी जब अभी कमल का गुरचरन के साथ व्यवहार नहीं हुआ था । उसके पापा ने एक दिन भरे गले से कहा था उस महाराजा का तो मेरे साथ अब बात करने में भी शर्म आती है । जब से देने वाला ये मकान लिया है तब से माफी भी नहीं लगता । कमल एकदम वहाँ से उठी और अंदर से चेक लाकर अपने पापा को पकडाते हुए बोली ये लोग पूरे पांच हजार हैं । मॉडगेज लौटाने के लिए जोड कर रहे थे । पहले उसकी मॉडगेज लौटा दूं मार उसके माथे पर बाकी के पांच हजार जब सही हो गए तो फिर लौटा दूंगी । पागल हुई है क्या? भूख कौन होता हूं डॉक्टरों का मैंने अपनी तरफ से दिए थे । अपने पास से भी क्या वो तो थे ही दे रहे हैं । जब से कनाडा ये एक दिन खाली नहीं बैठी तो फिर आपने जरूर उसके साथ ही रहना है । यहाँ मेरे पास रहो ना आपको कभी कोई तकलीफ होने दी है और फिर में बच्चों से बेफिक्र होकर काम पर जाये करूंगी पुत्र पोते के होते बेटी के द्वारे बैठा अच्छा लगता है लोग क्या कहेंगे? अच्छा मरो वही कमाल के मन में आया पर उसने शब्द कहीं नहीं उसने कहा आपको मेरे द्वारे पर नहीं रहना मेरे साथ रहना है आपकी अपनी पेंशन आती है आपको भी सुख और मुझे भी सुख और फिर आपके उस अगले कहती कहती कमल रुक गई मेरी तो बीत गई मैं जो सुखी होंगा जिस दिन तेरा घर बचेगा मेरा घर तो पापा बसा हुआ ही है अपनी मर्जी से रहती हूँ ही बिना कैसा घर अभी तेरी उम्र ही क्या है विभाग घरवाले मेरी तरफ से तो चुकी हूँ कमाल कर अपने पापा की भी जी आपके देखकर मन रो पडा उनका इस प्रकार छमा याचना करना कमल को अजीब सा लगा । कमल ने सोचा कि विभाग से पहले वो माँ के माध्यम से कितने अधिकार से कहा करते थे कि ऐसी वैसी बात नहीं सुननी चाहिए । हम खुद लडका तलाशेंगे और अब आप इतना असहाय क्यों हो गए । यही बात जब उसने आंटी के साथ साझी की तो वो बोली बेटी का दो खोल जीवन साथी का नाम बंदे को ऐसा बना देता है । बेटी का उन्हें किस बात का दुख मैं हुई नजर नहीं घूमती फिरती बल्कि सुख दुख में उन्हें लेकर ही जाती हूँ । जहाँ उन्होंने जाना होता है ही बात नहीं वो तो चिंता करते हैं कि अकेले कैसे सब कुछ करती है और फिर तेरी माँ के बाद तो कुछ अधिक की फील करने लग पडे हैं । जीवन साथी के बगैर आदमी किसके साथ सुख दुख साझा करें । ये भी कई बार कह चुके हैं कि तरफ से कहूँ कि शादी कर ले ये बहुत कमाल भी कभी कभी सोचती कि कोई हो जिसके साथ वो दिल की बात कर सके । बाहर शहर कर रहे युगल को देखकर उसका अंदर पडता तो सोचती है कि कोई हो जिसके हाथ में हाथ डालकर वो चले । कोई हो तो उस को अपनी बाहों में लेकर उसके अंदर के अकेलेपन को खत्म कर देंगे । और फिर वो सोचती है कि आपने अंतर्रात्मा को कुचलकर बच्चों के पालन पोषण पर ध्यान दें । क्या पता बच्चों के साथ कोई कैसा व्यवहार करेंगे? और जब आंटी ने जोर डालकर उसको गुरचरन से मिलवाया था तो उसको लगा कि यही आदमी है जो उसके अंदर उसका भरेगा और रागी जत्थे के साथ कनाडा आया था । पहली बार मिलकर उसने सीधा ही कहा था मैं कनाडा में सेट होने के लिए आया हूँ । मुझे ऐसे जीवन साथी की जरूरत है जो इस वक्त मेरी बहुत कसकर पकडेंगे । अपना डर दूर करने के लिए कमल ने कहा था, आप आंटी के रिश्तेदार हैं आंटी की खातिर आपको इधर उधर करवाने के लिए मैं कागजों से भी विवाह करवा सकती हूँ । इस रहा नहीं । पढना मुझे मैं पक्का रिश्ता चाहता हूँ । मेरे दो बच्चे भी हैं । मैं जानता हूँ मैं प्रोग्रेसिव विचारों का आदमी हूँ । बच्चे तो सभी की साझी होते हैं । तेरे मेरे नहीं होते छूट लोग सोचने वाली दूसरी कोई बात ही नहीं । जितना कोई मुझे प्यार आदर देता है ना उससे अधिक देने की कोशिश किया करता हूँ । किधर है वो दुगना तैयार करने वाले वायदे । अब हमारे कारण जलील होने लग पडा है रोटियां बनाकर । कमल को पता ही नहीं चला कि कब उसका ध्यान अपने पापा की ओर से गुरचरन की तरफ मुड आया था । टोटियों को गर्म रखने के लिए फाइल पेपर में लपेटकर डब्बे में बंद करती कमल को ख्याल आया कि गुरु चरण ने कहा था कि जलील शब्द उसके मुंह से कुछ से मैं निकल गया था । रोटियाँ संभालकर बर्तन साफ करने के लिए मुडी । कमाल के अंदर से दलील उठी गुस्से में उसे वही सब कुछ निकलता है जो आदमी के मन में होता है । ये दलील कमाल के अंदर से तब नहीं उठी थी जब गुरु चरण नहीं ये सफाई दी थी । ये सुनकर कमल सहज होने का यत्न करने लगी थी । तब उसको सब कुछ सहज ही तो लग रहा था जब उसने आइडिया जाकर वीजा लगवाने की सलाह की थी । वैंकुवर से काउंसलेट जनरल अपने अपने हमले फैले के साथ आया हुआ था । जब वीजा लगवाने गए तो कमल ने देखा की अर्जियों पर सरसरी दृष्टि डालकर उस कर्मचारी ने पेपरों पर से निभा उठाकर एनक् के ऊपर से गुरचरन की और देखकर पूछा था आपके परिवार के एप्लिकेशंस भाजी मेरे पास जो भी इंडियन पासपोर्ट ही है, मेरी वाइफ बच्चों के वीजा लगवाने हैं । कमाल से पहले ही गुरचरण बोला कर्मचारी बारी बारी से सभी की और देखकर कहने लगा आप हैं हरकमल कौर, बाज और आप सिमरित और बाद आप हैं अरजुन सिंह बास और छोटे दिया हैं गुरनूर सिंह मोर ठीक है ना । कमाल के मन में आया कि कहीं ऍम स्टाॅफ और उसने अपने आप को नियंत्रित रखा और सिमित अर्जुन के स्तरों पर हाथ फेरकर बोली बीस टोमॅटो । ऐसी कहकर वह फिर पासपोर्टों की और देखने लगा । कमल को लगा कि गुरचरण कुछ बुरा महसूस कर रहा था है । कार में बैठे हुए भी कमल को गुरचरन का मूड ठीक नहीं लगा । कमल ने अपना हाथ गुरचरन के गैर शिव लीवर पत्ते के हाथ पैर टिका दिया । वो छठी उठा लिया । जब गुज्जर मैंने कहा क्या मिलता है तुझे? मुझे इस तरह जलील करवाकर नाम बदलने तो क्या फर्क पडता है क्या? जलील किया है? देखती नहीं थी कैसे बार बार सवाल कर रहा था वो स्ट्रेंज अगर कमाल चुप हो गई । गुरचरण पूरा बोला घर वाली तो मेरी है और लास्ट नाम पहले वाला ही लगाए घूमती है । मैं तो खुद इस नाम को उतारने को फिरती हूँ । तो भी नहीं कहा था पूरे परिवार का नया नाम रखने के लिए । पर तुम चुकी लगा लिए थे । पहले वाला कैसे जोड दिया था अपने साथ । अब मेरे नाम के समय नए नामों की शर्त रखती है । इसी कारण मुझे यहाँ पक्का करवाया है तो मैं तो स्थाई करवाया है । यहाँ उसे तो इंडिया सुंदर भी किया था । अगर यही बात होती है तो उसका भी नाम लगती है और उस वक्त इस बात का खयाल ही नहीं आया था । मेरी बारी अब ख्याल आ गया । हालत में बहुत कुछ नया सिखाया है । जरूरी तो नहीं कि हम ये बातें बच्चों के सामने ही करेंगे । खर्च कर भी कर सकते हैं । कमाल ने पिछली सीट पर बैठे बच्चों की ओर देख कर कहा, और चुप हो गई । लेकिन उसका दिमाग शांत नहीं हुआ तो सोचने लगी इस बारे में क्या किया जाए । अपने आपको प्रोग्रेसिव विचारों वाला कहता है, नए फॅमिली नहीं वाले आइडी के बारे में सुन कर तो उसको खुश होना चाहिए । पर चलाऊं घर पहुंचकर दोबारा अच्छी तरह समझाने की कोशिश करूंगी और गुरु चरण में इसका अवसर ही नहीं दिया और वो उन्हें घर के आगे कार से उतारकर कहीं चला गया और जब वापस लौटा कमल बच्चों के सन टीवी देख रही थी । गुरचरण को सीधा सोने वाले कमरे की और जाते देख वो भी उसके पीछे पीछे चली गई । फॅार क्या अभी भी वैसा ही फील कर रहा है? कमल ने पूछा लगता है गुस्सा कर गई । गर्मी से कह दिया गुस्सा मुझे कंजर पर आया था । जो भी मुंह से निकल गया नहीं पाँच नहीं करती । चाय पीने का मन है तो बनाऊँ, फिर तेरे से बात करनी है । तीन होगा । मुझे भी बात करनी है । पहले तो चाह रहा हूँ जब कमल चाय के लिए स्टोर पर पानी रख कर लौटी तो गुरचरण बोला तो यार कमाल जब गुरनूर के पैदा होने पर मेहनत जी लास्ट नाम बदलने के लिए कहा था तो उन्होंने कहा था कि अर्जुन और से भी खुद को अलग अलग सा महसूस करेंगे । कमल बीच में ही बोल उठी याद है और मुझे ये भी याद है कि मैंने कहा था कि हम सब कोई नया फैमिली नाम रखें ताकि बच्चे बडे होकर अपने आपको अलग समय सूचना करेंगे और तुम सुनकर चुप हो गए थे और यही बात मुझे आज करनी थी । नहीं, इस बारे में पता करके आया हूँ । पांच साहब ने कभी सिमी के लिए चाइल् सपोर्ट तो नहीं दी । अपनी इनकम शो ही नहीं करता । इस बेस पर हम केस करके दोनों बच्चों का लास्ट नाम बदल सकते हैं । काम मैंने ड्रॉप कर लेता हूँ और तो अपना नाम चेंज कर ले । इस तरह अपना सबका एक फॅमिली नाम हो जाएगा । डबल पल भर के लिए चुप रही और फिर बोली मैं चाहे का पानी देख करती हूँ । उबलते पानी में चाय पत्ती और चीनी डालती कमल । इस विचार को अपने अंदर मस्ती रही । जब वापस आई तो गुरचरण बोला नाम बदलना तो पेपरों में ही करना है । बाप बनकर तो मैं अभी पालता हूँ । हम दोनों पालते हैं । गुरचरण अपनी जब भी इस बारे में बात होती है तो हर बार मुझ पर ही क्यों नाम बदलने का जोर डालते हूँ तो खुद को मानती हूँ बल्कि कहती हुई कमल चुप हो गई । उसने अपने आप को तेरे से ज्यादा कमाती हूँ कहने से रोक लिया तो अपनी कमाई पर बडा गर्व है, गर्व हूँ मालूम है कितनी मुश्किल से रहकर पाले हैं । अगर इतना ही है तो खुद क्यों नहीं चेंज कर लेता आपका नाम? जिन गोरों को देख कर तो इतना एडवांस हुई है उतने एडवांस तो वो भी नहीं हुए की और तो वाला नाम रखें रखती क्यों नहीं रखते हैं? वेशक खुशी रखते हूँ और मैंने तो मैं अपने वाला नाम रखने को कब कहा । मेरा अपना तो अभी कोई नाम है ही नहीं तो तू चाहती है कि मैं तेरे आगे बेच चाहूँ सुना है तुम्हें कोई पंजाबी बंदा जिसने खानदान का नाम छोडा हूँ और चरण तो मैं पता है लास्ट नाम कैसे शुरू हुए थे । ये बीसवीं सदी में यूरोपीय उन्होंने शुरू किए थे जब कईयों के एक जैसे नाम होने लग पडे थे ताकि पहचानने में आसानी रहे । पर पुरुषों ने इसको खानदान की बात बनाकर जब के साथ जोड दिया अब तो भी तो उसे जब कई शू बनाए बैठी है नहीं जब का नहीं बराबरी का इशू बनाती हूँ । हम दोनों ने साझे तौर पर परिवार शुरू किया है और मैं चाहती हूँ कि अपने परिवार का साझा ही कोई नाम रखें न तेरह मेरा कोई नया खानदान का नाम तो मैं छोडने से रहा । चाहे कुछ हो जाये बताएं कितनी पीढियों से चला रहा है तो खानदान कह रहा है की परिवार एक ग्यारह दोनों है जैसा चलता आया है । परिवार का नाम तो मेरे नाम के नीचे ही चलेगा । ठंडे दिमाग से सोच मैं आंटी के घर जा रहा हूँ कहकर गुरचरन चला गया । बर्तन साफ कर रही कमाल के मन में आया क्योंकि गुरचरन सच में ही ना लौटा । बडी मुश्किल से बनाया घर टूट जाएगा परिणाम के पीछे घर ना तो लोग घर टूटने का भय दिखाकर तो अपने मन की बात करता रहेगा । उसके अंदर से दलील उठी कहीं तीनों बच्चों को लेकर कमल को एकदम गुरु का खयाल आया । उसको लगा जैसे हो रहा होगा कुछ सचमुच हो रहा था । कमल ने उसको उठाया और अपनी छाती से लगा लिया जिससे वो बहुत देर बाद मिला हूँ । ऍम बच्चो तो बच्चो करती हूँ उसको उठाए उठाए उसके लिए दूध गर्म करने लगे । फिर उसने बनाया सी पूछ लिया ये प्यारा बच्चा किसका है और गुरुमूर्ति जब अपना नाम ना हाथ कमाल के गाल पर रखकर कहा मम्मा तो कमाल उसको और ऍम लिया उस पल कमल को । ये भी याद में आया की यदि इस वक्त कुल्लू को उसके बजाय गुरुचरण ने गोदी में उठाया होता तो गुरचरण की गाल पर भी हाथ रखकर यही कहता ऍम और उस पर कमल कहती ठहर जाता तो बताती हूँ बडा डेड वाला ये तो डैड का बेटा है । तब गुजर ने यही कहना था कमल का वही जवाब होना था जो इस तरह की बातचीत के समय अक्सर ही होता है । तो कहती है पता है पता है इसके पैदा होने से पहले ही डैड ने उस पर अपना अधिकार जमा लिया था । गुरनूर की जन्म से पहले प्रसव पीडा के दौरान जब नर्स ने कागजी कार्रवाई करते हुए पूछा था कि बेबी का फैमिली ने बात रखना चाहते हो या मोर तो गुरचरण ने झट से कहा था मोर! उस समय कमल का इस तरफ ध्यान नहीं गया था । उसने इस बारे में पहले सोचा ही नहीं था कि अस्पताल वाले ये पूछ लेंगे पर जब वो गुरनूर का बर्थ रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने लगी थी तो गुरचरण ने कहा था अब तो भी अपना लास्ट टाइम चेंज कर रहे हैं । उस वक्त कमाल के मन में आया । गुरचरण ने नर्स को जवाब देने से पहले मुझसे पूछा भी नहीं था । पूछना तो क्या मेरी तरफ देखा तक नहीं । जिसे बेबी के नाम के पीछे अपना नाम लगाना उसका जन्मसिद्ध अधिकार हो । फोन भर्ती कमल का हक वही रुक गया था, पूछ लेता तो फिर मैं बात रखने के लिए कहती । कमाल ने अपने आप से प्रश्न किया । फिर उसने सोचा बाज कौन सा मेरा है । मुझे तो बल्कि की बहुत समय पहले ही उतारकर फेंक देना चाहिए था । यदि बास की जगह कोई अपना नाम रखा होता तो शायद गुरचरण उसको बदलने की इतनी जितना करता कमाल के मन में आया । अगर यही बात होती तो नया फैमिली नाम रखने के लिए माना जाता है । ये तो आपने नाम की ही पूछ मेरे पीछे लगना चाहता है । कमाल के दूसरे बनने कहा यही सोचती वह गुरनूर के मूंग के साथ दूध की बोतल लगाकर फिर खिडकी के पास जाकर खडी हुई । जिस जगह से कंधों पर बच्चा उठाए, सावधानी से पैर रखता आदमी गुजरा था । कमल उस जगह की ओर देखती रही । फिर वो उन पदचिन्हों को देखने लगी जो उस आदमी के गुजरने के कारण बने थे । उन पदचिन्हों पर भी बर्फ कर रही थी पर वह भी भरे नहीं थे । कमाल की नहीं रहा । एक अन्य आदमी पर पडे जून पदचिन्हों पर पैर रखता हूँ, गुजर रहा था और फिर एक और व्यक्ति उसके पीछे पीछे ही जा रहा था । मैंने सोचा की तो यू लगता है जैसे प्रतीक्षा ही कर रहे थे कि कोई व्यक्ति रहा बनाया और वह कमाल के होठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई । उनकी स्मृति में वो देना गया जिस दिन उसने भी बर्फ साफ करने की जगह शहरों के चलने की इच्छा प्रकट की थी । उस दिन बाहर बढ चुकी बर्फ के अंबार को देखकर कमल नेपाली से कहा था आज ही बर्फ खोर, हवा कर सारी स्माॅल तो कुछ बात बने यू मीन शनों दस नो ईटर अच्छा अच्छा और जिन जगहों पर शरण जैसी गर्म हवायें नहीं चलती वो लोग भी तो गुजारा करते ही हैं । तो शब्द अगर हमारे कैलगिरी को कुदरत की ओर से वरदान मिला हुआ है जो कभी कबार बहकर हमें भी ठंड में से बाहर निकाल लेती है । मैडम जी वरदानों पर अधिक आशिक नहीं हुआ करते । पाली नहीं जवाब दिया तो कई बार यूपी लेक्चर झडने लग जाती है । मैं तो उधर ही होने के कारण ऐसा कह रही थी । जब शरू नहीं चलती तब कौन सा दूसरा ऑफ कर जाती है वो आज भी फिर शाॅट मत हो ये तो खुद को ही शरू बनाना पडता है । जिन्होंने हो टाइमिंग कमल को लगा जैसे पानी नहीं ये बात बहुत करीब से कहीं हो । उसने सोचा कि यदि इस प्रकार इसरो पडती रही भर तो हटाने और भी कठिन हो जाएगी । कुछ करना चाहिए । पर बजते फोन ने कमाल का ध्यान बर्फ पर से हटाकर अपनी और खींच लिया । उसकी आंटी कह रही थी गुरुचरन कहता था कि कलेश डाले बैठी है । छोटी छोटी बातों पर झगडा नहीं करते । बदल लेना आगे पीछे फिर भी बदलना तो है ही । मैंने बदलने से कभी इनकार किया है पर वो तो अपना फैमिली नाम लगवाने की जब पकडे बैठा है, उसकी बीवी है तो उसी का नाम लगाएगी और किसका लगाएगी ये कोई जरूरी तो नहीं । आंटी तो मुझे एक बात बताओ । गुरचरण मुझे मेरे पापा के घर से अपने पुश्तैनी घर में रोटियाँ पकवाने और बच्चे पैदा करने के लिए विभाग करके लाया है । जैसा कि पहले होता था आंटी की ओर से कोई हुंकारा न सुनकर । कमल फिर बोली नहीं ना मैंने अपनी कमाई से मकान खरीदा है । गुरचरन भी आप किसी मकान में रहता है । में ये भी नहीं कहती । ये मेरे घर में आया है तो मेरे पीछे पीछे चलेगा । हम तो उन्होंने फैमिली शुरू की है । आंटी फॅमिली का नाम भी हम मिलकर ही कोई नया रखें तो दूसरी ही बातें करती है । अरे आज भी नहीं बदला करते नाम अगर आदमी नहीं बदला करते तो एक बात और बताओ । यदि गुरु चरण भी कल मेरे से अलग हो गया तो मैं इसका नाम उतारकर किसी दूसरे का नाम रख होंगी । ऐसे तो नाम चेंज करने में लगी होंगी । बच्चों वाली बात करती है ये कैसे छोड देगा इतना सुशील लडका मिला है मुझे तो बल्कि पैर धोकर पी उसके तेरह बच्चों के साथ भी बुरा सलूक नहीं करता है तो भी बाॅंटी मैंने कब उसका या उसके परिवार का ख्याल नहीं रखा । सारी कमाई अब तक इंडिया भेजता रहा । मैं सब जानती हूँ तो भी बहुत करती है । पर अब ये मूर्खता न कर जबसे बाहर वाली बात न कर बना बनाया घर बर्बाद मत कर । ऐसे आदमी खोजे नहीं मिला करते । धूमल को आंटी और भी बहुत कुछ समझाती रही । पर कमल सोचती रही कि स्त्रियां क्यों नहीं समझती है? बात और पता नहीं क्यों नहीं समझती । इसी प्रकार कमल को कुछ सप्ताह पहले काम पर खाना खाते हुए पाली ने कहा था अब ये और बीच में कहाँ से आ गई? बात तो कल रात हुई बराक ओबामा की जीत की हो रही थी । कमल ने कहा था यदि बराक की माँ ने उसका लास्ट नाम आपने वाला रखा होता तो अब ओबामा ओबामा होती पालती रही गई । माँ और नानी पर चारों तरफ चर्चा हो रही थी पिता के नाम से जो करीब दो साल के बराक को छोडकर चला गया था । उसकी माँ को कौन से सपने आते थे? किसका बेटा एक दिन अमेरिका का प्रेजिडेंट चुना जाएगा? एक अन्य लडकी का कहा सुनकर कमल छत से बोली जो प्रेजिडेंट नहीं बनते, उनके नाम की कोई इंपॉर्टेंस ही नहीं होती । हर एक के अपने अपने हालात होते हैं । उसी लडकी की आवाज सुनकर कमल ने सोचा कि वह हालत को दोष नहीं देगी और गुरचरन के साथ इस बारे में खुलकर बात करके शीघ्र ही सारे परिवार का कोई नया नाम रख लेगी । पर आजकल आजकल करती वो दूसरी व्यस्तताओं के कारण गुरुचरण के साथ इस बारे में बात करने का अवसर ही नहीं पा सके । और अब जब अपने आप ही एक अवसर बन गया था तो कमल ने सोचा यहाँ पता था कि प्रोग्रेसिव विचारों वाला गुरचरण इस मामले में जिन्दर जैसा ही निकलेगा । सडक पर से बर्फ खुरचने की आवाज सुनकर तो मलने खिडकी में से बाहर जाएगा । सडक पर से ट्रक पर साफ कर रहा था तो मैंने अपने ड्राइव ए की और देखा । वहाँ उसको बर्फ का पहाड बना हुआ लगा । तार कमल ने दीवार घडी की और देखा । बच्चों के स्कूल से लौटने का वक्त होने वाला है । उनके निकलने की राह बनाऊँ । सरकार भी तो निकली हैं । डबल ने सोचा घडी पर से फिसलकर कमाल की दृष्टि उसी तस्वीर पर चली गई । एक पल वो तस्वीर की और देखती रही । फिर बाहर की और देखने लगी । क्या फर्क पडता है अगर ट्रक वाला आदमी हमारे ड्राइव वे में से और बीबर फटा जाएगा । तमिल के मन में आया ट्रक तो बल्कि उसके ड्राइव देके आगे और अधिक बर्फ बिखेर गया था । ऐसे किसी पर आज रखने से कहीं गुजारा होता है तो खुद ही कमाल ने सोचा । उसने खेल में मस्त गुरनूर की तरफ देखा । क्यों इस बेचारे को खेलने से हटाकर ठंड में ले जाऊँ । एक पल के लिए कमल हिचकी चाहिए लेकिन अगले ही पल वह गुरूर को गर्म कपडे पहन आने लगी ।

मैं कोई धरती निचला बैल नही -02

मैं कोई धरती निचला बैल नहीं है । चिता की राख कभी ठंडी भी नहीं हुई थी । पर उन्होंने विवाद भी रख लिया । मैंने कहा था कि रहने दो, अभी शादी दिया, साल भर तो रुको और नहीं माने । दलीलें देने लग पडे । आखिर मैंने कह दिया कर लो लेकिन मैं नहीं आ सकता । लोग तुम्हारे बिना हम कैसे कर लें । हमें कौन सा दुख नहीं है । ये तो हमें मिलजुलकर कडवा घूंट भरना ही पडेगा । मेरे साडू ने कहा भेजी ये तो उसी की इच्छा थी । इसी कारण तो वो आया था इंडिया अगर नहीं आता तो क्यों ये दिन देखना पडता । जितनी जल्दी हो सकता है हम उसकी आखिरी ख्वाहिश भी पूरी करें । जब मेरी साली ने से सकते हुए ये कहा तो मुझे वहाँ करनी पडी और भोग के चौथे दिन विभाग लिया । पर मेरा सरवन तो मेरी आंखों से एक पल के लिए भी ओझल ना होता था । जब नींद से उठता वो भी साथ ही उठ खडा होता । रात में यदि कभी कुछ देर आंख लगती तो सपने में दिखने लग जाता है । विभाग वाले दिन से पहली रात भी जब सारा सी आग लगी तो कोर्ट पैंट पहने दिखाई दिया । लडकी को सहारा देकर फेरे करवाता हूँ और फिर मुझे विभाग वाली लडकी की जगह फेरे लेती किरण मेरी बहू दिखाई दी मैंने अपने आप को भी देखा हाथ में कैसा पकडे हुए छोटी के सहारे खडा भीक मानता हुआ तभी मेरी आँख खुली मैं हो रहा था मेरा बुक्का फाडकर रोने को मन किया दूसरे लोग न जांच जाएँ ये सोचकर में कमरे में से बाहर निकाला खेल कि बुक्कल मार्कर हो सकता हुआ मैं कोठे पर चढ गया । मेरी दाह निकल गई । मेरे जी करता था कि मैं जोर जोर से पुकारों से शायद ऊंचाई पर चढकर मेरे द्वारा आवाज लगाने पर वह सुनी ले । ऐसा चित्र में आते ही में आगे बढकर चौबारे की छत पर चढ गया । मेरा बढ फट गया । मैं अपने मृत पुत्र को आवाजें लगाने लग पडा और सरवन और सरवन ओय कहाँ चला गया तू आजा ऍम उत्तर तो हम कैसे जिंदगी काटेंगे आज मेरे बेटे मेरा बडा ना बर्बाद कर कुछ बेघर करके नाजा आ जाया लॉरेटा वहाँ सारा आस पडोस इकट्ठा हो गया मैंने बहुत का छोड दो मुझे मुझे अकेले छोड दो ऍम बेटा रूठ गया है । मनाली तो मुझे मेरी आवाज सुनकर आएगा । वो मेरा रोना नहीं कर सकता हूँ । मत कर मत वहाँ गया कौन लौटा है? इतनी ठंड में कोठे पर चढा पडता है, ठंड लगवा लेगा । किसी ने कहा जिगरा बडा करने से ही बात बनेगी । अगर तो खुद ही हिम्मत हार गया तो बहु को कौन दिलासा देगा? किसी अन्य ने कहा और फिर वो मुझे नीचे उतार लाए । मैंने फिर कहा छोडो मुझे रोज तो लेने दो । बहुत सारा गुबार निकाल लेना है । फिर कल रोना नहीं आएगा । विवाह जो है उस दिन से ही रोज जाते हो । रोज कोई लौटा हो तो क्यों रोके? तुझे लगा भाई? डॉक्टर कोई टीका टू का ताकि से नींद आ जाए । मेरे भाई ने डॉक्टर से कहा । टीका लगते ही मेरी आंखें मच गई । अगले दिन विवाह वाली सुबह मेरे एक मित्र ने मुझे दवाई दे दी । वो होम्योपैथी का डॉक्टर है । कहने लगा इससे तेरा चित्र खडा रहेगा, रोना नहीं आएगा वो दवाई मैंने अपनी बहु किरण को भी भिजवा दी । वो अपनी बहन के घर में थी जिसकी बेटी का व्यवहार था । मुझे लगा कि ये दवाई काम कर रही थी । मान रात की तरह बेचे नहीं था । लेकिन सर्वण सरवन आंखों के आगे से नहीं हटता था । मैं उस भवन में जहाँ व्यवहार था सीधा पहुंच गया । मेरा भाई और भतीजा मेरे साथ गए । मेरे साली साढू ने कहा भी कि वह जाते हुए बारात में मुझे संग लेते जाएंगे तो मेरा मन नहीं माना । मैंने कह दिया मैं तो खुद ही सीधा पहुंच जाऊंगा । मैंने सोचा के बारात में जाता है । मैं भी अच्छा लगेगा । भवन में किरण पहले से ही खडी थी । मुझे लगा कि उस ने अपने मन पर काबू किया हुआ था । शायद दवाई ले ली होगी । किरण को पहले से खडी देख एक बार तो मुझे हैरानी हुई तो किसी विभाग क्या पार्टी पर जाना हो तो आने के आगे से हटने का नाम ही नहीं लिया करती । तैयार होकर आई को सरवन छेडता कहाँ करता हूँ ऍम लाट कुछ ज्यादा ही बडी है तो फिर आएंगे के आगे जाकर खडी होती । वहीं से आवाज आती आकर ठीक करवाओ ना । सरवन हस्ता हुआ उसके पीछे कमरे में चला जाता है और दोनों धीमे धीमे हस्ते रहते मेरे कान इन्हीं की तरह होते हैं । इस प्रकार मिलते करते मुझे बहुत प्यारे लगते हैं । यद्यपि कई बार किसी के फंक्शन पर विलंब से पहुंचने के कारण मुझे शर्मिंदगी भी महसूस होती, लेकिन इसका ये खेल मुझे अपनी जवानी के दिन याद करवा देता हूँ । मैं और जिन्दर भी इस प्रकार के पंगे लेते रहते बन ठनकर निकलते । बाहर साथी अध्यापक हमारे प्रेम पर एशिया करते । एक मित्र कहता एक दूजे पर मिर्चे वारकर निकला करो घर से नहीं तो किसी की नजर लग जाएगी । कभी वह कहता इतना ना एक दूसरे काम हो क्या करो? तब हँसी से कहता जला मत कर हम को देखकर अपनी घरवाली के साथ प्रेम कर अब लगता है कि उसकी बात शायद ठीक थी । यदि जिन्दर के साथ इतना होना होता तो इतना तंग परेशान ना होता । तीन साल हो गए, उसका निधन हुए । यदि ये सरवन और किरण होते तो मैं कभी का मर खप गया होता । दिन तो उधर डर खून भरकर गुजार लेता था । मगर रातों में उसकी याद हावी हो जाती है । कभी कभी न फूट फूटकर रोने लग पडता । सरवन और किरण आधी आधी रात दौड कर मेरे कमरे में आते । मुझे बाहों में भरकर हौसला देते ही कोई छह महीनों में जाकर मन थोडा सेटिंग पाया था । मैं फिर से गाडी में फिक्स ओ लगाने लग पडा था । बाहर कहीं जाते वक्त टाई बांधकर जाने लगा था और सरवन को लेकर तो कहीं कल्पना भी नहीं की थी । किरण जो मुझे दिलासा देती थी । स्वयं कैसे कटेगी जिन्दगी भवन में पहुंचते ही दौड कर मेरी और आई । पूछे लगी ठीक हुआ रात कुछ देर नहीं आई कि नहीं? राणो मैं ठीक हूँ तो ठीक है । दवाई ली तो उन्हें अरे बच्चों को भी दे देनी थी । मैंने कहा हम ठीक है डैडी आप अपना ख्याल रखें । मैं चाइना कर दूँ पर मैंने उसको रोक दिया । रोकता में तब भी रहा था जब भी एयरपोर्ट आने से पहले हमारे लिए खाना बनाकर रख रही थी । बटर चिकन बकरे का मीट सूखा चिकन बना बना कर ही फ्रिज में रखती रही स्टोर में से नाम लाकर रखती है । सरवन ने छह बडी बोतले शराब पिलाकर रखती । मैंने बहुत कहा रही कुल तीस दिन की तो बात है ना, इतनी शराब कहाँ भी होगा और फिर इतना सब कुछ हम कैसे खा लेंगे? इस पर वो बोला था जब आपका जीना लगे तो किसी यार दोस्त को बुला लेना पीने के शौकीन कहीं आ जाते हैं । अगर फ्रिजर में से खाना निकालकर गर्म करने को मन ना हो तो पीजा मंगा लेना । बस वर्ष में न जाना, कहीं टैक्सी मंगा लेना और बच्चों से कहने लगा टेडी को तंग नहीं करना । पीछे से किरण की और मुंह करके बोला हम बच्चों को साथ इंडिया ले चलते हैं । तीन हफ्ते का क्या है? स्कूल से छुट्टियाँ करवा लेंगे? नहीं नहीं बच्चों की पढाई खराब नहीं करनी हमारा । फेंकना करो तुम लोग । मैंने कई बार कहा एक तो डैडी रहेगा ही । मेरा तो बिलकुल मन नहीं करता । तुम सब के बिना जाने को ध्यान तो यही रहेगा । किरण ने कहा था क्या पता था हम बहुत तभी जी नहीं करता था । जाने को कुदरती जैसे कह रही हूँ कि वहाँ जाने पर सब कुछ बिगड जाएगा । मैंने मन ही मन सोचा । मेरी निगाह किरण की तरफ गयी । पूराने सब सूट पहन रखा था । मेरी अंतरात्मा तरफ उठी । इस समय तो इसमें वो सूट पहने थे जो सरवन पटियाला से अपनी पसंद के विशेष तौर पर लेकर आया था । फिर सिलाई के लिए दिए थे । किरण को उसने नहीं बताया था । कहता था सरप्राइज देना है । मुझे फोन पर सारी बात बता देता था । दर्जी का नाम भी बता दिया । जिसको सूट सिलने को दिए थे । कहने लगा उसके पास किरण का नाम है । वहीं इसके सूट चलता है । सूट सिलकर पता नहीं दे गया की नहीं कंजर का कहीं दबा ही ना ले । अब तो चौकन्ने होकर रहना पडेगा । किरण के साथ मिलकर काम करने पडेंगे । ये कौन सा भी पेंशन आती है । तीन साल पडे हैं अभी पेंशन लगने को अकेली किरण की कमाई से कहाँ गाडी खींचेगी । मेरे चित्र में इस प्रकार के विचार आते रहे । सरवन का साडू मुझे फूल पकडाकर कहने लगा । येलो मास्टरजी सरवन उधर विदेश से ही लेकर आया था । भगत फूल पकडकर जेल में डालने लगा तो वो बोला इसको कोर्ट पर ढंग । लोग सरवन की छठी की सारे बराती एक जैसे फूल ही लगाए । ऐसी चाय या मेरे मन में आया तो पक्ष में से फूल मेरे कोर्ट से लगा गया । मैं भूल को सरवन की निशानी समझकर सहलाने लगा । ये फूल सरवन और किरण ने किरण की किसी सहेली से बनवाए थे । पहले सरवन कई दुकानों पर गया था, खरीद लें तो कहीं भी उसकी पसंद के नहीं मिले । फिर सेल का कपडा और प्लास्टिक के डंडिया नगर किरण की सहेली को दे दी । किरण ने जामुनी रंग के कन्या पक्ष और सरवन ने कत्थई रंग के वरपक्ष के लिए बनवाए थे । धीरे दोनों पोतों के भी जामुनी रंग के फूल लगा रखे थे तो दोनों मेरे पास आकर खडे हुए । छोटे का चुप चाप खडा होना मुझे कुछ अजीब लगा वो तो एक मिनट भी नीचे नहीं खडा रह सकता । तो शादी के अवसरों पर तो ये बल्कि और मचल जाया करता था । लडकियों की चुन्नियां पीछे से दूसरी के साथ बांध देता । सरवन के अंतिम संस्कार के दिन तो की बहुत ज्यादा ही डर गया था । आंगन में बडी सरवन की लाश पर आप फेर फेरकर देखता था । कभी उसके माथे पर हाथ फेरता, कभी गालों पर कभी उसके चेहरे को दोनों हाथों में ले लेता । फिर उठकर चरणों की तरफ चला गया । दोनों चरणों अपने हाथों में लेकर अपना सिर्फ सात लगता रहा । कभी फटी आंखों से उसके मूंग की और देखता रहा । उस को ऐसा करते देख मेरा मन डूबने लगा था । फिर शमशान घाट पर जाकर पहले तो देखा देखी सरवन की देख पर लकडियाँ चिंता रहा । पर जब चिता को अग्नि दी तो मेरे साथ चिपक गया । मुझे तो अपने आप को ही होश नहीं था । जीत करता था कि सरवन के साथ चलती चौथा में लेट जाऊँ । जब छोटा होता मेरे साथ चिपटा मैं खिलाफ भी करता रहा और इसको अपने संकष् कर पकडे भी रहा । दिल, कडा तार, मास्टर लडकों का खयाल कर हौसला देन को किसी ने मेरा कंधा पकडकर झिंझोडा था । इन शब्दों के साथ मेरे अंदर पता नहीं कहाँ से हिम्मत आ गई । मेरा विलाप रुक गया । मुझे बडे पोते का भी खयाल हुआ है । वो भी मेरे कंधे से लिपटा हुआ था । मैंने दोनों को बाहों में भर लिया और उन्हें बहलाने लगा । फिर रात में जब भी अपने ननिहाल चले गए मैं सरवन की चिंता के पास चला गया । मुझे लगा मानो चादर ताने लेता हूँ । रोता मिलाप करता । मैं सरवन को आवासीय देने लगा । सिर की तरफ से रात को हटाने लगा । मेरे भाई ने मुझे कंधे से पकडकर हटाया और बोला क्यों मास्टर रात में हाथ चलता है, अभी गर्म है पर राष्ट्र में इतना से कहाँ था? अगर होता तो मुझे अपने में बस मना कर लेती । मेरा मन करता था कि वह रह की ढेरी । वैसे बाहर आ जाए तो वो नहीं आया । मैं रोता को लाता । खाली खाद वापस घर में आगे रहा । तब तब आया और नहीं अब बारह के साथ आया । उसकी कहां आना था । ये तो मेरा ये धर्म था कि काश वो भी बारातियों में कहीं सिर उठाए । मैं आंखे फाडे उधर देखता रहा । जिधर से बारह आ रही थी । बीस पच्चीस लोग थे । फिर किसी के साथ फोन पर बात करता मेरा भाई फोन मुझे पकडा नहीं लगा तो मैं नहीं कार में हाथ हिलाया । मैंने उसे कहा कि आज मुझे वो किसी का फोन ना पकडा है पर वो फोन देते हुए कहने लगा कर लो, बात थोडी सी ज्यादा ही पीछे पडा हुआ है । मैंने बेमन से फोन पकडकर काम से लगा लिया । कोई रोहन से सफर में कह रहा था हमारी महफिलों की शान हमारी जिंदादिल यार से रब ने कौन से जन्म का बदला लिया है । ये मेरा पुराना अध्यापक साथ ही था । मैं उसको दिलासा देने लगा और वो चुप करने में ही ना मुझे खुद रोना आने लगा था । मैंने फोन अपने भाई को पकडा दिया और आंखे रुमाल से पहुंचने फिर मेरे पास एक व्यक्ति खडा हुआ कोई दूर का रिश्तेदार आप मिलाकर कहने लगा ये तो जी रब ने बहुत बुरा किया । उसकी मर्जी मैं सभी को यही जवाब देता । बार बार कहाँ होने के कारण की शब्द अपने आप ही मुंह से निकल जाते हैं । अंतिम संस्कार पर हम बहुत नहीं सके । वैसे हुआ क्या था? उसने पूछा एक्सीडेंट वाली बात मेरे से वैसे ही निकल जाती है जैसे किसी टेपरिकॉर्डर के बटन को दबा देने से कुछ चल पडे, बहुत बुरा हुआ । बच्चे कितने बडे हैं ये खडे हैं । बडा बारह साल का छोटा दस का चलो ये तो अब हुए जवान कुछ सालों में हौसला रखो की शादी वाला काम भी आपने अच्छा किया । इसी काम के लिए वो आया था । उसकी इच्छा पूरी हो गई कहकर वह मिनटभर रोककर चला गया । फिर मेरा साडू और साली मेरे पास आ गई । कत्थई रंग का फूल मुझे पकडा गए । मेरे पोतों को पकडा दिए । बडे बोते ने मेरे कोर्ट पर दूसरे फूल के साथ ही से टांग दिया । फिर उसने अपना भी लगा लिया और छोटे भाई का भी हमारे दो दो फूल लग गए थे । यूरी मैंने तब कहा था तुम झगडते क्यों दोनों तरफ के फूल लगाना ताकि पता चले कि बिचौले हो तो झगड से कहा है हम सब तो फंशन करते ही खून दोनों ही लगाएंगे । कहकर सरवन फिर ताली बजाकर होता था । जब उसने किरण से कहा था कि वह विभाग वाले दिन लडके वालों की तरफ का फूल लगाए तो किरण बोली थी बल्कि तुम लगाना लडकी वालों का फूल हमने तुम्हारा लडका नहीं बुलाना क्या? कनाडा में बडी आगे लडकी वाली सारा दिन तो लडकी को घुमाता में थक जाता हूँ और मैडम जी तुम्हारी लडकी को मुझे ही पता है कैसे इधर विदेश बुलाया है तभी तो कहती हूँ कि लडकी वालों का फूल लगाओ । ये सुनकर सरवन ने ताली बजाई थी । मुझे सरवन की हार मान लेने वाली बात अच्छी नहीं लगी थी और मैंने दोनों तरफ के फूल लगाने वाली बात कह दी थी और फिर सरवन कहने लगा था श्रीमती जी जीवन काटने के वक्त मैं तो वर पक्ष के साथ लगकर खडा होऊंगा, मेरा तो भाई है, तुम कहाँ खडे होगे? मैं दूसरी तरफ लडकियों के साथ खडी होंगी और कहा उधर कैसे खडी हो जाएगी वहाँ तो लडके की सालिया खडी होती है और तुम तो लडकी की मौसी जी लगती हो । सरवन ने मौसी जी पर जोर देकर कहा था वहाँ एक आद मौसी भी होती है तुम जैसे बिगडे तो बिगडे को सीधा करने के लिए किरन ने शरारत में कहा था विवाह के वक्त किरण रिवन पकडे खडी लडकियों में नहीं थी वो पीछे अपने माँ के पास कुर्सी पर बैठी थी । लडकों में सरवन भी नहीं था । यहीं होता तो वह तालियाँ बजा बजाकर हस्ता अब सरवन कहा मैंने गहरी आभारी मुझे लगा लडके योगी ज्यादा वक्त लगा रहे हैं । उनकी ही सुनकर मेरा दिल बेचैन होने लगा । मैंने साथ खडे अपने साडू से कहा आगे बढाओ यारी ने भी ज्यादा टाइम लगाए जाते हैं । कोई नहीं भेजी चल पडते हैं । ये नोक झोंक करनी ही पडती है । मूवी बन रही है ना! कई बार इमिग्रेशन वाले मूवी मांग लेते हैं । अगर ये शगुन व्यवहार ना हो तो उन्हें विभाग के नकली होने का भ्रम पैदा हो सकता है । उसने मेरे कंधे पर हाथ रखकर कहा मैं पीछे की ओर हटने लगा तो उसने मुझे वहाँ से पकडकर वहीं खडा कर लिया । बोला जी बस टोमॅटो को और फिर वो लडकों को जल्दी करने के लिए कहने लगा । अंदर गए तो मेरा बडा पोता मेरे लिए चाहे आया अभी भूत भराई था की दो तीन लोग अफसोस करने के लिए करीब खडे हुए हैं । चाय पीते हुए शोक प्रकट करते रहेंगे तो मन करता था कि कब ये चाय पानी खत्म हो और कब ऊपर जाकर बैठे । जहाँ आनंद कारज होना था चाय पीकर जब बाहर निकले तो वही मन तो की टोलियां खडी हुई थी । मेरे दिमाग में मंगतों के बारे में सरवन के साथ हुई बातचीत आ गई । इंडिया की तैयारी करते घूमते सरवन से मैंने कहा था । शर्वाण्यै पांच पांच के नोट की गड्डी अलग रखना । विभाग के दिन मंत्रों के लिए एक एक महीने को दे देना नहीं तो तगडे मंत्री झपट कर ले जाते हैं । कमजोर मन तो के हाथ नहीं लगता । कुछ उपकृत उत्तर में बोला था । पांच के नोट को कोई नहीं पूछता । रेडी जी सौ पचास से कम बात ही नहीं करते थे और फिर अकेले विभाग वाले दिन ही तो मैं किसी भी फैलाए हुए हाथ को खाली नहीं बोलूँगा चल तू कर अपने मन के गरीब बन्दे की आशीष एहि आदमी को तार देती हैं । इसी साले की आशीष ने नहीं जा रहा बल्कि लोगों की नजरें ले डूबी । सोचता हुआ मैं मंगतों के बीच में से निकलकर ऊपर दरबार साहब की और चला गया । मेरे पीछे अन्य कई लोग भी ऊपर आ गए । वर्कप् था आधार मेरे साडू का बहनोई मेरे पास बैठा वो सोच क्रिकेट करने लगा । मैं मशीन की तरह के प्रश्नों का उत्तर देता गया । अब सोच करने वालों के चलता हूँ से प्रश्न और दिला से मुझे और तंग करते हैं । मुझे लगता मानो वो मेरे दुख में से स्वास्थ ले रहे हो । यदि पार्टी पाँच शुरू कर दें तो शायद ही चुप हो जाए । राधी अपने साथ टिका रहे थे तो फिर बोला आपने इमरजेंसी बी जे लगवाए होंगे । इधर आने के लिए खडे पैर तैयारी करनी बहुत कठिन है । भाई बच्चे टिके रहे जहाज में दोस्त मित्रों ने मिलकर सभी काम करवाकर चढा दिया । जहाज में अभी यहाँ कोई होश थी । गिरते रहते एक दूसरे को बहलाते पहुंची गए । किसी न किसी तरह मेरे दिमाग में बडे पोते का चेहरा गया । जब मैं रोने लगता मेरे कंधे को सहलाता । मुझे शाम देखकर वह खुद चुप चाप आंसू बहाने लग पडता हूँ । मैं अपने आप को बहुत रोकता पर मन उछल उछलकर बाहर आता । छोटा बार बार कहता बाबाजी डोंट वरी । हमें देखकर डैडी बोलने लग पडेंगे । जहाज में बिठाते समय मुझे बहुत से लोगों ने कहा था कि सरवन के काम अब मेरे जिन देना पडे हैं मुझे तगडा होना पडेगा । पर मुझे तो चार और अंधेरा दिखाई देता हूँ । कैसे उठा लूंगा में भला पूरी कबील दारी मैं तो सब कुछ सरवन पर छोडे बैठा था कभी किसी बात की और ध्यान ही नहीं दिया । सोचता था कि सरवन किए तो जाता है और सरवन करने भी कहाँ देता था । कहता था तो इंडिया से रिटायरमेंट लेकर आए हो इंजॉय करो अपने रिटायरमेंट जब मैं नया नया कनाडा में आया था । अब से सात साल उम्र भी कम थी । साठ खाता तब तब कई मित्रों ने कहा कि मैं बेटे पर निर्भर ना हूँ । मुझे लगता कि ये मुझ से चलते हैं । उनके बेटे उनकी सेवा नहीं करते इसलिए मुझे भी अपनी तरह इधर सिक्योरिटी गार्ड बना देखना चाहते हैं । अगर तभी काम की आदत डालनी होती है । क्या होगा बच्चों का बच्चों की पढाई अभी सर पर बडी है । कैसे गाडी चलेगी किचन पाए मेरा पीछा ना छोड दी । राजीव सिंह कोई शब्द गाने लगे मैं आंखे मूंदकर उधर ध्यान लगाने लगा और मन था कि टिकता नहीं था । सरवन की लाश दिखाई देने लगती । एक्सीडेंट में कुछ ली पसलियां देखने लगती । झट से आँखे खोल लेता । मन में खयाल आते मैंने जो भेजा इन्हें इस तरफ खुद क्यों नहीं आया अगर वो ना ऍफ होता न जान गंवाता क्यूँ भेजा मैं खुद आ जाता हूँ तो मेरा हो जाता एक्सीडेंट मैंने तो सारी उम्र भोग ली है और फिर मैं पत्नी जिन्दर के पास पहुंच जाता हूँ । खैर पड गया रब्बा जो मेरे मुंह से निकलवाई क्यों? मेरे चित्र में आया की सरवन और बहुत ही हुआ है । इधर रागी सिंह शब्द गा रहे थे लख खुशियां बादशाह ियाँ जिस सतगुरु नगरी करें नहीं खुशियाँ लगती है मेरा एक लौता बच्चा था मेरी दुनिया अंधेरी कर गया मुझे रागी सिंह पर गुस्सा आया हूँ । फिर मेरी नहीं था विभाग वाली लडकी पर बडी लडकी का पिता और भाई उसको गुरुग्राम सहित की हुजूरी में ला रहे थे । आम विवाहों की भर्ती ही उसको सजा सामान रखा था मुझे उसकी ये सज धज पकडी । मैंने सोचा यहाँ किसी को याद भी नहीं क्या हुआ ऐसे पुणे का? यदि न टाइम का विवाह करवाने तो नाॅट होता न? वो जान करवाता । लोगों को काम करता ही कोई जान गंवा बैठा । क्या मेडल दे देते मौसम ऐसा जिनके लडके को उधर कनाडा में बुलाना था । नहीं इस लडकी को कुछ याद है हो रही है तेरे पीछे वह जान गंवा बैठा । पहले बडी मुश्किलों में तुझे उधर बुलाया साल भर अपने पास रखा पढाया कितनी स्कीमें बनाए बैठा था । जब ये दोनों उधर जाते तब भी अपने पास ही रखता हूँ । अब कैसे रख पाएंगे हम अपने पास किरण बेचारी हमें संभालेगी की नहीं लिए घूमेगी फिर फेरे होने लगे । मेरी निगाह हर लडकी पर पडी उसकी आंखें भरी हुई थी । कम्बख्त की आंखे हैं भी बहुत सुन्दर छलक छलक पडती हैं । मुझे उस पर तरस आया । मन में खयाल आया कि वो अपने विभाग की खुशी मनाये या की । आपने मौसा के बिच छोडने का शोक खेले । इसका सरवन के साथ यार बहुत था । दिनभर अंकल अंकल करती रहती है और एक साल इंतजार कर लेते विभाग को मेरी चित्र में फिर वही बात उठी । मैंने लडकी के माँ बाप से भी कहा था पर इसका बाप बोला कनाडा अमरीका वाले रिश्तेदार आए हुए हैं । कहते हैं रोज रोज छुट्टियाँ लेकर आना मुश्किल है । उन्होंने वापस भी लौटना है और फिर जिस ग्राम सरवन आया था तो जितनी जल्दी पूरा हो जाए अच्छा है । काम के निपटाने वाली बात लडके के पिता ने भी कही थी । वो कहता था जितनी जल्दी हो सकता है हम ये विभाग वाला काम निपटाएं । अगर साल पर बात छोड दी तो पता नहीं कल कोई दूसरा ही दबाव न डालने लगे । उनका कोई दूसरा रिश्तेदार भी रिश्ता करवाने को फिरता था । ऐसे कैसे कोई दूसरा दबाव डालेगा जब सारी बात पक्की हुई पडी है । कार्ड बढ चुके हैं । मैंने कहा यहाँ कुछ पता नहीं चलता । कनाडा के नाम पर बंदे छत बदल जाते हैं । मेरी निगाह फिर लडकी पर पडी और रुमाल से ना पहुंच रही थी । मेरे मन में आया की लडकी बदलना चाहिए । कहीं अगर सियानी हुई तो किरण का सहारा बनेगी । फिर मन में आया कौन? सहारा बनता है तो खुद ही काटनी पडेगी तो दूसरा चित्र कहता हूँ कैसे कटेंगे सरवन के बिना ये दिन किरण ने तो सबकुछ सरवन पर ही छोड रखा था । कैसे चलेगा काम? रागी सिंह बधाइयाँ का सबका गायन कर रहे थे । मुझे ये शपथ भी अच्छा नहीं लगता । तब ले और छह नौ की आवाज मुझे जहर जैसी लगी । मेरा मन हुआ कि जल्दी से शपथ खत्म करें और काम निपटाएं । हमने पडता नहीं बल्कि लंबा होने लगा । लडकी के माँ बाप वर पक्ष को बारी बारी बुलाकर उन्हें जेवर गहने देने लगे । साथ साथ तस्वीरें उतरती रही । इन्होंने क्या खिलाना डाल दिया । जो कुछ देना है चुप चाप नहीं दिया जाता है । मेरे मन में आया लेकिन मैं शांत रहा लेकिन अधिक देर मुझे चुप नहीं रहा जाता । जब मुझे बिचौले की अंगूठी देने लगे तो मेरे मुंह से निकल गया तो काम खत्म करने की करो कि तुम्हें क्या खिलाना से डाल दिया । तेरा साडू बोला ये तो जीत करना ही पडता है । इमिग्रेशन वालों का भी फोटो से पेट भरना होता है । पर ये फोटुओं वाला काम को ज्यादा ही लटक गया । शगुन पडने लगे । पोज बना बनाकर खडे होते लोग मुझे पूरे लगते । मैं गुस्से में एक तरफ होकर बैठ गया । दो बंदे मेरे पास बैठे शायद भवन के सेवादार होंगे । उनमें से एक बोला सितार जी, बहुत दुख की घडी या पडी आप पर तो पर महात्मा का भाडा है मीठा करके मानने का । महाराज आपको बाल बच्चे एक दो अन्य अफसोस की बातें करके उनमें से कहने लगा भवन की कारसेवा चल रही है । अगर आप काकाजी की याद में कोई दान पुण्य करना चाहो तो मैं मेरा मतलब कोई कमरा बनवाना हो । धान बोलने को क्या मैं यहाँ होते की छठी करने आया हूँ । साले कमरे के हमें अपनी रोटी की फिक्र है कि कैसे चलेगी और ये मेरे चित्र में आया । पर मैं ये बात उनसे नहीं कहता और चुप चाहते । नोट उन्हें पकडा देता हूँ । किसी प्रकार सरवन के भूख के बाद गांव के गुरूद्वारे वालों को मैंने मांगा हुआ काम दिया था । वो रसीद काटकर चले गए । डाले जा रहे शगुन की तस्वीरें अभी ली जा रही थी । मैं कॉल मसोट कर नीचे चलाया । भवन के गेट के पास कुर्सियों पर बैठे लोगों के समीक्षा बैठक । वहाँ मन तो की टोली खडी थी उनके मांगने की आवाज मुझे वो कि गांव गांव जैसी लगे । मेरा वहाँ से हट जाने को मन हुआ । पर शीघ्र ही किसी में ममता को वहाँ से दुत्कार दिया । बडा पोता मेरे पास आ बैठा । कुछ मिनट चुप रहने के बाद वो बोला बाबा जी इजहार वाला टाइम सेलिब्रेशन का होता है ना । मैंने उसकी तरफ देखा, उसके अंदर चल रहे विचारों को समझने की कोशिश करने लगा । मुझे लगा कि वो भी मेरी तरह महसूस कर रहा था । मैंने अपना हाथ उसके घुटने पर रखकर उसे दबाया । उसने फिर कहा ऍन, मुझे उसका कोई जवाब नहीं सूझा । मेरे अंदर एक दर्द सा उठा । मैंने उस को अपने साथ दस लिया । मंत्रीस्तरीय अंदर आकर मेरे सामने खडी हो गई ये सरदार तू तो बिचोला है बाहर से आया है दे कुछ गरीबों को भी खुशी के मौके वो बार बार कहने लगी । मुझे उन की चीजें बुरी लगी । मैंने कहा भाग जा यहाँ से तो मैं खुशी का मौका लगता है । हमारे यहाँ तो शोक पडा हुआ है । पैसे देने के मारे ऐसे तो ना बोल सरदारा हम गरीबों ने तो दिन त्यौहार को ही लाख लेने होते हैं । उनमें से बोली मेरी बाहों में से सीख निकलने लगा । बच्चे लाता वक्त पर उठाकर उनकी तरफ बडा जाती होगी नहीं उसकी खुशी लगा रखी है । अरे हमारा रोम रोम हो रहा है तो मैं लाख चाहिए । सरदार कुफ्र नातोर अगर कुछ नहीं देना तो ना दे । कई मंत्रियों ने एक स्वर में कहा तो मैं कुछ रखता है । मेरा बेटा मर गया । धर दहाडा जोरि चलो सच में बिचारी का बेटा मेरा लगता है देखो कैसे चला रहा है । उनमें से एक मंत्री ने कहा और वो सब वहाँ से जाने लगे । ये सुनकर मेरा हाथ अपने आप ही जेब में चला गया और मैंने बिना देखे जितने भी नोट मेरे हाथ में आएगा रहने दे सरदार रहने दे सरदार कहती मंत्री के हाथ में जबरन पकडा दिए ।

पोखर -03

बुखार ये तो बुरा ही पहुँच गए तो उन्हें सुबह पुल की तरफ देखकर सोचा । पिछले साल जब तुमने ये फूल वाला मकान खरीदा था तो तेरे दिल दिमाग में भी नहीं था कि इसकी इतनी देखरेख करने पडा करेगी । काम पर से लौट कर तेरा मन किया कि पूल के किनारे बैठ कर आराम से धूप सेक आऊंगा । तब बैठते ही तेरी ने कहा पूल के पानी पर जा पडी । काम पर ओवर टाइम ने लगा होने के कारण तो दिन रहते घर पहुंच गया । रसोई में जाकर तूने अपनी लंच किट सिंह के पास रखकर स्टोर की और देखा । तेरे भीतर चाय पीने की तलब उठी । पता नहीं किधर गई है । उन्हें अपनी पत्नी के बारे में सोचा । एक पालतू उसी तरह खडा रहा और फिर शराब वाली अलमारी की ओर देखने लगा । कल काम पर जाना है । अगर पीने लग पडा तो फिर हटा नहीं जाएगा । सोचकर तुमने अपना ध्यान उधर से हटाकर दूसरी तरफ कर लिया । फिर फ्रिज खोला । तेरी नेता बीयर की बोतलों के साथ टकराई । इसका क्या देना? तूने सोचा और फिर बोतल उठा ही ली । बोतल खोलने से पहले तो बाहर की और देखा अप्रैल महीने की पहली गुनगुनी धूप में तेरा घर के पिछवाडे बैठने को दिल क्या हमसे बैठकर पिएंगे सोचकर तूने बीयर की एक और बोतल फ्रिज में से निकालकर बगल में दवा ले । फिर कार्डलेस फोन की और देखा यदि उसकी रिंगटोन बनने लगी तो अंदर की और भागना पडेगा । सोचकर तूने उसको भी उठा लिया और पिछवाडे की सीढियां उतर गया । सुबह पूल के किनारे बोतलों और फोन को रखकर तो शेड के नीचे रखी प्लास्टिक की कुर्सियों की तरह पडा । सर्दियों में इस्तेमाल न कि जाने के कारण मैली हुई पडी कुर्सियों की तरफ देख कर तुझे अपनी पत्नी पर खीचडे ये नहीं कि कुर्सी ही साफ कर दूँ । पता भी है कि अब बाहर बैठने की रोता आ गई है बढाकर तूने कुर्सियां साफ करने के लिए किसी पुराने कपडे की तलाश में इधर उधर देखा लेकिन देरी ने कहा किसी कपडे पर ना पडी तूने हाथ से ही कुर्सियां झाडकर धूल के किनारे ला रखी और एक कुर्सी पर बैठकर दूसरी पट्टा ऍम डिग्री नजर पूर्ण कि गंदे हो गए । पानी पर पडी स्कूल के पीछे बीस पच्चीस हजार अधिक का खर्च करना पडा तो मैं सोचा तुम लोगों ने सर्दियों में पूर्ण को ढका भी नहीं था । सारी सर्दी इसमें बारिश का पानी पडता रहा था । अगर इसमें कोई खराबी आ गई थी । अगर यही कोई पूल के बगैर मकान लिया होता तो उतने पैसों की अब जीप ले लेते । तेरे मन में खयाल आया जब तो कनाडा आया था । तेरी इच्छा थी कि जीव खरीद कर इसके पीछे जलदार लिखवाए । जैसे इंडिया में तेरे बापू की जीत के पीछे लिखा होता था, पर तब तेरी इतनी पहुंच नहीं थी कि कोई अच्छी जीत खरीद सके । पाँच छह साल तो तू अपनी घरवाली की पुरानी इम्पाला के साथ ही गुजारा करता रहा था । फिर मकान खरीदने के चक्कर में तिराहे शौक पीछे पडता चला गया । अब कुछ महीने से जब से तेरे बेटे ने लाइसेंस लिया था, तेरह शॉप फिर से जाग उठा । मेरी ख्वाहिश थी कि अगले साल जब ये यूनिवर्सिटी जाने लगेगा तो उसको जीप लेकर रहेगा । जब तूने अपनी अच्छा एक दिन उसके साथ साझी की तो उसका उत्तर था डाॅ । इस पर तूने नशे की झोंक में कहा था उत्तर पैसे की चिंता ना अगर हम बढिया जीप लेंगे और उसके पीछे जेलदार लिखवाएंगे फॅस अपने पुत्र की बात सुनकर तो झट से कहा वो ये बंपर स्टीकर नहीं और रेड ग्रैंडफादर मुँह जेलदार जब प्राउड होना चाहिए । क्या ऑटो लॅास कई बार बताया आपने पर डैडी लोगों को से क्या अपने पुत्र की ये बात तो ये अच्छी नहीं लगी थी । उन्हें सोचा पता नहीं किस पर गया है चल अपनी महंगी जीत नहीं मांगता तो न सहित मैं चला लिया करुंगा मारता रहेगा । ताक रहे मेरे पुरानी कार के साथ और जब तुम ने अपने पुत्र की अगले साल से यूनिवर्सिटी की पढाई पर आने वाले खर्च के बारे में पता लगाया तो जीप लेनी तो एक तरफ तो बडा घर लेकर भी पछताने लगा । स्विमिंग पूल की और देखते हुए तुझे मकान पर खर्च किए फालतू डॉलर चुभने लग पडे । लेने खराब होना था ठीक करवाने पर पता नहीं कितने लगेंगे तो तो उठा दूसरे तीसरे दिन क्लोरीन चेक करो रात को ढको साले बीस झंझट है तो मैं सोचा फिर तुझे अपने गांव वाली होगी की याद हुआ । उन्हें सोचा उसमें किसी को कडी क्लोरीन चेक करने की जरूरत नहीं पडती थी । निचले हिस्से में बनी मोरी में पत्रा अडा दो और भर गई । पत्रा निकाल दो तो खाली जब नहाने धोने के लिए इस्तेमाल करनी होती । बापू सीरी को कहकर कांच की तरह चमक वाले था । फिर तो मैं सोचा आप क्या बराबरी करना तुझे अपने बापू का अपने यहाँ गोबर कूडा उठाने वाली के साथ बहुत ही में नहाने वाला किस्सा याद हुआ या जिसके बारे में पता चलने पर तेरी बेदेने लडते हुए कहा था मैं तो उस की बाटी अपने बर्तनों में नहीं मिलना देती । वो देख ले आलेख में पडी है और तू वो शर्म का घाटा है तो उन्हें वोट में दो वक्त अगर आपने बापू की गस्ती आवाज में कहे शब्द सुने थे, यूनान कुटाई खा लेना जबर जबर किए जाती है । उन्हें मोरी में से देखा था कि ये कहकर तेरा बापू बाहर की ओर जाता हुआ मंद मंद हंस रहा था । तब मेरे बाल मन को अपने बापू का इस प्रकार करना समझ में नहीं आया था बल्कि तेरे भीतर भिंडूसी पैदा हुई थी । लेकिन अब अब तो तूने वह सब कुछ याद करके सोचा ऍम कौनसा पटियाला वाले महाराजा से कम था । ये सोचते ही तरह होठों पर मुस्कुराहट आ गई । पिछले साल मकान खरीदते वक्त पूल की और देख कर तेरे भीतर गुप इच्छा भी उठी थी । इस पोल में घरवालों के कई बाहर चले जाने पर तो किसी पडौसन पडोसन गोरी किसन रहा है लेकिन ये अच्छा एक पल के लिए ही उठी थी । मकान पर अधिक डॉलर खर्च करने में पूल वाले मकान से घर की शान बनेगी वाला विचार अधिक सहायक हुआ था । पहले तो तू मीनमेख निकालता कहता था जरूर लगाने हैं फालतू पैसे आस पास कोई दूसरा मकान सेल पर लगेगा तो उसका सौदा कर लेंगे । पर मेरी पत्नी ने कहा था बेटा अभी फोर्थ क्लास में है, तीन साल और स्कूल में जाना है उसने । इससे करीब और कौन सा मकान लगेगा? सेल पर रहे घर के बिल्कुल करीब है । मैं ही जानती हूँ मैं कैसे काम पर से हफ्ते हुए । लौटती हूँ कि कहीं लेटना हो जाऊँ । लडकी खडी इंतजार करेगी जल्दबाजी में किसी दिन एक्सीडेंट करवा बैठ होंगी इस घर में । अगर मैं पांच सात मिनट लेट भी हो जाऊंगी तो ये खुदिया जाया करेगी । और फिर जब अपग्रेड करने की लगे हैं तो ढंग से करेंगे । पूल से घर की शान बनती है तुझे । ये दलील जज गई थी और तुम लोगों ने मोर्चा मार लिया था । पर आप खराब हुए पूल की और देखकर तूने सोचा देखने वाला कहेगा कि पूल वाला घर लेने का तो बडा शौक है । तब पता लगता है जब मेन्टेन करना पडता है । ऐसे मकान साले दिखते भी नहीं नहीं तो चार डॉलर कमा ही ले । फिर तूने चल जो कुछ होना था हो गया । इतनी कौन सी बात है चलता रहता है सोच कर अपना ध्यान पूल की तरफ से हटा लिया । बीयर के घूंट भरते हुए तेरे निगाहा शेड के नीचे पडे बार्बी क्यू पर पडी तेरा मन बार्बी क्यू क्या चिकन खाने को हुआ तेरे दिल में अच्छा पैदा हुई कि किसी भाई बहन को बुला ले और बार्बी क्यू करते हुए डर हुए । उन्होंने अपने दो तीन मित्रों के बारे में सोचा तो वीक होने का खयाल आया । चल आप ही करते हैं कुछ सोच कर तूने अपनी पत्नी का सेल फोन मिला । इधर शहर गलती होती है दुबई में शहर करती लगती हूँ काम से सीधी लडकी को स्कूल से लेकर ग्रॉसरी लेने आई हुई हूँ । खत्म हो गई थी अच्छा फिर आती हुई तंदूरी चिकन उठाती लाना । बार्बी क्यू करते हैं, कहकर तो फोन बंद करने वाला था की तो दूसरी ओर से आवाज सुनाई दी । अकेले ही हो के साथ में कोई और भी है, अकेला ही हूँ और क्या फौजी होंगी । साथ में मैंने इसलिए पूछा था कितना लाऊं उन्हें फोन बंद करके बीयर का बडा सा खून भरा फोन की घंटी बजती सुनकर तुमने सोचा पत्नी का ही होगा फिर पूछेगी कुछ और तो नहीं लाना वो नॉन करके तूने कहा और दूसरी तरफ तुझे अजनबी आवाज सुनाई दी पाई जी हैं फॅर गुरजंट ऍम गांव से जगत सिंह का बेटा ऍम दो पूछना चाहता था पर पूछा नहीं अंदाजा लगाने के लिए चुप हो गया और तरह दिमाग में नहीं आया कि कौन है तो दूसरी तरफ से सुना पाई जी पिछली बार जब तुम इंडिया गए थे, मेरे बैंक में आए थे । अब तो आ गया यार सोलाह चडक सिंह कहीं का अब सीधा नहीं किया था कि चढते का जनता हूँ । कहना चाहता था पर कहा नहीं बल्कि वो अच्छा अच्छा कह दिया । दूसरी ओर से तुझे थोडा हंसने की आवाज के बाद सुनाई दिया मैं तुम्हारे शहर आ गया हूँ भाई जी अच्छा तूने कहा तो मुझे अपने भाई का बताया याद आया जिस आदमी ने बाहरी मुल्क में जाने की उम्मीद में विवाह नहीं करवाया था, पैंतीस साल का हो चुका था । ये बात तुझे उसने करीब दो साल पहले तेरे इंडिया गए पर बताई थी । जब तुम बैंक से वापस आ रहे थे । जहाँ ये आदमी क्लर्क था पहुंची गया फिर दबाया था तो उन्हें पूछा पिछले इतवार और गांव का क्या हाल चाल है? एक पल तेरे दिल में आया कि कहीं आज आप मेरे गांव की बातें करेंगे । पर तूने कहा नहीं जहाँ से ज्यादा वास्ता ही नहीं था । मेरा तो बहुत देर से लुधियाने में ही रहता था । सुनकर तूने कहा हम मान की जरूरत हो तो बताना । ये कहते हुए तेरह सीना गर्व से फूल गया । हम की कोई प्रॉब्लम नहीं है । भाई जी मेरे मिस्टर यहाँ किसी फैक्ट्री में सुपरवाइजर है । वो कहती है, पार्ट टाइम काम पर साथ ही लगवा लूंगी । मेरा विचार पडने का है । लेदरी नहीं हो पायेगी मुझे दस बारह साल बैंक में नौकरी करके दफ्तरी काम की आदत पड गई है । सुन कर तेरे भीतर कडवाहट भरने लगी । उन्होंने कहा अच्छा फिर अगर किसी हेल्प की जरूरत पडे तो बताना दूसरी ओर से मेहरबानी सुनकर तुम्हें चल अच्छा फिर कहा और फोन बंद कर दिया हूँ । लेदरी नहीं होने की तो बढ बढाया । तेरे अंदर की कडवाहट बेचैनी में बदलने लगी तो उन्हें अपने भाई को गांव में फोन लगाकर पूछा चढते का जंटा यहाँ आया घूमता है, उन्हें कभी बताया ही नहीं । अच्छा पहुंच गया । पंद्रह बीस दिन पहले गांव में आया था तेरा नंबर मांगता था, नंबर क्यों देना था? और फिर गुरु मेरे गांव की बातें तो बता दिया कर मैंने सोचा ही कौनसी बडी बात है और बहुत सारी जनता बाहर के मुल्कों की तरफ चली फिरती है । बीच में चढते का भी जा घुसेगा । वैसे बिहार का भी छोटा मोटा सा शहर में क्या है? कहीं कहते हैं बिहार भी किसी बडी उम्र की औरत के साथ ही हुआ है । सुनते हैं छुट्टी है भरे बच्चा भी बताते हैं और उसको कोई कुमारी कन्या कौन देता है कहकर तुम्हें फोन बंद कर दिया । अपनी अंतिम कहीं बात के बारे में सोचते हुए तेरे अंदर की बेचैनी खत्म होने लगी । तुझे नई नरम छमक जैसी अपनी घरवाली का ख्याल हुआ जिसमें तुझे कनाडा में बुलवाया था । कनाडा पहुंचकर तो उसके होश नहीं हो गया था । मुझे याद आया कि वह मुझे कोई ना कोई कोशिश कर लेने के लिए बहुत कहा कर दी थी । तब तू कहाँ करता था? आप पढना नहीं हो सकेगा । मैंने तो बी ए करके बडी मुश्किल से पढाई से पीछा छुडाया था । लेकिन अब तरह दिमाग में आया कि यदि पढ लेता तो अच्छा ही था । फिर तूने सोचा फॅसा जज बन जाता है जितने डॉलर ही बनने थे और छह महीने तक रात की शिफ्ट वाला सुपरवाइजर ऍम रिटायर हो जाएगा । फिर रात की शिफ्ट का सुपरवाइजर बनने की अपनी ही बारी है ये सोचते हुए तेरे भीतर खुशी की लहर दौडने लगे फिर तूने सोचा नहीं नहीं इधर आए लोग कहाँ ही करते हैं ये कर दूंगा वो कर दूंगा जब अंग्रेजी बोलते गोरों का कुछ भी पालने नहीं पडता तब छोड छाड जाते हैं सबको अच्छा तूने बियर का खून भरा तो जब बीयर बक बक ई सी लगी तुम्हें बियर एक तरफ रखकर पूल की और देखा तेरे चित्र में आया कि भूल को ठीक करवा ही लेना चाहिए घर की शान बनती है फिर टूटकर अंदर से राम और वो का गिलास भर लाया वापस आकर बैठते हुए तूने सोचा होते कहीं इंडिया में ऐसा पूल बनाते खेत में आनंद दिया जाता है आॅड आप वहाँ मछलियां पकड रहे हो तो उसे अपने बेटे की आवाज सुनाई दी । तूने नजर ऊपर उठाकर ॅ की और देखा जहाँ वो खडा था तो जो उसका मजाक समझ में नहीं आया तो उन्होंने कहा आ गया हजार रूप में बैठते हैं । फॅमिली में तूने देखा कि वह कुर्सियों की तरफ गया और फिर वापस सीढियाँ चढने लगा अब मूड चला उन्हें पूछा कोई रैप लेने जा रहा हूँ ॅ पडी हुई हैं वो आ जा तो मेरी मॉम वाश कर देंगी वीकेंड पर । पर वो अंदर जा चुका था । उसने अंदर से पुराना तौलिया लाकर सारी कुर्सियां साफ करके एक कुर्सी तेरह बराबर ला रखी । दायक अब समझ आ रहा है हमें पूर्ण ठीक करवाना चाहिए ऍम खराब हो गया है । अच्छा पिछले पंप पे होता है । पानी सर्कुलेट करने के लिए होता है करवाएंगे किसी दिन बार्बी क्यू करें शॉर्ट लगानी है बियर की बोतल तूने उस की ओर इशारा करके पूछा खाॅन तो उन्हें हस्कर कहा ठीक है मेरी मर्जी तो मुझे याद आया कि जब तो इससे भी छोटी उम्र का हुआ करता था तो तेरा बापू तुम दोनों भाइयों को पास बुलाकर थोडी थोडी लगवा देता था और तो उलटे हाथ से होट पहुंचता नशा होने से पहले ही नशेडी हो जाता था । फिर तुझे अपनी बे देखा कहा याद आया हूँ तेरे बापू को कहती तो खुद पि लिया कर जो पीनी होती है बच्चों को क्यों उल्टी रहा? लगता है तेरा बापू जवाब देता ये रहेंगे रहे की कर्मों में नहीं होती । तब मुझे अपने बाप ऊपर बेहद हुआ था । अब उन्होंने अपने पुत्र के बारे में सोचा । चलो इतनी नहीं पीता तो अच्छा ही है । कुछ पढ लिख जाएगा । मैं बार्बी क्यू की गैस चेक करता हूँ कहकर तेरा बेटा उठा और बार्बी क्यू का कवर उतारकर उसकी सफाई करने लगा । ऍम तुझे अपनी बेटी की आवाज सुनाई दी । उन्हें आवाज की दिशा में देखा । उसने तेरे पास आता स्विमिंग पूल की तरफ देखा और फिर पूछा ऍम? और तेरह जवाब की प्रतीक्षा किए बगैर ही बोली आॅड पूरा उसकी तरफ देखकर सोचा कितनी बडी हो गई है । कुछ ही दिनों में पिछले साल गर्मियों में ये स्कूल में एक दो बार नहीं दी थी । तब पूजा जी नहीं लगा था और एक साल में ही वह इतनी कदकाठी निकाल गयी थी कि तू उसका पूल में नहाना सुन नहीं सकता था । ने कहा था ऍम के साथ जाकर ग्रॉसरी रखवा काम क्या कर अब तो बडी हो गई है और मोहन से कहना कि चिकन पकडा जायेगा बेटी के तब तब करके सीढियाँ चढने से तुझे लकडी की सीढियां कहाँ टी सी लगी टूटकर बार्बी क्यू की ग्रिलों को साफ कर रहे अपने बेटे के पास चला गया चिकन पकडाने आई तेरी पत्नी ने पूछा आज मेरी बिटिया रानी ऍफ बनाएगी । घायल होगे तुझे यद्यपि मॅन अच्छा नहीं लगता पर तूने कहा रहेंगे क्यों नहीं? लडकी बडी हो जाती है । अपने साथ काम में लगाया कर तो उसकी चिंता मत करो । बडा काम कर लिया करेगी । बहुत सयानी है मेरी बेटी । अपनी पत्नी की बात सुनकर तो जब बहुत अच्छा लगा तो बार्बी क्यू चलाकर उसके बीच चिकन के पीस ठिकाने लगा । साथ ही साथ तो आपने गिलास में से खून भी भरता रहा । फिर तो उन्हें करीब खडे अपने बेटे से पूछा नहीं बढाई कैसी चल रही है? ठीक है बढिया वकील बनना है के? उन्होंने कहा तो उसको पहले भी इस तरह कई बार कह चुका था । जिस दिन मुझे पता चला था कि वह वकील बनना चाहता है तो तेरह अंतर्मन खुशी से भर गया था । फिर अवसर मिलते ही तो उन्हें उससे ऐसा कहा । ऐसा कहते हुए तो खुशी होती है । तेरा बेटा मुस्कुराकर पूल के किनारे खडा हो गया तो उसकी आवाज सुनाई दी । उसने कहा ऍम लेने के लिए मैं किसी को बुलाऊं, इस बार का एस्टीमेट पूल फिक्स करने का और किस बात का? हमें इससे इस्तेमाल तो करना है । नहीं ये तो गोरों के एस है । हम से बदला करवा दें । वो हूँ नया गार्डन बना लेंगे, सब्जियाँ हुआ करेंगी क्यों नहीं मेरे लिए और बडा दो काम पास आई तेरी पत्नी ने कहा तो उसकी तरफ वहाँ के तरह कर देखा ऐसा मत करना डेट फ्रीज चल देखेंगे छुट्टी वाले दिन करेंगे । कुछ ऍम ठीक करवाना ही है । तेरे बेटे ने जोर देकर कहा जी मेरे लिए आलू बीरभूम दो । देरी पत्नी ने आलू पकडाते हुए कहा तेरे द्वार आलू पकडते ही बेटा बोला ॅ तुम ॅ करूँ बार्बी क्यू करके डेट तुम्हारी हर कर दिया करेंगे । अदर वाइज तो झूठे बर्तन भी सिंह में नहीं रखते । जो ये अब बार्बी क्यू करके दे रहे हैं ये वो भी करना बंद कर देंगे । अपनी पत्नी का कहा सुनकर तो बोला जो बन्दों के करने वाले काम होते हैं तो कर देते हैं तेरे भाई जैसा तो मैं नहीं बन सकता । वो गुरु बूढियों जैसा है । बर्तन तक साफ करने लग जाएगा । बिट्टू बिना जाया करो यूटी बातें तो अपने मामा से सीखता है कहकर तूने अपना गिलास खाली कर दिया । मैं तो खुद ही खूब काम कर लूँ । रोज बार्बी क्यू करवाना महंगा पडेगा तो रोज ही बोतल बैठ कर बैठ जाया करेंगे कहकर तेरी पत्नी भीतर चली गई । बातों बातों में इधर मेरा पीस चलवा दिया तो उन्हें काले हो गए । इसको प्लेट में रखते हुए कहा तो जल गया । तेरे बेटे ने कहा तुझे उसके द्वारा जल गया । कहने पर चुटकला याद आ गया तो हल्का साहस पडा । ब्लॅक और ऍम अरे कुछ नहीं, एक जोक याद आ गया क्या? कहते हैं जब रब बंदे बनाने लगा तो सबसे पहले उसने गोरे बनाएंगे । डरते डरते बनाए जाने के कारण उन से कम लगा । इसीलिए वो कच्चे पक्के से रह गए । अगली बार रब ने से कुछ ज्यादा लगवा दिया तो जल गए, वो काले बन गए । तीसरी बार रब ने पूरा केयरफुल होकर बनाए तो फिर कहीं जाकर अपने जैसे वाॅर्डन लोग बने । तुम्हें खासकर बताया तेरा बेटा थोडा सा मुस्कराया । फिर बोला, आॅटो वो गुरु मजाक की बातें हैं । बस में खेलने के लिए कहकर तूने ऍम पीस उठाकर प्लेट में रख लिया । फिर तो बेटे को ग्रिल पर से तीस उलटने पलटने के लिए कहकर अपना क्लास भरने अंदर चला गया । फोन की घंटी सुनकर तुझे तुरंत गुरजंट के फोन का ख्याल आ गया तो उन्हें शराब का बडा घूंट बडा बार्बी क्यू में सिद्धू उठा तो उसको ढक कर उठाकर पीस हिलाने लगा तेरी नजर संडे पर खडी अपनी पत्नी पर पडे तो वो कुछ अधिक ही सुन्दर लगे तूने गिलास खाली करके अपनी पत्नी को आवाज लगाई ऍम आप ही अब बनाये घर आकर उसके आते ही तो गिलास पुनः भर लाया मेरे ऊपर नशा भारी होने लगा तो आपने ब्रेड में दो लाख बीस रखकर पूल के करीब पडी कुर्सी पर आकर बैठ गया । आवाज से रहा हम आराम से बैठकर खाया । तूने अपने बेटे को पुकारा वो तेरे पास आकर जैसे ही बैठा उन्हें कहा छह रहा उसे करना कर देरा पूल हम यू टेंट करके बढिया बना देंगे । जब वकील बन गया ना तब हम एक एकड लेकर वहाँ तेरे लिए पूल बना कर देंगे । रूप उत्तर शौक पूरे करना अपने भारी बात और थी मेरी जवानी तो साला कनाडा था, गया तू अपने दादा यानी मेरे बाबूजी की तरह यू नो ऍम । इंदरसिंह इंदर के अखाडे वाला उस गुरु ने सारे शौक पूरे किए तो नहीं करना रविंदर सिंह की जीत निकलती थी ना गलियों में लोग अब तो हर कोई घंटे जैसा ऐरा गैरा मनोतियां लिया करता है । इंदर सिंह की कौन बराबरी कर सकता है? हैं ऍम युवा ड्राॅ बेटा बोला ड्रंग कहाँ से हो गया । चार पाँच में तो मैं तो बोतल भी जाऊँ । इंदर सिंह भी पूरी बोतल पी जाता था । वो ऍम कहकर तेरे उत्तर ने तेरी प्लेट सामने कर दी । तूने दो बार डाँट मार कर तीस प्लेट में रख दिया और उसने फिर पीस उठाकर तेरे हाथ में पकडा दिया । देखो तो कैसे फिजूल की बातें करने बैठे हैं । पहले विकेट पर शराबी होते थे । आज मुझे अपनी पत्नी की आवाज सुनाई दी और आज आजा जॅानी हमारे पास बैठाकर डर उनसे कहा कल काम पर नहीं जाना जाॅन तेरा बेटा तो जब वहाँ से पकडकर उठाने लगता और तूने उसकी वहाँ झटक दी और गुनगुनाने लगा जाॅय ऍम इस तरह गुनगुनाता हुआ तो ऊपर जाकर अपने बैठकर पड गया और फिर बडबडा ऍम था ऍम रहते हैं जलदार आनी वो जलदार नी तो आवाज से लगाने लगा । इस तरह जेलदार नहीं कहकर उसे बुलाना तो बहुत अच्छा लगा और फिर तुझे पता ही नहीं चला की तू कब हो गया । सवेरे जब तरी पत्नी ने तुझे झकझोरकर जगाया तो तुझे अपना सिर भारी भारी लगा देना उठने को मन नहीं कर रहा था । पर दू अधखुली आंखों से ही मुंह हाथ धोकर ब्रेड खाता अपनी कार में जाता था । तो हम पर जाते हुए तुझे अपने अंदर खालीपन का एहसास हुआ, पर तुझे इसका कारण समझ में नहीं आया । देर काम की शिफ्ट शुरू होने के वक्त तेरी सुपरवाइजर पिंकी गिल जब तुझे आज के काम के बारे में बताकर हटी तो मेरे भीतर खालीपन का एहसास और तीव्र हो उठा । पर चित्र के ना चाहते हुए भी तो काम नहीं छूट गया । लंच टाइम का सायरन बजते ही तो फोर्कलिफ्ट पड से नीचे उतारा तो पिंकी के साथ एक जाना पहचाना चेहरा दिखाई दिया । तुझे उसे पहचानने में देरी नहीं हुई तो झट से फॅमिली ओट में हो गया । एक काम तो याद आया कि पिंकी गिल पिछले साल लुधियाना में ही शादी करवा कराई थी । तो जिस बात समझने में देर ना लगी तेरे अंदर गुबार सा उठा तेरा जी क्या है कि यहाँ से पलक झपकते ही गायब हो जाएगा । तू दूसरी तरफ से तेज कदमों से मैनेजर के पास गया और अपनी तबियत ठीक होने का कहकर लंच शुरू में चला गया? नहीं । तूने वहाँ बैठे कुछ सहकर्मियों से कहा अपनी दवाइयों नमस्ते अब और काम पर नहीं आना । ऐसा कहते हुए तुझे अपना आप हल्का हल्का सा लगा । बात तो बताओ क्या हो गई धूप ही नहीं एक साथ आवाजें सुनाई दी । बस रूम नहीं मानती कहकर तुल्लन शुरू में से बाहर निकल गया । किसी का कहा तो सुनाई दिया । आवाज थी मूर्खों के सिर पर सीन नहीं हुआ करते । अगर होते तो बारह सिंगर कौन होगा? तुझे एक और आवाज सुनाई दी फिर तुझे किसी के द्वारा लिया गया तेरा नाम सुनाई दिया और कईयों के एक साथ घुसने की आवाज । ये तो मेरे द्वारा ही अपने सहकर्मियों में प्रचलित किया गया चुटकुला था । तेरा मन हुआ कि वापस जाकर उन से बात करेंगे । पर तुझे पिंकी गिल और उसके साथ गुरजंट के उधर आ जाने का डर था । इसीलिए तो उन्हें जल्दी से अपना चोगा उतार कटांगा और बाहर निकल गया । पिंकी गिल का चेहरा तेरी आंखों के सामने घूम रहा था । ऍफ चमडे का छोटा टुकडा बढाकर तूने अपनी कर आगे बढा ली । जेल दारों का बेटा चडक सिंह की बहु के नीचे काम करता है । वही तो मुझे लगा जैसे किसी ने कहा हो, बहन के चलते हैं तो उन्हें कुछ गाली निकाली । इस कमबख्त ने भी यहीं मरना था और कम्बल पडे थे जाने के लिए । तूने सोचा यह सोचते हुए तो क्या की तो जीत जी कर गालियाँ बन गए । तेरे कार खुद खुद ही स्ट्रैप क्लब की ओर मुड गई । अंदर प्रवेश करते ही तो सीधे बार की तरफ गया । बारटेंडर लडकी से रमका डबल मांगा और अपनी आदत से मजबूर होकर तो उन्हें एक नजर लडकी के लोग कट ब्लाउस प्रणाली पढते ही नहीं वहाँ नहीं देगी तो उन्हें वहीँ खडे खडे ही एक साल उसने अपना क्लास खाली कर दिया । तो आपने बापू की कहीं बात स्मरण हुआ । वो कहता था खेत में घुसी और और और गिलास में डाली दारू हूँ वहाँ पे उठालो तुझे इस तरह की सांस पीने की आदत नहीं थी और अब तो उन्हें झटके से गिलास खाली करके एक और डबल मांग लिया । बारटेंडर लडकी ने क्लास पकडाते हुए तो उससे कहा ऍम पीजी! दो । अपना ग्लास उठाकर गोल स्टेज के गिर पडे । स्कूल पर बैठ गया । स्टेज पर स्टाॅक्स कर रही थी पर मेरे दिमाग में बिंग की गिलकी काम के लिए खुद देती उंगलियाँ घूम रही थी तो उन्हें अपना क्लास जल्दी खत्म करके दूसरा मंगवा लिया । तुझे पता ही नहीं चला कि कब एक स्ट्रिपर नाॅट खत्म किया और कब दूसरी स्ट्रिपर नहीं आकर निर्वस्त्र होना शुरू कर दिया । तेरा ध्यान उस वक्त उधर गया जब किसी ने जोर से सीटी मार कर कहा फॅस तो स्ट्रिपर के पूरे जिसमें से पिंकी गिल का भ्रम होने लगा । तूने अपने साथ वाले स्टोन पर बैठे आदमी का खादी ग्लास देखकर कहा फॅमिली धूने वेटर को उंगली के इशारे से बुलाया फिर स्टेज की और देखने लगा स्ट्रिपर की और एक कर तुझे लगा मानो पिंकी गिल नृत्य कर रही हो । दोनों ने अपनी जेब में से एक नोट निकाला और झूमकर स्टेज पर चढ गया । दू नोट को स्ट्रिपर के सिर्फ बढते घुमाने ही लगा था कि दो हट्टे कट्टे बाउंसरों ने तो बहुत से पकडकर स्टेज पर से नीचे खींच लिया और बाढ से बाहर फेंक दिया । उन्हें डर डर देखा कि कुछ परिचितों नहीं देख रहा । आसपास किसी को भी न पाकर की ये तसल्ली हुई और तू पैंट झाडकर उठ खडा हुआ तो अपनी कार में जाकर बैठा और सोचने लगा हूँ और तो जब कुछ न सूझा तो खत्म नहीं बना बनाया सारा खेल बिगाड कर रख दिया तो बोला तूने घर जाकर सारी बात अपनी पत्नी को बता दी । उस ने कहा कौन सा खेल बिगड गया । पहले भी तो करते थे काम और अब इतनी बढिया जॉब तो मैं और कहाँ मिलेगी । इतनी सीनियरिटी बनी हुई है । तू सुनते ही भडक उठा आंखों देखी मक्की कैसे निकली जायेगी? गांव में तो लोगों ने तेरी पत्नी चुप कर गई पर तू अपना नजला उसपर झाडकर भी शांत नहीं हुआ । अभी तो उसका ये वाकया अब इतनी बढिया जॉब कहाँ मिलेगी तेरे अंदर और आग लगा गया और उन् टू गुरजंट का जहरा और पिंकी गिलकी काम के लिए इशारा गलती उंगलियाँ तो फिर दिल में से निकलना सके तो बडबडाया ऐसी नौकरी उतरने लेनी है जब बंदे की दारू चढते ही उतार जायेगा । इस प्रकार नशे में तो पिंकी, गुरजंट और चढते की बहु के अधीन काम करने की सोच के साथ गुत्थमगुत्था होता बेहसूद हो गया । सुबह जब तेरी नींद खुली तो तू खाली खाली नजरों से कमरे की छत को खोलने लगा तो जब बाहर से अपनी पत्नी की आवाज सुनाई दी वो कह रही थी, उठो आज छुट्टी है तो पूल का करो, कुछ गंदा पोखर बना पडा है और तूने अनसुनी कर देंगे । अब तक छुट्टियाँ छुट्टियाँ है तो उन्हें सोचा इस सोच के साथ मेरे अंदर जैसे कचोट से उठे । फिर तूने सोचा आज ये भी घर में ही घूम रही है । ये तो तबियत खराब होने पर भी घर में नहीं टिकती । आज कैसे तो ये धुंधला सा कुछ याद आया कि तेरी पत्नी ने कहा था मेरा काम भी धीमा होता लगता है तो मुझे पूरी तरह याद आया कि वह के उसने कब कहा था । तेरा ध्यान एकदम कैलेंडर की तरफ गया तो कुछ देर उलझी नजरों से कैलेंडर की तरफ देखता रहा । जब तक समझ में आया कि आज शनिवार है तो थोडी सी तसल्ली हुई कि आज छुट्टी का दिन है । फिर मुझे लगा जैसे मेरी पत्नी ने कहा था यदि मुझे ले ऑफ हो गई और उधर तुमने काम छोड दिया तो मॉडगेज की किस कैसे चलेगी और फिर चार महीनों में लडका यूनिवर्सिटी जाने लगेगा । ऊपर से लडकी की बारिश स्तर पर खडी है इसका विभाग भी करना है । यू काम छोड देना कहाँ की समझदारी है । अगर ज्यादा ही है तो रात की शिफ्ट ले लो । ये छुट्टी ले लो जब तक सुपरवाइजर नहीं बनते अगर तुझे अपने लंच रूम में बैठे सहकर्मियों का तो ये बारहसिंगा कहकर हसना याद आया । एक पल तूने सोचा कि अच्छा ही किया कि मैनेजर को तबियत ठीक न होने का बहाना बना कर आया था । पर अगले ही पल तेरे सामने गुरजंट और पिंकी गिल के चेहरे आ गए । मेरे अंदर की जो थी तो उन्हें सोचा साले ने बडी बनाई खेल बिगाड देखो किसी दूसरी जगह काम करता हूँ ऍम मैंने आज तुम्हारे लिए स्पेशल ब्रेकफास्ट बनाया है तो उसे अपनी बेटी की आवाज सुनाई दी । तेरह दिन उठने को नहीं करता पर फिर भी तो उठ खडा हुआ रसोई में तुझे कोई भी दिखाई नहीं दिया । फिर तरी निगाहें पिछवाडे की और गई सहारा परिवार पूल के किनारे पडे ने इसके इर्दगिर्द बैठा था जिसपर खाने पीने का सामान रखा था । ऍम अपनी बेटी की आवाज सुनकर तो पिछवाडे की सीढियां उतर गया । तेरे बेटे ने तेरे चेहरे की और देखकर पूजा ऍम पर तूने कोई उत्तर नहीं दिया तो उन्हें देखा कि वह जवाब की प्रतीक्षा में तेरे चेहरे पर से नजरें हटाकर मॉम की ओर देखने लगा था । उसने कहा बात क्या होनी है मेरे डैडी की जो सुपरवाइजर है ना? पिंकी गेल वो तेरे डैडी के गांव के हरिजनों के लडके के साथ भी आ गई है । तो बीच में ही बोल पडा चढता उम्र भर हमारा सीरीज ही रहा है तो वो अपने बेटे का इस तरह कहना सुनकर तेरे अंदर आपके बगुले उठने लगे । साला सो वॉट का । इसके लिए तो कोई बात ही नहीं तो उन्हें सोचा पर कहा कुछ नहीं तुझे वहाँ और खडे रहना असंभव लगा । पूरे अपने बेटे की तरफ घूरकर देखा और चल पडा पैर में ठोकर लगने पर तो स्कूल में जा गिरा जाए तो मैं आगे देख कर चलना चाहिए तुझे बेटे के शव सुनाई दिए कितनी देर तो अपने बेटे की मूंग की तरफ देखता रहा और उसके कहे शब्द के अर्थ को समझने में उलझा वह साहब जहां का तहां खडा रहा मानो तेरे पैर पोखर की गाद में फंस गए हूँ ।

लावा -04

लावा जॉर्ज को जब बगैर करवट बदले और अधिक लेते रहना असंभव लगा तो वो तुरंत बिस्तर में से बाहर आ गया । उसने अंगडाई ली नरक भरी रात के दाग उसने अपने शरीर पर महसूस किए । एक दृष्टि उसने गहरी नींद में सोई बडी वांडा के चेहरे पर डाली । फिर दोनों में से रूई के फाहे बाहर निकालेंगे । कमरे के साथ जुडे गुसलखाने में से वृष पर भेज लगाया और दबे पैर कमरे में से बाहर निकलकर मुख्य गुसलखाने में घुस गया । दांतों पर ब्रश करने के बाद वो जीत पर ब्रश को रगड रगडकर अंदर से पीला पीला पानी बाहर निकालने लगा । मानो रात भर का इकट्ठा हुआ जहर बाहर निकाल रहा हूँ । अपने नित्यप्रति के कामों से फुर्सत पाकर वो रसोई में चला गया । स्टोन की और देखता वो सोचने लगा कि नाश्ते में क्या बनाएगा? कलवाडा द्वारा नाश्ते के लिए की गई फरमाइश उसको याद हुआ । उसने कहा था जॉर्ज तेरे हाथ का बनाया ग्राॅस तक ये बहुत दिन हो गए । एक बार उसने सोचा हूँ बना हूँ पर अगले ही पर डिग्री मगज मारी कौन करेगा? सोच कर उसने कॉफी की मशीन में दो कप पानी डालकर फिल्टर में एक चम्मच कॉफी का डाला और मशीन का बटन दबा दिया । खिडकी पर से पर्दे हटाते ही सूरत सीक्रेट उसके चेहरे से टकराई । उसको ये बेहद अच्छा लगा और उसने आंखें मूंदें उसके मन में आया कि वांडा का जगह कर लंबी शहर पर जाया जाए । पता नहीं बेचारी की तब आग लगी होगी । ये सोचकर उसने आंखें खोली । पडोसियों के पिछवाडे ने इधर उधर बिखरी पडी बेयर की बोतलें उसे दिखाई दी । उसके मुझसे यकायक निकला । हर रहा नहीं । उसका अंदर कडवा सा हो उठा । मु के कसैले पर को दूर करने के लिए उसका मन थूकने को हुआ । पर गुसलखाने तब जाकर गला साफ करने की उसकी हिम्मत ना पडी । उसने कडवा घूंट अंदर ही निकल लिया और खिडकी से एक तरफ होकर दोबारा कॉफी के मशीन के पास जा खडा हुआ । कॉफी के मशीन गडगड की आवाज कर रही थी । जॉर्ज का अंदर खोलने लगा । जब से आए हैं हरामी जिंदगी नरक बना रखी है । जॉर्ज बडबडाने लगा देखा जाएगा । जो कुछ होगा हम उसके साथ टक्कर लेनी पडेगी । उसके मन में आया । फिर उसे पडोसी द्वारा आधा धरती में गार्ड देने की धमकी याद आई । अब जॉर्ज का होश ढीला पडने लगा । जिस दिन पडोसी ने धमकी दी थी उस दिन जॉर्ज को शीशे में देखा । अपना चेहरा निराश और समर्थ और कमजोर लगा था । उसको लगा जिससे उसकी टांगे बहुत कमजोर हो गई हूँ । वो शीशे के सामने अपना चेहरा हाथों में लेकर दबाता हुआ बोला था वांडा अभी तुम साठ के शुरू में ही है । पर ऐसा लगता है जिसे सोच साल के लाचार बुजुर्गों बनाकर सब कुछ ही हो जाएगा । कहती हुई वांडा ने उसको अपनी बाहों में कर लिया था और वह काफी देर इसी तरह है । एक दूसरे को बाहों में घेरे खडे रहे थे । अब भी जॉर्ज का मन किया कि बंदा की बात है उसके इर्द गिर्द हो । पता नहीं बिचारे कप सोई होगी । सोच कर जॉर्ज ने अपना सिर्फ झटका और कप में कॉफी डालका सोफे पर जा बैठा । तीन हफ्ते पहले सब कुछ सामान्य सा था । वांडा की नींद सवेरे पहले ही खुल गई थी । उसने उठकर बैकन और अंडे का नाश्ता तैयार किया और जॉर्ज को लगा दिया । फिर वो लम्बी सर पर चले गए थे । वापस आकर जॉर्ज खुरपी लेकर पिछवाडे बने बगीचे में गुडाई करने लगा और वांडा मकान के अगले हिस्से में लगे फूलों को पानी देने लगी । दोपहर का खाना खाकर उन्होंने किताबें पढने के लिए धूप ने भरे भरे घास पर आराम कुर्सियाँ डाल नहीं वांडा तारे सी का घास खराब ना हो जाए । कई दिनों से किसी ने पानी नहीं दिया । बहुत मेहनत की है हमने । इस पर जॉर्ज ने पडोस के पिछवाडे की और दृष्टि डालते हुए कहा घास को पानी कौन देगा तो ऐसी का बेटा तो वापस अपने शहर लौट गया है । सुना था की ये मकान किराये पर चढ गया है पर अभी तक कोई आया तो है नहीं । वाडा ने कहा मैं ही ना पानी देखो पहले भी तो हमें देखभाल करते थे । जॉर्ज बोला तब बात और थी ऐसी घर पर होती थी । अब तो बिचारी मरने के करीब अस्पताल में पडी है किरायेदार क्या मालूम किसमें जांच के हूँ हमें दूसरों के बारे में नहीं जाना चाहिए । वांडा ने अपना विचार प्रकट किया तेरी बात तो ठीक है पता नहीं कैसे होंगे । जॉर्ज ने कहा फिर रुककर बोला अपने जैसे ही होंगे उम्मीद तो करते हैं । वांडा ने कहा अच्छे हो तो बढिया है । बहुत मुश्किल से बचाया है ये पडोस कहते हुए जॉर्ज पिछली तरफ खडे अंडर के दरख्तों की और देखा और सोचने लगा इन्हें तो कब का खत्म कर देते हैं । अगर हम और तरह सीना रोकते बिल्डर हरामी की निभा भी पता नहीं क्यों इस जगह पर टिकी हुई है और क्या कम जगह है वहाँ पे नहीं उजाडने पर क्यों खुला है हमें कीमत से अधिक धन क्या करना है? जब हमने देश नहीं नहीं पर यदि तरहसी का पुत्र लालच में आ गया तो अगर उसने बिल्डर का घर भेज दिया तो क्या होगा? और बिल्डर ने हमारे घर को छोडकर पीछे वाली जगह और तारे सी के मकान को मिलाकर अपार्टमेंट खडी कर दी तो इस सोचने उसको भयभीत कर दिया । उसने दूसरे पडोसी के मकान की और नगा डाली जिधर मुख्य सडक पर बनी दुकान की पीठ के साथ लगी गाली थी और उसके बाद उनका मकान था । फिर उसने दूसरी तरफ देखा जिधर तारे सी के मकान से आगे व्यापारिक इमारतें शुरू हो जाती थी जो आपने सोचा यही तो पडोस में एक मकान है ये भी ये भी फिर उसने सोचा फॅमिली के पुत्र ने मकान बेचना होता तो किराए पर क्यों देता हूँ । इस सोचने उसको दाढी बनाया और उसमें किताब की और अपनी दिखा कर लेंगे । उस रात ही जब गहरी नींद सोए हुए थे । एक बजे के करीब पडोस में रुके मोटर साइकिल की फट फट सहित उनकी नींद टूट गई थी और फिर कई कार्य आई थी । मोटरसाइकिल आई थी । जॉर्ज पडते हटाकर देखा की तरह किसी के घर में चहल पहल थी । शोर करता संगीत बज रहा था इतनी रात गए इतना शोर शराबा करना ये भी कोई तरीका है । जॉर्ज ने कहा नए मकान में आने की खुशी मना रहे हैं । कोई बात नहीं तुम लेता हूँ । वांडा बोली प्रीस्ट पार्टी पडोस का भी ख्याल रखना चाहिए हरामी मैं करता हूँ । फोन पुलिस को चौबीस गुस्से में बोला शाम चॉर्ज कल हम मिलेंगे । इनसे पडोसी से बनाकर रखनी चाहिए । वांडा उसको पकडकर बिस्तर में लेट आने लगी । तडके चार पांच बजे तक इसी प्रकार शोर शराबा होता रहा । जॉर्ज मिस्टर में करवटें बदलता रहा । वांडा उसको सहलाती रही फिर कार्य मोटरसाइकिल लौटने लगी । अगले दोपहर जब उन्होंने पडोस वाले मकान में एक आदमी को चलते फिरते देखा तो उन्होंने अपने नए पडोसी से जाकर मिलने का विचार बनाया । उन्होंने जब उसके दरवाजे की दस्तक दी एक साढे छह छोटा मोटा तगडा आदमी जिसने थोडी पर लंबी डाडी रखी हुई थी । मैं दरवाजा खोला और रूखी आवाज में पूछा । जॉर्ज की निगाहें उसकी सुडौल मोटी बाजुओं पर गोदे हुए सांपों पर अटक गई । उसके अंदर एक कप कप पीछे दौड गई । उसने अपना हाथ आगे बढाते हुए मारी से आवाज ने कहा जॉर हम आपके पडोस वाले मकान में रहते हैं । मैं सोचा अपने पडोसियों से मिले अच्छा मैं ईद मोटी मोटी सुडोल । बाजू वाले आदमी ने हाथ मिलाते हुए कहा वांडा बिस्कुट पर डब्बा पकडकर हाथ मिलाते हुए बोली मैं वांडा हमारे पडोस लाने का आपका स्वागत है । रात में क्या नहीं । जगह आने की खुशी में पार्टी चल रही थी । जॉर्ज मुस्कुराकर पूछा इस प्रकार मुस्कराने के लिए उसके होटों को काफी मेहनत करनी पडी था । हर शुक्रवार शनिवार की रात में ऐसी पार्टियां हुआ करेंगे । आप दिया जायेगा हूँ आपकी शराब मेरी तरफ से ईबोला धन्यवाद परम पार्टियों के आदि नहीं । जॉर्ज ने कहा आपके लिए बेहतर होगा की आप इन पार्टियों की आदत डाल लो । अगर पार्टियां पसंद नहीं करते हैं तो इन रातों में कहीं बाहर चले जाया करो । ईद ने डाॅॅ अंदर की और फैंककर कमर पर हाथ रखते हुए कहा होता है तो मजाक करते हो । वाडा ने मुस्कुराते हुए कहा नहीं बोला पार्टी दिन में नहीं हो सकती । जॉर्ज ने जैसी याचना सीखी हो नहीं जब बंद होने का समय होता है हमारी पार्टी तब शुरू होती है । ईद ने कहा तो तुम यही घर में ही अवैध शराब का धंधा खोल रहे हो । जॉर्ज ने कहा हाँ तुम्हारा अंदाजा ठीक है । मैंने बहुत कोशिश के बाद ये उपयोग जगह खोजी है । ईद ने कहा तो हमारे पडोस में ऐसा नहीं कर सकते हैं । जो बोला यही नहीं और भी बहुत कुछ कर सकता हूँ । अच्छा होगा कि तुम लोग मेरी राह में ना हूँ । ईबोला हम नए पडोसी होने के नाते तुम्हरे साथ मेलजोल बनाने आए थे और तुम धमकियाँ दे रहे हो । वाडा बोल उठी बूढे उसको धमकी नहीं समझे । मेरी सलाह है और हाँ अगर कहीं शिकायत की तो आधा धरती में गार्ड दूंगा । ईद ने कमर पर रख के हाथ से अपना कुर्ता ऊपर की और उठाया वहाँ खोसा हुआ ऍम का वाडा ने जॉर्ज का हाथ कसकर पकडा और खींच कर उसको अपने साथ ले चली । जॉर्ज की आंखों में क्रोध और बेबसी के मिले जुले साढे नमी के रूप में उतरने लगे । पीठ पीछे से ईद की आवाज उसके कानों में पडी । एक बार अगर मेरे किसी मेहमान के साथ बदतमीजी की तो और भी बुरा होगा । जॉर्ज के पैर थोडा रुके और वांडा के खींचे जाने पर बिना पीछे की और देखिए चुप चाप चलता रहा । एक दूसरे का हाथ पकडे वो अपने घर के अंदर घुस गए । जॉर्ज को अपनी बाहों में सिर्फ से निकलता महसूस हुआ । उसकी मुख्या भेज गई । उसको लगा जैसे उसकी उंगलियां बेजान हो । फिर उसे अपनी टांगे भी काफी महसूस हुई । वो सोफे पर बैठ गया । वांडा भी चुप चाप उसके साथ लग कर बैठ गई । जॉर्ज के दिल में आया कि वह एकदम से उधर पूरी रफ्तार से दौड कर अपना सिर ईद के पेट में देख पा रहे हैं । उसका गलत कडवा कडवा हो गया । उसका जोर से चिल्लाने को मन हुआ पर उसमें कुछ भी नहीं किया । उसकी आंखों में से अंगारे निकलने लगे । वाडा ने भरी आंखों से जॉर्ज की तरफ देखा और उसको पीस बाहों में भर लिया । मैं किसी काम का नहीं वांडा कहते हुए जॉर्ज के होटल अड्डें संभाल तो तो दुनिया का सबसे प्यारा और अच्छा इंसान है । कहकर वांडा ने उसको और अधिक कसकर अपने से लगा लिया । इस बात का अच्छा इतना अपमान करवा कर चुपचाप लौट आया । जॉर्ज बोला, बदमाशों के साथ टक्कर लेना हमारा काम नहीं, पुलिस का है । वांडा ने अपनी पकड ढीली करते हुए कहा तो चल पुलिस में रिपोर्ट करते हैं कहते हुए जॉर्ज वांडा की वही एक तरफ कि नहीं तुम शांत हो जाओ, पहले फिर देखेंगे कि क्या करना है । कहकर वाडा ने जॉर्ज को फिर कसकर पकड लिया और उसको शाम करने लगे हैं । जजबात के इस ज्वारभाटे के शांत होने पर जब जॉर्ज गुसलखाने में प्रमोद होने गया तो उसको लगा मानव शीशे में खडा आदमी कोई और हो जोर से वहाँ और अधिक खडा नहीं रह गया और वह फ्री शहनी आंखों वाले चेहरे को हाथों में दवाई वांडा के पास आ गया । सोफे पर कॉफी कर कपडे बैठे जॉर्ज नहीं उस धमकी के बारे में सोचकर एक लंबी आभारी ऍम रिपोर्ट कर देते तो अच्छा रहता । उसने सोचा ऐसे बदमाशों के साथ टक्कर लेना अपना का नहीं । उसको वांडा का कहा ये वाक्य याद आया चल देखते हैं क्या होता है सोच कर उसमें कॉफी के कप में से घूंट भरा अपना ध्यान दूसरी तरफ करने के उद्देश्य से उसने टेलीविजन के रिमोट कंट्रोल की और हाथ बडा नहीं । टेलीविजन की आवाज से वांडा की नींद खुल जाए, ये सोचकर उसने अपना हाथ पीछे खींच लिया और उठकर कंप्यूटर के सामने जाता था । इंटरनेट पर राजनीतिक लेखों वाली वेबसाइट् खोलकर जॉर्ज सुर्खियों पर नजर दौडाने लगा । वेब पेश को ऊपर नीचे करते हुए उसकी निगाह कल पडे लेख की सुर्खी पर अटक गई । सुर्खी थी माॅक कंप्यूटर के आगे बैठ जॉर्ज को लगा जैसी आवाज नहीं करीब से आई हो अमीने जिंदगी नरक बना रखी है । जो आपने सोचा वैसा ही कसैलापन उसके अंदर भरने लगा जिसके साथ वह पिछली रात छटपटाता रहा था । पिछली रात का विचार आते ही जॉर्ज अपने सिर को झटका पिछली रात को याद करके अपना दिन खराब नहीं करूंगा ये सोचकर जॉॅब पेज को नीचे क्या अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के दानवी कब के कार्टून पर खुदबखुद माउस अटक गया । ये कार्टून उसने कई बार देखा था । पहलवानों वाले तरीके से अपने दायें बाजू की मछलियों का प्रदर्शन करते हुए बुश नहीं माथे पर त्यौरियां लाकर आखिर सिकोड रखी थी । मानव कह रहा हूँ किसी में हिम्मत टकराने की । बोश के पैरों में इराक के भूतपूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन का बढी हुई दाढी वाला दयनीय कार्टून बनाया गया था । जॉर्जेट बाल के लिए ही इस कार्टून पर अटका था । फिर उसने किसी नए लेख की तलाश में सारी वेब साइट पर अपनी नजरें दौडाई और कोई भी नया लिखवा नहीं था तो उन्हें वेब साइट के पहले पेश पर आ गया । कल उसने लेख पढ लिया था । पढने के बाद जॉर्ज बुदबुदाया था धीरे गुंडागर्दी उसका दिमाग में आया था कि कहाँ है वो तबाही वाले हथियार जिनके बहाने बुश ने रात में फौजी गुसाई थी । फिर जॉब ने सोचा कि हथियार तो एक बहाना था । असल बात तो दुनिया पर वर्चस्व कायम करने के लिए मिडिल ईस्ट में अमेरिकी फौज द्वारा नियंत्रन करना था । इस सोच के साथ जॉर्ज के अंदर गुस्से का मोबाइल उठा था । लेकिन आज कार्टून देखते हुए उसने सोचा होगी अंधेरगर्दी यह सोचकर उसने गहरा निःश्वास भरा । फिर उसको लेख के अंतिम पहले का खयाल आया जिसमें लेखक ने आशा प्रकट की थी कि दुनिया के अन्य देशों के साथ साथ अमेरिका के लोगों द्वारा भी बुश के विरुद्ध उठ रही आवाजों के कारण ये गुंडागर्दी अधिक देर तक नहीं चलने वाली । तभी ईड उसकी स्मृति में उभरकर आया । उसने सोचा यदि इतना ही धरती में गार्ड देने वाला पहलवान है तो बूझ कैन वहाँ खोलता जहाँ चारों तरफ माकन होते हैं । यहाँ वो जानता है कि चारों तरफ व्यापारिक इमारतें रात में खाली होती हैं और हमारा क्या है? हम तो जैसे चाहे धमका कर चुप करवा लेगा और उसके अंदर खींच पैदा हुई । उसका कुछ और पढने का मन नहीं किया और उसने अपनी कुर्सी को कंप्यूटर से दूर धकेल दिया और अपनी टांगें कंप्यूटर मेज पर टिकाकर आंखें मूंदें उसका मन हुआ किसके दिमाग में कुछ ना पर आंखें मूंद ही जॉर्ज को ईद के सुडौल मजबूत बाजू देखने लगे । उसने चच्चा के खोल नहीं उसकी निगाह कंप्यूटर स्क्रीन पर पडी । वहीं कार्टून सामने था जॉर्ज को लगा जिसे बुश के बाजू पर बहुत सारे साहब कुंडली हमारे बैठी हूँ । फिर उसको लगा मानो वहाँ फनियर साहब भी हो । जिस दिन वो पडोस में आए ईद से मिलने गए थे । उस रात जॉर्ज को ये साफ मूवी बडे देखे थे और पिछली रात ही जब जब वो सोने के लिए आंखे बंद करता था उसको सांपों का मुंह खुला हुआ दिखाई देता था । पिछली रात तो मानो उसने अंगारों पर काटी थी । वाडा ने करीब आठ बजे कहा था जहाँ सो जा मैं भी किताब पढोगे अगर तेरी नींद पूरी न हो तो तो परेशान होता है और फिर जब पार्टी शुरू हो गई तो उस से सोया नहीं जाएगा । फिर जॉर्ज के बिस्तर में घुसते ही बोली थी पता नहीं कब तक यही जीना पडेगा । फिर ॅ ऐसे हाथ से अधिक देर नहीं चला करते । जॉर्ज ने कहा, बंद तो पुलिस भी करवाएगी । अगर पुलिस को कोई बताएगा तभी तो पुलिस को पता चलेगा । वांडा बोली पुलिस को पता लग जाया करता है । जॉर्ज ने कहा, अगर पुलिस ने बंद करवा दिया और ईद को शक हो गया कि हमने शिकायत की थी तो क्या होगा । हम किसी मुसीबत में ना फंस जाएँ । वाडा की आवाज काफी चिंता मत कर कुछ नहीं होगा । अब जॉर्ज में कह तो दिया पर जब उसने सोने के लिए आंखें मोदी तो ईद कि सांपों वाले बाजू दिखाई देने लगे । सापों के खुले वो देख वो आंखें खोल देता और करवट बदलकर फिर सोने की कोशिश करता हूँ । इस प्रकार करवटे बदलते बदलते बारह बज गए होंगे । जब कार और फिर मोटरसाइकिल के रूप में की आवाज आई थी । लोग हो गए पार्टी शुरू चौदह हो रहा । वांडा ने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा सोजा सूझा पर जोर से सोया नहीं गया था । फिर और कार्य आकर रुकी थी । संगीत की आवाज पहली रात की तरह ऊंची नहीं आ रही थी । कुछ दबी दबी हुई थी । जॉर्ज ने देखा की पीढी पूरा जुगाड कर लिया था । पहली रात के बाद शीशों के ऊपर गत्ते लग गए थे । सडक की ओर से गुजरते हुए किसी को पता नहीं चलता था कि अंदर अवैध शराब बिक रही है और पार्टी में शामिल लोग नशे में झूम रहे हैं । पर जॉर्ज को पार्टी में शामिल लोगों की पडोस के पिछवाडे में निकलकर बातें करने की आवाज तंग कर रही थी । आवाजों से अधिक ये सोच के पिछवाडे में बीयर पीते लोग खाली बोतल उसके बगीचे में फेंक रहे होंगे । पिछले सप्ताह पार्टी से अगले दिन पाँच छह खाली बोतलें अपने बगीचे में बडी देखकर जो उसके अंदर आग मैं छोटी थी । खाली बोतलों को वो पडोस के पिछवाडे की और फेंकने के लिए मुडा ही था कि उधर जगह जगह बिखरे फैले गंदे नेपकिन बीयर की खाली बोतलें और केनिया देखकर उसके अंतर्रात्मा करहा उठी थी । उन्होंने कैसे नरक बना छोडा है वो बडबडाया जगह जगह फैले गंद को देखकर जॉर्ज की आप नहीं लग रही थी संगीत की दबी आवाज एक दम ऊँची हुई । दरवाजे के ठान से बंद होने की आवाज आई और संगीत की आवाज फिर कब गई? फिर ऊंची ऊंची गालियाँ देती मरदाना आवाज आ रही है । लगता है झगडा हो गया । वांडा ने कहा जॉर्ज बिस्तर में से निकलकर घर के अगले हिस्से में बडी बैठक की और चला गया वांडा जिसके पीछे चल पडी जॉर्ज खिडकी के पर्दों को थोडा सा सरकार कर बाहर की ओर देखने लगा । एक उल्टी टोपी वाला आदमी गालियां बकता पीछे की ओर बढने की कोशिश कर रहा था और ईद उसको शांत हो शान कहता हुआ सडक की ओर धकेल रहा था । फिर एक एक संगीत की आवाज पूछी हुई जॉर्ज ने पार्टी वाले मकान की और देखा । उनकी तरफ गलत दरवाजा खोलकर कोई बाहर निकला और जोर से चिपका हुआ बोला आज आप अगर पैंतरा देखना है एक अन्य व्यक्ति ने चीखने वाले को अंदर खींचकर दरवाजा बंद कर लिया और संगीत की आवाज फिर से दब गई । जॉर्ज ने अपना ध्यान सडक की और मोड दिया । टोपी वाले आदमी ने ईद से छूटकर बियर की बॉटल बंद दरवाजे की और जोर से बीमारी बोतल चौंच के मकान के कोने से टकराकर चकना चूर हो गई । ई टोपी वाले को खींच कर एक पिकअप ट्रक के पास ले गया और ट्रक का दरवाजा खोलकर उसको भीतर धकेल दिया । फिर एक मुक्का मारकर गर्जा हो जायेगा से और अगर फिर इधर उधर देखा तो धरती मगर दुआ ट्रक स्टार्ट हुआ और एकदम से अपनी जगह से तेजी के साथ आगे बडा टायरों की चीखने की आवाज आई । टोपी वाले नहीं जोरदार गाली देते हुए कहा देख लूंगा तो ये भी किसी दिन और ये जा वो हो गया । गाली सुनकर जॉर्ज ने अपने अंदर ठंड पडती महसूस की । उसको लगा जैसे उसका अंदर कुछ हल्का हो गया हूँ । ईद ने हाथ झाडे और वापस बडा वांडा ने जॉर्ज का गांव खींचा और जॉर्ज छत से पढ के पीछे हो गया । वांडा चौदह से निपट गई जो उसके केशों में हाथ फिरने लगा । अगर बोतल कोने की जगह अपने शीशे में बजाती वांडा बोली तो बनाकर कुछ नहीं होगा क्या कर जॉर्ज ने अपनी बातें उसके इर्द गिर्द करते । मेरे ख्याल में हमें पुलिस को बुला ही लेना चाहिए । वांडा बोली, यहाँ जरूरत ऐसे लोगों के साथ बनना लेने की हो सकता है कि जो आदमी लडकर गया है वहीं पुलिस को बता दें । जॉर्ज ने कहा आकाश ऐसा ही हो । वांडा ने कहा बाहर सन्नाटा छा चुका था । पिछवाडे में खडे होकर जो बातें कर रहे थे वो भी शायद अंदर चले गए थे । अब तो संगीत के अलावा कोई भी आवाज नहीं आ रही थी । जॉर्ज और वांडा अपने बिस्तर में जा पडे । जॉर्ज की उंगली वांडा के बालों को सहला रही थी । कभी कभी वो वांडा को थपथपाने लगता । टोपी वाले आदमी के झगडकर जाने के बारे में सोचकर उसको अपने अंदर एक तसल्ली महसूस हुई । अब जल्दी ही ये बूझ कहना बंद हो जाएगा । टोपी वाला बदला लेने के लिए पुलिस को इस बारे में बताएगा । इस सोच के साथ जॉर्ज को मिली राहत का समय । कुछ पल का ही था उसका दिल में आया कि यदि टोपी वाले ने भी डर कर पुलिस को ना बताया । वांडा के सिर के नीचे भी अपनी वहाँ उसको बेजान सी लगी । वहाँ तो सिर के नीचे से निकालने के लिए जॉर्ज वांडा का सिर्फ ऊपर उठाने की खाते हैं । अभी अपना दूसरा हाथ उसके सिर से छुआया ही था । वांडा ने अपना सिर ऊपर उठा लिया और बोली थक गई वहाँ नहीं बस यूहीं तो कोई नहीं । अभी जॉर्ज ने कहा नींद कहाँ आएगी? जॉर्ड तो सोचा यूपी ना सोच तेरह ब्लड प्रेशर बढ जाएगा । वांडा ने कहा और वो अपनी उंगलियां जॉर्ज के बालों में फिर आने लगी । कुछ पल ही पीते थे कि जॉर्ज के गानों में हांफने की आवाज पडी लगता है अपने बगीचे में है कोई कहता हूँ जॉब बिस्तर में सोच चलकर बाहर निकला यहाँ करता है । जॉर्ज कहते हुई वाडा भी बिस्तर में से निकलकर फिर की के पास खडे जॉर्ज के बराबर जा खडी हुई । पर्दे की फांक बनाकर जॉर्ज ने बाहर देखा । चौंच की मुठ्ठियां भेज गई और वह प्रदेश एक तरफ हो गया । उतनी सिफांग बनाकर वांडा ने देखा और छत से पडता बंद कर लिया । हमारे वजूद को कुछ समझते ही नहीं । जॉर्ज नेताओं पीछे फिर बोला, पहले बीयर की खाली बोतलें उठाते थे । अब समय हुए लाॅबी पैरों के नीचे आया करेंगे । चौंच को अपने शरीर में से सीख निकलता महसूस किया जिससे वाडा ने जॉर्ज के चेहरे से भाग लिया और उसका हाथ पकडकर बोली हाँ मेन रातों में कहीं बाहर चले जाया करेंगे । अभी तो बगीचे में ही पहुंचे हैं । फिर तो यह अपने घर के अंदर भी घुस जाएंगे । चौंच बोला अगर अब भी आ जाए तो क्या कर लेंगे? हम अभी मकान भेजेंगे । वांडा बोली क्या बात करती है और इस तरह कैसे जाएंगे? मैं बाहर निकालता हूँ उनको कहता हुआ जॉर्ज बाहर जाने के लिए आगे बडा रहते वहाँ खेल गया है । जॉर्ज वांडा बोली हाँ दिमागी हिल गया है । जितना सबको चुप होकर सही जाता हूँ । अच्छा चाहिए फिर मार । बाहर जाकर वांडा की ऊंची आवाज सुनकर जॉर्ज वहीं का वहीं खडा रह गया या नहीं । उस दिन ईद ने कहा था अगर उसके मेहमानों के साथ झगडा किया तो कहती हुई वांडा ने उसकी वहाँ पकडी और बोली शांत हो जाता ऍफ बढ रहा है । वो लिखा कर लेना चाहिए हमें ऐसे बदमाश लोगों के साथ पंगा लेकर क्या कर रहा है? जॉर्ज को बिस्तर में घुसाकर वांडा ने अपने और जॉर्ज के कानों में रुई ठूंसी और जॉर्ज को दवा की गोलियां देकर अपने साथ दस लिया । आंखे मूंदे ही जॉर्ज को ईद का सातों वाला मजबूत बाजू दिखाई दिया । पर दवाई ने शीघ्र ही असर करना शुरू कर दिया था । जॉर्ज घबराकर हो गया था । कंप्यूटर के सामने बैठे जॉर्ज नहीं अपनी टांगे मेज पर से उठा ली और कुर्सी की पीठ को आगे पीछे करने लग पडा । उस की दृष्टि कंप्यूटर की आ गई । कुछ पल कार्टून को निहारता रहा फिर आके मूंदे कल जॉर्ज लेख पडने के बाद उसको मत बता रहा था । खासतौर पर अंतिम पैरा जिसमें लेखक ने उम्मीद प्रकट की थी कि बुश कि गुंडागर्दी अधिक देर तक नहीं चलने वाली । उसके प्रति में पिछले दिनों खबरों में पडी बेकर हैमिल्टन ग्रुप के इराक को लेकर रिपोर्ट कौन थी जिसमें उन्होंने बुश के इराक में फौजी भेजने को गलत कहा था । साथ ही उसको लाटो और यूरोपियन देशों द्वारा बुश के इस फैसले के विरोध के बारे में ख्याल आया है । जॉर्ज ने अमेरिकी लोगों द्वारा सैनिक चुनावों में उसके विरोध में दिए फतवों के बारे में सोचा और बुश द्वारा अपनी इच्छा के विपरीत अपना दायां हाथ समझे जाते अमेरिकन डिफेंस सेक्रेटरी रम्सफील्ड के इस्तीफे को स्वीकार करने के बारे में सोचकर जॉर्ज को लगता मानो बुश चारों ओर से घिर गया हो । ये सब सोचकर उसके अंदर पिछले बाजू वाला बुश प्रयोग रहा था । जॉर्ज को बुशका जहरा इस प्रकार का लगा था मानो झाडियों में बिल्ला फसा हुआ हूँ । सोच के साथ जॉर्ज के अंदर एक सुकून भरने लगा था । लेकिन वो तो कल था । आज उसकी स्मृतियों में ईड हावी था और जॉर्ज को लगता था कि ईद की मजबूत बाजू वाले सांपों ने अपने मुंह खोल रखे थे । ऐसे आदमी के साथ कैसे टक्कर लोग ये खयाल बार बार उसको चिंताग्रस्त कर देता हूँ । फिर अचानक ही जॉर्ज के अंदर किरण सीजन की उस की स्मृति में टोपी वाला आदमी उभरा और साथ ही उसके द्वारा ईद को दी धमकी एक लूंगा तो ये भी कभी याद आ गई होगी गुस्से नहीं रह गया होगा । जॉर्ज ने सोचा पर अगले ही पल जॉर्ज सोचा चलो ना भी करे वो कुछ और कहते हो गया है ना । ये घुसकर जॉर्ज को लगा जिससे उसको कोई बहुत बडा हथियार मिल गया हूँ । उसने सोचा कि यदि यहाँ बुश जैसे नहीं टिक सके तो ईद दो मूल्य किस बात की है । उसके चेहरे पर रमा आ गई तो कुछ देर इस प्रकार बैठा सोचता रहा । फिर उस नोट करवाडा को जगाया और नाश्ता बनाकर उसको अपनी योजना बताई । उससे अगले सप्ताह शनिवार की रात के करीब दो बजे जॉर्ज और वांडा अपनी बैठक के पदों की हाँ बनाकर देख रहे थे कि ईद के सापों वाले दोनों बाजु नीचे लटके हुए थे । उस की बातें पीठ पीछे हथकडी में जकडी हुई थी । जॉर्ज को लगा जिसे ईद के बाजुओं पर से साफ धरती पर गिर पडे हूँ और ईद के पीछे जा रहे पुलिस वाले के पैरों के नीचे उनके सिर कुछ ले जा रहे हूँ ।

फेसबुक -05

फेसबुक बलराम कैलिफोरनिया का चक्कर लगाकर सप्ताह भर बाद लौटा था । दरवाजे का खडता सुनकर रूप कंप्यूटर के सामने से उठी । आगे बढकर उसने बलराम के हाथों से आइस बॉक्स पकडने के लिए हाथ बढाएगा । ऍम बोला कि मैं रख देता हूँ तो कार में से कपडो लाभदायक और बाकी डिब्बे उठाला । मुझे हिम्मत नहीं दोबारा कार्तक जाने की ग्रुप दरवाजे में से बाहर निकलकर कार की और चली गई । बलराम ने अपनी बडे हुए पेट के सहारे उठाये आइस बॉक्स को रसोई के आइलैंड पर रखा और करीब ही कंप्यूटर डेस के सभी पडी कुर्सी पर बैठ गया । वो कुछ पल यु ही दम लेने के लिए बैठा रहा । उसकी निगाहें कम्प्यूटर के मॉनिटर पर पडी तो बंद था पर कंप्यूटर चल रहा था । कंप्यूटर के सामने बैठे दिनभर पता नहीं क्या करती रहती है । उसमें फिल्में आया । उसने मॉनिटर का बटन दबाकर किया । उसी पर कार में से छोटा मोटा सामान उठाकर रूप अंदर आ गई । बलराम को मानते चलाते देखो हडबडाकर बलराम की और बडी को लगा कि कहीं जल्दबाजी में वो फेसबुक बंद करना तो नहीं भूल गई थी । मॉनिटर पर डाॅन देखकर उसकी सांस में सांस आई । उसने बलराम के कंधे पर हाथ रखकर पूछा ऍम होगी या नहीं । अगर रोटी हो गई रोटी होंगा ये मुझे राय की बोतल में से आधा स्टील का गिलास भरकर पकडा को डालना मैं खुद डालूंगा । उसके बाद मैं होंगा मेरे पर अखबार नहीं कहकर रूप से एक बार क्या करूँ? कहकर बलराम ने रूपये की तरफ देखा । वो अंदर तक पानी पानी हो गई । बलराम के अगले शब्द सुनकर वो समरी उसने कहा तो को ज्यादा डालकर क्लास भर देती है । स्टील का गिलास जल्दी से खत्म कर बलराम ने कंप्यूटर की और देखा । उसका दिल में आया कि फेसबुक खोलकर देखे की नमी नहीं क्या लिखा था । अगले ही पल उसने अपना इरादा त्याग दिया । रूप के काम पर चले जाने के बाद सवेरे उठ कर आराम से पडेंगे । सोच कर वो उठ खडा हुआ । उसके आगे आगे जाकर रूप में, गुसलखाने में बलराम के धुले हुए कपडे और तो लिया टाइम दिया और बोली तब मैं घुसने से पहले कपडे उतारकर मुझे पकडा । दो । मुझे मशीन में डालने हैं । बलराम के उतारे कपडे और हफ्ते भर के बैग वाले कपडे मशीन के हवाले कर के रूप दाल सब्जियों वाले डिब्बों के गिर्द हो गयी । आइस बॉक्स में से छोटे डब्बे निकालकर उसने सिंक में रखे और आइस बॉक्स का ढक्कन खोल कर उसको संडे पर रख दिया । कुछ देर दरवाजा खुला ही रहने दिया । एक खिडकी भी खोल दी । फिर एयर फ्रेशनर छिडककर खाना गर्म करने लगी । बलराम ने नहाकर करीब आधा गिलास फिर शराब से भर लिया और रोटी खाने के लिए मेज पर आ गया । रूप में भाग छोडना, बटर चिकन, सलाह और रायता अभी सब बलराम के सामने ला रखें । फिर तवे पर से गर्म गर्म नान उठाकर बलराम की प्लेट में रखती ही बोली शेयर भी कर लेते हैं । देखो कितनी बडी हुई है । जिस कहती रूप में रहस्यमय भरे ढंग से बलराम की और देखा । लेकिन बलराम का ध्यान उधर नहीं गया । उसने नाम की गर्माहट को पढते हुए कहा, धक्का बडा हूँ, मन नहीं किया । रोटियों से गुजारा हो गया था । दाल तो खराब नहीं । इस बार रूप में चूल्हे के पास खडी होकर पूछा नहीं ठीक रहेगी । डाल मैंने पहले दिनों में ही निपटा दी थी । फिर डूडल्स खत्म किए । करेले आखिरी दिन निपटाए । पिछली बार मुझे लगता है ना फ्रिज में रखना भूल गया था । इसीलिए खराब हुई होगी । ये भी भला को जीना है । सारा हफ्ता बासी रोटियां खाए जाओ । रूप के बाद बलराम ने जानबूझकर बीच में ही काटते हुए कहा लडकों का आया फोन ठीक चल रही है । पढाई बडा कहता है की डेट लोकल ट्रक चलाया करें । मैं खुद भी कोई पार्ट टाइम जॉब ढूंढ लेता हूँ । नाना उसको कहना कि पढाई की तरफ ध्यान देंगे । चल मैं खुद ही कर लूंगा । बाद अगर जॉब करना चाहता है तो कर लेने दो । खाली घर काटने को दौडता है तो आपने फिर सेना चला देना । मुझे आराम से रोटी खा लेने देंगे । अच्छा कहकर रूप चुप हो गई । उसकी ये अच्छा मार फिर जैसी थी । पर बलराम का इसकी और ध्यान नहीं गया । उस को पता था कि यदि उसने रूप को चुप ना करवाया तो वो कहेगी । यदि लोकल ट्रक चलाने से कमाई पूरी नहीं हुई तो किराये वाले घरों में से एक को बेच देंगे । बलराम ऐसे वार्तालाप में नहीं पडना चाहता था । उसको लोकल ट्रैन चलाना सुनार की थाप तक जैसा लगता है । लोहारकी की चोट वाली आदत उसकी पक चुकी थी । जब बच्चे छोटे थे तब भी रूप उसको लंबे रूट पर ट्रक चलाने को रोकती थी । उन दिनों बलराम कहता था मेरे मित्र के कलेश से तो बच्चा रहता हूँ । जब भी कुछ कहती हूँ तो मैं मेरा कलेश ही लगता है अपनी माँ को नहीं कहते । कुछ जब सारा सारा दिन को फोन पर लोगों से चुगलियां करती हैं । अब तो माँ भी नहीं रही थी और घर में कोई कलेश भी नहीं था । पर बलराम ट्रक लेकर गया । हफ्ता हफ्ता लौटना ही ना । एक दिन घर में रहकर फिर अगले चक्कर पर चल पडता है । वापस लौटने पर हूँ । अपनी रील चलाने लगती तो वह से चुप करा देता । रूप अब भी चुप्पी साधे बलराम की और देख रही थी । वो अपना सलाह लाकर बलराम के सामने बैठी थी । बलराम को नाम की आखिरी बुर्की के साथ बटर चिकन वाली कटोरी साफ कर देख रूप बोले चिकन और लूँ ना, पहले ही स्वास्थ्य बाद में ज्यादा खाया गया । खुश होती रूप बोले तुम सोफे पर बैठे जाकर मैं दो मिनट में बर्तन संभाल करती हूँ । फिर कोई मूवी देखते हैं । ऍम बैठकर कमर दुखी हो जाती है । मैं तो लेट होगा तो आ जाना चल रही है । कहकर बलराम उठ खडा हुआ और अपने कमरे में जाकर लेट गया । रूप ने बडता इकट्ठे करके सिंह में रखती है । उसने सोचा बाद में साफ कर लेगी और कमरे में चली गई । जल्दी जल्दी दांतों पर ब्रश किया और बिस्तर में घुस गयी । रूप में अपना सिर बलराम की छाती से लगा लिया । उसका मन किया कि बलराम उसके बालों में अपनी उंगलियां, फेरे और कुछ प्यारी सी बात करेंगे । बलराम ने बिना कुछ बोले रूप को कस्टर अपने साथ लगा लिया । फिर उठा डॉॅ और दोबारा बिस्तर में लेट गया । रूप में बलराम के साथ लग कर अपनी तंग उसके गेट लपेट लें । धूप की भारी सबसे जब बलराम के कानों में सानी साइन करने लगी तो रूप की टांग को एक तरफ करते हुए बोला तो हम घुटता है, इधर हो कर पाएंगे । रूप कुछ देर और पडी रही । उसको नहीं नहीं आ रही थी उसके अंदर फिर वही खालीपन पसर रहे लगा । बलराम के खराटे शुरू हो गए । रूप में दोबारा नाइटी पहनी और फॅमिली रूम में जा बैठे । टीवी चला दिया और उसका ध्यान टीवी पर चल रहे नाटक पर नहीं गया । उसके निगाहें कॉफीटेबल पट्टिकायें अपने पैरों पर पडे तो कुछ देर आपने आज ही हमारे नाखूनों की तरफ देखती रही । उसको लगा जैसे बोस्को मुझे ला रहे हो । उसमें पैरों को नाइंटी में छुपा लिया । एक वहाँ उसके मुंह से निकली । उसके मन में आया कि वह घर से भाग जायेगा, छोड दे बलराम को उसकी आंखों से अविरल आंसू बहने लगे । ये खयाल उसको कुछ हफ्तों से आ रहा था । कभी वो सोचती कि बलराम से कहता हूँ, यदि तुम्हें मेरी कोई परवाह नहीं है तो मैं कहीं और चली जाती हूँ । ऐसा वो नहीं कह सकती थी और कुछ देर बाद अपने आप पर ही लालच देने लगती है । यू बसे बसाए घर को तोडने वाले खयालों से क्यू आते हैं क्या कहूँ लोगों को क्या बच्चों को क्यों वो एक तरफ होना चाहती है । कभी कभी उसके दोनों बेटों पर भी उसको गुस्सा आने लगता है जो घर से दूर टोरंटो यूनिवर्सिटी में पढने लगे थे । जब वो वहाँ की किसी यूनिवर्सिटी में होते तो उनकी देख रेख में ही व्यस्त रही थी । फिर वो सोचती उन्होंने तो एक दिन घर से जाना ही है तो बलराम है जिसकी परवाह नहीं करता है । सिख कैसे गुजरेगी? सारी उम्र उससे बचने क्यों लगा है वो कहीं किसी दूसरी और उससे तो उसका संबंध ये सब सोचकर रूप किसी सबूत की तलाश में बलराम की जेबे टटोलने लगे । बार बार उसको फोन करती बलराम की जुडता वो कहता सारा दिन वो घर में कैसे बैठा रहा करें रूप के फोन खाने बंद कर देता हूँ । कभी कहता हूँ खाली ना रहा कर अपने आपको किसी काम में लगा रूप में अपने आप को व्यस्त रखने के लिए कविताएं लिखनी शुरू कर देंगे । फेसबुक पर अपनी ताजा ताजा डाली कविता को याद कर के रूप में अपनी आंखें पहुंची और कंप्यूटर के सामने जा बैठे । फेसबुक खोल लिया । उसको तीस नोटिफिकेशन आए पडे थे । कुछ घंटे पहले ही उसने क्षेत्र फेसबुक पर डाला था । ये शेयर उसको बलराम की प्रतीक्षा करते हुए सूझा था । रूप में बेसब्री के साथ लोगों द्वारा दी गई दाद को बडा एक में उसकी अमृता प्रीतम के साथ तुलना की थी । ये सभी उसके रूस के प्रशंसक थे । लगभग सभी पूरे प्री प्रशंसा पढकर रूप को अपने अंदर का खालीपन भरता हुआ लगा । वो प्राइवेट संदेश करने लगी । नया संदेश कोई नहीं था और फिर भी उसमें सुनिश्चित हो जाने के लिए मैसेज बॉक्स खोल लिया । रूप खास प्रशंसक था जो दूसरों की तरह शेर के नीचे प्रशंसा भरी टिप्पणी न लिखता बल्कि मैसेज बॉक्स में संदेश भेजकर प्रशंसा के पुल बांध देता हूँ । वो रूप की आंखों की तारीफ करता हूँ । ऍम आपकी आंखों में डूबने के संदेश भेजने लगा । रूप को उसके संदेश अच्छे लगते भूमि चाव से पडती पर जवाब न दे दी । कभी कभी लिख देती । मैं विवाहित हूँ और अब उसके संदेश आने बंद हो गए थे । रूप इंतजार करती वो संदेश रूप के अंदर हलचल मचा देते और जब कुछ संदेश ना होता तो मायूस हो जाती है । उसको लगता कि यदि वह उसके संदेशों के उत्तर देती तो वह घूमना होता । फिर वो सोचती अच्छा ही हुआ । यूपी इस उम्र में बदनामी क्यों लेनी है? एक दिन इसी में ही उसे ख्याल आया । उसने फेसबुक पर एक फर्जी नाम से तलाकशुदा बनकर अपना खाता खोल लिया । अपनी असली पहचान छिपा ली । एक अखबार में से काटकर कोई धुंधला साॅस अपनी फोटो की जगह पर चस्पा कर दिया । अपना शहर भी वैंकोवर की जगह सेनफ्रांसिस्को लिखा । कुछ ही दिनों में उसके कई फ्रेंड बन गए । पहले खाते जैसा प्रेमी उसको यहाँ भी मिल गया । रूप के रूप की प्रशंसा करता वो अपने आप को भाग्यशाली समझता, जिसकी रूप जैसी रूपवती फेसबुक फ्रेंड बनी थी, रूप को उसके संदेश पढकर नशा होने लगा । एक दिन उसने रूप के साथ चैट करते हुए लिखा तेरी फोटो बहुत धुंधली सी है । जब तेरे बारे में सोचता हूँ तो फिर शक्ल मेरी आंखों के आगे नहीं बनती कोई दूसरी फोटो देखा उस शाम थे । बलराम की बेरुखी के कारण रूप दुखी थी । संदेशा पढकर रूप में सोचा कि यदि मेरे सूरत आंखों के आगे नहीं बनती तो योगी प्रशंसा करता रहे । इतने दिन अपनी खीच उस फ्रैंड पर झाडते हुए उसमें लिखा तो मेरे बारे में सोच कर क्या कर रहा है? अपनी घरवाली के बारे में सोचा कर फ्रेंड उसकी बात करके बूढाखेडा । आपका रोग घरवाली का नाम शंकर मूड खराब हो जाता है और लोगों की औरतों को खुश करने के लिए जान हथेली पर रखते हो । तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैं शादीशुदा हूँ और मेरे बच्चे भी हैं । ऍम सलाह तो यू दे रही हो जैसे कुछ सती सावित्री हूँ । यदि इतनी ही शरीफ है तो यहाँ क्या करती है अपने घर वालों की बहुत मजा । उसका ये जवाब पढकर धूप को झटका लगा । उसमें कंप्यूटर बंद कर दिया और अपने आपको बलराम की गुनेहगार मानने लगी । उसी पर उसने कंप्यूटर दोबारा चलाकर वह खाता ही बंद कर दिया । पर अगले दिन उसके अंदर उस खाते को लेकर बेचैनी होने लगी तो मैं सोचा वो कौन सा मुझे जानता था । यही खाता बंद कर दिया ऍफ किये जाती है उसका मन किया कि खाता दोबारा खोल नहीं । दूसरा मान कहे की हुई है मिलने के ऊपर ना इसी कशमकश में ही उसने अगले दिन दूसरे नाम का नया खाता खोल लिया । मगर इस वक्त वो अपनी असली पहचान वाले खाते पर शेयर की प्रशंसा से संतुष्ट थे । उसका मन हुआ कि नया शेयर लेंगे और तुरतफुरत दिमाग में कुछ नहीं सूझा तो दूसरों की पोस्ट देखने लगी । अपनी एक सहेली की फोटो पर उसकी निगाहें अटक गई । उसने फोटो पर क्लिक कर दिया । ये ऍम उसकी तस्वीरें थी । रूप की सहेली और उसका पति बाहों में बाहें डाले खडे एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे । धूप कुछ देर फोटो को देखती रही । उसके अंदर एक बेचैनी सी उठी । उसके फोटो को बंद कर दिया । ग्रुप का दिल में आया कि वह फ्रेंड के साथ चैट करें, जिसमें उसकी तुलना अमृता प्रीतम से की थी । ग्रुप में उसको फ्रेंड लिस्ट हो जा पर वो ऑनलाइन नहीं था । शरू अच्छा हुआ । सोच कर रूप में अपने इस खाते को साइन आउट किया और दूसरे खाते को साइन किया । वहाँ कोई भी नया संदेश नहीं था । वो पुराने संदेशों को पडती रही और फिर एक नया संदेश लिखकर वो दोबारा अपनी असली पहचान वाले खाते पर चली गई और जब जमीन से आके भोजन होने लगी । रूप फेसबुक की दुनिया में से निकली और खराटे मार रहे बलराम के साथ जा लेडी । फिर सवेरे बलराम को सुबह छोड कर ही काम पर चली गई । दिन काफी निकल आया था जब बलराम की आंखें, होली, चाय का कप लेकर वो कंप्यूटर के सामने बैठ गया । फेसबुक खोली । निमी के चार संदेश थे । दो सप्ताह पहले बलराम को फेसबुक निठल्लों का काम रखता था । उसने रूप से यही कहा था जब रूप में उसको भी फेसबुक पर खाता खोलने की सलाह दी थी । बलराम ने पलट का रूप से कहा था तो हर समय खोले रखती है क्या? मिलता है तो बोली और मैं घर में अकेली बैठी क्या करूँ पुरानी कई सहेलियाँ मिल गई उनके साथ बातें कर लेती हूँ । कोई कविता लिख कर डाल देती हूँ मुझे और ज्यादा डिप्रेस नहीं होना अपने आपको किसी तरह लगाया है रुक कर फिर बोली ये देखो तुम्हारे भतीजे ने गांव की तस्वीरें डाली हैं । देखो आकर फोटो में गांव के लोगों को पहचानते हुए बलराम को रूप में अपना खाता खोलने के लिए मना लिया । पिछले हफ्ते ट्रक से लौटे बलराम को रोकने बताया । उसके इंडिया वाले भतीजे ने अपने विवाह की तस्वीरें फेसबुक पर डाली हुई हैं । अगले दिन बलराम ने उन्हें देखने के लिए फेसबुक खोल लिया । उस को किसी निर्मल का एक सन्देश आया हुआ था । बल्ली बला भू जो तो मैं कौन हूँ बस हम सोचते पढ रहे हैं निर्मल कौन है उसने निर्मल की वॉल देखिए वोटो धुंधली सी थी । बलराम पहचान नहीं सका तो सोचने लगा कि कोई गांव से हो सकती है जिसने बल्ली लिखा है । दिमाग पर जोर देने पर उसको ख्याल आया कि गांव में उनके पडोसियों की लडकी नहीं हो सकती है । बलराम में जवाब लिखा मैं किसी निर्मल को नहीं जानता हूँ । मैं तो निधि को जानता हूँ और बलराम के बैठे बैठे ही जवाब आ गया था तेरी नहीं हूँ बढकर बलराम खुश हो गया । रूप यद्यपि काम पर गई हुई थी फिर भी बलराम नहीं इधर उधर देखा कि कहीं कोई दूसरा तो नहीं पड रहा था । तभी एक और संदेश आ गया । निर्मोही तो भूल ही गया । बडी मुश्किल से खोजा है तुझे । अब मुझे जाना है फिर बातें करेंगे । जीभरकर बलराम ने लिख भेजा तो ये किसने कहा की मैं भूल गया । सच बात हुई थी कि बलराम को विभाग के बाद निमी का कभी खयाल आया ही नहीं था सिवाय कुछ महीने पहले । जब उसने शराब दिए हुए अपने बेटों को छेडते हुए कहा था तो मैं कोई गर्लफ्रेंड बनाई है की नहीं । फिर खुद ही बोला था मेरी तरह सूखे ही नहीं रहे जाना आपकी कोई नहीं थी । डायट छोटे ने पूछा था फॅस कहाँ? हमने तो पडोसियों के निमी की और देख कर ही गुजारा कर लिया । मेरी तो बीत गया धूम अपना, समझ गए ना बात डेट कोई चुनाव आपने सुना की बात छोटे ने कहा बहुत सुनने से क्या होगा जब मैं कॉलेज जाता था उनके घर के सामने से निकलता था बट ठंड का वो कभी कभी मेरी तरफ देख लेती । बस इतने से ही हमारे कई दिन निकल जाते हैं और सिखाओ उल्टे काम नहीं । अरे पढ लिखकर कुछ बनने ना देना । इन को बीच में ही बोली हद हो गई या तो गले पडने को हमेशा तैयार रहती है । मैं तो उन्हें बता रहा हूँ कि योगी जी सकते ना रहना मेरी तरह और जिनके साथ निकलता बनाने में बलराम संकोच करता रहा था अब उसी दिन मैंने तीरी निम्मी लिखा था । पर नाम नहीं तेरी मम्मी और निर्मोही वही मुश्किल से खोजा है तो वाले संदेश अक्षर अक्षर पार बार पडे बढकर उसको सुरूर आने लगा । नए संदेश की प्रतीक्षा में कुछ और बैठा रहा पर कोई जवाब नहीं आया । बलराम ने ट्रक को लोड लेकर जाना था । वो और न बैठ सकता लेकिन दिल्ली के संदेश उसके अंग संग होली ट्रक चलाते हुए उसकी उंगलियां स्टेरिंग व्हील पर थिरकती रही थी । आपने पडोस के कोठे पर कपास के सूखे फूलों से कपास चुकती दिन मैं उसकी यादों में आ जाती है जिसको देखने के लिए वो यू कोठे पर चढ जाता था । कभी कभी नहीं । उसको अंगूठा हिला हिलाकर डोडो करती ये सब याद करके उसके होठों पर पता नहीं कहाँ से पुराना गीत आ गया था । मैं तो रख ले क्लीन रहे या आ रहा तेरे लमिया रोटा थे और आप लंबे रूप से वापस आकर उसने फेसबुक फिर से खोली जहाँ दिल्ली के चार अनपढे संदेश पडे थे एक संदेश था कहाँ गुम हो गया बडी मुश्किल से तो हो जाता है । दूसरा संदेश सच सच बता कभी याद किया तीसरा संदेश तेरी बार बार मेरी तरफ देखना याद करके मुझे कई बार हसी आ जाती है । चौथा संदेश बहुत अकेली हूँ बलि लगता है कोई मुझे प्यार नहीं करता । घरवाला मेरी कोई परवाह नहीं करता । उसके अंदर वाला मेरा प्रेमी पता नहीं किधर गया । मुझे मेरा रहनी चाहिए जो मेरी परवाह करें । नहीं पहुंच रहे बताओ मेरा प्रेमी बनेगा ना हो बलराम ये संदेश पढ ही रहा था कि नहीं करना या संदेशा गया बल्ली मुझे गलत मत समझना । बलराम नहीं गलत नहीं समझता तो बता अपने घर वाले के बारे में मैं छोड उसकी क्या बात करने अगर उस को मेरी परवाह होती तो मुझे यू भटकने देता । बडा बडा निर्दयी है तेरा घर वाला जितनी सुंदर पत्नी की परवाह नहीं करता तो मारता पिटता है नहीं नहीं नहीं उसे अपने काम की फिक्र रहती है ना यार दोस्तों की छोड दे उसकी बात देख ले । आज मैंने पकडे लिया है तो ऑनलाइन बता दूँ । मैं ट्रक का चक्कर लगाकर लौटा हूँ । एक हफ्ते बाद और फिर मुझे फेसबुक इतनी आदत नहीं पडी तो फिर बनाकर अब नहीं भटकने दूंगा तुझे इतने में इतने दिन में इंतजार नहीं कर सकती । तरह संदेशों कि आईफोन ले ले । आई फोन पर भी फेसबुक पर बातें हो जाती हैं । बलराम और रूप को कुछ महीने पहले ही बच्चों ने उनके विभाग की पच्चीस वर्षगांठ पर दो आईफोन ला कर दिए थे । ग्रुप तो इस्तेमाल करने लगी थी पर बलराम ने वापस कर दिया था । बोला था मैंने से इस्तेमाल नहीं करना तो डाटा प्लान के फालतू के पैसे डलवाने है । पर अब निमी को उसने लिख दिया लगता है अब तो आई फोन लेना ही पडेगा । लगते हद बलराम ने एक और संदेश भेज दिया ट्रक चलाते हुए तेरे संदेश ही मेरे दिमाग में घूमते रहे और तेरह मुझे अंगूठा दिखाना भी याद आ रहा था । तुरंत जवाब आया बलिक मैं तो ये इतनी अच्छी लगती थी कि तुम मेरी तरफ हर समय देखता रहा था । बलराम था बहुत नहीं नहीं तुझे एक रहस्य की बात बताऊँ । बलराम हूँ जल्दी बता हूँ मैं तो कॉलेज जाता था तो मैं छिपकर तो ये देखा करती थी तो बहुत सुंदर लगा करता था । बलराम अगर तो मुझे ये सब उस वक्त बताती तो अपनी बात आगे बढती है । नहीं नहीं तो उससे फिर भी कुछ नहीं होना था । ॅ बलराम ही क्या होता है लाभ आउट लाउड यानी मुझे जोर की हंसी आ गई । बलराम फॅमिली सच कभी कभी मन करता है वो दिन वापस आ जाएंगे सब देने जितना प्यार करने वाला कोई नहीं मिला । जिंदगी में नहीं जाने को दिल तो नहीं करता पर मेरे काम पर जाने का वक्त हो गया । नहीं नहीं मैं जल्दी में हूँ । आईफोन ले ले । जल्दी भाई सीओ जाने को मन नहीं करता । सच्ची बाई बलराम ये संदेश बार बार पडता रहा । कुछ देर बैठा रहा पर नया संदेश नहीं आया । बट सामने खडी की और देखा साढे बारह बज रहे थे । उसने सोचा कि रूप के लंच का समय भी बीत गया । उसने फोन ही नहीं किया कि खाने के लिए क्या बना कर रख रही है उसने दोबारा । एक ने कहा कंप्यूटर स्क्रीन पर मारी मैं संदेश नहीं आया था । उठकर नहाने चला गया । तब गरम पानी से भर लिया । तब मैं बैठा उस संदेश और मम्मी को याद करते हुए शुरूर में आने लगा । ऐसा जरूर उसको बहुत दिनों बाद आया था । अगली बार पता करुंगा की कहाँ है? फिर हो कराऊंगा उसके पास की सोचते हैं उसे ऐसे लगा जैसे नहीं कह रही हूँ । आज मुझे प्यार कर बलराम को अपना आप किसी विजयी की तरह महसूस हुआ । उसने शेव की और तैयार होकर कंप्यूटर के सामने बैठ संदेशे पडने लगा । बलराम की नजर एक संदेश पर्यटक गई उसके उसे दोबारा पडा । दिल्ली ने लिखा था छोड उसकी क्या बात करनी है । वो मेरी परवाह करता तो मुझे भटक नहीं देता । बलराम के दिल में आया कि कहीं ग्रुप तो नहीं । दिल्ली की राह पर चल रही पर अगले ही पल उसने शक को छोड दिया । उस ने सोचा कि ग्रुप ऐसी नहीं है । यदि ऐसी होती तो बार बार लोकल ट्रेन चलाने को क्यों कहती? और बलराम फिर से तीन दिन में और तो मुझे प्यार करेगा ना जैसे संदेश पढकर शुरू में आ गया । उसके वहाँ बैठे बैठे ही रूप काम पर से लौट आई । शुरूर में आए बलराम ने तक रूप को ऊपर से नीचे तक देखा । बगैर बाहों वाले टोमॅटो बलराम को अगर सी लगी बोला बडी जवानी चढी है रूप को लगा जैसे कुछ सपना देख रही हूँ । एक पल तो उसको यकीन नहीं आया कि ये बलराम था तो बोली तुम देखो भी असली जवानी तो अच्छा ही है । फॅमिली तो बच्चों की देखभाल में ही बीत गया । कहती कहती रूप चुप हो गई थी । पहली जवानी वाले दिन होते हैं तो वह रूकती नहीं कह देती या फिर तुम्हारी माँ की नोकझोंक में और महाभारत शुरू हो जाता है । पर अब ग्रुप में मुस्कराकर कहा सालों बाद आज कैसे रोमांटिक हो गए । फॅालो तो बाहर खाना खा कर आते हैं । तू तो जानती है आज की शाम तो दोस्तों के साथ होती है । ग्रुप की मुस्कुराहट गायब हो गई । उसके दिल में आया कि कहीं निंदी का घर वाला तो बडा नहीं लगता है जिसको तो नहीं समझता है तो मैंने ही नहीं बन कर खाता खोला है । पर उसने अपने आप को ऐसा कहने से रोक लिया । धूप ने सोचा कि ये विचार करने के लिए उपयोग समय नहीं बोली । मैं तो किसके साथ जाऊँ । बलराम चुप हो गया । कितनी देर चुप रहा । उसकी निगाहें कम्प्यूटर के मॉनिटर पर जा टिकी । फिर ग्रुप की और देखने लगा और देखता ही रहा हूँ ।

महक फूलों की -06

मैं फूलों की फोन की घंटी बजती रही । सुखचैन सिंह अपनी बहाव में बह रहा था । फोन मिनटभर की छुप के बाद फिर बोल पडा । सुखचैन ने फोन की तरफ देखा, लेकिन उठाया नहीं । चार घंटे का मार्कर फोन रुक गया । उस छठी फिर बोल उठा । सुखचैन ने सोचा कि जरूर उसके पुत्र रवि का होगा । सवेरे ही वह सुखचैन को टोरंटो आने के लिए कह रहा था । सुख चैन ने सोचा कि कहीं सच महीने टिकट बुक कर दे । उसने आंखें पहुंची और गलत साफ करके फोन उठा लिया । ये उसकी बेटी नवी का फोन था । बैडमिंटन से यद्यपि सुख चैन से अपनी आवाज को साधारण करने की पूरी कोशिश की थी, पर बेटी से अपनी मनोदशा छुपाना सका । बच्चे तो यही लगता है । मैं बिल्कुल ठीक हूँ । ये सुखचैन ने कई बार कहा पर बेटी की तसल्ली नहीं करवा सका । वो बार बार कुछ दिनों के लिए उसको बैडमिंटन आने के लिए कहने लगी । उसने तो ये भी कह दिया कि वह दोबारा सरिया जाती है । सुखचैन सिंह ने उसको रोक दिया । बोला बच्चे में ठीक हूँ तो अपने परिवारों की और ध्यान दो । नवी उसको अपना ख्याल रखने और समय से खाने पीने के बारे में कहती रही । उसने सुखचैन कभी बाहर घूम फिर आने की ताकीद की, ताकि उसका ध्यान दूसरी तरफ हो जायेगा । सुखचैन अपने को जब्त करता हुआ हुंकारा भरता रहा, पर फोन रखती, उसका बांध टूट गया । जब जीत क्यों? क्या तुम्हें मेरे साथ ऐसा कहते हुए वह बुक्का फाडकर होने लगा । कुछ देर वो इसी तरह हल्का होता रहा । फिर अपने आप को इकट्ठा करके वह गुसलखाने की और चला गया । कुछ देर गुनगुने पानी के छींटे अपनी आंखों पर मारे आंखों का खारापन खत्म होने पर नहीं आ रहा था । रसोई में जाकर फ्रिज खोला । सारे फल और सब्जियां वैसे के वैसे ही पडी थी, जिससे पिछले हफ्ते रवि और नवी लॉक कर रख गए थे । सुख चैन न सर ब्रेड और दूध ही इस्तेमाल किए थे । उसका कुछ भी खाने को दिल नहीं मानता था । जब भूख अधिक ही बेचैन करने लगती तो ब्रेड का टुकडा खा लेता । कोई भी काम करने का उसका दिल नहीं करता था । उसके भाई ने भी कहा था की रोटी वो उनकी तरफ खा लिया करें और सुख चैन ने कह दिया था तो मैं तो पता ही है । मैं खुद ही खाना बना लेता हूँ । जब तुम्हारा मन करें, इधर आ जाया करो हम यही बनाकर खा लिया करेंगे । गत सप्ताह तक सभी आते रहे थे, जब जीत के दाह संस्कार के बाद रवि और नवी भी चले गए थे । अफसोस प्रकट करने वाले भी आना बंद हो चुके थे । सो, मंगलवार को एक्का दुक्का लोग आए थे तो वहाँ संस्कार के दिन नहीं आ सके थे । लेकिन कल और आज तो कोई भी नहीं आया था । इन दो दिनों में उसको जिंदगी अधिक गर्त लगने लग पडी थी । सुखचैन ने चाय बनाने के लिए फ्रिज में से दूध की कैरी निकली । भूख उसको बिल्कुल नहीं थी । उसको याद आया कि रात में भी उस ने कुछ नहीं खाया था । नहीं, सवेरे उठकर उसने नाश्ता किया था । ब्रेड के दो टुकडे टोस्टर में रख दिए । टोस्टर में चार पीस रखने की जगह भी है । उसमें वो चार पीसी रखता था । जिस दिन उन्हें ब्रेड का नाश्ता करना होता है, परन्तु उसको तो स्तर की दो खाली जगह बहुत ही अजीब लगी । उसका मन फिर भराया । उसने टोस्टर और नहीं ना किया और नहीं चाय बनाने के लिए चूल्हा जला । लिविंग रूम की खिडकी के पास जा खडा हुआ बाहर की और देखता रहा । बाहर कहाँ सूख चुका था, जब जीत की बीमारी के कारण सुखचैन घास की तरफ ध्यान नहीं दे सकता था । सितंबर का दूसरा हफ्ता शुरू हो गया था । बरसात होने अभी शुरू नहीं हुई थी । पत्ते गिरने प्रारंभ हो गए थे । मेपल के पत्ते चेहरों और बिखरे हुये थे । सुखचैन को आस पास सूना सूना लगा । रात में भी रोटी खाने के वक्त सुखचैन सिंह के भीतर सुन पसरती गई थी । उसने इससे छुटकारा पाने के लिए शराब की बोतल खोल ली थी । खाली घर उसको काटने को दौडता था । उसको लगा जिससे वो किसी उधर बियाबान में घूम रहा हूँ । उसने उठकर सारे घर की एक एक बत्ती जलाई । अपने शयन कक्ष में चला गया जब जीत वाली आराम कुर्सी की और देखता रहा । ये कुर्सी उसने जब जीत के बीमार होने के बाद ला कर दी थी खाली पडी कुर्सी के बाहों पर हाथ फेरता रहा । एक पल उसको लगा कि जब जीत सच में कुर्सी पर बैठी है छत से कुर्सी के उस तरफ हो गया जहां खडे होकर वो जब जीत के मुंह में चम्मच से शुभ डाला करता था की दवाई की गोली देता था या फिर उसके उल्टी करने पर बर्तन लेकर खडा हो जाता था । एक बार तो उसने करीब कोई बर्तन ना होने की स्थिति में अपनी ओक में ही उल्टी करवा ली थी । उस दिन जब जीतने कुछ होश में आने के बाद अपनी आंखें भर ली थी । फिर बोली मैं तो तुम्हारे पर बोझ करेंगे, दुखी देती हो ना तो हैं नाची ते ऐसा मत बोल । सुख चैन ने कहा था सुखचैन को जब जीत के वो शब्द याद आ गए तो कुर्सी के पैरों की तरफ बैठ गया । बुला जीते मुझे कोई दुख नहीं खाते रहा बल्कि अब अकेला दुखी होता हूँ क्यूँ चली गई मुझे अकेला छोडकर खाली कुर्सी पर माथा टिकाकर फूट फूटकर रो पडा हूँ, चली गई जीता तो ऐसी तो ना थी लम्बी लम्बी सिसकियां भरता वहीं बिछे गलीचे पर ही टेडा हो गया । जब भी जब जीत अस्पताल से घर लौटा करती कोई सी गलीचे पर लेता करता था । पिछले तीन महीनों से वो कई बार अस्पताल में दाखिल हुई थी और कई बार उसको अस्पताल से छुट्टी मिली थी । जब भी उल्टियाँ बंद होती अस्पताल वाले घर भेज देते हैं । पहले दिन तो सुखचैन उसको अस्पताल के पिछवाडे से लेकर गया था ताकि जगजीत कैंसर यूनिट के बोर्ड न पडे और जब जीत कौन सा शहर में नहीं थी । पिछले चालीस साल का साथ था उसका शहर के साथ और सुख चैन के साथ सुखशिंद्र उसको बताया की भोजन नली में कोई नुकसान है जो मामूली से ऑपरेशन करके ठीक हो जाएगा । शाम तक सुख शान अपने आप के साथ जूझता रहा । क्या हो गया था कुछ जीत के सामने ऐसी कोई बात नहीं करना चाहता था और उसको खुद ही इस पर यकीन नहीं हो रहा था । उसका अंतर्मन हाहकार कर रहा था कि ये क्या हो गया । उन्होंने तो रिटायरमेंट के बाद के जीवन के लिए कई सारी प्लानिंग बना रखी थी । जब जीत में दो साल पहले ही साठ साल की उम्र में रिटायरमेंट ले ली थी । सुख चैन की रिटायरमेंट को तो अभी पूरा महीना भी नहीं हुआ था कि जगजीत कोटियां लग गई थी । कैंसर की स्टेज इलाज से ऊपर निकल चुकी थी । अब तो दर्जा उल्टियों का इलाज था । जितने भी दिन जब जीत के पास है कभी घर पर कभी अस्पताल घर होते हैं तो सुख चैन नीचे गलीचे पर ही पड जाता । जब जीत भी उसको कई बार कहकर थक चुकी थी कि कम से कम घटना तो उछालो । सुखचैन का एक ही जवाब होता है गद्दे पर पडने के बाद मुझे नींद आ जाएगी तो कौन दवा देगा? यदि रविया नवी आए होते तो कहते कि वह राहत में जाते रहेंगे, पर सुखचैन उनका कहाँ भी न मानता । जगजीत करवट भी बदलती तो झट से उठकर बैठ जाता हूँ । फर्श पर टेडे हुए । सुखचैन को लगा जैसे जगजीत की दवाई का वक्त हो गया हो । वो हडबडाकर उठा बिस्तर की और देखा जहाँ जब जीत लेता करती थी, कुछ देर सूनी आंखों से खाली बिस्तर की और देखता रहा । फिर उसकी निगाह नाइट टेबल पर रखे गुलदस्ते पर चली गई । ये गुलदस्ता जगजीत की मौत के बाद तू बैंक वालो ने भेजा था, जहाँ जगजीत सवेरे चार घंटे वॉलंटियर काम करती थी । जब जीत के शब्द सुखचैन को याद हो गए । उस ने कहा था क्रिसमस के करीब तुम भी मेरे साथ चला करो । फट बैंक सुखचैन के जवाब से पहले ही बोली थी को खाना खिलाकर मन को जो तसल्ली मिलती है ना उसका कोई मुकाबला नहीं । मुझे तैयार करके खुद से आगे सुख चैन से कुछ नहीं सोचा गया । उसके भीतर दर्द की लहर उठी । अपनी आंखों के कोई को पूछता हुआ उठ खडा हुआ बेडरूम के दरवाजे में खडा रहा । उसकी समझ में नहीं आया । क्या करें तो बोतल की तरफ गया । वो कॉफी टेबल पर पडी थी । गिलास भरकर उसके अंदर फेंका और सोफे पर पीठ िकाली । टांगे खुद ब खुद ही आदत के अनुसार कॉफी टेबल पर टिक गई । उसकी निगाहें पैरों के पास पडी । बोतल पटेल गई इस जगह पर जब जीत के पैर हुआ करते थे । शाम को सैर करने के बाद वो इसी तरह बैठे होते । सुखचैन ने सोफे के कोने से तीस लगाई रखी होती और जगजीत लव सीट पर बैठी होती । टीवी देखते हैं । जब जीत साथ साथ उनकी कोटियां भी होने जाती । कभी कभी उनके पैर एक दूसरे से शरारत भी करते हैं । पर वो दिन तो चुके थे । सुखचैन उन दिनों को वापस लाना चाहता था कि उसके बस में नहीं था । उसने देवसी के साथ खाली लव सीट की और देखा । उसकी आंखें फिर छलक आई । इनके अंदर की नमी अभी सूखने का नाम ही नहीं ले रही थी । जब जीत हो गए, ग्यारह दिन भी चुके थे । किसी के सामने ये आंखे बिल्कुल भी नहीं चल की थी । हम जरूर होती थी । यहाँ तक कि दाह संस्कार के वक्त भी । वह नवी को अपने साथ लगाकर दिलासे देता रहा था और हज अकेले होते ही छलक छलक पडती थी । जब जीत की बीमारी के दौरान ये एक दिन उसके सामने ही चल की थी । दर्द से जगजीत करा रही थी । उसके मुख्य सुखचैन ने भी हाई नहीं सुनी थी । दर्द के साथ बेहाल हुई को देख सुखचरन अपने आप को रोक नहीं सकता था । जैसे ही जगजीत को दर्द कम हुआ उसने कहा था आपकी आंखों में पानी उत्साह नहीं जाता हूँ । कडा करो अपने आप को तो फॅमिली थे और अब आप अभी कुछ महीने पहले की तो बात थी । शहर करने गए हॅूं में से उन्हें तीन चार दिन कोई भी नहीं दिखाई दिया था । पडोस में पूछ पडताल करने पर उन्हें पता चला की तहरीर को स्टॉप हो गया था और वह हॉस्पिटल में है । फूलों का गुलदस्ता लेकर वहर इनका पता लेने अस्पताल गए थे । ऍम का हाथ अपने हाथों में लेकर एलेक्स नी रहा रहा था । वापस लौटते हुए सुजॅय देते हुए कहा था फिर इनके सामने अपने आपको तगडा रखा कर तो ठीक हो जाएगी पर ये ठीक नहीं हुई थी । सुखचैन कोशिश करता हूँ कि जब जीत के सामने मन करा रखे पर अब मान पर पकड ढीली हो गई थी तो बहुत देर सोफे पर ना बैठ सका । उसके भीतरी खालीपन ने उसको बेचेन कर रखा था और रसोई की और चला गया । वहाँ खडे होकर दोनों जन खाना तैयार करते थे । सुख चैन लहसुन प्रयासशील देता । अगर खाना बना रहा होता तो जगजीत उसको सामान पकडाती । जब जीत के बिना रसोई सुखचैन वहाँ कुछ पर ही ठहरा और एक कमरे में से निकलकर दूसरे में चला गया । उसको मन हो रहा था की कोई उसकी अपनी बाहों में ले ले । शराब में अपने आगोश में लेकर उसको बेसुध कर दिया । सवेरे उठते समय फिर सुख चैन की आंखे नम थी । बेध्यानी में भी रात बहकी रही थी । आंखों के कोनों पर वही आंसुओं के धारे दिखाई देती थी । अंदर संस्थान था खिडकी के रास्ते । बाहर भी उसको एक जो फैली लग रही थी । उसकी निगाहें चॅू की तरफ से आ रहे गुरदयाल सिंह और नाहरसिंह पर बडी पाक से लौटे होंगे । उसने सोचा सुखचैन के चित्र में आया की यदि जगजीत जिंदा होती तो उसने नहीं जाते हुए देखकर चाय के लिए आवास लेकर बुला लेना था । कई बार तो वह निकलते गुजरते खुद ही आ जाते हैं । वो कहते हैं कि उनका अच्छी चाय पीने का दिल करता है । ये सुनकर जगजीत को चांस चढ जाता तो फ्रिजर में से समूह से अ स्प्रिंग रोल भी निकाल लेती हूँ । जब जब जीत बीमार थी उसकी खबर लेने आते तो वह सुख चैन से कहती खुली पत्ती वाली चाय बनाना जी जी वही लाइक करते हैं । उस समय ये बहुत नाना करते पर जब जी चाय के बगैर जाने नहीं देती थी । उन्हें अपने घर की और बढता देखकर सुखचैन दरवाजे की और बडा सुख चैन ने उन्हें अंदर आने के लिए कहा और वो अंदर नहीं आएगा । बच्चों को स्कूल से लाने का टाइम हो गया है फिर आएंगे । गुरदयाल सिंह बोला आप हमारे पास में चला करो मन दूसरी तरफ हो जाता है ना हाथ । सिंह ने कहा कर तो कुछ नहीं सकते पर अपना ख्याल रखो । गुरदयाल ने कहा तो कुछ मिनट तक इस तरह की बातें कर के चले गए । दूसरों को अतुल देना बहुत आसान होता है । पर आपने पर जब पडती है तब पता चलता है सुख चैन ने दरवाजा बंद करते हुए सोचा । फोन की घंटे फिर से बचने लगी । फिर नवी का फोन था तो बोला डैडी में देखना चाहती थी कि आप कहीं की नहीं । बच्चे बस जा रहा हूँ । लंच कर लिया रखा है । टोस्टर में ब्राइड डैडी प्लीज तीस का ख्याल रखो ऐसे ठीक नहीं । मैं देखती हूँ मैं आप ही आ जाती हूँ । वीकेंड तक बच्चे तुम्हारे पहले ही कितने चक्कर लगाते हैं । दो महीनों में ठीक हूँ । मैं खाकर जाता हूँ बस बाहर मेरी इतनी फिक्र मत करो । फोन रख कर सुखचैन ने टोस्टर का बटन दबा दिया और बाहर जाने के लिए कपडे बदलने लगा । जबरन ही ब्रेड के अंदर डाली बुर्की भूमि फूलने लगती । खाकर वो घर से बाहर निकल गया । उसके पैर खुद ब खुद उस रहा की और चल पडे जिस पर वो और जगजीत सालों से सैर करने जाते रहे थे । चॅू और बढ गया । बच्चों के स्कूल से लौटने का वक्त हो गया था । क्रॉसिंग गार्ड टेड अपना स्टॉप साइन वाला बोर्ड पकडे बच्चों को चौरासी एवन्यू पार करवा रहा था । उसकी घरवाली ऍम काॅपियों पर कुछ बोल रही थी । सुखचैन ने आदत अनुसार उन्हें हाथ हिलाकर हाय कहा । उसके दिल में है कि जी जगजीत होती तो किसी के पास खडी हो जाती है और वो दोनों बनती की बातें शुरू कर देती । सुखचैन के दिमाग में जगजीत की बात आ गई । वही जोडी को देखकर कभी कभी कहा करती । इन्हें देखकर मुझे गीत याद आ जाता है और खेलने ही चल ले चरखा मेरा जी थे तेरे हाल नौं दे वहाँ ले चल चरखा मेरा जहाँ तेरे हाल चलते हैं कभी वो कहती है आप भी टेड की तरह वॉलंटियर काम करना शुरू कर दो मैं पांच बेटी बोलती रह करूंगी याद करके सुख चैन नहीं एक आह भरी तरह उसी से प्रभावित होकर ही जगजीत भी नवजन्में बच्चों के लिए टोपियां और स्वेटर बुनने लगी थी । जब पंद्रह बीस बोल लेती तो अस्पताल जाकर दान करती है । तारे सी भी ऐसा ही करती थी । सुखचरन अभी कुछ ही कदम चला था । किस के करीब से गुजरती और आपने उसको सच्चे अकाल कहा । वो अपने पोते को स्कूल से लेने चली थी तो बोली थी जी मुझे तो अभी भी लगता है जैसे बहन जी यहीं कहीं खडी हूँ । मतलब आंखों से उनका हस्ता खेलता चेहरा एक तरफ होता ही नहीं । सच में ईश्वर बहुत बुरा किया । चलो जितना उसके साथ था था और क्या कह सकते हैं आप अपना ख्याल रखो भी चीज चले गए । उनके साथ जाया नहीं जाता कहकर वो और आगे बढ गई । कैसे बताऊंगा बाकी की जिंदगी हर कोई सुझाव देने बैठ जाता है । सोचता हुआ सुखचैन आगे चल पडा है । एक सौ बावन स्ट्रीट की और चढाई करते हो उसका सांस फूलने लगा । उसका दिल किया की वापस मिल जाए । घर भी तो काटने को दौडता था । सोच कर चलता रहा तो नहीं । वोंग आपने पिक अप ट्रक में से गारबेज बैग निकाल रहा था । जैसा कि सुख चैन की आदत थी । उसने उसको भी हाथ हिलाया । वो सडक के इर्दगिर्द बिखरे कूडे कचरे को उठाने की तैयारी कर रहा था । बच्चों के स्कूल से लौटने के बाद वो एक सौ अडतालीस स्ट्रीट से लेकर एक सौ बावन स्ट्रीट तक पैदल चलकर चक्कर लगाता हूँ । चलते चलते यदि उसे कहीं क्यूरा दिखाई देता है तो उसे उठाकर वह बैंक में डाल लेता । ऍम ऊपर उसके नाम की पट्टी लगी हुई थी । जिसपर लिखा था ये पडोस वोंग परिवार द्वारा साफ रखा जाता है । सुख चैन को याद आया की जब जीतने उसको कहा था की रिटायरमेंट के बाद वो भी किसी गली मोहल्ले को सांस रखने की जिम्मेदारी लेंगे । दिल की दिल में ही रहते हैं । सोच कर सुखचैन ने वहाँ भरी तो उसने सोचा कि सारा कुछ वैसे का वैसा ही चल रहा है । सिर्फ उसकी दुनिया ही उजड ही है । ऍम स्ट्रीट से मुद्दा और बढ गया । उस तरफ सडक की ढलान शुरू हो गई । एलेक्स के घर के पास पहुंच रही उसके पहले अपने आप धीरे हो गए । फॅमिली को छानना छोडकर सुख चैन से आगे बढकर मिला । सुखचैन का हाथ दबाते हुए बोला तो मैं अच्छा किया की घर से बाहर निकले । सुख चैन की आपके नाम होने लगी थी तो उसने अपना मूड दूसरी तरफ कर लिया । लडते होटों को उसने कैसा खंखार कर कुछ बोलने की कोशिश की, पर उसे कुछ भी बोला नहीं गया था । अंदर बैठते ही फॅसने कहा । तब तक सुखचैन ने अपने आप को संभाल लिया था । बोला नहीं, मैं ठीक हूँ तो अपना काम करूँ । मैं तो अपने आप कुछ बगीची में ही व्यस्त रखता हूँ । तो मैं तो पता है कि अगर इनको कितना प्रेम का फूलों के साथ हाँ तो हरी तो फुलवाडी पहले से भी ज्यादा भर गई है । नहीं हाँ, ये कौनसी के फूल नहीं लगाए हैं कि हर साल लगाने पडते हैं । फिर इनकम लगाया करती थी । इस बार मैंने ज्यादा लगा दिए । फॅसने घर के सामने रखे गमलों की ओर इशारा किया, जिसमें हल्के नीले और सफेद फूल थे । फिर इनको इनकी महत्व बहुत पसंद थी । कहकर वह संतरी पत्तियाँ जिनके बीच का स पीला था, वाले फूलों की ओर हाथ करके बोला ये पैट्रिका है । ये फूल और इन को बहुत पसंद थे । फिर प्याजी फूलों की और संकेत करता हुआ बोला, ये ब्लैक बदलो भी नहीं आए हैं और इनका मन भरता, रंग खाइए । फिर कुछ सुख चैन की और मु करके बोला, मुझे पहले फूल पौधों का अधिक शौक नहीं था, बस फिर इनके साथ देने के लिए लगा रहता था । अब जब मैं बगीची में काम करता हूँ तो मुझे लगता है जैसे मेरे अंग संग हो सुजॅय और देखा । उसे पता नहीं चला कि अलग सी आपकी तरह थी या उनमें चमक थी । सुखचैन कुछ देर वहाँ और खडा रहा एलेक्स की और देखता रहा । चीनी का ढंग खोज लिया इसने । उसने मनी कहा, सुख चैन फूलों की तरफ देखने लगा । उसको लगा जैसे उसके अंदर की सुनना कम होने लगी हो ।

अग्नि परीक्षा -07

अग्नि परीक्षा ऐसी मनहूस घडी थी जब सोच बैठी की काम पर गया, लौटे ही नहीं । सीमा ने दिल में सोचा तो कुछ देर स्थिर पडे, अपने पति आलोक की तरफ देखती रही । फिर उसके बैट का बटन दबाकर सरहाने वाला हिस्सा ऊंचा किया और केयर होम की रसोई वैसे आलोक को खिलाने के लिए कुछ लेने चले गए । यद्यपि क्या रेड ने आलोक को दोपहर का खाना पहले ही खिला दिया था, पर कभी कभी सीमा अपने हाथों कुछ ना कुछ उसको खिला देती । मीठे दही वाली सिगरेट की डिब्बी लाकर उसने आलोक के मूंग के साथ चम्मच लगाया ही था कि आलोक ने पहले बनाया हुआ जूस वोटों के दोनों किनारों से बाहर निकाल दिया । सीमा ने टिशु पेपर से साफ करने की कोशिश की पर जूस गर्दन से होता हुआ आलोक की पीठ की तरफ चला गया । मेरे को इतने भर के लिए क्या तकलीफ देनी है? सोच कर सीमा खुद ही आलोक का काम था । ऊपर उठाने का । यत्न करने लगी तभी सीमा को आवाज सुनाई दी । ग्रुप चाहूँ महल करती हूँ की सीमा ने नजर उठाकर उधर देखा । दरवाजे की तरफ से आते नवदीप ने ये कहा था कोई बात नहीं मैं क्या रेट को बुला लेती हूँ । सीमा ने कहा मेरा कुछ नहीं होने वाला । कहते हुए नवदीप ने आलोक के कंधे के नीचे हाथ डालकर उसको थोडा ऊपर उठा दिया । जब सीमा साफ कर के हटी तो वो बोला ही नहीं दिखाई दी कल से वो वीकेंड पर काम करते हैं । सीमा ने बताया तो बहुत अच्छी आंटी कभी किसीकी हेल्प करने लग जाती हैं कभी किसी की हाँ जी सीमा ने कहा को कहना चाहती थी कि आपकी मम्मी भी बहुत तारीफ करती हैं और उसे कहा नहीं गया । मुझे आंटी ने बताया है सब हूँ मेरी कभी भी जरूरत पडे तो आवाज लगा देना । संकोच मत कर रहा हूँ कहकर नवदीप चला गया । सीमा ने एक नजर जाते हुए नवदीप की और देखा तुरंत ही नजर घुमाकर आलोक की और कर ली तो खाली खाली आंखों से एक तक दीवार की तरफ देख रहा था । सीमा ने फिर उस तरफ देखा जिस तरह नवदीप गया था हूँ उसकी तारीख मम्मी सच में ही क्या करती है, कितना अच्छा है । सीमा ने सोचा नवदीप के प्रति थोडा सा लगा उसको कुछ दिन पहले ही हो गया था जब उसने मम्मी के मुझसे नवदीप के बारे में सुना था । मम्मी ने कहा था वो जो रंग वाली नहीं बुरी आई है । केयर होम में उसका बेटा बहुत अच्छा है । सारा दिन मां के सिरहाने बैठा रहता है । मैंने बातों बातों में यही पूछ लिया कि तोहरे बच्चे कितने हैं तो बोला बच्ची कहाँ होने थे, विवाह करवाने के लिए मिली नहीं अभी कोई मैंने कहा ऐसी कौन सी खास लडकी तलाशता है तो इस पर बुला आपकी बहु जैसी सुशील मम्मी के मुझे ये सुनकर सीमा के अंदर एक तरंग छुट्टी थी । अब नवदीप के साथ कुछ बोल साझे करके सीमा को और भी अच्छा लगा । उसने सोचा इतनी जल्दी चला गया । कुछ देर रुक जाता । सीमा ने पुल है । उन लोग की तरफ देखा । बिस्तर की चादर बदलने को कहने के लिए उन नर्सिंग रूम की ओर चल पडे । अपनी माँ के सरहाने बैठे नवदीप के साथ उसकी आंखें मिलेंगे । मुस्कराया सीमा का मन हुआ कि कमरे के अंदर जाकर अंटी का हाल पूछे और वो संकोच कर गई । ऍफ के साथ मिलकर आलोक कपडे बदलवाकर वह घर जाने लगी । नूर के दूध का समय हो चला था । जाते वक्त उसने आंटी के कमरे की तरफ देखा । उसके पैर कमरे के दरवाजे के सामने रुकने रुकने को हो गए लेकिन वो नहीं रुकीं चाल जरूर धीमी हो गई थी । उसके पीछे नवदीप आ गया । बोला जा रहे हैं जी बेटे को माँ के घर छोड कर आई थी । सीमा ने कहा आप चिंता मत करो, मैं यहीं हूँ । उधर चक्कर लगातार होंगा । ऍम उदास में रहा हूँ । हम है ना आपके साथ सीवर उसकी और देखा तो मुस्कराया । इसी मुस्कराहट को अपने अंग संग लेकर सीमा कार में जा बैठे तो और आगे बढाते हैं । उसका हाथ रेडियो के बटन पर पहुंच गया । वीडियो पर गीत चल रहा था । उसने ई ड्रम स्टेशन नहीं बदला बल्कि गीत को चलता रहने दिया । गीत सुन्ने तो सीमा ने बहुत देर पहले से छोड दिए थे । कार में लगे रेडियो पर यदि गीत चलता भी होता तो वो झट से स्टेशन बदल देती । आलू के साथ रहते हुए उस को ये आदत पड गई थी । उन लोग को भी तो से सख्त नफरत थी । इस बात का सीमा को विभाग के कुछ दिन बाद ही पता लग गया था । सीधा को जिम काम से छुट्टी थी । लोग काम पर गया हुआ था । उनका विवाह हुए । अभी महीना भी पूरा नहीं हुआ था । सीमा नहीं । शाम के लिए सब्जी बना दी थी और टीवी के सामने बैठ गई । उसको दिन लम्बा हो गया । लगने लगा । बेसमेंट के लिविंग रूम में टंगी घडी की और उसने देखा आलोक के काम पर से लौटने में । अभी दो घंटे बाकी थी । यदि कहीं आज आलोक घर रह जाता । सीमा ने अंगडाई लेते हुए सोचा । फिर उसके दिमाग में आया कि आलोक जब काम से लौटेंगे तो उनसे बाहर घूमने चलने के लिए होंगे । वोट कर नहाने के लिए चली गई । शीशे के सामने खडी होकर अपने आप को निहारती रही केशों को पहले ऊपर उठाकर बांधा । फिर उसमें पीछे सोया फसा कर देगी । केश खुले छोडकर भी अपने आप को निहारा और फिर गर्दन के पीछे थोडा सा ऊपर उठाकर अपने वालों को बांध लिया । तैयार होकर सीधी चला ली । आज ही ही तेरह रसिता वे उडी कर दिया । उस सांसद उडाने लगी । उसने घडी की और देखा । आलोक के आने में अभी भी पंद्रह बीस मिनट बचते थे । पता नहीं क्या बात है । आलोक ने लंच के टाइम भी फोन नहीं किया । सीमा ने सोचा आलोक का लंच टाइम में फोन करने को मन ही नहीं किया । सात के सहकर्मियों ने उसके अंदर उथल पुथल मचा दी थी । लांच करते हुए एक साथ ही ने दूसरे से कहा था । कल मैं कॅलेज गया, वहाँ एक लडकी के साथ में रखता का भरने लगा है और शादी करवा ले । यूपी कभी इसके तो कभी उसके पीछे चल पडता है । दूसरे साथी ने टोककर कहा शादी करने अगले साल जाऊंगा ना इंडिया तो बल्ले बल्ले है भाई लडकियाँ यहाँ फसाए पडता है । शादी इंडिया में दूसरे ने कहा रही हूँ शादी करके फंसना है । वही तो बताने लगा था तो बीच में ही रोक दिया । मैं जिस लडकी के पीछे गया था देखने में पूरी साथ ही देखती है । कॉलेज में स्टार्ट पहने घूम रही थी । ऍम पूरे ऍम में उससे पहचानी नहीं । पहले मना ही रहा था कि दूसरा बीच में ही बोला ॅ सुनते हैं भाई लडकियाँ घर से सीधी साधी बनकर जाती हैं और स्कूलों कॉलेजों में जाकर लॉकरों में से निकाल कर तो उस तरह कपडे पहन लेती हैं । आलोक को लगा जैसे वो उनको सुनाकर बातें कर रहे हो । उसका अंतर खोलने लगा । आलोक के मुझे निकला तो यूपी लोग बकवास करते हैं । सारी एक जैसी नहीं होती है । इंडिया में कौन से सारी सती सावित्री हैं । फिर हम कौन सा ये कहते कहते वो चुप हो गया । उसके लिए वहाँ और बैठना कठिन लगा शीघ्र ही उसने अपना खाना खाया और लंच रूम से बाहर आ गया । बहन तो जरूर कोई हुई होगी जो ये लगा लगाकर बातें करते थे । आलोक मनी मनी सोचने लगा । फिर उसको बिचौलियों पर गुस्सा आया जिसने कहा था कि यदि कोई ऐसी वैसी बात हुई तो हमारी जिम्मेदारी तब वालों की शंका प्रकट की थी । सोलह सत्रह साल की उम्र में कनाडा आई हुई है । साल दो साल यहाँ के स्कूलों में पडी है जरूर कोई बॉयफ्रेंड होगा । ये बात उसने अपनी मम्मी के साथ भी साझा की । मम्मी ने कहा था, राजे सभी लडकी एक जैसी नहीं होती । अंडे अच्छी हैं, लडकी भी खुशी लगती है और हम लोग को यकीन नहीं हुआ था । उसने सीमा के बारे में जानकारी लेने के लिए उसके ऑफिस और घर के इर्दगिर्द चक्कर लगाए थे । आलोक को ऐसा कोई सुराग नहीं मिला था जिसमें वो सीमा पर शक करता हूँ । सीमा के साथ किसको भाग गई थी और ऊपर से बिचौलियों गारंटी दे दी थी । रिश्ता करने के लिए लोग झूठ बोल दिया करते हैं । आलोक ने सोचा फिर उसने सोचा कि जाकर उन्हें लडकों से पूछे कि यदि उन्होंने सीमा के बारे में कोई बात सुनी हैं तो सीधे सीधे बताएँ । पर इस विचार कुछ उसी बल एक तरफ कर दिया । उसने सोचा कि यदि कोई बात नहीं हुई तो यूँ ही फालतू में शक करेंगे । फिर उसके चित्र में आया कि सीमन रखते तो है नहीं, ऐसी हो । अगले ही बहुत मन में आया कि क्या वाला हूँ । ये भी शादी होने का ढकोसला करती हूँ । ऐसा सोचते सोचते आलोक को बेचैनी होने लगी । उसका मन किया कि अभी घर चला जाएगा तो जा नहीं सकता था तो छुट्टी होने का इंतजार करने लगा । जैसे ही काम पर से छुट्टी हुई, उसने घर की तरफ का हर दौडा नहीं । घर में प्रवेश करते ही आलोक के कानों में जीत के बोल बडे बेसमेंट के दरवाजे के साथ ही सुबह पडा था । इस पर सीमा बैठी थी । आलोक में सीमा की तरफ देखा सीमा की सज धज दें आलोक का दिमाग चकरा दिया । उसके अंदर गीतों के प्रति गहरी धंसी नफरत जाग उठी । वो घर जा ऍम लगी । शौक पाल रखें हैं । साॅस सुनती रहती हूँ । घर देख कैसे अस्त व्यस्त पडा हुआ है । सीमा भौचक्की श्रीहति कहीं भी अस्त व्यस्त नहीं थी । उसने सवेरे ही सफाई की थी । वो लोग क्या बरसाती आंखों की तरफ देखता सहम गई कुछ देर यही खडी रही । फिर तेज कदमो से अपने कमरे की ओर गई और बैठ पर धर्म से गिरकर पौधे बुलेट गई । क्या किया ऐसा? जितना पाउँगा दिमाग में आता, उसका रोना ऊंचा हो गया । एक बार उसका मन हुआ कि उठकर आलोक से पूछे कि क्या बिगाडा है उसने । पर वो ऐसा न कर सके । अंदर उठ रहे गुस्से को आंखों के रास्ते बहाने लगी । आलोक की पदचाप सुनकर उसको लगा कि वह कमरे में आकर उसको मनाएगा । बना लो । सीडी प्लेयर को बंद करके वर्षो में घुस गया । काफी देर शावर के नीचे खडा रहा । उसको इस बात की याद ही न रही कि मकान मालिक ने कई बार कम पानी इस्तेमाल करने की चेतावनी दी थी । उसके अंदर तो लगते उठ रही थी तो शांत होने में नहीं आ रही थी । हर बार ये सोचता है कि जो ये इस तरह बैठकर गीत सुनती है, जरूर चालू किस्म की लडकी होगी । अच्छी लडकियां कब इस तरह के मटकाती हैं । ऐसा सोचते हुए आलोक को सीमा के आंखों में डाली शुरू में की मोटी धार नाक जैसी लगी । हॉस्टल से निकलकर वह लिविंग रूम में जा रहा था । धोखा ही हुआ है । उसने सोचा तो झटके के साथ था । सीडी प्रेयर में से सीडी निकालकर तोड दी और ऍम में फेंक कर फिर पहले वाली जगह पर आ कर बैठ गया । विवाह से पहले कैसे सीधी साधी लगती थी और अब सोचते ही उसने दम कितनी चाहे उसका विकल्प फ्रेंड होगा । उसका बहुत हुआ कि अभी कदम से पकडकर पूछे कि बताओ क्यों साडी बनने का ड्रामा करती थी पहले लेकिन उसने अपने आप को रोक लिया । वहीं बैठे बैठे दम किसकी जाता रहा? सीमा अंदर से उठाई थी आलोक में खा जाने वाली आंखों से उसको देखा वो तो के पास जाकर खडी हुई । चाय के लिए पानी रखा । मम्मी काम पर से लौटने लगी थी । मम्मी को मालूम ना हो जाये सोच करी वो अंदर से उठाई थी । स्टोपर पानी रखकर वाशरूम में जाकर मूड होने लगी । मम्मी के प्रवेश करते ही सीमा ने रूस की तरह आगे बढकर मम्मी का बैठ पकड लिया । फिर चाय के कप लाकर मेज पर रखती है । आलोक को लगा जैसे सीमा पाखंड कर रही हूँ । वहाँ तीसरे में उसने चाय के कप में पैर मारा । ये क्या है अगर कोई बात तो मुझसे बात कर अपना बच्चा है । मैंने कहा क्या बोलूँ से तुम इसके लक्षण नहीं दिखते कहता हुआ लोग झटके के साथ उठा और अपने कमरे में चला गया । मुझे तो भी कोई लक्षण बुरा नहीं दिखा । फॅमिली सीमा की तरफ देखा । उसकी आंखों में आंसू थे तो मम्मी के पास बैठ गई और बोली, मम्मी मेरी समझ में नहीं आ रहा कि बात क्या है । अंदर घुसते ही भडक पडे । मैं बैठी गीत सुन रही थी । कहती सीमा करो ना निकल गया । मम्मी ने उसको अपने संग लगा लिया । कुछ देर बाद बोली लोग गीतों को तो ये बचपन से ही अच्छा नहीं समझता । अपनी बहनों के साथ भी लड पडता था । अगर कभी वह गाने लगा लेती थी, कुछ देर बाद दोबारा बोलिए । मैं तब लडकियों से कहा करती हैं बंद कर दो री अपने घर जाकर जैसे चाहे सुनती रहा करना । अपने घर जा कर भी क्या मालूम होता है कि घर वाला सुनने दिया नहीं । सीमा मम्मी कि और देखने लगी मम्मी फिर बोली पता नहीं इसको क्यों? लडके लडकियों वाले शौक नहीं है । शायद उसके डैडी का साया नहीं मिला । इसलिए कोई नहीं काम में भी बहुत तगडा है । तो साल हो गया । मैं कनाडा है । एक दिन घर नहीं बैठा तू राजेश चिंता न कर सामने नहीं सुनेगी । आगे पीछे सुन लीजिए । रात को लेते वक्त सीमा ने आलोक से कहा अगर आपको गीत अच्छे नहीं लगते तो आज के बाद में नहीं । शुरू में ये सुनकर अलोक सीमा को बाहों में ले लिया तो सोचने लगा मैंने यूँ ही बेचारी पर शक्ति कुछ ही दिन बीते थे । आम दिनों की तरह सवेरे साढे छह बजे आलोक अपने काम पर जा रहा था । उसकी कार में मम्मी भी थी । आलोक ने पहले मम्मी को स्काईट्रेन स्टेशन पर छोडना था फिर अपने काम पर चले जाना था । वो भी घर वाला मोड मुडकर मुख्य सडक पर चढने के लिए बाएं हाथ छोडकर दूसरी ओर से आ रही कारों की प्रतीक्षा कर रहा था । उसकी नजर एक लडके पर पडी है । लडका पहले भी उसको इस वक्त यहाँ खडा दिखता रहा था । अचानक आलोक को लगा जैसे लडका आलोक की करके मरने का इंतजार कर रहा हूँ । आलोक ने कारबाई और मोडकर धीमें से उसकी और देखा । लडका उसके घर की तरफ जा रहा था । लोग का मन किया की कार मोडकर घर चला जाए तो उसने सोचा भी मम्मी को पहले घर छोड दें उसके बाद लौटता हूं । यह सोचकर उसने कर की गति बढा दी । उसको लगा कि इस लडकी उस सीमा ने बुलाया होगा । वो रात को काम पर से लौट कर इस वक्त अकेली घर में थी । आलोक को लगा कि जरूर ये लडका उसी के घर गया होगा । मम्मी को स्टेशन पर पार कर उसने घर की और कार दौडा ली । उसका अंदर खोल रहा था । उसने सोचा कि दोनों की पहुंचकर आंखें निकालूंगा । वो कार में से उतरकर तेज कदमों से पीछे की बेसमेंट के दरवाजे के करीब पहुंचा । बिना खटका की उसने दरवाजा खोला और तेजी से बेडरूम की और चला गया । सीमा वहाँ नहीं थी, ले भाई, वो तो चली गई । आलोक के दिल में आया । वो तो अगले कदमों से बेडरूम में से निकला । उसकी निगाह वॉशिंग के बंद दरवाजे पर बडी दरवाजा खोल उसने उसी आवाज में कहा और फिर जोर से दरवाजा खटखटाया क्या है? सीमा ने अंदर से कहा मैं कहता हूँ डोर खोला भी वाश रूम में बैठी हूँ । खोलती है कि दरवाजा तो सीमा ने दरवाजा खोला । आलोक एकदम अंदर घुसा और तब के दरवाजे को खोल दिया । हाली टपकी और देखकर वो बोला किधर गया तो घूर घूरकर छोटी खिडकी की और देखने लगा जिसमें से आदमी तो क्या बच्चा भी नहीं निकल सकता था । कौन किधर गया । सीमा ने हैरानी में कहा, उसे कुछ समझ में नहीं आया । कुछ मिनट बाद जब उसको समझ में आया वो एक लंबी टेर लगाकर रोहांसी आवाज में बोली वो वहाँ मुझे ऍम सीमा के आवाज के अंदर की वेदना ने आलोक परसवार भूत को छोड दिया तो शर्मिंदा होकर बाहर निकल गया । कार तक पहुंचने से पहले ही वापस लौट आया । बैठ पर भी लग रही सीमा के पास जाकर बोला ऍम सीमा कर उधर ऊंचा हो गया है । छुप खोजा प्लीज मकानमालिकों कुछ होगा, पता नहीं मुझे क्या हो गया था । अरे यही तो मैं इतना ही शक है तो मैं चली जाती हूँ । यहाँ से बात पूरी करते हुए सीमा का रुदन फिर लम्बा हो गया । आलोक ने फिर सीमा को अपनी बाहों में भर लिया । उस की खुद का मन बुक्का फाडकर होने को हुआ हूँ । उस सीमा कोपरेशन सस्ते में बोला फूल हो गई सीमा भाषक नहीं करूंगा हूँ । महीने भर बाद सीमा के भतीजे की जन्मदिन पार्टी थी । उसके लिए सीमा को गिफ्ट खरीदने गई आलोक भी साथ ही बैठा था । गहनों वाले एक विज्ञापन की और देख उसने सीमा से कहा एक सीमा कितना सुंदर ऍम तेरे ऊपर पहुंच जाएगा । सीमा कॅश की तरफ देखा बोली हाँ बहुत सुंदर है प्राइस देखा है । पार्टी वाले दिन आलोक तैयार हो रही सीमा से बोला आंखे बंद कर सीमा ने आके मूल कर कुछ देर बाद खोली तो अपने गले में वही निकलता देखकर मारे । खुशी के आलोक अपनी बाहों में भर लिया । जब सीमा ने अपना आलिंगन ढीला क्या? आलोक कुछ देर तक सीमा की और देखता रहा और फिर उसने सीमा को अपने आलिंगन में ले लिया । आलोक की सारी खुशी पार्टी में पहुंचकर उड गई । नास्ते वक्त सीमा का जीजा उसके करीब हो कर बार बार नोट फेकने लगा था । गीत भी इस तरह का ही था । सीमा भी गीत के बोलों पर राष्ट्री हुई अपने जीजा किसन नाचने लगी । इस मौके पर सीमा भूली गई थी कि आलोक को ये सब पसंद नहीं देखता हूँ । किसे नाच रही है ससूर इसका पहले कुछ टाका होगा । इसके साथ जैसे जैसे सीमा कमर को झटका देती वैसे वैसे आलोक के अंदर लगाते उठने लगती । उसका मन किया कि वह नाश्ते हुई सीमा को बालों से पकडकर खींच रहे और वो ऐसा नहीं कर सका । दांत पीसता रहा । लौटते वक्त कार में भी मम्मी की उपस्थिति के कारण उसने अपने आप को रोके रखा घर पहुंचकर कमरे में घुसते ही उसने सीमा को बालों से पकड लिया । उसका मुंह उतने करीब करके बोला बताऊँ बता मेरे में क्या कमी है । जो लोगों के साथ आंखे मटकाती भर्ती है उसमें तो उंगलियाँ सीमा की आंखों कि और सीधे किया और बोला नहीं आंखे मटकाती थी ना जीजा के साथ ले ले फिर इनका ये आज काम तमाम कर देता हूँ । वो उँगलियाँ सीमा की आंखों के बिल्कुल नजदीक ले गया । सीमा चीखने ही लगी थी कि आलोक ने अपना हाथ उसके ऊपर रख दिया । कुछ देर दवाई रखा । बोला ये जो गजरा लगाकर रखते है ना? पंजाबियों की तरह इसका इलाज यही है कि तेरी आंखें निकाल दो । ऍम बताओ अब लगाएगी काजल बोल अब लगाएगी फिर क्या बात है । मम्मी ने दरवाजा खटखटाकर पूछा । सीमा से कुछ बोला ना गया । अलग बोला कुछ नहीं हुआ जहाँ जाकर बढ जाता है । कैसे जाऊँ बात बता क्या है? सीमा पता बेटा क्या हुआ है? मम्मी फिर बोली सीमा ने दरवाजा खोला और मम्मी स्टे बढ गई । कुछ देर तक सिसकियां भरती रही । मम्मी उसकी पीठ पर हाथ फेरती रही । उसने पूछा मारा तुझे सीमा ने नाम सिलसिला पुलिस कहते हैं जीजा के साथ ना अच्छी क्यों मुझे तो पहले ही शक था । कोई बात है और जीजा के साथ नहीं ना चाहिए तो किसके साथ नाचेगी । फॅमिली के साथ मम्मी ने ऊंची आवाज में आलोक को सुनाकर कहा सीमा की पीठ सहलाते हुए बोली तो छोटा माॅब ही हो जाएगा । पता नहीं क्यों बचपन से ही शक्ति है । प्यार से वर्ष में कर से सीमा कुछ देर मम्मी के कंधे के साथ लगी रही । अगले दिन से सीमा ने काजल लगाना छोड दिया । सीमा कई दिन तक आलोक के साथ नहीं बोली थी । आलोक अपने आप को कोसता की उसने व्यर्थ भी शक क्या सीमा ऐसी वैसी नहीं यदि वो ऐसी वैसी होती तो इतना गुस्सा ना कर दी । उसने सोचा भविष्य में कुछ नहीं कहूंगा । आलोक ने अपने आप से फायदा क्या आलोक वायदा को कर बैठा, पर्षद उसके अंदर से ना निकलता । सीमा जब भी बाहर जाती तो उसको लगने लगता कि वह किसी यार से मिलने गयी है । इसका हल तलाशने के लिए उसने सीमा को कह दिया कि बाहर जाते वक्त अपने संघ मम्मी या उसे लेकर जाया करे लेकिन काम पर वह कैसे साथ ले जाती? कम से वापसी के वक्त कोशिश करती की एक मिनट भी उसे देर ना हो और उस रात राॅ हुआ पडा था आलोक की कोशिश रहती की सीमा के घर पहुंचने के बाद ही वह तो अगर उन दिनों में लोग की फैक्ट्री बंद थी वो अपने जीजा किसन छत डलवाने के काम पर चला जाता । धक्कड चूर हो जाता है । उसको जल्दी ही नहीं ना जाती लेकिन सीमा के काम पर से लौटने के समय ग्यारह बजकर पंद्रह मिनट पर उसकी खुदबखुद आप खुल जाती है सीमा के घर पहुंचते ही और निश्चिंत होकर खाते भरने लगता है । मगर उसमें आलू क्या खुलने के पंद्रह मिनट बाद भी सीमा घर नहीं पहुंची थी । आलोक ने करवट बदलकर घडी की और देखा । दस मिनट ऊपर हो चुके थे । उसकी आंखे पूरी तरह खुल गयी । वोट बैठा कमरे से बाहर लिविंग रूम में चक्कर लगाया । सीमा अभी भी नहीं पहुंची थी । लोग को लगने लगा जैसे सीमा किसी दूसरे की बाहों में हूँ तो सीमा की प्रतीक्षा करता । अपने कमरे में चक्कर काटने लगा । आए सही आज करता हूँ सीधे मैं इसको तो बार बार दाँत पीसता । फिर उसके चक्कर में आया कि कहीं सीमा का एक्सीडेंट हो गया हूँ । चल अच्छा है, जांच छूटेगी । उसने सोचा आलोक की कल्पना में आया की सीमा अपने काम की पार्किंग लॉट में किसी की कार में बैठी है । इस कल्पना ने आलोक के पैरों तले अंगारे रख दिए । उसका मन किया कि अभी वहाँ जाकर सीमा को बालों से पकडकर खींच लाए । फिर उसको बाहर वाले दरवाजे के खुलने की बाहर हुई । आलोक घडी की और देखा तीस मिनट ऊपर थे । सीमा तेजी से कमरे में गए और रोहांसी आवाज में बोली हम एक्सीडेंट हुआ पडा था । अच्छा क्या कर आलोक ने सीमा को ऊपर से नीचे तक निहारा और बोला काम पर लिपस्टिक लगा कर जाना बंद कर दिया की किसी ने पहुंचती स्टार्ट मैं तो यूँ छेडता था कहकर आलोक में सीमा को अपनी बाहों में ले लिया । फिर उसको निर्वस्त्र करता उसके अंग अंग को घूरता रहा । सीमा का दिल हुआ । वह जोर जोर से चीखें पर मम्मी ना सुन ले, ये सोच कर कुछ देर चुप चाप पडी रही । फिर दबी आवाज में बोली बाहर से आई अपनी बहनों को भी ऐसे ही देखता था । तेरी तो बाॅन्ड कहते आलोक ने हाथ उठा देख ले देखने मारकर बताती हूँ मम्मी को सीमा बोली । आलोक ने बहुत तीसरे में गाली दी और एक तरफ हो गया सीमा लेकिन रूम में पीछे सोफे पर जा गिरी मम्मी वहीं आ गई । उसने पूछा क्या बात है? फिर कुछ कहा था उसने? सीमा ने सोचा कि क्या बताएँ तो चुप रही । मैं फिर बोली यहाँ कर ले जा । क्या कहता है । कहता है लेट आई, शक करता है । सीमा ने बताया पता नहीं कब ऍम और पांच महीनों में घर में बच्चा जाएगा । शर्म नहीं आती ऐसी हालत में पता नहीं क्या? ऍम तो मतलब बेटी अंदर जा कर लेता हूँ । मम्मी ने कहा ठहरकर चले जाएंगे । मम्मी आफिॅस मम्मी । कुछ देर बैठी सीमा के बालों में हाथ फेरती रही, फिर चलेंगे । पर्स ईमानदर नहीं । वहीं लिट्टी लिट्टी नीर बहाती रही । आलोक अपने बिस्तर में लेता करवटें बदलता रहा । सीमा को भी पता चल गया । इसीलिए बहनों की बात करती है । आलोक अपनी बहन पारखी जुटी । उसको लगा जिससे कई लडकों ने टेक कहा हूँ । फिर उसके कानों में गजक कटक होने लगी । आलोक ने झटके के साथ करोड बदली । उसको लगा जैसे किसी ने दर्ज चूका हूँ हैं । कल कहकर आलोक ने फिर करवट बदली । उसको दृश्य याद हो गया जब दर्शकों को बहन की गाली देकर भागा था । दर्शकों ने अपने साथियों के साथ खेलते आलोक को गजक खाने को दी थी । पर आलोक ने अपने से उम्र में कई साल बडे दर्शन का हाथ झटकते हुए कहा था बॅाल अपनी बहन को दे जाकर और वहाँ से दौड पडा था । जब वापस अपने साथियों के बीच आया तो किसी ऊंची आवाज में गजब कहा था और बाकी के यार हंस पडे थे । आलोक तुरंत घर लौट गया था और रोटी खा रही अपनी बहन की कटोरी में ठोकर मारी थी । अंदर जाकर रोने लगा था । याद कर आलोक दांत भेजे । उसने करवट बदली । उसको लगा जैसे कोई कह रहा हूँ अलग की तो मौज है । दर्शन देता है कि घर में देते हैं । एक अन्य दृश्य आलोक को याद आया । पूरा कह रहा था गुरदासमान की नई टेप सुनी है । वह अगर मेरे पास नहीं है तो आप लोग से ले ले कहकर भूरा भी ठीक ही करके हंसा था । आलोक की ठीक ही कर हस्ते पूरे का चेहरा वैसे का वैसा दिखाई दिया । आलोक की मुखिया बच गए तो ना मार कर बात करते थे उसने दम पीछे फिर उसके चित्र में आया की सीमा भी ताना मारकर बात करती है । इसे भी लग गया पता उसके अंदर आत्मा छोटी ही वो उठा और लिविंग रूम में पडी सीमा के ऊपर से रजाई खींच कर उसे बालों से पकड लिया । अब मारता ना तो और करता हूँ सीधी समझ कर रखा मुझे बोलते हैं उसने सीमा को दो तीन हाथ चलती रहे क्या भूत सवार हो गया तेरे पर कहती मम्मी अंदर से थोडी आई । उसने आकर पीछे सालों को कोहली भर ले तू ही है ऐसी अभी से भी करेगी खराब कहते हुए आलोक ने मम्मी की बाहों से छूटने की कोशिश की पर मम्मी ने उसे नहीं छोडा मैं करती हूँ और इसको कॉल चीखें भर्ती सीमा ने कहा बता रहे हैं बाहर जाता है की करे फोन मम्मी ने कहा कर लो जिसको करना है फोन इससे तो मर ही अच्छा । आलोक ने कहा लेकिन उसमें अपने को मम्मी की बहुत से छुडाने की कोशिश छोड दी । फिर अपने कमरे में चला गया । मम्मी सीमा को अपने कमरे में ले गई । मतलब बेटी जब बच्चा आ गया तो छोड देगा । शब्द का नाम मम्मी इस तरह जिला से देती रही और सीमा सुनती रही । उसके अपने मन में सोचा कि काम पर गया आलोक लौटे ही ना । आलोक सच में ही घर नहीं लौटा था । वो अपने जीजा के साथ छत डलवाने के काम पर गया था । जीजा जी की वैन में बैठ उसने यू आंखे मूंद ली । मानो नहीं जा रही हूँ । उसका किसी के साथ भी बात करने का दिल नहीं करता था । दिमाग सुन्न हुआ पडा था । काम पर जाकर भी उसने बिना किसी से आप मिले कमर से बेल्ट बांधी । हथौडी फंसाई पाउच में खेले डाली और मकान की छत पर चढ गया । छत के ऊपरी हिस्से में सिंगल लगाते हुए वो काम खींचता रहा । नौ बजे उसे अपने बहन की आवाज सुनाई दी । आज आलोक चाय पी ले । आलोक ने दम पीछे उसे गांव वाला सीन फिर से याद आया । आलोक को टेपरिकॉर्डर सुनती अपनी बहन वैसी ही दिखाई थी जैसे वो कुंवारेपन में गांव में बैठी होती थी । आलोक के घर तो दर्शन देते लेकर जाता है । लोगों को लगा जैसे किसी ने बहुत पांच से कहा हो पर आप लोग को पता ना चला । तब उसको पाँच फिसल गया था और तब वो लडका हुआ नीचे आ गिरा था । उसे रीड की हड्डी और दिमाग में चोट लगी थी । कुछ हफ्ते उसको अस्पताल में रखा गया । डॉक्टरों के कहे अनुसार कोई करिश्मा है उसको ठीक कर सकता था । ऐसे तो पता नहीं कब तक पडा रहेगा । कुछ नहीं कहा जा सकता है । फिर उसको एक्सीडेंट केयर वाले होम केयर में पहुंचा दिया गया था । सीमा को जब भी वो याद आता कि उसने एक्सीडेंट वाले दिन मन ही मन पति की कबीर घर लौटने की अरदास की थी तो उसके अंदर गोनहा भावना भारी हो जाती । तो कई बार आपने सच्चे पातशाह का उलाहना भी दे चुकी थी । उसने ये कौन सा दल से कहा था ये तो बेहद दुखी होने पर उसके मन से निकल गया था । ऐसी उसकी मम्मी ने भी कहा था जिस दिन डॉक्टरों ने ॅ कहा था । घर बैठी दोनों सास बहू आंसू बहा रही थी । सीमा ने मम्मी को पहले कभी इस तरह होते नहीं देखा था । दुर्घटना वाले दिन भी नहीं मम्मी की और देख का सीमा पर फिर से गुनाह भावना भरी होने लगी तो मम्मी कि और अधिक करीब हो कर बैठे हुए बोली मम्मी शायद मैं दोषी हूं सब कुछ मेरे कारण हुआ है । ऐसा कहते हुए सीमा करो धन और अच्छा हो गया । फिर सिसकियां भरती कहने लगी कुछ एक बडी थी ऐसा सोचने की पेशवरों मेरे मन में आया कि वह घर ही ना लौटे, सीमा बिलखने लगी । मम्मी ने सीमा को अपने आगोश में ले लिया । कुछ देर बहुत साल से एक दूसरे से कसकर लिपटी आंसू बहाती रही । फिर मम्मी ने आके पहुंची और बोली तुम्हें कौन सा बेटी सच्चे दिल से कहा होगा? सफाई हुई के अंदर से खुद ही निकल गया होगा नहीं सच में मैं गुनेहगार कहती हुई सीमा करो । धन भी तेज होता था । बस मेरी बेटी मैं कौन सा तुझे नहीं जानती हूँ ना अपने आप को दोष मत दे । मम्मी ने कहा । फिर वो कुछ दिन सीमा को बहलाती रही । रात में सीमा के साथ ही लेट गई । रात में सीमा बोली हमें क्या होगा? कैसे जीवन गुजरेगा? मेरे होते तो जरा भी चिंता ना करो । सिर्फ अपने मन को थोडा कडा ऐसे ही रोधी रही तो बच्चे पर पूरा असर पडेगा । अभी मुसीबत आया जाया करती हैं । सब कुछ हो जाता है तेरे सामने ही है । आलोक जब तीन साल का था जब उसके डैडी की डेथ हुई थी । अगर मैं हिम्मत हार बैठी तो कैसे बताते जीवन सिर्फ अपने बच्चे की तरफ ध्यान नहीं । मम्मी ऐसा और भी बहुत कुछ कहती रही । कुछ देर बाद सीमा बोली हूँ हूँ नहीं मेरे साथ लेता हूँ मम्मी उसके साथ सोने लग बडी । सीमा को मम्मी की छांव तले नींद आ जाती । रात में वो मम्मी के और करीब होती रहती है और एक रात तो मम्मी से छिपती गई । मुझे बचाओ बचाओ कहती हूँ । वो मम्मी से कस करने पडती रही है क्या बात है बेटी पुट पानी पीले छत बुरा सपना आया होगा । मम्मी ने कहा पूरी तरह हाँ रही । सीमा उठकर बैठी और कुछ देर वैसे ही बैठी रही । फिर मम्मी के गले लगकर होने लगी । मम्मी कुछ देर तक उसकी पीठ सहलाती रही । फिर पानी लाकर मिला । बोली डर भी सपने में मुझे लगा जैसे किसी भी आंखों की तरफ सीधी करके आंखे निकालने लगे हो और साथ ही साथ चीख चीख कर कह रहे थे बताओ पता लगाएगी । काजल सीमा ने बताया मम्मी सीमा के देशों में हाथ फिरने लगी । बोली जान मेरी बेटी खुश रहा कर बच्चे पर असर पडता है । अब तो सिर्फ कुछ दिनों की बात है संभाल अपने आप को अगर खुद ही डरती रही तो बच्चे को कैसे संभालेगी? फिर कुछ देर बाद मम्मी बोली जब तक बच्चा नहीं होता, केयर होम कम ही जाएगा । बाहर कहीं घूम आया कर तेल पहल जाता है लेकिन सीमा कहीं अकेली नहीं जाती थी । नूर के जन्म के बाद एक दिन मम्मी ने कहा तो दिन भर घर में ही बैठी रहती है । जब किसी स्टोर का चक्कर लगा कब से कह रही हूँ कि नूर के लिए कपडे लेकर आने हैं । आज साथ चलो । मम्मा सीमा ने कहा मुझे कहाँ कहाँ लेकर जाएगी? अकेली जाना सीख सीमा गिलफोर्ड मॉल में चली गई । सीनियर्स स्टोर के बच्चों वाले हिस्से में उसका ध्यान एक कंबल पर अटक गया । सीमा ने कीमत देखकर कम्बल वापस रख दिया । फिर उठाकर उस पर हाथ फेरने लगी । नरम नरम कम्बल को उसका रखने को दिल नहीं कर रहा था । एक बार फिर कीमत देखी और रख कर आगे बढ गई । सीमा को आलोक ख्याल हुआ आया । उसने सोचा कि आलोक हुआ तो वह स्टोर में से निकलने से पहले कम्बल उठा लेता और बिल का भुगतान करने के लिए काउंटर पर रख देता । कुछ ही वक्त बार सीमा को आलोक का दूसरा रूप याद हुआ और उसको लगा कि जब घर लौटेंगी तो लोग उससे कहेगा । ऍफआईआर के पास इतना वक्त लगा कराई है । सीमा के अंदर उतावली मचने लगी । कुछ जल्दी से कार तक गए । घर पहुंचकर इसका मनिस्टर हुआ । इतनी जल्दी लौट आई । अम्मी ने पूछा, मुझे लगा बहुत देर हो गई । इतना जल्दी मत मचाया कर स्टोर में गए तो टाइम लगा ही करता है । फिर सीमा के चेहरे की और देखकर मम्मी बोली बेटी ऐसे ही चली गई थी । स्टोर बाहर जाते वक्त तो कर लिया कर थोडा बहुत नहीं कर अब जी नहीं करता हूँ । सीमा बोली कुछ नहीं होता । कल की लडकी अभी कर लिया कर थोडा बहुत । लेकिन सीमा ने मेकप नहीं किया था और उस दिन जब केयर होम में नवदीप के साथ बोल साझे करके आई थी । वो कुछ देर शीशे के सामने खडी रही । उसको अपनी आंखों के छोटा होने का दुःखपुर है । जब उठा सीमा ने अलमारी के खाने खंगाले और उसको अपनी काजल की डिब्बी ना मिली । उसमें हलकी से लिपस्टिक लगाई और अपने आप को आइने मैंने हारती रहे हैं । उसे नवदीप की मुस्कराहट वैसी ही दिखाई दी । सीमा के होठों पर मुस्कुराहट आ गई । अगले रोज तो मम्मी को केयर होम छोडने तो नूर को गोदी में उठाकर अंदर गई । आम तौर पर वो बाहर से ही लौट जाती थी । अंदर जाकर उसने नवदीप की माँ के कमरे की और देखा । वहाँ नवदीप नहीं था । सीमा के अंदर जैसे कुछ टूट गया हो । शाम को भी सीमा ने मम्मी को बाहर आकर खडे होने के लिए नहीं कहा । अंदर गई । नवदीप अपनी माँ के पास बैठा था सीमा की और देखो उसका तुरंत बाहर आकर बोला अभी को हाँ जी, आप सीमा के मुझे बडी कठिनाई से निकला । नवदीप ने नूर की गाल पर हाथ लगाकर कहा कितना प्यारा बच्चा है? सीमा को लगा जैसे उसके हाथ कहाँ रहे हो । उसका चेहरा सूख गया था तो वहाँ से तेजी के साथ अलोक वाले कमरे में चली गई । सीमा ने आलोक की तरफ देखा वो बिना आंखे छक्के देख रहा था । सीमा एकदम अपनी नजरें दूसरी तरफ कर लेंगे । सीमाओं को उसकी नजरों खुलती हुई लगी । जिस तरफ लोग का चेहरा था वो उससे दूसरी तरफ जाकर उसका बिस्तर साफ करने लगी । फिर अपने आप को संभालने की कोशिश करती हुई आलोक के पास नूर को ले जाकर बोली कि कौन है नूर के साथ खेल हो गई । आप कहाँ हूँ किसी को नहीं पहचानता । बेटी मम्मी ने आह भरकर कहा लूर को मम्मी की गोद में बिठाकर सीमा बोली ले मम्मी के पास जा । मैं जरा नर्सिंग स्टेशन तक हो करती हूँ । रह में नवदीप उसको फिर मिला तो फिर बोला मैं कल इसी वक्त आपकी सामने वाली कॉफी शॉप पर वेट करूंगा । सीमा ने एक बार फिर उसकी तरफ देखा और तेज कदमों के साथ वापस आलोक के कमरे में घुसती हुई बोली चले मामी आलोक से बिना मिले वापस लौट पडी । मम्मी से आगे आगे चलकर उपकार में जा बैठी । उसको लगा जैसे वो कोई चोरी कर रही हो । यदि किसी ने देख लिया नजदीक के साथ तो लोग क्या कहेंगे? उसके मन में आया नहीं, मैं नहीं जाउंगी । उसने सोचा इस सोच के साथ उसको लगा जैसे उसके अंदर कुछ टूट गया हो । नवदीप की मुस्कराहट उसको दिखाई दी । उसका मन किया कि नवदीप से मिलने जाए । इसी कशमकश में वो घर पहुंच गयी । खाना खाते वक्त भी वैसी खींचतान में रही । तू कैसे गुमसुम ऐसी हो गयी? मम्मी ने कहा कुछ नहीं मम्मी सिर में दर्द है क्या कर सीमा अपने कमरे में चली गई । उसने नूर को बिस्तर पर लिटाया और कपडे बदलने वर्षो में पहुँच गयी । शीशे में उसको अपनी आंखे वीरान लगी । उसने गहरा निःश्वास भरकर अपनी आंखें शीशे पर से हटा ली और बत्ती बजाकर नूर के साथ लेट गई । नूर को अपने बदन के साथ कस लिया । कुछ देर अंधेरे में ही उसकी तरफ देखती रही । उसको फिर नवदीप का मुस्कुराता चेहरा दिखाई दिया । उसके दिमाग में आया कि वह नूर और नवदीप को लेकर कहीं दूर चली जाए जहाँ उसको कोई नहीं जानता हूँ । फिर उसके दिमाग में आया कि लोग क्या कहेंगे कि पति बीमार पडा है और पत्नी अपनी यार के साथ दाग गए । इस विचार के आते ही उसे अपने आप पर शर्म महसूस हुई । नूर बडा होकर क्या सोचेगा, उससे आगे ना सोच सके । उसने इस विचार को दिमाग से झटकने के लिए करवट बदली । फिर उसके दिमाग में आया तो फॅमिली उस दिन की प्रतीक्षा नहीं की । कब आलोक मरे और एकदम उसके मम्मी उसकी आंखों के सामने आ गई । सीमा को लगा मानो वो कह रही हूँ हाय री, अपने सुख के पीछे मुझे जीते जी मार रही है । एक ही तो मेरा बेटा है । सीमा ने छठ चाहते हो, कितनी खुदगर्ज हो गई हूँ । मैं हाॅट सोचेंगे । मेरे बारे में वोट कर वाशरूम में चली गई । मैं बोली क्या? बात सीमा सिर दर्द कम नहीं हुआ । ज्यादा दुखता है तो मैं दबा दूँ । मम्मी के शब्द सुनकर सीमा को अपना आप और अधिक गुनेहगार लगा । उसने सोचा मम्मी मेरा कितना ख्याल रखती हूँ और मैं तो मम्मी के कमरे में गई । मम्मी उठ बैठी । सीमा मम्मी के बैठ पर बैठ गई और सुबह नहीं लगी । मम्मी ने उसको बाहों में भर लिया । बोली ज्यादा तो बेटा सीमा से कुछ बुलाना गया । मम्मी फिर बोली क्या दुखता है सर दे रहा है, कुछ नहीं दुखता । माँ बस जी सर नहीं लगता क्या कर सकते हैं? मिट्टी अपने आप को संभालना तो पडेगा । पता नहीं कब ठीक होंगे । सीमा बोली देख तो रहा है क्या ठीक होगा? मम्मी ने वहाँ भरकर कहा । फिर मम्मी सारी उम्र बस यही निकल जाएगी । सीमा रोते हुए कहा । मम्मी ने उसकी पीठ पर हाथ फेरा । बोली भी कई बार दिल में आया है । देखिए अभी उम्र क्या है? सारी उम्र पडी है आगे मम्मी वो नवदीप है ना, पता नहीं मुझे कहती हुई सीमा रुक गई । फिर बोली वो वो मिलने के लिए कह रहा था । हम भी कुछ सीमा की और देखती रही । फिर बोली आपने तेरह दिन क्या कहता है? सीमा ने मम्मी की तरफ देखा । मम्मी बोली निकालेगी सारी उम्र इस तरह सीवर फिर सोच में पड गई । सोचती रही अंदर ही अंदर घूमती रही । आखिर अपने आप को उसने नवदीप से मिलने जाने के लिए तैयार कर ही लिया । अगले दिन धडकते दिल के साथ सीमा कॉफी शौक नहीं गई । अंदर घुसते उसकी निगाहें कोने में बैठे नवदीप पर पडी उसे अपना श्री झूठा लगा । उसकी टांगे काफी नवदीप से नजरे चुराकर तेज कदमो से शौक से बाहर आ गई । उसको लगा मानव आलोक क्या क्या उसका पीछा कर रही हूँ ।

परछाइयाँ -08

परछाइयां चीज बडी आइए ऍम किसी दूसरे की जरूरत ही नहीं बंदा खुद ही खेलता रहेगा । मैं अभी अभी सचिन की माँ के साथ टेनिस खेल का रहता हूँ । मन खुश हो गया । पहले उसकी जली भुनी शक्ल बनाई उसी तरह का पकोडे जैसा नाथ लगाया । उसके चुंधिया आंखे बनाकर खूब काजल लगा दिया तो वही जैसा रंग और ऊपर से लाल सुर्ख लिपस्टिक लगा दी । उसका नाम रखा डायन । उसको निनटेंडो में सुरक्षित कर लिया । जब भी कभी उस पर दिल को कुछ हुआ करेगा उसके साथ खेल लिया करुंगा अब भी टेनिस खेलते हुए खूब दौडाया उसको अपने आप ही न जाने कैसे इतनी फुर्ती से आगे मेरी बाहों में रिमोट घुमाने के लिए उसको हफ्ते लग गया था । गई । अब ॅ को अपने पुत्र अर्जुन को देने को जी नहीं करता । कभी सोचता हूँ की उसको आॅटो दही हूँ, उसका जनधन है । अगले भी मुझे डर है कि उसके मामा मुझसे मिलने नहीं देंगे । कई बार सोचा है कि कभी बच्चों को कोई गिफ्ट वगैरह ही देता हूँ । अखिल बात हूँ पर कभी कुछ पास में बचता ही नहीं । ऍम खेल भी मैं सोच कर उसके लिए नहीं लाया । काम पर एक चोर आया था बेचने उच्चार उठाये घूमता था एक सौ डॉलर मांगता था पैसे कहते हैं कि तीन सौ में आती है मेरे साथ वाले बन्दों ने अपने बच्चों के लिए भी ले ली । मुझे भी कहने लगी कि मैं ये खरीद लूँ और भी कहे की बच्ची हुई को उठाए । वो इधर उधर घूमता भरेगा । बोला पचास में दे दूंगा आखिरी भी मैं पता नहीं किस में था । मैंने भी ले ली दिल में आया की चलो अर्जुन को दे दूंगा । अकेला वही है जो मेरे साथ महो जताता है । घर आकर वैसे की वैसे रखती दूसरे दिन काम पर मेरे साथ वाले दिन भर इस खेल की तारीख में ही करते रहे । घर लौटकर मैंने भी डिब्बा खोलकर टीवी के साथ जोड दिया । मुझे खेल बढिया लगा । बच्चों को तो भी अच्छी लगेगी । बडो का भी दिल बहला देती है । खेल का खेल और कसरत की कसरत रिमोट घुमाते और साथ साथ उछलता आदमी पसीने पसीने हो जाता है । डॉक्टर भी कहता था की कसरत किया कर कहता था तो मैं एडिक्शन है । मैं फाइल में अभी रिकॉर्ड नहीं करता पर तो में ध्यान दूसरे कामों में लगना चाहिए और कसरत करनी चाहिए । नहीं तो तुम ॅ के पास जाना पडेगा और उसकी फीस बहुत होती है । नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं । मैंने तुरंत जवाब दिया था । अब कई बार लगता है कि डॉक्टर की बात ठीक है बल्कि लगता है मुझे कोई बीमारी चिपटी हुई है मगर इससे छुटकारा नहीं मिलता । पहले ऐसा नहीं लगता था । तब तो ऐसा लगता था कि ईश्वर ने मुझे ताकतें नहीं दी है । टैक्सी चलाते हुए जब भी किसी उकसाऊ कपडों वाली सवारी मिलती, दिल को कुछ कुछ होने लगता और जिस दिन पत्नी के साथ झगडा हुआ होता है, उस दिन मन करता हूँ की कोई मिल ही जायेगा तो आम तौर पर गुस्सा ही रहती है । यदि मुझे कोई साथ मिल जाता तो मैं मनी मान घरवाली को कहता हूँ । जहाँ मार फिर कभी सोचता हूँ कि कहीं किसी बुरी हालत में ना फस जाऊंगा । कई बार कुछ हमारी गुस्सा हो जाती है । मैं झट माफी मांग कर उसे शाम कर देता हूँ और सोचता है आज के बाद ऐसे किसी से नहीं पूछूँगा । लेकिन जब कभी ऐसा अवसर आ जाता, उस सब कुछ भूल जाता सिवाय और ऍम एक दिन स्वच्छ मुझे पहुँच गया । एक सवारी के साथ उसके घर चला गया । ऊपर से उसका बॉयफ्रेंड आ गया तो अलग खुलता मार दिया । घर भी टूट गया । पहले छिप छिप कर कर लेता था । सब कुछ कोशिश भी की की बात घर तक ना पहुंचे । लेकिन पत्नी को पता चल ही गया और उसने मुझे खडे पैर घर से निकल जाने को कहा । सचिन साल भर का था सोचा की जो घर बर्बाद करता है मैंने भी गलती मान ली । कहा भी कि टैक्सी चलाने छोड देता हूँ मगर वो नहीं मानी । उसको शक तो पहले भी रहता था मेरे पास । खासकर तब जब उसकी छोटी भाभी के साथ बात करता तो गुस्सा हो जाती है । उसको यही समझे रहता कि हमारा आपस में कोई रहता है । इतनी आसानी से मुझे ससुराल वाले घर में ना जाने देती । जिस दिन मेरी बडी साली के लडके की पार्टी थी, उस दिन मैं अपनी उस साल महज के साथ नाच रहे लगा यूइन आज नाश्ते दूसरे के करीब हो गए । अभी पत्नी ने मुझे वहाँ से पकडकर एक तरफ खींच लिया । बोली सलहज बहनों जैसी होती है । लोगों को क्या तमाशा दिखाना है । घर पहुंचकर फिर बिफर गई कि मैंने उसकी पार्टी खराब कर दिया । मैंने बहुत सफाई देने का यत्न किया और उसने रोना धोना बंदी नहीं । क्या सच बात है मुझे मेरी वह सलहज अच्छी लगती थी जब मुस्कराती मुझे अपनी भाभी जैसी लगती है । चलो घर तो एक दिन आगे पीछे टूटना ही था । आदमी कब तक सही जाए? नुक्ताचीनी कनाडा क्या बुला लिया कि बस समझने लगी कि मोल ही खरीद दिया । एक दिन तो मन हुआ की घर से ही भाग जाऊँ । उस दिन मेरे एक फ्रेंड का फोन आ गया तो इंडिया से कुछ दिन पहले आया था । शाम के करीब छह बजे का वक्त था । बोला कि वह भी आ रहा है । किसी को संग लेकर मेरे फोन रखते ही पत्नी तुरंत खाना बनाने के लिए तो बोली । उन के आने से पहले रोटी खा लें । उनके आने पर चाय बना देगी । पर वो गुरु आधे घंटे में पहुँच गया । ब्रिज खबरों की तरह मिला । वो चाहे पीने वाला कहा था बैठ नहीं बोला । हुई हालचाल पूछता रहेगा कि कुछ पिलाएगा भी तभी खुलकर हाल चाल बताऊंगा था । उनका पत्नि झट से रसोई से बोली बस आ गई चाहे वीरजी लोग ये चाय पीने का वक्त भावी दोस्त मैं जीता हुआ रसोई जैसे बोटल लेने चला गया । मेरे हाथ से वो बोतल पकडकर बोली कल काम पर नहीं जाना गया । अब फिर चाहे कौन पिएगा, मैं उससे बोतल लेकर लिविंग रूम में जाता था, वो भी पीछे पीछे चाहे की ट्रे उठाया गई ठाणे से ट्रेन में इस पर पटकी और अपने कमरे में जा पडी । उस दिन मेरा मन करा की बडे भाई की तरह लाठी उठालो धूम दूसरे बिना कोई परवाह किए । लेकिन मैंने अपने आप को रोक लिया । मां कभी बोली नहीं थी । बापू के आगे ना कभी बडी भाविया बोली थी ये दब का तो क्या झेलना था । उल्टे खुद बात बात में नुक्ताचीनी करती । उसके बाद मैंने किसी दोस्त को कभी घर नहीं बडा । दोस्त तो मेरे बहुत थे पर ज्यादा भी नहीं । बचपन से ही मैं अपने आप में मस्त रहता । मेरी भाभी भी कहा करती कि मैं लडकों के संग ज्यादा न गुरु में लोग नहीं किसी को कुछ बताऊँ । इस तरह से वो मेरी सगी भाव भी नहीं थे । पर थी सबको से भी बढकर हमारी गली में ही रहती थी । जब मैं स्कूल से लौट था तो मुझे इशारे से अपने घर बुला लेती तो मुझे भी बहुत अच्छी लगती है । फिर जब बडा हुआ उस की बहुत याद आने लगी । सोचता था कि वे वहाँ के बाद उसके सपने देखने की जरूरत ही नहीं पडेगी । पर पत्नी का व्यवहार देखकर बल्कि वह ज्यादा याद आने लगी । अपनी ने तो विभाग के पहले दिनों में ही एक दीवार खडी कर दी । होली बिस्तर में जाने से पहले ब्रुश क्या कर जैसे वो करती है । मुझे लगता है कि वह नखरे करती है । मैंने कहा भी एक दिन लोगों की औरते तो घर वालों को छाती से लगाकर रखती है और तू दूर भक्ति प्रत्युत्तर में वो बोली तू जो मेरी केयर करता है वो भी दिख रहा है । मुझे पता है स्माइल से मेरा मूड ऑफ हो जाता है । दूसरे का इतना तो ख्याल रखना चाहिए । मैं तब ये सोचा करता हूँ कि इतने नखरे भी कौन झेले वो भी उसकी जिसकी शक्ति मैं सूरत कनाडा में ना होती तो इंडिया में ऐसी को गोबर कूडा फेंकने पर बिना रखते हैं आपका ऍम में कहीं तो करा हूँ । फिर उसे गोबर पूरे सब भर कर उसके सर पर रखकर देखेगी कैसी लगती है । लेकिन टोकरा कहाँ से होगा? गोरे लोगों के खेल ही अधिकतर क्यू इस बात से गोरों का कोई मुकाबला नहीं कर सकता । हर बात को खेल बना लेते हैं । फिर भी बात नहीं आती । खोल कर खेलते हैं और अंग्रेज स्त्रियाँ जरा नखरे नहीं करती बीस बार पबों में से बाहर लेकर आया हूँ । कभी किसी को मेरे मुंह से कोई स्माल नहीं आएगी । जब किसी पब में से सात में मिलता तो मैं सडकों पर काम करती और तो से भी भावी तलाशता मेरा मन करता है कि वह मुझे भावी की तरह जो मैं अपने बदन से कोस्टर चिपटाए जैसा मैं कहता वैसा किए जाती है । मगर एक नए वैसा नहीं । क्या बोली पर आए आदमियों को नहीं चूमती । मुझे लगा नखरे कर रही है । इतना खर्चा किया मैंने ऊबकर जबरदस्ती कर दी और वो जबरदस्ती महंगी पड गई । घंटे भर में ही दो लोगों को लेकर आती वो साले तो खून से मार गए और साथ ही साथ टीवी और जो दूसरा सामान पडा था, उठा कर ले गए । उस दिन तो मैंने कानून को हाथ लगा लिया या अब नहीं पढना इनके चक्करों में मेरे दिल में आया तू इधर उधर मुंह हारने से तो भावी कोई खोज मैं इंडिया चला गया । जब मैं दसवीं में था तभी उसके घर वाले की हमारे गांव से कई दूसरी जगह बदली हो गई थी । मुझे भावी का कोई अता पता ना मिला । हारकर मैंने दूसरी शादी कर ली । मुझे लगा कि मेरे दिन फिर गए । साल भर भावी की बिल्कुल याद नहीं आई । मेरे ख्यालों में मेरी घर वाली शक्ल घूमती रहती । मन करता रहता कि कब काम से छुट्टी हो और कब घर पहुंच । घर पहुंचने पर वो मुझे कसकर बाहों में भर लेती । मनोज दिनभर की बेसब्री हो, मेरे इर्द गिर्द घूमती मेरी हर इच्छा का ख्याल रखती हूँ । मैं खुश हुआ रहता है । कभी लौट है वो दिन दादा और मेरी किस्मत । इतनी अच्छी कहा । एक साल बाद ससुराल आ गयी । अनीता का जन्म हो गया । काम से लौट था तो घरवाली यहाँ तो अनीता की देख रेख में होती है । ये अपने किसी भाई को काम पर छोडने गई होती है या फिर दूसरे को लेने गई होती है । शक होता हूँ कि भाइयों को छोडने लाने के बहाने कहीं बाहर ही ना किसी से मिलने जाती हूँ । मुझे फिर भी की याद आने लगी । उसको मैं इधर उधर तलाशता घूमता और ये तलाश दिनों दिन बढती गई और साथ ही घर में कलेश । एक दिन मेरी घरवाली मेरी छाती से लगकर रो पडी । बोली क्या हो गया तो मैं तुम पहले वाले नहीं रह गए । ऋतु कौनसा पहले वाली रही है सारा दिन भाइयों के काम में फिर की बनी पडती है मेरी तुझे कोई चिंता नहीं । मैंने झट से जवाब दे दिया तो मैं तो यही लगता रहता है तो हमारी ना फिक्र करूंगी तो किसकी करूंगी? भाइयों को अभी इधर बुलाया है तो किसी किनारे तो लगाना । ये है ना अपने आप बसों पर जाएं । वो कौन सा बच्चे हैं यहाँ बना लिए और ये क्या काम है? अपने आप रहे हैं, अलग कर देते हैं । ठीक है अगर तुम कहो तो अलग कर देते हैं । मुझे अच्छी लगी । मुझे लगा कि वो मेरा बहुत ख्याल रखती है । ससुराल वाले अलग हो गए । अर्जुन का जन्म हो गया । मुझे फिर लगने लगा तो मेरे से दूर दूर रहती है । मुझे उस पर शक होने लगा । मुझे अपने अंदर खाली खाली लगता और मैं खालीपन को भरने के लिए बाहर सडकों पर चक्कर लगता घरवाली रोती । वो कहती कि मैं घर की तरफ ध्यान नहीं देता । वो प्रेम जताती मैं नहीं जाता हूँ । मुझे अपने शक निर्मूल लगते । मैं अपने आप को लाना दे देता हूँ । मैंने अपनी जेब में डॉलर रखने बंद कर दिए । टैक्सी चलाने छोडकर ट्रक चलाने लगा । सोचा कि यदि जेब में कुछ होगा ही नहीं तो कंट्रोल करना आसान होगा । मैंने सोच लिया कि भविष्य में कितना भी दिल डोले पर बाहर अंदर नहीं जाऊंगा । लेकिन अपने आप पर नियंत्रण रखना इतना सरल कहाँ होता है? एक दिन सडक पर अंगूठा उठाए खडी लडकी को देख कर पता ही नहीं चला कि कब मेरे से ट्रक के ब्रेक लग गए । वो ट्रक की तरफ आ गयी । उसकी मुस्कान में मेरे होश उडा दिए । ये भी खयाल न रहा कि मेरी जेब में तो पैसा भी नहीं फॅार आया तो उसे टरका दिया और ट्रक आगे बढा लिया । पर ध्यान उसी दे रहा है । मन हुआ कि बैंक में से कुछ डॉलर निकल वाली हूँ । मैंने ट्रक बोल लिया लेकिन वो तो जा चुकी थी । फिर से बुझ गया । मैं घर लौट आया । घर वाले घर पर रही थी । मेरा अंतर क्रोध में उबलने लगा तो बाद में आया कि वह जरूर किसी से मिलने गयी होगी । मेरे दिमाग में घूमने लगा कि मैं अपने आप को इतना कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा हूँ और वो पता नहीं किस के साथ घूमती फिरती मैंने दो तीन पैक दारू के अंदर फेंके । सोचा क्या जूतियों से सच बाहर निकलवाकर रहूँगा । दो घंटे बर्बाद आई उसके घर में ही गुस्से । मैंने कहा किधर से आ रही है । घूम कर राशि लेने गई थी । ग्रॉसरी का तो बहाना है, नहीं होगी । किसी से मिलने था । दो बच्चों को गोद में उठाकर में इश्क लडाने गई थी । उसकी बात सुनकर मुझे अच्छा गया । वो ग्रॉसरी वहीं पटक होने लगी । बच्चे होने लगी । रिया मुझे आपसे घटना हो गई । मैंने और दारू पी ली । फिर मैं उसको बहलाने लगा । पहला तो ये बहलाते खुद रोने लगा । उसे माफी मांगने लगा । सवेरे उठ कर मैंने फिर बात शुरू की । पता नहीं मुझे क्या हो जाता है । कहकर मैंने उसकी तरफ देखा । मेरी प्लेट में ऑमलेट रखती हुई मेरी और देखने लगी । मैंने फिर कहा रिजल्ट तो मेरा खयाल नहीं रखती । तो मुझे शक होने लगता है और कैसे खयाल रखूं । जैसे पहले रखती थी । मेरे से तुरंत दूर नहीं होती थी । अब के पहले जितने हैं, हम तो बूढे हो गए । तब बच्चे नहीं थे । अब उन का भी खयाल रखना पडता है कि नहीं । मुझे उसकी बात ठीक लगेगा । लगा कि मुझे योगी बहन हो जाता है, इतना ख्याल रखती है । पर ये विचार हमेशा ना रहता हूँ और मुझे लगता कि मेरा कोई नहीं है । मान सुना सुना हो जाता । मैंने ट्रक चलाना छोड कर फिर से टैक्सी चलानी शुरू कर दी । ट्रक चलाना मुझे रुखा सा कम लगता । टैक्सी चलाते दिहाडी अच्छी निकल जाती है । मगर कई बार घर लौटने पर घर में जीना रखता । मैं सडकों पर निकल जाता । दारू पीता वो रोती । पहले तो मुझे उसका रोना दिखला देता था । दाल में आता कि अगर दो तीन है तो होती रहेगी । मैं क्या करूँ जब मेरा कोई खयाल नहीं रखता । पूछती हूँ बताऊँ बता मैं कैसे खाता हूँ और मेरी समझ में नहीं आता कि क्या करूँ । बस मुझे लगता कि उसके अंदर मेरे लिए उतना आकर्षण नहीं रहा जितना भावी में था । दिनों दिन ये बात मेरे अंदर जोर पकडती चली गई और मैं बाहर दूसरी जगहों पर भाभी की तलाश करता रहा । एक दिन किसी काम से घर से निकलने लगा तो घरवाली बोली कुछ तो शर्म करो । अरे मेरा नहीं तो लडकी का ख्याल करो । वो बडी हो रही है । मेरे पैर जस के तस चल गए तो सोच चाहा इतनी कौन सा बडी हो गई । अभी दस एक साल की तो हुई है । मैं घर से निकल गया पर अधिक दूर नहीं जा सका । बार बार बेटी के बडी होने का खयाल आने लगा । सोच कर में डर गया यदि अनीता को पता चल गया तो कैसे सामने करूंगा उसका मैं वापस घर आ गया । बार बार अपनी बेटी की तरफ ध्यान जाता । वो एकदम बडी बडी सी लगने लगी । मुझे अपनी और एक तक देखता पाकर उसने मेरी तरफ देखा । मुझे लगा जैसे उसने मेरी तरफ नफरत से देखा हूँ । मैं उसकी नजर की तापना झेल सका । उठकर शराब गिलास में डाल नहीं मन करता था कि दिमाग में कोई खयाल आए और मैं सोचता हूँ । दूसरे दिन मैंने अपने आपसे वायदा कर लिया कि बच्चों के बडे होने से पहले पहले मैं ये सबको छोड हुआ । उस दिन के टिकाव के बाद फिर एक दिन मंदिर का वो उठा और मैं सब कुछ भूलकर बाहर की ओर चल पडा । मुझे लगा जैसे बाहर कोई औरत मुझे अपनी बाहों में भरने के लिए मेरा इंतजार कर रही है । लौटने पर लगा मेरी बेटी मेरी और नफरत भरी नजरों से देख रही हूँ । मुझे अपने यहाँ पर गिनाई । मैंने फिर बोतल का ढक्कन खोला । दूसरे दिन मैंने उसे कंप्यूटर ला दिया तो खुश हो गई । लेकिन मेरे करीब फिर भी ना आई । मेरे दिल में आता है । मेरे तो बच्चे भी मुझे प्यार नहीं करते हैं और मैं और अधिक दारू पीने लगा । एक दिन मेरे दोनों साले मुझे नशे में धुत हुए पीठ गए । कहते थे उनकी बहन को दुखी करता हूँ । मुझे घर से निकाल दिया जी जी! बहुत रश याद आता है ना तो सब मेरे अंदर आपकी लपटे उठने लगती है । अब ऍम उनकी शक्ल बनाकर उनके साथ बॉक्सिंग खेलूंगा । घुसे मार मार के जवाब दे तोड दूंगा । सालों के उसी तरह जैसे बीच वॉलीबॉल खेलते समय गोरों को थोडा था । अब दो तीन दिन पहले की बात है । स्टाॅपर बीच वॉलीबॉल खेलने लगा था । एक तरफ मैं अकेला और दूसरी तरफ दो अंग्रेज स्त्रियाँ तुरंत विनीपेग याद आ गया । लगा मानो कुछ गुम हो गया हूँ । रिमोट कंट्रोल एक तरफ रखा । टीवी स्क्रीन पर अंग्रेज और ऍम होने लगी । मुझे लगा जैसे जाएंगे तब? तब अगर मुझे चैलेंज दे रही हूँ कि अब मैंने पुनः रिमोट उठा लिया । फिर उछल उछलकर इतनी बोले लगाई कि पसीने पसीने हो गया । जब उनके मूड सिर पर बहुत बस्ती तो माथा पकडकर बैठ जाती है । मुझे बहुत सुकून मिलता लगता जैसे मैंने विनीत तक वाली घटना का बदला ले लिया होगा । विनीत वालों ने क्या भी मेरे साथ बहुत बुरा था । इतनी दूर बुलाकर उल्लू बना मेरा उनमें से एक मुझे इंटरनेट पर मिली थी । बहुत कर्मा कर्मा बातें किया करती थी । वो फोटो भी दिखा दी । फोन नंबर भी दे दिया । वो ऍम नहीं चलाती थी, कह देती है उसके पास नहीं है । पर उसके चित्र और उसकी बातों ने दिल को इतना तडपाया कि मैं जैसे तैसे डॉलर इकट्ठा करके विनिपेग चला गया । होटल बुक करवा लिया । दिल में डर भी था कि अगर न मिली तो इजी धोखा हो गया तो लेकिन वो आगे जैसी फोटो में थी, उससे अलग लगी । पर मैंने ध्यान नहीं दिया । पूरी सजीधजी संकोची सी मिलते ही दिल हुआ किसका अपनी छाती से लगाकर कसकर ही हूँ । बोलो किस की हड्डियाँ कडक जाएंगे । जो खर्चा किया था उसका गम ना रहा मैंने विशेष तौर पर भ्रष्ट क्या चिंगम भी चलता रहा । हम अब में चले गए वहाँ पीते रहे । मुझे तो बिना दिए ही शुरू हो रहा था । लडकी कर सा मन करता था कि बास यूएई बैठे रहे । मैं तो सोचता था कि वह वाइन लेगी पर वो तो मेरे से भी आगे थी पीने में दो लडकियों से और मिल गयी उसकी परिचित सभी पूरी पि ऍफ मैं उनके सामने कम पीकर कमजोर नहीं होना चाहता था । मन पूरा बागों बा लगा कि मेरे जैसा काम है । ग्रुप क्यों में कहा ना, वो भी बार बार कहती रही बीस दिन है फॅस । मैं मन में योजनाएं बनाने लगा कि तीनों को कैसे संभालूंगा । फिल्मों वाले सीम दिमाग में घूमने लगे । इसी शुरूर में उनके बराबर हो गया । फिर होश ही नहीं रहा कि होटल में कैसे पहुंचा और वो किधर चली गई । दूसरे दिन फोन ही नहीं उठाया । बहुत पछताया सोचा की अब किसी पंगे में नहीं पडना पर कंट्रोल नहीं रहता है । ध्यान दूसरी तरफ जाता ही नहीं । अब तो सपने भी उलटे सीधे आने लगे हैं । सपनों में मुझे कर्मा बकरियों वाला दिखाई दिया । गांव वाले कहते एक कर्म की माँ भी बकरियां ही हैं । और घरवाली अभी कितने साल हो गए मुझे गांव को छोडे हुए पता नहीं वो किधर से आ गया । सपने में उसे बोला छेरा हूँ तो बिल्कुल मेरी तरह खेला हो गया । लेह एक बकरी तू ले जाते हैं । जब वहाँ खुली तो मन हुआ कि कुछ साथ हो । मैंने चाय पीने से पहले इंटरनेट खोल लिया । पहले याहू मैसेंजर खोला फिर ऍम इतनी सवेरे किस सहेली ने होना था ऑनलाइन मैंने प्लाॅट खोलने वहाँ भी कोई नजदीक के ना मिली । फिर मैं कॅश साइट पर चला गया । लगा कि गरमा गरम इस्तहार मुझे आमंत्रित कर रहे हूँ । मन किया कि अभी कोई मुझे बाहों में लेकर दबोच ले । पर जेब में कुछ था ही नहीं । मैं अपना आईपैड बेचा । उसमें मैंने कीर्तन हवा रखा था । पूछता था कीर्तन सुनने से शायद मन कुछ स्थिर हो जाएगा । शायद गुरुवाणी सुनकर इंटरनेट पर जाने से मन रुकेगा । जब से इंटरनेट की बुरी लत लगे है ना मन की भटकन और बढ गई है । लोग पता नहीं इंटरनेट पर क्या क्या देखते पडते हैं । मुझे तो चैट करने है । फोटो देखने की लत लगी है । मेरी कई सहेलियाँ बन गई । जब उनके साथ मैसेंजर पर बातें करता तो बन बडा बीजी रहता ऍम पर मैंने कईयों से भावी खोजने की कोशिश की है । उनका बदम देखने के लिए मन उतावला हो जाता है । ऐसे ही मैं स्कूल से लौटने पर भाभी की ओर जाने को उतावला हुआ करता था । मगर वापस लौट तो लगता जैसे कोई बात किया हूँ । दिनभर डरा डरा रहता कि यदि किसी को बताओ लाॅक पर शाम को फिर भाभी के इशारे की प्रतीक्षा रहती है । चलो तब तो मैं बच्चा था । अभी आठवीं में पडता था, लेकिन उतावलापन अभी भी जो का क्यों कई भावी की तरह बदल दिखा देती । पर वो बात ना बनती जब ऍम बंद हो जाता । मन उचाट हो जाता हूँ । अंदर अकेलापन पसर जाता है । मन करता है कि कोई अपनी छाती में न वाले पर छाती के साथ कौन दबाती है । इतनी अच्छी किस्मत कहा कोई भी नहीं आता । अकेला है । कई द्वार तो लगता कि अकेले आदमी का भी क्या जीना है । यही बात मुझे पिछले दिनों किसी ने ताना मार कर कही थी । शादी की पार्टी थी । मैंने सोच रखा था कि शराब नहीं होगा । हफ्ते भर से नहीं पी थी । गुरूद्वारे जाने लग पडा था । कीर्तन सुनने की कोशिश करता हूँ । पार्टी में भी मैं एक तरफ होकर अमृत धारियों के करीब जा बैठा था । छोटा था कि अगर शराबियों के पास बैठा तो मन कर बैठेगा । अमृत धारियों में से एक बातों बातों में बोल पडा, ऐसे आदमी का भी क्या जीना अपने परिवार का भी न हो सका । ऐसे यार और खुदगर्ज आदमी तो धरती पर बोझ है । ये लगा कि वह मुझे सुना कर कह रहा था मैं कुछ कह नहीं सकता, पर मेरा अंतर खोलने लगा । मैं उठकर द्वार की ओर चल पडा । दारू पीते लोग बातें कर रहे थे, हस रहे थे और मैं अकेला खडा दारू पीता रहा । मेरे पास आकर कोई भी खडा ना होता है । मैं अपने आप को बहुत अकेला महसूस करने लगा । मुझे लगने लगा जैसे लोग मुझ पर हस रहे हैं । मेरा मन करता था कि मेरा दिमाग सुन्न हो जाएगा । कोई खयाल आएगा । मशीन टर्न होकर ना मालूम कब घर पहुंचा । सवेरे उठा वहाँ आस पास हम उजडा उजडा सुना सुना उदास उदास सा लगा बहुत देर तक जो का तू पढा रहा है । उदासी दूर करने के लिए मैं मसाज पार्लर चला गया । उनके द्वारा प्यार जताना, मीठा बोलना और हनी केसकर बुलाना मुझे पाॅइंट करता है । वहाँ घंटा भर बिताने के दौरान मैं सब कुछ भूल गया । मगर एक घंटा तो पंख लगाकर उड गया । मेरा अंतर फिर खाली खाली हो गया । लौटते हुए में ठेके से बॉर्डर लिया पी कर फिर हो गया । अगले दिन था तो लगा कि मसाज पार्लर वाली लडकियाँ बुला रही है । वापस लौटते हुए फिर बोटल ले आया । ऐसा तीन दिन तक चलता रहा । चौथे दिन शाम को जब नींद खुली तो मेरा फिर मसाज पार्लर जाने को मन करने लगा । सुबह भी होकर आया था दारू पीकर फिर चल दिया । मगर रहा में पुलिस वाले ने रोक लिया । शराब पीकर गाडी चलाने के अपराध में उस ने मेरा चालान कर दिया । रात थाने में बितानी पडी । मेरा ड्राइविंग लाइसेंस साल भर के लिए रद्द हो गया । मैं जैसे नींद से जागा हूँ । बेसमेंट में मुझे बुला रही थी । सिंह झूठे बर्तनों से भरा पडा था । जगह जगह कपडे और गंद मंद बिखरा पडा था । पिछले तीन दिनों से मैं ये सब बिखेर रहा था । मुझे अपने आप पर ठंडा दिल में आने लगा की जिंदगी यूपी गवाली मेरे साथ के लोग क्या से क्या बन गए और मैं दुर्गंध भरी बेसमेंट में जिंदगी बर्बाद कर रहा हूँ । बिखरी पडी बॉटलों की तरफ देख मुझे पर गुस्सा आ गया । मैंने उठकर उन्हें उठाया और बाहर गार्बेज बिन में फेंक दिया । जिसमें एक शायद भरी बोतल भी थी । सोचा था अब इसे हाथ नहीं लगाऊंगा । इसी कारण सब मुझ से दूर हो गए हैं । तीन बच्चों के चेहरे आंखों के सामने घूमने लगे । बडे बेटे सचिन को तो दोबारा कभी देखा ही नहीं था । कैसा लगता होगा । फिर ख्याल आया कि बच्चों में से वो यहाँ जाए । मैंने उठकर धीरे धीरे धर धर बिखरा सामान समेटा । कोई दूसरा नया काम भी खोजना पडेगा । टैक्सी चला नहीं सकता ये नहीं चिंता और लगदी फिर नहा धोकर गुरूद्वारे चलाया । रब के आगे अरदास की रम्बा मुझे सुमति बक्ष मेरी भात कम दूर कर नए आईपैड में कीर्तन फिरसे भरवा लिया । अब उसे सुनता, नृत्य गुरूद्वारे जाता अरदास करता और जब आंखें मूंदकर बैठता है लो फिर मसाज पार्लर वालिया दिखाई देती है । कभी भावी दिखाई देती कभी खींच कर उसको कहता ऍम छोड दे मुझे किसी तरह का नहीं छोडा तो उन्हें और कभी मसाज पार्लर की और हो जाता है वापस लौट तो अपने आप को लाना दे देता है । वो कौन सा सच्चा प्यार करती हैं । डॉलर लेकर प्यार की एक्टिंग करती है पर जाए बगैर फिर भी नहीं रहा जाता । फिर सोचता हूँ अरे क्यों यूरी भटकता फिरता है दोनों वापस बच्चों के पास चला जाऊँ । अर्जुन की माँ से कहूँ देख अब कभी गर्दन नहीं जाऊंगा । फिर लगता उसके साथ रहते कौन से कुछ तब भी लगता था कोई और हो । अब तो लगता है कि नॅान का भी कोई ऐसा खेल हो कि आदमी अपनी मर्जी का साथ बना ले । फिर किसी दूसरे की जरूरत ही नहीं पडेगी । यदि कहीं ऐसे खेल की डिस मिल गई फिर मैं दूंगा ये ऍम अर्जुन को मैं मूरत जैसी और तैयार करूँ और उसका नाम अभी रखो और फिर वो मुझे अपनी छाती के साथ था । मेरे अंदर की स्वाबी धूप बता दें ।

विवाह -09

विवाह शोभा करवाने की चाह में कहीं झोपडी ना बर्बाद करा नहीं जागे ने रजाई पैरों पर से एक तरफ करते हुए कहा कुछ नहीं होता झोपडी को बहुत कुछ है हमें और कहाँ ले जाना है यही तो एक कारज करना है । रानी ने मेकप उतारते हुए कमरे में बने गुसलखाने में से ही कहा फिर भी थोडा सा हिसाब से चले तो अच्छा है । मैं कहता हूँ होटल बुक करने को रहने दें । कैलगिरी वाले बंदे की शादी यहाँ है वो उसके घर जाकर रहने लगेंगे । कितनी का परिवार बहुत ही के रह जाएगा । मामलों के बारे में पीता कहता था कि उनके घर में ठहर जाएंगे । तीन परिवार हमारे अपने घर में ठहर सकते हैं, बढिया तरीके से नहीं । बाद में लोग यही सुनाते रहते हैं । रवि की शादी के वक्त लोगों ने बहुत बातें की थी । इस बार नहीं किसी को मौका देना, तेरी इच्छा, पैसे मेहमान अपने रिश्तेदारों के यहां रहकर ज्यादा खुश होते हैं । चल सुबह करेंगे सलाह मशविरा तो सोचा नहीं तो रात भर करवटें बदलते रहोगे । नहीं नहीं तब कहाँ ठीक जाएगी । जब तक शादी नहीं होती, सबकुछ हो जाया करता है तो यूरी फित्र किए जाते हो । मुझे तो बल्कि पूरी खुशी है कि कभी दारी निपट जाएगी । बडी मुश्किल से तो लडकी को लडका पसंद है । कहती हुई रानी ने बिस्तर में घुसकर बत्ती बुझा देगी । वो जगह के के शो में अपनी उंगलियां घर आने लगी तो कुछ देर उंगलियां फिराते भरा देश हो गई । तब तक जगह दम साधे पढा रहा । रानी के सोते ही वोट कर दूसरे कमरे में चला गया । उसको पता था इसको नहीं नहीं आएगी । वो करवटें बदलता रहेगा । पुराने की नहीं टूटेगी तो खींचेगी रानी की खींच उसको डर लगता है । वो चाहता था कि किसी तरीके से मोटल वाला खर्च बचाने के लिए रानी को मानले सारी रात इसकी में बनाते ही बीत जानी थी । जिस दिन से विभाग की तारीख पक्की हुई थी उसी दिन से ही जग्य के साथ नींद रुक गई थी । तीन महीने पहले वो दोनों और उनकी बेटी रूबी जिसका विभाग होना था कपडे लगाते खरीदने इंडिया गए थे । रूबी के विभाग वाले सूट की कीमत देखकर जगह बोला एक दिन तो ये पहनना है विवाह कौनसा बार बार होता है तो मैं अपनी तंग बीच में नाडा हो तो अच्छा है । दुकान में बैठते ही रानी बोली जगह चुप हो गया । रिश्ते नातेदारों में देने वाले सूट खरीदने के अवसर पर रानी अपनी देवरानी की बहनों तक के लिए सूट खरीदने लगी तो जगे के अंदर मरोड तो ठीक और शांत रहा । रोगी बोली हूँ हम क्यों नहीं दे रहे हैं? हमने रवि के विवाह पर कुछ नहीं दिया था । किसी को बस खानापूर्ति ही की थी । लोगों के यहाँ से आए हुए हैं । वो तो लौटा नहीं । रानी ने जवाब दिया ये कपडे कौन नहीं पहने वाला? आॅस्टिन बनी होगी । फिर बोली तो मुझे नहीं पता । इन बातों का तो चुप रहे । कह कर रानी ने बात ही खत्म कर दिया । फिर उन्होंने दहेज के कपडे खरीदे । दुल्हन के साथ चलने वाली दसों लडकियों के एक रंग केसू और फेरों के वक्त बहन के साथ खडे होने वाले भाइयों के एक जैसी अटकने भी खरीदी । जग्य ने विभाग वाले कार्ड भी इंडिया से ही छपा लिए । रानी ने जगह उस पर रोकते हुए कहा था हर एक कार्ड कनाडा से छुपा लेंगे । एयरलाइन हमें इतना बोझ नहीं ले जाने देगी । जब का तुरंत बोल पडा यहाँ बहुत सस्ते पडते हैं तो यही फेक रहना तो कार्डों के बोझ के कारण कम सूट ले जा सकेगी । एक अटैची तो इन्हीं से बढ जाएगी । रानी बोली वो घबरा मत । मेरे पास स्कीम है, इसकी भी किसी अटैची में कार्ड नहीं डालता । जहाँ वायदा रहा फिर कैसे ले जायेंगे और देखती रहना । और जब इंडिया से कनाडा के लिए चले तो जगे ने सचमुच किसी अटैची में कार्ड नहीं डाले थे । कुश्ती उठाए जाने वाला कंप्यूटर बैक कारणों से भर लिया और अपनी और देख रही रूबी से बोला एयरलाइन वाले लेपटॉप तो साथ ले जाने देते ही हैं, पर ऍफ है तो इसे कौन सा किसी ने खुलवाकर देखना है कहकर जगे ने बाकी बचे कार्ड अपने बडे कोर्ट की सारी जेबों में भर रहे हैं । हालांकि मार्च महीने की गर्मी शुरू हो गई थी, पर जागे का विचार था कि वो कौन सा उसमें पहनना है । अपनी बाहों पर रखकर जहाँ तक ही ले जाना है और जहाज में बैठ कर जग्य ने राहत की सांस ली थी, उस की इसकी सफल हो गई । उसके अंदर ये डर भी था कि कहीं एयरलाइन वाले अटैचियों में से सामान निकलवाना दें । जज्ञिरे हाॅकी में एक एक किलो अधिक सामान डाला था । इस बारे में सामान जमा करवाते वक्त क्लर्क में उसे चेताया भी था, पर जागे नहीं । जैसा की पहले ही सोच रखा था । भोला समूह बनाकर बोला शायद मेरा तराजू खराब होगा । मैंने तो हर चीज में आधा के लोग ऍम डाला था । जहाज में जब उडान भरी जगह शुक्र बनाया । जहाज की अपनी ऊंचाई पर पहुंचने तक जग्य का दिमाग इंडिया में हुई भागदौड और खर्च का हिसाब लगाने में लगा रहा है । बार बार उसका दिमाग में रवि का विभाग आ जाता है जब वह सारे खर्च से बच गया था । दूसरे कमरे में बडे जल्दी को खयाल आया कि जितना खर्च शादी पर होगा उतरे में तो एक और अपार्टमेंट खरीदा जा सकता था । खर्च तो नाजायज हुए जाता है और जब के दिमाग में विभाग के सारे खर्च बारी बारी से आने लगे । उसने सोचा कि ब्राइडल शॉवर हो गई थी । उस दिन का सारा खर्चा कॉपी में दर्ज था । उसके दिल में आया की अपने कमरे में से कॉपी लाकर छोड हिसाब कर के देखे तो सही पर फिर रानी के जाग जाने के डेढ से उसने ऐसा नहीं किया । अब होटल का खर्चा हालतों में करने को पडती है, सुनती नहीं किसी की अरे मैं तो कहता रहा कि कार्डों के साथ लड्डू बांट देते हैं वरना कहती है लड्डू कौन खाता है, गुलाबजामुन देंगे । ये सब सोचते हुए जगह करवटे बदलता रहा । उस दिन जगे ने लड्डुओं के लिए रानी को राजी ना होते देखकर एक और पत्ता फेंकते हुए कहा था, अच्छा फिर सतिगुरु पनीर वालों से गुलाब जामुन की बाल्टियां जाएंगे । साठ डॉलर में आ जाएगी । तीन सौ गुलाब जामुन होते हैं उसमें और फिर लेडी संगीत वाले दिन इस्तेमाल कर लेंगे । वो कोई गुलाब जामुन होते छोटी छोटी मिनट से होते हैं । हमने बातें नहीं करवानी । रानी बोली, अच्छा तू लेडीज । इतनी खिलाकर जगजीत लेना कहकर जगह विवाह वाले कार्डों की और देखने लगा । उसके दिल में आया ढाई सौ कार्ड । घर घर बात कराओ । पहले कितना कहाँ रवि के विवाह की मौत थी । कोई झंझट नहीं । रूबी ने भी लिख दे कर कहा ये तो बहुत ज्यादा कम है । इस की जरूरत नहीं । हम ईमेल करके क्यों नहीं इनवाइट करते हैं । सभी के पास की मैं नहीं होते । जब मैंने कहा अरे जिनके पास ईमेल नहीं हैं, उन्हें कार्ड मिल कर देते हैं । जगेंद्र रानी की तरफ देखा होली ऐसे अच्छा नहीं लगता । गुलाबजामुन के डिब्बे भी तो देख कराने हैं । चल कार्डों पाॅप बैठकर कार्डों पर पाते लिखती रूबी ने पूछा ॅ ये कौन है? अपने गांव से है, जो मैंने कहा मैंने जानती हूँ । रूबी ने पूछा तो नहीं जानती बस व्यक्ति जल रानी बोली । जब चौथी बार रानी ने यही जवाब दिया तो वो भी बोली अगर मैं जानती नहीं तो हम इनवाइट कर रहे हैं । तो तुम तो तब जानते हैं जब मेरे साथ ब्याह शादियों पर जाते हैं । तब तो बिस्तरों में से निकलते नहीं थे कि हम कौन से उन्हें जानते हैं । डैडी मेरे को तो कोई ओवर टाइम छोडने को कहकर देखले मैं जानती हूँ किस किसको शगुन डाला है । वो तो वापस ले रही । जितना शगुन मिलना है उससे ज्यादा तो हम उन पर खर्च कर रहे हैं । मुझे क्या पता इन बातों का चुप करके लेकर काम खत्म कर खुद ही लिख लो कहकर रूबी उठ खडी हुई, ये काम भी खुद ही करना पडेगा । कार्डों को अपने करीब खींचते हुए जग्य ने सोचा फिर मंगनी वाले कार्डों की तरफ देखकर जगह नहीं सोचा । चलो ये तो अच्छा हुआ कि कल मेहमानों की गिनती वाला काम निपट गया । एक दिन पहले भी ऐसा ही माहौल बनने वाला था । पर रवि बात को संभाल लिया था । मशेल और रवि भी आए हुए थे । रूबी ने कहा था अब हम पूरा परिवार बैठे हैं । चलो फैसला करें कि मंगनी वाले दिन किस परिवार के कितने सदस्य बुलाने हैं । रवि और मशीन की उपस्थति में वह अंग्रेजी में ही बात करते हैं । ऍसे अच्छा नहीं लगता हूँ अगले की इच्छा है चाहे सारा परिवार आये चाहे एक जन । रानी ने कहा अरे मगर हमें मालूम हो कितने लोग आएंगे तो हम बढिया तरीके से प्रबंध कर लेंगे और कार्ड पर ऐसा भी लिखना है कि दो हफ्ते पहले हमें बता दो कि आप होगे की नहीं । रूबी ने कहा ठीक नहीं लगता रानी बोली उसमें गलत किया है । मशीन में भी हाजिरी लगवाई । इस तरह अच्छा प्रबंध हो जाता है । रवि बोला हाँ और ऐसे खाना भी बर्बाद नहीं होता है । जग्गा बोल पडा तो मैं तो बस चार पैसों की फिक्र है कि कहीं से बच जाए । रानी का जवाब सुनकर जगह खिसियानी से हसी हजार मशीन बोली मॉम डेड की बात ठीक है अपनी माँ के चेहरे की तरफ देख कर रवि छत से बोल बडा हाँ मैं तेरी बात भी समझता हूँ पर इस तरह मैनेज करने में आसानी रहती है और लोगों की सेवा भी अच्छे से हो जाती है और एक परिवार की जितनी चाहो तो मेहमान बता देना जो दूर के परिवार होंगे । उनके फालतू मेहमानों से बच जाएंगे और इस तरह मांगने वाले कार्डों और मेहमानों की गिनती का काम उन्होंने निपटा दिया था । अब तो उन कार्डों को बडे कार्ड वाले लिफाफे में डालकर उस पर पाते ही लिखने थे । ये कम जगह करता रहा । अगला पूरा सप्ताह ही वो काम पर से लौटकर कार्ड बांटने जाते रहे । कार्डों का काम अभी बीच में ही था कि फोन आने आरंभ हो गए थे । पहला फोन जय तो वालों की बहू का था तो बोली हमने कार्ड पर दो जने लिखा अरे हम बच्चे किसके पास छोड कराएंगे या तो चार आ सकते हैं या कोई नहीं । नहीं नहीं है । तुम चारों ही आओ तो बच्चों ने अपनी मर्जी से लिखवा दिया । रानी बोल पडी । फोन बंद करके वो जगह से बोली है तो पहले से ही कहती थी अरे लोग ऐतराज करते हैं । ऐसे कार्डों का काम निपटाकर जग्य का परिवार ग्रॉसरी वगैरह लाने में जुट गया । पिछले दो दिनों से वो गुरूद्वारे में व्यस्त रहे । वहाँ उन्होंने लड्डू, शक्करपारे, मट्ठियां, पकौडियां, बूंदी समूह से बेसन और बहुत को छोटा मोटा बनवाकर रख लिया । ये सब विभाग के दिनों के दौरान इस्तेमाल किया जाना था और बाकी बचा । बाद में रिश्तेदारों में बटना था । कार्ड बांटने और अन्य दौड भाग के बारे में सोचकर जगे को रवि के विभाग वाला समय और अधिक अच्छा लगने लगता है । मगर लौट फिर कर मोटर वाला खर्च दिमाग में । फिर घोषणा था करवटे बदलते उसे एक स्कीम सूची । उसके बाद जब आपको नींद आ गई । अगले दिन सवेरे ही टेंट लगाने वाले आ गए । जगे का खयाल था कि दोपहर के बाद आएंगे और वो तब तक अमेरिका का बॉर्डर पार करके दूध और खट्टा उठाएगा । अमेरिका में डेरी का सामान सस्ता था । उसने गली में रहते हैं । दो बुजुर्गों को साथ ले जाने के लिए तैयार कर लिया । दो लोगों को साथ ले जाकर वो इस तरह तीन गुना सामान ला सकता था । जी, वो पहले ही बहुत ले आया था । दूध लाकर उसे अडोस पडोस के घरों के फ्रिज में रखना था ये सोचकर कि पडोसियों पडोसियों के फ्रिज उसके कितने दिन के लिए कहाँ उपलब्ध होंगे । उसने कम आज के दिन पर छोड दिया था । मगर टेंट लगाने वाले सुबह सवेरे या पहुंचे । जब ऍम अधिक रानी ने कहा ऍम ये खुद लगा लेंगे । आपने क्या करना है? यहाँ बहुत का दूध वाला काम खत्म करो । बुजुर्ग भी आ गए थे । वो भी जल्दी मचाने लगे । जगह क्या करता हूँ चल पडा लेकिन उसके अंदर एक जनता उछल कूद मचाने लगे । इतनी रानी टेंटवालों की बातों में आकर फ्लोर लगवाने लग पडे । बडी मुश्किल से तो राजी किया था कारपेट के लिए । फिर उसने सोचा कि यदि बॉर्डर पर लाइन ना हुई तो जब टेंथ गाडेगा तो आपको लौटाएंगे । थोडा सा हौसला करके जगह बोला अंकल हूँ तो खर्चा बूढी औरतों ने खूब करवा देना है वहाँ पर । पर ऐसे मौके खर्चा चुभता रही जब बेटी बेटा माँ बाप के कहीं में रहकर विभाग करवाएँ । कर्मों वालों के होते हैं पुत ऐसे मान ले हमारी बेटी ने तो सब कुछ हमारे सिर पर छोड दिया । कहती है जहाँ होगी वहीं करवा लूँ । लडकियों की ही चिंता होती है कि किसी गैर के साथ न करवा ले लडकों को चल जाता है । दूसरे बुजुर्ग ने कहा जब मेरे को लगा जैसे बुजुर्ग नहीं ऐसा जानबूझ कर कहा हूँ । सफाई देते हुए बोला हम कहे तो देते हैं कि गोरी और ठीक नहीं होती । हमारी बहू है, लगता ही नहीं कि अंग्रेजन है, अपनी भी नहीं होंगे । इतनी सुशील ऍसे भी बहुत अच्छी हैं । बुजुर्गों के साथ बात करते हुए जागे वो कुछ देर के लिए टेंट वाले भूल गए । जब वो अमेरिका से वापस लौटे । टेंट वाले अभी भी वहीं थे । उन्होंने टेंट खडा कर दिया था । रूबी आकर कहने लगी टेडी हम रोड डलवा लेते हैं । सुंदर लगेगी तो मैंने सोचा की माँ बेटी की एक राय हो गई है । अब तो ये लगवा कर ही मानेंगे । उसके दिल में आया की कहते चलो फ्लोर ही दाल वालों पर फिर खर्च के बारे में सोच करके चुप हो गया । रूबी को भीतर भेजकर वो ट्रेंड वाले लडके से बोला कौन से गांव से हो? अब तो यही गांॅव लगाने वालों में से एक बोला जब किसी आॅस्कर बुला रहे हैं ये तो अपना है ही । मैं मतलब पंजाब में हो सागा है । शायद आमिर बताया का बेटा भी है चाहे वह भी कि नहीं । उनका उत्तर सुनने से पहले ही जगह ऊंची आवाज में बोला अरे चाय वाय लाओ भाई, ये तो अपने घर के ही लडके लड्डू भी लेती आना । वो जी चाय वाय रहने दो । आपका भाई दूसरे खोसा गांव में जहाँ होगा हमने अपने गांव की लडकियाँ यानी छोड रखी हैं । पहले ने कहा हो सकता है इस तरह तो लोग जो टैलेंट लगवाई के पैसे छुडवा लेते हैं और हमारी रिश्तेदारी छोटी जगह की निकाल देते हैं । लेकिन ये क्या बात हुई तो अपने गांव के लडके को हमारे गांव में बिहार लें पर यू नो भागो । जब मैंने कहा चाहे मिलने के बाद जब क्या बोला आप कोई चिंता नहीं मैं तो सोचता हूँ नीचे फ्लोर सी भी डलवा ही ले सुंदर लगेगी कितने और लग जाएंगे तो आपको ले वो तो बाहर वालों का रेट था अब तो बडी जगह की रिश्तेदारी दे दी आप तो हमारे भी गुरु रैना जी जो आपका जी करता है यह हुई । रिश्तेदार वाली बात डाल दो । फिर तो वो भी उससे शो बन जाती है । पूरी जगह कुछ देर उन्हें काम करते देखता रहा । फिर बोला मैं ना रिश्तेदार बहुत अच्छे लगते हैं । रिश्तेदारी में से ही किसी ने करवाया रिश्ता वही आजकल के बच्चे तो खुद ही ढूंढकर बताते हैं कि फला के साथ शादी करनी है । हमारी बेटी तो कहती जहाँ कर दोगे ठीक है बच्चे खुश होने चाहिए । जी जहाँ मर्जी हो जाएगा पहला बोला नहीं फिर भी फर्क तो होता है क्या कर जब अंदर की ओर चल पडा डेकोरेशन करने वाली लडकियाँ मिल गई कि हम करें प्रबंध दूसरे ने पूछा नहीं नहीं हमारी बेटी की सहेलियों ने कहा है कि वह करेंगी कहकर जगह चल पडा । उसने हलवाई को फोन किया जिसमें पूरे सप्ताह घर में खाना पकाना था । उसकी वैन घर के सामने पहुंच गयी । ट्रैन में चूला, लडाइयां, पतीले और दूसरा छोटा मोटा सामान था । जगह उसके साथ गैराज में सामान रखवाने मदद करने लगा । हलवाई शाम को फिर आ गया । उसने सुबह के लिए प्याज, आलू और सब्जियां काटकर रखती । उसके जाने के बाद करीब नौ बजे जगह रूबी और उसकी सहेलियों के पास टेंट में चला गया । शाम को रूबी की सहेलियों ने पहले घर के अंदर सजावट की और फिर टेंथ के अंदर जुड गई । ये टेंट पूरे हफ्ते लगा रहना था । उनके पास जाकर जगह बोला अब तुम खाना खा लो । ऍफ लेट जाते हैं । सुबह से उठे हुए हैं । कल आपको फिर चार बजे उठना है । ऍम कहाँ लेता होगा? अभी तो मेरी मौसी को एयरपोर्ट से लेकर आना है । ग्यारह बजे रात की फ्लाइट है । मौसी टैक्सी लेकर आ जाए नहीं चली जाती । पर मेरी सहेली आई हुई हैं तो भरेली पीजा मंगवा देता हूँ । खाने का काम निपटा हूँ । मुझे को लेकर रेस्टोरेंट जा रहा है । आप हमारी वरीना करो । अच्छा कहकर जगह डेकोरेशन देखने लगा । उसको सजावट के लिए इंडिया से लाइफ सुनहरी साडिया याद हुआ । उन्हें यहाँ इस्तेमाल नहीं किया गया था । उसने सोचा शायद रूबी भूल गई होगी । तो बोला वो जो हम साडीयां वो डैडी फ्लोर के साथ मैच नहीं करती थी । दूसरी लिए आई चलो मारी सी आवाज में कहकर जगह अंदर की और चल पडा । इतने तो डेकोरेशन में नहीं बचने वाले जितने ये रेस्टोरेंट में खर्च कर आएगी जबकि के दिल में आया । अंदर घुसते ही रानी बोली अपने होटल बुक करवा दिया था ना? हाँ मैंने चार कमरे कह दिए हैं । जब मैंने रात में सोची स्कीम के अनुसार झूठ बोल दिया । उसने मोटल वाले से पूछ रहा था कि यदि जरूरत पडी तो कमरे मिल जाएंगे पर बुक नहीं करवाए थे । रूबी की मौसी और उसके दोनों बच्चों को एयरपोर्ट से लाकर उन्हें खाना खिलाते समय जग्गा बोला देखो सवेरे हमें चार बजे उठना है, किसी ने हुंकारा ना भरा । रानी की बहन पूछ रही थी दीदी जिस ब्यूटिशियन नेरोबी को तैयार करना है, मुझे भी उसी से तैयार होना है याद रखना जबकि का दिल कर रहा था किसानी । उसकी बहन कहते हैं क्या आप सो जाओ और अभी की बहन पूछ रही थी । फिजिकल धारी सूट पहनो या तो अपनी पडी हुई है । जब मैंने सोचा जब मैंने फिर सवेरे उठने की याद दिलाई तो रानी बोली है उसके लिए तो इतने सालों बाद मिली है आपको सोने की पडी है । मैं तो फिर जाकर लेता हूँ । कहकर जगह उठ खडा हुआ । अगली सवेरे उसने हलवाई के साथ सब्जियाँ बनवाई । हलवाई अपने साथ काम करवाने के लिए एक आदमी लाना चाहता था और जब क्या बोला कि दिनों में ले आना । कल तो कोई नाते रिश्तेदारी में से होगा । नहीं, मैं खुद ही करवा दूंगा काम साथ लगता है । कीर्तन की समाप्ति पर बर्तन क्रॉकरी संभाल कर करीब चार बजे जब भी का परिवार बैठाई था, फॅमिली वाले बंदे का परिवार आ गया । उनके साथ एक देगा ना परिवार भी साथ एक जोडा और दो बच्चे है ना बोला ये मेरा सारे साहब और इनका परिवार है । बोले हमें भी अपने साथ विभाग दिखा कर लूँ । जेपी के पीछे रहे हैं ताकि आप ये भी जगे कि धोनी पर जब मन में ये बात आई, लेकिन उसमें कहीं नहीं । रानी पहले ही बोली अजी धन्यभागी, हमारी तरफ रौनक और बढ जाएगी । चाय पीते हुए जगह बुला आप लोग नहा धो लोग हो गए बारह घंटों के सफर में फिर रोटी पानी छककर आपको मोटल में छोडेंगे मैंने बुक करवा रखा हम नहीं अरे नहीं नहीं रहना हमें अपनी साली के घर में है । हम तो हाजिरी लगवाने आए थे हिंदी की ये बात सुनकर जाग के भीतर ही भीतर शुक्र बना लो जी विवाह हमारे घर है और रहना साली के घर में हैं ये क्या बात हुई रानी बोल पडी इस यू गले में बडे जा रही है जब मन ही मन पत्नी पर की जा पर बोला रोटी खाकर जाना भाई रहो वही जहाँ का दिल करे कोई जबरदस्ती नहीं है पर मोटल अपना बुक करवा रखा है दिखाकर जाएंगे फिक्र ना करो जिंदा बोला उनके होंगे जल्दी खिला देते हैं डाले सब्जियाँ बहुत स्वाद बनी है जी जाए शादी में आए हैं हमें बासिया खिलाने की ना सोच धंदा बोला उसने फिर रानी की और मु करके कहा एक बहन जीजा हमारा हमें सवेरे वाली बची हुई खिलाने को फिरता है । मैं तो गुरु एक जनरल बात की है । अपने पीजा वाले को कहा हुआ है जब कहोगे पंद्रह मिनट में आ जाएगा । जग्गी ने खिसियाई हंसी हसते हुए कहा । बात छेडने से पहले उसके दिल में था कि धंदा कहेगा चलो दोपहर वाला लंदन ही छत लेते हैं उसका क्या पास ही हो गया । ड्यूटी के बाद धंदा और उसके साथ आए लोग जब चलने लगे तो रानी बोली सिर्फ अपना मोटेल भी बुक था । चलो आपकी मर्जी पर जितने दिन यहाँ हो रोटी धरी खानी है और अपनी साली के परिवार से भी कहना मैं फोन कर देंगे और देने निमंत्रण । जब मैंने मनी मन कहा गर्मियों में विवाह नहीं रखना चाहिए जहाँ के बहाने लोग छुट्टियाँ बिता जाते हैं । जगह इन्हीं विचारों में ही था कि उसको भिंडी की आवाज सुनाई दी । बहन परवान आकर यही हैं । ये बस दो दिन विक्टोरिया घूम कर आते हैं । ये संगीत वाले दिन के बाद कहीं नहीं जाने वाले । चल अच्छा है तो उधर तो छुट्टी होगी जब मैंने सोचा लेकिन दो दिन भी छुट्टी नहीं हुई । सोमवार जग्य की बहन और बहनोई आ गए । मंगलवार को तीन और रिश्तेदार आ पहुंचे । दो दिन हलवाई खुद ना आया । एक मई खाना बनाने के लिए भेज दी । बुधवार फिर भट्टी तभी लेडीज संगीत के लिए दो सौ औरतों को निमंत्रण भेजा गया था पर जागे नहीं । ईटन वाले दिन बचे हुए खाने को देख कर हलवाई को डेढ सौ लोगों के आने के बारे में ही बताया । हम हुई तो कई पुरुष भी ओरतों के साथ ही आ गए । रुलदू के चारों लडके आ गए भी देखकर जबकि को गुस्सा आता है और होता पीसता रहा । उसमें थोडी शराब का प्रबंध किया था । मंगली वाले दिन उसने शराब बैडमिंटन से मंगवाई थी । वहाँ सस्ती थी बिचौले बस में तीन पेटियां रख लाया था जब मैंने उनको पैसे दे दिए थे । जब को घबराया देख उसका भाई मंगा बोला छोटे भाई जितना मर्जी कंजूसी करले ये है कि मिट्टी कुँए में ही लग जाएगी जब ये नहीं सुनी कर दी मंगा फिर बोला कि जो गोरी घूमती फिरती है ना कि ले जाएगी सब कुछ एक दिन तू लेकर स्टोर किसी को भिजवाकर दारू मान वाले योगी मोदी ने लग जाता है जगह मंगे के सुभाव से परिचित था इससे पहले की मंगा कोई और प्रवचन करता जब वहां से खिसक नहीं लगा था एक लडका भट्टी की तरफ आता हुआ बोला आपको गोरी खोजती फिरती है कौनसी गोरी होते हैं जब मैंने कहा बताने वाला जग्गी का लहजा देकर कम गया मंगा बोला ये की हो रही है रविवार ली और कौन है पिछले घर वाली लीजा भी यही है पडोस इंटरेस्ट भी यही हैं । रूबी कि गोरी सहेली अभी आई हुई है फिर उस लडके की और मु करके जगह बोला रवि की घरवाली तेरी कुछ नहीं लगती । देखते हैं कब लगती है कुछ अब तुझे लडाने लगा । मैंने कहा शर्म क्या कर अब अपनी बहू है कहकर जगह पीछे टेंट की और चला गया । मशीन खाने वाली मेज के पास खडी पकौडे सर्व कर रही थी । जगह उसके पास जाकर खडा हो गया । वो बोली तेरी पनीर के पकौडे खत्म हो गए । मैं देखता हूँ कहकर जगे ने सब्जी वाले पकौडे समूह से और स्प्रिंग रूल का भी जायजा लिया और हलवाई को जाकर बताया देखना करो कहकर हलवाई ने बर्तन धोने और अपनी सहायता के लिए बुलाई । दोनों ही औरतों को बुलाकर एक को टोफू काटने पर लगा दिया और दूसरी को स्प्रिंग रोल के डिब्बे खोलने । खुद उसने जल्दी जल्दी बेसन और मैदे का घोल तैयार कर लिया और टोस्ट ऊपर तैयार घोल लगा लगाकर चलने लगा । सामान दस बीस बन्दों का ज्यादा बनता तो फिर ऐसी भगदड नहीं पडती है । मंगा बोला । जग्य ने अंदर छिपाकर रखी शराब की बोतलें ला डर मंगे को पकडा दी और बोला लोग हैं तुम लोग अंदर लिविंग रूम में जाकर बैठो । मंगे को भट्टी पर से एक तरफ करके जगजीवन एक लंबा सांस लिया हूँ । चाय का काम लगभग खत्म हो चुका था । कोई एक का दुख आने वाला शेष बचा था । उतना ही पकडे पडे थे हलवाई दाल सब्जियाँ बनाने में बीजी हो गया भिंडी की सब्जी में डालने के लिए कुछ और प्यास उससे छीलने के लिए । और तो से कह दिया सब्जियों की तरीक गाडी करने के लिए उसने आलू वाले रखती है । खुद वह दम मारने के लिए बैठ गया । उसी वक्त जागा चक्कर लगाने आ गया उसके पहुंचती हलवाई बोला सब कुछ कंट्रोल में है, फिक्र ना करो तुम्हारे होते कैसा फ्रेगरेंस जब का बोल दिया उसने पकौडे बनाने के समय हलवाई की फुर्ती का लोहा मान लिया था । मंगे के शब्दों के साथ जगह उबला घूमता था अपना बेटे हल्का करने के लिए । उसको अवसर मिल गया तो बोला हम गौरी ओरतों को बुरा समझते हैं । अरे अपनी देख लो, कैसे पीती है अंदर से खुद ही वोट का की बोतल उठा कर लेगी । अरे हम तो रोज देखते हैं कई कई तो आदमी की तरह पीटीए ब्याज शादियों में प्याज काट रही औरतों में से और बोली देख लो बदनाम गौरी ओरतों को करते हैं । हमारी बहुत गौरी है पर शराब के करीब भी नहीं जाती ना हमारी बेटी पीती है मेरे बेटी जो हमारी मेरी गांव है । कहती है जहाँ हो गए वहीं विवाह कर लूंगी । खुशनसीब हो भाई, ऐसी बेटियाँ कहाँ मिलती हैं । दूसरी औरत बोली जब को लगा की हलवाई भी कुछ ऐसा ही करेगा । पर वो बोला शुक्रवार छोडेगी रस महिला आप उस दिन तो साठ सत्तर लोग होंगे । बस आस पास के शनिवार रात को खाना बनाना है । इतवार लंच पर पूरा जोर लगाना है । आई रिश्तेदार बढिया मिल गए । हमें रिश्तेदारी में से ही है । लेकिन हलवाई ने जगह की बात वाली बात पर ध्यान नहीं दिया । बोला क्या क्या बनाये उस दिन मैं घर वालों के साथ सलाह करके बता दूंगा । कहकर जगह वहाँ से चल पडा । अगले दिन मंगनी बैंक्विट हाल में थी । उसका प्रबंध रूबी ने खुद किया था । जगह तो सिर्फ चेक कर देना था । जग्य को जनता इस बात की थी कि लडके वालों की बस बैडमिंटन से समय पर पहुंच जाएगा । बस में दारूवाली बोतले थी वो लेट हो जाएंगे तो यहाँ खरीदनी पड जाएगी और अगर बस समय से पहुंचती है यहाँ वाली वापस लौटा देंगे । यही इसकी उसने छतरियों और एयर मैं ड्रेस के लिए भी प्रयोग की थी । इन्हें मंगवाकर रख लिया जाता था । इतनी बारिश होती तो छतरियों का उपयोग हो जाता । यदि कोई मेहमान घर में और आ जाता तो मैं ट्रेस भी खोलकर उनमें हवा भर ली जाती है । लेकिन इस सब की जरूरत ही नहीं पडी । मोटल की भी जरूरत नहीं पडी । जगह कई मेहमानों को सलाह देता हूँ । कह चुका था मोटेल बुक किया है । देख लोग इन छोटे खर्चों से तो जगह बच सकता था पर बैंक्वेट हॉल की सजावट देखकर उसने सोचा इस पर तो काफी खर्च होगा । बॉल का एक हिस्सा हल्के नीले रंग में रंगा था और दूसरा गहरे । मेहरून रंग में मेजों के ऊपर वाला कपडा उन पर रखे भूल ऍम कुछ मैच करता था । मूवी बनाने वालों का जुगाड भी ऐसे जैसे किसी फीचर फिल्म की शूटिंग चल रही हूँ । इसकी कीमत जल्दी को मालूम थी । उनका जग्य ने कहा भी था हरे इतने डॉलर में तो पूरा विभाग हो जायेगा भी तो कभी कबार ही देखनी होती है । इतना खर्च क्यों करना? रूबी ने जवाब देने की बजाय अपनी माँ की तरफ देखा था और बोली जैसा इन का दिल करता है करने दो । रोकना मत बल्कि अपना तो बोझ हल्का होगा । वो खुद आगे होकर प्रबंध किए जाती है । ये खर्च रानी को भी अधिक लगा था । उसने जब ये के और करीब होकर कहा हमारी मर्जी के लडके के साथ विवाह करवा रही है खर्चा करने की हमें आजादी देनी चाहिए । घर लेने दो चाहूँ पूरे भरे मैं कब रोकता हूँ कहकर जगह चुप हो गया । अब भी पूरे हॉल का जायजा लेकर वो चुप चाप रानी के साथ गेट के आगे खडा हो गया । मेहमान आने लगे थे । जगह शीघ्र ही बनाया लेता लेता खर्च के बारे में सब कुछ भूल गया । खासकर गांव वाली तेजो चाची के शब्द सुनकर तो वह खेल ही उठा था । चाची ने कहा था बेटा आज अगर तेरे माँ बाप जिंदा होते तो कितना खुश होते । चलो कोई बात नहीं । लडके ने तो अपनी कर ली पर लडकी ने फिर मुँह बना दी और अब जगे के कम वाला ग्रैंड अपनी पत्नी बेटी के साथ आया तो जब उनके साथ ही चल पडा है । ऑल की सजावट देखकर ग्रैग बोला जाए दोनों तो बहुत पैसे खर्च किए हैं । जब का हल्के से हस्कर बोला किसी दिन के लिए तो जी रहा था । दस ग्रैग इतिहास पडा गैप बहुत पुराना साथी था । लगेगा तब अभी जगह की शादी भी नहीं हुई थी । उन दिनों जगह को मार मार कर काम करता देख एक दिन ग्रैग ने मजाक किया था और वहीं मजाक सारे वेयर हाउस में अभी तक जिन्दा था । हर कोई उस मजाक को अपने अपने ढंग से बना लेता असर नहीं । तब ब्लैक में जगह से पूछा था तो फॅमिली है तो मैंने कहा था नहीं दारु पिता है नहीं पार्टी करता है नहीं कलेक्शन है नहीं वो ऍन भी तो जीता किस लिए है? गायक कहकर हंसा था । बाद में अन्य कामगार साथियों ने चुटकी वन लाइन से पहले कई और बातें छोड नहीं कि ग्राहक ने फिर पूछा तो काम पर से छुट्टी कर लेता है । जय कहता नहीं ग्रेड में फिर पूछा तो कभी ओवर टाइम छोड देता है । जग ने कहा नहीं ग्रैंड में फिर पूछा तो कभी बच्चों को छुट्टियों में घुमाने ले जाता है । जय कहता नहीं । साथियों द्वारा कही गई बातें सुनकर जगह हल्का सा हस्कर चुप हो जाता है और आज जगे को अपनी दरियादिली दिखाने का अवसर मिल ही गया था । डाॅन फिर का इतनी लोग मेरे रिश्तेदार या दोस्त हैं । अभी तो तू विभाग वाले दिन देखना ब्रेक को प्रभावित हुआ । देखकर जगता बोला वो मूवी बनाने वाले देख रहा है ना बताओ कितना चार्ज करेंगे । उनके सामान को देखकर लगता है कि बहुत महंगा है । ब्रेक बोला फिर जगह बार की और हाथ करके कहा वो बार है फ्री शराब जितना मन करता है पी हमारी फॅार तो जो के दूसरे मेहमानों की और भी ध्यान दे । कहकर ग्रैग ने जगह को चलता किया लेकिन झगडा का मन करता था कि ग्राहक को और ज्यादा प्रभावित करें । जब रिंग सेरेमनी होने लगी तो जगह फिर ब्रेक के पास आ गया । जब रूबी ने अपने मंगेतर की उंगली में रिंग डाली तो जगह बोला ये हीरे की अंगूठी है, मैंने खरीद कर दी है । मैं तो मजाक कर रहा है । गृह केशव सुनकर जागे ने अंगूठी की कीमत बताता ग्राहक को और भी हैरान कर दिया । ग्राइंड उसके बाद अपनी पत्नी बेटी को हैरान करने में व्यस्त हो गया । अंगूठी खरीदते वक्त माँ बेटी बाप को साथ नहीं ले गई थी । वापस लौटी तो अंगूठी की कीमत सुनकर जगह हैरान और परेशान हो गया था । पर वह परेशानी जगह भूल गया जब बेटी ने हैरान होकर आंखे चोडी की । शनिवार को भी गुरुद्वारे में मिलने के बाद जब अपने काम वाले साथियों को प्रभावित करने लगा । ग्रैग के अलावा बाकी काम वाले सातों साथ ही भी पहुंच गए थे । सबसे पहले तो जगह ने उसके द्वारा मिलने में दी गई अंगूठियों और कंबलों के बारे में बताकर उन्हें हैरान कर दिया । फिर उनमें से गुलाब भर तेरे तो रिश्तेदार भी बहुत है रे अभी तो आएंगे तुम देखना कोई पांच छह सौ लोग होंगे । जगह बोल पडा तेरे बेटे की वहाँ पर इतने लोग नहीं थे । नहीं इस तरह कोई महंगी लिमोजिन कार थी । ग्रैंड ने बोला बोला देख मेरा बेटा ना बहुत ज्यादा है तो ज्यादा खर्च नहीं करता । जबकि को लगा जैसे किसी ने कहा हूँ बिल्कुल तेरे जैसा है, पर ऐसा किसी ने नहीं कहा था । जगदीश को शक हुआ था । रवि के विभाग के वक्त जग्य के परिवार रहे हैं । थोडे से रिश्तेदारों को ही आमंत्रित किया था । जगह और रानी विभाग के हाथ में तो थे नहीं, पर रवि ने उनके लिए कोई दूसरी रहा नहीं छोडी थी । उसने सीधे सीधे कहा था मैं और मशल विभाग करवाएंगे । तुम कोई रस्म करना चाहते हो तो कर लोगे । नहीं तो हम कोर्ट मैरिज करवाने के बारे में सोच रहे हैं । जबकि के परिवार ने रस्में की । पर बेदिल इसी के साथ । मगर इस विभाग में सारी कसर वो निकाल रहे थे । ये वे वहाँ उनकी इच्छानुसार हो रहा था । रानी को उसकी भावी ने बैडमिंटन से रूबी के लिए अपनी जान पहचान में से किसी लडके के बारे में बताया था । रूबी लडके से मिलाने बैडमिंटन गई थी । वापस लौटकर वो बोली थी आप इतने समय से मुझ पर विवाह करवाने का जोर डाल रहे थे । अगर ऐसा लडका मुझे पहले मिल जाता तो मैं कब का विवाह करवाले थी? और फिर लडका वैंकोवर आया था । महीने में ही उन्होंने विभाग के लिए हाँ कह दी थी जबकि को रूम भी बहुत अच्छी लगी थी । जगह गर्व से भर उठा था । उत्साहित सा जगह डोली के वक्त भी इधर उधर घूम रहा था । चारों तरफ से बधाइयां मिल रही थी । आनंद कारज के बाद दूर आन्दोलन और उसके साथ तस्वीरें खिंचवाने पार्क नहीं चले गए थे । झगडे का परिवार घर लौट आया था । उन्होंने डोली लेने आने वाले बारातियों की आवभगत की तैयारियाँ करवानी चाहिए और जब बाराती घर आए तो लडकियों ने रहा रोक ली । वो दूल्हे को बीस दंड बैठक लगाने को कह रही थी । ये सब देखकर जगह और भी ज्यादा खुश हो रहा था । एक पल उसके मस्तिष्क में रवि की डोली के समय का दृश्य उभर आया । रवि के विवाह के वक्त डोली लेने वो मशेल के घर नहीं गए थे । गुरूद्वारे में आनंद कारज के बाद रवि और मशल अपनी कार में जगह परिवार के घर चल पडे थे । डोली उतारने के लिए अभी और रिश्तेदार घर नहीं पहुंचे थे । रवि और मशल घर के पास पहुंचकर कार में ही बैठे रहे थे । पर गर्मी अधिक थी । वो कार में से बाहर आकर घर की तरफ चलने लगे रहेंगे में सब्जी मशहर को इस तरह बाहर मारते चली आती दे जब जी को बहुत बुरा लगा था । वो तो लजाती शर्माती अपने आप में सिकुडी सिमटी बहु को देखने का आदी था । डोली उतारने के समय भाई बाबी का रहा रोकने के लिए अभी लडकियाँ पहुंची नहीं थी । घर के आगे प्रतीक्षा करते हुए मशल ने कहा हम अब अंदर आ सकते हैं । बहू को इस तरह उतावली दिखाते देख आसपास खडे लोगों की निगाहें आपस में मिली जबकि का तो मन हुआ कि वहां से खिसक जाए तो क्या कर सकता था । बिचारा है बल्कि रानी से बोला और ज्यादा ना इंतजार कर किसी का चलता वारकर अंदर ले जा । बहु अपनी रूबी की डोली के वक्त जगह गर्व से सीना चौडे किए हुए था । रूबी की डोली विदा कर रिश्तेदार रात के खाने के लिए रुक गए । विवाह के अगले दिन बैडमिंटन वालों की भरी हुई बस उनके घर लंच के लिए आ लगी थी और उनसे अगले हफ्ते एडमेंटन वालों ने रिसेप्शन पार्टी रखी हुई थी । जगह और रानी वहाँ गए । उन्होंने ऍम किराये पर ली तरह से आए मेहमानों को भी साथ ले गए । अगले दिन रूबी और उसका पति हनीमून के लिए निकल गए । वैंकोवर लौटकर जगह काम पर जाने लग पडा । काम से लौटकर करीब के रिश्तेदारों में कोठी झाड और विवाह के कपडे बांटने चल पडते । विवाह में से बचा हुआ सामान दुकानों पर लौटाने का काम भी जगह विकेट पर नहीं छोडना चाहता था । उसकी इच्छा थी कि विकेट पर काम पर ओवर टाइम लगाया जाए । विवाह से करीब तीन सप्ताह बाद सबसे फिर सकता कर एक शाम चक्का बोला रानी अब तो घर बिलकुल सूना सूना लगता है । रानी की आंखे भराई बोली सब घर की रंगत अपने साथ ही ले गई । खाली घर अब काटने को दौडता है । अब हम ने इतना बडा घर क्या करना है ये भेजकर जो रवि के लिए अपार्टमेंट लिया था उसमें मूड हो जाते हैं । रानी ने कोई जवाब नहीं दिया । वो अविरल आंसू बहाती रही । जगह उसको अपने संग लगाते हुए बोला, लडकियों को तो एक दिन अपने घर जाना ही होता है । जगह भी रानी को दिलासा ही दे रहा था कि फोन की घंटी बजी । नंबर देखकर जगह बोला ले । जिसे याद करते थे उसका ही बोला गया ले कर बात रानी अपने आप को संभालने लगे । फोन जगह नहीं उठा लिया । दूसरी तरफ रूबी के रोने की आवाज थी । कुछ संभलकर । वो गोली डेड इसमें वापस आ रही हूँ । मैं घर में और नहीं रह सकती है । भिट्टा विजय से नहीं कहते । मुझे मुझे ठीक से बात बता और फिर रूबी के साथ लंबी बात करके रानी ने जगह से कहा । उसकी सांस बात बात पर हुकम चलाती है । रूबी कहती है कि वह और वहाँ नहीं रह सकती । टाइम लगा करता है सेट होने में ये कुछ गुड्डे गुडियों का खेल रही है । जग्गा बोला हूँ नहीं मानती कहती है मैंने लडके के साथ विभाग करवाया है उसकी माँ के साथ नहीं कुछ बात । रानी ने फिर कहा लोग कहेंगे महीना भी नहीं काटा । अरे ठंडे दिमाग से सोच की क्या करना है? अगले दिन ठंडे दिमाग के साथ सोच कर रानी बोली मैं कहती हूँ जो रवि के लिए अपार्टमेंट लिया था वो बेचकर रूबी को अलग घर ले देते हैं । इस तरह वो अलग रहने लग जाएंगे तो शायद सब ठीक हो जाएगा । इसी वजह से तो रवि को नहीं दिया था की पता नहीं कितने दिन व्यवहार निभेगा । बहु आधा हिस्सा लेकर चलती बनेगी । मुझे तो यही तरीका सोचता है । रूबी के विभाग को बचाने के लिए कुछ ले, कहीं यु ही ना । दारा कुछ नहीं होगा । हम कौन सा साथ लेकर जाएंगे । ये सब कुछ बच्चों का ही तो है । अनमने मन से जगे ने जैसी तेरी इच्छा कहा और चुप हो गया ।

सूरा सो पहचानिये -10

सूरा सो पहचानिए । स्कॉट रोड की और जाते हुए गुरजीवन की निगाह आगे जा रहे एक पिकअप ट्रक पर पडती है । उसपर वैंकुवर कनेक्ट की हॉकी टीम के लहरा रहे चार बडे झंडे गुरजीवन को अच्छे लगते हैं और जीवन अपनी मस्टैंग का उस ट्रक के बराबर करके हौंडा जाता है । ड्रग वाला भी हॉल मारता है । यदि ये आमदिनों जैसे दिन होते तो गुरजीवन इस तरह एक अनजान आदमी को हाँ नहीं देता । ये तो लडाई मोल लेने वाली बात होती है मगर वैंकोवर में खास दिन चल रहे हैं । सारा शहर एक रन में लगा हुआ है । गुरजीवन पूरे रास्ते इसी तरह के झंडे वाले कारों, ट्रकों और सडकों पर झंडे उठाए खडे लोगों के साथ हॉर्न बजाकर खुशी साझा करता आया है । ट्रक वाले झंडों के मुकाबले गुरजीवन को अपनी कार पर टंगे झंडे छोटे प्रतीत होते हैं । वो सीधे जाते हुए अचानक कार को एक सौ छब्बीस स्ट्रीट की और मोड लेता है । अरे गुरज ऍम बडा हम किधर जा रहे हैं । बगल वाली सीट पर बैठा उसके बचपन का दोस्त सुख कहता है शांति मैं शांति ऍफ जाना है । गन्ने के झंडे लेने तेरी कार पर दो झंडे लगे तो हुए हैं तुझे नहीं पता कि तेरी कार के दो ही दरवाजे हैं । दोनों पर एक एक झंडा उन्हें पहले ही बचा रखा है । ना आए मुझे दो बडे झंडे और चाहिए । अगर तुझे पैसे बर्बाद करने का इतना ही शौक चल रहा है तो वॉलमार्ट क्यों? स्कॉट रोड पर और बहुत सारे स्टोर हैं । स्थानीय और छोटे स्टोर तो मालूम है ना कि मैंने वॉलमार्ट का बायकॉट किया हुआ है तो मत जाना । कार नहीं बैठे, रहना तो देंगे तो मुझे खींचकर साथ लाया है और मुझे अकेला कार में छोडकर जाएगा । मेरे पच्चीस तीस डॉलर से वॉलमार्ट और ज्यादा अमीर नहीं हो जाएगा तो मेरे साथ चलना । वो रिकॉर्ड का मतलब है बॉयकॉट । मैं नहीं जाऊंगा क्या? समस्या क्या है तो जिंदगी के मजे क्यों नहीं लेता? कहते हुए गुरजीवन कार मोडकर कार को अट्ठासी ॅ क्यों कि और कर लेता है । और फिर स्कॉट रोड पर बातें गुरजीवन के मोड मुडते ही सुख बोला । कौन कहता है मुझे की मैं जिंदगी का मजा नहीं लेता बल्कि तो ये बात नहीं समझता हूँ कि वॉलमार्ट स्टोर अपने कामगारों को यूनियन नहीं बनाने देता । ऐसे स्टोरों का बायकॉट करके उन्हें बंद करवाना चाहिए ताकि लोग नौकरियों से हाथ धो लें । गुरजीवन व्यंग्य में कहता है और फिर सुख की और देखकर बोलता है की है तो बल्कि अच्छा है कि अपने चीजें सस्ती मिलती है । चीजें तो उन्हें मंडी के भावी बेचनी पडेंगी यदि उन्हें ग्राहकों को अपनी तरफ खींच रहा है पर वो कामगारों को कम तनख्वा देकर अपना मुनाफा बढाते हैं । अरे उस मुनाफे से वो और स्टोर खोलते हैं और दूसरे लोगों को नौकरियां मिलती है । यही तो सरमाएदार ई की खासियत है कि वह नौकरियाँ देने का लालच देकर या नौकरियां छीनने का भय दिखाकर कामगारों का शोषण करते हैं । बस वो कृपाकर आज मुझे जीत की खुशी मनाने देख हार्दिक कैसे लोग जीत का जश्न मना रहे हैं, कहकर गुरजीवन अपना हाथ कौन पर रख देता है और कार और तेज भगा लेता है । पर छब्बीस अवेन्यू पर जाकर उसे कार धीमी करनी पडती है । बहुत सारे लोग स्कॉट रोड के दोनों तरफ वैंकुवर काॅल्स के लोगों वाली जर्सियां पहने कनक के झंडे लहरा रहे हैं । गुरजीवन उनके पास से गुजरता हुआ कौन बजाकर फिर हाथ बाहर निकालकर लहराने लगता है । बहत्तर एवेन्यू वाला चौरास्ता पार करके वो बोलता है सुख आज पिछली बार से भी ज्यादा लोग है यहाँ पर तेरी बार ठीक है । प्लेऑफ के पहले राउंड की अपेक्षा दूसरे राउंड में लोग अधिक उत्साहित हुए थे । पर अब उससे भी ज्यादा जैसे जैसे टीम अगले राउंड में पहुंच रही है और लोग टीम के प्रबंधक बन रहे हैं, सुख जवाब देता है । अब तो आपने भी बहुत से लोग कनेक्ट के प्रशंसक हैं । ऍफ पर भी आधे से ज्यादा पंजाबी लोग हैं । अपने बूढे लोग भी हॉकी देखने लगे हैं । मुझे हैरानी वाली बात बताता हूँ । मेरे रिश्तेदार है । सनी तो उसकी नानी को देखा है । बहुत बूढी है । मैं उन के घर गया तो मैंने सनी से पूछा यार स्कोर किया है नानी बोली दो जीरो है अभी अभी काॅलर ने दो लगातार गोल किए हैं । हो गया । मुझे लगता था कि इसको हॉकी के बारे में कुछ भी नॉलेज नहीं होगी । कहकर गुरजीवन फसता है । स्कॉट्सडेल मॉल के पार्किंग लॉट में कार खडी कर वो फिर स्पॉट रोड पर बहत्तर एवेन्यू के चौ रास्ते की और चल पडते हैं । वहाँ ढोल बचता है । उन नाच रहे लडके लडकियों के संग नाचने लगते हैं । कई ऊंचे स्वर में गो काॅस्ट गो गा रहे हैं गुरजीवन और उसके मित्र ने उस साल भी ये गोकन एक्स गोगी बहुत उत्साह के साथ गया था । जिस साल वो पहली बार वैंकुवर कनेक्ट का खेल देखने के लिए प्रिंस रूपर्ट से चलकर वैंकोवर आए थे । तब वह आठवीं कक्षा में पढते थे । गुरजीवन ने अपने परिवार के साथ सुख को भी ले जाने के लिए अपने और सुख के माता पिता को बना लिया था । कार के चलने की देर थी कि गुरजीवन उसकी छोटी बहन गुरसिमरन और सुख कार की पिछली सीट पर बैठे दो ऍम गो गाने लगे थे । वो टेनिस तक पूरे रहा, घंटा भर इसी तरह गाते रहे थे और जीवन की माँ कहती तोहरा गला दुखने लगेगा । देखो तो कैसे गला फाड रहे हो पर वो चुप नहीं हुए थे । टॅावर करके जब पहले धीरे और बाद में शांत हुए थे तो गुरजीवन के डैडी बोले चलो अब रही रात साहिब का टाइम हो गया कौन करेगा? तीनों करेंगे भारी बारिश जो बच्चो गुरजीवन की बात बोली पाठ करने के बाद फिर उसी तरह गाने लगे मगर वो कुछ देर गाकर चुप हो गए । फिर कार की एकदम ब्रेक लगी और कार हिचकोला खाकर फिर चल पडी और जीवन में आगे देखा । सडक के बीच में हिरण खडा था, मूर्ति जानवर है, आंखे मूंद कार की तरफ भागेगा । गुरजीवन के डैडी ने कहा फिर गुरजीवन और सुख बाहर की और देखने लगे थे तो कुछ ही दूर गए थे कि गुरजीवन की निगाहें सडक पर पीछे खडे रीच पर पडेगी ऍम ही खडा है इसकी चिंता नागर बहुत समझदार जानवर है धैर्य बोला वो यूपी खडा रहेगा जब कार आगे बढ जाएगी तो आराम से सडक पार करेगा गुरूजी । उनके डैडी ने कहा गुरजीवन टिक कर बैठ गया उसको अपनी माँ का वाहेगुरु वाहेगुरु का जाप ऊंचा हो गया लगा जब उसकी आवाज कुछ मध्यम पडी गुरजीवन और सौ फिर गोकन एक्स गो का जाप करने लगे और जीवन की माँ बोली अगर हेरन कार से टकरा जाता तो कुछ नहीं बचता लगते । कनक सके जब कर के सो जाओ लेकिन वो नहीं हुए थे । सोलह घंटे के सफर में मुश्किल से तीन चार घंटे ही सोते थे । बैंकों पर पहुंचकर उन्होंने कर एक्स के लोगों वाली जर्सियां खरीदी थी और जीवन में अपने मनपसंद खिलाडी टॉवर टू जी वाली नंबर चौवालीस और सुख और गुरसिमरन ने मार्क्स नेसलैंड वाली नंबर गेम देखते हुए भी वह बाकी लोगों के साथ मिलकर बीच बीच में गोथॅर्ड को गाने लगते हैं । इस साल तो सारा प्रांत ही ये गा रहा है । वैंकोवर के करीबी शहरों में तो कनेक्शन आंधी चल रही है । वैंकुवर की आइस हॉकी टीम वैंकुवर कनेक्ट को चालीस वर्ष हो गए हैं । नेशनल हॉकी लीग के साथ गठबंध किए हुए । पर इसमें अभी तक एक बार भी स्टैनले कप नहीं जीता । दो बार जीत के एन किनारे पर आकर रह गई थी । इस साल पहली बार फॅसने रेगुलर सीजन के खेलों में सभी तीस टीमों में सबसे अधिक एक सौ सत्रह पॉइंट लेकर प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी जीती है । ऍम वालों को आस है कि प्लेऑफ में भी उनकी टीम सबसे ऊपर रहेगी और प्लेऑफ में भी टीम ने पहला दूसरा और फिर तीसरा राउंड जीतकर ऍम बाल बॉल ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया है । जैसे जैसे टीम आगे बढती है लोगों का उत्साह दूना सवाया हो रहा है । गो करुँगी जोर से गुजरा लगता है । स्थानीय अखबारों के पहले पन्ने पर वेंकुवर कनेक्ट की जीत की बडी तस्वीर होती है । पहले पृष्ठ पर कनेक्श की तस्वीर देखकर गुरजीवन को अखबार अच्छी लगती है पर उसको अखबार पिछले पन्ने से शुरू नहीं करनी पडती है जहाँ खेलों को लेकर समाचार होते हैं पर सुख को ये बहुत बहुत करती है कि अखबारों को और सब कुछ इतना महत्वपूर्ण नहीं लगता जितना हॉकी टीम की जीत हार उसको बडा गिला यह है कि अखबारें टैक्स प्रति उस रेफरेंडम को इतना महत्व नहीं देती जिसके परिणामों ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालना है । इस संदर्भ कि वोट में बहुत कम समय बचा है सुख के लिए इस रेफरेंडम की वह बहुत महत्वपूर्ण है । उसने अपने साथियों के साथ मिलकर घर घर जाकर टैक्स के विरुद्ध पेटिशन पर हस्ताक्षर करवाए थे जिसकी वजह से सरकार को ये रेफरेंडम करवाना पडा है । सुख को मीडिया पर तब भी रोज था जब मीडिया कह रहा था कि ब्रिटिश कोलंबिया के इतिहास में इस प्रकार की सिटीजन इनिशिएटिव पेटिशन कभी भी कामयाब नहीं हुई और नहीं होगी । मगर सुख और उसके साथियों ने ब्रिटिश कोलंबिया के विधानसभा के सभी पिचासी हलकों में से नब्बे दिन के अंदर अंदर दस प्रतिशत से ज्यादा रजिस्टर्ड वोटरों के दस्तखत करवाकर इतिहास रच दिया था । उन दिनों में गुरजीवन सुख का मजाक उडाते हुए कहता मैं तो अपना समय बर्बाद कर रहा है तो देख किसी को तो करना ही पडेगा । यदि हम चुप रहे तो सरकार के हौसले और बढ जायेंगे अपनी मनमर्जी करने के लिए । कभी सुना है कि सरकार ने लगाए गए टैक्स को वापस लिया है । हम ये करने के लिए सरकार को मजबूर कर सकते हैं । सरकार कर कहाँ से पैसे लाएगी? हम सही तो इकट्ठे करेगी तो देखना हाॅट बढाने पर एतराज नहीं है । दुख सिर्फ इस बात का है कि सरकार लोगों को गुमराह कर रही है । चुनाव से पहले कहते थे कि वह टैक्स के विरुद्ध हैं । जीतने के फौरन बाद उन्होंने ये टैक्स ठोक दिया और फिर इस्ट्रैक से होने वाली कमाई सरकार लोगों पर नहीं लगाएगी । आम लोगों से टैक्स लेकर इसके बराबर की छूट बडे व्यापारियों को देनी है । सरकार कहती है कि इससे और अधिक व्यापार हमारे स्टेट में आएगा और अधिक नौकरियां पैदा होंगी । और फिर जब व्यापारियों को टैक्स से छूट मिलेगी उनके खर्चे कम होंगे तो चीजें सस्ती कर देंगे । सरकार लोगों को यूँ ही फैसला रही है । व्यापारियों को सबसे बडा मकसद अधिक से अधिक मुनाफा कमाना होता है । अरे पर तू अपना समय क्यों बर्बाद कर रहा है? तुझे क्या मिलेगा? गुरजीवन ने कहा गुरजीवन इस तरह ही सोचता है । उसको लगता है कि बैंकों हराकर सुख बदल गया है । वो ऐसे काम करने लगा है जिन्हें करने का कोई लाभ नहीं । वैंकुवर वो पिछले दो साल से रह रहे हैं । बारहवीं करने के बाद उन्होंने साइमन फ्रेजर यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया । उनके माता पिता ने शरीर में एक साझा जुडवा मकान पहले ही खरीद लिया था ताकि जब बच्चे बडे होकर पडने के लिए वैंकुवर जाएंगे तो वहां उन्हें रहने के लिए मकान होगा । एक बेसमेंट में गुरजीवन और सुख रहने लगे और बाकी का घर किराए पर चढा दिया । किराये से गुड जीवन और सुख का खाना पीना और घर की किश्तें चल रही हैं । फिर से उनके माता पिता भर रहे हैं । यूनिवर्सिटी से मुक्त होकर वो दोनों एक ही कंपनी में टेलीमार्केटिंग की जॉब पर चले गए । गुरजीवन अधिक जाता है और सुख कब? अधिकांश समय सुख कोर्स के अलावा अन्य किताबें पडने पर लगता है । जबसे उसने नियोमी क्लैन की दशॉ डॉक्टरी ऍम उस तक पडी है वो किसी तरह की अन्य पुस्तकें पडने लगा है और जीवन कहता सौक इन फायदा कामों में तुझे क्या मिलता है जितना समय तो उन पर लगता है । उस समय तो काम पर जाया कर कुछ कमाई क्या कर वही तो यह हॉकी के बारे में सोचने और देखने से मिलता है । सुख का उत्तर होता बाकी सब देखते हैं क्योंकि हॉकी देखने में मजा आता है । ये सरमायेदारों द्वारा दिखाई जाने वाली सर्कस है । सरमाएदार ई निजाम का मानना है कि लोगों को खाने के लिए रोटी मिलती रहे और वो सर्कस में उलझे रहे तो उन्हें जैसे चाहे लूटते चलो वो सोक समाजवादी किताबें तरह दिमाग खराब कर रही हैं । वो सिस्टम इतना अच्छा होता तो रशिया और अन्य यूरोपियन देश उससे किनारा ना करते हैं । उन देशों से खिलाडी यहाँ नेशनल हॉकी लीग में खेलने के लिए आते हैं और यही रह जाते हैं क्योंकि उन्हें सिस्टम बढिया लगता है । जी भरकर कमाई करूँ और मनपसंद वस्तुओं को खुलकर इस्तेमाल करो । जीवन को लगता है कि सुख को छोड कर उसके आस पास के सभी लोग ऐसा ही सोचते और करते हैं । आज कल वो अपने शहर के अधिकतर लोगों की तरह हॉकी का मजा ले रहा है । उठता बेहतर सिर्फ हॉकी के बारे में ही सोचता है । पढाई करते करते वह अन्य टीमों के गोल चेक करने लगता है । वो चाहता है कि सुख भी उसके साथ इस खुशी में शामिल हो । फॅमिली कप का फाइनल मैच शुरू हो गया है । वैंकोवर की टीम सत्रह वर्ष बाद इस फाइनल में पहुंची है । पिछली बार टीम सातवें गेम में न्यूयॉर्क रेंजर्स की टीम से हार गई थी । इस बार भी उसका मुकाबला अमेरिकन टीम ऍम के साथ है । दोनों टीमें कुल सात मैच खेलेंगे । जो टीम पहले चार गेंद जीत जाएगी वो कब जीत लेंगे । पहले दो मैच वैंकुवर में होंगे फिर पोस्टर नहीं । अगर आवश्यकता पडी तो मैच एक एक करके दोनों शहरों में होंगे और जीवन चाहता है कि सुख उसके साथ सभी शहर में लगी बॉडी स्क्रीन पर पहला मैच देखने जाए । लेकिन सुख कहता है मुझे क्लास के बाद एक मीटिंग में जाना है । हमें रेफरेंडम के लिए इश्तहार छपवाने के बारे में विचार विमर्श करना है । ये कह देना की समय बर्बाद करने जाना है तो ये कैसे कह सकता है कि मैं समय बर्बाद करता हूँ । ये पे स्टेशनों पर हमारे द्वारा दस्तखत करवाने के कारण ही प्रीमियर को अपनी गलती का एहसास हुआ है कि उसने लोगों को भरोसे में लिए बिना टैक्स ठोक दिया । इसी कारण उस को इस्तीफा देना पडा । इसीलिए अब सरकार दो प्रतिशत टैक्स घटाने की बात कह रही है । अब रेफरेंडम जीतकर सरकार को मजबूर करना है कि लोगों की मर्जी के उलट लगाए टैक्स को वापस है ताकि आने वाले वक्त में कोई राजनीतिज्ञ अपने आपको तानाशाह ना समझने लग पडे । सुख मॅन तो अपना भाषण किसी दूसरे मौके के लिए सुरक्षित रहे और चल आज मैच देखते हैं पर सुख नहीं मानता हूँ । गुरजीवन अकेला ही सर्विस सेंटर की और निकल पडता है वहाँ साइमन फॅार यूनिवर्सिटी के कैंपस के सामने एक बडी सी टीवी स्क्रीन लगी हुई है । हजारों लोग एक साथ मैच शुरू होने का वेट कर रहे थे । गुरजीवन ने अपने चहेते खिलाडी गोल्ड टेंडर रोबर्टो लो गांव की एक नंबर वाली जर्सी पहनी हुई है । मैं शुरू होने की देर है कि गुरजीवन उसमें डूब जाता है । जब भी वैंकुवर का कोई खिलाडी बॉस्टन की टीम के और शॉट मारता तो दर्शक चने लगाते हैं और जब हॉस्टल वाले मारते हैं तो वो आप करते हैं और गोली द्वारा गोल बचाने पर तालियां बजाते वैंकोवर की टीम ने मैच जीत लिया है । गुरजीवन पूरी खुशी में चाहता हुआ घर लौट आपा है घर पहुंचने वो कहता है सौ कमाया है तो मैं नहीं जानता कि तूने क्या मिस किया गया सुख उसकी बात सुनकर मुस्कराता है फिर कहता है लेकिन मुझे खुशी है कि तू गेम का मजा उठा कर आया है । सुख को मालूम है कि गुरजीवन उत्साह के शिखरों पर पहुंचकर किस तरह बोलता है । उसने पिछले साल भी सुख कोई उत्साह में भरकर कहा था सुख मॅन । तुझे नहीं पता कि तूने आज कैसे आईपैड खरीदने का एक अवसर गंवा दिया । उस दिन सुख मुस्कराया नहीं था । उसने जवाब दिया था, अवसर नहीं गंवाया । मैं जान बूझ कर नहीं गया क्योंकि मेरे पास लेपटॉप है । मुझे आईपैड की जरूरत ही नहीं तो मैं क्यों जाकर लाइन में खडे होकर समय व्यर्थ करता । अरे ये समय नष्ट करना नहीं था । ये कंप्यूटर की नई पीढी है । दो घंटे में सारे दिन गए मित्र ये सब बेचने के ढोंग है तो वालों में एप्पल कंपनी जो ये आईपैड मार्केट में लाई है उसके शेयर बाजार में शेयर नीचे चले गए थे । उन्होंने इस आईपैड की मशहूरी इस प्रकार की इतनी रहे जैसे इंतजार करने लगे कि कब मार्केट में ये आए । उनके शहर रातोरात बढ गए । अब देखना कुछ ही महीनों में इनके मुकाबले ब्लैकबेरी वाले अपनी कोई इससे मिलती जुलती वस्तु लाएंगे, तेरे जैसे फिर उसके पीछे दौडेंगे । कुछ महीनों बाद एप्पल वाले इसमें कुछ एक नई विशेषताएं शामिल करके फिर मार्केट में आएंगे और फिर से लोग उसके पीछे हो जाएंगे तो बल्कि अच्छा है ना । जब आदमी किसी चीज से ऊपर जाये जब तक नहीं चीज आ जाती है । मार्केट में फिर गुरजीवन रुककर बोला और तुझे क्या तो महाकंजूस है । एक फोन से ही दो तीन साल निकाल लेता है । नई चीज मार्केट में आई हो, उसके बारे में जानना चाहिए । उसका इस्तेमाल करना चाहिए और उसकी कीमत उतारने के लिए फिर कक्षाएं छोड छोड कर काम करो । ऐसे ही तो जिंदगी का आनंद तुम लोगों की ऐसी मानसिकता बनाकर ही वो अपनी चीजों को बेचते हैं । तो देख अगर आईपैड पहले ही चार गीगाबाइट वाली रैम का बना देते तो लोगों को चार साल और लेने की जरूरत नहीं पडती । अब उन्होंने दो सौ छप्पन ऍम का बनाया । कुछ महीनों बाद एक जीगाबाइट वाला बनाएंगे और इस प्रकार प्रचार करेंगे कि पहले तो बहुत धीमा और बेकार है । नया खरीदो । आईपैड की कम मेमोरी वाली ट्रेन की बात पूरी जीवन के दिमाग में भी आई थी जब उसने कुछ महीने पहले ही खरीदे अपने नए लेपटॉप के साथ उसकी तुलना की थी । उसके लेपटॉप की मेमोरी आईपैड से चार गुना अधिक थी । जीवन का मन हुआ था कि वहाँ पे ना खरीदें । पाॅड देखता तो गुरुजी उनको बेचैन कर देता और अपनी और खींच लेता था । इंटरनेट पर आईपैड की फोटो के साथ लिखा कंप्यूटर की नई पीढी इसका मालिक बनने की कोशिश करो । ये पढकर गुरजीवन का दिल करता था कि वो अपने साथियों में पहला हो जिसके पास हल्के से वजन वाला टचस्क्रीन आॅफ हो । फिर इसकी कीमत देखकर वो कुछ सोच में पड जाता है । वो हिसाब किताब लगता की कितने घंटे अधिक काम करना पडेगा । हीटर जिंदगी है सोच उस पर भारी हो गई और वह आईपैड के मंडी में आने के पहले दिन ही कतार में जा खडा हुआ और फिर कुछ दिन तक आईपैड की विशेषताओं का गुणगान करता रहा था । सुख को पता था कि आईपैड का कुछ दिन इसी तरह जब होता रहेगा और फिर उसके अंदर के दोषियों की बात शुरू हो जाएगी । ऐसे ही तो वह हॉकी के खेल के बाद क्या करता है । जब टीम जीत जाती है वो खिलाडियों की प्रशंसा करता नहीं सकता और जब टीम हार जाती है तो कहने लगता है मुख खिलाडी को बदलकर उसकी जगह पर अब टीम का खिलाडी रख लेना चाहिए । वेंकुवर की टीम बॉस्टन के साथ हुआ दूसरा मैच जीत लेती है और जीवन हवा में उडने लगता है पर वैंकुवर की टीम द्वारा तीसरा मैच हारने पर जीवन में खाना नहीं खाया । चौथे मैच वाले दिन वो फिर से उत्साह में है । वो सबसे कहता है फॅसने पिछला मैच जानबूझकर हारा था । आज वो जीतेंगे और फिर वह पांचवी गेम में विजय करके अपने नाम कर लेंगे । वो चाहते हैं कि स्टाॅक कवर में ही जीता जाए । दूसरी टीम भी तो खेलती है । वो भी इस्टर्न कॉन्फ्रेंस की सारी टीमों को हराकर फाइनल में पहुंची है । तुझे मानना पडेगा कि अपनी टीम तगडी है । इसमें रेगुलर सीजन में सबसे ज्यादा पांच लेकर प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी जीती है । ये गेम को कंट्रोल करते हैं लेकिन वैंकुवर की टीम उस सुराख भी हर जाती है बल्कि पूरी तरह हारती है । कोई जीवन को दास देख सुख कहता है तो देख गनर्स की टीम मैच नहीं कंट्रोल कर दी बल्कि तुझे कण्ट्रोल करती है । गुरजीवन प्रत्युत्तर में कुछ नहीं कहता और इसी तरह शोक मई मूड में बैठा रहता है । सुख फिर कहता है मुझे बताया हाँ कि कितना बडा व्यापार है । टीमों के मालिक अरब पति हैं । वो हॉकी टीमों के साथ साथ और भी बडे बडे बिजनेस के मालिक हैं । फिर हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है । तुम्हारी इन्हीं भावनाओं का लाभ उठाकर सरमाएदार व्यापार करते हैं और तुम्हारी जेब में हल्की करते हैं । तेरह । फिर सरवानी दारी के बारे में भाषण शुरू हो गया और सीधी बात है कि हमारा गोली नर्वस हो गया और उसने कुछ खराब गोल करवा लीजिए । इसमें शर्माने दारी कहाँ से आ गई । अगले मैच में वैंकुवर में होगी और हमारी टीम ही जीतेगी तो नहीं बताया था कि तेरी टीम के गोली को पिछले साल बारह सालों के लिए चौंसठ मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है । छह । वो जीतेगा पीयूष की निजी प्राप्ति होगी तुझे क्या मिलेगा जब वो अच्छा खेलता है तो खुश हो जाता है । जब खराब खेलता है तो उदास हो जाता है । खाना पीना छोड देता है मतलब तेरी खुशी को एक अरब पति कंट्रोल करता है । ठीक है दाॅये गुरजीवन डाॅट को थोडा लम्बा खींच कर बोलता है और फिर कहता है दो ना मेरा बाप बनने की क्यों कोशिश करता है तो भाषण नहीं देता हूँ । मुझे बहुत अच्छा लगता है पर जब तू सुख पहुँच जाता है । गुरजीवन अगले मैच में पूरा खुश हो जाता है । वैंकोवर की टीम ने मैच जीत लिया था । बैंगलोर की टीम तीन मैच जीत चुकी है । अगले दिन फिर अखबार की सुर्खी है कि वैंकुवर में स्टैनली का परेड होने में सिर्फ एक मैच का फासला और उसके अगले दिन फिर से मैच होना है । जिस दिन वैंकोर में पहली बार स्टैनली कप चैंपियन बनना है लेकिन उस दिन गुरजीवन के एक रिश्तेदार की मंगनी है । जीवन के मॉम डैड और छोटी बहन गुरसिमरन प्रिंस रूपर्ट से चलकर इस रस्म में शामिल होने के लिए शरीर में आए हुए हैं । वो गुरजीवन को साथ चलने के लिए कहते हैं । पर और जीवन का कहना है कि उन्होंने मंगनी उस दिन की रखी है क्यों अंतरिम मामा को कह देते हैं कि भाई मंगली कैंसिल कर लो हमारे जीवन में उस दिन हॉकी का मैच देखना है जो जीवन कुछ जीवन की माँ बोलती है । फिर वो गुरजीवन का कंधा सहलाते भी कहती है मेरे बेटे हैं, जाना जरूर चाहे थोडे समय के लिए ही जाना । बहन के साथ तबला फिर कौन बजायेगा मेरी मासी कहती थी कि सिमरन मंगनी से पहले शपथ जरूर पडे । मैंने बहुत दिनों से तबले का ब्याज नहीं क्या मालूम और जीवन कहता है यही बहाने नगर ऍम साढे चार बजे शुरू होगा और साढे सात आठ बजे खत्म हो जाएगा । तेरे शब्द पडने के वक्त तो लौट भी जाएगा । सुब को ले जाओ ये बजा देगा तबला लोग सुख क्यों हो जाएगा जब तू ही नहीं बजाता और फिर गुरसिख लडकी के साथ गुरसिख ही तबला बजाते अच्छा लगता है सुख तब अंग्रेज बना हुआ है तो चुनाव अभ्यास करेंगे । कहती हुई गुरसिमरन अंदर से तबला उठा लाती है । तब ले तो गुरजीवन और सुख दोनों ही अपने साथ ले आए थे । पर वैंकोवर आकर कभी अभ्यास नहीं किया । प्रिंस रूपर्ट रहते हुए वो हर रविवार गुरुद्वारे में कीर्तन करते थे और सिमरन के जोर डालने पर गुरजीवन और सुख दोनों ही अपने तबलों की धूल झाडते हैं और फिर अपने हाथों को भी साफ करते हैं । अगले दिन वो तीनों ही बडी स्क्रीन पर मैच देखने के लिए शरीर सेंट्रल की और चल पडते हैं । बॉस्टन पिज्जा रेस्टोरेंट के सामने से गुजरते हुए सुख छेडता है । ऍम मनपसंद राॅड नहीं अब नहीं गुरजीवन जवाब देता है । रहे तो तो किसी दूसरे पॅन पर जाता ही नहीं था । अब क्या हो गया? इसका नाम बॉस्टन की टीम वाला है, कहकर गुरसिमरन हस्ती है । उन्होंने तो जितने दिन ये मैच होंगे बॉस्टन पीजा की जगह इसका नाम वैंकोवर पीजा रख दिया है । सुख कहता है तुम बजा जाओ, कैसा होगा गुरजीवन उन्हें आगे ले जाता है । पहले पीरियड के खत्म होने के बाद सुख गुरसिमरन को अपने संग लेकर वापस आ जाएगा । गुरजीवन पूरा मैच देकर सीधा हॉल में पहुंचेगा । उसने पार्टी वाले कपडे गाडी में ही रखे हुए हैं । अब उसने बैंगलोर की टीम की कप्तान ॅ स्टीम वाले पैंतीस नंबर की जर्सी पहन रखी है । मैच के शुरू होते ही बॉस्टन की टीम लगातार चार गोल कर देती है । कुछ के ऊपर मुर्दनी छा जाती है । दूसरा गोल होने के बाद ही वह बैंकों टीम के कोच पार तारापीठ ने लगता है जिसमें दूसरा गोल होते ही गोली को नहीं बदला था । पहले पीरियड के खत्म होते ही वो सुख और गुरसिमरन के साथ वापस घर की ओर लौट पडता है । घर पहुंचकर वो कनक के लोगों वाला सफेद तौलिया पकडकर टीवी के सामने बैठ जाता है । उसका विश्वास है जब वहाँ से हाथों में लेकर मैच देखता है तो कमेंट्स की टीम जीत जाती है तेरे इस तरह बैठने से अब कनक जीतने वाली नहीं बॉस्टन का गोली तगडा है । वो चार गोल नहीं करवाने वाला चल चले पार्टी पर सुख कहता है क्या पता होता है तुम जाओ कहकर गुरजीवन अपना ध्यान टीवी की ओर कर लेता है । वैंकोवर की टीम ने चौथे गोल के बाद दूसरे नंबर वाला गोली रख लिया है । टीम आक्रमण पर आक्रमण कर रही है लेकिन बॉस्टन का गोली उनकी एक नहीं चलने दे रहा । वो गोल के आगे दीवार बनकर खडा हो जाता है । बैंगलोर की टीम का खिलाडी डेनियल स्ट्रीट गोल के करीब पहुंच जाता है । गुरजीवन सोफे से टिकाई पीठ हटा लेता है और तौलिया जोश में घुमाता है । लेकिन डेनियल शॉट लगाने से पहले ही गिर पडता है । गया उसकी हॉकी से दूर चली जाती है । बॅालीवुड ऊंची आवाज में जीता है पर रेफरी ऍफ तो दूर पैनल्टी के लिए भी शायद नहीं करता । टीवी का कमेंटेटर कहता है वैंकोवर के खिलाडी स्टेट में बॉस्टन की टीम के रक्षक रहे हैं । अपनी हॉकी अडाकर उसको गिराया है । बॉस्टन के खिलाडी को इसकी पैनल्टी मिलनी चाहिए थी । है । टीवी पर खिलाडी के घर को दो तीन बार रीप्ले करके दिखाया जाता है । दूसरा कमेंटेटर कहता है कि ये पूरी तरह साफ नहीं कि खिलाडी खुद गिरा है या गिराया गया है । गुरजीवन को साफ दिखाई देता है । उस की टीम के खिलाडी को गिराया गया है । वो अपने आपसे कहता है ऍम की टीम का पक्ष ले रहे हैं । फिर वो रेफरी के खाते में दो तीन बडी बडी गालियाँ दागकर पानी पीने के लिए होता है । तीसरे पीरियड में फिर बैंगलोर के खिलाडी धावे पर धावा बोलते हैं और बॉस्टन के रक्षक पंक्ति की दस कद के खिलाडी बैंगलोर की टीम की एक नहीं चलने देते हैं । बैंको टीम का लडाकू खिलाडी खीजकर बॉस्टन की गोली के पैड पर हॉकी मारता है । हॉस्टल खिलाडी को धक्का देता है और दोनों खिलाडी दस्ताने उतारकर फेंक देते हैं और एक दूसरे के गिर वन पकडने की फिराक में हो जाते हैं । टीवी पर दर्शकों को लडो लडो का शोर सुनाई पडता है । कुछ जीवन सूफी परसूट खडा होता है और हवा में मुठिया चलता है । माँ माँ खिलाडियों के मुख्य चलने से पहले ही रेफरी बीच में आकर उनको छोडा देते हैं । ऐसे कुछ और भरते होती हैं और इन भिडंत तो में ही बैंगलोर की टीम को मिली एक पेनल्टी में हॉस्टल के खिलाडी एक और गोल दाग देते हैं । गुरजीवन टीवी का रिमोट टूट देता है और सोफे पर निर्णल होकर गिर पडता है तो कुछ देर किसी तरह पडा रहता है । उसकी माँ का फोन आता है । वो गुरजीवन को पार्टी हॉल में आने के लिए कहती है लेकिन गुरजीवन पर निराशा इतनी भारी हो जाती है कि उसका किसी के साथ बात करने को मन नहीं करता हूँ और अपने बिस्तर पर जा गिरता है । सुबह तीन खुलने पर उसका दिमाग खाली खाली है । वो कुछ देर यु ही बिस्तर पर पडा रहता है तो उसका दिमाग में आता है । उसको रात वाली पार्टी पर जाना चाहिए था । अपराधबोध उस पर हावी होने लगता है । लेकिन भाव अधिक देर उसका दिमाग में नहीं रहता और रात वाले मैच के बारे में वो सोचना पडता है उठकर वो अपना लगता बहुत करता है । अखबार में सुर्खी देखता है लिखा है वैंकोवर की टीम स्टाॅपर में ही जीतेगी कुछ जीवन को ये समाचार सुर्खी बहुत अच्छी लगती है । वो सोचता है इस संबंध में और खबरें वो यूनिवर्सिटी पहुंचकर लाइब्रेरी में बैठकर अखबार में अच्छी तरह पडेगा । अभी सिर्फ अन्य वेबसाइटों पर सुर्खियां देखेगा । उसकी माँ कहती है जीवन रात कितनी अच्छी पार्टी थी । सिमरन ने बहुत सुंदर शब्द गाया । लोगों ने डॉक्टरों की बारिश कर दी । अगर तू साथ चला जाता तो आधे तुझे भी मिल जाते हैं जो सिमरन आधे क्यूँ सुखने कौन से लिए हैं । सिमरन कहती है अच्छा अच्छा कहकर गुरजीवन टीवी चलाकर खेलो वाला चैनल लगा लेता है । सी । बी सी का प्रसिद्ध कमेंटेटर कहता है । बैंक कवर के प्रशंसकों निराश मत हो कब तुम्हारा है अगले मैच में तुम्हारा गोली बेहतर कारनामा दिखाएगा । वैंकुवर में बहुत बढिया खेलता है तो जीवन को ये टिप्पणी ठीक लगती है । वो सोचता है ओलम्पिक्स के वक्त भी ऐसा ही हुआ था । यही गोली फाइनल मैच में कनाडा की टीम के लिए बहुत बढिया खेला था और जीवन तेजी से तैयार होकर यूनिवर्सिटी की तरफ चल पडता है । उसका विचार है कि वह क्लास लगने से पहले ही अखबार पडेगा । रास्ते में और रेडियो उद्घोषक की वही दलील सुनता है तो लगभग हर हॉकी एक्सपर्ट्स ने कहीं या लिखी थी । वो कह रहा था कि कनाडा के जिस भी शहर में सर्दी की ओलंपिक्स खेल होते हैं उससे अगले वाले उसी शहर की हॉकी टीम स्टैनली कप जीतती है । पहले में किसी प्रकार मॉन्ट्रियल और फिर उन्नीस सौ उन्यासी में कैटेगरी में हुआ था । गुरजीवन इस टिप्पणी को सुनकर रात वाली निराशा को भूल जाता है और अगले मैच के लिए फिर सहित उत्साहित हो जाता है । यूनिवर्सिटी पहुंचकर गुरजीवन अखबार में हॉकी के प्रसिद्ध टिप्पणी का जब दुबई का कॉलम पडता है तो लिखता है कि अगला मैच वैंकुवर की स्पीड के लिए न भूलने वाला मैच होगा क्योंकि वो अपने शहर में अपनी स्थिति में अपनी टीम को स्टैन्ली कब जीतते देखेंगे? जीवन का मन होने लगता है कि वो भी इस मैच को देखने जाए । शाम होते होते अच्छा और अधिक प्रबल हो जाती है । वो ऍम करता है । वो सस्ती से सस्ती टिकट खोलता है । उसके देखा हजार डॉलर की टिकटों पर पडती है । इतनी सुस्ती वो सोचता है । उसने वैंकोवर के पांचवें मैच में हुई जीत के बाद रेडियो पर सुना था । यदि ये खेल श्रृंखला सातवें मैच पर पहुंची तो उसकी टिकटे कम से कम एक हजार प्रति टिकट होगी और कुछ जीवन इसकी पुष्टि के लिए ही इंटरनेट पर टिकटों की कीमत चेक की थी । सब पूछिए एक हजार या उससे ऊपर की कीमत पर लोग टिकट बेच रहे थे । गुरजीवन ने उस समय सोचा उसको भी पहले टिकटे खरीदकर रख लेनी चाहिए थी जिन्हें बेचकर मुनाफा कमाता और अब बैंगलोर में हुई पिछली हार के बाद वही डाॅट पांच सौ की बिक रही है । कुछ जीवन का मन हुआ कि वह तो टट्टी शीघ्र से शीघ्र खरीद ले लेकिन वो डॉक्टरों का प्रबंध कैसे करें । उसका दिमाग में आता है कि वो अपनी माँ से कहेंगे की उसके डैडी से कहकर ये टिकटी खरीदें । फिर वो अपनी सोच को दरकिनार कर देता है तो वो सोचता है कि उसका डैडी कभी भी इतनी महंगे टिकटे खरीदकर नहीं देगा । खासकर ये सोचकर की वो उनके कहने के बावजूद पार्टी में नहीं पहुंचा था । फिर गुरजीवन सोचता है कि वह गुरसिमरन से पूछ कर देखिए कि कल रात उसे कितने डॉलर मिले थे । ये सोच गुरजीवन को उचित लगती है और वह गुरसिमरन से पूछता है । कुछ सिमरन मैच देखने के लिए राजी हो जाती है लेकिन उसके पास दो टिकट के लायक पैसे नहीं है । फिर गुरजीवन के दिमाग में अपना आईपैड घूम जाता है । बहुत देर से उसमें इस्तेमाल नहीं किया था । उसकी टचस्क्रीन और धीमा चलने के कारण से ऊब गया था । कुछ होता है कि वह इसे भेज देगा । वो सोचता है कि ऍम खरीदेगा । अब तो पहले से तेज स्पीड वाले नए आईपैड आ गए हैं कि वह मैच देखने जरूर जाएगा । चाहे टिकट के लिए डॉलर का प्रबंध जैसे भी करना पडेगा और सिमरन कहती है कि सुख को भी संग ले चला जाए । कुछ जीवन को मालूम है कि सुख जाएगा लेकिन वह गुरसिमरन के कहने पर सुख से कहता है साॅस मुझे दो सस्ती टिकटे मिल गई पांच सौ किए तो विजय हमारे साथ इस कीमत पर तीसरी भी मिल जाएगी । तू तो मूर्ख है है थोडा चुप रहकर सौ फिर से कहता है तो मुझे लगता है ये सस्ती है तो आज भाषण मत देना हम जाना और चल मेरे साथ जिंदगी में । फिर पता नहीं कभी अपनी टीम द्वारा स्टाॅफ जीतने का मौका मिलेगा या नहीं । अच्छा जी पता की जीतेंगे । हो सकते हैं । देख बॉस्टन वालों ने बॉस्टन में हुए तीनों मैच जीते हैं और अपनी टीम ने वैंकोवर में सारे मैच जीते हैं । अपना गोली लोवांग वो बैंक और में बढिया खेलता है तो हमारे साथ चलना होगा । सिमरन चाहती है तो भी जांच चले । उसके बाद हम सिमरन को वैंकुवर घुमाएंगे, उसका उत्साह दे और गुरसिमरन के कहने पर सुख खाकर देता है । लेकिन वो सिर्फ डाउनटाउन जाने के लिए राजी होता है । जहाँ मैच होना है वो फैसला करते हैं कि गुरजीवन और गुरसिमरन रोजर्स एरिना में जाकर मैच देखेंगे और सुख बहुत टीवी की बॉडी स्क्रीन पर हो जाएंगे । एक साथ स्काईट्रेन पर जाते हुए गुरजीवन का उत्साह देख सुख कहता है । सूरज लगता है तो अभी भी आठवीं कक्षा में पडता है बिल्कुल नहीं बदला पर तू तो बदल गया है ना हमारे साथ आने के लिए धन्यवाद सुखी मुस्कराता है । जीवन फिर कहता है तो उन्हें पहले मैच में वह गोल देखा था जिससे लोगों ने रोका था तो बहुत बढिया गोल बचाया था उसने । और फिर वो उसकी तरह गोल बचाएगा । देखते हैं और घर गुरजीवन कहता है अरे मैंने इंटरनेट पर पडा है कि एक मुर्गे ने भी भविष्यवाणी की है कि कब कनक ही जीतेगा । अब तक उसकी सभी भविष्यवाणियां सही साबित हुई हैं । सुनकर सुख सस्ता है पर गुरजीवन का इस और ध्यान नहीं जाता हूँ । तो फिर कहता है तो मैं तू बाॅक्स की जर्सी पहनकर आता देख कैसे सबने पहन रखी है और तू कहा दो सौ पचास डॉलर जैसी पर खर्च करेगा । ऍम तो फिर ना अपना भाषण शुरू कर दे । ऐसा मत कर आज कुछ नहीं कहूंगा । सिर्फ मुझे खुशी देने आया हूं । सुख उत्तर देता है तो गुरजीवन खुश नहीं होता । वैंकुवर की टीम हर जाती है । गुज जीवन को लगता है मानव लुट गया हो । उसको चीजें मारने को मन होता है । एरिना में से बाहर निकलते हुए वह रहा । मैं बिक्री को बेयर की बोतलों को ठोकर मारता रहा । वो एरिया में से बाहर निकल कर देखता है कि हार से निराश लोग कारों और इमारतों के शीर्ष तोड रहे हैं, आग लगा रहे हैं । गुरजीवन भी बीयर की एक बोतल उठाकर दुकान के शीशे में सोड तार मारकर चीखता है । फिर वो शीर्ष तोड रही भीड में शामिल हो जाता है । गुरसिमरन उसके वहाँ पकडकर उसको छोडती है । रोती चीज की गुरसिमरन का चेहरा देख उसके साथ भीड में से बाहर निकल आता है और फिर वो गुरसिमरन को स्काईट्रेन स्टेशन की और ले जाता है । वहां पहुंचकर गुरसिमरन कहती है सोक कुछ जीवन उसको फोन में जाता है और दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता है । आप कहाँ से मिलता सुख तो भीड को काबू करने में लगा हुआ है । उसने देखा कि एक लडका पुलिस की कार को आग लगाने जा रहा है । सुख में चार और देखा वहाँ कोई पुलिस नहीं है । लोग अपने कैमरों से आग लगाने वाले उस लडकी की तस्वीरें लेने में बिजी हैं । कोई भी उसको हटाने की कोशिश नहीं कर रहा है । सुख साहस दिखाकर उस लडकी को पीछे से अपनी बाहों में जगह लेता है और कार से दूर धकेल कर ले जाता है और फिर उसे शाम करने लगता है सुख के साथ एक और लडका मिल जाता है और वह दोनों मिलकर उस लडके को शांत कर देते हैं । उस लडकी को शांत करके वो दोनों शीशे तोड रही भीड की तरफ बढते हैं । हुल्लडबाजों की बेकाबू और बिफरी हुई भीड पागलों की तरह तोड फोड और आगजनी करने में अहमदाबाद धुन में जुटी हुई है । अचानक सुख के सामने भीड को छोडते हुए कुछ जीवन और गुरसिमरन आते हैं । ये कहाँ की खेल भावना का जोश गुरज सुख पूछता है ये किस दिन ने हे तोड फोड कर रहे हैं और सिमरन गुरजीवन के जवाब की प्रतीक्षा किए बिना दूसरा सवाल डाल देती है । आपके वक्त के हुए गुरजीवन को धरती भी शरण नहीं दे रही ।

कविता के आर पार -11

कविता के आस पास तुम भी ले लेते थोडी सी वाहिनी जैसा आपने कितने चाहते तुम्हारी पसंद पूछी थी । अनवर की रसोई में से ड्रिंक लेकर जाते ही कविता बोली चाचा जी के सामने पीकर मैं उन्हें अनकम्फर्टेबल नहीं करना चाहती । मुश्किल से तो वह मेरे घर आए हैं । मैंने जवाब दिया सामने ना भी हो क्या चक्कर पी लो, मैं ऐसा नहीं किया कर दी । ॅ मेरे मुझे थोडा सख्त लहजे में निकल गया । एक पल मैं भूली गई की वो मेरी गैस थी लेकिन मैंने तुरंत ही अपने आवास पर नियंत्रण कर लिया और हॉस्टल वाले लहजे में पूछा तो अगले डालो ना बाबा मरना है तो बोली मुझे उसका ये जवाब चुनाव रात उसने बडे चाव से पी थी । मैंने उसके साथ का आनंद उठाया था । कल रात कवि सम्मेलन और डिनर के पश्चात कविता मेरे साथ ही मेरे घर आ गई थी । मेरे कहने के बगैर ही मुझे सच में बहुत अच्छा लगा था । मैंने तो चाचा जी से भी कहा था घर आने के लिए पर बोले मुझे मिलने की खातिर यहाँ दूसरे शहरों से बहुत सारे लेखक मित्र आये हुए हैं । मैं नहीं जाता हूँ और फिर हम मिल तो लिए ही हैं । चलो मैं चलती हूँ तुम्हारे साथ । डॉक्टर साहब तो बीजी आदमी है । कविता बोली थी । शायद उसने कभी चाचा जी के जवाब के साथ मेरे मुरझा गए चेहरे को पढ लिया था । उसने कुछ ही घंटों के साथ के दौरान निकटता बना ली थी । प्रोग्राम के दौरान सारे समय मेरे पास ही बैठी रही थी । घर पहुंचते ही कविता का बेच जग और अपना तो भरा व्यवहार । मुझे और भी अधिक अच्छा लगा था मैंने तो यूँही पूछा था क्या होगी चाय कॉफी वाइन क्या कुछ और कविता रे हंस कर जवाब दिया वाइन तो तुमने इस तरह पूछा है जैसे मैं कैनेडियन हूँ । सारे स्तर पूछने की आदत पडी हुई है । जब भी फ्रेंड्स करती हैं लोग सारी वाली कौन सी बात है । मैं भी फ्रेंड हूँ । चलो अजवाइन पीते हैं । शरीफ हैरान मत हो हम उम्र में सब चलता है और फिर हम वाॅक पर चली गई । वहां पहुंचकर कविता ने हवा में बाहें फैलाकर चारों तरफ देखते हुए कहा कि अगर तुम तो स्वर्ग में रहती हूँ । ऐसे सीन तो फिल्मों में देखे तो या फिर सपनों में? चंद चंद नहीं, समंदर का किनारा चांद की चांदनी को अपनी बाहों में भरने की कोशिश कर रही कविता मुझे भी उसी तरह ही लगी जैसे चाचा जी ने कहा था और फिर उच्चतम की और मूंग करके बैठ गई । मैं उसकी तरफ देखती रही । मुझे लगा कि वह कविता सोच रही होगी । कुछ देर बाद वो बोली ऐसा ही महान होता है । मेरे सपनों का मेरे सपनों कर रहा जाकर मुझे बाहों में भर लेता है । माहौल तो सचमुच का है और कल भाई साहब को भी यहाँ बुलाने के लिए अप्लाई कर देते हैं । मैं घर वाले की बात नहीं कर रही, सपनों के राजा की कर रही हूँ । मुझे लगता है कि कविता ने मेरे मजाक का जवाब उसी लहजे में दिया है । मैं हंस पडी तो वो नहीं, ऐसी मैंने चुप तोडने के लिए कहा । मेरे सपनों का राजकुमार तो अनुभव था और उसी को सच बना लिया । सभी तुम्हारे जैसी किस्मत वाले तो नहीं होते तो बोली किस्मत का तो पता नहीं पर हिम्मत जरूर कि पेरेंट्स की इच्छा के विरूद्ध जाकर विवाह करवाया है । पेरेंट्स के साथ तो व्यक्ति निपट लेता है तो समाज के साथ कैसे लडे । यहाँ बाद दूसरी है इंडिया में और तरह का समाज है । यहाँ तो पंजाबी समाज भी जालंधर मोगे से अलग नहीं । माता पिता यहाँ भी धर्मों जातियों की डिफरेंस की बात करके बच्चों को अपनी पसंद का लाइफ पार्टनर चुनने से रोकते हैं । अनवर हमारे साथ पडता था । यूनिवर्सिटी में पढते हुए ही हम एक दूसरे के करीब आए । हम दोनों में बहुत सारी बातें कॉमन है । बॅास था मुझे अगर मुसलमान के साथ विभाग करवाना है तो समझ ले हमारे लिए मर गई । लेकिन मैं नहीं झुकी तो यहाँ से टोरंटो मूव कर गए । कहते थे न हमें कहीं का नहीं छोडा और ऍम वो भी बहुत खुश नहीं थे । पर वो कभी कभी आ जाते हैं तो हमारे माता पिता भी किसी दिन आने लग पडेंगे । कविता बोली हो मैंने कहा जिस उम्र में तुम ने हिम्मत दिखाई उस उम्र में मेरी हिम्मत ना पडी और अब जब अहमद पडी है तो तलाश में भटक रही हूँ । मुझे लगा जैसे कविता की आवाज बहुत दूर से आ रही हो । कवि सम्मेलन में भी जो कविता उसने पडी थी वो भी भटकन और तलाश की ही कोई बात कहती थी । पूरी तरह तो मेरी समझ में नहीं आई पर कुछ इस तरह था सपनों में निरा राजकुमार आए । जब खुले तो कोई दूसरा हो । दया, सहानुभूति और प्रेम का कुछ मिला जुला भाव मेरे अंदर उसके प्रति पैदा हुआ था । कल रात जब हम सडक पर बैठी चांद की चांदनी का आनंद उठा रही थी और अब उसके छिपकर पीने वाले वाक्य नहीं उस भाव को खींच में बदल दिया था । मैंने उसको वाइन लेने के लिए दोबारा नहीं कहा और चीज काटने लगी । अनवर फिर किचन में आकर बोला, दीप घुस साॅस, ये मैं कर देता हूँ और वह कटी हुई चीज और सोशल के पीस प्लेट में रखने लगा । मैंने दृष्टि खाने पर डाली । जितना मुझे याद था उसके अनुसार मैंने कभी चाचा जी की पसंद का भोजन तैयार किया था । रोटिया में बहुत कम पकाती हूँ । अब कभी चाचा जी आए थे पिछले मैंने पकालीन सोचा कि चाचा जी शायद दूसरी किस्म का खाना पसंद ना करें । रोटियाँ बनाते हुए मेरे मन में ख्याल आया था की इसमें रोटियाँ ना पकाती तो चाचा जी शायद खाने की और देखकर मजाक करते हैं कि मैं कैनेडियन बन गई हूँ तो उसी तरह अपने खातों में पूछा करते हैं मेरी बेटी अभी भी पंजाबी है कि कैनेडियन बन गई । ये बात तो तब से लिखने लगे थे जब उनके खत के जवाब में मैं फोन पर चाचा जी पर बहुत गुस्सा हुई थी । उस खत्म चाचा जी ने मेरे बडे भाई को इंडिया आकर विवाह करवाने के लिए आमंत्रण देते हुए लिखा था कि कनाडा में मतलब जाना वहाँ की लडकियां बहुत खुली होती है । यहाँ से शुद्ध लडकी खोज कर देंगे । खत पढकर मुझे लगा था जिसे कभी चर्चा जी ने मुझे गाली बकि हो । मैंने क्रोध में आकर चाचा जी को फोन मिला दिया और कहा चाचा जी अगर कनाडा की लडकियाँ होती हैं तो आपकी बेटी भी अशुभ हुई फिर पहले तो वो मेरी बात ही ना समझे । जब मैंने उन्हें उनके खत के बारे में बताया तो बोले बेटी बहुत बोलने लग पडी है ऍम कहाँ से बन गई । अभी दो साल तो तुझे हुए गए हुए हैं । वो तो मेरे पंजाबी की जन्मी बेटी है । उसके बाद वो हर खत में मजाक के साथ लिखते कि कहीं पंजाब की भी ऍम तो नहीं बन गई । उनके खातों में तरह तरह के मजाक होते हैं । मैं कभी चाचा जी के खत्म वैसे ही चाव से पडती है जैसे उनकी कविताएं । उन दिनों उन्होंने अपनी दो किताबें करीब एक साल के अंतर पर भेजी थी । मैं उनकी कई पंक्तियां गुनगुनाती रहती विशेष करता हूँ । जब मन मार के साथ निकटता हुई थी । अनुभव फिर बोला, गोदी ॅ मैंने अपने और कविता के लिए जूस डाला और चाचा जी के पास चली गयी । लगता ही नहीं था कि वो हर वक्त मजाक करने वाली कभी चाचा जी थे । डॉक्टर साहब कितनी रमणीय जगह पर मकान लिया है । दीप ने कविता बोली हाँ आ गई । बहुत मनमोहन जगह है । चाचा जी ने कहा थैंक्यू आप ही रहूँ । तब तक बैंगलोर में है । यहीं बैठकर कविता लिख हो । मैंने कहा अच्छा जी किंचित मुस्कराये फिर बोल पडे तो कविता पडा करती है छोड दिया चाहिए । अब मैं कविता जीती हूँ । मेरे मुझे अनजाने ही निकल गया । मैंने अपने आप से फायदा क्या था कि चाचा जी के साथ कोई भी गिले शिकवे वाली बात नहीं करूंगी । पर ये खुद ब खुद ही मैं कह बैठी थी । चाचा जी चुप हो गए । कविता बोली ऍम दीप कविता वाली भाषा में बात कर रही है । चाचा जी थोडा सा मुस्कराया और खामोश रहे । अनवर सौं वाली प्लेट लेकर आ गया था । उस ने जब मेरे चाचा जी के आगे की तो वो बोले, भाई मुझे तो पंजाबी खाने के अलावा और कुछ अच्छा ही नहीं लगता । ट्राय कर लीजिए । अगर अच्छा लगे तो छोड दीजिए गा मैंने कहा लेकिन उन्होंने ट्राई भी नहीं किया और सर हिला दिया । चुप्पी फिर बन गई । चुप्पी तोडने के लिए मैंने सोचा की मैं चाची का हाल चाल पूछ लो । मगर वो तो पहले ही चार बार पूछ चुकी थी । समझ में नहीं आया क्या बात करूँ । चाचा जी किसी भी बात को आगे बढाने का सिरा ही नहीं थमा रहे थे । चाचा जी तो बातों की लडकी ही नहीं टूटने दिया करते थे । इसीलिए तो डैडी उन बातों नहीं कहा करते थे । माहौल देखकर मुझे लगा इस तरह चुप बैठे रहना बहुत देर तक नहीं चलेगा । मैं सोचा कि दोनों सब्जियों को थोडी ही देख कर ही लेता हूँ । जब संकेत मिलेगा तो खाना लिया होंगी । मेरे किचन में जाते ही अनवर फिर से ड्रिंक लेने आ गया । आते ही बुला हाॅस्पीटल पाँच दस ही जी हां न बस इतना ही कह पाई । मुझे महसूस हुआ कि चाचा जी अभी तक नाराज ही हैं, फिर नहीं आती । मैंने सोचा मुझे लगा की कविता जबरन लेकर आ गई होगी । सुबह जब मैं कविता को छोडने गई थी तो कार में से उतरकर गले मिलते हुए बोली तुम्हारे पैरेंट्स के बारे में तो नहीं कर सकती, पर डॉक्टर साहब को तुम्हारे घर जरूर लेकर आउंगी । पोस्ट मत करना । यदि उनकी इच्छा हुई तो जब चाहे प्रोग्राम बना लेना । मैंने कहा फोन करूंगी । मैं कहकर वो चली गई थी और फोन करके आज रात के खाने का ही प्रोग्राम बना लिया था । मुझे लगता नहीं था कि चाचा जी घर आएंगे । उन्होंने तभी जवाब दे दिया था जब इमिग्रेशन के ऑफिस में मिले थे सरीर इमिग्रेशन सर्विसेस के ऑफिस में कभी चाचा जी को देख कर मैं अवाक ही रह गई थी । पहले खयाल आया कि कोई और होगा । छात्र जी को इतने सालों से देखा भी नहीं था । लेकिन मैं ख्यालों में उलझी रही और केबिन में से निकलकर चाचा जी के सामने खडी हुई । ये भी नहीं सोचा कि चाचा जी पहचानने से इनकार भी कर सकते थे । चाचा जी, आप कोई काम बहुत चुपके से रह गए । फिर धीरे ईश्वर में बोलेगा, जी आप कब आएगा? चाची जी का भी आई हैं । मैंने हैरानी में कई सारे प्रश्न एक साथ पूछ लीजिए । काली आए थे, अकेला ही आया हूँ । कुछ लेखक मित्रों के साथ यहाँ कॉन्फ्रेंस होनी है तो या कैसे तो एक टीचर नहीं बन गई थी । टीचर हो जाएगा जी अगले महीने से स्कूल बंद होने वाले हैं । सोचा कि जुलाई अगस्त का महीना इंडिया में बताएं । सर, इमिग्रेशन वालों ने जलंधर में नैनी स्कूल खोला है । वहीं पढाने जाने का विचार है । आप बताओ चाची का क्या हाल चाल है । चलो घर चले नहीं, इतना टाइम नहीं है क्या? थोडे दिन ही है । कल से काॅफी हो जाऊंगा । इसीलिए आज यहाँ आए हैं । सोचा कि पहले पहले काम निपटा लें । चाचा जी बोले और फिर उन्होंने साथ खडी लडकी की ओर इशारा करते हुए कहा ये मेरी अजीजा है । कविता बहुत सुंदर लगती है । इन की बेटी को जालंधर वाले नहीं, स्कूल में एडमिशन लेना है । इसी सिलसिले में आए थे । मैंने कविता को हैलो कहकर चाचा जी से कहा ये क्या बात हुई? ज्यादा जी स्पॉट फेयर कॉन्फ्रेंस के बाद परसों कभी सम्मेलन और डिनर का प्रोग्राम होगा । डॉक्टर साहब, आप मुझे वहाँ बुला लें । चाचा जी के साथ आया व्यक्ति बोला हाँ जी, वहीं जाना तो चाचा जी बोले तो शोर मैंने कहा लेकिन जब चाचा जी के अचानक मिलने के कारण पैदा हुई एक्साइटमेंट कम होने लगी तो मैं दुविधा में पड गई जाऊँ, जानना चाहूँगा । मुझे कभी चाचा जी के शब्दों के अंदर का पर आपन चुभने लगा । उन्होंने एक बार भी अंदर का हाल चाल नहीं पूछा था । नहीं उसको संग लेकर आने के लिए कहा था । एक बार तो खाया है कि मैं नहीं जाउंगी लेकिन फिर सोचा कि अचानक मिले होने के कारण शायद उन्हें सुलझा ही ना हो । मतलब ऍफ डाउट सोच कर मैं खुद भी मुस्कुरा पडी थी । प्रसिद्ध कभी होने के कारण ही उन्हें कॉन्फ्रेंस के लिए बुलाया गया होगा । मैंने सोचा और कवि सम्मेलन में भी जब वह कविता सुनने के लिए उठे खूब तालियां बजी थी उन्होंने अपनी कविता सुनने से पहले वारिश शाह की पंक्तियां पडे नहीं नहीं हो गई । यही पंक्तियां मेरे घर में लगी वारिश शाह की तस्वीर के नीचे लिखी हुई थी की तस्वीर हमें अलवर के एक आर्टिस्ट मित्र ने देते हुए कहा था इसकी असली जगह हमारा घर है । फिर उसने उन पंक्तियों के अर्थ बताए थे । मैं उन पंक्तियों को अक्सर ही गुनगुनाने लगी थी । चाचा जी की कविता की और मेरा ध्यान नहीं गया था । मेरे कानों में तो ये शब्द ही गूंज रहे थे । जू ॅ रबदा है वो काजी अर्श खुदायदाद डालना हैं वे मैं जोडे काज इमान बेचा कौन जमिया जो अंत बनाना ही? और जब चाचा जी अपनी कविता सुना चुके तो हॉल में काफी देर तक तालियां गूंजती रही । चाचा जी को रात में मेरी प्रशंसा की । बधाई देने के लिए मैं स्टैण्डर्ड पर जाकर बोली । छह बजे कल डिनर पार्टी में आपको लोगों में गिरा देखकर सच में बहुत खुशी हुई । मुझे तो पता ही नहीं था कि मेरे चाचा जी इतने बडे कभी है । चाचा जी मुस्कराए बोले फिर भी नहीं । कविता बोली डॉक्टर साहब तो पंजाबी कविता में अथॉरिटी हैं । जो कविता नहीं पसंद आ जाए वो समझो कामयाब जब से ये आलोचना की तरफ बडे हैं तब से तो कभी लोग उनके आसपास इनसे निकटता बढाने की फिराक में रहते हैं । उनकी कविता की प्रशंसा में ये दो शब्द लिखते हैं । मुझे भी तो चाहता जी से आज थी कि वह मम्मी डैडी से मेरा और अनवर का विभाग कर देने के लिए समझाएंगे और इसी आशा में तो मैंने फोन किया था लेकिन चाचा जी के स्वर में ग्रोथ था तो बोले फिर कैनेडियन बन ही गई । चाचा जी इंडियन बनने में बुराई क्या है? माता पिता का कहना ना मानना और क्या पंजाबी लडकियाँ ऐसा नहीं करती हूँ । बेटा माँ बाप बच्चों के दुश्मन नहीं होते । वो जानते हैं कि बच्चों के लिए क्या सही है और क्या गलत तो मुझे बताओ तो सही किसमें गलत किया है इसमें ठीक भी किया है विभाग करवा के तो ये धर्म बदलना पडेगा और इस धर्म को बचाने में गुरुओं ने चाचा जी ने बात पूरी भी नहीं की थी कि मैं बीच में ही बोल पडी यही बात है तो बेफिक्र हो जाएगा ना मैं धार्मिक हूँ और ना अनवर तो धार्मिक हो या ना हो इसके साथ कोई फर्क नहीं पडता । तुम दो अलग अलग धर्मों से संबंधित हो की सोसाइटी में हम रहते हैं उसमें ये स्वीकार नहीं तो आपने अकेली के बारे में सोचती है । हमारे बारे में नहीं सोचती । हम लोगों को क्या वो दिखाएंगे? मुझे चाचा जी के व्यवहार पर आश्चर्य हुआ । मैंने वासी आवाज में कहा मुझे तो लगता था कि आप मेरे साथ खडा होंगे । आपकी कविता से तो मैंने प्यार करना सीखा है । कविता भावनाओं का प्रकटीकरण होता है और आम जिंदगी भावनाओं कि आश्रय नहीं चला करती । इसे सामाजिक तौर तरीके से किया जाता है इस बात को मारकर । लेकिन मैंने अपनी भावनाओं को नहीं मारा था । चाचा जी की नहीं कविताएं पडने का मोह कम हो गया था । अब चाचा जी से कोई बात करने के लिए इस कविता का सहारा लिया था । ये अलग बात है कि वह अधिक सफल नहीं हो रही थी । इस बार चुप का पत्थर चाचा जी ने ही थोडा बोले चलो दी भोजन का प्रबंध करो मैं तुरंत उठकर किचन में चली गई भोजन करते हुए फिर वही तो ये लोग ये लोग बोल कर कुछ देर तो मैं व्यस्त रही पर जब मुरकियां जमाने की आवाज आई तो मैंने चाचा जी से चलता हूँ प्रश्न कर दिया हूँ अच्छा जी ऐसा लगा हमारा बैंक हुआ बैंक और देखा ही कहाँ अभी कॉन्फ्रेंस में ही बिजी रहे कहकर चाचा जी ने फिर पल्ला छुडाने की कोशिश की पर इस बार मैंने सिर्फ पकडे लिया । इतने लोगों से मिले होंगे कोई फॅमिली आई होगा अधिकतर पंजाबी लोगों से ही मिला हूँ । लगता है बहुत एडवांस हो गए हैं फॅार अपना रहे हैं अच्छा इस बात पर लगा आपको ऐसा तुम्हारे लिए शायद ही सामान्य बातों पर मुझे कई लडकियों को शराब पीता देखकर जीत लगा । एक लडकी तो मेरे सब चीज भी कर गई तो खुद ही लेती हूँ । मैंने कहा मुझे लगा कि चाचा जी मजाक के साथ कहेंगे तो भी तो कैनेडियन बन गई है और वो बोले सच बताऊँ । मुझे डर था कि तू भी कहीं गिलास भरकर साथ मैं खडी हो जाए । चाय भी शराब का ही असर था कि चाचा जी थोडा सा खुल गए थे । फॅार बोला राउंड तो कुछ नहीं पर हर एक भाई चारे का अपना कल्चर होता है । उस कल्चर पर प्राउड करना चाहिए । दूसरों की देखा देखी अपनी संस्कृति को भूलना नहीं चाहिए । लेडीज का शराब पीना टेन इंडियन कल्चर है, पंजाबी नहीं । मेरे अंदर तीखा प्रश्न उठा । मैंने कविता की तरफ देखा और अपने आप को रोक लिया । ऐसे लडके ड्रिंक कर सकते हैं तो लडकियाँ क्यों नहीं? अंदर बोला अनवर ऍम कहकर मैंने अंदर को पूरा । इस विषय पर अनवर ने अपने अब्बू के साथ भी कई बार बहस की थी । हर बार उनकी बहस अब्बू के उठ कर चले जाने पर ही बंद होती थी । मैं उस तरह का वातावरण पैदा नहीं होने देना चाहती थी इसलिए अनवर को रोक दिया था । अब के साथ बहस करते हुए वो मेरे रोकने के बावजूद चुप नहीं करता था, पर अब कर गया था । फिर मैंने बारी बारी से सभी को ये लो ना ये लो ना में उलझा दिया । भोजन के बाद मैं सोच रही थी की कविताओं से कहे कि वह ऊपर स्टडी रूम में जाकर सोये । कॉस्ट्यूम जहाँ वो कल रात हुई थी, चाचा जी को दे दे चाचा जी को मैं उस तंग कमरे में मैट्रिक्स पर नहीं सुनाना चाहती थी । मेरी सुन जन को कविता ने खुद ही हाल कर दिया । वो लिविंग रूम की ओर इशारा करते ही बोली मैं तो यहाँ लेता हूँ । आज कुछ लिखने का बोर्ड है । बाहर बैठकर लिख होंगे । फिर यहाँ लिविंग रूम में आता हो जाओगे । डॉक्टर सबको गैस्ट्रो वाला बैठ दे दो । बत्ती बंद करके मैं और अनवर ऊपर बेडरूम में चले गए । अनवर तो पढते ही हो गया तो मुझे नींद कहाँ आ रही थी । चाचा जी के मेरे घर आने की खुशी थी । विवाह के बाद मायके वालों की तरफ से कोई पहली बार मेरे घर में आया था । पर चाचा जी आधे खुश नजर नहीं आ रहे थे । उनके आने पर उनके व्यवहार से उठे कई प्रश्न मेरे मन में आकर मेरी नींद उडा रहे थे । अनवर खर्राटे भर लगा था । मेरे सिर में दर्द होने लगा । दिल में आया की उठकर सिर दर्द की गोली लेलो । फिर सोचा कि यदि कविता लिख रही होगी तो डिस्टर्ब होगी । कुछ देर पडी रही । लेकिन जब अधिक देर लेते रहना कठिन हो गया तो मैं देना लाइट जलाए डाॅन की और उत्तरी मुझे संडे पर दो साढे दिखाई दिए । पहले तो मैंने सोचा कि मेरा भ्रम है पर गौर से देखा तो वहाँ चाचा जी और कविता थी । एक दूसरे को अपनी बाहों में जकडे वोटों से होम जुडे हैं । हिंदी कुछ चटक सीट टूट गया । मैंने ऍम चलता हूँ अंदर के मुकाबले बाहर अंधेरा हो गया । मैंने दवाई वाली कैबिनेट खोलने की बजाय वाइन की बोतल उठाई और सडक पर जाकर बोली मैं वाइन ले रही हूँ । यदि तुमने लेनी हो तो गिलास बनाना हूँ ।

तू ही बोल -12

तो वो ही बोल सब जगह एक ही खबर की चर्चा थी उसे । खबर को अपने अंदर मतदाता तरसेम जब घर पहुंचा तो हमेशा की तरह टीवी के सामने बैठी उसकी आठ दस साल की बेटी गुरनीत और चार पांच वर्षीय पुत्र सुमित ने एक साथ कहा ससुर इकार्डी सस्ता निकाल का जवाब दिए बगैर गुरनीत की और क्रोध के साथ देखते हुए तरफ से बोला स्कूल से आते ही टीवी के सामने बैठ जाए करूँ और छोटे भाई को सिखाई उल्टी आती है । फिर वो बच्चों के साथ सोफे पर बैठी अपनी माँ और चाय बनाने के लिए स्टोर के पास खडी अपनी पत्नी मन दीन की तरफ बारी । बारिश देखकर बोला तुम भी ना हटाया करो डर से इनकी माने साखियों वाली किताब पर से ध्यान हटाकर तरसेम की और देखा और फिर अपना ध्यान किताब की तरफ कर लिया । मनदीप ने तरसेम की गुस्से में भरी नजर को देखकर अपना ध्यान वाले खा रही चाय की तरफ कर लिया । अपने लंच पेट को किचन काउंटर पर पटक कर ऍम में घुसकर टॉयलेट पर बैठ गया । यदि उसका मूड ऐसा होता तो वो काम पर से लौट कर बच्चों के साथ बैठी अपनी माँ के पैरों को हाथ लगता । गुरनीत के सर पर हाथ रखने के बाद सुमित को अपनी सात रस्ते हुए मंदीप की और देखता करीब छह महीने पहले तरसेम ने एक रेडियो प्रोग्राम में सुना था कि बच्चों को देश देने की अपेक्षा उन्हें रोलमॉडल बनकर दिखाओ तो बच्चों पर ज्यादा असर पडता है । तब से तरसेम अपनी माँ को चरण स्पर्श करने लगा था और कुछ दिनों बाद उसने गुरमीत से कहा था देखो मैं जब बाहर से आता हूँ कि माँ के पैर छोटा हूँ तू भी जब हम बाहर से आए तो सस्ती अकाल कहा का फिर गुरमीत की और देखा सुमिति ऐसे कहने लगा था । टॉयलेट सीट पर बैठे तरसेम को लगा जैसे बच्चों ने टीवी की आवाज ऊंची कर दी हो । फिर उसको लगा मानव शोर मचा रहे हो । उसको मन हुआ कि उठकर दोनों की एक एयर जड देंगे । उसने दाद पीछे और ऊंची आवाज में कहा आओ बाहर कैसे शोर मचा रखा है? कहाँ शोर मचा रहे डैडी गुरमीत की जोर की आवाज आई देख तो कैसे बोलती है बताऊँ कैसे बडो के साथ बात करते हैं तो सीन पडती आवाज में बोला अरे कोई शोर नहीं मचा रहे । बेटा आपस में खेल रहे हैं । अगर कहता है तो बाहर ले जाती हूँ । पता नहीं क्या हो जाता है तो ये भी कभी कभी माँ की आवाज उसके कानों में पडी । माँ बिगाडेगी नहीं सोच कर उसको अपनी वहाँ पर गुस्सा आया पर वह कुछ नहीं बोला । कहती है पता नहीं मुझे क्या हो जाता है तो बोलती नहीं दिखाई देती । कैसे जवाब देती है पता नहीं चला क्या होगा अभी से आंखे दिखाती है । बडी होकर पता नहीं क्या रंग दिखाएगी । उसको लगा जैसे गुरनीत एकदम बडी हो गई हो । उसके अंदर एक चीज झूठी ऍम को लगा मानो गुरमीत किसी गोरे लडके के हाथ में हाथ डाले नहीं जा रही हूँ और वह लोगों से नजरे बचा रहा हूँ । ये सोचकर तरसेम डर से कम था । तरसेम के अंदर से बाहर नहीं । उसने सोचा पता होता तो पहले ही टेस्ट टेस्ट करवा लेते हैं । अब जब तक बडी होकर ही नहीं जाती सूली पडेंगे रहेंगे । ये सोचते हुए तरसेम की निगाह अचानक सामने लगे शीर्ष से जा टकराई । शीशे पर गुस्सा निकालता उसने कमदी गाली निकाली । ॅ कल और उसने अपनी नजरें शीर्ष पर से हटा ली । उसको मंदी पर ही जाएगी । सहेलियों के साथ बतियाने बैठ जाती है । सामने यह नहीं देखती कि लडकी बडी हो रही है । ये शीशा तरसेम ने खुद ही टांगा था । एक दिन जब बेडरूम में बैठी मनदीप अपनी बहुत कम आ रही थी तो तस्वीरें खींच कर बोला था ये सबको सिखाएगी तो बच्ची को दरवाजा तो बंद कर लिया कर । ऐसा करने से पहले और थोडी मैं दूर बंद करना भूल गई । बीस ब्लॉक कर जाना । बाहर निकलते वक्त मंदिर बोली तरसेम बडबडाता दरवाजा बंद कर के कमरे में से बाहर निकल गया । अगले दिन उसने टॉयलेट के सामने शीर्षा तंग कर नरम आवास में मंदिर से कहा था एक बंदी गुरनीत अब बडी हो रही है । हमें ख्याल रखना पडेगा । मैंने टॉयलेट के सामने शीर्षक दिया है टॉयलेट बैठने के बहाने बना लिया कर अपने आइब्रो । ये बात हालांकि तरसेम ने धीमे स्वर में मनदीप से कहीं थी पर एक तरफ बैठी उसकी माँ के कानों तक पहुंची गई । उसने वहीं बैठे बैठे कहा वो वो कर पहर रखना पडेगा भाई, बच्चे तो तुम्हें जैसे करता देखेंगे वैसा ही करेंगे । अब पुराने जमाने तो है नहीं जब लडकियां सिर पर चुन्नी उतरने नहीं देती थी अब शर्म हया वाला आवा ही बिगड पडा है । माँ की ऐसी बातें तरसेम को और ज्यादा फिक्र बंद कर देती थी । उस दिन तो कुछ ज्यादा ही फिक्रमंद हो गया था । जिस दिन उस की माने गुरनीत को टोकते हुए कहा था लडकी अब तो बच्चे नहीं रही पैंट पहना कर लडकियाँ नंगी टांगे नहीं रखा करती । ॅ काम है उसका अगर गुरनीत बैकयार्ड वाली सीढियां उतर गई थी उनकी तो देख कैसे मेरी कभी आंख में डाले नहीं चुकती थी फिर अब अभी ये हाल है बडी होकर पता नहीं क्या चाम दिखाएगी । टाॅम की माँ और भी बहुत कुछ बोलती रही थी पर तरसेम के दिमाग में तो बडी होकर पता नहीं क्या चाम दिखाएगी ही अटक गया था । उसी शाम ग्रॉसरी लेकर लौटी । मंदी बोली थी पता नहीं क्या होगा? भेडाघाट हुआ पडा है । टाॅस मंदीप की और देखा जिसे पूछ रहा हूँ कि तुझे स्टोर में घूमती को कहाँ से सपना आ गया कि मैं भी पता नहीं क्या होगा को लेकर फिक्रमंद हूँ । बंदी बोली ये जो अपने सामने बस स्टॉप है ना वहाँ बैठे हैं, वोट से हो थोडे मुश्किल से बारह तेरह साल के होंगे । लडकी तो अपने लोगों की ही लगती है । मुझे तो बताते हुए भी शर्म आती है । लडके ने लडकी के ब्लाउज में हार डाला हुआ है । मेरा तो पूरा शरीर ही कंपनी लगा मेरे बच्चे जो कुछ देखेंगे वही तो करेंगे । सुनकर तहसीन और अधिक चिंतित हो उठा । पता नहीं क्या होगा सोचते हुए टाॅयलेट की सीट पर जाता था । जब किसी समस्या को मतलब होता है वैसा ही क्या करता है । उसके दिमाग में आया कि यदि ये मालूम होता की लडकियाँ पालनी इतनी कठिन होती हैं तो पहले गर्म टेस्ट करवा लेते हैं । पर अगले दिन जब गुरमीत स्कूल से अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर आई थी तो सभी विषयों में एक्सीडेंट देखकर तरसेम को अपनी सोच पर शर्मिंदगी महसूस हुई थी और वो आईने के साथ आंख नहीं मिला सकता था । अब भी तरसेम के दिमाग में अगर टेस्ट वाली बात आने पर वो आईने से आंख नहीं मिला पा रहा था और उसने आएंगे कोई गंदी गाली बॅाल निकाल कर आंखें घुमा ली थी । आदमी क्या करेगी उसे ऐसा दिन ना देखना पडेगा । तब से हमने सोचा लेकिन उसके अपने अंदर के सवाल का जवाब ना मिला । उसको पहले की अपेक्षा बच्चों की धीमी आवाज और तेज जाती महसूस हुई । उसे तल्खी महसूस हुई । तरसेम ने सोचा कि ठंडे पानी का शौक चला दे । शौहर की आवाज बाहरी आवाजों को रोक लेती है और वो अपने अंदरूनी शोर में वो लग जाता है प्रदर्शन हमको पानी वाली मीटर का तुरंत ख्याल आ गया । नई जगह की साली सौ दूसरी मुसीबत हें उसे अपना पुराना मकान याद आया जहाँ पानी का साल भर का फ्लैट रेट था और ऐसे मौकों पर ठंडे पानी का शव ओवर चला दिया करता था । पुरानी बातों को छोडने में मेहनत तो करनी पडती है । दुख भी होता है । पहले पहले जब छूट जाती है तो सुख भी मिलता है । जीत मामा की कही बात तरसेम के दिमाग में कौन थे लेकिन अगले ही पल उसने सोचा हम आपको बातें बनानी आती हैं । दोनों बेटियां के डॉक्टर बन गई । ये लोगों को अखिल देने लग पडा है । तरसेम को जीत मामा आज दिन में भी याद आया था जब तरसेम काम पर खडा था । तरसेम को जीत मामा अपने घर के फैमिली रूम में सोफे पर बैठा वैसे ही दिखाई दिया था जैसे वो करीब दो वर्ष पहले दिखाई दिया था । जब वह कनाडा में नए आए तो अपनी बुआ के बेटी दामाद यानी तरसेन के माँ बाप को मिलने वैंकोवर आया था । खुद तो जीत करीब बीस सालों से मस्कट जून में रहता था । यहाँ वहाँ स्कूल में गणित पढाता था । बातचीत करते हुए उसने कहा था, बहन हम तब जिम्मेदारी और सब फ्री हो गए । बच्चियाँ दोनों डॉक्टर बन गई । दोनों की शादी हो गई तो भाई बहुत अच्छा हुआ कि दोनों लडकियों को डॉक्टर बना दिया तो बनना ही था । तो आप कौन सा काम पढा लिखा था लडकियों के फिर कहा कि रिश्ते तरसेम की मैंने पूछा । हमने कहा करने तो रिश्ते हम तो हाँ करने वालों में थे तो उनकी अपनी लाइफ है । जहाँ उन्होंने कहा विभाग करवाने को हमने हाँ कर दी । हम आज भी दोनों डॉक्टर ही हैं । यूनिवर्सिटी में दोनों के साथ पढते थे तो अब नहीं होंगे । ऍम की माँ ने हैरानी प्रकट करते हुए पूछा जीत है ऐसा? फिर बोला सारी दुनिया ही अपनी है और मुझे पता है बहन तो क्या पूछना चाहती है ना तो वो जब हैं और न ही फॅमिली अपने मामा के चेहरे की तरफ देखा । मामा के चेहरे की आभा देखकर तरसेम को आश्चर्य का हुआ जीतने बात पूरी की । दामाद अंग्रेज है और छोटा चीनी । कोई कुछ नहीं हुआ । ऍम की माने हिरानी के साथ आखिर सिकोडी मुझे क्या प्रॉब्लम होनी थी? लडके दोनों अच्छे हैं कि बेटियाँ भी कौनसी काम इंटेलिजेंट है हमारा पाकिस्तान को पढाना लिखाना बाकी उनकी लाइफ है जीतने कहा तू तो भाई बिलकुल ही गोरो जैसा बन गया । तकलीफ तो होती है ना लोग क्या कहते होंगे । तरसेम की माँ ने कहा जी फिर हजार बोला अरे नहीं बहन मुझे कोई तकलीफ हुई । असल में लोग दूसरों की परवाह नहीं क्या करते हैं बल्कि आदमी के अंदर ही कोई कॉम्प्लेक्स होता है जिसके असर पहले तो लोगों की परवाह क्या करता है । अगर आदमी के अंदर कोई गांठ हो तो वह किसी की परवाह नहीं क्या करता हम पंजाबियों ने अपनी जब को लडकियों के साथ जुडा हुआ है । देखो गोरे कभी परवाह नहीं करते की उनकी बेटी बहन किसके साथ उठती है । बैठती है के लिए ये सब का प्रश्न नहीं होता । हमारे बच्चों की किसी के संग छोटी मोटी बात हो जाए तो बहुत ज्यादा का चार लोगों में खडा होना दूबर कर देते हैं लोग कोई बढिया बातें नहीं हमारे लोगों की और इस समय के साथ हमें बदलना चाहिए । ये जो हमारे अंदर गांठे बंदी हुई है ना इन्हें खोलना पडेगा । टॉयलेट सीट पर बैठे तरसेम को अपने मामा की कई काट वाली ये बात याद हुआ । उसने सोचा तो माँ की बहुत ठीक लगती है पर बॅाल वो पता नहीं कब छोडेंगे ऐसा सोचना उन्हें छोड दिया । ऐसा सोचा तरसेम को लगा जैसे आईने के अंदर से उसके प्रतिबिंबन पूछा हूँ उसे कोई बात न सूची । फिर उसने सोचा भी ऐसे कैसे काटी खत्म हो जाती है । उसने अपना ध्यान आईने पर से हटा लिया । ये सवाल तरसेम के दिमाग में जीत मामा की बात सुनकर तब भी उपजा था पर उसने मामा से पूछा नहीं था बल्कि उस ने कहा था हाँ जी ये बडा कठिन काम है हमारे यहाँ पिछले दिनों अपने बजट की लडकी ने नाइयों के लडके से विवाह करवाया है । लोग विवाह तो उसे कहते ही नहीं थे कहते नाइयों के लडके के साथ भाग गई । अब ऐसे लोगों की बातों के पीछे अपने बच्चों की जिंदगी खराब करना कहाँ की समझदारी है? जीत मामा ने कहा था ऐसी बातें तो वही लोग क्या करते हैं जो अपनी बेटियाँ अपनी जात बिरादरी में भी आ चुके होते हैं जिनकी बेटियां नहीं होती । तरसेन के बापू ने गहरी आवास में कहा जैसे वो कहीं बहुत दूर से बोल रहा हूँ काम पर खडे तरसेम को बापू की कहीं ये बात याद आती है उसके दिमाग में गांव वाला तेजा नंबरदार घूम गया था । उसका ख्याल आते ही तरसेन के अंदर एक ही जुटी उसका कडवा कडवा हो गया । नंबर तारीख का बडा कर उसमें ठीक अंदर निकला । तेजा नंबरदार उसको दो आपने पोर्टा दिखाई दिया । मानव कह रहा हूँ अब भी राजी हुए ही हो । दीवार का आधा देने को अगर पहले मान जाते हैं तरसेम ने अपना सिर्फ झटका पर नंबर बार उसका दिमाग में से निकल ही नहीं रहा हूँ उसकी । कहीं हर बात तरसेम के अंदर था । ठाणे कर रही थी । बहुत साल पहले जब अभी तरह से तेरह चौदह साल का था । तेज नंबर आर के साथ तरसेम के बापू का बाहरी घर की चारदीवारी को लेकर झगडा होते होते चला था । तेजा नंबरदार घर की चारदीवारी करने के लिए साझी दीवार करनी चाहता था । पर थर्ड सेम का बापू पशुओं वाले कोठे की चारदिवारी करने को फालतू का खर्च ही समझता था । तरसेम के बापू का इनकार सुनकर नंबरदार के बिचौलियों के हाथ सन्देश आया था । उसने कहा था कोई बात नहीं, नहीं मानते तो नाम आने चारदीवारी को जब उस की लडकियाँ बाहर वाले घर में आया करेंगी तो मैं अपने लडकों को कह दिया करूंगा जो उनकी तरफ वो करके मुझे तो ये सुनते ही तरसेम का बापू एक कोने पर पडी कांदा सी की और बडा ऍम की माँ और बिचौले ने उसको पकडा दिया था । फिर उसको के साथ पंगा लेने में घाटा ही घाटा है कहकर उसे ठंडा कर दिया । पर वो बात जब तरसेम को याद आती तो उसके अंदर एक हलचल सी मचा देती । दिमाग में होती इस हलचल के साथ साथ तरसेम हाथों के साथ मशीन को फीड देता रहा । नहीं हो गई हो साले के बोते होती तो बहन के ऍम अंग हो करना । चाहूँ सोचते हुए तरसेम ने मशीन में से तैयार हुआ पीस बाहर निकालकर बेंच पर पटकता रखा और मैं पीस मशीन की वो इसमें कस दिया । नया पीस तैयार करते हुए तरसेम के सोचों में पर दलों का छाना आ गया तो तरसेम के गांव वाले घर के सामने पडी कटे हुए दरख्त की जड पर बैठ कर अंदर वाले घर से गाली बार करके बाहर वाले घर जाती तरसेम की बहन को घूरता रहता हूँ । आठवीं जमात में पढते तरसेन के हम उम्र जब छाने यापक दल का नाम लेते तो सीम को लगता जैसे उत्तर सेम को ही सुनाकर कह रहे हो उद्यानों तरसेन घर के बाहरी दरवाजे पर जाना भी भरोसा ना करता । जब भी थोडा सा खुलता वो तुरंत से बंद कर देता हूँ । तब से हम को लगा जैसे मशीन की चाय, चाय की आवाज छाना छाना कह रही हो । यदि किसी अच्छे मूड में होता तो मशीन की यही आवाज उसे किसी गीत की तर्ज लगती है और उसके साथ साथ वो भी गुनगुनाने लगता । इस तरह गुनगुनाते हुए वो मशीन को हाथ से फीट देता हुआ उसके साथ एक हो जाता है और उसे समय बीतने का खयाल ही नहीं रहता । ऐसा करते करते उसको मशीन की ऑटोमेटिक स्पीड के होते हुए भी हाथ से फील्ड देने की आदत पड गई थी । आज इस आवास को छाणा छाना महसूस करके तरसेम के अंदर में आग सी मच गई और वह झटके से मशीन को फिट दे बैठा । मैं कल गाली देते हुए तरसेम ने आसपास देखा की कुछ तो नहीं रहा फिर उस चीज की तरफ देखा जिसे इन मिल गढने के कारण निशान पड गया था । उसने पीस मशीन में से बाहर निकाला और उस की तरफ देखता रहा । उस ने सोचा कि इस स्क्रैप बिन में फेंक देंगे । फिर उसने सोचा कि हम आलू रेती से रगडने परेशान हो जाए लेकिन निशान गहरा था । मुझे लगा कि ये निशान इस तरह बैठने वाला नहीं है फिर भी उसने ऍम में नहीं फेंका । उसने सोचा ये कभी किसी दूसरे जॉब में काम आ जाएगा । ये सोच उसने इसे अपने बेंच के नीचे एक कोने में फेंक दिया जहां इस तरह की खराब हुए कई पीस सालों से बिल हुए पडे थे तरसेम के दिमाग में जीत मामा की कहीं बात आई गाठों को सारी उम्र साठ साठ मत उठाए फिरो अंदर के गोल्ड उठाकर बाहर है को मैं बढाकर तरह से हम ने नया पीस मशीन में फिट कर दिया और मशीन को ऑटोमेटिक फीट देकर एक तरफ होकर खडा हो गया । छाणा फिर उसका दिमाग में घूमने लगा लेकिन इस बार पहले वाला छाना नहीं था बल्कि पिछली बार जब उस साल भर पहले इंडिया गया था तब वाला छाना उसकी आंखों के आगे था । जब गली में से गुजर रहा था तो झाना उसको बहुत से पकडकर अपने घर ले गया था और फिर चाय पिलाते हुए अपनी बेटी की तरफ इशारा करते हुए बोला था ऍम ये अपनी बेटी कॉलेज में पडती है । उधर कनाडा में देखना अगर कोई जुगाड बनता हो तो कल रखियों हाँ लडकी तो तुम्हारी सच में कनाडा जाने वाली है । तरसेम ने कहा था जब अवैध छाना के घर से वापस लौटा तो उसके अंदर एक अजीब किस्म का सुकून का तो उसने कई बार अपने ख्यालों में छाने की बेटी को नैनी के तौर पर कनाडा मंगवाकर एक बेसमेंट में रखेल बना कर रखा है । छाणा की बेटी के साथ रासलीला के बारे में सोचकर तरसेम शरूर में आ जाता हूँ । उसके अंदर एक अलग किस्म कर्णशूल अच्छा जाता हूँ । लेकिन आज मशीन पर खडे तरसेम के खयाल जब छाना से होते हुए उसकी बेटी तक पहुंचे । उसके अंगों में कोई हरकत में हुई है और अगले ही पल उसे अपनी बेटी गुरमीत का चेहरा दिखाई दिया । उत्तर सिंह को जवान हो गई लगी । ऍम ने अपने सिर को झटका और पानी की बॉटल में से घूम खडा उल्टी सीधी बातें सोचकर आज कोई यूज ऍम करवा बैठा हूँ । ये खयाल आते ही तरसेम ने मशीन बंद कर दी और लंबी लंबी सांस लेने लगा । फिर उसने सोचा कि क्यों न लीड हैंड होने का लाभ उठाए और फिर उसने नए आए मैटीरियल और टुल्लू की देख रेख में अपने आपको उलझा लिया । लंच ब्रेक के समय भी उल्लंन शुरू में नहीं गया । वो अपने सहकर्मियों से बच रहा था । रात वाली खबर का जिक्र ना छेड बैठे सवेरे जब मुकाम पर पहुंचा था तभी ब्राइन ने जिक्र छेड दिया था ड्राइंग को मानो मुश्किल से वक्त मिला था अपनी दलीलों को सब साबित करने के लिए । ऍम और ड्राइंग बहुत बार अरेंज मैरिज पर बहस कर चुके थे । ब्राइन कि अरेंज मैरिज के खिलाफ दलीलों के जवाब जब तरसेम के पास खत्म हो जाते हैं तो वह बात खत्म करते हुए कहता, अच्छा बता तलाक । अरेंज मैरिज वाले हमारे लोगों के ज्यादा होते हैं तुम्हारे प्रेम विवाह वालों के । और आज जब ब्रायन ने तरसेन के काम पर पहुंचते ही खबर वाली बात शुरू कर दी तो तरसेम नहीं जल्दी जल्दी उसकी दो एक बातों का जवाब लेकर पीठ घुमारली । आज दिन भर ऐसी बातें होंगी । सोच कर तरह चीन की आंखें सुन लगने लगी । उसका मन हुआ की घर वापस चला जाए और अगले ही बाल उसने इस ख्याल को छोड दिया । कर दे रहे बातें दिहाडी जरूर खराब करनी है । ये सोचकर वह हॉस्टल में घुस गया । उसने अपनी आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारे और मशीन शॉप में जाकर घडी के आठ बजने से दो चार मिनट पहले ही एयर कंप्रेशर चला दिया, जिसके चलने की आवाज का मतलब था की बातों का समय समाप्त । उसके सहकर्मियों ने उसकी तरफ घूरकर देखा और उस ने किसी की परवाह किए बगैर अपनी मिलिंग मशीन चला दी । लेकिन काम पर से घर लौटते समय पंजाबी रेडियो पर फिर उसी खबर की चर्चा चल रही थी । रेडियो संचार बोल रहा था । ये बहुत दुर्भाग्य की बात है कि हम कनाडा जैसे बडे देश में रहते हुए भी अपनी संकीर्ण सोचों से पीछा नहीं छुडा सके । ऍम फॅस अगला वक्ता बोलने लगा । जवाब बात ऐसी है कि हमने इस देश में आकर दवाई तो बहुत कर रहे लेकिन बच्चों की तरफ ध्यान ही नहीं दे सके । अरे अगर हम ध्यान नहीं देंगे तो यहाँ के कल्चर को अडॉप्ट करेंगे ही । जब हमारी बच्चियां छोटी थी, हमने उन्हें इंडिया भेज दिया । मेरी पत्नी वही रही । गर्मियों की छुट्टियों में कभी कबार इधर आ जाते । बेटियाँ बडी होकर आई । इधर अपने कल्चर के बारे में जानती है । वह कुर्वानी तो करनी पडती है जी रेडियो संचालक बोला मेहरवानी जी कल्चर एक जगह खडा नहीं रहता । इंडिया में भी अब वो कल्चर नहीं रहा जो आप वहाँ छोड आए थे । बच्चों द्वारा अपनी इच्छानुसार जीवन साथी चुनने से कल्चर में विकास हुआ, निराश नहीं । तरसेम ये सब सुनता । घर पहुंचकर टॉयलेट सीट पर जा बैठा । उसका दिमाग में रेडियो वाले वक्ता की बात घुमाने लगी जो बच्चों के पालन पोषण के लिए उन्हें इंडिया भेजने की बात कर रहा था । इसी तरह एक दिन मनदीप ने कहा था जैसे मुस्लिम कराई थी की किसी की कुमारी लडकी बिना विवाह करवाए अपने बॉय फ्रेंड के साथ रहने लगी थी । उस दिन तरसेम कुछ देर सोचता रहा था । फिर बोला था माँ बाप दोनों ही चाहिए होते हैं । बच्चों को जब बडे हो रहे होते हैं तो यु ही बातें किया करते हैं । रेडियो पर ऑफ इंडिया में कौन सा सारे लगी निकलते हैं, तुम्हारी मर्जी है तो वही ज्यादा चिंता सताती रहती है जब किसी की बेटी बहन को लेकर बात सुना करते हैं । कुछ देर बाद फिर वो बोली थी पता नहीं क्या होगा ऐसा दिन दिखाना रब्बा किसी को टॉयलेट सीट पर बैठे तरसेम ने भी पता नहीं क्या होगा । सोच कर अपने हाथ ऊपर की और उठाए तो मुंबई बोला रक्षा करना । परमात्मा रात भी वही बोला था जब उसने टीवी पर ग्यारह बजे वाले समाचार में ये समाचार सुना था । फिर सारी रात करवटें बदलते बताई थी । जब भी आंखे बंद करता उसको समाचार वाले माँ बाप अपने और गुरनीत में बदलते महसूस होते हैं और वोटर कर छत से आके खोल देता । ऐसी रात के बाद जब सवेरे उठकर तरसेन काम पर पहुंचा तो ब्राइन मानो उसी का इंतजार कर रहा था । उसने तरसेम से कहा था और एक ये जो तेरे कंट्री मैंने अपनी बेटी का कत्ल किया है ना उसके बारे में क्या सोचता है ये क्या सोचना है । कहकर तरसेम चुप हो गया । वो बात को आगे नहीं बढाना चाहता था लेकिन ब्राइन आज बात को इतनी जल्दी खत्म नहीं कर देना चाहता था । उसने कहा मेरे विचार में ऐसे पिता को सबसे सख्त सजा मिलनी चाहिए । इनके दिमाग में खी जुडी बोला ब्रायन ये हमारी सभ्यता से जुडा मामला है तो नहीं समझ सकता है ये कैसा सभ्यता से जुडा मामला है तो बेटियों को कत्ल करने के लिए उकसाता है । बच्चों को पढाओ लिखाओ, अच्छे नैतिक मूल्य सिखाओ, जीवन साथी चुनने का हक बच्चे को होना चाहिए । उसने ही सारी उम्र अपने साथ ही के साथ व्यतीत करनी होती है । नहीं बचाई अपना बुनियादी हक मांगता है इसका मतलब ये तो नहीं इसका तत्व कर दूँ ब्लॅक और वो ऍम मरवाता अगर इतना करता हूँ तस्वीर दिल में आया कि कहे और उसने कहा तो उन सब आप अपनी बेटी का कत्ल करना चाहता है । फिर ब्राइन ने प्रश्न सूचक नजरों से तरसेन की तरफ देखा तो नहीं समझेगा कहकर तरह से उसके पास से दूर हो गया । बात को समझे बिना ही लेक्चर शुरू कर देते हैं । कहा तो है कि तुम्हारा अपना कल्चर है और हमारा अपना । तरसेम ने मन में ही सोचा । ब्राइन किए बातें तरसेम के दिमाग में खलबली मचाने लगे । बच्चों को पढाओ लिखाओ जो कि तुम्हारा फर्ज है । ऍम को लगा मानो ये बातें ब्राइन नहीं बल्कि जीत मामा कह रहा हूँ । पर अगले ही पल उसके दिमाग में रेडियो के किसी वक्ता की बात गूंजी जो उसने आज टॉक शो में सुनी थी । डॉक्टरों में कोई बोल रहा था भाई साहब, अब सारे गोरों के अखबार रेडियो सा आदमी को बुरा कहे जाते हैं । दे गाने घर में लगी आग एक तमाशा होती है आदमी ने भाई बन्दों में उठना बैठना भी होता है और कौनसा पंजाबी आदमी है जो किसी गोरे को दामाद बनाने को तैयार होगा । जब गंदी औलाद कहना ना माने तो आदमी क्या करेगा? जी शुक्रिया जी, ये आपका ख्याल है । कहना न मानने पर औलाद का कत्ल कर दें । बोलने वाले वक्ता को बीच में ही रोककर रेडियो संचालक ने कहा था संचालक बात याद आते ही तरसेम को लगा जैसे जीत मामा कह रहा हूँ बच्चों को पढाओ लिखाओ । जो आदमी का फर्ज है उन्हें अपनी जब का मसला ना बनाओ । लेकिन अगले ही पल रेडियो वक्ता की आवाज फिर उसके अंदर से उठी । तब से हमने सोचा आदमी को सोसाइटी में उठना बैठना भी होता है । अगर चार लोगों में कोई कह दे कि फैलाने की बेटी गोरे के साथ भाग गई तो क्या रह जाता है? बंदे का क्या करे? आदमी सोचते हुए तरसेम ने अनुभव किया कि उसका सर फट रहा है । उसने बेवसी के साथ ही नहीं की तरफ देखा लेकिन आई में उसको खाली खाली सा लगा हेलो! आप भी कुछ बोल तरसेन बुदबुदाया ।

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