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प्रतिशोध - अजनबी हसीना

आप सुन रहे हैं कुछ हुआ ऍम कहाँ का नाम है प्रतिशोध जिसकी लेखिका है फॅमिली हेलो नमस्कार । मैं हूँ और जो अभिनव हो करें ये आपने लाइब्रेरी में ऐड करें, ऍम सुने जो मन चाहे है अजनबी हसीना मैं बडी बेसब्री से बस के चलने का इंतजार कर रहा था लेकिन बस का ड्राइवर था कि न जाने कब से इंडियन तो चालू कर बैठा था मगर आगे बढने का नाम ही नहीं ले रहा था । मैंने हो से से आकर अपना हाथ बस की सीट पर दे मारा । मैं अपने दोस्त केविन के घर जा रहा था । कॉलेज का आखिरी साल था और हम पांच दो सौ उन्हें केविन के घर पर इस बार की छुट्टियां में जाने का प्लान बनाया था । लेकिन हमेशा की तरह मैंने सुबह उठने में देरी कर दी और मेरी ट्रेन छूट गई । मेरे सारे दोस्त सांगुडी में मेरी राह देख रहे थे । मेरे लापरवाही की वजह से सारे प्लान पर पानी भर गया । ऊपर से बस्ती की चलने का नाम ही नहीं ले रही थी । मैंने मन ही मन उस मनोज जानवर को कोसा । तभी मेरी बस खूबसुरत की लडकी चाहिए और मेरे पास वाली सीट पर अगर बैठ गई देखने में वो मेरी हमउम्र लगती थी । उसे देखते ही मैं अपनी सारी खुन्नस भूल गया । दस कभी बस भी चल बडी छह से उसके लिए ही इतनी देर से होगी हो । मैंने तो सोचा था कि आज ये बस छूट जाएगी । वो उस लडकी ने अपने हाथ जोडे और आपके बनकर सबसे कहा । भगवान का शुक्र है कि ऐसा नहीं हुआ । मैंने देखा उसके दायें हाथ में एक अंगूठी थी जिसपर धीरे जुडे हुए थे । हीरो के बीचों बीच कुछ लिखा हुआ था लेकिन मैं ठीक से नहीं बढ पाया । आप चाहूँगी जा रही है मैंने बात छेडी जी मोहन किसे मुस्कुराई मैं भी वहीं जा रहा हूँ । मैं मनी मनी ये सोच कर खुश हो रहा था कि उसकी संगत में सफर अच्छा करेगा । मैं पहली बार जा रहा हूँ । मेरा एक दोस्त रहता है वहाँ आपको क्या पता नहीं वो जगह जवान लडकों के लिए बहुत खतरनाक है । हालांकि ऐसा कुछ मैंने केवल को कहते हुए सुना था की वहाँ कोई छोडा नहीं है जो मर्दों का शिकार करते है । तो फिर भी बातों का सिलसिला जारी रखने के लिए मैंने अनजाने बनने का नाटक किया । अच्छा मैंने उसकी बात पर हैरानी जाहिर की । ऐसा क्यों? उस हसीना ने अपनी कहानी शुरू की । कहते हैं बहुत साल पहले शाम गुडी में एक लडकी रहती थी जिसका नाम वरदा था । वो एक लडके से बहुत प्यार करती थी जिसका नाम था राघव । दोनों के घर वाले सुरेश ने के खिलाफ है । वार्ता के परिवार को जब इस बात की भनक पडी तो उन्होंने वर्धा के लिए रिश्ते देखना शुरू कर दिया । वरदा ने जब ये बात राहुल को बताई तो उसने घर से भागकर शादी करने की योजना बनाई । अगले दिन वर्ड अपने घर से भाग का राजा से शादी वादी के जंगल में मिली । राघव को वर्धा से सच्चा प्यार नहीं था । उसकी नजर वर्धा की दौलत पर थी । उसे लगा अगर वह शादी करने की बात करेगा तो वर्धा अपने साथ अपने सारे जेवर भी लेकर आएगी । लेकिन जब राहुल को पता चला कि वरदा खाली हाथ आई है तो वर्धा से पीछा छुडाने के तरीके सोशल लगा वर्धा को घने जंगल में ले गया और एक वीरान जगह देख कर उसकी हत्या करती हैं । आप जंगल के ठीक बीच में एक सौ साल पुराना विशाल बरगद का पेड है । राघव ने वर्धा की इलाज को वहीं दफना दिया और वहाँ से भाग खडा हुआ वर्धा की आत्मा को मुक्ति नहीं मिली और वो वहीं जंगल में भटकती रही । राघव से मिले धोखे के कारण उसे अब हर मार से नफरत हो चुकी थी । वो शादी वादी के मर्दों को अपना शिकार बनाने लगी । शांग्जी के लोगों ने एक तांत्रिक से मदद भी मांगी । उस तांत्रिक ने गांव के चारों तरफ मंत्रों का घेरा बना दिया । इस घेरे के अंदर वर्धा की आत्मा मर्दों की ज्यादा से ही प्रवेश करती थी । उस तांत्रिक ने शादी वादी के मर्दों कोई सलाह दी कि जब वर्धा की और ट्रिप आत्मा आपसे अंदर आने की अनुमति मांगे तो कहना तुम का लाना कल क्यों? क्योंकि कल कभी नहीं आता होते हुए बोली हर कल अगले दिन आज में बदल जाता है । उसकी बात का समझ में आते ही मैं भी जोर से हंसा लोग आ गया । शाम हुई । उसने उंगली से बस स्टॉप की ओर इशारा करते हुए कहा हम दोनों स्टॉपर उधर गए और बस आगे बढ रही है । चांगली के जंगल बहुत सुंदर है । मुझ से बोली अगर तुम देखना चाहते हो तो मैं तो मैंने चलती हूँ । आकाश मन तो बहुत हुआ कि उसके साथ उसी वक्त चल पडो तो केवल और बाकी दोस्तों का खयाल आया तो मैं पीछे हट गया । आज नहीं मेरे दोस्त मेरे इंतजार कर रहे हैं । मुझे उसे डाल दो । बडा सोच हो रहा था लेकिन तुम कल आना मैं जरूर आऊंगा । अच्छा कहते हुए वह मुडी और आगे बढ गई । मैं भी थोडा और दो कदम आगे भी बढाएँ । लेकिन फिर अच्छा हुई कि मैं उसे एक बार फिर देखो । जब मैंने पलट कर देखा तो कहीं नजर नहीं आई में भारी मन से केविन के घर की तरफ चल पडा । लोग आ गए । लेटलतीफ मुझे देखकर केवल जरा नाराजगी से बोला कितनी बार दम से कहा है सुबह जल्दी उठने की आदत डाल लिया करो । तुम्हारे देर तक सोते रहने की आदत कर छूटेगी आकाश इस भारत के भी कई फायदे होते हैं तो मैं खुशी से पागल हुआ जा रहा था । जैसे वायदे । केविन ने मुझे घूरते हुए पूछा इस बुरी यादव के कारण तो आज मैं अजनबी हसीना से मिला क्या? लडकी की बात सुनते ही सारे दोस्तों ने मुझे घेर लिया । उसके बारे में जरा हमें भी तो बताओ ना? आकाश मैंने उन्हें हमारी मुलाकात का पूरा ब्यौरा दिया और वर्धा की वो कहानी भी सुनाई । झूठ बोल रहा है ये । केवल ने हंसते हुए कहा । ये किसी लडकी लडकी से नहीं मिला । एक तो देर से आता है ऍम बनाने की कोशिश कर रहा है ये तुम कैसे कह सकते हो? मैं बडा गया वो लडकी शाहुल की रहने वाली है ना केवल पूछा तो जरा हमें भी मिला हूँ मिलाऊंगा लेकिन कल मैंने पूरे आत्मविश्वास से कहा कल मैंने उससे मिलने आने को कहा है । ये भी झूठ केविन फिर ऐसा क्योंकि जनाब अगर वो लडकी शाम थोडी की है तो उसे वर्धा की कहानी भी मालूम होगी । वर्धा की प्रेमी है । उसका खत्म नहीं किया था । उसने घर से भागने की योजना जरूर बनाई थी लेकिन फिर वो खुद ही हम गायब हो गया । वरना ने जंगल में बहुत देर उसका इंतजार किया । लेकिन जब वो नहीं आया तो उसने नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली । ये है असली कहानी दोस्तों ये आकाश तो बस झूठ पर झूठ बोलता जा रहा है । इसे मैंने कहा था कि यहाँ चुडैल रहती है । जो मर्दों का शिकार कर दी है । उसके आगे आकाश ने पूरी मनमोहन कहानी बना ली । ये कैसे हो सकता है? मुझे कुछ गडबड नजर आई । अचानक मुझे याद आया कि उस लडकी ने जाने से पहले मुझे मेरे नाम से बुखार था । मगर उसे मेरा नाम कैसे पता चला? मैंने तो कभी नहीं बताया । केवल मेरा दिल जोर से धडकने लगा । क्या मारता की लाश मिली थी नहीं कि विंडसर लाया हूँ और कहाँ? उन दिनों बारिश का मौसम था और नदी का भाव बहुत तेज था इसलिए लाश कहीं मैं नहीं होगी । चलो मेरे साथ मैंने केवल का हाथ पकडा और बाकी दोस्तों को भी साथ चलने का इशारा किया । फॅमिली जैसे मैंने एक थोडा भी साथ ले लिया । जंगल पहुंचकर मैंने पूछा वो सौ साल पुराना बरगद का पेड कहाँ है? उस तरफ के वहाँ से इशारा करते हुए कहा हम सबको इस तरफ चल पडे । बरगद के पास पहुंचकर मैंने खुदाई करनी शुरू कर दी । थोडी देर खोलने के बाद हमें एक नरकंकाल मिला । हम सब चौंक गए । तभी मैंने उस कंकाल के दायें हाथ पर कुछ समझते हुए देखा । मैं पांच गया और वहीं जमीन पर बैठ गया । मैंने मिट्टी हटाई और देखा । उसके दायें हाथ में हीरे की अंगूठी है । वो ठीक वैसे ही थी जैसे उस बस वाली लडकी के हाथ में थी । हम सब ने मिलकर तो उस अंगूठी पर लिखे नाम को पढा । उस पर लिखा था वायदा अच्छा हुआ । आकाश केवल सहमते हुए बोला तुमने उसे कल आने को कहा है

प्रतिशोध - राजवंश

राहत हुआ है । एक जोरदार चीज सुनकर रियाना झट से आके खोली । उसके दिल की धडकनें तेज थी और वो पसीने में नहीं आई हुई थी । उसकी सांसे भी तेजी से चल रही थी । रिया ने कमरे की बत्तियां जलाई और चारों तरफ देखा । क्या हुआ रिया रिया के साथ वाले बिस्तर पर सोई हुई सोनिया उड गई और उसने आंखें बोलते हुए पूछा मैंने अभी कई लोगों को ऐसा चीज तो सुना । रिया हफ्ते हुए बोली तुमने कोई सपना देखा होगा? सोनिया ने रिया के कंधे पर हाथ रखा और कहाँ यहाँ कोई नहीं है । रात बहुत हो चुकी है । अब सो जाओ । कल सुबह में जल्दी उठना है । आज तो स्टडी टूर का पहला दिन हुआ है और अभी तो बहुत सारी जगह जाना है । हाँ तुम ठीक कहती हो, हरियाणा कमरे की लाइट बंद कर दी और सोने की कोशिश की । रियो अपने कॉलेज की दूसरी छात्राओं के साथ स्टडी टूर पर आई थी । वो लोग पुराने खिले और इमारतों पर शोध कर रहे थे । आज उन्होंने एक बहुत पुराना किला देखा था । उसके लिए मैं घूमते हुए रिया को ऐसा लगा जैसे उसके लिए इस एरिया का कोई बहुत पुराना रिश्ता है । रात को उनके ठहरने का इंतजाम किले के पास वाले होटल नहीं किया गया था । रिया को बहुत कोशिश करने के बाद भी जब नहीं न आई तो वो टी और खिडकी के पास जाकर खडी हो गई । खिडकी से वो खिला साफ नजर आ रहा था । न जाने कितने वर्षों से वो खिलाफ गुम नानी की चादर के पीछे छिपा बैठा था हरियाणा । उसके लिए को देखा तो ऐसा लगा जैसे वो खेला उसे सम्मोहित कर रहा हूँ । अंधेरे की घनी परत के पीछे वो खिलाफ चुपचाप खडा था । रियाना जाने कितनी देर उस पहले को बस देखते ही रह गई । अचानक उसे बहुत सारे लोगों के एक साथ चीखने की आवाज फिर से सुनाई दी । ऐसा लग रहा था जैसे उन लोगों को बहुत निर्मम यातनाएं दी जा रही हूँ और वो डर से करा रहे हो । रिया से उनका दौर बर्दाश्त ना हुआ और उसने अपने कारणों पर हाथ रख लिया । फिर उसने पलट कर सोनिया को देखा । सोनिया आराम से सो रही थी जैसे चीजें उसे सुनाई नहीं दे रही हूँ । ये खयाल आते ही रिया का दिल और जोरों से ढकने लगा । क्यों जी को को सिर्फ वो ही क्यों सुन सकती थी । रिया ने इस राज पर ये पर्दा हटाने की ठान ली । उसने कान ऊपर से हाथ हटाया और ध्यान से सुना । वो चीज हैं किले की तरफ से आ रही थी । मैं उसके लिए मैं जाकर देखती हूँ । रिया ने अपने गांव के ऊपर शॉल उडते हुए खुद से कहा देखो तो सही कि आखिर वहाँ क्या हो रहा है । बाहर अंधेरा काफी घना था और आज भी काफी हो चुकी थी । इस वक्त उसे अकेले बाहर जाते हुए डर लग रहा था । पहले उसने सोचा कि सोनिया को साथ ले चलें पर फिर उसे खयाल आया कि जब सोनिया चीज है सुनी नहीं सकती तो उसे क्या कहे? रिया पल भर के लिए हिचकिचाई लेकिन फिर उसने हिम्मत की और हाथों में टॉर्च लिए अकेले ही होटल से बाहर निकल आएगा । बाहर ठंडी हवा चल रही थी । चारों तरफ सन्नाटा था । रिया जल्दी जल्दी कदम बढाते हुए खेले की तरफ चली । खिलाफ अब एकदम खामोश खडा था । पल भर के लिए रिया को लगा कि उसने जो चीज सुनी कहीं वो उसका बहन तो नहीं लेकिन तब तक वो केले के अंदर प्रवेश कर चुकी थी । पंद्रह अंधेरा और भी ज्यादा था । रिया ने तौर जलाई और चारों तरफ देखा । खिलाफ एकदम शांत था और कहीं कोई हलचल नहीं थी । कुछ पल भी जाने के बाद प्रिया को विश्वास हो गया कि वहाँ कुछ भी नहीं है । रिया वापस होटल लौटने को मुडी थी कि वो चीज है रात के सन्नाटे को चीरती हुई फिर होगी फूल चीखों को सुनकर या का दिल दहल गया । दो शर्ट बाद वो चीज है रुक गई और सारा वातावर्ण फिरसे शांत हो गया । वो चीज है किले के निचले भाग से आ रही थी । सुबह जब वो लोग इसके लिए में आए थे तो उनके साथ आए गाइड ने बताया था कि नीचे तक खाना है । रिया को ते खाना देखने की बडी छाती मगर उसकी प्रोफेसर ने मना कर दिया । अब उसे रोकने वाला कोई नहीं था । रिया नीचे की तरफ जाती सीढियां उतरने लगी । चिडियाँ उतरने के बाद वो गलियारे से होकर गुजरी और एक बडे से कमरे में आ गई । तो याने तो उस कमरे को टॉर्च की रोशनी में ध्यान से देखा । वो कमरा जालियों से भरा हुआ था और उसकी छह से श्रम कानून लटके हुए थे । अचानक वो चीज है फिर से गूंज उठी और या के हाथों से मुँह गिर गया । चीखों बंद होते ही उसने टॉर्च उठा लिया । कमरे के एक तरफ से एक पाँच सौ दरवाजा था । भयानक चीज है । दरवाजे के पीछे से ही आ रही थी । रिया ने डरते हुए धीरे से हो सुबह तरह हैं हरियाणा उसे खोलने की बहुत कोशिश की, पर वह खोला नहीं । रिया ने बहुत जोर लगाया और आखिर में वो दरवाजा एक जोरदार आवाज के साथ खेल गया । उस दरवाजे के पीछे कई डिब्बी आ रखी हुई थी । उन डिब्बियों से अलग अलग रंग का प्रकाश निकल रहा था । हरियाणा उन्हें छूकर देखने को हाथ बताया था कि वह डर नाची है । फिर से हैं । लेकिन इस बार वह बहुत की वृद्धि रिया को लगा कि वह चीज है उसे पागल कर देंगी । उसका सर चकराने लगा । उसने अपने कारणों पर हाथ रखा और उस कमरे से बाहर आ गई । कमरे के दरवाजे पर वो अंधेरे में किसी से टकराई और डर के मारे चिल्लाने लगी हैं । रिया सोनियाना उसी कंधे पर हाथ रखा और कहा, मैं सोनिया घबराओ मत । उन सोनिया रिया ने रोते हुए सोनिया को गले से लगा लिया । अच्छा हुआ तो आ गई लेकिन तुम इतनी रात गए यहाँ क्या कर रही हूँ? मैं तुम्हें सब बताती हूँ । रिया ने खबर आई हुई नजरों से लेकिन टूटी फूटी दीवारों को देखा और कहा पहले यहाँ से बाहर निकालो । मैंने तो कुछ नहीं सुना । वापस अपने कमरे में पहुंचने के बाद सोनिया ने कहा लेकिन मुझे भारत ठीक है, साफ साफ सुनाई देती है । रिया परेशान होकर कमरे में चहलकदमी करने लगी । उन चीज होने मेरी आत्मा को छलनी कर के रख दिया है । वो चीज है ना मुझे चैन से जीने देती है और नहीं आराम से सोने देती है । लेकिन सवाल है कि ये चीजें मुझे कि सुनाई दे दी है और तो केवल एक ही व्यक्ति हमारी मदद कर सकते हैं । कौन मेरे पापा की दोस्तियां पास के ही कॉलेज में बढाते हैं । सोनिया ने रिया का हाथ पकडकर उसे अपने पास बैठाया और कहा वास्तु शास्त्र के प्रोफेसर है उन्होंने ऐसी आलू की शक्तियों पर काफी अनुसंधान क्या है? उनके पास ऐसे कई उपकरण है जिनके जरिए वो इन अदृश्य शक्तियों के साथ संपर्क स्थापित कर सकते हैं । उनका नाम प्रोफेसर के जाना शास्त्री है । एक काम करते हैं । हम कल उनसे मिलने चलते हैं । हाँ ये ठीक रहेगा । रिया को उम्मीद की किरण दिखाई दी । अगले दिन सुबह ही सोनिया रिया को साथ लेकर प्रोफेसर शास्त्री से मिलने गयी ऍम उसने रिया के साथ बीती रात हुई और भूत घटना का पूरा ब्यौरा उन्हें दिया । प्रोफेसर शास्त्री उन लडकियों की मदद करने को फौरन तैयार हुए तो उन्होंने अपने कुछ विशेष उपकरणों को एक बक्से में डाला और उनके साथ खेले की तरफ रवाना हो गए । वो तीनों सीधा ते खाने में गए । वहाँ दिन में भी अंधेरा था । प्रोफेसर शास्त्री ने अपने बक्से में से कुछ मोमबत्तियां निकली और उन्हें ते खाने की फौज पर जला दिया । वो तीनों उन मोमबत्तियों के पास ही घेरा बनाकर बैठ गए । प्रोफेसर शास्त्री ने बक्से में से कुछ उपकरण निकले और उन्हें वर्ष पर रख दिया । फिर उन्होंने अपने हाथ उन उपकरणों पर रखे और आंखे बंद कर ध्यान में लीन हो गए । कुछ देर बाद उन उपकरणों से देश प्रकाश आने लगा और पूरा ते खाना रोशन हो गया । कुछ क्षण बाद प्रोफेसर शास्त्री का शरीर इस तरह का आपने लगा जैसे उन्हें बिजली के झटके लग रहे हो । ये देखकर सोनिया और या डर गई परन्तु प्रोफेसर शास्त्री ने उन्हें पहले से हिदायत दे रही थी कि जब वो उन आलोकिक शक्तियों के साथ संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहे हो तो वो दोनों किसी प्रकार की बाधा ना डाले । इसलिए रही और सोनिया डरी हुई नजरों से उन्हें देखते ही नहीं । थोडी देर में उनकी काम कभी शांत हो गई और वो फिर से पूर्व स्थिति में आ गए । शास्त्री ने धीरे से आंखें खोली और उन दोनों लडकियों को देखकर मुस्कुराए । मुझे ऊंची होगा ऐसे पता चल गया दिया । शास्त्री ने कहा, और ऐसे क्या है? सोनिया अपनी उत्सुकता को नियंत्रित नहीं कर पाई और फट से बोली बताइए ना प्रोफेसर साहब, इन चीजों का संबंध तुम्हारे पिछले जन्म से है । पिछले जन्म दोनों लडकियों ने एक साथ पूछा था । शास्त्री ने तहखाने की दीवारों को देखते हुए कहा, सदियों पहले यहाँ मेरो जी राजवंश राज करता था । ये खिलाफ उनका है । मेरो जी राजवंश अपनी क्रूरता के लिए को किया था । उन्होंने अपनी प्रजा के कल्याण के लिए कोई कार्य नहीं । क्या कभी उनके हित की नहीं सोची और केवल इतना ही नहीं वो अपनी प्रजा पर तरह तरह के जुल्म करते थे । उन पर तरह दौरा के कर लगते और राजकोट भरते थे । मैं सारी जनता गुजारा बहुत मुश्किल से होता था । वो अपना पेट काटकर भरती थी । तुम्हारा नाम राजकुमारी नुपुर मणि था । तुम्हारे पिता चंद्र से मेरो जीराज बज के टूर राजाओं में सबसे बडे थे । उनसे उनकी प्रजा प्रसिद्धि । इसलिए प्रजा की रक्षा करने का बीडा तुमने उठाया । तुमने अपने कुछ विश्वास के सैनिकों को साथ लिया और राजकोष में जो की तो मैं जो धन प्राप्त हुआ वो तुम्हें गरीब प्रजा में बाढ दिया । ये सिलसिला कई वर्षों तक चला । आखिर राजा चंद्रसेन को शक हुआ और उन्होंने राजकोष की सुरक्षा के कडे इंतजाम कर दिए । एक दिन तुम जो अपने सैनिकों के साथ राजकोष में छोडी करने गई तो उन्होंने तो मैं डाकू समझा और मौत के घाट उतार दिया । जब तुम्हारे पिता को इस बात का पता चला तो उन्होंने आत्महत्या कर नहीं उनके बाद हो रहा जाए । उन्होंने भी प्रजा पर अत्याचार ही किए । एक राजा का सबसे बहुत धर्म होता है प्रजा का पालन करना । राजधर्म निभाने की वजह से मेरो जीराज मंच के राजाओं की आत्माओं को मुक्ति ना मिली और वो इसी जिले में कैद हो गई । प्रजा पर उन्होंने अत्याचार किये की यहाँ की रजा ने उन्हें श्राप दे डाला । शराब के कारण इन राजाओं ने अपने जीवनकाल में जो पीडा अपनी प्रजा को दी थी, वही पीडा के लिए मैं शायद उनकी आत्मा बहुत रही है । वो उनके ही चीखने की आवाज है जो तुमने कल रात को सुनी पर वो चीजें मुझे क्यों सुनाई देती है । रिया ने पूछा मैंने तो प्रजा पर कोई दम नहीं किया बल्कि उनकी सहायता ही की है । इसके दो कारण है । शास्त्री बोले पहला ये कि अपने पुरखों को स्पीड से तुम्हें नियुक्त करना होगा तो उनके पापों का प्रायश्चित करके उनकी आत्मा को इस यात्रा से मुक्त करना होगा । दूसरा ये कि प्रजा कल्याण का जो बीडा तुमने उठाया था वो आॅफ मृत्यु हो जाने के कारण तो पूरा नहीं कर सकी । अब तुम्हें वो काम इस जन्म में करना होगा । लेकिन रिया ने बडे आश्रय से शास्त्री को देखा । इस जन्म में मैं क्या कर सकती हूँ? मैं राजकुमारी नहीं आज का आज देखने का मुझे कोई अधिकार नहीं । मैं तो केवल एक आम नागरिक हूँ । हम आम नागरिकों के चाहने से इस देश की पिछली जनता का उधार होगा । रिया शास्त्री ने बडे प्यार से रिया के सिर पर हाथ फेरा और कहा या आसपास के गांव में ना बिजली है ना पानी है नहीं कोई और सुविधाएँ हैं तो लोग पढे लिखे भी नहीं है । इसलिए वो अपने हक के लिए आवाज नहीं उठा सकते । उन्हें नहीं मालूम कि उनके क्या अधिकार है और इन्हें पाने के लिए क्या करना होगा । सरकारी योजनाओं का लाभ ऐसे पिछले इलाकों की गरीब जनता तक पहुंची नहीं पाता । सरकार और इन अनपढ लोगों के बीच जो खाई है तो मैं उस पर पुल बनाने का काम करना होगा । तुम है उन्हें उनके अधिकारों से अवगत कराना होगा और सरकार वो इनकी आवश्यकताओं से आप भी कहते हैं सर रिया को लगा जैसे उसके जीवन को एक नई दिशा मिल गई हो । रिया, सोनिया और उनके सहपाठियों ने घर घर जाकर लोगों को सरकारी योजनाओं के बारे में बताया और उनका लाभ उठाने का मार भी बताया और साथ ही उन्होंने एक रिपोर्ट तैयार की जिसमें इन सब गरीब वालों की जरूरतों का पूरा देख रहा था । उन्होंने ये रिपोर्ट सरकारी अफसरों तक पहुंचाई । कुछ ही सालों में इन गांव में बिजली, पानी का स्वच्छ पानी, स्कूल, अस्पताल सब की व्यवस्था हो गई । किसानों के पास अब अच्छी पैदावार देने वाले बीज, खाद व खेती के आधुनिक उपकरण पहुंचा दिए गए थे । अब उन गांव में चारो लहराते हरे भरे खेत थे और गांव और उनके मन में भीड । सारी खुशियां रिया भी खुश थी क्योंकि अब उसे मेरो जी फिर ऐसे चीज है नहीं सुनाई दे दी थी । आखिरकार उसने अपने अथक परिश्रम से अपने पूर्वजों को उस यात्रा से मोच दिला ही दिया

प्रतिशोध - विशुम्भा

हूँ । टेलीविजन रिपोर्टर बनना मेरी जीवन की सबसे बडी अभिलाषा थी । लेकिन ये जबसे अभिलाषा पूरी हुई है मैं तो भूत प्रेतों के बीच फसकर है । गया हूँ । बात दरअसल यह है कि हमारे चैनल ने आलौकिक शक्तियों पर एक नया कार्यक्रम शुरू किया था और मुझे उसका एंकर बना दिया गया था । अगले रविवार का शो कुलधरा गांव पर आधारित था और उसके बारे में मुझे शोध करने के लिए भेजा गया । मैंने भी कमर कस ली । आखिरी मेरा पहला शो था और इससे मुझे बेहतरीन बनाना ही था । मैं हाथों में कैमरा ये निकल पडा कुलधरा की ओर । मैंने कुल मिला के बारे में कई कहानियां सुनी और पढी थी । सुनने में आया है कि कुलधरा गांव के सारे लोग एक रात अचानक गायब हो गए और तब से गांव वीरान है । कहने वाले तो ये भी कहते हैं कि वहाँ भूतों का आवास है । कुलधरा पर पहले भी कई टेलीविजन चैनल्स कार्यक्रम पेश कर चुके थे और कई अखबारों में इसके बारे में कई लेख भी लिखे जा चुके थे । इसलिए मुझे अपने शो के लिए इन सब से कुछ हटकर कुछ नया चाहिए था । तो थोडा गांव क्यों वीरान हो गया? इसके बारे में तो कई कहानियां प्रचलित है लेकिन मुझे तो उनके पीछे छुपा हुआ सच जानना था और मैंने जाना भी एक ऐसा खौफनाक सच जो आपके भी रोंगटे खडे कर देगा । ये कहानी है कि यात्रा है उन राहु से जिनसे मैं अपने शोध के दौरान पहुँच रहा था । राजस्थान पहुंच गए । सबसे पहले मैं अपने मित्र विवेक से मिला । जुहापुरा तो विभाग में अवसर था । उसे भूत प्रेतों में बिल्कुल विश्वास था । क्यों हर बात का वैज्ञानिक विश्लेषण कर केवल तथ्यों, बडी विश्वास करने वालों में से था । हरे सीधी सी बात है । विवेक ने चाय की चुस्की लेते हुए मुझसे कहा वहाँ खेती करने को पानी नहीं बचा था । भूमिका जल के सारे स्रोत सूख गए थे । फिर बेचारी गांव वाले क्या करते हैं? उन्होंने यहाँ से पलायन कर लिया । लेकिन विवेक एक रात अचानक साढे गांव वाले एक साथ कहीं चले जाते हैं । ये बात तुम्हें कुछ अजीब नहीं । उसमें जी क्या है? विवेक अभियान तो चाय का आनंद लेने में था । पंचायत की बैठक बुलाई होगी और उन्हें फैसला लिया होगा कि आज रात ही सब गांव छोड दे । बस और क्या सुना है वह जगह बहुत दिया है कहते हुए मुझे थोडी से रन जरूर महसूस हुई । विवेक ये सुनकर खेल खेला हूँ थोडा हाँ कहानियाँ तो मैंने भी कई हुई है । विवेक ने मुस्कुराते हुए कहा लोग तो ये भी कहते हैं कि एक जालिम राजा हुआ करता था जो वहाँ के बेचारे किसानों से बहुत भारी भरकम लगान वसूला करता था और जब वो लगा नहीं दे पाते थे तो मुआवजे के तौर पर वो करू । राजा उनके घर की ओर तो उठा कर ले जाता था । उसी की डर से सब भाग गए और फिर उस गांव में भूतों ने मेरा डालिया उसके बाद सारे मकान ढह गए और पूरा गांव तबाह हो गया । क्या इसमें कुछ सच्चाई है? मैंने उसकी आंखों में देखते हुए पूछा तो बिना विवेक को फिर से हसी आ गयी । बच्चों जैसी बातें ना क्या करूँ ये भूत पेपर ये और छोले जो है ना । इनका सिर्फ और सिर्फ बच्चों की कहानियों में होता है लेकिन वहाँ के सारे मकान कैसे रह गए? शायद कोई हूँ काम बायो विवेक में थोडी देर सोच कर कहा अच्छा हाँ मेरे ऑफिस जाने का वक्त हो गया । मैं चलता हूँ तो मैं किसी चीज की जरूरत हो तो फोन कर देना । विवेक से बात करने के बाद ही मुझे कोई खास संतुष्टि नहीं मिली । जो बात मैं जानना चाहता था उस पर तो अभी पता पडा हुआ था । मुझे तो कुलधरा गांव का खौफनाक राज जानना था । कुलधरा गांव के बारे में सोचते हुए मैं अपनी जीत की तरफ बडा । मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं किस बात का विश्वास करूँ । किस्से पूछूँ कौन है जो मुझे सच बता सकता है? ख्यालों में खोए हुए मैं अपनी जीत में जाकर बैठ गया । हर सवाल का जवाब विद्वान के पास नहीं होता । साहब जीटॅाक बोला क्या मतलब? मैंने बडी उत्सुकता से उसे देख और पूछा तो कहना क्या चाहते हो? कहाँ गया तो आपको बहुत सारी सुनने को मिल जाएंगे साहब बराबर ने कहा लेकिन अगर आपको सर जानना है तो मैं आपकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से करवा सकता हूँ जो उस रात का सर जांदा है । और यकीन मानिए साहब उनके अलावा और कोई भी पूरा सच नहीं । अंडा बाकी सब तो बस कहानियाँ बोलते हैं । वो कौन है स्टेशन मंदिर के पुजारी श्री आलोक आनंद बाबा ड्राइवर की आंखों में उस व्यक्ति के लिए सम्मान साफ झलक रहा था । सदियों पहले उनका परिवार उसी गांव में रहता था की आप मिलना चाहेंगे । उनसे ठीक है । उसकी बातों ने मेरी उत्सुकता को बढा दिया । नहीं चलते हैं बाबा आलोक आनंद की उम्र लगभग सत्तर साल से ऊपर की होगी । उनकी कमर थोडी झुकी हुई थी और वह कमर पर हाथ रखकर चलते थे । उनके सिर के बाल काफी झड चुके थे और उनकी दाडी पूरी सफेद हो चुकी थी । वो सफेद धोती कुर्ता पहने हुए थे और माथे पर लाल रंग का बडा सा तिलक लगाए हुए थे । ड्राइवर ने मेरा परिचय उनसे करवाया और मेरे आने का उद्देश्य भी बताया । मैंने पास जाकर उनके पैर हुए आयुष्मान भव । उन्होंने मेरे सिर पर हाथ रखकर कहा मेरी कुटिया यहीं पास नहीं है । चलो वही चल कर बात करते हैं । बाबा मुझे अपनी गोटियां में ले गए और जलपान भी कराया । कई सदियों पहले कुलधरा गांव में परिवार रहता था जिसके मुखिया किशोरीलाल थे । बाबा मेरे सामने रखी कुर्सी पर बैठकर कहानी सुनने लगे । वो गरीब किसान थे । कुछ गांव राजा राघवेंद्र प्रताप सिंह के साम्राज्य का ऐसा था । राजा बढा ही लाल जीता । वो हर साल लगान की रकम बढा देता था । एक साल किशोरी लाल की फसल बर्बाद हो गई और वह लगान देने की स्थिति में नहीं थे तो उन्होंने राजा से बहुत मेहनती की पर उसको राजा ने उनकी एक ना सुनी । राजा की नजर तो उनकी अप्सरा जैसी सुंदर बेटी नंदनी पर थी । वो हर कीमत पर नंदनी को पाना चाहते थे । राजा ने किशोरी लाल को लगान भरने के लिए सिर्फ एक दिन का समय दिया । किशोरीलाल अपनी जान दे देते हैं पर अपनी रोती बेटी को कभी उस जालिम राजा के हवाले ना करते हैं । हम किशोरीलाल के पास अपने पूरे परिवार के साथ आत्महत्या करने के अलावा और कोई चारा नहीं था । ऐसी विपदा की घडी में उनकी मुलाकात तांत्रे चंद्रालय से हुई । तांत्रिक को उन पर दया आ गई और उसने उनकी मदद करने का वादा भी किया । तांत्रिक ने कई साल तपस्या करके एक फ्रेंड को वर्ष में कर लिया था, जिसका नाम निशुंभ था । विश्वंभर का शरीर अगली से बना था । यही अग्नि उसकी शैतानी ताकतों को ऊर्जा देती थी । तांत्रिक ने तंत्रों मंत्रों से बने घेरे में उसे गैस कर रखा था । अपने मित्र की सहायता करने के लिए तांत्रिक ने विश्व को जगाया और उसे राजा का अंत करने के लिए कहा । निशुंभ ऐसा करने के लिए राजी हो गया, लेकिन उसने ये शर्त रखी कि इसके बाद तांत्रिकों से आजाद करना होगा । तांत्रिक ने उसकी बात माननी तुमने उस ईरान राजा राघवेंद्र को मार गिराया । अत्याचारी राजा की मृत्यु की खबर सुनकर प्रजा बहुत खुश हुई । विश्व वापस आया और उसने तांत्रिक से स्वयं को आजाद करने का आग्रह किया । लेकिन तांत्रिक को ऐसा करना ठीक ना लगाम । उसने वर्षों की तपस्या से विश्व को अपने काबू में किया था । अब वो उसे आजाद करके अपनी कठिन तपस्या पर पानी नहीं खेलना चाहता था । किशोरी लाल ने भी दादरी का समर्थन किया क्योंकि वह चाहते थे कि अगर भविष्य में उन पर या गांव वालों पर कोई भी बंदा आए तो विश्व का यहीं रहकर उनकी रक्षा करें । उनकी सहमती से तांत्रिक ने छल से विश्व ममा को फिर से शायद करने का प्रयत्न किया । तांत्रिक के विश्वासघात ने विश्व मम्मा को करोड से पागल कर दिया और उसने तांत्रिक की हत्या अगर उसके बाद उसका क्रोध गांव वालों पर बारह बडा उसने अपनी देवशक्तियों से गांव में भूकंप ला दिया और सारे घरों को तहस नहस कर दिया । विश्व के शरीर से निकलती यहाँ की लडकियों ने गांव का सारा पानी भी सोंग लिया । इससे पहले कि विश्व उन्हें भी मार डालता सब गांव अपनी जान बचाकर वहां से भाग गए । तांत्रिक के मंत्रों के जाल में बने होने के कारण विश्वकर्मा कुलधरा गांव से कभी आजाद नहीं हो पाया । उसके डर के मारे गांव वाले फिर कभी वापस आए । बाबा ने अपनी आंखें मन की और एक गहरी सांस । कुछ सालों बाद उन्होंने अपनी आंखें खोली और बडे प्यार से मुझे देखा । मैं किशोरी लाल जी का ही वंशज हूँ । बाबा ने एक मंद मुस्कान के साथ कहा कुलधरा का ये खौफनाक राज हमारे परिवार ने सबसे आज तक छुपा कर रखा था और वो इसलिए क्योंकि हम जानते थे कि कुलधरा की तबाही के लिए सब हमें ही दोषी ठहराएंगे । लेकिन कहते हैं ना सच को हमेशा के लिए छुपा कर रखा नहीं जा सकता । कभी ना कभी वो सामने आ ही जाता है । आज तुम्हारे माध्यम से मैं ये सच जन जन तक पहुंचाना चाहता हूँ और साथ ही यह संदेश भी देना चाहता हूँ की मेरे परिवार ने जो किया वो अपनी बेटी के अभिमान की रक्षा के लिए क्या मैं सबसे उम्मीद रखता हूँ कि वो हमें समझ सकेंगे और हमारी टूटियों को क्षमा कर देंगे । ये कहकर बाबा समाधि में लीन हो गए । मैं कुटियां से बाहर निकाल आया । उस दिन मेरे मन में बडी प्रसन्नता थी । मैंने कुलधरा का वो खौफनाक राज चांदिया था जो आज तक कोई नहीं जान पाया

प्रतिशोध - मृणालिनी

निर्णय ले नहीं । शिवानी ने करवट बदली और सोने की कोशिश की मगर उसे नींद ही नहीं आ रही थी । कई रातों से यही सिलसिला चल रहा था । वो रातों को चैन से सो नहीं पाती थी । उसने अपने बिस्तर के पास रखी मेज पर से पानी का जब उठाया । मगर वह जब खाली था वो मैं तो उसमें पानी रखनी भूल गई । क्या कर शिवानी ने जब को वापस में इस पर रख दिया । राज के ढाई बज चुके थे । चारों तरफ सन्नाटा था, शिवानी थी और किचन की तरफ चल पडी । किचन में जाकर उस ने फ्रिज खोला और उसमें से ठंडे पानी की बोतल बाहर निकाली । उसने पानी कोई गिलास में डाला था कि उसे अपने पीछे कोई बाहर सुनाई दी । शिवानी चौंक गई और उसने फौरन पीछे मुड कर देगा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था । किचन के बाहर जो गलियारा था वहाँ बाल चल रहा था । शिवानी ने पानी का ग्लास अपने हाथों में ले लिया । वो उस गिलास को वोटों से लगा नहीं वाली थी । उसे लगा उसके पीछे कोई घडा है । उसने बोल कर देखा तो उसे गलियारे में काली परछाई नजर आई । कौन है वहाँ? शिवानी ने काम भी आवाज में पूछा । शिवानी पानी का गिलास हाथों में लिए उस परछाई को देखते हुए धीरे धीरे गलियारे की तरफ बडी परछाई को देखकर लगता था कि वो किसी और उसकी परछाई है जिसका पद लंबा बदन छरहरा था और उसके लंबे लंबे बाल हवा में लहरा रहे थे । वो सौरभ ने अपने दायें हाथ से बालों को सहलाया । शिवानी ने देखा कि उसके नाखून बहुत लंबे और खून खाते थे । शिवानी किचन के दरवाजे पर खडी हो गई और उस से धीरे से गलियारे में झांककर देखा । वहाँ उसने जो दृश्य देखा उससे उसके होश हो गए । गलियारे में कहीं कोई नहीं था लेकिन फर्श पर एक परछाई नजर आ रही थी । देख खूंखार काली परछाई शिवानी बेहोश होकर फर्श पर गिर गई । राशि बेटा कोर्ट सरस्वती की आवाज में घबराहट थी । क्या है हाँ राशि आंखे बंद किए बिस्तर पर ही बडी रही । इतनी जल्दी की उठा दिया । अभी तो ठीक से सुबह ही नहीं हुई । शिवानी की तबियत खराब है । सरस्वती राशि के बिस्तर पर जाकर बैठ गई । तुझे आजी केवलपुर जाना होगा । दामाजी लंदन गए और शिवानी वहाँ के लिए तेरे पापा के घुटनों का ऑपरेशन अभी अभी हुआ है और मुझे उनकी देखभाल करने के लिए रुकना होगा । नहीं तो मैं भी चलती तेरे साथ लेकिन दीदी को हुआ क्या है? अब तुझे में क्या बताओ? बेटा सरस्वती जी आगे भराई किसी की नजर लग गई है । मेरी शिवानी को केवल पुर में शिव जी का बडा पुराना मंदिर है तो उसे वहाँ जरूर लेकर जाना । शिवानी की शादी केवलपुर के सबसे बडे रईस सिंघानियां परिवार में हुई थी । उसके पति आदित्य सिंघानियां अपने बिजनेस के सिलसिले में लंदन गए हुए थे । शिवानी बडी सी हवेली में अपने पांच साल के बेटे आरव के साथ अकेले रहती थी । आदित्य अक्सर यूपी काम के सिलसिले में शिवानी को घर पर अकेले छोडकर बाहर जाते रहते थे । शिवानी के लिए ये कोई नई बात नहीं थी लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसके साथ कुछ अद्भुत घटनाएं हो रही थी जिसकी वजह से वो बहुत परेशान थे । राशि के आने से शिवानी को थोडी राहत मिली । उसके कहने पर शिवानी एक मानसिक रोग चिकित्सक का डॉक्टर आशा अग्रवाल के पास गई । ऐसा तुम्हारे सांस कब से हो रहा? शिवानी डॉक्टर अग्रवाल ने पूछा हूँ जी पिछले छह महीनों से शिवानी ने सहमते हुए गा । मेरी सांस की मौत के हफ्ते बाद मुझे पहली बार ऐसा अनुभव हुआ । उनकी मौत कैसे हुई थी? दिल का दौरा पडने से तुम्हारी सास के साथ तुम्हारे संबंध कैसे थे? उनका सुबह बहुत विचित्र था । शिवानी का चेहरा उतर गया क्षेत्र मतलब डॉक्टर अग्रवाल ने शिवानी को ध्यान से देखा और पूछा क्या वो तुमसे अच्छा बर्ताव नहीं करती थी? क्या वो बहुत डांटती थी तो मैं लौटना तो दूर की बात है । उन्होंने तो मुझ से कभी एक शब्द तक नहीं कहा । शिवानी रोमांस अपना माथा पूछा और मुझे तू क्या? मैंने तो उन्हें किसी से बात करते हुए नहीं देखा । सिर्फ इतना ही नहीं वो तो किसी से मेलजोल भी नहीं रखती थी । हमारी शादी पर भी नहीं आई हो । बस एक बंद कमरे में बैठी रहती थी जिसके अंदर प्रवेश करने की इजाजत किसी को नहीं थी । केवल एक नौकरानी कमरे में खाना देने जाती थी और कमरे की साफ सफाई भी कर दी थी । तुम कभी उनसे मिलने नहीं गई । एक बार गई थी । शिवानी के हाथ ठंडे पड गए थे और उन्हें बार बार हवा कर गर्म कर रही थी । उनके कमरे के दरवाजे पर बहुत सारी चीजें बनी हुई थी । मैंने दरवाजा खटखटाया तो उन्होंने मुझे चले जाना होगा । फिर मैं कभी दोबारा वहाँ नहीं गई । इसका मतलब ये क्या है उन्होंने कभी भी तुम से बातचीत लेंगे कि सिर्फ एक बार शिवानी ने गहरी सांस लेते हुए कहा पहली और आखिरी बार काम उनकी मृत्यु से कुशन पहले क्या कहाँ हो रहे हैं? रात के लगभग ढाई तीन बजे होंगे । मैं सोच रही थी वो दौडती हुई आई और मुझ से लिपट कर फूट फूटकर होने लगी । आपको बहुत घबराई हुई सी लग रही थी । उनका पूरा बदन ठंडा पडा था और वो थर थर काँप रही थी । उन्होंने मुझसे सिर्फ इतना का एक काली परछाई क्या कर शिवानी एकदम छूट हो गई । फिर क्या हुआ? शिवानी डॉक्टर अग्रवाल ने बडी कौन चुकता से पूछा । अगले पल उन्होंने काम तोड दिया तो ये बात है । डॉक्टर अग्रवाल ने अपनी मेज पर से पलम उठाई और एक पर्चे पर कुछ लिखने लगी । देखो शिवानी तुम्हारी सास की मौत हमारी आंखों के सामने होगा तो अभी वो सदमे से बाहर नहीं निकल पाई होगी । तुम्हारी सास ने मरते वक्त जिस काली परछाई का जिक्र किया था तो उसे ही बार बार देखती हूँ । ये सब सिर्फ तोहरा बहन है । नहीं डॉक्टर मेरा वह नहीं है । शिवानी होने लगी । मैंने सब अपनी आंखों से देखा है । ऐसा सचमुच होता है । मेरे साथ दवाइयाँ सही वक्त पर लेती नहीं ना पर्चा । शिवानी को पकडते हुए डॉक्टर अग्रवाल ने कहा सब ठीक हो जाएगा । शिवानी राशि को साथ लिए डॉक्टर के केबिन से बाहर निकल आई । राशि शिवानी रोते हुए बोली मैं सबको कैसे यकीन दिलाऊं, तुम चिंता मत करो । दी राशि ने शिवानी के आंसू पोछे और कहा माने छह मंदिर जाने को कहा था । शाम होने वाली है । चलो जल्दी चलते हैं । संध्या की आरती के बाद ही शिवानी मंदिर में ही बैठी रही । उसे घर वापस जाने के खयाल से ही डर लगता था । मंदिर के पुजारी जब प्रसाद देने आए तो शिवानी से उसके दुःख का कारण पूछा । शिवानी है सब बता दिया । यहाँ से थोडा आगे महासचि देवी का आश्रम है । वो परम जानी है । पुजारी जी बोले तो वो ही तो मैं इस संकट से मुक् कर सकती है । शिवानी राशि को लेकर सतीदेवी के आश्रम गई । सतीदेवी ने शिवानी कोई आश्वासन दिया कि वो उस की हर संभव सहायता करेंगे । शिवानी उन्होंने अपनी व्यथा कह सुनाई, मैंने बहुत कुछ सुना है । तुम्हारे परिवार के बारे में सतीदेवी को जैसे अचानक कुछ याद आ गया । तुम्हारी सास की सांस का ध्यान भी किसी बहुत दर्दनाक हादसे से हुआ था । ना हाँ । शिवानी ने कहा मैंने भी कुछ ऐसा ही सुना है । उनकी मृत्यु हमारी शादी से पहले ही हो चुकी थी । तुम्हारे घर में जो सत्रह भी आई जाती है वो इसी तरह किसी ना किसी हादसे का शिकार हो जाती है । बडी विचित्र बात है । तभी सतीदेवी जी नजर शिवानी के गले में पडे हार्पर पडी ये हार किसने दिया तो मैं ये हमारा खाना नीहार है । शिवानी ने हार को अपनी उंगलियों से छुआ और कहाँ ये साथ ही गुजर जाने के बाद बहुत को दिया जाता है । ठीक है सतीदेवी ने अपना हाथ शिवानी के सिर पर रखा और कहा मैं ध्यान लाकर देखती हूँ कि वह कौन सी शक्ति है जो तुम है परेशान कर रही है । सतीदेवी ध्यान में लीन हो गई । थोडी देर बाद उन्होंने आंखे खोली और शिवानी को देखा हूँ । शिवानी तुम्हारा परिवार यक्षिणी के प्रकोप से ग्रस्त है । सतीदेवी बहुत चिंतित लग रही थी । ये कहानी शुरू होती है सूर्य प्रकाश सिंघानियां से तो तुम्हारे ससुर के परदादा थे । उन्होंने अपने गांवों की सुंदर लडकी मृणालिनी से प्यार हो गया था । तुम्हारा जो खानदानी हार है वो सूर्य प्रकाश ने मेरा लेने के लिए ही बनवाया था । लेकिन उनके पिता कोई रिश्ता बताई मंजूर नहीं था, क्योंकि मेरा लेनी गरीब किसान की बेटी थी । उन्होंने कुछ गुंडों को भेजकर बेचारी मेरा लेने की हत्या करवा दी । मेरा लेनी के पिता को जब पता चला तो वो अपनी बेटी हम में पागल हो गए । उन्हें तंत्रमंत्र का ज्ञान था । उन्होंने तंत्रविद्या की मदद से मृणालिनी को यक्षिणी बना दिया । फॅमिली अगर वह सिंघानिया परिवार की बहू ना बन पाई तो किसी और को भी नहीं बनने देगी । पिछले सिंहानिया परिवार की बहुओं की यू अकाल मृत्यु हो जाती है । उन की हत्या और कोई नहीं बल्कि निर्णय ले नहीं कर रही है । क्या उस यक्षिणी से मुक्ति पाने का कोई उपाय नहीं? शिवानी ने हाथ जोडते हुए पूछा । मेरा लेने के पिता ने उसका शव शरीर जंगल के सबसे पुराने बरगद के पेड के अंदर बने होटल में छुपा दिया है । हमें उसके शव को जलाना होगा । ठीक है । राशिद खडी हुई तो फिर अभी चलते हैं । शिवानी और राशि को साथ लेकर सतीदेवी उस बरगद के पेड के पास जा पहुंची हूँ । उन सब ने मिलकर उस पेड में आग लगा दी । पर विचित्र बात ये हुई कि पूरा का पूरा पेड तो जल गया मगर बडा लेनी का शरीर नहीं जला । ये क्या हो रहा है? सतीदेवी शिवानी ने हैरान होकर पूछा तो मुझे फिर से ध्यान करना होगा । छती देवी ने आंखे बंद की और ध्यान में लीन हो गई । शिवानी और राशि बडी बेसब्री से इंतजार करने लगे । इतने में मेरा इतनी की काली परछाई जलते हुए बरगद के पेड से निकली और शिवानी की तरफ बडी उसने अपने लंबे खूंखार ना हूँ शिवानी की कदम मैं कहाँ दिए दिवाली डर से कराओ थी छोड दो मेरी दीदी को राशी ने शिवानी को मृणालिनी के चंगुल से छुडाने की कोशिश की । मृणालिनी ने उसे जमीन पर पटक दिया और शिवानी पर न को से बात करने लगी । हमारी रक्षा कीजिए सतीदेवी अपनी बहन की दुर्दशा देखकर राशि जोर से चिल्लाई । वहाँ सतीदेवी ने झट से आंखें खोली और शिवानी से कहा तुम्हारा वो खानदानी हारी सारे फसाद की जड है । उसे नष्ट कर दो शिवानी यक्षिणी भी नष्ट हो जाएगी । ये सुनते ही शिवानी ने अपना हार उतारा और उसे आग में फेंक दिया । हार के नष्ट होते ही यक्षिणी भी हुआ हो गई और आज भी बोझ गई । केवल इतना ही नहीं बरगद का पेड भी फिर से हरा भरा हो गया । बस उसकी कोटर में और मेरा लेनी के शरीर के स्थान पर सिर्फ ऍफ थी । वो हर मृणालिनी के लिए बनवाया गया था । सतीदेवी बोली इसलिए उसकी आत्मा उस हार से बंद कर रह गई । वो हार किसी और को मिले ये उससे बर्दाश्त नहीं होता था । अब वो हार नहीं रहा इसलिए तो उसे भी मुक्ति मिल गई । स्थिति देवी ने कोटर से मेरा लेनी की राख निकली और शिवानी को देते हुए कहा । इससे गंगा में विसर्जित कर देना । जाने से पहले सतीदेवी ने शिवानी और राशि के सिर पर हाथ रखा और कहा मंगलभावना ।

प्रतिशोध - प्रतिशोध

प्रतिशोध हूँ । दिव्या पिछले हफ्ते विदेश से अपनी पढाई खत्म करके लौटी थी । उसे अपने कॉलेज की तरफ से लंदन में आगे की पढाई करने के लिए स्कॉलरशिप मिली थी । पूरे कॉलेज के छात्रों में सबसे अधिक अंक पाने वाले विद्यार्थी को ही ये स्कॉलरशिप दी जाती थी । ऐसा नहीं था कि दिव्या के बेटा उसे पढने के लिए विदेश भेजने की हैसियत नहीं करते थे लेकिन दिव्या को चाहत स्कॉलरशिप हासिल कर विदेश जाने की थी । इसका कारण ये था कि हर साल हजारों विद्यार्थी स्कॉलरशिप पाने की इच्छा से परीक्षा देते थे । इसलिए इतनी कडी प्रतिस्पर्धा को जीत करिए । स्कॉलरशिप पाना बहुत बडे सम्मान की बात है । उसके वापस आते ही उसके बिताने दिव्या के लिए बहुत शानदार पार्टी दे डाली । अपने पिता क्या हो मगर और प्रसन्नता देकर दिव्या भी बहुत खुश थी । रात की पार्टी के कुछ बेहतरीन पलों को याद कर ही रही थी कि उसके मोबाइल फोन की घंटी बजे फोन उसकी सबसे प्यारी सहेली स्नेहा का था । कॉलेज के दिनों में वो एक साथ ही पडती थी । दोबारा को मिली जान इस ने बडे जोश से कहा अब आगे क्या अगर नहीं आ रहा है । सोच रही हूँ पापा का बिजनेस मालूम तब तो ये बिजनेस की नहीं हूँ । अपने सपनों के राजकुमार की जरूरत है । इसलिए मैंने मुस्कुराते हुए कहा पैसे पापा कुछ विषय देख रहे हैं । लीबिया को शर्म आ गयी । वो सब तो होता रहेगा । इस नेहा के स्वर में अपार उत्साह था । आज मैं तुझे भविष्य जानने का सबसे आसान तरीका बता दूँ क्या है? देख कुछ नहीं । बस इतना करना है कि किसी ऐसे कमरे में जाकर बैठ जा जहां रोशनी बहुत कम हो । अपने हाथों में एक आईना ले लेना । फिर वहाँ मोमबत्ती जला लेना और पूरे तेरह बार ब्लडी मैरी का नाम होगा । तो जो साइने मैं एक आत्मा दिखाई देगी तो उसे पूछ लेना कि तेरा होने वाला जीवन साथी कैसा होगा? उसके बाद तुझे आइना हाथों में लेकर उल्टी सीढियां चढनी होंगी तो जो सेना में चेहरा नजर आएगा, ये चेहरा उसका होगा जो आप करते रहा, जिंदगी भर के लिए थामेगा । ये सब तो भगवान से लीबिया ने सिर हिला दिया । मैं ऐसी बातों पर विश्वास नहीं कर सकती । मैं सच कह रही हूँ इसलिए मैंने जोर देकर कहा अपनी रेखा है ना, उसने ऐसा ही किया था और तू जानती है । अगले ही दिन उसे लडके वाले देखने आए । उसके होने वाले पति की शक्ति बिलकुल वैसी थी जैसी उसने तो साइनी में देखी थी । चल झूठी देवी अपनी सहेली का मजाक उडाते हुए हसी तो जगह मुझ पर विश्वास नहीं तो खुद क्यों नहीं आजमाकर देख लेती हूँ । ठीक है तेरी फॅमिली के लिए ये भी करके देख लेती हूँ क्या कर दिव्या ने फोन कार्ड दिया । दिव्या ने अपने कमरे की खिडकियां बंद कर ली और पर्दे गिरा लिए । फिर उसने कमरे में चारों तरफ मोमबत्तियां जलाई और उसके बाद कमरे की लाइट बंद कर दी । रात का व्यवस्था इसलिए मोमबत्ती के हल्के से प्रकाश के बावजूद भी कमरा अंधेरे में डूब गया । उसने एक मोमबत्ती मेज पर भी जलाई और एक चाइना अपने हाथ में ले लिया । पता नहीं ये सब में क्यों कर रही हूँ । ॅ को देखते हुए कहा लेकिन क्या करूँ? अपनी सबसे अच्छी सहेली की बात टाल भी तो नहीं सकती । चलो ये भी करके देख लेते हैं । दिव्या ने आईने में देखा और पूरे तेरह बार ब्लडी मैरी का जवाब क्या जैसे उसका जवाब खत्म हुआ । उसने आईने में देखा हूँ । उसे अपने चेहरे के अलावा और कुछ भी नजर नहीं आया । मैं भी ना एकदम पागल हो । दिव्या हसी और आपने सर्पा धीरे से चपेट हमारी । जाने क्यों फालतू की बातों पर विश्वास करने लग जाती हूँ । ऐसा कहकर उसने आइना मेज पर दिया । उसके मुँह से शव निकाले थे कि कमरे की सारी मोमबत्तियां बुझ गई । सिर्फ मेज पर रखी एक मोमबत्ती ही चल रही थी । ये देखकर दिव्या को बडी हैरानी हुई । सारी खिडकी और दरवाजे बंद थे । कहीं से हवा का एक झोंका तक नहीं आया । तो फिर ये मोमबत्तियां मुझ कैसे गई? अंधेरा होते ही ना जाने क्यों दिव्या के दिल की धडकनें अचानक से तेज हो गई । जैसे उसे किसी अब शुरू उन का आभास हो गया हो । उसे ऐसा लगा कमरे में उसके पीछे कोई हरकत हुई हो । उसका मुड कर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था । उसे बार बार ये अहसास हो रहा था कि उसके कमरे में कोई अनजान साया सांस रोककर छुपा बैठा है । उसने धीरे से मेज पर रखा है ना उठाया उसके हाथ बहुत बुरी तरह से कहाँ रहे थे । फिर भी उसने कैसे कैसे आई, ना हाथ मिली और उसे देखा । उसे आईने में एक औरत का डरावना सा चेहरा नजर आया । उसकी अंगारों जैसी लाल आंखें बाहर को निकली हुई थी । उन आपको में आक्रोश भी था और खेलना भी ऐसा लग रहा था कि वह चोएल आंखों से ही दिव्या का खत्म कर डालेगी । उसकी नाक से खून बह रहा था और उसकी जी भी उनके बाहर लटक रही थी । उसके गले पर ऐसे गांव के निशान थे जैसे किसी रस्सी से उसका गला घोट आ गया हो । उसके देखते ही देव्याः थरथर का आपने लगी अपने होने वाले पति का चेहरा देखना चाहती हो । वो सौरभ से दिव्या को घूरते हुए पूछा । दिव्यांग डर के मारे अपनी आवाज खो दी थी । उसने सहमते हुए अपना से हिलाकर हामी भरी । फाइन को हाथ में लोग और उल्टी सीढियाँ चौडा शुरू कर दो तो स्टूडेंट है खून दिया । दिव्या आइना लेकर उठी और सीढियों की तरफ थोडी चिडियों के पास पहुंचकर उसने आईने में देखा तो छोडा जा चुकी थी । दिव्या की जान में जान आई । उसके पैर लडखडा रहे थे लेकिन फिर भी उसने बडी मुश्किल से हिम्मत जुटाकर सीढियां चढना शुरू किया । सीढी चढते हुए उस की नजर आई । ने पर ही टिकी रही । उसमें अव्यक्त चेहरा उभरकर आने लगा था । जैसे जैसे वो सीढियाँ चढती वो चेहरा और ज्यादा व्यक्त होने लगता है । जब उसने आखिरी सीढी भी चौडी तो उसने महीने में देखा । उसमें एक ऐसा चेहरा उभर आया था जो उतना ही भयानक था जितना कि वह आकर्षक था । उसके माथे पर लगी छोड से खून की धारा फूट रही थी जिसने उसके चेहरे के आधे हिस्से को खून में डूबा दिया था । रंजीत होने के बावजूद भी देवयानी वो चेहरा पहचान दिया था । उसे पहचानते ही दिव्या के रोंगटे खडे हो गए । राहुल दिव्या के मुझसे वो नाम खुद बा खुद निकल पडा । दिव्या को अपने डॅाल वाले कॉलेज का वो आखिरी साल याद आ गया । उन दिनों दिव्या हर हाल में स्कॉलरशिप पाना चाहती थी और उसके लिए वो जी तोड मेहनत करती थी । लेकिन दिव्या चाहे कितनी भी कोशिश क्यों ना कर ले वो हमेशा राहुल से मात खा जाती थी । स्कॉलरशिप के पहले चरण की परीक्षा में राहुल दिव्या से कुछ ज्यादा ले आया था । अब अगली परीक्षा में भी उसकी जीत लगभग निश्चित थी । दिव्या को लगा कि उसे जल्दी कुछ करना होगा नहीं तो राहुल बाजी मामले जाएगा । उस पर स्कॉलरशिप पाने का जुनून इस तरह सवार हो गया था । वो किसी भी हद तक जा सकती थी । जब सीधी उम्मीद से भी ना निकला तो दिव्या ने उंगली टेढी करने की सोची । उसने राहुल को छल से हराना ही उचित समझा । उसने राहुल से दोस्ती बढाई । राहुल सीधा साधा और दिल का बडा हिस्सा लडका था । वो दिव्या को धूर्तता ना समझ पाया । जब दिव्या ने देखा कि उसकी चाल काम कर रही है तो उसने राहुल को धीरे धीरे अपने रूप लगाने के जाल में भास्कर प्रेम पांच में बांध लिया । लेकिन राहुल उसे सच्चा प्यार करता था और मनी मान उसे जीवन संगीत मान बैठा था । जब दिव्या ने देखा कि राहुल उसके जाल में पूरी तरह से फंस चुका था तो राहुल पर छुपकर बाहर करने लगी । उसने धोखे से उसे नशीली दवाएं देनी शुरू कर दी । राहुल को नशीली दवाओं की लत पड गई और उसका ध्यान पढाई से हट गया । अब दिव्या का रास्ता साफ था । उसने अगली परीक्षा में खूब दिल लगाकर पढाई की और स्कॉलरशिप हासिल करें । उसके बाद राहुल का कोई पता नहीं चला । दिव्या को लगा स्कॉलरशिप ना मिलने की असम में वो कॉलेज छोडकर चला गया है । राहुल तुम दिव्या ने हकलाते हुए पूछा तो तो तो तो क्या हो गया मैं तुम्हारी तरह अमीर बाप के बोला तो था नहीं । पायले के अंदर से राहुल बोला मेरी माँ ने बहुत सारा कर्जा लेकर मुझे पढाया था । स्कॉलरशिप ना मिलने की वजह से मेरे लिए सारे रास्ते बंद हो गए तो ऊपर से ड्राॅ मुझे अंदर से खोखला कर दिया था । मेरे सामने आत्महत्या करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था । तुम जिस दिन स्कॉलरशिप लेकर विदेश गई थी तो मैं अपने घर की छत से कूदकर अपनी जान दे दी । मुझे होने के मेरी माँ भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली । तुमने आईने में जिस सुथरी को देखा था मेरी माँ थी मुझे माफ कर तो रहा हूँ । देव्यागिरि लडाई हो स्कॉलरशिप मेरे लिए बहुत मेहनती दे दिया । राहुल की आंखों से खून के आंसू निकल पडे लेकिन उससे कहीं ज्यादा अहम था हमारा प्यार तो मैं एक बार मुझसे कह दिया होता कि तुम्हें स्कॉलरशिप पाले कितनी तमन्ना है तो मैं खुद तुम्हरे रास्ते से हट जाता हूँ । स्कॉलरशिप तो में अगले साल भी हासिल कर सकता था । मैंने तुमसे सच्चा प्यार किया था दे दिया लेकिन तुमने मेरे प्यार के बदले मुझे धोखा दिया और अब तुम है इसकी सजा मिलेगी नहीं । वो सेना दिव्या के हाथों से नीचे गिरकर टूट गया । राहुल की आत्मा उस महीने से आजाद होकर और दिव्या के सामने खडी थी । राहुल को जगह जगह चोट लगी थी और खून बह रहा था वो धीरे से दिव्या की ओर बढा । दिव्या उससे बचने के लिए ऊपर छत की तरफ भागी । छत पर जाकर वो रेलिंग को कसकर पकड के खडी हो गई । उसने चारों तरफ देखा कहीं भी कोई नहीं था । दिव्या ने आंखे बंद की और एक गहरी सास नहीं लेकिन जैसे ही उसने फिर से आती खोली राहुल को आपने बिल्कुल करीब खडे पाया । वो भयानक दृश्य देखकर दिव्या का संतुलन बिगडा और वह छत से नीचे गिर गयी । उसकी तत्काल ही मृत्यु हो गई । दिव्या की मौत होते ही राहुल और उसकी माँ की अशांत आत्माओं को मुक्ति मिल गई हूँ हूँ ।

प्रतिशोध - शापित

शॉपिंग एक महीने पहले ही ऋतु की शादी हुई थी । उसके पति अमित असम के एक सरकारी हॉस्पिटल में डॉक्टर थे । ऋतु भी डॉक्टर थी और शादी के बाद उसने अपना तबादला अमित के हॉस्पिटल में करवा लिया था । अमित की हर हफ्ते में एक दो बार हॉस्पिटल में नाइट ड्यूटि लगती थी । उन रातों को ऋतु की नौकरानी रेशमा उसके साथ उनके घर पर ये रुक जाती थी । रेशमा असम के एक आदिवासी कबीले से थी और कुछ ही दिनों में उसकी ऋतु के साथ अच्छी दोस्ती हो गई थी । एक रात अमित हॉस्पिटल जाने के लिए तैयार हो रहा था । उसकी नाइट ड्यूटी थी । रेशमा दूसरा ऋतु के साथ उसके घर पर हो गई । रात का खाना खाने के बाद अमित हॉस्पिटल जाने के लिए अपनी कार में बैठा लेकिन उसी का स्टार्ट ही नहीं हो रही थी । बहुत कोशिश करने के बाद अमित ने हार मान ली और कार से उतर गया । वैसे ही काफी देर हो गयी थी । अमित को जल्दी से जल्दी हॉस्पिटल पहुंचना था । जंगल के बीच से होता हुआ छोटा सा रास्ता सीधे हॉस्पिटल को जाता था । अमित ने वही रास्ता लेना ठीक समझा । ऋतु को जल्दी हो जाने की और रेशमा को मेम साहब का खयाल रखने की हिदायत देकर अमित घर से निकल पडा । अमित के जाने के बाद ऋतु घर की सारी खिडकियों दरवाजे बंद करके सो गई । प्रदेश मैंने भी रसोई घर में अपना बिस्तर बिछाया और हो गई । कुछ समय बाद ऋतु बाहर के दरवाजे पर दस्तक सुनी जैसे उसकी नींद खुल गई । गहरी नींद में होने की वजह से उसे वक्का कोई होश नहीं था । उसने झट से आगे खोली और चारों तरफ देखा । अभी भी अंधेरा ही था । उसे लगा शायद कोई मरीज आया हूँ । उसने जल्दी से जाकर दरवाजा खोला । दरवाजे के खुलते ही उसने जो दृश्य देखा उससे ऋतु के रोंगटे खडे हो गए । अमित बडी बदहवासी की हालत में उसके सामने खडा था । उसके कपडे तारतार हो गए थे और उसके चेहरे और हाथ खून में डूबे हुए थे । तू समझ गई कि हॉस्पिटल से वापस आते वख्त जरूर किसी जंगली जानवर ने अमित पर हमला किया है । तब तक रेशमा भी वहाँ आ चुकी थी । ऋतु और रेशमा अमित को सहारा देकर उसके कमरे तक ले गई । ऋतु ने रेशमा से सो जाने को कहा और वो हम इसके जख्मों पर मरहम लगाने में जुट गई । अमित तब तक गहरी नींद में सो गया था । ऋतु जब अमित के चेहरे पर लगे खून को साफ किया तो उसकी हैरानी की कोई सीमा ना रही । अमित के चेहरे और हाथों पर तो कोई जख्म था ही नहीं । मतलब ये कि वह खून किसी और का था । ऋतु ने अमित के होठों पर से खून साफ किया तो उसने देखा कि अमित के दांतों के बीच कुछ फसा हुआ था । ऋतु हो और से देखा तो उसे लगा कि वह मांस का टुकडा है । ऋतु हैरानी में पड रही है क्योंकि हमें तो माफ खाता ही नहीं था । फिर उसने सोचा हो सकता है हॉस्पिटल में उसके दोस्तों ने उसे जबरदस्ती खिला दिया हूँ । अमित नमाज खाता था ना शराब पीता था मगर दोस्तों के बहुत आग्रह करने पर उनका दिल रखने के लिए थोडा सा जरूर लेता था । ऋतु ने दूध की मदद से वो मांस का टुकडा अमित के दातों से निकाला । ऋतु ने तो उस टुकडे को करीब से देखा तो उसे घिन आने लगी । वो तो कच्चा माल था । ऐसे मांस के टुकडे उसे अमित के नाखून में भी फंसे मिले । मेरे को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर मानना क्या है । फिर उसने देखा की अमित की उम्मीद से वो हीरे की अंगूठी भी गायब है । जो उसके जन्मदिन बारी तुम्हें उसे तो फिर में दी थी । ऋतु ने जिस रुई से खून साफ किया था उसे संभाल कर रख लिया । उसने अमित के ना होने और दातों से मिले मांस के टुकडों को भी सवाल कर रख लिया । ॅ अगले दिन सुबह अमित उठा और हमेशा की तरह हॉस्पिटल जाने को तैयार हो गया । उसका बढना बिल्कुल सामान्य था । जैसे पिछली रात कुछ हुआ ही ना हो । तैयार होकर वो नाश्ता करते समय तो उसकी तरह अखबार बढने लगा । देश में उसके सामने चाय की प्याली रख भी और बडी हैरानी सपने मालिक को देखा तो उन्हें इशारे से उसे चुप रहने होगा । प्रदेशभर फौरन वहां से चली गई अमित कल क्या हुआ था? रेश्मा के जाते ही तूने पूछा हूँ । कल रात के करीब तीन बजे मुझे बडे जोर से सिर में दर्द होने लगा । अमित ने चाय की चुस्की ली और कहा मैंने हॉस्पिटल की ड्यूटी डॉक्टर गुप्ता से संभालने के लिए कहा और घर वापस चल पडा । जंगल से होते हुए जब मैं आ रहा था तो मुझे चक्कर आने लगे । फिर सच कहूँ तो मुझे कुछ ठीक से याद नहीं और सुबह जहाँ खुली तो मैं अपने घर पर था । इतना कहकर अगर फिर से अखबार पडने लगा फिर उसने अपना नाश्ता खत्म किया और हॉस्पिटल जाने को तैयार होने लगा । ऋतु भी तैयार हो गए और उसके साथ चल पडेंगे । जाने से पहले उसे रेशमा को हिदायत दी थी कि वह कल रात वाली बात का जिक्र किसी से लाकर हॉस्पिटल पहुंची तो ऋतु को बताया गया की पुलिस एक लाख लेकर आई है जिसका पोस्टमार्टम उसे करना है । तूने वो लाश देखी तो उसके होश उड गए । उस ने आज तक किसी इलाज हो इतनी बुरी हालत में कभी नहीं देखा था । वो शव पर हर जगह दांतों और नाखूनों से हुए वहाँ पे दिल दहला देने वाले निशान थे । ऐसा लगता था किसी है वाले बडी बर्बरता से उस पर हमला किया हो । पुलिस को वो लाश आज सुबह जंगलों से मिली थी । दर्द उन्हें पोस्टमार्डम शुरू कर दिया । मोयना करते समय ऋतु को वो शव पर लगे जख्मों से एक हीरे की अंगूठी मिली । वो उसे देखते ही पहचान गई । वो अमित की अंगूठी थी । ऋतु के मन में शक घर कर गया । सच्चाई की तह तक पहुंचने के लिए उसने उस वास खून की जांच की जो से अमित के शरीर से मिले थे । जब रिपोर्ट आई तो ऋतु का शव यकीन में बदल गया । वो खून और मांस उस मृतक के ही थे । ऋतु सोच में पड रही है अगर इस आदमी ने अमित के अंगूठी लूट नहीं कोशिश की थी तो अपने बचाव के लिए अमित लात और घूसों से उस पर वार करता हूँ । ये जानवरों की तरह दातो राहुल से हमला करने की क्या जरूरत है? ऋतु ने सोचा कि जब तक पूरे सच का पता नहीं चलता वो बात को यही गवा देगी । उसने बहुत मोटी छुपा दी और रिपोर्ट में ये लिख दिया कि उस व्यक्ति पर किसी जानवर ने हमला किया था जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई और ऋतु अमित की गतिविधियों पर चोरी छिपे नजर रखने लगी । उसके बर्ताव में कहीं कोई परिवर्तन नहीं दिखाई दिया और हर पूनम की रात को यूँ ही खून में लथपथ और बेहाल होकर घर होता । अगले दिन सुबह पुलिस को जंगल से कोई लाश जरूर मिलती थी जिसका पोस्टमार्टम करते समय ऋतु कोई ऐसा सबूत मिलता जो अमित को बादल ठहराते । इस कशमकश में डूबी ऋतु बहुत उदास रहने लगी । वो घंटो मेडिकल साइंस की किताबें पडती और इंटरनेट पर फॅमिली रहती थी फिर भी उसे समझ नहीं आता कि अमित को आखिर क्या हुआ है । एक दिन उसने वेयरवुल्फ पर लिखा एक लेख पडा, पहले तो उसे बिल्कुल विश्वास ना हुआ लेकिन फिर भी वो सही बात तसल्ली का देना ठीक समझा । अगली पूनम की रात को जब अमित नाईट ड्यूटी के लिए हॉस्पिटल जाने वाला था तो तूने चुपके से उसका पीछा करने की योजना बनाई थी । उस लेख में भी यही लिखा था की अगर वेयरवुल्फ के सामने मांस का टुकडा फेंक दो तो शिकार को छोड देता है । ऋतु ने मांस के कुछ टुकडे साथ रख लिए और अमित के पीछे पीछे चल पडेंगे । अमित तेज कदमों से आगे बढ रहा था । जब वो जंगल के बीचों बीच पहुंच गया तो पूरा उनका चंद बाद लोगों के पीछे से निकल आया । चानकी रोशनी पढते ही उसके कदम एक काम से रोक गए । वो जोर से चीखा और उसकी चीजों से सारा जंगल गूंज उठा । धीरे धीरे तो उसके शरीर में कुछ परिवर्तन आने लगे हूँ । एक बडे से पेड के पीछे छुपकर उसे बडी हैरानी से देखने लगी । अमित की आंखे लाल अंगारो सी हो गई उसके ना हूँ लम्बे और खूंखार हो गए । उसके सारे शरीर बडे बडे बाल होगाए उसके दाम भी लंबे और पहले हो गए । अब वो पूरी तरह से वेयरवोल्फ में तब्दील हो चुका था । तभी वहां से एक आदमी गुजरा और अमित उसपर झपटा । लेकिन इससे पहले की अमित उसके टुकडे टुकडे कर डालता । ऋतु ने उसके सामने मांस का टुकडा टाल दिया । हमें बडे चाव से मांस खाने लगा और वहाँ आदमी अपनी जान बचाकर बाहर गया । ऋतु घर की तरफ जाने वाले रास्ते पर उसके सामने मांस के टुकडे डालती रही । अमित उनको खाते हुए घर की तरफ बढा । चार । फिर बाद उनके पीछे छूट गया और अमित का शरीर पूरी स्थिति में वापस आ गया । अमित बेहाल हो चुका था और वहीं समीन पर गिर गया । कितने में रेशमा भी आ गई । ऋतु और रेशमा ने अमित को बिस्तर पर लिटा दिया । हमारे कभी लेके सरदार परमज्ञानी है । इक्कीस हो जाने के बाद रेशमा निर्दोष से कहा अब वही आपकी मदद कर सकते हैं तो मुझे उनके पास ले चलो । ऋतु ने रोते हुए कहा मुझे किसी भी हालत में अमित को बचाना है । सब ठीक हो जाएगा । मेम साहब देशमाने हौसला दिया और अगले दिन वो दोनों सरदार से मिलने गए । क्या तुम्हें कोई ऐसी घटना याद है जब तुम्हारे पति का सामना मेडियो से हुआ हूँ । सरदार ने ऋतु से पूछा हाँ, एक बार अमित मुझे ऐसी घटना के बारे में बताया था । ब्रो तूने याद करते हुए कहा, करीब छह महीने पहले वो अपने दोस्तों के साथ इन जंगलों में घूमने गए थे । उनमें एक मित्र, एक भिंडी की तस्वीरें उसके बहुत करीब चला गया था । तब उस भेडी ने उन पर हमला कर दिया । अमित ने उनकी जान बचाने के लिए उस भेडियों को भी गोली मार दी थी । उस भेडी का शाह भी है जिससे तुम्हारे पति की हालत कर दी, उनकी रक्षा कीजिए । ऋतु यहाँ जोडते हुए कहा, अब तो बहुत देर हो चुकी है । सरदार ने अपना सिर झुका लिया । अगली पूनम की रात को तुम्हारा पति पूरी तरह से भेडिया बन जाएगा और फिर कभी अपने असली रूप में वापस नहीं आ पाएगा । कृपया उन्हें बचाने का कोई उपाय नहीं है । ऋतु लडाई मैं वादा तो नहीं कर सकता पर एक आखिरी कोशिश करके देख लेते हैं । सरदार ने बडे चिंतित स्वर में कहा मैं तो मैं एक मंत्र देता हूँ । पूनम की रात को जब वो भेडी में तब्दील होने लगे तो ये मंत्र जबकि रहना उसका रूप बहुत भयंकर होगा और वो तो मैं डराने की कोशिश करेगा पर तो मंत्रों का जाप मत रोकना । मैं भी तुम्हारे पति के लिए प्रार्थना करूंगा । पूनम की रात को ऋतु मंत्र जपने बैठ गई । करिश्मा भी उस रात वहीं रुक गई । जैसे ही पूरे चांद की किरणें अमित पर पडी वो भेडिये के रूप में तब्दील होने लगा । ऋतु मंत्रों का जाप करती रही । क्रोधित होकर अमित नैऋत् ऊपर हमला करना चाहा और सरदार की प्रार्थना की । शक्ति ने ऋतु के चारों तरफ एक सुरक्षा कवच बना दिया जिससे अमित ना भेज पाया । वो तरह तरह की खौफनाक आवाजें निकालने लगा और गुस्से में पागल होकर घर की चीजें तो नहीं फोडने लगा । रेश्मा का डर के मारे बुरा हाल था, लेकिन ऋतु इन सब की परवाह किए बिना मंदिरों का जवाब करती रही । कुछ देर बाद सवेरा हो गया । अमित का शरीर वापस पूर्व स्थिति में आ गया । मेम साहब रेशमा दौडती हुई आई और ऋतु के गले से लगकर बोली बुरा चला गया है । अब सब बिल्कुल ठीक हो जाएंगे । आपके प्यार और बलिदान की ताकत में उनकी जान बचा ली

प्रतिशोध - अनामिका

अनामिका ऍम आपका खाना लगा । दु साहब रामू ने मुझसे पूछा खाना में खा कर आया हूँ । मैंने अपनी मेंशन को और से देखते हुए कहा मुझे बडी खुशी थी ये बडा सा बंगला मुझे बहुत कम दाम में मिल गया । अच्छा हम ये बताओ । मैंने पूछा । ये बंगला इतने कम दामों में क्यू भेजा जा रहा था तो क्या मैंने साहब राम मुँह इसके चाहते हुए कहा । इस बंगले के पीछे एक बावडी है जिसे सब खूनी बावडी के नाम से जानते हैं । लोगों का मानना है कि वहाँ जो दाल रहती है क्या बकवास है? मैं सब नहीं मानता हूँ तो मैं जाऊंगा । हम रात हो गई है । मेरी पत्नी मेरा इंतजार कर रही होगी । रामू ने डरी हुई नजरों से बावडी की तरफ देखते हुए कहा, मेरे यहाँ कहने की डेढ थी कि राम वहाँ से सर पर भाग गया । राम के जाते ही मैं अपने कमरे में चला गया । मेरे कमरे की खिडकी से वो बावडी साफ नजर आती थी । मैं बहुत थक गया था और मुझे नहीं बहुत आ रही थी । मैंने एक बार नजर उठाकर उस बावडी को देखा और फिर अपने बिस्तर पर ले गया । थकावट की वजह से मुझे बहुत जल्दी नहीं आ गयी । थोडी देर बाद मुझे बंगले के पिछवाडे से कुछ आवाजें सुनाई दी । मुझे ऐसा लगा कि बावडी में कोई नहीं आ रहा है । मैंने खिडकी से बाहर झांक कर देखा । एक खूबसूरत सी लडकी बावडी के पानी में नहाकर बाहर आ रही थी । ये कौन है? मैंने मन ही मन सोचा और इतनी रात गए मेरे घर में क्या कर रही है? बात का पता लगाने के लिए मैं जल्दी से बिस्तर से उठा और बावडी की तरफ चल पडा । मैं जब वहां पहुंचा तो देखा कि वो लडकी बावडी के पास वाले बडे से बरगद के पेड के नीचे खडी थी बहुत होता हूँ । मैंने उससे पूछा फिर आपको यहाँ क्या कर रही हूँ? मैं अनामिका हूँ । उसने भी आंखों में आंखें डालकर करूँ और तो मेरा था । इतना कहकर बावडी की तरफ चल पडी और उसके पानी में समा गयी । मैं हम वहाँ पर उठा तो मैंने देखा सुबह हो चुकी थी । मैंने जो कुछ देखा हूँ केवल एक सपना था । ये विश्वास करना मेरे लिए बहुत कठिन था । नाश्ता करने के बाद भी उस लडकी का चेहरा मेरी आंखों के सामने घूमता रहा । क्या वो सच में बावडी वाली छोटी थी? मैंने अपने आपसे पूछा लेकिन अगले ही पल मुझे अपनी सोच पर हंसी आ गई । मैं कब से अंधविश्वासों पर विश्वास करने लगा । मैंने उस बात को मन से निकाल दिया और काम करने के लिए अपना लाभ खोला । लेकिन उस लडकी का चेहरा था कि मेरी आंखों के सामने से हटता ही नहीं था । मुझे उसके बारे में जानने की उत्सुकता हुई । मैंने इंटरनेट पर बनाने का मेंशन टाइप किया । मैं ये जानना चाहता था कि कल रात उसने मुझसे जो कहा क्या वो था? क्या वो सच मुझे कभी उस घर में रहा करती थी? दर्ज के बटन दबाते ही मैंने जो सनसनीखेज खबर बडी उससे मेरे होश उड गए । बनाने का मेंशन में एक बहाना ऍम मैं उस कपिल के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने पास की । पुलिस स्टेशन में या वहाँ के इंस्पेक्टर ने बताया कि कई साल पहले अपनी मेंशन में एक पति पति रहा करते थे । पति का नाम वरुण मेहता और पत्नी का नाम बनाने का था एक रहा । दोनों के बीच कुछ बहस हो गयी और अनामिका ने अपने पति की चाकू मारकर हत्या कर दी । अगले दिन सुबह पुलिस को वरुण की लाश बनाने का मेंशन में मिली । स्कूल में लगभग चाकू भी उसकी लाश के पास से मिला जिसपर अपनी की उंगलियों के निशान थे लेकिन अनामिका का कोई पता नहीं चला । अपने पति का खत्म करने के बाद वो फरार हो गई । पुलिस भी उसकी तलाश में है लेकिन अब तक पुलिस के हाथ नहीं आई । इंस्पेक्टर पवार ने मुझे बनाने का और उसके पति वरुण की तस्वीरें भी दिखाई जो पुलिस रिकॉर्ड में भी ये उसी लडकी की तस्वीर थी जिसे मैंने कल रात खूनी बावडी से बाहर निकलते हुए देखा था । मैं पुलिस चौकी से लौटा ही था कि मेरी मुलाकात हमारे पडोसी विशाल से हो गई । इधर उधर की कुछ बातें करने के बाद मैंने उसे वरुण के अखिल के बारे में पूछा । मुझे तो विश्वास ही नहीं होता कि अपनी वरुण का खत्म कर सकती है । तो हम इतना प्यार था वो क्यों अपने ही पति की हत्या करेगी तो तुम्हें क्या लगता है? विशाल मैंने पूछा इसमें क्यूँकि वरुण की हत्या मैं जानता हूँ ऐसा कौन कर सकता है? विशाल ने बडे गंभीर स्वर में कहा और उनका दोसा जिसका नाम था नहीं राजी वो अक्सर यहाँ आया करता था । खासकर उस वक्त भी जब वो घर पर नहीं होता था । मुझे पता था कि अनामिका पर उसकी बुरी नजर थी । मैंने वरुण को ये बात बताई थी । लेकिन वरुण को नीरज पर इतना भरोसा था कि उसने मेरी बात को हंसी माओवादियों । मुझे पूरा विश्वास है कि इस पत्र में नीरज का ही हाथ है । हत्या के बाद वो भी कभी यहाँ दोबारा नहीं आया । मैं सारी रात सोचता ही रहा हूँ । मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं किसकी बात और विश्वास करूँ । इंस्पेक्टर पवार की या विशाल की तो सोचते सोचते मुझे नींद आ रही है । कुछ देर बाद मैंने देखा कि बनाने का जोर से चिल्ला रही है । कोई आदमी उसे जबरदस्ती अपनी बाहों में कसने की कोशिश कर रहा था । अनामिका अपने आप को छुडाने भरसक का प्रयास कर रही थी लेकिन वो अपनी को मजबूती से पकडे हुए था । अपनी मदद के लिए चिल्ला रही थी । इतने में वहाँ वरुण आ गया । नीरज वरुण ओ सादी की तरफ बढते हुए कहा ये तुम क्या कर रहे हो तो उन्होंने कहा को नीरज अपनी कोर्ट के पॉकेट से चाकू निकाला और वरुण के पेट पर दे मारा । वरुण की उसी शब्द मृत्यु हो गई । तुमने मेरे वरुण को मार डाला । अपनी ने रोते हुए कहा मैं तो मैं नहीं छोडूंगी । अनामिका ने वरुण के पेट में घोपा हुआ चाकू निकाला और नीरज की तरफ बडी पर इससे पहले के बनाने का नीरज पर रहा कर दी । नीरज ने एक लोहे की छडी से उसके सिर पर वार किया तो इस प्रकार से अनामिका की भी मृत्यु हो गई । नीरज नाॅक इलाज को बंगले के पिछवाडे की बावडी में डाल दिया । नहीं उनसे हडबडाकर उठा । तभी मुझे भावी से कुछ आवाजें सुनाई दी । अपना बॉडी की तरफ हो । वहां पहुंचकर मैंने अपनी को उसी बरगद के पेड के नीचे खाना पाया । मुझे यहाँ से निकालो । अनामिका ने मुझे देखते ही कहा मेरे साथ बडा अन्याय हुआ है । मुझे न्याय दिलाओ । मैं तुम्हारी मदद करूंगा हूँ । यह कर मैं उसकी तरफ बढा । लेकिन इससे पहले कि मैं उस पर पहुँच पाता, किसी अदृश्य शक्ति ने अपनी को पकडकर खींचा और उसे बावरी के पानी में तो बोल दिया । ऍर को फोन किया । इंस्पेक्टर ऍम हत्याकांड के बारे में आप को कुछ जानकारी देना चाहता हूँ और जल्दी से जल्दी कुछ होता को लेकर जाना चाहिए । इंस्पेक्टर कुछ गोताखोरों को लेकर आ गए और मेरे कहने पर उन्होंने बावडी में भी तलाश शुरू की । सुबह होने ही वाली थी । उन्होंने बॉडी के अंदर से कंकाल मिला । उस कंकाल के सिर के पीछे जख्म का निशान था । ये जख्म ठीक उसी जगह था जहां नीरज ने अनामिका के सिर पर लोहे की छडी से द्वार किया था । कंकाल को जांच पडताल के लिए अस्पताल भेज दिया गया । जब फोरेंसिक रिपोर्ट आई तो उसमें साबित हो गया ये कंकाल अब नहीं आ रही है । अब मुझे वो सबूत की तलाश थी जो नीरज को दोषी करार दे सकता हूँ । मैं सोच में पड गया ये सबूत मुझे कहाँ से मिलेंगे? मैंने चारों तरफ नजर घुमा कर देखा । मुझे पूरा विश्वास है कि हो या ना हो । सबूत मुझे इस बंगले के आस पास ही कहीं मिलेंगे । लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अपनी तलाश कहाँ से शुरू करूँ । बहुत सोचने के बाद मेरा ध्यान एक बात की फोर गया । मैंने अनामिका को जब भी देखा था उसे उस बडे से बरगद के पेड के नीचे ही खडा देखा था । बनाने का वहाँ क्यों बारबार आती थी । मुझे ऐसा लगा उस बरगद का पेड के नीचे जरूर कोई राज दफन है । मैंने कुल्हाडी उठाई और वहां खुदाई करनी शुरू कर दी हैं । बहुत खुदाई करने के बाद मुझे वहाँ से जमीन मैं खडा हुआ एक पैकेट मिला । मैंने पैकेट खोलकर देखा तो उसमें क्या हो गई की छडी और किसी मार के कुछ कपडे थे जो खून से लगभग थे । ऍफ को पुलिस स्टेशन लेकर गया और उसे इंस्पेक्टर पवार के हवाले कर दिया । उस की जांच पडताल से पता चला कि उसमें जो खून लगा था वो अपनी का था । जब वो कपडे विशाल को दिखाए गए । दोस्त ने फौरन पहचान लिया कि वह कपडे नहीं रखते थे । उन कपडों से नीरज के सिर के कुछ बाल भी मिले थे । पुलिस नीरज को गिरफ्तार कर लिया । कपडों से मिले बालों की फोरेंसिक जांच के बाद ये साबित हो गया । ये कपडे नीरज के ही है और नीरज के पास अपना जुर्म कबूल करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं था । उसे दो लोगों की हत्या करने के इल्जाम में भांसी की सजा दे दी गई । आज इस बात को छह महीने बेच चुके हैं । हर रात सोने से पहले मैं उस बावडी की तरफ जरूर देखता हूँ । मेरे मन में अनामिका से एक बार फिर मिलने की बडी होती है लेकिन वो फिर कभी नजर नहीं आई है तो उसकी आत्मा को मुक्ति मिल गई थी । मैंने उसकी अंतिम इच्छा पूरी कर दी थी । उसके और उसके पति के हासिल को सजा दिलाकर मैंने उसे न्याय जो दिला दिया था । मुझे पता है वो कभी वापस नहीं आएगी । लेकिन वहाँ जाने की ओर हर रात में उससे मिलने की इच्छा मन में लेकर होता हूँ ।

प्रतिशोध - खौफनाक जंगल

ऑफ नाक जंगल । अपनी जवानी के दिनों में मुझे घूमना फिरना बहुत अच्छा लगता था । हम सभी दोस्त मिलकर छुट्टियों में घूमने का प्लान बनाया करते थे । हम चार करीबी दोस्तों का एक ग्रुप हुआ करता था । हमारे ग्रुप में रवि, कार्तिक, अखिल और मैं शामिल थे । लेकिन पिछले बीस सालों से हम कहीं भी साथ में घूमने नहीं गए । इसका कारण ये नहीं था कि हम सब अपनी अपनी जिंदगी में व्यस्त थे । कारण तो कुछ और ही था । पिछली बार छुट्टियों पर जब हम साथ घूमने गए थे तो हमारे साथ एक बहुत विचित्र घटना हुई थी । ये घाटा इतनी खौफनाक थी हमें जिंदगी में, फिर कभी दोबारा साथ में छुट्टियां बिताने का प्लान बनाने की हिम्मत नहीं । हालांकि बीस साल भी चुके हैं । फिर भी जब जब मैं हमारे पिछले हॉलिडे ट्रिप के बारे में सोचता हूँ तो मेरे को उन पे खडे हो जाओ । पिछली बार हम छुट्टियों में कैलाशपुर के जंगलों में घूमने गए थे । रवि कैलाशपुर का ही रहने वाला था और उसी ने हमें ये सुझाव दिया था । हम सब कोई सुझाव पसंद आया और हम खुशी खुशी अपने अपने घरों से निकल पडे । लेकिन हमें क्या पता था ये हमारा ॅ होने वाला था । ट्रेन में एक लंबी यात्रा करने के बाद हम कैलाशपुर पहुंच । जब हम कैलाशपुर के छोटे से होटल में पहुंचे तब तक शाम ढल चुकी थी । रात को खाना खाकर हम जल्दी हो गए, क्योंकि हमें अगले दिन सुबह ही कैलाशपुर के जंगलों के लिए निकलना था । लेकिन हमेशा की तरह हमारे अलार्म क्लॉक है । हमें धोखा दे दिया । हमें समझ नहीं आ रहा था कि अलार्म क्लॉक खराब हो गया था या हमने सही किसी ने नींद लौटकर उसे बंद कर दिया था तो ये जरूर था अलार्म समय पर बजा नहीं और हमें वक्त का पता ही नहीं चला । हमें तो होटल के वेटर ने उठाया जो हमारे लिए नाश्ता लेकर आया था । हम जल्दी से नहा धोकर तैयार हुए और जंगलों की तरफ निकल पडे । ऍम पूरे दिन जंगलों में घूम कर हम बहुत थक गए थे । लेकिन फिर भी हम सब बहुत खुश थे । हम शाम हो चुकी थी और सूरज डूबने वाला था इसलिए हमने वापस जाने का फैसला किया । जैसे ही हम वापस जाने के लिए मुडे अखिल को एक पुरानी गुफा नजर आई । चलो दोस्तों अखिल ने बडे उत्साह के साथ कहाँ जाकर देखते हैं कि उस गुफा के अंदर क्या है क्या तो बाकी लोग अखिल मैंने कहा ना वो गुफा बहुत पुरानी है । हो सकता है वह जाए और हम उसके अंदर फंस जाए । ऍम अखिल ने मुझे घूरते हुए कहा खतरों से खेलने नहीं तो मजा है । चलो मेरे साथ आओ । लेकिन रवि और कार्तिक ने भी अखिल की बात नहीं मानी । ठीक है तो फिर मैं अकेला ही चला जाता हूँ । यह कर अखिल गुफा के अंदर चला गया । हम सब काफी देर तक गुफा के बाहर उसके आने का इंतजार करते रहे । गुफा के बाहर अखिल का इंतजार करते हुए फल गुजरते । पाल के साथ हमारे दिल की धडकन तेज होती जा रही थी । हम उसकी सुरक्षा की प्रार्थना कर रहे थे और मन ही मन ये सोचकर पछता रहे थे कि हमने उसे क्यों जाने दिया । थोडी देर बाद हमने उसे बाहर रहते हुए देखा और चयन की । साथ देखो मुझे गुफा के अंदर से क्या मिला? अखिल ने मुस्कुराते हुए हमें एक नीले रंग का छोटा सारा दिन दिखाया । ढलते सूरज की किरणें जब उस रतन पर बडी तो उसमें से अजीब तरह की नीली रोशनी फोन पडी । उस विचित्र प्रकाश को देखकर मेरी जो कहाँ गई इसे वही वापस तो मैंने कल से विनती की । मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है तो पागल हो गए उमर अखिल नवरत्न को धीरे सपने बैग में रखा और अच्छी तरह से बैग को बंद कर दिया । ये रास्ता बहुत तीन ही लगता है । हो सकता है ऐसे बेचकर में काफी सारे रुपया मिल जाए । चलो अब जल्दी से वापस चलते हैं । अंधेरा हो चुका था इसलिए हमने ज्यादा बहस करना ठीक नहीं समझा और हम अपने होटल की तरफ चल पडेंगे । ठीक जरा रुको तो जब हम जंगल के छोड पर पहुंच गए थे तब अखिल टक्कर हो गया और उसने कहा क्या तुमने वो आवाज सुनी? ऐसी आवाज मैंने पीछे मुडकर अखिल को देखा है । पायल की झंकार की आवाज खिलने, बडी उत्सुकता से चारों तरफ देखा कि मजा का वक्त नहीं है । मुझे उस पार हो सारा वैसे काफी देर हो गयी है । हमें जल्दी वापस जाना चाहिए । नहीं मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ । अखिल ने मेरी बात का विरोध किया । मैं काफी जैसी आवाज सुन रहा हूँ । मुझे ऐसा लग रहा है कि कोई हमारा पीछा कर रहा है । चलो वापस चलते अखिल मैंने उसका हाथ पतला और खींचते हुए ले गया । हमें अपने होटल जल्दी से जल्दी वापस पहुंचना होगा । होटल पहुंचकर हमने गर्म पानी में स्नान किया और खाना खाकर जल्दी हो गए । कोई दरवाजा खटखटा रहा है क्या कर अखिल ने मुझे जगह दिया । मैंने अपनी आंखें खोली और घडी की तरफ देखा । आधी रात का व्यवस्था मैं ध्यान लाकर सुनने लगा । लेकिन मुझे रात के सन्नाटे में गूंजती झींगुरों की आवाज के अलावा और कुछ नहीं सुनाई दिया । बाहर कोई नहीं । अखिल मुझे नहीं आ रही थी इसलिए मैंने आंखे बंद की और मैं हो गया अमर । क्या तुमने वो आवाज सुनी? थोडी देर बाद अखिल ने मुझे फिर उठा दिया । जैसी आवाज मैं नहीं । मैं बाबा पायल की झनकार अब तुम द्वारा शुरू हो जाओ । खेलते मैं अपने हाथ जोडकर कहा देखो बहुत थक गया हूँ । मुझे बहुत नहीं जा रही है । ठीक है मैं देखता हूँ । मैं अखिल को कहते हुए सुना और मैं दोबारा हो गया । बर्फिली हवा का झोंका आया और मेरी आप खुल गई । मैंने देखा कि कमरे का दरवाजा खुला हुआ पडा है । मैं अपने बिस्तर से उठा और मैंने चारों तरफ देखा । मुझे अखिल कहीं भी नजर नहीं आया । फिर मैंने घडी की तरफ देखा तो भाग के तीन बच्चों के थे । मैं खुले दरवाजे से होते हुए कमरे से बाहर निकल आया । मैंने देखा कि अखिलेश कडाके की ठंड में बिना कोई गर्म कपडे पहले जंगल की तरफ जा रहा था । वो ऐसे चल रहा था जैसे उसे सम्मोहित कर दिया गया हो । मुझे लगा नहीं वो पागल तो नहीं हो गया लेकिन उसके बाद जो मैंने देखा उसे देखकर में है । कहाँ था अखिल से कुछ कदम? आगे मुझे औरत की धुंधली सी परछाई नजर आई । मैंने बार बार अपनी आंखें मलि क्योंकि मुझे ऐसा लगा कि मुझे धर्म हो गया । मैंने फिर से आंखें खोली और ध्यान से देखा । मैं अखिल को तो ठीक तरह से देख सकता था मगर वो औरत मुझे ऐसी नजर आ रही थी जैसे वो धोया धुंध से बनी हूँ । तभी एक ठंडी हवा का झोंका आया और मैं धरोटधार कम गया । मैं अपने कमरे की तरफ भागा क्योंकि मुझे कुछ गर्म कपडे पहनकर अखिल को वापस लेने जाना था । लेकिन जब तक मैं कुछ गर्म कपडे पहनकर वापस आया, अखिल और बहुत दोनों जा चुके थे । मैं डर और ठंड के मारे काफी लगा । मैंने अपने कमरे के बगल वाले कमरे का दरवाजा खटखटाया । जहाँ भी और कार्तिक हो रहे थे हमने होटल के चौकीदार को बताया हूँ कि हमारा एक दोस्त है । उसने आसपास के कुछ लोगों को इकट्ठा किया और हम सब अखिल की खोज में निकल पडे हैं । रात भर खोजने के बाद ही जब अखिल का कोई पता नहीं चला तो हमने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई । पुलिस ने कुछ महीनों तक छानबीन की लेकिन जब अखिल को ढूंढ नहीं पाए तो उन्होंने फाइल बंद कर दिया । इस घटना से हम इतना डर गए थे कि फिर कभी दोबारा इस तरह एक साथ किसी ट्रिप पर जाने की हमारी हिम्मत ही नहीं हुई । आपने दो उसको खोने का हम तो हमें था ही लेकिन जिस विचित्र ढंग से हो पाया हुआ वो हमारी समझ के परे था । मुझे आज भी उस रात के डरावने सपने आते हैं । बहुत में अचानक गैर तीन से चार होता हूँ । आज बीस साल के बाद ही उस और की धुलने सी परछाई को मैं अपने मन से नहीं निकाल पाया हूँ । और वैसे भी अखिल के बिना किसी ट्रिप पर जाने में कोई मजा नहीं था क्योंकि वही हमारे ग्रुप में सबसे जिंदादिल और साहसी लडका

प्रतिशोध - रहस्यमय कब्रिस्तान

रहस्यमय कब्रिस्तान हूँ । ये उस वक्त की बात है जब मैं इंजीनियरिंग कर रहा था । मैं फाइनल ईयर का छात्र था और हॉस्टल में रहा करता था । मेरे घर मेरे हॉस्टल से पांच घंटे की दूरी पर था । मैं हर हफ्ते रविवार की छुट्टी के दिन अपने घर जाता था । लेकिन महीने में एक बार मैं अपने मामा के घर जरूर जाता था । उनके बेटे चंदन के साथ मेरी बडी घनिष्ठ मित्रता थी । शनिवार की क्लास खत्म होते ही मैंने अपना सामान बांधा और अपने मामा के घर की तरफ रवाना हो गया । मेरे मन में मामा और उनके परिवार और खासकर चन्दन से मिलने की बडी उत्सुकता थी । लेकिन मुझे क्या पता था कि मेरे साथ एक विचित्र घटना होने वाली है, जिस पर विश्वास करना मुझे आज भी बहुत कठिन लगता है । मेरे मामा छोटे से गांव किशनपुर में रहा करते थे । किशनपुर शहर से सात घंटे की दूरी पर था । जब मैं किशनपुर पहुंचा तब तक बहुत रात हो चुकी थी । किशनपुर के बाद ड्रॉप से मामा जी के घर तक पहुंचने के लिए लगभग बीस मिनट तक एक कच्ची सडक से पैदल जाना पडता था । उस दिन अमावस की रात आकाश पर बादल छाए हुए थे । और ठंडी हवाएं चल रही थी । मैं ठंड के मारे कांपने लगा । कुछ मिनट पहले बारिश हुई थी और पेडों की पत्तियों से पानी अभी भी टपक रहा था । मामा के घर की तरफ जाने वाली कच्ची सडक पर टीचर भर गया था । मैंने उस सडक पर बडी सावधानी से कदम आगे बढाए । रात बहुत हो चुकी थी इसलिए सडक सुनसान दी और आस पास भी कोई नहीं था । किशनपुर के लोग ऐसी ठंडी बरसात की रातों में बहुत जल्दी सो जाते थे । मुझे घर पहुंचने की जल्दी थी इसलिए मैंने अपने कदम जल्दी जल्दी आगे बढाए । कहते हैं, अमावस की ऐसी काली अंधेरी रातों में इस रास्ते पर चलना खतरे से खाली नहीं है । क्या तुम्हें डर नहीं लगता? मैंने एक लडकी की आवास में और टक्कर हो गया । मैंने धीरे से पीछे होकर देखा । खूबसूरत सी लडकी मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी । उम्र में मुझसे एक दो साल छोटी होगी । एक ही में वो किसी कॉलेज की छात्रा लग रही थी । मैंने अंदाजा लगाया शायद वो भी मेरी तरह छुट्टियों में अपने घर वापस जा रही थी । मैंने उसकी कहीं बात को मजाक समझा और हसने लगा बला, मुझे डर लगेगा । मैंने उससे पूछा मैं तो मार दूँ डबला तो तो मैं चाहिए क्योंकि तुम लडकी हो यादों में पता नहीं उसने कुछ कदम मेरी तरफ बढाये और पूछा ऐसी अमावस की रातों में कब्रिस्तान से कुछ अतिरिक्त आत्मा बाहर निकलती है और अपनी अधूरी इच्छाओं को पूरा करने के लिए इधर उधर भटक ही रहती है । वो तुम्हारा खून चूस लेती है और तुम है मार डालती हैं । उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पडता कि तो मार दो ये और अब उन्हें सिर्फ तुम्हारा खून चूसने से मतलब है वो लडकी देखने में बहुत खूबसूरत थी और उसकी आवाज भी बहुत मीठी ना उसकी खूबसूरती की तरफ आकर्षित होता चला गया । अगर ये जगह ही खतरनाक है तो भला तुम यहाँ क्या कर रही हो? मैंने उससे पूछा तुम्हारा इंतजार कर रही थी ताकि तुम आओ और मुझे मेरे घर पहुंचा दूँ । मुझे उसकी बात पर हंसी आ गई और मीठा के माँ के हसने लगा तो ये बात है । अब उसकी मंशा मेरी समझ में आ गई थी । असल में तुम्हें अकेले अपने घर जाने से डर लग रहा था इसलिए तुम्हें ये उल्टी सीधी कहानी सुनाकर मुझे कराना चाहिए ताकि तुम है मेरा साथ मिल जाए । नहीं नहीं वो मेरे एक दम करीब आ गई और उसने कहा मैं सच कह रही हूँ चलो ठीक है मानी तुम्हारी बात मुझे उसकी बात पर यकीन तो नहीं था फिर भी मैंने उसकी तसल्ली के लिए कह दिया । अब ये बताओ कि तुम्हारा घर कहाँ है । वहाँ उस तरफ उसने अपने हाथ से दक्षिण की तरफ इशारा किया । मैं उसके साथ चल पा । उसके साथ बातें करते हुए मुझे बहुत अच्छा लग रहा था । मन ही मन मैं तो ये भी चाहने लगा था कि अगर उसके साथ थोडा और वक्त बिताने का मौका मिल जाता तो अच्छा था । लोग आ गया मेरा घर । उस कच्ची सडक पर थोडा आगे चलने के बाद उसने कहा मैं यहाँ से थोडा सा आगे जाना है । अब मैं चली जाऊंगी । धन्यवाद क्या मैं तुम्हें तुम्हारे घर तक छोडने आ सकता हूँ । मैंने बडी उम्मीद से पूछा नहीं उस की कोई जरूरत नहीं है । इतना कहकर वह रास्ते पर आगे बढ गई । मैं थोडी देर वहीं खडा रह कर उसे देखता ही रहा तो अंधेरे में वो कहीं ओझल हो गई तो मैं अपने मामा के घर की तरह पडा । चंदन काफी देर से मेरी प्रतीक्षा कर रहा था । डंडा ने दसवीं कक्षा के बाद ही पढाई छोड दी थी । वो मामा के काम काज में उनका हाथ बढाता था । खाना खाने के बाद हम दोनों बाहर बरामदे में बैठे । चंदू क्या तुम किसी लडकी को जानते हो जो उस तरफ रहती है? मेरे हाथ से उस ओर इशारा किया जहाँ उस लडकी का घर था । देखने में तो किसी कॉलेज की छात्रा लगती है । हमारे गांव की कोई लडकी कॉलेज तक पढे ही नहीं है । अभी लडकियों की तो शादी हो गई है और बाकी आधी लडकियों ने बहुत ही पढाई छोड दी । चंदू ना मुस्कुराते हुए कहा अच्छा नहीं । उस लडकी के बारे में जानने की उत्सुकता था इसलिए मैंने उसे फिर पूछा लेकिन तुमने उस लडकी को तो देखा होगा तो देखने में बहुत सुंदर है । लडकी के सुंदर होने की बात सुनकर चंदू को भी उसके बारे में जानने की उत्सुकता हुए । तुमने क्या बताया था? बंदो ने मुझसे पूछा उसका घर किस तरफ है? उस तरफ मैंने उन्ही से इशारा किया हूँ । देश तंदूरी अपना माथा पीट और कहा अरे उस तरफ तो पाकिस्तान है और क्या तुम जानते हो उस पाकिस्तान का कैसे क्या है तो उस कब्रिस्तान में उन लोगों को दफनाया गया है जिनकी मृत्यु के समय या तो कोई अच्छा अधूरी रह गई है या फिर उनकी मृत्यु समय से पहले हो गई है । कहते हैं ऐसी अमावस की रातों में वो अतृप्त आत्माएं अपनी खबरे से बाहर निकलती है और अपना अधूरा काम पूरा करती हैं । लेकिन अक्सर ये आत्माएं अपना रास्ता भटक जाती हैं और वापस अपनी कब तक नहीं पहुंच पाती । ऐसे में वो इंसानों का इंतजार करते हैं जो उन्हें वापस उन की कब तक पहुंचा सकें । यार मैं इंसान का रूप धरकर हमारे सामने प्रकट हो जाती है और हमसे मदद मांगती है । उनकी मदद न करने पर वो इंसानों का खून चूस कर उन्हें मार डालती है । तुम ने ऐसे ही किसी अतृप्त आत्मा को देखा होगा क्योंकि कोई भी जीती जागती लडकी खबर स्थान में तो नहीं रहती ना । चंदू की बात सुनकर मुझे हंसी आ गयी क्योंकि मैं भूत प्रेत में विश्वास नहीं करता था वो उस लडकी ने भी मुझे यही कहकर मुझे बेवकूफ बनाने की कोशिश की थी । मैंने हसते हुए कहा । मेरी बात सुनकर चंदू डर के मारे कांपने लगा । उस ने मेरा हाथ पकडा और खींचते हुए घर के अंदर ले गया । कल सुबह मैं साबित कर दूंगा जो लडकी जिसको तुमने देखा था वह भूलती थी । चंदू ने घर के दरवाजों को ठीक तरह से बंद करते हुए कहा, वो भला जैसे मुझे भी उसकी बात पर विश्वास नहीं हो रहा था क्योंकि भूतों के नाक कदमों के निशान मंत्री हैं और नई उनकी परछाई बनती है । चंदू की ये बात सुनकर मेरी हंसी गायब हो गई । मुझे उस लडकी के बारे में एक विचित्र बात याद आ गई । मैं उसके साथ कच्ची सडक पर चल रहा था । तब हम भी क्लाइंट के पास से होते हुए हो रहे हमारे पीछे से आती स्वीट लैंप की रोशनी से सडक पर मेरी परछाई तो बन गई, पर उसकी नहीं बनी । लेकिन उस समय मैं उसकी खूबसूरती में और उसकी बातों की मिठास में इतना खोया हुआ था कि मैंने उस बात पर ध्यान ही नहीं दिया । मैंने टॉर्च हाथ में लिया और चंदू को साथ लेकर उसी कच्ची सडक की तरफ चल पडा । उस रात क्योंकि बरसात हुई थी और कच्ची सडक पर की जब भरा था इसलिए किसी के भी पैरों के निशान साफ नजर आती । रात बहुत हो चुकी थी इसलिए हमारे बाद कोई भी उस सडक से नहीं गुजरा था । मैं और चंदू जब सडक पर पहुंचे तो जो नजारा हमने देखा उसे देखकर हमारे होश हो रहे उस पूरी सडक पर मेरे जूतों के निशान दो साफ नजर आ रहे थे । पर उन के अलावा और कोई निशान वहाँ नहीं थे । हम आश्चर्य के साथ एक दूसरे को देखते ही रह गए । कभी उस रात के सन्नाटे में किसी के जो उसे हसने की आवाजे आई । मैंने पहचान लिया कि वो आवाज उसी लडकी की है । जल्दी भाव चंदू ने में रहा पकडा और मुझे वापस घर ले गया । उस दिन मैं समझ गया कि हमारे आस पास कई ऐसे रहस्य छुपे हैं जो हमारी समझ पा रहे हैं । उस दिन के बाद से मैंने कब्रिस्तान वाले रास्ते से जाना छोड दिया । खासकर अमावस की काली रातों में मेरे लिए तो उस रास्ते से जाने की बात पूछना भी और संभव है । हूँ ठीक है ।

प्रतिशोध - आर्किड विला

आर्केट विला हर साल गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने पुश्तैनी गांव सहारनपुर पड जाता था । वहाँ मेरे ताऊ जी और उनका परिवार होता था । मेरे ताऊ जी की बेटी का नाम बनाया था और वो मुझे उम्र में पांच साल बडी थी । गर्मियों की छुट्टी में हम दोनों मिलकर हूँ । बहुत मस्ती किया करते थे । मुझे दिनभर कहीं बाहर घुमाने ले जाती थी और आज को कहानियाँ सुनाती थी । मुझे आज भी वो घटना यान है जो समय घटी थी जब मैं पांचवी कक्षा में था । ये घटना ऐसी विचित्र थी । उसके बारे में सोचकर आज भी मैं घर जाता हूँ । एक रात रानी दीदी मुझे कहानी सुना रहे थे । अचानक मैंने कुछ अजीब सी आवाज ही नहीं और खिडकी से बाहर झांक कर देखा । चाहूँ तरफ उनकी मोटी सी पडा जमी हुई थी । कुछ बडों के लिए जान बादलों की ओर से बाहर निकल आया और मैंने उस रोशनी में खूबसूरत था । मगर बहुत पुराना बंगला देखा जो उत्तर की दिशा में था । ज्ञान की रोशनी में बंगला इतना खूबसूरत लग रहा था कि मैं बस उसे मंत्रमुग्ध होकर देखता रह गया । मुझे सोच कर बडी हैरत हुई । ये मेरा ध्यान इस बंगले की ओर पहले क्यों नहीं किया दे दी उस बंगले में कौन रहता है? मैंने रानी देरी से पूछा वहाँ कोई नहीं रहता क्योंकि मुझे बडा अच्छा हुआ इतना खूबसूरत बंगला है और वहाँ कोई नहीं रहता । दरअसल उस बंगले का नाम आर्केट मिला है और मेरी सहेली कविता के रिश्तेदार का है । उसका कहना है कि वह बंगला भूतिया है । क्या तुम सच करियो दीदी? रानी दीदी की हंसी जब काबू में आई तो उसने मुझसे पूछा मेरी सहेली कविता के पास उस घर की चाबियां है । मैंने मुस्कुराते वो अपना सिर हिला दिया । ठीक है तो फिर कल शाम को ठीक छह बजे वहाँ पहुंच जाना । मैं कविता से भी क्या होगी । वो चाबी लेकर वहाँ जाए । रानी देवी ने कहा, अगले दिन में बडी बेताबी से शाम के छह बजने का इंतजार करने लगा । मुझे घर देखे की बडी उत्सुकता थी । जैसे घडी में छह बजे मैं उस बंगले की तरफ दौरौं लेकिन बहाना रानी दीदी पहुंची थी ना उन की सहेली कविता । इसलिए मैंने गेट पर खडे रहकर दोनों का इंतजार करना ठीक समझा । बाहर अंधेरा हो चुका था और ठंडी हवाएं चल रही थी । धीरे धीरे चारों तरफ धुंध भी फैल रही थी । तभी अचानक बारिश होने लगी और मैं खुद को भी लेने से बचाने के लिए बंगले की तरफ होगा । अपने बरामदे में खडा होकर उन दोनों के आने का इंतजार करने लगा । कभी बंगले का दरवाजा अंदर से खुला । पुराने दरवाजे के खोलने की आवाज सुन का मैंने पीछे मुडकर देखा । लडकी दरवाजे पर खडी मुस्कुरा रही थी जिसकी उम्र लगभग रानी दीदी जितनी होगी । अंदर आ जाओ नहीं तो मैं ठंड लग जाएगी । उस लडकी ने कहा उसकी मुस्कुराहट बडी प्यारी थी । मुझे लगा कि शायद वही रानी देवी की सहेली कविता है । मेरे कपडे भी गए थे और में ठंड से कांप रहा था । मुझे लगा कि वो ठीक कह रही है । अगर मैं बाहर ही खडा रहा तो मुझे जरूर ठंड लग जाएगी । मैं उसे देखकर मुस्कुराया और उसके पीछे पीछे बंगले के अंदर आ गया हूँ । यहाँ बैठा हूँ । उसने सोफे की तरफ इशारा करते हुए कहा मैं सोफे पर बैठ हो गया लेकिन मेरे मन में हजारों सवाल उठ रहे थे । मेरी नजरें लगातार सडक पर टिकी हुई थी लेकिन मैंने तो कविता देवी को आते हुए देखा ही नहीं । फिर वो किस राष्ट्रीय संदर्भ नहीं । मैंने उन्हें जरा गौर से देखा पर उन्होंने मेरी और कोई ध्यान नहीं दिया । कोई और रास्ता भी होगा । अंदर आने का कविता दीदी घर को मुझसे बेहतर जानती है और उन्हें सारे रास्ते भी मालूम होंगे । मैंने मन ही मन सोचा मेरे सामने वाले सोफे पर बैठ गई । मैंने देखा उनके बालों में से पानी टपक रहा था । हाँ, उन्होंने अभी अभी स्नान किया हूँ । मैंने मन में सोचा फिर मैंने देखा उनकी कपडे भी भेजे हुए थे । उनके बालों से पानी लगातार फर्श पर टपक रहा था । ये देखकर मुझे बडा अजीब सा लगा । फिर मैंने सोचा थोडी देर पहले बारिश हुई थी तो वो भी बारिश में भी गई हो । रानी दीदी कह रही थी ये घर भूतिया है, क्या यह सच है? मैंने उनसे पूछा कहा ये सच है । उन्होंने मेरी आंखों में आंखें डालकर का चालू पहले यहाँ लडकी रहती थी जिसका नाम था लाल । वो लडकी से प्यार करती थी जो बहुत गरीब था । मगर लाली के भाई नहीं चाहते थे कि वह गरीब लडके से शादी करे । इसलिए उन्होंने उस लडके का खत्म कर दिया और उसे जंगल में दफना दिया । लाली को जब इस बात का पता चला तो उसने नदी में कूदकर आत्महत्या कर ली । कहते हैं अब इस बंगले में लाली का भूत रहता है । ये सुनकर मैं यार गया और नजर कुमार का चारों तरफ देखने लगा । या तो ये घर देखना चाहोगे । उन्होंने मुझसे पूछा रानी दिया जाए? फिर सब मिलकर घर देखेंगे । मेरे मुंह से यह बात निकली थी कि मैंने कुछ कदमों की आहट सुनी । लगता है रानी दीदी आ गई । मैं सोफीपुर से उठा और दौडता हुआ बंगले के बाहर चला गया । वहाँ रानी दीदी किसी और लडकी के साथ खडी थी । इतनी देर क्यों कर दी? रन भी दी । मैं और कविता दीदी कब से आपका इंतजार कर रहे हैं । मैंने रानी दीदी से पूछा, जितनी क्या करे वो समझ रानीदेवी हैरान होकर पूछा कविता तो मेरे साथ ही है । रानी दीदी ने अपने पास खडी लडकी की तरफ इशारा करते हुए कहा तो फिर वो कौन है तो बंगले के अंदर बैठी हुई है । मैं बंगले की तरफ मोडा तो मेरे प्राण सूखते । मैंने देखा कि बंगले के दरवाजे पर तो ताला लगा हुआ है । तभी कविता देवी आगे बढी और चाबी लाकर बोलेगा । दरवाजा खोला हाँ वो लडकी देखने में ऐसी थी । कविता देवी ने बंगले की दीवार पर लगी एक तस्वीर की ओर इशारा करते हुए पूछा, हाँ मैंने धीरे से कहा भगवान कविता देवी का चेहरा पीला पड गया वो कौन है? कविता रानी देवी ने पूछा तो लाली है । कविता देवी ने से हटते हुए कहा हूँ

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