Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

Transcript

प्यार की वो कहानी अध्याय -01

आप सुन रहे हैं तो आपको एफएम किताब का नाम है । प्यार की भूख कहानी जिसे लिखा है पंकज कुमार ने आरजे सारिका की आवाज में ऍम सुनी । जो मन चाहे अध्याय एक घर को रंगीन रोशनी से सजाया गया था और सभी मेहमान उत्साहित होकर इधर उधर व्यस्त थे । एक ने एक नौकर को कुछ काम करने का आदेश दिया । कुछ समय बाद दूसरे ने उसे वह काम करने से रोककर कोई दूसरा काम करने का आदेश दिया । बारात आने ही वाली थी इसलिए उनका उत्साह प्राकृतिक ही था । यू तो हर कोई खुश था लेकिन दुल्हन का बिना रूके रोना उनमें से कुछ को अचंभित कर रहा था । उसके कुछ मित्र उसे शांत करने की कोशिश में थे लेकिन वो सब इस मामले में स्वयं को असफल ही महसूस कर रहे थे । पूछने रोने का कारण नहीं बता रही थी । ऐसा लग रहा था कि वो इस शादी से खुश नहीं है । कुछ लोगों का विचार था कि एक स्वाभाविक मनोस्थिति हैं क्योंकि वो अपने माता पिता का घर छोडने जा रही थी जिन्होंने अपने सारा प्यार और लगाव उस पर उडेल दिया था । उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह केवल उनकी बेटी थी, ना ही कभी उन्होंने एक बेटे की जरूरत ही महसूस की थी । लेकिन उसका इस तरीके से रोना उसके हिंदी की गहराई से निकलने वाले दुःख जो कि उसकी आंखों से आंसू के रूप में बाहर आ रहा था तो व्यक्त कर रहा था । निश्चित रूप से वह खुशी के आंसू नहीं थे जो कि एक दुल्हन द्वारा तब बाहर जाते हैं जब वो अपने ससुराल के लिए निकलती है । तभी वहां मिसेज सिन्हा आई शानदार पोशाक में थी और ऐसा लग रहा था जैसे वो उस अवसर की सबसे खास महिला थी । उन्हें देखकर दुल्हन माँ माँ पुकारने लगी और उनके पास लगभग तो करते हुए आई । मिसेज ने अपनी बाहों को फैलाया और उसे रोते हुए अपने गले से लगा लिया । उन्होंने स्नेहा के साथ उसकी पीठ थपथपाई और कहा, रोहिनी स्वयं पर नियंत्रण रखें, सब कुछ ठीक हो जाएगा । लेकिन रोहिनी ने कुछ उत्तर नहीं दिया । उसने अपनी माँ को बहुत कसकर पकड लिया जैसे कि वह उनमें समा जाना चाहती हूँ । आस पास खडी दूसरी महिलाएं अपनी आंखों में आंसू लिए उनको सहानुभूति की नजरों से देख रही थी । तभी वहां एक औरत दौडते हुए आई और दरवाजे पर बारात के आने की सूचना दी । इससे पहले की इस पर कुछ प्रतिक्रिया आती । सभी औरते और रोहिणी कि सहेलिया बारातियों की झलक और विशेष रूप से दूर है की एक झलक पाने के लिए दरवाजे की तरफ दौड पडे । रोहिणी अकेली थी । उसका दिल और तेजी से धडकने लगा और और ज्यादा नर्वस महसूस कर रही थी । पटाखों की आवाज प्रतिशन और तेज होती जा रही थी । दुल्हे को बेदी के पास बैठाया गया । वो बहुत खुश और विश्वस्त लग रहा था । ऐसा लग रहा था कि उसे वो मिल गया जिसकी उसकी इच्छा की थी । तभी पंडित जी ने दुल्हन को लेकर आने को कहा क्योंकि विवाह का शुभ मुहूर्त प्रारंभ हो गया था इसलिए कुछ लोग उस कमरे की तरफ भागे जहाँ रोहिणी बैठी हुई थी । कुछ ही में दुल्हन कुछ और तो तथा जवान लडकियों के साथ वहाँ पर उपस् थित हुई । उसने माहौल का जायजा लेने के लिए अपने गूगल की ओर से झांका और तभी उसने देखा । एक जवान पुरुष दूसरे व्यक्तियों को एक तरफ धक्का देते हुए वहाँ रहा था जिसे देखकर उसकी आंखें फैल गई । उस आदमी के चेहरे से लग रहा था कि वह बहुत ढका हुआ था । उसके पास साफ कपडे नहीं थे ना उसने गाडी ही बनाई थी । उसके बाल भी तितर बितर थे । उसे देखते ही रोहिणी ने अचानक एक झटके से स्वयं को आजाद किया और उसकी तरफ दौड पडी । इससे पहले की वहाँ खडी दूसरे व्यक्ति घटना को समझ पाती । उसने उस आदमी के कंधों को ये कहते हुए पकड लिया अमर और इससे पहले कि उसे कुछ उत्तर मिलता वह जमीन पर गिरकर निढाल हो गई । ये देखकर कुछ छोडते जोर जोर से रोने लगी । मिसेज सेना रोते हुए उसके पास आई । तभी एक लंबा और शक्तिशाली व्यक्ति वहाँ आया । उसने रोहिणी को अपनी बाहों में उठाया । पांच के कमरे में ले गया । किसी ने डॉक्टर को फोन किया और कुछ ही देर में डॉक्टर भी आ गया । किसी ने भी अमर की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया । केवल कुछ लोगों को बताया था कि वह कौन था । अमर बरामदे में हमले के सहारे अपनी कमर को झुकाए हुए खडा था । ऐसा लग रहा था कि वो अपने आस पास के माहौल को समझने में असमर्थ था । उसने अपने आप को शांत करने के लिए अपनी आंखे बंद कर ली । दस साल पहले उसने रोहिणी से किसी जगह पर बात की थी जब उसका एमबीबीएस में चयन का परिणाम प्रकाशित हुआ था और वह पहला व्यक्ति था जिसने उसे इस बारे में सूचना दी थी । इसी सुनने के बाद कितना खुश हो गई थी उसे । अभी तक वो दिन अच्छी तरह से था । वो उसे अत्यधिक आश्चर्य के चलते धन्यवाद भी नहीं पाई थी । उसमें आपने मुलायम और कोमल हाथों से हार उसे पहनाया था और भेल रोमांच के साथ उसके गालों और माथे को चूमा था । अब हम डॉक्टर बन जाएंगे । उसमें खुशी से कहा मैं नहीं तो उसने अपने चेहरे पर बिना कोई दुख का भाव लाते हुए उत्तर दिया । ये सुनकर उसने अविश्वसनीयता के साथ उसकी तरफ देखा और फिर उसका रोल नंबर देखने के लिए रिजल्ट देखा । उसे वहाँ उसका रोल नंबर नहीं मिला लेकिन फिर भी उसकी आंखे विश्वास नहीं कर पा रही थी क्योंकि वो उससे ज्यादा बुद्धिमान था और जब भी वह किसी दुविधा में होती थी वो उसकी मदद किया करता था । दो दिन की पश्चात रोहिणी अचानक अमर के घर उसकी बहन सुजीता जो कि उस की सह पार्टी भी थी को देखने का बहाना कराई । लेकिन वास्तव में सुजीता अपने मामा के घर गई हुई थी और ये रोहिणी को पता था । उस समय केवल अमर की माँ घर पर थी इसलिए वो उनके साथ बैठ गई और अमर का इंतजार करते हुए बातें करने लगी । दो घंटे बीतने पर भी उसका कहीं अता पता नहीं था । तब वो और ज्यादा देर तक धैर्य नहीं रख सकी और उसे अमर की माँ से पूछा वो कहाँ गया हुआ है? इससे पहले की वह जवाब देती । अमर कमरे में दाखिल हुआ और रोहित को वहां देखकर आश्चर्यचकित रह गया । उसे देख कर उसके चेहरे का भाव बदल गया और वह भी फ्रेश और रोमांचित देखने लगी । अमर रोहिणी को यहाँ आए हुए लगभग दो घंटे हो गए हैं । वह सुजीता से मिलने आई थी । उस से बातें कर लो, मैं चाय बनाने जा रही हूँ । उसमें अभी तक चाय भी नहीं होती हैं । अमर की माँ ये कहकर जाने के लिए उठ खडी हुई । रोहिणी ने ये कहते हुए की उस की चाय की इच्छा नहीं है । उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन अमल में कुछ नहीं कहा । अपना सिर नीचे झुकाएं । वो उसके चेहरे के भाव को पन्नी की कोशिश कर रहा था । वास्तव में वो यहाँ देखकर मूक हो गया था । वो उसके घर पहली बार आई थी । उन दोनों ने स्कूल तथा कॉलेज में एक साथ पढते हुए दस साल बिताए थे । लेकिन उससे पहले उसके घर नहीं आई थी । रोहिणी यहाँ कैसे? अमर ने उत्सुकता से प्रश्न पूछा क्यों? क्या ये मेरा घर नहीं है? उसने पूछा उसके बाद अमानीय प्रतिक्रिया में एक शब्द भी नहीं कहा । कुछ मिनट बाद उसे दोबारा पूछा कि तुम्हारी या आने के पीछे कोई कारण जरूर होना चाहिए । ऐसा दोबारा सुनकर रोहिणी ने उसकी तरफ ऐसे देखा मानो की वजह से अपनी आंखों के द्वारा उत्तर देना चाहती थी । अपनी होटों को अलग किए बिना वह हल्का सा मुस्कुराई । लेकिन उसने एक भी शब्द ऐसा नहीं कहा जिससे वो उसके आने के कारण को जानने के लिए और उत्साहित होता । लेकिन तब तक माँ वहाँ चाहे लेकर आ गई थी और उन सब में चाय पीने आरंभ कर दी । मानी उसके परिवार से संबंधित कुछ सवाल पूछे और उस लिए सामान्य हाय आना में उत्तर दिया । चाहे समाप्त कर वो उठी और उनसे जाने के लिए आज्ञा लिए अमर उसके साथ दरवाजे तक इस आशा से आया कि वो उसे कुछ बताएगी लेकिन उसने कुछ नहीं बताया । जब वापस अपनी माँ के पास आया तो उन्होंने रोहिणी की बहुत प्रशंसा कि रोहिणी ने अमर को बताया कि वह ना खुश थी क्योंकि उसके माता पिता उसे एमबीबीएस में प्रवेश दिलवाने के लिए तैयार नहीं थे । लेकिन वह किसी भी प्रकार एक डॉक्टर बनना चाहती थी । उस रात अमर ठीक से सो नहीं सका । वो बेचेनी पूर्वक अपने बिस्तर में करवट लेता रहा । बार बार रोहिणी का चेहरा उसके दिमाग में आकर उसे ये सोचने के लिए विवश कर रहा था कि आखिर क्यों उसके माता पिता तैयार नहीं थे । अगले दिन वो जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी रोहिणी के घर पहुंचा । उसके माता पिता जो कि उस के एडमिशन के लिए ज्यादा उत्सुक नहीं थे, उसे बताया कि वो उसके आगे की पढाई का बोझ उठाने में असमर्थ थे । मैं केवल साधारण पढाई करने में उसकी सहायता कर सकते थे लेकिन अंकल ये उसके भविष्य का सवाल है । अमर ने उन्हें भरोसा दिलाते हुए कहा, हम जानते हैं हमारे हम से ज्यादा और उसके भविष्य की चिंता कौन करेगा? रोहिनी के पिता ने दुःख के साथ कहाँ और पूछा उसके एडमिशन की फीस तथा उसके बाद के खर्चे की व्यवस्था करने में हमारी सहायता कौन करेगा? अमर वास्तव में हम मकान बनवाने के लिए बहुत सारा लोन पहले ही ले चुके हैं । अभी हमारे लिए संभव नहीं है । रोहिणी कि माता ने अपने पति के हाथ में हाँ मिलाते हुए कहा, अमर ने एक गहरी सांस ली और विश्वासपूर्वक कहा कोई किसी की भविष्य की राह में कैसे आ सकता है? अंकल लेकिन हमें बेहतर के लिए कोशिश करनी चाहिए । निरोध थे । उसके बाद अमर जाने के लिए उठ खडा हुआ लेकिन वो उसके साथ एक कप चाय लेना चाहते थे, जिसे उसने ये कहते हुए मना कर दिया कि उसे किसी अत्यावश्यक काम के लिए कहीं जाना है । लेकिन जाने से पहले उसने उनसे एडमिशन फीस की व्यवस्था करने तथा बाकी सब ईश्वर की इच्छा पर छोड देने की प्रार्थना की । रोहिणी के माता पिता उसकी सलाह को मुक्त बनते सुन दे रहे । तभी अमर मोडा और उसने देखा के सामने दरवाजे की ओर से रोहिणी झांक कर उनकी बातें सुनने की कोशिश कर रही थी और जब उसे इसका पता चला तो उसने मुस्कुराने की तथा अपने चेहरे पर खुशी का भाव लाने की असफल कोशिश की । इतना सब कुछ अमर के लिए उसकी अंतर्दशा जानने के लिए काफी था । समय बीतता गया और एडमिशन की अंतिम तारीख से दो दिन पहले अमर रोहिणी के घर गया और उसे मुबारक बात थी, लेकिन उसे ना खुश देखकर उसे आश्चर्य हुआ । अमर ने उससे इसका कारण पूछा तो उसने बताने से इंकार कर दिया और सिर दर्द का बहाना बनाया । तभी वहां रसोई से निकलकर मिसिज सेना आई और अमर को बताया कि किसी प्रकार उसके पिता ने छह हजार रुपयों का प्रबंध कर लिया है । लेकिन अब भी पांच हजार और चाहिए थे जिसकी व्यवस्था करने में वह असमर्थ हैं क्योंकि उन्होंने पहले ही बडा कर दे रखा था । इतना सुनकर उसे बिना एक शब्द कहे चाहे पीनी आरंभ कर दी । उसके बाद वो भारी मन से जाने के लिए उठ खडा हुआ । हालांकि मिसेज देना चाहती थी कि वह कुछ देर और बैठे लेकिन वो नहीं रुका पर

प्यार की वो कहानी अध्याय -02

अध्याय दो एक दिन में सिर्फ सेना ने सुजीता को बाजार में देखकर उससे अमरी के बारे में पूछा कि वह कैसा है । ये सुनकर बहुत दुखी हो गई और बताया कि वो ठीक नहीं है क्योंकि उसने अपनी सोने की चीन खो दिए हैं और जब मम्मी ने उसकी लापरवाही के लिए भला बुरा कहा तो वो बहुत उदास हो गया और हम से ज्यादा बाध्य करना बंद कर दिया । फिर पापा ने उसे दुखी ना होने की सलाह दी ये कहते हुए वो उसके लिए दूसरी चयन खरीदेंगे लेकिन तब भी नहीं बदला और उसने ज्यादातर समय अपने कमरे में ही रहना शुरू कर दिया । तब सुजीता ने मिसेस सीना से रोहिणी और उसके पढाई के बारे में पूछा क्योंकि उसको एमबीबीएस में एडमिशन लिए लगभग आठ महीने बीत गए थे । इस पर मिसेज सेना खुशी से मुस्कुराई और उत्तर दिया की वो अपने कॉलेज में अच्छा कर रही थी और छात्रवृत्ति मिलने के प्रति भी बहुत आश्वस्त थी । उन्होंने उससे अमर को अपने घर भेजने के लिए कहा क्योंकि उन्हें उससे कुछ कहना था लेकिन अमर मिसिज सेना कि यहाँ नहीं गया । समय के साथ वह सामान्य हो गया था और एक बार फिर से उसे चारों और की चीजें अच्छी लगने लगी थी, उससे पहले की तरह पढना आरंभ कर दिया । लेकिन उसने एक चीज जो की होती चीन होने से पहले नहीं किया करता था, आरंभ कर दी थी और वो थी कि उसने ट्यूशन देने आरंभ कर दिए थे और इसके बारे में अपने माता पिता को भी नहीं बताया था । एक दिन जब वो कैलेंडर में तारीख और दिन देख रहा था उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं था क्योंकि रोहिणी कि जनम दिन में बस चार दिन शेष रह गए थे । उसके हर जन्मदिन कर मुझ से कुछ उपहार दिया करता था । लेकिन क्योंकि उस साल शहर में नहीं थी वो उसे कुछ भी उपहार देने में असमर्थ था । रोहिणी के जन्मदिन के शुभ दिवस पर उसके कुछ मित्रों ने उसे पार्टी देने की सोची क्योंकि वो उन के बीच बहुत लोकप्रिय थी और वो उसकी आर्थिक हालत से भी परिचित थे । विशेष रूप से जयंत इसके लिए बहुत उत्साहित था । केवल उस समय ही नहीं बल्कि हर दूसरे अवसर पर वो उसके समीप आने के लिए प्रसन्नतापूर्वक उसकी मदद के लिए तैयार रहता था । इसी तरह रोहिणी को भी वो और उसका साथ पसंद आने लगा । जल्दी वो उसके सबसे खास मित्रों में शुमार हो गया जिस दिन वो सब पार्टी मनाने के लिए कॉलेज कैंपस से बाहर जाने वाले थे । रोहिणी गेट पर अमर को खडा देखकर आश्चर्यचकित रह गयी । वो उसकी तरफ दौडी और उसने प्रसन्नतापूर्वक उपहार का पैकेट उसके हवाले कर दिया । ऍम ये देख कर उसके सभी मित्र चकित रह गए । विशेष रूप से चयन जो स्वयं को कंट्रोल नहीं कर सका और उसके बारे में और ज्यादा जानने के लिए आगे आया । अमर ने इसका अंदाजा लगा लिया और इससे उससे बहुत तकलीफ हुई । एक व्यक्ति ये सहन नहीं कर सकता कि उसकी प्रेमिका को कोई दूसरा प्यार करे । अगर ऐसा होता है तो ये शक ना पसंद की और घटना और इन सब से ऊपर दुःख के बीच वो देता है जिसे सामान्यता वो व्यक्ति दूसरों के साथ बता नहीं चाहता । यदि भी रोहिणी चाहती थी कि वो पार्टी में उपस् थित हो लेकिन उसने उसका आमंत्रण यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि उसे घर पर बहुत महत्वपूर्ण कार्य है इसलिए उसका लौटना जरूरी था । उस दिन से अमर ने और शांत रहना शुरू कर दिया । उसके माता पिता इसका कारण पता लगाने में असमर्थ थे । उसके मन में सदा ये विचार चलता रहता था । की कहीं रोहिणी उसी भूलती तो नहीं जा रही और एक दिन उसकी कमरे का दरवाजा हल्का सा खुला था और सुजीता जो कि उसी साफ करने आई थी । दरवाजे की ओर से देखा कि अमरीक फोटो को निहार रहा था और बार बार अपनी आंखे पूछ रहा था । शीघ्र ही उसे शक हुआ और उसने जोर से दरवाजे को धक्का दिया । उसके इस प्रकार आगमन ने उसे उसकी फोटो छुपाने का मौका नहीं दिया । यदि पी वो ये चाहता था उसने तुरंत ही उससे फोटो छीनी, उसे देखा और सहानुभूति से मुस्कुराई । वो उस से कुछ भी छिपा नहीं सका और रोहिणी से अपनी निस्वार्थ प्यार को प्रकट कर दिया । उसने उसे वादा किया कि वो इसके बारे में किसी को नहीं बताएगी लेकिन उसे अपना ध्यान रखना होगा । उसने उसे ये भी बताया कि उसके पापा ग्रेजुएशन में उसके अच्छे परिणाम के उपलक्ष्य में एक पार्टी का आयोजन करने वाले थे और उसी इसमें खुशी से रूचि लेनी होगी और कहा कि उसे उसकी प्यार के लिए स्वयं को और अच्छा बनना पडेगा । ये पहला मौका था जबकि वह सच्चे मन से हंसा था और उसे ऐसा लगने लगा था कि वह अपने प्यार के प्रति आश्वस्त था । और ये निश्चित था कि उसे उसका प्यार मिल जाएगा । ये सब कुछ इस संबंध में सुचिता की सहायता का परिणाम था । यदि सहानुभूति को इसके उचित भाव के साथ दिखाया जाए तो ये अपनी अपारशक्ति के साथ एक व्यक्ति को संपूर्ण रूप से बदल सकती है । सुजीता के सहयोग के बाद उसके जीवन में एक नया मोड आया । उसने अपने आप को और अच्छा बनाने का वादा किया और उसके बाद उस ने और अधिक मेहनत से पढना भी आरंभ कर दिया । महीने बीट दे गए और इसी प्रकार दो साल बीत गए । अमर अब आपने पोस्ट ग्रेजुएशन की पढाई की अंतिम परीक्षा देने वाला था । उस समय वो केवल ये सोचा करता था कि कैसे स्वयं के लिए नहीं लेकिन अपने प्यार के लिए एक सफल व्यक्ति बनाया जाए । परीक्षा के बाद वो रोहिणी से मिलना चाहता था जिसे उससे बेहतर परिणाम की तैयारी के दौरान मिस किया था । उसे ये विश्वास था कि वो उसके बारे में जानकर बहुत खुश हो जाएगी । उसने खुशी और विश्वसनीयता के साथ परीक्षा दी और अंतिम परीक्षा के दिन शाम को वो उस शहर के लिए निकल पडा जहाँ रोहिणी पढ रही थी । होटल में कमरा लेने के बाद और स्वयं को फ्रेश करने के बाद वह मेडिकल कॉलेज के लिए निकल पडा । उस समय तक दस बच गए थे । जब वो कॉलेज के लिए गेट पर पहुंचा तो उसने देखा कि छात्र कॉलेज में आने लगे थे । वो निश्चित नहीं कर पाया की क्या करें । अब उसने एक छात्र से रोहिणी के बारे में पूछने की सोची लेकिन अगले ही पल उसने उसे सरप्राइज देने की इच्छा से ये उपाय टाल दिया । उस विचार से उसे बहुत आनंद आया । उसे वहाँ पहुंचे हुए दो घंटे बीत गए थे लेकिन उसे उसकी कोई झलक नहीं मिली । इसलिए उसने नाम मिलने के प्रति पूर्ण आश्वस्त होकर उसने प्रिंसिपल से उसके बारे में पूछने का निश्चय क्या । लेकिन जैसे ही उसने रोहिणी को कॉलेज जाते हुए देखा तो अचानक ही उसकी निराशा प्रसन्नता में बदल गयी । वह एक बाइक की पिछली सीट पर बैठी हुई थी जो कि बहुत ही हैंडसम नौजवान चला रहा था जिसमें उसकी स्मार्ट इसको बढाने वाले सन ग्लासेस पहने हुए थे । रोहिणी भी और ज्यादा स्मार्ट और आकर्षक हो गई थी । उसने उसकी सुंदरता को प्रदर्शित करने वाली पोशाक पहनी हुई थी जो कि रास्ते से गुजरने वाले लोगों को उसकी तरफ फासला भरी दृष्टि से देखने के लिए बाध्य कर रही थी । उसके स्तनों ने गोल आकार ले लिया था और उसके निपल्स नोकदार थे । उसी इसकी चिंता नहीं थी क्योंकि वो उसके एक जवान औरत होने के प्रतीक है । वो अपनी पोशाक के द्वारा आपने कुछ उभरे हुए भागों को प्रदर्शित कर रही थी जिसे उसने ये सोचकर पहना था की ये उसे और आकर्षक बना देगी । उसे देख कर उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ लेकिन वास्तविकता तो वास्तविकता थी । वो एक बार उसे जोर से पुकारना चाहता था लेकिन उसमें आए हुए परिवर्तन को देखकर आश्चर्य से ऐसा नहीं कर पाया । तब उसने उसे बेगैर मिले ही वापस जाने का निश्चय किया । लेकिन ऐसा सोचते हुए कि ये शायद मेडिकल कॉलेज के वातावरण का असर था, उसने शीघ्र ही वो विचार त्याग दिया इसलिए उसने दोबारा से उस से मिलने का निश्चय किया और इस उद्देश्य से वो कॉलेज की मुख्य इमारत की तरफ गया । लेकिन जब तक वो वहाँ पहुंचा कक्षा आरंभ हो चुकी थी इसलिए उसे क्लास खत्म होने का इंतजार करना था । तब उस समय को बताने के लिए उद्देश्य रहित होकर इधर उधर पहले लगा । वो ये सोचकर कभी कबार नर्वस हो रहा था कि वो उसका सामना कैसे करेगा उससे क्या और कैसे कहेगा । कैंपस में यहाँ वहाँ बडी और छोटी इमारतें थे । कुछ भिन्न भिन्न प्रकार के फूलों के पौधे लगाए हुए थे और उनके चारों तरफ लोहे की तार लगाए गए थे । इस प्रकार के हर क्षेत्र में प्रवेश तथा निकासी के लिए एक छोटा दरवाजा लगा होता है । उन के अंदर दो सीमेंट से बनी हुई पैन की पडी थी जिसपर कॉलेज आने वाले लोग कुछ देर के लिए बैठ सकते थे क्योंकि कॉलेज आने वालों में ज्यादातर छात्र होते थे । वे ही फुर्सत में वहाँ अपना समय पडने में बिताते थे । अमन ने भी समय बिताने के लिए उन बच्चों का उपयोग किया लेकिन हर चीज उसे परेशान कर रही थी । उसे ऐसा लग रहा था कि समय और धीमी गति से चल रहा था इसलिए समय समय पर वो अपनी कलाई पर बंधी घडी देखता था और उठ खडा होता था । जैसे ही उसने घंटे की आवाज सुनी अनायास ही उसकी कुछ आंतरिक शक्ति से वो क्लास की तरफ खींचा चला गया । वहाँ आंखों से कुछ खोजने का प्रयास करने लगा क्योंकि एक समय में बहुत से छात्र क्लास से बाहर आ रहे थे । पहली बार में वो उसे नहीं ढूंढ पाया लेकिन बाद में जब ज्यादातर छात्र चले गए और क्लास में केवल कुछ छात्र बच्चे थे वो और ज्यादा सावधान हो गया और उसे तीन छात्रों का अंतिम ग्रुप मिला । रोहिणी उनमें से एक थी और उसके साथ उसके जिगरी मित्र जयंत और कोमल थे । अमर एक बार में ही उन्हें पहचान गया क्योंकि वो उनसे तब मिला था जब रोहिणी को उसका बौद्धिक गिफ्ट देने गया था । रोहिणी उनसे बातें करने में व्यस्त थी इसलिए उसने वहीं से आवाज लगाई और उसकी तरफ दौडा उसे वहाँ देख कर बहुत ज्यादा उत्साहित थी और उसके दोस्तों ने भी अचानक एक आश्चर्य के भाव के साथ उसे देखा तो पूरी तरह से असमंजस में थी और उसे पहचान नहीं पाए की वो कौन था । लेकिन अगले ही क्षण उसे स्वयं को नियंत्रित किया और स्थिति की वास्तविकता को समझा । हेलो अमर! उसने नी रस्ता से कहा हेलो हाई अमर ने उत्सुकता से उत्तर दिया तू यहाँ कब आए? केवल कुछ घंटों पहले कोई महत्वपूर्ण कार्य नहीं । केवल इससे पहले की वह अपना वाक्य पूरा करता । अचानक जयंत बोल उठा, रोहिणी हमें देर हो रही है और अमर अपना वाक्य पूरा नहीं कर सका । रोहिणी ने जयंत को देरी के लिए क्षमा याचना की दृष्टि से देखा और मुस्कुराने की असफल कोशिश की । उसके बाद उसने कहा, क्योंकि अमर बाद में मिलते हैं तो मैं आज यहां रुक रहे हो ना नहीं । उसका उत्तर था । उसका उत्तर सुने बेगे ही उज्जैन की तरफ चली गई जो कि पहले ही बाइक पर बैठ चुका था और उसी स्टार्ट करने वाला था । पिछले सीट पर बैठकर उससे हाथ हिलाकर उसे बाय कहा । एक कर्कश आवाज के साथ अमर और कोमल को पीछे छोडते हुए बाइक स्टार्ट हो गई और एक धक्के के साथ तेजी से आगे बढ गई । उसी समझ नहीं आया कि कुछ शहरों में क्या हो गया । लेकिन उसके चेहरे के हावभाव से ये स्पष्ट था कि उसे रोहिणी के व्यवहार से गहरा धक्का लगा था । वह एक शब्द बिना कहे ही अपना सर नीचे झुकाएं । आगे बढ गया मिस्टर अमर क्या में आप के साथ एक कप कॉफी ले सकती हूँ को मिलने सुझाव दिया वो रुका उसकी उसकी तरफ आश्चर्य से देखा और हाँ खुशी से कहते हुए हामी भर दी । कुछ चुप चुप उसके पीछे कैंटीन की तरफ चल पडा । दोनों एक दूसरे की तरफ चेहरा किए हुए बैठे थे, को मिलने दो कप कॉफी लाने का ऑर्डर दिया और उसके बाद में शांतिपूर्वक बैठे रहे । एक वेटर आकर दो गिलास पानी तथा दो कप कॉफी रखकर चला गया । लेकिन वे शांति अंत में को मिलने चुप्पी तोडते हुए अमर से पूछा क्या रोहिनी तुम्हारी पडोसी है? नहीं वो दूसरी कॉलोनी में रहती है । हम साथ पढे हैं । मुझे पता है उसने मुझे तुम्हारे बारे में कॉलेज ज्वाइन करते समय बताया था । मुझे याद है एक भी दिन ऐसा नहीं जाता था जब तुम्हारे बारे में बात ना करें । लेकिन जयंत से उसकी मित्रता ने उसी पूरी तरह से बदल दिया । अब वो वैसी नहीं है जैसी शुरू में थी को मिलने जल्दबाजी में कहा । अमर ने गहरी सास बाहर तथा भीतर छोडते हुए उस की हाँ में हाँ मिलाई जोकि उसके अत्यंत दुख का संकेत थी । लेकिन मेरा विचार है कि वह जो कर रही है ठीक है क्योंकि वो डॉक्टर बनने जा रही है । अमर ने कुछ दिनों के बाद कहा और छत की सीलिंग की तरफ देखते लगा । उसने ऐसा अपनी निराशा को छुपाने के लिए कहा लेकिन असफल हो गया क्योंकि उसके चेहरे का भाव स्पष्ट रूप से उसके गहरे दुख को व्यक्त कर रहा था । तो मैं चुप चाप किसी समझ गई । उसके बाद उन दोनों ने एक दूसरे से बिना एक शब्द कहे ही कुछ और समय कॉफी पीने में व्यस्त रखकर बिताया । कैंटीन लगभग भरी हुई थी और हर कोई चाय या कॉफी पीते हुए पर हसते हुए अपने साथियों के साथ अपने अपने काम में व्यस्त था । जिंदगी का ये पडा बहुत ही आकर्षक और महत्वपूर्ण है क्योंकि वो नहीं रखता है जिसपर जीवन की इमारत खडी होती है । अच्छा एक बात बताओ तो आज कल क्या कर रहे हो? कोमल ने बातचीत को एक बार फिर शुरू करने के इरादे से पूछा । कुछ नहीं अभी पोस्ट ग्रेजुएशन का फाइनल एग्जाम दिया है । अमर ने नीरस था के साथ उत्तर दिया क्या में एक बार पूछ सकती हूँ को मिलने कुछ आश्वस्त होकर आग्रह किया मैंने कुछ समय के लिए उसकी तरफ देखा जैसे कि वह निर्णय कर रहा था या फिर उसके चेहरे से उसके सवालों का संकेत लेना चाह रहा था । पूछो जो तुम पूछना चाहती हूँ अपन ने उसे प्रोत्साहित किया । वास्तव में तुम रोहिणी को बहुत अधिक प्यार करते हो तो मैंने उसके चेहरे के हावभाव को पढने के लिए बिना आपकी बाल को को हिलाये उसकी तरफ देखते हुए गम्भीरता से पूछा । एक बार करता था लेकिन अब मैं नहीं जानता । अमर का उत्तर था समय हर चीज में बदलाव लाता है और हमें बदलावों को स्वीकार करना चाहिए । कोई भी व्यक्ति केवल भूतकाल को याद करते हुए जीवित नहीं रह सकता । उसी वर्तमान का सामना करना पडता है और भविष्य का ध्यान रखते हुए बदलाव लाना पडता है । लेकिन भूतकाल को बोलना उतना आसान नहीं है जितना हम सोचते हैं । क्योंकि जो कुछ वर्तमान में हैं भूतकाल का ही परिणाम है । अमन प्रतिक्रिया व्यक्त की और तब उसे लगा कि उसे समझाना उसके लिए आसान नहीं था । इसलिए उसने सोचा कि उसका बहस को आगे नाली जाना ही ज्यादा अच्छा होगा । इसलिए वह खडी हुई और ऐसा ही अमर ने भी किया । दोनों कैंटीन से बाहर आए और जब अमर गेट की तरफ चलने लगा तो उससे कुछ पूछना चाहती थी लेकिन उसकी हालत देखकर साहस नहीं कर पाई । साथ ही साथ रोहिणी से भी नाराज थी क्योंकि यह पोन्नैया स्पष्ट था कि अमर बचपन से उसे सच्चा प्यार किया करता था और वो उसी प्यार के कारण यहाँ आया था लेकिन उसने उसे धोखा दिया

प्यार की वो कहानी अध्याय -03

ऍम अध्याय तीन सुजीत ने खुशी के साथ अमर की कमरे में प्रवेश किया और देखा कि वह किताब पढ रहा था । वो एक्शन तक चुपचाप खडी रही । तब उसने पूछा भैया की आपको पता है कि आपका रिजल्ट आ गया है, अमर नहीं । उसकी तरफ रूखेपन से देखा । इससे वह कुछ देर के लिए चकित रह गई क्योंकि उसकी निगाह में कोई उत्साह नहीं था । नही उसके चेहरे पर कोई उत्सुकता का भाव था । लेकिन सुजीता स्वयं का उत्साह नहीं छुपा सके । अब फॅस हुए हो उस की अपनी अत्यधिक प्रसन्नता को बाहर निकालने के लिए हवा में अपने हाथों को नाचते हुए कहा । लेकिन इसका अमर पर कुछ असर नहीं हुआ । वो उसे ना देख सके इस उद्देश्य से पलंग की दूसरी तरफ मुड गया की उसकी बर्दाश्त से बाहर था । परिणामस्वरूप उसने उसका चेहरा अपने सामने करने के लिए उसके कंधे को खींचा जिससे कि वह उसके आनंद छुपानी प्रकट न करने का कारण जानने के लिए उसकी आंखों में देख सकें । क्या बात है भैया? उसने लगभग अपनी आंखों को मलते हुए पूछा कुछ नहीं । मुझे पहले से ही रिजल्ट का पता था । बिना किसी आनंद के भाव के उसका उत्तर था, लेकिन तुमने ही हमसे छुपाया क्यों? ये अब मेरे लिए कोई आनंद का विषय नहीं है तो जीता और अब इसका मेरे लिए कोई महत्व नहीं है । उस ने गंभीरता से कहा लेकिन क्यों? क्यों भैया उसने उसके कंधे को हिलाते हुए पूछा सुजीता रोहिणी ने मुझे धोखा दिया और मैंने ये सब केवल उसके लिए किया । उसने अपनी भर्राई आवाज में कहा ऍम जीता अमर । इतनी नाराजगी से चलाया की सुजीता अपना वाकिया पूरा नहीं कर सकी जिसके माध्यम से वो अपना गुस्सा हल्का करना चाहती थी । ली तो जीता उसके बारे में कुछ मत का हो । मैं ये सहन नहीं कर सकता । उस ने प्रार्थना की । इतना कहकर अमर उसकी तरफ मुडा और वह कुछ समय तक सदमे की अवस्था में वहीं खडी रह कर आंसू बहाती हुई कमरे से बाहर आ गई । दरवाजे पर उसने देखा की माँ अपना चेहरे पर दुख का भावली वहाँ खडी थी । उसने उन्हें बातें करते हुए सुन लिया था । सुजीत स्वयं को नियंत्रित नहीं रख सके और सुब रखते हुए अपनी माँ के गले लग गई । माँ की आंखों से भी आंसू बह रहे थे लेकिन वो अपने हाथों से प्यार से इधर उधर उसकी पीठ को सहलाते हुए तथा अपनी उंगलियों को धीरे धीरे उसके बालों में फ्री आते हुए उसे शांत करने की कोशिश कर रही थी । शाम को सुजीता फिर से अमर के कमरे में उसे ये बताने के लिए गई की माने पोस्ट ग्रेजुएशन में उसकी सफलता के उपलक्ष्य में एक पार्टी देने का निश्चय किया है । इसलिए उसे अपने कुछ मित्रों को आमंत्रित करना चाहिए । लेकिन जैसे ही वो दाखिल हुई वह आश्चर्यचकित रह गई । ये देखकर की वो अपनी पीठ के बल सो रहा था और उसके सीने पर एक फोटोग्राफ रखा था वो चुपचाप उसके पास कई और सावधानीपूर्वक वो फोटो ठाली रोहिनी एक पेड के नीचे खडी मुस्कुरा रही थी । बहुत खुश लग रही थी और स्पष्ट रूप से अमर ने ये फोटो खींच ली होगी । उस ने कुछ देर तक उसे देखा और फिर फुसफुसाई तो चालाक नहीं बनना चाहिए था । रोहिणी मेरी नजरों में तुम कुछ हो और क्रोध की अवस्था में वह इसे फाडना चाहती थी कि तब तक अमर जाग गया था इसलिए उसने चिल्लाते हुए उसे मना किया । नहीं सुजीता प्लीज नहीं । सुचिता ने ऐसा करने से स्वयं को रोक लिया और उसके ऊपर फोटो फेक टीवी बोली नरक में चाहूँ उसके बाद अपने गुस्से को प्रकट करने के लिए पैर पट्टी हुई वो कमरे से बाहर चली गई । अमर अपने चेहरे का भाव बदले बिना उसे जाते हुए देखता रहा । उसने अपने आवासों को पूछा क्योंकि उसकी आंखों से निकल रहे थे लेकिन उसने सुचिता को अपना गुस्सा छोडने के लिए शब्द भी नहीं कहा । कुछ समय पश्चात जब बाहर जा रहा था उसके मान्य उसे रोकते हुए कहा अमर जो बच्चा चंद के लिए होता है, बडे होने पर अपनी इस हरकत पर खूब रहता है । अमर ने परेशानी से उसे देखा लेकिन उत्तर में कुछ भी नहीं कहा । उसकी माँ ने भी उसे दुख पूर्वक देखा । कितनी वो पहले ही उसके चेहरे का भाव तथा उसके हिंदी में उडते हुए तूफान को पड चुकी थी । तब वो उसे दिल से कहना चाहती थी, मैं तुम्हें समझती हूँ मेरे बेटे लेकिन एक समझदार व्यक्ति परिस्थिति के उसके अनुकूल न होने पर हमेशा स्वयं से समझौता कर लेता है । ये सुनकर अमर विडंबना से मुस्कुराया और दरवाजे से बाहर चला गया । माने खाली दरवाजे पर दृष्टि डाली जिससे अमर बाहर गया था और फुसफुसाई की केवल समय तुम्हारा इलाज करेगा । मेरे पुत्र तो हमारी पीडा के बारे में नहीं पता और फिर उसने कुछ राहत पाने के लिए अपनी आंखें बंद कर ली । तभी अमरीकी पापा दरवाजे पर दिखाई दिए । वो बहुत खुश थे और उन सभी को आश्चर्यचकित करने के लिए आपने खुश होने का कारण बचाना चाहते थे । लेकिन अपनी पत्नी की हालत देख कर उन का सारा उत्साह ठंडा पड गया और तुरंत ही वो अपनी खुशी को भूल गए और उसकी दुखी होने का कारण जानने की कोशिश की । लेकिन उसने कुछ भी नहीं कहा कि सुजीता थी जिसमें वास्तविक कारण बताया । मिठाई का डिब्बा अपने हाथों में लिया और भारी मन से अंदर चली गई । जब वापस आया तो उसने अपने पिता को घर पर पाया तो माँ और सुजीता के साथ बैठकर चाय दे रहे थे । जब उन्होंने देखा तो उन्होंने अपनी बातचीत का विषय बदल दिया और अपने चेहरे पर इस तरह की भावनाएँ मान लो । किसी गंभीर विषय पर बात नहीं कर रहे थे लेकिन अमेरिकी आंखे और कानूनी उसे विश्वास दिलाया कि उसके बारे में गंभीरता से कोई चर्चा की जा रही थी । उसने अपने पिता को ये कहते हुए सुन लिया था की उस की शादी से सारी समस्याएं हल हो जाएंगे और वह पूर्व कि भारतीय एक बार फिर से सामान्य हो जाएगा । अमर इस पर कोई प्रतिक्रिया नार्थ जताते हुए अपने कमरे में जाना चाहता था लेकिन उसकी माँ ने उसे रोककर चाय के लिए पूछा । यदि पी वो कुछ समय उनके साथ नहीं होना चाहता था लेकिन उसे होना पडा क्योंकि उसकी बहन ने भी उसे उनके साथ एक कप चाय लेने का आग्रह किया । उसके पिता अभी भी चुप थे और चुप चाप अपनी चाय पी रहे थे । वो धीरे से आया और अपने पिता के नजदीक बैठ गया । उस समय तक सुजीता रसोई में जा चुकी थी और कुछ समय पश्चात एक कप गर्म चाय के साथ लौटाई । कुछ समय के लिए उन सब ने स्वयं को अपनी चाय पीने में व्यस्त रखा लेकिन अंत पिता ने चुप्पी तोडी । अमर अब तुम क्या करोगे? मैंने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है । पिता ने उसके बाद कुछ नहीं पूछा । ये माँ थी जिसमें उससे पूछने के लिए उसके पिता की जगह खाली अमर हमने तुम्हारी शादी करने का फैसला लिया है लेकिन मैंने अपना करियर शुरू नहीं किया है और अब तक मैं आप के ऊपर निर्भर हो क्या ये आपके लिए बोझ नहीं होगा? भविष्य किसने देखा है? ये हो सकता है कि वो आपके लिए उज्जवल भविष्य लेकर आए । माँ के उत्तर से पहले ही सुचिता ने कहा तब उत्तर में एक शब्द भी नहीं कह सका और गंभीरता से चाय पीने लगा । सुबह की छह बज चुके थे लेकिन सुजीता ये सोचकर चकित थी की अमर की कमरे का दरवाजा अभी तक बंद था और वो एक अप्रत्याशित घटना के बारे में सोच कर डर गई । इसलिए उसने खुले आम इसी खोलने से पहले संध्या से दरवाजे को खटखटा । लेकिन उसे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि केवल दस तक से ही दरवाजे के कपाट खुल गए । ये पहले से ही खुला था । उसने शीघ्रता से कमरे में प्रवेश किया और कमरे के अंदर की दशा देखकर भौचक्की रह गई । बिस्तर खाली था अमर कबीर के इस कमरे में कहीं भी नहीं था और उसके परिवार की फोटो क्योंकि खिडकी के ठीक ऊपर लगी रहती थी वो भी वहाँ नहीं थी । वो पागलों की तरह चलाई । माँ कुछ ही समय के बाद वहाँ वहाँ आश्चर्यचकित होती हुई आई कि वो इस तरह क्यों छिलाई लेकिन सुजीता उसकी तरफ उदासी से देख रही थी । कुछ दिनों पश्चात वो अस्थिर आवास में बोली भैया माँ क्या हुआ उसे माने । गुस्से से पूछा वो हमें छोडकर चला गया है । उसे स्वयं को नियंत्रित करते हुए उत्तर दिया क्या? हाँ हाँ देखो उनका ब्रीफकेस और वहाँ लगी हुई तस्वीर कमरे में नहीं है । उसने रोते हुए कहा । उसके बाद उसकी माँ ने स्थिति को महसूस किया और पागलों की तरह रोने लगी । कमरे में हल्ले गुल्ले से उसके पिता जो कि अपने कमरे में सो रहे थे, जाग गए और आश्चर्यचकित होकर वहां पहुंचे और उन्होंने देखा कि सुचिता और उसके माँ बुरी तरह से रो रहे थे । उनके रोने का कारण जानकर उन्होंने स्वयं को शांत रखा और उन्हें कमरे की तलाशी लेने की सलाह दी ये जानने के लिए कि उसने उन्हें जाने के बारे में सूचित करने के लिए कुछ छोडा था या नहीं । उन्हें कमरे में ऐसा कुछ भी नहीं मिला जिससे यह पता चले कि वह कहाँ गया था । तब उन्होंने पुलिस को सूचना देने का निश्चय किया । लेकिन शीघ्र ही उन्होंने ये सोच कर अपना इरादा बदल दिया की उनका ये जल्दबाजी में लिया गया कदम समस्याएँ पैदा कर सकता है । इसलिए उन्हें एक दो दिन उसका इंतजार करना चाहिए । शाम को जब सुजीता उसका कमरा साफ कर रही थी उसने उसके पलंग में बिछाए हुए तकिये को इधर उधर किया और तभी उसे तक की के नीचे एक मुडा हुआ कागज का टुकडा दिखाई दिया और उसने उत्सुकता से इसे ऊपर उठा लिया । एक भीषण गवाये बिना उसने उसे खोला । इसमें लिखा था, प्रिया मम्मी और पापा मैं जानता हूँ । मेरे जाने से आप बहुत तकलीफ में हूँ, लेकिन ये अकेला रास्ता था जिससे में शांति महसूस कर सकता था । मैं अपनी नई जिंदगी नई जगह पर शुरू करना चाहता हूँ, जहाँ कोई मुझे और मेरी पृष्ठभूमि के बारे में नहीं जानता । वास्तव में हमारे शहर की हर जगह नहीं, मुझे परेशान करना शुरू कर दिया है और मुझे लगता है कि मेरे लिए असहनीय था । मैं लौट कराने का वादा करता हूँ, लेकिन अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद मैंने अपने लिए निश्चित किया है । मेरी इच्छा है कि मैं आपको खुश रख सको । मेरी प्यारी बहन सुजीता को बहुत सारा प्यार आपका अमर । इस से पढकर सुजीता बुरी तरह से रोने लगी और उसके ऐसा करने से माता पिता को भी रुला दिया । उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि अमर ऐसा कदम उठाएगा । उसके पिता मूव थे लेकिन उनकी रोती हुई आंखें उनकी दूर्दशा को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर रही थी । माँ और बेटी दोनों कुर्सी पर बैठे एक दूसरे का हाथ पकडे रो रहे थे । उनके पिता ने उन्हें होते हुए देखा और वो भी बुरी तरह से रोना चाहते थे । लेकिन उन्होंने स्वयं को नियंत्रित किया और जब उनकी आंखें आंसू नहीं रोक पाई तो उन्होंने अपने कंधे पर रखे तौलिये से उन्हें पूछ दिया । घर में बिल्कुल कब्रगाह जैसा वातावरण था ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -04

अध्याय चार अब हमें हॉस्टल चलना चाहिए । रोहित ने कहा क्योंकि जसवंत के साथ गार्डन में बैठी हुई थी और वो अपना सर उसकी गोद में रखे स्वर्ग जैसा आनंद को महसूस कर रहा था और उसकी खुले बालों से खेल रहा था जोकि हवा के चलने के साथ धीरे से उड रहे थे । बीच बीच में वो प्यार के अहसास के साथ अपने हाथ उसके बालों में घुमा रहा था और उसकी पीठ थपथपाना रहा था जो कि प्रत्येक बार उसकी सनसनी बढा रहे थे । उसमें कोई उत्तर नहीं दिया । ना ही उसने अपनी आंखे खोली । वो अपनी पूर्व अवस्था में बना रहा जो क्यों से प्रसन्नता प्रदान कर रही थी । हालांकि उसने उसे जाने की सलाह दी थी । ऐसा नहीं लगता था कि वह स्वयं भी जाने की मूड में थी । आकाश की तरफ देखते हुए शायद वो स्वयं तथा जसवंत के साथ अपने क्रिया कलापों का फैसला करना चाहती थी । अचानक उसकी आंखों में एक नहीं चमक आई और उसके चेहरे का भाव बदल गया । उसने अपना चेहरा उसकी तरफ किए । बगैर पूछा जसवंत क्या में एक बात पूछ सकती हूँ? हाँ वेशक उससे अधिक महत्व दिये बिना जवाब दिया तो इसे गंभीरता से नहीं लोगे क्या तुम? उसने विनम्रतापूर्वक सोचते हुए कहा कि यदि उसके सवाल में सच नहीं था, निश्चित रूप से की उसे ना खुश कर देगा । ऐसा सुनकर उसने अपना चेहरा उसकी तरफ किया और उसकी आंखों के भाव पडने की कोशिश की और उसके बाद वो उठा और अपने पैर ठीक उसके पैरों के सामने फैलाकर बैठ गया जिससे कि वो उसके सवाल का जवाब देने के लिए उसका अच्छी तरह से निरीक्षण कर ले । लेकिन वो उस की तरफ मुस्कुराती हुई देख रही थी, उस बेचेनी पर ध्यान दिए बिना जिससे उसे बुरी तरह से जकड लिया था । दूसरी तरफ वो चाहता था कि वह जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी अपना सवाल पूछ ले लेकिन वो ऐसा करने में समय ले रही थी । प्लीज रोहिणी पूछो तुम पूछना चाहती हूँ उसने अधीरता से कहा तब उसने सर हिलाया और विनम्रता से कहा तो कॉलेज से एक साल के लिए क्यों निकाल दिया गया है? इस सवाल से उसके चेहरे का भाव बदल गया था और ये स्पष्ट था कि वह सवाल सुनने के बाद परेशान हो गया था । लेकिन अगले ही क्षण उसने स्वयं को नियंत्रित किया । उस समय भी वो उसमें आए हुए बदलाव को समझने में नाकाम हो गई । वो अभी भी मासूमियत से मुस्कुरा रही थी । ऐसा इसलिए था क्योंकि मैंने अपनी बहुत सारी क्लासेस मिस कर दी थी । मेरी उपस् थिति संतोषजनक नहीं थी । उसने धन्यता से जवाब दिया और उसे जवाब में कुछ भी नहीं कहा । अचानक वहाँ पास में एक अमानवीय सा दिखने वाला आज भी दिखाई दिया और उसने उनसे बिना कुछ कहे ही जसवंत में आतंक पैदा कर दिया । वो अचानक से चेंज हो गया और उसने उसे वापस हॉस्टल चलने की सलाह दी क्योंकि वो उस समय कुछ ठीक महसूस नहीं कर रहा था । अचानक तुम इतनी जल्दी में क्यूँ उसने आश्चर्य से पूछा वास्तव में अचानक मुझे कुछ महत्वपूर्ण काम याद आ गया है इसलिए मेरा जाना जरूरी है । आपके कहकर वो उठ खडी हुई । दोनों ने हॉस्टल जाते हुए एक दूसरे से बात नहीं की । वो मूवी थे और शायद अपने अपने विचारों में मग्न थे । हॉस्टल पहुंचने से पहले जसवंत ने ड्राइवर को ऑटो रोकने का आदेश दिया और इससे पहले की तो इसका कारण पूछती । उसने उसे बताया कि उसे कुछ जरूरी कार्य पूरा करना है इसलिए वो थोडी देर बाद हॉस्टल पहुंचेगा और इतना कहकर वह भीड में गुम हो गया । जब रोहिणी हॉस्टल पहुंची । उसने बरामदे में कोमल को देखा । उसके चेहरे पर थकान के निशान पोंटे स्पष्ट थे । जिस क्षण वो उसके सामने गई उसके उसके सामने सवालों की झडी लगा दी । वो कहाँ गई थी, किसके साथ थी और वो लेट होती इत्यादि । उसने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा क्योंकि वो ऐसी स्थिति के लिए तैयार नहीं थी । इसलिए वह जवाब में एक शब्द भी नहीं कह पाई और कमरे में घुस गए । कोमल उसके पीछे गई और उसने जसवंत के साथ उसकी मुलाकात पर शक किया और उसने बिना कुछ उत्तर लिए ही उसने उसे सलाह दी कि उसका जसवंत से मिलना उसका कैरियर बर्बाद कर सकता है और उसे बताया कि वह कॉलेज में बातचीत का केंद्र बन गई थी । फिर स्टूडेंट उसके बारे में और ज्यादा जानना चाहता था । रोहिणी सबकुछ चुपचाप सुन दे रही और तब उसने विश्वसनीयता के साथ जवाब दिया कि वे आवश्यक ही टेंशन ले रही है । वो ये निश्चित करने के लिए काफी बडी थी कि क्या करना चाहिए । ये कोई उन का मामला नहीं था । कोमल एक बार में ही उसके जवाब की विडंबना समझ गई । उसने तब केवल इतना कहा ओके और कमरे से बाहर चली गई । रोहिणी उसके गुस्से को समझ गई थी लेकिन उसे उसे शांत करने के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं और उसी जाने दिया । तब वह बातों में गए, अपना चेहरा धोया और अपने बिस्तर पर लौट आई और अपनी थकावट तथा तनाव को भूल ने के लिए इस पर लेट गई । जब उसने अपनी आंखे बंद की उसे कुछ आराम महसूस हुआ इसलिए वो थोडे और समय के लिए उसी मुद्रा में रहना चाहती थी । उसी स्थिति में रहते हुए जब नींद के आगोश में चली गई वो कुछ महसूस नहीं कर सकी । वो आठ बजे उठी जब को मिलने उसके शरीर को हिलाकर देने के लिए जाने को कहा लेकिन उसने ये कहते हुए मना कर दिया कि उसे भूख नहीं थी को मिलने तब तक कुछ नहीं कहा और अपना डिनर लेने के लिए अकेले चली गई । उसके जाने के बाद वो अपनी आंख बंद नहीं कर सके । रोहिणी रोहिणी दरवाजा खोलो । वो अपने पापा की आवाज सुनकर चकित थी इसलिए वह खडी हुई और दरवाजा खोला । आश्चर्यचकित थी कि उसके माता पिता दरवाजे पर खडे थे और उन्हें देख कर उसे मुस्कुराने की कोशिश की लेकिन इस कार्य में अच्छी तरह से सफल नहीं हो सकी । हालांकि उसके माता पिता उसे कुछ महीनों के बाद देख कर बहुत खुश थे । वे अंदर आए, उससे बहुत प्यार किया । अब ये सब चीजे क्यों लाए हो? उसने पूछा देखो तो मेरी इकलौती संतान हो और हमारी खुशी तुम्हारे आनंद पर निर्भर कर दी है । उसके पिता ने कहा लेकिन इसके लिए आपको अतिरिक्त पैसे की जरूरत है । रोहिणी ने चिंतित होते हुए कहा तो रोहिणी इसकी चिंता मत करो । एक बार तुम डॉक्टर बन जाओ । हमारी सारी चिंताएं एक झटके में ही हल हो जाएंगी । उसकी माँ ने उत्तर दिया और उसका माथा चूम लिया । उसकी माँ का चुम्बर इतना छू लेने वाला था कि उसने अपनी खोली और पाया कि वह कमरे में अकेली थी । जब कोमल डिनर लेकर अपने कमरे में वापस आई तो यह देखकर आश्चर्यचकित थी कि रोहिणी लगी हुई थी और बिना अपनी पलकों को हिलाएं । सीलिंग की तरफ देख रही थी । वो उस की मुद्रा को देख कर डर गई और घबराकर उसके पास गई तो ही नहीं तुम्हारी क्या हुआ । उसने उसके शरीर को हिलाते हुए पूछा । उसने स्वयं को असामान्य स्थिति में पाकर जल्दी से उत्तर दिया नहीं, कुछ भी तो नहीं । मैं बोलते ठीक हूँ लेकिन देखो रोहिणी हम यहाँ अपने उज्ज्वल करियर के लिए पढाई पूरी करने के लिए आए हैं और हमारे माता पिता केवल उसी उद्देश्य के लिए पैसा खर्च कर रहे हैं । इसलिए हमें अपनी व्यक्तिगत रुचि को कोई महत्व देने की बजाय उनकी उम्मीदों के बारे में सोचना चाहिए । उस ने गंभीरता से कहा रोहिणी चुप चाप उसी सुनती रही और कुछ मिनटों के बाद उसे सुबह ते हुए उसका हाथ पकड लिया । कोमल एक बार में ये उसकी दुर्दशा को समझ गई थी । फिर भी उसे सांत्वना देते हुए उसकी पीठ को थपथपाया कि सब कुछ जल्दी ही ठीक हो जाएगा । उसे केवल अब की पढाई की तरफ ध्यान देना चाहिए क्योंकि ये उनकी पढाई का अंतिम साल था । कोमल प्लीज मुझे बचा लो नहीं तो मैं निश्चित रूप से बर्बाद हो जाओंगे । अब पढाई मुझे आकर्षित नहीं करती । मैं क्या करूँ? उसे रोते हुए कहा मैं जानती हूँ और तुम भी समझती हूँ तो मैं पढाई पर अभी एकाग्रता मजबूत करने के लिए केवल अपने साहस को बाहर करना होगा । उसमें आत्मविश्वास से सलाह दी ताकि उसका मनोबल विकसित हो । अगले दिन वो अपने कमरे से बाहर नहीं आई । यहाँ तक कि वो अपनी क्लासिस अटेंड करने के लिए भी नहीं गई जिससे जसवंत उसके बारे में जानने के लिए चिंतित हो उठा और लास्ट पीरियड के अंत में वो स्वयं पर नियंत्रण नहीं कर सका और कोमल से उसके बारे में पूछ लिया लेकिन उसे जल्दी उत्तर नहीं दिया । उसने गम्भीरता से उसकी तरफ देखा और फिर प्रभावी ढंग से पूछा जसवंत तुम्हारे पास मुझसे बात करने के लिए थोडी फुर्सत है? हाँ उससे घबराकर जवाब दिया मेरे साथ कैंटीन में आओ । उसने सलाह दी और उसके उत्तर का इंतजार किए बगैर ही वो आगे चली गयी । कैंटीन कॉलेज कैंपस में ही थी और ये अक्सर भरी रहती थी क्योंकि ये स्टूडेंट्स के मिलने की जगह थी । लेकिन उस दिन इसमें बहुत ज्यादा भी नहीं थी तो एक दूसरे के आमने सामने सीटों पर बैठ गए । उसके बाद उसने दो कप कॉफी का ऑर्डर दिया । जसवंत की उत्सुकता दर्शन प्रतिशन बढ रही थी लेकिन वो धैर्य दिखा रहा था और उस समय की प्रतीक्षा कर रहा था जब उसे रोहिणी के बारे में बताना शुरू करें और वह समय आ गया जब उन्होंने अपनी चाय पीने शुरू कर दी । उसने चाय की दो या तीन घोटी लिए होंगे कि कोमल ने उसके ऊपर सवालों की बौछार कर दी । जसवंत के तुम रोहिणी से सचमुच प्यार करते हो या उसके साथ इश्कबाजी करते हूँ । इस सवाल ने उसके दिल को अंदर तक हिला दिया और वह भयावह महसूस कर रहा था । लेकिन उसके अपने गुस्से पर काबू रखा और शांति से पूछा तो ऐसा क्यों पूछ रही हूँ? बिना कोई सवाल किए केवल हाँ या ना में उत्तर तो उसने धीरता से पूछा । उसने कुछ पलों के लिए उसकी तरफ देखा और फिर अविश्वास के साथ मुस्कुराते हुए उत्तर दिया यदि मैं कहूँ इसका मतलब है कि तुम झूठ बोल रहे हो क्योंकि मैं तुम्हारा पिछला रिकॉर्ड जानती हूँ और मैं तो में बताना चाहती हूँ कि उससे तुम्हारे प्यार में अपने करियर को बर्बाद करना शुरू कर दिया है । वास्तव में तो प्यार करती है लेकिन उसे सच्चा कर कोई और करता है जिससे उसकी खुशी के लिए अपने प्यार को त्याग दिया और उसे बिना कुछ बताए उसकी जिंदगी से बाहर चला गया । ये तो तुम वास्तव में उसे सच्चा प्यार करते हो तो भगवान के लिए उसकी जिंदगी बर्बाद होने से बचा लो । कोई गरीब परिवार से संबंध रखती है । उसके माता पिता बहुत कठिनाइयों के साथ उसकी खर्चे का प्रबंध करते हैं । यदि वो वास्तविक मार्ग से भटक गई तो पूरा परिवार बर्बाद हो जाएगा । सच्चा प्यार दुर्लभ है जसवंत एक सच्चे प्रेमी बनने का अवसर मत गवाहों क्योंकि तुम्हें तुम्हारा भविष्य पता है । इतना कहकर उसने उसकी सहानुभूति की मांग की भावना के साथ अपनी आंखें उसके चेहरे पर टिका दी । लेकिन उस समय तक वो एक दम की भर्ती हो गया था । उसने केवल सिर हिलाया और अपनी बच्ची हुई कॉफी को खत्म किए बगैर ही खडा हो गया । कुँओं से जाते हुए देखा और ऐसा लग रहा था कि वह किसी प्रकार स्वयं को अपने अस्थिर कदमों पर नियंत्रित कर रहा था । एक सप्ताह बाद क्लास से निलंबित हो गई और छात्र स्वयं को फाइनल एग्जाम की तैयारी में व्यस्त रखने लगे । उन्होंने अपने कमरों में ही रहकर अपने नोट्स तथा पुस्तकों को पढना आरंभ कर दिया । ऐसा ही कोमल और रोहिणी ने भी किया । समय बीतने लगा और उनके एग्जाम का अंतिम दिन आ गया । छात्रों से बहुत खुश थे क्योंकि उस पेपर के बाद उन्हें कुछ समय के लिए अपनी पढाई के तनाव से मुक्ति मिलने वाली थी । जैसे ही अंतिम घंटी बजी छात्र सवाल तथा उनके जवाबों के बारे में बातें करते हुए परीक्षा कक्ष से बाहर आने लगे । लेकिन रोहिणी शांत थी और उसकी आगे किसीको खोज रही थी । जब वह कैंपस के अंतिम गेट पर पहुंची । उसे कोमल मिली क्योंकि वहाँ खडी होकर उसका इंतजार कर रही थी । उसे देख कर वो मुस्कुराई और रोहिणी ने भी वैसी प्रतिक्रिया की । हालांकि उसके अंतिम पेपर सहित सभी भी पर अच्छे किये थे लेकिन वो परेशान थी और उसके परेशान होने का कारण ये था कि उसे जसवंत कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा था । उसने सोचा कि वो कितना लापरवाह था । वो ये पूछने भी नहीं आया कि उसके पीपल कैसे जा रहे थे लेकिन उसने ये सच्ची इसको मार से ये सोचकर छुपा ली की उसे उसका भावुक हो ना अच्छा नहीं लगेगा । दूसरी तरफ कोमल उसके दिल तथा दिमाग में उठती हुई तरंगों को महसूस कर रही थी लेकिन वो शांत रही और किसी भी बात को शुरू करने के लिए उचित समय की प्रतीक्षा कर रही थी । इसलिए दोनों मूक बनकर रहकर हॉस्टल पहुंचे और युद्ध के मैदान से लौटे । थके हुए सैनिकों जैसे कमरे में दाखिल हुए । अगली सुबह को मैं बहुत देर तक सोती रही क्योंकि वह रात को बहुत देर से बिस्तर पर गई थी । वो रोहिणी से उसके परिवार, उसके कैरियर और अन्य चीजों के बारे में बातें करती रही जिसमें उसके जीवन के हल्की और गंभीर शन शामिल थे लेकिन रोहिणी ने उसे कुछ भी नहीं कहा । उसने केवल सुनने में अपनी रूचि दिखाई । उस रात वो ठीक से सो नहीं पाई और बहुत जल्दी उठ गई । हो सकता है शायद ये उसके तनाव के कारण था । जब बातों से बाहर आई उसे जमीन पर पडा हुआ अखबार देखा क्योंकि होकर इसे अंदर फेंककर चला गया था । उसने अखबार उठाया और उसी शर्ट वो डर पर सदमे से सहम गई जिससे कोमल चार गई और उसने परेशान होकर पूछा क्या हुआ रोहिणी? लेकिन वो उत्तर नहीं दे सकी क्योंकि वह अखबार पढकर सहम गई थी । उसने केवल इसे उसी सौंप दिया और दुख से अभिभूत होकर फर्श पर बैठ गई । पुलिस इनफॉर्मर को मार डाला गया तो वो माॅब उसने कहा और खबरों का विवरण पढा । ब्राउनशुगर ट्राफिक गिरोह के एक सदस्य जसवंत मेडिकल कॉलेज के छात्र थे । वो अचानक पुलिस सूचना कार्बन गए और गिरोह के कुछ प्रतिष्ठित सदस्यों को गिरफ्तार करवाने में पुलिस की मदद की । लेकिन किसी प्रकार उन्हें उस पर शक हो गया और उन्हें उस समय गोली मार दी जबकि वो पुलिस इंस्पेक्टर मिस्टर रावत के साथ एक बहुत महत्वपूर्ण मिशन पर जा रहे थे । उन्होंने मिस्र रावत की सारी गोलियां अपने ऊपर ले ली और घटनास्थल पर ही मारे गए । उसका फोटो इस अखबार की हेडलाइन में ठीक ऊपर था । कोमल ने इसे पढने के बाद रोहिणी की तरफ देखा और उसे दुख के सागर में डूबा हुआ पाया । वह चुप चाप अपने आंसू बहा रही थी तो मैं ये सोचकर उसके पास नहीं गई कि आंसू बहाने से निश्चित ही उसका दुख हल्का हो जाएगा । उस दिन रोहिणी ने खाना यहाँ तक कि अपना नाश्ता भी नहीं लिया । वह जसवंत को देखना चाहती थी लेकिन को मिलने अनुमति नहीं थी । वो नहीं चाहती थी कि वो पुलिस की निगाहों में आए । कोमल जसवंत की आत्मा मेरे बारे में क्या सोचेगी? कुछ नहीं वो तो मैं खुश देखकर शांति महसूस करेगी । उसने उत्तर दिया लेकिन रोहिणी तुम्हारी प्यार में उसे सुधार दिया था । उसकी मृत्यु निश्चित थी लेकिन जो मृत्यु उसे अब मिली है वो बहुत ही सम्मानजनक है । वो बेहतर के लिए मारा गया । हमें उसका सम्मान करना चाहिए और भगवान से उसकी शांति के लिए प्रार्थना करनी चाहिए । आपको मिले जवाब दिया और उसकी पीठ थपथपाई जिससे रोहिणी और ज्यादा भावुक हो गई । उसने उसे कसकर पकड लिया और अपना सर उसके कंधे पर रखकर रोने लगी । दो दिन बाद कोमल रोहिनी को विदा करने आई जो कि अपने शहर वापस जा रही थी और गहरी दुख नहीं थी । लाइट फॉर्म भरा हुआ था लेकिन फिर भी रोहिनी स्वयं को अकेला महसूस कर रही थी । वो लिखते लग रही थी जब ट्रेन आई उसने अपना सामान उठाया और भारी कदमों के साथ डिब्बे में दाखिल हुई । उसकी सीट ठीक खिडकी के बराबर में थी । तब कोमल उस खिडकी पर कई और उसे कुछ के लिए और एक लिफाफा सौंप दिया, जिसने उससे आश्चर्यचकित कर दिया कि क्या है । उसने शीघ्रता से पूछा, ये लिफाफा मुझे जसवंत ने दिया था लेकिन मैंने उस समय भी नहीं दिया था ये सोचते हुए कि ये तुम्हारी परीक्षा में बाधा उत्पन्न करेगा । कोमल ने गंभीरता से जवाब दिया । इससे पहले कि रोहिणी कुछ और पूछनी थी, ट्रेन की सीटी ने आवासीय और ट्रेन रेंगने लगी । उन्होंने एक दूसरे को अलविदा कहा और अब की आंखों से आंसू पूछे क्योंकि उनकी एक दूसरे से अलग होने के समय उनकी आंखों से बाहर आ रहे थे । वे एक दूसरे को तब तक देखती रही जब तक कि वे आंखों से ओझल नहीं हो गए । धीरे धीरे ट्रेन ने गति पकडी और कुछ ही मिनट बाद इसलिए बहुत तेजी से चलना आरंभ कर दिया । रोहिणी दुखी मन से खिडकी को देख रही थी तब उसने लिफाफा खोला और इसमें से पत्र निकाला । इसमें लिखा था, प्रिय रोहिणी मैं जानता हूँ तो इस शरण बहुत दुखी हो और पत्र पडने के बाद तो मुझे ना पसंद करना भी शुरू कर दी होगी । लेकिन सत्य तो सत्य है । सही अर्थ में मैंने कभी तुम्हें प्यार नहीं किया । मैं तुम्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर दवाओं की तस्करी के अपनी जघन्य उद्देश्य के लिए प्रयोग करना चाहता था । लेकिन तुम्हारी घनिष्ठ मित्र कोमल ने तुम्हें बचाया और मुझे महसूस कराया कि मैं गलत था और गलत काम का परिणाम कभी अच्छा नहीं होगा । केवल उसी दिन मैंने महसूस किया कि तुमने मेरे अंदर प्यार के बीच हुए । आज से मैं तुम्हारे प्यार के संबंध के कारण वह काम छोडने जा रहा हूँ । ये जानते हुए भी कि इसका परिणाम मेरी मृत्यु है लेकिन मुझे बहुत पसंद है क्योंकि वह मुझे तुम्हारा अस्थाई प्रेमी होने के बजाय तो मैं मुझ पर गर्व कराने का मौका देगी । मुझसे वादा करो कि तुम मेरे प्यार को अपने दिल से निकाल होगी और खुशी से रहना शुरू कर होगी ये सोचते हुए कि तुम्हें कुछ समय के लिए एक बुरा सपना देखा है तुम्हारा जस्ट बढकर उसने उदास होकर अपनी आँखे बंद कर ली । अचानक उसकी उंगलियों की दिलीप अकड के कारण पत्र खिडकी से बाहर रोड गया । उसने अविश्वास के साथ देखा और ट्रेन बिना ये सोचे कि क्या घटित हुआ था अपनी गति बढाते हुए तेजी से अपने गंतव्य की ओर बढ रही थी ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -05

अध्याय पांच रोहिणी को अपने घर पहुंचे हुए दो दिन बीत गए थे लेकिन वो कॉलेज की जिंदगी की यादों को भुला नहीं पा रही थी । जितना ज्यादा वो बोलना चाहती थी उतना ही ज्यादा वो उन घटनाओं को सोच कर दर जाती थी जो उसके साथ वहाँ घटित हुई थी । इसलिए वो सामान्यता दुखी मन से या तो अपने पलंग पर सोई रहती थी या फिर कोई पुस्तक पड रही होती थी । उस दिन उसने पढने के लिए डॉक्टर ऍफ द्वारा रचित उपन्यास वूमेन इन लव लिया और पढने से पहले वो बिना जाने इसके पन्नों को पलटने लगी और इसके अंदर एक पत्र को पाकर आश्चर्यचकित हो गई । उसने जल्दी से इसी खोला और देखा कि ये अमर की द्वारा मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षा से केवल तीन दिन पहले लिखा गया था । उसने उत्साह से पूरा पत्र पडा और इस दौरान उसके चेहरे का भाव कई बार बदल गया । उसने पढना पूरा खत्म भी नहीं किया था कि उसने वहाँ पडी हुई दूसरी पुस्तकों में कुछ ढूंढना आरंभ कर दिया । उन पुस्तकों में जो उसने अमर के साथ कॉलेज में पढते हुए प्रयोग किए थी, अचानक उसकी खुद समाप्त हो गई और उसे एक फोटो मिला जिसमें वो फूलों से भरे हुए पौधों के बीच कॉलेज गार्डन में खडी थी । उसे अभी भी याद था कि उसने उसे खींचा था और उसके बाद उसने गार्डन से तोडकर एक गुलाब उसे भेंट किया था । लेकिन उसने उसे आधी मुस्कान के साथ मूव प्रतिक्रिया दी थी । इसलिए उसने फिर से कुछ चीजें खोजी आरंभ कर दी और जल्दी उसे वो सूखा गुलाब मिला क्योंकि किताब के पन्नों के बीच दबकर स्मत हो गया था । उस समय वो बहुत ज्यादा इसका अर्थ नहीं समझ चुकी थी । लेकिन अब वो पूर्णत्या इसका मतलब समझ गई थी । तो मुस्कुराई और फुसफुसाई तो बहुत शर्मिले हुआ मतलब में बता देना चाहिए था । तुम केवल मेरे मित्र नहीं हूँ लेकिन उससे कुछ ज्यादा तब उसने वो फोटो देखा जो उसके प्रति अमर के प्यार को प्रकट कर रहा था । इसलिए उसने स्वयं की तस्वीर को चूमा और दोबारा से दोनों चीजों को किताब के पन्नों के बीच में रख दिया । ये सोचते हुए कि वे उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण थे, अमर का मुस्कुराता हुआ चेहरा उसके दिमाग में आया और वो सुखद अनुमति के साथ अपनी मुस्कुराहट नहीं रोक सके । उसी क्षण उसकी माँ वहाँ आई और उसने पूछा कि वह क्या कर रही थी? कुछ नहीं । कुछ पुरानी किताबों को खोज रही थी । उसे जल्दी में उत्तर दिया । तब वो अपनी माँ के पास आई और उत्सुकता से पूछा । अमर कहा है मम्मी उसकी मानें । उसकी तरफ एक पक्ष वाचक दृष्टि से देखा और कुछ दिनों के बाद उसे सवाल में जवाब दिया क्यों मैं उसे देखना चाहती हूँ । उसने उत्सुकता से कर दिया तो मैं ऐसा नहीं कर सकती । लेकिन क्यों? उसने फिर से पूछा वो यहाँ नहीं है और उसके परिवार के सदस्यों के विचार से उसकी यहाँ से जाने का मुख्य कार्य तो ये सही है कि उसके तुम्हारे एडमिशन के समय हमारी सहायता की थी । लेकिन बाद में हम उस राशि को लौटाने के लिए राजी थी । उसकी माँ ने अपनी ना पसंद की दिखाते हुए कहा वो अपनी माँ की तरफ आश्चर्य से देखते रहे और जवाब में कुछ भी नहीं कहा । लेकिन तेजी से चलते हुए वह कमरे में घुसी और स्वयं को बिस्तर के हवाले कर दिया । तब उसने तक की से अपना चेहरा ढका और अब बुरी तरह से रोना चाहती थी । दिल से हसना चाहती थी लेकिन वो उन दोनों में से कुछ भी नहीं कर सके । वह एडमिशन के लिए पैसे कहाँ से लाया । क्या उसके सोने की चेन नहीं हुई थी । निश्चित रूप से उसने इसे बेचा था । ये सब विचार उसके मन में आए और उसने पछतावे से अपनी आँखे बंद कर ली । एक दिन वो चुपके से अमर के घर पहुंची उससे जीता थी जिसने दरवाजा खोला लेकिन उसे देख कर उसके चेहरे का भाव बदल गया और उसने उसे अंदर आने के लिए कहने की बजाय उसकी तरफ नफरत से देखा । लेकिन वो उस की अनुमति का इंतजार किए बगैर ही घर में घुस गयी । सुजीता एक तरफ को हो गई और उसे अंदर आने दिया । वो उसके पीछे ड्राइंग रूम तक गई जहां उसकी माँ अकेली बैठी थी । उसे देखकर उसकी मां आश्चर्यचकित रह गई लेकिन कोई भी अप्रिय शब्द नहीं कर पाए । उनके पैरों को छूकर रोहिणी कुछ सवालों को सुनने के इंतजार में उन के बगल में बैठ गई । लेकिन उन्होंने कोई सवाल नहीं पूछा । तब रोहिणी ने ये पूछते हुए स्वयं की बात आरंभ कर दी । अमर कहा है आंटी वो हमें कुछ कहे बिना ही शहर छोडकर चला गया । रोहिणी लेकिन क्यूँ उसने ऐसा क्यों किया? रोहिणी ने उत्साह से पूछा केवल तुम्हारी प्यार के लिए रोहिणी सुजीता ने ना पसंदगी के भाव से कहा लेकिन क्या? लेकिन तुमने उसे धोखा दिया और जब मेरे पिता नहीं उसे किसी से शादी करने के लिए बाध्य किया तो उसने घर छोड दिया । बिना हमें बताए कि वह कहाँ जा रहा था । तब सब कुछ समय के लिए शांत हो गया । रोहिणी उनसे कुछ कहना चाहती थी लेकिन स्थिति को देखते हुए उस साहस नहीं कर पाई । उसके बाद वो अपने घर जाने के लिए उनकी अनुमति चाहती थी । लेकिन अमरीकी माँ की एक कप चाय की सलाह ने उसे कुछ समय और रुकने के लिए बाध्य किया । सुजीता अनिच्छा से उसके लिए एक कप चाय लेने चली गई । उसके जाने के बाद मान ने पूछा, सुजीता ने तो में चोट पहुंचाई? रोहिणी नहीं । उसने जवाब दिया, परिस्थितियों ने उसे तुमसे इस तरह बात करने को विवश किया, नहीं तो वह तुम्हारा सम्मान करती है । उसने कहा, मैं समझती हूँ । रोहिणी ने से हिलाकर उत्तर दिया । अब तुम क्या करोगी? कुछ नहीं । रिजल्ट आने के बाद में यहाँ प्रैक्टिस करने की सोच रही हूँ । उसने इनमें बिना ज्यादा रूचि लेते हुए जवाब दिया । जब सुजीता ड्राइंग रूम में आई तो उसने देखा कि रोहिणी वहाँ नहीं थी । इससे वह आश्चर्यचकित हुई और उसने प्रश्नवाचक में कहाँ से अपनी माँ की तरफ देखा । उसकी आंखों से पूछे गए सवाल को समझ गई और उसके कुछ कहने के पहले यूज ने कहा वह जल्दी में थी इसलिए मैंने उसे जाने दिया । ट्रीम एज पर रखते हुए उसे अपना मूड बनाया जी दिखाने के लिए कि उसके जाने से उसे कोई फर्क नहीं पडा । तुम्हे उसे उस तरह से नहीं कहना चाहिए था से जीता । उसकी माँ ने कहा कि आखिरकार उसके दोस्त थी । ये सुनकर सुचिता ने अपना मूड कुछ इस तरह से बनाया मानव उसने कोई कडवी चीज में गल्ली हो । रास्ते भर रोहिणी सुचिता के अशिष्ट व्यवहार के बारे में सोचती रही लेकिन वो उसके लिए नफरत का भाव नहीं ला पाई । ये सोचते हुए कि वह सही थी वास्तव में वो अमर के प्रति अपने पुराने व्यहवार के कारण स्वयं को ना पसंद करने लगी थी । जितना ज्यादा वो स्वयं को ना पसंद करती उसके प्रति उसका प्यार उतना ज्यादा मजबूत हो जाता था । जब घर पहुंची तो उसने अमर के घर जाने पर उसकी माँ का दुख से गुस्से से भरा हुआ चेहरा देखा । कुछ समय के लिए उसकी माँ ने कुछ नहीं पूछा लेकिन वो ज्यादा समय तक उनकी नाराजगी नहीं झेल सकती थी तो में अमरीकी घर नहीं जाना चाहिए था । उसने कहा क्यों? हाँ हम अच्छे दोस्त हैं । हम नहीं है हम थे । उस ने गुस्से से कहा कि समाज में उनका स्थान बढ गया था । उनकी सात रिश्ता रखना उसके लिए अच्छा नहीं था । ये सुनकर रोहिणी आश्चर्यचकित रह गए । उसे एक पर के लिए भी ये विश्वास नहीं हुआ कि उसकी माँ ऐसा कह रही हैं । एक ऐसा भी समय था जबकि वह उसकी तथा उसके परिवार की प्रशंसा करते हुए नहीं थक दी थी । जब भी उसे इसका मौका मिलता था अमर के परिवार के प्रति अपनी माँ की राय ने उसी दुखी कर दिया था और वो अपने आंसू नीचे गिरने से नहीं रोक पाई । एक भी शब्द का उत्तर दिए बिना भारी है दिया और कदमों के साथ अपने कमरे में चली गई । समय बीतने लगा और दो और साल बीत गए । लेकिन अमर तथा जहाँ वह रह रहा था उसकी कोई खबर नाथी उस अवधि के दौरान बहुत सी चीजें बदल गई । सुचिता का विवाह हो गया और वो अपने पति के घर चले गए । हालांकि हालांकि रोहिनी को आमंत्रित नहीं किया गया था । वो उस दिन उस की शादी में हिस्सा लेने गए और सुजीता उसे देख कर बहुत भावुक हो गई और उसने उसके साथ अशिष्टता का व्यवहार करने के लिए माफी मांगी और उसकी मां जो की अमर के न होने पर चेहरे से बहुत उदास की ने भी उसके प्रति अपना प्यार दिखाया । सुजीता और रोहिणी दोनों एक दूसरे के लिए भावुक होकर हुए और एक बार उन्होंने फिर से अपनी दोस्ती को बहाल कर दिया क्योंकि स्कूल और कॉलेज के दिनों में उनकी बीच थी । उन्होंने एक दूसरे को नाम खोलने का वादा किया । उस दिन से रोहिणी ने थोडा तनावमुक्त रहना शुरू कर दिया लेकिन जब भी उसे अपने काम से फुर्सत मिलती है तो अपने अतीत में चली जाती और दुखी हो जाती । हर दिन वह ईश्वर से अमर को एक बार भेजने की प्रार्थना करती जिससे कि वो उसे पूरी तरह भावुक होकर देख सके और उस दिन घर से आई चुकी उसे एक जटिल के सुलझाना था इसलिए वह थकी हुई भी थी । लेकिन जब घर पहुंची उसने ड्रॉइंग रूम में कुछ अपरिचित लोगों को बैठे हुए देखा और उनकी देखने के अंदाज से उसके दिमाग में शक का बीच बोल दिया था । इसलिए उनसे कुछ कहे बिना ही वो अपने कमरे में चली गई । लेकिन शीघ्र ही उसकी माँ उसके कमरे में घुसी और उसकी अनुमति की आशा लिये हुए आई । तेलुगु दिल्ली से आए हैं । वो बहुत धनी परिवार से हैं और लडका भी डॉक्टर है । उसने उत्साह से और अपनी प्रसन्नता प्रकट करते हुए कहा, रोहिणी ने अपनी माँ की कहे बिना कोई रूचि दिखाए उसकी तरफ देखा और कहा तो मैं क्या कर सकती हूँ? वित्त में देखने आए हैं । वे मुझे देख चुके हैं । जब मैं आ रही थी उसने जवाब दिया । तब उसकी माँ ने कहा वे तुम्हारी शादी की बात करने आए हैं । माँ तो अच्छी तरह से जानती हूँ कि मेरी शादी में कोई रूचि नहीं है । उसने अपनी परेशानी दिखाते हुए कहा लेकिन रोहिणी हमारी इज्जत का सवाल है तो में कम से कम उन से बात करने के लिए तो आना चाहिए । उसे विनती करते हुए कहा । ये सुनकर वो एक मिनट के लिए चुप रही और तब कहाँ उसके उसकी माँ अपने चेहरे पर विजयी मुस्कान लिए हुए कमरे से चली गई । जब रोहिणी दुबारा से ड्राइंग रूम में आई उसके हाथ में कब और प्लेटों से भरी एक रही थी । उसने मुस्कुराते हुए एक सच्ची भारतीय लडकी की तरह अपने हाथ मोडते हुए उनका अभिवादन किया । मेहमान बहुत खुश हो गए और उन्होंने उसे उसी तरह प्रतिक्रिया दिखाते हुए अपनी प्रसन्नता प्रकट की । विशेष रूप से उस नवयुवक नहीं क्योंकि महंगी सूट में था तो बार बार उस की तरफ देख रहा था । मानव नजरों के द्वारा उसे मापना चाहता था जिसे रोहिणी समझ गई और सतर्क हो गई । उसने अंदाजा लगाया कि शायद वो मुख्य अतिथि था जो से देखने आया था । उसने उसमें ज्यादा रूचि नहीं दिखाई और अपने विचारों को दूसरों के साथ बांटते हुए स्वयं को व्यस्त रखने की कोशिश की । जो औरत उसके साथ आई थी वो नरम सुभाव वाली थी । उसकी बातें करने का तरीका आकर्षक था और जीवन के चालीस के दशक के अंतिम पडाव में होते हुए भी वह प्रभावशाली और बहुत लग रही थी । ये पूरा स्पष्ट था कि वो उस टीम की नेतृत्वकर्ता थी । रोहिणी ने ज्यादा बातें नहीं, उसी की वहा या ना में उत्तर दिया । अचानक उस महिला ने कहा प्रकाश तुमने रोहिणी से कुछ नहीं पूछा है । मुझे लगता है तो मैं पूछना चाहिए । ऐसा सुनकर वो मुस्कुराई और सिर हिलाया । तब कमरे में चुप्पी थी । हर कोई प्रकाश के सवाल का इंतजार कर रहा था । रोहिणी का दिल धडकने लगा । वो नहीं सोच पाई कि वह क्या पूछने जा रहा था । उसकी परेशानी उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी । उसने उसको उत्तर देने के लिए खुद को तैयार करने के उद्देश्य से अपनी साढे से अपने चेहरे को पूछा । मुझे कुछ नहीं पूछना है । मुझे उसके चेहरे को देख कर ही मेरा जवाब मिल गया है । ये भी उसे कुछ पूछना है तो वह ऐसा कर सकती है । उसने संतुष्ट होकर कहा, ये सुनकर रोहिणी नपुसंक बन गई । उसने कभी नहीं सोचा था की स्थिति इस तरह से बदल जाएगी । उसकी माँ ने उसे वहाँ से दूर चले जाने का इशारा किया । इसीलिए वह कप और प्लेट इकट्ठा करने के बाद उससे के भाव के साथ वहाँ से चली गई । एक घंटे के बाद तीस तक चले गए । उसके माता पिता यह सोचकर बहुत खुश थे कि उन्हें अपनी पुत्री के लिए एक अच्छा जीवन साथी मिल गया है । लेकिन दूसरी तरफ रोहिणी जलन से उबल रही थी । उसने स्वयं को दोषी ठहराया की उसने उनके सामने नहीं जाना चाहिए था । नहीं नहीं वो किसी से शादी नहीं करेगी । वो फुसफुसाई और अपना चेहरा तकिए पर रख लिया । कुछ समय बाद उसने महसूस किया कि कोई आया और उसके पलंग पर बैठ गया । तब उसने अपने सिर पर प्यार भरी छुअन महसूस की । तभी वह मुडी और देखा कि उसकी माँ वहाँ बैठी हुई थी । सब कुछ ठीक हो जाएगा । वो ही नहीं समय एक मजबूत मरहम है । उसने प्यार पसन्द यहाँ से कहा लेकिन माँ मैं किसी से शादी नहीं कर होंगी । उसने कहा तब तुम अपना समय कैसे व्यतीत कर होगी? उस ने सवाल किया, मैं काम करती हूँ, मैं किसी पर निर्भर नहीं हूँ । उसने विश्वास के साथ उत्तर दिया, जीवन केवल पैसे के सहारे नहीं बताया जा सकता । कुछ और भी जरूरतें होती हैं । उसने उत्तर दिया और आगे कहा कि उसे ये तब महसूस होगा जब उसकी भावनाओं की नींव समय के साथ उखड जाएंगे । मैं कुछ नहीं जानती । प्लीज मुझे अकेला छोड दो और मुझे खुद निर्णय लेने दो क्योंकि मेरी जिंदगी सिर्फ मेरी है । उसने उसकी शादी करने के फैसले के खिलाफ अपनी नफरत दिखाते हुए कहा था, तुम्हारी जिंदगी सिर्फ तुम्हारी है लेकिन जिसने तुम्हें ये जीवन दिया है । क्या मेरा तुम पर कोई अधिकार नहीं है? क्या मैं तुमसे प्यार नहीं करती? क्या मैं तुम्हारी दुश्मन हूँ? ये तुम्हारे पिता तो में दुखों की घाटी में धकेला चाहते हैं । हमने हमेशा अपनी तुलना में तुम्हारे जीवन और खुशी को महत्व दिया है । रोहिणी लेकिन अब भी अगर तुम हमारी आज्ञा का पालन नहीं करना चाहती हो और उस आदमी के लिए इंतजार करना चाहती हो जिसमे कभी तो मैं अपने प्यार के बारे में नहीं बताया और किसी को नहीं मालूम कि वो कहाँ है, वो क्या कर रहा है और वो कैसा है तो इंतजार कर सकती हूँ लेकिन याद रखो की समय लौट कर नहीं आता है । यदि वह यहाँ होता तो मैं तुम्हारी शादी उसे करवा देती क्योंकि हम तुम्हें प्यार करते हैं और केवल तुम्हारी खुशी के लिए हमने दो लम्बे साल उसके लौटने का इंतजार किया । लेकिन वो इतना कहकर उसके उत्तर की प्रतीक्षा किए बिना रोती हुई कमरे से बाहर आ गई । सुबह को रोहिणी देर से उठी और उसने महसूस किया कि घर में हर तरफ एक चुप्पी थी । उसके पिता कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे और वहाँ नाश्ता बनाने में व्यस्त थी । उसने उसमें कोई रूचि नहीं जब वो रसोई में ये जानने के लिए खुसी की वो क्या पका रही थी । स्थिति को देखते हुए वो चुप रही और वहाँ से जल्दी लौट गई । और अपने क्लीनिक जाने के लिए तैयार होना शुरू कर दिया । जब वह बातों से बाहर आई तो उसे उसके कमरे में अपना लंच बॉक्स दिखाई दिया और मेज पर उसका नाश्ता रखा था क्योंकि वह कमरे में नहीं थी इसलिए ही ढका हुआ था । उसे थोडी देर के लिए सोचा और बिना कोई गुस्सा या पछतावा दिखाए बिना चुपचाप नाश्ता कर लिया । जब क्लिनिक पहुंची तो देखा कि कुछ मरीज पहले ही आ चुके थे । तब उसने उनकी जांच पडताल आरंभ कि लेकिन जब तीसरा रोगी उसके सामने आया तो वह आश्चर्यचकित रह गई और उसे रिसीव करने के लिए उठे । आंटी आप हाँ, मेरे बच्चे मेरे पैर की उंगलियों में दर्द है । उसने उत्तर दिया और उस से बैठने के लिए कहा । वास्तव में वो उसे अपने क्लीनिक में देख कर बहुत ज्यादा खुश और रोमांचित हो गई थी । उस ने उनकी जांच की और उसके बाद उन्हें कुछ तबाह मुफ्त ही दे दी । शुरू में उसने संकोच किया लेकिन उसके ऐसा कहने पर आंटी यदि अमर आपका बेटा तो क्या मैं आपकी कुछ नहीं रखती है? वो उसी स्वीकार करने के लिए विवश थी । रोहिनी क्या मैं एक बात पूछ सकती हूँ? अमर की माने कहा था क्यों नहीं? तुम अमर के लिए कब तक इंतजार कर होगी तो तुम्हारा फर्स्ट तुम्हारे माता पिता के प्रति भी है । जिंदगी कभी नहीं रुकती । ये हमेशा आगे चलती रहती है । किसी पता है कि इन सालों के दौरान उसके साथ क्या घटित हुआ । मैं स्वयं को बहुत भाग्यशाली समझती यदि तुम मेरे घर एक बहु की तरह थी । लेकिन समय को ये मंजूर नहीं है । हम क्या कर सकते हैं हम लोग? मेरे बच्चे कठपुतली की तरह है जिसकी डोल भगवान के हाथों में है और हम उसकी इच्छा के विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते । भावनाएं किसी का भाग्य नहीं बदल सकती है । एक समझदार व्यक्ति भाग्य की द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलता है । मैं तुमसे प्यार करती हूँ लेकिन उसने भराई आवास में कहा और उसे गले लगाने के लिए अपना हाथ फैला दिया । तब रोहिणी ने मात्र प्यार से मिलने वाली शांति प्राप्त करने के लिए अपना सिर उनके सीने पर रख दिया । दोनों चुपचाप रोते रहे और अमरीकी माँ उसी सांत्वाना देने के लिए उसकी पीठ सहला रही थी और तब उसने उसे इस तरह से चूमा जैसे कि एक माँ जो होती है । उसके बाद वह रोहिणी को देखते हुए बिना कुछ कहे ही कमरे से बाहर आ गई क्योंकि उसके पास ऐसा करने का साहस नहीं था ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -06

अध्याय अतीत की घटनाएं जो एक एक करके अमर के दिमाग में आ रही थी, अचानक बंद हो गई क्योंकि कोई उसे कंधे से हिला रहा था । वो अतीत से जाऊँगा और देखा कि मिस्टर सिन्हा अपने चेहरे पर चिंता का भाव लिए उसके सामने खडे थे । अमर मैं ईमानदारी से तुम से बात करना चाहता हूँ । मेरे पीछे उसने कहा और उसका उत्तर सुने बिना ही एक कमरे की तरफ चलने लग गए । अमर नी उनकी बात मानी बिना कारण सोचे कि उन्हें उनसे क्यों बात करनी थी । अमर मिस्टर सिन्हा ने कहा, मेरी इज्जत अब तुम्हारे हाथ में है । एक पिता होने के नाते मैं जानता हूँ कि मेरी बेटी को क्या चीज आनंद देगी लेकिन मैं इस समय उसकी इच्छा पूरी करने में असमर्थ हो क्योंकि हम समाज में रहते हैं और समाज के अपनी नियम होते हैं । अमर इन सब बातों को सुनकर चकित था । एक्शन के लिए नहीं समझ सका कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा । उसने केवल कुछ पूछने की नजर से उन्हें देखा और ये देख कर परेशान हो गया की उनकी आंखें आंसुओं से भरी थी । मैं इस संबंध में आपके लिए क्या कर सकता हूँ । उसने कमजोर आवाज में कहा, केवल रोहिणी को उसके दूल्हे से शादी करने के लिए मना उनका संक्षिप्त उत्तर था । अमर ने तब उन की सलाह मानने के लिए अपना सिर हिलाया और कमरे से बाहर आ गया । जब रोहिनी ने अपनी आंखें खोली उसने अपनी सिरहाने अमर को बैठा हुआ पाया और इस से वो खुश हुई । उसके चेहरे पर एक बार में ही प्रसन्नता का भाव आ गया और उसने अमर का हाथ अपने हाथों में लेने के लिए अपना हाथ फैलाया । लेकिन उसने इसे जानबूझकर नजर अंदाज कर दिया और उसकी प्रसन्नता को बढाने के लिए मुस्कुराता रहा । क्या अब तुम ठीक हो? रोहिणी ने स्वयं को ठीक बताने के लिए अपने सिर हिलाया । ये देख कर उसकी माँ खुशी से खडी हुई और उसी चूम लिया और तब वह कमरे से बाहर चली गई । धीरे धीरे सारे व्यक्ति जो वहाँ पर जवान थे, दूर चले गए सिवाय अमर की जो कि शायद अपने दिल की बातें उसके सामने प्रकट करने के लिए ऐसी ही स्थिति की तलाश में था । रोहिणी मैं वास्तव में बहुत भाग्यशाली हूँ क्योंकि मैं तुम्हारी शादी के दिन पहुंच गया । क्या तुम्हें मालूम है मैं अपनी पत्नी को भी जाना चाहता था लेकिन परिस्थिति इसके पक्ष में नहीं थी । इसलिए मैं नहीं ला सका, नहीं तो तुम उस से मिल लेती । रोहिणी अपनी पलकों को हिलाये बगैर उसकी तरफ देखती रही । उसके चेहरे पर सदमा और उदासी छा गई और वह असफलता पूर्वक इसे छुपाने की कोशिश कर रही थी । दूसरी तरफ अमर उसकी आंखों में देखने का साहस नहीं कर बाहरा था क्योंकि वह अपने अंदर अपराध भावना को महसूस कर रहा था । उससे क्या हुआ? उसने पूछा, वास्तव में वो गर्भवती है । उससे जल्दी से कहा और मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन असफल हो गया । यदि मिसेज जिन्ना उस समय उनके पास नहीं आती तो वे और बातें करते । रोहिणी! तुम बिलकुल ठीक हूँ क्या? तुम नहीं हूँ? उसने पूछा । उसने उत्तर नहीं दिया । नहीं, उसने उसकी तरफ देखा । तब भी शिवसेना फिर से दूर चली गई और कुछ लडकियों तथा महिलाओं के साथ जल्द ही वापस आ गई । जब रोहित को दूर है की बगल में बैठाया गया । अमर ने स्वयं को एक हमले के पीछे छिपा लिया और समय समय पर वो उस की ओर से झांक रहा था । एक भी व्यक्ति उसकी जरा सी भी कुशल शेम नहीं पूछ रहा था क्योंकि बारात को सुबह बहुत जल्दी लौट था । विवाह पूरा होने के बाद सभी मेहमान व्यस्त हो गए । जब कार को दरवाजे पर लाया गया और ड्राइवर अपनी सीट पर बैठा दुल्हन के दरवाजे से निकलने और अपनी सीट पर बैठने का इंतजार कर रहा था, अमर वहाँ दिखाई दिया । उसने उससे कुछ कहने के लिए अपने आपको तैयार किया था । लेकिन तभी वहाँ पर चार नवयुवकों का एक समूह आया और उन्होंने वहाँ खडे लोगों को धक्का देना शुरू कर दिया । अमर से भी उसी तरह का व्यवहार किया गया । वो फिर से हमले के पीछे चला गया और वहाँ से रोहिणी को देखने लगा । दुल्हन की पोशाक में वो पहले से ज्यादा खूबसूरत लग रही थी । सिंधु लगे उसके माथे की चमक हर किसी की आपके लिए बहुत सुखद थी । जब वो अपनी माँ को पकडे रो रही थी । उसके दोस्तों ने उसे लेकर कार में बिठाया जिसे फूलों से तथा रंगीन कागजों से खूबसूरती से सजाया गया था । कार्ड धीरे से चलने लगी लेकिन अमर उसे जी भरकर नहीं देख पाया तो अभी भी खबरें की सहारे झुका हुआ था इस इंतजार में कि वो उसे देख सके और तब वो एक दूसरे को देखने की अपनी इच्छा पूरी कर लेगा जब तक की कार उसकी नजरों से ओझल ना हो गयी वो वहाँ से नहीं मिला । तब वो धीरे धीरे अपने घर के लिए निकल पडा । सुबह के समय बहुत जल्दी दरवाजे पर दस्तक सुनकर सुजीता की माँ एक बार में ही समझ गई कि कौन होगा इसलिए वो बिना कुछ पूछे जल्दी से इसे खोलने चली गई । उसने अमर को घर में आने दिया । वो थका हुआ सदमे में और इन सब से ऊपर बहुत कमजोर लग रहा था क्योंकि घर पहुंचने के बाद और रोहिणी की शादी के बारे में जानने के बाद उसने जरा सा भी आराम नहीं किया था और उसके घर चला गया क्योंकि भारत आने ही वाली थी और उससे पहले वहां पहुंचना जाता था लेकिन वो ऐसा नहीं कर सका । वो सीधा अपने कमरे में गया । उस समय तक उसकी माँ ने कमरा साफ कर दिया था । स्वयं को बिस्तर पर लिटा आने के बाद उसने दिमाग के तनाव से मुक्ति पाने के लिए अपनी आंखे बंद करिए । वास्तव में उस दुःख से छुटकारा पाना चाहता था जो उसके भावुक होने पर जमा हो गया था । उसे अच्छी तरह से पता था कि अतीत को याद करने का कोई फायदा नहीं था लेकिन वो इसे शीघ्र ही पूरी तरह से बुला देने में असमर्थ था हूँ । जम्मू जगह दोपहर हो चुकी थी और कुछ समय के लिए वह स्वयं को अपने बिस्तर पर पाकर आश्चर्यचकित था क्योंकि कुछ बडों के लिए वह भूल गया था कि वो दिल्ली में नहीं बल्कि अपने स्वयं के घर में था । वो धीरे धीरे बिस्तर से उतरा और उसी समय उसकी माँ ने कमरे में प्रवेश किया । तुम ठीक हो अमर क्या तो नहीं हो । उसने उत्साह से पूछा अमर नहीं आपने होटों को ज्यादा सभी अलग किए बगैर ऐसे मुस्कुराते हुए से हिलाया मानो उसके साथ कुछ भी घटित नहीं हुआ है । यदि पी उसकी माँ की अनुभवी आंखें उसकी आंखों में गहरे तक जाकर उसके दुःख को महसूस कर रही थी लेकिन उन्होंने इसे प्रकट नहीं किया । उन्होंने उसे नहाने की सलाह दी जिससे कि वह फ्रेश महसूस करें । उसने अपनी माँ को कोई जवाब नहीं दिया और आज्ञा मानते हुए बातों की तरफ चला गया । उसकी माँ ने केवल उसकी तरफ देखा और उन बदलावों को महसूस करने की कोशिश की जो उसमें आ गए थे । अमर तो दिल्ली में क्या कर रहे हो मानी उसके प्लेट में गर्म रोटी डालते हुए पूछा । ये सुनकर उसने बिना कुछ कहे उनकी तरफ देखा लेकिन उत्तर नहीं दिया । उसने स्वयं को अपना भोजन लेने में व्यस्त रखा । माननी भी सोचा कि उसे कुछ पूछना ही ज्यादा अच्छा होगा । मांग की आपको पता है रोहिणी को एक बहुत अच्छा पति मिला है । उसने कुछ समय बाद कहा अब ये उसकी माँ थी जो उसकी तरफ बिना कुछ कहे आश्चर्य से देख रही थी । मुझे लगता है तो मैं मुझ पर विश्वास नहीं है । वो अब अपने डॉक्टर पति के साथ बहुत सुखपूर्वक रहेगी । उसने दोबारा से कहा लेकिन उसे अपनी माँ से । उसके पहले सवाल का भी कोई जवाब नहीं मिला था । उस समय वो स्वयं पर नियंत्रण नहीं कर सकी । उसने अपने दिल की गहराई से दुखी होकर उत्तर दिया नहीं तो गलत फैमी हुई है । अमर अचानक उसके अपने मूड भोजन डालना बंद कर दिया । उसने अपने मुकाम तक पहुंचने वाले हाथ को रोक दिया क्योंकि उसकी माँ के जवाब से वो परेशान था और उसने इसकी सच्चाई जानने के लिए अपनी माँ की तरफ देखा । कैसे उसने विश्वास से पूछा वो कॉलेज से लौटने के बाद तुम्हारा इंतजार इंतजार करती रही । तब उसने अपना क्लीनिक खुला पर एक सपना बाला की एक दिन तो मुझसे दुल्हन बनाने आओगे लेकिन तुम्हारी गैर जिम्मेदाराना कदम ने मेरी परीक्षा ली और मुझे धक्का भी दिया । कुछ भी हो मैं भी हूँ और उसकी माँ की आंखों में उसके लिए क्या सपना था । मैं ऐसे महसूस कर सकती थी । मेरे ही दिया ने मुझे स्वार्थी नहीं होने दिया और मैंने उसे बाध्य किया । उसने अपनी भराई हुई आवाज में कहा और अपना वाक्य पूरा नहीं कर सके । उसने रोटी जलने की गंध महसूस की और जल्दी से उसे उठा लिया और रोटी सेकनी बंद कर दी । अमर भी भोजन अधूरा छोडकर अपने कमरे में चला गया था लेकिन उसकी माँ ने उसे कुछ नहीं कहा । ना ही वो उसके पीछे गई । समय बीतने लगा लेकिन अमर अपने दुःख पर विजय नहीं पा सका । उसने स्वयं को केवल अपने कमरे तक ही सीमित कर लिया । इससे उसके माता पिता चिंतित थे तथा वो सोचने में असमर्थ थे कि उसको सामान्य करने के लिए क्या किया जाए । उसका ज्यादातर समय उसके कमरे में किताबे पढते हुए, गंभीर संगीत सुनते हुए ये सोते हुए बीतता था । ऐसा लगता था कि शायद उसे बाहर जाने में डर लगता था । क्या उसे किसी से भी बोलना ना पसंद था । उस दिन उसकी माँ उसकी कमरे में आई और कैसे प्लेयर का स्विच ऑफ कर दिया । अमर दीवार की तरफ चेहरा किए सो रहा था इसलिए वो नहीं देख पाया कि उसकी माँ ने क्या किया था । लेकिन जैसे ही गाना बंद हुआ तो थोडा और अपनी माँ को अपने सामने खडा हुआ पाया । उसके चेहरे के भाव से ये स्पष्ट था कि वह दुखी थी और उसके देखने के तरीके ने उसे विश्वास दिया दिया था कि वह खुश नहीं थी । इसलिए उसने अपनी माँ के गुस्से को दूर करने के लिए मुस्कुराने की कोशिश की लेकिन उसी मंजूर नहीं था । अमर प्रयाप्त हैं, हम भी घर में है लेकिन तो मैं हमारी और हमारी भावनाओं की कोई फिक्र नहीं है तो और कितने दिन इस तरह से व्यतीत करोगे । उस ने अपनी नाराजगी दिखाते हुए कहा अमर ने एक बार फिर उन्हें गया की नजर से देखा और उत्तर दिया मैंने क्या किया? हाँ तो हमें अपने व्यहवार से दुखी कर रहे हो कैसे? उसने पूछा तुम अपना समय न तो हमारे साथ और न ही अपने दोस्तों के साथ व्यतीत करते हो क्यूँ? तो इस तरह कितने दिन और बिताओ के उसने कुछ जवाब नहीं दिया लेकिन सीलिंग की तरफ देखता रहा । उसकी आंखों की शून्यता उसकी माँ के है । इंडिया में बहुत गहरे तक छुप गई और वो अपने आंसू नहीं रोक पाई । वो उसके ऊपर झुकी और उसका चेहरा अपनी हथेलियों के बीच में रख लिया जिससे कि वो उसे जी भरकर देख सकें । उसकी आंखों से अब भी आंसू बह रहे थे । अपनी माँ का चेहरा देखकर वो भी स्वयं को नियंत्रित नहीं कर सका । उसकी आंखे भी जल्द ही अश्रुपूरित हो गई । लेकिन उसके होट अभी भी एक भी शब्द बोलने के लायक नहीं थे । नहीं मेरे बेटे नहीं स्वयं पर नियंत्रण रखो, सबको जल्दी ही ठीक हो जाएगा । उस ने अपना प्यार उसके ऊपर उडेलते हुए कहा माँ वो केवल इतना कह सका इतना सब कुछ एक माँ के भावुक होने के लिए काफी था । उसने उसका सिर अपनी गोद में खींच लिया । जैसे कि वो उसके बचपन में क्या करती थी और उसे शांति से सोने देने की इच्छा से उसके सिर को थपथपाना शुरू कर दिया । इससे उसे आराम मिला और उसे उसके अविस्मरणीय तनाव से थोडी आजादी महसूस हुई । उस दिन उसने स्वयं को सामान्य करने का निश्चय किया । अगले दिन वह सुबह जल्दी उठ गया और एक मॉर्निंग वॉक के लिए गया । सुबह की ठंडी हवा ने उसे और ज्यादा ऊर्जावान तथा प्रसन्न बना दिया । जब वापस आया उसकी मानी नाश्ता तैयार कर लिया था । इसलिए बिना एक मिनट गवायें उस को फ्रेश करने के लिए बातों में घुस गया । अपना नाश्ता लेने के बाद उसने अपने कमरे में प्रवेश किया और जल्दी साफ कपडों में वापस आया । शायद वो कहीं जा रहा था । उसकी माँ ने उसे देखकर सोचा पूछना चाहती थी लेकिन उसके पूछने से पहले ही उसने खुद ही बताया कि वह अपने दोस्त रवि के पास जा रहा था । ये सुनकर उसकी माँ ने खुशी खुशी पूछे जाने की अनुमति दे दी । जभी उसके सबसे अच्छे मित्रों में से एक था । वो कक्षा नौ से उसका सहपाठी था और उसने ग्रेजुएशन के बाद ही अपनी पढाई समाप्त कर दी थी क्योंकि उसके पिता कैंसर से पीडित होने के कारण परिवार का भारत होने में असमर्थ थे इसलिए उसे बिजनेस की देखभाल करनी थी । उसकी एक रेडीमेंट की दुकान थी और ये परिवार के लिए आय का एकमात्र सूत्र था । रवि क्लास के अंदर और बाहर अमर की बहुत सहायता क्या करता था । वो हमेशा उसे सुझाव दिया करता था जैसे किए परिपक्व व्यक्ति को देने चाहिए । ऐसा इसलिए था क्योंकि वो इसके लिए उम्र तक पहुंचने से पहले ही परिपक्व हो गया था । एक बार रोहिणी और अमर में एक झगडा हो गया था क्योंकि रोहिणी ने अमरीकी भौतिकी की नोन उसकी मित्र सोनम को दे दी थी । जो जब भी उसे मौका मिलता उसे अपमानित करने से नहीं छोडती थी । उस समय वे आईएसी में थे और उसे क्लास का सबसे बुद्धिमान लडका समझा जाता था । ये मुख्य कारण था कि उससे ज्यादा तर सही पार्टी उसे पसंद करते थे । सोनम भी उसे पसंद कर दी थी लेकिन वो उस पर कभी ध्यान नहीं देता था जिससे वो से चलती थी और उसने उस तरीके से उससे बदला लेना शुरू कर दिया । लेकिन रोहिणी इन सब बातों से पूर्णत्या अनजान थी । उसे ये भी महसूस नहीं हुआ कि अमर उसे पसंद करने लगा है । रोहिणी के और समय आने के लिए उसने उसे अपनी नोटबुक दी थी लेकिन उसी ये पसंद नहीं आया । जब उसने वह सोनम को दे दी तो तुमने मेरी नोटबुक सोनम को क्यों दी? उसने पूछा वास्तव में वो एक बार ऐसे पूरी पढना चाहती थी । उसे जवाब दिया लेकिन तो मैं इसके लिए मुझे पूछना चाहिए था क्यों? क्या मैंने कोई अपराध किया तो गुस्से से पूरी हाँ तुमने किया है उसने अभी तक उसे नहीं लौट आया है । क्या मुझे पढाई नहीं कहीं नहीं है? उसने गुस्से से पूछा सौरी मुझे इसके लिए बहुत अफसोस है । जिस शहर वो अपने गांव से लौटेगी, मैं नोटबुक लौटा दूंगी । उसने अपने चेहरे पर गुस्से का भावना आते हुए उत्तर दिया जिससे अमर को और ज्यादा गुस्सा आया और उसने अपनी आवाज थोडी तेज करते हुए उत्तर दिया तो सॉरी कहकर बच गई । उसके बाद रोहिणी ने उसे कुछ जवाब नहीं दिया और अपने चेहरे पर नाराजगी का भाग दिए हुए वहाँ से चली गई । उसके कोमल गाल और ज्यादा लाल हो गए थे । उस क्या थी? उसके गुस्से को प्रकट कर रही थी । तुम गुस्सा हो गए । रवि ने पूछा क्योंकि वहाँ खडा था और उनके झगडे का गवाह था । हमने जवाब नहीं दिया और कॉलेज की कैंटीन की तरफ चला गया । बिना किसी शक के रवि उसके पीछे गया और कैंटीन पहुंचकर उसने दो बॉटल सिर्फ राइस लाने का ऑर्डर दिया । अमरीकी चेहरे पर अभी भी गुस्सा था लेकिन रवि उसे देख कर मुस्कुरा रहा था । वेटर उनका ऑर्डर लाया । उसने एक बोतल अमर को सौंप थी पर चुपचाप दूसरी को पीने लगा । कुछ समय बाद उसने पूछा अमर तुम रोहिणी को पसंद करते हो? नहीं बिलकुल नहीं । तब तुमने उसे अपने नोटबुक क्यों दी? वो मेरी सहर पार्टी है । उसने गम्भीरता से जवाब दिया । उसका जवाब सुनकर रवि एक मुक्त हसी हंसा और कहा सोनम भी तुम्हारी सही पार्टी है लेकिन मैं उसे आप पसंद करता हूँ । तब तक तुम वास्तव में रोहिणी को पसंद करते हूँ । प्लीज रवि भगवान के लिए से बंद करूँ हो किए मैं से बंद करता हूँ । लेकिन प्रिया अमर तो मैं पता होना चाहिए कि उसने तुम्हारी नोटबुक ये सोच कर दी कि तुम इसे गंभीरता से नहीं होंगे क्योंकि तुम उसे पसंद करते हैं और वो तो में अमर ने तब उसकी तरफ संदीप दृष्टि से देखा लेकिन कुछ नहीं पूछा । उस रात अमित ठीक से नहीं हो सका । ज्यादा समय वो अपने बिस्तर में करवट लेता रहा । जितना ज्यादा वो अपने झगडे के दौरान अंतिम पलों में रोहिणी कि याद तथा उसके चेहरे का भाव बुलाना चाहता था । उतना ज्यादा ही बेचैन हो जाता था और वह अधीरता से सुबह होने का इंतजार कर रहा था । उस समय अमर पहले अपने मित्र रवि के यहाँ गया और अपनी बेचे ही भरी रात का जिक्र किया । लेकिन रवि ने कोई प्रतिक्रिया नहीं । उसने उसे शांतिपूर्वक सुना, उसे नाश्ता करने के लिए दिया और तब दोनों कॉलेज के लिए निकल पडे । आश्चर्य से उसे रास्ते में भी कोई बात नहीं । जब वो कॉलेज पहुंचे रवि अमर को दूसरी सह पार्टियों से बात करता हुआ छोडकर सीधे लाइब्रेरी चला गया । प्रथम दृष्टि में उसे रोहिणी को देखा क्योंकि अकेले बैठी थी तथा एक मोटी किताब के पन्ने उलट पलट रही थी । उसके पास गया और गुड मॉर्निंग किए बगैर ही उसके सामने बैठ गया । रोहिणी ने उसकी तरफ देखा और जो किताब उसके सामने थी उसके पेज पढने शुरू कर दिए । शमा करें वो खुश हो जाए । रोहिणी ने निरस्त से उसकी तरफ देखा और पूछा, क्या मैं आप के मित्र की ओर से क्षमा चाहता हूँ? क्यों किया आज उसके मुंबई जवान नहीं है? नहीं, वास्तव में वो इसका साहस करने के लिए भी शर्मिंदा है । भाड में जाए । मैं उसे ना पसंद करती हूँ लेकिन वो भी पसंद करता है । रवि ने विश्वास के साथ उत्तर दिया । तब रोहिणी ने कुछ नहीं कहा और झूठे गुस्से के भाव के साथ उसकी तरफ उत्सुकता से देखा । इतना सब कुछ रवि को मौका मिलने के लिए काफी था । इसलिए उसने आगे कहा कि सोनम हमेशा उसे या तो कॉलेज में या फिर कॉलोनी में बेजिंग करती रहती है क्योंकि वह उसे कभी कोई भाव नहीं देता है । लेकिन इसमें मेरा क्या कसूर है? उसने पूछा कुछ नहीं और उसने इसी स्वीकार कर लिया । पाकिस्तान में पूरी रात सो नहीं सका । मेरे ख्याल से तुम कल की घटना के बारे में भूल जाना चाहिए । रवि नी नम्रता से तर्क क्या अब बोलने की बारी रोहिणी कि थी क्योंकि ऐसा कहकर रवि जवाब के लिए उसकी तरफ देखने लगा था और रोहिणी स्वयं को उसके लिए तैयार कर रही थी । लेकिन इसी बीच घंटी बच गई और वो ये कहते हुए उप खडी हुई, अब हमें क्लास में जाना चाहिए । अमर इन सब चीजों को याद करके मुस्कुराता रहा । फिर रवि की रेडीमेंट की दुकान पर पहुंचा । वो उसे देख कर आश्चर्यचकित हो गया । पहले तो उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं है, लेकिन अमर की मुस्कुराहट ने उसके संदेह को सच साबित कर दिया । तुम कब वापिस आई? उसने उत्साह के साथ पूछा एक हफ्ते पहले तो बहुत देरी से आए हुआ मत ना ही तो में अपना पता ही दिया । हम अब तुम्हारे इंतजार में चिंतित थे लेकिन तुमने कभी हमारी परवाह नहीं की । क्यों अमर ने दुःख के साथ उसकी तरफ देखा । दुख का सागर उसकी आंखों में था । रवि ने इसे समझा लेकिन इस बारे में कुछ भी नहीं कहा तो वहाँ क्या कर रहे थे? अमर रवि ने अपनी बातचीत का विषय बदलने के लिए पूछा । कुछ नहीं । मैं केवल बेहतर संभावनाओं के लिए संघर्ष कर रहा था ताकि मैं तो मैं वो सब लौटा सकूँ । क्यों? तो भारी सफलता के बिना हम तुम्हें पहचानने वाले नहीं थे । उसने तुरंत पूछा तुम नहीं लेकिन तो गलत फैमी हुई है । अमर मुझे पता है कि तुम्हें किस के लिए कहा लेकिन वह दिल की गहराई से तुम्हारी प्रशंसा करती थी । मेडिकल कॉलेज से आने के बाद उसे तुम्हारा इस आशा से इंतजार किया कि एक दिन तो वापस आओगे । तब वो अपनी सारी इच्छाएं पूरी कर लेगी जो बहुत समय से उसके दिल में मौजूद थी । लेकिन तुम नहीं आए और उसकी चाय उसके विवाह के बाद शील हो गई । रवि नहीं दुखी होकर कहा यदि वो मुझे वास्तव में प्यार करती तो दुल्हन बनने को क्यों राजी हुई? अमन ने दुख पूर्वक मुस्कुराते हुए पूछा वो कभी नहीं बनना चाहती थी लेकिन तुम्हारी लापरवाही, माता पिता के दबाव तथा समाज के सुझावों ने उसे ऐसा करने के लिए बात किया । मुझे अभी भी याद है जब वह तुम्हारे घर से लौटी थी । उसकी आंखों में आंसू थे क्योंकि उसने स्वयं को अपने भाग्य के सहारे छोड दिया था क्योंकि तुम्हारी माने भी उसे वही सलाह दी थी क्योंकि उसकी अपनी माँ से करवाना चाहती थी । उसने अपनी सारी आशा छोड दी थी जो उसने एक लंबे समय से पाली थी । मैं वास्तव में उसकी हालत को देखकर स्थल था लेकिन मैं कुछ सुझाव नहीं दे सका । मैं बुद्ध की भर्ती मूव था और मुझसे माफी मांगते हुए लौटी क्योंकि यहाँ तक कि मैं भी उस की इच्छा जीवित रखने के लिए उसका साथ नहीं दे सका ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -07

अध्याय सात सुबह पांच बजे थे और सुबह टहलने वाले उत्साहित होकर जितना तेज चल सकते थे चल रहे थे । सडक के एक तरफ जंगली बेर और पौधे लगे हुए थे और माइलस्टोन शेयर करने वालों की ये जानने में सहायता कर रहे थे कि वे कितना दूर चल चुके हैं । सडक के सीधी तरफ एक तालाब था क्योंकि आम तौर पर लोगों द्वारा प्रयोग में नहीं लाया जाता था इसलिए ज्यादातर लोगों को नहीं पता था कि कितना गहरा था । लेकिन यह आम धारणा थी कि तालाक प्रीता बाधित था क्योंकि कुछ लोग जिन्होंने इसके अस्तित्व को चुनौती देते हुए इसमें नहाने की कोशिश की तो या तो इस में डूब कर मर गए या फिर अपनी मृत्यु से बाल बाल बचे । नतीजतन ये उजडा हुआ लगता था । इसके चारों और घने और रेंगने वाले पौधे निर्वाह रूप से बढ रहे थे । अचानक अमर में आगे बढना बंद कर दिया । हालांकि उसके समूह के दूसरे लोग उसे पीछे छोडते हुए आगे बढ गए । वो तालाब के किनारे पर स्थित पत्थर पर बैठ गया । सुबह की हवा बहकर उन लोगों को फ्रेश कर रही थी जो कि खुले स्थान पर थे । लेकिन अमर को ये हवा अतीत में ले जा रही थी और उस घटना की याद दिला रही थी जो उसके साथ एक बार वहाँ घटित हुई थी । जब कोई एक स्कूल का छात्र था वो निरोध साहपूर्वक उसपर मुस्कुराया और उन दृश्यों को अपने दिमाग में एक एक करके आने देने के लिए अपनी आँखें बंद कर ली । एक शाम को जब स्कूल से लौट रहा था तो कुछ छात्रों के साथ दौडते हुए उसका संतुलन बिगड गया और वो सडक के किनारे खीचड से भरे हुए गड्ढे में गिर गया । उस की चिंता किए बगैर दूसरी लडकी उस पर हसते हुए आगे निकल गए लेकिन रोहिणी उसे उस स्थिति में देखकर रुक गई । ये देख कर के उसके जूते और कपडे की जड से भरे हुए थे । उसने उसे खीचड को पास के तलाब में धोनी की सलाह दी और उसके साथ तालाब तक गई । जब वो अपने जूते धो रहा था उसे हाथ के पास एक मछली दिखाई दी और वो इसे पकडने की अपनी लालसा को नियंत्रित नहीं कर सका । इसलिए उसने इसे पकडने की कोशिश की लेकिन उसके हाथ के उस तक पहुंचने से पहले ही मछली धीरे से गहरे पानी में चली गई और तब उसने उसके पकडने की छतरी हो गई । इसलिए वो तालाब में कूद पडा लेकिन उसका प्रयास व्यर्थ गया क्योंकि मछली उसकी पहुंचे दूर चली गई थी । वहाँ पानी बहुत गहरा था इसलिए उसके पैर तली तक नहीं पहुंच पाए और इसका परिणाम बहुत खतरनाक साबित हुआ क्योंकि वो इसमें डूबने लगा था । जितना ज्यादा वह किनारे तक आने की कोशिश करता, उत्तर गहरा वो टूटता जाता । दूसरी तरफ रोहिनी इन सब चीजों को देखकर सन्न थी । उसे स्वयं को उसके लिए कुछ भी करने में असमर्थ पाया । इसलिए वो सहायता के लिए जोर जोर से रोने लगी और कुछ मजदूरों ने उसका रोना सुना क्योंकि अपने काम से लौट रहे थे बे उसकी तरफ दौडे और बिना एक्शन गवायें उनमें से एक उसे बचाने के लिए तालाब में कूद गया । जब अमर सामान्य हुआ तो एक घंटा बीत चुका था । उसने देखा कि वह कुछ लोगों से घिरा हुआ था और रोहिणी ठीक उसके पास बैठी हुई थी । वो डर और दुख से सुबह रही थी । उसका झोला उसके पास था । उसने कुछ समय के लिए कुछ नहीं कहा और तब वो उठा जिसे देखकर हर किसी के चेहरे पर खुशी का भाव आ गया । अचानक रोहिणी मुस्कुराई लेकिन उसका पूरा चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था । वहाँ उपस्थित लोगों ने उसकी मूर्खता के लिए उस से कुछ नहीं कहा । उन्होंने केवल उसका पता पूछा, एक रिक्शा किराए पर ली और उसे और रोहिणी को इसमें बैठा दिया । पूरे रास्ते रोहिणी बीच बीच में सुबह होती रही लेकिन अमर ने उस से कुछ नहीं कहा । उसने उसे शांत करने की कोशिश की लेकिन वो स्वयं भी उस दर से पूर्णत्या छुटकारा नहीं पा सका जो उसे उस समय लग रहा था जबकि वह तालाब के किनारे तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहा था । रोहिणी का घर अमर से पहले पडता था । इसीलिए जब वो रिक्शा से उतर रही थी उसने उसकी जल्दबाजी की शिकायत करते हुए उसकी तरफ देखा लेकिन उसने उससे कुछ नहीं कहा । ये अमर था । किसने कहा प्लीस अपने माता पिता को इस बारे में मत बताना क्योंकि उसने सिर हिलाया, तुम कल स्कूल आओगी ना । मैंने पूछा हाँ मैं होंगी । उसने उत्तर दिया पर चली गई । जो अमर अपने घर पहुंचा उसकी माँ जो कि चिंतित होकर उसका इंतजार कर रही थी क्योंकि वह बहुत लेट हो गया था । उसे गीले कपडों में तथा रिक्शा में देख कर आश्चर्यचकित हो गई तो एक बार में उसके पास आई और उससे इसका कारण पूछा लेकिन वो उस अपराधी की तरह अपना से नीचे झुकाए हुए खडा रहा जिसमें चुप रहकर अपना अपराध स्वीकार कर लिया हो । रिक्शा चालक ने अमर के साथ हुई घटना का वर्णन किया और इसे सुनकर उसकी माँ के है । इंडिया में गहरा आघात लगा इसलिए उसने उसे प्यार से गले लगा लिया और रिक्शा चालक को किराए देने के बाद वो उस घबराहट के साथ घर के अंदर ले आई । वो दो दिनों के बाद स्कूल गया और देखा कि उसके बहुत ही सह पार्टियों और दूसरे छात्रों को उसके साथ कोई अनहोनी के बारे में पता चल गया था । उसी स्कूल में देखकर रोहिणी अचानक से बदल गई । ऐसा लगा कि उसे वह मूल्यवान चीज मिल गई है जो उसे एक बार खो गई थी । प्रार्थना के तुरंत बाद उसके पास आई और शिकायत की तुम दो दिनों से क्यों नहीं आ रहे हो? माननीय अनुमति नहीं । उसे जवाब दिया तुम कैसा महसूस कर रहे हो? बेहतर उसे जवाब दिया और वहाँ से जाना चाहता था लेकिन रोहिणी ने उसका हाथ पकड लिया और सहानुभूति भरी ने कहाँ से कहा, भगवान के लिए अपना ख्याल रखो, अमर उत्तर नहीं दे सका । इतना ही उसके अनुरोध में छिपे अर्थ को ही समझ पाया । उसके कुछ मित्रों ने उसके साथ छेडछाड की लेकिन उसने उन्हें कोई भाव नहीं दिया । अचानक उसका दीप का स्वप्न सरीखा सुहाना संसार गायब हो गया क्योंकि उसे ऐसा लगा की किसी ने अपनी हथेली उसके कंधों पर रखती हूँ और ये जानने के लिए कि वह कौन था, उसने अपना सिर्फ घुमाया और देखा कि रवि था जो कि उसे वहाँ बैठे देखकर मुस्कुरा रहा था तो यहाँ से कर रहे हो । उसने पूछा और फिर लगभग उससे अपने साथ चलने के लिए खींच लिया । जब तालाब के पास से गुजर रहे थे उसने कहा, अमर तो नहीं है । एक बार तुम इसमें डूबने वाले थे लेकिन कुछ लोगों ने तुम्हें बचाया और ये रोहिणी की मदद के लिए चिल्लाने के कारण हुआ । मैं कैसे भूल सकता हूँ । उसने जवाब दिया, लेकिन अब तो मैं भूल जाना चाहिए । उसने कहा, और अब मैंने उसे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो उसके साथ चल रहा था लेकिन उसके चेहरे के भाव से ही साफ दिख रहा था कि उसका दिमाग कहीं और चल रहा था । रवि तुमने कभी जिंदगी के बारे में सोचा है? अमर ने सवाल किया, नहीं मेरे प्यार है । मैंने इसे किसी भी रूप में स्वीकार किया । उसने उत्तर दिया क्यों? क्योंकि मनुष्य ईश्वर की रचना है और इसलिए वह मनीषियों को उसकी इच्छा के विरुद्ध कुछ भी करने की अनुमति नहीं दे सकता है । रवि का उत्तर था तो निश्चित रूप से सही हो लेकिन क्यों खुद की सृष्टि को नाखुश बनाता है? रहस्य है हैना अमर तुम जानते हो, मैं स्कूल में पढाई में अच्छा नहीं था, ना ही मैं तुम्हारी तरह विश्वविद्यालय तक पहुंच सका । इसलिए मुझे तुम्हारा दार्शनिक चिंतन समझ नहीं आता । लेकिन मैं तो मैं एक सलाह देना चाहता हूँ क्या? अमर ने ज्यादा महत्व दिए बगैर पूछा तो मैं रोहिणी को भूल जाना चाहिए । उसने कहा और चलना बंद कर दिया । उसने उसे सडक से अपनी तरफ खींचा और पास के टूटे हुए ईटों के खंबे पर अपने पास उसे बैठाया । इस पर बैठकर अमन ने पूछा क्या तुम्हें लगता है मुझे वो याद है? हाँ तो में याद है और तुम उसे जब तक नहीं बोल सकते जब तक तू शादी नहीं कर लेते । उसने कहा लेकिन कोई लेकिन नहीं । अमर तो किसी की पत्नी है । उसे एक सामान्य जीवन जीने तो और ऐसा ही तुम्हें भी करना चाहिए । मैं क्या करूँ? उसने पूछा यदि तुम उसे इसी तरह याद करते रहे तो वो तो मैं कैसे भूल पाएगी और यदि तुम दोनों एक बार फिर मिल लेते हो, तुम दोनों के बीच की सभी सीमाएं खत्म हो जाएंगे । तब तुम दोनों वो करोगे क्योंकि अपेक्षा से परे हैं । उसने कहा, और आगे चलने के लिए उठ खडा हुआ । जब अमर अपने घर वापस आया तो उसने अपनी बहन को देखा जो उससे मिलने अपने पति के साथ आई थी जो कि माँ के साथ बैठा था और उन दोनों ने प्रसन्नता से उसे देखा । सुजीता बिना किसी उत्साह से खडी हुई, उसके पैरों को छुआ और अश्रुपूरित आंखों के साथ अपना सिर झुकाए वही खडी रही । अमर ने उसका सिर अपने सीने से लगा लिया और उसका सर थपथपाती हुए । सारा प्यार उस पर उडेल दिया तो तुम कब आई? उसने पूछा केवल कुछ घंटे पहले उसने उत्तर दिया और तब दोनों माँ के पास बैठ गए तो सब्जी खेल रही थी । उन्होंने एक दूसरे से भिन्न भिन्न प्रकार के सवाल तथा उन का जवाब देते हुए प्रसन्नतापूर्वक बातें की । कभी कबार माँ भी उनकी बातचीत में दखल दे रही थी और उनका हस्तक्षेप सिटी को और ज्यादा सुखद बना रहा था । अचानक उनकी सुखद बातचीत के दौरान सुजीता ने पूछा तो जल्दी क्यों नहीं आ सके? वास्तव में में बहुत व्यस्त था और दूसरी तरफ मैंने शहर में अपनी सारी रूचि खो दिए है । लेकिन मुझे तुम सब के बारे में जानने के लिए आना पडा लेकिन कोई तुम्हारे ली और ज्यादा चिंतन होकर इनके साथ कर रहा था और तुम्हारे न आने और ना ही कोई संदेश भेजे जाने से उसके जीवन को पूर्णत्या बदल दिया तो जीता पूर्वक बोली ये सुनकर वो ऐसे चुप हो गया जैसे किसी ने उसके बोलने की शक्ति छीन ली हो । वो उसे कुछ उत्तर दिए बिना ही अपने कमरे में जाने के लिए खडा हो गया । मान्य स्थिति को समझा इसलिए उसने कुछ नहीं कहा और उसे वहां से जाने दिया । वो जान गई थी कि उसे उसकी लापरवाही से गहरा धक्का पहुंचा था लेकिन उसी समय वह समझ गई थी कि वह क्यों नहीं आया था । ऐसा इसलिए था क्योंकि रोहिणी ने एक बार स्वयं ही उन्हें बताया था कि उसके अपने व्यवहार से अमर को दुखी कर दिया था इसलिए वह से नाखुश था और लौटना नहीं चाहता था । लेकिन दूसरी तरफ उसने निश्चय कर लिया था कि वो उसके लिए जितना इंतजार कर सकती है करेगी और उसने किया भी । इसलिए उसने सुचिता को उसे रोकने के लिए मना कर दिया । उस दिन अमर पूरे दिन बाहर नहीं गया यह बहाना बनाते हुए कि उसके सिर में दर्द था । लेकिन सच यह था कि रोहिणी की याद उसे उस दिन पहले से अधिक सता रही थी । ऐसा शायद सुचिता के कारण था जिसकी उपस् थिति ने उसे उस सारे अतीत की याद दिला दी थी जो उसने रोहिणी के साथ अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों के दौरान बिताया था । यदि पी उसे अच्छी तरह से पता था कि अतीत उसके लिए कोई महत्व नहीं रखता था, फिर भी वो एक एक करके उन दोनों के बीच की सारी यादव को अपने दिमाग में लाया ताकि उसे कुछ आनंद तथा शांति मिल सके । लेकिन इसके बजाय उसे तनाव और आंसू मिले । उसका गाल आसो से भीड गया । वो अपने कमरे में उस बच्चे की तरह हो रहा था क्योंकि चंद को पानी की आपकी इच्छा पूरी नहीं कर सका । अपने कमरे में आया और बुरी तरह से हो गया हैं ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -08

अध्याय आठ अगली सुबह होते ही उठा और टहलने के लिए नहीं गया । एक बार मान्य से उठाने की सोची लेकिन वो ऐसा नहीं कर सकी ये सोचकर कि शायद वह देरी से सोया हो और वो सही भी थी । उस रात को रोहिणी कि याद अपने मन से मिटाने में असमर्थ था । जितना ज्यादा वो कोशिश करता हूँ उतना ज्यादा वो उसमें डूबता जाता । जब जब वो अपनी आँखे खोल और बंद करता था, कभी कभी वो अपने बेडरूम में टहलता लेकिन सामान्य नहीं हो पा रहा था । उसे खुद भी नहीं बताया था कि कितने समय सोने की कोशिश में उसने अपने बिस्तर में करवट बदली लेकिन हर समय रोहिणी का चेहरा आकर उसे परेशान करता रहा । जब कभी उसे उसके पति के साथ जाते समय उसके रोने की याद आती, खुद दुख से भर उठता । वो नहीं समझ पा रहा था की क्या करें । कोई निर्णय करने में भी खुद को असमर्थ पा रहा था कि उसका कोई निर्णय सही होगा या नहीं । इन सब चीजों को याद करते हुए जब उस हो गया तो उसे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा था । जब उठा सुबह के आठ बज रहे थे वो एक्शन के लिए इस पर आश्चर्यचकित था लेकिन जल्दी ही उसने इसका कारण पहचान लिया और बिस्तर छोडने से पहले गंभीरता से मुस्कुराया । कुछ दिनों के लिए तुमने मेरे सर जाने के बारे में क्या सोचा? सुजीता ने पूछा जब वो नाश्ता कर रहा था ये सुनकर उसमें ऐसे उसकी तरफ देखा जैसे कि उसने कोई अच्छी बात कह दी हूँ जिसकी उससे पहले कल्पना नहीं की थी । लेकिन जल्दी उसने अपना भाव बदल लिया क्योंकि उसके जीजा जी भी उसके पास बैठे हुए थे और वो भी उसके चेहरे के भाव पडने की कोशिश कर रहे थे । इसलिए वो जल्दी सामान्य अवस्था में आया और जल्दबाजी में उत्तर दिया नहीं सौरी वास्तव में मुझे जल्दी दिल्ली लौटा है नहीं तो अब नहीं जाओगे । माने सुजाता को दिए उसके उत्तर को सुनने के तुरंत बाद कहा लेकिन क्यों तुम्हारे पिता तुम्हारी शादी निश्चित करने जा रहे हैं और वह चाहते हैं कि तुम हमारे साथ त्यौहार हो, उसकी माने आदेश दिया लेकिन माँ जो कुछ भी तुम बताना चाहते हो अपने पिता को बताओ ये उनका निर्णय मेरा नहीं । उसकी माँ का उसे दृढ जवाब था । ये सुनकर वो कुछ नहीं ऐसा का और खुद को नाश्ता करने में व्यस्त रखा । एक सप्ताह भाग सुजीता अपने पति के साथ वापस जा रही थी और उनके साथ अमर भी था लेकिन वो खुश नहीं था । वो केवल अपनी माँ को खुश करने के लिए उनके साथ जाने को तैयार हुआ था । नहीं तो इसके लिए कभी कहीं आज ही होता । उसने बिना किसी उत्तर के सुचिता को देखा लेकिन उसकी चुप्पी ने उसके प्रस्ताव को उसकी सहमती की पृष्टि दे दी । जब अति पीडादायक हो जाता है और किसी को इसे सहन करने में दर्द होता है तो इसे किसी भी प्रकार की सहायता द्वारा भूल जाना चाहता है । विदा के समय सुजीता अपनी माँ से जितना ही दुखी थी । माँ और बेटी दोनों की आंखों में आंसू थे और जब से जीता ने अपनी माँ के पैर छुए उसने केवल उसे ये सुझाव दिया कि किसी भी प्रकार अमर को रोहिनी को बुलाने के लिए राजी करें और सुजीता ने बिना एक शब्द कहे स्वीकार कर लिया । अमर को सुजीता तथा उसके पति के साथ रहते हुए दो दिन बीत गए थे । उसका ज्यादातर समय उपन्यास पडने में बीतता था । बाकी का समय सोने में या फिर शहर की नई जगहों पर घूमने में लेकिन कुछ भी उसे आकर्षित नहीं कर पा रहा था । एक दिन उसने अपने शहर लौटने का निश्चय किया लेकिन वो ऐसा नहीं कर सका क्योंकि जब तक कि वह निर्णय के बारे में अपनी जीजाजी को बताया था उन्होंने उसके सामने विनती रखती और वह मना नहीं कर सका । उसके जीजा के एक मित्र थे जिनकी बहन बीए फाइनल एग्जाम की परीक्षा देने जा रही थी और उसे कुछ मार्गदर्शन चाहिए था । चुकी अमर द्वारा आसानी से दिया जा सकता था इसलिए उसे वहाँ एक सप्ताह और रुकना पडेगा क्योंकि वो अपने जीजा के अनुरोध को मना नहीं कर सका और इससे अधिक उसका घर लौटा । उस समस्या का हल नहीं था जो कि हमेशा उसके दिमाग को परेशान किया करती थी । पहले दिन जब से पढाने गया उसे खुद में अजीब सा महसूस हुआ । उसे लगा कि वह की सामान्य स्थिति को नियंत्रण करने में असमर्थ था । हालांकि को अकेला नहीं था । उसके जीजा उसके साथ थे । वह घबराहट के शिखर पर पहुंच गया जब लडकी ने शर्मीलेपन से उसका अभिवादन किया । उसके बर्फ की तरह सफेदा चमक रहे थे और उसके गालों के डिंपल्स ने उसे और ज्यादा आकर्षक बना दिया था । वो उसे सीधे देखने की हिम्मत नहीं कर सका क्योंकि उसने अंग प्रदर्शन करने वाली पोशाक पहन रखी थी । उसकी बीवी टीशर्ट क्योंकि बहुत छोटी थी उसकी कमर को जाहिर तौर पर दिखाती थी और वो उसके परिपक् स्थलों की हरकतों को नियंत्रन नहीं कर सका जो इतने दंग थे कि देखने वालों में वास्ता उत्पन्न कर रहे थे । इसके अतिरिक्त उसकी जीन्स तथा पतलू इतने तंग थे कि उसके नितंब का आकार अपने बीच में गहरी रेखा के साथ दो भागों में विभाजित हो गया था । जब वह चलती थी तो झूलते थे और उसकी छाती के उभरे हुए भाग उस आदमी की तरह ऊपर और नीचे हिलते थे क्योंकि एक लंबी दूरी तय करने के बाद रुक गया हो । जब उसने पढना शुरू किया तो उसने अपनी आंखों के संयोजन के बीच बुक या नोटबुक लाकर अपनी घबराहट को छिपाने का प्रयास किया । किसी प्रकार उसने अपना पहला दिन बिताया और जब आपकी बहन के घर जा रहा था, उसने उस लडकी को बढाने के लिए वहाँ दोबारा नहीं जाने का निश्चय किया जो कि उस की तरफ उस समय ललचाई नजरों से देख रही थी जब वो उसे कोई चीज समझा रहा था । उस समय उसकी ढीली और छोटी पोशाक उसमें वासना के भाव को बढावा दे रही थी जिसे उसने हमेशा नियंत्रन में रखा था । लेकिन जब पढाने का समय आया उसने खुद में कडवाहट महसूस की और ये निश्चित करने में असमर्थ था कि क्या करें । तभी उसके जीजा जी ने पूछा कि आज तुम रजनी को पढाने नहीं जा रहे हो, खाने जा रहा हूँ । मैंने उत्तर दिया और खुद को तैयार करना शुरू कर दिया । उसने महसूस किया कि उसकी जीजा जी ये कहकर मुस्कुराए लेकिन वो कुछ नहीं । ऐसा का उस दिन भी रजीव ऐसे ही मूड में थी और उसकी पोषण पारदर्शी थी । मुख्य रूप से हाथों पर उसकी शर्ट के पहले दो बटन लापरवाही से खुले थे जिससे उसके वक्ष अंशिक रूप से दिखाई दे रहे थे । जो वो उसके सामने बैठी तो उसके वक्ष का गोलाकर भाग उसकी पोशाक से बाहर निकल आया । अमर उन्हें देखना चाहता था लेकिन बुरी तरह से असफल हो गया क्योंकि उसके वक्ष का दिखाई देने वाला भाग उसकी नजरों में आ गया और रजनी ने इसे महसूस कर लिया । उसने उसकी दशा देखी और उसे उस दिशा में आगे बढने के लिए प्रेरित किया लेकिन उसने ऐसा नहीं किया । तब उसने अपनी बाइयां आंशिक रूप से दबाते हुए पूछा अमर जी ड्रॉफ्टिंग पांच पति क्यों थे? और उन सब का ध्यान कैसे रखती थी? अमर ने उसकी तरफ निराशा से देखा लेकिन इसमें उसे बिल्कुल प्रभावित नहीं किया । उसने अपना सवाल दोहराया, वास्तव में मैंने महाभारत ज्यादा नहीं पडी और देखिए हैं इससे अच्छा तो इस सवाल को अपने इतिहास के अध्यापक से पूछती अमर ने खुद को बचाने के लिए कहा । उसने अपने शरीर को मोडते हुए उससे कहते हुए कहा कि एक अध्यापक को पहले खुद पढना चाहिए और फिर अपने छात्र को समझाना चाहिए कि सुनकर वो उसे कुछ जवाब नहीं दे सका और खुद को पिछले साल के सवाल पडने में व्यस्त दिखाने की कोशिश की । उस दिन खूब घर पहुंचा उसकी बहन ने उसे बताया कि रजनी का भाई उसे बात करना चाहता था । शायद वो रजनी के बारे में बात करना चाहता था । वो उसने एक लंबी सांस ली और अपना मूड बनाते हुए मजाकिया लहजे में कहा रचनी पढाई में बहुत कमजोर है से जीता । मुझे विश्वास है कि वह पांच नहीं हो पाएगी वो नहीं वो विवाह के बारे में बात करना चाहते हैं । उसने कहा अमर ने ये सुनकर आश्चर्य से देखा और वहाँ से ये कहते हुए चला गया कि उसके पास समय नहीं था । कितने में रजनी पसंद नहीं आई भैया । उसने जोर से कहा उसने चलना बंद कर दिया और सुजीता की तरफ थोडा । वो उसे इस तरह से देख कर डर गई और उसके उत्तर की प्रतीक्षा करने लगी । कमजोर आवाज में उसने कहा तो मैं पता है तो जानती हो से जीता मेरी स्थिति और फिर भी भैया आदमी केवल अतीत को याद कर के नहीं रह सकता । उसे वर्तमान को भी समझना चाहिए । अतीत वर्तमान की नींव है और यदि नी भी तोड दी जाए तो मकान कैसे बनाया जा सकता है । उसने उत्तर दिया और चला गया । अगले दिन उसने लौटने के लिए अपना सामान पैक कर लिया और अपनी बहन के कुछ दिन और पहनने का अनुरोध करने पर भी उसे रोता और सुबह तवा छोडकर स्टेशन की तरफ चल दिया । जब घर पहुंचा उसकी माँ बहुत ज्यादा आश्चर्यचकित नहीं थी । उसी पहले से ही मालूम था इसलिए उसने उसे अचानक लौटने के बारे में कोई प्रश्न नहीं पूछा । एक बार फिर समय पहले की तरफ बीतने लगा लेकिन उसने सुबह टहलना जाना बंद कर दिया । उसका ज्यादातर समय टीवी देखने में तथा किताबें पढने में बीतता था हूँ ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -09

तो अध्याय नौ उसे दिल्ली से आए हुए छह महीने बीत गए थे और हर दिन उसके बिताने के लिए एक बोझ की तरह था । बहुत बार वो दिल्ली लौटना चाहता था लेकिन उसकी माँ उसे कुछ दिन और रुकने के लिए बाध्य कर देती थी । एक दिन दो व्यक्ति आए और उसके पिता से कुछ गंभीर विषय पर बातें की । यदि भी उसके पिता ने उसे कुछ नहीं बताया भी उसे अपनी माँ से जानने में सफल हो गया । जिसमें उत्साहित होकर उसे बताया कि वो उस की शादी के बारे में बात करने आए थे और ये सुनकर वो उदास हो गया और अपनी माँ से कहा कि वो उसके पिता को उस मामले को आगे न ले जाने की सलाह दे क्योंकि वो इसपर सोचने के लिए कुछ समय चाहता है । उसे निर्णय लेने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए । ये सुनकर उसकी मां स्थल थी और उसे बिना कोई उत्तर दिए वो किचन में घुस गई । शायद वो अपनी उदासियों से छुपाना चाहती थी । दो दिन बाद जब अमर बाजार से लौटा तो सामान्य नहीं लग रहा था । उसका चेहरा व्यक्त कर रहा था कि उसने कुछ निर्णय ले लिया है क्योंकि उसके चेहरे पर दृढता का भाव था और वो अपने निर्णय के प्रति विश्वस्त लग रहा था । वो सीधे रसोई में गया जहाँ खाना बना रही थी उन्होंने अपना सिर उसकी तरफ थोडा जब उसने रसोई में प्रवेश किया तुरंत उसका चेहरा पढा और फिर से अपने काम में लग गई जो उसके आने से पहले कर रही थी । ऐसा लग रहा था की उन्होंने उसके अपने पास आने को ज्यादा अहमियत नहीं दी । मुझे आपसे कुछ कहना है । उसने कहा किया उसने अपना काम रोकते हुए पूछा और उसकी तरफ उत्सुकता से देखा मैं दिल्ली जा रहा हूँ । उसने कहा लेकिन तुम्हारे पिता घर पर नहीं है वो दो तीन बाद लौटेंगे और मैं जल्दी लौटाऊंगा लेकिन मेरा वहाँ एक बार जाना जरूरी है । क्यों आपकी बहु के लिए किया । उसने आश्चर्य से पूछा मैं सही होमा और बाकी मैं तो वापस आने पर बताऊंगा । इतना कहकर वो अपनी माँ को दुविधा में छोडते हुए रसोई से बाहर चला गया । जब वो स्टेशन पहुंचा उसने टिकट के लिए लंबी लाइन देखी लेकिन वो किसी प्रकार से एक टिकट लेने में सफल हो गया और उसके बाद जल्दी से प्लेटफॉर्म पहुंचा जहां जल्द ही ट्रेन आने वाली थी । कोई हम सफर पाने के लिए प्लेटफॉर्म पर घूमता रहा लेकिन पूर्ण रूप से असफल हो गया । इसलिए वो बेंच पर बैठ गया जो कि पहले से ही यात्रियों से भरी हुई थी लेकिन उनमें से एक ने उसका अनुरोध स्वीकार कर लिया और उसी वहाँ बैठने के लिए कुछ जगह दे दी । लगभग दस मिनट तक इंतजार करने के बाद उसने अपनी ट्रेन की घोषणा सुनी और एक अच्छा डिब्बा प्राप्त करने के लिए खुद को तैयार करने के उद्देश्य से खडा हो गया । जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची वो जल्दी से डिब्बे में चढ गया जिसमें बहुत ज्यादा भीड नहीं थी और खिडकी के बहुत ज्यादा निकट बैठे एक आदमी के बगल में सीट लेने में कामयाब रहा । कुछ मिनट बाद ट्रेन चलने लगी और डिब्बे में शोरगुल कम हो गया । उसने पढने के लिए एक फॅमिली और इसके कुछ पेज पलटने के तुरंत बाद इसे बंद कर दिया क्योंकि मैग्जीन से उसे आकर्षक महसूस नहीं हो पा रहा था । और जब ट्रेन दोबारा से अगले स्टेशन पर रुकी वो आदमी क्योंकि खिडकी के बहुत पास बैठा था, ट्रेन से नीचे उतरने के लिए खडा हो गया और उसने खुशी से वो सीट हासिल कर ली । बाहर से आती हुई ठंडी हवा ने उसके चेहरे कुछ हुआ और उसका मूड फ्रेश कर दिया । उसे तब अपनी बोरियत काम करने के लिए खिडकी से बाहर देखा । प्लेटफॉर्म पर बहुत भीड थी । कुछ यात्री डिब्बे में सीट पाने के लिए इधर उधर दौड रहे थे । उस दृश्य से उनका तनाव कम हुआ और उसने आरामदायक महसूस किया । कुछ मिनट बाद ट्रेन ने फिर चलना शुरू कर दिया और खिडकी के रास्ते डिब्बे का वातावरण ज्यादा ठंडा और सुखद हो गया । तब उसने आराम के लिए अपनी आंखे बंद कर ली । उसी याद था जब पहली बार दिल्ली जा रहा था । कम्पार्टमेंट में इस तरह भीड की और उस समय भी किसी तरह उसे खिडकी के बहुत पास एक सीट मिल गई थी । वो दिल्ली के लिए एक अजनबी था और वह खुद को वहाँ कैसे जिस करेगा ये उसके लिए बहुत कठिन था लेकिन उसे इसके बारे में नहीं सोचा और जब कभी भी सवालों से बेचेन करते हैं बैठे बैठे ही सोने की मुद्रा में अपनी आँखे बंद कर लेता । उसके सामने एक व्यक्ति बैठा हुआ था जो बहुत सभ्य लग रहा था क्योंकि जब भी वो कोई खाने की चीज खरीदता वो उसके सामने रखता । शायद उसने उसके चेहरे के भाव द्वारा उसकी स्थिति को पढ लिया था । क्या तुम पहली बार दिल्ली जा रहे हो? क्या तुम ने ही उसने पूछा था तो कहाँ ठहर होगे? मुझे नहीं मालूम । अमर ने जवाब दिया और डिब्बे की छत की तरफ देखे । लगा क्यों? क्या वहाँ तुम्हारा कोई रिश्तेदार नहीं है? नहीं । ये सुनकर वो आदमी शांत और गंभीर हो गया । कुछ समय बाद ट्रेन एक स्टेशन बरूकी और अमन ने कुछ के लिए खरीदें । क्यों? उसने उनमें से कुछ खेलो साध्वी को दिए तो उसने बिना किसी संकोच के उन्हें स्वीकार कर लिया । हालांकि इससे पहले जब उसके अंदर के सामने कोई चीज रखी थी तो उसे लेने से मना कर दिया था । तुम्हारे नाम क्या है? अमर मेरा कमलेश है । उससे बिना पूछे ही कहा । तब वहाँ कुछ समय के लिए वे चुप हो गए और उसके बाद भी कमलेश था जिसने एक बार फिर बातचीत शुरू कर दी । मैं भी तुम्हारी तरह घबरा रहा था । जब मैं पहली बार दिल्ली जा रहा था लेकिन मुझे एक फायदा था । मेरे एक रिश्तेदार मेरे साथ थे तो बहुत कोओपरेटिव थे और उनके प्रोत्साहन ने मुझे वहाँ सब समस्याओं का सामना करने की हिम्मत दी और अब में अच्छी तरह से सेटल हूँ । मेरा एक परिवार है मेरी पद कि मेरा बेटा और मैं अमरीका सुनकर मुस्कुराया । लेकिन उसके चेहरे के भाव से ही साफ झलक रहा था कि उसने अभी तक आपने दुख पर विजय नहीं पाई थी । कुछ मिनट बाद कमलेश ने दुबारा कहा, मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ । ये भी तुम चाहो तो तुम कुछ दिनों के लिए हमारे साथ रह सकते हो । मेरा मतलब है जब तो जॉब नहीं मिल जाती । अमर ने उत्तर में कुछ भी नहीं कहा । वो केवल शून्यता से देखता रहा । वास्तव में दिल्ली में आश्चर्य पाना बहुत कठिन है । उसने उसे दोबारा से समझाते हुए कहा कि अच्छा होता यदि वो उनके साथ ठहरता । क्या आपकी पत्नी इसका विरोध नहीं करेगी? अमर नि संदेह व्यक्त करते हुए कहा, हर गेम से ही मेरे किए का कभी विरोध नहीं करती । वो मेरी बहुत सहायता करती है और मेरी सफलता उसकी सहायता का ही परिणाम है । कमलेश ने खुशी से उत्तर दिया, आप बहुत भाग्यशाली है, नहीं तो ऐसी पत्नी इन दिनों मिलना दुर्लभ है । मैंने उसके उत्तर का समर्थन करते हुए कहा

प्यार की वो कहानी अध्याय -10

अध्याय दस अमर को दिल्ली पहुंचे हुए एक हफ्ता बीत गया था और वो लगातार एक उचित जॉब पाने की कोशिश कर रहा था । चौथे दिन उसके पास बस के किराए के लिए पैसे नहीं थे और इसलिए वह बाहर जाने में संकोच कर रहा था और कमलेश क्योंकि सुबह से उसकी गतिविधियों को देख रहा था इस बात को समझ गया था । क्या आज तुम अपना भाग्य आजमाने नहीं जाऊ? के उसने पूछा । अमर ने अपनी कमल उसकी तरफ की ताकि वो उसके चेहरे का भाव नहीं पढ सके । हाँ, मैं जाऊंगा अमनी जवाब दिया लेकिन थोडी देर हो रही है । जल्दी से तैयार हो जाओ । हम दोनों साथ जाएंगे । उससे सलाह दी । अमर एक शब्द में नहीं कह सका और जाने से पहले अपनी फाइल को लेने के लिए गया । मेरे विचार से आज तुम भी जॉब मिल जाएगी । कमलेश ने उसे आशान्वित करते हुए कहा लेकिन अमर ने कुछ उत्तर नहीं दिया । जब कमलेश बस से उतरने वाला था उसने अमर को पचास रुपए देते हुए कहा यदि उसे एक जॉब मिल जाती है तो भावी और चिंटू के लिए मिठाई खरीद ले और अपना पहला वेतन मिलने के बाद इसी लौटा दे । अमर कुछ कहना चाहता था लेकिन इससे पहले ही वह बस के दरवाजे की तरफ पड गया । अमर इंटरव्यू के लिए आए हुए उम्मीदवारों की संख्या को देखकर था लेकिन एक आशा की किरण उसके हिंदी में अभी भी प्रकाशित हो रही थी क्योंकि उसने कमलेश की आंखों में उसके लिए सफलता का विश्वास देखा था । इसलिए उसे विश्वास था शायद भगवान उसकी इस संबंध में सहायता करें क्योंकि उसे इसकी बहुत जरूरत थी । लेकिन जो कुछ भी उन्होंने कहा था वो केवल से खुश करने के लिए था और यदि उसे ये जॉब नहीं मिली तो दिल्ली में कैसे अपना जीवन बिताएगा । कितने समय तक वो कमलेश की सहानुभूति पर जीवित रहेगा जिससे शायद भगवान ने उसकी सहायता करने के लिए भेजा था । कुछ मिनट बाद वो साक्षात्कार कक्ष से बाहर आया लेकिन वो खुश था क्योंकि उसे जॉब मिल गई थी इसलिए वह सीधे मिठाई की दुकान पर गया । जब घर पहुंचा तो उसने चिंटू को दरवाजे पर खडा पाया । शायद अभी अभी पास के मैदान से लौटा था । जहाँ कॉलोनी के बच्चे खेला करते थे, जल्दी पी है । वो केवल कक्षा में था तब भी वो एक परिपक्व इंसान की तरह बातें किया करता था । उसे मिठाई के डिब्बे के साथ देखकर वह चाहेगा और उसकी तरफ ये कहते हुए दौडा आप कोई जॉब मिल गई है ना? अंकल हाँ मुझे मिल गई लेकिन तुमने से जाना । उसने बहुत प्यार से पूछा मैं मिठाई के डिब्बे को देखकर जान गया और इतना कहकर मुझे गोद में बहुत बडा बच्चे बहुत संवेदी होता है । वो जानता है परिवार में क्या चल रहा है और चुप रहकर तथा उत्सुकता से ये निरक्षण करता है क्योंकि बडे लोग कहते हैं या करते हैं इसलिए कहा जाता है कि घर का आंगन बच्चे की पहली बार चला होती है अंकल की । आपको मालूम है मैंने असेंबली में भगवान से आपकी जॉब के लिए प्रार्थना की थी जब सारे छात्र प्रार्थना के समय अपनी आंखे बंद करके भगवान को धन्यवाद दे रहे थे । लेकिन मैंने आपको सुबह बहुत दुखी देखा था और पिछली रात को पापा ने मम्मी को बताया था कि आपकी चौक की बहुत जरूरत है इसलिए मैंने भगवान से इसके लिए प्रार्थना की । कल में असेंबली में भगवान को धन्यवाद के है दूंगा । ये सुनकर अ मैंने उसके कोमल कार पर एक चुम्बन लिया और मिठाई का डिब्बा दे दिया अपनी जॉइनिंग की । पहले दिन से ही वो अपने सहकर्मियों पर प्रभाव जमाने में सफल रहा और शीघ्र ही वो उनके साथ इस तरह से घुल मिल गया मानो वो लंबे अरसे से उनके साथ हूँ । समय बीतता गया और इसके साथ ऑफिस में उसकी प्रसिद्धि भी बढती गई । काम के प्रति उसकी ईमानदारी और वफादारी उसे उसके बॉस की नजर में पसंदीदा बना दिया जो की फैक्ट्री के मालिक भी थे । केवल छह महीने के बाद उसे प्रोन्नित कर दिया गया और वो अपने बॉस की बहुत करीब आ गया तो कभी कभी किसी काम के लिए या फिर जब कभी बहुत से अपने घर में अपने साथ रखना चाहते थे तब अपने बॉस के आवास पर भी जाने लगा । वास्तव में वे अपने बिजनेस की तरक्की के लिए उस पर बहुत ज्यादा निर्भर रहने लगे थे । एक दिन अमर खुद बॉस के यहाँ कोई फाइले नहीं जाना था जो कि बहुत महत्वपूर्ण थी और उस दिन की मीटिंग के लिए जरूरी थी । उसने घंटी बजाए और वहाँ इंतजार किया, दरवाजा खुला लेकिन इसे उस नौकरी नहीं खोला था जो कि आमतौर पर खोलता था । इसे एक युवा लडकी ने खोला था जिसमें खूबसूरत कपडे पहने थे । जैसे कि वो कहीं बाहर जा रही थी । उसने उसकी तरफ संदिग्ध दृष्टि से देखा और अमर समझ गया कि वह क्या चाहती थी । मेरा नाम अमर है । मैं ऑफिसियल्स पीली फाइल को लेने आया हूँ, जो सर भूल गए हैं । उसने कहा तो तुम अमर हूँ अंदर और जब घर में घुसा उसने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया और उसे ड्राइंग रूम में बैठाया । तब वो ये कहते हुए चली गई प्लीज कुछ इंतजार करूँ । मैं अभी वापस आ रही हूँ । जब कुछ समय बाद वापस आई उसके हाथों में दो फाइल थी पहली पीली तथा दूसरी हरी । उसने उसे पीली वाली फाइल पकडा दी और हरी वाली को खोलने लगी । उस समय तक नौकर वह चाहे तथा नाश्ते के साथ आ गया था । अमर को उन्हें लेने में संकोच हुआ लेकिन उसने उसे इस तरह से आगरा किया कि वह से मना नहीं कर सका । तब उसके उसे एक कागज दिखाया और खुशी के साथ उससे बोली, मिस्टर अमल । मुझे वाद विवाद प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार मिला है और इसका अध्यक्ष आपको जाता है । कैसे? उसने आश्चर्य से कहा, केवल दो दिनों पहले जब मैंने आपके द्वारा सुधार किया गया भाषण देखा तो पहले तो मुझे ये सोचकर गुस्सा आया कि तुम ने ऐसा करने का साहस कैसे किया । लेकिन जब मैंने से पूरा पढा तो मैं उन सुझावों को देखकर आश्चर्यचकित थी जो तुमने उस पर लिखी थी । वास्तव में उससे मुझे बहुत सहायता मिली और मैंने प्रथम पुरस्कार जीता । यदि गलती से मैं अपने भाषण को ऑफिस के दूसरे का उसके साथ नहीं मिला देती तो वैसे सही नहीं करते और तब मुझे पुरस्कार भी नहीं मिलता । अमर ने उसकी तरफ आंशिक रूप से अपराधी की तरह तथा आंशिक रूप से प्रसन्न होकर की दृष्टि से देखा । वो कुछ कहना चाहता था लेकिन वह शर्म के कारण या फिर उस से पहली मुलाकात के कारण अपनी होट नहीं हिला सका । तब कमरे में शांति छा गयी । वो चुप चाप अपनी चाय पीने में व्यस्त था और वो सोच रही थी कि कमरे की निरस्त था को दूर भागने के लिए उससे क्या पूछना है । तभी अचानक उसने पूछा आप के कितने बच्चे हैं? क्या अमन ने उसे उत्तर देने के बजाय पूछा मेरा मतलब है आप शादीशुदा हो क्या? नहीं तो उसने अपने सवाल में सुधार क्या नहीं ॅ हुआ हूँ । उसे शर्माते हुए उत्तर दिया । ये सुनकर उसने अपने अधिक खुलेपन को पहचाना और तब उसने महसूस किया कि वो अपनी सीमा को पार कर गई थी । वो खडी हुई और कहा वो वास्तव में मेरा मतलब है लेकिन वो अपना वाक्य पूरा नहीं कर सके क्योंकि उसे अपने पछतावे को व्यक्त करने के लिए कोई उचित शब्द नहीं मिला । उस समय तक अमर अपनी चाय समाप्त कर चुका था और उस से जाने के लिए अनुमति मांगी लेकिन वो कुछ नहीं कह सके और दूसरी तरफ उसने उसकी अनुमति का इंतजार नहीं किया और मेन गेट की तरफ चल पडा । सुबह की दस बज गए थे लेकिन अमर को कोई बस नहीं मिल पा रही थी । वहाँ यात्रियों की भीड थी लेकिन कोई बस वहाँ नहीं आ रही थी शायद अपनी मांगी पूरी करवाने के लिए । बस चालकों की हडताल की अमर के लिए ऑफिस समय से पहुंचना बहुत जरूरी था लेकिन उसे उस समय ऑफिस पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा था । पैदल जाना भी उसके लिए संभव नहीं था क्योंकि ऑफिस वहाँ से लगभग पंद्रह किलोमीटर दूर था । इसलिए वह घबराकर और अधीरता से एक बस का इंतजार कर रहा था क्योंकि पूर्णत्या असंभव लग रहा था लेकिन वो आशा न होते हुए भी आशा कर रहा था । तभी कार जिसके शीशे टिंटेड थे, वहाँ आई और एक झटके के साथ हो गई । कुछ यात्री सहायता पाने की दृष्टि से कार की तरफ दौडे । लेकिन जब कार का दरवाजा खुला ये अमर था । जिसे कोई आशा बंदी क्योंकि वो उसके बॉस की पुत्री थी । उसने एक प्यारी मुस्कान के साथ उसे देखा और ये उसके लिए काफी था की उस की प्रार्थना स्वीकार कर ली गई थी । लेकिन दूसरी तरफ दूसरे यात्रियों को उसके भाग्य से एशिया हुई उनमें से एक अपनी एशिया पर नियंत्रण नहीं कर पाया और फुसफुसाया क्या शानदार नसीब है तो शायद मैं उसकी जगह होता । अमर ने इसे सुना लेकिन नजर अंदाज कर दिया और उसने भी उसने खुशी से कार का दरवाजा खोला और बिना कुछ पूछे बिना उसे ड्राइवर की सीट के बगल में बैठने दिया और तब उसने का स्टार्ट कर दी जोकि एक झटके के साथ आगे बढ गई । मानव से चलने से पहले हल्की सी छलांग लगाई हूँ आपको बहुत बहुत धन्यवाद मैडम । अमर ने खुश होकर कहा लेकिन जल्दी ही तो आश्चर्य सके था जब उसके चेहरे का भाव बदल गया । इसमें गुस्से और दुख का रूप ले लिया । ना ही उसने उसके धन्यवाद का उत्तर दिया । वो लगातार आगे की तरफ देख रही थी । तब कुछ मिंटो के बाद उसने चुप्पी तोडी मिस्टर अमर । मुझे लगता है आपको मेरा नाम नहीं मालूम है कि आपको पता है नहीं मैं उसने जल्दी से जवाब दिया । मेरा नाम शालिनी है और मैं चाहती हूँ कि तुम मुझे मेरे केवल नाम से बुलाओ । बिना मुझे मैडम संबोधित करते हुए । लेकिन इस संबंध में कोई प्रश्न पूछे की जरूरत नहीं है । इसलिए मुझे केवल शालनी कहकर बुलाओ । उसने उससे एक अधिकार के साथ कहा उसके शालिनी लेकिन तो मुझे कहानी जा रही हूँ । उसने आश्चर्य से पूछा जब उसके ऑफिस की तरफ जाने वाली सडक को छोड दिया वो उसकी आश्चर्य पर मुस्कुराई और बोली मैंने वास्तव में आज के लिए तुम्हारा अपहरण कर लिया है । इतना कहकर उसने उसके चेहरे का भाव पडने के लिए उसके और देखा । लेकिन उसने पाया कि उसके चेहरे पर आधार या दुख का कोई निशान नहीं था । वो भी मुस्कुरा रहा था । शायद वो उसके साथ से खुश था । उस ने भी उसकी तरफ देखा और तब कहा लेकिन तुम्हारे पापा मुझे ऑफिस समय से न पहुंचने के लिए डाटेंगे और मेरा वेतन भी काट लेंगे । यदि मैं ऑफिस नहीं गया तो और ये सब केवल तुम्हारी मजा किया हरकतों के कारण होगा क्योंकि मैं वापस से बात करी होंगी । इतना कहकर उसे सडक के किनारे काहलो की और मोबाइल फोन पर अपने पापा से बात करने लगी । वो उससे कुछ कहना चाहता था लेकिन कह नहीं पाया क्योंकि उस समय तक उनके बीच बातचीत शुरू हो गई थी । लेकिन उसे जल्दी छोड देना उस एक मीटिंग अटेंड करनी है । वो की पापा मैं उसे जितनी जल्दी संभव हो सकेगा उतनी जल्दी खुद ऑफिस लिया होंगे । शालिनी ने उत्तर दिया और अपने पापा की अनुमति प्राप्त करने के बाद उत्साह से चाहेगी । अमर भी मुस्कुराया क्योंकि अब वो ऑफिस के तनाव से मुक्त हो गया था । लेकिन शालिनी व्यहवार पर उत्पन्न हुए अपने शक को नहीं त्यागा सका । कार तेजी से चल रही थी और सुखद अहसास उनके चेहरे पर छा रहे थे । अचानक कार यूनिवर्सिटी के हाथ में पहुंची और इससे पहले कि वह से कुछ कहता कि एक झटके के साथ रुक गए । पहले शालिनी कार से उतरी और तब उसे दूसरा दरवाजा खोला और अमर संकोच के साथ नीचे उतरा । शालिनी बहुत खुश दिखाई दे रही थी । उसने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया और उसके साथ आगे जाने का इरादा क्या? लेकिन जल्दी वो अपने कुछ मित्रों से गिर गई थी जो बहुत ही खुले और स्पष्टवक्ता थे । काये शालिनी । तुम कैसी हो अच्छे धन्यवाद उसे जवाब दिया केवल अच्छी नहीं बहुत अच्छे । दूसरे ने हसते हुए कहा शालिनी भी उनके साथ ऐसी और ये कहते हुए अमर की तरफ मुडी आप हैं । लेकिन इससे पहले कि वो वाक्य पूरा करती है, उनमें से एक नहीं उसे अमर कहकर संबोधित किया । ये सुनकर सभी मुस्कुरा दिए । अमरी सुनकर स्तब्ध था, लेकिन उसने इस प्रकट नहीं किया और कहा, आप कैसे हैं आप सब? और तब सब खुशी से उत्तर दिया आप कैसे हैं उसका उनसे परिचय करवाने के लिए । शालिनी को एक के करके अपने मित्रों के पास जाता हुआ देखकर उसने महसूस किया कि वह कितनी की तरह थी, क्योंकि बगीचे में बारी बारी हर एक फूल पर बैठी है । अंत में उसने कहा, अब हमें वापस चलना चाहिए । क्यों? क्या बूट गए हैं? शालिनी ने उत्सुकता से पूछा । नहीं, हरगिज नहीं । आप की कंपनी में होने से कौन इनकार करेगा? लेकिन उसने धीरे से उत्तर दिया । यह सुनकर वह मुस्कुराए और उसे सहमती देने के लिए सिर्फ हिलाया ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -11

अध्याय जा रहा बारिश हो रही थी और बोल दो कि आवाज शालिनी की कमरे में साफ सुनाई दे रही थी जिसकी खिडकी बग्गी जी के सामने खुल दी थी और उस बगीचे के किनारे पर एक नौकर कक्ष था जिसकी छत छप्पर से बनी हुई थी । खिडकी के सामने खडी होकर शालिनी दो छोटे बच्चे को देख रही थी जो कि बारिश में नहाते हुए एक दूसरे के ऊपर पानी देखते हुए इधर उधर दौड रहे थे । जांघिया के साथ उनका नग्न शरीर उन्हें प्रकृति के और करीब ले जा रहा था और उनकी गतिविधियों से लग रहा था कि वे स्वर्ग के जैसा आनंद महसूस कर रहे थे । उन्हें पता था कि वे बहुत गरीब थे और उनके माता पिता केवल मजदूर थे, केवल जीवन का आनंद लेने के बारे में जानते थे लेकिन जब बडे हो जायेंगे भी जान जाएंगे कि वे क्या थे । उनकी प्राकृतिक खुशी समाप्त हो जाएगी और वे उन्हें नियमों का पालन करने लगेंगे क्योंकि समाज ने पहले ही स्थापित कर दिए हैं । जाति, पंथ, धर्म और समाज में उनका स्थान भी । शायद ये कारण था कि वह अमर के साथ अपने रिश्ते का खुलासा करने में संकोच कर रही थी क्योंकि उनका कर्मचारी था । वास्तव में उसका रिश्ता परिपक्व था और हो सकता था की दोनों पक्षों द्वारा सामान रूप से स्वीकार किया गया हो । हालांकि वो अमर को पसंद करती थी लेकिन वो नहीं जानती थी कि अमर ने उसके प्यार में आगे बडने को कैसा लिया था । लेकिन उसे विश्वास था कि वो उसके प्यार को इनकार नहीं करेगा क्योंकि इसके पास दौलत था । खूबसूरती थी तब्बू बडे शिष्य के पास कई जिसमें कि उसका पूरा प्रतिबिम् दिखाई दे रहा था । उसने बिना ब्राकेल बिना बाजू वाली टी शर्ट पहनी थी और स्कर्ट पहनी थी क्योंकि उसकी पैरों की उंगलियों को छू रही थी । पहले की नीचे की उसकी टांगे चमक रही थी और उन्हें देख कर कोई भी आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकता था । वो ऐसे महसूस करने के लिए अपने दातों को लगभग बिना खोले मुस्कुराई और अपने लगभग परिपक् स्थन पर हाथ रख लिया जिससे उसकी नसों में विचित्र तरंगे उत्पन्न हुई और अब उसे अत्यधिक आनंद महसूस हुआ जिससे उसने अपनी आंखे बंद कर ली । जब उसने अपनी आंखे खोली तो उसे विश्वास था कि अमर उससे प्यार करेगा और उसका रिश्ता उन दोनों के प्यार के बीच बाधा उत्पन्न नहीं करेगी क्योंकि उसकी शिक्षा उसे ऐसे विचार रखने की अनुमति नहीं देती थी क्योंकि मनुष्य किसी धर्म जाती और सीट इसके साथ पैदा नहीं होता है । उसे पृथ्वी पर ये सब चीजे तब प्रदान की जाती हैं जब वो अपना ज्ञान विकसित करता है तो दोबारा से खिडकी पर आई और देखा कि बारिश की कुछ बूंदे रुक रुककर गिर रही थी । फूलों की पत्तियाँ और पंखुडी हो ऐसे चमक रही थी मानो उन्हें खुशी की पूरी खुराक मिल गई हूँ । अचानक घडी नहीं चार बजाए और इससे वो विचलित हो गयी । वो अपनी सुखद कल्पना से बाहर आई और उस जगह पर खडी रहकर कुछ देर सोचती रही । तब वो अपने वो ड्रॉप की तरफ पडी । उसकी कार उसकी फैक्ट्री की तरफ तेजी से बढ रही थी और कुछ समय बाद उस बस स्टैंड पर पहुंची जोकि कारखाने के सबसे पास था । जैसे कि उसने अनुमान लगाया था । उसने वहाँ अमर को एक बस का इंतजार करते हुए देखा । उसे देखकर अमर मुस्कुराया और उसके पास ये जानने के लिए आया कि किस चीज में उसे यहाँ आने को मजबूर क्या क्या बात है । एक यात्री ने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा, अमर नी से हम सुना कर दिया और भी देखना चाहता था की टिप्पणी किसने की थी लेकिन जल्दी ही उसने ये उपाय त्याग दिया और शालिनी की तरफ तेजी से बढा । अंदर उसने सलाह दी लेकिन मैंने संकोच पूर्वक कहा अंदर आओ प्लीज । उसने लगभग उसे मजबूर करते हुए कहा और उसे अपने बगल में बैठने के लिए सामने का दरवाजा खोल दिया । अमर हिचकी चाहता हुआ बैठ गया और पानी की बूंदों को विपरीत दिशा में धकेलते हुए कार आगे बढ गई । कार तेजी से चल रही थी और जब ये शहर से बाहर आई अमर चुप्पी सहन नहीं कर पाया और पूछा हम कहाँ जा रहे हैं? रोहिणी ने एकदम जवाब नहीं दिया । उसने कुछ समय लिया और उत्तर दिया मैं नहीं जानती लेकिन क्या तो मैं मुझे डर लगता है या तो मैं पसंद नहीं हूँ । नहीं कुछ भी नहीं । तब हमने जवाब दिया तब चुका हूँ । मैं तुम्हारा अपर है नहीं किया है । उसने मुस्कुराते हुए कहा और अमर ने सामने लगे हुए शीशे में उसके चेहरे का भाव बदलते हुए महसूस किया । अचानक कार चौराहे से पुराने चर्च की ओर चले जाएगी क्योंकि पहाडी की चोटी पर था । हालांकि कभी बहुत प्रसिद्ध रहा । अब इसे कुछ लोग ही भ्रमण करते थे । इसके चारों और हरियाली ने इसके महत्व को बढा दिया था । इसके अतिरिक्त शांतिपूर्ण वातावरण आंगतुकों को अत्यधिक प्रसन्नता देता था । सुबह के समय अमर बीमार और थकावट महसूस कर रहा था इसलिए उसने अपनी बीमारी के बारे में सूचित करने के लिए और दो दिन की छुट्टी का अनुरोध करने के लिए ऑफिस फोन किया । उस दिन वो अपने कमरे से बाहर नहीं गया लेकिन दोपहर के समय उसने दरवाजे पर दस्तक सुनी इसलिए उसने इसे खोला और देखा की भावी कमलेश की पत्नी दरवाजे पर खडी थी और वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी । वो प्रथम दृष्टिया उनके आने का कारण ही समझ पाया क्योंकि वो सामान्यता उसके कमरे में नहीं आती थी क्योंकि उसने ठीक कमलेश के मकान के बराबर में किराए पर ले रखा था । वो खुद ही साधारण तैयार कमलेश के घर जाता था जब उसे उससे उसकी पत्नी से कोई बात करनी होती थी । कोई लडकी तुमसे मिलने आई है । उसने कहा मुझे अमर ने विश्वास न करते हुए उत्तर दिया हाँ वो केवल तुम्हारी भी आई है । ओके अभी आ रहा हूँ । उसने कहा और अपनी शर्ट लेने के लिए हैंगर की तरफ बडा जम्मू कमलेश के घर पहुंचा और लडकी को देखा । पहली बार में वो अपने देखे हुए पर विश्वास नहीं कर सका । लेकिन वास्तविकता तो वास्तिवक थी मैडम आप उस ने आश्चर्य व्यक्त किया । ये कोई बात और पूछना चाहता था लेकिन उसने देखा की भावी ट्रेन में तीन कब चाहिए करा रही है । इसलिए वह शांत रहा और उसकी तरफ प्यार और आश्चर्य से देखता रहा तो यहाँ कैसे आई? उसने चाय की चुस्की लेते हुए पूछा मुझे यहां पहुंचने में कोई समस्या नहीं क्योंकि मैंने एक टैक्सी के आई पहली ड्राइवर को बता बता दिया और तब वो मुझे यहाँ पे आया । उसने एक साथ में कहा, लेकिन क्या लेकिन भावी ने मुझे तुम्हारे बारे में सब कुछ बता दिया था । इसका मतलब है तुमने भी अपने संबंध बना ली है । पेशक मैंने तब अमर मुस्कुराकर शांत बैठा रहा, तुम कैसे हो? शालिनी ने कुछ मिनट बाद पूछा बहुत अच्छा नहीं । उसने उत्तर दिया, क्या तुमने दवाई ले ली है? अभी तक तो नहीं लेकिन मुझे लगता है मुझे कल ले लेनी चाहिए तो कितने लापरवाहों । शालिनी ने अपने चेहरे पर चिंता का भाव लाते हुए कहा लेकिन अमन ने कुछ उत्तर नहीं दिया और चाय पीता रहा । भाभी वो बहुत लापरवाह है । पापा कहते हैं तो ऑफिस में अपना लंच नियमित रूप से नहीं लेता और जितना कम उसी करना चाहिए उससे ज्यादा करता है । इसलिए उसका अस्वस्थ हो ना उसकी लापरवाही का परिणाम है । उससे दुख पूर्वक कहा तुम सही कह रही हो शालनी मैंने भी उसे अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखने के लिए कितनी बार कहा है । लेकिन वो भाभी ने उसका समर्थन करते हुए कहा ओके मुझे बहुत अफसोस है, लेकिन मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि भविष्य में मैं अपना ख्याल रखूंगा । उसने उनका इल्जाम स्वीकार करते हुए कहा, तब एक बार फिर सब शांत हो गए और अपनी चाय समाप्त की । अब मुझे जाने दो भाभी मुझे तेल हो रही है । शालिनी ने कहा और उठ खडी हुई मैं तो मैं कैसे अनुमति दे सकती हूँ । जब वास्तव में तो अमरीकी मेहमान हूँ । प्लीज उससे अनुमति लो । भावी मुस्कुराते हुए बोली वो कीअमर । उसने कहा अमर ने कोई उत्तर नहीं दिया और उसी गेट तक पहुंचाने के लिए उठ खडा हुआ । जब गेट पर पहुंचे तो मैंने देखा की भावी वहाँ नहीं थी । शायद वो घर के अंदर से कोई चीज लेने या कुछ काम करने गई थी । उसने गेट खोला पर शालिनी जाने के लिए एक रास्ता बनाया । उसने फिर एक बार उसकी तरफ प्यार और शिकायती अंदाज में देखा । अमर तो में आपने अदित्य भावना दिखाने के लिए मुझे रुकने को कहना चाहिए था । इतना कहकर वो मुस्कुराए मैं हमेशा आपकी सेवा में हो मैडम, फिर अतिथ्य भावना का क्या मतलब है? अमर ने खुशी और उत्साह से कहा ये सुनकर शालिनी मुस्कुराई और जो उसने कहा था उसकी सहमती में सिर्फ खिलाया और अलविदा कहने के लिए खुशी से अपना हाथ खिलाया । अगले दिन भी अमर अपने ऑफिस नहीं गया लेकिन उस दिन वो ठीक महसूस कर रहा था । इसलिए उसे कमलेश के साथ चाय लेने का निश्चय किया और जब कमलेश की चाय का टाइम हुआ तो वहाँ गया कमलेश अपने ऑफिस जाने ही वाला था । जब वहां पहुंचा उसने देखा की भाभी ने पहले कमलेश को चाय पर उसकी थी और उसे देख कर कमलेश ने अपनी पत्नी को इसका एक कप और लाने के लिए कहा । अमर चुपचाप बिना कुछ कहे उसके सामने बैठ गया तो अब कैसा महसूस कर रहे अमर कमलेश ने पूछा ठीक और बेहतर उस समय तक भावी चाहिए आई थी और उन्होंने इसे उसके सामने रख दिया । अमर तुम्हारी भाभी ने मुझे बताया कि कल एक लडकी तुमसे मिलने आई थी । कमलेश ने पूछा तो वो लडकी वास्तव में मेरे बॉस की बेटी है और यूनिवर्सिटी से पडती है । एक बार मैंने अनजाने में उसका भाषण ठीक कर दिया और वो प्रतियोगिता में विजय हुई । तब से वो मेरे प्रशंसक बन गई है और जब उसे पता चला कि मैं ठीक नहीं था वो अपनी सहानुभूति दिखाने आई थी । अमर ने अपने चेहरे पर कोई असामान्य भावनाएं बिना उत्तर दिया । इसका मतलब है वह तुम्हारी सामप्ति चाहती है । कमलेश ने हल्के से हसते हुए कहा मुझे नहीं मालूम लेकिन वो मेरे बारे में बहुत गंभीर है । वह बहुत दयालु और खूबसूरत भी है । भाभी ने उनकी बातचीत में हस्तक्षेप करते हुए कहा, अवर उसके उत्तर में कुछ नहीं कह सका । लेकिन कमलेश स्वयं पर नियंत्रण नहीं रख सका । उसने कहा तो उस लडकी से बहुत प्रभावित हो क्या तुम नहीं हूँ वास्तव में अब तो मैं भी उसी देखना चाहता हूँ जिसमें एक ही बार मिलने से मेरी पत्नी का दिल जीत लिया । ये सुनकर सब एक साथ हसने लगे लेकिन अमर जी दिल्ली है अपना ख्याल रखना । कमलेश ने कहा और अपने ऑफिस जाने के लिए उठ खडा हुआ । कमलेश के अपने ऑफिस जाने के बाद अमर भी अपने कमरे में जाना चाहता था । इसलिए उसने भावी से अनुमति मांगी लेकिन उन्होंने उसे जाने की आज्ञा नहीं थी और उसे वही बैठे रहना पडा क्योंकि वह कोई घरेलू काम कर रही थी और ये खत्म होने ही वाला था । वो उसके पास एक दम नहीं है और उसे कुछ देर इंतजार करने का अनुरोध किया । जब ड्रॉइंग रूम में बहुत ही वो फ्रेश और प्रसन्न लग रही थी । वो उसके सामने बैठ गई और धीरे से पूछा अमर क्या तुम उसी वास्तव में प्यार करते हो? अमर उनकी इस प्रकार का सवाल पूछने से चकित था लेकिन उसने जल्दी स्वयं को नियंत्रित किया और उत्तर दिया भाभी मैं उसका सम्मान करता हूँ क्योंकि वो मेरे बॉस की बेटी हैं । कैसे मेरी तरह एक साधारण व्यक्ति उस लडकी से प्यार करने की हिम्मत कर सकता है जो कि एक अमीर परिवार से हैं लेकिन वो तुमसे बहुत प्यार करती है । मैंने उसकी भावनाओं को महसूस किया । वास्तव में वो तुम्हें अपने दिल की गहराई से प्यार करती है तो मैं इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए । उन्होंने ऐसे कहा जैसे कि वह अपने कहीं के प्रति बहुत निश्चित और विश्वस्त थी । अमर एक बार फिर चुक रहा । वो स्वयं ये निर्णय करने में असमर्थ था । कि क्या वह सही था? यह खुद भी उसे प्यार करने लगा था । अमर प्यार में धन, आयु, स्टेटस इत्यादि का कोई सवाल नहीं होता । प्रत्येक व्यक्ति को अपने प्यार के प्रति वफादार होना चाहिए । ये ईश्वर का उपहार है भाई । किसी को ये नहीं मिलता । उसने वकालत की लेकिन अमर ने उत्तर नहीं दिया । उसने केवल इतना कहा, ये तो ईश्वर का उपहार है और उसने मुझे दिया है । तो मैं इसे मना करने वाला कौन होता हूँ? लेकिन क्या लेकिन उसने उत्सुकता से पूछा वक्त प्यार को बदल देता है भाभी । उसने दुखी होकर कहा, मैं नहीं जानती तुम की स्थिर तक से ही हो सकते हो । लेकिन जितना मैं जानती हूँ समय भी एक सच्चे प्रेमी के दिल को जीतने में विफल रहता है । उसने असहमति व्यक्त की । तब अमन एक लंबी सांस ली और बिना एक शब्द कहे इच्छा से उसका विचार मान लिया । जब वो अपने कमरे में पहुंचा सवा ग्यारह बज चुके थे । वह अपने बिस्तर में लेते हुए कुछ समय बिताना चाहता था इसलिए उसके खुद को बिस्तर पर डाल दिया और तब खुद को नींद की बाहों में जाने के लिए तैयार करने के लिए एक मैग्जीन के पन्ने पर रखने लगा । लंच के समय प्रिया युगल प्रेमियों से भरा था और अमर ठीक शालिनी के सामने बैठा हुआ था । वो उस का साथ पाकर बहुत खुश थी और वो अपनी गतिविधियों से उसे जितना ज्यादा वो कर सकती थी उतना ज्यादा खुश करना चाहती थी । इसलिए उसने उसकी पढाई, परिवार और परिवार के दूसरे सदस्यों से संबंधित हर तरह के सवाल पूछे । वह पहले ही उसकी पसंद और ना पसंद के बारे में पूछ चुकी थी और उसके अनुसार उसने खुद को ढालने की कोशिश की । आश्चर्यजनक रूप से बिना किसी हिचकिचाहट के अमर ने मासूमियत से उत्तर दिया जो कि वह जानना चाहती थी । हालांकि वो इन सब चीजों के पीछे छिपे इरादे को जानता था । वो केवल ये निश्चित करने के लिए चुप था कि क्या करना चाहिए । जब वेटर शाकाहारी खाने के साथ आया और इसे दोनों को भरोसा तो यह देखकर आश्चर्यचकित था क्योंकि वो अच्छी तरह से जानता था कि वह मांसाहारी थी और उसका धर्म शाकाहारी खाने को कोई महत्व नहीं देता था । इसलिए वो अपने उत्सकता को दबा नहीं सका और जोर से बोला क्या तुम वास्तव में शाकाहारी भोजन होगी? हाँ मैं होंगी और तो नहीं जान करा । आश्चर्य होगा कि आज से मैं तुम्हारी तरह शाकाहारी बन जाऊंगी । उसने बिना डरे घोषणा की अमर उसे मूक बना देखता रहा और उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया । दूसरी तरफ उसने भी उसके इच्छानुसार अपना हाथ ढीला रखा । रेस्ट से बाहर आने के बाद शालिनी बहुत खुश दिखाई दे रही थी क्योंकि वह कार बहुत तीस तथा सुखद मोड में चला रही थी । उसकी नाक पर काला चश्मा और उसकी डी ले तथा अच्छी तरह शैम्पू किए हुए बाल जो महासागर की लहरों की तरफ उठे और गिर रहे थे, उसकी सुंदरता को बढा रहे थे । अमर ठीक उसके बगल में बैठा हुआ था और दुविधा में था कि क्या उसे जो भाग्य प्रदान करने जा रहा था उसी स्वीकार कर लेना चाहिए या फिर स्पष्टता इसे मना कर देना चाहिए । अचानक कार्य झटके के साथ रुक गई और अमर अपनी सामान्य स्थिति में आया । उसने देखा कि काश चर्च के गेट पर खडी थी और शालिनी आग्रह की दृष्टि के साथ उसकी तरफ देख रही थी । प्लीज इंतजार करो, मैं थोडी देर में चर्च से आ रही हूँ, लेकिन क्या तो किसी दिल पर लोगी, अगर मैं तुम्हारे साथ चलो तो । अमर ने कहा ये सुनकर वह कार से नीचे उतरते उतरते रुक गई और उसकी तरफ आश्चर्य से देखा । उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ क्योंकि उसने उससे सुना था लेकिन आप हिन्दू हो । उसने उत्साहपूर्वक कहा मैं पहले मनुष्य हूँ । उसके बाद हिंदू उसने उत्तर दिया । शालिनी ने तब अपना हाथों से देने के लिए आगे बढाया और कार से उतर गई । चेस खाली था । वो प्रार्थना का समय नहीं था इसलिए वो इशू के सामने खडी हुई और उसे उस उपहार के धन्यवाद दिया जो उसने उसे दिया था । उसका प्यार अमर प्रार्थना पूरी करने के बाद वह बडी और देखा कि अमर ठीक उसके बगल में खडा था । वो आनंदपूर्वक उसे देख रही थी जो कि अपनी आंखे बंद किए ध्यानमग्न था । शायद वो भी ईश्वर की उसके प्रति बक्शीश के लिए उसको धन्यवाद दे रहा था । तब दोनों चढ से बाहर आए और चुप चाप कार की तरफ चलने लगे । जब शालिनी ड्रॉइंग सीट पर बैठ गई । उसने देखा कि अमन ने पहले ही उसके बगल में अपनी सीट ले ली है और कौन सी चेहरे पर बहुत सारे मिश्रित भावली सामने की तरफ देख रहा था । वो कार स्टार्ट करने ही वाली थी लेकिन अचानक उसने अपना विचार बदल दिया । अमर की तरफ देखा और अपना हाथ उसके कंधे पलट दिया । ये उसकी कल्पना की दुनिया को तोडने के लिए काफी था । उसने उसकी तरफ देखा और उसकी आंखों का भाव पडा जिसमें उसको उसके आलिंगन में रखने के लिए प्रेरित किया और उसने तब वैसा करने में संकोच नहीं किया । फिर दोनों ने एक दूसरे को उस स्टोरी का समाप्त करने के लिए खींच लिया जो उनके बीच थी । अमर अचानक उठा और देखा कि उसे तकिये को अपनी बाहों में ले लिया है । उसके चेहरे पर पसीने की बोलती थी और वह प्यासा महसूस कर रहा था । वो कुछ देर तक छत की तरफ देखता रहा और फिर पानी पीने के लिए उठ गया । उसने अपनी उत्तेजना को समाप्त करने के लिए तथा सामान्य महसूस करने के लिए दो गिलास पानी लिया । अचानक उसके चेहरे के भाव में बदलाव लाया और अपने बिस्तर पर जाने की बजाय अपने बीस के इस की तरफ चल गया और छोटी कमरे की कॉर्नल में पडा हुआ था । इसके अलावा वहाँ कुछ किताबे थी । उसने तब ब्रीफकेस खोला । इसकी तली से एक पासपोर्ट साइज फोटो निकाला और इसे अपने होटों तक लगाया । लेकिन अचानक ही वो अपने होटल उस पर लगते रखते रुक गया । उसने केवल कुछ देर के लिए अपनी आंखों के सामने रखा । धीरे धीरे उससे अपने चेहरे पर घृणा का भाव लाते हुए अपनी आंखे बंद कर ली और फुसफुसाया, तुम एक धोखेबाज हो । रोहिणी एक धोखेबाज क्यों?

प्यार की वो कहानी अध्याय -12

अध्याय बारहा उसे उससे मिले हुए तीन महीने बीत गए थे । वास्तव में उसके काम में उसकी व्यवस्था और आईएएस की परीक्षा की तैयारी ने उसे उससे बातें करने के लिए समय निकालने की अनुमति नहीं दी । कभी कभी वे रास्ते में मिल लेते थे लेकिन हेलो या हाई के अतिरिक्त ज्यादा बात ही नहीं करते थे । अमर किसी भी तरह से चयनित होना चाहता था ताकि उसका सपना सच हो जाए । लेकिन कभी कभी रोहिणी का चेहरा उसे उसकी किताब के पन्ने पर दिखाई देता था जो उसे उसके बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता था और उसके चेहरे के बाद कभी कभी बाहर शालिनी का चेहरा दिखाई देता था जो उस की कठोरता के लिए चला था । लेकिन वह साहस के साथ इन सब समस्याओं को सहन करता और उन्हें अपनी पढाई में बाधा नहीं बनने देता हूँ । पारंपरिक परीक्षा के दिन उस जल्दी उठा और भगवान से परीक्षा में अपनी सफलता के लिए प्रार्थना करने के लिए मंदिर गया । जब परीक्षा केंद्र पर पहुंचा उसने एक बडी संख्या में छात्रों को देखा जो कि उस से पहले ही पहुंच चुके थे और वे अपने मित्रों से बातें कर रहे थे । केवल वही भीड में अकेला था । वहाँ उसके परिचितों में से कोई भी नहीं था । परीक्षा कक्ष में उसने देखा की सवाल ज्यादा कठिन नहीं थे और परीक्षा के अंत में वो मुख्य परीक्षा में चयन के प्रति बहुत आशावान था । जब खुशी से परीक्षा कक्ष से बाहर आ रहा था उसने परिसर के बाहर मैदान में बहुत खडे कुछ लोगों को देखा । वे अपने साथियों की प्रतीक्षा कर रहे थे लेकिन उसने उनमें कोई रूचि नहीं नहीं क्योंकि उसे अच्छी तरह पता था कि उसके लिए कोई इंतजार नहीं कर रहा होगा इसलिए वह मुख्यद्वार की तरफ बढने लगा । उसने मुश्किल से कुछ दूरी तय की होगी क्योंकि उसने किसी को अपना नाम पुकारते हुए सुना वो उस व्यक्ति को देखने के लिए पीछे थोडा और ये ठीक कर दुविधा में था कि शालिनी थी जो कि उस की तरफ उत्साहित होकर दूर से आ रही थी और उसको आगे चलने से रोकने के लिए बार बार उसका नाम पुकार रही थी इसलिए वह वही रुक गया और उसके उस तक पहुंचने का इंतजार किया । जब उसके पास पहुंची वो हाफ रही थी और अपनी सास को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थी । अच्छी बात है तुम भी इस केंद्र पर परीक्षा दे रहे थे । उसने कहा, अमर उससे सहमत हुआ और उसे उसके साथ एक कप कॉफी लेने की पेशकश की । कैंटीन की तरह भरते हुए उन्होंने परीक्षा में पूछे गए सवालों पर चर्चा की । शालिनी का पहला मौका था जबकि अमर दूसरी बार इसमें सम्मिलित हुआ था । इसलिए अपनी वरिष्ठता दिखाने के लिए उसने उसे परीक्षा में बेहतर करने के लिए कुछ तकनीकी और नियम बताने शुरू कर दिए और उत्साह से उन्हें सुन रही थी । अगले दिन जब ऑफिस पहुंचा, बॉस के उसे बुलाया और इसलिए उसके तनाव को बढा दिया । वो नहीं समझ सका कि वह से क्यों मिलना चाहते थे जबकि वो पिछले दो दिनों से छुट्टी पर था । जब उसने ऑफिस में प्रवेश किया तो देखा कि वह कंप्यूटर पर कुछ काम करने में व्यस्त थे । उसने एक्शन के लिए दरवाजे पर इंतजार किया और पूछा, क्या मैं अंदर आ सकता हूँ? सर कंप्यूटर में अपना ध्यान हटाए बगैर बहुत से कहाँ अंदर आओ? अमर वो ऑफिस में घुसा पर उन्हें सुनने के लिए टेस्ट के सामने खडे होकर इंतजार करने लगा । प्लीस बैठ जाऊँ । बॉस ने कहा और कंप्यूटर पर काम करना छोड दिया । तुम्हारी परीक्षा कैसी थी? बॉस ने पूछा तो पहले तो उन्हें उत्तर देने में हिचकिचाया लेकिन जल्दी उसे खुद को नियंत्रित करते हुए जवाब दिया कि ये अच्छी थी और वो एक अच्छे परिणाम के प्रति आशान्वित था । लेकिन तो मुझे पहले बताना चाहिए था मैंने तुम्हारे लिए कुछ किया है । पहुंचने सलाह दी मुझे अफसोस है सर ये काफी नहीं है तो उन्हें सजा माननी ही पडेगी और सजा ये है कि तुम्हें केवल पांच दिन ही ऑफिस अटेंड करना होगा । मेरा मतलब है तो मेरी तरफ से तुम्हारी तैयारी के लिए एक दिन मिलेगा । धन्यवाद सर और उन्होंने कहना जारी रखा तुम्हारे वेतन में भी एक हजार वृद्धि होगी । इस समय अमन में उन्हें धन्यवाद नहीं किया । उसने केवल आश्चर्य से उनकी तरफ देखा । ये सत्य है अमल मैं जीवन में तुम्हारे इरादे और साहसिक कदम के बारे में जानकर बहुत खुश हूँ । अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कडी मेहनत करो । मेरा शुरुआत तो हमेशा तुम्हारे साथ है । जब कभी भी तो में मेरे सहयोग की जरूरत पडी तो मेरे पास बिना संकोच के आया करो । धन्यवाद आपको बहुत बहुत धन्यवाद सर । अमर ने भावुक होकर कहा और जाने के लिए खडा हो गया । बहुत से मिले प्रोत्साहन ने उस पर जादुई असर किया । उसने और ध्यान से अपनी पढाई करना आरंभ कर दी । एक दिन जब तैयारी के लिए पढने में व्यस्त था, उसे दरवाजे पर दस्तक सुनी । अनिच्छा से वो दरवाजा खोलने के लिए उठा और जब उसने इसे खोला तो शालिनी को वहाँ खडा देखकर आश्चर्यचकित था । अत्यधिक आश्चर्य के कार्य वो ये निश्चित करने में असमर्थ था कि उससे क्या कहे । वो वहाँ उसकी प्रतिक्रिया के इंतजार में खडी थी । लेकिन उसने देखा की वो एक भूत की भारतीय खडा था । इसलिए ये वो थी जिसने पहले बात शुरू करें तो मुझे अंदर आने के लिए नहीं कहोगे । ये सुनकर अमर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसकी घबराते हुए कहा, हाँ क्यों नहीं अंदर आओ, कृपया अंदर आओ । शालिनी उसकी हरकत पर मुस्कुराई । हर कमरे में प्रवेश किया । कमरे खराब ढंग से सुसज्जित था । नंगी दीवार बदसूरत लग रही थी । केवल एक पंखा क्योंकि बहुत पुराना था । सिर के ऊपर धीरे धीरे ऐसा चल रहा था । मानव इसके पुराने होने के कारण अपनी सारी शक्ति खो दी है । अमर शर्मिंदा महसूस कर रहा था क्योंकि उसकी कमरे में उसे बैठने देने के लिए कोई अतिरिक्त कुर्सी नहीं थी । उसका पलंग जिस पर एक बहुत साधारण चादर बिछी थी, एक मात्र जगह थी जहां वो उसे बैठा सकता था । लेकिन वो इतना साहसी नहीं था कि उसे बैठने के लिए उस स्थान की पेशकश कर सके । शालिनी ये समझ गई और बिना किसी संकोच की उसके पलंग पर बैठ गई और तब उसने उससे भी बैठने के लिए कहा । अमर हिचकी जाया लेकिन उसे उसके आज्ञा का पालन करना पडा । थोडी देर के लिए बैठा लेकिन फिर दोबारा खडा हो गया । ये कहकर की प्रभावी के पास से आ रहा था । लेकिन भाभी घर पर नहीं है । मैं पहले वहाँ गई थी । उसने उत्तर दिया तब अमर दोबारा बैठ गया । वो उसे अच्छा अतिथियां देने में अपनी असमर्थता पर बहुत दुखी दिखाई दे रहा था । क्या तो मेरे यहाँ आने से खुश नहीं हूँ । शालिनी ने पूछा नहीं नहीं हरगिज नहीं । उससे तुरंत जवाब दिया तब तो दुखी और घबराए में क्यों दिख रहे हो? उसका दूसरा सवाल था वास्तव में मैंने तुम्हारे अचानक आने की आशा नहीं की थी या मैं या तुम ने क्या किया है? मुझे कोई समस्या नहीं है । तब तो मैं क्यों है? उसने स्वयं को थोडा सा पैसे नहीं दिखाते हुए कहा । तब कमरे में चुप्पी छा गई और दोनों एक दूसरे के प्रति बिना किसी उत्सुकता दिखाए बैठे थे । लेकिन कुछ मिनट बाद शालिनी ने पूछा क्या तुम मेरे हानि का कारण ही पूछ हो गए? वहाँ क्यों नहीं? लेकिन वास्तव में मैं ये देखने आई हूँ कि तुम कैसे रहते हो । मेरे विचार से कमरा तुम्हारे लिए उपयुक्त नहीं है तो अपना कमरा क्यों बदल लेते? नहीं शालिनी तुम गलत हो तो मेरे लिए इस कमरे का मूल्य नहीं मांग सकती । मैं कमलेश का बहुत आभारी हूँ इसलिए मैंने उससे दूर नहीं रह सकता हूँ । उस ने मेरी बहुत चाहता की और अब मुझे नौकरी मिल गई हैं और मैं अच्छी स्थिति में पहुंच गया हूँ । मैं उसे और उसके परिवार को कैसे छोड सकता हूँ । इसके अतिरिक्त उनकी पत्नी मुझ पर ऐसे प्यार बस आती है जैसे कि मैं उन का सगा देवर हो । उसने बहुत भावुक होते हुए कहा की वो उनके बिना रहने में समर्थ नहीं हो पायेगा । शालिनी को लगा कि शायद उसने उसे चोट पहुंचाई है लेकिन उसी समय उनके प्रति उसका आदर और सम्मान समझ गई । ये सुनकर उसने अतीत में प्रशंसा की तुलना में उसकी और अधिक प्रशंसा करनी शुरू कर दी । इसलिए वह कमरे में एक बार फिर सामान्य स्थिति लाने के लिए अपनी बातचीत का विषय बदलना चाहती थी इसलिए उसने पूछा आप की तैयारी कैसी चल रही है? ये अच्छी चल रही हैं । उस ने उत्तर दिया, क्या मैं तुम्हारे इतिहास के नोट्स देख सकती हूँ? क्यों नहीं तो देख सकती हूँ । उसने उत्साह से जवाब दिया और उसके सामने एक नोटबुक लाया । उसने खुशी से इसीलिए लिया और इसके पन्ने परक्या लगी । लेकिन केवल दो पन्ने पर लगने के बाद रुकी और बडे अक्षरों में लेकिन लाइन को पढना शुरू कर दिया । आदमी प्रस्ताव करता है लेकिन भगवान निपटता है ये देख कर उसे पन्ने पलट ना बंद कर दिया । तब अमर ने पूछा क्या हुआ? शालिनी उत्तर नहीं दिया लेकिन पेज को उसके सामने कर दिया । इससे पडने के बाद अमर मुस्कुराया और कहा वो इसलिए तुम्हें रोका उसके सवाल के लिए कुछ भी कहने की बजाय उसने उससे पूछा कि तुम भाग्य में विश्वास करते हो? हाँ मैं करता हूँ क्योंकि कभी कभी जो आदमी के साथ घटित होता है, आशा से परे होता है । हमारा काम है सोचना और करना लेकिन परिणाम भगवान की इच्छा पर निर्भर करता है । मेरे विचार से तो बहुत हद तक सही हो लेकिन इसे छोडो शालिनी कॅश लेना पसंद करो कि मेरे कमरे में यही एकमात्र खाने योग्य वस्तु हैं क्यों? मैं तो मैं पेश कर सकता हूँ क्या कुछ लेना आवश्यक हैं? हाँ ये हैं क्योंकि हमारी संस्कृति में उस व्यक्ति को कुछ खाने योग्य विशेषता है । मिठाई देने का निवास है जो पहली बार हमारे यहाँ आता है और तुम मेरे कमरे में पहली बार आई हूँ । ओके तभी खुशी से होंगी । उसने उत्तर दिया । उन्होंने चॉकलेट खाने समाप्त भी नहीं की थी की भावी दरवाजे पर आ गयी । शालिनी ने सम्मान के साथ उनका अभिवादन किया और वे दोनों भाभी के साथ उनके घर में चले गए । जब शालिनी चली गयी भाभी ने अमर को बताया तो बहुत भाग्यशाली हो तो शालिनी जैसा प्यार मिला है । वो तो बहुत प्यार करती है । अमर अमर ने उनकी सलाह को सहमती देने के लिए से खेल आया लेकिन उसके चेहरे से ये साफ दिख रहा था कि वह इतना खुश नहीं था जितना होना चाहिए । वो कुछ ऐसी चीज के बारे में सोच रहा था जो भाभी को नहीं पता थी । उन्होंने शालिनी कि प्यार के बारे में उसके इरादे को जानने के लिए उसकी तरफ देखा लेकिन वो अपने दिल की बात को उनके सामने प्रकट करने के लिए तैयार नहीं था । उसने सकती से मना कर दिया जैसे कि उसमें कुछ ऐसा था जो उसे ना खुश कर रहा था । समय बीत रहा था और दिन प्रतिदिन अमर के प्रति शालिनी का झुकाव त्रीव से ट्रीट होता जा रहा था । जितना अधिक वो अमर के निकट आने की कोशिश करती उतना ही वो उससे दूरी बनाने की कोशिश कर रहा था । कभी कभी वो इसका अंदाजा लगा लेती लेकिन वो इसे ये सोचकर अनदेखा कर देती थी कि शायद उसकी एक अमीर परिवार से होने के कार्य अमर को उस पर विश्वास नहीं था । वो अपने पिता की सारी जायदाद की उत्तर अधिकारी थी इसलिए वो उस परिवार की संपत्ति को उतना महत्व नहीं देती थी जहाँ उसे दुल्हन बनकर जाना था । दूसरी तरफ अमर कुछ तो उसे प्यार का सहारा देने में इसलिए सक्षम नहीं था क्योंकि वो एक बहुत धनवान परिवार से बडी हुई थी । इसलिए उसे मध्यमवर्गीय परिवार की समस्याओं का कोई अनुभव नहीं था और कुछ इसलिए क्योंकि वह से अपने दिल में जगह देना नहीं चाहता था जो उसने एक बार रोहिनी को दे दी थी । इन सब से ऊपर रोहिणी कि उसे धोखे देने के बाद उसे प्यार में कोई विश्वास नहीं रह गया था । लेकिन वास्तविकता ये थी कि रोहिणी की याद को उसके दिल से निकालने के कई प्रयास करने के बाद भी उस की याद उसे तंग करती थी जबकि वो फुर्सत में होता था और उस समय वह भूल जाता था कि रोहिणी ने उसके साथ कैसा व्यवहार किया और अपनी समृति में उसकी प्रशंसा करना शुरू कर देता । हालांकि उसे अपने मूल शहर को छोडे हुए तीन साल से ज्यादा बीत गए थे और तब से वो उसे भूलने की कोशिश कर रहा था लेकिन सफल नहीं हो सका और जब कभी भी वो उसके सपनों में आपकी अगले दिन वो बेहतर महसूस नहीं करता था लेकिन उसने उसके बारे में कभी किसी से कोई बात नहीं कही ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -13

अध्याय तेरह सुबह से हमें ठीक महसूस नहीं कर रहा था । एक बार उसने ऑफिस नहीं जाने का सोचा लेकिन जल्दी उससे अपना इरादा बदल दिया और अन्य अच्छा से खुद को ऑफिस जाने के लिए तैयार करना शुरू कर दिया । जब ऑफिस पहुंचा उसने देखा कि वहाँ चारों और असामान्य मौत था । प्रतिशत घटनाओं के संध्या के साथ उसे ऑफिस में प्रवेश किया और महसूस किया कि उसके सहकर्मी अपने काम के दौरान चुके थे और जिस शरण उन्होंने उसे देखा उनकी आंखों में आश्चर्य था । लेकिन उसने उनसे कुछ नहीं पूछा । वो सीधे बॉस के ऑफिस में गया । ऑफिस खाली था । बॉस वहाँ नहीं थी । तब चपरासी से मिला जो वहाँ उपस् थित नहीं था । लेकिन जब उसने देखा तो दो हफ्ता हुआ । उसके पास आया की अभी तक बॉस नहीं आए है । रामलाल उसने अधीरता से पूछा हाँ वे आए हैं लेकिन क्या हुआ? उसने और अधीरता से पूछा सर शालिनी मैडम का यूनिवर्सिटी जाते हुए एक्सीडेंट हो गया? क्या वो कहाँ है अच्छे अस्पताल में क्या? ड्राइवर यहाँ खासकर वो आपका इंतजार कर रहा है? अमर अभी भी अपनी कार में बैठा हुआ था जबकि ड्राइवर ने उसे ये कहते हुए चौकाया सर अब अस्पताल पहुंच गए हैं । उसके सामान्य अवस्था में आते हुए कहा जब आपातकालीन कक्ष पहुंचे जहां शालिनी भरती थी, उसने उसके पिता को उसके मित्रों तथा रिश्तेदारों के साथ देखा । वो वहाँ चुपचाप खडे थे । जब उन्होंने उसे देखा तो उनकी आंखों में आशा की किरण चमक उठी और वो उसकी तरफ पडे । अमर भी तीस कदमों के साथ उनकी तरफ पढा लेकिन दोनों ने एक दूसरे से एक शब्द भी नहीं कहा । अमर ने पहली बार अपने बॉस की आंखों में आंसू देखे वो भी भावुक हो गया लेकिन उसने खुद को नियंत्रित किया और चुप चाप उन्नीस सांत्वाना दी । डॉक्टर उसका इलाज करने के लिए ऑपरेशन थिएटर में व्यस्त थे और इसके बाहर असहाय लोग डॉक्टर को उनके प्रयास में सफल होने के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे । एक घंटे बाद ऑपरेशन थिएटर का दरवाजा खुला और उसमें से एक डॉक्टर बाहर आया । उसका चेहरा सफलता की खुशी से चमक रहा था इसलिए कुछ व्यक्ति ऑपरेशन का परिणाम जानने के लिए तेजी से उसकी तरफ पडे । वह खतरे से बाहर है लेकिन तो आप समय से अमर कौन है? डॉक्टर ने उत्सुकता से पूछा जब मैंने अपना नाम सुना तो आश्चर्यपूर्वक डॉक्टर के पास गया और कहा मैं अमर हूँ । डॉक्टर ने उसे ऊपर से नीचे तक देखा और तब अपना हाथ उसकी कंधे पर रख दिया । अमर ने को धूल से उसे देखा तो भाग्यशाली हो और तुम सबसे पहले उसे मिलने जाओगे जब वह होश में आएगी । डॉक्टर ने कहा, और चला गया जब अमर नौ कक्ष में प्रवेश किया । उसने देखा कि शालिनी उस दरवाजे की तरफ देख रही थी जहां से अमर आ रहा था । शायद वो उसके आने का इंतजार कर रही थी । वो उसके पास गया और उसकी बगल में बैठ गया । उसे देख कर उसके चेहरे के भाव में एक ताजगी आ गई । उसने आज सफलतापूर्वक मुस्कुराएं की कोशिश की । अब मैंने इसे महसूस किया लेकिन कुछ भी नहीं कह सका । वास्तव में वो इतना ज्यादा भावुक हो गया कि वह एक शब्द कहने में असमर्थ था । मैंने तुम सब को परेशान किया । उसने कुछ लेकिन बाद कहा, नहीं ये भगवान की कृपा है । हम उसके हाथों की कठपुतली है । लेकिन तुम गाडी चलने में बहुत निब्रो हो । तब कैसे? वास्तव में मैं सुबह से बहुत खुश थी क्योंकि गर्मियों की छुट्टियों से पहले का अंतिम दिन था । इसलिए गाडी चलाते हुए मैं थोडी सी कल्पना में हो गई और तभी अचानक मुझे अपने सामने ट्रक दिखाई दिया और टक्कर से बचने के लिए मैंने अचानक अपनी कारबोरी और पांच की पेड से जा टकराई क्योंकि सडक के किनारे खडा था । उसने समझाया एक ड्राइवर को या फिर अपना ध्यान रखो, उसके उस पर अधिकार की भावना के साथ सलाह दी । वो ये सुनकर मुस्कुराई और जोर से बोली क्या तो मेरा ड्राइवर बनना पसंद करोगे? अमर ऐसे सवाल का सामना करने के लिए तैयार नहीं था इसलिए उसने कुछ सेकेंड बाद उसे उत्तर दिया । हाँ, यदि केवल बहुत सा गया देखो तब तक दोनों खुल के मुस्कुराए । उस रात अमर ठीक से नहीं हो सका । उसने पाया कि वह जादुई रूप से शालिनी की तरफ खींचा जा रहा था और वो ऐसा कभी नहीं चाहता था । उसे लगता था कि वह धीरे धीरे उसकी भावनाओं को मजबूत बना रही थी और वो अपने ऊपर नियंत्रण हो रहा था । उस दिन जब उसने उसके एक्सीडेंट की खबर सुनी । वह बहुत ज्यादा खबर आ गया था । क्यों उसने खुद से पूछा और तब उसे उत्तर मिला कि ऐसा उसके प्रति उसके है दिया में प्यार के कारण था । ऑफिस में जब उसने शालिनी के एक्सचेंड के बारे में सुना तो उसके चेहरे का भाव तेजी से बदल गया और उसके खुद को नियंत्रित करने की कोशिश करते हुए भी वह सामान्य स्थिति नहीं बनाए रख सका । इसलिए वहाँ उपस्थित हर कोई इसे समझ का क्या था? क्या ये उसके प्रति उसका प्यार था? यदि नहीं तो क्या था? वो उस तरह घबराया क्यों? ये सारे सवाल उसके सामने अनुतरित थे । हालांकि उस शालिनी को नाखुश नहीं करना चाहता था । उसने वास्तव में कभी उसे प्यार करने के बारे में नहीं सोचा तो समाज में अपना स्थान और अपनी सीमा जानता था । लेकिन वहाँ एक अजीब सबल था जो कि उसे इच्छा से सिरकार करने को बाध्य कर रहा था । की दिन प्रतिदिन शालिनी का प्यार उसके दिमाग में गहरे फिर गहरा होता जा रहा था और रोहिणी कि याद चीन पडती जा रही थी । जब उसने शालिनी के साथ उसके प्यार की तुलना कि तो उसने शालिनी के प्यार को ज्यादा महत्व देना शुरू कर दिया और वो एक तरह से इसके लायक भी थी क्योंकि रोहिणी ने उसे छोड दिया था और उसके प्यार का सम्मान नहीं किया था । जबकि शालिनी ने समाज में अपनी स्थिति के बारे में सोचे बिना उसी प्यार करना शुरू कर दिया था । उसने उसे उससे कहीं ज्यादा सम्मान और आदर देना शुरू कर दिया था जितना कि वास्तव में लायक था । सुबह के समय जब ऑफिस पहुंचा चपरासी ने उसे सूचित किया कि बॉस उसका इंतजार कर रहे थे इसलिए वो ऑफिस में अपने बहुत से मिलने तथा उसका इंतजार करने के कारण के बारे में जानने के लिए गया । जब ऑफिस में घुसा उसने देखा कि उसके बॉस एक मैक्सिन पड रहे थे और बहुत पैसे नहीं थे । ब्लॅक उन्होंने मैक्सीन से अपना ध्यान हटाए बिना ही कहा । तब अमर बैठ गया और उनकी सवाल का इंतजार करने लगा । उसके अंदर तनाव बढता जा रहा था और वह ये सोचने में असमर्थ था कि वे किस विषय पर बात करने जा रहे थे । अमर उन्होंने कुछ चेकिंग बात कहा, तुम्हारे कितने भाई हैं? मैं कोई भाई नहीं है सर मेरी एक बहन है जो शादीशुदा है । उसने उत्तर दिया, क्या तुम दिल्ली में स्थायी रूप से बस जाओगे? ये अपने मूल शहर को लौटोगे । मैंने अभी तक नीचे नहीं किया है सर । लेकिन ये भी तो में उस तरह का अवसर मिले तो उन्होंने फिर से पूछा, वास्तव में मुझे अपने मूल शहर ज्यादा पसंद नहीं है । यदि मुझे मौका मिलता है तो मैं निश्चित रूप से, गहराई से और गंभीरता से इसके बारे में सोचूंगा तो मैं समझता हूँ । शालिनी परसो अस्पताल से आ रही है और वह चाहती है कि तुम वहाँ उसकी साथ रहूँ । यदि तुम्हें कोई समस्या नहीं है, हाँ मैं जाऊंगा सर । उसके उनका वाक्य पूरा करने से पहले ही प्रतिक्रिया की और बाहर जाने के लिए उठ खडा हुआ । जब वो अस्पताल पहुंचा उसने देखा कि उसके बॉस कुछ दूसरे कर्मचारियों के साथ वहाँ पहले से ही उपस् थित थे । शालिनी उनके साथ बहुत खुश और फ्रेश लग रही थी लेकिन जिस शहर उसने उसे देखा वो चाहे की और बहुत ज्यादा खुश और फ्रेश लगने लगी । जैसे की उसे वो मिल गया हो जिसकी वो कुछ देर से प्रतीक्षा कर रही थी । ऍम हेलो लेकिन तुम देर से आए हुआ अमर अमर ने अपनी घडी देखी और विनम्रता से बोला पांच मिनट देर से आने के लिए अफसोस है । तुम्हारी नजर में पांच मिनट का कोई महत्व नहीं है । इस अंतराल के दौरान एक देश को जीता जा सकता है, ऐसा नहीं हो सकता । डैडी हाँ, मेरे बेटे ऐसा हो सकता है । उन्होंने उसका समर्थन करते हुए कहा । तब वहाँ उपस्थित सब ने उसका समर्थन किया और अमर ने खुशी से अपनी गलती स्वीकार कर ली । उसके बाद शालिनी और अमर एक कार में बैठ गए और दूसरे लोग बॉस के साथ दूसरी कार्य में बैठ गए । अमर शालिनी के साथ पिछली सीट पर बैठा था और खिडकी से बाहर देख रहा था । अमर क्या तो मेरे साथ बैठकर खुश नहीं हो । उसने पूछा हाँ मैं हूँ फिर तुम बाहर क्यों देख रहे हूँ । उसने अपना अगला सवाल रखा, वास्तव में मैं ये देख रहा हूँ कि हम कैसे बिना कुछ सोचे चीजों को पीछे छोड रहे हैं । उस ने कहा यह प्रकृति का नियम है । हमें समय के अनुसार बहुत सारी चीजें पीछे छोडने पडती हैं और यदि हमें ऐसा नहीं करते हैं तो हम जीवन की दौड से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते हैं । उस ने गंभीरता से उत्तर दिया, वास्तव में जीवन एक दौड की तरह है । उसने सहमती जताई और इसके गंतव्य तक पहुंचना हमेशा ही दूर लगता है । नहीं तो मनुष्य हमेशा अतीत से ही जुडा रहेगा और वह भविष्य के बारे में नहीं जान पाएगा । उसने उसे और ज्यादा भरोसा दिलाने के लिए कहा । तब उसने उस से कुछ भी नहीं कहा और आगे देखने लगा । लेकिन उसका दिमाग उसके भविष्य की सोच उसके निर्णय और उसके डर से भरा हुआ था । वो अपना अतीत नहीं भूलना चाहता था । हालांकि ये उसके किसी काम का नहीं था । रोहिणी ने उसे धोखा दिया लेकिन वह अब भी उसे दिल से प्यार करता था । अब उसे विश्वास था कि वह से भूल गई है । उसे भरोसा था कि वह अब कभी उसे धोखा नहीं देगी । जो कुछ भी उसने किया वह स्थान के कारण था । जहाँ वो थी नहीं तो वो उसे भूल नहीं सकती थी । उस रात वो ठीक से नहीं हो सका । पूरी रात वो बिस्तर में करवटें बदलता रहा । जैसे की वो अपने भाग्य का एक बडा हिस्सा जोडे में हार गया हूँ । दो महीने की याद उसे तंग कर रही थी और टीवी चैन बना रही थी ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -14

अध्याय चौदह सुबह को जब अमर उठा उसके सिर में दर्द था क्योंकि वह देर से सोया था तो उठा भी देर से था तो अभी भी असमंजस में था कि क्या करना चाहिए? क्या उसे शाली का हाथ दृढता से धाम लेना चाहिए या नहीं । ये निश्चित था कि वह रोहिणी को पूरी तरह से नहीं भूल पाएगा और जब उसे रोहिणी के लिए उसके प्यार का पता चलेगा उसे ना पसंद करना शुरू कर देगी तो वो उसके प्रति आपने नि स्वार्थ प्यार की वास्तविकता को समझने में सक्षम नहीं होगा क्योंकि यह वह निर्णय करने में समर्थ नहीं था । ठीक क्या करना चाहिए? वो भाभी के पास ही विचार विमर्श करने के लिए गया कि उसे वास्तव में क्या करना चाहिए । जब दो बराबर महत्व की चीजें एक इंसान के सामने आती है, वो उनमें से एक कुछ नहीं में खुद को असमर्थ पाता है तो उस समय तीसरा व्यक्ति बेहतर न्यायाधीश होता है । भाभी अपना घरेलू काम करने में व्यस्त थी । जब उन्होंने उसे देखा वो थोडा सा आश्चर्यचकित हुई क्योंकि वो अभी तक ऑफिस जाने के लिए तैयार नहीं हुआ था । हालांकि कमलेश को गए हुए लगभग एक घंटा हो गया था कि आज तो ऑफिस नहीं जा रहे हो । उसने पूछा नहीं क्यों? क्या तुम ठीक नहीं हूँ? नहीं बहुत अस्वस्थ नहीं उसके उत्तर दिया और उसके चेहरे पर दुख छा गया जिसमे उनका संध्या बढा दिया लेकिन कुछ कारण तो होना चाहिए । उसने विश्वासपूर्वक कहा हाँ भाभी कारण है लेकिन मुझे ऐसे कहने में अपराधबोध महसूस हो रहा है क्यों? उसने उत्साहित होकर कहा वो तुम्हें और तुम्हारी भावना को भी चोट पहुंचा सकता है । तुमने मुझे सच बताए बिना इसका निर्णय कैसे कर लिया? ये सुनकर अमर चुप हो गया । वही निर्णय करने में असक्षम था कि कहाँ से शुरू करें । प्लीस थोडी देर के लिए बैठो, मैं चाय ली करा रही हूँ । उन्होंने कहा, और रसोई में चली गई जब वह तो कच्चा ही लेकर आई एक खुद के लिए तथा दूसरी अमर के लिए । उसने देखा की अमर पहले से ज्यादा विश्वस्त लग रहा था । उसे एक कप चाय देते हुए वह भी उसके सामने बैठ गई और उस से एक भी शब्द कहे बिना उसकी तरफ संदीप निगाह से देखा अमर ये समझ गया और अपने दिल में छुपी हुई चीजों का खुलासा करने के लिए अपना साहस एकत्रित किया । उसने शुरू किया कुछ साल पहले मेरी जिंदगी में एक लडकी थी और हम एक दूसरे को बचपन से प्यार करते थे । तब उसने एक मेडिकल कॉलेज जॉइन कर लिया और हम एक दूसरे से अलग हो गए । मैं उसके उज्ज्वल भविष्य को लेकर खुश था और वह दुखी थी क्योंकि मैं उसके साथ नहीं था । समय बीतता गया और समय के साथ मुझे भूलती गई । उसके दिल में मेरी जगह कोई दूसरा लडका गया । तुम्हें ये किस से मालूम? उसने बीच में टोकते हुए पूछा, एक बार मैं उसे मिलने गया लेकिन उसका व्यहवार पूरी तरह से बदला हुआ था और उसकी मित्र मुझे समझाया कि मुझे उसके लिए इतना भावुक नहीं होना चाहिए क्योंकि वह जल्दी एक डॉक्टर बन जाएगी । लेकिन मैं उस दिन से मेरी जिंदगी बदल गई । मेरे माता पिता ने इसे और मेरे नाखुश होने का कारण महसूस किया । इसलिए मेरी शादी करवाना चाहते थे । लेकिन मुझे उनका निर्णय पसंद नहीं आया क्योंकि मेरी जीवन का मरहम नहीं था और मुख्य कारण था कि क्यों एक दिन मैंने कुछ बनने के लिए अपना घर छोड दिया जिससे कि मैं उसे दिखा सकूँ । लेकिन यहाँ शालिनी मेरे जीवन में आई मुझे दिल से प्यार करने लगी । मैं उसे पूरी जिंदगी के लिए दुखी नहीं करना चाहता । मुझे मेरी दशा मालूम है और दूसरी तरफ बिल्कुल भी मुझे सुनने को तैयार नहीं है । उसने मानने के लिए जवाब दिया क्या तुम ने उस लडकी के बारे में बताया है? उन्होंने पूछा, नहीं मैंने अभी तक नहीं लेकिन नहीं अमर नहीं पीस । उसी इस बारे में कुछ मत कहना । उन्होंने सुझाव दिया जब दो विपरीतलिंगी अजनबी प्यार के धागे में बन जाते हैं, कोई उन्हें अलग नहीं कर सकता । लेकिन जिस शहर किसी के दिल में दूसरे के लिए शक पैदा हो जाता है, रिश्ते में भावना अचानक गायब हो जाती है, तब कोई उन्हें अलग होने से नहीं रोक सकता और उसके बाद कोई जिंदगी पश्चताप करते हैं । उन्होंने भावुक होते हैं । कहा मैं जानता हूँ अभी लेकिन मुझे क्या करना चाहिए तो उसके पिताजी से बात क्यों नहीं करते लेकिन बेटों में अच्छे सुझाव दे सकते हैं । मुझे साहस नहीं है भाभी उसने उत्तर दिया तब कमरे में शांति छा गई । दोनों कुछ देर तक शांत रहे । केवल चाय पीने की आवाज सुनाई दे रही थी । कुछ समय बाद अचानक अमन ने भाभी को पूछते हुए सुना, क्या तुम जानते हो रोहिणी कैसी है? नहीं? और मैंने इसके लिए कभी कोशिश भी नहीं । तब तुम घर क्यों नहीं चले जाते? तुम अपने माता पिता से शालिनी के लिए अनुमति ले लेना और इससे ज्यादा तो ये भी जान जाओगे कि रोहिणी कैसी है । उसने सलाह दी अमर को उनका सुझाव पसंद आया और अगले दिन उसने एक हफ्ते की छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र दे दिया जोकि मंजूर भी हो गया । अमर ये सोचते हुए अपना सामान पैक कर रहा था कि उसके माता पिता उससे किस रूप में मिलेंगे और उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी जब उन्हें पता लगेगा की वो एक ऐसी लडकी से शादी करने जा रहा था जो कि उसी समय उसने दरवाजे पर दस्तक सुनी है । वो ये सोचते हुए इसे खोलने गया की भावी उससे कुछ कहने आई होंगी । लेकिन दरवाजा खोलने पर उसने पाया की भावी अकेली नहीं थी । उनके साथ शालिनी थी । उसके चेहरे पर ये स्पष्ट था कि वह दुखी थी । इससे पहले की वह कुछ कह रहा था । भाभी ने बोलना शुरू कर दिया । मैं अपने काम में व्यस्त हूँ । मैं अभी वापस आ रही हूँ । इतना कहकर वो उन्हें छोड कर चले गए जिससे कि वे स्वतंत्रतापूर्वक पार्टी कर सके । अमर क्या तुम जा रहे हो हाँ लेकिन केवल एक हफ्ते के लिए उसने ऐसे उत्तर दिया जैसे कि वो उसकी सूचित ना करने की अपनी गलती को स्वीकार कर रहा था । लेकिन वो वास्तव में मैंने इतनी जल्दी में प्लान बनाया कि कुछ कारण से मैं तुम्हें नहीं बता सका । दूसरी तरफ मैं केवल एक हफ्ते के लिए जा रहा हूँ । अगले हफ्ते मैं यहाँ होगा । शालिनी कुछ देर के लिए उससे कुछ नहीं कह सकी । तब उसने पूछा क्या कारण है? अमर इस तरह के सवाल के लिए तैयार नहीं था । इसलिए वह हैरान था कि क्या उत्तर देते । कुछ मिनट के लिए वो उसकी तरफ मूक बना देखता रहा और तब उसने कहा मैं वापस आने पर तुम्हें हर बात बताऊंगा । शालिनी ने धैर्यपूर्वक इसे सुना और तब उसने एक पैकेट उसके हाथ में दे दिया की क्या है ये तुम्हारा डिनर है लेकिन प्लीस इसे रख लो । मेरे खुद ही से तुम्हारे लिए बनाया है उसे जवाब में एक शब्द कहे बिना उस से आग्रह किया । अमर ने इसे अपने खेले में रखा और अपनी घडी की तरफ देखा । तब उसने कहा, मुझे स्टेशन के लिए निकलना चाहिए तो क्या तुम जा सकते हो? उसने उत्तर दिया । दोनों तब कमरे से बाहर आए और देखा की भावी उनका इंतजार कर रही थी । उन्होंने भी उसके डिनर से भरा एक पैकेट से दिया । उसे इसीलिए लिया और ये कहते हुए उनका अभिवादन किया कि वह निश्चित रूप से अगले हफ्ते लौटाएगा क्योंकि कमलेश घर पर नहीं था । उसे अकेले ही स्टेशन जाना पडा । लेकिन जब वे गेट पर पहुंचे शालिनी ने पूछा अमर क्या तो मुझे तुम्हारे साथ स्टेशन तक आने की अनुमति दोगे लेकिन तुम्हारे पिताजी मैंने पहले ही उनकी आज्ञा लिए ली है । ठीक है तब ये मेरे लिए सुखद होगा । देश ये सुनकर शालिनी का जहरा खेल गया और वो उसके साथ अपनी कार तक गयी । स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक भीड थी इसलिए प्लेटफॉर्म पर खडे होकर ट्रेन का इंतजार करने लगे । अमर ये निश्चित करने में सक्षम नहीं था कि उससे क्या कहे । दूसरी तरफ शालिनी भी सोच में थी कि उससे क्या कहें । लेकिन इससे पहले कि वे बातें करना शुरू करते ये घोषणा सुनाई दी । ट्रेन समय पर थी और फ्लाइट ट्रंपर कुछ ही मिनट में पहुंचने वाली थी । यात्रियों ने उत्साहित होकर इधर उधर जाना शुरू कर दिया । अमर भी थोडा सा आगे बढा और उसके पीछे शालिनी शालिनी क्या तुम्हें पता है मुझे सारी रात ट्रेन में बितानी है तो अपना डिनर ठीक समय पर ले जाना । उसने उसके सवाल को अनदेखा करते हुए सुझाव दिया तो पहले होगा । उस समय तक ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंच गई थी और अमर आपने डिब्बे को ढूंढने लगा । जब वो डिब्बे में चढ रहा था, शालिनी ने उसका हाथ खींच लिया । वो तब मोडा और उसकी तरफ आश्चर्य से देखा । मैं तुम्हारा इंतजार करेंगे । उसने भर्राई आवाज में कहा मैं अवश्य ही इतना कहकर वो डिब्बे में चढ गया ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -15

अध्याय पंद्रह अचानक मैंने अपनी आंखें खोली क्योंकि ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने की आवाज ही उसे जगह दिया । उसने देखा कि ग्रीन पहुंच चुकी थी । ट्रेन सुबह बहुत जल्दी ही दिल्ली पहुंच गई थी । हर चीज आमदिनों की डर रही थी । व्यस्त सडके, भीड भरी दुकानें और क्या दी अमर नी अपने कमरे तक पहुंचने के लिए एक बस और रास्ते भर बहुत बहुत ज्यादा उत्साहित था लेकिन उसका उत्साह खत्म हो गया । जब वहां पहुंचा जिस क्षण भावी ने उसे देखा उन्होंने पहली बार में ही ये कहते हुए अपना दुख प्रकट कर दिया कि वह बहुत देरी से आया और इस से वो आश्चर्यचकित हुआ । कमरे में घुसने से पहले उसने उनसे पूछा कि सब कुछ ठीक था? हाँ सब ठीक है लेकिन उन्होंने एक कमजोर आवाज में उत्तर दिया क्या हुवा भावी बीस मुझे बताओ? उसने जो डालकर कहा मैं तुम्हें सबकुछ बताउंगी । पहले तुम फ्रेश हो जाओ और हमारे साथ एक कप चाय के लिया हो । उन्होंने कहा, और चली गई जब कुछ देर बाद वहां पहुंचा । उसने देखा कि कमलेश ऑफिस जाने के लिए तैयार था । उन्होंने एक दूसरे का अभिवादन किया और चाय के इंतजार में बैठ गए । कमलेश के चेहरे पर उसके बारे में कुछ जानने की कोई उत्सुकता नहीं थी । उसने चुपचाप अपनी चाय पी और ऑफिस जाने के लिए उसकी अनुमति ली । नहीं । दो से देरी हो जाएगी । अमेरिकी उनसे कुछ नहीं कहा और उन्हें जाने दिया । कुछ समय बाद भावी वहाँ फिर आई लेकिन वो भी उसके आने पर खुश नहीं थी । भाभी क्या कृप्या मुझे बताएंगे कि मेरी अनुपस्थिति में क्या हुआ? उसने अधीरता से पूछा, शालिनी की शादी हो गई । उन्होंने उत्तर दिया क्या? हाँ उसने तुम्हारा बहुत इंतजार किया । मैंने भी तो लिखा लेकिन तुमने उत्तर नहीं दिया । ना ही तुम्हें फोन किया नहीं । मैंने कुछ नहीं किया । उसने स्तब्ध होकर कहा, मुश्किल से एक हफ्ता बीता होगा । जब शालिनी मेरे पास आई । वो बहुत दुखी थी और मुझे देखकर रोने लगी । मैंने कारण पूछा तो और बुरी तरह से रोने लगी और मुझे बताया कि उसके पिता का एक एक्सीडेंट हो गया था और उनकी स्थिति अच्छी नहीं थी । मैं उसके साथ उसके पिता को देखने गई जो बेहोशी की अवस्था में थी । मुझे वास्तव में बहुत अफ्सोस हुआ । घर आकर मैंने तुम्हें पत्र लिखा क्योंकि मेरे पास तो टेलीफोन करने के नंबर नहीं था, ना ही तुम्हारे ऑफिस में ही था । लेकिन तुमने नहीं तब एक सप्ताह बाद वो फिर उस समय वह तुम्हारी खबर को लेकर बहुत आशान्वित थी । लेकिन उस दिन वो कोई भी और मुझे बताया कि उसके पिता नहीं बचेंगे । और उनकी मृत्यु से पहले वे उसे दुल्हन के लिए बाहर में देखना चाहते थे । वो चाहते थे कि मेरी शादी हो जाए । जब वो जाने वाली थी उसने मुझे असहाय रूप से देखा और मुझे तुम्हें किसी भी प्रकार सूचित करने का अनुरोध किया । तब मैं तुम्हें दोबारा लिखा । दस दिन बाद उसकी एक दूर के रिश्तेदार से शादी हो गयी । जब शादी वाले दिन मैं उस से मिली । मैंने देखा वह बहुत दुखी थी । वो दूसरों के साथ हस रही थी लेकिन मैं उसकी आंखों के पीछे छिपे गहरे दुख को समझ गई । जब उसने मुझे देखा वो अपने आंसू नहीं रोक पाई । उस ने कहा और ऐसा लगा शायद उसके ये वाक्य उनका दिल चीज ने के बाद बाहर आए हैं । लेकिन भाभी नहीं अमर नहीं, तुमने उसे दुःख के महासागर में धकेल दिया है । ओके मैं उससे माफी मांगने उसके पास जाऊंगा । ये सब संभव नहीं है । अमर उसने ये शहर छोड दिया है । उसके विवाह के एक सप्ताह बाद उसके पिता की मृत्यु हो गई और तब फैक्ट्री को बचाने के बाद उसने शहर छोड दिया । वो कहाँ गई है मुझे मालूम नहीं है । मैंने नहीं पूछा क्योंकि वो अपनी नई जिंदगी शुरू कर चुकी थी और उसने भी मुझे नहीं बताया । लेकिन वो जहाँ कहीं भी हैं मैं उसके बहुत सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करती हूँ । ये सुनकर उसने कुछ नहीं कहा और एक हारे हुए जुआरी की तरह पुर जाने के लिए खडा हुआ । लेकिन वो ऐसा नहीं कर सका क्योंकि उसी समय उन्होंने कहा अमर जब शालिनी अंतिम बार आई थी, उसने मुझे तुम्हारे लिए पचास हजार रुपए का एक चेक दिया । ये तुम्हारा पैसा है जो उसकी फैक्ट्री में पढा था । अ मैंने उत्तर में कुछ भी नहीं कहा और वहाँ से भारी कदमों के साथ चला गया । समय बीतने लगा लेकिन अमर की खुशी उसके पास नहीं लौटी । उसने हसना और किसी से ज्यादा बातें करना छोड दिया था । ज्यादातर समय उसने अपने कमरे में अकेले गुजारना शुरू कर दिया । कभी कभी एक या दो दिन तक वो अपने कमरे से बाहर नहीं आता था । एक दिन कमलेश उसके पास आया और उसे अपनी कमर के बल लेटा हुआ पाया । वो बिना अपनी पाल के हिलाएं छत की तरफ देख रहा था तो मैं क्या हुआ है? अमर उन्होंने पूछा, जब मैंने उनकी आवाज सुनी वो उठा और अपने बिस्तर में बैठ गया । तब उसने आश्चर्य से उनकी तरफ देखा क्योंकि उसने अचानक उन के आने के बारे में नहीं सोचा था । कमलेश उसके पास आए और उसकी बगल में बैठ गए । दोनों कुछ देर तक एक दूसरे से बिना कुछ बातें किए बैठे रहे । तब एक बार फिर उन्होंने अमर से पूछा तो कब तक अपनी जिले की इस तरह पिता होगी तो में समय की वास्तविकता को भी समझना चाहिए । मैं कोशिश करूंगा । उसने उत्तर दिया, उस शाम वो अपने कमरे से बाहर आया और ये सोचने लगा कि कहाँ जाया जाएगा । तब उसने अपना समय पास के पार्क में बिताने का निश्चय किया इसलिए वो उसकी तरफ चलने लगा । मुश्किल से ही वो पार्क के गेट तक पहुंचा था की किसी ने उसके पीछे से आवाज थी और वह यह चलने के लिए मुडा की । वो कौन था? ये शत्रु था जो उसके साथ ऑफिस में काम क्या करता था वो उसके पास दौडता हुआ है । अमर भी एक लंबे अंतराल के बाद से देख कर आश्चर्यचकित था । आप कैसे है मार बाबू? उसने उसके पास पहुंचकर पूछा तो बिना अपना मूड खोले मुस्कुराया । ठीक भगवान की कृपा से उसने जवाब दिया, शत्रु ने उसे सुनकर सीधे आया लेकिन वो पूरी तरह विश्वास नहीं था । इसलिए उसने दोबारा पूछा तो कब वापिस आए? एक सप्ताह पहले जब मुझे पता चला कि शालिनी मैडम ने किससे शादी कर ली है तो मैं आश्चर्यचकित था । लेकिन छोडो इसे शत्रु एक आदमी को उससे ज्यादा नहीं मिलता जितना ईश्वर ने उसके लिए रखा है । उसने आह भरी अमर बाबू तुम कहाँ जा रहे हो? मैं नहीं जानता हूँ । मैं खुद को फ्रेश करने के लिए कमरे से बाहर आया ताकि मैं कुछ समय के लिए अपने दुर्भाग्य को भूल सको । तो क्या तुम मेरे साथ आओ के कहाँ जगह का नाम मत पूछो लेकिन ये तुम्हारी जिंदगी बदल देगा जहाँ तुम आनंद में महसूस करोगे । उस रात अमर घर देरी से पहुंचा और अस्थिर रूप से चलते हुए उसने दरवाजा खोला । वो नहीं चाहता था कि कोई उसकी दशा के बारे में जाने इसलिए वह चुप चाप हो गया । जब वह सुबह दिए से उठा तो सूरज की रोशनी उसके कमरे में प्रवेश कर चुकी थी । उसे अपना सिर भारी लगा लेकिन उस रात हो किसी के प्रति किसी भी तनाव के बिना अच्छी तरह से सोया था । अगले शाम वो फिर शत्रु से मिला और उसके साथ पहले वाली जगह पर गया । उस बार उसे वहाँ पर संकोच महसूस नहीं हुआ । ये जगह उसे बहुत जानी पहचानी लगी और वहाँ के लोग काफी स्पष्ट और खुले ही दे वाले थे । वह शत्रु के साथ एक कोने में मेज पर बैठ गया और वेटर का इंतजार करने लगा । उससे कभी नहीं सोचा था कि उसे अपने जीवन में ऐसी जगह पर जाना पडा । उसी एक्शन के लिए सोचा लेकिन जल्दी नकार दिया । कमरा सिगरेट के धुएं और शराब की बदबू से भरा था । इससे कमरे का वातावरण जहरीला हो गया था और वहाँ बैठे लोग इसका आनंद ले रहे थे । शराब के प्रभाव से उनके मूड में तथा उनके चेहरे के भाव में बदलाव आ रहा था । वे कुछ समय के लिए अपना तनाव भूल गए थे और ऐसे बातें कर रहे थे जैसे कि वो अपना जीवन खुशी और आराम से बिता रहे थे । ये अनिश्चित थी । एक भविष्य में मनुष्य के जीवन में क्या घटित होगा और भविष्य की योजना का पूरा होना निश्चित नहीं है । यह संपूर्ण रूम से भगवान की इच्छा पर निर्भर करता है । क्योंकि मनुष्य समय के हाथ की कठपुतली है जिसकी डोर ईश्वर के हाथ में है । समय बीतने लगा और दो साल कैसे बीत गए । अमर को पता नहीं चला । नहीं उसने अपने व्यवहार को जानने की कोशिश की जिसने उसे बहुत बदल दिया था । वो आम तौर पर संसार के आकर्षण से दूर इसके प्रति अपना दुख और अपना भ्रम दिखाते हुए देर से लौटा था । उसकी भाभी ने उसे देखा और उसके दुःख को महसूस किया लेकिन वो उसे नियंत्रित करने के लिए कुछ भी करने में सक्षम नहीं थी क्योंकि सुबह के समय उस पर शराब का कोई असर नहीं होता था । वो बहुत अच्छे से पेश आता था और उस समय कोई भी ये नहीं सोच सकता था कि वह शराबी था । उसकी पडोसी उसे सहानुभूति दिखाते थे लेकिन शाम के समय उसे शराब पीने से कोई नहीं रोक सकता था । वास्तव में ये उसके जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन गया था । इसके बिना कभी भी उस की रात नहीं बीत दी थी । इसलिए निरंतर उसका स्वास्थ्य खराब रहने लगा । लेकिन इससे उसमें कोई बदलाव नहीं आया तो जल्दी से जल्दी अपनी मृत्यु को प्राप्त करना चाहता था । एक रात वह घर नहीं आया । उसकी भाभी इसपर आश्चर्यचकित थी और उन्होंने सोचा कि शायद उसने उस दिन शराब नहीं दी थी । इसलिए सुबह के समय चल ही वो उसे देखने गई । लेकिन उन्होंने उसके कमरे को बाहर से बंद देखा । डाला अभी भी लटक रहा था । इसका मतलब था कि वह रात वापस नहीं आया । डाॅ । उन्हें हिलाकर रख दिया और वो कमलेश को उसके ना आने की सूचना देने के लिए जल्दी ही लौट गई । क्या उसने कहा जब उसकी पत्नी ने उन्हें बताया कि अमर उस रात नहीं लौटा था और वह अनहोनी के डर से अचानक से गंभीर हो गया । तभी उन्हें दरवाजे पर एक दस्तक सुनाई दी और जब उन्होंने खोला तो उन्होंने देखा कि शत्रु अपने चेहरे पर डर का भाव लिए वहाँ खडा था क्या हुआ? कमलेश ने बिना उसकी सूचना का इंतजार करते हुए पूछा अमर अमर को क्या हूँ? भावी ने अधीरता से पूछा वो मेरे घर में हैं और पूरी रात वो बेचेन था और उसे रुक रुककर खून की उल्टी होती रही । क्या क्या तुम उसे एक डॉक्टर के पास नहीं गए? कमलेश ने चिंतित होते हुए पूछा था लेकिन डॉक्टर ने उसे अस्पताल में भर्ती करने का सुझाव दिया । कमलेश मुझे जेजे अस्पताल ले गया । भावी भी उसके साथ थी । लेकिन अमर अपनी आंखें नहीं खोल पा रहा था । उसके चेहरे से लगता था कि वह उस समय ये सोचते हुए शांति महसूस कर रहा था की शायद उसे जिंदगी के बोर्ड से छुटकारा मिलने वाला था । पहले तो मैं वो ही बोल रही हूँ । मैं पूजा हूँ । अभी अभी एक रोगी आया है और तुम्हें पता है कि वह बेहोशी की अवस्था में रोहिणी रोहिणी फुसफुसा रहा है तो मैं क्या करूँ तो मुझे परेशान क्यों कर रही हूँ तो मैं पता होना चाहिए कि मैं वहाँ पूरी रात काम करते करते बहुत नहीं हूँ । उसने अपनी असमर्थता दिखाते हुए कहा प्रिया रोहिणी मेरे विचार से क्या बकवास है? उसने उत्तर दिया और फोन काट दिया । मुश्किल से एक घंटा बेटा था । जब पूजा ने रोहिणी को उसकी तरफ आते हुए देखा । वो उसके आने पर बहुत ज्यादा आश्चर्यचकित नहीं थी क्योंकि वह उसके दिल में उसका नाम का महत्व जानती थी । कॅश और आराम करो वो कोई दूसरा हो सकता है । पूजा ने शांत होकर कहा लेकिन मैं देखना चाहती हूँ तो क्या मैं अभी तो मैं उसके पास लेकर चलती हूँ । उसने जवाब दिया और खडी हो गई । जब दोनों वार्ड में पहुंचे उन्होंने देखा कि रोगी सीधी करवट ली । गहरी मीन्स हो रहा था । पहले तो रोहिणी उसका चेहरा नहीं देख पाई लेकिन उसका दिल पहले ही जोर से धडकने लगा था और कब कब आते हुए कदमों के साथ उसके उसका चेहरा स्पष्ट रूप से देखने के लिए अपनी साइड बदल ली । जिस शरण उसने उसे देखा उसके अंदर से एक आवाज आएगी नहीं और वह लगभग बेहोश हो गई । लेकिन उसने जल्द ही दीवार का सहारा लेते हुए खुद को संभाला और पूजा ने भी उसे पकड लिया । इसलिए वह गिरी नहीं और धीरे धीरे उस सदमे से बाहर आई । तब पूजा उसे वापस उसके ऑफिस ले गए । एक घंटे बाद रोहिणी ने अपना सिर्फ मेरे से ऊपर उठाया और संदिग्ध दृष्टि से पूजा की तरफ देखा जो कि एक रजिस्टर पर झुककर कुछ काम कर रही थी । उसने भी तब उसके तनाव को दूर करने के लिए उसकी तरफ मुस्कुराकर देखा । वो कब भर्ती हुआ था? उसने दुःख के साथ पूछा, दस बजे उसके साथ कौन थे? उसका अलग सवाल था । मुझे ज्यादा नहीं मालूम लेकिन उसके साथ दो आदमी और एक महिला थी । महिला कुछ समय बाद घर चली गई और एक आदमी जिसका नाम कमलेश है, अभी अभी किसी काम के लिए बाहर कर रहा है लेकिन मैं दूसरे के बारे में नहीं जानती । उसके साथ क्या हुआ? एक । रोहिणी हम इस समय ज्यादा कुछ नहीं कह सकते लेकिन व्यक्ति की जान खतरे में हैं क्योंकि उसने बहुत ज्यादा शराब पीने शुरू कर दी थी । जो उसे स्थिति में नहीं आएगा । उसकी जांच की रिपोर्ट आने दो । हम इलाज झूठ लेंगे । तब रोहिणी ने कुछ भी नहीं कहा । वो रिक्त लग रही थी मानो वो कोई चीज खोनी जा रही हूँ जो उसके लिए बहुत मूल्यवान थी । कुछ समय बाद एक आदमी पूजा की तरफ लगभग दौडता हुआ आया और सूचित किया कि वॉर नंबर आठ के रोगी को फिर से खून की उल्टी होने लगी है और वह बहुत ज्यादा बेचैन लग रहा था क्योंकि जल्दी आती हूँ । पूजा ने उत्तर दिया और अपना स्टेथोस्कोप लेकर रोहिणी के साथ वह बाढ की तरफ दौडी । उन्होंने देखा कि रोगी बेहोश था, उसका सिर बिस्तर से नीचे लटक रहा था और उल्टी किये जा रहा था । ये देखकर तो तेजी से उसके पास गई और उसका सिर तकिए पर रख दिया और फिर पूजा ने उसे दवाई का इंजेक्शन दिया जिससे कुछ समय बाद उसके चेहरे पर चैन की सास आई । उसने उसके दिल की जांच की, उसकी नाडी देखी और जल्दी में रोहिणी से कुछ कहा, जिसे सुनकर रोहिणी सीधे डॉक्टर रमन के पास गई, जो की अस्पताल के वरिष्ठतम चिकित्सक थे । उसकी रोहिणी में जल्दी आ रहा हूँ । उन्होंने उत्तर दिया, जब उसने उनसे वॉर्ड नंबर आठ के रोगी को देखने तथा जांच करने के लिए कहा, लेकिन उसने उन का इंतजार नहीं किया और फॉर नंबर आठ में लौट गई । वहाँ उसने पूजा को उलझन में पाया । उसने उसे कुछ नहीं बताया, लेकिन उसके चेहरे से स्पष्ट रूप से झलक रहा था कि उसके वहाँ पहुंचने से तुरंत पहले ही कुछ घटित हुआ था । इससे पहले की कुछ पूछ सकती एक बार फिर रोगी की आंखें आधी खुली और उसके होट एक फुसफुसाहट के साथ धीरे से हिले । रोहिणी, रोहिणी और उसने फिर से अपनी आंखे पाँच । कहीं ये सुनकर रोहिणी खुद को नियंत्रित नहीं कर सके और अपना सिर दीवार के ऊपर रखकर तथा अपना चेहरा हथेलियों के बीच छुपाकर उसने रोना शुरू कर दिया । पूजा ने तब उसे सांत्वाना देना शुरू किया जब डॉक्टर रमन वहाँ पहुंचे । टूरिज्म खुद को नियंत्रित कर चुकी थी । उसने और पूजा ने रोगी की जांच करने में उनकी सहायता की । कुछ समय बाद डॉक्टर रमन ने एक लंबी साथ छोडी और जल्दी इलाज के लिए एक ऑपरेशन करने का सुझाव दिया और उसके बाद वो ये जानना चाहते थे कि उसके रिश्तेदार कौन थे । इससे पहले की कमलेश जो अपनी पत्नी के साथ तभी वहां पहुंचा था । कुछ कहते हैं रोहिणी ने कहा कि पैसे की कोई कमी नहीं थी, उन्हें अगला कदम लेना चाहिए । ये सुनकर डॉक्टर आश्चर्यचकित हो गया और संदिग्ध निगाह से उसकी तरफ देखा । पूजा ये समझ गई और डॉक्टर रमन के कुछ पूछने से पहले ही उसने जल्दी से कहा वास्तव में सर रोगी उसके गांव का है इसलिए वह बहुत भावुक हो गई तो ये बात है । डॉक्टर रमन ने शक का भाव अपने चेहरे से हटाते हुए कहा, कमलेश और उसकी पति वहाँ की स्थिति को देखकर आश्चर्यचकित थे । वो कुछ कहना चाहते थे लेकिन उसके पति ने उसे हाथ पकडकर पीछे खींच लिया और उसे कुछ बातें बताई जिससे उसी शांति मिलती । उसके बाद वो केवल जो हो रहा था उसे देखता रहा । कमलेश और रोहिणी के साथ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रोगी को ऑपरेशन थिएटर भेज दिया गया और तब रोहिणी ने पूजा और दूसरों के साथ वहाँ डॉक्टर की मदद के लिए तैयार होना शुरू कर दिया । ऑपरेशन सफल रहा जिससे रोहिणी के चेहरे पर सुखद भाव आया और उसे चुप रहकर भगवान को धन्यवाद दिया । दो घंटे बाद सब बाहर आए और पूजा ने कमलेश और उसकी पत्नी को ऑपरेशन की सफलता की सूचना दी । उस दिन रोहिणी अपनी अपार्टमेंट नहीं जा सकी क्योंकि उसकी नाइट ड्यूटि शुरू हो गई थी । अगले दिन जब कमलेश और उसकी पत्नी आए वो सीधे रोहिणी के पास गए क्योंकि उस दिन भी वो अस्पताल में थी । हालांकि उसने अपनी ड्यूटी पूरी कर ली थी । मैडम कमलेश की पत्नी ने उसे अकेले पाकर कहा, मैं आपको जानती हूँ । अमर ने मुझे आप के बारे में सब कुछ बताया था । वो मुझे भाभी कहता था । पहले तो रोहिणी आश्चर्यचकित हुई लेकिन उसने जल्दी खुद को तैयार कर लिया और पूछा लेकिन उसकी पत्नी और बच्चे कहा है क्या? पत्नी बच्चे नहीं, उसकी तो अभी तक शादी भी नहीं हुई है । मैं उस ने आश्चर्य से उत्तर दिया । इतना सुनकर रोहिणी ने अजीब सा महसूस करना शुरू कर दिया । क्यों फिर क्यू से समुद्र से कहा था उसने खुद से सवाल किया और अपने कानों के समय बहुत सी घंटों की आवाज को महसूस किया तब उसी अपने दोनों कान अपनी हथेलियों से बंद कर लिए और अपना सिर मेज पर रख दिया । कुछ समय बाद जब उसने अपना सिर्फ ऊपर उठाया उसने अपने सामने भाभी को अकेले बैठे हुए देखा । भाभी उसने कहा क्या प्लीज मेरा काम करोगी? क्या अब अमर को मेरे बारे में नहीं बताएंगे जब होश में आएगा लेकिन उसने उत्तर दिया लेकिन नहीं भाभी, ये आवश्यक है । उसने अनुरोध किया । उसने कहा और बाहर जाने के लिए उठ खडी हुई लेकिन रोहित ने उन्हें ये कहते हुए रोक दिया मैं अमर का सामान अपने अपार्टमेंट में शिफ्ट करना चाहती हूँ जिससे की यहाँ की तुलना में उसका इलाज बेहतर तरीके से हो सके । लेकिन भावी ने ये कहते हुए संकोच किया कि वह आपत्ति करेगा । तब रोहिणी ने कुछ दिनों के लिए सोचा और उसे सुझाव दिया कि ये उसके बेहतर इलाज के लिए डॉक्टर का आदेश था और तब कुछ सेकेंड का विराम लेकर उसने कहा तेज भाभी तीस मेरी सहायता करूँ और उसी समय आंसू की बूंदें उसके आंखों से फिसल गई और उसके गालों पर फैल गई जिसकी उसने पहुंचने की परवाह नहीं की । भाभी ने उसकी तरफ सहानुभूति से देखा और इतना भावुक हो गई की वो एक शब्द भी नहीं कह सकी । तब वह और ज्यादा भावुक होने से खुद को छिपाने के लिए जल्दी से वहाँ से चली गयी । भाभी के जाने के बाद रोहिणी उठी और अपना चेहरा और आंखें धोने के लिए वॉशबेसिन पड गई । वास्तव में वो अपनी आंखों में जलन महसूस कर रही थी । कुछ तो बिना प्रयाप्त नींद लीजिये जाते गुजारने के कारण तथा कुछ तनाव और चिंता के कारण उसने थोडी राहत पाने के लिए आपकी आंखों में कुछ पानी छिडका । और जब वो पानी की बूंदे अपने चेहरे से पूछ रही थी उसने दर्पण में अपना प्रतिबिंब देखा । वो ये देखकर चकित थी कि वो पहले से ज्यादा आकर्षक और विश्वस्त लग रही थी । हो सकता है ये अमर से उसके मिलने के कारण हुआ क्योंकि उसका खोया हुआ प्यार था । मुस्कुराई और अपने खुद के प्रतिबिम् के लिए अपनी बाई आपको दबाया तब वो फुसफुसाई, तुम कैसी हो, रोहिनी डालें और तब उसका चेहरा उस फूल की तरह खिलो था जो बारिश के बाद चमक उठता है । वो विश्वस्त और प्रसन्न लग रही थी

प्यार की वो कहानी अध्याय -16

अध्याय सोलह अपने फ्लैट की तरफ जाते हुए उसने अचानक अपनी कार चौराहे पर मोडी और उस मंदिर की तरफ पडी जहाँ वो कभी कभी भगवान से उसकी इच्छा पूरी करने के लिए प्रार्थना करने जाती थी जो उसने कभी किसी के साथ नहीं पार्टी थी । मंदिर में बहुत भीड थी इसलिए उसे कुछ देर इंतजार करना पडा लेकिन उस इंतजार से उसे थकावट महसूस नहीं हुई । धीरे धीरे अमर की सेहत में सुधार हो रहा था और हर दिन रोहिणी अपनी ड्यूटी शुरू करने से पहले कुछ दूर से उसे प्यार और सम्मान की दृष्टि से देखा करती थी । वो उसके सामने जाने का साहस नहीं कर सकती थी ना ही उसके किसी को ये रहस्य बताने के लिए अनुमति । जस्टिन अमर को छुट्टी दी जाने वाली थी । रोहिणी बहुत खुश थी । उस दिन वो अस्पताल नहीं गई क्योंकि वो उसका सामान खोलने में तथा उसकी प्रत्येक चीज को अपने अपार्टमेंट की कमरे में अपनी तरह से व्यवस्थित करने में व्यस्त थी । ऐसा करने में दूसरी किताबों के साथ एक डायरी गिर गई । उत्तम उनको उठाने लगी और जब उसकी डायरी को उठाया उसने अनजाने में इसकी कुछ पेज पट्टी और एक पेज पर रुक गई क्योंकि उसने अपने वहाँ नाम देखा । उसकी उत्सुकता तब बढ गई और उसने पढना शुरू कर दिया । इसमें लिखा था रोहिणी मैं तुमसे मिलने और तुम्हारा अंतिम निर्णय जानने के लिए आया । लेकिन बहुत से प्रयासों के बावजूद मैं तुम्हारी याद को किसी दूसरे के प्यार से स्थानांतरित नहीं कर सका । मैं जानता हूँ इसे दूर करना मेरे लिए संभव नहीं है । लेकिन जिस दिन मैं अपने घर पहुंचा मुझे पता लगा कि उस दिन तुम दुल्हन बनने वाली थी । इसलिए मैं सीधी तुम्हारे घर पहुंचा जिसे खूबसूरती से सजाया गया था । मेरा विश्वास करूँ । मैं वहाँ केवल तुम्हारी दुल्हन के रूप में एक झलक पाने के लिए गया क्योंकि मेरे जीवन का सबसे सुखद सपना था । लेकिन वहाँ मैंने देखा की तो मुझे भुला नहीं सकती हूँ । तो अब भी मुझे प्यार करती थी और मैंने वहाँ सबके सामने तुम्हारा हाथ थामने का निश्चय किया । बिना इसके परिणाम की चिंता किए । लेकिन मैं बात दिया था मैं बहुत दुखी हो गया लेकिन क्या हुआ यदि हमने शादी नहीं की । मैं दिल हमेशा गाता है । मुझे बहुत याद है बहुत कुछ प्रिया मीडियम लिया लेकिन डर है तुम्हारी लेटर, तुम्हारी खुशी को मैंने देखा, मेरी सबके में देखी तुम्हारी खुशी मेरी है । मेरे लिए इससे अच्छा क्या हो सकता है । अपने जीवन में कभी दुखी मत हो । अगर मेरी पत्नी नहीं हो तो क्या हुआ? मैं तुम्हारा हूँ तुम्हारा और तुम्हारा । मैं इंतजार करूंगा । अगर पहले मजा हूँ हम सात शिकायत करेंगे । शर्मिली क्या हुआ? अलगाव सर्वशक्तिमान ने दिया । प्यार बचाने के लिए क्या हमने क्या किया? लेकिन छोड तो क्या मेरे प्रिय कोई डर मत रखो । मैं तुम्हारा हूँ तो तुम्हारा और तुम्हारा । उसने तब उत्साहित होकर कुछ और पन्ने पलटे लेकिन एक बार फिर पढने के लिए रुक गई । मैं वापस दिल्ली जा रहा हूँ । लेकिन मैं नहीं जानता वहाँ मेरी तकदीर क्या होगी । मैं शालिनी से प्यार नहीं करता जो फैक्ट्री के मालिक की बेटी है । जहाँ मैं काम करता हूँ लेकिन वो मुझे बहुत प्यार करती है । इसलिए मैं भी सम्मान के साथ उसे उसी की तरह प्रतिक्रिया देना चाहता हूँ । वो एक बहुत अच्छी लडकी है और मुझे शादी करना चाहती है । लेकिन मैं उसके साथ आगे बढने का साहस नहीं करता । ये सोचते हुए कि क्या तब भी उसका कैक वैसा रहेगा जब उसे रोहिणी के साथ मेरे रिश्ते का पता चलेगा और मैं नहीं चाहता की कोई मेरे प्यार रोहिणी को ना पसंद करें । इसीलिए उससे शादी करने से पहले मैं उसे हर चीज बता दूंगा । तब भी अगर वो चाहती है मैं उसे शादी करूंगा और एक पति का प्यार देने की कोशिश करूंगा । वास्तव में मैं उसके प्यार और मेरे प्रति व्यहवार का सम्मान करता हूँ तो बहुत मासूम और सब दिया है । उसने तब डायरी बंद कर दी क्योंकि वह और ज्यादा पडने का साहस नहीं कर सके और अपनी भावुकता को नियंत्रित करने के लिए कुछ पानी लेने के लिए खडी हूँ । लेकिन पानी पीने के बाद भी उसमें कोई बदलाव नहीं आया । गहरी पडने का विचार न होते हुए भी उसने एक बार फिर से पढना शुरू कर दिया । आज मैं डर और आशा के साथ दिल्ली पहुंचा । मैं शालिनी को शायद खोलूंगा । आशा है उससे शादी कर लूंगा । लेकिन जब भाभी ने उसके बारे में कुछ बताया, मैं होना चाहता था इसलिए नहीं कि मुझे शादी नहीं कर सका । लेकिन इसलिए कि मेरी अज्ञानता ने उसे दुखी कर दिया । मैं प्रार्थना करूंगा निश्चित रूप से मैं उसके जीवन में खुशी के लिए प्रार्थना करूंगा । कभी कभी मैं भगवान से नाखुश हो जाता हूँ की उसने मेरी तकदीर इस तरह बनाई की जिस किसी को भी मैं प्यार करता हूँ वो पूरे जीवन के लिए दुखी हो जाता है । इसलिए मैं खुद से नफरत करता हूँ नहीं वो फुसफुसाई और अंत में डायरी बंद कर दी । अमर ने अपार्टमेंट के एक कमरे में रहना शुरू कर दिया था और एक नर्स नीलम उसकी देखभाल करती थी जिसे रोहिणी द्वारा नियुक्त किया गया था और उसने उसे उन्हीं चीजों का पालन करने के लिए बताया था क्योंकि वो निर्देश दे दी थी इसलिए वह अमर के व्यक्तिगत सवालों के बजाय अपने काम में ज्यादा रूचि लेती थी । कभी कभी वो डॉक्टर के बारे में और ज्यादा जानना चाहता था लेकिन नर्स ने कभी उसे संतोषजनक उत्तर नहीं दिया तो कभी कभी आश्चर्यचकित हो जाता था कि डॉक्टर क्यों उस पर इतना पैसा खर्च कर रहा था और वह कैसे इसे चुकाएगा लेकिन कोई भी रहस्य खोलने को तैयार नहीं था । यहाँ तक कि कमलेश और भाभी ने भी नियमित रूप से आना छोड दिया था और जब कभी भी आते थे उसी इसके बारे में ज्यादा नहीं । सोचने की सलाह देते समय अपनी गति से आगे बढ रहा था और अमर महसूस नहीं कर सका की कैसे दो महीने बीत गए । वह अपना अधिकतर समय पडने में टीवी देखने में बिता था । और दूसरी तरफ रोहिणी अपना समय अस्पताल में दिन की ड्यूटी करने में बिताती । वो कब आती और कब चली जाती अमर को पता नहीं चलता क्योंकि उस कमरे का फ्राइड के अन्य भागों के साथ कोई कनेक्शन नहीं था । रात को रोहिणी अक्सर देर से आती और अमर और नर्स की रिकॉर्डिंग बातचीत को सुनती क्योंकि नर्स द्वारा एक अमर से छुपाए गए टेप रिकॉर्डर में रिकॉर्ड किया जाता था । एक दिन तो ये सुनकर दुखी हो गई की अमर वहाँ और ज्यादा नहीं कहना चाहता था और वो किसी भी कीमत पर डॉक्टर से मिलना चाहता था क्योंकि कमलेश और भाभी ने उसे देखने आना बंद कर दिया था और ना ही उन्होंने मोबाइल द्वारा संपर्क रखने की कोशिश की । इसके अतिरिक्त उसने व्यक्त किया कि उसकी जिंदगी एक कैदी की तरह हो गई थी और वह किसी भी कीमत पर वो कमरा छोडना चाहता था । इससे रोहिणी उलझन में आ गई और वह स्थिति का किस तरह सामना करें इसका रास्ता पानी में ऐसा ही थी कि उसे उसके सामने जाना चाहिए या नहीं । पूरी रात को ये सोचते हुए अपने बिस्तर में करवटें बदलती रही लेकिन किसी दृढ निर्णय पर नहीं पहुंच पाई । सुबह में वो टेलीफोन की आवाज से जाग गई तो उसी तरफ उसकी नर्स थी जो जिन्ना आने पानी के लिए क्षमा मांग रही थी क्योंकि उसकी माँ की हालत अचानक गंभीर हो गई थी और उसे उन्हें अस्पताल जाना था । रोहिणी ये सोचने में असमर्थ थी कि उसे क्या उत्तर दे और जल्दी ही टेलीफोन कार्ड दिया । इससे उसमें घबराहट आ गयी क्योंकि एक लंबे अंतराल के बाद वो अमर के सामने होगी और वो इसे किस तरीके से लेगा जी भी उसे स्पष्ट नहीं था लेकिन साथ ही साथ इससे उसे आनन्द भी आ रहा था । उसका चेहरा सुर्ख लाल हो गया और उसे शर्मीला महसूस किया जब उसने अपना चेहरा आईने में देखा । अमर असामान्य महसूस कर रहा था क्योंकि नर्स अभी तक नहीं आई थी । हालांकि ये नाश्ते का समय था और उसे इसकी त्रीव इच्छा हो रही थी इसलिए टीवी देखना और मैक्सीन पडना उसे ज्यादा आनंदित नहीं कर रहा था । तब कुछ समय बाद उसने किसी के द्वारा दरवाजा खोलने की आवाज सुनी और वह निश्चित हो गया कि उसकी नर्स होनी चाहिए । ये बहुत बडी लापरवाही है । नीलम तो सोचना चाहिए कि मैं भी आखिर एक इंसान हूँ और मुझे भी भूख लगती है । उससे मैग्जीन से अपना ध्यान हटाया । बिना एक साथ में कहा सौरी नाश्ता बनाने में ज्यादा समय लग गया । ये उत्तर था जिसने अमर को आश्चर्यचकित कर दिया और उसने इसके वक्ता को देखने के लिए अपना सिर मोडा । जिस क्षण उसने उसे देखा वह आश्चर्यचकित रह गया तो पहली बार में आपने देखी पर विश्वास नहीं कर सका । रोहिनी उसके ठीक सामने खडी थी इसलिए उसने अपनी आंखे बंद की और दोबारा खोली लेकिन उसके देखे में कोई बदलाव नहीं आया । वो उसकी नाश्ते की ट्रे लिए अभी वहाँ खडी थी जो ही ली तो उसने खुद की पुष्टि करने के लिए जोर से कहा था मैं हूँ । लेकिन उसने कहा और उसके पास जल्दी से आ कंट्री । उसके हाथ से लेकर इसे पास की मेज पर दिया । रोहित ने कोई आपत्ति नहीं दिखाई, ना ही कोई शब्द बोली तो डॉक्टर थी । उसने चकित होकर कहा हाँ मैं हूँ । उसने आधा मुस्कुराते हुए कहा क्या ये तुम्हारा अपार्टमेंट है? हाँ ये है । ये सुनकर वो आगे कुछ नहीं बोल सका और अपना सिर नीचे करके पलंग पर बैठ गया । मानव की वो कुछ सोच रहा हूँ तो क्या सोच रहे हूँ । उसने कुछ दिनों बाद पूछा हाँ उसे उत्तर दिए बिना उसे उसे देखा जैसे कि वह उसके मिलने से खुश नहीं था । उसके चेहरे पर गहरा दुख साफ साफ चमक रहा था जिसने उसे बीच एंकर किया । इसलिए नाश्ता मेज पर रखते हुए वो उसके बगल में बैठ गई और कहा चिंता मत करो यदि तुम जाना चाहते हूँ मैं तुम्हें नहीं रोक होंगे लेकिन पहले अपना नाश्ता ले लो । अमर कुछ बताना चाहता था लेकिन उसने इसे इस का मौका नहीं दिया । उसने नाश्ते की प्लेट अपने हाथ में ले ली और इसी उसके सामने फैला दिया । नाश्ते की दो या तीन टुकडे लेने के बाद उसने दोबारा से उसकी तरफ देखा और फिर कहा लेकिन तुम्हारे पति प्लीज नाश्ता पहले जब उसने नाश्ता खत्म किया । उसने देखा कि रोहिणी बहुत खुश थी और वो ये कहते हुए प्रसन्नतापूर्वक खडी हो गई अभी तुम्हारी चाहिए करा रही हूँ । अमर ने उसे जाते हुए देखा और इच्छा की कि वह पूरे जीवन उसे इसी तरह सुख दे दे रहे हैं और उसके पास पडी मैक्सीन को उठा लिया ताकि वो उसके बारे में और ज्यादा सोच सकें । जल्दी रोहिणी दो कप चाय के साथ आ गई । एक अपने लिए दोनों चुपचाप चाय पीनी शुरू कर दी । कमरे में पूरी तरह शांति थी और जब कभी भी अमर कुछ पूछना चाहता हूँ पाता कि वो इसकी मूड में नहीं थी क्योंकि वह बार बार अपनी घडी में टाइम देख रही थी और तब चाय को समाप्त करने के तुरंत बार वह यह कहते हुए खडी हो गई अमर मुझे अस्पताल के लिए देर हो रही है लेकिन जल्दी आ जाओगे तब हम और बातें करेंगे । ये सुनकर अमन ने अपनी निगाह में बहुत सारे सवाल लिए दोबारा से उसकी तरह देखा लेकिन उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया और उसे पाय कहते हुए चली गई ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -17

हाँ, अध्याय सत्रह जब रोहिणी अस्पताल पहुंची उसे ऑफिस में पूजा नहीं दिखाई थी इसलिए वो उसकी खोज में एक वार्ड से दूसरे वार्ड को जाने लगी क्योंकि वो उसे नई सूचना के बारे में बताने के लिए पागलों की तरह उत्साहित थे और अंत में उसे वार्ड नंबर चार में वो दिखाई दी जहाँ वो एक महिला रोगी की जांच कर रही थी । लेकिन उसने उसका काम समाप्त होने तक उसे परेशान नहीं किया और जिस क्षण पूजा वार्ड से बाहर आ रही थी वह अचानक उसके सामने मुस्कुराते हुए आई जिसमें उसे एक शादी के लिए आश्चर्यचकित क्या? लेकिन जल्दी उसने खुद को संभाला और कहना शुरू कर दिया हेलो मेरी बनी बर तुम कैसी हो? अच्छा केवल अच्छी नहीं लेकिन बहुत अच्छी तुम्हारे चेहरे की चमक इसी साफ बता रही है । रोहिणी ने कुछ उत्तर नहीं दिया लेकिन आपने दाद दिखाए बिना शर्मीलेपन से मुस्कुराए क्या? ओ अगली हमने बात की लेकिन रोहिणी ने जवाब दिया और जल्द ही चेहरे का भाव ये कहते हुए बदल लिया पूजा तो मेरी संबंध में सहायता क्यों नहीं करती? मुझे घबराहट हो रही है । कैसे मैं चाहती हो तो मुझे मेरे बारे में सब कुछ बताओ । देखो रोहिणी कि तुम्हारा व्यक्तिगत मामला है और किसी और की बचाये तुम इसे बेहतर तरीके से निपट सकती हूँ । इसलिए तो मैं खुद ही कोशिश करनी चाहिए । उत्तर सुनकर रोहिणी थोडा सा दुखी हो गई और पूजा की तरफ सहानुभूति मांगने की दृष्टि से देखा । पूजा ने इसे महसूस किया और तब एक मिनट के लिए सोचा । जल्दी उसका चेहरा चमक उठा पर उसने विजय मुद्रा में कहा, रोहिणी मेरे पास एक उपाय है क्या? देखो आज हमें मिसिस अनुरोध आ के घर पर जाना है । पार्टी में जाना है जो कि उसके ट्रांसफर के उपलक्ष्य में आयोजित की गई है । हाँ, लेकिन रोहिणी ने हिचकिचाते हुए पूछा, मैं चाहती हूँ तुम उसी बहाला और तब मैं सब कुछ संभाल होंगी । भगवान की कृपा से मेरे पति घर पर नहीं है इसलिए मुझे अकेले ही आना होगा । पूजा ने उत्तर दिया, लेकिन ये तुम्हारे दर को निकाल फेंकने का स्वर्णिम मौका है । रोहिणी तो मैं इसे मिस नहीं करना चाहिए क्योंकि उसने सोचते हुए उत्तर दिया और अपने ऑफिस में चली गई । जब अमान्य दरवाजा खोला उसने भावी और कमलेश को वहाँ खडा पाया । वे मुस्कुराए लेकिन अमन ने उनकी उपस् थिति पर कोई उत्साह नहीं दिखाया । उसके चेहरे पर तनावपूर्ण स्पष्ट था इसलिए भाभी ने पूछा अब अगर तुम्हारे साथ क्या हुआ? कुछ नहीं । अभी क्या में एक बात पूछ सकता हूँ? था? खुशी सिंह उन्होंने खुशी से कहा क्या मैं आप का दुश्मन हूँ? यदि नहीं तो आपने मुझे इस तरह की जिंदगी में क्यों धकेला है? क्या तो मैं क्या हूँ? तुम्हें पता है क्या होगा? यदि उसका पति मेरे बारे में जान जाए तो क्या उसकी जिंदगी परेशानियों में नहीं की जाएगी? मुझे अपने जीवन से नफरत है । भाभी वास्तव में मुझे नफरत है में किसी को खुशी नहीं दे सकता । लेकिन हमने उसे तुम्हारे लिए कुछ भी करने को नहीं कहा । उसने खुद ही सब चीजे की भावी नहीं । रक्षात्मक जवाब दिया वो बहुत पागल है भाभी मैं जानता हूँ वो मेरे लिए अपनी सारी खुशियों को दिया कर सकती है । लेकिन इसलिए दिए हैं कि मैं उसकी लायक नहीं हूँ । कोई डॉक्टर है और उसका पति भी और उनकी समाज में इज्जत है । मुझे उसकी खुशी हर अपनी का कोई अधिकार नहीं है । मैं यहाँ और ज्यादा नहीं रुकूंगा । मैं आपके साथ वापस जाऊंगा भावी इतना कहकर वो अपने चेहरे पर अत्यधिक दुख का भाव लिये पलंग पर बैठ गया । भाभी उससे कुछ कहना चाहती थी लेकिन उसी समय उन्होंने बाहर दरवाजे पर किसी के रोने की आवाज सुनी इसलिए चकित होकर खेली हुई और दरवाजा खोल दिया । ये रोहिणी थी जो वहाँ खडी थी और उसके उन्हें बातें करते हुए सुन लिया था । कमरे में आने के बाद रोहिणी ने अपना रोना नियंत्रित किया । अब उसके चेहरे पर गुस्सा तथा उसकी आंखों में दुख का भाव था । तब उसने अपनी भराई आवाज में कहा, तो जाना चाहते हो तो जा सकते हो । मेरा तुम पर कोई अधिकार नहीं है, लेकिन जाने से पहले तुम ये भी जान लो कि मैं खुशी से नहीं रह रही हूँ । जिस आदमी से मेरी शादी हुई उसने मुझे धोखा दिया और मुझे शर्मिंदगी से भरा जीवन उपहार में दिया । क्या अमर ही आश्चर्य व्यक्त किया? रोहिणी ने उत्तर में कुछ भी नहीं कहा लेकिन उसकी आंखों में आंसू थे और तभी उन की कुछ बूंदे गई । गई नहीं रोहिणी नहीं, प्लीज मैं विश्वास दिलाता हूँ, मैं नहीं जाऊंगा । लेकिन ये सब कैसे घटित हुआ? अमर ने सांत्वाना दी । तब उसने खुद को उत्तर के लिए तैयार किया और कहना शुरू किया मैं शाम को दिल्ली पहुंची । ये मेरे लिए एक नई जगह थी और मैं नया जीवन शुरू करने जा रही थी । मैं पीछे नहीं हटना चाहती थी और मुझे एक नया जीवन शुरू करने के लिए एक नया ख्वाब बुनने की जरूरत महसूस हुई । मेरे पति का सामना किया और उनके घर का वातावरण मुझे मेरे अतीत को बनाने में सक्षम होगा । ये मेरा विचार था वो

प्यार की वो कहानी अध्याय -18

अध्याय अठारह शाम बहुत सुहानी थी और प्रकाश बहुत खुश लग रहे थे । इसलिए उन्होंने मुझे बाहर चलने के लिए कहा । लेकिन मैंने ये कहते हुए मना कर दिया की मैं बहुत थकी हुई थी और वास्तव में मैं भी । हम फ्लैट पर पहुंचे लेकिन मैं यह देखकर आश्चर्यचकित थी कि वहाँ कोई नहीं था । हालांकि मैंने सोच रखा था कि मुझे मेरे ससुराल वालों और दूसरों के द्वारा रिसीव किया जाएगा । मैंने उनकी तरफ कारण पूछने के लिए देखा तो उन्होंने मेरे पूछने से पहले ही कहा कि उसके माता पिता गांव गए हैं क्योंकि वहाँ भूमि विवाद पैदा हो गया था और वो एक हफ्ते में लौटेंगे । खुद को फ्रेश करने के बाद हम देने से पहले कुछ लेने की इच्छा से मेज पर बैठ गए क्योंकि हमने एक होटल से मंगवानी की योजना बनाई थी । लेकिन मुश्किल से आधा घंटा बीता होगा । जब टेलीफोन की घंटी बजी और प्रकाश नहीं इसीलिए चीज क्या मैं नहीं समझ सकी वो क्या बात कर रहे थे । लेकिन ये स्पष्ट था कि कुछ गंभीर घटना हो गई थी क्योंकि प्रकाश के चेहरे का भाव बदल गया था । जो की उनकी डर को व्यक्त कर रहा था । वो जल्दी से कमरे में गए और जब वह बाहर आए उनके हाथ में डीप केस था । मैं इस पर दुविधा में थी । मैं जल्दी वापस आ रहा हूं । उन्होंने कहा, और इससे पहले मैं कुछ कहती जा चुके थे । स्थिति को देखकर मुझे अनहोनी की आशंका से अपना सिर भारी महसूस हुआ । इसलिए मैं अपने बिस्तर पर लेटे के लिए गई और मैं कब सो गए कुछ पता नहीं चला । ये दरवाजे की घंटी की आवाज की जिसमें मुझे जगाया । मैंने घडी देखी और पाया कि रात के नौ बज रहे थे । मैंने सोचा कि प्रकाश लौट आए हैं लेकिन जब मैंने दरवाजा खोला वहाँ कुछ पुलिस वालों को देख कर मेरे आश्चर्य का ठिकाना ना रहा । वे मुझे वहाँ देखकर उलझन में थे । तब उन्होंने एक फोटोग्राफ ली और इससे मेरे चेहरे की तुलना कि मैंने भी फोटोग्राफ देखा और एक बार में ही पहचान गई की वही महिला थी क्योंकि मुझे देखने गई थी । देखिए मैं चुप रही । पुलिस ऍम उसी और इस की तलाशी लेनी शुरू कर दी । मेरे सिर में बहुत तेज दर्द होने लगा और मुझे खुद में बहुत कमजोरी महसूस होने लगी । यदि पी मैं भूत की भारतीय बैठी थी तब भी मैं सोचने में असमर्थ थी कि क्या करूँ और क्यों ये सब चीजें घटित हो रही थी । उन्होंने अलमारी से कुछ फोटोग्राफ, कागज और नगर इकट्ठा किया और तब इंस्पेक्टर ने मुझसे कहा मैडम आपको हमारे साथ पुलिस स्टेशन आना होगा लेकिन क्यूँ मैंने बहुत डरते हुए पूछा आपके पति वहाँ उन्होंने उत्तर दिया, इसे सुनकर मुझे अपने सामने गहरा अंधेरा दिखाई दिया और जब मैंने अपनी आंखें खोली मैंने खुद को अस्पताल में पाया और दो पुलिस वाले मेरे पलंग के पास खडे थे । मैं एक बार में ही स्थिति समझ गई । मैं चुप चाप सोचने लगी कि शायद मेरे पिछले जन्म के पाप की सजा थी । मैं बुरी तरह से रोना चाहती थी लेकिन नहीं कर सकी । कुछ मिनट बाद वहाँ एक डॉक्टर मेरे चैकप करने के लिए आई और उस महिला डॉक्टर को देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गई क्योंकि वो मेरी मित्र पूजा थी तो मुझे देख कर मुस्कुराई और मैंने भी उसे उसी तरीके से प्रतिक्रिया देनी चाहिए लेकिन असफल हो गई ही नहीं । अब तुम कैसे महसूस कर रही हूँ? उसने पूछा अच्छा मैंने उत्तर दिया । तब उसने मुझे किसी दवाई का इंजेक्शन लगाया और खुशी से कहा की मैं बिल्कुल ठीक थी । मैं उस से कुछ पूछना चाहती थी लेकिन उसने मुझे बताया कि वो उसे हर चीज बाद में बताएगी और उसने आगे कहा कि वो उसके बारे में सब कुछ जान चुकी थी । एक घंटे में इंस्पेक्टर वहाँ पहुंच गया । मैं एक बार फिर उसे देख कर डर गई लेकिन वो मुस्कुराया और कहा चलो रोहिनी, तुम कैसी हो? ठीक धन्यवाद । मैंने उत्तर दिया प्रकाश कम से कम मिला था । उसने दोबारा पूछा उसे उत्तर देने से पहले मैंने चारों और देखा क्योंकि मेरा दर प्रति मिनट बढता जा रहा था और देखा की पूजा मेरे पलंग के पास खडी है । इससे मुझे साहस बडा और मैंने गंभीरता से जवाब दिया तो मेरे घर शादी की बात करने आया था । क्या तो उसी इससे पहले से जानती थी? नहीं । मैंने दृढता से जवाब दिया लेकिन तब उसे तुम्हारी और तुम्हारे घर के बारे में कैसे पता चला । मेरे माता पिता ने अखबार के वैवाहिक कॉलम में उसका पता देखा और उसे मेरा फोटो, पता और अन्य जानकारी भेज दी । कोई और बाद उसे जोर देकर पूछा नहीं कुछ नहीं । मैंने मासूमियत से उत्तर दिया, मित्रों में आजाद कर रहा हूँ लेकिन जब कभी भी मुझे तुम्हारी जरूरत होगी तो मैं पुलिस स्टेशन आना होगा । उस ने गंभीरता से कहा और पुलिस वाले को मुझे मेरे फ्लैट तक छोड कर आने को कहा । रोहिणी ने कुछ पूछने के लिए पूजा की तरफ देखा और उसने कहा तो मेरे साथ रहोगी तुम्हारा फ्लैट । पुलिस ने सील कर दिया है । जब वे बाहर आए उन्होंने गेट पर उत्तेजित भीड देखी और वे जोर से एक नारा लगा रहे थे प्रकाश को फांसी दो, वह एक हत्यारा है । हत्यारे प्रकाश को फांसी दो । जिस शरण हम पुलिस वालों के संरक्षक में कार में दाखिल हुए किसी ने हमारे ऊपर सैंडल का सौभाग्य वर्ष ये हमारे ऊपर से गुजर गया और हमें जल्दी से डर के साथ कार में जगह नहीं । उसके बाद कर बहुत सी चीजों की बरसात हुई जैसे कि जूते, सैंडल, अंडे आदि । किसी प्रकार हम पूजा के घर पहुंचे और तब मैं खुद को नियंत्रित नहीं रख सकी । कितना ज्यादा में कोशिश करती उतना ज्यादा में भावुक हो जाती हैं और मेरी आंखों में आंसू आने लगते हैं । मैं नहीं समझ पा रही थी की चीजे क्यों घटित हो रही थी । बाद में पूजा ने मुझे बताया, प्रकाश बहुत कुख्यात है क्योंकि वह मरीजों की किडनी चुरा लेता था और उन्हें बेचता था । उसकी नशा तस्करी का गिरोह भी जॉइन कर लिया है । उसकी सहित मोनिका है, जो प्रकाश के साथ तुम्हारे घर गई थी । पुलिस अभी भी उसे ढूंढ रही है । इतना कहकर रोहिणी चुप हो गई, लेकिन उसके दिमाग में चीजें एक करके आ रही थी । तब उसने फिर से कहना शुरू किया, अगले दिन मेरे सामने अखबार की हेडलाइन थी डॉक्टर प्रकाश ने अपना जुर्म कबूल किया और मैंने इसे अनिच्छा से और दुख से पडा । मुझे मेरी तकदीर मालूम थी और मैं और ज्यादा रोना चाहती थी । मुझे लग रहा था मैं उस नरक से कभी बाहर नहीं यहाँ होंगी जिसमें मुझे धकेला गया है । चुपचाप होते हुए मैं फिर बिस्तर में लेट गई । दिन गुजर रहे थे और मैं खुद को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही थी । मेरे दिमाग में कभी भी प्रकाश से मिलने का खयाल नहीं आया तो उसने मेरी जिंदगी पर बात करती थी और मैं नहीं समझ पाई कि उसने मुझे शादी क्योंकि नहीं । मैंने इसके बारे में अपने माता पिता को बताया, जिन्होंने जल्दबाजी में मेरी शादी ऐसे आदमी सी कर दी, पुलिस द्वारा वंचित था । उसे जीवन में सिवाय पैसे के कुछ नहीं चाहिए था और शायद उसने अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए मुझे शादी की

प्यार की वो कहानी अध्याय -19

अध्याय उन्नीस रोहिणी रोहिणी मुझे हिलाकर जगाया गया और जब मैंने अपनी आंखें खोली मैंने देखा की पूजा मेरे ऊपर झुकी हुई थी और बहुत घबराई हुई थी । क्या हुआ? मैंने पूछा उठो और अखबार पढ क्यों क्या हुआ? मैं दोबारा पूछा मुझे कुछ बताए बिना उसने अखबार मैंने सामने रख दिया । जब मैंने इस की तरफ देखा मैं कहाँ उठी? हेडलाइन की डॉक्टर प्रकाश जेल से उस समय भाग गए जब उन्हें कोर्ट ले जाया जा रहा था । रास्ते में उनके दोस्तों ने गाडी पर हमला किया और उन्हें पुलिस की गिरफ्त से आजाद कर लिया । पुलिस नहीं ढूंढ रही हैं और जिस किसी को भी ऐसे व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी है, पुलिस को अपने बारे में बिना बताये सूचना दे सकता है । पुलिस वादा कर दी है कि उसे किसी भी समस्या में नहीं डालेगी । पुलिस को देश के बचाने के जनता के सहयोग की जरूरत है । अब क्या होगा पूजा? मैंने पूछा कुछ नहीं । उसने अपना भरोसा दिलाते हुए उत्तर दिया, लेकिन चिंता मत करो । मेरे पति आगे के लिए तथा तुम्हारी सुरक्षा के लिए पुलिस से मिलने जा रहे हैं । मैं कुछ नहीं कह सकी लेकिन मैं अपने दिमाग से डर भी नहीं निकाल सके जब पूजा अस्पताल चली गई और उसके पति अपनी दुकान पर । मैं घर में नौकरानी के साथ अकेली थी । मैं दिमाग से डर दूर करने के लिए एक मैग्जीन पड रही थी लेकिन घंटे की आवाज से मैं डर से उछल पडी और मेरे माथे पर पसीने की बूंदें छा गई । उस समय तक नौकरानी भी वहां पहुंच चुकी थी और वो मेरी तरफ आश्चर्य की दृष्टि से देखने लगी । मैंने उसे अपने सिर के संकेत से दरवाजा खोलने को कहा । वो पहले तो हिचकी चाहिए लेकिन जब मैंने उसे उस काम को करने का आदेश दिया तो धीमे कदमों से गई और अपने दिमाग में शक के साथ दरवाजे तक पहुंची और इसे अंतिम रूप से खोलने के बाद उसने मेरी तरफ देखा । मेरा दिल किसी अनहोनी की आशंका से धडक रहा था लेकिन मैंने उसी इसी खोलने के लिए प्रेरित किया । जब दरवाजा खुला तो इंस्पेक्टर एक पुलिस वाले के साथ दाखिल हुआ । मैंने उनसे हाथ हिलाकर अभिवादन किया और उन्होंने मुझे भरोसे वाली मुस्कान के साथ प्रतीक्रिया देखो । उसने तब मेरे एक कप चाय के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और कहा मिसिस प्रकाश मेरे ख्याल से आपने आज का अखबार पढ लिया होगा । मैंने सहमती में से खिलाया और कहाँ मैं मिसिस प्रकाश नहीं हॅूं । कानून भावनाओं को कोई महत्व नहीं देता हूँ । उसने आपसे शादी की इसलिए आपको उसके बारे में सचिव होना चाहिए । वो आपके पास आ सकता है और हम आपसे सहयोग की आशा करते हैं । मैं तब कुछ उत्तर नहीं दे पाई । इंस्पेक्टर खडा हुआ और बाहर चला गया । मैंने अधूरेपन से कमरे के दरवाजे की तरफ देखा जिससे इंस्पेक्टर बाहर गया था । शाम को जब पूजा वापस आई रोहिणी ने इसे इंस्पेक्टर और प्रकाश के बारे में सब कुछ बताया । इसी सुनकर पूजा ने कुछ उत्तर नहीं दिया लेकिन एक गहरी साथ छोडी और कुछ समय बाद उसने कहा इसे गंभीरता से मतलब पुलिस उसके पीछे हैं और वह जल्दी ही गिरफ्तार हो सकता है । लेकिन ये भी तो यहाँ गया । तब मैंने पूछा वो नहीं आएगा उसे हमारा पता कैसे मालूम पडेगा । उसने भरोसे के साथ कहा उस रात में ठीक से नहीं हो सकी । जब भी कोई आवाज सुनाई दी थी मैं उठती और डर से कांप जाती । ये सोचते हुए कि शायद प्रकाश ये पुलिस आई हो लेकिन उन दोनों में से कोई भी दिखाई नहीं देता था । तब मैं फिर से अपनी आंखे बंद कर लेती और खुद को चादर में अच्छी तरह से ढक लेती । अगले दिन मैं सुबह देर से उठी । उस समय तक पूजा अस्पताल के लिए तैयार हो चुकी थी और जाने से पहले उसने अखबार मेरे तक की के नीचे रख दिया था और उसने नौकरानी से मुझे परेशान ना करने के लिए लेकिन बताने को कहा कि जब मैं उठूं तो जल्दी तैयार हो जाऊँ क्योंकि उन्हें कहीं जाना था । जब मैं उठी और घडी में देखा तो मैं ये देखकर चकित थी की साढे नौ बच गए थे और मैं जल्दी से पलंग से उतरी । मुझे पता था कि उस समय तक पूजा चली गई होगी इसलिए मैं नौकरानी से उसके बारे में पूछे बिना ही बातों में घुस गयी । दो बजे पूजा अस्पताल से लौटी और उसकी लोटस टैम्पल घूमने की योजना बनाई । मैं ना चाहते हुए भी तैयार हो गयी ये सोचते हुए कि इससे मेरा तनाव और डर कम होगा । हमारी टैक्सी के पीछे एक सफेद रंग की कार आ रही थी जिसमें तीन लोग बैठे हुए थे । मैंने इसे देखा उसके बाद पूजा नहीं थी । हम दोनों डर से जकडी हुई थी । हम चुपचाप सोच रहे थे कि उस खतरे से कैसे निफ्टी चुकी हमारे सामने आने ही वाला था जब वो कार्ड जेब्रा क्रॉसिंग पर हमारी कार के बहुत पास आई । जहाँ हमारी टैक्सी को लालबत्ती के कारण रुकना पडा तो वह कार भी सीधी तरफ की लाइन में केवल दो कारों के बाद रुक गई । सडक पर बहुत ही कार्य थी और किसी की भी कार का दरवाजा खोलना संभव नहीं था । अचानक टैक्सी के दरपन में एक चेहरा दिखाई दिया क्योंकि प्रकाश का था । उसका चेहरा गाडी से ढका हुआ था और उसकी आंखें लाल चमक रही थी । मुझे बहुत डर लगा जिससे मैं कांपने लगी और पूजा ने इसका कारण पूछा लेकिन इससे पहले मैं उसे कुछ कहती कर आगे बढ गई । इस कार्य मेरे चेहरे पर पसीने की बूंदें छा गई और इसमें पूजा में शक पैदा कर दिया । इसलिए उसने जल्दी से पूछा तो क्या हुआ? मैंने उसकी तरफ बताने के लिए देखा लेकिन नहीं बता सकी । क्योंकि मैंने देखा कि जो कार हमारे पीछा कर रही थी वो निकट आ गई और प्रकाश के साथ बैठा एक आदमी हम पर निशाना साथ रहा था । इसलिए तुरंत मैंने पूजा को नीचे खींचा और हम दोनों ने खुद को छुपा लिया । लेकिन गोली लगने से ड्राइवर जख्मी हो गया और उसे सडक के किनारे का रोकती जल्दी राहगीर वहाँ इकट्ठे हो गए और एक पुलिस हरकत में आएगा । हम अस्पताल की तरफ दौडे और भगवान की कृपा से ड्राइवर खतरे से बाहर था । गोली उसके हाथ को हल्का सा छूकर गुजर कही थी ।

प्यार की वो कहानी अध्याय -20

अच्छा अध्याय बी जब हम शाम को घर पहुंचे । हम यह देखकर आश्चर्यचकित थे कि हमारे दरवाजे पर एक पुलिस की जीत थी और कुछ पडोसी पुलिस वालों के साथ थे क्योंकि हमने अस्पताल में अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया था । हमें नहीं मालूम था कि वहाँ क्या घटित हुआ था । हमने एक दूसरे की तरफ देखा और टैक्सी से उतरे । जल्दी सब कुछ स्पष्ट हो गया । सामने का दरवाजा आधा खुला हुआ था और इसके पास की नौकरानी अपनी ही खून में लथपथ पडी थी । की पूरा साफ था कि उसने मरने से पहले हत्यारे के साथ अपनी पूरी शक्ति के साथ संघर्ष किया था । यह देखकर मैं इतना स्थल थी कि मेरी आंखों में आंसू सूख गए थे और मैं ये सोचने लगी कि प्रकाश मुझे क्यों मारना चाहता था और नौकरानी को किसने मारा? क्या बे उसके आदमी थे जिन्होंने इस अपराध को अंजाम दिया? ये सभी सवाल मेरे दिमाग में आने लगे और मैं उनका उत्तर जानने में असमर्थ थी । पूजा एक पुलिस वाले से बात कर रही थी और शायद उसने घटना के बारे में उसे बताया था जो हमारे साथ रास्ते में घटित हुई थी क्योंकि पुलिस वाला तब मेरे पास आया और बोला विशेष प्रकाश आप की जिंदगी खतरे में हैं । आपके लिए और ज्यादा सचेत रहना जरूरी है और तब उसकी मुझे सीक्रेट नंबर देते हुए कहा कि उसे फोन करुँ । जब भी मुझे अपनी चारों और हल्का सा भी खतरा महसूस हो, मैं शब्द भी नहीं कह सकी । यहाँ तक कि उसे धन्यवाद भी नहीं किया क्योंकि मैं डर से अत्यंत घबराई हुई थी । उसके बाद में पोस्टमार्टम तथा अन्य गतिविधियों के लिए मृत शरीर को लेकर । उस समय तक पूजा का पति भी वहां पहुंच चुका था क्योंकि पूजा ने उसे टेलीफोन किया था । लेकिन मैंने उसे तब देखा जब उसने सांत्वना देने के लिए अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा । उसे देखकर में बुरी तरह से रोने लगी । इसलिए पूजा वहाँ आई और उन्होंने मुझे स्थिति का सामना करने के लिए पर्याप्त साहस देने की कोशिश की । लेकिन प्रकाश का क्या? पुलिस ने उसे दोबारा गिरफ्तार नहीं किया । भाभी ने पूछा, रोहिणी ने अपना सिर भावी की तरफ मोडा और दुखी होकर बताया । उन्होंने मुटभेड से उसी मार डाला । कैसे? अमर ने पूछा, उसके फिर कहानी जारी रखी । पुलिस की जाने के बाद हम पीछे के दरवाजे से घर में घुसे क्योंकि सामने का दरवाजा सील कर दिया गया था । उस रात हम नहीं सुन सके । पूरी रात हम जाते हुए ये बात करते रहे कि प्रकाश मुझे क्यों मारना चाहता था । अचानक मुझे याद आया कि प्रकाश ने मुझे उस रात ब्रीफकेस के साथ बाहर जाने से पहले एक डायरी की । टायरी को पीले रंग के कागज में पैक किया गया था और मैंने बगैर ज्यादा महत्व दिए उसे अपने बैग में रख लिया था । जिस क्षण ये मेरे दिमाग में आया, मैं खडी हुई । हालांकि पूजा जानना चाहती थी कि मैं कहाँ जा रही थी लेकिन मैंने उत्तर नहीं दिया और मैंने अपने कमरे में जाकर अपना बैग खोलकर उसमें से डायरी निकाली । पूजा के पति ने इसे बढा उसके चेहरे का भाव बदल गया और इससे हम इसके बारे में जानने को उत्सुक हो गए । क्या तुम हमें कुछ बताओ की? पूजा ने पूछा । उसके पति ने कुछ देर के लिए चुप चाप उसे सुना और तब उत्तर दिया कि ये बहुत महत्वपूर्ण आई थी और जल्दी इसे पुलिस को सौंप देना चाहिए । इसमें सब कुछ प्रकाश और उसके गिरोह के बारे में था । वो मेरी भगवान पूजा ने आश्चर्य प्रकट किया और कहा कि यही कारण था कि रोहिणी पर हमला हुआ और नौकरानी को मार डाला गया । तब हमने एक दूसरे की तरफ डर की निगाह से देखा और चुपचाप रहकर यह सूचना चाहती थी कि अब क्या किया जाए । लेकिन तभी हमने गोली चलने की आवास और नहीं समझ सकी कि क्या करना चाहिए और कुछ । लेकिन बाद हमने अपने घर के चारों और रोशनी देखी और उसके बाद एक घोषणा हुई । अपने आप को पुलिस के हवाले कर दो । भागने का कोई मौका नहीं है लेकिन उत्तर में वहाँ इस तरह से गोलीबारी शुरू हो गई जैसे कि दीपावली का दिन हो । हमने ये सोचते हुए डर से कांपने लगे । किसी भीषण हमारी जान जा सकती है । यू तो हमने अपना दरवाजा और अपने कमरे की खिडकियां अंदर से बंद कर ली थी लेकिन हम खुद को बाहर बीत होने से नहीं रोक सके । कुछ समय बाद गोलीबारी बंद हो गई । उनका साथ देने के लिए ज्यादा पुलिस वाले आ गए और वे उन दो लोगों को मारने में सफल हो गए जो हमारे घर पर चढने की कोशिश कर रहे थे और खिडकी के रास्ते कमरे से घुसना चाहते थे । लेकिन वहाँ पुलिस केसीआई कमलेश ने पूछा । रोहिणी ने उत्तर दिया, वास्तव में पुलिस हमारे घर के चारों और सादी कपडों में थी और वृद्ध दृष्टि के साथ सुरक्षा कर रहे थे कि कोई निश्चित रूप से मेरे घर में कोई ऐसी चीज पाने के लिए घुसने की कोशिश करेगा जिसे वे दिन में नौकरानी की आपत्ति के कार्य नहीं ले पाए थे । वो दो मृत पेट की कौन थे? अमन ने उत्सुकता से पूछा उनमें से प्रकाश था । रोहिणी ने उत्तर दिया उसके बाद क्या हुआ? भाभी ने सवाल किया, हमने डायरी पुलिस को सौंप दी और अगले हफ्ते हमने अखबार में पढा कि पुलिस ने कई स्थानों पर छापा मारा था और उस औरत का क्या हुआ जो प्रकाश के साथ थी । कमलेश ने पूछा वो भी छापेमारी के दौरान मारी गई भगवान को धन्यवाद । भाभी ने उत्सुकता पर विजय पाते हुए पूछा । उसी समय दरवाजे पर दस्तक हुई । सब नी एक दूसरे की तरफ संदिग्ध दृष्टि से देखा कि कौन हो सकता है । तब रोहिणी ने उठकर दरवाजा खोला और देखा की पूजा वहाँ खडी मुस्कुरा रहे थे हूँ

share-icon

00:00
00:00