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Transcript

Part 1

अभी आप सुनता ऍम मनचाहे और मैं आपके साथ आपका दोस्त ब्रजेश आज में लेकर आया हूँ । रवि रंजन गोस्वामी कर लिखा हुआ एक लघु उपन्यास नाकाम दुश्मन । एक मार्च दो हजार सोलह चेन्नई है । राजेश चेन्नई में ट्राइडेंट होटल में अपने कमरे के अंदर था । बाहर तेज हवा चल रहे थे । वो खिडकी से बाहर देख सकता था । काली घटा है । भारी बारिश का संकेत दे रहे थे । जल्दी तेज बारिश शुरू हो गए । कृतियों से टकराते दोनों की आवाज संसद का था तो बाहर जाना चाहता था । लेकिन मौसम की स्थिति को देखकर उसमें जाने का विचार छोड दे । शाम के करीब छह बजे थे । राजेश ने एक कोने में रखा । मैंने फ्रिज खोला और देखा । उसमें कुछ बियर की बॉटल, काजू, बादाम और बाल रखे थे । उसे उनमें से कुछ भी लेने का मन नहीं किया । उसने फोन उठाया । रूम सर्विस का नंबर मिला है और एक बडा ब्लैक लेवल व्हिस्की लाने का आदेश दिया । राजेश को थोडी ठंड महसूस हुई तो उसने रिमोट से एयरकंडीशनर बंद कर दिया । पर इसमें टीवी का रिमोट उठाया और बटन दवाकर टीवी चालू कर दिया । थोडी देर हो चैनलों को बदलता रहा । फिर उसने डीडी ओर तो लगा दिया उस पर उसकी पसंद का ऍम कार्यक्रम आ रहा था । राजेश रुपए पर बैठ के और गजलों का आनंद लेने लगा । कुछ समय के बाद घंटे बजे राजेश ने अनुमान लगाया कि रूम सर्विस वाला होगा । दरवाजा बंद नहीं था तो उसने कहा कमेंट । वेटर एक ट्रे में इसकी थोडा नमकीन आदि लेकर आया था । उसने ट्रेवल पर रख दी और उसके लिए एक पैक तैयार करने की पेशकश की । ऍम नहीं धन्यवाद वेट चला गया । राजेश दरवाजे तक गया और वहाँ ऍम लगाकर दरवाजा बंद कर दिया और वापस आ गया । उसने सोडा इसके लिए क्लास में डाला । फिर फॅसा उठाकर एक लंबा वोट लिया और उसे अपने शरीर में अवशोषित होने के लिए कुछ छोड इंतजार गया । थोडी देर में उसे एक सौ खुदाई गर्मी का एहसास हुआ । फिर उसने अपने पे और गजल का आनंद लेना शुरू कर दिया । विस्की और गजल एक दूसरे के पूरक थे । इसकी गजल को और अधिक मनोरंजन और गजल का प्रभाव विस्की के आनंद को बढाने का काम कर रहे थे । थोडी देर के लिए वह अपने यहाँ होने के प्रयोजन को ही भूल गया । वो दस दिनों में हो गया था । उसका मोबाइल बजने लगा । ये अलाम था । उसे बता रहा था कि सिंगापुर के लिए उडान पकडने के लिए एयरपोर्ट जाने का समय हो गया था । ऍफ पोर्ट के लिए चलते हैं । प्लेन के टेकऑफ के बाद जब सीट बेल्ट लगाए रखने की चेतावनी हट गई, राजेश अपने सीट को थोडा पीछे धकेलकर आराम से ठीक कर बैठ गया । उस होते नहीं लगा । पंद्रह साल से वो एक जासूस एजेंट था । उसका कार्य साॅस आश्चर्य और रोमांस से भरा था और उसने हमेशा अपने काम का आनंद लिया था । उसने कई राष्ट्रविरोधी गिरोहों का भंडाफोड किया था । वह भारत में और विदेशों में कुछ आतंकवादी संगठनों के प्रमुख ऑपरेटरों को निष्प्रभावी किया था । इस मिशन में जो कामों से मिलना था उसने उसे पशोपेश में डाल दिया था तो हम ने राज किया था । वो अभी मात्र तीस वर्ष का था । लेकिन क्या उन लोगों ने उसे अभी से उम्रदराज माल्य और इसलिए एक सस्ता ऐसा काम सौंप देते हैं । जासूसी के क्षेत्र में उस की असाधारण क्षमता के कारण वो प्रतिद्वंदियों के बीच एक कुख्यात एजेंट बन गया था । वे उसकी गतिविधियों पर नजर रखते थे । इसलिए जब सिंगापुर के लिए बोल रहा था उसका असली गंतव्य अलग । राजेश की फ्लाइट साढे चार बजे सुबह सिंगापुर समय पर चांगी हवाईअड्डे पर सुचारु रूप से उतरे राजेश ने अपने खिलाडी खडे स्थानीय समय के लिए समायोजित की । उसके पास ऐसा कोई सामान नहीं था जिसमें कस्टम वालों को कोई दिलचस्पी होती हूँ । आव्रजन मंजूरी के बाद वह निर्वाध रूप से हवाई अड्डे से बाहर आ गया । मेरे होटल मैं उसके लिए एक कमरा रखा था इसलिए वो होटल के बाहर इंतजार कर रही मेरे हाथ की मिनी बस में सवार हो गया । मिनी बस में चढने वाला वो पहला यात्रा था । कुछ देर में कुछ और लोग भी आ गए और ड्राइवर ने गाडी आगे बढा दी । राजेश ओ दाल में कुछ घंटे अच्छी तरह से सुबह सुबह जब उठा उसमें जल्दी से साफ कपडे पहने और कैसे की तरफ भागा । वो पाँच साल के बाद लैला से मिलने के लिए जा रहा था । राजेश जब कैसे पहुंचा लेना पहले से वहाँ पस्थिति वो उसे देकर मुस्कराई और शरारत से यहाँ कुमार दें तो भी मुस्कुराये और लाइनलाॅस के सामने बैठे हैं तो पाँच साल तो बहुत लंबा समय था । राज उसमें कहा और राजेश की ओर अपने दोनों हाथ बढा दे । राजेश ने उसके हाथों को अपने हाथों में ले लिया और थोडी देर से देखता रहा । फिर बोला हुआ है । बहुत लम्बा था लाना थोडा नाटकीय अंदाज में उसे निहारा और बोले कि तुमने अपने बाल रखना शुरू कर दिया है । राजेश हस पडा है । ऍम बोले राजेश तो सही हो तो फिर से देखना एक सुखद आश्चर्य लैला अभी तो मैं देख कर बहुत खुश हूँ । राजेश श्रम कब जा रहे हैं? लैला आज रात को राजेश क्या तुमने शादी की? लेना ने विषय से हटकर प्रश्न किया और मुस्कराएंगे राजेश ने उत्तर दिया नहीं तो फिर तो मैं अभी भी उम्मीद कर सकते हैं क्या वो हस पडे? राजेश भी हंस पडा । उसने राजेश को एक लिफाफा सौंप दिया और कहा इसमें अपने पासपोर्ट टिकेट और अन्य दस्तावेज हम शाम को हवाई अड्डे पर मिलते हैं । इसके बाद वो राजेश वाई वाई कर चले । राजेश भी अपने कमरे में चला गया । सिंगापुर जब राजेश चांगी हवाईअड्डे पर पहुंचा था । उसने लैला को प्रस्थान टर्मिनल पर उसका इंतजार करते पाया के साथ साथ सुरक्षा जांच के लिए रवाना हो सुरक्षा जांच के बाद में लॉन्च में बैठ गए । राजेश विचारमग्न था । इस बार के मिशन में सब कुछ स्पष्ट था । हालांकि उसने खुद ही आतंकवाद और छद्म युद्ध पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक में संस्कृति और आस्था पर हमले की बात भी रखे थे । वो अपने विचारों को सही समझता था लेकिन किस तरह से उन पर अमल हो सकता है पता नहीं । ये एक साधारण लडाई नहीं थी । वो एक सशस्त्र दुश्मन से लडना जानता था । यहाँ से जानकारी नहीं दी । कौन असली दुश्मन थी और कहाँ वो उनसे मिल सकता था । ऍम वो उद्घोषणा के पूर्व मई की आवाज बोर्डिंग के लिए घोषणा की गई थी । सेल केयर के हवाई उडान हो नाइंटी फाइव से इस्ला हुआ जाने वाले यात्रियों से गेट तीन से हवाई जहाज में बैठने का अनुरोध किया गया । राजेश और लहला यात्रियों के कतार में शामिल हो गए । लगभग आधा घंटा लगा । ऍन बोर्ड करने और अपने सीटों पर कब्जा करने वाले वे इकोनोमी क्लास के यात्री थे । वो अपना हॅारर सामान रखने के स्थान पर रख कर बैठ गए । दोनों ने अपने सीट फॅमिली लहला ने महसूस किया । राजेश कुछ ज्यादा ही शांत था तो खुश नहीं लग रहा था । लाने चारों और देखा और आसपास बैठे यात्रियों पर नजर डालें । ये सभी सामान्य लग रहे थे । ऍम राजेश को परेशान नहीं करने का फैसला किया ऍम हल्का झटका सा महसूस किया । ऍम से दूर हवाईपट्टी की तरफ मुड रहा था । जल्दी विमान हवाईपट्टी पर तेज आवाज और कहते गये साथ दौडा और हवा में ऊपर उठ गया और इसके आगे की कहाँ नहीं जानेंगे अगले अंक खानी थी लगी थी सब्स्क्राइब करना ना बोले सुनते रहे हैं क्योंकि ऍम हूँ

Part 2

अभी आप सुन रहे हैं को कॅश समय जो मान जाये और मैं आपके साथ । ब्रिजेश रविरंजन गोस्वामी कर लिखा हुआ लघु उपन्यास नाकाम दुश्मन अभी आप सुन रहे हैं । पेश है अपन ने इसका दूसरा भाग इस्लामाबाद पाकिस्तान अब्दुल अपने घर के बाहर पूरी तरह से परेशान करता था । वो अपनी पत्नी सादिया को थप्पड मार के आया था और अभी तक उससे मैं चल रहा था । उसका मन वापस घर जाकर सादिया को और पीटने का कर रहा था । वो अपने क्रोध को जानता था और सोचता था कि ये अच्छा था कि उसके पास बंदूक नहीं थी । बनना हो गुस्से में अपनी पत्नी को गोली मार सकता था । सादिया अपने पति को बहुत प्यार करते थे लेकिन शक की सभाओं की थी । वह बर्दाश्त नहीं कर सकते थे कि अब्दुल किसी भी महिला के साथ बात करेगा । पास में जायेंगे । उस दिन सादिया नहीं उनसे गली में अपने बडे भाई की पत्नी के साथ बात करते देखा । जब घर आया तो साथ दिया उस पर टूट पडे सादिया कौन थी वो और अब्दुल कौनसे और वही औरत जिसे आप गली में बात कर रहे थे । अब्दुल हो वो सुहानी भावी थी सादिया तुम दूर से बात नहीं कर सकते । अब्दुल की हम मतलब द्वारा मेरे बडे भाई की पत्नी है । वो भी एक जवान औरत है और तुम लगभग उसे छोड रहे थे । साथ ही हमने परोक्ष रूप से जो आरोप लगाया था अब्दुल वैसा सोच भी नहीं सकता था । उसे सौंप दिया की बात एक बात दिवाली की तरह लगे । अब्दुल ने गुस्से में चटाक से ऐसे जोर से थप्पड मारा और तेजी से घर से बाहर चला गया । वो झगडा बढाना या अधिक हिंसक बनना नहीं चाहता था । इसके अलावा उसे रात में हवाई अड्डे से प्लाजा होटल के दो मेहमानों को लेकर आना था । उसने अपनी टैक्सी होने का फैसला किया । रात में उसने बेनजीर भुट्टो अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे से राजेश और लैला को ले जाकर उन्हें प्लाजा होटल में छोड दिया । अब्दुल पिछले दो वर्षों से प्लाजा होटल के ग्राहकों को लाने ले जाने के काम में लगता है और वो इस काम से घोषणा उसने हम तौर पर ग्राहकों को सब दे पाया और टैक्सी भाडे की कोई सौदेबाजी नहीं थे । उसकी टैक्सी के भाडे का भुगतान होटल से होता था और कभी कभी यात्री बक्से इस अलग से दे जाते थे । अपना काम खत्म करने के बाद जब घर लौटा तो दरवाजे की घंटी बजाने से पहले बाल के लिए जिसका उसे दिन में अपनी पत्नी को तब पर मानने की घटना याद आ गए । उसे आशंका हुई कहीं वो इस समय झगडा न करें । अंत मैं मत कर अब्दल्ला घंटे बजाते साजिशाना दरवाजा खोला । वो मुस्कुराई और रसोई घर में चले गए । अब्दुल बातों में हाथों हाथ में चला गया । जब बाहर आया तो उसने सादिया को एक लाख दूध के साथ उसके इंतजार करते हैं । वो हमेशा स्तर पर जाने से पहले एक ग्लास दूध लेना पसंद करता था । पहले से ही देर हो चुकी थी और उसे नहीं ना रहे थे । उसमें दो समाप्त किया और अपने बिस्तर पर चला गया । साथ ही अभी आ गए । जल्दी ही वेस्ट हो गया । दिल्ली भारत ऍसे आने वाली इतिहास एयरलाइन की उडान से इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरा और सावधानी से आव्रजन काउंटर पर आया । जब काउंटर पर अधिकारी ने उसके पासपोर्ट का निरीक्षण करते हो उसका नाम पूछा तो उसने बताया ॅ । पासपोर्ट में यही नाम लिखा था । अधिकारी ने पासपोर्ट में मोहन लगाई और उसे वापस दे दिया । उसके पास एक हैंडबैग के अलावा कोई सामान नहीं था । उसने एंड उठाया और बाहर निकलने के लिए ग्रीन चैनल की और बढ गए थोडा डर रहा था लेकिन किसी कस्टम अधिकारी ने उसे नहीं रोका और वह एयरपोर्ट से बाहर आ गए । पीटर ने उसकी और अपना हाथ लहराया । उसे देखकर एलेन का तनाव एकदम कम हो गया । अपनी कार वहाँ लाने के बजाय पीटर ने हेलो इनको पार्किंग क्षेत्र में आने के लिए इशारा के फॅसने वैसा ही क्या पीटर अपने सफेद होंडा सिटी कार की ड्राइविंग सीट पर ऍप्स उसके बगल में बैठे हैं ऍफ दिल्ली के अपनी पिछली यात्रा के समय से पीटर को जानता था पीटर एक स्थानी और संसाधनों वाला आदमी का पीटर ने एलेक्स को इंद्रा नगर में एक मकान तो छोड दे कुछ अपने के छात्रों ने ये मकान कराया पहले रहता था ऍफ का वहाँ हमेशा स्वागत जब भी वहाँ था सभी के लिए भव्य पार्टी देता हूँ । दिल्ली में ही रहने वाले अफ्रीकी महाद्वीप की कुछ लडकियाँ भी उसमें शामिल होते हैं लेकिन उन्होंने बताया था कि वह धीरे की कंपनी का एजेंट । पिछले अवसरों की तरह इस बार भी शाम को एलेक्स द्वारा पार्टी आयोजित किए पीटर भी इस बार पार्टी में शामिल हो । अगले दिन सुबह के के के निर्देश पर पि ऍफ को को जिनका हवाई टिकट देकर एयरपोर्ट ऍम कोचीन भारत ऍम का संदेश प्राप्त हो कि वो इंडिया की उडान में सवार होने जा रहा है । लेकिन ये संदेश भेजा बोर्डिंग के बाद कन्फर्म करूँ । कुछ समय के बाद विभिन्न का संदेश था । विमान में सवार टेकआॅफ लगभग दो घंटे बाद एक सन्देश आया ऍफ हैदराबाद इस समय तक के कि नहीं आवश्यक व्यवस्था कर लेते । ॅ पहुंचे । उसके पहले एक स्थानीय ड्रग डीलर के साथ उसकी बातचीत हो चुके थे । विपिन पैसे ला रहा था । एलेक्सिस थाने और विदेशी दोनों तरह के दलों के लिए उपयोगी साबित हुआ था । मैं जानता ऍप्स पैसे के लिए कोई भी जोखिम ले सकता है । एलेक्स को कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर विभिन्न रिसीव किया । मैंने दूसरे दिन उन दोनों के लिए मुन्ना आपको चीन के निकट एक खूबसूरत हिल स्टेशन की यात्रा की व्यवस्था कर रखे थे । एक दिन ऍप्स और ऍम कोचिन शहर के एक पुराने हिस्से वोट कोई ऍम । उन्होंने वहाँ समुद्री खाद्य पदार्थ का आनंद लिया और विश्राम के दूसरे दिन सुबह छह बजे एक माजदा कार द्वारा मुन्नार के लिए निकल पडे । चाहता की नहीं । ये वक्ता जिसका नाम श्याम श्याम हिंदू व्यक्तियों का वास्तविक गंतव्य जानता था, वह के के का विश्वास बात करता हूँ । पूरे दिन शाम होने, पर्यटकों की दिलचस्पी के विभिन्न स्थानों पर घुमाता फॅसने खूबसूरत जानने के सामने और चाय के बागान के अंदर विपिन और शाम के साथ कुछ सैलरी फोटो ले दो । वार को अचानक मौसम बदल गया । बादल छा गए और बारिश शुरू हो गए । उन्होंने सडक के किनारे क्रेस्ट्रॉन में शरण ली और इस समय का इस्तेमाल कोचिन नास्ता करने और खोजे पीने में क्या जैसे ही बारिश शुरू की सभी कार्य में बैठे और ड्राइवर श्याम ने कार आगे बढा दी । शीघ्र ही वे कच्ची और अंधेरी सडक पर जा रहे थे । आधे घंटे के बाद शाम ने एक जगह सडक के किनारे कार को रोका और कार से उतर का फॅस और विभिन्न को अपने पीछे आने के लिए कहा । उन्हें पास के एक नारियल के पेडों के समूह हो ले गया । नारियल पेडों के बीच में एक छोटा सा लकडी का कुटीर था । श्याम ने दरवाजे पर दस्तक दी, दरवाजा खुला और एक युवा जोडे ने उनका अंदर स्वागत किया । कमरे में एक कम पावर का बाल भी लगा था । वहाँ कुछ बात की कुर्सियां और एक मेज जीता जोडेने उन्हें बैठने के लिए अनुरोध किया और पे की पेशकश की । लेकिन एलेक्स और विपिन ने मना कर दिया । विभिन्न डॉलर के बंडल को अपने जेब से बाहर निकाला और मैच कर रहा आदमी नहीं डॉलर की गिनती की महिला एक चमडे का बैग ले ऍफ क्या ड्रग्स कुछ सूखे नारियलों के अंदर भरे थे? अपराध और भ्रष्टाचार में कई बार लेन देन अध्यक्ष ईमानदारी और विश्वास के साथ किया जाता है । कोई सीमेंट के भीतर लेने पूरा हो गया था और वे वापस कोचीन के लिए चलती है । इस्लामाबाद पाकिस्तान अगले सभा राजेश और लैला होटल के बाहर निकले । उन्होंने सोचा था बाहर निकल कर कोई टैक्सी कर लेंगे । मुश्किल से एक सौ कदम ही दूर चले होंगे । उन के पीछे एक बडा धमाका हुआ । उन्होंने पीछे मुडकर देखा, प्लाॅट गिरा हुआ था । लोग यहाँ भाग रहे थे । वो उस जगह से दूसरी जगह भागने लगे । जाहिर तौर पर एक सुरक्षित दूरी तक पहुंचने के बाद में थोडा सुस्ताने को रोके । पुलिस, सेना और फायर विकेट के वाहन प्लास्टर होटल की तरफ भाग रहे थे । राजेश्वर लैला को खुद के लिए मुसीबत खडी होने की आशंका लगे । उन्होंने शीघ्र इस्लामाबाद छोडने का फैसला किया । आप भी जानते थे कि पुलिस जल्द ही कार्रवाई शुरू करेगी और हम से भी पूछताछ कर सकते थे उसमें जहाँ थे उससे क्या करना उन्होंने पता नहीं था । उन्हें थोडा दूर एक बोर्ड देखा जिस पर लिखा था अल्ताफ होटल । अलीगंज तुरंत जाकर होटल में प्रवेश हो गए और एक मेज पर बैठ के आस पास के लोग प्लाजा होटल में हुए विस्फोट के बारे में बात कर रहे थे । राजेश ने फोन पर अब्दुल से रावलपिंडी चलने के लिए कहा तो तैयार हो गया । राजेश नौ से बता दिया कि हो सकता है एक दिन वहाँ रुकना पडेगा । हालांकि रावलपिंडी वहाँ से बहुत अधिक दूर नहीं । अब्दुल आधे घंटे में वहाँ गया । इस बीच उन्होंने खाना खा लिया था । उन्होंने भुगतान कर दी और तुरंत अब्दुल की टैक्सी में बैठ कर चल पडे । अल्ला मेहरबान है आप जाना सुरक्षित हमदुल्ला एक बेहतर भीड और यातायात के मध्य से वाहन संभालकर चलाते हुए का और इसके आगे की कहा नहीं जानेंगे । अगले अंक सुनते रहे हैं तो कोई अगर सुने जो मन चाहे हूँ ।

Part 3

अभी अब सुन रहे हैं तो कोई ऍम सुने जो मन चाहे और मैं हूँ आपके साथ आपका दोस्त बचे । रवि रंजन गोस्वामी का लिखा हुआ लघु उपन्यास नाकाम दुश्मन अभी आप सुन रहे हैं पेश सीरीज का तीसरा बात । मार्च तीन दो हजार सोलह दिल्ली भारत ये भारत में शीर्ष खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों की एक नियमित बैठक थे लेकिन इस बार वहाँ की चिंता कुछ अलग और अच्छे थे । पाकिस्तान द्वारा घुसपैठ और सीमा उल्लंघन की घटनाओं लेकिन ये गिरावट राजनीति में लोगों ने इसको दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों का परिणाम बताया । हालांकि प्रधानमंत्री ने रक्षा और गृह मंत्रालय को अतिरिक्त सतर्क रहने को कहा था इसलिए इस बैठक मैं इस खामोशी के बारे में बात कर रहे थे कि पडोसी दुश्मनी चुपके से भारत के खिलाफ कुछ योजना तो नहीं बना रहा हूँ या उसकी नीति में कुछ सकारात्मक बदलाव आया था । बैठक एक घंटे में समाप्त हुई और इसकी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय, रक्षा मंत्रालय, गृहमंत्रालय, विदेश मंत्रालय को सूचना नहीं दी गई । बैठक के बाद दलजीतसिंह साॅस के अपने कार्यालय लौटा । ये सरकार द्वारा एक नवगठित संगठन उन्होंने पहुंचने के तुरंत बाद डाॅक्टर चीज संजय श्रीवास्तव को बुलाया । संजय को सीमेंट ओके बेहतर वहाँ आ गया हो । उम्र में करीब पचास साल आधा जनजा मध्यम ऊंचाई और बिना गाडी मुझ वाला आदमी उसके चश्मे का ढीला फ्रेम अक्सर उसकी नाक के नीचे लड रखने की कोशिश में लगा रहा था, जिसे वो बार बार आज से ऊपर चढाता रहता था । तो एक बुलाकर प्रोफेसर की तरह लगता था लेकिन वहाँ देखता मैं वो हमेशा सतर्कता और अंतरराष्ट्रीय मामलों में अदृश्य निर्धारण कर सकता था । पाकिस्तान के मामलों को वही देख रहा हूँ, क्या मैं करा सकता हूँ? ऍम श्रीवास्तव अंदर आया और बैठ गया तो उन्हें इसके लिए अनुमति की आवश्यकता नहीं । श्रीवास्तव दलजीत के द्वारा बात शुरू करने के इंतजार थे । दलजीत हमारा प्रिय पडोसी क्या कर रहे हैं? तो अलर्ट संजय सर अंतरिक सुरक्षा को खडा करने की आवश्यकता । हम गृह मंत्रालय के लिए एक मछुआरा पोस्ट कर सकते हैं और दलजीत क्या सीमा पर कोई अंदेशा? संजय कोई चिंता नहीं । दलजीत कुछ खास कर सकते हैं अभी नहीं कर । जो भी हम नेताओं द्वारा खुफिया विफलता के आरोप से बच नहीं सकते और हम अपने काम का खुलासा भी नहीं कर सकते हैं । संजय ने मजाक में कहा, और का बस कुछ दिन और प्रतीक्षा करें । महोदय, मैंने पाकिस्तान की यात्रा पर राजेश को भेजा । दलजीत राजेश तुम्हारा शागिर्द है इसलिए मुझे उससे उम्मीद । संजय धन्यवाद । मौत पूर्व के देशों की और ध्यान देते रहे हैं । ये क्षेत्र मुझ पर छोड दे । इसके बाद संजय श्रीवास्तव दल जी से आज्ञा लेकर अपने कमरे में चले गए । कुछ फोन कॉल करने के बाद वो अपने घर के लिए रवाना हो गए । घर में वो अपनी पत्नी के साथ बैठके चाय पी रहे थे । उनकी पत्नी उनसे कुछ कह रहे थे । कभी कभी होता है जब आपको सोच रहे होते हैं जो आपके लिए महत्वपूर्ण है और पत्नी अपने और आपका ध्यान चाहते हैं । इस तरह की स्थितियों में दोनों जो वास्तव में एक दूसरे को दुखी नहीं करना चाहते । हम जहाँ नहीं एक दूसरे को चोट पहुंचा देते हैं । श्रीवास्तव टीवी पर न्यूज देख रहे थे जिसमें पाकिस्तान में होटल प्लाजा में हुए विस्फोट के बारे में बता रहे थे वो राजेश के बारे में सोचने लगे । उनकी पत्नी ने फोन पर अपने भाई के साथ हुई बातचीत के बारे में बता रहे थे । अच्छा होता अगर वह पत्नी से थोडी देर के लिए चुप हो जाने का अनुरोध करते थे । इसके वजह उन्होंने दोनों कार्य उसे सुनने और साथ ही समाचार विश्लेषण करने की कोशिश की । कुछ ही देर में वो अपना धैर्य खो बैठे और पत्नी से थोडे ऊंचे सर मैं बोल गए थोडी देर के लिए चुकी हूँ । पता नहीं तो चुप कराने के तुरंत बाद उन्होंने महसूस किया । वह गलती कर गए थे । कई घंटों के लिए मुंह फुलाकर चुप रहने वाले थे । वो दिल्ली हैं । एलेक्स को सीधे बैठने में मुश्किल हो रहे थे । वो नहीं था गाडी के दिल्ली पहुंचने के सिर्फ आधे घंटे पहले सो जाने की विलासिता हुआ नहीं कर सकता हूँ । कभी कभी उसका सिर तंत्र से अभी बहुत नीचे झुक जाता । वतंत्र टूटती तो झटके के साथ सीधा हो जाता हूँ । जैसे ही ट्रेन स्टेशन को छूने से पहले दी में हुई रिलेक्स ने अपना सामान उठाया और तुरंत उतरने के लिए ट्रेन के डिब्बे के गेट के पास जाकर खडा हो गए । जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर रोके वो ट्रेन से उतर गया । उसने कुली से अपना सूटकेस लेकर चलने को कहा । कुली नहीं सूटकेस अपने सर पर रखा और स्टेशन के गेट की तरफ चलते हैं । एक सपना बॅायकॅाट लात कर को लेकर पीछे चल दिया । वो जानबूझकर कुली से थोडा दूर चल रहा था था की कोई मुसीबत पैदा हो तो बज कर भाग सकते । नशीली दवा का एक बडा ऐसा वो कुछ यूरोपीय देशों को कोचीन से कुरियर द्वारा बेच चुका था । लेकिन फिर भी उसके सूटकेस में जितनी मात्रा में हेरोइन रखे थे वो उसे कुछ सालों के लिए सलाना पीछे करने के लिए पर्याप्त थे । ऍम की वह मात्रा पीटर के लिए थे । पीटर विभिन्न स्रोतों से थोडी थोडी ट्रक स्क्रेप कर कुछ कॉलेज के छात्रों के लिए पूर्ति करता था । ये वो करीब के इशारे पर करता था जो सेंटर खरीदने के लिए पैसे और कॉलेज के छात्रों के लिए आपूर्ति करने का एक अच्छा पारिश्रमिक देना था । वॉशिंगटन । संयुक्त राज्य अमेरिका फरवरी दो हजार सोलह सीनेटर मार्क मजबूत पसंद और ना पसंद के व्यक्ति । हाल ही में उन्होंने एक अध्ययन समूह के प्रतिनिधि के रूप में भारत का दौरा गया था । भारत में वैश्य घुमाने का जिस तरह सामना किया था और पिछले कुछ वर्षों में विकास की उसकी उल्लेखनीय गति के लिए भारत के प्रशंसक थे, साथ ही नहीं कारणों से भारत के विरोधी भी थे । भारत को एशिया में अमेरिकी नेताओं के लिए एक चुनौती मानते थे । भारत के प्रति अपेक्षाकृत अनुकूल बनने के लिए अमेरिकी सरकार का विरोध करते मार्क नाॅट को कॉफी के लिए आमंत्रित किया था । एलवर्ट के दादा डॉक्टर वाहिद भारत के विभाजन के कुछ बाद आपने जवाने में पाकिस्तान से अमेरिका चले गए थे । इनके इकलौते बेटे सिराज नहीं खराब महिला समीना से शादी की थी । ऍफ का एकलौता बेटा था और उसमें एक अमेरिकी मुस्लिम महिला जो ऐसे शादी की थी जो है उसकी वाॅर्ड और विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर उसकी प्रथक सोच से प्रभावित हुए थे । जब तो फाॅरवर्ड पहुंचा मांगने बडे गर्मजोशी के साथ उसका स्वागत के एलवर्ट मार्क को उसके हर लाइन दृष्टिकोण और सत्ता के खिलाफ साहस के लिए पसंद करता हूँ । यहाँ तक कि राष्ट्रपति भी इस आदमी से थोडा सावधान रहते थे । वे मार के मकान की बालकनी में बैठे थे । मार्क ने पूछा कैसे हैं आप? ऍम आपका शोध कार्य कैसे चल रहा? ॅ अच्छी तरह से चल रहा है । ऍम अपने काम को प्रभावित नहीं करते लेकिन आपका प्रभाव तो है ही क्या कर फॅसे मार आप अकेले ही काम कर रहे हैं । फॅमिली साथ छात्रों का एक समूह कोई अमेरिकी, पाकिस्तानी, बांग्लादेशी, चीनी और भारतीय जाते हैं । वहाँ चीनी क्यों समयवद्ध का एक छोटा लडका लगाने के लिए साम्यवादी अभी भी काफी संख्या में उनके कैडर कुछ भागों में अभी भी मजबूत माँ प्रोफेसर मैंने आपको लाहौर यूनिवर्सिटी जाकर एक बोर्ड आयोजित व्याख्यान श्रृंखला में व्याख्यान देने के लिए शिक्षा बता के पैनल में शामिल करवा दिया । ये अच्छी खबर है । आपका बहुत बहुत धन्यवाद । ॅ खुशी प्रकट मार्क । आपका स्वागत ऍम कॉफी खत्म करने के बाद ऍम सीधा अपने घर के लिए चला गया । हमको बुजुर्ग डॉक्टर वाहिद अपने मकान के विशाल नाम के एक कोने में बैठे हुए चाय पी रहे थे । भारत और पाकिस्तान के कई अन्य विस्थापित व्यक्तियों की तरह उन्हें विभाजन के समय में स्थापित होने के लिए मजबूर नहीं किया गया था, लेकिन उन्होंने ऍम देखा था और उसके तरफ को महसूस किया था । विभाजन के कुछ वर्ष उपरांत वह उच्च शिक्षा के लिए लाहौर से अमेरिका आए थे तो अमेरिका में बसने नहीं थे । लेकिन परिस्थितियां कुछ ऐसी बनती गई, उन का प्रवाह से स्थायी हो गया । उन्होंने वाशिंगटन में एक छोटा सा लेने शुरू किया, अमेरिका बसे पाकिस्तानी मुस्लिम परिवार की लडकी से शादी कर ली । कैंट वाशिंगटन में एक मध्यम दर्जे कर घर बनाया और अंतर वहीं बस गए । उनके पुत्र शिवराज ने ऑटोमोबाइल पार्ट्स के कारोबार में अच्छी तरह के चिराग ने अपने पिता के सामान्य कार्य को एक शानदार बंगले मैं बदन देखो । डॉक्टर वह इतना एक बडा भूखंड खरीदा था । हालांकि उन्होंने इस पर एक छोटे से घर का निर्माण किया था । फिर आज के बेटे अली वर्ष के पढाई में दिलचस्पी थे । पहले इसमें एक स्थानीय अमेरिकी पाकिस्तानी मुसलमाना दौरा चलाए जाने वाले स्कूल में पढाई की । इसके बाद उसने ईसाई हाई स्कूल में पढाई की और आखिरकार उसने वाशिंगटन विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री अर्जित की और एक सहायक प्रोफेसर के रूप में वहीं कार्यरत हो गए । सुबह से हो कम से कम अपने परिवार की आंखों में दार्शनिक क्रांति करेंगे । तरह था किशोरावस्था में एक घटना से काफी अब साथ में आ गया था । नाइन इलेवन तो हजार एक के आतंकवादी हमले के तुरंत बाद गुस्साया विपक्ष के अमेरिका ने । स्कूल के कुछ छात्रों ने अलीबख्श को मारपीटकर स्कूल के बाहर फेंक दिया था । ये घटना एक बडा झटका थे और एक दर्दनाक अनुभव ता हूँ । वो कुछ हफ्ता हूँ के लिए स्कूल में वापस जाने की हिम्मत नहीं कर सकता था । अलीबख्श समझता था की ये मुसीबात उसकी मुस्लिम पहचान की वजह से पैदा हुई थी । उसने अपना नाम बदलकर एलवर्ट रख लिया । वहाँ नाइन इलेवन के तत्काल प्रतिक्रिया में मुसलमानों पर हमले की छिटपुट घटनाएं हुई थी और जल्द ही लोग सामान्य स्थिति में लौट आए थे । हालांकि अलीबख्श ने अपना नाम रिवर्ट बनाए रखा । डॉक्टर वाहिद अपने परिवार को बहुत प्यार करते थे और इस बात पर रहना खाखरा कहा कि वे एक ही छत के नीचे एक साथ रहते थे । उन्होंने देखा एलवर्ट के कारण गेट में प्रवेश की गरज मैं अपनी कार पार्किंग के बाद एलवर्ट डॉक्टर वाहिद के पास आया हूँ । दादा जी मैं पाकिस्तान की सरकारी यात्रा पर जाने वाला हूँ । ऍफ का हुआ है वहाँ क्यों और कब बॉलवर्ड? वहाँ मुझे लाहौर विश्वविद्यालय में एक व्याख्यान देना है । आपकी क्यों नहीं? मेरे साथ चलते तो पता है मैं नहीं चल सकता है । वह अपने अपने दिल पर हाथ रखकर का ऍम मैं नहीं चाहता हूँ लेकिन का सब चलते हैं । साला मरने से पहले एक बार जरूर वहाँ जाऊंगा । डॉक्टर फायदे का कलवर्ट इंशाअल्लाह आप शीघ्र यात्रा करने में सक्षम हो जाएगा और मैं आपको वाले जाऊँ । सांत्वना के ये शब्द कहकर अलर्ट घर के अंदर चला गया । इसके आगे की कहानी जानेंगे अगले हुआ तब तक सुनते रहे कॅामन चाहें तो हूँ

Part 4

अभिनव सुन रहे को काॅमन चाहे और मैं आपके साथ ब्रिटेश रवि रंजन गोस्वामी का लग उपन्यास नाकाम दुश्मन अभी आप सुन रहे और पेश है इस उपन्यास का चौथा बात । एलवर्ट शराब पीने को छोडकर अपने धर्म के सभी बंदिशों और नियमों को पालन करता था । अपने कॉलेज के दिनों के दौरान उसने पार्टी हमें शराब पीना शुरू कर दिया था । कभी कभी वो इसके बारे में मलाल महसूस करता था लेकिन फिर वो अपने समुदाय से अन्य और अधिक के व्यसनी लडकों के साथ तो न करके अपने अपराधबोध हो काम करता हूँ । वो लेकिन नियमित रूप से पीने वाला व्यक्ति नहीं था और उसकी पत्नी को छोडकर परिवार के अन्य सदस्यों को उसके पीने की आदत के बारे में पता नहीं था । एलवर्ट सीनेटर मार्क के साथ हुई बैठक और पाकिस्तान की संभावित यात्रा के बारे में जानने के बाद बहुत खुश है । आम तौर पर वो अपने दादा और पिता के साथ खाना खाया करता था । उस रात को थोडी शराब पीकर जश्न बनाना चाहता था । वाइन के एक बोतल इसकी अलमारी में पडी थी । उसने अपनी पत्नी जो ऐसे बैठे ही उनके लिए खाना लाने के लिए कहा । जो है ना । पिता और दादा से जोड कह दिया कि एलवर्ट के सिर में दर्द हो रहा है । ऐसा वह खाना बैठो में देर से खाएगा जो ऍम भोजन की व्यवस्था की ऍम पीने के बाद जो के साथ बहुजन साझा किया । जिस गति से और जितनी मात्रा में एॅफ पी थी उसे देखकर जो जानते थे कि एलवर्ट को तेज नशा हो जाएगा । ऐसा पहले भी हुआ था जो भोजन खत्म होने के बाद तुरंत बिस्तर तैयार किया । जैसे की उम्मीद थी भोजन के बाद ऍम और सीधे बिस्तर पर चला गया और जल्दी हो गए जो झूठे बर्तन उठाकर किचन में रखने चले गए । जब से एॅफ डॉक्टर वाहिद को अपनी संभावित पाकिस्तान यात्रा के बारे में बताया था, वो कुछ उदास से हो गए थे । अपने प्रारंभिक जीवन के सौ दो उनकी आंखों के सामने पुनर्जीवित हो गए थे । उन्होंने अपने बचपन के दिनों की याद आ रहे थे । उन्होंने लाला राम चाचा चाहती सीता को सामापा अपने हिंदू पडोसियों और रमेश रफीक जावेद अपने बचपन के दोस्तों की याद आ गई । भारत और पाकिस्तान के विभाजन के समय डॉक्टर वाहिद लगभग सात साल के थे । उनके पिता यूसुफ और लाला चाचा, करीबी दोस्त और व्यापार में भागीदार उन दोनों ने मिलकर एक बढाकर खरीदा और उसके आंगन में एक दीवार उठाकर तो हिस्सों में बांट लिया था । इस दीवार के बारे में एक विशेष बात ये थी कि उसमें एक द्वार था जो हम तौर पर खुला रखा जाता था और दोनों परिवार इस दरवाजे के माध्यम से एक दूसरे के यहाँ किसी भी समय आते जाते थे । सीता चाहती है, वाहिद को अपने बच्चे की तरह प्यार करते हैं और अक्सर उसे खाने के लिए मिठाइयाँ दिया करते थे । कुछ हम आपका उसके साथ खेलते हैं और उसके होंगा तो मदद करते थे । यूसुफ का परिवार समान रूप से कुछ उन की देखभाल करता था । सभी तो अच्छा चल रहा था कि अचानक सांप्रदायिक दंगे आज दैनिक लूटपाट और हत्या है, शुरू हो गए । भारत और पाकिस्तान के बीच आबादी का भी बंटवारा होना था । लोगों को स्वेच्छा से भारत या पाकिस्तान है । बस ने की छूट दी गई थी लेकिन कई लोग समुदाय के बीच बढ गए । अविश्वास के मद्देनजर जानमाल की हानि के डर से यहाँ वहाँ चले गए । बहुत से गैर मुसलमानों को पाकिस्तान छोडने के लिए मजबूर किया जा रहा था और कहीं गए मुसलमानों को भारत छोडने के लिए मजबूर किया जा रहा था । डॉक्टर हुआ है तो याद आया जाते समय कैसे सीता चाहती और कुसुम आपा उसे गले लगा कर रहे थे । दोनों परिवार रोये थे लाला राम और उनका परिवार भारत के पंजाब के लिए ये कहकर गया था की स्थिति सामान्य होने पर लौटाएंगे लेकिन वो कभी नहीं हुआ । उन दिनों को याद करते हुए डॉक्टर वाहिद की आंखें नम हो गई और हॉट का आपने लगे उनका मन में रोने को कर रहा था । लेकिन उन्होंने अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर लिया क्योंकि श्री राजन की दवाओं के साथ वहाँ आता हुआ दिखाई दिया हूँ । इस्लामाबाद मार्च तीन, दो हजार सोलह ये सरकारी एजेंसियों की एक बैठक थी लेकिन मौलाना भी आमंत्रित किया गया था । बैठक का आयोजन स्टालिस्ट इस्लामाबाद मैं आईएसआई मुख्यालय था । खुफिया, सेना, वित्त, रक्षा और गृह मंत्रालयों के प्रतिनिधि और मौलाना बैठक में उपस् थित ये एक बिना एजेंटे के अनौपचारिक बैठक की तरह लग रहे थे । सभी एक गोलमेज के चारों ओर बैठे थे । वित्तीय सचिव होटल प्लाॅट के पीछे कौन था? उन्होंने विशेष रूप से किसी को लक्ष्य करके नहीं पूछा था । बोला ना बोला रॉक बदमाश होंगे और कौन डीडी खो गया । तालिबान ने इस विस्फोट की जिम्मेदारी ले ली है । सचिव रहे हालांकि क्या किसी भी अन्य ग्रुप का इस्तेमाल किया गया इसका हम पता करने की कोशिश कर रहे हैं, करना चाहते हैं । हमें अपने नीति को बदलना होगा । भारत किसी भी उल्लंघन के खिलाफ तेजी से और शक्तिशाली प्रतिक्रिया दे रहा है । सीमा पर झडपें हम काफी हानि पहुंचा रहे हैं । मौलाना ने डीडी खुफिया की ओर देखते हुए कहा, जब मुझे फंड काम मिल रहा है क्यों कर रक्षा सचिव हम भी तंग हाल है । मौलाना साहब सभी ने वित्त सचिव की ओर देखा हूँ । उन्होंने कहा, वित्त मंत्री ने प्रधानमंत्री के साथ बजट पर विचार विमर्श किया है । उन्होंने कहा कि जहाँ भी संभव खर्चों को कम करने की सलाह दी गई, बेशक हम सेना को नजर अंदाज नहीं कर सकते हैं । लेकिन सेना को भी सलाह दी गई है कि भारत पाक सीमा पर अपने बजट को ना उडाने के लिए हम वहाँ कुछ भी हासिल करने नहीं जा रहे हैं । हमें अफगानिस्तान और बलूचिस्तान और आंतरिक आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए भी तो संसाधन चाहिए । मौलाना ने उस समय तेज स्वर में कहा, मेरा कहना है कि इस देश में सभी आपका इंडिया पैदा कर रहे है । हम कश्मीर कैसे छोड सकते हैं । रक्षा सचिव शांत स्वर में कहा मौलाना साहब हम कुछ भी नहीं छोड रहे हैं । केवल वर्तमान स्थिति में प्राथमिकता के मुद्दों को संबोधित कर रहे हो ना संतुष्ट नहीं लग रहा था लेकिन वह आगे कुछ नहीं बोला । इस बैठक में कोई कार्रवाई की योजना नहीं बनाई । डीडी तो पिया ने सबको धन्यवाद देकर बैठक को समाप्त किया । सभी वहाँ से रुखसत होली लाहौर, पाकिस्तान चार मार्च दो हजार सोलह एलवर्ट अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ लाहौर विश्वविद्यालय में पहुंचा । वो बसंत था लेकिन वो अपने पूर्वजों की भूमि की हालत देखकर दुखी था । उसने वहाँ गरीबी, भ्रष्टाचार और समाज में निराशा की भावना को देखा । संजय श्रीवास्तव ने राजेश को छोड आए देते व्याख्यान में श्रोता के रूप में भाग लेने को कहा था । वाह वाह विश्वविद्यालय के सभी छात्रों के लिए खुला था । यहाँ कोई गुप्त मामला नहीं था और वहाँ मौजूद सुरक्षाकर्मी आगंतुकों के बैग जांच कर अंदर जाने दे रहे थे और लोगों की पहचान से कोई सरोकार नहीं । राजेश और लैला बीच की बनती में बैठे थे । व्याख्यान के लिए विषय था पाकिस्तान की प्रगति और बाधाएं । राजेश के लिए व्याख्यान में दिलचस्प कुछ भी नहीं था । कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एक मौलाना है जिन्होंने एक होकर भाषण दिया था और पाकिस्तान द्वारा सामना की जाने वाली हर समस्या के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया था । राजेश को प्रोफेसर एलवर्ट उसके द्वारा प्रभावित देखें । एलवर्ट के बारे इसमें बुलाने के बाद आई है । अपने व्याख्यान के दौरान कई बार उसने मौलाना के भाषण से और उद्योग किया था और उनके विचारों का समर्थन किया था । कार्यक्रम के बाद ॅ और मौलाना एक ही कार में सामान राजस्थान से बाहर गए । एलवर्ट मौलाना से व्यक्तिगत रूप से पहले कभी नहीं मिला था, लेकिन वो काफी समय से ट्विटर पर उन्हें फॉलो कर रहा था । फॅमिली के माध्यम से भी संपर्क हुआ और उसमें कई बार मौलाना के धर्मार्थ संगठन को पाकिस्तान में कुछ मदद से चलता था । ऑनलाइन दान दिया था । मौलाना नहीं पाया । ॅ उसकी योजना में फिट बैठता है । जब मौलाना ने एलवर्ट अपने कार्यालय जो उस स्थल से बहुत दूर नहीं था, चाहे के लिए आमंत्रित किया तो एलवर्ट नहीं, ऐसे एक सम्मान माना और खुशी से निमंत्रण स्वीकार कर लिया । मौलाना उसे अपनी कार में बैठाकर ले गए । अपने कार्यालय में चावर मौलाना नाॅट से पूजा हमारे लोग वहाँ कैसे हैं और आप लोग क्या कर रहे हैं? अलवर । हम सरकार के साथ कुछ मुद्दों पर सहमत हैं लेकिन वो हम सब संभाल सकते । मौलाना मैंने आपकी किताब सांस्कृतिक संघर्ष पढी है । काफी अच्छी लिखिए । शुक्रिया । आपने लिखा है कि दुश्मन पर सबसे अच्छी और लंबे समय तक टिकाऊ जीते उसकी जडों पर चोट करके प्राप्त की जा सकते हैं, जिससे आप का क्या मतलब है? बोलाना ने एलवर्ट के समझ एक प्रश्न रखा जहाँ से मेरा मतलब है संस्कृति और आस्था । एलवर्ट ने उत्तर दिया जब बहुत कर रहे थे मौलाना का मोबाइल बजट । उन्होंने फोन सुनकर फोन पर कहा शिविरों को बंद कर दो लडकों को एक महीने के लिए घर भेज दो । अपने बेस को सीमा से दो शिफ्ट करूँ । कर्नल शाकर को सूचित कर दूँ । मौलाना गंभीर हो गया । एलवर्ट ने अनुमान लगाया कि मौलाना की उम्र साठ से ऊपर होनी चाहिए । तो आपने आधे गंजे से और अपनी लंबी सफेद दाढी के साथ एक सामान्य बुजुर्ग व्यक्ति दिखाई पडता था । इसके अलावा दैनिक पांच बार के नवाज और सस्ते से उसके माथे पर पडा काला निशान उसके धर्मपरायण होने को दर्शाता था । जो शायद था वे किन्तु मौलाना के भाषण और सार्वजनिक बयान उग्र, उत्तेजक और विवादास्पद थे । फोन कॉल है बोला मैं का मूड खराब कर दिया था वो किसी को देर होने में पड गया था । आपको कोई खास काम तो नहीं? मौलाना ने एलवर्ट से पूछा था मुझे लाहौर गेट के पास मेरा पैतृक घर देखने के लिए जाना है । हेलमेट ने कहा मौलाना हम कल सुबह नौ बजे मिल सकते हैं । मैं कुछ और लोगों को भी आपसे मैं जानना चाहता हूँ । हाँ, सुबह में आ सकता हूँ । मुझे रात की फ्लाइट से वापस जाना । एलवर्ट ने कहा इसके बाद की कहानी जानेंगे । ऍम तब तक सुनते रहे ॅ समय जो मन चाहे

Part 5

हाॅट जो मन चाहे और मैं हूँ आपके साथ । ब्रिजेश और रवि रंजन गोस्वामी का लिखा हुआ लघु उपन्यास नाकाम दुश्मन । अभी आप सुन रहे हैं पीछे इस उपन्यास का पांचवा भाई । यह तो वाइफ के पिता अपने दोस्त के लौटने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन लालाराम ना तो फिर लौटे होना ही संपर्क किया । ये सब कोई शक था कि लालाराम और उनका परिवार भारत जिंदा पहुंची पाए थे या नहीं । उन्हें लाहौर में शांति नहीं मिल रही थी । कुछ साल बाद वो संपत्ति का अपना हिस्सा भेजकर कराची चले गए । हालांकि डॉक्टर वाहिद लाहौर की अपने बचपन की यादों को कभी नहीं मिटा । फारॅवर्ड में बहुत समय पहले लाहौर और कराची का दौरा किया था । अब दोनों ही जगह कोई भी रिश्तेदार नहीं रहते थे । लाहौर । मैं लाहौरी गेट के पास वैद्यजी की गली में उनका पैतृक मकान था । हालांकि वो मकान अब किसी और का था । एलवर्ट ने वहां आकर उस गाली और मकान की कुछ तस्वीरें डॉक्टर वाहिद को दिखाने के लिए ले ली और बस से वापस के स्ट्राउस आ गया । वहाँ जब डाकबंगले पर पहुंचे प्रोफेसर जो लॉन में टहल रहे थे, उन्होंने टिप ॅ कितने सहज देख रहे हो जैसे यहाँ रहते थे, जो मेरे दादाजी इस जगह गए थे । मैं बचपन में इस जगह हो । आप रात के आठ बजे खाने के लिए हमारे साथ में शामिल होंगे । फॅमिली देखिए । लगभग सात बजे जरूर उन्होंने कहा और अपने कमरे में चले गए । वे डाइनिंग हॉल में आठ बजे रात के खाने के लिए करते हो । खाना उनकी पसंद करना ॅरियर के साथ खाना पसंद करते, किंतु वहाँ इन की अनुमति नहीं थे । खाने की मेज पर उन्होंने चर्चा की की क्या क्या उपहार अपने परिवारों के लिए मैं खरीद सकते हैं । बिस्तर पर जाने से पहले ॅ जोया को फोन किया और पूछा कि कुछ कुछ खास बस तो चाहिए जो मैंने खुद के लिए कुछ भी नहीं है । इसके बजाय उसने दावा जन के लिए कश्मीर और उसके दोस्तों के लिए इतना लाने के लिए कहा । फॅमिली में लिखा और बिस्तर पर चला गया । सुबह जब डाकबंगले से निकलने वाला ही था । मौलाना नया उसे फोन किया और बताया कि एक कारों से लेने के लिए आएगी । एलवर्ट को अच्छा लगा, वो चला गया और गेट पर खडा हो गया । पांच मिनट के भीतर एक सफेद कार वहाँ करोगे । चालक वही था जो उसे और मौलाना को पिछले दिन ले गया था । डाॅट को सलाम की और कार के पीछे का दरवाजा खोल दे । एलवर्ट कार्ड में बैठ गए और कार चलते हैं । मौलाना के घर पर इस दिन का माहौल अलग था । मौलाना के निवास के बाहर सडक के किनारे को जिन निजी और सरकारी वाहन कतार में खडे थे, मुलाना के बंगले के गेट पर कुछ हथियारबंद सुरक्षाकर्मी खडे थे । मौलाना का निवास एक पुराने बडे बंगले में था । छह सुरक्षाकर्मी, चालक और कार को पहचानते उन्होंने एलवर्ट के कार्य को बंगले में निर्बाध प्रवेश करने दिया । टॅावर पोर्टिको में लाकर रोक दे । एक हरे पठानी सूट धारी जवान लंबे छरहरे दडे हालत में जिसके सिर पर एक सफेद गोल्ड हुई थी । आज बडे कार कार का दरवाजा खोला और ऍम में ले गए । ॅ पहले से ही वहाँ करते थे । बुलाने के बगल में बैठे दो लोगों को वो तरंग पहचान गए । एक आईएसआई के उपनिदेशक थे और अन्य एक मंत्री थे जैसे उसने टीवी पर देखा था । अन्य लोगों के अलावा एक अमीर व्यापारी, सब देखने वाला व्यक्ति और चार कमांडो की तरह देखने वाले व्यक्ति वहाँ मौजूद हैं । मौलाना ने सभी से एलवर्ट का परिचय कराया । एलवर्ट को जान कर हैरानी हुई कि व्यापारी एक अंतरराष्ट्रीय ऍम ऍम को उनके द्वारा उनके गुट में इतने जल्दी स्वीकृति से अभी होता हूँ । पसंद मौलाना और उसका कोर्ट संयुक्त राज्य अमेरिका में एक नई मजबूत कडी बनाना चाहते थे तो दो हजार एक मैं । नाइन इलेवन के हमले के बाद अमेरिका ने वहाँ उनके सभी लेंगे तहस नहस कर दिए थे वो अमेरिका मैं अपनी लॉबिंग करने और वित्तीय समर्थन जुटाने के लिए उपयोगी कनेक्शन स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे । कुछ संपर्क स्थापित करने में सफल भी हो गए थे । मौलाना को एलवर्ट काफी होना और मदद करने के लिए तत्पर लगा । मौलाना सभी से कम दोस्तो, आज हमारे बीच एक विशेष स्थिति आए । अमेरिका से मिस्टर एलवर्ट जो आज यहाँ कुछ अपने विचार हमारे साथ बांटेंगे । ऍम हमारे भाइयों में से एक है । वो बहुत ज्यादा भेदभाव और दुनिया के विभिन्न भागों में हमारे लोगों के शोषण के बारे में चिंता है । वाशिंगटन विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर फिर उन्होंने एलवर्ट से संस्कृतियों के संघर्ष के बारे में बात करने के लिए गुजारिश की । वो नाना ने एलवर्ट को अपने सीट से ही बात करने के लिए कहा । एलवर्ट ने बात शुरू की, मेरी किताब संस्कृतियों के टकराव में नया असाधारण कुछ भी नहीं ये मूल्य विकास, सभ्यताओं और संस्कृतियों और मानव वस्ती और देशों को आकार देने में उनकी भूमिका को फिर से देखने और समझने के बारे में । इसके अलावा कैसे एक समूह दमन के हजार के रूप में उपयोग करता है और दूसरे पर वर्चस्व प्राप्त करता है । हम हथियारों के द्वारा एक शक्तिशाली दुश्मन को नहीं जी सकते । हमें जडों पर चोट करनी होगी । जब मैं जाडों की बात करता हूँ तो मेरा मतलब विशेष रूप से आस्था और संस्कृति से होता है । मुख्य विचार बताने के बाद एलवर्ट ने इतिहास से कुछ उदाहरण पेश किया । कैसे साम्राज्य बने और कुछ बाहरी लोगों द्वारा स्थानीय संस्कृतियों को प्रभावित किया गया । सब लोग एलवर्ट की बातों से प्रभावित लगे । मौलाना और डैडी ने अनुमोदन में से लायेगा एलवर्ट कर संचित वहाँ खत्म होने पर मौलाना ने बैठक समाप्ति की । घोषणा के रवाना होने से पहले मौलाना ने एलवर्ट को एक सीडी और कुछ गोपनीय दस्तावेज दिए । लाहौर पाकिस्तान कई बार ऐसा होता है कि कुछ खोजते खोजते कुछ और चीज हम आ जाता है । राजेश को यहाँ एक काम की चीज मिले वो थी एलवर्ट और मौलाना ऍम । थोडी देर उसने सोचा कि वो क्या कर रहा है । ये काम तो जूनियर खुफिया अधिकारी द्वारा किया जा सकता है । लेकिन जल्द ही उसने अपने अहंकार को परे हटाया और खुद को याद दिलाया । कोई काम छोटा नहीं होता और देश के लिए कुछ भी करेगा । राजेश ने मौलाना के घर पर हुई बैठक और एलवर्ट के बारे में विस्तार से जानकारी पाने के लिए अपने स्थानीय संपर्कों का इस्तेमाल किया । राजेश को जानकारी मिलेगी मौलाना नाॅट को एक सीडी और कोचिंग का हजार दिया है । इस बात से चौका न कर दिया राजेश नाॅट के बारे में । एक नोट तैयार किया और एक फॅस भारत में श्रीवास्तव को मेल भेज दिया । ऍम में मजा नहीं आ रहा हो तो कोई रोचक कार्य नहीं । कुछ रोमांचक जब उसने राजेश पूछा आगे क्या प्रोग्राम है? राजेश ने कहा रुको और हो मार्च छह दो हजार सोलह डाॅलर से लगभग बीस घंटे की हवाई यात्रा के बाद जब एलवर्ट लगभग तीन बजे टल ऐसा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा को शारीरिक रूप से था । क्या था? लेकिन वो खुश था जो मैंने उससे कहा था कि पापा उसे लेने आएंगे । उसने अपना सामान्य एकत्र किया और इमिग्रेशन और कस्टम की कार्रवाई पूरे करके हवाई अड्डे के बाहर आ गया । मौसम सुखद ठंडा लगा क्योंकि है वो पाकिस्तान में गर्म मौसम का सामना कर के आएगा । सिराज बाहर इंतजार कर रहा था । उन्होंने एलवर्ट को प्यार से गले लगाया और कार के पास ले जाए गए । ऍम पीछे सामान रखा और पिता के बगल में बैठ गया । एक घंटे बाद एलवर्ट डॉक्टर वाहिद को लाहौर का यात्रा बुरा टन सुना रहा था और डॉक्टर हुआ है । ऐसे गौर से सुन रहे थे जैसे एक बच्चा कोई परी कथा सुन रहा हूँ । अल्बर्ट को घर छोडने के बाद शिवराज अपनी दुकान पर चला गया जो मैंने खाने के महीनों के बारे में सोचना शुरू कर दिया । कुछ समय के बाद ऍसे अगली और अपने कमरे में चला गया । वो मौलाना द्वारा देंगे । सीडी और का साथ देखने बाॅडी लगाई थोडा देखा हूँ । फिर बाद में विस्तार से देखने के लिए से हटा दिया । इसी तरह सरसरी तौर पर कागजात देखकर फॅमिली में फाइल में रखते ॅ पीछे से गले लगाकर चौका दिया । ऍम पाकिस्तान से कहाँ? कोई आज तो हुआ मिला तो मुझे कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा हूँ । नहीं मैंने क्या मैं तुमसे कुछ छिपा सकता हूँ । आॅफर मुस्कुराया तो आज रात के खाने में क्या पसंद करोगे ऍम जी और पिताजी से पूछो मुझे कुछ भी चलेगा । अभी चाहे ॅ अभी पहले में नहीं आना चाहता हूँ । ठीक है वो कुछ देर के बाद होंगे जो एक कमरे से बाहर चली गई और ऍम में चला गया । रात के खाने के बाद एलवर्ट और जोया नजीडी और दस्तावेजों को देगा । सीडी में मौलाना के भारत विरोधी भाषण थे । कागजातों में भारतीय हिंदू और यहाँ तक कि कुछ भारतीय मुस्लिम नेताओं के खिलाफ कुछ लेख शामिल थे । इसके अलावा कुछ नाम और फोन नंबरों की एक सूची भी हूँ । जोया चिंतित हो गए तो मैं ये सब क्यों दिया? तो उनके लिए कुछ करने वाले तो नहीं । उसकी आवाज में चिंता स्पष्ट थे । जो डालें ये मेरे लिए एक सम्मान के बाद मौलाना वहाँ के महत्वपूर्ण धार्मिक और राजनीतिक नेता है । यहाँ तक की सरकार और सेना भी उनका सम्मान करते हैं । इसके अलावा हम अपने धर्म और जातीयता वो क्या बोल जाता हूँ तो हम मेरे के हैं । हम यहाँ तीसरी पीढी के दादाजी के बचपन, वहाँ गुजरात तो भी उन्होंने उस क्षेत्र कि राजनीति में रूचि नहीं ले । भारतीयों और पाकिस्तानियों के साथ एक सब व्यवहार करते हैं । मुझे समझ में नहीं आ रहा तुम्हारी इन पचडों में दिलचस्पी क्यों? मैंने चिंता मत करो । मैं आईएस में शामिल होने नहीं जा रहा हूँ । धन्यवाद लेकिन याद रखना तो उन्हें कुछ गडबड । काम किया तो अपने साथ नहीं रहेंगे तो रहने का ऍम हाथ पकडकर बिस्तर पर किस लिए और कहा है समझ चाहता नहीं हूँ । इसके बाद की कहानी जानेंगे । अगले हुआ है तब तक सुनते रही ॅ सुने जो मन चाहे

Part 6

अभी अब संदेह को काॅल समय जो मन चाहे और मैं हूँ आपके साथ आपका दोस्त प्रजेश रविरंजन गोस्वामी का लिखा हुआ लघु उपन्यास नाकाम दुश्मन वे आप सुन रहे तेज इस उपन्यास का छठ बाबा एलवर्ट समझता था कि उसका परिवार उसके विचारों या कार्यों का समर्थन नहीं करेंगे । इसलिए उसमें किसी के साथ आगे कुछ भी चर्चा नहीं लेकिन वह मौलाना के साथ ही मिल द्वारा संपर्क में बना रहा । एक पखवाडे के बाद एलवर्ट को मौलाना का एक ही मिल प्राप्त ऍम । जैसा कि मैंने आपको बताया था कि हम पूरी तरह से सरकारी धन और अन्य आंतरिक संसाधनों पर निर्भर नहीं रह सकते । फंड जुटाने के लिए प्रयास करेंगे । कोई भी राशि छोटी नहीं है आपका बहुत इस नहीं भाई ऍम मार कर के साथ इस मसले पर चर्चा के मार्क ने अपने संसाधनों से कुछ धन जुटा दिया । वो लाना की सलाह पर एलवर्ट ने एक छद्म नाम से आपने विचारधारा के प्रचार प्रसार के लिए एक ब्लॉक लिखना शुरू कर दिया था । अलवर टी ये सोच कर खुश था की ये विश्व व्यवस्था को आकार देने में कुछ भूमिका निभा रहा है । उधर ऐसा मौलाना से खुश था क्योंकि वो अमेरिका में एक ताजा लिंक स्थापित करने में कामयाब हुआ था । हेलमेट के ब्लॉक ने विश्व के कुछ क्षेत्रों से भारत के क्षेत्रों के कुछ समूह को आकर्षित किया । उनमें से कुछ हिंदू रहते थे और कुछ ऐसे थे भारत और इसकी सब्जी मुस्लिम आबादी तक से नफरत करते थे । वहाँ से सत्ताइस दो हजार सोलह लाहौर ऍम फिर डीडी करना । मौलाना, रक्षामंत्री टाउन मौलाना के आवास पर इकट्ठा हुआ । संतुष्ट थे की सरकार ने उनकी योजना का विरोध नहीं किया था । जी जी ने कर्नल से पूछता हूँ आपके क्या विचार है? ऍम मैंने प्राइम मिनिस्टर इस बात की है वो सकारात्मक बुलाना मुझे क्या करना घन्ना मौलाना उत्तर दिया जनाब, अपने फॅमिली कर जो शानदार योजना बनाई है हम उसे ही अमल में लाएंगे । लेकिन मैं ऑपरेशन कमान सामान होगा । डाउन से दीदी ने पूछा आप की तैयारी कैसे डॉॅ? हरदम तैयार है । मैंने पहले से ही नशीली दवाओं के के भेज दिए और नकली भारतीय मुद्रा का सैलाब भारतीय बाजार में भेजने की तैयारी है । मौलाना ऍम बोला, हम जानते हैं कि इस साल इंडिया से तुमने कई गुना प्रॉफिट कमाया तो मतदान करना चाहिए । डॉन जनाब, मैंने पहले से ही किया है एक मुस्कान के साथ ऍम से तुम इतने बोले नहीं जाना । मौलाना कोचर अलग इशारा कर रहे डाॅ । इस तरह से एक बारी बोल नहीं कर सकता । कल आप सभी को उपर पैकेट प्राप्त हो जाएंगे । फिर वे विस्तार से योजना पर चर्चा करते हैं । अंत में कर्नल है सबको संबोधित किया । ये सब चर्चा के बाद मेरा निष्कर्ष है कि हम चार लाइनों पर काम करने वाले जैसे हिंदुस्तान के विभिन्न विश्वविद्यालय में दुष्ट तत्त्वों को सक्रिय कर वहाँ शांति पैदा करना । हिंदुस्तान में किसी भी समूह के द्वारा किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन में हिंसा फैलाने के लिए असामाजिक तत्वों का उपयोग करना, कई महान बुद्धिजीवी और मीडिया के लोगों को खरीदकर पेड न्यूज के द्वारा राजनीतिक अस्थिरता, स्टार में कौन मौत बढ गाना और दुनिया में इंडिया की छवि को नुकसान पहुंचाना, भारत फॅमिली पर सेल सक्रिय करना और कश्मीर में आतंकी हमले करवाना हो, हम तुरंत तैयारी शुरू करेंगे और जब मैं आदेश दूंगा हर मोर्चे पर एक साथ एक्शन होगा जब हम इंडिया में माहौल बिगाड देंगे और इंडिया उसे सवाल है, व्यस्त हो जाएगा । हमारी फौज अटैक कर देंगे । आप सभी सहमत हैं, सभी नहीं । अनुबंधन में से रेला बैठक खत्म हो गए । सभी लोग मिशनरी काम की भावना के साथ वहां से रवाना हो । चौबीस मार्च दो हजार सोलह मुंबई । भारत अस्सी धारा भी मुंबई के घनी आबादी वाले जबकि बस्ती में कमरा किराये पर लेकर रह रहा था तो एकांत में और गुमनाम रहना चाहता हूँ । ज्यादातर उससे वहाँ कोई नहीं जानता था और इसमें किसी की खास दिलचस्पी नहीं दी । केंद्र त्योहारों पर पडोसियों से एकांत में रहने के लिए अनुमति नहीं देते । घर की मालकिन चाची से घर में बनी मिठाइयां भेजने नहीं होती कोई लोग । किसी त्योहार के संयुक्त समारोह के लिए उसे आमंत्रित । होली की सुबह उसके कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई । जब दरवाजा खोला तो मिठाई के एक पैकेट के साथ घर के मालिक की जवान बेटी खडे थे । वो होली होली मुबारक वाई । मैंने आपके लिए कुछ मीठा भेजा है । वसीम ने मिठाई को सरकार कर लिया और का धन्यवाद् आपका नाम क्या है? मेरा नाम नेता है । उसमें जवाब दिया और वापस चले । असीन सोच रहा था कितना मुश्किल है यहाँ एक अजनबी की तरह जीना । लोग कितने जल्दी रिश्ते बना लेते हैं । अनीता ने उसे पहली बार मिलने पर ही भाई बना लिया । उसे अपने घर की आसानी शुरू । कुछ समय के बाद फिर किसी ने दरवाजे पर दस्तक दे । उसी मैं चाहती लगाने वाले छह के माध्यम से बाहर देगा और उसके ये वक्त उन सबके चेहरे होते थे और कपडों पर भी रंग लगे थे । उससे याद आया । उस दिन हो लेते । उनमें से कुछ युवकों को पहचानता था लेकिन किसी के साथ कोई दोस्ती नहीं है । असीम ने अंदर से जवाब दिया, माफ करना तो मुझे बुखार है । एक ही वक्त नहीं जोर से पूछा तुम रंगों से बचने के लिए बहाना तो नहीं कर रहे हो? नहीं, मैं वास्तव में बीमार हूँ । उन्होंने ज्यादा परेशान नहीं किसी ने एक फॅमिली की तरह बजाना शुरू कर दिया और वे होली है चलाते हुए वहाँ से चले असीम नहीं । दिनभर कमरे के अंदर ही रहने का फैसला किया तो आपने लेपटॉप को खोल कर बैठ गए और अपने ईमेल पडने लगा । वहाँ उसके लिए एक विशेष संदेश था । कुछ दिनों बाद से गोरखपुर जाने को कहा गया था । तीस मार्च गोरखपुर भारत ॅ अपनी टीम के साथ गोरखपुर में हुए बम विस्फोट के स्थान पर पहुंचे । ब्लाॅस्ट एक संकरी गली में हुआ था । उन्होंने फिर क्रिकेट बम दस्ते और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को पहले ही बोला भेजा था । ये एक संकेत लघु अंधी गए नहीं थे । गले के पास भीड जुटी थे । लगभग सभी गली के निवासी बाहर आ गए थे । फायर ब्रिगेड कर्मियों और पुलिस ने गाली को पूरी तरह खाली करा दिया था । कोई बडी आग नहीं थे । गली के अंत में एक दरवाजे की खिडकियों और लकडी के दरवाजों की दरारों के माध्यम से धोना बाहर आ रहा था । निवासी उन्हें खालिद की सूचित किया कि उस मकान में पीछे भी एक दरवाजा था जो पीछे की गली में बोलता था । खालिद ने इलाके को घेर लिया । ऍफ का पानी का टैंकर गली के प्रवेश के पास तैनात किया गया । उस पर एक लंबे रबर के पास की मदद से उस मकान में बची हुई आग बुझाने के लिए पानी लिखा गया । ये निश्चित होने पर की आग बज चुकी है । पहले बम निरोधी दस्ता मकान में प्रवेश हो, वहाँ अंदर कोई भी नहीं तक बम दस दिन है । सुनिश्चित किया कि यहाँ कोई जीवित बम नहीं था । इसके बाद पुलिस और फॉरेंसिक विभाग के लोगों ने अपना काम शुरू कर दिया । वहाँ एक कमरे में विस्फोट द्वारा बना एक छोटा गड्डा और मानव रक्त के निशान मिले । इंस्पेक्टर खालिद को प्रथम दर्शिता ऐसा लगा कि कम तीव्रता वाले बम का गलती से विस्फोट हो गया था । शायद किसी ने वहाँ बम बनाने की कोशिश की थी । एंगर पर टंगे तो अलग अलग काम आप के कपडों से अनुमान लगाया गया कि दो पुरुष इसमें शामिल थे । रक्त की उपस् थिति से ये अनुमान लगाया जा सकता था कि उनमें से एक या दोनों को मामूली चोट लगी थी और वे पिछले दरवाजे से भागने में सफल रहे थे । पुलिस ने एक लेपटॉप और घर से कुछ अतिवादी साहित्य जब्त कर लिया । खाॅ को घटना के विस्तार से जानकारी दी । शहर में नाकेबंदी कर दिए गए । उन दो अज्ञात व्यक्तियों को पकडने के लिए अभियान शुरू किया गया । शहर नेपाल सीमा के पास था इसलिए वहाँ बीएसएफ को भी सतर्क कर दिया गया । खालिद ने दो घंटे के भीतर एक काठमांडू जाने वाली बस से दो युवकों को पकड लिया । एक युवक के एक हाथ में पट्टी बंधी थी । दूसरे युवक का एक हाथ चला था । दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया । इकतीस मार्च दो हजार सोलह दिल्ली भारत संजय ने राजेश से प्राप्त सूचनाओं से निष्कर्ष निकाला कि दुश्मन कुछ अलग करने की योजना बना रहा है । उन्होंने राजेश को लौटने के लिए सन्देश भेज दिया और पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल चीज दवाई और संयुक्त राज्य अमेरिका में अपने अन्य संपर्कों को सतर्क कर दिया । संजय श्रीवास्तव नरिंदरजीत को भी जानकारी देना ठीक समझा और उनके पास गया हूँ खतरा गंभीर है सर, कितना गंभीर खतरा? दलजीत ने पूछा श्रीवास्तव हूँ पहले से कहीं अधिक क्यों कर हमला बहुआयामी होने जा रहा है और उनकी आंतरिक तत्वों और संसाधनों का उपयोग करने की योजना है । आपका क्या मतलब? मुझे डर है देश में सांप्रदायिक और वर्ग संघर्ष, छात्रों के अशांति, अंतर आतंकवादी हमले हो सकते हैं और उत्तर और पूर्वी सीमाओं पर तनाव पैदा हो सकता है । ये सब क्या कर हूँ? रंजीत ने थोडा जानता तो अगर कुछ हूँ चीफ खतरा वास्तविक है संजय का ठीक श्रीवास्तव मुझे लगता है कि हमें शहनाई और गृहमंत्री को सचित करना चाहिए आंसर संजय का । इससे अच्छा के बाद संजय अपने कमरे में आ गया । इसके बाद की कहानी जानेंगे । अगले अंक में तब तक सुनते रहे ऍम समय जो मन चाहे

Part 7

अभी अब साॅस उन्हें जो मन चाहे और मैं आपके साथ आपका दोस्त ब्रिटिश रविरंजन गोस्वामी का लिखा हुआ लघु उपन्यास नाकाम दुश्मन अभी आप सुन रहे हैं पेश है इस उपन्यास का बाबा एक अप्रैल दो हजार सोना दिल्ली भारत राजेश में कुछ हफ्तों के लिए लेने को अमेरिका बेचते हैं और खुद दुबई के रास्ते भारत लौट आया । वो दुबई में एक दिन के लिए रुका । उसका ये प्रवास भी उपयोगी साबित अपने एक संपर्क से उसे करीब और एलेक्स के बारे में उपयोगी सूचनाएं मिली जो उसने तुरंत भारतीय सरकार को विस्तृत जब राजेश इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरा । दिल्ली के किस्तान समाचार पत्र के अनुसार एलेक्स कोचीन में हेरोइन की एक भारी मात्रा के साथ कस्टम अधिकारियों द्वारा पकडा गया था और करीब नकली भारतीय करंसी की एक बडी राशि के साथ दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था । इस जानकारी से राजेश को संतुष्टि मिले । राजेश एयरपोर्ट से सीधा ॅ के मुख्यालय गया और संजय श्रीवास्तव को सोचना । संजय उसे देख कर खुश है । कैसे हो राजेश संजय ने पूछा ठीक धन्यवाद, असली चुनौती अब यहाँ समझता हूँ । राजेश ने कहा संजय नर्स एक मोटर लिफाफा दिया और कहा ये तुम्हारे लिए एक दिन आराम करो और कल एक काम पर लगता होगा । ऍम धन्यवाद दिया और कार्यालय से बाहर आ गया । राजेश ने ले पापा खोला तो उसमें से एक लाख रुपये और उसके नाम पर एक आदेश और प्राधिकार पत्र मिले । अगले दिन दोपहर को राजेश ने एयर इंडिया के विमान से गोरखपुर के लिए उडान भरेंगे । लगभग दो घंटे में वो वहाँ पहुंच गए । इंस्पेक्टर खालिद हवाई अड्डे पर असर लेने आया था । हवाई अड्डे से सीधे केंद्रीय जेल गए राजेश ने अपने पहचान पत्र और प्राधिकार पत्र जेल अधीक्षक दिखाए और गोरखपुर में हुए बम विस्फोट के सिलसिले में गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ करने की अनुमति आपकी इस पूछताछ से राजेश ने पता लगाया कि उन गिरफ्तार व्यक्तियों के पाकिस्तान के साथ संबंध दुश्मन एक साथ अनेक स्थानों पर बडी कार्रवाई के लिए तैयारी कर रहे थे जिसके लिए कमांड किसी तीसरे देश से आना था और होने तब तक इंतजार करने के लिए कहा गया था । राजेश नई दिल्ली आकर श्रीवास्तव को जानकारी श्री वास्तव में हाॅकी साइबर शाखा के प्रभारी बनने आदेश दिए और तुरंत काम पर लगाने की सलाह देते हैं । अप्रैल दो सौ सोलह पाकिस्तान कर्नल ने हरी झंडी दे दी थी । कार्रवाई के लिए ग्यारह अप्रैल की तारीख तय किए । दस अप्रैल की रात को करीब ग्यारह बजे करनाल को मौलाना का फोन आया ना कल सुबह इंडिया की न्यूज देखना ना बोला । कर्नल ने सुझाव दिया जनाब क्यों ना हम ऐसे उद्घाटन को एक साथ देखें । मजबूत विचार है मेरे घर पर सब एक साथ चाय के साथ इस प्रायोजित कार्यक्रम कल चलेंगे । मौलाना ने कहा । इसके बाद मौलाना ने अगली सुबह की चाय पर डीडी अच्छा सचिव जॉन और कुछ अन्य मित्रों को आमंत्रित किया । अगले दिन सुबह आठ बजे सब बोल आॅटो में करते हुए सबको चाहे नाश्ता दिया गया । मौलाना मैं टीवी खोलकर आज तक न्यूज चैनल लगा दिया । जैसा की उम्मीद थी वो पिछले रात की खबर दिखा रहे थे । जब उन्होंने दिल्ली में युवकों के एक समूह को पाकिस्तान का झंडा लहराते और भारत के खिलाफ नारे लगाते हुए और कश्मीर की आजादी की मांग करते हुए देखा तो आपस थे । बताएंगे सबने मुलाना को खास बताए थे । मौलाना एक मुस्कान के साथ फख्र से आपने दाढी पर हाथ में नहीं लगा । हम लोगों के चेहरे शायद वैसा ही लेते जैसे पाकिस्तानी क्रिकेट टीम भारत के खिलाफ एक मैच जीते हैं तो हम पाकिस्तान का चेहरा खिल जाता है इंडिया ऍम पूरे भारत में कुछ को छोडकर सभी दिल्ली में हुई है सर वह तो विरोधी गतिविधि को देख चौंक गए थे । इन युवकों में से कुछ एक स्थानीय विश्वविद्यालय के चाहते थे । वो गिरफ्तार किए गए । कुछ राजनेताओं ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए इस घटना में भी एक मौका देगा । मैं छात्रों के समर्थन में खडे हो गए । जल्दी ही देश में विभिन्न मुद्दों पर आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया और लगभग सभी विरोध प्रदर्शन हिंसक होगा । कुछ स्थानों परिस्थिति संभालने में सेना की मदद ले गए । मीडिया के एक वर्ग ने विभिन्न धार्मिक समुदाय के बीच संघर्ष में आग में भी डालने का काम किया । कुछ लोगों ने एक धर्म विशेष की हर बात में आलोचना करने का जैसे पीडा उठा लिया था । भारतीय कॅश नहीं पता था और सरकार को सतर्क कर दिया था । सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया था । लेकिन दशमलव मैं कुछ स्थानीय लोगों और संसाधनों का उपयोग किया था । पता उन्हें नियंत्रित कार्रवाई का उपयोग करने की सलाह दे गए । पाकिस्तानी लोगों को नुकसान ना हो । हालांकि सीमाओं पर सेना को मुख्य आपसे दुश्मन से निपटने की छूट दे दी गई थी । मैं दो हजार सोलह अंत में गंभीर खो भी और सूचनाओं के आधार पर भारत सरकार ने सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया और एक असमान्य और कठोर कदम उठाया । फ्रांस और बेल्जियम से प्रेरणा लेते हुए सरकार ने देश में तीन दिनों के लिए आपातकाल लगा दिया । तीन दिनों के लिए कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने जगह, जगह, दिन और रात छापेमारे । किसी भी स्थान में प्रवेश उनके लिए वर्जित नहीं था । बाहरी लोगों और अंदरूनी दुष्ट तत्वों को पकडकर जेल में डाल दिया गया । आतंकियों के लगभग सभी इसलिए परसों को नष्ट कर दिया गया । ये सब बहुत तेजी से और बिना किसी प्रचार के किया गया था । मीडिया को कई स्थानों पर जाने की अनुमति नहीं दी गई थी । मौलाना और उनकी टीम ने अंतिम हमले के लिए चौदह मई दो हजार सोलह को चुना था । एक बार फिर मौलाना के घर पर इकट्ठे हुए हैं । टीवी पर एक साल भारत की दुर्दशा का आनंद लेने के लिए कर नाॅट के माध्यम से अमेरिका से भारत में अपने लोगों तक कार्रवाई करने का आदेश पहुंचा दिया था । ऐसा भारत को या एजेंसियों को चकमा देने के लिए किया था । उन्हें पता नहीं था कि सीडी और दस्तावेज की एक प्रति ॅ के पास पहुंच चुकी थी और ऍम हो चुके थे और उनके प्लान की जानकारी भारत को मिल चुके थे । सभी टीवी के सामने बडी उत्सुकता से बैठे थे । मौलाना ने आज तक चैनल लगातार देखा तो कोई खास खबर नहीं थे । उसमें दूसरे न्यूज चैनलों को बदल बदल कर देगा । उन पर भी उनके हित की कोई खबर नहीं थी । भारत में न किसी बम विस्फोट और ना ही किसी बडे हादसे की खबर समझ गए कि भारत में उन की योजना को नाकाम कर दिया था । सभी के मूल्य अटक गए थे । अब की बार उन्हें करारी हार मिली थी और वे पूरी तरह नाकाम हो चुके थे । कहानी पसंद आई तो सब्स्क्राइब करना मत भूलें और हमेशा सुनते रहे । ऍम चाहे वो हाँ

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