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भाग - 01

आप सुन रहे हैं कुछ फॅमिली अमित खान द्वारा लिखी किताब धस जाओ मेरे लिए का दूसरा और अंतिम भाग तो मरोगी मेरे हाथों और मैं हूँ पल्लवी भारतीय ऍम सुनी जन्मानि चाहे तो मरु जी मेरे हाथ हूँ अध्याय आना बैलेंस में आज किसी बडे जश्न जैसा माहौल है । नौकर चाकर इधर से उधर भागे भागे फिर रहे हैं सौ कमरों की उस अत्यंत विशालकाय आना पालस की दरो दीवार को खूब अच्छी तरह हम कहा गया है वहाँ लॉन की घास को वहाँ का मालिक मशीन से काफी तेजी के साथ दौड दौड कर का है । किचन में से झनझन करते पकवानों की सब गंदा रही है । मुख्य हॉल में लगे झाडफानूस के कांच को भी आज खूब अच्छी तरह से चमकाया गया है । उसमें रंग बिरंगे बाल लगे हैं और न जाने कितने सालों बार चला है आना । पालस के तमाम नौकरियों में गजब की इस थूकते हैं आखिर हा जसपाल इसकी शहजादे लौट रही है । जूलिया लौट रही हैं सबसे ज्यादा खुश मेरे आना गुन जानते हैं पचास साल के अधीन रूम सफेद शिफॉन की साडी में लिपटा शरीर बिल्कुल दूध जैसा गौरवपूर्ण । पंद्रह साल पंद्रह साल । उसने अपनी बेटी का इंतजार किया था । लेडी आना गुलजार दे । जिस समय पूरे बहस नहीं इधर से उधर भागी भागी फैल रही है । एक एक चीज को चेक करती हूँ । अपनी बेटी के आगमन से पहले वो कहीं कोई कमी नहीं छोडना चाहते हैं । बूटा राम भूराराम, लुधियाना, पंजाब इसकी करुँगा रहवास पूरे बाल इसमें गूंज रही थी और ये आसाना फौरन बूटा राम भागा भागा नहीं आॅफिस हमने पहुँचा हूँ पूरा राम बयालीस पैंतालीस साल का था काला भूरा चेहरा मोटे होट छोटी हाँ । कुल मिलाकर बूटा राम एक बदसूरत आदमी था लेकिन जितना बदसूरत था उतना ही दिल का साफ खास तौर पर आना । गोंजाल्विस का बेहद वफादार है तो मैं मिसी बाबा का कमरा तो ठीक कर दिया ना? बूटा राम फॅसा ना अपुन ने उसे एकदम फिनिश कर दिया । फॅमिली फिनिश फिनिश, वाई फाई और मैं पापा का गिटार का तार टूट गया था । क्या तुमने उसे भी छोड दिया? ऐसा ना गिटार का तार भी जोड दिया और बीच में से टूट गया था । इसलिए मैं सुबह म्यूजिकल शॉप से जाकर उसमें नया तार दाल भला घट । इतना ही नहीं बैडमिंटन कोर्ट में नया नेट भी कर दिया है । स्विमिंग पूल का सारा पानी बदला जा चुका है और मिस्त्री बाबा के लिए नई बीएमडब्ल्यू का ऑर्डर दिया जा चुका है । बस थोडी देर में यहां पहुंचने वाली होगी । ऍम मैं बाबा की जितनी आपको फिक्र आना उतनी मुझे भी है । मैं जानती हूँ मीडिया ना गुंजाल जिसकी आवाज जज्बाती होती थी । मैं जानती हूँ आखिर बचपन में वो तुम्हारी और में तो खेली है । उसके सुख दुख का ख्याल तुम्हें ही तो रखा है फिर भी मेरे मन में बडा अजीब सा विचार बार बार जान ले रहा है ना सब कैसा विचार मुझे न जाने क्यों ऐसा लग रहा है कि उसमें कुछ गडबड होने वाली है कैसी घर पर अब मुझे ऐसे शब्द अपनी जबान से निकलने तो नहीं देनी चाहिए आना । बूटा राम थोडा सकुचाते हुए बोला लेकिन फिर भी मैं अपनी भावनाएं प्रकट करने से खुद को नहीं रोक पाना । जब मैं बाबा यहाँ जाए तो आप उन्हें सबसे पहले खूब अच्छी तरह शेख करना ठीक नहीं । चेक चेक वाइॅन् लेकिन इससे बाबा कुछ कहने की क्या जरूरत है? लुधियाना पंजाब इसका विस्मित सौ रुपया ये भी तो हो सकता है ना बूट आराम बहुत धीमी आवाज में पहुँचता है कि मैं ऐसी बाबा के बीच में कोई और यहाँ जाना क्या पता हूँ कोई बेहरू क्या लडकी हो तो पागल हो गया बता रहा हूँ आॅलआउट मैं उससे अच्छी तरह जानते हैं । वो मेरी ही बेटी है । मुझे इस मामले में कोई धोखा नहीं हो रहा है । उसकी लेटर मेरे पास आते हैं । उसकी फोटो मेरे पास है । भला कोई और लडकी आकर मुझे धोखा कैसे दे सकती है? दुनिया बहुत खतरनाक हो गई आना । बूटा राम की आवाज अब हद दर्जे तक सस्पेंस फल हो गए । ऐसा भी तो हो सकता है । किसी में हमारी मासी बाबा का कितना आप करते क्या हो और अब उसकी जगह कोई दूसरी लडकी मेकअप करके यहाँ आ रही हूँ । तेरह तो जासूसी उपन्यास पढ पढ के दिमाग खराब हो गया बॅूद इसकी आवाज हो गई जब देखो शक करता रहता है और हजार बार कहा इन फिजूल के बकवास पन्यास को मत बढाकर लेकिन ठीक है ऐसी बाबा कहाँ देते हैं मैं तुझे ही मिस्सी बाबा को चेक करने का मौका दूंगी लेकिन ले हरियाना पंजाब नहीं जानती थी और वो बूटा राम भी नहीं जानता था कि कैसे शातिर दिमाग से उनकी टक्कर होने वाली है । बेटा सान्याल ने पहले जूलिया से खूब खोद खोदकर आना पालस के बारे में सब कुछ पता लगा लिया था । एक एक आदमी के स्वभाव के बारे में उसका पता लगा लिया था और रीता सान्याल उन सब से निपटने की रणनीति कि बकायदा तैयारी कर चुकी थी । तभी सफेद रंग की एक नई बीएमडब्ल्यू कार भी वहाँ गए । दोपहर के उस समय तीन बज रहे थे जब एक टैक्सी आना पहले उसकी विशाल ध्यान कि नीचे आप कर चुकी है और उसमें से चाहते हुई वीटर सान्याल बाहर निकली हूँ, ले लिया लुधियाना पंजाब इसका चेहरा रहता सान्याल को देखते ही खेल उठा तेजी से उसकी तरफ हफ्ते ऍम तो आना । ऍसे भी प्रसन्नतादायक सिसकारी छूट पडे तो दोनों हाथ फैलाकर तेजी से हरियाणा गोंजाल्विस की तरफ छपटी और पालक झपकते ही वही दूसरे की बाहों में समाज नहीं फॅस का खुशी से बुरा हाल था । वो रीता सान्याल के बेतहाशा चुम्बन लेती चली गई । अक्षय कमजोर हो गई है ना रिकाॅल बेहद गौर से आना गुंजाते इसको देखते हुए बोले बुढापा मेरी बच्ची कमजोरी तो आएगी हूँ आना गुंजाल जिसमें उसकी माथे पर पूरा नाम बना क्या? लेकिन अब तो वहाँ गयी इस आॅउट हो गई सचमुच कितनी बडी हो गई है तो फॅसे पंद्रह साल आज पंद्रह साल बाद मुझे देखती हूँ और मुझे भी तो आपको देखे हुए इतना ही समय हो गया है ना वो दोनों भावावेश ने पुनः एक दूसरे से लिपट गई । तभी एक नौकर ने आगे बढकर टैक्सी में से उसकी अटैची निकली थी । तत्काल तापसी सराटे के साथ वहाँ से निकल गए । यही वह क्षण था जब बूटा राम भी वहाँ गया बॅाल बूटा राम को देखते ही पहचान गए । आखिर वो जूलिया से बूढा राम के बारे में सब कुछ मालूम कर चुकी थी । बॅाल बुधाराम को देखते ही चाहे थी कैसे हो तुम अपनी इसमें से बाबा को भूल तो नहीं गए । दूदाराम घबरा गया चाॅस को छोडकर तेजी से मोटा राम की तरह पर हैं ऍम ऍम अपनी इस आदत को अभी तक छोडा नहीं । फॅस के काफी नजदीक पहुंच कर ली अंग्रेजी बोलती हूँ लेकिन हमेशा गलत बोलते शब्द को तोड मरोडकर बोलते हूँ मोटर हम सकता है और ये देखो मैं तुम्हारे लिए कितने अच्छे अच्छे जासूसी उपन्यास लाऊँ । रीता सानिया ने अपना ॅ खुलकर उसमें से तीन चार जासूसी उपन्यास निकले । जासूसी उपन्यास क्यों? तो क्या समझ रहे थे मैं पंद्रह सालों में सब कुछ भूल चुकी हूँ क्या मैं तो मैं नहीं जानती कि तू जासूसी उपन्यासों की कितने बडे शौकीन हूँ और कैसे शक्ति में जांच हो तो में काम करो । बता रहा हूँ क्या? ये देखो ये आमिर खान का बिल्कुल लेवॅल इस नॉवल में मेकप चेक करने की एक से एक भी दी हुई है तुम में काम करूँ इसमें ओवर में दी हुई विधियों को पढ पढ कर सबसे पहले मेरा मेकप चक्कर डालो । हो सकता है मैं कोई बहरूपिया लडकी हूँ तो तुम्हारी चूलिया बेबी का मेकअप करके यहाँ आ गई है और जो तुम कैसी बातें करती हूँ मासी बाबा बूटा नाम के छक्के छूट गए तो वही हो तो मैं तो मैं अच्छी तरह पहचानता हूँ । हाँ मैं वही हूं ऍम मेरी बचपन केयर करते थे तो नहीं आती होंगी बूटा रहा हूँ एक बार मेरे तो मजा चखाने के लिए बिजली का लगातार तुम्हारी पीठ से लगा दिया था । मुझे खूब अच्छी तरह याद है । पूरा राम शशिकुमार में बोला फिर भी तो मेरे चेहरे पर केमिकल लगा करते कि लोग बता रहा हूँ क्या पता में वहाँ कई कोई बाहरी रुपया लडकी हूँ तो मैं क्या हो गया? मेरी बच्ची मेरी आना गॅाड को फिर अपनी बाहों में समय क्या तुम जैसी भी हो मेरी बेटी हूँ मेरी जो लिया हूँ इस बूटा राम की तरफ ध्यान मत हो ये तो जासूसी उपन्यास पढ बढकर पागल हो चुका है । रेडर सानिया लेने आना गोंजाल्वेस तथा तमाम नौकर चाकरों के साथ आना पालस के अंदर पहुंची सच मुझको बेहद भारतीय पाला था पूरे गोवा में उस जैसा कोई दूसरा पहले मिलना मुश्किल था । दीवारों पर बडी बडी तीन और पेंटिंग्स लगी थी फर्ज पर ईरानी कालीन बिछे थे और सामने हो के बीचोंबीच काफी चौडा जीना था उस जीने की सीढियों पर भी सुर्ख ना अच्छा था फॅमिली मैं तुम्हें तुम्हारा कमरा दिखा दिया नहीं आना । ट्विटर सानिया तुरंत बोली मैं खुद अपने कमरे तक चली जाऊंगी हूँ । यानी आज पंद्रह साल बाद भी तुम्हें आधे की बचपन में तुम्हारा कौन सा कमरा हुआ करता था आना गुंजाल उसकी आंखों में चमक कौन थी? बिल्कुल आ गया है ना ऐसी बातें भी कभी कभी बूटा बूटा राम की आंखों में उत्सुकता के भाव दिखाई देने लगी ठीक है तो फिर बताओ तुम्हारा कौन सा कमरा था आना गुंजाल दस बोली पहली मंजिल पर मुझे अच्छा काम रहा है रीडर सानिया ने वहीँ खडे खडे कमरे की तरफ उंगली उठाई ॅ की सचमुच तुम्हारी आकाश त् कमाने भी ट्वीटर्स आने वाला तेजी से सीढियां फॅमिली गए उसके पीछे पीछे सब अलग के शीघ्र ही रीता सान्याल पहली मंजिल पर बने । उस कमरे का दरवाजा खोलकर अंदर घुसकर अंदर एशोआराम के हर वस्तु मौजूद थी । वहाँ आधे से ज्यादा कमरा खिलोनों से भरा पडा था । उस कमरे की भव्यता देखकर खून रीता सान्याल की कनपटी पर जोर जोर से ठोकरे मारने लगा । जो लिया का बचपन जहाँ इतनी ऐशो आराम से गुजरा था, वही उसके बचपन में दुःखी दुःख नहीं, संकट ही संकट नहीं । रीटर सान्याल ने अपनी भावनाओं को नियंत्रित किया । अब वो हर खुशी को जबरदस्ती हासिल कहेगी और दुनिया की हर चीज पर उसका कब्जा होगा । तो उनमें से बाबा बूटा राम आगे बढकर बोला मैंने पिछले पंद्रह सालों में तुम्हारे इस कमरे को बिल्कुल वैसे का वैसा ही रखा है । कहीं कोई बदलाव नहीं किया । वहाँ नहीं ऍसे मुद्रा के अंदर कमरे में चारों तरफ होगी । कहीं भी कुछ भी नहीं बदला, कुछ भी नहीं । फिर उसी सौंपने, उसे मुद्रा में आगे बढकर रीता सानिया ने कोने में रखा गिटार था लिया । मालूम है बेटी लिलियाना गोंजालवेज ने पूछा तो मैं ये गिटार किसने किया था? मालूम है ना डाॅॅ खोले खुले ऐसे में बोली मुझे सब मालूम है किसने पसंद किया था मुझे किताब डाॅट किया था मेरे ऍम बिल्कुल सही । इतना ही नहीं मुझे भी आधे की दारी का म्यूजिक से बेपनाह प्यार था । उन्होंने मुझे गिटार बजाना सिखाया था और मैं इसके तहत ऍम की धर्म जहाँ करती थी हूँ वहाँ नहीं तुम कुछ भी नहीं बोली में से बाबा उस क्षण बूटा राम भी बेहद जज्बाती होता था । कुछ भी नहीं फॅालो उस कमरे से निकल कर राजस्थान वाले एक दूसरे कमरे में जाकर वो पीटर का काम रहा था । सामने दीवार पर ही पीटर तथा लेते आना गुंजाल इसका काफी बडा फोटो लगा था । पीटर का फोटो देखते ही मीडिया सान्याल की आंखों में पुनः फोन उठा रहा है । आंखों में नफरत का सैलाब सिंगाडे मारने लगा वही था । वहीं था वो बरसात इंसान जिसके कारण उसकी तथा उसकी माँ शारदा सान्याल की जिंदगी बर्बाद जिसने दौलत की हवस में अंधा होकर उसे ठुकरा दिया, उसकी माँ को ठुकरा दिया और गोवा की उस बडी बिजनेस टाइकून लुधियाना पंजाब से शादी कर ली । सीट आसानी से उस बारे में जितना सोचा उतना ही उसकी नफरत का कुमार बढा । अब सारी दौलत उसकी होगी । लिलियाना गोंजाल्विस की सारी दौलत पर अब उसका कब्जा होगा जिसके लिए कभी उस दुष्ट पीटर में उसकी माँ शारदा आसानी गुड ठोकर मारती थी क्या सोच रहे हम भी आॅल के कंधे पर हाथ रखा क्या? कुछ नहीं कुछ नहीं । फिर भी कुछ तो बिहारी की तस्वीरें देखकर कुछ पुरानी यादें ताजा हो गई थी । वहाँ गए यहाँ ताल इसमें कुछ भी तो नहीं बदला है ना ऍम कमरे में चारों तरफ नजर दौडाती हुई बोली सही कहा तो हरियाणा गोंजालवेज ने ठंडी सांस भरी है । सच में यहाँ कुछ भी नहीं पता है । ये भी कुछ चीजें ऐसी हैं जो पंद्रह सालों में बहुत पीछे छूट गई हैं और जिनका लौटाना भी अब उन की नहीं । आपने ठीक कहा डीटा सानिया की आवाज भारी हो गए । नहीं कुछ चीजें हम बहुत पीछे छूट चुकी हैं । बहुत पीछे फॅसने पूरे आना काना । इसका एक चक्कर आ रहा था । वहाँ की एक एक चीज घूमी थी । उस साल इसमें ऐसी एक भी जगह नहीं थी जिसके बारे में जूलिया ने उसे पहले ही नहीं बता दिया था । उसी शाम आना बाल इसमें जूलिया के आने की खुशी में बडी भाग्य पार्टी का भी आयोजन किया गया । वो पार्टी रीता सान्याल के लिए काफी यादगार पार्टी रहें और उस पार्टी के द्वारा रीता सान्याल को ये भी मालूम हुआ कि लेडी आना गुंजाल कितने रसूख वाली औरत थी और गोवा के कॉन्फ्रेंस जगत में उसकी कितनी इस सकती । पार्टी में गोवा शहर के मैं से लेकर पुलिस कमिश्नर नागल फ्रांस कई मिनिस्टर जांच तथा बडे बडे बिजनेस टाइकून मौजूद थे । बेटा सान्याल ने उस पार्टी में एक बडी खास पैसों की चमकदार ड्रेस पहनी हुई थी । उसमें स्लीवलेस टॉप पहन रखा था और वह काफी लंबी स्कर्ट पहले थी जो एक साइड में से करती थी और इसी कारण उसमें से उसकी केले कि तनी जैसी चिकनी एक दम बिल्कुल साफ साफ नुमाया हो रही थी । उस वक्त उस पार्टी की रौनक उसी के दम पर थे । वहाँ जितने भी आदमी आ रहे थे वो बडे प्यार से उसे गले लगाते, उससे हाथ मिलाते या फिर उसे आशीर्वाद देते थे । पुलिस कमिश्नर माॅस् के बेहद खास दोस्तों में से था । नागमंडल फ्रांस ने बडे गर्व के साथ बीता सान्याल को गले लगाया हाॅल पहले मैं तुम्हारा अंकल हूँ । फिर वो उसके दोनों कंधे पकडकर मुस्कुराता हुआ बोला ना ॅ! लेकिन तो मुझे सिर्फ फ्रांस्वा अंकल ही कह सकती हूँ ऍम अस ऍम सांकर । फ्रांस के मुस्कान कुछ और गहरी हो गई नागूलाल फ्रांसो । चालीस पैंतालीस साल का तंदरुस्त गुवानी था । उसका शरीर साधारण गाडियों से कुछ लंबा था और रंग साफ था । इसके अलावा उसके चेहरे पर बडी बडी मूछे थी जो उसकी पर्सनालिटी कौर रोबीला बना रहे थे । लेवॅल भी उस क्षण रही थी । यहाँ आने के बाद क्या तुम अभी हुआ? घूमी हो या नहीं? फॅसने पूछा नहीं पीता । सानिया की गर्दन इंकार नहीं । हाँ तो फॅमिली से फुर्सत नहीं इसमें कोई शक नहीं नागुलाल फ्रांसो, ठठाकर हसा यहाँ आना । पालस में भी घूमने के लिए काफी कुछ । अभी मैं तुमसे बात जरूर करूँगा क्या जवाना पारस को अच्छी तरह देख लो तो फिर पूरे गोवा को घूम डालना । अब तो मैं यही रहना । इसलिए एक बार पूरा वो अच्छी तरह घूम लो की तो फिर तो मैं यहां के कल्चर को समझने में तथा उसके अंदर ढलने में काफी सहूलियत रहेगी । मैं भी यही समझती हूँ ऍम इसे पूरा हुआ घूम लेना चाहिए । एक दो दिन के अंदर ही मैं ऐसे शहर के लिए लेकर नहीं होगी । ये तो और भी अच्छा होगा । आना नागुलाल फ्रांस बोला तभी एक वेटर वहाँ सॉफ्ट ड्रिंक के ग्लासों से भरी ट्रे ले कर आ गया । रीता सानिया ले खुद एक ग्लास उठा करना गोल शाम को साफ किया ऍम नागोल शाम से बोला रेजा सानिया के चेहरे पर बडे प्यारे भाग है । इसके अलावा मैं तुमसे एक और बात कहना चाहूंगा मैं अच्छा है ऍफ करता हूँ क्या इस गोवा शहर के अंदर कैसे भी कोई प्रॉब्लम तो बेहिचक मुझसे कहना क्यों नहीं? रीडर सानिया दूरी अगर आपको अपनी प्रॉब्लम नहीं बताउंगी अलशाम सांग तो फिर किसी बताउंगी ऍम उसी क्षण पार्टी में कुछ और लोग ध्यान है आॅडिटर सान्याल अब उनकी तरफ बढते पार्टी में मेहमानों के साथ जितनी भी लडकियां आईं हुई थी, उन सब की इच्छा हो रही थी कि वह लीटर सान्याल से दोस्ती करें । उसे अपनी रनबनाए कुल मिलाकर आना । पैलेस में कदम रखते ही रीता सान्याल बहुत खास बहुत स्पेशल रुतबा हासिल कर चुकी नहीं । कहानी आगे बढे उससे पहले आइए अब हम चंद पलों के लिए जो जैसा कि आप सभी जानते हैं तो मरोगी मेरे हाथों नामक जिस उपन्यास को आप इस समय सुन रहे हैं ये उपन्यास फस जाओ मेरे लिए नामक उपन्यास का दूसरा और आखिरी हिस्सा है । आशा है आपने फस जाऊ, मेरे लिए सुन लिया होगा । अगर फस जाऊ मेरे लिए नहीं सुना तो इस उपन्यास को यही बंद करके रख दीजिए और पहले फस जाऊ । मेरे लिए सुनिए ये एक मारा मिस्ट्री उपन्यास है । इसमें पेचीदा घटनाक्रम और हालातों से अपने आप पैदा हुए साक्षियों के काफी योगदान है । इसलिए अगर आप प्रथम भाग को सुने या पढे बिना प्रस्तुत उपन्यास को सुनेंगे तो कहानी की पेश आपको समझ नहीं आएंगे और इसलिए आपका उचित मनोरंजन भी नहीं हो सकेगा । जो पाठक गण जो श्रोतागण है, भर जाओ मेरे लिए सुन चुके हैं । आइये संक्षिप्त रूप में कथासागर गुनाह दोहरा ली जिससे उनकी आ रही ताजा हो सके । हस जाओ मेरे ये रीता सान्याल नामक एक ऐसे दोस्त दांत अपराधी की कहानी है जिसने बचपन से ही दुःखी दुःख देखे । मुंबई शहर की मुश्किलों के बीच उसका सामना गरीबी से हुआ भूख से हुआ । रीता सान्याल की माँ का नाम था शारदा आसानियां । चार दासानिया की जिंदगी भी बस दुखों का तपता हुआ रेगिस्तान थी । उसने मुंबई शहर के लोगों की जेब काट काट कर अपनी बेटी मीडिया सान्याल की परवरिश डॅाल बडी हुई तो वह भी अपनी माँ की तरह ही मुंबई शहर में लोगों की जेब काटने की लेकिन लेता सान्याल के सपने ऊंची थे । अपना पेट भरना ही उसका लक्ष्य नहीं था बल्कि वह ढेर सारी दौलत कमाना चाहती थी । नई आजादियों की तरह जिंदगी को जानना चाहती थी आपने उन सपनों को साकार करने के लिए । तब रीता सान्याल ने कुछ छोटी मोटी डकैतियां भी डालें जिसमें वो कामयाब रहे । उन डकैतियों में काफी बडी बडी रख में भी नहीं जा सानिया के हाथ लगी । इस बीच रीता सानिया और कई बार पकडे भी गए । फिर उसनें मोटी मोटी सुपारी लेकर कई हत्याएं भी और ऍम की जिंदगी में सचिनदेव रह गया । डॉक्टर सचिन ऍम मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल का मशहूर प्लास्टिक साझे लेकिन डॉक्टर सचिन देवडा की जिंदगी की दास्तान भी कुछ काम हंगामा के इतना थी ये काम बडे आश्चर्य की बात नहीं थी कि जो डॉक्टर कभी न सिर्फ मुंबई शहर का बल्कि भारत वर्ष का भी मशहूर प्लास्टिक सर्जन हुआ करता था वहीं आज खतरनाक क्रिमनल बन चुका था । वही आज मुंबई पुलिस में वहाँ था । कभी डॉक्टर सचिन देवडा अमेरिका से प्लास्टिक सर्जरी का चार साल का स्पेशल कोर्स करके भारत आया था और भारत आते ही उसने प्लास्टिक सर्जरी की दुनिया में तहलका मचा दिया । डॉक्टर सचिन देवडा के बारे में मशहूर था कि वो किसी भी आदमी का प्लास्टिक सर्जरी के द्वारा न सिर्फ चेहरा बदल सकता है बल्कि प्लास्टिक सर्जरी के द्वारा ही किसी भी आदमी के चेहरे पर किसी भी दूसरे आदमी के चेहरे का पाॅइंट में का भी कर सकता है । नहीं संदेह प्लास्टिक सोचने के किसी डॉक्टर को ऐसी महारत हासिल होना बहुत बडी बात है और सचिन देवता को अपने पेशे में ऐसी ही महारत हासिल थे । उसके पास दुनिया की हर खुशी थी सिवाय एक चीज को छोड कर । उसके पास अच्छी बीती नहीं थी और अपनी बीवी की वजह से ही उसकी जिंदगी में वह सारा हंगामा हुआ । सचिन देवडा के बीच भी बहुत खुद से प्रसूतियां रहते हैं । वो हरदम उससे लडती रहती थी । चीख चीखकर सारा घर सिर पर उठाए रखती थी । बीवी से तंग आकर ही डॉक्टर सचिन देवडा के घर में एक और बडा हंगामा न जाने कैसे सचिन देवता कि बीवी को उसके न स्वाले अफेयर के बारे में पता चल गया । उस रात दोनों पति पत्नी के बीच जमकर युद्ध हुआ । उस युद्ध का परिणाम भी भयंकर नहीं चाहते । उस रात सचिन देवडा गुस्से में इतना बेकाबू हो गया जितना पहले कभी नहीं हुआ था । उसने वही रखा, एक सब्जी काटने वाला चाकू उठाया तथा फिर आक्रोश में अपनी पत्नी के पेट में जोर जोर से अच्छा आपको घोपता चला गया । उसे जब तक पूछा है तब तक उसकी पत्नी लाश में बदल चुकी थी । तब सचिन देवडा के छोटे छोटे वो जानता था किसी की हत्या करने का क्या अंजाम होता है । फिर उसकी बीवी के साथ कितने खराब संबंधी ये बात भी सबको मालूम थी । जैसे ही लोगों को ये पता चलता है कि उसकी बीवी की हत्या हो गई, फौरन ही सब कुछ कर इस नतीजे पर भी पहुंच जाने वाले थे कि ये काम उसी ने किया है । सचिन देवडा के आंखों के सामने फांसी का फंदा झूठ नहीं लगा । जल्द ही डॉक्टर सचिन देवरानी उस आफत से छुटकारा पाने का एक हल्दी खोज निकाला । उसने उसके कदकाठी और रंग सबकुछ उसके बीवी से हूँ हूँ मिलता जुलता था । बस सचिन ने अपने करामाती हाथों का कमाल दिखाया और प्लास्टिक सच्ची द्वारा उसमें उसका चेहरा बिल्कुल अपनी पत्नी के चेहरे में बदल दिया । अब कोई भी उसे देखता तो यही समझता की वह मिसेज सचिनदेव रहा है । फिर सचिन ने एक और दहला देने वाला कारनामा अंजाम दिया । उसने अपने मृत पत्नी के शरीर की बोटी बोटी का डाली । इतना ही नहीं उसने उसके शरीर की सभी हड्डियों के जोड भी खोल डाले । वो क्योंकि डॉक्टर था इसलिए इस काम को करने में उसे आसानी हुई उसके बाद सचिन देवरा ने अपनी पत्नी के जिस्म की तमाम मोटी और हड्डियों को तेजाब के अंदर अच्छी तरह चलाया तथा फिर उन सब को थोडा थोडा करके मुंबई शहर के लालू गंदे गटरों और समुद्रों में भेज दिया । इस तरह उसने अपनी बीवी की लाश बडी चतुराई से ठिकाने लगती अपने मंत्री हुए । दिमाग सेवा अपराध करने के बाद डॉक्टर सचिन देवडा ये सोच रहा था कि अब कानून उसे कभी नहीं पकडता आएगा लेकिन फिर भी हंगामा हो गया । दुनिया की नजरों में उसकी बीवी तो जिंदा थी लेकिन ना खराब हो चुकी थी । इससे नाराज के परिवार के बीच चिंता की लहर दौड के बडे पैमाने पर न उसकी ढूंढ मच्छी सबसे बडी आपत्ति आई की न्याज की जो माँ ही उसने अपनी गुमशुदा बेटी के वियोग में चारपाई पकड ली और उसकी हालत मरने जैसी हो गए । नस अपनी माँ की ऐसी हालत नहीं देख सकी । वो सचिन देवता को बिना बताए चुपचाप अपनी माँ से मिलने हॉस्पिटल जा पहुंची और उसने अपनी माँ के सामने सारा राज खोल दिया । बस यही से सचिन देवडा की बर्बादी की शुरुआत हो गए । उस समय हॉस्पिटल के उस वार्ड में सादी वर्दी के अंदर एक सब इंस्पेक्टर भी मौजूद था । उसने वह सारी कहानी सुनी । तुरंत वो क्लास को पकडने के लिए उसकी तरफ झपटा न वहाँ से भाग इसी भागा दौडी में वो ना उस काफी ऊपर वाली सीढियों से नीचे गिर पडी तथा फिर लुढकती चली गई । नीचे पहुंचते पहुंचते उसका सिर फट गया । सारा भेजा बाहर निकल आया और वह तत्काल ऑन द स्पॉट मर गए । फिर बोली सचिन देवता को गिरफ्तार करने उसके घर बच्चे । लेकिन तब तक सचिन देवरा को भी ये मालूम हो चुका था की तमाम चालाकियों के बावजूद उसका रास्ता खो चुका है । इसलिए पुलिस के पहुंचने से पहले ही वो भी अपना घर छोडकर भाग खडा हुआ । ये थी सचिन देवडा की बर्बादी की दास्तान बहुत आसान जिसने उसे अपराध की डगर पर धकेल दिया । उसी अपराध्कि नगर पर उस की रीटा आसानी से मुलाकात हुई और फिर उन्होंने एक साथ मिलकर कई अपराध किए । यहाँ तक कि एक बिलकुल ही आरपार का गेम खेलने के लिए उन दोनों ने एक सशस्त्र बैंक डकैती की प्लानिंग बना डाली जिसमें इत्तेफाक से वो असफल रहे और उस दान डकैती के दौरान वो दोनों ही मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तार होते होते बचे उसी दौरान रीता सानिया की जिंदगी में एक बडा प्रचंड तूफान आये । ऐसा तूफान जिसने रीटा सान्याल के जीवन की धारा ही बदलती है और उसे तूफान के कारण इस महागाथा की नींव पडी । शारदा सान्याल के पेट में कैंसर का बडा क्यों मर यानी थोडा था । एक दिन वो ट्यूमर फट गया और शारदा सान्याल मौत की दहलीज पर जा खडी हुई । उस दिन मरने से पहले शारदा सान्याल ने कई राहत से उद्घाटन किए । जैसे उस ने सबसे बडा रहस्योद्घाटन तो रीता सानिया के सामने यही किया कि उसे उसके बाप का नाम बताया । पढना रीता सान्याल उस दिन तक किसी बात से अनजान थी कि उसका बात कौन हैं? शारदा सानिया ने बताया उसके पिता का नाम पीता था । पीटर एक गुवानी नौजवान था । कभी ज्यादा सानिया गोवा में ही रहती थी और पीछे से महोब्बत करती थी लेकिन पीटर ने उसके साथ धोखा किया था । पीटर की जिंदगी में लीड आना गोंजाल्वेज नाम की बहुत बडी बिजनेस टायॅलेट दिया गई तो पीटर ने शारदा सान्याल को अपनी जिंदगी से मक्खी की तरह निकाल कर फेंक दिया और लेते आना गुंजाल से शादी कर ली । उस समय रीता शादा सान्याल कि पेट में थी । उसे जब पीटर के लेते आना । गोंजाल्वेस के साथ शादी करने का समाचार मिला तो पहाड सा टूट करके ना शारदा सान्याल के ऊपर वो रोती बिलखती हुई लेते आना गुलडागर के विशाल नहर जैसे पालस में पहुंची । वहाँ उसने फूट फूटकर रोते हुए पीटर को ये बताया कि वो उसके बच्चे की माँ बनने वाली है । लेकिन उस दुष्ट पीटर ने इस बात को मानने से ही इंकार कर दिया कि उसके कभी शारदा सान्याल के साथ संबंध भी रहे थे । इतना ही नहीं लेते आना गुंजाल ने भी उसे अपने नौकरों से उठवाकर पालस से बाहर भिजवा दिया । शारदा, सानिया और हुआ छोडकर मुंबई आ कहीं वहीं उसने अपनी बेटी को जन्म दिया और उसका नाम रखा था रीता सानिया हाँ शारदा सा न्यायालयों से अपना ही सानी दिया । पीटर की छाया भी वो अपनी बेटी पर नहीं पडने देना चाहती थी । उधर बीटर भी लेते आना गुंडागर्दी के साथ कभी सुखी नहीं रहा । उन दोनों के बीच अक्सर झगडे होते रहते थे । शायद शारदा सानिया का शाप लग गया था । उन दोनों की खुश हूँ । लेडी आना गोंजाल्वेस चाहे बहुत रहीस औरत थी, वहीं पीटर कुछ भी था । उधर शादी के बाद आना भी एक लडकी हुई जिसका नाम उसने जूलिया रखा । फॅस के पास इतना समय भी नहीं था तो वो अपनी बेटी को पाल भेज सकती । वो हमेशा बिजनेस में बिजी रहती थी । यही वजह है जूलिया का सारा पालन पोषण पीटर नहीं । क्या पीटर जल्दी अपनी पत्नी के सामने खुद को काफी हीन अनुभव करने लगा था । जो लिया अब सात साल की काफी समझता लडकी बन चुकी थी आना और पीटर के बीच अब छोटी छोटी बातों पर झगडे होने लगे थे । तंग आकर पीटर नहीं लेते आना गुंजाल जिसका बाल छोड दिया जो लिया भी चुकी अपने बाप के साथ ही ज्यादा घुली मिली थी इसलिए उसने भी उसी का साथ दिया । वो दोनों आना पालस छोडकर मुंबई आता है आना गोलवाल समझती थी । पीटर जूलिया को लेकर बहुत जल्द उसके पास हुआ लौटाएगा । लेकिन पीटर जिद्दी स्वभाव का नहीं किया । उसने मुंबई में ही नौकरी कर ली और फिर जो लिया के साथ अपनी सारी जिंदगी के साथ नहीं । मरने से पहले शारदा सान्याल अपनी बेटी रीता सान्याल को बताती है कि दो साल ते हैं । पीटर की उसी मुंबई शहर में मौत हो चुकी है जबकि जूलिया कस्तूरबा गर्ल्स हॉस्टल में रहती है तथा एक स्टेनो कम टाइपिस्ट की नौकरी करके अपना पेट भरती है । शारदा सान्याल रीता को ये भी बताती है कि झोलियां अपनी माँ लेते आना गुंजाल से सख्त नफरत है । जो लिया समझते हैं उसके बाद के तमाम दुखों का कारण आना है । लेडी आॅफिसर जूलिया को लेता है । लिखती है कि वो उसके पास हुआ लौटाएं लेकिन जो लिया पर उसकी उन चिट्ठियों का भी असर नहीं होता । शारदा सानिया जोर जोर से हफ्ते हुए कहती है बेटी उन्होंने पीटर तो जीवित रहा नहीं है लेकिन मेरे दिल में पतले की हाँ अभी भी धधक रही है पीटर ने और लेवॅल मेरा जो अपमान किया मैं उस अपमान को आज तक नहीं भूल ऍम इसके लिए फिर फॅस की जिस दौलत के लिए मुझे ॅ तो उन्हें उसी ऍसे बदला लेना है तो उसकी सारी दौलत हासिल करनी है । नहीं अच्छा! अगर पीटर की एक बेटी गोहाना की दौलत नहीं मिली तो उसकी दूसरी बेटी झूले को भी है ना कि तमाम दौलत नहीं मिलनी चाहिए । शारदा साना को खून का बडी बडी क्या होती है, उसकी सांसे जोर जोर से चलने लगती है । वो महीने से पहले रेट आसानी से वचन लेती है कि वह डिगियाना गुंजाल जैसे बदला नहीं, उसकी उस दौलत को हासिल करके दिखाई कि जिसके लिए कभी उस दुष्ट बीटर ने अपनी मोहब्बत को ठुकरा दिया था, अपनी बेटी को ठुकरा दिया था । वीडा सान्याल उसे वचन देती है कि वह आना से बदला लेकिन उसी क्षण शारदा आसानी को खून की और बडी बडी उल्टियाँ हैं हूँ मैं जाती है । अब रीता सान्याल की जिंदगी का एक ही मकसद रह गया था बदला लेडी आना । गोंजाल्विस से बदला किसी भी तरह उसकी तमाम दौलत हासिल कर रहे हैं । सचिन देवडा भी उस खतरनाक मिशन में पूरी तरह उसका साथ देता है । रीता साने और सबसे पहले जूलिया को मार डालने की एक प्लानिंग बनाते हैं । बडी जबरदस्त प्लानिंग मौर्य की एक ऐसी हैरतंगेज प्लानिंग जो दुनिया की कोई भी अदालत उस माता को मार डाॅॅ न दे सकें बल्कि कानून की नजर में वो स्वाभाविक मृत्यु का ही मामला हो । षडयन्त्र के धागों को अपने दिमाग में खूब अच्छी तरह कसकर रीता, सानिया और कस्तूरबा गौर हॉस्टल में जा पहुंचती है । वहाँ हॉस्टल के वॉर्डन रेणुका चौहान को वो अपना परिचय रीता शर्मा के नाम से देती है और वो उनको बताती है कि वह एक्ट्रेस है तथा आजकल फिल्मों तथा टीवी सीरियल में काम पाने के लिए स्ट्रगल कर रही है । पंद्रह सौ रुपए महीने पर उसे हॉस्टल के अंदर एक कमरा मिल जाता है । कस्तूरबा आगाज हॉस्टल की वॉर्डन रेणुका चौहाण बेहद प्लेन वाली औरत थी और उसकी डिसिप्लिन के चर्चे न सिर्फ उस हॉस्टल के अंदर बल्कि पूरे मुंबई शहर में थे । बहरहाल शीघ्र ही रीता सान्याल उस हॉस्टर के अंदर जूलिया को खोज निकालती हैं जो लिया कमरा नंबर दो सौ तीन में एक अन्य लडकी के साथ रहती थी । जूलिया एक बेहद भोली भाली मासूम सी लडकी थी । लेकिन जो दूसरी लडकी कमरा नंबर दो सौ तीन में जूलिया के साथ रहती थी उसका नाम रसिया था और वह बेहद चालाक तथा शातिर किस्म की लडकी थी । ऍफ में कहीं नौकरी करती थी लेकिन कहाँ नौकरी करती थी ये किसी को कुछ मालूम था । जैसा पूरी तरह कॅाल सी लडकी थी । उसे नॉनवेज जोक् सुनने का भी शौक था और वो जो लिया को अक्सर बडे बडे असली जोक सुनाती रहती थी । रिकाॅल अपने प्रयासों से उसी कमरा नंबर दो सौ तीन में शिफ्ट हो जाती है तथा जूलिया और जसिया के साथ रहने लगती है । एक दिन वो रसिया का रात के समय पीछा करती है तो उसे मालूम होता है कि रजिया ऑफिस में काम करने वाली कोई कामकाजी लडकी नहीं थी बल्कि वास्तव में कोई खाई प्राइस्ट कॉलगर्ल् थी और मुंबई के एक बेहद बदनाम इलाके ऍम रोड पर धंदा करती थी । उसके बाद रजिया के बारे में एक और बडा सफर दस्त राज रीता सानिया को पता चलता है । दरअसल लेडी आना गुंजाल देख अपने बेटी जूलिया को गोवा से जो लेटर भेज दी थी उन लेट इसके साथ बडी बडी मोटी रकम ओके चेक होते थे । लेकिन जूलिया ने उनमें से किसी चक को कभी जांच नहीं कर रहा । बल्कि सच्चाई तो यह है कि वह आना की चिट्ठी भी सही ढंग से खुलकर नहीं पडती थी । नफरत ही इस कदर थी उसे आना से लेकिन इसी कारण रजिया की लॉटरी लगी हुई थी । उसने पंजाब नेशनल बैंक में जूलिया के फर्जी नाम से अपना एक बैंक अकाउंट खुलवा रखा था । वो अक्सर लेडी आना गोंजाल्विस के चेक चुराकर अपने उस अकाउंट में जमा करा देती थी और इस तरह वो रकम उसे हासिल हो जाती है । कुल मिलाकर रजिया जूलिया को अपनी विश्वासपात्र सहेली बनाकर खोते उस तरह से उसे मून रही थी । जब सचिन देवता को रजिया के बारे में वो सारी बातें पता चलती हैं तो वो रीता सान्याल को अलर्ट करता है तथा उसे समझाता है कि वह शातिर लडकी आने वाले वक्त में जूरिया की मौत प्लानिंग के अंदर कोई बडा अडंगा पैदा कर सकती है । इसलिए अगर जूलिया को प्रॉफिट मारा करना है तो पहले इस रजिया का कोई ना कोई इंतजाम सोचना होगा । बात रीता सान्याल की समझ में आती हैं । अब वह रजिया को भी अपने साथ जूलिया की मौत वाली ट्रेनिंग में शामिल करने का प्लान बनाते हैं । वो जब राजिया से इस बारे में बात करती है तो रसिया पहले चौक हैं फिर मना करते हैं । मगर जब रीता सान्याल उसे ये समझाती है कि जूलिया की हत्या करने के बाद उसके हाथ लेते आना गोंजाल्विस की कितनी बडी दौलत लगेगी तो तैयार हो जाती है । आखिर खुद भी दौलत की कोई काम दुखी नहीं थी । इस तरह रेटा सान्याल, सचिन देवडा और रजिया वो तीनों उस मौत अपनाने में साझेदार बन चुके थे । फिर जूलिया का मोहरा करने के लिए एक बडी जबरदस्त प्लानिंग के पत्ते फैलाए जाते हैं । बॅाल एकदिन जूलिया को बातों ही बातों में बताती है कि मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बडे शोमैन सुभाष चोपडा जी जल्द ही ड्रग्स के ऊपर एक फिल्म बनाने वाले हैं । उस फिल्म में एक ब्लाॅक लडकी का ऐसा पावरफुल रोल है कि जो भी लडकी उस रोल को करेगी वो रातोरात फिल्म इंडस्ट्री के आकाश पर छा जाएगी । पूरे हिंदुस्तान के सिनेमाहॉल उसाक रिस्की तारीख में तालियों की गडगडाहट से गूंज उठेंगे । ऍम जूलिया को सलाह देती है अगर वो चाहे तो उसे मिल सकता है । क्योंकि सुबह शुक्ला जी को स्कूल के लिए जिस लडकी की जरूरत है उसके चेहरे पर थोडी मासूमियत होनी जरूरी है और वह मासूमियत इत्तेफाक से उसके चेहरे पर है जो लिया कहती है । लेकिन मैं तो एक्टिंग की एबीसीडी भी नहीं जानती तो क्या हुआ । फॅमिली सिखा दूंगी रीटर सानिया बताते हैं, पंद्रह दिन बाद सुभाष चोपडा जी इस रोल के लिए स्क्रीन टेस्ट लेंगे । इन पंद्रह दिन के अंदर अगर तुम चाहो तो फॅमिली बडी लाजवाब एक्टिंग सीख सकती हूँ । रजिया भी उसके ऊपर प्रेशर डालती है कि वो उस को हासिल करने का प्रयास करेंगे । जूलिया तैयार हो जाती है । रेडर सान्याल भी उसी दिन से उसे आठ दिन की ट्रेनिंग देने लगती है । दरअसल रीता सानिया कितना जानेंगे थी कि वह एक्टिंग की ट्रेनिंग देने के नाम पर जूलिया को धीरे धीरे सच में दो हजार एक बनाते हैं और एक दिन वो ट्रक का शिकार होकर मार चाहे । रीता सान्याल एक सिगरेट के अंदर से उसका सारा तंबाकू निकालकर उसे ब्राउनशुगर भर देती है । जबकि यूलिया को ये बताती है कि वह चॉकलेट का पाउडर है । फिर वो जो लिया से कहती है कि चॉकलेट के पास जैसे भरी उस सिगरेट को ये सोचकर कष्ट लगा है कि उसमें ब्राउनशुगर भारी है । इससे ब्लॅक लडकी थी । एकदम राॅकी जूलिया सिगरेट का कश लगती हैं । इस तरह रेता सानिया जूलिया को धीरे धीरे ड्राॅप बनाने लगती है । उधर सचिन देवडा के साथ ये घटना पेश आती है । वो कांदे वाले की जिस बैठी चौक में रहता था उसी के सामने एक और बैठ चौथी उसमें किरपाराम मूलचंदानी नाम का एक सिंधी आदमी अपनी बीवी के साथ रहता था । किरपाराम मूलचंदानी की बीवी का नाम रोशन था । उन्होंने कि बडी अद्भुत जोडी थी किरपाराम मूलचंदानी । जहाँ अधेड उम्र का पका हुआ आदमी था, वहीं ऊषा ऐसी कडक जवान औरत थी क्यों से देखते ही मारता का जबडा खुले का खुला रह जाए और वह तत्काल उसके साथ फिटिंग का सपना देखने लगे । कभी उषा पारस रोड पर धरना करती थी । फिर एक दिन होगा ही । किरपाराम मूलचंदानी की निगाह में चढ गई और ऐसी चढी कि उसने उसे कोठे से उठाकर अपने घर की अपने दिल की जीनत बना लिया था । लेकिन वह अपने हराम पंथियों से फिर भी बात नहीं आए थे । खासतौर पर किरपाराम मूलचंदानी तो इतना बडा हरामी था कि उस जैसा कोई दूसरा हरामी पूरे हरामी ओके ट्रेड में भी मिलना मुश्किल था । फिर दोबारा मूलचंदानी ने कभी अपनी जिंदगी के अंदर सीधे ढंग से पैसा कमाना नहीं सीखा था । हमेशा आडे तिरछे ढंग से पैसा कमाता था । जैसे वह मुंबई शहर के अंदर पहले किसी अच्छे खासे मोटे ताजे बकरी की तलाश करता था । फिर ऊषा उसे अपने घुसने के फंदे में खूब कसकर जा करती थी और तभी के बारा मूलचंदानी सिंह नाजुक से मौके पर पहुंचकर ऐसा बडा बबाल खडा करता था कि बकरा अपनी सारी जेबे झाडकर भागने में ही अपनी भलाई समझता मानो बडा सस्ते में छोटा हूँ और अब किरपाराम मूलचंदानी तथा शिक्षा की निगाहें सचिन डेवलॅप । वो रीता सानिया को रात के समय वहाँ आती जाती देखती थी । उन्हें साफ साफ लगता है कि वो लोग जरूर किसी बडे फेर है तो उनकी जमकर निगरानी करने लगते हैं । उधर रजिया एक जूडो कराटे क्लब की मेंबर है तथा जूडो कराटे के अच्छे खासी जानते भी हैं । उस जूडो कराटे क्लब का मेंबर बनने से पहले फॉर्म पर सिग्नेचर करने पडते हैं । उस क्लब के नियम है कि अगर फाइट प्रैक्टिस के दौरान कभी किसी मेम्बर की डेथ हो जाए तो उसके लिए कोई भी जिम्मेदार नहीं होगा । इसीलिए पहले ही हर मेंबर से उस काम पर सिंह ने चक्रवाल ये जाते हैं । रीता सान्याल रजिया से कहकर उस क्लब की मेंबर भी बन जाती है और वहाँ जूडो कराटे सीखने लगती है । वो अपने प्लानिंग के तार बडी कुशलता से फैला दी जा रही थी । इस बीच रीता, सानिया और जूलिया को खूब सबर दस्त ऍम बना चुकी है जबकि वह बेवकूफ यही समझती है कि वह सिर्फ एक्टिंग कर रही है । रेट आसानी से कई मर्तबा रॉयल सलूट बाहर में भी ले जाती है जो अंधेरी वेस्ट के इलाके में बना था और नशेडियों का पक्का आता था । उस बार के मालिक का नाम छत्रपति राहुल था और वो इत्तेफाक से जूलिया की शक्ल अपनी बेटी से मिलती बात था जो मर चुकी थी । इसी कारण उसे जूलिया से हमदर्दी हो जाती है और छत्रपति रहा हूँ । यूरिया को ये सलाह दे रहता है कि वह ट्राॅले ये बुरी चीज है । छत्रपति रहा उन्हें अपनी अपनी जिंदगी में किसी को पहली बार वो सलाह दी थी । जूलिया छत्रपति नाव की बात हंसी में उडा देती है क्योंकि वह तो ये समझ रही थी कि वह तो ले ही नहीं रहे हैं । रेटर सान्याल इस बीच दिल्ली ने आना गुंजाल इसको भी जूलिया के फर्जी नाम से चिट्ठी लिखती है और वह पत्र लिखते समय सबसे बडी चालाकी ये दिखाती है कि उस पत्र के साथ रसिया का एक फोटो भेज देती है । फोटो देखकर लेडी आना गुंजाल जैसी अनुमान लगाते हैं कि वो उसकी बेटी जो लिया है । आखिर पूरे पंद्रह साल हो अपनी बेटी की फोटो देख रही थी । इस तरह रीता सान्याल लेते आना गोंजाल्विस की निगाह में रजिया को उसकी बेटी साबित कर देती है । उधर ऊषा सचिन देवता को आप अपने प्रेमजाल में फांसने लगती है जबकि किरपाराम मूलचंदानी ये पता लगाने का प्रयास करता है कि वास्तव में सचिन देवडा कौन है । जल्दी वो ये राज पता लगा लेता है कि सचिन देवराय डॉक्टर है और कभी वह जसलोक हॉस्पिटल में एक बडा मशहूर प्लास्टिक सर्जन हुआ करता था । इतना ही नहीं किलपारा मूलचंदानी रीता सान्याल के बारे में भी सब कुछ पता लगाने में सफल हो जाता है कि वह एक बडी दूर तांत मुस्लिम है और उसके ऊपर छह माता तथा एक सशस्त्र बैंक डकैती का भी योग है । फिर एक दिन वो उनका वार्तालाप भी सुन लेते हैं जिससे उन्हें पता चलता है कि डॉक्टर सचिनदेव ना और रीता सान्याल लेते आना । गोंजाल्वेस की दौलत हडपने के लिए वो सारा षडयंत्र रच रहे हैं । जबकि रीता सान्याल जूलिया को डाॅक् बनाने के साथ साथ उससे कहना पारस के बारे में भी काफी जानकारी इकट्ठी कर चुकी है । उसके बाद रीता सानिया और कस्तूरबा गर्ल्स हॉस्टल में भी अफवाह फैला देती है कि जूलिया ब्लॅक बन चुकी है और फिर एक नया नाटक और रचती है । वो जूलिया तथा रजिया के साथ ये कहकर हॉस्टल छोड देती है कि जिस हॉस्टल में रहते हुए उसकी इतनी प्यारी सहेली ड्राॅप बनी अब वो हॉस्टल में नहीं रहना चाहती । हॉस्टल छोडने से एक रात पहले ही डेटा सान्याल रजिया के साथ मिलकर कस्तूरबा गौर हॉस्टल की रजिस्टर से वो पन्ने भी भार डालती है । जिम पन्नों पर उन तीनों लडकियों की डीटेल्स लिखी थी और जिन डिटेल्स की वजह से उन्हें फ्यूचर में नुकसान उठाना पड सकता था । हॉस्टल छोडकर वो तीनों सहेलियां एक होटल में आ जाती हैं । अभी तक सब कुछ रीता सान्याल की प्लानिंग के अनुसार चल रहा था । एक एक कदम वो बडे प्रीप्लांड ढंग से उठा रही थी । होटल में पहुंचकर रीता सान्याल जूलिया को हीरोइन की बडी हैवी डोज दे देती है जिससे वह बेहोश हो जाती है तथा आप उसे चौबीस घंटे पहले होश नहीं आना था । जूलिया के भी होश होते ही रीता सान्याल और रसिया तुरंत उसे टैक्सी में लाटकर । सचिन देवता कि बैठे चौल में ले जाती है । जहाँ सचिन देवडा बेहोशी की हालत में ही जूलिया के चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी करके उसका चेहरा बदल देता है, उसकी भूल ही गायब कर देता है । आंख ना किसी बदल चाहता है कुल मिलाकर जल्द ही जूलिया के चेहरे की हालत ऐसी हो जाती है कि अगर कोई भी उसे देखिए तो कम से कम जूलिया के रूप में न पहचान सकें । इससे पहले एक घटना और घटी है रीता सानिया को उषा पर शक हो जाता है कि वह सचिन देवता को अपने प्रेमजाल में फांसने का प्रयास कर रही है और सचिन बेवडा भी काफी कुछ । उसकी महक पत्नी की रफ्तार है । इससे रेटा सान्याल के दिल को ठेस पहुंचती है क्योंकि सचिनदेव से उसे भी मोहम्मद थी । उसे अपनी वीरान जिंदगी में बस एक ही अपना नजर आता था सचिन देवडा तब सचिन देवडा की भी आंखें होती हैं । उसे इस बात का भी कुछ कुछ शक होता है कि कहीं ऊषा उनकी मौत प्लानिंग को महा आपने के लिए तो वो सारा नाटक नहीं रच रही है । वो तुरंत ऊषा से कन्नी का ही लगता है । रोशा को इस बात का एहसास हो जाता है कि सचिन देवराव उसके ऊपर शक कर रहा है । वो ये बात किरपाराम मूलचंदानी को बताते हैं । किरपाराम मूलचंदानी भाग जाता है की आप ऊषा का सचिन देवरा के साथ मेलजोल उचित नहीं । वो उसी दिन उषा के साथ अपनी बैठी चौल में ताला लगाकर वहाँ से चला जाता है । जबकि हकीकत में वहाँ से जाता नहीं बल्कि सचिन देवरा के सामने मैं शुरू करता है । जैसे चला गया सच्चा ये थी वो दोनों पिछले रास्ते से वापस अपनी बैठे चोर के अंदर आ जाते हैं और पहले की ही तरह सचिन देख रहा तथा रीता सान्याल की गतिविधियों पर बारी तीसरे नजर रखते हैं । इतना ही नहीं जब सचिन बेवडा जूलिया के चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी करता है तो किरपाराम मूलचंदानी उसकी फोटो भी खींचता है । तथा तेल में उनका आपस का वहाँ तालाब भी रिकॉर्ड करता है । उसके बाद रीता सान्याल और रसिया जूलिया को रोयल सलूट बार में ले जाकर हाई डोसे मार डालती हैं । इस तरह लेडी आना गोंजाल्विस की बेटी और करोडों की ओनर जूलिया एक लावारिस मौत मरती है । उसका चुकी चेहरा बदला जा चुका था इसलिए उसे कोई नहीं पहचान पाता कि वह जो लिया है उसे लावारिसों की तरह ईसाइयों के कब्रिस्तान में दफना दिया जाता है । फिर रीता, सानिया और रजा का भी बडी नाटक के अंदाज में माँ ऑर्डर कर डालते हैं । वो एक दिन हंसी हंसी में रजिया के चेहरे पर अपना मायका करती है और अपने चेहरे पर रजिया का । फिर वो रजिया के साथ जूडो कराटे क्लब जाती है और वहाँ फाइव प्रैक्टिस के दौरान रजिया की मर्मस्थल पर एक ऐसी ताइक्वोंडो के मारती है कि रसिया की तुरंत ऍम विस्फोट टैब हो जाती हैं । उस समय क्योंकि रजिया के चेहरे पर रीता सानिया का मेकप होता है तो सब यही समझाते हैं कि रीटा सान्याल मुंबई की पुलिस भी रीता सानिया को मरा समझकर केस फाइल बंद कर देती है तथा उसके ऊपर छह हत्या हूँ तथा एक सशस्त्र बैंक डकैती का जो अभियोग था वो हमेशा हमेशा के लिए समय के गर्भ में दख में हो जाता है । इस तरह रीता सान्याल आपने तेज दिमाग की बदौलत अपने सारे गुनाहों को धो डालती है । फिर वो एक नई चार चलती है सबसे बाडी चार वो सचिन देवडा से अपने चेहरे पर रजिया का प्रॉमिनेंट में कब करवाती हैं । और फिर खुद जूलिया के नाम से लेडी आना गुंजाल जिसके पास फोन करती है कि वह कल गुफा रही है । जबकि रीता सानिया यान अब बडे खतरनाक के रातों के साथ हुआ रवाना हो जाती है । अब उसने लेडी आना गुंजाल उसकी हत्या करनी थी । इस तरह हत्या करनी थी जो कानून की नजर में हत्या ही ना कॅाल अपने मकसद में कामयाब हो सकते हैं उससे एक बार फिर प्लानिंग के कैसे कैसे पत्ते बिछाए क्या क्या चालीस चली लेडी आना गोंजाल्विस की हत्या किस तरह हूँ, कोई भी या नहीं ये सब जानने के लिए सुनी इस उपन्यास का दूसरा और अंतिम भाग तो मरु जी मेरे हाथ

भाग - 02

अध्याय दो आईएमएफ आलस में पार्टी समाप्त हो चुकी थी । पार्टी के दौरान जो शोरशराबे जैसा माहौल वहाँ बना था वो भी अब समाप्त हो गया था और इस समय पूरे पैलस में गहरा सन्नाटा व्याप्त था । नौकर बर्तनों के साथ सफाई में जुटे थे और बर्तनों की खनखनाहट भी कुछ कुछ वहाँ गूंज रही थी । लेडी आना गोंजाल्विस तथा लीटर सानिया था की हारी एक आकाश दान के सामने बैठी थी । पाकिस्तान में लकडियां पडी हुई थी जो चट चट करके चल रही थी । जब से तुम यहाँ से गए मेरी बच्ची समय बिलकुल अधूरी हो गए हैं । लुधियाना, पंजाब इसका बेहद भावुक ऍम जिंदगी में इतनी निराशा आ गई थी कि हर चीज बुरी लगती है । मैं तुम्हारी मनःस्थिति समझ सकती हूँ । आना डाॅॅ हूँ, लेकिन चिंता मत करो । अब मैं यहाँ आ गई हूँ । हमें सब ठीक कर दूंगी । तुम्हारी दवाइयों का चार्ट अपने अपने हाथ में ले । लुंगी और रोजाना बिल्कुल ठीक समय पर दवाई होंगे । तुम किसी बात की फिक्र मत करवाना । हाँ एक बात मैं तुमसे जरूर कहना चाहूंगी क्या? तो कितनी देर तक जाता मत कर देखो तुम्हारी आंखों के नीचे कैसे काले काले गड्ढे बढते जा रहे हैं । फॅमिली पर हाथ देखो खरीद वहाँ प्रे ये क्या है ये तो बहुत खतरनाक चीजें तो क्या हो गया चली गई थी ये ऍम इसका हाथ अपने हाथ में लेकर बोली तुम्हारे हाथों की नसे कुछ भी हुई दिखाई दे नहीं आना कल मैं तो मैं किसी अच्छे डॉक्टर के पास चेकअप के लिए ले चलेंगे नहीं बेटी तुम कैसी बात कर रही हूँ फॅमिली मुझे कुछ नहीं हुआ है बल्कि आप तो में और भी ज्यादा हो गई । इतना ये तो नहीं जानती हो ना । रीता सान्याल ने अपनी मौर्य प्लानिंग के पत्ते फैलाने शुरू करती है । कुछ बीमारियाँ ऐसी होती है जिनमें शुरू शुरू में कुछ भी पता नहीं चलता लेकिन बाद में वहीँ बीमारियाँ एका एक बडा खतरनाक रूप धारण कर लेते हैं । मुंबई के अंदर मेरी एक सहेली की मम्मी थी । वो देखने में बडी हल्दी नजर आती थी । हरदम बडी तरोताजा बनी रहती है । मालू एक दिन क्या हुआ? क्या हुआ उन्हें घर में बडे जोर से चक्कर आया था । वो धडाम से नीचे गिर पडी । मैंने उनसे कहा डॉक्टर के पास चलो लेकिन वो नहीं मानी । उन्होंने कहा कि ये मामूली चक करें । फिर इसी तरह उन्हें दो तीन बार चक्कर हो रहा है और जानती हूँ । रीता सानिया बेहद नाटकीय जैसे में बोले तीन दिन पहले क्या हुआ? तीन दिन पहले वो चालीस बासी क्या मेरियाना गोंजाल्विस का मुंह खुला का खुला रहेगा? अगर कुछ दिन पहले कोई उससे इस बात को कहता था तो बहुत खुश होती क्योंकि वो मारना चाहती थी । लेकिन अगले रियाना गोंजाल्विस की जीने की इच्छा थी । एक ही दिन के अंदर उसमें बडा भारी परिवर्तन आ चुका था । इसके अलावा एक और बडी खतरनाक बात हुई आना । वीटा सालों से कुछ ऑर्डर आते हुए बोली क्या मेरी सहेली की मम्मी थी मेरी सहेली की जब मम्मी थी उनके हाथों की नसें भी इसी तरह नीली नहीं हो गई थी । अब ये मालूम नहीं कि उनकी न से मिली नहीं ली क्यों हुई थी लेडी आना कुंवर ज्यादा खबरा उठे वो आयु के कारण नीली होती जा रही नस ऊपर धीरे धीरे अपना हाथ फिर मिलेगी । चलो छोडो इन सब फॅमिली अब चल कर लेता हूँ । वैसे भी काफी रात हो चुकी है लेडी आना । गोंजाल्विस धीरे से कुर्सी ऍम फिर आहिस्ता आहिस्ता कदमों से चलते हुए अपने मेट्रो में पहुंचे और बिस्तर पर लेट गई । रिटर्सं न्यायालयों ने कम्बल बढा दिया और हाँ जी तरसाने और कुछ विचार कर बोली तो मेरा रात के समय आवाज तो सुनाई नहीं देती । नहीं है ना ऍम कुछ भयंकर बीमारी ऐसी भी होती है । पेशेंट को रात के समय आवाजें सुनाई देने लगती है और नहीं नहीं हरियाणा गुंजाल ने हर बढाकर का मुझे रात के समय कोई आवाज सुनाई नहीं दी थी । अच्छी बात है लेकिन अगर कभी इस तरह की आवाजें सुनाई दे आना तो मुझे बता देना जरूरी है । अब आप सोच रहे हो आना गुंजार बजने आंखे बंद कर ली कहीं वो गोवा के मीटर मार बीच पर ये बनाए छोटा सा कॉटेज था जैसे सचिन देवडा ने किराये पर था वो शांत रिबेरो नामक एक गुवानी औरत का काम था । शांत राॅकी उम्र मुश्किल से चालीस बयालीस साल थी लेकिन वो अपनी अप्सरा जैसी कहा को इतना संभाल कर रखे हुए थी । इतना निकल पॉलिश करके रखी हुई थी कि कोई भी उसे पैंतीस से ज्यादा नहीं कह सकता था । ऊपर से सितम ये कि वह भरी पूरी दुनिया में अकेली थी । कुछ साल पहले ये उसने अपने पति से तलाक ले लिया था और आज की तारीख में वो गुलछर्रे उडाते भरती थी । अपनी जिंदगी में वो कितने लडकों को खाना खराब कर चुकी थी इसकी आखिरी डिटेल खुद शांत रे बैंकों के पास थी शांत अरे ब्रो ने आगे बढकर ऍफ का दरवाजा खोला तथा फिर सचिन देवडा के साथ अंदर हुई ये तो आम तौर पर मैं प्रॉपर्टी किराये पर देना मुनासिब नहीं समझते । शांत राॅक बोली लेकिन तो मुझे शकल सूरत से शरीफ आदमी लगते हूँ इसीलिए मैंने ये रिस्क उठा लिया । अनाज तक मेरे पास दर्जनों किराय जा रहा है किराये की बडी बडी रखने ऑफ लेकिन मैं किसी को घास नहीं जाती टाइम क्यूँ? सचिन देवरा ने अपने हाथ में मौजूद भरी अटैची अंदर ले जाकर रखी । ॅ कोई बात नहीं, शांत जगह होली वो लोग मुझे नहीं जमीन ॅ नहीं किया तो मुझे जमा हूँ इसलिए दे दिया तो अब ये तो वक्त बताएगा कि मेरा फैसला सही है या गलत । बेफिक्र रहिए हमारे सचिन देखना बोला मैं आपके अकेले को ठेस नहीं पहुंचने दूंगा । अच्छी बात है मुझे खुशी होगी फॅार घुसते हैं वह काफी बडे हॉल में पहुंच स्कॉट इसमें कुलजमा तीन कमरें हैं शांत जगह होली एक कमरा तो यही है जिसमें इस वक्त तुम खडे हूँ । ऐसे तो ड्रॉइंग हॉल के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं । इसके अलावा दो कमरे और है वो भी तो मैं नहीं खाती हूँ । शांत बैठो उस हॉल के कमरे का पहला दरवाजा बाहर करके बाहर निकले तो कॉलेज का बाकी हिस्सा नजर आ रहा है । ऍम देवडा को बाकी दो कमरे में नहीं आएगा । वो भी काफी बडे बडे कमरे थे और खूब हवादार थे । मैं समझती हूँ आॅटो में पसंद होगा उन्होंने बहुत अच्छा है । यहाँ की आबोहवा बेहद शानदार है । शांत राॅकी खोलते हुए थे तो देख सामने समुद्र की लहरों से टकरा टकराकर शीतल हवा के झोंके अंदर आते हैं । कभी मैंने फॅमिली बहुत दिल से खरीदा था लेकिन गृह जिंदगी के हालात बदलेंगे और हालात बदले तो मेरा इस्काॅन भी ना रहा जो पहले था हूँ । मैं क्या बातें नहीं थी । प्रशांत अखबारों ने उसे बाथरूम देखा है । शौचालय देखा । ठंडे गर्म पानी का सिस्टम उसे समझाया । शावक चालू करके दिखा सारे क्यों ब्लाॅक यहाँ सारा इंतजाम मौजूद हैं । शांत फॅमिली तो कुछ करने की जरूरत नहीं । सजन देगा काफी इम्प्रेस हुआ वहाँ सच मत सुख सुविधा के सारे साधन मौजूद है । टोमॅटो अकेले ही रहो, शांत है ब्रो उसकी तरफ घूमकर बोली वहाँ बिल्कुल अकेला खतम में शादी नहीं की । मैं अच्छी बात है । मैं भी अकेली हूँ । क्या आपने वे शादी नहीं की? नहीं शादी तो मैंने की शांति फॅमिली लेकिन मेरा अपने पति से भी पहुँच गया साढे इसमें साडी जैसी कोई बात नि शांत राॅय मेरे अपनी इच्छा से हुआ हूँ । मैं उससे नफरत करनी थी । हाँ, अगर वो ज्यादा दिन मेरे साथ रहता तो शायद मैं अच्छा आपको से उसका कलाकार डाल दिया । ऍम तो पक्का ऍम था हूॅं उसका ऍम बॅाक्स के मामले में बिल्कुल कुत्ते की साथ एक और अब से कभी मार्च का दिल नहीं था । खासतौर पर अगर वो और और बीवी हो तो ऐसी ही नहीं ऐसा ही वो था हमेशा पराई स्त्री के साथ सेक्स को एक छह रहता था । जहाँ कहीं भी वो अकेली अकेली औरत को देखता हूँ तो उधर उसके लाख घुटनों घुटनों तक तब तक नहीं लगती । बेटे का तो उसकी निगाह में कोई भी बायना था क्योंकि बीडी तो उसे हरदम हासिल थी । बीवी के साथ जिस्मानी रिश्तेदारी कायम करके बीवी के साथ सेक्स करके उसे अपने उस मतदान की का एहसास नहीं होता था जो किसी पडोस की औरत का मान मर्दन करके उसे अपनी मर्दानगी का एहसास होता था । जब किसी अकेली अकेली औरत को दबोचकर अट्ठाईस करती है, पांच जा करके है वो अपने आप को सूरमा समझता था । चाहे वो मेरी क्यों ना धोहनी क्यों ना चाहे वो कितना बडा गंदगी का नहीं लेकिन आई हंडिया पराई इंडिया आई इंडिया में चम्मच मारना और फिर अपनी बदले थपथपाना मारते की फितरत है । ऐसा था आपका वो मनाए सचिन देगा । हैरत से शांत रिबैरो को देखने लगा तो मैंने उसे समझाने की कोशिश नहीं की । सच नहीं होगा । बोला कि वो अपनी शहादत को छोड देते हो । समझाने की कोशिश की लेकिन वो मारने वाला कहा था । फिर मैं भी हरकत तरफ कराएं कि कैसे हर करता हूँ ऍम था उसी की तर्ज पर मैं होर बन गई । वो शब्द शांत रिबेरो ने इतनी सैलेरी से कहे कि सचिन नहीं थोडा भी अचंभित रह गया दे । इस तरह से किसी पढाई औरत का महान मर्दन करने में अपनी मर्दानगी का एहसास होता था । उसी तरह मैं भी दूसरे मर्दों के साथ जिस्मानी रिश्तेदारी करने में आत्मिक संतोष महसूस करने लगी । फिर तो बहुत हंगामा हुआ होगा । होना था हंगामा लेकिन फिर भी मुझे परवाह नहीं थी । शांत फॅमिली कम से कम मर्द इस मामले में बेवकूफ होता है वो नहीं जानता हूँ और जब तक फरमाबरदार बीवी होती है तब तक उससे बडी सती सावित्री कोई नहीं लेकिन अगर वही औरत एक बार फिसलना शुरू हो जाए तो उससे बडी छिनाल कोई नहीं । उससे बडी बेगैरत कोई नहीं और मैं उसी की देखा देखी छिनाल बन चुकी थी । जब मैं घर की मलाई छोडकर नुक्कड की जूठन चाट सकता है तो एक कम औरत क्यों नहीं कर सकती? और अकबरी क्यों बन दर्शक? बहरहाल मैंने हॅारर सारा झंझट ही खत्म कर दिया तो अपने यहाँ मैं अपने था चाहे तो कुछ कर चाहे मैं कुछ करूँ । दोनों खुश तो नौ हजार रोजाना । किल किल की बात है सचिन देवदास तब खडा रहा हूँ । एक बार वो पहले ही मुलाकात में खूब अच्छी तरह समझ गया कि शांत रहे । पहले बहुत आजाद खयाल और थी । जिंदगी से उसने बहुत तजुर्बा हासिल किया था और उसके रंग ढंग बता रहे थे कि आज की तारीख में वो अपनी सेक्स अपील को खूब जमकर के आज कर रही थी । कॅश ये सब जिंदगी के बच्चे हैं । शानदार इव रोहासी चाहे जितनी उधर दे रहा हूँ । ऍम खत्म होने वाली नहीं तो तुम अपनी बताओ तो गोवा में रह कर क्या करेंगे हम अभी तो कुछ सोचा नहीं सचिनदेव खुला अभी तो बेरोजगारी ॅ क्या करती है? अगर कभी मेरी मदद की जरूरत पेश आए तो मुझे हिचक शांत ॅ जरूर मदद कैसी भी हूँ शांत रिवेरो ने बडे प्रभाव से उसकी आंखों में झांका हिचकिचाना सचिन देवडा सकता हूँ मैं तुम्हारे लिए चौबीस घंटे तैयार नहीं होंगे । सचिन देवरा फिर याद रहे हैं चौबीस ऍम हम कुछ पूछना तो नहीं नहीं नहीं ठीक है तो फिर मैं चलती हूँ अपने कूल्हों में काम पैदा करती हुई बडी स्टाइल के साथ दरवाजे की तरफ बढ गए । सचिन देवडा का कलेजा उछल उछल कर हालत में आने लगा ।

भाग - 03

अध्याय थी किरपाराम मूलचंदानी और अच्छा भी । आपने खुराफातों को अंजाम देने गोवा पधार चुके थे । इतना ही नहीं उन्होंने भी मीठा मार बीच पर ये छोटा सा कॉटेज किराये पर ले लिया था । जो आना पहले से कुछ ही फास्ट था । कुल मिलाकर गोवा से मीठा मार बीच पर तमाम केदार जमा हो चुके थे और वो स्थान धीरे धीरे घटनाओं का केंद्र बिंदु बनता जा रहा था । किरपाराम, मूलचंदानी तथा उषा इस समय बिस्तर पर थे और आपस में खूब गुत्थम गुत् हो रहे हैं । मणि में लाइट बंद करता हूँ पर आ मूलचंदानी ऊषा के पहले से उठने की कोशिश की क्यों पूछा नहीं उसे तुरंत करता हूँ लाइट क्यों बनकर मनी अंधेरे में ताज की गद्दी के अंदर फेरी लगाने में कुछ और ही मजा आएगा? नहीं उषा हँसी ऍम वो मुदित मुद्रा में पूरा तुम्हारा जैसे बात कहते हैं । जैसे कोई नई नवेली दुल्हन तुम्हारे हत्थे चढ रही हूँ । ले के ऊपर आ मूलचंदानी भी हादसा हो तो नई नवेली नहीं और कुछ सस्ता है । कितनी बढिया बात है । उषा खिलखिलाएं हजार बार हंडिया चूल्हे पर चढ चुकी दर्जनों तरह की चम्मच झंडिया में घूम चुके फिर भी ग्राहक की निगाह में हंडिया कोरी की पूरी जैसे एकदम ताजी कुम्हार के चाक से बनकर उत्तरी वानी तुम मुझे इस तरह की मिसाल मध्य आकर किरपाराम मूलचंदानी बनबना जब तो मेरे से ऐसी बात बोलती है नहीं मेरा बेटा गरम होता है ठीक है कुछ नहीं है आज इसे नहीं बोलूँगा तभी के पर आ मूलचंदानी ने आगे बढकर लाइट का स्विच ऑफ कर दिया तत्काल कमरे में गहन अंधेरा क्या हो गया? क्या कर रहे हो अंधेरा होने के कुछ क्षण बाद ही उषा की चीज नहीं किरपाराम खिलखिलाकर हाँ ऐसा ही कुछ तो मैं कर ही रहा होंगा अब्दुलपुर फॅमिली पानी भी करनी मैं उतारती हूँ वो जल्दी से बोली हट जाएगी बट नहीं थे हूँ फिर ऊषा की उन्मुक्त हंसी की आवास को फिर किरपाराम ने उसी ढंग से हूँ ही तुम क्या कर रही हूँ उसी क्षण किरपाराम मूलचंदानी हर बढाया मैं भी वही कह रही हूँ तुम ने अभी अभी क्या लेकिन तभी कपडों के सर सराकर उतरने क्या है फिर जिसमें से जैसा रखना नहीं किया उसके बाद ही कर रही हो । तुम भी कभी कभी बिल्कुल बच्चे बन जाती हूँ । पूछा झल्लाए पानी तो मिसाल भूल गई । बच्चा और बुरा एक समान होता ही नहीं तुम कोई बडी बडी मैं बूढा नहीं मैं मिलिट्री का ट्रक जरूर बुलबुल लेकिन डिस्कॅाम और मैं क्या हूँ । पूछा पुनः खिलाकर भी बडे तू तो एकदम नहीं नकोर जीत है एकदम ताजी शोरूम से बाहर निकली हुई नया पेट नहीं । बॉडी नया सीट ऍम सब कुछ नाॅक हूँ घोषा की फिर हंसी छूट गया । फिर वहाँ ऐसी कह रहे गहरी सिक्स कार्यों में कहा गई हमारे मियां दोस्ताना गया था । किरपाराम मूलचंदानी नहीं फेंकनी की दो ग्लास तैयार किया । फिर एक ग्लास ऊषा को दिया तथा एक खुद ले लिया ही नहीं हुआ । ॅ पूछा नहीं लेनी का एक स्कूल भर्ती ही कडवा समूह बना का मगजमारी ऐसी जैसे शहर करेगी, कुछ चीरता चला जाए फिर पडा मूलचंदानी खामोशी हूँ बता रहा हूँ क्या करना है वो ही बढिया । वह क्या करना है? नहीं, पर आ मूलचंदानी हो सकता । अब तो या सारे पत्ते है चुके हैं । रीता सान्याल उस करोडपति बुढिया की बेटी बनकर आना पैलेस के अंदर घुसने में कामयाब हो गई । यानी सचिन देवडा ने भी कॉटेज किराये पर ले लिया और हम यहाँ शिफ्ट हो गए नहीं यानी सारे यमदूत अपने अपने मोर्चे पर फिर अब तो बस बुढिया के लोढा करने का वेट करना है और ठंड ठंड में करोडों के सपने देखने अगर मान लो गुडिया की दौलत हमारे हाथ लग गई फिर तो मुझे अदालत का क्या करोगे सबसे पहले तो तेरे वास्ते आना पहले जितना बडा यहाँ बंगला खरीदों का किरपाराम मूलचंदानी स्वप्निल अंदाज में बोला जिसके तेरे वास्ते हीरो नौकर जाकर होंगे घूमने के लिए मर्सिडीज बेंज कार होगी शोफर तेरे सम्मान में कार का दरवाजा खोले खडा होगा तू बहनों से इस तरह लकदक होगी कि तुझे देखकर सोफिया लॉरेन शर्मा है । महारानी अलग बहुत शर्म आ जाए तू जिधर जिधर से गुजरे किये उधर उधर से लोग मुझे यहाँ से भरी नहीं कहा हूँ से देखेंगे तो शहर की महारानी मैं शहर का महाराजा पूछा के पर हमसे कस करने पड गई था । क्यों मुझे इतने बडे बडे सबके दिखाती हूँ कि पडा पूछा उद्विग्न विभाव से बोले तुम इतने बडे बडे सपने दिखाती हूँ तुम्हें हवा में होने लगती है । बडी सपने नहीं है बिल्कुल । किरपाराम मूलचंदानी ने उसे अपने सीने से कस कर दिया था । सपने नहीं है नी ये तो सच्चाई है, बहुत जल्द हकीकत कर धारण करेगी नहीं एक दिन ये सारी चीजें हमारे पास होगी और ये हम धीरे धीरे अपनी मंजिल की तरफ बढ रहे हैं । और ये सब कुछ मैं तेरे लिए कर रहा हूँ नहीं आनी सर फॅमिली है । पूछा किरपाराम मूलचंदानी की बाहों में सिमटी अनंत आकाश में विचरण करती रही । उसी रात रीता सान्याल ने नई चाल खेली । उसने ऑडियो कैसेट कोई छोटे से पॉकेट टेप रिकॉर्डर में लगाया । उसका सिर के अंदर बडी बडी अजीब तरह के आम आदमी भरी हुई थी । फिर जब लेडी आना गोंजाल्विस हूँ कहीं तो रीता सान्याल उस टेपरिकॉर्डर को बहुत स्लो वालियों फर्स्ट आकर के उन के बैठ के नहीं खाई । वो सुबह उसी कैसेट के कारण आना पालस में काफी हंगामा के सुबह रहे । हरियाणा गोंजाल्वेस और रीता सान्याल डायनिंग टेबल पर बैठे नाश्ता कर रही थी । बूटा राम भी इत्तेफाक से उस क्षण वहीं हॉल में था । रात तो मेरे साथ बडी अजीब घटना घटी । जूलिया आना गोंजाल्वेज नाश्ता करते हुए बोले कैसे घटना हूँ मुझे बडी अच्छी बच्ची बावासीर सुनाई थी । कॅश ऐसे हवा से जो मेरी जिंदगी में पहले कभी नहीं सकती हूँ कि क्या ऍम नाश्ता करते करते ठिठककर आपसी क्या सियासी? कुछ बडी अच्छी तरह की आवाज थी है । ऐसा लग रहा था जैसे कोई मेरे कमरे में ये इधर से उधर चक्कर काट रहा है । मैंने आंखें खोलकर देखा तो कमरे में कोई नहीं था लेकिन किसी के चक्कर काटने की आप वहाँ से मुझे लगातार सुनाई देती नहीं । और उसके बाद तो एक बिलकुल ही नहीं काम हूँ क्या मुझे फिर ऐसी आवाजें सुनाई देने शुरू हो गई जैसे कोई दरवाजा खटखटाता है लेकिन दरवाजे के बाहर कोई नहीं था । वैसे भी मैं कभी दरवाजे के अंदर से सिर्फ नहीं लगा कर नहीं सुनती हूँ । आॅर्ट रीता सानिया के नेत्र भाटी के पार्टी रहते हैं । ये तो कुछ ऐसी आवाजें जैसी आवाज मेरी सहेली की मम्मी को सुनाई देती थी । उन सर वो आपको कोई सी बीमारी लग गया ना । मैं आज ही आपका किसी अच्छे डॉक्टर से चेकअप करता हूँ । नहीं ऍफ की कोई जरूरत नहीं । ऐसी आवाज तो कभी भी किसी को भी सुनाई दे सकते हैं । इसमें क्या बडी बात है यही तो लोगों का बहन होता है ना लीटर सानिया चिंतित मुद्रा में मैंने रात में बताया था ना कभी कभी इस तरह की छोटी छोटी बातें बहुत गंभीर बीमारी का रूप धारण कर ली थी । मेरी सहेली की मम्मी भी तो इन बातों को इसी प्रकार डाल रही थी । लेकिन फिर अंत में क्या हुआ नहीं मैं कोई रसमें ले सके । आना मैं आज ही आपका चक्कर करेंगे । बूटा राम जो इन बातों को बडे गौर से सुन रहा था उसके कान भी खडे हो गए तो मैं उससे बाबा मुझे तो लगता है इस बारे में आना की सलाह ही ठीक है । रात के समय इस तरह की आवाजें सुनाई देना कोई बहुत बडी बात नहीं है । दो साल पहले मुझे भी ऐसी साउंड सुनाई देती थी । साउंड नहीं सौं सौं वाईफाई बूटा राम जल्दी में हर बढाकर बोला । मुझे भी इसी तरह रातों को भागने दौडने की आवाज सुनाई देती थी । कभी कभी तो ऐसा लगता था जैसे कोई हवाई जहाज भयानक गर्जन करता हूँ । मेरे सिर के ऊपर से गुजर गया । एक महीने तक मुझे वो आवाज सुनाई देती रही । फिर अपने आप उनका सुनाई देना बंद हो गया । मैं जानती हूँ कभी कभी आबाजी सिर्फ मन का वहम होती है फॅमिली लेकिन यही मामूली से लगने वाली आवासी जब भयानक बीमारी का रूप धारण कर लेती है तो फिर इंसान को अपनी जान बचाने भारी पड जाती है । ऐसा एक हादसा में अपनी आंखों के सामने होते हुए देख चुकी हूँ । इसलिए मैं कोई रसमें लेना चाहती हूँ । मैं आज ही आना का चक्कर रहूँ । बूटा राम भी कुछ नहीं बोला । उस डॉक्टर के उम्र पचास पचपन साल के आसपास थी । वो तंदुरुस्त देश ही वाला था । लेकिन उसके बाल एकदम सामने जैसे सफेद थे और वो सुनहरी फ्रेम का आनंद लगता था । जैसे उसकी पर्सनालिटी बेहद गरिमापूर्ण बन गई थी । वो गोवा का एक फेमस मनोचिकित्सक था और उसकी ख्याति दूर दूर तक पहली हूँ । उस डॉक्टर ने लेते आना गोंजाल्विस को एक टेबल पर लेटाकर उसका बडी गंभीरतापूर्वक । क्या ये आवाज आपको कबसे सुनाई दे रही है? उसने लेते आना गुंजाल जिसकी तरफ देखते हुए पूछा कल रात पहले ही महत्वा सुनाई दी थी । फॅमिली ऍम को उतना फॅमिली भी नहीं थी जितना ये मेरी बेटी फॅमिली ले रही है । हम मैं तो समझती हूँ कि इस तरह की आवाजें कभी भी किसी को सुनाई दे सकती हैं । नहीं, इतना सीरियस ले लेना कोई अक्लमंदी नहीं । ऐसा कुछ नहीं है । मैं डॉक्टर का भारी स्वर्ग हो जाए । कभी कभी जो बात हमें मामूली लगती है, वह बडी साबित होती है । ये बात तो मैं समझाना चाहती हूँ । डॉक्टर डॉक्टर के मुझ से निकले । वो शब्द वीटा सान्याल के लिए मानव वरदान साबित हुए । वो तुरंत बोल बडी दरअसल हमें किसी भी बात को इतने हल्के तौर पर नहीं लेना चाहिए । खासतौर पर तब जब जिंदगी मौत का सवाल हूँ । अभी डॉक्टर ने अपनी पेंसिल टॉर्च का प्रकाश ले रियाना गुंजाल, जिसके आंखों में डालकर देखा, फिर उनके कान भी चक्की । वैसे आमतौर पर आपको आवाज तो साफ सुनाई देती है । टाॅफी हम बिलकुल क्या पिछले कुछ दिनों से परेशान थी? हाँ मेरा मतलब है हाइपरटेंशन तो नहीं थी, बिल्कुल भी नहीं । मेरियाना गुंजाल जिसकी गर्दन तुरंत इंकार में ही कमाल की सच्चाई तो यह डॉक्टर नहीं । पिछले कुछ दिनों में जितनी खुश नहीं हूँ, उतने खुश शायद ही जिंदगी में पहले कभी रही होंगी । फिर पूरे पंद्रह साल में अपनी बेटी को देख रहे थे मेरी बेटी जो हमेशा हमेशा के लिए मेरे पास आ चुकी है । पहला इससे ज्यादा खुशी की बात मेरे लिए और क्या हो सकती है? टेंशन तो मेरे दिमाग में दूर दूर तक नहीं थी । ये ऍम मेरे आने की वजह से ये वाकई बहुत खुश थी । कल रात उन्होंने इसी खुशी में बाल इसके अंदर एक बडी पार्टी का भी आयोजन किया था । डॉक्टर ने विचारपूर्ण मुद्दा बनाने, कभी आपके सिर में चोट वगैरह तो नहीं लगी थी । नहीं डॉक्टर ने फॅस का प्रकाश ऍम घटेगा । ठीक है आप चाहिए फॅमिली उठकर बैठ के फिर हीटर सान्याल ने एक और बडी जबरदस्त मनोवैज्ञानिक चली । जिस कमरे में डॉक्टर नहीं मेरी आना गोंजाल्विस का चक्कर किया था उसी कमरे साॅस बोर था जिसमें डॉक्टर बैठ था और आपने पेशंस से मिलता था । चैकप करने के बाद वो अपने उसी रूम की तरफ बढ गया ही बैठे ऍसे कहा मैं भी डॉक्टर से बात कर के आती हूँ आना गोंजाल्विस वही ठिठककर बैठके जाॅन डॉक्टर के पीछे पीछे चलती हुई दूसरे कमरे में पहुंच गई । फिर उसने अगला गाओ ये चला कि डॉक्टर से बडे गंभीर अंदाज में बात कर लेंगे । अपने चेहरे पर काम चिंता के भाव पैदा चाहिए और वो डॉक्टर से बात करते हुए बार बार पलट पलट कर पारदर्शी शिष्य में से लेते आना जाना उसको देखने लगी । अब आना गोंजाल्विस की सब पता हैं । उन्हें लगा जरूर को सीरियस मांगता है का तूफानी गति से आना पालस की तरफ दौडी जा रही थी । कार को गंभीरता की प्रतिमूर्ति बनी रॅायल कर रही थी जबकि उसके बराबर में फ्रांस सीट पर ही आना गोंजाल्विस बैठी थी और इस समय चुप चाप थी, चलते हैं डॉक्टर ने क्या कहा आना? गोंजालवेज ने काफी देर बाद पूछा आप कोई खास बात नहीं कहीं रीटर सानिया नजरीन चलाते हुए इस तरह बोली जैसे कोई बडी खास बात छुपा रही हूँ हम । दस डॉक्टर ने इतना ही कहा आपको कोई गंभीर किस्म की बीमारी नहीं राहत इत्तेफाक से ही वहाँ वहाँ से आपको सुनाई दे रही होंगी । हो सकता है तो आप ऐसे मन का वह भी हूँ बहन हम हॅूं । डॉक्टर कहता हूँ वो आवाजे फिर सुनाई देंगे क्या सचमुच डॉक्टर यही कहता है कि मुझे कोई बीमारी ने ही आना गुंजाल जिसका सशंकित स्वार्थों अब बिलकुल ना मैं आपसे झूठ क्यों बोलूंगी? लेकिन लेते आना गोंजाल्वेस के चेहरे पर यकीन के भाव भेज भी ना है । उस दिन लीटर सान्याल की ट्रेनिंग के मुताबिक आना । पंजाब उसके मन में शक की कीडे का जन्म हो गया था । उन्हें लगने लगा था उनसे कुछ छिपाया जा रहा है आना पालस के पीछे काफी बडा बैडमिंटन कोर्ट बना हुआ था वो बैडमिंटन कोर्ट वर्षों तक वीरान रहा था लेकिन अब सात सफाई करके उसे सुंदर बना दिया गया था और कोर्ट के बीचोंबीच नई नई भी लगी थी । शाम का समय था और उस समय रीता, सानिया तथा बूटा राम कोर्ट में जमकर बैडमिंटन खेल रहे थे तो मैं ऍसे बाबा, बूटा राम जोरदार ढंग से सर्विस देता हूँ । बोला जब तुम छोटी थी तब भी हम दोनों इसी तरह इसी कोर्ट पर बैडमिंटन खेला करते थे । ऍम आकर्षक हूँ और मुझे भी आता है तो मतलब जानबूझ कर रहा जाते थे । बूटा राम जोर से खिलखिलाकर आता हूँ । वाकई तुम्हारी याददाश्त कमाल की है । मैं भी बाबा लेकिन एक बात ध्यान रहे क्या अब मैं तुमसे जानबूझ कर नहीं हारूंगा । इसलिए पूरे दिलोजान से खेलो । बेफिक्र रहो बूटा राम तब तक में हर आ देना मेरे बाएं हाथ का खेल है तो नहीं जानते । मुंबई में रहकर मैंने काफी बैडमिंटन खेला है । ये देखो मेरा एक शांत फॅसने हवा में उछल कर एक बेहतरीन प्रश्न का शॉट लगा दिया था । मोटा राम लडखडाया लेकिन फिर उसने भी और शॉर्ट का वैसे ही करारा जवाब दिया । काफी देर तक हो गेम चलता रहा । दोनों धुरंदर खिलाडी थे । तभी रीता सानिया ने जम्प लगाकर अपनी संपूर्ण शक्ति से एक और जबरदस्त किया है । वो वाकई जबरदस्त था । बूटा राम जैसे फुर्तीले आदमी से भी उसका कोई जवाब न बन पाया । वो हार गया । फॅमिली मार अलावास भूराराम उस शॉट की तारीख में चला है । मारना आवास नहीं । महाबलेश्वर माडॅल हाँ, वही वही तुम वाकई एक बेहतरीन खिलाडी बन चुकी हूँ । मोटाराम जाकेट हवा में कमाता हुआ कितना पढा ऍम जानती हूँ तुम्हारे आज के शॉट को देखकर मुझे तुम्हारे बचपन का एक आ गया मेस्सी बाबा एक बार तो उन्हें बचपन में भी आपने उलटे हात से ऐसा इलाज अब आप शॉट लगाया था जिसका मुझसे कोई जवाब नहीं दिया गया । ऍर ईटा सान्याल के दिमाग में तुरंत चिंगारियां छोटे अनार बडे तो क्या छूट ऍम थी क्या उसके आतंक करते समय उससे कहीं गलती हो गई थी । रेट आसानियां बैडमिंटन खेलना भूल गई । उसने मेहत स्कोप अंदाज में आना पैलेस के अंदर थोडी छानबीन की नहीं तो शीघ्र ही उसे मालूम चल गया की सच मझौलिया बचपन से फॅमिली थी । आॅर्ट इतनी बडी गलती हो रही थी उससे और मोटा राम जैसे कहीं आदमी के सामने हो रही थी । रीटर सान्याल के पसीने छूट पडे सचिन देवरा ने अपना आधे से ज्यादा दिन मीडिया मार बीच पर हिप्पियों के बीच मटर गस्ती करते हुए हैं । फिर जब सूरज पश्चिम आकाश में डूबने लगा और उसकी विलक्षण लालिमा समुद्र की सतह पर फैलने लगी तो वो अपने कॉलेज में वापस लौटा । पैसे भी शाम होते होते आजकल मीटर बाहर बीच पर लोगों की आवाजाही काफी कम हो जाती थी । दरअसल इन दिनों वहाँ साइकल श्री नाम का एक खतरनाक अपराधी सक्रिय था । शाम होते ही मीटर मार बीच तथा उसके आस पास के निर्जन क्षेत्र में एक्टिव हो जाता था तो कहीं भी किसी अकेले धकेले लडकिया लडकी को देखता तो वहीं उसे दबोच लेता और साई कर की । छह दिन उसके गले में डालकर उसे बडी बेरहमी के साथ मजा आता था । फिर वो अपराधी उसकी जेबों से नकदी और जेवर बगैरा लेकर फरार होने से भी ज्यादा टाइम नहीं लगता था । अब तक पांच मॉडर कर चुका था और उसके नाम का साॅन्ग उन दिनों से पूरे इलाके में फैल हो ना । रात के आठ बजे बेटा सानिया सचिन देवडा से मिलने उस कॉलेज में आई । हम जगह तुमने वाकई बहुत अच्छी चीज है फॅमिली हुए थे । सचिन देवरा ने कुछ नहीं कहा तुम अपनी सुना वो थोडा धैर्य के साथ बोला ॅ क्या हो रहा है टेनिस में अब वही हो रहा है तो मैं चाहती बॅाल पैर फैलाकर एक्सॅन । वहाँ मैंने अपनी प्लानिंग के पत्ते फैलाने शुरू करते हैं । सबसे बडी बात ये है कि लेरी आना गोंजाल्विस के दिमाग में भी धीरे धीरे ही शक डालना शुरू कर दिया है । किसी कोई गंभीर बीमारी है । वक्त गुजरने के साथ साथ आहिस्ता आहिस्ता ये शक पुख्ता होता चला जाएगा । लेकिन आज एक बडी अजीबो गरीब घटना घट के कैसे घटना सचिनदेव रहे उसके सामने एक दूसरी सौ पचहत्तर बैठ चुका था हम । दरअसल मैं आज बूटा राम के साथ बैडमिंटन खेल रही थी । तभी ये रहस्योद्घाटन हुआ कि जूलिया बचपन में लेफ्ट अंडा थी । रीता सान्याल बोले ऍम ऍम मैंने इस बात की आना । पहले इसमें बडे ढके छुपे अंदाज में छानबीन भी की तो बात हंड्रेड पर्सेंट सच निकली । चुहिया वाकई ऍम थी लेकिन एक बडी उलझन में अब भी महसूस कर रही है क्या? जूलिया और मैं कस्तूरबा गर्ल्स हॉस्टल के अंदर काफी दिन तक साथ साथ रहे थे । लेकिन मैंने वहाँ से कभी लेफ्ट ध्यान से कोई काम करते नहीं देखा । कितना नहीं । जस्सियां ने मुझे कभी ये नहीं बताया कि वह वास्तव मिला ठंडा है । अगर झोलियां थाना थी तो कम से कम रसिया को तो ये राहत मालूम होना चाहिए था । आखिर क्या पिछले कई साल से उसके साथ रह रही थी? ये बात तो ठीक है लेकिन आना फिर इसमें छानबीन करने से ये साफ साबित हो गया है कि वास्तव में ही लाॅट थी । इसके पीछे एक बात हो सकती है । सचिन देवडा बोला क्या संभव है जो लिया बचपन में लेफ्ट ठंड रही हूँ लेकिन मुंबई पहुंचने के बाद जब उसने स्कूल में एडमिशन लिया हो वहाँ उसके लेफ्ट से काम करने को लेकर उसकी सखी सहेलियां मजाक उडाती हूँ तो उसने धीरे धीरे सीधे हाथ से काम करने कि आदत डाली हूँ । ऐसे भी वो अंतरमुखी स्वभाव की लडकी थी और ऐसे स्वभाव की लडकी को इस तरह के कमेंट ज्यादा झंझट होते हैं । बात तो तुम्हारी काफी हद तक ठीक है । रीटर सानिया प्रभावित मुद्रा में हुई । ऐसा हो सकता है कि जूलिया बचपन में नहीं ठंड रही हूँ लेकिन फिर बाद में धीरे धीरे वो अपने आदत में परिवर्तन में आई हूँ । लेकिन अब तो क्या करेंगे? सचिनदेव हो गया कैसे सारे हालात को संभालो वो सब मैं खुद संभाल होंगी । फिलहाल इस बात का शुक्र है कि मुझे समय रहते ही रहा पता चल गया बडा बूटा राम इसी को इन की वजह से कोई बडा हंगामा कर सकता था । फिर ऍम छोडकर खडी हो गई मुझे चलना चाहिए अभी से जा रही हूँ । सचिन थोडा धीरे से उठा उसमें उसकी आप हुई ऍम अब वो क्या है । मैं बूटा राम के कारण ज्यादा देर यहाँ नहीं रखना चाहते हैं क्या पंद्रह मिनट भी नहीं सचिन देवडा आगे बढाना उसने रेटर सान्याल अपनी बाहुबली मीरा सान्याल भी अमरबेल की तरह उससे कस खर्चे हटाएँ आज थोडा जल्दी ऍम मैं ठीक हूँ । सचिन देवरा ने अपने तहते हूँ उसके होठों पर रखें मैं तुम्हारा ज्यादा समय नहीं कमरे का तापमान का इस काफी बढ गया था । सचिन देवडा रीटर सानिया का अपनी हूँ में भरी भरी बिस्तर की तरह पढा वहाँ जाकर ढेर हो गया । सुबह लेते आना गुंजाल रस और रीता सान्याल नाश्ते की टेबल पर फिर एक साथ थी । फॅस की आंखों में आज कुछ बेचैनी के भाव थे और उनके चेहरे से स्पष्ट महसूस हो रहा था और ढंग से सो नहीं सकी हैं । क्या बात है आना । बूटा राम वही खडा था । आदर सूचक मुद्रा में बोला कि आज आप की तबियत ठीक नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है । वो उठा रहा हूँ भेज आना गोंजाल्वेस स्लाइस पर धीरे धीरे मक्खन लगाते हुए हुई । दरअसल रात मुझे भी कुछ आवाज सुनाई आवासी ऍम यहाँ क्या क्या दिया ना क्या राहत आपको फिर ऐसा लगा जैसे आपके कमरे में कोई टहल रहा है नहीं ऐसा तो नहीं लगा ऍम आवाज ही नहीं तथा की थी । मुझे ऐसा लगता था जैसे कोई मेरे सिर पर जोर जोर से नगाडे बजा रहा हूँ । कभी न गाडी की आवाज हल्की हो जाती, कभी तेज हो जाती है कोई दो घंटे तक मुझे लगातार न गाडी की वो आवाज सुनाई देती नहीं बडा चिंताजनक मामला है बेटा सान्याल मानो नाश्ता करना भूल गई रात उसी ने वो टेप लगा था । वोटा राम और वहाँ आस पास खडी नौकरों के चेहरे पर भी चिंता के भाव आ रहे थे । मेरे तो यही समझ में नहीं आ रहा आना ऍम कि यहाँ वहाँ से मुझे क्यों सुनाई देती है । आवाजे इतनी साफ थी कि उन्हें मन का वहम भी नहीं माना जा सकता है । मुझे तो ऐसा बिल्कुल उपन्यासों जैसी बात लगती है ना मोटा हो मालूम है जासूसी उपन्यास में बिल्कुल ऐसा ही घटनाक्रम था । एक आदमी को रात के समय इसी तरह बडी अजीब अजीब आवाजें सुनाई देती थी । कभी उसे ऐसा लगता था जैसे कोई जोर जोर से चिल्ला रहा हूँ । कभी ऐसा लगता था जैसे ट्रेन धडधडाती हुई उसके ऊपर से गुजर गई हूँ । बडी अजीब अजीब आवाजे उस आदमी को सुनाई देती थी । फिर उपन्यास के अंत में उन आवाजों का राज भी खुला और बढत धमाकेदार आज खिला कैसा रहा? दरअसर कोई आदमी उसके खिलाफ षड्यंत्र रच रहा था । बूटा राम बोला वो उसे बीमार साबित करके माहौल डालना चाहता था । तो तुम क्या कहना चाहती हूँ ऍम क्या खाना के साथ भी ऐसा कुछ हो रहा है? नहीं मेरा ऐसा कोई मतलब नहीं । फिर हमें इस बात की कहानी सुना रहे बोटल हम सब पकाकर खामोश हो गया । जबकि सच्चाई ये थी मोटा राम के उस बात में खुद रीटर सान्याल के छक्के छुडा दिये थे क्योंकि बूटा राम की उस बात में पूरी तरह सच्चाई जो छुपी थी । तभी रीता सान्याल ने एक चाल और उसने अपने हाथ में मौजूद चम्मच जानबूझ कर नीचे गिरा दिया । फिर सबको दिखाते हुए उसे उल्टे हाथ से उठाकर वापस केवल पर रखा और उसके बाद उलटी हाथ से ही नाश्ता करने लगे । डेटा सान्याल के उस हरकत को देख कराना गुंजाल जिसके होठों पर मुस्कान दौडे बिना नहीं रह सके । तुमारे बचपन की ये आदत अभी तक छूटी नहीं । अब कैसे आदत ऍम से काम करने की तो रीता सान्याल भी बडे स्वभाविक अंदाज मुस्कराए तथा फिर हर बढाकर बिल्कुल पहले की ही तथा सीधे हाथ से काम करने लगी । ऍम मैंने साधक कुछ होने के काफी प्रयास किए । डेटा सानिया गोली काफी हद तक की आदत छोड भी थी लेकिन फिर भी कभी कभी गलती हुई जाती है । ये बचपन की आदतें में सी बाबा तभी टन इसका एक पुराना नौकर और बचपन की आदतें इतनी आसानी से नहीं छूटती । अपनी सही कहा का वाकई बचपन के आदित्य इतनी आसानी से नहीं छोटा करती । छोडना चाहूँ तब भी नहीं । डायनिंग हॉल का माहौल कुछ देर के लिए हल्का फुल्का हो गया । आज सुबह सुबह कहाँ चले गए थे मैं कब से तुम्हारा वेट कर रही हूँ पूछा के पर आ मूलचंदानी कॉलेज में दाखिल होते देखकर बडी जरा आना पालस का एक फेरा लगाने कहाँ था? गिर बारामूल चलाने ने अपनी सिंधी टोपी उतारकर एक तरफ रखिए और कॉटेज में बकरे को चेक करने गया था कि वह क्या कर रहा है । मैंने रात भी तुमसे कहा था । पूछा हुई चालीस के ज्यादा चक्कर मत काटा कर अगर किसी अमृता, सानिया या सचिन देवरा में से किसी की नजर तुम्हारे ऊपर पड गए ना तो उसी दिन हमारे सारे रात हो जाएंगे । वो उसी दिन भाग जाएंगे की हम दोनों के चक्कर में है किस फिराक में है वही मैं कोई पागल नहीं हूँ । फिर बारामूल चलना नहीं चल रहा है । मैं जब ऍम सचिन डेवलॅप इसका फेरा लगाने जाता हूँ तो भरपूर चौकसी बरता हूँ और मेरी ने कहा जितनी उन दोनों के ऊपर होती है उतनी ही इस बात के ऊपर भी होती है कि वह मुझे तो नहीं देख रहे हैं थे । कभी गलती तो हो सकती है ना बिल्कुल हो सकती यानि अगर इसका मतलब ये तो नहीं बुलबुल यहाँ अपने बकरों की निगाह भी नहीं छोड दे । उन्होंने बिल्कुल आधार परिंदों की तरह खुले आकाश में उडने दे अपनी आखिरी मूंदकर बैठ जाए । ऊषा कम हो गई वो जानती थी किरपाराम मूलचंदानी थी कह रहा है अगर बकरों को हलाल करना था, उनसे मोटी रकम झाड नहीं थी तो सारी मशक्कत तो उन्हें करनी ही करनी थी । बिना मशक्कत के तो कुछ भी संभव नहीं था ।

भाग - 04

अध्याय फॅसने फिर एक जन चले वो बाजार से मेडिकल साइंस के ऊपर आधारित एक पुस्तक खरीद लाई । फिर बहाना पैलेस के ड्रॉइंग हॉल में ही लेकर उस पुस्तक को इतने मनोयोग के साथ पडने लगी जैसे वो कोई बहुत दिलचस्प पुस्तक हो और उस पुस्तक को पढने में उसे बेहद आनंद आ रहा हूँ । लुधियाना, पंजाब इसके साथ साथ आलस की तमाम नौकरों ने उसे वो पुस्तक बढते हुए देखा जब की रीटा सान्याल को कुछ तक पढते पढते दोपहर हो गयी लेकिन उसमें एक क्षण के लिए भी पुस्तक अपने चेहरे के सामने से ना हटाई । वो पुस्तक पडती रही पडती रहे क्या बात है जो लिया बेटी फॅसने ड्रॉइंग हॉल में कदम रखते हुए कहा आज सुबह से ही तो मैं इस पुस्तक को बहुत ध्यान से पढ रही हूँ । ऐसा क्या लिखा इसमें ये बहुत दिल्चस्प किताबें आना । रीता सानिया शीघ्र सोफे से उठकर यू तो मेडिकल साइंस ऐसे सब्जेक्ट पर आधारित किताब है लेकिन इसमें कुछ ऐसे पेशंस का जिक्र किया गया है जो अपने अपने क्षेत्र की बडी बडी हस्तियां थी लेकिन वो पहन कर बीमारियों से ग्रस्त हो के असमय ही मौत का ग्रास बन गए । इतना ही नहीं उन महान आदमियों का और उनकी बीमारियों का इस पुस्तक में बडी सजीवता के साथ वर्णन किया गया है कि पहले किस तरह उन भयंकर बीमारियों ने उन्हें बीरे तीरे अपने शिकंजे में । झगडा हाँ फिर वो किस तरह काल का ग्रास बने? अच्छा हरियाणा ऍम हुई हो तो ये किताब सचमुच काफी दिलचस्प होगी । बिल्कुल है ना । तभी तो मैं ऐसे इतने मनोयोग से पढ रही हूँ । यही वह था जब मोटा राम ने भी ड्रॉइंग हॉल में कदम रखा । नहीं लगता हम इससे बाबा तो मैं भी मेरी तरह किताबें पढने का चस्का लग गया । आए बूटा राम ने मुस्कुराकर का हाँ शास्त्र का तो लग गया आना गुंजाल देखने थोडे तुष् ऐसे में कहा लेकिन तुम्हारे तरह वो जुलूल जासूसी उपन्यास पढने का चस्का नहीं लगा है बल्कि मैं तो कहती हूँ अगर तुम्हें भी किताबे पढनी है तो इसी तरह की अच्छी किताबें बढाकर आप नहीं जानती है ना बूट नाम बोला जासूसी उपन्यास पडने वाले आदमी कभी इस दुनिया में मार नहीं खा सकते क्योंकि उनका दिमाग हमेशा ब्लेट की धार की तरह पहना रहता है जैसे तुम्हारा दिमाग पहना रहता है फॅमिली तभी तो जो लिया पर शक कर रहे थे कि ये तुम्हारी असली मासी बाबा है । भी या नहीं । बूटा राम सब पकाकर तुरंत बदले हो । अब इस किस्से को छोडो फॅमिली बडी कुशलता के साथ अपनी प्लानिंग का अगला दांव खेलते हुए बोली सुनो मैं ना आप लोगों को इस किताब में लिखा हुआ एक वाकया बताते बताओ आना गोंजाल्वेस । वही पडी चेयर पर बैठ गई । मोटा राम भी थोडा अलग पोजीशन में आया । ये वाकया फ्रांस के एक राष्ट्रपति की जिंदगी से जुडा । फॅमिली बहुत सुखी और साधन संपन्न आदमी था । ऐसी कोई चीज थी जो उसके पास नहीं हूँ या जिस चीज की वो ख्वाहिश रखता हूँ और उसे हासिल न कर सकता हूँ । लेकिन जल्दी ही उसकी जिंदगी में ऐसे वापस होने शुरू हुए जिसने उस जैसे साधन संपन्न प्रतिष्ठित आदमी को मौत के कगार पर लाकर खडा कर दिया । कैसे बाॅस का उत्सुक हो जाये? बूटा राम दिया बेटा सान्याल के लेकिन बाद बडे ध्यान से सुन रहा था । जैसे एक दिन उसकी पीठ में बडी जोर से डाॅॅ वो चीखने लगा, छटपटाने लगा । फिर तो भयंकर दर्द उठी । उसके लिए मानव साधारण सी बात हो गयी । कभी उसके हाथ में दर्द होता, कभी पेट में, कभी गर्दन में, कभी तंग में और वो दर्द इतना अधिक कष्टदायक होता कि हर बार उसे लगता है वो दर्द उसके प्राण लेकर छोडी का बोस ने डॉक्टर को नहीं दिखा भूटान हो रहा दिखाया डॉक्टर को भी लेकिन डॉक्टर एक का एक फैसला नहीं कर पाये कि उस दर्द की वजह क्या हिंदू उसके साथ बडी बडी अजीब वाकई होने लगे जैसे उसका वजन काफी तेजी के साथ घट नहीं लगा । फिर भूख भी कम हो गई और इन्तहां तो तब हुई जब अक्सर कहीं से भी ब्लीडिंग होने लगती है और फिर वो प्लीडिंग बडी मुश्किल के साथ ही बंद हो पाती है । क्या कभी नहीं खुला कि फ्रांस के राष्ट्रपति को क्या बीमारी थी? कॅश अच्छा हूँ नहीं रिकॅार्ड तब तो ये राज खोल चुका था । तो क्या बीमारी थी ब्लाॅक इसके साथ साथ मोटा राम के चेहरे का रंग भी बहुत बढ गया और सबसे बडी बात ये है की उसे लाॅबी बिल्कुल लास्ट स्टेज का था । यानी डॉक्टर्स के मुताबिक वो इस दुनिया में मुश्किल से तीन महीने का मेहमान था की वहाँ चला गया । डॉक्टर उसे बचाने के फिर भी हरचंद कोशिश कर रहे थे । पूरे दिलोजान से जुटे थे कि वो बच जाए, बातचीत चाहिए । ये जानते हुए भी दिलोजान से जुटे थे कि वह किसी हालत में नहीं बचेगा । फॅार में फ्रांस के राष्ट्रपति की स्थिति भी करती चले गए । डॉक्टर उसे आसानी से महीने नहीं दे रहे थे और बीमारी कहती थी इसे मारना है कि सबका बडा खौफनाक नदी । जाने क्या क्या फ्रांस का वो राष्ट्रपति बडी बहन ीय स्थिति में पहुंचकर मारा कैसी डाॅॅ स्थिति जैसे मृत्यु के समय उसके जिस्म का ऐसा कोई हिस्सा था जहाँ से ब्लीडिंग हो रही हूँ । आस पास दिमाग भन्ना देने वाली दुर्गंध पहली थी । डॉक्टर तथा उसके सगे संबंधी भी उसके पास जाने से कतराने लगे थे और अगर कोई उसके पास चाहता भी तो मास्क लगाकर हाथों में दस्ताने पहन कर वो अपना काम करने से लाचार हो गया था । यहाँ तक कि उसे टॉयलेट के लिए भी किसी दूसरे आदमी की जरूरत पडती है । हाई हुए उसे लंबा बाप गुजर गया था । पूरा शरीर पक्की फोडे की तरह पकने लगा । कुल मिलाकर वो राष्ट्रपति जो कभी महलों की शान हुआ करता था, जिस से हाथ मिलाने में भी लोग फख्र महसूस करते थे, वह कीडे मकौडों से भी ज्यादा बदतर स्थिति में पहुंच चुका था । उस स्थिति में पहुंचकर उसने डॉक्टर से मांग की कैसी मांग । उसने डॉक्टरों से कहा कि उसे जहर का इंजेक्शन लगा दिया चाहिए ताकि उससे इन कष्टों से छुटकारा मिल सके । तो क्या डॉक्टरों ने उसे जहर का इंजेक्शन लगा दिया? कहाँ लगा प्रश्न ही नहीं था । दरअसल इस तरह किसी पेशन को जहर का इंजेक्शन देकर महान ना पूरी दुनिया में गैरकानूनी लेकिन फिर भी वो राष्ट्रपति बार बार शहर का इंजेक्शन देने की मांग करता रहा हूँ । फिर उसी तरह तरह के छटपटाते हुए मृत्यु को प्राप्त हो गया । सच मुच, बडी खतरनाक बहुत मारा फ्रांस का राष्ट्रपति ऍम इसके शरीर में सिहरन दौडी बिल्कुल और इसके लिए काफी हद तक डॉक्टर जिम्मेदार है, जो पूरे दिलोजान से उसके इलाज में जुटे थे । क्यूँ वोटर हम चौका, वो डॉक्टर जिम्मेदार है क्योंकि जब ये राज पहले से जानते थे कि उसने बचना नहीं और आखिरकार उसे मरना ही मानना है तो फिर वो उसे क्यों बचाने की कोशिश कर रहे थे । उनकी उन्हीं कोशिशों ने उसकी जान आसानी से नहीं नहीं करनी थी पर उसे उस हालत में ला खडा किया । लेकिन डॉक्टर का काम है अपने पेशेंट को बचाने के आखिरी दम तक कोशिश करना आना । गुंजाल बोले और आपने नोबल प्रोफेशन की उसी सीख को अंजाम दे रहे थे । आपने सही कहा ऍम इसमें कोई शक नहीं डॉक्टर का यही काम है की वो अपने मरीज को बचाने की आखिरी दम तो कोशिश करे लेकिन डॉक्टर को मालूम होगी । उसकी पेशेंट को किसी हालत में बचना नहीं है और उन्होंने उसे जबरदस्ती बचाने का प्रयास किया तो पूरी मौत को प्राप्त होगा । तो फिर ऐसी परिस्थिति में डॉक्टर को क्या करना चाहिए आप खुद फैसला करें आना गोंजाल्विस को जवाब देते नहीं, मामला वाकई पॉजिटिव था । बहरहाल किताब में लिखा था कि राष्ट्रपति की मौत के बाद फ्रांस के अंदर वो मामला तूल पकडता है और राष्ट्रपति के कुछ प्रियजनों ने कितनी बर्बरतापूर्ण मृत्यु के लिए उन डॉक्टरों के ऊपर भारी हर्जाने की होती है । वहीं सोच संस्था है, मौसी कीलिंग की भी मांग करने लगी । मेरे सी के लिए उठा रामचौक ये मेरे से लेकिन क्या होता है मेरे सीने मासी मासी के लिए वाई फाई दरअसल मासी के लिंग हिंदी में आठ इसमें छामृत् थे । फॅमिली के बारे में डिटेल के साथ समझाते हैं । मौसी फिलिंग की मांग उन मरीजों के लिए की गई तो अस्पतालों में पडे हैं और मौत से जूझ रहे हैं जिनके लिए जीवन नरक बन चुका है जिनका भयंकर रोगों के कारण मरना तय है । लेकिन फिर भी उन्हें मौत नहीं आ रही हैं । फ्रांस में संस्थाएं मांग करने लगी कि अगर ऐसे पेशंट अपनी इच्छा से मारना चाहे तो वो ये बात लिखित रूप में डॉक्टर को दे देते हैं और डॉक्टर उन्हें जहर का इंजेक्शन लगाते । ये डॉक्टर के लिए एक पुण्य का काम होगा । किसी तरह तेज छटपटाते आदमी को मुक्ति प्रधान करेगा । उसे जीवन रुपये कष्टों से छुटकारा देना बडी अद्भुत बात बता रही हो । फॅमिली क्या उन संस्थाओं की मांग पर फ्रांस के कानून ने अपने देश में मौसी के लिंग की परमिशन दे दी? नहीं दी रीटर सानिया का सपा आठ सौ रुपया लेकिन फ्रांस के राष्ट्रपति की इस बर्बरतापूर्ण मृत्यु के बाद वहाँ मौसी किलिंग कि जो मांग उठी, पाँच पूरे विश्व में फैल चुकी हैं । आज पूरे विश्व में मौसी कॅालिंग के ढेरों हिमायती हैं । मैं खुद मौसी के लिए की हिमायती हूँ और मेरा मानना है जो पेशंट फ्रांस के राष्ट्रपति की तरह खतरनाक स्थिति तक पहुंच चुके हैं और अगर वो मानना चाहते हैं तो डॉक्टर को उन्हें फौरन जहर का इंजेक्शन दे देना चाहिए । इससे न सिर्फ पेंशन के कष्टों का निवारण होगा, बल्कि पेशंट के उन प्रियजनों के कष्टों का भी निवारण होगा । आपने पेशन की दयनीय दशा देख देख कर उनके मन को होता है । लेकिन अफसोस आज माॅडलिंग की मांग उठे वर्षों गुजर चुके हैं लेकिन अभी भी काफी देशों के कानून इसे मान्यता नहीं देते । आना गोंजाल्वेज और बूटा राम के शरीर में सन्नाटे की लहर सी दौड गए और उन डॉक्टर उनका क्या हुआ? मोटाराम बोला जिनके ऊपर मोटे मोटे हर जाने के केस हो के गए थे उनका भी कुछ नहीं हुआ । कानून वो सारे हर जाने के केस रद्द कर दिए और डॉक्टर को रिहा कहते हैं और बताइए केस रद्द होने के बाद भी महीनों तक फ्रांस के अखबारों की सुर्खियों में छाया रहा । इतना कई अद्भुत मामला हो क्या ऐसे ही और पेशंस का जिक्र किताब के अंदर है? लुधियाना पंजाब जैसे पूछा दर्जनों पेशंस का जिक्र है ना? फिर दवा का ये किताब काफी दिलचस्प ऍम छोडकर खडी हो गई जबकि रेट आसानी आपके होठों पर मुस्कान थी । होटल मुस्कान वो धीरे धीरे अपने शिकार को डसने की व्यूह रचना तैयार कर दी जा रही थी । उसी रात रीता सान्याल ने एक और दांव खेला ऍम उसके साथ बाहर पॅन में टहलकर अंदर आ रही थी तो उसने आखिर प्रशन विधि से उसके हाथ का एक विशेष कोई दबा दिया आगे प्रेशर विधि उसने सचिन देवडा से सीखती थी तो बस फिर क्या था इन दबते आना । गोंजाल्विस गला फाडकर चिल्लाई और वह जैसे नीचे गिरने को हुई तभी रेट आसानी से संभाल लिया । फॅमिली है क्या हुआ? अचानक ठीक होगा की आवाज सुनकर तुरंत सारी नौकर चाकर दौडी दौडी वहाँ पहुंचे । बूट आराम भी उसमें शामिल था । ऍम आवासों की तरह चलाते हुए निरंतर आना गुंजाल उसको झंझोड रही थी । क्या हो गया है ना क्या हो गया हम ऍम मुझे वहाँ भी अभी ऐसा लगा जैसे मेरे हाथों को पिछली का झटका लगा हूँ । फॅमिली होकर बिजली ऍम फॅमिली अभी भी अपने हाथ को जोर जोर से दवा रही नहीं । मेरे हाथ में इस समय भी दर्ज की प्रचंड ऍम मैं डॉक्टर को बुलाता हूँ । दूडाराम तेजी से ड्रॉइंग हॉल में रखे टेलीफोन की तरफ छापता था । लिलियाना गुंजाल जैसे समय मेट्रो में लेती थी । दर्द इतना तेज था कि उस दर ने कुछ ही मिनट में है । उसकी हालत बिगाडकर रखती थी । डॉक्टर ने उसके बाजू में एक इंजेक्शन लगाया और फौरन ये ऍम सिखाने को दे दिया । डॉक्टर का नाम डॉक्टर कौटिल्य था । डॉक्टर कॉटन ले आना गुंजाल जिसका पास नहीं डॉक्टर था, और वैसे भी उसकी गणना गोवा के बडी डॉक्टर्स में होती थी । डॉक्टर कौटिल्य पैंतालीस छियालीस साल का दरमयानी कट का था । रन सामला था । इसके अलावा शरीर स्वस्थ और आंखों पर हमेशा आईसाइट का मेहनत चढा रहा था । शक्ल से ये वो जहीन आदमी नजर आता था क्या अब भी दर्द हो रहा ऍम कोई बात नहीं मैंने इंजेक्शन लगा दिया है । अब धीरे धीरे आराम पड जाएगा लेकिन एक बार मेरी समझ में नहीं आई । डॉक्टर ऍम रहने का प्रदर्शन करते हैं । खाना को ये दर्द उठा क्यों? अभी इतना भीषण तक शहद पहले तो कभी नहीं इस तरह का दर्द नहीं उठा । क्यों आना ही बात है फॅमिली लाइफ का पहले से जब मुझे कितना तीस था मैं समझता हूँ इस बारे में ज्यादा सोचने या ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं ऍम अभी कभी इत्तेफाक से भी ऐसा दर्द हो जाता है । मेरा अनुमान है अब आगे से ऐसी घटना नहीं कटेगी तो काश हूँ ऍम राहत की सांस लेते हुए क्या हाथ के दर्द में कुछ कमी हुई? डॉक्टर काॅल जिसकी तरफ देखती हूँ । हाँ पहले के मुकाबले कुछ काम है घर में । अब धीरे धीरे अपने हाथ की उंगलियां लाये । फॅमिली या हिलाने बस इसी तरह अपने हाथ को आरक्षण देती रही । मैं समझता हूँ जल्दी आपको पूरा आराम मिल जाएगा । फिर डॉक्टर काॅर्निया की तरफ जूलिया बेबी डॉक्टर तो मना के हाथ की दो तीन मर्तबा मालिश घटेगा । इससे भी निहारा मिलेगा तो जी ऍम फिर डॉक्टर ऍसे चला गया आना पाल इसके पीछे की साइड में ये कुछ सर्वेंट क्वार्टर बने हुए थे । इस समय बूटा राम इन्ही में से एक सर्वेंट क्वार्टर में लेता था तथा कमांडर करन सक्सेना सीरीज का एक उपन्यास पड रहा था । आज की तारीख में उसे सबसे ज्यादा कमांडर करन सक्सेना सीरीज के उपन्यास कर सकते हैं । मकाई इस समय जब कमांडर करन सक्सेना सीरीज का उपन्यास उसके हाथ में था तब भी उपन्यास पढने में उसका बिलकुल मन नहीं लगता था । बार बार उसका ध्यान उपन्यासों से भटक कर रीता सानिया आज की तरफ चला जाता था । वो सोच रहा था जब से मिस्री बाबा ने चालीस में कदम रखा है तब से वहाँ आना के साथ अजीब अजीब सी घटनाएं क्यों कट रही हैं । यहाँ आना के साथ वो घटनाएं घटने में और मिसरी बाबा के वहाँ आने के बीच आपस में कोई संबंध है । पहले तो कभी आना तो रात के समय आवाज ही नहीं सुनाई देती थी । पहले उन्हें भी नहीं होता था । बूटा रामस् बारे में जितना सोच रहा था उतनी ही उसकी उलझने बढ रही थी । जब उन्होंने कुछ ज्यादा ही विकराल रूप धारण कर लिया तो उसने उपन्यास बंद करके एक तरफ रख दिया । फिर कुछ सोचकर वो छुट्टी के साथ बिस्तर से उठा हूँ । वहीं सावन क्वार्टर में बनी अलमारी के नजदीक पहुंच करुँगी । अलमारी खोली है और फिर काफी तेजी के साथ उसमें कुछ तलाशने लगाओ । जल्दी उसे अपने अपेक्षित वस्तु बरामद हो गयी । वो फोटो रुक रहा था । यूलिया के बचपन का फोटो जब आना हालत छोड कर गई थी और जब उसकी आयु केवल साठ साल पे भूराराम काफी ध्यान से जूलिया के बचपन की उस तस्वीर को देखने लगा सात साल की झूले और आज की जो लिया में जमीन आसमान का था उसके नाक नक्श किसी भी कोने से नहीं मिलते । नहीं पूरा आराम नहीं सोचा एक बच्चे के चेहरे में और एक जवान युवती के चेहरे में तो वैसे भी काफी फर्क आ जाता है । फेस का कितने बदल जाते हैं कि उनमें आपसी समानता दूर दूर तक नजर नहीं आती । फिर अगर बचपन की झूले और आज की दुनिया में जमीन आसमान का फर्क नजर आ रहा है तो इसमें आशा देखिए । भूराराम काफी देर तक जूलिया के बचपन की तस्वीर को देखता रहा हूँ । उसके जासूसी दिमाग में शक के कीडे कुलबुलाने लगी थी । रात का समय था, रेडक्रॅस के बैठो में थी और डॉक्टर काट लिया के निर्देश के मुताबिक उनके हाथ की मालिश कर रही थीं । रात के उस वक्त साढे दस बज रहे हैं । आलस होते होते आना गुंजाल उसकी आंखें मूंद नहीं । पाल इसके कारण उन्हें स्कूल पहुंच रहा था । उसी क्षण रेटा सान्याल ने फिर हर कर दिखाया । उसने पुनः एक्यूप्रेशर विधि का प्रयोग करके उसकी दायीं ढंग का एक पॉइंट दबा दिया । तक काली रहना कोनसा जिसकी हालत से हृदय विदारक चीख निकल गई । उसकी आंखें भक से खुली और वह पीडा से छटपटाने लगी । ऍम क्या हो गया है ना? ऍम एबॅट पहले में दर्द उन दोनों की चीख पुकार की आवाज सुनकर ताल इसमें पुनः हडकंप मच गया तो हम सारे नौ काॅफी वहाँ क्या क्या हो गया? ब्लॅक पूछा आप क्या हुआ? आना के पैर में दर्द हो रहा? पीटर सानिया बेहद आतंकी फर्मी बोली इंडिया भी अभी ऐसा महसूस हुआ जैसे शहर में बिजली का तेज झटका लगा हूँ । मैं मैं डॉक्टर को फोन करता हूँ । मुझे आराम जितनी तेजी से वहाँ आया था, उतनी ही तेजी से बदल आवासों की तरह वापस बाहर । मैं अभी डॉक्टर कॉटले को बुलाता हूँ । जब की फॅमिली रहे ठीक है । इस बार उससे पहले से कहीं ज्यादा भीषण दर्द उठा था । दर्द की लहरें उसकी टांग से होकर पूरे जिसमें से गुजरात में दिमाग तक पहुंच रहे थे । ऐसा लग रहा था जैसे उसके आमंत्रण है । ये अब नहीं है । दो मिनट में ही बूटा राम के फिर भागती हूँ । मुझे इतनी तेजी से लगता था । पता गया था उतनी ही तेजी से लगभग टाॅम को देखती । पूछा क्या डाॅ आ रहे हैं? नहीं नहीं नहीं होंगे । दरअसल वो एक मेजर ऑपरेशन के सिलसिले में शहर से बाहर गए हुए हैं । वोटर हम बोला और अब कल सुबह से पहले उनकी वापसी मुमकिन नहीं तो फिर कैसे होगा ऍम किसी दूसरे डॉक्टर को बुलाने का बंदोबस्त कर । लेकिन तब तक कहना गुंजाल जिसकी तबीयत सुधारनी शुरू हो चुकी हूँ । नहीं तो ऍम किसी डॉक्टर को मत बोला लेकिन आना मेरी मेरी तभी तक ठीक है चली गई थी । फॅमिली करना ठीक है अगर ठीक नहीं हो जाएगी काम का फॅमिली असमंजस की उन्होंने कहा हूँ ही कर रहा हूँ था मोटा राम देव नाम था । वो नहीं समझ पा रहा था कि ये सब हो क्या रहा है । लेकिन फिर भी लुधियाना गुंजाल उसकी तबियत ठीक होने में दो घंटे लग गए लेकिन इन दो घंटों के दौरान आना गोंजाल्वेस के चेहरे का सारा खून इस तरह में छोड चुका था । मानु इसीलिए मिक्सी में ढाकरे में छोड दिया । मेरे रूम में सन्नाटा था । गांधी घोर सन्नाटा उस सन्नाटे पर दुख और अवसाद की पर था थी । भूराराम सहित पालस के तमाम नौकर चाकर वहाँ से जा चुके थे । इस समय अगर वहाँ रिरियाना गुंजाल इसके अलावा कोई और था तो वो थी सिर्फ ट्रीट आसानी । झोलियां भी थी आना । गोंजाल्विस बेडरूम की छत को निहारते हुए बेहद शुष्क स्वर में हुई ये दर्द का उठना एक के साथ नहीं है । मुझे लगता है मैं किसी पडी रूप की गिरफ्तारी फसती जा रही है । आप ऐसा क्यों सोचते ऍम ऐसी कोई बात नहीं, ऐसी ही बात है । बेटी फॅलस्वरूप याद है तुम आज सुबह मुझे फ्रांस के राष्ट्रपति की कहानी सुना रही थी । अब हम तुम ने बताया था कि उसे भी शुरू शुरू में ही दर्द था । अभी टाॅस वो ऍम इसी तरह पडा था । इसी तरह चीख था आप क्या कहना चाहती है ना? रीटर सान्याल की मुसी टीवी सिसकारी छुट्टी कुछ नहीं कुछ नहीं कहना चाहती मेरी बच्ची बस एक अजीब सी दहशत मेरे ऊपर सवार होती जा रही है । मुझे लग जाए कुछ होने वाला कुछ होकर रहेगा फॅमिली बस आराम करें सब कुछ ठीक हो जाएगा । काश सब कुछ ठीक हो चाहे आना गुंजाल जिसने गहरी साथ छोड आपकी आंखे बंद कर लिया ना आना गुंजाली ने आंखे बंद करेंगे फिर सोने का प्रयत्न करने लगे । रीता सान्याल वहीं आना गुंजाल जिसके पास बैठी थी रहे थे वो तंग सहना रही थी जिसमें डर बैठा था का श्रीथर सानिया जैसी शातिर विवाह एक बाटी की उस क्षण तो उसकी एक एक एक्टिविटी पर नजर रखी थी और वहां रखी थी कमांडर करण सक्सेना के परम ढक बूट । आराम किया सुबह के नौ बज रहे थे जब आना पालस में साठ पैंसठ साल के बूढे ने कदम से वो नाम का ही बूढा आदमी था । वास्तव में उसका स्वास्थ्य काफी अच्छा था और उसकी चाल में नौजवानों जैसी चप्पल बनाने उस क्षण अपने हाथ में एक ब्रीफकेस उठाया था रीता सान्याल के लिए वो बिल्कुल अजनबी आदमी था । बाद में उसे मालूम हुआ कि वह मेरी आना गोंजाल्विस के विशाल कारोबार का स्वस्थ था और मैंने सब कुछ कभी बार में एक बडा काबिल वकील रहा था । लेकिन किन्हीं कारणों से उसने वकील की उस पेशे से रिटायरमेंट ले लिया था और आज की तारीख में आना के बिजनेस की पूरी तरह देखभाल वही करता था और कभी कोई कानूनी अर्चना आ जाती है तो उसे भी वही हाल ही करता ऍसे उसकी मुलाकात ड्रॉइंग हॉल में ही होगी । सबसे पहले तो मैं इस बात के लिए क्षमा प्रार्थी हुआ ना कि मैं किसी बाबा की पार्टी में नहीं ऍम उसी पर बैठने के बाद बोला । दरअसल उस रोज मुझे इकाई काम के सिलसिले में खडा पारसा जाना पडा था और वहाँ पहुंचने के बाद ऐसा फंसा कि चाहते हुए भी वहाँ आ सकता हूँ । मैं आपकी मजबूरी समझती हूँ । हमारे साहब फॅमिली जानती हूँ । इतने बडे कारोबार को संभालना कितना मुश्किल हो । फिर मैं भी तो सारे कारोबार की बात तो और आप के हाथ में सौंपकर बिल्कुल अलग हो गई । दरअसल कभी ये नहीं कारोबारी व्यस्तता होने मेरी फॅमिली लाइफ को बर्बाद कर दिया था । इसमें मुझे ऍम से नफरत हो गई । इसीलिए मैंने सारे कारोबार से किनारा कशिका मुझे आप से कोई लेना देना नहीं है तो हमारे साथ बल्कि मैं तो खुश हुआ मेरे खून पसीने से सींचा कारोबार को कितना संभाल कर रखे हुए हैं तो सोलह सत्रह का नाम गोत मारे था कही फिराना गोंजाल्वेस थोडा रुककर बोली हूँ आज आपका कैसे आना हूँ हम कारोबार के सिलसिले में यहाँ था गोत मारे गंभीरता पूरा कुछ चैट पर आपके सिखना अच्छा कराने थे और फिगारो आइलैंड वाली यूनिट के सिलसिले में आपको रिपोर्ट देनी थी क्या हुआ ऍफ में आज कल कर पढ चल रहे हैं वहाँ दिवाकर उन्हें पिछले तीन दिन से हडताल की हुई है और वह दस परसेंट वेतन वृद्धि की मांग कर रहा हूँ । यूनियन के लीडर से बात की गया सालाना कल ही उससे बात की लेकिन बहुत बदमाश प्रश्न का आदमी है । वो अपनी शर्त से अलग हटकर कोई भी बात सुनने को तैयार ही नहीं जबकि वेतन बढाने को लेकर हमारे सामने एक और बहुत बडी प्रॉब्लम है क्या अगर हमने फिगारो आइलैंड वाली यूनिट के वाक करों का वेतन बढाया तो हमें बाकी दूसरी यूनिट के वर्करों का भी वेतन बढाना होगा वरना वो सभी हडताल पर चले जाएंगे । आपने ये बात तो यूनियन लीटर को समझाए समझाएँ । फिर वो क्या बोला कुछ भी ना बोला । वो तो बस तोते की तरह एक ही बात करता रहता है । उन्हें वेतन में दस परसेंट भी चाहिए तभी वो काम करेंगे जबकि फिगारो आने वाली वो लगातार घाटे में चल रही है । मैं समझ नहीं पा रहा हूँ आना ऐसी हालत में क्या किया जाए । आना गोंजाल्विस सोच में गयी । वो अटल मामला था लेकिन आना गोंजाल्वेस । जिंदगी भर इसी तरह की कारोबारी जटिलताओं से जूझती आए नहीं इसका बस एक ही तरीका है वो हमारे साहब ऍम क्या आप उस यूनिट को खोलकर बिल्कुल खामोश बच्चा हैं और अब तब तक उस ने लीडर से बात न करें जब तक कि वह खुद आपसे मिलने ना आएँ । अच्छा ठीक रहती है ना गोल हमारे बोला हूँ, मुझे यह कदम उठा रहा हूँ । फिर गोट मारे ने अपना ब्रीफकेस टेबल पर रखकर खोला और उसमें से एक फाइल के साथ भी निकली । ये पिछले तीन महीने के बिजनेस रिपोर्ट है ना वो हमारे फाइल आना, गोंजाल्विस की तरह पढाई आप इस रिपोर्ट को पढ लीजिएगा । इसमें तमाम यूनिट कि डाॅक्टर नेपाल उठाकर अपने पास रखें और ये कुछ है राजन पर आपको सुनना चाहते हैं तो हमारे फॅमिली के सामने लेंगे । आॅखो ली और है ऍम करनी शुरू किया है वो हमारे थोडा आगे कुछ जैसे जैसे ऍम अच्छा कर दी जा रही थी । ठीक उन्हीं अनुपात में को हमारे उन्हें ये भी बताता जा रहा था कि वो चेक इस पानी को किस मद में दिए जा रहे हैं । रीटर सानिया गोत माने की भाव भंगिमाओं और उसके कार्यकलापों से शीघ्र ही समझ गए कि वह ईमानदार और निष्ठावान आती हैं । ठीक है आना । फिर वो तुम्हारे ब्रीफकेस बंद करके उघडा । अब मैं ये जानना चाहूँगा हम थोडी देर बाद मेरी कुछ पार्टियों के साथ रजत मीटिंग फॅसने भी अपना स्थान छोड सेव आ गया । फिर वो हमारे आना गोंजाल्विस के सामने आदर के साथ चुका । उसने रिटर्सं दुनिया के आभाव महिला लाख पर एक चुंबन अंकित किया । मुस्कुराते भी उसका थपथपाया और उसके बाद वहाँ से चला गया । दोपहर तक कोई घटना घटी लेकिन दोपहर के समय जब मेरी आना गोंजाल्वेज रसोई को एक स्पेशल देश बनाने का निर्देश देकर किचन से बाहर निकल रही थी तो रीता सान्याल भी उसके साथ थी । उसी क्षण रीटर सान्याल ने फिर हर कर दिखाई और बडी कुशलता के साथ उसकी पीठ का पोइंट दबा दिया । फौरन रात जैसा ही भूकम्प पानी इसके अंदर आ गया लेते आना गोंजाल्वेस की पेस्ट ठीक है । वहाँ गूंज नहीं लगी वो वहीं किचन के पास ढेर हो गई । सैंतालीस के तमाम नौकर चाकर वहाँ जमा हो गए और उसे आनन्द खाना से उठाकर ड्रॉइंग हॉल की सूची पढ लेता है । मैं डॉक्टर को फोन करता हूँ । मोटाराम तेजी से पूर्ण की तरह सकता था । इस बार अच्छी बातें हुई कि डॉक्टर कौशल ने भी जल्दी वहाँ गए । पढना आना की पीठ का पॉइंट ट्वीटर सान्याल से कुछ ज्यादा दब गया था जिससे उसकी हालत भी खतरनाक हो गई थी । जब डॉक्टर द्वारा ही नियंत्रित की जा सकती थी डॉक्टर कॉटन लेने आते ही आना गोंजाल्विस को इंजेक्शन दिया

भाग - 05

वो अध्याय डॉक्टर को चलने के माथे पर चिंता की तमाम लकीर खींची हुई थी । कभी किसी ने उन्हें इतना अधिक परेशान नहीं देखा था । वो इस समय कुर्सी पर बैठे थे और गंभीरतापूर्वक सोफे पर लेटी आना । गुंजाल इसको देख रहे थे । ऍम मीठी नहीं हो रही थी लेकिन उसके चेहरे पर थकावट और पीडा के चिन्धा भी भी साफ देखे जा सकते थे । रात भी इनकी तंग में तेज दर्द उठा था । फॅमिली से मुखातिब होती थी । बोली प्रसाद भी इसी तरह से दर्द से छटपटाई थी, सीखी थी चलाई थी आपको मोटा राम ने फोन भी किया था । लेकिन आप कहीं बाहर गए हुए थे, कहाँ डॉॅ धीरे से करता नहीं । मुझे मेजर ऑपरेशन के सिलसिले में शहर से बाहर जाना पड गया था या फिर किसी दूसरे डॉक्टर को बुलाया नहीं । क्यों नहीं क्योंकि चलते आना की तबियत कंट्रोल में आ गई थी । तो डॉक्टर कॉटले के चेहरे पर पहले की तरह शुष्क महाभाग है लेकिन डॉक्टर आना को ये किस तरह की दिन फिर है । मोटा राम बोला डिसाइड नहीं डिजीज डिजीज ऍम बीमारी अब वही वही तरफ से शुरू में तो मैं ऐसे साधारण मामला ही समझ रहा था । लेकिन कल से अब तक जिस तरह ये तीन बार दर्द हो चुका है उसे देखकर लगता है कि आना का ये डर अपने आप बन नहीं होगा । इसके लिए उन्हें बाकायदा दस पंद्रह दिन तक मेडिसिन्स खानी होंगी । लेकिन ये कोई ज्यादा सीरियस मामला तो नहीं है ना । डॉक्टर लीटर सानिया नी चिंता का प्रदर्शन किया नहीं नहीं । डॉक्टर काॅल ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है । ये दस पंद्रह दिन दवाई खायेंगे तो ये दर्द उतना बंद हो जाएगा । कभी कभी इस तरह का दर्द जोडों की वजह से जन्म ले लेता है । पैसे भी आना का बूढा शरीर है इसलिए जोडों में दर्द उतना साधारण सी बात है । तब आप जाने दो रीटर सानिया भावुक होगी, उसकी सीट जैसे आंखों में आंसू झिलमिला लेकिन मैं ना से बहुत प्यार करती । मैंने किसी भी हालत में खोना नहीं चाहती ही तुम्हारे भावनाएं में अच्छी तरह समझ सकता हूँ । थी । डॉक्टर काट लेने उसके सर पर हाथ रखा । चिंता मत कर आना को कुछ नहीं होगा । मैं उन्हें कुछ नहीं होने दूंगा । मैं बस यही चाहती हूँ । डॉक्टर मैं कागज पर दवाई लिखते ऍसे मंगा ले ऍम । डॉक्टर कॉकटेल लेने अपना लगातार निकाला और फिर इस पर सोच विचार कर कुछ दवाएं लिखनी शुरू की । फिर उन्होंने कागज हार, करेक्टर सानिया और कितना बढा दिया । थाना को अब ठीक टाइम पर दवाई देने की जिम्मेदारी तुम्हारी है । बेटी आप बेफिक्र नहीं था । फिलहाल मैं चाहता हूँ अगर आना को फिर इस तरह का दर्द उठी तो मुझे फौरन फोन करके बुला लेता हूँ । डॉक्टर कॉटले चला गया आना । गोंजाल्वेज अपने इर्द गिर्द मंडराते खतरों से बिल्कुल भी पडेगा । अभी इत्मिनान की गहरी नींद सो रहे थे उसे जैसे कुछ मालूम महीना था कि इसके साथ क्या हो रहा है, क्या कह रहे हो? ऊषा विद्रूपता पूर्ण ढंग से हसी आज तक ज्यादा जोश आ रहे हैं । जहाँ की मछलियां कुछ ज्यादा ही भडक रही कि बरा मूलचंदानी भी हादसा हो । ऍम रह रहकर यह एकदम मरियल पिलपिला सा बुड्डा भी जवान हो गया है नहीं, इस की रगो में भी अरबी घोडे जैसी ताकत आ गई है । नहीं फिर बारामूल चलाने ऊषा के ऊपर एकदम से जब तथा फिर उसे कब जाये? कब जायेंगे बिस्तर पर कल आवाज लिखा गया ओशाने खिलखिलाकर हसते हुए उसके शिकंजे से निकलकर भागना चाहा तो फिर बारा मूलचंदानी ने उसे फिर पूछे । ऊषा सेक्स के मामले में भी बहुत ही फितरती औरत थी । वो कभी मार्ग को आसानी से आपने उठे पर हाथ नहीं रखते देती थी और हमेशा खिला खिला कर प्यार देने में ही उसे मजा आता था । वो आनंदित होती थी कुछ और सिंह जहाँ सांसे लाभ नहीं की में माहिर होते हैं वहीं उनके अंदर इस बात की भी बडी पुख्ता ख्वाहिश होती है कि मार उनके सामने चूहा बनकर रहे । बिच बिच चाहिए बिस्तर पर उनके हैसियत मलकार आलिया जैसी हो और मार्ग की थोडी के कुत्ते जैसी जोडी जोडी को चार चार करिए खुश होता है । एहसान मानता है कि मालिक कार्यालया ने उस जैसे हक की शक्ति हो वो बुलंद, उस बंदा क्या फंडा वो इस काबिल कहा इसकी ऐसी ऐसी कहा कम से कम बिस्तर पर ऐसी होते हैं । मार्ग को हर मोर्चे पर पराजित करना चाहती हैं इसलिए वो प्यार ऐसे खींचा खर्चा कर देती है जैसे भिखारियों में मैं बडी बांटी जा रही हूँ । इस बार किरपाराम मूलचंदानी नहीं ऊषा को दबोचा तो दबोचते उसके शरीर से सारे कपडे अलग करते हैं । शीघ्र ही वहाँ आपने बहुत सूट में आ चुकी थी । उस की चोटियों की तरह तनी और वो स्पष्ट नजर आ रहे हैं के पर आ मूलचंदानी ने अपना चेहरा उसकी छातियों में छुपा लिया । ऊषा के अंदर से निकलती आग की लपटें किरपाराम मूलचंदानी के चेहरे को झुलसा नहीं लगे लेकिन वह सुखद आप थी जिसमें कोई भी मार झुलस जाना चल जाना पसंद करें । पूछा ने फिर उसके शिखर जैसे आजाद होना चाहिए तो इस बार के बारामूल चलाने का हाल है । उसके पेट से होकर फिर चलते हुए नीचे तक पहुंच गया । ऊषा के अंदर काम आदमी मरा कुठेर उसने अपने नाखून बेचैनी पूर्वक किरपाराम की पीठ में धंसा दिए । बुधवार एक बार धक्का तो फिर लावे के विसर्जित होने के बाद ही रखा वो दोनों । इस समय भी एक दूसरे की नंगी पीठ में बुरी तरह नाखून गडाए बिस्तर पर लेते थे और जोर जोर से हाथ रहे थे । काफी देर बाद जाकर वो शांत हुए । लगता है कि इस बार आम जैसे जैसे तो महीना गोंजाल्विस किया था । दौलत के करीब पहुंचते जा रहे हैं । ठीक उसी अनुपात में तुम्हारे जिस्म की गर्मी भी बढती जा रही है । तो उषा ने रखी कब सपने? दोनों रोजों पर चढाते हुए उसे प्रशंसनीय नहीं । तुम सिटी था वानी और अच्छी बात है । बिल्कुल किरपाराम मूलचंदानी तो ये सारी दौलत की मालकिन बनने के साथ साथ एक जवान शख्स की बीवी भी बन जाएगी । नहीं जवान शहीद हो तो आपने मोदी जैसे दान चमकाकर बडे मुदित भाव से हसी । फिर उसने अपने चेहरे पर आगे ढलक आये वालों को पीछे झंड पानी तो ये समाज बुलबुल के पर आ मूलचंदानी फस बताया दौलत तो बस किसी भी दिन हमारे हाथ लगने वाली है । वो सीधे हमारे कदमों में लोटती नजर आएगी । नहीं क्यों? क्या कोई और रिपोर्ट मिली है? रिपोर्ट तो रोजाना मिल रही है नहीं की पर आ मूलचंदानी बोला लेकिन बडे मार के की बात मुझे मालूम नहीं है क्या नहीं डॉक्टर कॉटले नाम का एक बडा डॉक्टर कल से अब तक और इसमें कई बार जा चुका है । इतना ही नहीं बुलबुल आज रीता साॅस की दुकान से कुछ दवाइयाँ भी लेकर आए । क्यों पूछा क्योंकि ऍम बीमार है आॅडी मैंने यही पता लगाने के लिए आज बाल इसके एक नौकर को हासानी । वो मार्किट में सबसे लेने आया था । वानी जाॅब के साथ उससे खुद खुद कर पूछा तो उसने बताया कि ताल इसमें लेडी आना । गोंजाल्विस बीमार है उसने आना की बीमारी बडी अजीबो गरीब बताई क्या से बीमारी पानी? उसने बताया भूल पोल किरपाराम मूलचंदानी के आवास सस्पेंस फुल हो ठीक है के पहले आना को रात के समय कुछ आवाजें सुनाई थी जैसे कोई दरवाजा खटखटा रहा है, जैसे कोई कमरे में टहल रहा है या वाणी जैसे उसके सिर के पास नगाडे बजा रहा होनी । दो दिन तक उसकी आवाज सुनाई देती रही और कल से तो उसका भी हालत क्या वाणी कल से उसे ऍम और दर्द भी इतना तेज की वो मछली की तरह तरह तरह जाती है तो वो उषा के नेत्र सिख गए । वहाँ जीत मामला और सबसे अच्छी बात । तो यह बुलबुल, किरपाराम मूलचंदानी ने एक एक शब्द चला कि ये सारी घटनाएं की सारी अजीबो हरी बातें तभी से हो रही है जब से वो बदमाश पुट्टी रीता सान्याल पैलेस के अंदर घुसी तो क्या कहना चाहती हूँ इन सारी वारदात के पीछे जीता सान्याल का माइंड काम करता हूँ बिल्कुल कितना मूलचंदानी बोला । इतना ही नहीं बडी ये सारे प्लानिंग आना गोंजाल्विस को मार डालने की है । लेकिन जीता सानिया की बदौलत कहना तो आवाजे कैसे सुनाई दे सकती है? ऊषा का है देंगे सौरभ उनके शरीर में तरीके से उठ सकता । हाँ न्यूज फट गाडी का नाम रीता सा न्यायालय नहीं बहुत करामाती फट रही है । बहुत खुराफाती फट रही है और यह भागते आदमी के लंगोट में से बिल्ली का बच्चा निकाल सकती है । नहीं पडी वो कुछ भी कर सकती है । वो हरफनमौला चीजें ट्यूशन्स तब ऐसी अपनी जगह बैठे थे । ये अहसास उसे भी हो रहा था कि रीडर सान्याल कोई खेल शुरू कर चुकी है । ऍम हूँ मैं धीरे धीरे अपनी मंजिल की तरफ ऍम ऍम बहुत जोर से खिलखिलाकर ऐसे इस तरह हसी जैसे वो पागल हो गई जैसे उसे हंसी का दौरा पड गया । अब बिंदु नहीं जवाना गुंडा जिसकी मौत मेरे हाथों हो जाएगी । उस औरत की मौत मेरे हाथों हो जाएगी, जिसके कारण मेरे पिता ने मुझे ठकराया मेरी माँ को ठुकरा मैं हाँ डालूंगी, उसे मार डालूंगी । उसका वक्त रेडक्रॅस तेरही बुलंद कह रहे लगती रहे हैं । इस समय वह सचिनदेव राॅबर्ट थी और उसने अपनी पसंदीदा मुगल मोना उसकी जमकर पी रखी थी । शायद उसी विस्की की बदौलत वह इतना अब सेट हो गई थी । इतना जज्बाती हो, ठीक थी जानते हो सचिन फिरेगा एक लीटर साल की हसीना जाने कहाँ हो गए उसके चेहरे पर भावनाओं का बवंडर उठ नहीं । मैंने अपने इस छोटे से जीवन में बहुत खेले । मेरी माँ भी दुख झेलते झेलते, मौत की भेंट चढ के और ये सब इस की बदौलत हुआ सिर्फ और सिर्फ स्थाना की बदौलत बेटा सान्याल में फिर एक और बैंक बनाया और उसे अपने होठों से लगना चाहिए । अब बस फॅमिली था । सचिन देवरानी वही उसका हाथ आपस करूँ । तुम पहले काफी चुकी हूँ तो नहीं जानती प्रतिशोध की ज्वाला तुम्हारे अंदर घटक नहीं लगती है तो तुम कितनी खतरनाक होती हूँ! ऍम ऍम रीटर सान्याल ने फिर एक बुलंद कह रहा लगाया और वह सचिन देवडा के विरोध के बावजूद फॅमिली मैं खतरनाक की लगना चाहती हूँ । मैं नागिन बन जाना चाहती हूँ । सचिन जहरीली नागिन मुझे इस दुनिया से नफरत है । बस बस मैं तुमसे प्यार नहीं नहीं रेडर सानिया लेकर एक सचिन देवरा किसी नीजी लग गए । अच्छे उसने जज्बात उनकी प्रवाह में बहते हुए सचिन देवरा के बारे में उन्हें भी दी था तो मुझे प्यार करते हो ना? सचिन हम हाँ तो मुझे आॅफ बोलो ऍम ऍसे कस करने पड गई तो मुझे कभी छोडकर मच्छर कभी नहीं तुम्हारे बिना में जी नहीं सक उनकी सचिन मैं प्यार की भूखी हूँ । उसकी आंखों में आंसू की बूंदें झिलमिला नहीं वो सचमुच कभी सोलह ठीक कभी शक था । अभी याद नहीं है तो कभी बारिश का तैयारियांॅ जब रीता सान्याल के ऊपर से विस्की का नशा उतरा तब कहीं जाकर वो नामल हुई । इस योग्य हुई आपने मॉडर की प्लानिंग पर बात कर सकें । उसने सबसे पहले सचिन देवडा को पालस में घटित हो रही घटनाओं के बारे में जानकारी दी । यानी तुम्हारी प्लानिंग के मुताबिक आना गुंजाल रिस्की दवाइयाँ शुरू हो चुकी हैं । सचिन थोडा उत्साहपूर्वक बोला बिलकुल आज से ही आना नहीं दवाइयाँ लेनी शुरू करती है । वो अपने आप को बिल्कुल स्वस्थ होते हुए भी बीमार समझने लगी है । और सबसे दिलचस्प बात तो ये है कि दवाइयों की वो प्रेस्क्रिप्शन उसके सबसे खास डॉक्टर ने लिखी है । अगर बाहर यहाँ तक पहुंच चुकी हैं तो हम लोगों को तुरंत इस मौके का फायदा उठाना चाहिए । सचिन देखना बोला बिलकुल मैं तो कहता हूँ तुम आज से ही उन दवाइयों के साथ मिलाकर लिमि । की एक मिनट सुबह शाम आना को देने शुरू कर तो फिर तुम कमाल दिखाना फॅस की बदौलत आना का वजन घटने लगेगा । जब ब्लड कैंसर का एक लक्षण है तुम तो ठीक कह रहे हो ऍम की मैं आज रात से आना कुछ स्लाॅट खिलाना शुरू करती है । लेकिन क्या तुम आ रहे थे इस पूरे प्लान में तुम्हारा रोल भी चलती आने वाला है । मुझे खूब अच्छी तरह याद है । सचिन नहीं । राहुल लेकिन तुम उस दिशा में कोई सार्थक कोशिश करते तो नजर नहीं आ रही? ऐसी बात नहीं है । मैं पूरी पूरी कोशिश कर रहा हूँ कि गोवा के किसी नर्सिंग होम हॉस्पिटल के अंदर डॉक्टर के तौर पर पॉइंट हो जाएगा । आज मैंने इस सिलसिले में नर्सिंग होम तथा हॉस्पिटलों की काफी भागदौड की है । मैं समझता हूँ दो तीन दिन के अंदर मुझे सही ना कहीं कामयाबी मिल जाएगी हम लेकिन इस भागा दौडी में एक बात का खयाल रहे किस बात का? कहीं तुम्हारा पिछला रिकॉर्ड जाकर ना हो जाए कि तुम्हें मुंबई में क्या क्या प्रार्थी चिंता मत कर । सचिन थोडा यकीन के साथ बोला वो रिकॉर्ड आसानी से उजागर नहीं होगा । सबसे बडी बात तो ये है कि यहाँ गोवा में कोई मेरे नाम से वाकिफ नहीं । मैं यहाँ सब के लिए आज मैं अभी आती हूँ । फिर मैं यहाँ अपने आप को एक प्लास्टिक सर्जन के तौर पर शो भी नहीं कर रहा हूँ । ये बहुत अच्छा क्या काम है? फॅमिली खुद को प्लास्टिक सर्जन के तौर पर क्यों नहीं कर रहे हैं? बहरहाल मैं आज रात से सबसे पहला कदम ये उठाती हूँ । कियाना कोस लिमिट आप ले देना शुरू कर दी । बिल्कुल ये कदम ज्यादा जरूरी है । अभी आगे का रिजल्ट भी निकल कर सामने आएगा ।

भाग - 06

अध्याय छह शाम का वक्त था । सूरज खिलाडी महा जाना । पालस के ऊपर कुछ ज्यादा छक्की हुई थी । हर ऐसा लगता था मानो प्रकृति भी टाल इसके अंदर घटित हो रही घटनाओं को लेकर कुछ ज्यादा ही चिंतित था । बूटा रहा मुझे ही टहलता तहलका रीता सान्याल के कमरे में पहुंच गया । रीता सान्याल उस वक्त अपने बिस्तर पर लेटी टीवी देख रही थी आम उदाराम वीटर । सानिया दूदाराम को देखते ही बिस्तर पर बैठ गई । लगता है तो मैं कमांडर करन सक्सेना का वो उपन्यास पूरा पढ लिया । हाँ मासी बाबा मैंने उपन्यास पूरा पढ लिया है । कैसा लगा एकदम बेहतरीन । आप तो वैसे भी जानती है । मैं कमांडर करन सक्सेना के कारनामों का जबर्दस्त हूँ । उस जैसा मार धीरे पूरे उपन्यास जगत में कोई दूसरा नहीं । रीटर सान्याल, हसी और आप सुनाए में से बाबा आप क्या कर रही है? बूटा रामपुर नाह बोला जब से आप आलस में आई हैं, तब से आपने एक बार भी गिटार पर अपनी दूर नहीं बजाई । जब की बचपन में आपको जाना वह धन बजाया करती थी । रीता सान्याल सतर्क हो गई । सचमुच बहुत शातिर दिमाग आदमी था । हमेशा मामूली बात पर भी पैनी निगाह रखता था । तुम तो जानते हो मोटाराम अंडा साल में कितनी दुनिया बदल जाती रीटर सानिया ने तुरंत बात संभाली । मैंने पिछले पंद्रह सालों में इतना कडा संघर्ष किया । म्यूजिक से तो जैसे रिश्ता ही टूट गया । लेकिन अगर तुम चाहते हो तो मैं अभी वह धुन बजाती थी नहीं । नहीं नहीं मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं क्योंकि बात गिटार की चल पडी थी । इसलिए बूटा राम की निगाह अनायास की दीवार पर टंगी गिटार की तरफ फट गई और तुरंत पूराराम के दिमाग में सोदार ढंग से बिजली कर कडाई इतनी बुरी तरह चौका जैसे एक साथ हजारों बिच्छुओं ने उसके ऊपर आक्रमण कर दिया । तरह साल पहले वो गिटार ग्राउंड रंग के केस था क्योंकि इस काफी पुराना हो चुका था । लेकिन बूटा राम ने देखा वह की सब बदल चुका है । उसकी जगह नीले रंग के बिल्कुल नए चमचमाते के इस ने ले ली है । ये किताब का नया केस कौन लेकर आई एम सी बाबा बूटा राम ने हैरत के साथ बीता सान्याल की तरफ देखा हूँ । नहीं लेकर आई फॅमिली असल पुराना की इस काफी गंदा हो गया था इसलिए मैंने सोचा क्यों ना ऐसे बदल डालूँ बूटा राम के दिमाग में आश्चर्य क्या ना छोडने लगे । नहीं नहीं तुरंत उसके अंदर से कोई चीज ये लडकी में से बाबा नहीं हो सकती है । ये असली मिस्सी बाबा नहीं हो सकती । बूट आराम फौरन झक्की से अपना स्थान छोडकर खडा हो गया । अब क्या ऍम इसमें से पूछा अब तक कुछ नहीं । बूटा तेजी से दरवाजे की तरह सकता । मुझे एक जरूरी कहा गया था कि मैं जा रहा हूँ । लेकिन मगर उसके बाद बूटा राम ने उसकी कोई बात नहीं सुनी । वो आंधी तूफान की तरह कमरे से बाहर निकल गया । रीता सानिया के दिमाग में भी आश्चर्य के बम फटने लगे । इतना तो वह समझ चुकी थी कि उससे कोई गडबड हो चुकी हैं । बडी गडवाडा बूढा रह में समय आपने सर्वेंट क्वार्टर में कुर्सी पर बैठा हुआ था लेकिन उसके दिमाग में जोर जोर से आतिशबाजी अभी भी छूट रही थी । नहीं नहीं उसके अंदर बार बार कोई चीज था । ये लडकी मासी बाबा नहीं है । ये ऐसी बाबा नहीं है । किसी बाबा को तो नीले रंग से नफरत बूटा राम को उसकी बचपन की घटनाएं आता है । एक बार खुद पूरा राम उस गिटार का नीले रंग का केस लिया था तो मैं उससे बाबा ने पूरे पाल इसमें इतना जबरदस्त कोहराम खडा किया था । चीख चीखकर में से बाबा ने पूरा पालन स्तर पर उठा लिया था और उसके इसको भी कैंची से तुरंत का डाला था । किसी बाबा को नीला रंग इतना ना पसंद था की वह प्लस में नीले रंग के पर्दे तक नहीं पडने देती थी । सोफे के कवर का भी रंग नीला नहीं होना चाहिए था । पाँच और आज को खुद नहीं ले । रंग का केस लेकर आई बूटा राम ने उस सिलसिले में जितना सोचा उतना ही उसका इस बात के ऊपर शक बढा कि वो लडकी में सी बावन नहीं वो जरूर कोई फ्रॉड है जरूर कोई बहरूपिया है । मिस्ट्री बाबा के बारे में सोचते सोचते मोटा राम को अपने जासूस तो उस की याद आ गई । वो खुद जितना अजीब आदमी था उतना या जी उसका नाम था मथुरा दास ऍम मथुरा राज मुंबई में रहने वाला था और कभी घूमने के इरादे से गोआ आया था । उधर राम के उसे मुलाकात हुई । वैसे भी वह घुमक् कर आदमी था । मथुरादास एलएलबी की याद आती बूटा राम की आंखों के उसकी पर्सनालिटी का पूरा खांचा खींच गया । लगभग पचास पचपन साल उम्र सिर के आधे से ज्यादा बाल सफेद जिनमें वह मेहंदी लगाकर रखता था । बढी हुई दाढी मैला कुचैला सा कॉफी कलर का चेस्ट जिसकी दाई जेब में वो हमेशा छोटा सा ध्यान रखता था जिसमें राम भरी रहती थी । वो राम का इतना शौक था कि वह हर दस मिनट के बाद राम के कुछ खूब जरूर लगा लेता था । बूट आराम से जब उसकी मुलाकात हुई अब भी वो नशे में बुरी तरह धुप था और मीठा मार बीच के रेट पर ही किसी लाश की तरह पढा था । नशा उसके ऊपर इस कदर हावी था की बात करते करते बार बार उसकी आंखें मूंद चाहती । फिर भी बूटा राम की उस से काफी देर तक बात हुई । बातों के दौरान मथुरा दास एलएलबी का एक नया ही किरदार उसके सामने उभर कराया । जैसे मथुरा दास एलएलपी कभी मुंबई का एक बडा मशहूर क्रिमिनल लॉयर था । वो पहले खुद ही के इसके इन्वेस्टिगेशन करता था और फिर खुद ही उसे बडे जोरदार अंदाज में जज के सामने प्रस्तुत करता है । वो कभी कोई केस नहीं हारा था लेकिन उसके ऊपर आप तों का पहाड तब टूटा जब अपनी ही बीवी का केस हार गया । दरअसल मथुरादास एलएलबी से बुरी तरह खुदा खाया क्रिमनल जब जेल से सजा काटकर बाहर निकला तो बाहर आती उसने मथुरा दास एलएलबी की बीवी को एक ऐसे झूठे कत्ल के इल्जाम में फंसा दिया और इतने प्रॉफिट ढंग से फसाया की खुद मथुरादास एलएलबी भी उसे अदालत में नहीं दोष साबित नहीं कर सका तथा उसे पंद्रह साल की सजा हो गई । दूसरा कहर उसके ऊपर ये टूटा की जेल पहुंचते हैं । उसकी बीवी ने चाकू से अपनी गर्दन काटकर आत्महत्या कर ली । मथुरादास का दिल तो उसी दिन से मथुरादास एलएलबी ने वकालत छोडती । जासूसी छोडती अब बंजारा बन गया था, जो इधर से उधर भटका भटका फिरता था । उसकी मुंबई में इतनी प्राप्ति थी कि वहाँ से उसे किराये की काफी आमदनी हो जाती थी । इसलिए गुजर पसर कि मथुरा दास एलएलबी को कोई चिंता नहीं थी । बूटा राम की उस से काफी घनिष्ठता हो गई थी । इतना ही नहीं, जब मथुरादास एलएलबी गोवा से वापस मुंबई जाने लगा तो उसने जाने से पहले मुंबई के एक बार काट रहे तथा टेलीफोन नंबर भी बूटा राम को दिया और उससे कहा कि अगर उसके ऊपर कभी कोई संकट आएँ तो वो उस बार वाले पते पर उससे संपर्क करने की कोशिश करेंगे क्योंकि वो उसका फेवरेट बार था और मुंबई में ज्यादातर वही उसका ठिकाना होता था । उस क्षण मथुरादास एलएलबी की आजादी बूटा राम के शरीर में बिजली से भाग गई तो कुर्सी छोडकर खडा हुआ तथा आनंद आनंद उस बार का ड्रेस तलाशने लगा । जल्द ही उसे वहाँ ड्रेस मिल गया था । उस बार का नाम था मकाऊ बाहर और वह मुंबई के माहिम इलाके में था । भूराराम ड्रेस हाथ में लिए लिए वापस कुर्सी पर जहाँ बैठे सोचने लगा अगर उसे मामला को ज्यादा गंभीर दिखाई दिया । बूटा राम ने कुछ पर खेलते हुए विचार किया तो वह अपनी मदद के लिए मथुरा दास एलएलबी को वहाँ बुला लेगा । फिर मथुरादास एलएलबी ही पता करेगा कि ये असली मासी बाबा है या नहीं । मथुरादास एलएलबी की याद आनी से उसकी चिंताएं कुछ काम । किरपाराम मूलचंदानी आजकल बडी कडी मेहनत कर रहा था । वो रीता सान्याल और सचिन देवडा की गतिविधियां चेक करने के लिए सारा दिन इधर से उधर भागा भागा । फिर फिर उसकी हरचंद कोशिशि भी होती थी कि कहीं किसी की उसके ऊपर नजर ना पड जाए और ये कुछ समझ नहीं आ रहा । किरपाराम मूलचंदानी उस दिन भी काफी थका, थका तथा हिला हुआ वापस लौटा नहीं, कुछ समझ नहीं आ रहा नी अब क्या हुआ? पोषण को तुरंत आ पूर्वक बोले आप क्यों हार से बेहाल हो रहे हैं बडी बहुत ही हाल से बेहाल होने वाली यानी एक से एक नया मामला सामने आ रहा का समझो फिलहाल की मैंने किसी बकरे को हलाल करने में इतनी आफत पहले कभी नहीं स्कूटी अब कुछ बताओगे भी क्या हुआ पानी अपना वो बकरा आया नहीं सचिन देवडा उसकी खोपडी पर ना जाने क्या गाज के लिए कि वो दोबारा से डॉक्टर की नौकरी करना चाहता है । आज इसी सिलसिले में वो गोवा के नर्सिंग होम तथा हॉस्पिटलों में जूती चक्का था घूम रहा था और वहाँ मगज बच्ची कर रहा था । नहीं न जाने की आम आना चालू है । यहाँ वहाँ चक्र हैं वहाँ कई पूछा की आंखों में भी घोर आश्चर्य के भाव तुम्हें ये तो तुम बिल्कुल नहीं बात बता रहे हैं लेकिन आपको टॉफी की नौकरी करके क्या करेगा? ऍम मिठाई क्या दिमाग में समाई? उसकी नहीं है तो समझ नहीं आ रहा नहीं । किरपाराम हो चलाने चला लेकिन वजह चाहे जो भी हो बडी बकरी का ये कदम भी लेडी आना गुंजाल दस की मौत प्लानिंग का एक हिस्सा है के फरामोश चंदानी आंदोलन हुआ लेकिन इस बात से कहना ऍम ऑर्डर का क्या संबंध हो सकता है और ये तो वक्त ही बताएगा । बुलबुल पर आ मूलचंदानी बोला कि क्या संबंध लेकिन एक बात की गारंटी है कोई ना कोई संबंध निकलेगा जरूर बडी यू समाज पटडी रीता सानिया के साथ साथ अब पकडे का खेल भी शुरू हो चुका है । अब वह भी फील्ड में अपनी कोई करामा दिखाएगा । ऊषा सस्पेंस की प्रतिमूर्ति बनी रहे हालात हर क्षण खतरनाक होते जा रहे थे । जिस बात की कल्पना भी नहीं थी अब वो वो घटनाएं घट रही थी । और ये बात बता पुडी किरपाराम ओर चलाने की आवाज हाथ से ज्यादा सस्पेंस हो गई । हमने मुंबई में जो लिया और रसिया की हत्या के टाइम पर जो फोटोग्राफ किंचित हैं वो फोटो फॅमिली के टाइम सकुशल हैं । पूछा होली पहला उन फोटोग्राफ्स को में खुर्दबुर्द कैसे कर सकती? होने के दम पर तो हमने ये सारा किला फतह करना है बिल्कुल ठीक और देख की वो कसर का किरपाराम मूलचंदानी फिर उस फसाया चिन्नई जीता सान्याल तथा बकरी की बातचीत उनकी सारी कारस्तानियां ठीक है वो भी संदूक के अंदर सुरक्षित बंद है । बडी बडी बहुत बढिया असम झूलेलाल की बडी मस्तानी पर ये चीजें हमारे लिए तो के गोले से भी ज्यादा तगडा काम करेंगे नहीं हमारा दुश्मन इनका सामना करने के बाद धडाधड चारों खाने चित्त पडा होगा । वो दोनों कॉलेज के अंदर अभी तक बातचीत कर ही रहे थे कि तभी एक नई घटना घटी । कॉलेज की जिस कमरे में वो इस समय मौजूद थे उसमें एक ऐसी खिडकी लगी थी जिससे सीधे सडक की तरफ खुलती थी । आकस्मात उसकी दृष्टि खुली खिडकी में से शांत रिबैरो के कार पर पडी जो सचिन देवडा के कॉलेज की तरफ भाग भी जा रही थी तो शायद उसी कॉलेज की मालकिन है जिसमें सचिन देवडा ठहरा पूछा तेजी से खोलेंगे बिल्कुल वाणी वही खुराफाती औरत ऍम बुलबुल ही अपना मकरा है । बहुत किस्मतवाला ऍम क्यों वो किस्मतवाला कीमत पडी नई नई पटरियां जो उसके जाल में भर्ती रहती है नहीं पर आ मूलचंदानी बोला हर बार पकडे आम कि पुट गाडियाँ तपाता उसकी झोली में गिरती है और बुलबुल शांत रिबेरो तो पक्की मर्द होर है गोवा की सोसाइटी में बडा ना मैं इसका तो देखना ये बकरे के साथ जरूर कोई ना कोई हंगामा कर के मानेगी । पानी बहुत जबरदस्त लेनी है हूँ । उषा हस पडे थाना पालस में एक बडी खतरनाक घटना और घटी । बूटा राम अब एकदम सहज हो गया था और उस दिन गिटार वाली जो घटना घटी थी उसे तो वो मना बिलकुल ही भूल गया था । जबकि वी ता सान्याल अभी भी नहीं समझ पाई थी कि बूटा राम गिटार के केस को देखकर इतनी बुरी तरह चौका क्यों था । अलबत्ता मोटा राम का एकदम इस तरह सहज हो जाना उसे उसके चौंकने से भी ज्यादा खतरनाक था । जरूर कोई खास बात जरूर वो शातिर आदमी अपने दिमाग में कोई और भयानक जाल बन रहा था । कुल मिलाकर इन्ही दिमागी झंझावतों में उलझे हुए भी पैसा निकालने मेरी गोंजालवेस को स्लेम की थावरे देनी शुरू कर दी । कुछ दिन में उसका आवले का रिजाल पी सामने आ गया । सिर्फ तीन दिन बाद की घटना है पुलिस कमिश्नर नागोल और फ्रांसो का आना पालस में आगमन हुआ लेते आना गुंजाल जिस समय ड्रॉइंग हॉल में आराम कुर्सी पर अगले टी । सी । पडी थी उसने आंखे बंद कर रखी थी और उस क्षण आप वहाँ बीमा प्रकाश था । कर मॉर्निंग जाना । पुलिस कमिश्नर माहौल और फ्रांस उसके नजदीक आकर थी में आवास में बोला आना गोंजालवेज ने अपनी आंखें खोली । कमिश्नर आना के चेहरे पर बेचैनी के भाव है ऍम फिराना गुलजार बजने आराम कुर्सी पर सीधे बैठने का प्रयास किया नहीं नहीं । आप ले रहे हैं ना, लेकिन आना गुंजाल दस फिर भी हिम्मत करके आराम कुर्सी पर सीधी बैठ गई । आज सुबह भी उसे तेज दर्द उठा था । ये उस दर्द की वजह थी जो उसके शरीर की सारी ताकत में जुड गई थी । बैठे हैं पुलिस कमिश्नर माॅस् उसके सामने पर ये कुर्सी पर बैठा है । तरसाल मुझे मालूम हुआ था कि आप बीमार चल रही है इसीलिए देखने चला । हाँ कुछ दर्द अच्छा था, अब ठीक है अभी कहाँ आज सुबह भी काफी तेज था ही ऐसा भयानक होता है जैसे जान लेकर ही जाएगा । तो नागुलाल फ्रांसो के माथे पर चिंता की लकीरें उभरी यानी काफी सीरियस मामला किसी डॉक्टर को दिखाया । डॉक्टर फॅमिली कोई दिखाया आना गुंजाल जिसका चीन ऍम उन्होंने क्या कहा कुछ भी नहीं । डॉक्टर का कहना मामूली दर्द है । जिस तरह आप शुरू हुआ है अपने आप ठीक भी हो जाएगा तो बात क्या कर ली । डियाना गोंजाल्विस बडे उत्साहपूर्वक अंदाज में मुश्किल है । तभी रेटर सान्याल ने भी ड्रॉइंग हॉल में कदम रखा । तुम मॉर्निंग अंकल ऍम नागिन अल्ट्रान सुने बडे भावभीने अंदाज में उसका स्वागत किया । सादा रीटर सानिया वहीँ उनके पास रहते थे तो नाना का खयाल क्यों नहीं रखती? थी । नागुलाल फ्रांस बोला देखो इन का क्या हाल हो गया मैं तो इन से आज सुबह से भी बोल रही थी अंकों की आप डॉक्टर कॉटले को छोडकर किसी और अच्छे डॉक्टर को दिखाएँ मानती नहीं है । सीता सान्याल ने कहा देवी थी कॅश दिमाग में बीमारी नहीं आ रही है तो आप किसी और डॉक्टर को दिखाइए । महिला डॉक्टर कहाँ खेलने से अच्छा डॉक्टर गोवा में और कौन होगा आना? गुंजाल बोले कभी कभी जो बीमारी किसी बडे डॉक्टर की समझ में नहीं आती, आना तो किसी मामूली डॉक्टर की समझ में आ जाती है । जी फॅमिली देवी बिल्कुल ठीक कह रहे हैं आपको अपनी ये बीमारी काफी गंभीरतापूर्वक लेनी चाहिए । देखी इन दिनों में ही कितनी कमजोर हो गया । ऐसा लगता है जैसा आपका वजन भी कम हो गया हूँ । ऍम होने लगा हूँ । लुधियाना गुंजाल जिसकी आवाज पूरी तरह का कप आएँ । बिल्कुल आना । मेरी गारंटी । अगर आप वजन करवाएंगे तो जरूर चार पांच किलो आपका वजन कम निकलेगा । आॅफिस के शरीर में दहशत की लहर दौड गई । उन्हें तुरंत फ्रांस के राष्ट्रपति क्या कहते हैं? उनका वजन तो इकाई किसी तरह काम होना शुरू हो गया था । यही वह क्षण था जब बूटा राम ने नाश्ते का सामान लेकर वहाँ कदम रखा । यूँ तो पुलिस कमिश्नर माॅल फ्रांस थोडी देर बाद ही पहले से चला गया लेकिन उसका एक का एक बहाना रीता सान्याल की प्लानिंग के लिए काफी मुफीद साबित था । सबसे बडी बात तो ये थी कि आना गोन्साल्विस के कानों में ये बात पड गई थी कि उसका वजन कम हो रहा है और ये बात भी उसके सबसे करीबी दोस्त की जवानी पडी थी । उसी रात रीता सान्याल ने फिर ड्रामा खेला । ऍम में सोने की कोशिश कर रही थी तो रीता सान्याल उसकी पीठ की मालिश करने वहाँ पहुंच गए । फिर पीठ की मालिश करते हुए उस ने इतनी हिस्सा से उसके पेट का पॉइंट दबा दिया कि उसे पता तक नहीं चला । अलबत्ता वह डर के कारण छह जरूरत थी । तुरंत डॉक्टर कौटिल्य को वहाँ बुलाया है । डॉक्टर कॉटन का भी बडी बदहवास स्थिति में बहाना हुआ । फिर एक घंटे बाहर मीडिया आना गुंजाल जिसकी हालत नॉर्मल हुए । बढती कमजोरी के कारण आना गोंजाल्विस पसीनों में न हाँ गई थी । उसका दिल तीस तीस धडक नहीं लगा था और दर्द से छटपटाते हुए एक क्षण तो ऐसा भी लगा कि कहीं उसका हाथ खेलना हो जाएगा । डॉक्टर काट लिया आना गोंजाल्विस की वो हालत देखकर और परेशान हो गया । फिर वो परेशान हालत में रीता सान्याल की तरफ बडा तुम आना को दवाई तो एकदम ठीक टाइम पर दे रही होना चाहिए थी बिल्कुल फॅमिली । जबसे मैंने आना की दवाइयों का चार्ट अपने हाथ में संभाला । सबसे मैं इस बात का पूरा खराब व्यक्तियों की कोई खुराक मिस ना डॉक्टर कॉटन लेने आना । गोंजाल्विस की तरह देखा इसमें कोई शक नहीं । सेवा कई मेरा बहुत खराब हो जाती है आना गुंजाल जिसकी गर्दन भी स्वीकृति में हैरानी है । डॉक्टर काटेंगे । बोला दवाइयाँ कुछ ठीक ठाक पर लेने के बावजूद आपको दर्द उठा है जबकि जहाँ तक मैं समझता हूँ ये बहुत सुंदर है । जब तक ठीक हो जाना चाहिए था कहीं ऐसा तो नहीं डॉक्टर की मुझे कोई भयंकर बीमारी हो । आप कुछ मालूम नहीं । मेरा वजन भी कम हो रहा है । भयंकर बीमारी डाॅ के नेत्र सिकुडे आप किस तरह की बीमारी की बात कर रहे हैं? मुझे ऍम भी तो हो सकता है । डॉक्टर ब्लड कैंसर एक क्षण के लिए डॉक्टर काट ले सकता है जिसके होठों पर मुस्कान दौड गए क्या? क्या उल्टी सीधी बात ही सोचने लगी है ना आपका वजन बढती हुई उम्र के कारण कम हो रहा है । बीमारी में तो अच्छे भले आदमी का वजन भी धरती लगता है लेकिन मुझे ब्लड कैंसर क्यों नहीं हो सकता है? क्योंकि आना जो आदमी ब्लाॅक होता है उसमें वजन कम होने के अलावा और भी कई सारे लक्षण होते हैं । कैसे लक्ष्य जैसे उसे हमेशा बुखार रहता है । फॅमिली भूख कम लगती है और के ज्यादा बढने पर पेशंट को ब्लीडिंग तक होने लगती है । जबकि आपके साथ ऐसा तो कुछ भी नहीं है । आना गुंजाल जिसकी बेचैनी कुछ और बढ गई । जब मेरे अंदर ऐसा कोई लक्ष्य नहीं है तो फिर मेरा ये दर्द ठीक क्यों नहीं होता? आना गोंजाल्वेस कातर स्वर में बोली ऍम टेंशन कि बात है । डॉक्टर काट ले के आवाज में बेचैनी झलकी । मैं समझता हूँ अभी हमें दो तीन दिन और इसी तरह देखना चाहिए । अगर दो तीन दिन में आप का दर्द ठीक नहीं होता तो मैं आपको हॉस्पिटल में एडमिट होने की सलाह दूंगा । फिलहाल बेसिक रहे और किसी बीमारी के बारे में सोच सोच कल खुद को ज्यादा हरकार न करें । लेकिन ये बात कहनी जितनी आसान थी, क्या बेफिक्र रहे? वास्तव में बेसिक रहना उतना ही मुश्किल था । उसी रात मीठा मार बीच पर एक बडी चौका देने वाली घटना कहते हैं, एक ही पीस फेनी के नशे में पूरी तरह धुत था और आप के वक्त झूमता हुआ बिल्कुल अकेला मीटर मार बीच से गुजर रहा था । अभी साइकल छह नामक क्रिमिनल नहीं, उसके ऊपर आक्रमण कर दिया । कुख्यात अपराधी ने उसके गले में साइबर कीचेन का फंदा डालकर उसे निर्ममतापूर्वक मार डाला था तथा फिर उसका सारा तीन तीसरा सामान लेकर घटनास्थल से फरार हो गया । ये साइकिल छेंका आठवां शिकार था, जबकि गोवा की पुलिस अभी तक यही पता लगाने में नाकाम रही थी कि वह क्रिमिनल था, कौन डिसाइड कर की चेन से मर्डर कर रहा था और लोगों को लूट रहा था । बहरहाल, हिप्पी की हत्या का मामला अखबारों में काफी अच्छा प्रेस रिपोर्टर उन्हें आपने आपने अखबारों में पुलिस की जमकर बुराई लिखी की एक इतना कुख्यात क्रिमिनल मीठा मार बीच पर सक्रिय हैं, लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर रहे हैं । बहरहाल, उस घटना के बाद जो एक महत्वपूर्ण काम हुआ तो ये था कि मीटर मार बीच पर साइकल चीन का आतंक और ज्यादा बढ गया । अब बिलकुल ही लोग रात के समय बीच पर घूमने पहने से डर नहीं लगेगा ।

भाग - 07

अध्याय साहब सचिन देवडा आज काफी खुश था । वो एक नर्सिंग होम में डॉक्टर की जाओ पानी में सफल हो गया था । हालांकि वो चाहता तो फिर आप के लिए वो इतना भटका था वो जो शिक्षक की बजाते हासिल हो सकती थी । बस उसे अपना असली परिचय देना पडता कि वह वास्तव में कितना मजा प्लास्टिक सर्जन है लेकिन सचिन देवरानी अपनी ऑस्ट्रिया हर जगह छुपायें वो भी वो इसीलिए कर रहा था क्योंकि बिना फॅमिली आना गोंजाल्विस की मौत प्लानिंग पूरी नहीं होने वाली थी । बहरहाल उसी दिन सचिन देवडा के साथ एक वाकया पेशा सनसनीखेज आ गया । उसे जिस नर्सिंग होम में जॉब हासिल हुई थी उसका नाम जीवन नर्सिंग होम था और वो ओल्ड गोवा में बना हुआ था । वहाँ से मीटर मार बीच तक आने के लिए स्टीमर का सहारा लेना पडता था । सचिन नहीं था । उस समय स्टीमर पर सवाल था जैसे ही वो स्टीमर अपने पहाड से जाकर लगा तो सचिन देवडा यात्रियों के बडे रेलवे के साथ साथ फाय पर उतरा तथा फिर आगे की तरफ बढा । यही वो अच्छा था जब सचिन देवता कि नहीं कहा एक का एक दूसरे से कीमत पर पडी वो टीम भी काफी बडा था और उसके वजह से काफी फासले के साथ एक दूसरे पार्ट से लग रहा था । सचिन देवडा जिस बात को देखकर बुरी तरह चौंका तो ये थी कि उस दूसरे स्टीमर में ऊषा सवाल थे । अभी उसकी निगाह सिंधी आदमी पर भी पडी जिससे कभी उषा ने अपना दारी बताया था ही दोनों गोवा में क्या कर है । सचिन देवडा के दिमाग में तेज चिंगारी छोटी वो खुलती से स्टीमर की तरफ झपटा । उसी क्षण ऐसा लगा जैसे ऊषा की निगाह भी उसके ऊपर पड गई । सचिनदेव ना उन दोनों तक पहुंच पाता उससे पहले ऊषा किरपाराम मूलचंदानी के साथ आनंद आनंद टीम से नीचे उतर कहीं । सचिन देवरा जब स्टीमर के नजदीक पहुंचा तब तक वो दोनों भीड में कहीं गुम हो चुकी थी । फिर सचिन देवरानी उन्हें वहाँ काफी तलाशा लेकिन उसके बाद वो दोनों दूर दूर तक उसे कहीं नजर ना सचिनदेव का बडा हैरान हो । दरअसल ऊषा ने जैसे इस बात को भाजपा के सचिन देवरानी उसे देख लिया है वो डर गई । उसने फौरन सबसे पहले ये बात किरपाराम मूलचंदानी को बताया कि बकरी की निगाह उनके ऊपर पड चुकी है । उस खबर ने किरपाराम मूलचंदानी जैसे जीवन आदमी को भी हिला डाला । मदद कार उषा के साथ स्टीमर से नीचे उतारा और उसी क्षण वही चाल खेल गया । बिल्कुल बराबर वाले पास से एक दूसरा स्टीमर वापस और गोवा के लिए जा रहा था तो उस क्षण था और रात से उसमें भर चुकी थी । नीचे उतरते ही किरपाराम, मूलचंदानी, ऊषा के साथ आनंद धान धान उस दूसरे स्टीमर में चढकर अगले ही क्षण । उस कीमत समुद्र की सतह कुछ चीज कर वापस बोल हुआ की तरफ दौडा जा रहा था । किरपाराम ओ चंदानी तथा ऊषा उस दौर से हुई सीमा पर यात्रियों से घिरे खडे थे और दूर से ही सचिन देवता को देख रहे थे जो पार्क के पास बदहवास उनकी तरह उन्हीं को ढूंढ रहा था । पानी पहले तो पहले ही समझाया था फिर पर हम ओलचना नहीं उठा के ऊपर देगा । हम दोनों को साथ साथ नहीं निकलना चाहिए । नहीं साथ था, पकडे का पीछा नहीं करना चाहिए । इस बात का मुझे था । वही काम हो गया और उसने हम दोनों को देख लिया । अब अब क्या होगा? उसका भी उस क्षण बेहद डरी हुई नहीं । पता नहीं क्या हो । हमने खामखाह मुश्किल अपने गले में डाली है । सीमर वृद्ध गति के साथ तो रेट आसानी यार के माथे पर भी चिंता की लकीरें पडी हूँ । ये तो क्या करें मैं बिल्कुल ठीक कह रहा था । सचिन डेवलॅप वो इस समय अपने कॉलेज में था, फॅसा थी जैसे मैंने स्टीम पर देखा । इतना ही नहीं उषा के साथ अधेड उम्र का सिंधी आगे भी था । जैसे वो अपना डायरी बताती थी लेकिन गोवा में क्या कर रहे हो तो मेरी समझ में नहीं आया । सचिन देवडा का स्वर्ग कौतूहल से भरा था । मुझे तो लग रहा जैसे वो दोनों मेरा पीछा कर रहे हैं । फिर उन दोनों ने जब ये देखा कि मैंने भी उन्हें देख लिया तो मैदान छोडकर भाग खडे हुए । बडी खतरनाक बात बता रही हूँ रीटर सानिया विचलित मुद्रा में बोली तो ये साबित हो जाएगी तो दोनों हमारी पूरी प्लानिंग से वाकिफ है और इसीलिए मुंबई से हमारा पीछा करते कृतिक हुआ तक आ पहुंचे बिल्कुल ठीक । मुझे भी इसी बात का अंदेशा है कि वह हमारी पूरी प्लानिंग से बाकी है । रीटर सानिया अलग साफ सांभर भेजना सलाह नहीं लगी । अगर वो दोनों वाकई उनकी ट्रेनिंग से वाकिफ है तो ये काफी खतरनाक बात नहीं । इसके अलावा मुझे एक बात और का भी शाखा साॅस किस बात का ऊषा उस संधि आदमी का अपना डारी बता देते हैं लेकिन वो जिस तरह उसके साथ रहती है, जिस तरह उसके साथ घूमती फिरती है उसे देखकर तो नहीं लगता कि वो आदमी इसका ध्यान ही हो सकता है । उसे देखकर तो ऐसा लगता है जैसे दोनों के बीच बडी तगडी ट्यूनिंग कोई ऍम सचिन देता बोला खडी सनसनीखेज बात बता रहे हो तो डारि के साथ साॅफ्ट भी जरूरी थोडी है की वो आदमी इसका दादी है । अगर डैडी नहीं है तो फिर ओशाने उसे अपना गाडी क्यों बताया? मुझे तो ऐसा लगता है कि उन्होंने शुरू से हमारे खिलाफ कोई बहुत बडा गहरा जाल बुनने में लगे थे । सचिन देवरा की आवाज हाॅल थे इसीलिए एक चाल उन्होंने पडी सोच समझकर चलेंगे । रेडर सान्याल के शरीर का एक हुआ खडा हो गया । उसने उन दोनों के बारे में जितना सोचा उतने ही ज्यादा वो दोनों उसी खतरनाक और तुम्हारी जॉब का क्या हुआ? तो जॉब तो मुझे मिल गई है । सचिन देखना बोला ओल्ड गोवा में जीवन अस्सी होंगी । कल से वहाँ मुझे ड्यूटी पर जाना है । फिर छल्लो प्लानिंग से संबंधित ये काम तो ठीक ठाक हुआ । डीटा सानिया राहत की सांस लेते हुए बोली ना मैं तो ये सोच रही थी क्या चौक मिलने में तुम्हें ज्यादा देर हो गई तो ये एक नया संकट पैदा हो जाएगा । तो क्या इस लिमिट आप लडने अपना कुछ असर दिखना शुरू किया? सचिन देवरानी पूछा हाँ स्टारलिट का खेल भी शुरू हो गया । फॅमिली आना गुंजाल उसका वजन उस टाइम लग की बदौलत कम होने लगा है । कल ही प्लस में पुलिस कमिश्नर ऍम था । उसने भी आना के ऊपर ये जाहिर किया कि उसका वजन कम हो रहा है तथा वो पहले के मुकाबले काफी कमजोर भी हो गई है । तभी से आना के दिमाग में ये डर बैठना शुरू हो गया है कि कहीं उसे ब्लाॅक नहीं वॅार सचिनदेव गा की आंखों में विलक्षण जमा कौन थी? यानी मेरियाना गोंजाल्वेस उसी दिशा में सोचने लगी है जिस दिशा में सोचने पर मजबूर करना तुम्हारी प्लानिंग का मकसद है । बिल्कुल मैं समझता हूँ ये बेहतरीन मौका हैं । सचिन देवगढ पडा उत्साहित होकर बोला आप तुम लेडी आना गुंजाल रस कोसली मीठा ब्लड के साथ आते थियोरम् सैनिक कॉल की आपसे भी सुबह शाम देना शुरू कर तो इसका वासियों को देने से आना गुंजाल जिसके चिकन पर लोड पडेगा और उसे बुखार हो जाएगा । ये कैसी और जब तुम उसे नियमित रूप से होगी तो बुखार उतरने का नाम ही नहीं लेगा । चुकी ब्लड कैंसर का एक और लक्षण है असल ये ऍम हमारी प्लानिंग में रामबाण हथियार के तौर पर काम करेगा । क्यों? क्योंकि इसी की बदौलत मीडिया ना गुडगाव उसको भूख कम लगने शुरू हो जाएगी । और ये क्या हो चुकी ब्लड के प्रवाह को तोड तब ये है तो इसी से फॅमिली में अभी हो जाएगा और अगर ये क्या आप को ज्यादा दिन तक खिला दिया गया तो ब्लीडिंग शुरू होने में भी वक्त नहीं लगेगा । बहरहाल ये सारे लक्षण लाख कैंसर के पेशंट के हैं और जब आना गुंजाल, जिसके शरीर में ये सारे लक्षण होंगे । फिर क्या होगा ये बताने की जरूरत नहीं । तब ठीक कह रहे फॅमिली मैं वो क्या लुधियाना को देना शुरू कर दी थी? गोट तो उस क्षण रीता सानिया के चेहरे पर उत्साह के भाव नहीं आ सके । सही बात है कि पूछा था उसके कथित सहयोगी के बारे में सोच सोचकर मेरा दिमाग खराब हो रहा । ये तो है उषा के बारे में सोचकर सचिन देवता का चेहरा भी पूछ रहा हूँ । जहाँ तक मैं समझता हूँ, अगर उन दोनों को हमारी प्लानिंग के बारे में भनक है तो वो मेरे साथ साथ तुम्हारी गतिविधियों पर भी जरूर नजर रखते होंगे । हाँ, बिल्कुल ठीक बात है । बहरहाल बूटा राम के साथ साथ ये वो खतरनाक आफत है जो हमारे कॉलेज में आप पडी । अर्जुन से हमें निपटना होगा । जी रसा नियान आंदोलत व्यवस्था में अपने स्थान पर बैठे नहीं । वो इस तरह की जितनी आप तों से बचना चाहती थी उतना ही और ज्यादा उसका इस तरह के आंकडों से सामना होता था । बारह । रीटर सान्याल ने फिर प्लानिंग से संबंधित कुछ कदम बडे सोच समझकर था । पहला कदम रीता सान्याल में आखिर प्रशन विधि का प्रयोग करके आना गोंजाल्विस के शरीर के विभिन्न मुँह जुबानी बंद कर दी है जिससे उसकी दर्द की शिकायत बंद हो गए हैं । लीटर सान्याल ने ये कदम इसलिए उठाया क्योंकि वो जानती थी कि अगर आना वो कांग्रेस को कुछ दिन तक दर्द की शिकायत और बनी चाहिए तो डॉक्टर कॉस्टली उसे हॉस्पिटल में एडमिट होने की सलाह दे देगा । और ये ऍम नहीं थी उसके दिमाग में तो षड्यंत्र का कुछ और ये मायाजाल बुना जा रहा था । दूसरा कदम रेटा सान्याल ने स्लाॅट के साथ साथ आना गुल जावे उसको क्लोरोफोम सैनिक ऑल का काफी भी देना शुरू कर दिया । भेज एक घटना ऐसी घटती जिसने रीटर सान्याल का साहब दुगना कर दिया और उस क्षण ऐसा लगा जैसे उस हत्याकांड को रचने में किस्मत भी उसका खुलकर साथ दे रही थी । एक दिन सुबह सुबह गुवानी लडकियों का एक बडा ग्रुप रीता सान्याल से मिलने पाल इसमें कहीं । रीता सानिया ने पूछा आप सब मुझसे क्यों मिलना चाहती हूँ? दरअसल हम सब रोटरी क्लब की महिला शाखा की मेंबर हैं । उनमें से एक लडकी बोली हमारी इच्छा है कि आप हमारे क्लब की प्रेसिडेंट बन जाए । रीता सान्याल आश्चर्यचकित रह गई फॅस लेकिन इस पद के लिए तो आप लोगों को मेरे से कहीं ज्यादा बेहतर लडकी मिल सकती है । लेकिन हमारे दिल्ली अच्छाई कि आप ही हमारे क्लब के प्रेसिडेंट बने । एक अन्य लडकी बोली हम इसके पीछे कोई खास अच्छा खास बजा भी है । फिर वही लडकी बोली दरअसल कभी आना । इस लक्की लंबे समय तक प्रेसिडेंट रही थी और उन के समय में क्लब के अंदर सबसे ज्यादा काम हुए । हम सब समझते हैं कराता आना की जगह क्लब की बात और संभाल लेंगे तो हमारे क्या आपके फिर वही सुनहरे दिन लौट आएंगे तो ऍम तो आप सब लडकियाँ, मत्स्य आना जैसे काम की उम्मीद रखती हैं । हम बिल्कुल फॅमिली मुस्कुराते हुए नीचे ड्रॉइंग हॉल में आ गई । मैं समझ उँगलियाँ थी तो मैं इस क्लब की प्रेसिडेंट शक स्वीकार ही लेनी चाहिए । आना ऍम कॅप्टन बन जाऊँ की तो इसी बहाने कभी कबार मैं भी कि अब की मीटिंग में चले जाए करेंगे और मेरी पुरानी यादे ताजा हो जाए करेंगे । इसके अलावा सबसे बडी बात तो ये है कि तुम्हे क्लब की प्रेसिडेंट की कुर्सी पर बैठा देखकर मुझे अच्छा लगेगा । मुझे लगेगा तुमने सही मायने में मिली धरोहर संभालते हैं । ठीक है आना । फॅमिली अगर आप कहती है तो मैं क्लब की प्रेसिडेंट बन जाऊंगी लेकिन मैं शायद पर ही इस करके मेंबर बनेंगी । हमें आप की सभी शर्तें मंजूर है । मैं जो लिया तत्काल सभी लडकियाँ संवेद स्वर में बोले नहीं नहीं पहले आप मेरी शर्त सुन तो ले बोली । दरअसल मैं चाहती हूँ कि इस कब का इस्तेमाल सिर्फ अपने मौज मेले की लेना करें । किसी पार्टी इसके लिए भी न करें या फिर सोसाइटी में अपनी प्रेस्टीज को इंप्रूव करने के लिए क्लब के प्रोग्राम चाइना करें बल्कि हम क्लब की मार सबको जैसे अभियान चलाये जिससे सच में सोसाइटी को फायदा पहुंच रहा हूँ । आने वाली पीढी को सही गाइडलाइन मिलती हूँ । ऐसे क्या अभियान हो सकते हैं? एक लडकी बोले हम जैसे हम क्लब के द्वारा मौसी किलिंग कानून पास कराने के लिए बडे पैमाने पर अभियान चला सकते हैं । फॅमिली फौरन अपना तुरुप का पत्ता फेंक दिया । आज पूरी दुनिया में मौसी किलिंग को लेकर हंगामा मचा हुआ । दुनिया की बडी बडी जागरूक संस्थाएं अपनी अपनी सरकारों पर इस बात का प्रेशर डाल रही हैं की माँ साइकिलिंग को कानूनी मान्यता दी । रोजाना पडी पडी प्रदर्शन मानसिक फिलिंग को लेकर दुनिया भर में होते हैं । आज दुनिया भर में ऐसे हजारों की तादाद में मरीज है । बडी भयंकर बीमारियों से ग्राॅस की मौत हो चुकी है लेकिन फिर भी दर्द से छटपटा रहे हैं वो अपनी बीमारियों से तथा अपनी प्रधान स्थिति से तंग आकर मौत मांग रहे मौसी किलिंग की गुहार लगा रहे हैं लेकिन डॉक्टर नहीं मासी खेलेंगे यानि वो इच्छा मृत्यु इसलिए नहीं दे रहे क्योंकि की आज भी गैरकानूनी हमारा देश भारत मौसी के लिंग के अभियान के मामले में आज भी काफी पीछे हैं । अगर हम ये पहल कर सकेंगे अगर हम ये अभियान चलाये तो इससे हमारे क्लब को एक नई पहचान मिलेगी । और सबसे बडी बात ये है कि हम उन मरीजों के लिए एक सार्थक पहल कर सकेंगे जो मौसी किलिंग ख्वाहिशमंद हैं बहुत चाहते हैं । डॅाल की बात सुनकर तमाम लडकियों के चेहरे खेल ऍफ प्रसन्नतापूर्वक बोली हमें इस बात पर गर्व है मैं ऑस्ट्रेलिया की हमने अपने क्लब की प्रेसिडेंट शिप के लिए आपकी जैसी उच्च विचार हमारी लडकी कुछ ना रहनी तुम सबको ये बोल है कि हम क्लब के द्वारा मर्सी किलिंग को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए अभियान चलाई । बिल्कुल कबूल है सब का फिर संवेदना हो जाए । ठीक है फॅमिली तो फिर आप लोग आज से मुझे अपने क्लब की प्रेसिडेंट समझे । उन सब के बीच खुशी की लहर दौड कर उन्होंने जोर से हर्षध्वनि करके अपनी खुशी जाहिर की ।

भाग - 08

अध्याय आठ पूरा काफी तूफानी उस्ताद गोवा में काफी तेज मूसलाधार बारिश हो तो और जोर से बिजली खडखडा आई हुआ की सहायता चाहते हैं । वैसे भी काफी खुश नमा और रंगीन होती है । सचिन देवडा उस समय अपने कॉन्टेक्ट्स में था और मौसम का आनंद नेता वस सोने की कोशिश कर रहा था वो कॉटेज क्योंकि समुद्र के किनारे बना हुआ था इसलिए वहाँ आस पास रहने वाले हवा में शीतलता कुछ और ज्यादा थी ऍम इतनी रात को कौन होगा सचिनदेव अच्छा होगा । फिर उसने बिस्तर से खडे होकर दरवाजा खोला है । अगले ही पल उसके हैरानी काफी बढ गई सामने दरवाजे मूसलाधार बारिश में बुरी तरह भेजती हूँ शांत रिवेरो खडी थी उसके सारे कपडे बारिश के पानी में उतारते ना बाल्कान हर जगह से बारिश की बूंदे टपक रही थी । अब मैडम आप सचिन देवता के स्वर में आश्चर्य छलका । आप इस दरवाजा खुलते शांत रिबैरो तुरंत अंदर आ गई और फिर बदन से चिपके अपने कपडों का मानी छोड नहीं । जब भी आप बताते एक साथ आती हैं । शांत रिबेरो ने उसी तरह वालों का पानी भी नहीं छोडा तथा फिर उन्हें पीछे झटका । ये मूसलाधार बारिश भी आज ही आनी थी और मेरी कार को भी आज ही खराब हो गया था कहाँ सचिन देवडा नहीं इधर उधर ना सकता भाई कहाँ आप के खाते हैं दूर बीच पर खडे ना जाने क्या हुआ चलते चलते अपने आप बंद हो गयी शांत होने लगता है इंजन में कुछ खराबी आ गई वो तो शुक्र है वहाँ मिस्टर सचिन वो कार काटेज के पास ही खराब हुई अगर कहीं और खराब होती तो ऐसे खराब मौसम में मुझे न जाने कहाँ कहाँ भटकना पडता है । ऐसे में टैक्सी वाले भी तो हजार नखरे दिखाते हैं मैं ठीक हूँ अब यहाँ सचिन देवराहट पढा है जी हाँ तब तक शांत रिबैरो अपने कपडों का काफी पानी नहीं छोटी थी वो कपडे अब उसके शरीर से कुछ ज्यादा चिपक गए थे और उसके अंगों का खुला प्रदर्शन करने लगे थे आम मैंने इस वक्त यहाँ पर तो मैं ऍम क्या अज जी नई सचिन देवडा पुनः हडबडाया शांत रिबैरो बडी उन्मुक्त अंदाज में चलते हुए उस कमरे में आ पहुंची जैसे सचिन देवरा ने अपना बैडरूम बनाया हुआ था । पहनने के लिए कुछ कपडे दोगे शांत है । बहन बोले अगर मैं नहीं गीले कपडों को अपने तन से लपेटी रही तो सुबह तक मेरी खुशी जम जाना तय कपडे अलग लेकिन मेरे पास आपके कपडे कहाँ होंगे मेरे पास तो अरे अपने कपडे देता हूँ अगर एक किसी मार के कपडे पहन लूंगी तो मैं मर थोडी बन जाऊंगी । ये बात कहकर वो पडे कुछ सद्भाव से हसी की मैंने क्रिस्ट गलत तो नहीं कहा सचिन देवडा से कोई जवाब नहीं दिया । उसने अपने नजदीकी बनाए क्वाड्रो खुला और उसमें से निकालकर अपनी कॉटन की चकता शर्ट तथा ट्रैक्ट्स और के साथ वाला अपना स्ट्रेस लोन का एक टाइप पजामा उसकी तरह पढा गया ऍम क्या सचिन देवडा कुछ नहीं बोला अगली तुम दो मिनट के लिए बाहर चले जाओ मैं जरा कपडे बदल सचिन देवडा कमरे से बाहर निकल गए इतनी राहत को शांत रिबेरो जैसी औरत का उसे वहाँ मौजूद होना चिंता में डाला था । अब जिंदगी में ऐसा कोई काम नहीं करना चाहता था जिससे कम से कम रीता सानिया के सामने उसे शर्मिंदा होने बडे सचिन ने उडाए कुर्सी पर जाकर बैठ कर बाहर मूसलाधार बारिश आप भी जानते हैं । दो मिनट बाद ही ब्लॅक और वहाँ शांत रहे हो । अपने एक नए रूप में प्रकट हुई सचिन देवता कि नहीं कहा जैसे ही उसके ऊपर पडी है उसका मुझे नाम उसमें देखकर उसका दिल उछलकर हालत में आप उसने स्ट्रेस लोन का वही पजामा पहन रखा था और कॉटन की वही छह का शर्ट पहनी हुई थी । अलबत्ता उसने शहर के निचले सिर्फ उनको पकडकर उन्हें आपस में बांध दिया था जिसकी वजह से उसका ना अभी तक नंगा पेट साफ नजर आ रहा था । शायद शायद उसे नाक में छोटी पड गई नहीं । बहरहाल उसके हर्बल बटन पर शांत रिबैरो के उन्नत उरोजों का ऐसा खिंचाव पड रहा था की हर दो बटनों के बीच एक फायदा का झरोखा पैदा हो गया था । उन घरों को पर एक नजर पडते ही सचिन देवडा समझ गया कि वह नीचे प्रेस इयर नहीं पहली थी । वैसे भी उसके यौवन के उन्मुक्त उठान को प्रेसे जैसे नकली सहारे की कतई जरूरत नहीं थी । मुझे जरा भी अपने कंधे पीछे को खींचती थी तो उसका काली जम्मू कहानी लगता और उस घडी में उसे ऐसा लगता है कि वह सारे बटन अभी तक तड करके टूट जायेंगे तभी जोर से बिजली हो । ऐसा लगता है शांत रिबैरो खिलाते हुए आगे बढ गई । ये बारिश आज थमेंगी नहीं थी का मैं आज रात यहां हजारों की स्थिति में कोई ऐतराज होना होगा । फॅमिली आपका ऍम नहीं शांति रिवेरो फिर उचित मुद्रा में हसी आपका ये तुम्हारा है आखिर ऍम वैसे मैं इसी कमरे में सोचा होंगे । शांत रहे पहले उस कमरे का अवलोकन करते हुए ये मेरा ऍम हैं आप ठीक है फिर मैं यहाँ का बिस्तर किए देता हूँ । सचिन देवडा बिस्तर का इंसान करने अपने मेट्रो की तरफ पड गए । रात के बारह बज रहे थे सचिन देवडा क्या खूबी नींद का दूर दूर तक नामोनिशान था । इस समय वह अपने बिस्तर पर बिल्कुल तन्हा लेता था लेकिन उसका ध्यान भटक कर बार बार बाहर वाले कमरे की तरफ चलना चाहता जहाँ शांत रहे पहले हुई थी आपसे सेक्स का आकर्षण सचमुच कई गुना हो होता है जिससे चार अच्छा कोई भी नहीं बच सकता हूँ । हालांकि आज के इस आधुनिक जमाने में सैलॅरी बन कर रह गया है जो किसी साधन संपन्न स्त्री पुरुष को उतनी ही आसानी से हासिल हो जाता है जैसे बाजार में जाकर किसी दुकान से आपने टाल कम्पाउडर खरीद क्या बॅान्डिंग क्रीम खरीद ली । ऐसे भी ऍप्स का आकर्षण अपना आकर्षण है । उसके खूबसूरत बन्दे से उसकी सुनहरी गिरफ्त से बच पाना आसान बात नहीं जानता । परिवारों के बारे में सोच की सोचते सचिन देवडा को कब नींद आ गई । उसे बताना चाहता हूँ आधी रात को उसकी एकाएक भक्सी हाँ खाली उसने महसूस किया है । पुलिस के शरीर से पूरी तरह चिपटा हुआ है । वो शांत है । पहले में उसका शरीर अंगीठी की तरह चल रहा था । सचिन देवता का हाथ उसके शरीर पर पडा तो उस तब धरे गए उस क्षण वह अपने शरीर पर कॉटन शर्ट भी नहीं पहले थी और ना अभी से ऊपर का उसका जस्ट बिलकुल नंगा था । अब आप सचिन देवराहट बढाया मैं माप तुम ने तो मुझे आज रात यहां रहने की फीस मांगी । नहीं शांत ने बहनों ने उसके बाद अपनी मुट्ठी में कसकर चक्कर है और अपनी होठ उसके सीने पर पूरी तरह रह रहे हैं । मैंने सोचा क्यों नहीं मैं ही तो नहीं वो फीस देती हूँ । लेकिन अब का मान गया कमान शांत रे भैरो ने उसके शर्ट के बटन बेदर्दी के साथ तोडकर खोल डाले और उसके सीने में अपने उन्नत रोज कराने सचिन देवडा का हाल बेहाल होने लगा । उसे अपनी सब्र का बांध छूट डाला था । आज की रात हमारे लिए याद का रात हो गया । आज तुम सेक्स का वो अजीम करीम सुख भूख होगे शायद पहले कभी तुमने भूखा ना हो शांत रिबैरो सचिन देवता का अपनी माहौल में भरी भरी बिस्तर पर कलाबाजी खा गए तथा फिर उसने ऐसी दिलकश फॅमिली की उसके उन्नत उरोजों में और सबर दस्त उठाना । सचिन देवरा कोई बार फिर वीटा सानिया क्या थाई उसकी सच्ची प्रेम क्या आएगा? उसमें छटपटाकर शांत रिवेरो की गिरफ्त से निकल जाना चाहता हूँ । लेकिन जैसे हर आपका और अब की गिरफ्त से निकलना बच्चों का खेलना था वो उसके शरीर पर मछली की तरह को लांच भर रही थी । वो सच मुझे हँसी लवमेकिंग की बडी एक धीरे धीरे सचिन देवडा पर एक नशा सा अच्छा नहीं लगा हूँ वो सब कुछ भूलता चला रहा है सब ये टाइम लग की ही महिमा थी । जो आना तो उसी दिन रात को बुखार चढा ऍम थर्मामीटर से उसका बुखार हो । पूरा एक सौ दो बुखार हैं फॅार अपनी आंखों के सामने कहती थी तो ली है क्या आपके सिर दर्द भी थोडा है । ये लक्षण ठीक नहीं आना । ट्विटर सानिया के चेहरे पर ढेर सारी चिंता की लकीरें उभर आई । पहले नहीं नहीं आवाज सुनाई देना फिर दर्द होना, फिर वजन का घटना और अब बुखार भी होना नहीं नहीं आना ये सब ठीक नहीं हो रहा हूँ । ऍफ काफी परेशान हो गई थी तो सच क्यों? मीठी आना । गोंजाल्विस की आवाज में भी बेचैनी थी । इस बीमारी के बारे में सोच सोच कर अब मैं काफी परेशान रहने लगी हूँ । परेशान था, बिल्कुल मत हो या ना? रीटर सान्याल उसकी सच्ची शुभचिंतक का कि भारतीय बोले बीमारी चाहे कोई भी हो, इस दुनिया में अब हर बीमारी का इलाज है । लेकिन एक बात मुझे खटक रहे हैं । है क्या ऐसा लगता है जैसे डॉक्टर कॉटले आपकी बीमारी को ज्यादा सीटें इसलिए नहीं ले रहे हैं? ऐसी कोई बात नहीं । नहीं नहीं नहीं आना । रीता सानिया ने ये बात जबर्दस्ती उसके दिमाग में ठोस मुझे ऐसा लग रहा है । इसे भी किसी आदमी पर ज्यादा लंबे समय तक भरोसा नहीं करना चाहिए । अब लेकिन आप मेरी बात मानी ऍम इसका हाथ अपने हाथ में ले । किसी दूसरे अच्छे डॉक्टर से अपना इलाज कराइये । यहाँ हम को हमी जीवन होंगे । कुछ मालूम हुआ है कि वहाँ मुंबई से सचिनदेव का नाम का एक बडा काबिल डॉक्टर आए हुए हैं । आप सचिन देवता से अपना च कब कर रहा है हूँ? ठीक है जैसी तुम्हारी मासी ऍम अगर तुम वहाँ चलने के लिए कहती हूँ तो मैं चाहूँगी रेटा सान्याल का चेहरा खेला था हैं

भाग - 09

हूँ अध्याय नहीं वो जीवन नरसिंहम के ओ पी डी सेक्शन में बना आठ बार दस का काफी बडा कमरा था । जहाँ डॉक्टरों वाला सफेद ओवरॉल पहने सचिन देवडा बैठा था उसके गले में स्थित इसको पडा था । नजदीक ही एक एक्सॅन था जिसकी स्क्रीन पर सफेद रोशनी बिखरी हुई थी । आप ले जाई तो बोल रहा हूँ फॅस वहीं बने एक सिपाही नुमा बिस्तर पर लेट गए । रीता सान्याल भी उसके साथ थी । सचिन देवरानी सबसे पहले हरियाणा गोंजाल्विस का ब्लड प्रशिक्षण किया तथा फिर उसका ऍम हूँ की ये बुखारे नहीं कल से है । फॅमिली एक क्षण के लिए भी नहीं होता है । सचिन देवरा ने बहुत धीमी हुंकार भरे आप अपनी जबान बाहर निकली फॅसने अपनी जबान बाहर निकले आप क्या अपने शरीर में कुछ बेचैनी सी महसूस कर रहे हैं । हाँ थोडी पीछे नहीं है भूख कैसे लग रही है पहले के मुकाबले कुछ काम है आना गुंजाल दस का धीमा स्वरूप इसीलिए कमजोरी भी कुछ बढी है जहाँ तक मैं समझती हूँ डॉक्टर पिछले कुछ दिन में ही उनका वजन काफी घट गया है । पीटर सानिया हुई तो तो काफी बडी चिंता की बात है । उसके अलावा ऍम कैसा था? हम बडा अजीब दर्द है जीता । सालाना आतंक क्रिकेट करते हुए बोली कभी हाथ में उठने लगता है, कभी पेट में तो कभी टाइम में और जब दर्द उठता है डॉक्टर तो ऐसा लगता है जैसे वो आज उनकी जान नहीं ले जाएगा । पसीना में बुरी तरह से लगभग हो जाती है । इनकी सांस जोर जोर से फूलने पिछडने लगती है । कभी कभी तो ये डर मन में समझ है कि कहीं नहीं वहाँ तक आठ हो चाहे हूॅं । सचिन देवडा के माथे पर भी असम की लकीरे उभर आई हो । ऍम क्या पहले भी कभी आप के साथ ऐसा हुआ है कि आपको भूख लगने बंद हो गई हूँ । सचिन देवरानी आॅफिस की तरफ देखा आपका वजन घटने लगा हुआ और आपको बुखार भी होने लगा । नहीं ऍम कार में है । पहले तो कभी मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ । सचिन देवनल सोच में टूट गया । आप बोलती लेट जाएंगे तो फिर बोला लिलियाना गोंजाल्वेस तिपाई नुमा बिस्तर पर उल्टी गए सचिन देवरानी स्थित इसको उसकी पीठ पर क्या फिर बोला आप जोर जोर से सांस लें । आना गुंजाल करने, जोर जोर से सांस सीरीज सचिन डेवलॅप से कुछ देर उसकी बॉडी चक्कर आ रहा हूँ । ठीक है सचिन देखना बोला आप उठ कर बैठ चाहिए । उसके बाद सचिनदेव खुद भी अपनी कुर्सी पर आकर बैठ गया था । लेकिन उसके चेहरे पर चिंता के भाव कम ना हो इन्हें क्या बीमारी है? डॉक्टर रीटर सान्याल भी बेहद बेचैनी से उसके सामने बैठे हुए आॅउट कर बैठ चुकी थी और उसकी बेचैन निगाहें भी उन्हें दोनों पार्टी की थी । देखिए एकदम से तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता कि इन्हें क्या बीमारी है । सचिन देवरा गंभीरता की प्रतिमूर्ति बना हुआ बोला लेकिन इनका ब्लाॅस्ट करवाना होगा । उसके बाद ही बीमारी के बारे में कुछ कहा जा सकेगा । अब ब्लाॅस्ट कहाँ होगा इसी नर्सिंग होम में होगा मैं लाख सैंपल लिया था सचिन देवरा ने । इंजेक्शन निकालकर हरियाणा फॅमिली इस दौरान रीटर सान्याल ने रोटरी क्लब के बैनर तले मौसी कैलिंग का अभियान बडे ही जोरों शोरों के साथ शुरू कर दिया था । वो लडकियों के ग्रुप के साथ हुआ के तमाम बडे बडे हॉस्पिटल तथा नर्सिंग होम्स में घूमी । वहाँ उसे ऐसे दर्जनों मरीज मिले जो भयंकर रोग से ग्रस्त थे । जिनकी मृत्यु हो चुकी थी और मेडिकल साइंस में भी अब उन का कोई इलाज नहीं था । वो पीडा से छटपटा रहे थे । वो सब मासी क्लीनिंग चाहते थे । उन्हीं मरीजों के शब्दों में अब मौत ही उनका एकमात्र हाल है । अगर उन्हें मौत मिल जाए तो ये उनके लिए सबसे सुखद क्षण होगा । कुछ डॉक्टरों ने भी रीता सान्याल की उस मौसी के लिए अभियान की खूब जोर शोर के साथ हिमायत की । मुझे उम्मीद भी नहीं थी आना के हमारे अभियान को शुरू में ही इतनी कामयाबी मिलेगी । ऍम के सामने बैठी बडी गर्मजोशी के साथ बोल रही थी हमारा मर्सी किलिंग का प्रचार जोर पकडता जा रहा है । गोवा के बडे बडे डॉक्टर हमारे अभियान में शामिल हो रहे हैं । इतना ही नहीं वह मरीज भी बडी तादाद में हमारे अभियान की हिमायत करते हैं । जो मर्सी किलिंग चाहते हैं । जो मारना चाहते हैं मुझे तुम्हारे ऊपर घर भेज देती हूँ । फॅसने भावविहल होकर पीटर सानिया का माथा छूट गया । मैं नहीं जानती थी कि तुम इतनी हो नहीं क्योंकि मेरा नाम यू पूरे गोवा में ऊंचाकर मासी किलिंग के बारे में आज से पहले कभी किसी ने गोवा में सोचा भी था और आज तो वो झंडा बुलंद किया है की उन थके हारे मरीजों की लडाई है ना लीटर सानिया जज्बाती होगी । बहुत दिन के लिए अब मुक्ति का मार्ग बन चुकी है । ऐसी हालत में अगर उन्हें मौत न देकर तडपने के लिए छोड देना चाहिए तो ये उनके साथ नाइनसाफी होगी । बूढा रहा उन दोनों की नजदीक आ कर बोला लेकिन मेरे एक बात समझ में नहीं आई थी । बाबा क्या आपने शुरुआत में ही इतना खतरनाक अभियान क्यों चुना? मौत का अभियान क्योंकि जो लोग बहुत की लडाई लडते बूटा राम उनका कलॅर बन जाता है । रीटर सानिया ले रखने का हो उसे उसकी आंखों में झांका और फिर वो बडे से बडे खतरे को झेलने की ताकत रखते हैं । हाँ जी मैं समझ गया बूटा राम हर बढाया और सब कुछ समझ गया तुम कुछ भी नहीं समझे बूटा राम रेटर सान्याल की आवाज और ज्यादा सख्त हो गए पढा तमाम जिंदगी समर्थक होगी ऍम थैंक्यू नेबू टायॅज अगर अंग्रेजी बोली नहीं जाती तो अंग्रेजी बोलते क्यों बस एक ही कम तरीके से करना चाहता है आना गुंजाइश हुए हैं । जासूसी उपन्यास पडेगा जैसे सुबह से शाम तक उपन्यास पडने के एक दिए जाओ बूटा राम पिता सामू लेकर वहां से चला गया तुम्हारा आजका और क्या क्या प्रोग्राम है आॅल हमें मर्सी किलिंग वाले ज्ञापन पर कुछ डॉक्टरों तथा मरीजों की सिग्नेचर करना है । आज शाम को हम तमाम लडकियाँ मिलकर विज्ञापन देने राज्यपाल के पास जाएंगे और उसके काफी भारत के राष्ट्रपति के पास के भेजेंगे ताकि मौसी के लिंग को कानूनी मान्यता दिलाने की दिशा में उचित पहल हो सके । इसके अलावा मर्सी किलिंग से सम्बंधित एक प्रेसनोट भी हम आज शाम को जारी करेंगे ताकि देश के बडे बडे अखबारों में मर्सी किलिंग से संबंधित खबरें छप सके । ऍम यानी पूरे अभियान पुत्तम बडे प्रीप्लांड ढंग से आगे बढा रही । क्यों नहीं आना रेट आसानी आदि मुस्कराई आखिर ये जूलिया बेटी किसकी आपकी आॅफ आपकी? सचिन देवडा के चेहरे पर उस क्षण गंभीरता कुछ ज्यादा गहरी होती हुई थी । चाॅद इसके साथ उसके सामने वाले फांसी पर रहते हुए बडे फॅमिली पूछा क्या कहना की रिपोर्ट ऍम हम यहाँ सचिन देवता का शीर्षक सवार हो गया । रिपोर्ट आ गई है लेकिन लेकिन क्या जॅानर के चेहरे पडेगा एक घबराहट की भावना है । मैं आपसे अकेले में बात करना चाहता हूँ ऍम उसके दिमाग पर वज्र की तरह के रहे । आखिर वहाँ क्या है? तो आप आप मेरे सामने क्यों नहीं बताया? अरे नहीं नहीं ज्यादा परेशान होने की बात नहीं है । मेरे रिपोर्ट में क्या आया है आपकी प्लाॅट कुल क्योंकि है ना नाॅन लिया से अकेले में कोई और बात पूछना चाहता हूँ आप ले थोडी देर नहीं बैठे फॅमिली या भी आती है लेकिन ऍम सचिनदेव अपने हाथ में ब्लड रिपोर्ट लेकर किसी से खा रहा हूँ । उसके साथ साथ लीटर सान्याल भी इस तरह कुर्सी छोड के खडी हुई मानव से कुर्सी से खडे होना बहुत भारी पड रहा है । उस क्षण वो एक्सॅन मुझे लडकी की बडी लाजवाब एक्टिंग कर रहे थे तो दोनों बराबर वाले कमरे की तरफ बढते हैं । सचिन देवरानी शक कुछ और बढाने के लिए एक चाहिए चली की दरवाजे के दोनों पालने भी आपस में मिला नहीं है । इस समय सचिन देवरा और रीता सान्याल कमरे के अंदर लेकिन वो दोनों जानते थे लेडी आना । गोंजाल्विस दरवाजे से कम लगाए बाहर ही खडी है तथा उनकी एक एक बात सुनने की कोशिश कर रही दरवाजे की निचली झंजी में से झांकते उनके पैर साफ नजर आ रहे हैं । आखिर बहुत क्या है? डॉक्टर रीता सानिया ने बडी घबराये आवास में पूछा आप मुझसे अकेले में क्या बात करना चाहते हैं? आॅउट ठीक है ना? ब्लड रिपोर्ट ही तो ठीक नहीं आई हैं । जो लिया सचिनदेव ना इतने ऊंचे स्वर में बोला जो आना गोंजाल्वेस उसके वह सब स्पष्ट समझ सके । रिपोर्ट के बारे में ही बात करने के लिए मैं तुम्हें हाली कर रहा हूँ कि क्या हो गया । हालांकि रीता सानिया ने अपनी आवाज में और ज्यादा घबराहट बैठा की शांति रखो मैं तो मैं सब कुछ बताता हूँ । ये देख उनके ब्लड में टीएलसी बहुत बढे हुए हैं । उनकी संख्या लगभग अस्सी हजार तक पहुंच चुकी है । किसी के ब्लड में इतने टीएलसी का बढ जाना बहुत खतरनाक होता है । इसके अलावा आना के बाद में इनमें चाॅस की संख्या भी काफी बढ गई है । सचिन देखा बोला और एच बी की संख्या काफी कम हो गई है । अब अपना दिल थाम हूँ मैं तुम्हें आना के बारे में एक बहुत ही खतरनाक खबर सुनने जा रहा हूँ । कैसी खतरनाक खबर खाना को ब्लड कैंसर हो चुका है । फॅमिली ऍम बहुत जोर से चीज ऍम तुम्हारी ठीक अगर आना सुनेगी तो उन्हें बहुत कष्ट होगा । ऐसा नहीं हो सकता हूँ । ऍम बिलकुल बच्चों की तरह फूट फूटकर होने लगे । ऐसा नहीं हो सकता हूँ । मेरी आॅफर हो चुका है । सचिन ऍम अब तुम्हें इस हकीकत का सामना करना ही होगा । मैं हो गया अलबत्ता उन्हें कौन सी स्टेज का कैंसर है ये चेक करने के लिए । अभी मैंने उन्हें यही नर्सिंग होम में कुछ और टेस्ट करवाने के लिए बोला है ये चेक करने के लिए । अभी मैंने उनकी यही नर्सिंग होम में कुछ और टेस्ट करने होंगे तो उन्होंने कल यहां लेकर आऊँ डीटा सानिया फूट फूटकर होती नहीं की हिम्मत से काम हो, सचिनदेव खोला और बाहर चलो आना को बिलकुल शक नहीं होना चाहिए कि उन्हें ब्लाक कैंसर हो चुका है । अगर उन्हें जरा भी अपनी बीमारी की भनक मिल गई तो वह समय से पहले ही मर जाएंगे । नहीं नहीं है मैं डाॅ पूछते हैं तो मैं आपको मरने नहीं क्योंकि नहीं काफी देर बाद वो अपने आप को नियंत्रित कर सकें । फिर वो दोनों कमरे से बाहर निकले तो ली डियाना गोंजाल्विस उसी कुर्सी पर बैठी थी जिस कुर्सी पर वो उसे बैठाकर छोड गए थे । इस समय उसका चेहरा बिल्कुल भाव रहे था । कार्यवृत्त गति के साथ दौर से हुई आना । पालस में जाकर उसके बाद ऍम बिल्कुल साथ साथ नीचे उतरे । सारे रास्ते आना गोंजाल्वेस प्रतिमा पनीर रही थी एकदम मगर फॅस में पहुंचते ही वह छुपना रह सके । डॉक्टर क्या कह रहा था अब कुछ नहीं रिकॅार्ड हुई हुई बीमारी के संबंध में ही कुछ सवाल पूछ रहा था । लेकिन इसके लिए उसे अकेले में बात करने की क्या जरूरत थी । हम मालूम नहीं उसने ऐसा क्यों किया? बहरहाल आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है ना? अब बिलकुल ठीक है । वो सब कहने के बाद हीटर सानिया ने ऐसा प्रदर्शन किया जैसे उसकी बडी तेज रुलाई फूट ने वाली हूँ । वो दोनों हथेलियों में अपना मुझे पाकर अन्दर की तरफ भाग कर चले गए । उस क्षण िरयाणा गोंजाल्विस के आंखों में भी आंसू की नहीं लगी । पूर्ण देखो मिलाओ उसका दिल भी चाहा वो लडकियों से तो नहीं? सचिन देवडा नर्सिंग होम में आते जाते समय बहुत सावधान रहता था और खास तौर पर इस बात के ऊपर उसकी निगाह रहती थी कि कोई उसका पीछा तो नहीं कर रहा है । कुछ दिन बडी अमन शांति नहीं लेकिन एक दिन जब नर्सिंग होम से वापस लौट रहा था और ओल्ड गोवा के तट पर खडे एक स्टीमर पर चढ रहा था तभी का एक उसकी निगाह फिर सिंधी टोपी लगाए उस आदमी पर पडी जो ऊषा का कथित सहयोगी था और ऊषा के शब्दों में उसका पिता था । सचिन देवडा तुरंत चौकन्ना हो गया । उसने ऐसा शो क्या जैसे किरपाराम मूलचंदानी पर उसकी नजर न पडी हूँ । उसने कनखियों से देखा किरपाराम मूलचंदानी अब लाल रंग के एक दूसरे स्टीमर पर चढ रहा था । जल्दी ही दोनों स्टीमरों केंद्र कर रहे थे और समुद्र की छाती को चीरकर तेज गति के साथ आगे बढे । सचिन देवता को सिंधी शब्द से ही कोई ॅ आदमी लगा जरूर वाॅटर सान्याल की पूरी प्लानिंग सेवा था जरूर मुंबई में उषा को भी उसी ने उसके साथ जानबूझकर सेट किया था । जरूर वो जानता था वो लोग गोवा में रहकर क्या कर रहे हैं । सचिन देवरा ने उस सिंधी के बारे में जितना सोचा उतना ही वह ज्यादा खतरनाक का काम बहुत कैसे लसूडे की तरह उस की एक एक गतिविधि पर नजर रखे । शीघ्र ही स्टीमर मीठा मार बील पर जाकर रखा और फिर उसमें से सवारियां उतर नहीं । सचिन देवता भी स्टीमर से नीचे हुआ । आज पूरी तरह सिंधी पर नजर रखे था । लेकिन साथ ही वह इस बात की भी एहतियात बरत रहा था कि सिंधी को उसके ऊपर शक ना होने पाए । सचिन देवरापानी पर चलता हुआ आगे रिक्शा स्थान के नजदीक हो अच्छा वहाँ से वो रोजाना रिक्शा पकडता था और फिर उसी में बैठकर कॅश जाता था । उस दिन भी उसमें ऍम रिक्शा हूँ । फिर वो रिक्शा रोजाना की भांति अपने रूम पर आगे बढ गया । सचिन देवरानी देखा उस सिंधी का ध्यान अब उसकी तरफ बिल्कुल था और वह फुटपाथ पर पैदल ही आगे चला जा रहा था । थोडा आगे गली में जाकर सचिन देवरानी भी रिक्शा छोड दिया । फिर तेजी से उसी तरह लग का जिधर सिंधी जा रहा था । आज तक सिम भी उसका पीछा करता था । लेकिन आज सचिन देवरानी फैसला किया हुआ था कि वो सिंधी का पीछा करेगा वो देखेगा की ये कहाँ रहता है । सिंधी को ये बात खास ख्याल में भी नहीं पता था कि बकरा भी उसका पीछा कर सकता है । वो बिल्कुल निश्चिंत अवस्था में आगे बढा जा रहा था । दूसरी पोजिशन में अपनी कॉटेज तक पहुंच गया । तब ही घटना घटी । ऊषा की वजह से घटना घटी । दरअसल ऊषा उस समय कॉटेज की छत पर कपडे सुखा रही थी जब एक का एक उसकी नहीं कहा । उसी तरफ आती किरपाराम मूलचंदानी पर पडी और तभी उसने सचिन देवता को भी देखा जो बडी सावधानी के साथ किरपाराम के पीछे पीछे चला रहा था । जब की किरपा राम को उसकी खराब ही भनक थी । पूछा तुरंत आनन फानन दौडती थी नीचे पहुंची और उसने कॉटेज का दरवाजा खोला तब तक किलपारा मूलचंदानी भी वहां पहुंच चुका था । उसने तत्काल किरपाराम मूलचंदानी का हाथ पकडकर अंदर घसीट लिया और फिर बेहद आतंकी व्यवस्था में दरवाजे के अंदर से सिर्फ हो पानी क्या हुआ नहीं किरपाराम हर बढा बडी क्यों बंदूक से छोटी गोली बन रही है । नहीं तुम्हें पता भी है कुछ की तरफ बकरा तुम्हारे पीछे पीछे यहाँ तक आ गया वहाँ कि क्या कहते हैं फिर पर हम मूलचंदानी का दिल दहला । मैं बिल्कुल ठीक हूँ । छत पर खडी थी । मैंने खुद उसे अपनी आंखों से तुम्हारा पीछा करते देखा और पुनीश कसम झूले लाल की ये तो बडी डेंजर न्यूज पेपर मूलचंदानी भयभीत हो । फिर उसने जल्दी से दरवाजे किसी के लिए वापस गिराए । दरवाजे के पालने के बीच झाँसी पैदा की और डरते डरते बाहर झांका । बाहर बगराना था । फिर उसमें सारा का सारा दरवाजा खुल गया । वहाँ नहीं उसके पीछे पीछे ऊषा भी नहीं । बकरी का दूध दूर तक नहीं बताना था । उसी रात रीता सान्याल और सचिन देवडा के बीच फिर एक दुख मुलाकात हूँ । सबसे पहले उन्होंने मुगल मुन्ना की बोतल खोली तथा ॅ पीते ही उनकी तबियत झूमती । मैं समझती हूँ हमारी प्लानिंग बडे ही संतोष जनक अंदाज में आगे बढ रही है । रीता सानिया अपने तथा सचिन देवडा के लिए एक एक बैंक बनाते हुए अब वो दिन दूर नहीं सचिन जब बहुत जाॅब्स की मेरे हाथों मौत हो जाएगी जब उसकी सारी दौलत पर हम दोनों काबिज होंगे बल्कि आना गोंजाल्विस की मौत होती मैंने एक प्लान और अभी से सोच लिया क्या पहले उसके अंदर मेरे लिए सबसे बडी खतरे की घंटी है? बूटा सबसे पहले तो मैं उसी का पत्ता साफ करेंगे क्या? क्या तुम उसे भी महान डालों की सचिन देवरा के शरीर में खौफ की लहर दौडे हूँ । नहीं रिकाॅल, बहुत जोर से खिलखिलाकर फॅस की की दो घुट और लगाए । मैं उसे मारूंगी नहीं दिया बल्कि कोई ड्रामा रचकर उसे नौकरी से निकाल दूंगी और इस तरह नौकरी से निकाल लेंगे । चलो फिर कभी आना । पाल इसके अंदर कदम नहीं रख सके । बहरहाल मोटा राम के जाते ही पालस पर पूरी तरह से मेरा कपडा होगा । मैं वहाँ आजाद होगी और उसके बाद मैं एक ग्रुप साल और चलेंगे । क्या मैं तुम्हारे साथ अमेरिका चली चाहूंगी और नोटों के बलबूते पर तुम्हारे चेहरे की प्लास्टिक सच में भी करा दूँगा । तुम्हें भी एक नई शक्ल के साथ साथ एक नया जीवन मिल जाएगा । तुम्हारा भी नया नाम होगा नहीं पहचान होगी और जब हम दोनों अमेरिका से लौटेंगे तो पति पत्नी बनकर लौटेंगे फॅस में आनंद के साथ रहेंगे जिंदगी की सारी अहम भोगेंगे ब्लॅक सचिन देवडा की आंखों में विलक्षण चमक कौन थी? हाँ नहीं तो जब भी सोच कॅश लाजवाब सोचती हूँ । रीता सान्याल फिर जोर से खिलखिला उसने विस्की के दो टूटा था सच बात तो ये है डाले सचिनदेव राजस् पाती हूँ मैं भी लुका छुपी का ये खेल खेलते खेलते तंग आ चुका हूँ । अब मैं भी डॉक्टर सचिन दिव्या नाम के इस लेवल को मुकम्मल तौर पर अपनी पर्सनालिटी के ऊपर से खुरच देना चाहता हूँ । अगर मैं खुद अपने चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी कर सकता तो कब का ये काम कर चुका था । चिंता मत कर गया । बहुजन तो भारी, ये छापे पूरन हो जाएगी । सचिन देवडा ने उत्साह वर्ष अपना पहले एक ही घूंट में खाली कर दिया । बीटा सानिया और की बातों से वो खुश हुआ था । कोई और खास खबर फॅमिली एक खास खबर और है क्या ऊषा के बारे में उसकी कथित सिंधी पिता या फिर कथित सिंधी यार के बारे में कैसी खबर? वो दोनों अभी भी पूरी तरह हमारी तो हमें लगे हुए । सचिनदेव आज भी जब मैं नर्सिंग होम से वापस लौट रहा था तो सिंधी भर से नहीं मेरा पीछा किया हूँ । डीटा सानिया परेशान हूँ । लेकिन आज मैंने भी उस पत्ते के खिलाफ एक दांव खेला । कैसा था फायर? पर उतरने तक तो उस ने मेरा पीछा किया, लेकिन पार्टी से जब आपने दिशा में अलग जाने लगा तो मैंने उसका पीछा शुरू कर दिया और मैं जल्दी ये पता लगाने में कामयाब रहा कि वो सिर्फ भी भैंसा अपनी उस बर्फ सात फुट डैडी के साथ कि भट्ट है किधर किधर दे रहा था । यही मीठा मार बीच पर क्या था? एक चर्च के बराबर वाली रोड पर कुछ पुर्तगाली अंदाज में कॉलेज बने हुए हैं । उन्हीं में से एक ऑफिस में वो दोनों ठहरे । क्या ॅ के दिमाग में बम फटा? ये चर्च तो आना पारस के बिल्कुल करीब में यहाँ और उन दोनों का कॉलेज भी पैलेस के करीब में है । भीतर सानिया हक्की बक्की रह गई

भाग - 10

अध्याय दास शानदार भरो । आज बहुत खुशगवार मूर्ति थी और वो इस समय सडक पर महात्मा स्टायरिंग नहीं । बार बार उसकी आंखों के गिरते सचिन देवता का चेहरा घूम जाता । सचिन देवडा के साथ उसने जो सेक्स का आनंद होगा था उसे भुलाए नहीं भूल रहा था । उसकी जांघों की मछलियां कमाल की थी और सेक्स के चर्मोत्कर्ष पर पहुंचकर अपने अंदर से बाहर निकलने वाले लावे को रोकने में । तो सचिन देवडा कुमार महारत हासिल थी । वो उस रात को जितना याद करती उतनी ही उसकी सांसे धडक धडक चाहती । चार । यही वजह थे शांत रिबेरो । आज रात होते ही फिर सचिन देवता कि तरफ और चले आज उसके दिमाग में एक बडा खुराफाती खयाल और जन्म ले रहा था । दरअसल सचिनदेव राजस् कॉटेज में ठहरा था । उस कॉलेज में पिछली तरफ से घुसने का एक बडा गुप्त रास्ता था । पिछली साइड में लोहे के लम्बे लम्बे स्त्रियों का एक काफी बडा जंगला लगा हुआ था । वास्तव में वही जंगला एक दरवाजा था । उसमें एक स्प्रिंग लॉक लगा था जो अंदर बाहर दोनों साइड से खुलता था । लॉक खुलते ही लोहे के लम्बे लम्बे सरियों वाला वो जंगला भी चौखट सहित किसी दरवाजे की तरह खुल जाता है । सबसे बडी बात ये थी कि उस वक्त रास्ते के बारे में सिर्फ शांत रहे बहनों को खबर थी और उस ऍफ की दिमाग में आज ही खुराफाती खराब जन्म ले रहा था कि वह उसी गुप्त रास्ते से कॉन्टेक्ट में घुसेगी तथा फिर सचिन देवडा के ऊपर एकदम से हमलापुर कर उसे हैरान करते थे । आज पांच लाख मेकिंग के बडे बडे आना विचार उसके दिमाग में मंडरा रहे थे । आज खूब खुलकर खेलने के मूड में थी । पास्ट राइडिंग करते हुए ही शांत राॅकी बाद में से एक ट्रिपल फाइव की सिगरेट निकालकर होटल से चिपका ली । फिर उसे स्टेयरिंग संभालते संभालते लाइटर से सुनता है । जब ज्यादा मूड में होती थी तो स्मोकिंग नहीं करती थी और आज वो स्मोकिंग के मूड में थी । उसने सिगरेट का धुआं छलने बना बनाकर अपने मुंह में से निकाला । कार की स्पीड और बढा है आपका बिल्कुल ही हवा से बातें कर मिलेंगे । जल्दी काॅस्ट गहरा सन्नाटा था । शांत रिबैरो नीचे उतरी और जंगली की तरह पढेगा जल्दी ही उसने चाबी के द्वारा जंगली काॅल डाला । जंगली की चौखट के नीचे वाले पुष्टि में स्प्रिंग ला कुछ इस अंदाज में फिट था की एक आए किसी बात का अंदाजा नहीं होता था कि वहाँ पुष्टि में कोई स्प्रिंग लॉक भी लगा हुआ है और यही कलाकार थे । स्प्रिंग खुलते ही शांत ने बहनों ने जंगला अन्दर की तरफ धकेल दिया । तत्काल चौखट सहित सर सर आता हुआ खुलता है । शांत रिबैरो चालाक लोमडी की तरह अंदर होगी । आपकी हल्की आवाज हुई । फिर उसने जंगला वापस दीवार के प्रेम के साथ आया था । उसके बाद सिगरेट के गोल गोल छलने बनाते हुई कॉलेज में अन्दर की तरफ बढती चली गई । वो नहीं जानती थी आज क्या होने वाला है । बाउंड्रीवॉल से घिरा काफी बडा लॉन पार करके वो कॉलेज के अंदर दाखिल हुए और कॉलेज में दाखिल होते ही वो ठीक है । अंदर से सचिन देवडा के साथ साथ किसी लडकी से बात करने की आवाज भी आ रही थी । लडकी वहाँ और कौन लडकियाँ गई? क्या सचिन देवडा कोई कॉल कर ले आया था तो वो ऐसा नहीं लगता था । शांत रिबैरो ने सिगरेट नीचे फेंक दी तथा फिर ऊंची ही वाली बाली से उसे रगडकर बुझाया । फिर कुछ कदम और आगे बढे तथा अंदर से आ रही आवाजों को ध्यान से सुनने लगी । अगले पल वासन रह गई अंदर लुधियाना गोंजाल्विस को मार डालने की, पर इस जबर्दस्त प्लानिंग बिछाई जा रही थी । जैसे जैसे शांत रिबैरो ने वो प्लानिंग सुनी वैसे वैसे उसके पैरों के नीचे से जमीन सकती चली गईं । शानदार एब्रो का दिमाग सही समय करके भरना नहीं लगा । वो एकदम हर बढाते हुई पलटी तथा उसने वहाँ से भाग जाना चाहते हैं । उसी क्षण तो पीछे रखेगा टेबल के साथ ऍम करनी फॅमिली ऍम वहाँ की तरफ ॅ तेजी से भागे परंतु तभी सचिनदेव ऍम भी दौडते हुए वहाँ उसी क्षण शांत हो फिर बौखलाहट में दरवाजे के साथ बुरी तरह टकराई ही नहीं थे और सचिन देवरा ने उसे पकाया मैडम आप सचिन देवता के दिमाग में जोर से बिजली गडबडाई आप थोडा मुझे शांत ऍम देवता को धकेलकर उससे अलग हो गई अब लेकिन मैं नहीं जानती थी सचिन देवडा शांत फॅमिली नागिन की तरफ अबकारी की तुम इतने खतरनाक आदमी हूँ तो क्रिमिनल हो मैं तुम्हें शरीफ अभी समझ बैठी थी । आप मुझे अभी भी गलत समझ रही है । मैडम सचिन देखना उसकी तरह पर नहीं शांत होती थी । उसने जोर जोर से अंतरिक्षविदों की तरह खिला मुझे ऍम मुझे तुम्हारे अंदर से खून की बुआ आ रही है । मेरा भी यहाँ से सीधे लेडी आना गुंजाल उसके पास जाउंगी । मैं उन्हें चीख चीखकर बताउंगी की तुम लोग उनके खिलाफ क्या षड्यंत्र चाहे वो तो शायद पागल हो गई हूँ । रीता सानिया भी अब गुस्से से चल रहा है तो मैं शायद मालूम नहीं कि तू क्या बकवास कर रही हूँ । मुझे सब मालूम है शांत रिबैरो आसन भरे नेत्रों से उन दोनों को देखते हुए पीछे हटते चली गई । मैं सब जानती हूँ मैं आना के पास जा रही हूँ मैं अभी बाल इसमें जा रही हूँ । उसके बाद शाम का ऍम पडे । अप्रत्याशित ढंग से पलटी और पलट दही द्रुतगति के साथ वहाँ से भाग साॅस रिकाॅल गला फाडकर दहार्इ ऍम पढाई की जबकि में हमारी सारी मेहनत पर पानी फेर देगी । सचिन देवरा बंदूक से निकली गोली की तरह उसके पीछे फॅमिली झपकी लेकिन शांत है । पहले पहले विमान ऊपर हो चुके थे । वो तूफानी गति के साथ दौडी चली जा रही थी । सचिन देवता को जब एक कुछ नहीं सूझा तो उसने भागते भागते कॉलेज के गलियारे में ही रखा । पीटर का फूदान उठाया और उसे बडे जोर से शांत रिबैरो के ऊपर ही करते । हमारा पीटर का पूरा भरा से शाम परिवारों की खोपडी पर्चा खडा था वही है किस तरह पहाडी जैसे हालत होती समय कोई बकरा टकराया हूँ । उसके दोनों हासिल की तरह थी । उसने दोनों हाथों से अपना सिर कसकर पकडा तथा फिर भी मुझे नाम से स्पष्ट करके गिरते ही वो ढेर हो गए । हाँ इससे क्या हुआ? ऍम लगता ही बेहोश हो गए । तब तक सचिन लेना दौडता हुआ शांत दीवारों के पास पहुंच गया था । उसने शांत रिवर को सीधा किया । वह चौका उसके नाक और मुंह से बहुत होना रहा था । ऐसा लगता था फूलदान की वजह से उसके सिर में कोई घूम चोट आई थी । सचिन देवरा ने उसकी नाॅट हुई । फिर हडबडाकर उसकी हार बीच चक्की क्या ऍम सचिन देवता कि मुझे ठीक नहीं थी । ये तो मर चुकी है । फॅमिली उसने भी शांत रिवेरो के नजदीक पहुंचकर उसकी फॅमिली उसकी हार बीतेगी । वाकई मर चुकी थी । उन दोनों के बीच अब सफलता दहशत फैलती चली गई । हालांकि डॅालर सचिन देवरा आज तक कई मास्टर कर चुके थे । लेकिन शांत में भैरो की उस बेहद अकस्मात बेहद अप्रत्याशित ढंग से हुई मौत में उन दोनों को ही बुरी तरह झिंझोडा । उन दोनों के शरीर का एक एक रूम खडा हो गया । ये ये ठीक नहीं हुआ । फॅालो माल निकालकर अपने चेहरे पर छलछलाता आया । ढेर सारा पसीना साफ करते हुए बोली शांत है शहरों की ये मौत हमारे लिए कोई बडा फसा पैदा कर सकती है लेकिन तो मैं उसके सर पर इतनी जोर से प्रहार नहीं करना चाहिए था । रीता सान्याल हर पढाई अब मुझे थोडी मालूम था कि जंगली शहनी की तरह चाकचौबंद नजर आने वाले ये शांत रिबैरो कागज की गुडिया निकलेगी रेट का ढेर निकलेगी तो एक ही बार में धराशायी हो जाएगा । फिर भी और मेरे जो कुछ भी किया सचिन फॅमिली प्लानिंग की भलाई के लिए क्या अगर ये आना पालस में पहुंच जाती है बहुत ज्यादा बडा हंगामा खडा हो जाना था । रीता सानिया के चेहरे पर भी चेन्नई के भाव उस क्षण उसका माइंड अभी अब सकता मुश्किल अभी भी हमारे सामने कुछ काम नहीं पीता । सानिया और विचलित मुद्रा में बोले अगर शांत रिबैरो की इस मौत का राज खुल गया तो हमारी सारी प्लानिंग पर पानी भर जाएगा । यहाँ गोवा में आकर हमने जितनी मेहनत की है वो सब बेकार हो जाएगी । तो अब हम क्या करें? सचिन देवडा के शरीर में झुरझुरी दौरे कुछ ना कुछ तो हमें करना ही होगा । मगर क्या कुछ सोचने दो रीटर सानिया वापस कमरे में आकर बैठ गई । फिर उसने अपने लिए विस्की ऍफ बनाया और उसे गाॅव चली गई । सचिन देवता का दिमाग भी उस क्षण काफी तेज पीछे दौड रहा था जबकि शानदार इधर अखिेलश अभी भी यथास्थान पडी थी । मैं सांसद से छुटकारा पाने का एक आईडिया बताया था । तभी सचिन देवडा कौतूहलता पूर्वक बोला कैसा आइडिया सीट आसानी अभी हालत हो क्यों ना हम शांत राॅकी लाश को यही पीछे लॉन में दफनाती । सचिन देवरा गर्मजोशी के साथ बोला किसी को पता भी नहीं चलेगा । शांत रिबैरो कहाँ गई? शांत भरो का क्या हुआ? अच्छा और बाहर घर एक कार का क्या करोगे? कब कार को कहीं छोड आएंगे किसी निर्जन स्थल पर नहीं पीता । सान्याल की गर्दन तत्काल इनकार की सूरत नहीं, नहीं ये ये उचित नहीं होगा । क्यों अच्छा नहीं होगा क्योंकि शांत रिवेरो कार में से गायब पाई जाएगी तो वहाँ पुलिस शांत दोपहर को तलाशेगी । उसकी बडे पैमाने पर खोजबीन होगी और उस खोजबीन के दौरान देर सवेर शानदारी बच्चों की मौत का राज खुल सकता है । सचिन उसकी लाश लोन में से बरामद हो सकती और यही मैं नहीं चाहती । हमें कुछ ऐसा करना होगा जो शांत रिबेरो हमेशा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा । लेकिन ये ये कैसे मुमकिन है? हमें शांत रे बहनों का आठ सौ प्लान करना होगा । एक का एक लीटर सोनिया ने धमाका स कर दिया । ऍम फिर हीटर सामने । आज सचिन निधडक अपनी पूरी प्लानिंग समझाते चले गए । सचिन देवडा के आंखों में भी अब धीरे धीरे जुगनू जब मकानें लगे फिर दोनों तेजी से आते हो गए थे । उन्होंने सबसे पहले शानदारी वालों की लाश को गलियारे में से उठाया और उसे बिल्कुल दुरुस्त क्या शानदार एब्रो की मुंह और नाक में से जो खून निकला था वो थोडी देर में जम चुका था । रीता सान्याल ने उसके चेहरे पर जमा खून गीले कपडे से साफ किया तथा फिर गलियारे में मौजूद खून के धब्बे भी मिठाई मैं जहाँ तक समझती हूँ ये शांत रिबैरो कॉटेज में पिछली तरफ से दाखिल हुई थी । फिर हीटर सान्याल सचिन देवडा से संबोधित हुई क्योंकि अगर ये मेन गेट से दाखिल होती तो हमें खबर होती है लेकिन पीछे से कॉन्टेक्ट में दाखिल होने का तो कोई भी रास्ता नहीं । सचिन दिन थोडा अचरज पूर्वक बोला कोई न कोई रास्ता जरूर होगा । रीटर सान्याल का दृढ स्वर्ग हो जाए ये बात अलग है । तुम्हें उस रास्ते की खबर नहीं लेकिन तुम ऍम विश्वासपूर्वक बोली तुम्हें वहाँ कोई ना कोई रास्ता जरूर मिलेगा और वहीं शानदारी दरों की कार भी खडी होगी । ठीक है अगर तुम कहती हो तो मैं जाकर देखता हूँ । सचिन देगा लंबे लंबे डग भरता हूँ कॉलेज में पीछे की तरफ बढ गया । हालांकि वो इस बात के प्रति आशंकित था कि उसे वहाँ कोई रास्ता मिलेगा परन्तु सचिन देवडा जितने लंबे लंबे डग रखता हुआ पीछे की तरफ गया था उतनी ही तेजी के साथ उसकी वापसी हुआ । दरअसल पीछे लॉन में पहुंच गए । इत्तेफाक से ही सचिन देवडा की नजर उस जंगले पर पड गई जो कॉलेज में आने जाने का गुप्त रास्ता था और जो किसी दरवाजे की तरह खुल जाता था । उस जंगले पर निगाह पडने के पीछे भी खास वजह थी । दरअसल शांत रेवेरोल जब कॉलेज में दाखिल हुई थी तो वह जल्दबाजी में उस जंगल को दीवार के प्रेम के साथ पूरी तरह मिलाना सके । वो थोडा अपनी जगह से हटा रहेगा । इसी कारण सचिनदेव ना जैसे पीछे लॉन में पहुंचा । तुरंत उसकी निगाह उस जंगली पर पडी और वह तक का सारा माजरा भाग गया । फिर सचिन देवरानी चला खोलकर वहाँ का बाहर उसे शांत रिवेरो की कार भी खडी नजर आई । वो तक का दौडा दौडा वापस वीटा सानिया के पास है । रिकॅार्ड तक शानदारी बहनों की लाश को उठाकर वापस सोफे पर लेता चुकी थी । उसने शांत राॅक इलाज का में कभी इस बीच थोडा ठीक कर दिया था और अब शांत रे बहनों को देखकर एक कोई नहीं कह सकता था कि वह मर चुकी है । तुम्हारा आइडिया बिल्कुल ठीक था । सचिन देवरा वहाँ आते बोला कॉलेज में पीछे की तरफ सचमुच एक एक गुप्त रास्ता है । वही शांत भरो की कार भी खडी है और ऍम तो फिर धीरे कर जल्दी से शानदारी बहनों की लाश उठाने में मेरी मदद कर सचिन देवरानी तुरंत आगे बढकर शांत रे पैरों के दोनों पहर पकड ली है । जबकि रीता सान्याल ने उसका कमर वाला हिस्सा पका लिया था । फिर वो दोनों से उसी तरह उठाये उठाये पीछे लॉन की तरफ बढे । सबसे पहले रीता सान्याल जंगले में से बाहर ली थी । उसके बाद उसी जंगले में से शांत रिबैरो की लाश को बाहर खींचा गया तथा फिर सचिन देवडा भी बाहर निकला । जंगल अच्छी तरह से बंद कर तो जीता सानिया रहेगा देते हुए बोली सचिन देवरा ने जंगला अच्छी तरह से कसकर बंद कर दिया । फिर वो दोनों शांत रिबैरो की लाश को उठाकर कार के अंदर लेकर कार में पहुंचते ही रीता सान्याल ने शांत रिवेरो की लाश को ड्राइविंग सीट पर इस तरह बिठा दिया मानो ड्राइविंग वही कर रही हूँ । उसमें शांत रिबैरो के दोनों हाथ फॅमिली पार्टी कहती है ये ही क्या कर रही हूँ । सचिन देवडा के आंख में आश्चर्य के भाव नमूदार हुए देखते जाओ मैं क्या कह रही हूँ । फिर रीता सानिया लेकार की छत में लगी डूम लाइफ भी चलाती । फौरन पूरी कार में डोम लाइफ का प्रकाश बिखर गया । अभी लाइट किस लिए ताकि जब कार सडक पर चले फॅमिली तो आते जाते लोग भलीभांति देख सकेंगे । कान के अंदर शांत रह ही मौजूद है, अकेली मौजूद हैं और वो खुद ही खान ट्राइ कर रही है । भाषा है सचिन देवडा इसमें पूर्व बोला जब कार के अन्दर शांत राॅकी में मौजूद होगी तो फिर कहाँ कैसे चलेगी? कार भी चलेगी तुम करिश्मा देखते जाओ । शांत लेबरों को ड्राइविंग सीट पर भलीभांति बिठाने के बाद रीता सानिया खुद उसके नीचे पायदान पर बैठ गई और उसने भी कार का स्टेयरिंग पकडेंगे । फिर उसी तरह उसने सचिन देवता को भी नीचे कार के पायदान पर बैठे मिलेगा । सचिन देवडा भी उसके बराबर में पायदान पर बैठकर सचिन देवडा के बैठे ऍम तत्काल बुखार बंदूक से छोटी गोली की तरह ही क्यों कर रही हूँ सचिन डेवलॅप हो जाएगा, नहीं होगा ऍम रीता सान्याल ने अब अपनी गर्दन बस थोडी सी ऊपर कहीं जो सामने साथ ही वाहनों को देख सके । लेकिन जैसे ही कोई वाहनों से सामने से आता दिखाई पडता तो वह फौरन अपनी गर्दन नीचे पहले थी । वाहन सराटे के साथ उसके बराबर में से पढाई है । ऐसी हालत में अब कोई भी उसका को देखता तो यही समझता की उसका के अंदर अकेली शानदारी पैरों है तथा वही कार ड्राइव कर रही है । काफी देर तक सडक पर भर्ती स्पीड से दोस्ती नहीं जबकि रीडर सान्याल की फास्ट राइडिंग के कारण सचिन देवडा विचान हालत में बाजी हुई थी । मीठा मार बीच पर ही काफी दूर ले जाकर ऍम वहाँ दूर दूर तक सुनना था । अब क्या करोगे? कब फाइनल गेम खेलूंगी लेकिन उससे पहले तुम कार से नहीं होता हूँ । अब मगर हरी आप फॅमिली जल्दी करो हमारे पास ज्यादा समय नहीं है । सचिन देवडा साइड डोर खुलकर तुरंत कार से नीचे उतर गया । उसी क्षण कार का इंजन बहुत जोर से हूँ । वो कार बम वर्षक विमान की तरफ बहुत हाई स्पीड के साथ सडक पर ऍम सचिन देना चाहिए है । ये क्या कर रहे हो? लेकिन कहाँ? तब तक तूफान मेल बन चुकी थी । वो तो सबसे छोटे गोले की तरह सडक पर भाग ही जा रहे हैं । फिर ऐसा लगा जैसे उसके ब्रेक फेल हो गए ऍम सचिन देवरानी दहशत नाॅक उस क्षण सामने चौराहा चौराहे पर पुलिस का बीस ऍम कार बडी प्रचंड ध्वनि के साथ ऍम टकराव ही वो कुछ उसी क्षण सचिन देना नहीं उसका का दरवाजा रुपये तथा किसी को बाहर छलांग लगाते हुए देखा । तब ये एक अप्रत्याशित घटना और घट काम का पेट्रोल ऍम भाग गया । तुरंत पूरी कार्ड दूधु करके चलूँ सचिन देवडा बदहवास उनकी तरह दौडता हुआ रहेगा । सानिया के नजदीक पहुंचा ऍम रिकाॅल अपने कपडे झाडती हुई सडक से जम्प लेकर थी मैं बिल्कुल ठीक हूँ कार में से अभी भी धूत होकर के आपके शोले उठ रहे थे तो हिस्सा खत्म । फिर एक्टर सान्याल ने कार को जलता देखकर राहत की सांस और शांत रे बहन की मौत की कभी कोई बखिया नहीं रहेगी सचमुच तुम्हारा जवाब नहीं था । सचिन देवरानी प्रशंसनीय नीतियों से उसे नहीं हमारे अंदर गजब की दिलेरी और साहब है वो सब तो ठीक है फॅमिली लेकिन आज मुझे आना पालन से निकले हुए काफी समय हो चुका है । मुझे जल्द से जल्द आना पालस में वापस लौटना चलो अब यहाँ से चलो वो दोनों मीठा मार बीच पर वापस लौट पडे । लौटते हुए उन्हें साइकल शेन का कॉपी सरकार की कहीं वो उनके ऊपर आक्रमण ना कहते हैं । परन्तु वो इस मामले में खुशकिस्मत रहे । उस रात और कोई घटना घटी । लिलियाना गोंजाल्विस की हालत चिंताजनक रहने लगी थी । जहाँ उन का बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा था वही उनकी आंखों के नीचे भी अब काफी गहरे काले गड्ढे पढ चुके थे । वो काफी कमजोर हो गई थी और भूक लगना भी उसे काफी कम हो गया था । कुल मिलाकर आना गुंजाल रक्षा को से ही बीमार नजर आती थी । सभा के नौ बज रहे थे । रेडक्रॅस समय बैडमिंटन कोर्ट पर अकेले ही प्रैक्टिस कर रही थी जब उसे कालस् के लंबे चोडे डायरी पर डॉक्टर कोस्टेलेकी कार आती नजर आएगा । रीता साना और तुरंत अपना राजक लेकर दौडती हुई पहुँच में पहुंचे । शीघ्र ही डॉक्टर ऍम पहुंच में आकर रुकी । फॅमिली कार में से उतरते हुए बडे खुश कबार अंदाज में बोले अब ऍम क्या बात है । डॉक्टर काॅल आजकल तो माॅडलिंग वाले अभियान को लेकर खूब धूम मचा रही हूँ । मैंने सुना है तो मेहमान साइकिलिंग से संबंधित कानून पास कराने के लिए ज्ञापन राष्ट्रपति और राज्यपाल को भी भेज दिया है । अच्छे अंक ये सच है । चलो अच्छी बात है । फॅमिली अगर ये कानून पास हो गया तो कम से कम उन मरीजों को तो राहत मिलेगी जो जिंदगी और मौत के बीच लडाई लड रहे हैं । रीता सानिया मुस्कराई मैंने सुना है आना की तबियत भी अब काफी खराब रहने लगी है । डॉक्टर काट ले के चेहरे पर एक का एक गंभीरता की परत गई । हाँ एक डर तो उनका कुछ कुछ ठीक है लेकिन फिलहाल होने लगातार बुखार रहने लगा और भूख भी कम लगती है । लेकिन मुझे तो इस बारे में किसी ने कोई इंफॉर्मेशन नहीं दी डॉॅ । वह तो क्या है कि आना का इलाज अब कहीं चल रहा है । तो डॉक्टर काट ले के चेहरे का रहने का एक ठीका पड गया । आइए आप अंदर आना है अब वो अभी सो रही है । आप कहीं तो मैं उन्हें उठा दूँ, नहीं रहने दो ऍम कभी आकर मिलूँगा । आना से कहना मैं अब ठीक है । फॅमिली जिस तरह का आज से बाहर निकले थे उसी तरह वापस कार में बैठकर अगले ही क्षण वो कार्ड तेजी से पालस के मेन गेट की तरफ दौड चली गई । उस कार को जाते देख रीता सान्याल के होठों पर षड्यंत्र पूर्ण मुस्तान मंडराने परन्तु वो नहीं जानती थी । बूटा राम उस क्षण भी उस की एक एक गतिविधि देख रहा है ।

भाग - 11

अध्याय जा रहा है । घटनाओं में अब काफी तेजी आ गई थी । आना गोंजाल्विस का स्वास्थ्य जहाँ दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा था वहीं रीता सान्याल का मौसी किलिंग अभियान वाकई जोर पकड रहा था । उनकी क्लब के साथ साथ दूसरी समाजसेवी संस्थाएं भी आप उस अभियान में शामिल होने लगी थी । कुछ और डॉक्टर भी अब उस अभियान में शामिल होने रखे थे । इतना ही नहीं अब गोवा के समाचार पत्र में भी आए दिन उस अभियान से संबंधित खबरें छपती रहते थे । ये देखिये ॅ कई सारे अखबार पत्र आनंद गोंजाल्विस की तरह पूछा है । आज के कई अखबारों में हमारे मर्सी किलिंग अभियान से संबंधित खबरें छपी हैं । आज की सबसे महत्वपूर्ण खबर ये है कि दिल्ली के पार्लियामेंट के अंदर भी एक सांसद ने मर्सी किलिंग का मामला उठाया है । इतना ही नहीं उस सांसद ने प्रधानमंत्री से ये भी कहा कि माँ साइकिलिंग को भारत में कानूनी मान्यता प्रदान की जाएगी । कुछ और सांसदों ने भी इस कानून को पास करने की पुरजोर ढंग से हिमायत आना, गोंजाल्विस की जेल में, शील में, चेहरे पर भी किसी मुस्कान भरा है । सचमुच हमारी जितनी तारीफ की जाए तो कम है । फॅमिली आना गुंजाली स्कूल इस अभियान को अभी तुमने सिर्फ चंद रोज पहले शुरू किया था तो अभी आना जितने बडे पैमाने पर फैल चुका है कि उसकी खून जांच पार्लियामेंट तक में सुनाई दे रही है । सिर्फ पार्लियामेंट में नहीं आना बल्कि देश के कोने कोने में आज इस अभियान की गूंज है । रीटर सानिया ने खुशी से कब का बाद इस बार में कहा ये देखिए ऍफ इंडिया में एक न्यूज छपी पूना के अंदर भी डॉक्टरों के एक दल ने मर्सी किलिंग को कानूनी मान्यता देने की मांग की है । इतना ही नहीं मुंबई में कुछ पेशंस दिया अब इस बात की विमान करें कि उन्हें मौत दे दी जाए तो मारना चाहते हैं आना । धीरे धीरे ये अभियान प्रचंड ज्वाला का रूप धारण करता जा रहा है । और ये देखिए हिंदुस्तान अखबार में तो इसी संबंध में आज अपना एटी लम्बा चौडा संपादकीय भी लिखा है । क्या लिखता है अखबार अखबार लिखता है कि माँ साइकिलिंग कोई अमानवीय कृत्य नहीं है । वीटा सान्याल हिंदुस्तान अखबार की काफी उठाते थे बल्कि माँ साइकिलिंग कष्टों से मुक्ति का नाम है । अगर कोई आदमी किसी बीमारी से बहुत दुखी है तब रहा है, छटपटा रहा है और डॉक्टर जानता है कि वो उसे बचा नहीं सकते तो ऐसी हालत में उसी मौत दे देना । उसके ऊपर उपकार करना है । हमारा इतिहास साक्षी है । बडे बडे संत महात्माओं तथा पीर पैगंबरों ने भी कई बार बीमारी से छटपटाते आदमियों के लिए तेश्वर से उनकी मौत के लिए दुआ मांगी और वो मर गए । वो भी तो मानसिक खेलेंगी थी । अखबार आगे लिखता अगर मानसी किलिंग अमानवीय होती तो पीर पैगम्बर ही ईश्वर से किसी की मौत की दुआ मांगते, किसी को कष्ट से राहत पहुंचा देना । सुकून देना भी कभी अमानवीय कृत्य हो सकता है । भला भारत सरकार को चाहिए कि वह मासी के लिए हो, फौरन कानूनी मान्यता प्रदान कर के पूरे विश्व के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करें । कम से कम इस मामले में हमें बाकी विश्व की तरफ नहीं देखना चाहिए, बल्कि खुद हमें पहल करनी चाहिए । सच मुझे लेवॅल जिसका बेहद प्रभावित हो जाऊँ तुम्हारे अभियान की इससे ज्यादा जबरदस्त दिमाग कोई दूसरा अखबार नहीं कर सकता हूँ । ये तो अभी सिर्फ शुरुआत है । नहीं, अभी आप देखती जाओ आगे आगे क्या होता है? उसी क्षण आना ऍम बेहद तेज सस्ता था । है उसका इतना ऍम खास्ते घास हाल से बेहाल हो गई फॅस गोल तकिये से पीट लगाए बिस्तर पर अगले दी बैठी हूँ मैं अब थोडी थोडी देर में ही उसकी तबीयत बिगड जाती थी । बेटा सान्याल ने उसे पीने के लिए फलों का जूस दिया लेकिन वो उसे भी पूरा नहीं हो सकी । क्या बात है ना रीडर सान्याल की आंखों में आश्चर्य का सागर उमड आया यूज भी नहीं नहीं थी । ऍम तो किसी भी चीज को खाने पीने का तो नहीं नहीं जाना । भूख न जाने कहां आयॅल ऐसा कब तक चलेगा ना हो अब तो ऐसा लगता है बेटी जैसे ऍम नहीं ऍम जोर से तो आखिर कब तक अंधेरे में रहेगी मेरी बच्ची ऍम जिसका बेहद भाव वहाँ पर क्योंकि फ्रांस की उस राष्ट्रपति की कहानी भूल गई तू नहीं मुझे सुनाई नहीं । उस राष्ट्रपति का भी तो ऐसा ही हाल था । पहले जिसमें में दर्द होता था फिर वजन घटने लगा हूँ भी लगनी बंद हो गई । सब कुछ बिल्कुल इसी तरह हुआ । मैं जाना नहीं ऍम आप के साथ ऐसा कुछ नहीं होगा । मैं कुछ नहीं होने दूंगी आना गुंजाल जिसके हूँ दर्द से भी कि मुस्कान बात वो बडे प्यार से रीता सानिया का हाथ सहन नहीं । उस दिन जीवन नर्सिंग होम में सचिन देवरानी मेरी आना गुंजाने इसके कुछ बोल मारो तथा ऍम लगभग चार घंटे तक वायॅस के अलग अलग टेस्ट लेता रहा । फिर जब तमाम टेस्ट की रिपोर्ट आ गई तो उसने उन सभी रिपोर्ट कुमारी जी के साथ क्या भला रीटर सानिया उससे बेहतर इस बात को और कौन जान सकता था की ये सब नाटक होता है सिर्फ रिपोर्ट की सारी करते करते हैं सचिन देवडा के माथे पर फिर बडे ही योजना मदन दास चिंता की लकीरों भरा है । उसके बाद फिर वो दोनों एक तरह काम नहीं । केस काफी सीरियस है । अब तो ये लगभग बिलकुल ही साबित हो चुका है कि आना ब्लड कैंसर की पेशंट सचिन देवता कि आवाज इस समय काफी घबराई । उन्होंने देखा आना पंजाबी दरवाजे से कान लगाये आज की उनकी बात सुन रहे हैं । लेकिन बच्चो जाएंगे रीडर सानिया के मुंह से इस तरह घुटने खुशी शांत निकले मानो अभी कुछ टूटकर होने लगी । मैं यही बार बताने के लिए तुम्हें यहाँ लेकर आया हूँ । सचिन हो दरअसल मैं तुमसे कुछ छिपाकर नहीं रखना चाहता । मैं हूँ आना को काफी खतरनाक लग कैंसर है । उन्हें क्यूट माय लाइफ ल्यूकीमिया है । ये ब्लाक कैंसर की सबसे खतरनाक किस्म होती है । इतना ही नहीं आना कमला कैंसर बिल्कुल अपनी लास्ट स्टेज है । सच तो यह है कि मेडिकल साइंस में अब उन का कोई इलाज नहीं, ऐसा नहीं हो सकता था । ऐसा नहीं हो सकता । ऍर जोर से सुबह मिलेगी तीस बनाना के साथ इतना बडा अन्याय नहीं ऍम ऍम सच नहीं होगा की आवाज में गंभीरता नहीं । सच्चाई अभी इससे और कहीं ज्यादा हो । फॅमिली कब कभी छुट्टी हो और क्या बात है खाना हाथ से हर दो महीने की मैं सचिन देवता की आवाज भी हाॅट नहीं होती तो उनकी जितनी सेवा करना चाहती हूँ । कल नहीं ऍम थी और वह सब दरवाजे के बाहर खडी मेरियाना गुंजाल जिसकी तेल दिमाग पर भी बम की तरह कर करा कर के लिए नहीं तो नहीं । सिर्फ दो नहीं उसे गांव शादी हो । बडी मुश्किल से वहाँ से चलती हुई कुर्सी पर जाकर बैठ सकते । रीता सानिया जोर जोर से सांस थकाती हुई आना हालत से बाहर नहीं तथा फिर स्पोर्ट में ही खडी अपनी कार में जाकर बैठ गई । शाम के उस समय सात बज रहे थे । तुरंत कार का इंजन का आप कहाँ जा रही है? जिससे बाबा यही वह क्षण था सभी का एक नीताराम महाभूत की तरह हो जबडे ऍम क्या आपने जहाँ कहीं भी जाओ तो बताकर जाना होगा । उसने महसूस कर देने वाली नजरों से बूटा राम को खुला और ऍम कोई बात नहीं हम ऐसे बाहर बूटा नाम हकबका है । फिर क्या बात है अगर तीन तरह खिलाफ तो जानती है आजकल मीडिया मार बीच पर साइकिल छेंका कितना जबरदस्त आतंक फैला हुआ है । कभी कभी रात के समय आपको आने में देरी हो जाती है तो फिक्र होने लगती है । किसकी कहीं आपको कोई प्रॉब्लम हो जाएगा । फिर प्रॉब्लम नहीं बूटा राम ऍम हूँ वहीं वहीं चिंता मतलब मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं होने वाली है । वैसे भी तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूँ आज क्लब की एक मीटिंग है । मैं नहीं जा रही है ऍम तुरंत होगा तूफान गति से आना पालस के मेन गेट की तरफ झटपट ये काम बहुत बूटा राम जरूर कोई ना कोई हंगामा करके रहेगा । सचिन देवरा ने जैसी कॉलेज का दरवाजा खोला हीटर सानिया पीर की तरह अंदर दाखिल होते तो अब क्या हुआ? जसूसी उपन्यासों का कुछ ज्यादा भूत उसके दिमाग पर चढा हुआ है । सर जरा सी बात पर शक करता रहता है । जब यहाँ आ रही थी तभी पूछना था कि कहाँ जा रही हूँ हूँ । सचिन देवडा के माथे पर भी चिंता की लकीरे थी उसने दरवाजे के अंदर से कितनी चढाई थी तो तुम्हारा यहाँ ज्यादा आना जाना खतरनाक है । ठीक कहा तुम्हें वो कभी भी हमारी हकीकत तक पहुंच सकता हैं । बूटा राम और कोषा आज की डेट में यही तो प्रॉब्लम हमारे लिए सबसे बडी है । वो दोनों टहलते हुए अंदर वाले कमरे में आ गए । अभी राॅयटर्स में आए मुश्किल से दो मिनट भी नहीं दूसरे होंगे कि तभी एक बडी सनसनीखेज घटना घटी किसी ने जोर से कौंदर बजाए कॉल दल के बचते ही उन दोनों के बीच का एक ऐसा हडकंप मचा जैसे सरहद पर हारती हुई फौज के बीच मच जाता है । जरूर बूटा राम होगा फॅमिली जरूर वही होगा । वो ऍम सचिन देवता के शरीर में भी सिहरन सी दौड गई क्या? जब तुम यहाँ आ रही थी तो तुम्हें चेक नहीं किया था कि कोई तुम्हारा पीछा करना है कि नहीं । अच्छी तरह से चेक किया था । रीटर सान्याल का घबराया हो सकता है मगर बूटा राम बहुत चला है तो मैं पहले बता चुकी जासूसी उपन्यास पर पढकर उसका दिमाग बहुत शाहब हो चुका है । लेकिन अगर वो थोडा आराम है तो अब क्या होगा? सचिन देना आतंकित में ऐसे नहीं बोलते मैं यही कमरे में छिप जाती । अगर मेरे बारे में तुम से पूछे तो उसे मना कर देना की तुम इस तरह के किसी लडकी को नहीं जानते । कभी जोर जोर से दो बार कॉल दर और बच्चे और तुम्हारी जो कार बाहर खडी उसके बारे में क्या जवाब दूंगा? मेरी कार बाहर नहीं हूँ । ऍर आज में खडी है और के राज में इकाई उसकी नजर नहीं पहुंचेगी । अपनी ही करूँ अगर तुम्हें दरवाजा खोलने में ज्यादा देर लगाई तो इसी बात पर शक करने लगेगा । तभी फिर ऍम सचिन देवता का दिल फिर जोर जोर से पसलियों को इस तरह फूट रहा था जैसे कोई हथौडा बरसा रहा हूँ धडक तेरे के साथ ही उसने दरवाजे की सिर्फ कडी नीचे गिरा और दोनों पहले होती है और दरवाजा खुलते उसके दिलो दिमाग पर फिर प्रचंड बिजली गडगडा कर के लिए वहाँ का बता रहे हैं सामने दरवाजे पर बूटा राम कि जगह ऊषा और किरपाराम मूलचंदानी खडे थे तो नई मेहमानों को देखकर सचिन देवरा के लिए तेहरानी से बहुत पडी तो और ऍम जी फिर पराठा मूलचंदानी दोनों हाथ जोडकर मुस्कुराता हुआ अंदर उसके पीछे पीछे बडे ये कुत्सित अंदाज में मुस्कुराती हुई पूछा भी अंदर दाखिल हूँ । वाणी हमारे यहाँ देख कर तो मैं हैरानी तो बहुत हो रही होगी सही पर हम मूलचंदानी के चेहरे पर शातिराना चमक थी । हम ने सोचा नहीं झंझट निपटा थे पानी तो हमारा एड्रेस जान गए नहीं हम तुम्हारा ड्राॅ नहीं फिर कहे कोई खाली पीली मगजमारी करें काय को ये छुआ बिल्ली का खेल के लिए बडी बढिया बात तो ये नहीं कि अब हम बैठ कर बात करे । बडी फॅमिली खून की तरह टेबल पर बैठ कर बात करेंगे । आखिर अंत में बडे बडे फैसले तो टेबल पर ये ऍम सचिन देवता के चेहरे का सारा खून चढ गया । उस क्षण को ये फैसला नहीं कर पा रहा था की उससे उन दोनों के साथ कैसा बर्ताव करना चाहिए । उधर अंदर मौजूद रीता सान्याल ने भी जब ये देखा कि बूटा राम की जगह कोई और है तो वो भी बाहर निकल रहा है । वो रीड आसानी और वहाँ देख कर के द्वारा मूलचंदानी की बात है और खुशी से दोबारा हुआ वानी तो बढिया हो गया यानि तुम भी यहाँ मौजूद हो बडी अब तो बढिया बढिया बातें होंगी नहीं पडी हो जाएगा नहीं और ना हम तो बकरे से मिलने के वास्ते यहाँ आए थे । नहीं ऍफ सीता सानिया सकता कौन रख रहा? वाणी सचिन देवडा नहीं तेरह परमानेंट अलावा आर्मी या आप उनका बक्कर मोटा ताजा माल देने वाला पक रहा । जरा तमीज से बात करो । रिकाॅल कर रहा है वानी तो तब तक किरपाराम ओलचना ने अपनी सिंधी टोपी दुरुस्त करके होकर के हसन बडी तो भी मजाक करती है । वो बडी बडी अगर अपन तमीज से बात करना जानता तो इसी बात भेज के धंधे में ना पडता । बडी अपनी तमिल तो कब की कमी फॅमिली अब तो निक्कर पहनने की बारी है । पतलून पहनने की बारी और की पर हम के आवाज में एक का एक सकती हूँ । बढिया का जरूरत बडी तो अपन तगडा बट्टा वाला जूता भी पहनेगा नहीं सचिन देवडा हक पकाकर इधर उधर देखने लगा । जबकि अंदर पहुंचते ही किरपाराम मूलचंदानी बडे ठाठ के साथ सोफे पर पैर पसारकर बैठना है । पूछा भी उसके बराबर में ही बैठे हैं । बडी उम्मीद ऍम चलना नहीं । उन दोनों से संबोधित हुआ फॅार समझो नहीं तो वो दोनों भी उसके सामने वाली कुर्सियों पर आपको खून की गुलाम बनकर बैठे हैं । उन्हें हालत खुश कॅश नहीं आ रहे थे तो यहाँ क्यों आये नहीं कुछ बडे वाले फोटो दिखाने भी तुम्हें फोटो वही फोटो नहीं समझते । नहीं पडी तस्वीर बडी बडी तस्वीरें बडी क्या कहते उन कम्बखत मारो को अंग्रेजी में फोटोकाॅपी कैसे फाॅर्स दिखाना चाहते हो तो रीता सानिया के आवाज में फिर सकती हूँ । बाल बाल गिर पडा मूलचंदानी निरोशा की तरफ देखा हाँ वानी तो इन्हें फोटो दिखानी की वहाँ पे आप घर बैठे है । पोषण तुरंत अपना मुँह खोला और उनमें से कई सारे पूरे ग्रास निकालकर सामने टेबल पर रखती है । रीता सान्याल ने लगभग झटकाकर वाॅल और जैसे उसकी नजर पहले वाली फोटो पर पडी तत्काल उसकी छक्के छूट गया । पहले फोटो में ही जूलिया के चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी होती दिखाई गई थी । फिर उसके प्लास्टिक सर्जरी होने के बाद के कुछ फोटो फिर ऍम मीरा सान्याल एक के बाद एक फोटो पलटी चली गई और उसकी खूबसूरती चलेगा सचिन देवडा ने भी वो फॅमिली उसकी तो और भी ज्यादा छक्के छोटे वो फोर ऍम के सारे कारनामों का खुला दस्तावेज क्या ऍम? किरपाराम मूलचंदानी उनके दहशत से सोते हुए चेहरे देख कर फिर हजार फॅमिली बडी सारे फोटो पर यहाँ नुमाइश में रखने लाया । वहीं मेले में दो दो रुपए का टिकट लगाकर दिखाने लाया कब बुलबुल और वो फिर ॅ रिकॉर्डिंग भी शुरू हुआ इनके भजनों और रागनियों की रिकॉर्डिंग । ऊषा ने अब अपने बाद नहीं आॅर्डर भी निकाला, फिर उस टेपरिकॉर्डर में कसरत लगाकर उसे चालू किया । तुरंत उसके प्रकाशन में से रीता सान्याल और सचिन देवता कि आवासी निकल नहीं लगी । उन्होंने जो लिया और रजिया की बेहद नाटक के अंदाज में जो हत्या की थी, उसकी पूरी प्लानिंग उन्हें दोनों की आवाज मिस्टेक के अंदर मौजूद थी । उसके बाद ऊषा नहीं स्टेट में दूसरी कसर लगाई तो मेरी बहना गोंजाल्वेस की पूरी मॉडल प्लानिंग भी उन दोनों के सामने आ गयी कि अभी उन्होंने आगे और क्या क्या करना था? रीता सान्याल और सचिन देगा अब हर बढाए उनके पसीने छूटते तुम चाहते क्या हूँ? फॅमिली हाँ, हम दोनों ने फोटो खींचने में है और ये हमारी आवाज बनने में बडी मैं न किए हैं । किरपाराम मूलचंदानी पूरी संजीदगी के साथ पूरा और ये सबसे पहले तो मुझे अपनी बीवी ऊषा कोई चारा बनाकर बकरे के सामने डालना पडा । नी हो तो शुक्र समझो पुडी बकरे ने इस की इज्जत नहीं लूटी और ना अपना तो हो जाता ना कूडा बीवी ऍम की ये बीडीएस हमारी बडी एकदम खरी बीवी एनी लेकिन इसमें तो सचिन से कहा था कि तुम इसकी दारी हो पलामू चलाने फिर बहुत जोर से हो होकर के हजार तो अब बडी ये बहुत सांसी झोक रिया नहीं बडी ये कब क्या कहने लग जाए कुछ पता नहीं चलता वाणी लेकिन अपन इसका मुरीद इसी वास्ते इसके हजार बताई माफ लाख सत्ताईस माफ । किरपाराम की बात सुनकर रोशा भी हसी रीता सान्याल अब बडे विचलित अंदाज में उन दोनों को देख ले लेगी । अजीब घनचक्कर छोडी थी पानी बातें बहुत हो चुकी किरपाराम ओलचना नहीं का एक शब्द व्यापारी अंदाज में बोला आप कुछ नावे पत्ते की बात भी हो जाए । नावी पत्ते की बात बडी कुछ रोकडे सूपडे की बात तो सही है तो उन लोग क्या कर रहे हो? अपन को इस से कोई मतलब नहीं है तो उन्हें रजिया को मारा हमने कुछ नहीं तुमने जूलिया को मारा तब भी हम खामोश रहे । वहीं आप तुम गुडिया कुमार हो गए । अपन कोई से भी कोई मतलब नहीं है । अब तो बस सीधे सीधे अपना हिस्सा चाहिए । हिस्सा सचदेवा बोला हूँ ऐसा हिस्सा उनियाना गोंजाल्वेस की कुलजमा प्रॉपर्टी कब फिफ्टी फिफ्टी सौ करोड का आधा पचास करोड साले सचिन ऍसे कुर्सी छोडकर खडा हो गया बहुत ऍम साॅल्वर हम को मारने के लिए उसके ऊपर ऍम छोडो मुझे अभी सारे सिंधी का और उसके सारे सबूतों का क्या पहुंचा करता हूँ और साथ में छिनाल और कभी जिसमें त्रिया चरित्र कर करके सारा ड्रामा रचा वहीं की उन गर्म पानी की तरह बन रहा है । ऐसा ही सिर्फ फरामोश चलना है पूरी शांति के साथ तो इन सबूतों के यहाँ पहुँचा करना चाहता हूँ कल मैं करता हूँ तेरे काम और उसके बाद फिर पर हमने सब मुझे एक एक करके फोटो खाना शुरू कर दिया । फिर उसने कसक का सारा फीता निकालकर भी वर्ष पर फैला दिया । मणि अगर अब तो ये समझता है कि सारे सबूत मिलेगा तो बडी बडी अच्छी बात है सचिन देवडा आँखे फाड फाड करके पर हम को देखने लगा वाकई वो अच्छी बात नहीं था । फॅमिली जानकारी जिले वाॅ देते हुए इनके डिजिटल पॅन और साथ में फॅस की मास्टर काफी पडी । अगर तुम दोनों ने सराहा भी हर कर दिखाई तो होगा वो सारा काम धाम पुलिस के पास पहुंचा दिखाई देगा । उसके बाद तुम दोनों का कैसा हरा नहीं सकता बनेगा ये बात बयान करने की जरूरत नहीं । खुटवाडी समझदार को इशारा काफी फॅमिली रीता सान्याल और सचिनदेव को दोनों ही आतंकित नजर आने लगे लेकिन पचास करोड बहुत ज्यादा है । फॅमिली बडे कुछ भी ज्यादा नहीं है । वो स्टडी तो मैं ऑर्डर की प्लानिंग बनाने में । जितनी मेहनत किया पडी उतनी मेहनत हम दोनों ने तुम्हारी प्लानिंग पता लगाने में क्या है ऍम इसीलिए नवाब पत्ता भी फिफ्टी फिफ्टी । रीटर ने एक बार विचलित मुद्रा में सचिनदेव रहा की तरफ देखा । ठीक है फॅमिली मैं अपनी प्लानिंग एंड टाइम पर कोई कर पढ नहीं चाहिए । मुझे तुम्हारे फॅमिली था । वहाँ बहुत बढिया तो वाकई बकरे से ज्यादा समझदार है । वो नहीं है । फिर किरपाराम, मूलचंदानी और उषा ज्यादा देर वहाँ नहीं देंगे । सौदे की बात फाइनल होते वो दोनों वहाँ से चलेगा । ये ठीक नहीं हुआ । सचिन देना उन दोनों की जाती हूँ । ये दोनों हमारे बारे में बहुत कुछ काम दे रही है कि आने वाले वक्त में हमारे लिए सबसे बडा खतरा बन सकते हैं । हमें ही रास्ते से हटाना होगा । ये बात मैं ही जानती ऍम क्या अब इन्हें रास्ते से हटाना हमारे लिए जरूरी है । लेकिन अगर बेवकूफी के हथकंडे इस्तेमाल करके हमें नहीं रास्ते से हटाएंगे सचिन तो खुद हमारे पैरों पर ही कुल्हाडी लगेंगे । निशान तारीफ की मौत हमारे लिए काफी बडा फसाद बनते बनते रह चुके हैं तो तुम कहना क्या चाहते हैं । सच्ची ट्विटर साल की आवाज एक आॅटो हमें इन दोनों को बडी कर के साथ रास्ते से हटाना होगा । कैसे वो प्लानिंग भी सोचना जाएगी । फिलहाल हमें अपना सारा ध्यान आना गुडगांव इसकी मौर्य उठाने की तरफ ही लगना चाहिए ।

भाग - 12

अध्याय बारह लेडी आना गोंजाल्विस की हालत और वाकई बहुत सीरियस हो चुकी थी । उसके शरीर में दर्द दोबारा से उठना शुरू हो गया था और अब टॅबलेट भी खुलकर अपना असर दिखा रही थी । ये ऍम का ही असर था कि उसके शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या कम होने लगी और उसी की वजह से आना गुंजाल । जिसको ब्लीडिंग भी होनी शुरू हो गई, उसकी मसूरी से खून रिसने लगा और लाटरी इनके रास्ते भी खून जाने लगा । इस बार सचिन देवडा उसका चक्कर करने वहीं आना वाला था । इन की हालत बहुत सीरियस है । वाने की थोडी देर बाद बोला इन्हें अनीमिया हो गया है । अनिमियता लिलियाना गुंजाल उसके दिमाग में धमाका हुआ जबकि वीटर सान्याल ने भी चौंकने की जबरदस्त एक्टिंग की । अनीमिया यानी ब्लड कैंसर का ही लक्षण । तब अब क्या होगा? ॅ के चेहरे पर चिंता के भाव है । हम ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है । मैं तो सचिन ॅ फौरन खून चढाने की जरूरत है, लेकिन एक प्रॉब्लम और है क्या तेल का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है जबकि इस ग्रुप का ब्लड हमारे नर्सिंग होम के ब्लड बैंक में नहीं, ये एक और नहीं चाहती थी तो फिर खून कहाँ ऍम खून का बंदोबस्त नहीं करना होगा और जल्द से जल्द करना होगा । हम कितनी बोतल खून चाहिए चार होता है । अगले ही पल वीटा सान्याल की पहले विमान उपांग सकते हैं । वो लगभग दो हफ्ते हुए, टेलीफोन के नजदीक पहुंची तथा फिर उसने पुलिस कमिश्नर नागुलाल फ्रांसो का टेलीफोन अलवर डाल क्या टोमॅटो के ऑफिस का प्राइवेट नंबर था जिसे सीधे वही रिसीट करता था । उस समय एक एक कदम योजना बद्ध तरीके से उठाया जा रहा था । हालांकि दूसरी तरफ से माधवनल फ्रांसो नहीं रिसीवर उठाया । कमिश्नर स्पीकिंग अब फॅलस्वरूप था मैं आना पाल से क्यों लिया? बोल रही हूँ ऍम लिया बेटे नागुलाल फ्रांस चाहेगा कैसे हॅूं यहाँ ॅ बडी भारी पाॅड प्रॉब्लम नागुलाल फ्रांस का चहकना तुरंत उडनछू हो गया की ऐसी प्रॉब्लम दे दी आना आपको अनीमिया हो गया जी टाॅकीज ओर से सिसकारी क्योंकि वो उन्हें तुरंत खून चढाने की जरूरत है लेकिन उनके ग्रुप का खून बिलकुल नहीं हो पा रहा है । ऍम क्या है? ये ऍम कितनी बोतल खून चाहिए? चार बोतल ठीक है मैं अभी आधे घंटे में खून लेकर पालस पहुंचता हूँ ऍम लेकिन उस की ये बात सुनने के लिए पुलिस कमिश्नर आॅनलाइन पर मौजूद नहीं था । वो रिसीवर लग चुका था रीता सान्याल के होठों पर बहाल जैसे कुटल मुस्कान दौर कर नदारद हो गई । पुलिस कमिश्नर को भी अपनी प्लानिंग के फंदे में कसना चाहती थी और उसके लिए वह चार चर्च चुकी थी । मैं गूगल फ्रांस बीस मिनट में ही आना पाल इसमें आ गया और वो चार बोतल खून लेकर क्या आप बिलकुल ठीक टाइम पढाते हैं? सचिन ने उनके सामने कुछ और ज्यादा बेचैनी का प्रदर्शन किया । आना की हालत काफी सीरियस है । अगर उन्हें खून चढाने में कुछ ज्यादा देर हो जाती तो कुछ भी हो सकता था कहाँ है ना सामने कमरे में है लगभग डॉॅ कमरे में दाखिल हुआ जिसमें मेरी आना काॅस्ट सामने ही बिस्तर पर आना कोजागर लेती थी । उसके ऊपर ने कहा पढते ही मैं गूगल फ्रांसो के सीने पर भरोसा सा पडा । बीमारी के कारण उसका चेहरा बिल्कुल पीला असर पड चुका था । आंखों के नीचे मौजूद शाहगढ भी अब कुछ और ज्यादा कह रहे हो गए ये ये आपकी क्या हालत हो गई है ना सब भाग केक रच्छक रहे हो आना गोंजाल्विस धीमी स्वर में बोली जरूर मैंने अपने जीवन में कुछ पूरे घर में क्या होंगे जिनका भर मुझे अब भुगतना पडता है तब तक सचिन देवडा भी उस कमरे में आज था । वहाँ भी उसने आना पंजाब जिसको खून चढाने की व्यवस्था करते हैं । चार बोतल खून चढ ने में काफी समय लगता है लेकिन खून चढ रही सचिनदेव ना वहाँ से चला गया हूँ । खून चढ ने की वजह से आना । गोंजाल्विस की हालत में भी थोडा सुधार दिखाई पडा । पुलिस कमिश्नर माॅडल फ्रांस्वा अभी भी आना गोंजाल्विस के करीब था और उसकी दयनीय दशा को लेकर काफी चिंतित था । पहले तो वहाँ बिल्कुल स्वस्थ इयाना, माधवनल शान सबके चेहरे पर परेशानी के लक्षण स्पष्ट देखी जा सकते थे । सब कुछ एक दम कुछ दिन ही कहाँ ऍम खास कहीं सब कुछ एक दम ही हुआ है । मैंने कल्पना भी नहीं की थी कि मेरी हालत ऐसी हो जाएगी वो और क्या हो? अभी तो मेरी ऍम पूरी हालत होने वाली है । आना पंजाब उसकी आवाज बेहद थी । नहीं हो गए ये या क्या करे आना भागो लाल फ्रांस बुरी तरह चाहूँगा मैं बिलकुल ठीक हूँ ये आना ऍम अब इस दुनिया में बस चंद्र उसकी मैं मना नहीं हो । मुझे लटके आंसर है मुझे मॅूग तब घर हैं लाॅस उसके दिमाग पर भीषण बज्रपात हुआ तो हैरानी से हालांॅकि उसको देख नहीं था जबकि लेडी आना गोंजाल्वेस का चेहरा भाव भी बिल्कुल पत्थर की तरह पे लाॅबी काफी खाॅ आना । गोंजाल्विस ने शांत मुद्रा में ही अच्छे ऍम ये मेरे प्लाट कैंसर का नाम है वो अपनी लाॅज पर हैं अब इसका कोई ऍप्स में नहीं ॅ दिमाग में जोर जोर से सीधी बडी मिलेगी । उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया । क्या झूला इस बात को जानती? हाँ आना गुंजाल जिसकी गर्दन स्वीकृति में जो लिया जानती है लेकिन वो इस बात को नहीं जानती कि मुझे भी अपनी बीमारी के बारे में खबर है । दरअसल वो डॉक्टर तो उन्होंने मुझे ये बीमारी छुपा रहे हैं । इतनी बातें भी मुझे इसलिए पता है क्योंकि मैंने कई बार उनकी बातचीत छिपकर सुनी तो फॅमिली पर चिंता के भाव और बढ गई है । बूटा राम जॅान के लिए काफी कम आग लेकर उसी कमरे में जाती हूँ ले जा रहा था उसने भी वो सारी बातें इसलिए उसके ऊपर भी भीषण बिजली गडगडा करके बूटा राम लगभग दौडता हुआ आपने सर्विस स्पोर्ट में पहुंचा । उसने बडा की तेज आवाज के साथ दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और फिर दोनों पल्लों से पीट लगाकर इस तरह जोर जोर से हाथ में लगा उसके पीछे सैकडों भूख लगी हूँ । ऍम की तरह बोला ॅ नहीं हो सकता है या ना इतनी जल्दी मार नहीं सकती । जरूर इसके पीछे कोई चाल है जरूर को षड्यंत्र है । भूटान धान से बिस्तर बच्चा कहीं इस समय उसके शरीर से पसीने की धारें इस तरह रह रहे थे मानो किसी ने नल खोल दिया हूँ । वहीं कमांडर करन सक्सेना सीरीज का नया उपन्यास रखा था । बूटा राम ने वो उपन्यास उठा लिया । फिर ऐसे ही उसे बीच में से खोला । तुरंत कमांडर करन सक्सेना के एक डालों पर उसकी निगाह पडे किसी भी इंसान को जब अपने आस पास खतरे ज्यादा मान जाते हुए नजर आने लगे तो उसे हथियार उठा लेनी चाहिए । ठीक क्या का अपना करण सकता ना भाई? बूटा राम ने झटके, उपन्यास वापस बंद कर दिया । मुझे कुछ करना होगा फिर जल्दी कुछ करना होगा । परन्तु बूट आराम नहीं जानता था कि उसका मुकाबला रीता सानिया जैसी बेहद चतुर और खूंखार अपराधी से हैं । अपने दुश्मन को भी बडी तरक्की के साथ मारने में यकीन रखती थी । रेड आसानी वाले उसी दिन से आना गुंजाल इसको दी जाने वाली टॉपलेस की संख्या कुछ और बढाते हैं । अब अपना बिल्कुल फाइनल गेम खेल रहे थे । टापलेस की संख्या बढने का तुरंत हीरे साल भी नहीं आना । गोंजाल्विस की हालत बहुत ज्यादा बिगड गए । उसे और ज्यादा ब्लीडिंग होने लगी । इतना ही नहीं रीता सान्याल ने अपनी आखिर प्रेशर विधि का इस्तेमाल भी दोबारा से शुरू कर दिया और पहले से कहीं ज्यादा बडे पैमाने पर शुरू कर दिया आना गुंजाल सारी जा दर्द से छटपटाती रही । चिल्ला रही उस रात न वो खुद सोई और न पहले इसमें कोई और सोया । सुबह के वक्त भी उसका दर्द से बुरा था । उसने नाश्ता भी नहीं किया । रेडा सान्याल के अलावा बूटा राम तथा पालस के कई दूसरे नौकर भी उसके करीब ही थे । देखो गुंजाइस बुरी तरह हफ्ते हुए और बडी बेचैनी से अपनी ऍम करती होगी । मुझे लगता है कि अब मैं नहीं बच्चों की सब मर जाउंगी आप ऐसा क्यों सोच के आना ऍम आपको कुछ नहीं होगा । कुछ कब तक असर? कब तक मेरी बीमारी के साथ आँखमिचौली खेलती रहेगी । मेरी बच्चे आना काॅस्ट बातें होती मैं सब जानती हूँ सब क्या जानती है आप का? सानिया के आवास भाई से यही कि मुझे मुझे ब्लड कैंसर है यह है कि मैं ज्यादा दिन की मेहमान नहीं । नहीं ऍम आपका ऐसा कुछ नहीं ऍम आपको मामूली बीमारिया जो जल्दी ठीक हो जाएगी तो कब तक किसी मामूली बीमारी होती रहेगी । फॅमिली बच्चे एक बार डॉक्टर कॉटले से अपना चेकअप करवाना चाहिए । मैं चाहती हूँ कि अब वो मेरे ऍम ऍफ करवाली की बीज आसानी होगी । आपको ये बहन हो गया की आपको बोला कैंसर है जबकि आपके साथ ऐसा कुछ भी नहीं है । कुछ भी नहीं । रीता सानिया ने ठीक ठीक कर तुरंत वो सारा भारत स्तर पर था और इस तरह डॉक्टर कॉकटेल जैसे चेक करवाने वाली बात को रखा था । करवाने में सफल रहे । उसी एक और बहुत महत्वपूर्ण घटना घटी है डॉक्टर कॉटन ले जो आने वाले वक्त में जीता सान्याल के लिए एक बडा खतरा बन सकता था । वही हिसाब से उसी दिन एक महीने के लिए दूर जर्मनी चला गया । रीता सान्याल ने राहत की उस आफत से उसे खुदबखुद छुटकारा मिल गया था । हरियाणा गोंजाल्विस की दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही हालत वायरस के तमाम नौकरियों को चिंता में नहीं था । फिर वो सब आना से बेहतरीन कहते थे । उधर आरा गोंजालेस दिया काफी चिंतित रहते थे । उसे बार बार फ्रांस के राष्ट्रपति क्या ताजा हो । उसे लगने लगा था कि वो देना ज्यादा दिन नहीं । जब वो भी फ्रांस के राष्ट्रपति की तरह एडियां रगड तेरह करते भयानक दूरदर्शन तक पहुंच जाएगी जब उसके जिस्म के बिहार हिस्से से ब्लीडिंग हो रही होगी तथा उसका शरीर हूँ वो बात सोच सोच कराना ॅ दहशत से कहाँ पढते जब उसे अपनी हालत में सुधार न होता दिखाई दिया तो उसने एक दिन टेलीफोन करके ऍम अल सांसे वही बोला है आपने मुझे याद के आना, ऍम से बडे दुखी अंदाज में उसकी वादियों में दाखिल होते हुए खासकर ऍसे जीर्णशीर्ण आवाज निकलेगी । मैंने ही तो नहीं किया । वो इस समय भी बिस्तर पर लेटी हुई थी । उसका शरीर इतना दुर्बल हो गया था कि उसे उठना भी मुश्किल था । लेकिन नागुलाल फ्रांस को देखकर वह भी थोडा हिम्मत करके उन्हें और बैठ की पुष्टि से पीठ लगाते बैठे हैं । मैंने आज तो नहीं यहाँ बहुत खास कान के लिए बुलाया है । कमिश्नर ही तो मेरा सौभाग्य ऍम जो आपने मुझे इस लायक समझा कि आपके किसी का आ सकते हैं । दरवाजा अंदर से बंद हूँ । लेकिन जो बात में तुमसे कहना चाहेंगे कॅश बहुत खास है इतनी खास की । मैं नहीं चाहती कि मेरी बेटी यूलिया को में इसकी कोई मना किया गया । नॅान आश्चर्य से हो गया दुनिया को भी नहीं जरूर कोई खास बात थी । उसने दरवाजे के अंदर से सिटकनी चढाएंगे मगर माॅडल फ्रांस नहीं जानता था । ऍम भी नहीं जानती थी कि वह शातिर दिमाग पीता । सानिया आज कुछ ज्यादा ही अलग है । पुलिस कमिश्नर के का एक आना पैलेस में आगमन नहीं उसके कान खडे कर दिए थे और इस समय वो दरवाजे के बाहर कान लगाये खडे हैं । उनकी एक एक पांच मॅन कुर्सी खींची फिर वाना गोंजाल्वेस के नजदीक ही बैठ गया । आखिर ऐसी क्या बात है ना? आप सिर्फ मुझसे करना चाहते हैं ये तो तुम्हें मालूम हो चुका है । फॅमिली मैं ऍम हर मेरा जीवन ज्यादा नहीं लेकिन ऍम आना गुंजाल इसकी आवाज में दया भाव छक्का । अब मुझे गुमराह करने के लिए ऐसी कोई बात मत कहना । जिंदगी का आश्वासन चला था । मैं इस बात का बहुत बेहतर जानती हूँ । मेरी मौत हो चुकी है । मैं बोला फ्रांस उसके चेहरे पर दुख की काली बादल आ कर चले गए मैंने । आज तो मैं यहाँ एक पुलिस कमिश्नर के हैसियत से नहीं बुलाया आना गुंजाली फिर बोले बल्कि अपने बेहद करीबी उसकी है । सबसे बडा है ऐसे दोस्त की हैसियत से जिस के सामने अपने दिल की कोई भी बात बयान की जा सकती है । आप जो कहना चाहती है ना बिलकुल भेज चुका हैं । फॅमिली हो आपके सामने पुलिस कमिश्नर नहीं बल्कि आपका एक दूसरी बैठा हूँ । मैं जानती हूँ बात आना । गुंजाइश गहरी सांस छोडें ऍम कमिश्नर मुझे हम अपनी जिंदगी सिर्फ डर लगने लगा है । ये या क्या कॅश बुरी तरह चाहता हूँ मैं मैं ठीक हूँ । मैं भी आॅस्कर नहीं मारना चाहती हूँ । मैं नहीं चाहती कि आपने इस भयंकर रोग के कारण ऐसी भयानक दुर्दशा तक पहुंचा हूँ कि हाँ मेरे अपने वो भी मेरे पास आने से घबराने लगे मैंने अपनी इच्छा से जिंदगी मैंने अपनी जिंदगी बहुत शाह के साथ ही है । कमिश्नर अरब में बहुत शान के साथ ही मर जाना चाहती हूँ । मेरी इच्छा है कि मैं मौसी के लिंग करूँ । मासी के लिए आटम बम सा फटा । माहौल सांस की दिमाग में लगता है कि हाँ होश में नहीं है ना वहाँ आहिस्ता से देखा था । मैं पूरी तरह होश में हूँ । कमिश्नर मैं जानती हूँ की मेरी जिंदगी अब पचास साठ दिन से ज्यादा नहीं है । आना गुंजाइस बडी ही तृण स्वर्ण हुई । खराब जगह फैसला हो चुका है कि मुझे मारना है तो फिर मैं क्यों तब तक कर मर क्यों? पेडा से छटपटाते हुए मर मैंने काफी सोच समझकर ये फैसला किया है कि नहीं । मेरे लिए मौसी किलिंग सबसे बेहतरीन उपाय है । एक ही झटके में मेरी तमाम मुश्किलों का अंत हो जाएगा लेकिन ये एक गैरकानूनी काम है ना? नागुलाल फ्रांस तीखे स्वर में बोला हमारे देश के कानून ने अभी माॅडलिंग तो परमिशन नहीं दी है, हूँ आना गुंजाल जिसके होठों पर बहुत हल्की विद्रूपता पूर्ण मुस्कान देखेंगे । शॅल एक इंसान की जिंदगी और मौत का संबंध किसी भी कानून से कहीं ज्यादा ऊपर होता हूँ । मैंने तो उससे पहले कहा था एक कमिश्नर के हैसियत से नहीं बल्कि एक दोस्त की हैसियत के साथ । इस समय में तो उसे बात कर रही हूँ । मुर्सी किलिंग पूरी तरह सीक्रिट होगी । सोचूँ किसी को क्या पता चलेगा कि मेरी मौत मानसिक फिलिंग के कारण हुई? सबकी निगाह में एक सामान्य मौत होगी । आपने अपनी बेटी के हाथ मौत का इंजेक्शन लेना चाहता हूँ । इससे मैं मौसी की लिंग के प्रथम बलिदानी के तौर पर भी खुद को पेश कर सकूँ । लेकिन क्या आपने सोचा है कि जब जूलिया बेबी को आपके इस फैसले के बारे में पता चलेगा तो कैसा पहाड से टूटकर गिरेगा? उसके ऊपर ऍम मैं जानती हूँ । कमिश्नर मैं जानती हूँ ये सब माजुली आसानी से बर्दाश्त नहीं कर पाएगी । इसीलिए मैंने पहले तुम से बात की ताकि फिर यूलिया को मानसिक तौर पर तैयार करने में तुम भी मेरा ऐसा तो उसे ये समझना होगा कि जब मेरी मौत अब जरूरी बन चुकी है तो फिर ऍसे मारो लेकिन ऍम आॅलआउट अब इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं । मैं साइकिलिंग मेरी जिंदगी पर बहुत बडा उपकार क्योँकि मैं केवल और फ्रांस जैसी सख्त आदमी की आंखों में भी आंसू उनकी नहीं नहीं । मुझे मिला था वो हो फिर पुलिस कमिश्नर बॅाल फ्रांस के सामने ही लुधियाना गोंजाल्विस ने फोन करके अपने साल से था । भूत मारे को भी वहां बुला है । इतना ही नहीं आना ने गुड हमारे से ये भी कहा कि वह अपने साथ दो स्टार पेपर भी लेकर है । आधे घंटे बाद ही कुछ हमारे भी वहाँ क्या वहाँ पे आना? गुरूद्वारे आते ही बोला आपने मुझे नहीं क्यों याद किया तो उसे कोई जरूरी काम आ गया था तो हैं बैठी हूँ लेकिन स्टाॅल तो उसकी वजह भी बताती हूँ हूँ, हूँ तभी आना । पंजाब इसको खांसी का एक तेज दस का था । वो हमारे बडी सस्ता फुल मुद्रा में वहीं कुर्सी पर बैठा नागुलाल फ्रांस में दरवाजा अंदर से बंद करके उसकी सीट केन यहाँ पर चढा दी नहीं गोत मारे के हैरानी और बढेगा अच्छा हूँ ऍम मुझे तुमसे वसीहत तैयार कराने आना गुंजाल धीरे धीरे खांसती हुए बोलिए । वसीहत हाँ आना गुंजाल विशेष भले हम जानते हैं वो हमारे मेरी सारी चलना चल संपत्ति लगभग सौ करोड के आस पास है । वो सारी संपत्ति अपने बेटी जूलिया के नाम पर कर देना चाहती हूँ । मेरे बाद वैसे भी जूलिया ही सारी संपत्ति की मालिक है । लेकिन मैं मैं फिर भी नहीं चाहती कि उसके सामने कैसे भी कोई भी मुसीबत पेशानी इसलिए मैं जीते जी इस काम को निपटा देना चाहते हैं । अब ठीक है ना । वो हमारे बोला अगर आपसी तैयार करवाना चाहती है तो मैं दो तीन दिन में उसका कागज टाइप करवाकर ले आऊंगा । फिर आप उस पर सेना चक्कर देना । फिर ऍर में बोले मेरे पास इतना समय नहीं ऍम अपने हाथ से लिखकर अभी तैयार करो । इसी वक्त अब लेकिन ये ऍम ऍम ठीक है । वो हमारे बडे असमंजसपूर्ण मुद्रा में बोला । उसने एक नजर आपने बराबर में बैठे । मैं गूगल फ्रांस ऊपर भी डाली । फिर उसने अपना ब्रीफकेस खोलकर स्टाॅपर बाहर निकाला और उसके बाद उस पर ॅ तैयार कर लीजिएगा । मुश्किल से दस मिनट में ही कुछ मारे । दिवसीय तैयार खट्टाली ले लीजिए गुड हमारी ने आना गुंजाल जिसकी तरफ शांति पर बढा है आपका यहाँ से फॅसने वसीयत के नीचे सिग्नेचर रहते हैं । फिर गवाह के तौर पर उस वसीयत पर नागुलाल फ्रांसो तथा गोद हमारे में भी सिखना अच्छा किया हूँ तो तैयार होते हैं । फॅमिली हाँ तुम दूसरे स्टैम्प पेपर पर एक वो नोट तैयार करूँ माॅ मासी के लिए वो हमारे जोर से चौंका यहाँ काॅलिंग कर रहा है आना गुंजाल रिजेक्शन चल रही वो हमारे के बराबर में बैठे नागुलाल फ्रांस उसके चेहरे पर अभी भी बेचे नहीं की चिंता है । आपने जवाब नहीं दिया । वो हमारी बारी बारी से उन दोनों की तरफ देखता हूँ । पूरा कौन कर रहा यहाँ मासी के लिए मैं कर रही आना गुंजाल इसका बहुत धीमा स्वर वो हमारे हतप्रभ रह गया । आश्चर्यचकित अब आप उसी मान अपने कानों पर यकीन ही नहीं आप मूॅग लेकिन अचानक देखो हमारी आना । गोंजाल्विस के स्वर्ण मित्रता चल कि अब इस सब्जेक्ट पर बहस करनी बेकार है । यह मेरा अटल फैसला है । तो मैं शायद मालूम नहीं मुझे क्यूँ माइलाइटिस कीमिया नाम का ब्लॅक और अपनी लास्ट स्टेज पर हैं । डॉक्टर मुझे लाइलाज घोषित कर चुका और उस ने कहा है कि मैं ज्यादा से ज्यादा दो महीने जीवित रहना जिसमें से कई दिन गुजर भी चुके हैं वो हमारे हक्का बक्का साहना गुंजाल जिसको देखते रहेंगे तुम क्या चाहते ऍम अच्छा बताते हुए मरु या फिर माॅडलिंग के द्वारा स्कूल से मर जाऊं । हमारे से कोई जवाब नहीं दिया वो अभी भी खोर विस्मय से कभी आना । गुलजार जिसकी तरफ तो कभी माॅस्को की तरफ देखा था लेकिन ये गैरकानूनी है तो बोला था जानती आना गुंजाल जिसकी गर्दन स्वीकृति में अगर सारा काम इतने चुपचाप ढंग से होगा की किसी को पता भी नहीं चलेगा की मैंने मौसी की नहीं की एक स्वाभाविक मृत्यु समझी चाहेंगी । फिर प्रोलू किस लिए वो हमारे ताकि कभी ऍफ खुल भी जाए तो ये प्रो तुम सब की कानूनी हिफाजत कर सके तो नोट में लिखा होगा कि मैं अपनी इच्छा से मार रही है वो हमारी फिर लुधियाना गोंजाल्विस के पास हर सवाल का जवाब था गुड हमारे बहुत होता था फिर भावुकता के उन्हें क्षणों में उसने अपनी ऍम था । फिर धीरे धीरे उस पर मासी के लिए का पूरा तैयार करेंगे हूँ हूँ रीटर सानिया बहुत जोर जोर से खिलखिलाकर हसती थी बिल्कुल पागलों की तरह जैसे उसे हँसी का भयानक दौरा पड गया । सचिन हूॅं मेरी प्लानिंग सफल हो गई । ऍम कह कहा लगा है ऍम बढिया मर जाएगी । कलॅर इसका अंत हो जाएगा । उस ने आज अपनी सारी प्राप्ति मेरे नाम कर दिए । कल इसकी मासी किलिंग के समय पुलिस कमिश्नर माॅल, फ्रांसबीन वहाँ मौजूद होगा । उसका सदस्यता भी वहां मौजूद होगा और वो पूडिया उन सब के सामने गिडगिडाते हुए मुझसे कहीं की मुझे मार डालू पूछे माल डालो वो हो हूँ रीडर सानिया और जोर से खिलखिलाकर ऐसे कामयाबी नहीं सच मुझे से पागल बना दिया था कल का दिन में सबसे शाम दिन है । सच लीटर सानिया हुई कल मैं उसकी हत्या करूंगी । मगर फिर भी कानून मेरा कुछ नहीं बिगाड पाएगा । कच्छ नहीं सचमुच सचिन देवता के आवाज में भी ढेर सारी खुशी चलेंगे ये तुम्हारे लिए गर्व का क्षण आखिर तुम्हारी इतनी फुल प्रूफ प्लानिंग कामयाब हो रही है । फॅमिली प्लानिंग नहीं । सचिन रिटर सान्याल की हंसी गायब हो गई तो जहरीली नागिन की तरह जोर से भूख कार्य सिर्फ प्लानिंग ही नहीं बल्कि कल मेरा वह वचन बीत रहा होगा । मैंने अपनी मस्ती हुई माफ कर दिया था । शारदा सान्या को दिया था काली मेरी माँ की बहुत तक याद हो फॅमिली का सचिन मिलेगा ऍम वो शब्द कहते कहते लेता सानिया और फिर हसने लगी जोर जोर से हसने लगी हूँ ।

भाग - 13

अध्याय दे रहा आना प्लस की वह सुबह बडी गमजदा सुबह यूँ तो उस दिन पहले इसमें अन्य दिनों की अपेक्षा कुछ ज्यादा चहल पहल थी फॅसने उस दिन सुबह होते ही आलस के तमाम नौकरों को आदेश दिया कि वो पालस की आज खूब अच्छी तरह साफ सफाई करें और एक एक चीज का अपने स्थान पर तरीके से सच्चाई । इतना ही नहीं उसमें आज अपने पसंदीदा ढेर सारे व्यंजन भी बनवाए थे । जैसे वो बीमारी के कारण पिछले कई दिनों से खा नहीं सकते । उस दिन वो रेखा सान्याल के साथ उसकी बी एम ऍम ड्राइव पर भी करेंगे और थोडी दूर उसने भी । ठारी वहाँ जिंदगी को पूरी तरह जी लेना चाहती थी । अदालत में वापस आकर उसने ॅरियर बचपन में अक्सर बजाह करते थे । फॅस में उस क्षण तक कोई नहीं जाता था कि आज वहाँ क्या आॅल भी ऐसा ही जाहिर कर रही थी, जैसे उसे कुछ भी मालूम नहीं । सुबह के लगभग दस बजे वहाँ सबसे पहले पुलिस कमिश्नर ऍम रखा । उसके चेहरे पर आज जमाने भर काता क्षमता हुआ था । ॅ के पीछे पीछे ही सॉलिसिटर को हमारे भी बहुत है । वो सब धीरे धीरे एरियाना गोंजाल्विस के निजी कक्ष में जमा होने लगी आना । गुलडागर ने महा गुलाल फ्रांसो तथा गोत मारे के साथ अपने निजी कक्ष में ही भोजन किया । फिर रीता सान्याल और बूटा राम के साथ साथ भारत के तमाम नौकरों को उसी कक्ष में बुलाया था । वहां काफी भीड जमा हो गए । सब सस्पेंस में थे कि आखिर उन्हें वहाँ क्यों इकट्ठा किया गया है? ताल इसका मुख्यद्वार ऍम करनी है आना । गोंजाल्वेज उस समय बिस्तर पर लेटी हुई थी और उसके चेहरे से काफी थकान जाना चाहिए । आखिर बात क्या है? मोटा राम भारी सस्पेंस के बीच झूलता हुआ बोला हम सब लोगों को यहाँ क्यों इकट्ठा किया गया? अभी सब कुछ मालूम चला जाएगा । ऍम थोडा धैर्य रखें । हालांकि रीता सानिया जानती थी वहाँ क्या होने वाला है? लेकिन फिर भी अपने आपको योजना अनुसार बेचैन प्रदर्शन कर रहीं थी । सबके चेहरे पर जबर्दस्त सुख थी । आप लोगों के लिए एक बुरी सूचना है । फिर गोट हमारी कुर्सी छोडकर खडा हुआ और वह बडी गंभीरता के साथ एक पल के लिए सन्नाटा छा गया । क्या रासन खाना? जैसा कि आप जानते हैं कि आनाज कर सख्त बीमार हैं और उन्हें ब्लड कैंसर जैसी घातक बीमारी है । वो हमारे क्षण के उतरान साथ फिर बोला नाना ने अपनी इसी बीमारी से तंग आकर प्राण के आगे का फैसला कर लिया है और वो खुद को मौसी किलिंग के प्रथम बलिदानी के तौर पर पेश कर रही हैं । नहीं इधर गोत मारे की वो शब्द पूरे हुए और उधर रीता सान्याल के हलक से हृदय विदारक चीखो बाल पडी ऐसा नहीं ऍम नहीं कर सकती । बाॅडी नजदीक पहुंचे तथा फिर उससे लिपट कर फिर की ओर से रूपडी भारत के तमाम नौकर सामने रहेगा । एकदम बहुत सबके बूटा राम के ऊपर तो हैरत का ऐसा बज्रपात हुआ कि वो बिल्कुल गूंगा ही बन गया । मैं जानती हूँ मेरी बच्ची हैं । मैं समझती हूँ कि तो मुझे बहुत प्यार करती है आना । गोंजाल्विस लडकियों से रोते डीटा सान्याल के सिर्फ बस नहीं कहा खेलती हूँ पूरी लेकिन जरा सोच थोडे दिन तो मैंने वैसे मर जाना क्या? तो ये चाहती कि मैं उस उस फ्रांस के राष्ट्रपति की तरह दर्दनाक मौत मरु बिस्तर परेड यार अगर तेरह करते हैं तो फिर इस बात की मन्नत मांगते हुए मरूँ की है परमात्मा मुझे मौत आ जाए आपको कुछ नहीं ॅ निरंतर है क्यों हो रही थी आपको कुछ नहीं होगा । सबकी आंखे भी नहीं, सब जज्बाती हूँ । फिर तो यह बात यह कहकर कब तक अपने आप को धोखा देती रही कि लिया आना गुंजाल बिस्तर इच्छा नहीं चलने हो इस बार में फिर कब तक अच्छा? तब तो इस बात को कबूल क्यों नहीं करनी थी कि मेरा लास्ट टाइम वहाँ चुका टाॅल के हलक से जोर जोर की सिसकारियां नहीं मैंने आपको पंद्रह साल बाद पाया सब मैं आपसे पीछे नहीं बर्दाश्त नहीं कर सकती हूँ अगली टाॅल इसके आंखों में भी आंसू ऍम एक फॅमिली था फिर आज ही क्यों नहीं नहीं आना ऍफ चीज ही नहीं कर रही हूँ अपने आप को संभाल हो चुकी है अभी भी माधोलाल फ्रांसो ने आगे बढकर जूलिया के कंधे पर हाथ नियति कुशाद यही मंजूर खाना की मौत हर किसी तरह हुई थी नाॅन जोर से हैं क्योंकि साथ हूँ मेरी फॅमिली ऍम पहले खुद की लेकिन अपना आना होना चाहती मैं खोलना चाहती वो शब्द लीटर सानिया ने इतनी मर्मस्पर्शी अंदाज में पूरे की माँ को लग फ्रांस अभी तो आप ना चाहते हुए उस की भी आंखों में आंसू छलक चला है और सिर्फ फॅमिली वहाँ मौजूद हर आदमी दूंगा । हर आदमी की आंख हो सकते हैं । देखो हूँ मैं तुम्हारा दर्द समझ सकता हूँ । जो लिया नहीं थी । कॅश जितना तुम आना से प्रेम करती हूँ मैं हम सब भी आना से प्रेम करते हैं लेकिन अब हमें यह बात समझनी चाहिए कि कहना कलॅर आना की अंतिम इच्छा है कि तो उन्हें अपने हाथ से फॅमिली मैं रीटर सानिया दोनों ही नहीं हूँ, अपना चेहरा छिपा सकता हूँ मैं ऍम दे दी बहुत हमारे भी आगे बढा थोडे दुखी हो रहा है क्या तो माना कि आखिरी इच्छा भी पूरी नहीं करोगी ऍम सुबह होती है जिस व्यक्ति रहेगा तभी मैं गूगल फ्रांसो ने अपनी जेब से फोर्टविन इंजेक्शन की शीर्ष तथा ऍम और फिर उन्होंने खुद अपने हाथ से से रेंज में फोर ट्वेंटी हाई दुरुस्त भाई लोग थे मैं फॅमिली की तरह पढा है अपने आंसू कुछ पुराना कोई इंजेक्शन लगाकर उनकी माँ साइकिलिंग की इच्छा पूरी कर ऍम साहब की तथा फिर वो इंजेक्शन पकाएंगे । इस समय वह अपना रोल बडी कुशलता के साथ अंजाम दे रही है । तुम सचमुच बहादुर हॅूं सचमुच बडी वहाँ ऍन लेकर बिस्तर पर लुधियाना कुछ साल जिसकी तरफ पडेगा उसके चेहरे पर भावनाओं कि कश्मीर कश्मीर भी जा रहे हैं । कभी उसके चेहरे पर दृढता के भाव भर्ती तो कभी ऐसा लगता की अभी फिर लडकियों से रोने लगी वायॅर इसकी नजदीक पहुंच आना गुडगांव इतने आंखे बंद था उसी क्षण नागुलाल फ्रांस में आगे बढ कराना ऍम ऍम लगाया जाता हूँ । रीता सान्याल इंजेक्शन का पिस्टल दबाकर उसमें से दवाई की बिल्कुल बाहर निकाला था । फिर मीडल आना गोंजाल्विस की बाहर की तरफ पढाई फॅस तार पर रख दिया । फिर लडकियों से तो मैं ऍम नहीं लगा सकती मैं ना की मौत का कारण नहीं बन सकते हैं हिम्मत से कम लोग भी वो हमारी ने आगे बढकर रीता सान्याल को ढांढस बंधाया । हिम्मत से काम तो माना की मौत का कारण नहीं बन रही हूँ किए तो आना की इच्छा है तब भी मैं नहीं कर सकते ऍम मैं नहीं कह सकते हैं ऍम क्योंकि मेरा कितना भी नहीं माने की अपनी आना कभी कहता नहीं क्यों कि ॅ जोर से खत्म हो गया । नॅशनल उठाकर दोबारा रीता सानिया की तरह पढाया । अपनी आना की इच्छा पूरी करूँ रीता सानिया ने जोर जोर से सुबह ते हुए । फिर ऍम अपने हाथ में नहीं उसने फिर इंजेक्शन की । वो नीडल उसकी बाह की तरह पढाएँ । इस बार उसने वो नीडल बडी दृढता के साथ मेरी आना गोंजाल्वेस कि वह में कैसा है तथा फिर वो उसका पेस्ट तब तक दबाती चली गई जब तक फोर्टविन की सारी किसानी तो उस उसके शरीर में ना समझ गए जैसे हाइड्रोजन आना गुंजाल इसके शरीर में पहुंचे वो एक्शन के लिए कबूतर कि मानव बडबडाए था, चिरनिद्रा सुनती चली गई, हीटर सानिया के हाथ से सिर्फ छूट करेंगी । चिकित् पडे गिरवाना गोंजाल्विस की मृत देह से निपट इतनी सुंदर संपूर्ण ऍम पूरे गोवा में लुधियाना गुंजाल, जिसकी मौत का समाचार इतनी तेजी के साथ था जैसे जंगल में आग कहते हैं । सबको यही सूचना दी है कि आज सुबह मेरियाना गोंजालवेस को एका एक हाथ ठाक हो गया । पालस के तमाम कर्मचारियों को ये हिदायत पहले ही दी जा चुकी थी की मौसी किलिंग से संबंधित कोई बात किसी भी हालत में ली न होने पाए । नहीं नहीं देखते पूरा आलस आने वाले लोगों से खचाखच भरकर सब क्या के नाम थी । गोवा में ऐसे लोगों की संख्या कम ना थी, जाना से प्रेम करते थे । शाम तक लुधियाना गोंजाल्विस का शाहब एक नक्काशीदार ताबूत में डाल इसके मुख्य हो के अंदर रखा रहा हूँ । जब सूरज पश्चिम आकाश में छुपने जा रहा था और उसके घनघोर लालिमा चारों तरफ फैली हुई थी, तब मेरियाना गुंजाल उसके शव गोपालस् के खूबसूरत बगीचे में ही दफना दिया गया । ऍम अपनी सॅान्ग रहा था तो देर होती । उसका बोल रहा था सिंध नहीं । वो रोते रोते ही बिस्तर से उठकर था नहीं । फॅमिली नहीं जरूर आना की हत्या हुई है । जरूर उन्हें योजना बद्ध ढंग से मार डाला गया है । मुझे अपने तो उसकी मदद लेनी ही होगी । सब मथुरादास एलएलबी ही कुछ करेगा । एक बार फिर मथुरादास आॅडी की याद आती ही पूरा राम जल्दी जल्दी अपनी आंखों से आंसू साफ करेगा । आना पालस के नजदीक ही एसटीडी शौक थी । भूराराम सीधा उसी दिशा पर पहुंचा, पर वहाँ से उसने मुंबई के उस मकान फॅमिली के सबसे ज्यादा महीने की चांस ऍम दूसरी तरफ से भारी भरकम मगा बार मुझे मथुरादास से बात करनी है । उधर बहुत उच्च स्वर में कौन? मथुरादास मथुरा ऍम भी फॅमिली वही भारी भरकम आवाज आ सकते हैं । फॅमिली तो यहाँ नहीं, पिछले कई दिन से उसका कुछ अता पता नहीं । बूट आराम के चेहरे पर निराशा पहुँच गए । अब कुछ अंदाजा है मुझे नाम बोला वो इस समय कहाँ होगा आप का आदमी आप पीने के मामले में पूरा तबेला पूरा ढोलक का पेड बडा होगा । किसी मोरी में किसी गंदे गटर में या फिर किसी वर्ष के पिछवाडे में अब दशक का पिछवाडा वाॅर नहीं । व्यवस्था पिछवाडा यानी पिछवाडा क्या होता है? कुछ काम ऍम हाँ बहुत जरूरी काम था डाॅन मैं गोवा से बोल रहा हूँ उसका फिराने बूटा राम तो मथुरा सरल भी से मेरा नाम लोगे तो वह मुझे बराबर पहचाने का बढिया बात है में काम करते हैं । क्या मैं कल आठ बजे रात को फिर फोन करूँगा । अगर इस बीच मथुरा कॅाल भी बाहर में आए तो मुझे मेरे बारे में बोल कर रखना और उससे कहना कि वह कल रात आठ बजे बार में मौजूद रहे है । अगर वो इधर आएगा तो मैं बोलूंगा । नाम क्या बताया तुमने अपना? बूटा राम गोवा से हाँ संबंध विच्छेद होगा । मोटा राम ने भी बडी साॅस एक बार उसके मन में बहुत शक पैदा कर नहीं । मथुरादास एलएलबी से उसकी मुलाकात को छह साल गुजर चुके थे । मालूम नहीं मथुरा डाॅॅ उसकी याद भी किया नहीं । ऐसे भी हूॅं आदमी था, ऍम भी और घुमक्कडी । सचिन देवरा ने कौंडल की आवाज सुनकर दरवाजा खोला । बसाम नहीं । उसे किरपा रामचंदानी और उषा के दर्शन हुए । ॅ ही फरामोश चंदा नहीं सचिन देवता को देखते बडे खतरनाक ढंग से हो तो हमारा तो नहीं किस बात की मुबारकबाद दे रहे हो ऍम ऐसा बोला बल्लम बहनी कॅश नहीं मैं किस बात की मुबारकबाद दे रहा हूँ । बडी बढिया का पत्ता साफ हो गये आनी रोकडे के रास्ते में जो काम गडबड थरूर थी अब तो सब साफ हो गई नहीं बारामूल चलाने अपनी सिंधी टोपी दुरुस्त करता उषा के साथ रहता हूँ बडे ढाट के साथ पहले की तरह कुर्सी पर जाकर बैठ गया हूँ अभी बैठी हूँ बडी चाहिए तो भी बैठ के ऍम सचिनदेव वोडाफोन के लम्बे लम्बे हो उन दोनों के सामने बैठ के बडी जो मेहमान मेहमान आते हैं क्या उन्हें चाहे पानी पिलाने का तेरे यहाँ कोई रिवाज नहीं मेहमान सचिन ऍम कौन है यहाँ हूँ हूँ हूँ किरपाराम ओलचना नहीं बडे जोर से ठठा कर रहा हूँ ऍम तेरे सामने बैठे पूछता है कि उन्होंने मेहमान अगर मेहमान ऐसे होते हैं तो ऐसे मेहमानों को मेरे यहाँ चाय पानी पिलाने का कोई रिवाज नहीं । सचिन देवरानी थोडे तल्ख अंदाज में मुझसे कोरकर वहीं तो उस पर असर झूठ बोल रहा है । इतनी सारी मुंबई के अपनी खुराफातों को क्या तो बिल्कुल भूल गया । नहीं पडी वहाँ तो तो ऊषा को बडे कूद कूद कर चाय पानी मिलाता था और चाय पानी क्या बडी माँ तो से अपना हर पानी बनाने को तैयार धानी यही मना करती थी ऊषा आपने मोटी जैसे दान चमकाते हुए बडे कुत्सित अंदाज नहीं हूँ । जबकि उस बात को सुनकर सचिन देवडा के चेहरे पर फटकार बस्ती लगे पडे तो तो ये बात ऍम की तेरे सिर्फ जनानी कोई चाय पानी पिलाने करवा भी अकेली तनाज नानी को अगर जलाने के साथ कोई मेरे जाॅन ना मार दो तो अपनी जनानी के चाय पानी के झुलते है । फिर वो बेचारी भी गए पानी के बाद हूँ तुम सीधे सीधे ये बताओ कि तुम यहाँ किसलिए आया हूँ सचिनदेव रह कर रहा है लावणी यह बात हुई बतानी पडेगी क्यों? जब तक बताओ कि नहीं मुझे क्या पता चलेगा बडी आप बढिया मार गए । उसका किस्सा भी तमाम हो गया अब ये बता सारे सारे ब्लाॅस्ट कैसे होगा? नहीं हमें पचास करोड का पेमेंट कैसे करोगे तुम लोग ये तो रिटायर बताएगी तो बडी उसको भी बुलानी डर मामला फिनिश हो हो जाना की किचकिच बंद गीता यहाँ नहीं सकती । सचिन देवरानी तुरंत रीता सान्याल की फूल प्रूफ प्लानिंग की एक और चाहे चल रही है । एक और नहीं था रीता नहीं आ सकते है । हराम चलानी चौका बडी क्यों? क्योंकि आना फॅसने बोलता राम नाम का एक नौकारियों से रीता पर शक हो गया है । सचिन ने क्या बोला उसे शक हो गया है कि पहले इसमें पिछले दिनों जितनी भी खुराफाती हुई हैं, उन सब के बीच उसी कहा है । इसीलिए रिकाॅल अब ज्यादा यहाँ नहीं आती है । हूँ तो फिर भी था कि हमारे साथ मुलाकात कैसे होगी । पूछा है वो कोई प्रॉब्लम नहीं । सचिन नहीं बनाने का तुम लोग काम करूँ । कल रात ही ग्यारह बजे ऍम बेटा सान्याल और मैं भी ग्यारह बजे वहाँ पहुंचाएंगे । फिर हमारे भी जो भी बात होनी होगी वहीं वहीं ठीक रहेगा कि परामणु चलानी खुश होकर बोला कल रात ग्यारह बजे मीटर और बीच का स्टीमर पॉइंट हाँ ठीक है तो हम लोग चलते ऍम मानव आ जी का बहुत बहुत शुक्रिया । वो दोनों मुस्कुराते हुए दरवाजे की तरफ बढ गए । जबकि सचिन देवडा की आंखों में इस समय बहुत खतरनाक किस्म की चमक थी । ऐसी छमक किसी शिकारी की आंखों में तब पैदा होती हैं जब अपने शिकार के ऊपर झपटने वाला वो बूटा मथुरा दास एलएलबी से बात करने को बहुत बेचैन हो रहा था । अगला सारा दिन भी उसका पालस में बडी बेचैनी के साथ जैसे ही रात के आठ बजे वह फिर नजदीक की एसटीडी शौक पर जा पहुंचा तथा उसने वहाँ से फिर मुंबई के मकाओ बार में टेलीफोन मिला हूँ । दूसरी तरफ से टेलीफोन लाइन पर कल वाले आदमी की आवाज रूप से मकाओ बार दूसरा मैं गोवा से बूटा राम बोल रहा हूँ वो बूटा राम तुरंत बाद में बडी गर्मजोशी के साथ हो रहा तुम बहुत लकी अब आप कल तुमने इधर एलएलबी के नाम में ऐसे छोडा और आज वो इधर एज आ गया । तुमने उसको मेरे बारे में बताया बरोबर बताया वो तुम्हारी फोन के वेट में इधर बैठा अपना भी उसको बुलाता है । फिर मकाऊ बार का वो आदमी जो संभवतः बारटेंडर था । जोर जोर से चिल्लाते हुए मथुरा राम एलएलबी को बताने लगा कि उसका फोन है कुछ क्षण के लिए टेलीफोन लाइन पर सन्नाटा छा गया । ऍफ फिर या पीस में बहुत ही था की हुई सी बहुत उनींदी से हवा जो थ्री मैं मथुरादासपुरा हम साफ लग रहा था वो उस समय भी राम के नशे में बुरी तरह बहुत हैं । मतदाता मोटाराम खुशी से चीज मैं भूराराम तुम्हारा । फिर ॅ महीने पहले तो मुझे अगर मिले पहचाना मुझे जाना उसकी व्यग्रता पर मथुरादास एलएलबी ने जबरदस्ती हंसने की कोशिश की बरोबर पहचाना ऍम गलत बोलते थे अब भी इस हालत बोलते फ्रेंड को इधर के गुंडे मवालियों के स्टाइल में रन बोला तुम होलाराम खिसियानी ढंग से हजार बोला क्या बात है उसका चल तू में घर से गायब तो तो मापन को इनशॉर्ट्स दिया ऍम आश्वासन वही वही तो मैं आप को आश्वासन दिया । उसके बाद अगर अपन के ऊपर कभी भी कोई संकट आया तो मापन की मदद करेगा । एक दिया था आश्वासन मथुरादास एलएलबी नशे की तरह में बोला अब क्या संकटा गया बहुत बडा संकट आ गया । उस्ताद फिर बूटा राम आना पाल इसके अंदर पिछले दिनों जितने भी घटनाएं घटी थी वो सारी घटना एक ही सांस में माॅस्को सुनाता चला था । दूसरी तरफ सन्नाटा छा गया । तुम सुनना उस्ताद बूटा राम चला मैं क्या कह रहा हूँ, सुन रहा हूँ मथुरादास एलएलबी कर नशे में झूमता स्वरोगार हूँ तो तो मैं इस बात का शक है कि आना ने जो मौसी के लिए की है उसके पीछे जरूर कोई कह रहा षड्यंत्र है बिल्कुल । इतना ही नहीं वो लडकी जब से पहले उसके अंदर आये तभी से सारा हंगामा हुआ मैं गारंटी के साथ कहता उस्ताद पुलट की जरूर कोई फिर रोड है । वो मेरी असली में सी बाबा नहीं है । सब की वजह कई वजह उसका पुटर हम तीखे स्वर में बोला । सबसे बडी बात तो ये है कि मिस्त्री बाबा की बचपन की तस्वीर से जरा बहुत भी शकल नहीं मिलती । नाक नक्श कुछ तो मिलना चाहिए था । फिर बचपन में हमारी मासी बाबा बोलते हाथ से काम करती थी । ये सीधे आपसे काम करती है । हमारी मासी बाबा को म्यूजिक से बहुत प्यार था जबकि इसे म्यूजिक से बिल्कुल लगाओ नहीं । इसके अलावा हमारी मासी बाबा नहीं रंग से सख्त नफरत करती थी जबकि इससे नीला रंग पसंद है । मैं समझता हूँ उसका किसी पर शक करने के लिए इतनी वजन कम नहीं होंगी हूँ । फिर उसके पास में आने के बाद यहाँ तो हंगामा शुरू हुआ वो भी शक करने के लिए । अपने आप में काफी तगडी वजह हूँ हूँ । मथुरा ना मेहनत भी की आवाज ऐसे आई जैसे वो सोते में बढ बना रहा है । तो तुम मेरी बात ठीक से सुनने होना । मोटा रामाशंकर फॅस सुन रहा हूँ । फिर तो मीटर गोवा हमारे देखूंगा देखूंगा बूटा हम झुका । क्या मतलब उसी क्षण? दूसरी तरफ से लाइन कट गई । मोटा राम हक्काबक्का रह गया । उसे मथुरादास एलएलबी से इस तरह की उम्मीद नहीं थी । फिर फौरन उसने दोबारा वो नंबर डायल किया । घंटे जाने लगी । अलाऊ एयर पीस में बारटेंडर की पूर्ण हवाई, भारी भरकम आवास तथा रटा रटाया जुमला हुआ । अखबार मैं पूरा बोल रहा हूँ मुझे हम तीन नेता से बोला मथुरादास का ऍम हाँ वो हम के घुट लगातार तथा किसी मार खाने हाथ की तरह जीता हुआ इस समय बार के दरवाजे से बाहर निकल रहा क्या बात है? मुझे उससे बहुत जरूरी काम था । उधर हम बोला वो बिना जवाब दिए चला गया । आप वो शराबी आदमी है गाएगा उससे मगजमारी करता है । उसे अपना पता नहीं वो तुम्हारा क्या जरूरी काम करेगा । लेकिन उसके बारे में कोई भी बात करना अपना टाइम खोटी करना है तो आप मुझे भूल जाओ । गुडबाई फॅार रखती है वोटर हम सैन्य व्यवस्था में अपनी जगह बैठ रहा फिर मजबूरन उसे भी रिसीवर रखना पडा । उस दिन जब एसटीडी शाहब से बाहर निकला तो बुरी तरह थका हारा था । निराशा में घूम रहा था तो मुझे तो कुछ साहसी फिर हसते हुए ही उसने किरपाराम ओशन नानी को अपने ऊपर से धकेलना चाहिए । इस समय वो दोनों बिस्तर पर बिलकुल निर्वस्त्र नहीं और अपना वही खेल खेल रहे थे जो उनका सबसे पसंदीदा तथा दिलचस्प खेल था । ऊषा जब गाडी पर उतर आई तो किरपाराम मूलचंदानी ने उसे कुछ और कसकर दबोच लिया । फिर उसने जैसे पोजिशन संभालने चाहिए तो उसका ध्यान थोडा भटका । उसी क्षण उषा खिलखिलाकर हसते हुए मछली की तरह फिसलकर उसके नीचे से निकल गई । अब छोडो भी उषा झुंझलाए वाणी आवे की आई क्या? मैंने नहीं फिर पर हमने फिर झपट कर उसे दबोच लिया । जब छोडो उसके बाद के पर राम ने अपने जिस्म के बूथ से ऊषा को कुछ और भेजा । मैं मुझे नींद आ रही है वहीं वीजा नहीं जा रही है । हाँ पूछने अपने आंखों में नशे जैसी हरा रखी आपने हादसा होने जी हालत में फैलाने ऍम बारामूल चलना ने अपना हाथ उसकी कमर के नीचे लेता और उसे झिंझोडा वाणी जानती नहीं आज ग्यारह बजे स्टीमर पॉइंट पर भी जाना है । आज फैसले की घडी है । बडी माल फिफ्टी फिफ्टी कैसे होगा आज फाइनल हो? नानी ठीक है तो फिर वहाँ चलो ना हो या नहीं अभी से चलो अभी तक ग्यारह बजने में बहुत वक्त बाकी है । बडी तब तक एक एक बार अपनी पंखुरी घुमा लेते हैं । हम पंखुडी हूँ पहले हमारी पंखडी वाणी ऍम को ऐसा लगता है जैसे आपने पहले में चलना आ गई हो की पर आ मूलचंदानी ने एकाएक उसे उन्मादी हो करता । पूछा तो फिर ऐसी थी मैंने तो हस्ती रहे, बस हस्ती रहे और मैं तेरे लिए दौलत इकट्ठी करता हूँ । ये सारी डॉलर दो लाख डॉलर इस तो मैं एक खुशखबरी हूँ । तभी ऊषा किरपाराम के काम किलो को अपने दातों से चलाते हुए पुलिस सुना आजकल मुझे खट्टी कृति प्रकार है । बहुत बार टी उषा के चेहरे पर लाज की लाल एमाओवादी जी मिचलाना हुआ रहने लगा । इसी काम कुछ दिल्ली नहीं चाहता तो जैसे की इच्छा होती बिस्तर पर पडी रहूँ । बडी रहूँ वानी तो कोई बहुत बडी डेंजर बीमारी लगती है । पहुँचना नहीं । चौका तो मुझे पहले क्यों नहीं बताया नहीं कि बीमारी नहीं है । मेरे साइयां दूसरा बडे अनुभवपूर्ण ढंग से उसे कसकर सिटी बल्कि खुशखबरी है । खुश खबरी वाणी सही पूछा बिल्कुल उसी की टीम में बोले तो वह बनने वाले अपनी यहाँ पर आ मुझे तो एक लेना लडका का वो मेरी बिल्ली की तरह मुलचंदानी झपट कर उसकी कॉलेज फॅमिली तथा वो बिस्तर पर ही भरत नाट्यम कर नहीं तो नहीं मैं अभी तेरे रामू मीठा कराता हूँ नहीं मुझे मीठा कर रहा हूँ वो लाकर अर्थपूर्ण ऐसे में हुई या फिर कोई उससे भी ज्यादा सारा काम करोगे ज्यादा जरूरी का समझा समझा उषा हसी ऍम खुली छूट है की तरह उषा के आवाज में अच्छा समर्पण था तुम आ चाहिए जो कुछ भी करूँ मेरी बॉडी कुछ जैसे चाहे हम करूँ फॅमिली मिले भी क्या ना मिले क्यों मणि ऐसे भी क्या पता जाएगी नहीं तब ये भी मुझे बताना पडेगा किरपाराम और को ऐसे दिन ओमी वाणी समझ गया तू तो बहुत समझदार फॅमिली तू तो खाले सौ रहता है फिर दोनों खिलखिलाकर हसते हुए हैं एक दूसरे से गुत्थमगुत्था लेकिन आज उस उसी में भी कुछ छिपा था कुछ आशंका कुछ मारम लगता था जैसे कुछ होने वाला है

भाग - 14

अध्याय चौदह मीटर मार बीच का स्टीमर पहुँच । ये वो जगह थी जो समुद्र के बिल्कुल किनारे थी पर जहाँ से यात्रियों से लदे स्टीमर आते जाते थे । लेकिन क्योंकि जहाँ के समय यात्रियों का आवागमन भी कुछ बंद हो जाता था तो वह सारे स्टीमर भी वहीं पार पर डेरा डाल देते हैं । इस समय भी वहाँ ढेर सारे स्टीमर खडे थे । दूर दूर तक सन्नाटा था । समुद्र की सतह पर भी ऐसा काला आवरण छाया था जैसे समुद्र का सारा पानी हो गया । आगे कुछ मिनी हाउस भरे हुए थे जिनकी छते लाल ढलवा थी और जो स्पेनी स्टाइल से रिजाइन किए गए थे उन्हें मिनी हाउसिंग में वो सारे बोटमैन रहते थे जो दिन में स्टीमर चलाते लेकिन उस समय कीमत पर कोई नहीं था । सब अपने अपने घरों में बांध थे । वहीं स्टीमर पॉइंट के नजदीक एक बीएमडब्ल्यू कार खरीद थी । इस समय बीएमडब्ल्यू कार के तमाम खिडकी दरवाजे अंदर से कसकर बंद थे और उसमें रीता सान्याल तथा सचिनदेव ना बैठे थे । उनकी निगाहें विंडस्क्रीन पर जमीन थी जो मीठा मार बीच का दूर दूर तक नजारा कर रहे थे । क्या टाइम हुआ? रीता सान्याल बोली सचिन डेवलॅप स्क्रीन में से छनकर आती चांद की रोशनी में अपनी फॅमिली ग्यारह बजने में पांच मिनट बाकी हैं । फिर बोला तो आ जाना चाहिए था उन दोनों को । साला सिंधी बहुत ऍम का आदमी है । सचिन नहीं बढता है और ऊषा तो उससे भी ज्यादा हिलती औरत है । जरूर दोनों किसी और खुराफात को अंजाम देने में बिजी होंगे । ऍम खामोश बैठे नहीं गाडी की फ्रंट सीट पर ही इस समय दो साइकिल चीन पडी हुई नहीं । इसके अलावा उन दोनों की जेब में से दो जर्मन में पिस्टल की मुझे भी बाहर झांक रही थी । ध्यान रहे हैं हमारे पास पिस्टल जरूर है, लेकिन इसका इस्तेमाल हमने किसी हालत में नहीं करना । इमरजेंसी में सिर्फ खोल देने के लिए धमकी देने के लिए जानता हूँ । बैठ रहा हूँ । काम भी कुछ चलती निपटना चाहिए । जीरा सानिया तो नहीं कुछ ऐसा सिर्फ मेरे हमलोग जहाँ रहेंगे उतना ही किसी की निगाह में आने का खतरा है । आपने समझता हूँ पांच मिनट से ज्यादा नहीं लगना चाहिए । किरपाराम को तुमने संभालना फॅमिली उषा को मैं संभाल होगी । ठीक है गाडी के अंदर फिर नहीं रफ्तार व्याप्त हो गई । उन दोनों की उत्सुकता बढ रही थी । निगाहें बार बार विंडस्क्रीन की तरफ जाती और बीच पर दूर दूर तक हारे सन्नाटे में किसी को खोज में लगते हैं तभी उन्हें दूर से दो साई आती दिखाई पडे जरूर वही दोनों है सचिन डेवलॅप गाडी की हेडलाइट चला लेकिन जलाओ सचिन देवरानी हेडलाइट चला तत्काल हाईबीम का विलक्षण प्रकाश आधे से ज्यादा स्टाॅपर फैल गया । हाईबीम की रोशनी में वो दोनों साइड भी नहीं है । वही दोनों हैं । सचिन देवरानी कर रहा है । एक तो सालों को कैसे इत्मिनान के साथ रहते हुए आ रहे हैं । लेने दो ही नहीं पहुंच लाइट बंद कर दूँ । कल तो सचिन देवरा ने हेडलाइट बुझाती फिर बीच पर अंधकार गया हूँ । कुछ क्षण बाद में वो दोनों गाडी केमेस्ट्री का है । जैसे ही वो दोनों नजदीक आए तभी रीता सान्याल और सचिन देवरा ने भी गाडी के दरवाजे खोले तथा वो बडी अलर्ट पोजीशन में नीचे उतरकर फॅमिली किरपाराम चलानी रेट आसानी से संबोधित हुआ । नहीं आना की मौत मुबारक होनी आना की रीटा सानिया ले का एक जहरीली नागिन की तरह आपका थी और अब तुम्हारी थी । उसी पल रीटर सानिया गाडी की फ्रंट सीट पर रखी साइकिल चीन की तरफ झपट पडी । सचिन नेहरा भी झगडा, किरपाराम, मूलचंदानी और अच्छा कुछ समझ पाते उससे पहले साइकिल छह उन दोनों के हाथ में आ गई । साइकिल चीन हाथ में आते ही वो मानशेर बन गए । ट्विटर सान्याल ने तो झपटकर साइकिल की चेन का भंडार ऊषा के गले में डाल दिया । सचिन देवरा भी किरपाराम की तरफ झपटा । पता नहीं ना पाल जी तस्मानियन आक्रांत करनी चाहिए । छोडना मत । किरपाराम और उषा दोनों की छक्के छूट है । वह अप्रत्याशित घटना उन दोनों की समझ के पढे थे । ऊषा ने अद्वितीय फूलती का प्रदर्शन करके अपने कलीम इसी साइकिल चीन का फंडा निकालना चाहा परंतु रीड आसानी उससे कहीं ज्यादा खूंखार थी । उसने तत्काल अपने घुटने की कटोरी का प्रचंड प्रहार ऊषा के पेट में क्या बाहर ही ऊषा उसे उबकाई आई और वो अपना पेट पकडकर दोहरी हो गई । उसी क्षण लीटर सानिया ने उसके गले में साइकिल चीन का बंदा अच्छी तरह कर दिया था । फिर अपनी संपूर्ण शक्ति से उस बंदे को खींचने लगी ऍम गिर पर हम उस समय खुद सुन करता था । सचिन देवा जैसी साइकिल छीन लेकर उसकी तरफ झपटा, वो भागा परन्तु सचिन देवरानी जम्प लगाकर उसे कब्जा लिया और फिर उसे अपनी बाहों में भरी भरी धडाम से नीचे नीचे गिरते सचिन मेहता ने उसके गले में भी साइकिल चीन का भंडा फिर होती है फिर बंदे को झटके के साथ जैसे खींचना चाहता भी किरपाराम चलानी नहीं चीन की तरह । जब लगाते हैं उसने उछल कर सिर्फ की भरपूर ठोकर सच्चा इलाके में ऊपर चढे सचिन देवरानी देखते हुए रेट पर कलावा सिखाई । चेन का भंडा के बरामदे गली में से निकल गया । ठंडा निकलते ही किरपाराम द्रुतगति से भागा । पीछे ऊषा रीटर सान्याल के शिकंजे में जब भी अभी भी छटपटा रही थी, उसकी आंखों में अब मौत मैच में लगी थी । दहशत के कारण उसकी जिसमें का एक एक रूम खडा हो गया था । वो पहले तो गला फाड फाडकर चिल्लाती रही लेकिन जब ठंडा उसके गले पर कुछ ज्यादा ही होगा तो उसके मुँह से आवाज निकल ने भी बंद हो गई । सिर्फ घूम उनकी आवाज से निकल नहीं । सचिन ऍम नानी को भागते देख कर रहा हॅू । सच नहीं । मैं अपनी संपूर्ण शक्ति से उसके पीछे पीछे लेकिन पर आम भागने के मामले में वाकई कुछ पीछे ही साबित हुआ । सचिनदेव को जब ये लगा कि वो उसे पता नहीं पाएगा तो फिर उसने के बारामूल चलाने के ऊपर एक सब दस छलांग लगा दी । इस बार भागते हुए के दौरान केदारी दम उसका उसने वही तंग कर साली तुरंत के पर हम औंधेमुंह नीचे क्या सचिन देवरा ने फिर उसके गले में साइकिल चीन का भरना डालना चाहते कि नीचे फॅमिली एकदम पर गया था और घूमते उसने घुसा सचिन देवरा के चेहरे पर है सचिन देवता चीख उसी पल के पर रामचंदानी नहीं उसके हाथ से साइकिल चेंज छीन ली तथा उसे दूर रेट पर उछाल दिया । उसके बाद फिर भाग टाॅल ऊषा को भेज कर चुकी थी । उसे ढेर करते ही वह सचिन देवडा की मदद की लेकिन बारामूल चलाने की तरफ छपी । तभी किरपाराम मूल चलना नहीं समुद्र में खडा हो कमान से छोटे तीन की तरह पानी हो । सचिन देवरा ने भी बेपनाह खुलती के साथ उसके पीछे पीछे समुद्र में छलांग लगानी चाहिए । पहले तो तभी ॅ ने पीछे से आकर उसका कंधा चाहिए । अब वहाँ नहीं आएगा लेकिन देख नहीं रहे हो । पानी में कितनी तेजी से कहता चला जा रहे हैं । सचिन देवरानी समुद्र की सतह पर नजर वाकई तब तक वो उसे दिखाई देना बंद हो गया था । वो पानी के नीचे ही नीचे पडी तेजी से बहता जा रहा था । ऊषा का क्या हुआ? उमर गए । सचिनदेव तुरंत स्थान पर पहुंचा जहां ऊषा का फोन से लगभग अच्छा पढा था । काला । बुरी तरह घुटने के कारण उसकी दोनों आंखें टोकरियों से बाहर निकल आई थी । जबान नीचे को लटक गई थी और उसके मुंह और नाक से ढेर सारा खून निकल कर उसके फैल गया था । इस समय उसके चेहरे की ऐसी भी बहुत हालत थी कि अगर रात के अंधेरे में कोई और उसे देख ले तो डर जाएगी । हम जल्दी चले । यहाँ से इलाज की हालत देखकर सचिन देवडा के ऊपर भी दहशत सवार हो गए । एक मिनट पहले बाकी और काम तो निपटान बाकी का क्या तुम्हें मालूम नहीं । साठ पीछे नाम का वो क्रिमनल किसी का इस तरह मौर्य करने के बाद उसका सारा कीमती साथ सामान लूट लेता है । वो फॅमिली और फिर वो बेहद आनंद आनंद । ऊषा के कानों से उसका टॉप्स तथा गले से उसकी सोने की चिंता नहीं लगी । फिर उसने उषा का पास देखो डाला और उसका सारा सामान निकाल कर रहा चारों तरफ फैला दिया । पांच में कुल तीन सौ पैंतीस रुपए थे । उसने वो रुपए भी अपने कब्जे में कहीं । अगले ही पल वो दोनों कार में बैठकर रात के अंधेरे में ही वहाँ से कूच करता है । वीडा, सान्याल और सचिनदेव रह हो दोनों उस समय कॉलेज में थे और बहुत दरेज हुए थे । उनके चेहरे पी ले जाते थे के फरामोश चलाने घटनास्थल से किस तरह फरार हुआ था । उसने उन दोनों को दहला डाला था । ये ठीक नहीं हुआ । सचिन ऍम पर पडता है ठीक नहीं हुआ । इस समय उसकी गर्दन धीरे धीरे इंकार की सूरत में हिल रहे थे । बहुत खुला हाथ जोडी थी । उस जोडी में से किसी कमर जाना तथा किसी एक का बस जाना उतना ही डेंजर है जैसे नाग नागिन की जोडी में से किसी का बच जाना तो देख लेना पर आ मूलचंदानी अब जरूर कुछ करेगा । वो खामोश बैठने वाला शख्स नहीं है । खास तौर पर घोषणा की मौत के बाद तो हर किस नहीं लेकिन अब वो क्या करेगा? सचिन देवता का शशक स्वरूपाराम क्या कहा जा सकता है? फॅमिली कुछ ऐसा आदमी हालत में जो कुछ भी कर दूसरे थोडा है कम है वहाँ तक कुछ और ज्यादा पड गया । कम पसंद के गले में मैंने फंडा डालने की हरचंद कोशिश की थी । सचिन देवरा अपने लिए भी रूकती का एक मैं आज का एक बनाता हूँ लेकिन वह पट्ठा को छलावा बना हुआ था । हाथ आप निकलता था उस समय उस की फुर्ती देखकर कौन कह सकता था कि वो आदमी अधेड हैं तो उसे दरअसल इसी एक पॉइंट पर गलती हुई । सच ऍम ऍम यही है कि तुम उसकी सही सही ताकत का अंदाजा लगाने में छूट गए और इसी एक बात का के परामणु चलाने में बखूबी फायदा उठाया । सचिन देवडा के चेहरे पर कडवाहट के भाव भरा है बारामूल चलानी बचकर भागने किया था वो इस बात के लिए खुद को पूरा पूरा दोषी मांग रहा था । उसने ऍम रात के पौने बारह बजे का समय होता था । रीता सान्याल को आ जाना । पैलेस में लौटने की वापस कोई जल्दी नहीं थे । जिस दिन से लेते आना । गंजाल जिसकी मृत्यु हुई तब से । बूटा राम ज्यादातर आपने क्वार्टर नहीं बंद रहता था । इसीलिए रीता सानिया अलाहाबाद आप हो गए थे तो कहाँ जाती थी? क्या करती है उस की उन गतिविधियों को चेक करने वाला? फिलहाल समय गुजरता रहा वो दोनों ही बस की कि आपने अपनी लाख खाली करके टेबल पर रह चुके थे । अभी एक घटना घटी, बाहर वाले कमरे में तडाक की आवाज हुई तथा फिर किसी चीज के खनखनाते पीस ले आए । दिखाने की आवाजाही ये क्या हुआ ऍम कुर्सी से उछालकर खडा हो गया । ऐसा लगा जैसे किसी ने बाहर वाली खिडकी का शीशा तोडा है । ट्वीटर सानिया का रहस्यपूर्ण स्वरूप क्या उसी क्षण धर्म से किसी के घुटने की आवाज, ॅ सीता सानिया आंधी कौनसी छोडकर खडी हो गई कुर्सी से खडी होती उसके हाथ में एक काम से पिस्टल भी नमूदार हुए । फिर वो दोनों अद्वितीय फूटती के साथ बाहर वाले कमरे की तरफ । हफ्ते इस बीच सचिन देवडा भी अपनी जेब से पिस्टल ने कहा चुका था और उसके चेहरे पर बडी खतरनाक भाव थे । उन दोनों ने धर धर आते हुए बाहर वाले कमरे का दरवाजा खोला तथा वांदर दाखिल हुए । सामने ही ग्लाॅस ढेर सारा कांच टूट कर नीचे लिखा हुआ था परंतु वहाँ कमरे में कोई नहीं था । लगता सचिनदेव अपनी पिस्टल चारों दिशाओं में घुमाता हुआ है । जो कोई भी है यहीं कहीं छिपा है । यही है तुम भी सही फॅमिली तो यही है तीसरा सान्याल और सचिन देवडा पिस्टल हाथ में लिए लिए कमरे में चारों तरफ खून गए तथा उसे ढूंढनी है । उन दोनों का दिल किसी अनजानी आशंका के कारण इस समय जोर जोर से धडक रहा था । आगे तो किरपाराम जन्मानि था । वो इस समय कमरे की परछत्ती पर छिपा बैठा था और वहीं से अपनी सुर सुर आंखों से उन दोनों को घूम रहा था । उसकी आंखों में खून उतारा था । उसके दिल दिमाग पर उस क्षण कुछ भी कर गुजरने वाली दहशत सवाल थे । इतना ही नहीं उसके हाथ में फाइनल के चौडे भाग वाला एक लंबा सा चाकू था जिसकी मुझे पीतल की बारह साल किरपाराम उल चलानी नहीं जैसे दूसरे कमरे से आपकी आवाज वो तुरंत झपट कर कमरे की परछत्ती पर चढ गया था । यहाँ तो कोई भी नहीं सचिन देखना कमरे में इधर उधर छाता हूँ । फिर उसने चारपाई के नीचे पीछा कहीं । ऐसा तो नहीं की जो भी आदमी अंदर है वो स्टोर में जा चुका हूँ ना? सानिया ने आशंका व्यक्त की ऐसा भी हो सकता है । मैं स्टोर खोल कर दी थी । कॅश हाथ में पिस्टल कुछ और ज्यादा सावधानी से पकडा तथा फिर बिल्कुल निशब्द ढंग से स्टोर का दरवाजा अंदर कोई नहीं था । फिर ॅ स्टोर के अंदर घुस गए । वहाँ उसमें एक एक चीज को उलट पलट कर देखा । वहाँ सचमुच कोई नहीं था क्या अंदर कोई है सचिन देखना होता नहीं है । कमाल है सचिन डेवलॅप न कमरे के अंदर कोई है और ना ही कोई स्टोर में है । बहुत में कहा हो गया जो लास्ट बन्दों का शीशा तोडकर अंदर घुसा था । काश इन दोनों में से किसी एक की भी परछत्ती की तरफ हो जाती तो तुरंत सीख उठते क्योंकि वहां बैठा किरपाराम मूलचंदानी अभी भी बडी खौफनाक निगाहों से उन्ही दोनों हो रहा था । रीता सान्याल और सचिन देवडा दोनों परेशान थे । नहीं वो बराबर वाले कमरे में तो नहीं चला गया । ऍम वहाँ कैसे जा सकता है । वहाँ से तो हम अभी आॅल फॅमिली में क्या हर्ज क्या पता हुई हूँ । ठीक है देखते हैं वीटर, सान्याल और सचिनदेव लाभ बडी सावधानी के साथ दूसरे कमरे की तरफ बढ गए । जैसे वो दोनों कमरे से बाहर निकले के बारा मूलचंदानी फिर हरकत में आ गया और वह एक वॉडरोब पर पहुँचकर नीचे उतर रहा है । उसी वॉडरोब के द्वारा वो बाल झड दी पर चढा भी था । नीचे कमरे में आते ही वो एक सोफे के पीछे घात लगाकर बैठ गया । उसकी मुद्रा ऐसी थी जैसे कोई जीता अपने शिकार पर झपटने के लिए तैयार बैठा है । उसके इरादे में एक नजर नहीं है यहाँ भी कोई नहीं । दूसरे ऍम ये आप में आखिर गया कहां मालूम नहीं कहा गया । ऐसा लगता है जैसे उसे धरती निकल गई हूँ । फॅस के बाहर देखता हूँ । ऍम शादी खिडकी के रास्ते बाहर चला गया । फिर सचिन देवरा तीस तीस दिनों से चलता हुआ वापस सबसे कमरे में आना जिसमें किरपाराम मूलचंदानी छिपा था । उस कमरे में आते ही वह तेजी से दरवाजे की तरफ पडा, लेकिन वहाँ भी दरवाजे तक पहुंच भी नहीं पाया था कि तभी एक का एक फायदा मूलचंदानी झटके के साथ सोफे के पीछे से बाहर निकल आया और इससे पहले कि सचिन देवता कि निकाह उसके ऊपर पडती, वो एकदम तीन की तरह उसके ऊपर छपता । तभी सचिन देवरानी भी उसे देखा । उसने फौरन बडी ही दहशत लाख ढंग से कला बाहर का चिल्लाना चाहा लेकिन के बारा मूलचंदानी में तुरंत उसके ऊपर अपना हाथ इस तरफ फिक्स कर दिया जैसे कुकर के ऊपर ढक्कन फिक्स हो गया । सचिन देवरा के मुझसे कोई हूँ की आवाज से निकल नहीं लगी । किरपा मूलचंदानी ने दूसरा हाथ उसके सीने के आगे से घुमाकर बगल में डाला तथा फिर उसे बेदर्दी के साथ घसीटता हुआ सोफे के पीछे लेगा । फॅमिली तुम को छोडना नहीं, पर आ मूलचंदानी ने ग्रुप में गुणगान करे अपने घुटने का एक मछली का हार उसके पेट में क्या फॅमिली लेकिन फॅमिली वाला हाथ सीधा करने का प्रयास किया । आपने मुझसे आवाज निकालने की कोशिश की लेकिन पर हम मूलचंदानी नेता काल अपने घुटने का एक और वजह त्यौहार उसके पेट में क्या दूसरे हाथ का प्रचंड घुसा, उसकी पिस्टल वाले हाथ पर चाहिए । सचिन देवरा के हाथ से पिस्टल छूट गई । किरपाराम ओ चलानी नहीं उस सिस्टर को तुरंत अपने अब से मिली नहीं तुम ने उस को मार डाला । परामणु चलाने का चेहरा था । टक्कर ज्वालामुखी बन गया थोडी मेरी जान से भी प्यारी ऊषा को मार डाला तुमने अब गाना कीत औरत मैं तुम्हारी होगी ना मेरी जब मेरी ऊॅचाई तो मैंने अभी रोकडे को चौक में मध्य मारना नहीं किरपाराम चलाने का चाकू एका एक हवा में बिजली की तरह मतलब पाया तथा फिर उसका सीना चीज डालने के लिए उसकी तरफ छापता । तभी सचिन देवरा आतंकी वशीभूत होकर पलटी खा गया । परंतु फिर भी वह चौडे फल वाला चाहते । उसके बाजु कुछ खेलता चला गया । उसी क्षण के पर आपके हाथ की पकड भी उसके ऊपर ढीली पडी । सचिनदेव फौरन गला भाग का चल रहा था । साॅस के चीखने की आवाज सुनकर दौडी दौडी वहाॅं तभी हो उससे मैं बंधे हुए किरपाराम चलाने का चाकू वाला हाथ फिर हवा में तेज बिजली की तरह लगाया तथा फिर उसके पेट की तरफ सकता । तब तक सचिन देवरानी अपने आप को काफी काबू में कर लिया था । पर हम मूलचंदानी का चाहते उसके पेट को भागने में सफल होता । तब ही सचिन देवरा ने अपनी दोनों तांगों की अडंगी सोफे के नीचे फंसाई तथा फिर पीठ का सहारा लेकर कुछ उसका सिर के पलामू चलाने के चेहरे पर पडा तो फौरन के पर आ मूलचंदानी के शिकंजे से आजाद हो गया और आजाद हो गए भागा आपके फरामोश चलाने में पिस्टल था । सच कमरे में दाखिल ऍम ढाई ढाई दो वो लिया था उसी क्षण जीता सानिया ने सचिन दिला के ऊपर छलांग लगा दी तथा वो से लेकर धाम सके । दोनों गोलियाँ उसके सिर के ऊपर से किस रही । गोलियों के गुजरती वो दोनों फिर खडे हुए तथा दूसरे कमरे की तरफ भागे । ऍम तुम दोनों की कैरॅल चलना नहीं सपूर्ण ढंग से कराता हूँ पीछे पीछे झगडा बडी आज मैंने तुम दोनों को चीर ऍम सचिन देवरा के साथ ॅ गोली सीधे जाकर किरपाराम चलाने की टांग मिलेगी । वो बाहर और बाहर हो गया परन्तु के पडा मूलचंदानी इतना खतरनाक बना हुआ था कि नीचे गिरने के बावजूद उसने वही रखे स्लाॅट उठा उठाकर उनकी तरफ से उसने धुआधार ॅ रूप से इतना आतंकित हुए की वो तुरंत सबसे आखिर वाले कमरे में जाकर घुस करें । वहाँ घुसते ही उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया । रीता, सानिया और सचिन देवता के सांसे भी सेकेंडों में इस तरह फूल गए जैसे वो कोई लंबी इमारत हाँ ड्रेस जीत करा रहे हैं । सचिन देखना तो सिर्फ नहीं चढाने के बाद दरवाजे से ही चिपक कर जोर जोर से हाथ में लगा था । उसके ऊपर कितना राम चलाने की बी पनाह दहशत हावी थी और उसके बाद उसे निकल निकल कर होना भी भी बह रहा था हूँ । पूछा की मौत ही से धंदा बना दिया । सचिन देवरा विक्षिप्तों की भारतीय होगा या कुछ भी कर सकता है । कुछ भी हाँ जिससे दौलत की भी परवाह नहीं है तुम्हारी पाॅकेट में कितनी गोलियां थी पीता? सानिया ने पूछा दस वो उसमें से छह गोलियां चला चुका है । फॅमिली अगर वो बाकी बचे चार गोलियां और चलाते तो हमारा काम काफी आसान हो सकता है लेकिन उसके पास चाकू है । सचिन काफी स्वामी बोला उसकी कोई भरवाने चाकू को समझाना जा सकता है । तुम्हारा साथ कैसा है? ठीक है रीता सानिया ने सचिनदेव ना के जख्म पर दृष्टिपात क्या वाकई किरपाराम ने उसके बाजू को बडी बेदर्दी के साथ ही डाला था? अगर कहीं बच्चा को उसके बाजू में घुसने की बजाए उसके अनंत अंतडियों में घुस गया होता तो उस समय सचिन देवरा की लाश उस कॉलेज में पडी होती । कभी बाहर से के बारामूल चलाने के कदमों के आवास यहाँ नहीं फॅार । सचिन देवरानी दरवाजे की छुट्टी में से बाहर का दृश्य देखा । किरपाराम मूलचंदानी लड खाता हुआ तथा हिस् सहित की आवाज करता हुआ वहाँ घूम रहा था । उसकी टांग में से बडी बुरी तरह खून बह रहा था । लेकिन उसे उसकी परवाह थी । परवाह कहना थी उसके चेहरे से तो ऐसा जाहिर हो रहा था जैसे उसे अपने उस जख्म का पता भी ना उस हमले में उसे और ज्यादा खूंखार बनाता रहा था । उसके हाथ में चाकू था । दूसरे हाथ में पिस्टल । वो लंगडाता हुआ, कुछ देर इधर से उधर घूमता रहा और फिर खिडकी के नजदीक पहुंच गए । उसे जोर जोर से भर बढाने लगा । दोनों आतंकी तो थे वो । वो खिडकी तोडने की कोशिश कर रहा हूँ । सचिन देवरा आक्रांत स्वर्ण बोला वो खिडकी के रास्ते अंदर आने की कोशिश कर रहा है । पिछले ऍम तो नहीं है जिससे वो आसानी से तो डालेगा । इस खिडकी को तोडने के लिए काफी दमखम की जरूरत है । इस समय मैं कुछ भी कर सकता हूँ । रीता सानिया भी उस समय भयभीत थे कि पर आ मूलचंदानी वाकई बहुत जोर जोर से खिडकी पर प्रचंड प्रहार कर रहा था । उसके हर प्रहार पर फिर की पूरी तरह झनझना थी । हर बार ऐसा लगता जैसे चिटकनी चौखट की पुष्टि से उखडकर नीचे गिरेगी । खिडकी की खस्ताहालत देकर सचिनदेव ला के शरीर में कुछ और झुरझुरी दौड गए । वो लगभग कर खिडकी के नजदीक जा पहुंचा और उसने खिडकी के दोनों पल्लों को अंदर से कसकर थाम लिया । किरपाराम मूलचंदानी सचमुच ऍम वहाँ बार उसकी आंखों की गयी अपनी मंशा का चेहरा चक्कर काट था । ऊषा का चेहरा चक्कर काटता तो और अधिक खूंखार होता । फिर से अपने उस बच्चे क्या थी तो ऊषा के पेट में पल रहा था । उस बच्चे की याद आते ही वो और पागल हो जाता है । वो इस समय खिडकी पर अपनी संपूर्ण शक्ति से हम ले कर रहा था । लेकिन जल्दी उसे एहसास हो गया कि वह खिडकी टूटने वाली नहीं है । आप पीछे हट गया, फिर दरवाजे के सामने पहुंचा । तभी उसे का एक न जाने क्या सूझा कि वो गुस्से में वहीं रखी कुर्सियों तथा स्टूल उठा उठाकर दरवाजे पर महान नहीं लगा । फिर उसने इधर उठाते गा । उस कमरे में घुसने का कोई और आसान था । जब उसे कुछ नहीं सूझा तो वहाँ जितना भी कीमती सामान रखा था उसने वह सारा सामान तो शुरू हो । उसके बुरी तरह कीमती सामान होने की आवाजें रीता सान्याल और सचिन देवता को अंदर तक सुनाई दे रही थी । हूँ अच्छा कि हम में पागल हो गया है सचिन देवडा के शरीर में झुरझुरी दौडेगा जब उसे कुछ और नहीं हो रहा तो वह सामान्य तोड रहा । उसे तो कुछ नहीं तो उसके अंदर जो गुस्से का गुबार भरा कहीं ना कहीं तो निकलेगा ना? बेटा सान्याल बिस्तर पर जाकर बैठे । सचिनदेव राबिया खिडकी किसान ने से हट गया था । काफी देर तक सामान तोडने कि वहाँ से होते रहे । फिर का एक आवाज आनी बंद हो गई । उसके बाद आधा घंटा बडी खामोशी के साथ कुछ रहा । पूर्ण खामोशी कोई हलचल नहीं हुई । आवास नहीं एक हाँ एक वहाँ ऐसी तीक्षण नीरवता व्याप्त हो गई थी जैसे वहाँ कोई नहीं है । ये खामोश कैसे हो गया? ट्वीटर सान्याल आश्चर्य वर्ष पूरी मालूम नहीं कैसे खामोश हो गया । सचिन देवता के स्वर में भी हैरानी थी । कहीं ऐसा तो नहीं था खाकर वापस चला गया हूँ । मैं ठीक हूँ । रीटर सान्याल तेजी से खिडकी के नजदीक पहुंची । फिर उसने बिल्कुल निशब्द ढंग से सिर्फ करने नीचे गिराए तथा फिर खिडकी के दोनों पर लोगों के बीच बेहद मामूली से छह पैदा कर के बाहर झांका । वहाँ कोई नहीं था । फिर रीता सान्याल खिडकी में थोडी और बिजली पैदा की तथा कुछ और बाहर झांका । वहाँ से फिर भी कोई नजर ना ट्वीटर सान्याल ने हम अपनी गर्दन वापस खींच तथा फिर खिडकी की सिर्फ नहीं वापस लगा दी । मालूम नहीं क्या चक्कर है? फॅमिली हुए । उसके बाद वो पडी असमंजसपूर्ण स्थिति में दरवाजे की तरफ बढी तथा फिर उसने दरवाजे किसी करेंगे । ऐसे ही नीचे गिर आनी चाहिए वो तुरंत चौक्का पीछे आ गए । दरवाजे और वर्ष के बीच मामूली छेडती थी । उसमें से बहकर कोई तरल पदार्थ अंदर कमरे में आ रहा था । दो बारी सीट ऍम सचिन देवरा भी लगभग कर दरवाजे के नजदीक का लेकिन वह क्या चीज अंदर डाल रहे । सचिन का पार्टी पार्टी नेत्रों से उस तरल पदार्थ को देखते हुए बोला जब काफी मात्रा में अंदर आ चुका था रीता सान्याल ने नीचे झुककर उस पदार्थ को सुनाता था । उसे उंगली से छुआ ऍम का बेहद आतंकी हो जाता । ऍम तो इस कमरे में आग लगाकर हमें जिंदा जला डालना चाहता हूँ । पेट्रोल धर्जा उठा सचिनदेव थी लेकिन उसके पास पेट्रोल कहाँ जरूर हमारी गाडी के अंदर से पेट्रोल निकालकर लाया है । उसी क्षण बाहर मौजूद के फरामोश अंदानी ने एक और खतरनाक कदम उठाया । उसमें उस पेट्रोल देख लिया । सलाह दिखाते तुरंत जैसे आपका कोई भीषण दरियाल । अपना फायदा वांदर की तरफ जाता । वहाँ और सचिनदेव रचना भागो । यहां से बडा आॅस्कर मरने में हमें ज्यादा वक्त लगेगा । जीता सानिया भी दरवाजे किसी की तरफ सकती । उसने सिटकनी खोली और अगले ही क्षण वो आपके धरिया को फलांग कर बाहर हो गई । तुरंत सचिनदेव भी उसके पीछे पीछे दौडता हुआ कमरे से बाहर निकला । सामने ही अपने संपूर्ण मुँह में पारा मूलचंदानी घर था । उसी इसी पल का इंतजार था । वह यही चाहता था जैसे वो दोनों ने के लिए उसने पिस्टल से उन्होंने ऊपर धुआधार गोलियां बरसानी है । लेकिन रीटा सान्याल और सचिन देव का भी कोई काम चलाते थे । बाहर निकलते वो दोनों फर्श पर ढेर हो गए । सारी गोलियां उनके ऊपर से निकल गए तथा आपके दरिये में से होकर कमरे के अंदर न जाने कहाँ कहाँ ऐसी किरपाराम झलानी ने कुछ और गोलियां चलाने चाहे ऍम उसमें आप गोलियाँ खत्म हो चुकी थी । सचिन देवडा ये देखते ही शेर होगा । वो एकदम से जम्प लेकर उठा और उठने के दौरान ही उसने रीता सान्याल के हाथ से उसकी पिस्टल भी छीन फिर फॅमिली की पर आ मूलचंदानी ने गोलियों से बचने का अथक प्रयास किया लेकिन वो दोनों गोलियां उसके सीने में जाकर था । सी तुरंत उसके सीने से खून के दो ऐसे फव्वारे छोटे जैसे किसी ने न खोल दिया । वो अच्छी खासी और फिर कश् खाकर नीचे गया । नीचे गिरते ही वो ढेर हो गया । शीतू में क्या किया था सान्याल सचिनदेव ना की तरह तुम ऍम सबकी । मैंने तुमसे कहा था कि पिस्टल का इस्तेमाल किसी हालत में नहीं करना । पिस्टल का इस्तेमाल सिर्फ खून देने के लिए लेकिन अगर मैं ऐसे नहीं माता तो ये हमें महादान सचिनदेव मैंने अपने आप को काबू किया । वो बुरी तरह हफ्ता हुआ । बोला खान दोनों को मार डाला था फिर भी तुम है । इस तरह आनन फानन हत्या नहीं करनी थी जो पिस्टल से इससे नहीं मानना था । अभी उन दोनों के बीच को गरमा गरम बातचीत हुई रही थी कि तभी पता मूलचंदानी की बहुत धीरे धीरे कराहने की आवास सकता या अभी भी जिंदा साॅस के नजदीक पहुंचे । उसी क्षण फोन से लगभग के भरा मूलचंदानी ने एक आईभक्ति आंखे खोलते । उस समय उसकी आंखों में खून होता था । उसका चेहरा बेहद डरावना नजर आ रहा था । आंखे खोलते हैं उसने कहर बरपाती निगाहों से रीता सान्याल और सचिन दिव्या को पूरा तथा फिर एकदम जख्मी शेर की तरह सचिनदेव ना के ऊपर छलांग लगाते सचिनदेव दहशत से चिल्ला उठा उसने फिर पर हम चलाने के शिकंजे से आजाद होना चाहिए, परंतु उसका शिकंजा लोहे जैसा सकता था । बारामूल चंदा नहीं, उसकी गर्दन कब जाना है ऍम तभी किसनाराम मूलचंदानी में आपने पीतल की उठाने चाहूँगा । मछली त्यौहार सचिन देवता कि पेट में सचिन ऍसे की तरह डकरा उठा । उसकी पीठ से खून का भाव द्वारा छोटा ॅ सचिन देवरा ने भीषण आर्तनाद किया था । ऍम उस दृश्य को देखकर रीता के होश भी फना होता है । उसने फौरन तीर की तरह सच देवता का हाथ पकडा तथा फिर उसे जबरदस्ती के फॅमिली बनाने के शिकंजे से बाहर खींच लेना चाहा, लेकिन की पर हम फॅमिली बडी मजबूती की स्वच्छता लिया । था ऍम अस भी ना कर सके अंदर कमरे में दूध घूम कर आओ चल रही थी और जो बढती जा रही थी कभी किरपाराम मूलचंदानी ने बडे जुनून में आकर फिर उसके पेट में चाकू का वजन बाहर क्या सचिन देखना फिर टकराया अफ्रीका सान्याल ने देखा के आराम से आसानी से छोडने वाला नहीं है तो उसने वहीं पडी लोहे की एक छड उठा ली तथा फिर वो छत बहुत जोर जोर से के फरामोश चलाने के ऊपर बचाने शुरू कर दी । लेकिन किलपारा मूलचंदानी के ऊपर इस तरह का कोई प्रभाव ना हुआ । तब ही किरपाराम मूलचंदानी ने एक और खतरनाक काम किया । उसने लम्बे फल वाले चाकू से सचिनदेव की गर्दन का डाॅॅ सचिन देवता कि बेहद मार्च तक ऍम चली गई और फिर आपके बारामूल चलाने के ऊपर ही भेज हो गया । उसकी गर्दन से थुलथुल करके निकलता खून किरपाराम के खून में एकाकार होने लगा । उसी क्षण किरपाराम मूलचंदानी भी पीछे जा गया । वो भी ढेर होगा । सीधा सानिया असम में रह गए । चंद सेकंड में ही सचिन देवराम मर चुका था । उसके सामने ही मर चुका था और वो कुछ भी ना कर सकें । उसने गुस्से से एक बार फिर बहुत जोर से वो चाय किरपाराम मूल चलाने के ऊपर खींचकर मारे तथा उसके बाद उस छड को दाई तरफ उछाल दिया । सीट सान्याल की आंखें भर रहा है । सचिन देवडा जो उसकी जिंदगी का इकलौता सहारा था । उसकी जिंदगी की एकलौती किरण थी आज वो भी खत्म हो गया । सब खाती है रेटा सान्याल काफी देर तक नमकीन मुद्रा में खडी नहीं । फिर उसने धीरे धीरे उस कॉलेज में अपनी उपस् थिति की जितने भी सबूत थे वो सारे मिटाने शुरू की । तमाम चीजों के ऊपर से अपने फिंगरप्रिंट मिठाई जब रीता सान्याल इस बात से पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि अब वहाँ उसकी उपस् थिति का कैसा भी कोई भी चीज निःशेष नहीं तो खामोशी के साथ कॉटेज से बाहर निकाला है । आग काफी बढ चुकी है । वो उस कमरे से निकल कर अब दूसरे कमरों में भी फैलती जा रही थी । लेकिन ऍफ का बढती हुई आप की कोई परवाह थी उसकी काॅल्स के दिलोदिमाग पर पूरी तरह सचिन देवरा की मौत का काम था । वो कहाँ लेकर फिर ऍम चाहकर फरामोश चलाने और पूछा ठहरे हुए हैं वहाँ पहुंच करेटा सानिया ने वो सारे फुटबाॅलर तथा ऑडियो कैसे खोज निकाले । उसके तमाम काले कारनामों का खुला दस्तावेज थे फिर उसने उन सभी वस्तुओं को जला डाला तथा उनकी रात को वहीं नाली के रास्ते बहा दिया । इस तरह ब्लैकमेलिंग का वो खतरनाक सिलसिला जो आगे चलकर कोई खतरनाक मोड लेता, उसका वही पटाक्षेप हो गया ।

भाग - 15

अध्याय पंद्रह अगले दिन गोवा में प्रकाशित होने वाले एक प्रमुख साध्य दैनिक में दो खबरें मुख्यपृष्ठ पर ही अलग अलग बॉक्स कॉलम में छपी हुई थी । पहली खबर थी मीटर मार बीच पर कुख्यात अपराधी साइकिल शेन द्वारा एक और दुर्दांत हत्या । इस बार साइकिल ट्रेन का शिकार एक औरत बनी जिसका नाम ऊषा बताया जाता है । कुछ दिन पहले मुंबई से गोवा में शायद घूमने के इरादे से आए थे तभी साइकिल शेन ने अपने पसंदीदा हथियार चीन से पूछा की गला घोटकर हत्या कर दी तथा उसके पास जो भी कीमती गहने तथा पहुँच में नकद रुपया था वो सब लेकर फरार हो गया । साइकिल चेन क्रिमिनल कि गोवा पुलिस द्वारा पहले किसी तरह खोजबीन जारी है । दूसरी खबर थी मीठा मार बीच पर बना स्वर्गीय शांत रिवेरो का कॉटेज पूरी तरह जलकर भस्म कॉलेज के मलबे में से दूर क्षतविक्षत शव बरामद कल अर्धरात्रि के समय स्वर्गीय शानदारी बैठ के कॉलेज में बडी प्रचंड आग लग गयी । आग कैसे लगी या भी राज बना हुआ है । लेकिन आप इतनी प्रचंड थी कि फायर क्रिकेट की आधा दर्जन बांध उस पर काबू नहीं पा सके । अगर समय रहते आग पर काबू न पाया जाता तो वो आग और भी प्रचंड रूप धारण कर सकती थी और फिर उसकी विभीषिका में आसपास के कई कॉटेज भस्म होने की संभावना बन जाती । कॉटेज के मलबे में से बुरी तरह जले हुए दो क्षतविक्षत शव भी बरामद हुए । एक शव की पहचान हो चुकी है । वो उसी कॉलेज में किरायेदार रह रहे डॉक्टर सचिन देवडा का शव था जबकि दूसरा शव इतनी बुरी तरह जल चुका था की उस की पहचान अब किसी भी हालत में संभव नहीं । रीडर सान्याल आना पैलेस के ड्रॉइंग हॉल में ही बैठकर दोनों खबरें पढी । फिर उसने वह सांधे रहनी तरफ पुछार दिया । एक ही रात में तीन हत्याएं हुई थी परंतु गोवा पुलिस के पास रीता सान्याल के खिलाफ भी कोई सबूत नहीं था । सबूत बहुत दूर रीता सान्याल उनकी वेस्टिगेशन में सस्पेक्ट तक नहीं थी । शाम का समय था मेरियाना गोंजाल्विस की मौत के बाद से पालस में जो सन्नाटा व्याप्त था वो सन्नाटा वहाँ भी भी जारी था । रीता सान्याल समय पालस के बगीचे में ही बेट के कुर्सी पर विराजमान थी और गरमा गर्म चाय की चुस्कियां भर रहे थे । बूट आराम भी बगीचे में ही था और मेरी आना गोंजाल्विस की कब्र के पास गुलाब के कुछ पौधे रोक रहा था तभी आना पालस का मेन गेट खुला और उसके लंबे चौडे ड्राइव वेपर एक टैक्सी नमूदार हूँ । रीता सान्याल और बूटा राम दोनों ने उसका आपसे की तरफ देखा । न जाने उसमें कौन चला रहा था । शीघ्र ही वो टाक से उन दोनों की नजदीक आकर फिर उसका दरवाजा खुला और फिर उसमें से मथुरादास एलएलबी उत्तरः बूटा राम के दिमाग में बिजली कर कर आए थे । ये बात उसके खराब में भी नहीं थी कि मथुरादास चैनल भी इस तरह बिल्कुल अकस्मात फॅस में ही । आठ आपके बूटा राम गुलाब के पौधे रोकना भूल गया । बहुत तेजी से मथुरादास एलएलबी की तरफ झपटा तो ऍम तो मुझे मैं जूलिया से मिलना है । मथुरादास एलएलबी बूटा राम को बिल्कुल नजरअंदाज कर के इतनी जोर से बोला जो उसकी आवाज रीता सानिया तक पहुंचा । फिर उसने ऍम लिया है जो यहाँ बूटा रामबोला मथुरादास एलएलबी तुरंत ब्रिटा सानिया की तरफ बढ गया । वो इस वक्त भी अपनी उसी चिरपरिचित हालत में था । बडी हुई खिचडी सीधा आॅल काफी काॅस्ट था और मुझे धमकी गंधाती हुई ऍम के नजदीक पहुंच कर बोला गरीब नहीं रिकाॅल अपनी कुर्सी पर बैठे रहे और उसने एक अनजान से दृष्टि उसके ऊपर डालते हैं शायद आपने मुझे पहचाना नहीं । मथुरादास एलएलबी खिसियाने ढंग से उसका पहचानोगे भी कैसे ये हम दोनों की पहली मुलाकात जो है । दरअसल आना मुझे अच्छी तरह जानती थी । मेरे ना मथुरादास है और मैं भारतीय जीवन बीमा निगम का एक छोटा सा एक हूँ । आज कुछ साल पहले आना ने मेरे द्वारा अपनी कुछ लाॅस करवाई थी । मैं उसी के संबंध में आपसे कुछ कहना चाहता हूँ । रीता ऍम सावधान हो गए । अब कैसी बात क्या है हूँ । मथुरादास एलएलबी ने बडी अप्रत्याशित सी बात कहीं । अब हाँ हाँ क्यों नहीं मथुरादास एलएलबी बेंड के कुर्सी खींच कर? वहीं बगीचे में रेखा सान्याल के सामने बैठ कर बूटा राम का दिल उस समय बहुत और जोर से धडक रहा था । वो नहीं समझ पा रहा था कि मथुरादास एलएलबी क्या करने जा रहा है । वो इसलिए उसके नजदीक जाकर खडा हो, परंतु मथुरादास एलएलबी ने उसकी तरफ देगा । उठा कर भी नहीं देखा । उसे जरा सा भी भाव नहीं दे रहा था । ऍम मुझे जवाना की मौत के बारे में पता चला तो बहुत दुःख हुआ । मथुरादास एलएलबी बोला, आना है लगभग एक करोड की लाइफ ॅ मेरे द्वारा कराई थी ऍम आपको मिल जाएगी । बस आपको आना की मौत के बारे में थोडी डिटेल मुझे बतानी होगी हम कैसी डिटेल ऍम चाहे पीते पीते ठिठकी कुछ मामूली सी बाते हैं । मथुरादास एलएलबी बोला जैसे क्या आना की मौत नाॅट थी वहाँ हत्या या आत्महत्या का मामला तो नहीं था लेकिन आना तो आप माता की है ब्लॅक तेरे सामने अच्छी होती तो मना जाओ ॅ क्या नाम बताया आपने अपना मथुरादास वहाँ मैं मथुरादास ऍम स्वर्ग हो जाए । हमें तुम्हारी कंपनी से कोई क्लेम नहीं चाहिए । तुम जा सकते हो लगता आप पर शायद आपने इस नौकर के बाद का बुरा मान गई हूँ । मथुरादास ऍम बडे उत्साहपूर्ण ढंग से बूटा राम की तरफ देखा । लेकिन इसकी बात का क्या बुरा मानना? ये तो शक्ल सही, कोई मूल कप्तानी नजर आता है । बूटा राम के चेहरे का रंग एकदम थक पड गया । मूर्ख मथुरादास चैनल भी उसे मूर्ख के रात वो इंसानों से मोर कह रहा था जो कल तक उसे अपना दोस्त भी नहीं सकता था । मैडम बस अच्छा मामूली औपचारिकताएं हैं । मतलब ऍम करने और उसके बाद ऍम आपको मिल जाएगा । अगर आपने हमारी कंपनी से ले लिया तो आपको कुछ मुश्किल जरूर पेश आ सकती है । कैसे मुश्किल तब हमारी कंपनी का जासूस विभागीय सोचने पर जरूर मजबूर होगा कि आखिर एक करोड का क्लेम क्यों छोडा जा रहा है । वो इस बात को शक की नजर से देखेगा तथा अपने डिटेक्टिव टीम से कहेगा कि वही इसके इसकी पूरी इन्वेस्टिगेशन की जाए । मथुरा दास एलएलबी के उन शब्दों नहीं पीता सानिया को चला गया ऍम इससे बेहतर है कि आप औपचारिकताएं पूरी करके क्लेम हासिल करें । ठीक है पता मुझे क्या औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी? ऍम सबसे पहले तो आप यही बताएं आना की मृत्यु नमो थी अपना मुँह उनकी मौत नौ बज गए फॅमिली उन्हें हार्ट अटैक हुआ था । लेकिन वोटर हमने फिर कुछ कहना चाहता हूँ तुम चुप रहो । वो अपनी बात पूरी करता । उससे पहले मथुरादास एलएलबी ने उसे बुरी तरह भडक दिया । मेरे समझ में नहीं आता आपने इस जैसे बत्तमीज नौकर को आपने पहले से क्यों रखा हुआ है? आपको इन्फॉर्म नौकरी से बर्खास्त करना चाहिए तो ठीक कहते हूँ । सीता सानिया ने भी उसे भस्म कर देने वाली नजरों से पूरा उसी क्षण मथुरादास ने बूटा राम की तरफ आंख मारी । वो भूत आराम के दिमाग में घंटी बजी तो उसका ऐसा कहना उसकी चांसू उसी में शामिल था । वो जासूसी के दांवपेच अपना रहा था । मुझे आप पर पूरा भरोसा ऍम क्या जो कहेंगे बिल्कुल ठीक कहेंगे । अगर आप कह रही है कि आना की मौत नहीं थी तो जरूर नॉर्मली थी । फॅमिली मथुरादास एलएलबी ने अपने बाग में से कुछ का बाहर निकले । आप ऍम कुछ कागजों पर सिग्नेचर कर दीजिए, बाकी सब मैं खुद संभाल लूंगा । ॅ मथुरादास एलएलबी ने अपना पहना आगे बढाया । डॅाल तुरंत भी, लेकिन कागजों पर से ले चल करती चली गई । उस समय मथुरादास एलएलबी की तीखी निगाहें रीता सान्याल की उसी सीधे हाथ पर टिकी थी, जैसे वो जल्दी जल्दी से मचा कर रही थी । शीघ्र ही उसने तमाम कागजों पर सिग्नचर करते तंग होता केवल मार्च मतलब फॅमिली हैं हम मैं चलता हूँ, हम बैठे, मैं आपके लिए चाय मंगाती । ऍम मेरे पास पीने के लिए एक दूसरी बेहतर चीज हैं । अब ये देखिए उसमें आपने चेस्टर की जेब में से राम यानी उसके दोनों जगह घूम भर फिर ढक्कन लगाकर वो ज्ञान वापस अपनी जेब में रखें । बडे अजीब आदमी यहाँ लीटर सान्याल नेत्र फैलाकर हम भी और साथ में खाना बदोश मथुरादास ॅ कुर्सी छोडकर खडा हो गया । रीता सान्याल ने भी उसके साथ ऐसे छोटे थे, तभी मथुरादास एलएलबी एक चाल और खेल गया । वो खडे होते ही एकदम इस तरह लडखडाया जैसे नीचे गिरने वाला उसी क्षण, उसके हाथ से सारे ॅ और सब रीता सानिया के पैरों में जाकर के लिए रिकॅार्ड बढाई । उसने शीघ्रतापूर्वक नीचे झुककर वो सारे का उठा मथुरादास में देखा । हडबडाहट में भी रीता सान्याल ने अपने सीधे हाथ से कागज उठाए थे । ऍसे ले लिए उन्होंने बाद में रखता हुआ टैक्सी की तरफ बढ गया । जिस टैक्सी में बैठ कर वहाँ आया था मेरे समझ में नहीं आता है तो मुझे क्या खेल खेल रहे हो? बूटा राम के आवाज में उस क्षण सफलता सस्पेंस था तुम ये बीमा एजेंट किस लिए बनी फिर बहुत जल्द तो मेरा समझा जाएगा । मथुरादास एलएलबी मुस्कुराकर पूरा वो दोनों उस समय मीठा मार बीच पर ही बनी कैस्टल बाहर के एक तरह कमरे में बैठे थे । कॅाल बार एक बेहद निम्न श्रेणी का बाहर था और वह सुबह से शाम तक बहुत मन गंदे हैं, पियो तथा नशेडियों से खचाखच भरा रहता था । उसे बाहर में छत पर आम की लकडी के कुछ छोटे छोटे दडबेनुमा कमरे भी बने हुए थे जो वस्तुतः गश्ती यानी वैश्याओं के साथ ऐयाशी करने के काम आते थे । शाम के समय जब बूटा राम किसी काम से अनाथालय से बाहर निकला तो थोडी दूर जाकर उसकी मथुरादास एलएलबी से मुलाकात हो गई और मथुरादास एलएलपी उसे वहाँ ले आया था । सबसे पहले तो मैं तुमसे इस बात के लिए माफी मांगना चाहता हूँ कि मैंने तुम्हें मूर्ख कहा, बददिमाग कहा । मथुरादास एलएलबी ने गरम के ज्ञान का ढक्कन खोला तथा फिर उसके तीन चार घुट भरे । अब उस सब आप भूल जाओ । मोडाराम बोला तो मुझे ये बताओ ऍम, तुम ये सब कर क्या रहे हो? तो मैं बी में का क्या? नया हजार भला नया ऍम वो समय भी नशे में पूरी तरह तुम था और उसकी आंखें चढी खडी हो रही थी मैंने कोई नया जाल नहीं भला होता रहा तरह और तुमने मुझे फोन पर बताया था कि तुम्हारी में सी बाबा बचपन में उल्टे आज से काम करती थी । राइट राइट राइट राइट नहीं राइट राइट आॅफ नाॅट करना चाहता था । मथुरादास बोला की जो लडकियाँ पालस में घुसी है, क्या वह जीवन में पहले कभी लेफ्टहैंडर रही है या नहीं? इसलिए मैंने बीमा एजेंट वाला वो ड्रामा रचा । पॉलिसी से संबंधित हो जोडी बात बोली लेकिन तुम्हारे उस ग्रामीण से ये कैसे पता चलता है कि वो लडकी कभी लेफ्ट हैंडर रहे या नहीं । बूटा राम की नेत्र इसमें से पहले जासूसी के कुछ पुराने नुस्खे रहे हैं । मथुरादास एलएलबी नशे की तरफ नहीं बोला । इनसे इस तरह की बात पता चल जाती है । जैसा की तुमने देखा होगा । मैंने जूलिया से बीमे के कुछ खास बातों पर सिग्नेचर कराए । अब तो मैं बडी महत्वपूर्ण बात बताता हूँ । मोटा जो आदमी पैदाइशी तौर पर लेफ्ट हैंडर होगा और अगर वो बाद मैं जबरदस्ती सीधे आज से काम करने की आदत डालने तब भी उसकी राइटिंग में कुछ ना कुछ फरक शरोंथा जैसा कि अब वह सीधे आपसे लिखेगा तो उसके शब्द इतने सुव्यवस्थित ढंग से नहीं बनेंगे जितना कि उन्हें बनना चाहिए । इसके अलावा उसकी राइटिंग थोडी टेडी होगी । लेकिन जूलिया को सिगनेचर करते समय मैंने देखा कि उसने ना सिर्फ सीधे हाथ से सिख मिस्टर केवल कि बडे सुव्यवस्थित तरीके से सिर्फ नजर क्या बूटा रामक । काफी प्रभावित ने कहा उसे मथुरादास एलएलबी को देखे थे । वो उसे बिल्कुल नहीं जानकारी दे रहा था । इसके अलावा इस पूरे सिलसिले में बेहद महत्वपूर्ण बात और है । मथुरादास एलएलबी ने राम का एक हूँ लगा क्या जो आपने कभी लेफ्ट हैंडर रहा है । मथुरादास एलएलबी बोला और वह सीधे आपसे काम करने की चाहे कितनी ही प्रैक्टिस कर चुका हो लेकिन अगर वो एक कोई काम करेगा या एकदम हडबडाहट में कोई काम करेगा तो आपसे करेगा । क्योंकि एक का एक की आठ बडा आठ में आदमी जो भी काम करता आपने नाच अगल अंदाज नहीं करता है । मैंने इसीलिए आना पहला से रवाना होते समय एकदम हडबडाकर बीमे के कागज जूलिया के ऊपर गिर आए थे और खुद भी बहुत लाकर ऐसा अभिनय किया था जैसे गिरने वाला हूँ । मेरी इस प्रक्रिया पर जूलिया भी और बडा और उसने एकदम से नीचे गिरे का उठाए । लेकिन लेकिन क्या बूटा राम की आवाज में जबर्दस्त ऍम लेकिन तो नौ हजार नोट नहीं किया बूटा राम की जूलिया ने बौखलाहट में भी हडबडी में भी सीधे आज से कहा था मथुरादास के एक एक शब्द चलता था । बोला जब की अगर वह बचपन में लेफ्ट हैंडर थी तो उसने उस अवस्था में हाॅट आपने उलटे हात से कागज उठाने चाहिए थे । हाँ उस्ताद भूटान हम के मुझसे अतिरिक्त पूर्ण स्वर्ण निकला तो तो बिलकुल करंट सक्सेना के मॅन तो उसकी बढिया अंग्रेजी पर मथुरा ऍम भी एक बार फिर मुस्कुराये बिना ना रह सका । इतना ही नहीं इससे तो ये एकदम पुख्ता तौर पर साबित हो जाता । उसका की जो लडकी मिस्सी बाबा बनकर पाल इसमें घुसा है वह पैदाइशी तौर पर लेफ्ट हैंडर नहीं मोटर हम बोला इसीलिए वो असली में सी बाबा भी नहीं है । गर्ट मथुरादास एलएलबी के सफर में दृढता चलके हमारा अनुमान काफी हद तक भी गए बूटा हालांकि मैं भी उस लडकी से एक ही मर्तवा मिला हूँ । लेकिन उसे एक मर्तबा में ही मुझे इस बात का पूरा पूरा शक हो रहा है कि जरूर कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ गडबड है । मुझे सिलसिले में आप कुछ और छानबीन भी करनी होगी । अब कैसी झानबीन तुम मुझे फोन पर उस हॉस्टल का नाम बता रहे थे जहाँ तुम्हारी मासी बाबा ना पैलेस में आने से पहले रहती थी और कस्तूरबा गर्ल्स हॉस्टल दूडाराम बोला वो मुंबई में ये मथुरादास ऍम मुंबई फिर कैस्टल बाहर में उस समय कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया । क्या सोच रहा हूँ? कुछ नहीं मथुरादास विचारपूर्ण मुद्रा में हो गया लगता । अगर मुझे इस केस की सही तरह से जांच पडताल करनी है तो वापस मुंबई जाना होगा क्योंकि मैं देख रहा हूँ । घटनाएं जरूर इस समय गोवा में घट रही है । मगर इन घटनाओं के सूत्र अभी भी मुंबई शहर में कहीं दफना है तो मुझे उन सूत्रों कोकोदकर बाहर निकालना होगा । तभी केस के ऊपर अच्छा ये तुम साफ होगी तो अब तो मुंबई जाओगे । मैं कल सुबह मुंबई रवाना हो जाऊंगा ।

भाग - 16

अध्याय सोलह घटनाओं की दूरी या बडी तेजी के साथ वहाँ पर सुस्ती चक्कर पर घूमने शुरू हो गई थी । जहाँ रीता सान्याल ने कभी आपने चाला दिमाग से कुछ खूनी अध्याय लिखे थे । मुंबई के कल्याण इलाके में बना बेहद फेमस कस्तूरबा गर्ल्स हॉस्टल जहाँ आज भी देश के कोने कोने से लडकियाँ कर रहती हैं और अपने आपको तथा अपने इज्जत को महत्पूर्ण समझते हैं । दोपहर के उस समय एक बच रहे थे जब मथुरादास एलएलबी ने हॉस्टल की वार्डन रेनूका चौहान के ऑफिस में कदम रखा बैठे चालीस वर्षीय बेहद गरिमामयी पर्सनालिटी कि मालिक रेणुका चौहान ने अपना सुनहरी फ्रेम का एक दोस्त क्या तथा फिर उसे बैठने के लिए कहा । मथुरादास एक कुर्सी खींच कर बैठ गया । इस समय मथुरा दास एलएलबी का व्यक्तित्व काफी व्यवस्थित था जैसे उसने अपने बाल सवारे हुए थे । गाडी में भी कंघा फेरा हुआ था और सबसे बडी बात तो ये कि उसके मुझसे राम कि गंदगी नहीं आ रही थी । मैं गोवा से आया हूँ । मेरा ना मथुरादास है मथुरादास एलएलबी शालीन रहते में बोला एक महीने बाद में अपनी बेटी का यहाँ मुंबई शहर के कॉलेज में एडमिशन कराने वाला हूँ । लेकिन मेरी दिल्ली अच्छा है कि वो आपके इस हॉस्टल में ही है क्योंकि मैंने अनुशासन के मामले में आपके हॉस्टल का बहुत नाम सुना है । उसने एक मनगढंत पिस्ता बयान किया क्यों नहीं तीनों का चौहान आपकी बेटी जरूर हमारे हॉस्टल में रहेगी आप कृपया अपने हॉस्टर के नियम और फीस मुझे बताती । नियम बिल्कुल वही है जो किसी भी एक आदर्श परिवार के होनी चाहिए देने का चौहान ने । फिर आपने सुनहरी फ्रेम का एनल दुरुस्त करके बोला नहीं उन सबको अपनी सगी बेटी की तरह समझती । इसीलिए उन के हित में जितने भी प्रतिबन्ध होनी चाहिए वो सब प्रेस हॉस्टल के अंदर है तथा मैं उन्हें कडाई से लागू करती हूँ । और फीस फीस सिर्फ पंद्रह हजार रुपए । महीना ठीक है । मुझे आपकी सारी बाते पसंद है । मथुरादास एलएलबी बोला अगले महीने में अपनी बेटी का । कॉलेज में एडमिशन कराने के बाद उसे सीधा यही लेकर आऊंगा । तभी मथुरादास के लिए चाहे आ गई उससे चाय की चुस्कियां भरते हुए बातें बातों में पूछा हमारे गांव में कुल लेडी आना ऍम थी बहुत बडी फॅमिली बहुत बडी बिजनेस टाइप को ग्रेड सोशल । शायद आपने उनका नाम सुना हूँ । हाँ, ऐसा क्यों नहीं? रेणुका चौहाण? पूरन पोली मैंने खूब अच्छी तरह उनका नाम सुना है ऍम मैंने सुना था । उनकी बेटी जूलिया भी आपके हॉस्टल में रहती थी । मथुरादास फॅमिली अपने आगे से कोर्ट है । बोला हाँ हाँ बिल्कुल । रेणुका चौहाण । फौरन कहा जूलिया इस हॉस्टल में काफी टाइम तक रही । क्या आप उस से मिले? उसकी तबियत अब कैसे कभी याद? मथुरादास के दिमाग में अनार पटाखे छूटते? क्या वहाँ कुछ बीमार हो गई थी? रेणुका चौहाण बताने वाली थी कि वहाँ ड्राॅप बन गई थी, लेकिन जल्दी उसे हॉस्टल की इज्जत का खयाल आ गया और वो इस बात को छुपा गई । नहीं नहीं मैंने ऐसे पूछ लिया उसकी तबियत के बारे में । लेकिन रेणुका चौहान के जुबान से निकला हुआ एकलौता शब्द मथुरादास के दिमाग में शक्ति एक साथ हजारों घंटियां मचाता चला गया और शायद ही तो वो धरती है जहां जासूसी की शुरुआत होती है । ठीक है मथुरादास एलएलबी चाय पीने के बाद कुर्सी है खडा हुआ मैं भी जा सकता हूँ । नमस्ते नमस्ते रेणुका चौहान ये अपने दोनों हाथ जोडकर ऐसे खडी हो गई । एक बार मथुरादास एलएमवी पहली ही मुलाकात में हो । अच्छी तरह समझ गया था कि उस हॉस्टल के अंदर जूलिया के साथ जरूर कोई घटना घटी है । कोई ऐसी सनसनीखेज घटना जैसे बताते हुए रेणुका चौहाण जैसे आदर्शवादी और अब के जवान भी कम गए । हम उसे सबसे पहले उसी घटना के बारे में पता लगाना था । वो आखिर क्या घटना थी? उसी शाह मथुरादास ने एक नया नाटक रचा उस हॉस्टल का जो नाइट वॉचमैन था, जोकि एक नेपाली था । मथुरादास एलएलबी शाम होते उसने पहली के बाद जा पहुंचा तथा उसके पास पहुंचते ही वह पछाड सीखाकर नीचे गिरा और तुरंत उसके तहत बताई है । नेपाली जोर से बिदका, जबकि उसके पैर कसकर पकडते । मथुरादास एलएलबी लगा बुक का बाहर का जोर जोर से रोने बहुत नेपाली की छक्के छोटे क्या हुआ अब आपका ॅ मेरे को बात मत बोल । मथुरादास एलएलबी लडकियों से होता हुआ होगा । तू ऍम मेरी माँ है तो मेरा भाई तो मेरा सब कुछ आज ही शाम कॉमेडियन आदमी है । नेपाली ने आदत के मुताबिक छोटे सबको बडा शब्द बोला । निर्माता वहाँ भी कुछ विश्वास हो रहा तू मेरे भी बच्चे पिछले तीन रोज भूखे है । मथुरादास ने कल अप कराओ । जोर जोर से आवाज निकली तो ये बात आश्रालय नेपाली ने उसे खतरनाक नजरों से पूरा दिखा रही है । भीख मांगने का ये जॉॅब निकाला नहीं में अधिकारी नहीं हूँ । फिर मैं स्वाभिमानी आदमी हूँ । मैं थोडा ध्यान से होता हुआ बोला । मेहनत मजदूरी करके अपने बीवी बच्चों का पेट भरना चाहता हूँ । फिर मैं क्या करूँ तो मुझे नौकरी दिलवा दूँ तो मुझे नौकरी दिलवा हो गया तो मैंने बहुत बडा एहसान होगा तुम्हारे बीवी बच्चे सुखी रहेंगे लेकिन मैं तो ये नौकरी कहाँ दिलवा सकता होगा । ये वाली बोला मैं तो खुद नौ करूँ ठीक है तुम तुम भी ना करो लेकिन विश्वासपात्र नौकर मालिकों के या तीन जीते हुए नौकर शेफर पडता पडता है तो मालिकों से कहते मुझे नौकरी दिलवा सकती हूँ तो मुझे अपने इसे हास्य में नौकर रखा सकते । मैं झाडू दे दूंगा, बर्तन मांज लूंगा, चौकीदारी कर लूंगा बात तुम जो कहोगे मैं करूंगा । मेरे बीवी बच्चों के वास्ते दो रोटी का सवाल है हम मेरे पैर तो छूट नहीं पता ऍम हुआ था अब तो मेरे पहले छोड मथुरादास ने उसके पहले छोड दिए तो मेरी नौकरी पक्की तो खुशी से उछल कर खडा हुआ वैधशाला घनचक्कर ऍम वैसे भी तेरी जानकारी के लिए मैं बता दूँ इस हॉस्टल में काम करना कोई आसान बात नहीं क्यूँ क्योंकि आॅफ खुराफाती लडकी रहती है जो दो दिन में अच्छे वाले आदमी को पागल बना दे । नहीं नहीं नहीं मुझे नौकरी जरूर चाहिए । माॅग दे रहा है अगर तुम मुझे नौकरी दिलवा आओगे तो मैं हर महीने अपनी तरफ का एक चौथाई हिस्सा तुम्हे दे दिया करूंगा । एक चौथाई हिस्सा हाँ, हर महीने हाँ नेपाली की आंखों में और लालच की तेज चमक कौन थी? उसने अपने शीर्ष कदमों पर जवान फहराएंगे आप तेरा आइडिया बुरा नहीं नेपाली कौतूहल मुद्रा में बोला मैं तेरे को कम से कम इस आखिरी वाली बात के आवाज में यहाँ नौकरी जरूरत था । लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस हॉस्टल में ऐसी घटना घट गई है कि अगर मैं माता रेणुका चौहान से तेरी सिफारिश करूंगा विवाह तो वो तेरे को इधर नौकर नहीं रखने वाली पहुँच कल बहुत शोर समझकर एक कदम उठाते हैं क्यूँ मथुरादास ऍम तुरंत चौकस हुए । इधर हॉस्टल में ऐसी क्या घटना घट के वो आखिर ऐसा कोई राज जानने के लिए तो ये सारा नाटक कर रहा था । फॅमिली चूलिया नाम की एक लडकी रहती थी नेपाली बेहद साॅल्वर में फस पैसा है इस हॉस्टल में रहते रहते वो लडकी एक गाडी हो गई । हाँ ऍम मथुरादास के दिमाग में जोर से बम बता हाँ ड्राॅ । लडकी का नाम क्या बताया तुम्हें? जूलिया वो हुआ की रहने वाली बात और भी साफ हो गयी । पाॅलिसी बाबा का जिक्र कर रहा था वो लडकी ड्राॅ किस तरह बनी मालूम नहीं बाप और ड्राॅ किस तरह बनी वाश एक दिन वो बेहोशी की हालत में हॉस्टल के लॉन में पडी पाई गई । तभी पता चला कि वह ड्राॅप बन गई है । उसके शाह ही हॉस्टल में दो लडकियाँ रहती थी तो कमरा नंबर दो सौ तीन उसकी रूम मेट थी । उसकी शैली आदि उन लडकियों के नाम क्या है एक का नाम रख दिया था और नेपाली अपने दिमाग पर जोर डालते है, बोला था और दूसरी लडकी का नाम ऍम । मथुरादास एलएलबी की उस घटना क्रम में उत्सुकता बढती जा रही थी । कुछ दिन वहाँ आप तीनों बहुत पक्के शायरियां भी जूलिया के ड्राॅप बनने का भी उन सभी को वो दुख का । उसके बाद उन तीनों ने यह हॉस्टल छोड दिया । उनका कहना था, वहाँ हॉस्टल में नहीं रहेंगे । जहाँ उनकी इतनी प्यारी शहरी ट्राॅफी बन गई वो तीनों यहाँ से कहाँ गई? मुंबई में एक फॅमिली है जो ऍम क्लब के बराबर है बना हुआ है । फिर उन तीनों ने वही अपना पडा उठाना शोर और आज का दिन । आप तब से हमारी मैडम दो अलर्ट हुई है अब हॉस्टल, शीशम, बंधते के कदम बहुत सोच समझ कर उठाते हैं । वो किसी भी नया आदमी को आसानी होस्टल में नौकरी की परमिशन नहीं रहती । वो मथुरादास एलएलबी ने अपने चेहरे पर गहन तुर्की भाव पैदा किया । अगर ये बात हैं तो फिर मैं भी तुम्हारे ऊपर नौकरी के लिए ज्यादा दबाव नहीं डालूंगा । मैं कहीं और नौकरी तलाश दूंगा । ठीक है मैं चलता हूँ । नेपाली वाच मैंने भी बडी संजीव जी के साथ अपनी करता नहीं आई । जबकि मथुरादास एलएलबी लडखडाते कदमों से अब आगे की तरफ बढ गया । गली के मोड पर पहुंच गई । उसने रानी की जो है उसका दिमाग इस समय काफी स्पीड से चल रहा था । जिस जूलिया सेवा ऍम मिलकर आया था वो कम से कम उस लडकी के बारे में एक बात बिल्कुल साफ कह सकता था कि वो लडकी हाल फिलहाल में कभी ऍफ नहीं रहे । क्योंकि एक ड्राॅप के चेहरे पर जो लक्षण होनी चाहिए ऐसा कोई लक्षण उसके चेहरे पर नहीं था । वो पूरी तरह टाॅप लडकी थी । तो क्या मुझे सचमुच जूलिया नहीं थी? मथुरादास एलएलबी फिर उस होटल में पहुंचा जो रागम क्लब के बराबर में बना हुआ था और जहाँ कभी वो तीनों सहेलियां एक साथ रहती थी । हाँ, ज्यादा वजन का अकाउंट क्लब बोला वो तीनों लडकियां हमारे इस होटल में रही थी कितने पदमदास? एलएलबी ने पूछा आज ज्यादा दिन तो नहीं रहें? ऍम मुश्किल से दो तीन दिन उन्होंने आपको सारे क्या? इस बीच कोई खास घटना घटी? नहीं । कोई खास घटना नहीं घटी तरह उनमें से एक लडकी बहुत बीमार थी । वो ज्यादातर कमरे में रहती थी । लेकिन एक रात उसकी तबियत बहुत ज्यादा खराब हो गई । मुझे ऐसा लगा कि वो भी वो भी हो गई थी । उसी रात उसकी वो दोनों सहेलियों से हॉस्पिटल ले जाने के लिए यहाँ से नहीं तो फिर कभी वापस नहीं लौटी । बल्कि हमारे होटल का तो रूम जांच भी उनके ऊपर बाकी है । क्या ये मालूम हो सकता है कि जिस लडकी की तबियत खराब हुई थी उसे क्या बीमारी थी? नहीं काउंट एक लाख में इंकार में करता है । ये तो नहीं हो सकता । ऍम बीमार होने वाली लडकी का नाम क्या था? जूलिया काउंट एक लाख का थोडा सशंकित सर हाँ, उसका नाम जो लिया था ऍम पक्का उस लडकी की बीमारी के टाइम की कुछ हालत बयान कर सकते मथुरा ऍम भी पूरा मेरा मतलब है । उस वक्त उसकी कंडीशन कैसी थी । ये बिल्कुल बयान कर सकता हूँ । काउंटर पूरा उस लडकी की तो उस वक्त बहुत बुरी हालत थी । आंखों के नीचे काले काले इकट्ठी बडे हुए थे । चेहरे कर्म बिल्कुल पीला पड चुका था । जैसे किसी में है उसके शरीर का सारा खून छोड लिया । इसके अलावा बीमारी के कारण वह सूखकर ऐसे काटा बन चुकी थी कि उसे देखकर ऐसा महसूस होता था वो इस दुनिया में मुश्किल से चंदेक रोज की मेहमान है । धन्यवाद मुझे तुमसे बस यही सब कुछ कुछ था । फॅस कर हाथ मिलाया तथा फिर वो हो गया उसे भी बिता हुआ काउंट । एक लाख ने जूलिया की जो हालत बयान की थी उसके बाद तो ये बात और भी ज्यादा पुख्ता तौर पर साबित हो जाती थी कि जो लडकी समय आना पान इसमें थी तो किसी भी हालत में झुरिया नहीं । मथुरादास के दिमाग में शक्ति और सफर दस घंटे हाँ मछली लगी । उसे बूटा राम का शक सही महसूस होने लगा । मथुरादास एलएलबी फिर अंधेरी पुलिस स्टेशन पहुंचा । अंधेरी पुलिस स्टेशन का इंचार्ज आत्माराम मोटलानी नाम का एक बडा क्रूर सा मराठा था परन्तु क्रूर वो सिर्फ अपराधियों के लिए था । वैसे यारों का यहाँ था यारी में अपनी जान लुटाने वाला था और मथुरादास पर तो वो खास तौर पर मेहरबान था । किसी जमाने में मथुरा दास और आत्माराम क्लास सालो रहे थे । आप मारा मोटलानी की उम्र भी पचास के ऊपर । क्या वो बहुत जल्दी पुलिस की इस नौकरी से रिटायर होने वाला था । मथुरादास एलएलबी को देखते ही मोटलानी की बात है कि मेरे गरजते शेयर मोटलानी तुरंत कुर्सी छोडकर खडा हो गया । रुपये ईद का चार हो गया मथुरादास बल्कि ईद का चांद भी साल में एक जगह दिखाई दे जाता है । तेरह और परेशानी नहीं होते । वाही दो तरह के आदमियों से कभी आई नहीं करनी चाहिए । मथुरादास एलएलबी उसके नजदीक पहुंचकर पहला शराबी और दूसरा जिसका ठोर ठिकाना और इत्तेफाक से ये दोनों गुड मेरे अंदर है । आत्माराम मोटलानी के चेहरे की सारी खुशी का फूल हो गए तो ऐसी दिल तोडने वाली बात करता । मथुरादास तो मालूम मेरे जगह में कैसा साल मुख्याल पैदा होता है । मुगलानी कुपित होकर मेरा जगह चाहता है कि मैं अभी किसी फर्जी जुर्म में तेरे को हवाला के अंदर ठूस दूर था । फिर तरीख, ऊब पकडे डंडे से लडाई कर मथुरादास दिल खोल कर रहा हूँ । अपनी तमन्ना पूरी क्यों नहीं करता मोट लाने । मथुरादास एलएलबी बोला मैं नहीं करता आप मारा मोटलानी का कलब पासवर्ड पूछा कम महाद नंबर डंडे से तेरी रघुराई करूंगा तो चोट तो मेरे दिल को भी लगेगी । आखिर तो यार मेरा यार आप मारा मोटलानी ने एक का एक मथुरादास का अपने गले से लगा लिया । मथुरादास एलएलबी उस क्षण चल पाती हुए बिना नहीं रह सकता था । घर छोडने सारी बातें मोटलानी ने उसे अपने से अलग क्या बैठ मथुरादास एलबीए कुर्सी खींचते हैं । मतलानी भी अपनी कुर्सी पर विराजमान था । अब ये बताओ कैसे आना हुआ? तेरा मोटलानी बोला क्योंकि बिना मतलब के तो तू दर्शन देने वाला नहीं जरूर कोई ना कोई पंगे वाली बात होगी । ठीक है देखो तो साले को कैसे? रॉब से कह रहा ठीक का मैंने मोटलानी भूल गया । मथुरादास एलएलबी ने बत्तीस चमकाई फिर अपनी चेस्टर की जेब से राम का क्या निकाला तथा उसका ढक्कन खुला क्या होगा उसने? क्या अन मोटलानी की तरह पढाते हैं ये घोडे का पैसा तुझे मुबारक तो पीस । मथुरादास एलएलबी ने मुस्कुराते हुए हम के कई सारे घूम रही है । किस्सा क्या है? मोटलानी थोडे बेसब्री के साथ बोला आज रात पुणे पुलिस का पूरा लाव लश्कर साथ लेकर एक जगह धार मार नहीं कहाँ कस्तूरबा काॅस्ट कस्तूरबा ऍम मोटलानी चौका वही जो कल्याण के इलाके में बना । जिस हॉस्टल की वॉर्डन रेणुका चौहाण वाई हिस्सा क्या मेरे भाई मथुरादास एलएलबी ने पूरा किस्सा उसके सामने बयान क्या आत्माराम मोटलानी गंभीर हो कोई गडबड तो नहीं होगी ना? मोटलानी बोला बेसिक रहे हैं मथुरादास एलएलबी ने राम का यहाँ और भरा कोई गडबड नहीं होगी थी है तो कहता है कि कोई गडबड नहीं होगी तो नहीं होगी तो वकील आदमी आया जासूस आदमी है ये बात तो मेरे से कहीं ज्यादा बेहतर समझ सकता है । उसी रात ठीक ग्याहरा बजेंगे जब कस्तूरबा गर्ल्स हॉस्टल की तमाम लडकियाँ अपने अपने कमरों में सोने की तैयारियाँ कर रही थी । वहाँ चारों तरफ सन्नाटा फैल चुका था । तभी का एक मुंबई ऍम में से कोई दर्जनभर पुलिस कर्मी नीचे कूद तथा तुरंत हॉस्टल के चारों तरफ फैल गए । अपने अपने बिस्तरों में सोने जा रही हॉस्टल की लडकियों को भी जब ये पता चला की वहाँ पुलिस की रेट बढ गई है तो वह सब डर गई । फौरन दौडी दौडी नहीं चाहिए । उस घटना ने रेणुका चौहान के भी छक्के छुडा दिये थे । मथुरादास एलएलबी क्योंकि उस समय पुलिस के साथ था इसलिए मथुरा राज को देखते ही न सिर्फ ट्रेनों का चौहान पहचान गए बल्कि नेपाली भाजपा भी पहचान गया । हमें इतना मिली है कि आपके हॉस्टल में जुडिया नाम की एक लडकी रहती थी जो यहाँ रहते हुए ड्राॅप बन गई । आत्मा ना मोटलानी बडे कठोर स्वर मेरे होगा जहाँ से संबोधित हुआ और फिर बाद में उसे मजबूरन अपनी दो सहेलियों के साथ ही हॉस्टल छोड कर जाना पडा । ये ये सब झूठ है । रेणुका चौहान ने उस बात का जबरदस्त विरोध किया । जरूर किसी ने आपको झूठी इन्फॉर्मेशन दिया है । मथुरादास एलएलबी ने वहीं अपने बराबर में खडी नेपाली वाचमैन का कसकर गिरेवान पकड लिया तथा फिर गिरेबान पकडे पकडे उसे झटके से आगे क्या जो बाजु लिया के बारे में तुमने मुझे आज बताई थी । वह एक बार फिर से दौराव तो नेपाली वाष्पन की गिनती बन गयी । वो सूखे पत्ते की तरह कांपने लगा, जल्दी वॅाक रहा वरना पुलिस से साक्ष्य छुपाने के काम में तुम्हें सजा भी हो सकती है । तुम जेल भी जा सकते हैं सीधा साधा नेपाली जेल जाने के नाम पर और भी ज्यादा भाई भी ठीक ठाक थर थर कांपते हुए उसने ये बात स्वीकार कर ली की उस हॉस्टल में रहते हुए सचमुच जूलिया नाम की एक लडकी ड्राॅ गई थी आपका ये है मैडम । नेपाली वॉचमैन की ये बात स्वीकार करते ही मथुरादास एलएलबी मानो शेर बंद था । वो गरज ते हुए ही रेणुका चौहान की तरफ घूमा । क्या भी आप यही कहेंगे कि ये सब झूठ है? मुझे झूठी इन्फॉर्मेशन हुई है । वैसे आप की जानकारी के लिए बता दूँ कि ये राज मुझे पहले से ही पता था । मैं तो सिर्फ इस बात की जांच करने के लिए ही यहाँ आया था । मैं आज सुबह खुद अपने भी जूलिया की तबियत के बारे में पूछ कर ये बात कुछ कमोवेश स्वीकार करी ली थी कि यहाँ वह ड्राॅप बन गई थी । रेणुका चौहाण के अब सारे कॅश उसकी गर्दन लटक हाँ ये सच है । रेणुका चौहान ने बहुत भारी मन से यह कुबूल किया । जूलिया यहाँ रहते हुए ॅ बन गई । लेकिन इसमें हम लोगों का कोई खुश नहीं । हमें तो यही नहीं मालूम कि उसे ड्रग्स की लत लगी कहाँ से ब्लॅक बन गई है । हमें तो ये राज भी एक दिन तब पता चला जब हॉस्टल के कंपाउंड में बेहोश पडी पाई गई । एक बात का मेरा आज भी दावा है किस बात का उसे ड्रग की ये लत कम से कम हॉस्टल के अंदर से नहीं तो आखिर एक वाकिंग थी । वो सारा दिन हॉस्टल से बाहर रहती थी । ऐसी हालत में वो कहाँ जाते हैं क्या करती है हमें क्या मालूम जूरिया के साथ साथ रजिया और रीता शर्मा ने भी हॉस्टल क्यों छोड दिया था । हाथ मारा मोटलानी हम दरअसल वो दोनों लडकियाँ दुनियाँ से बहुत प्यार करते थे । रेणुका चौहान ने बताया सच बात है कि हॉस्टर जूलिया ने नहीं छोडा था बल्कि रजिया और रीता शर्मा ने छोडा था वो दोनों लडकियाँ किसी ऐसी जगह नहीं रहना चाहती थी जहाँ रहते उनकी इतनी प्यारी सहेली ड्रग जैसी लग का शिकार बने । इसीलिए वो जूलिया को लेकर इस हॉस्टल से चली थी । बाकी मैंने उन दोनों से कहा भी मुझे लिया को उसकी माली आना गुलजार जिसके पास छोडा रईस औरत है वो जूलिया का किसी ड्रॉ रिहैबिलिटेशन सेंटर में ज्यादा अच्छा इलाज करा सकते हैं । भरवा दोनों सहेलियां क्या बोली मथुरादास एलएलबी ने पूछा वो दरअसल अपनी सहेली के प्रति को ज्यादा इमोशनल थी रेणुका चाहती थी । उन्होंने मेरी बात के जवाब में कहा कि नहीं वो पहले अपनी सहेली का मुंबई में ही इलाज करवाएंगे तथा फिर उसे लेडी आना गुंजाल जिसके पास छोड कराएंगे जाता है । आपको कितना समय गुजर गया? अब मुश्किल से बीस बाइस तक मथुरादास एलएलबी के चेहरे पर अब ढेर सारी लकीरे खींचकर इंस्पेक्टर आत्माराम उठ लाने की निगाह भी उसी के ऊपर थी । अगर आपको कोई हो तो मैं उस कमरा नंबर दो सौ तीन को एक नजर देखना चाहता हूँ । मथुरादास ऍम बोला जिसमें कभी वो तीनों सहेलियां एक साथ रह कर दी थी हो तो हमें क्या ऐतराज हो सकता है । रेणुका चौहाण तुरंत हुई मैं अभी आप लोगों को वो कमरा दिखा देती ये कोई काम बडा इत्तेफाक ना था कि जिस कमरा नंबर दो सौ तीन में कभी रीता सान्याल ने अपने उस खतरनाक खेल की आधारशिला रखी थी वो कमरा नंबर दो सौ तीन अभी तक खाली पडा होगा । फॅसे वो तीनों सहेलियां उस कमरे को छोडकर गई हैं । सबसे कमरा बिल्कुल उसी तरह खाली पडा है । रेणुका चौहाण कमरे का ताला खोलकर इसके अंदर दाखिल होते हैं । रेणुका चौहाण ने अंदर पहुंचकर लाइट चलाई । तुरंत ट्यूब का प्रकाश वाहन चारों पर अपने घर गया । देर उनका चौहान के पीछे पीछे मथुरादास ऍर आत्माराम मोटलानी ने भी कमरा नंबर दो सौ तीन सौ कदम है । उनके पीछे पीछे कुछ पुलिस करने तथा कुछ लडकियाँ भी वहाँ घुसा । यानि उन तीनों के बाद इस कमरे के अंदर कोई नहीं रहा । नहीं, बिलकुल नहीं । जहाँ तक मैं समझती हूँ तब से कमरा खुला भी । आज ही मथुरादास एलएलबी ने एक बार चारों तरफ खून कर उस कमरे का अच्छी तरह हुआ है ना । फिर उसने बडे सूक्ष्मा अंदाज में उस पूरे कमरे की तलाशी लेनी शुरू की । मथुरादास की तलाशी लेने का अंदाज कुछ ऐसा था मानो खुर्दबीन से किसी चीज को तलाश रहा । वो छोटे से कमरे की लगभग आधे घंटे तक तलाशी लेता रहा । लेकिन उसे वहाँ कोई भी काम की वस्तु नहीं । अंत में वो थक हारकर कमरा नंबर दो सौ से बाहर नहीं कराया । उसके पीछे पीछे सब बाहर आ गए । कमरे का वापस टाला लगा दिया गया । आपके हॉस्टल के रजिस्टर में उन तीनों लडकियों का फूल रिकॉर्ड भी तो होगा । मथुरादास एलएलबी काफी सोच विचारकर पूरा मैं वो रिकॉर्ड चेक करना चाहता हूँ । सौरी ऋण का चौहान बोले हमारे पास अब उन तीनों लडकियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है की क्या मतलब? मथुरादास बुरी तरह चौंका रिकॉर्ड कहाँ गया? दरअसल उन तीनों लडकियों के जाने के बाद जब हमने एक दिन यूँ ही वो रजिस्टर चेक किया जिसमें उन तीनों लडकियों का फुल बायोडेटा मौजूद था तो रजिस्टर में से उनकी डिटेल वाली तीनों पन्ने ही हमें नहीं मिले । बनने की इसमें भारतीय मथुरादास एलबीके हैरानी और बढेगा । हम ये रहस् पता नहीं चला कि वह पन्ने किसने भारतीय लेकिन जहाँ तक मेरा अनुमान है रोनी तीनों में से किसी लडकी की हरकत थी । उसने जाने से पहले सारा रिकॉर्ड नष्ट कर दिया था । अब मथुरादास एलएलबी के दिमाग में शक का पेज और ज्यादा गहराने लगा । लडकियों ने जाने से पहले वो रिकॉर्ड नष्ट क्यों? क्या क्या चक्कर था इसका मतलब शुरू से ही कोई मना चाह रही थी । क्या उनके हॉस्टल छोडकर जाने के पीछे भी कोई षड्यंत्र था? मथुरादास एलएलबी ने उस संदर्भ में जितना सोचा उतनी ही उसके दिमाग में उलझन पडी । जूलिया को छोडकर वो जो बाकी दो लडकियाँ थी । मैं उन दोनों लडकियों के बारे में वो तमाम बातें जानना चाहता हूँ जो आपको मालूम है । मथुरादास के तीनों का चौहान से संबोधित जैसे वो लडकियाँ क्या करती थी? कॅश था और उनकी आदतें कैसी थी । ऍम तो काफी लंबे पीरेट्स तीस हॉस्टल में रहती थी । तीनों का चौहान ने उन दोनों लडकियों के बारे में विस्तारपूर्वक बताना शुरू किया । वो कहीं नाईट शिफ्ट में जब कहती थी रोजाना रात को वो हॉस्टल से नौ बजे तक चली जाती और फिर दिन निकाले लौट वो कहाँ जॉब करती थी ये मुझे नहीं मालूम । इसके अलावा रजिया जूडो कराटे की भी जबरदस्त चैंपियन थी और राम उसने रोजमरा प्रैक्टिस करने के लिए बाकायदा एक जूडो कराटे क्लब भी जॉइन किया था । आपका नाम क्या था? जहाँ इनका ये क्लब तो शायद उसी होटल के पास है । मथुरादास एलएलबी ने नेपाली वॉचमैन की तरफ देखा जिसमें वो तीनों लडकियां यहाँ से जाने के बाद रही थी । वहाँ और रीटर शर्मा क्या करती थी? मथुरादास थे रेणुका चौहान से हूँ । रीता शर्मा डाॅक्टर थी और फिल्मों तथा टीवी सीरियल में स्ट्रगल कर रही थी । इसके अलावा जैसा की वो बताती थी उसे कुछ फिल्मों में तथा टीवी सीरियलों में कुछ छोटे मोटे रोल भी मिली थी । रीडर शर्मा के बारे में कुछ ज्यादा जानकारी मुझे इसलिए भी नहीं है क्योंकि वो अभी कुछ दिन पहले हॉस्टल में आकर नहीं थी । रीता शर्मा तथा जूलिया के बारे में एक बात मैं भी जानती हूँ । तभी भीड में खडी हॉस्टल की एक लडकी है । उस लडकी ने गुलाबी कलर की शॉर्ट ड्रेस पहनी हुई थी और उसके बाद बडे खांसी बाप का स्टाइलिश थे तो मैं क्या बात जानते हैं उन दोनों के बारे में । मथुरादास एलएलबी ने उस लडकी की तरफ देखा । अब दरअसल वो सहेलिया एकबार कैंटीन में बैठी पडी धीमी धीमी आवाज में कुछ बातें कर रही थी । उसी वार्तालाप में मुझे मालूम हुआ कि आजकल फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बडे शोमैन सुभाष चोपडा ड्रग्स के ऊपर कोई फिल्म बना रहे हैं । उसमें ड्राॅप लडकी का कोई ऐसा बहुत ही पाॅवर रो था कि जो लडके भी उस रोल को करती उसी के नाम के पूरी फिल्म इंडस्ट्री में झंडे कर जाते हैं । फिर सबसे बडी बात ये थी कि सुभाष चोपडा को उस रोल के लिए किसी बिल्कुल नहीं लडकी की तलाश थी । उस दिन लीटर शर्मा कैंटीन में बैठो । जूलिया से कह रही थी कि अगर जरूर तुम करना चाहो तो तुम कर सकती हूँ क्योंकि सुभाष चोपडा जी को जिस तरह की लडकी चाहिए वह सारी बातें तुम्हारे अंदर है । रिटर शर्मा ने जूलिया से ये भी कहा कि सुभाष चोपडा से उसके काफी अच्छे जान पहचान ने तथा वो रोल दिलवाने में मैं तुम्हारी भरपूर मदद करेंगे । इतना ही नहीं मैं तुम्हें ड्राॅ की बडी शानदार एक्टिंग करना भी सिखा दूंगी । ऐसा बोली हो से अधिक लडकी क्या एक्टिंग करना सिखाते की मथुरादास के दिमाग में एक का एक सौ जोर से सीटियाँ मछली लगी नहीं जूलिया को ट्राॅफी बनानी । एक शर्मा का तो आप नहीं था । कहीं उसी ने तो सारे षड्यंत्र की आधारशिला नहीं रखी थी । अब इसके अलावा तो उन दोनों के बारे में कुछ और जानती नहीं । गुलाबी कलर की शादी इस पहने खडी उस लडकी की गर्दन इंकार में ही था । इसके अलावा में हम दोनों के बारे में बाकी कुछ नहीं जानती । मथुरादास एलएलबी कुछ क्षण गंभीरता की प्रतिमूर्ति बना खडा रहा । ठीक है फिलहाल हम लोग चलते हैं । आपने हमारी जमानत की, उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद । फिर मथुरादास एलएलबी जिस तरह पुलिस के माॅल उसी तरह हूँ । अगले दिन सुबह सुबह मथुरादास एलएलबी सुभाष चोपडा के ऑफिस में पहुंचकर उससे भी मिला । उस समय सुभाष चोपडा के ऑफिस में काफी गहमागहमी का था । वो अपनी फिल्म क्या और दो शूटिंग के सिलसिले में पंद्रह जाने वाला था । बाहर खडे टैम्पो मेरे फॅमिली नागरा, बॉक्सर काफी सारी कुर्सियां मगर अलादी जा रही थी । आधी से ज्यादा यूनिट उस समय ऑफिस के अंदर मौजूद थी । जबकि सुभाष शुक्ला आपने के हमें मन को जल्दी जल्दी ये बता रहा था कि आज आउटडोर शूटिंग पर जो शौच ले जाने थे उनमें कैमरा हैंडल करते समय किसके सामान की जरूरत पडने वाली थी । उसी गहमागहमी भरे माहौल में मथुरादास एलएलबी की सुभाष चोपडा से मुलाकात हूँ । मथुरादास ने उसे सबसे पहले अपना परिचय दिया तथा फिर वहाँ आने का नाम अक्सर पता है । अच्छा लगता है तो आपको किसी ने बिल्कुल गलत जानकारी दी है । मतदाता अच्छी । सुभाष चोपडा बडे मनमोहक भाव से मुस्कुराकर पूरा मैं ड्राॅप पर कोई फिल्म नहीं बना रहा । मैं तो इस बार बडी प्यारी सी लव स्टोरी बनाया । इतना ही नहीं मेरी फिल्में हीरोइन में कोई नहीं नहीं । दीपिका पादुकोण आजकल नए चेहरे बॉक्स ऑफिस पर चलते है तो उन्हें चांदी कर दिया जाए । यानी आपको ऐसी किसी नई लडकी की बिल्कुल जरूरत नहीं थी । मथुरादास एलएलबी के आवाज में खोलता हूँ जो ड्राॅप लडकी की जबरदस्त एक्टिंग कर सके ही । मुझे बिलकुल भी जरूरत नहीं थी । और क्या आप नेता शर्मा नाम की किसी लडकी को जानते थे जो फिल्मों में स्टार्ट कर रही थी? नहीं, मैं इस नाम की किसी लडकी को भी नहीं जानता है । मथुरादास एलएलबी के दिमाग में अब और सफलता सस्पेंस का तूफान उठते हैं । इसका मतलब वो लडकी सिरे से ही झूठ बोल रही थी । सिरे से ही सहारा ड्रामा रचकर चला जा रहा था । मथुरादास एलएलबी ने रीता शर्मा के बारे में जितना सोचा उतना ही ज्यादा वो लडकियों से डाउटफुल जरूर ये सब किया धरा उसीका था जरूर । वहीं पूरे ग्रामीण की राइट करते मथुरादास ने तुरंत अपने चेस्टर की जेब से राम का ज्ञान निकाला तथा उसके तीन चार लम्बे लम्बे घुट भरे । इससे उसके दिमाग में पैदा होती उलझनों की गुत्थी पर कुछ हम कुछ था क्या? आपको कोई और सवाल पूछना? सुभाष चोपडा बोला नहीं, मथुरादास एलएलबी ने बनाया गया मुझे और कोई सवाल नहीं पूछा । तभी उनकी यूनिट का प्रोडक्शन कंट्रोलर भी सुभाष को बुलाने वहाँ सुभाष चोपडा ने मथुरादास एलएलबी से हाथ मिलाया था । फिर वहाँ से विधा हुआ जीता । सानिया और का दिमाग भी कुछ कम परेशानियों में घिरा हुआ था । हालांकि उसकी प्लानिंग पूरी तरह सफल हो चुकी थी । पूरे आना, पालिस तथा लेरी आना गोंजाल्विस की तमाम धन संपदा पर उसका अच्छा था । गोवा की सोसाइटी में आज उसे वही रुतबा हासिल था जो कभी मेरी आना गोंजाल्वेस कहाँ था? सबसे बडी बात तो ये थी कि किरपाराम, मूलचंदानी तथा ऊषा जैसे हिल हफ्ते हथकंडे बाहर से भी उसका पूरी तरह पीछा छोड चुका था और बिना पुलिस के नोटिस में आए पीछा छोड चुका था । अगर सबसे ज्यादा तो उसी सचिनदेव रहा की मांग का था सचिन देख रहा हूँ । आखिर उसको लेकर उसने अपनी जिंदगी के ढेर और सपने जो देखे थे कैसे कैसे सुनहरे सपने सजाकर रखी थी उसने की आना । गोंजाल्विस की दौलत हासिल होने के बाहर वो उसके चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी करवा है कि इन से शादी करेंगे ऐसी शानशौकत हूँ । लेकिन सब सब शायद जब दौलत का कूद भंडार उसके कदमों में पढा था तो ऐसा कोई अपना उसके पास नहीं था जिसके साथ मिलकर वो अपनी खुशियों उस कामयाबी को सेलिब्रेट कर सके । एक माथी उमर कहीं एक सचिन देवडा था वो भी खत्म । अपनी उस कामयाबी पर वह हस्ती नहीं सकती थी । वो हसना चाहती तो उसे रोना उसका दिल चाहता । वो किसी कमरे में बंद हो जाए और खूब फूट फूटकर हुए । वो एक अजीब से दोराहे पर घडी थे । इसके अलावा वो बीमा एजेंट के बारे में भी सोच सोच कर परेशान थी जो कुछ दिन पहले उससे मिलने पाॅलिस में आया था । पर जिसका नाम था मथुरादास वो बीमा एजेंट उसे क्लीन की बातचीत करने दोबारा क्यों नहीं है? क्या एक ही बार में सारे कागज पूरे हो गए थे? क्या सच कुछ नहीं रहना कुंजालडी इसमें एक करोड की पॉलिसी करवाए थे या या फिर वो बीमा आयोजन भी कोई धोखेबाज आदमी था? बॅाल को मथुरा दास नाम का वो आदमी किसी भी आंगल से बीमा एजेंट नहीं लगा था । वो तो किसी दूसरी दुनिया का ये आदमी लगता था कुछ जानती ऍम हकीकत की तह तक पहुंचने के लिए रीता सान्याल के दिमाग में एक आइडिया कौंधा और उसने अगले ही थे स्वाॅट मारे को फाॅर्स में बुलवा भेजा हाॅलीडे भी हमारे बहुत खुशी खुशी काल इसके अंदर दाखिल हुआ । कैसे हाल है तुम्हारे फाॅर्स कराएं बैठे ना हमारे वही ड्रॉइंग हॉल में एक सौ ऍम और ये बताओ भी कैसे याद किया हम मैं दरअसल आना के बारे में आपसे एक सवाल पूछना चाहती थियांग वीटा साल के आवास काफी धीमी हो गई । कैसा सवाल क्या आना अपने पर्सनल इस्तेमाल में जो पैसा खर्च करती थी उसका रिकॉर्ड भी आपके पास रहता था । रेट आसानी और के सवाल पर पहले तो बहुत मारे के आंखों में आश्चर्य के भाव उम्र हैं । फिर उसने बताया आना खाने पीने या पाॅवर जो पैसा खर्च करती थी उसका तो कोई रख और मेरे पास नहीं रहता था । लेकिन इसके अलावा वो जो भी पैसा खर्च करती थी उसका फल रिकॉर्ड मेरे पास रहता था । घुटने तो फिर आना की बीमा पॉलिसी की फायर भी जरूर आपके पास होंगे । फॅमिली थोडा उत्सुकतापूर्वक कहा ऍम ये ऍम कहना नहीं तो कभी कोई बीमार नहीं कर रहा । सच बात तो ये है उन्हें इन्शोरेंस के नाम से चल थी । वो कहती थी मेरे पास पहले ही कौन सा काम दौलत है जब मैं अपनी लाइफ को भी इन शोर करवा लो, जीटॅाक रहेंगे । उसे अपने हाथों तोते उडते महसूस हुए । अगर लेडी आना गोंजालवेज ने कभी कोई बीमा ही नहीं करा था तो मथुरा डाॅमेस्टिक आदमी क्या आपको पाँच बज रहा था वो वहाँ बीमा एजेंट बनकर । इसलिए आज क्या बोलूँ? कोई जासूस था क्या बात है बीवी को हमारे ध्यान से उसके चेहरे का भाव पडता हुआ बोला तो मेरे का एक परेशान की हो गई ही नहीं । नहीं परेशानी वाली कोई बात नहीं । और ये तो आना कि बीमा पॉलिसी का जिक्र क्यों कर रही थी । ऐसे कह रही थी मुझे दुखी मैंने आपका तीन की समय बर्बाद किया । मैंने बस यही मालूम करने के लिए आपको यहाँ मिल रहा था हमारे बडी असमंजसपूर्ण मुद्रा में कोई सी छोडकर खडा हो गया अगर कोई बात है मैं भी तो मुझे बताऊँ नहीं कोई खास बात नहीं हमारे असमंजसपूर्ण मुद्रा में ही दरवाजे की तरफ बढ गया रंथू रीता सानिया नहीं देख सके कि बूटा राम में उसकी एक एक बात सही है । ये बात सुनते ही बूटा राम घबराओ था और काफी लंबे लंबे डग भरता हुआ आपने सर्वेंट क्वार्टर की तरफ बढते

भाग - 17

पद ध्यान सत्रह गोवा में जहाँ रीटर सान्याल मथुरादास के बारे में सोच सोच कर परेशान थी वहीं मुंबई शहर में मतदाता सैंडल की उसके इसकी तमाम बकी अच्छी तरह उधेड देने पर तुला था । राजेंद्र क्लब में पहुंचा जो छोडो कराटे का था और जिस क्लब की कभी रजिया मेंबर रहे थे उस सीधा क्लब के मैनेजर से मिला तथा उससे रजिया के बारे में बात की । हाँ हाँ मैंने तुरंत पडा मैं रजिया को अच्छी तरह जानता हूँ वो हमारे क्लब की मेंबर थी । तरफ रजिया को लेकर तो हमारे क्लब में एक बहुत बडा हंगामा हो गया था साहब इतना बडा हंगामा की उस प्रकरण में तो हमारी जाने बहुत बडे बवाल में बसते बसते बच्ची वह शब्द बोलते बोलते मैनेजर के चेहरे पर आतंकी छाडो नहीं लगी । ऐसा हंगामा हो गया था । मथुरादास एलएलबी की उत्सुक्ता भी बढी फुटबाॅलर की तरफ झुका । दरअसल रजिया की एक अच्छी सहेली थी रीता शर्मा पहुँचने बडे उत्कंठित अंदाज है वो सारी बात बताइए । रजिया ने अपने और सहेली को भी क्लब की मेंबर बनवा दिया था और फिर उसकी वह सहेली भी यहाँ कभी कबार जूडो कराटे की प्रैक्टिस के लिए आने लगी थी । लेकिन एक दिन जब दोनों सहेलियां रिंग में प्रैक्टिस कर रही थी । तभी हम एक समय दस हंगामा हो गया । उसी प्रैक्टिस के दौरान रीटर शर्मा मर गई । लीटर शर्मा मर गए । मथुरादास एलएलबी इकाई किस तरह चौका जैसे अकस्मात हजारों बिच्छू ने उसके ऊपर हमला बोल दिया । ये उसके लिए बिल्कुल नहीं । खबर थी लेकिन कैसे भी था? शर्मा कैसे? हमारी तो सफाई प्रैक्टिस के दौरान ही रजिया की कोई एक उसके जिस्म के गलत लाइन पर पड गई । रीता शर्मा तुरंत सेकेंड के सौवें हिस्से में हम दस बहुत मर गई । ऍम बडी खतरनाक होते हैं । अभी तुमने खतरनाक खबर सुनी का मेरे भाई एक लाख का महानगर आंदोलन मुद्रा में होगा । अभी तो तुम खतरनाक खबर सुनो । रीता शर्मा तो मर गई परंतु रीता शर्मा के मारते कानून का पचडा पडा । क्लब में पुलिस आई और क्लब में पुलिस के आते ही एक नई खबर का बम भटा मालूम हुआ कि जो लडकी रजिया की सहेली थी, ये जो अपना नाम रीता शर्मा बताती थी वो वास्तव में मुंबई पुलिस की वांटेड क्रिमिनल राॅकी और उसके ऊपर छह मॉर्टर तथा एक सशस्त्र बैंक डकैती का इल्जाम था । यानी फॅस तव में रीटर सानिया और थी । मथुरादास एलएलबी के मुँह से तेज सिसकारी छुट्टी जी यहाँ मथुरादास एलएलबी के दिमाग पर है । सबसे अच्छी बात हुई है । फिर जजिया का क्या हुआ? उस खबर नहीं रसिया को बहुत डाॅॅ क्या की? उसकी सहेली वास्तव में खतरनाक रमन थी । प्रोफेशनल किलर थी । अब क्या कहा है? मालूम नहीं । जिस दिन से वह घटना घटी है, उस दिन के बाद से तो रजिया कभी क्लब में आई नहीं । मथुरादास एलएलबी के दिमाग में चिंगारियां छूटने लगी । केस वाकई बहुत सस्ता था । जितना वो उसकी गहराई में उतरता जा रहा था, उतनी ही नई नई बातें सामने आ रही थी । ये सच है । इंस्पेक्टर आत्माराम मोटलानी में कुर्सी की पुश्त से प्लेआॅफ फिर अपने सामने बैठे मथुरादास एलएलबी की तरफ देखते हुए बोला ऍम मुझे खतरनाक थी । कभी मुंबई के अपराध जगत में उसका बडा नाम था, बडा वलवला था । फिर बाद में सचिन देवडा भी उसके साथ जुड गया तथा वो दोनों एक साथ मिलकर अपराध करने लगे । सचिनदेव बडा मतलब ऍम है । इंस्पेक्टर आत्माराम मोटलानी ने उसे सचिन देवरा के बारे में भी विस्तार से बताया । मथुरादास ऍम यानी सचिनदेव कभी भारत का मशहूर प्लास्टिक सर्जन था और उसे खासतौर से इस बात में महारत हासिल थी कि वह किसी भी आदमी के चेहरे पर किसी भी दूसरे आदमी की प्लास्टिक सर्जरी करते बिलकुल थी । लेकिन बाद में सचिन देवडा के जीवन पर शनि का कुछ ऐसा प्रभाव पडा कि पहले तो उसके हाथों अपनी बीवी का मॉडर हो गया । फिर उससे भी ज्यादा गलत कदम उसने ये उठाया की पुलिस से बचने के लिए वहाँ खडा हुआ । बस उसी दिन से वो भी रीता सान्याल की तरह अपराध जगत का दुर दुर करता कुत्ता बनकर रहेगा । उन दोनों ने बाद में साथ साथ मिलकर एक बैंक को लूटने का प्रयास किया लेकिन तिफाक से उन दोनों का वो प्रयास असफल रहा । मथुरादास एलएलबी को एक बिलकुल नए क्या अधिकतर के बारे में जानकारी मिल रही थी जो उसी सारे घटनाक्रम से जुडा होना चाहिए था । ये डॉक्टर सचिन देवडा का मथुरादास एलएलबी ने पूछा मालूम नहीं है वो कहाँ है? अभी पिछले कुछ दिनों गोवा के एक अखबार में डॉक्टर सचिन देवडा की मौत की खबर छपी तो थी मुंबई से पुलिस का एक दस्ता लाश की पडताल करने आ गया भी था लेकिन लाश ज्यादा जल गई थी इसलिए वास्तव में वो सचिन देवडा था भी या नहीं था । मालूम नहीं गोवा में आपकी वह घटना के जगह घर की मेरा मार बीच पर मीटर बार बीच मथुरादास एलएलबी । फिर क्या मीठा मार बीच पर उस घटना का घटित होना भीम है । जब तक आप की बात थी क्या वो सारी घटना अकस्मात ही एक दूसरे से जुडती जा रही है और ऍम इलाज का क्या हुआ? मथुरादास ऍम पूछा जब राजन क्लब में उसका मर्डर हो गया था तो फिर लाश का पुलिस से क्लेम करके उसका दाहसंस्कार किसने किया? मैंने तो अखबार में पढा था । आप मारा मोटलानी बोला ॅ इलाज को काम करने वाला कोई पुलिस के सामने नहीं आया था । इसलिए जहाँ तक मैं समझता हूँ रीता सानिया उसके शव कुछ पुलिस कस्टडी में ही लावारिस लाश के तौर पर फूफा दिया गया होगा । शायद हाँ ऍम तो मौत पहुंचने के बाद ही पता चलेगा कि वास्तव में रीता सान्याल इलाज का क्या हुआ? आत्माराम मोटलानी बोला हूँ ठीक है मथुरादास एलएलबी ने अपनी जेब से क्या निकाल कर दो । राम के भूख लगा है । मैं मार्ग जाना चाहता हूँ क्या तुम भी मेरे साथ चल हो गए? क्यों नहीं आत्माराम मोटलानी बोला अगर तुम कहते हो तो जरूर चलूंगा । मथुरादास एलएलबी और इंस्पेक्टर आत्माराम मतलानी मौत पहुंचे । मौत में छंगा तथा कालिया नाम के दो चौकीदार थे वो उस समय भी ड्यूटी पर मौजूद थे तो नहीं । बहुत खुर्राट नस्ल की प्राणी थी और लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार की सारी जिम्मेदारी मोर में उन्हें दोनों के ऊपर थी और ये नमस्ते इंस्पेक्टर साहब छंगा आत्माराम मोटलानी को दूर से देखकर बोला कि आज फिर किसी के इलाज को लेकर आया हूँ । नहीं मैं आज किसी भी इलाज को लेकर नहीं आया । आत्माराम मोटलानी मुस्कुराकर बोला बल्कि आज तो मैं इलाज के बारे में तो उन लोगों से तस्दीक करने आया हूँ । किस क्लास के बारे में कालिया भी लगभग कर उनके नजदीक पहुंचा । इस बीच मथुरा दास एलएलबी जाम के दो तीन घूंट और लगा चुका था । नशे के कारण उसकी आंखें हरदम गुलाबी रहती थी और वह चलते हुए भी ऐसा उनींदी अवस्था में रहता था जैसे सौरव सात । उन लोगों को याद होगा कि आज से लगभग बीस बाइस रोज पहले यहाँ एक लडकी की लाश पोस्टमार्टम के लिए लाई गई थी । इन तक रात बारा, मोटलानी, छंग और कालिया से संबोधित हुआ । लडकी फाइव प्रैक्टिस के दौरान जिसको के किसी गलत प्रॉपर केक लग जाने से मारी थी और लडकी का नाम रीता सानिया था । बाद में जैसा कि मैंने अखबार में पढा था । उस लडकी की लाश को अंतिम संस्कार के लिए क्लेम करने भी यहाँ कोई नहीं आया था । यादा कार्य तुरंत पूरा याद था । वो लडकी शायद ड्रॅाप में मारी थी और वह किट भी शायद गलती से उसकी सहेली के द्वारा ही लग गई थी । करेक्ट आत्माराम मोटलानी की आंखे चमकी नहीं उसी लडकी की बात कर रहा हूँ । क्या नाम बताया आपने? उसका बेटा सान्याल हाँ! कालिया के गर्दन जब बढ की बब्बू की तरह इधर उधर ही उसका नाम फॅमिली था । छोटा भाई कालिया ने बडे स्टाइल से छंगा की तरफ देखा तो मैं भी उस लडकी के बारे में कुछ आ रहा कि नहीं नहीं मुझे तो कुछ याद नहीं है कि तुम लोग किस लडकी की बात कर रहा हूँ । छंगा विचारपूर्ण मुद्रा में बोला मंगवाई लोग उसी लडकी की बात कर रहे हैं । कालिया ने आंखों से दूरगामी इशारा किया, उसी की उसी की क्या बिल्कुल भूल कॅश नहीं तू वो अच्छा अच्छा छंगा के आंखों में भी एक का एक विलक्षण जमा कौन यहाँ आया कालिया अपने मूड के बीच में से हवा निकालकर बडे विद्वत्तापूर्ण ढंग से हसा ऍम उसका इस तरह हसना मथुरा डाॅगी को बडा अच्छा लगा । उसे लगा जरूर कुछ गडबड है । पूजा बाप कालिया फॅमिली से संबंधित हुआ क्या पूछना चाहते हो? उस लडके के बारे में? नहीं, बस एक ही बात पूछनी थी आत्माराम मोटलानी बोला क्या बाद में भी कोई लडकी की लाश को यहाँ क्लेम करने आया था या नहीं? नहीं कालिया नहीं गर्दन हिलाई उस लडकी के इलाज को तो यहाँ ऍम तक कोई भी क्लेम करने दिया । फिर उस लाश का तुम लोगों ने क्या किया? लाख क्या करना है? कालिया ऍम ने अंतिम संस्कार कर डाला अगर किसी ना किसी को तो उसका क्रियाकर्म करना था । मथुरादास एलएलबी जो अभी तक बिल्कुल खामोश खडा था । उसने अपनी चेस्टर की जेब में से रमका ज्ञान निकाला तथा फिर धीरे धीरे उसका ढक्कन खोलता हुआ कालिया की आंखों में झांककर बोला । रात उनमें सचमुच उसका दाहसंस्कार कर दिया था । मथुरादास एलएलबी की आंखों में । उस समय कुछ ऐसा सद्भाव था कि कालिया के पूरे शरीर में खौफ की सेहरा दौड गई । न सिर्फ कहानियाँ के शरीर में बल्कि छंगा भी कम उठा और हाँ कालिया का काम तक स्वरूप हॅाल कार कर दिया था । अगर तुमने सचमुच उसका दाह संस्कार कर दिया था तो फिर तुम्हारी आवाज क्यों काम करे? मथुरादास एलएलबी कठोर स्वर में पूरा आप पास कम हर एक काम कर रहे हैं । तब तक इंस्पेक्टर रात बारा मोटलानी भी किसी गडबड की आशंका को भाग चुका था । हो कालिया अगर सचमुच तुम लोगों ने उस लाश के साथ कोई गडबड किए है तो मुझे हिचक बताऊँ । हाथ मारा मोटलानी उससे प्रेम के भाषा में पेशा अपना दोस्त और भाई बंधु समझकर बताओ मैं तुम्हारी कहीं कोई कंपनी नहीं करूंगा । मथुरादास ऍर लगा बताओ आप मारा मोटलानी ने उन दोनों के ऊपर थोडा और प्रेशर डाला । आखिर बात क्या है? कालिया ने झंडा की तरफ देखा । उस क्षण दोनों ही विचलित नजर आ रहे थे । जल्दी बताओ मेरे भाई तोहरा मोटलानी बोला आखिर क्या है? तभी छंगा आगे बढा । मैं बताता हूँ ऐसा क्या है तो नहीं बताओ सब बहुत मामूली है । छंगा बोला दाॅये इलाज को क्लेम करने वाला यहाँ कोई नहीं आया तो फिर ये हमारी जिम्मेदारी बनी की हम उस लाश का दाहसंस्कार करें । लेकिन किसी भी लावारिस लाश का दाहसंस्कार करने में एक बहुत बडी प्रॉब्लम है । क्या गवर्नमेंट की तरफ से हमें एक लावारिस लाश को रोकने के सिर्फ पांच सौ रुपए मिलता है । छंगा खोला इतनी महंगाई का दौरे, मिट्टी भी सोने के भाव बिक्रियां ऐसे में किसी भी मुझ को सिर्फ पांच सौ रुपए में कैसे होगा? जा सकता हूँ । सही बात तो ये ऍम साहब की इतने रुपयों में लकडियाँ ढंग से नहीं आ पाती । मुद्दा आगे चला रह जाता है । परन्तु फिर भी हम किसी तरह अपने सब बहुत मजा काम को अंजाम देते आ रहे हैं । लेकिन उस दिन हमारे दिमाग में पूरा फोन पैदा हो गयी । क्या ऐसी खुराफात हमारा मोटलानी के साथ साथ मथुरादास एलएलबी के कान भी खडे हुए आम हमने सोचा क्यों? नाॅक इलाज को मुसलमानों के कब्रिस्तान में दफनाने गावं से मिलने वाले रुपये हम दोनों अपनी जेब में लगा । इससे हमारा भी भला और मुझे का भी वाला वह श्मशानघाट में आधा अधूरा चलने से बच जाएगा । साहब हूँ बस हमने उस दिन ऐसा ही किया । इंस्पेक्टर साहब छंगा थोडी शीर्षक सफर में बोला हमने रिकाॅल कैलाश को नजदीक के ये कब्रिस्तान में दफना दिया । यानी मथुरादास एलएलबी तेजी से बोला रीता सान्याल की लाश समय कब्र में दफना बिल्कुल । मैं अभी उस कब्रिस्तान में जाना चाहूंगा । चलो साहब छंगा और कालिया फॉरेन बोले हम आपको उस कब्रिस्तान में लिए चलते हैं हूँ

भाग - 18

अध्याय अठारह मुश्किल से पांच मिनट बाद ही वो चारों उस कब्रिस्तान में पहुंच गए जो मार्ग से बस थोडे ही फैसले था । छंगा और कालिया ने कब्रिस्तान में पहुंचते ही उस कमरे का पता लगा लिया था जिसमें रीड आॅखो दी गई । कब खुद से ही तेज सडांध का भाव कारा बाहर नहीं । अंदर एक लाश बहुत क्षत विक्षत हालत में मौजूद थे । उसका बेड हट गया था । इतना ही नहीं इलाज के ऊपर ढेर सारे देखने वाले जी भी कॉलेज में जा रहे थे । परंतु कपडा खुदसे ही वो जीत तेजी के साथ इधर से उधर भाग में शुरू हो गए । सबसे बडी बात ये थी उस लाश के चेहरे पर जो था वो भी अब उतर चुका था । विशेष नोट जो सुनने वाले फस जाऊ मेरे लिए पढ चुके हैं । वो इस बात से भलीभांति वाकिफ होंगे कि रीटा सान्याल ने रजिया के चेहरे पर अपना सिर्फ मेकप किया था । प्लास्टिक सर्जरी नहीं कराई थी रे मथुरादास एलएलबी उस चेहरे को देखते ही चौंका इसका चेहरा तो बहुत उस लडकी से मिलता है जो लडकी समय गोवा में आना पडा । इसके अंदर मौजूद है तथा वहाँ जूलिया बन कर रह रही है । छोलिया हमारा मोटलानी का भी विस्मित स्वरूप लेकिन मैं इसे तो रीता सान्याल होना चाहिए । जस्ट जस्ट मिनट लाश को देखते कालिया भी बेहद क्या गृह मुद्रा में हूँ एक बात मैं बताता हूँ क्या मथुरादास एलएलबी और आत्माराम मोटलानी की करता निकली की तरफ ये वो लडकी नहीं साहब जैसे हमने दफनाया था । कालिया धमका सकता हूँ इसके सूरत और रीटर सानिया उसे बिल्कुल नहीं होती । हर एक अभी वो और बुरी तरह चौका फिर ध्यान से इलाज का चेहरा देखता चला गया । अभी उसने अपने डोंगियों से लाश के चेहरे कुछ हुआ तथा फिर शहरी पर चढी मेकप की छोटी सी परत को पकडकर खींच गया ये क्या मुझे यानी चौका? भगवान जब की परत को तरते देखकर कालिया के आंखों में विस्मय का सागर उमड पडा । इतना बाद धोका इतना बडा छल आप मेरे सबकुछ चला जा रहा है सब कुछ । आखिर बात क्या है । मतलब फॅमिली आगे बढा उसे । यही बात आपने आपने बहुत हैरान कर रही थी कि बिल्कुल एक सी शक्ल की दो लडकियाँ मौजूद थे । ऍम तो मर ही नहीं है । कहानियाँ आंदोलन मथुरा में ये तो बस किसी ने इस लडकी के चेहरे पर रॅाक कर दिया था । यह देखो सब मैं कब की वो पर आज जॉब उतर गई कालियान इलाज के चेहरे से थे लेकर की एक छोटी सी तरह के पास कर दिखाए ये तो तुम बडी सनसनीखेज बात बता रहा हूँ कि रॅाव जिंदा आत्मना मोटलानी भी आॅल लेकिन अगर ये रीता सोनियाल कैलाश नहीं है तो फिर किसकी लाश मैं बता रहा हूँ कि हूबहू बिल पुलिस शक्ल की लडकी आना । बाल इसके अंदर मौजूद हैं अपने आपको । जूलिया कहती है मतलब ऍम बोला यानी तुम ये कहना चाहते हैं मथुरा डांस आप मारा मोटलानी की आवाज में आश्चर्य और बढा बिलकुल अच्छे से शकुल की दो लडकियाँ मौजूद है । मैं तो यही करिश्मा देख रहा हूँ । फॅमिली का दिमाग भी उस परिस्थिति पर पूरी तरह बनना था । वो बहू इस जैसी शक्ल की लडकी मैं गोवा में देख कर आ रहा हूँ और एक लडकी अब मैंने यहाँ देखिए मामला सचमुच काफी पेचीदा है । फॅमिली भी अब सोच नहीं मुद्रा में तो इस गुत्थी को सुलझाने का आ गया है द्वारा मोटलानी नहीं जोर से चुटकी बजाएंगी । क्या कस्तूरबा गर्ल्स हॉस्टल की वॉर्डन रेणुका चौहान को यहाँ बुलाया था । वो इस लाश को देखकर बताएगी कि यह वास्तव में किस लडकी की लाश आइडिया बुरा नहीं है । मथुरादास एलएलबी ने भी सहमती टोमॅटो आत्मना मोटलानी अभी रेणुका चौहान को बुलाकर था इंस्पेक्टर आत्माराम उठानी दौड कर अपनी जीत में समाज हुआ तथा फिर उसमें देखिये कब्रिस्तान के लिए हो ठीक रही रेणुका चौहाण ही रहा है । हरीश उसी को देखते थे उनका चौहान के चेहरे पर भूकंप जैसे भाई वो भी क्योंकि ये ही तो मुँह की लाश रजिया मथुरा ऍम भी उसमें राहत से उद्घाटन पर और पूरी तरह चाहूँगा । यानी वो लडकी जो जूडो कराटे ऍम थी जो नाइट शिफ्ट में जॉब करती थी बिल्कुल वही लेकिन ये वो लडकी कैसे हो सकती है? मथुरादास एलएलबी बोला उस रजिया के हाथों तो इसकी जाॅब में मौत हुई थी फिर हूँ इसी जैसी शक्ल की लडकी समय आना आलस के अंदर भी मौजूद है जो अपने आपको जूलिया बताती है हम मैं कुछ नहीं जानती है । रेड का चौहान मुझे सिर्फ इतना मालूम है की ये हंड्रेड पर्सेंट राजिया किला है और जहाँ तक इसके जूलिया होने का सवाल है तो इस बात की आशंका तो दूर दूर तक नहीं है क्योंकि जैसे और जूलिया की शक्ल में तो जमीन आसमान का अंतर था । सिर्फ शक्ल में नहीं बल्कि उनकी पर्सनालिटी में भी जमीन आसमान का अंतर था । मथुरा दास एलएलबी के दिमाग में अब जोर जोर से आतिशबाजी छूटने लगी । रीता सान्याल, रजिया और जो लिया उन तीनों लडकियों के व्यक्तित्व एक खेल नाश पर आप केंद्रित हो गए । एसिया जी बात है मुझे तो लगता ये सारा खेल रीता सानिया द्वारा ही रचा गया । आत्माराम मोटलानी एक उंगली से अपनी खोपडी ठकठक आता हूँ । बोला क्योंकि उन तीनों लडकियों में एक वही लडकी थी जो विलक्षण दिमाग की मालिक थी और अपराध करने में भी माहिर थी । सबसे बडी बात तो ये है कि डॉक्टर सचिन देवडा की भरपूर मदद भी उसे हासिल थे और उसकी मदद से वो किसी के चेहरे की भी प्लास्टिक सोचने अपने चेहरे पर करवा सकती थी । उसके लिए तो ये सब कुछ बच्चों का खेल था । सही का तो मथुरादास एलएलबी हाथ बढाया । सही कहा मुझे लग रहा है इस समय आना । पारस के अंदर जो लडकी मौजूद है वह हाॅल है सीट आसानियां जवाहर रजिया के मेकप में जूलिया बन कर रह रही है । मुझे जल्दी कुछ करना होगा । मथुरादास के चेहरे पर भी चली झलक नहीं लगी । इससे पहले की फॅमिली के अंदर कोई और बडा हंगामा करें । मुझे राहत से की तमाम गुत्थियां ढेर डालने होंगे । इंस्टाॅल हमारा मोटलानी दिया । काफी गंभीर होता था और मामले की भयानक को महसूस कर रहा था । मथुरादास एलएलबी आत्मना मोटलानी के साथ दोबारा उस राजन क्लब में पहुंचा जहाँ वो हादसा पेश आया था । आपकी एक क्लब का जब कोई मेम्बर बनता है तो क्या आप कोई मेंबरशिप फॉर्म भरवाते हैं? मथुरादास एलएलबी क्लब के मैनेजर से संबोधित हुआ बिल्कुल भरवाते है । जब मैंने जब बोला बिना फॉर्म भरे बडा कोई भी क्लब का मेंबर कैसे बन सकता है? क्या उसको हम पर मेम्बर की फोटो भी चुकी होती है? हाँ, वो भी जब की होती है । मैंने बोला ऍम मथुरादास एलएलबी के चेहरे पर उत्साह का संचार हुआ । मैं जल्द से जल्द ऍम देखना चाहता हूँ । आप तुरंत अपने क्लब के रिकॉर्ड में से उन फॉर्म्स को मंगवाई । आप एक मिनट रुकिए । मैं अभी उन दोनों के माॅस् मंगवा देता हूँ । क्लब के मान जाए । बेल बजाकर एक लडकी है से पहले आदमी को रहा बुलाया तथा उसे रीता, सानिया तथा ऍम लाने के लिए कहा । वो शीघ्र ही दोनों फाॅर में से निकाल कर लेता हूँ । दोनों फॉर्म्स पर लीटर सान्याल और रजिया के फोटो मौजूद थे । डेढ का चौहान ने बिल्कुल ठीक है । जलाश कब्र में से बरामद हुई थी । वह शत प्रतिशत रजिया की लाए नहीं । उसके बाद मथुरादास एलएलबी ने एक सबसे खास काम ये किया की उसने देने का चौहान से जो नेगेटिव हासिल किया था, उसने तो मैं सिर्फ और सिर्फ जूलिया का पोस्ट काट साइज फोटो बनवाया । अब कम से कम उसके पास उन तीनों लडकियों के फोटोग्राफ थे जो पूरे घटनाक्रम में किसी ना किसी तरह ऍम रही थी । फिर वो इंस्पेक्टर आत्माराम मोटलानी के साथ ही रॉयल बार में भी पहुंचा । छत्रपति रह उस समय काउंटर पर ही मौजूद था । वो पचास पचपन साल की बडी दुर्दांत सी शक्ल वाला मराठा था । उसका नाम ताप हुआ था । वो कभी हसीन तहरीन औरतों का जबरदस्त रसिया था । लेकिन उसकी जिंदगी में परिवर्तन आ चुका था । ऍम आप इंस्पेक्टर आत्माराम मोटलानी को देखते छत्रपति राव फौरन कुर्सी छोडकर खडा हुआ । उसने फौरन अपने दोनों हाथ जोडे । क्या मेरे से फिर कोई गलती हो गए? बाप जो आज आपके दोबारा दर्शन हो रहे हैं । ऐसे विवाद में छत्रपति राव मोटलानी हादसा ऍम मेरा ये दोस्त ऍसे तुम से कुछ पूछ रहा था । क्या पूछना था बाप छत्रपति राव की आवाज में सस्पेंस और कह रहा मथुरादास एलएलबी ने पहले चेस्टर की जेब से क्या निकालकर राम के वोट लगाए । फिर छत्रपति राव को अपनी बडी गहरी पारखी नजरों से देखा । छत्रपति राव सकपकाया वो तुरंत भाग गया । उसके सामने खडा हुआ आदमी कोई साधारण नहीं । उसी क्षण मथुरादास एलवी ने जूलिया की तस्वीर निकालकर छत्रपति राव के सामने रखी तो मैं इस लडकी को पहचानते हो । छत्रपति राव मथुरा था, बोला बिल्कुल पहचानता । छत्रपति राव ने सिर्फ की कि क्षण उस तस्वीर को देखा और तुरंत हामी भरी । मैं जब इस बार में नशे पानी का धंधा करता था तो एक बार ये लडकी आई थी । और उस समय ये ब्राउनशुगर से भरी सिगरेट खूब जमकर भी रही थी । सिर्फ एक ही बार आई थी वहाँ । छत्रपति बोला मैंने तो इसे यहाँ एक ही बार देखा । काॅपी की आंखों में शशंक भाव थे । कोई लडके तुम्हारे बार मैं सिर्फ एक मर्तबा आई और तुम उस लडकी की तस्वीर देखकर उसे फॅमिली की तरह पहचान गए । इसके पीछे भी एक खास वाजा है छत्रपति । नाम बोला क्या? दरअसल इस लडकी की शादी मेरी बेटी से काफी मिलती थी जो एक एक्सीडेंट का शिकार हो कर मारी गई थी । इसलिए इस लडकी को बाहर में देखने के बाद मेरे दिल में इसके लिए हम दर्जी का जज्बा पैदा हुआ । बहुत बात और खुलूस का वो जज्बा पैदा हुआ जो जो किसी ऐसे जज्बाती बाप के दिल में पैदा हो सकता है जो अपनी हालत की हर हाल में सलामती कतम बनाई । शायद यही वजह मथुरादास चीज मैंने इस लडकी को ये सलाह भी दी थी कि राम शुक्र कि वह सिगरेट ना तथा डाॅ जैसी उस नामुराद चीज से कोसो दूर रहे । मैंने अपने पूरी जिंदगी में पहली बार किसी ग्राहक को ऐसी नसीहत थी । फिर उस लडकी पर हमारी योजना सेहत का कुछ असर हुआ । बिल्कुल भी असर नहीं हूँ । वो तो पूरी तरह डाॅक् बन चुकी थी छत्रपति राहुल बोला अब तो नशा ही उसे अपनी जिंदगी दिखाई देता था । नशे से ही उसे दिमागी सुकून पहुंचता था वो इतने नसीहत सुनकर वो मेरे ऊपर हसली लगी । उसके बाद हमारे बार में कोई ऐसी और घटना घटी हो । मतलब ॅ समझते होता था जो इस घटनाक्रम से थोडी बहुत जुडी हूँ और एक घटना घटी थी छत्रपति रामबोला । परन्तु मैं गारंटी के साथ ये नहीं कह सकता कि हो के सारे वाकए के साथ जुडी भी दिया नहीं क्या घटना थी इंस्पेक्टर साहब छत्रपति रहा आप हमारा मोटलानी से संबोधित हुआ आपको । वो लडकी तो याद होगी जो धाड वाले दिन यहाँ ड्रग की हाइट उसके कारण मरी पाई गई थी और जिसका बाद में पोस्टमार्टम भी हुआ था । हम बिलकुल याद है लेकिन उस मरी हुई लडकी का इस लडकी से क्या संबंध है? मथुरादास एलएलबी नहीं बडी कौतूहलता के साथ जो लिया की तस्वीर पर भूमि है । संबंध तो कुछ भी नहीं । उस मरी हुई लडकी की शादी हो इस लडकी से बिल्कुल अलग थी । परंतु फिर कुछ बातें ऐसी थी जो दोनों में कॉमन थी । ऐसी बात है जैसे जो लडकी बार में हाइट उसके कारण मारी वो भी अपने गले में क्रॅशर पहनी थी । जैसा लॉकेट । ये लडकी पहले उसके हाथ में भी बिलकुल वैसा एड्रेस लगता जैसा कभी मैंने इसके हाथ में देखा था । इसके अलावा उस लडकी का रंग रूप कदकाठी सबकुछ किसी लडकी जैसा था । दोनों की शक्ल अलग थी । बाद में क्या किसी ने उस लडकी की लाश को आइडेंटिफाई क्या? मथुरादास एलएलबी ने पूछा कि वो लडकी वास्तव में कौन थी? उसका नाम क्या था? नहीं । इस बार जवाब इंस्पेक्टर आत्माराम मोटलानी नहीं दिया । किसी ने भी उस लडकी की लाश को आइडेंटिफाई नहीं किया । उसे भी एक लावारिस मौत ही नसीब हुई क्योंकि उसके गले में क्रॉस पडा हुआ था । बस इसी से अंदाजा हो सकता कि वह क्रिश्चिन थी और इसीलिए बाद में उसके इलाज को ईसाइयों के कब्रिस्तान में दफना दिया गया था । ये सारी बातें भी मुझे इसीलिए मालूम है क्योंकि ये सारा मामला मेरे ही चल सेक्शन के अंदर था और सब कुछ मेरी एक स्टडी में हो । मथुरा दास एलएलबी को वो एक और नई बात मालूम हो रही थी कि एक ऐसी लडकी मर भी चुकी है जिसका चरित्र जूलिया से काफी मिलता चलता था । राजकीय जो नई नहीं पढते खुल रही थी । उन्होंने मथुरा दास एलएलबी के दिमाग को पूरी तरह झंझट डाला । अब वो उसके इसमें बिल्कुल ही एक नया रोमांच अनुभव कर रहा था जो उसने पहले कभी अनुभव नहीं किया था । एक बात वो अब तक भलीभांति समझ चुका था कि उस पूरे सिलसिले के पीछे बहुत मास्टरमाइंड काम करता है । बहुत तेज दिमाग काम कर रहा है । शुरू से ही उसमें एक एक चाल काफी सोच समझकर तथा योजनाबद्ध अंदाज में चली थी । मथुरादास ऍम इंस्पेक्टर आत्माराम मोटलानी के साथ ईसाइयों के उस कब्रिस्तान में भी पहुंचा जहां उस लडकी को दफना दिया गया था । जो रोयल बाढ में ब्लॉक की हाइट उसके कारण मारी थी और जिसकी पर्सनालिटी काफी कुछ जूलियो से मैच करती थी । कब्रिस्तान में पहुंचते ही उस लडकी की कब्र भी खुलवाई गई तथा उसके ताबूत को अब जैसे बाहर निकाला गया । फिर ताबूत खुला लाश क्योंकि ताबूत में रखी थी । इसलिए अभी उसकी इतनी दुर्गति नहीं हुई थी, लेकिन फिर भी ताबूत खुलते हैं । मथुरा दास एलएलबी और आत्माराम मतलानी दोनों चौंकियें दस साल कभी उस लडकी का चेहरा बिगाडने के लिए उसकी जो प्लास्टिक सर्जरी की गई थी, वो प्लास्टिक सर्जरी अब भूल गई थी और लाश के चेहरे से आप सबसे पहले उसी जगह की खाल छूट रही थी, जहाँ जहाँ प्लास्टिक सर्जरी की गई थी । मथुरादास एलएलबी तथा इन सकरात्मकता मोटलानी घुटनों के बाद ताबूत कॅर ध्यान ॅ देखने लगे । कुछ समझ जा रहा मथुरादास आत्माराम मोटलानी बोला हाँ, मथुरादास एलएलबी की गर्दन स्वीकृति में कुछ कुछ समझ में आ रहा है । इस लाश को देखने के बाद अब मैं कम से कम एक बाद दावे से कह सकता हूँ क्या ये ऍम जूलिया की है? और सारे षड्यंत्र के पीछे सीधा सामने यहाँ का है? फॅमिली कुल अगर तो मैं इस लाश का चेहरा और से देखो के तो तुम्हें भी महसूस होगा कि इस लडकी की शक्ति काफी हद तक जूलिया से मिलती है । मथुरादास एलएलबी बोला अलवत्ता इसके चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी करके इसका चेहरा बिगाडने का प्रयास किया गया है । यही वजह है कि इसके चेहरे की जहाँ जहाँ से प्लास्टिक सर्जरी की कई वही वही से खाल फूल गई । मेरे को मथुरादास एलएलबी ने अपनी जेब से जूलिया का फोटो निकाल कर आत्माराम मोटलानी की तरफ बढाया तो जूलिया के फोटो से इस लाश का चेहरा मिलाकर देखो । सारी बात खुदबखुद तुम्हारी समझ में आ जाएगी । आप मारा मोटलानी नहीं । जूलिया का फोटो पकड लिया तथा फिर वो सचमुच उन दोनों को एक दूसरे से मिलान कहने लगा । हाँ ऍम शीघ्र ही आत्माराम मोटलानी की मुझसे तीव्र, संस्कारी छोटी ये तो वाकई जूलिया की लाश । यही बात तो मैं उनसे कह रहा हूँ । इसका मतलब जूलिया मर गई लेडी आना । गोंजाल्विस की वो असली बेटी मर गए जो वास्तव में उनकी चल अचल संपत्ति की ओर थी । हाँ सर जो लिया मर चुकी है मोटलानी बल्कि रजिया भी मर चुकी है । मथुरादास बोला अब सिर्फ एक ही लडकी जिंदा है और वह रीता सामियाना । लेकिन अगर वीटा सानिया में दुनिया को मानना ही था तो फिर उसे जूलिया के चेहरे पर ये प्लास्टिक सर्जरी कराने की क्या सर्व करते हमारा मोटलानी होगा तो इतनी मामूली बात नहीं समझे मोटलानी मतदाता सैंडल भी बोला । दरअसल ये सारा प्लान इसीलिए रचा गया जूरिया के चेहरे को प्लास्टिक सर्जरी करके इसलिए बिगाडा गया ताकि उसे लाॅ अगर दुनिया को पहले से ये मालूम हो जाता कि जूलिया मर चुकी है । विराज रीता सान्याल जूलिया बनकर आना पालस में कैसे मुझे होती तुम ठीक हूँ । आत्माराम मोटलानी की कदम स्वीकृति में है बिल्कुल ठीक ऍम मथुरादास एलएलबी नेता बूत का ढक्कन वापस बंद कर दिया तथा फिर अपना स्थान छोडकर खडा होगा । खडे होते ही उसने दम के दो मुझे लगता है अवधराज की तब हम यहाँ सुना चुकी है मथुरा ऍम हर बात ही नहीं की तरह बिल्कुल साफ हो चुकी है । अब तो सिर्फ एक ही काम बचायेंगे, क्या आखिरी गोली छोडना और जो आखिरी ली अब मैं छोड । मथुरादास एलएलबी ने अपने दान पूरी तरह के कितना है, धमाका मेरी तरफ से होगा हूँ ।

भाग - 19

अध्याय उन्नीस गोवा की वह सुबह कुछ अलसाई हुई थी । आसमान पूरी तरह साफ नहीं था । ऐसा लगता था जैसे बस किसी भी क्षण धूलभरी आंधी चलने वाली हूँ जैसे समुद्र में कोई बडा ज्वार आने वाला हूँ । आना प्लस में भी सन्नाटा था । सुबह के उस समय दस बज रहे थे जब मुंबई पुलिस की एक बडी फॅमिली आना पालस के अंदर आकर रुकी । जैसे ही स्टेशन वायॅस में से डेढ दर्जन से भी ज्यादा हथियारबंद पुलिस कर्मियों ने नीचे उतरकर पूरे फॅमिली को चारों तरफ से किए हैं । उन पुलिस कर्मियों के साथ साथ मतलब फॅमिली और इंस्पेक्टर आत्माराम मोटलानी भी स्टेशन राजन से नीचे होते हैं । सिर्फ आत्माराम मोटलानी को उसकी इसकी पूरी डिटेल मालूम थे । बाकी उनके साथ जितने भी हथियारबंद पुलिस कर्मी वहाँ थे उन्हें आत्माराम मोटलानी और मथुरादास एलएलबी ने यही बताया था कि आना पाल इसके अंदर कोई खतरनाक क्रिमिनल छुपा हुआ है । जैसे पकडने के लिए वहाँ जा रहे क्रिमिनल का नाम क्या है, ये उन पुलिस कर्मियों में से किसी को मालूम नहीं था जैसे मुंबई पुलिस की वो स्टेशन राजन आना, पालस में जाकर जो की और जैसे ही हथियारबंद पुलिस कर्मियों नेपाल इसको चारों तरफ से घेरना शुरू किया वहाँ चारों तरफ हडकंप मच का बूटा राम तत्काल वहाँ दौडा दौडा आया और बेहद आतंकित अवस्था में मतलब फॅमिली को लेकर एक कोने में तो क्या बहुत तुम तो इधर से मुंबई चलेगा । मैं तुम्हारे पीछे बहुत भारी गडबड, फॅमिली कैसी गडबड? इसी बात को तुम्हारी ऍम को मालूम हो चुका है कि तुम बीमा एजेंट नहीं तो मैं आना की पॉलिसी के बारे में झूठ बोल बूट आराम के बाद सुनकर मथुरादास एलएलबी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आकर चली गई । अब इस बात से कोई फर्क नहीं पडता हूँ । आराम की इस लडकी को मेरे बारे में क्या मालूम है और क्या नहीं? तुम्हारे लिए एक खुशखबरी जरूर है । कैसी खुशखबरी हमारा अंदाजा बिल्कुल सही था । मतलब ऍम ये लडकी सचमुच हमारी मासी बाबा नहीं ऍम की आंखों में दहशत की बात है । कोई खतरनाक किस्म वाली किट मिनट है या फिर वो ऍम कोई ऍम ऍम मैं थोडा सा हो अभी सारे पत्ते तुम्हारे सामने खर्च आएंगे । मथुरादास एलएलबी ने आना पालस में आने से पहले एक बडा महत्वपूर्ण काम और क्या था वो पहले शांत राॅकी उस कॉलेज में भी गया था जो आधे से ज्यादा जलकर खाक हो चुका था और उसका मलबा भी अब वहाँ पडा था क्योंकि उस कॉटेज का मालिकाना हैसियत वाला कोई भी आदमी जिंदा नहीं था । इसलिए उस जगह की और भी ज्यादा पूरी हालत हो चुकी थी । बहरहाल मथुरादास एलएलबी ने कॉटेज के मलबे की खाना तलाशी ली तो उसे वहाँ सचिन देवडा की पर्सनल डायरी हाथ लग गई । सचिन देवरा ने अपनी उस गाडी में ऐसी बहुत सी बातें लिखी हुई थी जिसकी मथुरादास एलएलबी को भी भनक तक नहीं थी । उसी डायरी से मथुरादास एलएलबी को ये भी मालूम हुआ कि वास्तव में रीता सान्याल ने ये सारे प्रीप्लांड नॉट बदले की भावना से किए थे । आपने उस वचन को पूरा करने की खातिर किए थे जो उसने अपनी मस्ती हुई माफ को दिया था । वो उसकी इसका एक बिल्कुल नया अध्याय मथुरा दास एलएलबी के सामने खुला और उस अध्याय के खुलने के बाद रीता सानिया के प्रति सोच में भी बडा इन कलावे परिवर्तन हुआ । रीता सान्याल उस समय अपने बेडरूम में थी जब एक नौकर बदहावास हालत में लगता झपट्टा वहाँ और उसने रीता सान्याल को ये बताया कि पहले उसको चारों तरफ से पुलिस ने घेर लिया है । उस खबर नॅान के होश उडा आती है । वो तुरंत बिस्तर से खडी हुई और तेजी से दरवाजे की तरफ लक्की लेकिन वह दरवाजे से बाहर निकल पाते इससे पहले ही मथुरादास एलएलबी बिल्कुल किसी जिन की तरह वहाँ पर खडा हुआ था तो दो ऍफ कर चुकी है तो लगता है तो अभी तक मुझे बोली नहीं मैं तुम्हें कैसे भूल सकती हूँ? जीटॅाक चल रहा है तुम दो के बाद हो तो फ्लॉप हो तुम बीमा एजेंट हो ही नहीं मथुरा डॅान फिर हसते हुए ही उसने नौकर को बाहर निकालकर बैड रूम का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया । ये ये दरवाजा तो मैं क्यों बंद किया? क्योंकि मुझे तो उसका कुछ बहुत फाइवर बात करनी है । फॅमिली मथुरादास एलएलबी ने स्वीकृति में गर्दन हिलाई और अपनी बढी हुई शेर पर हाथ गया ऍम तुम ठीक का मैं ऍम नहीं । लुधियाना गोंजालवेज ने मुझसे कभी पॉलिसी नहीं कराई थी । उस बेचारी से तो मैं कभी मिला भी नहीं । मैं दरअसल एक फॅस ऍम तुम मुझे सिर्फ जांच भी समझ सकती हूँ । इस वक्त तुम्हारे लिए बहुत पूरी खबर है । मथुरादास एलएलबी एक्शन के नेहरू का, फिर पूरा मुझे तुम्हारी सारी असलियत मालूम हो चुकी है । मिस रीटा सान्याल हूँ, आॅडिटर सानिया था, उसी शब्द नहीं पूरे बेटों में विस्फोट कर दिया तो कौन है ये? यहाँ ऍम तो हो मथुरादास फॅमिली वाले की तरह उसकी तरफ तो जो इस समय रजिया के मेकप में जूलिया बनकर मेरे सामने खडी हूँ तुम्हारे कॅरियर के ऊपर जितने पर्दे पडे थे वो सारे पर्दे मैंने उतार फेंके है । मैं समझ सीधा मुंबई से आ रहा हूँ तथा कस्ट दूर फाॅरेस्ट रोयल बाहर ड्राॅ हर उस जगह से हो करा रहा हूँ जहाँ से तुम्हारी असलियत खा सकती थी ऍम आतंकित होती उसे अपने सामने खडे उस आदमी से एक का एक डर लगने लगा । सबकी मथुरा दास एलएलबी ने अपनी चेस्टर की जेब में से क्या निकाला था ऍम इतना ही नहीं मैं तुम्हारे अतीत से भी अच्छी तरह हो चुका मथुरादास एलएलबी थोडा ठहर कराने अच्छा हाँ हाँ वो आती है जिसमें अगर तुम्हारी माँ शारदा सान्याल मौजूद है तो पीटर भी मौजूद है जिसने तुम्हारी माँ को धोखा दिया और खुद लेडी आना । गोंजाल्विस भी तुम्हारे उसी अतीत का एक हिस्सा है । मैं तुम्हारे बारे में सबको जान चुका हूँ । सब कुछ वहाँ अंदर प्रतिशोध की ज्वाला धता खाई थी । उसी वाला को शांत करने के लिए तुम ने खून की होली की । हमारी जिंदगी में जिस तरह के आधे से पेश आए उससे मुझे हमदर्दी है । रीता सानिया मथुरादास एलएलबी की आवाज थोडी नरम पड गई थी । शायद इसीलिए मैं इस वक्त हमारे जैसी खतरनाक मुजरिम के साथ इतनी सख्ती से पेश नहीं आरा जितनी सख्ती से मुझे पेश आना चाहिए । अगर का मुँह तुमने सिर्फ फॅस की दौलत हडपने के लिए क्या होता? तो इस वक्त का नजारा कुछ दूसरा ही होता है । तब क्या नजारा होता है? तब मैं तुमसे इतनी मा बाद में बात नहीं कर रहा हूँ । मतलब फॅमिली की आवाज वाला मुख्य की तरह खाना कोठी बल्कि तब तुम्हारे हाथों में इस समय आप कडी होती या फिर तुम्हारी गोलियों से छलनी छलनी हुई लाश यहां पडी होती है जिसे आप पुलिस वाले पंचनामा भरने के बाद घसीटकर लिये जा रहे होते हैं । वीजा सान्याल के चहल पर एक साथ कई रंग आ कर चले गए और ये अब सिर्फ कोरी धमकी नहीं है । मेरी मथुरादास ऍम किस समय में पूरे इंतजाम के साथ यहाँ आया तो तुम्हारे खिलाफ कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार है और मैं तो मैं सच्चाई से अवगत कराता हूँ । मथुरादास एलएलबी ने आगे बढकर उसके बेडरूम की वो छिडकी खोल डालेंगे । इसीलिए फाइनेंस के कंपाउंड में खुलती थी वहाँ से वो तमाम हथियारबंद पुलिस कर्मी नजर आ रहे थे, जो इस समय पहले इसके चप्पे चप्पे पर फैले हुए थे । रीता सान्याल ने उन पुलिस कर्मियों को देखा फिर वही का एक बडे अप्रत्याशित ढंग से हस पडे । फिर इसके था कि उस पेट्रोल में गूंज नहीं लगे । अब तक हो हूँ तो महस क्यों रही हो? मथुरादास एलएलबी पहुँचा हूँ हमारी बेवकूफी पर हस रही हूँ । रीता सान्याल निरंतर ठहाके लगाते हुए हो । जब तक पहली मर्तबा यहाँ आए थे और जब मुझे पता चला कि कम बीमा एजेंट नहीं तो मैं तुमसे डर गई । मैं सोच रही थी कि तुम जरूर कोई बहुत चालाक आदमी हूँ, लेकिन तुम ने अपनी असलियत खुद ही खोल डाली । तुम क्या समझते? हम अच्छा था तो मेरी सारी हकीकत जानने के बावजूद भी मेरे हत्याओं की संपूर्ण प्लानिंग से वाकिफ होने के बावजूद भी मुझे गिरफ्तार कर सकोगे । आप ही मथुरादास नहीं । हाँ, मैं अच्छी चीज का कुबूल करती हूँ कि मैंने जो लिया की हत्या की, मैंने ही रजिया कुमारा और अब लेते आना गुंजाल, जिसका मॉडर्न भी मैंने ही किया, लेकिन फिर भी दुनिया की कोई अचानक कोई कानून मेरे ऊपर ये जरूर साबित नहीं कर सकता । जूलिया ड्रॉप की हाय तो उसके कारण मारी थी और इस बात का गवाह आज भी पूरा रॉयल बार है । इतना ही नहीं उसने ड्रग की ये हाईडोज भी अपनी आप ली थी अपनी इच्छा से ली थी फॅार कहाँ हूँ । इसी तरह रसिया राजन क्लब में फाइट प्रैक्टिस के दौरान मरी गयी वो भी एक सिंपल सा हादिसा था ऐसा हादसा का ये भी किसी भी जगह घटित हो सकता है । फिर जजिया की मौत में तो एक और बडा जबरदस्त सबूत भी मेरे हक में है जो मुझे निर्दोष साबित करता है । ऐसा जिस्ट राजन क्लब में रस्सियां बडी ऍफ का जब कोई मेम्बर मारता है ना तो उसके मैं कश्यप फॉर्म में ही एक कॉलम और भी भरा जाता । भीतर सान्याल कर्म जोशी के साथ हुई उस कॉलेज में लिखा चाहता है जासूस माहौल है कि अगर किसी मेंबर की प्रैक्टिस के दौरान डेथ हो जाती है तो उसके लिए कोई उत्तरदायी नाॅक उसके लिए वह स्वयं उत्तरदायी है । रीता सान्याल उसका मखौल उडाते हैं । सिर्फ ऍम में भरी ओस एकलौते कॉलम के बाद सारी बातें खत्म हो गई । फिर तो रसिया के मादर के इल्जाम में मुझे फंसा रहा तो बहुत बडी बात है सजा के मॉडर्न कोई माडर ही साबित नहीं कर सकता । मथुरादास चैनल भी खामोशी से उसकी तरह सुनता रहा और जहाँ ऍफ का प्रश्न है तो कौन कहता है कि आना कम हुआ था? रीटर सानिया मथुरादास पर हावी होने का प्रयास करते हैं । पुलिस कमिश्नर से लेकर गोवा के तमाम आदमी इस बात की कमाई है कि आना को हाथ बटा या फिर तुम हाथ से हाथ ये साबित कर सकते हैं । मथुरादास की उन्होंने मासी के लेंगे लेकिन उनका मॉडर्न तो फिर भी साबित नहीं हुआ । फिर तुम मुझे उनके मॉडन के अपराध में भी कैसे गिरफ्तार कर सकते? सच बात तो ये है कि कानून मेरा कुछ भी दिखाई नहीं सकता, कुछ भी नहीं । मथुरादास चैनल भी खामोशी के साथ वही पडी । कुर्सी पर पहले रेटा सान्याल की बातों ने उसे झिंझोडा हो या विचलित क्या हो ऐसा कोई अच्छे हैं । उसके चेहरे पर नहीं हो पाया । उसने बडी शांति के साथ ही रह के दो फिर लगा है । इसमें कोई शक नहीं कि मैं तुम्हारे बारे में सब कुछ जान चुका मथुरादास चेहरे पूरा बोला लेकिन फिर भी मेरे पास तुम्हारे खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है । सच बात तो ये ऍम मैं समय क्या गारंटी के साथ ये भी साबित नहीं कर सकता कि तुम जूलिया नहीं हूँ हूँ । ट्विटर सान्याल हसी जब मैं सच्चाई से वाकिफ हो मत खाया था तो पुलिस के इतने बडे लाव लश्कर को लेकर तुम यहाँ क्यों आया हूँ? दरअसल पूरा की इस अब इतना कमजोर भी नहीं है जितना तो में से समझ रही हूँ क्या मतलब? फॅमिली मतलब मैं तुम्हें समझाता मथुरादास एलएलबी कुर्सी पर पहले बनाकर बोला । दरअसल तुम्हारे जैसा चाला क्रिमिनल जब कोई पांच खत्म ऑर्डर करता है तो ये समझता है कि आप दुनिया की कोई अदालत, कोई कानून उसे पकडने पाएगा, क्योंकि उसने मॉडर करते समय का ही कोई सूत्र छोडा ही नहीं । परंतु क्रिमनल का इस तरह सोचना उसकी बहुत बडी बेवकूफी होती है । उसकी कम्पनी होती है क्रिमिनल जाए जितना ही शातिर, क्यों ना उसने अपराध चाहे कितनी ही सोच समझकर योजनाबद्ध ढंग से क्यों ना किया हो, लेकिन फिर भी उस से सबूत छोड देते हैं और सबूत तुमसे भी छूट ऍम मथुरादास ने रीता सान्याल की तरफ उंगली था जो गलत फहमी में हरगिज मत रहना की तुमने ऍम ऑर्डर किए हैं । सबूत छोटे पीता सान्याल के शरीर में सर्द लहर दौडे कहाँ सुबह छोटे हैं तो मैं पहला मर्डर जूलिया का क्या जो लिया जो ट्रक के हाल तो उसके कारण मारी? ठीक ठीक ऍम अगर जूलिया की वो मृत्यु एक स्वाभाविक मृत्यु भी । अगर जूलिया ने वहाँ तो लेकर खुद अपनी मौत को गले लगाया तो उसे मरने से पहले अपने चेहरे पर प्लास्टिक सर्जरी की क्या जरूरत थी? मतलब ऍम था सिर्फ और सिर्फ ये प्लास्टिक सर्जरी वाला पोइंट इस बात की तरफ खुल्लम खुल्ला इशारा करता हॅाल की जो लिया की मौत के पीछे जरूर कोई पेज जरूर कोई रास्ता था जो लिया की मौत उतनी साधारण नहीं थी जितना लोगों ने उसे समझाया । रीटर सन्याल के चेहरे पर एक का एक हवाइयां उडती नजर आ रहे हैं । फिर दूसरा मार्डर तुमने रजिया का क्या मतलब? ऍम क्लब में रजिया को रीता सानिया बनाकर माँ तुमने राजी आकर चेहरे पर अपना में का पहले कर दिया था ताकि लोग ये समझे कि रीटा सानिया मर गए ॅ हो जाए । लेकिन अब जबकि ये रात हो चुका है कि मृतका वास्तव में रीता सानिया नहीं बल्कि रजिया थी तो बडा भारी सवाल कानून के सामने आकर खडा हो चुका है कि अगर वो एक स्वाभाविक जरूरत थी तो राजन क्लब में उस हादसे इससे पहले रजिया कोरिका सान्याल क्यों बनाया गया उसके चेहरे पर रीता सानिया का में काम करने से तथा फिर उसके मरने से सबसे बडा फायदा की से था और इससे भी बडा सवाल तो यह है रीता सान्याल उस दिन क्लब में वो लडकी कौन थी जो रजिया के मेकप में मौजूद थी और जिसकी किक से असले, रस्सी हमारी रीता, सानिया अलग साफ साफ घबराई हुई नजर आने लगी । उसके माथे पर पसीने की ढेर सारी बूंदे जो चौहान तुम्हें क्या लगता है जिस मौत के आगे इतने सारे सवाल खडे हूँ, उसे कानूनी इतनी ही सहजता से स्वाभाविक मृत्यु मान लेगा । मथुरादास मेरिडा सान्याल क्या अच्छा एक साधारण हादसा मान लेगा? और इस समय तुम अपने आप को देखो तो मैं क्या लगता है कि अगर मैं इस समय कस्तूरबा गांधी हॉस्टल की वॉर्डन रेणुका चौहान को तुम्हारे सामने लाकर खडा कर दूँ तो क्या वो ये कहते हैं कि तुम्हें इसलिए जो लिया जबकि असली जूलिया का शव भी बरामद हो चुका है तो तुम्हारी जूलिया के रूप में स्टाल इसके अंदर उपस् थिति किस बात की तरफ इशारा कर दिया? जानती हूँ तुम्हारी सिर्फ और सिर्फ यहाँ पर स्थिति से ही साबित हो जाता है कि ये सब कुछ की आधारा तो आ रही है, लेकिन सिर्फ हॉस्टल की वॉर्डन रेणुका चौहान के कह देने से यह बात साबित नहीं हो जाएगी कि मैं जो लिया नहीं हूँ । रीडर सानिया थोडी हिम्मत बटोरकर ठीक का तो मथुरादास एलएलबी ने उसकी बाद जरा भी काटी नहीं । सिर्फ रेणुका चौहान के कह देने से ये साबित नहीं हो जाए । लेकिन रेणुका चौहान के कह देने से तुम शक के दायरे में जरूर आ जाओगी और कानून असलियत का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस कर्मियों की कोई ना कोई तीन रिजर्व नियुक्त कर देगा । मथुरादास चैनल भी की उन अवकाश के तरफ उनका रीता सान्याल के पास कोई जवाब नहीं था । महसूस कर रहे थे कि वह शातिर बुद्धे के शिकंजे में भाव भी जा रहे हैं । तो मैं बिल्कुल नए तरह की विचारधारा का आदमी, मथुरादास एलएलबी की आवाज अभी भी हम शांत और भावना रहे थे । मैं सिर्फ उन अपराधियों को सजा दिलाना अपना धर्म समझता हूँ, जो आदि मुझे मैं जान गए । सुधरने की कोई गुंजाइश नहीं, लेकिन हमारे अतीत को पढकर मैंने जाना है कि तुम्हारे अंदर अभी भी कहीं न कहीं एक अच्छा इंसान मौजूद हैं । मैंने आज तक सिर्फ ये कहावत सुनी थी कि और कभी उधार नहीं रखती मोहब्बत इस नफरत वफा साफ दोगुना करके लौट आती है लेकिन आज तुम्हारे रूप में और अब के उस को देख लिया इसलिए मैं तुम्हें नई जिंदगी शुरू करने का एक जांच देना चाहता हूँ । आखिरी चांस बाहर जितने भी पुलिस कर्मी हैं उनमें से कोई नहीं जानता कि तुमने वास्तव में क्या अपराध तुम्हारी असलियत से सिर्फ और सिर्फ मैं करता हूँ । मथुरादास एलएलबी की बात सुनकर अभिजीत आसानी हार के नेत्र भट नहीं लगे । अभी मथुरा ऍम पीने एक बडा अजीबो गरीब काम किया । वो कुर्सी छोडकर खराब था । फिर मैंने में ही रखे । उसके अलावा पाँच की तरफ बढा जिसमें गुलाब और ऍम उसके कुछ ताजी हूँ । सच हुए थे । मथुरादास एलएलबी ने उस लावा पार्ट में से गुलाब का और एक डॅाल का फूल निकली और फिर उसने वो दोनों को लाकर बेटा सानिया के सामने टेबल पर रखें । रीता सानिया नहीं जानती थी कि बूढा वो सबकुछ क्यों कर रहा है । मेरे तो मैं एक सलाह है । फिर मथुरादास एलएलबी रीता सान्याल से पुनः संबोधित हुआ । ऍम किए तमाम चल अचल संपत्ति विद्वान और अनाथ आश्रमों के नाम करके आप यहाँ से चले कानून तो मैं कुछ नहीं आएगा । अपनी मस्ती हुई माँ का वचन पूरा करने के लिए जो हत्याएं तुमने की है वो हत्या सदा सदा के लिए राज रह जाएंगे । हमारे पास सोचने के लिए पूरे दस मिनट है मैं फिलहाल तो मैं यहाँ अकेला छोड टाॅल में जा रहा हूँ । अगर तुम्हें मेरा प्रपोजल मंजूर हो तो गुलाब का ये भूलने कहीं से आ जाना और अगर फॅमिली नामंजूर हो तो रीता सान्याल की आवाज उस क्षण पूरी तरह काफी तो बेर डॅाल का ये फूल लेकर नीचे आ जाना । फिर तो क्या करोगे फिर वो करूंगा शादी लडकी जिसके बारे में तुमने अभी सोचा भी नहीं है । बूढा मथुरावासी का एक शेर की तरह कर रहा था । अभी तुम ने सिर्फ अपने ही पत्ते बिछाने देखें परन्तु जब ये मथुरा ॅ तुम्हारे खिलाफ पत्ते बिछाए गाना तो तुम्हारे छक्के छोड जाएंगे । फिर मैं तो मैं तो उन के सौ में ले जाकर मासूम का जिन केसों की अभी मैंने इन्वेस्टिगेशन भी नहीं किया । क्या मतलब मुशाहिद भूल राॅ मुंबई पुलिस के रिकॉर्ड में तुम्हारे ऊपर छह मॉडर तथा एक सशस्त्र बैंक डकैती का अपराध दर्ज है । मैं जब इतना करूंगा कि तो मेरिट आसानियां साबित कर दूंगा और इसके लिए मुझे कोई ज्यादा पहाड के पत्थर भी नहीं तोडने होंगे । मैंने मालूम किया है मुंबई पुलिस के रिकॉर्ड मेरी टायॅज भी मौजूद हैं और सिर्फ वही फिंगप्रिंट इस बात को साबित कर देंगे कि तुम वास्तव में कौन हो । क्योंकि तुम ने अपना चेहरा बदला है, मगर ऍम आज भी वहीं होंगे । रीता सान्याल के दिमाग में धमाके पर थमा के विस्फोट पर विस्फोट होते चले घटनाएं नहीं जा रहा हूँ । लडकी परंतु ध्यान रहे अगर तुम गुलाब का फूल लेकर नीचे आओगी तो तुम्हारा ये प्रतिशोध महानता की मिसाल बन जाएगा । गोवावासी इस बात के लिए तुम परसदा गर्व करेंगे कि तुमने अपनी सारी संपत्ति दान करते हैं । बाहर जो पुलिस कर्मी इस समय तो मैं गिरफ्तार करने आए हैं । वह तुम्हें सैल्यूट करेंगे । वो शब्द बोलते हुए मथुरादास चैनल भी दरवाजे की तरफ पडता । फिर उसने दरवाजे किस इतनी नीचे गिराई और अगले ही क्षण वो बिना रीता सानिया की तरफ देखिए, बेड रूम से बाहर निकल गया । इंस्पेक्टर आत्माराम मोटलानी और मतलब फॅमिली । इस समय आना पैलेस के ड्रॉइंग हॉल में मौजूद है । मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि तुम आखिर ये सब क्या कर रहा हूँ । हमारा मोटलानी बेचे नहीं । पूरा बोला तुम्हें उस लडकी को इस तरह ऊपर कमरे में अकेला छोडकर नहीं आना चाहिए था । ऐसे खाॅ था और जल्द अब रंगमंच के ऊपर से पडता उठने वाला है । वो दोनों इस समय ड्रॉइंग हॉल में जरूर मौजूद थे परंतु उनकी निगाहें बाहर बार पहले माले पर बने राॅकी पेट्रोल की तरफ चली जाती थी । जैसे ही दस मिनट पूरे हुए तब ही बेडरूम का दरवाजा खुला है और वहाँ रीता सानिया प्रकट हुई । वो समय अपने हाथ में सुख गुलाब का फूल पकडे थी । मथुरादास तेजी से उसकी तरफ था । तब तक रीता सान्याल सीढियाँ उतरकर नीचे ड्रॉइंग हॉल में ही आ गई । ऍम मुझे तुमसे यही उम्मीद थी मथुरादास एलएलबी की आंखे छमा कुछ नहीं । मैं जानता था कि तुम्हारे जैसी इंटेलिजेंट अपराधी कभी हाँ बादल का नहीं उठाएगी । तभी मथुरादास एलएलबी ने एक मेरा कदम और वॅार आत्माराम मोटलानी और रीता सान्याल के साथ आना पालस के कंपाउंड में पहुंचा तथा उसने तमाम पुलिस कर्मियों को इकट्ठा किया । ऍम बारे वो कृष्णास्वामी बोला हूँ, आप लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है । दरअसल हम जिस क्रिमिनल को पकडने के लिए यहाँ आए थे, उसे पकडने में हम बस थोडा सा चुक्का वहाँ से भाग निकला है । पर हम तो अभी अभी एक बहुत शानदार घटना घटी है । इस पूरे पहले उसकी मालकिन तथा ली डियाना गोंजाल्विस जैसी महान औरत की सुपुत्री मैडम जूली आनी अभी अभी घोषणा की है कि वो अपनी सारी चल अचल संपत्ति, विधवा आश्रम तथा अनाथ आश्रम के नाम दान कर रही है । इसलिए इन सुखद क्षणों को और भी ज्यादा सुखद बनाने के लिए मेरी आप लोगों से रिक्वेस्ट है कि आप माध्यम जूलिया को सेल्यूट करें । तुरंत हथियारबंद पुलिस कर्मियों ने अपनी अपनी राइफल तानकर तथा बडे जोरदार ढंग से आॅपरेशन ब्लैकबोर्ड बजाकर जूलिया को सेल्यूट दिया । यही वह क्षण था जब आना पैलेस के उसका हूँ । अकस्मात एक और बडा जबरदस्त भूकंप आ क्या बूटा राम जब तक बडी ही खामोशी से वो सारा नजारा देख रहा था, वही का एक बडी अप्रत्याशित रूप से आत्माराम मोटलानी की तरह लगता था । मोटलानी कुछ समझ पाता उससे पहले ही उसने मोटलानी के होस्टल में से पॉइन्ट थ्री टू की पुलिस स्पेशल रिवॉल्वर खींच ली और फिर वो लीटर सान्याल का निशाना लेकर रिवॉल्वर का ट्रिगर बुरी तरह से हो गया । मतलब फॅमिली और तमाम पुलिस कर्मियों ने जब तक झपट कर मोटा राम को दबोचा । तकरीबन आसानियां लाश नेता तेल हो चुकी थी । उसका खून से लथपथ पक्षा अफगानिस् के कंपाउंड में पढा था साहब बहुत छक्के रह गए । मथुरादास बूटा राम तीखे स्वर में बोला मैंने कमांडर कारण सक्सेना के उपन्यास पढ पढ कर कुछ और सीखा या न सीखा हो लेकिन एक बात बडी अच्छी तरह जरूर सीखी है । क्या जुर्म की जडों को कभी सलामत नहीं छोडना चाहिए? मोटा राम की आवास था थी उनमें तेजाब छिडक देने में ही भलाई खबर देखा मैंने तेजाब छडप दिया । वैसे भी मैं इस रीता सान्याल को इस कारण से भी माफ नहीं कर सकता था क्योंकि ये मेरी आना और मासी बाकी खूनी थी । अब तुम लोग मुझे रेस्ट कर सकते ऍम फिर आपने उस सब पर खुद ही जोर से हसन इस बार मैंने अंग्रेजी तो गलत नहीं बोली ना मथुरा दास उसने सिर्फ बडी कहने मसलों से बता रहा हूँ आपने खिचडी नुमा बढी हुई शेर में हाथ भी रहा है । फिर अपनी सिस्टर कि जी में से राम निकालकर ऍम । उसके बाद वो धीरे धीरे कदमों से स्टेशन वादन की तरफ बढ गया । पीछे आत्माराम मोटलानी बूटा राम के हाथों में हथकडी लगती समाप्त हूँ

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