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PART 1 (A)

ऍम किताब का नाम है ताली का गौरव धंदा हूँ जिसमे लिखा है रामाकांत नहीं और आवाज भी है आपके प्रिय मोहिल हैं ऍम समय जब मन चाहे वे सचमुच बहुत भयंकर दुर्घटना थी । ऐसा लोमहर्षक दृश्य मैंने आज तक नहीं देखा था । अभी थोडी देर पहले बेहद घबराया हुआ था । खडा था और शरण भारत बाद उसका सारा शरीर टुकडे टुकडे होकर देखा गया । एक लम्हें तक में अपनी जगह तब और जडवत खडा रहा हूँ । फिर वहाँ से भाग निकला जिस और उस आदमी का जिसमें तो खडे टुकडे होकर पडा था । उस तरफ देखने का मुझे साहब भी नहीं रह गया था । मैं सोचता हूँ मैं वहाँ से क्यों भाग निकला? अगर मैं भागता नहीं तो मेरे साथ जो कुछ हुआ वो होता हूँ लेकिन कुछ कहा नहीं जा सकता । हो सकता है सारी दुर्घटना के लिए मैं ही जिम्मेदार ठहराया दिया जाता और यही सोच कर मैं वहाँ से बाहर निकला । उस समय ऐसा सोचने के लिए मैं अपने आप को दोष भी नहीं दे सकता । हर आदमी में सुरक्षा की भावना बहुत जबरदस्त होती है । आम आदमी जिंदगी से कभी दो चार नहीं होना चाहता । खतरे की जरा भी आशंका होते ही मैं भागता है उसमें आगे पीछे सोचने की भी ताकत जैसी नहीं रह जाती है । मैं ये ही सोच पाता कि खतरे से भागने का परिणाम शायद हो रहा हूँ और ठीक यही बात मेरे साथ हुई थी । मैं एक इंजीनियरिंग फॉर्म में ड्रॉफ्टमैन का काम करता था, मकानों और इमारतों का नक्शा बनाये करता था । फॉर्म काफी बडी थी । करीब दो सौ आज में उसमें काम करते थे । मेरा मतलब है नौकरी अच्छी और पक्की थी । तनख्वाह के अलावा ओवर टाइम भी अच्छा खासा बन जाता था । मेरी पैंतीस साल की उमर और आज कल पढे लिखे बेकारों की बढती हुई फौज को देखते हुए हैं । आमदनी बुरी नहीं थी । सुबह जब मैं दफ्तर के लिए रवाना होता तो मेरी पत्नी पुष्पा, बेटी पम्मी कोली है । घर के बाहर तक आदि होठों पर खेली हुई मुस्कान के साथ मुझे विदा कर देती है । हमने अपने दोनों हाथ कुछ का घर मेरी गोद में आ जाती है और जब तक मैं उसके दोनों गालों खीम एटीना ले लेता और उसको दे को भी न चुम लेता वो मुझे ना छोडती । शाम को जब तक मैं घर ना बहुत जाता है ना तो खाना खाती और नहीं होती है । मेरा मन भी पुश पावर पम्मी पर ही टंगा रहता है । इसलिए दफ्तर की छुट्टी होने पर जहाँ मेरे बहुत से साथ ही चाहे घरों या कॉफी हाउसों का रास्ता पकडते । मैं मेट्रो पकडने के लिए तेज कदमों से मेट्रो स्टेशन की ओर बढ जाता है । कभी कभी दोस्त मजाक करते हैं ही देवी बच्चे हमारे भी हैं पर तुम तो जैसे उनके गुलाम हो गए हो लेकिन मैं इसका कोई खयाल नहीं करता । बस छुट्टी होते ही मेट्रो का रुक करता । साढे पांच बजे वाली मेट्रो मुझे आराम से साढे छह बजे अपने घर पहुंचा देती । पम्मी मानव मेरे कदमों की आहट जानती थी । मैं कॉल बैल जवाब ही नहीं पाता था कि वह दौड कर दरवाजे पर आ खडी होती है और मुझे खींचती हुई घर के अंदर ले जाती है । उस दिन हमें होगा टाइम पर उतना पडा था । ऐसे मौके पर में आपने देर आने की सूचना मोबाइल पर दे दिया करता था । लेकिन उस दिन नेटवर्क ना मिलने की वजह से पुष्पा को मेरे देर से आने की खबर नहीं मिल पाई । दफ्तर का काम भी ऐसा जरूरी था की मैं उसे छोड कर जा नहीं सकता था । हमारी कंपनी ने एक सरकारी कॉलोनी बनाने का ठेका लिया था । उसके नक्शे अगले दिन ही पेश होने थे । पिछले तीन दिनों से हम उसी में लगे रहे । आज भी दिनभर हम उसी में लगे रहे । पर अभी दो ढाई घंटे का काम बाकी था । लिया था । हमें देर तक रुकना था । मैंने अपना ध्यान कंप्यूटर के स्क्रीन की ओर केंद्रित किया । फिर धीरे धीरे अपने काम में इतना हो गया कि और सब कुछ भूल गया । बस रह गया सामने फैला ब्रो पेंट और उस पर किसी बडी तिरछी रेखाएं । हमारा काम कविता से कम दिलचस्प नहीं । कभी अपने सपनों की दुनिया को शब्द देते हैं । हम रहने की जगह के बारे में आदमी के सपनों की इन्हीं रेखाओं से वास्तविक रूप रहते हैं । एयर में अपने काम में पूरी तरह मशगूल हो गया । मेरे बगल में ही मेरा साथ ही जयंत भी ध्यान मांगता था । जितनी देर हम काम करते रहे, हम में से कोई भी एक दूसरे से नहीं बोला । आखिरकार मैंने अपना आखिरी नक्शा बोरा क्या? जयंत ने भी करीब करीब मेरे साथ ही अपना काम खत्म किया । अपने लक्ष्यों के प्रिंस संभाल कर रख देने के बाद थकान में डालने के लिए मैं अपनी कुर्सी पर ही निडाल सा हो पेट लगाकर बैठ गया । मैंने सोचा थोडी देर में उठ जाऊंगा । जयंत होने के लिए बातों में चला गया मेरी निगाह दफ्तर की दीवार घडी पर पड गई । रात के आठ बज रहे थे । मैं कुछ हो गया । मैंने सोचा था ज्यादा से ज्यादा दो घंटे का काम होगा । पर यहाँ करीब तीन घंटे बीत गए थे । मैंने सोचा कि पुष्पा को आज मेरे देर से घर पहुंचने की खबर भी नहीं हो पाई है और यहाँ इतनी देर हो गई । ठीक है सेल पर सूचित कर देता हूँ । मैंने जयंत को आवाज दी पर जब मैं बाहर निकला तो हम दोनों जल्दी से अपनी दराजें वगैरह बंद कर दफ्तर से बाहर निकाला है । हमने तय किया था की ऑफिस की इमारत के नीचे वाली कैंटीन नहीं चाहेंगे । फिर घर जाएंगे । पर अब मैंने चाय का इरादा त्याग दिया । जयंत को कुछ बुरा भी लगा हूँ पर अब मैं और इंतजार नहीं कर सकता था । लगभग साढे आठ बज रहे थे । मैं जल्दी से स्टेशन पहुंचकर मेट्रो पकडना चाहता था ताकि जल्दी से जल्दी घर पहुंच सकूँ । जयंत निकट में ही रहता था इसलिए वह बस अथवा और डोसे जाया करता पर बस स्टॉप तक पहुंचने के लिए उसे थोडी दूर तक मेरे साथ पैदल चलना पडता था क्योंकि उसका बस स्टॉप उसी ओर था जिधर मेट्रो स्टेशन था और दिनों में दफ्तर से मेट्रो तक पैदल ही जाए करता था । इस तरह छोडा व्यायाम भी हो जाता था और पैसे भी बचते बराज मैंने मेट्रो स्टेशन तक ऑटो से ही जाने का निश्चय किया । हताहत कंपनी से बाहर आकर हमने और तो कर लिया और दोनों उस पर सवार हो गए । लगभग पांच मिनट बाद मेरा मेट्रो स्टॉप आ गया । जयंत को उसी ऑटो से आगे जाना था इसलिए मैं उसे छोडकर उतर गया । तो कल लेकर मैं प्लेटफॉर्म पर पहुंचा और मैंने इत्मिनान की सांस ली । मेट्रो आने में अभी भी पांच मिनट शेष थे । सोच रहा था कि ज्यादातर लोग साढे पांच या हद से हद छह बजे के मेट्रो से निकल जाते होंगे । पर इस समय भी इतनी ही भीड थी जितनी पांच या छह बजे हुआ करती है । अभी मेट्रो आने में पांच मिनट बाकी थे इसलिए मैं प्लेटफॉर्म पर सबसे पीछे खडा था । अब सिर्फ एक मिनट रह गया था । मैंने सोचा कि आप जिस डब्बे में से थोडी भी गुंजाइश होगी उसे मैं बैठ जाऊंगा । यही सोचता हुआ बढ रहा था कि न जाने कहाँ से मैं बूढा मेरे सामने पड गया । उस ने मेरा करना थाम लिया और उसी के सहारे हाफ का हुआ खडा हो गया । जब उसका थोडा दम बंधा तो बहुत ही कतार स्वर में उसने मुझसे का मैं बहुत परेशान हूँ । मेहरबानी करके मेरी मदद कीजिए । फिर दिल्ली जैसे बडे शहर में कोई किसी की राह चलते मदद नहीं करता । इस तरह लूटपाट और धोखाधडी कितनी घटनाएं घट चुकी हैं । इसलिए मेरे मन में भी आया कि मैं उसे परे हटाकर अपना रास्ता लोगों पर । तभी मैंने उसके चेहरे की ओर देखा । वह कोई गुंडा या बदमाश नहीं बल्कि बहुत ही शरीफ पढा । लिखा आदमी लग रहा था । उसके कपडे बहुत ही कीमती थे और चेहरा किसी भयानक दर्द से विकृत हो गया था । मुझे अनायास ही उस बूढे पर दया आ गई । मैंने पूछा क्या मैं मेट्रो पर चढने में आपकी मदद करूँगा? आप कुछ भी करे मिस्टर पर मेरी मदद जरूर करें । मेट्रो प्लेटफॉर्म पर आ चुकी थी और चल रही वाली थी । मैं कुछ समझ नहीं पा रहा था कि वह क्या चाहता है । मैंने फिर पूछा आखिर आप क्या चाहते हैं? मैं आपकी क्या मदद करूँ? जहाँ मेरी बात का कोई जवाब देने जा ही रहा था, किस ऐसा उसका चेहरा वैसे सफेद पड गया । ऐसा लगा जैसे उसने कोई बहुत ही डरावनी चीज देखती हूँ । फिर एक का एक मुझे छोड कर वे आगे की ओर भागा । मेरे मुंह से एक ही चीज निकलते निकलते, गले में घुटकर रहे गई । ऍम पर खडी मेट्रो चल पडी थी । ऍम बिना उसकी ओर देखे आगे की ओर ही दौडता जा रहा था । पता नहीं किस से इतना डर गया था कि उसे चलती और अब रफ्तार पकडते । मेट्रो का ज्ञान ही नहीं रह गया । इससे पहले की मैं उसे चलाकर उसे आगाह करूँ । उसका पैर आगे बढ गया । फिर एक साइन बोर्ड से उसकी तेज टक्कर हुई और उसका दूसरा पैर भी प्लेटफॉर्म से उखड गया । पलक झपकते चलती मेट्रो के नीचे आ गया । उसकी आखिरी ठीक स्टेशन के शोरशराबे के बीच को कर रह गई । मेट्रो झटके से रुक गई । उसके ऊपर से दो डब्बे गुजर चुके थे । मैंने ही पाल के लिए उस जगह की ओर देखा जहाँ गिरा था । उसके शरीर के चित्र हो रहे थे । उसके धड का एक हिस्सा है । उसके गिरने की जगह से करीब बीस मीटर दूर खींच कर चला गया था । रेल की पटरियां और उनके बीच की जगह लहूलुहान हो गई थी । मैं उस जगह दोबारा नहीं देख सका । जिन लोगों ने ये दुर्घटना देखी थी तो अलावा कराए गए मौत का इतना भयावह ना और बदसूरत द्रश्य देखकर लोग सिहर उठे हैं । कुछ लोग तो बुरी तरह कहाँ रहे थे? शायद मौत की गति आवाज की गति से भी अधिक तेज होती है । इसलिए बाद की बात में वहाँ सैकडों आज में इकट्ठा हो गए हूँ । खुद मैं अपने शरीर में भयंकर कपकपी सी महसूस कर रहा था और मेरे लिए वहाँ खडा होना भी मुश्किल था । इस खयाल से मुझे हमारे भी डर लग रहा था की मेट्रो के नीचे आने के एक ही मिनट पहले उसने मुझे पर गढकर मुझ से मदद मांगी थी और मैं उसकी कोई मदद नहीं कर पाया था । इसके अलावा मेरे मन को और कोई बात परेशान नहीं कर रही थी । मैंने उसे चलती मेट्रो के नीचे कताई नहीं अकेला था । चलती मेट्रो के नीचे आने से पहले उसने लम्हे भर के लिए मुझे पकडा जरूर था, पर ना मैंने उसे अपने से अलग हटाया । नावों से मेट्रो के नीचे तक खेला । इस मामले में मेरा मन बिल्कुल साफ था । साफ तौर पर कह सकता था कि मैंने उस बूढे आदमी को मेट्रो के नीचे नहीं खेला था । उल्टा मैं उसकी मदद करना चाहता था । अगर वह मुझे छोडकर भागता नहीं तो वो मेट्रो के नीचे नहीं आ पाता । लेकिन ये है सोचने के साथ ही एका एक मैं भीतर ही भीतर भयभीत हो उठा । मैं अपराधी नहीं था । मैंने उसे धकेलना नहीं था । प्लेटफॉर्म पर और भी बहुत चार में थे । उनमें से बहुत से आदमी ने सारी घटना देखी होगी । उन्होंने देखा होगा कि जहर मुझे पकडकर खडा था । फिर एकाएक मुझ से अलग होने के तुरंत बाद ही मैं मेट्रो के नीचे आ गया था । पर क्या उन्होंने इस घटना को इसी रूप में देखा होगा? जिस तरह मैं उसका गवाह था क्या वो भी यही सोचते होंगे कि मैंने उस बूढे आदमी को नहीं खेला है? अपने आप में ही मुझे छोडकर अलग हो गया था । शायद कुछ लोग ऐसा ही सोचते हूँ । पर कुछ लोग ऐसे भी जरूर होंगे जो हलफ लेकर ये कहने के लिए भी तैयार हो जाएंगे की मैंने उसे नहीं धकेला । झूठ नहीं बोलेंगे पर ऐसी बहुत सी चीजें की कल्पना कर लेंगे जब कभी हुई नहीं और उसे ही सच मान बैठेंगे । बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो किसी घटना को खूब बहु उसी तरह बयान कर सकते हैं । जिस तरह होती है एक आज बाहर मुझे किसी वजह से अदालत में जाना पडा था । तब मैंने अपनी आंखों से देखा था कि एक ही घटना को अलग अलग गवाह किस किस तरह से अलग ढंग से बयान करते थे । ऐसी हालत में अगर एक आदमी ने भी कह दिया कि मैंने ही बूढे को द खेला है, उसकी भी गवाही उतनी ही वजनी होगी जितनी है । कहने वाले की है कि मैंने उसे नहीं धकेला । ऐसी हालत में मेरे लिए जो परेशानी पैदा हो जाती है उसके बारे में मैं सोचना भी नहीं चाहता था । मुझे सिर्फ एक ही बार सोच रही थी किसी भी तरह यहाँ से भाग चलना चाहिए । यह एक अच्छी बात हुई थी कि अभी तक किसी का ध्यान मेरी और नहीं गया था । भीड में खडे लोग अभी तक घटना को समझने की कोशिश कर रहे थे । मेरे बगल से ही पुलिस के कुछ सिपाही गुजर गए थे । पर उन्होंने मेरी और कोई ध्यान नहीं दिया । किसी ने भी मुझे नहीं होगा । कोई मुझसे बोला भी नहीं । लोगों के बीच से रास्ता बनाता हुआ मैं भीड के बाहर आ गया । एक्शन के लिए खडा होकर मैं कुछ सोचता रहा । फिर मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलने के रास्ते पर पड चला । अब ये मेट्रो काफी देर तक रुकी रहेगी । स्ट्रेचर आएगा । लाश का पंचनामा होगा शिनाखत गवाही वगैरा की ओर भी कार्यवाही होगी । यूजर तुरंत किसी का खयाल मेरी और नहीं गया तो मेरा इस मेट्रो के ही किसी डिब्बे में बैठ जाना भी उतना ही सुरक्षित रहना जितना कि वहाँ से बाहर निकलना था । पर देर का खयाल करके मेट्रो स्टेशन से बाहर की ओर चल पडा । मेट्रो के बाहर थोडी दूर जाकर बस स्टॉप था । वहाँ से नोएडा की और बसें जाती थी । रास्ता जरा लम्बा था पर मैंने सोचा आज उसी से चलना ठीक रहेगा । दिल्ली में जनवरी के महीने में भी काफी सर्दी होती है लेकिन मुझे पसीना आ रहा था । शायद अभी अभी जो कुछ हुआ था उसकी वजह से कब राहत पैदा हो जाने के कारण मेरा ये बुरा हाल हो रहा था । ट्वीट का कोट उतारकर मैंने कंधे पर डाल लिया । फिर एक गिलास पानी पिया । तब जाकर कहीं कुछ चैन मिला हूँ । ओवर ब्रिज पार कर बस स्टॉप तक पहुंचने में लंबा चक्कर पडता था । इसलिए मैंने सोचा के नीचे उतरकर सडक पार करके मेट्रो स्टेशन के पीछे की ओर से निकल चलूँ । तभी मैंने उस आदमी को देखा । सहसा मेरा रोम रोम चौकन्ना होता हूँ । मैंने महसूस किया कि एक आदमी मेरे भीड से निकलने के बाद से मेरे पीछे पीछे आ रहा था । लेकिन मेरा ध्यान टूटा । मैंने सोचा हूँ । शायद मेरा कोई बहन था पर सच चाहिए थी कि वह मेरे पीछे पीछे ही आ रहा था । मुझसे करीब दस मीटर दूर मेरे साथ साथ ही चल रहा था । एक बार मैंने मोडकर गौर से उसे दिखाना चाहा लेकिन मेरे घूमते ही मेलापक कर एक खंबे की ओट में आ गया और अभी तक मैं कुछ तय नहीं कर पाया था कि वह मेरा पीछा कर रहा था या नहीं । मैं आगे बढकर बस स्टॉप के पास लगे एक बुक स्टॉल पर पहुंचा और यही उलट पुलट कर कुछ पत्रिकाएं देखने लगा । बुक स्टॉल के दूसरे किनारे पर आकर भी खडा हो गया । इस बार उसने अपने कुछ पाने की कोशिश नहीं की । अब मेरा शक यकीन में बदल गया । वह लंबा सावले रन का पतला दुबला आदमी था तो दुबला होने से उसकी लम्बाई और भी अधिक लग रहे थे । शरीर की ही तरह उसका चेहरा भी बहुत पतला और लम्बा था । पीछे की ओर मुडे हुए लंबे बाल जैसे खोपडी से चिपके हुये थे । मैं धारीदार कमीज के ऊपर चार खाने वाली एक जर्किन और जींस पहने था । चेहरे पर काले धब्बे, कौनसी धंसी, धंसी आंखें खूंखार लग रही थी । अब है आपने कुछ पाने की बजाय मेरी और लगातार हो रहा था । जैसे वह मुझ पर जाहिर कर देना चाहता था कि उसका लक्ष्य में ही हूँ मुझे पर फिर से पहली जैसी घबराहट हावी हो गई, पर किसी तरह उस पर काबू पाकर फिर आगे बढने लगा । इस बार वह तेजी कदमों से मेरे एक दम करीब आ गया और मेरे कंधे पर हाथ मारता हुआ बोला बाबू जी, ताली मुझे दे दीजिए । कोई भी शरीफ आदमी किसी अंजान आदमी की इस तरह की हरकत पर एक चला रहा जाएगा । मेरे साथ भी यही हुआ । फिर रहे । कुछ देर से मेरा पीछा भी कर रहा था । उस पर है ऊटपटांग सी बात भला किस ताली की बात कर रहा था मैं । वे आठवीं कोई छठा हुआ बदमाश लग रहा था । कहीं उसने किसी और आदमी के धोखे में तो मुझसे ताली नहीं मांगी । लेकिन तभी उसने फिर कहा, अरे तुम से ही कह रहा हूँ मिस्टर ताली मुझे दे दो । उसकी आवाज भी बहुत कडी और बच्चे की बाहर की तरह तेज थी । मुझे फिर घबराहट होने लगी । समझ में नहीं आया कि करूँ क्या? इसलिए वही किया जो ऐसे मौके पर मुझ जैसा हर आदमी करता हूँ । मैं चुपचाप आगे बढ गया । मानव मैंने उसकी बात ही नहीं सुनी हूँ । थोडी देर तक वैभवी खामोश मेरे साथ चलता रहा । फिर जब एक जगह थोडा अंधेरा पडा तो वह मेरे सामने तनकर खडा हो गया और अपनी कडा दार आवाज पर जरा धीमी आवाज उसने मुझसे का । अभी तक मैं सर्राफा दिखा रहा था लेकिन लगता है तुम सीधी तरह नहीं मान होंगे । जल्दी ताली मेरे हवाले करो । कुछ लोग हमारे पास से गुजर रहे थे पर किसी ने हमारी और ध्यान नहीं दिया । बडे शहरों में कोई योगी किसी पर ध्यान नहीं देता । मैंने भी थोडी हिम्मत बांधी और अपनी आवाज को भर सा खडा बनाते हुए था । कैसी डाली नहीं किसी ताली वाली के विषय में कुछ नहीं जानता । ऍम मुझे देर हो रही है । मैंने उससे कतराकर आगे निकलने की कोशिश की पर तभी उसने मेरी कलाई पर कर ली । उसके हाथ की उंगलियां तो पतली थी और जैसे फौलाद की बनी थी । फिर कुटिलता से मुस्कुराते हुए कहा बच्चे चालबाजी करते हो तो मुझे जाने दो, डाली मुझे दे दो और चले जाऊँ मैं तो मैं नहीं रोकूंगा । हडताली दे दो और एक ऐसी ताली भाई कौन सी वाली वह जो बोलेंगे तो मैं दी है किस बूढे ने मान सिंह मोहन सिंह समझ में आया कुछ वही मानसिंह जैसे तुम ने गाडी के नीचे धकेल दिया । ऍसे नहीं खेला हो सकता है पर उसने तो मैं ताली दी है । मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है । आप ज्यादा बहस मत बढाओ । ताली फौरन मेरे हवाले कर दूँ अचीव खपती होता हूँ मैं कुछ चला गया ना । मैं किसी मान सिंह को जानता हूँ और ना किसी तली को और न कोई तली मेरे पास है । उससे बेकार ही बहस मत करो हूँ । मैं कुछ सोचने लगा । शायद इसी वजह से मेरी कलाई पर उसकी पकडे कुछ ढीली हो गई । इस मौके का फायदा उठाते हुए मैंने उसका हाथ छठा कर उसे जोर कर रखा दिया । उसके पांव लडखडा गए और है । पीठ के बल गिर पडा । मैंने उसके उठने का इंतजार नहीं किया और पैसे की परवाह किए बिना दौड कर सडक पार कर ली और बस स्टॉप की और तेज कदमो से भर चला । मैंने सोचा जो भी बस आएगी बस उसी पर चढ जाऊंगा । फिर उसे रास्ते में कहीं छोडकर नोएडा वाली बस पकड लूंगा ।

PART 1 (B)

एक बार तभी आ गई गाॅधी बजा रहा था हूँ हूँ हूँ दौड कर उस की ओर बढ चला और हफ्ता काम था किसी तरह उस पर चढ जाने में सफल हो गया । नोएडा वाली ही बस्ती बस के रफ्तार पकडते पकडते मैंने देखा सडक के उस बार खडा ने आदमी बस की ओर गुस्से से हो रहा था । जिस सीट पर मैं बैठने जा रहा था उस पर पहले ही एक मोटी औरत बैठी थी । मेरे लिए उस पर जगह बहुत कम थी फिर भी किसी तरह में बैठ गया है और थोडी देर तक तो मुझे देखती रही । फिर उसने पूछा तुम्हारी तबियत खराब है क्या? करूँ तो बस रुकवा दूँगा मैं अधेड महिला शायद बहुत दयावान थी । मेरी हालत पर तरस खाकर ऐसा कह रही थी । लेकिन इस वक्त वह अपनी दया भावना के वशीभूत हो बस रुकवाने के लिए गई थी तो मैं उसके साथ बहुत रुखाई से पेश आता और उसने फिर कभी किसी पर दया ना की होती है । बहरहाल उसने कोई ऐसी हरकत नहीं । मैंने कहा जी नहीं मैं ठीक हूँ । दरअसल बस पकडने के लिए दौडने से मेरी हालत ऐसी हो गई । इसके बाद उसने मुझसे कोई बात नहीं नोएडा दिल्ली से करीब आठ किलोमीटर दूर है । लेकिन बस से यह बस्ती कुछ ज्यादा ही दूर पडती है और समय भी अधिक लगता है । थोडी देर बाद मेरी बेचैनी कुछ कम हुई है । ठंडी हवा के झोंके खिडकियों से बस के अंदर आ रहे थे । मेरे ऊपर इनका अच्छा सर हुआ । शहर का इलाका छोडकर बस अब कम आबादी वाले सुनसान इलाकों के बीच से बस गुजर रही थी । शहर का इलाका छोडकर बस अब कम आबादी वाले सुनसान इलाकों के बीच से गुजर रही थी । अब मैं सारी घटना पर शांत मन से विचार करने लगा । आखिर मानसिंह कौन था? मेट्रो से उसका घटना सिर्फ एक सहयोग था, षड्यंत्र हूँ । यदि संयोग था तो ये ताली वाली बात एका एक कहाँ से पैदा हो गयी? मेरे दिमाग में इस घटना का नक्शा इस तरह बना । कोई आदमी उस बूढे आदमी का पीछा कर रहा था । उस से बचते हुए मैं भागा । बिछे करने वाला आदमी वही होगा जिसने बाद में मेरा पीछा किया है । भोडे का मुझसे मदद मांगना और उसके बाद मेट्रो के नीचे आ जाना । सारी घटना उसी ने देखी होगी । इसके बीच उसे ये गलत फहमी हो गई कि बूढे ने मुझे ताली थी थी । अगर ऐसा न होता तो उस ने मेरा पीछा क्यों? क्या होता है? इससे पहले तो उसे देखा नहीं । मुझे अपने यहाँ पर जा लाहट होने लगी । हम अक्सर बगैर जरूरत बहादुर बन जाते हैं और जब सचमुच बहादुरी दिखाने का मौका मिलता है तो उससे पीछे भागते हैं । मैंने क्यों नहीं उसका कॉलर पकडकर दो एक दम से जमा दिए । पर मुझे शायद उसका उतना भय नहीं था जितना इस बात का की कोई मुझे स्टेशन पर पहचान न ले और फिर ये ना समझ बैठे की मैंने ही वह बूढे को गाडी के नीचे धकेला । मेरा पीछा करने वाले आदमी ने तो मुझे यही कहा था एक का एक मैं चौंक पडा । अब सारी बात मेरे सामने स्पष्ट हो गई । दरअसल मेरा पीछा करने वाला आदमी मेरे ऊपर बूढे को धकेलेगा । इल्जाम लगाकर मुझे ब्लैक मेल करना चाहता था । ताली वाली बात तो मुझसे बातचीत शुरू करने का बहाना थी । मैं इस बात पर काफी देर तक सोचता रहा और यही बात सही लग रही थी । वरना ऍन इसके पहले एक दूसरे को देखा तक नहीं । उस बूढे को भी मैंने उसकी जिंदगी के आकृषण में पहली बार देखा । भला है मुझे कौन सी गाली देने लगाया है । मेरा सारा शरीर से हर उठा पर भय के कारण नहीं । ठंड के कारण बस काफी तेज रफ्तार से चल रहे थे । अब उसमें आज भी कम है । सभी खिडकियां खोली हुई थी । मेरे बगल में बैठी हुई अधेड महिला पिछले स्टॉपर उधर गई थी । मैंने अपनी सीट के बगल वाली खिडकी बंद कर दी और कोर्ट जिससे मैं अभी तक अपने कंधे पर लडका आए हुए था, पहन लिया । उसके सारे बटन बंद किए, कॉलर के उठा लिया और हथेलियों को गर्माहट देने के लिए उन्हें कोर्ट के दोनों जेब में डाल दिया । मेरी ताई जी में खाली पडी थी तो उन्होंने मुझे सचमुच डाली थी थी । ताली मैंने जेब से निकाल ली और उसे देखने लगा । वह एक मामूली चपटी सी पीतल की डाली थी और उस पर अंग्रेजी अंकों में कोई संख्या लिखी थी । बस उसके सेवा और मैं कुछ समझना सका । उसके बारे में मेरे मन में कोई दिलचस्पी भी पैदा नहीं हुई । निहायत मामूली सी डाली थी, जिसके लिए मेरी इतनी फजीहत हुई । मैं सोचने लगा जब उस आदमी ने मुझसे ताली मांगी तो क्यों नहीं किसी भले आदमी की तरह मैंने अपनी जेब टटोली और दाली निकालकर उसके हवाले कर दी थी । उसने भी भले आदमी की तरह बात की होती है तो शायद मैं नहीं करता । अगर उस ने मेरा पीछा करने के और अकड दिखाने की बजाय ये कहा होता । जरा देखिए तो बोले ने आपकी जेब में कोई ताली तो नहीं छोड दी । तो मैं जरूर अपनी जेब टटोलकर देखता और उसमें ताली पाकर उसे लौटाते था । चाहे ताली से करूंगा, खा जाना है कि उन्हें मिलता । मैं इसे अपने पास नहीं रखता हूँ । लेकिन अब तो इसके बारे में सोचना ही भी कार है । मैं सडक के दूसरी ओर खडा मुझे देखता रह गया । उसे यह पता नहीं था कि मैं कहाँ रहता हूँ और फिर दिल्ली जैसे शहर में ही इस बात का क्या ठिकाना कि वह मुझे कहीं फिर से मिलेगा । मैंने सोचा कि आवेस ताली को मेरे पास ना रहना ही अच्छा हूँ । अगर मुझे मिलता है और थाली में उसे दे देता हूँ तो वही समझेगा की मैंने जानबूझ कर पहली बार उसे डाली नहीं दी थी । नहीं, अभी सोच सकता था कि इस ताली से जो कुछ भी खुल सकता था उसे खोलकर अपना उल्लू सीधा करने के बाद मैंने उसे ताली लौटा दी । नहीं अकाली अपने पास रखना ठीक नहीं है । मैं इसकी वजह से जिस झंझट में पडा और आगे भी पढ सकता था । उस से पीछा छुडाने का सीधा उपाय यही था की झंझट की जड ही खत्म कर दी जाए । मैंने तय कर लिया कि आपने बस स्टॉप पर उतरकर मैं ताली हवा में उछालकर दूर से दूंगा और एक बार ही ही इससे छुट्टी भी पाऊंगा । फिलहाल मैंने ताली जेब में रख ली पर बस है । जब मैं अपने स्टॉपर उतरा तभी रहा विचार बदल गया था । मैंने अपना हाल जेब में डाला ही नहीं । ताली कुछ हुआ भी नहीं । मैं जिस चक्कर में फस गया था उस से निकलने का एकमात्र रास्ता यही था की ताली जिसकी हो से लौटा दी जाए । मैं जानता था कि मैंने कहाँ से वर्ष ली थी और उसे अगर ताली की बहुत जरूरत होगी तो अगले दिन फिर बस स्टॉप पर या मेट्रो स्टेशन पर मेरा इंतजार करेगा । एक दिन, दो दिन, तीन दिन । जब तक मैं दोबारा उस से नहीं मिल जाऊंगा भी मेरे इंतजार करता रहेगा और मिलते ही मुझसे फिर ताली की मांग करेगा । इस बार शायद वहाँ कोई और तरीका अपनाए और मैं इतनी आसानी से उसे चकमा देकर भाग नाशक हूँ । उस समय मैं तालियों से लौटाकर समझा दूंगा । वही मुझे पता ही नहीं था कि मेरी जेब में बोले नहीं, कोई ताली छोड दी थी । चालीस है मेरा कोई मतलब नहीं है ना । मैं ये जानता हो गई है, किस डाले की डाली है और न जानना चाहता हूँ । बस तुम अब इसे लेकर मेरी छुट्टी करो या फिर यह ताली लेकर मैं पुलिस के पास जा सकता था । लेकिन पुलिस के पास जाकर कहूंगा क्या? फिर तो सारी बात पता नहीं होंगे । बूढा मुझसे कैसे मिला? फिर कैसे गाडी के नीचे आ गया? क्या बोले से इस बात पर यकीन करेगी कि मैं बूढे को बिल्कुल नहीं जानता था और वह मुझ से अनायास सी मदद के लिए कहने लगा । इस बात का क्या सबूत है कि वो दे को मैंने नहीं लगेगा । हो सकता है कि पुलिस को मामले की पूरी छानबीन करने के बाद सच्चाई का पता लग जाए । पर उसके पहले कि सुबह की सोची में ही पहला आदमी रहूंगा, फिर एक बार इस मामले में फसा नहीं कि निकलना मुश्किल बयान, सुबह से गिरफ्तारी, जमाना, दवा कील अदालत नहीं । मैं इन सब में नहीं फंसना चाहता था । मुझे फिर घबराहट होने लगी । ऍफ से घर की ओर आते आते मैंने कई बार पीछे मोडकर देखा कि कहीं कोई मेरे पीछे तो नहीं आ रहा लेकिन कोई नहीं था । एक मोटर साइकिल मेरे पास से निकल गई जब मैं सडक छोडकर अपने घर के सामने पहुंच रहा था । एक टैक्सी उसी सडक से गुजरी । बस इसके सेवा कुछ भी नहीं लेकिन इनमें कोई अनहोनी बात नहीं थी । मैं निश्चिंत हो गया की कोई मेरा पीछा नहीं कर रहा है । आज पहली बार मैं घर इतनी देर से पहुंचा था । पहली मेरा इंतजार करते करते हो गई थी । पुष्पा मेरा इंतजार कर रही थी में देर से आने की खबर नहीं देख पाया था । इसलिए उसका यह पूछना स्वाभाविक ही था कि कहाँ देर लग गई थी । पर मैं इस हालत में नहीं दाके । ब्यौरे के साथ अपने देर से आने की वजह बताता । मैं ये नहीं चाहता था कि अपनी परेशानियों का हाल सुनाकर पुष्पा को चिंता में डाल दूँ । इसलिए उसके पूछने पर बडी रुखाई से मैंने सिर्फ इतना का आज कुछ कम ज्यादा था । मैंने तुम्हें खबर करने की कोशिश की थी पर मोबाइल मिल नहीं रहा था । पुष्कर मेरी ओर अविश्वास की नजरों से देखा पर उसने कुछ कहा नहीं और खाना लगाने चली गई भी मुझसे नहीं खाया गया । किसी तरह दो फुल्के निंगल कर मैंने अपना हाथ खाने से हटा लिया तो उसने पूछा क्यों अच्छा नहीं बताया क्या? यह बात नहीं मुझे हो की नहीं लगी है । उसके अगले प्रश्न का इंतजार किए बिना मैंने उठकर हाथ मत होते हैं और अपने बिस्तर पर जाकर लेट गया हूँ । थोडी देर बाद पुष्पादि आकर अपने बिस्तर पर लेट गई हूँ । हम दोनों के बीच में ही होती है । थोडी देर तक मैं मम्मी के सुनहरे वालों से खेलता रहा । वो अपना प्लास्टिक का कुत्ता साथ लेकर हुई थी । सिराहने चाभी से चलने वाला घोडा रखा हुआ था । ये सब उठाकर मैंने नीचे रख दिया ताकि ड्राइवर बदलने में उसे तकलीफ हो । अब मेरा मन शांत था । मेरे साहब जो कुछ भी हुआ था तो चोट लग रहा था । मेरी इच्छा हुई कि पुष्पा को सारी बात बता दूँ पर वह अपना चेहरा दूसरी ओर फेर कर ली थी । मतलब ये है कि वह जानना तो चाहती थी पर सबको जाने के अधिकार के लिए लडाई करके और लडाई उसने शुरू कर दी थी । थोडी देर बाद करवट बदलकर मेरी ओर मुखातिब हुई और उसने कहा तो तो नहीं बताओगे की क्या बात हुई? क्या करूँ? मैंने आदिया डाल देने में ही खैरियत समझे । दरअसल आज मेरी आंखों के सामने एक आदमी गाडी से कट गया । इसलिए मन अजीब सा हो रहा है । गाडी से कट गया कौन? उसके स्वर में गुस्से का भाग गायब हो गया था । मैंने सब कुछ बता दिया । बड ताली और मेरा पीछा करने वाले आदमी की बातों से नहीं मालूम होने दी । काफी देर तक मैं चुप रही । मैं भी कुछ और कहने की हालत में नहीं था । थोडी देर बाद उसने मुझसे का अच्छा सुनते हो । तुमने क्यों बता दिया ये सब मुझे अजीब अजीब सा हो रहा है । तो मैंने पूछा था कुछ घबराहट हो रही है तो मेरे पास ही क्यों नहीं चले आते है तो नहीं आ जाती हूँ । आजाओ रसोई घर में का एक सारे बर्तन झनझन आउट । हमें लगा कि जैसे ऊपर से नंगे पैर कोई फर्ज पर खुदा हो । फिर दरवाजे खोलने और बंद होने की आवाज आई हूँ । ये करीब करीब रोजी रात को उधम मचाने वाली मिली थी । पर उस रात एक मिनट तक मैं कुछ समझ नहीं पाया । मेरे साथ जो कुछ हुआ था उस से अभी तक मैं बहुत भी था । फिर जब मैं ये समझ गया कि दिल्ली को दी थी तो भी मन को बराबर यही बात बेचैन करती रहेगी । कहीं वो आदमी यहाँ तक तो नहीं आ गया । पुष्पा मेरे पास ही आ गई थी । पर उसकी निकटता के बावजूद मेरा भाई काम नहीं हुआ । मुझे दो ढाई बजे के करीब नींद आई । सुबह सिर काफी हल्का था । पिछली रात की घटनाएं किसी गुजरे हुए तूफान की तरह बीत गई थी । पहले पिनान से चाय पी । अखबार की सुर्खियां देखी । बम्बई के साथ थोडी देर तक गेंद खेली । फिर नौ बजते बजते दफ्तर के लिए तैयार हो गया । रोज की तरह पुष्पा और पम्मी ने घर के बाहर आकर मुझसे विदा ली ।

PART 2 (A)

भाग दो मुझे सिर्फ एक बार रात की घटना की आवाज आई थी और मैंने यह देखने के लिए इधर उधर नजरें दौडाई की । जिस बदमाश ने मेरा पीछा किया था है या उसका कोई साथ ही कहीं आसपास खडा मेरे घर पर नहीं था तो नहीं रखे हुए हैं । पर जो लोग दिखाई थी ऐसे आस पडोस के ही लोग थे तो या परिचित नहीं दिखाई दिया । जनरल स्टोर पर भी सिर्फ एक संभ्रांत महिला सामान ले रही थी । कोई ऐसा आदमी नहीं था जिस पर शक होता हूँ । मैं तेज कदमों से बस स्टॉप की ओर चल दिया । कल की घटना से मैं अभी तक पिछले था कि आज मेट्रो से जाने का इरादा नहीं कर पा रहा था । दफ्तर जाने वालों के लिए नोएडा सेफ रहता । सात बजे से दस बजे तक पंद्रह पंद्रह मिनट में बसें दिल्ली के लिए जाती थी पर जाने वालों की लाइन जैसे टूटती नहीं । एक बार मुसाफिरों को भरकर रवाना होती हैं और दूसरे के आते आते सवारियों की एक लंबी लाइन फिर से तैयार हो जाती है । मुझे पास के लिए कुछ देर इंतजार करना पडा । राष्ट्रीय पढने के लिए मैं अखबार अपने साथ लेता हूँ और मेट्रो में जगह मिल जाती है तो पढ लेता हूँ क्यों? मैं खडा खडे मैं एक बारी पडता रहा थोडी देर बाद बस आ गई और मैं चौकी पंक्ति में काफी आगे था । मुझे बैठने की जगह मिल गई जहाँ बैठकर में अखबार पढ सकता था । गरमा गरम खबरों में मैं इतना डूब गया की काफी देर तक मुझे पता भी नहीं चला कि कब बस भर गई और कब चल पडी । जब तक अखबार की खास खास खबरें पढकर खत्म की बस आईटीओ के पास पहुंच गई थी । अच्छा मैंने महसूस किया कि कई लोगों की निगाहें एक साथ मुझे घोर रही हैं । करन समझने में कुछ समय लगा और जब समझा तो मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई । मेरे पास की सीटों पर सभी महिलाएं बैठी थीं अपनी सीट पर । मैं अकेला ही आदमी था और मेरे बिल्कुल बास । एक महिला खडी थी बसों में चलने का एक सलीका है । महिला यात्रियों के लिए लोग जगह छोड देते हैं । बसों पर उनके चढते या उतरते वक्त कंडक्टर लेडीज की हाँ लगता है और ड्राइवर एकदम से बस रोक देता है । आमतौर पर बसों में उनके साथ कोई असभ्यता नहीं होती है । कायदे से मुझे अपने पास खडी युवती को जगह देने के लिए उठ जाना चाहिए था । पर अखबार पढते हुए मेरा ध्यान उधर गया ही नहीं । अब जब ध्यान गया तो मैं सौरी कहता हुआ उठ खडा हुआ धन्यवाद! युवती ने बहुत ही मधुर कंठ से कहा और बैठ गई । जहाँ बहत गई तो मैंने उस की ओर ध्यान से देखा । कितनी सुंदर युवती मैंने कभी नहीं देखी । चम्पई रंग की साडी में सोने की तरह चमकता सिंदूर, सुगंधित होस्टल सुगर, चेहरे में बडी बडी धीर गंभीर आंखें और कुछ उमराली कम काले बाल लावन ने जैसे फूट पड रहा था । उमर यही बाईस से पच्चीस के बीच होगी । कुछ देर तक नहीं होती की ओर ही देखता रहा । फिर मैं अपने आप ही बुरी तरह मुझे क्या मैं शादी शुदा ऍम । इस तरह आप परिचित युवती की ओर देखना मुझे अधिकार नहीं । आप परिचित मुझे बात खटक सी रही थी । युवती काम अब बच्चे थे । इस बात को मन एक का एक मान नहीं रहा था । कहीं से देखा जरूर था, पर कहाँ अपने घर के सामने वाले जनरल स्टोर पर तो नहीं लेकिन मैं तो निश्चित नहीं कर पाया क्योंकि आते समय मैंने स्टोर की ओर दूर से ही देखा था और वहाँ जो महिला खडी थी उसने मैंने पीछे से देखा था, सामने से नहीं होगी । कोई नोएडा से दिल्ली आने वाले हर आदमी को तो मैं जानता नहीं । फिर मिर्ची कौन सिर खपा । इस पर साढे नौ बजे के करीब मेट्रो के पास वाले बस स्टॉप पर पहुंच गया । मेरे दफ्तर कनॉट प्लेस में है । मेट्रो से आने पर भी यहाँ से मुझे बस पकडनी पडती है । जलते चलते मुझे कल वाले आदमी की याद आई हूँ और मैंने सोचा हूँ कहीं आसपास में मेरी खोज तो नहीं कर रहा है तो मैं कहीं दिखाई नहीं दिया । हो सकता है ही है । सोच करके मैं बस से ही जाऊंगा । ऍम स्टेशन के बाहर मेरा इंतजार कर रहा हूँ । लेकिन उसके बारे में सोचकर मुझे इस वक्त कोई खास कब राहत नहीं हुई है । मैंने तय कर लिया था कि वह मिलेगा तो उसे ताली दे दूंगा । टालेंगे । मुझे जरा भी दिलचस्पी नहीं । ये देखने के लिए की ताली सुरक्षित है । मैंने जेल में डाला । पर है क्या ताली झेल में नहीं थी मैंने । दूसरी फॅमिली उसमें भी नहीं थी । भीतरी जेब में भी ताली नहीं नहीं । मुझे पसीना आने लगा लगा कि पैर जवाब दे जाएंगे । आखिर खली गई हूँ । मेरी सच बात पर भी की ताली मेरे पास नहीं है तो यहाँ की नहीं करेगा । जैसे कल उसने नहीं किया था । ताली मेरे पास थी तो मुझे मालूम नहीं था । मैंने उससे सच्ची बोला था । कल उसने मुझ पर विश्वास नहीं किया तो आज कैसे करेगा । अगर रहे पुलिस से यह कह दे कि कल प्लेटफॉर्म पर मैंने ही बोले आदमी को ढकेला था तो ऍम कि मुझे अपने ही ऊपर हसी सी आने लगी । मेरे पास जाडे के दो कपडे हैं । सर जी का एक सूट जो ससुराल से मिले कपडे से चार साल पहले से लाया था । दूसरा ट्वीट का कोर्ट ऍम वाली ब्रैंड जो पिछले साल से लगाई थी । अक्सर ट्वीट का कोर्ट और स्टेट की फॅमिली पहनता हूँ ताकि सूट दो एक साल और खिंचाए लेकिन बीच बीच में जब सर्दी कम रहती छोड भी पहन लेता हूँ । आज मैंने अपना सर्च वाला सूट पहना था इसलिए ताली ट्वीट के कोर्ट में रह गई थी जिसे कल पहन कर मैं दफ्तर गया था । फाउंटेनपेन और बढ के सेवा और कोई ऐसी चीज मेरी जेब में नहीं रहती जिसे इस्कोर्ट से उस कोर्ट में रखने की जरूरत पडे और ये काम भी पुष्पा ही करती थी । जो माल में फ्रैंड कीजिए । मैं रखता हूँ जिसे पुष्पा रोज घर में धुले हुए रोमांस से बदल देती है । ऍफ नहीं की तालिकोट में नहीं गई हूँ । मैंने पुष्पा से भी उसके बारे में नहीं बताया था और दफ्तर चलते वक्त मुझे उसका खयाल भी नहीं आया । जब आदमी बहुत ज्यादा दूसरे के सहारे रहे, लगता है तो उसे खयाल भी नहीं रहता की खोलो से क्या करना है । धाली उसी कोर्ट में रह गई थी या कहीं और तो नहीं खुल रही । मैं कुछ निश्चित ही नहीं कर पा रहा था । मैंने सोचा कि पुष्पा को फोन करके ये निश्चित घर लेना चाहिए कि ताली उसी कोर्ट में है या नहीं । पर आज सेल फोन भी बोल आया । बस के पास से एक एसटीडी बूथ से घर पर फोन किया । सेल पुष्पा हैं । उठाया बोली हेलो पुष्पा ज्यादा देखना मेरे गोल्ड की जे मैं कोई डाली तो नहीं रह गई है । खाली ऍम कोई बहुत जरूरी नहीं है । मैंने बहाना बनाया पर दफ्तर की डाली है । कल मेरी चेन नहीं रह गई थी । यहाँ मेरी जेब में नहीं । इसलिए सोचा कि इत्मिनान कर लो कि तालिब है तो सही देख कर बताती हूँ । मैंने एसटीडी बूथ का दरवाजा बंद कर लिया था ताकि कोई मेरी बात ना सुन सकते हैं । उसके शीर्ष से मैंने देखा चार पांच आठवीं फोन करने के लिए इंतजार में लाइन में खडे थे । सबसे आगे दोहरे बदन के लिए अफेयर सज्जन थे जो शायद मेरी बातचीत में देर लगने से बहुत अधीर हो रहे थे । उनका चर्बी चढा चेहरा बहुत बिगड सा लग रहा था और ये क्या, सबसे पीछे उसी लाइन में रह युवती खडी थी जिसे मैंने बस में अपनी सीट दी थी । परेशान में भी लग रही थी और उसका चेहरा बिगडा नहीं था । परेशान उसकी कमान जैसी वीरानियों में ही उलझ कर रहे गई । माथे पर परेशानी की हल्की हल्की रेखाओं में उसका चेहरा और भी प्यारा लग रहा था । मैं मन ही मन उसकी तुलना सामने खडे अधेड खूसट से करने लगा । एक ही बात अलग अलग शहरों पर क्या रंग लाता है लेकिन तभी मेरी कविता में बाधा बढ गई । पुष्पा की आवाज आई भलो तुम्हारी ताली जेब में है, पीटल की चलती डाली है ना? हाँ वही मैं अधीरता से बोला उसे सहेजकर अच्छी तरह रख देना रख दूंगी लेकिन तो परेशान क्यों? क्या तो से लेने आओगे । मैं कुछ कह नहीं सकता तो मुझे संभाल काॅफी फोन रख रहा हूँ । टेलीफोन बूथ से बाहर निकल कर मैं ऑटो की ओर लंका बाहर आते रहते । मैंने देखा क्यों में सबसे अधिक खो सैट महाशय तो आपसे छोटे गोले की तरह बूथ में दाखिल हो गए । पर दफ्तर पहुंचने की जल्दी में मेरे पास मनोरंजन का समय नहीं था, लेकिन सबसे पीछे लाइन में खडी होती है । अब वहाँ नहीं थी । अभी अभी तो यही थी । फिर तुरंत ही कहाँ चली गई? नहीं, इस पर भी ज्यादा नहीं सोचा है । मुझे दफ्तर के लिए देर हो रही थी । मैं दफ्तर में बीस मिनट देर से पहुंचा । मेरे पास वाली बीच पर बैठे । चयन दे ताजुब से मेरी ओर देखते हुए पूछा आज के बाद हो गए भाई । मैंने बसों कि जली कटी सुनाई अभी वक्त से नहीं चलती है और और ट्राफिक का इंतजाम तो बस कुछ मत पूछो । जब देखो तब ट्रैफिक जाम यार सोनू जयंत ने मजाक के लहजे में बीच में कहा बहुत पीती आवाहन आया कुछ और सोचो शराब ऍसे लग रहे हो, भाई तो हो ही जाती । कभी कभी किरम आदमी है मशीन तो नहीं है मैं । तुम चुप हो गया । मेरी और अजीब अजीब नजरों से देखने लगा । मैंने महसूस किया मुझे इस तरह नहीं ओपन पढना चाहिए । था सोचा उससे माफी मांग लूँ पर यह खयाल भी तैयार किया । मैंने अपने कंप्यूटर किया और नक्शा बनाने के लिए प्लान का गौर से निरीक्षण करने लगा । बता नहीं कब तक मैं ये करता रहा । अचानक मुझे चैन की आवाज सुनाई पडी । संजय कोई खास बात है क्या? इस बार उसकी आवाज में सहानुभूति और दोस्ती का भाव था । मैंने पूछा क्यों? ऐसा क्यों लगता है तो मैं तुम पंद्रह मिनट से प्लान की ओर टकटकी लगाकर देख रहा हूँ । मैंने सोचा शायद कोई खास परेशानी हो । घर पे तो सब ठीक ठाक है ना । मेरे कुछ कहने से पहले ही टेलीफोन की घंटी बजने लगी । अपनी जगह से उठकर चपरासी नहीं रिसीवर उठाया । फिर माउथपीस पर हथेली रखकर बोला संजय बाबू आपका टेलीफोन है क्या? कहते हो मैं उठकर टेलीफोन के पास क्या रिसीवर? काम से लगाते हुए मैं बोला हो । उधर से कोई आवाज नहीं आई । मैंने फिर कहा हूँ कोई आवाज नहीं ऍम अल ऍम जल लाकर मेरी सेवा रखने जा ही रहा था कि उधर से एक मोटी भारी आवाज आई । संजय हाँ, संजय बोल रहा हूँ । मैंने आपकी आवाज नहीं पहचानी । कहिए क्या? काम हो तो मुझे नहीं पहचान होंगे । मोटी आवाज वाले व्यक्ति नहीं कहा फिर है हस पडा हूँ हूँ ऍम मैं कुछ कहता हूँ उसने फिर से कहा मैं मान सिंह हूँ आप कुछ पहचाना? मान सिंह मेरे माथे पर बल पड गए । कल रात मेरा पीछा करने वाले गुंडे ने मुझे बताया था की गाडी से कटने वाले आदमी का नाम मानसिंह था । सिर्फ है कौन? मानसिंह क्या उसका प्रे बोल रहा था । ऊपर से अपनी आवाज कडी बनाते हुए मैंने गा मैं किसी मान सिंह को नहीं जाता आप कोई गलतफहमी हुई है । नहीं संजय मुझे कोई गलत फहमी नहीं हुई है । सुनो मान सिंह कल रात ट्रेन से कटकर मर गया । मैं उसका भाई हूँ । अपने भाई का नाम तो मैं सिर्फ याद दिलाने के लिए । मैंने कहा मुझे तुमसे बहुत जरूरी काम है कैसा काम? कुछ जरूरी बातें करनी है उससे बात करना बे कहा है । मेरे पास कोई बात नहीं करने को नहीं । अभी नहीं जानता कि तुम हो कौन? मेरा यकीन करो में सच बोल रहा हूँ और मैं जानता हूँ कि बोले को तुमने ही धक्का देकर गाडी के नीचे गिराया था । जैसे मैं तो मैं टेलीफोन कर रहा हूँ उसी तरह पुलिस को भी कर सकता हूँ । लेकिन मैं यहाँ से कोई बात नहीं कर सकता हूँ । मैंने हथियार डालती हूँ और मुझे भी पता है कि ताली तुम्हारे पास है । मैं तुमसे यहाँ बात नहीं कर सकता हूँ । मैंने कहा और टेलीफोन रख दिया । जयंत इतनी देर तक मेरी ओर ही देख रहा था और मोडते ये फिर अपने कंप्यूटर की ओर देखने लगा हूँ । मैंने अपनी सीट पर आकर काम करने के लिए पेंशन उठाई पर मेरा हाथ काम रहा था और पेंसिल पकडे तक नहीं जा रही । नहीं कभी टेलीफोन की घंटी फिर बजी । इस बार मैंने ही लगभग का रिसीवर उठाया । वही आवाज थी संजय हूँ मुझे चरका देने की कोशिश मत करो । अरे मैं जानता तक नहीं और तुम देर सिर्फ शहर की बातें किये जा रहा हूँ । मैं नहीं तुम बेसिरपैर की बात कर रहा हूँ । उसने कहा हूँ तो मुझे नहीं भय का सकते । कल जगह से मिले थे ना तो उससे एक बार बज गए । हमेशा नहीं पढ सकते मैं । मैं नहीं मनोज बनता हुआ उसकी बात सुनता रहा हूँ । मोटी आवाज में वह कहता रहा हूँ उसके बारे में एक तो बातें जान लोग गया उतना खडा नहीं दिखता नहीं है जितना कि सचमुच है हूॅ छूरा या पिस्तौल का इस्तेमाल नहीं करता हूँ । बस हाथों में लोहे की चादर का एक दस्ताना पहन लेता है और फिर खून सौ से अपने से दोगुनी आदमी का भी भेजा निकालकर घर देता है । इसलिए शराफत है काम लोवर मुझे ताली दे तो इसी में तुम्हारी भलाई है । मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ । हाँ मैं तो मैं समझा दूंगा पर इस से पहले एक बार और जान लोग तले मुझे दे दो । अगर कोई तुम्हारा कुछ वाला कर सकता है तो सिर्फ मैं अगर पहले ताली मुझे दे दो । पर हाँ मुझसे कोई चार चलने की कोशिश मत करना । मैं तुमसे मिलूंगा । कोई टालमटोल नहीं चलेगी । दम ताली चाहते हो ना । कल मुझे मालूम नहीं था कि ताली मेरे पास है । मैंने कहा जगन को भेज देना । मैं ताली दे दूंगा जाएँ जगह नहीं । मैं खुद में लूंगा तुमसे तुम्हारे घर पर मोटी आवाज में उस आदमी ने कहा और सर रिसीवर रख दिया । मैंने भी रिसीवर रख दिया । फिर अपनी कुर्सी पर निढाल होकर बैठ गया । जयंत ने कहा तो मैं कोई खास परेशानी है तो बताते क्यों नहीं हो? मैं समझ नहीं पा रहा हूँ, समझा भी नहीं सकता । बस ये जान लो की गर्दन तक परेशानी में फसा हुआ हूँ । मैंने घरेलू परेशानियों की एक छोटी कहानी गढकर सुना नहीं । जैन सारी बात गौर से सुनता रहा । मैंने कहानी खत्म करके कहा आप कुछ काम भी कर लिया जाए । आखिर कहाँ तक ये पकडा? सुन हो गए काम काम हायर वक्त काम की रेट लगाए रहने वाले ये कभी नहीं बताते हैं कि कम पलायन का भी एक अच्छा साधन है । बच्चे किसी तमाशे में चलने के लिए सिर्फ करते हैं और बडे बाबू दफ्तर में जरूरी काम का बहाना बनाकर घर से वोट लेते हैं । बीवी किसी रिश्तेदार के यहां चलने का आग्रह करती है तो साहब जरूरी काम से खिसक चाहते हैं । मैंने भी काम का नाम इसी अर्थ में लिया था जबकि सच्चाई ऐसी की काम मुझे बिलकुल नहीं हो रहा था । एक लाइन भी सी बी खींची नहीं जा रही थी । कुछ स्टाकर अपने को सहन करने के लिए मैंने एक गिलास पानी पिया । फिर कुर्सी को जरा पर ही किसका अपनी सीट के पीछे वाली खिडकी से बाहर देखने लगा । कनॉट प्लेस के बीच में पार्क है । उसके किनारे चारों और घास के मैदान है । दक्षिण की ओर जीवन बीमा के विशाल बिल्डिंग धूप में चमक रही थी । चारों ओर आदमी ही आदमी और बसों का कभी खत्म होने वाला सिलसिला आप घंटों उधर देखते रहे हैं और कभी जीना ओ में हर्षण नहीं चाह रहे । नहीं बातें मेरी निगाह दफ्तर के सामने वाले स्टॉप पर गई । स्टॉप पर काफी मनोरंजक बातें होती हैं । कभी कोई लडकी घंटों किसी के इंतजार करती खडी रहती है । बस के बाद बस निकलती है पर जैसे उसकी बस आती ही नहीं । कभी कोई युवा प्रेमी वहाँ खडा आतुरता से अपनी प्रेमिका की प्रतीक्षा करता है । फिर किसी युवती को देखते ही उसके चेहरे पर खुशी दौड जाती है । वे शारी में एक दूसरे से बातें करते हैं, फिर एक साथ किसी ओर चले जाते हैं । एक बार मैंने फिर काट को बस पर चढते सेठ जी की जेब साफ करते देखा । पर मैं परामर्श की तरह तटस्थ दर्शक बनकर ये सब देखता रहा । यहाँ हर छड बनने वाली कहानियों में न कोई नायक होता है । खलनायक किसी का पक्ष नहीं लेता है । आज भी मैं अपनी आप इस एकमात्र मनोरंजन में हो जाना चाहता था । पर कुछ देर के लिए सहायता मैं चौंक पडा । आज सुबह वाली खूबसूरत हुई थी । यहाँ बस स्टॉप पर खडी थी । आखिर क्यों खडी थी? क्या मैं यहाँ रोज दोहराई जाने वाले किसी प्रेमकहानी की ना आएगा थी मेरे सिर बनाने लगा । जेम्स बॉन्ड वाली एक किताब में मैंने पढा था । अगर कोई घटना एक बार घटे तो घटना होती है । दूसरी बार घटने वाली घटना संयोग होती है, लेकिन तीसरी बहन वही घटना फिर घंटे तो है । दुश्मन की कार्यवाही होती है ।

PART 2 (B)

एक बार यह युवती मुझे बस में मिली थी दूसरी बार टेलीफोन बूथ पर जहाँ से मैं एक का एक गायब हो गई थी और अब तीसरी बाहर है । फिर मेरे दफ्तर के सामने वाले बस स्टॉप पर खडी थी । इसके साथ ही मेरा यह शक्ति पक्का हो गया कि मेरे घर के सामने वाले जनरल स्टोर पर भी यही युवती खडी थी, लेकिन मेरा मुक्त चिंतन ज्यादा देर तक नहीं चल सका । चपरासी ने आकर खबर दी कि फॉर्म के छोटे पार्टनर गांगुली बाबू ने मुझे बुलाया है । मालिक या अवसर अपने अधीनस्थ कर्मचारी को शकल देखने के लिए अपने पांच नहीं बोला था । या तो उसे आप से कोई काम होता है या फिर आप की किसी गलती पर डाटना होता है । हमारे दफ्तर में डाटने का काम सीनियर पार्टनर सरकार बाबू ने अपने ऊपर ही ले रखा था । हूँ छोटे पार्टनर गांगुली बाबू बेठी डांट पिलाते हैं पर ज्यादा कठोर हूँ जी वही में उनके कैबिन में उनकी मैच के सामने आकर खडा हुआ । उन्होंने नहीं आया । शराफत के साथ मुझसे बैठने चलेगा । फिर जब मैं बैठ गया तो बडी संजीदगी से पूछा ऍम आप की तबियत खराब है? नहीं सर, हम को तो ऐसा ही मासिक लगता है । आज आप बीस मिनट लेट आया करिए । मैं देखिए कैसा खराब कर दिया ऍम मिस्टर संजय भैया आदमी की तबियत खराब हो जाती है । कभी कभी बीमारी नहीं करता हूँ । लेकिन आपको जानता है हमारा सरकार बाबू कितना सकते हैं । अगर हम इस बात का नोटिस नहीं लेगा तो हमको बोलेगा फिर हम क्या जवाब देगा? हम सजेस्ट करता है आवाज छुट्टी ले लो । छुट्टी आई आई छोटी क्योंकि सर जैसा आप कहें नाॅन जाए । हमको गलत मत समझिएगा । नहीं सर नहीं ऐसी कोई बात नहीं । मैंने कहा ऍफ मुझको गलत मत समझना । मिश्रा संजय नहीं सर, मैंने ऊपर से कहा पर भीतर से मैं खींच उठा । अपना कलेजा निकालकर रख दिया । मेरे सामने और बीस मिनट देर से आने की सजा भी देती हूँ । मुफ्त में मेरी एक दिन की छुट्टी मारी गई, लेकिन डॉक्टरों का काम इसी तरह चलता है । मैंने सही बात बताई होती तो शायद ये ना होता । आखिरी गांगुली इतना बुरा तो नहीं कि मैंने अपनी वास्तविक परेशानी बताई होती तो उसे मुझ से सहानुभूति न होती पर वो अभी सही बात बताने की स्थिति में था । कहाँ छुट्टी की आरसी देकर मैं बाहर आया । इस घर जाने का मेरा इरादा नहीं था । मैं दफ्तर से इस तरह कभी दिन के समय घर नहीं आता था । मैंने सोचा कहीं खाना खाऊंगा, फिर कोई मैंने शो देखूंगा और शाम को ही लौटूंगा । इस तरह और पास पडोस के किसी व्यक्ति को जल्दी घर आने का ब्यौरा देने से बचाऊंगा । डॉक्टर से बाहर निकल कर मैंने देखा मैं ये वित्तीय अभी तक बस स्टॉप पर खडी थी । मुझे आश्चर्य हुआ उधर से जबरन ध्यान हटाकर में रास्ते पर मुडा ही था कि पीछे से उसने पुकारा । संजय बाबू मुझे उसका स्वर बहुत मधुर लगा । एक छड के लिए मेरे दिमाग में यह बात आई कि अगर ये दुश्मन की कार्यवाही भी है तो क्या हुआ । ऐसे खूबसूरत दोस्त ना सही, दुश्मनी सही । एकदम बात आकर उसने कहा संजय बाबू आपसे कुछ काम है लेकिन आपका परिचय और आपको मेरा नाम कैसे मालूम होगा? अभिनेता सबसे पूछा फिल्म ना माधुरी है अभी आप इतना ही जान लीजिए पर आपको मेरा नाम कैसे मालूम हुआ? मैंने आपका पीछा किया और जब आप दफ्तर में दाखिल हुए तो मैंने दरवान से पूछ लिया । मैं तो बस में था । ऍसे उस बस का पीछा किया था लेकिन संजय बाबू ये सब बाद में पूछ लेगा । अभी तो अभी तो क्या चलिए ना साथ साथ कुछ देर तक पहले पहले हाँ । पहले टहलते हुए मैं आपको सारी बातें बताउंगी । माधुरी ने कहा बिस से पहले की आप मुझे कुछ बताया नहीं । आपको बता दूँ । मैंने कहा आप ताली के लिए आए हैं ना? उसी मनोज ताली के लिए हाँ । उसी के लिए माधुरी ने कहा तो उसके साथ चल पडा । रीगल से हम पैदल ही संसद भवन की ओर होते हुए राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे । फिर सडक छोडकर इंडिया गेट की ओर बढ चले । यहाँ शाम को या छुट्टियों के दिन सैलानियों का जमघट होता है । लेकिन दिन के वक्त दिल्ली कारोबार में व्यस्त रहता है । इसलिए यह जगह शाम के मुकाबले निर्जन रहती है । हम उधर से ही इंडिया गेट की ओर जा रहे थे कि मैंने थोडा भय महसूस किया । मेरे दिमाग में बात आई । उठाए से चलने की सलाह माधुरी की है तो क्या बातों में बुलाकर रहे । मुझे सुनहरी बाकी सुननी सडक पर ले जा रही थी । शायद उसका कोई आदमी कहीं हमारा इंतजार कर रहा होगा । तो क्या यह अत्यंत सुन्दर युवती अपराधियों के की रोकी है? मैं उसकी ओर गौर से देखने लगा । उस की मुद्रा में ऐसी कोई बात नहीं थी । उसके चेहरे और आंखों में कहीं कोई गंदा भाव नहीं था । विचार और पहले एक साथ नहीं चलते हूँ । मैं चलते चलते पीछे रह गया । नहीं रुक गई । जब मैं उसके पास पहुंचा तो उसने मेरा हाथ थाम लिया हूँ । एक रोमांचक अनुभूति से सिर के पास तक से हर उठा । मैं भूल गया कि क्या सोच रहा था । बस उसके स्पर्श का सुखद अनुभव ही मुझे याद रहा हूँ । फिर मैं सोचने लगा की भला उसके लिए मैं क्या महत्व रखता हूँ । अकारो से मुझ से ताली ना लेनी होती तो क्या कहीं रास्ते में मिलने पर वे मेरी और देखती भी । आज उसे मुझ से काम है तो इस तरह में रहा पकड लिया । इससे मैं उसका पुराना परिचित हूँ । उसने मेरी उंगलियां अपनी ओरियो में फसा ली और हम उसी तरह कुछ दूर तक साथ साथ चलते रहे सर । उसने कहा संजय बाबू, अब कुछ बोलते क्यों नहीं? मैं क्या बोलूँ? मैंने कहा मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ । क्या मैं आप को पसंद नहीं है? मुझे उम्मीद नहीं थी कि वह मुझसे खोले तौर पर बात करेगी, पर मैं चुकी रही । उस ने सही कहा, आप शायद मन ही मन अपने आपसे संघर्ष कर रहे हैं । अब सोच रहे हैं कि ये क्या बचपना है । अब शायद अपनी पत्नी और बेटी के बारे में सोच रहे हैं और इस तरह मेरे साथ चलने में शर्म महसूस कर रहे हैं । मेरी पत्नी पुष्पा मत से कभी कभी कहती है कि और भी बहुत सी अच्छाइयों के साथ । मेरे अंदर एक अच्छा ये भी है कि मैं किसी के साथ सिर्फ इसलिए भद्रता से पेश नहीं आता कि वह महिला है । यानी मैं भद्रता के साथ तभी पेश आता हूँ जब भी भाजपा के साथ पेश आएं । भरना में इस बात का ख्याल नहीं करता हूँ कि वह महिला है या पुरुष आदमी की बात है । मुझे बहुत ही बेटों की लग रही थी । मैंने रुखाई से कहा नहीं है । मतलब की बात कीजिए । उसने मेरी और अजीब नजरों से देखा । फिर हसने लगी, हस्ते हस्ते हैं । उसने कहा क्या फिर भी मतलब की बातें कर रही हूँ? मैंने कहा आपका मकसद है मुझसे ताली लेना । लेकिन अब बातें कर रही हैं । फिल्मी हीरोइन जैसी देखिए मैं एक से ऐसे ही बातें नहीं करती । संजय बाबू उसने कहा सिर्फ आपसे कर रही हूँ, शायद इसलिए कि आप मुझे पसंद आ रहे हैं । आप शरीफ युवा है, लेकिन ताली मुझसे कई ज्यादा आकर्षक है । फॅमिली फॅमिली का नाम क्यों ले रहे हैं? क्यों वो इसीलिए तो आॅल क्या? आप ताली में आपकी दिलचस्पी नहीं रही । मैंने चलाकर कहा । बातचीत करते करते हम कुछ और दूरी लोधी गार्डन टक्निकल आए थे । हम दोनों ही चुप थे । लोधी गार्डन की हरियाली जनवरी के चटक धूप में खेली हुई लग रही थी । मैंने महसूस किया कि मैं एक अजीब से गौरख धंधे में भ्रष्टाचार रहा हूँ । मैंने कहा लेकिन आखिर की ऐसी ताली है । किस चीज की ताली रहे किसी खजाने की ऐसी तालियाँ का जिक्र तो रहस्य की पुरानी कहानियों में ही मिलता है । वो ताली पस ताली उसने वो भी हुई आवाज नहीं हूँ कोई और बात की थी ना अरे कैसे करूँ? ऍम कहा कल जब तक वो बोले ने मेरी जेब में है, ताली नहीं रख दी । तब तक मैं सुखी आदमी ता हूँ । हँसी हाँ, बिल्कुल सुखी । मेरी अपनी ओर जाने और परेशानियाँ थी, पर मैं सुखी था । लेकिन इस मनोज ताली से मुझे क्या मिला? बस भाई, परेशानियाँ और उलझनें आठ में भी तो इस ताली की ही बदौलत मिली ना आपसे? हाँ, अभी अभी तो वही चाहती हैं जो और चाहते हैं यानी डाली लाइफ में चौक गई तो तुरंत ही अपने चेहरे पर आए । आश्चर्य का भाव दवाकर । अपनी आवाज को सामान्य बनाने की कोशिश करते हुए उस ने कहा आत्मिक कौन और लोग? मेरी तो कल रात वाला आदमी जिसने स्टेशन पर मेरा पीछा किया, उसका नाम शायद जगह है । हाँ वो ही है, लेकिन क्या किसी और ने आपसे तली मांगी? अब है आपने आश्चर्य का भाव छिपाना सकी । मान सिंह का भाई कौन है? संजय बात हो, हम तो पूरे जासूस निकाले । उसने अपने स्वर्ग को फिर से हल्का बनाते हुए कुछ मजाक के लहजे में कहा आप तो बहुत कर जानते हैं । आपका ख्याल गलत है । मैंने कोई जासूसी नहीं । मैंने कहा मैं फोन को जानता हूँ । जिन्होंने मुझे ताली मांगी, क्या उसमें भी आपसे ताली मांगी? हाँ फॅमिली आपको मैं मुझे नहीं पता । वह मुझे मिला नहीं । मैंने कहा उसने मुझे डेली फोन किया था । माधुरी जैसे भय से पीली पड गई । उसने पूछा तो क्या आपने उसे ताली देती हूँ? नहीं, अभी मुझे मिला नहीं है । उस ने राहत की सांस ली । हम बाहर में ही छायादार जगह में जाकर बैठ गए । मैंने पूछा लेकिन आपने मेरा पीछा कैसे? क्या आपको मेरे घर का पता कैसे लगा? इतिहास पडी फिर बोली, ऍम बोले चाॅस दौडता है आपकी वर्ष जैसे ही आगे बढी उस ने फॅमिली । फिर उसी टैक्सी से उसने आपकी बस का पीछा किया और आपके घर का पता चल गया । सवेरे जनरल स्टोर में आती थी । अच्छा मान सिंह कौन था ये मैंने बता सकती है । अभी और उसका भाई ये भी नहीं बता सकती हैं । उसने कहा, अब दिन के बारह बज रहे थे । मैंने सोचा था कहीं लंच करूंगा । फिर किसी सिनेमा हॉल में बैठकर अपना गांव गलत करूंगा । पर ये कहाँ फसा? गाली देने का निश्चय मैंने कर ही लिया है । थाली देने भर की देर हैं और बस खेल खत्म । आखिर उसके लिए क्यों ये लोग इतने गोरखधंदे रह रहे हैं? फॅमिली ने कहा लेकिन संजय हूँ अगर बुरा ना माने तो बात करूँ क्या हूँ आप ही की तरह लिया मान सिंह के भाई को मार दीजिएगा क्यूँ नहीं कह सकती हूँ आपसे आपसे ताली मत दीजिएगा । अब तो आप भी बार बढ ताली का नाम ले रही हैं । ये एक आए क्या हो गया आपको? संजय हुआ आप मुझे गलत मत समझिए । मैं ये ताली खुद अपने लिए नहीं चाहती हूँ । ये ठीक है कि मैं आई ताली के लिए ही हूँ पड ताली में अपने लिए नहीं चाहती है । लेकिन अगर आपने डाली मान सिंह के भाई को दे दी तो मैं मुझे जिंदा नहीं छोडेगा की मेरी जिंदगी और मौत का सवाल है । उसके यहाँ बहुत ही नहीं लग रही थी । थोडी देर पहले के उस व्यक्तित्व की सारी कोमलता गायब हो गई थी । बेचारी हुई लग रही थी कौन को जिंदा नहीं छोडेगा । वहीं जिसने मुझे ताली के लिए भेजा है क्योंकि आप जान लेंगे पर अभी नहीं । एक ऐसा गोरा ठंडा है । मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है । मैंने चलाकर कहा आखिर साफ साफ सबकुछ क्यों नहीं कहती? उसने कहा आप मेरा विश्वास कीजिए । मैं आपसे कुछ भी छिपाना नहीं चाहती, पर अभी आपसे कह भी नहीं सकती । मैं चाहता था कि उस पर विश्वास कर लो क्योंकि उसकी सुंदरता देखकर मन यह मानने के लिए तैयार नहीं होता था कि उसकी बातों में कोई फरेब होगा । खूबसूरती को फरेब के साथ मिलाकर कौन गंदा करना चाहेगा, पर उसके सच्चाई का भी क्या भरोसा । मैं और अधिक उलझन में पढना नहीं चाहता था । मुझे अफसोस हुआ कि ताली उस वक्त मेरे पास नहीं थी, नहीं तो ताली उसी दम उसे सौंप देता और सारे झंझटों से छुट्टी पा लेता । पर अब मान सिंह का भाई भी बीच में आदम का और माधुरी ने कहा था कि ताली उसे ना तो मैं सोचने लगा कि अगर उसे ताली नहीं देता तो फिर क्या होगा? मान सिंह का भाई मुझसे किस तरह पेश आएगा और उसे दे देता हूँ तो माधुरी किस तरह पेश आएगी । मैं ऐसा महसूस करने लगा जैसे मैं बहुत बुरी तरह चक्कर में फस गया हूँ । एक तरफ खाई थी और दूसरी तरफ हुआ । बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था । माधुरी ने मेरी चिंता को लक्ष्यकर कहा । आप किसी सोच में बढ गए कि आपको मेरी बातों पर यकीन नहीं आ रहा है । मैं सच कह रही हूँ । मैं खाली अपने लिए नहीं चाहती । फिर आप किसके लिए चाहती हैं? मैं कहीं करीब ठीक पडा, आपको मालूम हो जाएगा लेकिन क्या फिर अच्छा सकते हैं । कहाँ बहुत उन नहीं हमें टैक्सी ले लेंगे और थोडी देर में अपने ठिकाने पर पहुंच जाएंगे । मैं उठ खडा हुआ किसी भी कीमत पर मैं उस उलझन से छुटकारा चाहता था लेकिन दो चार कदम चलने के बाद ही सहसा मैं थोडा क्या वहाँ कोई गडबड तो नहीं होगी । मेरे साथ चलने को तो मैं चल रहा हूँ पर कोई खतरा ना हूँ । माधुरी कम से मेरे पास आ गई । फिर अपना पर्स खोलकर उसने कहा । इसमें देख रहे संजय बाबू मेरी आँखें फटी रह गईं । पास में एक पिस्तौल पडी थी । उसने कहा आप ये ले लें, अगर कोई खतरा हो तो उस समय काम आ जाएगी । ऍम हाथ में लेकर मैं कुछ देर ढाकों से उल्टा पलट आ रहा है तो उसे पर्स में वापस रख दिया । मुझे उसका यकीन हो गया था ।

PART 3 (A)

भारतीय ऍम ने मुझसे कहा हूँ मैं आपको अपने बारे में सब कुछ साफ साफ बता दूँ । मैं शादीशुदा हूँ । मैं आपको अपने पति के पास ले चल रही हूँ । मैं उसकी ओर आॅक्टा रहा हूँ । आप इस तरह क्यों देख रहे हैं इसमें जब की बात क्या है हम तौर से लोग हमारी उम्र तक आते आते शादियों का डालते हैं और शादियों की बहुत सी वजहें होती हैं । फिर हमारे यहाँ तो शादियाँ करती चाहती हैं । मैं कुछ नहीं बोला । वो बोलती रही हूँ लेकिन मेरी शादी किसी और ने नहीं कि मैंने खुद ही की । ये शादी मैंने इसलिए नहीं कि कि मैं उनसे यानी अपने पति से बिहार करती थी । दरअसल उन्होंने मेरे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया । जब मैं बेसहारा थी तो उन्होंने मुझे सहारा दिया लेकिन औरत यही नहीं चाहती कि वह किसी आदमी के साथ औरत बनकर रहना और जीना चाहती है । मैं सोचती हूँ बहुत बनकर किसी को ली के साथ ही रहना अच्छा था । लेकिन आप एक वादा करें उससे ये ना पूछे कि मैंने ऐसे आदमी से शादी क्योंकि आप समझ सकेंगे ज्यादा करें । लेकिन आप मुझसे ये सारी बातें क्यों कह रहे हैं? मैंने कहा एक डेढ घंटे की जान पहचान में आपने अपने बारे में मुझे इतनी सारी बातें बता दी । खुद नहीं समझ पा रही । शायद में ये सारी बातें किसी से कहकर अपने मन का बोझ हल्का करना चाहती थी । ये शायद आपका बहुत विश्वास किया जा सकता है उसने नहीं । मैं कहा आपके पति कौन हैं? थोडी देर में आपको मालूम हो जाएगा । उसने कहा नहीं, बडी विदेशी कंपनी के हिंदुस्तानी चीफ हैं । उनका नाम है रोहित चंदानी । मैं कुछ समझ नहीं सका । उसके पति कौन थे? क्या नाम था? उन्होंने कहा, इन बातों का मेरे लिए कोई महत्व नहीं था । ये पूछने की कोई तुम भी नहीं थी । यही पूछ लिया था । मैं जो क्या बैठा रहा अब नहीं । इस मामले में गर्दन तक पहुंच चुका था । मेरी सारी सतर्कता बुद्धि विवेक जैसे हवा में उड गए थे । मैंने चक्कर से निकलने की सारी कोशिशें छोड दी । मन बार बार यही कह रहा था कि अब मामले की तह तक पहुंच करेंगे । उससे निकला जा सकता है और किसी भी तरह नहीं फॅस । हम डिफेंस कॉलोनी और अशोका होटल से होते हुए चाणक्यपुरी के इलाके में पहुंचे । इस इलाके में बढे लिखे उच्च वर्गीय लोग रहते थे । आगे नहर पार्क है । यहाँ कर प्राकृतिक जगह में होने का एहसास होता है । आदमियों से भरे कनॉट प्लेस में ऐसी शांत मनोरम जगह की कल्पना भी नहीं की जा सकती । इसके इर्दगिर्द दूतावास है । उनके बीच से खूबसूरत सडकें निकली हुई हैं । ऐसा लगता है जैसे ये सडकें बागों के बीच से निकली हुई हैं । हम भाग से भी आगे निकल आएगा । निरजन जगह में बनी बंगले के सामने माधुरी ने टैक्सी रुकवा दी । टैक्सी का किराया है दो सौ अस्सी रुपया । ऐसा माधुरी ने तीन सौ रुपए टैक्सी ड्राइवर की वह बढा दी है और बाकी रुपये लेने का इंतजार किए बिना बंगले के फाटा केवल बढ गई है । टैक्सी ड्राइवर सलाहम करके चला गया । फाटक पर तैनात एक वर्दीधारी दरवान ने उठकर फाटा खोला । यहाँ माधुरी शहजादियों की तरह पेश आ रही थी । दरबान ने उसे सलाम किया और उसने उसकी ओर देखा तक नहीं । एक बडे लॉन के किनारे ही आ रहे हैं । बने रास्ते से होते हुए हैं । हम मुख्य भवन के सामने पहुंचे । दो मंजिला काफी बडा बंगला थाई पोर्टिको में दो कोई चमचमाती हुई बीएमडब्लू कार्य खडी थी । बाहरी बरामदे में गद्देदार सोफे करीने से लगे थे । लेकिन ये बंगला जितना बढा था उसके मुकाबले यहाँ जीवन का चेन कम था । यहाँ भी माधुरी के दरवाजा खोलने से पहले ही न जाने कहां से प्रकट होकर एक आदमी ने दरवाजा खोला और माधुरी का सलाह बजाया । माधुरी ने बिस आदमी की ओर भी अपने नजरें नहीं उठाऊँ शहजादियों जैसे उसके इस व्यवहार का मेरे ऊपर रोक बडे बिना रह रहा है । अभी थोडी देर पहले जब मेरे साथ टहल रही थी मैंने नहीं समझाता की उसकी और मेरी दुनिया में इतना अंतर है । हम एक बडे हॉल में दाखिल हुए ऑल के सभी दरवाजों और खिडकियों पर पढ देखे थे हुए थे । पूरे हॉल में एक ही ट्यूबलाइट चल रही थी है पूरे हॉल के लिए काफी नहीं थी इसलिए वहाँ खान मेरा सा फैला हुआ था और शायद बाहर से आने के कारण मुझे तुरंत कुछ साफ दिखाई नहीं दिया । एक आदमी की आवाज सुनाई थी अलाॅटी तुम तो अभी वो उठा था । काम नहीं नहीं देखा उसे । इतनी देर में मेरी आंखें उस हॉल कि मध्यम रोशनी के लिए अब व्यस्त हो गई थी । ऑल के दूसरे सिरे पर एक बडी डाइनिंग गेट के पास मैं एक आराम कुर्सी पर बैठा था । उसके सामने छोटी सी थी । भाई पर एक प्लेट में कुछ खाने का सामान एक बोतल हमारे खिलाफ रखा था । ये आदमी कुर्सी से उठकर कुछ कदम आगे बढाया तो काफी लंबा, चौडा और मोटा आज भी था और उसकी जाल में फुर्ती और चलती थी । अभी कुर्सी पर बैठा वह शराबी पी रहा था पर ना तो उसके कदमों में लडखडा हाथ और ना आवाज में । हिचकौले जब है हमारे यहाँ आ गया तो माधुरी नहीं कहा यह रहे मेरे ऍन धानी ऍम मिस्टर संजय तो बहुत अच्छे, आपका स्वागत ऍम उसने हाथ मेरी ओर बढाया । उससे हाथ मिलाते हुए मैंने महसूस किया उसकी पकड मजबूत और कडी थी । उसने मुझे एक दूसरी कुर्सी पर बैठने का इशारा किया और वह भी कुर्सी पर बैठ गया । उसके बाद उसने पूछा, मिस्टर संजय अब कुछ देंगे । मैं पीता बिता नहीं हूँ । मैं पीता वही हो जहाँ पीना जरूरी हो जाए और इस वक्त मैंने महसूस किया कि एक हाथ पैर लेने से शायद मेरी बधावा सी दूर हो जाए और मैंने हामी भरते हैं जैसे खेल उठा ऍम है । अगर आप इंकार कर देते तो मैं मायूस हो जाता है और अगर हमारी बातचीत मायूसी के शायद शुरू होती तो वह मनोज शुरुआत होती है । मुझे आपने माल यूज नहीं किया । यह एक अच्छी शुरुआत है फिर उसने तीन छोटे गिलासों में थोडी थोडी व्हिस्की उडेली और एक ग्लास अपने हाथ में लेकर सिर्फ तक उठाते हुए कहा तो ये रहा की सेहत का जाम मुझे उसका दोस्ताना अंदाज बना । ऐसा लग रहा था इसलिए मैंने जवाब में गिलास नहीं टकराया । जो जहाँ वोट कर होंठों से लगा लिया हूँ, माधुरी नहीं भी यहीं किया । पीने पिलाने का दौर करीब आधा घंटा का चलता रहा हूँ मैंने सिर्फ दो लिए मेरी सीमा यही है । इसके बाद सवान और पैर लडखडाने लगते हैं और मैं कम से कम यहाँ इस अंजान जगह में ऐसा नहीं चाहता था । लेकिन चांदनी तो जैसे दीपा थी जो अपने अंदर शराब उडेले जा रहा था । बहादुरी उसका साथ तो नहीं दे रही थी पर वह भी लगातार पी रही थी जब मुझे अच्छा नहीं लगा । लेकिन इतना पीने के बाद भी जैसे उस पर कोई असर ही नहीं हुआ था । तभी ट्विटर ने आकर खबर दी पाना तुम्हारे साहब लगा । दु चंदानी ने मेरी ओर देखा । मिस्टर संजय क्या राय है आपकी, लेकिन आपको मुझ से कुछ बात करनी है । मैंने कहा तो बातचीत थोडी देर तक इंतजार कर सकती है ना । मैं सुकरात की इस बात का कायल हूँ कि सच्चाई तभी निकलती है जब पेट भरा हो । भूके पेट नहीं और राव की अभी तो कहा गया है भूके पेट भजन नहीं होता । फिर मेरे से उसने कहा तो जाओ और तीन जगह खाना लगाओ । मेरा उसी हॉल वाली डाइनिंग टेबल पर खाना लगा गया । दंदौली मुर्गा रिश् कटलेट, बहुत ही उम्दा मुगलई पराठे, नफीश चावल का पुलाव । मैं बहुत धोखा था । उम्दा खाना देखकर भूख और भी खुल गई । मैंने जमकर खाया । कल आज को भी ठीक से खाना नहीं खाया था । मेरे दिमाग के कोने में ताली एक कोठी सी बन करा भी मौजूद थी । चंदानी आगे क्या कहेगा इसका भी एक कुतूहल दिमाग में था । पर इस वक्त भूख और भोजन के बीच मैंने उसे भारत नहीं होने दिया । खाना खाकर हम फिर पहले की तरह कुर्सियों पर बैठकर चंदानी ने मेरी और बढियां अमरीकन सिगरेट का पैकेट बढाया । फिर एक सिगरेट खुद भी लेकर सुलगाई । कुछ देर ताक कुछ देर तक दो तीन लम्बे लम्बे कस लेने के बाद उसने कहा हाँ, मिस्टर संजय अब हम काम की बातें कर सकते हैं । मैं भी अपनी कुर्सी से उठ खडी हुई हैं । आप जारी है । मैंने कहा ने कुछ काम है । चंदानी बोला फिर अपने आप ही हो होकर हस पडा हम में से किसी ने हसने का उसका साथ नहीं दिया । थोडी देर पहले माधुरी ने उसके बारे में जो भावनाएं व्यक्त की थी मुझे वो सही मालूम हुई । मंत्री ने कहा फॅमिली हूँ फिर मिल होंगे आप से डेढ लाख विस्की अब अपना हल्का सा असर दिखा रही थी । उमदा खाने से भी तबियत थोडी अलसा रही थी । इसलिए जब माधुरी बाहर जाने लगी तो मुझे लगा मानो वह कमरे से बाहर तहर गई हूँ । चन्दानी मेरी ओर ही देख रहा था । उसके होट मुस्कान में पहले थे और आखिरी नहीं । आंखों में हिंसा पशु जैसी चमक थी । उसने कहा हूँ निश्चय संजय मैं देखता हूँ कि आप मेरी पत्नी के प्रशंसक हैं । मैं भी उठा गया । इस बात की ओर कोई ध्यान नहीं देते हुए चंदानी ने कहा कोई ताज्जुब नहीं सभी उसकी प्रशंसा करते हैं और मुझे ये बुरा नहीं लगता लगता भी नहीं चाहिए । अगर मेरे पास नया चीजें हूँ और लोग उनकी प्रशंसा करें तो मुझे फख्र ही होना चाहिए । हाँ और उस हालत में तो और भी जब चीज कई हाथों से गुजरकर मेरे पास पहुंची हूँ क्या नहीं उसका भी एक इतिहास हो । आपका यहाँ से गुजर चुकी हूँ इतिहासों मैं कुछ समझा नहीं । मैंने कहा अभी तक मेरे सामने एक के बाद दूसरी जो पहेलियां बनती गयी नहीं वैसे खोलने लगी । क्या अभी तक माधुरी ने आपसे प्यार की बातें नहीं? मेरी बात का जवाब देने के बदले चंदानी ने कहा क्या है की बातें आखिर आप का मतलब क्या है? कुछ खास नहीं । चन्दानी ने कहा आपको सिर्फ ये बताना चाहता हूँ कि कुछ लोगों को जैसे टिकट जमा करने का शौक होता है, उसी तरह माधुरी को अपने इर्द गिर्द प्रेमी जमा करने का शौक है । अखिल मंदिर या बेटी को भी से उनमें से मैं कुछ के साथ शादी कर लेती है है । उसका चौथा बनती हूँ । चौथा जहाँ मुझे अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ । मैंने बहुत ही अजीबो गरीब बातें सुनी । मार पडी नहीं लेकिन यहाँ तक की सबसे अजीब और अद्भुत बात थी । मेरा दम जैसे घुटने लगा तबियत हुई कि वहाँ से भाग खडा हूँ । लेकिन हॉल के सभी दरवाजे बंद है और मुझे मालूम था कि बाहर निकलने वाले दरवाजे के पीछे जरूर है । दरबान खडा होगा जिसमें माधुरी के लिए दरवाजा खोला था । मौका पडने पर खुलकार भी हो सकता था और ऊपरी भद्रा दावा बातचीत के कुछ मजाकिया लहजे के बावजूद चन्दानी काइयां और निर्णय था । ये बाद मुझसे भी नहीं नहीं लेकिन इसमें कोई ताज्जुब की बात नहीं । मिस्टर संजय उसने कहा यह शादी नहीं सुविधा का एक समझौता है । मैं उसे आराम और शांति जिंदगी मुहैया कराता हूँ और बदले जब मैं जरूरत समझता हूँ अपना जिसमें सकती है और कभी कभी अपनी मेहनत भी । यानि मैं उसे अपने दूसरे कानों में भी इस्तेमाल करता हूँ । जैसी हाथ आपको लाने के लिए मैं पूरी तरह हो रहा था । यह मुझसे क्यों इस तरह की बातें कर रहा था, अपना राजदार क्यों बना रहा था? मैंने तो कुछ पूछा नहीं, जनता नहीं । जैसे ऊंची स्थिति के लोगों को अक्सर कोई दोस्त नहीं होते हैं और जो कुछ भी होते हैं उसका उन्हें गर्व होता है । इसलिए जो भी उन्हें मिलते हैं उन से अपना जीवन दर्शन बताया बिना नहीं झुकते और यहाँ मैंने महसूस किया कि यही बातें नहीं थी । उसे मुझसे ताली लेनी थी और ताली उसे बिना जोर जबरदस्ती के मिल जाए तो सबसे अच्छा चाय । इसीलिए मैं इतनी भूमिकाएं बांध रहा था लेकिन डालेगी । वह चर्चा भी नहीं कर रहा था फिर करता रहा । मेरे लिए पति पत्नी की द किया तो उसी तालुका का कोई मतलब नहीं । मैं उन्हें कोई अहमियत नहीं देता भी मेरे लिए दूसरों की बात की अहमियत है । जैसे रूपया क्या है तो ताकत है । तब हम दुनिया के ऐशोआराम है । जहाँ तक माधुरी का सवाल है, उसे भी यही चीजें पसंद हैं । इनके लिए तो मेरे ऊपर बुला ऐसा रहना पडता है । इसीलिए मैं मुझसे तालुका तोड भी नहीं सकती । उसमें अच्छा सौदा किया है और मैं उसकी जिंदगी में कोई दखल नहीं देता है । हम हम मतलब की बातें करें । मैंने राहत की सांस ली । कम से कम डाली की बात की कुछ दुख थी । चन्दानी ने पूछा आपके पास डाली है है यहाँ इस वक्त आपके पास है नहीं । चन्दानी के चेहरे पर फिर एक कुटिल मुस्कान खेल गई । उसने कहा मिस्टर संजय, आप काफी चतुर आदमी हैं और चतुर लोगों की मैं बात करता हूँ । अब मैं ताली के लिए ना तो आपकी जान ले सकता हूँ वरना अपनी शर्तें मानने के लिए आपको मजबूर कर सकता हूँ । फिर भी आप की बात की सच्चाई पर रखने के लिए आपकी तलाशी लेनी पडेगी । हालांकि इस बात के लिए तैयार होंगे अडतालीस सचमुच अपने साथ नहीं ले आए होंगे । फिर भी कोई चांस नहीं लेना चाहता हूँ लेकिन यह मेरी भेजती है । मैंने कहा मिस्टर संजय । उसने कडी आवाज में कहा आप मेरे घर मैं यहाँ वही होगा जो मैं चाहूंगा लेकिन मेरे पास ताली सचमुच में नहीं आया । मैं आपको यकीन करता हूँ चंदानी नहीं कहा पर मैं कोई चांस नहीं लेना चाहता हूँ । उसने कॉलबेल दवाई जिस वर्दीधारी ने माधुरी के लिए दरवाजा खोला था, बिना किसी आवाज या आहत के मेरे सामने खडा हुआ । फिर पुलिस के सधे हाथों की तरह उसके हाथों ने मेरे सारे जिसमें की टोली एक एक जेब उसने देख डाली बोला हुआ अनुमान पर कमीज की आस्तीनें और काॅल जूते । मुझे सब उसने देख डालें । जब उसे ताली नहीं मिली तो जिस तरह रहा आया था उसी तरह चला गया बिना किसी आवाज या आठ के उसके जाने के बाद । चंदानी ने कहा सच में आप तो राज भी हैं मिस्टर संजय । हालांकि आप को देख कर कोई ये नहीं समझ सकता की आप इतने चतुर होंगे पर चेहरे धोखा देते हैं । जैसे माधुरी को देखकर हर कोई धोखे में पड जाता है है ताली आपके पास नहीं है । लेकिन इससे पहले कि हम इस पर आगे बात करें अब तो एक बात है और बता दें कौन सी बात है? क्या आपने ताली के लिए मान सिंह की हत्या की? नहीं मैं क्यों उसकी हत्या करने लगा? उसे मैंने कभी जिंदगी में देखा तक नहीं था । कभी नहीं नहीं मैंने कल से पहले उसे कभी नहीं देखा था । मेरे पास मदद मांगने आया और मुझे पकडकर खडा हो गया । उसके बाद उसने पता नहीं कि आती कहा कि भय से सफेद पड गया । फिर मैं मुझे छोडकर आगे भागा । चलती हुई मेट्रो कि नीचे गिर गया । लेकिन आपके लिए ये साबित करना मुश्किल होगा । वैसा संजय कि आपने मान सिंह को मेट्रो के नीचे नहीं खेला था होगा । मैंने कहा मैंने इस पर सोच लिया है पर आप मुझे धमकी देने की कोशिश कर रहे हैं, ब्लैक मेल करना चाहते हैं । मुझे चंदानी से कोई वह नहीं लग रहा था । अब है ना तो मुझे जान से मार सकता था । मेरे साथ कोई जोर जबरदस्ती कर सकता था क्योंकि मेरे पास नहीं थी । जनता नहीं नहीं कहा नहीं मिस्टर संजय आप मुझे गलत समझ रहे हैं । मैं आपको धमकी नहीं दे रहा हूँ । मैं सिर्फ आपकी मुश्किलें सामने रख रहा हूँ । अपनी मुश्किल है । मैं जानता हूँ । मैंने कहा पर मैं मान सिंह को जानता तक नहीं था कि उसके पास डाली है उस बीमार अपाहिज शरीफ घोडे को मैं क्यों मारता? शरीफ चन्दानी ने आश्चर्य से कहा । और फिर कई छडों तक मेरी ओर देखता रहा । फिर जोर का ठहाका लगाकर रहना पडा । खांसी से उसका सारा शरीर जैसे हिल रहा था । फसना किसी तरह रोका तो बोला मैंने कहा था ना मिस्टर संजय चेहरा धोखा देता है । इतनी है जी तो कोई ओर हो ही नहीं सकती । मान सिंह और शरीफ खुल खूब । मैं आपसे उसे देखता रहा । अब मुझे आपका यकीन हो गया । मिस्टर संजय उसने हसते हुए कहा हो सकता है आप सचमुच मान सिंह को ना जानते हूँ । कौन था ये उत्सकता बढती जा रहे थे माधुरी के साथ यहाँ आते हुए मैंने सोचा था कि इस दुर्घटना और ताली को लेकर न जिस चक्कर में फस गया हूँ, उसमें से निकलने का एकमात्र रास्ता शायद इसकी तह तक पहुंचना ही है । मुझे खुशी हुई कि मामले का राज कुछ कुछ खुल रहा था । मैंने सिर्फ पूछा मिस्टर चंदानी, आखिर मानसिंह गौंडार जनाब, आपका यह शरीफ मानसिंह दरअसल हिंदुस्तान का सबसे बडा दूर तथा अपने जमाने में क्या नहीं किया । उसने स्मगलिंग धोखाधडी जो का अड्डा चलाना सबकुछ यानी वो धूर्तों का बहुत अच्छा था लेकिन यही सब कुछ नहीं है । उसके हाथों पर कितने ही लोगों के खून के दाग भी थे । लेकिन इसमें आपको और ये डाली कहाँ होती है? मैंने उत्सुकता से पूछा आप की तरह मैं भी धोके में आ गया था । वेस् को फ्री में पढकर मैंने अपनी कंपनी में मान सिंह को इस बार बना लिया । खाली एक बैंक सेफ डिपॉजिट बॉक्स की है, जो मेरे और उसके संयुक्त नाम से था । एक पार्टनर का हिस्सा उसने धमकाकर खरीद लिया । धो पार्टनरों की जो अपना हिस्सा बेचने के लिए तैयार नहीं हुए । दो तीन दिनों के बीच ही बडे रहस्यमय ढंग से मौत हो गई । एक तो सडक पार करते हुए तेज बाकी हुई मोटर से टकराकर मर गया और दूसरा आजाद अपार्टमेंट में अपनी चौथी मंजिल वाले फ्लाइट से नीचे गिरकर हमेशा के लिए चला गया । नहीं चाहता था कि ये बात मेरे साथ भी हूँ । पिछले एक साल तक बयाना खौफ में रहते हुए मैंने उसके दल को तोडने में कामयाबी पाली । उसके साथियों की करतूत के सबूत जुटाकर मैं पुलिस को देता गया और वह गिरफ्तार होते गए । आपने डिगेड प्रेमियों को इकट्ठा करने का माधुरी का शगल इसमें कहाँ आया और अब मान सिंह का दायां हाथ जगह मेरे साथ है क्योंकि एक तो मैं माधुरी का कुत्ता है और दूसरे मेरे पास ऐसे सबूत हैं जिससे उसके गले में पन्ना पड सकता है । जब से मेरी आंखें खुली रह गई मुझे जिंदगी का काफी तजुर्बा है इसलिए अक्सर मुझे ताज्जुब नहीं होता हूँ । पर यहाँ चंदानी जो कुछ मुझे बता रहा था उसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी । मैं नहीं है भी नहीं सोचा था की वो छोटी सी ताली की बदौलत में इतनी सारी बातों का राजदार बन जाऊंगा । ऊपर से प्रतिष्ठित लोग बडे लोग कैसे कैसे खेल खेलते हैं । ये चंदानी जो सा बता रहा था कौन दूध का धुला था तभी जैसे मेरे विचार बढकर चलानी नहीं कहा आपसे सोच रहे हैं कि मैं इसके चक्कर में कैसे पडा । लेकिन मिस्टर संजय आप मेरा यकीन करें तो आपने मान सिंह को शरीर समझा उसी तरह मैंने भी समझा था । उसके बारे में मुझे तभी मालूम हुआ जब उसने अपने हथकंडे दिखाने शुरू किए तो मुझे भी वही हथकंडे अपनाने पडे जो मानसिंग बनाता था । लो वालो ऐसे इकट्ठा है ना । लेकिन बैंक डिपॉजिट बॉक्स की दो तालियाँ होती हैं होती हैं एक हमारे पास और एक बैंक के पास हम दोनों उसे साथ साथ ही खोल सकते थे । एक आदमी उसे तभी खोल सकता है यदि दूसरा लिख कर अपनी अनुमति देते हैं । इसके अलावा हम में से एक आदमी उसे तभी खोल सकता था जब दूसरे की मृत्यु हो जाये । फॅमिली रहते मेरे पास थी । लेकिन शाम को मान सिंह ने मेरे तालियों के गुच्छे से डिपॉजिट बॉक्स की ताली चुरा लिया । चुरा ली जी हाँ चांदनी चंदानी नहीं, कठोर स्वर में कहा और ताली उसके पास रहने का मतलब आप समझते हैं क्या? इसका मतलब था मेरी मौत अकेले बैठे पहुँच बॉक्स तभी खोल सकता । ढांचा मैं लिख कर बैंक को इसकी इजाजत देता लेकिन ये मैं कभी नहीं करता । इसलिए मेरी मौत इस बात के लिए लाजमी थी ताकि ऍम खोल सके । कंपनी के दो डॉक्टरों के साथ क्या हुआ, ये मैं बोला नहीं हूँ । यही मेरे साथ भी हो सकता था । जैसे ही मुझे पता चला कि उसने दारी चुरा ली है, मैंने जगन को उसके पीछे लगा दिया । महान सिंह अकेला हो गया था । उसके सारे साथ ही जेल में थे और उसका दाहिना हाथ जगह उसकी जान का प्यासा था । भाग निकला तो किसी भी कीमत पर ताली जगन के हाथ में पडने नहीं देना चाहता था । इसलिए उसे सबसे अच्छा उपाय यही सोचा होगा थाली आपको दे दे फिर कभी आप से मिलकर ताली ले ले का लेकिन जघन्य उसे आपसे बात करने का मौका नहीं दिया । वो एकदम से उसके सिर पर पहुंच गया तो उसने चुपके से ताली आपकी छह में डाल दी और यह सोचकर कि किसी तरह आपका पता लगाकर फॅमिली पा जाएगा । मैं भाग निकला । पर इस बार किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया । बहुत से लोगों की मौत की वजह बना था दो कदम आगे बहुत उसी का इंतजार कर रही थी । आपने मुझे जो कुछ भी बताया है या दी वह सच है । यहाँ अपने अगर खुद उससे ताली छीनकर उसे मेट्रो के नीचे नहीं धकेला तो यही हुआ होगा । मैंने आपको बता दिया ना कि मैंने उसे नहीं धकेला । कुछ गुस्से में बोला और अपने आप से इस विषय पर बात भी नहीं करना चाहता हूँ ।

PART 3 (B)

और मिस्टर संजय चन्दानी ने बैंक से का तो मुझे आप से नहीं धकेला । पडताल तो आपके पास है और निहायत शराफत के साथ साथ आप उसे अपने साथ लाए भी नहीं है । मिस्टर संजय आप समझते हैं कि मैं ना बेस को हूँ कि आपकी यह बात माल लूंगा । उसका स्वारी का एक बहुत कठोर हो गया । मैं उसे ये नहीं बता सकता था की मैं ताली क्यों भूल गया । जिंदगी की छोटी छोटी आम बातों पर कभी कोई यकीन नहीं करता । अत्यंत सहज मानवीय बातों के पीछे भी लोग नोटिस देखते हैं । कपडे बदलने के कारण मैं खाली अपने साथ नहीं ला सका । ये मैं उसे समझा नहीं सकता था । उसकी बात पर मैंने कहा आप मेरा विश्वास करें या ना करें लेकिन मुझे ताली में कोई दिलचस्पी नहीं है ना मैं उसे अपने पास रखना चाहता हूँ, रखना नहीं चाहते हैं । चन्दानी का चेहरा चिपके हुये गुब्बारे की तरह हो गया । उसने जो कुछ भी समझाओ उसे ये आशा नहीं थी कि मैं ताली अपने पास नहीं रखना चाहता था । शायद समझता था की मुझे ताले का रहस्य मालूम है और उसके लिए मैं अपनी बातें रखूंगा । सौदेबाजी करूंगा । जो जैसा होता है वैसा ही दूसरे को भी समझता है जितना मक्का और कहीं हाँ, बैक होता तो नहीं मुझे भी समझ रहा था लेकिन जिसका कोई स्वार्थ ना हूँ उसके आगे बडे बडे मक्कार भी मार खा जाते हैं । जैसे इस वक्त चंदा नहीं खा गया था । हत्प्रभ होकर उसने कहा, आप खाली नहीं रखना चाहते हैं तो कल आपने जगन को क्यों नहीं देती? कल मुझे उस वक्त पता नहीं था कि ताली मेरे पास है नहीं तो दे देता हूँ । मुझे बाद में पता चला फिर आज क्यों नहीं लाया । आज मैं घर में रखकर बोल दिया उसे सच उसमे रूप से कहा आपका मतलब है आप डाली मुझे दे देंगे । अगर मैं अपना आदमी आपके साथ भेज दूँ उसे दे रही है । चन्दानी मेरे हाथ में खेल रहा था । मैंने अपनी ओर से इसके लिए प्रयास नहीं किया । वो अपनी ही मक्कारी का शिकार हो गया था । मैंने कहा चन्दानी साहब, मैं उसे अपने पास नहीं रखना चाहता । लेकिन पहले मैं ये इत्मिनान कर लेना चाहता हूँ कि उसका असली मालिक कौन है । असली वाले क्या अभी अभी मैंने आपको जो कुछ बताया उस पर आपको यकीन नहीं । यकीन मैंने जो कुछ आपको बताया था उस पर आपने यकीन किया था । अगर आप देश को नहीं है कि मेरा यकीन कर सके तो क्या मैं बेस को हूँ कि आप के किस्से को सही मान लोग खडे याने आपने मान सिंह के बारे में जो कुछ बताया वो आपकी ही चरित्र हूँ और ताली के लिए आप ही उसकी जान कि ग्राहक बन गए हूँ । दोबारा जैसे कुछ और चिपक गया । बैठ कोछड तक मुझे गौर से देखता रहा । फिर उसका चेहरा सख्त हो गया । कमरे की मध्यम रोशनी में कुछ फैसले पर इस तरह खडा हुआ है । कुछ खौफनाक सा लगा । फिर मैंने देखा कि उसका हाँ धीरे धीरे जेब की ओर बढ रहा था । उसकी जी एम में पिस्तौल थी इसका मुझे पक्का यकीन था । मुझे घबराहट होने लगी लेकिन फिर उसने अपने आप को संभाल लिया । जेब तक जाता हांड बीच में हीरो क्या? अपनी नाराजगी दबाने की कोशिश करते हुए उसने कहा जो लोग मेरी बातों पर शक करते हैं, मुझे पसंद नहीं है । आपको पसंद हो या ना हो लेकिन आज ही मुझसे मान सिंह के भाई ने भी ताली मांगी थी । मान सिंह के भाई चांदनी का चेहरा ऐसा लगने लगा जैसे किसी ने गुब्बारे को जल्दी से घर से छोड दिया हूँ और फिर से उसकी सारी हवा निकल जाए । मान सिंह के भाई यानि शैतान सिंह ने । मैं नहीं जानता कि वह कौन है । पर आज उसने दफ्तर में ताली के लिए मुझे फोन किया था । उसे आपका पता कैसे चला? अरे मैंने इस पर अभी तक सोचा नहीं था । पर कल जब मैं घर के पास था तो मेरे पास एक मोटर साइकिल और एक कार गुजरी थी । कार पर जगह था, ये मुझे मात्र ने बता दिया था । मोटर साइकिल पर मान सिंह का भाई रहा होगा । मैंने निश्चय करने के लिए पूछा क्या मैं मोटा साइकिल चलाता है? हाँ चलता तो है पर आपको कैसे पता चला? चलता ही नहीं है । मोटर साइकिल का आवाज है यानी मोटर साइकिल पर बैठे बैठे ही अपने शिकार पर निशाना चाह सकता है । मैं तो सोच रहा था । वही बात हो गई । लेकिन मेरे सामने गुत्थी कुछ और वो बच गई । स्पष्ट था कि जघन्य मेरा पीछा किया था और जगन का पीछा मान सिंह के भाई ने । लेकिन क्यों आखिर क्या रहता था तभी चलानी नहीं कहा । मिस्टर संजय आप ताली मुझे ही दे । मैं आपको ताली के लिए सात अंकों में रुपए दे सकता हूँ । सात अंक अब मेरे चक्कर में पडने की बनी थी । मैं बेईमानी से एक पैसा भी नहीं जाता, पर इतना आशीर्वाद भी नहीं की । सात अंकों का कोई असर मुझ पर ना हूँ । फिर भी मैंने यही दिखाने की कोशिश की कि मुझ पर रुपयों के आप बाहर का कोई असर नहीं हुआ है । चन्दानी ने कहा, मिस्टर संजय सात अंकों में रुपए कम नहीं होते हैं । अगर मैं आपकी जगह होता तो ये ऑफर मान लेता हूँ । लेकिन मान सिंह का भाई इतनी कमजोर आवाज में कहा, मैं उसे क्या जवाब दूंगा । आप उस की चिंता ना करें । उससे जगह निपट लेगा कैसे? क्या खत्म करके मैं किसी के कत्ल की कीमत पर सात अंकों की रकम नहीं चाहता हूँ । आप अपनी गर्दन की फिक्र करें, मिस्टर आपसे ताली मिलेगा और आपकी गर्दन भी दे देगा । ये रुपये भी आपकी तरफ नहीं करेगा । क्या आप मेरी इफाजत करेंगे? ऍसे कहा, मैं आपको मुगालते में नहीं रखना चाहता है । उस ने अपने होटल होटल, मुस्कान लाकर कहा, मिस्टर संजय, मैं अपनी गर्दन बचाने में यकीन रखता हूँ, दूसरों की नहीं । लेकिन अगर उससे दूसरों की भी बज जाए था, मेरा क्या पडता है और हम तो आपको मेरा ऑफर मंजूर है नहीं क्योंकि आपने इंकार नहीं किया । इसलिए मैं क्या समझो, क्या मंजूर है? मैं चुप रहा हूँ और मौन से बढकर स्वीकृति का कोई और लक्षण आज तक याद नहीं हुआ । चन्दानी भी जानता था । मैं सोच रहा था अगर दो बीवियाँ लडते हैं तो लडें । लेकिन मेरा ये सोचना गला था । यह मुझे बाद में मालूम हुआ । चंदा नहीं उठकर बाहर गया और कुछ देर बाद लौटा । उसके साथ एक आदमी और था । अंदर आ गया तो मैंने उसे पहचाना जगह था । चन्दानी ने कहा जगह आपके साथ जाएगा । इसी को ताली दे दें जरूर दे रहे हैं । पुलिस के सिपाहियों की तरह जगह मेरे एकदम बगल में आकर खडा हो गया जैसे मैं कोई अपराधी हूँ । फिर मेरे कंधे पर हाथ मारकर बोला चलो चंदानी नहीं रुपए के बारे में ना मुझ से कुछ कहा और न जगन से । शायद में कमरे से बाहर जगन को रुपया चक्की देने गया था । मैं पूछना चाहता था पर संकोच भी हो रहा था तो शराफत में मुझे ऐसा आदमी ही मारा जाता है । तब तक जघन्य फिर मेरे कंधे पर हाथ मारा चलो चलते क्यों नहीं? मैं उलझन में पढा हुआ कमरे के बाहर निकल आया । मेरे ठीक पीछे पीछे जगह था । शायद धान की तरह खूंखार बाहर पोर्टिको में कार तैयार खडी थी । कार का पिछला दरवाजा खोलकर जगह ने मुझे अंदर धकेल दिया तो फिर खुद भी मेरे बगल में आकर बैठ गया । बैठने के तुरंत बाद ही उसने अपने लोहे का दस्ताना जिसके बारे में मान सिंह के भाई ने बताया था निकालकर पहन लिया । इस बात का संकेत था कि मैं जरा भी गाय बडी नाम अच्छा हूँ नहीं तो मेरा भरकस बना दिया जाएगा । लगता था कल मैं उसे जो चकमा देकर निकल गया था वैसा ही चकमा फिरना देता हूँ । इसलिए मैं पहले से ही ओशिया रहना चाहता था । पर मेरा गडबडी करने का जरा भी इरादा नहीं था । रुपए मिले ना मिले इसको रक डंडे से छुटकारा पाने का खयाल करके ही मैं इत्मीनान महसूस कर रहा था । जगन ने कहा अगर कल ही तुम्हें ये ताली दे दी होती तो ये परेशानी होती है । उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया । मैं काफी थक चुका था और बात करने की मेरी जरा भी इच्छा नहीं हो रही थी । फिर जा गाना है तो बिलकुल भी नहीं । कहा कि गद्देदार सीट पर बैठा हुआ मैं अपने थके शरीर को आराम देने की कोशिश कर रहा था । जघन्य अपनी कडी निगाहों से दो एक बार मेरी ओर देखा हूँ । फिर भी चुपचाप बैठ गया । कारबात दी जा रही थी । करीब सवा घंटे बाद हम नोएडा पहुंच गए । जब मेरा घर थोडी दूर रह गया तो जघन्य कार रुकवा दी और मुझसे कहा आप तुम जल्दी जाओ और ताली लेकर तुरंत मेरे हवाले करूँ । मैं इंतजार कर रहा हूँ । मैं उतर कर घर की ओर चल पडा हूँ । करीब तीन बजे थे । दिन के इस वक्त लोग अपने अपने काम पर रहते हैं इसलिए वस्ती वीरान से लग रही थी । तेज कदम बढाता हुआ मैं घर की ओर चल पडा । घर पहुंचकर मैंने कॉलबेल का बटन दबाया और दरवाजा खोलने का इंतजार करता खडा रहा । पर कर ये दो मिनट भेज गए । फिर भी दरवाजा नहीं खुला । अपनी को स्कूल भेजकर शायद पुष्पक हो गई होगी । यह सोचकर मैंने फिर बटन दबाया लेकिन फिर कोई आहट नहीं । तब मेरा ध्यान दरवाजे पर गया । सिटकनी बाहर से बंदी मतलब कि पुष्पा घर में नहीं थी और लगता था कि मैं कहीं दूर नहीं गई थी । क्यूकि दरवाजे पर ताला नहीं लगा था तो मैंने सोचा उसे देखो पास पडोस में और एक तो मुझे पता नहीं था कि वह कहाँ है । दूसरे मुझे देर होती देखकर कहीं जगह मारपीट पर नहीं उतार हो जाए । इसलिए मैंने सोचा कि पहले उससे ताली दिया हूँ । चटकनी खोलकर मैं भीतर गया । कल वाला कोट हैंगर पर करीने से टंगा हुआ था । फिर आप दिल था कहा था लगभग मैंने उसकी छह में हाथ डाला, लेकिन तालिबान नहीं थी । पुष्पा को ताली हिफाजत से रख देने की दागी दी थी । उसी ने जेब से निकालकर रिद्धि होगी इफाजत के नाम पर मैं हर चीज अपनी डॅाल की एक दराज में रन देती है तो खाली भी वहीं होगी । यह सोचकर मैंने दराज खोली । उसका कोना कोना देख डाला । बढ ताली उसमें भी नहीं थी । आखिर नहीं कहा हूँ मैंने अपनी किताबों की अलमारी, पुष्पा के चेस्टर की जाॅन रसोई घर के डिब्बे डिब्बियां जिनमें कभी कभी पुष्पा रेजगारी रख दिया करती थी, सब कुछ देख डाला । हडताली कहीं नहीं थी आप मेहफिल फिर से जोरों से धडकने लगा । आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा । अभी तक मैं जो इत्मिनान महसूस कर रहा था, अब फिर से खत्म हो गया । सारा है सारी घबराहट एक बार ही जैसे लौटाई, सोचने लगा की जगह इंतजार करते करते हो जाएगा और फिर यहाँ से चला जाएगा । सिर्फ इतना ही होकर रह जाए तो भी गनीमत पर बेहतर गुस्से में आकर झगडा हो सक्कर बैठा । मेरा कोई भी बहाना नहीं नहीं सुनेगा । अच्छा होगा की नहीं । उसे बताया हूँ कि ताली नहीं मिल रही है । मिलते ही दे दूंगा । फिर भी मुझे विश्वास नहीं हो रहा था की जगह को मेरा यकीन होगा । मैं तेज कदमों से चलता हुआ उस जगह पर पहुंचा जहां जगन कार रोककर मेरे इंतजार कर रहा था । सचमुच अधीर हो रहा था । घर से बाहर निकलकर मैं मेरी बेचैनी से चहलकदमी कर रहा था । मुझे देखकर उसे घाटा हुआ लेकिन मैंने सारी बात बताई तो उसका चेहरा गुस्से से तमतमा उठा । गलत कर उसने कहा तो मैं फिर चार चलने शुरू कर दे । मैं सडक पर कोई तमाशा नहीं खडा करना चाहता था । कहा झगडा बचाने के लिए उसके तेज आवाज का मैंने भी धीरे से जवाब दिया । नहीं ऐसी बात नहीं है । लगता है मेरी पत्नी कहीं उसे रख कर चली गई है । आ जाए तो तुरंत मिल जाएगी तो में ही रुके । राहुल मिलते ही तो मैं दे दूंगा रुखाई से । उसने कहा मैं भी चलो खोजने में तुम्हारे मदद करूँगा तो मेरा विश्वास नहीं हो रहा है । मैं विश्वास वगैरह कुछ नहीं जानता । हूँ । मुझे ताली चाहिए । मैं कहाँ कहता हूँ कि ताली तो मैं नहीं दूंगा लेकिन मैं अपनी पत्नी का इंतजार कर रहा हूँ । उसके आते ही दे दूंगा । उससे पहले नहीं । मुझे चालबाजी कटाई पैसा नहीं है । उसमें थोडा कर कहा चालबाजों की खबर में इससे लेता हूँ और उसने अपना पंजाब मेरी और बढा दिया । उसके दस्ताने में लोहे की छोटी छोटी कीलें उभरी हुई थी । मैं भीतर ही भीतर बिहार उठा । उसे समझाने की कोशिश करते हुए मैंने कहा तुम बेकार ठीक चला रहे हो । आधा घंटे में मेरी पत्नी आ जाएगी । तभी तो मैं ताली मिलेगी लाने से नहीं । उसके जवाब का इंतजार किए बिना ही नहीं घर को लौट पडा । जघन्य आगे बढकर मेरा हाथ पकड लिया । उसके दस्ताने की छोटी छोटी कीलें मुझे छोडने लगी । तब तक उसके दूसरे हाथ का एक हल्का सा घुसा में छुट्टी पर लगा दूसरे हाथ की भी दस्ताने की खेले की वजह से वही छुट्टी छिल दी गई और खून चूस वहाँ आया । फिर उसने कहा तो मैं इस तरह मुझे चकमा देखा नहीं जा सकते । मेरी है मैं तो नहीं हो रही थी पर मैंने भी एक खान बढाकर उसका कॉलर पकड लिया । फिर कहा अगर तो मिताली चाहते हो तो ये ऐसा भरकर बंद कर हूँ, नहीं तो मैं चकमा नहीं दे रहा हूँ । अडतालीस तभी मेले की जब मेरी पत्नी आ जाएगी । उसने झटके से अपना कॉलर मेरी पकडते छुडा लिया पर हर कोई हरकत नहीं की । घोषणा भी नहीं चलाया । लेकिन कडक कर पूछा हूँ कब आएगी तुम्हारी बात नहीं । मुझे कुछ नहीं पता लेकिन आ जाएगी । तारीख तभी मिलेगी उसके पहले नहीं । शायद कोई सुनसान जगह होती तो और झगडा करता । या शायद मेरा मूड गुस्से का देखकर उसने मारपीट करना ठीक नहीं समझा रहे । कुछ झंड तक मेरी ओर घूरकर देखता रहा । फिर बोला मुझे ऐसा पैसा नहीं लेकिन तुम्हारे कहने से एक मौका तो मैं और दे रहा हूँ । अभी मैं जा रहा हूँ एक घंटे बाद लौटूंगा । लेकिन ताली दया रहे और कुछ नहीं सुनूंगा । मैंने राहत की सांस ली । ठीक है तो यही मुझसे मिलना एक घंटे बाद मेहताजी लेकर यहाँ जाऊंगा नहीं । इस बार मैं तुम्हारे घर पर आऊंगा । उसने कहा और कार में बैठकर ड्राइवर को गाडी स्टार्ट करने का हुक्म दिया । मैं घर की ओर चलता हूँ

PART 4

भारत क्या है? घर पहुंचने के पहले तक मुझे पता नहीं था कि घटना एक दूसरा ही मोड ले चुकी थी । इस बीच कुछ पढना जाने कहाँ से आ गई थी और दरवाजे के सामने हैरान सी खडी थी । दरअसल हुआ ये है कि जब मैं ताली ना मिलने के बारे में जगन को बताने के लिए जा रहा था तो दरवाजा बंद करना भूल गया । लौटने पर पुष्पा को दरवाजा खोला मिला तो मैं ये सोच कर हैरान हो रही थी कि बीच में कौन दरवाजा खोल गया था । तभी उसने मुझे देखा एक तो दफ्तर से मेरा इस वक्त घर लौट आना नहीं बात थी । दूसरे मेरी हालत देखकर है और हैरान ओटी घबराकर उसने पूछा क्या है जी तो हरी तब तो ठीक है । वो तो ठीक है पर तुम कहाँ गई थी? मैं भी आकर फिर जरा बाहर चला गया था तो दरवाजा तो हूँ । उस ने राहत की सांस लें । फॅमिली हालत क्या बना रखी है थोडी पर खून की ऐसा ऐसा बाद में पूछना । पहले ये बताओ तालिकाएं फॅमिली उसने पूछा वही जिसके लिए मैंने तो टेलीफोन किया था उसे तुमने कहा रख दिया है आपने पर इसमें तो रख कर नहीं चली गई नहीं हैरानी मुझे देखती रही । फिर बोली क्या है इतनी से हो रही है ऍम यहाँ आया हूँ लेकिन मैं कहाँ? मैंने कहा घर में तो मैंने ऍम में रख दी थी, उसमें तो नहीं है ना घर में और ना कहीं पहले तो सारा छान मारा और मुझे इतना हर्ट हो रही थी । आप ही के मिलने लगी? पुष्पा नहीं तो झल्लाकर कहा तो भी कोई चीज मिलती भी है क्योंकि सामने चीज रहेगी मिलेगी नहीं । तुम्हारी तो आदत बन गई है कि हर चीज तुम्हें में ही उठा कर दो । मैं झटके से अपनी ड्रेसिंग टेबल के बाहर गए और तैश में आकर पूरी दराज ही बाहर की नहीं ऍम यहाँ मैंने पहले ही देख लिया था । ताली सचमुच उसमें नहीं । पुष्पा नहीं दूसरी दराज खोली । वो वहाँ पे डाली नहीं थी वो भी ताज्जुब में पड गई हो रखी थी । उसने कहा फिर हो रही है यहाँ तो नहीं तो मैं थोडा पुठा पुष्पाणि हूँ कर मेरी ओर देखा तो वहीं इकाई क्या हो गया है? इस तरह तो तुम कभी नहीं बोलते । जो मैं पूछ रहा हूँ वो बताओ । तालिकाएं दो किस तरह चला रहे मुझ पर मैंने बताया फॅमिली के ही रख दी थी कॅश यहाँ तो नहीं ऍम पुष्पा का चेहरा बीस वक्त हो गया । कडी आॅफ ने कहा तो से इसी तरह बोल रहे हो तो सब सब बताओ कि हुआ क्या है? क्या मुझे इस तरह मत बोलो? बर्दाश्त करने की भी होती है । मैं अपना सिर पकडकर सोफे पर बैठी हूँ । अब मैं चारों ओर से जैसे पेट चुका था । जगन चंदानी, मान सिंह के भाई और अपने दफ्तर के गांगुली बाबू से धक्के खाकर मैं पिटे हुए आदमी की तरह और कर बरस रहा था । मुझे पुष्पा को शुरू से ही सब कुछ बता देना चाहिए था । अखिल मेरे ना बताने पर भी पूछ मैंने भर्ती लिया कि कोई खास गडबडी थी, इसलिए वहाँ छिपाने की कोशिश बेकार थी । मेरे अंदर इतनी ताकत भी नहीं रह गई कि मैं सारी बातें अपने अंदर ही छिपा रहा हूँ । मैंने पुश्ता को सारा किस्सा कह सुनाया । इस बाहर मैंने कोई बात नहीं छोडी, नई जगह की और न चंदानी से अपनी मुलाकात की । यहाँ तक कि माधुरी की बात भी मैंने नहीं नहीं पाए । जब मैंने अपनी बात खत्म कर ली तो उसने मुझसे पूछा तो मैं सारी बातें सच सच बताई है । आॅवर बोल रहा कहीं ये क्या नाम है उसका? चार कसमें वाली सुंदरी के पीछे दीवाने होकर किस से तो नहीं कर रहे हो? क्या मतलब? मतलब ये कि तुम ऐसे बच्चे तो नहीं कि वह अपनी उंगली पकडकर जहाँ तो मैं चाहे ले जाएँ । तुम ना चाहते तो चलाने के पास भी नहीं चाहते । मैं तुम्हारा क्या कर लेती हूँ, लेकिन जरूर तुम्हारे ऊपर उसका जादू चल गया होगा । तभी तो गए तो और तुम्हें क्या पिछला ले बैठी । मैंने कहा हो इसका फैसला बाद में कर लेना । पर इस वक्त सवाल तालिका है । थाली क्यों? उसका मसला क्या है? क्या मैं सारा किस्सा फिर बयान करूँ? पंद्रह बीस मिनट में जगन ताली के लिए फिर आ धमके । गांव अगर तुम ने ना दी तो तो वो लोग कुछ भी कर सकते हैं । उनके लिए कुछ भी नाम उन की नहीं है तो नहीं । कितने घबरा रही हूँ । उन्होंने लाकर में जो कुछ भी रखा हूँ उसके लिए तुम जिम्मेदार नहीं तो नहीं । ताली चुराई तो नहीं । किसी और के लाकर की ताली रखना चोरी के बराबर है । उनके पास के असर होती कि तली तुमने रखी है है । तुमने कहा जिरहा में वक्त बर्बाद कर रही हूँ । मैंने कहा हमें जल्द से जल्द ताली की खोज कर लेनी चाहिए । घोषणा बेकार है । पुष्पा ने कहा मुझे आती की मैंने ताली कहाँ रखी थी? उस ड्रेसिंग टेबल की जो हर मैं तो उन्हें देखा और मैंने भी लगता है कोई उठा कर ले गया होगा । मान सिंह के भाई ने तुमसे टेलीफोन पर कहा था ना कि तुम से मिलेगा । हो सकता है वही इसी बीच जाकर ले गया हो हूँ । लेकिन तुम घर में ताला बंद करके क्यों नहीं नहीं थी? मैं पडोस में ही वकील साहब के घर गई थी और उसमें जाती हूँ तो कभी ताला बन नहीं करती । फिर मुझे क्या पता था कि ताल इतनी जरूरी थी पर तू खबर आती क्यों? अगर वे आएंगे और कोई गडबडी मचाएंगे तो हम पुलिस को बुला लेंगे और फिर मैं भी जेल की हवा खाऊंगा ऍसे कहा क्यों उनकी खाओगे जेल की हवा । इसीलिए तो यह साबित करना मुश्किल होगा कि मैंने मान सिंह को नहीं खेला । दूसरा ये कि अगर मुझे ताली मिली थी तो मैंने कल ही रिपोर्ट क्यों नहीं की? आज अब तालिक हो गई तो मैं रिपोर्ट कर रहा हूँ और अगर कहीं डाली के पीछे कोई साजिश हुई जैसा की मुझे लगता है तो फिर मैं भी उसमें शामिल मान लिया जा सकता हूँ । नहीं, मैं पुलिस को इस मामले में रिपोर्ट करने की हालत में बिल्कुल भी नहीं हूँ । इस पर कुछ भी सोच में पड गई ।

PART 5

भाजपा आएंगे । तेरी बुरी हालत हो रही थी । किसी भी शरण जगन की कॉलबेल का इंतजार कर रहा था । मुझे कल्पना करते हुए भी डर लग रहा था कि अगर जगन को मालूम हो गया कि ताली सचमुच गायब हो गई और बहुत मुमकिन है कि उसे मान सिंह का भाई ले गया तो मेरी क्या कट बनाएगा । पुलिस में मैं जा नहीं सकता और जगह से मुकाबला कर नहीं सकता था । दिल जैसे उछलकर अपनी जगह से बाहर निकलकर जाना चाहता था । पसीने से मेरे सारे कपडे भी गए । अब मुझे सिर्फ एक उपाय सोच रहा था, वही है । जगह के आने से पहले ही कहीं भाग चलूँ । लेकिन पुष्पा गो मेरी योजना पसंद आए । उसने कहा अब नहीं घर से बाहर चाहे और भी कुछ बच्चों की डर से मम्मी का क्या होगा? मेरे स्कूल से उसे भी साथ ले नहीं या किसी पडोसी से कह देते हैं कि वह दो चार दिनों से अपनी फॅमिली और हम जाएंगे कहाँ? जो बदमाश तुम्हारा यहाँ तक पता लगा सकते हैं तो क्या कहीं और नहीं बोलेंगे तो मैं हम किसी और शहर में चलेंगे नहीं चलती हूँ । जाना चाहो तो चलने चाहूँ लेकिन मुझे ना पाकर है तो मैं परेशान करेंगे तब कुछ भी हो मैं अपना देखी होंगी तो मैं जाना हो । चले जाओ आखिर हम और कर भी क्या सकते हैं वो तुम बेकारी खबरे आ रहे हो । गुंडे ही तो है तो क्या कर लेंगे? दिनदहाडे क्या किसी का कत्ल कर देंगे? उनके लिए अभी कोई बडी बात नहीं । फिर उनके हाथ में पैसा और ताकत भी है । चन्दानी एक विदेशी कंपनी का हिंदुस्तानी चीज है । हम उसका मुकाबला नहीं कर सकते तो बेकार ही पहुंचाई को डाॅक्टर बना रहे हो तो तुम्हारे पास से डाली है जिसके लिए चंदानी तो मैं सात अंकों की रकम देने का तैयार है । इसका मतलब है कि ये कोई ऐसी वैसी मामूली ताली नहीं है । अब जब तक तो मुझे ताली नहीं देते हैं तब तो फिर तुम्हारा कुछ भी नहीं निकालेंगे तो लेकिन श्रीमती जी ताली है, कहाँ हो तो आपको इस तरह कह रही है जैसे ताली आपके पर नहीं मौजूद हो । फॅमिली पर इसमें नहीं है और मैं चाहती हूँ कि मैं कहा है लेकिन डाली हो गई है । वो तो सिर्फ हमारे तो जानते हैं उन्हें तो इस बात का पता नहीं तो उन्हें बताओ कीमत की तरीक हो गई है । पुष्पा की ओर मैं आशा जैसे देखता रह गया । हमारी शादी को आठ साल हो चुके हो । मैं पढने के लिए अपने पॉलिटिक्स नहीं जाता था तो उसी बस में पुष्पा भी कॉलेज जाती थी । एक दिन मुझे अपनी ओर देखता पाकर वह बहुत धीरे से मुस्कुरा पडी थी । ये हमारा पहला परिचय था । उसके बाद जब हमारा परिचय प्रेम में बदल गया और हम ने शादी कर ली, तब से आज तक में यही समझता रहा कि हमारी अपनी जिंदगी के बीच मेरा ये निर्णय अंतिम होता है, भाषा है, बोलती है पर अच्छे पति की तरह । मेरा निर्णय वही होता है जो पूछना चाहती है । मैंने ये कल्पना भी नहीं की थी कि वहाँ इतनी व्यावहारिक होगी । इस संकट में उसने मुझे सुझाव दिया था । उस से बढकर और कोई हो ही नहीं सकता था । काॅल की आवाज कमरे में पहुंच गयी । जगह आ गया था । मेरा कलेजा जैसे भूमि को आ गया । हम अपनी पूरी योजना पर सोच भी नहीं सके और वे आ धमका । मुझ में खडे होने की भी हिम्मत नहीं थी कि उठकर दरवाजा खोलो । लेकिन पुष्पा के चेहरे पर जैसे भय्या घबराहट का कोई चेन्नई भी नहीं दिखाई दे रहा था । उसने कुछ तो सिर्फ कर्म अच्छे कहा तो अहमद कहना कि ताली नहीं है ताकि बात सिर्फ मैं करूंगी । रेडमी नान से उठकर दरवाजे पर कहीं और दरवाजा खोल दिया । बाहर न्यायिक बत्तमीजी से सिगरेट बेटा हुआ जगह खडा था । वो पुष्पाणि अनजान सी बनकर पूछा तो मैंने आप और कोई जवाब देने के बजाय पुष्पा के ऊपर ही सिगरेट का धुआं छोडते । हुए जगह बेटा उसमें लगा मेरा खून भीतर से कॉल उठा । कहना चाहा कि एक और अच्छे कैसे व्यवहार करना चाहिए इसकी भी तमीज नहीं है । तो मैं पर मेरे खून में मोबाइल जवाया था जो ऊपर नहीं प्रकट हुआ । मैं आया नहीं हूँ । बस एक गुंडे के साथ हाथापाई न करनी पडे । यही सोच कर चल रहा है । लेकिन पुष्पा को जगह से जैसे कोई बहन नहीं लगा तो उसने अपना हाथ बढाकर जगन का रास्ता रोकते हुए उसे डाटा तो दोनों जी पूछती हूँ तो पराठे भी नहीं और चोरों की तरह सीधा घर में घुसे चले आ रहे हो तो मैं ये भी तमिल नहीं की औरतों के साथ कैसे पेश आना चाहिए । बेशरम कहेंगे पुष्पा की आवाज में इतनी खडा थीं कि कलेजा दहल उठा । सोचने लगा कि कहीं जगह नाराज होकर उस पर वार्ना कर बैठे । तो क्या मैं तो जैसे सीधा हो गया और उसने कहा सारी बैन ही में जगह हो । बाबू जी ने आपको मेरे बारे में बता दिया होगा । आप मेरे बाबूजी पुष्पाणि मेरी ओर इशारा कर दिया और खुद भी आकर हमारे पास ये कुर्सी पर बैठ गई । लेकिन देवर उसके अभी तक खडे हुए थे । जाॅब जल्दी मेरे हवाले कर दीजिए । देर ना कीजिए उससे साफ झूठ भी नहीं बोलते । बंदा कहीं जगह मेरा छूट था, अपना ले तो इसलिए मैंने ये भी पुष्पा के ऊपर ही छोड दिया । जगन को जवाब देने की बजाय मैंने पुष्प ऐसे पूछा क्यों है हमारे पास? हाँ है । पुष्पाणि कडे स्वर में छोटा सा उत्तर दिया । जघन्य कुछ परेशानी में बढकर मेरी ओर से ध्यान हटाकर पुष्पा की ओर देखा । फिर कहा बेहद ताली मुझे बाबू साहब से लेनी है । शराफत से बातचीत करने में जगन को काफी मेहनत करनी पड रही थी । पुष्पा ने जैसे पहले रुखाई से कम जानती हूँ तो फिर दे दीजिए । मुझे देर हो रही है । ताली नहीं मिलेगी तो मैं पुष्पा ने कहा जगह जैसे आसमान से गिरा मेरा कलेजा कहाँ रहा था? अगर जगन को जरा सा भी शक हो गया कि हम नाटक कर रहे हैं तो हमारी खैर नहीं और गुस्सा उसे आ रहा था । ये मैं उसका चेहरा देखकर बता सकता था । उसने कडक कर पूछा क्यों डाले मुझे क्यों नहीं मिलेगी? इस तरह नहीं मिलेगी । पुष्पा ने भी उसी तरह का एक जगह बैठे ही बैठे जैसे उछल पडा तो मैं पूछता हूँ क्या मजाक है ऐसे नहीं मिलेगी तक कैसे मिलेगी? चंदानी ने ताली के बदले कुछ फायदा भी किया था । रुपये का रुपये ताली पाकर हम भेज देंगे । इसके पहले नहीं जघन्य नाराज होकर कहा । पुष्पा ने फिर अपनी कठोर आवाज में कहा हमे घास चराने चले हूँ और यह लोग ताली सिर्फ सात अंकों की रकम से नहीं मिलेगी । चंदानी से जाकर कह देना । जगह मेरी ओर मुखातिब हुआ । उसके हाॅल हो रही थी जी कौन है ये हरामजादी तो ऐसे बीच में क्यों ले आए और ताली तुम्हें हमें देनी थी इसे नहीं । इससे पहले कि मैं कुछ जवाब दे पाता । पुष्पा की सैंडल तलाक है । जगह के बारे गाल पर लगे और पलक झपकते रह जगह के सिर पर सवार हो गई । क्यूट को देश कमीने मेरे ही घर में अगर मुझे करता है बोलता हूँ कि पडोसियों को कि तू मेरे घर में घुसकर मेरे साथ बदतमीजी कर रहा है । और जितनी देर पुष्पा ये कहती रही उतनी देर में तलाक और पांच सात फॅमिली जगन के सिर पर और गानों पर पढ रही उसके झाडू उधार मोर्चों की सारी रहना चाहती रही हूँ । अपना लोहे वाला दास थाना भी उसे याद नहीं आया । पहले हमला कर देना बचाव का सबसे अच्छा तरीका है । मेरा दिल बल्लियों जैसा उठा रहा था । डर यही था कि बदला लेने के लिए कहीं रह भी कुछ करना बैठे लेकिन लगता था हल्ला गुल्ला बचाने से वे भी उतना ही बचना चाहता था कितना की मैं सिर्फ धमकियों से कम निकालना चाहता था । पडोसियों के आ जाने से एक औरत के साथ बेअदबी के जुर्म में पडने का डर था । दूसरे एक विदेशी फॉर्म के हिंदुस्तानी चीज जिसने उसे भेजा था, उसकी इज्जत का भी कुछ तो खयाल रखना ही था । दो हल्ला मचने पर चंदानी का नाम आता ही जगन जिस कार में आया था उसका पता लगाया जाता हूँ और तब चंदानी शायद जगन की हरकते पसंद करता हूँ । तो उसने मुझे ये भी बताया था कि जगह के अपराधियों के कई सबूत उसके कब्जे में हो सकता है, चंदा नहीं । बाद में मेरी भी खबर लेता और जगन की हरकत वह कतई पसंद करता है । जगन की है कमजोरी भागकर मेरी भी हिम्मत हुई । मैं भी उठकर उसके पास पहुंच गया और ऍम आया तो अभी थोडी देर पहले उसने मुझे अपने लोहे के दस्ताने वाले हाथ से जो खून सा लगाया था उस की याद दिलाते हुए मैंने कहा थ्रीडी पर घोषणा क्या होता है? पता लगा जगह छोडकर खडा हो गया । उसका चेहरा बिगड गया था । होठ कट गए थे मेरी और आंखे तरेरता हुआ बोला कैसा होता है ये मैं बाद में बताऊंगा पर अभी तो ताली दे दो । मैं खोल जाऊंगा इस रकम में हम ताली नहीं देंगे । जाकर कह तो चंदा नहीं से पुष्पा दर्जी निकल जाओ यहाँ से मैं तुम्हारी शकल भी नहीं देखना चाहती हूँ । कितने रुपए चाहते हो तुम लोग कम से कम पचास लाख उससे कम में हम ताली नहीं देंगे । और चंदानी से कह दो बात करना चाहते हैं तो खुदा यहाँ या किसी शरीफ आदमी को भेजे हैं । तुम आए तो नहीं तुम्हारी पुष्पा नहीं । कडी आवाज में कहा । जगह देर की तरह कमरे से बाहर चला गया । फिर हमें उसकी कार्य स्टार्ट होने की आवाज सुनाई पडेगी । तब खिलखिलाकर हंस पडे । मैंने कसकर पुष्पा को बाहों में भर लिया । वहीं पुष्पा जो भी जगह के सामने देख कठोर हो गई थी मेरे पास आकर मौसी को मिल हो गई । ठक्कर उसने मेरे कंधे परसेंट टिका दिया और हम कुछ देर इसी तरह बैठे रहे । इस परेशानी में पुष्कर की निकटता से बहुत समझना मिल रही थी लेकिन समस्या अभी खत्म नहीं हुई थी । जगन के चले जाने से एक व्यक्ति खतरा टलने में हम सफल रहे और इसका मतलब ये नहीं था कि खतरा पूरी तरह टल गया । इसके विपरीत ताली के लिए अपनी कीमत मांग कर अपनी तरह से ये मान लिया था कि उसके पीछे जो भी रहता था हम उसे जानते थे और उसकी साजिशों में शामिल थे । इस तरह खतरा कम होने के बजाय बढ गया । इसलिए कुछ खास मसलों पर सोचना जरूरी हो गया था । सबसे पहली बात तो ये थी कि ताली के लिए हमने जो भी कीमत मांगी थी उसे अगर चंदानी मान लेता तो हम क्या करेंगे? उसके अलावा अन्य भी बातें थी हाली के लिए हमारी मांगी कीमत न देकर चंदानी ने कोई और राष्ट्र अपना है तो हम क्या करेंगे? जगन के साथ जो कुछ हुआ उससे नाराज होकर उन लोगों ने बदले के लिए कोई कदम उठाया तो क्या करेंगे और जैसा की हमें सकता हूँ अगर ताली मान सिंह का भाई ना ले गया हूँ और वह उसे लेने के लिए आए तो उसे क्या जवाब देंगे । लेकिन हमारे लिए कुछ भी सोच कान आसान नहीं था क्योंकि सच्चाई थीं कि हमें कुछ भी पता नहीं था । हमें ये नहीं पता था कि ताली मान सिंह का भाई ले गया है । नहीं हम ये भी नहीं जानते थे कि ताली है कहाँ? पर हमें इस बात का भी पता नहीं था कि चंदानी और जगह आगे क्या कदम उठाएंगे । तो हम ये भी नहीं जानते की मान सिंह का भाई कैसा है और अगर डाली रहे अब तक नहीं ले गया तो खाली ना पाकर है । हमारे साथ कैसा सलूक करेगा । दुश्मन का पता हूँ और आप ये जानते हो कि वह किसी खास मौके पर क्या कदम उठाएगा तो उसके मुकाबले की योजनाएं बनाना आसान होता है । लेकिन जब दुश्मन का ठीक ठाक पता ना हो तो वहाँ एक बिना चेहरे वाला ब्रिज बना रहता है । आप कुछ भी नहीं कर सकते । यही हमारे साथ भी था । हम सोच नहीं पा रही थी कि क्या करें वो सच तो यह है कि हमारी हालत भी बत्तर थी । इस दुश्मन के वार का इंतजार करते हुए हाथ पर हाथ धरे बैठे भी नहीं रह सकते थे । विचारों में डूबे हुए मैंने खिडकी से बाहर देखा जाए का देना हो रहा था और सांस का अंधेरा घिरने लगा था वो हालांकि अभी साढे चार से ज्यादा नहीं बच्चे थे । अम्मी के आने का वक्त हो गया है । नर्सरी की गाडी आती होगी चलो उसके लिए कुछ दूध वगैरह गरम कर दूँ तुम्हारे लिए अधिक चाहेगा बनाना उनको पुष्पा उठकर खडी हुई और मुझे अपनी समस्याओं में उलझा हुआ खेला छोडकर रसोई किधर चली गई ।

PART 6 (A)

भाग है । करीब पंद्रह मिनट बाद खुश का जहाँ नाश्ता तैयार कर लाये पुष्पा पांच कलाम में दक्ष है बढ जाए के प्रति मेरे मन में कोई उठा नहीं हुआ तो हमारे मन से मैं चाहे पी गर्ब्याल ही रहा था कि अचानक मोबाइल बजट था वो मुझे जहाँ है बिजली का करेंट हो गया । मिस्टर संजय उधर से कडी आवाज आई । उसी का टेलीफोन था जिसका सोच रहा था यानी चंदा नहीं । उसने कहा ऍम है मुझे आपका या ज्यादा ठीक का हो तो आप की मिसेज का सन्देश में लिया । मैं इससे बेहतर जवाब नहीं दे सकता था । शायद पुष्पा ज्यादा अच्छी बात कर सकती हूँ । आप ही बात करेंगे की मिसेज मुझे बता दीजिए । जवाब कहना चाहते हैं । मैंने बडी मुश्किल से कहा ओके, जरा ध्यान से सुनिएगा का झंडा नहीं । नहीं कहा तो मुझे आपका यानी आपके मैसेज का प्रपोजल मंजूर नहीं और मैंने पहले जो ऑफर किया था उसे भी वापस लेता हूँ लेकिन ताली आपको देनी पडेगी । सुन लिया ना आपने? मैं आप का मतलब नहीं समझा । क्या तालियाँ जबरदस्ती ले लेंगे? उधर से चंदानी की आवाज आई हूँ । उसने गुस्से में फोन का चोंगा रख दिया तो लाइन कटने की क्लिक की आवाज मुझे ऐसी लगी जैसे मेरे ही दिमाग की कोई नस टूट गई हो । मेरा सिर संज्ञाशून्य हो गया । आखिर है जबरदस्ती ताली कैसे लेगा? क्या कर स्टेशन की दुर्घटना के लिए मुझे जिम्मेदार ठहराते हुए पुलिस को खबर देगा, इस बारे में सोचना नहीं चाहता था । पर इसके सारे परिणाम मेरे दिमाग में एक साथ चक्कर काटने लगे हूँ । वो कटमा तबाही और कौन जाने जेल और अगर छूट गया तो नौकरी नहीं रह जाएगी । पुलिस केस में वह भी हत्या के मामले में फंसे आदमी को कोई नौकर नहीं रखता हूँ । लेकिन चंदानी ने जो किया वो है इससे भी कहीं भयानक और जाली माना था । पुछ बेहद घबराई हुई थी और मुझे देखते ही कटे पेड की तरह मेरे ऊपर गिर पडी है । बुरी तरह हो रही थी और उसकी हिचकियां बन गईं । छुट्टियों के बीच में उसने क्या कहा ये मुझे साफ समझ नहीं आया । सिर्फ एक शब्द समझ में आ सका । वो हो ऍम मेरा जल्दी बच्चे की तरह काम ऍम पीटी उषा । बातचीत होने लगी तो बताओ पुष्पा क्या हुआ? पाॅड मैंने दिल खडा करके पूछा । अपने ऊपर का वो रख पाना मुश्किल लगाया था । फॅमिली को कुछ कर दिया क्या उन्होंने उसे दिल की इस कर दी । बात को मानने के लिए तैयार नहीं होता था तो गलती से उसके स्कूल जाओ । खुश पानी क्यों के बीच बताया नजदीकी गाडियाँ कर चली गई ही उसमें नहीं थी । उस से दो घंटे पहले कोई औरत अपने साथ दिवाली गई तो ॅ उसके स्कूल । पता नहीं कौन? कल ही लिवा ले गए उसे । स्कूल हमारे घर से करीब दो किलोमीटर दूर पडता है ऑटो रिक्शा लेकर मैं जल्दी जल्दी स्कूल की ओर बढा । आठ मिनट में स्कूल पहुंच गया । अपने बच्चे और अध्यापिकाएं जा चुकी थी । हेडमिस्ट्रेस मिसिज मित्रा अपने ऑफिस में एक सहायक अध्यापिका के साथ बैठी कुछ काम कर रही थी । मुझे देखते ही उन्होंने पूछा क्या फॅमिली लग रहे हैं? मेरी बेटी का ऍम तो लंच के कुछ देर बाद ही चली गई । चली गई किसके साथ? मैसेज? मित्रा ने अपनी सहायक रिशपाल की ओर देखते हुए कहा संजय बाबू, हम अपने बच्चों का तो ख्याल रखते हैं । बिना किसी गाजन या जिम्मेदार अभिभावक के । हम किसी के साथ बच्चों को स्कूल टाइम दे, बाहर जाने की इजाजत नहीं देते । क्यों ऍम से पूछ ले ये उनकी क्लास टीचर हैं । भाजी मैसेज मैं ही कह रही हो, लेकिन कौन ले गया उसे आपकी बहन और कौन मैसेज मित्रा नहीं रुखाई से कहा मेरी बहन मेरे हैरानी से कहा मेरी बहन तो मुंबई में रहती है और वहाँ आई भी नहीं शॅल थी, हुई है । अपने इस पालने सहानुभूति है कहा लेकिन जो औरत यहाँ आई उस पर शक करने की कोई वजह नहीं थी । रहे बडी का आई थी । बहुत ही संभ्रांत महिला थी और फिर सीधे मेरे दफ्तर में नहीं । यहाँ से बात मैसेज मित्र ने पकडा नहीं हूँ । मुझे उसने अपने को आपकी बहन बताया और कहा कि आप लोग घूमने जाने वाले हैं इसलिए मैं अपनी भतीजी यानी मम्मी को लेने आई हैं । उसने बताया कि आप लोग कार्य में व्यस्त हैं इसलिए वहीं चली आई हैं । लेकिन हुआ क्या है? क्या कोई खास बात हो गई? वॅार घर नहीं पहुंची और मेरी कोई बहन यहाँ नहीं आई । संजय बाबू ऍम नहीं था । ऍम इतना घबराए हुए स्वर में बोली अब मामले की गंभीरता और अपनी गलती समझ चुकी थी । उन्होंने कहा आप हमारी पोजिशन को भी थोडा समझे । कोई बडे घराने की औरत कार में पिछले वर्दी पहले ड्राइवर चला रहा हूँ । हमारे पास आती है तो अपने को आपकी बहन बताती है । उस की बातचीत चालढाल और व्यवहार में कुछ भी ऐसा नहीं था जिस पर शक किया जा सके । फिर हम उसके कहने पर अविश्वास करें भी तो कैसे? मैसेज मित्रा को मेरी बेटी की चिंता नहीं थी, जितनी की आपने तो उसकी गायब होने की जिम्मेदारी से छुटकारा दिलाने की थी । उनका औपचारिक दफ्तर के बाबू जैसा स्वर मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा । इस वक्त मुझे जरूरत थी मानवीय सहानुभूति की, लेकिन हर जगह वही ठंडी औपचारिकता मिलती है । कहीं भी लोग आप से जुडते नहीं तो मैंने कुछ रुखाई से कहा लेकिन ऍफ का पहचानती थी ये तो आपने गौर किया होता । अब आप बता रहे हैं तो खाया ला रहा है । हमने उस औरत को पहचानती नहीं थी । लेकिन उस वक्त हम इस बात पर गौर नहीं कर सके क्योंकि उसने बडे ही प्यार से पम्मी को अपनी बाहों में भरते हुए कहा मुझे पहचान नहीं रही है तो अपनी बुआ को हाँ कैसे पहचान होगी । जब एक साल की थी तब दिनभर मेरी गोद में रहती थी तो उस वक्त ही बच्चे याद के से होगी । फिर हमें भी उस सहिल मिल गई ऍम नहीं कहा अरे रबर की गुंडा भी नहीं, नहीं नहीं उसे देखते यूज पर लट्टू हो गई थी और जब उसने अपनी कार दिखाई तो हमें खुद ही उसे बुआ जी बुआ जी कहती हुई कर में घुमाने की जिद करने लगी थी । क्यों? मैसेज मित्रा यही कहा था ना? उसने? हाँ यही तो मुझे याद आ रहे हैं । उसमें पानी को गोद में उठाकर उसे आपने कहा दिखाते हुए पूछा था पानी में घूमने चलेगी, कैसी कार थी वह? मैंने पूछा हूँ ठीक से नहीं देखा, नहीं लिया खाली झंडा यानी कि यहाँ मैंने दो कार्य देखी थी । दे गाली और दूसरे नीली काली कार में तो मैं खुद ही बैठ कराया था । नीली कार रही होगी । रहे तो क्या माधुरी आई थी यहाँ? मैंने सोचा फिर पूछा दे औरत कैसी थी? देखने में पढी लिखी लगती थी । ढंग साफ था पर बहुत नहीं साधारण सी थी । बहुत खूबसूरत न बदसूरत था बहुत कीमती आसमानी रंग की साडी पहनी हुई थी नाॅट मित्रा ने का ब्रेक काफी सुंदर थी और गोरी थी । मैं इस पाल का चेहरा उतर गया । वे अपनी चीज की बात का प्रतिवाद करना चाहती थी पर चुप नहीं । मैं कुछ समझ नहीं सका । पहले में सोच रहा था कि शायद चलाने की कार में माधुरी आयो और मम्मी को बहकाकर ले गई होगी । लेकिन मैं साल के कथन से लगता था कि जय नहीं आई थी क्योंकि माधुरी तो सुंदर और खूब गोरी थी । लेकिन दूसरी ओर मैसेज मित्रा भी ये कह रही थी कि वह काफी सुंदर और गोरी थी । होलिया माधुरी के बारे में लागू हो सकता था लेकिन फिर ऍम रही थी कि वॅार नहीं थी ऐसा मैं सब कुछ समझ गया । नेपाल जवान और खूबसूरत थी । कुछ नदी नहीं, बहुत खूबसूरत राशि हुए ॅ, पुष्ट डॉल, अंग डाॅक्टर, रंग रूप और यौवन तो यही बात ही जिसकी वजह से मैं कॉल को माधुरी खूबसूरत नहीं लगी होगी । फिर भी इसके आधार पर मैं किसी निश्चित नतीजे पर नहीं पहुंच सका । अगर मान भी लें कि माधुरी आयु होगी और ताली के लिए मेरे ऊपर दवाब डालने के उद्देश्य से पम्मी को भय का अगर अपने साथ ले गई तो आखिर कवाई कैसे आई? चंदानी की यहाँ से जनना चला था । तब घर में ही थी और उसने यह काम खाली पानी में जगह की असफलता के बाद ही किया होगा । लगता है मेरे घर से निकलने के बाद जघन्य चंदानी को मोबाइल किया और तब चंदानी ने पानी को गायब करने की योजना बनाई । चंदानी ने टेलीफोन पर मुझे धमकी भी दी थी कि फॅमिली ले लेगा । मैं इन सब बातों को सोच रहा था कि तभी मिसेज मित्रा ने पूछा संजय हूँ, आपको ठीक मालूम है कि क्या आपकी बहन यहाँ नहीं है । तो मेरा मुझे अच्छी तरह मालूम है कि मेरी बहन यहाँ नहीं है । आती है तो मेरे पास ही रहती हैं और मैं तीन बजे से घर में ही हो । उसके आने पर मुझे ना मालूम होता । ये नामुमकिन है । ऍम मुझे और आप सबको बेस को बनाया गया है । आप का मतलब है पाॅल, मैं यही खयाल है । तब हमें पुलिस को खबर करनी चाहिए । आप देखना कर रहे हैं पुलिस एक्शन के लिए मैं घबरा उठा । यही थी मेरी कमजोर नस जिससे चंदानी समझता था तो मैं समझता था कि मैं पुलिस के पास जा नहीं सकूंगा और वाह वाह पर किसी भी तरह की जोर जबरदस्ती कर सकता है । पर मैंने अपनी घबराहट को जाहिर होने नहीं दिया और कहा हाँ मैं जरूर रिपोर्ट करनी चाहिए । वो मैसेज मित्र ने टेलीफोन की ओर हाथ बढाया । अभी तक मैं पुलिस के पास जाना नहीं चाहता था पर अब तो मेरी बेटी खतरे में थी । इसके आगे मुझे अपने खतरे की कोई परवाह नहीं थी । फिर भी मैं सारी बातों पर सोचने के लिए समय चाहता था । फॅसने कहा आप तकलीफ न करें, मैं खुद खाने जा रहा हूँ । ठीके संजय बाबू मैसेज मित्रा ने कहा किसी तरह की मदद की जरूरत हो तो बताइए । गांॅव बडे अफसर है । जरूरत पडेगी तो मैं उनसे भी पुलिस ॅ होंगी । पुलिस कोई ढिलाई नहीं दिखाएगी हूँ । मैं सच मित्रा को धन्यवाद देकर चला गया । पर मैं सीधे थाने नहीं गया आपने थाने जाने के बाद मैंने इसलिए कहीं थी कि कहीं मैसेज मित्रा टेलीफोन कर दें । लेकिन ये मैंने तय कर लिया था कि अगर कुछ नहीं हो सका तो मैं जरूर पुलिस में रिपोर्ट कर दूंगा । मेरे साथ होना होगा होगा । मुझे अपनी परवाह नहीं थी । स्कूल से भी सीधा मैं घर आया । मन में कोने में हल्की सी उम्मीद थी कि शायद पानी अभी आ गई होगी । राष्ट्रीय में अपने साथ ही किसी लडकी के साथ उतर कर खेलने लगी होगी । लेकिन कितनी वेस्ट फूफी की बात है । अभी थोडी देर पहले मैसेज मित्रा ने बताया था कि एक औरत उसे ले वाले गई थी । फिर भी मैं सोच रहा था कि शायद वहाँ गई होगी तो मैं सचमुच आई नहीं थी और पुष्पा उसी तरह बैठे हो रही थी । जैसा मैं उसे छोडकर गया था । मुझे अकेला वापस आया, देख कर रहे । समझ गए कि पाँच ही नहीं मिली वो और भी फफककर रो पडी में कुछ समझ नहीं पा रहा था की क्या घरों को मेरी बेटी गायब हो गई थी और पत्नी बैठे आज सुबह रही थीं चाहे सकता दोषी नहीं था । मजबूरी की हालत में शायद अपने आप को दोष देना आदमी का स्वभाव होता है । पर यहाँ सवाल स्वभाव का नहीं था । सचमुच ये हालत मेरे ही पैदा किए हुए थे । ना मैं अपनी जान के डर से भागा होता और न ही हालत पैदा होते हैं । और कौन रोता देखकर आदमी अपने आप को मजबूर अनुभव करता है? नहीं पुष्पा के पास गया और उसे अपनी बाजुओं में भरकर साफ ना देने लगा तो वो नहीं पुष्पा मैंने कहा मैं अपने शब्दों को निरस्त पडता महसूस कर रहा था तो फिर जैसे शब्द अपने आप निकलते चले जा रहे थे तो वो नहीं ऍम इससे छोटा होता जा रहा है । जो नहीं सब ठीक हो जाएगा । लेकिन मैं सिर्फ कह रहा था मैं नहीं जानता था कि सब कुछ कैसे ठीक हो जाएगा । जैसा कि मुझे विश्वास हो चला था । पब्लिक को मातृ ही लिवा ले गई थीं लेकिन कहाँ नहीं गई होगी? कहाँ रखा होगा? उसने पान नहीं हूँ, ये सब मुझे पता नहीं था और अगर मुझे पता ही हो कि कहाँ रखा है तो कैसे उसे ले जाऊंगा । ये भी तो नहीं सोच पा रहा था ना मैं चांदनी और उसके साथियों को पता था कि मैं पुलिस के पास नहीं जा सकता था और जब पुलिस के पास नहीं जा सकता था तो अकेले मेरे बोलते कि ये बात नहीं थी कि चंदानी के गुंडों के चंगुल से अपनी बेटी को छुडा लाया था । मेरी एक कमजोरी समझकर उन्होंने ये किया था वो सचमुच मैं कमजोर था और चंदानी का कुछ नहीं बिगाड सकता था । अपनी इस कमजोरी का एहसास कर में मन ही मन अपने आपको अपमानित अनुभव करने लगा हूँ और पुष्पा को ढांढस बांधने में भी मेरी हिम्मत अंदर से ना रह गई । हम जैसे कमजोर लोग इसी तरह अपमान सहते हुए जिंदा रहते हैं । लेकिन ऐसा मुझे लगा कि मैं कमजोर नहीं हूँ तो एक अमित का नहीं हुआ था । सारी बातें नहीं होने से मेरे दिमाग में बैठने लगी । चंदानी और उसके साथियों से गलती हो गई थी । उन्होंने अपने सारी योजना गलत हिसाब के आधार पर बनाई नहीं । सबसे पहले तो उन्हें यह पता नहीं था कि ताली मेरे पास सचमुच नहीं । मैं गायब हो चुकी है, ये भी नहीं जानते थे और अगर उन्होंने पम्मी का अपहरण डाली के लिए किया था तो मैं ये तालियों ने किसी भी तरह नहीं दे सकता था । इसलिए ताली के आधार पर मैं उनसे किसी तरह की सौदेबाजी करने के बजाये हम नहीं कोई छुडाने का कोई और उपाय करूंगा ये उन्होंने नहीं सोचा था । दूसरा उपाय सिर्फ पुलिस की वजह लेना हो सकता था । इसके अलावा ऐसा कोई रास्ता नहीं था जिसे अपना सकता । पम्मी का अपहरण चाहे किसी ने भी क्या हो जाए । चंदानी ने चाहे मान सिंह के भाई ने हैं, मैं यही सोचता था कि मैं पुलिस के पास जाने की हिम्मत नहीं कर सकता पर उन्हें नहीं मालूम था कि मैं मम्मी से कितना प्यार करता था और यही उनकी गलती थी । हर चीज को ताकत के आधार पर आंकने वालों ने भी ये नहीं सोचा था कि प्यार की ताकत हर ताकत से बडी होती है और पुष्पा मेरी सारी दुनिया थी और यह दुनिया मुझे अपनी सेहत और जान से ज्यादा प्यारी थी । उनका ये सोचना सरासर गलत था कि अपनी जान बचाने के लिए अपनी बेटी को उनके हाथों में बडा रहने दूंगा और पुलिस के पास नहीं जाऊंगा । ऍम उठकर कमरे में चहलकदमी करने लगा । सारी बातों पर विचार कर लेने के बाद मैंने पालने के गायब होने की रिपोर्ट पुलिस में लिखवाने का पक्का निश्चय किया । तब मैंने कुछ ना कुछ के बारे में बताया तो जरा ठंडा रखा । बैठाने जा रहा हूँ । अब होने से काम नहीं चलेगा । थोडी हिम्मत और सब्र से काम लेना पडेगा तो छत तक कुछ ना कुछ नहीं बोली । फिर उसका होना हो गया । सुनी सुनी आँखों से मेरी ओर देखते हुए उसने पूछा वो स्थान पर क्यूँ मम्मी को किसी तरह भी छुडवाया नहीं जा सकता हूँ । लेकिन थाने जाना क्या ठीक होगा हूँ, ठीक क्यों नहीं होगा? अब मुझे इस बात का कोई डर नहीं है कि मेरे साथ क्या होगा । अवल तो मैं सिर्फ बनने के गायब होने की रिपोर्ट करूंगा लेकिन अगर जरूरत पडी तो मैं सारी बातें बता दूंगा । जो होगा देखा जाएगा । मेरा ये मतलब नहीं । पुष्पा ने कहा मैं सोच रही थी कि मम्मी के हाथ में ये ठीक हो गया नहीं । क्यों नहीं होगा कहीं उसके लिए कोई खतरा ना पैदा हो जाये । खतरा अरे कैसा खतरा मैंने सुना है । बच्चों को गायब करने वाले रुपये की मांग करते हैं, अखबारों में ही पडा है मैंने वहाँ से सब मैंने कहने को कह दिया और पुरुष को की बात में वजन था । उसका कुछ नाराज हो गयी । तानाशा मारते हुए उसने कहा, जब मैंने तुमसे पुलिस में रिपोर्ट लिखा देने के लिए कहा तब तो आगे पीछे सोचते रहे । अब जब बेटी की जान पर बनी हुई है, पुलिस में खबर कर देने से बेटी की जान जाने का खतरा है तब तो मैं बहादुरी सोच रही है । मैं फिर बेचैनी से कमरे में चहलकदमी करने लगा । अभी थोडी देर पहले पुलिस में रिपोर्ट कर देने को मैंने जो पक्का निश्चय किया था वो दिखता मालूम हुआ । फिर यह तय करने की कोशिश करने लगा कि क्या करूँ । तभी पुष्पा की आवाज सुनाई थीं । सुनो हम इंतजार करना चाहिए किसका जिन लोगों ने ॅ क्या है उन का हमें इंतजार करना चाहिए कि अखिर में क्या करना चाहते हैं । लेकिन क्या ठिकाना कि वह हमें खबर करेंगे । अगर वे हमसे कुछ चाहते हैं नहीं तो फिर मम्मी को गायब क्यों? क्या पुष्पाणि कहा मैं जरूर खबर करेंगे पुष्पा के बाद शंकर मुझ से कुछ उत्तर देते नहीं बना । मुझे तो उकसा हुआ की इस हालत मेरी पुष्पा कैसे शांत और सुव्यवस्थित ढंग से सोच रही थी । है । सभी औरतों के बारे में नहीं जानता । लेकिन शायद जहाँ पुष्पा की बुद्धि काम नहीं करती, वहाँ करते हमेशा शांति चित्र होकर सोच सकती । फिलहाल पुलिस में रिपोर्ट लिखाने का इरादा हम ने छोड दिया । ऍफ गायब करने वालों के संदेश का इंतजार करने लगे । जाडे के शाम जल्दी ही गहरा गई । मेरा धैर्य खत्म हो रहा था । रह रहे कर मुझे पम्मी का खयाल आ रहा था । उसके बिस्तर के पास उसके खिलौने जैसे उसका इंतजार कर रहे थे । जब भी मेरी नहीं रहा, उन खिलाना थी और पडती मैं आशंका ऐसी होता कि कहीं उसके लिए कोई खतरा ना हो जाए जो उसमें लगभग इसी समय घर आया करता था । घंटे बजाते ही कमी आकर मेरे पैरों से ले पड जाती है और उस चक्कर मेरी गोद में आ जाती है । आज ये घर उसके बिना सुना सुना लग रहा था । उसे बचाने के लिए मैं कुछ भी कर सकता था । अगर कोई कहता कि उसे बचाने के लिए हत्या करना जरूरी है तो शायद नहीं, अभी कर बैठा हूँ । लेकिन ऐसा कोई था नहीं तो जो यह बताता की मुझे क्या करना था । बस अनिश्चय, वार पन्नी का अपहरण करने वालों के संदेश का इंतजार शाह गहरी और अंधेरी होती जा रही थी । मैं उठ खडा हुआ हूँ । कुछ न करने से कुछ करते रहना बेहतर था । दबी मोबाइल बज उठा है ।

PART 6 (B)

ऍम उठाया उधर से आने वाली आवाज में पहचान नहीं सका । शायद चंदानी आवाज बदलकर बोल रहा था क्या उसका कोई और साथ ही था? उसने कहा संजय बोल रहा हूँ । अपनी आवाज से घबराहट का चिन्ह मिटाने की कोशिश करते हुए मैंने कहा हो तुम क्या चाहते हूँ, वही रकम डाली या अपनी बेटी ॅ तो तुम खुद ही समझ सकते हो । मैं समझता हूँ तुम अपनी बेटी के लिए परेशान हो । बम्बई का जिक्र आते ही मैं चला सब पडा ऍम । अब जो कह रहा हूँ ध्यान से सुनो मैं रहूंगा नहीं । मेरी बात का जवाब देने की बजाए किसने कहा अगर अपनी बेटी चाहते हो तो जैसा मैं कहूँ वही करूँ क्या बीच में मैं तो लोग उधर से बोलने वाले युवक नहीं लुढककर का जब मैं तुमसे कुछ पूछूँ तभी जवाब तो तुम्हारे यहाँ से बढकर लेकिन लगभग तीस पैंतीस किलोमीटर दूर पडेगा । वहाँ एक चौकियां बोट क्लब है । निताई चौधरी किराये पर मोटर वोट देता है, सीजन नहीं है इसलिए हिला हवाला करेगा लेकिन दस पांच रुपये ज्यादा देने से मोटर बोर्ड दे देगा तो उसे पांच मिनट में चलाना सीख लोगे । उसी मोटर बोर्ड पर तुम किनारे के पास ही रहना थोडी देर बाद तो में हमारे आदमी मिलेंगे । वही तो मैं बताएंगे कि आगे क्या करना है । लेकिन हाँ इस बार ताली लाना ना बोलना वरना अपनी लडकी को कभी देख नहीं पाओगे । और हाँ, अगर अपनी लडकी को जिंदा देखना चाहते हो तो पुलिस को भी खबर मत करना । हम तुम्हारे घर की निगरानी करेंगे, कोई बाहर नहीं निकलेगा । अगर कोई कहीं गया तो तुम्हारी लडकी जिंदा नहीं बचेगी और न तुम बचोगे । इसे अच्छी तरह समझ लो । बस ज्यादा से ज्यादा आठ बजे तक बढ । कल पहुंचाओगे उधर से संपर्क टूटने क्या आवाज आई एक्शन तक मैं सदमे की हालत में खडा रहा हूँ । मेरी फोन पर मुझे जो कुछ भी करने के लिए कहा गया था उसके लिए रुपयों की जरूरत है तो पार महीने का था । इसलिए दोस्तों से कर्ज मिलना मुश्किल था । मोदी मेरी मदद कर सकता था । वो मोदी से महीने भर तक नगद उधार सामान हम लेते थे लेकिन उससे नगद कर्ज कभी नहीं लिया था । उसके ऊपर मेरे कुछ एहसान भी थे । फॅस बस्ती में से उसके मकान का नक्शा बना कर दिया था जिसके अप्रूव होने में जरा भी दिक्कत नहीं हुई थी । तब से वह मेरे लिए हर काम करने को तैयार रहता है । इस पर भी मुझे रुपये के लिए कैसे को झपसी हो रही थी । परहेज ऍम खोज का वक्त नहीं था हूँ । मैंने रुपयों के लिए पूछा । मुझे कुछ रुपयों की जरूरत है । आप दे सकेंगे जरूर पिता चाहिए । मोदी ने कहा हूँ दो हजार रुपये से कम चल जाएगा । खुदरा कीजिए, हजार के नोट नहीं । मोदी नहीं रुपये गिनकर मेरी ओर बढा दिया । एक का एक मुझे एक बात और याद आई । मोदी के पास एक स्टॉल भी थी । जब यहाँ रहने के लिए आया तो वह बस्ती बहुत वीरान थी । दो दो सौ मीटर फैसले पर कुछ खडते और बाकी वस्ती अभी बस ही रही थी । उन्हीं दिनों मोदी ने रजत के लिए पिस्तौल खरीदी थी । मैंने उससे पिस्तौल भी मांगी । अच्छा नहीं संजय बाबू पिस्तौल में आपको नहीं दे सकता । माफी चाहता हूँ क्यूँ? क्या मुझ पर विश्वास नहीं तो ऐसी बात नहीं है । विश्वास तो बहुत है । आप रुपये जितने चाहे ले जाएँ पर स्टॉल के मामले में इस वक्त में आप पर भरोसा नहीं कर सकता । मोदी ने साफ शब्दों उन्होंने कहा क्यों आप बहुत बदहवास और खबर आए हुए हैं । इस हालत में आपके हाथ में पिस्तौल होना खतरनाक है ना बाबा ना, लेकिन मामला क्या है? कुछ बताएं शायद में आपकी मदद कर सकूँ नहीं मुझे कोई मदद नहीं चाहिए । तो अगर आप अपनी पिस्टल दे सके तो देते हैं सारी । मोदी ने कहा तो स्टॉल में नहीं दे सकता हूँ आपको निशानेबाजी की प्रैक्टिस के लिए इतनी रात गए स्टॉल नहीं चाहिए । ये मैं समझता हूँ और अगर खतरे आधे की बात है तो पुलिस में क्यों नहीं रिपोर्ट करते थे । चलिए मैं चला जाता हूँ उसके साथ । धानी चार से मेरी जान पहचान भी हैं । पुलिस के पास जाने के बाद से मेरे होश को मैं हो गए । मैं वहाँ ठहरने में भी घबराने लगा क्योंकि इस हालत में हो सकता था की मोदी को सारी बात समझानी पडती या फिर कोई बहाना बनाना पडता हूँ और कोई झूठी कहानी गढने की इस वक्त मुझे जरा भी ताकत नहीं थी । नहीं ऐसी कोई बात नहीं है । खास यही जरा शहर जाना था इसलिए सोचा इफाजत के लिए पिस्तौल मिल गया तो लेता चलूँ लेकिन जाने दीजिए । मैंने कहा और दुकान से बाहर आ गया । अंधेरा और भी गाडा हो गया था । अभी मैं सडक बाहर भी नहीं कर पाया था कि पीछे से किसी ने मुझे पुकारा । जवाब वो सडक के किनारे जहाँ काफी अंधेरा था, एक बडी कार खडी थी उसी में से किसी ने मुझे पका रहा था । कौन था गए मैं पास पहुंचा हूँ । एक का एक शेर से पास तक घुसने से भर उठा । कार में माधुरी बैठी थी । उसने कहा का दरवाजा खोलकर कहा ऍम हूँ, एक मिनट बैठे हैं और आप ऍम रहे हैं । एक गुजरती हुई कार की रोशनी छत भर के लिए उसके चेहरे पर पडी पल भर के लिए मैं स्तब्ध रह गया । अपने गुस्से के बावजूद मैं उसके रूप से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका । कैसा जादू था उसमें? पर कैसा नीच काम किया था उसने । मेरे साथ उसे एक जोर का चांटा मारने से मैं अपने को बडी मुश्किल से रोक सका । मैंने कहा तो शर्म नहीं मेरी आवाज में मेरा गुस्सा सारी करवाहट बडी हुई थी । आप ऐसी पार्टी क्यों कर रहे हैं? ये बच्चे ना एक मिनट के लिए मैं आपकी मदद दूर कर सकूँ । माॅडल की से कहा तो मेरी मदद करोगी । अभी तक हमारा मन नहीं भरता । उस छोटी बच्ची को ले जाकर तुम्हारा जी ठंडा नहीं हुआ जो मेरी और मदद करने चली आई हूँ । मैं तुमसे बात भी नहीं करना चाहता हूँ । ऍम थी, मजबूर थी मैंने वो छुडाने के अंदाज से कहा फिर थोडा कर पूछा तो मेरी बच्चे ले ठीक है लेकिन मैं और कुछ नहीं बता सकती भी कह रहे हैं तो उनका समझाती हूँ तो मैं उसे मारा पीटा तो नहीं । मैंने उत्सुकता से पूछा तो मैं कसम खाकर कहती हूँ कि वो ठीक है लेकिन आप नाराज ना हूँ । आप नहीं जानते की मैं कितना बडा खतरा मोल लेकर आपसे बात कर रही हूँ । इस तरह में यहाँ पर निगरानी रखने के लिए भेजी कहीं हूँ । अगर कहीं चंदानी को पता चल गया कि मैं आप से बात कर रही हूँ तो क्या नहीं कर डालेगा? गैस सब झूठ है । अगर तुम इतनी मजबूर हो तो क्यों उठा रहे हो ये खतरा हूँ । मैं सच बोल रही हूँ मेरा विश्वास करूँ तो हम नहीं कहा है । मैं फिर धोका इसमें नहीं बता सकती । तो फिर क्यों नहीं हो क्या चाहती हो सिर्फ एक ही मैं तो कह रही हूँ सुन लो सिर्फ पांच मिनट के लिए । आपको नहीं मालूम कि मैं आपके लिए क्या महसूस करती हूँ । झंडू में जाता हूँ । संजय बाबू इतने कठोर ना बनूँ मेरी जिन्दगी क्या आ रही है ये आप नहीं जानते तो आपकी दुनिया बहुत साफ सुथरी और सीधी साधी है । आप सोचते हैं कि आज बुरे लोगों के हाथों में पड गए । मैं भी उन्हें जी कहती हूँ और अब चंदानी मेरा बदन भी छोटा है तो नफरत से भर जाती है क्योंकि मुझे प्यार से नहीं बल्कि यही याद दिलाने के लिए होता है की गैमा लेके अगर मैं गुलाम मैं मौके की तलाश में थी एक ऐसे आदमी के साथ जिंदगी बिताने कि तलाश में थे जो सचमुच इंसान हूँ । यही मौका है मैं जानती हूँ की उस सेफ डिपॉजिट बॉक्स में क्या है और उसकी अच्छी से अच्छी कीमत कहाँ मिल सकती है? बहुत कम भी मिलेगा तो एक करोड मिल जाएगा सर सोचिए संजय बाबू एक करोड रुपये और उसकी ताली आपके हाथ में है, इतने रुपये में है और आप एक नहीं जिंदगी है । सोच में पड गया उसकी बातों में बनावट नहीं भी मुझे विश्वास नहीं हो रहा था । नहीं वह मुझे अपने साथ नहीं जिंदगी बताने के लुभावने सपने दिखाकर रुपए खुद अपने कब्जे में तो नहीं करना चाहती थी । यहाँ मुझे मीठी बातों में फंसाकर आसानी से ताली हथियाने की एक और कोशिश तो नहीं कर रही थी । तभी मुझे मम्मी का खयाल आया मैं मासूम बच्ची जिससे शायद नहीं मालूम था कि उसके साथ क्या हो सकता था । मैंने कल की से कहा और अपने बच्चें बचाये, घर को उधर जाने दो अपनी पत्नी और बेटी को सलाह दो के हवाले कर दूँ रे मुझे एक करोड रुपये के बिना भी चाहते हैं ऍन बता रहा था मैं बहुत ही नाम आ गोल औरत है । ऍम पे देखे बात है और कह भी कह सकता है लेकिन मेरे साथ आप उन सबको भूल जाएंगे । करोड रुपये के साथ कोई ज्यादा चिंता दुखी नहीं रह सकता हूँ । फिर मैं भी नहीं होंगे क्या वो तो अपने बारे में बहुत बढ चढकर सोचती हूँ लेकिन और कोई चारा भी नहीं आपके पास । माधुरी ने रूखाई से कहा आप थोडा शांत होकर सोचें कि तली लेकर वे आपकी बच्ची को वापस कर देंगे । आप के पच्चीस समझदार है, लोगों को पहचान सकती है । उंगली उठाकर बता सकती है कि किसने उसे उठाया और किसने उसे कैद में रखा । मुझे जगह और चंदानी को भी उनके पास सिर्फ एक रास्ता है कि उसे कहीं छिपा दें, पुलिस के पास जा नहीं सकते । आप को खुद अपना खतरा है । फिर अब अगर आप गए भी तो लडकी की जान से हाथ होंगे और किसी हालत में ये तो होना ही है । तो क्यों नहीं वह करें जिसमें आपको ज्यादा फायदा है उससे के कारण मैंने उसकी बात का कोई उधर नहीं दिया तो उसकी बातों में हार्दिकता का कहीं नामोनिशान नहीं था । हर बात के पीछे चालबाजी थी, ऍम था फिर गणित जोड बाकी और सिर्फ परिणाम था शायद है । सोच रही थी कि मैं उतना ही हिसाब ही हो जाऊंगा । झटके के साथ मेरे दोनों हाथ उसके गले पर पहुंच गए और उसे बुरी तरह झंग छोडते हुए मैंने कहा उससे पहले की मैं तुम्हारा गला घोट हूँ । तुम यहाँ से चली जाऊँ मुझे तुम्हारे यहाँ रुपये की तुम्हारे जरूरत नहीं है । बिल्कुल भी देखी नहीं है । क्या इससे पहले की वह मेरा प्रतिरोध कर दी आपने को मुझे छुडाने की कोशिश करती हूँ । मेरे ऊपर निर्णय नहीं । मैंने उसके वक्षों का दवाब अपने ऊपर महसूस किया । तब उसके होटल को अपने चेहरे पर एक मिनट के बाद में कार से बाहर निकल गया । चेहरे पर उसके हो टोका गीलापन फैला हुआ था । माना जीतना हो रहा था घर की ओर बढते हुए मुझे उसकी कार के इंजन के स्टार्ट होने की आवाज सुनाई थी जैसे मैं बहुत गुस्से में हूँ । झटके के साथ कार आगे बढी और अंधेरे में एक हो गए हैं ।

PART 7

भाग सात घर में कुछ तो बेसब्री से मेरे इंतजार कर रही थी । हूँ, दुखी है । अभी थी पर धोखा पहले वाला दौर खत्म हो चुका था लेकिन तूफान से हुई बर्बादी का पता तूफान के बाद ही लगता है । एक घंटे में ही रह क्या हो गई थी । अब उसका दमकता हुआ चेहरा यहाँ पड गया था और वह महीनों से बीमार पडी हुई और अब जैसे लगने लगी थी मेरी समझ में नहीं आ रहा था । मुझे क्या करूँ? निराश हो चुका था । मैं सिर्फ यह कह सका पुष्पा हम जो सोच रहे थे गलत था क्यों? क्या उन की कोई खबर नहीं आई? आई तो हम सोच रहे थे कि हमारा पलडा भारी रहेगा । लेकिन इस वक्त तो हम उन्हीं के हाथों में हैं । कैसे? क्या कहा उन्होंने वो जो कहते हैं हमें करना पडेगा । इसके अलावा और कुछ नहीं कर सकते हैं । अगर हम करेंगे नहीं तो मम्मी की जिंदगी खतरे में पड जाएगी । तो क्या मांग रहे हैं वही जो अब तक मांग रहे थे । यानि ताली और उसके बाद मैंने फोन पर सारी हुई बातचीत का ब्यौरा पुष्पा को सुना दिया । मेरे बात खत्म होने पर पुष्पा कुछ देर तक चुप रही । फिर उसने कहा लेकिन संजय अली है कहाँ? और सचमुच यही सबसे बडा सवाल था । फोन पर जो मेरी बातचीत हुई थी उसके लिए मैंने अपने आप को तैयार कर लिया था । इसलिए मैंने मोदी से रुपये मांगे थे । मैं चाहता था कि पुष्पा को सारी बातें बताकर बढकर लेक के लिए रवाना हो जाऊंगा । वहाँ जैसी की मुझे हिदायत दी गई थी मैं किराये पर मोटर बोट लेकर एक किनारे पर ही रहूंगा और आगे के निर्देशों का इंतजार करूंगा । शाह तो हर कोई मौका होता तो इस ठंडी अंधेरी रात में अकेला घने जंगल जैसे बढकर लेख में जाने की हिम्मत बिना करता । क्योंकि सवाल पम्मी को छुडाने का था इसलिए मैं सब करने के लिए तैयार हो गया था । लेकिन इस चक्कर में मुझे यह बात याद ही नहीं रही कि सबसे मुख्य बात तो स्थित अली बिना ताली के सारा किया धरा बेकार हो जाएगा ये मैंने सोचा ही नहीं था । लेकिन आप जब इस बात का खयाल आया तो मैं अंदर ही अंदर फिर आपने लगा । मैंने पुष्पा से पूछा हूँ कि जिस तरह हम अब तक बहाना बनाकर अपनी जान बचाते रहे हैं कि ताली हमारे पास ही है । क्या मैं ऐसा कोई बंदा फिर नहीं बना सकते । पुष्पा को छह तक मेरी और देखती रही । इस मुसीबत की घडी में भी उसके होटों पर एक हल्की व्यंग भरी मुस्कान खेल गई । उसने कहा ऍफ एक बार दिया जाता है । अगर दोबारा हम कहते हैं कि ताली हमारे पास है तो थोडी देर के लिए तो वे चकमे में आ सकते हैं । पर जब उन्हें ताली नहीं मिलेगी तो क्या खतरनाक नहीं हो जाएंगे । अब हमारे लिए कहीं कोई उम्मीद नहीं रह गई थी । पुष्पा ने कहा क्यों ना हम एक बार फिर से अपने घर की तलाशी करें । तलाशी लेना आसान बात नहीं थी । अच्छी तरह तलाशी, कोई ट्रेनिंग पाया, आदमी ही ले सकता है । लेकिन फिर भी हमने तलाशी शुरू कर दी । सबसे पहले मैंने अपने कपडे देखें वहां ताली नहीं थीं । फिर डेबल किताबें मिस्टर टकियों के खिलाफ लिहाफ जूते मुझे साहब डालें । पुष्पाणि बार फिर अपनी ड्रेसिंग टेबल संदूक अलमारियाँ वगैरा देखी । पम्मी के कपडे खिलौनों का डब्बा वगैरा भी देख डाला । घर का कोना कोना छान मारा । सारा सामान घर में बिखर कर इधर उधर फैल गया । पड ताली ना मिलनी थी ना मिले हैं हमने ठक्कर हार मानली वक्त भाग रहा था फोन पर जिस आदमी से बात हुई थी उसने कहा था कि मैं फोन की बात खत्म होते ही फौरन बढकर लेग के लिए रवाना हो जाऊँ । लेकिन मैंने करीब आधा घंटे बर्बाद कर दिया था फॅमिली से बातचीत करने में और पंद्रह मिनट यहाँ ताली खोजने में लग गए । मुझे अब तक रवाना हो जाना चाहिए था । लेकिन सवाल जहाँ कहाँ कहाँ था की दाल ही कहाँ है उसके बिना रवाना हो भी तो कैसी? कहीं से धीमी । लेकिन लगातार आती हुई आवाज जैसे अंधेरे में डूब गए । सारे घर को हिला रही थी । आवाज जारी थी । कहाँ से आ रही थी आवाज सामने का दरवाजा तो खुला था । मेरी आवाज कहाँ से आ रही है । हमदम साथ घर खडे हो गए और ये अंदाजा लगाने लगे कि कहाँ खटखट हो रही है । अगली बार खटकड होने पर तुरंत पता चल गया कि रहे आवाज पिछले दरवाजे से आ रही थी लेकिन कौन था है? हम भयभीत हो गए । उठकर दरवाजा खोलने की हिम्मत हम में से किसी की नहीं थी । घट कट की आवाज लगातार आ रही थी । आखिर बहुत हिम्मत करके मैं उठा । पुष्पा भी उठकर खडी हो गई । मैं तीसरा चल होंगी । उसने कहा कुछ कदम आगे बढने पर उसने फिर कहा लेकिन यह खाली हाथ पिछवाडे के दरवाजे पर जाना ठीक नहीं । उधर पर कुछ संस्थान रहता हैं । पढाई के दिनों में मैं हॉकी खेलता था उसकी यादगार के रूप में मैं कब जो इनाम में मिला था और एक हॉकी पडी थी । इसके सेवा मेरे पास कोई चीज नहीं थी जिसे हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता हूँ और वह हॉकी भी छत पर जीने की सीढी के नीचे बनी है । कोठारी में किबाड के पीछे रखी थी और कुछ न होने की वजह से मैंने उसी को निकाल लिया और सहमते सहमते पिछले दरवाजे के पास पहुंच गया लेकिन खोला फिर भी नहीं । अंदर से ही पूछा कौन है? जवाब देने के बदले बाहर खडे व्यक्ति ने फिर दरवाजा तेजी से बढ बढाया हो । दरवाजे की दरार से मैंने आंख लगाकर बाहर देखने की कोशिश की । बाहर जो भी था वह दरवाजे से लगकर इस तरह खडा था कि कुछ भी दिखाई नहीं दिया । मैंने सर पूछा कौन है दरवाजा फिर तेजी से बढ बनाया गया । अब मैंने देख लेना ही उचित समझा कि कौन है क्योंकि मुझे डर था कि अगर रहे इसी तरह दरवाजा पीटना रहा तो पडोसी भी उससे खो उठेंगे और बातचीत ही नहीं रह जाएगी । मैंने दरवाजे की सिटकनी धीरे से बिना कोई आहट किए खोली ताकि बाहर दरवाजे पर खडे व्यक्ति को पता ना चले हैं । लेकिन जो ही महीने से इतनी नहीं चेक इसकाे क्यों ही बाहर खडे व्यक्ति ने दरवाजे को इतनी मजबूती से अंदर की ओर ढेला कि मैं अपनी जगह पर खडा नहीं रह सका । दरवाजे पर कोई आदमी नहीं जैसे कोई रहते खडा था वो छह फुट ऊंचा दरवाजा भी उसके लिए छोटा लग रहा था और अपनी ऊंचाई के अनुपात में ही वह तगडा था । वह एक लंबा सा चेस्टर पहले था जिससे उसकी लम्बाई और अधिक लग रही थी । मेरे घर में आने के लिए उसने मेरी अनुमति की जरूरी नहीं समझे । अच्छा आई थी । आज के साथ उसने दरवाजा बंद किया और फिर भीतर सहन में आ गया हूँ और पुष्पा उससे मंत्र मुग्ध से देख दे रहे हैं । हाँ तो मिस्टर संजय उसमें बहुत कडी आवाज में कहा हूँ । मैं उसकी आवाज पहचान गया । वो वही आदमी था जिसने मुझे सुबह दफ्तर में फोन किया था यानी महान सिंह का छोटा भाई शैतानसिंह । उसने कहा हूँ, ऍम फोन किया था और तुम भाग निकले थे लेकिन बहुत से बच करने का नाम मुश्किल है । कहाँ है खाली मैं सिर्फ हैरानी में पड गया । अब तक हम सोच रहे थे कि हो सकता है ताली शैतानसिंह ले गया हूँ । पर उसके आने का मतलब था ताली उसने नहीं यानी चालीस सचमुच गायब हो गई थी । लेकिन आखिर गए कहां? अचानक मैं कुछ तय नहीं कर पाया कि उससे क्या कहूँ । अगर सच बोलता हूँ तो विश्वास नहीं करेगा । सच्चाई के साथ कुछ ऐसा ही होता है कि उस पर कोई अनायास विश्वास नहीं करेगा कि तालिक हो गई है । यही समझेगा की मैं बातें बना रहा हूँ । उसने अर्थपूर्ण नजरों से एक बार मुझे और फिर मेरे हाथ की हॉकी की ओर देखा । उसके चेहरे से ऐसा लगा जैसे मैं मुझे बहुत तो अच्छे से चीज समझ रहा हूँ । मानव कह रहा हूँ कि इस हॉकी से उसका कुछ बिगाड नहीं सकता है और उसका सोचना गलत भी नहीं था । पहला इससे मैं उस बाहर जैसे आदमी का क्या भी कर सकता था । बिना हम लोगों से पूछे हमारे ड्रॉइंग रूम की ओर इस तरह से बढ चला जैसे इस घर का मालिक वही हूँ । वहाँ पे आराम से सोफे पर बैठ गया हूँ । पीछे पीछे हम भी पहुंचे । आखिर हम चाहते क्या हो? मैंने उसकी उद्दंडता वार झल्लाकर पूछा हूँ क्या बाहर बार बताना पडेगा? उसने भी उसी ऐसे मैं जवाब दिया, डाली चाहिए मुझे खाली बिजी जवाब देने से पहले ही पुष्पा बोल पडी । फॅमिली नहीं हमारे पास कुछ बाकी जल्दबाजी नहीं । कुछ नहीं पानी में डाल दिया । मैं खुश, बाकी पुरानी ट्रिक दोहराकर यानी जिस तरह ताली अपने पास होने का वाहना बनाकर अपने जगह को टोला था, उसी तरह इस से भी कुछ कर देने के लिए बिन छुडाना चाहता था । पर पुष्पा ने सच बताकर साथ चौपट कर दिया । लेकिन पुष्पा जो भयंकर चार चल रही थी, वह मैं कुछ देर बाद समझा । उस वक्त मेरा दिमाग पुष्पा के जैसे की ओर नहीं गया था तो झूठ बोल रही हूँ । शैतानसिंह करीब करीब ठीक कर बोला मुझे कोई झूठ नहीं बोल सकता समझे इसीलिए तो सच बता रही हूँ । कुछ पाने कहा टाॅस हमारे पास नहीं है । अपने भाई डील डबल के बावजूद बडी फुर्ती से मैं उठा और झपट कर पुष्पा के पास जहाँ पहुंचा फिर उसका हाथ उमेठते हुए बोला मुझे से चाल चल रही हो, समझती हूँ कि तुम्हारा शौहर बच जाएगा । पर ये मेरा कुछ बिगाड नहीं सकता हूँ । सच सच बता दो ताली कहाँ है? पुष्पा अच्छी बडी उसकी फौलादी हाथों की जगह में भी बुरी तरह छटपटा रही थी । मेरी तबियत हुई कि दो तीन हाथियां उसे जड हूँ । पर इसके परिणाम की बात सोच कर मैं भी तो उठा और आखिरकार हॉकी दान कर उसके सिर पर जमाने के लिए जब तक मेरे हाथ सडकें पुष्पा ने कहा बताती हूँ बहुत अच्छी ऊपर भी रहा तो छोड दो पहले छह टन सिंह ने उसका हाथ छोड दिया । पुष्पा अपने हाथ का दर्द कम करने के लिए उसे दूसरे हाथ से मलती हुई । बोली फॅमिली सचमुच हमारे पास नहीं है । छह तानसिंह फिर उस की ओर झपटा लेकिन ये जातियों की वह कहा है पुष्पा नहीं कहा और उसकी ओर झपट्टा शैतानसिंह बीच में ही रोक दिया । अब मैं पुष्पा की बात समझा । उससे भी पता था कि सच बात पर शैतानसिंह विश्वास नहीं करेगा और सच बात उसने इस तरह कही थी जैसे मैं झूठ बोल रही हूँ और शैतान सिंह के जोर जबरदस्ती करने पर उसे सच बता रही थी जो वास्तव में एकदम झूठी उसकी आखिरी बात से शैतानसिंह चक्कर में पड गया तो कहाँ है ताली? उसने उत्सुकता से लेकिन पहले जैसे ही कडे लहजे में कहा जल्दी बताओ पता थी हो लेकिन अखिर हमें क्या मिलेगा? पहले डाली का बता बताओ वहाँ जी पुष्पा ने झगडालू औरतो की तरह हाथ नचाकर कहा हमको ही पढाने लगे । हम बच्चे नहीं हैं हूँ । समझ लो कि मैं तुम दोनों का क्या कर सकता हूँ । अभी हाथ का दर्द गोली नहीं होगी और तुम भी समझ लो कि हम धमकी से डरने वाले नहीं । पुष्पाणि का एक गरज कर कहा हूँ तुम यहाँ हमारा कुछ नहीं बिगाड सकते हैं । अभी मैं शोर मचा होंगी और सीधे पुलिस के हवाले करवा दूंगी और तुम्हारे शहर का क्या होगा? कल मेट्रो स्टेशन पर हुई वारदात की छानबीन अभी पुलिस कर रही है । देखा जाएगा जो होगा अव्वल तो उन्होंने किसी को धकेला नहीं और फिर पहले दो ही किसी के घर में घुसकर धमकाने के जुर्म में जेल की आवाज खाओगे और ऐसी हालत में ताली भी नहीं मिलेगी । तो मैं ताली की बात में तो रूप चाल की तरह काम किया । जब वो खाये वैसे की तरह शैतानसिंह शांत हो गया और फिर सोफे पर जा बैठा । कुछ देर चुप रहने के बाद उसने कहा भी गया तो तुम लोग आखिर चाहते क्या हूँ? पुष्पा को जैसे इसी मौके का इंतजार था । उसने छोड नहीं था । हमें हमें रुपये में कोई दिलचस्पी नहीं है । वैसे पर जैसे और जोर का चाबुक बडा जो मैं दिलचस्पी नहीं है । फिर क्या चाहते हो तुम लोग? उसने चौंककर कहा अपनी देती देगी कैसी बेटी कुछ और लोगों ने जो ताली चाहते थे हमारी बेटी को गायब कर दिया है और बेटी को लौटाने के लिए पैतालीस चाहते हैं अपनी बेटी को उनके चंगुल से छुडाने के लिए हमें उन्हीं को बताना पडेगा कि ताली कहाँ है । शैतानसिंह उठकर कमरे में टहलने लगा । फिर उसने पूछा हूँ तुम्हारी बेटी कहाँ है हूँ । हमने फोन पर हुई सारी बातें उसे बता दी है । यह भी बता दिया है कि क्या करने के लिए कहा गया है । शैतानसिंह हमारी बात ध्यान से सुनता रहा । हम ने अपनी बात खत्म की । दोस्त ने पूछा तो मैं ठीक पता है की डाली कहाँ है? हाँ पता है पुष्पा नहीं कहा तुम्हारे आने से पहले तक हमें पता नहीं था । दोपहर में जब जगह आया तो ताली नहीं थी । उस वक्त हम ने सोचा कि शायद तुम किसी वक्त आए और ताली उठा ले गए लेकिन तुम नहीं ले गए । तो अब हमें पता है कि ताली कहाँ है । मतलब के तुम अपने ख्याल से अंदाज से बता रही हूँ कि ताली कहाँ है । छह । थानसिंह ने शक में पढकर कहा ही नहीं हमें एक दम ठीक पता है कहाँ है अब ये मैं तभी बताऊँ कि जब हमारे पास हमारी बेटी आ जाएगी । ऐसे हर चीज नहीं है । लेकिन क्या पता तुम छोड बोल रही हो जैसा मजिलों की मुझे झूठ बोलने का नतीजा बहुत बुरा होगा । जानती होगी तो हम जिंदा नहीं छोडोगे । लेकिन मैं जो कुछ कह रही हूँ तो इस बात को अच्छी तरह समझकर कह रही हूँ । शैतानसिंह कमरे में टहलता हुआ कुछ सोचता रहा । फिर दरवाजे की वार पडता हुआ बोला आप मेरे साथ तुम दोनों को ही चलना होगा तो मैं ऐसे किसी को मैं अकेला नहीं छोडूंगा ।

PART 8

भाग आठ पिछले दरवाजे से निकल कर था में घने पेड की आड में खडी मोटर साइकिल पर जा बैठे । सबसे आगे शैतानसिंह, उसके पीछे पुष्पा और सबसे पीछे मैं संभलकर बैठने के लिए पुष्पा का बीच में बैठना आवश्यक था । पर इस तरह से शैतान सिंह को पीछे से पकडकर बैठा हूँ । मुझे अच्छा नहीं लग रहा था । लेकिन इस मौके पर मैंने चुप रहने को ही ठीक समझा । मुझे डांसिंग मोटर साइकिल काफी तेज चला रहा था फिर भी मुझे उसकी रफ्तार धीमी लग रही थी । मैंने उससे मोटर साइकिल तेज चलाने के लिए कहा । इस पर मैं थोडा कर बोला सीधी तरह बैठे रहूँ, अंधेरा नहीं देख रहा हूँ, देश चलाऊंगा था, शायद पहुंच भी नहीं पाऊंगा लेकिन कहीं मेरी बेटी को कुछ करना बैठे हैं । मुझे तुम्हारी ब्लॅक भी नहीं है । बच्चो क्या बैठे रहा हूँ । मोटर साइकिल की पिछली गद्दी पर मैं और पुष्पा जो क्या बैठे रहे हैं । जिस दौर से हम गुजर रहे थे उसका बोझ जैसे कुछ पा के लिए बहुत ज्यादा था । मैंने ढल से मेरे ऊपर टिकी बैठी थी । अच्छी बात है अभी अभी शैतान सिंह के सामने उस ने कितनी हिम्मत और दिलेरी से काम किया और अब कितनी असहाय लग रही थी वह मुझे दुख हुआ कि इस वक्त मैं उसे अपनी बाहों का सहारा नहीं दे सकता था । मुझे अगर बाते परेशान कर रही थीं जैसा की चांदनी ने मुझे बताया था, उसे लगता था कि शैतानसिंह ताली खुद अपने लिए चाहता था । ऐसी हालत में अगर वह मुझे शैतान सिंह के साथ देखेगा तो किस तरह पेश आएगा? कहीं ऐसा तो नहीं कि शैतान सिंह भी उन्हीं की ओर से काम कर रहा हूँ और वहां पहुंचकर आपस में मिलकर हमें मुझे पुष्पा और पत्नी को खत्म नहीं कर डालें । हमारा तुरूप का पत्ता सिर्फ यही था की ताली हमारे पास नहीं थी और हम यह कहकर धोखे में रख सकते थे कि हम ताली के बारे में जानते हैं । लेकिन ये बहुत कमजोर तुरूप का पडता था और कहीं उनके सामने अगर ये बेड खुल गया तब वे शायद हमें कतरकर डालने में ही अपने भला समझेंगे । ऑस्ट्रेलिया के रोगी की तरह मेरा बदन कम दे लगा । अपने ऊपर काबू रख पाना मुश्किल लग रहा था । भडकाऊ लेख पहुंचने में हमें करीब आधा घंटा लगा । खतरा शैतान सिंह को सब पता था । उसने दूर से ही इशारा कर के बता दिया कि वोट लग रहा है । दिन में सैलानियों की भीड की वजह से रमनीक लगने वाला बढ गल्ले रात के अंधेरे में साढे साढे कर रहा था । पांच से उस पार फरीदाबाद की असम की बत्तियां जगमगा रही थी । पर इस ओर घने पेड अंधेरे में खडे व्यक्तियों की तरह लग रहे थे । वोट क्लब में लगता था कोई नहीं था । सीमेंट सीट की छाज नौ वाला छोटा सा घर था और उसी की बगल में छोटी सी कोठरी थी । मैंने अनुमान लगाया क्लब का रखवाला नेता ही उसमें रहता होगा पर कोठी में भी एक का मन दे रहा था । शायद नेता या खाफी हो गया होगा तो अनजाने दरवाजा बड बनाने से मैं चलना पडेगा । इस तरह के क्लबों में एशोसिएशन के चौकीदारों का कोई भरोसा नहीं । ग्लब के प्रभावशाली मेंबरों को छोडकर ये किसी को कोई परवाह नहीं करते । पर ये समय इन बातों के सोचने का नहीं था । मैंने दरवाजा जोर से पीटा । मिठाई जाग रहा था और शायद चिलम पी रहा था । दरवाजा पीते ही उसने जोर से खाते हुए जवाब दिया फिर बडे बढाते हुए उठकर दरवाजा खोल दिया । सफेद दिख रहे बाल और खिचडी दाढी वाला एक तो मिला पतला आज मेरे सामने खडा था तो मुझे वोट किराये पर देते हूँ हो । मगर मौसम राॅड और दिन में रात के समय सिर्फ गर्मियों में कहकर उसने दरवाजा बंद कर दिया । एक्शन के लिए बहुत चक्कर है गया मैं अगर और कोई चारा नहीं था मैंने फिर दरवाजा बेटा और जब कई मिनट बाद उसने खोला तो मैं कोठारी के अंदर दाखिल हो गया ताकि रहे फिर से दरवाजा बनना कर सके । मैंने का मुझे बहुत जरूरत है । रात भर के लिए मोटर बोल दे तो हम समझता है की क्या जरूरत है । हमारे पास नाम नहीं है, तुम जाओ । मुझे संकट के समय भी उसके भोलेपन पर हंसी आ गई । मैंने फिर कहा तुम गलत समझ रहा हूँ । हम खूब समझता है यह बाल धूप में सफेद नहीं किया तो महाराज ऐसा नौजवान रात का मोटर बोर्ड पर छोकरी को घुमाने के लिए बहुत आता है और देखो कैसी कालीरात है इसमें कभी नाव फॅमिली तो ले की गोद में ही जाओगे ना बाबा ना हम नाथ नहीं देगा । नेता ही मेरी बात हूँ । मैंने उसे समझाने के स्वर्ग कहा । किसी छोकरी और घुमाने नहीं लाया । मेरी चार साल की बेटी का बदमाश उठा ले गए । मेरी पत्नी और एक दूसरा आदमियों से उनके जंगल से छुडाने जा रहे हैं । बदमाशों नहीं हमें यहाँ बुलाया है तो तुम चाहो तो खुद चलकर देख लो । आपका जितना खिलाए लगे ले लो और मुझे मोटर बहुत है तो मोदी से जो रुपए मांग कर लाया था मैं सब का सब मैंने उसके हाथ में रख दिया । नेता ही अपनी कमजोर आंखों से कुछ आ मुझे देखता रहा हूँ । फिर उसने पूछा तो मैं अकेले जाओगे गुंडों के पास आप मकर पुलिस को क्यों नहीं खबर करके मेरे साथ में ले लिया? नहीं । गुंडे ने कहा है पुलिस को खबर करने पर वो मेरी बेटी को मार डालेंगे । निताई को मैंने जो नोट दिए थे उन्हें लौटाते हुए उस ने कहा यह रुपया तो अपने पास रखो । हम आपकी बेटी के वास्ते सबसे अच्छा मोटर वोट देगा । पच्चीस हॉर्स पावर वाला ना आप को कुछ हो गया तो अभी से कर मत करना । हम देखेगा जो होगा वो क्लब के पीछे ही घाट पर उतरने की सीढियां थे । उधर से ही निताई मुझे नहीं चले गया । उसने इधर उधर टॉर्च की रोशनी से ही अंधेरे को चीरती हुई उस की रोशनी गंदले पानी पर इधर उधर दौडती रहीं । फिर एक स्थान पर जाकर रुक गई । वहाँ आठ दस छोटी नावें बंधी थी । रोशनी के उसको ले के आगे घना दे रहा था । मुझे ये भी नहीं पता चल रहा था कि कहाँ जमीन थी और कहाँ पानी बस अनुमान ही लगा सकता था । निकाई अपनी उमर के बावजूद लगभग कर एक नाव पर चला गया । वहाँ से उसने दूसरी नाव पर छलांग लगाई । तीसरी नाव पर इसी तरह कई नावें पार करता हुआ वही पर हो गया । दो शन तक अंधेरे में उसकी छाया चुकी हुई टटोलती रही । फिर हल्की धड धड की आवाज सुनाई थी । उसने मोटर वोट का इंजन स्टार्ट कर दिया और फिर उसे किनारे पर उस जगह लेकर आया जहाँ मैं खडा था । मुझे मोटर बोट पर बैठाकर पांच मिनट तक है । उसके इंजन के काम करने का ढंग समझाता रहा । बहुत सरल था । शीघ्र ही सब कुछ मेरी समझ में आ गया । फिर उसने मुझसे मोटर बोट स्टार्ट करने के लिए कहा । नहीं, इंजन चालू करके ना आपको थोडी दूर तक ले गया । फिर उसने मोटर वोट किनारे ले चलने के लिए कहा । किनारे पर उतर कर उसने कहा अब तो नाम ले जा हूँ, हम तो बुरा है, नहीं तो हम भी चलता और देखता कि साला लोग कहे तुम्हारी बेटी को नहीं बेटा सिर्फ कार्ड की सीढियों पर धीरे धीरे ऊपर चढता हुआ अंधेरे में गायब हो । उसके जाने के बाद मैं भी उसी रास्ते से ऊपर गया । ऊपर चाहते हुए अपनी गलती का एहसास कर मन ही मन घबरा उठा । पुष्पा को में शैतान सिंह के साथ अकेले छोडा है था अगर मेरे ऊपर ताली के लिए जोर डालने के नियत से शैतानसिंह नहीं पुष्पा को ले उडा तो मैं क्या करूंगा? अभी तक बेटी से ही हांथ हो गया था । अब पत्नी से भी हाथ धो बैठा तो कहीं का नारा होंगा । दूर सही अंधेरे में मुझे शैतान सिंह की सिगरेट के तहत दिखाई पडी । तब कहीं जान में जान आई । मतलब शैतान सिंह वहीं था । फोन करने वाले ने मुझसे नाव में बैठकर किनारे पर ही इंतजार करने के लिए कहा था । पर शैतान सिंह ने मुझसे नाराज को दक्षिण की ओर बढाने के लिए कहा । एक बाहर मैं फिर से सोच में पड गया । अगर फोन करने वाला आया और मैं उस की हिदायत के मुताबिक यहाँ नहीं मिला तो तब शायद समझेगा कि मैंने पुलिस को खबर कर दी है । फिर मम्मी का क्या होगा? तब क्या मैं उसे जिन्दा छोडेंगे? क्यों ना हम यहीं इंतजार करें अकेला होता तो पुष्पा से सलाह देता हूँ । लेकिन यहाँ शैतानसिंह सिर पर शैतान की तरह सवार था इसलिए है मुंबई नहीं हूँ । तेज ठंडी हवा चल रही थी । हवा के तेज थपेडों ने ना आपको डगमगाकर रख दिया था । फिर भी मैं उसका इंजन चालू नहीं कर रहा था । वो शैतान सिंह ने खडा कर कहा हूँ ना चालू क्यों नहीं करते हैं । मैंने अपनी आशंका बताई । शैतानसिंह फुर्ती से उठकर खडा हो गया । उसके वजह से ना वो एक और जुड गई और बडी मुश्किल से मैं पुष्पा और अपने आप को संभाल पाया । उसने कहा इसका मतलब है तारीख तुम्हारे पास मौजूद हैं । नहीं खाली मेरे पास नहीं है । तब तो मुझ से खिलवाड कर रहे हो जिसका तुम इंतजार करना चाहते हो । वो ना तो मैं छोडेगा ना । तुम्हारी बेटी को जैसा मैं कहता हूँ वैसा ही करो वरना यहाँ से बचकर नहीं जा सकते । ये कहने के साथ ही उसके हाथ में बडे छोटे का पाल चलता था । साल की चमक वहाँ फैले अंधेरे में भी दिखाई दे रही थी । लेकिन जैसे ही मेरी और लगभग अनेको हुआ मुझे बात सोच गई । मैंने नाव का इंजन चालू कर दिया । ना तीन की तरह पानी को काटती हुई आगे बढ गई और उसके तेज झटके से शैतानसिंह खडा नहीं रह सका । भाव से अपनी जगह पर गिर पडा और अपने को संभालने के चक्कर में उसका छोरा हाथ से छोड दिया और छिटक कर मेरी हो रहा गया । आज की बात में पुष्पा ने उसे उठाकर पानी में फेंक दिया ना आपको मैं तेजी से भगाता ले जा रहा था । मुझे पता भी नहीं था कि वह किधर जा रही थी । मैं बस उसे चलाया जा रहा था । छह सिंह ने पुष्पा को छोडा फेंकते देखा । उसने झपट कर फिर उठने की कोशिश की लेकिन तो तेज रफ्तार से भारतीय छोटी से ना फिर शैतान सिंह का स्कूल शरीर तो आउट नहीं पा रहा था । मुझे किसी खतरनाक जंगली जानवर को वर्ष में कर लेने की खुशी हो रही थी । हालांकि वह खुशी छठी की थी । साथ ही मुझे भी हो रहा था कि आखिरकार कहीं तो नाव रुकेगी । तब शैतानसिंह मेरे साथ क्या सुलूक करेगा । लेकिन फिलहाल उसे परेशान देखकर मेरा खासा मनोरंजन हो रहा था । बार बार कोशिश करने के बावजूद बहुत नहीं पा रहा था । भारे हुए दैत्य की तरह उसने अपनी जगह से ही गुस्से में चिल्लाकर कहा ना आपको धीमा करो वहाँ की गहरे सूनेपन में नाव के इंजन की तेज गडगडाहट में उसकी आवाज ऊपर है गई । मैंने ऐसा भाव बनाए मानो को चुना ही नहीं । फॅमिली लाया रोकते हुए ना या नहीं मैं नहीं आता ही तुम दोनों की जान ले सकता हूँ । एक का एक मुझे अपने कानों पर विश्वास ना हुआ । अंधेरे का फायदा उठाकर पुष्पा ने सिर्फ खतरनाक दांव चला था । हूँ ना गाँव में ही पडी एक लकडी का तो बडा उठाकर उसने अपना हाथ शैतान सिंह की तरफ इस तरह टाल दिया हो जैसे उसके हाथ में पिस्तौल हो और कडक कर कहा छह तानसिंह अपनी जगह पर चुपचाप बैठे रहूँ तो यहीं से तुम्हारी खोपडी उडा दूंगी । भय से आदमी अंधेरे में भूत देखता ही है । मैं भी शैतान सिंह ने अंधेरे में पुष्पा के हाथ में पिस्तौल देखी हो तो कोई ताज्जुब नहीं । थके हुए वैसे की तरह सुख कारकर खामोश हो गया । मैंने अंदाजा लगाया नाम इस वक्त बोट क्लब से बहुत आगे निकल आई होगी । हम मुझे क्या करना था इसका रास्ता पुष्पा नहीं दिखा दिया था । मैंने थोडा का शैतानसिंह से कहा हाँ बताओ कि कहाँ चलना है? शैतानसिंह नहीं बोला हूँ । अच्छा बोलते क्यों नहीं हो? कहाँ चलना है । नाव की गडगडाहट में आवाज सुनाई दे इसलिए मैं लाकर बोला छह तानसिंह नहीं । मैं नहीं जानता था कि तुम लोग पक्के ठाकुर मुझे पहले ही समझ लेना चाहिए था । छह । तानसिंह जवान संभाल कर बात करो, पुष्पा होती है उसकी आवाज में कुछ ऐसी तलब ठीके शैतानसिंह फिर सहन कर चुप हो गया । उस पाने अपना दांव सफल होते देखकर फिर कहा हाँ, सीधे सीधे बताओ के कहाँ चलना है? छह तानसिंह फिर भी चुभ रहा हूँ । हमने अंदाजा लगाया कि वह हमसे नाराज था । किसी भी हमारी बात का जवाब नहीं दे रहा था । शैतानसिंह फिर भी चुप रहा । हम ने अंदाजा लगाया कि वह हमसे नाराज था, इसलिए हमारी बात का जवाब नहीं दे रहा था । पर अपनी थोडी सी सफलता के लिए हम ये भूल गए थे कि वहाँ एक पेशेवर बदमाश था । उस पर काबू पाने के लिए हम जो नाटक रच रहे थे, उसके चक्कर में नाव की रफ्तार का तेज रहना जरूरी था । पता नहीं कैसे घीसटते हुए पुष्पा के एकदम पास आ गया । मैंने उसे देखने में एक्शन की और देर कर दी । जब तक मैंने चिल्लाकर पुष्पा को अगर क्या वह सिर पर सवार हो गया था हूँ, उसने झपटकर पुष्पा की वही हाथ पकड लिया जिसमें उसने पिस्तौल के आकार की वह लकडी पकडा रखी थी । मेरा कलेजा हूँ आ गया क्या हमारा वेट खुल जाएगा और शैतान सिंह देश को बनाये जाने की सजा दिए बगैर नहीं रहेगा । लेकिन पुष्पा की भी डाल दिए बढ गया नहीं रह सकता । मैं उसमें शैतान सिंह के झपट्टे ही अपनी पिस्तौल नामा लकडी पानी में छोड दी । शैतानसिंह यही समझा होगा की पेस्ट ही पानी में जा गिरी है । ये नहीं समझ पाया कि हमने उसे बुद्धू बनाया था लेकिन अब हम नहीं चाहते हो गए थे । यह समझकर शैतान सिंह को कम खुशी नहीं हुई । वेट हटाकर हस पडा आप बोलो तुम लोग मैं चाहूँ तो दोनों को जानो भेज दू मैं खिसककर मेरे वार पुष्पा के बीच में आ गया । एक हाथ से उसने पुष्पा की और दूसरे से मेरी गर्दन पकडी और कहा अब ना उसके साथ खिलवाड ना करना नहीं तो बचता होगे । तभी पुष्पा ने कहा लेकिन तालिका क्या करोगी? शैतानसिंह नहीं चाहिए तो मैं मैंने महसूस किया कि मेरी गर्दन पर उसके फक्कड कुछ ढीली हो गई । उसने कहा पास इसी वजह से तो तुम लोग अभी तक बचे हुए हो नहीं तो कब का तो मैं पानी में फेंक चुका होता हूँ । लेकिन अभी बता दो अगर ताली यहाँ हो तो मुझे दे दो और मैं तुम लोगों को छोड दूंगा । कुछ पाने टाॅवर में कहा खडे थे इसको समझते हो तो हम यहाँ डाली लेकर आएंगे । हमें हमारी बेटी दिलवा दो तो हम बता देंगे ताली कहाँ है बस अब मैं आगे तुम्हारी कोई बकवास नहीं सुनूंगी लेकिन कोई और बदमाशी करोगे तब बदमाशी हमारी ओर से नहीं तुम्हारी ओर से ही शुरू हुई थी । अगर तुम हमें धमकी दोगे तो क्या हम धमकियों से डर जाएंगे? तुमने छूरा ना निकाला होता तो हम भी कभी झगडा ना करते हैं । पुष्पा ने समझौते के स्वर्ण का कुछ देर चुप होकर शैतानसिंह कुछ सोचता रहा । फिर बोला अच्छा है तुम्हारी बात मान लेता हूँ । आप जिधर नाव जा रही है उसी ओर चलते रहो । जहाँ मैं बताओ वही रोक देना लेकिन कोई बदमाशी मत कर बैठना । मुझसे यह समझ लो

PART 9 (A)

भाग फॅमिली में पानी को छुट्टी हुई । नाम आगे बढती रही । दोनों और किनारे की एक का दुख की बत्तियां देखकर लगता था । एक काफी चौडी थी । इधर के इलाके से मैं एकदम अनजान था इसलिए मैं इस इलाके में कुछ भी समझ नहीं पा रहा था । मुझे बिल्कुल पता नहीं था कि हम किधर जा रहे थे । अब रात के साढे दस बज रहे थे । मुझे बमनी की चिंता सता रही हूँ । जिस आदमी ने मुझे फोन किया था भई इस बीच आया होगा और वहाँ मुझे ना पाकर उसने समझा होगा कि मैंने उसे चकमा दे दिया । मोबाइल चेक किया, कोई मिस कॉल तो नहीं । शायद निताई को डरा धमकाकर मेरे बारे में जानकारी ले और से मेरा पीछा करें या फिर अपने साथियों को खबर दें और मम्मी को खत्म कर दें । मैंने चौकन्ना होकर यह आहट लेने की कोशिश की । पीछे किसी और के मोटर बोर्ड के इंजन की आवाज नहीं सुनाई दे रही है । लेकिन किसी भी तरह की आहट नहीं नहीं । मैं अपनी आप तक की कार्यवाही पर गौर करने लगा । मैं यह ज्यादा ठीक हूँ तो पुष्पा नहीं अब तक जो भी कदम उठाए थे वो वक्त की जरूरत को देखते हुए उठाए थे । हमने ये नहीं सोचा था कि आगे क्या नतीजा होगा और इसलिए थोडी देर तक की अपनी सफलता के बाद इस ताली के गोरखधंधे में और गहराई तक फंस गए थे । हम लोग बिना किसी योजना या उद्देश्य के काम कर रहे थे और हम जिस उलझन में फंस गए थे, ऐसी करना भेजा था । अब पुष्पा ने शैतान सिंह को यह कहकर चकमा दिया था कि उसे पता था कि ताली कहाँ थी? क्या उसे सचमुच पता था? हम सोच रहे थे कि अगर शैतान सिंह की मदद से ही मिल भी गई तो उस वक्त हमारे क्या गत बनाएगा जब उसे मालूम होगा कि हम ताली के बारे में बिल्कुल नहीं जानते । लेकिन इसके सेवा हमारे पास झारा भी किया था । अगर हम यह व्यक्ति तिकला में नाराज थे तो करते क्या हूँ? और इनकी सबसे बडी सफलता ये थी क्या वेदर जिंदा थे और न कौन जाने की ये गुंडा कब का खत्म कर चुके होते हैं । कल जब उस बूढे ने मेरी जेब में डाल रखी थी, तब से लेकर आज तक चौबीस घंटे से कुछ अधिक ही भीतर है लेकिन ये ऐसे चौबीस घंटे थे जैसे मेरे अब तक के चौबीस हो चुकी हूँ । इस बीच में मैंने क्या क्या नहीं साहब भय, निराशा भेजती और गहरी नफरत सभी कुछ कहा नहीं नहीं और अभी तक यह पता नहीं था कि हम किस ओर बढ रहे हैं । इस वक्त जो गहरा अंधेरा फैला था उसमें हम बाहर निकल पाएंगे या हमेशा के लिए हमें निकल जाएगा हूँ । ये एक अजीबो गरीब सवाल था । मैंने सोचा कि अगर शैतान सिंह को सच बता दूँ तो शायद ये हमारे छुट कार्य का एकमात्र उपाय हूँ । हो सकता है वह व्यर्थ परेशान करने के लिए हमें बुरा भला करें । ये भी हो सकता है कि हमें दो धौल जमाए पर इसके सिवा कुछ नहीं करेगा । ताली ना रहने पर बेकार में हमारी जान नहीं लेगा । लेकिन इस बात का विश्वास उसे अच्छी तरह दिलाना होगा कि तली सचमुच हमारे पास नहीं है और हम ताली के बारे में कुछ नहीं जानते ना उस से हमारा कोई संबंध है । लेकिन यह सबसे बडी होशियारी से करना था । कहीं पहले की तरह से ये ना मान ले कि हम उसे चकमा दे रहे हैं । मैंने दोस्ताना लहजे में उससे बातचीत शुरू करें । भाई शैतानसिंह ये चंदानी आके है कौन क्यों बन रहा है जैसे तुम को जानता ही नहीं । सच हो गया । हम उसे नहीं जानते हैं । नहीं जानते तो चर्चा बैठे रहो । शैतानसिंह गुड का कुछ देर की चुप्पी के बाद मैंने सर कहा और हम ये भी नहीं जानते ये ताली किस बक्से की है । उसमें क्या है यहाँ श्रद्धान सिंह चौका हूँ । हम सच कह रहे हैं, कुछ भी नहीं पता हूँ । ये भी खोल रही शैतान सिंह ने कहा । और उस वक्त की मोटी भाई भाई करती हसी वहाँ की निस्तब्धता में गूंज उठी । बताता भाई, क्या है बक्से में मूंगफलियां एक शैतान सिंह ने ऍम इतने बोले मत बनों । शैतान सिंह सब समझता है । इसके बाद मेरी हिम्मत जवाब दे गई । मैं फिर चुप हो गया । पुष्पा पहले से ही चुप बैठी थी । नाम आगे बढती रही । अब नदी का पाठ बहुत चौडा मालूम हो रहा था । पश्चिम की ओर से चंद भी धीरे धीरे हो रहा था । उस की हल्की सी रोशनी फैल गई थी । मैंने नजर उठाकर देखा । हर ओर पानी, पानी, किनारा कहीं नजर नहीं आ रहा था । मुझे अचानक फिर वही घबराहट होने लगी । आज तक मैंने किसी तालाब में भी कोई छोटी सी नाव नहीं चलाई थी और यहाँ इस लेख में मोटर वोट भगाए लिये जा रहा था । करीब छह मीटर लंबी मोटर बोर्ड ही मजबूत लग रही थी । जरूरत के वक्त काम आने के लिए पतवारों का एक जोडा खुद लगी । रस्सी दस कैलेंड पेट्रोल की अलग अलग टंकी भी थी । नेता ही नहीं है, सब कुछ समझा दिया था । लेकिन मुश्किल ये थी कि पंद्रह मिनट की ट्रेनिंग में यह पूरी तरह नहीं समझ सका था की कौन सी चीज का इस्तेमाल कब करना है । बस कार्ड स्टार्ट करना से बन करना और कंट्रोल लिवर से नाव की दिशा बदलने या उसे तेज या धीमा करने की सेवा में कुछ भी नहीं कर सकता था । इसलिए मेरा घबराना स्वाभाविक था । शैतान सिंह से मैंने फिर पूछा हूँ आखिर हम चले किधर जा रहे हैं? अभी चलते रहा हूँ । जहाँ पहुंचना है वह जगह आने पर मैं तो मैं बता दूंगा हूँ । मेरी बेटी कहा है एक मोटर बोर्ड आॅफ हाँ इसी तरह के बडे मोटर बोर्ड पर । लेकिन ये बेकार सवाल क्यों पूछ रहे हो? हमारा सौदा मुझे ताली दे दो और मैं तुम्हारी बेटी तो वह दिलवाने में मदद करूंगा । बस मेरा सिर मत खाओ । मैं ये जानना चाहता हूँ कि हम जहाँ कहा रहे हैं तो सिर्फ ना चलाते रहो और लगभग बंद करो चाहे तो संजय पुष्पाणि कहा अब हम इसमें फस गए हैं । यहाँ से हम लोग भी नहीं सकते हैं । जैसा शैतानसिंह चाहे तो ऐसा ही करूँ । तुम्हारी औरत तुमसे ज्यादा समझदार मालूम होती है तो मैं ये फैसला करने का हक नहीं है । पुष्पा ने थोडा कर कहा तो फिर अपने शहर से कहा की चर्चा चले मैं और कुछ नहीं चाहता हूँ तो तो हम कर ही रहे हैं । फिर हम सच चुप हो गए । मैंने अपनी कलाई घडी वहाँ पहली धुंधली चांदनी में देखने की कोशिश की । बारह बजने में कुछ मिनट रह गए थे तो इस ठंडी हवा रह रहे कर हमें कब आ जाती ना आपके कंट्रोल लेवल पर मेरा हाथ हम नहीं रहा था अचानक शैतानसिंह चौका हमने कुछ भी तो नहीं था । सामने मैंने आॅस्कर देखने की कोशिश की फिर भी कुछ नहीं दिखाई दिया । हाँ, शैतान सिंह की धडक पर इंजन मैंने जरूर बन कर दिया था । सामने आपको हरे का गडासा जाल तंता जा रहा था इसलिए ये देख पाना मुश्किल था । किस हमने कौन सी चीज थी? क्या ऐसा मैं मैंने श्रद्धान सिंह से पूछा । उनका ठिकाना कहीं पास होना चाहिए । इंजन की आवाज होती रहेगी तो कहीं उन्हें हमारी आता मिल जाएगा । हम ना आपको खेकर दूसरे किनारे की ओर ले चलेंगे । किनारे पर पेडों की घनी पंक्ति थी इसलिए यहाँ गहरा अंधेरा छाया हुआ था । ये अंदाजा लगाया कि जिस रफ्तार से हम बढ रहे थे उससे हम उसी जगह पहुंच सकते थे । मेरा अनुमान बहुत गलत नहीं निकला हूँ । मैंने जहाँ सोचा था ठीक वही तो नहीं । उससे करीब पचास मीटर आगे हम दूसरे किनारे पर पहुंचे हैं । किसी चीज से टकराकर हमारी नाव पीछे हट गई । फिर धारा ने हमें तेजी से एक बार और आगे धकेल दिया और फिर एक बार जोर का टक्का अंधेरी में हम देख नहीं पाए थे । जैसे एक बडी करीब एक मंजिल ऊंची मोटर बोट थी । वो बाहर से एकदम खाली लग रही थी । यहाँ अंदर अगर कोई था तो बाहर से उसके कोई भी आठ नहीं मिल रहे थे । अंदर से रोशनी की एक रेखा भी बाहर नहीं निकल रहे थे । पर दूसरी टक्कर से जरा धीरे बाद कुछ खटर पटर हुई नहीं । एक खिडकी खुली एक चेहरा बाहर झांका । इस बात की संभावना समझकर हमने पहले ही ना आपको जरा और अंधेरे में कर लिया । छह टन सिंह ने फुसफुसाकर हमें एकदम चुप रहने के लिए कहा । हमने दम साथ लिया खिडकी से झांकने वाला चेहरा कुछ देर तक इधर उधर निगाहें दौडाकर देखने की कोशिश करता रहा । फिर मैं हट गया और कुछ देर बाद छोटी से टॉर्च लेकर लौटा तो उसने खिडकी से बाहर हाथ निकालकर नीचे की । इसके बाद वे आदमी हाथ की टॉर्च इधर उधर घुमाकर सामने देखता रहा तो की रोशनी ज्यादा दूर नहीं जा रही थी । पर अगर हम उस लडकी के एकदम नीचे होते हैं तो वहाँ हमें जरूर देख लेता हूँ । लेकिन हम जहाँ पर थे, वहाँ तक टॉर्च की रोशनी नहीं पहुंच पा रही थी । उस आदमी को भी जैसे जिनान हो गया हूँ कि यहाँ कोई नहीं था । लेकिन शायद एहतियान उसने दोबारा एक बार टॉर्च की रोशनी इधर उधर फेंक कर देखने की कोशिश की । अखिरकार उसने जब ये निश्चित घर लिया, वहाँ कोई नहीं है तो टॉर्च बंद की और खिडकी का पल्ला बिना कोई आहट की है । धीरे से बंद कर लिया । मुझे बात कुछ अजीब से लगी । कीबोर्ड में जब मोटर फिट थी तब बिजली क्यों नहीं थी? उस पर सारे लाइट भी होगी । छह तानसिंह से मैंने धीरे से इसकी चर्चा की । शाॅट आकर मुझे धडका, जो भी हो तो बेकार की बात में सर कब आ रहे हो? अगर बिजली जलाएंगे तो छिपेंगे क्यों? उसकी बात ठीक थी । कॅश कुछ देर हम बहुत बने बैठे रहे हैं और इस बात का इंतजार करते रहे कि शायद फिर कोई हमारी आहट लेने के लिए बाहर झांकें । लेकिन पांच सात मिनट भी जाने पर गोई ओवर बाहर नहीं झांका तो हमें इस बात का भरोसा हो गया कि थोडी देर पहले जिस आदमी ने बाहर झांका था उसे पूरी तरह या इत्मिनान हो गया था कि यहाँ कोई नहीं है । आगामी आगे की कार्रवाई तय करनी थी । शैतान सिंह ने फिर हमें कोई आवाज न करने की ताकि दी ये वही बोट हैं । मैंने पूछा मेरा कलेजा धडक रहा था आप वाई । शैतान सिंह ने पहले की तरह फुसफुसाकर जवाब दिया पर आप बहुत होशियार रहने की जरूरत है । उन्हें कुछ भी पता न लगने पाए । तुम्हारी पत्नी यही नाव पर रहेगी और हम चुपचाप ऊपर चलेंगे । पुष्पा के लिए अपने को संभाल पाना अब मुश्किल हो रहा था । ये मालूम होते ही कि यही ना थी जहाँ हमें पहुंचना था । एक का एक आधी रोटी अच्छा यही है मेरी बेटी । उसने पूछा नहीं होनी चाहिए । शैतान सिंह ने जवाब दिया तब मैं भी नीचे नहीं होंगी । मैं ऊपर चल होंगी नहीं तो मैं नीचे रहना है । श्रद्धान सिंह ने फुसफुसाकर लेकिन ते श्रद्धा लेने का तो मुझे नहीं होगी । नीचे रहकर तुम्हें पहरेदारी भी तो करनी है । कोई भी नाबाद ही दिखाई दे तो हमें खबरदार करना होगा और अब ज्यादा बोलो मत नहीं तो उन्हें हमारी आहट मिल जाएगी । इसके आगे पुष्पा का कोई तर्क नहीं चला । हमने धीरे धीरे चप्पू से नाम खेलते हुए बडी बोर्ड का एक चक्कर लगाया । शैतान सिंह को उम्मीद थी की शायद कहीं कोई रस्सी इसी लडकी होगी और सीढी तो क्या कहीं एक रस्सी भी नजर नहीं आए और चडने के किसी साधन के बिना यह बोर्ड किसी की ले की तरह सुरक्षित थी । यहाँ तक आने के लिए हमने जो इतनी मेहनत की थी तो मैं सब बेकार होती दिखाई दे रही थी । शैतानसिंह खडा हो गया और मोटर बोट पर हाथ लगाकर उसे टटोलने का ऊपर नीचे दाएं बाएं फिर बोर्ड पर ही हाथ की टेक देकर उसमें ना आपको जरा और आगे बढाया । उसके बाद रुक का बोर्ड को फॅमिली लगा । अंधेरे में कहीं हार्ट टिकाने लायक भी जगह नहीं मिली । अब उसने अपनी टॉर्च निकाल नहीं ये खटाना काम था पर इसके सिवा कोई और चारा भी नहीं था । दूसरी जेब से उसने एक रंगीन रुमाल निकाला और उसे डॉट के शीशे पर लपेट दिया ताकि उसकी रोशनी ज्यादा दो ट्रक ना जाए तो हर चीज की हल्की रोशनी उसने नाव पर दौडाई । लकडी के तख्ते एक दूसरे के साथ खूब अच्छी तरह जुडे हुए थे और उन पर चिकनी पॉलिस्टर हाथ कहीं रुखी नहीं रहा था । उसने अपनी खोज जारी रखें । ये काम बडे रहे एहतियात से कर रहा था । मैंने महसूस किया कि उसका ढंग सादा हुआ था । एकदम पेशेवर अपराधियों की तरह । बोट को हमारी नाव से या उसके शरीर के वजह से भी कोई धंधा नहीं लग रहा था । इस तरह हम बोर्ड के करीब करीब आधा चक्कर लगा वायद हैं कि एक जगह आकर वैष्णो किया । उसने मेरी और सिर घुमाकर का । यहाँ एक जगह दो पटना के बीच के लिए और उंगली जा सकती हैं तब लेकिन अपने से ही ऊपर नहीं चला जा सकता हूँ । उस ने निराशा जाहिर की और सिर अपनी खोज जारी की । इतनी बडी वोट में कहीं का छह तो होना ही चाहिए बे जैसे अपने आपसे कहता रहा । लेकिन छोटे छोटे सुराखों के सेवा कुछ भी दिखाई नहीं दिया । इन सुराखों में उसके से एक साथ दो गोलियाँ जा सकती थी । अगर कोई इनमें उंगलियाँ फसाकर किसी तरह लटक भी जाए तो कहीं पैर की डेट लगाने की कोई जगह नहीं थी । बोर्ड की दूसरी ओर सुराग गिटार में बने हुए थे । ऐसा हमारी बात है । खेल गई उन सुराखों के ऊपर लोहे का एक खडा लटक रहा था । मैं खडा रस्सी वगैरह बांधने के काम आता होगा, लेकिन वह काफी ऊंचाई पर था । शैतान सिंह भी उस चक्कर उसको सिर्फ हो सकता था । फिर भी कोई और साधानों पर जाने का नहीं था । इसलिए हमने उधर से ही किसी तरह चडने का निश्चय किया । लेकिन ठहरो तुमने कुछ सुना तो नहीं । यहाँ किसी नाव के इंजन की आवाज तो नहीं आ रही है । हम तीनों दम साधकर सुनने की कोशिश करने लगे और उसे जरा दूर नदी का पानी ठाठें मारता लहरा रहा था । देश हिलोरों के कारण कुछ ठीक से सुन पाना मुश्किल था । आप भी रह रहे कर सीटियां बजा रही थी । फिर भी अगर कहीं पास से मोटर बोर्ड के जिनकी आवाज आती तो हम एक करोड सुनाई पडती है । मैंने कहा मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा है । लेकिन मुझे लगा कि कहीं दूर किसी नाव की मोटर की घडघडाहट हो रही है और यह मेरा बहन नहीं हो सकता हूँ क्यूँ तो मैं जिन लोगों ने वोट लग के निकट पर इंतजार करने के लिए कहा था वहाँ तो मैं ना पाकर देहधारी आ रहे होंगे । उनका जाना वो जा रास्ता है किसी भी वक्त यहाँ पहुंच सकते हैं मुझे काठ मार गया यहाँ की उत्तेजना के कारण मैं इस बात को गोली किया था । सब कुछ अगर है इसी समय आ धमके तो हम कहेंगे नहीं रहेंगे । शैतान सिंह ने कहा वक्त बिल्कुल नहीं है हमें जल्दी करना चाहिए लेकिन हमें इस कडे के सारे चलेंगे । कैसे है ना आपको? धीरे धीरे आगे बढाकर हमने उसे मोटर वोट से एकदम सटा दिया । मैं घुटनों और हाथों के बाद हो गया । शैतानसिंह मेरे ऊपर खडा हो गया । उसका भारी भरकम वजन मेरी बर्दाश्त से बाहर था । लगा क्या पी टूट जाएगी डाक्टरों से हो दवाघर दर्द की गढा मौसे बाहर निकालने में मैं जबर्दस्त रोके रहा हूँ आपने । डील डॉल के बावजूद शैतानसिंह में काफी फुर्ती थी । एक पैर उठाकर उसने मोटर वोट के बने सुराखों में से एक में अपने जो देखी नौ फसादी फिर उस चक्कर लोहे का खडा पकड लिया और दूसरे जूते की नोक सुराख में फंसा दी । मैंने छोड कर उसके पैरों को अपने कंधे का सहारा दिया ताकि उन छोटे सुराखों से खिसककर वहाँ नीचे ना आगे रहे हैं । अब उसका पूरा वजन मेरे ऊपर नहीं पड रहा था । फिर भी लगा कि मेरे बदन के जोड जोड खोल जाएंगे । जब उसने कडे को दूसरे हाथ से पकड लिया तो उसका सारा वजन मेरे ऊपर से हटकर बोर्ड पर चला गया । इस सब है कोई ज्यादा देर नहीं लगी । सब कुछ एक डेढ मिनट में हो गया लगता था । उसे इस तरह के कामों का अच्छा प्रयास था । उसकी सभी सदा ढंग से मैं प्रभावित हुए । बिना ना रहा ना आपको एक झटका तक ना लगा । बहुत धीरे धीरे छिपकली की तरह रेंगता हुआ वो ऊपर की ओर ले सकता रहा हूँ । और फिर उसने खान बढाकर वोट का सबसे ऊपर का सिर पकड लिया । अब लोहे के कडे में उसका बैठ था । ठक्कर कुछ देर है, उसी तरह खडे सांस लेता रहा । सिर्फ बात की बात में बोर्ड पर पहुँच गया । कुछ देर तक छाया की तरह किनारे पर खडा आहट लेता रहा । फिर ऊपर बने के अब इनके पास से हटकर मोटर बोर्ड के खुले हिस्से में पहुंच गया । वहाँ से फिर उस जगह आया जहां नीचे की तरफ हम खडे थे । झुककर उसने हमसे कहा । अच्छा पिछली और फॅमिली है । उधर ही नाम लिया हूँ मैं उसे लगता हूँ । जब मैं नाम वोटर बोर्ड की दूसरी ओर ले गया तो वहाँ वैसे ही अटक रही थी । सीढी पर चलते हुए हैं । मुझे हिचक होने लगी । कुछ काम अब सेकस करले पड गई हूँ । मैंने भी उसे बाहों में कर लिया । हम कभी ऐसी हालत में एक दूसरे से ज्यादा नहीं हुए थे । मैं नहीं जानता था कि आगे क्या होगा । ना रह जानती थी और खतरे में हमें एक दूसरे के पास लाकर एक जन बना दिया था । मम्मी को बचाना है । पुष्पा जानती हूँ और उसकी इतनी सी बात में जैसे भाई और विश्वास दोनों ही सीमा शायद है । हम इस तरह एक दूसरे से कभी अलग नहीं हुए थे । मैं मम्मी को छुडाने में सफल भी हो सकता था और नहीं कुछ देर तक एक दूसरे से बंधे हम इसी तरह खडे रहे । हो सकता था मैं ऊपर से नीचे लौटा ही नहीं । वोट पर खडा शैतानसिंह अधीर हो रहा था । अपना धड नीचे की हो झुकाकर मैं तभी आवाज में गुड का ही ऊपर आओ देर हो रही है । पुष्पा मुझे छोडकर अलग हो गई । मैं बिना कुछ बोले रस्सी के सेरी दोनों हाथों से पकडकर ऊपर चलने लगा हूँ । काफी ऊपर चढना था लेकिन तो दे रहा था । दूसरे इस तरह की सीढी पर चढने का वहाँ मेरा पहला अनुभव हूँ । हर कदम पर लगता था या तो महंगी ही जाऊंगा या फिर सीरियल टूट जाएगी । मेरी परेशानी समझकर शैतान सिंह ने अपना हाथ लटकाकर और जला दी है । अब मैं पहले के मुकाबले आसानी से चल सकता था ।

PART 9 (B)

आप तभी शैतान सिंह की दर्द भरी ठीक वहाँ के सन्नाटे में गूंज गई । किसी ने उसके सिर पर जबरदस्त चोट मारी थी । उसके हाथ से तो छोड कर पानी में जागे नहीं और वह भी अच्छे होकर लडा गया । बोर्ड के नीचे लडका उसका हाथ किसी मुद्दे के हाथ की तरह बेजान हो गया था । तो मैं रस्सी के सहारे लडका वोट के ढांचे से लगा दुखता रहा ऍम दोबारा किसी ने खडा कर रहा हूँ । मैं अपनी जगह पर ही दुब कर रहा हूँ । मेरी ताकत जवाब दे रही थीं । जगदाधार अस्सी हाथ से छूट जाएगी । ऊपर वाले आदमी ने फिर कडक कर कहा जो भी हो पर जाओ नहीं तो वही देर कर दिया जाएगा । मैं अपनी नाव पर भी वापस नहीं जा सकता था । शायद उसके हाथ में पिस्टल थी । उस हालत में वह हमारे ऊपर गोली चला सकता था । मैं ये खतरा मोल नहीं लेना चाहता था तो उस आदमी नाॅन ऊपर क्यों नहीं आता? आ रहे क्या बताओ? मेरे सामने कोई चारा नहीं था । फिर पहले की तरह ही सट्टा हुआ । ऊपर की ओर चलने लगा । मैं ऊपर पहुंच गया तो उस आदमी ने जो अंधेरे में खडी छाया की तरह मालूम हो रहा था । पूछा हूँ ऍम है तुम्हारा, मैं चुप रहा हूँ । शैतानसिंह रस्सी वाली सीढी के पांच लडका पढा था उसके साथ तेजी से घरघराहट के साथ चल रही थीं । वहाँ खडा आदमी लगभग कर के दिन की ओर गया और बाद की बात में एक लालटेन उठाकर मेरे चेहरे के पास ले आया तो उसने कहा, और इसी के साथ मैंने भी उसे पहचान लिया । वो जगह था । उसने लाॅबी और पूछा तले ले आओ मैं अपनी बेटी के लिए आया हूँ कहाँ रहे और उसने कहा और फनी बिजली सी तेजी के साथ मेरी छुट्टी पर उसका एक तेज घुसा लगा मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया और लगा कि मेरे सारे ढांचे लोड है । मुझे चक्कर जाने लगा । आपने मुश्किल से संभाल पाया । तभी फिर एक तेज घुसा मेरे दाएं जबडे पर पडा । मुझे लगा की गर्दन अपनी जगह से अलग हो जाएगी । लेकिन अब मेरे अंदर भी गुस्सा बडा उठाता हूँ और उसी की बदौलत अपनी जगह पर हमला खडा रहा हूँ जगन की फिर मेरे ऊपर वार करने के लिए हरकत होते ही मैंने उछालकर उसके पेट में फुटबॉल की तरह एक देश के कुमार जी वो गले में घरघराहट की आवाज निकालते हुए वे अपनी जगह पर ही दो रहा हो गया पर गिरा नहीं । कसकर मैंने दूसरे के उसके खोले पर लगाई । इस बार वह खडा नहीं रह सका । वर्ष पर लडा गया उसे । वहीं छोडकर मैं केविन की ओर लग का मैं शैतान सिंह की ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया । लकडी के तख्ते खडे कर दो तीन कमरे बनाए गए थे । किसी में से कोई आठ नहीं आ रही थी । एक कवर सिस्टर बहुत हल्की रोशनी दरारों से बाहर ठंड करा रही थी । उसके कीमार भीतर से भीड का आए हुए थे । मैंने दरवाजे को हल्का सा धक्का दिया तो खुल गया । भीतर एक लांत मध्यम करके रखा हुआ था । उसकी हल्की रोशनी में मैंने देखा । गर्दन तक कम्बल से ढकी पम्मी एक सोफे पर निश्चिंतता से सो रही थी । बगल में कुर्सी पर माधुरी भी बैठे हो रही थी । वो मेरा दिन तेजी से उठ चलने लगा । मैं बनने की ओर बढा यही मौका था । दोनों बदमाश बाहर बेहोश पडे थे । मैंने सोचा बस अम्मी को गोद में उठाकर किसी तरह नीचे अपनी नाव पर बहुत जाऊँ तो फिर कोई फायदा नहीं रहेगी । एक घंटे में बढकर लेके वोट लग पहुंच जाने के बाद कोई खतरा भी नहीं रह जाएगा । अगर यहाँ माधुरी कोई रुकावट डालेगी तो उससे भी मैं अच्छी तरह नहीं पाठ होंगा । तभी पीछे किसी के तेजी से टकराने की आहट मिली । मैं जैसे ही पीछे मुडा जैसे भूचाल आ गया था । वो शैतान सिंह और जगन को इस बीच होता गया था और वो दोनों एक दूसरे से घूमते हुए थे । वो पेडों की आठ से चांदनी यहाँ तक नहीं पहुंच पा रही थी । अब उनकी चीखों और कर रहा हूँ से सिर्फ अनुमान लगाया जा सकता है कि वह क्या कर रहे थे । जगन ने शायद आपने लोहे वाला दस्ताना पहन लिया था जिसकी चोटों से शैतान सिंह के थुलथुले शाहिद से पाँच पाँच बज करते खून के फव्वारे छूट रहे थे । रहे कर वह चोट खाएं हाथ की तरह चिंघाडता हूँ । बीच बीच में जगन के तेज ठीक वहाँ के सन्नाटे को तोड जाती लगता था । अंधेरे में दो प्रेस एक दूसरे से टकरा रहे हैं । कभी भी एक दूसरे से अलग हटकर धोकनी की तरह हफ्ते हुए हैं । कुछ देर के लिए खडे रहते हैं और फिर एक दूसरे की जान के प्यासे जंगली जानवरों की तरह एक दूसरे पर टूट पडते हैं । यह क्रम करीब दस मिनट तक चलता रहा । मैं आँखे फाड फाड कर उन दोनों के इस भीषण धंधे को देखता रहा । जघन्य जोर का घोषणा चलाया जो शैतान सिंह के होटल पर जा बैठा हूँ । मैं चीत्कार करोडा जगन में गजब की फुर्ती थी । वो चीते सी फुर्ती से शैतान सिंह के ऊपर वार पर वार करता जा रहा था । वो शैतान सिंह बार बार उसे अपने नीचे लाने की कोशिश करता । पर हर बाढ जगन अपनी जगह बदलकर नई तरफ से शैतान सिंह परमार करता । जगणी बार बार क्या फिर से जो शैतान सिंह के कंधे पर लगा, वह श्रद्धान सिंह को चोट नहीं आई क्योंकि वाॅटर पहले था तो अभी मैं उससे संभाली रहा था की जगह बाएं हाथ से सीधे उसके चेहरे पर वार किया । शैतान सिंह को जैसे किसी का इंतजार था । एक और झुककर इस बार से बच गया । जगह ने अपने उस घुसने में ज्यादा जोर लगाया था । वहीं जैसे उसका दुश्मन बन गया । वे खडा नहीं रह सका और ऍम गिर पडा । बिजली की तरह झपटकर शैतान सिंह ने उसी कमर और गर्दन से पकड लिया और किसी खेला होने की तरह उठाकर अपने सिर के ऊपर तान दिया । फिर पूरा जोर लगाकर नीचे पटक दिया । जगन के एका एक पंजाब ढीले पड गए होंगे । एक और उसके तीस सीखो जी फिर बंद हो गयी । मैं ले जाया गया । मेरी समझ में नहीं आया कि मैं खुश हूँ कि उसने मेरे साथ अच्छा सलूक नहीं किया था । लेकिन इंसानी जिंदगी के साथ इस तरह पेश आना जैसे वह बहुत कुछ निर्जीव से चीज हूँ । मुझे वह पसंद नहीं था । छह । थानसिंह एक मिनट खडा होकर सुस्ताता रहा हूँ । फिर जगन के ऊपर झुककर कुछ करता रहा हूँ । मैं देख नहीं सकता कि नहीं क्या कर रहा है । कुछ देर बाद वह उससे फारिक होकर मेरे पास आया था । फोटो के दोनों दोनों से खून की लकीरें बहकर जम गई थी और जहाँ उसकी बनी थी वहाँ एक बडा सा डब्बा नजर आ रहा था । वो दोनों कान पटियां थोडी भी भर कुछ हो गई थी । कॅश नहीं पहुंच कर अपने दोनों हाथ कमर पर रख तनकर खडा था । मैं अभी तक नाम था । शहनी से आवाज में मैंने पूछा ब्लॅक ताली? जवाब देने के बदले में उसने कहा तो मेरी बात का जवाब क्यों नहीं देते कि अगर मर गया तो मैं उससे बहुत हमदर्दी हो रही है । हमदर्दी का कोई सवाल नहीं लेकिन आदमी का अपनी आंखों के सामने इस तरह मारा जाना मैं देख नहीं सकता । क्या सचमुच तुमने उसे मार डाला? रिकॉर्ड बहुत अच्छा । संजय बाबू कल से आप जो हरकतें कर रहे हैं उन्हें देखते हुए आपके मुंह से यह बात बहुत अच्छी लग रही हैं । श्रद्धान सिंहस् पडा कमीने दो के बाद जहाँ जगह पडा था वहीं से उसने ठीक कर कहा फिर बुरी तरह अपने हाथ पैर पीटने लगा । ये जैसे मिले सवाल का जवाब था शैतान सिंह और भी तेजी से हंस पडा मैं । भास्कर उसका चेहरा देखता रहा । हंसी बंद हुई तो उसने कहा अच्छा जघन्य आपकी बात का जवाब दे दिया । मैं यहाँ नहीं मरेगा तो मैं काट लिया । थियारा नहीं हूँ मैंने । बात उसके हाथ पाँव बांदिया है । अपनी अपनी जगह से उठकर भाग नहीं सकता । पर अब आप जल्दी से ताली मेरे हवाले कीजिए । आपकी बेटी कमरे में हैं । उसे ले जाइए और सारी बातें बोल चाहिए । मैं भी भूल जाऊंगा । मेरा और बढ गया । मैंने पूछा आप हैं कौन? आखिर ये ऍम ठंडा खुद समझ में भी तो आए । इसके चक्कर में मत पडी है । बस ताली दे दीजिए या बताइए दीजिए कहाँ है और अपनी बेटी को लेकर चले जाइए? नहीं नही संजय इसको ताली मत हो । मेरे पीछे से तेज आ जाएंगे । ये माधुरी थी । अब तक मैं ये भूल गया था की पीछे के कमरे में माधुरी भी थी । उसकी आवाज पर मैं पीछे घूमा और मुंह खुला का खुला रह गया । छह । तानसिंह कि वे जवान नहीं खोली । माधुरी के हाथ में पिस्टल थी और वह हमारी ओर बनी थी । संजय मैं तुम्हारा कट नहीं करना चाहती लेकिन अगर तुमने ताली उसे दे दी तो तुम में से कोई भी नहीं बचेगा ना तो मुन्ना शैतान सिंह और ना तुम्हारी बेटी है । इतनी कैश में थी कि उसकी आवाज कम रही थी । ऍम माधुरी जगन अपनी जगह से ही चलाया मेरी लडकियाँ खोल दो इस कमीने ने मुझे बांदिया है पश्चिम मुझे खोल दो । फिर देखो कैसा मजा चखाता हूँ इन दोनों को फॅमिली उस की ओर कोई ध्यान नहीं दिया । ऍम फिर चलाया तो माँ ही उस पर भी बस पडी । चुप चाप अपनी जगह पर पढा रहे हैं उस तरह का बीच में बोलेगा तो पहले तेरह ही काम तमाम कर दूंगी । मस्का है तो क्योंकि ऍम जगन अपनी जगह पढाई अच्छी तरह लेकिन माधुरी ने उसकी ओर फिर कोई ध्यान नहीं दिया । मैं सोच रहा था कि अगर वह उसे छुडाने के लिए बढेगी तो उसका ध्यान बन जाएगा । इस हालत में उस पर काबू पा लेना । आसानों का स्टॉल छिन जाने पर नावें हमसे आकर सकेगी ना जगन को छुडा सकेगी, पर वह हमसे होशियार ने के लिए । मैं बहुत तैश में थी और उसकी पिस्तौल की भाषा के आगे हमें से किसी की बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी । के दिन के दरवाजे के पास ही खडी थी तम्मी पहले की तरह सोफे बस हो रही थी हम से एकदम बे खबर उसका गुड्डा जिससे शहर माधुरी उसे मैं गा कर ले आई थी । सोफे के नीचे सडक कर फर्श पर पडा था । कल की रोशनी कमरे से बाहर आ रही थी । उस रोशनी में माधुरी बडी अजीब लग रही थी । उस पर खून सवार था जिससे उसका सुंदर चेहरा बिगडा हुआ लग रहा था । मुझे एक हल्की सी आहट नहीं शायद किसी के धीरे से खिसकने की आज पता नहीं और उन्हें सुना था या नहीं और मुझे इसमें कोई शक नहीं रहा हूँ । क्या जगन अपने बंधनों को छुडाने की कोशिश कर रहा था लेकिन नहीं आहट उधर से नहीं आ रही थी जिधर पडा हुआ था । एक का एक में समझ गया कि वह आहत कहाँ से आ रही थी । नीचे मैं पुष्पा को अकेला छोड आया था । वहीं ऊपर आने की कोशिश कर रही थी उस कैसे का और कौन हो सकता है । मुझे खुशी भी हुई और भी निहत्थी पुष्पा ऊपर आकर हमारी कौन सी मदद कर सकती थी । मैं कहा मैं अपनी जान भी खतरे में डाल रही थी । मैंने चाहा कि चलाकर उसे आघा कर दूँ पर इससे तो खतरा और भी बढ जाता हूँ । माधुरी शायद हमें छोडकर उसे ही पहले अपनी स्टॉल का निशाना बना डाले । यह सोचकर मैं जो भी रहा हूँ मैं उस तरफ देख भी नहीं रहा था । जिधर रस्सी वाली सीढियां थे वो क्योंकि माधुरी का सारा ध्यान मेरे ही ऊपर था और शायद मेरे उधर देखने भर से वो भी पुष्पा के ऊपर आने की आहट पहुंचाते हैं । हाँ, कनखियों से मैं उधर रह रहे कर देख लेता था तो अंधेरे में कुछ साफ दिखाई तो नहीं दिया लेकिन जहाँ ऐसी वाली सी ली थी उससे रेपर पहले ऊपर उठकर कुछ लहराया । किसी का हाथ था क्या मैं पुष्पा का हाथ हूँ और पहले हाथ से तो लेकर इस बात का अंदाजा लगाना चाहती थी कि कोई उसे देख तो नहीं रहा । धीरे धीरे एक से ऊपर आने लगा । जैसे जमीन फोडकर कोई ऊपर आ रहा हूँ । पहले उसका सिर्फ दिखाई दिया । फिर कंधी, फिर सीना और उसके बाद एक पूरी आदम कद छाया । वहाँ अंधेरे में खडी हुई थी । पर ये पुष्पा नहीं थी क्योंकि ये छाया किसी और अब की नहीं आदमी की थी । छाया छड बोर्ड के किनारे पर ही खडी नहीं । फिर बहुत ही सावधानी से बिना कोई आहट की आगे बढी । ये सब कुछ करीब आधे मिनट में हुआ । वे छाया धीरे धीरे हमारी ओर बढ रही थी । मैं घोर आश्चर्य में पड गया कि आखिर पुष्पा नहीं थी तो कौन था? और फिर पुष्पा का क्या हूँ? तभी शायद माधुरी ने मेरे चेहरे पर आश्चर्य का भाव पढ लिया और उसी ओर देखने लगी जिधर मैं कनखियों से देखा था । माधुरी का बाल भर के लिए चौकना था कि उसी शन शैतान सिंह का एक तेज होता । उसकी कनपटी पर लगा भूल जैसी नाजुक माधुरी फॅसा क्या संभाल पाती भी बेहोश होकर वहीं बडी शैतान सिंह ने झपट कर उसके हाथ से पिस्तौल अपने कब्जे में कर ली । लेकिन उसी छड अंधेरे में पीछे खडी छाया झपट कर आगे आई । उसके हाथ में दो पिस्तौल थी जो शैतान सिंह की ओर तनी हुई थी । मैं चंदानी था । वहाँ की हल्की रोशनी में भी मुझे उसे पहचानने में दिक्कत नहीं हुई । मुझे यह समझने में भी देर नहीं लगी कि वह कैसे यहाँ पहुंचा होगा । शायद बढ कर ले के घात पर जो आदमी मुझसे मिलने वाला था उसने मुझे वहाँ ना पाकर चंदानी को खबर की होगी । चंदानी ने फिर मेरे घर पर मेरा पता लगवाया होगा और वहाँ हमें ना पाकर मामला भाव क्या होगा हूँ और फिर यहाँ चलाया बस चुपचाप अपनी जगह खडे रहो । उसने कडी आवाज में शैतानसिंह से कहा अपना हाथ भी नीचे किए रहा हूँ । जरा भी हरकत हुई नहीं की गोली मार दूंगा हो ऍम सिंह के पास उसका हुक्म मानने के सिवा और कोई चारा नहीं था । अब चंदानी मेरी ओर मुखातिब हुआ हूँ और उसके बेस्ट बराबर शैतान सिंह की ओर नहीं रहे । उस से बात करते हुए भी तो उस की ओर से बेखबर नहीं हुआ । उसने मुझसे कहा तो सचमुच मकार और काइयां हो ताली मेरे हवाले कर दो, नहीं तो इस बार में तो मैं नहीं छोडूंगा । फिर मुझे भी उसने शैतान सिंह के बगल में खडे होने का हुक्म दिया । ॅ ऐसा उसने इसलिए किया ताकि हम दोनों पर है । एक साथ नजर रक्षा के हैं । मुझे उसकी बात माननी पडी । मैं अपनी जगह से हटकर शैतान सिंह के बगल में जा खडा हुआ तो चंदानी ने मुझे फिर पूछा हूँ हाँ अब बताओ कि टाली कहाँ है? मुझे नहीं मालूम नहीं मालूम हूँ । चंदानी ने कहा संजय मैं कह देता हूँ ताली अब तुम्हारी जान की जमानत नहीं बन सकती । आप जान एक ही सूरत में बढ सकती है । तुम्हारी वह यह है कि ताली मेरे हवाले करूँ और चुपचाप वहां से खिसक जाऊँ और सब भूल जाऊँ । अगर ताली नहीं देते तो समझ लो तुम्हारी जान नहीं बचेगी क्योंकि अब तक तुम काफी कुछ समझ चुके हो । बोलो तो मैं क्या मंजूर है? बॉस आप आ गए । मैंने जवाब देने के पहले ही जगह अपनी जगह पर पडा पडा खुशी से चिल्लाया मुझे इस कमीने शैतान सिंह ने बांधी आया है मुझे खोल दें । फिर देखिए मैं उन्हें क्या मजा दिखाता हूँ । जगह चंदानी चलाया क्या? तो में इन लोगों ने बांध रखा है । ठीक है तब राव नहीं जरा इनसे निपट लू । पहले शैतानसिंह में थोडी हरकत हुई । उसने शायद सोचा कि चंदानी जगन को छुडाने के लिए मुडेगा तो उसी वक्त उसके ऊपर झपट पडेगा । लेकिन शैतान सिंह को चंदानी इतना मौका देगा । ये सूचना ही नादानी थी । एक नंबर का घट था । वह इस खतरे को बखूबी समझता था इसलिए जगन की आवाज कर तुरंत उसे छुडाने के लिए नहीं किया । शैतान सिंह ने जो हरकत हुई थी उसे वह भी भाग गया । वो मिलेजुले बिना खडे रहो या भी हरकत होते ही फौरन गोली मार दूंगा । उसने खडा कर कहा ऍम सिंह एकदम सीधा खडा हो गया । हाँ ठीक है चल नानी ने सरकार अपनी पिस्तौल मेरे हवाले कर दो । शैतान सिंह ने जैसे उसकी बात ही नहीं सुनी । वह पहले की तरह चुपचाप खडा रहा । मैंने महसूस किया कि शैतानसिंह जानबूझ कर उसकी बात नहीं सुन रहा था । एक का एक मुझे बहुत डर लगने लगा । अभी तक मैंने ये सोचा नहीं था कि हम मौत के एकदम सामने खडे हुए थे । चन्दानी गुस्से में था और कुछ भी कर सकता था । खट्टाली जिसे रह मांग रहा था, मेरे पास नहीं थी और वह कह चुका था कि ताली ना मिलने पर मैं मेरी जान नहीं छोडेगा । फिर इसमें पुष्पा का क्या? क्या कहीं इस ने उसे मारा पीटा तो नहीं । ऐसा तो नहीं की मारपीट कर बेहोश कर दिया हो फिर आप पांच बांधकर उसी नाव में ही छोड दिया हूँ । लेकिन ऐसा होता तो कोई आहट जरूर मिलती है । मैं चीखती चिल्लाती पर किसी तरह की आठ नहीं मिली तो एक ही हालत में ऐसा हो सकता था । लेकिन मैं इसके बारे में सोचना भी नहीं चाहता था क्योंकि जहर बहुत भयानक थी लेकिन मेरे ना चाहते हुए भी दिमाग कुतुब नमाज की सोची की तरह उसकी एक बात की तरह जा रहा था और उसके बारे में सोचते हुए मेरा रूम रोहांसी हर उठा हुआ होगा कि पीछे से आकर चंदानी ने पुष्पा का गला दबा दिया होगा । इस तरह की वह चीज भी ना पाई होगी । और फिर नाम से नीचे उसका आधा धड लडका कर उसने पुष्पा का सिर्फ पानी में डुबा दिया होगा और तब तक दबाए रहा होगा जब तक कि वह तलब तलब कर धन डीना पड गई होगी । इस तरह से लाभ भी नहीं सकी होगी । जितना ही मैं इस खयाल को भागने की कोशिश करता था उतना ही मेरा ये विश्वास पक्का होता जा रहा था की जरूर ऐसा ही हुआ होगा और इसके साथ ही मेरा बदन भीतर से बुरी तरह थरथराने लगा तो मुझे अपने दिल की धडकन तक सुनाई दे रही थी । वो जानता नहीं की तेज आवाज वहाँ के सन्नाटे में पिस्तौल से छोटी गोली की तरह हो तो मेरी बात सुन रहे हो या नहीं । अपनी पिस्तौल तुरंत मेरे हवाले कर दो । बस एक बार और कह रहा हूँ नतीजा पूरा होगा । समझ लो छह टन सिंह ने स्टॉल उसकी और हिंदी चंदानी ने उसे हाथ खडाकर लगभग लेना चाहा पर शायद शैतान सिंह ने पिस्तौल काफी जोर लगाकर फेंकी थी । इसलिए रे उसके हाथ में नहीं आई और उससे कुछ मीटर पीछे जाकर गिरी तो हमने इतनी दूर ऍम दानी ने कहा होकर पहुंचा हूँ मैं क्या जानता था कि तुम ये जरा सी पिस्तौल भी नहीं पकडता हो गया हूँ । शैतान सिंह ने कठोर आवाज में कहा तो मैं ऐतराज है तो डाला स्टाल वहाँ से हो या फिर कहो तो मैं उठा कर देते तो मैं चंदानी ठहाका लगाकर हंस पडा हूँ । उसकी ॅ अब भी हमारी ओर बनी थी और जरा भी काफी नहीं था पर वह करीब आधा मिनट तक लगातार हस्ता रहा हूँ । फिर उसने कहा तो मुझे ऍफ समझते हो कि मैं तुम्हारी ओर से पलट कर पिस्तौल उठाने जाऊंगा और तुम्हें मौका दूंगा । शैतान सिंह की असली मंशा शायद यही थी लेकिन मैं ये भाव नहीं पाया था । अपनी चालबाजी खुल जाने से शैतान सिंह के चेहरे पर हल्की सी झेल का भाव था । उसने चलाने की बात का कोई जवाब नहीं दिया । मैं उन लोगों को पसंद नहीं करता हूँ जो मेरे साथ चालबाजी करते हैं । चन्दानी ने फिर कहा उन्हें माफ भी नहीं करता । मैं भी बदमाशों को पसंद नहीं करता । शैतान सिंह ने भी कडक आवाज में जवाब दिया चंदानी फिर ठठाकर हंस पडा । बदमाश हूँ पर तुम क्या हो? एक बहुत और शरीफ आदमी जो चोरी से मेरी वोट पर चढकर मेरी औरत को मारपीट कर रहे हो । अगर मैं तो नहीं इस बात पर मार डालो तो मेरा कुछ भी नहीं बिगडेगा । मैं धमकियों से नहीं डरता । शैतान सिंह ने छोटा सा जवाब दिया और चंदानी की ओर से ध्यान हटाकर दूसरी ओर देखने लगा । तभी चंदानी फील्ड का इधर उधर नहीं सामने देखो तुम्हारी कोई चाल मेरे साथ कामयाब नहीं होगी तो नहीं जानते की किस से पाला पडा है । इस बार शैतानसिंह हंस पडा । फिर हस्ते हस्ते ही बोला मैं खोज जानता हूँ तुम कौन हो और तो नहीं नहीं उससे भी जानता हूँ जो बेचारा मूर्दाघर में पडा । अपनी लाश की शिनाख्त घर का इंतजार कर रहा है । जमदानी का चेहरा फर्क हो गया । गहरे डर के बावजूद मेरा मोहित आ जब मैं खुला रह गया आखिर है क्या? बे था ये अगर चंदानी नहीं तो आखिर कौन था? और फिर ये शैतानसिंह कौन था? लेकिन मुझे ज्यादा सोचने का मौका नहीं मिला । जिस आदमी को मैं चलाने के नाम से जानता था, उसके नथुने फडकने लगे हो । उस चेहरे पर एक विचित्र तरह का तनाव आ गया । उसकी आखिर चलने लगी और उनसे चिंगारियों से टूटने लगीं । उसकी सूरत वैसी ही हो गई जैसे शिकार के पहले दिल्ली की सूरत हो जाती है । उसने हाथ में पिस्तौल, सागली, उंगली स्टॉल के घोडे पर कट गई । फिर तो कदम आगे बढकर शैतान सिंह के और नजदीक आ गया ताकि किसी भी सूरत में निशाना खाली ना जायेंगे । आप जानते हो तो यह जानकारी अब तुम्हारे साथ ही चली जाएगी । ठंडा पानी नहीं कहा ऍम शैतान सिंह के सर के सामने साथ थी । मैंने भी अपने आंखों ऍम दो बाहर गोली चलने की आवाज वहाँ सन्नाटे में बहुत दूर तक पहुँच गई । लेकिन उनका शैतानसिंह मेरा नाम है । इसके विपरीत अपने को चंदानी, कहने वाला आदमी ही जैसे पीछे से किसी जोरदार धक्के से आगे की ओर फेंक दिया गया हो । उसके हाथ हवा में उछले और स्टॉल छूटकर गिर पडी तो डर डर से उसका चेहरा जो पहले ताना हुआ था बिगड गया गृह जमीन पर हमारे आगे ही लडा क्या? और जाने कहाँ से आकर पुष्पा मेरी बाहों में गिर पडी और ऑस्ट्रेलिया के रोगी की तरह कहने लगी ऍसे पहुंच गए हो ना । फिर मैं मम्मी को देखते ही मुझ से अलग होकर भीतर भाग गई और उसे गोद में उठाकर पहले की तरह कहते रही मेरी बेटी फक से अभी मेरी बेटी जैसे होश में नहीं थे । थोडी देर तक तो मैं समझा ही नहीं था कि हुआ क्या? मुझे याद पडता है गोली चलने के ठीक पहले तो मैंने अपनी आंखें मूंद ली थी और मुझे जगन की आवाज सुनाई पडी थी बहुत देखना पडता भी गोली चल पडी थी आपने कुछ चंदानी कहने वाला आदमी ऍम पडा था उसमें जीवन का जरा भी चेन नहीं था और एक गोली उसके कंधे में लगी और दूसरी पीठ ने बिल्कुल बीचोंबीच । उसने गोली लगने के बाद शीघ्र ही दम तोड दिया । इसलिए ज्यादा खून नहीं रहा था और जो भी थोडा बहुत खून बहा था है उसे उन्नीस अर्जी कोर्ट में जज हो गया था । पुष्पा का ऑस्ट्रेलिया का दौरा खत्म हो चुका था तो लेकिन उसके दाएँ हाथ में बुरी तरह झनझनाहट हो रही थी । अपनी जिंदगी में कभी उसने पिस्तौल नहीं चलाई थी और ना उसे मालूम नहीं था कि ब्रिस्टॉल कैसे चलाई जाती है या झनझनाहट उसी के तेज झटके से हो रही थी ।

PART 9 (C)

काफी देर तक उसके हाथ में मालिश करने के बाद ये झनझनाहट कुछ कम हुई । अच्छी तरह आश्वस्त हो जाने के बाद उसने बताया कि वह सुरक्षित रही और कैसे एकदम ठीक वक्त पर ऊपर पहुंच गई । आपने कुछ नानी कहने वाला आदमी बोर्ड से काफी दूर ही रह गया था तभी उसने अपनी मोटर वोट का इंजन बंद कर दिया और बाकी फैसला ना तो धोके तय किया लेकिन पुष्पक उसकी आहट लग गई और उसने बडी मुश्किल से ना आपको घोलकर बोर्ड के पिछले हिस्से में अंधेरे में कर लिया ताकि रहे चाहे कोई भी हो उसकी निगाह पुष्पा भरना पडेगा तो वह चंदानी को जानती नहीं थी । लेकिन सावधानी उसने इसलिए बढती के ऊपर जो कुछ हो रहा था उसकी थोडी बहुत आहत उसे भी मिल सकें और उसने सोचा कि होना हूँ वही आदमी हो जिससे संजय को बढकर लेख के घात पर मिलना था इसलिए वह आठ नहीं हो गई । क्यों आदमी अभी अभी वहां पहुंचा था । उसने बोर्ड की रस्सी की सीढी के पास आकर ना आपको उसमें बांधा । थोडी देर नीचे ये रुककर ऊपर की बातचीत की आहट लेता रहा और फिर धीरे धीरे ऊपर चढ गया । उसके ऊपर चढ जाने के कुछ देर बाद पुष्पा भी उसी रस्सी के सीढी के पास आई । नीचे खडी खडी ऊपर की बात है, सुनने की कोशिश करती रहीं लेकिन सारी बातें ठीक ठीक सुनाई नहीं दे रही थी । इसलिए वह भी रस्सी की सीढी के सहारे ऊपर पहुंच गई लेकिन बोर्ड के ऊपर नहीं गई । सीढी के सहारे लटकी हुई वे सब कुछ सुनती रही । फॅमिली उसने देखा था लेकिन अपने को चंदानी कहने वाले आदमी ने जब तक पिस्तौल नहीं खानी थी तब तक वह निश्चित नहीं कर पाई थी कि उसे क्या करना है । जब उसने समझ लिया मुख्य शैतान सिंह की और उसके बाद मेरी भी जान को खतरा हो गया । तब जा बिना किसी की परवाह किए लगभग कर बोर्ड के ऊपर चढी और शैतान सिंह ने जो स्टॉल फेकी थी उसे उठाकर उसने था । इधर तो फायर किए हूँ ।

PART 10 (A)

ऍम गोली की आवाज से माधुरी की बेहोशी टूट चुकी थी । अपने को चंदानी कहने वाले आदमी की लाश की ओर उसने एक बार देखा । फिर उस की ओर से निगाह डाली । मैं जैसे ये समझ गई कि खेल खत्म हो चुका है तो उसी की और गुस्से से देख रही थी तो मेरी बेटी को चुना लाई थी । कल ही कहेंगे । आधुनिक ने जवाब नहीं दिया । पुष्पा उसे कुछ देर तक और बुरा भला कहती नहीं, लेकिन माधुरी की तो जैसे किसी ने जवान ही कर दी थी । एकदम चुप नहीं । उसके सारी सुंदरता भी जैसे किसी ने हर ली थी । शैतान सिंह ने जगन को किसी तरह लाख फांदकर नीचे मोटर बोट पर उतारा । उसके बाद एक एक कर हम सभी नीचे उतरे । माधुरी, पुष्पा नीवर, मैं मम्मी अपने आप नहीं कर सकती थी । उसे मैंने ऊपर से रस्सी के सीढी थामकर नीचे की ओर लटका दिया और नीचे से शैतान सिंह ने उसे संभालकर मोटरबोट पर उतार दिया । वहाँ इतना सब हो गया । इस की उसे जैसे कोई खबर नहीं चलते । चलते भी जमीन पर पडा अपना थोडा उठाना नहीं नहीं बोली । लेकिन उतरने की पहले एक बार में मोटर बोर्ड पर सिर्फ उस ओर गया जिधर मैं आदमी मरा पडा था । मुझे डर लग रहा था, लेकिन मन में खडा करके उसके पास पहुंच गया और पुष्पाणि जिस पिस्तौल से गोली चलाई थी, उससे अच्छी तरह अपने अनुमान से पूछने के बाद ताकि उस पर उंगलियों के निशान ना रहे, मैंने जोर से घुमाकर नदी में फेंक दिया । फिर मैंने वह जगह भी अच्छी तरह पहुंचती जहाँ मेरी या पुष्पा के मूल्यों के निशान होने की आशंका थे । उसके बाद सावधानी से मैं भी मोटर वोट पर उतर गया । आप क्या करने लगे थे? छः? थानसिंह ने पूछा तो कुछ नहीं, यही मैंने बात बनाई । खुफिया पुलिस की नहीं कहा से कुछ नहीं सकता । संजय बाबू मैंने पानी में छपा की आवाज सुनी थी । छट तानसिंह ने कहा फिर बैठ हटाकर हस पडा तो खैर कोई बात नहीं, अब पुलिस उसका पता भी नहीं लगा सकेगी और आश्चर्य में पड उसकी ओर देखने लगा हूँ । ऍर निकला खुफिया पुलिस जी हाँ, स्पेशल क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर शैतानसिंह आपकी खिदमत में हाजिर है । मुझे नहीं पता वो मेरे माँ बाप ने मेरा ऐसा अच्छा नाम क्यों? चुनाव मेरा काजू और भी बढ गया तो मैं अभी कुछ कह नहीं पा रहा था । छह टन सिंह ने ही बातें जारी रखें । अभी तो चलिए बढ का लेख वहाँ से हेडक्वार्टर को फोन कर के ऊपर बोर्ड पर पडी लाश बरामद करा दूँ । फिर आपके यहाँ मेरी चाह रही मैं बडी दिलचस्प कहानी सुनाऊंगा । आपको नेता एक ऐसे आशावादी भी दुनिया में कम ही मिलेंगे । हमारे पहुंचने के पहले ही उसे विश्वास हो गया था कि हम सफल होकर लौटेंगे । पिछले उसने हमारे स्वागत के लिए चाय का पानी पहले से ही गर्म करके रखा था । उसकी चाहे मेरी अब तक की जिंदगी की शायद सबसे अच्छी और स्वादिष्ट चाय थी तो हम जिस वक्त घर पहुंचे सुबह हो रही थी । मेरे पडोसी वकील साहब के पिता टहलकर लौटे थे । सामने के जनरल स्टोर पर मालिक मोदी तो नहीं आया था पर उसका नौकर दुकान के सफाई का दे रहा कर रहा था । बस्ती का नेपाली पहरेदार मेरे घर के ही सामने सतर्कता के साथ खडा था । हमने रात को रवाना होने के पहले एक बत्ती जली छोड दी थी । मैं उसी के बारे में सोच रहा था । किसी को उसने कुछ बताया नहीं । पर बातों का पडोसियों को अजीब ढंग से पता चल जाता है । किसी तरह लोगों को पता लग गया था कि सब रात को जल्दी में कहीं निकल गए थे । जाने के पहले मैंने मोदी से पिस्तौल भी मांगी थी जो उसने मुझे नहीं थी थी । ये सब मुझे पहरेदार ने बताया जिससे पडोसियों ने मेरे ही घर के सामने तैनात कर दिया था । कई लोगों ने रात को हमारे बारे में पूछताछ की थी और तय किया था कि सवेरे तक कोई पता न लगने पर पुलिस को खबर कर दी जाएगी । हम पहुंच गए तो पहले डार्को इत्मीनान हुआ लेकिन हमारी बुरी हालत हो रही थी तो हम ने जिस दहशत में कुछ घंटे गुजारे थे उसने हमें बदहवास बना दिया था । वो पहरेदार कुछ देर तक हमारी ओर ता जब से देखता रहा । बात की बात में पडोस के लोगों को हमारे लौटने की खबर लग गई हूँ । एक एक कर कई लोग हमारी खैर पूछने आए पर अभी हम कुछ बता सकने की हालत में नहीं थे । सभी से शाम को सब कुछ बता देने का वादा कर मैंने मिस्टर सरकार के घर पर टेलीफोन कर दफ्तर से आज की छुट्टी भी नहीं । इसके बाद हम सोने चले गए और शाम पांच बजे तक बे खबर सोते रहे हूँ । शाम को मेरे ड्राइंगरूम में अच्छी खासी भीड जमा थी । गुडिया के तरह सजी पम्मी आस पास के दो एक और बच्चों के साथ बरामदे में खेल रही थी । हम बात कर रहे थे मेरे छोटे से घर की खुशी लौटाई थे । वो करीब सात बजे घर के सामने शैतान सिंह की मोटर साइकिल आकर रुकी । शैतानसिंह इस वक्त अपनी पूरी वर्दी में थे और उनके भारी डीएल डाल के बावजूद उनमें शैतान जैसी कोई बात नहीं थी । हो सकता है नजर और वक्त का फर्क हो पर वह एक शरीफ पुलिस अवसर ही नजर आ रहे थे और कुछ भी नहीं । चाहे खत्म होते होते लोगों के सब्र का बांध टूट गया । दूसरी प्याली गले के नीचे उतारते हुए मेरे पीछे वाले मकान के पडोसी शैलो बाबू बोल पडे ऍम कुछ बताओगे बी ए चाय पिलाते चले जाओगे । अब तो इंस्पेक्टर साहब भी आ गए । ऍम सिंह ने कहा पहले संजय बाबू! आप अपनी ही यहाँ बीती सुना दें । मैं तो गुस्सा सुनाऊंगा है । इसके बाद ही लोगों को पूरी तरह से समझ में आएगा नहीं । कल रात स्टेशन पर बूढे के ट्रेन से कटने से लेकर आज सुबह घर लौटने तक की सारी कहानी सुना दी । मैंने सिर्फ खास खास बातें ही बताई और कुछ बातें तो बिल्कुल ही हजम कर ली । जैसे ही है बात मैंने खासतौर पर विस्तार से बताई कि शुरू में ही मैंने घटना की रिपोर्ट पुलिस में क्यों नहीं कर दी और जिन लोगों को मैंने नहीं बताया उन्हें हजम करना जरूरी था । जैसे अपने आप को चंदा नहीं कहलाने वाले आदमी की सौत उस पा के गोली चलाने से हुई । ऐसी बातें लोगों को बताने से कोई फायदा नहीं है और यह ना बताने से कहानी की दिलचस्पी जरा भी कम नहीं हुई । पुष्पा की बहादुरी की और बातें मैंने जरा विस्तार से ही बताएं । लोग जिस तरह ध्यानपूर्वक चुप जात मेरी कहानी सुनते रहे, उससे मालूम होता था कि लोगों को मेरे ऍफ लगा होगा । बीच में किसी ने कुछ नहीं पूछा और जब कहानी खत्म कर चुका दब भी लोग कुछ देर तक खामोश बैठे । फॅालो बाबू नहीं, छुट्टी थोडी लेकिन संजय बाबू उन्होंने पूछा वह चल दानी नहीं था तो आखिर कौन वकील साहब भी मौजूद हैं? उन्होंने पूछा हूँ आखिर खली कहाँ नहीं? मैं किस बेस की कुंजी है ये तो पता ही नहीं चला । सच पूछा जाए तो यही सब सवाल मुझे भी परेशान कर रहे थे तो सिर्फ घटनाएं जानता था जिनसे मेरा ताल्लुक था । बाकी सब कुछ मेरे लिए अंधेरे नहीं था । इन सवालों का जवाब संजय बाबू नहीं दे पाएंगे । शैतान सिंह ने जो अब तक जो बैठे थे, कहा, इन्हीं का जवाब देने और संजय बाबों की कहानी की कुछ गलतियां ठीक करने के लिए मैं हाजिर हुआ हूँ । गलतियाँ जी हाँ कौन सी गलतियां मैंने हर बाद सही बताइए । हाँ, कुछ बाते मैंने सही नहीं बताई क्योंकि उनकी यहाँ जरूरत नहीं समझी मैंने । लेकिन मैंने कोई भी बात छिपाई नहीं ना । गलत ढंग से पेश की तो मैं उन की बात नहीं कर रहा हूँ जो आपने छोड दिए हैं । मैंने अधीर होकर पूछा हो । जैसे यह है कि जिस आदमी को आप मेट्रो से कटा बताते हैं, सच कहा जाए तो उसकी हत्या हुई है गा । कमरे में सन्नाटा छा गया । सभी लोग सदमे में आ गया । एक कोई भी गिरने की आवाज सुनाई दे जाती है । एक का एक । जब इस बात का मतलब मेरी समझ में आया तो नए कमरे की चुप्पी तोडते हुए लगभग फल पडा । क्या अब यही सोचते हैं कि मैंने मजबूरी को मेट्रो के नीचे धकेल दिया? मैं सच कहता हूँ मैंने उससे नहीं । अरे नहीं नहीं चुनाव नहीं छह टन सिंह ने मेरी बात काटते हुए बीच में हस्कर कहा हाल खबर आई है । नहीं मेरा ये मतलब बिल्कुल नहीं । फिर क्या कहना चाहते हैं? मैंने पहले की तरह तैश में आकर कहा । उसे मैंने अपनी आंखों से करते हुए देखा । उसे किसी और ने भी नहीं धकेला । ये मैं हालत लेकर कह सकता हूँ और आप कहते हैं कि उसकी हत्या की गई है । आपकी आंखों पर विश्वास करना छोड दूँ? नहीं, बिलकुल नहीं ऐसा है कि उसे आपने या किसी और ने नहीं अकेला हूँ और आपने वह दूसरे बहुत से लोगों ने उसे मेट्रो से काटते हुए देखा पर कोई उसकी हत्या, उसका मेट्रो से घटना दुर्घटना नहीं था बल्कि बडी ही चतुराई से की गई हत्या थी । अखिल कैसे कई लोगों नहीं पूछा यह मैं फिर बताऊंगा । किसे सिलसिलेवार लेना अच्छा होगा? छह थानसिंह ने कहा अब मैं आप लोगों का दूसरा सवाल लूंगा कि आखिर डाली कहा है? इस सवाल का जवाब मुझे भी नहीं मालूम है । संजय बाबू को भी नहीं पता ये मुझे विश्वास है, लेकिन ताली कोई ले भी नहीं गया । पर अगर उसे कोई ले नहीं गया और संजय बाबू को भी नहीं पता कि ताली कहाँ है तो आखिर कहाँ नहीं है? सच पूछिए तो मैं आप लोगों की उत्सुकता शांत करने ही नहीं आया । अखबार में जो ब्यौरा छपेगा उससे भी आप लोग समझ लेंगे । दरअसल में आया हूँ ताली की खोज करने दल जो आदमी बोर्ड पर मारा गया, उसके सामान में भी ताली नहीं मिली । घुस के घर की भी तलाशी हुई, पर वहाँ भी डाली नहीं मिली हूँ । अब मेरा एक अनुमान है गा । शायद मैं सही साबित हो । लेकिन मैं कौन था जो बोर्ड पर मारा गया? कई लोगों ने पूछा । मान सिंह, मान सिंह, मैंने और कई लोगों ने जो कहानी सुन चुके थे, ताज्जुब से पूछा । मानसिंह तो परसों रात स्टेशन मेट्रो से घटकर मर गया था या अगर आप की बात मानी जाए तो उसकी हत्या हो गई थी? नहीं, वह मानसिंह नहीं था, ॅ चंदानी थे । बहुत ही शरीफ और एक आदमी थे । उनकी लाश की शिनाखत हो चुकी थी । जान दानी को इसी मान सिंह ने कैद करके रखा था और उसी की कैसे छोड कर भागते हुए मैं मारे गए । आखिर हुआ क्या था? मानसिंह चंदानी और चंदानी मानसिंह कैसे बन गए, दोनों की शकल भी नहीं मिलती थी । छः थानसिंह ने कहा यही तो मामले का दिलचस्प पहलू हैं । दर असल । ये सारी बात एक हफ्ते पहले शुरू हुई शुरू तो हुई थी बहुत पहले से लेकिन जहाँ तक इस मामले का ताल्लुक है वह एक हफ्ता पहले शुरू हुई हूँ । एक मकैनिक से बढकर ऐसे चंदानी साहब एक बडे कारखाने के मालिक हो गए । यहाँ एक लंबा किस्सा है और यहाँ से विस्तार से बताने की जरूरत भी नहीं है । उनके कारखाने में मशीनी औजार बनते थे जो अच्छे और बाहर से आने वाले औजारों के मुकाबले सस्ते भी पडते थे । उन की अच्छी मांग थी हमारे यहाँ कल कारखाने बढ रहे हैं । नए नए मशीनें, बाजारों की मांग बढ रही हैं लेकिन वे औजार हमारे यहाँ नहीं बनता हैं । चंदानी साहब एक अच्छे और दूरदर्शी बिजनेसमैन हैं । उन्होंने देखा कि अगर मैं हजार मुल्क में ही बनेंगे तो उनकी मांग बढ जाने से पैसे भी पैदा हो सकते हैं और उन औजारों को बाहर से मांगना भी नहीं पडेगा । लेकिन उनके पास पूंजी की कमी थी । उन्हें बनाने वाले इंजीनियर मकैनिक वगैरा भी नहीं थे । लिहाजा उन्होंने कोई जगह बातचीत चलाई और आखिरकार एक अन्य देश की कंपनी उनके साझेदारी में यहाँ कारखाना लगाने के लिए तैयार हो गई । लेकिन चंदानी साहब ये नहीं चाहते थे कि साझे में जो कंपनी में बनाएं, उस पर विदेशी हावी होगा । इसलिए आधे से ज्यादा हिस्से के लिए काफी पहुंची की जरूरत थी । वो चंदानी को बैंक वाले राशा जो कर्ज मिल सकता था वह काफी ना होता हूँ । इसलिए मैं अपनी फर्म हिंदुस्तानी हिस्सेदारों को लाने की फिराक में थे । यहाँ उनकी भेड मानसिंह से हुई है । अपराधियों का ये सरदार बडी शान और ठाठ से रहता था । खुद मान सिंह ने चंदानी बनकर अपनी कारगुजारियों का कुछ हिस्सा संजय बाबू को बताया था । इससे वह बता चुका था । लेकिन उसके कुछ और भी भयानक अपराध हैं जैसे भोली भाली लडकियों को फंसाकर जिसमें का व्यापार करने वाले विदेशी अड्डों पर बेचना, बाहर से नशीली चीजें, स्मगलिंग करके मंगाना और संगठित गिरोहों से उनकी बिक्री, खुद यहाँ कॉल, गालियाँ, डंडा चलाना वगैरह । शैतान सिंह कुछ देर के लिए रुके । फिर उन्होंने कहना शुरू किया, एक तो ये चीजें अपने आप में जुर्म है, दूसरे इनसे जितने नौजवान गुमराह होते हैं, उसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता । अगर इस बात को भी शामिल किया जाए तो मैं इस तरह दोहरा अपराध करता था । जैसा कि मैंने बताया, मैं बडी शान्त जिंदगी बताता था । चंदानी जिस क्लब में चाहते थे, उसी में वह भी जाता था । एक दिन बातों बातों में चल । नानी ने उससे अपनी योजना का जिक्र कर दिया । रहमान सिंह कि असलियत जानते नहीं थे इसलिए उन्होंने उसे भी कंपनी में हिस्सेदार बनाने के लिए कहा । ध्यान सिंह तैयार हो गया । मैं क्यों तैयार हो गया? क्या उसे एक का एक मुल्के कल कारखानों की तरक्की से मोहब्बत हो गई? नहीं, बिल्कुल नहीं डॅाल । उसके सामने एक मसला था । अगर बहुत घट कार, जिंदगी बिताने वाला आदमी प्रकट रूप से कुछ करता ना हो तो उस पर लोग तो यही शक करने लगते हैं । इसलिए उसके सामने मसला था अपने अपराधों पर पडता डाला और अपनी िशत परशान को भी बनाए रखना हूँ । क्या मामला हर सफल आदमी के सामने पैदा होता है तो तो सबसे अच्छी तरह की होती है । किसी कानूनी ढंडे की आठ खडी कर लेना वह को छोटे मोटे ठंडे क्या करता था पर जिस तरह की जिंदगी में बिताता था उससे रे में नहीं खाते तो जननी का प्रस्ताव उसके लिए वरदान बन गया हूँ । इस तरह है उसका खाली दौलत को छिपा सकता था जिसे उसने तरह तरह के काले कारनामों से पैदा किया था । कंपनी में आकर उसे एक और ठंडा करने का भी अच्छा मौका मिल गया । जरा गौर कीजिए, एक बनी बनाई कंपनी उसका नाम भी है । देश में सभी जगह उसके एजेंट है । अगर उसे अपने कालेधन जे के लिए इस्तेमाल किया जा सके तो कैसा रहेगा? धाम के दम हूँ और किसी को जरा भी सुबह खाना हो उसमें कंपनी के नाम के बहाने विदेश का दौरा किया और उसके बाद यहाँ उसकी एजेंसियों में चुप चाप अपने आदमियों को खास खास पदों पर रखवा दिया । गैरकंपनी के डाॅक्टरों में से एक था इसलिए लोगों को रखवाने के काम में कोई दिक्कत नहीं हुई । बाहर से कंपनी के लिए छोटे मोटे पुर्जो या दूसरी चीजों की खेलते जिन बॉक्सर में थी उन्हीं में बहुत ही नशीली गोली के पैकेट दे रहे थे । विदेश जाकर उसने उन्हें भेजने वाले आदमी ठीक कर लिए थे । इस तरह है उन गोलियों को मंगाना बहुत आसान हो गया था । कस्टम पर मशीनरी वगैरा के बक्सों की बहुत ज्यादा जांच नहीं होती । बक्सों पर ही सब कुछ लिखा होता है और उसी को देखकर सिस्टम वाले उसे पास कर देते हैं । फिर अपने यहाँ काम धंधे बढाने की गरज से जिन कंपनियों के माल आते हैं उन पर ड्यूटी की भी छूट सरकार देती है । गिरा दिए हैं कि सब कुछ बिना किसी शक के कस्टम के पास हो जाता है और सीधे कंपनी के गोदाम नहीं पहुंचता । जहाँ महान सिंह की आदमियों से खोलते फिर एजेंसियों में तैनात उनके आधियों के पास भेज दिया जाता । वे गोली थी एलएसटी आप लोगों ने अखबारों में पढा होगा । इधर उसके चोरी छिपे बिक्री के काम में बहुत तेजी आ गई थी और कई शहरों की पुलिस या जानने के लिए परेशान थी कि आखिर ये गोलियाँ तीन कहाँ से और कैसी दिखती हैं । वैसे इन गोलियों की कीमत ज्यादा नहीं होती पर नशा लग जाने पर इन की कोई भी कीमत वसूली जा सकती है । एनएसजी खाने से अजीब सी बात होती है । उन्हें खाने वाला नशे में सुंदरियों और अप्सराओं के साथ भोगविलास के सपने देखता है । पर खास बात ये होती है की गोली खाने वाले को यह सबसे अच्छा मालूम होता है । उसे खाने वाले धीरे धीरे उसके आदि हो जाते हैं । उन्हें हमारी असली दुनिया अच्छी नहीं लगती और वह उन्हें सुंदरियों की खयाली दुनिया में डूबे लेना चाहते हैं । धीरे धीरे उनका व्यक्तित्व सड जाता है और वे नहीं काम में और रही हो जाते हैं और एक दिन ऐसा भी आता है जब मैं उन्हें सुंदरियों से घिरेगी ने मर जाते फॅालोअर्स एक खाते पीते धनी घरों के लोग इनके शिकार बनाए जाते हैं ताकि उनमें इसकी लत पैदा कर वो मांगी कीमत वसूली जा सके तो ताली जिस लॉकर की है उसमें यही गोलियाँ रखी हुई हैं । मैंने पूछा हूँ नहीं शैतान सिंह ने गर्दन हिलाई और कुछ देर के लिए मैं चुप हो गए । हम भी चुप बैठे रहे । हम ऐसे कोई टिप्पणी भी नहीं कर रहा था क्योंकि इससे कहानी का क्रम टूट जाने का खतरा था । नौकर में क्या है यही बताने जा रहा हूँ । थानसिंह ने कहा कंपनी के हालत खराब होने लगे । हजार कंपनी नशे के धंधे की कंपनी बन जाए तो इलाज में ही है वो चंदानी को धीरे धीरे शक होने लगा । वो हूँ कि कहीं दाल में कुछ काला है लेकिन पहचान नहीं सका की गडबडी क्या थी? तो इसी दौरान कस्टम ऑफिस को एक अजीब सखत मिला । उस घट में लिखा था कि चंदानी की कंपनी के लिए बाहर से आने वाले पांच सालों के ध्यान से जांच की जाए । साफ साफ कुछ नहीं लिखा था । वो सिर्फ इशारा किया गया था कि उनमें से कुछ गैरकानूनी चीजें मिलेंगी । लिखने वाले ने अपना नाम भी नहीं लिखा था । हम भी नहीं जानते थे कि ये खट किसने लिखा था । हमारा अनुमान है कि मुनाफे के बंटवारे का झगडा होगा । ऐसे मामलों में अक्सर ऐसी बातें होती हैं और फिर सच । मुझे एक पार्सल आया तो उसमें मशीन के पुर्जों के अलावा एलएसटी का भी एक पैकेट मिला । कस्टम वालों ने तुरंत कोई कार्यवाही नहीं । कंपनी बडी और नामी थी । उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई करना ठीक है होता । पर उन्होंने वह पार्सल और पैकेट जब्त कर लिया और कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर चंदानी को खबर कर दी । चंदानी कंपनी में गडबड ियों की वजह समझ गए तो अब उन्होंने नए सिरे से जांच शुरू की । ये जांच उन्होंने अपने तक ही गुप्त रखी हो । मैं रात में दफ्तर में जाजागढ सारे का आजादी पत्रव्यवहार फाइलें रजिस्टर वगैरा देखते । धीरे धीरे उन्हें कुछ साफ तस्वीर समझ में आने लगी । उन्होंने पाया कि उनके दफ्तर में ही एक और दफ्तर लग रहा था । एक छोटे से रजिस्टर पर ऐसे कुछ रखने लिखी थी जिनका कंपनी से कोई ताल्लुक नहीं था । मानसिंह जिस कमरे में बैठा था उसमें और फाइलों के साथ एक ऐसी फाइल भी मिली जिसमें एजेंसियों में काम करने वाले कुछ लोगों की चिट्ठियां लिखी हुई थी । उन चिट्ठियों में कुछ साफ साफ नहीं लिखा था और उनमें जो कुछ भी लिखा था वो उनका कंपनी के बिजनेस से कोई मतलब नहीं था । लेकिन मान सिंह बहुत होशियार था । वो हमेशा दूसरों का इस्तेमाल करता था तो इसीलिए उसके खिलाफ कोई पक्का सबूत नहीं मिला । चंदानी चुपचाप खोजबीन करते रहे । मानसिंह अभी इन खोजों से बेखबर भी था । चंदानी ने किसी को पता न चलने दिया । चन्दानी ने सोचा कि अगर किसी तरह मान सिंह का पर्स उडा लें तो शायद कुछ सबूत मिल जाए । यह काम आसान और कठिन दोनों धान कोई अच्छा मौका मिल जाने पर किसी के कोर्ट से पर्स उडा देना कोई मुश्किल बात नहीं थी । लेकिन मुश्किल ये थी कि मौका मिले नहीं, कोई गिरह कर तो नहीं थे । फिर मान सिंह जो खुद इन बातों में उत्साह था उससे कौन गिरावटी करने की हिम्मत करता हूँ । लिहाजा मौके की तलाश में थे मान सिंह की आदतें उन्हें पता थी वह शाम को दफ्तर का वक्त खत्म होने के बाद कॉफी देरतक डॉक्टर ने रहता था । डॉक्टर में ही मैं बात भी जाता है अपना को टाइम वगैरा अपने कमरे में ही कुर्सी पर तंग कर बाथरूम जाया करता था । चंदानी इसी पर डाउन लगाए हुए थे और एक दिन उन्हें मौका भी मिल गया

PART 10 (B)

पूरे दफ्तर में चंदानी और मानसिंह के सेवा और कोई नहीं था । बॅूद उसके कमरे, महंगाई और उसकी जेब से पर्स निकाल लिया और उसमें कुछ रुपयों के अलावा कुछ भी नहीं था । फिर उन्होंने उसकी दूसरी जेबों की तलाशी ली हो । एक जेब में एक छोटी सी डायरी रखी थी, जिसमें कुछ बातें नोट लिखे हुए थे । चन्दानी ने वह डायरी अपनी जेब के हवाले कर दी और दवे वहाँ अपने कमरे में लौट आए । मैं समझ नहीं पाया की डायरी में कोई काम की बात है या नहीं, पर उसे और इससे पहले उन्हें जो रजिस्टर और चिट्ठियां मिली थी, उन सबको उन्होंने दूसरे दिन बैंक के एक घर में रख दिया । उससे सुरक्षित और कोई जगह नहीं थी । वहाँ कोई भी पहुंच नहीं सकता था क्या हम में से किसी ने पूछा? उस करने में कागजात थे? जी हां, ब्लॉक कर में वही का एक साथ थे । पर अभी मान सिंह के खिलाफ कोई पक्का सबूत नहीं मिला था । उन्हें मिलने की उम्मीद भी नहीं थीं । मैं जासूसी आप पुलिस के तरीके नहीं जानते थे, लिहाजा उन्होंने खुफिया पुलिस से मदद लेने की सोची । जिस दिन उन्होंने सारे कागजात लाकर मेज पर रखें, उसी दिन उन्होंने स्पेशल क्राइम ब्रांच को एक चिट्ठी लिखी । ये सब्जियों में आप लोगों को बता रहा हूँ । उसके बाद की गई जांचों से मालूम हुआ है । वह है उसके बाद की गई जांचों से मालूम हुआ है । लेकिन इससे हमें ये पता नहीं चला था कि मान सिंह जी चंदानी बन गया था क्योंकि एक तो ऐसा उस चिट्ठी के लिखे जाने के बाद हुआ । दूसरे शुरू में ही हम एक बडी भयानक चालबाजी के शिकार हो । हम इतने बुद्धू कभी नहीं बने थे । किस किस से मैं यहाँ से माधुरी ने एक खास भूमिका अदा की । वह चंदानी की प्राइवेट सेक्रेटरी थीं । लेकिन सच पूछिए तो मेहमान सिंह की कठपुतली थी । उसे मान सिंह ने धीरे धीरे एलएसटी की आदत लगा दी थी और उसके बाल पर वह माधुरी को खिलौने की तरह इस्तेमाल करता हूँ । बता चुका हूँ कि जिसे इसकी आदत लग जाए तो मैं उस गोली के लिए कोई भी कीमत अदा करेगा । माधुरी अपने तन के सेवा और कोई कीमत नहीं अदा कर सकती थी और मानसिंह ने कीमत वसूल भी की पर वह एक और कीमत भी वसूलता था । माधुरी से चंदानी के खिलाफ जासूसी कराकर इसी माधुरी से चंदानी मेरे चिट्टी टाइप कराई जो उसने हमें लिखी थी । उसके और मानसिंह के बीच क्या व्यापार चल रहा था इससे भी खबर थे । दुनिया का सारा काम विश्वास पानी चलता है और वह भला क्यों अपनी सैकेट्री पर विश्वास नहीं करता । उन्होंने अपनी चिट्ठी में मान सिंह का नाम नहीं लगता पर अपनी कंपनी की छाया में नशे के धंधे के चलने व फलने फूलने का शब्द जाहिर किया था और यह भी लिखाया की खुफिया सबूत मिले हैं जिन्हें उसने बहुत ही हिफाजत से रख दिया और जांच के वक्त निकालेंगे । मोहन सिंह को इसकी खबर मिल नहीं थी । हमने कार्रवाई करने में कोई देर नहीं की । ये कार्ड ऐसी गोले किस रफ्तार में दौडते हैं इसकी चर्चा रोज की असेंबलियों और अखबारों में हुआ करती हैं । खनापूर्ति इतनी लम्बी चौडी होती है कि जब तक पुलिस मौके पर पहुंचती है वारदात अक्सर पुरानी पड चुकी होती है । फॅमिली में क्या था ऍम छूरेबाजी की बात महज शख्स लेकिन क्योंकि वह कंपनी काफी बडी थी और चंदानी साहब की पहुंच ऊपर तक हो सकती थी इसीलिए हमने तुरंत कार्रवाई की लेकिन जैसे खता था उसने जरा सी भी देरी नहीं हूँ । ये चिट्टी हमें शाम की डाक से मिली थी और उसे दिन रात आठ बजे मैं जांच के लिए चंदानी साहब से मिलने चल दिया लेकिन मान सिंह इसके पहले ही कार्रवाई कर चुका था । चन्दानी साहब अपने कैबिन में बैठे कुछ काम कर रहे थे तो हो सकता है हमारा भी इंतजार कर रहे हूँ । तभी मोहन सिंह हाथ में पिस्तौल लेकर उसके सामने जा खडा हुआ जगह भी साथ था । गोली मार देने की धमकी देकर दोनों उन्हें दफ्तर के बाहर ले गए तो वहाँ कार पहले से तैयार खडी थी । उसमें माधुरी भी पहले से ही बैठी थीं । चन्दानी के कार में बैठते ही उसने उन्हें क्लोरोफॉर्म सुंघाकर बेहोश कर दिया । फिर जगह भी उसी कार में जा बैठा और उन्हें मान सिंह के घर के पास एक खाली मकान में ले गए । वहाँ चलानी साहब को एक कमरे में कैद कर दिया गया । मान सिंह डॉक्टर में ही रह गया और चंदा ने साहब के कैबिन में जिस चंदानी से मैं मिला वे चंदानी नहीं, यही मान सिंह था । उसने अपना परिचय मुझे चंदानी के रूप में दिया । मैंने कभी चंदा नहीं तो इस से पहले नहीं देखा था इसलिए मुझे उसकी बातों पर शक करने की गुंजाइश ही नहीं थी । मैं मुझसे बडी इस और शराफत के साथ भी हराया, चंदानी नहीं । जो कुछ लिखा था उसे रे सीधे सीधे झूठा नहीं कह सकता था क्योंकि उस हालत में सवाल होता की फिर उन्होंने क्राइम ब्रांच को रैप खाते लिखा ही क्यों? मुझे गुमराह करने की कोशिश नहीं जरूर कि उसने मेरे मन में यह बात बैठाने की कोशिश की कि खत की बातें महक शक है ताकि हम उसे मामूली सी बात मान का मत बच्ची ना करें और जांच बन करते हैं । लेकिन उस की इस बात ने मेरे अंदर मामले के बारे में ज्यादा दिलचस्पी पैदा कर दी । फिर एक बात और थी मैं यही नहीं बता सकता हूँ की चंदानी ने जो सबूत इकट्ठा किए थे उन्हें कहाँ रखा है । इस बारे में मेरे सवालों को मैं टालता रहा और जब मैंने सीधे सीधे उनके बारे में पूछा तो कहने लगा कि वक्त आने पर ही उन्हें पेश करेगा और उससे भी मैं किसी तरह सही नतीजे पर नहीं पहुंचा । उस वक्त मैंने ये सोचा कि या तो चंदानी बहुत डरे हुए हैं या चिट्ठी लिख देने के बाद उन्होंने अपना विचार बदल दिया है और किसी वजह से यह नहीं चाहते कि सच्चाई सामने आए और नहीं चाहते तो क्यों इस की उनके उत्तर की तलाश नहीं, मेरे अंदर सडक गर्मी पैदा की वो मैंने जब उस नकली चंदानी से मान सिंह का पूछा तो उसने उसी मकान का पता बता दिया जहां उसने चंदानी को कैद करके रखा था । लेकिन यह बता देते हुए उसके मन में भयानक योजना काम कर रही थी । यह मुझे नहीं मालूम था उसने एक परफेक्ट मर्डर की योजना बनाई थी । एक ऐसी योजना की हत्या भी हो जाए और किसी को शक्ति ना हो की हत्या हुई है । लेकिन इससे पहले उसने डाली हथिया लेने की सोच मुझे ठीक ठीक नहीं पता था कि उसने ये कैसे जान लिया कि चंदानी ने जिन सबूतों के बारे में लिखा था जाकर में रखे थे । चन्दानी ने अपनी चिट्ठी में ये भी नहीं लिखा था कि वह लॉकर में रखे थे । हो सकता है उसने ये अनुमान लगा लिया हूँ । फिर बैंक में फोन करके किसी बहाने यह पूछा कि चंदानी वहाँ गए थे या नहीं । ऍम था और बैंक के लोगों से जानते थे इसलिए बैंक को इतनी सूचना देने में कोई हिचक ना होती हूँ । ये भी हो सकता है कि उसने जोर जबरदस्ती की हूँ । उसकी एक डायरी गायब हो गई थी । उसी के बारे में पूछने के लिए उस ने उन पर दबाव डाला होगा । लेकिन पहली बात ही ज्यादा सही मालूम होती है क्योंकि है मालूम होने के बाद भी की चंदानी बहन गए थे । वे निश्चय के साथ नहीं जानता था की उन्होंने वह कागजात वही रखे हैं कि नहीं । अगर चंदानी ने दवाब में पढकर बता दिया होता की डायरी और दूसरे कागजात लॉकर में है तो मैं किसी भी तरह पहले उस नौकर को ही खुलवाने की कोशिश करता हूँ । मैं डायरी चंदानी के समझ में कोई बहुत तक का प्रमाण नहीं था लेकिन उसमें जरूर ऐसी बातें रही होंगी जिससे उसके लिए उस डायरी को पाना जिंदगी और मौत का सवाल बन गया हूँ वरना है ताली पाने के लिए जमीन आसमानी इतना कर देता हूँ । उसके लिए कत्ल टक्कर देने में उसे हिचक नहीं हुई । चन्दानी का कत्ल करके तो मैं एक ही पहले से दो शिकार कर सकता था । एक तो यह है कि उसे चंदानी से फिर कोई खतरा नहीं रह जाता है । दूसरे यह है कि उन लोगों की मौत हो जाने के बाद उसे लाकर की ताली की जरूरत ना रह जाती है । उसकी मौत की हालत में वह चंदानी के बाद नंबर दो होने के नाते बैंक के अफसरों से डॉक्टर खुलवा सकता था । अगर ये नहीं होता तो उनके परिवार वालों को सामने पेश करके लॉकर खुलवा लेता । उन्हें कुछ बताना होता की है । कागजाद कैसे हैं और उनका आजाद को कंपनी का बताकर उन्हें हथियार लेता । लेकिन उसने ये नहीं सोचा था कि चंदानी अपनी मौत के पहले चैताली आपको दे देंगे । आप देखिए कि उसकी परफेक्ट मर्डर की योजना क्या थी? छह टन सिंह ने नाटकीय आवाज में और हाव भाव से कहा । उसने कहा कि मैं जांच के सिलसिले में मान सिंह जो वास्तव में चंदानी थे, से दफ्तर में ना मिलूँ क्योंकि इससे बेटा ही दफ्तर में घबराहट फैलेगी और काम का ही होगा । कंपनी की बदनामी होगी सवालाख इसलिए अच्छा होगा कि मैं मान सिंह से उसके घर पर ही मिलो । उसने मुझे ये भी सुझाव दे दिया कि मान सिंह से किस वक्त मिलना ठीक होगा । उसने मुझे मानसिंह से अगले दिन शाम को मिलने का सुझाव दिया । मैंने उसे मान लिया क्योंकि जांच के शुरूआती दौर मैं यही तरीका ठीक होता है । जब तक जुर्म कायम नहीं हो जाता तब डाक किस बात का हक नहीं होता हूँ कि मुफ्त में किसी को बदनाम किया जाए । था । पक्के सबूत हूँ तो बात और है । फिर मैं यह भी नहीं जानता था कि वह सुझाव के पीछे था क्या? इसलिए उसी वक्त वहां पहुंचा जो वक्त उसने बताया था । उधर वहाँ से उसी वक्त उन्हें भाग निकलने का मौका दे दिया । मैं उस घर पर अभी पहुंचाई था कि चंदानी, जिन्हें मैं उस वक्त मानसिंह समझता था, घर से बडी सावधानी से बाहर निकलते दिखाई दी है । तो मैं आगे पीछे बडी सतर्कता से देख रहे थे कि कोई पहरेदार वगैरह तो नहीं है या कोई उनका पीछा तो नहीं कर रहा है । मैंने यही समझा कि मान सिंह ही कहीं जा रहा है और किसी अच्छे मकसद से नहीं जा रहा है । इसीलिए नहीं सावधानी बरत रहा है । वहाँ पहले से ही एक टैक्सी मौजूद थी वो अब मैं पक्के तौर पर कह सकता हूँ कि वह टैक्सी असली मान सिंह ने पहले से वहाँ तैयार रखा छोडी थी और उसी का कोई आठ दिनों से चला भी रहा था । पर उस वक्त में ये सब नहीं जानता था । मैंने उस टैक्सी का पीछा करना शुरू किया । मुझे खुशी हो रही थीं कि बैठे बिठाए मान सिंह के बारे में पक्के तौर पर कुछ जानने का मौका मिल जाए । अगर मैं अपने किसी गुप्ता दे पड जा रहा है या अपने कालेधन ने वाले कुछ साथियों से मिलने जा रहा है तो अवश्य मैं को जानने में सफल हो जाऊंगा वो तो इसलिए मैंने बडी होशियारी से अपनी मोटर साइकिल से उस टैक्सी का पीछा करना शुरू किया तो मुझे क्या पता था कि मेरी एजबेस् कोफी पर असली मानसिंह हस रहा होगा । टैक्सी उन्हें लेकर मेट्रो स्टेशन की ओर बढ चलीं । नोएडा जाने के लिए उधर से ही जाना पडता है । मैं उस टैक्सी के पीछे था, एकदम पीछे नहीं लेकिन तीन चार गाडी छोडकर टैक्सी का नंबर मैंने याद कर लिया था । इसलिए उसके थोडा आगे रहने पर भी मुझे उसका पीछा करने में कोई दिक्कत नहीं हो रही थी । लेकिन नोएडा के पास पहुंचकर मुझे ऐसा महसूस हुआ कि उस टैक्सी का पीछा एक और टैक्सी कर रही थी । सेक्टर अठारह तक पहुंचते पहुंचते हैं । मेरा शर्ट विश्वास में बदल गया क्योंकि कडी पाँच किलोमीटर का फैसला एक दूसरे टैक्सी ने पहले वाले टैक्सी से बराबर दूरी बनाते हुए तय किया । पहली टैक्सी ने उसे आगे निकलने का मौका दिया तब भी वे आगे नहीं निकला । जब की और बसें निकाल कर लूँ मैं उस वक्त ये नहीं समझ पाया कि आखिर है दूसरी टैक्सी क्यों पीछा कर रही थी । फ्लाईओवर पार करते करते एक का एक टैक्सी जिस पर चल नानी बैठे थे, खराब हो गई । ड्राइवर ने बाहर आकर बोनेट उठाकर इंजन वगैरा की जांच की । दो एक रही गानों से टैक्सी को धक्का भी लगाया । फॅमिली नहीं चलेगा क्योंकि वह चलने वाली थी ही नहीं । यकीनन है टैक्सी जानबूझकर खराब हुई थी । तंग आकर चंदानी टैक्सी से उधर पडे । टैक्सी चलाने वाले पर बिगडते हुए उन्होंने वहाँ तक का किराया अदा किया और फिर अपनी कलाई घडी पर नजर डालते हुए तेज कदमों से मेट्रो की ओर बढ चलें जो वहाँ से मुश्किल से एक किलोमीटर पडता है हूँ । मैंने अभी तक नहीं देखा था कि चंदानी की टैक्सी का पीछे करने वाली टैक्सी भी आगे जाकर रुक गई थी । चन्दानी के कुछ कदम आगे बढते ही उसमें से लगभग करेगा । आदमी बाहर आया हूँ है जगह था जिससे मैं उस वक्त नहीं पहचानता था । उसमें चंदानी को रोककर से कुछ कहा जमदानी छह बार के लिए झटके फिर मालूम होता है चंदानी डर के आगे केवल भागे उन्हीं के पीछे आदमी भी तेज कदमों से आगे बढ गया तो जरा सोचिए कैसी अजीब बात है । मेरे सामने ही एक हत्या की भूमिका बन रही थी । पर मैंने क्या सोचा मैंने यही सोचा कि टैक्सी मान सिंह का नहीं मेरा पीछा कर रही थी और मेट्रो स्टेशन के पास मान सिंह को रोककर उसने मेरे ही बारे में बताया था । भागते हुए चंदानी मेट्रो में दाखिल हुए । उनके पीछे जगह था और जगन के पीछे मैं मेट्रो स्टेशन पर आ रही थी । चन्दानी लगाते हुए उसी की ओर बढ रहे थे । फिर एक डब्बे के पास उन्होंने एक आदमी कहाँ पकड लिया वो जो संजय बाबू आप हैं उसी के कुछ बार गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई । ऍम मैंने कहा ये कभी नहीं हो सकता । मैं बिलकुल पास ही खडा था उनके अगर कोई गोली मारता तो मैं जरूर देख लेता । गोली चलने की आवाज तो मैंने सुनी होती । संजय बाबू उस वक्त मैंने किसी को गोली चलाते नहीं देखा था । ना ही गोली चलने की आवाज मैंने सुनी । कल्पना कीजिए आप स्टेशन पर हैं, वहाँ असंख्य लोग हैं । मेट्रो आ रही है । साइलेंसर लगी पिस्तौल की आवास गाडी की आवाज से बहुत भिन्न नहीं होती । आप उसी चीज की कल्पना करते हैं जो आपके आस पास होती हैं । अगर कोई पिस्तौल चले भी और आप उसकी आवाज भी लें तो आप उस आवाज को पिस्तौल छूटने की नहीं बल्कि शोर गोल से बारिश स्टेशन की ही आवाज कहेंगे । इसलिए आपने उसे नहीं सुना तो स्टॉल का निशाना क्योंकि ब्रिस्टॉल पर रोमान लपेटकर साधा गया था इसलिए उसे किसी ने भी नहीं देखा । फॅस तौल की गोली चलने से पहले चंदानी ने उसे देख लिया था । बता रहे बदहवास होकर आगे केवल भागा और गोली लगने से लडखडाकर चलती मेट्रो के नीचे आ गया । देखने वाले उसे दुर्घटना ही समझेंगे । ऐसा भी इतनी टेस्टी और चतुराई से होगा की आप उसे अगर नहीं समझ सके तो कोई ताज्जुब नहीं । फिर इसे मैं सिर्फ एक तर्क के आधार पर ही हत्या नहीं कर रहा हूँ का लाश का पोस्टमार्टम हुआ । पोस्टमार्टम में मौत की जाहिर तौर पर तो मजा होती है । डॉक्टर अक्सर उसी की तस्वीर कर देते हैं जिसमें कम रहे । ऐसा जहाँ गोली लगी थी मेट्रो के पहियों के नीचे पेश किया था । लेकिन डॉक्टर की निगाह कपडों पर गई हूँ । एक जगह उसमें छेद था और मैं खेद जैसे जल जाने की वजह से हुआ हो । सुनने पर उससे बारूद की गणनाएं डॉक्टर ने तब ब्लाॅस्ट किया तो कार तो से हुई मौत पर किसी दूसरी वजह से हुई मौत का पता खून की जांच से चल जाता है । इसमें भी इस बात का पता आसानी से चल गया की मौत मेट्रो से कट कर नहीं बल्कि गोली करने से हुई हूँ । फिर लाश की शिनाख् सर्दी हो गई । दो दिन से चंदानी के घर वालों को उनकी कोई खबर नहीं थीं । दफ्तर में कोई कुछ ठीक बताता नहीं था इसलिए उनके घर वालों ने पुलिस में रिपोर्ट कर दी । पुलिस ने चंदानी का हुलिया हेड क्वार्टर में भेजा और उसके वाहक लाश के बारे में शक हुआ । फिर चंदानी के घर वालों को खबर की गई । उन लोगों ने लाश की शिनाखत की । हम लोग सारा मामला समझ गए लेकिन फिलहाल इसे कुत्ते रखा गया ताकि मानसिंह भागना निकले । उन लोगों के सामने जो से नहीं जानते थे अपने आपको चंदानी के रूप में पेश करने के पीछे उसकी यही योजना थी । फिर इससे पहले ताली पा लेना भी जरूरी था ताकि मान सिंह के खिलाफ पक्के तौर पर कार्रवाई की जा सकें । आपको तालिका पता कैसे लगा? मैंने पूछा और फिर आपको कैसे मालूम हुआ कि है ताली नौकर की है ये मुझे पता बिल्कुल भी नहीं था कि गैर ताली लॉकर की है । आती चोरी की मैसेज दिया जानता था कि आपके पास डाली है क्योंकि मैंने भी चंदानी को आपकी जेब में ताली डालते हुए देखा था । फॅमिली उन्होंने मुझे क्यों नहीं? मैंने पूछा । उन्होंने ऐसा सोचा कि मुझे तली दे देने से उनका मकसद पूरा होगा । आपने खुद बताया है कि मैं जब आप से मिले तो बहुत घबराए हुए थे । उन्हें पटा था की उनका पीछा किया जा रहा है । आपको उन्होंने शरीफ नौजवान समझा जो आप है भी और चुपचाप आपकी जेब में ताली डालकर आपसे कहा मेरी मदद कीजिए । ये मदद उन्होंने ट्रेन पर चढने के लिए नहीं मांगी थी । वो ज्यादा बात करने का वक्त उनके पास नहीं था । आप भी उसी मेट्रो से जाना चाहते थे और चंदानी भी । मेरा अनुमान है हूँ की हिफाजत के लिए उन्होंने आपकी जेब में ताली रख दी और आगे चलकर आपको अपने परेशानी के बारे में बताकर आपसे डाली मांग लेते ना भी मानते तो बाद में जेब से एक अनजान ताली पाकर आप उसे पुलिस के हवाले कर देते । आप ताली पुलिस के हवाले ना भी करते हैं तो भी उसे आपके पास ताली होने का पता चल जाता । पुलिस के पास उन की छुट्टी थी, उसके आधार पर जगह डाली का जिक्र करते हैं तो पुलिस डेढ सवेरे रात को खोज लेती हूँ । या फिर अगर आप डाली पुलिस के हवाले कर चुके होते हैं तो ऍम नानी को मिल जाती है । लेकिन वही है नहीं । जानते थे कि अगले ही क्षण मौत उनका इंतजार कर रहे थे । फिर आप मेरे साथ किसी गुंडे या बदमाश की तरह ऍम हूँ । इसीलिए की जिस वक्त चंदानी ने आपकी जेब में ताली गिराई तो उस वक्त मैंने उन्हें पहचाना नहीं था और मानसिंह ही समझा था । नहीं । ये भी समझता था कि मान सिंह ने आपकी जेब में डाली आपकी जानकारी में गिराई है । यानी मैं समझता था कि आप मान सिंह के हीरो के आदमी है । अपने ऊपर शक हो जाने पर मान सिंह ने उसे वह जगह थी जहां उसने गोलियां छुपाकर रखी होंगी । डाली आपके हवाले कर दी । लेकिन ताली मिलने के बाद जब वह मेट्रो के नीचे आ गया तो आप ने ताली को हथियार लिया । कल मैंने आपको टेलीफोन किया था तो उस वक्त बोल टनाटन की रिपोर्ट तो आ गई थी पर लाश की शिनाख्त नहीं हुई थी । बोल टनाटन रिपोर्ट सही है । जन का ही उस आदमी की हत्या हुई है । मेरा शक आप पर और बढ गया । मैंने सोचा कि होना होगा आपने ही किसी तरह गोली मारकर हत्या कर दी होगी । वो लाश की शिनाख्त हो गई तो भी आप पर मेरा शक झुका क्यों बना रहा है? तब मैंने आपको निश्चिंत ही मान सिंह का आदमी मान लिया और ये विश्वास कर बैठा हूँ कि आप नहीं चंदा नहीं की हत्या फॅमिली के लिए की है । इसलिए आप से उस तरह पेश आया क्योंकि आम तौर पर लोग पुलिस को अपने भेज नहीं बताते । कुछ होता भी है तो छुपा लेते हैं । मैंने सोचा घाट ऐसे घाटा निकलता है । हाँ हूँ अगर सचमुच कांदा हो तो आपको एक निहायत शरीफ आदमी निकले जो गुंडों के चक्कर में फंस गए थे । मेरे उस तरह के व्यवहार से आपको जो तकलीफ पहुंची है, उसके लिए मुझे बेहद अफसोस है । अपनी लंबी कहानी खत्म करके शैतानसिंह चुप हो गए । फिर उन्होंने खुद के इटली से आपने कप में चाय डाली । जब आप चूस किया लेते रहे, लेकिन एक सवाल तो अब भी रह गया । वकील साहब ने चुप्पी तोडी हो यहाँ मैं समझ गया । ऍम सिंह ने मुस्कुराते हुए ये सवाल है कि आखिर डाली गई कहाँ हो? हाँ इस किससे में हम ये तो भूल ही गए कि अखिल तालिका हुआ क्या? शैलो बाबू ने कहा मेरा ख्याल है मैं जानता हूँ और शायद पुष्पा ही भी जानती हैं वो । शैतान सिंह ने कहा गा आपको पता हैं कहाँ है? आश्चर्य से एक साथ कई लोग बोल पडे लेकिन ये मेरे खयाल ही है । इसके लिए मुझे प्रयोग करना पडेगा रही हो । जी हाँ । शैतान सिंह ने कहा और पीतल की एक ताली हवा में उछाल दी । वो झंडे की आवाज करती । पुष्पा के सामने फर्श पर गिरी पुश ताकि गोद में पम्मी बैठी थी । उसे लगते लगते । बच्ची खुश पानी डाली उठाकर पम्मी को देते हैं । फिर शैतानसिंह बच्चों की तरह उसे लेने के लिए लडके और रूखाई से ताली उसके हाथ से छीन लिए । मैं कुछ समझना सका तो मम्मी रोने लगी । ऍम सिंह ने उसे गोद में उठा लिया । फिर कुछ करते हुए कहा ना बेटा, ये मेरी डाली है नहीं नहीं मिली नहीं बेटा या मेरी है क्या? तुम्हारे पास भी है ऐसी ताली हो? ऍम नहीं निकलती नहीं निकलती नहीं कहाँ फॅमिली देंगे? नहीं करो ना हम चला था ऍम बताओ तो कहा है मैं निकाल दूंगा । मम्मी शैतान सिंह की गोद से मचलती हुई उतर पडी और दौड घर वही गुड डाले आई जो उसे माधुरी ने दिया था । उस से भी जोर जोर से हिलाने लगी । गी प्लास्टिक के खोखले गुंडे के अंदर कोई चीज खटखट कर रही थी । उसे शैतान सिंह को थमाते हुए हमने कहा बॅाजीरॅाव निकाल तो निकाल दो । शैतान सिंह ने कहा लेकिन पहले ये बताऊँ, यही इसमें कैसे गए? तो फिर होने लगी और सहन कर पुष्पा की ओर देखने लगी । नहीं बेटा, मम्मी नहीं मारेंगे, मुझे बताओ । ऍसे पूछ कारण वो फिर अपनी तोतली बोली में । पम्मी ने बताया कि मम्मी ने ताली टेबल पर रहती थी । उसे उसने उठाकर अपनी स्कूल ड्रेस की जय में रख लिया था । दो बुआ जी यानी माधुरी नजर गुड डाल दिया । उसमें खाने के लिए जम्मू में छेड नहीं था । उस ताली से मैं दे के मुंबई छेद बना रही थी कि ताली हाथ से छोडकर गुड्डे के पेट में चली गई । दुनिया बहुत दुखता टाली लिखा गया । डर के मारे उसने बुआ जी को नहीं बताया, क्योंकि वह मम्मी से कह देंगी तो नहीं मम्मी मारे ना । इसी बीच गुड्डे के उसी वहाँ वाले छेद में उंगली फसाकर शैतान सिंह ने एक जब टी पीतल की थाली निकाल ली थी, उस से हम लोगों को दिखाते हुए उसने कहा ये रही साहबान बेहता ली । मुझे खुशी है कि मेरा प्रयोग सफल रहा । ढाई साल बच्चे से जिला नहीं की जा सकती थी । उसने ताली लिया नहीं, यह जानने के लिए जरूरी था की उस की याददाश्त उकसाया जाए । इसलिए मैंने ये नाटक किया । हाँ, मेरा खयाल या तो था कि हो सकता है बच्ची ने ताली नहीं हूँ । पर ये तो मैंने सोचा तक ना था कि ताली गुड्डे में थी और सारे समय मान सिंह और माधुरी की नाक की नहीं चाहिए थी । सभी लोग आवाक होकर कुछ श्रद्धान सिंह की ओर हथेली पर पडी उस थाली की ओर देख दे रहे हैं तो यही थी मनहूस डाली जिसके लिए मैंने इतनी मुसीबतें झेली । पर बमनी की मेरी वक्त पुष्पा की जान पर बनाई थी । शहरों बाबू, वकील साहब और मोदी ने हाथ में लेकर उलट पुलट कर देखा । हालांकि उसमें देखने की ऐसी कोई बात नहीं थी । मैंने उस ताली को छुआ भी नहीं । इतना सब हो जाने के बाद मेरे अंदर उसे हाथ में लेने की भी हिम्मत नहीं रह गई थी । ना अच्छा वो शैतान सिंह ने बडी चतुराई से वह ताली झेल में रख ली और जो ताली उठा ली थी उसे पन्नी को थमा दिया । पानियों से लेकर खुशी खुशी किलकारियां मारती है । फिर पूछताछ की खोज में चाह रही थी । हम लोग कुछ देर और बैठे रहे हैं । चाय का एक और दौरा चला । फिर एक एक करके सारे मेहमान उठने लगे । शैतानसिंह भी उठे । मैंने पूछा जगन और माधुरी का क्या हुआ? दोनों हिरासत में है । माधुरी मिजोरम में अपना हिस्सा इकबाल कर लिया है । वह बदमाशों के चंगुल में फंस गई थी । गन्ना उसमें ऐसी कोई खराब बात नहीं । जुर्म का इकबाल कर लेने से उसे सजा में कुछ रियायत मिल जाएगी । रहा जगन चंदानी के ऊपर स्टेशन पर गोली उसी ने चलाई थी । पर ये साबित करना मुश्किल होगा क्योंकि वो उस पिस्तौल का अभी तक पता नहीं चला है जिस से गोली चलाई गई थी । अगर आप पता चल भी जाए तो उस पर हाथियां क्योंकि निशान नहीं होंगे । लेकिन जुर्म में उसके पूरी तरह शरीफ होने के काफी सबूत हैं और लम्बी जेल से उसका बचना नामुमकिन है । मेरे ऊपर उसने जो छोटे मारी हैं है, मैं बोला नहीं हो था । जहाँ तक खास मुस्लिम का सवाल है, अर्थपूर्ण ढंग से छुट होगा । शैतान सिंह ने पुष्प की ओर देखते हुए कहा, उसे तो आपने क्या की सजा मिल चुकी है । हम घर में अकेले रह गए । मम्मी हो गई थी । अच्छी बेटी की तरह उसने शैतानसिंह वाली ताली पुष्पा को दे दी थी । माधुरी वाला गुडडा उसकी खट्टो लिया के नीचे पडा था । कुछ भी सिर तक लिहाज थोडे थी पर मुझे पता था मैं लगी हुई थी । मैंने कहा पुष्पा यहाँ मेरे पास । पुष्पा ने चेहरे पर से लिहाज हटाते हुए कहा ऍम बात बताऊँ क्या वो मेरे हाथ में एक आदमी का खून लगा है तो मुझे खुद ही तो नहीं समझेंगे । उसने पूछा हो तुम क्या कह रहे हो? ये नहीं कहती कि तुमने दो आदमियों की जान बचाई है तो मैं कौन को नहीं कह सकता है । तोषण पुष्पा खामोश रही । उसके बाद फिर उसने कहा अच्छा एक और पद पता हूँ आप क्या? तो तुम्हारे ऊपर उसका ही का कहना में उसका ज्यादा चल गया था ना सच बता ना मैं तुरंत कुछ नहीं कैसा का अब तुम सबकी हो गए । पुष्पा ने फिर से कहा सच बता दूँ । झूठ मुझे तो के में नहीं रख सकता । मैं आदमियों पूछता और आदमी की कमजोरियाँ मुझे भी हैं । नहीं नहीं सच बात बता दी नहीं, ये मार्ग की कमजोरियाँ है । पुष्पाणि उठकर बैठे हुए कहा, लेकिन मुझे खुशी है कि तुम हो । तुम झूठ बोलते तो मेरी नजरों में गिर जाते हैं आप मुझे तुम्हारा यकीन है । उसने उठकर बत्ती बुझा नहीं । तभी रसोई घर में कोई बर्तन झनझना करनी चाहिए । फिर जैसे नंगे पाँव ऊपर से जमीन पर कोटा । यह करीब करीब रोजगारी उधम मचाने वाली मिली थी । पर आज मुझे कल की तरह कोई डर नहीं लगा । मैं पुष्पा को अपने पास महसूस कर सकता था और वह होस्ट डाली । अब मेरे पास नहीं थी ।

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