Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

Transcript

तलाश भाग 1

ऍम रहे हैं । कहानी तला हूँ जिसे लिखा है उमेश्वरी नूतन नहीं और मैं भी पारीक आपके साथ तो कोई ऍम चाहिए । पहला भाग सुबह कॉलेज से आकर खाना खाने के बाद फिर चाची के यहां चली गई क्योंकि गांव के सुनसान वातावरण में चाची के घर बैठना उसे अच्छा लगता था । चाचा चाची आवाज देते हुए अंदर जा रही थी कि सामने किसी लडके को बैठा देख ठिठक गई । ये देखकर चाची मुस्कुराई और बोली अरे रुक क्यों गई, आना कोई गैर थोडी है । घर का ही लडका है । रह जाते जाते उस लडकी की तरफ देखती रही जो अभी तक सिर झुकाए हुए कोई पुस्तक पड रहा था । फिर अंदर जाकर चाची के पास बैठ गई । चाची रोटी बना रही थी, जिसके साथ वो भी काम में हाथ बंटाने लगी । चाची ने विजय को बुलाया आओ बेटा खाना खा लो । ये सुनते ही विजय अंदर चला गया तो सुबह उठ खडी हुई बोली अच्छा चाची मैं चलती हूँ कहकर वो चली गई । चाची विजय की तरफ इशारा करते हुए बोली लडकों से बहुत शर्माती हैं तो देख तो मुझे देखते ही चली गई । सुमन घर में आई तो देखा बाबू स्कूल गए थे और माँ पडोसन के यहाँ बैठने गई थी । ये देखकर वह चौके में कई गोभी की सब्जी निकली और उसे लेकर सुमन फिर चाची के घर की तरफ चले । वहाँ गए तो देखा विजय खाना खा रहा था । मैं चुपचाप अंदर चली गई और चाची को सब्जी देकर जल्दी से बाहर निकल गई । चाची बुलाती ही रह गई । वह घर आई तो सोचने लगे की विजय कितना प्यारा नाम है । उसका चेहरा भी और अवश्य ही उसका स्वभाव भी सुंदर होगा । लेकिन मैं तो बदसूरत हूँ इसलिए शायद उसने मेरी तरफ देखा भी नहीं । से झुकाए पुस्तक ही पड रहा था । लेकिन वो बिना देखे कैसे जान गए कि मैं कुरु मन ही मन अपने आप से सुमन बातें कर रहे थे कि उसकी मार्च लाती हुई आई । सुमन उमर अरे कहाँ गुम हो गई । सुबह अचानक आवाज सुनकर की चौक गई और फिर संभलकर बोली माँ मैं मैं यहाँ बैठी हूँ । हाँ बडबडाने लगी बैठी है । कितना हो गया कॉलेज से आई तेरे बापू को तो कहते कहते थक गए मगर वो मानते कहा है बस यही कहेंगे एक ही साल दो बच्चा है, वो बीएससी पास हो जाएगी । करी बोलना कितना टाइम हुआ जब तो कॉलेज से आई अभी तक यहाँ बैठे क्या कर रही है । न तो सुतारी है, न खाना खाई है । खाना भी मुझे निकाल कर देना पडेगा । सुमन धीरे से बोली मैं इतनी तेज आवाज में क्यों बोलती हूँ? आते जाते लोग सुनेंगे तो क्या कहेंगे? क्या कहेंगे? यही रखी सौतेली माँ है । खूब सताती है नहीं । हाँ मैं कह रही हूँ कि आप इतना सताती है । सुबह चुपचाप चौके में चली गई और खाना निकालकर खाने बैठ गई । तभी माँ आई और बोली मैंने तुझे कहा कि तू कब कॉलेज से आई क्या ये भी नहीं बताएगी । ये सुनते ही सुमन झट से बोली मैं आज आखिरी पीरियड था । देर हो गयी । ग्यारह बजे तक क्लास लगी थी । फ्री नानाजी की यहाँ गई थी । एक घंटा संगीत सीखने के बाद बारह बजे वहां से रवाना हुई और साढे बारह को यहाँ घर आई । फिर आकर के धरकार महसूस हुई तो बैठ गई वो । वो प्यारी गुडिया कॉलेज से आने जाने में थक गई और मैं तो इतना काम काज घर का करती हूँ । मैं तो नहीं सकती । हाँ और किससे पूछकर नाना जी क्या संगीत सीखने गई थी? पैसा कहाँ से देगी? बाबू यानी कि नाना तो एक महीने का दो सौ रुपए ले कहना । ये सुनकर सुमन बोली नहीं । वहाँ मैंने उन्हें कहा है कि वह मुफ्त में से खाने को तैयार है और फिर दो ही दिन तो हुए हैं । हरी संगीत के दादी कान खोलकर सुन ले तू संगीत सीखने नहीं जाएगी । सीधा कॉलेज जाना हो तो जा आखिर क्या करेगी तो संगीत लिखकर आखिर पति की सेवा ही तो करनी है । जुलाई तो फूंकेगी फिर हो जाने क्या गया ही भक्ति गई और सुबह धीरे से हाथ धोकर अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर गिर गई । वो सोचती रही क्यों? आखिर मा मुझसे इतने समय का हिसाब लेती है । क्यों माँ मुझ पर इतना शक करती है । आखिर में संगीत ही तो सीख रही हूँ, इसमें क्या गुना कर रही हूँ । ऐसे ही जाने कितने सारे प्रश्नों के घेरे में सुमन गिरी जा रही थी । जिन प्रश्नों का उत्तर वह स्वयं नहीं जानती थी, फिर ना जाने क्यों से अपनी माँ की याद आ गई और वह सिसक सिसक कर रो पडी । सोचने लगी काश मेरी माँ होती तो मैं कितनी भी बदसूरत हो फिर भी मेरी माँ मुझे इतनी बुरी नजर से कभी नहीं देखती हूँ । मुझे संगीत सीखने से नहीं रोकती और ना ही मेरी पढाई को उल्हाना दी थी । ऐसी ही कल्पना करती हुई सुमन कब हो गई उसे पता ही नहीं रहा । आज रात को सुमन का मन खारा खाने को नहीं था । फिर भी बाबूजी और माँ के डर से कुछ खापेकर सोने गई । सुबह जल्दी उठो और नहा धो कर के पूजा की तैयारी करने लगे और जब पूरी तैयारी हो गई तो वह चाची की यहाँ गई और फूल तोडने लगी । तभी उसे सिर उठाकर देखा तो विजय उस की ही और एक तक देख रहा था । सुबह डॉक्टर से झुकाकर फिर फूल तोडने लगी । फूल तोडने के बाद जब वो जाने लगी जाती जाती उसे देखा की विजय अभी उस की ही और देख रहा था । वो जल्दी जल्दी घर में आई । पूजा के बाद चाय पीकर कॉलेज चली गई । नहीं मालूम क्यों आज उसका पडने में मन नहीं लगा । फिर भी मन में आज जाने क्या उत्साह था कि वो आज बहुत खुश थी । आज शायद जीवन में उसे पहली बार खुशी का अनुभव हुआ था । वो सोच रही थी कि मैं सूरत तो ऊपर शायद उतना नहीं जितना मैं समझती हूँ । आज उसका पढाई में मन नहीं लगा इसलिए उसके पीरियड छोडकर संगीत सीखने के लिए नाना के घर की तरफ चल पडी । वहाँ पहुंचने ही । नानी ने बताया कि आज अचानक नानाजी की तबियत खराब हो गई इसलिए वे अस्पताल गए हैं । ये बात सुनकर सुमन का प्रसन्न मन फिर एक बार निराश हो गया और वह साइकिल उठाकर सीधे घर की और जल्दी घर पहुंची तो घर पहुंचती ही माने कहा आज जल्दी की वहाँ गई क्यों संगीत का नशा पूरा हो गया कि आज नहीं सिखाया । मैं कहती देना कोई बिना पैसों की सिखाने वाला नहीं है । और भी मेरे बाबूजी तो दो चार लोगों को संघीय किसी खाकर ही अपना जीवन व्यतीत करते हैं जिसमें तू बीज बैठी थी । कल बडी शान से कह रही थी कि मेरे नोलॉजी मुझे मुफ्त में संगीत सिखाने को तैयार है । क्या हो गया? जब मैं चुप हो गए तो सुमन ने कहा कि माँ और बोलना है या अब मैं बोलो माँ । नाना जी की तबियत खराब है इसलिए वो अभी एक सप्ताह तक संगीत नहीं सिखा सकते हैं क्या तबियत खराब मेरे बाबूजी की अरे आते ही क्यों नहीं बताया? मैं तो बोल दी जा रही थी । मुझे बोलने का मौका कहा दे रही थी । वे लोग बात ही कर रही थी कि सुबह के बाबू जी भी वहाँ गए । उन्हें देखते ही सुबह की । मैंने कहा अरे अभी तो आप स्कूल गए और अभी आप भी गए इतनी जल्दी तबियत तो ठीक है । ये सुनते ही सुमन के बाबू जी बोले मेरी तबियत तो ठीके सुमन की माम अगर तुम्हारे बाबूजी अस्पताल में भर्ती है, चलो जल्दी से तैयार हो जाऊँ । हमलोग शहर जायेंगे तुम्हारे बाबूजी को देखने और सुमन घर में रहेगी । ये सुनकर जल्दी से सुमन की बात तैयार हो गई और दोनों शहर की और चले गए । जब सुमन की माँ और बाबूजी चले गए तब सुमन घर का दरवाजा बंद करके चाची के यहां चली गई ये सोचकर कि आज वो विजय से बात करेगी । मगर जब चाची के घर गई तो पता चला की वो अपनी पढाई करने कलकत्ता चला गया क्योंकि उसके आस पास के शहर में जो कॉलेज हैं उसमें अच्छी पढाई नहीं होती । ये सुनकर सुमन कुछ मायूस हो गई । फिर चाची के सामने कुछ इधर उधर की बातें करके घर वापस लौट आई और कुर्सी पर बैठ गई । बैठी होती पडने लेकिन पढने में मन नहीं लगा तो वह पुस्तक बंद करके चुपचाप बैठ गई और जाने कहाँ हो गई । वह हकीकत की दुनिया से निकलकर ख्वाबों की दुनिया में घूम रही थी । वह किसी बगीची में बैठे विजय से बात कर रही है तो तभी वो विजय से बोली विजय मैं तुमसे प्यार करने लगी हो । ये बात सुनते ही विजय आग बबूला हो गया और वह यह कहते हुए उठ गया कि सुबह मुझसे प्यार करने से पहले तुम दर्पण में अपनी सूरत देखा हूँ । फिर बात करना ये कहकर विजय खडा हो गया और अपनी मोटरसाइकल उठाकर वहाँ से चला गया । सुमन गिडगिडाती ही रह गई । जाने सुमन और कितनी देर तक कल्पना की दुनिया में ही रहती कि अचानक उसी समय पडोस की एक लडकी आई और कहने लगी दीदी थोडा सा नमक देना । जब शहर जायेंगे तो लाकर वापस कर देंगे । अचानक मीरा की आवाज सुनकर हॉलेज से सुमन चौकी श्री नमक देकर उसे भेज दिया । फिर उसने सोचा नहीं विजय मेरे प्यार को नहीं ठुकरा आएगा । जिस तरह मैं उसे प्यार करती हूँ वो भी मुझसे प्यार करता होगा । क्यों ना में अपने मन की बात को विजय तक पहुंचा हूँ । अगर वह भी मुझ से प्यार करता होगा तो प्यार आगे बढेगा । ये सोचकर सुमन विजय को खत लिखने बैठ गई । नमस्ते लोग कहते हैं कि प्यार एक नजर में ही हो जाता है । वह ना तो धन दौलत देखता है ना सूरत । ये बात सिर्फ मैंने सुनी थी, मैंने कभी महसूस नहीं किया था । ये बाद मुझे अब महसूस हुई विजय में तुमसे प्यार करने लगी । नहीं मालूम क्यों मेरा दिल तुम को चाहने लगा है और मैंने तो में अपने मन का मीत मान लिया है । विजय जरूरी नहीं कि मैं तुमसे प्यार करती हो तो आप भी करें । ये अपनी अपनी नजर और अपनी अपनी चाहत की बात है । मगर में इतना जरूर जानती हूँ कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ और सिर्फ तुम्हें ही पूछती रहूंगी । अगर आप भी मुझे स्वीकार करते हैं तो ठीक है वरना मैं तो में अपने मन का मीत मानकर जीवन भर तुम्हारी पूजा कर होंगे । नोट विजय प्यार अपनी नजर पहचान लेता है इसीलिए मैं अपना नहीं लिख रही हूँ । एक दिन जान जाओगे क्योंकि मुझे ये भी नहीं मालूम कि तुम मुझसे प्यार करते हो या नहीं । आपकी खत्म में इतना सब कुछ अपने मन की बातों को सीमित रूप से लिख कर बैठे ही थे कि उसकी नजर घडी पर पडी । शाम के छह बज रहे थे । ये देख वो जल्दी से उठी और चौकी की तरफ पढी और खाना बनाने लगी । खाना आधा ही पता था कि इतने में उसकी माँ और बाबूजी आ गयी । आते ही उसके माँ चौके में घुसी और चावल को खोलते देखकर बोली चुडैल अभी खाना बना रही है, बैठी रही होगी । अपनी चाची के यहाँ मेरी चुगली कर रही होगी । भगवान जाने इस बेशरम से मुझे कब छुटकारा मिलेगा । ये बोल रही थी कि सुमन के बाबू जी आए और बोले छोडो मालती क्यों पीछे बडी हो पढ रही होगी । इसीलिए खाना बनाने में देर हो गई होगी । अब तक आ तो रही है । तुम तो बेचारी पर आती बरस पडी हो । ये सुनकर मालती जलभुन करके अपने कमरे की और चली गई । तब सुमन ने पूछा बाबू जी नाना जी की तबियत कैसी है? मालदीव चौके से दाखिल होते होते ये बात सुनकर तेजस्वर में कहने लगी ठीक है चले जाना कल संगीत सीखने, खबरदार जो मेरे बाबूजी के घरसंगी ठीक नहीं गई । ये कहकर बातों में चली गई । रात को सब ने एक साथ बैठकर खाना खाया । फिर सुमन जब कॉलेज गए तो साथ में उस वक्त उस खत को भी लेती गई जिसे उसने कल लिखा था । शहर में जाने के बाद बडा साहस करके उसने आगे पीछे देखते हुए खत्म को डिब्बे में डाला और कॉलेज चली गई हूँ ।

तलाश भाग 2

दूसरा भाग विजय कलकत्ता जाकर अपनी पढाई में लग गया । वे इंजीनियरिंग कॉलेज के आखिरी साल में पढ रहा था । आज वह सवेरे उठ कर बाथरूम से नहाकर निकल ही रहा था कि पोस्ट मैंने आवाज दी । वह पोस्टमैन की आवाज सुनते ही उत्सुकता से बाहर आया और पत्र खोलते खोलते कुर्सी पर बैठ गया । लेकिन खतरे पढते ही चौक गया । विजय ने सोचा था कि वो खत उसके गांव से आया होगा । फिर उसने बहुत बार दिमाग पर जोर डालकर सोचा कि ये लडकी कौन हो सकती है । इस समय उसे सुमन की बिल्कुल याद नहीं आ रही थी । फिर इसी उधेडबुन में उल्टा ही था कि ये लडकी कौन होगी । जिसने मेरे पास पत्र भेजा है । उसने अपना नाम क्यों नहीं लिखा? वो अपने आप को बदसूरत मानने वाली लडकी कौन हो सकती है जो मुझे अपने मन का मीत मानती है । मुझे प्यार करती है । विजय खत के बारे में सोच रहा था कि उसका दोस्त विकास आ गया । विकास ने कहा हरे विजय ही दे यार, तेरे पापा का पत्र आया है । कल तेरह जन्मदिन है । आज ही शाम को तुझे बुलाया है । ये सुनकर विजय विकास से खत लेकर पडने लगा । उसमें बस इतना ही लिखा था, बेटे विजय दो मार्च को तुम्हारा जन्मदिवस है इसलिए तुम एक मार्च को घर जरूर आ जाना । इस समय हम तुम्हारे जन्मदिन में दोबारा खुशी मनाएंगे । अपने बाबूजी का खत्म पडने के बाद विजय का दिल थोडा बहला फिर भी वो उस खत को बोला नहीं पाया जिससे किसी अंजान लडकी ने लिखा था । विजय को खामोश देखकर विकास बोला क्यों यार विजय इतने मायूस क्यों नजर आ रहे हो? विकास की बात सुनकर विजय कुर्सी पर बैठते हुए कहता है विकास में एक लडकी से प्यार करता हूँ । कितने में विकास हसते हुए बोला हरी प्यार करता है तो शादी कर ली । विजय बोला वो तो ठीक है मगर पहले ना तो लडकी को देखा है और न ही लडकी का नाम जानता हूँ । विकास विजय की बात सुनकर हस पडा हरबोला कैसी अजीब बात करते हो या प्यार नजरों के मेल से होता है और तुमने उसे देखा तक नहीं । विकास की बात सुनकर विजय मायूसी से बोला कि विकास ये सच है कि प्यार नजरों के मेल से होता है । मगर तो मैं इस पत्र को पढकर ही बिहार करने लगे जबकि उसने स्पष्ट लिखा है कि मैं बदसूरत हूँ और तो मैं इतने हैंडसम और बडे लिखे व्यक्ति हो । तुम्हारे तो आगे पीछे कितनी सुंदरियों के पापा चक्कर काट रहे हैं । विकास की बात विजय को शायद अच्छी नहीं लगी और वह घर जाने की तैयारी करने लगा । इधर आज इतवार का दिन था । सुमन देर तक हुई थी । सात बज रहे थे । तभी चाची आई और सुमन की माँ के पास बैठ कर कहने लगे मालती दीदी, मुझे भतीजी की जन्मदिन पर जाना है । अब भतीजा हूँ या बेटा । यही तो सब कुछ है । मेरे लिए परीक्षा है । इस कारण लेने के लिए नहीं आ सका । मैं चाहती हूँ कि आप लोग मेरे साथ सुमन को भेज दीजिए । मैं विश्वास दिलाती हूँ की हमलोग परसो जरूर आ जाएंगे । चाची की बात सुनकर सुमन उठ गए और बातों में जा घुसी । तभी चाची ने फिर कहा क्यों गलती दीदी आपका क्या विचार है, भेजेंगे या नहीं? सुमन की मैंने कहा तुम तो जानती हो बहन, मैं तो सौतेली माँ हूँ । मेरा कहा तो वह मानती ही नहीं है, उसी से पूछूं । मालती की ये बात सुनते ही जांची । खुश होकर बोली मालती दीदी, वो आपके बाद भले ही नाम आने पर मेरी बात को वो टाल नहीं सकती है । सुमन चाची के पास आते हुए बोली कहाँ जाना है चाची तब चाची उत्सुकता से बोली चलोगे ना, मेरे भतीजे का जन्मदिन है । गांव चलना है । ज्यादा दूर नहीं है । शहर से थोडी ही दूर है । चाची की बात सुनकर सुमन बोली रुकी चाचीजी बाबूजी से पूछ कर बताती हूँ ये कहकर बाबू जी के कमरे में चली गई । सुबह के पूछने पर बाबू जी ने कहा तो जाना चाहती हो तो चली जाऊं नगर मेरा नाम मत लेना । तेरी माँ मेरी जान खा जाएगी । बाबू जी की बात सुनकर सुमन जाने के वास्ते कपडे वगैरह रखने लगे । सुमन और चाची दोनों शहर से टैक्सी में बैठ गई और गांव की ओर चल दिए । गांव पहुंचने पर सब लोगों ने उनका स्वागत किया । फिर चाची सुमन का परिचय अपने भैया भाभी से कराकर और इधर उधर देखते हुए बोली भावी विजय कहा है । विजय का नाम सुनते ही सुमन चौक पडी हर बोली ये विजय का घर है । चाची सुमन के चेहरे का पसीना देखकर बोली इतना घबरा रही है । अब सुमन संभलते हुए बोली नहीं चाची घबराने की कोई बात नहीं है । मैं पूछ रही थी उसी का घर है क्या? मगर अंदर उसके शरीर में बिजली दौड गयी । वो मन ही मन कहने लगी । क्या ये संयोग हमारे प्यार को सहारा देने के लिए है? हम फिर एक बार आमने सामने हो जाएंगे । वहीं पर खडी सोच रही थी कि उसे शोरगुल सुनाई दिया । उसने बाहर आकर देखा तो विजय के स्वागत में खडे सहारे गांव के लोग विजय से गले मिल रहे थे । चाची भी और विजय के मम्मी पापा भी । ये देख कर के मैं अचानक चाची के पास चली गई और विजय को नमस्ते किया जिससे सब चौंक गई । तब चौधरी ने कहा कि विजय मेरे घर गया था तब इन दोनों की मुलाकात हुई थी । ये कहते हुए सब लोगों ने घर में एक साथ प्रवेश किया । फिर चाय पीने के बाद विजय अपने कमरे में चला गया । वो सोचने लगा कहीं मुझे मन का मीत बनाने वाली और मुझे बिहार करने वाली वो लडकी सुमन ही तो नहीं है । वो कपडे बदलकर बैठा ही था कि उसके पापा और बुआ एक साथ कमरे में प्रवेश करते हुए बोले बिजी तुम तो हमें परेशान कर रखी हूँ । विजय चौक कर बोला पापा जी आपको परेशान कर रखा हूँ । पापाजी हस्कर बोले और नहीं तो क्या किसी ना किसी दिन लडकी के पिताजी आते रहते हैं । इस से छुटकारा पाने के लिए दो भारी सगाई हो जानी चाहिए । पापा जी की बात सुनकर विजय परेशान हो गया और बोला इतनी जल्दी सगाई क्यों? पापा दब । बुआ बोली जल्दी तुम ही नहीं बेटा, हमें है तो अभी सगाई हो जाने दो, शादी परीक्षा के बाद होगी । वैसे तुम्हारी शादी करना हमारा फर्ज है । तुम तो कहोगे नहीं मगर हम लोग तो लडकी पसंद कर लिए है इसलिए कल सगाई होगी । अच्छा चलो बेटा खाना खाएंगे । ये कहकर सब लोग खाने के लिए चले गए । फिर सभी एक साथ बैठकर खाना खाने लगे । सुमन भी थी और विजय भी था । परन्तु परेशान वो उस अंजान लडकी को प्यार करता था जिसने उसे मन का मीत बनाया था और उसे शक भी था कि शायद वो अनजान लडकी जिसे वह प्यार करता है, सुमन ही है । पी चुपचाप खामोशी से खाना खाकर अपने कमरे में आकर हो गए । विजय बिस्तर पर लेटा ही था कि उसकी माँ दूध लेकर आई और सात सात फोटो भी दिखाने लगी, जिसे सब लोगों ने विजय की बहु बनाने के लिए पसंद किए थे । तो फोटो दिखाते हुए बोली देख बेटा मेरी पसंद लाखों में एक है, सुंदर है, खूबसूरत है, धनवान है, हर गोरा रंग सबकुछ है । इसमें क्या कमी है? बोल तुझे पसंद आई ना? माँ की उत्सुकता को देखकर विजय बोला मैं आपकी पसंद तो मेरी पसंद है मगर इतनी जल्दी सगाई करने की क्या जरूरत है? माँ बोली कम से कम एक परेशानी दूर हो जाएगी बेटा जब लोग ये जान जाएंगे कि जमींदार एवं तहसीलदार के इंजीनियर बेटे की सगाई हो गई तो लडकी वाले आना बंद कर देंगे । ये कहकर विजय के माने विजय के गाल पर चुंबन जड दिया और चली गयी । माँ के जाने के बाद विजय खूबसूरत शब्द पर जोर देते हुए मन ही मन बडबडाया नहीं माँ नहीं, मैं खूबसूरत लडकी से शादी नहीं करूंगा । मैं तो उस अजनबी लडकी से जो अपने को बदसूरत मानती है, उसे प्यार करता हूँ । वो लडकी शायद सुमन ही है । यही सोचते सोचते उसे सुमन का चेहरा याद आ गया । रंग सामला भरा हुआ बदल और साधारण सुंदरता की मालकिन सुमन कितने अपनत्व की भावना से गोभी की सब्जी लाई थी उसके लिए । मगर एक बात उसके समझ में नहीं आई कि सो मैंने कॉलेज की छात्रा होते हुए भी एकदम गुमसुम रहती है, लडकों से जी सकती है और हमेशा उसका चेहरा मायूसियों से घेरा हुआ रहता है । हालांकि वह हमेशा खुश रहने की कोशिश करती है । फिर वह सुमन के बारे में जारी किया क्या सोचता रहा और रात को कब उसकी नींद लग गई, उसे खोज ही नहीं रहा । आज विजय का जन्मदिन है । सब लोग आए हुए है । सभी बैठे हुए थे । सभी के काउंटर के सामने नाश्ता रखा हुआ था । इस जन्मदिन की पार्टी में सुमन भी थी । सेट गुलाब चंद का इंतजार था कि उसी वक्त किसी ने जाकर बताया कि सेट, गुलाबचंद्र और रेट आ रहे हैं । ये सुनकर विजय के बुआ यानी कि सुमन की जांच जी ने कहा, भाइयों एवं बहनों एवं सभी सम्मानित अतिथियों कृपया आप लोग शांति बनाए रखें । थोडी देर शांत रहेगा । आज विजय के पच्चीस वर्षगांठ पर उसका सगाई समारोह भी होगा । चाची क्या ही रही थी कि सुमन के होश उड गए वो अभी तक इस बात से भी खबर थी कि विजय की सगाई होने वाली है । तभी हॉल में रीता और गुलाब चंद्र जी ने प्रवेश किया । हॉल में एक खलबली सी मच गई सबके मुझे यही निकल रहा था की क्या पसंद है । जमींदार साहब के पढी लिखी भी और सुंदर भी । जहाँ जहाँ से यही आवाज सुनाई दे रही थी । सुमन यह सब बाकी सुनकर के इतना घुटन महसूस करने लगी कि उसके लिए वहाँ रहना मुश्किल हो गया और वो बाथरूम जाने के बहाने घर से बाहर निकल गई । विजय का शक सही होता सा महसूस हुआ । अभी तक वह सिर्फ शक्कर रहा था कि जिस लडकी को वो प्यार करता है वह सुमन है । मगर अब उसे विश्वास हो गया । तभी उसके बाबू जी पास आए और बोले जल्दी करो बेटा के कार्डो पर सगाई की रस्म भी पूरी करनी है । तब ना जाने विजय क्यों झल्लास आ गया और बोला पापा जी! पहले देख तो लीजिए कि पूरे मेहमान है भी या नहीं । ये सुनकर विजय के पापा सभी मेहमानों के पास जाकर कहने लगे क्यों भाई, सब ठीक ठाक है ना । किसी के पास कोई चीज की कमी तो नहीं है । तभी विजय सुमन जिस काउंटर पर बैठी थी उसके पास गया और हॉल ऐसी चौक गया । वहाँ पर डाट पैंसे लिखा हुआ था । मन का मीत जन्मदिन मुबारक हो साथ में नई जिंदगी में प्रवेश करने के लिए अपनी जीवन संगिनी के साथ आज बंधन में बंद रहेगी भी बधाई । विजय ये सब पढते ही बुआ को जोर से आवाज देते हुए बोला बुआ जी सुमन कहा है । सुमन को ना पाकर वो चौक पडा और बाद उनकी और जाकर देखा तो बातों खुला पडा था । बेटा विजय बिचारी सौतेली माँ के कारण परेशान रहती है बेटा और इसी परेशानी के कारण उसे थोडा भी शोरगुल पसंद नहीं आता । आपका मतलब है कि वो अकेले ही घर चली गई । विजय ने घबराते हुए कहा न जाने की वो इस बार विजय के दिल में जोरों से हलचल मच रही थी और वह किसी अनजान भाई से कम पैसा गया तो बुआ शक प्रकट करती हुई बोले हो सकता है घर चली गई हूँ । गोवा के वाक्यों को सुनते ही विजय बाहर निकला और मोटर साइकल उठाकर शहर की तरफ बढ गया । सब चल ही रहे थे । विजय तो मत जाओ हम किसी और को भेज देंगे तो पहले के काट लो मगर विजय बिना किसी बात सुने स्टेशन की तरफ चलने लगा । वहाँ जाकर देखा सुमन जिस मोटर में बैठी थी वह मोटर विजय के देखते देखते ही छूट गई । ये देख विजय अपनी गाडी को तेज चलाकर बस के सामने लाकर खडा कर दिया । बस रुक गई तब विजय बस में चढकर सुमन का हाथ पकडकर उसे एक मुजरिम की तरह खींचते हुए नीचे उतार लिया और बस को जाने की इजाजत दे दी । सुमन कहती ही रह गई कि नहीं? विजय मैं तोहरे गांव नहीं जाऊंगी । मुझे घर जाना है । लोग देखेंगे तो क्या कहेंगे? विजय खामों सुमन को लेकर के मोटर साइकिल पर चलता रहा । चलते चलते अचानक कोई गार्डन के पास रोका और सुमन को उतरने का आदेश दिया । सुबह गार्डन जाकर किसी मूर्ति के सामान खडी रही । उसकी आंखों में आंसू थे, मगर विजय थका हुआ था । इसीलिए बैठ गया और बोला सुमन मैं तुमसे प्यार करता हूँ । उस दिन से जिस दिन से तो महारा ये दुखों से मलीन चेहरा मैंने फूल तोडते समय देखा था और आज तो मुझे छोड कर जा रही हूँ । सिर्फ इसलिए कि तुम्हारी कारण मेरी सगाई में किसी प्रकार की बाधा न हो । सोचो सुमन सोचों में अपने दिल को महफिल से जाने दूं और के कार्ड दो ये मुझ से नहीं हो सकता । सुमन बोले तो बिना की काटे ही आए हैं । अब क्यों आए जाइए? जल्दी जाए । सब लोग आपका इंतजार कर रहे होंगे । फिर बिचारी । रीटर व्याकुल हो रही होगी । उसका प्यारा सा चेहरा मुरझाया होगा । विजय सुमन के ऊपर हाथ रखते हुए कहने लगा सुमन तुमने ही तो अपने खत में लिखा था कि प्यार एक नजर में होता है और तुम ये भी सुन लो सुमन की तो में भी मैंने अपने मन का मीत मान लिया है और मैं तुमसे प्यार करता हूँ । सुमन सिर्फ तुमसे ही मुझे प्यार है तुम्हारी सूरत से नहीं अच्छा बातें फिर कभी होगी । चलो मेहमान इंतजार कर रहे होंगे मैं तुम्हें लेने आया हूँ । विजय की बात सुनकर सुमन बोली मैं नहीं जा सकती विजय में मजबूर हूँ और ये भूल जाओ कि मैंने तुमसे प्यार किया है । मैं नहीं जानती थी कि तुम उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हो और ये भी नहीं जानती थी कि तुम एक जमींदार के बेटे हो इसलिए मैंने तो उसे प्यार किया था । विजय मुझसे बहुत बडी भूल हुई थी । मुझे माफ कर दो और तुम अपनी गांव जाऊँ । मुझे अपने गांव जाने दो । ये कहकर सुमन जाने लगी । तब विजय ने सुमन का रास्ता रोकते हुए कहा सुमन तुमने मुझसे प्यार करके भूल की होगी लेकिन मैंने कोई भूल नहीं की है । मैं तुम्हें प्यार करता हूँ और करता होगा और एक भी उसी शर्त पर आज कटेगा जब तुम मेरे साथ घर चलोगे । सुमन बोली नहीं विजय, मैं इस लायक नहीं हूँ कि तुम्हारे घर की बहू बनो तो मुझे भूल जाओ । मैं एक साधारण परिवार की साधारण लडकी हो जिसके पास सुंदरता भी तो नहीं है । तब विजय ने गंभीर स्वर में कहा मैंने कहा ना सुमन कि मैं तुमसे प्यार करता हूँ, तुम्हारी सूरत से नहीं चलो सुमन वरना आज से अपना जन्मदिन नहीं मना होगा तो मैं मेरी कसम सुमन चलो मेरे साथ विजय के प्यार को देखते हुए सुबह न चाहते हुए भी वापस विजय के साथ विजय के घर चली गई । जब भी लोग वहाँ गए तो सब लोग उन्हीं लोगों का इंतजार कर रहे थे । सब लोगों ने देख कर खुश हुए । विजय अंदर गया और मेहमानों की आतुरता को देखकर के के सामने आकर खडा हो गया । फिर सभी ने एक साथ हैप्पी बर्थ डे टू उच्च स्वरों में कहा । फिर विजय ने के काटा और सबसे पहले के का टुकडा सुमन की और बढा दिया । सुमन देखकर के घबरा गई और सब लोग आश्चर्य से सुमन की और देखने लगे । रेटा भी तिरछी नजर से सुमन को ही देख रही थी । जबकि सबको अपनी ही तरफ देखते देखकर सुमन की घबराहट और भी ज्यादा बढ गई थी । फिर विजय की डैडी ने ऊंची स्वस्थ्य विजय को अपने पास बुलाया और रीता को भी और अपनी जेब से दो सोने के चलने निकालकर एक विजय को दिया और दूसरा बेटा की और बढाते हुए विजय से बोले बेटी, इसको रीता को पहना दो, आज तुम दोनों की सगाई की रस्म पूरी हो ही जाएगी । विजय ने एक नजर सुमन को देखा फिर आगे बढकर अपनी माँ के पास जाकर छल्ला वहाँ को देते हुए बोला मैं भी अभी इसी लायक नहीं हुआ हूँ । जब मैं स्वयं कमाना सीट जाऊंगा तो अपने पैसों से छल्ला लेकर मैं मंगनी कर लूंगा और ये भी जरूरी नहीं है माँ की मेरे बेटा से ही शादी करूँ । ये सुनकर सबकी निगाहें विजय पर फिर सुमन पर टिक गई । सुबह ये देख नजरें नीचे कर बैठी रही । तब जल्दी से सुबह की घबराहट को देखते हुए विजय बोला आज की पार्टी का अब यही पर समापन होता है । चलिए चल कर के सब मेहमान खाना खा ले । खाना खाने के पश्चात सभी मेहमान अपने अपने घर को रवाना हो गए । जब सब लोग चले गए तो सुबह चाची से कहा चाची कल मुझे कॉलेज अटेंड करना है । क्यों ना हम आज ही घर चलते तो चाची अपनी स्वीकृति के साथ भैया भाभी के कमरे में चली गई । वहाँ पर विजय भी बैठा था और विजय को उसके पिताजी कह रहे थे कि विजय आज तुमने रीता से सगाई ना करके गुलाब चंदगी और हमारी बेज्जती की है । क्या सोचेंगे मेहमान लोग विजय अपने पिताजी के गुस्से को देखते हुए कुछ नहीं बोल पा रहा था । मगर बात जवाब पैसे बाहर हो तो बोल देना चाहिए । बोलना भी जरूरी हो जाता है । इसलिए उसने सरलता से कहा पिताजी में इतनी जल्दी अपने जीवन का फैसला कैसे कर दू शादी सादा ये सब जीवन भर का सवाल है और फिर अभी तो मैं पढाई कर रहा हूँ । फिर पिताजी मेरी भी तो कुछ पसंद होगी । मुझे अपना जीवन साथी पसंद करने का अधिकार है । विजय के बाद सुनगर उसके पापा और भी ज्यादा गुस्सा हो गए और बोले विजय ने बेझिझक होकर जवाब दिया की मैं नहीं चाहता की रीटा से तो इसका मतलब ये है कि तुम बेटा से शादी नहीं करोगे । मेरी इज्जत का तो मैं कोई खयाल नहीं । विजय सरलता से कहा मैं तो नहीं जानता बाबा की रीटा से शादी करूँ । अब उनकी आंखें लाल हो गई थी । इसी भयानक रूप से वे बोले अच्छा ये बात है क्या कमी है । बेटा में बताऊँ वो खूबसूरत है, स्वभाव से अच्छी है । अपने पापा की बात को बीच में ही काटते हुए विजय बोला पापा जी मुझे रेटा की खूबसूरती से नफरत है । विजय के मुझे ये बात सुनकर विजय के पापा अचानक बोल पडे रीता की खूबसूरती से नफरत है तो क्या सुमन की बदसूरती से प्रेम है तो पापा जी की बात सुनते हुए विजय हसते हुए बोला कि यही समझ लीजिए ये कहकर वह कमरे से बाहर निकल गया । सुमन जिस कमरे में थी विजय भी उसी कमरे में आ गया और बोला सुमन तुम घर जाना चाहती हो ना चलो मैं तुम्हें छोड आता हूँ । विजय की अजीब सी बातों को सुनकर सुमन डरते डरते बस इतना ही कह पाई मैं चाची के साथ आई हूँ और चाची के साथ होंगी ये बात । चाची दरवाजे पर प्रवेश कर दी हुई । सुनकर बोली अच्छा बेटा तेरह जाने का मन नहीं है तो चले जाते हैं । अब हम लोगों का रुकना भी यहाँ के वातावरण के अनुसार ठीक नहीं है । ये कहकर चाची अपना सामान समेटने लगी जाती । व्यक्ति सुमन और चाची विजय के पापा मम्मी से विदा ले रही थी । तभी वहीं पर विजय भी तैयार हो कर आ गया और पापाजी से बोला पापा जी, मेरे कारण अब की बेईज्जती हुई । उसके लिए मुझे दुख है और अफसोस की अब मैं जा रहा हूँ । परीक्षा भी नजदीक है और बुआ जी को भी उनके गांव छोडना है । मैम को गांव छोडने के बाद कलकत्ता के लिए रवाना हो जाऊंगा । ये कहकर विजय भी सुमन और चाची के साथ अपनी बुआ के गांव आ गया ।

तलाश भाग 3

तीसरा भाग सुबह जब अपने गांव पहुंची तो चाची के कहने पर सुमन पहले जांची के घर ही पहुंच जांची । घर में गए और काम में व्यस्त हो गई । तब सुमन ने कहा अच्छा चाची मैं चलती हूँ । ये कहकर सुमर अपने घर के लिए आ रही थी की विजय की आवाज ने उसे रोका । विजय ने कहा सुमन रुको मैं तुम्हें घर तक छोड आता हूँ । इसी बहाने तुम्हारा घर भी देख लूंगा । सुमन विजय की बातों को संकट पहले तो घबराई क्योंकि वो जानती थी कि विजय के साथ वो घर जाएगी तो डाट पडेगी फिर भी मर्यादा को न तोड सकी । इसीलिए हमें सिर्फ हिलाते हुए विजय के साथ अपने घर की और आ गई । सुमन घर में आई तो देखा ताला बंद था । वह पडोसी की यहाँ गए तो पूछने पर पता चला कि सुमन की माँ बाबूजी दोनों आज उसके नाना के घर शहर गए हैं । उसके नाना के अस्पताल से छुट्टी होने वाली है । घर में ताला लगाकर गए थे इसलिए चाबी पडोसन को ही देख कर गए थे । उन लोगों को मालूम था कि आज सुमन आ सकती है । सुमन ने चाबी लेकर ताला खोला और विजय के साथ घर में जाने के बाद विजय को बैठने के लिए बोल कर स्वयं अपने कमरे से निकलकर चौकी की तरफ जाने लगा । तभी विजय ने उसका हाथ पकड लिया और कहा बैठो सुमन कहाँ जा रही हूँ आज तुमसे मुझे कुछ बातें करनी है । सुमन क्या बात करोगे? विजय क्या तुमने मुझे माफ नहीं किया जो मेरी भूल थी? विजय मैं तुमसे प्यार करने लगी थी । विजय ने बातों को नजर अंदाज करते हुए कहा कि सुमन तुमने तो भूल की है नगर में हकीकत में तुमसे प्यार करता हूँ क्या मेरे प्यार को तुम ठुकरा होगी? मेरा दिल तोड होगी और तुम ने क्या गलती की है जिसकी माफी मांग रही हो? नहीं विजय ये मत भूलो कि तुम मुझे भले ही प्यार करने लगे हो मगर तुम्हारे घर की बहू बनने का सपना देखना भी मेरे लिए एक गुनाह होगा । और फिर उस मासूम और सुन्दर था कि देवी रीता का क्या होगा? विजय तुम उसके सपनों के राजा बन चुके हो और फिर मैं इतनी खूबसूरत भी तो नहीं हूँ कि आप अपने मम्मी पापा रीता को छोडकर कुछ गरीब को बहुत बनाने को तैयार हो जाओ । और सबसे बडी बात ये है कि विजय में कुछ बनना चाहती हूँ । सुमन की बात सुनकर विजय ने कहा क्या बनना चाहती हो? विजय जब तुम जानना ही चाहते हो तो फिर में छुपाना भी नहीं चाहती हूँ । ये कहकर सुमन अपने जीवन की कहानी विजय को बताने लगी जो मैं तीन साल की थी तो मेरे सर से मां का साया हट गया तो क्या यह तुम्हारी सौतेली माँ है? विजय ने अचानक ही भावुक स्वर में पूछा विजय जब मैं चार वर्ष की थी तभी घर में सौतेली माँ आ गई और मैंने इस लोकापवाद को अपने जीवन में महसूस किया है कि सौतेली माँ के आ जाने पर सगा बाप भी सौतेला हो जाता है और मेरी माँ का स्थान मेरी सौतेली माने ले लिया । साथ ही मैं भी उसे अपनी माँ के समान ही मानने लगी । मगर उसने पहले ही दिन से आज तक कभी भी एक माँ की तरह प्यार नहीं दिया । बस उन की नजर से मुझे एक ही चीज प्राप्त हुई नफरत, सिर्फ नफरत ये कहते हुए सुबह की आपकी भराई फिर भी वो बोलती गई । विजय मेरी माजक गुवारी थी, शादी नहीं करना चाहती थी । उन्हें संगीत का बहुत शौक था । वो एक फिल्म गायिका बनना चाहती थी मगर किस्मत को ये मंजूर हुआ । इ साधारण और एक और शिक्षित परिवार की लडकी थी । फिर भी उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की और जब संगीत सीखने की लालसा प्रकट की तो सिर्फ सीखने के नाम से ही नाना जी को दिल का दौरा पडा और वे इस दुनिया को छोडकर चले गए । फिर मेरी नानी जी ने माँ की शादी कर दी और माँ बेजुबान की तरह चुपचाप ससुराल आ गई । इसके बाद माता दिल टूट चुका था । उन्होंने अपनी बीच यानी से छुटकारा पाने के लिए आत्महत्या कर ली और मुझे इस दुनिया में अकेली और सिर्फ अकेली छोडकर चली गई । फिर उस दिन के बाद बाबू जी भी वो नहीं रहे । जोमा की जिंदा रहते हुए थे ये कहकर सुमन अचानक जोरों से सिसक पडी । विजय ने कहा कि अब तो मैं अकेली नहीं हो सुमन मैं भी तुम्हारे साथ हो । हर सुख दुख अब हम मिल कर सकेंगे नहीं । विजय अपनी किस्मत के इस खेल को में अकेले ही खेलना चाहती हो तो मेरे साथ इस खेल में शामिल होकर अपने आपको गम की दुनिया में मध्य के लोग मैच में कुछ नहीं दे सकती । ना खुशी न प्यारी सी सूरत सूरत का नाम लेते ही विजय ने सुमन के ऊपर उंगली रखते हुए कहा, सुमन! अब आइंदा मेरे सामने, कम से कम ये सूरत और धन दौलत की बात बिल्कुल मत करना । तो मैं मेरी कसम सुमन वादा करूँ । मैं आज के बाद ये शब्द कभी नहीं सुना होगा । सुमन ने अपने आंसू पहुंचने हुए विजय की और देखा और सिर्फ हिला दिया । उसने देखा कि उसके जीवन की कहानी संकर विजय की आंखों के दो होती उसके गाल पर गिरे हुए थे । सुबह ये सहन नहीं कर सकी और अपने दुपट्टे से विजय की आंखों के आंसू पहुंचने लगी । तभी विजय ने अचानक से सुमन को अपनी बाहों के घेरे में घेर लिया । सुमन ने कहा, अब तुम जाओ विजय मैं तो में भेजने के लिए मजबूर हूँ । अब हाँ बाबू जी आ रहे होंगे । सुमन की बात शंकर विजय खडा हुआ । मैं आज रात को ही कलकत्ता जाऊंगा । परीक्षा नजदीक है और वहाँ से चला गया । विजय के जाने के बाद सुमन आंसू पहुंचकर घर का जो सामान अस्त व्यस्त पडा था उसे ठीक करने लगे और फिर खाना बनाने चौके में चली गई । रात के साढे सात बज रहे थे । ये देखकर सुमन रेडियो की तरफ दौडी ही थी कि उसके माँ और बाबूजी आ गए । बाबू जी आगे थे । इसीलिए सुमन ने बाबूजी से ही पूछा नानाजी को छुट्टी मिल गई बाबू जी सुमन की बात सुनकर उसकी मैंने कहा हाँ हा मिल गई, चली जाना कल संगीत सीखने । सुमन माँ की बात सुनकर चुप रही । तभी घर जाने के लिए विजय समन के पास मिलने आ रहा था कि सुमन कि मांझी की आवाज सुनकर दीवार से लगकर खडा हो गया । सुमन की माने चलाते हुए कहाँ? घर से दूर रहने का तो में इतना ही शौक था तो दो चार दिन और रुक करती आज ही क्यों आ गई । नहीं आना था कल की आने वाली आज कैसे आ गई । रुक जाना था दो चार दिन और तब आती क्या? मैं इतनी लायक नहीं हूँ कि जाने से पहले मुझे पूछा तक नहीं । बोल तेरह ऊपर ज्यादा पूछने से या मैं रोक देती तुझे जाने से । सुमन ने महा की बातों को सुनकर धीरे से कहा आपने तो चाची को हाँ कहा था और बाकी जाने न जाने का फैसला मुझ पर छोड दिया था तो मैंने सोचा कि कहीं तो घूमने जाना नहीं होता है । क्यों ना चाची के साथ ही चली जाऊं? हाँ तो अब तो जवान लडाना किसी गई तेरी ये हिम्मत मुझे मालूम है तुझे अपनी पढाई पर कितना गर्व है । और अब संगीत बीस सीखने लगी । जब संगीत सीट जाएगी तो न जाने और क्या करेगी । ये सब तेरे बापू के कारण है । मैंने लाख बार समझाया चुडैल बदसूरत को ज्यादा मत पढाओ, मेरी जान खा जाएगी पर वह मेरी सुनते तब ना जब सुमन से ज्यादा नहीं कहा गया तो सुमन ने कहा माँ आप हर वक्त, हर बात पर मेरी पढाई को क्यों दोष लगती हो? क्या पूरा कर दिया? मैंने पढ लिया तो और अब संगीत भी आपकी आंखों में चुभने लगा । सुमन की बात सुनकर उसकी माँ का गुस्सा और भी बढ गया और उसने एक हाथ समन के गाल पर जड दिया । सुमन के बाबू जी सामने ही खडे थे । ये सब बातें सुमन के घर के अंदर हो रही थी और विजय बाहर खडे होकर सुन रहा था । विजय ने जब सुमन को मार खाते हुए देखा तो उससे और अधिक देखना मुश्किल हो गया और वो विरोध गन्ना अच्छा ना समझकर बुआ के घर वापस चला गया और बोला कि बुआ मेरे सिर में दर्द है, मैं कल जाऊंगा ये कहकर वह बिना खाए ही हो गया । सुमन कभी सोच भी नहीं सकती थी कि माँ मुझ पर अपना हाथ भी उठा सकते हैं । वो मार खाकर चुपचाप वहाँ से उठी और अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गई और जारी क्या सोच कर रोने लगी । जब सुमन चली गई तो उसके बाबू जी ने मालती से कहा तो मैं सुमन पर हाथ उठाकर अच्छा नहीं किया । सुमन के बाबू जी की बात सुनकर उसकी माँ बोली और क्या करती देख रहे थे ना, उसका मुँह कैसे कैसे की तरह चल रहा था । मालती की बात सुनकर सुमन के बाबू जी चल लाकर बोले मालती अब तो हद से ज्यादा बढ रही हो, अपनी औकात भूलती जा रही हूँ । सुमन के बाबू जी को गुस्सा होते थे । उसकी माँ बोली हाँ तो मुझे घर में इसीलिए लाए थे कि आप की बेटी की जीवन भर सेवा करती रहूँ और जब बडी हो जाए तो उसकी तरफ से समाज के ताने हूँ और कुछ बिना हूँ । ये कहकर सुमन की माँ रोने लगी । सुबह की माकुर होते हुए देखकर उसके बाबूजी का सहारा गुस्सा शांत हो गया और कहा नहीं मालती मैंने ऐसा कब कहा मगर जवान बेटी पर हाथ उठाना अच्छा नहीं है । कहीं वो कुछ कर ले तो फिर धीरे धीरे दोनों में समझौता हो गया और दोनों खाना खाकर सो गए । नगर सुमन होती रही और नाहि उसे खाने के लिए कहने को कोई आया और ना ही सुमन ने खाना खाया । नहीं मालूम क्यों? आज उसे अपनी माँ भी बहुत याद आ रही थी और वह होने लगी । फिर उसे विजय की वह बात याद आई कि सुमन तुम अकेली नहीं हो, मैं भी तुम्हारे साथ हो । बस इसी बात को बार बार याद करके विजय की यादों मिक हो गई । दूसरे दिन सुबह जब कॉलेज जा रही थी तब विजय भी उसके साथ चल दिया और उसने खामोशी को तोडते हुए कहा कि सुमन आज तो मेरे साथ चल होगी । विजय की बात सुनकर सोमन एकदम से चौंक गई । फिर बोली कहाँ चलने की बात करते हो विजय वहीं सुमन जहाँ मैं कहूंगा आशा की तो मेरा दिल नहीं तोड होगी और मेरे साथ नाश्ते के लिए चल होगी । सुमन ने कहा नहीं विजय, मैं भी घर से नाश्ता करके निकली हो । सुमन की बात सुनकर विजय ने सहते हुए कहा सुमन झूठ और वो भी मुझसे बोल रही हो । तुम घर से नाश्ता खाकर नहीं आज एक खामोशी भरी नफरत खाकर आ रही हो । तुमने कल रात को भी खाना नहीं खाया था । हाँ, खाने के बदले कल रात एक तमाचा जरूर मिला था । बोलू सुमन क्या यही सच है जो तुम कह रही हो या मेरी बात? विजय भावुक होकर कहते जा रहा था और सुमन खामोश होकर सुन रही थी । फिर बोली छोडो विजय घर में इस प्रकार की झंझटें होती रहती हैं । अच्छा मैं कॉलेज चलती हूँ और हाँ तुम कहाँ जा रहे हो? विजय ने कहा कि मैं तो तुम्हारे साथ चल रहा हूँ या तो मेरे साथ नहीं चल होगी, मेरा दिल तोड होगी । सुमन बोली नहीं विजय, नाश्ता तो आज मैं नहीं करूंगी । अगर तुम चाहो तो किसी गार्डन में जाकर बैठे । सुमन और विजय दोनों ही गार्डन में बैठे थे । विजय ने कहा सुमन आज में कलकत्ता जा रहा हूँ । फिर इसके बाद परीक्षा देकर मैं सीधा तुम्हारे साथ यही इसी जगह पर मिल होगा । फिर उस दिन हम दोनों अपनी शादी के बारे में सोचेंगे । सुमन बोली लेकिन विजय तुमने वादा किया है कि तो मेरा तब तक इंतजार करोगे जब तक मैं गायिका ना बन जाऊँ । हम एक दूसरे से दूर ही रहेंगे । और हाँ विजय शायद तो में मेरा इंतजार करना भी बहुत महंगा पडेगा । फिर ये भी तो निश्चित नहीं है कि मैं अपनी मंजिल तक पहुंच हूँ । कहीं ऐसा ना हो कि मैं सीढी पर चढते चढते ही सर जाऊँ और किसी खाई में गिर जाओ जहाँ से लोग फिर उठ नहीं सकते । नहीं सुमन ऐसा नहीं होगा । तुम्हारी लगन और मेहनत जल्दी ही रंग लाएगी तो हिम्मत मत हारो । रात हमेशा नहीं रहती । एक समय ऐसा भी आता है कि रात के बाद एक नया सवेरा आता है । सूरत के साथ तुम्हारी जिंदगी में भी अंधेरा नहीं रहेगा । एक दिन सूरज जरूर निकलेगा और फिर लगन और मेहनत ऐसी शक्ति है जिसके सामने तूफान भी नहीं ठहर सकता । सुबह बोली लेकिन विजय में अपनी मंजिल पर अकेले ही जाना चाहती हूँ । अपने साथ मैं आपको परेशान करना नहीं चाहती और मैं जो भी सोच रही हूँ वो एक सपना ही तो है । हाँ, सपने अक्सर टूट जाया करते हैं । मगर हाँ विजय मैं आखिरी दम तक उस मंजिल तक पहुंचने के लिए सफर कर दी रह होंगे । हाँ सुमन कभी कभी किस्मत भी साथ नहीं देती, लेकिन भगवन न करे कि तुम्हारा सपना टूटे । मेरा दिल तो यही कहता है कि तो अपनी मंजिल तक जरूर पहुंच जाओगी । ये मुझे विश्वास है और जहाँ तक हो सकेगा । मैं भी तुम्हारे साथ चलने की कोशिश करूंगा और मेरे जीवन में सबसे ज्यादा खुशी का दिन वही होगा जिस दिन तुम गायिका बाल होगी । सुमन ने कहा अच्छा विजय अब वक्त बहुत हो चुका है तो मैं भी गांव जाकर आना है । मुझे भी नाना जी के पास जाना है । क्यों ना अब हम अपने अपने रास्ते चले । ये कहकर दोनों अपनी अपनी मंजिल की और चले गए । सुमन नानाजी के घर गए तो नाना जी सो रहे थे । वो नाना जी के पास गई और जगाते हुए बोली नाना जी । थोडी देर बाद नानाजी की नींद खुल गई और सुमन ने देखते ही बोला भी को नानाजी मेरी परीक्षा दो दिन बाद ही है । अब परीक्षा खत्म होने के बाद ही आप के पास संगीत सीखने होंगे । तब तक आप भी पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाएंगे । ये कहकर सुमन अपने घर चली गई । सुमन घर जाने के बाद मन लगाकर अपनी पढाई में जुट गई । नगर परीक्षा के इस माहौल में भी माने उसे कम से छुटकारा नहीं दिया और वह चुप चाप अपनी पढाई के साथ साथ घर का पूरा कामकाज भी करती रही । इस बीच सुमन कभी अपनी मंजिल पर पहुंचने का सपना देखती तो कभी विजय की हसीन यादों में खो जाती थी । इधर सुमन कीगम और प्यारभरी यादव को लेकर विजय भी कलकत्ता अगर अपनी पढाई करने लगा । दिन में एक बार सुमन की याद उसे जरूर सताती और जब सुमन की याद आती तब विजय यही सोचता कि सुमन को जिस घर में एक घडी भी प्यार नसीब नहीं होता वो उस घर में कैसे रहती होगी । भगवान भी कितना निर्दयी है । बेचारी से माँ का प्यार तो छीन ही लिया साथ ही उसके बाबूजी का प्यार भी जाता रहा और जहाँ किसी का प्यार नहीं मिलता वहाँ उसे नफरत देने वाली उसकी सौतेली माँ है । बस कभी कभी इसी प्रकार सुमन के बारे में सोचता और कभी परीक्षा का खयाल करके पडता और कभी सुमन की उस मंजिल के बारे में सोचता जो उलझनों से भरी हुई थी ।

तलाश भाग 4

चौथा भारत आज गई है । सुमन परीक्षा देकर नाना की यहाँ गई । उसने नानाजी को वादा किया था कि वह छब्बीस मई से संगीत सीखने आएगी । वो मस्ती करके हारमोनियम की ओर बढने लगी । तभी नाराज जी ने कहा सुमन! मैं तुम्हें संगीत नहीं सिखाऊंगा तो इसके लिए कोई दूसरा इंतजाम कर लो । नानाजी आप ये क्या कह रहे हैं? हाथ सुमन वही के राहु जिसे बहुत पहले ही कह देना था । मेरी बेटी तेरे घर में गए तो सिर्फ मुझे पाल पोस कर बडा करने के लिए और जीवन भर तेरे बाबू जी की सेवा करने के लिए और ऊपर से तेरे और समाज के ताने सुनने के लिए । लेकिन नानाजी मैं माँ को हमेशा अपनी ही मां समझती हूँ । मुझे फिजूल की बातें पसंद नहीं । सुमन तो यहाँ से जा सकती हो । इस प्रकार नाना के कटु वचन सुनकर सुमन चुप चाप अपनी आंखों से बहते आंसुओं को पहुंचते हुए आने लगी । सुमन नानाजी की बातों को सुनकर चुप चाप चली आई । ये सोचते हुए की हे भगवान, अभी तो सफर शुरू ही किया था और इतनी उलझने नहीं मालूम । मेरे सपने का क्या होगा जिसकी खातिर दुनिया में जीवित हो । यही सोचते हुए सुमन अपने घर आ रही थी । मगर उसे मालूम नहीं था कि घर में तो इससे भी भयंकर तूफान आ गया है जिससे शायद वह सहन न कर सकें । विजय छब्बीस तारीख को पेपर खत्म होते ही अपने घर चला गया और अपने मम्मी पापा से शादी की बात करने पर साफ साफ कह दिया कि मैं शादी करूंगा तो सुमन से और वो भी अभी नहीं जब शादी की योग्य हो जाऊंगा । तब विजय की बात सुनकर उसके मम्मी पापा दोनों विजय से ये कहकर कि अच्छा हम सुमन के माँ बाप से बात करके आते हैं । ये कहकर वे सुमन के गांव आ गए । देखा विजय के मम्मी पापा का बैठे हैं । उन्हें देखकर सुमन ने नमस्ते किया और अपने कमरे की ओर बढने लगी । तभी विजय के पापा के शब्दों ने उसे रोक दिया । विजय के पापा ने कहा सुमन तुम होश में हो । सुबह इस प्रकार के कडवे शब्दों को सुनकर कुछ नहीं बोली और विजय के पापा के गुस्से से बडे चेहरे को देखने लगी । तभी विजय के पापा फिर बोले सुमन तो में इस जवानी ने पागल कर दिया है तो अपना होश खो बैठी हो मगर अभी भी वक्त है तुम अपना होश संभालो । पढना बहुत बुरा होगा । सुमन हिम्मत करके धीरे से बोली वरना क्या बुरा होगा? अंकल विजय की मम्मी बोली वरना तेरे साथ तेरे माँ बाप भी बर्बाद हो जायेंगे । सुमन ये मत भूलो कि तुम एक साधारण परिवार की साधारण सूरत वाली लडकी हो तो मैं शर्म नहीं आती । मेरे बेटे पर डोरे डालते हुए सुमन समझ गई की विजय के मम्मी पापा क्यों आए हैं? वो बोली आप लोग यही कहना चाहते हो ना कि मैं विजय से प्यार करना छोड दूँ नगर मैं तो उससे प्यार करती हूँ, करती रहूंगी । हाँ शादी नहीं । क्योंकि ये बात सच है कि दो प्यार करने वालों के बीच में दौलत की दीवार खडी हो जाए तो उसे लांगणा मुश्किल होता है और साहसी दीवार तोड भी ली जाए तो दुनिया वाले उस पर उंगली उठाते हैं । उसके नाम पर कीचड उछालते है ये मेरी भूलती अंकल की । मैं अपने से ऊंची खानदान के लडकी के साथ प्रेम कर बैठी हूँ । हाँ मैं गुनेहगार हूँ मगर अब मेरे इस गुनाह को माफ कर दीजिए । अंकल ये मैं नहीं चाहती कि विजय मेरे कारण अपने मम्मी और पापा का प्यार खोदे । मैं ये नहीं चाहती कि विजय के ऊपर कोई उंगली उठाए । मैं आपकी बेटी के सामान हो एक बार माफ कर दीजिए । मुझे अब ये गलती कभी नहीं दोहराई जाएगी । ये कहते हुए सुमन विजय के पापा के पैर पर रोती हुई गिर गई । विजय की मैंने कहा अच्छा इस बार ये नहीं माफ करते तो मैं माफ कर रही हूँ । मगर हाँ तुम इतना मत भूलना की समुद्र में रहकर बडी मछलियों से बैर करना अच्छा नहीं होता । ये कहकर दोनों जाने लगे । तभी सुमन आगे बढकर बोली, आंटी जी, आप मेरे घर मेहमान के रूप में आए हैं । चाय तो पीते चाहिए । सुमन की बात सुनकर विजय के पापा बोले, हम चाय और हम तुम्हारे घर हमारे पास वक्त नहीं समझी की हम एक कप चाय के लिए अपना आधा घंटा बर्बाद करें । विजय सारी बातें दीवार की आठ से सुन रहा था । वो अंदर प्रवेश करते हुए बोला मगर इतना समय कैसे मिल गया पापा की यहाँ आकर बी फजूल बातें करूं । विजय की आवाज सुनकर सब चौंक गए । फिर उसके पापा ने कहा कि विजय तुम्हें यहाँ कैसे विजय अपने पापा और मम्मी की तरफ नफरत भरी नजरे डालते हुए बोला अपनी प्रेमिका से मिलने आया हूँ । तब विजय की मम्मी बोली विजय तुम किसके सामने बात कर रहे हो । ये मत बोलो कि यहाँ हम भी खडे हैं । विजय बोला हाँ, मम्मी भी अच्छी तरह से जानता हूँ कि किसके सामने बोल रहा हूँ । मगर ये नहीं जानता था कि मम्मी अब जितना मुझ से प्रेम करते हो उससे भी ज्यादा धोखा देते हूँ । विजय के पापा ने कहा विजय तो भी कैसी बातें कर रहे हो? हाँ पापा बिल्कुल ठीक कह रहा हूँ आप लोग हाँ रिश्ता तय करने के नाम से आए थे तो हर यहाँ अगर एक मासूम लडकी पर इल्जाम लगाते हुए बहली बुरी बातें सुनाते हुए आपको जी जब नहीं होती सुबह को बुरा भला कहने या गाली देने का आपको कोई हक नहीं बनता है । बाबा इस मासूम सी लडकी से इस तरह से बातें करते हुए आपकी जुबान किसी ने लडखडाई । पापा और विजय के बढते हुए गुस्से को देखकर सुमन बोली विजय विजय बोला सुमन प्लीज इस वक्त कुछ ना कहो और मुझे बोलने दो वरना मैं पागल हो जाऊंगा । पापा जी आपने सुमन को नहीं आज आपने विजय के दिल को जख्मी किया है । आकाश मा आप सुमन को कुछ कहने से पहले उसके चेहरे पर छुपी हुई मन की परछाई को पढ लेते मगर आप अंधी हो गए हैं । अब चेहरे के गरीबों को पढना छोडकर उसे और मन का बोझ देने चले आए । हाथों के अधिकार है मेरे प्यार के बीच में आने का । विजय के पापा ने कहा विजय बहुत बक बक कर रहे हो । तुम चुप रहो वरना वरना सुमन के ऊपर गोली चला दूंगा । पापा तो आप स्टॉल लेकर आए हैं । अच्छा गोली चलानी है तो चला दो मगर ये मत भूलना । पापा की सुमन गोली लगने के बाद मारेगी और मैं गोली चलते ही मर जाऊंगा । बाबा जितना प्यार आपको अपने विजय से है, उससे कहीं ज्यादा मुझे सुमन से है! और हाँ, अब विजय सुमन के बिना एक मिनट भी नहीं रह सकता । अच्छा आप लोग जाइए जो विजय आपसी बाहर बातें करने लगा तो सुमन अपने दिल पर पत्थर रखकर सामने आई और कहा, आप कौन होते हैं मेरे घर में आए हुए मेहमान को भागने वाले आप क्यों आए हैं? आपको किसी काम है? आप अपना काम निपटाई और चले जाइए । विजय सुमन की इन चिचली बातों को समझ गया और कहा सुमन डर गई बस प्यार के एक ही इम्तिहान में सुमन बोली विजय में तुम से प्रेम करती हूँ और करती रहूंगी । वह मेरे मन के मीत है जो मेरे दिल रूपी मंदिर में भगवान की तरह है मगर आप कौन हो ये मैंने जानती । मैं उस विजय को प्यार करती हूँ जो मुझे अपनी जान से भी ज्यादा चाहता है । जो मेरा दिलबर है । एक घटिया खानदान के दौलतमंद बाप का बेटा नहीं । विजय सुबह की बातों को सुनता रहा और उसकी प्यारी सूरत को देखता रहा । फिर बोला सुमन तो में एक लडकी नहीं देती हूँ और वो देवी जी से अभी कोई पहचान नहीं पाया । मगर ये मत भूलना सुमन विजय तुम्हारा है और हमेशा तुम्हारा ही रहेगा । कहकर विजय चला गया और उसके मम्मी पापा भी चले गए । विजय और उसके मम्मी पापा के जाने के बाद सुमन के बाबू जी ने कहा, सुबह मैंने तो में इसलिए छूट नहीं दी थी कि तू कॉलेज में जाकर किसी लडके से प्यार का खेल रचाती रहे और वो भी ऐसे लडके के साथ जिसे पाना तो मुश्किल नाम लेना भी मौत को आमंत्रित करना है । एक ऐसा इंसान जो तुझ पर गोली चलाने की धमकी दे तो उसके बेटे से प्रेम करती है और वो विजय यहाँ अगर ऐसा डायलॉग मार कर गया कि जैसे तूने सच मुझे प्यार करता है । ऐसे धोरे भी तब तक ही मंडराते हैं । जब तक फूल में रस रहे समझी रस निकल जाने के बाद फूल के आस पास आना तो दूर देखना भी पसंद नहीं करते । सुबह मैंने सपने में भी नहीं सोचा था की तुम इस कदर गिरजा होगी और हमें समाज में मुंह दिखाने के काबिल नहीं रख होगी । जब सुमन के बाबू जी बोलते रहे और सुबह चुप चाप सुनती रही तो सुमन की माँ बोली बोल अपनी ही कैसी की तरह चलने वाली जुबान कहाँ चली गई । तू तो अपनी सब औकात भी भूल दी जा रही है । सभी सीमाएं तोड दी जा रही है । याद रखें जब नदी सीमा के अंदर रहती है तो उसे नदी कहते हैं मगर सीमाएं तोडने के बाद उसे बाढ कहते हैं और तब सब बाढ से दूर हटने लगते हैं तो भी अपनी सीमाओं को याद रख वरना दुनिया वालों के साथ साथ विजय तुझे भी छोड देगा । नहीं, मैं ऐसा नहीं हो सकता । धरती पर आसमान गिर सकता है पर मेरा विजय नहीं बदल सकता और फिर मामा मेरे खयाल से प्यार करना कोई गुनाह नहीं है । हर इंसान को एक हम सफर की जरूरत होती है । कोई हम सफर की तलाश स्वयं कर लेता है और किसी के माँ बाप करते हैं सुमन की माँ बोली पहले तो चोरी और ऊपर से सीना जोरी, गलती भी करे और हमें शिक्षा भी दे कि ये सब तेरी पढाई का ही कसूर है और अब संगीत का क्या क्या नशा दिखाएगी वो भी देखेंगे जब सुमन से ये बात सही नहीं गई कीमा बार बार पढाई का उलहाना दे दी है । उसने कहा मैं तीन साल हो गए जब से मैं कॉलेज गई हो रात दिन पढाई की उल्हाना देती रहती हो । अब मैं ये बात से है नहीं कर सकती मैं दुनिया में पडने वाली मैं अकेली लडकी नहीं हूं और न ही मैंने पहली बार किसी से प्यार किया है । मुझे पहले ये सारे काम कई लडकियाँ कर चुकी है मगर मैंने किसी से ये नहीं सुना है कि उसकी माँ से डाट भी है बल्कि उनको गर्व होता है कि मेरी बेटी पढाई कर रही है या फिर मेरी बेटी अपने लिए जीवन साथी ढूंढने में समर्थ है और एक आप एमा जिनको मेरा हर अच्छा काम बुरा लगता है । आगे राष्ट्र का आपने मुझे नफरत की सेवा दिया ही क्या है? प्यार देना तो एक तरफ रहा मुझे जो प्यार बाबू जी से मिल रहा था, उसे भी आपने छीन लिया । माँ मेरी सहनशक्ति का बांध टूट गया है । मैं कुछ भी सही नहीं कर सकती । इसीलिए आज मुझे इस घर से तनिक भर भी प्रेम नहीं रहा क्योंकि इस घर से तो मेरी माँ का नाम भी कट गया । सुमन के बाबू जी बोले सुमन तुम अपनी जबान को संभालो, भावनाओं में इतना न हो नहीं तो मेरा हाथ छूट जाएगा । और हाँ ये कान खोलकर सुन लो कि आज से पढाई और संगीत सीखना । दोनों बंद तो मैं घर से बाहर नहीं जाओगी । घर से तो मकडोली के साथ ही जा सकती हो और वो वक्त अब दो नहीं मैं गांव के किसी मजदूर से तुम्हारी शादी कर दूंगा फिर देखता हूँ तुम्हारा विजय में कैसे अपनाता है बाबू जी, आज तक वही हुआ जो आपने चाहा लेकिन आज से वही होगा जो मैचा होंगी क्योंकि मुझे अपने जीवन में क्या करना है, क्या ठीक है, क्या गलत है? मैं ये जानने लायक हो गई हो । बाबू जी आपने कैसे कहा की मैं डौली के साथ घर के बाहर कदम रखूंगी । यहाँ से सिर्फ अकेले निकलूंगी बाबू जी और वो भी शान से । बाबू जी आज तक में बेजुबान थी लेकिन अब नहीं अभी तक में सो रही थी । मगर अब मैं जान गई हूँ आप विजय के बारे में कृपा करके कुछ नहीं रहे । उस से लेना देना मुझे हैं । आपको नहीं । अच्छा तेरी ये हिम्मत कहते हुए सुमन की माँ ने हाथ उठाया था की सुबह नहीं अपनी माँ का हाथ पकड लिया और बोली रुक जाओ जब प्यार नहीं दे सकती है तो आपको मारने का कोई हक नहीं । सुमन की मैंने कहा हाँ जो मुझे मारने का कोई हक नहीं तो तू भी सुन ले मेरा तुझ पर कोई अधिकार नहीं तो मेरे घर पर तेरह कोई अधिकार नहीं । सुमन बोली हाँ आपके अनुसार निकल जाउंगी मगर आप के कहने पर नहीं । क्योंकि मुझे अपने इस घर पर उतना ही अधिकार है जितना आपका । हाँ मुझे आभास हो जाएगा की मेरी इस घर में कोई आवश्यकता नहीं तो मैं खुद ही ये घर छोड कर चली जाऊंगी । कहकर सुमन बिना कुछ सुने ही अपने कमरे में चली गई । सुमन ने अपने कमरे में जाकर खाली अटैची निकली और अपने कपडे और आवश्यक सामान रखने लगी । फिर वो कुछ सोचकर लिखने के लिए बैठ गई । पूजे बाबूजी प्रणाम कहते हैं चलना ही जिंदगी है और लोग जाना मौत है तो आज भी मैं जीवित रहना चाहती हूँ इसलिए अपने जीवन के सफर में जा रही हूँ और आपने ये महसूस कर रही हूँ कि इस घर में रहना मेरी आत्मा के लिए मौत के सामान होगा । इसीलिए आज मैं जा रही हूँ कहाँ जा रही हूँ तो मैं स्वयं भी नहीं जानती मगर इतना जरूर जानती हूँ कि आज मैं जिस राह पर चलने की हिम्मत कर रही हूँ वो काटो से भरी हुई है और मैं जिस मंजिल के लिए आज सफर की शुरुआत कर रही हूँ वो मंजिल कुलजन भरी मंजिल है । और हाँ बाबू जे जिस तरह उलझनों में फस कर आज जा रही हूँ उसी तरह आप लोगों को भी उलझन में नहीं रखना चाहती । इसीलिए मैं बता देती हूँ की मेरा मुख्य उद्देश्य माँ की आत्मा की शान्ति प्रदान करने के लिए गायिका बनना है । हाँ बाबू जी आज जो मैंने आप लोगों को शब्द बोले हैं वो आपको बुरे जरूर लगे होंगे परन्तु हो सकते हैं और सत्य शायद कटु ही होता है । आज जो कुछ भी हमारे बीच सवाल जवाब कोई वो एक हादसा था बाबू जी इसको एक घटना समझकर भूल जाना ही अच्छा है । नहीं मालूम बाबूजी क्यूँ आज आपसे दूर जाने पर मुझे बहुत दुख और अफसोस भी है । मगर इस समय भी छोड जाना ही ठीक है । मैं आपकी सामाजिक दुनिया से दूर एक गुमनाम दुनिया में जा रहे हो । बाबू जी, आज के बाद इस घर में या तो सुमन का मुर्दा जिस्म आएगा या आपकी बेटी सुप्रसिद्ध गायिका सुमन आएगी और तब उस सबन के चेहरे से संतुष्टि का भाव उभरेगा और तब भी ये सुमन विजय से प्रेम करती रहेगी क्योंकि मैं जीवन में सब कुछ भूल सकती हो, पर अपना वादा नहीं आपकी बेटी सुमन इतना सब कुछ लिखने के बाद सुमन ने अटेची उठाई और चुपचाप धीरे से दरवाजा खोलकर घर से बाहर निकल गई । जाती जाती । सुबह नहीं घर को एक बार मुडकर देखा और कहा माँ मुझे आशीर्वाद दीजिए कि में उलझनों को झील सकू काट ऊपर चल सकूँ और आपकी आत्मा को शांति दिला सको । ये कहकर सुमन चुपचाप चली जा रही थी उस रास्ते पर जिससे वह स्वयं अनजान थी मगर परिचित जरूर थी । सुमन की माँ बाबूजी जब सुबह उठे तो सुमन के कमरे को खुला देखा और सामान को अस्त व्यस्त देखकर दोनों दंग रह गई । फिर जब जाकर देखा और कमरे के अंदर सुमन को न पाया तो दोनों की मूर्ति अचानक निकला । सुमन तुम कहाँ चली गई? फ्री सुमन के बाबू जी टेबल पर रखे कागज को पर नहीं लगे । पत्र पडने के बाद सुमन के बाबू जी और भी ज्यादा उदास हो गई हूँ और चुपचाप कुर्सी पर बैठ गए । तभी सुमन की माँ बोली चलो अच्छा है हमारे से से तो एक बला उतर गई । सुमन के बाबू जी बोले मगर वो जाएगी । कहा वो तो अभी दुनिया के बारे में कुछ जानती भी नहीं है की दुनिया बहुत अजीब है । मालती हर समय गिरगिट की तरह रंग बदलती रहती है और आदमी को धोखे पर धोखा देती रहती है । फिर सुमन की मैंने कहा अब कर भी क्या सकते हैं । आप भी कहते थे ना कि उसे उसके हाल पर छोड दूँ । यही करना ठीक है । ये कहकर सुमन कीमत जाए बनाकर सुमन के बाबू जी को देने लगी । तभी वहां पर विजय आया । विजय को देखकर मालती बोली विजय बाबू आप यहाँ कैसे? तो विजय बोला हाँ मैं यही आया हूँ । सुमन कहा है सुमन के बाबू जी बोले जो नहीं होना था बेटा सुख हो गया । सुमन यहाँ से निकलकर न जाने कहाँ चली गई । कल दोपहर जब आप लोग यहाँ से गए । उसके बाद एक बेटी के बाप होने के नाते मैंने उसे कुछ ताडना ही दी और फिर रात को सब सो गए । सुबह जब हम लोग उठे तो सुमन नहीं बल्कि सुमन का ये पत्र था । ये कहकर सुमन के बाबू जी अपनी आंखों में आए आंसू पहुंचने लगे और सुमन के खत को विजय की ओर बढा दिया । खत्म । पढकर विजय ने कहा बाबू जी सुमन अपनी मंजिल की तलाश में निकल गई मगर अफसोस मुझे साथ नहीं ली गई तो ये कहते ही विजय अचानक खडा हो गया और बोलने लगा नहीं ऐसा नहीं हो सकता । सुमन अपनी मंजिल पर जाएगी परंतु मेरे साथ मैं उसके साथ जाऊंगा । विजय ने फिर पूछा क्या आपको पता है वो कहाँ गई होगी? सुमन की माँ ने कहा हमें अगर बता दे तो हम उसे जाने देते । हमदर्दी जताना तो अच्छी तरह पता है आपको विजय सब आप के कारण ही हुआ है । जब एक बार बता दिया गया कि सुमन कहाँ गई है ये हम नहीं जानते तो बार बार पूछना अच्छा लगता है । सुमन की माँ के इस प्रकार के कटु वचन को सुनकर विजय उठ खडा हुआ और जाते हुए बोला हाँ तो माँ कहलाने के लायक नहीं है । मगर ये सूची है कि आपको सुमन जैसी बेटी मिली थी । सुमन घर से निकलकर झूठे से शहर में चली गई । उसके पास कुछ पैसे थे । उसने खाना खाया फिर शहर की और घूमने निकल गई । शहर घूमने के साथ सुमन का एक उद्देश्य और था । नौकरी ढूंढना, थोडी कोशिश और मेहनत के बाद आखिर सुमन को एक टॉकीज में टिकट लेकर के रूप में नौकरी मिल गई । उसे इस नौकरी में पांच हजार रुपये मिलती और वह दिन के बारह बजे से तीन बजे तक ड्यूटी करने लगी । दूसरे दिन सुबह एक संगीत शिक्षिका के पास संगीत सीखने की तलाश में गई । शिक्षिका संगीत सिखाने को तैयार हो गई तो सुमन ने पैसे के बारे में पूछ लेना सही समझा और शिक्षिका से कहा मैडम बुरा ना माने तो पूछना चाहती हूँ आपको फीस कितनी देनी पडेगी । शिक्षिका बोली शहर में लडकियाँ काम आती है इसीलिए मैं लडकियों का कम लेती हूँ मगर पैसे के बारे में तुम्हें क्या फिकर है तुम्हारे गार्जियन से बात कर लेंगे । शिक्षिका की बात सुनकर सुमन कुछ उदासी हो गई और कहा मगर मैडम मैं मैं अकेली हूँ, मेरी ना तो माहौल ही । बात सुमन की बात सुनकर शिक्षिका चौकर बोली क्या तुम्हारी माँ बाप नहीं है तो लावारिस हो आप जा सकती है । मेरे घर में लावारिस बच्चों के लिए कोई स्थान नहीं है । यहां ऊंचे खानदानों की रईस बच्चे आते हैं और उन सब के बीच तुम जैसे लावारिसों को मैं नहीं रखती । शिक्षिका की बात सुनकर सुमन उठकर बिना कुछ बोले ही चली गई । सुनने कमरे में किराए पर रहती थी । वहाँ जाकर खाना बनाया और खाने के बाद बाजू वाले कमरे में रहने वाली लडकी के पास चली गई जो कि इसी शहर में नर्स थी । उसके पास जाकर सुमन ने कहा, बीवी शहर में संगीत शिक्षक कपूर जी है, क्या आप उन्हें जानती हैं? सुमन की बात सुनकर नर्स उत्सुकता से बोली कपूर अंकल उनको तो में अच्छी तरह जानती हूँ । उन बेचारी का कोई नहीं बस एक लडका है उन का जो अभी अभी बाहर गया हुआ है अपने दोस्त के पास । नर्स की बात सुनकर सुमन बोली तू दीदी आप चलेंगे मेरे साथ । कपूर जी के यहाँ सुमन की बात पर नर्स ने हाँ भर दी और दोनों कपूर यानी कि संगीत शिक्षक के यहाँ चले गए । अब नर्स और सुमन कपूर अंकल के घर पहुंची तो कपूर अंकल खुश हो गए । बहर बोले कि ज्योति तो उनके से आई हो बेटी तुम ठीक हो । जो दी ने बताया कि सुबह को लेकर आई है और सुमन यहाँ आपके पास संगीत सीखना चाहती है । जो दी की बात सुनकर कपूरजी तुरंत बोले वहाँ बेडी ये तो अच्छी बात है की एक लडकी संगीत सीखना चाहती है । ये कहकर सुमन की तरफ देखते हुए बोले अच्छा सुमन बताओ तुम्हारे पापा का क्या नाम है, कहाँ रहते हैं और तुम यहाँ क्या करती हूँ । इस प्रकार डेरो प्रश्न एक ही बार में कपूर जी ने पूछ लीजिए । सुमन को कपूर जी के प्रश्नों का उत्तर देने से डर लग रहा था । वो सोच रही थी शायद कपूर जी भी उसे लावारिस जानकर संगीत सिखाने से इंकार कर देंगे । फिर भी वो बोली अंकल जी, मेरे माँ बाप कोई भी नहीं है । मैं अकेली हो और यही टॉकीज में काम करती हूँ । सुमन की बात सुनकर कपूर जी बोले उस और सुमन मैंने पूछ कर हमारे दिल को दुःख पहुंचाया । मैं तुम्हे संगीत सिखाऊंगा, बेटी और जरूर सिखाऊंगा रही फीस की बात तो तो मन से जितना चाहूँ दे देना । हाँ बेटी एक बात बताओ तुम ज्योति को कब से और कैसे जानती हो? सुमन मैं ज्योति दीदी को आज से ही जानने लगी हूँ । और नाम जब आपने लिया तब मालूम पडा तो कपूर अंकल बोले सुमन तुम ज्योति के बारे में शायद आगे भी कुछ नहीं जानती होगी तो भारी तरह ही ज्योति भी इस दुनिया में अकेले ही है । ज्योति जब आठ वर्ष की थी तो इसकी माँ महामारी के शिकार हो गयी । बाबू जी तो पहले से ही दुनिया को छोड चुके थे और इस प्रकार दोनों ही अपने तीनों बच्चों को छोड कर चले गए । एक ज्योति है और दूसरा जो भी का भाई था जिसका अब तक कुछ भी पता नहीं है और ज्योति की बडी दीदी और थी जिसकी शादी हो चुकी थी और शायद उसे भी संगीत सीखने का शौक था । इसीलिए जो थी की बडी दीदी की जल्दी शादी करके ससुराल उन्हें भेज दिया गया । भगवान की लीला भी अजीब होती हैं । ज्योति का एक सहारा उसकी दीदी का होता है मगर उसने भी किसी कारण बस आत्महत्या कर ली । इस प्रकार ज्योति भी बिल्कुल अकेली हो गई । गांव के एक व्यक्ति ने ज्योति को अपने घर रख लिया और मैट्रिक तक की शिक्षा भी दिलाई । मगर कभी उस बेचारी की किस्मत ने फिर से करवट बदले और ज्योति के साथ एक ऐसी घटना घटी कि ज्योति यहीं आकर नर्स की नौकरी करने लगी । कपूर जी की बातों को सुनकर ज्योति और सुमन दोनों की आंखों में आंसू भर आए थे । फिर कुछ देर तक वो खामोश रही । फिर सुमन बोली, अच्छा अंकल चलते हैं और फिर दोनों चले गए । दोनों घर जा रहे थे । तभी सुमन ने कहा, ज्योति में आपको दीदी नहीं आज से मौसी कहाँ होंगे आपके मन में मेरे प्रति जो अपना तो है उसे देखते हुए मेरा दिल कहता है आप किसी जन्म की मेरी माँ हो । तब ज्योति ने कहा हर सच कहूँ तो सुमन तो भी मुझे गैर नहीं कोई अपने ही लगती है । ये कहकर दोनों हंस पडे और उस दिन से सुमन ज्योति को मौसी कहने लगे । सुमनाथ कपूर जी के यहाँ संगीत सीखने गई थी । तभी वहां पर दो नवयुवक आए । उन लोगों को देखते ही कपूर जी खडे हो गए और एक लडकी को गले से लगाकर बोले बेटा में कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हो । आज तीन दिन हो गए मैं तुम्हारे नहीं आने से परेशान सा हो गया था । फिर कपूर जी उन दोनों को लेकर सुमन के पास आए और बताया कि सुमन यह मेरा बेटा अजय और इसका ये दोस्त है । पिताजी को बताया कि अजय ये सुमन है ज्योति के साथ ही रहती है और ज्योति की तरह ये भी अकेली है जो दी का नाम सुनकर अजय की उत्सुकता बढ गई और वह सुमन के सामने बैठ कर कहने लगा अच्छा सुमन जी अब ज्योति को जानती हैं । बताओ ज्योति कैसी है? उसकी तबियत ठीक है ना? खाना तो ठीक सिखाती है । इस प्रकार के ढेर सारे प्रश्न एके साथ कर डाले तो सुमन को आश्चर्य हुआ । वो सोचने लगी ज्योति के दैनिक कार्य और स्वास्थ्य इन सब के बारे में क्यों पूछ रहे हैं? सुमन जब कुछ नहीं बोली तो अजय और भी आतुरता से बोला बोली सुमन जी चुप क्यों हैं? अजय की आतुरता को देखकर सुमन ने कहा हाँ, जो भी भी अच्छी है, खाना भी अच्छे से खाती है और ड्यूटी ठीक समय जाती है और जब से मैं आई हो तो फसते ही रहती है । फिर सुमन को कुछ कुछ समझ में आने लगा था कि ज्योति और अजय का क्या रिश्ता हो सकता है? इसलिए छेडते हुए बोली और हाँ ज्योति थी । आपको याद भी खूब करती है और जाने के वास्ते उठने लगी । तभी अजय बोला सुमन जी ज्योति को बता देना मैं आ गया हो और आज शाम को अपने दोस्त के साथ जोडी के पास आ रहा हूँ । सुमन ने हामिद सिर हिला दिया और चली गई । सुमन को अभी तो बहुत अच्छा लगा पर रजत की निगाहें अच्छी नहीं लगी । सुमन जूती के पास आकर बैठ गई और कहा मौसी मैं आपके लिए खुशखबरी लाई हूँ तो ज्योति बोली क्या खुशखबरी है? बताना? सुमन बोली नहीं मौसी, ऐसे नहीं बताउंगी । पहले मीठा करा हूँ तो जूती बोली अच्छा तो घूस भी लेती है ये कहकर ज्योति सुबह के गाल पर चांटा मारने का अभिनय करके बोली अच्छा भी ज्यादा तंग नहीं की अगर थे चलो जल्दी बताओ । सुमन बोली मौसी जी, आपका जो आ गया है और साथ में उनके दोस्त रजत भी है । सुमन की बात सुनकर ज्योति थोडा झेंप गई और बोली सुमन तुम्हें कैसे पता चला कि अजय मेरा है तो सुमन ने कहा मौसी में भी इंसान हूँ, प्यार की भाषा नहीं जाऊंगी । यह कहकर अपने कमरे में जाने के लिए सुमन उठ रही थी । तभी वहां पर अजय और रजत आए और तब बजे ने कहा बैठे ना सुमन जी कहाँ जा रही हो । क्यों हमारा ना अच्छा नहीं लगा गया । तब सुमन हसते हुए बोलिंग नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है और बैठ गई और बोली मुझे तो अपने बातें कर ही ली है । मेरे खयाल से मौसी से बात करना अभी ज्यादा जरूरी है इसलिए मैं जा रही हूँ । ये कहकर सुमन उठी और फिर अपने कमरे में चली गई । फिर रजत, अजय और ज्योति कक्षक मानने लगे । एक दूसरे को छेडने लगे । उन लोगों की सभी बातों को सुमन सुन रही थी । सुमन ज्योति और अजय की बातों की छेडछाड को सुनकर थोडा उदासी हो गयी । उसी समय अजय और ज्योति को देखकर विजय की याद आ रही थी और फिर यादव में कोई अकेली सुबह अपने कमरे में बढ बढाने लगी । विजय तो मुझे बेवफा नर समझना मैं बेवफा नहीं हूँ । मैं तुम से दूर जरूर हो मगर मैं तुम्हारी ही हूँ और तुम्हारी ही होंगे । मगर विजय तो मुझे भूल मत जाना । इस प्रकार सुमन न जाने क्या क्या कह रही थी और इस बात से बिल्कुल भी खबर थी कि उसकी बातों को ज्योति, अजय और रजत सुन रहे हैं और सच कुछ ही तीनों सुमन की बातों को सुन रहे थे । फिर ज्योति नहीं जी की तरफ देखा और कहा, सुन ली प्यार कितना अच्छा होता है । ये हकीकत है जो झुठलाई नहीं जा सकती । जूती किस प्रकार की भावभरी बातों को सुनकर अजय बोला हाँ होती, मैं तुम्हारा इशारा समझ गया । फिर घडी की और देखते हुए कहा अच्छा, अब हम लोग चलते हैं । यह कहकर अजय और रजत दोनों चले गए । उनके जाने के बाद ज्योति सुमन की बातों को अपने मन में दोहराते हुए बैठ गई । तभी सुमन कमरे में आई और अपने दिल की उदासी को छुपाते हुए बोली । वे लोग चले गए । मौसी हाँ चले गए । सुमन कुछ भारी स्वर में बोली, लेकिन आप इतनी उदास क्यों बैठी है? मौसी आपको तो खुश होना चाहिए । जूती बोली सुबह मैंने तो तुम से आज तक कुछ भी नहीं छिपाया, परन्तु मुझे आभास हो रहा है कि तुम उसी को छुपा रही हो । बोलो सुमन तुम्हारी जीवन का ऐसा कौन सा मोड है जिसे बताने में असमर्थ हो? ज्योति की बातें सुनकर सुमन की आंखों में आंसू आ गई । वह बोली, मौसी जी मुझे समझ में नहीं आता कि आपको में इंसान समझो या कोई फरिश्ता । घाट तो मेरी नस नस को जानने लग गई है । मैं आपका ये शक भी पूरा कर देती हूँ । जिस तरह आप और अजय है उसी तरह मेरा भी दोस्त था । विजय बहुत ही पढा लिखा और समझदार तो क्या तुमने उसे छोड दिया? ज्योति ने साधारण ही पूछ लिया, नहीं मौसी जी मैंने उसे नहीं छोडा । किस्मत से हम दोनों का मिलना मंजूर हुआ और हम दोनों के बीच में दौलत की दीवार खडी हो गई जिसे विजय तो तोडना चाहता था मगर मैंने रोक दिया और अब उन्हें पता नहीं है कि मैं कहाँ हूँ । वरना वो तो मेरे लिए सारी दुनिया छोड सकते हैं । दुनिया के हर विचार तोड सकते हैं, मगर अब में उनसे गायिका बनने के बाद ही मिलना चाहती हूँ । ये कहकर सुमन कुछ ज्यादा ही उदास हो गई । तब उसे समझाते हुए जो भी बोली सुमन तो एक दिन गायिका जरूर बनेगी । इस प्रकार दिन बीतते गए सुमन रोज कपूर अंकल के यहाँ संगीत सीखने जाती थी । साथ में अजय भी सीखता था परंतु वह सुमन से बहुत आगे निकल चुका था और इसी बीच सुमन यह भी जान गई थी कि रजत की निगाहें सुमन के लिए गलत है । सुमन एक दिन अपनी ड्यूटी ज्वाइन करके घर आ रही थी तभी उसके पीछे से रजत भी आ गया और पास आकर बोला सुमन जी मैं जब के साथ घर चलूंगा, वहाँ तो बुलाती ही नहीं । मगर आज मैं जरूर आऊंगा । सुमन बोली क्यों मेरे घर के आएंगे? क्या काम है आपको मुझ से? इस प्रकार सुमन की टेडी बातें सुनकर रजत बोला कमाल है सुमन यह भी कोई पूछने की बात है । जब दो जवाब दिल मिलते हैं तो हर दिल में कसक होती है । सुमन रजत का इरादा जान गए और बोली शराब रजत बोला तो वो सुमन तुम तो ऐसे कर रहे हो जैसे मैं कोई पर आया हूँ तो बाहर ही तो और सुमन जी प्यार का जवाब प्यार से ही देना चाहिए । अच्छा तो आप मुझे प्यार करने लगे हो, लेकिन मैं तुमसे प्यार नहीं कर दी । अच्छा तो मुझे बेवकूफ समझकर अपने आगे पीछे घूमना रही हो । रजत ने कहा ये तुम्हारी गलत फहमी भी मेरा रास्ता छोडो । ये कहते हुए सुमन ने रजत को सामने से हटाने के लिए प्रयास किया कि देख कर सब आस पास के लोग इकट्ठे हो गए और रजत को थाने ले जाने की कोशिश करने लगे । तभी सुमन मौका देखकर वहाँ से चली गई । सुमन ने उस दिन रजत का सर सबके सामने झुका दिया परंतु रजत के मन में बदले की भावना आगे और वह अवसर ढूंढता रहा । आखिर एक दिन उपाय सूची लिया, उसे होटल में कमरा बुकिंग कराया फिर जैसे गोला देख रहे ये सुमन मेरे पीछे पडी है और मैं ये प्यार प्यार के चक्कर में पड नानी जाता और बाद में सुमन के घर जाकर अपना बौद्धि बताकर सुमन को होटल के कमरे में बुला लिया और उसी होटल में रजत ने जो थी और अजय को भी । सुमन को एक बदमाश लडकी बताने के लिए बुला लिया । सुमन जाना नहीं चाहती थी मगर ज्योति ने भी जोर देकर कहा था । इसीलिए वो रजत के बताए अनुसार होटल के कमरे में गई जहां रजत का इंतजार करती हुई पाई । सुमन ने अंदर जाकर देखा कोई नहीं था । दरवाजे की तरफ वापस आने लगी । कभी रजत ने दरवाजा बंद कर लिया और बोला इस पहले मुझे उस दिन के थप्पड का बदला लेना है । दरवाजा बंद करने पर सुमन एक दम घबरा गई । वो बोली रजत मुझे जाने दो मेरे साथ ऐसी वैसी हरकत करने की कोशिश मत करो । तभी रजत विजयी दृष्टि से सुमन को देखते हुए बोला फिक्र ना करो देवी जी मैं तुम्हारे पास तक नहीं आऊंगा । मैं इतना बदमाश किसमें का लडका नहीं हूँ । मुझे बदला लेने दो, थोडी देर दरवाजा खुलने का इंतजार करो । ये कहकर रजत ने गालों पर लिपस्टिक के दम जैसी कोई लडकी ने चुम्बन क्या हो लगा लिया । फिर थोडी सी लिफ्टिंग के दाग अपने कपडे में लगा लिए और सुमन के माथे से बिंदी निकालकर अपने शर्ट पर लगा ली । फिर दरवाजा खोला और निकल गया । तब सुमन भी उसके पीछे पीछे सीढी से नीचे उतरने लगी । ज्योति रजत को देखकर हसते हुए बोली क्या सूरत बना रखी है तुमने? ज्योति की बात सुनकर रजत बनते हुए बोला क्या जो दीदी आप भी मजाक करती है? मैं उस जाली लडकी से जैसे तैसे भागकर आ रहा हूँ और आप सूरत की बात कर दी है । तभी सुबह भी आ गई जो पहले से ही रजत के पीछे पीछे आ रही थी । उसी देखते ही रजत बोला अजय ये रही गुमसुम लडकी जिसने आज मुझे कमरे में बंद कर लिया था और आने नहीं दे रही थी । ज्योति और अजय को सुमन की बात पर विश्वास हो गया क्योंकि उन लोगों ने सुमन को रजत के पीछे जाते देखा था और सुमन भी रजत के उपर स्थिति के कारण अजय और ज्योति से बात सुनकर रजत अपनी कामयाबी पर मन ही मन मुस्कुरा रहा था । दूसरे दिन सुमन कपूर अंकल के यहाँ संगीत सीखने गई तो उसे कपूर अंकल की जगह अजय मिला । आज उनके साथ रजत नहीं था । मुझे बोला सुमन जी माफ करें । आप जैसे लोगों को मेरे बाबूजी अब संगीत सिखाना नहीं चाहते । अजय की बात सुनकर सुमन समझ गई कि अजय गलतफहमी का शिकार हो गया है और वह चुपचाप उठकर वहाँ से चली गई । अभी वो सिर्फ वादा संगीत ही सीट पाई थी । आज सुमन घर में आई और चुपचाप गम के आंसू पीते हुए हो गई । जब सुमन की नींद खुली तो शाम के सात बज रहे थे । वो जल्दी से उठी और हाथ में होकर फिर किसी अनजान शहर की ओर जाने के लिए तैयार हो गई और टैक्सी में बैठ कर सीधा स्टेशन चली गई । जब स्टेशन पर सामान रखकर टैक्सी से उतरी तो अपने सामने ज्योति को पाकर सुमन आश्चर्य से भर गई । वो बोली मौसी आप यहाँ क्यों आई हो? ज्योति ने गंभीर स्वर में कहा तुम्हें लेने तब सुमन बोली लेकिन मौसी अब इस शहर में मेरा रहना ठीक नहीं है और अब तो नौकरी भी छूट गई । साथ में बदनाम भी हो गयी किस कारण होंगी । ज्योति ने कहा, सुमन में तुम्हारी बात को ही सच मान रही हूँ । इसीलिए तो मेरे साथ चलो लाख समझाने मनाने पर जब सुबह रुकने को तैयार नहीं कोई तो ज्योति सुमन कर उसके अनजान रास्ते पर सफल सफर के लिए भगवान से दुआ मांगती हुई वापस घर लौट आई । विजय सुमन के घर से निकलकर सीधा अपने घर चला गया और वहाँ जाकर सुमंत इस वाक्य को दोहराने लगा जिसे सुमन ने विजय को कहा था में आपको नहीं जानती । मगर हाँ उस विजय को जानती हूँ जो मेरा दिलबर है । रईस बाप का बेटा नहीं । सचिन तो कहा था सुमन ने मैं सुमन का दिलबर हो, दल का मालिक हूँ, दौलत का नहीं । विजय अकेले नहीं जाने किससे बात कर रहा था । सुबह तो मुझे इतना प्रेम क्यों करती हूँ और अपने प्रेम के बदले मुझे क्यू प्रेम पानी से दूर चली गई हो । गंभीर दुनिया में तुम अकेले ही क्यों चली गई? इस प्रकार कई प्रश्न विजय के मन में उठ रही थी, जिसका उत्तर सिर्फ सुमन ही दे सकती थी । सुमन तो विजय के रग रग में समा गयी थी । अब सुमन नहीं तो उसकी यादि ही काफी थी । विजय सुमन की यादों में अपना जीवन बिताने के साथ साथ सुमन को भी पानी की कोशिश में आस पास के शहरों में सुमन को ढूंढता पडता था । विजय के मम्मी पापा भी विजय की हालत देखकर विजय को कुछ नहीं बोलते थे । वे लोग जान गई थी कि और आगे कदम बढाने से विजय घर को ही छोड देगा । इसीलिए विजय को हमेशा गुमसुम और उदास देखकर उसके पापा कुछ नहीं कहते । हाँ, विजय की मम्मी कभी कभी मौका पाते ही सुमन को विजय के दिल से निकालने की कोशिश में लगी रहती है । आज विजय सुबह उठा और अखबार को पढते ही उसके चेहरे पर उत्सुकता लहराई । उसे देखती हूँ । उसके बाबा बोले क्या बातें विजय आज अखबार में कोई विशेष चीज है क्या? विजय बोला हाँ पापा आज बीएससी फाइनल का रिजल्ट आया है । सुमन पास हो गई । विजय बोलते समय बहुत ही खुश था । उसे देखकर उसके पापा बोले तो उसके पास होने से तो मैं क्या खुशी है । बेटा विजय को पापा की बात पर गुस्सा आया । करन तो उसी को रोकते हुए बोला, पापा के आपको मम्मी की सफलता पर खुशी नहीं होती । विजय के पापा को विजय से ऐसे उत्तर की आशा नहीं थी, परंतु ऊटपटांग उत्तर सुनकर विजय के पापा कुछ हाथ बडा से गए । फिर बोले विजय सुमन ने तुम कुछ दिन कहा था ना तुम कौन हो, निकल जाओ यहाँ से और तुम हो कि सुमन की आस लगाए बैठे हो । विजय बोला आप आप सुमन को समझ नहीं सकेंगे । ये कहकर विजय अपने कमरे में जाकर लेट गया और तकिये के नीचे अपना मूड छुपाकर बोलने लगा । सुमन्तु आज अपना रिजल्ट देखकर कितनी खुश हुई होगी मगर मुझे किसी के सामने अपनी खुशी प्रकट करने का अधिकार नहीं । ये कहकर विजय अचानक रोक बडा विजय की मम्मी ने विजय से कहा की विजय तुम कब तक ऐसे ही करते रहोगे । जो होना था हो गया तो सुमन तो में मिल नहीं सकती और मिल भी गई तो घर से निकली हुई लडकी किसी की अमानत नहीं हो सकती । इसीलिए तुम भी अपना घर बसा लो । मम्मी की बात सुनकर विजय बोला माफ इस प्रकार की बातें मत करो वरना मुझे भी घर छोडने पर मजबूर होना पडेगा । सुमन मेरे खातर दर दर भटक रही है । मैं भी दर दर भटक सकता हूँ मगर किसी और लडकी को अपनी जिंदगी में नहीं ला सकता । और सुमन कोई बाजारू लडकी नहीं है । हाँ वो मेरी अमानत हैं और अमानत ही रहेगी । विजय ने सोचा कि सुमन कहीं भी हो, मगर आपने मार्क्स इट लेने जरूर आई थी । ये सोचकर विजय सुमन के कॉलेज चला गया । वहाँ जाने पर उसे पता चला कि सुमन अपनी मार्कशीट पहले दिन ही लेकर चली गई । फिर विजय सुमन की यादों में खोई सुमन के संगीत की शिक्षा को स्वयं भी लेने का निर्णय लिया और विजय शिक्षक के पास संगीत सीखने लगा । विजय फिल्में देखने गया था तो वहाँ से बुआ मिली । बुआ जी बोली विजय तुम यहाँ फिल्म देखने आए हो । अच्छा हुआ । इसी बहाने मुलाकात हो गयी । विजय बोला हाँ बुआ जी सुमन की याद मुझे चैन से रहने नहीं देती । इसीलिए आज फिल्म देखने चलाया । अच्छा बुआ जी, आप बताइए समन के माँ बाप उसकी तलाश कर रहे हैं या हाथ पे हाथ धरे बैठे हैं । बुआ बोली कहाँ? बेटा, वो तो सुमन की जाने से खुशियाँ मना रहे हैं । कहते हैं अच्छा हुआ हमारे सेंसिग बला उतर गई । हाँ जी जी, अगर तुम चाहो तो सुमन से तो मिल सकते हो । विजय आतुरता से बोला लेकिन सुमन है कहाँ? बुआ बोली बेटर सुमन का पता लग गया है । फिर भी उसकी माउस के बाबू जी को नहीं बता रही । सुमन यहाँ से पचास किलोमीटर दूर सिंगरौली नामक शहर में है । मेरी नौकरानी का मारेगा वही है । वही बता रही थी । विजय थोडी देर तक वहीं खडा रहा फिर टिकट को फाडकर फेंक दिया । बहुत देर पूछताछ करने के बाद सुमन तो नहीं मगर ज्योति विजय को मिली ज्योति बडी गंभीरता से सुमन की सारी कहानी सुनने लगी और बताया कि सुमन अब शायद कलकत्ते में होगी । ज्योति विजय को सुमन के जाने का कारण बताती हुई और सुमन से भी छोडने के कारण स्वयं रूपडी उसे रोती देखकर विजय बोला ज्योति जी आप हो रही है लेकिन यहाँ हुआ किसके लिए बाहर ही है । विजय की बात सुनकर ज्योति ने अपने आंसू पहुंचते हुए कहा आप ग्लासों को शायद नहीं समझ सकेंगे, लेकिन फिर भी क्या पूछ रहे हैं तो मैं बताती हूँ कि ये आंसू सुमन की याद है । विजय सुमन क्या जिसका आपकी सेवाएं इस दुनिया में कोई नहीं है? ज्योति का सुमन के प्रति अपनत्व देखकर विजय ने कहा सुमन का मेरी सेवाएं आप भी तो है । उसके प्रति आपके मन में इतना अपनापन है । इतना प्रेम है । ये क्या काम है कि ज्योति बोली नहीं विजय जी अगर मुझे इतनी शक्ति होती तो मेरे अपने बंद में ताकत होती तो समय यहाँ से नहीं जाती । मुझे फिर पहले की तरह अकेले नहीं रहना पडता और न ही सुमन मुझ से दूर होती । ये कहकर ज्योति और भी रो पडी । मैंने उसे लाख मनाया, लाख रोका परंतु शायद वो पत्थर बन गई थी । वो नहीं रुकी तो विजय बोला रूकती भी कैसे । शायद आपको नहीं मालूम कि वो अपना घर को छोड कर आई थी । सुमन अपनी माँ की आत्मा को शांति दिलाने के लिए एक गायिका बनना चाहती है क्योंकि सुमन की माने अपने संगीत के शौक को पूरा न करने के कारण ही खुदकुशी कर ली थी । सुमन की महाजन भगवान को प्यारी हुई । उस समय सुमन मात्र तीन साल की थी । नगर आज सुमन दुनियादारी को समझने लगी है जो अपनी माँ की मौत के कारण को जान गई है । उनकी आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए सुमन दर दर भटक कर संगीत सीख रही है । शिक्षक को कस्ट हो जाने से सुमन इस शहर में ना रुक सके । फिर घडी की ओर देखते हुए विजय बोला अच्छा जो होती थी मैं चलता हूँ । रात के बारह बजे के करीब विजय अपने घर पहुंचा तो माँ को अपने इंतजार में बैठा पाया । विजय की माने विजय को देखते ही कहा विजय तो कहा था मैं तो तेरा इंतजार करते करते परेशान हो रही थी । माँ की बात सुनकर विजय बोला ज्योति के यहाँ ज्योति का नाम सुनते ही माँ बोली की जोडी कौन है? विजय बोला समझ में नहीं आता माँ की मैं ज्योति को क्या कहूँ? उसकी बोली में शांति और मिठास है । उसकी आंचल में मां का ममत्व और बातों से सहयोगी बहन के समान लगती है । मैं उसे क्या कहूँ खुद समझ नहीं पाया खैरमा आपके लिए इतना ही जान लेना बहुत है कि ज्योति जी मेरी परिचिता है जिसमें इंसानियत और हमदर्दी कूट कूट कर भरी हुई है । शायद विजय की माँ विजय की बात को न समस्या की और बोली चलो अच्छा हुआ तो सुमन को तो भूल गया । अरे हाँ तोरी अभी तक की नहीं बताया कि ज्योति कि पापा क्या काम करते हैं, अच्छे मालदार है या नहीं और खूबसूरत तो होगी ना कि दूसरी सुमन उठा कर ला रहा है । इतना कहकर माना हस्ती विजय कुमार की बात पर बहुत गुस्सा आया । बोला की माँ जो थी वो लडकी नहीं है जो आप समझ रही है और मैं भी वो लडका नहीं हूँ जो आप समझ रही है । ज्योति को पहले सुमन जानती है और सुमन के कारण ही ज्योति मुझे जानती है । मामले जीवन के अंतिम क्षण तक सुमन का इंतजार करूंगा और इंतजार कभी असफल नहीं होता । और फिर आप सुमन को इतनी गिरी हुई लडकी क्यों मानती है कि किसी घृणास्पद बाद के लिए उसकी तुलना करती हूँ माँ अखिल सुमन आपके घर की ही बहुत बनेगी फिर आप उस इतनी नीचे निगाहों से क्यों देखती है? और हामा एक बाद अच्छी तरह सुन लो की दुनिया की कोई शक्ति मुझे सुमन का इंतजार करने से नहीं रोक सकती । विजय की माने देखा विजय धीरे धीरे आवश्यक होता जा रहा है । उससे ज्यादा बोलना अच्छा नहीं समझा और बाद को पलटते हुए बोली छोडो विजयन बातों को चलो खाना खा लो । मैंने भी तुम्हारी राह देखते देखते खाना नहीं खाया है । विजय रूखे स्वर में बोला मेरे खाना खा लिया है जो थी के यहाँ आप खा लीजिए । विजय की बात सुनकर उसकी लाने कहा विजय ठीक है तो नया जो थी कि घर खाना खा लिया है लेकिन मेरे प्यारे लाल आज से किसी भी लडकी के घर खाना मत खाना आज की लडकियाँ चालबाज होती है वरना सुमन की गोभी की तरह तुम्हें अपने जाल में फंसा लेगी । फिर उस जाल से निकलना मुश्किल हो जाता है जैसा की अभी निकलना तेरे लिए मुश्किल हो गया है । अच्छा जहाँ सोचा मगर याद अपना बेटा काम अब बाहर खाना मत खाना । विजय की बात सुनकर चुपचाप खडा रहा । फिर बोला आप सुमन से इतनी नफरत क्यों करते हो? उस पर इतना भला बुरा इल्जाम क्यों लगती हो? मेरी समझ में तो आज तक नहीं आया । हाँ, मैं सुमन जैसी हर लडकी से नफरत करती हूँ । ऐसे छोटे घर की लडकियों को तो इज्जत बेज्जत का कोई डर नहीं रहता । और दूसरी बात ये कि सुबह जैसे लडकी कोई विजय जैसे लडकी से ही क्यों प्यार कर्नाटक चाहती है । क्या उसे अपने बराबर का कोई लडका नहीं मिलता? मेरे इस प्रश्न का जवाब दो । विजय विजय बोला मैं अपने कैसे सोच लिया कि सुमन मुझसे नहीं मेरी दौलत से प्रेम करती है । इस प्रकार से सोचना आपके लिए सिर्फ गुनहा नहीं माँ बल्कि भरी जुर्म है । सुमन मेरी जिंदगी में आने से पहले मेरा ठिकाना कहाँ है ये भी नहीं जानती थी और आपके पास कितनी दौलत है ये भी नहीं माँगना आपको विश्वास नहीं तो आप इम्तेहान लेकर देख लो आप एक तरफ मुझे दूसरी तरफ अपनी दौलत को रखोगे तो सोमनाथ की दौलत को ठुकरा देगी । दौलत की चाहे तो सिर्फ दौलत वालों को होती है माँ दिल वालों को नहीं, मेरी समझ में आज तक लेने आया । क्या कैसी औरत है जो एक लडकी को पहचान नहीं सकते । मुझे अफसोस है कि आप कभी सुमन को समझने की कोशिश नहीं करती । सुबह की बातों को सुनकर विजय की माँ दूर हो गई थी । उसे विजय पर गुस्सा आ रहा था । इस कारण वह उसी से बोली विजय बस करूँ ये बकवास सुनने के लिए । अब मेरे पास वक्त नहीं है । मुझे भूक लग रही है और मेरी भूख भोजन से ही समाप्त होगी । तुम्हारी सुमन की बढाई करने से नहीं । ये कहकर विजय की माँ खाना खाने के लिए चली गई और विजय भी अपने कमरे में चला गया । विजय रोज सवेरे आठ से दस बजे तक संगीत सीखने के लिए किसी शिक्षक के पास जाता था । मगर ये बात उसके मम्मी पापा को मालूम नहीं थी । आज विजय जब नाश्ता करके तैयार हो रहा था संगीत सर के पास जाने के लिए । तब उसके पापा बोले विजय आजकल रूस सवेरे तुम कहाँ जाते हो । अपने पापा के प्रश्न को सुनने के बाद विजय रूखे स्वर में बोला, चतुर्वेदी सर के घर चतुर्वेदी का नाम सुनकर विजय के पापा उत्सुकता से बोले, चतुर्वेदी की यहाँ अच्छा हुआ बेटा की तुम सुमन को भूल गए । आज अगर तू जा ही रहा है तो हमारी होने वाली बहू से हमें भी मिलने के लिए ले जाना । आज मुझे जानकर बहुत खुशी हुई कि तुम सुमन को छोडकर चतुर्वेदी जी की लडकी को चाहने लगे हो । विजय अभी पापा के बाद को सुनता रहा और चुपचाप उनके चेहरे को देखता रहा कि जब वो चुप हो गए तो विजय ने कहा शादी, शादी, शादी का भूत आपके सर से कब उतरेगा? समझ में नहीं आता है । बिना किसी चीज को जाने बिना समझे बिना पूछे किसी भी लडकी को बहुत बना सकते हैं । तो कर लीजिए आपने दौलत बंद लडकी की शादी मैं नहीं कर सकता । आजकल बेटे भी तो बाजार में मिलने लगे हैं । पापा चतुर्वेदी की लडकी जो मेरी बडी दीदी के समान है, मैं उससे शादी करूंगा । विजय की बात को सुन कर उसके पापा चौंक गए । बोले तो तुम चतुर्वेदी जी की यहाँ क्यों जाते हो? विजय बोला संगीत सीखने विजय के पापा बोले तो तुम संगीत सीखने जाते हो । बाहर आज तक हमें बताया नहीं । मुझे नहीं कहा कमाले पापा पे कभी पूछा ही नहीं और आज पूछा भी है तो सुनने के पहले जाने क्या क्या बोले जा रहे थे । फिर गंभीर स्वस्थ्य विजय ने कहा, पापा दुनिया में अगर मजबूर होकर हर गलत काम करना पडे तो मैं कर सकता हूँ, मगर बेवफाई नहीं कर सकता और आप ही बताइए । इंसान की जब सबसे प्यारी चीज गुम हो जाती है तो वह उसे खोजने की सेवा कर ही जा सकता है । आज मैं भी अपनी सबसे प्यारी चीज अपनी जिंदगी सुमन को खो बैठा हूँ और मैं उसे ढूंढने के सिवाय किसी और से शादी नहीं कर सकता । बोलो पापा जवाब दो । विजय की बात सुनकर उसके पापा कुछ देर तक चुप रहे । फिर बोले, विजय चाहिए, चीज प्यारी हो या ना हो, अगर खो जाए तो उसे जहाँ तक हो सके भूल जाना चाहिए । कोई भी चीज को पाने की लालसा नहीं रखनी चाहिए और हो सके तो दूसरी वस्तु से संतुष्ट होने की कोशिश करनी चाहिए । ओरिजिनल नहीं तो डुप्लीकेट और अक्सर इस दुनिया में खोई हुई वस्तु कभी नहीं मिलती, चाहे वह दिल हूँ या पैसा । इसीलिए तो मैं यही सोच लो कि सुमन भी दुनिया की भीड में खो गई है और वह तो मैं कभी भी नहीं मिल सकती । उसकी जगह किसी और लडकी को देखकर तुम स्वयं अपनी जीवन को सुधार लू ताबा की बातों को सुनकर विजय ने कहा कि पापा एक प्रश्न का जवाब देना नि स्वार्थ भाव से अगर अब मेरी जगह होते और बीच में यही दौलत और सूरत की दीवार खडी हो जाती तो आप क्या करते हैं? इस बार विजय के प्रश्न पर उसके पापा को गुस्सा आया और कुछ सहते हुए बोले, विजय प्रश्न ऐसा पूछना चाहिए जैसे उत्तर देने वाले को भी मजा आएगा और प्रश्नकर्ता को ज्ञान मिले । ऐसे प्रश्न किसी से नहीं करनी चाहिए जिसका संबंध अपने व्यक्तिगत जीवन से ही हो । और हाँ, अगर मैं तेरी जगह होता सबसे पहली बात सुमन जैसे लडकी से प्यार ही नहीं करता और धोखे से भी उसके जाल में फंस जाता तो उसमें उलझने की कोशिश नहीं करता और ये भूल जाता कि मैंने किसी लडकी से प्यार किया था और उसके बाद नए सिरे से अपने जीवन की शुरुआत करता अपना घर बसा लेता । विजय ने कहा, मुझे मालूम था पापा आप ऐसे ही जवाब देंगे आपके अंदर विजय ने ही विजय का दौलतमंद बाप बोल रहा है सच का ये बाबा क्या ये आपकी आत्मा से निकला हुआ उत्तर है एक बनावटी उत्तर जिसके सहारे से आज में सुमन को छोडकर किसी और लडकी से शादी कर लो । आप सीधा ये क्यों नहीं कहते कि अगर आप मेरी जगह होते तो आप भी मेरी तरह सुमन को कभी नहीं भुला पाते बल्कि बगावत पर उतर आते । विजय की पापा गुस्सा होकर बोले विजय तो मुझसे प्रश्न पूछकर शिक्षा ले रहे हो या शिक्षा दे रहे हो शिक्षा देना ही है तो सुमन जैसे लडकी को दो जो एक माँ बाप से उसका बेटा छीन रही है जो एक लडकी की दिल में अपने प्रति प्यार और माँ बाप के प्रति नफरत भर रही है । तो ये क्यों नहीं पूछता है की दुनिया में प्रेमिका बडी होती है या माँ बाप? अगर ये प्रश्न मुझसे नहीं तो किसी और से भी जाकर पूछना फिर के उत्तर मिलेगा मुझे बताना विजय टॉप इसमें कोई शक नहीं दुनिया में सबसे बडे माँ बाप ही होते हैं पर उन माँ बाप का भी यह कर्तव्य होता है कि वो अपने बेटे या बेटी को उसी समय हो कि जब बुरा काम कर रहे हो । माँ बाप को भी समझना चाहिए कि वो अपने अधिकार का दुरुपयोग न करें । किसी बात पर अपने बच्चे को रोकने से पहले उस बात पर पहले अच्छे से विचार कर लेना चाहिए । इन सब के अलावा एक महत्वपूर्ण बात ये है कि बच्चों को से खाने के लिए माँ बाप को भी आगे बढ कर ईमानदारी और सही रास्ते पर चलना चाहिए । और पापा मुझे मालूम है कि में सही रास्ते पर चलने के लिए ही आपसे इतनी ऊलजलूल बातें कर रहा हूँ और सुन रहा हूँ लेकिन पापा याद अपना मैं जिस रास्ते पर चल रहा हूँ वही मेरे प्यार की मंजिल जुडी हुई है और मुझे अपने आप पर विश्वास है की उलझनों को झेलकर बस दुनिया की भीड से मैं अपनी जिंदगी को निकाल होगा । हरिद्धार ताप समझ रहे हैं ना पापा कि मैं तभी चैन की सांस लोगा जब सुमन गायिका और मैं उसका पति बन जाओ । विजय के पापा ने गंभीर स्वर में कहा अच्छा तो विजय हम समझ जाए बेटा कि हमारा लडका उस बाजारों लडकी के साथ अपना जीवन बिताने के लिए अपने माँ बाप को छोड कर जा सकता है और उसकी माँ जिसने उसे नौ वहाँ तक अपने गर्भ में रखा और पृथ्वी पर आने पर उसे दूध पिलाया । आज पाल पोसकर तुझे जवान क्या उसके लिए एक लडकी को नहीं छोड सकता है? वीडियो पे पापा की बातों को सुनता रहा फिर बोला छोडिये पापा इन सारी बातों को बेकार की बातों पर आप जैसे इंसान को दिमाग नहीं लगाना चाहिए तो वही होगा जो किस्मत को मंजूर है क्या? तो तन्हाई या मिलन इसमें से जो भी भगवान को मंजूर होगा वही होगा । इस प्रकार कहकर विजय अपने पापा के सामने से हट जाता है और संगीत सीखने चला गया और फिर इसी प्रकार विजय के माँ बाप विजय के दिल से सुमन को निकालने का और सफल प्रयास करते रहे और विजय के माँ बाप की बातों को फिजूल की बातें समझकर ध्यान नहीं देना चाहता था और सुमन की यादों में खोया तन मन धन लगाकर संगीत सीख रहा था । इस तन्हाई में एक संगीत का ही सहारा था जो कि सुमन से दूर नहीं बल्कि उसके पास ले जा सकता था ।

तलाश भाग 5

पांचवा भाग सुमन ने सिंगरोली से सीधा कलकत्ता की ट्रेन पकड ली । वो जिस डिब्बे में बैठी थी उस डिब्बे में एक लडकी और लडका भी बैठे थे । शायद में दोनों भाई बहन थे । सुमन चुपचाप उदास मन से होने वाली सीट पर बैठी थी । तभी उस डिब्बे में बैठी हुई लडकी सुमन के पास आकर बोली आप कहाँ जा रही है? सुमन बोली, मैं तो कलकत्ता जा रही हूँ, लेकिन आप कहाँ जा रहे हैं? वह लडकी बोली मैं भी कल करता ही जा रही हूँ । चलो अच्छा हुआ, दोनों हमजोली के हैं । बातों बातों में ही रास्ता गुजर जाएगा । फिर वो लडकी थोडी चुप रहकर बोली आपका शुभ नाम क्या है? मेरा नाम सुमन है । मैं सिंगरोली से आ रही हूँ । लडकी बोली आप अकेली है । सुमन बोली हाँ मैं अकेली ही जा रही हूँ । अच्छा अब आप अपना नाम बताइए । मेरा नाम अर्चना है और फिर बाजू वाले लडकी की और इशारा करते हुए बोली ये मेरे भाई है । फिर सुमन ने अर्चना के भाई को नमस्ते किया और अर्चना के भाई ने भी नमस्ते क्या और बोला आप से मिलकर बडी खुशी हुई । अर्चना बोली अच्छा सुमन जी, आप ये बताइए कि आप कलकत्ता किस काम से जा रही है, किसी रिश्तेदार के यहाँ जा रही हूँ । सुमन बोली मैं घूमने के लिए जा रही हूँ । मैं तो मेरा कोई रिश्तेदार कलकत्ता में रहता है और ना ही में बिजनेस करती हूँ । तो पहुँचना अश्चर्य से बोली । घूमने और अकेली तब सुमन बोली यहाँ अकेली हूँ, किसी साथ लाती आपके भैया जी है, इसलिए आप कहीं भी भैया जी के साथ जा सकती है । मगर मुझे भागन का तो इस दुनिया में कोई नहीं है और जो भी है उसे मैं अपने साथ नहीं ला सकती । ये कहते हुए सुमन का गला रूंध गया । आज तक सुमन ने कभी भी महसूस नहीं किया था कि मेरे भाई पहन रही है, परन्तु आज उसे महसूस हो रहा था कि काश मेरा भी कोई भाई होता । सुमन की आवाज कुछ मोटी हो गई है और धारत उसके बाद से सुमन को दुख पहुंचा था । अर्चना ने कहा कि माफ करना बहन, मैंने कोई उल्टा सीधा प्रश्न पूछकर आपके दिल को दुःख पहुंचाया है । अर्चना की बात सुनकर भी सुमन कुछ नहीं बोली । वर्जना के बडे भाई दीपक जो अर्चना के साथ थे वो बोले इसकी तो आदत ही ऐसी है । बिना सोचे समझे किसी को कुछ भी बोल देती है आप कृपया इस की बातों पर ध्यान न दें । दीपक की बात शंकर सुमन जल्दी से अपने आप को संभालते हुए बोली नहीं, इसमें शमा मांगने की क्या बात है? ये बात तो सभी पूछते हैं और पूछना भी चाहिए । अर्चना को थोडी मालूम था कि मेरे कोई भाई बहन नहीं है । मालूम होता तो वह स्वयं नहीं पूछती । फिर स्टेशन आया । वहीं पर दीपक, अर्जुना और सुमन तीनों ने एक साथ उतर कर नाश्ता किया और फिर अपनी अपनी सीट पर बैठ गए और दोस्त के समान ही सुमन और दीपक बात करने लगे । बातें बातों में सुमन ने बताया कि वह कलकत्ता पहली बार जा रही है और कलकत्ता उसके लिए एकदम नया शहर है । तब दीपक ने कहा कि आप वहाँ से उतरकर लॉज में रुकेगी । इससे अच्छा आप हमारे घर चली । तब दीपक का समर्थन करते हुए अर्चना बोली भैयाजी थी की तो कह रहे हैं अब चलिए हमारे घर पर दो । सुमन ने उनके घर जाने से इंकार कर दिया तो अर्चना ने कहा कि सुमन में तो मैं अपना दोस्त बनाती हूँ ये कहकर सुमन की और अपनी दोस्ती का हाथ बढा दिया जिसे सुमन ने खुशी से स्वीकार कर लिया तो अर्चना बोली । दोस्ती के नाते से एक दोस्त का कर्तव्य होता है कि वह उसके सुख दुःख में काम आए कि आप कुछ अपना दोस्त नहीं मानती जो मेरे घर जाने से इनकार करती हूँ । तब सुमन ने सोचा कि अर्चना ठीक ही तो कहती है कि मैं इस अजनबी शहर कलकत्ता में कहाँ होंगे । इससे अच्छा तो यही है कि अर्चना के साथ उसके घर चली जाऊँ । फिर सुबह अंतिम निर्णय लेकर बोली कि ठीक है आप लोगों के साथ चल होंगे । सुबह अर्चना के घर गए तो अर्चना ने अपने माँ बाप से सुमन का परिचय कराया । उसके माँ बाप दोनों ही दयालु प्रवर्ति के थे । इसीलिए एक लडका जो की तीन साल का था तभी भटक गया था । उस समय वह लडका ये भी नहीं जानता था कि उसके माँ बाप कहा है और उसके गांव का नाम क्या है । तभी उस लडके को अर्चना की पापा अपने घर ले आए थे और आज वो लडका दीपक के बराबर का हो गया था । उसका नाम विकास का और विकास भी । अर्चना के माँ बाबूजी को अपने ही माँ बाप के समान मानता था । दीपक अर्चना और विकास में कोई भी किसी भी प्रकार का अंतर नहीं समझता था । एक दिन सुमन ने अर्चना से पूछा अर्चना तेरे घर में आए मुझे आज दस दिन हो गए हैं । अब मुझे जाने दो । अर्चना बोली लेकिन तुम जाओगी कहा । सुमन बोली कोई काम ढूंढने अर्चना बोली क्या काम ढूंढने जाएगी? क्यों तुझे या क्या दुख है? सुमन अपने आपको तू जिस घर के सदस्य के रूप में मानना चाहिए, जितना इस घर में मेरा अधिकार है, उतना तेरह भी और क्या मेरे भी माँ बाप तुमको पसंद नहीं या मेरे भैया से तेरी कोई शिकायत है या फिर मैं ही तो उसको अच्छी नहीं लगती जो कि तुम नौकरी की तलाश करती फिर होगी । सुमन बोली नहीं अर्चना, ऐसी कोई बात नहीं, तुम नहीं समझोगी । अर्चना की मैं शहर में क्यों आई हूँ । मैं यहाँ सिर्फ घूमने ही नहीं बल्कि खास उद्देश्य लेकर आई हूँ । आपके साथ रहकर मेरा उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता क्योंकि मैं जिस काम के लिए आई हूँ उस काम को शायद तुम्हारे मम्मी पापा भी पसंद नहीं करेंगे मेरे माँ बाबू जी की तरह । तभी वहां पर विकास आया । वह शायद आते आते सुमन की बात को सुन चुका था । वह बोला जरा हम भी सुने बहन जी की आप यहाँ पर किस उद्देश्य से आई हो तो उस की बात का समर्थन करते हुए दीपक वहाँ गया और सुमन से आग्रह कर के कहने लगा जैसे हमारे लिए अर्चना है, वैसे ही सुमन और हाँ सुमन तो में अच्छी तरह से जान लो कि कोई भाई अपनी बहन से और बहन अपने भाई से कोई भी बात नहीं छुपाया करते हैं । इसीलिए तुम ही बताओ कि तुम यहाँ किस उद्देश्य से आई हो । दीपक का अपना तो देखकर सुमन बोली कि भैया जी में संगीत की अधूरी शिक्षा को पूरी करने के लिए आई हूँ और मेरा उद्देश्य पूर्ण रूप से संगीत सीखकर एक गायिका बनने का है । सुमन की बात सुनकर अर्चना अत्यंत खुशी से सुमन को चूमते हुए बोली सेवा क्या बात है, मेरी दोस्त गायिका बनेगी और मैं गायिका की दोस्त । अर्चना की बात सुनकर सभी लोग कहाँ का मार्कर हस पडे हाथो सुमन तुम संगीत सीखना चाहती हूँ । मैं और दीपक आजी जाकर किसी टीचर से मिलाते हैं तो उनको नौकरी करने की जरूरत नहीं है । समझी आखिर मैं भी तो तुम्हारी तरह पहले इस घर के लिए एकदम अजनबी था । मगर यहाँ आने के बाद मुझे मालूम ही नहीं हुआ कि मैं किसी पराई जगह में रहता हूँ । यहाँ अपने घर में और कुछ ही दिन रहने के बाद मुझे यह भी अहसास हुआ कि मैं जिन लोगों को पराया समझ रहा था वही मुझे अपनों से भी बढकर अपनत्व और प्यार और महत्व देते हैं । फिर उसके बाद से मैंने कभी भी ये नहीं समझा के मुझे किसी नेपाल करके एहसान किया है । हम तो ये घर मुझे अपना घर प्रतीत होता है तो इस मामले में बिलकुल बेफिक्र रहो कि तुम्हारी इच्छा के अनुकूल वही कार्य किया जाएगा । यहाँ सब अपनी अपनी इच्छा से हर काम करते हैं । किसी को भी किसी प्रकार का दबाव नहीं है और न ही रोकने टोकने वाली बात है । अपने भविष्य को बनाने या बिगाडने का जिम्मेदार हर व्यक्ति स्वयं होता है । हर व्यक्ति है जानता है कि उसके लिए क्या करना उचित है और वह वही करता है । हर इंसान को अपने जीवन के बारे में पूर्ण रूप से छूट देनी चाहिए । चाहे वह ठोकर खाये हो या बिना होकर खाई ही सीख जाएंगे । हर व्यक्ति की अपनी अपनी सफलता और सफलता और समझदारी है । फिर हर रोज एक संगीत शिक्षक सुमन को संगीत सिखाने आया करते थे और सुमन अपनी लगन से सीखा करती थी । अब सुमन खुश रहने लगी थी । उसे अब ये अहसास हो गया था की दुनिया में अपनों से ज्यादा पर आए लोग ही होते हैं । वो अपने आप से ही बातें करने लगी । देख सुमन कुदरत ने तेरी माँ को तो छीन लिया लेकिन तेरी दूसरी सौतेली माफी कुदरत की तरह का ढोने के लिए उसने तुझसे मेरे बाबूजी को छीन लिया । मगर आज तुझे भगवान की दुआ से माँ और बाबूजी मिल गए हैं । फिर कहने लगी विजय अर्चना विकास ज्योति और माँ बाबूजी तेरे लिए पढाई ही तो थे मगर आज ये सब तुझे तेरी मंजिल तक पहुंचाने के लिए एक साथ प्रयास कर रहे हैं । फिर उसे विजय की याद आई तो वह कहने लगी कि विजय तो पहले मेरा कुछ नहीं था मगर वो मेरी खुशी के लिए माँ बाप को छोडने के लिए तैयार थे । फिर उसे जो थी की याद आई । बोली कि ज्योति मौसी आप कितनी अच्छी थी आप मुझे विदा करते वक्त बहुत दुखी थी ना । आप भी तो मेरी कोई रिश्तेदार ना थी । बस मूड बोली मौसी और अब यहाँ अपने ही भैया के समान विकास और दीपक लगते हैं । बहन जैसी अर्चना है और माँ को पाकर ये पता चला की माँ का प्यार कैसा होता है । इस प्रकार सुमन अपने बीते हुए दिन और आज की तुलना करते हुए बहुत खुश थी । गम था तो सिर्फ विजय से दूर रहने का, मगर उसने गम को किसी के सामने प्रकट नौ करने की ठान ली थी और सुमन कभी कभी यह सोचकर मायूस हो जाती थी कि विजय ने कहीं शादी तो नहीं कर ली होगी लेकिन फिर उसकी आत्मा से ये आवाजा दी थी कि नहीं । विजय शादी नहीं कर सकता । विजय बेवफा नहीं हो सकता है । फिर वह स्वयं कहती अगर उसने अपने माँ बाप से तंग आकर शादी कर ली होगी तो फिर उसकी आत्मा कहती कि सुमन तो विजय को मन का मीत मालती है तो क्या उस की शादी के बाद तो उसे मन से निकाल देगी । फिर सुमन जोर से रो पडी और संस्थान कमरे में स्वयं अपने आपसे कहने लगी नहीं नहीं, ऐसा नहीं हो सकता हूँ । मैं अपने जीवन से अपने मन की मीट को अलग नहीं कर सकती । अगर विजय ने शादी किसी और से कर बिल्ली तो में जीवन भर उससे नि स्वार्थ प्रेम करते होंगे । फिर अचानक सुमन को अपने आप पर हंसी आ गई और बोली कि वहाँ सुमन तू तो बेकार यहाँ सुबह रही है । तेरह विजय तो सिर्फ दे रहा है वे दूसरी लडकी का साया भी अपने पास आने नहीं देगा । फिर सुमन ऐसे विजय की याद में कोई की कल्पना की दुनिया में हो गई । विजय और सुमन दोनों समुद्र के किनारे पर बैठे हैं । सुमन का सिर विजय की गोद में है और विजय का हाथ सुमन की जुल्फों से खेल रहा था । तभी विजय बोला, सुबह तुम गायिका बनना चाहती थी, बन गई । मेरी पत्नी बनना चाहती थी, बन गई अर्थार्थी तुम्हारी हर इच्छा पूरी हो गई लेकिन मेरी इच्छा का पूरी करोगी । विजय की बात सुनकर सुमन बोली तुम्हारी क्या इच्छा है? विजय ने कहा कि एक गुडिया की विजय की बात सुनकर सुमन कुछ शर्म आ गई और बोली फिर घट विजय बोला, बस इतनी सी बात पर शर्मा गई । मैं तो गुडिया के बाद एक मुन्ना भी जल्दी आई सोचता हूँ तो सुमन हसते हुए बोली लेकिन मैं तो भगवान से पहले मुन्ना और फिर मुन्नी मांगूंगी । विजय बोला नहीं, पहले मुनिया सुमन बोली नहीं पहले मुन्ना । इस प्रकार दोनों मुन्ना मुन्नी की याद में खोई हुई थी । तभी सुमन के पास अर्चना की माँ आई और बोली सुमन तो मर चना को तैयार कर दो, आज उसे देखने के लिए आने वाले हैं । माँ की आवाज सुनकर सुमन की कल्पना टूटी और वो बोली हाँ आपने कुछ कहा गया तो अर्चना की माँ बोली अरे कहाँ हो गई थी मेरी बात को भी नहीं सुना । मैंने कहा आज अभी दस बजे अर्चना को देखने के लिए लडके वाले शादी का रिश्ता लेकर आने वाले हैं इसलिए मैं तो काम में व्यस्त हूँ । तुम अर्चना को तैयार कर दूं । माँ की बात सुनकर सुमन खुश होकर बोली हाँ देखना अर्चना को ऐसे सजा होंगे कि देखने वाले देखते ही रह जाएंगे बल्कि भी नहीं झुका सकेंगे । अर्चना के पापा के साथ अधेड उम्र का व्यक्ति आ रहा था । उसे देखते ही अर्चना की माँ बोली यही है जो हमारी लडकी का रिश्ता ली करा रहे हैं । सुमन माँ की बात शुरू कर एक दम चौंक गई क्योंकि अर्चना के पापा के साथ आने वाले व्यक्ति कोई और नहीं विजय के पापा थे तो सुमन समझ गई की विजय के पापा विजय का रिश्ता लेकर यहाँ आए हैं । फिर उसने विजय के पापा के सामने आना ठीक न समझकर सिर दुखने का बहाना करके अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर गिर पडी और तकिये के नीचे मूड को छिपाकर रोने लगी । सुमन तेरा इंतजार समाप्त हो गया । अब तुझे जीवन भर सिर्फ वो विजय की आदमी जिन्दा रहना है । फिर विजय के पापा और अर्चना के पापा जाने लगी । वह चुपचाप उन लोगों की बातों को सुनने लगी । विजय के पापा कह रहे थे कि मेरे विजय ने अब इंजीनियरिंग पास कर ली है और आपसी देखेंगे तो देखने में भी किसी भी प्रकार की उसमें कोई कमी नहीं है । और हाँ एक बात मैं अच्छी तरह से सच सच बता देना चाहता हूँ कि मेरा बेटा विजय भी औरों की तरह एक गरीब घर आने की एक बेवफा लडकी से प्यार करता था । वह उसे शादी भी करना चाहता था और हम लोग भी तैयार हो गए थे । परंतु लडकी बेवफा निकली और विजय को छोडकर किसी दूसरे लडके को लेकर भाग गई । नगर विजय तेहरा हमारे खानदान का एक न एक लडका । वो आज भी उस बेवफा लडकी कि चाहत के नाम से डूबा रहता है और अपने दिल से उस लडकी की चाहत को निकाल नहीं सका । इस प्रकार विजय आज भी उसपे वहाँ लडकी की यादों में खोया रहता है और अब वह उसी गम के कारण संगीत भी सीखने लगा है । विजय के पापा की बात सुनकर दीपक हस्कर बोला तो संगीत का शौक भी है उन्हें । मगर हमारी अर्चना तो संगीत संगीत नहीं जानती । हाँ, लेकिन मेरी बहना इतनी भोली भाली है कि उसके भोलेपन और चंचलता के सामने विजय बेवफा लडकी को क्या हुआ था कि सूरत को भी भूल सकते हैं । फिर अर्चना आई और चाय का ट्रे टेबल पर रखकर स्वयं सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई । विजय के पापा ने अर्चना से कुछ बातें की और अर्चना अंदर चली गई । सुमन यह सब एक झरोखे से देख रही थी । फिर विजय के पापा थोडी देर बैठे और ये कहकर चल दिए कि मुझे तो लडकी पसंद है । हाँ, एक दिन विजय भी आएगा और अर्चना को देख जाएगा । विजय के पापा के जाने के बाद सुमन ने झरोखा बंद कर दिया और बोलने लगी विजय सच में तुम एक वफाकी सूरत हो । दुनिया के ताने सहते हुए भी तो मुझे बोलने की भी कोशिश नहीं करते, लेकिन विजय में तुम्हारे पापा की नजरों में बेवफा हूँ । विजय अर्चना बहुत अच्छी लडकी है । वह मुझे तुमसे ज्यादा प्यार दे सकती हैं तो मुझे भूल जाओ विजय और अर्चना से शादी कर लो । ये कहकर सुमन विजय की फोटो लेकर रोने लगी । तभी अचानक फोटो सुमन के हाथों से छूट गई और फ्रेम चूर चूर होकर फर्श पर गिर पडा । ये देखकर सुमन और भी रो पडी और बोली विजय तो मुझसे रूट गए लेकिन रूट ने से क्या होगा? अब तो वही होगा जो मेरी और तुम्हारी किस्मत में लिखा है । फिर सुमन कुछ सोच कर फर्श पर बडे शीशे के टुकडे उठाने लगी । उसे हर शीशे के टुकडे में सिर्फ विजय नजर आता था । सुमन सबके सामने खुश रहकर उसने अर्चना और विजय की शादी में शामिल होने की बात ठान ली । आज विजय के बाबा का खत आया था की विजय आ रहा है और वह तीन दिन कलकत्ता में रहेगा । अर्चना के साथ दो दिन शहर घूमेगा फिर चौथे दिन वापस लौट जाएगा । सुमन को जब ये पता चला की विजय आ रहा है तो वह सोच में पड गई और सोचने लगे कि एक दिन होता तो किसी सहेली क्या बैठकर बिता देती । लेकिन विजय तो यहाँ तीन दिन के लिए आ रहा है । तीन दिन के लिए मैं कहाँ जाऊँ? फिर उसे एक उपाय सूझा । विजय आएगा तो क्योंकि बहुत दिन हो गए विजय को देखा नहीं इसीलिए विजय को एक बार देख लूंगी । फिर अपनी एक सहेली को सब कुछ सही सही बताकर उसके घर तीन दिन तक रुक जाऊंगी और घर में भैया, माँ और सब लोगों को यही गहत होगी की सहेली के साथ बम्बई जा रही हूँ । विजय अर्चना के घर आया । उसके बाद अर्चना के पापा ने दीपक से विजय का परिचय कराया और अपने कमरे में बैठे विकास को भी आवाज देकर बुलाया । विकास जब अपने पापा की बुलाये अनुसार आया तो वहाँ पर विजय को देख कर एक दम खुश हो गया । हरबोला विजय तुम ही हो, मेरे होने वाले जीजा जी विजय को विकास से मिलकर थोडी खुशी हुई । फिर बोला, विकास मुझे मालूम नहीं, तैयार की अर्चना तुम्हारी बहन होगी तो विकास ने हसते हुए कहा मुझे भी कहाँ मालूम था कि तुम ही मेरे बहन अर्चना के सपनों के शहजादे बनने वाले हो । इसी प्रकार विजय और विकास दोनों दोस्त बातें करने लगे । तब अर्चना के पापा बोले, बेटी विजय को कुछ खाने पीने भी होगी या बातें करते रहोगे तो विजय बोला अरे हाई और विकास भूख लगी है, खाने के लिए नहीं रहेगा । तो विकास विजय को अपने कमरे में ले गया और बोला कि हाँ मेरी बहन अर्चना तुमको खाना देगी । ये कहकर विकास अपने कमरे से बाहर अर्चना को बुलाने के लिए जाने लगा । तभी विजय ने उसका हाथ पकड लिया और कुछ गंभीर स्वर से बोला विकास में यहाँ लडकी देखने नहीं कुछ और ही बात करने आया हूँ । अच्छा हुआ तो मैं घर के बेटे हो वरना मैं तो अपनी बात कहकर चला गया होता । विजय की बात सुनकर विकास बोला कि मैं समझ गया विजय आश्चर्य के साथ क्या समझ गई । विकास बोला यही ना कि तुम बेवफा लडकी का जिक्र करोगी जिससे तो मैं छोड कर किसी और लडके से शादी कर ली । विजय बोला यह तुमसे किसने कहा कि मैं जिस लडकी से प्रेम करता हूँ उसने किसी और के साथ शादी कर ली तो विकास दोस्ती के नाते हसते हुए बोला हरे तो चुप रहना यार तेरे पापा ने तो मुझे सब बता दिया है या ऐसी लडकी जो बेवफा हो उसके लिए वफा करना मुर्खता है । विजय ने कहा मैं यही तो सुनना चाहता था कि पापा ने क्या कहा है? विकास तो मेरा दोस्त है यार और दोस्ती के नाते तो उससे कुछ भी छिपाना नहीं चाहता हूँ । विकास बोला तो क्या तुम्हारे पापा ने झूठ बोला था । हाँ विकास । मुझे अफसोस है कि पापा एक मासूम लडकी को बदनाम करते फिर रहे हैं । विकास में एक लडकी से प्यार करता था और अब भी करता हूँ । जो लडकी साधारण रूप रंग की मालकिन और एक सीधी सादी गम की मरी हुई थी और वो मुझे भी बहुत प्यार करती थी । मैंने पापा से शादी की चर्चा चलाई तो पापा मेरी शादी एक दौलतमंद लडकी से करना चाहते थे जिससे मैंने साफ इंकार कर दिया और पापा को साफ साफ कह दिया कि मैं शादी करूंगा तो उसी से । मगर पापा को तो दौलत ने अंधा बना दिया है । इस कारण पापा और मम्मी ने उस लडकी के घर जाकर उसे बहुत बुरा भला कहा जिससे सुमन का अपने घर में रहना मुश्किल हो गया और वो अपने घर से निकल गई । जब विजय बोलते बोलते चुप हो गया तो विकास बोला तुमने अभी बोलते वक्त सुमन बोला इसीलिए पूछ रहा था और हाँ एक बात और बताओ विजय की शायद तुम्हारी सुमन को संगीत का शौक था । इस बार विजय को आश्चर्य हुआ । उसने कहा हाँ विकास उसे संगीत का तो शौक था मगर तो मैं कैसे पता है । विकास बोला की तो थोडी देर बैठ में आ रहा हूँ तब बताऊंगा । ये कहकर विकास समन के कमरे में चला गया और वहाँ जाकर सुमन को नहीं देखा तो माँ से पूछा कि सुमन कहा है । तब उसके मैंने बताया कि सुमन किसी सहेली के साथ बंबई गई है । फिर मा की बात संकर विकास विजय के पास वापस आ गया । सुमन अपनी सहेली के यहाँ गए तो पता चला कि उसकी रानी की तबियत अचानक खराब हो गई है । इसलिए सब लोग रात में ही बम्बई चले गए । सुमन बहुत देर तक सोचती रही कि अब क्या किया जाए । फिर कुछ सोचकर अपने घर वापस आ गई और चुपचाप अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर के बैठ गई क्योंकि विकास का कमरा सुमन के कमरे से लगा हुआ था । इसीलिए सुमन को विजय और विकास की बात स्पष्ट सुनाई दे रही थी । विकास अपने कमरे में गया और विजय के सामने बैठते हुए बोला भगवान की कृपा से जो भी होता है यार अच्छा ही होता है । विकास की बात को समझ नहीं सका । उसने कहा क्या हुआ विकास? तुम किसके बारे में बात कर रहे हो? विकास बोला तुम्हारे बारे में बोल रहा हूँ या और मेरा तेरह मेल हो गया । विजय तुम यहाँ आई थी घंटे के लिए मगर रुक गए तीन घंटे और पहले प्रोग्राम के अनुसार तुम्हें मेरी बहन से मिलने के लिए तीन दिन रुकना पडेगा । विजय ने कहा लेकिन यार मैंने बता दिया है कि मैं सुमन से प्यार करता हूँ और शादी भी उसी से करूंगा । फिर तुम्हारी बहन से मुलाकात करने की आवश्यकता क्या है? विजय लेकिन गंभीर शब्दों को संकर विकास ने कहा तो की अर्चना की सेवाएं । सुमन मेरी बहन नहीं हो सकती । विजय क्या मतलब? विकास मतलब सीधा यार कि सुमन मेरी बहन है और वह मेरे घर में है । जब सुमन को ये मालूम पडा कि तुम यहाँ अर्चना के वास्ते आ रहे हो तो वो अपनी सहेली के साथ बम्बई चली गई है । तीन दिन में वापस होगी । विजय को विकास की बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था । उसने कहा कि विकास मन बहलाने का तो अच्छा तरीका निकाला है । सुमन भला यहाँ की वो आएगी विकास क्यों नहीं? विजय इंसान इंसान के घर क्यों नहीं जा सकता बल्कि यह पूछो कि सुमन यहाँ कैसे आई? पहले सुमन शायद सिंगरोली नामक छोटे से शहर में रहती थी । जब सिंगरौली से आ रही थी तो संयोग था की बस दीपक भैया और अर्चना भी उसी डिब्बे में बैठे थे जिसमें सुमन बैठी थी । सफर के एक मुलाकात में ही अर्चना और सुमन की दोस्ती हो गई । जब अर्चना को पता चला कि सुमन यहाँ काम की तलाश में आई है, उसके माँ बाप कोई नहीं है तो सुमन को अपने साथ घर ले आई । फिर यहाँ का सुबह ने बताया कि वह संगीत सीखना चाहती है । फिर हम लोगों ने एक अच्छे संगीत शिक्षक से सुमन को अधूरी संगीत शिक्षा को पूरा कराया और अब सुमन पूरी तरह से संगीत सीख गई है । विजय तो तुमने अर्चना के कहने पर सुमन को यहाँ रख लिया । तब विकास विजय मैंने आज तक तुम को नहीं बताया कि मैंने भी इस घर में जन्म नहीं लिया है । सिर्फ पाला गया हूँ । मुझे भी यहाँ सुमन की तरह रखा गया और विजय मेरा तो इस दुनिया में पहले से ही कोई नहीं था । मैं सिर्फ अकेला था और आज मेरी माँ है, पापा है भाई है, बहन सब है और अब मुझे अहसास नहीं होता कि मैं घर में लाया गया हूँ बल्कि मुझे ऐसा लगता है कि मैंने इस घर में जन्म लिया है और सुमन भी अब इस घर की सक्रिय सदस्य बन गई है । इस प्रकार माँ बाबू जी के दो से तीन और तीन से आज चार बच्चे हैं । विकास की बातों को सुनकर विजय की आंखों में आंसू भर आए और वह कहने लगा कि विकास तो मैं भागे होते हुए भी कितने भाग्यशाली हो, तुम्हारा कोई न होते हुए सब मिल गए । काश मेरे मम्मी पापा भी तुम्हारे मम्मी पापा की तरह होते हैं । लेकिन मेरी किस्मत में तो ये दौलत और ऐशोआराम की सेवाएं कुछ भी नहीं है । मैं गरीब घर में जन्मे लेता तो शायद बहुत खुश रहता की दौलत वाले मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं है । मैं दौलत मंदिर बाप का बेटा हूँ इसीलिए मुझे अपने आप से नफरत होने लगी है । राज सुमन को देखे बिना ही मुझे मरने की हिम्मत होती लेकिन विकास में मार भी नहीं सकता यार क्योंकि सुमन को हम दौलत वालों ने तो घर से निकाल दिया है दुनिया में भटकने के लिए उसका बदला भी मुझे ही लेना है । मुझे ये दिखा देना है विकास की दुनिया में दौलत बडी नहीं होती । प्यार बडा होता है और इंसान दुनिया और दौलत को छोड सकता है । मगर प्यार करना नहीं छोड सकता । हाँ विकास अबकी बार जब तो मुझे सुमन से मिला होगी तो उसके बाद सुमन मुझसे एक पलवी दूर रहे ये मुझे गवारा नहीं होगा । मैं सुबह के साथ मिलकर उसकी मंजिल की और बढूंगा । विकास तुम कितने अच्छे दोस्त हो या जो आज तुमने मेरी जिंदगी को अपनी बहन बनाकर अब मुझे नई जिंदगी दी है । मैं तुम्हारे इस अहसान के बदले जीवन भर सेवा करता हूँ तो भी शायद कम है । एहसान का नाम सुनते ही विकास ने विजय के होठों पर उंगली रख दी और कहा देखो यार विजय मुझ सेना एहसान एहसान वाली बातें मत करो । ऐसी बातें मुझे पसंद नहीं । इसमें अहसान की क्या बात है? सुमन का हमसे पिछले जन्म में कोई रिश्ता रहा होगा जिससे सुमन हमें मिली और फिर सुमन तो अपने आप को इस घर का एक सदस्य मानती है । विजय मुझे इस बात की खुशी हुई है यार कि तुम यहाँ मेरे जीजा बनने आए थे और जाओगे भी जीजा ही बनकर । बस फर्क इतना ही होगा कि पहले आप के हाथ में अर्चना का हाथ देते मगर अब सुमन का हाथ देंगे और मेरे लिए तो अर्चना और सुमन में कोई अंतर नहीं है । मेरे लिए तो दोनों ही बहनें हैं । हाँ, पहले तुम सुमन से मंदिर या कोर्ट में शादी कर सकते थे । लेकिन विजय सुमाना बीस घर से डोली में बैठकर जाएगी और हम लोग उसके जाने पर खुशी और भी छोडने पर आंसू बहाएंगे । विजय कहीं ऐसा ना हो जाए विकास की सुमन और मेरी शादी की बात सुनकर तुम्हारे माँ बाप को बुरा लगे और वे शादी से इंकार कर के सुमन से भी नफरत करने लगेंगे । इससे अच्छा यही होगा विकास की तो मुझे सुमन को मिला दो और फिर हम दोनों यहाँ से चले जाएंगे । विकास ने कहा मैंने बोला ना यार की जैसे माँ बाबू जी के लिए अर्चना है वैसे ही सुमन बल्कि जब वो ये जानेंगे कि तुम दोनों पहले से ही प्यार करते हो और अब तुम सुमन की तलाश में थे तो वह हंसी खुशी से शादी करने को तैयार हो जाएंगे । सुमन से शादी कर के माँ कितनी खुश होगी ये मैं वर्णन भी नहीं कर सकता । आखिर एक दिन सुमन की भी तो शादी करनी है लेकिन तुम तो खुशी के इस मौके पर भी गम के सपने देखते हो । अरे मेरे यार ऐसी अशोक बातें नहीं किया करते । अरे चली आर अब बहुत हो गया है तो मेरे जीजाजी बनोगे चलो खाना खा लो फिर शहर की तरफ घूमने निकलेंगे । बहुत दिनों बाद मिले हैं । विकास की बातों में इतनी खुशी थी, कुछ कहा नहीं जा सकता । विजय विकास के और एक बार देखा फिर मुस्कुराकर बोला अच्छा चल, फिर दोनों एक साथ नहीं चल पाएंगे । चलेंगे भी तो साथ में सुमन होगी । फिर दोनों खाना खाकर शहर की तरफ दोस्तों से मिलने चले गए । विकास और विजय ने जो भी बातें की सब सुमन ने सुन ली थी । और ये भी जान गई थी क्या विजय और विकास शहर घूमने जा रहे हैं । सुबह ना जैसे दोराहे पर खडी थी जहाँ से एक खुशी और दूसरा रास्ता गम से जुडा था । एक रास्ता प्यार की मंजिल से जुडा था तो दूसरा रास्ता फर्ज से कौनसी रास्ते पर चले । एक तरफ खुशी थी तो दूसरी तरफ फर्ज । एक तरफ दोस्ती थी तो दूसरी तरफ सफाई । वैसे तो सुमन ने अपने आप से वादा कर लिया था कि वह भी जैसी तभी मिलेगी जब गायिका बन जाएगी और अच्छी खासी दौलतमंद तो विजय के माँ बाप भी उसे अपनी बहु बनाने को तैयार हो जाएंगे । फिर शादी के बाद एक औरत वही करती है जो उसका पति चाहता है वरना उसके गृहस्ती सुहाने बगीचे के बदले खंडर बन जाती है । फिर उस की दुनिया सिर्फ आंसू से भरी होती है । फिर वह अपने आपसे कहने लगी । लेकिन विजय तो विकास भैया से कह रहे थे कि शादी के बाद हम दोनों ही एक साथ मंजिल पर कदम रखेंगे । तभी उसके मन में अर्चना आई और वो अपने आप से कहने लगी कि सुमन तो कितनी स्वार्थी है । भला सोच अगर तुम्हें विजय से शादी कर ली तो अर्चना क्या सोचेगी तेरे बारे में वही ना जिसको आज तक बहन मानती थी । उस सुमन ने उसकी खुशी को छीन कर अपना घर बसा लिया । नहीं सुमन तो विजय से शादी नहीं करेगी । इस प्रकार स्वयं ही सुमन अपने आप से बातें करने लगी । फिर वो बोली लेकिन सुबह अगर तो सबके सामने विजय से शादी के लिए इंकार कर देगी तो तो कितनी बेवफा हो जाएगी । जिससे मन का मीत मानती है उससे शादी करने से इनकार क्यों? और फिर विजय भी तो तुझे जान से ज्यादा चाहता है । अपना सब को छोड देना चाहता है तेरी खाते इस तरह बहुत सारी बातें सुमन के मन में उभरने लगी और उसने कई बार निर्णय लिया कि वह विजय के सामने आकर उससे शादी करेगी । तभी उसने अपनी माँ की आवाज सुनी जो अर्चना से बात कर रही थी । वो कह रही थी अर्चना विजय ने अभी तुझे देखा नहीं है, विकास की दोस्ती में खोया हुआ है मगर मुझे विश्वास ही बेटी की वो हम सब का दिल नहीं तोडेगा और ना ही अपने पिता की पसंद को ना पसंद करेगा । देख अर्चना तो अच्छी तरह से तैयार हो जा अब वो दोनों आ रहे होंगे । माँ की बात सुनकर अर्चना बोली लेकिन मैं आप लोगों को छोडकर नहीं जाउंगी । तब उसकी माँ बोली ये तो दुनिया का दस्तूर है । बीटी तेरी शादी करके दूसरे घर भेजकर हमें खुशी थोडी होगी । अर्चना मुझे तो ऐसा लगता है बेटी की तुझे डोली में बिठाते समय मैं अपने आप को नहीं संभाल होंगी । माँ की बात सुनकर चलाने का हाथ ना यहाँ तो सुमन रहेगी । आपकी एक बेटी रहेगी लेकिन मैं तो वहाँ एक दम अकेली हो जाऊंगी । ये कहकर अर्चना रूपडी तब उसकी माँ बोली तो क्या समझती? अर्चना की तेरह भाव की पूर्ति सुमन कर सकेगी नहीं बेटी कुछ भी हो लेकिन मैंने सुमन को जन्म नहीं दिया है । जन्म तो तुझे दिया है ना तो ही बता दीपक और विकास में तुझे कौन अधिक प्यारा लगता है मैं ये बात तो सच है कि आपका खून विकास भैया और सुमन में नहीं है, परंतु वे लोग आपको माँ की तरह मानते हैं । अरे बेटी तो नहीं समझती दुनिया में सब स्वार्थी होते हैं । हम लोग अभी इस उमर और विकास को अपना समझते हैं लेकिन कल वही लोग अपने स्वार्थ के कारण हमें किसी भी गम की दुनिया में फेक सकते हैं तो बहुत भोली अर्चना । इन बातों को भी नहीं समझेगी मेरी प्यारी बच्चे अच्छा तो तैयार हो ये कहकर अर्चना की मान नाश्ता तैयार गढने अंदर चली गई और अर्चना ड्रॉइंग रूम में चली गई । सुमन मा और अर्चना की बातों को सुन रही थी । जब उन लोगों की बात खत्म हो गई और अपने अपने काम में जुट गए तो सुमन एक बार फिर से आशा और निराशा के भवन में पड गई । उसके कानों में बार बार वही आवाज गूंजती । कुछ भी सही अर्चना । लेकिन विकास और सुमन को मैंने जन्म नहीं दिया है । वे अपने स्वार्थ के कारण हमें गम के दरिया में फेक सकते हैं । रहे फिर एक बार सोच में पड गई । अगर वो विजय के सामने आएगी तो वह साथ चलने को कहेगा । जैसे वो इंकार नहीं कर सकेगी और अगर विजय से शादी करेगी तो अपने स्वार्थ के खाते रचना को गम के दरिया में फेकना होगा । माँ का सपना तोडना होगा और अर्चना को जब पता चलेगा कि मैं विजय से प्यार करती हूँ तो विजय से शादी नहीं करेगी । फिर अंत में सुमन ने यही सोचा कि वो अपनी दोस्त अपनी बहन अर्चना की खातिर अपने प्यार की कुर्बानी दे देगी और अर्चना का घर छोडकर वो अपनी मंजिल की तलाश में बम्बई चली जाएगी । फिर अपना सामान अटेची में रखा और लिखने बैठ गई । विकास भैया नमस्ते विकास भैया, शायद आपको मालूम नहीं था मैंने आपकी और विजय की बातों को शुरू से अंत तक सुन लिया है क्योंकि मैं अपने कमरे में ही बैठी थी । सहेली के घर से वापस आ गई थी मगर विजय की उपस् थिति को जान कर चुकी थी भैया इस घर में मुझे किसी भी प्रकार का कोई दुख नहीं था । फिर भी आज मैं इस घर को छोड कर जा रही हो । कहाँ जा रही हूँ ये मैं भी नहीं जानती । मेरा यहाँ से जाने का मन नहीं कर रहा है । फिर भी जा रही हूँ । मेरे जाने का कारण है भैया की । मैं विजय को तो प्रेम करती हूँ अपनी जान से भी ज्यादा नगर में ये नहीं जाती की विजय मेरी खातिर अपने माँ बाप घर बार सब छोड दें और मेरी खाते ठोकर खाता रहे । मैं तो दुनिया से निकलकर ठोकर को सहने की आदि हो गई हूँ मगर मेरा विजय तो अपने मम्मी पापा की आंखों की रोशनी है और उस बगीचे का एक अकेला खूबसूरत फूल जो कांटों पर कैसे चलेगा । और फिर एक बात और है भैया की विजय मेरा नहीं होगा तो क्या हुआ? अर्चना भी तो मेरी ही बहन है और मुझे कोई काम नहीं । भैया विजय को समझाना की, वहाँ अर्चना से शादी कर ले भैया में यहाँ पर अकेली नहीं हूँ । मेरे साथ माँ बाबूजी, अर्चना, दीपक तथा आपका प्यार जा रहा है और इन सब के अलावा जब मैं घर से निकले हो तब से विजय की याद भी मेरे साथ है । उन यादों के सहारे तो मैं आज अपनी मंजिल पर पहुंचने जा रही हूँ और साथ ही आप सभी मेरे मन की यादों की डोर से बंधे हुए हैं और भैया अपनी मंजिल पर पहुंचने के बाद में इन सब यादों को मेलन में बदलूंगी । भैया में आपके नाम से ही खत्म इसीलिए लिख रही हूँ क्योंकि आज मुझे सबसे ज्यादा दुख आप से भी छोडने का है । कुछ भी हो लेकिन आप भी मेरी तरह ही इस घर में आपने तो है पर माँ और बाबूजी के खून के अंश नहीं है । मेरी इन बातों को ध्यान में रखना भैया क्योंकि माँ बाबू जी ने हम लोगों को जन्म नहीं दिया फिर भी पालन तो क्या है । इसीलिए मेरे प्यारे भैया अपने स्वार्थ के लिए माँ बाबूजी को नहीं भूलना । शायद भगवान को ये मंजूर नहीं की मैं विजय से मिलूँ । इसीलिए विजय से मिलने से पहले ही इतना मजबूर थी कि बिना मिले ही एक बार उनसे जुदा हो रही हूँ । और आज मेरी मजबूरी कुछ ऐसी है कि मैं आप लोगों को न बताने में मजबूर हो और मजबूरी, सुख दुख और व्यक्तित्व ऐसी चीजें हैं जिसके कारण इंसान को स्वयं अपनी आपकी तन्हाई और जुदाई रूपी भाग के दरिया में कूद जाना पडता है । आपकी बहन सुमन जब शाम को विजय और विकास घूम कर घर आए तो अर्चना तैयार बैठी थी । अर्चना की माँ ने कहा बेटा विजय हमारी लडकी अर्चना को भी देख होगी या शहर ही घूमते रहोगी बैठो हमारी अर्चना आपको अपने हाथ से बनाया हुआ नाश्ता खिलाएगी । अपनी माँ की बात सुनकर विकास ने कहा कि माँ अब मेरे साथ जरा इधर आइए । ये कहकर विकास अपने कमरे में चला गया और विजय को वहीं बैठने को कह गया । वर्जना के महा विकास के पीछे पीछे चली गई विकास विजय यहाँ अर्चना का रिश्ता लेने नहीं आया कि आप लोगों को भी हम है कि विजय अर्चना से शादी करेगा बल्कि वह तो रिश्ता तोडने आया था मगर अब उसने निर्णय ले लिया है कि वह शादी करेगा । विकास की माँ बोली विकास में तेरी बात को नहीं समझ पा रही हूँ । विकास विजय के पापा ने बताया था ना की विजय एक लडकी से प्रेम करता है और वो लडकी बेवफा निकली लेकिन ये झूठ है । माँ विजय जिस लडकी को प्रेम करता है वह वफा की मूरत है । वो लडकी विजय की खुशी है और विजय उसी को ढूंढ रहा था । उसका प्यार सच्चा था इसीलिए वो लडकी और विजय को मिल गई है । विकास की बात बोली तो क्या विजय हमारी अर्चना से भी नहीं करेगा और जब ध्यान नहीं करना तो यहाँ क्यों रुका है तो विकास बोला इसीलिए रुका है कि विजय जिस लडकी को प्यार करता है । वह हमारी बहन है तो मैं आश्चर्य से बोली लेकिन हमारी अर्चना तो घर में ही है । और दो कहता है कि लडकी घर से निकल गई थी । विकास तो क्या, अर्चना ही हमारी बहन है । मांग सुमन भी तो हमारी बहन है । विकास की बात सुनकर उसकी मारे नाराज होते हुए कहा तो विजय सुमन से क्या करेगा? सुमन को मैंने इस दिन के लिए शरण नहीं दी थी कि वह मेरी बेटी की खुशी को छीन ले । मैंने लाख बार कहा उसके बाबा को भगवान की कृपा से हमारे घर भी एक बेटी है । मगर उन्होंने मना ही नहीं और रख लिया अर्चना के कहने पर और अब तो कहता है कि मेरी बहन सुमन से बिहार करेगा क्या ये हो सकता है कि मैं अपनी बेटी के रहते हुए किसी पराई लडकी की शादी करूँ । आज महंगाई का जमाना है । उस पर हमने उसको इतने दिन रखा और अब उस की शादी करें ये नहीं हो सकता । नहीं करेंगे हम उसकी शादी माँ के आवेशी दिमाग को देखकर विकास कहने लगा कि अवसर ठंडे दिमाग से सोचे तो सही शादी, जन्म मरण सब भगवान की मर्जी से होता है । इसमें वाला हमारी और आपकी क्या चल सकती है । फिर माँ विजय और सुमन तो एक दूसरे से पहले से ही प्रेम करते हैं । इस बीच अगर हम लोग जबरदस्ती अर्चना से विजय की शादी करा दे तो उन लोगों की जिंदगी में कभी भी खुशी प्रवेश नहीं कर सकती । और फिर आप तो कहती थी माँ की आपके लिए सुमन और अर्चना दोनों बराबर है । तो क्या आप अपनी बेटी बनाने के नाते सुमन की शादी करके अपना फर्ज पूरा नहीं करेगी? मेरे खयाल से तो सुमन और विजय दोनों ही बहुत खुश होंगे अगर आप खुशी से इन की शादी करेगी । माँ और भी उत्तेजित होकर बोली मैंने कहाना विकास की उस चुडैल सुमन को मैंने दिल से कभी भी बेटी नहीं माना । वो तो तुम्हारे पापा का दबाव था जिस वजह से मैं उसके साथ हमदर्दी जता रही हूँ । भगवान मेरी अर्चना का क्या होगा? वो तो विजय को पसंद कर चुकी है कहाँ से मेरी अर्चना ने उस बेशन में लडकी से दोस्ती कर ली । भगवान मेरा तो दिल बैठा जा रहा है । विकास ने कहा माँ अब सुमन को अपनी बेटी नहीं मानती लेकिन अर्चना तो अपना दोस्त मानती है और दूसरी रिश्ते नाते से भी अधिक प्यारी होती है और मुझे विश्वास है कि अर्चना अपने दोस्त के लिए अपनी पसंद की कुर्बानी दे सकती है और सिर्फ पसंद का ही तो सवाल है कोई उन्होंने प्यार थोडी ना क्या है? माँ बोली विकास आखिर तो चाहता क्या है? यही ना कि हम लोग सुमन और विजय की शादी कर दी लेकिन तुम्हें कान खोलकर सुन लो । विकास की सुमन की शादी हम नहीं करेंगे और वह सारी करना ही चाहते हैं तो कर ले क्या है कि हमारा सुमन पर और विजय पर जो हम रुकेंगे । अर्चना को मैंने सच्ची कहा था कि आखिर पराय लोग पढाई ही होते हैं । आपने कभी नहीं हो सकते हैं । अपने स्वार्थ तक तो चाहते हैं और स्वार्थ निकल जाने के बाद कुछ नहीं समझते हैं । मेरी अर्जुन आने सुमन से दोस्ती की है तो सुमन दी तो अर्चना से दोस्ती करती है तो सुमन को अपने प्यार की कुर्बानी दे देनी चाहिए । विकास आप समझती क्यों नहीं है? सुमन को कुर्बानी देने से क्या होगा? विजय तो सपने में भी किसी दूसरी लडकी का साया तक अपनी जिंदगी में शामिल नहीं करना चाहता । माँ अगर आप नहीं करेंगी तो पापा से बोल कर मैं करूंगा । सुमन की शादी विकास की बात को सुन कर उसकी माँ की थ्योरी और भी ज्यादा बढ गई और गुस्से से बोली विकास में अभी तुम्हारी हर बात को सुन रही हूँ, मगर अब एक भी नहीं सुनी होगी । जिस तरह सुमन का मेरे घर पर कोई अधिकार नहीं, तुम्हारा भी कोई अधिकार नहीं । फिर तुमने कैसे कह दिया कि सुमन की शादी तुम करोगी? अब वही होगा जो मैं होंगे, तुम्हारे पापा की भी नहीं चलने दूंगी और ना ही अब इस घर में सुमन रहेगी । तभी अर्चना दौडती हुई वहाँ पर आई और रोती हुई बोली मां सुमन जाने कहाँ चली गई । विकास आश्चर्य से चली गई कहाँ चली गई? क्यों चली गई? अर्चना ये तो नहीं जानती भैया की कहाँ गए मगर ये खत शायद आपके नाम से लिखा है किसी छोड गई है । ये कहते हुए अर्चना सोफे पर धंस गई और ऐसे खामोश हो गई जैसे बेहोश हो गई हो । तभी वहाँ पर विजय आया और कहने लगा क्यों विकास इन्हें क्या हुआ? ये कौन है? बेहोश कैसे हो गई? विकास विजय येही अर्चना है । सुमन के घर छोड देने से बेहोश हो गई । विजय बोला तुम तो कह रहे थे सुमन किसी सहेली के घर गई है और सहेली के घर चले जाने से आप लोगों को इतना परेशान होने की कहाँ जरूरत है? विकास बोला नहीं विजय सुमन सहेली के घर नहीं गई थी, वो तो अपने कमरे में ही थी और हम दोनों की बातों को सुन रही थी फिर तुम्हारी खुशी के लिए यानी कि तुम उसके साथ दर दर नौ भटकते रहो । इसीलिए वो तुमसे मिलने से पहले ही भी छूट गई और एक अनजान रहा पर चली गई । अब सुमन यहाँ नहीं आएगी ये देखो मेरे नाम से खत्म छोड गई है । इससे स्पष्ट होता है कि सुमन तो में प्यार तो बहुत करती है और पाना भी चाहती थी । मगर नहीं मालूम इस मिलन की बेला में उसके पास क्या मजबूरी आई और सुमन इस घर को छोड कर चली गई । फिर इस बात से भी खबर होकर ये कहकर विकास तडाक उठा विजय निर्जीव सा खडा रहा । फिर कुछ देर बाद कहने लगा में कितना भागता हूँ विकास जो कि अपने में ही अपनी आत्मा को नहीं रख सकता है । मैं तो जो भी हो किस्मत ने जो भी दिखाया है तन्हाई जुदाई झेल रहा हूँ । मगर आज तेरे घर आकर मैंने एक भाई से बहन, एक बहन से बहन और एक माँ को बेटी से दूर कर दिया । इस पत्र को पढकर सुमन की मजबूरी का पता चल रहा है । विकास अर्चना सुमन के वियोग से जिस प्रकार सहम गई है उसी प्रकार सुमन भी अर्चना को बहुत चाहती थी । इसी कारण शायद सुमन घर छोड कर चली गई की उसके जाने के बाद मैं अर्चना से शादी कर लो । विकास कुछ गंभीर स्वर में अच्छा हुआ विजय की सुमन ने इस घर को छोड दिया । कम से कम इस बात से तो अनजान रहेगी की पाले हुए बच्चे और जन्मदि हुए बच्चे में माँ बाप के दिल में पर्वत और राई की तरह अंतर होता है कि तुम कैसी बातें कर रहे हो । भैया अर्चना उठते हुए बोली तो विकास बोला अर्चना आज में वही बातें कर रहा हूँ जो सच है । ऐसा सच जिसे झुठलाया नहीं जा सकता तो नहीं जानती और सेना कि अगर सुमन इस घर में होती तो माओत्से हाथ पकडकर इस घर से निकाल देती । ये कहकर की वो एक लावारिस बच्चे को पाल सकती है मगर उसकी शादी नहीं कर सकती । अर्चना बोली भैया शायद आपको गलतफहमी हो गई है । मैं वैसी नहीं है जैसा आप सोच रहे हैं । माँ सुमन की दुश्मन थोडी है, विकास मुझे मालूम था अर्चना की तुम को मेरी बात पर विश्वास नहीं होगा मगर माँ आज तेरे प्यार में अंधी हो गई है । महत्व विजय को तेरे साथ देखना चाहती है मगर बात कुछ बनी रहे तो मैं विश्वास नहीं तो पूछ लो मा से सुमन को माँ मजबूर होकर प्रेम करती थी । सच्चे दिल से नहीं अच्छा तुम पूछ लेना । ये कहकर विकास अपने कमरे से निकलने लगा । तभी अर्चना ने भैया का हाथ पकड लिया और कहने लगी आप कहाँ जा रहे हैं भैया विकास सुमन की तलाश में माँ बोली विकास नगर तो सुमन को लाएगा तो सुन ले अब तेरे लिए भी घर में कोई जगह नहीं । अब मैं तो में एक ही शर्त पर इस घर में रख सकती हूँ । जिस तरह सुमन अपने प्यार की कुर्बानी देकर अपनी सहेली अर्चना के लिए विजय को छोड गई, उसी तरह तो विजय से भी कहता हूँ कि वह तुम्हारी दोस्ती में अपने प्यार की कुर्बानी दे दी और अर्चना से शादी कर ले, वरना तेरे लिए भी इस घर में जगह नहीं । विकास ने कहा सुनलो अर्चना वही हाल आज सुमन का भी होता है जो आज मेरा हो रहा है । अच्छा किया सुमन ने जो आपने इज्जत की परवाह करते हुए पहले ही इस घर को छोड गई । इस समय तो कम से कम उसे देखना पडा । ये कहते हुए विकास की आंखों में आंसू भर आए और विकास उन आसुओं को भी जाने की कोशिश करने लगा । विजय सौरी, विकास मेरे कारण सुख शांति से भरे हुए घर में एक तूफान खडा हो गया । फिर थोडी देर चुप रहकर मन में ही कुछ सोचने लगा और बोला विकास महीने पहले अर्चना को देखा नहीं था । इसीलिए सुमन से शादी करने का फैसला लिया था । मगर जवाज अर्चना को देखा था । पता चला कि सुमन तो अच्छा के सामने कुछ भी नहीं है । मैंने निर्णय लिया है कि मैं चुनाव से शादी करूंगा । विकास चुपचाप खडे होकर विजय के अंदर छुपे हुए सुमन के प्यार को देखता रहा । फिर अर्चना ने कहा नहीं, ये नहीं होगा । मैं किसी भी शर्त पर आपसे शादी नहीं करूंगी । मैं भी एक लडकी हो और मैं भी जानती हूँ कि प्यार क्या होता है और प्यार की कुर्बानी देना अपने आप को बर्बाद करने के सिवाय और कुछ नहीं है । आठ । सुमन इस घर को छोड गए तो क्या एक दोस्त और अपने प्यार के लिए ऐसा करने पर वह मजबूर थी और मजबूर होकर विकास की खुशी के लिए मुझसे शादी करने का फैसला ले रहे हैं । विकास भैया माँ के अनुसार इस घर में आपका कोई अधिकार नहीं है तो क्या हुआ मेरे दीपक भैया का और पापा का तो इस घर पर अधिकार है । जब माँ भगा सकती है तो हम बोला भी सकते हैं । जमा अन्याय करने से नहीं डरती तो हमें न्याय करने में कोई डर नहीं । कोई झिझक नहीं । आप यहाँ से नहीं जाएंगे और इस घर में शान से रहेंगे । विकास अर्चना के दिल में इतना अपना तो देख कर एक दम खुशी और मायूसी देखो । अर्चना माँ बाप का फर्ज होता है । एक बेटे को पढा लिखाकर उसके पास पर खडा कर देना और एक बेटी की शादी करके उसका घर बसा देना । उसके बाद बेटे का कर्तव्य होता है । खुद काम करके जिए और माँ बाप का भी पालन करें अच्छा अब मैं जा रहा हूँ । ये कहकर विकास माँ के पावों को छू रहा था । तभी उसकी माँ हटते हुए बोली अर्चना हमदर्दी जता जताकर आज हम बर्बाद हो गए । अब और हमदर्दी जताने की हमें हिम्मत नहीं । ये कहकर विकास के कमरे से निकल गए और अपने कमरे में चली गई । विकास माँ के जाने के बाद आंखों में आंसू भरकर कहने लगा दीपक भैया को मेरा नमस्ते कह देना और पापा को भी प्रणाम कहना । अलविदा विजय कहने लगा विकास को मैं भी चल होगा । मैं यहाँ बैठ कर क्या करूंगा तो मैं अकेले नहीं हूँ । विकास मैं भी तो तुम्हारे साथ मेरे यार जीवन में घबराना नहीं चाहिए । विकास मैं तो तुम्हारी किस्मत को पलट नहीं सकता । फिर भी एक दोस्त होने के नाते तुम्हारे साथ साथ चलने का वायदा करता हो । फिर विजय विकास की कंधे पर अपना हाथ रखकर बोला चल यार मेरे दोस्त ये कहकर दोनों चले गए । उन्हें जाते देखकर अर्चना ने विकास के पाओ को पकड लिया और बार बार कहने लगी कि भैया कम से कम पापा के आने तक तो रुक जाओ, फिर चले जाना । प्लीज भैया आप दफ्तर से आते ही होंगे । बहुत समझाने पर भी विकास नहीं रोका तो अर्चना अपने कमरे में चली गई और वहाँ से अटैची लेकर कुछ सामान जो अनिवार्य होता है रख लिया और रोते हुए बोली कि जाओ भैया जाओ । मगर इस अभागन बहन को मत भूलना और मेरे लिए इतनी ही कृपा करना । भगवान से ये दुआ मांगना कि रब ने जिस तरह मुझसे मेरी बहन और भैया को जुदा कर दिया है उसी तरह माँ के नाम पर कलंक करने वाली मेरी माँ को भी मुझ से जुदा करते । फिर विकास और विजय चलती है । विकास खामोश था और उदास पी । फिर थोडी दूर चलने के बाद विकास के मन में जाने क्या बात आई कि उसने खत्म वहीं पर बैठकर लिख डाला और अर्चना के कमरे में झरोखे की तरफ डाल दिया । विजय ये सब चुपचाप देखता रहा और मन ही मन बोला शायद इसी को जिंदगी कहते हैं । मैं तो समझा था कि सुमन और मुझे ही गम और तन्हाई मिली है । लेकिन यहाँ तो सबकी अपनी गम से भरी कहानी है । शायद में जीवन भर में भी जिंदगी की परिभाषा नहीं लिख सकूंगा । यहाँ तो जीवन के हर मोड पर जिंदगी की एक नई परिभाषा मिलती है । तभी वहां पर एक टैक्सी आ गई । विजय टैक्सी को रुकवा लिया । उसमें दोनों बैठ कर विजय के गांव की ओर चल दिए । सुमन अर्चना के घर से निकलकर सीधा चलने लगी । फिर बीच में टैक्सी अफॉर्ड की और बैठ गई । फिर थोडी देर में ही गार्डन के पास पहुंचकर टैक्सी रुकवा लिया और स्वयं गार्डन में जाकर बैठ गई । वहाँ से समुद्र की लहरें स्पष्ट दिखाई दे रही थी । सुमन अपने सिर को घुटने में रखकर बैठे ही दी कि अचानक रूपडी सुनना जीवन में सबसे ज्यादा दुखी थी । उसी आज पागल पन सा लग रहा था । सुमन सूचने लगी मेरे आने के बाद विकास और विजय आये होंगे । फिर मेरे घर छोड देने वाली बात का पता चला होगा तो विजय फिर एक बार टूट जाएगा । विजय को मुझ पर ग्लानि होगी कि सुमन बेवफा है । पापा सच्ची कहते थे कि तुमने एक बेवफा लडकी से प्यार किया था । मैं एक बेवफा लडकी के पीछे सब कुछ लुटा देना चाहता था । फिर विजय मुझे बेवफा समझकर अर्चना से शादी कर लेगा । फिर सुमन स्वयं ही बोली नहीं विजय इतनी छिछली बुद्धि का नहीं हो सकता । वो मेरी मजबूरी को समझता है । विजय मुझे दिल की गहराई तक चाहता है । शायद यही सब बातों को सोचकर सुमन रो पडी थी सुमन को फिर एक बार माँ की वही बातें याद आने लगे की दुनिया में सब स्वार्थी होते हैं । हम लोग अभी सुमन और विकास को अपना समझ रहे हैं लेकिन गाली अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए हमें आग के दरिया में फेक देंगे । बार बार माँ के वही शुद्ध सुमन के कानों में गूंज रहे थे । फिर कुछ क्षण बाद स्वयं ही अपने आप से बोली कि नहीं मेरे विकास भैया ऐसे नहीं है । वह स्वार्थी कभी नहीं हो सकती है । वह तो अपने कर्तव्य के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं । मैं या तुम कितना भागे होगी, आपके नाम आ हैं और ना ही बाप । मगर जिन्हें तुमने अपना माँ बाप समझा वो तो में अपना बेटा नहीं मानते । हम जैसे बिना माँ बाप के बच्चों का कोई सहारा नहीं होता । भैया भगवान की तेरी दुनिया कैसी है, जहाँ पर एक शरीफ और इज्जतदार आदमी चैन से जी नहीं सकता । सच्चाई से जीने वाले इंसान को सिर्फ गम ही मिलता है । भगवान तो बताओ क्या तुम्हारी दुनिया में विकास भैया जैसे कर्तव्यनिष्ठ आदमी, विजय जैसा वफादार तथा सुमन जैसे मेहनत और लगन से मंजिल पर बडने की इच्छा रखने वालों के लिए जगह नहीं है । और अगर जगह नहीं है तो हम जैसे लोगों को जन्म दिया । हम जैसे लोग आपकी दुनिया में सिफ्ट होकर ही खाते रहेंगे । आओ भगवान कहाँ छिपे हो? मेरे सामने आकर मेरे प्रश्नों का उत्तर दो । भगवान मेरी नहीं सुनते तो मजदूरों पर मेरी प्रार्थना जरूर सुनना । भगवान मेरी विकास भैया को किसी प्रकार की विपत्ति का सामना न करना पडे । इस प्रकार सुमन तडप तडप कर भगवान को कोसने लगी और दुआ मांगने लगी और ऐसे ही अतीत की दुनिया में खो गई । विजय और सुमन दोनों समुद्र के किनारे पर बैठे हुए हैं । सुमन का सिर विजय की गोद में है । विजय कहना है, सुमन तुम सबको पा लेने के बाद मेरा मतलब है अपनी मंजिल और तुम्हारे विजय से है । अब तो मैं तुम्हारे माँ बाबूजी से मिलने की इच्छा नहीं होती । सुमन बोली होती तो है मगर ये प्रसिद्धि अब ऐसी चीज बन गई है जिसके कारण हम कहीं जहाँ नहीं सकते हैं । जहाँ जाते हैं वहीं आदमियों की भीड और लडाई चालू हो जाती है । विजय हसते हुए बोला हाँ मेरी पत्नी और गायिका को देखने के लिए वही तो तुम चाहती थी ना । सुमन और अभी तो यही चाहते थे । अच्छा चाहने वाली बात छोडो और बताओ कब जाएंगे माँ? बाबूजी से मिलने मेरा मतलब आपके और मेरे दोनों के गांव से है और दोनों के मम्मी पापा से है । विजय हाँ, अब इस महीने के बाद जाएंगे । मगर ये बताओ पहले किसके गांव जाएंगे? सुमन हमारे गांव पहले जाएंगे तो विजय बोला देखो बहु पहले ससुराल जाती है तब ससुराल से मायके जाती है । इसीलिए पहले अपने गांव जाएंगे सुमन नहीं । लडकी अपने मायके में रहती है तभी तो ससुराल जाती है । इसीलिए पहले हमारे गांव में ठीक है ये कहकर सुमन विजय के गाल पर चुंबन चढता है । तभी वहां विकास आया और कहने लगा अरे भाई आप लोग खाना भी खाएंगे या बस यहीं पर बैठे रहेंगे । मैं कब से देख रहा हूँ आप लोगों को खाना खाने के लिए । और सुमन तो को याद नहीं कि तीन बजे फिल्म के गीत की रिकॉर्डिंग के लिए जाना है । सुमन ने भैया को देखकर विजय की गोद से अपना सिर हटा दिया और कुछ शर्म आ गई । फिर बोली हाँ मालूम है भैया, हम लोग भी अभी उसी की बात कर रहे थे । लेकिन भैया आप तो काम में इतने व्यस्त हो गए हैं कि कुछ पूछो मत । जब देखो तब आपको जल्दी ही रहती है खाने की जल्दी सोने की जल्दी । सुमन की शिकायत भरे स्वरों को सुनकर विजय बोला, काम के मामले में चुस्त होना भी चाहिए । अच्छा चलो बातों में समय बर्बाद मत करो । फिर सब एक साथ खाना खाने के लिए गार्डन से उठकर घर की और चल दिए । चलती चलती सुमर फिर विकास भैया से शिकायत भरे स्वर में कहने लगी भैया देखो खाने के लिए कम से कम आज जल्दी जल्दी मत करना । आज के दिन ही तो थोडी फुर्सत मिलती है । उसमें भी आप जल्दी बाजी करते हैं । फिर खाने के लिए बैठ गए । ख्वाबों की दुनिया में जब सुमन खाने के लिए बैठी थी तभी हकीकत की दुनिया में उसे भूख लगी और सुमन का सपना टूट गया । सुमन नींद से जाग गई और जल्दी से गार्डन से उठी और फिर कपडे से धूल झाडने लगी । फिर अपना सूटकेस उठाकर फल से लगे हुए थे ले के पास चल पडी थे । ले के पास जाकर सुमन सेब लेकर फिर वापस गार्डन में चली गई और सेब खाने लगी । फिर बच्चे हुए सेप्को बैंक में डाल दिया और खाना खाने के विचार से होटल की ओर बढ गई । सुबह होटल में जाकर बैरा से सब्जी और रोटी मंगाई क्योंकि ज्योति का सबसे ज्यादा रुचिकर भोजन रोटी और सब्जी ही था । फिर थोडी देर में ही बैरा रोटी ले आया । मगर सुमन को आज रोटी खाने की इच्छा नहीं हुई । आगे उसने वह रोटी भी छोड दी और पास रखी अखबार को पढने के लिए उठा लिया । इधर उधर समाचार पडने के बाद उसका ध्यान विज्ञापन में गया । जिसमें बम्बई के प्राइवेट स्कूल में बीए बीएससी पांच शिक्षिका कि शिक्षक की मांग की गई थी । पहले तो सुमन ने सोचा कि जाकर इंटरव्यू दिया जाए । फिर उसके मन में आया कि जो लडके अपनी मंजिल की तलाश में स्वयं व्यस्त रहेगी वो बच्चों को शिक्षा क्या दे सकेगी । क्योंकि टीचर की मांग बम्बई में की गई थी इसलिए सुमन ने तुरंत निर्णय लिया कि वह बंबई जाएगी । उसे कलकत्ता में आए सात महीने ही हुए थे और इस दौरान वह पूरा तन मन लगाकर संगीत ही सीख रही थी । इसीलिए घर में ही ज्यादा रहती थी । कहते उसे ये भी नहीं मालूम था कि ट्रेन कलकत्ता से बंबई के लिए कब जाएगी । एक सज्जन वही होटल में बैठे हुए पत्रिका पढ रहे थे । मालूम होता था वो होटल मालिक होगा क्योंकि जब से वह सज्जन होटल में आए थे नौकर दौड दौड कर काम कर रहे थे । सुबह सज्जन से कहने लगी क्यों भाई साहब यहाँ से बंबई के लिए ट्रेन कब जाएगी । इतने में ही सज्जन ने तुरंत जवाब दिया कि ट्रेन यहाँ से साढे ग्यारह बजे जाएगी तब तक आपको इंतजार करना होगा । सुमन ने घडी की और नजर घुमाई तो भी साढे नौ बज रहे थे । उसने मन ही मन में निर्णय लिया कि साढे ग्यारह बजे तक बैठे रहने से अच्छा है फिल्में ही देख ली जाए जैसे मनोरंजन भी हो जाएगा । बहुत दिमाग भी फ्रेश हो जाएगा । सुमन ने टॉक इसके लिए रिक्शा पकडो चलती । वहाँ जाकर उसने देखा पुरानी फिल्म जीने की राह लगी थी जिसमें तनुजा और जितेंद्र और संजीव कुमार थी कि देख कर उसे थोडी खुशी हुई । एक दूसरे पुरानी फिल्म पसंद थी और दूसरा उसे तनुजा अच्छी लगती थी । अर्थार्थी वह तनुजा की फिल्म देखने के लिए उत्सुक रहती थी । उसने एक टिकट कटाई और फिल्म देखने के लिए घुस गयी । जब सुमन फिल्म देखकर निकली तो उसके मन में एक बात अच्छी तरह बैठ गई थी कि मंजिल तक पहुंचने के लिए जिंदगी जरूरी है और जिंदगी के लिए रोटी जरूरी है । रोटी के लिए नौकरी जरूरी है । इस प्रकार उसने निर्णय ले लिया की नौकरी जो भी मिले में करूंगी । यही सोचकर वह मुंबई जाने वाली ट्रेन में साढे ग्यारह बजे बैठ गई । फिर वहां पहुंचकर सुमन उसे स्कूल की और जल्दी जहाँ का विज्ञापन सुमन ने होटल में पढा था क्योंकि बम्बई उसके लिए नया शहर था । फिर भी उसे स्कूल तक पहुंचने में अधिक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पडा । वहाँ जाकर देखा तो मात्र तीन टीचर के लिए साक्षात्कारों की संख्या कम से कम सौ रही होगी । ये दशा देखकर सुमन जिस टैक्सी से आई थी उसी टैक्सी से एक होटल में जाकर रुक गई । वहाँ जाकर उसे ठंडे दिमाग से सोचा की अब क्या किया जाए । सबसे पहले उसे एक होटल के रूप में अपना सामान रख दिया और डाला लगाकर स्वयं चाबी रख ली और नौकरी की तलाश में निकलने लगी । तभी वहाँ पर एक बैरा आया और बोला कि मेम साहब आप खाना हॉल में खाएगी । आपके कमरे में लगा दु सुमन बोली चलो हॉल में ही आ रही हूँ और फिर हॉल में खाना खाकर सुमन ने अपना पर्स उठाया और होटल के बाहर निकल गई । तभी वहां पर एक कार आकर रुक गई । कार के रंग को देखकर पहले तो सुमन को आश्चर्य हुआ क्योंकि अर्चना की कार भी ऐसी ही थी जैसे अभी अभी वहाँ थी । फिर सुमन यह सोचकर चलने लगी कि एक ही रंग के कितने ही कार हो सकती है । तभी उसके कानों में आवाज आई रुको सुमन । तब सुमन ने पीछे मुडकर देखा तो और सलाहकार से उतर कर सुमन की तरफ आ रही थी । ये देखकर सुमन को आश्चर्य हुआ कि अर्चना अकेली थी जबकि अर्चना अकेली कहीं नहीं जाती थी । फिर अर्चना ने सुमन के पास आकर कहा चलो सुमन सुमन बोली कहाँ तो वर्ष उन्होंने कुछ देर सोचकर कहा कि गार्डन और गार्डन में दोनों चले गए । दोनों खामोश की बैठी थी । तभी खामोशी को तोडने हुए सुमन बोली अर्चना तुम यहाँ अकेली कैसे आई हो? विजय कहाँ है? सुमन की बात सुनकर अर्चना की दो बडी आंखों में आंसू आ गए और वह बोली सुमन तो मेरी माँ की नादानी की सजा मुझे मत दो और उन्हें माफ कर दो और मेरे साथ चलो मैं तुमको लेने आई हूँ । अर्चना की बात सुनकर सुमन थोडी देर खामोश रही । फिर बोली तो मैं ये कैसे पता चला । अर्चना की मैं यहाँ हूँ । अर्चना बोली कि मेरी दोस्ती ने तुझे ढूंढने को मजबूर कर दिया और मैं तुझे ढूंढते ढूंढते उस होटल तक गई जहां से तुम निकल रही थी । अर्चना की बातों को सुनकर सुमन से रहा नहीं गया और उसने अर्चना को गले लगाते हुए चुन लिया और खूब रोइ अर्चना भी रो पडी । फिर सुमन बोली कि विकास भैया कैसे हैं और विजय ने तुमसे शादी से क्यों इंकार कर दिया । सुमन के इस प्रश्न से अर्चना और भी जोर से रो पडी और बोली कि सुमन तुम्हें ये प्रश्न मुझसे नहीं पूछती तो ठीक रहता । इस प्रश्न का मेरे पास कोई उत्तर नहीं है फिर भी तुम पूछ रही हो तो बताती हूँ । अर्चना की बात सुनकर सुमन एक अनजान भय से कम गए और बोली दोनों अर्चना जल्दी बोलो क्या हुआ मेरे विकास भैया को क्या हुआ मेरे विजय को? अर्चना सुमन जिस दिन तो मुझे अभागन को छोड आई थी बहन उसी दिन मेरे विकास भैया भी मुझे छोड कर चले गए । उनके घर से निकलने का कारण मेरी माँ है । वो जाती थी कि विजय मेरे साथ शादी करे मदर बजे से पहले भैया ने ही बोल दिया की विजय की शादी तुमसे होगी माने अपने घर से निकलने को कहा मगर विजय मुझसे शादी करने को तैयार हो गए । वो चाहती थी कि उनके कारण विकास भैया का घर ना उजडे मगर मैंने शादी से इंकार कर दिया क्योंकि मैं जानती थी कि विजय तुम्हारे सपनों का राजा बन चुका है और यही कारण है कि भैया घर से निकल गए मैंने भैया को जाती समय बहुत रोका मगर वह नहीं रूके । पापा के दफ्तर के आने तक भी नहीं रुके और चले गए । फिर दूसरे दिन में अपने कमरे को साफ कर रही थी तो जमीन पर एक खत मिला जो विकास भैया का ही लिखा हुआ था । उन्होंने लिखा था अर्चना तो मेरी फिक्र मत करो बहन क्योंकि मैं तो लडका हूँ, कहीं भी कमा कर खा सकता हूँ और फिर अभी तो मेरे साथ विजय है । दो इंसान मिलकर क्या नहीं कर सकते तो दो रोटी की बात है । इसके लिए तो हर इंसान जिम्मेदार होता है । हाथों में फिक्र करनी है तो सुमन की करो । वो लडकी है और अकेली है और फिर उसे कुछ बनना भी तो हैं जिसके लिए उसे बहुत संघर्ष करना पडेगा और शायद थोडे संघर्ष के बाद अब उसे अपनी मंजिल मिल भी जाएगी । मदर अरचनात्मक सुमन की तलाश करना । वैसे मैं और विजय हम दोनों भी सुबह की तलाश करेंगे उसके बाद ही कुछ नौकरी के लिए विचार करेंगे । तो महारा अभागा भाई विकास और फिर उसी दिन से तुम्हारी तलाश में लग गई । मगर पूरे पंद्रह दिनों के बाद आज तो मुझे मिली हूँ और सामने खुशखबरी भी है । सुनोगी की ये कभी हो सकता है कि जल्दी बताओ क्या खुशखबरी है? अर्चना बोली मेरी सगाई हो गई । सुमन खुश होकर बोली, सगाई कहाँ किसी वर्जना बोली वहीं कलकत्ता में ही रजत नाम के एक लडके से और सुमन तुम्हारी दोस्त ज्योति भी आई थी और अजय नाम का रजत का एक दोस्त था । सुमन चौक हुई बोले तुम्हारी सगाई अजय के दोस्त रजत से हुई है । अर्चना ने हसते हुए कहा तो तो मुझे और ज्योति के साथ साथ रजत को भी जानती हो । सुमन अपने भाव को छुपाते हुए बोली हाँ रजत बहुत अच्छा लडका है । अच्छा बताओ । ज्योति मौसी मेरे बारे में कुछ बोल रही थी क्या? अर्चना बोली बोल नहीं रही थी । पूछ रही थी कि अब तुम कहाँ मिल होगी? और तुम्हारे आने के बाद शायद उन लोगों ने तुम्हारी तलाश भी बहुत की । मगर जब तुम्हारे मिलने का कोई भी स्वरूप नजर नहीं आया तो उदास होकर बैठ गई और अब ज्योति पैसे तलाश में लगी हुई है । एक और बात सुमन अजय को एक फिल्म निर्माता ने संगीत निर्देशक के रूप में अनुबंध किया है । वो सब अभी पांच से छह दिन के बाद ग्यारह अक्टूबर को बम्बई जाएंगे । सुमन अच्छा अब तुम ये बताओ कि ज्योति तुम्हारी क्या लगती है तो मुझे कैसे जानती हूँ? अर्चना की बात सुनकर सुमन बोली अर्चना तुम यह बताओ कि तुम मेरी क्या लगती हो जो मेरी तलाश करती हुई यहाँ तक पहुंच गई । अर्चना उत्सुकता से बोली तो ज्योति तुम्हारी सहेली है मगर उम्र में तो तेरे से दस साल की बडी लगती है । सुमन नहीं । अर्चना जूती मेरी सहेली नहीं मु बोली मौसी है उसे ममता की मूरत भी कहे तो अतिश्योक्ति नहीं । सुमन बोलते बोलते रो पडी थी । अर्चना बाद को ज्यादा बढाना । अच्छा ना समझकर बोली अच्छा चलो सुमन घर जल्दी चलते हैं । फिर ज्योति के पास भी खबर देनी है कि तो मेरे घर हो । अर्चना के अपना तो और विश्वास भरी बातों को सुनकर सुमन बोली नहीं आज ना अब मैं यहाँ से कहीं नहीं जाऊंगी । उसके बाद और उन्होंने सुमन को चलने के लिए बहुत जिद की । पर्व तैयार नहीं हुई तो अर्चना सुबह कोई कटा चीज । हम आते हुए बोली कि ठीक है सोमन, तुम जाना नहीं चाहती तो मैं तुम्हारी मंजिल में रुकावट भी नहीं बनना चाहती । मगर तुम्हें सटाई जी को रखना ही होगा । इसमें कुछ नहीं थोडे कपडे हैं । सुमन ने अर्चना के दिल को तोडना ठीक नहीं समझा और अर्चना से अटैची ले ली । फिर दोनों अपने अपने रास्ते पर चल पडी । सुमन जब अपने रूम में गए तो सूटकेस को खोलते ही उसके मुझसे हाई निकल गया । उसमें अर्चना की सोने की चेन, अंगूठी तथा कुछ रुपये थे । इसके अलावा सुमन के लिए कपडे भी थी और इन सब के अलावा खत्म भी था जिसमें लिखा था प्रिया सहेली सुमन सुमन मेरी भलाई के कारण तुमने मेरा घर छोड दिया तो नहीं जानती कि तुम्हारे जाने का दुख मेरे विकास और विजय के अलावा पापा और दीपक भैया को भी बहुत है । दीपक भैया और पापा भी तो मैं मेरी तरह ही मानते थे और इस प्रकार उन सब की अनुमति और ज्योति तथा अजय की राय और विकास भैया के निर्देश के अनुसार मैं तुम्हारी तलाश में निकल पडी थी । तभी डैडी ने पंद्रह हजार रुपये और दीपक भैया ने ग्यारह हजार रुपये तुम्हारे लिए दिए थे । तुम्हारे साथ सात महीने गुजारने से हमें मालूम था कि तुम मेरे साथ नहीं होगी और सुमन उसमें मेरी चैन और अंगूठी तथा कुछ कपडे भी है जो बाहर रहने पर तो मैं काम आएंगे । इन सबका उपयोग करना और बिना रोटी की तलाश के अपनी मंजिल की ओर बढना और मुझे विश्वास है कि तुम्हारा त्याग और तुम्हारी मेहनत जरूर रंग लाएगी । तो तुम्हारी अर्चना सुमन खत को पढकर रो पडी । ये आंसू उसकी खुशी के थे और फिर अपने आप से ही कहने लगी कि देख सुमन तेरी कितने आपने है और सब तुझे मंजिल तक पहुंचाने में सहायता पहुंचा रहे हैं । हर तो समझती है कि तेरह दुनिया में विजय की सेवा ही कोई नहीं है । हे भगवान की कैसी माया है जो मुझे माह के बच्चे पर इतनी दया कर रहे हैं । काश भगवान मुझ से मेरी माँ को जुडा करने से पहले ही मुझ पर दया करते और मुझे मेरी माँ का साया ना खेलते । मगर खैर ये भी विश्वास है कि आप मुझे मेरी त्याग और मेहनत का फल भी अवश्य देंगे । इस प्रकार सुमन ने ये निर्णय ले लिया कि आज वो किसी निर्माता से मिलेगी । सुमन एक निर्माता जी के घर गए तो वहाँ उसे निर्माता जी की सेक्रेटरी मिली । उसने बताया कि चोपडा जी घर पर नहीं है, वापस लौटने पर मिल लेना । हाँ कुछ कहना हो तो मुझे बता दो । मैं उनसे बात कर लुंगी । ये कहकर फोन नंबर लेकर सुमन वापस लौटाई । दूसरे दिन सुबह नाश्ता करके सुमन जुहू तट की और चल दी । उसे मालूम था कि वहाँ निर्माता निर्देशक ओ पी । रल्हन रहते हैं और आज जुहू तट पर ही फिल्म की शूटिंग चल रही थी । कुछ देर तक तो सुमन शूटिंग देखती रही । फिर शूटिंग खत्म होने के बाद सुमन रल्हन जी के पास गई और व्यवहारिकता निभाने के बाद वहीं बैठ गई । तभी रल्हन जी बोले, वैसे तो आप को देखकर यह आभास हो रहा है कि आप कोई कलाकार है फिर भी बताइए कैसे कष्ट के आने का । सुमन को रलहन जी की बात बहुत अच्छी लगी । वो बोली कि अंकल जी में आपकी फिल्मों में गाना गाना चाहती हूँ । आप अगर किसी प्रकार का स्वर परीक्षण लेना चाहते हैं तो ले लीजिए । रलहन जी बोले, अच्छा बेटी पहले अपना नाम बताओ और इससे पहले अपने स्कूल कॉलेज में गाना गाया है या नहीं और नहीं गाया है तो ये बताओ कि तुमने कैसे मान लिया कि तुम गाना गा सकती हो । अब की बार सुमन कुछ हडबडाया सी गई फिर बोली कि हाँ अंकल, मैंने वैसे कॉलेज में एक बार लता जी का गाना गाया है तो सारे कॉलेज में पसंद किया गया था । मुझे विशेष प्राइस के साथ प्रमाण पत्र भी मिला था । ये कहकर सुमन अपने पांच से प्रमाणपत्र को निकालकर दिखाने लगी । तभी रल्हन जी बोले कि नहीं बेटा, इस की जरूरत नहीं, बस अपना नाम बता दूँ । सुमन ने अपना नाम बताया । तभी वहाँ पर एक फिल्म का हीरो में कब सहित आ गया और सुमन वहाँ से उठ कर चली गई । करीब चार बजे सुमन माया पूरी नामक पत्रिका से देवीदत्त नाम के निर्माता जी का पता नोट की और फिर उनसे मिलने की बात सोचकर एक टैक्सी ड्राइवर को बुलाया और टैक्सी में बैठने लगी । तभी ड्राइवर बोला माफ कीजिये बहन में अभी नहीं जाऊंगा । जो सामने वाले मेरे दोस्त है उनकी कार में बैठकर चले जाइए । टैक्सी ड्राइवर के बाद सुनकर सुमन कार के पास गई और बोली क्यों आप जाएंगे क्या? कार भी बैठा व्यक्ति बोला जाएंगे, मेमसाहब जाएंगे नहीं तो रोटी कैसे मिलेगी । फिर सुमन उस कार में बैठ गए और थोडी ही देर में कार तेजी से चलने लगी । सुबह का ड्राइवर को देवीदत्त का पता बता दिया और बे खबर होकर कार में बैठी रही । मगर वह कार ड्राइवर देवीदत्त के बंगले में नहीं बल्कि एक सुनसान गली की और कार को दौडाए जा रहा था । फिर गार्डन के पास जाकर का रुक गई और कार ड्राइव करने वाला नवयुवक बोला उत्तरीय मेमसाब । सुमन बोली मैंने आपको देवीदत्त के बंगले पर ले जाने के लिए बोला था और ये तो गार्डन है । नवयुवक हसते हुए बोला मैं कोई टैक्सी ड्राइवर नहीं हूँ जो आपके ऑर्डर से चलो । मैं एक रईस बाप का बेटा हूँ और ये गली एकदम सुनसान है । यहाँ आपके और मेरे सिवा कोई नहीं । कभी कभी कोई सैर करने वाले ही टपक पडते हैं और अब मैं जो कहूंगा वही तुमको करना पडेगा । अब तुम कार से उतरो । सुमन बोली आप मुझ पर रहम खाई, भगवान के लिए मुझे छोड दो । नवयुवक थोडा हस दिया और फिर जोर से बोला मैंने कहा कि मैं जो कहूंगा वो तुम्हें करना पडेगा वरना मुझे जबरदस्ती करनी पडेगी उतरो । गाडी से ये कहते हुए सुबह को हाथ से पकडकर कार से नीचे पटक दिया और बोला तुम को जाना है तो चली जाना बस एक घंटे में छोड दूंगा । सुमन समझ गई कि गिडगिडाने से कुछ नहीं होगा और वो लडका अपनी और से जबरदस्ती करके सफलता प्राप्त कर लेगा । इसीलिए वह खडी हो गई और गुस्सा दिखाते हुए बोली कि आखिर तुम चाहते क्या हो? लडका आशिकाना अंदाज में बोला कुछ नहीं देवी जी बस आपका हाँ उसने चाहिए तुम्हारे इस खूबसूरत बदलने तो हमें दीवाना कर रखा है और दीवाने बस प्यार के भूखे रहते हैं । सुमन ने एक थप्पड उस लडके के गाल पर जड दिया और कहा तो समझते हो क्या लडकों की ही इज्जत होती है । लडके ही बलवान होते हैं लडकियाँ उनसे हार जाती है मगर आज की लडकियाँ डरती नहीं समझे हिम्मत से कम लेती है ये कहकर सुबह झट से उसी की कार को स्टार्ट करके स्वयं कार ड्राइव करने लगी और वो लडका पीछे पीछे दौडने लगा । तभी सडक पर थोडा सा मोड आया और जब कार धीरे हुई तो नवयुवक जम्प लगाकर कार में बैठ गया और बोला लडकियाँ जब इतनी हिम्मत कर सकती है तो हम जैसे हुस्ने के दीवाने भी काम हिम्मत ही नहीं होते । ये कहकर सुमन को ड्राइविंग सीट छोडने के लिए जबरदस्ती करने लगा । तभी सामने से कहा रही थी सुमन और उस लडकी की लडाई के कारण सुमन की कार सामने वाली कार से टकरा गई और सुमन बेहोश हो गई । तभी दूसरी कहाँ से क्यूबा कजे और कार ड्राइवर अपनी कार से बाहर आए और कार ड्राइवर उस युवक को झडते हुए बोला, अभी कार चलानी नहीं आती तो चलता कि वह ये कह कर एक थप्पड लगा दिया । थप्पड खाकर युवक बोला कार मैं नहीं वो लडकी चला रही थी । मेरी कार को लेकर भाग रही थी । मैं तो उसका पीछा करते हुए अभी सामने का कांच तोडकर गाडी में बैठा था । अजय वो लडकी कहाँ है? जरा देखो कहीं उसको चोट तो नहीं लगी है । ये कहकर अजय कारकी और बढ गया और झाकते ही जी जाग गया और उसके मुंह से चीख निकल गई । सुमन फिर सुमन के पास जाकर देखा उसका ब्लाउज फटा हुआ था और साडी भी अस्त व्यस्त हो रही थी । यह देख अजय को समझने में देर नहीं लगी और फिर अजय एक झटके में ही कार्ड से उस युवक के पास आ गया और पकडकर बोला जरा ये बताओ जनाब की तुम लडकी को लेकर भाग रहे थे । ये लडकी कारको ये कहकर उस युवा कोई घुसा मारा और तब वो लडका दूर जा गिरा और गिडगिडाते हुए बोला कि मुझे छोड दो भगवान के लिए छोड दो । अब मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा । मुझसे गलती हो गई । ये कहकर अजय के पास को पकड लिया और अजय पैर से झटकते हुए बोला चलो तो जैसे बुजदिल आदमी को मारकर मुझे अपना हाथ गंदा नहीं करना और बेटा आठ से लडकियों को अकेले मत समझना समझे लडकियाँ अकेली नहीं उसके साथ हम जैसे कितने भाई रहते हैं । फिर अजय कारकी और बढाओ से रेखा सुमन को चोट तो नहीं आई थी परंतु वह डर से बेहोश हो गई थी । तब बजे ने धर्म से पानी निकालकर सुमन के चेहरे पर छिडक दिया और थोडी ही देर में सुमन को होश आ गया । सुमन अपने सामने अजय को देखकर एकदम से डर गई और उसे आश्चर्य भी हुआ कि अजय यहाँ कैसे पहुंच गए । तभी अजय बोला कि सुमन में अजय हूँ सिंगरोली का अजय जिसके घर तुम संगीत सीखने आया करती थी । सुमन बोली हाँ मैं आपको पहचान रही हूँ मगर आप यहाँ कैसे? यहाँ तो एक लडका था । अजय बोला हाँ लडका था वो बाहर पडा है । शायद तुम्हें धोखा देकर यहां लाया था । अजय की बात सुनकर सुमन की आंखों में आंसू आ गए । वो बोली आपने ठीक समझा वो मुझे अपनी वास्ता का शिकार बनाना चाहता था । अजय बोला खैर छोडो अब नमस्कार में चलकर बैठों और मेरे साथ चलो । सुमन कुछ बोले बिना ही जब जात दूसरी कार में बैठ गई । अजय भी बैठ गया और ड्राइवर से कहा वही वापस चलो जहाँ से आए थे । फिर थोडी देर में ही कार एक हॉस्टल में पहुंच गए और तब अजय और सुमन उतर करे कमरे की ओर बढ गए । कमरे में घुसते ही सुमन ने ज्योति को देखा जो कुछ पढ रही थी पडना छोडकर ज्योति ने सुमन को अपने सीने से लगा लिया और बोली सुमन तुम कहाँ थी, कैसा हाल बना रखा है । मेरी ये आ खेतों में देखने को तरस रही थी । सुमन यह कहकर ज्योति सुमन के दोनों गालों को चूम रही थी और फिर बजे नहीं ज्योति को सारी बात बता दी । सुमन ने कहा मौसी जी मैंने सुना है कि अजीत जी को किसी निर्माता ने अनुबंध किया है । ज्योति बोली तो थी कि सुना है मगर तूने बताया किसने? सुमन बोली अर्चना जो भी कुछ सोच ही रही फिर बोली अच्छा रजत की बात आती ही मुझे रजत की याद आ रही है जिससे अजय का भ्रम दूर हुआ । सुमन तुम सिंगरोली छोड कर आई और दूसरे दिन ही रजत और अजय तुमसे मिलने आई थी क्योंकि रजत उनसे माफी मांगना चाहता था । उसे अपनी करनी पर बहुत पश्चाताप था । सुमन बोली चलो अच्छा हुआ मौसी की रजत ने स्वयं अपनी गलती को स्वीकार कर लिया और पिछली बार छोडो ये बताओ मौसी की अजय जी कब संगीतकार बनने जा रहे हैं । तब ज्योति बोली कल ही देवी दर्जी के घर में एक संगीतकार की हैसियत सी गीत रिकॉर्डिंग करेंगे । दूसरे दिन अजय कोई फिल्म के गीत के लिए संगीत देना था । समय के अनुसार ज्योति और सुमन भी साथ चल दिए । वहाँ दूसरा रिहर्सल के बाद गाना रिकॉर्ड कर लिया गया । फिर अजय सुमन के बारे में देवी दर्जी से बोले तो उन्होंने कहा कि अभी कोर्स गायिका के रूप में रहने दो फिर अगली फिल्म के लिए देखेंगे । इस प्रकार सुमन अभी कोर्स गायिका के रूप में फिल्म इंडस्ट्री की सदस्य बन गई है और अजय देवी दर्जी की दो फिल्मों में अपना संगीत देखकर संगीतकार बन गए । इस प्रकार सुमन, अजय और ज्योती एक बार फिर से मिल गए और तीनों ही एक किराए के फ्लैट में रहने लगे ।

तलाश भाग 6

छठा भाग विकास को अर्चना के घर से सीधा अपने घर ले गया । वहां पहुंचे तो सामने हॉल में विजय के पापा बैठे थे । वे विजय के साथ विकास को देख कर खुश हुए क्योंकि वह समझ रही थी की विजय और अर्चना की शादी पक्की करने के लिए विकास आया है । विकास और विजय दोनों ने ही पापा को नमस्ते किया । फिर विजय कहने लगा आओ विकास कमरे में बैठेंगे । विजय के पापा बोले यही बैठ होना सफर कैसा रहा? विजय सफल तो पूरा होते होते रूक गया । पापा मुझे पहुंचने में देर हो गई और बिना मुझे लिए ही गाडी छूट गई । तभी वहां पर विजय की मम्मी आई और बोली कैसे बेटा, लडकी पसंद आई । माँ की बात सुनकर भी विजय डालते हुए बोला मैंने अपने दोस्त विकास का हमेशा जिक्र करता रहता था ना । ये वही विकास है । फिर विकास दिमाग को नमस्ते किया । फिर बोली भरी तुम लोग इतनी देर से खडे क्यूँ बैठो? बताओ क्या लोगे? ठंडा या गर्म मांगी? बात सुनकर विजय बोला नहीं गर्म, कुछ नहीं, भूख लगी है, खाना खाएंगे और हामा विकास अब यही रहेगा । विजय की बात सुनकर उसके पापा हसते हुए बोले हाँ विजय कीमांग, विकास को हम जल्दी थोडी ना जाने देंगे । इससे तो अभी रुकना ही पडेगा । विजय की माँ विकास विजय के दोस्त की सेवाएं अर्चना का भाई भी तो है । तब उसकी माँ उत्सुकता से बोली तब तो बात बन गई और हाँ विजय बताओ अर्चना कैसी है माँ को विजय कुछ जवाब देने ही वाला था । तभी विकास बोला छोडो ना ये शादी और सगाई की बात । माँ बोली तो विजय को उसने पसंद नहीं किया । माँ की बात सुनकर विकास बात बनाते हुए बोला हाँ कुछ ऐसी बात है कि जिस तरह विजय सुमन को प्यार करता है उसी तरह हमारी अर्चना भी किसी लडके से प्यार करती है । अर्चना के साथ साथ पापा भी उसकी प्रेरि के साथ शादी करने को तैयार हो गए हैं । विकास की बात सुनकर विजय को आश्चर्य हुआ कि विकास ने इतनी जल्दी बातें कैसे बना डाली और उसे जवाब सवाल के घेरे से बिल्कुल अलग रख दिया । फिर सोचने लगा कि शायद इसी को दोस्ती कहते हैं । शायद इसी बात से विजय की आंखों में खुशी के आंसू भराई थी और वो फिर अपने कमरे की और चल दिया । विजय के जाने के बाद उसकी माँ बोली विकास बेटे! तुम हर बात पर अर्चना के पापा क्यों बोलते हो? अर्चना की पापा तो तुम्हारे भी पापा है, फिर तो अपने पापा को क्यों संबोधित नहीं करते? विकास को माँ की बात सुनकर ऐसा लगा जैसे तन को बिजली हो गई हो । फिर बोला मैं आपकी प्रश्न को तो समझ रहा हूँ, मगर उत्तर कैसे दो ये समझ नहीं पा रहा हूँ । वैसे अर्चना मेरी बहन है और मैं उसका भाई हूँ और यू कहूँ तो अर्चना के पापा मम्मी मेरे पापा मम्मी है । फिर विकास के अपने घर से पिछड जाने से अर्चना को पापा के शरण देने और अब घर से भी अर्चना की मम्मी के द्वारा निकाले जाने वाली बातें बता दी । ये सब बातों को बताते समय विकास की आंखों में आंसू आ गए थे । इसलिए विकास से अपने मुंह को दूसरी और फेर लिया था । तभी विजय के बारे विकास के पास आकर विकास के चेहरे को अपनी और घुमा कर उसके आंसू पहुंचने लगी और बोली रो मत बेटे । ये जिंदगी कुछ ऐसी है जिसमें भी छोडने और मिलने को धूप और छांव की तरह झेलना पडता है । विकास इस जीवन का दूसरा नाम अगर हादसा रख दे तो शायद अतिश्योक्ति नहीं होगी । विकास अब तुम यही रहोगी, इतने बडे घर में सिर्फ विजय ही तो है । वो भी हमेशा खामोश और खोया हुआ रहता है और उसकी खामोशी का कारण भी हम ही है । नगर विकास तो उसकी दोस्त और भाई होने के नाते तुम ही विजय को समझाना की उसकी खामोशी से हम लोगों को कितना दुःख होता है । विकास मेरे बेटी विजय शरीर से तो स्वस्थ है मगर मानसिक रूप से बीमार है, प्रेम रोग का शिकार है और जैसा की पहले ही बता चुकी हूँ बेटा के विजय के इस रोग का कारण हम लोग ही है । अब हमें आभास हो रहा है कि हमने विजय की प्रेमिका सुमन को उससे छुडाकर अच्छा नहीं किया मगर अब तो कुछ नहीं किया जा सकता । सुमन का मिलना असंभव है । विजय की मानसी सुमन के मिलने की बात सुनकर विकास को आश्चर्य हुआ क्योंकि विजय पहले ही बता चुका था की सुबह को घर छोडने पर विजय के माँ और पापा ने ही मजबूर किया था । विकास कुछ कहने वाला ही था तभी विजय की माँ फिर बोली अब हमने विजय की हालत को देखकर के निर्णय लिया है कि अब विजय के साथ साथ हम लोग भी सुमन की तलाश करेंगे और सुमन से अपनी गलती की माफी मांग कर विजय और सुमन की शादी करा देंगे । विजय अपने कमरे से निकलकर खाने के लिए बोलने ही रहा था । तभी अपनी माँ की बात सुनकर बडे गंभीर स्वर में बोला काश मैं आप ये पहले समझ गई होती की दौलत और प्यार में प्यार ही बडा होता है । मगर अब क्या होगा? मां आपके चाहने से कुछ नहीं होने वाला है । जो होना था वो तो हो ही गया । विकास नहीं आर विजय ऐसे उदास नहीं हुआ करते तो नीरज रखूँ मैं तुम्हारी सुमन और अपनी बहन को दुनिया की इस भीड से निकालकर ही रहूंगा । तभी विजय के पापा बोले विकास बेटे! मैं चाहता हूँ कि तुम दोनों दोस्त मिलकर आज ही सुमन की तलाश में निकल जाओ और सुमन को जल्दी ही हमारी बहु बना दो । दूसरे दिन विजय और विकास दोनों ही सुमन की तलाश में बम्बई के लिए रवाना हो गए ।

तलाश भाग 7

सातवाँ भाग अर्चना सुमन से विदा लेगर सीधे अपने घर कलकता गई । अर्चना जब अंदर दाखिल हुई तो सामने उसके पापा और दीपक बैठे हुए थे । अर्चना को देखते हैं । उसके पापा बोले अर्चना सुमन का कुछ पता चला । अर्चना बोली हाँ, पापा सुमन का पता चला और आपका खयाल भी थी कि निकला लाख मनाने पर भी सुमन यहाँ आने को तैयार नहीं हुई । अर्चना के पापा बोले हाँ, बेटी और हर इंसान को ऐसे ही स्वाभिमानी होना चाहिए और हम शहर अजनबी होने के कारण उसे तकलीफ तो नहीं है ना । अर्चना बोली नहीं पापा, सुमन को भी हाल में कोई तकलीफ नहीं है । फिर भी मुझे बम्बई नाम से ही डर लगता है । वहाँ लोग कई चेहरे लगाकर घूमते हैं । बम्बई शहर हादसों से भरा हुआ है । दीपक अब और आगे भी कुछ सुबह के बारे में बताओ की या बस अपना ही लेक्चर सुना होगी और हम कोर्ट ने पर मजबूर होना पडेगा । अर्चना शिकायत भरे स्वर में बोली देखिए ना बाबा भैया हमेशा मुझे लेक्चर देने वाली ही बना देते हैं । आप बताइए में अभी लगभग दे रही थी गया फिर अर्चना भैया को चिढाते हुए बोली अब आप यहां बैठकर भजिया खाओ । चलो बाबा हम लोग अपने कमरे में चलते हैं । यह कहकर अर्चना अपने बाबा का हाथ पकडकर उठाने लगी । तभी दीपक ने भी पापा का हाथ पकड लिया और बोला नहीं पापा, मत जाइए, यही बैठे रही है । अर्चना बोली चलिए बाबा । तभी दोनों भाई बहन के झगडों के बीच में उसकी माँ गई और बोली कहाँ जा रहे हो भाई? तुम लोग अपने पापा को अर्चना बोली सुमन की बात सुनने दीपक हमें भी सुमन की बात सुनी है इसीलिए हम पापा को यहाँ से नहीं जाने देंगे । अर्चना की माँ को सुमन के प्रति इतना प्रेम देखकर गुस्सा आया । वो बोली मेरी तो समझ में नहीं आता कि तुम लोगों को हो क्या गया है । लगता ही सुमन ने तुम सब पर जादू कर दिया है । अच्छा होता कि विकास और सुमन को उसी समय ही नहीं रखती जिस समय तुम लोग लाए थे । और हाँ, मेरे घर में मेरे दोनों बच्चों के सेवाएं में किसी और को रहने नहीं होंगी और ना ही तुम लोग यहाँ समर और विकास को लाने की कोशिश करोगे । उनके इस्वर में गुस्सा था और कडवापन भी था । अर्चना को अपनी माँ से यह आशा नहीं थी । फिर माँ की हालत देखकर बोली, मुझे अफसोस है कि भगवान ने आपको माँ तो बना दिया मगर माँ का दिल नहीं दिया । मैंने तो सुना और देखा भी है कि हर मैं अपने बच्चों की उम्र के हर बच्चों को अपने ही बच्चों की सामान मानती है और खासकर ऐसे बच्चे जिनके माँ नहीं होती, उन्हें तो अपने बच्चों से भी ज्यादा चाहती है । अर्चना जाने और क्या क्या कहती पर अर्चना की माँ वहाँ से उठ कर चली गई । ये देख कर के अर्चना के आंखों में आंसू आ गए । वो अपने आप से बोली, अर्चना तो एक पत्थर से बोलने की आशा कर रही थी । मगर पत्थर कभी बोला नहीं करते । फिर अर्चना कुछ सोच कर बैठी रही । उसके बाद रजत को फोन करके अपने घर बुला लिया । थोडी ही देर में रजत अर्चना के घर आ गया । अर्चना किसी सोच में डूबी सोफे पर बैठी हुई थी । अर्जुन आने जाने का हक हो गई थी । तभी रजत कहने लगा अर्चना कहाँ हो गई हो? अर्चना जैसे नींद से जाग गए और वो बोली तुम आ गई । चलो अच्छा हुआ । अर्चना की आवाज में गंभीरता थे । रजत क्या बात है? मेम साहब कुछ चिंतित नजर आ रही हैं और एक सप्ताह तक कहाँ गोल थी । एक तो इतने दिन से बाहर थी और जब घर में मिली हो तो मुंह फुलाए । अरे भाई, कुछ तो बोलो मुझे यहाँ बुलाया है । अर्चना तुम जल्दी बोलो तुम्हारी खामोशी मुझे डरा रही है । अर्चना ने कहा बात कुछ नहीं । रजत माँ की बातें ना मुझे अच्छी नहीं लगती तो मैंने तुमको बुला लिया है । शायद दिल बदल जाए । यही सोचकर रजत माँ क्या कर रही है जिससे तो इतनी खफा हूँ । अर्चना मैंने मुझे कुछ नहीं कहा । रजत मगर जिससे इंसान के लिए वह इतना बुरा भला बोलती है । मैं सुनती हूँ तो मेरे कान फट जाने को होते हैं । रजत वो कौन इंसान है? अर्चना जिसके बारे में कुछ बोल दिया तो तुम सहन नहीं कर सके तुम्हारा वो इंसान क्या लगता है? अर्चना एक बार मैं और दीपक भैया भैया के दोस्त की शादी में गए हुए थे तो वापसी में एक लडकी से मेरी दोस्ती हो गई । उसकी बात और व्यवहार से मैं बहुत प्रभावित हुई और चार घंटे के सफर में ही वो लडकी मेरे पिछले जन्मो में कोई अपनी सी लगने लगी और फिर बाद में पता चला की वो लडकी सुमन सिंगरोली नामक छोटे शहर से आ रही है और उसके माँ बात कोई नहीं है तो हम उसे अपने घर ले आए थे । सिंगरोली शहर और सुमन का नाम सुनकर रजत के होश उड गए और उस के मन में शंकाएं उठने लगे कि शायद ये वही सुमन है जिसको मैंने सिंगरोली में बदनाम किया था । अर्चना रजत मेरी बात सुनते ही तुम कहाँ हो गए? रजत संभालते हुए बोला नहीं मैं तो तुम्हारी बातों को सुन रहा हूँ । फिर आगे क्या हुआ? बताओ अर्चना फिर वही हुआ । रजत जो होना था माने सुमन को घर से निकाल दिया । रजत गंभीर स्वर में बोला और अब तुम्हारी सहेली सुमन कहाँ है? अर्चना बोली वही तो मैं बताना चाहती हूँ । सुमन गायिका बनना जाती है । हाँ, रजत सुमन कह रही थी कि वो तो मैं जानती है । तब तो शायद तुम भी सुमन को जानते होंगे । रजत बोला मैं सुमन को सिर्फ जानता ही नहीं । अर्चना बल्कि सुमन को तुम्हारे तक पहुंचाने का श्रेय भी मेरा ही है । अर्चना को रजत की बातों पर आश्चर्य हुआ । उसने कहा सुमन को तो हम लोग ही जिद्द कर के अपने घर लाए थे । फिर इसमें तुम्हारा क्या हाथ है? रजत बोला तुम इन बातों को छोडो अर्चना क्योंकि इन बातों को समझना मुश्किल है और समझ भी गई तो शायद तुम्हें मुझसे नफरत हो जाएगी । हम दोनों के बीच में एक दरार पैदा हो जाएगी । खैर अब ये बताओ कि हमें शादी कब करनी चाहिए । मेरा मतलब है कि तुम्हारे विचार से तुम्हारे पापा के विचार से नहीं अर्चना । बहरहाल, अभी तो एक दो महीने शादी का कोई सवाल ही नहीं । उसके बाद सुमन से पूछ कर बताओ होंगे रजत क्यों अभी एक दो महीने शादी क्यों नहीं हो सकती? अर्चना इसीलिए की सुबह को भी कम से कम एक दो महीने अपनी मंजिल तक पहुंचने में लगेंगे । फिर जब सुमन अपनी मंजिल तक पहुंच जाएगी तब उसे पूछेंगे कि वह कब आ सकती है । फिर उसके हिसाब से डेट फिक्स करेंगे । सुमन के प्रति इतना अपनत्व देखकर रजत परेशान सा हो गया और बोला क्यों सुमन का तुम्हारी शादी में आना इतना जरूरी है? ऐसा भी हो सकता है कि सुमन की अनुपस्थिति में हम लोगों की शादी हो । अर्चना रजत मैं तुमसे एक बात पूछूं । रजत हाँ पूछो ना मना कौन कर रहा है? अर्चना मेरी बात पर नाराज तो नहीं हो जाओगे । और हाँ, मेरे सवाल का जवाब सच सच देना झूठ बोलने की कोशिश मत करना । रजत अरे बाबा पूछो तो सही जरा देखी कि ऐसा कौन सा सवाल है जिसमें झूठ भी बोलने की तुम्हें संभावना है? अर्चना रजत अभी अभी थोडी देर पहले तुम कह रहे थे कि सुमन को यहाँ तक पहुंचाने में आपका हाथ है और फिर ये भी कह रही थी कि सुमन को यहाँ तक पहुंचाने के श्रेय को अगर में सुन लूंगी तो हम दोनों के बीच में दरार पैदा हो जाएगी । और फिर उसके बाद अभी ये बोल रही थी कि सुमन की अनुपस्थिति में हमारी शादी हो । क्या तुम बता सकते हो? रजत कि सुमन से तुम्हारा क्या रिश्ता है और तुम सुमन की बात सुनकर क्यों एक मुसीबत सी महसूस करते हूँ? रजत झल्लाकर बोला अर्चना ये बात जानने से तुम को कोई फायदा नहीं होने वाला है इसलिए तुम्हें ये बात जानने की कोशिश ही ना करो तो अच्छा होगा । अर्चना रजत नाम मालूम क्यों मेरा मन पापी हो रहा है और मैं सुमन को कुछ गलत समझने लगी हूँ इसीलिए तो मैं बताना ही होगा । रजत रजत अच्छा अर्चना सुना ही चाहती हो तो सुनो मगर में ये विश्वास के साथ कह रहा हूँ कि सुमन और मेरी बात सुन कर तो मुझसे शादी करने से कतरा होगी तो मुझ पर गुस्सा आएगा और मुझे भी डर है कि मैं तो में खोना दूर । अर्चना नहीं, रजत ऐसा नहीं होगा । मैं तो तुम्हारा साया हूँ, तुम्हारे साथ होंगे तो मैं छोडकर में कहीं नहीं जा सकती । रजत तुम अपने प्यार पर भरोसा रख हूँ । तुम कितनी भी बडी गलती करो, मैं तुम्हें माफ कर सकती हूँ । रजत सुमन में अजय के साथ एक बार उसके शहर सिंगरोली गया था । सुमन उस समय सिंगरोली में ही थी क्योंकि अजय के पापा संगीत के ज्ञाता थे । इसीलिए सुमन अजय के पापा से संगीत सीखने अजय के घर आया करती थी और मैं भी कभी कभी अजय के साथ जोडती के घर जाया करता था । वहाँ सुमन रहती थी । इस प्रकार सुमन से में रोज मुलाकात किया करता था और सुमन को में मन ही मन चाहने लगा था परन्तु सुमन उस समय किसी विजय से प्रेम करती थी और विजय के माँ बाप सुमन को अपनी बहू नहीं बनाना चाहते थे । एक दिन मौके का फायदा उठाकर मैंने बीच सडक पर सुमन से अपने प्यार का इजहार कर दिया । तब सुमन आग बबूला हो गए और गुस्से में आकर मेरी बेज्जती कर दी जिससे सब लोगों ने यही समझा कि में आवारा हूँ और बदमाश हूँ और सब लोगों ने मिलकर मेरी पिटाई देगी । मैंने उस वक्त तो लोगों की मार्गों सहन कर लिया । बाद में मेरे मन में बदली की भावना जागृत थी । फिर एक दिन मैंने अजय और ज्योति के सामने साबित कर दिया कि सुमन एक बदमाश किसमें की लडकी है और वो मुझ पर मरती है और जब तक मुझ पर डोरे डालती रहती है क्योंकि मैं जानता था कि ज्योति और अजय के कारण ही सुमन उस शहर में रहती थी । इसीलिए उन लोगों के मन में सुमन के प्रति घृणा करवाना ही मेरी बगावत थी । अर्चना फिर क्या हुआ? रजत जल्दी बोलो । फिर सुमन अजय की आंखों में गिर गई और अजय ने अपने पापा जी को मना कर दिया कि वह बदमाश लडकी को संगीत न सिखाएँ और सुमन का मुख्य उद्देश्य संगीत सीखना था । इसीलिए सुमन ने उस शहर को छोड दिया और तब शायद कलकत्ता रही थी और तुम मिल गई अर्चना गंभीर स्वर में बोली तुम्हें अच्छा नहीं क्या रजत मैं भी जानता हूँ । अर्जना की मैंने अच्छा नहीं किया मगर उस वक्त मेरे दिल में बदले की आग थी और आज मुझे भी अफसोस है । अर्चना मगर मैं कर भी कह सकता हूँ । जो होना था हो गया । अर्चना रजत तुमने अभी अभी बोला कि तुम सुमन को अजय और ज्योति की आंखों से गिराना चाहते थे, लेकिन उनकी बातों से पता चल रहा था कि वे लोग अभी सुमन को बहुत चाहते हैं । वही तो में बताने वाला था । अर्चना की जब मेरे दिल से बदले की भावना का नशा उतर गया, तब मुझे होश आया कि मैंने मासूम लडकी पर इल्जाम लगाकर ठीक नहीं किया और दूसरे दिन में स्वयं ही अजय के साथ समन के घर माफी मांगने के वास्ते गया था । मगर अफसोस की सुमन शहर छोड चुकी थी । उसके बाद आज तक में सुमन को दुख के दरिया में फेंकने की ज्योति से अलग करने की और संगीत शिक्षा को अधूरी रखने की आग में जल रहा हूँ । मुझे दुख है अर्चना, बहुत दुख और आपने सुमन को अपना काला मोदीखाना नहीं चाहता । अर्चना बोली तो यही बात है । रजत जिसके लिए तुम्हें डर था कि मैं तुम्हारा साथ छोड होंगे मगर प्यार इतना छिछला नहीं होता । रजत ये तो वह गहरा सागर है जहाँ डूबकर आज तक कोई नहीं निकल पाया है । रजत तुम्हें माफ करती हूँ और मुझे ये भी विश्वास से रजत कि सुमन भी तुम्हें माफ कर देगी । हाँ, अब इन सब बातों को छोडो और सुनो मैंने तुम्हें यहाँ क्यों बुलाया है? मैं आपसे ज्योति का फोन नंबर पूछूँ । रजत मगर मुझे तो छोटी का फोन नंबर मालूम नहीं है क्यों ज्योति से तो मैं क्या काम है? अर्चना तो जानती होगी । ज्योति सुमन को बहुत चाहती है मगर तुम ये नहीं जानते कि ज्योति के विजय में सुमन के प्रति सिर्फ रुपया नहीं अपनत्व भी है । जब हम लोगों की सगाई के दिन ज्योति आई थी तभी उसने सुमन का जिक्र किया था । फिर मैंने ज्योति को सब कुछ सच सच बता दिया कि सुमन मेरे घर में रहती थी और अब शायद बम्बई में है । मेरी बात को सुन कर शायद वो अपने आप को रोकना सकें और रो पडी थी और मुझसे कहने लगी कि जब भी सुमन का पता चले तो मैं उन्हें बताऊँ । जो भी बता रही थी कि ज्योति का भी इस जहाँ में सुमन और अजय की सेवाएं कोई नहीं है जिसे वह अपना कहे तू रजत दुनिया में सबसे बडी इंसानियत होती है । मैं चाहती हूँ कि इंसानियत के नाते ही सही ज्योति को सुमन के बारे में बता देना चाहती हूं । रजत कहाँ अर्चना तुम ठीक की । कहती हो कि दुनिया में सबसे बडी इंसानियत होती है तो भारी विचार से हम लोग ज्योति के घर चलेंगे नहीं । रजत मैं ज्योति के घर जाना नहीं जाती । बस बता देना चाहती हूँ कि सुमन बम्बई में है, रजत नहीं । अर्चना ज्योति के घर फोन नहीं है इसलिए हमें ज्योति के घर जाना ही पडेगा । चलो ज्योति के घर चले जाते हैं । अर्चना रजत में अभी पंद्रह दिन के दौरे से आ रही हूँ और फिर जाने की बात करुँ होंगे तो मैं शायद बहुत नाराज होंगी । एक तोमर सुमन के नाम से झल्ला उठती है । वह सुमन से नफरत करती है और दूसरी बात ये है कि माँ मुझे बहुत प्यार करती है जिसके कारण जाने से रोकेगी । मुझे तो माँ का ज्यादा प्यार भी बला के सामान लगता है । अर्चना कौन आया? बेटी किसके साथ बात कर रही हूँ । तभी रजत बोला मैं हूँ हाँ, आज अर्चना से मिलने का मन बन गया तो चला आया । माँ बोली अच्छा क्या बेटा मैं भी तुझे बुलाने के लिए फोन करने वाली थी । अर्चना रजत कब से आया है अभी चाय नाश्ते के लिए नहीं बोला है तो वर्जना को होश आया कि वाकई में रजत को आए बहुत देर हो गई और मैंने रजत को चाय नाश्ता दिया नहीं । फिर बोली अच्छा बताइए आप क्या लेंगे? रजत ने कहा बस एक कप चाय काफी है । अभी घर से खाना खाकर निकला हूँ । थोडी देर बाद नौकर चाय लेकर आया और फिर तीनों इधर उधर की बातें करने लगे । तभी बातचीत के दौरान रजत बोला, मैं आज हम लोग कहीं घूमने के लिए जाना चाहते हैं । मेरा मतलब है कि अर्चना के साथ तो आपका क्या विचार है । अर्चना की माँ बोली कैसी अजीब बात करते हो बेटा, तुम्हारे साथ अर्चना को नहीं भेजूंगी तो किसके साथ भेज होंगी? अर्चना में बेटी के सेवाएं तुम्हारी होने वाली पत्नी भी तो हैं अच्छा ये बताओ कहाँ के लिए प्रोग्राम बनाया है? रजत कुछ सोचते हुए बोला एक दोस्त क्या पार्टी है बस वही जाना है । शायद रात भी हो सकती है या रात में रुकना पड जाए । शायद सवेरे तक वापस आ जाए इसलिए तो पूछ रहा था । अर्चना की माँ बोली देखो बेटा आजकल जमाना खराब है और दोनों शादी के बंधन में नहीं बंधे हो और शादी के पहले कुछ ऐसी सीमाएं होती है जिसके अंदर चलना पडता है । वैसे तुम लोगों पर मेरा विश्वास है कि तुम लोग अपनी अपनी सीमाओं में ही रहोगे । बस फिर तो एक रात क्या तीन चार दिन के लिए भी जा सकती हूँ । ये कहकर अर्चना की माँ चली गयी माँ के जाने के बाद और जिन्होंने हसते हुए कहा वहाँ रजत क्या बात बनाई है पार्टी की? हाँ आज कल तो बहुत चालाक हो गए हो । मिस्टर चलो मुझे इस बात की खुशी है कि मेरा मंगेतर चालाक भी है । मगर हम सीमाएं तोडने के नाम से चालाकी मत करना । रजत भरोसा मुझ पर छोड दो और चलो चलते हैं सिंगरोली ज्योति के घर । अर्चना हाँ, जाना तो है मगर किससे जाएंगे । कार तो भैया ले गए हैं । रजत चलो अपनी कार से चलेंगे । फिर दोनों सिंगरौली के लिए रवाना हो गए । वहाँ जाने के बाद वो लोग ज्योति के घर गए । वहाँ जाने के बाद पता चला कि जो दिया वहाँ नहीं रहती है और वहाँ पर कोई दूसरा किरायेदार आ गया है । शायद ज्योति दूसरे शहर में चली गई । इस प्रकार जो टी से ना मिलने पर अर्चना और रजत का प्रसन्न मन कुछ उदास सा हो गया और दोनों अजय के घर की तरफ बढ गए । अजय के घर जाने के बाद घर में अजय के पापा ही मिले । बजे के पापा रजत को देखते ही बोले भरी बेटा रजत तुमने बहुत दिनों बाद याद किया है, वहाँ हूँ । अंदर आओ कहते हुए अजय के पापा स्वयं ही बैठक की और चल दिए । उनके पीछे पीछे रजत और अर्चना भी जाने लगे । अजय के पापा बोले, अगर में कुछ गलत नहीं कह रहा हूँ तो शायद यही अर्चना है । रजत बोला कहाँ अंकल, यही अर्चना है । रजत ने कहा कि अर्चना ये अजय के पापा है, जिनके बारे में मैंने तो में बताया था कि ये सभी प्रकार के संगीत का ज्ञान रखते हैं । अजय के पापा बोले, अच्छा बेटी, ये बताओ कि तुम क्या लोगी, ठंडा या गर्म अर्चना नहीं अंकल कुछ नहीं चाहिए । हम लोग कुछ जल्दी में है । अजय के पापा बोले अरे अभी तो बैठे ही हो । आने का कारण भी नहीं बताया है । बाहर जाने की बात कर रहे हो, लेकिन आज तो तुम लोगों को यहाँ पर रुकना ही पडेगा । मैं जाने नहीं दूंगा । रजत अच्छा अंकल ये बताइए कि अजय कहाँ है । हम लोग उसी से मिलने आए थे । अजय के पापा हसते हुए बोले मैं मिल गया तो शायद बात बिगड । गयी, इसीलिए जाने की बात कर रहे हो । क्यों? बेटी अर्चना नहीं अंकल ऐसी कोई बातें हैं । मगर हमलोग अजय के पास आए थे, उससे मिलना था । वैसे काम ज्योति से था, मगर ज्योति भी नहीं मिली । तो हम लोगों ने सोचा कि शायद अजय के घर होगी । यही सोच कर आए थे अजय के पापा बोले कि बेटा अजय ज्योति यहाँ पर नहीं है और वो लोग तो बम्बई चले गए हैं । तो मैं जाती समय फोन नहीं किया क्या? अजी तो बोल रहा था की जाती जाती कलकत्ता होते हुए जाएगा । तो मैं तो मालूम है कि मेरे जी की मेहनत रंग लाई है और उसे एक फिल्म निर्माता ने संगीत निर्देशक के रूप में अनुबंधित कर लिया । रजत हाँ अंकल मैं जानता था कि अजय बम्बई जाएगा और उसे किसी फिल्म में संगीतकार के रूप में अनुबंध किया गया है । मगर ज्योति दी जाएगी ये मालूम नहीं था । हाँ, बेटा मैंने भी मना किया की अभी ज्योति को मत ले जाओ मगर अजय मानने को तैयार नहीं था । बोला कि ज्योति रहेगी तो अच्छा लगेगा वहाँ पर सब लोग अजनबी होंगे वहाँ पर कुछ लोग मुझे जो थी और अजय के रिश्ते के बारे में भी पूछ रहे थे तो मेरे भी कुछ ज्यादा नहीं कहा । उन दोनों को छोडने मैं खुद ही गया था । वहाँ तो कुछ लोग बोल भी रहे हैं कि संगीत वाले कपूर ने अपने बेटे को इतनी छूट दे रखी है कि शादी से पहले किसी लडकी को साथ लेकर घूमने की इजाजत दे दी है । क्या करें? ये जमाना ऐसा ही है और फिर बेटा कुछ पाने के लिए कुछ खोना भी तो पडता है । अर्चना नहीं देखा की बातों बातों में वक्त निकला जा रहा है । वो बोली कि अच्छा अंकल अब हम लोग चलते हैं यह कहकर उठने लगी । फिर रजत की तरफ देखते हुए बोली चलिए और जगह भी तो जाना है । अजय के पापा बोले बेटी जबसे मैंने तुमको देखा है सुमन की याद आ रही है । वो भी दे रही तरह मुझे अंकल कहा करती थी । कभी कभी उसके बारे में सोचता हूँ तो खाने पीने का मन नहीं करता । सुमन कहाँ होगी? यही सोचकर मेरा दिल बैठा जाता है और ये सोचकर ही काम जाता है कि सुबह इस दुनिया में है भी या नहीं । तुम्हारे जाने के बाद अजय और ज्योति दोनों ने ही सुमन की तलाश की मगर सुमन का कहीं भी पता नहीं लगा और रजत मैं जब जब तुम को देखता हूँ, मुझे सुमन की याद आती है । आज तुम्हारे साथ साथ अर्चना को देखकर मुझे सुमन की और भी याद आ गई जिसे बोले बिना न रह सका । ये कहकर अजय के पापा ने अपना मूड फेल लिया । शायद उनके आंखों में आंसू भर आए थे । अजय के पापा की बातों को सुनकर और उनकी आंखों में सुमन के लिए आंसू देखकर रजत को बहुत दुःख हुआ और अर्चना भी रो पडी । तब बजे के पापा बोले की अर्चना तुम क्यों रो रही हो? बेटी क्या तुम सुमन को जानती हूँ? अर्चना बोली हाँ अंकल मैं सुमन को जानती हूँ । आपको भी जानकर खुशी होगी की सुमन इतनी बडी एवं बेरहम दुनिया में जिंदा है और अब वो अपने मंजिल के करीब है । अजय की पापा उत्सुकता से बोले क्या सुबह अपनी मंजिल के करीब है लेकिन तुम्हें कैसे पता? और जब तुम को सुमन के बारे में मालूम है तो ये भी मालूम होगा कि सुमन कहाँ है? विजय के साथ है या अकेली । सुमन के बारे में जानने की व्याकुलता को देखकर अर्चना बोली अंकल जी, अब सुमन के लिए फिक्र बिल्कुल ना करें । वो अभी बम्बई में हैं और भगवान की कृपा से अच्छी है । उसे किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं है । रही जानने के बाद तो बस इतना ही जान लीजिए कि रजत और अजय जिस तरह से एक दूसरे के दोस्त है उसी तरह सुमन से भी मेरी दोस्ती है । और विजय के बारे में बताते हुए मुझे अफसोस है कि विजय और सुमन अभी मिल नहीं पाए हैं । ये कहते हुए अर्चना और भी रो पडी और अपने आप को धिक्कार रही थी की अर्चना तू ही है सुमन और विजय के नौ मिलने का कारण और जुदाई का कारण फिर अर्चना अपने ही आपसे कहने लगी अर्चना । जब तो सुमन और विजय की जुदाई का कारण है तो तुझे मेलन भी कराना होगा । नहीं तो तेरी दोस्ती में एक ऐसा दाग लग जाएगा जिसे छुडाना नामुमकिन हो जाएगा । अर्चना न जाने और क्या क्या अपने आप को ही कोसती रही रजत चलो अर्चना चलते हैं । रजत की आवाज सुनते ही अर्चना कुर्सी से उठ खडी हुई और बोली चलो फिर अजय के पापा भी उन लोगों के चेहरे के भाव को पढते हुए रोकने सके और फिर दोनों चले गए । कार में बैठे बैठे अर्चना बोली, रजत तुम्हें मालूम है कि हमें कहाँ चलना है? रजत आश्चर्य से कहाँ? मुझे तो कुछ नहीं मालूम । अर्चना विजय के घर रजत में विजय को बता देना चाहती हूँ कि सुमन बम्बई में है ताकि विजय सुमन से मिल सकें । मेरा विकास भैया से मिलने को भी मन कर रहा है और मुझे विश्वास है कि विकास भैया विजय के घर में होंगे । अर्चना की बात रजत समझनी पाया । आज वो पहली बार विकास का नाम सुन रहा था । उसने कहा कि ये विकास कौन है? अर्चना तो मुझे कैसे जानती हूँ और विजय से विकास का क्या रिश्ता है? इतने सारे प्रश्न रजत ने एक ही सांस में कह डाले और अर्चना रजत की बात संकल् रो पडी और बोली रजत विकास मेरा भाई है सगा भाई मगर मुझे दुख है रजत की । मेरा भाई मुझ जैसी अभागन बहन को छोडकर विजय के साथ घर से निकल गया । रजत लेकिन अर्चना पापा तो कह रहे थे कि तुम लोग एक भाई और एक बहन हूँ । बस इसकी सेवाएं एक लडका और रहता है जिसे तीन साल की उम्र में तुम्हारे पापा लाए थे । उसके बारे में इतना ही बताया था कि वो लडका नौकरी पर कहीं रहता है । अर्चना बोली हाँ, रजत यही वो लडका है जिसका नाम विकास है । रजत विकास तो नौकरी पर गया है ना अर्जना इस बार अपने आप को रोकना सके और रोते हुए कहने लगे कि नहीं रजत ये सब झूठ हैं । विकास भैया नौकरी पर नहीं गए हैं, उसे माने घर से निकाल दिया और अभी भैया कहाँ है ये अभी कोई नहीं जानता । मगर मेरा दिल कहता है कि विकास भैया विजय के घर पर होंगे क्योंकि भैया और विजय में गहरी दोस्ती थी और जिस समय भैया घर से निकले गए उस समय विजय भी साथ में थे । ये कहकर अर्चना और विरोधी रही रजत अच्छा बच्चों की तरह होने से क्या होगा? जिंदगी में इन्सान को खुशी के साथ आंसुओं को भी अपनाना पडता है कि जिंदगी एक ऐसी चीज है जिसमें गम का दरिया, खुशी के सागर, जुदाई के जहर और मिलन रूपी अमृत होता है । अच्छा चलो हम लोग विजय के गांव ही चलते हैं । मैं उसके गांव को जानता हूँ । वहाँ जाकर किसी से भी विजय के घर को पूछ लेंगे । ये कहकर रजत अपनी कार को विजय के गांव की तरफ मोड लेता है । विजय की गांव पहुंचने के बाद रजत ने एक सज्जन से पूछा की विजय का घर कहाँ पर है । सज्जन ने बताया कि सामने जो बंगला दिख रहा है, जिसके सामने लॉन है वहीं चाहिए । वही विजय का घर है । उस सज्जन के बताए अनुसार रजत ने अपनी कहाँ स्टार्ट की और विजय के घर के सामने जाकर रुक गया । फिर गेट पर खडे आदमी से पूछने पर पता चला की विजय है । फिर रजत चौकीदार के द्वारा अपने आने का संदेश विजय तक पहुंचाया । थोडी ही देर बाद विजय दरवाजे के पास आया अर्चना को तथा उसके साथ एक युवक को देख कर शंका से भर गया । फिर आगे बढते हुए बोला नमस्ते अर्चना जी । अर्चना ने विजय को नमस्ते का जवाब दिया । फिर रजत की और देखते हुए बोली रजत ये है मिस्टर विजय । और फिर विजय को कहा कि विजय जी ये ही मेरे मंगेतर रजत परिचय जाने के बाद विजय को कुछ राहत मिली । उसने कहा कि अर्चना जी आइये घर में बैठ कर बातें करेंगे । ये कहकर विजय स्वयं बैठक की तरफ आ गया । उसके पीछे पीछे रजत और अर्चना भी आ गए । अर्चना विजय जी, विकास भैया कहाँ है हम लोग उन्हें से मिलने आए हैं । विजय ने हसते हुए कहा पहले तो अंदर आकर बैठे कुछ खा पी लो तो फिर बताऊंगा की विकास कहा है । अभी इतना ही जान लो कि विकास है । ये कहकर विजय अर्चना की व्याकुलता को देखने लगा और सब लोग बैठ गए तो विकास कोर्ट का बटन लगाते हुए बाहर आया और अर्चना के साथ एक युवक को देखा तो आश्चर्य से भर गया । वह खडा का खडा ही रह गया । तभी अर्चना विकास को देखकर कहने लगी भैया आप माँ को माफ कर दो और मेरे साथ घर चलो । विकास ने अर्चना के आंसुओं को पहुंचती हुए कहाँ धत पगली रोती क्यों है? तेरे भाई तो जिंदा है मरा नहीं है और लोग मरने पर होते हैं । ये कहकर विकास आपने रोमांस ए अर्चना के आंसुओं को पहुंचने लगा और रजत की तरफ इशारा करते हुए बोला अर्चना ये कौन है? अर्चना ये मेरे मंगेतर रजत है । भैया और भाई बहन के इस पार घाट प्रेम को देखकर रजत और विजय के आंखों में आंसू भर आए थे । ये देखकर विकास बोला हरी तुम लोगों को क्या हुआ? तुम लोग क्यों रो रही हो? विकास की बात सुनकर रजत कुछ हाथ बडा सा गया और बोला नहीं हम रोनी रहे हैं । ये तो आंखों में आंसू भर आए थे । अब इसमें हमारा क्या दोष है । रजत की बातों का समर्थन विकास भी करने लगा तो विजय ने कहा कि हमारी दोस्ती हैं । रजत को आई अभी पांच मिनट ही हुए हैं और मेरा दोस्त उसकी बातों का समर्थन करने लगा और मैं रह गया । अकेला विजय की बात सुनकर सभी हस पडे और उसी उसी के माहौल में विजय अपनी सीट छोडकर जाने लगा । तभी विकास ने कहा अरे विजय, तुम कहाँ जा रहे हो? विजय अब तुम लोग भाई बहन बहुत दिन बाद मिले हो । तुम लोग बातें करूं । मैं अभी आया ये कहकर नाश्ता बोलने के लिए चला गया । विजय के जाने के बाद विकास कुछ गंभीर स्वर में बोला अर्चना सुमन का कोई पता चला क्या? अर्चना हाँ भैया, हम लोग इसीलिए ही तो आए हैं कि आप से मुलाकात कर ले और सुमन की खबर भी बता दें । विकास आश्चर्य से तो क्या सुमन कलकत्ता में ही थी । अर्चना नहीं भैया सुमन कलकत्ता में नहीं बम्बई में है । ये कहते हुए सुमन जिस होटल में ठहरी थी उस होटल का फोन नंबर और पता निकालकर विकास की ओर बढा दिया । विकास लेकिन हम लोग तो अभी हाल ही में बंबई गए थे । कल ही तो वापस आए है और जिस होटल का तो बता दे रहे हो वहाँ भी गए थे । मगर हम लोगों को तो सुमन का कहीं पता नहीं मिला । विकास की बातों पर अर्चना को आश्चर्य हुआ । वो बोली नहीं बढिया में सुमन से मिलकर आ रही हूँ जो इसी होटल में ठहरी थी । ये कहकर अर्चना सामने रखे । फोन के और मुडी और सुमन को फोन करने लगी तो उस कमरे से किसी आदमी की आवाज आई । उसने कहा की यहाँ सुमन नाम की कोई लडकी नहीं रहती । इस रूम में मैं अकेला हूँ । विकास लोग सुन लिया ना कि सुमन वहाँ पर नहीं है परिवार हम लोग तो अभी पंद्रह दिन रुकने के बाद बम्बई से आ रहे हैं मगर बम्बई से जब सुमन का पता नहीं लगा तो हम लोग ये सोच कर आ गयी कि सुमन कलकत्ता में होगी । हमलोग कलकत्ता जाने वाले थे । अर्चना लेकिन भैया मैं तो सुमन से मिल कर आई हूँ । सुमन बम्बई में ही है । हाँ ऐसा हो सकता है कि होटल बदल लिया होगा । विकास अच्छा अर्चना अब रहने वाली बात छोडो और बताओ कि जब तुम सुमन से मिली तो सुमन भली चंगी थी ना और मुझे याद भी करती है कि नहीं हाँ भैया बल्कि आपकी कलकत्ता छोड देने वाली बात जानकर बहुत दुखी हुई । मैंने जो भी हुआ सब सच सच बता दिया । और हाँ विजय जी के बारे में भी कह रही थी विकास क्या कह रही थी विजय के बारे में यही की विजय ने मुझसे शादी क्यों नहीं की? और फिर जब मैंने बताया कि शादी से मैंने इंकार कर दिया फिर बाद में विजय जी का हालचाल पूछ रही थी । फिर मैंने बताया कि वो ठीक है । अर्चना कुछ और बोलने वाली ही भी तभी विकास अर्चना को इशारा करके रोक दिया क्योंकि विजय आ राधा और विजय सुमन की बातें अर्चना को कर दी । सुनकर जान जाएगा कि सुमन बम्बई में है और विजय जिसका जन्मदिन दूसरे ही दिन था, अपना जन्मदिन मनाना छोडकर सुमन की तलाश में बम्बई चला जाएगा । शायद इसीलिए विकास ने अर्चना को चुप रहने का इशारा किया था और अर्चना भी एकदम चुप हो गई । तभी विजय आगे आगे और पीछे पीछे नौकर ट्रे में नाश्ता लेकर आया । विजय सबको चुप देखकर बोला हरे तुम सब इतने खामोश क्यों हो? रजत हसते हुए हम सब इसीलिए चुप हैं क्योंकि हम आपसे नाराज है । विजय को आश्चर्य हुआ क्यों नाराज क्यूँ मुझे यदि कोई गलती हो गई हो तो मैं माफी चाहता हूँ । विजय के आश्चर्य पन को देखते हुए विकास बोला जनाब इतनी बडी गलती की है कि उसे माफ नहीं किया जा सकता । ये कहकर विकास की मुझसे हसी निकल गई । विकास को हस्ती देख विजय समझ गया कि ये सब लोग मिलकर उसको छेड रहे हैं । फिर भी रजत की और देखते हुए नाटक गाना अंदाज में बोला सर क्या मैं जान सकता हूँ की मुझसे क्या गलती हुई है । इस बार बिजी की एक्टिंग देखकर सब ढाका मार्गन हस पडी की ओर से पूरा कमरा गूंज गया । विजय अब हसी छोडो नाश्ता करो ये कहकर स्वयं भी बैठ गया और फिर जब लोग हल्के फुल्के मजाक के साथ नाश्ता करने लगे । विजय समूह का एक टुकडा मूह में ले जाते हुए रुक गया क्योंकि आज बार बार सुमन की याद फिर से सता रही थी और जैसे ही समूचा मु में डालने वाला था वो अपने आप को भूल गया और एक ऐसी दुनिया में खो गया जिसे कल्पना कहते हैं । विजय सुमन से कह रहा है कि सुमन तुम गायिका बन गई अपने हाथों से पकाकर कभी नाश्ता ही नहीं करती हो मगर आज तो हम तुम्हारे हाथों का बना हुआ समोसा खाकर ही रहेंगे । गोलू खिलाओगे ना सुमन देखो विजय तुम कहते हो तो मैं समोसा जरूर खिलाऊंगी मगर तो मेरी मेरी सहायता करनी होगी वरना स्टूडियो जाने में देर हो जाएगी । बोलो सहायता दोगे तो मैं बनाउंगी नहीं तो बसंती नौकरानी ही बनाएगी । विजय हसते हुए लोग कहते हैं कि इस तरी हट और बाल हट इन दोनों को कभी भी मनाया नहीं जा सकता । हर तुम मिस्त्री हो इसलिए तुमारी हट के सामने मैं भी हार गया और तुम्हारी जीत हुई । अब चलो रसोई घर में ये कहकर दोनों रसोई घर में चल दिए और समोसा बनाकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गए । सुमन लोना मेरी तरफ क्या देख रहे हो तो विजय छेडते हुए तो एक दिन समोसा क्या बनाया, खाने के लिए भी डांट लगाना चालू कर दिया । सुमन हसते हुए अच्छा में आज ही समोसा खाओ वरना देर हो जाएगी । ये कहकर सुमन समूह से को विजय के वो में डालने लगी । तभी विजय ने अपना मूवी लिया और कहने लगा पहले तुम खाओ फिर स्वयं अपने हाथ से सुमन को समोसा खिलाने लगा । सुमन नहीं तुम पहले गाओ । विजय अच्छा दोनों एक साथ खायेंगे । ये कहकर दोनों एक दूसरे को खिलाने लगे और फिर दोनों खस पडे । विजय को समोसा पकडकर कहीं खोया हुआ देखकर विकास समझ गया कि विजय सुमन की यादों में खो गया और फिर उसकी आंखों में आंसू भर आए । वह मन ही मन कहने लगा विजय तो कब तक यादव होता रहेगा । तभी रजत बोला विजय जी आप समोसा हाथ में लिए कहाँ हो गए? खाओ ना? रजत की बात सुनकर विजय को होश आया । उसी तब महसूस हुआ कि ये एक सुहाना पाल नहीं बल्कि एक सपना था । रजत को सुनते ही टूट गया । विजय देखा कि विकास की आंखों में आंसू भर आए हैं । अर्चना सिर झुकाए हुए बैठी थी और रजत चुपचाप विजय को ताक रहा था । विजय हरी तुम सब नाश्ता करना छोड कर क्या कर रहे हो? क्यों समोसा अच्छा नहीं लगा क्या? विजय की बात सुनकर रजत बोला नहीं ऐसी बात नहीं है । समोसा अच्छा बना है और हम लोगों ने खूब खाया दी है । मगर अब ये बचा हुआ समोसा मेरी बहन का है । जो भी यहाँ पर उपस् थित नहीं है मगर मुझे पूरा विश्वास है आज नहीं तो किसी दिन हम यारो के बीच में जरूर होगी । विजय रजत की बातों को समझ नहीं सका और बोला तो भारी कौनसी बहन है जिसके लिए ये समोसा तुम सब ने बचा दिया है । रजत कुछ गंभीर स्वर में बोला सुमन और चुप हो गया । विजय रजत के मुझे समन का नाम सुनकर आश्चर्य से भर गया और बोला आप तो सुमन को जानते हैं । रजत हूँ हाँ, अर्चना के द्वारा जानता हूँ और हम लोग इसीलिए आए है कि आपको सुमन के बारे में बता दे । रजत की बात सुन अगर विजय को कुछ राहत मिली और बिना उतावला हुए शांत स्वर में बोला तो अर्चना जी बताइए सुमन के बारे में क्या बताना चाहती है? अर्चना विजय के बुझे हुए स्वर्गों और उनकी बातों की गंभीरता को देखकर स्वयं भी कुछ उदासी हो गई और सोचने लगे कि वहाँ पर बेकार ही आई । तभी विजय फिर दोबारा बोला बोल इयन आर्चना जी, आप भी सुमन के बारे में क्या जानती है? अर्चना ने कहा कि विजय जी जब मैं आप के घर में आई तब तो सुमन के बारे में जानती थी । मगर अब नहीं जानती कि सुमन अभी कहा है विजय आपकी बातों को मैं समझा नहीं । अर्चना बोली सुमन से में बम्बई में मिल कर आई थी और उसके बाद आप के पास आई थी मगर विकास भैया ने बताया कि मैं सुमन से जिस होटल में मिली थी, उस होटल में आप लोग गए थे और वहाँ पर सुमन नहीं थी और ये बात भी तय है कि अभी अभी हमने उस होटल में फोन किया था परंतु वहाँ सुमन नहीं है । फिर भी अभी मैं यही कहूंगी कि सुमन बम्बई में ही है कि हो सकता है कि उसने होटल बदल दिया होगा । और अब मैं आप लोगों से भी यही कहूंगी कि अगर आप लोग सुमन की तलाश में कहीं जाना चाहते हो तो बम्बई ही जाओ कलकत्ता मत जाइए । विजय थोडी देर चुप रहा और फिर बोला जब आप सुमन से मिली थी तो सुमन ने क्या कहा? अर्चना हल्की फुल्की घर की बातों के बाद सुमन अपनी मंजिल के नजदीक होने का जिक्र करते हुए हूँ । वो बहुत खुश नजर आ रही थी । यहाँ आपसे बिछुडकर रहने का गहरा दुख है । इसके अलावा सुमन आपके और विकास भैया की दोस्ती से बहुत ही संतुष्टि थी और हम हम लोग सुमन के बारे में बताने के लिए ही यहाँ पर आए थे और विकास भैया से भी मिलने की इच्छा थी । इसीलिए विजय जी अब हमें आज्ञा दीजिए । हम लोगों को जाना है और साथ में विकास भैया को भी ले जाना चाहते हैं । ये कहकर अर्चना अपनी सीट छोडकर उठ गई । तब रजत भी उठ गया । तभी विजय की माँ अपने कमरे से निकलकर आते हुए बोली बेटी इतनी दूर से तो आए हूँ और अभी जा रही हूँ । हाँ, आज रात यही रुक जाओ । हम सुबह तुम लोगों को छोड देंगे । अर्चना विजय की माँ को नहीं जानती थी । फिर भी अपना समझकर देखकर बोली माफ कीजिए माजी, मैं आपको पहचान नहीं पा रही हूँ । विजय अर्चना ये मेरी माँ है और फिर माँ की तरफ देखते हुए बोला मैं ये अर्चना है विकास की बहन । तब विजय की माँ बोली मैं जानती हूँ बेटा, मैं तो अपने कमरे में बैठे बैठे ही तुम लोगों की बातों को सुन रही थी । तभी तो लोगों को जाते हुए जानकर रुकने के लिए कहने आई हूँ । विजय माठी कहती है, आप लोग रुक जाइए फिर सवेरे मैं और विकास भी बम्बई जाएंगे । साथ ही चलेंगे । रजत नहीं विजय हम लोगों को और मत रोकिए । रात होने पर सब घर में चिंता करेंगे इसीलिए हमें आज्ञा दीजिए । विजय अब आप लोग जाना ही चाहते हैं तो मैं कुछ नहीं कह सकता । अर्चना चलो भैया आपकी बैठे हो । विकास ने कहा नहीं और चुनाव तुम इस तरह से बोलकर मुझे शर्मिंदा ना करो । भाई बहन को लेने जाते हैं, बहन भाई को नहीं और फिर मैं यहाँ ठीक हूँ । तभी विजय की माँ बोली बेटी मेरे विजय का एक ही सहारा है विकास तो वैसे कहा ले जाओगी ये तो मेरा बेटा है । मैं अपने बेटे को जाने नहीं दूंगी । विजय की माँ की बात सुनकर अर्चना की खुशी का ठिकाना ना रहा और उसकी आंखों से खुशी के आंसू निकल पडे । फिर बोली, मां धन्ने है आप मेरे अभागे भाई को अपना बेटा मानती हो । मैं अपने विकास भैया को मैं ममता के बादल से हटाकर अब नफरत के सागर में नहीं ले जाना चाहती । ये कहकर अर्चना ने माँ को प्रणाम किया और बोली अच्छा! अब हम लोग चलते हैं । ये कहकर अर्चना और रजत जाने लगे । विजय, उसकी माँ और विकास भी उन्हें दरवाजे तक छोडने आए । रजत और अर्चना के जाने के दूसरे दिन ही विकास और विजय दोनों सुमन की तलाश में फिर बम्बई के लिए रवाना हो गए । ये दोनों इस समय अलग अलग रह कर के पूरा शहर छान मार लेने की बात सोचकर गए थे । इस प्रकार बम्बई में जाकर दोनों ही विकास और विजय अलग अलग हो गए और सुमन को तलाश करने लगे ।

तलाश भाग 8

आठवा भाग शायद जी की किस्मत अच्छी थी तभी तो से कम मेहनत में ही फिल्म में काम करने का अवसर मिला और उसके संगीत में गाए हुए गीत भी बहुत फिट हुए । इस प्रकार अजय ने फिल्मी दुनिया में अपना एक अच्छा संगीतकार के रूप में स्थान बना लिया और कई फिल्म निर्माता इस नए संगीतकार अजय को बडी जोर शोर से ले रहे थे । जब की सुबह अभी कोर्स गायिका ही थी, बजे कार खरीद ली है और अजय, ज्योति तथा सुमन तीनों जहाँ भी जाते हैं साथ ही जाते हैं । इस तरह एक दिन फिल्म निर्देशक ने जब अजय को संगीतकार के रूप में अनुबंध करने की बात कही तो अजय ने उनकी फिल्म में संगीत देने के लिए हाँ कह दी परन्तु उसने एक शर्त रखी कि उस फिल्म में महिला गायिका सुमन ही होनी चाहिए । निर्माता जी तुरंत तैयार हो गए क्योंकि वो एक नया निर्माता होने के कारण नए कलाकारों को भी लेना चाहता था और हिट गायिका के लिए डेट लेना साधारण बात नहीं थी और फिर अजय जैसे जोरों से उभरते संगीतकार भी उसकी फिल्म में संगीत देने को तैयार हो गए थे । इस प्रकार निर्माता जी ने अजय और सुमन को फिक्स कर दिया । फिर निर्माता जी चले गए । इसी दिन ज्योति और सुमन फिल्म निर्माता देवीदत्त जी को पहले ही आश्वासन कर दिए थे कि अपनी अगली फिल्म के लिए देखेंगे । और अब देवीदत्त जी ने अपनी अगली फिल्म की घोषणा भी कर दी थी । वहाँ की औपचारिकता निभाने के बाद सुमन बोली, अंकल जी, शायद आपको याद होगा कि आपको फिल्म की शूटिंग के दौरान मैं आपसी मिली थी । देवीदत्त जी बोले, हाँ याद है याद कैसे नहीं रहेगा भाई । जिस तरह तुम लोगों को निर्माता की तलाश होती है, उसी तरह हम लोगों को आप जैसे उत्सुक कलाकारों की तलाश रहती है । फर्क है तो बस इतना ही कि आप हमको तलाश करते करते थक जाते हैं । मगर हम लोग कभी नहीं सकते और फिर तलाश की सफलता के बाद और सफलता प्राप्त हो जाने पर आप कलाकार लोग निराश हो जाते हैं । मगर हमलोग का सफलता को ही सफलता की सीढी मानते हैं । वहाँ एक बात और है । मैं आपको साफ साफ बता देता हूँ कि नए कलाकारों को लेना बहुत ही जोखिम का काम होता है । इसीलिए मैं चाहता हूँ की रकम भी कुछ किफायती होनी चाहिए । सुमन बोली, अंकल जी या पैसे वाले मामले में बेफिक्र रहेंगे । मुझे भी पैसा नहीं कला प्रकट करने के लिए स्थान चाहिए । इस प्रकार देवीदत्त जी और सुमन दोनों एक ही बात चाहते थे तो बात बन गई और देवीदत्त जी सुमन को गायिका के लिए अनुबंध कर लिए और बोले सुमन मैं जब संगीतकार जी से डेट ले लूंगा तब तुमको फोन करूंगा । निर्माता जी की बात सुनकर और अपने को कोर्स गायिका से पाशर्व गायिका के रूप में पानी की बात से सुमन चहक उठी और हसी खुशी देवीदत्त जी की यहाँ से विदा लेकर ज्योति और सुबह भी अपने फ्लैट की और चल दिए । सुमन को देखकर ज्योति भी बहुत खुश थी और खुशी के कारण दोनों ही खामोश बैठी थी । तभी सुमन कुछ गंभीर स्वर में बोली मौसी आज मुझे अपनी मंजिल की अंतिम सीढी पर चढते हुए फिर से मांगी याद आ रही है । मेरी माँ भी इसी मंजिल के लिए कदम बढाना चाहती थी जिसपर मैं अभी कदम रखने जा रही हूँ । लेकिन मेरी माँ के पास इतनी हिम्मत नहीं थी कि जो इतनी बडी दुनिया में अकेले अपनी मंजिल की तलाश करें और दुनिया जिस राह पर चलने को कार्डो भरी राहत समझती है, उसे देखने और महसूस करने के लिए मैं निकल पडी थी । मैं घर में अपनी माँ की तस्वीर से आशीर्वाद मांग कर निकली थी और उनकी दबी हुई इच्छा जिसे उनके शरीर के साथ ही दफन कर दिया गया था और किसी भी इंसान के पास जो की अपनी इच्छा को नहीं दबा सकते हैं उसके पास मौत और बगावत के सेवाएं कोई तीसरा रास्ता नहीं होता तो मेरी माने भी मौत का रास्ता अपना करके अपने दिल के दुःख के साथ इंसाफ किया था । मैं समझती हूँ कि माँ की आत्मा को शांति दिलाने के लिए माँ और बाबूजी से बगावत की है, वो भी अपने दिल से इंसाफ करना ही था का शायद मेरी माँ होती तो हिम्मत और मेरी लगन को देखकर बहुत खुश होती है और अपनी मंजिल के समीप पाकर आज मेरी माँ मुझे अपने सीने से लगा ली थी । लेकिन अब मैं किसी का हूँ मौसी की आपकी बेटी गायिका बनने जा रही है । ज्योति समझाते हुए सुमन मेरी बच्ची खुशी के समय आंसू नहीं बहाया करते । बदली देख सुमन मुझे देख मेरी तो इंसान होना जिसका इस दुनिया में कोई नहीं न मान । अब आप फिर भी में बहुत खुश रहती हूँ । सुमन दुख और सुख ये तो जिंदगी का एक अंग है, जिसे जीवन से अलग नहीं किया जा सकता है । हर जो लोग गम पीकर हस्ती है उन्हें कभी रोना नहीं पडता । अब टैक्सी घर के पास आ गई है और स्वयं अपने आंसू पहुंचकर अपने रूमाल से सुमन के गालों पर आए । आंसू पहुंचने लगी । तभी टैक्सी फ्लैट के सामने आकर रुक गई और ज्योति सुमन उतर गई । ज्योति और सुमन अंदर गए तो देखा अजय मस्त बैठा सिगरेट खींच रहा था, उसे देखते है । छोटी बोली तो आप यहाँ मैं तो सोच रही थी कि आप स्टूडियो चले गए होंगे । अजय जाने वाला था मगर गया नहीं क्योंकि आज तुम लोगों से कुछ जरूरी बातें करनी है तो जल्दी ही कर डालिए क्या बातें करनी है । फिर हम भी आपको खुश खबरी बताएंगे । खुशखबरी अजय आश्चर्य से बोला तो ज्योति बोली हाँ संगीतकार जी खुश खबरी खुशखबरी है । सुमन कहकर ज्योति ने सुमन की तरफ देखा तो सुमन बस पीके मुस्कान से ही हाँ भर दी । फिर दोनों बैठ गए । तब ज्योति बोली कहाँ बताइए आप क्या बताना चाहते थे? अजय मैं बताना चाहता हूँ वह बहुत जल्दी ही साफ साफ बता रहा हूँ । ध्यान से सुनो फिर में दोबारा बताने वाला नहीं हूँ । ज्योति नाटकीय ढंग से बोली हाँ, आपसे दोबारा हम पूछेंगे नहीं तो बताने का सवाल ही नहीं उठता । अजय सुमन गायिका बनने जा रही है । सुमन यह तो हम लोगों को पहले से ही मालूम है । हम लोग भी तो आपको यही खुशखबरी बताने वाले थे । लेकिन आपको किसने बताया? अजय कमाल है । अरे वही मैंने तुम्हारे गाने के लिए डेढ दी है और मुझसे ही पूछते हो कि किसने बताया है बल्कि ये बताओ तुम्हें कैसे मालूम हुआ? ज्योति बडी अच्छी बात है । मैं सुमन देवीदत्त जी से बात करके आ रहे है और तुम हम से ही पूछती हूँ कि हमें कैसे मालूम है । अजय एकदम उत्सुकता के साथ बोला हाँ तो सुमन को एक साथ दो फिल्म मिल गई है । चलो अच्छा हुआ । फिर अचानक सुमन को देखते हुए बोला लेकिन ये ये सुमन दूर दूर रोनी सूरत बनाए बैठी हो । हम लोग अपनी धुन में बातें कर रहे हैं तो गायिका बनने जा रही हो तो मैं तो खुश होना चाहिए । अजय की बात सुनकर सुमन संभालते हुए बोली, खुशी में सभी लोग बातें ही करेंगे तो सुनेगा कौन? इसीलिए मैं सुन रही हूँ लेकिन हमें आप लोगों की जीवन भर कर्जदार होंगे । किसका कर्ज? ऐसा कर्ज तुम कैसी बातें कर रही हूँ । सुमन यही मौसी की आपने अपना मानकर मुझे आज तक जो प्यार दिया है जिसके लिए हर बेटी माफी तरफ होती है । ऊपर से मंजिल तक पहुंचाने में आप लोगों ने मेरा बहुत सहयोग किया है और आज आप लोगों ने मुझे मंजिल तक पहुंचा ही दिया । मुझे तो लगता है कि मैं आप के एहसानों के बदली जीवन भर सेवा करती रहूँ तो भी शायद कम है । ज्योति धत्त पगली कही की अपनों के द्वारा किए गए कार्य को एहसान से नहीं स्वीकारते । उसे अपना ही क्या हुआ का मानते हैं और तुम पर आई थोडी ही हो जिसमें एहसान की बात कर रही हूँ । बोले क्या तो मुझे अपना नहीं मानते? सुमन नहीं मौसी नहीं, मैं आपको पराया समझो । ये कभी हो सकता है । मैं आपको जब जब देखती हूँ आप मुझे एक ममता का सागर ही देखती है कि जिसका कोई अंतर रहे । अजय ने देखा कि ज्योति और सुमन की बातें जल्दी ही खत्म होने वाली नहीं है । वह उठते हुए बोला अच्छा तुम बातें करूं । मैं चला तुम लोग अपने पराए पर विवाद करो । अजय के जाने के बाद जो थी और सुमन अपने अपने कमरे में चले गए । आज सुमन के गीतों का रिकॉर्डिंग का दिन है और सुमन सु प्रसिद्ध नए संगीतकार अजय के संगीत निर्देशन में गीत गाने जा रही थी । इस प्रकार आज समर अपने मंजिल पर कदम रख रही थी और उसे विजय की बात याद आ रही थी जिसे विजय ने सुमन को याद दिलाते हुए कहा था कि सुमन तुम्हारी मेहनत और लगन जरूर रंग लाएगी । हर एक दिन तुम गायिका जरूर बनोगे और वही दिन मेरा सबसे ज्यादा खुशी का दिन होगा । विजय के कहे अनुसार सुमन की मेहनत जरूर रंग लाई थी मगर उसमें वो खुशी नहीं थी अर्थात अधिक खुशी जाहिर करने वाला विजय नहीं है । ये बात सुमन ज्योति से भी बोली थी कि मौसी आज विजय होता तो बात कुछ और ही होती है । तब ज्योतियों से समझाते हुए बोली अरे पगली विजय तो तेरी तलाश में है और तू है कि अपनी मंजिल की तलाश समाप्त हो जाने पर अर्थात मंजिल को पांच आने पर भी विजय को याद कर बैठी हैं । तेरह । यही फैसला थाना के विजय और मंजिल में मंजिल ज्यादा प्रधान है तो अब तो अपनी मंजिल पर पहुंच गई है तो ऐसा कर विजय को तो फोन कर और बता दे कि तो यहाँ है और आज तो एक गायिका बनने जा रही है । सुमन को ज्योति की बात जज गई । उसने विजय को फोन किया । तभी दूसरी तरफ से आवाजाही की विजय नहीं है । वो बम्बई गया है लेकिन बेटी तुम कौन हो ये तो बताओ । सुबह विजय की माँ की आवाज को पहचान गई और अपने लिए बेटी शब्द सुनकर सुमन को खुशी हुई । उसने कहा कि माँ में सुमन बोल रही हूँ । विजय बम्बई में कहाँ रुके होंगे? वहीं का फोन नंबर बता दीजिए तो विजय की माने सुमन को विजय का फोन नंबर बता दिया । फिर सुमन ने विजय जिस होटल में रुका था वहाँ पर फोन किया तो वहाँ विकास मिला । सुमन की आवाज सुनकर प्रसन्न मन से बोला सुमन तुम कहाँ हो, कहाँ से बोल रही हो तो मैं कैसे मालूम हुआ कि हमलोग यहाँ है । इस प्रकार विकास ने फोन पर धीरे सारे प्रश्न कर डाले । जब सुबह ने बताया कि वह बांद्रा बम्बई में अपनी परिचिता जोति और अजय के साथ रहती है । फिर सुमन विजय के बारे में पूछताछ करने लगी तो पता चला कि सुबह की तलाश में ही विजय कहीं पर गया है । फिर सुमन बोली कि भैया विजय के आते ही आप लोग जरूर आइयेगा आज से गायिका बनने जा रही हूँ । ये कहकर सुमन ने फोन रिसीवर पर रख दिया और मनी मन खुश होने लगे की विजय मुझे आज भी उतना ही प्यार करता है जितना कि पहले करता था । तभी तो उसकी तलाश में विजय बम्बई आया हुआ है । सुमन और अजय दोनों स्टूडियो गए । वहां पहुंचने पर उन लोगों ने देखा कि वहाँ पर गीतकार, निर्माता, निर्देशक सभी उपस् थित है । फिर अजय और सुमन दोनों दो बार रिहर्सल के बाद गीत रिकॉर्डिंग करने लगे । सुमन ने दो गाने अकेली ही गाए और तीन गाने पुराने गायब के साथ । इस प्रकार फिल्म के पूरे गाने एक ही दिन में रिकॉर्ड हो गए जो कि कुल पांच गए थे । इधर विकास सुमन का फोन सुनने के बाद बहुत ही घोषणा उसी इस बात की खुशी थी कि सुमन की तलाश में आई थी और सुमन मिल गई थी । विकास विजय का इंतजार करता हुआ एक घंटे तक बैठा रहा । जब विजय नहीं आया तो विकास विजय के नाम से खत लिखकर के छोड दिया और स्वयं टैक्सी में बैठ कर सुमन के बताए अनुसार फ्लैट पर चला गया । सुमन के बताए अनुसार उसके फ्लैट के सामने जाकर विकास, टैक्सी से उतर गया और नौकरी से पूछा कि सुमन है क्या? नौकर बोला नहीं, सुमन तो नहीं है । खाना मेम साहब है । ये कहकर नौकर मेम साहब को बुला लाया । ज्योति को देखकर विकास बोला मेरा नाम विकास है । मैं सुमन का भाई हूँ और समझ ही मिलने आया हो कि ज्योति खुश होकर बोली हो तो तुम ही विकास हो । जिसके बारे में सुमन हमेशा जिक्र किया कर दी थी । आओ बैठो विकास आज्ञा पाकर बैठ गया तो ज्योति बोली अब क्या लेंगे विकास वैसे सब चलता है परंतु चाहे हो तो अच्छा है । ये कहकर हस पडा और विकास अंदर से बहुत कश्मीर कश्मीर पडा था । कारण ये था कि विकास की ज्योति को देखा है । उसे लग रहा था जैसे वह पहले भी कहीं उसे देखा है । बहुत देर सूचने के बाद विकास कहने लगा शायद मैंने आपको कहीं देखा है जो थी लेकिन मैं तो आपको पहली बार देख रही हूँ । शायद वो दूसरी होगी जैसे आपने देखा है । खैर इन बातों को छोडिये । अभी तक आपने अपना नाम नहीं बताया तो ज्योति ने कहा कि उसका नाम ज्योति है । ज्योति नाम शंकर विकास को फिर लगा कि उस को जानता है । तभी उसको याद आया कि जो थी उसकी बहन का नाम था । जैसे वो अपनी माँ के स्वर्गवास होने के बाद बिझड गया था । ज्योति की शक्ल सूरत भी विकास को अपनी बहन जैसी ही लग रही थी । विजय को लगा कि आज उसकी खोई हुई बहन मिल गई और जो थी उसकी सगी बहन है । विकास माफ कीजिए । मैं जानना चाहता हूँ कि आप के मामा और पापा का क्या नाम है जो थी लेकिन आपको मेरे माँ बाप के नाम से क्या करना है? हाँ तो यहाँ सुमन से मिलने आए हो फिर मेरी तरफ कैसे उतर आए? विकास हाँ, वैसे तो मैं और सुमन से ही मिलने आया था परंतु आपका नाम और शक्लोसूरत देखकर मेरी बंदी शंकाएं उठ रही है । इसलिए मैंने आपसे माँ बाप का नाम पूछा था । ज्योति को आश्चर्य हुआ जी रखते हुए कहने लगी शंका कैसी शंका किसके प्रति किसलिए? ज्योति को परेशान होते देखकर विकास बोला क्या परेशान ना हो? दरअसल बात ये है कि जब मैं सात वर्ष का था तभी मेरी माँ इस दुनिया को छोडकर चली गई । पापा तो पहले ही हमें छोड चुके थे । उसके बाद मेरी माँ की चिता में आग लगाने के लिए जब मुझे ले जाया गया तो मैं रोता हुआ शहर के और आ गया । तभी एक सज्जन मुझे सडक पर होता हुआ देख कर लिए गए और उनके बच्चे होने के बावजूद भी मुझे अपने बेटे के समान रख लिया । लेकिन जिस वक्त बीमा महामारी का शिकार हुई थी उस समय सिर्फ मैं ही नहीं था । मुझे बडी एक बहन और थी जिसके साथ ही में रहता था । उसका नाम भी ज्योति था और आज आपको देखकर मुझे शंका हो रही है कि शायद आप ही मेरी बहन हूँ ज्योति लेकिन मेरे भाई का नाम कौशल था और आप अपना नाम विकास बता रहे हैं? विकास हाँ मैं ही कौशल हूँ परन्तु मेरा नाम मुझे पालने वालों ने विकास रख दिया और तब से मैं विकास हो गया । ये कहकर विकास पुरानी फोटो दिखाई जिसमें जो थी और उसकी बडी बोली बहन थी । तस्वीरें देखते ही जोति ने अपना छोटा रूप और अपनी बडी बहन को पहचान लिया और फिर फोटो को ही देखती रह गई । उसे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था । विकास क्यों होती तो मैं अब भी विश्वास नहीं आया कि तुम्हारे साथ बचपन के सात वर्ष गुजारे हुए हैं तो तुम्हारा भाई कौशल मैं ही हो । ज्योति के सामने विकास का छोटा रूप कौशल नजर आ रहा था जो हमेशा ही ज्योति के साथ स्कूल जाया करता था । कल का वह गौशाला जोति के सामने विकास के रूप में बैठा था । वो जाकर विकास के गालों पर चुंबन की बरसात कर देती है और कहती है विकास में तुझे बहुत देर बाद पहचान पाई हम दोनों आखिर एक ही घूम के दो कतरे हैं । कब तक दूर रहेंगे? आज मेरा खोया हुआ भाई मिल गया । मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे दोनों जहाँ मेरे सामने है मेरा भाई कौशल मैं तुम्हारा स्वागत किस तरह करूँ, मुझे समझ में नहीं आ रहा । इस प्रकार बीस वर्ष से बिछडे भाई और बहन मिल गए और तब मिले जब अपने अपने बुरे दिनों को काट चुके थे । आज विकास अपने पैरों पर खडा होने जा रहा है । एक सप्ताह के बाद वो अपनी ड्यूटी पर जाने वाला था और ज्योति ने भी बम्बई में एक मंदिर में अजय से शादी कर ली थी । दोनों भाई बहन यानि कि ज्योति और विकास दोनों ही मिलने पर अपने जीवन में हुए हादसों और खुशियों को एक दूसरे को बताने लगे । इसी प्रकार बातें चल रही थी कि फ्लैट के सामने का रुकने की आवाज आई तब ज्योति बोली अच्छा जाओ तुम उस कमरे में आराम करो । शायद अजीजी आ गए हैं । दरवाजे पर उनको लेने जा रही हूँ । सुमन और अजय दोनों कहाँ से उतर करा रहे थे? तब ज्योति बोली काॅर्पोरेशन सुमन सुमन किस बात की? ज्योति बोली जब तो यहाँ से गई थी तो सिर्फ सुमन थी, मगर तेरे साथ एक ड्राइव आ रही है तो बधाई नहीं होंगी । ज्योति की बात सुनकर सुमन और अजय दोनों ही हस पडे । अजय यहाँ तो बहुत खुश हो । कोई बात है गया । ज्योति ने कहा तो बिल्कुल ठीक समझे अजय आज मुझे बरसों से खोया हुआ भाई मिल गया । हर मुझे मेरे भाई से मिलने का श्रेय सुमन को है । सुमन ने आश्चर्य से कहा मेरे द्वारा आपका खोया हुआ भाई मिला । आप कैसी बातें कर रही है? ज्योति हाथ सुमन तुम्हारे द्वारा ही मेरा छोटा भाई कौशल आज विकास के रूप में मुझे मिला । सुमन विकास भैया आपके सगे भाई है मौसी मगर भैया है । कहा ज्योति मेहमान वाले कमरे में है । चलो में तुम लोगों को आज अपने भैया से मिलाती हूँ । ये कहकर ज्योति अजय को लेकर मेहमान वाले कमरे में चली गई । फिर ज्योति अजय का विकास से परिचय कराया । तो विकास बोला ज्योति दीदी, आप भी ऐसे परिचय करा रहे हो जैसे इन्हें कोई जानता नहीं । अरे भाई, इतने बडे संगीतकार को कौन नहीं जानेगा? अजय नहीं जी, मुझे संगीतकार मत बोलिए । मुझे जीजा जी बनने का शौक है । ज्योति अच्छा आप लोग बातें करो, मैं सुबह को बुलाकर लाती हो । ज्योति सुबह के पास आकर बोली सुमन विकास से मिलने नहीं चल होगी क्या? सुमन मिलने तो जाउंगी मौसी मगर मेरे समझ में नहीं आता है कि आपके भाई और मेरे विकास भैया का कैसे स्वागत करूँ । इसलिए चुप चाप बैठी हूँ । अच्छा चलते हैं भैया से मिलने को । मुझे भी आज बहुत खुशी है । भैया से मिलने वाली हो । इसीलिए ज्योति सुबह को लेकर मेहमान वाले कमरे में पहुंच गई और विकास भैया के सीने से लिपट कर रोने लगी । भैया आप इतने दिन तक कैसे रहे भैया मेरे कारण आपको बेघर होना पडा । इधर विजय सुमन की तलाश में निकला था परन्तु सुमन को लिए बिना ही होटल में आया तो विकास गायब था । फिर विजय सामने पडे खत को देखा । उसमें लिखा था कि विजय तुम सुमन के पास शीघ्र ही मिलने आना । मैं जा रहा हूँ और साथ ही सुबह के फ्लैट का पता छोड कर जा रहा हूँ । विजय खत को पढकर तुरंत सुमन के फ्लैट में चला आया और उत्सुकता के कारण चौकीदार को धक्का मारकर सुमन के फ्लैट में घुस गया । परंतु दूर से ही सुबह को विकास के सीने से लिपटे हुए देखकर भटक गया । फिर जाने क्या सोचा उसके मन में क्या आया की विजय वही से लौट गया । जाकर अपना सामान उठाया और अपने गांव चला गया । विकास सुबह मैं तो ठीक हो तो अपना बताया कि तेरी मंजिल अब तो उससे और कितनी दूर है । सुमन भैया, आप लोगों की कृपा से मैं तो मंजिल पर ही खडी हो । आप बताइए कि विजय कहाँ है? आप तो फोन पर बोल रही थी की साथी आएंगे विकास विजय अब ही रहा होगा । मैं एक खत्म छोडकर आया हूँ । इस प्रकार विकास, सुमन और अजय तथा जोति सभी विजय का इंतजार करने लगे परंतु विजय आकर लौट गया था । जब रात हो गई और विजय नहीं आया तो विकास होटल आ गया और आते ही उसे आश्चर्य हुआ की विजय अपने घर चला गया है । इस प्रकार विजय के जाने के बाद विकास भी गांव जाने को तैयार हो गया और रात की ट्रेन से ही चला गया ।

तलाश भाग 9

नवा भाग विकास के जाने के बाद सुमन ज्योति और अजय फिर विजय और विकास का इंतजार करते बैठे रहे । परंतु जब रात के दस बज गए तो सुमन ने होटल में फोन लगाया तो पता चला कि विकास और विजय दोनों ही होटल छोडकर आठ बजे से पहले ही चले गए हैं । ये सुनकर सुमन को आश्चर्य हुआ । उसने विजय के घर पर फोन लगाया तो दूसरी तरफ से विजय ने फोन उठाया । विजय यहाँ कौन हो? मैं विजय बोल रहा हूँ । सुमन विजय हमलोग तुम्हारा इंतजार कर रहे थे और तुम बिना मिले ही अपने गांव चले गए । विजय लेकिन तुम कौन हूँ? सुमन विजय तो शायद मुझ से दूर रहकर मेरी आवाज भी भूल गए हो । मैं सुमन हूँ विजय का दिल सुमन का नाम सुनते ही कॉल उठा । उसने कहा कि कौन? सुमन मैं किसी सुमन को नहीं जानता । मैं वही सुमन हूँ । विजय जिसकी तलाश में तुम लोग विकास के साथ बम्बई आए थे । विजय हाँ, मैं उस सुमन की तलाश कर रहा था जो एक साल पहले थे । मगर आज तो वो समझ नहीं हो और अब मुझे न किसी समय से मिलने की उत्सुकता है ना ही किसी सुमन के बारे में कुछ जानना है । ये कहकर विजय ने फोन रख दिया और सुमन आश्चर्य से भर कर विजय विजय चलाती ही रह गई । विजय सुमन से फोन पर बात कर के एकदम गुस्से से भर आया था और अपनी ही गलतफहमी के कारण सुमन को बेवफा के आग में जला रहा था । तभी वहां पर विकास आया और उसने कहा क्या यार विजय तुम कैसे हो? मैं सुमन के फ्लैट पर तुम्हारा इंतजार कर रहा था और तुम यहाँ पर बैठे हो । विकास का एक एक शब्द विजय को चुभ रहा था । उसे लग रहा था जैसे सुमन का नाम लेकर विकास विजय के निहत्थे शरीर पर वार कर रहा है । फिर भी अपने गुस्से को संभालते हुए अपने कमरे से उठकर चला जा रहा था । तभी विकास ने उसका हाथ पकडा और बोला विजय कहाँ जा रही हूँ अरे यार कुछ तो बोलो तुम्हारी खामोशी मुझे जला रही है । विजय मेरे यार बोलो तो मुझ से क्यों खफा हो? विजय बता मुझसे क्या गलती हो गई? मेरे यार मेरे दोस्त मुझे माफ कर दो यार मैं अपनी अनजान गलती की तो उससे माफी मांगता हूँ । विकास की बात सुनकर विजय पहले विकास को नफरत भरी निगाहों से देखता रहा और फिर कहने लगा, तुमने गलती नहीं की । विकाश मेरे साथ धोखा किया है । मुझे तुमने वो धोखा दिया है जिसका कोई विश्वास भी नहीं कर सकता । विकास विजय की बातों पर हैरान था । वो बोला धोखा और तुमसे विजय शायद तुम्हें गलतफहमी हो गई है । नहीं तो तुम स्वयं अपने दिल से पूछो विजय की क्या तुम्हारा विकास तुम्हें धोखा दे सकता है? विजय गुस्से से लाल पीला होकर बोला, विकास मुझे सुनने की आदत नहीं है और ना ही में सुनना चाहता हूँ और ना ही तुम जैसे धोखेबाज को में अपने यहाँ रखना चाहता हूँ तो निकल जाओ मेरे घर से मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं और शायद तुम को भी मेरी जरूरत नहीं रही । अब तुम्हारी हर कमी को पूरा करने वाली सुबह मिल गई है । विजय की बातों को सुनकर विकास को पहले तो ठिकानों पर विश्वास नहीं हुआ कि ये शब्द विजय बोल रहा है । फिर विकास विजय तुम कैसी बातें कर रहे हो? तुम्हारा दिमाग तो भी गए भारी बातें तो मेरी समझ से बाहर है । विजय आवेश में आ गया और कहने लगा विकास मैंने तुमको कहा की तो मेरे सामने से चले जाओ । तुम्हारा एक एक शब्द मुझ पर वार कर रहा है और मैं घायल होता जा रहा हूँ । जितनी बार तुमको नजर उठाकर देखता हूँ मुझे आघात पहुंचता जाता है और अब आज के बाद तो मेरे सामने मत आना और ना ही अपनी मीठी जुबान से कुछ समझाने की कोशिश करना वरना बढना क्या बोलू विजय आज तुमको सब बोलने की आजादी है मेरे लिए तुम्हारे अंदर जितना मैल है आज निकाल दो तुम्हारे कटु वचन सुनने के लिए तुम्हारा दोस्त हाजिर है फिर तुम्हारे यहाँ आए न आए और हाँ विजय आज के बाद अगर में दूसरी बार हमारे पास आउट तो तुम्हारी ये नजरे मुझसे नजर नहीं मिला सकेगी । विजय विकास में तुम जैसे आदमी से मिलना तो दूर दोबारा देखना भी नहीं चाहता हूँ । तुम धोखेबाज हो, दोस्त के नाम पर कलंक हो । तुम स्वार्थी हो । बीजी आगे और न जाने क्या क्या कहता कि विकास बीच में ही बोला विजय संभलकर बोलो । मैं बहुत देर से सुन रहा हूँ तो वो उल्टा सीधा बके जा रहे हो । अगर ये जुबान, तुम्हारी सेवाएं किसी और की होती तो अब तक जुबान खींच लेता । विजय कुछ उदास और गंभीर स्वर में बोला विकास तो में अपनी करनी का दोष स्वीकारने पर इतना गुस्सा आ गया की जुबान खींच लेने की बात कर रही हूँ जिसके दिल में आग लगी हूँ बेवफाई की वो अपने दिल की आग को कैसे भूल जाएगा । विकास ने कहा विजय तुम्हारी दिल में आग कैसी आप किसकी आग में तुम्हारा दोस्तो बजे तुम्हारी आग बुझाना सकू तो काम जरूर कर सकता हूँ । विकास के मुझसे दोस्ती का नाम सुनकर विजय बोला तो तुम्हारे दुखी की आग सुमन की बेवफाई क्या कुत्ते और पूछता है किस क्या कैसी आप अपने लिए? विजय के मुझसे कुत्ते शब्द को सुनकर विकास को गुस्सा आया और उसका हाथ पक्षियों के पर की तरफ फडफडाकर विजय के गाल में जागे रहा हूँ । मैं तुम्हें सबक सिखाकर ही रहूंगा । विजय को भी अपने गाल पर तमाचा पडने से बहुत गुस्सा आया । उसका हाथ भी विकास की तरफ बढ ही रहा था । तभी विजय की माँ दौडती हुई आई और विजय का हाथ पकडकर बोली विजय तुम्हें क्या कर रहे हो? विजय हाँ वही कर रहा हूँ जो बहुत पहले कर देना चाहिए था । माँ मुझे छोड दो मैं आज इस हरामजादे को सबक सिखाकर ही होगा । माँ किसी दिलजले आदमी पर हाथ उठाने का अंजाम क्या होता है? ये कहकर विजय अपनी माँ से अपने आपको छुडाने की कोशिश कर रहा था । तभी विकास बोला अच्छा विजय अलविदा । अगर जाते जाते फिर कहते जा रहा हूँ कि जो भी तुम समझ रहे हो वो गलत है और आज जो हुआ उसके लिए तो मैं बहुत ही पछताना पडेगा । विजय माँ के घेरे में फंसे हुए कहने लगा कुत्ते में तेरे तमाचे का बदला एक दिन लेकर ही रहूंगा और तुझे इस्तमाल जी के लिए बहुत पछताना पडेगा । सुमन फोन पर चलाती रहे परंतु जब उसका विजय पर कुछ असर नहीं हुआ तो सुबह एक अनजान भाई ऐसी काम कहीं और फोन रिसीवर पर रखकर पास लगे बिस्तर पर गिर गई और अपने हाथों से चेहरा छिपाकर होने लगी । वह मन ही मन कहने लगे विजय के यही तेरे सबसे ज्यादा खुशी के दिन है कि तुम मुझे छोड दो ताकि मैं लडती रहूँ । विजय मछली को मना नहीं था तो पानी से क्यों अलग? क्या उसे पानी में रहने देना था ताकि वह तालाब को अपना संजार समझकर जीती रहे । उसकी जिंदगी तो जलसे बाहर रहकर तडपने से अच्छी है । फिर सुमन अपनी किस्मत को दोष देने लगी और कहने लगे भगवान सब की किस्मत में खुशी और गम बराबर ही लिखना । मेरे सामान तिनके समान खुशी और सागर के समान गम किसी को मत देना । वैसे डूबते को तिनके का सहारा बहुत होता है । इसलिए मैं भी दिन की के समान खुशी में ही अपनी जिंदगी बिता होंगी । भगवान मेरे विजय को मुझसे छीन लिया तो कोई बात नहीं, मगर विजय की खुशी को अलग मत करना । वो जहाँ भी रहे, मगर खुशी उसके साथ हो । सुमन अकेले ही भगवान से विजय के लिए दुआ मांगते हुए रूपडी । तभी ज्योति आई और बोली, चलो सुमन खाना खायेंगे । अब तो अजय के साथ खाना है वरना तो बैठने तक को समय नहीं मिलता है और तुम्हारी भी फोड सकती । जिंदगी से ज्यादा दिन नहीं है । जो भी बोलते ही जा रही थी । परंतु सुमन ने कुछ नहीं बोला तो ज्योति सुमन के पास आकर बोली सुमन क्या तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है या विजय की याद आ रही है । पागल यादव से पेट नहीं भरता । चल चल कर भोजन कर ले हरी भाजी विजी आज नहीं आया तो कल आ जाएगा । ज्योति की बात सुनकर सुमन को और भी रोना आया और वह किस किया । भर्ती हुए बोली मौसी अगर विजय जीवन भर ना आए तो क्या करना चाहिए? ज्योति सुमन आज तो बिल्कुल पागल नजर आ रही है । रोड होकर अपनी आंखें लाल कर ली है । वही विजय आज नहीं आया तो इसका मतलब ये नहीं है कि जीवन भर नहीं आएगा तो क्या समझती हूँ यार इतना छिछला होता है कि दूर रहने पर बुलाया जा सकता है । हो सकता है कि विजय आज किसी काम में फस गया होगा । देखना कल जरूर आएगा और नहीं आएगा तो तुम चली जाना उसे मिलने बस चल खाना खाएंगे । ये कहकर ज्योति सुमन का हाथ पकडकर बिस्तर से उठाने लगी । सुमन हक कहती है, मौसी की मैं उनसे मिलने उनके घर चली जाऊँ । नगर विजय तो मेरा नाम तक सुनने को तैयार नहीं है । आज मैंने उसे फोन पर बात की तो वह घर पर ही मिला और कहने लगा कि वह किसी सुमन को नहीं जानता । ज्योति आश्चर्य से क्या बिजली तो में जाने से इंकार कर दिया लेकिन वजह क्या है? सुमन कल तक तो में पानी के लिए तलाश करने वाला विजय आज तो मैं जानने से इंकार क्यों कर रहा है? सुमन मैं भी तो यही जानना चाहती हूँ । मौसी ज्योति तो तो मेरी पता नहीं की विजय क्यों हवा है? सुमन हाँ मौसी मुझे कुछ मालूम नहीं है । सुबह की बात सुनकर ज्योति ने विजय के घर पर फोन किया तो दूसरी तरफ किसी वयस्क औरत की आवाज आई । जूती बोली, विजय घर पर है क्या? अनजानी आवाज सुनकर विजय की माँ बोली लेकिन आप कौन हैं? तब ज्योति ने अपना नाम बताया और थोडी देर बाद ही फोन विजय के हाथ में आ गया । उसने कहा हाँ होती थी इतने दिन बाद कैसे याद किया जो थी विजय । अगर तुम चाहो तो मैं सुमन के बारे में तुम से बात करना चाहती हूँ । सुमन का नाम सुनते ही विजय के तनबदन में आग लग गई और वो बोला माफ कीजिए, मैं भी बाहर जा रहा हूँ । मेरे पास बात करने के लिए समय नहीं है । विजय के इस बर्ताव से ज्योति को भी बहुत दुख पहुंचा मगर वह कर भी क्या सकती थी । फोन को रिसीवर पर रख दिया तो सुमन बोली क्या बोला मौसी इतनी जल्दी बातें कर ली । ज्योति ने बोझ हुए शब्दों में कहा सुमन विजय शायद वो विजय नहीं है जो तुम समझती हूँ और अब ये विजय तुम्हारा कभी नहीं हो सकेगा । वो तो तेरा नाम सुनते ही बात करने से इंकार कर रहा है । मतलब मेरी समझ से बाहर है की विजय के खफा होने का कारण क्या हो सकता है । ज्योति को आशा से अधिक उदास देखकर सुमन बोली छोडो मौसी मेरे साथ आप क्यों परेशान हो रही है? मेरी किस्मत में जो होगा इसमें हम और आप कुछ नहीं कर सकते । ज्योति वास्तव में सुमन तो में इंसान ही हो जो वक्त के साथ अपने आप को ढाल लेती हो । भगवान में तुझे सब कुछ दिया है । धीरज, साहस, मेहनत बस इन सबके अलावा जी आई की शैली भी तुम ही सीखनी चाहिए । मगर मुझे अफसोस है कि रब ने तो में खुशी नहीं दी । सुमन छोडो मौसी इन बातों को तीस गुड आपको मुझे नजर इसीलिए आता है कि आप मुझे अपना मानती हूँ । एक इंसान के दिल में जिसके प्रति अपना हुए है उसे उसकी अच्छाई ही दिखती है । गोराई नहीं अच्छा चलो खाना खा ले ये कहकर सुमन ज्योति के साथ अपने दिल पर पत्थर रखकर भोजन करने चली गई । इधर विकास विजय के घर से निकलकर जंगल की और बढता ही जा रहा था और फिर एक जंगल के संस्थान वातावरण में बैठ गया । उसके मन में बार बार यही प्रश्न उठ रहा था की विजय को सुमन के प्रति शक कब हुआ और क्यों हुआ जिससे विजय सुमन को बेवफा मानने लगा और मुझे इस क्रिकेट ठेकेदार आज विकास को आदमियों की भीड से पेडों की भीड अच्छी लग रही थी । आदमियों की भीड में शांति नहीं मिलती परंतु पेडों की भीड में शांति जरूर मिलती है । विकास अपने दिमाग पर जोर डालकर बार दार सोचता रहा मगर उसकी समझ में अभी तक ये नहीं आया कि विजय को सुमन और उसके प्रति शख् कब हुआ । फिर विकास विजय को छोडकर सुमन के बारे में सोचने लगा तू वो फिर एक बार अंदर तक का आप उठा सिर्फ इस भाई से की जब सुमन को इस बात का पता चलेगा की विजय वहम के सागर में डूब गया है और अब तो सुमन को वे वफा समझता है तो सुमन के ऊपर क्या गुजरेगी? विकास बार बार रब से यही दुआ मांगने लगा कि ये भगवान मेरी बहन को इतनी शक्ति देना कि वो इस आघात को सह सके और जब तक विजय का वहम दूर नहीं हो जाता तब तक अपनी बहन से मुझे दूर रहकर जीने की शक्ति दे । विकास सब सुमन के पास जाना नहीं चाहता था और उसने अपने आप से समझौता कर लिया था कि जब तक विजय सुमन को अपनाने को तैयार नहीं होगा या विजय बहन के सागर से निकल नहीं जाएगा तब तक वह सुमन की परछाई तक नहीं देखेगा और ना ही ज्योति से मिलेगा । यही सोचकर पहले दो चार दिन तक के लिए दिमाग ठीक करने के लिए अपना जाना पहचाना शहर कलकत्ता चला गया । विकास कलकत्ता जाकर दो दोस्तों से मिला । उन लोगों ने उसे आग्रह किया कि वह क्लब चले । इस प्रकार शाम को विकास दोस्तों के साथ क्लब गया तो कम से कम एक दो दिन के लिए विजय की बातों को भूल जाना चाहता था । मगर क्लब में जाने के बाद एक जानी पहचानी सूरत नजर आई । विकास ने देखा कि रजत शतरंज खेलने में मगन है तो उसने अपने दोस्त से कहा कि चलो यार, हमलोग घर चलते हैं । विकास रजत से नजर चुराकर भागना चाहता था । मगर हुआ कुछ यूं और रजत ने जानी पहचानी आवाज सुनी । नजर उठाकर देखा तो विकास था । रजत ने शतरंज खेलना छोड दिया और बोला विकासी किधर जा रहे हैं । रजत की आवाज सुनकर विकास पानी पानी हो गया । उसे मालूम था कि रजत सुमन के बारे में जरूर पूछेगा । विकास के चेहरे की शिकन को देखकर उनके दोस्त बोले, क्यों यार विकास ये लडका तुम्हारा दुश्मन है क्या? इतने डर क्यों रहे हो? विकास नहीं वो मेरे परिचित है । विकास बोल ही रहा था कि रजत उसके सामने आ गया और हाथ बढाते हुए बोला, कहिए क्या हाल चाल है विकास हाल चाल तो ठीक है मगर बाकी बाद में पूछना । ये कहकर विकास दोस्तों के साथ खेलने बैठ गया । करंट खेलने में उसका मन नहीं लग रहा था । खेल के बाद विकास ने दोस्तों से विदा ली और रजत के पास आकर बोला अच्छा चले रजत वो विकास जी, आपने तो कमाल कर दिया भी कुछ बातें हुई ही नहीं । बहुत जाने की बात करते हो । फिर विकास ने निर्णय लिया कि वह सब कुछ रजत को सच सच बता देगा । इस प्रकार विकास क्लब से दूरी गार्डन में जाकर सुमन की तलाश और सुमन की मंजिल की तलाश को खत्म होने से लेकर विजय की बहस तक की बात रजत को बता देता है । फिर तीन दिन तक जन्म भूमि के समान समझने वाला कलकत्ता शहर में रुककर पहले दिन की ड्यूटी के लिए दिल्ली चला गया । रजत जब अर्चना से मिला तो उसने सारी बात अर्चना को बता दी जिसको सुनकर अर्चना की दिल पर बहुत ठेस पहुंची और फिर सुमन की मंजिल प्राप्ति को सुनकर अर्चना को कुछ खुशी भी हुई । सारी बात बता देने के बाद रजत बोला, अर्चना, मुझे भगवान ने बहुत अच्छा समय दिया है । मैं इस समय को खोना नहीं चाहता । अर्चना को रजत की बातों पर आश्चर्य हुआ । कैसी बातें करते हो रही थी । बेचारी सुमन विजय से नफरत पाकर एकदम टूट गई होगी और तुम कहती हूँ कि भगवान ने अच्छा समय दिया है । रजत देखो, अर्चना जो हो गया सो हो गया । उसके प्रति दुख मनाने से कोई फायदा नहीं । मगर में अब चाहता हूँ कि हमलों कोई ऐसा तरीका अपनाए जैसे सुमन और विजय मिल जाए । और हम लोग ये सिद्ध कर दे के विकास और सुमन एक दूसरे को प्रेम जरूर करते हैं । मगर उन लोगों का प्रेम भाई बहन का है और इस काम को कर लेने के बाद समझो कि मैंने भूल से सुमन के साथ जो अन्याय किया था, उसका प्रायश्चित कर लिया । अर्चना उत्सुकता से तो फिर ऐसा उपाय सूची जिससे विजय बहन के सागर से निकलकर ये जान जाएगी । सुमन बेवफा नहीं वफा की मूरत है रजत मैंने उपाय सोच लिया है । बस में जो कहता हूँ वही करती जाओ । मुझे विश्वास है कि मुझे सफलता जरूर मिलेगी । अर्चना तो बताओ क्या तरीका सोचा है आपने? रजत ने कहा कि बस जो मैं कहता हूँ करती हूँ । इस प्रकार रजत और अर्चना सुमन तथा विजय को मिलने के लिए एक नाटक रचने लगे जो दुनिया के सामने हकीकत था । आज सुमन गुमसुम अपने कमरे में बैठी थी । तभी फोन की घंटी बजे सुमन ने भागकर फोन उठा लिया । को फोन देवीदत्त जी का था । उसने सुमन को कहा कि मैंने संगीतकार प्रसाद साहब से तारीख ले ली है और फिल्म के तीन गाने लिखी जा चुके हैं । इसीलिए मैं चाहता हूँ कि संगीतकार की डेट्स के अनुसार तुम कल महबूब स्टूडियो में पहुंचना । सुमन ने देवीदत्त को तुरंत वहाँ भर दी । दूसरे दिन सुमन और ज्योति दोनों महबूब स्टूडियो पहुंचे । वहाँ दो चार रिहर्सल के बाद तीन गीत रिकॉर्ड किये गए । उसके बाद सभी नाश्ते के लिए गए । सुमन आप चाहे तो आपकी फिल्म के लिए एक गाना लिखा है । दत्तजी सुमन की बात पर सहमत हो गए । इस प्रकार सुमन ने अपने ही लिखी गजल को बर्मन साहब के संगीत पर फिर से रिकॉर्ड किया जो इस प्रकार था । भले ही समझे तो मुझे वहाँ पर में भी वफा नहीं हूँ । चाहते हुए भी तुमको आज में तुम्हारी दिलरुबा नहीं हूँ तुम तो रह जाओगे चैन से पर हम को नहीं आएगा करार जब तक जियेंगे हम सनम करते रहेंगे तुम्हारा इंतजार काश भूल जाती तुमको पर मैं भूलने वाली खुदा नहीं हूँ चाहते हुए भी तुमको हाजमें तुम्हारी दिलरुबा नहीं हूँ छोटा सा है जहाँ और लम्बी है जिंदगी कभी तो मिल होगे जीतेजी नहीं तो मार घर ही सही कभी तो मिल होगे महत्व करूंगी इंतजार मरकर भी क्योंकि बेवफा नहीं हूँ चाहते हुए भी तुम को आज मैं तुम्हारी दिलरुबा नहीं हूँ पहले समझे तो मुझे बेवफा कल में बेवफा नहीं हूँ ऍम

तलाश भाग 10

दसवा भाग आज रजत विजय के घर पर बैठ कर विजय का इंतजार कर रहा था । विजय कहीं बाहर गया हुआ था । रजत इंतजार खत्म हुआ । विजय ने देखा हो रजत तुम यहाँ कहो भाई, हमें कैसे याद किया? अर्चना जी तो अच्छी है ना? रजत कुछ उदास स्वर में बोला कहाँ अर्चना का स्वास्थ्य तो अच्छा है । बहुत परेशान रहती है । विजय परेशान क्यों? उसे किसी चीज की परेशानी है तो उसके साथ रहती हूँ । फिर क्या परेशानी आ सकती है? रजत यही तो मुसीबत है । विजय अर्चना बस यही कहती है की मैं परेशान हो । रजत मुझसे तुम बात मत किया करो और मैं उससे परेशानी का कारण पूछता हूँ । तो बस इतना ही कहती है कि इल्जाम झूठा, इल्जाम झूठा । इसके आगे और कुछ नहीं बोलती और अब उसके कारण मैं भी परेशान रहने लगा हूँ । सोचा कि तुम्हारे पास जाकर कहीं घूमा जाए, जिससे कम से कम एक दो दिन तो परेशानी से छुट्टी मिले । रजत की बात सुनकर विजय बोला पहली बार भी हो या तुम्हारी जिंदगी उधर बीमार है और तुम यहाँ घूमने आए हो । खैर अब आ गए हो तो दिमाग ठीक करके ही जाना है । तुमको बहुत शानदार जंगल दिखाऊंगा जो यही पर है । हाँ, इस जंगल में रेललाइन भी दी गई है । रजत मन ही मन मुस्कुराते हुए हाँ विजय जी वही जाएंगे । इसी रात को घूमना अच्छा लगता है । इसलिए अच्छा होता है कि रात को ही घूमने के लिए जाते । रजत की बातों का समर्थन करते हुए विजय बोला पैसे जंगल में रात को घूमने का आनंद ही कुछ और आता है । रात को खाने के बाद रजत को मेहमान वाले कमरे में ठहराकर विजय रजत दुनिया थोडी देर आराम कर लो, फिर चलेंगे । विजय के जाने के बाद रजत ने देखा कि घर पूरी तरह नींद के आगोश में समा गया है । दीवार भी सोने लगी है । वो चुपके से घर से निकल गया और घर से थोडी ही दूर पर कार के पास चला गया । कार में अर्चना बैठी थी । रजत अर्चना आप तुम जल्दी जाऊ, जंगल के अंदर घुसा हूँ और जब हम लोगों को देखोगी तो पटरी पर दौडते रहना । ये कहकर रजत फिर चुपके से विजय के घर आ गया और लेट गया । तभी वहां विजय आया और कहने लगा रजत चलो अब चलते हैं । रात के ग्यारह बज रहे हैं । विजय की आवाज सुनकर रजत ने दरवाजा खोला और फिर सूट पहनने लगा । फिर दोनों पैदल ही जंगल की और चले गए । विजय और रजत दोनों जंगल में चले ही जा रहे थे । तभी विजय बोला रजत देखो वहाँ पर किसी की कार खडी है । शायद और भी लोग यहाँ सैर करने आए हैं । रजत विजय के कहने पर कार की और देखा और बोला तो ये तो अपने ही गाडी है, लेकिन मेरी गाडी यहाँ कैसे आई? ये कहकर रजत बनावटी घबराहट प्रकट करने लगा । विजय अनजान वहाँ से प्रेरित होकर रजत कहीं अर्चना अपनी परेशानी से छुटकारा पाने तो नहीं आई होगी? रजत लेकिन यहाँ उसे परेशानी से छुटकारा कैसे मिलेगा? विजय रजत इस जंगल से होती हुई एक रेललाइन गई हुई है । कहीं अर्चना वहाँ आत्महत्या करने तो नहीं आई है । अरे वो देखो रजत रेल आ रही है । देखो अर्चना भी परेशानी से दूर हटने के लिए कहीं दुनिया से ही दूर ना हो जाए । ये कहकर रजत और विजय दोनों ही रेललाइन की और चल दिए । उन्होंने देखा कि अर्चना गाडी की तरफ भागे जा रही थी । उसे देखकर रजत भी अर्चना अर्चना चलना था । हुआ उसके पीछे दौडने लगा और पांच जागर अर्चना को पकडकर रेललाइन के नीचे उतार लिया और गाडी वहाँ से गुजर गई । तब अर्चना रोने लगी । वो बोली कि रजत तुमने मुझे क्यों बचा लिया? रजत क्या तुम नहीं जाती कि मैं खुश रहूँ तो मुझे खुश देखना नहीं चाहती । रजत लेकिन तो में मरने में क्या खुशी है? अर्चना अर्चना परेशानी से दूर हो जाओंगे । रजत आखिर तुम्हारी परेशानी क्या है? मुझे बताओ शायद में दूर कर सकूँ । रजत की बात सुनकर अर्चना बोली रजत मेरी परेशानी विजय की सेवाएं कोई दूर नहीं कर सकता । तुम नहीं जानती । रजत विजय गलतफहमी का शिकार हो गया है और मेरी देवी जैसी बहन सुमन को बेवफा समझता है । मेरी विकास सामान भाई को धोखेबाज समझता है । विजय विकास और सुमन के भाई बहन जैसी प्रेम को कुछ और ही समझता है । ये सब मुझे से है, नहीं हो सकता । मैं सुमन को जुडाई का जहर और विकास भैया को शराब का जहर पीते हुए नहीं देख सकती और मेरे सामने मरने की सेवाएं कोई दूसरा रास्ता नहीं है । ये कहकर अर्चना रजत के आगोश से छूटने की कोशिश करती हुई फिर बोली जब किसी ने प्राणघातक वार करके मार दिया तो उसके चाहने वालों में जिंदा रहने की शक्ति नहीं रहती और वो लोग फिर आत्महत्या कर लेते हैं । उसी तरह आज में सुमन को जुदाई का जहर पीते हुए नहीं देख सकती तो इतना तो कर सकती हूँ कि सुमन को तडपते हुए न देख कर मैं मर जाऊं । ये कहकर अर्चना भागना चाहती थी, तभी विजय उसके सामने आकर उसे रोक लेता है । विजय रुको अर्चना विजय को देखकर अर्चना गुस्से से भराई बोली विजय तुम यहाँ क्यों आए हो और मुझे क्यों रोक रहे हो? रजत जिसकी मैं जिंदगी हूँ, उसके कहने पर नहीं रुक सकती तो तुमको होते हो रोकनेवाले अर्चना का एक एक शब्द विजय को बाढ के समान लग रहा था । तब फिर विजय संभालते हुए बोला अर्चना जी आज आपका सुमन के प्रति लगाव को देख कर और असलियत बात जानकर मुझे अपनी गलती का एहसास हो रहा है । आज मेरे कारण एक लडकी की हत्या हो जाती । मैं हत्यारा बन जाता है । अच्छा हुआ कि सहयोग से यहाँ पर हम लोग घूमने आ गए और मैं अब आपकी परेशानी को दूर करना चाहता हूँ और आज ही चलकर सुमन तथा विकास दोनों से माफी मांगना चाहता हूँ और आपसी भी अपनी गलती के लिए माफी चाहता हूँ । विजय के बदले हुए रूप को देखकर अर्चना बोली विजय जी सुबह का भूला हुआ आदमी अगर शाम को घर आ जाए तो उसे भूला भटका आदमी नहीं कहा जाता । चलिए आज रात गार्ड ने के बाद ही हम सब सुमन के पास बम्बई जाएंगे और आप की तलाश तथा सुमन की अपनी मंजिल की तलाश की सफलता मिलने पर सब मिलकर खुशी मनाएंगे । ये कहकर अर्चना रजत को तेजी नजर से देखते हुए नजरों से कहने लगी, रजत तुमने अपनी करनी का प्रायश्चित कर लिया है तो मैं अपने इस नाटक पर सफलता मिल गई । अब तुम सुमन के मुजरिम न रहे । वहाँ बाल गीतों में एक दिन सफल नाटक कार्बन सकते हो और रजत भी अपनी सफलता पर मंद मंद मुस्कुरा रहा था । सुमन और ज्योति दोनों ही अपने अपने में खोई हुई फ्लैट के सामने लॉन में बैठकर धूप सेक रहे थे । तभी सामने आकर कार रोकी । कार्य रुकते देख सुमन बोली, मौसी आज कौन आने वाला था जो दिए । आज तो किसी की भी आने की खबर नहीं थी । मौसी की बात सुनकर सुमन खडी हो गई और कार की तरफ जाने लगी कि वह खडी की खडी रह गई । कार से उतरकर अर्चना, रजत और विजय आ रहे थे । सब लोग फ्लैट की तरफ ही आ रहे थे । फिर भी सुमन पत्थर की मूरत बनकर खडी ही रही तो जो भी बोली खडी खडी क्या देख रही है । सुमन जांच अगर अपनी जिंदगी का स्वागत कर विजय ने ज्योति की बात को सुन लिया । उसने देखा कि ज्योति की बात का सुमन पर कुछ असर ना हुआ । वह सुमन के पास जाकर बोला सुमन, मैं तुम से माफी मांगने आया हूँ और अगर तुम चाहो तो अपनी तलाश खत्म कर गी, जीवन भर के लिए मेरे साथ आ सकती हो । वरना मुझे एक साल पहले वाली मुझे चाहने वाले सुमन की तलाश करते हुए जिंदगी बितानी पडेगी । विजय की जुबान से मिलने की बात सुनकर सुमन जैसे अपने आप को भूल गई थी तो हर विजय के सीने से लग गई और बोली विजय बोलो विजय मुझसे क्या गलती हुई थी जिसकी तुम इतनी बडी सजा दे रहे थे? विजय गलती तुमसे नहीं सुमन गलती तो मैंने की थी और उसका एहसास तब हुआ जब अर्चना को तुम पर मरते हुए देखा । तब विजय की बात सुनकर सुमन और साथ में जो टीवी हैरान हो गई फिर बोली विकास भैया कहा है ज्योति से विकास का नाम सुनकर विजय विकास को आप कैसे जानती है? ज्योति हसते हुए एक खून को दूसरे खून से पूछते होगी जी की कैसे जानती हूँ कि ज्योति की बात सुनकर विजय अत्यंत भावुक स्वर से आप क्या कह रही है? विकास आपका भाई है? सुमन हाँ, विकास भैया जो भी मौसी के सगे भाई है । लेकिन ये तो बताइए कि विकास भैया कहाँ है? विजय को जैसे सौ सौ तलवार एक साथ जिसमें में लगाते हुए महसूस हुई । वो भावुक स्वर में कहने लगा मुझे अफसोस से ज्योति जी की मैं अभी विकास के बारे में कुछ नहीं जानता । फिर विजय को विकास की वह बात याद आने लगी । विजय बहुत पचता होंगे । अभी तो बहन के सागर में डूबे हो । बार बार वही शब्द विजय के कानूनी गूंज रहे थे और वह सर्दी के दिनों में भी पानी पानी हो गया । विजय के चेहरे पर पसीना देखकर सुमन बोली विजय में क्या हो गया? सर्दी में पसीना मेरे विकास भैया तो ठीक है ना । रजत समझ गया कि विजय को आत्मग्लानि हो रही है और इसी कारण विजय पानी पानी हो गया है । वह बोला भी आपके भाई के बारे में सिर्फ विजय ही बताएंगे या हम भी बताएँ । विजय तो तुम्हे विकास के बारे में मालूम है । रजत तो रजत बोला हाँ विकास अपनी ड्यूटी पर दिल्ली में है । विजय अत्यंत भावुक होकर तो मैं कैसे मालूम? तो रजत बोला कि मुझे कहीं से भी मालूम हो पर इतना मालूम है कि विकास चांदनी चौक के बाजू वाले होटल में रुके हैं । रजत की बात सुनते ही विजय दौडते हुए कार के पास गया और गाडी स्टार्ट करके सीधा दिल्ली चला गया । सब लोग चिल्लाते ही रह गई कि विजय अभी मत जाओ । विजय के जाने के बाद सुमन ही सब क्या चक्कर है? अर्चना मेरे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है । तब फिर सुमन ज्योति को परेशान देखकर रजत ने कुछ भी छुपाना ठीक नहीं समझा और विजय की गलत फैमी से लेकर के विकास के घर से निकलने के बाद बता दी । रजत की बातों को सुनकर पहले तो सुमन को बहुत आश्चर्य हुआ । फिर हसने लगी और बोली, रजत जी आपने मेरे ऊपर कितना बडा एहसान किया है, जैसे मैं कभी नहीं भूल सकती । अर्चना सुमन के पास आगर उसके होठों पर उंगली रखते हुए बोली खींची सुमन ऐसी बातें नहीं करते । तुम जैसे एहसान समझ रही हूँ । ये रजत का प्रायश्चित है और अब रजत ये जानना चाहते हैं कि आपने उन्हें माफ किया या नहीं और माफ किया है तो ये बता दूँ कि फोर सद्कर्म मिलेगी और हम लोग शादी कब करेंगे? अर्चना की बात सुनकर आश्चर्य से सुमन बोली प्रायश्चित कैसा प्रायश्चित? किसका प्रायश्चित तो रजत बोला सुबह जी जख्मी तो जख्म भर जाने के बाद भूल जाता है परन्तु जख्म करने वाला कभी नहीं भूलता । मैंने आपके प्रति जो दुर्व्यवहार सिंगरोली में किया था, उसका प्रायश्चित करना चाहता था और मुझे मौका मिलते ही मैंने अपना काम भी कर लिया । मुझे बस इस बात की खुशी है कि आप मुझे माफ कर देंगी । रजत के मुझसे माफी वाली बात सुनकर ज्योति बोली देवर जी ये मेरा घर है, माफी मांगने का अड्डा नहीं । मैं देख रही हूँ आप लोग जब से आये हो माफी मांगनी का सिलसिला जारी है । ज्योति की बात सुनकर सब लोग हस पडे और ज्योति भी हंस पडी । तभी वहाँ पर बैठा नाश्ता लेकर आ गया और फिर सब लोग हल्की फुल्की बातचीत के साथ नाश्ता करने लगे । विजय सीधा चांदनी चौक के बाजू वाले होटल में गया और वहां विकास का कमरा नंबर पूछकर सीधा विकास के कमरे की और चला गया परन्तु दरवाजे पर जाकर ही वह भटक गया । विजय विकास को शराब पीता हुआ देखकर एकदम सहम गया । फिर विकास के पास रखी हुई बोतल को पकडकर जमीन पर पटकते हुए बोला विकास तो में क्या हो गया है ये तुम क्या कर रहे हो? मेरे दोस्त आज से तुम्हें जहर पीना छोड दो । विजय के मुझसे दोस्त शब्द सुनते ही विकास हसते हुए बोला क्या तुमने मुझे दोस्त कहा? अच्छा विजय समझ गया कि आज तुम क्यों आए हो ये भी जानता हूँ । इसीलिए आये हो ना कि मुझसे मीठी जुबान बोलकर उस दिन के थप्पड का बदला ले सको तो ले लो । बदला मुझे कोई ऐतराज नहीं लो । विजय तो मुझको मारूँ । मैं कुछ नहीं कहूंगा । विकास की बात सुनकर विजय को बहुत दुःख हुआ । उसने कहा कि विकास में तुम से बदला लेने नहीं बल्कि माफी मांगने आया हूँ । विकास तुमने कहा था ना कि मुझे अपनी गलती पर पछताना पडेगा और तब मैं तुमसे आंख नहीं मिला सकूंगा मेरे दोस्त इसीलिए आज मैं तो में बिना देखेगी अपनी गलती गा तो में धोखेबाज कहने का सुमन को बेवफा कहने का मैं तुम से माफी मांगता हूं । विकास अगर तो मुझे माफ नहीं करोगे तो मैं जहाँ से आया वहाँ जाने के लायक नहीं रहूंगा । विकास बहुत ही सरल और मेरी जुबान से बोला कहाँ से आ रहे हो । विजय विजय ने बताया कि मैं समय से मिलकर ज्योति जी की फ्लाइट से आ रहा हूँ और तुम को ले जाना चाहता हूँ । विकास खुश होकर तुम सुमन से मिल कर आ रहे हो? विजय हाँ विकास में सुमन से मिलकर आ रहा हूँ । वहाँ तो भारी तीनों बहने अर्चना, ज्योति और सुमन तुम्हारा इंतजार कर रही होगी । इसीलिए तो मेरे साथ अभी चलो । विजय के मुझसे तीन बहनों का नाम सुनकर विकास को खुशी हुई क्योंकि उसमें सुमन का नाम भी शामिल था और वह विजय से गले लग गया । बोला विजय मेरे दोस्त मुझे बहुत खुशी है कि आज तो हकीकत जान गया और जो इंसान बहन के सागर से डूब अगर फिर निकल जाता है उसके लिए माफी माफी होती है । हाँ, चलो बम्बई चलते हैं । बहुत दिन हो गए । अर्चना को भी नहीं देखा है । ये कहकर विकास स्वयं होटल का बिल चुकाने सर के पास चला गया । ऍम

तलाश भाग 11

ग्यारह भाग सुमन के संसार में अब खुशियाँ ही खुशियाँ थी । उसी मंजिल मिल गई थी, विजय मिल गया था और इतना ही नहीं बल्कि अब सुमन ने गायिका के रूप में अपना एक अच्छा स्थान भी बना लिया था । आज अर्चना और रजत के विभाग का दिल था । इस शादी में अन्य मेहमानों के अलावा विकास, विजय और सुमन भी शामिल हुए थे । ये सभी अर्चना के घर गए थे तथा जोति और अजय रजत के घर गए थे । रजत और अर्चना के मिलन की पहली रात को रजत के घर में पार्टी थी । पार्टी में मेहमान के अलावा अजय, ज्योति, सुमन, विजय और विकास भी आए थे और सुमन अर्चना की सगाई वाली चयन और अंगूठी भी लाई थी, जिसे अर्चना सुमन की बम्बई जाने पर सूटकेस में डालकर उसे दिया था । सुमन के उपहार को खोलकर देखते ही अर्चना के आंखों में आंसू भर आए थे । आंसू खुशी के थे । उसने कहा सुमन! आज तो मुझे इतना अमूल्य उपहार दोगी, इसका मुझे अहसास टकला था । सुमन उपहार कहा अर्चना! आज शुभ घडी में मैंने तुम्हें तुम्हारी अमानत जिसे सगाई में तो में रजत ने दिया था, लौटा रही हूँ । इतना कहकर सुमन की आंखों में भी आंसू छलक आए । अजय ने अब अपने लिए एक नया फ्लैट खरीद लिया था । वहां राजेश और सुमन निर्माता जी के आग्रह पर उसी फ्लैट में रहने लगे जहाँ पहले ज्योति के साथ सुमन रहती थी ।

तलाश भाग 12

दारवा भाग सुमन और विजय दोनों सवेरे अखबार पढते हुए चाय पी रहे थे । तभी माली दौडते हुए आया और कहने लगा कि अजय जी आ रहे हैं । माली की बात सुनकर सुमन बोली क्या अजय जी बिना सूचना दिए आ रहे हैं? और वो भी सुबह सुबह लगता है कोई विशेष बात है । तभी वहां पर ज्योति और अजय के पापा भी पहुंच गए । उन्हें देखकर विजय ने कहा आइए बैठे कहीं सुबह कैसे आना हुआ? अजय विजय जी और बैठने को कहते हैं तो बैठ जाते हैं परन्तु अभी बैठने का वक्त नहीं है । मैं सुमन जी से कुछ बातें करने आया हूँ । विजय हसते हुए अजय जी आप गीत संगीत के बाद छोडकर बाहर क्या बात करेंगे? वहीं कहोगे ना कि अमुक निर्माता सुमन को लेना चाहता है वो अपना दे दे दिए हैं । विजय की बात सुनकर अजीबाे हस पडा और बोला नहीं भाई, वो बात नहीं है ये तो मैं फोन पर भी कह सकता था । बात ये है कि पापा सिंगरोली से आए हैं क्योंकि वहाँ की सब लोग जान गए है की उभरती गायिका सुमन सिंगरोली में पहले रहती थी और इसीलिए सिंगरौली के सब लोग सुमन को देखने के लिए उत्सुक है । और सुमन को अपने क्षेत्र में बुलाना चाहते हैं । वैसे मुझे भी आमंत्रित किया गया है और अपनी जन्मभूमि पर एक रात के लिए जरूर जाऊंगा । अजय की बात सुनते ही सुमन की खुशी का ठिकाना ना रहा और अजय को छेडते हुए बोली अजेरी समझ पाता भी कहेंगे तो कपूर अंकल क्यों आए हैं? सुमन को एकदम चंचल देखकर अजय के पापा बोले, मुझे तो लगता था कि शायद तुम हंसी का मुखी नहीं देखता होंगे तो आज तुम इतनी बडी गायिका हूँ । ये जानकर मुझे खुशी बहुत है और तुम गायिका बनने के बाद भी आपने कपूर अंकल को नहीं भूली । सुमन बोली उन अंकल को भूल जाऊँ ये तो आप ही की सब कृपा है । अंकल मैं जो कुछ भी हो उस पर आप का बहुत बडा हाथ है । मेरे सबसे पहले संगीत गुरु तो आप ही है । अजय को भी मौका मिल गया छेडने का । विजय जी मैंने इसी कारण आते ही कहा था कि जल्दी जाना है । मुझे मालूम था कि सुमन बात करने लगी तो फेरों से एक घंटा लगता है । हाँ ये बताओ सुमन की आज तुम्हारी रिकॉर्डिंग तो नहीं है और फुल हो तो मैं चलता हूँ या आज ही हम लोग सिंगरोली चले । सुमन मोह बनाते हुए बोली हाँ, मैं तो बतंगड हूँ, बहुत बात करती हूँ । ज्योति हो सुमन, तुम तो बात का बतंगड बना रही हो । तुम तो ऐसे मुंह फुलाकर बैठ गई हो जैसे दो साल की बच्ची हो । अजय जी के प्रश्न का जवाब जल्दी दो सुमन फिर बनावटी बघारते हुए बोली हाँ जी में आज फुर्सत में हूँ, इसीलिए सिंगरौली जाने की तैयारी करें । सुमन को नाटक के ढंग से बोलते हुए देखकर सब एक साथ कहाँ का मार्कर हस पडे । फिर विजय ने कहा देखो राजेश जी की सुमन कितनी अच्छी एक्टिंग कर लेती है । सुबह तो बिल्कुल एक्ट्रेस लग रही थी की गायिका नहीं । फिर विजय सुमन, अजय जूती और अजय के पापा! सब लोग उसी दिन सिंगरोली को रवाना हो गए । हजारों दर्शकों के बीच सुमन और अजय को अपना प्रोग्राम देना था । दोनों स्टेज पर खडे थे । स्टेज के चारों और पुलिस का पहरा था और इस प्रकार दर्शकों की इच्छा के अनुसार सुमन अपनी ही लिखी हुई गजल जिसे विजय से दूर होने पर लिखा था और देवीदत्त जी की फिल्म के लिए जिसे गाया था वो गजल सब लोगों ने बहुत पसंद की और इसी गजल के कारण सुबह का नाम हर श्रोतागण में आने लगा था । उसी गजल को आज सुमन पेश करने जा रही थी । सभी दर्शकों के बीच हंगामा हो गया और लोग साफ साफ चलाते हुए अपना अपना स्थान छोडकर भाग रहे थे । ये देखकर सुमन ने अपना प्रोग्राम बंद कर दिया और स्टेट से उतरकर साफ काटते हुए व्यक्ति के पास गई । सुमन साहब काटी व्यक्ति को देखते ही चला उठी बाबू जी आपको ये क्या हो गया बाबू जी फिर देखा माँ को भी साहब काट चुका था । फिर सुमन ने अपने बाबू जी के पैर के ऊपर अपना दुपट्टा बालदिया और मुझसे ही साहब के काटे हुए स्थान का खून चूस चूसकर फेंकने लगे । इस प्रकार सुमन ने अपने बाबूजी को तो बचा लिया परंतु अपनी माँ को न बचा सके । फिर वो एकदम से बेहोश होकर गिर पडी । सारे दर्शकों के बीच हलचल मच गई थी । हजारों की संख्या में लोग अस्पताल के सामने खडे होकर सुमन की जिंदगी के लिए दुआ मांग रहे थे तभी डॉक्टर आए । डॉक्टर को देखकर सभी जनता ने डॉक्टर को घेर लिया और सुमन के बारे में पूछने लगे । तब डॉक्टर ने बताया कि सुमन को साहब के जहर का कुछ असर नहीं पडा है और वह पूर्ण रूप से स्वस्थ है । फिर डॉक्टर उदास बैठी विजय के पास जाकर बोले, काॅल्स विजय । डॉक्टर की बात सुनकर विजय और उसके साथ बैठे अजी और ज्योति हर बढा गए । बहुत बोले डॉक्टर आप क्या कह रहे हैं? सुमन कैसी है? डॉक्टर बोले की सुनना बिल्कुल ठीक है और आप लोग उनसे मिल सकते हैं । और हाँ, सुमन की बेहोशी का कारण था उसका माँ बनना । इसीलिए तो बधाई दे रहा हूँ । ये कहकर डॉक्टर चला गया और विजय और ज्योति तथा अजय सब लोगों ने एक साथ कमरे में प्रवेश किया और बोले देखिए तो इधर कौन आए हैं? सुमन विजय और उन लोगों को देखकर एकदम से बिस्तर से उठ गई और हसने ही वाली थी कि वह शर्मा गई । तब जो भी बोली इसमें शर्माने की क्या बात है? ये तो प्रकृति की देन है । जब सब लोग एक साथ थे तभी सब लोगों ने ज्योति के जीवन के बारे में जानने की इच्छा प्रकट की । तब ज्योति अपनी सारी जिंदगी के बारे में माँ के बडने से लेकर अब तक की पूरी कहानी उसने बता दी । जिसे सुनकर सुमन के बाबू जी ज्योति को घूरकर देखने लगे । तब सुमन बोली क्यों बाबूजी मौसी को इस तरह घूरकर क्यों देख रहे हैं? सुमन के बाबू जी बोले मैं सोच रहा हूँ सुमन की इंसान अपने रिश्तों से दूर रहकर भी पहचान जाते हैं और देख रहा हूँ । सुमन की कल की छोटी ज्योति आज भी वैसी ही है जैसे पहले थी । उसकी सूरत में थोडा भी फर्क नहीं आया है । ज्योति आश्चर्य से बोली मतलब आपने मुझे पहले भी कहीं देखा है । सुमन के बाबू जी बोले ज्योति! तुम्हारी बडी बहन की इच्छा को दबाकर उसकी जान लेने वाला मुजरिम तुम्हारा अभागा जीजा जी मैं ही हूँ । ज्योति उत्सुकता से बोली तो क्या सुमन मेरी दीदी की निशानी है? ये कहकर ज्योति सुमन को गले से लगा लेती हैं और बोली जीजा जी, आप मेरी देते कि हत्यारे नहीं है । मेरी सुमन के जन्मदाता है आपको आज गर्व होना चाहिए जीजाजी की आप एक गायिका के पापा है । जीजा जी, अब दीदी के जाने का गम छोडकर सुमन के आगमन का स्वागत करो । फिर प्रोग्राम कैंसिल करके । विजय सुमन के पापा और अजय तथा जोति सब विजय की गांव गए और वहाँ से विजय के पापा को लेकर सब लोग बम्बई चले गए और बस अपने अपने काम में मस्त हो गए । आज विजय के घर पार्टी थी । बहुत सारे मेहमानों के अलावा दो छह फिल्म अभिनेता, अभिनेत्री, निर्माता, निर्देशक भी थे । तो विजय ने कहा मैं ये पार्टी नए फ्लैट खरीदने के कारण दे रहा हूँ और साथ ही मैं अपनी फिल्म का नाम भी पहलान कर देना चाहता हूँ और मेरी फिल्म की स्टोरी हकीकत होगी । इसमें सुमन और मेरे जीवन की कहानी रहेगी । इस फिल्म का नाम होगा तलाश, क्योंकि आज तक हम लोगों का जीवन तलाश में ही बीता है । मैं सुमन की तलाश करता रहा और सुमन अपनी मंजिल की । इस प्रकार ऐलान करने के बाद तीसरे दिन ही विजय ने अपनी फिल्में तलाश की शूटिंग प्रारंभ कर दी जिसके अभिनेता थे विकास और अभिनेत्री नहीं थी और इस फिल्म तलाश के गीत सुमन ने लिखे तथा संगीत अजय का था ।

share-icon

00:00
00:00