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Transcript

भाग - 1.01

आप सुन रहे हैं कोई ऍम कहानी का नाम डाल से बिछडे जिसे लिखा है रमेश गुप्ता ने और मैं हूँ आॅल सुनी जो मनचाही भारतीय जिंदगी भी कितनी रहस्यमई पहेली है इसके अर्थ ढूंढने की प्रक्रिया में इंसान कहाँ से कहाँ भटक जाता है । अपनी अजनबी बन जाते हैं और अजनबी प्रीत का नाता जोड लेते हैं । घुटन भरे माहौल से तंग होकर मैं बाहर लॉन में आ गई । उमस से भरी सुबह और चिट्ठी के पसीने से मुक्ति पाने के लिए मैं बाहर आई थी । पर घर वालों के साथ जैसे हवा ने भी अपना गुण बदल लिया था । तेज हवा के बावजूद पसीना सूखी नहीं रहा था । पिछले कितने दिनों से भयंकर गर्मी पड रही हैं । भीतहा शालू चल रही है । मैंने आपके लिए चाय का प्याला बना लिया था । मम्मी पापा या दीपक को तो मेरे साथ चाय तीन ही नहीं थी । छोटी सी में इस पर चाय का थैला रखकर में आराम वाली कुर्सी पर बैठ गई । अखबार आ गया था । मुझे समाचार में कोई खास रुचि नहीं थी । वीएस मान युद्ध में हनोई पर बमबारी हो रही है या श्रीमती इंदिरा गांधी प्रयाग पहुंच गए हैं कि चंबल के डाकुओं ने आत्मसमर्पण कर दिया है । इस सब से मुझे क्या लेना देना । बाहरी दुनिया की सारी गतिविधियां मेरे अंतर में मौजूद थी । मैं भी तो निर्जन गली के छोड पर पहुंच चुकी थी । मैंने भी तो किसी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था । मेरे ऊपर भी तो घरवालों ने क्रोध और घृणा की बमबारी की थी । मेरी जिंदगी भी तो वियतनाम की जमीन की तरह ध्वस्त और रक्तरंजित हो रही थी । मैंने दूसरा प्रश्न खोला । कम से कम चार सौ वैवाहिक विज्ञापन रहे होंगे । मैं एक के बाद एक विज्ञापन पडती रही । कुछ तो इतने विचित्र थे कि उन्हें पढकर में हसीना रोपाई एक विज्ञापन को पढकर मैं रुक गई । उसने जैसे मुझे बांध लिया, मैं आगे नहीं बढ पाई । लगभग तीस वर्षीय एक पंजाबी नवयुवक के लिए एक सुंदर सुशील संस्कृत गए । कार्य में दक्ष लडकी की आवश्यकता है । लडका लंदन में रहता है । उसकी मासिक आएँ लगभग आठ हजार रुपये हैं । विवाह के बाद लडकी खुल लंडन जाना होगा । जांच पार दहेज आदि का कोई बंधन नहीं । नवीनतम फोटो के साथ शीघ्र ही पोस्ट बैग नंबर से संपर्क करें हीरामन जैसे बन गया इस विज्ञापन को पढकर क्या मम्मी पापा का ध्यान नहीं सुराक्षित करना चाहिए । पल भर को में सोच में पड गई । क्या होगा इससे? उन्होंने तो भूल साल तक बंद कर रखी है । फिर वो क्यों कुछ करने लगी? इस दिशा में न करें तो फिर पत्र लिखूंगी । जब ऐसा स्वर्ण अवसर मिल रहा है तो ऐसे क्यों हूँ? मैंने प्याला उठाया और चाय के दो घुट सडक ली । इस सुखद कल प्लानी जैसी मेरे मन में सप्तरंगी रंगोली रह चुकी इंग्लैंड क्या ये सपना साकार हो सकता है? नहीं सोच में डूब गई । कॉलेज में हमारे प्रॉफेसर थी जो हाथ की रेखाएं देखने में सिद्धस्त थे । एक दिन कैसेट एरिया में उन्होंने मेरा हाथ देखकर और बातों के अलावा ये भी बताया था कि मैं इस रीना शर्मा तुम्हारी रेखाएं तुम्हें विदेश प्रवास करा रही हैं । तब तो इसे किसी विदेश सेवा अधिकारी से प्रेम शुरू कर देना चाहिए । पांच ही खडी तरंग अहलुवालिया ने मजाक किया था । मैं उस भविष्यवाणी को सुनकर खुश हो गई थी । अभी तीन वर्ष पहले की तो बात है । पापा ने एक जगह मेरी शादी की बात चलाई भी । लोग पुराने ख्यालों के थे । वो मेरी और लडकी की जन्मपत्री मिलाना चाहती थी । पापा के पास मेरी जन्म कब की थी? उन्होंने जन्मपत्री उनके पास भेजने से पहले उसे अपने मित्र संकटा प्रसाद त्रिवेदी को दिखाया था । त्रिवेदी जी ने जन्म पत्री का गहन अध्ययन कर की घोषणा की थी । शर्मा जी इस लडकी के ग्रह बडे बडे हैं । ये मंगली है । इसके विवाह में बडी अडचनें आएंगी । पर इसके जीवन में सात समंदर पार जाने का योग है । हाथ की रेखा है जन्म । पति के ग्रहों में मुझे तनिक भी विश्वास नहीं था । पर कुछ भी हो मेरी तन मैं तो एक सुखद ऐसा सपना पालने लगा था । नहीं, भारत से कहीं दूर चली जाती और आज ही विज्ञापन मेरे सामने पड गया है । युवक सर, पत्र पत्रिकाएं ऐसे विज्ञापनों से भरी रहती हैं पर न जाने क्यों इस विज्ञापन ने मुझे बांध लिया है । इंग्लैंड जाना होगा कितनी मदर कल्पना है लोगों से सुना है कि वहाँ का जीवन कितना सुखी और ऐश्वर्यपूर्ण है । सुन्दर जलवायु, सारी भौतिक सुख सुविधाएं, पैसा ही पैसा ना वहाँ बेरोजगारी है और न ही गरीबी, न अधिकारी हैं और न ही जादूगर । विज्ञान के क्षेत्र में पाश्चात्य देशों ने इतनी तरक्की की है और एक अपना भारत है । पिछडा हुआ भुखमरी, गरीबी और बेरोजगारी की कैंसर से पीडित यहाँ मक्खी मच्छर और साफ है । वहाँ लडकी की शादी आराम से हो जाती है और यहाँ शादी योग्य लडकी धक्के खाती करती है, वहाँ ध्वनि की गति से ज्यादा तेज चलने वाले यान बन गए हैं । और यहाँ अभी भी ऊट गाडी और बैलगाडी चलती है तो वहाँ की चीजे देखो कितनी खूबसूरत और बढिया होती है । हर भारत में सब चोर है और तू और वहाँ इंसान की जिंदगी की कीमत है और यहाँ इंसान किए मुकदमों की तरह मर जाता है और कोई शोक मनाने वाला भी नहीं मिलता । कुछ दिन पहले शेखर से ही बातें हो रही थी । तभी मैंने कहा था शेखर ये भी कोई देश है जहां व्यर्थ में अकारण ही असम की मर जाते हैं, यहाँ लूट चलती है तो सैकडों आदमी मर जाते हैं । यहाँ शीतलहर आती है तो आदमी मरता है । हर मौसम में आदमी मरता है । मौसम ना हो तो विषैली शराब पीकर आदमी मारता है । शायद पसंद का मौसम ही ऐसा है जिसमें उसमें भी आदमी मारते है । रीना शेखर नहीं मेरी बात को बीच में ही काट दिया क्योंकि मैंने पूछा मुख्य से इस मौसम में लोगों की दिल टूटते हैं इसलिए मारते हैं नहीं सिर्फ मुस्करा दी थी । शेखर ने तो सिर्फ मजाक किया था पर उसकी बात में काफी दुखद सच्चाई खेलती थी पास चार के देशों के व्यक्तियों के जीवन में सच्चाई है, ईमानदारी है, विश्वास है और हमारे देश में धोखा, छलावा, दोहरा व्यवहार । मैंने चाय पी डाली और एक तक खाली क्या की ओर देख के नहीं । यही तो मुक्त जैसी असम की भारतीय लडकियों की जीवन का प्रति खाली प्याला शिक्षा समाप्त कर ली । शिक्षा समाप्त कर लो । बाईस किस वर्ष की आयु हो जाए? फिर नौकरी या विवाह क्या फिर दोनों पर इस देश में दोनों तो क्या एक भी नहीं मिलता । बस माँ बाप की जिंदगी पर साहब की तरह कुंडली मारकर बोझ बानी बैठी हूँ । दो वर्ष से घर पर एकदम बेकार बैठी हूँ । बी । ए कर लिया था । उसके बाद पापा ने आगे बढाने से इनकार कर दिया । कहने लगी ज्यादा पड जाएगी तो उतना ही शिक्षित लडका तलाश करने में दिक्कत होगी । शायद वो ठीक ही थी । बी । ए । पास किए हुए पांच वर्ष हो चुके थे । इन पांच वर्षों से पापा बराबर मेरे लिए किसी योग्य लडके की तलाश में जुटे थे । पिछले दो वर्षों से मैं भी एक तलाश में जुटी थी । घर पर बैठे बैठे भीषण अंतहीन रूप से मुक्ति पाने के लिए नहीं कहीं नौकरी करना चाहती थी । समय भी करता । कुछ पैसे भी जमा हो जाती तो विवाह के समय काम आ जाती है । न जाने कितनी जगह आवेदन पत्र भेजे । कितनी जगह परीक्षाएं दी । शाक शात कार के लिए गई । कितना ही पैसा आवेदन पत्रों के साथ तीस जमा करने में खर्च हो गया । फिर भी नौकरी नहीं मिली । पापा ने भी अपनी तलाश में कोई कोर कसर नहीं उठा रखी । ना जाने कितना पैसा खर्च किया उन्होंने दौड रूप में पर काम बना ही नहीं । जो लडका ने पसंद आता वो विवाह के लिए राजी नहीं होता । जो लडका मुझे पसंद कर लेता, उसे पापा पसंद नहीं करते । इस कांच मिचोली, लुका छिपी और तलाश के खेल का कोई परिणाम निकल ही नहीं रहा था । मैं वहीं थी जहाँ से सबको शुरू होता है । आपने अपनी व्यथा के मूलभूत कारणों के विषय में सोचती थी । शायद मैंने उन्हें खोज भी निकाला था । हम लोग मध्यमवर्गीय हैं पापा । केन्द्रीय सरकार में दलित पापा केन्द्रीय सरकार में गजेटेड पद पर हैं । मध्यवर्गी परिवार को जितनी सुख सुविधाएं प्राप्त होती हैं कि सब हमें प्राप्त हैं । मम्मी पापा ने मेरे भावी पति के विषय में जो भी कल्पना की थी, वो हमारे मध्यमवर्गी स्वर से मेल नहीं खाती थी । मम्मी पापा की कल्पना का लडका शिक्षित होना चाहिए था । अच्छी नौकरी, शरीफ खानदान और उसके पास फ्रेंड्स, फोन, टीवी, नौकर चाकर आदि सारी सुविधाएँ होनी चाहिए । ऐसा लडका कहाँ से मिलेगा कि यदि मिलेगा भी तो उस से टक्कर लेने की पापा में सामर्थ है क्या? व्यापार में जितनी पूंजी लगाओ उतना ही लाभ होता है । पर जिसके पास पूंजी नहीं, व्यापार क्या करेगा और जो व्यापार नहीं कर सकता उसे लाभ कहाँ से होगा? किसी छोटे मोटे लडके, साधारण रूप से शिक्षित लडके, क्लर्क आदि से मेरा विवाह करने का प्रश्न ही नहीं उठता था । पूछे उडने की शक्ति नहीं, पृथ्वी पर उतरने से प्रतिष्ठा को धक्का लगता है । बस अधर में असहाय से लटके थे पापा । मैंने उनकी पीडा को काफी गहराई में जानकर देखा था । उनकी रातों की नींद गायब हो गई थी । वो इस समय ही बूढे हो चले थे । काले वालों के बीच सबसे तार चमकते लगे थे । उनकी भूख प्यास कम हो गई थी । अक्सर मम्मी से सलाह मशवरा करते और फिर ठंडी या घर कर कहते हैं इस लडकी नी तो नाक में दम कर दिया है । समझ में नहीं आता क्या करुँ । तब मुझे एक अपराध भावना का चोट जाती हैं । मुझे लगता है मैं अप्रत्यक्ष रूप से पापा को सजा दे रही हूँ । मैं भी क्या करती? बहुत सोचने विचारने के बाद मैंने जो कुछ क्या उसका क्या परिणाम निकला, मैं अपने ही घर में अजनबी हो गई । शायद सब लोग उठ गए थे । उन्होंने अंदर ही चाय पी ली थी । दीपक बाहर आया तो फिर मम्मी पापा की तरम उससे बहुत कम बोलता है । बिना कुछ पूछे ताजी कहीं सुनी उसने मेरे सामने पडा हुआ बार उठा लिया । मुझे मालूम है दीपक को सुबह एक पहला चाय पीने और अखबार पडने का नशा है पर मुझे भी क्रोध आ गया । ना जाने क्यों महीने अखबार का एक छोड पकड लिया और तेज स्वर में बोली देख नहीं रहे । मैं एक बार पढ रही हूँ, पढ रही हो या उसकी पूजा कर रही हो । दीपक की स्वर्ग की शिक्षा और कर्कशता से मैं तिलमिला गई । महीने अखबार को अपनी ओर घसीटते हुए कहा पहले मैं पढ लो उसके बाद तुम ले जाना । पापा मंगा रहे हैं । दीपक की स्वर में उदासीनता की नहीं जानती थी । दीपक छूट बोल रहा है अखबार की पापा को नहीं दीपक को जरूरत है । वो आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रहा था । सामान्य ज्ञान के प्रश्न के लिए वो अखबार को खूब अच्छी तरह पडता था । उसमें से कुछ महत्वपूर्ण बातें अपनी डायरी में भी नोट कर लेता था । मेरा क्षणिका अब एक शांत हो गया । मैंने अखबार को छोड दिया पर लोग पढकर मुझे वापस कर देना और नहीं तो क्या बैंक के लॉकर में बंद कराऊंगा । दीपर मैं मर्माहत हो । कुकडेश्वर में बोली कहीं दीपक तो मेरे भाई होना । हाँ बदकिस्मती से हूँ । कहीं आखिर मेरा कसूर क्या है? तुम लोगों ने मुझे इस तरह देशनिकाला क्यों दे दिया है तो अभी तक आपको इस बात का भी ऐसा नहीं । अपनी समस्या तो मैंने कोई अपराध नहीं किया । पापा की नाक कटवा दी । हम लोगों की प्रतिष्ठा को धूल में मिला दिया और कहती हूँ कहकर दीपक ने अखबार को एक झटके से खेल लिया और अंदर चला गया । कहकर दीपक ने अखबार एक झटके से खेल किया और अंदर चला गया । मैं सकपकाई सी मौन बैठी रही । क्या सच मुझे मैंने कोई अपराध किया था । वास्तव में पापा की प्रतिष्ठा धूल में मिल गई थी । मैंने लीक से हटकर कुछ किया था पर उस से मेरी तीन दुर्दशा होगी इसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी । मैंने लीक से हटकर कुछ किया था । परसों मैं इतनी दुर्दशा होगी, इसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी । मैं अतीत की गलियों में भटक गई । दूसरी मंजिल पर अपने कमरे तक जाती जाती । मेरी टांग का मेरी टांगे मेरी टांग काम रही । कमरे में पहुंचकर शेखर ने अपनी अट ए जी कोने में पडी मेज पर रख दी । फिर मेरे सीधे हाथ को अपने दोनों हाथों में कसकर पकडकर वह अनुराग भरे स्वर में बोला नहीं ना, मुझे बडा अच्छा लग रहा था । शेखर के संपर्क में मैंने हमेशा सुरक्षित महसूस किया था । पहनना जाने क्यों होटल के मैनेजर की शन से भरी निगाहों और मेरे अंतर्मन भर्ती शोर अपराध की भावना ने मुझे सहमा रखा था । क्या नहीं निकाला करते? खुश नहीं हो रही है । फिर फिर तो काम कर रही हो तो तुम्हारा हाथ मिर्जी सा होकर क्यों सीख रहा है? नहीं छुट रही कमरे में डबल बेड देकर मेरा हृदय कम गया । अच्छे ज्ञानी सी हुआई ये मैंने क्या किया? ठंडी हवा चल रही थी । खिडकी से बाहर झांकने की जरूरत नहीं थी । जहाँ मैं बैठी थी वहीं से मुझे नैनीताल की प्याली । इनमें झील दिखाई दे रही थी । घबरा क्यों नहीं हो रही ना? कुछ नहीं । शेखर मैंने अपने अंतर को झुठलाने का असफल प्रयास किया । मैं बाहर जाकर थोडा सा नाश्ता ले आता हूँ तब तक तुम तैयार हो जाओ । फिर हम लोग वोटिंग के लिए चलेंगे । कहकर शेखर उठ खडा हुआ । मैं उद्विग्न इसी बैठी रही । शेखर के बंधन से मुक्त होते ही है तो फिर वह बीस से होने लगी । शेखर बाहर चला गया । जहन में जाओ नैनीताल लाने की क्या जरूरत थी वहीं भेजे थे । पटाने ही शादी के बाद और तीन इतनी झगडालू की हो जाती हैं । पता नहीं विवाह के बाद पुरुष का प्रेम कहाँ चला जाता है? मैं चौकी की नारी पुरुष पर एकदम बराबर की कमरे से आ रही थी । स्पष्ट था कि पडोस की कमरे में कोई दंपत्ति आपस में झगड रही थी । मेरा मन वितृष्णा से भर गया । अपने नाते रिश्तेदारों और परिवार हितों का इतना बडा दायरा है की दस में से आठ विवाहों का यही हाल देखा । हर तौर बडी बहन की शादी आगरा में हुई है । उसका वैवाहिक जीवन भी सुखी नहीं । आठ वर्ष के वैवाहिक जीवन में चार बच्चों की मां बनाकर जीजा जी एकदम उदासी हो गए । दूर क्यों जायें? घर पर ही मैंने सुखी वैवाहिक जीवन की शवयात्रा निकलते देखी है । पापा और मम्मी के शुष्क व्यापारिक तथा औपचारिक संबंधों को देखकर अक्सर मुझे परेशानी हुई थी । यही सोच कर तो मैंने ये रास्ता चुना था पर पता नहीं मैंने ठीक किया था । हमने गलत रास्ते पर आगे बढ गई थी । हम नहीं चाहते की हमारा विवाह दिया, सफल रहे देना । एक भी शेखर ने ऐसा कहा था । शेखर मेरा क्लास था बी ए में हम दोनों साथ साथ थे । फाइनल करते करते हम दोनों को लगा हम दोनों एक दूसरे को चाहते हैं । पर हमारे अंदर इतनी परिपक्वता चुकी थी कि हम प्रेम के अंतिम लक्ष्य के विषय में पूरी तरह जागरूक थे । इसीलिए शेखर ने ये बातें से कहीं थी । मैंने काफी गंभीरतापूर्वक शेखर की बात का सुना नहीं उस से पूरी तरह सहमत हूँ । मैंने उसका अनुमोदन करते हुए कहा हाँ शिखर मैं भी यही चाहती हूँ । मैं विवाह करने के बाद एक नौकरानियां आया या सिर्फ खाना बनाने वाली महाराज इन या बच्चे उत्पन्न करने वाली मशीन नहीं बनना चाहती हूँ । मैं चाहती हूँ विवाह के पश्चात हम दोनों सुखी नहीं । सह अस्तित्व और आपसी सम्मान पर हमारे संबंध आधारित हो । पर इसके लिए क्या किया जाए? तुम सोचो क्यों न विवाह का प्रयोग किया जाए । तुम्हारा मतलब ट्राई मेरी से हैं था वो किस संभव होगा इसमें क्या मुश्किल है? हम दोनों दस पंद्रह दिन के लिए कहीं बाहर हिल स्टेशन पर चलते हैं । वहाँ पति पति की तरह रहेंगे । यदि हम इस परीक्षण में सफल रहे तो शादी पर की अन्य था । पर शेखर मेरा इस तरह के लिए बाहर जाना इससे क्या दिक्कत है? थोडा सा झूठ बोलना पडेगा । मम्मी से कहना कॉलेज की लडकियों का टूर नैनीताल जा रहा है । तुम भी उसमें शामिल होना चाहती हूँ । बस मुझे योजना पसंद आई । इतने बडे क्रांतिकारी प्रयोग के लिए इतने छोटे से झूठ को बोला कोई बुरी बात नहीं थी । कर मेरे मन में कुछ और शंकाएं भी थी । मैंने कहा पर शेखर अगर पोलकी गए तो क्या होगा? होना गया है । हमारी सामाजिक और पारिवारिक मान्यताएं और संपूर्ण आचार संहिता इस प्रकार के प्रयोग की आज्ञा नहीं देते । यदि किसी को पता चल गया तो मेरा जीवन नष्ट हो जाएगा तो व्यर्थ में ही घबरा रही । हो रही ना जीवन भर की व्यथा और विनाश से तो ये अच्छा है कि शेखर मैंने उस की बात बीच नहीं कर दी और बोली पता नहीं क्यों मेरा दिल घबरा रहा है । रीना इस क्षेत्र में क्रांति की आवश्यकता है । हम पचास पैसे की आलू खरीदते हैं तो खूब अच्छी तरह से देखभाल के पर जीवन भर के बंधन में बनने के लिए आंखे मूदकर तैयार हो जाते हैं । नहीं मिला परिवर्तन का विरोध करना मानव की प्रकृति है ।

भाग - 1.02

पर जो पहला युगांतकारी कदम उठाते हैं, वही मसीहा बनती हैं । ने सहमत हो गई । मेरे झूठ कम कर गया । मैं शेखर के साथ ने निकाला गई । चार नंबर कट गए तुम्हारे रीना शेखर तीस सारी खाने की चीजे लेकर लौट आया था । उसकी स्वर में उल्लास था । मैं समझी नहीं । मैंने शेखर की तरफ उलझन भरी निगाहों से देखते हुए पूछा । इन पंद्रह दिनों में हम दोनों के पास सौ सौ नंबर है । हमें एक दूसरे को उसके आचरण पर नंबर देंगे । गलत आचरण करने पर नंबर कट जाएंगे । अच्छे आचरण करने पर नंबर जुड जाएंगे । अंत में सारे नंबरों का जोड बाकी हो जाएगा और उससे पार से खेल का फैसला हो जाएगा । तो इस समय मेरे नंबर कैसे कट गए? मैंने मुस्कुराते हुए पूछा मैं आपसे तैयार होने को कह गया था, पर आप क्यों कि क्यों बैठी हैं? इसका मतलब है कि विवाह के बाद यदि कल ही पिक्चर का कार्यक्रम बनेगा तो आप घंटों लगाएंगी । तैयार होने में हर मैं जल्दी करो । ठीक तरह होगा नहीं, सिर्फ मुस्करा दी । वही चार नंबर खो देने का सोच नहीं था । नष्ट करके हम दोनों बाहर निकले तो मैंने महसूस किया कि मैं काफी घबराई हुई हूँ । शेखर मेरा हाथ चुनना चाहते पर मैं टाल गई । लगता है तो अभी भी सही नहीं हुई हूँ । शेखर ने कुकडेश्वर में पूछा हूँ हाँ शिखर मुझे डर लग रहा है क्यों? ये भी यहाँ कोई परिचित मिल गया तो तो क्या फांसी करा देगा? शेखर के उसे सर को सुनकर में चुप हो गई । झील में नौका विहार करने का बडा आनंद आया । पर मुझे एक नाम है और निश्चित अपराध भावना कुतरे जा रही थी । रात के साई नैनीझील पर उतर आई थी । हम लोगों ने एक होटल में डिनर खाया और अपने कमरे में लौट आई । मुझे लगा शायद मेरी अग्नि परीक्षा की घडी आ गई है । विवाह से पूर्व में कैसी एक ही बिस्तर पे शेखर के साथ हो सकूंगी । शेखर ने अपना नाइट सूट पहना और कलम पर लेट गया । मैंने एक पत्रिका उठा ली और आराम कुर्सी पर बैठे । उसे पडती रही मेरा हृदय आशंका से कम कहा था क्यों क्या सोना नहीं है? शेखर ने सर क्या क्या सोना नहीं है? शेखर के स्वर में विकसित किसी बहन थी । मुझे नहीं नहीं आ रही पर मुझे तो आ रही है । हो जाओ अकेली शेखर दस सितंबर करेंगे । पिछले हस कडी मैंने हल्की समय बोला तुम तो बडे सख्त परीक्षकों । शेखर अगर किसी व्यक्ति से नंबर देती रही तो अपना जोर तो घाटी चला जाएगा । अभी जाओ ना क्यों परेशान कर रही हूँ । शेखर के स्वर्ग के उतावलेपन में मुझे बेहद ठीक कर दिया होगा । मैं कोई निर्णय नहीं कर पाई । मुझे लगा मेरे आंसू निकल पडेंगे । नहीं निष्कासि बैठे नहीं तुम लडकी हो या बर्फ के खिलाफ नहीं अच्छा बैठे नहीं जहन में जाओ । मैं तो सो रहा हूँ । कहकर शेखर ने करवट बदल दी । नहीं चटपटा गई । चौबीस घंटे के अंदर मुझे ये सुनने को मिल गया जो पडोस वाले कमरे की महिला को शायद दस पंद्रह वर्ष के बाद सुनने को मिला होगा । पहचानी कितनी देर तक में आराम कुर्सी पर बैठे पत्रिका पडने का नाटक करती रही । शहीद शेखर हो गया था । हल्की सी सीट है । उसकी नाक से बचने लगी थी । मुझे भी काफी थकान महसूस होने लगी थी । मैं होना चाहती थी पर कहाँ हूँ? आखिर में मैंने एक्सीनॅास होने का फैसला कर लिया । सूचनाओ शेखर ने कहाँ तक सोचा आत्मनियंत्रण की भावना है इसका भी फैसला हो जाएगा । मैं कपडे बदलकर कलन पर जा ली थी । शेखर सी काफी दूर बिल्कुल एक छोड की । पार्टी पर मैं इतनी धीमे से लेती थी की शेखर की नींद में देखने पडने का प्रश्न ही नहीं होता था । सोने का उपक्रम करते हुए मैंने महसूस किया हम दोनों ने इस परीक्षा द्वारा जीवन की किसी स्वच्छ और पवित्र अंश को नष्ट करके रख दिया है । तभी शेखर ने करवट बदली और उसकी बात नहीं गर्दन से पड गई । फिर मुझे उसका बहता हुआ टीमा सस्वर सुनाई पडा आंॅकडे तो शिखर सोने का सिर्फ भाई का जगह था । मीरा, मनवीर, कृष्णा और आत्मग्लानि से भर गया । शेखर की वहाँ को उठाकर अपने से परे कर दिया उससे घृणा करते हुए ना शेखर की आंखे मूंदी थी तो बोल रहा था शेखर घृणा की बात नहीं विवाह से पूर्व मैं बात को पूरा ना कर सकी तो फिर मेरे सामने निकाला ने क्या जरूरत थी? सोना कैसे? आप भी बस से बस ये देखने के लिए कि विवाह के बाद हम लोगों के बीच बौद्धिक तथा भावना तक की संगती तो नहीं होगी कि शारीरिक संबंधों के बिना ये परीक्षण कैसे पूर्ण होगा । शेखर विवाह में इन संबंधों का स्थान गौड होता है । अभी घर में बोर मत करो कहकर शेखर ने अपने दोनों हाथों से मुझे कसकर पकड लिया और अपनी खींचने लगा मैं छिटककर तलन से और बैठे फॅमिली पागल मत बनो । मुझे लगा शेखर पथभ्रष्ट और लक्ष्यहीन हो गया है । में कमरा खोलकर बाहर आ गई । बडी प्यारी ठंडी हवा चल रही थी, पर मैंने अपने माथे पर हाथ फेरा तो पाया वहाँ पसीने की बूंदें उभर आई । मैंने ऊपर आसमान की ओर टका पूरी चाट की । रात थी, पर एक छोटी सी कली बदली ने चार को ढक लिया था । नहीं नहीं कितनी देर में योगी मैं इस टेस्ट सी बालकनी में खडी नहीं । जब तंत्र सी छाने लगी तो मैं अंदर कमरे में जाकर आराम कुर्सी पर बैठ गई । सेंटर टेबल पर दोनों पांव फैलाकर मैं आराम से हो गई । शेखर सो चुका था । सुबह मेरी फॅमिली तो दिन काफी चढाया था । बाहर उजली धूप की आबादी कर चुकी थी । मैंने कमरे में चारों तरफ देखा । शेखर नहीं था, कहाँ चला गया हूँ मैं उठी वहाॅं में । मुझे या तो खुला था नहीं पर रखे ट्रांजिस्टर को मैंने खोला तो उसमें एक भजन आ रहा था जहाँ वो होता क्या है? ये जो है वो कमान करते हैं । इतनी कमाल की बात आप आप बता रही है और भजन का स्वर एक नारीश्वर और उसके बाद की कलकल छलछल उन्मुक्त हंसी में डूब गया । फिर एक सौ का धमाका संगम और पुरुष का अट्टाहास पहुँच गया । जरूर पुरुष नहीं नारी की पीठ पर प्यार की ढोल लगाई होगी । ईस्वर पडोस की कंपनी से आ रही थी । मैंने उन्हें पहचान लिया था । ये वही स्वर थे जो कल शाम को मुझे हुई थी । विश्व टूटे हुए थी । आज की सुबह उन्हें चांदनी किसी सीट थी । फूलों किसी फॅस की थी । प्रेम का मृत था । सौ ऐसे पचास नंबर कट गए । चौकी पलट कर देखा । शेखर दो ग्लास सोने चाहे लेकर अंदर आ गया था । वो कैसे? तुम जानती हो, चुप हो गई । ये लो चाहती हूँ । मैंने चाय का क्लास पकड लिया । शेखर सामने पडी कुर्सी पर बैठ गया और चाय की चुस्की लेकर बोला आलस छोडो, जल्दी से नहीं आलू और तैयार हो जाओ । मौसम साफ है, चाइना थी पर चलेंगे । आज एवरेस्ट की हिम् मंडी छोटी जरूर दिखाई देगी । नहीं कुछ नहीं बोली । मुझे तो ऐसा एहसास हो रहा था जैसे मैंने एवरेस्ट की चोटी की कोर्ट में छिपे सच्चाई के सूरज के दर्शन कर लिए हैं । तीन तो जैसे तैसे कट जाएगा, पर लाख तैयार होकर मुझे शेखर के साथ चाइना तीन जाना पडा । कुछ दूर की चढाई नहीं मेरा बुरा हाल कर दिया । संयोग से दो को नहीं मिल गए और हम लोग उन पर सवार हो गए । कोई डेढ घंटे की दुर्गम चढाई के बाद हम लोग ठीक कर पहुंच गए । वास्तव में ही अध्यक्ष था । दूर दूर तक बर्फ से ढकी ऊंची ऊंची शेख रहें । नंदा देवी ऍफ स्पष्ट नजर आ रही थी । होटल से अपना लंच कराकर हम ले आए थे । हम लोगों ने वही लंच किया और धर्म से निकालकर चाहिए थी । सब कुछ और आकर्षित था पर कहीं गहरी में प्रभाव था । खेत की भावना करवटे ले रही थी कहाँ शेखर अभिनेता ना होता है कि परीक्षण ना होकर वास्तविकता होती तो जिंदगी कितनी सुखद और ऐश्वर्यपूर्ण होती । शाम को हम लोग अपनी कंपनी में लौटायें ज्योतियों रात के साइड हिलते आ रहे थे । मेरा है बुरी तरह काम रहता । कल रात को तो क्षेत्र में कैसे कैसे संयम रख लिया । पर क्या वो आज की रात कि अपने आप को नियंत्रित कर सकेगा? डिनर के बाद हम लोग इतनी थकान महसूस कर रहे थे कि कहीं बाहर जाने का प्रश्न ही नहीं था । क्या आज के पचास नंबर कटवाने हैं? क्षेत्र कुर्सी पर बैठा था और मैं पलंग कर लेती थी? नहीं वही है । आशंका से कम थी तो बोलती क्यों नहीं? शेखर तो में क्या हुआ है? हुआ तुम्हें है मुझे पल भर को में चीज की । फिर दृढतापूर्वक बोली शेखर मैं एक बात स्पष्ट कर देना चाहती हूँ । तुम जो चाहते हो वो कभी नहीं हो सकेगा । मैं उस सब में विश्वास नहीं करती तो यहाँ झक मार नहीं आई थी । शेखर ने उन के सर में कहा क्रोध हर घटना की रेखाएं साहब उॅचे अगर तुम्हें ही सोचते हो तो मैं ये कहूँगी कि मैंने यहाँ पर बहुत बडी गलती की । गलती तो मुझसे हुई । जिसे मैं आकर्षक गुडिया समझा करता था । वो बर्फ की ठंडी खिलाने की तो ठीक है । मैं कल सुबह दिल्ली वापस चली जाउंगी । बडे शौक से इस तरह से तो अच्छा है । ना होगा बांस न बजेगी बांसुरी । शेखर पांचवी विवाह के बाद बजने पर ही कर्णप्रिय लगती है । अब आप भाषणबाजी बंद कर दीजिए । पल भर में दो मित्र अजनबी हो गई । शेखर आराम से पलंग पर लेट गया । मैं नीचे जमीन पर पिछले फर्श पर हो गई । अपना चाहे कितनी देर तक मैं रोती रही थी । रही मैंने विवाह के परीक्षण का विदेशी पौधा एक ऐसी जमीन पर लगाया था । इसकी उर्वराशक्ति और जलवायु उसकी एक दमित्री थी और दूसरे दिन सुबह पहली बस से मैं दिल्ली लौट आई ।

भाग - 02

भाग तो ये लीजिए शहर लगाकर इसे चैट लीजिए । आपने चौक पडी मेरे सामने पडी छोटी सी मेज पर फटाक से अखबार आ गिरा । दीपक वार पड चुका था क्योंकि मैंने उससे अखबार वापस कर जाने का अनुरोध किया था । इसीलिए वह क्रोध में भरकर उसे मेरे सामने पटक कर चला गया ने बुरी तरह उखड गई । मेरे ख्याल से क्या वन तक जब मम्मी पापा ने ही मुझे समझने से इनकार कर दिया । सच बोलने की सजा दी तो में दीपक को दोष तो नैनीताल से लौटकर ऍम क्या घर वालों को सब कुछ हादसा बता दूँ के सारा किस अच्छी हूँ? मैं नैनीताल चली गई थी तो मैंने शेखर की आंखों में उभरता क्रोध, निराशा और घटना की फूटती चिनगारियों को स्पष्ट रूप से देखा था । कहीं बदले की भावना से मुझे ब्लैक मिला करें । मैं रहती थी दूसरे मुझे लगता था कि वो झूठ असफल प्रयोग के बोझ को नहीं, अकेली हमेशा के लिए उठा नहीं सकूँ । कई रातों तक में सोना सकी । तब मुझे सिंचाई का आभास हुआ कि मन में छल कपट लिए इंसान गुदगुदे गद्दों पर कहीं भी हो सकता है । सच्चा निर्मल मान लिए इंसान काटो कि नौकर भी आराम से हो सकता है । मम्मी मेरी मनोदशा ताड देगी । इसका कारण था । मैं पंद्रह दिन के लिए नैनीताल गए थे और तीसरे दिन ही वापस आ दी थी । कई दिन तक मम्मी मुझे को देखती रही । आखिरी झूठ का बोझ होना मेरे लिए असर हो गया । मैंने मम्मी को सब कुछ बता दिया । बस फिर क्या था, घर में कोहराम मच गया । मम्मी ने अपना सिर पे डाला । पापा का हाथ मेरे ऊपर उठ गया । दीपक ने जैसे मुस्लिम नाता ही तोड लिया । मैं रोती ही रही । सोचती नहीं कैसी विडंबना है । मैंने झूठ बोला तो मुझे नहीं निकाल जाने की आज्ञा मिल गई । वहाँ से लौटकर मैंने सच कहा तो मुझे सजा मिली । किसानी आए हैं । ये कैसा विधान है जहाँ झूठ की जीत होती है और सच्चाई की हार । मेरी महान नेताओं को जबरदस्त धक्का लगा था । अपने परिवार में सिर्फ उपस् थित थी । मेरा व्यक्तित्व नष्ट हो चुका था । शायद पापा ने मेरे विवाह के विषय में सोचना भी छोड दिया था । फिर इस विज्ञापन के विषय में क्या करूँ? क्या काफी कम? यदि वो पत्र लिखने को राजीना हुए तो मैंने फैसला कर लिया । अपने भविष्य का निर्णय मैं खुद करोंगे । मैं उठी अंदर गई सारा सामान ले आई पत्र लिख डाला । अपनी फोटो साथ लेकर संलग्न कर दी । लिफाफा बंद करके उसे नौकर के हर पोस्ट करा दिया । तभी मैंने देखा । पापा तैयार होकर कहीं बाहर गए । ऍम कहाँ गई? मैं समझ गई । कुछ समझ नहीं आया । वो झूठ भी तो किसी कई बार जी चाहता है कि मम्मी से बात करूँ, पर अक्सर मेरा स्वाभिमान आडे आ जाता है । किसी व्यवस्था है । तभी रामू चिट्ठी डालकर वापस आ गया ही । सुबह सुबह मैंने रामो से पूछा वास्तव में ही नौकर ही मेरा संपर्क सूत्र है । स्टेशन क्यों? आगे वाली बहन जी आ रही हैं । हिंदी भी आ रही है । मैं खुश हो गई । हाँ साहब उन्हीं को लेने स्टेशन गए हैं । परिणाम हूँ इस समय आगे से कौन सी गाडी आती है? बहनजी आग्रह से नहीं कश्मीर से आ रही हैं । कश्मीर से तो कश्मीर नहीं । कोई एक महीने पहले दिल्ली होकर तो गई नहीं, सीधी चली गईं । मेरा मन कर सक गया । यदि मैं किसी से कहूँ कि मुझे घर की इतनी भी गतिविधि का पता नहीं रहता कि कोई विश्वास करेगा । बहन कश्मीर गई है, अब वापस आ रही है और उसकी छोटी बहन को पता ही नहीं कितनी अविश्वसनीय अनहोनी सी बात है । यह एक कटु वास्तविकता थी की सीमा तक इन लोगों ने मुझे निर्वासित कर रखा है । जांओं अभी भी खडा था । मुझे कुछ खयाल आया । मैंने पूछा साथ में जीजा जी और बच्चे भी होंगे । जीजा और सबसे छोटा दे दी है । ठीक है कहकर में उदासी हो गई । नैनीताल वाली घटना के बाद तो जी जी से कभी सामना नहीं पर उन्हें पता तो चल ही गया होगा । पता नहीं वो क्या सोचती होंगी । न जाने वो कैसा व्यवहार करें । मेरा मन दुविधा में पड गया । मैं उठी डीजी के आने से पहले ना हद होकर तैयार तो हो जाना चाहिए । मैं कपडे लेकर वाशरूम में घुस गई । सारा शरीर पसीने से छिप छिप आ रहा था आपने शावर कि नीचे खडी हो गई । शीतल फुहारों के नीचे पर अच्छा लग रहा था तभी मेरे मन में एक अनाम रहस्यमयी कर रखी है । जी जी और टीचर जी के संबंधों में तनाव आ गया था । कुछ दिन पहले उन की टिक्की आई थी कि वह बहुत दुखी हैं । उन के पति उनकी कोई चिंता ही नहीं करते । वो अपनी जिंदगी में इतनी हो गई हैं कि बस मर जाने को जी चाहता है और अब पति पत्नी कश्मीर की सैर कर के आ रहे हैं । जब तक एक दूसरे के मन में प्रेम ना हो, ऐसे पर्यटन का आयुष कैसे हो सकता है? तभी मुझे यहाँ जाया नैनीताल के उस कमरे का वो दंपत्ति पिछली शाम तक को एक दूसरे को जहन्नुम भेज रही थी और दूसरी सुबह खूब खिलखिलाकर हंस रही थी । फॅमिली है कैसा रहते हैं कि कैसा आकाश पटाने जिसमें पल पल में रंग बदलते रहते हैं दीदी आ गयी घर का जैसे सारा माहौल ही बदल गया ठहरे ठहरे तब ठहरे ठहरे इस तब दुर्घटन भरे वातावरण में जैसे बहारों के फूल की थी दीदी मां से लिपटकर मिल रही थी दीपक ने दीदी के देवी को गोद में उठाए हुआ था वो कभी उसे प्यार करता कभी हवा में ऊपर उछालता मैं ड्राइंग रूम की होने में खरीद चुप चाप इस मधुर मिलन के दृश्य को देख रही थी, क्यों बेचारे को तंग कर रही हूँ? जाती नहीं । संकर में भीषण रूप में चौक गई जीजा जी ठीक मेरे सामने खडे थे । उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे कंधों को जकड रखा था । जीजा जी की बाद मेरी समझ में नहीं आई । प्रश्न सूचक दृष्टि से उन की ओर देखती हूँ मैं समझा नहीं क्या जी आप किस का जिक्र कर रहे हैं? अरे उसी बेचारे का जिसके पास तो मैं हमेशा के लिए जाना है । पता नहीं बेचारा कहाँ खाता होगा । अकेले रहती कैसे बताता होगा । होटल का खाना खाकर जब उसकी तबीयत खराब होती होगी तो पता नहीं कौन उसकी तीमारदारी करता होगा थी कि अर्थपूर्ण मुस्कुराहट ने उनकी सबको समझा दिया । मैंने हसते हुए थी में सर ने कहा तलाश जारी है । कब तक चलेगी तलाश जब तक वो मिल नहीं रहा था अब काम मिल रहा है । आप भी तलाशी मदद कीजिए । में बेशर्मी पर उतर आई लाला जी कपडे बदलिए, नहा धोकर नाश्ता कर लीजिए । मम्मी ने जीजा जी से कहा शायद मैंने उन का मेरे साथ किस प्रकार मिलना? मैं अच्छा नहीं । जीजाजी हट गए तो दीदी आई और मुझे अपने वक्ष में चिपकाकर मेरे बालों पर हाथ फेरती भी । प्यार भरे स्वर में बोली क्या हाल है? तेरह नहीं मैंने महसूस किया मुझे आ गई हैं और काफी गुदगुदी हो गई है । कितने दिनों बाद मिली थी । मैं अभिभूत होकर बोली बस जिंदा होने दी क्यों? ऐसी क्या बात है तो नहीं । नहीं पता बता तो हैं पर उसमें है । दोपहर को हमारी बातें होंगी की सब लोग नहाने धोने, नाश्ता करने में जुट गए । मेहमानों की देखभाल करने में मम्मी का हाथ था । मैं मेहमानों की देखभाल करने में मम्मी का हाथ बता रही थी । उन्होंने प्रतिवाद नहीं किया । दोपहर का खाना खत्म करके मार दलों के कमरे में और महिलाएं दूसरे कमरे में चली गई । दीपक पढाई में लगा था । पापा और जीजा जी व्यापार के विषय में बातें कर रहे थे । मम्मी शायद थक गई थी इसीलिए वहाँ की मौत कर लेती थी । शायद उन्हें जब क्या गई थी और मैं और दी थी । नीचे फर्श पर लेटी थी । उन्हें ऐसा क्यों किया? रीना दीदी एक नए प्रयोग की सनक सवार हो गई थी । नहीं अप्रिय हम दोनों चाहते थे कि हमारा विवाह सफल हूँ । इसीलिए हमने सोचा क्यों ना उसका परीक्षण कर लिया जाए । टीवी गंभीर हो गई तुम्हारी सर मैं बोली हीना विवाह एक ऐसा फल है । इससे खरीदने से पहले चक्कर नहीं देखा जा सकता हूँ तो उन्हें बडी नादानी की आपने मान टीम दीदी पर अपने चारों ओर असफल विवाहों और वैवाहिक जीवन का की कटता को देखकर में भेजी हो गई थी । सीना हर विवाह एक जुआ होता है । एक जोखिम एक सहयोग अंधेरे में छोडा गया । तीन भी कह सकती हूँ । उसे विवाह से पूर्व तुम्हें चांदी के फ्रेंड में बढाकर प्रमाणपत्र नहीं मिल सकता है कि तुम्हारा विवाह सफल ही होगा । विवाह से पूर्व तुम वैवाहिक जीवन का परीक्षण नहीं कर सकती । विवाह जीवन में प्रतिपल प्रतिदिन पति पत्नी की परीक्षा होती है । प्यार और सम्मान के साथ रहकर पति पत्नी रेवाही जीवन के राजमार्ग पर आगे बढते हैं । इस यात्रा में अभाव, सुख दुख, कष्ट, अंधेरे सभी आती हैं । हम गिरते हैं, उठते हैं, लडते हैं, जुडते हैं पर यात्रा जारी रखते हैं । इस सबके बावजूद प्यार बना रहता है । विवाह से पूर्व का प्यार रीना उस छोटे से कमल पौधे की तरह होता है जो जरा सी तेज हवा से जमीन पर बिक जाता है । विवाह के बाद जो प्रेम पर लगता है वह बरगद के प्रक्षिण जैसा विशाल, घना और मजबूत होता है । वह आश्रय देता है, छाया देता है, सुरक्षित लगता है । मुझे लगा मेरे मन में छाया कोहरा छंट गया है । मुझे नैनीताल वाले दंपत्ति के रहस्यमय व्यवहार का उत्तर मिल गया था । मुझे दीदी के वैवाहिक जीवन की कडवाहट और फिर उससे उत्पन्न मधुरिमा के कारणों का ज्ञान हो गया था । रीना विवाह में सुख सफलता की कामना करने वालों के लिए एक अनिवार्य शर्त होती है । शांतिपूर्ण सह अस्तित्व और भावनात्मक संतुलन की खाद डाल कर वैवाहिक जीवन में रंगीन गुलाब के फूल खिलाया जा सकते हैं । में समझ के दीदी हर तूफान के बाद जो शांति आती है उसका आनंद वरना तीस नहीं है । रीना हल्के स्तर पर आकर मैं यू महसूस कर सकती हूँ । मियां बीवी की लडाई जैसे दूध ऊपर जमी मलाई भी थी उससे बहुत बडी गलती हुई । यदि तुम्हें ऐसा एहसास होता है तो मैं समझती हूँ कि सब ठीक है । सच्चा बच्चा था पवित्र पूर्व जन्म होता है । मैं तो पता था कि आदमी चलती हूँ दीदी पर इन लोगों ने हद कर दी है । मुझे दूध में पडी मक्खी की तरह निकालकर बाहर फेंक दिया है । इतनी उपेक्षा इतना फिर इसका इतना अपमान कितना करेंगे । सस्ती लगता है प्रतिपल ये लोग उस आदमी एक ही डाल रहे हैं जिससे मैं जल रही हूँ । ये गलत है तो उस से बात नहीं करता हूँ । मुझे इतना नगण्य और व्यर्थ बना दिया है लोगों ने कि कई बार जी चाहता है की इस समय से ही गलती होती है । हम सभी अपनी अपूर्णताओं में पूर्ण है । छमा जीवन का शृंगार है, उन्हें समझाओ नदीदी समझा होंगी । तुम्हारे जीजा जी कल चले जाएंगे नहीं अभी कुछ दिन होंगी मैं दी थी लिपट गई मेरी आंखों में आंसू छह चला आए । रूम मत पगली आंसू दुर्बलता के प्रतीक होते हैं । मैं सब ठीक करके जाऊंगी तो मुझे विश्वास है भी थी भावा देश के कारण मैं यहाँ की कुछ ना बोल सके कोई लडका लडका देखा तेरे लिए लोगों ने मैंने से हिला दिया तो क्या कुछ भी जिंदगी भर घर पर ही बिठाए रखेंगे । तभी मुझे उस विज्ञापन की याद आई । मैं उठी और विज्ञापन की कटिंग ले आई दीदी को देकर मैं बोली ये देखो दीदी उसे पडने लगी । मैंने किसी से पूछे काशी बिना अपना विवरण और फोटो भेज दिया है । डी टी पल भर को मान रही थी गंभीर सर में होली तो उन्हें ठीक क्या देना? मुझे लगा डूबते को तिनके का सहारा मिल गया है । ये टीम का नहीं लाइफ बोर्ड की आप वापस से बात करेंगे । आपसी बात कर के क्या होगा? अगर इसका कोई उत्तर नहीं आया तो मैं खुद मम्मी पापा करो । लगा करूंगी, चिंता मत कर लेना । उल्लास में भरकर मैं दीदी से निपट गई । मेम साहब का फोन है काम की, ना धाम की ढाई मान नाच की ऊपर से मैम साहब की टेलीफोन ऑपरेटर ही करूँगा । दीपक के बीच मुझे अपमान भरे कटु स्वर को संकट में समझ गए कि ये सारे गैंग बाढ मुझे लक्ष्य करके ही छोडे गए हैं । अब जाइए ना । शेखर साहब फोन होल्ड किए हुए हैं । दीपक बिल्कुल मेरे पास आकर बोला । उसके हर शब्द में घृणा और तिरस्कार के कीडे रेंग रही थी । मेरा फोन मुझे फोन करेगा । फिर किसका फोन है? दीपक क्या तो बिल्कुल भूल गए हूँ की शालीनता क्या होती है? रीना तुम्हारी बडी बहन है क्या बडी बहन से इस तरह से बात करेंगे? क्या बडी बहन से इस तरह का व्यवहार बीवी पारसी खडी थी । उन्होंने दीपक की बत्तमीजी देखती थी और उसे डांट रही थी । मैं इस तरफ अपना ध्यान नहीं मोडिफाई । मेरा ध्यान तो फोन की तरफ था । मैंने आगे बढकर रिसीवर उठाया और बोली हलो मिस रीना जी मैं बोल रही हूँ पर आप ऍम तो शेखर नहीं था । मेरे मन को शांति मिल गई । आपका पत्र मिला था । मुझे आप की फोटो अच्छी रही है । आप का विवरण भी मुझे सूट करता है । ऍम आप आगे किस से हूँ जैसा आप कहीं मेरे ख्याल से आप मुझे भी देखना चाहेंगी और मेरे बारे में विस्तार से जानना चाहेंगे । मैं चुप रही । यदि आपको आपत्ति ना हो तो अपने माता पिता के साथ हमारे यहाँ पर आई । ये तो संभव नहीं । जब तक कोई बात निश्चित ना हो जाए हम लोग भी आप के घर जाने में असमर्थ तो घर के बाहर ही कहीं मिल लेते हैं । आज शाम को आप फ्री है जी तो क्या आप आज शाम को छह बजे प्रिंस होटल में नहीं सकेंगे? अभी पर एक बात है हम एक दूसरे को पहचानेंगे । कैसे देखिए मेरे साथ मेरी माँ होगी मैं होटल के नीचे । आज मैं होटल की नीचे मैं होटल के नीचे जो बनारसी पान वाला है उसके पास खडा होकर आपकी प्रतीक्षा करूंगा । मेरी सात मेरी दीदी होगी । हमें पहचानने में आपको कोई दिक्कत नहीं रहेगी । आपने लॉरेल हार्डी की जोडी तो देखी होगी कहते हो गई पर के प्रथम वार्तालाप में मजाक जरूरी था । मई मई जरा ये तो बताइए आप कैसे लॉरेल कौन है? हार्डी कौन है? वह शाम को आप खुद देख लीजिएगा । ओके शाम को मिलते हैं । तब तक के लिए बाई ऍम मैंने रिसीवर रख दिया । एक विचित्र सी उत्तेजना और मदहोशी मेरे ऊपर छाने लगी । मैं सुख में जैसे उजली चांदनी बिखर गई थी । कानून में चर्च में बस्ती, प्रार्थना और घंटों के सर गूंज रही थी । कानूनी मुझे अफसोस से दीदी दीपक मुंह लटकाई मेरे सामने खडा मुझसे माफी मांग रहा था । स्पष्ट था कि जब मैं फोन पर राम से बातें कर रही थी, दीदी ने दीपक को काफी गहरी झाड लगाई होगी । तभी वो मुझे क्षमा मांग रहा था । ठीक है, मुझे दीपक के क्षणिक औपचारिक हृदय परिवर्तन में ज्यादा रूचि नहीं थी । उस समय तो मेरा मन शाम को होने वाली भेंट से उलझा हुआ था । क्या होगा बातों से तो लडका झलग रहा था । पता नहीं शक्ल सूरत कैसी होगी? क्या वो मुझे पसंद करेगा? पत्र में मैंने फोन नंबर लिखकर बुद्धिमानी की थी । तभी तो पत्र मिलते ही उसने फौरन संपर्क कर लिया । तो इस तरह ठगी से क्यों खडी है? क्या उसी का फोन था? दीदी ने पूछा हाँ दीदी, शाम छह बजे प्रिंस होटल में उनसे मिलना है तो यहाँ कर दी । हाँ, मैंने कह दिया कि मैं और मेरी दीदी आएंगे तो उन्हें ठीक किया । हम लोग चलेंगे । दीपक पास ही खडा था । उसके मुंह पर उलझन भरे बादल दिखाई दे रही थी । वो कुछ भी नहीं समझ पाया । सादी मानी इतना है कि उससे कुछ भी पूछा नहीं जा सकता । मम्मी को बताना चाहिए । मैंने दीदी से पूछा इन सब की तू चिंता मत कर, मैं सब ठीक कर लूंगी । देवी के सर में एक अनुभवी महिला जैसा आत्मविश्वास था । शाम को ठीक छह बजे हम लोग प्रिंस होटल पहुंच गए । बनारसी पान वाले के पास ही एक नवयुवक और एक अध्यवसाय था कि महिला खडी थी, यही हैं । मैंने उल्लास भर कल दीदी की कमर में चिकोटी काटी । जैसे ही हम पाने वाले के पास पहुंचे, लडका आगे बढा और हम दोनों के हाथ जोडकर अभिवादन करके हल्के स्वर में बोला, जी आप लॉरेल हार्डी जी ये आप क्या कह रहे हैं? दीदी उलझ गई । उनकी समझ में कुछ नहीं आया । क्षमा कीजिए । बहनजी पहचान के लिए उन्होंने ये सीक्रेट कोर्ट नंबर बताया था । आपकी बहन मई मई काफी मजाक पसंद लगती हैं । वो बहुत खुश नजर आ रहा था । दीदी राम की माँ से परिचय कर रही थी और मैं कनखियों से राम की ओर देख रही थी । आयु लगभग अट्ठाईस से तीस वर्ष की होगी । हष्ट पुष्ट शरीर, एकदम गोरा रंग, घुंघराले भूरे बाल हल्के काले बाल की गहरी आंखें, तीखे नाम नक्ष फोटो से प्रतिपल उभरती मुस्कान सब कुछ सफल और असमान्य था । पर मई का तकिया कलाम और बातें करते समय बार बार बाइयां कश्यप अपना थोडा खटकता था । इस नवयुवक को भारत आकर विवाह करने की क्या आवश्यकता थी? ऐसे आकर्षक व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के लिए विलायत ने नियमों की क्या कमी? पर शायद ये व्यक्ति शुद्ध रूप से भारतीय उसमें अभी भी भारतीय संस्कृति और सभ्यता का भाव है । उसमें अभी भी भारतीय संस्कृति और सभ्यता का प्रभाव शेष है । तभी वो अंतरराष्ट्रीय विवाह का पक्षपाती नहीं है । ऊपर चलिए ना मई मई क्या नीचे खडे खडे ही सारी बातें हो जाएंगी । राम की स्वर्ग में मुझे एक बात का एहसास हुआ । शायद उसने मुझे पहली निगाह में ही पसंद कर लिया है । वरना वो इतना उल्लास और उत्साह न दिखता । हम चारों ओर पहुंचे हम लोगों की मैं पहले से रिजर्व थी । उस पर ढेर सारा खाने का सामान रखा हुआ था । लोमेटिक हूँ राम की नानी जहाँ की माँ ने पाइन एप्पल के की प्लेट मेरी ओर बढाते हुए कहा आप लीजिए ना कहीं थी हुए मैंने आधा के अपनी प्लेट में रख दिया । तुम्हारे बारे में तो हम को सब कुछ मालूम हो ही गया है पर तुम ने खूब विस्तार से लिखा था मेरे खयाल से तुम राम के बारे में भी विस्तार से जानना चाहूंगी । राम की माँ की बात सुनकर मैं शर्मा गई । मैं अपनी गर्दन झुका ली । पहले ये बताओ राम तुम्हें पसंद है राम कि माननीय अचानक एकदम ऐसा सीधा कृष्ण पूछ लिया कि मुझे कोई उत्तर ही नहीं सूचना पर मेरे गाल नजर से लाल हो गए और कान की लोगों में गर्माहट दौडाई नहीं । मई राम जैसे उछल पडा । देखो बेटी मेरा इस दुनिया में इन दो बेटों के अलावा और कोई नहीं एक तो मिला है, चला ही गया । दूसरा बेटा कपडे का व्यापार करता है । उसकी करोल बाग में दुकान है । मैं उसी क्षेत्र में रहती हूँ तो राम की पापा जी जीवित नहीं । मैंने सोचा और न थोडा दुखी हो गया । रीना जी मैं पिछले पांच साल उस इंग्लैंड में हूँ । एक ब्रिटिश फर्म में मैं कैमिकल इंजीनियर पद पर काम कर रहा हूँ । हफ्ते के दो हजार रुपए मिल जाते हैं । राम ने अपने बारे में सूचना दी । हफ्ते की दो हजार रुपए महीने की आठ हजार रुपए तो मैं अवाक रह गई । इतना सारा पैसा ये भी समस्या हो जाती होगी कि किसी खर्च गए किसी नहीं अविवाहितों पर ब्रिटिश सरकार इतना आयकर लगती है कि बस मई मई कमर टूट जाती है । मैं सोचा सरकार को पैसे देने की बजाय पत्नी पर ही क्यों न खर्च किए जाएं । मई मई फिर तो आप लोगों को हमारे जीना पसंद आई । दीदी ने रहस्य रोमांच की घडियों को समाप्त करने के लिए अंतिम प्रश्न पूछ लिया । हमने तो पहले ही फैसला कर लिया था । हम लोग तो आपकी राय जानने आए थे । शाम की माने उत्तर दिया ये तो आप लोगों की शराफत है, वरना भारत में लडकी वालों की आय क्या कीमत रखती है? माँ माँ ही आजकल के समान अधिकार के जमाने में ऐसी बातें करना अच्छा नहीं लगता । मैंने पहली बार नजर उठाकर भरपूर दृष्टि से राम क्यों देखा तो अद्भुत सपने मेरे मुट्ठी में था । बेटी एक बात है राम पंद्रह दिन बाद विनायक लौट जाएगा । वो रीना बेटी को साथ ले जाना चाहते हैं । हम चाहते हैं कि शादी दस दिन के अंदर हो जाए । इतनी जल्दी दीदी थोडा चल रही ही माँ इसमें घबराने की क्या बात है? दस दिन तो बहुत होते हैं लंदन में तो शादी एक दिन में हो जाती है । यहाँ पे कौन सी दिक्कत है? मई मई मांझी हम पूरी कोशिश करेंगे । पर एक बात है हमारे पास देने के लिए रीना के सिवा और कुछ नहीं दी थी । हमारे पास काफी है । मुझे बेटी चाहिए और कुछ नहीं । राम की माननी इसलिए भरी गर्मी का आई माँ पार्टी नहीं देंगे क्या डी डी मुस्कुरा दी । बेटी ये थोडा मजा किया है इसकी बात का बुरा मत मानना नहीं । मान जी, ये तो अच्छी बात है । तो फिर रीना हमारी हो गई । हाँ दीदी ने दृढतापूर्वक कह दिया मुझे लगा हीरे जैसे उसका मूल क्षण ने मेरा आमूल रूपांतर कर दिया है । वह पल एक झटके से मेरी मांग को रंगीन करके अनफॅालो दीदी नहीं मुझे मीठी सीमेंट की नहीं । मैं उठी मांझी की ओर गई । झुककर उनके पापा को छू लिया और हाथ आंखों से लगा लीजिए सुखी रहो बेटी तेरह सुहाग अमर रहीं कहकर माँ जी ने मुझे कलेजी से लगा लिया । मुझे अपने पास वाली कुर्सी पर बैठा दिया । दीदी हटकर मेरी वाली कुर्सी पर बैठ गई थी । ऍम हम काफी खुश लग रहा था । मैंने नोट किया माताजी की आंखें छलछला ही नहीं, क्या खुशी है या अपने सुहाग की स्मृति में । फिर उन्होंने मुझे अपनी उंगली से अंगूठी उतारकर राम को पकडाते हुए कहा, क्या लोगों की तरह देख रहा है ये ले पहना देना । मई मई कहते हुए राम ने मांझी से अंगूठी ले और मेरे सीधे हाथ की उंगली में पहना दिए । देर तक अंगूठी पहनाने के बहाने मेरा हाथ थाम ले रहा हूँ कितनी लडकियाँ देखकर इसमें मुझे परेशान किया । कोई पसंद नहीं आती थी । कोई मोटी कोई पतली किसी की आंखें छोटी किसी के कान बडे नाक में दम कर दिया था लडकियों में दोष निकाल निकाल कर अब मिली तो पल भर में ही मिल गई । इसे कहते हैं सहयोग माजि जैसे हम लोगों से नहीं अपने आप से बातें कर रही मई मई मैं क्या करता? पंडित जी से शादी की तारीख निकलवाकर हमलोग आपको सूचित कर देंगे । वैसे अगर कल शाम को आप लोग चाहिए खाने पर हमारे यहाँ जाएँ तो पापा को आप से मिलकर बडी खुशी होगी । शादी की तारीख और अन्य बातों के बारे में बातचीत हो जाएगी । दीदी ने काफी बुद्धिमानी की बात कही । एक बार मेजरमेंट आशंकित हो गया । ये भी मम्मी पापा ने इस संबंध पर सहमती नहीं दी तो क्या होगा? पण्डित पण्डित क्या करेगा? पंद्रह तारीख को िद्वार हैं, उसी दिन की शादी रख लेते हैं । सीधी साधी सीरियस हो जाएगी । अठारह तारीख को मेरा रामविनायक लौट रहा है । आपकी छह सिर आंखों पर । हाँ, अब कल आ रही है । ना आ जाएंगे तो वो भी अपना ही घर है । राम ने इशारे से वेटर को बुलाया । बेटर बिल नहीं कराया । दीदी ने पर्स खोला और लाख कोशिश की । बिल चुकाने की । हनुमान जी नहीं किसी की एक न सुनी । मेल का भुगतान कर दिया । हम लोग उतरकर नीति आई । दीदी ने अपनी पर्स से एक सौ एक रुपये निकालकर राम को पकडाते हुए कहा ये थोडा सा सकून स्वीकार की थी । वास्तव में हम लोग तैयार होकर नहीं आई थी । हमें आशा नहीं थी कि इतनी जल्दी ये काम हो जाएगा । मॅाडल रुपया किस लिए कितना नहीं चलेगा । बेटी माननीय नीति के सिर पर हाथ रखते हुए कहा ईस्ट सघन है, इसको मना मत कीजिए । माजि माॅस् ठीक है । हम एक रुपया रख लेते हैं कि कर राम ने दी थी कि हादसे पर । इसलिए फिर उसी पर्स में सौ का नोट टक्कर उसे दीदी को वापस कर दिया । अच्छा बेटी चलते हैं । हाँ जी ने हाथ जोडकर कहा । मैं एक बार फिर चुकी और माताजी के चरणों को स्पष्ट कर लिया । खुश रहो गई थी, भरेगी शरीफ और सचिन लोग है दीदी बुदबुदाई नहीं नहीं दीदी की मदद आहट सुनी टैक्सी लेकर हम लोग घर आ गई । रास्ते भर में सोचती रही । ये जीवन भी क्या अनबूझ पहेली है । कोई है कि तो लडती चली जाएगी । आज सुलझेंगी तो पल भर भी नहीं लगेगा । पर सुलझने का ये पर जमकर खेला जाता है । अमर हो जाता है ।

भाग - 03

भारतीन में कमरे में गई तो वातावरण को बहुत तनावपूर्ण पाया । पापा सिगरेट पीते हुए कमरे में चहलकदमी कर रहे थे । दीपक टेबल लैंप के पास स्टंट फिल्म के हीरो की तरह तनकर खडा हुआ था । दीदी और मम्मी चारपाई पर बैठी हुई थी । मम्मी ने अपने दोनों हाथों से अपने माध्यम को पकडा हुआ था । मैं तो चाहता हूँ कि जितनी जल्दी से जल्दी इसका काला हो जाए उतनी मुझे शांति मिलेगी । पाकिस् पर उठा हुआ था मम्मी इस हर जी क्या है? दीपक मधुर स्वर में बोला मैं तो इसकी सूरत देखने को भटक जाऊंगी है तो आखिर में अपना खून । उसने कोई असर कसूर थोडी क्या है जो उसे जिंदगी भर के लिए देश निकाला दे दिया जाए । मम्मी ने भी ये सर में कहा मैं समझ गई कि रात का खाना खत्म होते ही दीदी ने मेरे विवाह की बात छेड दी है । मेरे आने से पहले भी बातें हो रही थी । मम्मी तो समझती क्यों नहीं । आजकल दूरी का कोई महत्व नहीं । आपको बम्बई जा रहे में चौबीस घंटे लगते हैं पर वहाँ पहुंचने में कुल बारह घंटे ही लगेंगे । दीपक ने समझाया मैं एक बात है लडका बहुत सुन्दर, सुशील और सुसंस्कृत है । महीने के आठ हजार रुपए कमाता है । अपनी रीना राज करेगी माँ बडे दुर्लभ संयोग से ऐसे लडके मिलते हैं मेरा कहना मान लोग तो दीदी ने अनुनय विनय भरे स्वर में कहा । शक उनकी मांग शकुन ठीक कह रही है तो बेटा इस काम वक्त से भी पूछा पापा की स्वर्ग में मिलावटी रोज था जी पापा पूछ लिया है वो की राजी नहीं होगी उसे हम लोगों से क्या लेना देना? उससे कहा है कि मोहन ममता खुद को विनायक की सैर करने का मौका जो मिल रहा है । मम्मी ने दुखी हो कह रहा मैं आगे बढी । चारपाई पर मम्मी के पास बैठ के ही थीमें स्वर में मैंने कहा ऍम किसी घर में जान नहीं हूँ । आप लोगों ने पाल पोसकर इतना बडा किया है । अब सोचती है मुझे तो शुक्र है । दीदी ने मेरी बार बीच में ही काटकर कहा । और पापा जी को लक्ष्य करके बोली पापा जी एक बात और है लडके वाले काफी शरीफ है, उनकी कोई मांग नहीं । वो तो सिर्फ एक छोटी सी सीधी साधी रस्म करना चाहते हैं । अरे बेटी सर वैसा ही कहते हैं । पर समय आने पर पापा जी बात को अधूरा ही छोड दी है । आप ही ये लोग ऐसे नहीं है । आप खुद बात कर के देखिए । मैंने कल शाम को लोगों को चाहते बुलाया है । दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा फिर ठीक है । पापा जी ने गहरी सांस लेकर कहा तो फिर सब लोग सहमत है ना । दीपक ने उल्लास में भरकर कहा सब मौन थी । ये सहमती का सूचक मौन था । सबके मुख पर प्रयास की चमक थी । मुझे लगा था मेरे जीवन की नौका को दीदी ने टूटने से बचा लिया है । बधाई हो रही न दीदी सिर्फ बाहर तो टी तक मेरे पास आकर बोला । फिर उस ने मेरा हाथ पकडकर चारपाई से मुझे उठा लिया और लगभग खींचता हुआ बाहर लॉन में ले आया । आपने आश्चर्च चुकी थी, कल तक दीपक किया था और आज क्या हो गया है? क्या मेरे विवाह के कारण वो इतना प्रसन्न में है? क्या मैं पढाई हो रही हूँ? इसीलिए उसकी घृणा प्रेम में बदल गयी है । कितनी जबर्दस्त किस्मत है तुम्हारी दीदी इंग्लैंड जाओगी, खूब ऐश कर होगी अपने भाई को भूल तो नहीं जाओगे ना । मैं अभिभूत हो गई । दीपक के गाल पर हाल एसे चपत लगाकर में ही तो कैसी बातें करना है । जानता है भाई बहन का रिश्ता अमर और अटूट होता है । दीदी एक बात है आईएएस की परीक्षा दे रहा हूँ, पर सफल होने की कोई गारंटी नहीं तो जानती ही हो । भारत में कितनी भयंकर बेकारी है । सुना है इंग्लैंड में खाली जगह है और काम करने के लिए आदमी नहीं मिलते हैं । क्या तो मेरी मदद करोगे । अगर यहाँ नौकरी नहीं नहीं तो क्या वहाँ तो मेरी मदद कर पाओगी । दीदी अगर लंदन में मेरे लिए कोई अच्छा सा जॉब तलाश कर दो तो मैं तुम्हारे जीवन भर एहसान मानूँगा । मैं अवाक रह गई । मुझे जैसे किसी भी ऊंचाई से नीचे पटक दिया था तो दीपक के हृदय परिवर्तन का ये रहस्य था । कितना स्वार्थी है ही घर का एकलौता बेटा नौकरी के ही विदेश जाने का इच्छुक है । माँ बाप की बिल्कुल चिंता नहीं । वास्तव में हम लोगों को विदेश जाने का कितना भयंकर आकर्षण है । मेरा मन वितृष्णा से भर गया तो चुप हो गई । पहले जाने तो दे भैया, अब जाने में क्या कसर रह गई है । मैं क्या की थी? मना करो दीदी? हाँ हाँ भैया तो निश्चित रहूँ । अगले कुछ दिन मेरे जीवन के अत्यंत महत्वपूर्ण अंश थी । दूसरे दिन नाम मांझी राम के बडे भाई और भाभी जी चाहे पढाई खूब अंतरंग और खुल कर बातें हूँ । मम्मी पापा जी और दीपक उनसे बहुत प्रभावित हुए । विवाह की तारीख पक्की हो गई हूँ, पर विवाह से पूर्व मुझे राम के साथ बहुत घूमना पडा । विदेश यात्रा की सारी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए काफी दौड धूप करनी पडी । पासपोर्ट बनवाया, ब्रिटिश हाई कमीशन से वीजा लिया । रिजर्व बैंक से विदेशी मुद्रा का मामला हाल क्या स्वास्थ्य संबंधी प्रमाण पत्र लेने के लिए टीके लगवाएं? तारीख की सुबह पौने आठ बजे वाली बीओएसी की फ्लाइट से रिजर्वेशन हो गया । सारी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी थी । इन दस पंद्रह दिनों में लगभग हर रोज मुझे राम के साथ घूमने करने का मौका मिला । मैंने पाया राम हसमुख, मृदुभाषी, कुशल स्टेटर और संयम नहीं । बीच में हमने एक आपके चल भी देखी । टेस्ट में हमने काफी चाय भी थी । एक बात थीं जिसके कारण राम मेरी नजरों में ढांचा नहीं कितना ऊँचा चढ गया था । उसमें पूर्ण बहुत ही और भावना तक परिपक्वता का परिचय दिया था । उसके व्यवहार में कहीं भी सस्तापन या उतावला पर नहीं था । और ये मेरे लिए बडे संतोष की बात नहीं । आखिर वो दिन किया गया जिसकी सात लडकियाँ बडी यहाँ से अपने अंतर में रहती है । मैंने ॅ सिंगार हुआ । हाथ पैरों में नहीं नहीं लगाई गई । मैं दुल्हन बन गई । मेरा यूट्यूब का सपना साकार हो गया । कितनी सीढी सादी आडंबरहीन शादी थी ना बारह चली ना बाजी बजे दूल्हा घोडे पर चढकर भी नहीं आया । हमारे यहाँ एक संयुक्त पार्टी का प्रबंध था । थोडी सी सजावट वर वधू पक्ष के लिए और एक ही स्थान पर । पार्टी का प्रबंध आठ बजे के बाद पार्टी हुई । उसके बाद फेरे पड गए । दस बजे तक मैं विदा कर दी थी । कितनी संक्षिप्त शादी थी । लेन देन भागदौड और न गहमागहमी । सचमुच आदर्श विवाद था । सब लोग प्रसन्न थी मैं मेरा रूपांतर हो चुका था । चांदनी कि शिखर ता और फूलों की खुशबू मेरी मुट्ठी में बंद थी । अंत में मुख्य दिया गया जब मुझे अपने प्रियतम के साथ एक अंतिम सुखद यात्रा पर जाना था । पालम हवाईअड्डे पर हम दोनों को छोडने वाले की बहुत भीड थी । दोनों ओर के नाते रिश्तेदार शादी में आई थी और वे लोग हमें विदा करने के लिए रुक गई थी । इतनी भीड भाड के बीच सिर्फ तीन व्यक्ति है जिनकी आंखें गीली थी । एक ही मेरी माँ दूसरी माँगी और ऍम शहीद पीढी आंखों में खुशी के आंसू थी पर मम्मी और मामा जी का दर्द सचाना एक की बेटी छोड रही थी तो उसी का बेटा शेष लोग रखते लगाने और फरमाइशी करने में व्यस्त थे । भाई खूब हाथ मारा । हमारी साली ताइवानी भाई वहाँ जाकर हमारे लिए क्या भेज होगी? जीजा जी ने कहा जो आप कहीं मैंने उत्तर क्या तुम्हारी दीदी हमारी दारी के जंगल से परेशान रहती है । थोडे से ब्लेड और हो सके तो बिजली से चलने वाला शेवर भेज देना । जी दीदी तुम्हारे जाने के बाद घर एकदम सुना हो जाएगा । सुना है इंग्लैंड में टेलीविजन बहुत सस्ते हैं । क्या एक भेज सकते हो की कोशिश करूंगी? दीपक क्यों लेना? मेरे लिए क्या भेजूंगी? याद रखना मैं यहाँ होती तो दीदी तुम्हारा किसान तुम्हें जिंदगी भर नहीं बोलूंगी । सुना है बाहर बहुत को सूरत खिलौने मिलते हैं । अपने भतीजे भतीजियों के लिए कुछ भेजोगे ना जरूर दीदी और देख अभी के लिए कुछ भी भेजना हो तो हो सके एक दो अच्छे से कार्डिगन भेज देना । अवश्य दीदी किट्टी चेक हो चुकी थी । ट्रांजिट रूम जाने का समय होने लगा था । सुना है बाहर बडी अच्छी मिक्सी मिलती है । बेटी एक हमारे लिए भेज देना, मैं पैसे दे दूंगी । चाची नेगी फरमाइश कर दी मेरा मन वितृष्णा से भर के हैं । कितनी चीजों की फरमाइश हुई हैं उनमें से कौन सी ऐसी चीज है जो भारत में नहीं बनती या ना मिलती हूँ । पर हम लोगों को विदेशी वस्तुओं का इतना आकर्षण है कि उचित अनुचित अनुरोध करने से भी नहीं चुकते तो हर हफ्ते पत्र डालना नहीं ना पढाया । देश है, जरा होशियारी से रही हूँ । संगीत माननी कोई फरमाइश नहीं । सिर्फ मुझे अपनी छाती निपटाकर ही सलाह दी । उनका पर उठा हुआ था । फ्लाइट वीए सेवन सिक्स सेवन के यात्रियों को अंदर आने के लिए घोषणा की गई तो राम मेरी हो रही है । हम दोनों ने संयुक्त रूप से सबका अभिवादन किया । मम्मी और पापा की पहुंच हुए । फिर राम की ओर के संबंधियों का अभिवादन कर ट्रांजिट रूम में जाने के लिए अंदर चले हैं । अंदर हमारे पास पोर्टर सामान को चेक किया गया । फिर हमें बोर्डिंग फिर देखी गई । ट्रांजिट रूम में राम ने दो कोकली और मुझे पकडाते हुए कहा अकेला आया था अब तो मैं लेके जा रहा हूँ । मैं बहुत खुश हूँ । पता नहीं तुम क्या सोचती हूँ मैं मेरी खुशी की कोई सीमा नहीं है । इतनी सुखी तो मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी । तभी सुरक्षा की दृष्टि से हम दोनों की चेकिंग शुरू हो गयी । हाईजैकिंग के कारण ऐसा होता है । मैं तुम्हें पूरी तरह से खुश रखने की कोशिश करूंगा । मेरा विश्वास करो लेना पहले तो मैं खिलाऊंगा, बाद में खुद खाऊंगा । ऐसी बात मत कीजिए । हमें एक है हमारे सुख एक हैं । दुख एक हैं । यात्रियों से वायुयान की ओर चलने की प्रार्थना की गई । सब लोग ट्रांजिक्ट रूम से बाहर निकल आए । कुल तीस चालीस यात्री रहे होंगे । हम लोग बाहर आ गई । विशालकाय बोइंग ज्ञान सामने रहने पर खडा था । हम लोगों ने वहाँ तक पैदल ही जाने का फैसला कर लिया । हम लोगों ने देखा दर्शन गैलरी में सारे संबंधी खडे हुए । हाथ और रुमाल हिलाकर हमें दिखा कर रहे हैं । हम यान तक पहुंच गए । सीढिया चढकर अंदर घुसने से पूर्व हम दोनों ने दर्शन गैलरी की तरफ देखते हुए अपने हाथ हिला दिए । आकृतियाँ स्पष्ट नजर नहीं आ रही थी । अगले दस मिनट में विमान आकाश में ऊंचा उडने वाला था । मैं संज्ञाशून्य सी खिडकी के पास वाली सीट पर बैठी थी । मेरी जिंदगी का एक अध्याय खत्म हो चुका था । दूसरा महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हो चुका था । मेरी जिंदगी का एक अध्याय खत्म हो चुका था और दूसरा महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हो चुका था । मुझे कुछ अजीब सा लगा । मैंने राम की बाहों कि मेरे से मुक्ति पाने के लिए एक मुख्य प्रयत्न किया । वो सब कुछ समझ गए । बोली क्या तो खुश नहीं होती ना हुई । फिर मैंने खिडकी के बाहर दृष्टि डाली । दूर तक चैरासी मिला आकाश नीचे अतल गहराई । मैंने एक गहरी सांस लेकर कहा आपका साथ ताकत तो जैसे जन्म जन्मांतर की खुशी मेरी मुट्ठी में आ गई है । आप ये क्या? आप आपकी रट लगाई हुई है तो क्या करूँ? सिर्फ ऍम क्या? फिर तो जैसी आपकी नहीं सॉरी तुम्हारी मर्जी मुझे फिर कुछ अटपटा सा लगा । हवाई जहाज में इतनी आती थी । होस्ट इस बार बार इधर से उधर घूम रही थी और राम है कि मेरी गर्दन को किसी पेड का तना समझकर झूले जा रही थी । कंधे पर सिर्फ रखे मस्ती में भरे जा रही थी । ऐसे मुझे भी ये सब मादक सा लग रहा था । पर में शालीनता की सीमा में रहना चाहती थी । मैंने नियुक्ति और राम के होटल के बीच हाथ रख दिया तो वो खेल असल में बोली ये विरोध क्यों? ये विरोध नहीं संयम है राम किसी छोटे संयम ने हम भारतवासियों को बर्बाद कर के रख दिया है । ये झूठा संयम नहीं, जहाज संकोच और शालीनतापूर्ण व्यवहार है । तब तो मैं बहुत बडे शौक के लिए तैयार रहना चाहिए ना । कैसे हो पश्चिमी देशों में प्रचलित उन्मुक्त स्वच्छंदता को देख कर तो आश्चर्यचकित रह जाओगी । किस प्रकार में चलते हैं? किस प्रकार राजमार्ग पर चलते चलते वे आपस में एक दूसरे का चुंबन कर लेते हैं । हर जरा धूप निकली नहीं कि पार्कों में युवक युवतियों के जोडे आलिंगनबद्ध दिखाई देने लगते हैं । संस्कारों की बात है । मैंने गंभीर सर में कहा अब तो तुम्हारे संस्कारों को बदलना पडेगा नहीं । सोच में पड गई । फिर शेखर ही मैंने उत्तर दिया आधारभूत संस्कारों को आंखे मोडकर, बदलना कहाँ तक उचित होगा ही तो इंग्लैंड जाकर ही पता चलेगा । फिर आप एक बात का विश्वास करें । रोम में रहकर मैं ऐसा ही करूंगी । जैसा रोमांस ही करते हैं । वो हस पडे हूँ अंग्रेजी का हाथ का तुमने खूब बडी अनुवाद किया है ना । मुस्कुराते हुए बोली जहाजपुर रहा था । दो ढाई सौ यात्रियों के जहाज में मुश्किल से चालीस पचास व्यक्ति बैठे होंगे । आपने अपनी प्रथम हवाई जहाज यात्रा की तेजना से रोमांचित थी । कितना विश्वसनीय लगता है ऊपर से नीचे देखना पहाड गुड्डे गुडियों के खेल में बनाए छोटे छोटे तीनों जैसे लगते हैं । बडे बडे शहर ऐसे लगते हैं जैसे कोई मॉर्डल हो । सागर की असीम जलराशि के ऊपर से उडते हुए मन कांसा जाता है । जहाँ पहले कितनी देखभाल करते हैं, यात्रियों की परिचारिकाएं कितनी आवभगत करती हैं उनके होटों पर तथा एक मुस्कान उभरी रहती है, जहाँ किसी पर्वतीय प्रदेश के ऊपर से उड रहा था । मैं मंत्रमुग्ध इसी खिडकी के बाहर देख रही थी । अगले एक घंटे में बे रोता जाएगा । जानने धीमी से कहा उनका सिर्फ मेरी कंधे पर टिका था । अनायास मेरे मन में कई दिनों से सोया प्रश्न जाग गया । सफर काटने के लिए बातें करने से अच्छा कोई दूसरा काम नहीं । मैंने कहा राम एक बात पूछूं जरूर तुमने शादी में इतनी जल्दी क्योंकि क्यों? क्या मेरी उम्र विवाह क्यों कि नहीं थी? नहीं मेरा ये मतलब नहीं था, वो मैं समझ रहा हूँ । रीना इंग्लैंड के आयकर कानून अविवाहितों के लिए अभिशाप हैं । शादीशुदा हो तो बहुत छूट मिल जाती हैं । यदि अविवाहित हो तो आय का बहुत बडा भाग कर में चला जाता है । ऐसा क्यों? वहाँ की सरकार चाहती है कि लोग व्यस्त में छडे ना रहे हैं । आखिर क्यों सरकार चाहती है । जनसंख्या बडी वहाँ नौकरियाँ ज्यादा और काम करने वाले काम है । कमाल है बस इसलिए मैंने सोचा अपनी आय का बहुत बडा हिस्सा सरकार को देने से तो पत्नी पर खर्च करना ही ज्यादा अच्छा होगा । तो परोक्ष रूप से पत्नी आय का साधन है । वहाँ ये भी कह सकती हो तो रीना तो मैं एक राज की बात बताऊँ । इंग्लैंड में बसे असम की भारतवासी इस मामले में खूब हेरा फेरी करते हैं । कैसी हेरा फेरी महीने आश्चर्यचकित होकर पूछा भारत वर्ष से अपने विवाहिक और बाल बच्चेदार होने के झूठे सर्टिफिकेट मंगा लेते हैं और आयकर में कटौती कराते हैं । कमाल है । यही नहीं अगर कोई अंग्रेज लडकी फस जाती है और विवाह की नौबत आ जाती है तो पहली पति की मृत्यु का झूठा सर्टिफिकेट भी उनके पास आ जाता है । हाँ हो गई मैं सोच में पड थी मेरे मन में फिर वही प्रश्न कुलबुलाने लगा । राम स्वस्थ सुंदर संस्कृत हैं, अच्छी आए हैं । फिर उन्होंने कोई अंग्रेजी लडकी क्यों नहीं फंसाई? या किसी अंग्रेज लडकी ने क्यों नहीं फसाया? मैंने साहस बटोरकर पूछ लिया क्यूँ आपका पाला किसी अंग्रेज लडकी से क्यों नहीं पडा? कहाँ मुस्कुराई? फिर वो दार्शनिको जैसी गंभीर मुद्रा बनाकर बोले अंग्रेज महिलाओं और मौसम के विषय में कोई भी भविष्यवाणी की जा सकती है । मैं समझी नहीं । इंग्लैंड का मौसम भी अजीब होता है । पल में वर्ष पाल मिलूँ । कोई कुछ नहीं कह सकता कि कब क्या हो । मुझे मौसम में कोई अच्छी नहीं रही । अंग्रेजी महिलाएं वो भी वहाँ के मौसम की तरह ही होती हैं । उससे क्या फर्क पडता है? रीना वह सफल प्रेमिकाएं हो सकती हैं, पर पत्तियों के रूप में उनकी सफलता संदिग्ध ही रहती है । ये आप बीती है या जब भी थी अतीत को ठंडी कमरे में ही सोया खडा रहने दो तो अच्छा है । कई बार एक सफल विवाह टूट कर बिखर जाता है क्योंकि पति पति एक दूसरे के अतीत में झाकते की कोशिश करते हैं । मेरा ये मतलब नहीं था । मैं तो यही मजाक कर पूछ रही थी तो मजाक में पूछ रही थी मैं गंभीरतापूर्वक इसका उत्तर दूंगा तुम्हें रीना किसी भी अंग्रेज महिला के साथ किसी भारतीय पुरुष का विवाह सफल होना लगभग नामुमकिन है । पहली बात तो ये कि अंग्रेजों के दिल में अभी भी वो भावना मौजूद हैं कि भारतीय उनके गुलाम थे । दूसरे विवाह सामान भावनात्मक स्तर वाले दो व्यक्तियों के बीच का एक पवित्र बंधन है । पर इंग्लैंड में वो एक समझौता माना जाता है । मैं बंधन चाहता था, समझौता नहीं । और दूसरी बात ये कि विवाह सामान भावनात्मक स्तर वाले दो व्यक्तियों के बीच कई पवित्र बंधन है । पर इंग्लैंड में ये सिर्फ एक समझौता माना जाता है और मैं बंधन चाहता था समझौता नहीं । और शायद ही संस्कृति, आचार, विचार, खान पान, धर्म, रहन सहन की भिन्नता दीदी इस मार्ग में बहुत बडी बात है । तुम ठीक कह रही हो रही ना फिर भी उस सब के बावजूद इस तरह की विवाह होते हैं, होते हैं पर सफल कितने होते हैं? कितने दिन चलते हैं वो वास्तव में वे क्षणिक आवेग ये सारे एक आकर्षण पर आधारित होते हैं । शरीर की वास्ता संतुष्ट होते ही दोनों के रास्ते अलग हो जाते हैं । हम वास्तव में बहुत बुद्धिमान होराम इस तारीख के लिए धन्यवाद । पर मैंने बुद्धिमानी क्या बेवकूफी ही ये तो समय ही बताएगा । मुस्कुराते हुए राम ने कहा और मेरी बगल में चिकोटी काट ली । महीने राम का सीधा हार अपने दोनों हाथों से कसकर पकड लिया और बोली मुश्किल भरोसा रखो राम, मैं तुम्हें जीतेजी बेवकूफी का एहसास कभी नहीं होने दूंगी । तभी सीट के ऊपर लगी बत्ती जला थी और उस पर ये आदेश आया और उस पर ये आदेश आया । अपनी सुरक्षा बैठ बाद लीजिए । पायलट ने भी घोषणा की हमलोग अगले ही कुछ दिनों में बेरूत हवाईअड्डे पर उतरने वाले हैं । वहाँ का तापमान ऍम हाइट है । इस समय वहाँ डॉक्टर बजे हैं । कृप्या अपनी सेल्सिय बेल्ट बांध लें और सिगरेट बुझा दें । हम लोग बेरूत हवाईअड्डे पर नहीं बेरू । ड्यूटी फ्री सामान के लिए प्रसिद्ध है । हम लोग ट्रांजिट रूम में गई । पास ही सटा हुआ है । छोटा सा बाजार एक बडे हॉल में दुकानों में सामान अटा पडा था । टीवी कैमरे के रिकार्डर, सौंदर्य प्रसाधन की सामग्री, खेल, खिलोने, उपहार की वस्तुएं, घडियां, चश्में, साडिया सामान देकर तो मेरे मुँह में पानी भराया । तभी मैंने एक पिक्चर, पोस्टकार्ड, घंटा और उस पर एक संक्षिप्त असर संदेश लिखकर वहीं से टिकट लगाकर पोस्ट कर दिया । राम खरीदारी कर रही थी ताकि मुझे ख्याल आया कि मैंने ना केवल अपने ही घर कार डाला, एक कार्ड मांझी को भी डालना चाहिए । मैंने एक कार्ड और खरीदा और राम के पति पर पोस्ट कर दिया । राम ने शराब की दो बोतलें खरीदी । कुछ थोडा सा धक्का लगा । कुछ ऐसी मेरी मनोदशा तार गए मुस्कुराते हुए वही इंग्लैंड की जलवायु में थोडी बहुत लेनी अनिवार्य हो जाती है ना । फिर यहाँ ये बोतल सिर्फ बाइस रुपये की मिली है । प्लेन में अट्ठाईस की थी इंग्लैंड में पैंतालीस की ओर भारत में पौने दो सौ की मिलती है । मैं कुछ नहीं बोली, सिर्फ मुस्करा दी । जहाज की रवाना होने का समय हो गया था । हम लोग ट्रांजिट रूम से बाहर आए और ट्रॉली में बैठकर जहाँ तक पहुंच गए अगले कुछ क्षणों में जहाज और चला । साफ नीला सागर चल और ऊंची ऊंची पहाडियों पर बने मकानों को नीचे छोडता हुआ जहाज उपर आकाश की ओर उडता चला जा रहा था । साफ पीला सागर जल और ऊंची नीची पहाडियों पर बने मकानों को नीचे छोडता हुआ जहाज उपर आकाश की ओर चला जा रहा था । शायद इन बोतलों को देखकर तुम कुछ और सोचने लगी हूँ । राम ने मुझे खोलेगा नहीं तो रीना, सिगरेट, शराब या मांसाहारी भोजन को हम भारत में बुरा समझते हैं या उसे धर्म के विरुद्ध समझते हैं । पर पश्चिम के इन ठंडे देशों में ये वस्तुएं जीवन के अनिवार्य अंग है । महिलाएं, पुरुष, बच्चे सब समान रूप से इसका उपयोग करते हैं । इसमें कोई आप नहीं । मैं फिर भी चुका हिं तुम्हे अपना एक अनुभव सुनाओ । पहले पहले मुझे भी बडा विचित्र लगा था । मैं एक बार जर्मनी गया था । मेरे साथ एक और भारतीय मित्र था । हम दोनों कार में थी । नवंबर का अंतिम सकता था । कडाके की सर्दी पड रही थी । नाक कान तो जैसे गायब हो गए थे । कॉफी पीने के लिए हम लोग एक छोटे से शहर में एक पब में रुके । हम लोग कॉफी का इंतजार कर रहे थे कि तभी एक हस्त पुष्ट जर्मन महिला अपने दोनों बच्चों के साथ वहाँ एक बच्चा कोई आठ वर्ष का था और दूसरा कोई छह वर्ष का । उस महिला ने तीन मत बियर का ऑर्डर किया और सिगरेट सुलगा ली । बेट्रिस तीन बडी मक ठंडी बीयर से उभरते हुए ले आई । मैंने उत्सुकतापूर्वक उधर देखा और आश्चर्य भर कर उसे देखता ही रह गया । शायद वो मेरी मनोदशा ताड गयी । वो अंग्रेजी जानती थी । उसने गर्व से टूटी फूटी अंग्रेजी ने अपने दोनों हाथों से दोनों पक्षों को ऊपर उछालते हुए कहा, श्रीमान जर्मन महिलाओं के स्तन में दूर नहीं बीयर प्रवाहित होती है । जन्म के साथ ही शिशु इसका पालन करने लगता है और मैं अवाक रह गया । शाम का अनुभव सुनकर में भी आश्चर्यचकित रह गयी । बडी अद्भुत है । पश्चिम की जिंदगी । यही नहीं रीना इंग्लैंड में मध्य निषेध जैसी कोई चीज नहीं होती । यहाँ तक कि बेकारी के भर्ते में शाह का इलाज शामिल होता है । हैं भी गाडी का भत्ता मैं समझी नहीं । हाँ, ये भी कमाल की व्यवस्था है । इंग्लैंड में जिससे सामाजिक सुरक्षा कहते हैं, जो व्यक्ति बेकार होते हैं या जो नौकरी छोड देते हैं और दूसरी नौकरी तक घर बैठ जाते हैं, उन्हें सरकार द्वारा जीवन यापन करने के लिए साप्ताहिक घटना मिलता है । जिसमें शराब, सिगरेट और मनोरंजन तक का खर्चा शामिल होता है । कमाल है तब तो वहाँ कोई भूके पेट नहीं होता होगा । सवाल ही नहीं उठता । वहाँ भारत की तरह नहीं है की असम के लोग आधा पेट रहते हैं, नंगे घूमते हैं । यात्री डस्टबिन से झूठी चीजे उठाकर खाते हैं । वास्तव में पश्चिम में भी बडी प्रगति की है । पर इस प्रकार की सामाजिक सुरक्षा से अकर्मण्यता को बढावा नहीं देता हूँ । जब घर बैठे हाथ पर हाथ रख के पैसे मिल जाए तो कौन काम करें? रीना वे लोग आधारभूत रूप से ईमानदार होते हैं । ये काम चोर नहीं फिर भत्ता प्रति सत्ता कम होता जाता है । सरकार ऐसे लोगों को नौकरी पर लगाने की कोशिश करती रहती है । फिर यदि ये सिद्ध हो जाए कि आदमी जानबूझकर बेकार घर बैठा है तो यह भत्ता बंद कर दिया जाता है । मुझे लगा मैं किसी स्वप्नलोक या परिवेश की कहानी सुन रही हूँ । कितना उन्नत और विकसित देश है । जीवन कितना सुखी है । वहाँ मानव कितना खुश होगा । वहाँ कितना सुखद संयोग है कि मैं ऐसे देश में रहने जा रही हूँ जहाँ जी रोक के ऊपर से उड रहा था । नीचे बादलों के झुंड के झुंड टहल रहे थे जहाँ लगभग चालीस फीट की ऊंचाई पर उड रहा था मैं जहाज में नहीं असीन शून्य मैं अकेली भारहीन की कह रही हूँ जहाँ यूरोप के ऊपर से उड रहा है । नीचे बादलों के झुंड के झुंड कह रहे हैं जहाज लगभग चालीस हजार की ऊंचाई पर उड रहा है । आपने जहाज में नहीं अस्सी शून्य में अकेली भारतीय सही कह रहे हैं । मेरी घडी में रात के आठ बजे थे । इस समय लंदन में साढे तीन बजे होंगे । राम ने मीठी सर में कहा जहाँ लंदन के हीथ्रो हवाईअड्डे पर उतर रहा था, मैं अभिभूत थी की सब लोग की मेरी मंजिल आ गई थी । हवाई जहाज रुका । हम लोग बाहर आए । काली काली बादल छाए हुई थी कि सी रिएक्शन वर्ष हो सकती थी । बडी ठंडी हवा चल रही थी जहाँ से बाहर निकलते ही मेरी दृष्टि जिस व्यक्ति पर पडी वो थाई भारतीय एक सरदार की पास ही खडे दूसरे यान की सफाई कर रहे थे । हम तीनों के सहारे हम लोग आगे बढ रहे थे । कितने लंबे कारिडोर थे रास्ते में मैंने देखा एक अच्छी व्यवस्था की । भारतीय महिला खर्च पर तो छारा लगा रही थी । हम लोग पासपोर्ट परीक्षा काउंटर पर पहुंच गई ।

भाग - 4.01

भारत चार यही है मेरा सब लोग । यही वह धरती हैं, जिस तरह पाओ रखने के लिए भारतवासी तरफ जाते हैं । मैं भी कितनी खुशकिस्मत हूं कि राम जैसा पति मिला और लंदन जैसा शहर मिला रहने के लिए नहीं, मन ही मन बन बता रही थी । कोच तेज रफ्तार से मोटर भी पर दौड रही थी और मैं खिडकी के बाहर चक्की दृष्टि से सब कुछ देख रही थी । बिल्कुल ऐसे ही जैसी की कोई गांव वाला पहली बार शहर आया हूँ । हीथ्रो हवाईअड्डे से बाहर निकलकर हम लोग विक्टोरिया सिटी टर्मिनल जाने वाली खोज में बैठ गई थी । वहाँ से भूमिगत रेल द्वारा हमें अपने घर जाना था । मैं बेहद खुश थी, पर मैं नोट कर रही थी । राम कुछ चिंतित से नजर आ रही थी । बीवी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वो इतने गंभीर हो गए हैं । कोच से मुझे एक पहाडी सी पर बना किला नजर आया । मैंने नाम से पूछा ये क्या है? फॅस रामकेश्वर में तटस्थ था की मुझे ये शिक्षा खटक गई । मैंने उत्सुक होकर पूछा क्या बात है? आप कुछ उदास लग रहे हैं? नहीं तो नहीं । तो क्या आपके चेहरे से परेशानी साफ झलक रही है? नहीं ऐसी कोई खास बात तो नहीं? आम ही सही बताइए तो राम पल भर को मौन हो गई तो मुझे कुछ अटपटा सा लगा क्या? पत्नी बनकर भी मेनका विश्वास नहीं जीता हूँ । मैंने उदासर में कहा पति को कि हमें आज नहीं बना होगी तो जिंदगी कैसे काटोगे? राम अब तो हिन्दू ने एक है । जिंदगी की सुख दुख की समान रूप से भागीदारी करनी है । बताओ ना क्या बात है कोई खास नहीं । बस जरा मकान की दिक्कत है । आज कल में एक नाम रोड पर अपने मित्र के साथ रह रहा हूँ । वो डॉक्टर है, विवाहित है । उसके दो वर्षीय एक बच्चा है । दो कमरे के मकान में हम सबकी गुजर हो जाती है । मैं हर सप्ताह उसे रहने और खाने के पैसे देता हूँ । भारत आते समय मैं उसे कह कर आया था कि वो मेरे लिए कोई नई जगह तलाश कर के रखी । भाई ने कोई पत्र भी नहीं लिखा । पता नहीं उसने कोई जगह तलाश कर ली होगी या नहीं । बस इतनी सी बात पर परेशान हो गए । मैंने मुस्कुराकर था ये पी सी बात नहीं लेना । लंदन में आवाज की समस्या बडी विकट है और फिर भारतीयों के लिए तो राम ने बात को अधूरा ही छोड दिया । आधारहीन चिंताओं, बिना जन्मी परेशानियों को लेकर दुखी होना कहाँ की धीमानी हराम हो सकता है । अपने डॉक्टर मित्र ने कोई प्रबंध कर लिया हूँ । हाँ संभव है फिर अभी से परेशान हो रहे हैं । क्यूँकि कहकर राम ने अपनी बाहर मेरी गली में डाल दी । कोच विक्टोरिया टर्मिनस पर पहुंच गई । दो अॅान हमारे पास एक महीने पकड ली और दूसरी रानी हम दोनों बाहर आ गयी । वो सामने बोल देख रही हूँ । राम ने सडक की दाहिनी ओर कुछ दूरी पर इशारा किया । मुझे कुछ नहीं दिखाई दे रहा । चलो पास पहुंचने पर दिखाई दे जाएगा । क्या है विक्टोरिया क्यूब स्टेशन हम दोनों और पैदल चल दी । कुछ दूरी पर अंग्रेज किशोर किशोरियों का एक झुंड एक पक्के बाहर खडा था । किशोरों के सिर मुंडे हुए थे । किशोरियों ने गन्दी और विचलित सी ढीली ढाली पोशाके पहन रखी थी । उन्हें देखते ही राम ने तो फुटपाथ छोड दिया और दूसरे फुटपाथ पर चले गए । तभी रिमझिम रिमझिम वर्षा होने लगी । अब दूसरी ओर था पर जैसे ही हम लोग उसके सामने से गुजरे की उन लडकी लडकियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया । कॅश अश्लील मुद्राएं प्रदर्शित कर रहे थे । उनके मुख पर हिंसा और घृणा की नंगी आकृतियाँ नाच रही थी । ये लोग करीब करीब घर जी क्या कह रहे हैं, उनकी तरफ मत देखो । अच्छा सामने देख रहे । आप चुपचाप सामने देखी चलिये हूँ उत्तर देने की आवश्यकता नहीं वरना खून खराबा हो सकता है । सामने घबराई सर में कहा मुझे लगा वो एक्टर नर्वस हो गए हैं । उनका चेहरा अकेला पडा हुआ था और उनकी चांस तेज हो गई थी । वो बार बार कनखियों से पक की ओर देख लेती थी । आखिर में इतना पुराने की क्या बात है? भारत में लडकी राहत चल की लडकियों को नहीं छुट्टी वही ना । ये वो बात नहीं है क्यांकि स्वर में खेलती थी और वह तेज चलने लगा । मुझे हटेगी लेकर इतना तेज नहीं चला जाता है । पता नहीं क्या चक्कर है आप पुरुष हैं । आपकी आश्रम में मुझे के साथ काम है जैसी कैसे लगाते हुए हम दोनों विक्टोरिया स्टेशन पहुंच गए । इलाज हमने चैन की सांस ली । ठंडी हवा और वर्षा की फुहारों के बावजूद यांग के माथे पर पसीने की बूंदें भराई थी । स्टेशन पर पहुंचकर वो कुछ आश्वस्त हुए । फिर वो धीरे से बडबडाई बच गए । मैं बुरी तरह रहसि की जाल में फंस गई थी । आखिर तो क्या चक्कर है । राम स्टेशन पर लगी एक मशीन के पास पहुंचे । उन्होंने जेब से कुछ छेलिंग निकले और इस मशीन में डाल दिए । मशीन से दो टिक्की निकल आई । फिर वह मुझ से बोली मेरे पीछे पीछे आ जाओ । राम ने दे कर लो । लाइन वाला बोर्ड पढा और लाल तीनों के शहरों पर चलने लगे । स्वचालित सीढियां दो एक्सीलेटर से उतरकर हम लोग प्लेटफॉर्म पर आ गयी । तीन मिनट में ट्रेन आ गई । दो तरह के देते एक सिगरेट पीने वालों के लिए दूसरी नो स्मोकिंग वाले हम लोग जुटे । बस सामने आया उसी में चढ गए । जैसे ही हमने कम्पार्टमेंट में प्रवेश किया दरवाजे स्वतः ही बंद हो गई और ट्रेन ने पलभर में तेज रफ्तार पकडेगी बडी सुंदर व्यवस्था है । महीने राम से कहा लंदन के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने के लिए कुल पंद्रह मिनट की जरूरत है जबकि दिल्ली की बसों के लिए तो पहले घंटों प्रतीक्षा करूँ । मैंने उत्सुकतापूर्वक पूरी कम्पार्टमेंट का निरीक्षण किया । डिब्बा लगभग आधा खाली था । एक होने में एक नवयुवक और एक नवयुवती आलिंगनबद्ध खडे थे और बीच बीच में एक दूसरे का चुंबन कर लेते हैं । मुझे आश्चर्य हो रहा था और में बार बार उन की ओर देख रही थी । इस तरह नहीं देखते रहना । राम मेरी मनोदशा तार गए क्यों? अंग्रेज लोग बडे रिजर्व होते हैं । वे दूसरों की व्यक्ति का जिंदगी में दखल नहीं थी । देखना आप हैं पापा कुछ नहीं, पर इस तरह से घुटने से साफ जाहिर हो जाता है की तो मुझे भी और विदेशी हो हूँ । बहस नहीं करते रहना जैसा मैं कहूँ वैसा करती हूँ । हर देश और हर समाज के कुछ नियम होते हैं । कुछ शिष्टाचार होते हैं, उसका उल्लंघन करना शालीनता के विरुद्ध होता है में उखडकर रह गई ही कैसे? बंधन है ही ऐसा शहर है जहां स्वच्छंदता और निर्भीकता से हम चल सकते हैं, देख सकते हैं वही धक्का सा लगा मेरे सिंधूरी सपनों का रंग पलभर में धूमिल पडने लगा नहीं मौन हो गयी । मुख्यद्वार के पास एक भारतीय खडे थे । ब्रिटिश रेल की यूनिफॉर्म पहनी नहीं, हाथ में झोला था जिसमें शायद सब्जी भरी हुई कि क्योंकि उसमें से मूली बाहर झांक नहीं ऍम ड्यूटी खत्म करके घर लौट रहे थे । हमारी सीट के ठीक सामने एक भारी भरकम अंग्रेज महिला बैठी हुई थी । उसने अपने विशालकाय और बेडौल स्तनों पर बाइबिल का एक छोटा सा संस्करण रखा हुआ था और वह से पडने में तल्लीन थी । उस महिला के पास ही एक अंग्रेज थी । बैठा था अधीर अवस्था साफ सुथरा सूट तो शाम का अखबार पढ रहा था । ट्रेन कल भर को हर एक स्टेशन पर रुकती फिर तेजी से चल पडती । वो अंग्रेज एक स्टेशन पर उतर गया पर अखबार को वहीं सीट पर छोड गया । लगता है वो लगता था महीने जी ने से कहा राम मेरी बात समझ गए मुस्कुराकर उन्होंने कहा जी नहीं दिल्ली में अखबार की रद्दी बिक जाती है । पर यहाँ नहीं अखबार दूध की वोट ले, कोका कोला आदि पेयपदार्थों की बोतलें एक बार प्रयोग करके नष्ट कर दी जाती हैं । उनका कोई मूल्य नहीं होता हूँ । अच्छा कमाल है । मैं आश्चर्यचकित रह गई । कमाल की कोई बात नहीं । यहाँ मानव श्रम बहुत महंगा है । जितना इन को एकत्र करने में खर्चा करना पडे उससे अधिक सस्ती पडती है । ये बोतलें भाई क्षेत्र देश है । मैं केवल नहीं कर पाई । लेबर हेड स्टेशन आ गया था । हम दोनों कैसी नहीं किया गई । बाहर जाने का मार्ग तीनों द्वारा प्रकाशित था । हम उन्हें तीनों के सहारे आगे बढ रहे थे । फिर स्वचालित सीढियों से हम लोग ऊपर आ गयी । गेट पर दोनों टिकटे देखकर हम लोग स्टेशन से बाहर आ गई । गेहॅू लेने के लिए एक मोटी निकालो महिला खडी थी । उसे देखकर में पल भर को डर गई । बस यहाँ से दस मिनट का पैदल रास्ता है । राम के स्वर में लंदन पहुंचने के बाद पहली बार मुझे क्लास की झलक दिखाई थी तो हम साथ हो तो दस मिनट । क्या मैं दस घंटे भी पैदल चल सकती हूँ । ये फिल्मी डायलॉग बोला कहाँ से सीखा फिल्मों से कहकर मैं ऍसे अच्छा फिर से सर सर कहकर में हंस पडी । राम भी हंस पडी हम लोग । महत्वपूर्ण मोटर भी एम फोर के पुल के नीचे से गुजर रही थी । अनायास मुझे विक्टोरिया स्टेशन के पास वाली घटना याद आ गई । यहाँ तो कोई खतरा नहीं । मैंने पूछा इस असंगत आकस्मिक प्रश्न में राम को चौका दिया । कैसा खतरा वैसा ही विक्टोरिया स्टेशन के पास वाला अरे नहीं ये खेत एकदम सुरक्षित है । पर उनकी वो बात की थी । मेरी समझ में तो कुछ नहीं आया । फिर कभी बता दूंगा अभी बचाने में क्या आपत्ति है? लंदन में पहले दिन ही अप्रिय बातें होंगी तो मन उदास हो जाएगा । अब तो यहाँ भी गई हूँ । उदास होने की क्या बात है । वास्तविकता का मुकाबला करने के लिए साहस और धैर्य जुटा होंगी । यदि आप मुझे अज्ञान के अंधेरे में रखेंगे तो फिर मेरा कायर और डब्लू बनना स्वाभाविक हो जाएगा तो उनसे बहस नहीं, कोई नहीं देख सकता हूँ । आठ के पास बसे किए थे एकमात्र स्तर होता है अब सुनाइये ना तो तुझे मालूम ही है कि आज इंग्लैंड में लगभग छह लाख भारतीय हैं । स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले जब भारत में अंग्रेजों का राज्य था तो लगभग प्रत्येक अंग्रेज का कोई ना कोई सजा संबंधी भारत में होता था । पर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद स्थिति एकदम बदल गई । अब प्रत्येक भारतीय का कोई ना कोई रिश्तेदार इंग्लैंड में मौजूद है तो क्या हुआ? अंग्रेजों को भारतीय की इस बढती हुई जनसंख्या से चिंता होने लगी । उन्होंने उनके आगमन का विरोध करना शुरू कर दिया । इंग्लैंड की पत्र पत्रिकाएं भारतीयों के विरुद्ध घटना का विश्व मन करने लगी । एक पत्र में तो यहाँ तक लिखा गया था कि भारतीयों को मुर्गी के बच्चों की तरह इसी तरह बढने दिया गया तो वो दिन दूर नहीं की जनसंख्या के आधार पर एक भारतीय इंग्लैंड का प्रधानमंत्री चुन लिया जाएगा । पर इस घृणा के प्रचार ने नई उम्र के अंग्रेज लडके, लडकियों को हिंसा के मार्ग पर लाकर खडा कर दिया । लडकों ने स्किन है मतलब बना लिए । उनके मुंडे हुए सिर्फ हमारे प्रति उनकी घटना के प्रतीक है । घृणा और उपहार से हमें करीब करीब गाल अर्थात रसेदार भोजन करने वाला लडका लडकी कहते हैं । जहाँ कहीं लोग का दुख का भारतीय को देखते हैं, उस पर हमला कर देते हैं, भारतीयों की दुकानों को लूट लेते हैं । अखबारों ने सारे समाचार नहीं सकते, पर ही सच है कि अनेक भारतीय इसी क्लब के सदस्यों के हाथों मारे गए हैं । मैं कहाँ थी, मैंने आशंका से भर गया । एक सुरक्षा और अपमान की भावना ने लंदन आगमन की उत्तेजना को ठंडा कर दिया । लंदन में लोगों के कुछ खास गढ हैं । उदाहरण के लिए लंदन का ईस्ट एंड भारतीयों के लिए कब्रिस्तान है । सरकार कुछ नहीं कर रही, इस विषय में था थोडा बहुत अंकुश रखे हुए हैं । पर सरकार कैसे सफल हो सकती है यदि जनमत उनके साथ हो

भाग - 4.02

बातों ही बातों में घर आ गया । वहाँ पीटर का एक बोर्ड लगा हुआ था । डॉक्टर स्वरूप जीती । मन उदास सा हो गया था । फिर भी अपने आप को संयत कर मैं खुद को नये वातावरण में डालने के लिए तैयार कर रही थी । राम ने कॉलबेल बजाई । दो फल की प्रतीक्षा दरवाजा खुला सामने एक भारतीय महिला खडी थी अरे राम भाई तुम्हारे मैं तो घंटों से तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही थी तो इसका मतलब है कि आपको मेरी चिट्ठी मिल गई थी । हाँ मेरी भाभी के साथ आई है भाई, कमाल की रुचि है तुम्हारी राम भाई भावी किया है, चार टुकडा है । अरे आओ मैं भी कैसी हूँ । बाहर खडे खडे ही बातें कर रही हूँ । इसे स्वरूप बेहद खुश नजर आ रही थी । उनके व्यवहार में ऐसी चपलता थी जैसी कई दिनों के भूखे व्यक्ति को अचानक ढेर सारा खाना मिल जाए । डॉक्टर साहब कहा है मुन्ना कैसा है? सब ठीक है ना । राम ने अंदर घुसते ही कहा सब ठीक है तो उनका हो । भारत में सब अच्छे हैं । में देवर भाभी के असम बांध और असामान्य वार्तालाप को सुन रही थी और उलझ गई थी । मैं इसे स्वरूप मुझे भावी कह रही थी, पर है तो वो काफी उम्र की महीने उन्हें काफी गौर से देखा । बडा बासी का व्यक्तित्व था उनका पिता पिता थका थका हारा हारा साल व्यक्तित्व सारा शरीर मुरझाया हुआ मुझे मुझे निष्प्राण सी आंखें, तेरा चेहरा अस्त व्यस्त, बालों के बीच अधिक मिट्टी सी सिंदूर की देखा । विचित्र से ढीली नाइट सौ किस्म की कोई चीज पहले हुई थी । मुझे लगा जैसे स्वरूप की जिंदगी ने जरूर कोई घर लगा हुआ है । अंडर पहुंचकर मैंने कमरों की दशा देखे तो मेरा मन डूब गया । व्यवस्था पसंद समाज में ऐसी व्यवस्था ये क्या हो गया, क्या सोचा था और क्या हुआ? वही चक्कर से आने लगे । शायद तुम्हें नींद आ रही है । राम ने मेरे सिर पर हाथ खेलते हुए कहा हाँ मुझे नहीं जा रही थी । मेरी कलाई पर बंधी घडी में बारह बज गए थे की सोच रही थी मम्मी पापा दीपक मांझी सब लोग खा पीकर आराम से सो रहे होंगे । हर यहाँ अभी डिनर बनने की तैयारी भी शुरू नहीं हुई थी । मेरी आंखें नीट के कारण बोझिल हुई जा रही थी और मान पर अवसाद का बोझ सारे शरीर को सुनने किये जा रहा था । मैंने अपनी कलाई पर बंधी घडी की ओर देखा तो राम बोली अब इसमें टाइम एडजस्ट कर लो । जल्दी क्या है बार बार इसे देख होगी तो अवचेतन मन इस परिवर्तित देशकाल से संबंधित हो सकेगा । जब हो जाएगा तो कर लूंगी । मेरे रूखे स्वर को सुनकर राम कुछ चिंतित हो गए । फिर गंभीर सर में वो बोली दो चार दिन में सब ठीक हो जाएगा । चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है । सब कुछ से उनका क्या मतलब था? मैं समझी नहीं । मैं आगे बातचीत करने की स्थिति में भी नहीं थी । तुम कुछ थकी सी लग रही हो, जाकर अपने कमरे में आराम करो । मैं खाना वहीं पहुंचा दूंगी । मिसेस स्वरूप मुन्नी को दूर खिलाकर रखी और मुझसे इसमें ये भरे स्वर में बोली अपना कमरा । मेरा तो इस घर में दम कट रहा था । लगभग दस बाई बारह के दो कमरे । उनमें ठेस सारा सामान भरा हुआ था । कहीं दिल रखने की भी ज्यादा नहीं थी । मैं स्वरूप को इतनी अव्यवस्था पसंद थी की सारी चीजें अस्त व्यस्त रूप से पडी थी । मुझे तो ये दृश्य एकदम अविश्वसनीय लगा । टेलीविजन के ऊपर भी मैंने ब्लाउज, पेटीकोट और बनियान पडे हुए थे और मेरा कमरा उसमें सिर्फ एक पलंग था । चारों तरफ फर्ज पर चीजें लिखी हुई थी । इस असामान्य और अप्रत्याशित परिस्थिति से समझौता करने के अलावा कोई और चारा भी तो नहीं था । मेरे पास नहीं उठी । अपने तथाकथित कमरे में जाकर पलंग पर पड रही । जहाँ मैं लेती थी वहाँ से निचे स्वरूप के कमरे का दृश्य स्पष्ट दिखाई दे रहा था । उस कमरे में राम डॉक्टर स्वरूप तथा मिसेस स्वरूप बैठे कुछ मंत्रणा कर रही थी । पर अभी कुछ देर पहले ही पर अभी तक कुछ देर पहले हुए एक रहस्य उद्घाटन के धमाके से मेरा मन अभी तक सुनने सा हो रहा था । हम लोग चाय पानी खत्म नहीं कर चुके थे कि डॉक्टर साहब आ गए । मुझे देखकर वो अत्यंत प्रसन्न हुए । मेरी बडी प्रशंसा की उन्होंने । मुझे लगा डॉक्टर स्वरूप निहायत ही समझदार और सुलझे हुए व्यक्ति हैं । उनके मुख पर निश्चितता और नैसर्गिक शांति थी । भाई राम तुम तो अपना काम कर आए पर इन दिनों इतनी दौड धूप करने के बावजूद हम तुम्हारे लिए कोई मकान नहीं खोज पाए । ये तो गडबड वाली बात हो गई । फिर हम के चेहरे पर चिंता की रेखाएं भराई । मैंने भी ये सुना तो मेरा दिल टूट गया । अरे इसमें जल्दी के साथ की है फुटपाथ पर बैठे हो तुम लोग अपना घर है बने रहो जब कोई ढंग का मकान मिले तो बदल लेना फिर कोई हमारा तुम्हारे ऊपर एहसान हैं । अरे रहने खाने का पैसा देते हो राम शीला ठीक कह रही है भावी आई है जरा दस पांच दिन इन्हें इस दुनिया की सैर कराओ । घुमाओ फिराव फिर फसाना ने चूल्हे चौके के चक्कर में इतने वर्षों के बाद तो लगा है जैसे घर के पतझड में बाहर आई है । कोई तो मिला बोलने चालने वाला कुछ दिन तो सबके कटेंगे में से स्वरूप के स्वर में गहरी आत्मीयता की डॉक्टर साहब और में से स्वरूप का नेता, डॉक्टर साहब और में से स्वरूप का आत्मीयता और इसमें भरा ये व्यवहार मुझे कहीं बहुत अंदर तक भी हो गया ने आज तक हो गई । तो इसीलिए आप लोगों ने इस विषय में गंभीरतापूर्वक तलाश नहीं कि राम ने तटस्थता भरे स्वर में पूछा । नहीं राम ऐसी बात नहीं है । मैंने बहुत तलाश की । कई अपार्टमेंट देखे । बडे महंगे हैं । डबल अपार्टमेंट का किराया कम से कम पंद्रह पहुँच सकता ही है । पंद्रह । ॅ राम अवाक रह गया । पंद्रह पॉंच यानी की तीन सौ रुपये । मैंने मन ही मन हिसाब लगाया । फिर धीमी सर में कहा इतना तो हम लोग खर्च करने की स्थिति में है । मैंने मन ही मन हिसाब लगाया । फिर धीमी सर में मैंने कहा इतना तो हम लोग खर्च करने की स्थिति में हैं । मैंने ये हिसाब लगा के समय सोचा था कि दो हजार रुपये साप्ताहिक आये वाला व्यक्ति आसानी से तीन सौ रुपये मकान पर खर्च कर सकता है । यह तो आय के दस प्रतिशत से भी कहीं काम है । भारत में तो किराया उससे कहीं अधिक है । मेरी बात संकट डॉक्टर साहब मुस्कुरा दिए । उस मुस्कुराहट में कुछ ऐसी अर्थहीनता व्यंग और बाहर था की मैं घर गयी । दोनों पुरुषों ने मेरी बात को पहली बना दिया था । पर तभी में से स्वरूप ने सारी स्थिति स्पष्ट कर दी । वो बोली अभी राम भाई सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत कुल दस कौन साप्ताहिक पा रहे हैं । हाँ अच्छी नौकरी लगते ही तुम दोनों कोई अच्छा सा मकान तलाश करके शिफ्ट कर लेना । पर एक बात है भाभी बुरा ना मानो तो कहता हूँ राम भैया को नौकरी मिलने के बाद भी तुम लोग इतना महंगा मकान लेने की स्थिति में नहीं, आप आओगी नहीं । जैसे आकाश से पृथ्वी पर आ गई तो राम बेकार है । आठ हजार रुपये मैकेनिकल इंजीनियर क्या वह बडा धोखा था? क्या हुआ? एक भयंकर झूठ था सर की की बहुत छूट ही मेरे माथे पर पसीने की बूंदें भराई । मुझे लगा मेरी आंखों के सामने चितकबरे धब्बे नाच रहे हैं । रीना मुझे गलत, मैं समझना । इंग्लैंड में लोग नौकरियाँ ऐसे बदलते हैं जैसे हर सुबह हम अपनी मैली कमीज में भारत जाने से पूर्व जिस समय काम करता था, उन्होंने मुझे दो महीने की छुट्टी देने से इंकार कर दिया । बस मैंने नौकरी को लात मार दी । अब देखना दो चार दिन में नौकरियों की लाइन लग जाएगी । राम ने मुझे समझाने की कोशिश की । मैं कुछ नहीं बोली । केवल पथराई दृष्टि से शून्य ताकती रही । भावी जी राम ठीक कह रहा है, यहाँ कोई ज्यादा दिन बेकार नहीं रह सकता । यहाँ काम ज्यादा है और आदमी काम है । डॉक्टर साहब ने राम का समर्थन किया । शायद में से स्वरूप ने स्थिति की भयावहता को पहचान लिया था । उन्होंने खोरकर राम को देखा फिर मेरे कंधे पर अपना । इसने ये भरा हाथ टक्कर बोली भाभी, तुम सैनिक की चिंता मत करो । क्या ये सब आ के राम भाई ने तो में पहले नहीं बताई । नहीं अनायास मेरे मुंह से निकल गया । बस यही खराबी है । हम भारतीयों में तडी बाजी में हमारा मुकाबला नहीं । हम लोग भारत जाएंगे । अपने नाते रिश्तेदारों पर वो ड्रॉप जमाएंगी कि बस पूछो मत । पता नहीं अपनी आपको तो बताकर इन लोगों को क्या मिल जाता है । शादी हो जाती है पर बस में कह गई रीना राम लगभग ठीक पडे । ठीक खोमद्राम भाई । डॉक्टर साहब बोले तो क्या इसका मतलब था कि मैं सच्चाई बचाकर अविवाहित रह जाता है । राम को क्रोध आ गया था । मैं अपने पांव पर खुद कुल्हाडी नहीं मारना चाहती थी । दो बाहर के व्यक्तियों के सामने अपने वैवाहिक जीवन को तमाशा नहीं बनाना चाहती थी । जो कुछ दिन गया था वो मोटी था । असली या नकली । जो भी था तो मोती था । मैं दिन अमृतसर में बोली यहाँ मैं क्षमा चाहती हूँ । पुलिस मुझे गलत न समझें । मेरा मतलब नहीं था जो तुम समझे । मैं तो सिर्फ ये कहना चाहती थी कि मेरी बात को बीच में ही काटकर राम ने कहा छोडो इस बात को सन्तो लो । भारत में कोई पत्र पत्रिका ले लो, उसमें रेवाही विज्ञापन भरे मिलेंगे । उनमें से अधिकांश ऐसे नवयुवकों के होते ही जो विदेश में जाकर बस गए होते हैं । उन में से किसी को पांच से दस हजार रुपये मासिक से कम की आमदनी नहीं होती । उनमें से कोई इंजीनियर, डॉक्टर या सीनियर जी के किसी काम नहीं । क्या ये हमेशा सच होता है? झूठ की ये तीसरी दुनिया बस करो । रीना मेरे ख्याल से भाभी तुम बिल्कुल ही कह रही हूँ । भोली भाली भारतीय लडकियाँ और उनके माता पिता इस साल में ऐसे फसते हैं कि बस पूछो मत । विदेश में आकर ही लडकी का स्वप्न भंग हो जाता है । जिसे स्वरूप हुई । अरे छोडो, इस अप्रिय वाद विवाद को मैं ही ना भावी को एक बात का विश्वास दिलाना चाहूंगा । अपना राम अडीबाज भले ही हो, पर झूठा नहीं । डॉक्टर साहब ने उफनदी दूध ठंडे पानी के छींटे मानत थी । मैं भी मौन हो गई । अब पिता बढाने से लाभ जो कुछ हो चुका था उसे मिठाइयाँ नहीं जा सकता था । एक भाग कर सुना था काले बादलों में प्रकाश की एक देखा हूँ । मिस्टर और मिसेज स्वरूप के रूप में ईमानदार हमदर्द मिली थी । पलंग पर लेटकर में सोना पाई मछली बार बार शेखर की बात किया जा रही थी वो अक्सर कहाँ करता था? ऍम फॅारेन क्या है? कितनी ही अप्रिय बात हो जाएगी । हमेशा मुस्कुराते रहो । मैंने मुस्कुराने की कोशिश की । परमिशन नहीं हुआ । मैं मुस्कुरा नहीं सकी । मैंने दूसरे कमरे में दृष्टि डाली । वहां का दृश्य देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गई । यहाँ डॉक्टर साहब भर में से स्वरूप एक छोटी गोल में इसके इर्दगिर्द बैठी थी । नीरज पर शराब की बोतल रखी थी । तीन गिलास तीनों की उंगलियों में फंसी सिगरेटें । इसी स्वरूप ने तो आरंभ से ही मुझे बहुत प्रभावित किया था । उनके इस रूप को देखकर मन हो गया । मैंने जो उनकी तस्वीर बनी थी, वह धूमिल पडती । कुछ देर में उनका शराब पीने का दौर खत्म हो गया । में से स्वरूप उठी । शायद उन्हें खाना बनाना था । मैंने सोचा मैं क्यों? इनके ऊपर बोझ मुझे उनका हाथ बटाना चाहिए । इस श्रम विभाजन से घर की शांति बनी रह सकती है । मैं उठी दूसरी कमरे में आ गई । क्यों? ॅ नहीं नहीं आई । राम ने उत्सुकतापूर्वक पूछा नहीं गए हैं । ऐसा हो ही जाता है । इसी स्वरूप पर्दों का कपडा लेकर बैठे हैं । ये क्या कर रही है? मैंने पूछा । अरे तुम्हारी कमरे के लिए दो पर्दे तैयार करने रह गए तो इस समय लेंगी सीना किया है, पांच मिनट लगेंगे पांच मिनट । हाँ, चारों तरफ से मोडकर एक सॉल्यूशन लगाकर प्रेस कर देना है । बस कर देते यार कमाल है । मैंने आश्चर्य से भर कर कहा फिर में बोली टीवी यदि आपकी आगे हो तो किचन में आपका कुछ हाथ बटा दो अभी से कितनी भी जल्दी क्या है । जरा तो ऐश कर लो थे हार बताने के लिए । यहाँ इंसान की जरूरत नहीं, मशीनें ही काफी है । वो देखो खोने में घर साफ करने की बिजली की नही । अंदर रसोई घर में ऑटोमेटिक ओवन है । उसमें खुद आता मर जाता है । खुद ही रोटियाँ मिल जाती हैं । चोला भी सचालित है । दस मिनट में कोई चीज पकती हो तो दस मिनट के लिए सेट कर दो, अपने आप हो जाएगा । कपडे धोने की मशीन है, कपडे सुखाने की मशीन है, ऑटोमेटिक प्रेसर है जिसमें कपडे खुद खुद हो जाते हैं । सच्ची ना भावी तकनीकी दृष्टि से ये देश बहुत उन्नत है । किसान की कमी को मशीनों ने पूरा कर दिया है । पर किसी स्वरूप ने अपनी बात को अधूरा ही छोड दिया पर किसानी से गिरा दिया है । अपनी तकनीकी अधूरी बात को डॉक्टर साहब की पूरा कर दिया । डिनर खत्म करके या और डॉक्टर साहब ताश खेलने बैठे । टेलीविजन चल रहा था । उसमें कोई अच्छी सी फिल्म चल रही थी । अपने अपने कमरे में आकर पलंग पर लेट गए । इससे पूर्व झूठे बर्तन साफ कराने में मैंने निचे स्वरूप की मदद कर दी थी । मुझे स्वरूप ने मुन्नी को दूध पिलाकर सुला दिया था । वो मेरे पास पलंग पर आकार लेना गई । देर तक हम दोनों की बातें होती नहीं । मेरे और मेरे परिवार के विषय में विस्तार से पूछती नहीं बीबी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हैं । पर एक बार कुछ कुछ । आप अपनी उम्मीद से अधिक क्या लगती हैं? तीनों कहकर को कुछ उदास हो गई पल भर के बाद तो फिर बोली ये ऍम क्यों सुनोगी तो मन उदास हो जाएगा । आज नहीं तो कल पता तो लगता ही है बहना मंत्री ना अब यहाँ आ ही गई हो तो साहस से काम लेना होगा । यहाँ हम लोगों की जिंदगी भौतिक सुख सुविधाएं और पैसों की चारदीवारी में कैद है । श्री सिद्दीकी क्या है? आजीवन कारावास का दंड भोग रहे हैं हूँ वो साडी चांदी के चंद टुकडों से ये लोग हमारा श्रम खरीदते हैं । पर अभी भी हम चांदी के चंद टुकडों सी ये लोग हमारा श्रम खरीदते हैं । पर अभी भी इनके दिमाग से यह बात नहीं नहीं थी कि हम इनके गुलाम थी । यहाँ हम से ना कोई बोलने वाला है नहीं चलने वाला बस अकेले घर में सडके रहूँ । ना कोई मनोरंजन, ना कोई साथी । अंग्रेज लोग हमारे साथ खेलना करते हैं । बस ये ही अकेलापन नासूर बनकर जीवन को विश्व में बना देता है । नी अवसाद विश्व में भविष्य की कल्पना से मेरा सारा शरीर होता जा रहा था । हो गई ठीक है, सो जाओ, थकी हारी हो । मैं अभी नाम को भेजती हूँ । मुझे लगा ये शब्द भावी नहीं बोल रही । किसी कहाँ से आ रहे हैं मुझ पर तंद्रा सी छाने लगी थी । हो गई कोई मेरी बगल में आकर हो गया था । कौन था वो ही तो मुझे पता नहीं । पर किसी के होने का ऐसा जरूर था । मैं सोई पडी रही । न जाने कितनी देर तक सोती नहीं और फिर अचानक मेरी आंखों गई लगा में अपनी पूरी नहीं ले चुकी हूँ । मुझे याद था कि मेरी नीट में अनेक भयानक सपने आई थी । आप खुली तो अपनी चारों तरफ कहना नहीं जा पाया । कलाई बंदी घडी में देखा रेडियम युक्त अक्षय चंकी साढे सात बज रही हैं । इस समय तो धूप खिलखिला आती हैं । खिरिया नहीं था क्यों? तभी मुझे याद आया अंधेरा है क्योंकि मैं भारत में नहीं इंग्लैंड में हूँ । मैं फिर से सोने की कोशिश करने लगी

भाग - 05

धार पांच । हाई पाक कॉर्नर राजनीति से ने बहुत प्रभावित हुई । उस दिन इतवार था । राम ने कहा चलो तुम एक तमाशा दिखा लाता हूँ । तमाशा आपने उछल गई । चलो तो उसी समझाया नहीं जा सकता है । उसे सिर्फ देखा और सुना जा सकता है और यहाँ मुझे हाई पांच ले गए । ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट की तरफ वाले पाक के नुक्कड पर बेतहाशा भीड थी । हर रंग घर जाती और हर राष्ट्रीयता के व्यक्ति वहाँ मौजूद थी । हाई पाक कॉर्नर विचार स्वतत्रता का अद्भुत मंच था । वहाँ अनेक व्यक्ति छोटे छोटे प्लेटफॉर्मों पर चढे हुए भाषण दे रहे थे । बीस पच्चीस श्रोता उनके लिए काफी थे । कोई महारानी एलिजाबेथ की आलोचना कर रहा था । कोई किसी व्यक्तिगत मामले में किसी न्यायालय की आलोचना कर रहा था । एक नीग्रो ब्रिटिश सरकार की रंग नीति की धज्जियाँ उडा रहा था । कुछ भारतीय थे जो साम्यवाद समर्थक भाषण दे रहे थे । किस मंच से कोई कुछ भी कह सकता था? सब माफ था । एक अंग्रेज भाषण दे रहा था । वहाँ काफी भीड थी । हम लोग उसी तरह जाकर खडे हो गए थे । इन सूत्रों ने हमारे देश की जलवायु खराब कर दी है । उन्होंने इस देश को अपने बाप की जायदाद समझ रखा है । इन हराम ियों को चुन चुनकर इस देश से निकाल देना चाहिए । वरना देख लेना देख लेना । एक दिन ऐसा आएगा जब हमारी मां बहनों की इज्जत और ऊंची नौकरियाँ सुरक्षित नहीं रह पाएंगी । ये ब्लाॅकबस्टर राम ने मेरी बाह पकडकर मुझे पर एक खेल लिया और बोली चलो हाइट पार्क के बीच में बनी सर पिटाई खेल के किनारे बैंकर बियर पियेंगे । मैं राम की बात पूरी नहीं संघाई । मैं उनके साथ होली मेरे कानों में अभी तक जाती । देख के विषय में उडेली जाने वाला वो विश्व प्रवाहित हो रहा था । पैदल ही हम झील की तरफ चले गए । धनी रक्षियों की छाया के नीचे प्रेम व्यापार चल रहे थे । एक जगह भंगडे वस्त्र पहनी अंग्रेज युवक युवतियों की मंडली हरे रामा हरे कृष्णा का किर्तन कर रही थी । असम की वृत्ति वृद्धाएं किराये की कुर्सियों पर अधिक लटके हुए, बडे बडे मगों में बी । ए पी रहे थे । अद्भुत कार ये थी कि उस समय धूप निकली हुई थी और महिलाओं के शरीरों पर केवल आवश्यक वस्त्र ही रह गई थी । रानी मेरा हाथ थामा हुआ था । वो मोहन थी मान तो मैं भी थी कर मेरा मन बेचैन था । पिछले एक सप्ताह में राम ने मुझे लंदन के सारे दर्शनीय स्थानों की सैर करा दी थी । टेम्स नदी पर हमने नौका विहार किया था । लंदन के ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट सहित सारी शॉपिंग सेंटर देख डाली थी कि यो गार्डन विंडसर प्लेस मैडम तो सेट का मोम की मूर्तियों का बना संग्रहालय ट्राॅफी, महारानी का निवास स्थान, ब्रिटिश म्यूजियम, पुराना किला जहाँ कोहीनूर हीरा रखा है, सब स्थानों की शहर की थी । सबसे महत्वपूर्ण स्थान था तो वो क्षेत्र एक नाटक देखा, एक पिक्चर देखी, एक स्क्रिप्ट तीस तो भी देखा ये भी एक अभूतपूर्व अनुभव था । पश्चिम में सेक्स के क्षेत्र में व्याप्त निर्बाध ता एवं सचिन दत्ता को देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गई । देखने लायक महीने सब कुछ देख लिया था । करना जाने क्यों मेरा मन किसी भी चीज में नहीं रंपा रहा था । मैं कह रही में जाकर सोचती और इस मुखडे पन के कारण को तलाश करने की कोशिश करती । मुझे महसूस होता इस नहीं मिट्टी में मैं अभी जब नहीं पाई हूँ या शायद मैं उस भीषण धक्के से अभी तक उबर ही नहीं पाई हूँ । हम लोग सर पिटाई झील के पास पहुंच गए । काफी भीड थी । वहाँ काफी लम्बी चौडी खेलती हूँ । उसमें खूबसूरत पटके कह रही थी झील की सिरे पर बने रेस्ट्रां में हमलोग गए । पर वह एक भी सीट खाली नहीं थी । हम लोग लौटाए झील के किनारे किनारे सीमेंट की बैंक से लगी हुई थी । हम उनमें से एक पर बैठ गए । कुछ देर बाद तो कुछ दासो रीना क्या बात है । बहुत देर के बाद राम बोलिये । उन्होंने अपनी माँ मेरी गर्दन में डाल दी । कुछ भी नहीं कुछ जरूर है तो मुझे कुछ छुपा रही हूँ नहीं तो तो फिर इस कदर क्यों चुप हो? क्यों नहीं इस नई दुनिया के रंग ढंग देख रही हूँ । अच्छे लगे अच्छा तो एक साथ एक शब्द हैं । मतलब एक ही चीज कुछ के लिए अच्छी हो सकती है और कुछ के लिए बुरी । कुछ को मारो गोली क्यों? अपनी कहूँ? सच कम बुरा तो नहीं होगी? नहीं नहीं अच्छे बुरे का फैसला नहीं कर पा रही । मैं यही चाहती हूँ की हम लोग जल्दी से जल्दी स्थापित हो जाएगी । ठीक से सेटल हो जाएगी । राम हंस पडी मेरे गाल कर चिटकी काटते हुए बोले तो तुम्हें इस बात की चिंता सता रही थी । हरी पगली ये भारत नहीं इंग्लैंड है, यहाँ नौकरियों की नहीं आदमियों की कमी है । कल ही लो मैं कोई न कोई बढिया सी नौकरी ले आता हूँ । पिछले एक हफ्ते से आपने कोई कोशिश नहीं की । जल्दी थी । मैंने सोचा पहले तो मैं लंदन की सैर करा लूँ । उसके बाद नौकरी तलाश कर लेंगे और मकान वो ही मिल जाएगा । पर कम पैसा हो तो लंदन में मकानों की कोई कमी नहीं है । पर में स्वतंत्र रूप से अकेले रहना चाहती हूँ, वैसा की तलाश कर लेंगे । मेरे मन में खींचे कार जैसे ढीले हो गए । धूप में मीलों चलकर आने वाले पति को जैसे घनी बर्गर की छाया मिल गई । एक तक झील में टेंटी बच्चों को देखती नहीं । पास की बैंक में छोटा सा बालक बट को को देख देख कर तालियाँ बजा रहा था । कुछ भी होगी जानने पूछा अरे वा भाई, मिस्टर रैमजे बीच में कौन पकडा है? उछल गई रामचौक पडी उन्होंने पलट कर देखा । हमारी बैच के पीछे एक अधेडावस्था के भारतीय खडे थे और उनके साथ ही एक लडकी अरे खन्ना तो ध्यान में खडे होकर आश्चर्य से पूछा भारत से कब लौटे? एक सप्ताह हो गया है । आयकर में कटौती का प्रमाणपत्र ले आए और मिठाई भी नहीं खिलाई या तू तो बडी साफ कहता है साफ कपडे पहनता हूँ और साफ बात कहता हूँ तो मुलाकात रीना से कराता हूँ । अपना नाम सुन घर में खडी हो गई । ये है मेरी पत्नी रीना रीना ये है मिस्टर पीएस खन्ना मेरा पक्का दोस्त है यहाँ स्पोर्ट स्ट्रीट में कार्याणि लेन में पट्टों की दुकान है । नकली जेवर भारतीय कुर्ते और ड्रेसेस बनाता है । अंग्रेजों को बेवकूफ बना बनाकर काफी पैसा इकट्ठा कर लिया है । घर का मकान खरीद लिया है । गाडी है, फोन है, खूब ठाठबाठ है और के अंग्रेजों ने सदियों तक हमें बेवकूफ बनाया । अगर कुछ वर्षों से मैं उन्हें बेवकूफ बना रहा हूँ तो इसमें क्या पति है । वैसे ये भी अंग्रेजों को बेवकूफ बनाने में मुझसे पीछे नहीं रहा है । अरे चुका यामनी घबराकर कहा हरी भावी जी से क्या छिपाना? नौकरी करता है अपना नाम राम से बदलकर रहन दे कर लेता है । चल यार झूठ बोलता है । भाभी जी से डरता है । अच्छा भावी माफ करना । मैं झूठ बोल रहा था हूँ कहकर खन्ना हस पडे । मुझे दूसरा धक्का लगा । स्पष्ट था कि खन्ना सच बोल रहे थे । राम झूठ मैं घर गयी क्या राम का स्वरूप सच में झूठ के आग्रह से लिपटा हुआ है । कहीं भावी जी लंदन कैसा लगा? मिस्टर खन्ना ने पूछा अच्छा मैंने नहीं में से कह दिया आप कितने ठंडी पड रही हैं? लंदन तो सोने की खान है । यहाँ जो जितनी गहराई से उतरता है उतना ही ज्यादा दौलत हथिया लेता है । अभी आप नहीं है आप कब से ही यहाँ मैंने पूछा । यही कोई पंद्रह वर्ष हो गए हैं । तब से ये काम कर रहे हैं । अरे ने ही भावी जी इन पंद्रह वर्षों में पच्चीस काम किए हैं । उत्तर खानी से लेकर बस कंडक्टरी तक की है । पिछले दो तीन वर्ष से ही दुकान की है । लगता है अब ठीक रास्ते पर आ गए हैं । यही कब तक खडे रहेंगे । पापा चल कर बैठते हैं । खन्ना साहब किसान जब लडकी थी, उसने उकताकर कहा । उसने खन्ना साहब को पापा कहकर संबोधन क्या इसलिए स्पष्ट हो गया कि वो उनकी बेटी थी । बेटे आंटी को विष नहीं किया । खेलने साहब ने किसी एक मीठी सी ब्रीड की गई । आपने अभी तक परिचय की कहाँ कराया था? उस लडकी की उत्तर ने खन्ना साहब को निरुत्तर कर दिया । हम दोनों के बीच अभिवादन का आदान प्रदान हुआ । आपका नाम मुझे अलका कहते हैं । कल मुझे इस नाम से सबके हैं । मेरी फ्रेंड्स मुझे मिला के निकल पकाती हैं । अल्का की सर में भी कृष्णा नहीं मम्मी नहीं आई । उन्हें कपडे फाडने से ही फुर्सत नहीं मतलब कल का कुछ नहीं बोली । मेरी प्रश्न सोचन दृष्टि मिस्टर खन्ना पर्यटक गई । अचानक काले बादलों ने धूप को निगल लिया । अंधेरा सा छा गया । अगले ही किरण हल्की बूंदाबादी होने लगी । हम लोग घने पेडों के नीचे थी इसीलिए ठीक ने का डर नहीं था । जहाँ भी तारपूर्वक मिस्टर खन्ना की ओर देखी जा रही थी, उनके चेहरे पर पल भर को काली बदले का साया पडा था । पर उन्होंने शीघ्र ही अपने को सैयद कर लिया । अच्छा ये बताओ देने के लिए कमा रहे हो । मैंने एक नया सोफा सेंटर रंगीन टीवी लिया है । देखोगे तो तबीयत खडक उठेगी । मिस्टर खन्ना ने कहा हम लोग मौन नहीं क्या मम्मी की तबियत ठीक नहीं । मैंने हल्का से पूछा चलता है । उसने निर्लिप्त भाव से उत्तर दिया अकेले ही कि वाई उनको तुमने लिया कि तो पापा के साथ डेटिंग कर रही हो । ना हो टाॅक, भीषण रूप चौक पणी ये क्या कह रही हो गई थी? राम ने पूछा कल सुबह बस थोडा सा झूठ बोलना पडेगा । जब सारे फ्रेंड्स अपनी अपनी डेट के अनुभव का विनिमय करेंगी तो मैं भी गर्व से कह सक होंगी । हाँ, मैं भी अपने बॉय फ्रेंड के साथ हाइट पाक गई थी । इसमें आधा सच आधा झूठ होगा पर आधा झूठ इनसे तो बचा लेगा । अलका की स्वर में थोडा थी अपने लिखित चक्र में फंस गई थी । बीस समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि के दे रही है । लंदन में जिंदा रहने के लिए छोड बोलना एक अनिवार्य शर्त है । क्यों? यार खन्ना क्या बात है? अलका बेटी को क्यों नाराज कर रखा है? राम बोलिये आओ रेस्ट्रो में चले वहाँ चल कर बैठे गला चटक रहा है । कुछ दिया जाएगा । कहकर मिस्टर खन्ना ने जेब से सिगरेट का पैकेट निकाला, एक सिगरेट राम को दी और ये खुद संग्राली हम लोग रेस्ट्रां की तरफ चल पडी । हल्की बूंदाबांदी हो रही थी । इस कारण हम खुले स्थान की बजाय रेस्ट्रां के शराब गृह में चली गई । उससे बिना कुछ ही मिस्टर खन्ना ने चार बियर का ऑर्डर दिया तो मैंने किया मैं काफी होंगी । क्या अभी शुरू नहीं की? मिस्टर खन्ना नहीं मुस्कुराकर पूछा यहाँ कॉफी नहीं देखते ये लोग ऍम यहाँ काफी नहीं देते ये लोग । फिर टोमॅटो राम ने सुझाव दिया मैंने स्वीकृति में से हिला दिया । वे क्रिस्टीन बियर और एक और इटली आई मिस्र खन्ना ने एक ही घूंट में आधार खाली कर दिया । फिर ठंडी आह लेकर बोली, स्वर्ग है स्वर्ण पौने दो सौ की बोतल मिलती है भारत में इंसान क्या कद्दू की यहाँ वहीं की तीस रुपए में मिल जाती है । बस सारी थकान सारे हम गलत हो जाते हैं । खन्ना तुम मेरी बात का उत्तर नहीं दिया क्यों डाल रहा है? क्या बताना नहीं चाहता हूँ । राम भी एल्का की पहली को जानने के लिए उत्सुक थी । मिस्टर खन्ना ने दूसरे घुटने पूरा माल खाली कर दिया । बेट्रिस को बुलाकर एक बडा प्रैक्टिस की । कल आने का ऑर्डर दिया । फिर बोले अरे भाई, क्या बताऊँ? इस लडकी और इसकी मानी नाक में दम कर दिया है । मुझे तो तुम जानती हूँ । बिजनेस के काम से फुर्सत नहीं मिलती । माँ बेटी झगडती रहती है क्यों? बेटी क्या बात है? कभी माँ बेटी में भी झगडा होता है । राम ने इनका से पूछा । अंकल, मम्मी के दिमाग के सारे तीन महीने हो गए हैं । अब आप ही बताइए उसे पट्टी कैसे बैठ सकती है? अलका ने घृणा भरे स्वर में कहा आखिर बात क्या है? राम ने पूछा अंकल में हाई स्कूल में आ गई हैं । अभी तक उन्होंने मुझे डेटिंग की इजाजत नहीं दी है । जब भी मेरी सहपाठी मुझे देख मांगते हैं, मैं मना कर देती हूँ, तब मुझे कितना छोटापन और अपमानित होने का भाव सा लगता है । फिर सोमवार को सारी फ्रेंड्स अपनी अपनी डेट्स के अनुभव का आदान प्रदान करती है । किसी ने पिक्चर देखा होता है, कोई नाटक देख कर आई होती है कोई कहीं पर अब मैं कैसा महसूस करती हूँ? अंकल इस क्या कल्पना भी नहीं कर सकती । मेरे सारे दोस्त मुझे पिछडा हुआ दब्बू और पुरानी मान्यताओं की जंजीरों में पैर ही समझते हैं । आँखों के सामने तो मैं गर्दन तक नहीं उठा पाती । कुछ पल रुककर अलका रूढि सर में बोली अंकल ज्यादा मेरी तरह देखिए क्या मेरी खुबसुरती में कुछ कमी है? मुझसे ज्यादा बदसूरत लडकियाँ अच्छे अच्छे लडकों से डेढ पाने में सफल हो जाती हैं । लडके मेरे पीछे दीवाने हैं, पर मम्मी की वजह से मुझे मना करना पडता है । समय डेटिंग की आयु नहीं हुई है । अंकल मेरी बहुत सी दोस्तों, दो दो तीन तीन वर्ष से ये सब कुछ कर रहे हैं । पर तुम्हारी मम्मी को क्या पडती है? कहती है ये भारतीय धर्म और संस्कृति के खिलाफ है, अपना उदाहरण देती हैं । कहती हैं जब चौदह वर्ष की हुई तो उनके माँ बाप ने उन्हें स्कूल से उठा लिया और घर से निकलना भी बंद कर दिया । सत्रह वर्ष में प्रवेश करते करते वहाँ बन गई । कहती है इस उम्र में लडके लडकियों को अकेले मिलना ठीक नहीं पीढियों की संघर्ष की बात है मैं बुदबुदाई मिस्टर खन्ना पहला पैक डी टी चुकी थी । दूसरे फॅार उन्होंने दे दिया था फाइनल का तो मैं अपनी मम्मी को समझाना अंकल अलका ने राम की बात बीच नहीं काट दी और उत्तेजित साल में बोली खुद तो सत्रह वर्ष की आयु में माँ बन गई और उन्नीस वर्ष की अपनी बेटी को डेटिंग नहीं करने देगी । ऐसे फॅमिली इंसान को कौन समझा सकता है । इस भीषण रहस्य उद्गार से मीरा जैसे सब कुछ मिल गया तो लंदन में बसे भारतीयों के सामने ये भी एक समस्या है । देसी पहुँच दिलाई थी । मिट्टी में रोप आ गया है तो उसको पनपने में एक नहीं अनेक समस्याएं आना स्वाभाविक है । माँ के लिए ऐसा नहीं कहते । बेटी राम का चेहरा भी तमतमाया हुआ था तो उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे अंकल । अब आप ही बताइए यहाँ लंदन में रहकर आप भारत की उन्नीसवी सदी की बातें कैसे लागू कर सकते हैं? इस तरह के बंधन चोरी छिपे काम करने को बाध्य करते हैं । एक बार में एक लडकी को घर ले आई थी । बस गजब हो गया । उनका मेरे ऊपर से विश्वास ही उठ गया । अब तो वो बस भक्ति सकती रहती हैं । सिर्फ कपडे फाडने की कसर रह गई है । और अगर पार्टी की हो तो किसी पता मेरा मन डूब गया । इस इस खंड के प्रति मेरे मन में असीम सहानुभूति उत्पन्न हो गई । कैसे विषम चक्र में फंसी है बेचारी हूँ अब बस करो खन्ना अभी तुम्हें गाडी चलानी है । वो हल्का चला लेगी । अब चला जाएगा । मैंने धीमी से राम के कान में कहा चलिए मैं आपको ड्रॉप कर दूंगी । अलका ने हमारी बात शायद सुनी थी । नहीं बेटी, अभी हम लोग घर नहीं जा रहे सर । सामने प्ले बाइट लगने जाना है तो आंटी को अर्धनग्न एक ही साझे में डेली चालीस चौबीस चालीस माफ वाली बेटर सिखाने ले जा रहे हैं । कमाल अंकल इतनी सारी एक सी उत्तेजक और मादक और की कहाँ से घंटी कर ली लोगों ने । मैं उठ खडी हुई । राम ने भी मिस्टर खन्ना की तीन थपथपाती हम दोनों बाहर आ गई

भाग - 06

भारत है । डॉक्टर स्वरूप और आगंतुक की बातें सुनकर मेरी समझ में पूरी बात नहीं आई । पर इतना महसूस हुआ था कि इसमें जरूर कोई रहते हैं । कोई हायर कानूनी चक्कर है । नाश्ता खत्म होते ही कॉलबेल बजी । मैंने बाहर जाकर दरवाजा खोला । एक भारतीय नवयुवक बाहर खडा था । कहीं किसी मिलना है । डॉक्टर सरूपी ही रहते हैं । जी में पांच मिनट के लिए उस से मिलना चाहता हूँ आप एक मिनट रुकी । आकाश अपना मुझे जीती । शाह कहते हैं डॉक्टर साहब से परिचय नहीं है । अपने अंदर गई । डॉक्टर साहब को बताया । उन्होंने नवी वर्ग को अंदर लाने के लिए कहा । में शाह को अंदर ली वालाई नहीं मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ? डॉक्टर साहब ने युवक से पूछा में वहीं खडी नहीं मुझे मुत्थुस्वामी ने भेजा है । ये चिट्ठी भी दी है अच्छा डॉक्टर साहब में शाह के हाथों में से एक छोटी सी फॅमिली और उसे पट्टी में मूल्य मिस्टर मुत्थुस्वामी को जैसे जानते हैं । वहीं कह रहा हूँ अच्छा अच्छा बैठिए । अरे लेना जी मिस्टर शाह के लिए पीने के लिए चलाइए ऍम मैं भी नाश्ता करके आ रहा है । शाहनी कुर्सी पर बैठे हुए कहा कितनी चाहिए आपको कम से कम सौ वैसे दो सौ का प्रबंध हो जाए तो आपकी बडी कृपा होगी । हो जाएगा ऍम बहुत बडी समस्या हल हो गई । पर मिस्टर शाह आजकल भाव काफी तेज चल रहा है । चौंतीस का भाव है पर मैं आपको बत्तीस नहीं दूंगा । पर डॉक्टर साहब मिस्टर मुत्तूस्वामी तो तीस बताया था । ठीक हैं पर उनके दो सौ रुपए के हिसाब से चार सौ कमीशन के कौन देगा? ठीक है मुझे मंजूर है । फिर मैं कल आऊँ । पहले काम कीजिए कि लीजिए मेरे घर का पता टेलीग्राम दे दीजिएगा । इस पते पर अपने घर वालों से छह हजार चार सौ जमा करने की सूचना दे दीजिए । जैसे ही मेरे पास इनके जमा होने की सूचना ही मैं आपके पास आकर दो सौ पहुँच जाऊंगा । ठीक है । मिस्टर शाह चली गई । पहली सबकुछ सुन लिया था । कुछ समझ में आ रहा था । अपने अपने कमरे में आ गयी । ग्राम तैयार हो रही थी । उन्हें एक नौकरी के लिए इंटरव्यू में जाना था । मैंने उन्हें अभी हुई घटना के विषय में बताया तो मुस्कुराकर बोले इसमें परेशान होने की क्या बात है? सरकारी रेट अठारह रुपये हैं । अठारह रुपये के फोन को बत्तीस रुपए में बेचना गैरकानूनी नहीं । सब चलता है ना भारत का अमीर आदमी लंदन में गरीब होता है । यदि भारतीय मेरी सेवा, विदेश यात्रा और प्रवास खरीदना चाहता है तो इसमें किसी को क्या आपत्ति होनी चाहिए तो ये ही चलता है । हम खूब जोरो से लगभग प्रतिशत भारतीय इसमें लगे हैं । एक से लेकर दस हजार काउंटर तो मिंटो में खरीद सकती हूँ । बस यहाँ भी पैसा भारत में भी पैसा इसे कहते हैं । दोनों दुनियाओं के ऐश्वर्या हमारी मुट्ठी में है । कुछ भी कुछ अच्छा नहीं लगा । मैं यहाँ के बात करती है कि जहाँ आ गई तीन छुट्टियाँ थी मेरे ना मम्मी की चिट्ठी आई कि घर पर सब ठीक की । दीपक को मियादी बुखार हो गया था । अब ठीक हो चुका था, पर कमजोरी थी । काका मेरी बहुत याद करते थे तो बहुत उदास रहने लगी थी । दूसरी चिट्ठी आग्रह वाले भी देखी थी मैंने लंदन पहुंचकर जबकि चेकपोस् काल भेजा था तो उन्हें मिल गया था और मेरे और मेरे नहीं जीवन के विषय में विस्तार से जानना चाहती थी । कैसी है, कैसा वातावरण है, कैसा घर है लंदन की जलवायु कैसी है लंदन के लोग कैसे हैं ये सारे प्रश्न आत्मीयता भाई उत्सकता से उपजे मैं क्या उत्तर होंगी? अगर ईमानदारी से उत्तर लिखने बैठी तो क्या उन्हें पढकर देवी प्रसन्न होगी? तीसरा पत्र खोला तो भीषण रूप से चौक नहीं । वो शेखर का था । उसी बढा तो कलेजा धक से रह गया । मालूम नहीं उस ने मेरा तथा कहाँ पाया था । शायद घर फोन करके दीपक से ले लिया होगा । शेखर लंदन आ रहा था । उसी कंपनी में उच्च पद की नौकरी मिल गई थी तो कंपनी सरकारी कांट्रेक्ट लिखी थी । इमारतों में प्लास्टिक के प्रयोग का अध्ययन करने के लिए वो कंपनी शेखर को तीन महीने के लिए कुछ यूरोपीय देशों के दौरे पर भेज रही थी । शेखर को लगभग एक दो महीने इंग्लैंड में रुकना था । मेरा नाम क्षेत्र का पत्र ताकत उदास हो गया । थोडी सी आशंका मैंने उनकी कहीं उसने यहाँ कर अजीब को दोहराने की कोशिश की या फिर दुष्टतापूर्ण तरीके से राम को पिछले सब कोई बता दिया तो क्या होगा? फिर उसके मन में मेरे जीवन की एक विचित्र सी ऐश्वर्यपूर्ण जीवन की तस्वीर होगी । वो यहाँ आएगा देखेगा । मेरे जीवन को कितनी निराशा होगी, उसे मेरी प्रतिष्ठा धूल में मिल जाएगी । किसकी चींटियां हैं, क्या कोई खास बार है? मुझे कुछ सुनाई नहीं पडा । शेखर को आने में डेढ दो महीने थी । काश तक राम को नौकरी मिल जाती । हम लोग किसी नई और दो कमरे वाले अच्छे से अपार्टमेंट में शिफ्ट कर लेते तो कितना अच्छा था । क्या बात है ना घर पर । सब ठीक है तो मैं कोई कोई सी लग रही हूँ । पास आकर राम ने कुछ और मेरे कंधे पर अपना हाथ रख दिया । मेरी चेतना लौटाई नहीं, नहीं बनावटी मुस्कान भी खेल जब कैंसर में इसने खोलकर बोली कोई खास बात नहीं । फिर से चिट्ठी आई हैं । दीपक को टाइफाइड हो गया था । काका मम्मी को मेरी बहुत याद सताती है या हम सिर्फ मुस्कुरा दिए । मैं पहुँच गयी कहीं कि थी के बारे में ये पूछ रहे थे । मैंने कहा क्यों मुस्कुराने की क्या बात है? टोरी में आकर्षण होता है ना? भारत में होती तो मम्मी पापा का कहते क्या अपने घर सुखी रहे । किसी ने हमें संतोष है पर इतनी दूर आ गई हो तो उन्हें तुम्हारी यहाँ सटाणा स्वाभाविक है । अच्छा इन बेकार की बातों को छोडी और ये बताइए इंटरव्यू कितने बजे हैं? ग्यारह बजे दस बज रहे हैं । जरा चलती कीजिए ना, मैं तो तैयार हूँ पर सोचता हूँ क्या? तो भी साथ चले तो कैसा रही? मैं क्या करूंगी? इंटरव्यू आपको देना है मुझे अगर लंदन में नौकरी के इंटरव्यू के लिए पति पत्नी दोनों के जाने की प्रथा है तो मैं भी चली चलती हूँ । राम मुस्कुरा दी और फिर बोले इंटरव्यू में तो सिर्फ पांच मिनट रहेंगे । तब तक तुम बाहर प्रतिक्षालय में बैठना कर इससे आने जाने में तो साथ रहेगा । पेशेंट पर तैयार हो गयी । हम दोनों बाहर आई हल्की बूंदाबादी हो रही थी । मैंने बरसाती पहनी हुई थी और राम ने छात्रा लगाया हुआ था क्यों में बेहद भीड थी । सुबह शाम इन गाडियों में तिल रखने की भी जगह नहीं मिलती । जैसे जैसे हम लोग एक क्यूब में घुस गए हम दोनों सटकर खडे थे । महीने चीनी से राम से कहा अगर ही नौकरी आपको मिला है तो बस आ जाएगा । क्यों अच्छा मजा नहीं आ रहा है । पहले आपको कहाँ से कहाँ ले जाते हैं । मेरा मतलब था कि आपको नौकरी मिल जाए तो हम लोगों के जीवन की नई शुरुआत हो जाएगा । अपना अलग घर होगा, स्वतंत्रता होगी, जो चाहो करूँ, किस मेहमान को चाहो कह रहा हूँ क्या कोई मेहमान आने वाला है? अभी अभी मत बुलाओ, कुछ तो ऐश कर लो । एक बार मेहमानों की देखभाल में फंसी नहीं की क्या सब समझ में आ जाएगा ना । एक्टर जी शुरू हुआ, बारी बारी से सबको बुलाया जाने लगा । मेरा नाम बनाया । मैं इंटरव्यू वाले कमरे में दाखिल हुआ । बोर्ड में तीन व्यक्ति थे । मुझे देखते ही जैसे उनका उत्साह हो गया । बीच में बैठे अधूरे से व्यक्ति ने पूछा क्या टोमॅटो इंडियन हूँ? जी नहीं, पर आपका नाम मिस्टर रेम से कैसे है? यूरी आप ये नौकरी के जाते हैं? नहीं । इस निरर्थक प्रश्न सुनकर छिड गया । मैंने एक स्वर में कहा अब के खाने कपडे, घर के खर्च को पूरा करने के लिए । पर उसके लिए आपको और पच्चीस नौकरियाँ मिल सकती है । इस नौकरी में क्या खराबी है? क्या मैं नौकरी के लिए? क्वालिफाइड नहीं? आपने मेरी योग्यता के विषय में मेरे प्रार्थना पत्र में पडा । हाँ, आप योग्य है पर इस महत्वपूर्ण पद पर किसी अश्वेत को नहीं लगाया जा सकता । क्यों अपनी कंपनी की नीतियों के औचित्य पर प्रकाश डालने के लिए हम बात ही नहीं है । फिर आपको विज्ञापन में ये स्पष्ट कर देना चाहिए था कि ये नौकरी केवल श्वेतों के लिए सुरक्षित है । वे लोग निरुत्तर हो गए । मैं वापस लौट आया । मेरा मन डूब गया तो लैंड भी रंगीन की नीति के अधिशासी से पीडित है । भारत में हम दक्षिणी अफ्रीका के विषय में पढा करते थे । इंग्लैंड के विषय में ऐसा कुछ नहीं सुना था । थोडा बहुत अमेरिका में होने वाले नीग्रो मेरी की लोगों के साथ संघर्ष के बारे में सुना था । तरफ पता लगा कि दुनिया भर वाले क्षेत्र में ही नहीं काले गोरों के बीच में ही बनती हैं । क्या किसी अश्वेत को नौकरी मिलना इतना कठिन है का राम तो कुछ और ही कहते रहे हैं । पहले डाॅक्टर में कहा हूँ पर आपका अक्सर कहते हैं कि यहाँ नौकरियों की नहीं आदमियों की कमी है । ठीक कहता हूँ लेना यहाँ नौकरियों की कमी नहीं जरा ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट पर निकल जाओ । हर डिपार्टमेंट, स्टोर, हर व्यापारिक संस्थान के बाहर आवश्यकता है । कब बोर्ड मिलेगा पर उच्च्पर श्वेतों के लिए सुरक्षित है । शारीरिक श्रम वाली असम की नौकरियाँ हैं जिनके लिए श्वेतों को गुलामों की जरूरत है और वे उन्हें मिल ही जाते हैं । एशियाई अफ्रीकी देशों में असंख्य काले लोग इन नौकरियों के लिए तरफ जाते हैं । क्यों ना नरसिंह सफेद कॉलर वालों से ज्यादा पैसे मिलते हैं तो फिर इस नौकरी के मिलने की बहुत कम संभावना है । नहीं नहीं आशंकित होकर पूछा थारी ना फिर भी प्रयत्न कर असफल हो जाना प्रयत् न करने से लाख गुना अच्छा है । नाइट्सब्रिज स्टेशन आ गया । हम दोनों ट्यूब से उतर गए । भूमिगत स्टेशन से बाहर आए तो देखा धूप निकल आई थी । पता लगा ही सच्चाई के लोग हैं । उस विशाल आधुनिकतम इमारत के मुख्यद्वार पर जैसे ही हम दोनों ने कदम रखे, स्वचालित दरवाजे अपने आप खुल गए । हम अंदर दाखिल हुए तो दरवाजे अपने आप ही बंद हो गए । ब्रिटेन की सुप्रसिद्ध इंजीनियरिंग फॉर्म साइमन ऍम का मुख्य दफ्तर था । वो अंदर बेहद सफाई थी । हर वस्तु चंचल समझ रही थी । हल्की सुगंध भी वातावरण में रची । बसी की मैंने गौर से राम को देखा । वो काफी खूबसूरत लग रहे थे । उनका व्यक्तित्व उभरा हुआ था । उन्होंने बर्टन के यहाँ से पैंतीस फोन में खरीदा हुआ स्टील गृहं का सूट पहना हुआ था । उसी में मैच करती टाई रूमाल, जूते, ऊपर चमकीली कॉलेज और होटों पर विजय भरी मुस्कान उन्होंने घडी में देखा । ग्यारह बजने में तीन चार मिनट थे । हम लोगों ने स्वागत कक्ष की ओर देखा । एक बेहद सुंदर, पूरे बालों और नीली आंखों वाली नवयुवती वहाँ बैठी सिगरेट पी रही थी । हम दोनों के पास पहुंचे तो वो उठ खडी हुई । स्वर्ण, विनम्रता और मिठास भरकर बोली । क्रिकेट मानी । मैं आपकी क्या सहायता कर सकती हूँ? फॅमिली स्पोर्ट से ग्यारह बजे मेरा इंटरव्यू है । राम ने अंग्रेजों के लहजे में कहा, उस महिला ने डेस्क कर रखी, एक मोटी सी डायरी को खोला । फिर उसमें कुछ तलाश करने लगी । पल भर के बाद उसने पूछा आप मिस्टर रहती है भी? मैंने देखा उस महिला के मुख पर असंतोष अविश्वास और वितृष्णा के भाव करने लगे थे । उसने फोन उठाकर कोई नंबर डायल किया । फिर अपने विशिष्ट अंग्रेजी लहजे में किसी से बातचीत करने लगी । उसको चारन इतना छोटा था और इतनी थी में बोल रही थी । मेरी समझ में कुछ नहीं आया । उसने फोन पर बातचीत खत्म की और काउंटर से बाहर आकर शुल्क स्वर में बोली कि कराइए । तीसरे फ्लोर पर मिस्टर स्मिथ फोना की प्रतीक्षा कर रहे हैं । वो महिला अपनी ऊंची सैंडलों को फट फट करके चल रही थी । साधारण था उस जैसी कोमलांगी की चाल में एक लक्ष्य एक अदा और एक नजाकत होनी चाहिए थी । पर वो तो जैसे किसी मजदूरी के कारण दो पशुओं को घसीट टीवी भागे जा रही थी । कुछ दूर चलकर हम लोग सचालित लिफ्ट में तीसरी मंजिल पर पहुंच गए । फिर एक लंबा गलियारा । हम लोग उस महिला के पीछे लगभग भागते रहे । उसने एक बार भी हम दोनों को नहीं देखा । वो एक बडे से कमरे के बाहर रुक गई । पल भर को उसने राम को ऊपर से नीचे तक देखा हूँ । फिर हूँ अंदर जा सकती हूँ । मेरी ओर देखकर तो मुस्कराई कुछ मुस्कान में कुछ ऐसी लोकेशन मिली थी कि मैं तिलमिला गई तो बोली आप उधर लाउंज भी जाकर प्रतीक्षा कर सकती हैं । फिर तेजी से लिफ्ट की ओर बढ गई । महिलाओं में आकर एक गुनगुने सोफे पर बैठ गई । निहाई थी । सुंदर ढंग से सजाया था । वो टीवी लगा था । सेंटर केबल पर अनेक अखबार और पत्रिकाएं करीने से सजी थी । आॅस्ट्रेलिया रखी थी । एक कोने में छाती और बरसाती टांगने के लिए स्टैंड था । वहाँ मंदिर जा चुके थे । मेरा मन ज्यादा आशंकित नहीं था । परिणाम का पूर्वाभास मुझे हो चुका था । फिर भी अंधेरी निराशा की अपेक्षा आशा की एक ही प्रकाश रेखा देखने की मैंने आदत डाली थी । क्या आप भारत से आई है? ये प्रश्न सुनकर में चौक पडी । मैं अपने आप में इतनी हुई हुई थी कि मुझे पता ही नहीं चला की बगल के सोफे पर एक अंग्रेज महिला बैठी हुई हैं । तो बराबर मुझे हो रही थी । मैंने मुस्कुराकर उसकी ओर देखा और बोली, जी, आपका अनुमान सही है, यहाँ कैसे आई हैं? उस अपरिचित महिला की अंग्रेजी अटपटी सी थी । उच्चारण भी विजिट था । बोलने में अटक रही थी वो । मैंने कहा मेरे पति के इंटरव्यू के लिए आए हैं । उन्हीं के साथ आई थी ये अंग्रेज लोग कितने धुत्त होते हैं, बेकार का तमाशा करते हैं । वो आगे भी कुछ कहने वाली थी पर ना जाने क्या सोचकर चुप हो गई । आप का मतलब में समझी नहीं, कुछ नहीं मैं तो बस यही मेरा मतलब था कि आपने समझ गयी । वो अपने आप को स्पष्ट नहीं करना चाहती थी । मैंने भी उसे ज्यादा को लेना उचित नहीं समझा । मैंने बात को बदलकर कहा आप कैसे आई हैं मैं पति पहले सत्तर में थे, उसी संबंध में कुछ कागजात लेने हैं । अरे हाँ में ये तो बताना भूल ही गए कि अभी तीन दिन हुए तो भारत गए हैं । भारत गए हैं के सिलसिले में हाइडलबर्ग विश्वविद्यालय ने धनबाद क्षेत्र में शोध योजना आरंभ कि है । उन्हें उसमें लगाया गया है । वहाँ कितने दिन रहेंगे? दो वर्ष की योजना है, वैसे आते जाते रहेंगे । वो आप नहीं गए, उनके साथ नहीं किससे जा सकती थी । क्यों? मेरे पास छह महंगाई देवी है तो क्या हुआ? हमने सुना था कि भारत में अच्छी किस्म का देवी मिल पडा । नहीं मिलता मैं आपने पहले देवी का जीवन खतरे में नहीं डालना चाहती थी । नहीं रह गई । महिला क्या कह रही थी कि हमारे विदेशी प्रचार व्यवस्था इतनी कमजोर है? मैंने उस महिला से कहा ये आपसे किसने कहा? भारत में टेंशन ओं तरह के बीडी मिलफोर्ड मिलते हैं । उनमें से जो कई हम निर्यात करते हैं, ऐसा उस महिला ने आश्चर्य से पूछा । जी हां, भारत के विषय में लोगों को बहुत गलत फहमियां हैं । हमने हर क्षेत्र में काफी प्रगति की है । हम इतनी पिछडे हुए नहीं । कितना पश्चिम के लोग सोचते हैं हमारी जर्मनी । मैं तो यही धारणा प्रचलित है कि भारत में अभी भी बैलगाडियां चलती हैं । वहाँ के लोग आज के युग में भी भूख से मारते हैं । वहाँ मक्खी मच्छर, सांपो का के क्षेत्र साम्राज्य हैं । अभी कुछ दिन पूर्व बीसीसी टेलीविजन पर भारत के विषय में कुछ फिल्में देखी थी । ये सभी पक्षी कितने हैं? निर्मूल धारणाएँ हैं । असल में जितनी तरह की हम लोगों ने मेरी बात पूरी भी नहीं हुई कि महीने देखा राम बाहर आ गए थे । कृपया मुझे क्षमा करें कहकर में तेजी से उठी आजाम की ओर लगभग कर पहुंची । उतावले सर में मैंने पूछा कहीं जा रहा हूँ बाहर चलो सब कुछ बताता हूँ । राम ने तटस्थ स्वर में कहा मैंने राम के मुक्कों गौर से देखा था । आशा निराशा के संगत में उत्पन्न उलझन मौजूद थी । वहाँ मैं कुछ भी नहीं समझ पाई । हम लोग लिफ्ट से नीचे आए । गलियारा लांघकर हम बाहर जाने वाले द्वार तक पहुंच गई । तभी अचानक रामपट्टी मेरा हाथ पकडकर स्वागत कक्ष की ओर आ गए । उस महिला के होठों पर उपहास नहीं मुस्कान थी । ईरान ने उसी उपहास भरे स्वर में कहा धन्यवाद मैडम, आपको संकर खुशी होगी की मुझे नौकरी मिल गई है क्या वो महिला जैसे तिलमिला गई । आवेश में भरकर वह खडी हुई और तेज सफर में बोली नहीं ऐसा मत कहिए । धन्यवाद बाई बाई की । कल राम ने में बगल में हार डाला और दरवाजे की ओर बढ गए । क्या ये सबसे अच्छी राम मैंने अविश्वास भरे स्वर में पूछा । जैसे सब करो सब बताता हूँ हम लोग बाहर आ गई । फिर बूंदाबादी हो रही थी । तभी मुझे खयाल आया कि नहीं अपनी बरसाती वहीं लाउंज छोड आई हूँ । काम तेजी से अंदर गए और उसे ले आए । बताइये बिना क्या हुआ क्यों व्यर्थ में जासूसी फिल्मों की तरह रहस्य रोमांच की सृष्टि कर रहे हो । कहीं बैठा जाये कहाँ बैठेंगे? फांसी पर था । वहीं जाकर हम लोग बैठ गए । सामने अपने लिए भी और मेरे लिए लेमन स्क्वैश का ऑर्डर कर दिया । फिर वो बोली मैं अंदर घुसा तो देखा तीन गुडी अंग्रेज शमशान घाट में विश्राम करते गिद्धों की तरह बैठे थे । मेरी अंदर घुसते ही बीच में बैठे सर्जन उठे । मुझ से हाथ मिलाया और अपने दोनों साथियों से मेरा परिचय कराया । मैं बैठ गया । बडे ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में मेरा इंटर भी शुरू हुआ । उसी व्यक्ति की बातों में रूचि नहीं किसी की बात कर रहा हूँ । आ रहा हूँ समुद्र सही । तभी बीएल और स्पेशल आ गयी । राम ने बीयर के दो बहुत भरकर कहना शुरू किया । उन्होंने मेरी योग्यता आदि के विषय में पूछा । फिर उन्होंने इंजीनियरिंग के विषय में प्रश्न पूछने शुरू किए । मेरा विश्वास करो रीना एक भी प्रश्न ऐसा नहीं था जिसका में उत्तर नहीं दे पाया । फिर फिर क्या इंटरव्यू की औपचारिकता समाप्त हो गई । बीच में बैठे सज्जन ने अपने सहयोगियों से कुछ मंत्रणा की और फिर बोले, मिस्टर रैमजे, हम लोग आपसे पूरी तरह संतुष्ट हैं । आप योग्यता, अनुभव आदि के आधार पर इस पद के लिए पूरी तरह से होगी । पर एक समस्या है आपको इस पद पर लगाने का अर्थ होगा लगभग दो सौ अंग्रेज कर्मचारियों के ऊपर आपका नियंत्रन । इससे हमारी कंपनी में सदियों से चले आने वाले सुनियोजित मानवीय संबंधों में व्यतिक्रम आने की पूरी संभावना है । पर आपकी योग्यताओं को देखकर हम आपको एक अन्य पर दे सकते हैं । इसमें आपकी अंग्रेजों से टक्कर होने की कोई संभावना नहीं तो आप ने स्वीकार कर लिया । नहीं । मैंने उनसे कल तक निर्णय करने का समय मांगा है । तरह आज ही स्वीकृति दे सकते थे । रीना तो कुछ समझती तो हो नहीं । आवेश में भरकर राम ने बियर का पूरा माल खाली कर दिया । फिर वो खेसर में बोली सालों ने इंटरव्यू के लिए बुलाया था । किस पोस्ट के लिए बुलाया और कौनसी पोस्ट ऑफर की? क्या बहुत फर्क है । महीने साहस जुटाकर पूछा किस के लिए बुलाया गया था वो पद हे सत्तर पहुंच साप्ताहिक का । उसमें कुछ तो है पर वो ऑफर कर रहे । ऐसा पर जिसमें पूरे महीने का बेटा सत्तर फोन है । मैं पल भर को उलझन में पड गई । कहीं कुछ ऐसा ऐसा कह दिया तो राम नाराज ना हो जाए । इंटरव्यू तो तमाशा था उन्होंने मेरा नाम देखकर मुझे स्वीट संख्या होगा इसीलिए बुला लिया । पर जब मैं वहां पहुंचा तो सालों के दिल टूट गए होंगे । अब क्या सोचा है अपनी रीना, रंगभेद और घृणा के जंगल में मैं रह भटक गया हूँ । मुझे कुछ नहीं सोच रहा हूँ । आपकी अर्थ ने इतने परेशान हो रहे हैं । सत्तर पाउंड में बखूबी गुजारा चल सकता है । फिर अगर जरूरत हुई तो मैं भी । मैंने भय के कारण अपनी बात अधूरी छोड दी । राम एक तक मेरी और देखते रह गए । उनकी आंखों में क्रिकेट सी अनुराग भरी छमा को भी वो टी मेरे वालों को चुनकर बोले, तुम जैसा हम सफर साथ हो तो रास्ते अपने आप नहीं जाते हैं । चलो राम काउंटर पर गए और दिल के पैसे चुका दिए । हम लोग पक से बाहर आ गए । वर्ष बंद हो गई थी । सुनहरी धूप खिल उठी थी तो हम शायद हाँ कर देंगे । मैंने साहस जुटाकर पूछ लिया तो हम ये कह रहे हैं मैं समझती हूँ बेकारी से तो ये पद स्वीकार करना अच्छा ही होगा । फिर कोई अच्छी नौकरी मिलेगी तो बदल लेंगे तो ठीक है कहकर राम उदास हो गए । नाइट्स ब्लॅक स्टेशन से हम लोग ट्रेन में सवार हो गए क्योंकि लगभग खाली थी । मैं राम की बगल में बैठी थी । अचानक मेरी नजर सामने डिब्बे की दीवार पर लगे एक विज्ञापन पर्यटक गई । ब्रिटिश पोस्ट ऑफिस को इतवार या अन्य छुट्टियों के दिन पोस्ट ऑफिस में काम करने के लिए पांच टाइम कर्मचारियों की आवश्यकता थी । जब तक गंतव्य स्टेशन नहीं आ गया, मेरी दृष्टि उसी विज्ञापन में चिपकी रही । हाँ,

भाग - 07

भाग सारे चलो तुम्हें आज दिल्ली की सैर करा लाएँ । राम ने चाय का कैमरा उठाया और मुस्कुराते हुए बोले इतनी सुबह ही सुबह हजार में कुछ नहीं बोली । अविश्वास में भरी सिर्फ उनकी तरफ देखती नहीं तो सब कुछ समझ गए । सच्ची ना मैं मजाक नहीं कर रहा हूँ । आज सुबह चांदनी चौक और करोलबाग कि सैर कराऊंगा हूँ । सामने गंभीर सर में कहा क्या अलादीन का चिराग रात लग गया है? मैंने मजाक में पूछा । सब पता चल जाएगा तो जल्दी से तैयार हो जाऊँ । उस दिन रविवार था । ध्यान की छुट्टी थी उन्होंने । साइमन ऍम इंजीनियरिंग फॉर्म में वो छोटा सा पद स्वीकार कर लिया था । सत्तर कौन नासिक मिल जाता था । मैं भी काम करने लगी थी । मुझे पोस्ट ऑफिस में पार्ट टाइम का काम मिल गया था । वैसे पोस्ट ऑफिस में काम करने वाले नियमित लडकों को सप्ताह के चौबीस पॉइंट मिलते थे । पर मैं सिर्फ छुट्टियों वाले दिन काम करती थी । मुझे छह घंटे की एक दिन की ड्यूटी के चार पॉंच मिल जाते थे । बहुत काफी थी, समय भी कर जाता था । मैंने सोचते विचारते हुए कहा मुझे ना आप की तो छुट्टी है पर मुझे तो ड्यूटी पर जाना है । बारह बजे से छह बजे तक की ड्यूटी है ना? जी हाँ कोई हर्ज नहीं । ड्यूटी से पहले चांदनी चौक और ड्यूटी के बाद करन बात चलेंगे । राम ने दृढ सर में कहा साफ साफ बताइए कहाँ चलना है कि पहले नंबर चाहिए । बाथरूम खाली है । हम लोगों को जल्दी से तैयार हो जाना चाहिए । ध्यान में चाय का आखिरी बहुत पीते हुए कहा आगे कुछ पूछना था मैं उठ पडी । कपडे संभालकर में बाथरूम में चली गई । आठ बजे तक तैयार होकर हम लोग बाहर आ गई । डॉक्टर साहब तब भी सोई पडे थे । वैसे स्वरूप जाग गई थी । हम लोगों ने उन्हें सूचित कर दिया कि हमें लौटी में कुछ देर हो जाएगी । नवंबर का पहला सप्ताह चल रहा था । काफी ठण्ड थी । तेज ठंडी हवा चल रही थी । शेक्सपियर की भूमि में मुझे शेक्सपियर की वो पंक्ति याद आ गई । ब्लॅड बार बार में सिहर उठती । क्यों से हम लोग कॉलगेट आ गये थे । स्टेशन के बाहर निकलकर हमलोग न्यू रोड पर आ गए । लंदन के इस की स्टैंड के बारे में मेरे मन में बडे रोमेंटिक विचार थे । चौसा तथा इरासमस जैसे महान साहित्यकारों के इस क्षेत्र के वातावरण में कला और साहित्य की सुगंधी रस्सी वैसी होगी पर इन सडकों और गलियों के गुजरते हुए मेरे सारे स्वप्न भंग हो गए । कितनी गंदगी और बदबू थी वहाँ छोटी छोटी खोखे जैसी दुकानें टूटे फूटे पुराने जमाने के मकान खिडकियों के टूटे शीशों की जगह गत्ते लगे हुए थे । कसाइयों की दुकानों पर गोष्ठ खडा हुआ था । सडक के किनारे किनारे गंदगी के बदबूदार ढेर थे । खुली हुई नालियां रुकी हुई थी और उनमें की चढ भरी हुई थी । एक घर के सामने से हम गुजर रहे थे कि अचानक की एक मुर्गी की ताजा मरोडी हुई । गर्दन हमारे पास ागिरी मेरा मन गिना गया । उल्टी सी आने लगी । मैंने भी कृष्णा से भर कर कहा यहाँ कहानी आए अश्वेतों के स्वर्ग में मतलब इसी क्षेत्र में अधिकांश एशियाई अफ्रीकी लोग रहते हैं गंदगी की नरक में उनके लिए यही स्वर्ग है ना पर रूमाल रखे । हम उस क्षेत्र से निकलकर पेटीकोट लेन में आ गई । यहाँ है चांदनी चौक । सामने मुस्कुराकर कहा मैंने देखा राम ठीक ही कह रही थी जिस तरह एतवार के दिन पटरी बाजार लगता है, वैसा ही था ही मार के यहाँ से फिट वार के दिन सुबह आठ बजे से दोपहर के दो बजे तक ये बाजार लगता है । राम ने कहा वास्तव में चांदनी चौक सदृश्य था । पटरियों और खेलों पर दुकानें लगी थी । कपडे, नकली जेवर, खिलौने, घर का सामान, रिकॉर्ड, सौंदर्य प्रसाधन सामग्री, दुनिया भर का सामान वहाँ देख रहा था । भीड इतनी थी की कंधे से कंधा चल रहा था । हर वस्तु के विक्रेता की ऊंची बोली गूंज रही थी । लंदन में इसे सस्ता सामान और कहीं नहीं मिलता । कुछ ही देर में राम की इस बात का प्रमाण मिल गया । ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट के डिपार्टमेंटल स्टोर में जो कमी से दो ढाई पौंड की मिलती थी वो इस बाजार में एक एक फोन की मिल रही थी । काफी देर तक हम बाजार में घूमते रहे । मैंने राम से पूछा चांदनी चौक तो घूम लिया आप हरे भाई जिसके लिए आए थे तो काम तो कर ली, कैसा काम? दो कम थे । पहला कुछ खिलाने खरीदने थे । आज डॉक्टर साहब के पुत्र की वर्षगांठ है, कुछ तो भेट देनी चाहिए । अच्छा मुझे नहीं बताया आपने । दूसरा मेरा एक दोस्त है करतारसिंह । वो यहाँ दुकान लगता है, सुना है उसके वायरल में कोई मकान खरीदा है । उसमें एक हिस्सा खाली है और वह किराए पर उठाना चाहता है । सर मैं खुश हो गई । इतने दिन हो गए घुटने गुट्टे, मैं तो सोच रही थी की जिंदगी उसी छोटे से कमरे में यूज ही रहती हूँ, गुजर जाएगी । फिर लगता था राम भी स्वतंत्र जीवन बिताना चाहती थी और वह मकान की तलाश में जुटे हुए थे । पर तभी मेरे मन में एक प्रश्न कुल बुलाया कि करतारसिंह यहाँ सप्ताह में सिर्फ एक बार दुकान लगता है । क्या इसने उसे इतना लाभ हो जाता है कि वह लंदन में एक मकान खरीद सकें । मेरी अपनी ये शंकरराम के सामने रखी तो वो बोले रे करतारसिंह मशीन है पैसा बनाने की । पेंडिंग टन में उसकी होलसेल की कपडे की दुकान है । इतवार को उसकी छुट्टी रहती है इसीलिए ये दुकान लगा लेता है । कमाल है । सेना लंदन में जितने भारतीय हैं मैं उन्हें आराम से तीन वर्गों में बांट सकता हूँ । पहला वर्ग उनका है जो थोक व्यापार करते हैं वे लोग खास तौर से रेडीमेट कपडों, खाद्य सामग्री और नकली जेवरों का व्यापार करते हैं । आर्थिक दृष्टि से ये सबसे ज्यादा समृद्ध वर्ग है । इन लोगों ने जाए जाते भी खरीद रखी हैं । दूसरा वर्ग है हम जैसों का जिन्हें अच्छी खासी नौकरियां मिली हुई हैं । बस गुजारा चल रहा है । तीसरा वर्ग उनका है जो बढेगी भी मकान बनाने वाले राज मजदूर और अन्य शारीरिक श्रम का काम करते हैं । इनकी राम बीच में ही चुप हो गए । वो रहा करतारसिंह राम को अपने मित्र का स्टॉल दिखाई दे गया । हम दोनों उसके पास पहुंचे तो करतारसिंह ने बडे उत्साह से हमारा स्वागत किया । तेज तक बातें होती रहीं । करतारसिंह ने जेब से चाबी निकाली और उसे राम को देता हुआ बोला पता मैंने तुम्हें बता दिया है । किसी दिन जाकर देख लेना पसंद नायडू शिफ्ट कर लेना । पर किराया हमने पूछा देखेंगे क्यों करते हो या फिर भी कुछ इशारा तो दे । दो हफ्ते के दस पॉइंट्स डाॅ । राम ने आश्चर्यचकित होकर कहा क्यों? क्या हुआ इसमें? चौक की क्या बात है कि आप फ्लैट देखेगा तो तबियत खडा उठेगी । हर तरह की सुविधा सोफी रंगीन टीवी, रसोई घर की सारी आधुनिक मशीनें हैं । वहाँ पर दस फोन तो बहुत ज्यादा है । राम तो विश्वास नहीं करेगा । कुछ दिनों पहले इस फ्लैट का किराया पंद्रह कौन था? वो तो कहो । कई हिंदुस्तानी लोगों ने वहाँ फ्लैट खरीद लिए हैं । इसीलिए वहाँ किराये कम हो गए हैं । वरना इससे क्या फर्क पडता है । ये साले गोरे हिन्दुस्तानियों के साथ रहना पसंद ही नहीं करते । जिस इमारत में मेरा फ्लैट है उसमें पहले सारे गोरे थी । मेरे फ्लैट में जो पहले गोरा रहता था तो सोलह कौन किराया देता था । अब उस इमारत में एक दो भारतीय गए । बस कोई गोरा मेरे फ्लैट को लेने को तैयार नहीं है । कितने ही विज्ञापन दिए पर कोई फायदा नहीं हुआ । गोरे आते हैं और देख कर चले जाते हैं । राम कुछ सोच में पड गए थे । मैं उदास हो गई थी ही । ऐसा समाज है । रंगभेद पर आधारित रंगभेद पर आधारित है की सीमा तक पहुंच गई है । फिर में बजट कराने लगी थी । चार सप्ताह के चालीस फोन किराये में निकल गए तो बच्चे ठीक है । मैं परसों मुझे फोन कर बताता हूँ कहकर राम चल पडे । रास्ते में कुछ खिलाने खरीदी पेटीकोट ट्रेन बाजार से बाहर निकलकर हमने एक एक को की खाली बोतलें डस्टबिन में डालकर हम क्यों स्टेशन की ओर पैदल चल दिए । क्या फैसला किया अपनी? मैंने पूछा देखिए वो तो है ही । ये लोग हमवतन होकर भी जरा लिहाज नहीं करते । पैसे के मामले में कोई लिहाज नहीं करता । राम पैसा साधन है साथ ही नहीं रीना ये सब किताबी बातें हैं । पैसा जीवन की पूर्नवास लिखता है । राम चुप हो गए । हम लोग क्यूब से यूस्टन पहुंच गए । यूस्टन टावर पोस्ट ऑफिस में मेरी ड्यूटी थी । हम दोनों पोस्ट ऑफिस में घुसे । राम की टक्कर खडे हो गए और बोले अब मैं क्या करूँ? घर जाकर आराम कीजिए । साढे पांच बजे तक के घर आ जाइएगा । तुम्हारे लंच का क्या होगा? हमेशा की तरह होगा । मतलब आधा घंटा मिलेगा । मैं सडक के उस पार इंडियन वाईएमसीए में जाकर पराठे और सब्जी खाउंगी । ठीक हैं । राम चले गए । मैं अंदर ऑफिस में चली गई । टिकटे बेचते बेचते हो गई । पूर्वी देशों के लिए उपहार पार्सले रजिस्टर करते हुए मुझे महसूस हुआ कि यदि इन एशियाई अफ्रीकी देशवासियों का बस चले तो ये लोग समूचे पश्चिम को खरीद कर अपने घर भेज दें । विदेशी वस्तुओं के लिए कितना मोह? इन्होंने साढे पांच बजने लगे थे । सिर्फ आधा घंटा और शेष था राम के आने में । न जाने क्यों आज मेरा मन बेहद उदास था । मुझे बुरी तरह से अपने देश और अपने घर वालों की याद आ रही थी । अपने देश के बदलते मौसम, उसकी मिट्टी की सोंधी सोंधी खुशबू, सलवार कुर्ते, साढे ब्लाउज, पजामा, कोटे का पहनावा, हिंदी पंजाबी ने बोल चाल, अपनी फिल्में और उनकी मधुर गानी खाने के लिए छोले भटूरे, चाट पकौडी, बाबू जी मम्मी जी तक के इसने भरे चेहरे । होली हो या दिवाली कोई त्यौहार पता नहीं चलता । आज सबकुछ बुरी तरह मेरे ऊपर छाया हुआ था । लंदन में रहते इतने दिन हो गए । दिन रात अंग्रेजी बोलते बोलते मैं बोर हो गई थी । अपनी फिल्मों के गाने सुनने को कान तरस गए थे । सुनने को मिलते सिर्फ अंग्रेजी गाने जिनमें शोरशराबे के सिवाय कुछ नहीं होता । कई अंग्रेजी फिल्में देखी, पर मंद्रम न सका । ऍम ईएलओ इसके पीछे इस कदर दीवाने हैं जैसे उन्होंने अभी अभी से खोज निकाला हो । इतने महीनों के बाद आज पहली बार मुझे एहसास हुआ । विदेश में सजा के लिए बस जाना । एक कस्टमर पीडादायक स्थिति है । यहाँ कुछ दिन के लिए सैर सपाटा करके अपने देश लौट जाना एक महत्वपूर्ण अनूखा है । छह बजने में कुछ मिनट बाकी थे कि राम आ गए । वो टाइप की रहे थे और एक रहस्यमय मुस्कान उनके होठों पर भी हुई थी । मुझे देखकर वह अकस्मात गंभीर हो गए । काउंटर खाली था । मैं यही बैठी थी । हम खिडकी के पास आकर बोले क्या बात है? कुछ उदास नजर आ रही हूँ, नहीं तो मैंने तो कह दिया पर अचानक मुझे दोपहर की एक दुखद कितना याद आ गई । मैं भारतीय वाईएमसीए में लंच के लिए गई थी । वहाँ खाकर बाहर निकली तो एक भारतीय नवयुवक लोगों से चंदा मांग रहा था । एक भारतीय नवी वक्त उच्च शिक्षा के लिए लंदन आया था । उसकी तबियत खराब हुई । वो इधर उधर डॉक्टरों के पास गया । किसी ने कोई ठीक से देखभाल नहीं । अंत में वार्डन ने उसे अस्पताल में ही भर्ती करा दिया । दो चार दिन में उसकी मृत्यु हो गई । भारतीय में बडा आक्रोश था क्योंकि उसने युवक की मृत्यु का कारण उसका समुचित उपचार न होना था । भारत में उसके परिवार वाले गरीब है । चाहते हैं कि उसका शव भारत भेज दिया जाए । भारतीय नवयुवकों ने ब्रिटिश सरकार और भारतीय हाई कमीशन के अधिकारियों से इस दिशा में सहायता करने की प्राप्त था कि पर सब ने अपनी असमर्थता प्रकट कर दी । हारकर उन लोगों ने चंदा करके शव को भारत भेजने का निर्णय कर लिया । इस करोड स्थिति को देखकर महीने भी एक फोन दे दिया । पर मेरा मन बुरी तरह हो गया था । अब चलो भी है, बजने लगे हैं । राम ने उतावले सर में कहा, मैंने अपनी कलाई पर बंधी घडी देखी । अभी छह बजने में तीन मिनट थे । मैं बोली अभी देर है । अंग्रेजों के देश में समय की पाबंदी खो बारे अंग्रेजों के देश में समय की पाबंदी खूब आ गई है । चलिए कुछ सीखा राम मुस्कुरा दिए । छह बजते ही मैंने काउंटर बंद कर दिया । आपने इंचार्ज को हिसाब के घर में राम के साथ बाहर आ गई । एयर कंडीशन ऑफिस से निकलकर में बाहर आई तो महसूस हुआ कि सर्दी बेहद तेज हो गई है । मुझे लगा मेरे नाक कान सर्दी के कारण गायब हो गए हैं । कहीं कहाँ चलना है? मैंने राम के बगल में वहाँ डाल दी । खरोल बाद कैसे चलेंगे टैक्सी से वो पास है क्या काफी दूर है । फिर क्यों फॅमिली है ना पिक्चर में हो जाएगी कौनसी पिक्चर? देखनी है आराधना । भारत में इसके गाने सुने थे अच्छे हैं । इसीलिए तो प्रोग्राम बनाया है । हम लोग टैक्सी लेकर साउथॉल आ गए । उस एरिया को देखकर मुझे लगा । रात ठीक ही कह रहे थे कि ये सचमुच अपना दिल्ली का करोलबाग है । दो पिक्चर हॉल थे । वहाँ दोनों में हिंदी पिक्चरें लगी हुई थी । खिडकियों के बाहर क्रिकेट खरीदने वालों की लंबी लंबी लाइनें लगी थी और खिडकी के पास खडे लोग आपस में धक्कम धक्का कर रहे थे । वहाँ अधिकांश लोग भारतीय ही थे । एक तो कांग्रेस नजर आता तो ऐसा लगता जैसे विदेशी हो । दुकानें भी भारतीय वस्तुओं से भरी थी । चाट, पकौडी, छोले भटूरे, चाट पकौडी, छोले भटूरे, जलेबी, गुलाब जामुन पांच वगैरह सब उपलब्ध उठा रहा । हम लोगों ने एक दुकान पर खडे होकर चार खाई । फिर दो टिकटे लेकर पिक्चर देखने हॉल में घुस गए । नौ बजे के लगभग पिक्चर खत्म हो गई । वैसे पिक्चर लंबी थी पर शायद उसे काटपीट कर छोटा कर दिया गया था । पिक्चर देखते देखते मुझे भारत की आजादी । जब कभी कोई रोमेंटिक सीन आता तो अगली पंक्तियों वाले सीटियां बजाने लगते । भारत ने तो ये बुरा लगता था पर पता नहीं यहाँ की अच्छा लगाई । हॉल से बाहर आकर मैंने अपने आप को काफी सहज और स्वाभाविक पाया । शाम का वो खडा उदासी भरा मूड बदल चुका था । कहो तो वह फ्लाइड भी देख ले । सामने पूछा, मैंने घडी देखी । नौ दस हो रहे थे । सर्दी बहुत बढ गई थी । बुरी तरह कोहरा छाया हुआ था । मैं कुछ फैसला नहीं कर पा रही थी । बोलो चलना है । कितना समय लगेगा पास की है । आधे घंटे से ज्यादा क्या लगेगा तो चलो इधर आई है तो देख लेते हैं । हम लोगों ने टैक्सी ली और करतारसिंह का फ्लैट देखने के लिए चले गए । हम लोग उस इमारत के सामने उतर गए जिसमें करतारसिंह का फ्लैट था । चार मंजिला इमारत थी । वो बाहर से ऐसा लगता था जैसे इसमें आठ फ्लैट हैं । बीच में जीना था । हम लोग मुख्यद्वार से अंदर गए । सामने ही लिफ्ट थी । अजीब बात थी कि लिफ्ट का गेट गायब था । हम लोग लिस्ट में घुसे और ऊपर जाने वाला बटन दबा दिया । लिफ्ट खडी नहीं । हम लोग लिफ्ट से बाहर आकर जीने से चलने लगी । हमारा अनुमान सही था । दोनों फैट थे और जीना कॉमन था । हमको चौथी मंजिल पर जाना था । ऊपर चढते समय हम लोग फ्रेंड्स के बाहर वाली नेम प्लेट को पढते जा रहे थे । अधिकांश अंग्रेज के वहाँ तीसरी मंजिल पर हमें एक भारतीय की नेम प्लेट नजर आई । मैं ठीक की । पहले अपना फ्लैट देख आएँ । फिर संजय से यहाँ के वातावरण के बारे में बातें कर लेंगे । राम ने शायद मेरी मनोदशा सत्तर ली थी । हम लोग चौथी मंजिल पर पहुंच गए । चैट के बाहर ताला लगा था । सामने अपनी जेब में हाथ डाला । सारी जेबे तलाश कर ली । पर चांदी कहीं नहीं थी । क्या कहीं गिरा दी । मैंने घबराकर पूछा । नाम कुछ सोचने लगे । फिर शांत होकर बोले ॅरियर ताली कहीं गिरी नहीं । सुबह वाला कोर्ट में बदला था । शायद चाबी उसी में रहती तो बेकार परेड की । यहाँ तक देखा कर के तीसरी मंजिल वाला फ्लैट देख लेते हैं । सब एक जैसे ही होंगे । हम तीसरी मंजिल पर आ गई । फ्लैट की बाहर एक नेम प्लेट लगी थी । आरके सेट नेम प्लेट के पास ही घंटे का गठन था । मैंने उसे दबा दिया । अंदर घंटे बाजी उसका सर बाहर तक सुनाई दिया । हम लोग दरवाजा खुलने की प्रतीक्षा करते रहे । कई मिनट बीत गए, पर दरवाजा नहीं खुला । मुझे आश्चर्य हुआ । मैंने दोबारा घंटी बजाई । कई मिनट की प्रतीक्षा के बाद दरवाजा थोडा सा खुला । उसमें से एक अधेडावस्था के भारतीय कब है? बीज सा चेहरा बाहर झांक रहा था । हमें देखकर दरवाजा पूरा खुल गया । क्या आप मिस्टर सेट है? जानने पूछा जी हाँ, उसके पति ने उत्तर दिया, मैंने नोट किया कि मिस्टर स्टेट के ऊपर छाया भय खत्म हो गया और वह कुछ उलझन में फंसे लग रहे थे । क्या हम नहीं जा सकते हैं? राम ने मुस्कुराकर पूछा, मैंने आप लोगों को पहचाना नहीं देखी रही । हम लोग कोई सीक्रेट एजेंट नहीं । जब हम लोग पहले मिले ही नहीं तो आप हमें कैसे पहचान होगी? कहकर राम बुरी तरह खिलखिलाकर हंस पडी हूँ । वहाँ का शमशानी सन्नाटा रामके अट्टाहास में कसमसा गया । मिस्टर सेकने दोनों हाथ जोडकर विनम्र सर में कहा कृपया इकतीस जोर से मत हसी । मुझे डर लगता है । मुझे मिस्टर से विचित्र व्यक्ति लगी । हम लोग अंदर पहुंच गए । हमने अपने आने का उद्देश्य बता दिया तो मिस्टर सेट के गहरी सांस ली और वो नहीं तो डर गया था । मुझे लगा ये व्यक्ति दिखते ही नहीं । रहस्यमय भी है तो हम लोग देख सकते हैं । राम ने पूछा जी, हार शौक से पर जाना में अपनी पत्नी को विलाल और कोई घर में है । कहकर मिस्टर सीट उठे और शीघ्र ही लौटाई । उनके पीछे थी कोई सोलह सत्रह वर्षीय एक लडकी शाहीन की पत्ती करती नहीं, थिएटर की लडकी जैसी है । बच्चे हो सकती हैं । नये बुरी तरह लग गई । परिचय हुआ तो मेरा अनुमान सही निकला । वो साजन की लडकी नहीं, उन की पत्ती कहाँ है ये पता नहीं चला । मैं पूछना चाहकर भी पूछ नहीं पाई । मिस्टर सेंटर उनकी लडकी ने हमें फैट दिखाना शुरू किया । राम कुछ जल्दी में थी शायद इसीलिए वह तेज चाल से पाओ को पटक पटक कर चल रही थी । मिस्टर सेठ ने ड्राइंग रूम में आकर कहा विश्वराम जरा धीरे चलिये इस बार मुझे बुरा लगा कि व्यक्ति विचित्र रहस्यमय नहीं, पागल और सनकी भी है । क्या इस लडकी छठी कमजोर है? रामनिधि शायद मिस्टर सेट की बात का बुरा माना था । इसीलिए उन्होंने ये व्यंग कर दिया था । इससे पूर्व की मिस्टर सेट कुछ उत्तरदेते सारा ड्राइंग रूम ठकठक से जोर से हिल गया । कोई किसी मोटी लकडी से नीचे की फ्लैट में छत को ठोक रहा था । मैंने देखा कि मिस्टर सेट का चेहरा भर से पीला पड गया था । हम लोग सन्न रह गए । यू ब्लॅड नीचे से गालियों की आवाज जा रही थी । जिसका डर था वही हुआ ना । बडी मुश्किल से मिस्टर सेट बोल पाए । आखिरी चक्कर क्या है? राम ने मिस सेट से पूछा कुछ नहीं अंकल, इन अंग्रेजों ने नाक में दम कर रखा है । यहाँ हम लोग ऐसे ही रह रहे हैं जैसे दांतों के बीच में जीव मतलब नहीं नहीं । स्टेट से पूछा । आंटी, इन लोगों ने जीना हराम कर रखा है । न जोर से बोल सकते हैं, ना हर सकते हैं, न हो सकते हैं । चले तो चोरों की तरह कहीं नीचे धमक तक पहुंचे । पार्टी अभी नहीं दे सकते मम्मी तो इतनी तंग आ गई है जिंदगी से कि क्या हुआ नहीं । मैंने घबराकर पूछा तो भारत चली गई । सेठ ने शांत भाव से उत्तर दिया तो मैं अकेली हो । जी हां करोल बाद में पिक्चर देकर जो बढिया मूड बना था वो मैं स्टेज की दशा देखकर उखड गया । आप लोग कुछ पिएंगे । मिस सेठ ने औपचारिकता निभाई । नहीं, इस समय कुछ जरूरत नहीं । ठीक है मिस्टर सेटअप । घबराइए मत । मुझे फ्लैट पसंद है । दो चार दिन में हम शिफ्ट कर लेंगे । राम ने कहा मैंने देखा मिस्र सेठ के चेहरे पर चमक आ गई थी ।

भाग - 08

धार शाम के तीन बजे और सूरज डूब गया । मैं सोफे पर आंधी पडी थी । पास की खिडकी मैंने खोल रखी थी । उसमें से ठंडी हवा नहीं आ रही थी । मैंने कई बार उससे बाहर जहाँ का था घनी मत महली । कुहासे की चादर ने सब कोई ढक रखा था । मैं अपने इस वायरल होने वाले नए फ्लैट में आकर खुश थी । मुझे एकांत, स्वच्छंदता और व्यक्तिगत ता से लगाव है कि सब कुछ मुझे उपलब्ध थे । यहाँ उससे रात को जब ये फ्लैट देख कर गए तो राम कई दिन तक उलझन में पडे रहे । बार बार यही कहते थे रीना क्या करोगी? स्लाइड में जाकर अकेले पड जाओगी । यहाँ रहने से दिल तो लगा रहता है । मैं इसे स्वरूप है । मुन्ना है । डॉक्टर साहब हैं पर न जाने की । मुझे डॉक्टर साहब की यहाँ रहते हुए विचित्र सा लगता है । मेरी शुरू से ही मान्यता रही कि ये छत के निचे केवल एक ही परिवार सुख से रह सकता है । राम मेरी बात मान गए । जब हम लोग अपना सामान बाद कर वहाँ से चले गए तो मैंने नोट किया था । मैं इसे स्वरूप की आंखे छत चलाई थी । क्यों नहीं कई दिन तक सोचती रही थी क्या वह आँसू आज नेता इसमें से उपजे थे । क्या मिसेस स्वरूप अकेलेपन की भयावहता से अकाउंट हो गई थी? नई फ्लैट में आकर मुझे बडी शांति मिली थी । जो कुछ था जैसा दी था अपना था । अगर यहाँ शेखर आधी गए तो कोई परेशानी वाली बात नहीं होगी । यहाँ सारी भर्ती सुख सुविधाएं उपलब्ध थी । एक सोना साहब हरापन था । वो अकेला पन जो दूसरों को छटपटाता है, मेरे लिए वरदान बन गया था । तभी कॉलबेल बजी ये समय कौन आ गया? मैं ऐसा इसी उठी दरवाजा खोला । नीचे के फ्लैट वाली सेट सामने खडी थी । मैं अंदर आ सकती हूँ । आंटी ये आंटी आंटी क्या लगा रखा है में सेट दे दी । कहा करूँ बशर्ते आग में सेट की जगह अंजू कहकर पुकारें । मंजूर है आवाज अंजू अंजू अंदर आ गई । फिर उसने दरवाजा बंद कर दिया । ड्राइंग रूम में आकर हम दोनों बैठ गए । टीवी चल रहा था । कोई मजाकिया फिल्म चल रही थी । कहीं दीदी नई जगह मन लग गया । हाँ अच्छा है । मैं तो यहाँ की जिंदगी से इस कदर हो गई हूँ । दीदी की बस्ती चाहता है । क्यों ऐसी बात है ये भी कोई जिंदगी है दीदी, ना कोई बोलने चालने वाला ना कोई सुख दुख का भागीदार में कुछ सोचना पड गई । मुझे अंजु के जीवन के साथ किसी दुखद घटना के जुडे होने का एहसास हुआ हूँ । मिस्टर से क्या करते हैं जो मैंने पूछा एक डिपार्टमेंटल स्टोर में हेल्पर का काम करते हैं आप लोग इंग्लैंड का भाई हो गई कोई दस पंद्रह साल एक व्यक्तिगत प्रश्न पूछ संजू बुरा तो नहीं मानोगी दीदी ये भी एक समस्या है । यहाँ कोई व्यक्तिगत प्रश्न पूछने वाला ही नहीं खेलिए । आप मिली तो सही तो छे क्या पूछना है तुम्हारी मम्मी भारत के चली गई क्या वो लौटकर आएगी? शायद नहीं दीदी इसी बात की पापा को तोडकर रख दिया है । शायद यह भी एक कारण है कि जिसने मेरी जिंदगी को आकर्षणहीन कर दिया है । हुआ क्या होता? क्या मम्मी को यहाँ का जीवन, यहाँ की संस्कृति यहाँ के तौर तरीके बिल्कुल पसंद नहीं थे । वो घंटों पलंग पर पडी रोती रहती । पिछले दिनों से उनको बस एक ही रेट लगी हुई थी । चलिए अपने देश लौट चलते हैं । पापा उनको समझाने की कोशिश करते रहे पर उनकी समझ में कुछ नहीं आता । उन्हें हिस्टीरिया के दौरे पडने लगे । उन्हें तो बस एक ही रेट लगी थी यहाँ कुत्तों की तरह जिंदगी से अच्छा है कि हम लोग अपने देश लौट चले । अंत में उनकी दशा इतनी खराब हो गई कि पापा को उन्हें स्वदेश भेज नहीं पडा । अंजू की मम्मी की करुण कहानी सुनकर मेरा मन उदास हो गया । मैं सोचने लगी धन्य है संजू के साहस को दीदी उधर मम्मी क्या जाती है? इधर पापा का छटपटाना देखा नहीं गया था आप शिक्षित कटाना हाँ दीदी मैंने अक्सर देखा है और रात में अपनी चारपाई पर पडे रहते हैं और चोरों की तरह सोच अच्छा बाहर ही रहते हैं तो कैसी है? मैं बात को बदलना चाहती थी । इस अप्रिय प्रसंग से मेरे मन किया । नाम कोने में उदासी घनीभूत होती जा रही थी । मैं बोली कुछ भी होगी । अंजू आप लेंगे तो मिलोगी तो मैं भी ले लूंगी । आॅटोमेटेड हो मैं बना कर लाती हूँ । दोनों चलते हैं । अंजू उठी और मेरे साथ होली पहली बार मैंने नोट किया वो चलने में थोडा सा लगा रही थी । क्यों क्या हो गया? मैंने पूछा नहीं तो फिर ऐसे कैसे चल रही हूँ? अंजू कुछ नहीं बोली । उसकी आंखों में उदासी की एक बदली टेड गई । रसोई घर में मैंने बिजली की इटली में दो क्या पानी रख दिया । वहीँ खडे होकर उसके उभरने की प्रतीक्षा करने लगी । पांच मिनट में काफी बन गई । अपने अपने पहले लेकर हम लोग फिर से ड्राइंग रूम में आ गए । टीवी पर अर्धनग्न अफ्रीकी महिलाओं का समूह निर्णय आ रहा था । अंजू सामने वाले सोफे पर बैठी हुई थी । उसने अपनी साढे को कितने तक चढा दिया? नहीं चौकी आखिर मेरे सामने अपनी नगरी टांगों का प्रदर्शन क्यों कर रही है? कुछ देखा दीदी अंजु के कहने पर मैंने गौर से देखा । उसके सीढी तंग ने एक चोट का निशान था कभी काफी बडा घाव रहा होगा । वो चोट कैसे लगी? ये चोट नहीं दीदी श्वेतों के अश्वेतों के ऊपर अत्याचार का प्रतीक है वो कैसे? इसके साथ एक बडी ही दुखद घटना जुडी हुई है दीदी कोई आपत्ति ना हो तो सुनाओ । अंजुमने कॉफी का घोटिया और बोली आपको तो मालूम ही होगा कि हमारी इस लोकेलिटी के लिए सबसे पास का बाजार ड्राफ्टर है । वहाँ जाने के लिए यदि मुख्य सडक से जाएँ करीब दो ढाई फलांग चलना पडता है । पर एक शॉर्ट कट है पिछवाडे जो में से शौक का याद है कि यदि उधर से जाओ तो बाजार सौ गजनी दूर नहीं रहता । इस सब से क्या मतलब है? तुम्हारा बताती हूँ दीदी ये घटना कोई आठ दस वर्ष पहले की है । एक दिन मम्मी ने मुझे ग्राफेन बाजार से पे चलाने को कहा । मुझे स्कूल जाने की जल्दी थी । मम्मी को भी मेरी फ्रॉक सीने की फिक्र थी । मैं घर से बाहर आई । मैंने सोचा कॉल मुख्य सडक से इतनी दूर जाएँ । मैं पिछवाडे चली गई और मुझे शौक की आठ से होकर बाजार पहुंच गई । मैं टीचर लेकर लौटी तो यार्ड में मिले शॉप मिल गई । उनका चेहरा क्रोध से तमतमाया हुआ था और छोटी छोटी पनीली आंखों से चिंगारी बरसाती हुई । वो अगर जी ये क्या तेरे बार की जायदाद है । गंदी काली लडकी इसे आम रास्ता समझ रखा है । आगे से कभी घर पाँच रखा तो समझ लेना टांगे तोड होंगी । मेरे पास बंदूक है चल भाव और मैं सिर्फ पर पांव रखकर भाग आई । ये चोटिया ठोकर लगने लगी । नहीं दीदी, पूरी कहानी तो सुन लीजिए । मैं घर आ गयी बढा अपमानिक महसूस कर रही थी । सोचती रही सांगली जरूर हूँ पर गन्दी नहीं साफ कपडे पहनती हूँ । फिर मैं शॉप का क्या बिगड गया जरा उधर से निकल गई तो उनको इतना बिगडने की क्या जरूरत थी । कानून ऐसी ट्रेसपासिंग कहते हैं जो वो तो बाद में मुझे भी मालूम हो गया । खैर मैं उस घटना को भूल गई । फिर एक दिन दोपहर को मम्मी ने मुझे पोस्ट ऑफिस भेजा । उन्हें कुछ चिठ्ठियां लिखनी थी । मैंने बाहर निकलकर सोचा इस गर्मी में कौन इतनी दूर चले? मैं ऐसे शौक की आप की ओर चली गई । ऐसे शौक आपने याद में घूम रही थी । मेरी हिम्मत नहीं हुई । मुख्य सडक का पूरा फासला तय कर नए पोस्ट ऑफिस पहुंच गई । काफी भीड थी वहाँ । काउंटर क्लर्क ने पहले श्वेत पुरुष महिलाओं को टिकट ले फंसे दिए । घंटे भर की प्रतीक्षा के बाद उसमें मुझे निपटाया । मैं पोस्ट ऑफिस के बाहर आई । मैं बुरी तरह थक गई थी । साथ ही में घबरा रही थी कि मम्मी चिंता कर रही होगी कि ये अंजू कहाँ मर गई । मैंने साहस जुटाया । शॉप की आपकी तरफ आई । वो वहाँ नहीं थी । मैंने अपनी पूरी शक्ति लगाकर याद के अंदर दौड लगा दी । तभी मैं तीस यार्ड में पहुंची ही थी कि मुझे शॉपिंग कर जीना सुनाएगी । काली मसूर की बच्ची तो फिर घर से निकली । अभी मजा चखाती होते हैं और उन्होंने अपनी शॉटगन को मेरे पांव का निशाना बनाकर डाल दिया में भागती रही । घर आकर मैंने देखा मेरी सीडी तंग में धोखा हो गए थे । एक जांग में और दूसरा घुटने के नीचे । दोनों से खून बह रहा था । मम्मी ने मेरी मरहमपट्टी की और डाटकर कहा तो उधर क्यों गई थी उसमें खर्जी क्या है? ये ट्रेसपासिंग? अंजू ये कानूनी अपराध है । पर सब लोग जाते हैं, उधर से श्वेत हैं । हम काले हैं तो क्या हुआ? मम्मी ने कोई उत्तर नहीं दिया मैं ये सब सुनकर बुरी तरह खड्डे उदास मन से मैं बोली निर्ममता की हद है एक बहुत बच्ची पर इस तरह बंदूक चलाना कहाँ कि मानवता है । अभी और सुनी दीदी शाम को पापा लौटे । मेरी चोटों को देखकर वह मुझ पर ही बरस पडे । उनका विचार था कि मैं उनका जीवन दूभर कर दूंगी । शाम को मिस्टर शौक भी तस्वीर लाए । उन्होंने कर्कश स्वर में मेरे पापा को झाडा । मेरी पत्नी ने तुम्हारी बच्ची को चेतावनी दी थी । इसके बावजूद उसने ट्रेसपास क्या इस बार गांव को निशाना बनाया गया । अगर इस लडकी ने फिर ऐसी गलती की तो अगली बार में से शौक ने निशाने को थोडा ऊंचा करने का फैसला किया है । अगर कोई दुर्घटना होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी तुम पर होगी । पापा नहीं आते हुए बोले मिस्टर साहब, अब ये गलती कभी नहीं होगी । मोह में भर तंबाकू को साफ वर्ष में होते है । मिस्टर शाम बोले ठीक है तो उन लोगों की औलाद यहाँ के तौर तरीके सीखने में सुस्ती दिखाती है । फिर हमें उन्हें बल प्रयोग कर सिखाना पडता है । मैं सब कुछ सुन रही थी । शॉप चले गए थे तो मैं बुदबुदाने लगी । हाँ राक्षस कहीं मैं तुमसे तुम्हारे गोरे रंग से कहना करती हूँ । काफी खत्म हो गयी । अंजू उठी और दोनों वालों को धोकर रसोई घर में रख आई । मैं अनमनी सी बैठी रही । बाहर वर्ष शुरू हो गई थी । अंजू ने खुली खिडकी बंद की और अपनी सोफे पर आकर बैठ गई । दीदी मेरा मन घर के विश्व से भरा हुआ है । मैं बदला लेकर रहूंगी । बदला किसी मैं चौंक गई । इन श्रेत्रों से कैसी अभी तय नहीं कर पाई हूँ । वैसे एक श्वेत लडका मेरे चंगुल में फंस गया है । सोचती हूँ सिखाते से वो पाट जो मिसेज शॉप ने मुझे पढाया था । अंजू घृणा का उत्तर बिना नहीं होता । सही क्षमता और धैर्य के गुणों से घटना के ऊपर विजय पाई जा सकती है । अंजू चली गई । अचानक अनायास बातों के सिलसिले को अधर में ही छोडकर मुझे लगा उसका जाना अचानक नहीं सायास था । मेरे मन को कोई मथे दे रहा था । इस मंथन में हर बार विश्व की निकलता था अमृतसर निकलेगा । मैं सोचती रही राम को नीचे तक छोडकर मैं ऊपर आई और सोचा नहा धोकर बाजार जाना चाहिए । घर के सामान की बहुत सी चीजें खत्म हो चुकी थी । मैंने तब में गर्म पानी भरा और कपडे उतारकर उसमें घुस गयी । बडी ही सुखद अनुभूति हुई । सारा शरीर गुनगुने जल के टाइप से सिहर उठा । तभी कॉलबेल बजी कितने आश्चर्य में पड गई । इस समय कौन आया है? राम अपनी ऑफिस जा चुके हैं । अंजू की स्कूल चली गई होगी । इस पूरे आस पडोस में किसी और व्यक्ति से परिचय नहीं । तभी कॉल बैल फिर से वजह मैं तब से बाहर निकल गई । जल्दी से शरीर पूछा और गाउन पहनकर बात हम से बाहर आई । कॉल बैक एक बार फिर टुनटुन आई जरूर कोई व्यक्ति जल्दी में है । पर ऐसी भी अभी तक किस काम की? मैंने दरवाजा खोला । दरवाजा खुलते ही आगंतुक लगभग कर अंदर आया और उसने अपनी दोनों बाहों से मुझे जकड लिया । मैं स्तंभित रह गई हूँ, बस में नहीं कह पाई । फिर आवाज उसकी ओर देख रही हैं । मुझे लगा वो चेक शाहीन होती जा रही है । इतने दिनों बाद अपने देश से इतनी दूर एक अजनबी परिवेश में तुम को देख कर तो उसे मिलकर मेरा मन नाजाने कैसा हो रहा है ना? मैं कह नहीं सकता कब आई? शेखर मैंने अपने आप को संभाला । शेखर की बाहों से अपने आपको मुक्त करके मैंने दरवाजा बंद कर दिया । दरवाजा बंद करते ही एक अज्ञात हैं । मेरे अंतर को सेना गया । कल शाम को आया था । सुबह उठते ही तुम्हारी खोज में निकल पडा । पहले ऍम रोड गया वहाँ डॉक्टर साहब ने तुम्हारा नया पता दिया तब कहीं यहाँ तक पहुंच पाया । कैसे आई टैक्सी पूरे तीन पार्ट लग गए । कहते हुए शेखर ने अपने हाथ में पकडे हुए दोनों पैकेट में इस पर रख दिए । कितने दिन के लिए आई हूँ क्यों? क्या मेरे आने से तो खुशी नहीं हुई । मेरा ये मतलब नहीं था । ग्यारह हफ्ते तो हूँ ही बाद में देखा जाएगा । मामाजी कनाडा में है । उन्होंने हवाई जहाज की टिकट भेज दी तो ठीक है । अमेरिका और कनाडा भी घुमाऊंगा । कहाँ ठहरे हो वाईएमसीए में, क्यों लंदन में उससे अच्छी और सस्ती जगह कहाँ मिलेगी? मेरा मतलब था क्या बात है । नहीं ना लगता है हमें एक दूसरे की मतलब भी समझने योगी नहीं रहे हैं । शेखर के सफर में तीखा दिया था । कुछ भी कहूँ मैं ये चाहती थी कि यदि तुम्हें आपत्ति ना हो तो ये घर तुम्हारा अंदर बाहर की लेती काम नहीं । मुझे इतना घबरा दिया की मैं अपने आपको व्यक्ति भी नहीं कर पाई । औपचारिकता वर्ष नहीं शेखर को अपने पास रहने का निमंत्रण देना चाहती थी । पर अंदर से मैं डर गई थी कि कहीं शेखर मेरे निमंत्रण को स्वीकार न करले जीना शेखर ने गंभीर सर में कहा मुझे तुम्हारे पास रहने का क्या अधिकार है और छुट्टी की दूरी बनाए छह समय भी कर जाए तो बहुत समझो ठहरूंगा तो मैं नहीं । हाँ, थोडा घूमने फिरने के बीमारी हारी में तुम्हारी सहायता की अपेक्षा जरूरत होगा । इस अजनबी पराए देश में तुम्हारी सिवाये मेरा कोई है भी तो नहीं । शेखर के संतुलित और करीब पकडता पूर्ण व्यवहार ने मुझे अभिभूत कर दिया । मैंने प्रसंग बदल दिया । भारत में सब ठीक हैं । ठीक हैं आने से दो दिन पहले मैं तुम्हारे घर गया था । सब खुश हैं । दीपक और मम्मी पापा को तो तुम्हारे ऊपर गर्व है । वे लोग सब कहते हैं कि हमारी बेटी लंदन में है, तभी मेरी दृष्टि उन दोनों टिब्बों पर कडी मैं बोली इस औपचारिकता की की आवश्यकता की मैंने कोई औपचारिकता नहीं निभाई हैं । ये मिठाई नमकीन के डिब्बे तुम्हारे घर वालों ने भेजे हैं । क्या जरूरत थी यहाँ कौन सी ऐसी चीज है जो नहीं मिलती? मैंने तो मना किया था पर वे लोग नहीं माने । यहाँ राम साहब कहाँ है वो तो अब ये भी तुम्हारे आने से पहले चले गए क्या? तो में समय नहीं आ रही थी मैं पूरी तरह चौकडी शेखर के इस तरह अचानक आ जाने से मैं ऐसी आतंक स्मिथ हो गई कि मुझे खयाल ही नहीं रहा की ना उसके सामने सिर्फ ग्राउंड में खडी हूँ । एक मिनट के लिए क्षमा करना शेखर में भी आई कहकर में दूसरे कमरे में चली गई । वहाँ से कपडे बदल कर लौटी तो देखा शेखर ड्राइंग रूम की हर वस्तु को बडी तन मेहता से निरक्षण कर रहा है । जरा अपना घर तो देखा हूँ । शेखर ने मुस्कराकर कहा देख लो, छोटी सी जगह है तो कोई विशेष बात तो नहीं । शेखर ने पूरा घर देखकर हल्की सर्वे कहा क्या ठाठ है मैं क्या उत्तर दी थी चुप रहेगी । शेखर बेचे ऐसा कमरे में इधर उधर घूम रहा था । आराम से बैठ कर बातें करो ना । मैंने कहा शेखर बैठ गया । मैं भी सामने वाले सोफे पर बैठ गई । मेरे मन के अनाम कोने में एक अज्ञात भय बिच्छू बनकर रेंग रहा था । कहीं शेखर अतीक को दोहराने तो नहीं आया? क्या हो सकता है वह अतीत में मेरे द्वारा की गई गलती का राम को इशारा करके मेरे दांपत्य जीवन को देश में बना दी तो कुछ घबराई सी लग रही हो रही ना क्या बात है? कुछ नहीं सोच रही थी क्या पेश करूँ? शेखर जोर से हंसा हो शेखर हर साल तो मुझे अपनी बेवकूफी का एहसास हुआ । मैंने अपने आप को स्पष्ट करते हुए कहा हम नाश्ता लगाओ, मौतों में कर के आया हूँ । फिर कोई चाय कॉफी लेना है । अभी नहीं । थोडी देर ठहरकर देखा जाएगा । अब क्या बात करूँ । मैं उलझन में पड गई और सुनाओ कैसे कट रही है? शेखर ने पूछा अपनी मुट्ठी कट रही है । तुम अपनी का हो, ठीक ही है । अब तो जिंदगी में सेटल हो गए हो । शादी वादी करने का इरादा नहीं है क्या शादी शेखर के होटों पर दर्द से जन्मी एक मुस्कान होगी । फिर वो बोला अभी फिलहाल तो कोई इरादा नहीं क्यों बस यूँ ही क्या बीवी अच्छे से जुडे हो क्या तुम ने बीते कल से नाता तोड दिया है? शेखर मेरे लिए तो आने वाला कल ही अहमियत सकता है क्या आने वाला कल बीते कल से नहीं जुडा है ने कम गई तो क्या मेरा अनुमान सही था? मैंने भर रायसर में कहा शेखर तुम्हें मेरी कसम है प्लीज भूल जाओ से अरे तो मेरा ही नाम रीना घबराने की कोई बात नहीं । डी टेकल की कब्र मेरे अंतर में खुद ही है । उसमें से मुर्दे निकलकर कभी बाहर नहीं आएंगे । मेरा विश्वास तक हूँ मेरे मन में ठेकेदार शिथिल पड गए कि आश्वासित काफी था । शेखर के आने के बाद पहली बार मुझे उसका आगमन सुखद लगा । राम कैसे हैं? अच्छे हैं, कैसी पड रही है? ठीक है कर एक बात है बुरा ना मानो तो एक बात कहूँ ना कहूँ मुझे लगता है तो खुश नहीं हो । इस थोडे से वैवाहिक जीवन ने तुम्हारा कैसा रुपांतर कर दिया है । जिस चेहरे पर सुबह की चटकीली धूप खिली रहती थी वहाँ लंदन का कोहरा छाया हुआ है । क्या बात है? रीना सच बताना वो क्या है जो तुम्हें इस तरह अंदर ही अंदर उतर रहा है । मेरा विश्वास करो । शेखर ऐसा कुछ भी नहीं है तो अपनी आपसे छल कर रही हूँ । नहीं शेख है यदि ऐसा कुछ भी हो तो उसके लिए राम उत्तर नहीं । नहीं नहीं तो क्या? मैं हूँ ही नहीं । तुम भी कैसी बातें कर रहे हो थे तुम जानने पर तुम्हें ही हो तो कहना पडेगा । शेखर मुझे लंदन का जीवन अच्छा नहीं लगा । आखिर क्यों? क्या खराबी है इसमें तो यहाँ अभी चौबीस घंटे भी नहीं हुए । कुछ दिन रह लो, फिर तो भी स्वयं इसका आभास हो जाएगा । शेखर चुप हो गया । फिर उसने कलाई पर बंधी घडी की ओर देखा । ग्यारह बजे लगी थी क्यों? क्या कहीं और जाना है? हाँ, ब्रिटिश काउंसिल पहुंचना है । कितने बजे बारह बजे मेरे प्रोग्राम ऑफिसर ने बुलाया है । अभी तो बहुत समय है । इसका दफ्तर है कहाँ? ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट पर डेविस रोड पर कैसे जाना होगा? आपने मुस्कुरा दी । फिर मैंने कहा बडी स्वाभीमानी हूँ, खुद नहीं होगी । नहीं कह देती हूँ मैं चलूंगी । बस शेखर मुस्कुरा दिया । अब चाय बना लूँ, काफी मिल सकेगी । अवश्य । मैं दो पहले कॉफी बना लाये । भारत से आए दोनों टिब्बे खोल डाले और दो प्लेटों में नमकीन मिठाई लगा दी । खाऊंगा कुछ नहीं । अभी नाश्ता करके आ रहा हूँ । शेखर ने कौनसी का कहना उठाकर कहा काफी खत्म करके मैंने कपडे बदले । फिर मैंने घर को ताला लगाया और हम लोग बाहर आ गई । देख मुझे आज पास हो गया । नैनीताल में फेल हो गया था । शायद उस पर शायद उसका सफलता का हिसाब मुझे जीवन भर का छोटा रहेगा । शेखर की ये बातें मुझे बहुत अंदर तक उद्वेलित कर गई हूँ । पर मैं मौन प्रतिक्रिया ही क्यों स्टेशन की ओर बढ ही नहीं और शेखर मेरे साथ चलता रहा ।

भाग - 09

भाग नो पिकैडिली सर्कस में शानदार होटल में चेन होटल के बाहर मैं और राम शेखर और मेसियर की प्रतीक्षा कर रहे हैं । शाम के सात बज रहे थे । तेज ठंडी हवा चल रही थी । घना कोहरा छाया हुआ था । पिकैडिली सर्कस की ऊंची ऊंची इमारतों की रंग बिरंगी बत्तियां और न्यून साइंस धूमिल और मटमैली सी लग रही थी । शेखर अच्छा आदमी है । मैं बराबर आउटफिट स्टेट की ओर जाने वाले मार्ग पर नजरें टिकाए हुई थी । राम कई अचानक शेखर की प्रसंसा करना मुझे चौका गया । दो तीन बार मिलने से ही इतने प्रभावित हो गए । मैंने मुस्कुराकर पूछा उसका व्यक्तित्व ही आकर्षक है । मैं तो पुरुष हूँ । परिस्थितिया कितनी आसानी से प्रभावित हो जाती हैं तो भी देख लो । ब्रिटिश काउंसिल की अपनी प्रोग्राम ऑफिसर में सियांग को ही पटा लिया । पल भर को मैं आशंकित हो गई । राम ने इस लिया शब्द का प्रयोग किया है । कहीं उसके मन में मेरे बारे में कोई संदेह उत्पन्न नहीं हो गया । वैसे शेखर को आए पूरा एक महीना हो चुका था । इस बीच शेखर कई बार हमारे घर आया नहीं । उसे लंदन के दर्शनीय स्थानों की सैर कराने ले गई और राम उसके निमंत्रण पर वाईएमसीए में खाने गए । आज हमने उसे खाने पर आमंत्रित किया है । पर ऐसी कोई बात नहीं हुई जिससे राम के मन में संदेह का भी जान सके । लोग आ गए महाशय जी मैं सियन भी साथ है । राम ने उत्साह से बढकर कहा । शेखर ने मैं प्रियंका और हमारा परिचय कराया । फिर हम चारों होटल में चले गए । ये होटल अन्य होटलों से अलग था । यहाँ कि विदेशी खाने की चीजे मशहूर थी । यहाँ की सर्विस की बडी प्रशंसा सुनी थी । जैसे ही हम लोग अंदर गए खुबसूरत फूट पहने स्टीवर्ड हमारी हो रहा है । उसने एसियन की ओर मुस्कराकर देखा और फिर हम तीनों की तरफ नजरे घुमाती घुमाती । उसके होटों से हसी कपूर की तरह उड गई । वहाँ चारों को कोने में पडी एक मेज की ओर ले गया । उसने एक कुर्सी को पीछे हटाकर एसियन को बैठके में मदद की । ऑफिसियल बैठ गई तो वह चला गया । मुझे उसका ये व्यवहार कहीं बहुत अंदर तक का छोड गया या जिम्नेशियम इस स्वाभाविक विनम्रता की अधिकारिणी है तो मैं क्यों नहीं? हम लोग संयम ही बैठ गए । मैंने मेसियर के मुखकर भरते आक्रोश को स्पष्ट देखा । वास्तव में ये होटल अन्य होटलों से कुछ अलग था । मेष पर फूलों का गुलदस्ता होना चाहिए था । पर उसकी जगह पानी का एक जा रखा था, जिसमें छोटी छोटी सुनहरी मछलियां तैर रही थीं । दीवारों पर भी जल में तैरती मछलियों के चित्र थे । उन पर प्रकाश की ऐसी व्यवस्था थी कि वे एकदम जीवित लग रही थीं । मुझे लगा यहाँ ना काफी महंगा पडेगा, पर मुझे चिंता नहीं थी । मेरे पर्स में पच्चीस कौन थे? तभी एक वेट रिसाई, अर्धनग्न एकदम करने वाली नारंगी रंग की पोशाक पहने उसने मेन्यू कार्ड में इस पर रखा और उसके फोन लौट गई । ये क्या बत्तमीजी है? उसे ऑर्डर लेने के लिए प्रतीक्षा करनी चाहिए थी । सियांग में खडे सर में कहा, मुझे इन सब के कारण का एहसास हो चुका था । मैंने हाल में चारों ओर दृष्टि डाली । सारे स्वीट लोग थे । वहाँ उनकी चीजों के इर्द गिर्द ही सारी वेटरेस मंडरा रही थी । आप चुनी अपना मनपसंद खाना । राम ने कार्ड में सिंह को पकडा दिया । फिर राम ने अपनी जेब से सिगरेट का पैकेट निकाला और मुझे छोड कर तीनों सिगरेट पीने लगी । हम दोनों ने अपनी अपनी पसंद का खाना चल लिया । दस मिनट हो गए । वेट्रेस लौट कर नहीं आई । ऑफिसियल स्पष्ट रूप से आहत सी लग रही थीं । तभी शेखर को वेट्रेस दिखाई दे गई । उसने उसे इशारे से बुलाया । उसके आने का ऐसा नहीं था, जैसे वो हम पर एहसान कर रही हूँ । उसने हम लोगों के ऑर्डर नोटकी बेट्रिस चली गई । हम लोग करीब बीस मिनट तक प्रतिशत करते रहे, पर खाना नहीं आया । काफी प्रतीक्षा के बाद एक वेटर आया और उसमें सूप के पहले मेस बजट दिए । उसके व्यवहार में कुछ ऐसी असावधानी और अशालीन थी कि दो प्यालों से सूप छलक कर ने इस पर गिर गया । हम लोगों ने सोचा खेद प्रकट करेगा, माफी मांगेगा और मेरे को साफ कर देगा । पर उसने ऐसा कुछ नहीं किया । वो जाने के लिए मुडा ही था कि मिसिंग ने उसे टोका और बोली, वो वेट्रेस कहा है, अंदर किचन में उसने सर क्यों नहीं किया? वो व्यस्त है, व्यस्त है । सर नहीं करना चाहती । बेटर कुछ नहीं बोला । क्या सर्व करने का यही तरीका है? क्या हुआ? सूप मेस पर गिर गया है तो इसमें क्या परेशानी है? तो मैं क्षमा मांगनी चाहिए थी । मैं ऐसा नहीं समझता, तो मिस डंडी ने इस को साफ करना भी उचित नहीं समझते हैं । वो कर दूंगा । खाना खत्म करने के बाद पहले क्यों नहीं हाथों को कांटे छुरी की जगह इस्तेमाल करने वालों के लिए इस सब से क्या फर्क पडता है । कहकर बेटर चला गया । मैंने देखा मैं स्वयं की आंखों से क्रोध की चिंगारियां फूटने लगी थी । वो खडी हो गयी । उसका सारा शरीर थरथरा रहा था । ब्लॅक व्यर्थ में तमाशा खडा हो जाएगा । राम ने उन्हें समझाया मैं इस होटल में कदापि खाना नहीं होंगी । अखिल बात क्या है आप लोगों को समझ में अभी तक नहीं आया । उसने आश्चर्य में भरकर कहा म्यूजियम हम लोग इस तरह के व्यवहार के आदि हो गए हैं । अब शांति रखें । मैंने उसे समझाया हम खाने के पैसे देंगे, कोई मुफ्त में तो नहीं खा रहे हैं । फिर इस तरह की बदतमीजी क्यों? आस पास की मेजों पर बैठे लोग हमारी बातें सुन रहे थे और मुस्करा रहे थे । मुझे बडा छोटा फंसा महसूस हो रहा था । कुर्सी की पीठ पर टेका अपना कोट उठाकर सियन ने तेज सर में कहा नए यहाँ एक पल भी नहीं ठहर सकती । मैं जा रही हूँ यदि आप लोगों को खाना खाना हो तो यही ठहरिये । आसपास की सीटों पर बैठे लोगों की निगाहों के सामने मैजिशियन गर्दन उठाए शांसी मुख्यद्वार की ओर बढ गई । शेखर भी रुक गया । हम को भी उठा पडा । सुख के प्यालों को मेज पर छोड कर सब होटल से बाहर आ गए । सबसे अंत में मैं बाहर आई थी । जैसे ही मैंने बाहर आने के लिए कदम रखा, मेरे पीछे हाल में एक जोर का ठहाका गूंजा था । मैं तिलमिला गई । मुझे लगा ये था आपका नहीं एक घुसा है जो किसी ने कसकर निर्ममतापूर्वक मेरी पीठ पर मारा है । बाहर आते ही मिसिंग हम पर उबल पडी । आपको कमाल करते कैसे? पहले इस तरह का अपमान आप सोचती है । इसका विरोध करके हम सफल हो सकते हैं । राम ने गहरी सांस लेकर कहा मिसिंग, मैं कल शाम की बात बताता हूँ । ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट पर मैंने एक दुकान पर एक ओवर को पसंद किया । उस पर दम की ठीक नहीं लगी थी । मैंने सेल्स मेन से उसका दाम पूछा तो वो बोला ये बिक्री के लिए नहीं है, फिर इसके लिए है । मैंने नियम से पूछा तुम जैसों के लिए नहीं है ये ये था उसका उत्तर मेरा विश्वास कीजिए । मैं बिल्कुल सच बोल रहा हूँ । शेखर ने अपना अनुभव सुनाया । मिस ियंका क्रोध उदासी में बदल गया । धीमे स्वर में बोली कुछ भी नहीं मालूम था । ये क्या हो गया है । लोगों को ट्रेन की शिक्षा देने वाले धर्म के अनुयायियों के मन में ये कुछ घृणा का दृश् बीच किसने बो दिया है । सचमुच मैं लज्जित होंगे में होटल के प्रबंधकों की ओर से आपसे क्षमा मांगती हूँ में सियांग आपकी व्यस्त में परेशान हो रही हैं । बेकार में शाम बर्बाद करने से क्या फायदा? आइए किसी भारतीय होटल में चले, वहां बैठ के आराम से खाना खाएंगे । राहत स्वर में इसने खोलकर कहा, हम लोगों ने एक टैक्सी ली और क्वालिटी होटल पहुंच गए । यहाँ टेस्ट कर खाना खाया मैं सियांग ने मिर्च मसालेदार खाने में खूब रुचि दिखाई । खाना खत्म करके हम लोग बाहर आई तो मैंने महसूस किया कि निशियन सहज और स्वाभाविक हो चुकी हैं । आक्रोश और उत्तेजना की जगह संतोष और आनंद ने ले ली थी । वो शेखर की बगल में बाहर डालकर चल रही थी । दो सौ कष्ट दूर पर वाईएमसी था हम लोग । पैदल ही उसको चलती है । अब क्या प्रोग्राम है? शेखर भाई सामने आपने ओवर कोट के कॉलर को ऊंचा उठाकर कानून को ढकने का प्रयत्न करते हुए कहा, इतने छह डिनर के लिए धन्यवाद राम भाई । चलो बैठकर गप्प लडाते हैं । शेखर के स्वर में इतनी औपचारिकता ऍम ठंड थी कि मैं समझ गई कि ओ यंग के साथ एकांत चाहता था । राम ने मेरी ओर प्रश्न सूचक नहीं, वहाँ से देखा । मैंने शाना कर दिया । फिर किसी दिन बैठक जमेगी । अब चलेंगे तुम दोनों ऍम बोले ऐसी तुम्हारी मर्जी शेखर और में सियांग । हम दोनों को अंडर ग्राउंड स्टेशन तक छोडकर वापस चले आए । करीब पौने दस बजे हम लोग अपने फ्लैट पर पहुंचे । अभी हम लोगों ने अपने कपडे की नहीं बदले थे कि कॉलबेल बज उठीं । जरूर मिस्टर सेठी होंगे । इस समय और कौन हो सकता है? मैंने उकताए हुए स्वर में कहा राम ने मेरी बात का उत्तर दिए बिना ही दरवाजा खोल दिया । मेरा अनुमान ठीक था । मिस्टर सेठी थी जो अंदर आ गए । उनकी दशा देखकर मैं हैरान हो गई । उनका चेहरा पीला पडा हुआ था । वो एकदम बदहवास से लग रहे थे । उनका सारा शरीर घर घर आ रहा था और आंखें डबडबाई हुई थी । क्यों मिस्टर सेट क्या बात है? राम ने पूछा नहीं तो केवल ठगी सी खडी रह गई । गजब हो गया । अब मैं क्या करूँ? आखिर हुआ क्या? अंजू अभी तक घर नहीं लौटी है । अभी तक तो दस बज रहे हैं । वो तो स्कूल से कोई दो बजे लौट आती है । मैंने कहा जी हाँ, मैं शाम को घर आया तो ताला बंद था । सोचा कहीं ऊपर न हो । आपके पास आया तो देखा आप का भी ताला बंद है । फिर सोचा बाजार नहीं गई हूँ । प्रतीक्षा करता रहा । वह नहीं लौटी । फिर सोचा कहीं आपके साथ नहीं । वो हमारे साथ तो नहीं थी । फिर कहाँ गए वो मेरी तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है । उसके स्कूल में कोई फंक्शन वगैरह तो नहीं था । मैंने पूछा होता तो वह सुबह मुझे सूचित कर दी थी । अब क्या होगा? मिस्टर राम राम चिंतित से मिस्टर सेट के पास बैठ गए । उनकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था । मेरा मन आशंका से कम उठा । मुझे आज आया । उसने किसी से बदला लेने की बात कही थी । कहीं शिकारी खुद शिकार नहीं हो गया । मेरा मन खराब हो गया । फिर मैंने साहस जुटाकर कहा आप हाथ पर हाथ रखी क्या सोच रहे हैं? जवान लडकी का मामला है । चाहिए । पुलिस को सूचित कीजिए । मेरा तो दिल डूबा जा रहा है । यहाँ और मिस्टर से चले गए । मैं निष्प्राण सी बैठी रही । मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ । फोर इयर्स के यहाँ से कुछ पुस्तकें खरीदकर मैं टाइटेन हम रोड पर आ गयी । मिडलैंड बैंक में मुझे राम से मिलना था । हरी रामा हरे कृष्णा वातावरण में कीर्तन सर घूम रहा था । मैंने देखा एक मंडली को लगभग दस बारह श्वेत नवयुवक नवयुवतियां सडक पर कीर्तन करते जा रहे हैं । उन्होंने भगवे बीडी जिन पर नाम लिखा हुआ था पहनी हुए थे, नवयुवकों के से घुटे हुए थे ना उन लोगों ने खडाऊ पहनी थी । वे बडी तन्मयता से कीर्तन कर रहे थे । ढोलक मंजीरे के स्वर गूंज रही थी । मैं बैंक की ओर बढ चली मंडली सोहू की ओर बढ गई और सिनेमा हाल के पास से गुजरी । उसके बाहर लगे पोस्टरों पर मेरी दृष्टि बडी । अस्सी नग्नता, कामुकता और यौन का प्रदर्शन । सांस्कृतिक विरोधाभास का धक्का मुझे विचलित नहीं कर पाया । मेरा मन तो कहीं और था । एक जटिल समस्या ने मेरे मन को बुरी तरह अवस् कर रखा था । राम पहले जैसे राम नहीं रह गए थे । उनमें एक पीछे किसका परिवर्तन आ गया था तो हर समय गुमसुम खोए हुए परेशान से रहते थे । इतना बोलना चालना ना हसी मजाक नहीं पहले जैसी निश्चिंतता और तटस्थता । इस दौरान दो बार बर्फ गिर चुकी की क्या चीज थी जो राम को अंदर ही अंदर घुन की तरह खाई जा रही थी । कई बार मैंने इसका कारण जानना चाहा, पर वह खुलते ही नहीं थे । मुझे लगा था कि पत्नी होकर भी मैं उनके सुब रुक की भागीदार करने की अधिकारिणी नहीं हूँ । मैंने फैसला कर लिया कि मैं आज ये बात जानकर रहोगी । पिछले कई दिनों से मैं अनुमान कर रही थी कि राम की उदासी के सागर तल तक पहुंचने के लिए मैंने कितने गोटे लगाई थी । क्या राम को मेरे और शेखर के संबंधों के विषय में कोई संदेह हो गया? क्या उसे हमारे अतीत के विषय में आभास हुआ है? ऐसी कोई बात हुई नहीं थी तो क्या अंजू की स्थिति ने उन्हें झकझोर कर रख दिया है? अंजू किसान बहुत बुरा हुआ । उस सात पुलिस में रिपोर्ट लिखाने के बाद उसका पता दो दिन मार लगाया गया था । वो भी पुलिस की तत्पर्ता से मिल पाई । वरना उस दिन उसका अंग्रेज मित्र अपने दो साथियों के साथ बेटर सी मनोरंजन पार किए गया । वहाँ से आकर उन लोगों ने सोह के एक होटल में खाना खाया । वहाँ सीधे अंजू को जबरदस्ती ब्राइटन सागर तट सरकार में ले गए । दो दिन तक उसको एक होटल में रखा । वहाँ से भी अंजू को जबरदस्ती ब्राइटन सागर तट पर कार में ले गए । दो दिन तक उसको एक होटल में रखा । तीनों ने उसका शीलभंग किया । जब पुलिस ने उसे ब्राइटन में लाकर मिस्टर सेट को सौंपा तो वह लगभग अर्धमूर्छित थी । पुलिस ने मिस्टर सेठ को सलाह दी थी जिन्हें डेटिंग के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं । उन्हें इस की आज्ञा देने में सावधानी रखनी चाहिए । अंधाधुंध पश्चिम की नकल करना मूर्खता है । उन लडकों को कुछ नहीं हुआ । उन लोगों ने बयान दिया, वो लडकी से छह से उनके साथ आई थी । मामला खत्म हो गया, पर राम के व्यक्तित्व की जैसे नींद ही मिल गई । हो सकता है इसकी वजह से वो इतने उदास रहने लगे हूँ । मैं बैंक पहुंच गयी । राम मेरी प्रतीक्षा कर रहे थे । मैंने देखा वहीं उदासीनता व्याप्त थी । उनके मुख पर मैंने घडी में देखा । मुझे दस मिनट की देरी हो गई । पर राम ने देरी का कारण भी नहीं पूछा । अब एक संक्षिप्त साहब कृष्ण उनके मुंह से निकल गया । नहीं चुप रही । जानबुझकर घर चले, मेरा मन नहीं । फिर रीजेंट पार्क चलते हैं । किस लिए बैठेंगे । राम ने कोई प्रतिवाद नहीं किया । हम लोग पैदल मार्ग की ओर चल दिए कोई खास दूर नहीं था । पार्क के इर्द गिर्द नहर में अनेक खुबसूरत बंद की तय नहीं थी । हम लोग पार्क के पश्चिमी ओर झील के तट पर घने प्रक्षिण की छाया में एक बैंच पर बैठ गई । पार्क सुना था । एक का तो का नव झीन में चल रही थीं । मैं उदास नजरों से पूरे माहौल का जायजा ले रही थी । अजीब सा सन्नाटा, कसमसाती की भयावहता, छटपटाती से छुट्टी सारे माहौल में व्याप्त थी । हमारे गांव के पास असंख्य पत्ते गिरे हुए थे । वो ऑस्ट्रेलिया के लंबे नुकीले पत्ते डाल से बिछडे बिछुडकर पीले और सूखे हुए निर्जीव ट्रान ही अस्तित्व को बनाए रखने के संघर्ष में जुटे हुए मैं एक तक नहीं देखती रही । मुझे लगा आज नहीं तो कल डाल से पिछले ये पत्ते सदैव के लिए नष्ट हो जाएंगे । क्या मानव मन कोई ऐसी युक्ति खोज खाया है कि जिससे यह भात के पत्ते डालने फिर से जुड सकें? शायद नहीं । राम ने एक सिगरेट सुलगा ली और वह सोनी गाहों से शून्य में ताक रहे थे । मैंने उनके मुख्य और देखा, वहाँ उदासी की शामिल घटा छाई थी । राम बोलो क्या बात है, कुछ नहीं मुझे यानी में कोई गलती हुई है, नहीं तो फिर तो ऐसी क्यों रहते हूँ? कैसे उदाहरण परेशान से आखिर हूँ क्यों चल रहे हूँ? कौनसी लिया तो मैं कुछ कर रही है । क्या अपनी पत्नी से भी चुका होंगे? हाँ तुम तो जानती हूँ । पीडा काटने से उसका बोझ हल्का हो जाता है । खुशी बांटने से और बढ जाता है । ध्यान कुछ नहीं बोले । सिर्फ उन्होंने अपनी उदास बोझ निगाहों से मुझे खोलकर देखा और फिर गर्दन झुका ली । जल में से जैसे किसी सुनहरी मछली ने अपना मुख्य भार को निकाला और फिर गोता लगा गई हो क्या? शेखर के कारण? नहीं । फिर अंजू नहीं में उलझ गई । फिर तीसरी बात क्या हो सकती है? नहीं तेज सर से पूछा फिर आके क्या बात है? राम कुछ ये पूछने का अधिकार है मेरी तुम नहीं बताओगे तो मैं समझूंगी । पहले तुम्हारा विश्वास खो दिया है । क्यों जिद कर रही हूँ मुझे तुम्हारा इस तरह उदास रहना अच्छा नहीं लगता । संसद होगी क्यों नहीं सुनकर दुख होगा? इस अनिश्चय और असामान्य स्थिति से तो मुक्ति मिलेगी । पल भर को राम मौन हो गए । मुझे लगा वो किसी अप्रिय रहस्य का उद्घाटन करने के लिए साहस जुटा रहे हैं । फिर वो गंभीर सर में बोले मेरे स्थान बडा अन्याय हुआ है । कहाँ किसी क्या है में बुरी तरह चौक कहीं दफ्तर में मिस्टर स्मिथ फोन नहीं किया है । कैसे एक सुपरवाइजर का पद खाली हुआ था? मेरी योग्यता, अनुभव, वरिष्ठता आदि के आधार पर वो पद मुझे ही मिलना चाहिए था पर वो मुझे ना देकर उससे नीचे वाले एक श्वेत नवयुवक को दे दिया गया । राम ने करोड स्वर में कहा पर ये तो अन्याय है तो मैं कह रहा हूँ मेरा अपराध केवल इतना ही है कि मेरी त्वचा सामली यदि गोरी होती तो मुझे मिल जाता । जिस दिन सी घटना घटी है, मेरा दिल टूट गया है । ईमानदारी, मेहनत योग्यता के लिए यही कोई पुरस्कार नहीं । फिर इंसान गांधी क्यों करें? क्या जिंदगी भर इसी तरह निम्न स्तर में ही काम करने होंगे? क्या इस अन्याय के विरुद्ध आवाज नहीं उठाई जा सकती? आपने एक बार बताया था कि ब्रिटिश सरकार ने रंगभेद की नीति पर आधारित किसी भी गैरकानूनी काम की जांच के लिए एक जाती संबंध बोर्ड बनाया हुआ है । वहां शिकायत की अपनी कि कई प्रतिवेदन किए पर उनसे क्या होता है? उन प्रतिवेदनों पर विचार करने वाले भी तो श्वेत ही लोग हैं । वहाँ से उत्तर आ गया क्योंकि ये विभागीय मामला है इसीलिए बोर्ड इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है । तो इसका मतलब है कि कि ये रेस रिलेशन्स पुर अश्वेतों के लिए एक बहुत बडा मजाक है । बिल्कुल ने मौन हो गई पर मैंने महसूस किया मेरे अंतर में उबाल आ रहा है किसी ने जैसे वर्षों से शांत पडे जल में कोई भारी चीज धमाके के साथ गिरा दी हूँ । उस चीज का गिरना था और जल की बडी बडी उत्तार लहरें उठने लगी और सहनशीलता के तटबंध भरभराकर टूट गए । राम आखिर हमलोग कब तक की स्वयं आरोपित बनवास भोगते रहेंगे? ने समझा नहीं रीना क्या जीवन भर के लिए हम लोगों ने अपनी प्रतिष्ठा, अपना स्वाभिमान, अपनी भावनाएं, अपनी चाय, अपनी संस्कृति इस तंगदिल देश के हाथों भेज दिए । तुम कहना क्या चाहती हूँ, यही की इस देश से मेरा दिल खूब गया है । हमें भारत लौट चलना चाहिए । ई के कह रही हो रही ना मैं ठीक कह रही हो रहा इस देश में अश्वेतों के प्रति घृणा के जंगल का दिन प्रतिदिन विस्तार हो रहा है । कहीं कोई सुरक्षा नहीं । काले हरामी सुनते सुनते कान पक गए हैं । ऑक्सफोर्ड स्टेट के भीड भरे फुटपाथों पर भी श्वेत अश्वेतों को धक्का मारते हैं । नौकरियों में तरक्की नहीं मिलती । करी बॉल जैसे घृणित शब्दों का हमारे लिए प्रयोग होता है । मौका मिलता है तो ये श्वेत हमारे घरों, दुकानों में आग लगा देते हैं । वो हम लोगों पर घातक हमले कर देते हैं । हमारी बेटियों के साथ भी चार करते हैं । ऐसे समाज में रहकर जीना की कोई जीना है । राम एकदम उलझन में पड गए । हमारी पीढी तो किसी ना किसी तरह सह अस्तित्व की भावना में गुजारा कर लेगी । पर आने वाली पीढी क्या समाज में खप सकेगी? उसी स्थान मिलेगा । यहाँ जो भी हो रीना पर भौतिक दृष्टि से हम लोग भारत की अपेक्षा यहाँ ज्यादा समृद्ध है । अपनी प्रतिष्ठा और स्वाभिमान की कीमत चुकाकर ये भौतिक समृद्धि पाना बडे घाटे का सौदा है । राम मैं मानती हूँ कि यांत्रिक दृष्टि से यहाँ सब सुख है, पर जरा याद कर उन दिनों को धो भी कपडे धोकर लाता है । उसका हिसाब करो, कपडे मिलाओ । अलसाई दोपहरिया में कहा ऋण आती है नल के पानी तब तक और बर्तन की खनन विचित्र से संगीत कीशिश टी करती है । कहाँ है ये रोमानी स्थितियां पश्चिम पैसे की खान है । रीना, पैसा, पैसा, पैसा साधन है ना कि साध्य जहाँ किसी पैसे की दौड में हमें इतना स्तरहीन कर दिया है । इसी की खातिर हमने अपने सारे मूल्यों की आहुति दे डाली है । यहाँ की जिंदगी में कितना आकर्षण है? रीना आकर्षण कैसा आकर्षण? मैं तो समझती हूँ । यहाँ का सामाजिक जीवन एकदम मनहूस, आकर्षण ही और उप भरा है । कौन किस से मिलता है? अश्वेतों को नौकरियाँ मिलती है, पर वे कितनी अपमानजनक होती हैं । पूरे भारतीयों का लगभग आठ प्रतिशत परिवहन में लगा है । बस कंडक्टरी करते हैं । वो लोग पचास प्रतिशत कारखानों में शारीरिक श्रम करते हैं, शेष व्यवसाय में है । क्या इन लोगों को ये नौकरियां उनके अनुभव और योग्यता के आधार पर मिली हैं? नहीं । अंग्रेज सदियों से हमारे मालिक रहे और हम उनके गुलाम । वहीं दास प्रथा यहाँ भी चल रही है । मैं पूछती हूँ जो व्यक्ति लंदन में बस कंट्री करता है, क्या वो यही काम भारत में कर सकता है? राम चुप हो गए । शायद में आवश्यकता से अधिक उत्तेजित हो गई थी । फिर कुछ सोच विचार कर वो बोले यहाँ भारतीय व्यापारीवर्ग तो समृद्ध है, स्वतंत्र है । ठीक है, इन लोगों ने पैसा कमाया है । पर क्या इनको यहाँ भी वहीं प्रतिष्ठा और सम्मान मिल रहा है, जैसा भारत में मिलता है? मेरे खयाल से यदि हमलोग थोडा धैर्य रखें । थोडा सा संतुलन बनाये रखने का प्रयत्न करें तो राम पूरा वाकी नहीं बोलता है । राम ये खयाल एकदम निर्मूल है । दो जातियां दो रन दो संस्कृतियों का संगम असंभव है । ये इसलिए कि अंग्रेजों के अंदर इस जाती विदेश की जडे बहुत गहराई तक पहुंच गई है । वो कभी भी किसी अन्य संस्कृति को अपने में समेट लेने के लिए प्रस्तुत नहीं होंगे । उसकी ये फ्रेश प्रतिदिन बढता जा रहा है । क्लब उ और पत्र पत्रिकाओं में प्रतिदिन देश का विश्व मन होता रहता है । राम सोच में डूब गए । मेरे अंदर जैसी विस्फोट हो रहे थे । मैंने फैसला कर लिया था कि राम को आज में मना कर ही होंगे । राम मेरा कहना मानो अभी भी देर नहीं हुई है । लाहौर चलो मेरा यहाँ दिल नहीं लगता । हर समय मेरा मन घुटता सा रहता है । यहाँ कर कुछ दिनों नहीं । मेरी समझ में आ गया कि पर्यटक के रूप में आकर लौट जाना ही अच्छा है । पर रीना ये कैसे संभव है इसमें दिक्कत क्या है? भारत के हम लोग क्या करेंगे जो करोडो वहाँ करते हैं । मेरा मतलब ये नहीं था । मेरा कहने का अर्थ था कि वहाँ भयंकर बेकारी है । सुना है हजारों की संख्या में इंजीनियर वहां सडकें नापते खिलाते हैं । फिर मुझे नौकरी कौन देगा? ये भी एक समस्या थी, इसके बारे में नहीं । बिलकुल नहीं सोच रही थी । वास्तव में यह एक जटिल समस्या थी । ईरान ठीक ही कह रहे थे । भारत लौटने पर यदि उन्हें नौकरी नहीं मिली तो क्या होगा? मैंने अपने पैरों तले लौट के सूखे जर्जर केले पत्तों को देखा । फिर उत्साह से भरकर बोली, यदि तुम्हें वहाँ कोई नौकरी मिल जाए तो वो कैसे प्रयत्न करने से क्या संभव नहीं । तुम सिर्फ हाँ तो कर दो । मैंने महसूस किया । राम ने एक बडी कष्टकर प्रक्रिया से गुजर रहे थे । ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला था । उनका हिचकी जाना स्वाभाविक था । ठंडी हवा चल रही थी । मैंने अपनी दोनों बाहों को राम की गर्दन में डाल दिया और प्यार भेज पर में बोली राम हाँ कर दो अपना देश अपना ही होता है । विदेश में अजनबी बनकर रहना अपना ठोक होना है । मुझे अपने देश की मिट्टी की सौंधी खुशबू याद आ रही है हम प्लीज हाँ कर दोनों । राम ने मुझे अपनी बलिष्ठ बाहों में जकड लिया और बोले तुम्हारी खुशी के लिए नहीं अपना सब कुछ न्यौछावर कर सकता । हो रही ना वो जाम कितने अच्छे हो । मुझे लगा खुशी के कारण मैं चिडिया के पंख जैसी भारहीन हो गई हूँ । आप चले चलो । मैं अब गर्दन उठाकर चल सकती हूँ । हम डाल से बिछडे । सूखे पत्तों को रोते हुए हम पार्क से बाहर आ गई और अंडर ग्राउंड स्टेशन की ओर बढ गए ।

भाग - 10

भाग दस अंतर की गहन मत आत्मीयता से भरे एक पत्र सके पंखों वाले देव दू जैसा पवित्र केवल और पेडों में उप तीन नई नई कोमल नवजात कोपलें । मैं बेहद खुश थी । अंतर का सुखसागर बनकर जैसे उफान पड रहा था । खुशी के कारण मेरे कानों में घंटियां से गूंज रही थी । टैक्सी तेजी से एम फोर सडक पर दौड रही थी । गहवर कोई लोगी गुनगुना रहा था । मैं उल्लास ने भरी टैक्सी से बाहर देख रही थी । मैं इतनी खुश थी की हर चीज का तारतम्य गडबडा सा गया था । बाहर के दृश्य को देखते देखते मुझे महानगरी कभी शैली की एक पंक्ति याद आ गई । इस विंटर कम फॅमिली फोर बिहाइंड शीत ऋतु आती है तो उसके बाद बस इन को भी आना होता है । बाहर भी और मेरे भीतर भी । बर्फ के घर चुकी की वृक्षों का रूपांतर हो रहा था नहीं, खोखले उम्र ही थी । फिर जिंदगी में एक नई मस्ती जान ले रही थी । मैंने कनखियों से राम की ओर देखा । वो गुमसुम से बैठे खिडकी के बाहर देख रही थी । अचानक मुझे सहगल के मशहूर गाने की एक पंक्तिया जाती बाबुल मोरा नैहर छूटो जाए क्या इसी के लिए रामदास थी किसी भी वस्तु से निकट का संबंध स्थापित हो जाए और फिर वो भी छोडने लगे तो कलेजे में एक खोकसी उठना स्वाभाविक है । पत्र में मम्मी पापा और दीपक ने अलग अलग ढंग से बस एक ही बात लिखी थी रीना तुम आ जाओ तुम्हारी सूरत देखने को हम लोग भटक गए हैं । भारत में जाए ऐसा कैसा जो इंसान को अपने से अलग कर दी । ये मम्मी के शब्द थी मुझे पत्र पढकर इस नहीं की गर्मी महसूस हुई थी । मेरे सामने जिंदगी की एक महान सच्चाई उजागर हो रही थी । दूरी से आकर्षण का जन्म होता है और रक्त संबंध पानी से अधिक गाडी होते हैं और केवल सिर्फ इतना ही लिखा था इस काम को करने में कुछ देर हो गई । क्षमा प्रार्थी हूँ, सब इंतजाम हो गया है । फॉरेन चले हूँ मैं खुशी से पागल हो गयी । अनेक बार पढाई सीधे शिकार को आवेग में भरकर मैंने उसे चुन लिया । हाँ शेखर नहीं भेजा था नहीं शेखर के प्रति श्रद्धा से नतमस्तक हो गई शेखर मेरी दृष्टि में कितना ऊँचा हो गया था उसने जो कहा वह पूरा करके दिखाया था । रीजेंट पार्क में राम ने जो निर्णय लिया था उसने मेरे हिर्दय में हलचल मचा दी उस की कुछ दिन बाद ही शेखर अपनी ट्रेनिंग पूरी करके भारत लौटने वाला था । वो कनाडा और अमरीका जाना चाहता था । पर उसके जनरल मैनेजर ने उसे केवल भेज कर शीघ्र ही भारत लौटने का आदेश दे दिया । कंपनी में कोई विशेष समस्या खडी हो गई थी । शेखर की उपस्थिति अनिवार्य हो गई थी । भारत लौटने से पूर्व शेखर मेरे पास आया था । शाम का समय था जहाँ अभी ऑफिस से लौटे नहीं थी । शेखर आया तो मैंने देखा तो खुश था और जांच भी । मुझे मजाक सुझा । मैं बोली क्यों? क्या मैं एसियन से झगडा हो गया? झगडा नहीं तो तो फिर क्यों परेशान हूँ ऐसी कोई बात नहीं । मैं सियांग के साथ रोमांस स्टेज तक पहुंच गया है । तुम तो पागल हो रही ना । नहीं नहीं हाँ मैं सीएम जरूर तुम्हे क्या रहे? पागल हो गई हैं । तुम जरूर मुझे पागल खानी है । जेल भिजवाकर रहोगी । क्यों मिला? अरे इन अंग्रेज लडकियों से इस कल्याना । कोई हंसी खेल नहीं । अगर कोई इनके चंगुल में फंस जाए तो बस समझ लो उस की तीन पीढियां तक नीलाम हो सकती है । रीना यहाँ का कानून बढा सकते हैं । यदि कोई अविवाहित महिला आप पर आरोप लगा दी की आपने उसे गर्भवती बना दिया है तो आप पर पांच लाख कौन टक्कर जुर्माना हो सकता है । यही नहीं इंग्लैंड का चर्च अदालत में केस लडने के लिए उस लडकी के पक्ष में आ जाता है । अब तुम ही बताओ तो किसी के साथ उसके साथ तो व्यापारिक संबंध है । वो अपनी प्रोग्राम ऑफिसर है । उसको शराब खिला दिया, खाना खिला दिया, जो प्लान्स चाहो ले लो ऐसा प्रोग्राम चाहूँ बनवा लो तो आप भी व्यापारी हो गए हैं । मैंने दिया । मैंने कहा ऍम के लिए व्यापारी पर तुम से तो यारी है और जन्म जन्मांतर तक रहेगी । मैं चुप हो गई । क्या की थी कहने के लिए बचा ही किया था । रिहार्इ ना तुमने तुमने सियुंग के चक्कर में ऐसा फंसाया की बस मुख्य बात कहना तो भूल ही गया । मैं कल भारत लौट रहा हूँ । कई ही मैं आश्चर्यचकित रह नहीं । फिर मैंने पूछा क्या कनाडा और अमरीका नहीं होगी? इस बार संभव नहीं । कंपनी ने कोई समस्या हो गयी है मेरा वहां पहुंचना अत्यंत आवश्यक है । तो कल किस लाइट से जा रही हूँ सुबह साढे सात बजे । और हाँ राम कहा है बस आते ही होंगे । मैंने सोचा कल जा रहा हूँ । तुम लोगों से मिलकर विदा लिया हूँ । किसी विदा हमलोग एयरपोर्ट आएंगे नहीं नहीं लेना काफी सुबह लाइट है । क्यों परेशान होती हूँ पैसे तुम्हारे यहाँ होने से निरस्त में अच्छी तरह से गुजर गया, वरना यहाँ तो चार दिन में ही बोर हो जाता हूँ । तुम्हें जितना घुमाया फिराया, जितना खिलाया पिलाया जब तक तुम्हारा साथ रहा । सच लेना कि ढेर सारी क्षण मेरी जिंदगी की अमूल्य निधि बन गए हैं । शेखर मेरा सर भरना गया । मैं भी कुछ नहीं कहता । आई भारत कुछ भेजना हो तो मेरे साथ भेज तो वैसे में दीपक से मिलूंगा । तुम्हारे परिवार को तुम्हारी कुशल चैन की सूचना दे दूंगा । साथ ही कह दूंगा लेना बेहद खुश है । आप लोगों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं । शिखर कहकर में सोचने लगी, मैं खुश हूँ । ये सुनकर मेरे अंतर में जुलाई सी फट मिलेगी । अरे तुम्हारी आंखों में आंसू कहाँ? मैंने शीघ्र ही अपने आपको सैयद कर लिया । मैं नहीं चाहती थी कि शेखर के सामने मेरा दर्द खटाई मैं समझ गया । शेखर ने मुस्कराकर कहा मैं शेखर की गलत फहमी को दूर नहीं करना चाहती थी । मैं जानती थी तो क्या समझा है आपको समझा था । उसके जाने के कारण मेरी आंखों में आंसू आ गए हैं । पर बात कुछ और ही थी । मैंने बात पलट दी । रीजेंट पार्क में राम ने जो वादा किया था मुझे उस की याद आ गई । मैंने पूछा शिखर तुम किस कंपनी में काम करते हूँ? एक अर्ध सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी है, किस पद पर हो? पर्सनल विभाग में हूँ । फिर तो तुम जिससे चाहो नौकरी दिला सकते हो । शेखर ने मुस्कराकर कहा सी बात करो, किसी चाहिए नौकरी । यदि कोई मैकेनिकल इंजीनियर हो तो कौन? वो हाँ राम शेखर अवाक रह गया । फिर उसने गंभीर स्वर में कहा क्योंकि कार्य में मजा करती हूँ । मैं मजाक नहीं कर रही । गंभीरतापूर्वक कह रही हूँ यहाँ की इतनी अच्छी नौकरी और इतनी सुखसमृद्धि पूरी जिंदगी छोडकर राम क्यों जाने लगे? शेखर नहीं जिंदगी से उब चुकी हूँ । हमने भारत लौटने का फैसला कर लिया है । राम से ही पूछ रहे हाँ वो राजी हैं बशर्ते उन्हें उनकी योग्यतानुसार कोई नौकरी भारत में मिल जाए तो बोलो शेखर करोगे मेरी मदद नहीं पर अपना कुछ अधिकार समझती हूँ । मैं तुम्हारा ये एहसान जिंदगी भर नहीं बोलूंगी । कैसी बाते करती हो रही ना मैं तुम्हारी कुछ काम आ सकूँ । इस से बढकर मेरे लिए खुशी की और क्या बात हो सकती है । शायद तुम्हें पता नहीं ऐसे में तुम्हें बताना भी नहीं चाहता । मेरे मन में अभी भी है छोडो जाम की नौकरी की विषय में पूरी कोशिश करूँगा । वैसे अभी मैं इस कंपनी में नया हूँ । सिर्फ एक साल ही तो हुआ है । फिर भी जनरल मैनेजर मुझसे बहुत खुश हैं । पर सुनील विभाग के अध्यक्ष मेरे पापा के मित्र हैं । वैसे भारत में इंजीनियरों की दशा बडी खराब है । सुना है लगभग अस्सी हजार इंजीनियर बेकार है । वो तो है नई इंजीनियरिंग । स्नातकों के लिए तो बेकारी है । पर जहाँ तक राम का संबंध है उनके लिए कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए । हर कंपनी अनुभवी व्यक्ति को पसंद करती है । फिर भारत में भी विदेशों में अनुभव प्राप्त व्यक्तियों के लिए बहुत इज्जत और मांग है । किसकी तक की मिल जाएगी शुरू? शुरू में हजार बारह सौ तो कहीं नहीं गई । उसके बाद फिर अपने ऊपर निर्भर करता है । तो ठीक है शेखर तुम्हें भारत पहुंचने ही पहला काम ही करना है । जैसे ही कोई बात बनी मुझे केवल दे देना । राम की शैक्षणिक योग्यता और अनुभव का कोई विवरण पत्र हैं । मैं उठी और राम की व्यक्तिगत फाइल से उनका एक विवरण पत्र निकाल का शेखर को दे दिया तो मैं पूरी उम्मीद खुश शेखर शेखर कुछ नहीं बोला । वो राम का विवरण पत्र पडता रहा । तभी राम आ गई । शेखर ने विवरण पत्र को तह करके अपने कोर्ट कीजिए । मैं रख दिया लगभग तीन माह के बाद शेखर का वहाँ चिरप्रतीक्षित केवल आ गया । उससे पूर्व शेखर ने दो पत्र डाले थे जिसमें उसने सूचना दी थी कि वह कोशिश कर रहा है और उसे सफलता की पूरी आशा है । केवल सागर में खुशी से पागल हो गयी है नाम उन्होंने कोई उत्साह नहीं दिखाया था तो चिंतित से हो गई थी । क्या सोचने लग गया । मैंने उन्हें खरीदा रहा कैसे होगा ये सब हो जाएगा । आप की चिंता करते हैं । यदि भारत पहुंचकर तथा लगा की शेखर ने जो पद मेरे लिए निकाला है वो मुझे नहीं मिल सकता तो ऐसा कभी नहीं हो सकता । राम शेखर इतना गैर जिम्मेदार नहीं है । पता नहीं कहाँ तक के निर्णय हमारे पक्ष में है । अब ये सब सोचने का समय नहीं । रीना जगह ठंडे दिल से सोचो । भारत में क्या रखा है वहाँ देखा रही है । भुखमरी है, चोर बाजारी है, भ्रष्टाचार है, बेईमानी है, मक्खी मच्छर सात हैं । राम ये सब विश्व के हर स्थान पर हैं । अंतर केवल मात्रा का है । देख लो, मैंने खूब देख लिया है । सोच लिया है इस अपमान भरी अजनबी जिंदगी से अपनी जिंदगी लागुना अच्छी है राम अब इस पर नए सिरे से शुरुआत मत करो । राम मान गई । हमने अपने सामान बाद शुरू कर दिया । लगभग अस्सी प्रतिशत सामान पैक कर समुद्री जहाज से भेज दिया । लगभग पंद्रह प्रतिशत सामान हवाई जहाज से पहले ही रवाना कर दिया । केवल हटेगी और हैंड बैग अपने साथ ले जाने के लिए रख दिए । रवाना होने से पूर्व हमने अपने मित्रों और रिश्तेदारों के लिए उपहार खरीदिए । ध्यान ने कहा कि पर मैंने शेखर के लिए कोई उपहार नहीं खरीदा । कहीं वो गलत ना समझ बैठे । तीन चार दिन तक लगातार हम लोग अपने मित्रों से मिलते जुलते रहे । जिसने भी सुना कि हम सदैव के लिए भारत जा रहे हैं, वह आश्चर्यचकित रह गया । अभी कुछ देर पहले अंजू ने तो तनाशाही खडा कर दिया । मिस्टर स्टेट और वह हमें नीचे टैक्सी तक छोडने आई । मैं टैक्सी में बैठने लगी थी कि अंजू मुझसे लिपट गई और फूट फूटकर होने लगी । मैंने उसके बालों को प्यार से हाथ से खेला और बोली ऍम की थी तो मन लग जाता था । कडी हिम्मत रहती थी । अब क्या होगा? सब ठीक हो जाएगा हूँ । आंटी अपना चाहिए ना जा रही है तो मुझे भी साथ में ले चलिए यहाँ के लिए मेरा दम खुल जाएगा । मिस्टर सेट चित्र लिखित से खडी थी । उन्होंने अंशु को पकडकर अपनी और घसीट लिया । मैं टैक्सी में बैठ गई । टैक्सी हीथ्रो एयरपोर्ट पर पहुंच गयी । पासपोर्ट की चेकिंग हुई । सुरक्षा की दृष्टि से हमारे सामान तथा हमारी तलाशी हुई । सारी औपचारिकताएं पूरी हो गई और हम ट्रांजिट हाल में पहुंच गए । तभी माइक पर घोषणा हुई एयर इंडिया अपनी लंदन रोम, तेहरान दिल्ली की उडान की घोषणा करते हैं । यात्रियों से अनुरोध है कि वह ज्ञान में पहुंच जाये । हम लोग उठकर खडे हुए । ट्रांजिट हॉल से निकलते ही रन लिया गया । एयर इंडिया का साथ चार सात जंबोजेट खडा था । हम लोग ज्ञान में पहुंच गए । अपनी सीट पर बैठ कर मैंने एक गहरी सांस ली । शेखर की तस्वीर मेरे सामने थी और मैं श्रद्धा से उसके सामने झुक गई । अगले कुछ मिनटों में विमान और चला जहाँ मुद्दा से लग रहे थे । पर मैं खुशी से बाहर ही कह रही थी अनायास मेरे मुख से निकल गया अलविदा ग्रेट ब्रिटेन

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