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जिनी पुलिस भाग 1

हाई हेलो नववर्ष का स श्रेया का खमा घडी कैसा का मैं गुरु भी पारीक और आप मेरे साथ सुन रहे हैं कुकू एफएम पर किताब जिन्हें पुलिस जिसे लिखा है अर्पित अग्रवाल ने तो इस किताब के सारे एपिसोड्स सुनने के लिए इसे अपनी लाइब्रेरी में एड करने के साथ साथ ऍम बिल्कुल ना बोले तो सुनते रहेंगे ऍम सुने जो मनचाहे । पहला भाग अगर आप दिल्ली में है तो पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करने की आपके पास दो कारण हो सकते हैं । या तो आपके पास अपनी बोस्टल गाडी नहीं है या आपके शहर में वाहनों के लिए और इवन नियम लागू है । लोहित के पास दोनों ही कारण थी दिल्ली शहर की भीडभाड और तेज गर्मी के बीच लोग इतने डीटीसी बस में प्रवेश किया और सीट की तलाश करने लगा । जब छोटा था उसे खिडकी के बगल वाली सीट हमेशा अट्रैक्ट करती थी । लेकिन जैसे जैसे वह बडा हुआ उसे किसी लडकी के बगल वाली सीट ज्यादा अट्रैक्ट करने लगी । ऐसे अक्सर उम्र के साथ हमारी प्रायोरिटीज बदल ही जाती है । खिडकी के बगल में एक खूबसूरत लडकी बैठी थी और उसका गुलाबी हैंडबैग बेशर्मी से उसकी बगल वाली सीट पर रखा हुआ था । शायद किसी को वहाँ पर बैठने से रोकने के लिए लोहित उसे ताकते हुए सोचने लगा की भला कोई लडकी इतनी खूबसूरत कैसे दिख सकती है । उसकी खूबसूरती लोहित के मैच नेशन से भी बेहतर थी । उसकी गहरी भूरी झिलमिला थी । आंखों का तीस महनों किसी को भी अपने वश में कर ले । कंडक्टर ने सीटी बजाई और ड्राइवर बस को तेज रफ्तार से दौडाने लगा । लोहित ने उस लडकी से उसके बाद की और इशारा करते हुए कहा एक्स क्यों? उसमें ये एकदम साफ था कि लोहित उससे उसका बाद उठाने की बहुत बडी उम्मीद कर रहा था ताकि वहाँ पर बैठ सकें । मगर फिर भी उस लडकी ने ऐसा बर्ताव किया जैसी की उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा हूँ । उसने चौंकते हुए पूछा क्या क्या आप अपना बैग उठा सकती हैं? लडकी ने लोहित की आंखों में देखते हुए पूछा क्यों दोनों की नजरें मिले? वो बिना कुछ कहे एक दूसरे को देखने लगे । महान उनका पिछले जन्म का कोई नाता हूँ? लोहित ने मासूमियत से कहा अब बैंक उठाइए ताकि मैं यहाँ बैठ सकूँ । लडकी ने दूसरी सीटों की और इशारा करते हुए कहा, लेकिन बाकी सभी सीटें भी तो खाली है । आप कहीं और बैठ जाइए उसे देखकर लोहित कुछ इस तरह मंत्र मुग्ध हो गया कि उसने बाकी की सीट्स की तरफ देखा ही नहीं । जिंदगी में अगर आपको सफलता पानी हो तो आपका ध्यान लक्ष्य पर इस कदर केंद्रित होना चाहिए । अपना सामू लेकर लोहित आगे की सीट पर बैठ गया । लोहित से ज्यादा भाग्यशाली तो उस लडकी का बैग था जो उसके इतने करीब रखा हुआ था । कुछ देर के बाद यात्रियों की भीड और सारी सीटें भर गई । एक अधेड उम्र के अंकल खडे रह गई । लोहित भावनाओं में बहकर उठ खडा हुआ और अपनी सीट अंकल को दे दी । अंकल लेट है । इस कहाँ और उस सीट पर ऐसे पसर गए जैसे वो सीट नहीं अंकल के बुढापे की पेंशन हूँ । किस पर सिर्फ उन्हीं का हक हो । लोहित बेसहारा सामूह बनाये उस लडकी के पास खडा हो गया । खिडकी से बाहर देखते हुए वो लडकी अपने बालों को सवार रही थी । काले रंग की कुर्ती और लाल चूडीदार पहने वो इतनी हसीन लग रही थी कि कोई भी लडका बडी प्राउड से उसे अपने माँ बाप के सामने ले जाकर कह सके कि देखो ये मेरी पसंद । उसके बाई कंधे में सिमटे लाल दुपट्टे ने उसकी खूबसूरती को निखारने में कोई कसर नहीं छोडी । लोहित में अपनी सबवे शर्ट और नीली डेनिम में बहुत हैंडसम लग रहा था । उस लडकी ने आखिरकार लोहित के बेबस चेहरे पर तरस खाकर सीट से अपना बाग उठाकर अपनी गोद में रख लिया । वो लोहित से तुरंत वहाँ बैठने की उम्मीद कर रही थी । लेकिन लोहित वहीं उस लौटते हुए हैंडल को पकडे खडा रहा । लडकी ने कहा एक्स की उसमें जी लोग इतने ऐसे चौंकते हुए पूछा जैसे उसे कुछ समझ नहीं आ रहा हो । लडकियों की तरह नखरे दिखाने में उसे बडा बजा रहा था । आप यहाँ बैठ सकते हैं । लडकी ने कहा और दोबारा अपने फोन में बिजी हो गई । उसे लगा कि लोहित को सीट देकर उसने राष्ट्र के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी को निभाया है । जब हम किसी पब्लिक प्लेस पर इधर उधर कूडा कचरा ना फेंककर कूडेदान में देखते हैं तब जो संतुष्टि महसूस होती है, जो सैटिस्फैक्शन मिलता है, तृशा को शायद वहीं महसूस हुई । लोहित वहां बैठा और उस लडकी के बात को देखकर सोचने लगा, इसका भी क्या नसीब है । पहले उसके बगल में बैठा था और अब सीधा उसकी गोद में । लोहित ने बात शुरू करने के लिए कहा भाई मैं रोहित बंसल हो उसने ऐसे बिहेव किया जैसे उसने कुछ सुनाई ना हो । जैसे लोहित खुद से ही बात कर रहा हूँ । लोहित उसके कान में फस फसाया । मुझे पता है कि तुम तृषा देखता हूँ । मैं एक जासूस हूँ, तुम्हारा पीछा कर रहा हूँ क्या वो इतनी जोर से चिल्लाई की उसकी आवाज से सडक किनारे पेडों पर बैठे कबूतर उड गए । उसने घबराते हुए पूछा किसने कहाँ है तुम से मेरा पीछा करने को फॅस नहीं हूँ । मैं तो बस मजाक कर रहा था । अगर ब्लॅक लाइन का कोई नोबेल पुरस्कार होता तो वह जरूर रोहित को ही मिलता हूँ । उसने लंबी सांस लेते हुए कहा ये कैसा मजाक है तो उन्हें तो डरा दिया मुझे । रोहित ने कान पकडकर कहा हम सौरी दुनिया में दो तरह की लडकियाँ होती है । एक जो ऐसी सिचुएशन में थप्पड जड देते हैं और एक जो उस करती हैं वो मुस्कुराई । इधर कंडक्टर सभी का टिकट काट रहा था । अच्छा अगर तुम जासूस नहीं तो मेरा नाम कैसे जानती हूँ? वो अभी लोहित को जासूस समझ रही थी तो मैं अपने फोन पर फेसबुक चला रही थी । बस वही मैंने तुम्हारा नाम देख लिया । इससे तुम इतनी चिंता क्यों कर रही हूँ? क्या सच में कोई है जो तुम्हारी जासूसी करवा सकता है । इसी बहाने उन दोनों की बातचीत शुरू हुई । नहीं, असल में मुझे आदत नहीं है बस उसमें यू अजनबियों से मिलने की जो मेरे साथ ऐसा मजाक करें । लाइफ में बहुत कुछ पहली बार होता है । सेनोरिटा, सडक ट्रैफिक जाम लगा था । बस अपनी जगह से हिल भी नहीं रही थी । लोहित और दिशा के पास अपनी सीट पर बैठे बैठे बात ही करने की सेवा और कोई चारा नहीं था । लोग जितने भी कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वो ट्रैफिक जन को इतना इंजॉय करेगा । भाई मैं कृष्णा हूँ । उसने कहा और लोहित के साथ हाथ मिलाया । उसका टच लोहित के लिए किसी इलेक्ट्रिक करन से कम नहीं था । तो शादी पूछा बसों में अनजान लडकियों से फ्लर्ट करने के अलावा तो मार्केट करते हूँ ऍम वो सुनने में तो काफी दिलचस्प लगता है लेकिन किसी कंपनी का सी । ई । ओ पब्लिक ट्रांसपोर्ट में क्या कर रहा है? एक छोटी सी कंपनी है मुझे इंट्रेस्टिंग आइडिया आया । मैंने अपनी जॉब छोड दी और अपने जैसे बीस सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को लेकर कि मैंने ये कंपनी शुरू कर दी । हम अपने वेतन का भुगतान करने के लिए देशभर से छोटे छोटे प्रोजेक्ट्स लेते हैं और खाली टाइम में मेरे आइडिया पर काम करते हैं । मैंने अपनी सारी सेविंग्स अपनी इस कंपनी पर खर्च कर दी है और मुझे यकीन है कि एक दिन मेरी कंपनी बहुत बडी हो जाएगी । क्या मैं पूछ सकती हूँ क्या है तुम्हारा ही इंट्रस्टिंग आइडिया हम एक ऑटोमेटिक कॉल सेंटर प्लेटफॉर्म डेवलप कर रहे हैं जिसमें बॉर्ड कस्टमर से बात करेंगे । उनकी प्रॉब्लम्स को सुनेंगे और किसी भी ह्यूमन के इंटरफेयर के बिना इसका जवाब भी देंगे । ये इंसानों की तरह ही कंप्यूटर प्रोग्राम होंगे । क्या सच में ऐसा हो सकता है वो हाँ हो सकता है । करण सिनेरियों में कस्टमर के द्वारा पूछे गए बहुत ही कॅश और उसके आंसर्स का एक डॉक्यूमेंट कॉल सेंटर के लोगों को दिया जाता है । उन्हें अपने प्रोडक्ट की कोई डिटेल इन्फॉर्मेशन बिल्कुल नहीं होती । वो पाॅइंट पढकर मशीनों की तरह बात करते हैं तो उन की बजाय मशीनें ही ये काम क्यों ना करें । हम वाइस मॉड्यूलेशन टेक्निक कभी यूज करेंगे । बॉर्ड इंसानों की वो इसमें ही बात करेंगे और कस्टमर ये समझ नहीं पाएंगे कि वो इंसानों से नहीं बल्कि कंप्यूटर से बातें कर रहे हैं । उस टाइम के बारे में सोचो जब तुम किसी कंपनी के कस्टमर केयर को कॉल करोगे और वह तुरंत करेक्ट हो जाएगा तो मैं उस चिडचिडी कॉलेज भी उनको नहीं सुनना पडेगा की हमारी सभी प्रतिनिधि अन्य कॉल पर व्यस्त है । कृप्या लाइन पर मौजूद रहे या थोडी देर पश्चात कॉल करें आपका कौन हमारे लिए महत्वपूर्ण है तो ये बॉस हमसे बातें करेंगे और हमारी हेल्प करेंगे और ये इंसानों से कई ज्यादा बेहतर होंगे क्योंकि मशीनें ना तो बेहतर पैकेज के लिए नौकरियाँ छोडेगी ही कुछ भूलेगी और ना ही रात को सोई की पैसे । तुम्हारा आइडिया तो शानदार है रोहित लेकिन इससे हमारे देश में काम कर रहे लागू कॉलसेंटर कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है । उसका क्या? लोग इतने भूमि सिकोडते हुए कहा हम ऑटोमेशन को सिर्फ इसीलिए ना कहा नहीं सकती कि इससे हमारे लोगों की नौकरी चली जाएगी । दूसरी और उन वॉस्को डेवलप और मेंटेन करने के लिए हजारों सक्षम सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को काम भी तो मिलेगा । काश अगर ये देश बेहतर तकनीक का उपयोग करने लगे तो करियर पाने की होड में यहाँ के इंजीनियर्स को विदेश न जाना पडेगा । इतना कहकर लोहित कुछ देर शांत हो गया । वैसे भी त्रि सुंदर लडकी से बहस करना अच्छी बात थोडी ना है । आज तो क्या करती हूँ? मैं स्कूल में टीचर हूँ । वो माफ कीजिएगा । मैडम भरे आपको परेशान किया अगर आप चाहे तो मैं सौ उठक बैठक लगाने को भी तैयार हूँ । अरे मैं टीचर नहीं हूँ । आज तक मैंने कभी किसी स्टूडेंट को पनिशमेंट नहीं दी है । अच्छा फिर तो बच्चों को कंट्रोल कैसे करती हूँ? अपनी अदाओं से उन्हें पडने के लिए मजबूर करने के बजाए में पढाई को ही इतना ईजी और इंट्रेस्टिंग बना देती हूँ कि स्टूडेंट मेरी क्लास में मुझे सुनना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं । लोहित सोचा हाँ, वही तो मैं आखिर कौन सुनानी जाएगा? तो मैं शायद लगे कि मैं तुमसे फ्लर्ट कर रहा हूँ, लेकिन विश्वास करो मेरा । मुझे लगता है कि मैंने तो में पहले कहीं देखा है । बेशक में सोचूंगी की प्लॉट करने का ये सबसे पुराना तरीका है । लोहित सोचा पुराने तरीके इस्तेमाल नहीं करता मैडम । कुछ ही घंटों पहले मुझे पिक अप लाइंस के लिए नोबेल पुरस्कार मिला है । रोहित ने फिर कहा मैं झूठ बोल रहा है । तृशा तत्ता नाम की एक लडकी मेरे स्कूल में थी । तृषा ने मुस्कुराते हुए कहा हाँ मेरी क्लास में भी लोहित बंसल था क्या लोहित उम्मीद कर रहा था कि काशी वही लडकी हो जिसे वो जगह जगह तलाश रहा है । लोहित ने कहा, तृषा मेरे बचपन का क्रश है । मैं कभी नहीं भूल सकता । हमने जो पल सात बताए थे, मेरी जिंदगी की सबसे यादगार लम्हे है । हम मुंबई में एक ही स्कूल में पढते थे । मगर मैं कभी मुंबई गए ही नहीं और मेरे स्कूल में लोहित नाम का कोई नहीं था । निराशा के काले बादल लोहित पर फिर से मंडराने लगे । मेरा स्टॉप आ गया तो उन से मिलकर अच्छा लगा । ऐसा कहकर दिशा बस से उतर गई । लोहित ने भगवान को कोसते हुए कहा, ये भगवान इतनी भी क्या जल्दी भी ट्रैफिक जाम खत्म करने की कहा । श्री बस कभी आगे बढते ही नहीं । वह अपने स्टॉप तक कभी पहुंचती ही नहीं । हम बस यूँ ही बैठे बैठे बातें करते रहते हैं । लोग है तो उससे नंबर लिए बिना उसे जाने नहीं देना चाहता था । उसके साथ वो बहुत अच्छा महसूस कर रहा था जैसे कि वो अपनी तृषा के साथ करता था । इससे पहले की बस अपनी स्पीड से दौडने लगती लोहित भी बस से उतर गया । तृशा बस स्टॉप पर ही खडी थी और लोहित को देखकर ऐसे मुस्कुराई जैसे वो लोहित के आने का ही इंतजार कर रही हूँ । तृषा ने पूछा घरे हमने तो वसंतकुंज का टिकट लिया था, फिर यहाँ के उतर गए । वो अच्छी तरह से जानती थी कि लोहित बस से उसके लिए ही उतरा था । फिर भी उसने लोहित को चढाने के लिए पूछा । लोग इतने अपनी सफाई में कहा कि मुझे यहाँ पर कुछ काम याद आ गया । हाँ, वही आखिरी तुम सीईओ हूँ और तो मैं तो कहीं भी काम हो सकता है । तृष्णा वहाँ से जाने लगी । लोहित ने तृषा को रोकने के लिए झट से पूछा तो मैं काफी पसंद है या चाहे क्यों? अगर तुम बताओ की नहीं तो मैं सामने वाले इंडियन कॉफी हाउस में तुम्हारे लिए ऑर्डर कैसे करूंगा? वो लोहित की बात सुनकर सोच में पड गई । अब चलो भी मैं कुछ और टाइम तुम्हारे साथ बताना चाहता हूँ । तो मैं अपनी दिशा के बारे में बताना चाहता हूँ । ठीक है, लेकिन आधे घंटे से ज्यादा नहीं । उसने कहा, हर वह लोग हित के साथ चलने लगी । उन्होंने कॉफी आउटलेट में एंट्री ली । वहाँ की हवा कॉफी के मनमोहक सुगंध से भरी थी । खाएंगे तो भगवान जी, इंडियन कॉफी हाउस हर जगह ब्रांच खोलने के लिए लोग इतने मैंने देखते हुए कहा, मैं पहले कभी किसी भारतीय मूल की कॉफी चेन में नहीं गया । उम्मीद यहाँ की कॉपी अच्छी हो । तृषा ने कहा, भारतीयों द्वारा बनाई गई हर चीज अच्छी होती है । लोग इतने अपना ज्ञान शेयर करते हुए कहा तो ये बताया है । शताब्दी में मूल भारतीयों को ब्रिटिश कॉफी हाउस में जाने की परमिशन नहीं थी और इसीलिए इंडियन कॉफी हाउस टेन का गठन किया गया था । त्रिशा ने उत्साह से कहा बडी ही इंट्रस्टिंग हिस्ट्री है पैसे अब मुझे अपनी तृषा की हिस्ट्री बताओ । लोहित ने अपनी तृषा को याद करते हुए कहा बहुत कुछ बताने को कहाँ से शुरू करूँ परेशानी । कॉफी की चुस्की लेते हुए कहा, शुरू से शुरू करूँ जब तुमने उसे पहली बार देखा था । लोहित अपनी स्कूल की कहानी सुनाना शुरू करता है है ।

जिनी पुलिस भाग 2

दूसरा भाग जब लोग इस स्कूल में था तो अक्सर सोचता था कि अगर आतंकवादियों ने उनके स्कूल पर हमला कर दिया तो कैसे वो सबको बचाएगा । अगर बंघा दे रहा तो किस पर गिरेगा और अगर कोई उन्हें उनके क्लास के अंदर बंद करते तो कैसे वो सबको बाहर निकालेगा और हीरो बन जाएगा तो यूँ ही वो प्लेट थॉट्स में खोया था । तभी लगभग उसी की उम्र की एक लडकी सोसाइटी के ग्राउंड में खडी एक कार से उतरी । उसने लाल रंग की फ्रॉक पहनी हुई थी और उसके बाल पोनीटेल में बंदी थी । उसे देखते ही लोहित की दिल की धडकन बढ गई जो पहले उसने सिर्फ एक्जाम हॉल में ही महसूस की थी । उसके बाद साउथ इंडियन फिल्मों के किसी खलनायक से मिलती जुलती शक्ल वाला एक आदमी और एक बहुत ही सुंदर महिला जो स्पष्ट रूप से उस लडकी की सुंदरता का स्रोत थी । वो दोनों बाहर निकले अंकल ले लो । हिट को एक छोटा सा पर्चा दिखाते हुए पूछा बेटा ये फ्लैट कहाँ है? लोग इतने सोचा कि शायद वो किसी के घर मेहमान होंगे । ब्लॅक फोरजीरो फोर घराें । ये फ्लैट तो हमारे फ्लैट के बगल वाला है लेकिन ये तो कई दिनों से खाली अंकल आपको किसी मिलना है । बेटा हमने फ्लैट किराय पर लिया है । रोहित ने सोचा अरे वाह! मतलब वो लडकी अब मेरी पडोसन होगी । चलिए मैं आपको ले चलता हूँ । रोहित ने कहा और अपने भावी सास ससुर और अपनी होने वाली बीवी के साथ लिफ्ट में दाखिल हुआ । अंतर ये हमारा घर है । अगर आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो आप जरूर बताइएगा । जैसे कि चीनी, चाय, बद्दी यहाँ फिर सामान धन्यवाद बेटा । अगली सुबह लोहित के घर के दरवाजे की घंटी बजे मैंने सोचा की उनका धोबी होगा । गंदे कपडे हाथों में लेकर माने । दरवाजा खोला लेकिन दरवाजे पर धोबी जैसे ही शक्ल वाली तृषा के बाबा थी । मैंने उन्हें अंदर बुलाया । उन्होंने हाथ जोडकर अभिवादन किया । नमस्ते भाभी जी, मैं आपका नया पडोसी हो । मैं अपनी बेटी की शादी आपके बेटे से करवाना चाहता हूँ । ऐसा उन्होंने लोहित की कल्पनाओ में कहा मेरी बेटी के लिए यहाँ पर अच्छा स्कूल कौनसा है ऐसा उन्होंने रियालिटी में कहा । यहाँ कई स्कूल है । आप कौन सा कोर्स या माध्यम लेना चाहेंगे? माँ कह रही थी कि तभी लोहित ने बीच में ही टोकते हुए कहा जेब इंटरनेशनल स्कूल यही आस पास के एरिया का सबसे छह स्कूल है । माँ ने भी हामी भर दी । अंकल के जाते ही माने कहा मुझे नहीं पता था कि तुम्हें तुम्हारा स्कूल इतना पसंद है । लोहित सोचा स्कूल नहीं मुझे वो लडकी पसंद हैं । लोग इतने कैसे में बैठी कृष्णा से कहा तो इस तरह हमें अपनी तृषा से पहली बार मिला । फिर क्या हुआ? क्या उस लडकी का एडमिशन प्रभारी स्कूल में हुआ था? हूँ? तुम जाना चाहूँ कि आगे क्या हुआ? मेरे पास तुम्हारे पंद्रह मिनट बचे हैं । हाँ, मगर जरा शॉर्ट कट में सुनाना । कौन कैसा दिखता है ये ज्यादा मत समझाना । नए सत्र का स्कूल में पहला दिन था । लोहित अपनी पिछले साल की फी की यूनिफॉर्म पहने सोसाइटी के गेट पर गया तो देखा कि त्रिशा अपने पापा के साथ वहाँ पर घडी स्कूल बस का इंतजार कर रही थी । उसकी नीली स्कर्ट और सफेद शर्ट ऐसे चमक रहे थे जैसे स्कूल के प्रॉस्पेक्ट्स में दिखाया जाता है । उसके मुझे घुटनों तक चढे थे । बाल तेल से सुने थे और लाल रिबन से दो छोटी में बंदे थे । वो अपनी बोतल पर छपी बार्बी डॉल से भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई दे रही थी । लोहित और तृषा बस में चढे वो खिडकी के पास वाली सीट पर बैठ गई और लोहित उसके पीछे वाली सीट पर खिडकी से आ रही हवाओं उसके बाल बिगाड रही थी । उसने खिडकी के शीशे को बंद करने की कोशिश की मगर अपने छोटे मुलायम हाथों से वो ऐसा नहीं कर सकें तो मैं कर देता हूँ । रोहित ने कहा और सुपर मैन की तरह उसकी जिंदगी में एंट्री ली । इतने सालों तक हॉर्लिक्स वाला दूध पीकर उसने जितनी पावर हासिल की थी, लेकिन माननीय उसने वह सब झोककर रख दी । मगर खिडकी का शीशा टस से मस ना हुआ । तृशा पे दोनों हाथों को ऊपर रखकर मुस्कुराने लगी । लोहित भी उसके साथ मिलेगा । अजब अहसास है इसके लिए । बस उसे हस्ता देख अच्छा लगता है । भले ही वो मुझ पर हस रही हो । खिडकी तो कसम है ग्रैविटी भैया की अपनी होने वाली भावी के सामने बेइज्जती मत करवा बंदो । जब प्लीज लोहित ने खिडकी से निवेदन की आम अगर फिर भी ये बंद नहीं हुई । रोहित ने फिर से चतुराई दिखाते हुए अपनी सीट की खिडकी का शीशा बंद करके तृषा के साथ सीट बदल दी । हाई मैं लोहित बंसल हूँ । क्लासिक सकती मैं तृषा देखता हूँ क्लास सिखती इसका मतलब वो ना सिर्फ लोहित के स्कूल में बल्कि उसके क्लास में भी थी । त्रिशानु एक्साइटेड होकर पूछा हमारे स्कूल के बारे में बताऊँ क्या बताओ बडे घटिया सा है । यहाँ का प्रिंसिपल बडा खडूस है तुमने मेरे पापा से क्यों कहा कि ये सब से छह स्कूल है । लोग इतने मन में कहा ताकि मैं रूस में देख सकूँ । लोहित तृषा से कहा प्रिंसीपल खडूस है, लेकिन पढाई अच्छी होती है । फॅस पहुंचे तृषा लडकियों की साइड में पहली बेंच पर बैठ गई और लोहित लडकों की साइड में अपने दोस्त अमन के साथ आखिरी बेंच पर बैठ गया । अमल लोहित का सबसे अच्छा दोस्त हैं और उन दोनों का साथ ऐसा है जैसे चोली और दामन । लंच ब्रेक में लोहित दिशा को स्कूल कैंपस घुमाने ले गया । देखो ये है जेलर का कमरा । सभी कैदियों और पुलिस अधिकारियों के ऊपर यहाँ से कंट्रोल रखा जाता है । तृशा सोच में पड गई । फिर लोग इतने समझाया हरी बुद्धू ये प्रिन्सिपल सर का ऑफिस है । पुलिस अधिकारी यानी हमारे टीचर्स हर कैदी यानी हम वो जोर से हंस पडी । कुछ आगे बढते ही लोग इतने कहा अब ये एक ऐसी जगह है जहाँ पर लडकियाँ किताबे पढनी जाती है । हर लडके लडकियों को पढते हुए देखते हैं । लाइब्रेरी, लाइब्रेरी उसने झट से कहा और शर्मा गई । ये हमारा खेल का मैदान है । कई लडके सिर्फ खेलने के लिए ही तो स्कूल आते हैं और ये है हमारा म्यूजिक हूँ तो मैं भी गाना गाना शुरू कर देना चाहिए क्यों? क्योंकि तो भारी आवाज बहुत मिलती है । फॅस उसके फिर शर्माते हुए कहा और ये है टॉयलेट लडकों और लडकियों के अलग अलग तृषा हसते हुए बोली तो क्या हर जगह अलग अलग ही होते हैं? हाँ लेकिन मैं अक्सर सोचता हूँ ऐसे स्कूल जो क्वाइट नहीं है । मेरा मतलब है कि क्या सिर्फ लडको या सिर्फ लडकियों के स्कूल में भी दो अलग टॉयलेट होते हैं । इतना कहकर लोहित अपनी यादों के झरोखों से बाहर निकला । तृषा ने अपनी कलाई में बंधी सुनहरे रंग की घडी पर समय देखते हुए कहा अब मुझे चलना चाहिए वो दोनों टैक्सी स्टैंड की और बडे लोहित ने उसकी आंखों में देखते हुए पूछा हम फिर कम मिलेंगे फिर क्यों मिलना चाहते हो तो क्योंकि मुझे तब से प्यार हो गया है । मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ और तुम्हारे साथ बच्चे पैदा करना चाहता हूँ । लोहित ने सोचा क्योंकि मैं तो मैं बताना चाहता हूँ मेरी कहानी में आगे क्या हुआ? लोहित ने कहा वो टैक्सी में बैठ गई । लोहित हर बढाते हुए कहा अरे जाने से पहले मुझे अपना नंबर या पता तो देती हूँ । मैं तुमसे फिर कैसे मिलूंगा? उसने टैक्सी की खिडकी से सर बाहर निकालकर कहा तो मैं क्या की हो? खुद ढूंढ लोग केवल ॅ हूँ, कोई सुपर हीरो नहीं किया की ही है । आज की सुपर हीरो लडकियों को रोटी गोल बनानी आए ना आए मगर बातों को गोल घुमाना खूब जानती है । लोह इतने निराश होते हुए कहा, देवी दो नंबर क्या होगा अगर मैं तुम्हें फिर कभी ढूंढना सकूँ और सोचा क्या होगा जो तुमने मुझे ढूंढ लिया उसकी आंखों में प्यार भरा था । अच्छा क्या मिलेगा मुझे अगर मेरे सच में तुम्हें ढूंढ निकाला । टैक्सी ड्राइवर ने इसी बीच अपनी गाडी स्टार्ट की और धीमें धीमें चलने लगा । त्रिशाला टैक्सी की खिडकी से चलाते हुए कहा मैं तुम्हारे साथ डेट पे चल होंगी हूँ ।

जिनी पुलिस भाग 3

तीसरा भाग दी रात हो गई थी । लोहित मदहोश था लेकिन वो सोना नहीं चाहता था । वो तृषा को याद करना बंद नहीं करना चाहता था कि शायद वो सो रहा था और उसके बारे में सपने में सोच रहा था । जब प्यार में जिंदगी सपनों से भी बेहतर लगने लगती है तो सो जाना कठिन होता है । अगली सुबह जो लोहित, जग और कमरे से बाहर निकला तो उसने देखा कि घर में मातम जैसा माहौल था । लोहित की माँ लिविंग रूम में रखे सोफे पर बैठे हो रही थी । पिताजी वह को शांत करने की कोशिश कर रहे थे । तुमने इससे भी बुरे हालत देखे हैं । निराश मत हो, सब अच्छा होगा । भगवान हमारी मदद के लिए किसी ने किसी को जरूर भेजेंगे । माँ का हो लिया और रोना देखकर सारे बुरे गया । लोहित के जहन में आए जैसे उसके दादा जी की मृत्यु या उनके घर में चोरी आदि । लोहित हर बढाते हुए पूछा क्या हुआ? हाँ सब ठीक तो है ना । जिस पर पापा ने कहा वहाँ बेटा सब ठीके तुम्हारी माँ तो योगी हो रही है तो तुम जाओ सो जाओ । यूँ ही रो रही है । सं । कर्मा और जोर से रोने लगी । नहीं पापा! मैं ऐसे नहीं हो सकता । माँ बताओ मुझे क्या? अब दोनों के बीच में झगडा हुआ है बेटा ये तो तो अपने पापा से पूछ ले । हाँ, इस तरह बातों को घुमाना बंद करो और मुझे साफ साफ बताओ कि क्या हुआ है । तो थोडे विराम के बाद सिक्स क्या लेती माने हिम्मत जुटाते हुए कहा । कल हमारी नौकरानी मीना बाई सुबह अपने सामान्य समय पर आई । उसने झाडू, पोछा, बर्तन सारे काम किए लेकिन आज वो काम पर आई ही नहीं और जब मैंने उसके मोबाइल पर कॉल किया तो उसने कहा कि अब वहाँ काम नहीं करेगी । उसे उसके घर के पास कहीं और काम मिल गया है । वो कहती है कि हमारा घर उसके घर से बहुत दूर है । ये सुनकर लोहित झल्लाते हुए बोला, माँ क्या तिलका टाडू राई का पहाड बना रही हूँ । सिर्फ एक नौकरानी की वजह से तुम इतनी बुरी तरह से हो रही हो । पापा ने चुटकी लेते हुए कहा मैंने तो पहले कहा था कि तो सोचा बेटा तेरी मा यो ही हो रही है । मान भी बरतते हुए कहा तो ये अंदाजा भी है कि एक नौकरानी ढूंढना कितना मुश्किल काम है । इंजीनियर तो गली गली में मिल जाते हैं । नौकरानी नहीं मिलती ही लोह इतने आहत महसूस किया । चार साल तक दिन रात पढाई करके दुनिया की सबसे प्रसिद्ध डिग्री हासिल की । ऑफिस में काम कर करके कोलू का बैल हो गया । मतलब माँ के लिए कोई जरूरी है तो सिर्फ नौकरानी । लोहित ने कहा मीना बारी ऐसे अचानक काम कैसे छोड सकती है? दो महीने का नोटिस देना पडता है । काम छोडने से पहले ये नोटिस देने की मजबूरी तो इंजीनियर लोगों की होती है । बेटा बारी तो जब चाहे काम छोड सकती है । थोडा सोचने के बाद माने सुझाव देते हुए कहा अगर मेरा भाई को हमारा घर दूर पडता है तो क्यों ना हम उसकी बस्ती के पास एक नया घर ले ले । माँ की आंखें अपेक्षा से चमक उठे । इस अजीबो गरीब सुझाव को संकर लोहित और उसके पापा दंग रह गए । लोहित ने माँ को चलाने के लिए कहा । हम ऐसा भी कर सकते हैं कि हम अपनी सोसाइटी में मेरा भाई के लिए एक फ्लैट खरीद लें । माने लोहित के कटाक्ष को न समझते हुए बडी उम्मीद से कहा क्या हम वाकई में ऐसा कर सकते हैं? नहीं माँ ये नामुमकिन है वाला नौकरानी के लिए घर कौन खरीदता है? आपको जल्दी कोई दूसरी भाई मिल जाएगी और जब तक नहीं मिलती है मैं और पापा घर के काम में आपकी मदद करेंगे । अब खुश माँ ने झुंझलाकर कहा बेटा बात सिर्फ काम की नहीं है । हर सुबह तुम दोनों अपने अपने ऑफिस चली जाती हूँ । लेकिन मैं पूरे दिन घर पे अकेले रहती हूँ । अब ऐसे में समय बिताने के लिए मीना वाई है । मेरा एकमात्र सहारा है तुम दोनों से भी ज्यादा वो मेरे साथ समय बिताती थी । लोहित ने सहानुभूति दिखाते हुए पूछा ठीक है तो बताइए मैं आपके लिए क्या कर सकता हूँ? थक गई हूँ में नौकरानियों के साथ समय बिताते बिताते । अब मुझे मेरे अकेलेपन का स्थायी समाधान चाहिए । अब मैं अपनी बहु के साथ ही समय बिताना चाहती हूँ । क्यों न तो शादी करन और घर में एक प्यारी सी बहुत ले आओ । माताएं बेटों को जन्म ही इसीलिए देती है कि एक दिन घर में बहुआ जाए पापा, हमें सच में अपार्टमेंट शिफ्ट करने की जरूरत है । बताइए मीराबाई की झुग्गी कहाँ पर है? मैं अभी शादी नहीं कर सकता और में हमेशा के लिए भारत में नहीं रह सकता । आज नहीं तो कल में अमेरिका में बस जाऊंगा । मैं कैलिफॉर्निया में फेसबुक या गूगल के हेडक्वार्टर की तरफ नहीं कंपनी का हेडक्वार्टर बनाना चाहता हूँ । माने हैरानी से पूछा गूगल और फेसबुक मेरे मोबाइल के एप्स है क्या? इनके ऑफिस भी है अमेरिका में? हाँ ये सिर्फ ऐप से नहीं है बल्कि दुनिया की सबसे बडी कंपनियों में इनकी गिनती होती है । किसी भी अन्य कंपनी की तुलना में ये ज्यादा पैसा कमाते हैं क्योंकि पूरी दुनिया इनके प्रोडक्स का उपयोग कर रही है । मैं भी चाहता हूँ कि एक दिन पूरी दुनिया मेरे बनाए सॉफ्टवेयर का उपयोग करें । मैं भावुक होकर बोली मेरा आशीर्वाद है कि तेरह हर सपना सच हो डेटा लेकिन मेरे सपनों का क्या आपके क्या सपने है? माँ यही कि तुम एक सुंदर, सुशील और घरेलू लडकी से शादी करूँ जो मेरे साथ मेरी बेटी बनकर रहे । मैं अपनी बहु के साथ अपनी बाकी की जिंदगी बिताना चाहती हूँ । मैं चाहती हूँ कि तो मुझे दादी बनाओ । अपने पोतों के साथ खेल कर मैं अपना बुढापा बिताना चाहती हूँ । माँ में वादा करता हूँ कि आप अपने पोते के साथ खेल होगी लेकिन इंडिया में नहीं, हमारी कम है । एक बार जब मैं वहाँ पर सेटल हो जाऊंगा तो मैं आप दोनों को भी ले चल होगा । लेकिन हमारी सभी रिश्तेदार यहाँ पर है में उन विदेशी लोगों के बीच विदेशी भाषा में बात करते हुए और विदेशी खाना खाते हुए नहीं रहना चाहती । और हमारे मरने के बाद तुम हमारी अस्थियों को कहाँ विसर्जित करोगे? अमरीका में तो गंगा नदी भी नहीं है । महाने अपना इमोशनल कार्ड खेला । उस समय लोहित का घर पर रहना खतरनाक था । फटा फट रहा कर वो ऑफिस के लिए रवाना हो गया । ऑफिस पहुंचकर वो अपने सहयोगी और बचपन के दोस्त अमन से मिला । जब भी लोहित की जिंदगी में कुछ भी अच्छा या बुरा होता है तो सबसे पहले अमन के साथ शेयर करता है । मुंबई में उन्होंने स्कूल और कॉलेज की पढाई एक साथ की । अमन गुडगांव की एक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छा काम कर रहा था । लेकिन जब लोहित ने अपनी नौकरी छोड दी और अपना स्टार्टअप शुरू किया तो हमने भी लोहित की कंपनी जॉइन कर ली । अमन नीललोहित को कभी अकेला नहीं छोडा और छोडना भी क्यूँ घट । फिर दोस्ती का पहला शब्द ही दो है । एक कप कॉफी के साथ लोहित ने अमन को सुबह का किस्सा सुनाया । अमन लोहित की हालत पर जोर से हंसने लगा । दो होते ही ऐसे है आपकी बडी से बडी समस्या का कुछ इस तरह मजाक उडाते हैं की समस्या ही छोटी लगने लगती है । माँ जाती है कि मैं शादी कर लो, हाँ तो कर लेना अच्छा ही तो है कर तो लोगो मगर किससे शादी के लिए कोई लडकी भी तो होनी चाहिए । जिस लडकी से तो बस में मिला था उसी से कर ले अच्छे दोस्त आपकी कहीं बात समझ सकते हैं और सच्ची दोस्त आपको प्लीज मुझे गिलास पानी देना । अमन ने लोहित से अनुरोध किया जोकि फिल्टर के पास खडा था । वे दोनों रोहित की माँ की मदद करने के लिए कुछ सोचने के लिए अपने ऑफिस के कॉन्फ्रेंस रूम में बैठे थे । लोहित ने अमन को पानी दिया और फिल्टर पर लगा हुआ अटैक दिखाकर अमन से कहा तो जानता है ये ब्लॅक कहाँ से आया है । लोहित को लोगों के सामान्यज्ञान की जांच करने का बडा शौक है । अमन ने कोरी ने गांवों से लोहित की और देखा है । इस नाम एक भारतीय आदमी हवेलीराम के नाम पर रखा गया है । वो इस कंपनी के संस्थापक थे । अमन ने चौंकते हुए कहा क्या सच में मुझे तो ये कोई विदेशी नाम लगता था । ये देश ऐसे लोगों से भरा हुआ है । मेरे दोस्त जिनमें और साधारण विशेषताएं हैं और मैं भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके अपनी माँ के लिए कुछ असाधारण करना चाहता हूँ । कुछ ऐसा जिससे यह सिद्ध हो जाएगी एक इंजीनियर कितना खास हो सकता है । अमन ने कहा सही कहा दोस्त इंसानों की मूर्खता से निपटने का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही एकमात्र ऑप्शन है । हर चीज के लिए हमारे पास मशीनें हैं । कपडे धोने के लिए वाशिंग मशीन, वर्तन साफ करने के लिए डिशवाशर, घर की सफाई के लिए वॅार मगर फिर भी सभी उपकरणों को चलाने के लिए हम इंसानों पर ही निर्भर है । क्यों उन्होंने कैसा रिपोर्ट बनाए जो सभी घरेलु उपकरणों को नियंत्रित कर सके, कंट्रोल कर सके और ग्रहणियों से बात करने में भी सक्षम हो । अमन ने कहा हमारे स्टार्ट अप का बेसिक आइडिया भी तो यही है की मशीन इंसान से इंसानों की तरह ही बात कर सके । हाँ, हमारी रिपोर्ट को बातचीत करने और घरेलू काम करने के लिए आसानी से एनकोड किया जा सकता है क्योंकि रोजाना उसे एक ही काम करना है । ये हमारी कॉल सेंटर प्रोग्राम के कम्पेरिजन में बहुत ही आसान है क्योंकि कॉल सेंटर में बोर्ड को हर बार अलग व्यक्ति के साथ बात करनी होगी लेकिन यह रोबोट को सिर्फ अपने परिवार से ही निपटना है । अमन ने तुरंत उनकी कंपनी के सभी सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और विश्लेषकों के साथ एक मीटिंग का आयोजन किया । उन्होंने भी इस परियोजना के सफल होने की संभावना को प्रमाणित किया । लोह इतने एक्साइटेड होकर अपनी माँ को फोन किया मॉम मेरे पास आपके लिए एक खुशखबरी है । मैंने पूछा अरे वाह क्या? तो मैं नौकरानी मिल गई । आप फिर बहुत मिल गई या फिर दोनों नहीं । मां जो मुझे मिली है वह नौकरानी या फिर बहुत से भी खास है । मैं ये साबित कर दूंगा की एक इंजीनियर चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकता । अगले हफ्ते मैं उसे आपसे मिलने के लिए घर लेकर आऊंगा । लोहित शर्मीले व्यक्तित्व के पीछे वास्तव में एक मसखरा और आकर्षक व्यक्ति है जो किसी भी मसले को अपनी चालाकी से हाल कर सकता है । फिर चाहे वो मसला तकनीकी हो या गैर तकनीकी । वो बोलता कम और संता ज्यादा है । उसके लिए कंप्यूटर में कोडिंग करना इतना आसान है जैसे किसी बगीचे में घूमना, उसे नई नई भाषाएं सीखने का शौक है । वह फर्राटेदार हिंदी, अंग्रेजी और मराठी के साथ स्पैनिश और फ्रेंच भी बोल सकता है । और आश्चर्य के बाद तो ये है कि स्पैनिश और फ्रेंच बोलना सीखने के लिए उसने कभी भी कोई कोर्स नहीं किया । वहाँ की फिल्में देखकर और सोशल साइट्स पर वहाँ के लोगों से बातें करके उसने भाषा सीखी है । वो विकीपीडिया बहुत पडता है और हमारे चारों और के इंटरेस्टिंग फैक्ट्स को बात बात में बता दे रहता है । शुरुआत में आपको ये अजीब लग सकता है लेकिन एक बार आप उसके साथ टाइम बताइए तो आप उसके सादा के कायल हो जाएंगे और उससे आपको काफी कुछ सीखने को भी मिलेगा । वो केवल तीस सेकंड में रूबिक क्यूब को सॉल्व कर सकता है । पैसे कमाने के लिए उसके पास एक बेहतरीन तरकीब है । वो कुछ ऐसा डेवलप करना चाहता है जिससे वह पूरी दुनिया को बेच सकें और इसका सबसे आसान तरीका यह है कि इसे ऑनलाइन करे क्योंकि दुनिया के हर कोने में किसी भी चीज को भेजना बहुत मुश्किल है । यही रीजन है कि दुनिया का सबसे अमीर आदमी वही है जो कंप्यूटर का ऑपरेटिंग सिस्टम बनाता है । वो नहीं जो कंप्यूटर का हार्डवेयर बनाता है । बचपन से ही अपने हर काम खुद करने की कोशिश करता है । फिर चाहे वो अपने जूतों की लैस बांधना हो या फिर शर्ट में बटन टांगना वो बहुत ही सिंपल कपडे पहनता है । नीली डेनिम के साथ ढीली हाफ स्लीव्स वाली कंपटी शर्ट उसके पास एक ही रंग के आधा दर्जन टीशर्ट है । आपको लगेगा कि वह एक ही टीशर्ट रूस पहनता है लेकिन वो इसे बदलता है हूँ ।

जिनी पुलिस भाग 5

भाग चार सभी की जिंदगी में ऐसी टीचर्स होते हैं जिन्होंने उन्हें प्रोत्साहित किया और उनकी जिंदगी को बदला है । तो तृषा दत्ता भी ऐसी ही एक टीचर है जो हर साल सैकडों छात्रों के जीवन में बदलाव लाती है । वो अपनी पीढी की सीआइयू कहेगी किसी भी पीढी की सबसे बेहतरीन सुखी का है । पढाई के प्रति उसका उत्साह छात्रों को भी पॉजिटिव एनर्जी देता है । जब उसे कहा जाता है कि कम उम्र के कारण उसमें एक्सपीरियंस की कमी होगी तो वो कहती है कि किसी को पढाने के लिए बूढा होने की जरूरत नहीं है और वह तब से अपने दोस्तों को पढा रही है जब खुद स्कूल में पढती थी इसीलिए पच्चीस साल की उम्र में ही उसे दस साल का एक्सपीरियंस है । जहाँ दूसरे टीचर्स किसी सब्जेक्ट पर बहुत ही बोरिंग लेक्चर देकर स्टूडेंट्स को सलाह देते हैं तो वो जितना हो सके वास्तविक यानी कि रियल एक्जाम्पल देकर समझाती है । वो छात्रों के साथ विषय पर चर्चा करती है और उनसे भी उनकी राय लेती है । वो छात्रों को बोल के बताने के बजाय यथा सम्भव करके दिखाने की कोशिश करती है । हर बार भौतिकी व्याख्यान के दौरान वो छात्रों को बहुत ही की प्रयोगशाला में ले जाकर उन्हें पहले कार्यशील मॉर्डल दिखाती है और सिद्धांत सिखाती है । वो जानती है कि हम जो आंखों से देखते हैं वो हमें ज्यादा याद रहता है । वो अपनी क्लास के छात्रों को वैज्ञानिक के नाम दे देती है । उदाहरण के लिए जब उसे न्यूटन का गति का नियम पढाना होता है तो वो अपनी कक्षा के किसी छात्र का नाम न्यूटन रख देती है । ऐसे में छात्रों को चैप्टर याद रखना आसान हो जाता है क्योंकि उन्हें मैं जान करने के लिए वैज्ञानिक का एक चेहरा मिल जाता है । तृशा के द्वारा पढाई गई छात्र को घर पर नोटबुक खोलने की भी जरूरत नहीं होती । वो सब्जेक्ट को इतनी आसानी से सुनाती है जैसे कोई दादी अम्मा बच्चों को कहानी सुना रही हूँ जैसे कोई कभी भूल नहीं सकता । लेकिन जब वो छात्रों के आस पास नहीं होती तो वह एक अलग ही शख्सियत होती है जिसके बारे में सिर्फ उसके करीबी ही जानते हैं । वो बडी ही शर्मिली है । अगर वो आपको नहीं जानती तो आपसे बात तक नहीं करेगी । वो आपसे नजरे जुलाई और अगर आप फिर भी उसकी और देखेंगे तो वहाँ से चली जाएगी । लेकिन एक बार अगर आपकी उससे दोस्ती हो जाए तो आप उसके बडबोलेपन को बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे । वो तब भी आपको तंग करेगी जब अब सो रहे हो, खा रहे हो या कोई भी जरूरी काम कर रहे हो और नाजुक तो इस बात का है कि जब आपको तंग नहीं करेगी इस बात से अब और भी ज्यादा तंग हो जाएंगे । अगर एक भी दिनों से नहीं देखेंगे तो उसकी यहाँ बताएगी । वो कमाल का शतरंज खेलती है और उसे फिल्में देखने से ज्यादा किताबें पढना पसंद है । जब भी वह यात्रा करती है तो उसके हाथ में हमेशा कोई किताब होती है । वो दसवीं और बारहवीं के छात्रों को दिल्ली के सबसे अच्छे स्कूल में पढाती है या योग रहे कि वह पढाती है । इसीलिए वो स्कूल दिल्ली का सबसे अच्छा स्कूल है । वो ना केवल स्टूडेंट को सब्जेक्ट समझने में मदद करती है बल्कि उन्हें नई चीजों को सीखने में सक्षम भी बनाती है । किसी सामान्य दिन की तरह कृष्णा ने कक्षा में प्रवेश क्या गुड मॉर्निंग मैं क्लास में खडे होकर मैडम का स्वागत किया । ग्राॅस कृष्णा ने मुस्कान के साथ सभी का अभिवादन किया । अपने शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले ही तृषा स्कूल प्रबंधन से छात्रों की सूची लेकर सब के नाम याद कर लेती है । स्कूल के पहले दिन से ही वो हर छात्र को उनके नाम से पुकारती है । वो पिछली कक्षाओं के टीचर से हर छात्र के बारे में फीडबैक ले लेती है । उसे पता होता है कि कौन सा छात्र पढाई में कैसा है । वो कभी भी हाजिरी लेकर या अटेंडेंस लेकर टाइम वेस्ट नहीं करती । खाली सीटें गिनकर पता लगा लेती है कि उसकी क्लास में कितने बच्चे उपस् थित है । वो फिजिक्स बढाना शुरू करती है । किसी भी विषय को पढाने से पहले वो बताती है कि यह वास्तविक जीवन से कैसे जुडा हुआ है जो छात्रों के बीच रूचि पैदा करने में मदद करती है । स्पीड डिस्टेंस एन टाइम को पढाते समय वो अपने छात्रों को वास्तविक जीवन से जुडे प्रश्न देती है । जो भी तृषा के छात्र ट्रेन या बस में यात्रा करते हैं उन्हें दो स्टेशन के बीच की दूरी को यात्रा में लगने वाले समय से डिवाइड कर के ट्रेन या बस की स्पीड की कैलकुलेशन करते हुए देखा जाता है । स्टेशन के बीच की दूरी की सारी डिटेल्स टिकट में दी होती है और लगने वाला टाइम छात्र अपनी घडी में देख लेते हैं । तो आज हम सीखेंगे लॉफबोरो शन उसने कहा पहले में तीनों लो तो में अच्छी तरीके से समझा देती हूँ और फिर हम इस से जुडे सवालों को हल करेंगे जो की परीक्षा में पूछे जाते हैं । तृषा ब्लैक बोर्ड में लगभग पचास मिनट तक सभी विषयों को पढाया । क्या सभी को समझ में आया । तृषा ने हर विषय को समझाने के बाद पूछा । सभी छात्रों ने एक साथ जवाब दिया कि ये ऍम केवल कनाडी छात्र हरप्रीत को छोडकर वो अपना मुंह खोलकर उबासी ले रहा था । त्रिशा जो पढा रही थी उसमें उसका जरा भी ध्यान नहीं था । वैसे भी गर्मी के दिनों में नींद पे काबू रखता ना बहुत ही मुश्किल होता है । कृषि सुबह का सबसे पहला लेक्चर लेती है ताकि छात्र सुस्त ियाँ नीरस नाम महसूस करें । लेकिन पहले ही लेक्चर में हरप्रीत को नींद आ गई । वह चुलबुला पंजाबी लडका है जो सर पे पगडी पहनता है । परीक्षा में सबसे कम अंक प्राप्त करता है लेकिन उसके शरीर का वजन उसकी कक्षा में सबसे ज्यादा है । तृशा उस की तरफ ज्यादा ध्यान देती है क्योंकि उसे पता था कि वह पढाई में कमजोर है । त्रिशा ने उसे नाम से पका रहा हरप्रीत पूरी कक्षा उसकी और देख रहे थे । लेकिन वो खिडकी से बाहर देख रहा था । उसके बगल में बैठे छात्र ने अपनी कोहनी मारकर उसी अलर्ट क्या? तृषा हरप्रीत से कहा आगे आओ और इस विषय को समझाओ । हरप्रीत आगे आया और किसी मोम के पुतले की तरह खडा हो गया । उसे कोई अंदाजा नहीं था कि कक्षा में क्या पढाया जा रहा था । तृशा ने उसके पास जाकर अपना हाथ उठाया । हरप्रीत ने तुरंत ही डर के मारे अपने दोनों हाथ अपने कोमल गालों पर रखकर आंखे बंद कर ली । उसने सोचा कि त्रिशा उसे थप्पड बारे कि जैसा कि किसी दूसरे टीचर ने क्या होता है लेकिन परेशानी ऐसा नहीं किया । तृशा ने उसके सर पर हाथ रखा और विनम्रता से पूछा क्या हुआ बेटा पढाई में ध्यान क्यों नहीं दे रहे हो के तुम्हारी फॅमिली में कोई प्रॉब्लम है या फिर मैं ठीक से पढा नहीं पा रही हूँ । नहीं मैं ऐसी कोई बात नहीं है । अगर कोई स्टूडेंट रिशा के बढाते टाइम ध्यान ना दे तो वही से अपनी ही नाकामी समझती है । कृषि का मानना है कि स्टूडेंट के ऊपर पढाई का प्रेशर बनाने की बजाय पढाई को ही इतना इंट्रेस्टिंग बना दिया जाए । स्टूडेंट को खुद ब खुद पढने का मन करें हरप्रीत त्रिशा की उदारता को देख कर गदगद हो गया । पढाई में कमजोर होने के कारण ता उम्र उसी टीचर्स ने सिर्फ फटकारा है । पहली बार किसी ने उससे इतने अच्छे से बात की । तृषा ने फिर से पूछा तो फिर तुम पढाई में ध्यान क्यों नहीं दे रहे हो? मुझे नहीं पता मैडम ऐसा क्यों होता है । लेकिन जो भी मैं ब्लैक बोर्ड की तरफ देखता हूँ तो मुझे नहीं जाने लगती है । मैसेज जानबूझ कर नहीं करता हूँ । बस ऐसा हो जाता है । त्रिशा ने पूछा फिर तो मैं किस चीज में दिलचस्पी है? तो मैं सबसे ज्यादा क्या पसंद है? खाना खाना? धर्मप्रीत ने मासूमियत से कहा वो क्या करें अगर उसे खाने की सेवा और कुछ सोचता ही नहीं । अब बहस पूछ उठाएगी तो गाना थोडी जाएगी । गोवरी करेगी ना क्लास के सभी छात्र और तृषा हस पडे । अंत में हरप्रीत भी हसने लगा खाने को छोडकर ऐसी कौन सी चीज है जिसके लिए तुम रात भर जाग सकते हो । तुम्हारा ऍम किया है कुछ तो होगा ऐसा खर प्रीत वहाँ खडा अपना सिर खुजलाने लगा । उससे पहले कभी नहीं सोचा था कि उसकी हॉबी क्या है । बहुत सोचने के बाद उसने कहा फुटबॉल हाँ मैं मुझे फुटबॉल खेलना बहुत अच्छा लगता है । मैं बिना खाई पे दिन रात फुटबॉल खेल सकता हूँ । लियोनल मैसी मेरा पसंदीदा फुटबॉल प्लेयर है । हाँ, क्लब बार्सिलोना मेरी पसंदीदा टीम है । सुस्ती और नींद से भरे हरप्रीत में जोश भर गया तो क्या तुम पढाई छोडकर सिर्फ फुटबॉल खेलना चाहते हूँ? ये बडा मुश्किल सवाल था । असल में हरप्रीत चाहता तो यही था मगर अपनी टीचर से वह कैसे कहे तो खेल में अपना करियर बना सकते हो । इसमें कुछ गलत नहीं है लेकिन तुम्हें फिर भी अपनी प्रारंभिक शिक्षा तो पूरी करनी ही होगी । मान लो तुम कल को बहुत बडी प्लेयर बन गई और इंडिया को रिप्रेजेंट करने लगे । तो क्या तुम चाहोगे कि लोग तो में बारह फील कर हैं । हरप्रीत की नजरे शर्म से झुक गई आपने ऍम को फॉलो करो, इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन पहले सुरक्षा प्राप्त करो । कम से कम अपने माता पिता के लिए और जहाँ तक किस सब्जेक्ट में रूचि का सवाल है, इंट्रेस्ट का सवाल है तो तुम पढाई करने के लिए भी अपने फैशन का इस्तेमाल कर सकते हो । हरप्रीत कुछ भी समझ पाने में असमर्थ था । मानो तृषा फिरसे फिजिक्स पढा रही हो । चिंता मत करो, मैं तुम्हारी मदद कर होंगी । मुझे ये बताओ कि तो फुटबॉल खेलने कब और कहाँ जाते हो । बीडी ग्राउंड शाम चार बजे उसने कहा, फुटबॉल की संदर्भ मात्र से उसकी आंखें चमक उठीं तो ठीक है । मैं इस रविवार शाम चार बजे वीडी ग्राउंड आउंगी तो मैं अपनी फुटबॉल नहीं कराना । खुशी से भरपूर । हरप्रीत ने तृषा से पूछा मैडम क्या आप भी मेरे साथ फुटबॉल खेल होगी? तृषा ने कहा हाँ तो मेरी कक्षा में पढाई तो करनी रहे हो तो क्यों ना मैं तुम्हारे मैदान में तुम्हारे साथ फुटबॉल खेल लो । आखिर किसी को तो किसी से कुछ सीखना ही चाहिए । तृषा ओदार था का प्रतीक है उसकी पढाई हुई । छात्र परीक्षा में अच्छे नंबर से पास हो इसी को अपनी जिम्मेदारी मानती है । वो छात्रों को सजा नहीं देती जैसा वो कहती है छात्र अक्सर वैसा ही करते हैं और अगर वे ऐसा ना करें तो तृषा के पास उसके अपने तरीके हैं हूँ ।

जिनी पुलिस भाग 6

भारत पांच लोगी तो उस की टीम ने जमीन आसमान एक करके लोहित की माँ के लिए रोबोट विकसित कर दिया । लोहित के घर ले जाने से पहले अमन ने रोबोट की और देखते हुए कहा इससे कोई नाम देना चाहिए । लोहित ने चौंकते हुए पूछा भला एक रोबोट को नाम देने की क्या जरूरत है? अमन ने पूछा तो वाइस कमांड देने के लिए तो मैं ऐसे क्या कहकर बुखार हो गई । ये वो वोट है तो मैं ऐसे रोबोट करूंगा भरे कितना बुरा लगेगा । उसे तो इंसान हो तो क्या? मैं तो में सिर्फ इंसान का हूँ । हमारे आस पास बहुत से दूसरे इंसान है मगर रोबोट एक ही है । मुझे नहीं लगता कि ये कोई उलझन की बात है । फिर भी एक प्यारा सा नाम रखने में भला क्या हर्ज है । लोग इतने थोडा सोचने के बाद कहा थी कि अगर तुम इतना चाहते हो तो रोबो ने कहा कैसा रहेगा सी किसी टीवी सीरियल के विलन की जैसा लगता है अच्छा तो फिर क्यों ना मैं तृषा कहकर बुला हूँ । उसका नाम लेते हुए रोहित शर्मा गया अमन नीललोहित का मजाक उडाते हुए कहा मगर फिर तुम्हारी शादी के बाद हमारे घर में दो तृषा होगी तो उनका होगी कि त्रिशा मुझे किस करूँ और वह रोबोट तो मैं किस कर देगी । ठीक है मैं समझ गया लोग इतने फिर कहा की रोबोट हमारी इच्छाओं को किसी जिनकी तरह पूरा करेगा तो क्यों ना हम इसी जीने का है । अमन ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा अरे वा जिनी एक बेहतरीन नाम है । लोहित ने उत्सुकता से अपनी माँ को फोन किया और कहा माँ में उसे लेकर घर आ रहा हूँ या तो मुझसे मिलने के लिए तैयार हूँ । हाँ बेटा मैं तो तब से तैयार हो जब तो उन्हें पहली बार उसका जिक्र किया था ही जल दिया मेरी बहु को लेकर तेरे पापा और मैं उसे देखने के लिए बहुत एक्साइटेड है । हाँ वो आपकी बहु नहीं है । माने और भी ज्यादा खुशी से कहा तो क्या वो बाई है नहीं वो बाई भी नहीं है । मैं समझ गई तो तेरी गर्लफ्रेंड होगी है ना तुझे उसे हमारी बहू कहने में शर्म आ रही होगी । शर्मा मत हम तुम्हारी तरफ से उसके माता पिता से बात कर लेंगे । मैंने कहाँ और फोन रख दिया? लोहित सोचने लगा कि जब पहली बार अपनी तृषा को माँ से मिलने लेकर जाएगा तो क्या तब बीमा इतनी ही खुश होगी जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है जिन्हें वैसी रोबोट नहीं है । देखने में यह एक मशीन की तरह है, इंसानों की तरह नहीं । ये मोटर पाॅड गैर जैसे मैकैनिकल पार्ट से लैस है जो से आगे बढने, पकडने और मोडने में मदद करती है । इसमें आंखों की तरह ऑपटिकल सेंसर है । कान की तरह माइक्रोफोन और ये की तरह स्पीकर है । सबसे इंपॉर्टेंट बात ये है कि ये सोच समझकर खुद निर्णय लेने में सक्षम है और ये सब पॉसिबल हो पाया है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से । लोहित की कंपनी कई सालों से इसी तरह के प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी इसीलिए इसे बनाना उनके लिए मुश्किल नहीं था । लोहित उसे लेकर घर पहुंचा और जिनको अपना पहला वाइस कमांड दिया जिन्हें दरवाजे की घंटी बजाओ । ओके लोहित जिन्होंने जवाब दिया और अपने रोबोटिक हाथ से डोरबैल बजाई । अपनी होने वाली बहू का स्वागत करने के लिए माने । हाथों में आरती की थाली लेकर दरवाजा खोला । जैसे ही माने रोबोट को देखा तो वहाँ जोर से चलाई हे भगवान और आरती की थाली हाथ से छूट गई । नमस्ते हाँ, मैं जी नहीं हूँ । रोबोट ने अपनी गर्दन घुमाते हुए कहा मुझे लगा था कि तुम किसी लडकी को हम से मिलने ला रहे हूँ लेकिन तुम्हें क्या लेकर आए हो? जिन्होंने अपनी रोबोटिक स्वर में कहा मैं किसी लडकी से कम नहीं हुआ । जी नहीं माँ को बताओ तो उनके लिए क्या क्या कर सकती हूँ । मैं घर की सभी काम कर सकती हूँ जैसे कि झाडू लगाना, वाशिंग मशीन में कपडे धोना, आपके हाथ पैर दबाना, इंटरनेट से रेसिपी डाउनलोड करके खाना पकाना या मैं आपकी रेसिपी सीख भी सकती हूँ । मैंने हस्कर कहा ये इतनी बुरी भी नहीं है । लोहित ने राहत की सांस ली और सोफे पर बैठ गया जिन्होंने फिर कहा एक और बात माँ मैं आपके साथ डी ए सारी बातें भी कर सकती हूँ होते हैं ।

जिनी पुलिस भाग 6

भारत छह ठंडी हवा के झोंके ने रविवार की दोपहर फुटबॉल ग्राउंड में तृषा का अभिवादन किया । पहले से ही मौजूद हरप्रीत वहाँ अपने फुटबॉल के साथ प्रैक्टिस कर रहा था । स्कूल में लेट आने वाला हरप्रीत फुटबॉल ग्राउंड में टाइम से पहले ही पहुंच गया । किसी भी काम को करने में उस काम के प्रति दिलचस्पी एक अहम भूमिका निभाती है । हरप्रीत मैडम को देखते ही दौडते हुए उनके पास गया और उत्साहित होते हुए बोला चलिए मैडम खेलते हैं ये मेरा गोलपोस्ट है । बहुत वो आपका तृषा ने मुस्कुराते हुए कहा हाँ बाबा, हम फुटबॉल खेलेंगे लेकिन पहले तो मैं मेरा काम करना होगा । कैसा काम? मैडम तृशा ने अपने हैंड बैग से फिजिक्स की किताब निकली और कहा कि खेलने से पहले तो वे न्यूटन के तीनों नियम सीखने होंगे जो मैं क्लास में पढा रही थी । हरप्रीत ने चौंकते हुए पूछा, मैं चाहती है कि मैं फुटबॉल ग्राउंड में पढाई करूँ । हाँ, यही एकमात्र जगह है जहां तो में नींद नहीं आएगी । मेरी क्लास में तुम फुटबॉल के बारे में सोच रहे थे इसलिए मैं तो यहाँ लेकर आई । अब फुटबॉल ग्राउंड में तो मेरी क्लास के बारे में सोच हूँ । अपने टीचर के इस उत्साह को देखकर के हरप्रीत भावविभोर हो गया । यही निष्ठा आपको देश का सबसे बेहतरीन शिक्षक बनाती है । छात्रों को पढाने के लिए वह कुछ भी कर सकती है । एक विलक्षण शिक्षक ऐसी जुनून को प्रेरित करता है जो जिंदगी भर आपके साथ रहता है । जबकि बे हुनर शिक्षक सीखने की इच्छा को ही मार देता है । शिक्षकों में जीवन बनाने या बिगाडने की पावर होती है । वो किसी भी सब्जेक्ट को इतने अच्छे तरीके से सिखा सकते हैं कि घाट को लगेगा कि आप को ये सब पहले से ही जानते थे । हरप्रीत और तृषा एक बरगद के पेड के नीचे बैठ गए और पढाई शुरू कर दी । हरप्रीत को फुटबॉल ग्राउंड का वातावरण और खुली हवा उसके बंद क्लासरूम के कम्पेरिजन में ज्यादा पसंद थे । इसलिए उसे नींद भी नहीं आ रही थी । गति के पहले नियम को समझते हैं । अगर कोई वस्तु स्थिर अवस्था में है तो वह तब तक स्थिर अवस्था में ही रहेगी जब तक उस पर कोई बाहरी बाल न लगाया जाए और अगर कोई वस्तु गतिशील है दो तब तक एक समान गति की अवस्था में रहेगी जब तक उस पर बाहरी बाल लगाकर उसे स्थिर न किया जाए । हरप्रीत को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था तो ईशान उसके हावभाव देखते हुए कहा हरे ये इतना सरल है । चलो महत्व में फुटबॉल की भाषा में समझाती हूँ । अगर तुम जमीन पर फुटबॉल रखते हो तो ये तब तक रखा रहेगा जब तक कोई खिलाडी इसे मारता नहीं और जब कोई फुटबॉल को किक करता है तो ये तब तक एक सीधी रेखा में गति करता रहेगा जब तक दूसरा खिलाडी बॉल को रोक नहीं देता । हरप्रीत ने खुशी से कहा हर यहाँ ये तो बहुत आसान है । इसी तरह परेशानी फुटबॉल के उदाहरण के साथ न्यूटन के दूसरे और तीसरे नियम को भी समझाया । क्या अब तीनों नियम याद हुए? बेशक मैं अब मैं इन्हें जिंदगी भर नहीं भूलूंगा । फ्रीजर में साठ साल का हो जाऊंगा तब भी में अपने नाती पोतों को एक कहानी की तरह न्यूटन के गति के नियम सुना सकता हूँ । इतना होना हर छात्र सिर्फ सही शिक्षण तकनीकों की कमी के कारण कम अंक प्राप्त कर रहा था । यह सोचकर दिशा को दुःख हुआ । एक घंटे पढाने के बाद निशाने वास्तव में हरप्रीत के साथ फुटबॉल खेला । हालांकि कुछ ही मिनटों के लिए ही अपनी मैडम के खिलाफ गोल करके हरप्रीत को बडी खुशी हुई । हरप्रीत ने अब नियमित रूप से फुटबॉल ग्राउंड के पास पेड के नीचे पढाई करनी शुरू कर दी और एक बार विषय को अच्छे से समझने के बाद परीक्षा में अच्छे अंक लाना जरा भी मुश्किल नहीं था । तृशा का मानना है कि कुछ छात्र ऐसे होते हैं जो कक्षा के माहौल में पढाई नहीं कर सकते लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि वे मुर्ख हैं । तृषा का सामना अक्सर ऐसे छात्रों से होते रहता है और इसी तरह से तृषा उनसे निपटती है । वो कभी भी अपने छात्रों से किसी विषय को रखने के लिए नहीं कहती जिसे वे लास्ट में परीक्षा हॉल में भूल जाएगा । वो छात्रों को वास्तविक दुनिया के उदाहरणों से परिचित कराती है, अवगत करवाती है उनकी पहचान करवाती है ताकि छात्र अगर एक बार समझ जाए तो फिर कभी भी उसे ना बोले ।

जिनी पुलिस भाग 7

भाग साल तो ऑफिस का काम संभाल लेना । दोस्त मैं फिनिक्स मॉल जा रहा हूँ । रोहित ने अपने फोन पर नोटिफिकेशन देखा और एक आई का मन से कहा । अमन ने मुस्कुराते हुए पूछा, मॉल इस वक्त क्या अत्र शामिल गई? लोग इतने आंख मारी तो हर मॉल के लिए निकल गया । वहां पहुंचकर लोहित तृषा को इतने बडे मॉल में ढूंढने लगा । खुद को शांत करते हुए उसने मन में सोचा घर बरामद वो जरूर मिलेगी तो उसे ढूंढने के लिए एक लडकी की तरह सोचना होगा । अगर में लडकी होता तो मॉल में कहाँ जाता हूँ? लोहित ने सभी टॉप ब्रैंड्स की जांच की जहाँ एक लडकी खरीददारी करना चाहेंगे । रोहित फॅमिली के सामने रुक कर सोचने लगा कि जब उसकी तृषा से शादी होगी और बच्चे होंगे तो वे बच्चों के लिए खरीददारी करने यही आएंगे । मॉल की पहली मंजिल पर जांच करते हुए उसे कई खूबसूरत लडकियाँ देखी लेकिन तृषा नहीं । लोग इतने इलेक्ट्रॉनिक जोन में भी नजर दौडाई कि कहीं वह कोई गैजेट खरीदने आई हूँ । उस चार मंजिला इमारत में केवल ऊपरी मंजिल ही बची थी जिसका मतलब उसके मिलने की संभावना एक चौथाई ही बची थी । उस मंजिल में केवल फूट कोट और ऍम था । लोहित ने अब उससे मिलने की उम्मीद छोड दी और सोचा की लडकी नहीं तो ना सही । कम से कम अच्छा खाना तो खाओ । उसने अपने लिए पनीर, ग्रिल्ड सैंडविच और डाइट को ऑर्डर किया । पांच मिनट के इंतजार के बाद एक पीले रंग की टीशर्ट और पीली टोपी पहने लडके ने लोहित को सैंडविच और को परोसा । वो आराम से बैठ कर खाने के लिए कोनसी ढूंढ रहा था । तभी उसे आभास हुआ कि उसने दूर से तृषा को देखा । उसने पुष्टि करने के लिए आंखों को दो से तीन बार बंद कर के फिर से खोला । वहाँ तीन अन्य लडकियों के साथ सच में तृषा ही थी । दो से ही उसके चेहरे की सादगी ने विलोहित को मंत्रमुग्ध कर दिया । लोहित ने उसकी तरफ देखा और फिर सैंडविच की तरफ देखा और सोचा हमारे किस्मत सेंडविच में मिल गया । हर लडकी भी हाथों में सेंडविच कर ट्रे लिए लोहित तृषा के पास गया । तृषा के सामने बैठे सहेलियों ने लोहित को आते देखा । लोग इतने अपनी उंगली को होटों पे रख कर उन्हें चुप रहने का इशारा किया । लोहित पीछे से तृषा के करीब गया और अपने हाथ त्रिशा की आंखों पर रखकर कहा तो आखिर मैंने तुम्हें ढूंढ लिया । लोहित की आवाज को तृषा झट से पहचान गई । परेशानी खुश होते हुए कहा, मुझे पता था कि हम फिर मिलेंगे मगर इतनी जल्दी मिलेंगे ये नहीं सोचा था । आखिर तुमने मुझे ढूँढा कैसे? लोहित को देखकर वह इतनी रोमांचित हो गई कि उसे गले लगाना चाहती थी, लेकिन अपने दोस्तों के सामने उसने ऐसा नहीं किया । किस्मत हमें आखिर मिला ही दिया । लोहित ने कहा और दिशा के पास बैठ गया । लोहित मिलो मेरे दोस्तों से खुशी, पल्लवी और मानसी और गलत । ये है लोहित मेरा डीटीसी बस वाला दोस्त । तीनों लडकियां एक स्वर में बोली हो तो ये है वो लडका लोग इतने मुस्कराते हुए पूछा वो लडका क्या भरी कुछ नहीं । कृष्णा ने बात आई गई कर दी । कुछ पल रुककर लोहित ने कहा आखिरकार मैंने तुम्हारी शर्त जीत ली । अभी नहीं तो मेरा पता और मेरा फोन नंबर भी पता करना होगा । मिलेनियम अपार्टमेंट, फ्लैट नम्बर फाइव जीरो वन तुम्हारा पता है और ये तुम्हारा फोन नंबर है । रोहित ने उसका नंबर अपने मोबाइल पर दिखाया । तृशा के दोस्त खुश हो गए । हाँ, त्रिशा की आंखें चौडी हो गयी । सच बताओ तुम ने इतना सब कैसे पता? क्या वो फिर सोचने लगे कि कहीं लोहित सच में जाउं तो नहीं तो नहीं आती । तुमने उस दिन अपने घर जाने के लिए टैक्सी ली थी । मैंने उसके नंबर प्लेट ये तस्वीर क्लिक कर ली थी । फिर में आरटीओ ऑफिस गया और कहा कि मैं टैक्सी में अपना बात भूल गया हूँ और मुझे इस टैक्सी वाले का नाम और पता चाहिए । फिर मैं उस टेक्सी वाले से मिला और उसे पूछा कि आज तक उसकी टैक्सी में जितनी भी लडकियां बैठी हैं उनमें से सबसे खूबसूरत लडकी को उसने कहा छोडा । वो तुरंत समझ गया कि मैं तुम्हारी बात कर रहा हूँ लेकिन उसे तुम्हारा पता याद दिलाने के लिए उसे पैसे देने पडेंगे । वो मुझे तुम्हारी सोसाइटी तक ले गया और सोसाइटी के सुरक्षा गार्ड ने मुझे तुम्हारा फ्लाइट नंबर बताया । तृषा ने पूछा तो फिर तो मेरे घर क्यों नहीं आए? लोहित ने सोचा घर तो मैं सीधे बारात लेकर आऊंगा । कृष्णा ने फिर पूछा और तुम्हें कैसे पता लगा कि मैं यहाँ इस मॉल में हूँ क्या? तो मेरे घर से मेरा पीछा कर रहे थे । जी नहीं, मैं तुम्हारा पीछा नहीं किया मगर कभी जरूरत पडी तो करूंगा जरूर । मैं एक दूसरी आईडी से तो फेसबुक पर फॉलो कर रहा हूँ और आज हमारी इस महीने तो मैं टैग करके पोस्ट किया है । फॅमिली वहीं पढकर मैं यहाँ पर आया । उसके दोस्तों ने कहा वाह क्या बात है । लोहित ने पूछा तो हमारी डाॅ जब तुम का हूँ । एक सहेली ने हैरानी से पूछा और तुम्हें तृषा का फोन नंबर कहाँ से मिला? सभी लडकियाँ ये जानने के लिए एक्साइटेड थी । फेसबुक से मुझे उस स्कूल का नाम पता चला जहाँ पर तुम पढाती हूँ । मैंने तुम्हारे स्कूल की वेबसाइट्स खोली । उसमें शिक्षकों की सूची में सबसे ऊपर तुम्हारा ही नाम था । मैंने तुम्हारा प्रोफाइल खोला तो उसमें तुम्हारा ईमेल और फोन नंबर दिया हुआ था । स्कूल के नेवी ब्लू ब्लेजर में भी तुम कमाल लग रही थी । कृष्णा ने कहा बचपन में तुम जितने बोले थे अब उतने ही शातिर हो गए हो तो मैं कैसे मालूम? लोहित ने फिर सोचा क्या यही मेरी बचपन की तृषा है? तुम्हारी कहानियाँ सुनकर मैंने अंदाजा लगाया क्या तुम जान नानी चाहोगे कि मेरी कहानी में आगे क्या हुआ? हाँ चाहती तो लेकिन हमने यहाँ फिल्म की टिकट ले ली है । क्यों ना तो अपने दोस्तों को फिल्म देखने जाने दो और हम यहाँ बैठ कर बातें करें । थोडा सोचने के बाद तृषा ने हामी भर दी । उसके दोस्तों ने चढाने के लिए कहा लेकिन अगर वो नहीं आएगी तो उसकी टिकट बेकार हो जाएगी । लोग इतने कहा वहाँ किसी हैंडसम लडके को दे देना । त्रिशा की टिकट कृष्णा ने अपनी जेब की सबसे छोटी जेब से टिकट निकाली और अपने दोस्तों को दे दी । लोहित पूछा क्या तुम जानती होगी हमारी जेब में जेब के ऊपर ये छोटा जीत किस लिए होता है? वहाँ छोटे कागज दिया । चिल्लर पैसे रखने के लिए बाहर क्या नहीं । असल में साडी में जींस के मशहूर ब्रैंड लेविस ने पॉकेट वॉच रखने के लिए इस छोटे से जीत को इजाद किया था और ये दिखने में सुंदर है इसीलिए आज भी इसी जेन्स परसिया जाता है । लेकिन मेरे पास पॉकेट वॉच तो है नहीं इसलिए मैं जो चाहूंगी रख होंगे कहकर तृषा हसने लगी । तृषा ने पूछा सच कहूँ तो क्यू आई हो । यहाँ लोहित ने मेज पर रखे आधी भरी बोतल से पानी का घोट दिया और दिशा की आंखों में देखते हुए बोला तो मैं जी भर की देखने के लिए क्यों देखना चाहते हो? मुझे फॅस होगी तो मैं देखना अच्छा लगता है । कृष्णा ने लोहित को छेडते हुए कहा । देख लिया ना मुझे अब जाओ यहाँ से नहीं, क्योंकि जी अभी भरा नहीं । ठीक है तो बैठो । देखो मुझे तो मैं सैंडविच पसंद है । रोहित ने खाने से पहले शिष्टाचार दिखाते हुए पूछा । हाँ, बहुत पसंद है । उसने कहा और बेशर्मी से लोहित की प्लेट सी सैंडविच उठाकर खाने लगी । जब भी कभी खाने की बात आती है वो जरा भी नहीं शर्माती । लोग इतने खुद के लिए एक और सेंडविच ऑर्डर किया । आखिर भूख तो उसे भी लगी थी । तो बताओ तुम्हारी बचपन की तृषा के साथ आगे क्या हुआ? लोगे तो फिर से अपने बचपन की कहानी सुनाने लगा ।

जिनी पुलिस भाग 8

भाग आठ तृषा के स्कूल में एडमिशन लेने के बाद पहली बार ऐसा हुआ था कि वह स्कूल नहीं आई । दिनभर उसकी याद में लोहित उदास रहा । लोगे तो स्कूल में रोज बातें तो नहीं करता था मगर उसकी एक झलक भी किसी मुलाकात से कम नहीं थी । घर वापस आकर लोहित टीवी देख रहा था जब उसके लैंडलाइन से रिश्ता का फोन आया । हाई तृषा आज स्कूल क्यों नहीं आई? लोग इतने तुरंत उसकी मधुर आवाज पहचान ली । मुझे सर्दी खासी हो गई है । ये कहकर वो फोन पे ही खास नहीं लगी । लोहित को उसकी घासी भी मधुर लग रही थी । अब कैसी होता हूँ काफी बेहतर? लोहित ने सोचा तुम्हारी आवाज सुनकर मैं भी बेहतर महसूस कर रहा हूं । लोहित मैंने ये पूछने के लिए फोन किया है कि आज स्कूल में क्या हुआ? ज्यादा कुछ नहीं । हमारी टीम ने टीम भी से फुटबॉल मैच जीत लिया । मैंने तीन गोल मारे और ये चौबीस होमवर्क ना करने के लिए कभी को फिर से मारा । उसने अपना गला साफ किया और कहा कि मेरा मतलब है कि पढाई में क्या हुआ । लोह इतने सोचने की कोशिश की लेकिन पढाई से जुडा कुछ भी उसे याद आया । लोहित ने कहा मैं अपना स्कूल बैग लेकर तुम्हारे घर आ जाता हूँ । आकर तो में सब बता दूंगा तो रोहित ने सोचा और इसी बहाने तो मैं देख लूंगा । हाँ ये अच्छा रहेगा । फोन रखते ही लोग इतने अपने चेहरे को पापा की फीस वह सिद्ध हो या माँ की फॅस क्रीम लगाई और अपने दिवाली वाले नए चमकदार कपडे पहनकर उसके घर जाने के लिए तैयार हो गया । अपना स्कूल बैग पकडे वो घर से जा ही रहा था कि मानों से देखकर टोका क्या तो किसी पार्टी में जा रहे हो वो भी स्कूल बदली नहीं मम्मी तृषा बीमार है । नौ से बताने जा रहा हूँ की आज स्कूल में क्या पढाई हुई । मैंने मुस्कुराते हुए कहा फिर तुमने ऐसे कपडे पहने हैं । कुछ साधारण सा पहन कि जाओ जो बच्चे जवान होने लगते हैं और पहला पहला इश्क फरमाते हैं । होने लगता है कि माँ बाप नहीं समझेंगे । माँ बाप भी तो इसी दौर से गुजरे हैं । समझ जाते हैं लॅाक और कैप्री पहनकर तृषा के घर पहुंचा और डोर बेल बजाई नमस्ते आंटी । लोहित ने कहा जब त्रिशा की माने दरवाजा खोला इंतजार तो लोहित उस दिन का कर रहा था जब उन्हें आंटी नहीं मम्मी जी का है । आंटी ने कहा हो तो मैं स्कूल बैग लेकर आए हूँ । वहाँ लोग इतने फिर सोचा हूँ और एक दिन बारात लेकर भी आऊंगा । लोहित रिश्ता की कमरे में गया । तृषा को देखते ही लोहित का जी तो क्या है कि उसे गले लगा ले पर उसने ऐसा नहीं किया । एक तो उसे डर था कि कहीं तृषा के बुखार के जी वानों उस से संक्रमित ना करते है और दूसरा ये कि जबरदस्ती गले लगाने के लिए तृशा उसे थप्पड ना झडते । तृषा अपने पलंग पर आलती पालती मोडी बैठी थी और उसके पैरों के ऊपर एक तकिया रखा हुआ था । उसने सफेद स्वेटर पहना था जिसमें गुलाबी फूल छपे थे । बुखार से उसका शरीर गर्म था शायद इसीलिए वह हॉट दिख रही थी । लोहित ने कल्पना कि की एक रात फूलों से सजी बिस्तर पे गर्व दूध से भरा एक गिलास लेकर वहां बैठी होगी । कृष्णा का बैडरूम दूसरी लडकियों के कमरों की तरह नहीं था । हर दीवार पे अध्ययन से संबंधित सामग्री जैसे मैच के फॉर्मूले, पीरियोडिक टेबल आदि टंगे हुए थे । बहुत सारे गणित और विज्ञान ओलंपियाड में प्राप्त प्रमाणपत्रों को भी दीवार पर लटकाया गया था । लोहित वहाँ इस अचरज में खडा था कि कहाँ बैठे आओ यहाँ बैठो । तृषा ने कहा लोहित बिस्तर पर उसके पास बैठ गया । भर अपनी नोटबुक दिखाने के लिए उसने अपना स्कूल बैग खोला । तृषा ने अपने छोटे हाथों को अपने चेहरे पर रखकर झपटमारी लोहित ने कहा गॉड ब्लेस यू तो हंसी जानती हो । जब कोई ठीक होता है तो गॉड ब्लेस यू क्यों कहते हैं क्यूँ? क्योंकि जब हम सीखते हैं तो हमारा दिल एक मिली सेकंड के लिए धडकना बंद कर देता है । वो ऐसा अच्छा तो बताओ । आज गणित में क्या पढाई हुई? लोहित ने अपनी तीखी बहुत सिकोडने पर उसे कुछ याद नहीं आया । फिर उसने कॉपी देखते हुए कहा गणित में उन्होंने सिखाया सेमी सर्कल मुझे सर्कल पता है लेकिन सैमी सर्कल क्या है? ये एक सर्कल का आधा हिस्सा है कि इस तरफ का आधा किसी भी तरह का । लोहित ने सोचा मैं सिर्फ तुमसे प्यार करता हूँ तो मुझे नहीं किया । ये से मिला हुआ ठहरो । मैं इसे अपनी नोटबुक में नोट कर लेती हूँ । उसने अपने पैरो पे रखे तकिये को हटाया और अपनी अलमारी खोलने के लिए खडी हुई । उसने पीले रंग की शर्ट पहनी थी जो उसके घुटनों के ऊपर तक ही लंबी थी ही । भगवान सेमी नेकेड उसकी दाहिनी जांघ में एक काला काला था । फिर से वो तकिये को गोद में रखकर बैठ गई । अब लोहित को समझ आया कि उसने अपनी गोद में तकिया क्यों रखा हुआ था । लोहित की अलमारी के विपरीत उसकी अलमारी में किताबे, कपडे, स्कूल बैड और एक बडा सा टेडी बियर अच्छी तरह से अलग अलग खंडों में व्यवस्थित रखा हुआ था । हिंदी भाषा में आज क्या पढाई हुई? रोहित ने अपनी नोटबुक देखी और कहा विशेषण अब ये क्या है? विशेषण एक शब्द है जो किसी संख्या का वर्णन करता है । उदाहरण के लिए अगर मैं कहूँ तो बहुत खुबसूरत हो तो यहाँ पर खूबसूरत विशेषण है क्योंकि ये तुम्हारा वर्णन करता है । वो शर्मा गई माफ करना । भगवान सिर्फ चौदह साल की उम्र में ही लोहित फ्लर्ट करने लगा क्या तो मैं और उदाहरण चाहिए । नहीं नहीं मैं समझ गई तो इसी भी नोट करलो लोह इतने अलमारी की और इशारा करते हुए कहा था कि वह फिर से उसकी चमदार टांगो को देख सके । लेकिन इस बार निशाने तरकीब लगाई और कहा कि वहाँ क्या तुम अलमारी से मेरी नोटबुक लाड होगी? नोट करने के बाद निशाने पूछा तो उन्हें चॉकलेट पसंद है । बिलकुल उसके अपने बैग से निकालकर लोहित को एक खास दिल के आकार वाली चॉकलेटी लोह इतने खाते हुए पूछा ये बहुत टेस्टी है कितने दिनों में आज सुबह पापानि दी थी तुम्हारे साथ शेयर करने के लिए मैंने इसे बैग में रख दिया था । उसके अगले हुए चॉकलेट को देखकर लोहित का दिल भी पिघल गया । किसी टीनेजर के साथ अगर कोई अपनी चॉकलेट शेयर करें तो ये उसके लिए बहुत बडी बात होती है । लोहित पहले शायद कृष्णा से उसकी खूबसूरती के लिए प्यार करता था । लेकिन ठीक उसी क्षण लोहित को तृषा से उसके स्वभाव के लिए फिर से प्यार हो गया । वो कमरा, चॉकलेट और तृषा द्वारा लगाए हुए पॉंच पाउडर की मोहक खुशबू से महक रहा था । पॉंच पाउडर लडकियों का पहला मेकप होता है । दोनों चॉकलेट खाने में मशहूर थे कि तभी लोहित ने अचानक ही पूछ लिया तृषा तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है । कमरे में कुछ पलों के लिए गहरा सन्नाटा पसर गया । लोहित को लगा कि शायद उसे कृष्णा से ऐसा नहीं पूछना चाहिए था लेकिन जब से उसने तृषा को पहली बार देखा था तभी से वह ये पूछना चाहता था । इसीलिए आज खुद को रोकने सका । क्या नौ लोग हैं बॉयफ्रेंड बनाने के लिए अभी मैं बहुत छोटी हूँ । भगवान का शुक्र है कि हम भारत में रहते हैं पडना विदेशों में तो लडकियाँ इस उम्र में मां बन जाती है । लोहित ने फिर पूछा क्या तुम्हारा कोई क्रश है? वो शर्मा गई शर्ट अपना लो है । जब भी उसे शर्म आती है वो दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लेती है । हाँ या ना बताओ भी उसके हाथों से अपने चेहरे को ढके हुए ही हामिद सिर हिलाया लोहित का दिल डूब गया कौन? मुझे बताओ कौन है वो? क्या वो तुम्हारे पिछले शहर से है या यहाँ से । यही से लोहित के दिल की धडकन कई गुना बढ गई । उसे लगा कि शायद वो खुद ही तृषा का क्रश है । उसने त्रिशा की तरह शर्मा कर अपना चेहरा ढकने की कोशिश भी की । कौन है तुम्हारा क्रश? लोहित ने भगवान से प्रार्थना की भगवान अगर वह मुझे अपना क्रश कहेगी तो मैं एक साल तक पहुँच नहीं देखूंगा । गबरू जवान, लडकी कुछ इसी तरह की कुर्बानी देते हैं, है ना? कृष्णा ने पूछा क्या तुम उससे मिलना चाहूँगी? लोहित के सीने में हल्का हल्का दर्द होने लगा । उसे एहसास हुआ कि शायद त्रिशा का क्रिश कोई और है । इसलिए दृशा उस से मिलवाना चाहती है । ए केवल में उसकी सारी खुशियाँ छीन गई । लोहित ने दिल पे पत्थर रखते हुए कहा हाँ, बेशक मिलना चाहूंगा । लोहित के अति कल्पनाशील मस्तिष् नहीं तो ये कल्पना करने भी शुरू कर दी कि वह त्रिशा की शादी के रिसेप्शन में कडाई पनीर और आलूदम खा रहा है । रिशा ने शर्माते हुए कहा वो यहाँ इसी कमरे में मौजूद है । लोहित की कोई हुई खुशियां लौट आई आपने कल्पना में जहाँ लोहित त्रिशा की शादी के रिसेप्शन में खाना खा रहा था, वहाँ उसने खाने का प्लेट फट से रखा और स्टेज पर चढकर डोले की जगह पर खडा हो गया । लोहित के जन्म से लेकर उस बाल तक इतनी ज्यादा खुशी उसे कभी नहीं हुई थी । वो इतना खुश था कि यदि वो एक राजा होता तो अपनी प्रजा के सभी लोगों में हजारों स्वर्णमुद्राएं बाढ देता । ये ऐसा था जैसे लोहित ने एक लॉटरी के तीन टिकट खरीदे हूँ और उसे ही पहला, दूसरा और तीसरा पुरस्कार मिल गया हो । लोहित निश्चित था कि त्रिशा उसी के बारे में बात कर रही है । मगर इसे उसके मुझसे सुनने के लिए उसने फिर पूछा कौन मौजूद है यहाँ पर मुझे तो कोई दिखाई नहीं दे रहा । त्रिशा ने कहा तो उसको उस से मिल पाती हूँ और फिर से खडी हुई डर के मारे लोहित का तो गला सूख गया । लोहित का ध्यान अब उसकी टांगों पे नहीं गया तो निशाने अपनी अलमारी में रखे टेडी बियर को कसकर गले लगाया और कहा देखो ये है मेरा क्रश ऍम । लोहित ने कहा और डैडी को हैंडशेक ऑफर किया । हालांकि टेडी ने कोई जवाब नहीं दिया । लोहित को एक ही समय में दुख और खुशी दोनों महसूस हुई । दुखी इस बात का की वो तृषा का क्रश नहीं था और खुशी इस बात की की उसका रही सिर्फ कैरी है कोई दूसरा लडका नहीं और उसे इस बात की भी खुशी थी की अब उसे बॉन्ड की कुर्बानी नहीं देनी पडेगी । कृषि अपने दोनों हाथों से डैडी को पकडती है और उसकी छोटे काले प्लास्टिक के नाक के साथ अपनी नाक रगडती है । टैपियोका जीवन ही भला सुंदर लडकियों के साथ खेलो । फिर बडे आराम से उनकी अलमारी में सोचता हूँ । कृषि के दोस्त फिल्म देख कर वापस आ गए । अब बॉलीवुड में कहाँ तीन घंटे लंबी फिल्में बनती है । लोहित ने दृशा की सहेलियों से पूछा कैसी लगी मूवी लेकिन तुम्हारी कहानी जितनी दिलचस्प तो नहीं थी । सभी हंस पडे । तृशा की सहेली ने कहा, अब घर चलो की या तो उम्र यही रहने का इरादा है । नहीं नहीं चलो चलते हैं । लोहित पूछा जाते जाते इतना तो बताती जाओ कि हम डेट पर कब चलेंगे । अब तो तुम्हारे पास मेरा नंबर है । हम फोन पर तय कर लेंगे । उस ने कहा और वहाँ से चली गई । लोह इतने बच्चे हुए सेंडविच को खत्म किया और अपने ऑफिस के लिए निकल गया ।

जिनी पुलिस भाग 9

धान ना । अगले दिन लोहित तृषा को कॉल करना जाता था लेकिन किया नहीं । उसने सोचा कि शायद त्रिशा छात्रों को पढाने में व्यस्त होगी । रात में फिर रोहित ने अपने फोन में तृषा का कॉन्टेक्ट खोला और कॉल करने ही वाला था । तब उसे महसूस हुआ कि शायद किसी लडकी को कॉल करने का ये ठीक टाइम नहीं है । मैं उसे कल फोन करूँगा । लोहित सोचा और कमरे की रोशनी मंदिर करके सोने की कोशिश करने लगा । लेकिन कल सुबह वह फिर स्कूल में होगी । ये सोचकर लोहित उलझ गया । इसी उलझन में उसे ऍम भेजने का आईडी आया लेकिन एस एम एस में लिखो क्या ये सोचकर लोहित फिर उलझ गया? डेट कब चलेंगे? लोहित ने इस संदेश को टाइप की आ मगर भेजने से पहले सोचा कि उसे तृषा से पूछना नहीं चाहिए क्योंकि अगर वह पूछेगा तो हो सकता है कि त्रिशा ये कहकर टाल देखी देखते हैं सोचते हैं । इसीलिए उसे सीधा बताना चाहिए की है कि लोहित फिर से सोच में पड गया कि उन्हें लंच में जाना चाहिए या डिनर पर । यदि डिनर पे गए तो तृषा के साथ बताने के लिए समय कम मिलेगा क्योंकि उसे घर जाने की जल्दी होगी । लेकिन अगर लंच पे गए तो कम से कम चार पांच घंटे मिलेंगे । संडे को एक बजे इंडियन ऍम लोहित ने ये मैसेज टाइप किया और फिर से सोच में पड गया । क्या उसे सीधे ऐसे कहना ठीक होगा अगर वह कभी और या कहीं और जाना चाहे तो वैसे अपने क्रश को पहला मैसेज भेजना बडी ही हिम्मत का काम है । लोहित सोच में डूबा था कि जब भी फोन उसके हाथ से फिसलकर उसके चेहरे पे गिरा हाँ और उसके नाक से टच होकर मैसेज सेंड हो गया । टच फोन के साथ ना यही तकलीफ है । ऍम लोहित जोर से चिल्लाया वो इतना डर गया था की घडी होकर उसने कमरे की लाइट चालू की और दिशा में अपना फोन बिस्तर पर पटक दिया । जैसे कि उसने किसी बम से चाबी खींचती हूँ और बम किसी भी मिनट फटने वाला हो । कुछ सेकेंड्स के बाद लोहित का फोन बजा । उसने डरते हुए अपना फोन देखा कि विस्फोट कितना बुरा है । त्रिशा का जवाब आया था ओके । लोहित ने अपने फोन को चूमा और राहत की सांस ली । अच्छा ही हुआ जो संदेश खुद से भेजा गया वरना लोहित सारी रात भर सोचता ही रह जाता है । तकिये को गले लगाकर उसके बारे में सोचते हुए लोहित हो गया । संडे को लोहित समय से पहले ही पहुंच गया क्योंकि वह तृषा के साथ बिताई जा सकने वाला एक विपल गवाना नहीं चाहता था । शहर के फेवरेट रेस्ट्रां की सजावट देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गया । सर्दी का मौसम था । दोपहर को हल्की धूप का आनंद लेने के लिए लोहित ने बाहर बगीचे में रखी टेबल का चयन किया । आधे घंटे के बाद तृषा वहाँ पर आई । उसकी एक झलक मात्र से ही लोहित का इंतजार करना सार्थक हो गया । घुटनों तक लंबी स्लीवलेस ब्लैक ड्रेस में बहुत ही खूबसूरत लग रही थी । लोगों तक जगह पे खडा हो गया ताकि तृषा उसे आसानी से देख सकें । ऊंची हील वाली सैंडल से टिक टॉक की आवाज करते हुए और हाथों में एक चमडे का आकर्षक हैंडबैग पकडे हुए तृषा लोहित के पास आई । लोहित से हाथ मिलाया और उसके लिए कुर्सी खींचती हरी तुम करवाई उसे लोहित को एक व्यापक मुस्कान के साथ पूछा । बस अभी कुछ ही मिनट पहले लोहित ने उसे ये नहीं बताया की वो आधे घंटे से बैठा उसका इंतजार कर रहा था । उसके कहानी, लंबे बाल और उसकी मखमली गोरी त्वचा उसकी खूबसूरती को चार चांद लगा रही थी । रोहित ने उसकी तारीख में कहा तो तुम्हारे बाल कमाल लग रहे हैं क्या? राज्य में से इनका? उसने अपने लंबे बालों को सहलाते हुए कहा, मैं लॉरियल शैम्पू इस्तेमाल करती हूँ । ये एक विदेशी ब्रांड है । रोहित ने नाग चढाते हुए कहा विदेशी ब्रैंड तो बताइए कैसे जडी बूटियों के उपयोग द्वारा पहली बार शैम्पू बनाने की विधि भारत में ही खोली गई थी । शैम्पू शुद्ध संस्कृत के चंपू से ही लिया गया है जिसका मतलब है मालिश करना । क्या सच में हाँ । लेकिन विडंबना यह है कि विदेशी लोग हम से ही सीख कर आज हम से भी बेहतर शैम्पू बना रहे हैं । केवल लोहित जैसा ही एक की है जो अपनी पहली डेट में शैम्पू के ऊपर भाषण दे सकता है । मीटर आया और पूछा सर, क्या ऑर्डर देना चाहेंगे? आप लोग थे । मैंने को थोडी देर देखकर दृशा को थमा दिया । कुछ तो शिष्टाचार के कारण और कुछ इसीलिए की उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था । तृशा हावभाव ने व्यक्ति किया कि उसे भी कुछ खास समझ में नहीं आया । महंगे रेस्टोरेंट में आम चीजों की भी अजीबो गरीब नाम होते हैं । वेटर के साथ सलाह मशविरा करने के बाद उन्होंने ऑर्डर किया और बेटर वहाँ से चला गया । एक्सक्यूज में तृषा ने कहा और टेबल पर अपना विशाल हैंड बैग रखकर वाशरूम चली गई । लोहित को ये जानने की जिज्ञासा थी कि बना एक लडकी अपने हैंड बैग में चार रखती होगी । लोग इतने हैंड बैग को खोलकर देखने का सोचा । लोहित के दिमाग ने कहा कि किसी और के बैग को खोलना गलत है लेकिन दिल्ली कहा इसमें गलत क्या है? मैं सिर्फ देख रहा हूँ, कुछ चुरा नहीं रहा । आखिरकार दिल्ली बाजी जीत ही ली और लोहित ने दर्द हुए बात कीजिए खोली उस छोटे से बाद में पूरी दुनिया देख कर लोहित दंग रह गया । उसमें लोहित की अलमारी से भी ज्यादा सामान था जैसी की छोटा दर्पण, सेलफोन, मेकप के क्रेडिट कार्ड, कुछ सिक्के, चॉकलेट, माॅस्, नील फाइल । पिछले साल के एटीएम, रसीद फॅार चाबियाँ, पुरानी मूवी टिकट, कुछ पैसे, बॅाल चार्जर, ऍम और एक छोटा बहुत जिसमें पचास और आइटम थे, उसमें छोटी पॉकेट बुक भी शामिल थी । इससे पहले की तृषा वाशरूम से वापस आए । लोहित ने बात बंद करके वापस कर दिया । तृषा के आने पर लोग इतने पूछा क्या? तो मैं किताबें पढना पसंद है? हाँ, तुम्हारा पसंदीदा लेखक कौन हैं? रोहित किसी विदेशी लेखक का नाम सुनने की उम्मीद कर रहा था जो उसने पहले कभी सुनाना हो । लेकिन उसने कुछ ऐसा कह दिया कि जैसे वह पूरी तरह आश्चर्यचकित हो गया । ऋषि व्यास क्या हाँ उन्होंने महाभारत लिखी है जो अब तक की सबसे महान किताब है । उसने कहा और अपने हैंड बैग से महाभारत की छोटी सी पुस्तक निकली । महाभारत में ऐसा क्या महान है कुछ? बल्कि खामोशी के बाद तृषा ने कहा ये पूछो की क्या महान नहीं है । इसका हर शब्द महाकाव्य है । जो कुछ भी दुनिया में होना संभव है इसमें पहले से उसका वर्णन है । प्रेम, घृणा, नफरत, एशिया लोग तो किसी भी भावना का नाम, लोग वो सब इसमें मौजूद हैं । राजनीति, कूटनीति, कल्याण, उपकार, धोखा, बलिदान, धर्म हरी । इस दुनिया में ऐसा क्या है जिसका वर्णन महाभारत में नहीं हुआ हूँ । लोह इतने त्रिशा की बातों के सहमती जताते हुए कहा और महाभारत में तुम्हारा पसंदीदा पात्र कौन है? भगवान श्रीकृष्ण । उन्होंने अर्जुन को जो ज्ञान दिया वह अमूल्य है । वेटर उनके लिए खाना लेकर आया । बिरयानी की स्वादिष्ट सुंघने उनकी भूख को और बढा दिया । लोहित ने पूछा तो में लगता है की ये सब वास्तविक है । रियल है । महाभारत का युद्ध कभी हुआ था । महाभारत सच में हुई थी या नहीं इससे कोई फर्क नहीं पडता है । मान लो की ऐसा कुछ कभी हुआ ही नहीं । मान लो कि भगवान है ही नहीं और महाभारत सिर्फ एक मान्य घनन खानी है । ये सोचो कि गैस कहानी से हम कुछ सीख नहीं सकते । आखिर जिंदगी एक कहानी ही तो है जिसमें एक नायक है और एक खलनायक एक शुरुआत है और एक हर कहानी कुछ न कुछ सिखाती है । रोहित को त्रिशा की बाद इतनी दिलचस्पी लगी कि उसकी रोंगटे खडे हो गए । उसने तृषा से पूछा तुम्हारी कहानी का नायक कौन है? हर कोई अपनी कहानी का नायक होता है । बडी बात तो तब होगी जब इंसान दूसरों की कहानी का नायक बने । तृशा की बातें भी उतनी ही गहरी थी जितनी उसकी आंखें । एक स्कूल की शिक्षिका और दूसरा तकनीकी विशेषज्ञ । आपने रोमेंटिक डेट में भला वो बाहर क्या बातें करते हैं? अच्छा ये सब छोडो और मुझे अपनी तृषा के बारे में बताओ । आगे क्या हुआ? तुम दोनों अलग कैसे हुए? लोह इतने उदास होते हुए कहा कि ये बहुत ही दर्दनाक कहानी है । उसने शहर छोडकर जाने से पहले मुझे बताया तक नहीं । उसकी याद में मैं महीनों तक रोता रहा । उसने मुझे अलविदा तक कहने की जहमत नहीं उठाई । उसने तो में इसीलिए नहीं बताया क्योंकि शायद उसके पास तो में ये बताने की हिम्मत ही नहीं थी । शायद उसने कोशिश की होगी अपने घर में दर्पण के सामने तो में ये बताने का अब इतिहास भी क्या होगा कि वह जा रही है हमेशा के लिए ये शहर और तो मैं छोडकर की फिर कभी जिंदगी में वो तो में देख ले सकेगी की उसे जाना होगा । उसके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है । शायद वो भी रात को तकिये के नीचे अपना चेहरा छिपाकर रोई होगी । नई जगह जाना आसान नहीं होता । लोहित ये कहते हुए कृष्णा की मोह रखी नाम हो गई । रोहित ने उसकी आंखों से निकले आंसू पहुंचने के लिए उसे एक टिशु पेपर सौंपते हुए कहा क्या हुआ तो इतनी भावुक क्यों हो रही हो? तुम्हारी खानी है ही इतनी भागों । हर मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था । लोहित ने फिर से सोचा कि कहीं लडकी ही उसकी तृषा तो नहीं है । कुछ पल रुकने के बाद लोहित ने फिर कहा काश जाने से पहले सिर्फ एक बार मुझसे मिल लेती हूँ । एक बार मेरे गले लग जाती तो शायद ही जिंदगी कुछ आसान हो जाती है । उसकी ऐसे बिना मिले चले जाने से आज भी मेरे सीने में दर्द होता है । मुझे नहीं पता कि मैं उसे दोबारा देख पाऊंगा भी या नहीं । वो कहाँ है, कैसी दिखती है और उसे मैं या तो वो भी या नहीं तो मैं कैसे कोई भूल सकता है । रोहित और तुम्हारी तो शक्ल भी नहीं बदली । आज भी वैसे ही देखती हूँ बच्चे जैसे उसकी । ये कहती ही लोहित झट से समझ गया कि वह लडकी ही असल में उसकी तृषा है । अंदाजा तो शुरू से ही था मगर जब उसे कहा कि वह कभी मुंबई गए ही नहीं तो लोहित को यकीन करना पडा । लोहित ने कुछ नहीं कहा बस अपनी बाहें फैलाकर खडा हो गया । वो भाग कर लो, हिट की बाहों में लिपट गई ।

जिनी पुलिस भाग 10

भांदस लोह इतने भावुक होते हुए कहा कहाँ? इतने साल मैं डर गया था कि हम फिर कभी मिलना सकेंगे । तृषा ने बडे ही प्यार से कहा लेकिन देखो हम मिले । मैंने भी तो ढूंढने की बहुत कोशिश की । मैं नहीं मानता कि तुमने कोशिश की तो मेरी मेरी इतनी भी परवानी जाने से पहले एक बाहर अलविदा कह सकता हूँ । तो मैं सच में लगता है कि मैंने तो मैं इसीलिए अलविदा नहीं कहा क्योंकि मुझे तुम्हारी परवानी थी । वे अपनी सीटों पर वापस बैठ गए । लोग उन्हें घूर रहे थे । हाँ लगता तो यही है । मुझे विश्वास नहीं हो रही थी तो मेरे बारे में इस तरह से सोच होगी । अगर ऐसा नहीं है तो बताओ तुमने बताया कि उन्हें कि तुम्हारे पापा का ट्रांस्फर हो गया है और तुम जाने वाली हूँ क्योंकि तो मैं ये बताना मेरे लिए बहुत मुश्किल था । मैं तो मैं दुखी नहीं देख सकती थी तो उन्हें अलविदा कहना मेरे लिए दुनिया का सबसे मुश्किल काम था । लोहित ने तृषा को छुडाते हुए कहा, और मुझे बताए बिना जाना आसान लगा तुम्हें । मैं सिर्फ सोलह साल की थी और कितनी अगले होती । मुझे और मेरे दिल की गहराइयों में मुझे यकीन था कि हम फिर मिलेंगे । रोहित के फोन में एक ईमेल नोटिफिकेशन आया । उसने अपनी जेब से फोन निकाला लेकिन फिर वापस रख लिया । तृषा ने कहा, देख लो, कहीं कुछ खास हुआ तो तुमसे ज्यादा खास । मेरी जिंदगी में कुछ हो ही नहीं सकता । अच्छा ये बताओ । जब हम बस में मिले थे तो तुमने मुझे क्यों नहीं बताया कि तुम्ही मेरी तृषा हूँ । मैं जानना चाहती थी कि तुम्हें मेरे बारे में कितना याद है । तो इसीलिए मेरी कहानियां सुनने के लिए तो मैं इतनी एक्साइटेड थी । लोग इतने समय देखने के लिए अपने फोन को अनलॉक किया और होम स्क्रीन पर पहले आई ईमेल की विषय पंक्ति पढकर चौंक गया । फॅस बुक से अधिग्रहण प्रस्ताव टू ऍम, लोहित, ऑफिसियल ऍम सीसी जेडीयू, सीकेएस रेड एफ बी डॉट कॉम, हाई लोहित मांगने, आपकी स्टार्ट अप कंपनी को देखा और उसकी टेक्नोलॉजी को काफी पसंद किया । उनका कहना है कि अगर हम आपकी टेक्नीक को फेसबुक में शामिल कर ले तो हम फेसबुक को और भी बेहतर बना सकते हैं । इसलिए आप की कंपनी के अधिग्रहण प्रक्रिया पर आगे चर्चा करने के लिए मैं आपको फेसबुक मुख्यालय आने का न्यौता देती हूँ । मार्क व्यक्तिगत रूप से आपसे बात करना चाहते हैं । आप की कंपनी के अधिग्रहण के लिए हमारे वित्तीय सलाहकार द्वारा अनुमानित मुआवजा लगभग बीस मिलियन डॉलर है । यदि आप इस प्रस्ताव को लेने में रूचि रखते हैं तो कृपया हमें अपनी सहमती भेजे ताकि मैं माँग के साथ आपकी बैठक तय कर सकूँ । यदि आपके पास अधिग्रहण के बारे में कोई प्रश्न है तो मुझसे पूछे प्रस्तावित तिथि अक्टूबर दो हजार बीस प्रस्तावित समय शाम साढे चार बजे । स्थान फेसबुक मुख्यालय ऍम सी यू एस ए सादर अनेक रिकॉर्ड सचिव फीस को वाओ लोहित वह ईमेल पड की खुशी से झूम उठा तो मेरे लिए ना बहुत भाग्यशाली होते । मुझे इस ईमेल में अपनी जिंदगी कि सबसे बडी खुशखबरी मिली है । तो क्या अब ये मुझ से भी खास है? लोहित ने मुस्कुराते हुए कहा एक तरह से हाँ कृषि कोएशिया महसूस हुई । मुझे मार्क जुकरबर्ग के ऑफिस से ईमेल आया है वह बधाई हो । वैसे कौन है ये मांग? सुख रबर अगर तो फेसबुक यूज करती तो तो मार्क जुकरबर्ग को कैसे नहीं जानते क्योंकि वो मेरी फ्रेंड लिस्ट में नहीं है । वो फेसबुक के संस्थापक है जो दुनिया के दूसरे सबसे अमीर लोगों में से एक है । मुझे नहीं पता था अच्छा ये बताओ क्या तो बिजली का यूज करते हो । हाँ बिल्कुल करता हूँ तो क्या तुम जानती हूँ कि बिजली का आविष्कार किसने किया था? लोहित को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने माफी मांगे हो । सौरी आर पैसे ईमेल में लिखा क्या है? फेसबुक मेरी स्टार्ट अप कंपनी खरीदना चाहती है । उन्होंने मुझे ट्वेंटी मिलियन डॉलर्स की पेशकश की है । ट्वेंटी मिलियन डॉलर वाओ लगता है । बहुत बडी रकम है ये । कितना रुपया हुआ अपने फोन में कैलकुलेशन करके । लोहित ने जवाब दिया लगभग एक सौ सत्तर करोड रुपए । ये भगवान क्या करोगे तुम? इतने सारे पैसों का ये कंपनी मेरा सपना है और मैं अपना सपना कभी नहीं होगा । तो बाहर आ मतलब है कि तुम एक सौ सत्तर करोड रुपये के ऑफर को ठुकरा दोगे । देशक कृष्णा ने कहा, सपने अक्सर पूरे नहीं होते हैं, उनकी नहीं होते होंगे । जो बंदा घुसे सपने देखते हैं । मेरी कंपनी का मूल एक सौ सत्तर करोड रुपयों से कहीं ज्यादा है तो देखना एक दिन मेरी कंपनी फेसबुक से भी बडी हो जाएगी । लेकिन ट्वेंटी मिलियन डॉलर से बडा आखिर क्या हो सकता है? फेसबुक का नेटवर्क लगभग पचास बिलियन डॉलर्स है और हम चाहती हूँ की मैं केवल बीस मिलियन डॉलर से ही संतुष्ट हो जाऊँ । ठहरो पहले ये बताओ की पचास बिलियन डॉलर्स होते कितने हैं तीन लाख करोड रुपए? क्या तृषा ने इतना बडा मुंह खोला की लोहित उसके सारे दाद गिन सकता था? क्या किसी एक व्यक्ति के पास इतना ज्यादा पैसा होना संभव है? ऐसा नहीं है कि उनके बैंक खाते में इतना पैसा है लेकिन ये उनके कुल व्यवसाय और संपत्ति का मूल्यांकन है । इसका मतलब है कि अगर वे अपना सारा कारोबार भेज देंगे तो उन्हें इतने पैसे मिलेंगे । बातें करते करते उन्होंने खाना खा लिया और वेटर ने टेबल भी साफ कर दी । अगर तुम अपनी कंपनी को बेचना ही नहीं चाहते तो तो मैं सीमेल के आने से इतना खुश हूँ । माँ की इस ईमेल का मतलब है कि मैं अपना काम सही कर रहा हूँ और मैं सही दिशा में आगे बढ रहा हूँ । हाँ और इसका मतलब तुम्हारी कंपनी का मूल्यांकन है । एक सौ सत्तर करोड रुपए बिल्कुल सही । लोग इतने मैंने खोला और तृषा के सामने रखा । चलो कोई कॉकटेल ऑर्डर करते हैं तृषा नहीं, मैंने में छपे कॉकटेल के नाम पडने शुरू किए ऍम ऍम बीच लोग इतने हस्कर कृष्णा की और देखा और कहा खाने पीने की चीजों की कोई ढंग की नाम ही नहीं मिलते गए । नहीं तृषा ने पे मोबाइल में गूगल खोला और कहा ऍम बीच क्या है? मैं गूगल में सर्च करती हूँ । लोग इतने तुरंत उसे रोकते हुए कहा नहीं नहीं, इससे सच मत करूँ । हम वेटर से ही पूछ लेंगे । लोहित सोचा कि अपना गूगल को कैसे पता चलेगा कि हमसे एक सॉन्ग बीच देना चाहते हैं या फिर करना? कैसे उस ईमेल को याद करते हुए परेशानी पूछा । तुम क्या करोगे अगर सच में तुम्हें इतने पैसे मिल जाए । मैं से बडी ही होशियारी से निवेश करूंगा ताकि मैं और भी ज्यादा पैसा कमा सको और ज्यादा पैसे कमा के क्या करोगे? मुझे नहीं पता शायद मैं दुनियाभर की खुशियाँ खरीद लूंगा । अगर तुम खुशियां बटोरना चाहते हो तो एक बंदे बनो, नहीं किया करो । इस जहाँ में मैं सरकार को भारी भरकम टैक्स देता हूँ, करने दो । उन्हीं को सारी नहीं क्या टैक्स भरना ही काफी नहीं है । रोहित अपनी खुशी के लिए दान करना भी जरूरी है । दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जिनके पास मुझे कहीं ज्यादा पैसा है । उनके होते हुए भला मैं क्या दान करूँ । ये सोच गलत है कि जिसके पास ज्यादा पैसा है वह ज्यादा दान करेगा और जिसके पास काम है वो काम ही कर सकता है । दान देना तो देने वाले की इच्छा पर निर्भर करता है । लोहित ने मासूमियत से पूछा ही गया तो फिर तो बताओ कि मुझे क्या करना चाहिए । जब तुम्हारा हौसला बुलंद होगा और नियत साफ होगी तो नियति तुमें मौका जरूर देगी । तो महारा दिल तो में खुद ब खुद बता देगा । जब सही समय आएगा बशर्ते तुम अपने दिल की सुनो, अपने दिल की सुनना भी तो बडी हिम्मत का काम है लोहित हौले हौले मुस्कुराने लगा और तृषा को देखकर सोचने लगा कि इतनी चुलबुली सी दिखने वाली छोटी सी लडकी कितनी गहरी बात करती है । हरे तुम तो आपने टेक्निकल नॉलेज से चमत्कार कर सकते हो । आखिर तुम्ही तो कल की सुपर हीरो सुपर हीरो सुपर हीरो बनने के लिए मेरे पास कोई सुपर पावर नहीं । मैडम जो बहाने बनाते हैं वो फिर कुछ नहीं बनते हैं और वैसे विलोहित सिर्फ ऊपर पावर से ही सुपर हीरो नहीं बनते तो वो अब बस भी करूँ । आज के लिए इतना ज्ञान काफी है, कुछ आगे के लिए भी छोड दो आखिर सारी जिंदगी तो मैं यही तो सुनना है । ये सुनकर दृशा थोडा शर्मा गई पैसे बिजली का आविष्कार किसने किया था? लोहित ने एक का एक पूछा तृषा ने हसते हुए बताया । बेंजामिन फ्रैंकलिन ने लोहित दिशा की टांग खींचते हुए कहा ठहरो मैं ये कैसे मान लो कि तुम्ही मेरे बचपन की तृषा हूँ मेरे पैसों के लिए तो मुझसे झूठ भी तो कह सकती हूँ । आखिर में एक मिलियन डॉलर कंपनी का मालिक हूँ । एक नंबर के गोबर गणेश होता हूँ । एक तो मुझे पहचाना नहीं और अब मुझ पर शक कर रहे हो । ठीक है मैं नहीं वो तुम्हारी तृषा जा रही हूँ मैं वो खडी हुई और वहाँ से जाने लगी । लोहित ने हस्कर पीछे से उसका हाथ थाम लिया और कहा भारी बाबा मैं मजाक कर रहा था । वो हमेशा से लगता था कि तुम ही मेरी तृषा हो । लेकिन तुम ने कहा कि तुम कभी मुंबई गए ही नहीं । बारह साल हो गए तो और भी ज्यादा खूबसूरत हो गई हो इसलिए मैं नहीं पहचान सका । हाँ मगर फिर भी गोवर गणेश तो तुम को ही वो कैसे तो मुझे इतना प्यार करते हो तो मुझे पहले बताया क्यों नहीं पहले काम जब हम स्कूल में थे तो क्या तुम भी मुझे पसंद करती थी? तृशा हामिद सर हिला दिया तो तुमने मुझे क्यों नहीं बताया? मैं कैसे कहती? पहले मैं एक लडकी हूं । हर लडकी अपनी लाइफ में एक बार इस लाइन का प्रयोग जरूर करती है । मैं डरता था तुमसे ये कहने से मुझ से डरते थे तो तुम से नहीं तो मैं एक होने से मुझे डर था कि कहीं तुम ना कह दो और हमारी दोस्ती टूट गई तो तो में कम से कम एक बार पूछना तो चाहिए था । अभी पूछ लेता हूँ क्या? अब बहुत देर हो गयी है । मुझे नहीं पता पूछ लो शायद देना हुई हूँ । तृषा ने लोहित को आंख मारते हुए कहा लो ही तुरंत अपने घुटनों पर बैठ गया और अपने हाथों से उसका हाथ पकड लिया । तृशा ने अपनी बल्कि गिरा दी । लोहित अब आस पास के लोगों की परवाह नहीं कर रहा था । जो ने देख रहे थे । उनकी तरफ आ रहे वेटर ने भी उन्होंने देखकर रास्ता बदल लिया । परिस्थितियों ने हमें ज्यादा किया लेकिन नियति चाहती थी कि हम फिर मिले वादा घरों की तो मुझे फिर कभी छोड कर नहीं जाओगी और अगर गरीबी तो बता के जाओगी । लोग इतने शरारती अंदाज में तृषा को छोडने के लिए कहा । तृषा हंस पडी । जब मैं तुम्हारा हाथ धाम लेता हूँ तो मुझे महसूस होता है । जैसे मेरे पास तो सब कुछ है जिसकी कभी कोई काम ना कर सकता है । जैसे मुझे मुकम्मल जहाँ मिल गया हो, जैसे मुझसे ज्यादा खुशकिस्मत कोई है ही नहीं । रिशा खुश लग रही थी । बेहद खुश फिर अचानक से उसने पूछा और अगर मैं फिर तुम से दूर चली जाओ तो क्या करोगे? मैं ऐसा होने ही नहीं दूंगा और मान लो अगर तुम चली भी गई तो मैं तो मैं ढूंढ निकालूंगा तो मिस तृषा दत्ता क्या तुम अपनी जिंदगी के सभी पासवर्ड्स मुझे बताओगी धरे ऐसे कौन बोल करता है लोग? इत ऍफ इंजीनियर ऐसी प्रोपोज करते हैं क्या? तो मुझे तुम्हारा सारा एक्सिस प्रोवाइड कर होगी । हाँ, लोग इतने फिर कहा मैं जीवन की सारी वेबसाइट्स तुम्हारे साथ साफ करने का वायदा करता हूँ । यदि कोई वायरस कभी तुम्हारे सिस्टम को परेशान करे तो मैं तुम्हारा एंटीवायरस बनने का वादा करता हूँ । कृष्णा ने भी शरारती अंदाज में लोहित को जवाब दिया व्हाट्सएप्प है ग्रीन फेसबुक है ब्लू हेलो मिस्टर लोहित आॅन । उन दोनों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था । दोनों अपनी अपनी सीट पर बैठ गए । ये लोहित की जिंदगी का सबसे अच्छा दिन था । उसे उसके बचपन का खोया तैयार और उसके आदर्श व्यक्ति माँ की तरफ से ईमेल मिला । वेटर ने उनके पास जाकर कहा और कुछ लाओ सर । लोहित नीतिशा को आंख मारते हुए कहा नहीं, मैं जो कुछ भी चाहता था, मुझे वो सब मिल गया । वेटर की उलझन मिटाने के लिए त्रिशा ने कहा कुछ नहीं बस बिल्लियाँ हूँ । वो धीरे धीरे चलते हुए रेस्ट्रों से बाहर निकले । पहले तुम अपने मम्मी पापा से हमारे बारे में बात करना और फिर मैं भी अपने घर पे बात करोंगे । हाँ, जहाँ अब मैं एक पल भी इंतजार नहीं कर सकता हूँ ।

जिनी पुलिस भाग 11

भाग ग्यारह कुछ दिनों बाद सुबह निशाने लोहित को फोन किया और उस पर चलाना शुरू किया । क्या तुमने अभी तक अपने मम्मी पापा से बात की? लोहित ने नींद में कहा किस बारे में तो मुझसे शादी करना चाहती हूँ या नहीं । नहीं वहाँ मेरा मतलब मैं शादी करना चाहता हूँ लेकिन मैंने अभी तक बात नहीं की है । लोहित की दोनों आंखें अभी भी बंद थी । पुत्र शाह को अपनी बाहों में कल्पना कर रहा था तो तुम कब बात करोगी? मेरी किसी और से शादी हो जाने के बाद जल्दी करूंगा । क्या करूँ मुझे शर्म आती है । त्रिशानु कडक अंदाज में कहा, मैं आर्यन को शादी के लिए हाथ होंगे । अगर तुमने अपने घर पे आज ही बात नहीं की तो एक बाल में लोहित की सारी नींद गायब हो गयी । वो दिशा को फिर से खोने के विचार से सहम गया । कौन आर्यन वो अमेरिका में रहता है और गूगल में काम करता है । उसकी माँ ने मेरी प्रोफाइल एक वेडिंग वेब साइट पर देखी जहाँ मेरे पापा ने मेरा प्रोफाइल बनाया था । वो लोग फिदा हैं मुझे कल वो भारत आ रहे हैं और हमारे घर भी आएंगे तो क्या हुआ तो उसे ना पसंद कर देना । भारत में लडकियों से उनकी पसंद पूछते ही कहा है और मुझे उसे ना पसंद करने की कोई ठोस वजह देनी होगी । और सबसे बडी परेशानी तो ये है कि मेरे माता पिता को भी बहुत पसंद है । हमारी जाति का है, अच्छा कमाता है उसका परिवार बहुत अच्छा है संभाला मेरे मम्मी पापा को और क्या चाहिए? लोहित थोडा सोचने के बाद वकालत की कह देना की वह देखने में अच्छा नहीं है कि ये सुनकर तृषा जोर से हंसने लगे । इसमें हसने की क्या बात है कोई अंदर ही होगा जो ये कहेगा कि वह देखने में अच्छा नहीं है । छह फीट लंबा गोरा और इतना हैंडसम है कि जब चाहे फिल्मों में हीरो बन सकता है । लोहित का तो दिल बैठ गया । उसकी नाक लाल हो गई और कान से धुंआ निकलने लगा क्या? तो मैं भी वो पसंद है जिस तरह से तृषा उसकी तारीफ कर रही थी । लोहित खुद को ये पूछने से रोक नहीं सका । मैं उसे खुशी से शादी कर लेती अगर बचपन में तुम्हारी चक्कर में पसीना होते हैं । चलो अच्छा है मैंने सही टाइम पे पटा लिया । तुम है उससे निपटने की मेरे पास एक्टर की है । क्या मैं उसके खिलाफ कोई सबूत इकट्ठा कर लेता हूँ । अमेरिका में रहता है तो उसका कोई चक्कर वक्त तो चली रहा होगा । यहाँ शराब तो पिता ही होगा और अगर अच्छा कमाता है तो जो अभी खेल का ही होगा, कुछ नहीं मिलेगा तो मैं मेरे पापा ने अच्छे से जांच पडताल कर ली है । लडका हीरा है हीरा । उन दोनों के बीच कुछ सेकेंड्स की खामोशी पसर गई । लोहित सोच रहा था कि काश जिंदगी में एक बार तो आर्यन से मिले ताकि इतना प्रॉफिट होने के लिए उसके मुंबई एक मुक्का मार सकें । लोहित में अपने तरीके से यहाँ संभाल होंगे तुम बस वहाँ अपने पेरेंट्स से जल्दी बात करूँ । ठीक है । लोहित ने फोन रखा और कम्बल से निकलकर झटपट कमरे से बाहर चला गया । लोहित के पापा लिविंग रूम में बैठकर अखबार पढ रहे थे । लोहित चुप चाप उनके बगल में जाकर बैठ गया और सोचने लगा कि वह इस बात को शुरू कहाँ से करें । पापा के हाथ में वार्ता और उनका चेहरा ढका हुआ था । गुड मॉर्निंग पापा लोहित ने कहा, कम से कम होने, अपनी उपस् थिति से अवगत कराने के लिए तो तुम आज इतनी जल्दी जात गए । लोग इतने आहिस्ते से हसते हुए कहा बस योगी पापा ने अखबार पढना फिर से शुरू कर दिया और अखबार पर छपी खबर को पढकर सुनाया । अपने बूढे महाबाद को छोडकर एकलौता बेटा दूसरी जाति की लडकी के साथ भागा । ये सुन कर लो है तो हक्का बक्का रह गया । पापा ने लोहित को ऐसे घूमते हुए कहा जैसे वो भी घर से भागने ही वाला हूँ । इस बीडी के बच्चों को देखो स्कूल या कॉलेज में किसी से आकर्षित हो जाते हैं और इसे ही प्यार समझ लेते हैं । वे जानती नहीं है कि सच्चा प्यार होता क्या है? और इस अच्छा प्यार तो हमारे जमाने में हुआ करता था जब हम शादी से पहले लडकी की तस्वीर तक नहीं देखा करते थे । अपने जीवन साथी को हम शादी हो जाने के बाद ही देखते थे । केवल हमारे माता पिता ही हमारे लिए फैसले लिया करते थे और शादियाँ उन दिनों हमेशा के लिए टिकती थी । लोह इतने नाखून चबाते हुए सिर्फ लाया तो मैं क्या लगता है? क्या कारण है कि आजकल तलाक की दर इतनी ज्यादा बढ गई है? लोहित खामोश रहा और मन में ही जवाब देने लगा क्योंकि आजकल लडकियां भी शिक्षित होती हैं, अपना हक जानती है या फिर इसीलिए की आजकल बेहतर वकील उपलब्ध है । रोहित की चुप्पी को उसकी हामी समझकर पापा ने फिर कहा, आजकल बच्चे अपनी पसंद से शादी कर लेते हैं । अपने माता पिता से पूछते तक नहीं । बीजी से प्यार समझते हैं । ज्यादातर समय वो महज एक आकर्षण होता है जो शादी के तुरंत बाद खत्म हो जाता है । फिर दोनों में लडाइयां होती है । जिसके बाद तलाक की नौ बताती है । उन्होंने लोहित की प्रतिक्रिया लेने के लिए उसकी और देखा । लोहित ने बिना सोचे हमें सर हिला दिया । उन्होंने आगे कहा, लेकिन मुझे गर्व है कि मेरा बेटा बहुत सीधा है । वो सिर्फ अपने काम से काम रखता है । उसके पास ऐसी लडकियों को देखने की फुर्सत तक नहीं है जो लडकों को उनकी माता पिता से दूर करें । क्यों भई रोहित है ना सही गाना । मैंने लोहित का चेहरा पीला पड गया । वह कुछ नहीं कह सका । उसका उतरा हुआ चेहरा देखकर पापा ने फिर कहा क्या हुआ बरखुरदार, तुम्हें किसी लडकी के साथ भागने की फिराक में हो गया । नहीं तो कभी नहीं, कभी नहीं । रोहित ने खुद को कोसते हुए मन में सोचा । इस समाचार को भी अखबार में आज ही सपना था । क्या माँ को मनाना आसान होगा । रोहित ने सोचा और उनसे बात करने के चला गया । रोहित जी नहीं और माँ को सबसे काटते हुए देख सकता था । फिर भी बातचीत शुरू करने के लिए उसने कहा हाँ क्या कर रही हूँ? मैंने बेरुखी से पूछा क्या काम है तुझे काम ऐसा काम किया मैं योगी अपनी माँ से बातें करने नहीं आ सकता । मुस्कुराते हुए माने बोला पिछले पच्चीस सालों में बस एक बार आया था जब तुझे साइकिल चाहिए थे । अब क्या चाहिए? बताओ मुझे आप की चिंता है । हाँ, अब सारा दिन घर पे अकेले रहते हो । किसी को होना चाहिए ना आपके साथ लोहित रे साहस बटोरते हुए सबकुछ सीधे कह दिया जिन्होंने अपनी रोबोटिक आवाज में कहा मैं हूँ ना माँ के साथ तुम चुप रहो जी नहीं लोग इतने डरते हुए कहा माँ ये तो सिर्फ मशीन है तो मैं किसी इंसान के साथ की जरूरत है । मैं सिर्फ एक मशीन हूँ । सिर्फ एक मशीन जिन्होंने इस बात को तीन बार दोहराया और अपनी अलमारी में ऐसे रूट कर बैठ गए । मानव सच में वो लोहित की बीवी हो । मैंने उत्साह से भरकर पूछा हो अब मैं समझी क्या यह सच है? रोहित क्या तुम सच में तैयार हूँ? रोहित ने राहत की सांस लेते हुए सोचा की माँ आखिरकार समझी गयी माँ की आंखों में खुशी साफ झलक रही थी । उन्होंने सब्जियाँ काटना बंद कर दिया और लोहित के पापा से अपनी खुशी साझा करने रसोई के बाहर गई । सुनो जी खुशखबरी है, लोहित मान गया है । लोहित दूर खडा शर्मा रहा था । किस लिए मान गया? पापा ने पूछा हमे शाम का एक इशारा तक बाबा झटपट से समझ जाते थे लेकिन उस दिन तो जैसे सारे सितारे लोहित के खिलाफ थी । हरे आप देना इतनी सी बातें समझते हैं । लोहित घर में एक नई नौकरानी रखने के लिए मान गया है क्या लोहित चौंक गया नहीं माँ में नौकरानी की बात नहीं कर रहा हूँ । मैंने कहा तो मैं ही तो कहा कि मुझे किसी के साथ की जरूरत है तो अगर नौकरानी नहीं तो फिर कौन एक बाद में साफ कह देती हूँ । हाँ, मुझे अपने घर में एक और रोबोट हरगिज नहीं चाहिए । खतरा शो कर लोहित अपने कमरे में चला गया । दरवाजे के पीछे लटके तोलिये से अपने चेहरे पे आए पसीने को पहुंचा हूँ और कुछ हिम्मत बटोरते हुए वापस आया । मुझे लगता है कि मैं तैयार हूँ । लोहित ने उन्हें फिर समझाने की कोशिश करते हुए कहा माने फिर पूछा अकबर धाबी दे किस के लिए तैयार है? लोहित से अब और रहा नहीं जा रहा था । उसने लाज शर्म का त्याग करके कहा आप मुझसे शादी करने को कह रही थी ना? मैं तैयार हूँ तो शादी नहीं । बेटा तो मेरे लिए ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है । मुझे बताइए कि तुम इस कच्ची उम्र में अभी नहीं करना चाहते हैं तो ये सब सिर्फ मेरे लिए कर रहे हो लेकिन मैं इतनी स्वार्थी नहीं हूँ और वैसे भी जिन के साथ मेरा गुजर बसर हो ही रहा है । लोहित ने सोचा कल सबसे पहला काम तो ये करूंगा कि इस जिनी की बच्ची को वापस ले जाऊंगा । नहीं माक्सवार्दी तो मैं था जो मैंने पहले इंकार कर दिया । मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ । थोडा और समझाने के बाद मैंने कहा चलो अच्छा है कि तुम शादी के लिए मान गए । हमने तुम्हारे लिए एक लडकी भी देख रखी है । लडकी है क्या? लोहित चौंक गया । पापा ने कहा हाँ बेटा लडकी क्या तुम लडकी से शादी नहीं करना चाहते? कितने लडकियों से ज्यादा लडकी पसंद है? नहीं पापा ऐसा नहीं है । मुझे एक लडकी से प्यार है । माँ चिल्लाई किया तो प्रेम विवाह करना चाहते हो तो अपनी पसंद की लडकी से शादी करना चाहती हूँ । लोहित को लगा था कि माँ पापा को समझाने में मदद करेगी लेकिन उन्होंने तो मामला और ज्यादा बिगाड दिया । पापा केवल तीन शब्द ही बोल पाए आकर्षण शादी तलाक माँ में उस लडकी से सच्चा प्यार करता हूँ । क्या नाम है उस लडकी का? तृशा तृशा क्या कौनसी जाती? मैं चाहती तो पूछ सकती थी कि वो कहाँ तक पडी है । देखने में कैसी है तो उससे पहली बार कहा मिला वगैरह वगैरह । लेकिन नहीं हिंदुस्तानी माँ बाप के लिए जात पात से बढकर कुछ नहीं न जाने की सोच कब बदलेगी । तृषा तत्ता बंगाली है । लोहित ने ये कहते हुए अपनी आंखे बंद कर ली । हर समय लोहित के माता पिता ने लोहित का साथ दिया । जब लोग इतने इंजीनियरिंग करने का फैसला किया तब भी जब उसने नौकरी छोडकर दिल्ली में खुद की सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू करने का फैसला किया तब भी उसे विश्वास था कि वे उसे उसके पसंद की लडकी से शादी करने से भी रोकेंगे । नहीं किया एक बंगाली लडकी तुम चाहते हो कि एक बंगाली लडकी अग्रवाल खानदान की बहू बनी । उसका और हमारा मेल तो जैसे चूका मुरब्बा तुम चाहते हो वो मेरी रसोई में मछली पकाएंगे । हम जिंदगी भर मछली खायी । अरे नॉनवेज खाना तो दूर देख कर ही मुझे उल्टी आती है । लोहित की माँ ऐसी चिल्लाने लगी जैसे किसी ने एक जिंदा मछली उनके भूमि डाल दी हो । वहाँ वो शाहकार ही खाना भी खाती हैं और मैं उनसे बात करूंगा । वो घर में मछली नहीं खायेगी लोगों की । जबकि वहाँ के गुस्से वाले चेहरे को देखा और फिर कहा घर में तो क्या वो बाहर भी कभी मछली दिखाएगी? वो भी हमारी तरह शाकाहारी बन जाएगी । लोग इतने वादा तो कर दिया लेकिन उसे डर था कि त्रिशा मानेगी या नहीं । पता नहीं वो लोहित से ज्यादा प्यार करती है या मछली से चुप रहो । लोहित मेरे घर को मच्छी बाजार मत बना हूँ । हमने तुम्हारे लिए एक लडकी पसंद कर ली है और अब वही इस घर की बहू बनेगी बस । लेकिन हाँ लोहित ने विरोध करने की बहुत कोशिश की माने समझाते हुए कहा कम से कम उसे एक बार देख तो लो । वो इतनी सुंदर है की तुम एक सेकंड में अपनी बंगालन को भूल जाओगे । मैंने अपने फोन पर उस लडकी की दसवीं होली और लोहित के पास गई नहीं । मैंने देखूंगा उसे अपनी आंखे बंद करके लोहित लिविंग रूम के बीचोंबीच खडा हो गया । लगभग सौ सेकेंड बाद लोहित को अपने चारों और सन्नाटा महसूस हुआ । उसने सोचा कि माँ रसोई में चली गई होगी और पापा भी अखबार पडने लगे होंगे । इसलिए उसने धीरे से अपनी आंखें खोली तो देखा माउस लडकी की तस्वीर हाथों में लिए वहीं पर खडी थी । लोहित ने अनजाने में उसे एक झलक देख लिया । वो सच में बहुत सुन्दर लग रही थी । कुछ सेकेंड उसे देखने के बाद लोहित को लगा जैसे उसके उस लडकी को पहले भी कहीं देखा है शायद इसीलिए क्योंकि उसकी शक्ल कृष्णा से बहुत मिल रही थी । कुछ और सेकंड के बाद लोहित ये देखकर चौंक गया की तस्वीर में वो लडकी कोई और नहीं बल्कि उसकी तृषा ही थी । हरे वामा यही तो है त्रिशा जिसकी मैं बात कर रहा था लोहित के मम्मी का जोर से हंसने लगे लेकिन ये कैसे हो सकता है आप इसे कैसे जानते हो? मैंने स्पष्ट क्या काला मनाया था । उसी ने हमें इस लडकी के बारे में बताया और ये भी बताया की तो मैं उस से कितना प्यार करते हो हो तो इसीलिए आप ना समझने का नाटक कर रही थी । जब मैंने शादी की बात की । हाँ बेटा हम तुम्हारी टांग खींच रहे थे और ये तरकी बिहार में अमन नहीं सुझाई थी । वरना तो ये सोच भी कैसे सकता है कि हम जात पात के चक्कर में पडकर तुझे तेरी पसंद की लडकी से शादी करने से रोकेंगे । मैं जानता था पापा में पहले से जानता था । लोहित बस इतना ही कह पाया और खुशी के आंसू उसकी आंखों में भराए । क्या आपको वो पसंद आ? इमाम हाँ, बेटा बसों से मछली खाने से मना कर देना । मैं सब हंस पडेगी । ईश्वर ऐसे माता पिता सभी को दी ।

जिनी पुलिस भाग 12

भारत बारा कृष्णा अपने लिविंग रूम में बैठी थी जब उसके दरवाजे पे दस तक हुई जैसी उसे दरवाजा खोला । एक पंजाबी महिला ने कहा बेटी त्रिशा मैडम को बलाओं में उनसे मिलने आई हूँ जी, मैं ही तृषा हूँ । सच में नमस्ते मैडम जी उसने हाथ जोडकर अभिवादन किया लेकिन आप तो काफी यंग दिखती है । इतनी सी उम्र में कितना वादियाँ पढाती है आप जी शुक्रिया थे । उन्होंने अपना परिचय दिया । मैं हरप्रीत की मांगूं आंटी ने हरप्रीत को आगे की जा जो उनके पीछे छिपा हुआ था । हरप्रीत हूँ मैडम के पैर हो पाॅलिस अंदर आइए । पंजाबी माँ बेटी की जोडी लिविंग रूम में रखे सोफे पर बैठ गए । तृषा उनके लिए पानी लाने रसोई घर गई और वहाँ से अपनी माँ को बताया की उसका एक छात्र अपना रिजल्ट बताने आया है । हरप्रीत की माने पंजाबी लहजे में कहा तो उसी तो जादू कर देता मैडम जी दूसरी तो घंटे को भी घोडा बना देता । उसकी बातों से जाहिर था कि हरप्रीत का रिजल्ट उसकी उम्मीद से काफी बेहतर आया है । मैंने कुछ नहीं किया । ये सब हरप्रीत की मेहनत का फल है । आंटी ने कहा मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि मेरा बुद्धू बेटा इस बार प्रतिशत के साथ पास हुआ है । उसके पिछले दो कक्षा की मार्क्स मिलाकर भी इतने नहीं थे । कोई छात्र पढाई में कमजोर नहीं होता । टी सिर्फ सही शिक्षण तकनीक की जरूरत होती है । आप सही कह रहे हैं वो बेवकूफ नहीं है । घर पर वो अपने छोटे भाई बहनों को पानी लाने की प्रतियोगिता में लगा देता है कि कौन उसके लिए सबसे पहले पानी ला कर देगा । बच्चों को ये अहसास भी नहीं होता कि वह हरप्रीत के लिए कुछ काम कर रहे हैं । फुटबॉल ग्राउंड के पास पढाई करने का आपका सुझाव बेहतरीन है । तो अब वो फुटबॉलर अपनी किताबें दोनों लेकर ग्राउंड जाता है और मैं उसे मना भी नहीं करती । तृषा ने कहा उसे हमेशा यू ग्राउंड जाकर पडने की जरूरत नहीं है तो एक बार उसके मन में पढाई के प्रति दिलचस्पी जाग गई तो वो बाकी छात्रों की तरह कक्षा में भी अध्ययन कर सकेगा । हरप्रीत की मम्मी ने विदाई लेते हुए कहा ठीक है तो फिर हमें चलने की इजाजत दीजिए और ये आपके लिए मैडम जी मेरे बेटे को पढाने का शुक्रिया । उन्होंने एक पैक किया हुआ तोहफा और मिठाई का एक डिब्बा तृषा को दिया । नहीं नहीं मैं स्वीकार नहीं कर सकती । मैं मिठाई ले लोंगे लेकिन मैं ये उपहार स्वीकार नहीं कर सकती । मैडम जी मैं आपकी जितनी पढी लिखी तो नहीं हो लेकिन हमारे बुजुर्गों ने हमें एक बात सिखाई है । जब भी हम से बडे हमें कुछ बडप्पन के साथ दे तो हमें हमेशा आदर के साथ उसे ले लेना चाहिए और फिर जब हम बडे हो तो उसी बडप्पन और प्यार के साथ अपने छोटों को भेज देनी चाहिए । शुक्रिया आंटी! इतना कहकर तृषा ने उपहार स्वीकार कर लिया । इतने प्यारे और सम्मान से दिए तो फेको भला कोई कैसे नकारे और ये हरप्रीत के डैडी का विजिटिंग कार्ड है । वो इस शहर की सबसे बडे प्रॉपर्टी डीलर है । आधी रात को भी कोई प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने हो तो कॉल कर सकती हो, बिना किसी ब्रोकरेज के एन जी मुझे इस की जरूरत नहीं आती । रख लो बेटा पता नहीं कब किसे किसकी जरूरत पड जाए थी कि आंटी तृषा ने कहा और आपने हैंडबैंड में विजिटिंग कार्ड रख लिया । दरवाजा बंद कर के कृष्णा ने मिठाई का डिब्बा खोला । उसमें त्रिशा की पसंदीदा काजू कतली थी । उसने एक कतली खाई और क्या हुआ? तौफा खोला । उसमें सुनहरे रंग की बडी ही सुंदर गणपति जी की मूर्ति थी जो एक पारदर्शी कांच के बक्से में बंद थी । तृशा ने मूर्ति के सामने माथा टेका और उसे अपने पूजा घर में रख दिया । फिर

जिनी पुलिस भाग 13

भागते रहे । लोहित दिनभर तृषा को फोन और मैसेज करता रहा लेकिन निशाने जवाब नहीं दिया । उस रोज उसे देखते अमेरिका से लडके वाले आए थे । लास्ट में लगभग दस बजे तो निशाने लोहित को फोन किया हलो लोह इतने उतावला होते हुए कहा । लोहित सुनना चाहता था कि उस अमेरिका से आये लडकी आर्यन न्य तृषा को ना कह दिया । लेकिन दूसरे ही पल उसने सोचा कि भला कोई दिशा को ना जो कहेगा । कृष्णा ने उदासी भरी आवाज में जवाब दिया भाई क्या हुआ? सब कुछ खत्म हो गया है । रोहित को ऐसा लगा जैसे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई हो । क्या खत्म हो गया? क्या तुम्हारी शादी उसके साथ तय हो गई है? मैं ऐसा होने नहीं दूंगा । तुम्हारी शादी से पहले ही हम यहाँ से भाग जाएंगे । नहीं रोहित मेरा मतलब है कि आर्यन के साथ सब खत्म हो गया । उसने शादी से इंकार कर दिया । वाओ ये तो बहुत अच्छी बात है । हम भी तो यही चाहते थे । फिर तुम इसकी दुखी क्यों लग रही हूँ? क्या इसीलिए कि वह मुझ से अच्छा दिखता है? मैं दुखी हूँ क्योंकि मेरे मम्मी पापा दुखी है । मेरी शादी को लेकर बहुत एक्साइटेड थे । तो क्या मैं करूंगा मैं तुमसे शादी यही ठीक समय है । इससे पहले की कोई और तुम्हें देखने आए मैं कल ही अपने मम्मी पापा को तुम्हारे घर भेज दूंगा । जैसे उसने तुमसे शादी करने से इनकार क्यों? क्या मुझे क्या पता जो उसी से पूछ लो? तृशा ने बढकर फोन काट दिया । तृषा जैसे लडकी को ना पसंद करने की क्या वजह हो सकती है । ये सोचते हुए लोहित ने रात बिता दी । लोहित के माता पिता अगले ही दिन लोहित और तृषा की शादी की बात करनी तृषा के घर गए । तृषा के माता पिता ने लोहित के माता पिता को पहचान लिया क्योंकि वे दोनों पहले पडोसी थे । सौभाग्य से दोनों परिवारों में सहमती हुई और अगले महीने की तारीख तय हो गई । उन दोनों की शादी की लोग इतने रात में तृषा को फोन किया और कहा आज मैं बहुत खुश हूँ । मैं अपनी जिंदगी कि सबसे बडी खुशखबरी तो मैं बताना चाहता हूँ । त्रिशाला शर्माते हुए कहा हाँ मुझे पता है तो उन्हें पता है क्या यही की अगले महीने हमारी शादी होने वाली है । भला और क्या हो सकती है तुम्हारी जिंदगी कि सबसे बडी खुशखबरी । हाँ सच कहा भला बहुत क्या हो सकती है । लेकिन मैं तो मैं कुछ और बताना चाहता हूँ एक्सक्यूज मी ये मेरी दूसरी बडी खुशखबरी है । क्या ये हमारे हनीमून ट्रिप के बारे में है या फिर हमारी शादी की जगह को लेकर गूगल में काम कर रहा? लडका तो मैं देखने आया था । इसका मतलब ये नहीं है कि तुम भी गूगल की तरह अंदाजे लगा दी जाओ मुझे बताने का मौका तो मैं कल अमेरिका जा रहा हूँ । हमारी का क्यों? तुम हमारी शादी से पहले ही हनीमून पे जा रहे हो और वो भी अकेले । दरअसल दरअसल में मिस्टर जुकरबर्ग से मिलने जा रहा हूँ । उन्होंने ही मेरी टिकट भी बुक की है । बडी अच्छी बात है तो तुम्हारी यात्रा मंगलमय हो । नमस्ते उसने कॉल काट दिया । लोहित ने उसे दोबारा कॉल किया । क्यों ना शादी से पहले हम एक बार मिले क्या कहती हूँ एक महीने से भी कम समय बचा है । हमारी शादी को क्यों मिलना चाहते हो? वैसे भी शादी के बाद हम रोज मिलेंगे ही । शादी से पहले एक आखिरी बार में अपनी गर्लफ्रेंड से मिलना चाहता हूँ क्योंकि बीवी या होती है उबाऊ लेकिन गर्लफ्रेंड होती है वहाँ । वो जी हाँ, मैं भी अपने बॉयफ्रेंड से मिलना चाहूँगी क्योंकि पति होते हैं बोरिंग लेकिन बॉयफ्रेंड होते हैं कि अरे अमेरिका के लिए मेरी फ्लाइट कल रात को है । हम शाम को मिल सकते हैं । ठीक है कहाँ मिलेंगे । वहीं गेट पर कौन सा गेट इंडिया गेट हूँ ।

जिनी पुलिस भाग 14

भाग चौदह है । लोहित तय समय पर इंडिया गेट पहुंचकर तृषा का इंतजार करने लगा । शादी से पहले आखिरी बार वे दोनों एक दूसरे को देखने को एक्साइटेड थे । वहां पहुंचते ही बडे ही रूके । अंदाज में तृषा ने कहा मैं ये शादी नहीं करना चाहती हूँ । लोग इतने जिज्ञासा से पूछा वो घबराया नहीं क्योंकि उसे यकीन था कि त्रिशा मजाक कर रही है । उसे पता था कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि उसकी तृषा उससे शादी करने के लिए कभी बना करें । तृषा के लहराते हुए खुले बाल उसकी कमर तक लंबे थे । इतने सारे अंजान लोगों के बीच पारंपरिक तरीके से शादी करने में कोई मजा नहीं है । बचपन से मेरा सपना था कि एक दिन मेरा राजकुमार एक सफेद घोडे पर सवार होकर आई तो हर बजे पहाडों में ले जाए । मैं तुम्हारे साथ भाग जाना चाहती हूँ, मगर शादी नहीं करना चाहती । ऍम हमारे माता पिता काफी बोले हैं, क्या वो फिल्में नहीं देखते? काश तुम्हारे पापा ने कहा होता हेलो ब्लॅक और दूर हो जाओ मेरी बेटी की जिंदगी से । कृष्णा ने लोहित की आंखों में देखते हुए पूछा तो तुम क्या वो चैट ले लेते? बेशक कौन नहीं चाहेगा? इतने सारे पैसे लोग इतने त्रिशा की टांग खींचने के लिए कहा और उसे अपनी जीत दिखाई । लेकिन उस चैक से पैसे निकालकर में तुम्हारे साथ ही भाग जाता । दोनों हंस पडे तो मेरे पापा को धोखा देते तो मैं धोखा देने से तो अच्छा ही है ना कि मैं तुम्हारे पापा को धोखा दे दूँ । तृषा ने अपना सिक्स इंच डिस्प्ले वाला मोबाइल फोन और एक सफेद रुमाल जिसमें उसका नाम कडाई किया हुआ था, लोहित को जेब में रखने के लिए दिया । उसकी टाइट जींस की जेब बहुत छोटी थी । चलो अब विभाग चलते हैं । उसने कहा, और ऐसे दौडने लगी जैसे कोई पागल होता उसके पीछे लगा हूँ । रोहित भी उसके साथ भागने लगा । लोगों की भीड सिर्फ उन्हें ही देख रही थी । लोहित और तृषा जब भी साथ होते हैं तो ऐसा भी करते हैं जैसे छह साल के बच्चे हो । वे राष्ट्रपति भवन की ओर जाने वाले रास्ते पर दौड रहे थे । एक विदेशी पर्यटक अपने कैमरे में उन्हें दौडते हुए फिल्म आने लगा । कुछ मिनट दौडने के बाद लोहित ठक्कर घास पर लेट गया । तृशा थोडी दूर भागी और लोहित को देखकर वापस आकर उसके पास बैठ गई । क्या हुआ इतनी जल्दी थक गए? हफ्ते हुए लोहित कुछ भी कह नहीं सकता । बस सहमती में सर हिला दिया । सिर्फ दौडने से ही अगर तो इतना थक गए तो मुझे डर है कि शादी के बाद तुम बाकी सारे काम कैसे करोगे? ऐसा कहकर परेशानी आंख मारी । लोहित पूरी तरह से समझ गया कि त्रिशा क्या कहना चाहती है । फिर भी उसने पूछा कौनसी का घर के काम जैसे झाडू पोछा, बर्तन, कपडे आदि चिंता मत करो । इन गांवों के लिए मैं एक लडकी से शादी कर रहा हूँ की दोनों खिलखिलाकर हंस पडे । तृशा लोहित की बाजुओं में हौले हौले मुक्का मारते हुए पूछा गंदे क्या? तो मुझे सिर्फ घर के कामों के लिए शादी कर रहे हो । नहीं सिर्फ घर के काम नहीं और भी कुछ काम है । ये कहकर लोहित ने भी आंख मारी और तृषा को अपनी बाहों में जकड लिया । सूरज हुआ मध्यम और शाम ढलने लगे । सडक किनारे मदर डेरी आइसक्रीम की रेडी लगी थी । लोग इतने पूछा शादी के बाद हमारे कितने बच्चे होंगे तो निशाने शर्म से अपनी बल्कि गिरा दी । हर लडका अपनी बंदी के साथ फ्लर्ट करने के लिए ये सवाल जरूर पूछता है । दोनों घास पर इत्मीनान से बैठे थे । तृषा ने पूछा तो मैं कितनी चाहिए लोहित ने उसे छेडते हुए कहा, कम से कम दस हम हर साल एक बच्चा करेंगे । नामुमकिन तो मैं समझ गया रखा है । मुझे बच्चा पैदा करने की मशीन हम सिर्फ एक ही करेंगे । वो भी लडकी हाँ और उसकी नाक तुम्हारी तरह तीखी और आखिर तुम्हारी तरह खूबसूरत होगी । चलो मस्कर हमारा बंद करूँ और मुझे इस श्रृंखला दूँ । तृशा ने आइसक्रीम की रेडी की तरफ इशारा करते हुए कहा, ठीक है चलो लोहित खडा हुआ और तृषा को हाथ पकड के उठाया । वे दोनों एक की कोन में आइसक्रीम खाते हुए टहलने लगे । तृषा ने लोहित की ओर देखते हुए कहा न जाने क्यों किसी ने इतना बडा इंडिया गेट बनाया जिसमें कोई दरवाजा भी नहीं है । शायद किसी राजा ने अपनी रानी के लिए बनवाया होगा कि जैसे कि ताजमहल नहीं, यह स्मारक प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मारे गए हजारों भारतीय सैनिकों की याद में बनाया है । लोहित ने अपने सैनिकों की मौत पर अफसोस जताते हुए कहा, पता नहीं लोग लडते क्यों है? हिंसा तो किसी समस्या का हल नहीं है ना थोडी देर वे दोनों मान रहे हिंसा हाल है या नहीं यह तो समस्या पर निर्भर करता है । प्रभु श्रीराम ने सीता को बचाने के लिए रावण का वध किया । वो युद्ध भी तो हिंसा ही थी । युद्ध करना गलत तो है मगर कुछ परिस्थितियां ऐसी आती है कि गलत करना ही एकमात्र सही विकल्प होता है । लोहित ने फिर से सोचा कि कैसे इतनी चुलबुली लडकी कितनी गंभीर बातें सोच सकती है । तृशा का फोन लोहित की जेब में बजा । लोहित तृषा को फोन देते हुए कहा तुम्हारे पापा का फोन है हम वो भी तुम्हारे पापा है । निशाने कहा और फोन उठाया जी पापा, मैं घर आ रही हूँ, बस रास्ते में ही हूँ । ऋषि ने कहा और फोन रख दिया । लोहित ने सिफारिश की, बेहतर होगा कि अब हम चले । हम दोनों को देर हो रही है । कृष्णा ने कहा चलो एयरपोर्ट चलते हैं । मैं कुछ और बाल तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूँ । नहीं मेरे पास किराए की गाडी है । चलो पहले में तो मैं घर छोड दूँ फिर एयरपोर्ट चला जाऊंगा । मेरा घर उल्टी दिशा में है लेकिन मैं तो में रात में इस समय अकेले नहीं जाने दे सकता । लोहित ने जोर देकर कहा तुम मत बताओ कि मुझे क्या करना चाहिए? मैं बच्चों को पढाती हूँ, खुद बच्ची नहीं हूँ । मैं तुम्हें छोडने जा रही हूँ और ये फाइनल है कोई जरूरत नहीं है । अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा यहाँ से बीस किलोमीटर दूर है और तुम्हारा घर उल्टी दिशा में बीस किलोमीटर दूर ऐसा करो तुम टैक्सी लेकर सीधे घर जाओ । रात में ये शहर लडकियों के लिए सुरक्षित नहीं है और मैं यहाँ से सीधे एयरपोर्ट जाता हूँ । होगी मिस्टर सीईओ । उसने कहा और लोहित को एक जोर की झप्पी दी । मुझे ये समझ में नहीं आ रही कि अगर दो अपनी कंपनी फेसबुक को बेच रही नहीं चाहते हो तो तो अमेरिका क्यों जा रहे हो? क्योंकि मुझे अपने आदर्श मिस्टर मार्क जुकरबर्ग से मिलने का मौका मिल रहा है । उनसे मिलने का सम्मान केवल योग्य व्यक्तियों को ही नसीब होता है और मुझे अपने सपनों के देश में अपने सपनों की कंपनी का मुख्यालय देखने को मिलेगा । भला हो और क्या चाहिए मुझे काश्मीरी सपनों की रानी मेरे साथ चल सके । लोहित त्रिशा की ओर देखते हुए कहा तृशा ने कहा मैं इतनी बडी बेवकूफ नहीं की अगले महीने मेरी शादी है और मैं किसी सीईओ को देखने घंटे लंबी उडान भरकर जाऊँ । मैं यहाँ अपने सीईओ को देख कर ही खुश हूँ में अच्छी तरह से उस जगह की जांच पडताल भी करूंगा । आखिर एक ना एक दिन तो वहीं मुझे अपनी कंपनी का हेडक्वार्टर स्थापित करना है । तो क्या तुम भारत में नहीं रहना चाहते? बिल्कुल नहीं । क्यों में इस दुर्भाग्यपूर्ण देश में रहूँ जब मेरे पास अमेरिका में रहने की क्षमता है । हम वहाँ यहाँ से ज्यादा खुश रहेंगे । लोहित इस बात की क्या गारंटी है कि हम वहाँ ज्यादा खुश रहेंगे? ये भी तो हो सकता है कि उन विदेशियों के बीच तुम पैसे तो कमाल होंगे मगर खुशी नहीं और मैं वहाँ रहकर क्या करोगी? मेरी नौकरी तो यहाँ पर है दिशाओं में वहाँ पर लाखों डॉलर का मैं आऊंगा तो मैं काम करने की जरूरत ही नहीं होगी । तो मैं लगता है की मैं सिर्फ पैसे कमाने के लिए काम करती हूँ । दुनिया में हर कोई सिर्फ पैसों के लिए ही काम नहीं करता । मैं पढाती हूँ क्योंकि मुझे पसंद है । त्रिशा को गुस्सा आ रहा था । उसने लोहित से अपना मूड खेल लिया । अगर तुम पैसों के लिए काम नहीं करती तो मत लिया करो, तब हुआ मुफ्त में पढाया करो । बच्चों को लोहित नीतिशा के गुस्से को काम करने की जगह और बढा दिया । उसकी इस बात ने आग में घी डालने का काम किया । मैं बाकियों की तरह ट्यूशन नहीं पढाती । सिर्फ स्कूल से अपने हक का वेतन लेती हूँ । अगर मुझे पैसों का लालच होता तो मैं भी औरों की तरह कोचिंग सेंटर खोल लेती । इस देश की सबसे बेहतरीन शिक्षक हूँ मैं । अगर मैं कोचिंग खोलो तो इतना कमाऊंगी की तुम सपने में भी नहीं सोच सकते । अच्छा बाबा ऍम सौरी तो अमेरिका में ही किसी स्कूल में पढा लेना । तुम्हारी जैसी टीचर पाकर गोरों की किस्मत खुल जाएगी । दोनों खामोश हो गए । तृषा ने कुछ देर सोचने के बाद कहा, और तुम्हारे मम्मी पापा का क्या? भारत में यहाँ उनकी देखभाल कौन करेगा? एक दो साल के अंदर एक बार में अपना कार्यालय वहाँ पर स्थापित कर लो । फिर उन्हें भी अपने साथ ले चलूंगा । क्या तुम्हें लगता है कि वो अमेरिका में उन अंजान लोगों के बीच में रह पाएंगे? उनके सारे रिश्तेदार, दोस्त सब यही पर है । उनकी जिंदगी भर की यादें यहाँ है । एक एक शब्द नापतोल कर बोल रहे थे, हूँ, मगर फिर भी अपने विचारों को व्यक्त करने से खुद को रोक नहीं पा रहे थे । लोहित ने फिर कहा, हाँ, शुरू में तकलीफ होगी, लेकिन समय के साथ सभी को वहाँ रहने की आदत हो जाएगी । वहाँ बहुत सारे भारतीय भी है । वो हर हिंदुस्तानी त्यौहार मनाते हैं । कुछ दिनों बाद उन्हें लगेगा जैसे वो हिंदुस्तान में ही है । और फिर अपने मोदी जी भी तो आते जाते रहते हैं । अमेरिका कृष्णा ने लोहित के चुटकुले पर मुस्कुराने की कोशिश की लेकिन मुस्कुराना सकें मेरी बात समझो तृषा में वहाँ पर रहना चाहता हूँ । जिंदगी में सफल होना चाहता हूँ । तृषा ने गहरी सांस ली । उसका चेहरा रोष से लाल हो गया था । तुम्हारे हिसाब से सफलता क्या? हेलो लोग इतने तृषा के सवाल को ये सोचकर अनसुना कर दिया कि इसका उत्तर तृशा के गुस्से को और भडका देगा । जब प्यार में होते हैं तो आपको केवल दिल से सोचना चाहिए । तृषा ने फिर पूछा मुझे बताओ लोहित तुम्हारे हिसाब से सफलता क्या है? वो उदास थी ये सोचकर कि उसे अपने प्यार के खातिर अपना प्यारा देश छोडना होगा । कैलिफॉर्निया में एक बडा ऑफिस और मेरे बैंक खाते में लाखों डॉलर सफलता है । तो इसका मतलब एक स्कूल टीचर जो सैकडों छोटे बच्चों के भविष्य को आकार देता है वो असफल है । एक गृहणी जो अपने बच्चों की परवरिश करती है और अपने पति के हर उतार चढाव में उसका साथ देती है वो भी असफल है । मेरे हिसाब से जो भी व्यक्ति अपने जीवन से संतुष्ट है, खुश है वह सफल है क्योंकि लोहित लोग का तो कोई अंत है ही रहे हैं लेकिन मैं कोई स्कूल टीचर या ग्रहणी नहीं हूँ । मैं बिजनेसमैन हूँ और मेरे लिए सफलता का मतलब एक विकसित देश में एक बडा कार्यालय और मेरे बैंक में ढेरों पैसे हैं । हर व्यक्ति की सफलता के अपने मायने होते हैं । खुशी भी हर इंसान को अलग अलग चीजों में मिलती है । मैं ये नहीं कहता कि एक स्कूल शिक्षा क्या एक ग्रहणी और सफल है । उनकी सफलता के अपने अलग अलग मायने है और तुम कहना चाहती हूँ कि कोई भी व्यक्ति जो अपने जीवन से संतुष्ट है वो सफल है । तो क्या अगर कोई अधिकारी भीख मांगता है और अपनी भीग से संतुष्ट है तो क्या वो भी सफल है? लोहित के तर्क ने तृषा को चौका दिया वो आगे कुछ नहीं कह सकती । मैं जानती हूँ की तुम कभी कोई गलत फैसला नहीं लोगे । लेकिन मेरी बात हमेशा याद रखना कभी भी सपनों के लिए अपनों की कुर्बानी मत देना क्योंकि सपने जब टूटते हैं तो अपने ही साथ खडे होते हैं । रोहित अपना हाथ उसकी कमर पर रखकर उसे पकड लेता है । अगर में भारत में रहोगी तो एक दशक में मैं सैकडों छात्रों को तुम्हारी तरह मास्टरमाइंड बना दूंगी और फिर भी अपने देश में नौकरी के अवसर पैदा करेंगे, करों का भुगतान करेंगे और राष्ट्र के विकास में योगदान देंगे तो मैं भी यही रहना चाहिए और अपनी प्रतिभा का उपयोग देश की भलाई के लिए करना चाहिए । यूएस जाना आसान है लोहित लेकिन यहाँ रहकर लोगों की मदद करना मुश्किल है । मुश्किल काम करके दिखाओ लोहित उसका जोशीला भाषण सुनकर लोहित ने सोचा कि उसी तो राजनीति में शामिल हो जाना चाहिए । लोहित कोशिश की अगर वह कहने से खुद को रोक दे सका । लेकिन अगर मैं अमेरिका में रहकर अच्छा काम करूंगा तभी तो में भारत का ही नाम ऊंचा करूंगा । कुछ सालों बाद ही सुर्खियां बनेगी कि भारतीय बिल गेट्स और मार्क जुकरबर्ग से भी अमीर बन गया । ये अलग है । रोहित अपने लिए काम करना या फिर अपनों के लिए चलते चलते हुए पार्किंग एरिया के पास पहुंच गयी । लोहित ने कहा, ठीक है, हम बाद में इस बारे में चर्चा करेंगे । तृषा ने पूछा तो वापस कब आ रही हूँ? मैंने तुम्हारे मोबाइल में अपनी वापसी की टिकट भेज दी थी । ऋषभ खामोश रही । दस पांच दिनों के अंदर लौटते समय अमेरिका से क्या लाऊं? तुम्हारे लिए कुछ नहीं । मेरी जरूरत थी इतनी बडी नहीं है । रोहित किराए की कार में बैठ गया । उसका सामान पहले से ही गाडी में था । ठीक है अब सीधा शादी में मिलते हैं ।

जिनी पुलिस भाग 15

भाग पंद्रह है । सडक पर एक घंटे के सफर के बाद लोहित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पहुंचा । कार की डिक्की से अपना छोटा सा बैग निकालकर उसने ड्राइवर को अलविदा किया और एयरपोर्ट के अंदर चला गया । लोह इतने ज्यादा सामान कैरी नहीं किया था ताकि उठाने में उसे सहूलियत हो । उसका मानना था कि अमेरिका की सडकों में धूल कम होगी तो कपडे भी कम गंदे होंगे । लोग इतने डिस्प्ले बोर्ड में हांगकांग एयरलाइंस की उडान संख्या ऍम फाइव पेट की तलाश की फ्लाइट के प्रस्थान का समय रात बारह बजकर दस मिनट का था और फ्लायर्स को दो घंटे पहले ही बुला लिया गया था । त्रिशा का कोई मैसेज पाने की उम्मीद में लोहित हर पांच मिनट में अपना फोन देख रहा था । सुरक्षाकर्मी ने लोहित के पासपोर्ट में लगी फोटो के साथ उसके चेहरे को मिलाया । टेक्नोलॉजी के इतने विकसित होने के बाद भी हर आदमी का चेहरा देखकर पता लगाना की वो सही है या नहीं बडा ही उबाऊ कम है । क्यों ना हम फेस रेटिना फिंगर प्रिंट को स्कैन कर लें और अगर सभी कुछ पासपोर्ट और आधार कार्ड के डेटा बेस से मैच हो जाए तो यात्री को जाने दे और बाहर निकलते समय उनके रेटिना और फिंगरप्रिंट को फिर से स्कैन किया जाए । प्लायर उनका सामान तुरंत देते । ये तेज भी होगा और इससे सुरक्षा भी बढेगी । आपने काल्पनिक दुनिया में ये सब सोचते हुए लोग इतने प्लेन में एंट्री ली । दरवाजे पर खडी छह महिलाओं और दो पुरुषों कैबिन क्रू ने लोहित का स्वागत किया । कैबिन क्रू की वर्दी पर उनके नाम लिखे हुए बिल्ले और विंक इनके साथ प्रावधानित किया गया था । रोलर डाइट में गोल घूमते डेरू सामान में से अपने सामान को ढूंढने कि परेशानी से बचने के लिए लोग इतने अपना सामान जमा नहीं किया । उस पर कैबिन बैगेज का टैग लगवाकर अपने साथ ले गया । ट्रेन में हम अपने सामान को चेन से बांधकर रखते हैं और फिर भी हर स्टेशन के बाद चेक करते हैं । लेकिन हवाई जहाज में हम सभी पर भरोसा करके अपने सामान को यूँ ही छोड देते हैं । अगर ये एयरपोर्ट पर लगे कैमरों की वजह से है तो हम हर रेलवे स्टेशन और यहाँ तक कि ट्रेन के दरवाजे के पास भी कैमरे क्यों नहीं लगा सकते लोगी । तब की सीट पर बैठकर खिडकी से बाहर लगे विशालकाय एजेंट को देखकर इसके पीछे की फिजिक्स को समझने की कोशिश कर रहा था । उसके आस पास बहुत विज्ञान था । फ्लाइट अटेंडेंट ने सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद करने की मांग की । बस एक मिनट ये बहुत जरूरी है । लोग इतने निवेदन किया और तृषा को फोन किया । लोहित उस लंबी उडान पर जाने से पहले एक बार त्रिशा की सुरीली आवाज सुनना चाहता था । त्रिशा का फोन कुछ मिनटों तक बचता रहा, लेकिन उसने फोन नहीं उठाया । रोहित ने सोचा कि त्रिशा घर पहुंचकर हो गई होगी । तभी उसे याद आया कि उसकी जेब में तृषा का रुमाल था । रोहित ने अपनी जेब से रुमाल निकाला । उसे आहिस्ते से जुमा और अपनी जेब में वापस रख लिया । उसके खुशबू से लोहित का दिल भर गया । कृपया अपने सेलफोन को बंद करते हैं । एक और एयर होस्टेस से थोडा झुककर लोहित के कान में कहा लोहित उससे पूछा, टिक ऑफ के समय फोन ऑफ क्यों करना पडता है? शायद लोहित सच में जानना चाहता था या उससे कुछ और देर बातें करने का बहाना बना रहा था । एयर होस्टेस ने अपने सीमित ज्ञान को टटोलते हुए बताया, क्योंकि मोबाइल नेटवर्क हवाई जहाज के ग्राउंड नेटवर्क को बाधित कर सकता है । अगर वैज्ञानिक इस विशाल विमान को बना सकते हैं तो क्या एक ऐसा नेटवर्क नहीं बना सकते जो मोबाइल नेटवर्क से बाद इतना हूँ । एक सुस्त मुस्कान देते हुए वो आगे बढ गयी । उसकी मुस्कान का मतलब था कि उसे समझने आया लोहित ने क्या कहा और वह समझना चाहती भी नहीं थी । उसके जाने के बाद लोहित के बगल में बैठे यात्री ने कहा, ये रियल नहीं लगता । क्या उसके स्तन कुछ ज्यादा ही बडे हैं? लोहित ने आश्चर्यचकित होकर पूछा हाँ लेकिन वो ऐसा क्यों करेगी? आकर्षित दिखने के लिए हाँ और क्या बडी जोर से हसते हुए रोहित ने कहा तुम शायद यकीन न करों लेकिन मैं भी एक बाढ लडकी बना था । नकली स्तन पहनकर उसने लोहित को ऐसी हराने से देखा जैसे लोग इतने प्लेन को हाईजैक करने की घोषणा कर दी हो तो तुम ने क्यों किया? ऐसा जो मैं स्कूल में था तो मुझे कृष्णा नाम की लडकी से प्यार हो गया था । उसके साथ स्कूल पिकनिक पर जाने के लिए मैंने लडकी का भेज बनाया था और ये एक लंबी कहानी है । उस यात्री ने मुस्कुराते हुए कहा, मुझे लगता है कि आपकी लंबी कहानी सुनने के लिए मेरे पास काफी समय है । लोहित ने मुस्कुराते हुए कहानी सुनानी शुरू की । क्लासरूम में एंट्री करते ही हमारी बायलॉजी की टीचर जया मैंने अनाउंसमेंट की क्लास मेरे पास से खुश खबरी है । इस संडे हम खंडाला लोनावला पिकनिक मनाने जा रहे हैं । जो भी जाना चाहता है हाथ उठाए । बहुत सारे बच्चों ने एक्साइटेड होकर हाथ उठाया । तृशा पहले तो हिचक रही थी लेकिन उसके सहेलियों की जोर देने पर उसने भी हाथ उठा लिया । उसे देख कर लो हितने भी झट से हाथ खडा किया लेकिन इस ट्रिप में केवल लडकियाँ ही जाएगी । लडकी नहीं । लडकों को ठेंगा दिखाते हुए लडकियों ने हूटिंग की । लोहित लगभग चलाया । लडकी क्यों नहीं जा सकते हैं? लडके एक हफ्ते के बाद चौधरी सर के साथ जाएंगे । ये सुनकर लोहित अपने ख्यालों में ही डिप्रेशन में चला गया । उसने गाडी बडाली शराब पीना शुरू कर दिया । उसे कैंसर हो गया तो समाज के द्वारा त्याग दिया गया और लास्ट में आपने कल्पना में ही वो मर गया । रोहित ने अमन से साफ कह दिया, मैं किसी भी तरह इसी संडे को जाना चाहता हूँ । उसकी आंखों में जुनून था, थोडा धैर्य रखो । हम अगले रविवार को चले जाएंगे । क्या तुम पागल हो? मैं अपने प्यार के बिना रोमेंटिक जगह में क्या करूंगा? मैंने जाने से पहले कहा इस ट्रिप के लिए आप अपने दोस्तों को दूसरे स्कूल से भी इनवाइट कर सकते हैं लेकिन ध्यान रहे कि वह लडकियाँ हो । लोग इतने अफसोस के साथ कहा कि भगवान उसे लडका क्यों बनाया? अमन ने टिप्पणी की अगर तुम लडकी होते तो फिर लडकों के साथ जाना चाहते हैं । हाँ तुम सही कह रहे हो मुझे कोई तरकीब सुझाव जिससे कि मैं त्रिशा की सात जा सकूँ । उसके साथ जाने के लिए मैं लडकी बनने को भी तैयार हूँ । अमन ने लोहित की खिल्ली उडाते हुए कहा क्या सिर्फ एक ट्रक के लिए तुम लिंग परिवर्तन करवाओगे? नहीं बाबा । लोग इतने चालाक मुस्कान के साथ कहा मेरे चचेरे भाई का दोस्त बॉलीवुड में मेकअप आर्टिस्ट है । अमन ने डरते हुए कहा तुम्हारी शैतानी दिमाग में जो चल रहा है ना, वो होना नामुमकिन है । वे एक मिनट में हमें पहचान जाएंगे । में पहले अपना मेकप करवाऊंगा । अगर तुमने मुझे उस गेट अप में पहचान लिया तो हम नहीं जाएंगे और अगर नहीं पहचान पाए तो हम दोनों लडकियाँ बनकर उस पिकनिक पर जाएंगे । लगी शर्त लगी उन दोनों ने हाथ मिलाया । अमन भी लडकियों के साथ जाना तो चाहता था बस थोडा डर रहा था वो दोनों सुबह जल्दी मेकअप आर्टिस्ट के पास पहुंच गए और वो जगह देखने में किसी आम ॅरियर की तरह ही थी । एक दुबले पतले व्यक्ति ने लोहित और अमन से पूछा कहो क्या काम है? उसके बाल ऐसे अस्त व्यस्त थे । जैसे ही एक उम्र के बाद उसने गंगी को हाथ नहीं लगाया हूँ । लोग इतने बेसब्री से कहा सर, हमें लडकी बना दो । क्या उसके लिए तो मैं थाईलैंड जाना होगा । दोस्ती गंदा काम यानी होता है । रोहित ने कहा मेरा मतलब है हमारा मेकप करके हमें लडकियों की शक्ल दे दीजिए । उस ने इंकार करते हुए कहा मैं ये केवल फिल्मों या थिएटर के कलाकारों के लिए करता हूँ । दूसरों के लिए ऐसा करना अनैतिक है । रोहित ने भावुक होकर पूछा भैया क्या आपको कभी किसी से सच्चा प्यार हुआ है? वह खामोश हो गया । मैं एक लडकी से बहुत प्यार करता हूँ । लडकी के गेटअप में मैं सिर्फ उसके साथ कुछ समय बिताना चाहता हूँ । मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं कुछ गलत काम नहीं करूंगा । क्या आप अपने प्यार के घाटे अपने छोटे भाई की मदद नहीं करेंगे? लोहित का ड्रामा देखकर वह पिघल गया । हरबोला ठीक है बताओ पहले कौन करवाना चाहता है । लोहित ने हाथ खडा किया वे लोहित को भीतर के कमरे में ले गए और कमरे में कई मेल और फीमेल वे कई तरह के कि डाॅ और भी बहुत कुछ था । अमन बाहर सोफे पर बैठ गया और टेबल पर रखे मैग्जीन देखने लगा जिसके कवर अर्धनग्न मॉडल्स की तस्वीर छपी थी । उन्होंने लोहित के गालों को शेयर किया और उसके शरीर के देखने वाले अंगों में वीट क्रीम लगाकर सारे बाल हटा दिए । योगी की त्वचा मुलायम महसूस हुई । उसके बाद उन्होंने लोहित के चेहरे भी फाउंडेशन लगाया और उसके चेहरे का रंग बदल गया । उन्होंने इसे गाल की हड्डी माथे और नाक पर लगाकर मिला दिया । लास्ट में उन्होंने लोहित को आगाह किया कि ये मैं कब वाटर प्रूफ नहीं है । आज पानी से मुहम्मद होना लोहित सोचा होना तो दूर मैं आज पानी पीऊंगा भी नहीं । लोहित के चेहरे पे काम करने के बाद उन्होंने उसकी कृतिम पलकों को कॉल किया । बहू के पास अनचाहे पाल उखाड दिए और काले रंग के आई लाइनर से बहुत को सुंदर आकार दिया । उन्होंने काजल पेंसिल से लोहित के दाहिने गाल पर एक काला तिल बना दिया और होठों पर लिपस्टिक लगा दी । लास्ट में उन्होंने लोहित के करने तक लम्बे और थोडे घुंघराले बालों का एक विक उसके सर पर लगा दिया । लोहित ने स्पोर्ट गार्ड भी पहन दिया ताकि अगर लडकियों को देखकर वह ज्यादा उत्साही हो जाएगी तो उन्हें इसका पता ना चले । अब बारी थी सबसे अंतरंगी पोशाक यानी की ब्राह पहनने की । उन्होंने लोहित से पूछा कौनसी साइट्स कब रादू? रोहित ने पूछा क्या साइज अवेलेबल है? अट्ठाईस, तीस, बत्तीस, चौंतीस और फिर कब साइज? जैसे कि ए बी सी मुझे लगता है कि आपकी हेल्थ के अनुसार तीस भी ठीक रहेगा । उसके उसे ब्रा पहनने को दी । लोहित को इस बात का अंदाजा तो था कि इसे उतारते कैसे हैं लेकिन उसने कभी किसी को पहनते हुए नहीं देखा था । वो हर बडा गया । ये कैसे पहनते हैं तीनों मेकप आर्टिस्ट पहले तो लोहित पर हंसी बहुत फिर उसे ब्राह पहनाकर पीछे से खुद लगा दिया । लोह इतने काला घुटनों तक की लंबाई वाला वन पीस ड्रेस पहना हूँ और वो लडकी के रूप में बाहरी दुनिया से मिलने को तैयार था । लोहित ने खुद को आईने में देखा तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ कि वह खुद को ही देख रहा है । वो इतना सुन्दर दिखाई दे रहा था अगर रिश्ता उससे शादी करने से इंकार करती है तो वह खुद से शादी करने पर विचार कर सकता था । उन्होंने लोहित के ड्रेस से मैचिंग ऊंची हील वाली सैंडल भी । लेकिन लोग इतने फ्लाइट खेल ही पसंद की । अपने पैरों के नीचे दो पहाड लेकर चलने की आदत उसे नहीं थी ।

जिनी पुलिस भाग 16

भाग सोलह है । रोहित पिछले दरवाजे से बिल्डिंग के बाहर निकला और कुछ दूर चलने के बाद मुख्य सडक पर पहुंचकर एक ऑटोरिक्शा से रुकवाई । ऑटो रिक्शा चालक लोहित के नकली स्तन और टांगो को घूर रहा था । लोगे तो उसके ऑटो में सवार हो गया और इससे पहले की गाडी स्पीड पकडती और वो ऑटो चालक पीटर चालू करता । लोहित सलून के सामने ऑटो रुकवाकर उतर गया । अमन ने उसे ऑटो से उतरते देखा । अब वो कभी भी ये नहीं सोच सकता था कि खूबसूरत लडकी लोहित हो सकता है । लोहित सलून में प्रवेश किया और आराम से टांगे फैलाकर बैठ गया । फिर उसे याद आया कि वो लडकी है और उसने वन पीस पहना है इसलिए वह क्रॉसलैंड बैठा था । लोहित को मालूम था कि कुछ ही घंटों में अमर उससे बात करेगा । वो ये जानने के लिए उत्सुक था की अमन की पिक अप लाइंस क्या होगी भाई ये ब्यूटी पार्लर नहीं है । अगर आपको कोई गलत फैमी हुई हो तो लोहित उसे अनसुना कर की दूसरी तरफ देखने लगा । लोहित ने उसे सडक के किनारे पडे कचरे की तरह नजर अंदाज कर दिया जैसा अक्सर लडकियाँ लडकों के साथ करती है । वैसे मैं अमन हूँ । उसने अपना हाथ बढाते हुए कहा हाई मैं हूँ । कुछ देर तक लोहित अपना नाम कह नहीं पाया । झटपट नकली नाम बनाना हसा नहीं होता दिया । उसने लोहित के साथ आहिस्ते से हाथ मिलाया । अमन ने कहा मैं अपने दोस्त के वहाँ से बाहर आने का इंतजार कर रहा हूँ । मुझे नहीं लगता कि वह आएगा । अमन ने आश्चर्यचकित होकर पूछा क्यूँ? क्योंकि मैं तेरा दोस्त लोहित हूँ । रोहित ने भी सामान्य आवास में कहा ही । भगवान अमन ने उत्साह से उछलकर लोहित को गले से लगा लिया । पहली बार उसे किसी लडकी को कल ही लगाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । नकली ही सही तुम बाहर से कैसे आएगा? क्योंकि मुझे पता था कि अगर कोई असली लडकी भी इस दरवाजे से बाहर निकलते तो भी तुम कहती कि लोहित मैंने तुम्हें पहचान लिया । तुम जाओ और तैयार हो जाओ । हम दोनों सुंदरियां धमाल मचा देंगी । एक घंटे बाद वे उनके स्कूल पहुंच गए जहां से बस आउटिंग के लिए निकलने वाली थी । हाई गया मैं मैं रिया लोहित की बुआ की लडकी लोग इतने एक प्यारे लहजे में कहा और मैं अमन की आशा । अमन की चचेरी बहन आशा हमें पिकनिक पर जाना चाहते हैं । वो दोनों बिना किसी कारण मुस्कराए जैसा की लडकियाँ करती है । मैडम ने रजिस्टर पर उनके नाम नोट किए । वे सभी बस में सवार हो गए । लोहित जल्दी से तृषा के बगल में बैठ गया । बाहर अमन खुशी के बगल में बैठ गया । दोनों को उनकी पसंद की सीट मिल गई । यात्रा की शुरुआत तो उनकी उम्मीद से काफी बेहतर हुई । हाई लोग इतने मुस्कुराकर कहा हाय! तृषा ने जवाब दिया । लोहित उसके इतने करीब बैठा था कि उसके दिल की धडकन सुन सकता था । लोहित के क्लीन शेव्ड पैर उसके पैरों को जरा सच हो रहे थे और लोहित का कंधा उसके कंधे से टकरा रहा था । तो महाराज चेहरा कितना जाना पहचाना लग रहा है । लगता है मैंने तो पहले कहीं देखा है, हाँ देखा है ना? तृषा ने उत्सुकता से पूछा कहाँ देखा है बाहर? जब मैं जया मैन से बात कर रही थी । अरे ऐसे नहीं तो मैं देख के लगता है जैसे मेरे तो में पहले भी कहीं देखा है या शायद इसीलिए ऐसा लग रहा है क्योंकि तुम हूबहू लोहित की तरफ देखती हूँ । यहाँ भाई बहन की शक्ल तो मिलती है । ये कहकर लोहित ने राहत की सांस ली कि अब शायद उसका शक दूर हो जाए । मगर अफसोस शक्ल तो सगे भाई बहन की मिलती है । तुम दोनों तो चचेरे भाई बहन हूँ । लोहित सोचने लगा लॉजिक वाली लडकियाँ खतरनाक होती है । देखो मेरे मम्मी और लोहित के पापा सगे भाई बहन है और इसीलिए वह दोनों एक जैसे दिखते हैं । मैं अपनी मम्मी की जैसे देखती हूँ और लोगी तब पापा की जैसे तो इसीलिए हम दोनों भी एक जैसे ही देखते हैं । तो इस तरह से ये साबित हुआ माय लॉर्ड । लेकिन लोहित ने कभी तुम्हारा जिक्र नहीं किया । रोहित ने मान ने कहा मैंने जिंदगी में पहली बार अपने हाथों और पैरों के बाल काटे । ऐसे अजीब से कपडे पहने, लिप्स्टिक लगाई और इतना बडा जोखिम उठाकर तुम्हारे पास आया । इसीलिए नहीं कि तुम मुझसे इतने सवाल करूँ । वो पता नहीं उसने कभी मेरा जिक्र क्यों नहीं किया । उस से तो वो हमेशा तुम्हारी ही बातें करता रहता है । वह मुस्कुराने लगी लडकियों की जरा सी तारीफ कर दो तो वो सब कुछ भूल जाती है । अच्छा तो बताओ । क्या कहता है वो? वो कहता है कि तुम उसके क्लास की सबसे खूबसूरत लडकी हो क्या नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है । वो शर्मा गई उसके बल्कि झुकी और उसके गाल थोडे से गुलाबी हो गए लेकिन पिछली सीट से कहा चलो ऍम कुछ खेलते हैं, कॅरियर कैसा रहेगा? एक दूसरी लडकी ने सुझाव दिया ये इस सभी ने सहमती जताई । निकिता ड्राइवर की सीट के पास गए और बस में लगे ऑडियो सिस्टम को दिखाकर बोली । जैसे ही म्यूजिक शुरू होगा सब इसरो माल को पास करेंगे और जब म्यूजिक बंद होगा तब जिसके पास जो माल होगा वोट रथिया, डेयर चुनेंगे । निकिता ने म्यूजिक शुरू किया । मैडम की खुशबूदार रो माल को गेंद की तरह मोडकर सभी लडकियों ने एक दूसरे को देना शुरू कर दिया । जो म्यूजिक रुका तो गेंद सुरभी के पास थी । श्रोतिया डेयर । सुरभि से पहले बैठी लडकी ने उससे चुनने को कहा तो उसने बे झिझक पूछ लिया । क्या तुमने कभी किसी को सोच क्या है था? किया है? उसने बिंदास कह दिया । बाकी सभी लडकियों ने जमकर हूटिंग कि किसको क्या है? उसने जवाब दिया वो मैं क्या बताऊँ? तुम एक बार में सिर्फ एक ही सवाल पूछ सकती हो । सभी खस पडे । खेल जारी रहा । एक लडकी ने डेयर लिया और आइटम सॉंग में अपनी टॉप ऊपर कर ना बी दिखाकर नाचने लगे । लडकियाँ इतना हूटिंग कर रही थी कि ड्राइवर को रास्ते भर हॉर्न बजाने की जरूरत ही नहीं पडी । इस बार जो म्यूजिक बंद हुआ तो रुमाल तृषा के पास था । लोग इतने उसकी आंखों में देखते हुए पूछा तो क्या डेयर लोहित सोचा? अगर वह डेयर चुनेगी तो वह तृषा को उसे किस करने को कह देगा तो उसने चुना । ये लोहित के लिए एक वरदान की तरह था । वो अपने प्यार से जो भी चाहे पूछ सकता था उससे शादी करोगी । वो पूछना चाहता था लेकिन उस समय वो लोहित नहीं था । काफी मंथन के बाद रोहित ने नपा तुला सा सवाल पूछा, अगर कोई लडका तो में शादी के लिए प्रपोज करें तो क्या तुम हाँ होगी ये तो इस पर निर्भर करता है ना कि प्रकोष्ठ कर कौन रहा है । अगर मेरा भाई लोहित तुम्हें प्रपोज करे तो लोहित ने इस बार सही सवाल पूछा । तृषा का जवाब सुनने के लिए लोहित व्याकुल हो गया । उस पल के लिए पृथ्वी ने घूमना बंद कर दिया । बाहर पेडों में बैठे पक्षियों ने चहचहाना बंद कर दिया । ड्राइवर भी सडक के किनारे बस खडी करके लोहित के जीवन के फैसले को सुनने के लिए पीछे देखने लगा । लो हितने सांसी रोक ली और ये जानने के लिए स्थिर हो गया कि वहाँ कहेगी यादव त्रिशा ने कहा रूल्स रूल्स एक बार में एक ही सवाल पूछ सकते हो । सभी लडकियाँ हसने लगी । लोहित को अफसोस हुआ कि उसने पहले ही सीधे लोहित का नाम लेकर क्यों नहीं पूछ लिया । लेकिन उसे इस बात की संतुष्टि थी कि कम से कम तृषा ने लोहित के लिए ना तो नहीं कहा । कुछ ही घंटों में ठंडी हवा के झोंकों ने लोनावला में उनका स्वागत किया । हमेशा की तरह वहाँ हल्की हल्की बारिश हो रही थी । तृशा बस से उतरी पानी की छोटी छोटी बूंदों ने उसके कोमल गालों को चूम लिया । लोहित भी बारिश में तृषा के साथ भी लेना चाहता था लेकिन उसके नकली मेकप ने उसे ऐसा करने की परमिशन नहीं दी । एक छात्रा शेयर किया अमर लोहित ने और वह बस से उतरे । एक लडका उनके पास मगर लाल चिक्की बेचने आया । जब लोहित और अमन उसकी चिक्की देख रहे थे तब वो लडका उन्हें देख रहा था । वे दोनों नकली लडकियाँ थी फिर भी होने बुरा लग रहा था । लडकी होना आसान नहीं । हर लडका उन्हें ऐसी नजरों से देख रहा था जैसे वो उनका बिछडा प्यार हो । कुछ कदम चलने के बाद वे दूसरी बांध से आने वाले झडने के पास पहुंच गए । झडने से पानी झाड बनाता हुआ नीचे गिर रहा था । लडकियां उत्साहित होकर पानी में चली गई । अमन और लोहित दूर खडे होकर प्रकृति के सौंदर्य को बनी में नहाते हुए निहार रहे थे । पानी में एक दो डुबकी लगाने के बाद तृषा लोहित के पास गई और कहा चलो हमारे साथ पानी में नहीं नहीं क्यूँ? रोहित ने बहाना बनाया बदलने के लिए हमारे पास कपडे नहीं है, चिंता मत करो । मेरे पास एक्स्ट्रा है तो मेरी ड्रेस पहन लेना । लो ही तो रमन वही खडे खडे हिचकी चाह रहे थे । तृषा ने फिर कहा मुझे पता है तुम पानी में क्यों नहीं जाना चाहती हूँ । लोह इतने धीरे से अपनी भी कुछ किया कि सही जगह में है या नहीं । तृषा लोहित के करीब गई और उसके कान में फुसफुसाई महीने की वो दिन चल रहे हैं क्या लोहित समझते नहीं पाया कि त्रिशा किस दिन की बात कर रही थी लेकिन फिर भी उसने हमें सर हिला दिया । उसने चौंकते हुए पूछा तुम दोनों का एक साथ उन दोनों ने एक साथ हाँ कहाँ? और आगे बिना कुछ कहे वहां से भागकर बस में जा बैठे । थोडी ही देर बाद तृषा और खुशी भी बस में आ गई । उन्होंने बस का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया । पानी में भीगने के कारण दोनों लडकियों के कपडे लगभग पारदर्शी हो गए थे । अमन और लोहित को विश्वास नहीं हो रहा था कि वह क्या देख रहे थे । तृशा ने पूछा हमारे साथ मजारा है ना? लोग इतने उसकी ओर देखते हुए कहा हाँ, इससे ज्यादा मजा तो हो ही नहीं सकता । कृषि और खुशी ने अपने बैग से सूखे कपडे निकाले । लोहित ने पूछा तो तुम दोनों कपडे कहाँ बदलोगे? यही इससे पहले की लोहित, कुछ समझ वादा या उन्हें रोक पाता । तृषा ने अपना टॉप उतार दिया । लोग इतनी चौंकते हुए पूछा ही तू क्या कर रही हो? तृषा ने ठंड से थरथराते हुए कहा आपने गीले कपडे बदल रही हूँ और क्या लोहित के नैतिक मूल्यों ने कहा पहले हमें बाहर तो जाने दो । फिर तुम कपडे बदल लेना चलता है बाबा हम सब लडकियाँ ही तो है । खुशी ने कहा और उसने भी अपना टॉप उतार दिया । फिर दोनों लडकियों ने अपनी जिंदगी उतार दी । अमन और लोहित ने शर्म से अपनी आंखे बंद कर ली । वे केवल अपने प्यार के साथ क्वालिटी टाइम बताना चाहते थे ना कि उन्हें ऐसे देखना । तृषा ने उन्हें देखते हुए कहा उस तुम दोनों तो ऐसे शरमा रही हो, जैसे तो वास्तव में लडकियाँ हो ही नहीं । ये सुनकर अमन और लोहित की आंखें चौडी हो गई । उन्होंने सोचा अगर वह तृषा और खुशी को नहीं देखेंगे तो उन्हें शक हो जाएगा । लोग इतने धीरे धीरे अपना दुस्साहस बढाया और दिशा को देखने लगा । तृशा ने अपने सफेद दातों में तौलिया दबाकर आपने गिरी बॅाबी उतार दी और लोहित के सामने वाली सीट पर फेंक दी । लोहित की अंतरात्मा कह रही थी उसे मत देख लेकिन उसका दिल इतने जोरों से धडक रहा था कि उसे अंतरात्मा की आवाज सुनाई ही नहीं थी । लोहित मन ही मन सोचता था कि काश तृषा अपना तो लिया गिरा दे । लोहित ने अमन को टेलीपैथी करते हुए कहा कि इस हाल में तृषा को देखने की जरूरत नहीं करना । भावी वो दे दी । हाँ बताइए मुझे और दो भी खुशी को मत देखना । उन दोनों ने मन ही मन आपसी समझौता कर लिया । कृष्णा ने लोहित से निवेदन किया रिया मेरे गीले कपडे बैग में पैक कर दो । प्लीज रिशा के उतारे हुए कपडे लोहित के हाथ में थे । उसने छोडकर बैग में पैक कर दिया । तृषा ने कहा तो दोनों भी अपने कपडे बदल लोग नहीं लोगे तो रमन एक ही स्वर में जोर से चलाए । कुछ ही घंटों में अन्य सभी लडकियाँ भी आपने गीले कपडे बदलने के लिए बस में वापस आ गई । अमन और लोहित बस से बाहर चले गए क्योंकि उन सभी को कपडे बदलते हुए देखने का दबाव उनका स्पोर्ट्स कार्ड सहनी पाता । फिर वापस मुंबई पहुंचे और मेकप आर्टिस्ट को उनके कपडे लौटाकर धन्यवाद किया ।

जिनी पुलिस भाग 17

भाग सत्रह है । फ्लाइट में लोहित के बगल में बैठे व्यक्ति ने कहा, वह आपने तो वास्तव में बहुत शैतानियां की है । हाँ और मेरी हर शैतानी में मेरा साथ दिया । मेरे दोस्त अमान में उन्होंने एयरलाइंस द्वारा परोसा गया खाना खाया और कुछ घंटों के लिए हो गए । जब भी जागे तो विमान अमेरिका में उतरने वाला था । उतरते समय विमान के अंदर की रोशनी मंदी हो गयी । लोहित ने अपनी आदत अनुसार स्मार्ट बनने की कोशिश करते हुए पूछा तो मैं पता है लैंडिंग के दौरान विमान के अंदर की रोशनी मंदिर क्यों करते हैं । काफी सोचकर उसने कहा, शायद ऊर्जा बचाने के लिए ताकि वे इंजन को अधिक ऊर्जा प्रदान कर सके । नहीं या और इन छोटे छोटे एलइडी लाइट से बचाई गई बिजली उस विशाल इंजन की भला क्या मदद करेगी । फिर अगर विमान लैंडिंग के समय क्रैश हो जाए और यात्रियों को अंधेरे में विमान से बाहर निकलना पडे तो उनकी आंखें पहले से ही कम रोशनी में देखने के लिए तैयार रहे । अरे बाप बडी अच्छी तरह की है तो लोहित के सपनों के देश में विमान लैंड हो गया । कप्तान ने घोषणा की कि बाहर का तापमान नई दिल्ली की तुलना में ठंडा है । रोहित ने अपने बैग से नया लॉन्ग कोट निकाला जो उसने खास रूप से अमरीकी दौरे के लिए दिया था । अपनी उंगली पर कोर्ट को घुमाते हुए हवाई अड्डे पर लोहित खुशी से ऐसे घूमने लगा जैसे कोई बच्चा खिलोनों की दुकान में घूम रहा हूँ । अमेरिका में दोपहर के ढाई बजे थे, लेकिन भारत में रात के बारह बजे थे । जैसे ही एयरपोर्ट के वाईफाई से कनेक्ट हुआ, लोह इतने तृषा को इंटरनेट कॉल किया । वो उसे बताने के लिए एक्साइटेड था कि वो सब कुशल हमारी का पहुंच गया है । मगर तृषा ने फोन नहीं उठाया । एक पल तो लोहित के जहन में आया कि त्रिशा हो गई होगी इसलिए फोन नहीं उठा रही । मगर दूसरे ही पलों से ये विचार भी आया कि कहीं अमेरिका में रहने की बात को लेकर प्रिशा उससे नाराज तो नहीं है । रोहित ने उसे अपनी आवाज में रिकॉर्ड करके मैसेज भेजा । जाने बाद मैं तुम्हें बहुत मिस कर रहा हूँ तो नहीं जानती मैं तुम से कितना प्यार करता हूँ । प्लीज एक बार मुझसे बात करूँ, मुझे मौका तो तुम्हें मनाने का वैसे भी दोस्त रूठा करते हैं । ऐसी दोस्ती नहीं । लोग इतने फिर अपने मम्मी पापा को वीडियो कॉल किया । मम्मी ने आंख रगडते हुए कहा पहुंच गए एयरपोर्ट से निकलने से पहले अपना सामान लेना मत भूलना । हाँ में पहुंच गया और सामान भी ले लिया है । मैंने पूछा आधी रात है होटल जाने के लिए टैक्सी मिल जाएगी ना? मैं यहाँ पर रात नहीं बल्कि दिन है । क्या वहाँ अलग अलग देशों में अलग अलग समय होता है । भारत में रात होती है तब यहाँ दिन होता है । लेकिन ऐसा जो बेटा पापा ने बीच में टोकते हुए कहा अरे और कितनी फिजूल की बातें कर होगी । उसके फोन के इंटरनेशनल रोमिंग लग रहा होगा । मैं वॉट्सऐप से कॉल कर रहा हूँ । पापा इसमें रोमिंग नहीं लगती तो माँ पृथ्वी निरंतर घूम रही है । पृथ्वी का कुछ हिस्सा कभी सूरज के समीप होता है । कुछ हिस्सा दूर होता है तो जो हिस्सा सामने होता है वहाँ सूरज का प्रकाश पडता है । जिसे हम दिन कहते हैं और जहाँ नहीं पडता वहाँ अंधेरा होता है जिसे हम रात कहते हैं । तो इसलिए हर देश में सूरज की किरणों के हिसाब से समय निर्धारित होता है । इसका मतलब है अगर मैं अमेरिका जाऊंगी तो यहाँ की टीवी सीरियल्स देखने के लिए मुझे रात में जानना होगा । मासूमियत से भरी माँ को एक ना एक दिन तो अमेरिका में रहने की चिंता सता ही रही थी । नहीं मावे इस देश में यहाँ के समय के अनुसार प्रसारित करते हैं । पापा ने माँ से फोन छीनकर कहा अच्छा बेटा डॉलर को संभाल के रखना । अंदर की जेब में हो के पापा लव यू लोहित ने मुस्कुराकर फोन काट दिया । इमीग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद रोहित ने एयरपोर्ट में ही अपने कपडे बदले और बाहर चला गया । उसने गोबर क्या बुक की और लगभग पंद्रह मिनट में ही पचास किलोमीटर का रास्ता तय करके सीधे फेसबुक हेडक्वॉर्टर मेनलो पार्क पहुंच गया । वो भी बिना नहाये । इतने लंबे सफर के बाद उसे थोडा आराम करना चाहिए था । मगर मार्क जुकरबर्ग से मिलने की उत्सुकता के कारण वो बिल्कुल तरोताजा और काफी अलग महसूस कर रहा था । फेसबुक हेडक्वार्टर के मेन गेट पर सुरक्षा गार्ड ने उसे रोकते हुए कहा, मुझे अपना पासपोर्ट और फॅार दिखाइए । सुरक्षा गार्ड का चेहरा ऐसे उतरा हुआ था जैसे कई जन्मों से वह ऐसा ही ना हूँ । सिक्योरिटी गार्ड पूरी दुनिया में एक जैसे ही होते हैं । डॉक्यूमेंट शेख करने के बाद गार्ड ने लोहित को अंदर जाने की परमिशन दे लोहित निर्धारित समय से दो घंटे पहले पहुंच गया था । फेसबुक दुनिया की सबसे बडी कंपनी में से एक है और इसका कार्यालय अपने कद के अनुरूप ही भव्य और विशाल है । ये एक कर्मचारी हितेषी परिसर है जहाँ कर्मचारी खुले विचारों के साथ काम करते हैं । लोहित मांग कि पोस्टल सेक्रेटरी अनेक रिकॉर्ड के पास पहुंचा । उसकी आंखे आईपैड की स्क्रीन पर टिकी थी । वो किसी काम में बिजी लग रही थी । हाई ॅ रोहित ने जाने से पहले कई बार जिन्हें की मदद से उनका नाम उच्चारण करने का अभ्यास किया था । हाँ, युवा मिस्टर बंसल फ्रॉम इंडिया उसने कहा, जैसे ही उसने लोहित की गर्दन पर लटका हुआ विजिटर आईकार्ड देखा, आपकी जर्नी कैसी रही? मिस्टर बंसल उसने पूछा । एयर होस्टेस को याद करते हुए लोहित ने मुस्कुराते हुए कहा, यात्रा सुखद थी, आप कॉफी लेंगे । उस ने फिर पूछा और जवाब का इंतजार किए बिना ही लोहित को ब्रेकआउट एरिया ली गई । वहाँ लगी कॉफी मशीन से लोहित ने खुद ही एक कप कॉफी निकली । आप उस कॉन्फ्रेंस रूम में बैठकर इंतजार कीजिए । मैं आपको आपकी उपस् थिति के बारे में सूचित कर देती हूँ । वहाँ हर किसी को उनके नाम से बुलाया जाता है । भले ही वो कंपनी का मालिक ही क्यों ना हो किसी को भी वह सर या मैडम नहीं कहते । फेसबुक के अन्य कर्मचारियों के साथ माँग की बैठने की जगह खुले क्यूबिकल में थी । अनेका के जाने के बाद एक कप कॉफी और पीकर लोहित कॉन्फ्रेंस रूम में बैठ गया और माँ का इंतजार करने लगा । फेसबुक की टीम मजाक में मांग के कॉन्फ्रेंस रूम को एक्वेरियम कहती है क्योंकि इसकी सभी दीवार काज की है । हर कोई देख सकता है कि उनके कंपनी का फाउंडर क्या काम कर रहा है । लोग इधर किसी को आस पास के क्यूबिकल्स में बैठा देख सकता था और विलोहित को लोहित देखा की एक लडकी अपने हाथों में कुछ कागजात लिए ऐसे भाग रही थी जैसे अगर वह जल्दी ना जाए तो फेसबुक के शेयर गिर जाएंगे । रामजाने इस मीटिंग रूम में कितने इंपॉर्टेंट मुँह लिए गए होंगे जिसमें फेसबुक को इतनी बडी कंपनी बनने में मदद की । आखिर हम जो फैसले लेते हैं उसी से हमारी जीत या हार तय होती है । एक आई पी फोन और एक प्रोजेक्टर आयताकार आकार के मेज पर रखा हुआ था जिसके चारों और दस कुर्सिया थी । दीवार के एक तरफ एक मार्कर बोर्ड को लगाया गया था जिसमें कुछ नंबर और उनके बारे में लिखा हुआ था वो संख्या डिफरेंट दिया डेवलपमेंट के मॉड्यूल नंबर हो सकते हैं । एक कोने में फुटबॉल और छोटे डंबल रखे थे और दूसरे कोने में एक गृह रंग का कॉर्नर । सोफा छत पर लकडी का शानदार काम किया हुआ था । लगभग बीस मिनट के इंतजार के बाद लोह इतने मार्क को हाथों में एप्पल का लेपटॉप लिए आते देखा । ये उसके लिए बहुत ही खुशी का पल था । उसकी जिंदगी का आदर्श व्यक्ति उसके सामने योगी चला रहा था । मांगने मेले डेनिम के साथ एक ढीली हाफ स्लीव्स ग्रे टीशर्ट पहनी हुई थी । वो हर दिन इसी तरह की साधारण कपडे पहनते हैं । ढेर सारे पैसे होने का मतलब ये नहीं है कि आप हमेशा महंगी कोट पहने । तो जब इंटरव्यू में पूछा गया कि वह ज्यादातर एक ही रंग की टीशर्ट क्यों पहनते हैं तो उन्होंने बडा ही सरल और प्रभावशाली जवाब दिया । उन्होंने कहा कि मैं इतना भाग्यशाली हूँ की मैं हर दिन सुबह उठकर दुनिया भर के अरबों लोगों के लिए काम करता हूँ और मैं ये नहीं चाहता कि मैं कुछ भी ऐसा करने में अपना टाइम वेस्ट करो जो गैर जरूरी हूँ । दूसरे सभी कामों में मैं अपने आप को कम से कम बिजी रखना चाहता हूँ और सिर्फ इस पर ध्यान देना चाहता हूँ की कैसे में लोगों की सेवा अच्छे ढंग से कर सकता हूँ जो आपको दुनिया के सबसे सफल उद्यमी बनने में मदद करती है । लोहित ने खडे होकर उनसे हाथ मिलाकर उनका अभिवादन किया । फिर बैठकर उन्होंने चर्चा शुरू की । मेरी टीम ने मुझे आपके स्टार्ट अप के बारे में बताया । हमें आपका आइडिया पसंद आया । मैं फेसबुक को और बेहतर बनाने के लिए आपकी टेक्नीक का यूज करना चाहता हूँ । मेरी कानूनी टीम आपको अनुबंध भेजेगी और आपके हस्ताक्षर करने के एक सप्ताह के भीतर आपके खाते में पैसे भेज दिए जाएंगे । मैं अपनी कंपनी को बेचना नहीं चाहता हूँ सर मुझे पता है कि अगर मैं अपने आइडिया पर काम करता रहूँगा तो मैं भी आपकी तरह चमत्कार कर सकता हूँ । अगर बेचना नहीं चाहते तो यहाँ जो आए हो आप मेरे आदर्श है सर, मैं आपसे मिलने का मौका गवाना नहीं चाहता था । मैं अपने बस कराकर कहा आपसे मिलकर खुशी हुई । यदि कभी भी आपका इरादा बदले और आप अपनी टेक्नोलॉजी बेचना चाहो तो चले आइयेगा मार्केट लोहित को समझाने या बहलाने की कोशिश नहीं की । बस अपना लेपटॉप लेकर वहाँ से चले गए । आप जितना कम बोलते हैं उतना ही लोग आप की बात सुनते हैं । रोहित ने मांग के साथ मुश्किल से तीन मिनट बताए होंगे लेकिन ये उसकी जिंदगी कि सबसे बेहतरीन तीन मिनट थी । लोहित के पहले किससे भी बेहतर माँ की शख्सियत कमाल की थी । उस से मिलकर लोहित का खुद के प्रति आत्मविश्वास और भी ज्यादा बढ गया । बडा आदमी असल में वही होता है जिस से मिलकर अब छोटा महसूस ना करें । मार्ग से मिलने के बाद भूख और नींद जैसी मानवीय जरूर थी । लोहित के शरीर पे हावी होने लगी रोहित ने फेसबुक के कैंपस से बाहर निकलकर अपने मोबाइल में भारतीय रेस्तरां की खोज की और मिनी भारत डाॅट माउंटेन व्यू दिए जाने के लिए निर्देश प्राप्त किया । जब रोहित ने वहां पहुंचकर मैंने खोला तो देखा कि एक साथ ही नान की कीमत तीन डॉलर थी जिसका मतलब लगभग दो सौ दस भारतीय रुपए । भारत में दो सौ दस रुपये में हम किसी अच्छी जगह पर स्पेशल अनलिमिटेड थाली खा सकते हैं और यहाँ उतने में सिर्फ एक रोटी आती है । मैंने में खाने के दाम को देखते हुए कुछ भी ऑर्डर करना लोहित के लिए बहुत ही मुश्किल हो रहा था । आधे घंटे पहले लोग इतने बेशुमार दौलत को ठुकरा दिया और अब भरपेट खाना खाना भी मुश्किल लग रहा था । उसे कीमतें अदा करनी होती है अपने जुनून के लिए बडे हो ही नहीं बनते साहब तीनी आज पर पकडना पडता है । लोहित फिर त्रिशा को इंटरनेट कॉल किया लेकिन परेशानी कोई जवाब नहीं दिया । जब से वो मेरी का आया था, निशाने उसे एक बार भी बात नहीं की थी । लोहित के दिमाग में बहुत सारे थर्ड चल रहे थे । मैंने शादी के बाद अमेरिका में रहने की जिद क्योंकि ये सोचकर लोहित खुद को कोसने लगा । उसे इतना बुरा लग रहा था कि अमेरिका में हो । कहीं घूमने भी नहीं गया । खाना खाकर सीधे होटल चला गया और वहाँ एकांत में तृषा को याद करने लगा । रात को उसकी इंडिया वापस लौटने की फ्लाइट थी । हाँ,

जिनी पुलिस भाग 18

भाग अठारह है । इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नहीं दिल्ली में आपका स्वागत है । स्थानीय समय तेरे पचास है और तापमान बत्तीस डिग्री सेल्सियस है और हवा चौंतीस प्रतिशत नाम है अपनी सुरक्षा के लिए कृप्या अपनी कुर्सी की पेटी बांधे रखे । जब तक की कैप्टन फाॅल साइन बंद नहीं कर दी । आप का दिन शुभ हो । लोहित गहरी नींद था जब इस अनाउंसमेंट ने उसी जगह दिया हिंदुस्तान पहुंच गए उसी संतोष और शांति महसूस हुई । घर आखिर घर होता है चाहे कैसा भी हो । काश तृषा मुझे सरप्राइज देने के लिए हाथों में प्लेकार्ड लेकर एयरपोर्ट के बाहर खडी हो जिसमें लिखा हूँ मेरा होने वाला पति ये सोचकर लोहित खिलखिलाकर हंस पडा कहीं ना कहीं लोहित के दिमाग में ये अहसास तो था की कुछ बहुत ही बुरा हुआ है और वह नहीं आएगी लेकिन उसका दिल्ली के मानने को तैयार नहीं था । इमिग्रेशन काउंटर पर ये कन्फर्म करने के बाद की वो सब कुशल हिंदुस्तान वापस आ गया है । लो हिट एयरपोर्ट टर्मिनल से बाहर निकला लोहित देखा की कुछ दूरी पर तृषा हाथों में गुलदस्ता लिए खडी थी । उसे देखते ही लोहित के लंबे सफर की सारी थकान छूमंतर हो गई । उसके शरीर में एक नई एनर्जी भर गई । तेजी से चल के लोहित उसके पास गया तो उसने देखा की असल में वो तृषा नहीं बल्कि कोई और थी जो दूर से तृषा जैसी दिख रही थी । लोहित के मम्मी बातों से लेने आए थे । उन्हें देख कर लोग इतने सोचा लगता है तो क्या उसे सरप्राइज देने के लिए घर पर छुट्टी होगी और वह इतनी शैतान है कि उसने मम्मी पापा को भी अपने प्लान में शामिल कर लिया होगा । लोहित के पहले विदेश दौरे से उसका स्वागत करने के लिए उसने लिविंग रूम को सजाया होगा । हाँ और घर पर ही झुककर लोहित का इंतजार कर रही होगी । लोहित कमनीय मानने को तैयार ही नहीं था कि त्रिशा उससे बात नहीं कर रही है । अपने मम्मी पापा को देखते ही लोग इतने सीधे पूछा माँ तृषा कहा है जब से मैं अमेरिका गया हूँ उसने मुझसे बात नहीं की है । ये सुनते ही लोहित की माँ का चेहरा पीला पड गया । एक हफ्ते बाद अपनी बेटी को देखकर उनके चेहरे पर जो खुशी थी वो अचानक से भी की पड गई । चलो घर चलते हैं फिर इस बारे में आराम से बात करेंगे । पापा ने सख्त चेहरा बनाते हुए कहा ये सुनकर रोहित और भी आश्वस्त हो गया कि त्रिशा उसके घर में ही छिपे हैं । इसलिए तो पापा ने कहा कि घर चल फिर बात करते हैं । लोहित । मन ही मन मुस्कुराने लगा और कुछ भी नाम समझने का नाटक करने लगा । लोहित जानता है दिशा को सरप्राइज देना कितना पसंद है । राष्ट्रीय भरमाने लोहित से आंख नहीं मिलाई । पिताजी भी गंभीर लग रहे थे । उन्होंने लोहित से ये भी नहीं पूछा कि लोहित उनके लिए अमरीका से क्या लाया । लोहित ने सोचा कि दोनों कितना अच्छा नाटक कर लेते हैं । आधे घंटे बाद वे घर पहुंचे । लोहित ने अपने फ्लैट के दरवाजे को बडी उम्मीद के साथ खोला । लेकिन जैसा उसने सोचा था लिविंग रूम वैसा सजाया हुआ नहीं था । वो भाग कर अपने बेडरूम में गया । ये देखने की कहीं बैडरोल्स सजाया हुआ होगा । उसे सोचा कि काश तृषा उसकी दरवाजे के पीछे छुट्टी हो और जैसे ही वो अंदर जाएगा वो बाहर निकले और उसे एक जोर की झप्पी देते हैं । मगर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । लोहित ने अपने दिल को झुठलाना बंद किया और मौके की गंभीरता को समझाते हुए पूछा, पापा तृषा के बारे में आप क्या बताने वाले थे? लोहित यहाँ बैठो पापा ने लोहित को बुलाकर सोफे पर बैठने को कहा । क्या हुआ माँ लोहित के लिए पानी लाने रसोई में गई । प्लीज बताओ क्या हुआ? लोहित ने लगभग रोते हुए पूछा । अब उसे एहसास हो गया कि उसे जो आभास हो रहा था कि कुछ बहुत बुरा हुआ है, वो सच है । अब उसके जलने उम्मीद छोड दी और दिमाग की बातें मानकर उदास हो गया । मैं पानी का ग्लास लेकर आई और लोहित के सामने टेबल पर रख दिया और उसके बाजू में बैठ गई । मम्मी और पापा ने लोहित के दोनों हाथों को अपने हाथों में पकड लिया । बाबा बताने लगे कि क्या हुआ था । र्इशा के पिताजी ने दो दिन पहले मुझे फोन किया और कहा कि वे लोग की शादी नहीं करना चाहते हैं और वे हमेशा के लिए ये शहर छोड कर जा रहे हैं । लोहित और तेज रोने लगा । लो हित की मामी रोने में लोहित का साथ देने लगी । पापा ने आगे कहा, मैंने इसका कारण पूछा लेकिन उन्होंने कहा कि उनके साथ कोई दुर्घटना घटती है जिसका जिक्र वो नहीं करना चाहते । लोहित के सर पे तो जैसे आसमान टूट पडा । उसने रोते हुए पूछा आप ने मुझे पहले बताया कि उन्हें लोहित ने सोचा कि कहाँ शीर्ष अर्पित बुरा सपना हूँ । उसने खुद को चिमटी काटी लेकिन कोई दर्द महसूस हुआ । पहले ही उसके दिल में बहुत दर्द भरा हुआ था । अगर वो मेरे साथ ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि मैंने उसे अमेरिका में रहने के लिए मजबूर किया तो मैं वादा करता हूँ सपने में भी कभी अमेरिका के बारे में नहीं सोचूंगा । रोहित भी बखूबी जानता था कि त्रिशा ये सब जानबूझ कर नहीं कर रही होगी । उसके परिवार के साथ कुछ बहुत बुरा हुआ होगा । कोई बहुत बडी मजबूरी होगी । लोहित को तृषा के ऊपर जरा भी गुस्सा नहीं आ रहा था बल्कि वो तो तृषा को लेकर कि चिंतित था । परिस्थितियों को समझने के लिए लोग इतने तृषा को फोन किया लेकिन उसका नंबर बंद था । लोहित ने उसके पापा मम्मी और उनके लैंडलाइन नंबर पर भी फोन किया लेकिन सभी नंबर बंद थे । लोहित की मम्मी ने अपने आंसू पहुंचती हुए कहा बेटा चिंता मत करो, हम तुम्हारे लिए उससे भी अच्छी लडकी ढूढेंगे । माताओं का विजय अति कोमल चिंता होती है तो सिर्फ अपने बच्चों की, फिर पडोस में चाहे आगे क्यों ना लगे हैं । मैं उसके घर जाकर देखता हूँ । शायद पता चल जाएगी आखिर ऐसा क्या हुआ जिसके कारण हम सबकी जिंदगी उजड गई । लोहित ने सोचा और लिविंग रूम की दराज में बाइक की चाबी तलाशने लगा और लोहित ने मेज पर रखे पानी के ग्लास को छुआ तक नहीं । बेटा कोई जरूरत नहीं है वहाँ जाने की । अगर उन्होंने शादी से इनकार किया है तो जरूर कोई वजह होगी । ये भी तो हो सकता है कि उन्हें कोई बेहतर लडका मिल गया हूँ अपनी बेटी के लिए जो उनकी ही बिरादरी का हूँ । लोहित के बाबा नाराज थे जोकि लाजमी था । भला वो थोडी ना लोहित की तरह प्यार में अंधे थे । लोहित का दिमाग सुनने था । उसे कुछ भी सुनाई नहीं दे रहा था और कई सारे सवाल उसके दिमाग को घेरे हुए थे । अपने मम्मी पापा को अनसुना कर लोहित घर से निकला और तेजी से बाइक चला गया । तृशा की सोसाइटी पहुंच गया । तृशा आठवीं मंजिल पर रहती थी लोग इतने लिफ्ट के बटन को लगातार कई बार दबाया मगर लिफ्ट नहीं आई । उससे इंतजार हुआ और तेजी से सांस रोकते हुए आठ मंजिल पर वो सीढियों से चढ गया । जैसे ही वह वहां पर पहुंचा उसने देखा कि उसके फ्लाइट के दरवाजे पर ताला लगा हुआ था । लोहित नब्बे किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बाइक चलाकर वहां पहुंचा । एक सांस में आठ मंजिल सीढी चढ गया और उसे मिला क्या केवल एक डाला लोहित तृषा को अपने पूरे दिल से प्यार करता था पूरी ईमानदारी के साथ । लेकिन तृषा ने ईद बार फिर से वही किया जो उसने बचपन में किया था । क्या इस बार पहले से कहीं ज्यादा बदतर लोहित तृषा के फ्लैट के बाहर ही फर्श पर बैठ गया । उसका शरीर पसीने से भीगा हुआ था । उसने वहीं बैठ कर अनंतकाल तक तृषा के आने का इंतजार करने का फैसला किया । उसका फोन बज रहा था । उसके पापा मम्मी उसे कॉल कर रहे थे लेकिन लोहित उनसे बात नहीं करना चाहता था । लोहित त्रिशा की सेवा किसी और से बात नहीं करना चाहता था । करीब दो घंटे के इंतजार के बाद तृषा के पडोसी ने दरवाजा खोला । लोहित वहाँ एक शराबी की तरह जमीन पर पडा था । उस पारसी महिला ने पूछा दिख रहा तो मैं यहाँ क्या कर रहे हो? मैं उनका इंतजार कर । राव आंटी वो कहाँ गए क्या तो लोहित हो । आंटी ने पूछा । लोहित की आंखें आशा से भर गए । उसे लगा कि त्रिशा ने उसके लिए जरूर कोई संदेश छोडा होगा । हाँ आंटी मैं लोहित हूँ । लोहित ने खडे होकर कहा कहाँ गए हैं वो लोग वापस कब लौटेंगे? उन्होंने ये शहर जोड दिया ऍम वो कभी वापस नहीं आएंगे । मुझे नहीं पता कि अचानक क्या हुआ । उस लडकी की तो शादी भी तय हो गई थी । फिर भी वो अचानक यहाँ से चले गए । क्या उन्होंने आपको कुछ नहीं बताया कि वह कहा और क्यों जा रहे हैं? नहीं मैंने जाने का कारण पूछा लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया । वो बहुत ही दुखी लग रहे थे । वो लोग आपस में भी कुछ बात नहीं कर रहे थे । जाती जाती तृषा मेरे पास आई और मुझे लिफाफा दिया । उसने कहा कि कुछ दिनों के अंदर लोहित नाम का एक लडका मुझे ढूंढते हुए यहाँ पर जरूर आएगा । उस ये लिफाफा दे देना । रुको मैं लेकर आती हूँ कहकर वह अंदर चली गई । लोहित फिर से फर्श पर बैठ गया । खडे रहने की ताकत उसमें नहीं थी । कुछ पलों में आंटी आई और एक सफेद सीलबंद लिफाफा लोहित को सौंप दिया । लोग इतने ऐसे काटते हुए हाथों से वो लिफाफा पकडा जैसी कोई व्यक्ति जिससे बरसों से कुछ नहीं खाया हूँ उसे खाना मिल गया हो । उस लिफाफे में तृषा का लिखा एक पत्र था लोहित । उसकी लिखावट आसानी से पहचान सकता था । उस की लिखावट इतनी सुंदर है कि माइक्रोसॉफ्ट को उस की लिखावट का एक नया फोन लॉन्च कर देना चाहिए और उस पॉंड का नाम तृषा रख देना चाहिए । लोहित ने पत्र को आहिस्ते से पकडा और सहलाते हुए उसे पडने लगा लोग हैं मुझे पता है हमारे साथ जो कुछ हो रहा है वो हरगिज नहीं होना चाहिए था । लेकिन अफसोस की ऐसा हो रहा है । जीवन में ऐसी परिस्थिति आती है जिन्हें हम नियंत्रित नहीं कर सकती । शायद इसे ही हम नियति कहते हैं । जब तक तुम अपने सपनों के देश से वापस लौट होंगे और ये चिट्ठी पढ होगी । मैं इस दुनिया में जीवित नहीं रहूंगी । मैं आत्महत्या करने जा रहे हो । लोहित की आंखों के सामने अंधेरा छा गया । कुछ पलों के लिए वह आगे बढने सका । लोहित नहीं सुनिश्चित करने के लिए पिछली पंक्ति को कई बार पढा की उसने सही पढा है या नहीं । मुझे पता है कि इस बात पर यकीन करना तुम्हारे लिए जरा मुश्किल होगा । पर तो में सच्चाई को स्वीकार करना ही होगा । हमारी शादी में बस कुछ ही दिन बचे थे और मैं तुम्हें दहलीज पर छोडे जा रही हूँ लेकिन यकीन मानो में कभी ऐसा करना नहीं चाहती थी । सिर्फ तुम्हें क्या? मैं तो इस दुनिया को ही छोडकर जा रही हूँ क्योंकि ये दुनिया और मुझे गवारा नहीं । खासकर दिल्ली मुझे गवारा नहीं तुम सही थी । लोहित और मैं गलत भारत रहने के लिए अच्छी जगह नहीं है । अच्छा है कि तुम ने अमरीका में रहने का फैसला किया है । मैं तो मैं ऐसे अचानक छोड कर जा रही हूँ । तो मैं लगता होगा ना कि कितनी बुरी हूँ मैं । मगर मेरा यकीन करो लोहित बुरी मैं नहीं मेरे हालत है । किसी शीशे की तरह टूट गई हूँ मैं और तुम्हें चोपना जाऊँ इसलिए तुम से दूर जा रही हूँ तो मैं पता है जब हम स्कूल में पढती थी शायद तब मुझे तुमसे प्यार हो गया था । मगर उस वक्त ये मेरी समझ में नहीं आया । मैं इतनी छोटी थी कि मुझे पता ही नहीं था की यार क्या होता है । लेकिन अब मैं जानती हूँ मुझे जब भी हसी आती थी तो मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती थी । जब मुझे रोना आता था तो मैं तुम्हारी कंधे पर सर रखकर होना चाहती थी । मैं अपना हर पल तुम्हारे साथ बिताना चाहती थी ही, प्यार नहीं तो और क्या है? इस तरह बेरुखी से पत्र लिखने की बजाय मैं तुमसे आखिरी बार मिलना चाहती थी । मैं तुम से रूबरू होकर जीभरकर होना चाहती थी । एक आखिरी बार तुम्हारे गले लगकर तो प्यार करना चाहती थी लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया । नहीं आई तुम्हारे सामने क्योंकि मुझे पता है अगर एक बार में तुम्हारे सामने आ गई तो तो मुझे हर किस जाने नहीं होंगे । इसीलिए मैं तुमसे मिले बिना ही जा रही हूँ । वैसी डिटो में अलविदा कहना मेरे लिए सबसे कठिन काम होता है । मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती क्योंकि मैं तुम्हें कभी भी वो खुशी नहीं दे सकती जो एक लडकी अपने जीवन साथी को देती है । मैं चाहती हूँ कि तुम हमेशा खुश रहो । मैं चाहती हूँ कि तो मैं फिर से किसी से प्यार हो जायेगा और उसके साथ तुम्हारी शादी हो जाएगी । मेरे एक छात्र हरप्रीत के पिता की मदद से हमने रातोरात अपना घर बेच दिया और अब हम यहाँ से हमेशा के लिए जा रहे हैं । कहीं दूर बहुत दूर मैं इस जीवन का बोझ उठाना नहीं चाहती है । मैंने अभी तक अपने माता पिता को ये नहीं बताया है लेकिन जब मैं उन्हें इस शहर की भीडभाड से दूर किसी शांत जगह पर ठहराते होंगी । तब एक दिन चुपके से मैं आत्महत्या कर लूंगी । इंडिया गेट पर हमारी आखिरी मुलाकात ही आधे तो में तुम अपनी गाडी में बैठे और मैंने कहा था कि मैं घर जाने के लिए सीधे टैक्सी ले रही हूँ । मैंने झूठ कहा था । टैक्सी से घर तक का किराया बहुत जाता था इसीलिए मैं घर ना जाकर मेट्रो स्टेशन पर उतर गई । वहाँ सिर्फ दो मिनट की देरी के कारण मेरी मेट्रो छूट गई और अगली ट्रेन एक घंटे बाद थी । मुझे लगा कि मैं रात ग्यारह बजे तक घर पहुंच जाओगे लेकिन उस रात में घर पहुंची ही नहीं ।

जिनी पुलिस भाग 19

भाग उन्नीस मैंने अपनी माँ को फोन किया और बता दिया कि मुझे घर पहुंचने में देरी हो जाएगी । उन्होंने पूछा मुझे की मैं इतनी देर रात कहाँ हो? अकेले तो नहीं हूँ मगर मैंने ये कहकर फोन काट दिया की मैं कोई बच्ची नहीं हूँ । अपना ख्याल खुद रख सकती हूँ । मैंने सोचा की एक स्वतंत्र नागरिक हूँ । ये मेरा भी देश है । मेरा भी शहर है । मैं जो चाहे कर सकती हूँ । आजाद मैं भी रात को पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सफर करने के लिए एक घंटे के इंतजार के बाद में मेट्रो ट्रेन में सवार हुई । ट्रेन में कुछ खास भी नहीं थी । देर रात की मेट्रो होने के कारण हर कोई थका हुआ दिखाई दे रहा था । मैं जिस डिब्बे में चढी उसमें कोई और लडकी नहीं थी । सिर्फ ऑफिस से वापस घर लौट रहे मर गए थे । लेकिन वो सभी शरीफ दिखाई दे रहे थे । उनके हाथों में बैंक और टिपिन बॉक्स थे । मैंने अपने कान में एयर फोन लगाया और कोल्ड प्ले के गाने सुनने लगी । दो से तीन बार तुम्हारा कॉल भी आया, लेकिन मैंने नहीं उठाया क्योंकि फिर तो पूछते कि मैं कहाँ हूँ । अभी तक घर कैसे नहीं पहुंची? पागल तो नहीं हो गई जो मेट्रो से जा रही हूँ । मैंने सोचा घर पहुंचकर तो मैं कॉल कर होगी । लगभग पच्चीस मिनट के बाद में स्टेशन पहुंची । घर अब भी आठ किलोमीटर दूर था । मैं झट से मेट्रो स्टेशन से बाहर निकली । जैसे जैसे देर रात हो रही थी, सडक पर भीड कम हो रही थी । सडक पर चलते ऑटो रिक्शा को मैंने रुकने का इशारा किया, लेकिन कोई भी मेरे लिए रुक नहीं रहा था । शायद वे भी अपना काम खत्म करके घर लौट रही थी । मैंने ऑटो या टैक्सी की तलाश में पैदल चलकर टैक्सी स्टैंड तक जाने का फैसला किया । चारों तरफ गहरी शांति पसरी थी । सडक पर कुछ आवारा कुत्ते भौंक रहे थे और मैं इतनी डरी हुई थी कि मेरी सांस और मेरे कदमों की आवाज भी मुझे विचलित कर रही थी । चंद्रमा घने बादलों के पीछे छूट गया था । अंधेरा और घना हो गया था । मैं वहां सडक किनारे बेवसी खडी थी । तभी मैंने एक तर्रार लाल रंग की पुरानी सी प्राइवेट में नहीं, बस को अपनी और आते हुए देखा । उस मनहूस जगह से निकलने के लिए वो बस मुझे एक अच्छा विकल्प लगा । मैंने हाथों से इशारा कर उस बस को रुकवाया । बस यही मेरी सबसे बडी गलती थी । बस का दरवाजा खुला । मैं अंदर गई और मेरे बैठने से पहले ही बस फिर से तेजी से दौडने लगी । लग रहा था जैसे यात्रियों से ज्यादा बस चालक को घर जाने की जल्दी थी । बस लगभग खाली थी । सिर्फ तीन से चार लोग थे जो शायद अपनी दूसरी शिफ्ट से लौट रहे थे । मैं दरवाजे के पास वाली सीट पर बैठे । कंडक्टर से टिकट खरीदा, कानूनी एयर फोन लगाया और अपनी आंखे बंद कर ली । मेरे खुले बाल हवा में लहरा रहे थे । बस कई बार रुकी और फिर शुरू हुई । लेकिन मेरा स्टॉक तो काफी दूर था इसीलिए मैं परेशान नहीं हुई । सिर्फ आंखे बंद कर बैठी रही । कुछ ही देर में पता ही नहीं चला कि कम मुझे नींद आ गयी । दिन भर की भागदौड के बाद में काफी ज्यादा थक गई थी । लगभग एक घंटे के बाद मैं चौक कर उठी । जब मुझे महसूस हुआ कि कोई अपनी उंगलियों से मेरे होटों को छू रहा है । मैंने आगे खोली तो देखा कि बस एकांत इलाके में खडी थी । वह बडा मैदान था । अन्य खानी बसी भी वहाँ पर खडी थी । दूर दूर तक ना ही रोशनी थी और ना ही कोई व्यक्ति मैच लाइव अच्छी तो ये क्या कर रहे हो? मेरा सेलफोन मेरे हाथ से छूट गया । बस के अन्दर हलकी सी रोशनी थी । मैं खडी हुई और वहाँ से भागने का सोचा लेकिन बस के दोनों दरवाजे अंदर से लॉक थी । चार लोग मुझे घेरे खडे थे । कानून तुम लोग ये क्या कर रही हो? चिंता मत करो, हम तो में चोट नहीं पहुंचाएंगे । तुम हमें अपना दोस्ती समझो और मजे करो हमारे साथ मैंने चारों की चेहरे देखे । वे उम्र में मुझसे छोटे या मेरे बराबर के लग रहे थे और सभी शराब के नशे में धुत्त थे । उनमें से एक ने मेरे होटों को फिर से हुआ । मैंने उसके हाथ को जितना संभव हो सके उतने जोर से खरोंचा और रोने लगी । प्लीज मुझे जाने को तो मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो? मेरी रोते हुए विनती की मेरे नागपुर उसके हाथ में चुभेंगे और उसके हाथ से खून आने लगा । उसने मुझे जोर से थप्पड मार दिया । उन में से दो लडकों ने आकर मेरे हाथों को दोनों तरफ से पकड लिया और मुझे सीट पर बैठा दिया । जिसने मुझे थप्पड मारा था । उसी ने कहा मेरी बात सुनो में भी तुम चाहो या ना चाहूँ हम तो आज सब कुछ करेंगे तुम्हारे साथ हाँ लेकिन अगर तुम भी हमारा साथ होगी तो तो मैं भी मजा आएगा । ये सब कहते वक्त वो मुझे जगह जगह छोडने लगा । मैं डर से काम रही थी और मैं मदद के लिए चिल्लाई लेकिन कोई मेरा बचाव करने नहीं आया । मैंने भाई बीत होते हुए उन दोनों से पूछा ड्राइवर और कंडक्टर कहा है चिंता मत करो, उन का इंतजाम कर दिया है । यहाँ रात भर हमें परेशान करने कोई नहीं आएगा । ये बोल कर वह सब जोर जोर से हंसने लगे । दो लडकों ने मेरी बाहों को कसकर पकड रखा था । एक लडका मेरे चेहरे के करीब आया । उसकी कर्कश सांसों में शराब की तीखी गंध आ रही थी । मैंने अपनी आंखे बंद कर ली और प्रार्थना करने लगे । लेकिन भगवान कृष्ण मुझे बचाने नहीं आई जिस तरह उन्होंने द्रोपदी को बचाया था । क्या सच में भगवान कभी किसी को बचाने आती भी हैं? क्या महाभारत सिर्फ एक मनगढत कहानी है जैसा कि तुम कहते हो उसने मेरे बाल खींचे और अपनी जीत से मेरी जिसमें को वो किसी जानवर की तरह छांटने लगा । मुझे लग रहा था जैसे मेरे शरीर में कोई साफ लोड रहा हूँ । जो कभी भी मुझे दे सकता है । उसने मेरी टॉप के अंदर हार डाला और बेदर्दी से दबाने लगा । मुझे बहुत दर्द हो रहा था । मैंने निवेदन किया तो जो करना चाहती थी तुमने कर लिया । जाने दो मुझे । मैंने अपने हाथ जोडकर उनसे निवेदन किया लेकिन उन कमीनो ने मेरे हाथों को जुड नहीं नहीं दिया । उन समय सबसे कम उम्र के लडके ने कहा जो पीछे खडा था भारी मेरी बारी कब आएगी? चलो से पीछे की सीट पर ले जाते हैं ताकि हम सभी स्लो इंडिया के मजे ले सके । मेरी बाई वहाँ को पकडे लडकी ने सुझाव दिया हाँ, चलो ले चले वो लडका जो मुझे झूम रहा था उसे मंजूरी दे दी । वो नजारों का नेता प्रदीप होता था । दो लडकों ने मेरे हाथ पकडे और दोनों मेरे पहले और बेरहमी से घसीटकर मुझे बस की पिछली सीट पर ले गए । उन्होंने मुझे सीट पर लिटा दिया और अपने घुटनों के बल बैठ गए । एक मेरे चेहरे के पास एक कमर के पास और दो टांगों के पास रो रोकर मेरे आंसू सूख गए थे । वो ऐसा बर्ताव कर रही थी जैसे मैं जीवित नहीं सिर्फ मांस का टुकडा हूँ और वो मुझे काट कर खाने वाले हैं इसके कपडे उतार हूँ । उनके नेता ने कहा, मैंने उनकी बात सुनी लेकिन बचने का कोई प्रयास नहीं किया । कुछ भी करने में मैं और समर्थ थी । मेरी अंतरात्मा की मृत्यु तो पहले ही हो चुकी थी । एक लडकी ने मुझे थोडा ऊपर उठाया और दूसरे ने मेरा टॉप उतार दिया । अन्य दो लडकों ने मेरी नीली डेनिम जेन्स को खींचकर उतार दिया । उन्होंने मेरे कपडों को ड्राइवर की सीट की और फेक दिया । मैं उनके लिए एक खुली लौटरी थी । वो चारों मेरे शरीर पर हर जगह सोच रहे थे । कुछ मिनटों के बाद उन्होंने मेरी बाकी के कपडे भी उतारकर खिडकी से बाहर फेंक दिए । मेरे शरीर में अब उनसे छिपाने के लिए कुछ भी नहीं बचा था । उन चारों की आंखें ऐसी पटी थी जैसे उन्होंने पहली बार किसी नगनी लडकी को देखा हूँ । एक लडकी ने मेरे पैर फैलाये और अपना प्यासा मोम मेरी टांगों के बीच में दबा दिया । उन्होंने मेरे शरीर पर हर जगह मुझे हुआ और छोडना शुरू कर दिया । वे मुझे चोट पहुंचा रहे थे लेकिन मेरी आत्मा के घावों की तुलना में शारीरिक गांव कुछ भी नहीं थे । मेरा फोन बचा है जो सामने की सीट के पास वर्ष पर पडा था । मेरे मम्मी पापा और तो मुझे फोन कर रहे थे । लगातार बज रहे फोन की घंटी से वो घबरा गए और अपनी मोटी कर्कश आवाज में बोले इससे पहले की कोई लडकी को ढूंढते हुए यहाँ पर आ जाये । चलों का काम खत्म करके भाग यहाँ से मैं एक मृत्यु शरीर की तरह वहाँ पर पडी थी । मेरे आत्मविश्वास नहीं तो मुझे उसी क्षण छोड दिया था जब उन्होंने मुझे पहली बार हुआ था । उनके नेता ने अपनी पैंट उतारी और मेरे ऊपर चढ गया । मुझे असहनीय दर्द हुआ और खून भी निकला । लगता है की लडकी कुंवारी है । उस लडके ने अपने साथियों से कहा थी लेकिन अब नहीं रही । उन चारों ने एक के बाद एक मेरा ऐसे इस्तेमाल किया जैसे मैं कोई वैश्या हूँ । चलो यहाँ से चलते हैं अब यहाँ पर और रुकना ठीक नहीं । उनमें से सबसे कम उम्र के लडके ने कहा मैं वहीं पडी थी हिलने में भी और समर्थन । उन्होंने दरवाजा खोला और जाने लगी । मैंने कहाँ पी आवाज में कहा को मेरे पास ठीक से बात करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं थी । क्या तुम चाहती हूँ की हम तुम्हारे साथ और कुछ भी करें । उनमें से एक ने पूछा चारों उसके बेहुदी मजाक पर हस पडे नहीं । मैं चाहती हूँ कि जाने से पहले तो मार डालो । मुझे खुद से मारना मुश्किल होगा । मेरे लिए हर जीना और भी मुश्किल तो मर । मर के जीने से मर जाना बेहतर होगा । हम ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि तो मैं मारने की हमें कोई जरूरत नहीं है और अगर मैंने पुलिस में शिकायत कर दी तो तुम लोग क्या करोगी? उनके नेता ने सबसे कम उम्र के लडके के कंधों को थपथपाती हुएकहा । हमें पुलिस से कोई डर नहीं । पुलिस तो इसके बाद आपकी जेब में रहती है । उन्होंने बस का दरवाजा खोला और वहाँ से भाग निकले । बस के बाहर काफी अंधेरा था । ये दरिंदे अंधेरे में न जाने कहाँ गायब हो गए । मैंने खडे होने की कोशिश की मगर होना सके मेरे पूरे बदन में बहुत दर्द हो रहा था । लगभग एक घंटे तक में उसी हाल में पडी रही । फिर थोडी हिम्मत जुटाते हुए के सामने की सीट की ओर गई और अपना बैग खोलकर पानी की बोतल निकाली । थोडा सा पानी पीने के बाद मैंने अपने शरीर को धोया । मेरा फोन लगातार बज रहा था लेकिन मैंने उठाया नहीं । मैं भयभीत थी कि मैं सभी को क्या बताऊँ कि क्या हुआ है मेरे साथ तुम जानते हो लोहित मेरे साथ बलात्कार होने से भी साधा । पूरा क्या हुआ यही की उन्होंने मुझे सिंधा छोड दिया । चिट्ठी पकडे हुए लोहित के हाथ काफी रहे थे । तृशा अपने दिल में छिपे दर्द को शब्दों से व्यक्त कर रही थी, जिसे लोहित भी महसूस कर रहा था । आगे उस सिटी में लिखा था, मैंने बिना किसी अंडरगारमेंट के अपना टॉप और जेन्स पहना और सवेरा होने का बस में ही इंतजार करने लगी । मैंने अपना फोन बंद कर दिया क्योंकि मेरे मम्मी पापा मुझे लगातार फोन कर रहे थे । मुझे पता था कि उन्हें मेरी चिंता हो रही होगी और मुझे उनसे बात कर लेनी चाहिए । कम से कम होने ये बता देना चाहिए कि मैं ठीक तो नहीं लेकिन हाँ जिंदा जरूर हूँ । मगर मुझे हिम्मत ही नहीं थी । उनके किसी भी सवाल का जवाब देने की सवेरा होने के बाद करीब आधा किलो मीटर पैदल चलकर में मुख्य सडक तक पहुंची । फिर एक निजी टैक्सी में सवार होकर में घर पहुंची । सुबह की मंदिर रोशनी भी मेरे शरीर पर लगे चोट के निशान साफ साफ दिखाई दे रहे थे । अब यही मेरी तकदीर है । रोहित शायद भगवान ने मेरे नसीब में यह लिखा है मगर तुम निराश मत होना जैसा कि मेरे भगवान कृष्ण ने कहा है हैं ज्यादा याद आ ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं ऍम परित राणा ये साधु ना बिना शायद और दूसरी करता हूँ । धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे योगी अर्थात पांच जब जब इस धरती में धर्म की हानि और अ धर्म की वृद्धि होगी, तब तब धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करने मैं प्रकट होता रहूंगा । अब समय आ गया है लोहित भगवान कृष्ण के फिर जन्म लेने का और देखना वो जरूर आएंगे । किसी भी रूप में किसी के भी भीतर कोई नायक जरूर आएगा जो ये पीडा उठाएगा और अन्याय को नष्ट करेगा । कोई तो आएगा जो सभी बलात्कारियों को पकडकर उन्हें उन की कब तक पहुंचाएगा और वो दिन दूर नहीं जब उनकी कब्र पर थूकने के लिए मैं दोबारा जन्म होंगे । उस रात जब मैं घर पहुंची तो हमारे फ्लैट का दरवाजा खुला हुआ था और मेरे मम्मी पापा लिविंग रूम में बैठे थे । ऐसा लग रहा था वे पूरी रात मेरे इंतजार में नहीं सोच । घर में घुसते ही पापा मुझसे सवाल करने लगे, क्या हुआ कहाँ की सारी रात मैंने कोई जवाब नहीं दिया । मम्मी मेरी हालत देखकर सब समझ गए और पापा को चुप रहने का इशारा किया । मम्मी ने मुझे गले लगा लिया और कहा न हालु फिर हम एक साथ नाश्ता करेंगे । मैंने उस समय उनसे कुछ नहीं कहा । कहने को मेरे पास था भी किया । पता नहीं क्यों? लेकिन मुझे लग रहा था जैसे मैंने ही कोई पाप किया हूँ । जैसे मैंने ही किसी का बलात्कार किया हूँ । मैं अपराध का शिकार थी फिर भी एक अपराधी की तरह महसूस कर रही थी । ये सब होने से पहले अपने सपनों की दुनिया में जीती थी मैं । मुझे विश्वास था कि अगर हम अच्छा करेंगे तो हमारे साथ भी से बच्चा ही होगा । लेकिन देखो कितनी गलत थी मैं । वैसे गलती तो सारी मेरी ही थी । पापा ने मुझे रात में अकेले जाने से मना किया था । फिर भी मैं गयी । तुमने भी मुझे घर के लिए सीटें टैक्सी लेने को कहा था । लेकिन मैंने मेट्रो से जाने की जिद की । मेरी बचकानी हरकत की वजह से ये सब कुछ हुआ । मैं नहाने के लिए बात हो गई और काफी देर तक शावर के नीचे खडी रही । मगर उन दरिंदों की बदबू मेरे शरीर से जानी रही थी । आईने में मैं अपनी शक्ल भी नहीं देखना चाहती थी । नफरत हो रही थी । मुझे अपने शरीर से नहाने के बाद बिना अपने मम्मी पापा से बात किए और बिना कुछ खाए ही अपने कमरे में जाकर हो गई । इसलिए नहीं कि मुझे नींद आ रही थी बल्कि इसलिए कि मेरा दिमाग सुनना था । मेरे पास अपने मम्मी पापा से बात करने की हिम्मत नहीं थी । कुछ घंटों बाद जब मैं उठी तो मैंने अपने मम्मी पापा को किसी तरह मना लिया तो मैं और शहर को छोडकर जाने के लिए तुमसे हमेशा के लिए दूर जा रही हूँ । क्यों ही तो मैं भी नहीं जानती । शायद हमारा मिलना लिखा ही नहीं था । शायद भगवान से कभी मेरी खुशी देखी नहीं जाती है । मैं ये भी जानती हूँ कि मेरा बलात्कार होने के बावजूद भी तो मुझसे शादी करने से हरगिज खतरा हो कि नहीं । तुम कभी मुझे इस बात का अहसास तक नहीं होने दोगे की मेरे साथ ऐसा कुछ कभी हुआ भी था लेकिन मैंने जाती कि मैं अपने साथ तुम्हारी भी जिंदगी पर बात करूँ । मैं नहीं चाहती कि मैं तुम्हारे चेहरे की हंसी छीन लो । अगर मैं एक जिंदा लाश की तरह तुम्हारे सामने रहोगी तो तुम भी कहाँ मुस्कुरा सक होगी । हो सके तो मुझे भुला देना और अपनी जिंदगी फिर से शुरू करना । किसी खुशमिजाज लडकी के साथ वैसे भी तुम्हारे डिंपल पर तो कोई भी लडकी फिदा हो जाएगी । लोहित ने वो चिट्ठी पडी और उसके भीतर का कर रहे उसके दिमाग में कौन रहा था । उसके लिए ये मानना कठिन था कि त्रिशाला ने आत्महत्या कर ली । उसने अपने हाथों में पकडे बाइक की चाबी को स्ट्रेस बॉल की तरह जोर से दबाया । लोहित अपने आप में पछताते हुए सोचने लगा, ये सारी मेरी गलती है । मुझे उसे मिलने के लिए बुलाना ही नहीं चाहिए था और अगर बुलाया भी तो से सुरक्षित घर छोड कर आना चाहिए था । अगर मुझे भनक भी होती की ऐसा कुछ हो जाएगा तो मैं कभी उसे बुलाता ही नहीं । मैं कभी अमेरिका जाता ही नहीं ।

जिनी पुलिस भाग 20

बहुत बीस घर आते ही अमन ने पूछा लोहित कहा है । लोहित की माँ ने उदासी भरे लहजे में कहा अपने कमरे में उसने खुद को इस घर की चारदीवारी में कैद कर लिया है । ना किसी से बात करता है और ना ही ठीक से खाता है । अमन ने लोहित के कमरे का दरवाजा खटखटाया । दरवाजे की दस्तक ने लोहित को चौका दिया । उसके कमरे में घना अंधेरा था । अमन ने लाइट का बटन दबाया । दोपहर टिमटिमा कर ट्यूबलाइट चमक उठी । आंसू सूखकर लोहित के चेहरे पर धब्बे बन गए थे तो बिस्तर पर लेटा हुआ था । उससे पहले कभी भी इतना असहाय महसूस नहीं किया था । पिछले कुछ दिनों से वो ऑफिस भी नहीं जा रहा था । उसकी गैर हाजिरी में सारा काम अमन ही संभाल रहा था । अमन आगे गया और लोहित को कस के झप्पी दे दी । अमन ने कहा ही सब क्या हो गया भाई । उस रात जब मैंने अपने सपनों के देश जाने के लिए उडान भरी । किसी ने यहाँ मेरे सपनों को चकनाचूर कर दिया । ये सब वो सहना सके और उसने आत्महत्या कर ली । तृषा मेरे दिल में तो है लेकिन मेरी किस्मत में नहीं । अमन भी फूट फूटकर रोने लगा । उसने लोहित की वहाँ फक्कड रखी थी और उसका दर्द बांटने की कोशिश कर रहा था । सब मेरी गलती थी । सब मेरी गलती थी । लोहित बस यही कहकर रो रहा था । रोती रोती उसका गला पूरी तरह से सूख गया था । अमन ने कहा बस कर भाई और कितना रहेगा । बडे कमाल के हैं या मेरी आंखों को ये अपना घर मान बैठे हैं । अमन एका एक खडा हुआ और उसने जोश भरी आवाज में कहा हम छोडेंगे नहीं उन कमीनों को लोह इतने चौकर अमन की और देखा । वो दुख में इतना मशरूफ था कि उसने उन बलात्कारियों से बदला लेने के बारे में सोचा ही नहीं । अम् अन्य लोहित में ऊर्जा भरते हुए कहा में मानता हूँ की परिस्थिति तुम्हारे विपरीत है । मगर जो अपनी परिस्थिति का डटकर सामना करता है वही असली हीरो होता है । ये समय तुमारे हिम्मत हारने का नहीं बल्कि उन अपराधियों को सबक सिखाने का है । उठो और उन्हें ऐसा सबक से खाओ के फिर कभी कोई लडका किसी लडकी को बुरी नजर से देखने से पहले भी हजार बार सोचे । अमन के शब्दों ने लोहित के मन को नए जोश से भर दिया । उसने लोहित को फिर से अपना जीवन शुरू करने के लिए एक लक्ष्य दे दिया । दो कप चाय लेकर लोहित की माँ कमरे में आई । माँ के कमरे से चले जाने के बाद लोहित ने अमन से पूछा हम बलात्कारियों से बदला कैसे ले सकते हैं? सबसे पहले हमें पुलिस स्टेशन जाकर इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करानी चाहिए । लोहित ने हाल में सर हिलाया । उदासी भरे कई दिनों के बाद लोहित को आशा की एक किरण दिखाई दी । वो तृषा को न्याय दिलाना चाहता था । लोहित ने अपना चेहरा धोया, कपडे बदले और अमन के साथ रवाना हो गया । उन अपराधियों को सजा दिलाने का खयाल जहन में आने के बाद एक पल भी गवाना लोहित को गवार आना था । उसे लगा जैसे वो एक बडा दायित्व पूरा कर रहा हूँ । वे दोनों उनके इलाके के पुलिस स्टेशन पहुंची । ये ठीक वैसा ही था जैसा हिंदी फिल्मों में दिखाया जाता है । दो दशकों से भी पुरानी एक मंजिला इमारत, जिसे नवीनीकरण की सख्त आवश्यकता है । गश्त लगाने वाली दो जीत थाने के बाहर पार्किंग में खडी थी और साथ ही एक दर्जन पुराने वाहन, जिन्हें पुलिस द्वारा जब्त किया गया हो, अदालत में अपनी सुनवाई का इंतजार करते वहाँ खडे थे । न जाने अदालत में मामलों की सुनवाई के लिए उम्र भर का वक्त क्यों लगता है? यदि उनके पास न्यायालयों यानी कि कोर्ट की क्षमता से ज्यादा मामले हैं तो न्यायालय रात की शिफ्ट में भी काम क्यों नहीं करते? इससे हजारों नए न्यायाधीशों, वकीलों क् लडको आदि को रोजगार भी मिलेगा और कानून व्यवस्था में लोगों का विश्वास भी बढेगा । जो लोग अपने मामले का जल्दी निपटारा चाहेंगे वह रात को कोट आने से कतराएंगे भी नहीं । आखिर सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियां और कारखाने भी तो रात की शिफ्ट में काम करती है तो न्यायालय और सरकारी ऑफिस क्यों नहीं? रस्सी से बंधी मोटी फाइलों की एक गठरी वहाँ पर रख एक पुराने लकडी की मैच के ऊपर रखी हुई थी । पुलिस स्टेशन भी देखने में बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसा क्यों नहीं हो सकता? क्यों ना यहाँ ॅरियर कंडीशन हूँ, दीवारों पे वॉलपेपर हूँ और छत्ते फॉल सीलिंग हो दाहिनी और दो जेल बने हुए थे, जहां कैदियों को अदालत में पेश करने से पहले रखा जाता है । रोहित ने अपने चेहरे से पसीना पहुंचा और उस गैस की और चल दिया जहाँ पुलिस अधिकारी बैठे थे । लोहित पुलिस वाले से कहा सर में एक एफआईआर दर्ज कराना चाहता हूँ । लोहित उस अधिकारी से बात करते हुए जरा घबरा रहा था । उसे पता था कि जो शुरू करने जा रहा था उसका अंजाम बडा भयंकर होने वाला है । पुलिस वाले ने एफआईआर रजिस्टर खोला, हाथों में कलम पकडी और लिखने को तैयार होते हुए पूछा किस अपराध की एफआईआर? रोहित ने संकुचित होते हुए कहा, बलात्कार अच्छा किसने? क्या तुम्हारा बलात्कार उससे पूछा और दी में से मुस्कुरा दिया । मानो बलात्कार उसके लिए कोई हंसी मजाक की बात हो । कुछ अन्य पुलिस अधिकारी शायद उसके जूनियर्स भी उसके इस भद्दे मजाक पर हंसने लगे । मेरी मंगेतर का बलात्कार सर लोहित को गुस्सा तो बहुत आया मगर किसी तरह अपने आप पर काबू रखते हुए कांपते इस्वर में उसने जवाब दिया । कहा हुआ है ये एक बस के अंदर साउथ दिल्ली के पास । मोनिका में अफसर ने तुरंत रजिस्टर बंद किया । बैन वापस ऍम में रखा और कहा तो फिर तो यहाँ क्या कर रहे हो? ये वसंत विहार पुलिस थाने का मामला है । बाहर जाते टाइम लोहित और अमर ने उस अवसर को ये कहते हुए सुना इन दिनों लडकियाँ देर रात तक पार्टी करती है, शराब पीती है, छोटे कपडे पहनती है और फिर कोई जरा सा छेड दे तो बलात्कार की शिकायत दर्ज कराने हमारे पास आ जाते हैं । लोहित की गुस्से के मारे मुट्ठी बन गई । अमन ने उसे देखा और खींचते हुए बाहर ले गया । लोहित गुस्से में बेकाबू हुए जा रहा था । अमन ने कहा लोहित छोड दे उसे तुझे त्रिशा की कसम । भले ही तृषा अब नहीं रहे, मगर लोहित उसकी कसम तोड नहीं सकता । वो शांत हो गया और बोला, बैंक केंद्रीयकृत है । हम किसी भी शाखा में पैसे जमा कर सकते हैं और वो सीधे हमारे खाते तक पहुंच जाता है । इसी तरह पुलिसथानों को के केंद्रीयकृत क्यों नहीं किया जाता है? क्यों ना पीडित अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवा सकें और फिर अगर जरूरत हो तो उसे उचित थाने में ट्रांसफर किया जाए । वे मुनरिका के वसंत विहार पुलिस स्टेशन पहुंचे सर में एक एफआईआर दर्ज करवाना चाहता हूँ । लोहित ने वहाँ बैठे पुलिस कर्मी से कहा जिसकी मेज पर एक विशाल एफआईआर रजिस्टर रखा हुआ था । क्या हुआ सर? कुछ गुंडों ने मेरी मंगेतर के साथ बलात्कार किया । कहाँ है हमारी मंगेतर? अमन और लोहित एक दूसरे को देखने लगे । वो अफसर तृषा से मिलना चाहता था । सर तृषा तो यहाँ नहीं है । उसका पता तो उसका बयान लेने हम उसके घर महिला कांस्टेबल भेज देंगे । अधिकारी के उल्लेख मात्र से ही दो हष्ट पुष्ट महिला कांस्टेबल उनके पास आकर खडी हो गई । लोहित ने विनम्रतापूर्वक कहा सर अब हम तृषा से नहीं मिल सकते हैं । क्यों मर गए क्या लडकी लोहित चुक रहा? उस पुलिस वाले का सीधा सवाल सुनने में कितना बुरा लग रहा था? लोहित की चुप्पी को ही उसका जवाब बानकर पुलिस अफसर ने फिर से पूछा । ठीक है उसकी मेडिकल रिपोर्ट देखा हूँ कैसी रिपोर्ट? लोहित को नहीं पता था कि वह किस बारे में बात कर रहा था जो रिपोर्ट साबित कर दी है कि वास्तव में बलात्कार हुआ है । बलात्कार होने के चौबीस घंटे के भीतर किसी भी अस्पताल में इसका परीक्षण करना जरूरी है । तुम्हारी मंगेतर ने टेस्ट करवाया नहीं नहीं सर, उसने भी एफआईआर रजिस्टर बंद कर दिया और लोहित से पूछा क्या तुम जानते हो किसने उसके साथ बलात्कार किया है? नहीं सर, क्या तुम्हारे पास तुम्हारी मंगेतर का डेथ सर्टिफिकेट है? लोहित की नजरे झुक गई । उसे ये पता तक नहीं कि कि शहर में और कैसे त्रिशा की मृत्यु हुई । प्रमाण पत्र देना तो बहुत दूर की बात है । फिर तुम्हारे पास क्या सबूत है की किसी ने तुम्हारी मंगेतर का बलात्कार किया और क्या सबूत है कि वह मर चुकी है और क्या सबूत है की तुम्हारी सच में कोई मंगेतर भी थी । उस अवसर के पेचीदे सवालों का लोहित के पास कोई जवाब नहीं था । वो चुप क्या कुछ देर के लिए वहीं बैठा रहा । किसी ने उसकी पूरी जिंदगी गुजार दी और अधिकारी सबूत चाहता था । लोहित उस अवसर के सामने खामोश रहा लेकिन उसके दिमाग में कई तरह के सवाल उठ रहे थे ।

जिनी पुलिस भाग 21

बहुत एक केस तीन दिनों से रो रोकर मेरी आंखें सूज गई है क्या? तो मैं ये देखकर लगता है कि मैं झूठ बोल रहा हूँ । अगर मेरी मंगेतर का बलात्कार ना हुआ होता तो मैं पुलिस स्टेशन आता ही क्यों? क्या सबूत इकट्ठा करना और अपराधी को पकडना पुलिस का काम नहीं है । अगर किसी लडकी ने अपना मेडिकल टेस्ट नहीं करवाया तो क्या उसका बलात्कार हुआ ही नहीं? लोहित सोचा लेकिन कुछ कहा नहीं । उस अवसर से बात करके लोहित को एहसास हुआ कि उस दिन पुलिस में शिकायत दर्ज करवाना तृषा के लिए कितना मुश्किल रहा होगा । क्यों उसने उन अपराधियों को सजा दिलाने की तुलना में अपनी जान देना आसान समझा । अमन लोहित के कान में फुसफुसाया उसे वक्त देखा हूँ । हाँ ये सही रहेगा । लोहित ने कहा और सबूत के तौर पर तृषा का लिखा हुआ खत पेश किया । खत कैसा खत्म किया ये मंत्री जी ने दिया है । ये कहते हुए उस अवसर की आवाज जरा सुरीली हो गई सर शहर छोडने से पहले मेरी मंगेतर ने मेरे लिए ये खत लिखा है । उसने इस खत में आपने बलात्कार के बारे में बताया है । ये सुनते ही उसकी आवाज फिर से कडक हो गई उसने कहा, हम इस हस्तलिखित पत्र को सबूत नहीं मान सकते हैं तो कोई भी लग सकता है । उसने पत्र पढना तो दूर देखने से भी इंकार कर दिया । मैं तो मैं एक सलाह देता हूँ तो बलात्कार की बजाय अपने मंगेतर की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवा दो । अगर हमें कोई लावारिस लाश मिलती है तो शिनाख्त के लिए तो मैं बुला लेंगे । लोहित सोचा मुझे ठोकने से पहले अगर वह अवसर खुद अपने शब्दों का स्वाद चख लेता तो शायद मुझे ऐसी बातें कहता । लोहित को आश्चर्य इस बात का था कि उस अफसर ने अपनी जिंदगी में ऐसे कितने कत्ले देखे होंगे कि उसकी भावनाएं बढ चुकी थी । उसके भीतर जहर का घूंट पीकर लोहित थाने से बाहर निकला लोहित लोहित अमन उसका नाम पुकारते हुए उसके पीछे बाहर आया और कहा, इतना गुस्सा मत करो । वो अफसर तो सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रहा है । नहीं, वो अपनी ड्यूटी नहीं बल्कि अपने काम से दूर भाग रहा था । उसकी ड्यूटी थी कि पहले मुझे बैठाए, शांति से मेरी पूरी बात सुने, मेरी शिकायत लिखे, फिर त्रिशा और उसके माता पिता को ढूंढने में मेरी मदद करें और फिर दोषियों को ढूंढ कर उन्हें गिरफ्तार करें । मुझसे ऐसे सवाल पूछना जिससे मैं परेशान होकर शिकायत दर्ज ही ना करवाऊँ उसकी ड्यूटी कतई नहीं है । पुलिस वाले अक्सर ऐसा करते हैं ताकि उन्हें शिकायत दर्ज करनी ही ना पडे । बलात्कारियों ने सिर्फ तृषा का ही बलात्कार नहीं किया । उन्होंने मेरी शांति, मेरा प्यार, मेरी आशा और मेरी इच्छाओं का भी बलात्कार किया है । उन्होंने हमें ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि इस देश के नागरिक कितनी कमजोर है और एक तरह से वो सही भी है । अब देखो ना, जब हम उनके खिलाफ एफआईआर लिखवाने में ही सक्षम नहीं है तो उन्हें सजा क्या खास दिलवाएंगे । इस घटिया देश में इंसान तो हर घर में पैदा होते हैं, पर इंसानियत कहीं नहीं । यहाँ के लोग कुछ अच्छा करना चाहते ही नहीं है । इन्हें खुशी मिलती है तो सिर्फ किसी चौराहे पर मोमबत्ती जलाकर शोक व्यक्त करने में हडताल करने में या फिर सरकारी बसों को आग लगाने में । वे दोनों वहाँ से सीधा ऑफिस पहुंचे और अपने थिंक रूप में गए । जहां बैठकर जिन्हें को इजाद करने का खयाल उन्हें आया था, समय काफी धीमी गति से चल रहा था । कुछ फाइलें वहाँ व्यवस्थित रूप से टेबल पर रखी हुई थी और लोहित इतने गुस्से में था कि उसने उन सारी फाइलों को नीचे जमीन पर फेंक दिया । ऑफिस के बाकी लोगों ने पहली बार ही लोहित के इस गुस्से को देखा था । तुमने सुबह से कुछ नहीं खाया है । मैं तुम्हारे लिए लंच में क्या ऑर्डर करूँ? अमन ने पूछा मैं जो महसूस कर रहा हूँ, ऐसे में खाने का खयाल भी मेरे जहन में नहीं आ सकता । जब तक उन दरिंदों को फांसी नहीं मिल जाती, मुझे चैन नहीं मिलेगा । रोहित की बात से सहमत होते हुए अमन ने कहा, भूकंप, बाढ और अन्य प्राकृतिक आपदाएं पहले ही काफी है इंसान को बर्बाद करने को । फिर पता नहीं क्यों इंसान दूसरे इंसान को बर्बाद करने में लगा हुआ है । लोग इतने अमन से पूछा तो मैं क्या लगता है? पुरुष बलात्कार क्यों करते हैं? क्योंकि हमारे देश में महिलाएं सशक्त नहीं है । पुरुष महिलाओं का सम्मान नहीं करते हैं । अमन ने निष्कर्ष निकाला कि ये सब महज बकवास है । तो मैंने जो कहा वह सिर्फ न्यूज चैनलों में होने वाले बेकार के बहस में कहने के लिए ठीक है । मगर वास्तविकता से इसका कोई तालुक नहीं है । पुरुष बलात्कार करते हैं । जब मन में तीव्र हवस पैदा होती है तो अपनी पैंट उडाने से पहले कोई भी मार दिए । नहीं गिनता की संसद में कितनी महिला सांसद है । कितनी महिलाओं को शिक्षा का अधिकार मिला । कितनों को नौकरी मिली महिला सशक्तिकरण का बलात्कार से कोई लेना देना नहीं है । ये लडाई अच्छे और बुरे मर्दों के बीच है, महिला और पुरुष के बीच की नहीं । अमन ने भी बौखलाकर पूछा तो फिर लडकियों को क्या करना चाहिए? बचने का कोई रास्ता है या वह केवल बलात्कार का शिकार होने के लिए पैदा होती है । इसका एक ही उपाय है डर । ये डर इतना भयानक होना चाहिए कि जब भी किसी व्यक्ति के मन में किसी लडकी को देखकर बुरे खयाल आए तो वह डर उस पर हावी हो जायेगा । पकडे जाने का डर दुनिया के सामने बेइज्जत होने का डर मौत का डर लीटर इतना बर्बर होना चाहिए कि अपराधियों को अपराध करने के बारे में सोच कर के ही पेशाब निकल जाए । अमन अलमारी में रखे भगवान की छोटी मूर्ति के सामने हाथ जोडकर सहायता के लिए प्रार्थना करने लगा । लोहित ने ताना कसते हुए कहा, भगवान वहाँ स्वर्ग में आराम कर रहे हैं । हम वो यहाँ नई दिल्ली में हमारी हेल्थ के लिए क्यों आएंगे वाला और अगर भगवान् यहाँ होते तो ये सब अनर्थ होता ही क्यों? उसकी आवाज निराशा से भरी हुई थी । ऐसा मत कहो लोहित ईश्वर सर्वव्यापी है । रोहित ने अपना सर टेबल पर रखा और अपनी नींद से वंचित आपको को कुछ पलों के लिए बंद कर लिया तो सोच रहा था कोई ऐसी तरक्की जिससे उसकी तृषा को न्याय मिल सके, बलात्कारियों को रोका जा सके और उस प्यारी शहर दिल्ली से अपराध को खत्म किया जा सके । भारत की राजधानी की समस्या यही है कि सभी कैबिनेटमंत्री, पूर्व कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और बहुत सारे राजनीतिक दलों के सदस्य शहर में रहते हैं । इन नेताओं के परिवार के सदस्य ही नहीं बल्कि उनके ड्राइवर, उनके घर के नौकर और मंत्रियों के सचिव भी खुद को भगवान मानते हैं । उन्हें लगता है कि मंत्रियों के साथ उनका संबंध उन्हें गिरफ्तार होने से बचा लेगा और अफसोस की सच भी है । हमें ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जो बईमानी या किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से मुक्त हो । ऐसी व्यवस्था जिसमें कोई ये ना कह सकें तो जानता नहीं है । मेरा बात कौन है? अमन ने खुशी से चाहते हुए कहा, मैं समझ गया मेरे दोस्त की तेरे दिमाग में कोई कारगर तरकीब आ चुकी हैं । कोई ऐसी तरह की जिस से सब कुछ ठीक हो जाएगा जिससे फिर कभी किसी तृषा को ये सब सहना नहीं पडेगा जिससे बलात्कार करने से पहले लोगों की रूह कांप जाए । लोह इतने कॉफी मशीन से अपने लिए एक कप कॉफी लिया और बडी खुशी से मुस्कुराते हुए कहा हाँ इसी इंसानी बेवकूफी का एक ही तोड है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लेकिन ये काम कैसे करेगा? दोस्त चलो पहले हम घर वापस चलते हैं मैं तो मैं जिनसे मिलवाता हूँ । जब उन्होंने घर की डोरबेल बजाई तो जिन्होंने दरवाजा खोला और कहा वेलकम लोहित की ऐसा राहत तुम्हारा दिन लोहित ने अमन को बताया कि एक बार जिन्होंने टेलीविजन पर एक महिला को अपने पति के स्वागत के लिए ऐसा कहते देखा था । सबसे जिन्हें लोहित का इसी तरह स्वागत करती है, जिन्होंने अमन से भी कहा हेलो अबन हाई जी नहीं । अमन ने हैरानी से पूछा कि ये तो कमाल है इसमें मुझे कैसे पहचान लिया फेस रिकॉग्निशन तकनीक से, लेकिन इससे पहचाना कैसे? मेरे चेहरे को फेसबुक से जब ये निष्क्रिय होती है, इंटरनेट पर सब करती रहती है और अपने डेटाबेस में व्यक्तियों के विवरण को सेव कर लेती है । यह तुम्हारी बेटों, पर्स और मोबाइल नंबर भी जानती है । अमन इसकी सराहना करते हुए कहा, जी नहीं तो कमाल की है । हाँ मुझे पता है लोग इतने उत्साह के साथ कहा तुम जानती हो अमन किसी मशीन के लिए चेहरा और आवाज पहचानना कोई मुश्किल बाद नहीं है । इन सुविधाओं को तो मैं एक साधारण एंड्रॉइड फोन में प्राप्त कर सकते हो । हम गूगल पर कुछ ढूंढने के लिए बोलते हैं या आईफोन में सिरी से बात करते हैं और ऐसे फोन है जो हमारा चेहरा पहचानकर अनलॉक हो जाते हैं । भविष्य में ये टेक्नोलॉजी दुनिया को बदल देगी । हर जगह इसका उपयोग होगा । स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों की अटेंडेंस लगाने के लिए क्लास में टाइम वेस्ट नहीं होगा । कक्षा में लगे कैमरे हर किसी के चेहरे को स्कैन करेंगे और छात्रों को पहचान करो ने डेटा भी इसमें मौजूद चिन्हितकर देंगे । इन तकनीकों का प्रयोग हम अपराध को मिटाने के लिए भी कर सकते हैं । हम एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार करेंगे जिसकी मदद से शहर से अपराध का सफाया हो जाएगा । पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हमें से केवल अपने शहर में ही लागू करेंगे और अगर ये कामयाब रहा तो हमें से पूरे देश में लागू कर देंगे । बहुत ही बेहतरीन तरकीब विलोहित मुझे पता है कि हमें कर सकते हैं । हम ने मुझे कसकर गले लगा लिया । वो दिन आ गया है जब उन शैतानों को और भगवान को ये साबित कर देंगे कि हम कतई कमजोर नहीं है तो कहते हो कि ईश्वर हर जगह है लेकिन सच तो यह है कि विज्ञान हर जगह है जो भगवान मदद नहीं करता था, विज्ञान मदद करता है । हमारी तृषा का बलात्कार करने वाले दरिंदे हस रहे होंगे ये सोचकर कि हम ने पकडा नहीं सकते हैं और शायद वो सही दी है । हम उन्हें ढूंढ नहीं सकते हैं । लेकिन सच तो यह है कि अब हम को नहीं ढूंढना चाहते भी नहीं । हम तय की है अब हम सिर्फ उन्हें नहीं बल्कि इस शहर के सारे अपराधियों को पकडेंगे और उन्हें ये अहसास दिलाएंगे की एक ताकि से पंगा लेने का अंजाम क्या होता है ।

जिनी पुलिस भाग 22

बहुत बाईस तुम ने अंदर जा सकते हो । तुम्हारे पास अपाॅइनमेंट हैं । मंत्री जी के घर के बाहर खडे सिक्योरिटी गार्ड ने बिहारी लहजे में कहा, उसकी बडी मुझे थी और पेट गोलमटोल था । वो एक नीली शर्ट और काली पैंट पहने हुए था । हम मंत्री जी से मिलने आए हैं । लोहित ने ऐसे आत्मविश्वास से कहा जैसे वह मंत्री जी का दामाद हूँ । कोई सुहानी सुबह थी । अमन विलोहित के साथ खडा था । मंत्री जी के निजी हवेली किसी बडी सरकारी कार्यालय की तरह दिखाई देती थी । गार्ड ने लोहित और अमन को ऊपर से नीचे तक देखा और कहा मंत्रीजी हुई हर किसी से नहीं मिलते । उनसे मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लेना पडता है । ठीक है तो दे दो हमें अभी कपार्टमेंट । अमन ने कहा । वो बनाते हुए गार्ड ने कहा अरे नए भाई ऐसे थोडी ना होता है । लग रहा था आपने जन्म के बाद से वह गार्ड कभी मुस्कुराया ही नहीं होगा । ठीक है तो बताओ कैसे मिलता है पाॅइंट? लोहित ने पूछा आप ऑनलाइन मंत्री जी की वेबसाइट्स एॅफ बुक कर सकते हैं । हम तो ऑनलाइन कर लेंगे मगर ऐसे लोग जिनके पास कंप्यूटर नहीं है वो कैसे करेंगे? अमन ने सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाते हुए कहा, उनके लिए हमारे पास रजिस्टर है । हम इसमें नाम पता एंट्री कर लेते हैं और शाम को मंत्री जी के लिए इसको वेब साइट में चढा देते हैं । तो बताइये बाबू आप खुद कर लेंगे या मैं रजिस्टर में लिख लो । अमन ने उसकी मुट्ठी गर्म करने के लिए दो हजार रुपये का गुलाबी नोट उसे दिखाते हुए पूछा, सिरामिक बहुत ही जरूरी बात करना चाहते हैं मंत्री जी से क्या आज उसे मिलने का कोई रास्ता नहीं है क्या तो मुझे रिश्वत देना चाहती हूँ । मैं मंत्री जी का सिक्योरिटी गार्ड हूँ, खुद मंत्री नहीं । जो रिश्वत लोग उससे कटाक्ष के रूप में कहा ठीक है हम कल अपाॅइनमेंट लेकर फिर आ जाएंगे । लोहित ने अमन से कहा खुद को क्या अपना तो उनका नाती समझते हो जो तो मैं इतनी जल्दी अपाॅइनमेंट मिल जाएगा । लोहित और अमन घर वापस पहुंच गए । लोहित ने अपने डिजिटल गर्लफ्रेंड जीनी को आदेश दिया जिन्हें मंत्री जी के साथ हमारी अपाॅइनमेंट बुक कर दो । ठीक है कब? क्या फॅालो जिन्होंने बुक करने से पहले पूछा कल अच्छा रहेगा सॉरी डियर बीस दिनों से पहले की कोई डेट खाली नहीं है । अमन और लोहित हैरान हो गए । अमन ने मायूसी से कहा, हम उनसे सिर्फ मिलने के लिए बीस दिनों का इंतजार नहीं कर सकते हैं । पता नहीं इन दिनों में कितनी और मासूम लडकियों का बलात्कार हो जाएगा । हमें इस अपराध को जल्द से जल्द रोकना होगा । मैं कुछ करता हूँ । लोहित ने कहा और लेपटॉप में मंत्री जी की वेबसाइट्स खोली । कुछ मिनटों तक इस पर काम करने के बाद रोहित ने अपने दोनों हाथ ऊपर कर की घोषणा की । बधाई हो हमें कल की अपाॅइनमेंट मिल गई है क्या? तो मैं कैसे? क्या ये अमन ने चौंकते हुए पूछा । ज्यादा कुछ नहीं । पहले मैंने बीस दिन बाद की अपाॅइनमेंट बुक की । फिर उनके डेटाबेस को हैक करके अपाॅइनमेंट की तारीख को बदलकर कल का कर दिया । अगले दिन अमन और लोहित फिर मंत्री जी के घर पहुंच गए । उन्हें देखते ही सिक्योरिटी गार्ड ने झुंझलाकर कहा हमने तुमसे कल कहा था ना कि बिना फाइन मेंट के तो मंत्री जी से नहीं मिल सकते हैं । तो आज कर के आ गए । जो पहले ब्लॅक लेकर हूँ लोगों के लिए कुछ नहीं कहा । बस अपार्टमेंट का प्रिंटआउट उस गार्ड के हाथ में थमा दिया । अपाॅइनमेंट में आज की तारीख देखकर वह गार्ड ऐसे घबरा गया जैसे कि उसने भूत देख लिया हो । गार्ड को अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ । उसे कई बार प्रिंटआउट की जांच की । फिर वेब साइट खोलकर इसका मिलान भी किया । इस बात की पुष्टि करने के लिए कि कहीं उनके पास कोई जाली का अगस्त नहीं है । वेब साइट पर विलोहित और अमन के नाम की पुष्टि कर लेने के बाद गार्ड ने विनम्रतापूर्वक कहा ठीक है सर, आप जा सकते हैं । जाने से पहले उसने आपने तंबाकू घर घुसकर सडक हुए दांत दिखाते हुए पूछा, सर, मैंने पहले कभी किसी को इतनी जल्दी अपाॅइनमेंट मिलते हुए नहीं देखा था । क्या आप के मंत्री जी से कोई संबंध है? हमारे संबंध मंत्री जी से नहीं विज्ञान से हैं । रोहित ने मुस्कुराते हुए कहा ना समझाते हुए गार्ड सर खुजलाने लगा लोहित और हमने मंत्री जी के विशाल विला में प्रवेश किया । किसी विदेशी प्रजाति के दो काले मोटे कुछ दे हर आने जाने वाले व्यक्ति पर भाग रहेगा । नीले रंग की सफारी सूट पहने एक आदमी को कुत्तों को संभालने की जवाबदेही दी गई थी । वो एक हाथ से कुत्तों के गले का पट्टा पकडे हुए था और दूसरे हाथ से वॉकीटॉकी एक बडी से वेटिंग रूम में सभी के बैठने की व्यवस्था थी । वहाँ पे चंद्र कुर्सियां ही थी और बाकी गांव वाली जमीन पर बिछी दरी में बैठे थे । मंत्री जी । पी । ए । ने लोहित और अमन को भी नीचे बैठे को कहा । अमन ने लोहित से कहा क्या हमें भी वो ही नीचे बैठना चाहिए? बैठ जा दोस्त यू समझ कि ये हमारा बडप्पन है, हकाक नहीं । वहाँ की दीवारों पर मंत्री जी कि भारत के प्रधानमंत्री के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री और कुछ अन्य मंत्रियों के साथ फोटो लगी थी । कुछ ही देर में मंत्री जी के कमरे के बाहर बैठे व्यक्ति ने हमारा नाम पुकारा । जैसा कि डॉक्टर के क्लीनिक में होता है । मंत्री भी तो डॉक्टर ही होते हैं । उन्हें समाज के लोगों को दूर करने के लिए चुना जाता है । खुले दरवाजे पर एक दस्तक देकर अमन और लोहित मंत्री जी के कार्यालय में दाखिल हुए । नवासी सर मंत्री जी की कुर्सी का सम्मान करने के लिए लोहित ने हाथ जोडकर कहा । मंत्री जी ने उनके नमस्ते को नजर अंदाज करते हुए सामने रखी कुर्सी उन्हें बैठने का इशारा किया । कुछ बाल तो लोहित और अमन यूँ ही बैठे मंत्री जी को देखते रहे । मेज पर रखी डेरो फाइलों पर एक एक कर हस्ताक्षर करते हुए मंत्री जी ने शालीनता से कहा का हूँ मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूँ सर मेरी शादी से एक सप्ताह पहले ही कुछ गुंडों ने मेरी मंगेतर के साथ बलात्कार कर दिया । हमें अपने लोगों को इन बेखौफ गुंडों से बचाने के लिए कुछ करना होगा । बाद खत्म करते करते लोहित जोश से भर गया था । लेकिन मंत्री जी ने ऐसी ठंडी प्रतिक्रिया दी जैसे लोहित की मंगेतर का बलात्कार नहीं बल्कि उसे सर्दी जुकाम हुआ हूँ । मंत्री जी ने पूछा नाम क्या है? तुम्हारी मंगेतर का नाम सुनने के लिए मंत्री जी फाइलों में हस्ताक्षर करने से एक पल रुककर ध्यान से लोहित की और देखने लगे । तृषा पूरा नाम पूरा पर अधिक बल देते हुए मंत्री जी ने कहा तृशा दत्ता लोहित सोचा कि उसके नाम का इस मामले से क्या लेना देना है? दत्ता की जनरल का मंत्री जी ने कहा, और ऐसे निराश हो गई जैसे उन्होंने अगले चुनाव को जीतने का मौका गवाह दिया हो और तुम्हारा नाम क्या है? तो बडी उम्मीद से मंत्री जी ने पूछा सर मैं भी जनरल कास का ही हूँ करना । राजनीतिज्ञ हर समय राजनीति के बारे में सोचते हैं । उन्हें आगामी चुनावों में किसी विशिष्ट जाती से वोट की आवश्यकता होगी । शायद इसीलिए उन्होंने लोहित और तृषा की जाती में खासी दिलचस्पी दिखाई । इससे पहले के लोग है तो उससे आगे कुछ कह पाता मंत्री जी की बेटी अंदर आ गई हो तो मैं इतनी जल्दी उठ गई । बेटा अभी तो सिर्फ ग्यारह बजे हैं । हाँ डाॅट! आज मैं अपने दोस्तों के साथ शॉपिंग करने जा रही हूँ । मुझे कुछ पैसे चाहिए । उसने नीली जिसके साथ हल्की भूरे रंग की टीशर्ट पहनी हुई थी । मंत्री जी ने अपनी टेबल की दराज खोली और उसे दो हजार रुपये के नोटों की एक गड्डी दे दी । ये लो बेटा अगर और चाहिए हो तो बताना था इस पापा उससे कहा और पैसे अपने पास में रख लीजिए ।

जिनी पुलिस भाग 23

भाग तेज लोहित और हमने एक दूसरे को देखा और पैसों की मानसिक गन्ना करने लगे । दो हजार रुपये के सौ नोट मतलब कुल दो लाख रुपए की । ये कई लोगों की वार्षिक आय से भी ज्यादा है और तुम्हारा भाई अयान कहा है । मंत्री जी ने पूछा वो तो सो रहा होगा क्या? मैं उसे जगह ॅ नहीं? नहीं सोने तो उसे वो देर रात अपने दोस्तों के साथ पार्टी करके आया था । थोडी देर बैठो मेरे पास मुझे तुमसे कुछ बात करनी है । वो मंत्री जी के बगल में रखी कुर्सी पर बैठ गई और लोहित और अमन को एक झलक देखा । मंत्री जी ने लोहित से कहा आप अपना नंबर बाहर रजिस्टर में लिखवा दीजिए । मैं पुलिस से कहकर अपराधियों को जल्द से जल्द पकडवाने की कोशिश करूंगा । लोग इतने विनम्रता से कहा सर हम यहाँ इसलिए नहीं आए हैं । फिर क्या तो मैं किसी प्रकार का मुआवजा चाहिए । मैं देखूंगा कि मैं क्या कर सकता हूँ । मंत्री जी ने हमें नमस्ते करते हुए वहाँ से जाने का इशारा किया । एक नमस्ते के भी तो हीरो अर्ध होते हैं । नहीं सर, मैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ और मेरा ये मानना है कि अगर हम तकनीक का सही इस्तेमाल करेंगे तो हम बलात्कार जैसी घटना को होने से रोक सकते हैं । मैं आप के पास एक प्रस्ताव लेकर आया हूँ । सर डेटा कहते हैं कि हमारे शहर में बलात्कार की घटनाएं दिन पर दिन बढती जा रही है । अपराधी हत्या, डकैती की पहले से योजना बनाते हैं लेकिन बलात्कार और नियोजित होता है । अपराधी किसी लडकी को सडक पर अकेले देखते हैं और उसके साथ बलात्कार करते हैं और लोकलाज के भय से कई बार पीडिता पुलिस के पास जाती ही नहीं । हमें इस अपराध को रोकने के लिए कडे कदम उठाने चाहिए । फिर मैंने एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार की है । कृपया इसे एक बार सुनती थी । आज ही स्पेशल इंटेलिजेंस का उपयोग करके हम अपराध को होने से पहले ही रोक सकते हैं । इस पर मंत्री जी की बेटी ने कहा कि हमें ये सब करने की जरूरत भी हैं । दुनिया में ऐसे भी देश है जहां अपराध की दर भारत से भी ज्यादा है । मुझे नहीं लगता कि हमें ये सब करके अपना समय और पैसा बर्बाद करना चाहिए । मंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा थी के श्रीमान तुम इस फाइल को यहाँ छोड दो । मैं इसे देख कर तो मैं कॉल करूंगा । हताश होकर वे दोनों उसके कार्यालय से बाहर जाने लगे जाती जाती । उन्होंने सुना के मंत्री जी की बेटी कह रही थी कॅरियर्स इन्हे लगता है की हम दिन की तरह बेरोजगार बैठे हैं जो इससे फालतू के प्रस्ताव लेकर चले आते हैं । लोहित वापस जाकर उस लडकी को एक जोर का चांटा करना चाहता था । लेकिन अपने गुस्से को निकल कर वो बाहर चला गया । लोहे तुम चिंता मत करो, उस कपटी मंत्री में हमारी बात को समझने की समझ नहीं । हम चीफ मिनिस्टर से मिलेंगे और जरूरत पडी तो प्रधानमंत्री जी से भी मिलेंगे । बहुत जल्द पूरा होगा हमारा सामना । अमन ने लोहित को झूठा दिलासा देते हुए कहा, लोहित ने अमन की आंखों में झांका । उसने अपनी बल्कि गिरा दी । ठीक है अमन इस बात का मुझे पहले से अंदाजा था । वैसे भी बहस के आगे बीन बजाने का क्या फायदा? हमारी योजना को एक ऐसे देश में लागू करना कठिन तो होगा ही जहाँ कोई भी महिला सुरक्षा की परवाह ही नहीं करता । कुछ देर की चुप्पी के बाद लोहित ने कहा, चलो मंदिर चलते हैं । मंत्री जी का कुत्ता भी रामन और लोहित को देखकर बातें लगाओ । सिक्योरिटी गार्ड ने जाते वक्त उन्हें सलाम किया । क्या शंका वास्तव में उन मंत्रियों से कोई संबंध होता । अपनी वाइफ से भी मंदिर पहुंच गए । लोग थे । ये सारी पीढी मंदिर में भर लगाकर बाहर बैठे भिखारियों में बांट दिए । अमन लोहित को बडे अच्छे से देख रहा था कि आखिरकार क्या कर रहा है । लोहित ने अपनी चुप्पी तोडते हुए कहा आज तृषा का जन्मदिन है । मैं हर साल इस दिन नए कपडे पहनता हूँ और मंदिर के बाहर मिठाई बांटता हूं । मैं इसी त्यौहार की तरह बनाता हूँ । वहाँ तो उसका जन्मदिन है । याद तो में उसके जन्मदिन के लिए तुमने जो लव लेटर लिखा था अमन मुस्कुराने लगा । हाँ कैसे भूल सकता हूँ मैं मेरी जिंदगी के सबसे हसीन पर । बीते दिनों को याद करते हुए वे दोनों फ्लैश बैक में चले गए । स्कूल बस में बैठे लोग इतने अमन के कान में फुसफुसाया यार, मैं उस पारी को किसी भी तरह प्रेस करना चाहता हूँ । बताओ ना क्या करूँ लोहित की फिरकी लेने के लिए अमन ने कहा कि जाओ और गहनों की तुम उससे प्यार करते हो । ये आसान नहीं है । जब मैं उसे ये पहली बार का होगा तब सब कुछ ज्यादा ही होना चाहिए । वो दिन वो समाप्त वो जगह और मेरे कहने का अंदाज सब कुछ प्रॉफिट होगा तभी तो बात बनेगी तो तो उसके जन्मदिन पर उसे प्रभु करना लडकियाँ अपने जन्मदिन पर एक राजकुमारी की तरह महसूस करती है । लोहित की आंखें खुशी से चमक उठी । कभी उसका जन्मदिन उसने पूछा । लोहित के लगातार सवालों से चढकर अमन ने कहा मैं उसका डैडी नहीं है जो मुझे उसका जन्मदिन पता होगा मैं उसी से पूछ लेता हूँ । लोहित उसके पास जाने के लिए खडा हो गया । तृषा बस की पिछली सीट पर बैठी थी । अमन ने लोहित को उसकी कमर से पकडकर वापस बैठा दिया । अरे क्या हुआ उस से मत बूझ के उसका बहुत कम है उसे सरप्राइज दे लेकिन मुझे तारीख कैसे पता चलेगी? अमन ने लोहित के अंदर जोश भरते हुए कहा अपने आप को पहचानो । लोहित कौन होता हूं? मैं लोहित बंसल हूँ और कौन नहीं मेरे भाई लोहित नहीं हो तो तो फिर मैं कौन हूँ? एक योद्धा हो तो अपने बिहार को पानी की लडाई लड रहे हो । ये तुम्हारी लडाई है लोहित और तुम्हें इसे खुद ही लगना है तो में खुद ही इसका पता लगाना होगा कि कब है पुरुष का बुद्धि । लोहित को युद्ध के मैदान में प्रवेश कर रहे किसी योद्धा की तरह महसूस होने लगा । जोश में भरकर उसने कहा हाँ मैं एक योद्धा हूँ और तृषा का बोल दे पता लगाना मेरा मिशन है । आज रात को सभी के सो जाने के बाद मैं उसके घर में घुसकर उसके बहुत सर्टिफिकेट को ढूंढूंगा । रोहित ने एक नाटकीय स्वर में कहा कि एक शानदार तरकीब असैनिक लेकिन तुम कुछ आसान सा भी तो कर सकते हो क्या? जब हर कोई प्रेयर करने क्लास से बाहर जाएगा तो तुम तबियत खराब होने का बहाना बनाकर क्लास में रुक जाना और तृषा के बॉक्स उसके स्कूल डायरी निकालकर उसमें देख लेना कि कभी उसका बहुत दे । हाँ, ये भी ठीक रहेगा । लोहित खुश हो गया । सभी के प्रेयर में जाते ही लोहित ने उसकी गुलाबी बैग को खोला । सभी नोटबुक उसके बैग में बडे सलीके से लेबल किए हुए थे और एक दूसरे खंड में उसका टिपिन बॉक्स और एक डेरी मिल्क चॉकलेट थी । लोहित ने उसके स्कूल डायरी निकाली और तृषा का बहुत दे देखा । लोहित ने खुशी से कहा अरे वाह! भग ले सकता ही है, उसका बहुत दे । लोहित का दल स्कूल की इस घंटे की तरह जोरों से धडकने लगा जिसने प्रार्थना की समाप्ति के संकेत दिए । लोग इतने जल्दी से डायरी वापस रखी और अपना सिर मेज पर टिकाकर आराम करने का नाटक करने लगा । अमर ने जाते ही पूछा कब अगले सप्ताह तो मैं ऐसे खास कैसे बनाओगे? लोहित कहा देख भाई मैं विज्ञान और गणित तो समझता हूँ लेकिन लडकियों को नहीं । हाँ और अब आगे क्या करना है तो उससे बेहतर मुझे कौन बताएगा? बस कर मुझे मक्खन लगाने की कोई जरूरत नहीं है । मैंने पहली तुम्हारे लिए डर की सोच ली है । उसके लिए सबसे पहले तो वे एक लव लेटर लिखना होगा । लवलेटर भाई मैंने कभी छुट्टी की एप्लीकेशन भी खुद से नहीं देखी । मम्मी से लिखवाता हूँ आॅल्टर क्या खाक लिखूंगा तो ऐसा ऍम हूँ । ठीक है घर जाकर पूछता हूँ मम्मी से अरे भाई मैं मजाक कर रहा था ना अपनी मम्मी से लवलेटर कौन लिखवाता है । पता है मैं भी मजाक कर रहा था । ठीक है लिख लूंगा मैं लवलेटर ऍम मैंने तो सोच कर लिया है कि मैं क्या लिखूंगा । ये तुम्हारा अगला मिशन है । सोल्जर यस कैप्टन । अगले दिन क्लास में टीचर ने सरप्राइस टेस्ट ले लिया । जब भी क्लास में टीचर बढाना नहीं जाते तो सर प्राइस टेस्ट ले लेते हैं । वो चाहता तो सिर्फ उत्तर लिख सकता था । मगर वो ब्लैक बोर्ड से देखकर प्रश्न लिखने लगा जोकि लिखना जरूरी भी नहीं था । धीरे से लोग इतने अमन को छोटा सा कागज दिया । तूने और ब्लाॅस्ट के लिए भी चिट कैसे तैयार कर ली? हमने आश्चर्यचकित होकर पूछा कि चिट नहीं लवलेटर है, इतनी जल्दी लिख लिया । हाँ मैंने स्मार्ट वर्क किया इसीलिए जल्दी हो गया । क्या मैंने ये लेटर हमारी हिंदी की बुक से देखकर लिखा है । ये सुनते ही अमन की उसको पढने की उत्सुकता और भी ज्यादा बढ गई । उसने लेटर को अपने नोटबुक के अंदर छिपाया और पढने लगा । अमन के पढ लेने के बाद लोहित ने पूछा ऐसा लगा बहुत ही भयानक उसने सोचा अच्छा है तेरे से उसने कहा । क्लास खत्म होने पर सभी ने अपनी कॉपी मैडम के पास जमा कर दी । लोहित ने अगले ग्लास में अमन से कहा लवलेटर वापस जी । अमन ने स्पष्ट कह दिया ब्रो मेरे पढकर तो मैं तुरंत ही लौटा दिया था । क्या मतलब मेरे पास तो नहीं वॅाटर । मुझे लग रहा था कि तुम्हारे पास है । लोहित ने घबराकर अपनी जेब अमन की जेब अपना बाग अमन का बैग चेक किया मगर लाइटर नहीं मिला । लोहित ने हर मानते हुए कहा छोडो मैं नया लिख लूंगा और अगर वो लेटर किसी और के हाथ लग गया तो किसी ने तुम्हें ये कहकर ब्लैकमेल किया कि वो तृषा को सब बता देगा । दो बता देना ब्रो यही तो मैं चाहता हूँ और वैसे भी मैंने उस लेटर में अपना और दिशा का नाम नहीं लिखा है । पहली बार तुमने कोई अच्छा काम किया । अमन ने कहा और लोहित की पीठ थपथपाई तभी चपरासी नोट इसलिए हमारी कक्षा में प्रवेश करता है । सभी छात्र छुट्टी की खबर की कामना करने लगे । सिर्फ लोहित और अमन को अंदाजा था कि ये स्कूल की नहीं बल्कि बल्कि लोहित की छुट्टी का नोटिस था ।

जिनी पुलिस भाग 24

बहुत चौबीस टीचर ने वो नोट बढकर कहा । लोग है तो मैं प्रिन्सिपल सर ने अभी अपने दफ्तर में बुलाया है । हर कोई लोहित कि और टकटकी लगाए देखने लगा । अमन फर्स्ट फसाया । अच्छी बातें सोच लोहित ये भी तो हो सकता है कि तुम्हें एक भी उत्तर नहीं लिखा । इसीलिए प्रिन्सिपल सर ने तो मैं ऑफिस में बुलाया हूँ । लेकिन ये दोनों जानते थे कि ये माजरा सरप्राइस टेस्ट का नहीं बल्कि लापता लवलेटर का है । मैं आई कमिनश्नर लोहित बाहर से ही खुशबू से पहचान गया कि मैं भी प्रिन्सिपल सर के ऑफिस में ही बैठी थी । ये ऍम लोहित अंदर गया और प्रिंसिपल के ऑफिस को देखने लगा । ये एक साधारण सा ऑफिस था । उनके स्कूल को कई शैक्षणिक और खेलकूद के टूर्नामेंट में मिले प्रमाणपत्र दीवारों पर टंगे थे । एक बडा लो पेपर वेट ऍम फोन और दुनिया की सबसे धीमे प्रोसेसर वाला एक प्राचीन कंप्यूटर प्रिंसिपल के डेस्क पर रखा था । क्या तुम जानती होगी तो मैं यहाँ पर क्यों बुलाया गया है? नहीं सर, नजर झुकाए जमीन को टकटकी लगाए लोहित ने कहा लोहित जानता तो था लेकिन खुद कबूल करने पर उसे बेनिफिट ऑफ डाउट नहीं मिलता । प्रिंसिपल ने पूछा तुम ने सरप्राइस टेस्ट में एक भी उत्तर नहीं लिखा । क्यों हो तो ये माजरा लवलेटर का नहीं सरप्राइज टेस्ट का है । लोहित की खुशी का ठिकाना नहीं था । मान लो किसी खोनी पर सिर्फ चोरी का मुकदमा चल रहा हूँ । प्रिंसिपल ने पूछा तो पढाई क्यों नहीं करते? अब लोहित का प्रिंसिपल की बातों में ध्यान ही नहीं था । उनकी टेबल में रख एक लोग को देखने लगा और उस पर भारत को ढूंढने की कोशिश करने लगा । तुम्हें पता है कि तुम्हारा पढाई पर ध्यान क्यों नहीं लगता? लोहित प्रिंसिपल की बातों को अनसुना कर के थोडा दाई और सरकार और आखिरकार उसे लोग में आइसक्रीम कोन के आकार का भारत दिखाई दे गया । पहले ऑस्ट्रेलिया के सामने खडा था । बाहर बैठी मैम ने जानबूझकर उसका गला साफ किया क्योंकि तुम पढाई छोडकर प्रेमपत्र लिखने में लगे हो । वह दफा ये सिर्फ सर प्राइस टेस्ट नहीं बल्कि लेटर का ही मामला है । लोहित सोचा प्रिंसिपल ने अपनी जेब से लेटर निकाला, मेज पर रखा और उस पर पेपर वेट रख दिया । क्या है ये पता नहीं चल लोहित ने इतनी मासूमियत से कहा जैसे उसने जीवन में कभी कोई पत्र देखा ही ना हो चलो में बढकर सुनाता हूँ । इसमें क्या लिखा है, सेवा में मेरी जान जेबी इंटरनेशनल स्कूल मलाड, वेस्ट मुंबई विषय अपने प्यार का इजहार गन्ने हेतु आवेदन पत्र हो गया । विनय निवेदन यह है कि मैं कक्षा सिक्स्थ एक का छात्र हूँ । जब से मैंने तो नहीं देखा है । मुझे बहुत तेज प्यार हो गया है । मेरे दोस्तों ने मुझे ये बात तो में बताने की सलाह दी है । अतः आपसे सानु रोज है कि मुझे अपना बॉयफ्रेंड कहे जाने की अनुमति प्रदान करें । धन्यवाद तुम्हारा आज्ञाकारी बॉयफ्रेंड । नाम लोहित बंसल कक्षा छठी रोलनंबर दूसरी थ्री वन ॅ दिनांक माता पिता के हस्ताक्षर प्रिंसिपल ने कहा ये क्या है? रोहित तो लवलेटर भी ढंग से लिखना नहीं आता । मैं फिर से खास नहीं लगी हूँ । मेरा मतलब है और तुम पढाई छोड कर ये सब क्या कर रहे हो सर, ये मैंने नहीं लिखा है । लोहित ने अपनी बेगुनाही साबित करने का अंतिम प्रयास किया । तुम्हारा मतलब है कि किसी और ने से लिखकर तुम्हारी कॉपी में छिपा दिया । लोहित ने तेजी से हाथ में सर हिलाते हुए कहा जी हाँ सर, बिलकुल ऐसा ही हुआ होगा । बडी कमाल की बात है । किसी और ने से लिखा भी तुम्हारी ही हैण्डराइटिंग में है है ना? प्रिंसिपल ने फटकारते हुए कहा कि जो पूरे दिन हाथ ऊपर करके मेरे ऑफिस के बाहर खडे रहो जाती जाती, लोहित नहीं पूछना चाहता हूँ क्या मुझे वो लेटर वापस मिल सकता है? लंच ब्रेक में कृष्णा ने लोहित के पास जाकर पूछा अरे क्या हुआ? मैंने तुम्हारे लिए चिट्ठी लिखी थी जो मैम को मिल गई । रोहित ने मन में कहा मैंने टेस्ट में भी उत्तर नहीं लिखा । लोहित ने तृषा से कहा तो तुम पढाई क्यों नहीं करते? क्योंकि मैं हमेशा तुम्हारे बारे में सोचता रहता हूँ । पढाई कब करूँ? रोहित ने फिर मन में सोचा पल भर में ही एक सब कहाँ बेड गया । अगले दिन उसका जन्मदिन था जैसी घडी में बारह बजे लोहिता हिस्से आई । इसके अपने घर के लिविंग रूम में गया और लैंडलाइन फोन पर दिशा का नंबर डायल किया । आधी रात को उसे फोन करना एक खतरनाक विचार था । शायद वो लेटर लिखने से भी बत्तर मगर आशिकी में जोखिम उठाने का भी तो अपना मजा है । लोहित को जितने नाम आते थे, सभी देवी देवगांव का नाम जपते हुए उसने अपना मिशन शुरू किया । उसने लिविंग रूम की लाइट चालू नहीं की । अंधेरे में ही तृषा का नंबर डायल किया । लोहित के कान में हौले हौले घंटे की आवाज सुनाई दी । मगर सूची तृषा के घर के आधी रात को घंटे की आवाज के लिए तेल सुनाई दे रही होगी तो है हर ट्रिंग ट्रिंग के बाद लोहित का दिल जो जोर से धक धक करने लगा । हमेशा की तरह लोहित की किस्मत ने फिर उसके साथ बेवफाई की और इसका सबसे बुरा डर सच हो गया । तृषा के डैड ने फोन उठाया और कहा हलो । रोहित ने तुरंत फोन रख दिया और दौडता हुआ अपने कमरे में जाकर चादर के अंदर दुबक गया । उस समय मोबाइल फोन का आविष्कार तो हो गया था मगर वो सिर्फ पैसे वालों और खास लोगों के पास ही होता था । करीब पंद्रह मिनट के बाद लोहित अपनी चादर से निकला । अपने कमरे की लाइट जलाकर वो अपने स्कूल के ग्रुप पिक्चर में तृषा को देखने लगा । उनके क्लास टीचर और प्रिंसिपल सामने की कुर्सी पर बैठे थे और बाकी छात्र ऊंचाई और लिंग के अनुसार चार पंक्तियों में खडे थे । अगर आपने भी नाइनटीज में अपने स्कूल पास की है तो यकीनन आपके पास भी ऐसी एक फोटो जरूर होगी जिसे अपने अपने उस खास शख्स को देखने के लिए अब तक संभालकर रखा होगा । एक का एक लोहित के घर का फोन बजा । इससे पहले की लोहित के मम्मी पापा जांच जाएँ । वो आंधी की रफ्तार से गया और फोन उठा लिया । फोन उठाते ही लोहित गाना गाने लगा हाॅट ऊॅ ऊॅ होते ऍम अच् तुम्हें कैसे पता चला कि मैंने फोन किया है । उसने पूछा जैसे तुम्हें पता चल गया कि पहले मैंने फोन किया था । मुझे पता था कि ये तुम ही हो । क्योंकि आधी रात को मुझे विश्व करने के लिए इतना पागल हो और कोई नहीं हो सकता है तो मैं कैसे पता लगा कि आज मेरा बुड्ढी है क्या? मैंने पहले कभी तो में बताया है कि मैच जादूगर हूँ । वह दबी आवाज में हसने लगे वो दोनों धीमे धीमें बात कर रहे थे इस डर से कि कहीं किसी के भी पेरिस जागना जाए । अच्छा अगर तुम सच में जादूगर हो तो मुझे मेरे जन्मदिन का तोहफा चाहिए, वो भी अभी । मैं तो मैं कल दू तो नहीं चलेगा नहीं मुझे तो अभी ही चाहिए अपने जादू से दो मुझे तोहफा रोमेंटिक मूड में थी । देर रात की जाने वाली बातें अक्सर रोमेंटिक हो ही जाती है । ठीक है अगर तुम अभी जाती हो तो मैं अभी तो ये तोहफा देता हूँ । अभी करता हूँ मैं जादू आबरा का डाबरा हो काॅल्स अपनी गणित की नोटबुक चेक करो हूँ । अहम जी क्या सच में तुमने जादू किया है तो मैं अभी देख करती हूँ । उसे फोन टेबल पर रखा और दौड कर अपने कमरे में कहीं । उसने अपना बैग खोला और उसे गणित की नोटबुक में एक पत्र में लिपटा हुआ डेरी मिल्क चॉकलेट मिला । हाँ, रोहित ने उसके लिए एक और लव लेटर लिखा था हूँ ये तुमने कब डाला मेरे बैग में तो मैं याद मैंने तुमसे स्कूल बस में मैच की नोटबुक मांगी थी । बस तभी घरे हाँ उसने चॉकलेट खाते हुए पत्र पढना शुरू किया । मेरी सबसे अच्छी दोस्त है त्रिशा । वो मेरी ही कक्षा में पडती है । त्रिशा हमारे कक्षा की सबसे होशियार लडकी है और सबसे सुंदर भी । ये पढते वक्त तृषा जरा शर्म आ गयी । वो हमेशा पढाई में मेरी मदद करती है । अपने आखिरी बेंच पर बैठता हूँ और तृषा सबसे पहली बेंच पर पीछे से भी वह बहुत सुन्दर दिखती है । उसके हाथ बहुत नरम और मुलायम है । मुझे उस से हाथ मिलाना अच्छा लगता है । वो अपने बाएं हाथ में गुलाबी या सफेद रंग का है कि पकडती है जिसका उपयोग वो अपने चेहरे को पहुंचने के लिए करती है । वो पढाई में मेरी मदद भी करती है । मैं उसके डैडी से डरता हूँ फिर भी अक्सर शाम को उसके घर जाता हूँ । मुझे नहीं पता क्यों मुझे जलन होती है जब वो अपने टेडी को कसकर गले लगती है । पूरा स्कूल स्टाफ और सभी छात्र उससे बहुत प्यार करते हैं । मैं भी हम कभी कभी टिफन भी शेयर करते हैं । एक बार वो सभी के लिए टिफेन में गुलाब जामुन लेकर आई थी लेकिन मुझे उसमें से एक भी नहीं मिला । अगले दिन वो सिर्फ मेरे लिए पांच गुलाब जामुन लेकर आई । मुझे इतना अच्छा दोस्त देने के लिए थैंक्यू भगवान । मैं हमेशा उसका दोस्त बने रहने की कामना करता हूँ । घोंचू बहुत अच्छा है ये उन दोनों की आंखें खुशी से नाम हो गई थी । चल इससे पहले की हमारे पेरेंट्स जाग जाए । हम फोन रखते हैं । तृषा ने कहा तो डाइट तृषा लोहित ने फोन को चूमकर रख दिया । जरूरी नहीं कि हर बार शब्द ही हो । इस क्रम में ऐसा भी होता है कि आप सोचेंगे और वह समझ ले । एक बार फिर अपने यादों के झरोखे से बाहर आकर अमन ने कहा काश आज वो हमारे साथ होती है । लोग इतने गुस्से में जवाब दिया । अच्छा ही है कि आज वो हमारे बीच में नहीं है । अमन ने लोहित की और अचरज से देखा । अगर वहाँ होती तो हम उसे क्या? मोदी खाते इतने लाचार और कमजोर है । हम की उसे इंसाफ दिलाने के लिए कुछ भी नहीं कर सकते हैं । मंत्री की बेटी का कहना है कि बलात्कार होना एक आम बात है । हमें ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए तो इतने दिनों से ठीक से सोई नहीं हूँ । क्यों ना घर जाकर अपनी नींद पूरी कर लो । नींद तो तब आती थी जब त्रिशा से बात होती थी । अब तो रो रोकर थक जाता हूँ सो जाता हूँ । अमन ने लोहित की कंधे पर हाथ रखकर कहा अब हम क्या करेंगे? लोग हैं कुछ नहीं करेंगे । हम कर भी क्या सकते हैं तो अपने घर जाऊँ । मुझे आराम करने को तो उदास ना हो ना दोस्त इस बात का हौसला रखना कि हमने पूरी कोशिश की । हारने वालों का भी तो अपना रुतबा होता है । मलाल तो वह करे जो दौड में शामिल ही नहीं हुआ । ये कहकर अमन अपने घर चला गया हूँ ।

जिनी पुलिस भाग 25

भाग पच्चीस छह महीने बाद जैसे जैसे समय बीतता गया लोग अपनी जिंदगी में आगे बढता गया । उसका ध्यान उसके करियर में वापस लगने लगा । उसने लोगों से मिलना, जुलना घूमना फिरना सब बंद कर दिया और अपना पूरा ध्यान काम पर ही लगाए रखा । घर के मुकाबले लोहित ऑफिस में ही ज्यादा समय बिताने लगा । वो घर पे सिर्फ रात को सोने जाता था और कभी कभी तो सोने भी नहीं जाता था । वो हस्ता तो था मगर खुश हुए । एक ऐसा हो गया था । एक सुबह जब लोहित आपने बातों में नहीं आ रहा था तो उसका फोन बच्चा लोहित ने पूछा किसका फोन जी ने एक अननोन लैंडलाइन नंबर से फोन आया है । उस नंबर को गूगल पर सर्च करो । अगर किसी क्रेडिट कार्ड कंपनी से होगा तो फोन काट देना । लोग इतने शावर लेते हुए सोचा बेकार में परेशान करेंगे ये क्रेडिट कार्ड वाले जिन्होंने उत्साह से कहा ये कॉल तो भी जरूर लेनी चाहिए । ठीक है इसे बातों के फोन से कनेक्ट करो । लोग इतने जिनी को आदेश दिया हलो । लोहित ने कहा क्या में लोहित बंसल से बात कर सकता हूँ? फोन पर आवाज आई हाँ मैं बोल रहा हूँ । मैं मंत्री जी के कार्यालय से बोल रहा हूँ का ये सर लोहित मंत्री जी के पी की आवाज पहचान गया । मंत्री जी अभी तुरंत तुम से मिलना चाहते हैं । जितनी जल्दी हो सके आजाओ लेकिन वह मुझ से मिलना क्यों चाहते हैं? क्या उन्होंने मेरी फाइल पढी? क्या उन्हें अच्छी लगी? लोह इतने उत्साह से पूछा । लोहित खुशी के मारे बादलों में ही राज ने लगा ईश्वर के घर देर है अंधेर नहीं ये सब मुझे नहीं पता । उन्होंने तो मैं बुलाने को कहा है । और हाँ आते आते अपना प्रोजेक्ट भी लेते आना । लोह इतने ताना कसते हुए कहा लेकिन मेरे पास अपाॅइनमेंट लेटर नहीं है । आपके सिक्योरिटी गार्ड उसके बिना तो अंदर आने ही नहीं देते । मेरे तो में लेने के लिए मंत्री जी की गाडी भी होती है । सिक्योरिटी गार्ड हमारी कार नहीं रोकते ये कहकर उसने कॉल काट दिया । जैसे ही लोग इतने फोन रखा जिन्होंने उत्सुकता से पूछा क्या हुआ, क्या कहा उसने के तुम्हारे मतलब की बात नहीं है । लोहित ने कहा और कपडे पहनने लगा ज्यादा स्मार्ट रोबोर्ट की यही समस्या है ही आपकी माँ बनने की कोशिश करते हैं । लोग इतने जी को आदेश दिया जितनी फॅमिली नाम की एक फाइल मेरे कंप्यूटर में है । उसका प्रिंट निकाल दो, लेकिन ये सब तो मेरे मतलब का है ही नहीं । इंजीनि ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, लोग इतने मुस्कुराते हुए कहा ऍम अब नाॅट लोहित अपने प्रोजेक्ट के ब्रेड डॉक्यूमेंट लेकर के नीचे उतर करके पार्किंग में गया । लालबत्ती, वालिक, सफेद स्कॉर्पियो गाडी वहाँ उसका इंतजार कर रही थी । ड्राइवर ने सफेद रंग की वर्दी पहनी हुई थी । लोहित आराम से कार की पिछली सीट पर टांगे फैलाकर बैठ गया । इन दिनों का होना तो आम बात है । आप खास है अगर आपका ड्राइवर वर्दी पहनता हो । गाडी में बैठकर लोग इतने ड्राइवर से पूछा तुम्हारा नाम क्या है? ड्राइवर ने जवाब दिया, मेरा नाम मोहम्मद है । तुम जानती हूँ पूरी दुनिया का सबसे कॉमन नाम मोहम्मद ही है । ड्राइवर उर्दू में कुछ बढ बढाया और रेडियो चालू कर दिया । लोगों से सामान्य ज्ञान साझा करने की अजीब आदत लोहित को किसी दिन मुसीबत में डाल देगी । पहली बार लोहित एक लाल बत्ती वाली सरकारी गाडी में बैठा था । मंत्री जी की गाडी एक सिग्नल से गुजरी तो ट्रैफिक पुलिस ने लोहित को सलामी दी । लोहित ने पहले कभी इतना प्रभावशाली महसूस नहीं किया था जैसे भारत में रहना इतना भी बुरा नहीं है । अगर आप के पास सही अधिकार हो तो रेडियो में बॉलीवुड के गाने चल रहे थे जो लोहित के मूड के अकॉर्डिंग थी । वो कार की पिछली सीट पर नाच रहा था । ड्राइवर ने लोहित को रियरव्यू मिरर में देखा और उससे जलकर रेडियो का स्टेशन बदल दिया । दूसरे स्टेशन पर अपने जीवन से थकी हुई एक बूढी औरत समाचार सुना रही थी और समाचार को सुनकर लोहित चौक गया । कल रात जब गृहमंत्री की बेटी पार्टी से वापस लौट रही थी तो कुछ अज्ञात गुंडों ने उसका अपहरण करके बलात्कार कर दिया । इस घटना शहर को दहला दिया है । हर कोई पूछ रहा है कि जब गृहमंत्री का परिवार ही सुरक्षित नहीं तो आम लोगों का क्या होगा । पुलिस आयुक्त ने कहा है कि वे अपराधियों को पकडने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं । उन्होंने आश्वासन दिया है कि उनकी सर्वश्रेष्ठ अधिकारी इस मामले की छानबीन करने में जुट गए हैं । लोहित सोचा कि यही वजह है कि छह महीने बाद अचानक मंत्री जी ने उस याद किया । जब लोग इतने मंत्री जी को अपनी प्रेमिका के बलात्कार के बारे में बताया तो उन्होंने कहा कि भारत में बलात्कार बहुत ही आम है । हम इसे रोक नहीं सकते । उन्होंने कहा कि वह अधिक महत्वपूर्ण चीजों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं । लेकिन अब जब उनकी बेटी का बलात्कार हुआ तो उन्होंने लोहित को लेने के लिए अपनी गाडी भेज दी । अब वह रोहित के प्रोजेक्ट को जानने के लिए एक्साइटेड है कि किस तरह का स्वार्थी समाज है । काश की अगर तृषा के पिताजी भी कोई मंत्री होते तो अब तक उसे न्याय मिल चुका होता । पता नहीं क्यों लोहित को कृति के बलात्कार की खबर सुनकर सुकून महसूस हो रहा था । मंत्री का अहंकार चूर चूर हो गया था । शायद अब इस एक लडकी का बलात्कार शहर में बहुत सारे गुनाह होने से रोकेगा । मंत्री जी की गाडी पहुंच गए । जिस गार्ड ने कभी लोहित को अंदर जाने से रोका था, बुधवार खोलने के लिए दौडता हुआ आया । उसे लोहित अपाॅइनमेंट लेटर नहीं मांगा बल्कि उसे सलाम किया । उन्होंने अब लोहित को वेटिंग हॉल में रुकने के लिए भी नहीं कहा बल्कि सीधे उसे एक वातानुकूलित सम्मेलन कक्ष में ले गए जहां मंत्री जी चार लोगों के साथ उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे । लोहित ने सभी का अभिवादन किया । गुड मॉर्निंग सर । मंत्री जी ने कहा स्वागत है नौजवान । हम सभी तुम्हारा ही इंतजार कर रहे थे । हमें बताओ तुम्हारे प्रोजेक्ट जीने के बारे में जिससे हम अपराध पर काबू पा सके । दिल्ली में अपराधियों ने सारी सीमाएं लांघ दी है । पुलिस आयुक्त, दो आईएएस अधिकारी और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के प्रमुख इस बैठक के लिए आज हमारे साथ शामिल है । अगर ये सभी प्रतिनिधि तुम्हारे प्रस्ताव को पसंद करेंगे तो हमें से लागू करने के लिए उचित कदम उठाएंगे । बडी अजीब विडंबना है । जब त्रिशा का बलात्कार हुआ तो पुलिस अधिकारी ने एफआईआर लिखने तक से मना कर दिया । लेकिन जब मंत्री की बेटी का बलात्कार हुआ तो पुलिस कमिश्नर खुद लोहित के सामने बैठ कर उसका सुझाव ले रहे थे । लोग इतने अपनी क्लाॅज फाइल डाउनलोड की और वहाँ लगे प्रोजेक्टर पर चालू की मैंने कार्ययोजना तैयार की है जिसे यदि हम सुचारु रूप से लागू करने में सक्षम होते हैं तो हम प्रतिशत तक और संगठित अपराध को कम कर सकते हैं । लोग इतने सभी प्रतिनिधियों का विश्वास हासिल करते हुए कहा, सबसे पहले हमें शहर के सभी स्ट्रीट लाइट्स पर कैमरे लगाने होंगे । स्ट्रीटलाइट पर कैमरे लगाना आसान है क्योंकि हमें सडक किनारे पोल नहीं लगाना होगा । हम मौजूदा बुनियादी ढांचे और बिजली कनेक्शन का उपयोग कर सकते हैं । मंत्री जी ने पूछा, दिल्ली में कितनी स्ट्रीट लाइटें हैं? मेरी रिसर्च की रिकॉर्डिंग लगभग तीस हजार होनी चाहिए । टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के प्रमुख ने कहा, दिल्ली में करीब छियालीस हजार तीन सौ सत्तावन स्ट्रीटलाइट है । पुलिस कमिश्नर ने भारी संख्या में सुनकर आश्चर्यचकित होते हुए कहा, आपके कहने का मतलब है कि हमें दिन और रात सभी हजार तीन सौ कैमरों की निगरानी करनी होगी । लोहित ने कहा, नहीं, अगर हम इनकी निगरानी नहीं करेंगे तो कैमरे लगाने का फायदा ही क्या हुआ? ये अपराध को रोकने में हमारी मदद कैसे करेगा? मुझे खुशी हुई कि आपने ये सवाल उठाया । हमें सभी कैमरों की निगरानी करने की जरूरत इसलिए नहीं है क्योंकि जिसके अमरीकी में बात कर रहा हूँ, कोई साधारण कैमरे नहीं है बल्कि स्मार्ट कैमरे हैं जो मेरे द्वारा डिजाइन किए गए हैं । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर जिनी से सुसज्जित है । कैमरे, माइक्रोफोन और स्पीकर से लैस होंगे । ये देखने, सुनने और यदि जरूरत हो तो बोलने में भी सक्षम होंगे । मैं सॉफ्टवेयर को जिन्हें इसीलिए कह रहा हूँ क्योंकि ये अपराध को खत्म करने की हमारी इच्छा को किसी जी की तरह पूरा करेगा, जी नहीं, स्वचालित रूप से कैमरों के ऑडियो और वीडियो इनपुट के आधार पर खुदबखुद यह निर्धारित कर लेगा की सब कुछ सामान्य है या कोई अपराध होने की संभावना है । पुलिस आयुक्त ने पूछा, सब कुछ सामान्य है या नहीं ये भला एक कैमरा कैसे निर्धारित कर सकता है, कर सकता है । सर फॅर जी की सहायता से ऐसा होना संभव है । आईएएस अधिकारी ने पूछा, क्या तुम्हें यकीन है कि ये सटीकता से काम करेगा? जी हा सर, चेहरा और आवास पहचानना कोई जटिल तकनीक नहीं रह गई है कि पूरी सटीकता से काम करती है । इस तकनीक का हम हर रूस अपनी निजी जिंदगी में प्रयोग करते हैं । अब वक्त आ गया है कि हम इसका इस्तेमाल सुरक्षा के लिए करें । जब हम अपने फोन को देखते हैं तो ये खुद ब खुद अनलॉक हो जाता है । ये है फेस रेकग्निशन हमारी रेटा बीस में उन सभी व्यक्तियों के डेटा होंगे जिनका पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड है, जिन्हें अपने सामने आ रहे लोगों की पहचान लगातार उन अपराधियों से चेहरे मिलाकर करता रहेगा और अगर जिन्हें किसी पूर्व अपराधी की पहचान कर लेगा तो ये उन पर विशेष ध्यान देगा । जिन लोगों के चेहरे के हावभाव और बॉडी लैंग्वेज पर भी नजर रखेगा । अगर ये सडक पर किसी को बहुत तेज दौडता हुआ पाता है तो ये उन्हें मॉनिटर पर प्रदर्शित करेगा और विमॅन की भी सहायता लेंगे । एक आई फोन में जब हम सिरे से बात करते हैं, वह वाइॅन् ये इतनी सरल तकनीक है कि हम सभी के पास ये हमारे फोन पर है तो फिर अपराध रोकने के लिए इसका उपयोग क्यों नहीं? हम पहले से ही कुछ शब्दों को सेट कर देंगे जैसे की हेल्प बचाओ मुझे छोड दो, पुलिस, जिनी आदि । अगर सिस्टम किसी को इन शब्दों का उपयोग करते हुए पाता है वो भी सामान्य से ऊंची आवाज में तो उन का फुटेज कंट्रोल रूम में लाइट प्रदर्शित करेगा और फिर निगरानी कर रहे पुलिस अधिकारी निर्णय लेंगे कि वास्तव में पुलिस की जरूरत है या नहीं । पुलिस आयुक्त ने कहा, हाँ और हम जिनको यूआईडी यानी के आधार कार्ड विभाग के डेटाबेसे भी जोड सकते हैं क्योंकि हर किसी का चेहरा और रेटिना तो यूआईडी डेटाबेस में ऑलरेडी है ही । जब जिन्हें ऐसे व्यक्ति का पहचान करती है जिसका चेहरा मेल नहीं खाता तो हम उससे पूछताछ कर सकते हैं या तो वह कोई पर्यटक होगा । ऐसे में हम उसके पासपोर्ट को चेक कर सकते हैं और या वो कोई आतंकवादी होगा जिसने अवैध रूप से भारत की सीमा पार की हो । लोग इतने कहा थैंक यू सर एक शानदार टिप है

जिनी पुलिस भाग 26

भाग छब्बीस कमरे में मौजूद हर व्यक्ति ने इस प्रोजेक्ट की सराहना की । हर कोई लोहित के विचार से सहमत था । हम लगभग सो मॉनिटरों के साथ एक छोटा नियंत्रणकक्ष बनाएंगे और केवल बीस पुलिस अधिकारी इसकी चौबीस घंटे सातों दिन निगरानी करेंगे । अधिकारी शिफ्ट में काम करेंगे और भी शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होंगे । दिल्ली में मौजूद हर व्यक्ति कैमरे की निगरानी में होगा । अगर कभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को कोई घटना और नैतिक लगे तो ये इसी ह्यूमन इंटेलिजेंस के लिए कंट्रोल रूम में दिखाएगा और अगर हमारे अधिकारी भी इसे एक आपराधिक गतिविधि समझेंगे तो भी कैमरे में लगे सायरन को चालू कर देंगे और गश्त लगा रही पुलिस को उस स्थान की लोकेशन भेज देंगे । आईएएस अधिकारी ने पूछा और कभी अगर लाइट चली गई तो क्या होगा? लोहित ने सलाह दी, सर, हम सभी कैमरों में सोलर सेल लगा सकते हैं ताकि ये दिन के दौरान खुद ही चार्ज हो जाएगा । आपका सॉफ्टवेयर अच्छा है, लेकिन शहर में ऐसी जगह है जहाँ स्ट्रीट लाइट नहीं है । वहाँ पर हम नजर कैसे रखेंगे? सभी स्ट्रीट लाइटों पर कैमरे लगाने में सफल हो जाने के बाद अपने दूसरे चरण में हम दुकानों, सोसाइटी प्राइवेट बिल्डिंग में स्थापित सभी प्राइवेट कैमरे को अपने सॉफ्टवेयर से जोडेंगे और उन एकांत क्षेत्रों के लिए जहाँ हमें कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं मिलेगा, वहाँ हम ड्रोन की मदद से निगरानी करेंगे । हम उन स्थानों की पहचान भी कर सकते हैं जहाँ पहले अपराध हुए हैं और ऐसी जगहों पर विशेष ध्यान दे सकते हैं । मंत्री जी ने कहा, हाँ, ये किया जा सकता है और जीने की नजर वाहनों के नंबर प्लेटों भी रहेगी । अगर सडक पर चलने वाले वाहनों में से कोई चोरी की होगी तो हम आसानी से इसका पता लगा सकेंगे । लोहित की प्रस्तुति समाप्त होते ही तालियों की गडगडाहट से कपडा भर गया । हर किसी के चेहरे खिल उठे । महान उन्होंने अपनी पसंदीदा फिल्म देख ली हो । पुलिस आयुक्त ने कहा कि पहले कुछ वर्षों के लिए हमें इस परियोजना पर जुझारू रूप से कार्य करना होगा । हमें अपराधियों के मन में भय पैदा करना होगा । एक बार जब हर कोई ये मानने लगे कि कोई लगातार उन पर नजर रखे हुए हैं तो अपराध अगर अनिवार्य रूप से नीचे चली जाएगी और हमें इसमें इतना आक्रामक होने की जरूरत भी नहीं होगी । हाँ, ये बिल्कुल सही है । सर लोहित ने जवाब दिया, आईएएस अधिकारी ने फिर से पूछा और लोगों की प्रिवेसी का क्या होगा? अगर जिन्हें हर समय उन पर निगरानी रखेगी तो प्रिवेसी की कोई चिंता नहीं होगी । जी किसी के घर के अंदर निगरानी नहीं करेगी, केवल बाहर ही करेगी । अधिकारी ने सिर हिलाया, हम जीनी हेल्पलाइन नंबर भी लांच करेंगे ताकि अगर लोगों को मदद की जरूरत हो तो वो हमें फोन कर सकें । सबसे पहले हम कैमरों में उनकी निगरानी करेंगे । यदि कोई कैमरा मौजूद हुआ तो अगर नहीं तो हम जांच के लिए ड्रोन को तुरंत उन की जीपीएस लोकेशन पर भेज देंगे । लोग इतने आगे समझाया अधिकारी ने कहा, हाँ, दुनिया के अधिकांश विकसित देश पहले से ही इन सभी तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं । मेरे पास भविष्य के लिए भी रणनीतियां हैं । हम जिन चीजों पर अब तब बातचीत कर चुके हैं, उन्हें सफलतापूर्वक लागू करने के बाद हम जी ने नाम से महिला सुरक्षा एप्लीकेशन भी विकसित करेंगे । अन्य एप्स के विपरीत ये एक वो आॅफ होगा । यूजर्स इसे वॉइस कमांड से कंट्रोल करेंगे । उपयोगकर्ता को अपनी आवाज में ही एक पूर्वनिर्धारित वाइस पिन सेट करना होगा । जब भी कोई आपातकालीन यानी कि एमरजेंसी के सिचुएशन आएगी और उपयोगकर्ता अगर उसकी वर्ड को बोल देगा तो ये ऐक्टर अगर हो जाएगा जिन्हें यूजर के लाइव लोकेशन को कंट्रोल रूम में पुलिस अधिकारियों को भेज देगी और फोन में स्थापित कैमरा खुदबखुद चालू हो कर यूजर का लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग करने लगेगा । शानदार मंत्री जी ने कहा और कार्य बजाना शुरू कर दिया । उनके पीए ने कमरे की लाइट चालू कर दी । लोहित ने टेबल पर रखी बोतल से पानी दिया । पुलिस आयुक्त ने कहा, ये एक अच्छा प्रोजेक्ट है और मुझे इसमें कोई कमी नजर नहीं आ रही है । हर किसी ने उनके साथ सहमती जताई । मंत्री जी ने घोषणा की, आज इस बैठक को हमें स्थगित करते हैं । लोहित मुझे तकनीकी विवरण भेज देना । मैं इस परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों से बात करूंगा । एक बार जब हमें उनसे मंजूरी मिल जाएगी तो हम कैमरे और अन्य हार्डवेयर की खरीद के लिए निविदा आमंत्रित करेंगे । मैं ध्यान दूंगा कि कैसे हम जल्द से जल्द इस परियोजना को लागू कर सके । यहाँ के गुंडों ने अब गलती कर दी है । मंत्री जी की कार में ही लोहित घर वापस पहुंच गया और घर पहुंचते ही उसने नाश्ता किया और ऑफिस के लिए निकल गया । कुछ ज्यादा ही उत्साहित होकर उसने सुबह से कुछ नहीं खाया था । ऑफिस पहुंचने ही लोग इतने अमन को गले लगा लिया । वो काफी कुछ दिखाई दे रहा था । अमन और ऑफिस में काम करने वाले बाकी के लोग कई दिनों के बाद लोहित को हस्ता हुआ देख कर खुश हो गई । अमन ने पूछा क्या हुआ बता तो सही । आज सुबह मंत्री जी ने खुद मुझे अपने कार्यालय बुलाया । हरे वह फिर क्या हुआ । मैंने उन्हें अपने प्रोजेक्ट जीने के ऊपर एक प्रेजेंटेशन दी जो ने काफी पसंद आई । अमन की आंखों से खुशी के आंसू छलक पडे । मंत्री जी ने कहा है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री जी से इस बारे में चर्चा करके बताएंगे । अमन मेरी पीठ थपथपाई और कहा कि आखिर का हमें मिल ही गया जो हम कहीं दिल से जाते थे । तीन दिनों तक बडी उत्सुकता से लोग इतने मंत्री जी के फोन का इंतजार किया । जब भी उसका फोन बचता तो उसे लगता कि मंत्री जी का ही होगा । पर मंत्री जी का फोन आया ही नहीं । उतावला होकर लोहित ने खुद ही मंत्री जी के ऑफिस के नंबर पर फोन क्या हाल हो? मैं लोहित बंसल बोल रहा हूँ । मंत्री जी से मेरी बात करवाइए कुछ बल्कि इंतजार के बाद मंत्री जी फोन पर आए । लोग इतने उनसे सीधा सवाल किया, सर, हम अपना प्रोजेक्ट कब शुरू कर रहे हैं? हाँ, नौजवान में तो मैं बताने के लिए एक उपयुक्त समय की प्रतीक्षा कर रहा था । मैं तुम्हारे प्रस्ताव को लेकर मुख्यमंत्री जी से मिला था । लेकिन अफसोस है कि हमारी बैठक सफल नहीं रही । लोहित कर दिल्ली सुनकर बैठता गया । क्यों सर अगर मुख्यमंत्री जी को समझ नहीं आया हमारा विचार तो मैं उन्हें भी अपना प्रेजेंटेशन दे देता हूँ । मुझे यकीन है कि उन्हें भी हमारा प्रोजेक्ट पसंद आएगा । मंत्री ने अपना गला साफ करते हुए कहा कि नहीं बात वो नहीं है । लोहित उन्हें भी तुम्हारा प्रोजेक्ट पसंद आया । लेकिन दरअसल कुछ स्थितियां ऐसी है जो उनके नियंत्रन से भी बाहर है । जिस बात का मुझे डर था वही हुआ । लोहित की आवाज लडखडाने लगी क्या बात है सर बताइए भी । हमने कुल परियोजना की लागत का अनुमान लगाया और पाया कि ये काफी महंगा प्रोजेक्ट है । स्मार्ट कैमरे और ड्रोन की खरीदी और कंट्रोल रूम स्थापित करने के लिए हमें दे सारे पैसे लगेंगे और सरकार के पास अभी कोई बजट नहीं है क्या? लोहित ने चौंकते हुए कहा घर सरकार के पास पैसों की कमी कैसे हो सकती है?

जिनी पुलिस भाग 27

भाग सत्ताईस देखो हम राज्य सरकार से हैं, केंद्र से नहीं । हमारे पास सीमित बजट होता है जिससे हमें अपने राज्य की तरक्की के लिए खर्च करना होता है और ये हमारे पांच वर्षों के कार्यकाल का अंतिम वर्ष है । हमारे पास आपने पहले से चल रही योजनाओं को पूरा करने का यह अंतिम मौका है । मुख्यमंत्री का दायित्व है कि अगला चुनाव घोषित होने से पहले पिछले सभी कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करें अन्यथा हमें मीडिया और जनता के भारी दबाव का सामना करना पडता है और हम अगला चुनाव हार भी सकते हैं । लोहित ने उत्सुकता से इस प्रक्रिया को समझने के लिए पूछा तो आम तौर पर राज्य सरकार के पास पैसों की कमी होने पर क्या होता है? मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार से फंड मांगता है, फिर क्या समस्या है? हम प्रधानमंत्री महोदय से मिलकर फंस मांग सकते हैं । अगर उन्हें हमारा प्रोजेक्ट पसंद आया तो वह जरूर सहायता करेंगे । चीजें इतनी आसान नहीं है जितनी दिखाई देती है । रोहित ये राजनीति है । नेता जो कुछ भी करते हैं उसमें राजनीति शामिल होती है । मान लो की उन्हें हमारा प्रस्ताव पसंद भी आया और वो ये मान भी गए कि इससे जनता की भलाई होगी । फिर भी वो हमें फण्ड नहीं देंगे क्योंकि वह विपक्षी दल के नेता है । वो नहीं चाहते कि हमारे शासन के दौरान कुछ भी अच्छा हो जिसका हमें राजनीतिक फायदा मिले । वी जानबूझकर हमारी सरकार द्वारा शुरू की गई किसी भी अच्छी परियोजना में देरी करवाते हैं ताकि अगले चुनाव में उनकी सरकार बनी । जनता के लिए क्या अच्छा, क्या बुरा, इससे नेताओं को कोई फर्क नहीं पडता । केंद्र सरकार का ध्यान उन राज्यों पर अधिक होता है जहाँ राज्य सरकार भी उन्हीं की पार्टी की है । राजनीति बहुत गंदी है । बेटा जब मैं छोटा था, मैं केवल अच्छे काम करने के लिए ही राजनीति में शामिल हुआ था । गरीबों की मदद करना और भ्रष्टाचार को खत्म करना ही मेरा मकसद था । कई ठेकेदार मेरे पास आकर मुझे रिश्वत देना चाहते थे । जब मैंने कडाई से इसका विरोध किया तो उन्होंने मुझ पर राजनीतिक दबाव डाला । यहाँ तक कि मेरी खुद की पार्टी हाईकमान ने मुझे रिश्वत लेने के लिए मजबूर किया । उन्होंने मुझसे कहा कि थोडा में अपने लिए रखो और बाकी का पार्टी फंड में जमा करवा दूँ । कुछ सालों में मुझे इसकी आदत हो गई । यदि तुम लगातार की चढ में काम करोगे तो कभी ना कभी तो तुम्हारी भी दामन में दाग लगेगा ही । लोहित सोचने लगा, यही प्राथमिक कारण है कि मैं भारत से इतनी नफरत करता हूँ । कोई यहाँ आगे बढना ही नहीं चाहता हूँ । हर कोई सिर्फ एक दूसरे की टांग खींचना जाता है । लोग इतनी याद किया कि कैसे उसने अपनी बेटी को सिर्फ शॉपिंग के लिए दो लाख रुपए दे दिए थे और कहा सर क्या मैं आप से कुछ निवेदन कर सकता हूँ? हाँ बोलो अगर आप के पास इतना सारा पैसा है तो क्यों ना आप अपने पैसों से ही इस परियोजना को शुरू करते हैं । इससे आपको राजनीतिक लाभ भी होगा । दिल्ली के लोग आपको बहुत पसंद करेंगे और हो सकता है कि अब दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री बने मंत्री जी को भी लोहित का विचार पसंद आया । कुछ सेकंड सोचने के बाद उन्होंने एक आई कहा, नहीं लोहित, मैं ऐसा नहीं कर सकता । लेकिन क्यों सर मेरे पास जो पैसे हैं वह सब काला धन है । मैं इसे इस प्रोजेक्ट के लिए खुले आम खर्च नहीं कर सकता । ये मीडिया और आयकर विभाग के नजर में आ जाएगा हूँ । लोग इतने मंत्री जी को जोर देते हुए कहा, सर क्या फायदा ऐसे कालेधन को इकट्ठा करके जिसे आप अपनी मर्जी से खर्च भी नहीं कर सकते । अमन ने लोहित को टोका एक मंत्री के साथ वो कुछ ज्यादा ही बदतमीजी से बात कर रहा था । कॉल पर सन्नाटा पसर गया । अभी अब इस प्रोजेक्ट को लॉन्च नहीं कर सकते । हाँ, अगर अगले कार्यकाल में भी हमारी पार्टी चुनाव जीतती है तो हम निश्चित रूप से से शुरू करेंगे । लेकिन इसमें कुछ साल लगेंगे । मंत्री ने निष्कर्ष निकाला, कुछ सालों में हम इस परियोजना में रूचि ही खो देंगे । हम अपराध को रोकने का हमारा उद्देश्य ही खो देंगे । भारत में अधिकांश परियोजनाओं के असफल होने का यही कारण है क्योंकि इसमें आवश्यकता से कहीं ज्यादा समय लगता है । मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता । मंत्री जी ने कहा और फोन काट दिया । लोहित के फोन रखते ही अमन ने पूछा क्या हुआ सरकार के पास हमारी परियोजना के लिए फंड नहीं है । तरह तरह के घोटाले करके वे अपनी विदेशी खातों में पैसे जमा करते हैं तो हम से सैकडों तरह के कर इकट्ठा करते हैं और अक्षय व्यापारियों को हजारों करोड रुपये का ऋण देते हैं जो अनंत है । पैसे वापस किए बिना भारत छोडकर भाग जाते हैं लेकिन उनके पास एक नेक काम के लिए पैसे नहीं है । अमर ने आश्चर्य से कहा लेकिन वह तो खुद सरकार है । उनके पास नोट छापने की मशीन है । वो तो जितना चाहे नोट छापकर खर्च कर सकते हैं ही । लोहित ने एक घृणित आह भरी शायद ऐसा नहीं होता होगा । मैंने सुना था की नोट छापने से पहले वर्ल्ड बैंक से अनुमति लेनी होती है और मैंने तो ये भी सुना है कि किसी देश के पास जितना सोना होता है वो उसके बराबर ही नोट छाप सकते हैं । ऐसा कुछ भी नहीं है । कोई भी देश जितना चाहे उतने नोट छाप सकता है । कोई अंतरराष्ट्रीय दिशा निर्देश या सोने से इसका कोई ताल्लुक नहीं है । लेकिन मैं खुद ऐसा नहीं करते क्योंकि जिस देश की अर्थव्यवस्था में जितना ज्यादा पैसा होगा, महंगाई उतनी ही ज्यादा बढेगी । अमन ने कहा मैं कुछ समझा नहीं । अगर बाजार में ज्यादा पैसे होंगे तो ये लोगों की चीजों को खरीदने की ताकत को बढाएगा और यदि लोग ज्यादा चीजें खरीदेंगे तो उससे चीजों की मांग में वृद्धि होगी जिससे हर चीज की कीमत खुदबखुद बढ जाएगी । यही कारण है कि एक अर्थव्यवस्था में देश का कुल धन देश में मौजूद कुल वस्तुओं और सेवाओं के बराबर होता है । अमन ने कहा तो अब इस विपदा की घडी में हमें क्या करना चाहिए? क्या हाथ पे हाथ रख के आगामी चुनाव का इंतजार करना चाहिए या केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने का इंतजार करना चाहिए? चुनाव में तो भी कई दिन बचे हैं और हम ये जानते हुए नहीं की कौन सी पार्टी जीतेगी और नई सरकार को हमारा ये प्रोजेक्ट पसंद आएगा भी या नहीं । लोहित को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें । इसी बीच लोहित की कंपनी के कर्मचारी ने भीतर प्रवेश क्या? एक फाइल में वह रोहित के हस्ताक्षर लेना चाहता था । रोहित ने गुस्से से उस फाइल को फेंक दिया और चलाने लगा । नहीं करना है मुझे साइन । मैं इस कंपनी को चलाना ही नहीं चाहता । मैं सब कुछ खत्म करके बस मारना चाहता हूँ । अमन के इशारे के बाद वो कर्मचारी ऑफिस से बाहर चला गया । लोहित ने अपना मोबाइल फोन कॉन्फ्रेंस क्योंकि कांच की दीवार पर दे मारा । कांच के टुकडे फर्श पर बिखर गए । ऑफिस में हर किसी ने पहली बार लोहित का ये अवतार देखा । अमन ने लोहित को शांत करने की पूरी कोशिश की मगर सब बेकार था । लोहित जोर से चिल्लाने लगा । अब इस परियोजना को लागू करना ही मेरे जीवन का एकमात्र लक्ष्य है । अगर मुझे अपनी जान भी देनी पडे तो मैं दे दूंगा इसे शुरू करने के लिए । अपनी अगले के घोडे दौडाकर अमन ने कहा अगर तुम सच में ये करना ही चाहते हो तो बीच तो आपने ये कंपनी मार्क जुकरबर्ग को और उन पैसों से शुरू कर लो अपना ये प्रोजेक्ट जीनी । ये सुनते ही लोहित एकदम शांत हो गया । लोहित के कानों में तृषा के शब्द गूंजने लगे । जब तुम्हारा हौसला बुलंद और नियत साफ होगी तो नियति तो में भलाई करने का मौका जरूर देगी । तो महाराज दिल तो में खुद ब खुद बता देगा । जब सही समय आएगा, बशर थी तो अपने दिल की सुनो, अपने दिल की सुनना भी तो बडी हिम्मत का काम है । रोहित को आशा की एक किरण नजर आई । एक ही समय में उसे अपार खुशी और दर्द महसूस हुआ । लोहित से पूछा क्या यह सच में ऐसा संभव है? क्या मैं खुद इस प्रोजेक्ट को फंड कर सकता हूँ? क्यों नहीं कम से कम मंत्री इस इस बारे में पूछ कर तो देखो हिट शानदार आई दिया है । मैं अपने लोगों के लिए अपने सपनों को न्यौछावर करने को तैयार हूँ । रोहित ने तुरंत ही अपने ऑफिस के डेस्क फोन से मंत्री जी के लैंडलाइन नंबर पर कॉल किया क्योंकि उसकी गुस्से के कारण उसका मोबाइल फोन टूट गया था । पीएम ने फिर से फोन उठाया । लोहित ने कहा, सर मैं लोहित बोल रहा हूँ, प्लीज मंत्री जी से मेरी बात करवा दीजिए । कुछ मिनटों तक लाइन होल्ड करने के बाद पीएम ने कहा, मंत्रीजी व्यस्त है, अभी आप से बात नहीं कर सकती है सर ये बहुत जरूरी है । फिर एक बार आप उनसे बात करवा दीजिए । लोहित ने निवेदन किया मंत्री जी ने फोन पर आकर कहा लोगे तो जैसा कि मैंने कम से पहले ही कहा है मैं तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकता । मुझे बार बार फोन करने से कुछ नहीं बदलेगा । ऐसा कहकर मंत्री जी फोन रखने ही वाले थे । तभी रोहित ने कहा, सर अगर पूरे पैसे में खर्च करूं तो क्या हम यह प्रोजेक्ट कर सकते हैं? लोहित जी, हम इस परियोजना के लिए करोडों रुपए चाहिए और वो भी पूरा वाइट । हम इसमें काला धन खर्च नहीं कर सकते । बेवकूफ इंसान मेरे पास तेरी तरह हराम का काम आया । वह काला धन नहीं है । एक एक पैसा मैंने कडी मेहनत से कमाया है । तुझे क्या लगता है कि कानूनी ढंग से इतना पैसा कमाना संभव ही नहीं है । लोहित ने मन में सोचा बेशक सर ये सब सफेद धन ही है । लोहित ने कहा एक बार फिर से सोच लो नौजवान ये कोई छोटी रकम नहीं है । मैंने सोच लिया है सर दिल्ली में क्राइम खत्म करने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ । बडी अच्छी बात है । बेटा जैसे ही पैसों का इंतजाम हो जाए हम काम शुरू कर सकते हैं । सर मैं एक हफ्ते में ही फंड की व्यवस्था करता हूँ । मुझसे और इंतजार नहीं हो रहा है । लोहित ने कहा और फोन रखते ही अमन को गले से लगा लिया । वो दोनों वहाँ कॉन्फ्रेंस रूम में ही नाचने लगे । उन्हें उनकी जिंदगी की सबसे बडी प्रॉब्लम का समाधान मिल गया था । खुशी से वो वोटिंग करने लगे जैसे वो अपने स्कूल के दिनों में क्या करते थे । लोहित ने कहा अमल मुझे फिर से अमरीका जाना है । ठीक है । मैं तुम्हारे टिकट की व्यवस्था करता हूँ लेकिन अमेरिकी वीजा का क्या करेंगे? वीजा बनने में तो कई दिन लग जाएंगे । मंत्री जी से कहता हूँ कि वे विदेशी दूतावास की मदद से एक दिन में ही वीजा बनवा दी । आखिरकर मैं सरकारी काम के लिए ही तो जा रहा हूँ ।

जिनी पुलिस भाग 28

भाग अट्ठाईस दो दिनों बाद लोहित ने फिर से कैलिफोरनिया की उडान भरी । इस बार ना ही उसने दूसरे यात्रियों से बात की और ना ही एयर होस्टेस पर ध्यान दिया । फेसबुक से पैसे मिलने के बाद कैसे अपने प्रोजेक्ट को आगे ले जाया जाए । बस इसी ख्याल में वो बिजी था । लोहित फेसबुक हेडक्वार्टर पहुंचा । इस बार उसके पास अपॉइंटमेंट लेटर नहीं था । सिक्योरिटी गार्ड्स को दिखाने के लिए उसने मार्क की सेक्रेटरी अनिका से बात कर उसे अंदर आने देने का आग्रह किया । शुक्र है कि उसने लोहित को पहचान लिया और उसका विजिटर पास बनवा दिया । अनिका ने कहा मिस्टर बंसल अचानक कैसे आना हुआ? मैं अपनी कंपनी बेचना चाहता हूँ । मैंने कहा था मुझे की जब भी मैं अपना विचार बदलूं, मैं दोबारा आ सकता हूँ । ठीक है इतने लंबे सफर से आई है । अब थक गए होंगे । क्यों आप यहाँ आराम करें और मैं मार्ग से इस बारे में बात कर के आती हूँ । ठीक है । रोहित ने कहा और ऑटोमैटिक कॉफी मशीन से अपने लिए एक कप कॉफी निकालकर पीते हुए वहीं बैठकर मार्क का इंतजार करने लगा । अगर माप में मेरी कंपनी को खरीदने का अपना इरादा बदल दिया तो अगर वो मेरे बर्ताव से नाराज होकर मुझसे मिले ही ना तो ढेर सारे नेगेटिव थॉट्स ने लोहित के दिमाग को घेर रखा था । लगभग बीस मिनट के बाद अनेक अपने चेहरे पर निराशा लिए वापस आई । हम सौ सौ रहे । मार्क ने कहा है कि वह बहुत बिजी है और आप से नहीं मिल सकते हैं । ये सुनते ही लोहित के चेहरे का रंग उड गया । प्लीज उन्हें बताइए कि ये बहुत जरूरी है । मेरे लिए उनसे मिलने में सात समंदर पार आया हूँ । लोहित ने विनती की । उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसका सबसे बुरा खयाल उसकी आंखों के सामने सच हो रहा था । काश लोहित अपनी पिछली मीटिंग में ये प्रस्ताव लेने से मना नहीं करता । डोंट वरी मार्क ने तुम्हें अपने प्रतिनिधि से मिलवाने को कहा है । उनके पास भी इस दिल को पूरा करने के सारे अधिकार है । लोहित का चेहरा फिर से खेलो था लेकिन उन्हें कन्विंस करना मुश्किल है । मार्क से भी जाता चलिए मैं आपको उन से मिल पाती हूँ । उनके कैबिन के बाहर नेम प्लेट पर मिस्टर आर्यन दे लिखा हुआ था । अच्छा तो ये एक भारतीय है । लोहित ने एक मानसिक टिप्पणी की । हाई आर्यन अन्न, रोहित बंसल, लोहित ने उनके कार्यालय में प्रवेश करती ही कहा, आपने खराब मिजाज के बावजूद लोहित आर्यन की शानदार लुक्स को नोटिस करने से खुद को रोकने सका । बैठे होने के बावजूद ये अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि वह कितना लम्बा है । आर्यन ने लेपटॉप से अपनी नजर एक बाल के लिए उठाई । लोहित को देखा और कहा बैठी है सर मैं यहाँ अपनी स्टार्ट अप कंपनी के बारे में बात करने आया हूँ जिसे फेसबुक टेक ओवर करना चाहती है । लोहित ने उसे समझाना शुरू किया, हमें सब जानता हूँ । मेरी मार्ग से इस बारे में बात हो गई है । उसने काले रंग का सूट पहना हुआ था जिसमें वह बहुत ही कमाल का लग रहा था । मुझे पता चला कि तुम पहले भी यहाँ आए थे लेकिन तब तुम अपनी कंपनी को बेचना नहीं चाहते थे । क्या मैं जान सकता हूँ की अचानक क्या हुआ? वो लोहित से बात करते हुए अपने लैपटॉप पर काम कर रहा था । लोहित को बुरा लग रहा था कि आर्यन उसकी और देख भी नहीं रहा । रोहित ने गर्व से कहा, पहले मेरी कंपनी को दुनिया की सबसे बडी कंपनी बनाना ही मेरा सपना था लेकिन अब मैंने इससे भी बडा सपना देख लिया है । आर्यन ने चौंकते हुए पूछा ऐसा सपना भला दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनने से भी बडा सपना हर क्या हो सकता है? मैं अपने शहर को अपराधमुक्त बनाना चाहता हूँ और इसके लिए मैंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करते हुए जिनी नामक प्रोजेक्ट डेवलप किया है । लोहित ने आज उनके साथ विस्तार से अपने प्रोजेक्ट पर चर्चा की । आर्यन ने लोहित के कदम को सराहा और उसे कुछ टेक्निकल टिप्स भी दिए । फिर आर्यन ने पूछा आपने करोडों की कंपनी को भेजकर देश की सेवा करना । इसके पीछे जरूर कोई बडा कारण होगा? जी आप सही कह रहे हैं । इससे पहले मैं भी आपकी तरह भारत छोडकर अमेरिका में रहना चाहता था । एक ऐसे देश में जहां टैलेंट की असली कद्र है लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ की सब कुछ बदल गया । मेरे विचार, मेरे सपने, मेरा जीवन सब कुछ क्या हुआ? उसने अपने लेपटॉप पर काम करते हुए ही पूछा । लोहित को थोडी हिचकिचाहट हुई । किसी अंजान व्यक्ति को अपनी मंगेतर के बलात्कार के बारे में बताना । लोहित को थोडा अजीब लगा । रोहित ने कुछ नहीं कहा । आर्यन भी समझ गया कि लोहित इस बारे में बात नहीं करना चाहता हूँ । अगर तुम नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं । कुछ मिनटों के बाद आर्यन ने पूछा रिशा कैसी है? आर्यन की मुझसे तृषा का नाम सुनकर लोहित हक्का बक्का रह गया । उसके रोंगटे खडे हो गए । लोहित सोचने लगा, वो कैसे जानता है त्रिशा को? क्या उसने मेरे फेसबुक पर देखा है? उसे आर एम के लेपटॉप के बगल में रखा प्रिंटर अचानक हरकत में आ गया और उसमें कुछ कागज प्रिंट होने लगी । लगभग पच्चीस पेज प्रिंट होने के बाद वो प्रिंटर बंद हो गया । आर्य ने सभी पे जिसको जमाया और स्टेपलर लगाकर लोहित को दिया और कहा ये अग्रीमेंट की पेपर से इसे एक बार पढकर साइन कर दो । इसका मतलब पूरे टाइम वो लोहित को नजर अंदाज नहीं कर रहा था बल्कि लोहित के लिए ही कागजी कार्रवाई करने में बिजी था । आप तृषा को कैसे जानते हैं? रोहित ने टेबल पर रखे अपने मोबाइल को चेक किया कि कहीं तृषा के नंबर से कोई संदेश तो नहीं आया । मैं हूँ मैं कृष्णा को देखने अपने माता पिता के साथ उसके घर गया था । आर्यन दे हाँ याद आया । तृषा ने बताया था मुझे लेकिन उसने कहा कि तुम गूगल में काम करते हो । हाँ, पिछले महीने ही मैंने फेसबुक ज्वाइन किया है मैं यहाँ नई टेक्नोलॉजी की टेक ओवर का काम संभालता हूँ । इससे पहले कि मैं उससे पूछता उसने कहा तृशा ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया था और तुम्हारी तस्वीर भी दिखाई थी । इसलिए मैंने तो पहचान लिया लेकिन अगर तुम्हारी शादी उसके साथ तय होने वाली थी तो तुम ने इंकार किया । तृषा ने मुझ से किसी को भी ये बताने से मना किया है । हाँ, लेकिन तो मुझे तो बता ही सकती हूँ । ठीक है चलो कैफिटेरिया चलते हैं और लंच करते हुए बात करते हैं उन्होंने वो अग्रीमेंट वही टेबल पर रखकर उस पर पेपर वेट रख दिया और लंच करनी चल दिए । आर्यन में अपनी कहानी सुनानी शुरू की । वो दिन आ गया था जिस का मुझे बेसब्री से इंतजार था । जब मैं अपने परिवार के साथ लडकी देखने गया था । पापा ने कार्य मुझसे कहा कि बेटा तुम आज पहली बार उस लडकी को देखोगे जिसके साथ शायद तो में सारी जिंदगी बितानी है । हर किसी की आंखों में उत्साह था । मेरे मन में जिज्ञासा थी कि न जाने कैसी होगी वो लडकी तृषा के घर पहुंचते ही हम कार से उतरे । तृषा के पिताजी हमारे स्वागत के लिए दरवाजे पर खडे थे । उन्होंने हमें अंदर सोफे पे बढाया । मेरी आंखें तृषा को देखने के लिए बेचैन थी । बाजार में उपलब्ध सभी स्वादिष्ट स्नैक समय परोसे गए थे जैसे समोसा, कचोरी, ढोकला, रसमलाई, गुलाब जामुन आदि । इतना नाश्ता था कि किसी हलवाई की दुकान में भी ना हो । मैं एक समोसा खाना चाहता था । लेकिन जब आपके भावी ससुराल वाले आपको घूर रहे हो तो खाना मुश्किल होता है । बेटा तो क्या करते हो? तृशा के गांव वाले ताऊ जी ने पूछा । वह बात करने के लिए मेरे बगल में बैठ गए । मैं गूगल में काम करता हूँ । कल जी हाँ, गूगल में तो सभी काम करते बेटा । आजकल गूगल के बिना काम चलता ही कहाँ है? जी मेरा मतलब है । मैं गूगल कंपनी में नौकरी करता हूँ । राजीव आप और बढिया । फिर तो मैं सभी चीजों के बारे में सब कुछ पता होगा । फैन जी आर्यन ने कहा कि गूगल के पास खुद की कोई जानकारी नहीं होती है । ये सिर्फ दूसरी वेबसाइट्स से डेटा ढूंढने में हमारी मदद करता है । पुणे ज्यादा कुछ समझ में नहीं आया । परिवार के दूसरे बुजुर्गों को भी मुझसे बात करने का मौका देने कुछ दूर जाकर बैठ गई । उनके जाने के ठीक बाद तृषा के मौसाजी मुझसे बात करने आए बेटा काम क्या करते हो मेरा बायोडेटा पढ लीजिए एक ही बात कितनी बार बताऊँ । मैंने मन में सोचा जी मैं गूगल में काम करता हूँ । मैंने थोडा जोर से कहा था कि वहाँ दो से चार और भी लोग सुन ले । अब जल्दी से लडकी को बुला दीजिए । मैं उसे देखने के लिए माना जा रहा हूँ और अगर आपने मुझे फिर परेशान किया तो मैं सबकी गूगल सर्च हिस्ट्री को हैक करके सार्वजनिक कर दूंगा । महीने फिर मन में कहा तृषा मेरे मन की बात सुन दी और वहाँ गई ।

जिनी पुलिस भाग 29

भाग उनतीस वो एक सफेद सूट पहने मेरे सामने आई । उसकी दो चचेरी बहनें उसके साथ थी । भाई वाली नीली सूट में और दाहिनी वाली लाल सूट में एक साथ तीनों फ्रांस का झंडा लग रहे थे । मैंने पहली बार वो चेहरा देखा जिसे मैं अपनी आखिरी सांस लेने से पहले तक देखना चाहता था । वो अपनी तस्वीर से बहुत ज्यादा सुन्दर लग रही थी । मैंने देखते ही उसे अपनी पत्नी मान लिया था । उसके पापा मुझसे ऐसे सवाल पूछ रहे थे जैसे एफबीआई हिरासत में लिए गए किसी आतंकवादी से पूछताछ कर रही हो । उनके प्रश्नों का उत्तर देते हुए मैं अपनी मां और दादी के बीच बैठी तृषा को निहार रहा था । क्या होगा अगर माँ को पसंद नहीं आई या फिर उसके पापा को मैं पसंद नहीं आया या अगर उसने मुझे ना पसंद कर दिया । मैं काम भी ज्यादा डरा हुआ था । चलो लडका और लडकी को कुछ देर अकेले में बात करने देते हैं । उसी ताऊ जी ने कहा जो कुछ देर पहले मुझे परेशान कर रहे थे, पंद्रह मिनट मिलते हैं लडका लडकी को बात करने के लिए । बस इसी दौरान उन्हें जिंदगी भर का फैसला लेना होता है । हम उसके कमरे की बालकनी में गए । हमारे बैठने के लिए वहाँ पहले से ही प्लास्टिक की कुर्सियां रखी हुई थी । मैंने कहा मेरे बारे में कुछ भी जानना चाहती हो तो पूछूँ । अरेंज मैरिज में यही लडकों की पिक अप लाइंस होती है । त्रिशा ने कहा, आर्यन मुझे माफ कर दो, मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती । उसके सीधे लब्जो में मेरी दुनिया ही पलट दी । देखो तृषा, अगर तुम अभी शादी के लिए तैयार नहीं हो तो मैं तुम्हारे लिए इंतजार कर सकता हूँ या अगर तो अमेरिका में नहीं रहना चाहती तो मैं तुम्हारे लिए भारत में रहने को तैयार हो । मुझे यहाँ दिल्ली में आसानी से एक अच्छी नौकरी मिल सकती है । त्रिशा ने कहा मेरे लिए इतना सोचने के लिए धन्यवाद आर्यन । तुम सच में बहुत अच्छे हो । वो लडकी खुशनसीब होगी जो तुमसे शादी करेगी । मैं शायद वह पहला लडका था जिसे लडकी ने अरेंज बारिश के समय भी ट्रेन जोन कर दिया था । मैंने भारी मन से पूछा तो क्या तुम किसी और से प्यार करती हूँ? उसके हाथ में सर हिलाया । मेरा दिल बैठा गया । मुझे लगा जैसे मेरी शादी से पहले ही मेरा तलाक हो गया हो । फिर तुम्हारे माता पिता ने हमे तो में देखने आने का निमंत्रण क्यों दिया? मुझे गुस्सा आ रहा था । मैं उस पर चलाना चाहता था, पर चिल्लाना सका । ये सब एकदम अचानक ही हो गया । मैं घबरा गई और अपने प्यार के बारे में अपने मम्मी वापस से बात नहीं कर पाई । असल में मैं पिछले हफ्ते ही उस से मिली हूँ क्या? तो मैं उससे मिले । सिर्फ एक हफ्ता हुआ है और इतनी जल्दी उससे शादी करने का फैसला कर लिया । ऐसा नहीं है । मैं उसे जानती तो बचपन से हूँ । बस मिली पिछले हफ्ते । हर तो मैं यहाँ इनवाइट करने से पहले मेरे माता पिता ने मुझसे पूछा भी नहीं । उन्होंने तैयारी शुरू कर दी । तब मुझे पता चला मैं तुम्हारी सिचुएशन समझ सकता हूँ । ठीक है मैं सबसे कह दूंगा की मुझे ही लडकी पसंद नहीं आई । उसके ना कुछ ज्यादा ही जोडी है । त्रिशा हस बडी हमारी शादी नहीं हो सकते लेकिन हम दोस्त तो बन ही सकते हैं ना । मैंने अपना हाथ बढाते हुए कहा । उसने भी मुझ से हाथ मिलाते हुए कहा फ्रेंड्स । रोहित ने आर्यन से कहा उसने मुझे ये सब कभी नहीं बताया, सिर्फ इतना कहा कि तुम ने उसे रिजेक्ट कर दिया । आर्यन ने कहा तो वास्तव में भाग्यशाली हो लोहित तृषा तुम से बहुत प्यार करती है । ये सुनकर रोहित ने सोचा ये बात तो सच है । उप अगले मुझ से इतना प्यार करती है कि मेरे लिए ही मुझसे दूर चली गई । लंच के बाद वे आर्यन के कैबिन में वापस आ गई । लोहित ने उन कागजात को एक नजर देखा और उन पर साइन करने लगा । साइन करते टाइम उसके हाथ काम रहे थे । जिस कंपनी को उसने खुद खडा किया । दिन रात जिसे बढाने के सपने देखें, उसे बेचना अपने बच्चे को किसी दूसरे को गोद देने जैसा था । उसने हिम्मत करके साइन तो कर दिया मगर उसकी आंखों से एक बूंद झलक कर उसका अगस्त में गिर गई । आर्यन ने कहा कि एक सप्ताह में हम तुम्हारे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करवा देंगे । तब से तुम्हारी स्टार्ट अप कंपनी हमारी हुई । हम इसका इस्तेमाल फेसबुक और भी बेहतर बनाने के लिए करेंगे । आर्यन ने लोहित से हाथ मिलाते हुए कहा, तृशा से कहना मैंने उसे याद किया है । लोहित एकदम से खामोश हो गया । उसे देखकर आर्यन ने पूछा क्या हुआ? लोहित ने कहा माफ करना । मैं चाहकर भी तुम्हारा ये मैसेज उस तक नहीं पहुंचा सकता क्योंकि वो अब इस दुनिया में नहीं रही क्या? आर्यन एकदम से चौंक गया । कुछ गुंडों ने तृषा का बलात्कार कर दिया । वो ये सब बर्दाश्त न कर सके और उसने खुदकुशी कर ली । मैं ये सब इसीलिए तो गहरा होता कि फिर कभी ऐसा कोई हादसा हमारे देश में ना हो । वो खामोश खडा रहा । उसके हाथ उनके हैंडशेक के बीच में ही रुक गए । आर्यन ने लोहित के हाथों को कसकर दबाया और कहा कि तुम्हारा मतलब है कि दूसरा मर चुकी है । उसे लोहित की बातों पर यकीन नहीं हुआ । उसे कन्फर्म करने के लिए दोबारा पूछा । लोहित खामोश रहा और बस सर हिला दिया । आर्यन के शरीर में क्रोध के लहरें दौड रही थी । उसने अपने हाथों में मुट्ठी कसी और एक गहरी सांस ली । लोहित कहने लगा, अपने सपनों की दुनिया में खोया था मैं । मेरी जिंदगी ऐसी थी जैसे परियों की कहानी । हमारे माता पिता ने हमारी शादी को मंजूरी दे दी थी । मैं यहाँ अपने आदर्श व्यक्ति मिस्टर जुकरबर्ग से मिलने और उन्हें ये बताने आया था की मैं अपने सपने बेचना नहीं चाहता हूँ । लेकिन नियति को तो कुछ और ही मंजूर था । उस एक हादसे ने मेरी पूरी जिंदगी पलट दी । आर्यन ने कहा, लगता है तुम्हारे देश में कुछ अच्छा कभी हो ही नहीं सकता । जाओ और सबका सिखा उन कमीनों को एक हिंदुस्तानी के मुझसे हिंदुस्तान के लिए तुम्हारा देश सुनने में लोहित को अजीब लगा । शायद आर्यन अब अमेरिका को ही अपना देश मान चुका था । लोग हीट एयरपोर्ट गया और भारत आने वाली पहली फ्लाइट में सवार हो गया । देर रात हो गयी थी । फ्लाइट अटेंडेंट सहित सभी लोग अपनी अपनी सीट पर हो गए थे लेकिन रोहित को नींद नहीं आ रही थी । बस याद आ रही थी त्रिशा की । लोहित ने अपने सिर के ठीक ऊपर स्थापित रीडिंग लाइट चालू की और दृशा को याद करते हुए अपने फोन में शायरी लिखने लगा । इसे लिख कर लो हितने तृषा को ईमेल करने का सोचा । उसे पता था की दशा अब इस दुनिया में नहीं है और वह ईमेल नहीं पढ सकती । मगर फिर भी तो भेजना चाहता था ये सोचकर कि स्वर्ग में बैठे दिशा को ये फिल्म तो हो कि क्या बीत रही है उसकी दिल पर शीर्षक लौटाओ एक सितारा बन के जादुई है बडी मोहब्बत तुम्हारी की पहले तुम्हारा नाम नहीं सुना था और अब हमारे नाम अक्सर साथ लिए जाते हैं कि पहले कभी देखा तक नहीं था तुम है और अब देखे बगैर नींद नहीं आती कि पहले जानता तक नहीं था तुम है और अब जानती हो तो मुझे मुझ से भी ज्यादा अगर जीवन है एक पहेली तुम हो जवाब मेरे हर सवाल का अगर जीवन है एक सफर तो में मंजिल हो मेरे हर रास्ते का है ये कैसी कशमकश कि तुम सब कुछ हो मेरी फिर भी मेरे साथ नहीं अगर तुम ही कारण हो मेरे होने का तो फिर क्यों तो मेरे पास नहीं है क्या बेच रही है मुझ पर अहसास तो तुम्हें भी होता होगा ना जो रोता हूँ मैं यहाँ बल्कि तो तुम्हारी भी भीग जाती होगी ना लौटाओ बाहों में एक दफा घर के मेरे तरफ को महसूस जो दुखी हूँ मैं इतना खुश तो तुम भी नहीं रह पाती होगी ना याद आती है मुझे तुम्हारी मस्ती भरी शरारती घंटो बाद भी खत्म होने वाली हमारी बातें घर जाना था दूर इतना कम्बख्त तो ही क्यों थी मेरी जिंदगी में कैसे बोलो तो भारी काजल में लिपटी आठ है लौटाओ कभी दबे पाउल रात में एक सितारा बंद की रह जाओ मेरे आंगन में मेरा शामियाना बन के रह जाओ मेरे आंगन में मेरा शामियाना बाँध के हूँ तो

जिनी पुलिस भाग 30

भाग तीस पिछले कुछ दिनों में हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं ने भारत के प्रति लोहित की धारणा को बदल दिया । वो नफरत नहीं करता था हिन्दुस्तान से बल्कि उसे अफसोस इस बात का था कि पहले कभी उसने चीजों को बदलने की कोशिश क्यों नहीं की । अब वह सिस्टम को दोष ना देकर ये सोचने लगा कि आखिर वो भी तो सिस्टम का एक हिस्सा है । लोहित अपने देश वापस आ गया । जल्द ही अमेरिका से उसके खाते में पैसे आ गए और पुलिस अधिकारियों की मदद से उसने प्रोजेक्ट जी नहीं पर काम करना शुरू कर दिया । उन्होंने शहर के प्रति काॅस्ट में नई कैमरे लगाए और मौजूदा कैमरों को भी बदलकर स्मार्ट कर दिया । सरकार ने घरों और दुकानों के बाहर कैमरे लगवानी के लिए सब्सिडी भी प्रदान की । परिणाम स्वरूप कुछ महीनों के भीतर ही पूरे शहर को कैमरू से कवर कर लिया गया । छह महीने के अंतराल में लोहित और उसके साथियों ने उन सभी तकनीकी और गैर तकनीकी समस्याओं को दूर किया जो जीने की सफलता के आडे आ रहे थे जिनके सफल प्रक्षेपण के कुछ दिनों बाद यह सुनिश्चित करने के लिए कि सब कुछ ठीक चल रहा है या नहीं । लोहित पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचा । क्या ये शहर सुरक्षित है? जिन्हें लोग इतने कंट्रोल रूम में इंस्टॉलमेंट कंसोल से पूछा जो हजारों कैमरों पर एक साथ नजर रखे हुए था । जिन्होंने अपनी रोबोटिक आवाज में कहा मौजूदा हालात सामान्य लोहित रात बहुत हो गई थी । कुछ अफसर कंट्रोल रूम में ही आराम कर रहे थे । तभी जीने का साइरन, बच्चा और एक मॉनिटर पे कुछ चलने लगा । अधिकारी ने तुरंत सायरन को बंद किया और उस स्थान के पास लैंपपोस्ट पर लगे कैमरे को जूम किया । साथ ही उसे उस एरिया में गश्त कर रही पुलिस को भी चौका न कर दिया था की आवश्यकता होने पर वहाँ पर तुरंत पहुंच सके । कुछ सेकंड के भीतर मौके का लाइव वीडियो प्रसारित होने लगा जिसका लोकेशन बारह खम्भा रोड पर स्थित एक पब के बाहर का दिखाई दे रहा था । देर रात होने की वजह से वो हिला का काफी संसाल था । सडक पर कोई मौजूद नहीं था । सेवाएं उस लडकी के जो अपने प्रेमी के साथ वहाँ से गुजर रही थी । उस लडकी की बाइक खराब हो गई थी । इसीलिए वे दोनों बाइक को हाथ में लिए पैदल चल रहे थे । चार लडके नशे में धुत्त अपनी मॉडीफाइड ओपन जीप में सवार वहाँ से गुजरे । उन्होंने सडक पे चल रही लडकी को देखा और तेजी से ब्रेक लगता है । गाडी रूकी और व्यवस् करके उनके पास वापस गई । उनके चेहरे देखकर जिन को ये अंदाजा लग गया कि वो अपने आप पे में नहीं है । बस इसी बात से जितनी सचेत हो गई और पुलिस कंट्रोल रूम का सायरन बचा दिया । जीप में सवार लडकों ने पूछा क्या हम तुम्हारी कोई मदद कर सकते हैं? नहीं सर शुक्रिया हम तुमसे नहीं बेवकूफ उस लडकी से पूछ रहे हैं । एक ने लडकी की ओर इशारा करते हुए कहा । दूसरे लडके ने कहा मेरी तो ये समझ में नहीं आता है । ऐसे घोंचू लडकों को ऐसी हॉट लडकिया मिल कैसे जाती है । वो सभी जीत से नीचे उतरे और लडकी के पास गए । आओ भी हम तो मैं घर छोड दें । एक गुंडे ने कहा और उस लडकी को छूने की कोशिश की जिन्होंने तुरंत एक जोरदार सायरन बगल के लैंड पोस्ट में बजा दिया । जिसे सुनकर वह लडकी थोडा घबरा गए । कंट्रोल रूम में मौजूद अक्सर ने कहा छोड दो लडकी को पुलिस किसी भी वक्त वहाँ पर पहुंचती होगी । ये सुनकर वो लडके भागने के लिए अपनी जीत में बैठे थे कि उसी समय पुलिस वहाँ पर पहुंच गई और उनकी जीत के सामने अपनी गाडी लगती । पुलिस वाले ने पूछा क्या और क्या बस उनकी वाइफ खराब हो गयी है? बस इसलिए हम की मदद कर रहे थे वो तो हम अच्छी तरह से जानते हैं कि तुम क्या कर रहे थे हवलदार फॅालो पुलिस अधिकारी ने निर्देश दिए तो बिना किसी सबूत के हमें गिरफ्तार नहीं कर सकते । तो जानते नहीं मेरा बाप कौन है? पुलिस कर्मी ने कहा और तुम नहीं जानते की जिनी कौन है । हमारे पास तुम्हारे सारे करतूतों की वीडियो रिकॉर्डिंग है । कंट्रोल रूम में सभी ने जमकर ताली बचाये । जिले के कारण हम अपराध को होने से पहले ही रोकने में सफल रहे । बहुत ही कम समय में जिन्होंने दिल्ली में लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल कर ली । ऐसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भी आकर्षित किया । लोग मदद के लिए अब जिनका नाम पुकारने लगे । मंत्री मेरे भी चालाकी दिखाते हुए अपने राजनीतिक लाभ के लिए जीने का खूब प्रचार प्रसार किया । तो हर राजनीतिक रैली और पत्रकार सम्मेलन में अपने मुंह मियां मिट्ठू बनने का एक भी मौका नहीं छोडा । वो ये कहानी सुनाती थी कि कैसे उन्होंने एक टैक्स स्टार्ट अप कंपनी के मालिक श्री लोहित बंसल को दिल्ली को अपराधमुक्त बनाने के लिए एक सॉफ्टवेयर विकसित करने के लिए उकसाया । भड कैसे उन्होंने इस परियोजना को शुरू करने के लिए करदाताओं के पैसों का उपयोग न करते हुए विदेशी निवेश प्राप्त किया । मंत्री जी की राजनीतिक लालसा नहीं और प्रत्यक्ष रूप से प्रोजेक्ट जीने की भी मदद की । ज्यादा से ज्यादा लोगों को जीने के बारे में पता चला और लोगों के मन में ये विश्वास ज्यादा की वो अब सुरक्षित है । इस परियोजना के शुरू होने से और संगठित अपराध को रोकने का लोहित का सपना पूरा होने लगा था । कुछ दिनों के बाद नूरानी जामा मस्जिद के पास एक और घटना होने से चली । एक लडकी अपने कॉल सेंटर की नौकरी से आधी रात को अपने घर लौट रही थी । ऑफिस की बस ने उसे मुख्य सडक पर छोड दिया था । करीब एक किलोमीटर संकरी सडक में चलकर वो अपने घर जाने लगी । चलती समय से ध्यान दिया कि गाद में उसका पीछा कर रहा था । लडकी को पता था कि शहर के सभी स्ट्रीट लाइट में जितनी पुलिस स्थापित है इसीलिए वह चालाकी से एक स्ट्रीट लाइट के सामने जाकर रुक गयी । वो आदमी रोकी हुई लडकी को देख कर और भी खुश हो गया और उसके पास जाने लगा । जैसे ही वो आदमी उस लडकी के एकदम करीब पहुंचा उस लडकी ने स्ट्रीट लाइट को देखकर चलाया जीनी बचाओ मुझे वह आदमी सोचने लगा कि ये लडकी किसी पुकार रही है क्योंकि वहाँ पर तो कोई मौजूद नहीं था । कुछ सेकंड के अंदर जितने सॉफ्टवेयर ने उन दोनों के चेहरे स्कैन करके उनके नाम लेते हुए कहा उस लडकी से दूर रहो । पुलकित मिश्रा वरना हम तुम्हें गिरफ्तार कर लेंगे तो तुम चिंता मत करो, प्रीति वाले साथ ही होगी । स्ट्रीटलाइट से खुद का नाम सुनकर कोई कित की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई । वो तुरंत लडकी से दूर जाकर हाथ जोडकर बोला दीदी, मैं तो सिर्फ टाइम पूछ रहा था और वहाँ से ऐसे ही भाग गया । उसके जाने के बाद कैमरे में इस लडकी को देख कर पुलिस अफसर ने पूछा क्या तो मैं किसी मदद की जरूरत है? उसने खुशी से कहा नहीं सर, अब वो किसी लडकी को अपने सपने में भी नहीं छोडेगा । थैंक्यू लॉन्च होने के दो साल के अंदर कुल चौदह सौ मामले दर्ज किए गए जिनमें जिनी ने अपराध रोकने में मदद की और घर के भीतर होने वाले अपराध में भी जिन्होंने अपराधी का पता लगाने में मदद की जिनका उद्देश्य अधिक अपराधियों को गिरफ्तार करके जेलों में दोषियों की संख्या बढाना नहीं था बल्कि अपराध को ही खत्म करना था । वे लोगों के मन में एक ऐसा डर पैदा करना चाहते थे कि शहर में कोई अपराध करने की सोची हिला जो अनंत है हुआ ।

जिनी पुलिस भाग 31

भाग दिल्ली में प्रोजेक्ट जीने की शानदार लॉन्चिंग के बाद केंद्र सरकार ने लोहित को जिन्हें प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने को कहा । लोहित को भारत सरकार की प्रोजेक्ट समिति के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया । इस पद में रहते हुए लोहित को अगले पांच सालों की अवधि में प्रोजेक्ट जीने को पूरे देश में लागू करना था और सबसे अच्छी बात ये थी कि इस बार लोहित के सामने फंस की कोई समस्या नहीं थी । सरकार ने लोहित कोई अच्छा वेतन भी दिया । लोग इतने अमन को भी उसी कमेटी में शामिल कर लिया । फेसबुक को अपनी कंपनी बेचने के बाद अमन को भी एक अच्छी नौकरी की तलाश थी । उन्होंने एक समय में एक राज्य पर काम करना शुरू किया जिसमें उन राज्यों को प्राथमिकता दी गई जहाँ अपराध के डर ज्यादा थी । लोग इसे जिन्हें पुलिस कहने लगे, अगर वे चाहते तो पूरे भारत में इसी एक साथ भी लागू कर सकते थे । ऐसों और संसाधनों की कोई कमी नहीं थी लेकिन उन्होंने इसे एक एक करके लागू करना उचित समझा क्योंकि प्रोजेक्ट जीने को लागू करने के प्रति चरण के बाद नई चुनौतियों का सामना करते हैं और हर चुनौती से नए सबका सीख रहे थे और हर सबका के साथ जिन्हे और भी बेहतर होती चली गई । लोहित की जिंदगी फिर पटरी पर लौट रही थी । उसके साथ तृषा तो नहीं थी मगर उसे जीने का एक मकसद मिल चुका था और उसे यकीन था कि त्रिशा जहाँ कहीं भी होगी लोहित को देख कर बहुत खुश होगी । एक सुबह जब लोहित ऑफिस जाने से पहले नाश्ता कर रहा था, घर पर उसके पापा समाचार देख रहे थे । टीवी पर चल रही सुर्खियों ने लोहित का ध्यान आकर्षित किया । वो नाश्ते में एक ग्लास दूध और काम्प्लेक्स खा रहा था । लोहित कॉम्प्लेक्स खाता है क्योंकि उसे ये स्वादिष्ट लगता है । लेकिन वर्ष अठारह सौ चौरानवे में जॉन हार्वे केलॉग ने इस व्यंजन का आविष्कारिक विचित्र मकसद के लिए किया था । उनका मानना था कि मांस और कुछ खाद्य पदार्थ यौन इच्छा बढाते हैं । जब की अनाज और नर्स इस पर अंकुश लगा सकते हैं, उन्होंने इसे एक अस्पताल में रोगियों को खिलाने के लिए पहली बार बनाया था ताकि रोगी ज्यादा उत्तेजित ना हो । टीवी पे जो समाचार आ रहा था वो किसी अपराध या प्रोजेक्ट जीने से जुडा नहीं था मगर फिर भी इसमें लोहित का ध्यान आकर्षित किया । सीबीएसई दसवीं के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं । टॉपर्स के अंक हमेशा की तरह आश्चर्यजनक है । पांच सौ में से चार सौ अट्ठानबे अंक के साथ एक छात्र पूरे हिंदुस्तान में टॉप पर है । लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि हमेशा की तरह वो छात्र दिल्ली से नहीं है । पिछले एक दशक में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था । क्या ये भारत की राजधानी दिल्ली में दिन पर दिन बदतर हो रही शिक्षा व्यवस्था के सवालिया निशान हैं । लोहित पूरे शहर को कोसते हुए कहा कि ये तो होना ही था त्रिशा जो नहीं है यहाँ पर । लेकिन क्या इस शहर में कोई और शिक्षक नहीं जो तृषा की जैसे शानदार पढा सके । ये समाचार देखकर लोहित के दिल को तृषा को याद करने का एक और बहाना मिल गया । बीते दिनों लोहित को त्रिशा की कुछ ज्यादा ही याद आ रही थी । जब भी वो किसी स्कूली छात्र या शिक्षक को देखता उसे याद आती थी । त्रिशा की जब किसी प्रेमी जोडे को हाथों में हाथ लिए घूमता देखता हूँ उसे याद आती थी त्रिशा की जब किसी डीटीसी बस को सडक पर चलते देखता तो याद आती थी त्रिशा की । आखिर बस में ही तो लोहे तृषा से मिला था और सबसे ज्यादा तो तब जब इंडिया गेट के बाद से गुजरता था । वहीं तो लोहित तृषा को आखिरी बार देखा था । दो महीने बाद शिमला से चौदह किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटा सा शहर है मशोबरा । ये आकर्षक बर्फीले पहाड और अपने शांत जीवन के लिए जानी जाती है । यहाँ मौजूद सेब के बाग जान, जमानती धाराएं, देवदार और ओक के जंगल और यहाँ की वास्तुकला बहुत ही सुंदर है । ये जगह पूरी तरह से एकांत से घेरा हुआ है । निश्चित रूप से प्रदूषित नई दिल्ली की तुलना में रहने के लिए ये सबसे अच्छी जगह है । अपनी भावनाओं को अपने भीतर समेटे लोग इतने नई दिल्ली से चंडीगढ हवाई अड्डे तक उडान भरी और इस आकर्षक जगह तक पहुंचने के लिए एक निजी टैक्सी से सडक पर किलोमीटर का सफर तय किया । वहाँ का मौसम कितना खुशनुमा था की जो एक बार वहाँ पहुंच जाएगा, उसका कभी लौटने का जीना करें, साफ नीला आसमान और ठंडी ताजी हवा खुशियां बिखेर रही थी । शहर के बाहरी इलाके में छोटा सा लकडी का कॉटेज बना हुआ था । लोहित निक सफेद घोडा किराये पे लिया और उस घोडे पर सवार होकर उस कॉलेज के चारों और चक्कर काटने लगा । उस कॉलेज के बाहर दो कश्मीरी बच्चे खडे थे । एक लडका और एक लडकी । उन्होंने लोहित को देखा और खुशी से चलाते हुए अंदर चले गए । लडकी ने कहा हॉर्स हॉर्स बिग व्हाइट हॉर्स मैडम बाहरी बहुत ही हैंडसम राजकुमार एक सफेद घोडे पर सवार आपके घर के चक्कर लगा रहा है । उस लडके ने भी कहा जी मैडम, वह बहुत ही बडा और सुंदर सफेद घोडा है । ये सुनते ही तृष्णा की धडकने तेज हो गए । उसने गहरी सांस लेना शुरू कर दिया । उसकी आंखों में एक आई खुशी के आंसू भर आए । वो आ गया की कहकर तृषा खुद पर काबू ना रख सके और जोर जोर से रोने लगे । कौन आ गया मैं कोर्स में चार पांच छात्रों ने पूछा जो फर्श पर बैठकर पढाई कर रहे थे । तृषा नंगे पैर ही दौड कर बाहर आ गई और अपने घर की दहलीज पे किसी मोम के पुतले की भारतीय खडी हो गई । उसी यकीन ही नहीं हो रहा था । जो कुछ भी हो रहा है वो सच है कि लोहित ने सच में उसे ढूंढ लिया है । वो लोहित से दूर जरूर गई थी मगर हर पर वो सिर्फ लोहित को ही याद किया करती थी । लोहित से दूर जाना उसकी मजबूरी थी । मर्जी नहीं । लोहित अभी वहाँ तेजी से चक्कर लगा रहा था और तृषा दहलीज पर खडी नजरे झुकाएं आहे भर रही थी लोहित तृषा के सामने घोडा रोका और कहा तो मैं पहाडों में ले जाने तुम्हारा राजकुमार आ गया है । रोहित ने मजबूती से तृषा का हाथ पकडा और उसे भी घोडे पर अपने सामने बैठा लिया । मैं जानती थी जानती थी मैं वो बस बार बाढ कह रही थी कि वह जानती थी कि लोहित एक दिनों से जरूर ढूंढ निकालेगा । उसकी आंखों से बहने वाले आंसू थे कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे । तृशा ने ये नहीं पूछा कि लोहित क्यों आ गया उसके पास कुछ देर के लिए वो स्वार्थी हो गई थी । वो भी उस प्यार को महसूस करना चाहती थी जिसके लिए हो ना जाने कब से तरस रही थी लोग इतने घोडे की लगाम को खींचा घोडा पूरी गति से दौडते हुए पहाडों की और पडने लगा । तृशा जाती तो थी कि लोहित भूल जाये । उसे किसी और से शादी कर ली और खुश रहे । लेकिन अपने दिल के किसी कोने में वो चाहती थी कि लोहित लौटाए उसकी बाहों में फिर कबीना जुदा होने के लिए अपनी अंतिम सांस लेने से पहले कम से कम एक बार वह रोहित को गले लगाना चाहती थी । वो खुद लोहित से संपर्क नहीं कर सकती थी क्योंकि वो चाहती थी कि लोहित उसे भूल जाये । लेकिन उसे खुशी थी कि लोग इतने ऐसा नहीं किया । दिल की गहराइयों में कई दर्द दस थी उसके मगर चेहरे पर हसीन खुशी झलक रही थी । इतने सालों तक मुझे ढूंढा क्यों नहीं तो मैं क्या पता कैसे मैंने आंसू पीकर दिन गुजारे हैं । एक भी दिन ऐसा नहीं गया होगा जब मैंने तुम्हारे बारे में ना सोचा हो । तृशा ने लोहित के सीने में प्यार से वार करते हुए पूछा, लोहित ने कुछ नहीं कहा । वो अपनी तृषा को प्यार करने में व्यस्त था । लोहित उसे पीछे से कसकर गले लगाए हुए था और उसकी पतली गर्दन को चूमते हुए घोडे की सवारी कर रहा था । गोडा उन्हें शिमला के हसीन वादियों में ले जा रहा था । आसमान से हल्की हल्की बर्फ गिर कर पृथ्वी की सतह को चूम रही थी । ऐसा लग रहा था जैसे पहाडियों और घाटियों को एक सफेद कंबल से ढक लिया गया हूँ । कुछ दूर जाने के बाद लोहित रहे । एक पेड के नीचे घोडा रोका और वो दोनों उतर गए । दोनों ने एक दूसरे को बाहों में भर लिया । लोहित अपनी छाती में तृषा के गर्म आंसुओं को महसूस कर सकता था । लोहित ने अपनी जेब से तृषा का सफेद रूमाल निकाला और उसे दिखाया घरे हीरो माल । तो मैंने तो मैं इंडिया गेट में जेब में रखने को दिया था और वापस लेना भूल गई थी । तो मैंने अब तक संभाल के रखा है । हाँ, एक यही निशानी तो थी मेरे पास । तुम्हारी लोहित ने कहा इतने सालों बाद की तो बिल्कुल वैसी ही देखती हूँ । तुम भी नहीं बदले । उसने अपने दोनों हाथों से लोहित कि सफेद शर्ट का कॉलर पकडा और उसके होटों को छोडने लगे । किस करते करते तृषा ने पूछा क्या तुम ने शादी कर ली और लोहित का जवाब सुने बिना ही वापस से किस करने लगे । अपने दिल में वो जानती थी कि लोहित कभी किसी और से शादी नहीं कर सकता । चाहे स्थिति कितने भी बत्तर क्यों ना हो । लेकिन फिर भी वो लोहित के मुझसे की सुनना चाहती थी । मैं शादी करने वाला था कि मेरी दुल्हन भाग कर इस खूबसूरत जगह पर चली आई । वे फिर इतने दिनों से किस करने लगे । मानो परसों से भूखे किसी बच्चे को चॉकलेट केक मिल गया हो । उन का घोडा उन्हें किस करते हुए देख रहा था । इसीलिए वह शर्मा कर पेड के पीछे चला गया । तो मैंने एक ऐसे ढूंढ लिया मुझे इतनी आसानी से थोडी जाने दूंगा तो मैं अपनी जिंदगी से । लेकिन तो मैं कैसे पता कि मैं यहाँ हूँ । सीबीएसई दसवीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट आया । हर उसका टॉपर दिल्ली का नहीं बल्कि यहाँ से है । तो में लगता है कि ये तुम्हारे जैसी सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के बिना संभव है । मुझे सीबीएसई वेबसाइट्स डॉक्टर का नाम पता चला । फिर उससे मिलकर मैंने पूछा उसकी सफलता का रास्ता । उसने कहा कि सिर्फ और सिर्फ ऍम । बस फिर क्या था उससे तुम्हारा पता पूछा और यहाँ पर चला आया । लोहित समझाया और फिर से तृषा को छूने लगा । कुछ सेकंड के बाहर तृषा ने फिर पूछा लेकिन नतीजे तो दो महीने पहले ही घोषित कर दिए गए थे तो इतने दिनों बाद क्यों आए? लोहित ने मुस्कुराते हुए कहा मैं अपने राजकुमारी के लिए गुड सवारी सीख रहा था । हूँ । वो हसी लोहित दीवानो सा उसे हसते हुए निहारने लगा । उसकी एक मुस्कान देखने के लिए लोहित कोई भी खतरा मोल ले सकता है । कुछ भी कर सकता है । तुम्हारी अमेरिका में रहने के सपने का क्या हुआ था? मैंने उससे भी बडा सपना देख लिया है । तुम्हारी पत्र ने मुझे झकझोर दिया था । मैं सच में मान बैठा था की तुम अब नहीं हो इस दुनिया में तो उन्हें झूठ क्यों कहा था कि तो मरने वाली हूँ । मैंने जो लिखा था वो झूठ नहीं था । लोहित मैंने सच में खुदकुशी करने का फैसला कर लिया था । आपने एक स्टूडेंट हरप्रीत के पापा की मदद से मैंने रातोरात अपना दिल्ली वाला फ्लैट भेज दिया और उन पैसों से या एक छोटा सा घर खरीद लिया । मैं नहीं चाहती थी कि मेरे मम्मी पापा दिल्ली में रहे । वहाँ समाज और रिश्तेदार उन्हें मेरे बारे में पूछ पूछकर और ताने दे देकर ही मार देते । मरने के लिए तो जहर सिर्फ एक बार पीना पडता है । जिंदा रहने के लिए हर रोज देना पडता है । यहाँ आने के बाद मैंने तो अपने खुद खुशी का दिन और जगह भी तय कर लिया था । ऍफ कॉलेज के पास की पहाडी जो सुसाइड प्वाइंट के नाम से मशहूर है वहाँ से कूद कर अपनी जान देने का मैंने पूरा फैसला कर लिया था । लेकिन मेरे आखिरी दिन से ठीक पहले मैंने अपने पडोस में रहने वाले बच्चे को अपने पापा से मार खाते देखा । जो मैंने इसकी वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि उनका बेटा पढाई में ध्यान ही नहीं देता और परीक्षा में फेल हो गया । मुझे इस बच्चे की दूर्दशा पे दया आ गयी । इसीलिए मैंने उसके पिता को ये आश्वासन दिया की मैं उसे पढाऊंगी और वह निश्चित ही अच्छे अंक लाएगा । उस पिता ने हाथ जोडकर मेरा आभार व्यक्त किया और मुझे मेरे जीवन का एक उद्देश्य मिल गया । मैंने मरने से बेहतर यहाँ के छात्रों के लिए जीने का फैसला किया । इन बच्चों को पढाने में मैं ऐसी लीन हो गए कि फिर कभी मरने का खयाल ही नहीं आया । रोहित ने कहा महिला हो छात्र का जो सही समय पर फेल हो गया और तुम्हें बचा लिया । हाउस बच्चे की पिटाई ने मुझे बचा लिया । नहीं असल में पढाने के तुम्हारे जुनूने तुम्हें बचा लिया । वे बर्फ से ढके रास्ते में पैदल चलने लगे । तृषा ने कहा तुम्हारा ईमेल पडने के बाद कम से दूर रहना और भी मुश्किल था तो फिर क्यों तुम ने खुद को दूर रखा । मुझ से कुछ देर खामोश रहने के बाद उसने कहा मैं इस तरह तो मैं छोड आई । रूठे नहीं मुझसे अगर रूठ जाता तो मनाने के लिए । तुम जो नहीं थी मेरे पास बस इसलिए नहीं था, बस बहुत हो गया । मुझे फिर कभी छोड कर मत जाना । इसकी गारंटी मैं नहीं दे सकती । वो हसी और आहिस्ते से नीचे झुककर अपनी मुट्ठी में बर्फ लेनी, लोहित, त्रिशा की शरारत को समझने की कोशिश कर रहा था । तभी वह रोहित की तरफ थोडी और उसके चेहरे पर निशाना साधते हुए स्नो बॉल फेक दिया । लोहित का मूड बर्फ से ढक गया और वह खिलखिलाकर हंसने लगे । तृशा को हस्ता देख लो हित में सोचा में अपने स्तर पर बर्फ का पहाड गिराने को भी तैयार हूँ । अगर इससे तो खुशी मिलती हो तो लोहित ने भी कुछ बर्फ उठाई और प्रशाद पे निशाना लगाया । तृषा झुक गए और बर्फ जमीन पर गिर गई । तृषा बर्फ में भागने लगे और लोहित भी उसके पीछे भागा । हर उसकी कमर पकडकर उसे हवा में उठा लिया । मुझे सच बताओ मिस्टर हैंडसम कुछ में ऐसी क्या खास बात है जो मेरे इंतजार में तुमने अब तक शादी नहीं की? लोहित तृषा कोई शायरी सुनने लगा जो उसने तृषा के लिए ही लिखी थी सदियों निहार सकता हूँ तुझे पलके झपकाएं बिना सुन सकता हूँ बेतूकी बातों को देरी एक पल मोबाइल विदा कह सकता हूँ तो से बेबाक आता है जो कुछ भी मेरे जहन में कोई छल, कोई दिखावा कोई आडंबर किए बिना एक बच्चे सा हो जाता है मन जब होती है तो सामने ठीक सकता हूँ बे परवाह इसकी उसमें कहे बिना कोई छल कोई दिखावा, कोई आडंबर किए बिना कभी जो थक जाए तो तो खाना मैं बनाऊंगा जो बुरा हो मिजाज तेरा तो दिल में पहनाऊंगा हर सुबह हाथों से आपने भरूंगा में मांग तेरी कोई छल कोई दिखा रहा है कोई आडंबर किए बिना बंद करता हो जो आंखें देखता हूँ सिर्फ तुझे खोलता हूँ जो आंखें देखना चाहता हूँ मैं तुझे सच्चे दिल से तुझसे आशिकी की है सनम कोई छल, कोई दिखावा कोई आडंबर किए बिना क्यों ढूंढू में कोई और तेरे जैसी नहीं मिलेगी कभी ये जानते हुए कि तुझसे मिलने से पहले सोने तक नहीं थी शायरी कोई कित उससे मिलने से पहले सोने तक नहीं थी शायरी कोई तू जुदा क्या हुई मेरे हर अल्फाज गजल हो गए इतना कहकर लोह इतने तृषा का हाथ पकडा और घुटनों के बल बैठ गया । तृषा को बेहद खुश होना चाहिए था की लोगे तो उसे सपोर्ट करने वाला है । लेकिन वह खुश नहीं हुई बल्कि उसके चेहरे का रंग उड गया । वो शादी के लिए अब तक तैयार नहीं थी । उसका रियल अब तक बलात्कार के आघात से उभरा नहीं था । शादी का बंधन उसके लिए कुछ ज्यादा ही जिम्मेदारी थी । रोहित ने उसके चेहरे पर तनाव महसूस किया और कहा मिस तृषा दत्ता मैं ये पहले भी पूछ चुका हूँ, तुमसे आज एक बार फिर पूछता हूँ । मगर इस बार ये बात जरा सी अलग है । इस बार मैं तुमसे शादी करने को नहीं कह रहा । फॅालो हित की बातें सुनकर तृषा आश्चर्य से देखने लगे । उसे हम कभी शादी नहीं करेंगे मगर साथ रहेंगे प्यार में पागल टीनेजर्स की तरह लोहित की बात सुनकर दिशा को सुकून मिला । तृशा ने खुशी से लगभग चलाते हुए कहा हाँ हम लेकिन रिलेशनशिप में रहेंगे । हाँ लाइक फॅस । त्रिशा की आंखें बडी हो गयी । वह खिलखिला के हसी और लोहित को मारने उसके पीछे दौडने लगी । लोहित हसते हुए भागने लगा । किसी ने सच ही कहा है जिसके साथ आप एक बच्चा बन सके उसी से आप सच्चा प्यार करते हैं हूँ ।

जिनी पुलिस भाग 32

भाग बत्तीस जल्दी करो लोहित वरना हमारी फ्लाइट, मिस होजाएगी रिकवरी इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचती ही उत्सुकता से कहा चिंता मत करो । उसके ठाठ तो में लिये बिना आज ये फ्लाइट नहीं उडेगी । उन्होंने प्रवेश द्वार पर ही एक ट्रॉली में अपना सामान रखा । सुरक्षा गार्ड ने उनके टिकट और फोटो आईडीप्रूफ को मिलने के बाद उन्हें अंदर जाने की परमिशन दी । तृशा ने फिर कहा चेक इन काउंटर पर भी भीड होगी । जल्दी करो वो पहली बार विदेश जाने को लेकर के कुछ ज्यादा ही उत्साहित थी । जी ने पहले ही हमारा ऑनलाइन चेकिंग कर दिया है । बेबी है गार्ड प्रभारी वर्चुअल गर्लफ्रेंड तुमसे ज्यादा समझदार है । त्रिशा ने लोहित को छेडते हुए कहा, लोग इतने हरे रंग की शर्ट और भूरे रंग की पतलून पहन रखी थी । परेशानी घुटनों तक लंबा हरे रंग का फ्लोरल प्रिंट वन पीस पहना हुआ था । हम ने अपना सामान बोलने के लिए रखा और सौभाग्य से ये एयरलाइन दिशा निर्देशों के अनुसार अधिक वजन का नहीं था । उन्होंने अपना चेकिंग लगे जमा कर दिया और अपने कैबिन लगेज के साथ इमिग्रेशन के लिए भारत से बाहर जाने वाले भारतीय नागरिकों की कतार में लग गए । इमिग्रेशन अफसर ने तृषा से पूछा तो तुम पहली बार अमेरिका जा रही हूँ । जी हाँ, तुम्हारी यात्रा का उद्देश्य क्या है? ये पूछते हुए उसने इशारे से तृषा को कैमरे में देखने को कहा । तृशा चुप रही । उद्देश्य बताने में उसे शर्म आ रही थी । हनीमून ट्रिप है सर । लोहित ने पीछे से कहा । तृषा ने लोहित को गुस्से से देखा । इमिग्रेशन अफसर ने कहा, हनीमून लोग हनीमून के लिए स्विट्जरलैंड या पेरिस जाते हैं, हमारे का नहीं । तृशा लोहित की ओर देखते हुए कहा हाँ, लेकिन जब किसी बोरिंग है कि का हनीमून होता है तो वह अमेरिका ही जाता है । अब सर ने फिर पूछा, लेकिन यहाँ तो तुम्हारी वैवाहिक स्थिति सिंगल है? हाँ, हम ने शादी नहीं की है, सिर्फ साथ रहते हैं । क्या आपको इससे कोई ऐतराज है? पहला इमीग्रेशन अवसर से ऐसे कौन बात करता है? नहीं, कोई प्रॉब्लम नहीं जाए और यात्रा का आनंद लीजिए । उसने कहा और उनके पासपोर्ट पर मुहर लगा दी । सुरक्षा अनुभाग पर पहुंचे, जहां उनकी सावधानीपूर्वक जांच हुई । उन्होंने अपने मोबाइल फोन कोई ट्रेन में रखा और पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग अलग लाइनों में कतारबद्ध हो गए । सुरक्षाकर्मियों ने उनके बोर्डिंग पास पर मोहर लगती और लोहित और प्रशांत टर्मिनल थ्री की और बढे । देश का सबसे बडा एयरपोर्ट होने के नाते टर्मिनल तक पहुंचने के लिए उन्हें बहुत ज्यादा पैदल चलना पडा । लग रहा था मानो पैदल ही अमरीका पहुंच जाएंगे । त्रिशूल टर्मिनल के रास्ते में ड्यूटी फ्री दुकानों से शॉपिंग करनी चाहिए लेकिन टाइम की कमी के कारण भी रुके नहीं और आखिरकार वो फ्लाइट के दरवाजे तक पहुंचे गए । अभी काफी कतार फिर सीधे एरोप्लेन के भीतर एयरलाइन स्टाफ ने उनके बोर्डिंग पास का आधा हिस्सा फाडकर अपने पास रख लिया और बाकी का उन्हें दे दिया जैसा कि सिनेमाघरों में होता है । कृष्णा ने उत्साह से कहा मुझे खिडकी वाली सीट पर बैठने दो । मुझे बादल देखने हैं । लोहित उसके बगल में बैठ गया । फ्लाइट में उडान भरी और कुछ पर या एयर होस्टेस की वर्दी पहनकर यात्रियों की सेवा करने आ गई । रास्ते के पास बैठे होने के कारण लोहित आसानी से उन्हें निहार रहा था, जिसे देख तृषा को जलन हुई । अगर तुम भी बादल देखना चाहूँ तो हम सीट बदल सकते हैं । लोह इतने तृषा को छेडते हुए कहा नहीं, मुझे बादल देखने में कोई दिलचस्पी नहीं । महत्व साक्षात प्रिया देख रहा हूँ । बदमाश चलो तो मैं इधर बैठो । उन्होंने सीट बदल ली । कुछ घंटों के बाद जब वह बादलों के बीच में थे तो तृषा अपने अतीत को याद करके दुखी हो गई । लोग इतने उसका हाथ पकडा और कहा अब बंद भी करो अपने अतीत को याद करना । अपने दिल का यह दल ना दुखाओ । उस रात अपनी जिंदगी का सिर्फ एक हिस्सा खोया है तो पूरी जिंदगी नहीं । हाँ वो हिस्सा जो सबसे अधिक मायने रखता है । तृशा की आंखों में आंसू भरे थे । मुझे अफसोस है कि मैं तुम्हारे बलात्कारियों को पकडना सका । काश चीनी जैसा कुछ पहले से मौजूद होता तो तुम्हारे साथ जो हुआ वो ना हुआ होता है । मुझे पता है अगर एक बार मुझे पता चल जाए कि कौन है तुम्हारे अपराधी अपने हाथों से गला घोटकर मार डालूंगा । नहीं मेरा मतलब है मुझे पता है कौन है वह लोहित चौंक गया क्या तो शुरू से ही जानती थी तो उस लेटर में उसका नाम क्यों नहीं लिखा तुमने नहीं । मैंने कुछ दिन पहले ही उसे टीवी पे देखा । कौन है वह कमीना लोहित के दिल की धडकन तेज हो गई । गृह मंत्री का बेटा और उसके दोस्तों ने ही उस रात को मेरे साथ बलात्कार किया था । कुछ पल के लिए लोहित का शरीर सुनना हो गया । उसने अपने हाथों से कुर्सी के आर्मरेस्ट को स्ट्रेस बॉल की तरह दबाया । तृषा ने कहा, मैंने से टेलीविजन पर तब पहचाना जब मीडिया उसे उसकी बहन के बलात्कार के बारे में सवाल पूछ रही थी तो तुमने किसी को बताया कि उन्हें इस बारे में मैंने जानबूझ कर किसी से नहीं कहा । लोहित ने गुस्से से पूछा, तुमने पुलिस में शिकायत क्यों नहीं की? वो उस कमीने को मारने के लिए तत्पर हो रहा था क्योंकि उस रात उसने मुझे चेतावनी दी थी और शायद उसने सच ही कहा था । उसने कहा था, वो लोग पुलिस से नहीं डरते बल्कि पुलिस उनसे डरती है । यदि मैंने शिकायत दर्ज की तो वह अदालत में मुझे ही चरित्रहीन साबित कर देंगे । वो ये साबित कर देंगे कि मेरा बलात्कार नहीं हुआ । बल्कि मैंने ही अपनी मर्जी से ये सब पैसों के लिए क्या है? मैं डर गई थी लोहित इसीलिए चुप रहना ही मैंने बेहतर समझा । लोह इतने तृषा का हाथ थामते हुए कहा इसलिए डर का तो ऐसे लोग फायदा उठाते हैं । रोहित ने गुस्से में थरथराते हुए कहा मैं छोडूंगा नहीं । उस कमीने को उसे बर्बाद करना ही अब मेरी जिंदगी का लक्ष्य है । तृशा नीललोहित के हाथों को छोडते हुए कहा, क्यों न तो मुझसे भी अपना मोहब्बत करने को अपनी जिन्दगी का लक्ष्य बना लो । छोडो बिगडैल रईसजादे को मैंने उसे माफ कर दिया है । वह मिर्जा गालिब ने कहा है ना कुछ इस तरह मैंने जिंदगी को आसान कर लिया । किसी से माफी मांग ली, किसी को माफ कर दिया । आगे जो कुछ भी हुआ उसके कारण अब शहर की बाकी सभी लडकियाँ सुरक्षित है । हमें कुछ भी करने की जरूरत नहीं । कर्मा उसे खुद खुद सजा देगा । लोहित ने मन ही मन सोचा मैं ही तो करना हो । मैं ही विधाता हूँ । पापियों का वध तो करना ही होगा । तुम जानते हो जब तो मेरे साथ नहीं थे । मैं हमेशा अखबारों में तुम्हारे बारे में पडती थी । मुझे हमेशा से पता था कि एक दिन तुम कुछ बहुत बडा करोगे और सभी गर्व करेंगे तुम पर मैंने ऐसा कुछ नहीं कि आदर्शा जिस पर गर्व होता है । लोह इतने उदासी से कहा ये तो क्या कह रहे हो तुमने अपने शहर के लिए, अपने देश के लिए बहुत कुछ किया है । तुम्हारे प्रोजेक्ट जेरी ने एक पूरी पीढी का जीवन बदल दिया है । काश सभी अच्छे काम करने का रास्ता जितना दिखता है उतना आसान होता तो मैं सच्चाई का पता नहीं है । त्रिशा कैसी सच्चाई लोहित अगर तुम्हें इस मुकाम को पाने के लिए मेहनत करनी पडी तो क्या तो मैं खुश होना चाहिए की आखिरी तुम्हारी मेहनत रंग लाई । लोहित की आंखों में पश्चताप था । वो तृषा से नजरें चुरा रहा था । कृष्णा ने कहा, ये सब जो कुछ भी मुमकिन हुआ है उस मंत्री की बेटी के बलात्कार के बिना संभव नहीं था । उस घटना के बाद ही शीर्ष अधिकारियों ने इस मुद्दे को कुछ गंभीरता से लिया । सही कहा तुमने लोग किसी भी प्रॉब्लम को तब तक गंभीरता से नहीं लेते जब तक वो प्रॉब्लम उनकी खुद की न हो । पैसे सोचने वाली बात तो ये है कि वह शख्स कौन होगा जिसने इतनी हिम्मत दिखाते हुए मंत्री की बेटी का बलात्कार किया तो निशाने अपनी बहन से खोलते हुए कहा लोहित खामोश था, जैसे अंदर ही अंदर कोई चिंताओं से खाए जा रही हूँ । काफी सोचने के बाद उसने कहा मैं जानता हूँ कि वह किसने किया, क्या सच में तुम जानते हो से हाँ लोहित खिडकी से बाहर देखने लगा । दूर दूर तक सिर्फ घने बादल थे तो बताओ किसने किया उस लडकी का बलात्कार लोहित ने अपनी गर्दन त्रिशा की और घुमाई और कहा मैंने किया क्या तुमने एक लडकी का बलात्कार किया? रोहित ने अपनी सफाई में कहा कि मंत्री जी मेरे प्रोजेक्ट को सुनने को भी तैयार नहीं थी । पुलिस वाले तुम्हारा एफआईआर लिखने को तैयार नहीं थे । हट गया था मैं सबसे लडते लडते । मैंने भी आत्महत्या कर के तुम्हारे पास आने का फैसला कर लिया था । फिर मैंने सोचा कि क्यों ना मरने से पहले उस लडकी और उसके बाप को यह एहसास करवाओं की असल में बलात्कार होता क्या है? तृशा लोहित के गाल पर एक जोर का थप्पड मारना चाहती थी । लेकिन विमान में बैठे दूसरे यात्रियों के सामने उसने ऐसा नहीं किया । मगर वो लोहित पर चिल्लाने से खुद को रोकना सके । तृशा की आवाज सुनकर एक एयर होस्टेस आई और उसने पूछा क्या मैं आपकी कुछ मदद कर सकती हूँ? हाँ, मेरा बॉयफ्रेंड एक बलात्कारी है, उसे जेल भेज दो । प्लीज परेशानी सोचा बस एक गिलास पानी प्लीज । लोहित ने कहा था कि वो वहाँ से चली जाये तो किसी का बलात्कार कैसे कर सकते हो? लोहित उसने अपने हाथों से अपना चेहरा ढका और रोने लगी । मुझे विश्वास है कि मैंने जो कुछ भी किया एकदम सही किया । तुम्हें क्या लगता है कि मुझे किस बात का ज्यादा पछतावा होता कुछ भी न करने का या मैंने जो किया उसका अगर एक लडकी का बलात्कार लाखों लडकियों का बलात्कार होने से रोक सकता है तो इसमें बुराई क्या है? एयर होस्टेस पानी का ग्लास लेकर वापस आ गई, लेकिन तुम ने ये किया कैसे? उसके आस पास तो कडी सुरक्षा होगी वो मेरी जैसी साधारण लडकी थोडी है, जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट में घूमी । मैं तो डिटेल में बताता हूँ । अब त्रिशा की दिलचस्पी ये जानने में ज्यादा थी कि लोहित ने कैसे क्या बजाय इसके क्यों किया । तभी एयर होस्टेस डिनर पैकेट बांटने हमारे पास आई और पूछा सर वाॅच वेज? लोहित ने जवाब दिया और आप क्या लेगी? मैं मुझे नहीं चाहिए । तृशा की आंखों में पानी भरा था । एक लडकी जिसे तुरंत ही ये पता चला होगी उसके बॉयफ्रेंड ने किसी का बलात्कार किया है, उसी पालक खाना क्या बनाएगा? रोहित ने सामने की सीट पर लगे पैन को खोला और अपना खाने का पैकेट वहाँ रख दिया । बलात्कारी लंबे समय तक भूखे नहीं रह सकते । तृषा ने कहा बताओ मुझे क्या हुआ था? उस रात सबको जानना है । मुझे लोहित ने अगल बगल की सीट पर बैठे यात्रियों को देखा कि कहीं कोई उनकी बातें सुन तो नहीं रहा । कुछ सो रहे थे और बाकी आपने आपने मस्त थी । उस काली रात का एक एक पल लोहित के जहन में चलने लगा । लोहित ने अपनी कहानी सुनानी शुरू की ।

जिनी पुलिस भाग 33

भाग तैंतीस मंत्री जी की बेटी का अपहरण करना आसान नहीं था । लोहित ने कुछ महीनों तक उसका पीछा किया ये जानने के लिए कि वह कहाँ जाती है, क्या करती है, किसके साथ जाती है । उसे अकेला पाना मुश्किल था क्योंकि वो हमेशा अपने दोस्तों से घिरी रहती थी । फिर रोज मौका पाकर लोहित ने उसे अगवा कर लिया । मे खुशी के कुछ घंटों बाद होश में आते ही कृति ने पूछा मैं कहाँ हूँ? उसके हाथ पर कुर्सी से कस कर बंधे हुए थे और उसके आंखों पर पट्टी बंधी थी । लोह इतने गंभीर स्वर में कहा शांत हो जाओ राजकुमारी मेरे तुम्हारा अपहरण किया है क्या? बकवास है तो तुम जानते भी मेरा बाप कौन है? कृति ने बडे ही कडे तेवर के साथ कहा जैसे कि लोहित उसका नौकर हो, उसे बचपन से ही लोगों के साथ अगर से बात करने की आदत थी तो मैं लगता है मैं तुम्हारी बात को नहीं जानता । अरे मैंने इसीलिए तो अगवा किया है तो मैं क्योंकि तुम दिल्ली के गृहमंत्री की बेटी हूँ । लोहित कृति के करीब गया और उसके गाल पर इतने जोर से थप्पड मारा कि वो स्कोर सी समित गिर गई जिस पर वह बनी हुई थी । लोहित नहीं । कुर्सी के साथ उसे उठाकर वापस बैठा दिया । कृति गुस्से में आगबबूला होते हुए बोली, मेरे पापा तो जिंदा नहीं छोडेंगे । मिस्टर जिंदगी भर जेल में सड होगे तो लोहित ठहाके मारकर हंसने लगा । आज रात तुम्हारा बलात्कार करने के बाद मैं आत्महत्या कर लूंगा । क्या अभी तुम्हारा बाप मेरा कुछ बिगाड सकता है? इस बार वो सच में डर गई । उसकी आवाज गर्म हो गई है । ऐसा मत करूँ । अगर तुम्हें पैसा चाहिए तो कहीं मेरे पापा तो में जितना चाहे उतना पैसा दे देंगे । लेकिन मुझे छोड दो । लोहित फिर हसते हुए बोला, मोहतरमा कफन में जेब नहीं होते । जो आदमी कुछ ही देर में मरने वाला हूँ, वह भला पैसों का क्या करेगा? यदि तो मैं फिरौती के पैसे नहीं चाहिए तो फिर तो तुम ने मुझे अगवा किया है क्यों? क्योंकि मैं अपनी बात सिद्ध करना चाहता हूँ । कौन सी बात यही की ये शहर कितना और सुरक्षित है । अगर कोई गृहमंत्री की बेटी को अगवा कर सकता है तो सोच यहाँ क्या कुछ नहीं हो सकता । लोहित अपने पास रखी बोतल से पानी पीने लगा । कृति ने उसे पीते हुए सुना और तरस कर कहा मुझे भी पानी चाहिए । लोहित ने दोहराया, तुम्हें पानी चाहिए, उससे हमें सर हिलाया । कृति के पास जाकर लोहित ने अपने हाथ से उसके जबडे को कसकर पकडा । उस से पानी का घूंट लेने के लिए मून खोला । लेकिन लोहित ने बोतल का सारा पानी उसके चेहरे पर गिरा दिया । इससे उसके कपडे भी गए और लगभग पारदर्शी हो गए । लोहित ने गुस्से में चलाते हुए कहा, क्या तो मेहमान हो मेरी जो मैं तुम्हें पानी पिला हूँ, वह आपने लगे कुछ डर से और कुछ ठंड से लोहित ठक्कर अपनी कुर्सी पर बैठ गया । किसी को अगवा करने में थकान बडी होती है । कुछ पल आराम करने के बाद लोहित ने कहा कोई भी इस शहर में किसी की परवाह नहीं करता । कल रात जब तुम अपने दोस्तों के साथ डब्बे नाच रही थी तो मैंने तुम्हारे ड्रिंक्स में नशे की गोलियां मिलाई जिसके कारण तो चक्कर आने लगा । मैंने तुम्हारे ड्राइवर की ड्रिंक्स में भी वही गोलियाँ मिलाई और उसकी वर्दी पहनकर तुम्हारी गाडी में ड्राइवर की सीट पर बैठ गया । तुम कार में आकर बैठी और ड्राइवर का चेहरा देखे बिना ही घर चलने को कहा और मेरी दवा के कारण तुम बेहोश हो गई । फिर मैं तुम्हारी ही बीएमडब्ल्यू में तो में अगवा करके यहाँ ले आया देखा तुमने शहर में एक लडकी का अपहरण करना कितना आसान काम है । कोई भी ये जानने में दिलचस्पी नहीं रखता कि यहाँ पर हो क्या रहा है । ये गैराज पिछले कई सालों से बंद था लेकिन कोई अडोसी, पडोसी या पूछने नहीं आया कि कल रात से यहाँ कौन आया है कि शहर कितना असंवेदनशील है और दो डेवलॅप नामक ड्रग्स जो मैंने तुम्हारी ड्रिंक्स में मिलाया वो भी आसानी से बाजार में मिलता है । हर हैरानी तो इस बात की है मुझे कि इस ड्रग्स के बारे में सिर्फ गूगल में ये सर्च करके पता चल गया कि किसी लडकी का बलात्कार कैसे करें । इस ड्राॅ कोई रंग सुगंधियां स्वाद नहीं होता इसलिए से किसी भी ड्रिंक में मिलाया जा सकता है और पीने वाले को इसकी भनक तक नहीं लगती । इस ड्रग से नशा होता है और ज्यादा सेवन करने पर बेहोशी ताकि आसानी से बलात्कार किया जा सके । तुम्हारे आपको तो शायद अभी तक ये भी पता नहीं चला होगा कि तुम्हारा अपहरण हुआ है । यही तो तकलीफ शहर के न जाने हर कोई अपराध को लेकर कि इतना अनजान क्यों बने पडता है । लोग अपराध होते थे एक अपने मोबाइल फोन में शूट करते हैं, वायरल करते हैं लेकिन कोई से रोकने की कोशिश नहीं करता हूँ । और भी लोग इसका विरोध करने के लिए मोमबत्ती जलाकर धरना देते हैं । पुलिस अक्सर वारदात होने के बाद आती है, छानबीन करती है और गुनेहगार को पकडने की कोशिश करती है और अगर पुलिस गुनेहगार को किसी तरह फक्कड भी लेती है तो वह से बडी कामयाबी मानती है । अगर मैं नहीं मानता की हत्या हो जाने के बाद हत्यारे को पकडना कोई कामयाबी है । अगर पुलिस हत्यारे को पकड लेती है तो इससे क्या जिसकी मृत्यु हुई है वह दोबारा जीवित हो सकता है । हत्यारे को पकडना नहीं बल्कि हत्या को होने से रोकना एक उपलब्धि है । अगर लडकी का बलात्कार हो जाए और बाद में पुलिस बलात्कारी को गोली मार भी दे तो इससे उस लडकी को भला क्या मिलेगा । उसके साथ जो अनिष्ट हुआ वह बदल तो नहीं सकता ना । बहादुरी गुनेहगार को पकडने में नहीं बल्कि गुना होने से रोकने में है । कृति कोई जवाब नहीं दे रही थी बस खामोशी से लोहित की बातों की गहराई को टटोल रही थी । मानव मूवी लोहित की बातों से सहमत हो वह समझ चुकी थी कि उसके पास लोहित से बचने का कोई रास्ता नहीं है । कौन हो तो उसने एक आई पूछा क्या मैं तो जानती हो या हम पहले कभी मिले हैं? मैं ये तो नहीं जानता की तो मुझे जानती हो या नहीं । लेकिन हाँ हम पहले मिल चुके हैं तुम्हारे बाप के ऑफिस में । कृति ने निवेदन करते हुए कहा मैं तो में देखना चाहती हूँ पट्टी उतारों मेरी लोहित को । उस पर अब उतना गुस्सा नहीं आ रहा था । शायद उसे थप्पड जडकर उसकी नाराज की कुछ कम हो गई थी । उसकी बात मानकर लोहित ने उसकी आंखों में लिपटी पट्टी उतार दी । कुछ देर उसने अपनी आंखे फडफड आई और फिर आहिस्ता से आंखें खोलकर चारों और देखने का प्रयास किया । मगर उसके सर के ऊपर लटकती छोटी से बल्ब की धीमी रोशनी में उससे ज्यादा दूर तक दिखाई नहीं दिया । कुछ पल उसने पहचानने की कोशिश करते हुए लोहित को एक टुक देखा और फिर चौंकते हुए बोली तो हमें क्या हुआ? मुझे देखकर तुम्हारी चेहरे का रंग छूट गया क्या? तो मुझे इस लायक भी नहीं समझती कि मैं तुम्हारा अपहरण कर सकूँ । क्या तुम्हें लगता है कि इस देश में आम आदमी सिर्फ टैक्स भरने और अत्याचार सहने के लिए ही पैदा होते हैं । लेकिन तुमको एक जाने माने तरक्की हो तो फिर तो बचाने के एक बलात्कारी कैसे बन गए । लोहित को बलात्कारी शब्द शंकर अजीत लगा आखिर उसने अब तक बलात्कार किया नहीं था । मैं ये सब कर रहा हूँ क्योंकि असल में मैं ये जानता ही नहीं की मुझे करना क्या चाहिए । मेरी मंगेतर ने आत्महत्या कर ली । मैंने अपने जीवन का प्यार हमेशा के लिए खो दिया । जब उसे न्याय दिलाने पुलिस के पास गया तो उन्होंने मेरी शिकायत दर्ज करने से इंकार कर दिया । मैंने हताश होते हुए एक नायाब तरीका खोज निकाला जिससे फिर कभी किसी लडकी का बलात्कार ना हो । और आपने आईडिया को सुनने के लिए मैं होममिनिस्टर के पास गया । लेकिन वहाँ तुम ने और तुम्हारे बाप ने मिलकर मेरा मजाक उडाया तो मेरे पास देने की कोई वजह नहीं बची थी । मैं आत्महत्या करने जा रहा था लेकिन फिर मैंने सोचा कि बेहतर होगा कि मैं मरने से पहले तो मैं और तुम्हारे बाप को सबक सिखाओ । मंत्री जी तुमसे बहुत प्यार करते हैं । शायद अब उन्हें अहसास होगी जब किसी अपने पर बीतती है तो कैसा लगता है । मैं तुम्हारे बाप से बदला लेना चाहता हूँ और तुम्हारा बलात्कार करके तुम्हे मारने से बेहतर कोई उपाय मेरे पास नहीं है । कृति ने कहा मुझे अफसोस है कि तुम्हारे साथ ये सब हुआ । मैं मानती हूँ की हमें तुम्हारा मजाक नहीं उडाना चाहिए था । तो मैं नहीं लगता कि अपनी गलती का एहसास करने में तो मैं बहुत देर हो गई और हम मैं कोई बेरोजगार इंजीनियर नहीं हो । जैसा कि तुमने कहा था मेरी कंपनी की वैल्यूशन एक सौ सत्तर करोड रुपये हैं । इतने सालों तक भ्रष्टाचार करके भी तुम्हारे बाप ने इतने पैसे नहीं काम आए होंगे । लोहित का दिलोदिमाग फिरसे गुस्से से भर गया । उसने पानी की खाली स्टील बोतल फेंककर कृति को मारा । आउच कृति जोर से चलाई, बहुत और उसके घुटने में लगी और फर्श पर गिर गई । कृति फिर से रोने लगी और रोते हुए बोली, मुझे बहुत दुख है कि मैं पहले इस अपराध की गंभीरता को समझ नहीं पाई । टाइम सौरी लोहित ने उससे पूछा क्या तो में अंदाजा भी है कि बलात्कार का शिकार हो ना कैसा होता है? कृति ने कुछ नहीं कहा बस सर झुकाए बैठी रही

जिनी पुलिस भाग 34

भारत बत्तीस रोहित ने फिर कहा जिंदगी नरक से भी बदतर लगने लगती है । हर काम वक्त तो में ऐसी नजरों से देखता है जैसे तुम ही बलात्कारी हो । हर बार जब तो मायने में खुद को देख होगी तो में अपने ही शरीर से नफरत होगी क्योंकि उन दरिंदों ने इसे हाथ लगाया था । जब भी तुम अपने घर से बाहर निकलोगी तो तुम्हारे मोहल्ले में बैठे मर्द हर बार अपनी आंखों से तुम्हारा बलात्कार करेंगे । याद तो मैं रोज क्या कहा था कि बलात्कार तो होते रहते हैं और हम इसके बारे में सोचने में अपना टाइम वेस्ट नहीं करना चाहिए । लोहित के सर पर फिर से गुस्सा सवार हो गया । उस लडकी को फेंक के मारने के लिए लोहित फिर से कुछ ढूंढने लगा मगर उसे कुछ ना मिला । लडकी ने रोते हुए निवेदन किया अपने प्यार के खाते छोड दो मुझे क्या ये शब्द तुम्हारे मुझे अच्छा नहीं लगता । जानती भी और प्यार का मतलब क्या? तुम्हारे सीने में दिल भी हैं? ठीक है चलो माना कि मेरे सीने में दिल नहीं और मैं किसी के प्यार के काबिल नहीं हूँ । लेकिन तुम्हारे जैसा प्यार है जिसने तुम एक लडकी का बलात्कार करने पे मजबूर कर दिया । कृति को अब लोहित से डर नहीं लग रहा था । एक विराम के बाद लोहित ने कहा, मैं ये सब कर रहा हूँ क्योंकि तुम्हारे बाप ने ही मेरी मंगेतर को मारा है । मेरे पापा ने उसे मारा, वो कैसे । वो इस राज्य के गृहमंत्री है । नागरिकों की सुरक्षा उनकी जवाबदारी है और क्योंकि वो अपने कर्तव्य का पालन करने में और सवार्थ है इसीलिए मेरे मंगेतर को खुद खुशी करनी पडी । ऐसे में तुम किसी दोषी मानोगी । कृति ने चुप्पी साधे रखी और वैसे भी अपने अपहरणकर्ता से बहस करना कोई अच्छी बात थोडी है । कृति ने कटाक्ष करते हुए पूछा मुझे मारने की भी कोई योजना बनाई है या तो वैसे भी गूगल पर सर्च करोगे । मिस्टर ते की लोहित चुप खडा रहा । भला आपने किडनेपर से ऐसा कौन पूछता है क्या तो में लगता है की तुम्हारी मंगेतर स्वर्ग से तो मैं ये सब करता देख बहुत खुश हो रही होगी । उसकी बात सुनकर लोहित सोच में पड गया तो तुम्हारा बलात्कार करके तुम्हें मारु नहीं तो और क्या करूँ । मैं मरने से पहले यही करना मुझे सबसे आसान लग रहा है । उसने कहा अगर तुम भरोसा करो मुझ पर तो मेरे पास एक तरकीब है मैं जानती हूँ की तुम क्या चाहती हूँ और तुम वो कैसे पा सकते हो । लोहित ने पूछा क्या चाहता हूँ मैं तब जाते देगी । किसी तरह वो जीने प्रोजेक्ट लॉन्च हो जाए और शहर के लाखों लडकियों का बलात्कार होने से रोका जा सके । अगर तो मैं अभी भी यही चाहते हो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ । वो कैसे? मैं यहाँ से बाहर जाऊंगी और सभी से कहेंगे कि किसी अज्ञात गुंडे ने मेरा बलात्कार किया है । पापा ये बात सुनकर गुस्से से तिलमिला उठेंगे । फिर में किसी तरह उन्हें मनाल होंगे कि वह तुम्हारे उस प्रोजेक्ट पर ध्यान दे और इसे अमल में लाए । मैं उन्हें ये भी यकीन दिला होगी कि अगर उस रोज हमने तुम्हारी बात सुनी होती तो आज मेरा बलात्कार ना हुआ होता । लोहित ने पूछा अगर तुम्हारी कोई चाल हुई तो । अगर तुम ने पुलिस को मेरे बारे में बताकर मुझे पकडवा दिया तो राजू की बात है । जो आदमी मौत से नहीं डरता वो पुलिस से डर रहा है । तुम्हारे पास प्रोजेक्ट जिनी को लागू करने का यह आखिरी मौका है और मुझे नहीं लगता की तो मैं ऐसे हाथ से जाने देना चाहिए । प्रोजेक्ट जेनी के उल्लेख मात्र ने लोहित का दिल से बिना दिया लोहित ने उसकी रस्सी खोल दी और आराम से अपनी कुर्सी पर बैठ गया और प्रति से ऐसे बात करने लगा जैसे वो उसकी कोई पुरानी दोस्त हो । मौत का डाॅकृति के चेहरे से भी नदारत हो चुका था । ठीक है, मैं भरोसा करता हूँ पर अब सब कुछ तुम्हारे हाथों में हैं । यहाँ से बाहर जाकर अगर तुमने मेरी मदद की और मैं जीत गया तो लाखों लडकियां बलात्कार का शिकार होने से बच जाएगी । और अगर तुम ने मेरी मदद नहीं की तो मैं ऐसा हारूंगा की तुम जीत कर भी पचता होगी । फ्लाइट में लोह इतने तृषा से कहा मैंने उस रात उसका बलात्कार नहीं किया था । मैं तो उसका बलात्कार करना ही नहीं जाता था । मैं सिर्फ चाहता था कि उसके पिता इस अपराध की गंभीरता को महसूस करें । मैंने पहले कृति को गलत समझौता असल में वह बहुत ही अच्छी लडकी है । उसने अपने कपडे खुद ही पार्टी ताकि उसका बलात्कार उसके पिता को असली लगे । वैसे भी गृहमंत्री की बेटी के बलात्कार की पुष्टि के लिए कोई मेडिकल टेस्ट की आवश्यकता थोडी ना होती है । ये प्रपंच तो सिर्फ आम जनता के लिए है । कृषाली बडे प्यार से लोहित की और देखा और उसे किस कर लिया । हर कहा ॅ तो मैं किसी लडकी का बलात्कार नहीं किया । लोहित ने अपने सर के ऊपर लगे बटन को दबाकर फिर से एयर होस्टेस को बुलाया और कहा मैं उनके लिए एक फिश करी प्लीज । उन दोनों ने एक साथ अपने भोजन का आनंद लिया । उन की फ्लाइट अगले दिन यूएस एयरपोर्ट पर वो अपने के आईफोन बैगेज के साथ गैर अमेरिकी नागरिक की लाइन में लग गए । इमिग्रेशन प्लेयर करवाने के बाद वह बैंक में ग्रहों की तरह घूम रहे अपने सामान को ढूंढने लगे । जो भी एयरपोर्ट से बाहर निकले तो उन्होंने अपने नाम का एक तकता देखा जिसमें लिखा था स्वागत है लोहित और तृषा मिस्टर ते की और मिस टीचर । पास जाने भी देखा कि आर्यन ये तकता पकडे खडा था और साथ में थी उसकी पत्नी तृषा अपने पुराने तो उसको देख कर खुश हो गई । हरे बार्यन तुम यहाँ कैसे हम तुम्हें यहाँ लेने आए हैं । लोहित ने हमें बताया कि तुम दोनों अमेरिका रहे हो तो हमने सोचा क्यों ना तुम्हें सरप्राइज दिया जाए? तृषा ने पूछा लेकिन तुम दोनों एक दूसरे को कैसे जानते हो? लोग इतने कहा कि आर्यन फेसबुक में काम करता है । हम फेसबुक मुख्यालय में मिले थे । उसने मुझे प्रोजेक्ट जीने के लिए धन जुटाने में काफी मदद की । मैंने कहा मैंने सिर्फ अपना काम किया था । त्रिशा ने कहा, अरे वाह, ये दुनिया कितनी छोटी है ना? आर्यन ने अपनी पत्नी को तृषा के सामने पेश किया । मिलो मेरी पत्नी कृति से कृति ने कहा तो आप तृषा है, मैं कब से अब से मिलना चाहती थी । बहुत सुना है आपके बारे में । इन दोनों से दोनों लडकियाँ गले मिली । परेशानी लोहित के कान में फस फसाया । क्या ये वही मंत्री की बेटी कृति है जिसे तुम ने अगवा किया था? हाँ, ये वही है । आर्यन ने कहा तुम दोनों को हमारे साथ ही रहना होगा । मैंने अपने ऑफिस से एक सप्ताह की छुट्टी दे दी है । हम सब साथ में घूमेंगे हमारी का । लेकिन हमने होटल पहले बुक कर लिया है । अपनी सारी बुकिंग कैंसिल कर दूँ में हमारे साथ ही रहना होगा । आर्यन ने जोर देकर कहा । कृति ने भी कहा जब से मैं अमेरिका आई हूँ, मैं भी कहीं नहीं घूमी है । अब मान भी जाओ, सब साथ घूमेंगे । लोग इतनी त्रिशा की और देखा परेशानी हामी भरती लोहित और तृषा ने अपना सामान कार की डिक्की में रखा और पीछे की सीट पर बैठकर अरे ड्राइवर की सीट पर बैठा और कृति उसके बाजू में बैठ के निशाने धीरे से लोहित के कान में पूछा आर्यन ने मंत्री की बेटी से शादी कैसे कर ली? क्या वो पहले से दूसरे को जानती थी? वो ये जानने के लिए बहुत ही उत्सुक थी । कृति के बलात्कार की खबर जब फैली तो उसके बॉयफ्रेंड भी उसे छोड दिया । कोई भी प्रतिष्ठित परिवार उसे अपनी बहु बनाने के लिए तैयार नहीं था । मैंने आर्यन को पूरी कहानी बताई । उसके माता पिता वैसे भी लडकी ढूंढी रहे थे । कृति और आर्यन दोनों भारत में कई बार मिले । उन्होंने एक दूसरे को पसंद किया और शादी करने का फैसला कर लिया और मैंने प्रोजेक्ट जेनी के लिए करोडों रुपए खर्च किए । तो मंत्री जी भी मान गए कि एक तय की एक नेता से ज्यादा काम आता है । वे सडक के दोनों और गगनचुंबी इमारतों को निहार रहे थे । आर्यन ने अपनी कार्य बहुत बडी और सुंदर टाउनशिप के सामने रोगी और वो लिफ्ट से छब्बीस मंजिल पर उनके शानदार थ्री बीएचके अपार्टमेंट पहुंचे । लोहित और परेशानी अपना सामान गैस रूम में रखा और बाहर सोफे पर आकर बैठ गए । कृति आपने ओपन किचन में गयी । उनके लिए ब्लूबेरी, मफिन बनाने के लिए आर्यन भी उसकी मदद करने चला गया । कृति अपने हाथों से आटा, चीनी और ब्लू बेरी के मिश्रण को बूथ रही थी । उसके बालों की एक लट बार बार उसके चेहरे के सामने आकर उसे परेशान कर रही थी । आर्य ने अपने हाथों से उस लटको हटाकर उसके कान के पीछे दबा दिया । लोहित और कृष्णा सोफे पर बैठे उन्हें देख रहे थे । वो दोनों एक साथ बहुत प्यारे लग रहे थे । तृषा ने एक आई कहा, एक बात मुझे अभी भी समझ नहीं आई क्या? लोहित से पूछा इतनी प्यारी लडकी ने आखिर ये अफवाह क्यों फैलाई की उसका बलात्कार हुआ है? कितनी बदनामी हुई उसकी? तुमने उसे बेहोश करके उसे अगवा किया । फिर भी उसने तुम्हारी मदद की । वो चाहती तो मैं आसानी से पकडवा सकती थी । हाँ, अगर वो मेरा साथ नहीं देती तो मैं गिरफ्तार हो जाता है । प्रोजेक्ट जी नहीं कभी भी लांच ना हुआ होता है । हम फिर कभी मिले ना होते और देश में पहले की तरह बलात्कार होते ही रहते हैं । मगर भगवान का शुक्र है कि ऐसा नहीं हुआ । मंत्री जी की बेटी है तो क्या हुआ? आखिर है तो वो भी एक लडकी, एक कोमल हृदय वाली लडकी

जिनी पुलिस - लेखक द्वारा विशेष नोट

तो जिन्हें पुलिस किताब का सफर यहीं पर खत्म होता है । लेकिन एक या दो सालों में आप इस कहानी के पात्रों को भूल जाएंगे । कुछ और साल के बाद आप शायद इस कहानी को भी भूल जाएंगे । लेकिन इस कहानी को सुनते टाइम आपको कैसा महसूस हुआ कि हमेशा आपके दिल में रहेगा शब्द क्षणिक लेकिन भावनाएं अमर होती है । नमस्कार मैं हूँ अर्पित अग्रवाल और मैं इतना भाग्यशाली हूँ कि मैं अपनी भावनाओं को कहानियों के माध्यम से लाखों दिलों तक पहुंचा सकता हूँ । मुझे विश्वास इस कहानी को सुनकर आपका रहते पुलकित और मन प्रफुल्लित हो गया होगा । मंजिल से ज्यादा अपने यात्रा का आनंद लिया होगा भविष्य में जब भी आप इस कहानी को याद करेंगे आप बिना बात ही मुस्कराएंगे किसी कहानी के हीरो की तरह में ऊंची कदकाठी बहुत ज्यादा सुंदर नहीं हूँ । एक साधारण जीवन जीता हूँ, सडक के दोनों और देख कर ही पार करता हूँ । रेस्ट्रां में जाकर मिक्स वेज ऑर्डर करता हूँ और कंप्लीमेंट्री में सलाद मानता हूँ । स्मार्टफोन होने के बावजूद भी लोगों से पाते पूछता हूँ मगर शायद मेरी कहानियां आपका दिल हो सकती है । ओडिसा के छोटे शहर में जान ना और रायपुर के पास एक दूसरे शहर में पला बडा हैण्डराइटिंग किसी डॉक्टर से भी खराब है । नगर में बडी तेजी से टाइप कर सकता हूँ । भिलाई की रूंगटा कॉलेज से इंजीनियरिंग कर के मैं सॉफ्टवेर कंपनी एक्सेंचर में जॉब करने पूरे चला गया । अगर सिर्फ तीन सालों के बाद मैंने स्टार्ट अप के लिए जॉब छोड दी । आखिरकार जीवन में पैसा ही सबकुछ नहीं । कभी कभी आपको और ज्यादा पैसों की जरूरत होती है तो डाॅॅ सोशल मीडिया में हर रोज मेरी कहानियों की समीक्षाएं लिख कर मेरा हौसला बढाने के लिए धन्यवाद । मेरी लिखी सभी रोमेंटिक पंक्तियों की प्रेरणा बनने के लिए मेरी खूबसूरत पत्नी शुचि का धन्यवाद । मेरा अनुज निशान । दूसरे भाइयों की तरह बचपन में हमने टीवी रिमोट के लिए कभी लडाई नहीं की क्योंकि हमें हमेशा एक ही चैनल देखना होता था मेरे मम्मी पापा और मेरे बच्चे युवान और वियान । इससे बेहतर परिवार तो हो ही नहीं सकता । कुछ लोग आपके जीवन में आकर चले जाते हैं, कुछ आते जाते रहते हैं । हर कुछ आते हैं, फिर कभी न जाने के लिए । बचपन से हमेशा मेरे साथ होने के लिए । मेरे दोस्त हैप्पी का धन्यवाद । साल दो हजार तेरा में जब मैं पुणे में रहता था, एक दिन मेरी बाइक कटाया । पंचर हो गया था तो ऑफिस जाने के लिए लोहित नाम के एक अनजान शख्स ने मुझे लिफ्ट दी थी । मैंने उसे बताया कि मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर होने के साथ जात के दावे भी लिखता हूँ । उसने कहा कि भविष्य में अपनी किसी कहानी में मैं उसका नाम इस्तेमाल करो तो लोकहित । अगर आज तो मैं इस कहानी को सुन रहे हो तो मुझे लिफ्ट देने और तुम्हारे नाम के लिए धन्यवाद । साथ ही धन्यवाद । मार्क जुकरबर्ग का न केवल फेसबुक बनाने के लिए बल्कि इस कहानी के प्रेरणा श्रोत बनने के लिए मेरे शब्दों को अपनी खूबसूरत आवाज देने के लिए वॉइस ओवर आर्टिस्ट रूबी पारिक जी का धन्यवाद और सबसे अहम कुक फॅमिली का तहेदिल से धन्यवाद, जिन्होंने मेरी कहानियों पर भरोसा किया और मुझे एक मुकम्मल मंच दिया । अब मैं बीस फैमिली का एक हिस्सा हो । अपने जज्बात, अपने अनुभव, अपनी भावनाएं जो कुछ भी लिख सका, मैंने लिख दिया है इस कहानी में मगर हर बात लिखकर बयां करना जरूरी तो नहीं । क्या कभी ऐसा नहीं हो सकता कि मैं कुछ सोचूँ और अब समझ जाएँ? अगर जो मैंने सोचा उसे बिना बढिया बिना सुने ही आप समझ जाए तो कुछ बात बने । मैं चाहता हूँ की अपनी शिद्दत से अपने किरदार को निभाओं की । मेरा पर्दा गिरने के बाद भी आपकी तालियाँ बचती रहे । धन्यवाद तो इसी के साथ दोस्तों कमेंट बॉक्स में लेकर की जरूर शेयर कीजिएगा की कहानी आपको कैसी लगी? कहानी की किस लाइन ने कहानी की किस मोडने आपके दिल कुछ हुआ । बाहर आपको भी लगा कि आप उस कैरेक्टर के साथ उस जर्नी में आगे पढ रहे हैं और फिलहाल आगे बढने का टाइम हो गया है । धन्यवाद कहानी का सुनने के लिए अपना प्यार हमारे साथ शेयर करने के लिए तो ऐसे ही दिलचस्प कहानियां आपको मिलती रहेगी । मुझे फॉलो करना ना बोले और सुनते रहे तो ऍम सुने जो मन चाहे

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