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Intro

आप सुन रहे हैं को एफएम किताब का नाम है चांस । लेकिन इसकी लोकप्रिय कहानियाँ जिससे लिखा है चांस डिकेंस हैं और मैं ॅ कुक एफ । एम सुने जो मन चाहे

1 चार बहनें

चार बहनें उन घरों के कतार जिसमें वो बूढी औरत और उसके परेशान करने वाले पडोसी रहते हैं उसमें निसंदेह कई लोग रहते हैं क्योंकि हम उन में से सब लोगों का वर्णन इस से घर नहीं कर सकते हैं । आॅफ उनमें से जो सबसे खास या अलग देखने वाला घर है उसके बारे में आपको बिना कुछ ज्यादा भूमिका बांधे बताना चाहते हैं । वो चार ऍप्स हमारे कस्बे में लगभग तेरह साल पहले बस ले के लिए आई थीं । एक बहुत उपयुक्त कहावत है और कुछ उदास में किस समय और लहरें कभी भी किसी का इंतजार नहीं करती है । ऍम ये कहावत इन चारों बहनों पर बाखूबी चरितार्थ होती है । हम यहाँ ये भी कहना चाहेंगे कि इन चारों बहनों में से कोई भी तेरह साल पहले भी किशोरी या अठारह वर्ष की आयु से कम नहीं थी । पर देहाती कथाकार होने के नाते मेरा ये बताना करता है कि उन दिनों सबसे छोटी मिसलेनियस बहुत ही नाजुक अवस्था में आई थी और सबसे बडी फॅमिली इसके लिए तो कोई योग्य वर मिलने की कदाचित कोई संभावना ही नहीं थी । जब मिस विलिस इसलिए इस मकान को लीज पर लिया था तब इसमें ताजा ताजा पेल करवाया गया था । कमरों में ऊपर से नीचे तक नए वॉलपेपर लगाए गए थे और उनमें नीचे लकडी के फॅस बिठाया गया था । जो फिल्में बहुत ही महंगा होता है । जहाँ जहाँ संगमर्मर था उसे अच्छी तरह से साफ कर दिया गया था । पुराने लोहे की जाली के चौक की जगह आधुनिक स्टोर लगवाए गए थे । पिछले बगीचे में चार पेड भी लगाए गए । सामने के दौरान में जगह जगह छोटे छोटे पत्थरों और छोटी छोटी टोकरियां भर भर कर बिछाया गया था । उसके बाद कई गाडियों में बहुत खूबसूरत कालीन और सुंदर फर्नीचर आया था । लडकियों में ऑटोमेटिक पर्दे भी लगाए गए । तमाम तैयारियों और साज सजावट के लिए दो बढाई और अन्य आदमी लगाए गए थे । उन्होंने आसपास की रेड सर्विस हो उस घर के बारे में उन लोगों को तरह तरह की बातें बताई और उन मित्रों ने अपनी अपनी मेम साहबों को वहाँ रहने वाली बहनों के बारे में बताया और शीघ्र ही उस रो हाउस, इसके मोहल्ले वालों के घरों में ये बात फैल गई की पच्चीस कॉमिक गार्डन में रहने आई पैसों के पास तमाम संपत्ति थी और वो बहुत अमीर थी । अंत में फॅस और अन्य तीन बहने वहाँ पर शिफ्ट हो गई थी तथा पडोसी उन लोगों के घर शिष्टाचार वर्ष एक एक दो दो करके आने जाने लगे । घर के अंदर क्या गजब की सफाई सुधर आई थी और चारों बहनें भी वैसे ही बनी नहीं और साफ सुथरी थी । प्रतीक चीज बहुत ही औपचारिक, कडी और ठंडी और वैसे ही चारों बहनें भी थी । कोई भी कुर्सी अपनी जगह से खिसकी हुई नहीं मिलेगी और ना ही चारों बहने आपको कहीं इधर उधर बैठे मिलेगी । सबकी अपनी अपनी ते जगह थी और वो आपको हमेशा उसी जगह पर काम करती हुई मिलेंगे । सबसे बडी मिसाल इस हमेशा कुछ बुनाई मेकिंग करती हुई मिलती थी । उससे छोटी कुछ ट्राई करती हुई और उनसे छोटी दोनों बहनें बयानों पर डोंट संगीत बजाते हुए मिलती थी । उन बहनों का अपना अलग से कोई अस्तित्व नहीं था परन्तु ऐसा प्रतीत होता था कि जैसे उन्होंने ये निश्चय कर लिया था कि वो जीवन के शीट से किसी तरह इकट्ठे ही गुजर जाएँ । एक ही दे फ्री या परदे से जैसी तीन लम्बी लम्बी सिलपटी हूँ । साथ में एक स्कूल देना एक बडी बहन तथा तीन बहने एक ही तरह के भाग्य के साथ जैसे फॅस या दो गुना हूँ । यदि सबसे बडी बहन को पित्त की समस्या हो जाती थी तो बाकी तीन बहनों को भी वैसे ही पित्त की समस्या हो जाती थी । यदि बडी बहन को गुस्सा आता था या धार्मिक होती थी तो सारी बहनें भी उसी समय पर वैसे ही हो जाती थी । जो भी बडी बहन करती थी वैसा ही अन्य तीनों भी करती थी है । पर ये थी किसी अन्य पहनने कुछ अलग सा काम की नहीं तो बाकी तीन बहने उसका अनुमोदन नहीं करती थी और उसे नकार देते थे । और इसी प्रकार से वो किसी सब्जी की तरह एक वेजिटेटिव अवस्था में रहती थी । एक ध्रुवीय समझता या पोलर हार्मनी में कभी कभी वो बाहर जाती थी अपने पडोसियों से बचते हुए किसी से मिलने जुलने या घूमने के लिए । इस प्रकार उनके तीन वर्ष वहाँ बीत गए जब एक बहुत ही असाधारण घटना घटी जिसके कभी किसी ने कोई आशा नहीं की । नहीं । उन बहनों के जीवन में जैसे कहीं पसंद या ग्रीष्म ऋतु का आगमन हुआ । धीरे धीरे बस पिघल गई और एक संपूर्ण काया पलट हो गई । क्या ऐसे संभावना था इन चारों विलिस बहनों में से एक का विवाह होने वाला था? अब ये सवाल उठता था अचानक के पति नाम का जी कहाँ से पैदा हो गया । किस प्रकार की तरफ से ये संभव था कि विलिस बहनों में से एक की शादी हो सकती थी या किसी आदमी के लिए कैसे मुश्किल था कि वो उन में से किसी एक से शादी कर ले । बिना सबके साथ वेवा किए इन सब सवालों का हाल जवाब ढूंढ पाना हम लोगों के लिए नामुमकिन था । फिर जो भी हो, हमें पता चला कि अभी पिछले कुछ दिनों से मिस्टर रॉबिनसिंह जो एक पब्लिक ऑफिस में अच्छे वेतन पे काम कर रहे थे और जिनकी खुद भी कुछ प्रॉपर्टी थी, उन लोगों के घर आना जाना हुआ और वो फिलीस् बहनों के साथ बात पैदा कोशिश कर रहे थे । अब उनके पडोसी खासकर महिलाएं जानने के लिए छटपटा रही थी कि कौन सी मिस पुलिस इतनी भाग्यशाली थी जिसके साथ मिस रॉबिन्सन शादी करने जा रहे हैं । उनकी ये परेशानी इससे भी दूर नहीं हुई जब सबसे बडी मिस विलिस ने ये घोषणा की कि हम मिस्टर रॉबिन्सन से शादी करने जा रहे हैं । क्या वे सारी बहनें एक ही मिस्टर रॉबिन्सन से विभाग करने जा रही थी? ये तो और भी भ्रमित करने वाली बात है । ये तो बहुत ही असाधारण बात थी । बोलूँ एक दूसरे के साथ इतनी घुली मिली थी कि उस लाइन में उस ओर लीडी की जिज्ञासा भी आज सीमा से बाहर हो चुकी थी । इस विषय पर चाय मीटिंग पर और ताश खेलते समय तरह तरह की बातें लेडिस ग्रुप और आदमियों की गोष्ठी में भी होती रही । सबसे वृद्ध आदमी ने तो यहां तक कहा कि मिस्टर रॉबिन्सन पूरी दिए थे और वो उस सारे परिवार से यानी चारों बहने से इकट्ठा ही शादी रचाना चाहते थे । अब सारे मोहल्ले वाले और ऍम आदमी अपने सिर्फ गंभीरता से हिलाने लगे और ये सारा मामला और भी ज्यादा रहे । समय हो गया उन्होंने आशा की मैं इस वजह से और अन्य बहनों में इतनी समझदारी थी कि उनमें से कौन उससे व्यवहार करेगी और अन्य लोगों को अपने अपने काम से मतलब रखना चाहिए हूँ हूँ हूँ । आखिरकार एक दिन सुबह पौने आठ बजे पच्चीस दिसंबर में दो ग्लास कोचिस वाली मक्खियाँ आए । उसके पहले एक क्या ऍन आए थे । उन्होंने हल्के नीले रंग का कोट पहना हुआ था और डबल मिल करसी पतलून पहनी हुई थी । जैसा कि तेईस नंबर के मेड ने बताया जो उस वक्त बाहर सीढियों पर झाडू लगा रही थी और उत्साह से भरपूर पर नर्वस थे । उसी ने ये भी बताया कि कुक ने दरवाजा खोला था जिससे बहुत बडी सफेद बोल लगाई हुई थी और नियमानुकूल टोपी की जगह बहुत बडा सहायक लगाया हुआ था । इसके अलावा मिस्टर रॉबिन्सन ने सफेद गोलबंद गले में लपेटा हुआ था । हम शूज पहने हुए थे और काफी साॅस या दास्ताने पहने हुए थे । ये सूचना बहुत तेजी से पूरे मोहल्ले में फैल गई और लोगों ने सोचा कि आज वह घडी आगे जिसका वो वर्षों से सांस रोककर इंतजार कर रहे थे । उस रोज उस शो के हाउस या मोहल्ले के सारे लोग अपनी पहली मंजिल या दूसरी मंजिल की खिडकियों में खडे हो गए ये देखने के लिए कि आगे क्या होता है । आखिरकार मिस विल इसके घर का दरवाजा खोला और साथ ही साथ पहली कोच का जिसमें से दो पुरुष और दो अदद महिलाएं निकली । शायद उनके परिवार के दोस्त रहे हैं और वो पच्चीस संबंधित दाखिल हो गए तथा खटाक से उसका करवा सा भी बंद हो गया । फिर उस घर का मेन करवा सकता और सारे मोहल्ले की बहुतों दिल्ली धडकनें तेज हो गई । ऍम और सबसे बडी एलिस बहन उन्नीस नंबर वाली ने कहा मैंने हमेशा से कहा था कि ये फॅमिली ही थी । अठारह नंबर वाली बोली लीडी नंबर वाली ने उल्टा जवाब पूछ लिया । क्या तुम ने ऐसा कहा था? नंबर सत्रह में जो उम्रदराज अविवाहित औरत रहती थी । उसने कहा इस कितनी फिजूल बातें हैं । पर गार्डन स्पेस में रहने वाले लोगों के अचरज का ठिकाना ना रहा जब उन्होंने कहा था की मिस्टर रॉबिन्सन ने एक एक करके सारे बीस बहनों को कोच में बिठाया और फिर स्वयं भी उसने किसी तरह घुस कोस आ कर बैठ गए तथा महंगी भी अगली लगे की तरह तेजी से उस कस्बे के चर्च के फोर दौड पडी । अब उस पादरी की उलझन के बारे में सोचिए जिसमें इन की शादी चर्च में करवानी थी जब सारी बहनों ने इकट्ठा ही चर्च में झुककर उन वचनों को दोहराया होगा जो पांचवी पढे होंगे और विवाह के मंत्रों को भी उन चारों बहनों जोर जोर से दोहराया होगा या मान लोगों के किसी प्रकार से ये सब कठिनाइयाँ किसी तरह से सुलझ गए होंगे । फिर उसके बाद चार पुलिस इत होकर इस्तीफे कल हो गए होंगे और सारे चर्च का हॉल उनकी चीख चिल्लाहट से गूंजायमान हो गया होगा क्योंकि इस यादगार समारोह के बाद ही वो चारों बहनें और मिस्टर रॉबिंसन उसी घर में रहते रहे जिसमें की हवायें बहने रही थी । थी हमारे लिए यह जान पाना ऍफ का व्यवहार किस बहन के साथ हुआ था लगभग नामुमकिन था । जब बोलो कभी बाहर निकलते थे तब भी वो चारों बहने साथ साथ होती थी । शायद यह भ्रामक स्थिति बनी रहे हैं । पर सबसे ज्यादा नियम कानून के साथ रहने वाले घरों में भी कभी कभी कुछ ऐसी बात हो जाती है कि उन का भेद खुल ही जाता है । और ऐसा ही कुछ इस केस में भी हुआ । हमारे पडोसियों को किसी प्रकार से ये पता चल गया कि सबसे छोटी मॅन को भरा था और वही मिसिस रॉबिन्सन थे । कभी कभी सेवक सेविकाएं ऊपर नीचे आते जाते दिखाई पड जाते थे तो ये जानना चाहते थे कि मिसिस ऍम सीधे और उनको हमेशा यही जवाब मिलता था । ॅ बिल्कुल ठीक ठाक थी और उनके साथ कुछ भी गडबड नहीं है । अब पियानो की आवाज नहीं सुनाई पडती थी और बुनाई कढाई की सोनिया भी आराम फरमा रही थी । दो इन पेंटिंग पर भी कोई ध्यान नहीं देता था । अब सारा परिवार छोटे छोटे बच्चों के कपडे और झगडे तथा है । दिया तो क्या बनाने में व्यस्त हो गया था । यही साडी पहन के एक प्रकार से अमोद प्रमोद का जरिया बन गया था । ड्रॉइंग रूम भी अब पहले की तरह उतना सजा सजाया यह साफ सुथरा नहीं रहता था । यदि आप किसी दिन सुबह सवेरे वहाँ पहुंच जाएं तो पाएंगे कि स्टाॅपर पुराने अखबार बिखरे पडे थे कहीं कहीं पर सफेद गांव जो बडे साइज की थी या छोटे छोटे बच्चों के कपडे यह प्लीज लगी तो क्या इधर उधर बिखरी पडी होती थी सारा कमरा जो पहले इतना साफ सुथरा और सजा धजा रहता था, अब अस्त व्यस्त रहता था । एक बार जब हम लोग उनसे दिन में मिलने गए तो पाया कि कमरे में एक लंबा सा सफेद रोलर जिसमें नीले रंग का किनारा बना था, रखा था । इसका क्या इस्तेमाल होता होगा कि हमारी समझ से परे हमने पाया कि नॉक डॅाल जो हमारी लाइन के पास रिबन में रहते थे, उनके यहाँ रात में आधी रात को अक्सर पच्चीस नंबर वाले दस तक दे रहे थे और उन्हें नींद से जगह कर घर ले जाया करते थे । डॉक्टर डाइसन के घर में रंगीन कांच लगे थे और वो उसके पीछे एक बडा सलाह चलाकर रखा करते थे और एक दिन हमने रात में एक है वो कोच यानी मगी को मिसिस रॉबिन्सन के दरवाजे पर रात को ढाई बजे रुकते हुए देखा । उसमें से एक मोटी उम्रदराज महिला जिसमें नम आधा कोन रखा था और नाइट क्या पहन रखी थी । उत्तरी उसके एक हाथ में एक बंडल था और दूसरे हाथ में एक जोडा खडा थी । ऐसा लग रहा था कि जैसे उसको अचानक ही मध्यरात्रि में बिस्तर पर से किसी खास काम के लिए उठा लिया गया हूँ । जब सुबह उठे तो पाया कि उनके घर के वो कर कूडे में एक सफेद बच्चे का दास खाना बना हुआ था । जब हम अपनी अबोधता से ये सोच रहे थे कि ये आस्थाना किस कारण से माना गया था । हम तब अविवाहित थे तभी सबसे बडी फॅमिली सामने का दरवाजा खोलकर प्रकट हूँ । फॅमिली आप लोगों को मुबारक बाद मिस रॉबिन्सन साहब कुशल है और छोटी सी बेटियाँ भी खूब अच्छी तरह है और फिर सारे मोहल्ले मान और पडोसियों की तरह हमारी जिज्ञासा भी शांत हुई और ये समझ में आ गया ये सब क्या मांग रहा था और हम पहले क्यों नहीं मामूली सी बात जान पाए?

2 लेडीज सोसाइटीज

हूँ । लीडी सोसाइटी हमारे कस्बे में लेट इसी कई धर्मार्थ सोसाइटीज हैं । जाने में जब ठंडक ज्यादा हो जाती है और लोगों को जल्दी जल्दी जुकाम हो जाता है तब लीड ईसु वितरण सोसाइटी, लेडीज गोल वितरण सोसाइटी, लेडीज कम्बल वितरण सोसाइटी आदि शुरू हो जाते हैं । गर्मी के समय में जब स्टोन फल बहुतायत में होने लगते हैं और तमाम लोग पेट दर्द से पीडित होने लगते हैं तब हम देखते हैं कि कई ली डॅडी बीमारों का रिससिटेशन सोसाइटी आधी करने जाती हैं और सारे साल भर चलने वाली सोसाइटीज भी है । जैसे चल रही इन सामने सोसाइटी, बच्चों की परीक्षाओं में मदद के लिए लीडी बाइबिल और प्रार्थना पुस्तक वितरण सोसाइटी और बच्चों के कपडे वितरण करने वाली मासिक सोसाइटी । महात्मा गाँधी दोनों सोसाइटी वाकई में बहुत ज्यादा अहम है । हम नहीं जानते कि बच्चों को समाज को कितना लाभ पहुंचाते हैं, पर ही बात जरूर है कि दिन में और सोसाइटीज की तुलना में ज्यादा अफरा तफरी होती है । हमें यहाँ पर जरा आप सोच से कहना पड रहा है । बाइबिल और प्रार्थना पुस्तक सोसाइटी इतनी ज्यादा लोकप्रिय नहीं जितना कि बच्चों के बिस्तर की चादर एवं कपडे वितरण करने वाली सोसाइटी हैं । तथापि पिछले एक दो सालों में आई बिल और प्रार्थना पुस्तक सोसाइटी को थोडी सी बढत इसलिए मिली क्योंकि बच्चों की परीक्षा वाली सोसाइटी का काम अचानक धीमा पड गया था और वो सब अविवाहित महिलाएं तो बच्चों की पढाई लिखाई की और ध्यान देती थी और सब बच्चे सभी लोगों के बयान का केंद्र बन गए थे । तीनों मिस ब्राउन बहनें जो कमजोर बच्चों को पढाती थी, उनको इम्तिहान के लिए तैयारी करती थी और बच्चों को बार बार समझ मश्क और उन की परीक्षा दी थी थी । उनके बच्चे और बच्चियां अचानक बीमार पड गए और कमजोर भी हो गए । वो तीनों में ब्राउन तो बारी बारी करके बच्चों को पढाती रही है । पर वो बच्चे बच्चियां जो उनकी विद्यार्थी थी उनमें थकान और कमजोरी के लक्षण प्रकट होने लगे थे तथा उन पर अब और दबाव नहीं डाला जा सकता था । इस सबके फल शुरू गांव वाले उनका हसी मजाक उडाने लगे और कुछ अन्य लोगों ने तो उनकी गतिविधियों पर किसी प्रकार की टिप्पणी करने से अपने आप को बिल्कुल अलग रखा । पर बहुत समय नहीं देता जब क्यों रे यानी पांचवी का सहायक नहीं चार टी स्कूल के लिए एक चैरिटी दानशीलता पर एक जोरदार भाषण दिया और उस भाषण में कुछ माननीय व्यक्तियों के अथक प्रयासों को खूब सराहा और उनकी प्रशंसा भी की । तीनों में ब्राउन जहाँ चार से बैठी थी, वहाँ से रोने सिसकने की आवाज आएँ । उस विभाग के सब बच्चे का जल्दी से जाकर एक गिलास पानी लेकर आई । फिर किसी की करहाने की आवाज आई । तब कुछ महिलाएं सेविकाओं द्वारा उन्हें चर्च से बाहर ले जाया गया और फिर वो पांच मिनट बाद वापस आएँ । उनके हाथों में सफेद रूमाल थे जिनसे वो अपनी आंखें पूछ रही थी । ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे वो चर्च के बाहर बने छर्च यार्ड में किसी मृतकके शोकसभा से आ रही हैं । इससे ये साफ हो गया ये सब किस संदर्भ में कहा जा रहा था और किन व्यक्तियों की ओर इशारा था । उन गरीब या अनाथ बच्चों को सहायता देने की जरूरत सभी की समझ में आ गई थी । तीनों में ब्राउन को समझाया गया, बच्चों के चैरिटी स्कूल को कक्षाओं में विभाजित कर दिया गया तथा हर एक कक्षा में दो महिलाओं को उनकी देखभाल के लिए नियुक्त किया गया । थोडा संज्ञान खतरनाक होता है पर थोडी सी ऍम और ज्यादा खतरनाक हो सकती है । तीनों में ब्राउन ने बूढी बूढी मीट्स को बच्चों की निगरानी के लिए नियुक्त कर दिया और बहुत ही सावधानी से युवतियों को इस काम से बाहर रखा । कुमारी चाचियों को विजय हो गई और लोगों में तीनों में ब्राउन सिस्टर्स के विरोध में रोज की भावना पैदा हो गयी जो कभी भी हिंसक रूप धारण कर सकती थी । पर एक सहयोग इस तरह की कोई दुर्घटना टल गई । ॅ पाकर जो साथ अच्छी अविवाहित लडकियों की माँ थी उन्होंने कई अन्य माताओं से जो स्वयं अविवाहित लडकियों की बात आई थी उन्होंने उनसे बताया की प्रति रविवार को चर्च में पांच आदमी छह और थे और बहुत सारे बच्चे चर्च के अंदर मुफ्त वाली सीटों पर बिना बाइबिल या प्रार्थना पुस्तक के बैठे रहते हैं । क्या ऐसी बात किसी सभ्य समाज में बर्दाश्त की जा सकती है? क्या ऐसी चीज इसाइयों की जमीन पर सही जा सकती थी? कभी नहीं । उसी वक्त एक लेडी सोसाइटी बाइबिल और प्रार्थना किताब के वितरण के लिए बनाई गई नहीं । मिसिस जॉनसन पार कर तो सोसाइटी की प्रेसिडेंट बन गई और उनकी बेटियां ऍम और ऑडिटर बन गई । तत्पश्चात चंदा इकट्ठा किया गया, भाई और प्रेयर बुक्स खरीदी गई तथा उसके चर्च में स्वीस सीट पर बैठने वालों को वितरित कर दिया गया । परंतु अगले रविवार को पादरी ने जब पहला अध्याय पालना शुरू किया तो किताबों के गिरने की और पत्तियों की सरसराहट की इतनी आवाज हो रही थी कि उस दिन पादरी सर्विस में क्या बोल रहे थे । उसे सुनना लगभग असंभव हो गया था । एक भी शब्द वहाँ मौजूद लोगों की समझ में नहीं आया । तीनों चौंसठ बहनों ने आने वाले खतरों को भाप दिया था और उसे ताना, कृषि तथा मजाक उडाकर उसे टालने या बचाने का प्रयास किया । ब्राउन बहनों का कहना था की न तो वृद्ध पुरुष और न ही वृद्ध महिलाएं किताबें पढ पाती हैं । पर मिसिस पार्कर ने कहा कि इससे क्या फर्क पडता है । वो धीरे धीरे पढना सीख चाहेंगे । मिस ब्राउन ने कहा कि वह बच्चे भी किताबें पढ पाती हैं । कोई बात नहीं । मैं इस पार करने उल्टा जवाब दिया । उनको पढना लिखना सिखाया जा सकता था । एक संतुलन पार्टी का आयोजन किया गया ब्राउन बहनों ने खुले आम इसकी परीक्षा जो की लोकप्रिय तरीका था बच्चों की परीक्षा सोसाइटी का । ब्राउन बहनों ने खुले आम इसकी परीक्षा के जो लोकप्रिय तरीका ना बच्चों की परीक्षा सोसाइटी का मिस पार करने, जनता में खोले आम, बाइबिल और प्रार्थना पुस्तक पटवाई एक पर भी किसी के पक्ष में फैसला इधर उधर कर सकता था और एक बंक ने ऐसा है क्या? एक मिशन ही वेस्ट इंडीज से लौटकर आया था और वो एक ढाणी विधवा से अपने विवाह के बाद उसे एक फॅमिली सोसायटी के सामने पेश होना था । ऍम पार करने भी उन्हें अपनी तरफ मिलने का प्रयास किया । उनका सुझाव था कि क्यों न दोनों सोसाइटीज की एक संयुक्त मीटिंग हूँ । ये प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया । सारी जनता में घोषणा करती गई और मीटिंग के समय मीटिंग रूम आदमी और और तो से खतम खर्च भर गया । मिशेल भी मंच पर आया और उसका जोर शोर से स्वागत हुआ । उसने एक संवाद उसने झाडियों पीछे से दो दिन रोज के बीच वितरण सोसाइटी के बारे में सुना था । उसे दोहराया उसका पुरजोर अनुमोदन हुआ । उसमें दोनों नीग्रो उसकी बातचीत हो । उनकी टूटी फूटी अंग्रेजी में नकल करके सुनाया । पूरी छात्र शोर और ठहाकों से गूंज उठे हैं । उसमें से पुस्तक वितरण सोसाइटी की लोकप्रियता धीरे धीरे बढ गई । ऑॅपरेशन सोसाइटी इसका विरोध नहीं कर पाई । अब बात बच्चों के बिस्तर के चादरों के लिए बनी सोसाइटी की थी जो बच्चों के लिए जाते आदि मासिक उधार पर देती थी । इस सोसाइटी की लोकप्रियता अन्य दो सोसाइटी के बारे में जानता किराये पर आश्रित नहीं थी । चाहे जो कुछ भी हो, उन विषयों की कमी नहीं थी जिन पर आप अपनी दानशीलता का उपयोग न कर सकें । हमारे गांव या कस्बे की आबादी काफी धनी थी और वहाँ शहरों की अपेक्षा ज्यादा बच्चे पैदा होते थे । बताया, आप बच्चों के लिए कुछ भी देकर अपनी दानशीलता का प्रदर्शन कर सकते थे । इसके फल शुरू हमारी मासिक बच्चों के कपडों, छात्रों वाली सोसाइटी फलती फूलती रहे हैं । सोसाइटी हर माँ चाहे की मीटिंग करती थी जिसमें बीते हुए माँ का लेखा जोखा होता था तथा उसकी गतिविधियों की समीक्षा भी होती थी और जो पाक से लोन उधार पर नहीं दिए जा सकते थे, उन को अच्छी तरह से देख कर फिर रख दिया जाता था । मीटिंग में अगले माह के है सिक्यूरिटी का चुनाव भी होता था । हम लोग इस मीटिंग में कभी भी हिस्सा नहीं लेते थे जिससे यह साफ सहित था कि आदमी लोग इस मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए वांछित नहीं है और उन्हें सावधानीपूर्वक इससे बाहर रखा जाता था । परंतु मिस्टर बंग को एक सोसाइटी में एक दो बार बुलाया गया था और उन के अनुसार ही मीटिंग बहुत नियमित रूप से अच्छी तरह संचालित होती थी । किसी भी विषय पर एक समय में चार सदस्यों से ज्यादा नहीं बोल सकते थे । जो नियमित कमेटी थी उसमें केवल विवाहित महिलाएं थी । पर कई युवा महिलाएं जो अठारह से पच्चीस वर्ष की तरह की थी उन्हें मानद सदस्य के रूप में सोसाइटी में सदस्यता पडी हुई थी । विशेष कार इसलिए भी कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए जरूरी बक्से बनाने में मददगार थी । परन्तु वो ऐसी महिलाओं का जो सौर में थी जिन्हें हाल ही में बच्चा हुआ था उन्हें समय समय पर जाकर मिल आती थी । ये इसलिए भी जरूरी था कि उन्हें विवाहित जीवन के बाद मातृत्व जीवन का भी कुछ ज्ञान और अनुभव हो जाए और जो चतुर्मास थी वो लडकी की । इस को विवाह के प्रस्ताव के समय अच्छे से बखान की ये सोसाइटी महासिंह बक्सी लोन देने के अलावा कभी कभी अच्छा बच्चा को बीस तीन या गर्म बिरियानी, मसाले, चीनी तथा अंडे भी सप्लाई करते थे । इन बक्सों पर जो नीले रंग के होते थे । सोसाइटी का नाम सफेद अच्छा रूम में लिखा रहता था । इन चीजों को टॅाक कर लाभार्थियों को बता जाता था और ये भी इन चीजों के वितरण के लिए और फॅमिली मेंबर्स की सेवाएं दी जाती थी और ऐसे मौकों पर जब मरीजों को देखने जाती थी तो क्या दिन और बीजेपी की टेस्टिंग यानी स्वास्थ्य खाना भी हो जाती थी और छोटे छोटे सॉसपैन में उन्हें गैस चोले पर रख कर गरम कर लिया जाता था । बच्चों को नहलाया धुलाया जाता था, उनके कपडे बदले जाते थे, उनको दूध पिलाया जाता था तथा उनके नन्हें नन्हें पैरों को हाथ के सामने रखकर सेका जाता था । इतना आनंद में कंफ्यूजन होता था । बाहर बातचीत होती थी, कुकिंग होती थी । हारबर गडबड होती थी कि उसका कुछ कहना नहीं । सब लोग मिलकर इस मौके पर खूब आनंद उठाते थे । इन दोनों संस्थाओं की प्रतिस्पर्धा में और अपने एक अंतिम प्रयास में चल रही परीक्षा सोसाइटी ने जी फैसला लिया कि वह अपने सब विद्यार्थियों की एक पब्लिक परीक्षा लेंगी । इस देश से उन्होंने नेशनल सेमिनरी का विशाल स्कूल का कमरा गांव में चर्च की अनुमति से ले लिया । गांव के मुख पादरियों और अन्य दो संस्थाओं के सदस्यों को भी बुलाया जिन पर उन्हें अपने प्रयासों का असर डालना था । सेमिनरी हॉल के फर्स की एक दिन पहले सूबे अच्छी तरह से धुलाई, सफाई की गई । आप लोगों को बैठाने के लिए इंतजाम किया गया । बच्चों द्वारा बडे बडे लिखावट के नमूनों के चार और गणित के सवालों के चार्ट लगाए गए । ऍम पोस्टों लिखाई में इतना सुधर किया गया था कि वो बच्चे जिन्होंने उसे लिखा था वो स्वयं भी नहीं पहचान पाए कि ये उन्हीं की लिखावट है और वो आश्चर्यचकित रह गए । विद्यार्थियों को कठिन सवालों को तब तक बार बार अभ्यास कराया गया जब तक की वो उनको जमाने याद नहीं हो गए तथा सारे अन्य तैयारियां भी बडी मेहनत और सावधानी से कराई गई और सुबह अंततोगत्वा ही गई । बच्चों को अच्छी तरह नहलाया धुलाया गया । उनको अच्छे अच्छे कपडे पहनाए गए, उनके चेहरे चमक रहे थे । लडकियों को सफेद रंग का काफी जो उनके गले और कंधों को ढक रहे थे, पहनाए गए और सिर पर सफेद टोपी थी जो ऍम बिल से सिर के पीछे बात की गई थी । लाखों की कमियों के कॉर्नर कुछ चौका देने वाले साइंस के थे फिर वहाँ से खोल दिए गए और तीनों में ब्राउन बहने वहाँ पर सफेद रंग के मसले की ड्रेस पहने खडी थी । उन्होंने भी सफेद रंग की वैसे ही टोपी पहनी थी जैसे कि लडकियों ने सबसे बडा रखा । सबका अभिवादन करते हुए वहाँ आया और उसने स्वागत भाषण सब के सम्मान में पढा जो मिस्टर हेनरी ब्राउन द्वारा लिखा गया था । सब लोगों ने खूब जोरो से एक साथ तालियाँ बजाये और सारा हॉल तालियों की गडगडाहट से गूंज था । मिसिस जॉनसन पार कर और उनके साथ ही बहुत छक्का रह गए । बच्चों की परीक्षा बहुत सफलतापूर्वक संपन्न हुए । बच्चों को परीक्षा सोसाइटी को उस समय क्षणिक विजय प्राप्त हुई । मिसिस जॉनसन पार कर और उनके साथ ही थोडा पिछड गए । उस रात मिसिस जॉनसन पार करके जहाँ बच्चों के कपडे वितरण करने वाली सोसाइटी की एक गुप्त मीटिंग हुई जिसमें इस विषय पर चर्चा हुई कि इस प्रकार से विधान सोसाइटी अपनी पुरानी जगह पर वापस आकर और फिर से मान सम्मान प्राप्त कर सकें । इसके लिए क्या करना चाहिए? क्या एक और मीटिंग करनी चाहिए? उसमें शिरकत मैंने कौन आएगा? वो मिशन ऋतु दोबारा आने से रहा । पादरी को फिर से किसी प्रकार से अचंभित कर देना चाहिए । उसके लिए क्या कदम उठाना चाहिए? बाद में काफी वादविवाद के बाद किसी ने एक वृद्ध महिला को कहते हुए सुना एंड आॅल सबके मन में एक बिजली सी कौन गई? सब ने मिलकर ये फैसला किया की कुछ महिलाओं का एक दल उसी विख्यात वक्ता यानी भाषण देने वाले के पास जाए और उसे एक अच्छा सब भाषण देने के लिए मना लिया जाए । तभी वह महिला तल इस गांव के बाहर के गांव में जाएँ और वहाँ से दो तीन अन्य वयोवृद्ध महिलाओं को भी उस सभा में बुलाया जाए जहाँ वो व्यक्ति भाषण देगा । उनके दल का अभियान सफल रहा और मीटिंग हुए भाषणकर्ता जो एक आयरिश था आ गया और उसने पांच कर दिया । विदेशी तत्वों के बारे में हरे भरे दीन ईसाइयों की उदारता और दया भाव पर विशाल अटलांटिक सागर और उसकी गहराई ऍफ विस्तार पर खून खराबा और जातियों के बिना पर दिल में दया पर हाथों में छोरियां, आधार यू बीती का घर और घर के देवी देवताओं पर उसने अपनी ना छुट्टी और हुई आखिर पूछी और लैटिन में कुछ कोर्ट क्या इस सबका बहुत जोरदार असर पडा था तथा लाइटिंग डेकोरेशन का वो कहना ही क्या, किसी को उसका मायने तो समझ नहीं आया और सब यही सोचा की बहुत ही भाव भी हिल करने वाली चीज होगी क्योंकि वो खुद भी बहुत भावुक हो गया था । वितरण सोसाइटी की लोकप्रियता हमारे गांव में बहुत तेजी से बढ गयी तथा शिशु परीक्षा सोसाइटी का धीरे धीरे पतन शुरू हो गया

3 हमारे पड़ोसी

हमारे पडोसी हम सब लोग जब साथ पर चल रहे होते हैं तो हमें ये जानने का मुंड कोतुहल रहता हूँ कि हमारे आस पास रहने वाले लोग कैसे हैं और वो क्या करते हैं और इस सब में हमें सबसे ज्यादा मदद उन के मुख्यद्वार को देखने से मिलती है जो साथ पर खुलता हूँ । आदमी के चेहरे पर आने जाने वाले हावभाव का अध्ययन बहुत ही खूबसूरत और दिलचस्प होता है । पर मुख्य दरवाजे पर लगें दूर नौकर यह खटखट करने वाले लोहे के छल्ले खुलने की बनावट से भी हम उसमें रहने वालों के बारे में काफी कुछ सही सही अंदाजा लगा सकते हैं । जब हम किसी आदमी से पहली बार मिलने जाते हैं तो हम उसके दरवाजे पर लगे डोर जान नौकर की बनावट से बहुत कुछ उस आदमी के बारे में जान सकते हैं क्योंकि हमें ये अच्छी तरह पता है । इस सामने लगे डोड नौकर और अंदर रहने वाले आदमी में काफी कुछ समान्यता हो सकती है । उदाहरण के तौर पर एक नौकर जो अक्सर लोगों के घरों के बाहर लगा रहता है, उसके चलने के अंदर हसते मुस्कुराते हुए शेर का चेहरा बना रहता है जिससे आप ही अंदाजा लगा सकते हैं कि भीतर रहने वाला आदमी कदापि गवार नहीं हो सकता । वहाँ जाने पर आपका गर्मजोशी से स्वागत होगा और हो सकता है कि आपको एक प्याला गर्म चाहे कुछ मदिरापान करने के लिए मिल जाए । इस तरह डोर लॉक कर किसी छोटे मोटे वकील या ब्रोकर के दरवाजों पर नहीं मिलेंगे । उसके नौकर पर एक अलग किस्म का शेर बना पाया जाएगा । एक बार और भयानक देखने वाले शेर का चेहरा जो किसी प्रकार की जंगली मूर्खता को बयान करता है । दो नौकर इसमें एक तरह का ग्रैंड मास्टर और स्वास्थ्य निर्दयी और कठोर व्यक्ति को दर्शाता है । फिर एक प्रकार का खूबसूरत समस्या या अध्यक्ष नौकर जिसमें एक लंबा चेहरा थोडी उठे हुई ना और तराशी हुई हड्डी होती है । इस प्रकार का नौकर ज्यादातर सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले लोगों के घरों के बाहर दरवाजों पर लगे होते हैं । बोलो हल्के मध्यम यह पी के रंग की कपडे पहनता होगा और गले में कल लगी हूँ । ऍम टाइम लगता होगा छोटे ऍम अपने आप को बहुत ही ठीक ठाक और महत्वपूर्ण समझने वाला आदमी होगा तथा जो अपनी राय को बिलकुल सही समझता होगा । कुछ साल पहले हम एक नए प्रकार के नौकर जिसमें कोई चेहरा नहीं था, देखकर चकरा गए जिसमें एक छोटे से हाथ या छडी के खोलों की एक गोलमाल आ लटक रही थी । फिर कुछ अनुसंधान और खोज भील से हमें ये पता चला कि इस प्रकार के नौकर या द्वार खटखटाने वाले ऐसे लोगों के घरों में लगे होते हैं जो बहुत औपचारिक और ठंड किसी के लोग होते हैं जो आपसे हमेशा यही कहेंगे कि आप आते क्यों नहीं? पर कभी भी आप से अंदर आने को नहीं कहेंगे । सब लोग जानते हैं कि उपनगर ये बडे बडे पीला टाइप के घरों में और विस्तृत विशाल स्कूलों में जिसमें छात्रवास नहीं होते हैं उनमें पीतल के नौकरी लगे रहते हैं और इस प्रकार के नौकर को देखने के बाद हमने अन्य प्रकार के नौकर इसका विवरण ऊपर देने का प्रयास किया है । कुछ कपाल विज्ञानिक इस बात का दावा करते हैं कि आदमी के अंदर भिन्न प्रकार की भावनाएँ और आवे उसी खोपडी की बनावट के विकास को प्रभावित करते हैं । इसके कहने का तात्पर्य ये नहीं है कि आदमी के स्वभाव के परिवर्तन उसके दरवाजे पर लगे नौकर में प्रतिनिधित् होंगे । हम केवल ये कह सकते हैं कि हो सकता है जो चुंबक त्वत् या आकर्षण एक व्यक्ति और नौकर में होता है, उसके मद्देनजर रखते हैं । वो अपने नौकर को अपने व्यक्तित्व के अनुसार बदलती है । यदि आप बिना किसी कारण के ही अपना घर बदलते हुए पाएं तो आप ये मान कर चलिए उसके व्यक्तित्व में और नौकर में समंजस्य होने के कारण उसने ऐसा किया । पर्व स्वयं इस तरह से अवगत नहीं होता है । ये एक नई फेरी या सिद्धांत है पर मैं इसे प्रतिपादित करने का जोखिम उठा रहा है । नौकरी के बारे में इतनी कुछ व्याख्या करने के बाद हमें ये बडी चिंता करने चाहे लगा कि हमारे बगल वाले पडोसी ने अपना नौकर बिलकुल ही हटवा दिया और उसकी जगह एक घंटी लगभग जी एक ऐसी आपदा या परिस्थिति थी जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी । कोई आदमी बिना नौकर के रह सकता है । ये विचार ही बडा, विचित्र और भयानक लगता है जो हमारे दिमाग में एक छाड के लिए भी घोस नहीं सकता और हमारी कल्पना के परे हैं । किसी तरह से घूमते फिरते थे । हम ऍम स्वच्छत पहुंच गए जो उस वक्त सिर्फ एक मिलती थी । पर हम किसी चीज को नोट करके बहुत अचंभित हुए और चौके भी की । घंटियों ऍप्स का चलन बहुत तेजी से बढता जा रहा है और दो नौकरी तो बिल्कुल नियुक्त होते जा रहे हैं । इससे नौकरी के बारे में हमारी धीरे बिल्कुल गलत साबित हो सकती थी या उसका आधार ही खत्म होता जा रहा था । हम जल्दी चलती घर आए और ये देखते हुए की नौकरी उस की प्रथा बिल्कुल खत्म होती जा रही है । हमने विचार किया कि अब हम किसी व्यक्ति के बारे में उसको देखकर के ही कोई धारणा बनाएंगे । हमारे घर की बाई और एक घर था तो आजकल बिलकुल खाली था था । हमारी ढाई और जो घर था उसके निवासियों के बारे में देखने सुनने का पर्याप्त समय था । हाँ, हाँ वाला घर जिस नौकर नहीं था वो एक सिटी क्लर के काम से में था और उस की बैठक की खिडकी पर एक नोटिस चस्पा था की एक अकेले आदमी के रहने के लिए यहाँ कमरा उपलब्ध है । भूख घर सडक के छाया डर हिस्से में एक छोटा सा साफ सुथरा मकान था । उसके पैसे में एक नया पतला फर्स्ट कपल छावं था और पहली मंजिल तक जोर से जा रही थी । उस पर भी नई पतली कालीन बिछाई हुई थी, वॉलपेपर भी नया था, रंग रोगन भी नया किया गया था तथा फर्नीचर भी नया था । इन तीनों चीजों को देख कर ऐसा लगता था कि किरायेदार एक सीमित साधनों का आदमी था । फॅमिली भी एक छोटी लाल काले रंग की कारपेट थी और उसके चारों बॉर्डर की फर्स्ट हैं । छोटी सी मेज और कुछ धब्बे वाली कुर्सियां भी थी । एक छोटे से साइज बोर्ड के दोनों पुर गुलाबी रंग के शेल्स रखे थे और एक आते स्नान पर कुछ और ऍम रखे थे और उन सब के ऊपर तीन मोरपंख सुरूचिपूर्ण ढंग से सजाए गए थे । यही सब उसके कमरे की सजावट को पूरा करते थे । इस कमरे में दिन के समय एक भद्र लोग को बैठाया जा सकता था । इस कमरे के पीछे एक और कमरा था जो रात में उसका बैठे था । खिडकी में लगे नोटिस ज्यादा दिन तक चिपकी नहीं रह पाई क्योंकि जल्दी ही एक आदमी जो गठीले बदन का था और जिसकी उम्र लगभग पैंतीस साल रही होगी वो किराये पर रहने के लिए आ गया और सम्भवता जल्द ही किराया आदि और अन्य चीजें तय हो गए होंगे क्योंकि शीघ्र वो नोटिस हटा लिया गया था । एक दो दिन बाद ही वह अकेला आदमी रहने के लिए आ गया और अब उसका असली चरित्र निकल कर आया । सबसे पहले तो उसे राहत में तीन चार बजे तक जगह रहने की आदत थी और उस वक्त वो इसके में पानी मिलाकर पीता रहता और तमाम सिगार भी फूंकता रहता था । फिर वो अपने दोस्तों को बुलाने लगा तो रात में दस बजे और कल सुबह तक गुल कपडा मचाते रहते थे । वो मिलजुलकर जोर जोर से आधा दर्जन दो गानों की लाइन में गाते थे और फिर कोर्स में जोर जोर से कोई अन्य गाना गाने लग जाते थे जिससे उनके पास सिया को बहुत परेशानी होती थी और उस की आदमी की तकलीफ का आपको अंदाजा लगा ही सकते थे । ये तो बडी गडबड बात थी और ऐसा हफ्ते में तीन बार होता था और यही सब कुछ नहीं था क्योंकि जब बोल सुबह बाहर निकल कर जाते थे तब भी रास्ते में वो तरह तरह की आवाजें जोर जोर से निकालते हैं और कभी कभी तो ऐसी आवाजों में चिल्लाते थे जैसे कोई और बहुत परेशानी में हूँ । और एक दिन रात को तो ऐसा होगा कि लाल चेहरे वाले एक आदमी ने जिससे सफेद रंग का हाथ लगाया हुआ था, घर नंबर तीन में जाकर दरवाजा खटखटाया जिसमें सफेद बालों वाला एक आदमी रहता था । उस आदमी ने सोचा कि शायद उसकी किसी विवाहित लडकी की समय से पूर्व तबियत खराब हो गई हूँ । वो अंधेरी में टटोलते हुए सीढियों से नीचे उतारा और कई सिट के लिया और काले खोलने के बाद दरवाजा खोला । दरवाजा खोलने पर उसने देखा के सामने लालमोहन वाला एक आदमी जो सफेद रंग का हाथ पहने हुए था, खडा था और जिसमें आधी रात में दरवाजा खटखटाने के लिए माफी मांगी और कहा कि क्या उसे एक गिलास ठंडा झडने वाला पानी मिल सकता था और साथ में एक शिलोंग का उधर भी जिससे क्या अब लेकर घर पहुंच सकें । इतना सुनकर वृद्ध आदमी ने अपना दरवाजा जोर से बंद कर लिया और ऊपर जाकर खिडकी खोलकर जब का सारा पानी नीचे उसके ऊपर फेंक दिया तो गलती से वो पानी किसी दूसरे आदमी के ऊपर पड गया और उसके बाद सारे गली में शोर शराबा मच गया । एक मजाक एक मजाक ही होता है और यदि दूसरा आदमी उस मजाक को समझ सके तो बहुत अच्छी बात है वरना बात बिगड सकती है । पर हमारी गली में जो लोग रहते थे वो बडे, सुस्त, दसवीं के लोग थे और इस तरह के माहौल आदि को समझने में असमर्थ थे । इस सबका परिणाम ये हुआ कि हमारे पडोस में जब सचिन अकेले रहते थे, उनको अपने किराएदार से कहना पडा कि यहाँ तो वह अपने दोस्त हो, घर पर बुलाना छोड दें या मकान खाली करते । उस आदमी ने इस लाश फटकार को गंभीरता से लिया और उसने वादा किया कि वह भविष्य में अपने दोस्तों को घर नहीं बुलाएगा और अपनी शाह में किसी कौनसी हाउस में गुजारेगा । उसकी इस बात से और मोहल्ले में रहने वाले लोगों ने सुकून की सांस ली । परेशान कि ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाई । अगली रात तो ठीक ठाक थी उसकी अगली रात फिर से उतना ही शोर शराबा होने लगा । दरअसल पहले से भी ज्यादा उस एकांकी पुरुष के दोस्तों ने तो उसको पहले एक एक दिन छोडकर मिलने आया करते थे । उन्होंने तय किया कि वो उसे रोज रात मैं घर तक छोडने आया करेंगे और तब उसे छोडने के बहाने और ज्यादा शोर मचाते हुए उससे बाय बाय और गुड लाइक कहते तथा वह देखा कि आदमी भी घर में शोर मचाते हुए घुसते सीढियों पर धकधक करके चलता तथा ऊपर जाकर धक धक कर जो थे निकालकर इधर उधर फेंक देता था । हमारे बगल वाले पडोसी ने उस एकाकी पुरुष को घर छोडने का नोटिस दे दिया तथा कुछ दिन बाद किरायेदार ऊपर का घर खाली करके अन्यत्र चला गया । अपने नए मकान मालिक और पडोसियों का मनोरंजन करने किसी और जगह फर्स्ट फ्लोर पर खाली अपार्टमेंट के लिए जो अगला अभ्यार्थी था वो परेशान करने वाले जाॅब बिल्कुल अलग प्रकृति का था । वो लम्बा पतला और युवा आदमी था और उसके सिर पर घने और पूरे बाल थे तथा लाल रंग कि कल मुझे थे और थोडी हल्की सी मुझे भी थी । उसकी ऍम थी जिसके पीछे मेंढक बने थे और वह सिलेटी रंग की पैंट पहने हुए था । चमडे के अलग थे और कुल मिलाकर वो कोई मिलिट्री वाला दिखाई देता था । दो । उस वो स्वभाव और भूल गुलाब मचाने वाले आदमी के बिल्कुल विपरीत था तो बहुत ऐसी वाना और नम्रता से बातचीत करने वाला था । वो जब पहली बार घर देखने आया तो उसने पूछा कि क्या उसे पेरिस चर्च में एक सीट मिल जाएगी और जब वो इस बात के लिए राजी हो गए कि वो उसे ले जाएंगे तब वो लोकल चैरिटी यानी यहाँ के खैरात खाने के बारे में जानना चाहता था । वो इसलिए कि वह अपने सामर्थ में जो कुछ भी अंशदान हूँ उन्हें दे सकें । जो सबसे ज्यादा उसके योग जो सबसे ज्यादा उसके योग्य हूँ । हमारा निकट पडोसी अपूर्णता संतुष्ट था । उस खोते ऐसा किरायेदार मिल गया था जो बिल्कुल उसी की सोच का था । एक गंभीर और अच्छे स्वभाव वाला आज सोच उसी की तरह थी जिसको किसी भी तरह कार्य होर शराबा पसंद नहीं था । और जिसको अपना रिटायरमेंट ज्यादा पसंद था उसने आपने नोटिस ऍम मन से उतार दिया और उन तमाम शांतिपूर्ण रविवार के बारे में सोचने लगा जो आपने किरायदार के साथ बताएगा, बातचीत करेगा और अखबारों की अदला बदली करेगा । वो गंभीर आदमी आ गया और उसका सामान गांव से अगले दिन आने वाला था । उसने अपने मकान मालिक से एक साफ कमीज और प्रार्थना की किताब मांगे और जल्दी ही सोने चला गया तथा साथ ही हमारे पडोसी को िदाई थी कि उसे सुबह दस बजे से पहले ना उठाया जाए क्योंकि वह सुबह का ढाका हुआ है और आराम करना चाहता था । अगली सुबह उसे दस बजे के बाद आवास दी गई । थोडी देर बाद उसे फिर आवाज दी गई लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया । अब हमारे पडोसी का माथा ठनका तो उसने दरवाजे को धक्का दिया । दरवाजा एक जोरदार धक्के से अचानक खुल गया । पर ये क्या, अंदर तो कोई नजर ही नहीं आ रहा था । गंभीर देखने वाला आदमी वहाँ से रहस्यमय तरीके से गायब हो गया था और अपने साथ शर्ट और प्रार्थना की पोथी के अलावा एक चम्मच और बिक्री चादर भी ले गया था । इस वास्ते के बाद पता नहीं क्या हुआ हमारे पडोसी ने जो अगला नोटिस अपनी खिडकी पर लगाया उसमें केवल ये दिखा था की पहली मंजिल पर अपार्टमेंट खानी है । ऐसा लगता था की अब उसे अकेले आधी को किराये पर कमरा देने में डर लग रहा था । जल्दी ही वो नोटिस भी हट गया जो नए किरायेदार आए । उन्होंने पहले तो हमारे जिज्ञासा जाग्रत की और फिर उसमें हमारी दिलचस्पी भी बढते हैं । तो लगभग अठारह से उन्नीस साल का एक युवा लडका और उसकी माता थी जो लगभग पचास वर्ष की रही हूँ । या तो उस से भी कुछ काम ही रही है । हाँ एक विधवा थी और उस लडकी ने अभी शोक के कपडे पहने हुए थे । वो लोग गरीब थे, काफी खरीद थे क्योंकि उनकी आय का एकमात्र साधन का स्तोत्र उस लडके द्वारा कुछ किताबों के नजर करने या इनके अनुवाद करने से जो पैसा उसको मुॅह प्रकाशकों से जो मिलता था वो बहुत कम था । दो लोग किसी गांव से आकर लंदन में बसे थे । इसी वजह से लंदन में उस लडके को नौकरी ढूंढने की संभावनाएं ज्यादा थी और दूसरी एक मुझे ये भी हो सकती थी कि शायद अब उस रखा और ज्यादा दिन नहीं रहना चाहते थे जहाँ उन्होंने पिछले दिन गुजारे थे । और जहाँ आप लोगों को उनकी गरीबी के बारे में पता था वो आपने बुरे दिन में भी कर से सिर उठाकर जीना चाहते थे और अपनी कमजोरियों और विपिन थे, अजनबियों को बताना नहीं चाहते थे । उनके दुर्दिन कितने कठिन थे और वो लडका उन्हें दूर करने के लिए कितना कठिन प्रयास कर रहा था इसका किसी को कुछ पता नहीं था । हर रात तीन चार बजे तक काम करता रहता था और रात में उसके खास है । पाकिस्तान में आपको रेतने तथा लकडी खडखडाने की आवाज हमें सुनाई पडती थी और दिन में हम पडोसियों को ये पता चल रहा था कि उसके चेहरे पर जो हल्की सी गैर जमीनी रोशनी यह चमक से देख रही थी वो किसी भयानक बीमारी छह रोग की और इशारा कर रही थी । जिज्ञासा से कुछ अधिक पडोसी भावना से प्रेरित होकर हमने अपना परिचय बढाना चाहते और उसने कुछ घनिष्ठता पैदा करने का प्रयास किया । हमें जिस चीज का डर था वही सच निकला । बहुत तेजी से उस लडके की तरह बचाओ गिरती जा रही थी । अगले साल के जाने फिर पसंद रहता हूँ और फिर गर्मियों में भी उसी खांसी और छाती का दर्द बढता ही गया । उस की तकलीफ बढती ही जा रही थी तथा उसकी माँ घर का खर्च चलाने के लिए सिलाई कढाई का जो भी काम मिलता था धूप कर लेती थी । पर इस सब के बावजूद भी वो कुछ फिलिंग ही यदा कदा कमा पाती थी । लडका भी लगभग बराबर ही अपने काम में लगा रहता था । वो छान छड करके मार रहा था पर फिर भी कभी कोई गिला शिकवा नहीं करता था और न ही उसकी आवाज कभी सुनाई पडती थी । शिशिर ऋतु की एक सुहानी शाम को हम अपने कृषि का मरीज को देखने गए । पिछले दो तीन दिनों में उसके रही सही शक्ति भी कमतर होती जा रही थी । वो खिडकी के पास रखे सोफे पर बैठकर शहर में डूबते हुए सूरज को देख रहा था । उसकी माँ बाइबिल पड रही थी जैसे बंद करके वो हम लोगों से मिलने के लिए आगे बढेंगे । मैं विलियम से कह रही थी उसने बताया कि हम फिर से गांव में खोली जगह चले जाएँ जहाँ उसे तासा हवा मिल सके और सेहत भी सुधर जाये तो बीमार नहीं है । बस इधर ज्यादा काम करने की वजह से वो कमजोर हो गया है । बेचारा उसने अपने आंसू छिपाने के लिए दूसरी और मुझे भेज लिया । उसने अभी भी विधवाओं वाली टोपी पहन रखी थी जिसको उसने ठीक ठाक किया और अपने आस को छिपाने की उसी कोशिश नाकाम रहे । हम सोफे के सराहने बैठ गए पर कुछ बोली नहीं क्योंकि उसकी तारवानी धीरे धीरे छानी होती जा रही थी और हमारे सामने नहीं उसकी सास तीस चलने लग गई थी । हर पांच सांस लेने पर उसके दिल की धडकन हल्की पडती जा रही थी और उसे ज्यादा प्रयास करना पड रहा था हूँ । लडकी ने अपना रेखा हमारे हाथ में रख दिया और दूसरे हाथ से अपनी माँ की बाहों को पकड लिया और छोडती से उसे अपनी और खींचा तथा जलती से उसके दलों को छू वो थोडा सा रुका । वो अपने तकिए पर फिर से लडाकर दस गया और अपनी माँ के चेहरे की ओर चाहत से बडी देर तक देखता रहा । फॅमिली हम उसकी काफी देर बाहर साकर बोली मेरी और इस तरह से मत देखो बेटा मुझसे बात करो । मेरे बेटे बात करुँ । धडका बहुत शांति से मुस्कुराया पर एक बात है उसका चेहरा ठंडा और गंभीर मुद्रा में पता लग गया ऍम मेरे प्यारे बेटे अपने आप को उठाऊं मेरी होर इस तरह मत देखो मेरे बेटे मैं तुमसे विनती करती हूँ ऐसे मत देखो । बटन भगवान में क्या करूँ वो विद्वान स्तरीय चिन्नई अपने दोनों हाथ तमाम दस दुख से जोडते हुए बोली फिर अब ग्यारह बेटा तो मैं कहाँ है? लडकी ने तमाम जोर लगाकर अपने आप को ऊपर उठाया और दोनों हाथ छोडकर बोला माँ, मेरी प्यारी, कुछ खुले मैदान में दस लाख करना । कहीं भी इस मैं गलियों को छोडकर वहाँ पर रहना चाहूंगा जहाँ पर तुम मेरी कब्र को देख सकें । पर इन बंद अंधेरी गलियों में कभी नहीं । इन्होंने मुझे बाहर डाला है मुझे फिर से जो मुझे प्यार करते हैं । तुम अपनी बातें मेरी गली में डाल दो । वो वापस बेदम होकर लुढक गया और उसके चेहरे पर एक अजीब सद्भाव आ गया जो कि न दर्द का था, न पीडा सहने का था । पर अवर्णीय मासपेशियों और चेहरे की हर रेखाओं के घर जाने का था ना आपका दूसरी दुनिया में जहाँ पर

4 वॉक्सहाल गार्डेंस

बॉक्स हॉल गार्डन दिन के समय एक समय ऐसा था जब यदि रेल के समय कोई वॉक्सहॉल गार्डन जाना चाहता था तो लोग उसे इस बेवकूफी भरे विचार के लिए तिरस्कार की दृष्टि से देखते थे । ये ऐसा ही था जैसे कि स्पीकर के बिना लोकसभा, एक गैस लैंप के बिना गैस या फिर कोई चीज जिसके सिर पर कोई बोझ या बर्तन न हो । नॉनसेंस बकवास ऐसी बात तो कभी सोची भी नहीं जा सकती थी और उन दिनों ये अफवाह भी फैली हुई थी कि दिन के समय वहाँ पर गोपनीयत बातें और गुप्त छिपे हुए प्रयोग होते रहते हैं । वहाँ दिन के समय ऐसे ऐसे रहस्यमय गोश्त के काटने वाले यानी कॉमर्स होते थे जो सुबह कि गोश्त के एक टुकडे को ऐसा पतला पतला कार्ड देते थे कि वह सारे गार्डन में बिछा दिए जा सकते थे या कुछ पेड के साथ के नीचे ये रसायनिक प्रयोग करते देखे जाते थे के वो सारे गार्डन में बिछा दिए जा सकते हैं या कुछ पेड के सारे के नीचे ये रसायनिक प्रयोग करते दिख चाहते थे कि एक निकल इसका कटोरा अपने में कितना पानी समझा सकता था तथा किसी अन्य अलग थलग कोनों में कुछ लोग पक्षियों के आने जाने का अध्ययन करते रहते थे और कुछ अन्य साधु सन्यासी टाइप के लोग किसी बडे पक्षी की चमडी हड्डी का मिश्रण बनाते रहते थे । इस तरह की पूर्ति पडती अफ्वाहों से बॉक्स हॉल गार्डंस पर एक रहस्यमय पडता पड गया था और बहुत सारे लोगों के लिए जो वहाँ दिन में जाना चाहते थे कि प्रमोद प्रमोद में खलल डाल सकता था और निसंदेह वो लोग बहुत जाने से बचना चाहेंगे । हम लोग भी इसी श्रेणी में आते थे । शाम को वहाँ पर दीप्तिमान पेडों और झुरमुट के बीच घूमना पसंद करते थे जहाँ पर दिन में इस तरह के प्रयोग चल रहे हूँ और हम वहाँ उस सफर में ढूंढना चाहते थे जो उन्होंने दिन में अपनी प्रयोगशाला में बनाया होता था । इन सब गतिविधियों के कारण शायद ही ऐसा कोई शख्स होगा जो बॉक्स हॉल गार्डेन्स दिन में जाना चाहता हूँ । हम घूमते घूमते यु ही वहाँ पर पहुंच गए और हम उन दीप्तिमान झुरमुटों के अंदर से गुजरने और उन रिवान मेंथी रिसर्च करने में लगे लोगों को देखते रहते थे और फिर उनके द्वारा भरोसे गए सांध्यकालीन भोजन की प्रतीक्षा करते थे जो उन्होंने दिनभर की कडी मेहनत के बाद बनाया होता था जो की रात की धुंधली रोशनी में और रात्रिकालीन संगीत के साथ परोसा जाता था । मंदिर से लू और कोर्स मार्स वहाँ प्रकाश में चलते रहते थे । महिलाएं गायकों के सुंदर था और बद्र लोगों की शालीनता से चलने फिरने ने हमारे दिलों को बांध लिया था । कुछ एक हजारों लाइटों ने हमारी इंद्रियों आंखों को चकाचौंध कर दिया था और मिश्रित शराब पाँच के दो चार जामों की खुमारी हमारे ऊपर चढ रही थी । पता नहीं किस बुरी घडी में बॉक्स हॉल गार्डन का मालिक हमें वहाँ दिन के समय भी गया जिसका हमें जनता की बार आप सोच रहा क्योंकि वहाँ पर केवल दोपहरिया की धूप और स्वर्गीय ऍसे नहीं कभी जा पाए थे । पर पता नहीं क्यों इस झाड में हमें वहाँ जाने पर हिचकिचाहट हुई । शायद आगे चलकर हमें जो निराशा, आशंका या इन तीनों का मिलाजुला असर था उसकी वजह से शायद हम तब तक गैर अंदर नहीं गए थे । दो तीन घोषणाओं के बाद भी जब तक की दो बैलूनों के रेस की घोषणा ने हमें अंदर खींच लिया, हमारी प्रवेश पर एक एक सिलिंग का टिकट लिया और दिए जो ऐसे ही लकडी से लगाकर बनाया गया था । हम उसे ढकेलकर अंदर दाखिल हो गए । हमने ऑफ मिस्टर और ऊपर वाले कमरे की ओर देखा और आगे बढ गए । फायर वर्क्स यानी आतिशबाजी वाले मैदान से हम झुककर आगे दूसरे और आश्चर्यचकित होकर वहाँ पहुंच गए । जहां पर ये तमाशा बैलून रेस शुरू होने वाला था । वहाँ पर एक मोरिश टॉवर और लकडी का दरवाजा था जिसपर सुर्ख लाल रंग और पीले रंग ऐसे पोता हुआ था जैसे वो किसी घडी का केस हो । यहाँ पर प्रति रात को ब्लाकिंग बहुत एयर बैलून में पढते थे । चारों तरफ आग चल रही थी और तमाम बारूद रखा हुआ था तथा वहाँ पर गोलाबारूद बनाने वाली महिला के सफेद कपडे भी रखे हुए थे जो अक्सर हवा में उडते रहते थे । फिर उसमें लाल डी ले और रंगबिरंगी प्रकाश आपने टेम्पल को रोशन करने के लिए चलवाये पर तभी घंटी बज उठी और सभी लोग धक्का मुक्की करके बाहर जाने को भागने के लिए उतावले हो उठे जहाँ से घंटे की आवाज आई थी और हमने भी पाया कि हम उन सबसे आगे भाग रहे थे जैसे कि हम जान बचाकर भाग रहे हैं । ये आवाज वहाँ से आई थी जहाँ और टेस्ट था और संगीत गायन का कार्यक्रम होना था । कुछ बेकार से दिख रहे आदमी टॉन्ट रेडी के धन बजा रहे थे । इस को देखने के लिए तमाम आदमी और सब परिवार अपने अपने खाने के डिब्बे और अब भरे मार्ग को लेकर भाग कर आए थे । उसी वक्त एक जेंटलमैन ड्रेसकोड पहने हुए एक लंबी औरत के साथ, जिसने अजीबो गरीब ड्रेस पहनी हुई थी और सिर पर एक बडा हेट लगाया हुआ था तथा उसमें सफेद पर लगा हुआ था । उन लोगों ने मिलकर एक मामूली सर डोंट गाना गाया । हम लोगों ने पहले भी उसके पोस्टर देखे थे जिसमें उसका मुंह खुला हुआ था, जैसे कोई गाना गा रहा हूँ और एक हाथ में वाइन का क्लास पकडे हुए था और बैकग्राउंड में एक मेज पर फॅस शराब परोसने वाला तथा चार आना रखे हुए थे । ये फोटो उसके संगीत रिकॉर्ड पर भी छापे रहते थे । उस लंबी महिला को भी हमने कई बार सुंदर सुंदर परिधान पहने हुए तथा अच्छे अच्छे गाने गाते हुए देखा था । इस बार भी उसका डेट संगीत बहुत अच्छा था । अब पहले उस जेंटलमैन ने उस महिला से एक सवाल पूछा एक उस महिला ने उसका कुछ माकूल जवाब दिया । उसके बाद दोनों ने मिलकर एक बहुत सुंदर मधुर गीत गाया । इसके बाद उस आदमी और महिला ने बारी बारी शेख दिया तथा दोनों एक दम से हवा में विलीन हो गए । फिर बाजे वाले भी अपने अपने साथ उठाने लगे और लोगों ने जोरों से तालियां बजाकर उनका अभिनंदन किया । इसके बाद जो कॉमिक सिंगर या आज से गायब था वो सबसे लोकप्रिय था । हमें लगा कि एक आदमी जिसने रुमाल में अपना खाना बांध रखा था, वो हस्ते हस्ते लोट पोट होकर बेहोश होने लगा था । वो कॉमिक सिंगर बहुत विनोदी स्वभाव कर रहा होगा, ऐसा हमारा खयाल था । उसमें एक भी पहना हुआ था जिससे बूढा दिखता था और उसका नाम भी एक काउंटी के नाम पर था । उसने सात अवस्थाओं के बारे में एक बहुत अच्छा गाना आया था । उसके पहले आधे घंटे में तो लोगों को शुद्ध मनोरंजन हुआ था । शीर्ष आधे घंटे के प्रदर्शन गायन के बारे में हम कुछ नहीं कह सकते हैं क्योंकि फिर हम लोग वहां से खिसक चुके थे । हम लोग वहाँ से निकलकर इधर उधर घूमते रहे पर हर जगह निराशा ही हाथ लगी । जगह जगह पे क्या हुआ था? जो दाग धब्बे जैसे दिख रहे थे और चमक नहीं रहे थे, वो उस वक्त केवल नलके पाइप की तरह दिख रहे थे जैसे कि भट्ट गए हूँ और उनमें से पानी फव्वारे की तरह बाहर आ रहा हूँ । सारी सजावट ठीक की भी की थी और जहाँ जहाँ भी हम घूम रहे थे वो पगडंडियां उदास । वह सोनी सोने से थी । एक ओपन थिएटर में रोक डांस याने रासी पर नाचने का कार्यक्रम चल रहा था । नियुक्तिको के असल में सितारें वहाँ पोशाकों पर सूरज की रोशनी चमक रही थी जैसे किसी तरह खाने में कंट्री डांस में हो रहा हूँ । सब मिलाकर कुछ कुछ होता है । ऐसा प्रतीत हो रहा था पता हम वापस आतिशबाजी या फायर वक्त ग्राउंड में चले गए जहां लोगों की छोटी मोटी भीड मिस्टेक ग्रीन की अपेक्षा कर रही थी । कुछ मुट्ठीभर लोग एक पूर्ण दया भरे हुए बालू मॅन बारी को रोकने के लिए उतावले हो रहे थे । बैलूर एक कार के साथ जोड दिया गया था । अफवाह थी कि उसने एक लॉर्ड छोडने वाले थे । भीड असाधारण से उत्सुक और बातचीत में व्यस्त नहीं । एक आज जिसमे फिटेड ब्लैक कलर के कपडे पहने थे । गंता सच चेहरा था और महिला कुछ महिला लाल बॉर्डर मना गोलू बंद लगाया हुआ था । बारी बारी से सबसे बात कर रहा था तथा सबके सवालों का जवाब दे रहा था । वो आपको बांधे हुए खडा होकर बैलून को बडे ध्यान से देख रहा था और उस हवाबाज के लिए प्रशंसा से भरा हुआ था । उस आदमी हवाबाजी में हरे रंग के कपडे पहने हुए थे । ये उसका दसवां ऊपर जाने का मौका होगा और उसे अभी तक कभी भी दांत का दर्द तक नहीं हुआ और ना अगले सौ सालों में कभी होगा । जब कभी भी हम इस तरह के प्रति भाव मान व्यक्ति से मिले तो हमें उसे खूब प्रोत्साहित करना चाहिए । उसके इस तरह से खूब जोशीले भाषण देने की वजह से भीड में सोचा जरूर कि ये कोई दया भिवाडी है । हाँ सर, आप बिलकुल सही बात कर रहे हैं । एक आदमी जो अपनी पत्नी, बच्चों, माँ सालियों और अन्य कई लोगों के साथ खडा था । उसने कहा मिस्टर ग्रीन एक बहुत सधे हुए आदमी हैं और उनके बारे में कोई राय या आशंका नहीं है । डर और भय उस छोटे आदमी नहीं कहा क्या ये बहुत बढिया बात नहीं है कि वो और उसके पत्नी आज घटता ही उडने जा रहे हैं और उनका बेटा तथा पत्नी एक दूसरे बैलून में उडने वाले हैं और वो सब दो तीन घंटे में बीस तीस मील उड जाएंगे और फिर उसके बाद वो वापस लौट कर आएंगे । मुझे पता नहीं ये वैज्ञानिक तरक्की कहाँ जाकर रुकने वाली है । यही चीज मुझे परेशान किए हुए हैं । अब जैकेट पहने पहुंचते भी आपस में काफी बातचीत करने लग गई थी । लेडीज किस बात पर इतना हस रही है सर? उस छोटे आधी ने सम्मानपूर्वक सवाल पूछा जी, मेरी बहन मेरी है । छोटी सी लडकी ने कहा । और वो ये कह रही है कि लॉर्डशिप को कुछ अखबारों में जाते वक्त कोई डर तो नहीं लगेगा और वह कहीं उसमें से बाहर निकलकर तो नहीं जाएंगे । तो मैं कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है । आराम से रहो । उस छोटे आठवीं नहीं कहा । यदि वो बिना अनुमति के एक इंच भी बाहर निकल कर आए तो मिस्टर ग्रीन उन्हें पकडकर फिर से ले आएंगे । वो टेलिस्कोप से देख लेंगे और बिना समय लगाए उन्हें बास्केट यानी टोकरी में बैठा देंगे और फिर उन्हें ऊपर भेज देंगे । जब तक कि वह नीचे नहीं आ जाते हैं । क्या वो आ जाएंगे? कुछ संदेह से एक अन्य आदमी ने पूछा वो जरूर लौटाएंगे । उस छोटे आदमी ने कहा, और आपको इस बारे में फिक्र करने की जरूरत नहीं है । मिस्टर ग्रीन की अगले वक्त पर काम करती है और कुछ भी गडबड नहीं होती । कभी उसी वक्त सबका ध्यान उस फोर गया जहाँ उडान की तैयारियाँ हो रही थी । दूसरे बैलून को भी कार के साथ जोड दिया गया था और दोनों गाडियों को बैलोन के साथ पास पास खडा कर दिया गया था और अब मिलिट्री बैंड ने जोर जोर से अपने बैंड बाजा बजाना शुरू किया जिसको सुनकर भीरू से भी रू आदमी को भी जोश आ जाए और फिर भी कुछ ऐसे लोग थे जो इस शोर शराबे से दूर चले जाना चाहते थे । फिर मिस्टर क्रीम सीनियर और उनकी पत्नी एक कार में बैठ गए तथा उसके बाद मिस्टर ग्रीन जूनियर और उनकी बीवी दूसरी कार में बैठ गए । फिर दो बालोन ऊपर आसमान में उड गए और हवा में छोडने वाले यात्री अपनी अपनी बास्केट में खडे हो गए और बाहर जमीन पर खडे भीड जोर जोर से शोर मचाकर तालियाँ बजाने लगे । दो जाॅन जो उसके पहले कभी उन्हें नहीं थे तो टोकरी में खडे खडे अपने झंडे हिलाने लगे जिससे लोगों को ये लगा कि वह नर्वस नहीं थे पर रस्सियों को जोर से पकडे हुए थे और दोनों बैलून धीरे धीरे हवा में ऊपर उठके चले गए और बाद में तो वह आसमान में एक धब्बे यह छोटी चिडिया से नजर आने लगे । पर वो छोटा आदमी अभी भी यही कहीं जा रहा था कि वह उनके सफेद हैट को अभी भी देख पा रहा था । बाहर से अब भीड छटने लगी थी । लडके! बच्चे इधर उधर मैदूल बेलूर चिल्लाते हुए दौड रहे थे । बाहर सडक पर लोग दुकानों से निकल आए थे और अपनी गर्दन पीछे की ओर ऊंची करके उन दोनों बार की ओर देख रहे थे जो अब केवल काले धब्बों की तरह दिख रहे थे । फिर जब वह दिखना बंद हो गए तो लोग अपनी अपनी जगह दुकानों और मकानों में वापस चले गए । अगले दिन अखबारों में इस घटना के लोगों के ऊपर होने का समाचार जोर शोर से छापा । जनता को बताया गया की कैसा वो एक बहुत खूबसूरत दिन था पर केवल मिस्टर ग्रीन की स्मृतियों को छोडकर किससे वो आसमान के ऊपर बादलों के बाद चले गए । जब उनका दिखना बंद हो गया और किस तरह से वास्को में बैलून का प्रतिबंध अनोखा लग रहा था । उसमें सूरज एक गिरोह से परावर्तन का कमाल था और वाता वरन गर्मी वह चक्र हवाओं का कैसा हमें सम्मान करना चाहिए । समाचारों में ये भी पडी दिलचस्प खबर थी कि कैसे एक आदमी ने जो नाव में बैठा था वो बारी को देखकर आज चर्यचकित होकर बोला । ऍम जैसे मिस्टर गृह जूनियर ने बताया कि उनकी आवाज बैलून में उठ रही थी । आवाज सतह से कार में प्रतिध्वनित हो रही थी । इसके बाद भी यही बताया गया की अगली बुधवार को फिर एक बार आसमान में उडान भरी जाएगी । यदि हम तारीख को बताना भूल गए हैं तो हमें अगली गर्मियों तक इस अभियान की प्रतीक्षा करनी होगी ।

5 अपराधियों की कोर्ट-कचहरी

अपराधियों की कोर्ट के चाहे हम अपने स्कूल के उन दिनों को नहीं भूल सकते जब हम लडके, नियुक्ति चील के बाहर से जाते हुए उसे भयमिश्रित सम्मान से देखते थे । उसकी खुरदुरी मोटी दीवार नीचे िंचाई के भारी भारी तरफ से बढेगी । बयान अगर देखते थे उन प्रवासियों को देखकर ऐसा लगता था जैसे तो इसको देश से ही बने हैं कि वह लोगों को बंधक तो आने दे पर एक बार उसके अंदर जाने के बाद वो लोग कभी बाहर ही ना निकल पाएं । पैथियों को पहनाने वाली हथकडियाँ बेडियाँ महान लडकी रहती थी । ऐसे हम समझते थे कि यकीनन असली लोग है की ही होंगी और वहाँ वो इसलिए नहीं है ऐसे कि जरूरत पडने पर जल्दी से फॅमिली को पहला दिया जाए । हम सोचते कभी नहीं सकते थे कि किस प्रकार से वहाँ पर सामने बैठे कोचवान । आपस में हर वक्त हसी मजाक करते रहते थे और तमाम समय दारू पीते रहते थे । हम घूमते फिरते थे, उस जगह पहुंच जाते थे जहां लोगों को कोडों से पीटा जाता था और मैदान के उस बार बहुत जगह चारों पर हत्या आदि जैसे जघन्य अपराध करने वालों को फांसी देने के लिए टिकटी पर लगाया जाता था । और अन्य तमाम खौफ ऍम रखे रहते थे तथा वहाँ पर एक दरवाजे पर एक नेम प्लेट लगी हुई थी जिसपर मिस्टर केंद्र खुदा हुआ था । ये हमारी समझ से बाहर था की ये विशिष्ट अधिकारी कहीं और भी रह सकता था । इस तरह के बचकाने सपनों के दिन गुजर गए थे और इसके साथ ही इसी तरह के तमाम खुशमिजाजी की उन ऊलजलूल विचार पर अभी भी हमारे अंदर उन मौलिक भावनाओं के कुछ अब शेष बची हुई थी । और अब भी जब हम उस कारागार के सामने से कुछ करते थे तो एक बार ऐसा काम उठते लंदन में ऐसा कौन सा राहगीर होगा ही चाहती हूँ । कभी भी उस खानी बाढ के अंदर न देखा हो जिससे कैदियों को इस अंधेरे और उदास कैदखाने के अंदर ना ले जाया जा रहा है और उसने हूँ क्या सब भरी निगाहों से ना देखा हूँ । भारी भारी दरवाजे जिसमें लो ही की बढती चली थी और जिसके ऊपर लोगों के बहुत अच्छे लगे थे और इसके ऊपर आप मुश्किल से ही इसके अंदर झांककर नीचे देख सकते थे जहाँ पर मत सूरत समाज में खूब चौडी है । पहले ब्लेयर कर मान लिए और जिसने एक पूरा कोर्ट पहना हुआ था जो कि लंबे कोर्ट से थोडा छोटा था और स्पोर्ट्स जैकेट से थोडा बडा था और उसके हाथ में एक बहुत बडी भारी से चाहते हैं और सारे आज पर्याप्त फॅमिली हुए और वहाँ से उस वक्त गुजर रहे हैं जब गेट खोला जा रहा हूँ । तब फिर आप उस निवास के पीछे एक और गीत देख सकते थे जो की बिल्कुल पहले वाले भारी की तरह ही होता था और वहाँ पर और तीन चार चाबी वाले सिपाही आपके चारों और बैठे नजर आ जाते थे । जिनकी घोषणा भी बिल्कुल पहले वाले चाबी वाले सिपाहियों की जैसी थी । उस की रोशनी में सफेद भी सर आगे हुए । भवन में ये सब चीजें दिख जाती नहीं । हम मिसेस फ्राय का बहुत आदर करते थे पर निश्चय हैं उनको मिसिस वेटलिस्ट से ज्यादा रोमांटिक चीजें, उपन्यास, कहानियाँ लिखना चाहिए थी । हम कुछ समय पहले आराम से खराब, खराब पुराने ओल्ड बेली गेट के पास से गुजर रहे थे जबकि तो एक से देखने वाले गेट को एक्टर की सिपाही नहीं खोला । हम यूज जल्दी से पीछे की और मुझे और देखा कि दो व्यक्ति सीढियों से नीचे उतर रहे थे । अपने को वहाँ पर रुखकर उन्हें देखने से रोक नहीं पाए । उसमें से एक तो उम्रदराज और अच्छी दिखने वाली महिला थी और उसके साथ साथ चौदह । यह पंद्रह साल का एक लडका भी था और जोर जोर से रोज जा रहे थे और उसके हाथ में एक बंडल भी था । लडका उसके पीछे पीछे थोडी दूरी पर चल रहा है और आपका उसका अपना बेटा था इसको पाल पोस कर बडा करने के लिए इसके बिना तो क्या किए तमाम कष्ट झेले थे उस तरह की उम्मीद पर की जब वो बडा होकर उसको इतना कष्ट झेलते हुए देखते हैं कुछ कमा धमाकर उसको कुछ खेला मिला सकेगा तथा स्वयं भी ठीक से रहेगा । पर अब ऐसा लग रहा था जैसे कि वो गलत संगत में पड गया था । काइल बने या आलस ने उसे अपराध की दुनिया में ढकेल दिया था और वो किसी छोटी मोटी थोडी के कोर्ट में पेश किया गया था । काफी दिन जेल में रह चुका हूँ तथा धुआँ थोडी सी और सजा काटने के बाद आज सुबह उसे देखा क्या जाना था ये उसका पहला गुनाह है और उसकी गरीब बूढी मां इस उम्मीद से खेल के दरवाजे पर उसका इंतजार कर रही थी । वो उसे घर ले चलने के लिए प्रेरित करेगी । हम उस लडके को कभी बहु नहीं सकते थे और सीढियों से बहुत सतर्क होकर एक साहस और दृढ निश्चय के साथ उतर रहा था और अब सिर्फ को बार बार बडी बहादुरी से हिला रहा था । वो लोग कुछ कदम स्थल कर रहे हो गए । माने उसे कंधे पर पीडा बहुत अनुनय करते हुए हाथ रखा और लडकी ने अचानक अपना सिर्फ मना करते हुए उठाया । वो एक बडी चमकदार सुबह थी और सूर्य की खुशनुमा रोशनी में हर चीज मरीज सा सूत्री वहाँ अच्छी लग रही थी । लडके ने अपने चारों और आश्चर्य होकर देखा जी ल्कि उदास और मेरी कोर्ट ऍम बहुत दिनों बाद निकला था । शायद उसकी माँ की दुर्दशा ने उसके ऊपर कुछ असर डाला । यह संभव था । इस बात का असर हुआ । वो भी एक खुशमिजाज बच्चा था और केवल मौका ही उसकी एकमात्र तो और उस की सबसे अच्छी साथी थी । इन बयानों से वो फूट फूटकर रोने लगा और जल्दी से एक हाथ से अपना चेहरा ढाक कर और दूसरा हाथ अपनी माँ के हाथ में रख कर तो उसके साथ बाहर चला गया । ऍम वर्ष हम ओल्ड बेली के दोनों कोर्ट में चले गए । पहली बार जो आदमी वहाँ जायेगा उसे ये बात जरूर नजर आएगी वहाँ कितनी शांति से और पूरे जिम्मेदारी के साथ बहुत सारा काम चलता रहता था क्योंकि बिना किसी से लगाओ होता हूँ प्रत्येक ट्रायल । क्या मुकदमा महज एक औपचारिकता सी लगती थी और एक मिसेस की तरह और से निपटाया जाता था । वहाँ पर कायदा कानून बहुत दिखाई पडता है और दया करुणा का सर्वथा आभाव प्रतीत होता था । लोगों को दिलचस्पी तुम बहुत होती थी, परंतु सहानुभूति नहीं । वहाँ पर जज बैठे होते थे जिनकी मान प्रतिष्ठा से सब लोग परिचित होते थे और जिनके बारे में हमें ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं थी । फिर वहाँ पर केंद्र में लॉर्ड मेयर बैठे रहते थे, जो उतने ही शांत देखते थे । इतनी उनके सामने रखा भारी सर गुलदस्ता और वो अपनी सरकारी शानोशौकत के साथ वहाँ विराजमान रहते थे । फिर महान शरीफ बैठे होते थे, जिनकी भी शानशौकत लॉर्ड मेयर के बराबर ही होती थी । वहाँ पे सिस्टर या वकील भी होते थे जो अपनी अपनी जगह और अपनी राय से काफी प्रतिष्ठित होते थे । इतना ही नहीं हूँ, दर्शकगण भी होते थे जिन्होंने वहाँ पर आने के लिए कुछ फीस भरी होती थी और जो सोचते थे कि ये सब तमाशा उनके मनोरंजन के लिए किया गया था । अब आप कोर्ट में बैठे सारे समूह पर एक निगाह डालिए तो आपको पता चलेगा कि कुछ लोग तो सुबह हमारे बढने में मशहूर थे । कुछ अन्य लोग धीरे धीरे आप वास्तव फुसफुसाकर बात कर रहे हैं और कुछ अन्य लोगों को तो आप उम्र थे यह सोते ही पाएंगे । इन सब लोगों को देखकर यह लगता था कि जो मसला किसी का भाग्य आर्मी के लिए जीवन मृत्यु का मामला हो सकता था वो इनके लिए कुछ खास मायने नहीं रखता था । पर एक छड के लिए आप अपनी नजरें कठघरे में खडे तथाकथित अपराधी की और नहीं चाहिए तो आपको उसकी दर्दनाक स्थिति का पता चल जाएगा । आपको पता चलेगा कि कितनी बेचैनी से वहाँ पिछले दस मिनट से खडा था और उसके सामने जो झाड घूस आदि रखे थे उनसे कितनी तरह के भोकाल चित्र बना रहा है । उसके चेहरे कि सिर्फ पडे पीने को लूट करिए । खासकर जब कोई गवाह उसके सामने पेश किया जाता था और किस प्रकार से वो अपनी स्थिति बदलता था और सीधे हुए मुंह बात हैं को अपने बुखार वाले हाथों से पूछता था । जब की उसकी इसकी सुनवाई खत्म हो जाती थी ऐसे उसे इस बात का था कि ज्यूरी को उसके बारे में सबसे खराब बात है । पता नहीं उसके पक्ष के वकील ने उसके बचाव में अपना बयान पूरा किया । चाॅस पूरे केस और गवाहों के बयान का सारा बताया और कैदी जूरी की और ऐसी आशा भरी निगाहों से देखता था जैसे कि कोई प्राणी की आशा खो बैठा मरीज अपने डॉक्टर की और देखता है शायद हो उसे किसी प्रकार से बचा सके । प्यूरी ऑफिस में हल्की आवाज में एक दूसरे से परामर्श करते हैं और आप किस्सा मुश्किल है । उस आदमी के दिल की धडकन होंगी सुन सकते हैं जो यहाँ बेचैनी से एक फूल की ठंडी को जवाने लगता था और फौजी कोशिश करता था कि उसके चेहरे की बेचैनी बाहर न चलके वो लोग अपनी अपनी जगहों पर बैठ जाते थे और एक सन्नाटा सा छा जाता था । अच्छा फोर ऍफ का फैसला सुना था है अपराधी है गैलरी में बैठी हुई और तो में से एक चीज होती हैं कि कैदी उसको और देखता है जहाँ से आवाज आई थी कैदी को जेल होती से कटघरे में से निकाल कर बाहर की ओर चल पडता था । कोर्ट का कलर एक चपरासी को आदेश देता है की चीखने चिल्लाने वाली और आपको फौरन अदालत के कमरे से बाहर कर दिया जाए और फुल नया किस ले लेता है जैसे कुछ हुआ ही न हो । इसकी तुलना में जो कोर्ट में जो बाल अपराधियों के मुकदमें और दलीलें होती हैं वो बहुत ही जाना कि भरी प्रतीत होती थी । उदाहरण के तौर पर एक तेरह साल के लडके पर ब्रिटिश नागरिक की जीप काटने का है और उस पर अदालत में कार्रवाई की जा रही है । उससे कहा जाता है कि वह अपनी सफाई यानी दोष होने पर वहाँ पे तो फिर जूरी के सदस्यों पर पढाई करता है तथा कहता है कि सारे गवाहों ने कोर्ट के सामने गलत या झूठा बयान दिया है और उनके ऊपर फोर्जरी का आरोप है तथा सारे पुलिस वाले उसके खिलाफ थे । पर इस बयान के सही होने की चाहे जितनी भी संभावना हूँ कोर्ट इसे मानने को तैयार नहीं है और फिर कुछ इस प्रकार का ऍम बहुत होता है । कोर्ट कहता है क्या तुम्हारे पास कोई ऐसा गवाह है जो तुम्हारे चरित्र के बारे में सत्यापन कर सके? लडका जवाब में बोलता है जी माय लॉर्ड कोर्ट के बाहर पंद्रह गवाह खडे हैं और वो कल भी सारा दिन आपके बुलावे का इंतजार करते रहे । जब की उन्होंने बताया था कि कल मेरा ट्रायल होने वाला है । कोर्ट बोला उन गवाहों के बारे में पता करो और बुला उन सबको एक्टिंग, ॅ और मोटा सा टहलकर बाहर जाकर आवाज लगता है कि कपडा हासिल हूँ और उसकी आवाज धीरे धीरे हल्की होती जाती है । जैसे जैसे वो सीढियाँ उतरता नीचे आंगन में जाता है, पांच मिनट है वो गरम होता हूँ । वापस आया और मोटी सी घर खराब थी । आवाज में बोला जो उसे पहले ही पता था साहब वहाँ पर ऐसा कोई काम नहीं है । इस पर बोलने का जोर जोर से चीखने चिल्लाने और आपने अठखेलियों से अपनी आंखों कोरा गाने लगा जैसे कि वो रो रहा हूँ और आंसू पूछ रहा हूँ और अपनी बहुत था तथा गोले पाँच के आहत होने का नाटक करने लगा । ज्यूरी ने उसी वक्त उसे अपराधी करार कर दिया और वो फिर से आंसू बहाने का नाटक करने लगा । मैं द्वारा पूछे गए एक सवाल के उत्तर में जेल सुपरिटेंडेंट ने बताया, ये लडका मेरे चार पहले भी दो बार जेल में रह चुका है । इस बात पर उस लडके ने कहा सर सिर्फ मेरी मदद की थी । मैंने इससे पहले कभी कोई जो नहीं क्या सही कह रहा हूँ सर सब कभी भी पहले मैंने कोई गडबड नहीं किया आज तक नहीं किया । ये सब इसलिए है कि मेरा एक जोमा भाई है और वह गडबडी करता है और ये मुझे उसी को समझकर पकडवाए । मैं सही ऍम मुझे और उसमें कोई फर्क नहीं है और किसी को ये फर्क पता नहीं चलता उसकी इस चीज का भी डिफेंस की अन्य चीजों की तरह कोर्ट पर कोई असर नहीं पडा और उसे सात साल की सजा सुना दी गई । अपना गुस्सा जताने के लिए वो कटघरे में से अपने आप बाहर निकला और बल्कि पुलिस वालों को जबरदस्ती उसे वहाँ से पकडकर ले जाना पडा । उसको इस बात की बहुत खुशी थी वो जिसको जितना परेशान कर सकता था उस ने कर लिया । हाँ,

6 क्रिसमस डिनर

कॅश क्रिसमस के समय शायद ही कोई ऐसा आदमी हो का जिसके मन में क्रिसमस के समय हर्षोल्लास ना हो । जिस के मन में बीते साल के क्रिसमस के समय की कुछ खुशनुमा यादव ना हूँ । कुछ लोग तो ऐसे भी होंगे जो ये भी कहते नजर आ जाएंगे कि अब क्रिसमस के तलवार में वो बात नहीं रही जो पिछले सालों में हुआ करती थी । आने वाले सालों में कुछ आशाएं जो पिछले सालों में जकी थी छेड यह बंद हो गई हैं । अब ये है कि वर्तमान में उनके पास केवल अच्छी यादें और काम आए ही रह गई थी । उनको याद आ रही थी जब वो अपने खस्ताहाल खब्ती दोस्तों को बडे दिन पर खाना खिलाते थे और आप वही लोग इस तंग हाली के दिनों में उन से नजरें चुराते हैं । इस तरह के बस खयालों पर ध्यान नहीं देना चाहिए । इस दुनिया में कुछ ही ऐसे आदमी होंगे जो साल के किसी भी दिन ऐसे खयालों का सामना नहीं करते थे । वो उस साल के तीन सौ पैंसठ दिनों में या मस्ती में दूसरे दिनों को याद नहीं करते थे । परन्तु अपनी कुर्सी, फायर प्लेस यानी आदिश दान जहाँ आग जल रही होती थी, वहाँ पर खींच कर ले आते हैं । आपने गिलास को भी भर लेते हैं और घर में चारों ओर गीतिका थे । बिछडने लगने और यदि आप का गिलास पंचमेल शराब से मैं कर रहा था इसके बजाय की चमकती हुई वा इनके तब भी आप अपने चेहरे पर खुशियां सजोए रखिए और उसको जल्दी से खाली करके दूसरा ग्लास भर लीजिए और जो आपको पुराने गाने, क्रिसमस के रोगी आदि याद हूँ उन्हें गाना शुरू कर दीजिए और ईश्वर को धन्यवाद दीजिए कि इससे कम स्तर या बहत्तर कोई सूरत नहीं पैदा हुई । अपने बच्चों के यदि आप के घर में हूँ तो उनके खुशनुमा चेहरे देखिए जब वो आगे गिर गेट बैठे हैं । हो सकता है की एक छोटी सी सीट खाली हो जो कि पिता के चेहरे पर खुशी ला देती थी और माँ माता की झांकी गर्व से फूल जाती थी और वो अब वहाँ नहीं हूँ । आपने पीते हुए दिनों को याद करिए । उस छोटे से बच्चे के बारे में सोचिए जो पिछले साल धूल मिट्टी में खेल रहा था । वो अब बडा होकर आपके सामने छोटी सी कुर्सी पर बैठा उसे इधर उधर घूम आ रहा है जिसके बच्चों के तरह गुलाबी गाल है और उसी खुशी भरी आंखों में बालसुलभ भोलापन हो ईश्वर प्रदाय आपने प्रदानों को गिनी जो हर आदमी के पास कम वेश होते हैं ना कि आप अपने दुर्भाग्य बारे दिनों को याद करें । खुश कुमार चेहरे और संतोषपुर दिल से आप अपने गिराज को फिर से भर लीजिए । मैं शर्त लगा सकता हूँ कि आपका क्रिसमस बहुत ही हर्षोउल्लास से बारा होगा और नववर्ष तो और भी खुशनुमा होगा । कौन ऐसा आदमी होगा जो इस समय वातावरण में व्याप्त हँसी खुशी के माहौल के प्रति उदासीन हो सकता है? क्रिसमस के एक पारिवारिक पार्टी हम जानते हैं कि इससे ज्यादा आनंद भूति कोई अन्य चीज नहीं प्रदान कर सकती । क्रिसमस के मौसम में एक जादू सा हैं । आपस की छोटी मोटी लडाइयां सब लोग भूल जाते हैं । वो छोटी मोटी एशिया की चीजें नहीं की । वो अपने भीतर दिलों में छुपाए थे । सामाजिक और मिलने जुलने की भावनाएं उभरकर ऊपर आती है । बाप बेटे और भाई बहनें जो कुछ समय पहले एक दूसरे से नजरें चुरा रहे थे या इस तरह से देखते थे, जैसे उन्हें कभी जानते ही ना हूँ । इससे बाहर के मौसम में आपने दुश्मनी भुलाकर एक दूसरे से प्यार से गाली मिल रहे होते थे । वो कृपालु और नया लो दिल जो एक दूसरे से मिलना तो चाहते थे पर एशिया वर्ष एक दूसरे से खींचे खींचे रहते थे । वो आप एक दूसरे से पुना जुड गए हैं । क्या ऐसा क्रिसमस साल भर चल सकता था? और क्या पूर्वग्रह और भावावेश जो हमारे अच्छे स्वभाव को तबाह कर रखते हैं, वो उन सब लोगों के प्रति फिर कभी ओवर उभरकर ऊपर नहीं आएंगे जिनके लिए वो हमेशा से अजनबी बन जाएंगे । क्रिसमस पार्टी जिसका हम यहाँ जिक्र कर रहे हैं वो साल में एक बार केवल सब रिश्तेदारों का एक समय में घर में इकट्ठा होने ही मात्र नहीं है, जो कि एक या दो हफ्ते के नोटिस पर एक मात्र हुए होंगे जिनका पहले से कोई रिवाज नहीं था या पिछले साल नहीं मनाया गया था और अगले साल होने की भी संभावना नहीं नहीं । इस साल में सारे रिश्तेदार जिन तक पहुंचा जा सकता था, चाहे वह जवान हूँ, वृद्ध अमीर हो या गरीब और सारे बच्चे किसी दिन का लगभग दो माह पहले से इंतजार करने लगते थे । पहले ये मिलन दादा दादी के घर होता था, पर अब दादा दादी जी बूढे हो गए हैं और दादी भी बोर ही और निर्मल हो गई हैं तो उन्होंने इस पार्टी की जिम्मेदारी अंकल जॉर्ज पर छोड दी थी और अब स्वयं भी जॉर्ज चाचा के घर पर भ्रष्ट बनाने के लिए गए थे । पर दादी जी इस मौके के लिए तरह तरह के व्यंजन बनाकर चाचा जॉर्ज के जहाँ भेज देते थे राजा जी खुद भी लडकी से पढ सकते हैं । घर से काफी दूर न्यूगेट मार्केट जाते थे जहाँ से वो एक्टर की खरीदते थे और फिर एक गोली उसे जॉर्ज अंकल के घर पहुंचाता था । घर पर वह विजय मुद्रा में पहुंचते थे तथा इस बात पर जोर देते थे कि उसे पोर्टर को एक गिलास शराब पिलाकर के ही विदा किया जाए और अंकल जॉर्ज तथा परिवार के अन्य सदस्यों को खासकर मेरी और जॉर्ज को क्रिसमस कहकर विदा करें । जहाँ तक दादी माँ का सवाल था वो बहुत गुप चुप तरीके से पर इस बात की तनख्वा तो फैल ही जाती थी कि उन्होंने सारे नौकरों के लिए एक नई टोपी खरीदी थी जिसमें गुलाबी रंग का राॅबिन बना था और सब बच्चों के लिए छोटी मोटी चीजें जैसे पेंसिल बॉक्स, किताबें, पैन नई आधी उपहार में देने के लिए खरीदे थे और साथ ही वह पेस्ट्री बनाने वाले को अपने पुराने ऑर्डर के अलावा डिनर के लिए धार जिलों में पाए और एक बडा साथ नाम के बच्चों के लिए बनवा दी थी । क्रिसमस की पूर्व संध्या पर ताजिमा हमेशा ही बहुत खुश और जोश खरोश में रहती थी और सब बच्चों की तरह तरह की एक्टिविटी यह कामों में उलझाए रखती थी जैसे कि क्लम आलोचकों को इकट्ठा करना तथा शाम को इस बात पर जोर देती थी कि शाम को जॉर्ज अंकल कोर्ट उतारकर किचन में आए और आधे घंटे तक चूल्हे पर पक रही बोर्डिंग को अवश्य काम से चला दे रहे हैं जो कि अंकल जॉर्ज बहुत खुशी खुशी करते थे और बच्चे तथा नौकरों को इस में बडा मजा आता था । शाम का खाना पीना और फिर आंखमिचोली के खेल से अंत होता था जिसमें दादा दादी इस बात का ख्याल रखते थे कि वह जल्दी से पकडा लीजिए जाए जिसमें उन्हें अपने हाथ की सफाई दिखाने का मौका मिल सके । दूसरे दिन सुबह वो वृद्ध दंपत्ति, दादा दादी तमाम बच्चों को साथ लेकर चर्च जाते थे और ऍफ जॉर्ज को घर पर पीछे साफ सफाई करने के लिए छोड देते थे और अंकल जॉर्ज बोतलों को डाइनिंग रूम में ले जाए और सबसे कॉप्स क्यूकि धुलवाया करते थे तो सब लोगों के रास्ते में आते जाते रहते थे । जब छाछ पार्टी लंच के समय घर लौट दी थी तब लाख जी अपनी जेब से मिस लांटों की एक नहीं अपनी जीव निकालते थे और बच्चों से कहते थे कि वो उसके नीचे से गुजरें और अपनी छोटी कजिन सिस्टर्स को किस करें । ये एक ऐसी कार्रवाई थी जिसे दादी माँ पसंद नहीं करते हैं । पर इससे दादा जी को बहुत संतोष मिलता था और उन्होंने बताया कि जब वो तेरह साल तीन महीने के थे तो उन्होंने ऐसे ही एक फॅमिली के नीचे उन्होंने दादी को पहली बार किस किया था । जिस बात पर बच्चे खुश होकर जोर जोर से तालियां बजाते थे और अंकल जॉर्ज भी खूब मदद होते थे और दादी माँ भी बहुत खुश होती थी और बताती थी कि दादा जी एक बहुत ही ढेड कुत्ते की तरह थे जिस पर बच्चे जोर जोर से हंस कर तालियां बजाते थे तथा दादा जी नहीं उसमें खुशी खुशी पूरे जोर से शामिल हो जाते थे । पर ये सब तो कुछ भी नहीं था । इसकी तुलना में जब दादी माँ अपने इस लिट्टी रंग के गांव पहले और ऊंची टोपी लगाए तथा दादा जी अपने सुन्दर से फील वाली कमीज पहने हैं और तमाम छोटे मोटे बच्चों और उनके कजन्स के साथ आग के सामने बैठकर आने वाले मेहमानों का इंतजार कर रहे होते थे । अचानक एक भी दरवाजे के सामने आकर रूकती है तथा अंकल जॉइंट जो खिडकी पर खडे हो कर उन की राह देख रहे होते थे वो खुशी से चिल्ला उठते हैं । ये देखो बच्चे आ गई और सब बच्चे खुशी से चिल्लाते, सीढियों से आपाधापी करते हुए नीचे दरवाजे की और भागते और चाचा रॉबर्ट वह चीन को सब लोग ऊपर लेकर आते । उनके साथ उनका छोटा बेटा, उनके साथ उनका छोटा सा बच्चा और उसकी आया भी होती थी । सब बच्चे उस छोटे से शिशु को देखकर बोलते । अरे कितना संदर है और बाहर बार मना करने के बाद भी सारे बच्चे उसका गाल चूम रहे थे या छू रहे थे तथा दादी माँ अपनी बेटी का चुंबन लेती हैं । और अभी पहले आंगतुक का स्वागत समारोह और शोरगुल समाप्त भी नहीं हुआ था कि कुछ और चाचा चाची या तथा भतीजी भतीजियां आना शुरू हो जाते हैं । जवान भतीजे भतीजियां एक दूसरे से फ्लर्ट करना शुरू कर देते हैं और उनकी देखा देगी छोटे काॅल्स लडके लडकियां आपस में ही हंसी मजाक करना शुरू कर देते हैं और उसके बाद सब कुछ हंसी शोरशराबे और भूल कडाहों की आवाज में गुम हो जाता है और जब शोर में थोडी सी कमी आती है तो बाहर साहब पर खुलने वाले दरवाजे पर हल्के से दस्तक दो बार खटखट सुनाई पडती है । सबलोग निगाहें उठाकर दरवाजे की ओर देखते हैं कि आप कौन आया? दो बच्चे जो खिडकी पर खडे बाहर देख रहे थे उन्होंने बनाया ये तो बेचारी मार्ग्रेट आंटी हैं । इसके बाद जॉर्ज अंकल उठकर नीचे उनका स्वागत करने दरवाजे पर गए । अब दादी माने उठकर अपने ड्रेस को ठीक ठाक किया तथा आपसी पर कडा रुख अख्तियार कर दिया क्योंकि मार्गरेटा ने एक गरीब लडकी सिर्फ दादी की आज्ञा के बगैर शादी कर ली थी । और जैसे कि गरीबी अपने आप में एक बडी सजा नहीं थी, उसके घनिष्ठ रिश्तेदार और दोस्तों ने उसका बहिष्कार ही कर दिया था और उस से मिलना जुलना बिल्कुल बंद कर दिया था । पर क्रिसमस जैसे तेहार के समय इस तरह की कडवी भावनाएं ऐसे पिघल गई जैसे कि नदी या झील के ऊपर जमी बर्फ की परत सूरज की किरणें पढते ही पिघल जाती हैं । एक माता पिता के लिए अपने भी और अनुशासनहीन या आज्ञापालन ना करने वाले बच्चों को कुछ समय तो उसकी गृह जनता के लिए सजा के तौर पे अकेले कमरे में उन्हें बंदूक कर सकते हैं पर हमेशा के लिए दो उसे छोडा नहीं जा सकता । उसे इस प्रकार से जो बच्चा एक घर में पला बढा है और आतिश दार या फायर प्लेस के सामने बैठ कर सब के साथ आग से की हैं और कक्षक तथा हँसी मजाक किया है उसे हमेशा के लिए अपने परिवार से कैसे अलग कर सकते हैं । वो लडकी जो हमारे ही घर में पली बढी है और फिर युवा हुई तथा विवाह करके चाहे अपनी मर्जी से ही किया हूँ, अचानक चली गई । उसे हम एकदम से कैसे भुला सकते हैं तो उसे मृत महिला इस प्रकार से कडा और बेरुखा व्यवहार की अपेक्षा नहीं की जा सकती थी । पर फिर भी वो बेड हुई से वहाँ बैठे रहे । वो लडकी अपनी बहनों द्वारा जिस वक्त अंदर लाई गई वो अपेक्षा और कृपालु व्यवहार से उसका चेहरा पीला पड गया था । वो लडकी अपनी बहन से अपना हाथ छुडाकर भागती हुई अपनी माँ के पास दोनों कर गई और उसके गले में आठ डालकर और वक्ष स्थल पर अपना मूड छुपाकर जोर जोर से रोने लगी । एक छड के बाद उसके पिता उठे और उसके पति का आठ पकडकर उसका अभिनंदन किया । इससे वहाँ पर एक खुशी का माहौल बन गया । सब लोगों ने उन्हें बधाइयां दी तथा बच्चों ने तालियाँ बजाई । जहाँ तक के डिनर का सवाल था वो बहुत ही लजीज और स्वादिष्ट था और उसने मौके के अनुकूल तरह तरह के व्यंजन भी थे तथा सभी आदमी और थे और बच्चे उल्लासित एवं प्रसन्न मुद्रा में थे । दादा जी ने बताया कि वो किस प्रकार से बाजार से टर्की लेकर आए थे और फिर कुछ बहते हुए उन्होंने इस तरह से बयान किया जिसके दादी माने बहुत सूक्ष्मता से पुष्टि की । जॉर्ज कहानियाँ सुनाते हुए उस चिडिया तरकी को काटते और मदिरा पीते हुए बच्चों के साथ हँसी मजाक करते हैं और उनका जिसको आंख मारते हैं जो एक दूसरे से प्रेम का इजहार कर रहे थे या यूं समझिए कि फ्लैट कर रहे थे, वह अपने मजाकिया स्वभाव से सबको हंसाते आस आते रहते हैं तथा अपने अतिथि सत्कार से भी । इसके बाद जब एक मोटा नाटा नौकर भारी सी पोर्टिंग लेकर आता है जिसके ऊपर एक होली पेड की टहनी रखी हुई होती थी । तब सब लोग जोर जोर से हसने चिल्लाने और तालियाँ बजाने लगते थे । छोटे छोटे बच्चे अपने गुबरेले हाथों से और आपने मोटे मोटे पैरों को उछालते हुए इतनी उत्साहित और जोरों से तालियाँ पीटने लगते हैं कि उन की बराबरी अन्य लोग अतिथियों की करतल ध्वनि से तभी की जा सकती थी जब उन लोगों द्वारा ऍम वहाँ क्या बाॅंटी डालते वक्त होती थी । उसके बाद डिस्ट्रिक्ट, फिर वाइन, फिर हंसी मजाक और गुलगुला मार्ग्रेट के पति बहुत सुन्दर सुन्दर भाषण देते हैं और खूब सुंदर सुंदर गाने गाते हैं । और भी इतने अच्छे आदमी साबित होते हैं और वन्स मोर वन्स मोर एक बार और एक बार सुंदर चिल्लाते हैं । तभी दादाजी एक नया गाना जो पहले कभी किसी ने नहीं सुना था की बाल दादी और एक दूरदराज की कदर के लिए गाते हैं जिसको सुनकर सब लोग हस्ते हस्ते लोट पोट हो जाते हैं । ये सब से हाथ प्रदाय कौन सा गाना था जो उन लोगों ने इससे पहले कभी भी नहीं सुना था । इस तरह से यह क्रिसमस की संध्या क्या रात हसी खुशी से बीत जाती है और सब लोग एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं । गले मिलते झूलते जमाते वहाँ सुविधा हो जाते हैं और अगले साल फिर मिलने के वादे के साथ

7 नव वर्ष

हूँ । नाॅक क्रिसमस के बाद जो हर साल नया और खुशनुमा तय हुआ आता है वो नववर्ष है । पर कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इस वक्त पर अश्रुपूर्ण रहते हैं और व्यक्त करते हैं जैसे कि वो नए साल के आगमन और स्वागत करने के बजाय बीते हुए साल के विदा होने का शोक मना रहे हैं । हो सकता है कि वह पुराने साल के विदा होने के साथ साथ नए साल के आगमन की खुशियां और हर्षोल्लास का पूरक हो । और जो भी हो, अधिकतर तो लोग इस समय मौज मस्ती मनाते हैं और पटाखें और फुलझडियां छुडाकर आने वाले साल का आगमन करते हैं । पर पिछले साल कुछ ऐसी घटनाएं अवश्य हुई होंगी जिन्हें याद करके हमें दिल ही दिल खुशी होती होगी और हम मन ही मन मुस्कुराते होंगे और भगवान को नमन करके धन्यवाद देते होंगे कि प्रभु ने हमारे ऊपर ऐसी कृपा की है । ऍम और कायदों से बंधे हुए हैं कि हम जेल में आये । उचित समझें कि आने वाला साल हमारे और हमारे समाज के लिए अच्छा समय और खुशहाली लाएगा । जब तक की वो हमारे लिए अन्यथा या आयोग देना साबित हो । इस वर्ष में हमारा खयाल है । बीते हुए साल के प्रति बिना किसी अनादर के मैं इस बार सन अठारह सौ छियासी में इससे अपने घर में आग के सामने बैठे इसलिए आपको लिख रहा हूँ । ऐसे जैसे कोई असाधारण घटना नहीं घटी है ना अगले साल घटने वाली है जिससे हमारा मिजाज जो अभी खुशी से भरपूर है, भूख खराब होगा, यह बिगड जाएगा । बग्घियां और घोडे गाडियाँ अच्छी तरह से सजे धजे लोगों को इधर से उधर ले संदेह पार्टियों में ले जा रही थी । सडक के दूसरी ओर दरवाजे पर दो बार खटखट हुई और उस घर के दरवाजे जहाँ हरे रंग के पढते पढते थे, खोले और कई लोग उसमें जल्दी से घुस गए । इससे लोगों को पता चल गया कि उस घर में कोई बडी पार्टी थी । हमने भी खिडकी में से पर्दा हटाकर देखा । घने कोहरे के बीच से अंदर देखने की कोशिश की । अंधेरा इतना ज्यादा हो गया था कि हमने मोमबत्तियां मंगवाई । हमने देखा कि वहाँ पर पीस भी उसके आदमी अंधेरे में अपने सिरों पर हरे हरे रंगों के डिब्बों को रख कर ले जा रहे थे । वहाँ पर तमाम फर्नीचर था और करा तरह के फर्नीचर और केंद्र सीट के सोफे और फ्रेंच ऍम घरों में पहुंचाए जा रहे थे जहाँ पर उस रात खुलना वर्ष के आगमन पर आयोजन होना था । हम अपने आप को अच्छी तरह सूटेड बूटेड होकर बालों में कंघी, गाडकर ऐसे ही एक पार्टी में शरीक होने की कल्पना कर सकते थे । मैं साल के तौर पर आप उस घर को ही ले दीजिए जहाँ पर हरे रंग के पर्दे लटक रहे थे । हम जानते हैं कि ये एक कोलटल पार्टी है क्योंकि हमने उन्हें आदमियों को सुबह घर के ड्रॉइंग रूम में कालीन ले जाते हुए देखा और ये थी इसका और अधिक सबूत चाहिए तो हमें उन्हें स्त्रियों को थोडी देर पहले एक दूसरे के बाल बनाते हुए देखा था । एक असाधारण रूप की शानशौकत जो आम तौर पर इस तरह की पार्टियों में होती है । हमारा अनुभव कहता है कि गृहस्वामी किसी पब्लिक ऑफिस में काम करता है । ये हमें उसकी कोर्ट के कट और टाई बांधने के स्टाइल से पता चलता है और उसकी चाल ढाल की मुद्रा तथा रंग पडती भी इसी बात को व्यक्त करते हैं । फॅसने संभव था काम करता रहा होगा । अब लीजिए एक मध्यम आकार रूकती है और उसी ऑफिस का साफ सुथरी ट्रस्ट बहने एक युवा आगे जिसको जुकाम और कौन हो सकता था जो उसके ऑफिस का ही एक जूनियर क्लर्क हो सकता है अपनी जेब में से जूते निकालकर पहनता हुआ वकील से उतरता है । हवल में घुसते हैं एक दरबान लोमा आदमी उनके आगमन की घोषणा करता है और उसे ऑफिस का एक मैसेंजर बोले नीला कोट पहने उसके नाम की घोषणा करता है । सीढी के पास जो आदमी है वो आकर फिर जोर से ऊपर की ओर आवाज देता है बॅाल घर का स्वामी उससे पूछ सकता है आप कैसे है माॅल वो आपके सामने से उठकर आता है और लेडीज की ओर मुखातिब होकर कहता है मैं डॅाल बॅाल ये मेरी सबसे बडी लडकी जो लिया है बॅाल और ये है मेरी अन्य बेटियाँ और ये रहा मेरा बेटा सिर्फ चप्पल अपने हाथों को अच्छी तरह बढता है और मुस्कुराता है । जैसे कोई बहुत बडा मजाक रहा हो और झुक झुक कर घूम घूमकर सबसे आठ मिलाता है जब तक की उसका परिचय सारे परिवार से नहीं हो जाता है । उसके बाद वो सोफी की एक कोने वाली सीट में फस जाता है और लेडीज के साथ मौसम थिएटर नाटक गए साल और हाल ही में हुए एक मर्डर के बारे में बातचीत करने लगता है । दरवाजे पर खटखटाहट होती है । क्या बढिया बातचीत हो रही होगी और सब लोग आराम से कॉफी पी रहे होंगे । अब हम डब्बल को अपने मन की आंखों से देखते हैं । उसके महानतम छडों में अभी अभी वो स्कूल का महिला का कार्य नौकरों के हाथों में थमा देता है । अब वो कूदकर दरवाजे की ओर बढता है नए मेहमानों का स्वागत करने के लिए । पर जाते जाते वो लेडीज के लिए एक सेवक से मैं ऑफिस की प्लेट ले लेता है । दरवाजे से वापस आते वक्त वो महिलाओं की ओर ऐसे निकल डालता था जैसे उन्हें वर्षों से यह बचपन से जानता था । ऍम अल बडे ही मनमोहक व्यक्ति थी । वो महिलाओं के आदमी थे । बहुत ही आनंददायक । साथ ही भी है पापा के मजाक । कोई भी आदमी आधा भी नहीं समझ पाते थे । पर वो आधा मजाक सुनकर इतनी जोर से हंसने लगते थे और लोट पोट हो जाते थे कि देखते ही बनता था । बडे ही मनोरंजक पार्टनर भी थे वो । इसके साथ ही वह बहुत ही रोमांटिक तथा विनोद सभाओं के थे । सबसे ज्यादा खास कर महिलाओं के साथ घूम घूम कर बातें कर रहे थे । यहाँ पे भी व्यक्ति थे । वो युवाओं के बीच इतना प्रिय नहीं थे । वो लोग तो उनका मजाक ही उडाते थे पर सब लोग जानते थे कि ये केवल ईष्र्यावश होता था और उनके लोगों को उनके गुरु को नजर अंदाज करने का । जब कम आंकने का कोई हक नहीं था और माँ तो ये कहती थी कि वो मिस्टर टिप्पल को भविष्य में होने वाली हर पार्टी में बुलाएंगे क्योंकि खाना परोस ले के बीच और अलग अलग कोर्स सर्व करने के बीच में उनमें लोगों से बातचीत करने और उन्हें आस आते रहने की छमता थी और यदि कभी भोजन पर उससे में देरी हो तो अन्य मेहमानों का ध्यान दूसरी ओर ले जा सकते थे । संध्या भोजन के समय तो वो और भी मजाक हो जाते थे और जब पापा सारे एकत्र मित्र मेहमानों से कहते थे कि बोलो अपने अपने गिलासों को भर लें तो वो और भी मसखरापन करते थे और सारी महिलाओं से कहते थे कि वो भी अपने अपने गिलासों को फिर से भर लें उन के बाहर बार मना करने पर भी कि वो ऐसा नहीं कर सकते ना वे तुरंत गिलास खाली कर सकती थी तथा इस बात की अनुमति मांगी की पापा जी ने जो भावनाएं व्यक्त की हैं उस पर वह दो शब्द कह सकें । फिर उन्होंने उसके बाद नववर्ष के आगमन पर और पुराने वर्ष के पिता होने पर एक बहुत ही जोरदार कविता मई भाषण दिया जिसकी संभावना था आप कल्पना ही कर सकते थे । इसके बाद की टोस्ट पी लिया गया था और जब महिलाएं चली गई तो मिस्टर सिब्बल ने कहा कि सारे भद्रपुरुष जो वहाँ पर हैं एक बार फिर से अपने गिलास भर लें । जिसके बाद वो फिर एक टोस्ट प्रपोस करेंगे जिस पर प्रत्येक जेंटलमैन चिल्लाया ऍर और उसके बाद उन्होंने डाॅक्टर जो एक शराब पर उसने वाला जग था एक दूसरे को बारी बारी दिया । इसके बाद घर के मालिक के उन्हें बताया वो सब पूरी तरह से चार्ज हो गए हैं पर वो अपना टोस्ट भाषण दे सकते हैं । इसके बाद में सिर्फ टिप्पल अपनी जगह से उठे और उन जेंटलमेंस को बताया की किस प्रकार से ये ऍम इस शाम को तमाम तरह की शालीन तथा चमक दमक की सुंदरियों से भरा था और उन सुंदरियों ने कैसे उन लोगों का मन मोह लिया था । लोग फिर से जोर जोर से कह रहे थे ऍम चिल्लाएँ बॅाल ने उन्हें बताया कि किस प्रकार से वो उन सुंदर महिलाओं के बाहर से पैदा हो जाने से दुखी और निराश थे । पर सम्भवता वो उन की मौजूदगी में ये टोस्ट नहीं प्रोपोज कर पाते तो लेडीज लेडीज का एक शोर उठा । लेडीज के बीच उनकी खूबसूरत और कई कलाओं में माहिर उनकी लडकियां भी शामिल थे । वो कह रहा था कि लोग उनके लिए भी एक बडा सा जाम पीए लेडीज और उन्हें नया साल मुबारक । खुद बोलें । ऍम लोग बहुत जोरों से हैप्पी न्यू ईयर बोलते हैं और जोरों से तालियां बजाते हुए और ऊपर कमरे में लीड इस अपने ही लोगों के साथ स्पेनिश डांस कर रही थी । अभी मुश्किल से इस बीच पर करतल ध्वनि बन नहीं हुई थी कि एक आदमी जो गुलाबी रंग का बास्केट पहने हुए था और बहुत देर से अपने दोस्त बीच देने को बेचैन था, उसके प्रयासों को मिस्टर टिप्पल ने पहले ही टोस्ट भाषण देकर विफल कर दिया था । वह बहुत ही गंभीरता से उठा और इस उम्मीद से कि उसे बोलने का मौका मिलेगा । पटक पल्ले ये मौका भी उसे नहीं दिया । वो कहता है कि अपने अपने लायक मेजबान कि मेहमान नवाजी से बहुत ज्यादा प्रभावित था । वो कह सकता था कि कितने वैभवशाली और वहाँ से ढंग से सबका स्वागत सरकार किया था । खूब जोरो से तालियाँ बचती हैं यद्यपि इस जगह पर आने का और यहाँ पर आप सब के साथ बैठने का ये उसका पहला मौका था । वो अपने मित्र तो बाल को बहुत पहले से जानता था और उनके साथ उसके काफी घनिष्ठता थे । उनके साथ उसका बिजनेस का भी संबंध था । वो चाहता था कि लोग ये जानें की वो उसके साथ कितना नजदीक था । मेजबान इस पर खास नहीं लगता है । वो टप्पल अपने दिल पर हाथ रखकर कह सकता था कि वो उससे यानी डबल से बढिया दोस्त, पिता, पति, भाई या बेटा अन्य कोई रिश्ता नहीं जानता था । न कभी था सब लोग शेयर है चल रहते हैं । आज आप लोगों ने उन्होंने अपने परिवार के साथ दिल्ली शांति से देखा है । अब आप लोगों को उन्हें सुबह अपने ऑफिस में उसी शांति से काम करते देखिएगा । शांति से आपने सुबह के कागजों को देखते हुए अपने हस्ताक्षर के साथ भी कोई समझौता न करते हुए अजनबियों के साथ बहुत शालीनता से पेश आते हुए और उनके सवालों का विनम्रता से जवाब देते हुए अपने सीनियर या बडे अधिकारियों से बडे सम्मानपूर्वक बोलते हुए अपने संदेश वाहक या मैसेंजर से भी बहुत राज्य सही ढंग से बातचीत करते हुए लोग फिर तालियाँ बजाने लगते हैं । जब वो शॅल का इस प्रकार गुडगान कर रहा था तो फिर फॅमिली के बारे में वो क्या कसीदें गढेगा आप समझ सकते हैं । अब आते ही मिस्टर डॅाल जूनियर अपने मुँह में एक संतरा ठूसने का प्रयास कर रहे थे । वो अपना पोस्ट सही करके दूसरों के लिए दर्शनीय बनने के इरादे से खडे हो जाते हैं । वो शायद यही के हैं कि उनके मित्र मिस्टर डबल किसी भी ऐसे व्यक्ति से कहीं ज्यादा सुपीरियर थे जिस को वो जानते थे और उनकी पत्नी ॅ । उनका तो कहना है क्या वो भी सबसे विशिष्ट हैं केवल अपनी पुत्रियों को छोडकर । फिर वो कहेंगे डेवलॅप मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि आप ऐसे ही हसी, खुशी और दरियादिली से अगले कई नहीं इस साल बनाएँ । सब लोग जोर शोर से आखिरी टोस्ट जाम पीते हैं । फिर सारे पार्टी लीड । इसके पास ड्रॉइंग रूम पहुंच जाती है । वो नौजवान है जो पहले डांस करने से हिचकिचा रहे थे । उनको आप डांस पांच लाख मिल गए थे और वह संगीत की धुन पर थे, रख रहे थे । पांच पापा जाने वाले भी अब पीकर मस्त हो रहे थे और मस्ती भरे महत्त क्यों कि धोनी बजा रहे थे अभी ये ऍम गायन का प्रोग्राम सारे ही रात चलता है जब तक कि नए साल के प्रथम किरण नहीं दिखाई पड जाती यानी वर्ष कि सुबह नहीं हो जाती है । हमारे पिछले वाक को लिखने से काफी पहले रात बारह के आसपास चर्च में घंटे बजने लगते हैं पर उनकी ध्वनि कानों को बहुत ही नहीं है । उस आवाज में कुछ न कुछ गडबड है फिर आगे घंटे बहुत तेजी से भागने चले जाते हैं परन्तु आम लोगों की आयु सालो मनाते हैं और हमें ये याद दिलाता है कि हमारे बहुमूल्य जीवन का एक और साल गुजर गया और हम अपने मृत्यु की ओर या कब्र की ओर एक और कदम आगे बढ गए हैं । ये हमारे लिए एक चेतावनी है हूँ ।

8 कैदियों की गाड़ी

हूँ कैदी की गाडी एक दिन तो पहरिया के बाद हम मोस्ट ट्वीट के कोने से गुजर रहे थे कि हमने देखा कि वहाँ पर पुलिस चौकी के सामने बहुत सारे लोग घट्टा थे पर वहाँ पर लगभग तीस चालीस लोग रहे होंगे । कुछ तो फुटबॉल पर खडे थे तो कुछ सडक के । दूसरी ओर साफ जाहिर था कि बहुत सब लोग किसी के आने की आशा में वहाँ इंतजार कर रहे थे तो हम ने भी कुछ मिनट वाॅकर इंतजार किया पर कुछ भी नहीं हुआ । फिर हमने वहीं पास्ट बैठे मोर्चे जो फटे पुराने कपडे पहने था और जिसकी दाढी बढी हुई थी उससे पूछा ये मामला क्या है भाई आपको कुछ पता है । उस मोची ने हमें ऊपर से नीचे तक देखा । बोला कुछ भी नहीं । अब हमें पता था कि यह की तो अभी कहीं पर खडे होकर किसी दिशा में देखने लगे । वहाँ कुछ ही देर में सौ दो सौ पार्टियों की भीड इकट्ठा हो जाएगी । सबलोग उसी और देखने लगेंगे तथा आपस में खुशी कुसूर करने लगेंगे । पर हमें ये पता था कि लोगों की कोई भीड, किसी सडक, यह करीब ज्यादा देर तक बिना आपस में कुछ हँसी मजाक किये रुक नहीं सकती । थी । उसके बाद हमने उसी मोदी से फिर पूछा आखिरकार ये सब लोग यहाँ पर किस चीज का इंतजार कर रहे हैं । भाई उस टाइम जवाब दिया फॅस का यानी रानी की गाडी के लिए इस जब आपने हमें और भ्रमित कर दिया हमें कुछ भी नहीं समझ में आया ॅ इस वक्त या पुलिस स्टेशन के पास क्यूँ की हम अभी इस सोच विचार में पढे ही थे । भीड में से कुछ लोग और लडकों की आबादी आई ये रही गाडी ये बहन आ गई ये वहाँ आ गई । फिर हमने सिर उठाकर सडक की ओर देखा । वन गाडी जिसने अलग अलग पुलिस थानों में से कैदियों को भिन्न भिन्न जेलों में भेजा जाना था, पूरी रफ्तार से आ रही थी तब जाकर मुझे समझ में आया कि बंदी गाडी जिसमें ट्रेडियो को ले जाया जाता था उसे ही और लाॅस बोलते थे जिससे लोगों को लगे कि उन्हें सम्मानपूर्वक ले जाया जा रहा था और राज की कोशिश से उसका खर्चा दिया जा रहा था तथा जेलों में भी उन्हें उन दिनों मालूम नहीं क्यों? लेकिन हर मिनिस्ट्रीज कहते थे मैं पुलिस ऑफिस के सामने आकर रुक गई और सारे वारा टाइट लफंगे हमारी तरह के अन्य लोग सीढियों के इर्द गिर्द खडे हो गए । ट्रैन में से ड्राइवर और एक अन्य आदमी जो उसके साथ बैठा था उत्तर कर पुलिस ऑफिस में जाने के लिए सीढियों पर चढने लगा लोगों का रास्ता छोड दिया । हमारे मित्र और मुझे भी आगे बढा पुलिस ऑफिस का दरवाजा खोला और वो लोग फटाफट अंदर दाखिल हो गए तथा दरवाजा खट से बंद हो गया । अन्य लोग आशापूर्ण निगाहों से दरवाजे की ओर देखने लगे । कुछ भी मिल तो बार दरवाजा खोला और वहाँ से दो बंदी निकले । वो दोनों लडकियाँ थी जिसमें से बडी सोलह साल की रही होगी और दूसरी छोटी अभी चौदह वर्ष की शायद नहीं हुई थी । उनके चेहरे मोहरे ऐसे लगता था कि शायद वह बहनें थीं और उनको देखने से भी लगता था कि वो दोनों ही बहुत गरीब घर की थी । पर उन दोनों ने उस वक्त सस्ते और भडकीले कपडे पहने हुए थे और पुलिस दोनों को एक ही हथकडी से झगडा हुआ था । छोटी वाली लडकी बहुत बुरी तरह से रो रही थी इसलिए नहीं उसका कोई असर पडे यह दिखाने के लिए बल्कि इसलिए कि बहुत शर्मिंदा थी । उसने अपना सिर्फ अपने कुमार से छुपा रखा था और वह बहुत दुखी प्रतीत हो रही थी । फॅमिली यहाँ पर तो नहीं कितने दिन रखा जाएगा । लालमोहन वाली एक महिला ने भीड में से चिल्लाकर पूछा लगभग छह हफ्ते की कैद बामुशक्कत बडी बहन ने कुछ हसते हुए उत्तर दिया और ये स्टोन जग से बेहतर है सेशन की डील मिल से बेहतर है और ये मिला है जो पहली बार जेल जा रहे हैं । अपने सिर उठाओ ऍम कुछ हसते हुए कहा और अपनी छोटी बहन के चेहरे पर सी धुमाल हटा दिया । अपना सिर ऊपर उठाओ और उन लोगों को दिखाओ हूँ मैं इस साल में ठीक है ठीक है एक आदमी जिसमें काकस की टोपी पहनी हुई थी भीड में से चिल्लाया जो इस प्रकार से खुश था हूँ इस सब में क्या गडबडी है बडी लडकी फिर बोली अंदर आ जाओ तुम दोनों ड्राइवर बीच में बोला कुछ मैं सुन कोई जल्दी नहीं करना मैं पूर्ण बात स्कूल में बडे से घर में जिसमें अच्छा लॉन हूँ और सामने गार्डन में ऊंची दीवार हो मैं उसमें रहना चाहूंगी । हेलो मेला तुम्हें क्या कर रही हूँ तुम तो मेरी बही उखाड होगी । भीड की आंखों से बचने के लिए जल्दी से खोज की सीढियों पर चढ गयी तथा एक ही साथ खडी से बने रहने के कारण बडी बहन का हाथ भी जोर से खींचता जा रहा था और वो दोनों फिर किसी तरह से खींचतान कर गाडी में बैठे हैं । इन दोनों लडकियों को इनकी कदम और लालची माने सडकों पर खाने कमाने के लिए एक दिया था । चाहे जिस प्रकार से बोल रहे हैं जो पहले बडी बहन छोटे छोटे अपराध कर दी थी अब वहीं छोटी बहन से भी करवाने लगी थी एक फॅार उसका कई बार मंचन होता था खुदा जाने उसका क्या भविष्य होगा आप लंदन की पुलिस और गलियों कीबोर्ड देखिए ये सब चीजें आम हो गए हैं और इनकी और शायद ही कोई ध्यान देता है । इन लडकियों या लडकों की आपराधिक प्रवृत्ति इतनी तेजी से बढेगी जैसी लेक जैसी महामारी । ये अधिकतर अकेले ही होती है । समाज द्वारा तिरस्कृत बाॅम्बे छह और न ही इनके ऊपर किसी को दया आती है । फिर और कैदी लडके हैं । दस साल या इन से ऊपर की उम्र के राहत की दुनिया में ये इतने पक्के हो चुके हैं जैसे कोई चालीस से पचास साल का अपराध ही हो । चीलों बडी आसानी से चीज चले जाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि बाहर रहने खाने को तो मिलेगी और भयानक सर्दी से भी बच जाएंगे । इन लोगों का भविष्य बर्बाद हो चुका है । ये बिचारे चरित्रहीन हो जाते हैं । इनके परिवार नष्ट हो जाते हैं । इनके पहले जो उनके साथ ही तथा हमारी जिज्ञासा भी शांत हुई । पहले दल ने हमारे ऊपर जो छात्र डालते हैं वही काफी थी भी । तितिर बितर हो गई, बंदियों वाली गाडी चली गयी जिसमें मौका भागे लोग बैठे थे और हम ने उसे फिर कभी नहीं देखा । दोस्त हूँ याद रखिए हमारी जिंदगी में और हमारी कामयाबी के पीछे हमारी माँ बाप की भूमिका बहुत ही अहम होती है जो शुरुआती दौर में ज्यादा महत्वपूर्ण नजर नहीं आती है । लेकिन इस माँ की गंभीरता का एहसास हमें तब होता है जब हम खुद मावा बनाते हैं और अपने बच्चों को पालने पोसने । यह पढाने लिखाने में अपनी सारी जिंदगी समर्पित कर देते हैं और तब कहीं जाकर ये बात हमारी समझ में आती है कि एक अच्छा माँ बाप बनना कितना मुश्किल और कितना जिम्मेदारी का काम होता है वो और इसी बात से उनकी बेलौस मोहब्बत का जिसका इस दुनिया में कोई बदल नहीं हो सकता । इस बात को सिद्ध करता है कि माँ बाप की मोहब्बत पाने के लिए आपकी किस्मत का बंद होना बहुत जरूरी है । याद रखिए अपनी आवास उसके सामने कभी बनाना करेंगे जिसमें आपको बोलना सिखाया । अगर किसी कारण वश आप अपने माँ बाप से आपके माँ बाप किसी बात आपसे नाराज है तो इस सच्ची कहानी को सुनने के बाद आप उनसे जाकर माफी मांग की और गाली लग के उनको प्यार करिए । मेरा वादा है वो आपको जरूर माफ कर देंगे क्योंकि माँ वो है जो इस दुनिया में आपसे सबसे तेर में नाराज होती है और सबसे जल्दी माँ भी कर देती है । मानता से बडी कोई चीज नहीं होती है और किसी भगवान ने माँ के पैरों के नीचे जन्नत रखी है । उम्मीद करता हूँ ये कहानी आपके जीवन में कोई न कोई बदलाव जरूर लाएगी हूँ ।

9 विदेश-यात्रा

विदेश यात्रा मैं एक जर्मनी यात्री नाथ में बैठ गया तो काफी भरी थी । बैठने के बाद मैंने पायदान को ऊपर खींच लिया और आराम से बैठकर दरवाजे को बहुत स्मार्ट ली । बंद कर दिया और साथी को चलने का आदेश दिया क्योंकि गौ वन बहुत ही जल्द लंदन की पश्चिमी और दक्षिणी पश्चिमी पीछे छूटते चले गए । इतनी तेजी से कब ॅ और यहाँ तक शूटआॅफ कप पीछे निकल गए इसका पता ही नहीं चला । इससे पहले कि मैं एक शांत यात्री की तरह पीछे मोडकर देखता हूँ तब तक सब कुछ काफी पीछे छूट गया था । मेरी तो बडी बडी ऍम रखे हुए थे और दूसरा सामने की जगह में फिट कर दिया था । ऊपर रखी हुई किताबों के लिए एक फॅमिली जान लगा था । सारी लडकियों के साथ ही बडी बडी रैलियां लगी थी और इधर उधर की चीजें रखने के लिए चमडे का एक धोना भी था । इसके अलावा रत के पिछले हिस्से में पढने के लिए एक नहीं भी था । मेरे पास उस रखने ऐशोआराम की घर चीज थी और मुझे कुछ भी पता नहीं था कि मैं कहाँ जा रहा हूँ । ये एक बहुत ही आनंददायक चीज थी । इसके अलावा की मैं विदेश जा रहा था । पुरानी ऊँची सडक फॅमिली है और भी इतने तरोताजा थे और इतनी तेजी से दौड रहे थे । कुछ ही समय में हम ग्राॅस और पाँच स्तर के बीच में थे कि हम जल्दी ही चौदह पांच वाली नदी के पास पहुंच गए । जहां तमाम जहाज खडे थे जिनके मस्त तुम यहाँ तो सफेद थे या काले । उसी वक्त मैंने सडक के किनारे एक अजीब सा लडका देखा है । लो नहीं उस अजित से लडके से कहा तुम कहाँ रहते हो जाता था । मैं उसको बताया । मैंने पूछा तुम वहाँ पर क्या करते हैं? उसने कहा मैं स्कूल जाता हूँ । मैंने इन ठंड में उसे अपने रख में बैठा लिया । थोडी देर बाद उस बालक नहीं कहा । गाइड फिल्म है जहाँ पर फर्स्ट ऑफ मुसाफिरों को लूट लेता था और भाग ज्यादा था तो नहीं । कुछ फॅस के बारे में पता है । मैंने पूछा मुझे उसके बारे में सब कुछ पता है । उस छोटे से अजीब लडकी ने कहा मैं काफी बडा हूँ । मैं नौ साल का हूँ और मैं हर तरह की किताबें भी पढता हूँ । पर हमें इस पहाड की चोटी से रुकना चाहिए और उस घर को देखना चाहिए । यदि आप चाहे तो प्लीज तुम्हे वो घर पसंद हैं । मैंने पूछा आपका भला हो सर वो छोटे से लडके ने कहा, जब मैं केवल पांच वर्ष का था तब मुझे बहुत अच्छा लगता था जब मेरे पिता मुझे ये घर दिखाने के लिए ले जाते थे और अब मैं नौ साल का हो गया हूँ और अपने आप यहाँ उस घर को देखने चला जाता हूँ । और मुझे जहाँ तक याद है मेरे पिता कहा करते थे यदि तुम्हें ये घर इतना ही पसंद है और तुम अगर लगन और मेहनत से काम करोगे तो एक दिन इस घर के मालिक हो सकते हो । ये नपी वो लगभग असंभव है । उस छोटे से अजीब बालक नहीं एक धीमी सांस भरते हुए कहा अब वो खिडकी से बाहर उस घर की और ध्यान से देख रहा था । मैं उस छोटे से बालक के मुझसे ये बात सुनकर बहुत हसने लगा क्योंकि वास्तव में वह घर तो मेरा ही था और मुझे विश्वास था कि जो कह रहा था वो बिल्कुल सच था । ये है मिला तो मैं बाहर रुका नहीं और थोडी देर बाद उस अजीब छोटे से बालक को अपने रत से उतार दिया । हमारा उन सडकों पर से गया जहाँ पुराने समय के रोमन लोग मार्च करते हुए जाया करते थे । हम उन सडकों पर सिख गए जहाँ सपना चीज, काउंटर बरी तीर्थयात्री होकर जाया करते थे । हम उन सडकों पर सिख गए जहां पुराने समय में वो रोहित और राजकुमार हो और राजाओं की सवारियां निकला करती थी और यात्री घोडे की पीठ पर सवार जिनके गले में बंधी घंटियां टनटन बजा करती थी और वो यूरोप महाद्वीप से इस ब्रिटिश द्वीपसमूह पर आया करते थे । नदी और कि चडने से गुजरते हुए उन सडकों पर से गुजरे ऍम अपने आप से गुनगुनाते हुए चला करती थी । सर्दी की सर्द हवा बहुत बहो जब वो सराय के गेट पर बैठकर बहुत रहता था, बैठे हुए वहाँ से आते जाते बहनों को देखा करता था और हम चेरी के बगीचों, सेब के बगीचों और मक्के के खेतों में से गुजरेंगे । इस तरह से मैं सफर करता रहा कैंटरबरी से डोबर तक हो । वहाँ पर समुद्र में अंधेरा होने के बाद ऊंची लहरें उठ नहीं थी । तेज हवा के साथ समुद्र तट पर के ट्राइनेल में लाइट हाउस से रोशनी की तेज किरणें हर आधे मिनट पर घूम घूमकर आ रही है वो परेशान । रोशनी का पुंछ ऐसा लग रहा था कि जैसे वह लाइट स्पीकर का सिर हूँ और मुझे जानने को उत्सुक था की हर आधे मिनट पर नाइक कैसे जल रही थी । सुबह जल्दी ही हम स्टीमर के ट्रैक पर थे और हम लोग सामान्य सहनीय तरीके से बाहर की ओर देख रहे थे और उसी तरीके से बार हम लोगों को देख रहा था एक बार अपने तरीके से और हम अपने असैन्य तरीके से एक दूसरे को पार करते हुए चले गए । पर जब हम काट के दूसरी ओर कस्टम हाउस से निकलकर आए और जब हमारे घोडे फ्रांस की तिरासी सडकों पर भूल उडाने लगे और सडकों के दोनों ओर पत्तियाँ बिहीन टहनियों वाले पेड जिन पर शायद ही कभी पत्तियाँ होती थी क्योंकि उन पर पत्ते कभी लगाते ही नहीं थे । और मासी की बात तो ये है कि इन पेडों की रखवाली के लिए भी धूल दूसरी कपडे पहने रखवाले तैनात थी जो पेड के नीचे ना मात्र की छाया में सोये हुए थे । तब हमारी सफर करने की इच्छा फिर से दोबारा जाग्रति । इनकी टूटे पत्थरों के ब्रेकर पहुंचने पर एक कडे गरम है । आज के ऊपर सूरज की किरणें पडने के बाद मैं ये समझ गया था कि मैं अपने प्रिय देश फ्रांस में पहुंच गया हूँ । मैंने अपने रथ की थैली में से अपना लंच का सामान निकाला जिसमें साधारण ऍम के साथ घंटे भूमि हुई । बत्तर तथा बैंक और थोडा सा नमक था और जिससे मैंने तमाम अवर्णीय संतोष के साथ लंच किया । हो सकता है खाना खाने के बाद मैं सो गया हूँ क्योंकि जब एक चमकता चेहरा खिडकी के बाहर से अंदर झांका तो मैं चौंक गया और बोला ये भगवान लुई मैंने सोचा कि तुम मर गए हो मेरे हसमुख सेवक ने हसते हुए जवाब दिया मैं बिल्कुल ठीक हूँ साहब बिल्कुल नहीं । शुक्र है कि मैं जाग गया । लुई हम क्या कर रहे हैं? हम लोग यहाँ पर घोडे बदलेंगे । आप उस पहाडी तक चल सकेंगे? हाँ जरूर क्यों नहीं? स्कूल फ्रेंड्स हिल में आपका स्वागत है जहाँ पर बूढे फ्रेंड्स पागल जिनका किसी माफिया से दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं था, कच्चे घास फूस से बने कुत्ते के घरों में रहते थे और जो कि अपने बडे बडे सिर के साथ बैसाखियों के सहारे इधर उधर घूम रहे थे और वृद्ध आदमी और और तेरे अपन बच्चों के साथ घूम रही थी । ऐसा लग रहा था कि जैसे कि भगवान ने उन्हें उसी दिन के लिए बचाकर रखा है जब वही ले अच्छाई करेंगे की दुनिया को तमाम आबादी से भर दिया जाए । हम उनके बीच छोटे छोटे से के जो मेरे पास थे वो सब दे दिए और कहा ये लोग यहाँ पर लोग आ रहा है जो नींद से जाग उठा है । हम ने फिर से अपनी यात्रा शुरू कर दी और ये जानकारी आज हुआ कि फ्रांस वहीं पर था जहाँ पर मैंने उसे पिछली बार छोडा था । वहाँ पर मेरा दारडा घर थे जहाँ पर गंदे खोल साल भी थे लेकिन साफ सुथरे पोस्टमास्टर दी थी । उन की स्थितियां भी साफ सुथरी और फॅमिली थी और घोडो की देखभाल भी करती नहीं है । वहाँ पर सवार या सईद थे । उनको जो पैसे मिल रहे थे वो दिन रहे थे । वहाँ पर फॅस लेटी रंगों के दोनों की प्रजाति भी थी हूँ । हमेशा मौका मिलने पर एक दूसरे को करते रहते थे । वहाँ पर किसी रोज वाली भीड की खाली थी जो उनके यूनिफॉर्म पर घुडसवारों द्वारा पहना दी जाती थी । जैसे की बेटी की तरह एक दिन हो जो उन्हें तेज हवा बहने पर या बारिश होने पर पहना दी जाती थी और वो जब तक कोडे चलाते रहते थे फिर वहाँ पर कैथेड्रिल थे जिन्हें मैं उत्तर कर देखने गया और फिर आगे छोटे मोटे कस्बे जिन्हें वहाँ होने की कोई वजह नहीं थी क्योंकि वहाँ पर ज्यादातर मकान खाली पडे थे और किराये के लिए मौजूद थे । उन्हें किसी आदमी को देखने के लिए प्रेरित नहीं किया जा सकता था । इसके अलावा जिन लोगों को उन्हें देखने के लिए रखा गया था वो उन्हें दिनभर देखते रहते थे । मैं वहाँ एक रात को ठेरा और आलू से तैयार किए हुए कुछ व्यंजन स्वाद लेकर खाएं जिन्हें यदि कभी घर पर पकाने की कोशिश की जाए तो ये तय था की एक महान गडबड होना अवश्यंभावी था । पर किसी तरह से मैं और उस कमजोर ब्रिटिश किसान ने किसी तरह से राहत बताई और मैं तो अवश्य ऐसे ही खडा रहा कि एक खाली डिब्बे में एक गोली रखी हुई हो । फिर किसी तरह से लडखडा थे, खडखडा आते हम अपने पीछे दोनों की निशान छोडते हुए पेरिस पहुंच गए । टेरिस में मैंने रूम फ्री वाली पर एक होटल में ऊपरी मंजिल पर एक अपार्टमेंट कुछ दिनों के लिए किराए पर नहीं दिया था । मेरे कमरे की सामने वाली एक खिडकी तो फॅमिली और खोलते थे जहाँ पर नर्स मेरे और स्कूलों में केवल ये अंतर था कि जब मिनट मेरे तो चलती फिरती थीं, फूलों के पौधे वहीं स्थिर रहते थे । कमरे की, पिछले खेल की, होटल के और कमरों की पिछली खिडकियों की और खुलती थी और दूसरे पर एक पिछले आंगन में, जहाँ पर मेरा जर्मन रत एक मेरा दार वाराणसी में आराम से नीचे खडी थी, जैसे उसे बहुत जिंदगी भर ही रहना हूँ और वहाँ पर घंटियां हर वक्त मचती रहती थी और जिसकी किसी को कोई परवाह भी नहीं थी । पर कुछ चैंबर्स लेन राजसेवक जिन्होंने हाथ में फर्म के झाडू पकडी हुई थी और हरे रंग की टोपियां पहनी हुई थी, वहाँ से शांति से नीचे की ओर देख रहे थे । जहाँ पर साफ सुथरे विजिटर्स सुबह से रात तक अपने वहाँ कंधे पर लिए आते जाते रहते थे । जब भी मैं पेरिस में होता हूँ तो मुझे एक अज्ञात शक्ति मुर्दाघर की ओर खींच कर नहीं जाती थी । मैं वहाँ पर कभी भी नहीं जाना चाहता हूँ, पर हमेशा ही मुझे वहाँ कोई न कोई चीज खींच कर ली जाती थी । क्रिसमस दिवस पर जब मुझे किसी और जगह पर होना चाहिए था, उस दिन भी मुझे वहाँ जाना पडा । महापौर मैंने देखा कि एक मुल्लाह आदमी अकेली ही अपने ठंडी बिस्तर पर लेटा हुआ था । उसके सिलेटी सिर के बालों किसी ने एक ठन्डे पानी का नल खोल दिया था जिससे बूंद मूल करके पानी उसके सिर पर टपक रहा था जो उसके लिए चार के चेहरे पर से होता हुआ उसके मुंह पर आ रहा था । यहाँ पर वो एक मोड लेता था जिससे वो कुछ लगने लगता था । नववर्ष की सुबह और उसके उपलक्ष्य में बाहर सहमति हुई थी और वहाँ पर गेट से एक दस के अंदर एक फॅमिली हकीम बैठा हुआ था जिसमें नाक पर एक स्वर्ग को संतुलित किया हुआ था । मैं फिर उस अठारह साल के पूरे रहे थे । बालों वाले लडके से खींचा चला आया जिसके छाती सी एक दिल्ली का हुआ था और जिस पर अपनी माँ से शब्द खुदा हुआ था जो कि नदी के इस तरह से एक जाल में फंसकर इस तरफ आ गया था जिसके माथे पर गोली लगने का घाव भी था और जिसके साथ कटे हुए थे । पर कब और कैसे वहाँ वो आ गया था । ये एक रहस् ही था । इस बार मैं फिर से उस भयानक जगह में आ गया था और उस विशाल गहरे रंग के आदमी को देखने लगा जिसका चेहरा पानी से भायनक तरह से पर एक मजाक की ऐसा लग रहा था ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कि वो कोई एक महान योद्धा रहा होगा जिस थी एक जोरदार मुख्य के प्रहार से बंद हो गई थी और वो उसको तुरंत ही खोलने जा रहा था और वो सिर्फ को हिलाएगा तथा मुस्कुराए का वो उस गहरे रंग वाले आदमी ने उस रोशन शहर में मुझे कितना महंगा पड गया होगा । मौसम बहुत गरम था और उसमें कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था । और तो हाल बहुत ही बुरा था । भीषण एक साथ सुथरी और अब जो अपनी उंगली में चाभियों का गुच्छा डालकर घुमा रही थी उसने अपनी छोटी सी लडकी को जो की ट्रॉफी खा रही थी उन महाशय को दिखाया और उससे अपनी अचरज भरी आंखों से पूछा कि क्या माजरा था? उस ने नकारात्मक जवाब देते हुए अपना सिर हिलाया । सात पार करके एक शराब की दुकान पर गया और अपने आप को तरोताजा करने के लिए ब्रांड की एक मॉडल भी ली और नदी में तैरते हुए हम्मा में नहाने का इरादा बनाया जिससे ऍफ हो जाए । हम उस वक्त तमाम पुरूषों से भरा हुआ था जो रंग बिरंगे कच्चे पहने हुए थे जो कि हाथ में हाथ डाले जहाँ से वहाँ घूम रहे थे तो फिर पी रहे थे और सिगार भी पी रहे हैं । वो छोटी छोटी रिजो पर बैठे थे और नम्रता से उन लडकियों से बात कर रहे थे जो कि उन्हें तौलिया थमा रही थी और जब तब दो लोग सिर के बल नदी में होते लगा रहे थे । वो बार बार बाहर निकल कर आ रहे थे और उसी सोशल रोटी इनको दोहरा रहे थे । मैंने भी जल्दी जल्दी ने उस जल ये मनोरंजन में भाग लेने का मन बनाया और उस आनंद नहीं स्नान का पूरा मजा ले रहा था । जब मेरे मन में ये बेढंगा विचार आया कि वह विशाल गहरे रंग का शरीर मेरी तरफ मानता हुआ आ रहा था । मैं उसी छड नदी में से बाहर निकल आया और सौरव नहीं अपने कपडे पहन लेंगे । इस हडबडाहट में मुझे लगा कि मैंने नदी का कुछ पानी पी लिया था । इससे मुझे मतलब इसी आने लगी क्योंकि मुझे लगा कि उस प्राणी के स्पर्श से पानी दूषित हो गया था । मैं अपने होटल के ठंडे कमरे में वापस आ गया, सोफे पे बैठ गया और फिर अपने आपसे तर्क करने लगा भी शक मुझे पता था कि वो बडा से गहरे रंग का प्राणी पत्थर के समान मृत था और वो वहाँ पर हो ही नहीं सकता था । ये ऐसा ही था जैसे कि नॉट डोमिनोस क्या था? बिल बिल्कुल किसी नई जगह में देख लूँ । मुझे परेशानी इस बात से थी कि उस प्राणी की बयान अच्छा भी मेरे मन में बुरी तरह से छप गई थी और उससे मुझे फिलहाल छुटकारा नहीं मिल पा रहा था । मेरी इस खयाल नहीं, मुझे पूरी तरह से परेशान कर रखा था । उस दिन रात को डिनर के समय मिल लेट में गोल्ड का एक टुकडा था जो कि उस मृत आदमी का लग रहा है और मुझे इस बात की खुशी हुई कि मैं उसको उसी वक्त वहीं पर छोडकर अपनी टेबल से उठकर बाहर निकल गया । बाद में उस दिन शाम को रोसेट होना सडक पर घूम रहा था तो मैंने एक कमरे के बाहर साइनबोर्ड देखा कि अंदर छोटी सलवार, बडी तलवारों और कुश्ती के कारनामे दिखाए जा रहे हैं । मैं अंदर चला गया और दूसरी तलवार बाजी के कई कारनामें अद्भुत और कौशल ने पूर्ण थे । मैं बाहर रुक गया । थोडी देर में बहुत घोषणा की गई कि ब्रिटिश बॉक्स इस जो हमारे राष्ट्रीय खेल था उसका भी प्रदर्शन अंत में होगा । एक ब्रिटिश नागरिक होने के नाते मैं उसे देखने के लिए वहाँ रुक गया । पर ये खेल का एक बहुत फूहड नमूना था जो दो इन दोनों द्वारा किया गया था जिसमें से देखने दूसरे को बहुत जोर से दाहिनी आज से कसकर एक घूसा दोनों आंखों के बीच में मारा जिससे उसकी आंख ना के बीच वैसे ही निशान पड गया जैसा काॅपर था और उससे मेरी सारी रात खराब हो गई थी । मेरे अपार्टमेंट से लगे हुए कमरे से बडी बुरी दुर्गंध आ रही थी जो कि पेरिस के लिए कोई गैरमामूली बात नहीं । मुस शवगृह के विशाल गहरे रंग के प्राणी से ये गंध नहीं आ रहे थे । ये अंदाजा तुम मैं लगातार रहा था क्योंकि वो प्राणी एक तो मोटे कांच की दीवार के पीछे था जो की स्टील लिया संगमर्मर की भी हो सकती थी । फिर भी हवा के झोंकों के साथ जो बदबू आ रही थी वो वहीं से आती हुई प्रतीत हो रहे हैं । इससे भी ज्यादा अजीब बात तो ये थी कि उसका चेहरा मेरे दिमाग में बार बार ना चाहते हुए भी आ ही जाता था । चाहे मैं किसी रेडीमेंट कपडे की दुकान पर कपडे जब वहाँ पर डमी को पहनाएं हुए कपडे ही क्यों ना देख रहा होता हूँ । क्या राज महल में घूम रहा होता था और मैं फिर स्वयं को बीमार महसूस करने लगता था । मुझे लगता था कि वह डमी बगैरा उसी तरह की थी और इसीलिए मेरा जी मिचलाने लगता था । थिएटर में भी ये सब चीजें उसी प्रकार से होती है । अक्सर सात पर भी मेरे साथ ऐसा ही होता था जब मैं उसकी समानत तक को कभी भी कहीं धूम नहीं रहा होता था । ऐसा नहीं था कि वो प्राणी मर गया था या उसकी छाया मेरे आसपास मंडरा की रहती था । पर उसकी याद मेरा पीछा ही नहीं छोड दी थी क्योंकि जीवित चीजों से भी मुझे उतनी ही रुचि थी । ये सब लगभग एक हफ्ते तक चलता रहा । ये तस्वीर एकदम से नहीं खत्म हो गई, पर धीरे धीरे वो काम शक्ति से आने लगे और फिर धुँधली पडती गई । ये तजुर्बा उन लोगों के लिए बहुत अच्छा हो सकता है, जिन्हें बच्चों की देखभाल करनी होती हैं । किसी बुद्धिमान और चतुर बच्चे की किसी चीज को देखने की तीव्रता और सूखा पर दुखनी यानी ज्यादा होती है उसकी व्याख्या करना संभव नहीं है । यदि वह अमित साहब किसी भयानक चीज की हुई तो जाहिर है कि वह उसके दिल में हमेशा के लिए बैठ जाएगी और उसको उस से अलग कर पाना असंभव हो जाएगा । ऐसे समय में आप बच्चे को फिर से उसकी याद दिलाए और वो बच्चा अपने इच्छा के खिलाफ फिर से उस अंधेरे में चला जाएगा । और ये थी आपने उस बच्चे को किसी बेडरूम में इन यादव के साथ अकेले ही छोड दिया । तो आप समझिए कि आप ने उसकी हत्या ही करती हैं । एक रुपए ली चमकती हुई सुबह में मैं अपने जर्मन रखने, सवाल होकर खडखड करते हुए पैर इसको छोड दिया तथा उससे परेशान बहन गहरी धन के प्राणी को वही पीछे छोड गया । मैं यहाँ इस बात को जरूरत को मुँह करूंगा कि मैं उस भयानक प्राणी को देखने एक बार फिर मुर्दा घर गया था । जब उसको नीचे कब्र में दफन किया गया था उसके कपडों को देखने के लिए और उनको बहुत भयंकर पाया खासकर उसके होते । फिर भी मैं स्विट्जरलैंड और खडखडा हुए अपनी धीमे चल पडा । उन सबको पीछे छोडते हूँ और आगे बढते हुए फ्रांस में मैं लंबे लंबे समय तक रखते हुए चलता रहा । वहाँ देहातों के अजीबो गरीब सराय भी गुलदस्ता हूँ । बहुत गाडियों से सगे रहते थे और उन छोटे छोटे सुस्त से देखने वाले कस्बों में जहाँ बहुत कम आबादी थी और शाम को अच्छे मार्क्स । पेडों के नीचे रहते हुए समय गुजारा । महान शिव क्या वो आपका स्वागत है? शहर के बाहर जल्दी सुबह टहलते हुए उस वक्त मैं दैनिक प्रार्थना की उस तक पड रहा था मानसिक हूँ तक की वो जो कि बिना पुस्तक भी पढी जा सकती थी । बाद में दिन में हाईवे यानी मीन रोज पर खाखड करते हूँ भी में दौडते हुए मानसी उडता की ओर आपका फिर से स्वागत है । बग्गी के दौडने से इतनी धूल हो रही थी जैसे हम स्कूल भरे बाद में से कुछ कर रहे हैं । एक दूसरे को नमस्कार करते हुए आपका पूरा स्वागत है । जब आप अपने कितनी गार्डंस शाम को सीट बनाने के लिए एक दो सब्जी तोड रहे होते थे । मैं अपने जर्मन रखना चाहता हुआ खिडकी से बाहर झांकते मनमोहक दृश्यों को देखने लगा । इसकी चिंता हूँ । आज क्या होगा? कल क्या होगा? केवल गुजरते हुए ऍम चीज है और उनमें से आती हुई सुगंध और आम आदमी का आनंद लेते हूँ और बस इसी तरह मौज मस्ती करते हुए मैं स्ट्रासबर्ग पहुंच जाता हूँ । वहाँ पर एक भी की भी सी रविवार की शाम खिडकी से झांकते हुए बिताता हूँ सामने वाले घर के लोग मेरे लिए एक संगीत धूम बजाते हैं और छोटा सा नाटक करते हैं । इतने बडे घर में केवल तीन ही लोग क्यों रहते थे? हाँ केवल तीन ही लोग क्यों रहते थे ये केवल उन्हीं को ही पता था उसकी इनकी छत पर कम से कम दस खेल क्या थी? सामने वाले बेढंगे बडे से कमरे में कितनी लडकियाँ थी मैंने उसकी गिनती ही करना छोड दिया । उस मकान का मालिक एक दुकानदार था जिसका नाम स्ट्राइडम हाई था । मैं ये नहीं जान सकता हूँ की उसका व्यापार या धंधा क्या था क्योंकि उसके दुकान के साइन हो पर कुछ दिखा ही नहीं था और उसकी दुकान भी बंद शुरू शुरू में मैंने स्ट्राइकिंग हाई कोर्ट दुकान पर अनवरत गिरती बारिश में से देखा और अंदाजा लगाया कि वह गूगल लीवर यानी बत्तक के मांस का विक्रेता होगा । पर जब मुझे वो सहयोग से दूसरी मंजिल की खिडकी से देखा तो मुझे विश्वास हो गया कि वह इससे कहीं ज्यादा बडा और लगी चीजों का व्यापारी होगा । इसलिए एक काम मखमल की तो भी पहली हुई थी और बहुत धन बडा महान जान लगता था । दो बडे हो तो माला और आने के आसार की नाक वाला तथा सफेद बालों वाला बूढा आदमी था जिसके बेधती हुई पर नजदीक ही देखने वाली थी । वो एक डस्ट पर बैठा हुआ कुछ लिख रहा था और बार बार अपनी लिखाएं छोडकर फॅमिली में रखकर दाएँ हाथ से कुछ करने लगता था । जैसे कि कोई आदमी नोटों की गड्डी ठीक से रख रहा हूँ । वो पांच फ्राइंग के सिक्के या नोट थे या गोल्डन नेपोलियन सिक्के भी हो सकते थे । कौन जाने ऍम एक सर्राफा ऍम था । रुपया पैसे का लेन देन करने वाला भी हो सकता था या फिर धीरे का व्यापारी भी बुक कौन था इस बात को अभी मैं नहीं जानता था । स्टाॅफ वाली फिर के लिए एक महिला बैठी थी । शायद वो हस्की पर थी जो बहुत युवा तो नहीं थी पर देखने में ठीक ठाक थी और एक सुंदर सी ड्रेस पहने थी । उसके कानून बडी सी सोने की बालियां और गले में बडा सा सोने का ब्लॅक का हुआ था तथा हाथ में एक पंखा लिया था । ऐसा लग रहा था जैसे वो वहाँ छुट्टियाँ बिताने आई हूँ । पर वर्षा की कारण बाहर निकल नहीं पा रही थी और घर में ही थी । मैंने स्टाॅफ में छुट्टियाँ बिताने का इरादा छोड दिया था क्योंकि वर्ष की वजह से पहले घरों की छतों पर से इकट्ठा होकर पर नानु सडकों पर एक छोटी मोटी नदी की जलधारा के रूप में बह रहा था । घर के रख रखा हूँ । वहाँ भी देखभाल करने वाली महिला अपने दोनों हाथों को बच्चे स्थल पर रखी थी और अपने पंखों को अपनी धुन दी पर टिकाए हुए थे । वो अपनी खुली खिडकी देखकर मुस्कुरा रही थी । इसके अलावा स्टाॅफ घर के सामने वाला ऐसा बहुत ही निरस्त था । हाउसकीपर खिडकी ही सारे घर में एक खुली मिलती थी स्वाॅट अपने को कमरे में बंद रखती आने की पूर्व उमसभरी शाम थी जब हवा कर लगना सुहाना लगता था । बारिश रुक गई थी और उसके साथ ही सानिया कस्बे में एक फॅमिली भरी हवा चल रही थी जिसके साथ घास की खुशबू भी मिली हुई थी । जैसा कि ग्रीष्मऋतु में होता है । पाँच दिन हाइल के कंधों के पास एक आदमी की धुंधली सी आकृति दिखाई थी जिससे मुझे इस बात का अंदेशा हुआ कोई आदमी हो सिंघानी महाजन व्यापारी की हत्या करने आया हूँ उसके धन के लिए जो मैंने उसे दिया था, पर क्या हुआ? एक बहुत उत्तेजित आदमी था । दुबली पतली लंबी काया का और उसके कमरे में चुपचाप दबे पांव घुस आया था और बजायें तो उसे कोई शारीरिक चोट पहुंचाता । वो उसके साथ कुछ बातचीत कर रहा था और फिर वो दोनों उस कमरे की खिडकी के पास गए जो हाउसकीपर के कमरे के ठीक ऊपर थी और नीचे झांककर उसने देखने की कोशिश की । और मेरी राय उस महान और मशहूर आदमी के लिए उसी वक्त बदल गई जब मैंने उसे देखा । खिडकी से बाहर नीचे कुछ थूक रहा था । उस खाने को जी उम्मीद थी कि उसका तो उस हाउसकीपर लीडी के ऊपर गिरेगा । हाउसकीपर जो इस समय बे खबर थी, उसने अपना पंखा झाला और अपने सिर को इधर उधर घुमाकर हसी । यद्यपि वो सार्डिन हाई की मौजूदगी से बे खबर थी, पर उसे किसी न किसी आदमी की उपस् थिति का अहसास था । शायद वीरा वहाँ पर मेरे अलावा कोई और नहीं था । मैं अपनी खिडकी से इतना झुककर और सिर्फ बाहर निकाल कर रहा था । मैं उनकी बिलकुल देखते हुए देख सकता था । ॅ और उसके दुबले पतले आदमी नहीं है, अपने सिर अंदर कर लिए थे तथा खिडकी पाँच कर अब घर का दरवाजा चुपचाप खुला और वो दोनों आदमी उस घनघोर वर्षा में अपने घर से बाहर निकल गए । दे सम्भवता मेरी और आ रहे थे । ऐसा मैंने सोचा और शायद इस बात को जानना चाह रहे थे कि मैं उनकी हाउसकीपर को क्यों इतने ध्यान से देख रहा था । फिर वह उस मकान के एक बजे के अंदर चले गए जो मेरी खिडकी कि नीचे था और वहाँ से उन्होंने एक सिपाही को खींच निकाला जिसके पास बहुत छोटी सी अबूद तलवार थी । फॅमिली उसकी लंबी सी चमकती हुई सिर की टोपी को एक ही बार में नीचे गिरा दिया और उसके अंदर दो चीनी की छडियां निकालकर गिर पडी और तीन चार चीनी के बडे बडे टुकडे भी उससे योद्धा ने अपनी संपत्ति या टोपी को उठाने की कोई चीज था नहीं । पर उसने बडे ध्यान से स्टाॅक की ओर देखा जब उसने और दुबले पतले आदमी ने उसको पांच बार लाख मरी और उसने स्टाॅर्म की और भी बडे ध्यान से देखा जब उसने उसके कोर्ट के बटन खोल दिए और उसकी दस फॅमिली को उसके गाल पर जैसे कि वो दस हजार हूँ । जब इस तरह के अत्याचारपूर्ण कम हो गए तब स्टाॅल और उसका साथ ही घर में घुस गए और दरवाजा बंद कर लिया । इस सब में एक आश्चर्यजनक बात ये थी कि हाउसकीपर जो इस सबका को देख रहे हैं और पंखा झल रहे थे, वो जो अपनी छाती में इस तरह के छह योद्धाओं को रख सकती थी, वो केवल हंसी जैसे पहले हँसी थी और इसके बारे में कोई राय अच्छी या खराब नहीं थी । पर इस सबका मुख प्रभाव उस योद्धा पर पडा जिसमें एक असाधारण तरीके से इसका बदला दिया । वह बरसात में अकेला रह गया था । उसने अपनी टोपी उठाई, कुछ सूखी कुछ मिली और अपने सिर पर पहन लिया तथा एक आंगन में चला गया है । स्टाॅक भर का एक कोना था । इसके बाद वो इधर उधर चक्कर लगता है और फिर उसने अपने दोनों सामने वाली उंगलियों को फॅस की तरह बनाया और अपनी नाक के ऊपर लाख उन्हें रखना उसका अनादर दिखाते होंगे । बाहर करते हुए और अपना विरोध जताते हुए ऍम अपने प्रांगण में होते ही इस अजीत से कारनामें से अनभिज्ञ था । पर इससे इस छोटे योद्धा को इतना संतोष मिला उसने दो बार फिर उस आंगन के कोने में आकर प्रक्रिया दोहराई जैसे कि इससे उसका शस्त्री, गुस्सा यह पागल हो जाएगा वो अपने साथ अन्य दो छोटे छोटे है तो ले आया और उन लोगों ने मिलकर ही प्रक्रिया दोहराई जब मैं कहानी कहने को सुनता हूँ परन्तु वो अपने साथ एक सफर मैंने को ले आए और जैसे उन्होंने उनके साथ जो अत्याचार शुरू में हुआ था उसे बताया और फिर सब मिलकर वहीं सब कारनामा दोहराया और सम्भवता इस चीज की या क्रियाकलाप को स्टाॅल फिर भी नहीं नोटिस किया और फिर वो सब हाथ में हाथ डाले गाते बजाते हुए चले गए । सभी होते हैं । मैं भी अपने जर्मन रख है, बैठ कर चल दिया । दिन प्रतिदिन के बहुत आ गया जैसे सपने में कोई चल रहा है, मेरी कानून है । घोडों के कल और काबू में बंदी हुई घंटियां ऐसे बज रही थी जैसे कोई महारानी चल रही हो और साथ में कोई नर्सरी फॅस या गीत गा रहा हूँ । और हम मैं उस प्रदेश में आ गया जहाँ पर लकडी के घर थी, अबुध के थे और पतला बटन सूट था और बिल्कुल बेदार साफ सुथरे सराय के कमरे भी थे जो देने की तरह थे और अब हर जगह स्विस निशानेबाज थे जो कि झाडियों में बनी लक्ष्य पर बराबर राइफल से किए जा रहे थे और मेरे कानों में इतनी नजदीक थे कि मैं फॅसने ग्लेसर की तरह महसूस कर रहा था और मैं उस अत्याचारी जीवन में चला गया जिसके सहयोग था इस निशानेबाजी में ईनाम के तौर पर घडियां, अच्छे और खूबसूरत रुमाल, हार्ड चमचे और इन सब के अलावा चाय की ट्रे भी थी और इन प्रतियोगिताओं में मैं अपने मैत्रीपूर्ण देशवासियों से भी मिला जो दक्षिण निशानेबाज थे और उन लोगों ने इतनी सारी चाय की ट्रेन जीत ली थी कि उनको अपनी गाडी में भरकर महिमा मंदिर चीज जांच की तरह घुमा रहे थे । जी लोग साल भर कॉम्पिटिशन में भाग लेते लेते पहले भी हो गए थे । अब जिस पर्वतीय देश घूम घाम रहा था उसमें मेरे घोडों के आगे बहल भी जूत दिए गया था जिससे हम ऊपर नीचे बारिश और धुंध में भी चल सके । इसी में पीछे से कल कल करके गिरता हुआ पानी पांच वर्ष संगीत का काम कर रहा था । अचानक ही धुन और बरसात खत्म हो गई और मैं एक बहुत खूबसूरत फसले में आ गया जिसमें चर्च की चमकते हुए लौहस्तंभ थे और पुराने पुराने इस्तमाल थे । मैं घूमते फिरते चढाई वाली एक घुमावदार राष्ट्रीय से बाजार में पहुंच जाता हूँ जहाँ पर सैकडों और बॉर्डर साॅस पहले अंडे शहर मक्खन और फल बीच रहीं थी और अपने साथ सुथरी टोकरी के साथ बैठी हुई थी । अपने बच्चों को छा किसी चिपकाकर दूध भी पिला रही थी । इस समय मैं अपना जर्मन रख छोड कर एक मच मैली से रंग के खच्चर पर बैठ जाता हूँ जिसका रंग मेरे स्कूल के ट्रेन से मिलता था और मैं आदतन । उस पर आपने आध्यक्ष ढूंढने लग जाता था और मैं हजारों ओवर खबर रस्तों से गुजरता हुआ हजारों स्वर और देवदार के जंगल से कुछ करता हूँ । मैं इस बात की कोशिश करता हूँ कि मेरा खर्चा पहाडियों के बहुत किनारे खिलाडी ना चले क्योंकि मुझे हर वक्त डर लगा रहता था । वो मुझे कहीं नीचे खाई में न गिराते पर फिर भी कभी कभी वो किसी कगार पर चलने लगता था । वो मुझे धीरे धीरे अपने ही तरीके से अल पास पर्वतों के बीच के दरों में सुरक्षित ले आया था । उन्होंने लकडी के बडे बोले गठन को अपनी मीट पर लाख कर ले जाने की आदत की वजह से और यहाँ पर मुझे दिनभर में ही दर्जनों तरीके के मौसम का सामना करना पडता था । ऐसा लग रहा था जैसे ऍम के काट के होने पर सवार था । अब वायु के क्षेत्र में था तो अब अग्नि के क्षेत्र में था और अब थोडी देर बाद पर और पिघलते हुए बस के क्षेत्र में था यहाँ पर हिलते हुए मार के वहाँ से गुजरा । इसके नीचे एक झरना झांझर करके मैं कह रहा था तथा यहाँ पर मुझे मार के लगाते हुए लम्बे लम्बे टुकडे देखिए जिनकी सुंदरता बयान करना ही मुश्किल है और यहाँ पर इतनी दिल बहल की हवा आपने मदन और मोह को छू रही थी जिसका अहसास बहुत सुखद था और जब मैंने अपने खच्चर को वहाँ पे पर बस में लूट लगाते देखा तो मुझसे भी रखना गया और मैं भी बस के मैदान पर लूटने लगा । अब मैं आधे घंटे में अपनी यात्रा के उस पडाव पर पहुंच जाऊंगा जहाँ पर एक काम चलाऊ सराय मिल जाएगी जबकि आर्थिक की ठंडी त शामिल एक मील आगे खर्चा अपने ऊपर सामान रख कर ले जा रहे होंगे । और इस तरह से मैं पहले या लकडी के मनी मकानों के समूह के पास पहुंचूंगा जहाँ से रास्ते से थोडा हटकर वो झरना है और मैं खुशी के मारे किसी अन्य यात्री को वहाँ पर देखकर सुनना उठाऊंगा और तब मुझे उस खडी चढाई पर्ची पर जाकर कुछ खाने की चीज चाहिए होंगे । फिर मैं उस देवता से जा टकराता हूँ जिसकी पत्नी को भेजेगा, लिखना हुआ था और दो उसे सहलाते हुए उठ नहीं का लोग अपना पुराना धो फॅमिली के लिए मुझे कुछ खाने पीने के लिए भी थी की और वहाँ से आने जाने वाले मुसाफिरों की कहानियां सुनाइए और उसमें से कुछ जो वहाँ थोडी दूर पर ही बर्फ में दबकर मर गए थे । एक रात को जब बाहर जानलेवा ठंड थी और अंदर इसको जल रहा था । मैंने सपना देखा कि मैं रूस में है और वो बिल्कुल वैसा ही था जैसा कि मैंने कभी पिक्चर बुक में देखा था और उसमें एक गुलाम भी दिखा था तथा मुझे एक राजकीय व्यक्ति द्वारा जो ऑफर की टोपी पहले था, बूत पहले था तथा कानून में बाद में पहले था मुझे कौन से मारने वाला था । मैंने सोचा ये भी किसी तरह करने लग ग्रामर रहा होगा । मुझे इन पर्वतों पर झरनें और छोटी नदियों पर जाने को कहीं । इस यात्रा में मैं कई धार्मिक जगहों पर ठहरा और कई निर्जन स्थानों पर भी ठहरा । यद्यपि में उन लोगों के विचारों का नहीं था । वो लोग नीचे समतल प्रदेश में जाना चाहते थे जबकि मैं वहीं पर रूके रहना पसंद कर रहा था । जहाँ पर मैं था उन लोगों ने कैसे कैसे कदम नहीं उठाए । नीचे जाने के लिए हूँ बहुत गहरे और अंधेरी खड्डों में गिर गए और उसमें से किस किस तरह की मुझे नहीं आएँ । कुछ हिस्सों में जहाँ मैं गया था, उन लोगों में से कई लोगों का इस्तेमाल लकडियाँ नहीं खेले जाने के लिए किया जाता था जिससे उन्हें अगले चरणों में मैं के ईंधन के रूप में चलाया जा सके । पर उनके भयानक जंगली स्वभाव को आसानी से काबू में नहीं लाया जा सकता था और वो लकडी के हर करने से लडते रहते थे, उसको बार पर घूम आते रहते थे । जब तक की इन दोनों में से छानना निकल आए, उसको नुकीले कोनों के साथ टकराते रहते थे, उसको उसके रास्ते से हटा देते थे और चिल्लाते हुए उस है उन किसानों के ऊपर लहराते रहते थे । वो लूँ उसे फिर आपने लंबी लट्ठों से सही रास्ते पर मजबूत लट्ठों के साथ डाल देते थे । हाँ, समय और जल की धारा मुझे तेजी से नीचे नहीं गई और एक बहुत ही साफ आसमान माने दिन मैं स्विट्जरलैंड पहुंच गया । जिनेवा की झील कितना मन बहुत तक पर खडे होकर मैंने चमकदार नहीं पानी को देखा और उसके सामने बर्फ से ढके पहाडों को देखा तथा अपने पाउंड के पास ना और जहाँ देखे जिन पर मध्यसागर के पान लगी थी जो कि मेरे वतन के फंसे बने भव्य कदम की बहुत बडी सी छवि सी लग रही थी । अचानक आसमान में बिना किसी आहट के बाद अच्छा अगर और ऐसी हवा चलने लगी जैसे कि मार्च में इंग्लैंड में पूर्वी हवाएं चलती है और मेरे कानों में एक आवाज आई ये बंद ही यह आपको कैसी लगी? मुश्किल से आधे मेरे के लिए एक जर्मन यात्री रखने बैठा था जो लंदन में गाडी विभाग में बिक्री के लिए रखी हुई थी । मेरे एक दोस्त ने जो बाहर विदेश जा रहा था मुझसे कहा था कि मैं उसके लिए एक गाडी । यह कोच देखकर हम और जब मैं गाडी की गंदी और इस आदमी को बैठ कर जांच परख रहा था तब मुझे उसमें यात्रा करते समय ये सब खयाला आए । ये बहुत अच्छी रहेगी । मैंने कुछ उदास होते हुए और उसके दूसरी ओर के दरवाजे से निकलते हुए कहा तथा उसके दरवाजे को बंद कर दिया । ये पूरी यात्रा बस मेरा एक लम्हें का खयाल भर ही था । कितना अच्छा होता कि अगर मैं ये सब यात्रा सच्ची मुझ कर चुका होता ।

10 इटालियन कैदी

ऍम इटालियन लोगों पर लंबे समय से चले आ रहे अत्याचार जो शब्दों में बयान नहीं किए जा सकते हैं, उसके खिलाफ विद्रोह और तमाम लंबी लंबी रातों के बाद एक उदास और था की सुबह का होना इस बात नहीं । उनके सुंदर देश के मुंह पर कालिख पोत दी है । इस से मेरा दिमाग कभी कभी मेरे उस देश में इधर उधर छोटी मोटी यात्राओं और प्रवासों की ओर चला जाता था । इसी से संबंधित मुझे एक अजीब सी घटना याद आती है, जिसमें मैंने एक बहुत छोटा सा रोल अदा किया था । मैं अपनी कहानी को बिना किसी आठ का प्रदर्शन के संदेह के डर से बयान करना चाहता हूँ । ये बात कई एक सत्य खता है । भूमध्य सागर के तट पर बसे एक छोटे से शहर में गर्मी की एक शाम को नया ही नया आया था । मैंने सराय में डिनर किया तथा मैं और मच्छर एक साथ ही सराय से बाहर निकले । ये जगह नेपाल से काफी दूर थी, पर चमकती भूरी चमडी की एक मोटी से नेपोलियन और वहाँ पर एक नौकरानी के रूप में काम करती थी । वो मूक नाटक या नकल करने में इतनी होशियार थी कि मेरे कहने पर कि वह ऊपर कमरे में रखे जूते पॉलिश कर के लिए आए । उसने एक मिनट के अंदर उसे काल्पनिक रूप से ब्रश किया । फिर कॉलेज करने की तरह जल्दी जल्दी हाथ चलाए और मुस्कुराते हुए लेकर मेरे सामने रख दिए । मैं उस पोटली छोटी सी औरत पर उसके इस तरह के फुर्तीले फंसे भी जल्दी से मुस्कराया और वो खुद थी और अभी मेरे इस काम से बहुत संतुष्ट हुई । बस और वो खुश हुई क्योंकि मैं भी उससे संतुष्ट था । उसने खामोश होकर अपने हाथों से ताली बजाएं । हम लोग सराय के आंगन में खडे थे । मुझे सिगरेट पीता देखकर उसकी आंखों में चमक आ गए जिससे मैंने साहस करके उसे भी एक सिगरेट पेश करते हैं और उसने खुशी खुशी स्वीकार कर लिया है । मैंने उस सिगरेट से उसके गालों पर पडे डिंपल को भी छोड दिया था । उसने चारों ओर बनी हुई लकडी की हरी जालियों में से ये देख कर सुनिश्चित किया कि कहीं उसकी मालकिन उसे देख तो नहीं रही है । और फिर उसने पंजों के बल खडे होकर मेरी सिगरेट से आपने सिगरेट चला लिया और सिगरेट का कश खींचते हुए कहा आप यहाँ से सीधे चले जाए और पहले चाय मोल लें और आपको वो सामने दरवाजे पर खडा मिल जाएगा । मैं उसको अपने इस काम के लिए कमीशन दे देता हूँ तथा उसके बारे में पूछताछ करने लगता है । मैंने इटली में कई महीने तक कमीशन दिया । मेरे इटली छोडने से पहले एक दिन एक बहुत ही उदार मानव या नोबल मैन मुझसे मिलने आए । ये कहानी लिखने के समय उनकी मृत्यु हो चुकी है और इसके साथ ही बहुत से देश निकले । अंग्रेजों ने अपना एक अच्छा दोस्त भी खो दिया था । उसने मुझसे कहा जब भी मैं कभी इस तरफ किसी शहर में नहीं तो एक गियोवानी कालो देना की खोज करें जिसकी एक छोटी से शराब की दुकान है उससे मेरा नाम महीना और तब तुम उसकी प्रतिक्रिया देखना । मैंने उसकी इस बात को जो बहुत ही भरोसे पर कहीं गयी थी उसको स्वीकार कर लिया और अब मैं उसी करता विकुल निभाने आया हूँ । सारा दिन भूमध्यसागर से गर्म हवाएं आधी रही और शाम को भी सी । बी । एस की जगह गरम हवा ही चलती रही । मच्छर और जो लोग आराम से मस्ती में बोल रहे थे पर बाकी सब प्राणी बेहोशी की हालत में नजर आ रहे थे । यदि कोई चीज हवा दे रही थी तो वो मर्दों को रिझाने वाली दो चालबाज लडकियों के छोटे से गुडिया के स्टाॅल बहुत ही बूढी और खाकी मानवीय बहुत थे । अपनी अपनी तक ये लेकर ऐसे बैठी थी जैसे वो अपने ही सफेद हो चले बालू से मुलकात रही हैं । मेरा ख्याल है एक की वो भी कभी खूबसूरत रही । वो सब फुटपाथ पर घरों की दीवार के सहारे बैठी थी । हर आदमी जो फव्वारे पर पानी लेने आता था वहाँ से वापस ही नहीं जाना चाहता था । जैसे कि उनके पास घर जाने की शक्ति ही ना बच्ची हो चर्च में बस ये संध्या पूजा अभी थोडी देर पहले ही खत्म हो गई थी क्योंकि जब मैं उसके पास से गुजर रहा था तो वहाँ से अगर बत्ती की खुशबू है, कोई भी आदमी काम करता हुआ नहीं दिख रहा था, केवल एक घंटे रहे हैं जो तांबे के बर्तन बनाने वाला था उसके अलावा कोई काम नहीं कर रहा था । किसी भी इटालियन शहर में आप इस ठठेरे को हमेशा काम करते हुए देख सकते हैं । वो जोर जोर से अपने बर्तनों को ठोकना तीस तक दिख जाएगा । मैं सीधे चलता रहा और थोडी ही देर में पहले दाय मोड पर पहुंचता हूँ । ये एक पतली और निष्क्रिय से गाली लग रही है जहाँ पर मैंने एक अच्छे खासे कद के आदमी को देखा जिसके चार ढल मिलिट्री वालों की तरह है और जिसमें एक ओवर कोट भी पहना हुआ है । वो मुझे देखता है और मैंने देखा की वो एक छोटे से मदिरालय में घुसने की डेथ हुई थी और मैं वहाँ की इस मध्यम रोशनी में ये देख सकता था कि इस दुकान का मालिक जी वो पानी कारले हुए रहा था । मैंने उस आदमी के लबादे से अपना है छुडवाया और अंदर दाखिल हो गया । अंदर जाकर मैं एक स्कूल खींच कर एक छोटे से टेबल के साथ बैठ गया । नाम जो लग रहा था कि कॉम पे के खण्डरों से खोज कर लाया गया हूँ चला दिया गया था परसाना कमरा खाली था । लगता थोडे आदमी मेरे पीछे पीछे आया और सामने आकर खडा हो गया यस मिस्टर मैं आपकी सेवा में उपस् थित हो साहब मुझे गिलास माइंड दीजिए । वो मोडकर एक छोटे से काउंटर के पास शराब लेने जाता है । उसके पीले चेहरे और धीरे धीरे काम करने के तरीके से मैं अंदाजा लगाता हूँ कि वह जैसे किसी बीमारी से उठा हूँ और बहुत कमजोर भी लग रहा था । मैं पूछने पर उसने बताया, यहाँ वो बीमार था पर इतना ज्यादा भी नहीं । बस उसे मामूली बुखार था । जब उसने छोटे से टेबल पर वाइन का ग्लास रख दिया तब मैंने उसे कंधे पर पीछे से हाथ रखकर उससे धीमी आप आज कहा मैं एक इंग्लिशमैन होंगे और तुम मेरे एक दोस्त को जानते हो क्या तुम्हें याद है और मैं धीरे से अपने उस देशवासी मित्र का नाम लेता हूँ । अच्छा नही वो जोरों से चिल्लाता है और फूट फूटकर रोने लगता है । वो अपने घोटलों के बाल एकदम मेरे करीब आ जाता है और मेरे दोनों पैर पकडकर अपना सिर्फ जमीन को छू आता है । कुछ साल पहले ये आदमी जो इस वक्त मेरे पैरों पर पडा था और जिसका दिल अब पिघल कर फट पडने वाला था और जिनके अनवरत बहते हुए आ सोने मेरे कपडों को भी रो दिया था । वो उत्तरी इटली के एक जेल में गुलाम के तौर पर था । वो पिछली क्रांति में हिस्सा लेने के कारण एक राजनीतिक बंदी था और उसे आजीवन कारावास का दर्द मिला था । ये निश्चित था की वो एक कैदी की तरह जंजीरों में जकडा हुआ ही मर जाता । ये ऍम की नहीं परिस्थितियों में उसे जेल में मिलने नहीं जाता । वो इटली की बहुत खराब और बदलाव जेल थी और उसका कुछ हिस्सा पानी में बंदरगाह के नीचे था । उसके बंदीग्रह की जगह तहखाने में और पानी के नीचे थे । उसके गेट में लोहे की एक जाली लगी थी जिसमें से केवल उतने ही हवा और रोशनी आती जाती थी जितने की वहाँ आ जा सकती थी । उसकी दशा असहनीय रूप से खराब थी और कोई भी अजनबी क्या पर्यटक वहाँ शायद ही सांस ले सकता था या बिना टॉस की मदद से कुछ देख सकता हूँ । उस इंगलिशमैन ने उसे इस अमानवीय दशा में जब देखा तो वो तो खाने में आपने लो है कि चार फाइव है बडी भारी लोहे की जंजीरों से बना हुआ था । उसके चेहरे को देखकर उस अंग्रेज को ये लगा कि वो उन लोगों में से नहीं था जो इस प्रकार के जघन्य अपराध कर सकते हूँ कि इतनी कडी सजा पाए । फिर उससे बात करके दो ये जान पाया कि वह किस तरह से यहां पहुंचा । जब वह अंग्रेज उस भयानक अंधेरी सीजन भरे ते खाने से बाहर निकला तो उसने अपने कमांडर जो उस चीज का गवर्नर भी था, उससे पूछा कि जियोवानी को क्यों सबसे खराब जगह रखा गया था तो उसने बहुत रुखा सा जवाब देते हुए कहा क्योंकि उसे इससे का रखने के लिए खासकर बोला गया है । उसका बहुत रुखा सा जमा था और उसको मौत की सजा दी गई है । माफ कीजिएगा उसकी विशेष कार अनुशंसा की गई है उसके गले में एक बहुत खराब ह्यूमर है । निसंदेह ये उसकी इस खराब दैनि स्थिति से हुआ है । यदि उसको यूँ ही छोड दिया गया और नगालैंड कर दिया गया तो वहाँ यूँ ही मर जायेगा । छमा करें लेकिन इस कैदी को विशेष रूप से इलाज के लिए रिकमेंड किया जाना चाहिए तो कांग्रेस उसी शहर में रहता था पर उस आदमी को जो काल कोठरी में अपने बिस्तर पर चीन से बना पडा था । उस आदमी की तस्वीर बार बार उसके जहन में उभरकर आ रही थी और उसकी शांति भंग कर रही थी । वो बार बार जेल जाता रहा और उससे बातचीत करता था तथा उसको किसी भी प्रकार से खुश करने की भी कोशिश करता था । उसने अपना पूरा जोर लगा दिया । उसे चारपाई के पास से चेन से ना बंदा जाए और आजादी दिलाई जाए । अच्छा है वो दिन में कितनी थोडी देर के लिए ही हो और वह जेल के गेट तक आ सके । आखिरकार काफी समय बाद उस की कोशिशें रंग लाई और उस बंदी को उन्होंने चीन से मुक्त कर दिया जिससे वो थोडा चल फिर सके और गेट तक के आ जा सके । लोहे के गीत की सलाखों से जब उसके ऊपर रोशनी पडी तो उसके गाने का ट्यूमर ठीक से दिखा । डॉक्टर ने उसकी शल्य चिकित्सक करके उस ट्यूमर को बाहर निकाल दिया और थोडे दिनों बाद ही दो गांव भर गया तो उस समय तक उसकी उस बंदी में दिलचस्पी काफी बढ गई थी और उस ने संकल्प लिया कि वो अपनी पूरी कोशिश करेगा कि उसे छमा प्रदान करानी चाहिए । यदि कैदी कोई चोर, बदमाश यह हत्यारा हूँ अथवा कोई राजनीतिक बंदी होता जिसने न्यू के कैलेंडर में हर प्रकार के राजनीतिक काम किए होते हैं और बार बार जेल के अंदर गया होता तो किसी वकील द्वारा या पादरी के प्रभाव से उसे बडी आसानी से छुडवाया जा सकता था । पर इसके इसमें ऐसा कुछ भी मुमकिन नहीं था और उसको जेल से छुडाना बहुत मुश्किल था । इटालियन अधिकारी और इंग्लिश अधिकारियों ने भी उसको केवल यही आश्वासन दिया कि उसे छोडा पाने की कोई उम्मीद नहीं थी । अधिकारी लोग उस से कतराते थे । यह मना कर देते थे अथवा फिर उसका बाद में मजाक भी उडाते थे । वो राजनीतिक बंदी उस जगह में एक मजाक बन कर रह गया था । दो अभागा अंग्रेजी समाज में भी एक मजाक का विषय बन कर रहे गया था । परन्तु उस अंग्रेज के अंदर बहुत आसाधारण साहस था जो अंग्रेजों में बहुत कम पाया जाता है । उसको इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि लोग उसे एक बोझ समझेंगे । वो एक अच्छा मानवीय काम करना चाहता था । पता वो जी जान से इस कोशिश में लग गया कि किसी प्रकार से वह जोवानी कालू बेटे को जेल से रिहा कर आप आए । उस कैदी को उसके ट्यूमर के ऑपरेशन के बाद फिर बडी बेरहमी है जंजीरों से जकड दिया गया था और ये मुड के नहीं था कि वह बहुत ज्यादा दिन तक जिंदा रह पाएगा । एक दिन जब सारे शहर को इस इंगलिशमैन और उसके राजनीतिक बंदी के बारे में पता चल गया तो उसके पास एक फॅर जिससे बहुत थोडा थोडा जानता था । उसने उसके सामने एक अजीब सा प्रस्ताव रखा । उसने कहा जियोवानी कानून मेरे को जेल से छुडाने के लिए आप मुझे सौ पहुँच । मुझे उम्मीद है कि इस घर द्वार मैं उसको छमा दिलवाने में कामयाब रहूँगा । पर आप मुझसे कभी भी ये बात नहीं पूछेंगे कि मैंने इस धन का कब और कैसे कहाँ इस्तेमाल किया । उस अंग्रेजी से पूछा कि चलो कोई बात नहीं ये जोखिम भी उठाना ठीक होगा और उसने उसको सौ कौन दे दिए तथा उस बारे में फिर उसने दुबारा कोई बात नहीं । आधे साल या उससे ज्यादा ॅ कोई इशारा नहीं किया और किसी भी प्रकार से उसने इस विषय को अपने मन में नहीं लिया । वो इंगलिशमैन फिर विवश होकर शहर छोडकर इटली के उत्तर में एक मशहूर शहर में चला गया । उसने बहुत भरे दिल से उस कैदी से विदा ली जिसकी मौत निश्चित थी । उसके लिए कोई और चारा ही नहीं बचा था । इंग्लिशमैन अपने नए घर में छह महीने या उससे अधिक समय रहा होगा और उस अभिशप्त कैदी के बारे में कुछ पता नहीं चला । काफी समय बाद उसे ऍसे एक छोटा सा और रुखासाना लेकिन बहस समय नोट मिला जिसमें दिखा था । यदि तुम उस आदमी का भला चाहते हूँ जिसमें कभी दिलचस्पी ले रहे थे तो तुरंत पचास और अधिक भिजवाने की कृपा करें । मेरे खयाल से उसका जेल से रिहा हो जाना सुनिश्चित हो जाएगा । अब उस अंग्रेज ने बहुत पहले ही अपने मन में ही तय कर लिया था कि ये एडवोकेट एक शातिर चालाक आदमी है, जिससे उसकी विश्वसनीयता और उस अभागे कैदी के प्रति जो दया भावना थी, उसका नाजायज फायदा उठाया था । पता है उसने भी एक एडवोकेट को एक सूखा और संचित उत्तर दिया कि वो पहले से ज्यादा अक्लमंद हो गया है और उसकी जेब से अब वो और पैसे नहीं निकल जा सकता है । वो शहर के बीच से कुछ दूर बाहर रहता था और पोस्ट ऑफिस वहाँ से लगभग एक या दो मिल के फासले पर रहा होगा । वो इतना पैदल चलने का आधी भी था और आपने पत्र खुद ही डाकखाने में डालकर आता था । पसंद के एक खूबसूरत दिन जब आसमान साफ और नीला था तथा समुद्र देवी रूप से सुन्दर था । उस अंग्रेज ने अपने कोर्ट की जीत में बहुमत रखा और शहर में पोस्ट ऑफिस की ओर चल पडा जब वो ऐसे खूबसूरत वातावरण में चल रहा था और मौसम का आनंद उठा रहा था । भर बस ही उसका नहीं यार उस कैदी की ओर चला गया जिसको आप शायद ही करें । खुले आसमान के नीचे घूमने का मौका मिल पाए और उसके लिए इस दुनिया में कोई खुशी नसीब नहीं होनी है । जैसे जैसे वो पोस्ट ऑफिस के नजदीक पहुंचता गया उसके मंदिर एक बहुत उथल पुथल मचने लगी और वो बहुत अशांत महसूस करने लगा । वो मन ही मन में विचार करने लगा कि हो सकता है पचास फोन उस बंदी को मुक्त कराने में काम आए और उस एडवोकेट का प्रयास सफल हो जाए तो वो एक आजाद आदमी की तरह बाहर निकल आएगा । इंग्लिश में कोई बहुत अमीर आदमी नहीं था पर बैंक में उसके पास कुछ पैसा था जिसमें से वो सिर्फ पचास बोर्ड इस काम के लिए और अधिक दे सकता था । तो उसने सोचा कि चलो कोई बात नहीं एक बार और इसके लिए लिया जा सकते आता है नहीं बनती है । भगवान ने उसकी इस कोशिश के लिए उसकी मदद की थी । वो इन्वेस्टमेंट फिर आपने बैंक गया और वहाँ से पचास फोन का एक ड्राफ्ट बनवाकर उसे चिट्ठी के साथ उस एडवोकेट को भेज दिया जिससे वो मिलना भी चाहता था । उसने उस ॅ को उस पत्र में लिखा की वो एक गरीब आपकी था और वह इतना समझता था कि इसलिए सारे धन से अलग हो ना उसके लिए कष्ट दायक होगा और इतनी स्पष्ट पत्र द्वारा तथा उसे उम्मीद थी कि वह धन का सदुपयोग करेगा और यदि इसमें उसका कुछ गलत इस्तेमाल किया तो उसकी आत्मा पर वह भरी पडेगा । लगभग एक हफ्ते के अंदर ही वो इन्वेस्टमेंट सुबह का नाश्ता कर रहा था तो उसके दरवाजे पे अचानक सीढियों के पास कुछ शोर सुनाई पडा और कुछ ही क्षणों के बाद जोवानी का लोबेरा उसके पैरों पर पडा था । एक आजाद आदमी की तरह इस बात से दुखी होकर कि उसने शायद एडवोकेट को गलत समझ लिया, उनसे छामा मांगते हुए एक पत्र लिखा और कहा कि वह उसका बहुत आभारी था । उसने आगे ये भी जानना चाहा कि उसने किस तरह से उसे जेल से मुक्त कराया है । फॅमिली जैसी ही उसे डांट द्वारा उत्तर दिया जैसा कि आपको पता होगा हमारी इटली में कई ऐसी चीजें हैं जिनके बारे में यही बेहतर रहेगा कि फिलहाल हम कोई बातचीत न करें क्योंकि ये सुरक्षित रहेगा और मुमकिन है कि जब हम भविष्य में कमी मिली तो आपसे इस बारे में पूरी बात बता सकें । पर अभी यहाँ खत्म में यहाँ तो बिलकुल भी नहीं ऍम और वह ऍम कभी भी नहीं मिल सके क्योंकि जब इंगलिशमैन को उसका बंदा मिला तब तक उस ॅ की मृत्यु हो चुकी थी । इस वजह से और किस तरह से वो आदमी उस तरह खाने और जेल से मुक्त हुआ था मेरे लिए और उस अंग्रेज के लिए तथा स्वयं उस बाद में के लिए रहस्य ही बन कर रह गया । परंतु इस उमसभरी रात में मेरे सामने वो बाद में मेरे पैरों पर पडा था और जोर जोर से रोज जा रहा था और उसके आंसुओं से मेरी ड्रेस भी गई थी । वो कुछ कहना चाहता था लेकिन जोर जोर से रोने की वजह से उसका गला रुंध गया था । वो खुश हो रहा था क्योंकि मैं उसके उस दोस्त से मिला था, उसका हाथ हुआ था जो उसका हितैषी था और जेल से छुडवाने में उसने अपनी जमा पूंजी खर्च की थी । उसको ये बताने की जरूरत नहीं थी कि वो उसके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार है, यहाँ तक कि मरने के लिए भी । मुझे संदेह है कि मैंने उसके पहले या बाद में कोई ऐसी आत्मा देखी होगी जो कभी भी किसी के लिए इतना ज्यादा कृतज्ञ हुआ हूँ । लोग उस पर अभी भी संदेह करते थे और उस पर कडी नजर रखते थे । फिर वो इस बात के लिए बहुत सावधान रहता था की वह फिर से दोबारा किसी भी तरह की कोई झंझट में ना फंस जाए ये तो एक वजह है और दूसरी वजह यह की दुनिया बी तौर पर उसमें ज्यादा का रखी नहीं की थी तो उस इंगलिशमैन से पिछले दो तीन सालों में उतना संपर्क नहीं रख पाया था जितना उसे रखना चाहिए था । पर उसका भविष्य अब बेहतर होने वाला था क्योंकि उसकी पत्नी जो बहुत दिया था, बीमार थी, अब लगभग ठीक हो गई थी और उसका बुखार भी अब उतर गया था । उस आदमी ने अब एक छोटा सा अंगूर का मखीजा या वाइनयार्ड खरीद लिया था और मुझे ये जानना चाहता था कि वो उसके दोस्त के लिए और हितैषी के लिए उसके वाइनयार्ड से निकली शराब की एक होटल उस तक पहुंचा देगा या नहीं । तो उस दिन मैंने कहा हाँ जरूर क्यों नहीं? और मैं उसमें से एक मोर भी ज्वाइन छलकने नहीं होगा । उसने बातचीत शुरू करने से पहले कमरे का दरवाजा बहुत सावधानीपूर्वक बंद कर लिया था और इतने भावविभोर होकर प्रांतीय इटालियन में बात कर रहा था कि उसको समझना मुश्किल हो रहा था । इस वजह से इंग्लिस मैंने उसे बीच में कई बार तो करिए । कहा कि वह धीमी रफ्तार से और थोडा शांत होकर मूल्य जिससे वो उस की बात पूरी तरह से समझ सकें । धीरे धीरे वो शांत हुआ और सुकून से मेरे साथ होटल तक चल कर आया । होटल में अपने कमरे में पहुंचने के बाहर सोने से पहले मैंने उस इंगलिशमैन को अपनी इस मुलाकात का विस्तृत वर्णन एक पत्र में लिखा और अंत में उसको लिखा कि मैं उसकी वाइफ को बिना एक मूल भी गिराए । चाहे जितनी भी घटनाएं हो उस तक जरूर लेकर आऊंगा । अगले दिन सुबह जब मैं अपनी आगे की यात्रा शुरू करने के लिए होटल से बाहर आया तो देखा वहीं इटालियन एक बहुत बडी सी ऍम जैसे कि इटली में शराब स्टोर करने के लिए घरों में होती है और उसमें लगभग आधा दर्जन सामान्य वाइन मुझे समझा सकती थी । वो लिए होटल के बाहर खडा था । सफर में उसके टूटने से बचने के लिए उसने उसके चारों बेटे की एक टोकरी सी बनाने नहीं । इतने दिनों में मैं आज उसको दिल के उजाले में ठीक से देख पा रहा था । उसकी आंखों में तक क्या के आंसू भरे हुए थे और कर सब मेरा ध्यान उस भारी भरकम होटल की बहुत खींच रहा था । उसी समय सडक होने पर दो हट्टे कट्टे बिच्छू जो आपस में बातचीत करने का नाटक कर रही थी पर उनका सारा ध्यान मेरे पास बॉटल की ओर ही था और वो चारों आंखें हम पर नजर रख रही थी । वो बोतल वहाँ कैसे लाई गई थी? मुद्दा ये नहीं था पर समस्या ये थी कि उस भारी भरकम बॉटल को उस टूटी फूटी गोडा गाडी पर कैसे जाएगी जिसमें मुझे वहाँ से निकलना था और जब वो बॉटल किसी तरह से उसमें अंदर रख दी गई तो फिर मेरी बैठने के लिए तो जगह ही नहीं बची थी । इस वजह से मुझे बाहर कोचवान के पास बैठना पडा । आखिरी बार जब मैंने जियोवानी का मेरा को देखा तो वो शहर में जाती हुई कोच के साथ दौड रहा था और मेरा हाथ पकडकर अपने हितैषी के लिए तमाम दुआएं और सन्देश भेज रहा था । बीच बीच में वह सागर उस होटल की ओर भी देखता जा रहा था जो अपने पिता इसी के लिए बताओ और उपहार भेज रहा था । और अब बेचैन मन से वो ऍम और अमूल देने नहीं मुझे भारी लगने लगी और उसका मुझे हर जगह शुल्क चुकाना पडता था जो कोई भी व्यक्ति नहीं जानता था । उस अमूल्य निधि मेरी साठ सैकंड उम्मीद की यात्रा की दिन रात मैंने उसे अपनी पलकों से ओझल नहीं होने दिया । यहाँ तक की खराब सडकों के ऊपर से और ऐसे तमाम सडकों से मुझे कुछ करना था पर्वतों के ऊपर से और मैं हुसैन ने सहायक इधर उधर झुकते हुए बहुत हिलते डुलते देखता रहा असम के सराय के दरबाजों पर, जहाँ पर मुझे खराब मौसम की वजह से रोकना पाता था । पहले उस मॉर्डल को उतारा जाता था और फिर मुझे ऐसे ही सराय से निकलने के समय पहले उस होटल को किसी प्रकार से आदमियों की मदद से उसे कोच में चढाया जाता था और फिर बाद में मैं बैठता था । बहुत से लोग उस विशाल अभूत मॉर्डल को संदेह की दृष्टि से देखते थे । इससे मेरे मुश्किलें और अधिक बढ जाती थी । वो किसी बच्चे की किताब में बनी ॅ की तरह था । दस कमीने उसे किसी प्रकार से टैकल क्या ऍसे कुतरा और रूम में उसे लेने से इंकार कर दिया? ऑस्ट्रिया नहीं । इस पर दो शहरों पर क्या सिपाहियों को भी उस पर शक होता था? फॅसने उसे जो आप क्या मैं नहीं इस प्रॉब्लम पर काम किया एक छोटा और सात सुखा ब्याख्यान बॉटल के बारे में बना लिया था । जिससे मैं हर गार्ड, हम धमाल, शहरों के गेटों पर बैठे प्रहरियों और प्रतीक ड्रॉप भेज और तीनों के प्राचीर पर सुना दिया करता था । कई बात को मुझे दिन में पचास बार बंदी से उतरकर सिपाही हूँ को समझाना पडता था कि उस विशाल बोतल को में क्यों नहीं जा रहा था और इसलिए क्या रखा है रोमन राज्यों की गिरती हुई व्यवस्था में उस बॉटल को ले जाना ऐसा था जैसे कि मैं अब धर्म धर्मशास्त्र को ले जा रहा हूँ । नेपोलियन देशों में जहाँ पर प्रत्येक व्यक्ति गुप्तचर था, जैसे पहले अथवा फिर पांच ही था वहाँ पर वो बेशरम अधिकारी बॉटल टूट पडते थे और जब तक मुझ से कुछ रुपया पैसा नहीं वसूल लेते थे उसे छोडने को तैयार ही नहीं होते थे । मुझे उस बॉटल के बारे में तमाम पूरे और स्पष्ट अच्छा परफॉर्म घर में पढते थे और फिर उस पर तमाम तरह की मोहरे लगाई जाती थी । तब कहीं जाकर मैं कुछ आगे बढ पाता था । मुझे तरह तरह से घर आया और धमकाया जाता था और जब तक मैं उनके गंदे हाथो में कुछ चांदी के सिक्किम नहीं दे देता था । तब तक वो बहुत को आगे नहीं जाने देते थे । हर तरह से हतोत्साहित होने के बाद भी मैं अपने इसलिए छह पर अडिग रहा की मैं होटल को हर हाल में उसके गंतव्य तक बिना किसी नुकसान के या एक भी बूंद गिराए उसको वहाँ तक पहुंचाऊंगा । हालांकि बहुत बडी शर्त में मुझे ज्यादा परेशान किया और मिलिट्री वालों ने ना जाने किस किस तरह के कौन किस फिल्म लगाए तथा उसे खोलने की भरसक कोशिश की । जब बॉटल नहीं खुल पाई तो अज्ञात जांच यंत्रों को लेकर आए । वो बॉटल खोलकर देखेंगे कि वह वाकई में शराब थी या कुछ और । जब की मैं उनसे कहता रहा कि वह ऐसा कुछ नहीं करें और मैं उस पर जमकर बैठ जाता था । इटली के दक्षिणी भाग में उस मॉर्डल को लेकर और ज्यादा झंझट और मोर चलाना तथा इशारेबाजी हुए । ऐसा लगता था कि यदि किसी ने पचास हत्या की होती तो भी उसको इतना नहीं लगता ना जाता । जितनी बातें मुझे इस मोटल की वजह से झेलनी पडी थी, उसने तमाम बडे बडे अफसरों को आधी रात में उठाकर बैठा दिया । मैं जानता हूँ कि कम से कम आधा दर्जन मिलिट्री की लॉन टेनिस उस हुए हुए चौक के चार और भेज दी जाती थी कि वह सरकारी अफसरों को आधी रात में अपने बिस्तरों में से उठाकर लाये और वो लोग भी तुरंत ही अपनी पॉकेट हैड को सिर पर रखकर बोतल की यात्रा रोकने के लिए निकल पडते थे । मुझे इस भारी भरकम होटल को लेकर इस शहर से उस शहर जाने कितनी कठिनाई हुई जिसको मैं बयान नहीं कर सकता । जबकि सिग्नल मार्जिन उन्हीं दिनों जनता हुआ क्रॉस लेकर इटली की एक छोर से दूसरे छोर तक जा रहे थे । फिर भी मैं अपनी इस विशाल बॉटल से ऐसे चिपका रहा जैसा की एक पुराने जमाने का नफीस अंग्रेजी ऍम कर सकता था । लूट जितना ही मेरे बॉटल के साथ प्रतिबंध लगाते थे या उस की यात्रा में रुकावट पहुंच जाते थे, उतना ही मेरा इरादा तो हो जाता था कि मैं इस बॉटल को उसके असली मालिक तक हर हाल में पहुंचाकर ही रहूंगा । जैसा मैंने जियोवानी का लोबेरा वादा किया था क्योंकि ऍम उस आजमी द्वारा दी गई थी जैसे उन्होंने जेल से छुडाने में सारी शक्ति लगा दी थी और उसे नया जीवन मिला था । यदि मैंने कभी कोई जिद पकडी थी तो उन दिनों वो भी उस बॉटल ही के लिए । पर मैंने अपना ये नियम बना लिया था कि अपना पॉकेट में कुछ खुले पैसे और सिक्के उस बॉटल के खाते जरूर रख लेता था और ये भी देखता था की मुझे होता ना आए । किस तरह से मैं और मेरी बॉटल रास्ते में आगे बढते रहे । एक बार तो रास्ते में हमारी कोच का ब्रेकडाउन ही हो गया और वो बहुत ही बुरा था । जब हम एक ऊँची चढाई वाली जगह से गुजर रहे थे तब बडी आज तूफान वाली शाम थी जब हमारे बीच समुद्र था और बहुत जोर किसान देख रहा था । हम उस दिन चार जंगली को नोवल पढी में चल रहे थे और ऍम में हमें काफी दिक्कत हुई । मैं बाहर बैठा हुआ था और गनीमत ही था की मैं घी से गिरा नहीं पर बॉटल उस तगडे झटके से झटक करुँगी से बाहर सडक पर गिर चुकी थी और ऐसा होता देख मेरे तो होश ही उड गए थे । पर ईश्वर की कृपा से बॉर्डर कोई छठी नहीं पहुंची और उसके पास कितना जो मामूली टूट फूट हुई थी उसे हमने ठीक करवा लिया । और फिर हम विचाई भाव से अपने सफर पर आगे बढते रहे हैं या फिर इस जंगली घोडों वाली महीने मुझे बहुत परेशान किया था । फिर हम से हजारों बार यहाँ वहाँ आवेदन किया गया । मैं उस बॉटल इस जगह ऍम छोड दो पर मैं किसी भी आश्वासन या डराने धमकाने से होटल से अलग नहीं हुआ । इस तरह की तमाम राजनीतिक चालों से मैं गुजरता हुआ विजयी भाव से जिनेवा के बंदर कहाँ पर पहुंच गया? ऍम भी फिर मैंने हमारे दिन से उस बॉडी को अपने एक इंग्लिश ऍसे हवाले कर दिया जो उस जहाज द्वारा उसे इंग्लैंड के बंदरगाह तक सुरक्षित पहुंचा देगा । और इस तरह से मैं उससे कुछ हफ्तों के लिए जुडा हुआ । जब वो होटल अपनी समूह यात्रा पर थी तब मैं उन दिनों सिटिंग से जुडी हुई हर खबर को बहुत ध्यान से पडता था जैसे कि मैं कोई अंडरराइटर हूँ । जब मैं स्विट्जरलैंड और फ्रांस के रास्ते में इंग्लैंड पहुंच गया तो उसके बाद खबर आई कि रास्ते में समुद्री तूफान आ गया था और मुझे मन में डर लगा कि कहीं वो बहुत दूर ही ना गई हो । पर बाद में मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा । जब मुझे ये बताया गया की बॉटल सही सलामत अपनी जगह पहुंच गई है और मैं उसको सी फॅमिली कस्टम हाउस से ले सकता हूँ । वो केवल विनिगर या सिर का थी । मैंने उसे इंग्लिश में इनके सामने रखा । शायद वो सिर्फ की तरह ही कोई चीज रही होगी जब मैंने उसे जोवानी कालू मेरा से लिया था । पर एक बोल ही कहीं गिरी नहीं थी और ऍम बहुत भावुक होते हुए मुझे बताया कि उसे कभी भी इतनी उम्दा बाइक नहीं है जो इतनी मीठी और बढिया है । उसकी बहुत दिनों बाहर मैंने उस बॉटल को उनकी डाइनिंग टेबल पर सजावट के तौर पर देखा और आखिरी बार मैंने उन्हें इस दुनिया में भी जिसमें उनकी कमी अब भी खलती है । तब उन्होंने मुझे भीड में से बाहर ले जाकर मुस्कुराते हुए एक दोस्ताना अंदाज ने बताया कि हम लोग डिनर पर आज आप की ही बात कर रहे थे और मेरी इच्छा थी कि काश आप वहाँ पर होते हैं क्योंकि मेरे पास काला फेर की बॉटल में कुछ बढियां दसवीं की शराब अभी भी थी । उम्मीद करता हूँ आपको ये एक इंसान के दूसरे इंसान बी लॉस तरीके से मदद करने की कहानी पसंद आई होगी । इस कहानी से हमें यही प्रेरणा मिलती है कि अगर हमें भगवान नहीं इस काबिल बनाया है कि हम किसी कि मदद कर सकें कि हम किसी के काम आ सके तो हम जरूर करना चाहिए । क्योंकि किसी भी अच्छे काम को करने के लिए सिर्फ मन का स्वच्छ होना ही सब कुछ होता है क्योंकि भगवान हमारे हमारी करने के हिसाब से इसका भल कहीं न कहीं जरूर देंगे ।

11 दुकानें और उनके किराएदार

दुकानें और उनके किरायेदार लंदन की सडकों पर । यदि आपको में तो आपको सोचने के लिए तमाम बातें मिल जाएगी । हम स्टर्न के साथ इत्तेफाक नहीं रखते हैं जिनका कहना है कि यदि आप डाॅन से ब्रशों तक पद यात्रा करें, यह सफर करें तो आपको सब कुछ बनचर देखेगा । हमें उस आदमी के साथ जरा भी सहानुभूति नहीं है जो ये कहीं की उसने अपनी छडी उठाई, हैट लगाई और कोविंद गार्डंस, सेंट पॉल चर्च तक गया था तथा वापस आया और उसके बदले में कुछ भी आनंद भूलती नहीं हुए या कोई मनोरंजन ही नहीं हुआ । पर इस तरह के लोग भी है जिनसे हम रोज ही मिलते हैं । बडे काली फोटो और उसके अन्दर हलकी बास्के, बहकी बहकी बातें और असंतुष्ट चेहरे इस तरह के लोगों के चरित्र गुण होते हैं और वह तेजी से आप के पास से गुजर जाते हैं । या तो किसी बिजनेस यह काम से जा रहे होते हैं या खुशी की खोज में भागते रहते हैं । ये लोग किसी पुलिस मैन की तरह बेचैनी से इधर उधर घूमते नजर आ जाएंगे । उनके मन पर कभी भी किसी भी चीज का कोई असर नहीं होता, जब तक कि कोई कोहली उन्हें धक्का देकर गिरा नाते या वो खुद ही किसी बग्गी के नीचे ना आ जाए । आप उनसे किसी भी दिन लंदन की सडकों पर टकरा जाए । जब वेस्टलैंड में किसी सिगार शॉप में शाम को नहीं पडने के पीछे से झांकते हुए देख सकते हैं वो यहाँ पर गोल्ड डबिंग या पाइप बॉक्सों पर बैठे देखे जाएंगे । चांदी की घडी पहने और गाल मुझे बढाए हुए वहाँ पर जो भी जवान और तेरे सुर फ्रेंड्ज के कपडे पहने होती थी और बडे बडे एयर रिंग्स भी उनके कानों में होते थे और जो काउंटर के पीछे से गैस लाइट की रोशनी में बैठी होती थी उनसे कुछ स्कूल जरूर और मीठी मीठी बातें करते हुए आपको मिल जाएंगे । जो जो आस पास के नौकरानियों की प्रशंसा के पात्र होती थी उसके दो दिन के अंदर जो लिट्टी ॅ बनाती थी उनकी भी चाहिए थी होती थी । हमारे मनोरंजन का एक साधन ये भी था की हम बहुत किसी दुकान की उन्नति का यानी उसके उत्थान और पतन का अध्ययन करना होता था । हमने इस तरह से शहर के कई हिस्सों में दुकानों का इतिहास जाना है । हम कम से कम ऐसी बीस दुकानों को जानते हैं जिन्होंने कभी भी टैक्स नहीं भरा है । हमने पाया कि वह कभी भी दो महीने से ज्यादा एक मालिक के हाथ में नहीं रही थी और मेरा विश्वास है कि उन दुकानों में हर तरह की चीजों का व्यापार हो चुका था । मैं यहाँ नमूने के तौर पर एक खास दुकान का जिक्र करना चाहूंगा जिसे मैं उसकी शुरुआत से ही जानता था । वो नदी के सरे की तरफ है । मार्च गेट से थोडी दूरी पर मूलता वो एक बहुत अच्छा घर था पर उसका मालिक परेशानियों में फंस गया और वो घर सरकार ने जब्त कर लिया । उसके बाद उसका किरायेदार भी चला गया और वो घर कालांतर में बर्बाद हो गया और खंडर हो गया । जब हमारा उस घर से परिचय हुआ तब उसका पेंट और पॉलिश उखड गया था और खिडकियां भी टूट गयी थी । सारे लॉन में झाड झंकार और बडी बडी होगी आई थी करो और बाउंड्री वॉल पर काई जम गयी थी । पानी के भी बडे से हॉल में से तमाम पानी इधर उधर बह चुका था । उस पर कोई ढक्कन भी नहीं था । सडक पर जो दरवाजा खुलता था वहीं उस घर की दुर्दशा बयान कर देता था । आस पास के छोटे छोटे बच्चों का ये खेल सा हो गया था कि वो उसके सीढियों पर इकट्ठा होकर उस पर लगे नौकर लोहे के कुंडे को जोर जोर से खटखटाते रहते थे जिसमें पडोसियों को बडा संतोष होता था । खासकर एक वृद्ध नर्स लेडी को कई बार उनकी शिकायतें की गई और उनके ऊपर तमाम बाल्टी पानी उन्हें लग गया पर बच्चों पर इसका कोई भी असर नहीं हुआ । इस शामिल कोने में जो एक मरीन स्टोर था उसके मालिक एक दिन उसके नौकर को ही खा ले गया तथा उसे बेच दिया और वो अभागा घर पहले से भेज ज्यादा खराब दिखने लगा । हमने अपने इस दोस्त यानि की हमारे घर का कुछ दिनों के लिए हाल चाल लेने नहीं गए । पर आश्चर्य की बात ये थी कि जब हम उस जगह पर कुछ दिनों बाद होते तो उसका कुछ नामोनिशान तक नहीं था । उसकी जगह खूबसूरत दुकान बनने की तैयारी थी जो अब लगभग तैयारी पर थी । उसके शटर पर बडे बडे इश्तिहार लगे थे जिस पर लिखा था ये दुकान जल्दी ही खोलने वाली है । यहाँ पर पर्दे, सोफी बिस्तर आदि के लिए फॅमिली और लेनिन मिलेगी और जल्द ही वह दुकान खुल भी गई और वहाँ पर साइनबोर्ड पर बडे बडे अक्षरों में प्रोपराइटर का नाम और काम नहीं लिखा हुआ था । हूँ । चांदी जैसे चमकते अक्षरों में लिखा था जिससे आँखें चौंधिया जाती थी । ऐसे रेविन और ऐसे शॉल और काउंटर के पीछे दो युवा आगे जो सफेद रंग के साफ कॉलरों वाली कमी से पहले थे और गले में साफ सुथरे सफेद रंग के ही दो इसका लपेटे हुए थे जैसे कि किसी नाटक में कोई प्रेमी हो । जहाँ तक मलिक का सवाल था वो दुकान में इधर उधर घूम रहा था और बी सेक्टर और ग्राहकों को कुर्सी पर बैठने का आग्रह कर रहा था । वो बीच बीच में अपने दो युवा सेल्समैन से कुछ बात भी कर लेता था । शायद वही एंड हो रहे होंगे जिनकी ये दुकान थी । हमने ये सब बहुत दुख के साथ देखा क्योंकि हमें कुछ ऐसा लग रहा था या पूर्वाभास हो रहा था कि वह दुकान ज्यादा दिन तक नहीं चल पाएगी । और ऐसा ही हुआ भी और दुकान बंद हुई पर जरा धीरे धीरे लेकिन बंद जरूर हो गई । उसकी खिडकी पर टिकट इस्तिहार ये नोटिस चिपकाई गई थी । फिर पहले नेल के मंडल के मंडल जिस पर लेकिन लगे थे दरवाजे के साथ खडे कर दिए गए । फिर दरवाजे पर जो बाहर स्वीट पर खुलता था नोटिस चिपकानी गया कि उस घर ये दुकान की पहली मंजिल ऍम यानी बिना साजोसामान के किराये के लिए खाली थी । उसके बाद दो में से एक नवयुवक बिल्कुल ही गायब हो गया और दूसरे नहीं । गले में सफेद के वजह काले रंग का स्कार्फ लगा दिया और मालिक ने शराब पीना शुरू कर दिया था । दुकान गंदी रहने लग गई थी और खिडकी के जो शीशे टूट गए थे वो वैसे ही पडे रहे । दुकान में से धीरे धीरे सारा सामान गायब होने लगा । अंत में वो कंपनी का आदमी वहाँ आया और उनके पानी की सप्लाई भी बंद कर दी और फिर लेनी टेम्पर भी दुकान छोडकर भाग गया और मकान मालिक के लिए पीछे चाबी छोड गया और साथ ही अपनी शुभकामनाएं दुकान का अगला किरायेदार एक फॅस को अभी आदि का विक्रेता था । दुकान को ठीक ठाक से पेड कॉलेज करवा दिया गया और साफ सुथरी भी । जब हम वहाँ से कुछ रही तो हमें ऐसा प्रतीत हुआ जैसे वो दुकान भी मुश्किल से ही चल पा रही थी और शायद ही उनका खर्चा निकल पा रहा होगा । हमने उनके मालिक को अपनी शुभकामनाएं दीं और उसकी सफलता के लिए प्रार्थना भी किए । उसका मालिक एक विधुर था और वो शायद कहीं और भी काम करता था क्योंकि हमने उसको अक्सर शहर की ओर आते जाते देखा था । दुकान का सहारा कम उसकी बडी बेटी देखती थी । बेचारी लडकी उसको किसी कि मदद की जरूरत नहीं थी । हमें कभी श्वाब के पीछे वाले कमरे में दो तीन बच्चे दिख चाहते थे जो उसी की तरह उदास से बैठे रहते थे जैसे कि किसी का शोक मना रहे हो । और जब भी हम वहाँ से रात में गुजरते थे तो हमें वो लडकी हमेशा कुछ काम करते हुए ही दिख जाती थी । यहाँ तो अपने लिए कुछ बनाती हुई या फिर दुकान के लिए कुछ छोटी मोटी चीज बनाते हुए हम वहाँ से गुजरते हुए मोमबत्ती की रोशनी में उसका पीला और उदास चेहरा देखकर अक्सर ये सोचा करते थे कि वो और जो उस से सामान आधी खरीदती थी क्या उन्हें उसके दुःख या कष्ट का आधा हिस्सा भी पता था । वो बिचारी किस तरह की गरीबी से गुजर रहे थे? क्या उन्हें इसका कुछ भी आभास था? किस तरह से ईमानदारी से वो अपना रोज मर्रा का जीवन व्यतीत कर रहे थे । उन्हें ये सब पता चलता तो उन्हें एक धक्का सही लगता है । पर इन सब बातों में हम दुकान को तो भूल ही गए । हम उस दुकान पर नजर बनाए रखे थे और हर रोज उसे देखते थे । उसको देखने से यही पता चलता था की उसमें रहने वाले पहले से ज्यादा गरीबी के दिनों में गुजारा कर रहे हैं । बच्चे तो साफ सुथरे रहते थे पर उनके कपडे बहुत ही गरीबों वाले लग रहे थे । पहली मंजिल के लिए अभी तक कोई भी किरायेदार नहीं मिला था जिससे वो किराया और अपना रोज मर्रा का कुछ खर्चा चला लेते हैं । बडी लडकी की खांसी खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी जिससे वह दुकान के लिए ज्यादा काम नहीं कर पा रही थी । तीन महीने के मांग मकान मालिक को किराया लेने का दिन आ गया था । पिछले किरायदार की फिजूलखर्ची से परेशान मकान मालिक ने इस बार के किरायेदारों पर किसी भी प्रकार की कोई दया नहीं दिखाई । उसने अधिकारियों से मिलकर उनके सामान की कुर्की यानी नीलामी करवा दी । एक दिन जब हम उस मकान के सामने से कुछ रहे तो देखा कि दलाल के आज उस दुकान जो भी टूटा फूटा पुराना फर्नीचर था, उसे हटवा रहे हैं और फ्रंट डोर पर दोबारा टू लटका स्टीकर चिपक गया था । किराए के लिए उपलब्ध इस बात का मोर बडे बडे अक्षरों में लगाया गया था । पुराने किरायेदारों का इसके बाद क्या हुआ हमें कुछ पता नहीं । हमारा विश्वास है कि वो लडकी इस दुनिया के हर प्रकार के कष्ट और दुख से दूर चली गई थी । भगवान उसकी मदद करें । हम ये जानने के इच्छुक थे कि उस मकान या दुकान का आगे क्या हुआ । जल्दी ही टू लेट का साइनबोर्ड हट गया और उस दुकान के अंदर कुछ छोटे मोटे बदलाव किए गए । हमें बस ये जानने का बुखार चढा था कि अब उस दुकान में जो आएगा वो कौन सी लाइन का होगा और क्या बेचेगा? हमने हर तरह के धंधे की कल्पना कि जो उस दुकान में चलाया जा सकता था । वो दुकान जो पहली भी ज्यादा बडी नहीं थी, उसे दो हिस्सों में विभाजित कर दिया गया था । एक बहुत पतली से पार्टीशन द्वारा और एक सस्ता स्ट्रॉ पेपर चिपका दिया गया था । दुकान के एक हिस्से में एक बोनट क्षेत्र में कर था और दूसरे हिस्से में एक टोमॅटो यानी तंबाकू वाला जो झाडियाँ और संडे न्यूजपेपर भी बेचता था । तुम ऍम हमारी याददाश्त में सबसे ज्यादा समय वहाँ ठहरा । वो लालमोहन वाला खडे इंसान था । न कैसे काम का न कार्यका और वो इस चीज का आदेश था कि जो भी चीज जैसे चल रही है बस ठीक ही है और किसी भी खराब काम का कैसे सबसे अच्छे तरीके से करना । वो दिन भर में जितने भी स्वीकार मुमकिन हो सकता था, बेचता था और बाकी खुद भी जाता था । वो बस तब तक उस दुकान में टिका रहा जब तक की लैंडलॉर्ड ने उसे आसानी से शांतिपूर्वक रहने दिया । उसके बाद वो बिचारा भी दुकान बंद करके चला गया । उस समय से लेकर अब तक उन दो छोटी दुकानों में तमाम लोग आए और चले गए । तंबाकू वाले हिस्से में एक नाटक में काम करने वाले लोगों की ऍम सिंह या केशसज्जा करता था और उसने अपनी खिडकी के शीशे पर तमाम सेक्टरों के फोटो भी नहीं स्टाइलों के साथ लगा रखी थी । बोले छह पर की दुकान में अब एक सब्जी वाला जैसे ग्रीन अग्रसर कहते हैं, आ गया था और हिस्ट्री आॅफ बार बार या हेयर ड्रेसर की दुकान में अब एक टेलर यानी दर्जी आ गया था । इधर हाल में दुकानों को किराए पर लेने वाले और उनके ब्रिसल्स में इतनी जल्दी जल्दी और इतने ज्यादा बदलाव आए कि हम अब उनका हिसाब नहीं रख पाए और उन दुकानों के किराएदारों में बाद में अन्य कमरों को भी किराये पर देना शुरू कर दिया गया तथा अपने दिए केवल सामने कहे साथ या पार्लर ही रखा था । पहले एक कमरे के बाहर के दरवाजे पर पीटल की एक ब्लेड जो नजर आई उस पर लिखा था लीडी स्कूल । उसके बाद फिर एक और पीतल की प्ले और डोर बेस । फिर एक और ब्लॅक लेट नजर आई । जब जब हम इस घर ये दुकान के पास से गुजरते हैं तो हमें ऐसा प्रतीत होता इसका मालिक दिन प्रतिदिन गरीब होता जा रहा है । पर हमारा ऐसा सोचना एक दिन गलत साबित हुआ जब हमने देखा कि उसमें एक दिन एक डेरी या साइनबोर्ड लगा हुआ था और उसके बाहर मुर्गे मुर्गियां घूम रहे थे जो घर के पिछवाडे हिस्से में भी जा रहे थे हूँ ।

12 गिरवी रखनेवाले की दुकान

हूँ । गिरवी रखने वाले की दुकान हूँ । ठीक है लंदन में जो तमाम दुःख दारिद्र की चौदह लगाएँ हैं, उनमें से एक हैं कौन रोक यानी रहीन रखने वालों की दुकानें । इन दुकानों के बारे में उन्हें किस्मत के मारे को पता होता है, जो कि आपने निर्धनता के कारण अपना सामान गिरवी रखने पर विवश हो जाते हैं । उन्हें अपना सामान गिरवी रखकर कुछ समय के लिए राहत मिल जाती है । ये विषय पाठकों के लिए बहुत रोज का तो नहीं है, पर फिर भी इतनी घृणा नहीं की जा सकती । सामान गिरवी रखने वालों की भी कई श्रेणियाँ होती हैं । कुछ भी वाली दुकान है तो बहुत ही अच्छे प्रकार की होती हैं, जहाँ पर आपको शाही, स्पेनिश पोशाक या साधारण कैलिको, शेयर्ड चांदी के चम्मच, कांटे या फॅस, थ्री माॅस्, बेचर, गोलू बंद और इसी तरह की अन्य चीजें देखने को मिल जाएंगे । इस तरह की गर्मी की दुकानें अपने आपको सिल्वर इसमें यानी चांदी का काम करने वाला कहते हैं और अपनी दुकानों को महीने की जूलरी और छोटे मोटे साथ सजा के समानों से अपने शो विंडो को सजाए रखते हैं । जबकि ज्यादा विनीत महाजन यानी उधर पर धन देने वाला अपने व्यापार को ज्यादा साहस से प्रदर्शित करते हैं । यहाँ पर हम उन्हें गिरवी वालों की दुकानों की बात कर रहे हैं जो थोडा बहुत मध्यम या गरीब श्रेणी के लोगों को धन देते हैं । हम इसके लिए एक खास दुकान को चुनते हैं । ये कौन रो करके दुकान ड्राइक्लीन के एक कोने में स्थित है जो की एक कोर्ट का कोना है । इस दुकान में साइड से भी जाने का एक दरवाजा है जिससे कि लोग चाहें तो जनता की नजर से भी बचकर जा सकते थे । ये दुकान थोडी सी नीचे गंदी धूलभरी दुकान है जिसका दरवाजा हमेशा थोडा सा ही खोला रहता है जो आपको कभी आधा आमंत्रित करता रहता था तो आधा आने वाली ग्राहक को दूर बताता था और यदि वह नया नया ग्राहक है जिसको यहाँ का कोई तजुर्बा नहीं था तो बाहर की खिडकी में लगे ग्रेनेट के मुझको एक या दो मिनट देखता हूँ जैसे कि वो वहाँ पर कुछ खरीदारी करने आया हो और फिर चारों और नजर घुमाकर ये देखते हुए कि कोई देख तो नहीं रहा था, चुपके से साइड वाले दरवाजे से अंदर घुस जाता है और दरवाजे को धीरे से उतनी चौडाई तक बंद कर देता है जितना कि वह पहले था । इस शॉप के सामने का हिस्सा और खिडकियों को देखने से ऐसा लगता था जैसे कि वो कभी पेट की गई थी । पर कब, कितने समय पहले और मूल रंग क्या रहा होगा ये अभी कहा नहीं जा सकता था । पुराने लोग बताते हैं कि सामने वाले कांच के दरवाजे पर नीले रंग की पृष्ठभूमि रंग पर तीन लाल रंग के गोले बने हुए थे जो राहत में अंदर की रोशनी से झलकते भी थे तथा दरवाजे पर लहरी अगर अच्छरो में लिखा था प्लेट वहाँ आभूषणों तथा पहनने के कपडों और अन्य प्रकार की संपत्ति पर धन कर्ज पर दिया जाता है पर अब समय के साथ सब अच्छा धुंधले पड गए थे । इसके साथ ही दुकान की खिडकी में कुछ सामान रखा था जो किए गए गवर्नमेंट से मेल नहीं खाता था । खिडकी में कुछ टूटे फूटे चीनी, मिट्टी के कप प्लेट, कुछ आधुनिक फूलदान जिस पर कुछ फूल पत्तियाँ अंकित थी और तीन स्पॅाट सवार जो गिटार बजा रहे थे । यह किसी पर कुछ देहाती लोग कुश्ती करते हुए अंकित थे । शतरंज के कई सेट दो या तीन मसूरी एक गोल गोल आंखों वाले पोर्ट्रेट जो की बहुत गहरी पृष्ठभूमि से बाहर जहाँ जा रहा था, कुछ जल्दी चढी । बाइबिल, प्रार्थना, पुस्तकें और टेस्टामेंट चांदी की घडियों की दो कतारें जो ऐसे साडी थी जैसे फर्गुसन की पहली घडी थी । कई एक पुराने फैशन की मेरे सिंह तारे और तमाम चमचे पंखी पर पंखे के आकार में सजाया हुआ था । आधे आधे दर्जन के समूह में मूंग की मान आएँ जिनमें चांदी के छोड ऍप्स लगे थे । अंगूठियों के और बुरी चीज जिनको अलग एक कार्ड में फंसा दिया गया था और उन पर टोक नंबर भी लिखा था जैसे कि ब्रिटिश म्यूजियम में कि दे रखी हूँ सस्ते वाले चांदी के पेन होल्डर जिस पर एक नौसैनिक तारा बना था । ये आभूषण या जूलरी विभाग को पूरा करता था । जब की पांच छह चारपाइयां जिसमें तमाम खटमल मरे हुए थे, कमरे में एक और खडी थी और ये चरपाई ज्यादा उपयोगी वस्तु नहीं थी । यद्यपि उनके कुछ कंबल और चादरें तथा रुमाल और हर तरह के पहनने के कपडे, ये ऍम काम कलाकारी और अलंकृत कपडे भी बिक्री के लिए रखे थे । इसके साथ ही बढी के बहुत सारे टूल्स हजार जैसे कि रंदा वसूली प्लेन आधी भी सेल पर था । ऐसा लगता था कभी गरीबी के दिनों में किसी बढाई ने इन हजारों को रहन पर रखा था और फिर कभी भी ऋण चुकाकर लेने ही नहीं आ पाया और यदि आप दुकान में ऊपर चाहें वहाँ पर आपको बडे बडे बंडल जिनके ऊपर आपको टिकट नंबर लगे हुए मिल जाएंगे वहाँ का पांच पडोसी भी बहुत गन्दा संध्या था और हर खिडकी में से आपको कोई बदसूरत चेहरा बाहर झांकता हुआ मिल जाएगा । इतना ही नहीं चारदीवारियों और मुंह देवियों पर आपको कुछ पौधों के ठूंठ दिख जाएंगे जो कि कभी भी किसी आने जाने वाले को लग सकते थे । आंजन के कोने में मेरा रास्तों के नीचे आपको हमेशा कुछ आदमी इधर उधर आवारा गर्दी करते घूमते नजर आ जाएंगे या फिर वो बाजू में बनी मदिरालय में या फिर उसके इर्द गिर्द घूमते हुए दिख जाएंगे और उनकी पत्नियां बडी बडी टोकरियों में सस्ती सब्जियां लिए सडक पर बेचने के लिए खडी रहती थी । ये सारा माहौल उस फोन दो करके शराब के आस पास का था । यदि गिरवी वाले की दुकान के सामने का हिस्सा और डिस्प्ले पर भी वस्तुएँ ग्राहक को अंदर आने के लिए आकर्षित करने के लिए लगी थी तो अंदर का भी हिस्सा कम दिलचस्प नहीं था । दुकान के सामने का दरवाजा एक कॉमन शॉप में खुलता था जहाँ पर आने जाने वाले कस्टमर्स इसके आदि थी और उन लोगों को इस बाहर की कोई परवाह नहीं थी कि उनके बाजू में कौन बैठा है और वो क्या वस्तु गिर भी रखने के लिए आया है और उस बिचारे की क्या मजबूरी रही होगी । इस मेरे रूम का साइड वाला दरवाजा एक गलियारे में खुलता है जिससे एक तरफ छह क्लोज लिस्ट या अलमारियाँ रखी थी जो अंदर से बंद की जा सकती है और उनके सामने छह छोटे छोटे क्यूबिक है जिसमें वो शर्मीले तथा थोडे अमीर कसम के आदमी आता कर बैठ जाते हैं जो अब किसी वजह से गरीबी के दिन काट रहे हैं और अपनी कुछ मूल्यवान वस्तुएं हैं, दुकान में रखकर अपनी इज्जत बरकरार रखना चाहते हैं तथा जरूरत भी पूरी करना चाहते हैं । मेन काउंटर पर जो आदमी बैठा था उसके काले गंगरैल बाल थे । उसने अपने हाथ की फॅमिली में हीरे की अंगूठी पहनी हुई थी और उसका डबल सिल्वर मौज गार्ड था । उसका ध्यान जब वहाँ छुप कर बैठे ग्राहकों पर जाएगा तो उसकी सेवा कब आरंभ करेगा ही उसी की मर्जी पर था । इस वक्त वो बाद जिसमें बहुत बढिया कपडे पहने हुए थे, काउंटर पर झुककर एक मोदी से रजिस्टर में डिकट की एंट्री कर रहा था और बीच में अपने सहकर्मी से भी बातचीत करता जा रहा था । वो उस घटना का हस्ते हस्ते जिक्र कर रहा था जो उसके साथ रात में एक औरत के साथ घटी थी जब उसने खूब शराब पी रखी थी । उनकी इस हँसी मजाक के कार्यक्रम में नाहक कोई हिस्सा नहीं पा रहा था तो उसी समय एक बुजुर्ग महिला काउंटर पर अपना हाथ धरे जिसमें वो एक मंडल ली थी, बेसब्री से उसका इंतजार कर रही थी क्योंकि वो पिछले आधे घंटे से अपनी बारी का इंतजार कर रही थी । उसने दुकानदार से कहा अरे मिस्टर हेनरी, जरूरत जल्दी कीजिए । पीस मैं अपने दो प्यारे प्यारे बच्चों को घर में बंद कर के आई हूँ और मुझे डर है कि कहीं वह आपके पास ना चले जाएँ । दुकानदार उसकी ओर उपेक्षा से सिर उठाकर देखता है और फिर आपने एंट्री वाले काम में बडे ध्यान से व्यस्त हो जाता है जैसे कि वो उसमें कोई खुदाई या फिर नकाशी कर रहा हूँ । लगभग पांच मिनट बाद वो फिर बोलता है आप जल्दी में है ना मेरी सिस्टर काम है ना वहाँ मिस्टर हेंड्री मैं थोडा जल्दी में ही बच्चों के कारण मुझे सिख हो रही है । उन्हीं की वजह से मुझे आपको परेशान करना पडा है । दुकानदार उसका बंडल लेकर खोलते हुए उससे पूछता है, इसमें क्या है? कुछ पुरानी चीज है यह पेटीकोट वगैरह है । बूढी औरत मैं उन पर तो मैं कुछ नहीं दे सकता । हफ्ते में तीन चार बार पहन कर तो उसे मेरे पास ले आती हो । अरे अरिना मजाक कर रहे हैं, पेटीकोट नहीं है । ये एक बच्चे की फ्रॉक है और एक सुंदर सिल्का रुमाल है जो मेरे पिता का है । उसने इन कपडों के लिए सिर्फ चार शिलिंग भी और दुर्भाग्य वर्ष उसी दिन उसका हाथ टूट गया । इसके लिए आपको क्या चाहिए? मिस्टर हेनरी पूछते हैं इन सामानों में से वो पहले से परिचित थे । आपको अठारह पैसे दूँ या नौ पैसे हूँ? अरे भले आदमी कम से कम शिलिंग यानी बारह पैसे तो कर दीजिए । उस महिला ने प्रार्थना की । नहीं नहीं केवल नौ पैसे इससे अधिक एक फर्जी भी नहीं दे पाऊंगा हूँ । चलिए ठीक है फिर नौ पैसे ही देते हैं । उस महिला को नौ पैसे दे दिए जाते हैं और उसका डुप्लीकेट टिकट बनाया जाता है । एक उस महिला को दे दिया गया और दूसरा उस पार्सल पर लगा दिया गया तथा उसे लाभ भरवा ही से अब एक कोने में भी ठीक दिए गया एक और ग्राहक आ जाता है जो चाहता है कि उसका दावा जल्दी से निपटा दिया जाए । उसकी निगाह फॅार जैसे आदमी पर पडी जो भी गंदी से पेपर क्या पहने हुए था और जो बहुत ही अजीब सा लग रहा था जैसे कि बहुत भद्दा दार ही बडी हुई तथा और बच्चे भी लग रहा था वो अपनी पत्नी को पीते पीते ठक्कर अब पिछले पंद्रह मिनट से आराम कर रहा था । वो अपनी हजार वापस लेने आया था जिससे वो कुछ काम कर सकें । जिसके ऍम उसने पहले से ही अग्रिम राशि ले रखी थी उसे पूरा कर सकें । यदि आप उसकी लडखडाती हुई चाल और सूजी हुए चेहरे से अंदाजा लगा सकें कीजिए आदमी काम कर पाएगा या नहीं कुछ समय तक इंतजार करने के बाद वो अपना गुस्सा एक गरीब से लडके पर होता है जो वहाँ पर काफी देर से खडा था और अपनी ओर दुकानदार का ध्यान खींचने के लिए कूद कर अपनी दोनों कोहनियों को उस पर टिका लेता था और जब वो नीचे गिरता था तो उस आदमी के पास पर गिर जाता था । बदमिजाज शराबी आदमी ने उसके गाल पर एक जोर का तमाचा मार दिया और वो बेचारा चारों खाने चित होकर नीचे गिर पडा । वहाँ खडे आसपास आदमी हूँ और औरतों का गुस्सा उस पर तुरंत ही फूट पडा । तुमने इस बेचारे को इस तरह से क्यों मारा? निर्दयी आदमी एक और जिसने उलजलूल से कपडे पहन रखे थे । उसने पूछा उसके पास के टोकरी में ऍम थी क्या तुम सोचते हो की वो तुम्हारी पत्नी है । वो शराबी बोला जहाँ जाओ अपने आप को सूली पर लटका लो । साथ में उस और आपको घूसा भी मानना चाहा । जो भाग्य वर्ष उसको लगा नहीं मैं तुम्हे ना कार डालूंगा और तुम्हारे टुकडे टुकडे का डालूंगा । जब तक मैं आता नहीं तब तक तुम बच्ची हूँ । मैं तो महीना कार्ड डालों कहीं तो हमारा नहीं हो साथ तुम बेमोल । आवारा आदमी और ऊंची आवाज में उसने कहा तुम्हारी बीवी कहाँ है? और शैतान आपने बताया इस तरह की और थी अपने अंदर बहुत ही कम समय में तमाम माधवेश पैदा कर लेती हैं । बेचारी तुम्हारी बीवी जिसके साथ तुम कुत्ते से भी ज्यादा बुरी तरह से पेश आती हूँ तो आदमी हूँ कि हैवानी मेरा दिल चाहता है कि मैं अभी तुम्हारी जान ले लूँ फिर चाहे मुझे इसके लिए फांसी की सजा ही क्यों ना मिले । शराफत से बात कर वो आदमी बोलता है तुम भी शराफत से बात करो, वो और घृणा से बोलती है ये बहुत ही शौपिंग है, धक्का पहुंचाने वाला है । क्या ये शौक नहीं है? चीफ हुई और चिल्लाती हुई गलियारे से भागे जहाँ कक्ष में से एक महिला झांक रही थी और सोच रही थी कि ये सब आखिर हो क्या रहा है जिसको पता था की क्यो नेट में बंद रहने की वजह से उसका कोई नुकसान नहीं हो सकता था । क्या ये शॉकिंग नहीं है मैंने ये बहुत ही भयानक है । वो और बोली इस आदमी की बीवी है और वह बहुत ही मेहनती है जैसे कि एक जवान हो सकती है तो यह जुगली बहुत तेज आवाज बोलती है । ये लोग हमारे घर के पीछे वाले कमरे में रहते हैं और ये आदमी जब तक नशे में धुत आता है और बिना बात किए उसकी पिटाई करने लगता है और सारी रात और न केवल अपनी बीवी को अपने बच्चों को भी जिससे उसकी जिंदगी और नर्क हो जाए ताकि वो बिचारी और ज्यादा परेशान हो जाए । तुम तो जानवर हो जानवर और वो बेचारी क्या करें वो करी फिर छोला चक्की में लग जाती है । अब कौन रोकर जो सिलिकाॅन ड्रेसिंग गाउन पहना था, काउंटर के पीछे से आ जाता है और कहता है अब ऍम अपनी घरेलू बातें आप अपने तक ही सीमित रखिए । नहीं तो आपको अपने फ्लैट आयरन के जो चार पैसे मिलने हैं वो भी नहीं मिलेंगे । वो अधिकारिक स्वर में बोलता है ऍम आप अपनी पत्नी को भेजी कि वह आकर अपने दो टूल्स ले जाए और आप अपना ये मनहूस चेहरा मुझे तब तक ना दिखाइएगा जब तक आप नशे मुक्त ना हो जाये । हमारी दुकान से दफा हो जाओ और यहाँ फिर शक्ल मत दिखाना हो । इस भाषण का उसके ऊपर कोई असर नहीं होता और उस को ही पीटने लग जाता है जब तक कि वो इस बात पर बाजी नहीं हो जाती है कि वह राहत में वहाँ सोने आ सकता है । तभी वहां पर उसकी पत्नी आ जाती है जो मैंने कुछ कपडे पहने हैं और बहुत ही दुबली पतली है तथा गोद में एक बच्चा भी लिए हैं और आग्रह तथा अनुयाई आप पास में फिर उससे बोला तुम घर आ जाऊँ, तुम एक बहुत अच्छे आदमी हूँ और फिलहाल तुम बिस्तर में जाकर सो जाओ, प्लीज ही घर चली जाओ वो शराबी बदमाश बोलता है कथा साथ में उसे धक्का भी देता है । उसकी पत्नी फिर से उससे विनय पूर्वक कहती है तुम चुपचाप शांति से घर जाओ । बहुत दोबारा उसको उल्टा जवाब देता है तो वो भी घर चली जा और साथ में उसको एक जोर का थप्पड भी जड देता है जिससे वो बच्चे के साथ जमीन पर गिर पडती हैं । बच्चे की टोपी भी खिसककर उसके दुर्बल चेहरे पर आ जाती है । तो उसका जो प्राकृतिक संरक्षक है वो उसे धक्का देता हुआ आंगन में ले जाता है और उसका बच्चा भी इस हमले से रोने लगता है । एक गलियारे के सबसे अंधेरी कोने में एक कक्ष में एक युवा और नाजुक सी लडकी है जो अभी मुश्किल से बीस साल की ही होगी । एक उम्रदराज महिला के साथ बैठी थी जो उसकी माँ लग रही थी और हूँ । ये नहीं चाहती थी कि दुकानदार के अलावा उसे कोई और देख सके । वो लोग वहाँ शायद अक्सर आते रहते थे क्योंकि जो भी सवाल दुकानदार ने पूछा उसका उन्होंने धीमे स्वर में ही फटाफट जवाब दे दिया । मैं यहाँ पर किसका नाम लिख हूँ । निश्चय ही आप का सामान है । आप स्वयं मकान मालिक है जब वहाँ पर किरायेदार के रूप में रह रही है । वह दुकानदार जो उधार उसे दे रहा है वो उससे ज्यादा के लिए मांग करती हैं और मूलभाव भी करती हैं । जो सम्भवता बिल्कुल नया ग्राहक शायद ही कर सकें । इसके लिए जो माँ है वो अपनी बेटी से इशारे में समझाती हैं कि वह दुकानदार को उससे ज्यादा दाम देने के लिए राजी करें तथा जो सामान वो लाए हैं उसका नाम भी कुछ ज्यादा ही बताएं । वो सोने की एक छोटी से जंजीर है और फॅमिली हुई एक अंगूठी है । संभव था उस लडकी की चीजें क्योंकि वो माँ के लिए काफी छोटी थी । ऐसा लगता था कि जिंदगी की जरूरतें पूरी करने के लिए माँ का हिरदय कठोर हो गया था और वो लडकी भी अपनी इन चीजों के लिए दिल मजबूत करके उसे रहन रखने पर राजी हो गई थी और उसके बदले में पर्याप्त धन पाने की संभावना भी । शायद उसके परिजन और जान पहचान वालों ने कठिन समय में उसकी मदद करने से मना कर दिया था या अपना मुंह फेर लिया था । शायद अब यही उनके लिए एक आखिरी उपाय बच्चा था । अन्य था वो अपनी ऐसी बेच तीन टी और भावनात्मक चीजें क्यों गिर भी करने आते हैं । यकीनन उन्होंने कुछ अच्छे दिन जरूर देखे थे लेकिन इस मंदी के दौर में अब उनको भी पूरे दिनों का सामना करना पड रहा था । अगले कक्ष में एक जवान और जिसमें बहुत ही गरीबों वाली ड्रेस पहन रखी थी जो शोक रंग के थे और जिसने जाडे में भी गर्मी वाली टोपी लगाई हुई थी । इस सर्दी के मौसम में बहुत ठंडक महसूस कर रही थी । वो जीवन के इस मोड से किस गरीबी से गुजर रही थी इसका देखते ही पता चल रहा था उसने भारी सैटन गांव और दो किनारों से घिसेपिटे स्टॉकिंग्स पहने हुए थे । ढांसा हुआ चेहरा इस पर थोडा सा रोज लगाकर उसे आकर्षित बनाने की कोशिश की गई थी और जिस से प्रतीत होता था की उस की जवानी और खुशियाँ सब कुछ लुट चुका था । ऐसा लगता था जैसे अब उसकी खुशियाँ कभी भी लौटकर नहीं आएंगे । अगर वह जबरदस्ती भी मुस्कराएं तो वो भी एक नकली मजाक उडाती हुई मुस्कुराहट लगती थी । खैर जो भी हूँ जब उसने अपनी पडोस वाली युवती लडकी को देखा जो अपनी छोटे मोटे गहने गिरवी रखने आई थी तो उसके दिमाग में एक बिजली से कौन गई और उसे अचानक कुछ याद आ गया और उसका पूरा व्यवहार एकदम से बदल गया । उसकी पहली प्रतिक्रिया ये थी कि वह अपनी आधी छुपी हुई पडोसी को फिर से एक बार अच्छी तरह से देखें पर उसकी पडोसी नवनियुक्ति ही उसको देखकर अपने कक्ष में मो छुपा कर रोने लगी । आदमी के दिमाग में कई ऐसे तार होते हैं जो महीनों सालों तक सुषुप्त अवस्था में पडे रहते हैं । पर कभी कभी जरा सा भी जाने अनजाने कनेक्शन जुडने से वो अचानक झंकृत होते हैं और आदमी भावा बीच में रोने लग जाता है । कुछ ऐसा ही उस समय भी हुआ । उस दुकान उस समय एक अन्य औरत थी जो बहुत ही नीचे तबके की और गरीब से लग रही थी । वह थोडी गंदी थी और किसी भी प्रकार की टोपी याॅर्क नहीं लगाई थी । वो उन लोगों की बातों को और आदान प्रदान को दिलचस्पी से देख रही थी । ऐसा लग रहा था जैसे उसमें थोडी सी मदिरा पी रखी थी और उसकी भी उसी तरह की प्रतिक्रिया थी जैसे उन दो महिलाओं की थी और वो दोनों महिलाएं कक्ष में बैठी हुई थी । कौन कह सकता था की अब दो महिलाओं की स्थिति बदल जाएगी और उनमें से कोई उसके साथ स्थान बदलने और इनमें से कब कोई अस्पताल और अस्पताल से खबर में पहुंच जाये । दो सौ हमें गरीबी से लडने के लिए एक दूसरे की मदद करना चाहिए । अगर हमें भगवान इस काबिल क्या है कि हम किसी गरीब के थोडे से ही सही लेकिन अगर हम मदद करने के काबिल हैं तो हमें जरूर करना चाहिए । हो सकता है हमारी इस छोटी सी मदद से वो अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करें । यकीनन हम इंसानों के पास किसी दूसरे इंसान की तकलीफ को महसूस करने के लिए सीने में भगवान ने दिल दिया है जो किसी दूसरे की तकलीफ को महसूस करता है और उसके दर्द को समझता है । इसीलिए हर धर्म में एक इंसान को दूसरे इंसान से प्यार मोहब्बत से पेश आने के लिए कहा गया है । तो अगर हम किसी गरीब की मदद करेंगे तो इसका सिला इसका सवा इसका पूर्ण हमें भगवान जीतेंगे । लेकिन अपनी करने के बदले हमें बन्दों से कोई उपेक्षा नहीं रखनी चाहिए । उम्मीद करता हूँ आपको मेरी कहानी पसंद आए और हो सकता है कि आपके जीवन या आपके सोच में कोई मामूली सा बदलाव आ जाए । अगर ऐसा हुआ तो मेरा जीवन सफल समझिए, धन्यवाद

13 सिग्नलमैन

फॅमिली है । जब उसने ये आवास उसको पुकारते हुए सुनी तो बोल नीचे अपने कक्ष के दरवाजे पर एक छोटे से डंडे में झंडा लिए हुए खडा हुआ था । जमीन के हालात देखते हुए कोई भी सोच सकता था कि कहाँ से आवाज आ रही नहीं । पर इसके बजाय की वो उस और ऊपर देख था जहाँ पर मैं खडा था । भूख घूमकर नीचे उस और देखने लगा जहाँ से रेलवेलाइन आ रही थी । उसके ऐसा करने में कुछ आसाधारण था पर मैं यही नहीं बता सकता था कि वह किया था । पर मैं ये जानता हूँ कि उसमें कुछ ऐसी आसाधारण बाद थी जिसमें मेरा ध्यान आकर्षित किया था । यद्यपि गहरी खाई में उसकी आकृति छोटी हो गई थी और डूबते हुए सूरज की रोशनी नहीं जो मेरी आंखों में सीधे पड रही थी । उससे बचने के लिए मैंने अपने हाथों से अपने ऊपर शीट बना लिया जिससे मैं उसे नीचे देख सकें । बोलो आप बोलो लाइन को देखना छोडकर उसने अपना सिर घुमाकर ऊपर उस फोर देखा जहाँ मैं खडा था । क्या कोई ऐसा रास्ता है जिससे मैं नीचे आकर तो मैं मिल सकूँ । उससे मेरी और बिना कोई जवाब दिए देखा और मैंने भी अपना सवाल जल्दी दोहराने की कोई कोशिश नहीं की । उसी वक्त जमीन में एक कम्पन हुआ और हवा का भी एक तेज झोंका आया जिससे चौकर मैं पीछे की और हट गया । जैसे कि मुझे उस हवा के झोंके ने मुझे नीचे की ओर खींचना चाहता हूँ । जब वो हवा का झोंका बहुत के रूप में तेजी से आती हुई ट्रेन के कारण ऊपर आ गया था और जब मेरे सामने से हट गया और ऊपर चला गया तब मैंने देखा कि वो आदमी फिर से झंडी को डंडे मेरा बेटा रहा था । इसे ट्रेन के पास होते समय उसने दिखाई थी । अब मैंने फिर से उसे नीचे आने का रास्ता पूछा । थोडी देर तक जब उसने मेरी ओर ध्यान से देखा तब उसने अपनी झंडी द्वारा उस जगह की ओर इशारा किया जहाँ मैं खडा था । वो स्थान जहाँ पर मैं अभी खडा हूँ । वहाँ से लगभग दो तीन कस्तूर ही थी । मैंने उसकी ओर देखते हुए कहा ठीक है और उस जगह की ओर चल पडा । वहाँ पर अच्छी तरह देखने के बाद मैंने पाया कि एक टेढा मेढा रास्ता सीढियों के रूप में नीचे जा रहा था जिससे मैं नीचे उतर गया । पत्थरों के बीच से काटकर मनाया गया रास्ता काफी खडी चढाई उतराई वाला था और उसमें जगह जगह कई लग गई थी । इसीलिए शायद उसने बहुत ही अच्छा से नीचे उतरने की जगह बताई थी । मुझे जब मैं उस टेढे मेढे रास्ते से काफी नीचे उतर कर आ गया तो मैंने देखा कि वह रेललाइनों के बीच जिस पर से अभी अभी ट्रेन गुजरी थी, खडा होकर मेरे आने का इंतजार कर रहा था । उसके देखने के तरीके से ऐसा लग रहा था कि वो कुछ घटित होने की आशंका कर रहा हूँ । मैंने नीचे उतरना जारी रखा और जब मैं नीचे रेलवे लाइन की सत्ता पर आ गया तो देखा कि उसने अपना बायां हाथ अपनी थोडी और डायना हान छाती पर रखा हुआ था । जब मैं उस जगह पहुंच गया जहां पर वो खडा था तो पाया कि वह एक गहरे रंग का पीले चेहरे का गानी, ताडी तथा भावों वाला एक आदमी था । उसकी पोस्ट या चौकी इतनी अकेली और उदासी से भरी थी जैसा मैंने कभी पहले नहीं देखा था । रेलवे लाइन के दोनों तरफ पत्थर की ऊपर खावा गेजी दीवार दी जिसपर से पानी टपकता रहता था जहाँ से ऊपर खाली आसमान के अलावा कुछ भी नहीं दिखता था । यदि आप नीचे देखेंगे तो एक तरफ आपको वहाँ अंधेरी खाई आनंद तक चलती हुई दिख जाएगी और दूसरे बोर रेट लाइन और लम्बी अंधेरी सुरंग जिसके अंदर से ट्रेन आती थी । सुरंग के अंदर हर वक्त एक बडी, ठंडी और बदबूदार हवा तेजी से आती रहती थी जो आपको उदास कर देती थी । इस जगह पर सूरज की रोशनी कभी कर आ रही आती थी जिसकी वजह से वो सारी जगह सडन सडन बन्दों से भरी हुई थी और वहाँ इतनी ठंडी और तेज हवा थी कि मैं ठंड से कांपने लगा । यहां पहुंचने के बाद ऐसा लगता था कि जैसे हमारा इस दुनिया से रिश्ता ही टूट गया हो । इससे पहले की वो अपनी जगह से हिलता । मैं उसके इतना नजदीक खडा हो चुका था की मैं उसे छु लेता हूँ । तभी वो मेरे चेहरे से अपनी नजर हटाए बिना एक कदम पीछे हट गया और अपना हाथ ऊपर उठाया । ये नितांत अकेली जगह है काम करने के लिए जो बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है । मैंने कहा तथा उस जगह में मेरा ध्यान अपनी ओर खींच लिया जब मैं दूर ऊपर खडा था । यहाँ पर किसी का आप आना अत्यंत दुर्लभ था । मेरे ख्याल से वो व्यक्ति अनचाहा अतिथि नहीं होगा । ऐसी मुझे आशा थी । शायद उसने मुझे एक ऐसा आदमी देखा जो संभव था । अपनी जीवन भर संकरी सीमाओं में रहा और जिसे अब आजाद होने पर और जागने पर इस तरह की जगह में दिलचस्पी जाग्रत हो गई थी । इस प्रकार से मैंने उससे बातचीत की । पर मुझे पक्का याद नहीं कि मैंने इन्हीं शब्दों में उससे बात की थी या नहीं । इसके अलावा मैं उस आदमी के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता लाभ करने के लिए तैयार नहीं था । उसमें कुछ ऐसी बात थी, मुझे हतोत्साहित कर रही नहीं । उसने बहुत ही जिज्ञासा भरी निगाहों से उस रैडलाइट की ओर देखा जब सुरंग के उनके पास लगी हुई थी, जैसे उसमें से कोई चीज घायल हो और फिर उसने मेरी ओर देखा । बोले, तुम्हारे चार्ज में है, फॅमिली नहीं । उसने बहुत धीमी आवाज ने कहा, मेरे मन में उस वक्त खयाल आया कि कहीं ये निश्चित सच चेहरा कोई आत्मा तो नहीं थी । आदमी की जगह एक प्रेतात्मा मेरी मन में तब से ये खयाल आ रहा था कि कहीं उस आदमी के दिमाग में कुछ चल तो नहीं रहा था । मैं फिर पीछे हट गया । पर ऐसा करते समय मैंने देखा कि उसकी आंखों में मेरे लिए एक बाइक छुपा हुआ था । इससे मेरे मन में आया कि मैं उसके साथ लडाई करूँ । काम तो मेरी और इस तरह क्यों देख रहे हो । मैंने उसकी ओर जबरदस्ती मुस्कुराते हुए देखते हुए कहा, जैसे तो मैं मुझे डर लग रहा हूँ, मुझे कुछ संदेह है । उसने जवाब दिया, मुझे ऐसा लगता है कि मैंने कहीं आपको देखा हूँ लेकिन कहाँ पर ये याद नहीं आ रहा है । उसने उस रेडलाइट की ओर इशारा क्या जहाँ पर वो देख रहा था वो वहाँ पर मेरी ओर ध्यान से देखते हुए उसने कहा, मेरे अच्छे दो समय वहाँ पर कैसे हो सकता हूँ और किस लिए पर जो भी हो मैं वहाँ पर कभी भी नहीं था । तो कसम खाकर कह सकते हो तो कहूँ । मेरे खयाल से मुझे यकीन है । मैंने आपको वहीं पर देखा था । उसने उत्तर दिया, मेरी ही तरह अब उसका व्यवहार स्पष्ट और साफ सुथरा हो गया था और वो मेरी जिज्ञासा का उत्तर चुने हुए शब्दों में तैयारी के साथ दे रहा था । क्या तुम्हारे पास यहाँ पर्याप्त कम है? वहाँ उसके पास काफी जिम्मेदारियाँ थी और उसको काम काफी तत्पर था और सही सही तरीके से करना पडता था और जहाँ तक शारीरिक मेहनत का काम था वैसा वहाँ पर कुछ भी नहीं था । सिग्नल को बदलना, लाइक्स को साफ सुथरा रखना और उनके लोहे के हैंडलों के समय समय पर घुमा देना । बस यही सब काम उसकी जिम्मेदारी में था । जहाँ तक दिन लंबे लंबे समय तक अकेले रहने का सवाल था, उसने अपने आप को उसके अनुसार ढाल लिया था । वहाँ नीचे रहे कर उसने एक भाषा सीख ली थी । चाहे वो उसको केवल देखकर पहचान सकता था और उसने उसको बोलने का भी उच्चारण करने का भी एक मोटा मोटा तरीका ढूंढ लिया था । उसने वहाँ रहकर फैक्शन दशमलव और बाल चंद्रा भी सीखने का प्रयास किया । यह कभी बचपन में वो गणित में बहुत ही कमजोर था । उसके लिए जरूरी ये था कि हर वक्त वो यूँही बीस घंटे उस सीलन भरे वातावरण में दो रिश्ते हुई पत्थर की दीवारों के बीच बना रहे हैं । क्या वह कभी किसी दिन वहाँ से निकलकर ऊपर धूप में नहीं जा सकता था क्योंकि ये समय और परिस्थितियों पर निर्भर करता था । कुछ दशाओं में लाइन पर काम धूप आ सकती थी और कुछ अन्य दशाओं में बहुत ज्यादा धूप आ जाती थी । जब बाहर या ऊपर चमकदार धूप होती थी तो वो कभी कभार मौका देखकर ऊपर धूप में चला जाता था । पर ऐसे मौकों पर उसके मन में हमेशा ये घट का लगा रहता था कि कब वह बिजली की घंटी बच जाए और वहाँ से दूर ऊपर हो तो उसके दुःख, चिंता और बढ जाती थी । ऊपर जाने का मजा किरकिरा हो जाता था । ऐसा मुझे लगा वो मुझे अपने बॉक्सनुमा कमरे में ले गया जहां पर एक डस्ट थी और उस पर एक नोटबुक रखी हुई थी जिसमें जहर से बात है, जरूरी सूचनाएं दर्ज थे । एकतार प्रणाली का यंत्र था जिसपर टाइम लगा था, पेस था, सोनिया थे और वो घंटे भी लगी थी जिसका मैंने अभी जिक्र किया था । मेरे ये विश्वास दिलाने पर की वो बहुत अच्छा और पढा लिखा था । शायद वो इस स्टेशन पर जितना पढ लिख सकता था उतना पढ लिख लिया था । उसने ये कहा कि इस तरह की भाषाएँ आदमियों के समूह में कम ही पाए जाते हैं । उसमें सोना कि बडे बडे बर्खा, उसे कारखाना, पुलिस बर और यहाँ तक कि फौज भी ऐसे ही थी और उसको ये ध्यान था की तमाम रेलवे स्टाफ में भी कमोबेश ऐसा ही था । उस झोपडे में वो बैठे हुए जैसे वह कभी का बाहर ही बैठ सकता था की वो अपनी युवा अवस्था में प्राकृतिक दर्शनशास्त्र का छात्र था और उसने उसकी कॉलेज अटेंड की थी पर वह बिगड गया था । इधर उधर आवारागर्दी करता था । तमाम मौका गवाह दिए थे, नीचे चला गया था और उसके बाद तो फिर कभी ऊपर उठी नहीं पाया । उसने अपना बिस्तर ठीक कर लिया था और उस पर लेट गया । दूसरा बिस्तर लगाना अब इस वक्त संभव नहीं था । जो कुछ भी मैंने ऊपर संक्षिप्त रूप में बयान किया है वो उसने मुझसे आग के सामने बैठकर कहा था हमारे बीच में केवल वहाँ अंगीठी थी । समय समय पर वो मुझे सर कहकर संबोधित करता था । खासकर जब अपनी जवानी के दिनों की दास्तान सुनाता रहता था जैसे कि वो मुझ से प्रार्थना कर रहा हूँ की मैंने उसको जैसा पाया उससे अधिक वो कुछ नहीं था । बीच बीच में कई बार वो छोटी सी घंटी बजे और सत्तर द्वारा जो संदेश आए थे उन्हें पढा और उनका जवाब भी दिया । एक बार दरवाजे के बाहर खडे होकर वहाँ से गुजर की हुई एक गाडी को झंडी भी दिखानी पडी और उसने ड्राइवर के साथ बातचीत भी की । अपनी ड्यूटी को वह पूरे मन से अच्छी तरह और सही सही ढंग से निभा रहा था । जैसा कि मैंने देखा जिसके लिए वो अपनी वार्ता को वहीं रोककर चुपचाप शांति से अपना काम करता जिसके लिए वहाँ रखा गया था । एक शब्द हमें मैं कहूँ तो ये आज मुझे जहाँ पर इस पद पर काम करने के लिए बिलकुल उपयुक्त लगा । पर बीच में कुछ ऐसी चीजें प्रतीत हुई जिससे मुझे लगा कि शायद मैं कहीं गलत था । जैसा कि वो बातचीत करते हुए अक्सर एक बार घंटे की ओर देखने लगा । कहीं वो बच्ची तो नहीं थी जबकि वास्तव में वह बची ही नहीं । फिर भी बीच में दरवाजा खोलकर वो टनल की ओर देखता । जहाँ रेड लाइट लगी थी । वो अपने केबिन दरवाजा हमेशा बंद रखा था जिससे सीलन भरी हवा अंदर न आने पाए । इन दोनों मौकों पर जब आपके पास खाता था तो उसके ऊपर एक ऐसा भाव होता था जिसे मैं आपको समझा नहीं सकता । जब मैं वहाँ से उठने लगा तो उसने कहा आपसे मिलकर मुझे लगा कि आप बहुत संतुष्ट आदमी है । इसके जवाब में उसने कहा, मुझे विश्वास है कि मैं भी कभी ऐसा था । धीमी आवाज में उसने कहा पर आजकल मैं बहुत परेशान हूँ । बहुत ही ज्यादा परेशान भी शायद अगले शब्द वापस ले लेगा । पर मैंने उससे एकदम से पूछ लिया किस बात से आप इतना परेशान है? आपकी परेशानी का सबब क्या है? ये बहुत मुश्किल है । समझाना और उससे भी ज्यादा मुश्किल है कि इस बात को किसी को समझा पाना । यदि आप फिर भी यहाँ आए हैं तो मैं इसे बताने की कोशिश करूंगा । पर मैं आपके पास एक बार फिर अवश्य आना चाहूंगा । आप बताइए कि मैं कबाब । यदि मैं कल सुबह ड्यूटी जल्दी चला जाता हूँ तो फिर मैं कल रात यहां दस बजे आऊंगा तो फिर में ग्यारह बजे तक आ जाऊंगा । उसने मुझे शुक्रिया अदा किया और दरवाजे तक छोडने आया । उसने धीमी आवाज में आगे कहा, मैं आपको अपनी सफेद लाइट तब तक दिखाता रहूंगा जब तक की आप ऊपर नहीं पहुंचे जाते । आप आवास नहीं नहीं चाहेगा और जब आप ऊपर पहुंच जाएं तब भी कोई आवाज नहीं नहीं दीजिएगा । उसके कहने के अंदाज से मुझे वो जगह और ठंडी लगने है और फिर मैंने उसको जवाब दिया ठीक है । उसने फिर बोला जब आप कल रात में यहाँ आएँ तब भी आवाज नहीं दीजिएगा । एक बात बहुत बताई जब आज रात आप यहाँ आए तो आपने चिल्लाकर यहाँ क्यों बोला? नीचे कोई है? भगवान जाने पर मैंने ऐसा क्या कुछ कह दिया था? मुझे अच्छी तरह याद है । आपने बिल्कुल यही शब्द बोले थे । मान लिया मैंने बिल्कुल यही शब्द कहे थे । इसमें कुछ संदेह नहीं क्योंकि मैंने आपको वहाँ पर नीचे देखा था । कोई और बजह तो था ही नहीं । उसने मुझे कुछ नाइट का और अपनी सफेद रोशनी दिखाई । मैं रेल की डाउनलाइन के किनारे किनारे चलता रहा, जब तक कि उसके ऊपर जाने तक कर रहा था, नहीं देखा था । हर वक्त मुझे यही डर लग रहा था कि कहीं पीछे से कोई ट्रेन धडधडाती हुई ना आ जाए । ऊपर जानना नीचे उतरने से कहीं ज्यादा आसान था और मैं सराय में अपने कमरे में वापस आ गया । मैं अगली राहत ठीक ग्यारह बजे उस जगह पर पहुंच गया जहां से मुझे दे दे । मेरे रास्ते से नीचे उतरना था । वो शख्स अपनी सफेद लाइटली नीचे खडा था । जब मैं उसके काफी नजदीक पहुंच गया तब मैंने धीरे से कहा मैंने आज आपको पुकारा नहीं । क्या मैं आप से बात कर सकता हूँ? मैंने अपना हाथ उस की ओर बढाया जो उस ने पकड लिया और बोला कुछ डाइट सर और क्यों नहीं । उसके साथ ही हम लोग साथ साथ केबिल की और दरवाजा खोलकर हम अंदर को से और फिर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया तथा आग के पास बैठ गए । मैंने अपना मन बना लिया है सर उसने बहुत धीमी । आप पास में जो फुसफुसाहट से भी कुछ ही ज्यादा थी उसमें कहा आपको दोबारा ये पूछने की जरूरत नहीं पडेगी की मुझे क्या चीज परेशान कर रही है । कल शाम को मैंने आपको कोई और ही आदमी समझ लिया था । वही बात मुझे परेशान कर रही थी कि इस बात से वहीं वो दूसरे व्यक्ति वाली बात वो कौन है? मुझे पता नहीं मेरी ही तरह है । मुझे पता नहीं । मैंने उसका चेहरा भी कभी नहीं देखा । उसका बायां हाथ तो चेहरे पर था । टाइम हाथ को वह जोर जोर से हिला रहा था । बहुत जोर से उसके क्रियाओं का मैंने आंख से पीछा किया । वो हाथ को बहुत ज्यादा आवेश से इशारा करते हुए जोर जोर से हिला रहा था । भगवान के लिए रास्ता खली करो । ऐसा बोल रहा था एक चांदनी रात को । वो आदमी ने बताया मैं यहाँ पर बैठा था जब फिर मैंने उसकी आवाज को चिल्लाते हुए सुना हलो नीचे कोई है वहाँ पर हेलो बोल दिया । मैंने चौकर ऊपर की ओर उस दरवाजे पर देखा और फिर मैंने उस आदमी को टेबल के पास रेड लाइट के नजदीक देखा । वो वहाँ भी वहाँ से जोर जोर से हाथ हिला रहा था । जैसा की अभी मैंने आपको बताया था चलाने की वजह से उसकी आवाज भारी हो गई थी और बहुत चिल्लाया तो फॅमिली देखो उधर देखो और फिर मैंने अपनी लैब को उठाया और उसकी बत्ती लाल कर दी और फिर मैं उस आकृति की ओर दौड पडा ये पूछते हुए कि गडबड किया है । मैं उस आकृति के बहुत नजदीक पहुंच गया था जब की वो अपनी बातें अपनी आंखों के ऊपर रखे हुए था । मैं बिल्कुल उसके नजदीक तक दौड कर गया और जैसे ही अपना हाल उसके चेहरे पर से बाएं हाथ हटाने के लिए बढाया वो मैं सही एकदम से गायब हो गया । कहाँ गायब हो गया भाई स्वर्ण के अंदर नहीं । मैं सुरंग के अंदर पांच सौ दस तक दौडता हुआ गया । मैंने अपने लाभ को अपने सिर के ऊपर उठाया और वहाँ पर दूरी की । नाथ दीवार पर लिखी हुई थी और दीवारों पर से पानी रिस रहा था । किसी के वहाँ से आने जाने की दीवार पर धब्बे थे । जितनी तेजी से मैं सूरत के अंदर डाल कर आया था उससे भी तेजी से दौड कर बाहर गया । वैसे भी वो अंधेरी सुरंग मुझे नैतिक रूप से अच्छी नहीं लगती थी या फिर यू गए हैं कि मुझे वो गलत लगती है । मैंने अपने रेडलाइट ऍम से उस रेडलाइट को सुरंग के मुहाने पर अच्छी तरह से देखा और वहाँ लगी लोहे की सीढी से चढकर मैं ऊपर गया और फिर जल्दी से नीचे उतर आया तथा यहाँ मैंने अपने केबिन में दोनों और तार भेज दिया । एक नाम जिससे कि ये मालूम हो जाएगी कुछ गडबड है । दोनों तरफ से लगभग तुरंत ही जवाब आया सब कुछ ठीक है । मैंने एक जमती हुई उंगली से उसके द्वारा बनाई गई आकृति का नक्शा की इच्छा और उस से बताया कि ये किसी प्रकार का नजरों का भरम हो सकता है जो कि एक प्रकार की मानसिक बीमारी होती थी और जहाँ तक आवाज का सवाल था वो भी काल्पनिक हो सकती थी । मैंने उससे कहा कि आप इस आप्राकृतिक घाटी में सुरंग में से सरसराती हुई हवाओं को सुनेंगे । जवाब धीमी आवाज में बोल रहे हैं तो आपको ऐसा भ्रम हो सकता है और वो हवा के टेलीग्रॉफ सितारों की वजह से भी हो सकती थी । उसने इसके प्रति उत्तर दिया ये सब बात तो ठीक हैं और वह उसके दार और हवाओं से जो ध्वनि पैदा होती है उसके बारे में पता होना चाहिए क्योंकि वह जाडों की ठंडी और लम्बी रातों को अपने केबिन में पिता था था परन्तु उसने अभी अपनी बात पूरी नहीं की थी । मैंने उससे छमा मांगी और उसने मेरी वहाँ को छूते हुए आगे कहा उस आदमी के बाहर दिखाई देने पर छह घंटे के बाद इस रेलवे लाइन पर एक गाडी दुर्घटनाग्रस्त हो गई और उसके दस घंटे बाद कई मृत लोगों की लाशें तहत तमाम घायल लोग उस जगह पर पाए गए वही जहाँ पर वह आदमी मुझे दिखाई दिया था । मैं एकदम अंदर से कम उठा और उसे जाहिर नहीं होने दिया । मैंने कहा कि ये बात तो नकारी जा सकती थी कि ये बहुत ही असाधारण सहयोग था जिसने उसके मन पर बडा असर डाला था । पर ये सवाल भी नहीं आता है कि इस तरह की घटनाएं और संयोग वहाँ पर बार बार हूँ और इस तरह के विषयों को सावधानी के साथ देखना या ट्वीट करना चाहिए । फिर मैंने ये भी जोडा कि सब आम आगे जिसमें कॉमनसेंस या सहजबुद्धि है वो इस तरह की घटनाओं को जीवन की साधारण गणनाओं में ज्यादा महत्व नहीं देता हूँ । यहाँ पर उसने फिर कहा, अभी उसकी बात पूरी नहीं हुई थी । उसने अपना हाथ मेरी वहाँ पर रखते हुए आंखों के कठूमर देखते हुए कहा, इस घटना को हुए अभी साल भर हो गया है और मैं उस अचानक अचंभित कर देने वाले मानसिक आघात से उबर चुका था । जबकि एक दिन सुबह बहुत फटने के समय मैं इस दरवाजे पर खडा रेड लाइट की ओर देख रहा था । तभी अचानक वो प्रेत छाया फिर दिखाई पडी तो अचानक मेरी और स्थिर निगाहों से देखते हुए रुक गया क्या? क्या वो चलाया नहीं? वो खामोश था । क्या उसने अपना हाथ मिलाया था? नहीं, वो बिजली के खंबे से लगकर खडा हुआ था और उसके दोनों हाथ उसके चेहरे पर इस प्रकार से रखे हुए थे । मैंने उसके हाथों ऍम को देखा । इस प्रकार से हाथ रखना शोक का प्रतीक था । मैंने इस प्रकार कच्चे कुछ खबरों पर ही देखे थे । क्या आप उसके पास गए थे? मैं यहाँ पर वापस आ गया और बैठ गया । थोडा सा अपने विचारों को एक जगह इकट्ठा करने के लिए और थोडा इसलिए भी की मैं बेहोश हो गया था जब में दरवाजे पर पहुंचा तक सूरज की रोशनी फैल चुकी है और बहुत तो वहाँ से गायब हो चुका था । इसके उपरांत कुछ होगा क्या? उसने मेरे हाथ को अपनी उंगलियों से दो तीन बार हुआ और एक भयानक तरीके से और बार से हिलाया । उसे दिन एक गाडी जिस वक्त सुरंग से बाहर निकल रही नहीं उसी वक्त एक डिब्बे की खिडकी जो मेरी तरफ खोल रही थी उसमें से कुछ सिर और हाथ कुछ परेशानी की हालत में हिलडुल रहे थे और किसी ने हाथ हिलाया । मैंने बिल्कुल उसी समय ड्राइवर को रुकने का संकेत क्या और स्टॉक चलाया । उसने इंजन बंद कर दिया और ब्रेक लगाया । पर ट्रेन रुकते रुकते डेढ सौ दस और आगे निकल गई । मैं अभी उसके पीछे पीछे भागा । गाडी में तमाम रोने चिल्लाने और चीखने की आवाज आ रही थी । एक सुंदर जवान और मौके पर ही डिब्बे में मर गई थी और उसे यहां लाया गया था वो इसी जगह इस केबिन में जो हम दोनों के बीच सिखा पर है वहीं लिटाई गई थी । अनचाही मैंने अपनी कुर्सी को किसका आया और हर जगह रोड की बोर्ड देखा जिस और वो इशारा कर रहा था । मैं बिल्कुल सच बता रहा हूँ । सर बिल्कुल उसी तरह में बयान कर रहा हूँ जैसे की घटना यहाँ कटी थी मैं क्या करूँ? मेरी समझ में कुछ नहीं आया और मेरा मुंह सूख रहा था । हमारे और इस कहानी को सरसराती हुई । एक करो वासी आवाज में अपने साथ ले गई । उसने फिर अपनी बात कहने शुरू की । अब सर इस बात को लोड करिए और फिर इस बात पर फैसला कीजिए कि मेरा मन किस कदर परेशान है । वो भूत या परेड फिर एक हफ्ते पहले वापस आया और उस दिन से वो कभी भी किसी समय भी यहाँ आ जाता है । बार बार उसी लाइन पर, उसी लाइन पर वहाँ उसी खतरे की लाइट पर तो वहाँ पर क्या करता है? उसने फिर पूरे जोर से और उसी तरह इशारा करते हुए कहा भगवान के लिए रास्ता साफ करो । फिर उसने कहना जारी रखा तबसे मुझे जरा भी चैन या आराम नहीं है । वो मुझे व्यथित तरीके से बार बार बुलाता है । बिलो लुकआउट लुकआउट निचे देखो उधर उधर वो खडा होकर मेरी और हाथ हिलाता रहता है और बार बार मेरी घंटी बजाता है । मैंने उसको उसी जगह पकड लिया क्या कल्चर मैं यहाँ बैठा था तब घंटी बच्ची थी वहाँ दो बार देखा तुम्हारी कल्पना तो मैं कैसा गलत रास्ते पर ले जा रही है । तुम्हारी कल्पना ले तो मैं किस गलत रास्ते पर ले जा के खडा कर दिया है और पूरी तरह से भ्रमित कर दिया है । मेरी आंखें घंटी पर थी और मेरे कान खुले हुए थे और यदि मैं जिंदा आदमी तो मैं पक्के तौर पर कह सकता हूँ कि उस दौरान घंटी बिल्कुल भी नहीं मिलेगी ना वो किसी अन्य समय बाजी । बस वो उसी समय बाजी थी जब दूसरे स्टेशन वाले तो मैं संपर्क करना चाहते थे । उसने अपना सिर हिलाया और कहा मैंने अभी तक कोई गलती नहीं किए साहब । मैं भूत की घंटी और आदमी की घंटी में कभी भी कंफ्यूज नहीं हुआ हूँ । भूत की घंटी के कम्पन अजीत थे और कहा की आंखों के सामने घंटी बजी थी । मुझे कोई आश्चर्य नहीं कि आपने घंटे को कभी चुनावी था या नहीं । पर मैंने घंटी बजते सुना और क्या भूत बाहर वहाँ पर था जब आपने बाहर निकल कर देखा वहाँ वहाँ पर था दोनों बार तो हाँ दोनों बार उसने दृढता से जवाब दिया क्या आप मेरे साथ दरवाजे तक आएंगे और फिर से उसे देखेंगे । उसने अपना निचला होट काटा और ये जताने के लिए की । वैसे वो इसके लिए अनिच्छुक था । पर फिर भी वो उठा । मैंने दरवाजा खोल दिया और सीढी पर खडा हो गया जब कि वह दरवाजे की दहलीज पर खडा हो गया । वहाँ पर खतरा यानी टेंडर लहर दिख रहे हैं और सुरंग का मानक मूवी वहाँ था । वहाँ पर पत्थर की भी की दीवार भी थी और उसके ऊपर वही आसमान में तारीख चमक रहे थे । क्या तुम उसे देख रहे हूँ? मैंने उससे पूछा और उसके चेहरे की और खास तौर से ध्यान रखते हुए उसकी माँ की साफ साफ नजर आ रही थी । पर ताकि हुई प्रतीत हो रही नहीं पर शायद इतनी ज्यादा नहीं जितने की स्वयं मेरी । जब मैंने उसको इशारा किया, उसने जवाब दिया नहीं, वो वहाँ पर नहीं हैं । ठीक बात है । मैंने कहा हम दोनों फिर अंदर चले गए । धर्मदासा बंद कर लिया और फिर से अपनी अपनी कुर्सियों पर बैठे गए । मैं सोच रहा था कि फायदे मंद दशा को किस प्रकार से और बेहतर बनाया जाए पर उसने जब दोबारा से बहुत एक रूप से बातचीत शुरू की ये मानकर चलते हुए कि हमारे बीच कोई गंभीर सवाल हो ही नहीं सकता । तब मैंने स्वयं को बडी कमजोर स्थिति में पाया । सर, आप इस समय तक के अच्छी तरह समझ गए होंगे । उस नहीं कहा कि मुझे ये बात परेशान कर रही है कि ये भूत कहना क्या चाहता है । मैंने कहा मुझे पता नहीं मेरी समझ में नहीं आ रहा है । वो मुझे किसी के लिए चेतावनी दे रहा था । वो कुछ परेशान सा सोचते हुए बोला आप की ओर देखते हुए कभी कभी बीच में वो मेरी ओर भी देख लेता था । आखिर खतरा क्या है और कहाँ पर इस रेलवे लाइन पर कहीं ना कहीं खतरा मंडरा रहा था । कोई बहुत भयानक दुर्घटना होने वाली है । इसमें तीसरी बार कोई संदेह नहीं था जैसा के पहले भी उसके प्रकट होने के बाद हो चुका था । पर निश्चित ही ये बहुत भयानक विचार है तो मुझे बता रहा है मैं क्या कर सकता हूँ । मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है । उसने अपना रुमाल निकाला और अपनी माथे से पसीना पहुंचा । यदि मैं अपने दोनों तरफ के स्टेशनों को सोचना दे भी दूँ या एक ही ओर तो मेरे ऐसा करने का कोई ठोस कारण नहीं निकला तो मैं परेशानी में पड जाऊंगा । उसने अपनी आती भी भी रूमाल से पहुंची और इन सब बातों से कोई फायदा नहीं होगा । वो लोग सोचेंगे कि मैं पागल हो गया हूँ और जब मुझसे पूछा जाएगा कि कहाँ पर खतरा है, किस तरह का खतरा है और मैं उन को जवाब नहीं दे पाऊंगा तो फिर मेरी नौकरी भी चली जाएगी । उसके मन में जोदार था, उसको देखकर मुझे दया आ रही थी । ये एक संवेदनशील आदमी की मानसिक व्यथा भी । वो एक ईमानदार भागने की मानसिक ये आंकडा जो कि मनुष्य या जीवन की हानि होने की संभावना से व्यथित था, वो जान माल के आने की जिम्मेदारी भी अपने ऊपर ही समझता था । भगवान मेरी सहायता करूँ, एक बेचारा ऍम एक एक कान रेलवे लाइन पर इस तरह से सहायता अपनी ड्यूटी निभा रहा था । मैं क्यों न किसी ऐसे आदमी के पास जाओ तो मेरी बात का विश्वास कर सके और जिसके पास कुछ करने की सामर्थ भी हो । जब मैंने उसको इस अवस्था में इतना हैरान परेशान देखा तो मैंने सोचा इस आदमी की खातिर और जनता की सुरक्षा के वास्ते मुझे चाहिए कि किसी तरह से मैं इस आदमी के मन को शांत कर सकते हैं । अच्छा मैंने इस सवाल को बडे रखते हुए की क्या वास्तविकता थी? उससे कहा, जो भी आदमी अपनी ड्यूटी ईमानदारी से करता है उसे कोई फिक्र नहीं करनी चाहिए और मुझे पता था कि वह अपना काम और करता हूँ । अच्छी तरह समझता था । ऍम भ्रमित कर देने वाले प्रेरित के प्रकट होने को समझ नहीं पा रहा था । इस तरह से मैं उसे ये अच्छी तरह से समझा पाया । उसे इस तरह से भूत प्रेत को देखने से घबराना नहीं चाहिए । मेरे इस प्रकार समझाने से वो शांत हो गया । जैसे जैसे रात भर थी गयी उसका काम भी बढता गया और वो उस पर ध्यान देने लगा और करीब रात में दो बजे वहाँ से चला गया । मैंने वहाँ रात भर रुकना चाहते पर उसने मना कर दिया । मैं इस बात को छिपा नहीं सकता था कि वापस लौटते समय और ऊपर चढते समय बार बार मुड मुडकर पीछे रेडलाइट की ओर देख लेता था और शायद मैं भी रात में ठीक से सो नहीं पाता । यदि मेरी खाड या मिस्टर उसके लालबत्ती के नीचे होते हैं । मुझे उन दो घटनाओं का क्रम और वो मृत लडकी की घटना याद आई और मुझे ये बात परेशान कर रहे हैं । मैं इस भावना के ऊपर काबू नहीं पा रहा था कि यदि बाद ऊपर अधिकारियों को बताई गई तो उसके साथ विश्वासघात हो सकता था जब तक की ये बार उसके साथ स्पष्ट न कर लूँ और उसके लिए मुझे कोई बीच का रास्ता निकालना पडेगा । अच्छा मैंने ये तय किया कि इस बात को अभी मैं अपने ही तक रखता हूँ और दूसरे दिन उसे किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाऊंगा । अगली रात को उसकी नाईट शिफ्ट बदलने वाली थी । पता मैं उसको परसों नाइक की ड्यूटी के बाद डॉक्टर के पास सलाह के लिए ले जा सकता था और मैंने ये बात उसको बता भी थी । अगली शाम बहुत सुहावनी थी और मैंने उसका लुत्फ उठाने के लिए जल्द ही होटल से सैर करने निकल पडा । मैंने सोचा कि यदि में एक घंटा ज्यादा हूँ तो सिग्नलमैन के केबिन में जाने का समय हो जाएगा । अभी सूरज डूबता नहीं था । पता मैं खेतों से घूमता घाम था, उस जगह पहुंच गया जहां गहरी खाई थी और नीचे सुरंग का मोहाला मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब मैंने सुरंग के मुहाने के पास एक आदमी को देखा जिसके बारे बात हूँ उसकी आंखों पर थी और जो हाथ को बहुत जोरों से हिला रहा था । ये अज्ञात भयानक चीज जो मुझे सता रही थी तो हॉस्टल में एक आध नहीं था और उस से थोडी दूरी पर कुछ अन्य आदमियों का एक छोटा सा समूह खडा था । जिसको ये आदमी वह इशारा समझा रहा था । डाॅ नहीं । बत्ती अभी चलाई नहीं गई नहीं लाइट के खंभे के सहारे एक झोपडी सी बनाई गई थी । वो झोपडी अभी अभी कुछ देर पहले ही बनाई गई थी क्योंकि मैंने वो उससे पहले कभी भी उसको वहाँ पर नहीं देखा । फॅार से ज्यादा बडी नहीं । मेरे मन में अचानक खयाल आया कि कहीं कुछ गडबड तो नहीं थी । मेरे मन में ये बात कौन ली? कहीं मैंने उस आदमी को कल रात अकेला छोडकर कुछ गलत काम तो नहीं किया या फिर शायद कहीं कोई जानलेवा दुर्घटना तो नहीं हो गई । मैं जल्दी जल्दी पतली नदियों से नीचे उतर गया । क्या मामला किया है? मैंने एक आदमी से पूछा ऍम की आज सुबह मृत्यु हो गई । ये वही आदमी तो नहीं जो इस केबिन में रहता था । हाँ साहब, आप उसे पहचान लेंगे यदि आप उसे जानते थे । उस आदमी ने कहा उसने बहुत ही गंभीरता से और संजीता तरीके से अपना है तो तारा और धीरे से उस पर पडी चादर को थोडा सा हटाया । उसका चेहरा काफी शांत था । उसने कहा, और एक ये कैसे हुआ, ये हुआ कैसे? मैं हर आदमी की ओर घूम घूमकर पूछने लगा । वो एक इंजन के नीचे आकर कट गया । सर सारे इंग्लैंड में उससे बेहतर अपना काम करने वाला कोई और नहीं था । ये ऍम बिल्कुल दिन के समय हुआ । उसने लाइट जला दी थी और लैंप उसके हाथ में था । जब इंजन सुरंग से पहाड था तभी उसकी पीठ इंजन की ओर थी और उसने उसको काट डाला । ये बात ऍफ ने बताई कि ये दुर्घटना आखिर हुई कैसे? तो साहब को बताओ ये कैसे हुआ । वो आदमी जिसने गहरे रंग की खोल दूरी ड्रेस पहनी हुई थी, पीछे हटता सुरंग के मुहाने पर गया और मेरे सोलह से बाहर आते समय मैंने उसे देखा । स्पीड काम करने का कोई मौका नहीं था और मुझे पता था कि वह बहुत सावधान रहता था । जब उसने सीढियों की आवाज नहीं सुनी तो मैंने इंजन बंद कर दिया । जब वो उसके ऊपर से गुजर रहा था और मैंने जितनी जोर से हो सकता था उसको पुकारा । तुम ने क्या कहा था । मैंने कहा लो देर लुकआउट लुका भगवान के लिए रास्ते से हट जाओ मैं चौका । अरे सर वो बडा ही भयानक समय था । मैंने उसको पुकारना कभी बंद नहीं किया । मैंने ये हाथ अपनी कानून और आंखों पर रख लिया था और उसको सारे समय रास्ते से हटने के लिए दूसरा हाथ लाता रहा पर उसको कोई फायदा नहीं हुआ । अब ये समझ गए होंगे कि ये बस संजोग की बात है कि ड्राइवर ने भी वही शब्द बोले थे जो उसने मुझे बताए थे और वो उसी प्रकार से इशारा कर रहा था जैसे उसे अपने भ्रमित अवस्था में दिखाई पडा था ।

14 घोड़ा गाड़ी का स्टैंड

रहा घोडा गाडी का स्टाइल हमारा मानना है कि घोडा गाडी जो लंडन में हैकनी खोज कह जाती है केवल मेट्रोपोलिटन शहर में ही पाई जाती थी । हमें ये बताया जाता है कि एडनबरा और बहुत ज्यादा दूर नहीं । लेवल पूल और मैनचेस्टर में भी अपने अपने हक ले कुछ स्टैंड पाए जाते हैं । हम इस बात को भी तुरंत मान लेते हैं कि इस तरह के कुछ घोडा गाडियां इन शहरों में भी पाई जाती हैं । पर वह भी अक्सर लंदन की कई घोडा गाडियों की तरह सुस्त, धीरे धीरे चलने वाली और गंदी होती हैं । पर वो किसी भी तरह लंडन कि घोडा गाडियों की संख्या में कितने स्टैंड हैं, कितने ड्राइवर हैं या कितने घोडे हैं वो कहीं से भी उन की बराबरी नहीं कर पाती हैं । अब एक भारी भरकम टूटी फूटी लंडन कि घोडा गाडी को ही ले लीजिए । मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि दुनिया का कोई भी वहाँ या सवारी लंडन की इस घोडा गाडी की तरह नहीं हो सकती हैं, चाहे वो उतनी ही पुरानी हैकनी कोच क्यों ही ना हो । हमने अभी हाल ही में लंदन की सडकों पर जो बडे अफसोस के साथ कहना पडा रहा है कि कुछ स्टैंडों पर ऐसी गाडियां देखी हैं जो कि एक साफ सुथरे सजे हुए रथ की तरह थे । हरे रंग के रात और पीली पॉलिस कि हुई चार पहियों पर घोडा गाडियां और कुछ गाडियों के पहले भी अलग अलग रन और अलग अलग साइजों के होते हैं । ये एक तरह से नवीनता या विधता लाने का प्रयास है जो कि मानव मन की बेचैनी की ओर इशारा करता है और तमाम समय से चली आई मान्यता हूँ या संस्थाओं का अनादर है । अब आप ही बताइए घोडा गाडियां साफ सुथरी क्यों होनी चाहिए? हमारे पूर्वजों ने उन्हें गंदी पाया और वैसे ही छोड कर चले गए और हमारे अंदर ये इच्छा क्यों होनी चाहिए कि हम हमेशा चलते ही रहे हैं वो भी छह मील प्रति घंटे की रफ्तार से । जबकी बे सिर्फ चार मील प्रति घंटे की रफ्तार से हैं । पथरीली ऊपर खावन सडकों पर चलते रहते थे । ये सब बहुत गंभीर सवाल है । गोला गाडियाँ अब हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग है । वे विधायक द्वारा निर्धारित की गई हैं और उन्हें सरकार द्वारा पार्लियामेंट द्वारा बाकायदा रेजिस्टर्ड करके एक नंबर प्लेट दी गई है । फिर क्यों लंडन जैसे शहर को कॅश और शौक नहीं बस द्वारा भर दिया गया है या लोगों को क्यों आठ पैसे प्रति मिल के हिसाब से सफर करने के लिए देना चाहिए । जबकि पार्लियामेंट ने ये फैसला लिया था कि उन्हें धीमी सवारी से आने जाने के लिए एक स्लिंग प्रति मील की दर से भुगतान करना होगा क्योंकि हमें इसका जवाब मिलने की कोई संभावना नजर नहीं आती । इसलिए अब हम एक नया पैरा शुरू करेंगे फॅमिली को जिससे हमारी जान पहचान पुरानी है । हम तो किरायों की चलती फिरती किताब है और हम ये महसूस करते हैं कि अगर इस बात पर कभी कोई विवाद हो तो हम अपने मुद्दे पर सही पाए जाएंगे । कोविंद गार्डंस के आस पास तीन दिन तक कितने पानी वाले हैं वो हमें जानते हैं और हमें उम्मीद है कि उस क्षेत्र के जितने भी घोडे वाले हैं, बहुत सब भी हम लोगों को बहुत अच्छी तरह जानते होंगे अगर वह अंधे नहीं हैं । हमें है अपनी कोच इसमें बहुत ज्यादा दिल सस्ती है पर हम शायद ही कभी कभार उस पर चलते हैं । यदि हमने कभी किसी हैकनी कोच को चलाया तो मुझे उम्मीद है कि वह कुछ जरूर पलट जाएगी । अन्यथा हम घोडों और हैकनी कोच इसके महान दोस्त है । जैसा की मुसलमान टीम है जो एक फेरी वाले के रूप में जाने जाते हैं । हम कोई घोडा नहीं रखते पर केवल एक थार यानी कि सिर्फ एक कपडे का घोडा हमने कभी भी घोडों की काठी पर बैठना पसंद नहीं किया था । केवल मरन की काठी को छोडकर और कभी भी हाउस जाने के शिकारी कुत्तों का पीछा नहीं किया । यातायात के इन साधनों को छोडकर हम अपनी राय आपको घोडा गाडी के स्टैंड के बारे में जाहिर करना चाहते हैं । जिस घर के ऊपरी कमरे में बैठ कर हम ये लेख लिख रहे हैं उसकी छिडकी के नीचे एक हैकनी पूछ स्थान है । इस वक्त वहाँ पर केवल एक ही गाडी खडी है पर इस तरह की गाडियों का एक अच्छा नमूना है एक लम्बी चौडी भर का कार्ड भी जैसे कोई पत्ती रूलेट हो जिसमें छोटी छोटी कांच की खिडकियां हैं तथा बडे बडे फ्रेंड्स है । उनके फाइनल पर किसी राजघराने के कोर्ट फॅस का निशान बना हुआ था जो अब धुन्ना पड चुका था । उसकी एक्सिस या दौरे लाल रंग की थी और ज्यादातर पहिये आरॅन के थे । कोच का मॉक्स एक बडी ओवर कोर्ट से ढका हुआ था । उस पर कंधों ढकने के लिए बहुत सारे क्या या बडे बडे कपडे लगे हुए थे और कुछ आसाधारण कपडे भी ढके हुए थे । कई जगह से उसमें घास स्पोर्ट्स दिख रही थी जो कुशल भरने के लिए इस्तेमाल किया गया था हूँ के सिर झुके हुए थे और उनमें से प्रत्येक का खयाल और पूछूं । बाल इतने कम थे जैसे कि वो घिसेपिटे लकडी के घोडे की पूंछ या आय आल हो । वो धैर्यपूर्वक किसी बीजी घास पर खडे थे और कभी अपनी ढकी हुई आंखों से कुछ देखने की कोशिश करते थे तथा कभी कभी अपने सास को हिलाने की कोशिश किया करते थे और कभी बीस में एक घोडा दूसरे घोडे के कान के पास मूल्य जाता था जैसे कि वो खुसपुसाहट का ये कह रहा हूँ की मेरा बस चले तो मैं उस जवान की हत्या कर दूँ । कोचवान स्वयं जल घर में था और जो पानी वाला था वो अपने दोनों हाथ टाइम्स की जेब में डाले तो बाल सफल का नाच कर रहा था जिससे उसके पैर गर्म रहे हैं । घर नंबर पांच में से एक नौकरानी बालों में खुला भी रिबिन लगाए बाहर निकल जाती है और उसके साथ में चार बच्चे भी हैं । वो जोर जोर से पुकारती है पानी वाला आज में नल घट से भाग कर आता है तथा कुछ पाँच को जोर जोर से आवाज लगता है है । इसी बीच वह घोडों को भी खींच कर लाता है और उन को लगाम लगता है । इसके साथ ही वो उस जवान को भी पुकारता है और फिर ऍम रूम में से कुछ मान अपनी लकडी के स्कूल वाले जूते पहनकर खटखट करते हुए भागता हुआ आ जाता है और खींचतान करके आगे पीछे करके अपने घोडागाडी घर नंबर पांच के दरवाजे के सामने खडी कर देता है । इन सब बातों में कितना हल्ला गुल्ला और गडबड हो रही थी । वो वृद्ध महिला जो वहाँ पिछले चार महीने से रह रही थी वो वापस अपने घर जा रही थीं । कई बॉक्स घर के बाहर आ गए और उससे गाडी का एक हिस्सा सामान से भर गया । बच्चे जो हर आदमी औरत के रास्ते में आ रहे थे उन की बजह से उसके काम में रुकावट आ रही थी । एक छोटा बच्चा जो एक छाता लेकर भाग रहा था वह अचानक गिर गया और उसे चोट लग गई थी तथा उसे जब घर के अंदर लाया जा रहा था तब वो अपने हाथ पैर फेंक रहा था । अन्य बच्चे इधर उधर दुबक गए थे तथा साफ जाहिर था कि वो वृद्ध महिला पिछले कमरे में उन जाते हुए बच्चों का चुंबन ले रही थी । उसके बाद वो उस कमरे से बाहर निकलकर आई । उसके पीछे पीछे उसकी शादी शुदा लडकी तथा उसके बच्चे उनके पीछे पीछे दोनों नौकर भी इन दोनों नौकरों और कोच वान की मदद से सब लोगों को गाडी पर चढा दिए गया । फिर एक कपडा और एक छोटी सी टोकरी जिसमें मेरे खयाल से एक काली बॉटल थी तथा कुछ कागज में लिपटी इंसान बिच भी थे जो पकडा दिए गए थे । गाडी में जब सब सवार हो गए तब उस कोच के दरवाजे बंद कर दिए गए । टॉन गोल्डन क्रॉस ऍम पानी वाले आदमी ने कहा गुड बाय नानी । बच्चे जोर से चिल्लाए और कोच की घंटी बजाते हुए तीन मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल पडे । उनकी जाने के बाद माँ और बच्चे घर के अंदर वापस आ गए पर उनमें से एक बच्चा सडक पर दौड लेता है और नौकरानी उसके पीछे पीछे उसका पकडने के लिए भाग जाती है और उसे किसी प्रकार पकडकर घर में वापस लेकर आती है तो घर के अंदर घुसने के पहले उसने मोड कर हम लोगों की ओर देखा । पता नहीं क्या हुआ लेकिन सच में हैॅ बिल्कुल शांत हो गया । हमने अक्सर बहुत संतोष के साथ ये देखा है कि कैसे कोई नौकरानी जो किसी काम के लिए या कुछ लाने के लिए बाहर भेजी गई वापस घर आने पर एक प्रकार के राहत महसूस करती थी । और यदि इसी काम के लिए किसी लडके या नौकर को भेजा जाता था तो वो उस कोच के बॉक्स पर चढकर बहुत खुशी महसूस करता था । पर हमको इससे ज्यादा घोषित कभी महसूस नहीं हुई । जबकि हमने कुछ जवानों की एक पार्टी देखी । हाँ, एक दिन तो मैं जोड पर थे तो हमने एक काम पर गली से एक शादी की पार्टी को निकलते देखा जो की फिजिशियन के पास है । दुल्हन ने जिसका बडा सा लाल चेहरा था, एक पतली से सफेद शादी के ड्रेस पहनी हुई थी और बुरा इट्स मेरे साथ में चलने वाली सह बालिका ने उसी तरह के उचित कपडे पहने हुए थे और वो एक खुशमिजाज लेकिन थोडी, मोटी सी और कम उम्र और थी । दो बहने नीले रंग का सूट पहना हुआ था और उसके पे स्कोर भी पीले रंग की थी । वो सफेद बैंक पहने हुए था और उस से मिलता जुलता ही बोल इन ग्लव्स भी वो उस गली के खोने पर रुके और बहुत ही फॅमिली लिता से उन्होंने कोच के लिए आवाज लगाई । जैसे ही कोच आई वो लोग उसमें बैठ गए और दुलहन की सहेलियों ने बहुत ही लापरवाही से उसके दरवाजे पर एक लाल सॉलिड दो शायद इसी उद्देश्य लाई गई थी उसको डाल दिए गया जिससे कि उसका नंबर ना देखिए और वो कोई नीचे गाडी प्रतीत हो पर शायद वो ये भूल गई थी । गाडी के पीछे भी नंबर बडे अक्षरों में लिखा था इस तरह से वो लोग वहाँ से चले गए । एक शिलिंग प्रति डर के मिल से और इस बार की शहर शायद उन्हें पांच फिलिंग की पडे एक हाथ नहीं । खोज के बारे में कितनी दिलचस्प उस तक कर लिखी जा सकती थी यदि वो अपने शीर्ष पर भी उतना सामान ले जा सकती थी जितना कि उसके शरीर के अंदर एक टूटे फूटे हैकनी । कोच की आत्मकथा उतनी ही दिलचस्प होगी जितनी की एक गए बीते पुराने जमाने के नाटक कारकी जीवली कितने ही लोगों को इस बिजनेस या मुनाफे के लिए यहाँ घूमने फिरने या दुख तकलीफ में यहाँ से वहाँ पहुंचाया होगा और कितने ही लोगों की उदास कहानियाँ इसमें घाटी होंगे वो गांव की लडकी, ज्यादा पोशाक पहले और दिखावा करने वाली और या फिर मदहोश एशिया एक नौ से क्या जब बहुत कंजूस आदमी या फिर कोई चोर ही

15 बेचारा मर्केंटाइल जैक

बेचारा माॅक वो छोटी से चेरू यानी देवदूत जो एक डाल पर बैठी हुई थी । हवा में उडती को इसलिए नियुक्त किया गया है कि वह गढ सब जाग के ऊपर या मर्कन्टाइल जाग के ऊपर या फिर नेशनल नेवी के जाग के ऊपर नजर रखें । यदि नहीं तो फिर वो कौन है या व्यापारी? जब कौन है वो देवदूत किया है? और वह व्यापारी जय कौन है जिसका दिमाग पानी के जहाज के पेन इवेंट्स के दोहरा हिलाया जा रहा है? क्या ये विश्वास करना ठीक नहीं है की उस फर्स्ट ऑफिसर ने काफी छाती पहुंचाई है । ये मेरी सोच थे जब मैं लेवल बोलके डॉकयार्ड में पहुंचा बेचारा मोर्कन टाइल यार पर नजर रखने पर मेरे हालात उस छोटी सी चीज रूप से अलग थे पर यहाँ पर मैं था पर मैं यही पर था । मर्केंटाइल जैक बहुत ज्यादा व्यस्त और बहुत ठंडा या चुपचाप रहने वाला आदमी था । अभी भी बर्फ गड्ढों में पडी हुई थी और पूर्वोत्तर से आती हुई बर्फीली हवाएं शरीर को काट रही थी । वहाँ पर बर्फ के आंधी तूफान आ रहे थे और पत्थर से गिर रहे थे माकन टाइल जाक इसे हटाने के काम में खराब मौसम में बुरी तरह से लगा हुआ था । बेचारा जाॅब वह जहाज के मस्तूल हूँ और फाइनल से बुरी तरह चिपका हुआ था । जैसे कि कोई वन्यप्राणी ओक के पेड से चिपका हुआ हूँ । वो उन्हें खुरचकर पेंट कर रहा था । वो यार्ड में जो मस्तूल थोडे जा रहे थे उन्हें फैलने और लपेटने की कोशिश कर रहा था । बडे बडे जानू और मक्कड के बीच में वह मुश्किल से ही दिखाई पड रहा था । शिप में जहाँ सामान रखा जाता था वहाँ भी उसकी आवाज बहुत धीमी सुनाई पडती थी और जहाँ से शिप में माल उतारा जाता था बहुत से भी वहाँ कैप्टन को गोल गोल घुमाना दिख जाता था । उसके घुमाने से एक संगीत मैं आवाज निकलती थी और वो ज्यादातर नशे में रहता था । बहुत लंग पाऊँ डेक को धोता रहता था और उस वक्त उसकी कमीज के बटन भी खोले रहते थे जिसमें ठंडी हवाएं तीर की तरह लग रही थी । वो पूरे ध्यान से बलपूर्वक देखता रहा था । वह कुनार सीमर के शूट के ऊपर खडा था जो कल छूटने वाला था । ये स्टीमर कल ही यहाँ से निकलने वाला था क्योंकि उसके बर्फखाने यश, ईद ग्रह में तमाम गोष्ठ और मुझे आदि दिए जा रहे थे । उसके पास एक बैग में टोल के था जो छोड बदमाशों के कारण आता था । तरह तरह की आवाजों से वो बहुत ज्यादा कन्फ्यूज था और गोदी में आपको बहरा कर देने वाली आवाज आ रही थी । पहियों के खडखडाने घोडों की टापों की आवाजें । कोई इसकी आवाज से आपको पागल कर देने वाली आवाजें रोई और चमडी के बडे बडे बंडल इन सबके बीच बेचारा मोर्कन स्टाइल जाए खडा था । जिस व्यापारिक कारणों से मैं और जैक साथ आए वो ये था कि मैं लिवरपुल पुलिस ने इसलिए रखा गया था की मैं उन गैर कानूनी ट्राॅले जाल पर निगाह रखें जो जाग के लिए हर रात स्थापित किए जाते थे । क्यूँकि मेरा इस पुलिसफोर्स में रहना स्थाई और बहुत कम समय के लिए था और मेरा उस पुलिस बल में बने रहना और मेरा उस पुलिस माल में बने रहने का पूर्व गृह सीमित था । मैं जो सबूत पेश करूंगा उस पर कोई संदेह नहीं किया जाएगा । इसके अलावा ये जांच एक उस आदमी द्वारा की जाएगी जो उस पुलिसबल का या सदस्य नहीं था । पता उसकी निष्पक्ष था और बुद्धिमत्ता पर कोई संदेह नहीं किया जा सकता था जहाँ के लिए कुछ घंटे पहले ही डॉकयार्ड में अपना काम खत्म कर लिया था और उसको पहचान पाने के लिए मैंने उसका एक फोटो पुलिस के ऑफिस में से ही लिया था । मैं पुलिस परेड पर था और घडी में अब रात के दस बज रहे थे । मैंने पुलिस सुपरिटेंडेंट से उसकी लालटेन ले ली थी और उन जगहों पर जा रहा था जहां उसको पकडने के लिए पुलिस वालों ने जाल बिछाए थे । मिस्टर सुप्रीटेंडेंट एक लंबे चौडे भारी खत्म वाले आगे थे जिनके चेहरे पर कठोरता रहती थी । उनके हाथ में काले रंग की एक कडी लकडी की काली छडी रहती थी । मैं उनके पीछे पीछे चल रहा था और जहाँ भी उन्हें संदेह होता था वो उसे फट बात पर खटखटाते रहते थे जिससे घनघनाने कि धोनी आती थी और साथ ही एक सीटी भी बच जाती थी और अचानक कहीं से एक पुलिसमैन प्रकट हो जाता था । इस तरह से एक रहस्यमय छडी जाग के लिए बिछाए जानो में से एक उत्तर चीज साबित होने वाली थी । हम बंदरगाह की सबसे अनजानी सडकों पर और गलियों में आ गए । अचानक ही इधर उधर की बातचीत करते हुए मिस्टर सुपरीटेंडेंट ने एक दीवार के पास जो लगभग दस में लंबी रही होगी, अपनी छडी को खटखटाया या टक टक आया । उस दीवार में से एक दरवाजा खोला जो बंद हो गया और वहाँ से दो पुलिसमैन निकलकर आ गए जिससे मुझे तो अच्छा हुआ पर मिस्टर सुप्रीटेंडेंट को तनिक भी आश्चर्य नहीं हुआ । सब ठीक है शहर भाई सबकी के सर सब ठीके ट्रॅफी के कोई कर मैं यहीं पर हूँ सर हमारे साथ आओ जी सर इस तरह से चार आई हमारे आमने सामने और बीस में मैं और मिस्टर सुपरीटेंड और ट्रांसफोर्ट और कोई कर हमारे पीछे पीछे रक्षक या प्रहारी की तरह चल पडे । मैंने देखा कि एक शार्प आई, बहुत चतुराई और प्रोफेशनल तरीके से दरवाजा खोला था उनके कुंडी । ये मैच को बहुत ही सावधानी से और नजाकत से छोटा था । जैसे मुकुल नहीं ना होकर कोई बजा हो या फिर संगीत का कोई यंत्र । जो भी दरवाजा वो छोटा था वह बडे आराम से खुल जाता था । शार्ट आईने जाग को पकडने के लिए जाल बिछाए, कई दरवाजे खोले पर जा किसी भी दरवाजे के अंदर नहीं मिला जाए । यदि मैं तुम्हारी जगह होता तो शायद उनको इससे ज्यादा चौडी एक बर्थ देता सभी जगह हैं । बडी ही कष्टदाई थी और सब के अंदर कोई न कोई आदमी या और जाॅब कोर्ट के इंतजार में बैठे हुए थे । अब जो दरवाजा खोला उसमें एक बूढी और पीठ झुकाए हुए हाथ सेक रही थी । वो ऐसे लग रही थी जैसी छह पेरीवाल ड्रीम बुक्स में कोई जिप्सी हूँ । अब इस बार एक घुंघराले बालों वाला आदमी था जिसने चेक की कमी इस पहनी हुई थी लेकिन कोर्ट नहीं । वो वहां बैठा हुआ अखबार पढ रहा था । अगले दरवाजे के अंदर एक घुंघराले बालों वाले आदमी और घुंघराले बालों वाली औरत थी । उन्होंने अपना परिचय एक दंपत्ति के रूप में दिया । अब ये जाग के लिए खुशखबरी थी । वो ऍम थे यानी नाना नानी । बहुत सब भी जैक का इंतजार कर रहे थे । पर हमें देखकर उन्हें बेहद निराशा हुई । वहाँ ऊपर कमरे में कौन है? शार आयने पूछा कोई भी नहीं सर, पक्के तौर पर वहाँ कोई नहीं है । तुम्हारे कोई नहीं है । कहने का मतलब क्या है? जब मैंने दरवाजा खोला तो मैंने किसी और के ऊपर जाने की पागलों की आप सुनी थी । अरे हाँ साहब, मैं उस औरत के बारे में बताना तो भूल ही गया । और इस सर वो बेबसी है सर एक गोरी और आपको बच्ची को जानते ही हैं । वैसी डार्लिंग नीचे आओ और साहब को विश करो । ऐसी अवस्था में सामान्यता बैठ सीढियों के ऊपर से नीचे की ओर रोषपूर्ण होकर देखती है और सोचती है कि जब जैक आएगा तो वो उसकी खूब धुनाई करेगी । ऐसे में अमूमन चार आई मिस्टर सुप्रीटेंडेंट की ओर दौड कर जाता है और ऐसे कहता है जैसे कि उसके सामने जो घर के लोग हैं वो मूंग का एक पुतला हूँ । ये घर सबसे खराब घरों में से एक है सर इस औरत को तीन बार सजा हो चुकी है । ये आदमी भी उतना ही बदमाश है । इसका असली नाम है पर अपने आपको वो वाटर हाउस कहता है मेरा नाम कभी भी पैक नहीं था भगवान जब से मैं इस घर में हूँ अमूमन वो आदमी कुछ भी नहीं कहता था पर वो अपने कंधों को जो काकर अखबार पडने का दिखावा करता था । मिस्टर शर्मा आई हम लोगों का ध्यान दीवार की ओर ले गया जहां पर तरह तरह के फोटो और तस्वीरें लगी थी । हमेशा ही ट्रंप फट और कोई कर दरवाजे पर नजर रखते थे । यदि शहर पाए किसी आदमी का सही नाम नहीं जानता था तब उन दोनों आदमियों में से कोई भी बाहर से एक भूत की तरह बाहर से बोलता था । ऍम ऍम नहीं हैं बल्कि वो पागल था या की कैलान वाकर का भाई है जिसके खिलाफ काफी सबूत थे अथवा वो आदमी जो कहता था कि वह बचपन से कभी भी समुद्र के पास नहीं गया था वो वास्तव में पिछले हफ्ते ही समुद्री यात्रा से घर वापस लौटा था या फिर वो कल ही समुद्री यात्रा पर जा रहा था और उसकी गिनती वहाँ अच्छे आदमियों में नहीं होती थी । मिस्टर सुपरीटेंड कहते थे जब वह अंधेरे में पुणे जाते थे और इन आदमियों से डील करना बहुत ही मुश्किल था और जब से जगह उनके लिए बहुत हर्ट हो जाती है तो फिर वो किसी जहाज में कुछ या रसोई या स्वीट गार्ड बंद कर कई महीनों के लिए गायब हो जाता था । या फिर वो कहीं महीनो बाद पहले से भी ज्यादा बुरा या बदमाश आदमी होकर लौटा था । हाँ, जब कई ऐसे घरों में हो कर बैरंग वापस आ गए तब गायन घर में गए जहां उसके आने की प्रबल संभावना थी । एक लंबी से निचले कमरे में ऊपर गायन वह संगीत का अभ्यास चल रहा था । कमरे के एक सिरे पर एक प्लेटफॉर्म पर संगीत बजाने वाले दो आदमी थे और जांच के बैठने के लिए कई चर्च नुमा कुर्सियां खाली पडी थी और उसके बाद एक बडी न्यूज सीट नहीं जिस पर्स लंग लिखा था और उस पर मार्टेस और उस तरह के अच्छे पद वाले लोग ही बैठ सकते थे । कमरे के अंदर काफी रंज की कुछ तस्वीरें जिनके फ्रेम में अच्छी तरह वार्निश की गई थी, दीवारों पर टंगी थी तथा कुछ सिस्टम किए हुए जान बार कमरे में इधर उधर रखे हुए थे इस्नर में और इस तरह के बाहर भी उनके प्रिय कॉमिक ऍम जो आपने गृहण, काले किए हुए मूंग और लटके हुए शुगर लीग के आठ पहने हुए कमरे को सुसज्जित किए हुए थे । इसके बाद ऍम वॉटर पीते हुए भी दिखाई गई थी । वो शुक्रवार की एक रात थी जिस वक्त जांच के आने के लिए अच्छी नहीं समझी जाती थी । यद्यपि ऐसा सोचा जाता था कि जैसे वहाँ पर अवश्य आएगा क्योंकि वो उसका प्रिय स्थान था । पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और यहाँ पर काफी रूपया और धन भी लेते थे । वहाँ पर उन बता हुआ एक ब्रिटिश जाता था । वो अपना खाली गिलास लिए हुए चुप चाप बैठा था और उसके अंदर वो ऐसा झुक कर देख रहा था जैसे उसमें से वो अपने किस्मत पडने की जेठ कर रहा हूँ और वहाँ पर स्टार और स्ट्राइक्स का एक लाफिंग जाता था जो एक बिना समझौता करने वाला एक ग्राहक था जिसकी लंबी ना थी और ऊंचे ऊंचे ठीक बोल थे और उसके बारे में कुछ भी मुलायक नहीं । केवल उसके ऍम छोडकर इसके अलावा वहाँ पर एक स्पैनिश जाता था जिसके कांड कुंडल में थे, काली घुंघराले बाल थे और हाथ में एक चाकू भी था कि यदि कहीं कोई झगडा झंझट हो जाए फिर वो वहाँ पर एक माल्टीज था स्वीडिस जाता था । फिर जाग ज्ञानी फिनलैंड से जो आपने पाइपों में से धुएं के छल्ले हवा में उडा रहे थे और उनके भाव शून्य चेहरे ऐसे लग रहे थे जैसे कि वो लकडी से तराशकर बनाए गए हूँ और वो हवा के छलने तोड फोड कर उस युवक डांसर के पास जा रहे थे जो एक होल पाइप के पास खडी थी । मुझे उस लडकी के लिए वो एक मंच इतना छोटा लग रहा था कि जैसे कहीं वो नाराज करते करते खिडकी से बाहर ही न गिर जाए । अच्छा फिर भी वहां मौजूद सारे लोगों को बिना जाए तो अभी आधा हॉल खाली ही बडा था तथापि मिस्टर लाइसेंस कोई करने बताया की आप ये नोट करें । आज फ्राइडे नाइट है और राहत के बारह बज रहे हैं और जहाँ किसी शॉप में चढ गया होगा मिस्टर कोई कर रहे हैं । एक बहुत तेज आंखों और पैसे हुए हो तो वाले आदमी थे । उसके दोनों आंखों में कॉमर्स का गणित था । उनका कहना था की वो अपना बिजनेस स्वयं देखते थे और हमेशा मौके पर मौजूद रहते थे । जब वो किसी प्रतिभा के बारे में सुनते थे तो वो किसी अन्य की कहीं सुनी बातों पर विश्वास नहीं करते थे और उस स्थान पर सैम रेल द्वारा जाकर उसकी परख करते थे । यदि किसी की प्रतिभा उनको जब जाती थी तो फिर उसको वह एक, दो, चार या पांच पहुंच प्रति सप्ताह के डर से उसे अपने यहाँ रख लिया करते थे । ऍम ये संदेह एक प्रतिभावान गायिका थीं । आप वो जो ये बाध्य यंत्र शायद पियानो या अकोर्डिंग थी उसको सुनिए तो आपको पता चल जाएगा कि वह महोत्सव में कितनी प्रतिभावान थी और यही सच था । ये पियानो याॅर्क एक सुंदर युवती द्वारा बजाया जा रहा था जिसके सामने दर्शक बडे बोलें और भद्दे दिख रहे थे । उसकी टिकट और ड्रेस भी बहुत खूबसूरत थी । उसमें वाद्ययंत्र के साथ गाना गाया । पहले एक गाना गांव के घंटों के बारे में था और वो कैसे धुन में बजाते थे । फिर दूसरा गाना समुद्र में गाया था और फिर उसके बाद पाइपर की नकल के साथ खत्म किया जो शायद मर्कन्टाइल जात को बहुत पसंद आता । मिस्टर लाइसेंस कोई करने कहा की वो एक अच्छी लडकी थी । वो अपने आप में रहती थी । इस नाक में बैठती और सीमेंस कि फालतू बातों पर ध्यान नहीं देती थी । उनके पिता की मृत्यु हो चुकी थी और वो अपनी माता के साथ रही थी थी । उसके पिता भी कभी व्यापारी हुआ करते थे पर अपनी है सिर्फ से ज्यादा खर्च कर दिया था । जब मैंने उससे उसके वेतन के बारे में पूछा तो पता चला कि पाउंड्स गिरकर शिलिंग हो गए थे । फिर भी वो कुछ फिलिंग एक उभरते हुए युवा कलाकार के लिए आराम से जीने के लिए काफी थे । वो हर शाम को छह बार ही शोक करती वो भी सिर्फ शाम को छह से बारह बजे तक । सबसे ज्यादा अच्छी बात तो ये थी कि वह कभी भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल पसंद नहीं करते थे और न ही अपने यहाँ कोई गडबडी या शोर शराबा होने देते थे । शार्प ने इस बात की पुष्टि की और वहाँ पर जो शांत वातावरण था वो इस बात का गवाह था । इससे मैंने ही निष्कर्ष निकाला कि पुअर माकन टाल जाक अपनी शाह में यहाँ व्यतीत करने के लिए नहीं आ सकता । अपहरण दूर सडक पर बाहर आने के बाद काम फूटने फौजी सलाम करते हुए कहा, बाॅन्ड पर अभी तक हम डार्क जैक को खोज नहीं पाए हैं । सही काॅर्पोरेट जादुई छडी को बचाओ, अनोखी लालटेन को रख लो और उन से कहो कि हमें जात तक ले चले । डाॅक् के मामले में कोई निराशा होने की बात नहीं थी । उसको आराम से प्रकट किया जा सकता था । डीजे लाइने हमें एक छोटे से पब्लिक हाउस की पहली मंजिल पर ले गया जहाँ का वातावरण बडा ही दमघोटू था । वहीं पर डार्क जांच बैठा था और साथ में उसकी सफेद असुंदर नहीं नहीं थी । दीवार के सहारे कमरे में कई नई नहीं बैठी थी पर डार्क जॅानी सबसे सुंदर थी, नैतिक रूप से भी और शारीरिक रूप से भी । मैंने तो ऐसा ही पाया जब एकदम बुरा और फिर दाल पढ रहे थे तब कोई करने सुझाव दिया कि क्यों ना हम लोग उस पर इस वक्त हमला कर दी तो लडके एक नहीं करू जो दरवाजे के पास बैठा था । जेंटलमैन लोगों को एक डांस दिखाओ । ये आदमी जो बोल रहा था वो वहाँ का लैंडलॉर्ड क्या मालिक था । उसकी आधी ट्रेस ग्रीस की थी और आधी इंग्लिश । उसने ग्रेवी टोपी पहन रखी थी । मास्टर ऑफ जर्मनी या वहाँ का मुख्य सूत्रधार होने के कारण वो सबको जोर जोर से और एक एक करके पुकारता था और डांस के लिए भी कहता था ।

16 पुअर जैक

हूँ । टोमॅटो पुरुष नर्तकों में एक काला, सबसे ज्यादा असाधारण रूप से ताकतवर और लगभग छह फीट तीन इंच या चार इंच लम्बा था । फर्श पर उनके फॅमिली था । उन सब बाकी लोगों से बिल्कुल अलग थी । वो सब पंजों और हील पर ही नाचते थे, शफल करते थे, फिर डबल सफल करते थे । डबल डबल सफल भी करते थे, बकल को ढालते थे और समय के साथ नाच रहे थे । बी । डी टाइम तो वो लोग जब डांस करते थे तो उनके दातों का भी अच्छा प्रदर्शन होता था और वह लोग बच्चों की तरह मजे ले लेकर हसी मजाक मस्ती करते हुए नाच रहे थे । मिस्टर सुप्रीटेंडेंट के अनुसार वो लोग ज्यादातर साथ साथ ही रहते थे क्योंकि यदि वह अकेले रहे या बाहर निकलेंगे तो गोरे लोग उन पर छींटाकसी करते थे । पर यदि में लाइट जैक होता तो फिर मैं डार्क जैक के साथ दबाते यह धमकाते हुए पेश नहीं आता क्यों कि जब भी मैं उनसे मिला, मैंने उनको बहुत सीधा साधा और सब आदमी के रूप में पाया । इसी बात को अपने मन में रखते हुए मैंने उसको वहीं पर बियर पीते हुए छोडकर और गुड लाइक कहकर सीढियों से नीचे उतर गया । जेंटलमैन चले गए । फॅस पी आराम से धीरे धीरे खत्म हो चली थी और सुबह होने वाली थी । पर हमने मिलो चलकर और कई घंटे लगातार अजीबो गरीब दुनिया देखिए जहाँ कोई सोता नहीं था । पर प्रतीक आदमी बराबर जाकर जैक का इंतजार कर रहा होता था । ये खोज भी तमाम गलियों और चारों तरफ बारों में चलती थी । कई जगह प्रवेश लिखा हुआ था जिसका रख रखा हूँ । पुलिस वालों ने अच्छी तरीके से किया था । कॉरपोरेशन वालों से बेहतर यहाँ पर इस भुतहे शहर में गैस लाइट का अभाव था । इस जगह के दो तीन ऐसे घरों का वर्णन मैं करना चाहूँगा जहाँ पर जैक का इंतजार किया जा रहा था । कुछ जगहों में तो जाने के रास्ते में इतना अंधेरा था की हमें हाथ से रास्ता कडोल टटोलकर चलना पडा । कोई भी ऐसा घर नहीं था जहां पर प्रिंस और सजती हो । सूरत क्रॉकरी ना रही हो तो थोडी सी भी क्रॉकरी जो छोटी छोटी अलमारियों के शाॅट या केस इसमें रखी हुई थी, वो इस बात का आभास देती थी कि माॅक क्रॉकरी का कितना ज्यादा शौकीन था । ऐसे ही भोली सी सजावट वाले एक घर में सामने वाले कमरे में जब आधी रात में घुसे तो पाया के चार और ये आपके पास बैठी थी और तो की गोद में एक छोटा सा लडका था एक स्टूल पर एक जवान लडका गिटार लिए बजा रहा था पर अब हमारे अंदर अचानक आ जाने से वो रुक हो गया तो तुम कैसे हो? मिस्टर सुपरीटेंडेंट ने उसकी ओर देखते हुए पूछा बहुत अच्छी तरह हूँ सर और मुझे उम्मीद है कि आप लोग हम लीडी से अच्छी तरह से पेश आएंगे जब की आप लोग हमारे पास यहाँ आए हैं । ऑर्डर देर नहीं ऐसा कुछ नहीं नहीं, ऐसा कुछ नहीं करना है । शाहरुख आई नहीं कहा बाहर खडे ट्राम फुटने अपने आप से कहा ये मेरी सोच के लोग हैं जो बहुत ही खराब होते हैं । फॅसने उस जवान लडके के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा और ये आदमी कौन है? वेल ये आदमी कौन है? एंटोनियो है सर और ये यहाँ पर क्या कर रहा है? हम लोगों को कुछ संगीत सुनने आया है । इसमें कोई नुकसान तो नहीं है मेरे ख्याल से एक युवा विदेशी नाविक असर वही इसपे नहीं । याद है ऍफ होना मैं स्पेनिश हूँ और तुम क्या कह रहे हो इस की कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है । एक शब्द भी नहीं समझ पाए गई है, चाहे तुम इससे कयामत तक बातें करते रहो । उसने बिछाई भाव से कहा जैसे उसको इस जगह कि असलियत बिल्कुल समझ में आ गई हो तो क्या वो कोई संगीत बज जाएगा? ऍम यदि आप कहे तो बिल्कुल बजाएगा कोई धुन बचाओ एंटोनियो तो मैं कहीं शर्म तो नहीं आ रही है ना? उस टूटे फूटे गिटार से उसने एक मध्यम से धूम बजायें और तीनों स्त्रियों ने और बच्चे वाली और आपने भी उस धुन के साथ साथ अपने सिर्फ हिलाये । मुझे इस बात पर भी संदेह है कि यदि एंटोनियों के पास कुछ धन है तो क्या वो इन लोगों से बचाकर ले जा पाएगा? उसके जैकेट और गिटार दोनों ही बुरी दशा में थे, पर उस आदमी का लुक हैं और जो गीत वह अपने गिटार से निकाल रहा था, उसने उस जगह को इस तरह से तब्दील कर लिया था जैसे कि डॉन को एक जोर का उपन्यास का कोई पात्र निकल आया हो । यहाँ पर मैं एक बडी मुसीबत में फंस गया । हुआ कुछ यूं कि मैंने उस औरत से बच्चा अपनी गोद में ले लिया । प्यार करने और कुछ करने के लिए बस पर जब मैंने उस औरत को बच्चा वापस देना चाह तो उस औरत में जो कि शराब के नशे में पूरी तरह से डूबी हुई थी, आपने उस बच्चे को वापस लेने से इंकार कर दिया । उसका कहना था कि जब कोई आदमी उनसे बच्चा अपनी गोद में ले लेता है तो वह बच्चा फिर उसी का ही हो जाता है । लेकिन बाकी औरते हैं उसके इस बात का समर्थन बिल्कुल भी नहीं कर रही थी । पर फिर भी वो औरत इस बात पर जोर दे रही थी कि यही कानून था । अब मेरी समझ में यह नहीं आ रहा था कि मैं करूँ क्या? खैर उस वक्त मेरी मदद के लिए ट्रंप फट आया और उसने मेरी गोद से वह बच्चा लेकर उनमें से एक औरत को देते हुए बोला संभाला है उस और अपने बच्चे को अपनी गोद में लेकर एक बोतल की तरह उस भयानक औरत को दे दिया । ये साफ था कि इस बच्चे को भी रात का दूध जान नाइट कप नहीं दिया गया था और उसने भी अन्य लोगों की तरह पूर जैक का इंतजार करना था और शायद बडे होकर भी उसको यही करना पडेगा । और देर रात में हम उस जगह आए जहाँ एक आदमी की हत्या हुई थी तथा एक और आहता जहाँ उसे खींच कर ले जाया गया था । उसके बाद फिर हम एक और घर के सामने वाले कमरे में पहुंचे जहाँ पहले वाले ही कमरे की तरह लू आग के इर्द गिर्द बैठे थे । वो भी बहुत ही गंदी जगह थी और लोगों ने फटे पुराने कपडे पहन रखे थे और वहाँ से बदबू आ रही थी । पर वहाँ पर ऊंची सी एक शेल्फ भी थी जिसपर दो ब्रेड और चेशायर चीज रखी थी और जहाँ आसानी से पहुंचा नहीं जा सकता था । बॅाल आप लोग कैसे हैं लिस्ट? सुपरीटेंडेंट ने कमरे के चारों ओर अच्छी तरह से देखते हुए कहा हुआ और आप लोग कैसे हैं? हमारे पास कुछ ज्यादा कहने बताने को नहीं है सर । वहाँ पर जो औरत थी उसने सलाम करते हुए कहा ये हमारा आदमी है तो तुम्हारा घर कॉमन लॉजिंग हाउस की तरह डिस्टर्ब नहीं है । नौ । सर शॅल वहाँ से चलने के इरादे से पूछ ही लिया था । तब अपने आप को रजिस्टर क्यों नहीं करवाया? हमारे और हमारी पति के अलावा यहाँ कोई नहीं है । मैं तो शहर पाई केवल हमारा परिवार ही है । यहाँ आपके परिवार में कितने लोग हैं वो और मन ही मन कुछ गिनने का और खासी करने का नाटक करती है और फिर सोच समझकर जवाब देती है सर, हम सब सात लोग हैं पर उसने एक आदमी को नहीं बिना और शार्प आई ने उसे देख लिया था, जिसको सब पता था यहाँ पर तो एक और युवक है । इस तरह से तो आठ लोग हुए तो ये कौन है? मिस्टर चारपाई ये एक साप्ताहिक आंगतुक है तो ये क्या काम करता है इस बिंदु पर वो नौजवान उत्तर देने की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए बोला मेरे पास कोई काम नहीं है सर, वो नवयुवक दूरी पर पडे गीले कपडों के पीछे खडा हुआ कुछ सोच रहा था । जब मैं उसकी ओर देख रहा था तो पता नहीं क्यों लेकिन मुझे बोल विच गौतम स्पोर्ट्स स्पोर्ट्स बहुत और डोवर की याद आ गई । जब हम बाहर निकलकर आए तो हमारे आदरणीय कॉन्स्टेबल्स चारपाई ने सुपरीटेंड उनसे पूछा सर आपने उस नौजवान को देखा, वहाँ वो कौन है? वो एक डॉक्टर है यानी फौज का भगोडा । मिस्टर चारपाई ने आगे कहा कि जब हम लोग अपनी ड्यूटी पूरी कर लेंगे तो मैं फिर से आऊंगा और उसे हिरासत में ले लूंगा और उसने ऐसा ही किया भी उसको इस बात की तसल्ली थी कि उसने उसे पकड लिया था । बाद में हम एक दो घर और आगे गए और पार्लर में आ गए जो बहुत साफ सुथरा था और सुरूचि पूर्वक सजाया हुआ था । वहाँ सीढियों के पास एक खूबसूरत फ्रॉक सजी हुई थी । क्रॉकरी इतनी सुन्दर और ज्यादा थी कि वह किसी नुमाइश में ये सेल पर लगाई जा सकती थी । उसके पीछे एक हट्टी कटीली दी थी शायद वहाँ जिसकी वह तस्वीर होगी और एक लडका वहाँ पर बैठा हुआ कुछ कॉपी में लिख रहा था । वह मैडम आप कैसे हैं? मैं बहुत अच्छी हूँ, बहुत अच्छी हैं । उसने मधुर और मनमोहक आवाज में उत्तर दिया और बताया कि हम लोगों को देखकर उसे बहुत खुशी हुई । इस बच्चे के लिए ये वक्त अभी लिखने पढने का है । बडा ही अजीब समय हॅूं । ये बडा अजीब समय है होमवर्क करने का । भगवान आपका भला करें पर ऐसा है कि ये लडका आज अपने दोस्तों के साथ एक नाटक देखने चला गया था और अब इस समय अपना काम पूरा कर रहा है । भगवान आपका भला करे सर । इस कॉपी के लेख में कहा गया था कि आदमी को अपनी प्रबल इच्छाओं का दमन कर देना चाहिए । कोई आज ही भी सोच सकता था की इच्छाओं की आप को और भडकाना चाहिए । बहुत पर बैठी हुई वह अपने लडके की ओर खुशी से फूली हुई देख रही थी और हम लोगों पर दोनों की झडी लगाए हुए थी । देररात गए हम एक ऐसे कमरे में पहुंचे जिसका फर्श मिट्टी का था और गाली की एक नाली में से वहाँ गंदा संध्या बदबूदार पानी आ रहा था जिससे मुझे वहाँ उल्टी सी आने लगी । यहाँ पर बीमारी और गरीबी साथ साथ थे और कुल मिलाकर बडा घृणा वातावरण था और घरों की तरह यहाँ भी एक विजिटर था और वो आग सेक रहा था तथा उसके सामने ग्रैंड की भतीजी भी बैठी थी जो उसकी आकर्षण का विषय भी थी । दुर्भाग्यवश गृहणी एक बार जेल की हवा खा चुकी थी । अगले कमरे में तीन अजीब सी औरते कुछ कढाई बुनाई का काम कर रही थी । ट्रैफोर्ड पहली चुडैल से कहता है तो क्या बना रहे हो? बट हुआ । उसने बताया वो आयु में केंद्र ट्रांसफोर्ट ने जोर से दोबारा पूछा झोला बना रही हैं ताकि जिसमें तो लोग अपने रुपये रख सको । अपने दांत बाहर निकालते हुए वह बोली क्योंकि आप लोगों के पास बहुत धन है वो एक मामूली सब देखने वाला बैग था जो हाथ में उठाए हुए थे । चुनाव नंबर दो हमारे ऊपर हस्ती है । तीसरी छोडा हमें घोर कर देखती है और कुछ काम का बोलती है । पहली चुडैल की आंखों के किनारे गेरे गहरे काले काले हल्के पड गए थे । मुझे ऐसा प्रतीत हुआ कि जब ये काला घेरा पूरे चेहरे और सिर को ढक लेगा तब ये उसकी दुर्गंध से मर जाएगी । रामपुर पहली चुडैल से ये जानना चाहता था कि उसने मेज के पीछे क्या छुपा रखा था । दूसरी और तीसरी चुडैल ने उससे कहा कि उसे बच्चा दिखाओ । उसने बच्चे को इस तरह से उठाया और उन्हें दिखा कर रख दिया जिससे की उसकी नींद में बाधा ना पडे । इस तरह से हमने पाया कि इस दुनिया में कम से कम एक बच्चा ऐसा था जो रात में होता था । मिस्टर सुपरीटेंडेंट ने उससे पूछा कि वह कितनी देर तक ये काम करती रहेगी यानी कि ये बैग बनाती रहेगी । पहले चुडैल इसका जवाब देती है, ये कब सौसर और प्लीज देखिए अब हम लोग खाना खाने जा रहे हैं । हम लोगों को अच्छा सुबह और शाम का खाना कमाना पडता है और तभी हम खा सकते हैं । दूसरी और तीसरी चुडैल ने भी यही बात दोहरा दी । इसके बाद कुछ गंभीर वार्ता शुरू हो जाती है और वो लोग उस बूढी चुडैल का जिक्र करते हैं जो कल जेल से छूटने वाली थी । वहाँ पर फिर वो बताती है कि इतनी ज्यादा दूर वो अपनी भतीजी द्वारा पकडा कर लाई जाएगी क्योंकि वो ज्यादा चल नहीं सकती । जब मैं वहाँ से चला तो मैंने उस औरत थी और फिर से देखा तो पाया कि उसकी आंखों के काले घेरे पहले से ज्यादा बडे हो गए थे और वो बाहर गलियारे की ओर देख रही थी कि क्या जैक यहाँ आएगा क्योंकि जहाँ यहाँ भी आता था और वह मिस्ट्रेस उसके बाल चलाने की वजह से जेल में थी । जब मेरी इस रात का सफर खत्म हो गया और मैंने अपने कमरे में आकर बिस्तर पर सोने की कोशिश की तो मेरा मन समुद्री जहाज पर काम करने वालों की और बार बार जा रहा था और उनके लिए जो आरामदेह घर बने हुए थे उन की ओर गया डाॅ । रिलेशन में काफी सुधार करना था जो की जाग को ज्यादा बेनीफिट यह संधि का फायदा देने की जरूरत थी । बजाय की उसे फायर और ऍम लेकर सिप्पर दौडते हुए उसे बताया जाए । मेरे दिमाग में उन घरों का कीडा रेंग रहा था जो मैं अभी देख कर आया था और यही सब दृश्य मेरी नींद में भी घूम रहे थे । इससे भी अधिक यदि में उस मौका ऍफ को किसी दिन बंदरगाह में मजदूरों के बीच से भागते हुए देखूंगा तो उन लोगों के बारे में सोचूंगा जो राहत भर अपने ट्रैप्स में जाकर उसका इंतजार करते थे ।

17 मिस जेमीमा इवांस और ईगल

ऍम और गिल ऍम एक यांत्रिक बढे थे, जो कि बहुत लंबे कद के आदमी नहीं थे, लगभग बहुत ही थे । उनका चेहरा गोल और चमकदार था । उनके बाद सावधानीपूर्वक दोनों आंखों के ऊपर घूमे हुए थे, जो कि अर्द्धकुंभ रहने बाल थे । उनको अमूमन लोग अगले रब आदर्श कहते थे । उन की कमाई उनके लिए काफी थी, जो की लगभग अठारह शिलिंग से एक बॉल से पांच मिनट प्रति सप्ताह थी । उनका बातचीत करने का तरीका और व्यवहार बहुत ही अच्छा और सब था । छुट्टी के दिन वह चमकदार वेस्टकोट पहनते थे । अब जाहिर है कि महिलाओं को वो बहुत पसंद आते थे । कई स्त्रियां तो इससे भी कम गुडी लोगों पर मोहित हो जाती थी । पर सामिल ऐसे लोगों के प्रलोभन से अछूते रहे जब तक की उनकी नजर एक ऐसी स्तर पर नहीं पडी जिसके बारे में उन्होंने सोचा कि भाग्य विधाता ने उन्ही के लिए इसको बनाया है और वह उससे विवाह के लिए प्रस्ताव देते हैं जिससे वो लडकी मुस्कुराकर कुबूल कर लेती है । मिस्टर वाॅल अपनी प्रीमि जेमीमा रिवाज के साथ अक्सर दिखने लगे । ऍम जैसा की उसके आस पास के लोग उसे बुखार थे थे । फॅसने अपने शुरुआती जीवन में शूट बाइंडिंग या जूता साजी का काम अपना लिया था और फिर बाद में उन्होंने स्ट्रॉ बोलने याने स्त्रियों की टोपियां बनाने का काम भी जोड लिया था और वो अपने नाना ने और आपने दो बहनों के साथ लंडन के अलग थलग इलाके में रहती थी । ऍम एक दिन शाम को बडी ठण्ड कर बडी है, ड्रेस पहने इनके घर पहुंच गए । उस दिन ऍम कुछ ज्यादा ही अच्छे लग रहे थे । वो परिवार उस वक्त चाय पीने जा रहा था और उनके वहाँ आ जाने से सारा माहौल एकदम खुशगवार हो गया । ऍम एक पैकेट में शाम के खाने के लिए कुछ झींगा मछली ले गए थे जो जाहिरन उन लोगों को खुश करने के लिए था । मिस जेमिमा उस वक्त ऊपर हाथ मुह होकर अपने साफ सफाई में लगी थी । कॅश बैठकर माॅस् के घर खर्च कैसे चलाया जाए और घर की अर्थव्यवस्था क्या हो इस बारे में बातचीत करने लगे । दोनों छोटी बहनें अंगूठी में काफी डालकर उसकी तीस कर रही थीं ताकि इटली में चढी चाहे जल्दी से उबल जाए । मैं सोच रहा था कि आज रात को मैं जेवा कोई गल ट्विटर ले जाऊँ । क्या ख्याल है ही भगवान मिस स्टीवंस उत्साहित होकर बोली ये तो बहुत अच्छी बात है । हम लाइस, छोटी बहन भी बोली जेमीमा को कहूँ कि वह अपने मन पसंद मसलिन ड्रेस पहने माॅल्स खुशी से चिल्लाई और उन के स्वर में माँ की चिंता जाहिर हो रही थी । थोडी देर बाद फॅस स्वयं उतरकर नीचे आ गई । सफेद गांव पोशाक पहले जो जगह जगह सावधानी से पिनों द्वारा फिक्स किया गया था और उसके ऊपर उसने छोटा सा लाल रंग का शॉल डाल रखा था । इसके साथ ही एक सफेद रंग का ऍम जिसमें लाल रविन लगे थे और एक छोटा संगली का हार, एक जोडा, बडे बडे ब्लॅड डाॅॅ शूज और एक जोडा कढाई के काम वाले मुझ से सफेद सूती दास्तानें उसकी उंगलियों को सुशोभित कर रहे थे । इसके साथ ही उसके हाथ में एक यांत्रिक रुमाल बहुत ही अच्छा लग रहा था । कुल मिलाकर वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी । इसके बाद ऍम जिसके हाथ में एक चांदी के मूड वाली एक खडी थी जिसको देखकर लोगों को इच्छा होती थी । अब ये दोनों घर से बाहर ईगल्स थिएटर जाने के लिए बिल्कुल तैयार थे । सब बहुत खुश थे । अभी वह मोडकर फॅस रोड पर पहुंचे ही थी कि सौभाग्यवश मिसिस जेमीमा को एक जान पहचान की लडकी अपने युवा साथी के साथ उन्हें वहाँ मिल गई और ऍम वो लोग भी वहाँ पर लीगल थियेटर ही जा रहे थे । ऍम परिचय जमीमा रिवाज की सही ली और उनके युवा दो से करवाया और फिर वो सभी लोग बातचीत करते आस्ते मजाक करते हुए पैदल ही ईगल थी डर की ओर चल पडे । जब बोलो रास्ते में फॅमिली पहुंचे तो उनकी सहेली के दो सुने सुझाव दिया कि क्यों ना वो लोग द क्राउन में कुछ श्रव् का स्वाद चखें । कुछ हसते खिलखिलाते थी शर्माती और लानूफ करने के बाद उस दोनों लडकियों ने शुरू कोपिया एक बार स्वाद लेने के बाद उनको कहा गया कि वह उसे बार बार सकती रहे तो लोग बाग में श्रम हरी सब्जियों के जूस को पी रही थी क्योंकि अभी ईगल सीटर जाने के समय पूरा नहीं हुआ था । सभी लोग इसी बीच वहां बैठ कर हँसी मजाक और बातचीत करते रहे । जब थिएटर जाने का समय हुआ तो फिर वह सब लोग तेजी से आगे बढे और फिर बोलो वहाँ से रोड टुंडा रोड पर अपनी मंजिल की ओर बढने लगे । ईगल थियेटर की ओर चल पडे जहाँ गोल भवन कल सेट के लिए समय से पहुंच सके । वहाँ कितना खूबसूरत है । ये कितना अलौकिक है मिस जेमीमा और उनकी दो सुने गार्डंस के अंदर प्रवेश करते ही खुश होकर कहा, वहाँ पर बहुत सुन्दर पथरीले रास्ते थे जिसके दोनों ओर पेड पौधे लगे थे और जगह जगह पर खाने पीने और जलपान के लिए इंतजाम था, बॉक्स रखे थे जो कि बहुत अच्छी तरह से रहेंगे और ऐसे सजाया हुए थे कि जैसे कि वो झूल बॉक्सों और जगह जगह वह सुंदर खूबसूरत लाइटें जो ऊपर से रोशनी कर रही थी तथा नृत्य के लिए भी मंच तैयार था । बाकी सिर्फ पर मशरूम दान बजा रहा था और दूसरे सिरे पर मिलिट्री बैंड बज रहा था तथा वोटर्स ब्रांडी के साथ गर्म पानी और अन्य ड्रिंक्स मेहमानों को परोस रहे थे । एक जगह जिंजर बियर पर उसी जा रही थी तो दूसरी ओर हंसी मजाक का दौर चल रहा था । रो टुंडा यानी गोल भवन में भीड बढती ही जा रही थी और सन शीप में मिस जी बीमा के शब्दों में वो वहाँ के माहौल से एकदम प्रभावित होकर बोली बहुत ही शानदार और उत्साह वर्धन था । जहाँ तक बात कंसर्ट रूम यह संगीत कक्ष की थी तो उन्होंने इससे आधी बेहतर भी कोई चीज पहले नहीं देखी । थी, हैं, गायकों के लिए एक वाध्य चलता था । सब अच्छे से पेश और कॉलेज किये हुए थे या चांदी चढे हुए वहाँ रियल कितने खूबसूरत लग रहे थे । मिस जेमीमा की युवा सहेली ने उनसे फुसफुसाकर कहा, कम से कम चार सपोर्ट का होगा । हाँ, कोई बहुत ज्यादा भी नहीं । ऍम बोले महिलाएं भी इस राय से इत्तेफाक रखती थी । दर्शक ऊंची उठी हुई कुर्सी पर मंच के चारों और बैठे हुए थे और सब लोग खाने पीने में मस्त थे । शो शुरू होने से पहले मिस्टर विलकिंसन ने दो ग्लाॅस और गर्म पानी और दो नीबू ऑर्डर किए । इसके साथ ही शहरी वाइन लेडीज के लिए भी और जीरे वाले कुछ मीठे बिस्किट भी मंगवाए और इस तरह से उन का समय आराम से कट जाता अगर एक गाल मोच्छों वाला आदमी मिस जेमीमा को घोर घोर कर नहीं देख रहा होता है और एक अन्य आदमी जो प्लीट वाली बेस कोट पहने था, वो मिस जेमीमा की सहेली को भी उसी तरह से घोर घोर कर देख रहा था और आंख मार रहा था । उन आदमियों की इस हरकत से जी बीमा के सहेली के दोस्त को बहुत गुस्सा आ गया और इन लोगों के वस ताकि और घटाई पर वो रोष प्रकट कर रहा था और मन ही मन बोल रहा था कि वो उसकी पिटाई कर देगा । पर जेमीमा और उसके दोस्त ने उसे ऐसा करने से रोक दिया और उसकी सहेली ने कहा कि वह इस तरह का लडाई झगडा देखकर बेहोश हो जाएगी । संगीत समारोह शुरू हुआ पहला वातावरण के बजने से मिस जी मैंने खुश होकर कहा कितना सुंदर और शांत है पर कनखियों से बो गाल मोच्छों वाले आदमी को भी बीच बीच में देखती जा रही थी । कॅश जो अपने ही आपसे कुछ बुदबुदाते जा रहे थे जैसे कि वो अपनी चांदी की मुझे वाली बेड से कुछ बात कर रहे हो । शायद वो बदला लेने की भावना से जोर जोर से सांस ले रहे थे । ऍम सिपाही दाग गया है किसी युवती ने जो सफेद साठ दिन की ड्रेस पहनी थी, कहा । मिस जेमीमा की सहेली ने कहा एक बार और ऍम जिस आदमी ने प्लीट वाली वो इस्कोर्ट पहनी हुई थी, जोर से मेरे को मोटी सी बोतल से था पाते हुए कहा मैं मुझे बीमा के दोस्त के युवा साथी ने वो इस्कोर्ट पहले आदमी को ऊपर से नीचे तक के देखा तथा मिस्टर शामिल वो कैंसिल की ओर नफरत भरी सवालिया नजरों से देखा । बाजी के साथ एक हाथ से गीत गाया जाने लगा और मिस जी बीमार तथा गाल मुछे वाला आदमी हंसी से लोटपोट होने लगे । वो लेडीज जो भी करती थी गाल मुछे वाला आगे तथा वो स्कोट वाला आदमी भी वह सही करते थे और इस तरह से वो ये जताने की कोशिश कर रहे थे कि उन की भावना भी उन्हीं की जैसी थी और उनके अनुकूल थी मिस जेमीमा एवं उनकी शहरी बहुत मुदित हुई और आपस में खूब बातें करने लगी । परन्तु मॅन और मिस जेमीमा के युवा दोस्त उसके उलटे अनुपात में बहुत उदास हुए और उनके चेहरे लटक गए । यदि ये मामला यही समाप्त हो गया होता तो ये छोटी सी पार्टी फिर से अपने पुराने हँसी खुशी और दोस्ताना माहौल में लौट आती । पाॅर्न और उसके दोस्त गाल मुझे और वास कोट वाले की ओर विरोधी नजरों से देखने लगे । वो स्कूल और गाल मुछे वाला आदमी है । उन लोगों को चलाने के लिए मिस ऍम और उनकी सहेली की ओर प्रशंसा भरी नजरों से देखने लगे । संगीत और नृत्य नाटक का कार्यक्रम खत्म होने के बाद बोलो बात में टहलने गए गाल मुझे और वेस्ट कोट वाला आदमी भी वैसा ही करने लगे और बीस में वाॅल एवं उसकी सहेली की ओर अंकित करते हुए प्रशंसात्मक टिप्पणी भी करने लगे । इससे भी जब उन्हें संतोष नहीं हुआ तो वह ऍम और उसकी सहेली के पास आकर उनके साथ मृत्त करने का आग्रह करने लगे । बिना ऍम और उसकी सहेली के दोस्त की कोई परवाह किए बिना और जैसे कि वो वहाँ थी ही नहीं । ऍम सिलने, अपनी चांदी की मुझे वाली छडी हवा में खतरनाक तरीके से हिलाते हुए कहा तुम्हारे कहने का मतलब क्या है? बदमाश हो तो हमारे साथ क्या गडबड है कि वो शैतान नहीं गल । मुझे वाले ने पलटवार किया । तुमने मेरा मेरे दोस्त का अपमान करने की हिम्मत कैसे की? उस छोटे आखिरी के युवा दोस्त ने का और तुम्हारे दो और लटका दिया जाएगा फिस्ट कोटले उत्तर दिया ऍम सिंह ने अपनी चांदी की मुझे वाली छाडि हवा में लहराई और उसका बेटा लैंपों की रोशनी से चमकता है । जैसे ही वो हवा में लहराई ऍम और एक ही छाड में ऍम उसका होने वाला पति और उसकी दोस्त का युवा दोस्त धराशाही हो गए । वो गल मुझे और वेस्ट कोट वाला उसी समय ना जाने कहाँ गायब हो गए ऍम और उनके सहेली को यह एहसास था की ये झगडा झंझट उनकी वजह से नहीं हुआ था । उनके ऊपर बिला वजह ही संदेह किया गया था जैसे कि उनको ही दिन देखने के लिए जीवित ही नहीं रहना चाहिए और आदि आदि इस प्रकार के वो लोग विलाप करने लगी और हर बार वो जब अपनी आंखें खोलती इसी प्रकार से बोलने लगती । खैर उनके पुरुष दोस्तों को किसी प्रकार जैसे तैसे हैकनी खोज में बिठाकर उनको घर पहुंचा दिए गया और वह लोग शराब के सेवन से अभी भी अच्छे अवस्था में पडे थे ।

18 क्यूरेट, वृद्ध महिला और आधे वेतनवाला कैप्टन

क्यूरे वृद्ध महिला और आधे वेतन वाला ऍम हमारे कस्बे में पालिका सहायक यानी क्यूरे मनमोहक देखने वाला और मोहन और बहुत तेजी वाला आदमी था । इतना ज्यादा कि उसके गांव में आने के बाद कस्बे की आधी से ज्यादा युक्तियां धार्मिक प्रवृत्ति की हो गई और शेष आधी औरतें उसके प्रेम में पड गई । हमारे पेरिस चर्च में रविवार को इसके पहले कभी भी इतनी ज्यादा संख्या में औरतें नहीं देखी गई थी और मिस्टर टॉमकिन्स इस बार के पास जो बगल वाली सीटें थी, उस पर इतनी ज्यादा कभी भक्ति विभोर इस क्रिया नहीं देखी गई थी । दो । हमारे गांव में पहली बार आया तो केवल पच्चीस वर्ष का था और सारे गांव के निवासियों को उसने अपनी उपस् थिति से चौंका दिया था । वो अपनी पहली मांग बीस से कहाँ था? जैसे किलो में ना की तरह और बाइबिल का पाठ करते समय अपने बाएं हाथ की चौथी उंगली से पवित्र जल को अपने गाल पर लगता था । उसकी आपास बहुत गंभीर और गहरी थी । समझदार माताएं उसको अपने घर में आने के लिए असंख्य बार आमंत्रित करते थे और उनको कभी वह निराश नहीं करता था । यदि चर्च में मंच पर उसका व्यवहार बहुत शालीन था तो मिलने जुलने का उसका व्यवहार उससे भी दस गुना जिया था । अच्छा था बाइबिल पांच की ॅ के पास जो बैठने की सीटें थीं, उनकी मांग अचानक बढ गई थी । उसके आस पास की सीटें किसी भी मूल्य या प्रेम के लिए नहीं पाई जा सकती थी । और कुछ लोग तो यहाँ तक के तीन मिस ब्राउन बहने जिनकी सीटें चर्च वार्डन के सीट के पीछे थीं, देख रविवार को चर्च में बैठे थे जिससे कि जब वह सहायक पुजारी क्यूरेट वहाँ से गुजरेगा तो वह उसे देख लेंगे । वो बिना पूर्व तैयारी किए ही भाषण देने लग गया और लोग भी उससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाए । एक बार उसने साढे बारह बजे रात में उठकर धोवन के बच्चे की मदद की । इससे ग्रामवासियों के उसके प्रति आभार की कोई सीमा नहीं रही । इसके बाद चर्च बॉर्डर भी उसके प्रति बहुत उदार हो गए और उन्होंने गांव वालों से कहा कि वह मोबाइल केबिन के बनने में आर्थिक सहायता करें । जैसे वो इसलिए बनवा रहा था ताकि खराब बरसात के मौसम में वो लोगों की अंतिम क्रिया करवा सके । उसने एक गरीब औरत को जिसके चार छोटे छोटे बच्चे थे, उसको काफी मात्रा में दलिया और चाय की पत्ती भेजवाई । इस तरह से उस गरीब और आपको एक छोटी मोटी रकम घर का खर्च चलाने के लिए मिल गई । उसने बहुत उत्साह से गोट एंड बूट्स मीटिंग में गुलामी की प्रथा के खिलाफ बोला । उसने जो बहुमूल्य सेवाएं उन गांववासियों को दी थी, उससे खुश होकर लोगों ने उसे एक तस्तरी देने का इरादा बनाया । इसके लिए लोगों ने आगे बढ चढकर चंदा दिया बल्कि लोगों में ये होती कि कौन सबसे ज्यादा बडा चंदा देता है । जब चंदा इकट्ठा हो गया तो लोगों ने उसे चांदी का पाॅइंट स्टार्ट भेंट किया और उस पर उसका नाम लिखकर उसी गोल्ड और वोट मीटिंग में नाश्ते के लिए बुलाकर उसे सम्मानित किया । मिस्टर केबिन पूर्व चर्च के वो दाल ने ऐसा भावपूर्ण भाषण दिया के लोग बहुत ही द्रवीभूत हो गए और कई लोगों की आंखों में आंसू आ गए । इतनी लोकप्रिय था और लोकसेवा के पश्चात लोगों ने सोचा कि वह लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच जाएगा । पर अफसोस ऐसे कोई बात नहीं हुई । क्यूरेट को खांसी आने लगी । एक दिन सुबह की सर्विस लेटे नहीं और फिसल के बीच चार बार खांसी का दौरा पडा और शाम को सर्विस में उसे फिर पांच बार खांसी का दौरा पडा । अब लोगों को पता चल गया कि उसे चाय रोग है । ये कैसे दिलचस्प उदासी है । यदि इससे पहले जवान और तेरे सुख पूर्ति से भरी हुई थी तो अब उनकी सहानुभूति और चिंता की कोई सीमा नहीं थी । ये कैसे हो सकता है कि इतना प्रेमी आज नहीं उसे तपेदिक हो जाए । ये बहुत ज्यादा था । उसके पास कई गुमनाम लोगों से किशमिश, मुनक्के, इलास्टिक स्कोर और गर्म मुझसे और गर्म बनियान आने लगे जब इस तरह से वो जाने के कपडों से बिल्कुल फिट फाट हो गया जैसे कि वो नॉर्थ पोल जा रहा हूँ । उसके स्वास्थ्य के बारे में भी दिन में कम से कम छह बार मौखिक सूचना सारे गांव में जारी की जाती थी । इस समय के आसपास के हमारे गांव की आत्मा में एक परिवर्तन आया, एक बहुत शांत, आदरणीय भौंकता । समृद्ध आदमी जो बारह साल ऍफ चीज में काम कर रहा था, एक सुबह मर गया और इस बात का किसी को कोई नोटिस नहीं मिला । उसका जो उत्तराधिकारी आया वो बहुत ही दुबला पतला और कहा जाए तो सिर्फ एक हड्डियों का ढांचा ही था । उस की बडी बडी काली आंखें और लम्बे लम्बे उलझे हुए बाल जिन्हें वो पीछे किए रहता था । उसकी ड्रेस बडी ढीलीढाली और अव्यवस्थित थी तथा वह कामकाज करने में भी बहुत हुआ था । एक तरह से वो क्यूरेट का हर तरह से विपरीत था । हमारे गांव की स्त्रियां उसको सुनने के लिए आई क्योंकि वो इतना विषम और अलग दिखता था । वो अच्छी व्याख्या करता था और अच्छा वक्ता भी था । सब लोग ये सोचते थे कि उसमें कुछ ऐसा ही था जिसका वर्णन करना बहुत मुश्किल था पर इन सब चीजों के बावजूद उसमें कुछ भी नयापन नहीं था जैसा कि उस पुरानी पादरी में था । ऐसा कहा जाए कि जनता की राय कभी स्थाई नहीं होती और धीरे धीरे भीड छट्टी गई । पुजारी की खासी बढती गई और उसका चेहरा काला पडता गया । वो बहुत मुश्किल से सांस ले पा रहा था और अब उसके प्रति लोगों के दिल में इतनी ज्यादा सहानुभूति भी नहीं जा पा रही थी । अब फिर से एक बार हमारे कस्बे के चर्च में किसी भी सीट पर बैठा जा सकता था और ऍम इसका अब विस्तार किया जाना था क्यों कि रविवार को वहाँ बहुत ज्यादा भीड हो जाती थी । हमारे गांव में सबसे ज्यादा जानी मानी और आधार मिली है । एक वृद्ध महिला थी । वो वहाँ हमारे जान से काफी पहले से रह रही थी । हमारा दस बार सब यानि आधा शहरी है और ये लेडी शहर के सबसे अच्छे, हवादार और खुश नमा इलाके में रहती थी । ये घर उसका अपना खुद का था और वृद्ध महिला को छोडकर जो अब दस साल पहले से ज्यादा उम्रदराज लगती थी । घर में सारे चीजें वैसे ही थी जैसी दस साल पहले और तब उस घर का मालिक भी जिन्दा था । घर के सामने वाले कमरे में यह सीटें रूम में कमरे में कालीन बिछा था । बहुत साफ सुथरा और वेल सेटल्ड था । जितनी भी अपेक्षा फ्रेंड थे और जो कांच का सामान था वह पीले रंग की मलमल के कपडे से ढका हुआ था । बीज पर से टेबल कवर तभी हटाया जाता था जब उसे कॉलेज किया जाना होता था । उस पर मोम की पॉलिश की जाती थी और ये काम हर सुबह नौ बजे किया जाता था । कंपनी में जो छोटी मोटी चीजें थी वह भी बिलकुल ठीक उसी प्रकार से रखी जाती थी जैसे पहले रखी हुई थी । इससे ज्यादातर चीजें उन छोटी छोटी लडकियों के माता पिता द्वारा दिए गए उपहार थे जो उस लाइन में रहते थे । पर इसमें कुछ चीजें जैसे दो पुराने जमाने की घडियां जिसमें एक हमेशा पंद्रह मिनट धीमी चलती थी और दूसरी पंद्रह मिनट तीस चलती थी और राजकुमार लियू कोर्ट की छोटी सी तस्वीर जैसे कि रॉयल बॉक्स ड्रीलिंग थियेटर में थी और ऐसी अन्य चीजें उसके पास काफी पहले समय से थी । यहीं पर वो वृद्ध महिला चश्मा लगाकर गर्मियों के मौसम में खिडकी के पास बैठकर कढाई का काम किया करती थी और यदि यहाँ से वो किसी को अपने घर में आते हुए देखती और अगर वह व्यक्ति उसकी जांच पहचान का होता तो उसको बिना दरवाजा खटखटाए उठकर मुख्यद्वार को खोल देती थी और चूकी आप गर्मी के मौसम में चलकर आने से था । कह गए होंगे वो आपको दो ग्लास चेरी ब्लेयर की पिलाई की और इसके पहले की वह बातचीत शुरू करें और यदि आप शाम के समय आए तो वो आपको ज्यादा गंभीर देखेगी और उस वक्त उनकी सीवी का यानी सारा उन्हें माइकल से कोई अध्याय पढकर सुनाती होती थी । इस वृद्ध महिला के पास कभी कभार ही कोई मिलने के लिए आता था । केवल उन छोटी लडकियों को छोडकर जो उनके पडोस में रहा करती थी । उन लडकियों के आने के दिन ते थे और वह उन्हें चाय पिलाने के लिए आमंत्रित किया करती थी और ये लडकियों के लिए एक दावत के समान होता था । बस स्वयं कभी ही किसी के यहाँ जाती थी वो और बस इतना ही चलकर जो उनके दायें क्या बाय पडोसी थे । इसके लिए उसके सेबी का यह परिचारिका पहले से ही उनके घर जाकर दरवाजा खटखटा आती थी जिससे कि उन्हें बाहर देर तक खडे ना रहना पडे और कहीं दुकान ना हो जाए । इन छोटे मोटे मेहमानों को अपने घर बुलाने के लिए दो बहुत ही सावधानी बरती थी और तमाम छोटी मोटी बातों का खास ख्याल रखती थी । मिलने के लिए वो और सारा मिलकर टीपॉट और कप प्लेट वहाँ अच्छी तरह साफ कर लें । उसके घर में मेहमानों को भी किसी खास मेहमानों की तरह यानी राजसी मेहमानों की तरह ड्रॉइंग रूम में रिसीव करके बैठा दिया जाता था । उसका एक बेटा हिंदुस्तान में था जिसको वो एक सुंदर जेंटलमैन बताती थी जो कि बहुत कुछ अपने पिता की तरह था जिसका फोटो उन्होंने साइनबोर्ड पर सजा रखा था । पर वो बहुत उदासी के साथ बताती थी कि उस को पाल पोसकर बडा करना एक कठिन काम था और एक बार तो उसने उसका दिल ही तोड दिया था । वो इस विषय पर बात करना पसंद नहीं करती थी । उसके पास बडी संख्या में पेंशनर थे तथा शनिवार को जब मार्केट से लौटकर आती थी तो कई वृद्ध महिलाएं और पुरुष उससे अपनी हफ्ता वाली राशि पाने के लिए उसके घर के रास्ते में खडे रहते थे । किसी भी तरह का सहायता आठ दान देने के लिए उसका नाम सबसे आगे रहता था और जाने की विंटर कोल सूप वितरण सोसाइटी के लिए भी वो सबसे खोले दिन से वह धन देती थी । हमारे कस्बे के चर्च में एक वाघरे अंतर लगाने के लिए उसने बीस स्पोर्ट की राशि दी थी और जब पहले रविवार को बच्चों ने उस बाजे के साथ गाया तो उसको इतनी खुशी हुई कि चर्च में सभी कर्मचारियों को उठाकर बाहर ले जाना पडा । रविवार को जब वो चर्च में आती थी तो वहाँ बैठे लोग खासकर गरीब तबके के लोगों में हडकंप मच जाता था । वो लोग उठकर उसे सलाम करते थे और फिर वो अपनी सीट पर बैठ जाती थी । पीयू अब डर उनको सलाम करके फिर वापस चला जाता था और फिर पीछे से दरवाजा बंद कर देता था । ये प्रक्रिया फिर से चर्च सर्विस खत्म होने पर दोहराई जाती थी । फिर जब वह सर्विस से घर वापस लौट थी तब अपने बगल वाले पडोसियों के साथ सारे समय उपदेश के बारे में बातचीत करती थी और इसकी शुरूआत बस ऐसे ही हो जाती थी सबसे छोटे बच्चे से पूछ कर कि पादरी कहाँ से पढा रहे थे । इस तरह से साल में केवल एक बार इस बात को छोडकर की वो किसी जगह समुद्र तट पर घूमने जाती थी । उसकी जिंदगी साल दर साल दान पूर्ण के कार्य करते हुए लोगों की मदद करते हुए गुजर रही थी और बिना किसी चिंता या भय के शांति के साथ वो अपने अंत का इंतजार कर रही थी । हमारे कस्बे में एक बहुत ही अलग दसवीं का एक व्यक्ति उस वृद्ध महिला का पडोसी था । दो एक पुराना सैनिक अधिकारी जो आजकल आधी तन्खा पर काम कर रहा था । उसका ये भी लॉस व्यवहार और बातचीत करने का तरीका उसके पडोसी याने बुजुर्ग महिला के जीवन में काफी खलल डालता था । पहली बात तो ये कि वो उसके सामने वाले लोन में अक्सर बैठकर सिगार क्या करता था और जब उसका कुछ ड्रिंक करने का मन होता था तो वो उसका दरवाजा खटखटाकर उससे एक मदिरा की मांग करता था जो कि अब उसके लिए एक आम से बात हो गई थी और उससे उसके घर की आर्थिक व्यवस्था थोडी गडबड आ गई थी । इसके अलावा वो थोडा थोडा हर चीज की जानकारी रखता था । यहाँ नहीं जाॅन ट्रेडर्स का हरफरमौला एक तरह का ॅ क्रूसो और वो लीडी की प्रॉपर्टी पर तरह तरह के प्रयोग करता रहता था । एक दिन सुबह जल्दी उठकर उसने उस महिला के सामने वाले लॉन में गेंदे के फूल के तीन चार पौधे लगा दी और जब उसने सुबह उठकर नॉन की ओर देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा कि राहत भर में ये पौधे कैसे उगाए । एक बार वो आठ दिन की चाबी वाली घडी को उठाकर बाहर लॉन में ले आया और उसे पूरी तरह से खोल कर रख दिया । पूर्व से पुर्जे अलग करके उनको जोड भी दिया पर्पस हुआ कुछ यूं कि उसकी बडी सोच छोटी सी हुई के ऊपर आकर हमेशा ट्रिप कर जाती थी । फिर उसने सिल्क के कपडों का प्रचलन शुरू किया । उनमें से कुछ क्यों को वो उस महिला के घर कागज के बक्से में रख कर ले आता था जिसमें से कुछ कीडे हर बार उसके घर में गिर जाते थे । इसके फलस्वरूप एक दिन देखा गया कि कुछ हष्ट पुष्ट कीडे सीढियों से चढकर ऊपर जा रहे थे । शायद अपने दोस्त का हाल चाल जानने के लिए क्योंकि थोडी देर बाद देखा गया कि कुछ कीडे ऊपर भी विचरण कर रहे थे । इससे निराश हताश होकर फिर वृद्ध महिला समुद्र तट पर चली गई । क्या आठ दिन में उसकी गैर हाजिरी में उसके दरवाजे पर लगी नेम प्लेट को पॉलिश करने के चक्कर में उसका नाम ही उस पर से मिटा दिया था । पर इस सबसे उनका जनजीवन में जो विद्रोही व्यापार था उसका कोई लेना देना नहीं था । चर्च के मीटिंग हॉल में जितनी मीटिंग भी होती थी वो उनमें बिना न गाती है ज्यादा था । पर उसके अधिकारी लोग जो भी प्रस्ताव लाते थे उन का वह विरोध करता था तथा चर्च वॉर्डन की हठधर्मिता का भ्रष्ट सुना करता था । वहाँ के क्लर्क के कानूनी बिंदुओं पर विवाद किया जाता था । कर अधिकारी जो कि उसके घर बार बार कर लेने के लिए आता था, उन्हें यु ही लौटा देता था । फिर एक दिन स्वयं भी जाकर सारा कर जमा कर के आ जाता था । रविवार के दिन प्रवचन होते थे उसमें वो तृतिया निकालता था । हाँ, संयंत्र बचाने वालों को बोलता था कि उन्हें इस तरह से बाजा बजाने पर शर्म आनी चाहिए और कहता था कि वह सब बच्चों से अच्छा प्रभु ईसा मसीह गीत गा सकता था और ये सब काम बहुत शोर शराबे के साथ करता था । इस सब में सबसे बुरी बात ये थी कि उस बुजुर्ग महिला को जिसका वह बहुत आदर करता था, उसे अपने विचारों से धारणाओं में परिवर्तित करना चाहता था । वो जब तक अखबार लेने उस महिला के घर में आ जाता था और जोर शोर से राजनीति पर बातचीत करता था पर अंदर ही अंदर वो एक खोले दिल का उधर मानव व्यक्ति था । यह थी वो बुजुर्ग महिला को अक्सर नाराज कर देता था पर मुख्य मुद्दों पर वो अक्सर सहमत रहते थे और वो उसके हर कारनामे पर बाद में खूब हसती थी जैसे कि किसी को हटना चाहिए हूँ ।

19 डॉक्टर्स कॉमन्स

डॉक्टर्स कॉमर्स बिना किसी उद्देश्य के घूमते घामते थोडी देर पहले जब हम सीट बॉल के छाछी आठ से गुजर रहे थे तब यूँ ही एक गली की ओर मुड गए जिसका नाम बॉल्स चेंज था और थोडी दूर हैं । उस सडक पर सीधे चलते हुए हम कुछ सौ दस बार डॉक्टर्स कॉमर्स पहुंच गए । अब शायद आप को ये बात पता ना हूँ कि डॉक्टर ऍम वो जगह है जहां प्रेम से पीडित दंपत्तियों को विवाह का लाइसेंस दिया जाता था और उन लोगों को तलाक की भी अनुमति दी जाती थी जो अपने साथी से किसी वजह से अलग होना चाहते थे । इसके अलावा यहाँ पर जिन लोगों के पास संपत्ति होती थी तथा अपनी मृत्यु के बाद वो उसे किसी के नाम छोडना चाहते थे उनकी बसी अभी यहाँ रजिस्टर होती थी । यहाँ पर लफंगे लोगों को या जेंटलमैन को भी सजा मिलती थी जो महिलाओं के साथ बदसलूकी यह छेडखानी किया करते थे । जब हम वहाँ पहुंच ही गए तो हमने सोचा कि क्यों ना हम वहाँ की कार्यशैली और क्या कुछ चल रहा है । उस को जानने का प्रयास करें । जिज्ञासा वर्ष हम उस कोर्ट में पहुंच गए जहाँ पर लोगों को अपने वैवाहिक बंधन से मुक्ति या सलाख मिलती थी । वहां पहुंचने के लिए हम एक छायादार और पत्थर बिछे हुए आंगल से गुजरे । उसके बाद कई लाल ईंटों से बने हुए घरों को पार किया । उन के दरवाजों पर कुछ पढी लिखी नागरिकों के नाम लिखे थे । हम एक छोटे से हरे रंग के दरवाजे पर आए जिसपर पीतल की की ले जुडी हुई थी और जो हल्के से धक्के से खुल गया । अंदर घुसते ही हमने देखा कि वह अजीब सब देखने वाला अपार्टमेंट था जिसमें धंसी हुई खिडकियाँ थी और काले रंग की खिडकी दीवारों के नीचे के हिस्से में मुडी हुई थी । उस कमरे के ऊपरी हिस्से पर ऊंचे उठे हुए एक प्लेटफॉर्म पर एक अर्धवृत्ताकार मेज पर लगभग आधा दर्जन लोग गंभीर मुद्रा में बैठे थे । उन्होंने लाल रंग के गांव और विक्स पहने हुए थे । वो लोग ज्यूरी के सदस्य प्रतीत हो रहे थे । केंद्र में एक ऊंची डस्ट पर एक बहुत मोटे भद्रपुरुष कछुए के खोल का चश्मा पहने बैठा था जिसकी शालीनता से लग रहा था कि वह जज है तथा एक अन्य बडी सी गोलमेज पर जो बिजली स्टेबल की तरह थी, जिसमें कुछ और पॉकेट्स नहीं थे, उसके इर्दगिर्द कई स्वयं महत्वपूर्ण लगने वाले व्यक्ति बैठे थे जिनके गले में कई गोलू बंद थे और उन्होंने काले रंग का गांव जिससे सफेद धन का कर लगा रखा था, हमने उनको एक डॉक्टर के रूप में पहचान लिया । बिलियर्डस टेबल के दूसरे निचले सिरे पर आराम कुर्सी में एक अन्य सज्जन ब्रेक पहने बैठे हुए थे जिनके बारे में हमें पता चला कि उनको रजिस्टार कहते हैं । दरवाजे के नजदीक एक छोटी सी टेबल पर बडे भारी भरकम व्यक्ति जिनका वजन तकरीबन दो सौ अस्सी बोर्ड के लगभग रहा होगा, काली कपडे पहले बैठे हुए थे और एक मोटी मोटी वाला, सब हिस्सा प्रतीत होने वाला आदमी काले गांव ब्लैक के डासा ने घुटनों तक की हाफ बैंड सिल्क और जिसकी कमीज में छाती के ऊपर फिल्म्स झालर लगी हुई थी, उसके हाथ में चांदी का एक डंडा था । हमें ये पहचानने में देर नहीं लगी कि ये आदमी इस्कोर्ट ऑफिसर है । हमने उस आदमी से बातचीत शुरू करने की चेष्ठा की और उसने हमें पांच मिनट के भीतर ही ये बता दिया कि वह कोर्ट का अता रिटर था और दूसरा आदमी कोर्ट कीपर था और ये आठ से स्कोर था । इसलिए काउंसिलों ने लालगांव पहने हुए थे और डॉक्टरों ने फर्क कॉलर पहने हुए थे । जब यहाँ दूसरा कोर्ट बैठता है तब वो लोग लालगांव या फिर कॉलर नहीं पहनते थे और उसने छोटी मोटी बहुत सी दिलचस्प बातें बताएं । इन दो अफसरों के अलावा एक अन्य दुबला पतला असर भी था जोकि एक कोने में बैठा था । हमारे मित्र अफसर ने बताया कि इस आदमी की ड्यूटी थी कि जब सुबह कोर्ट शुरू हो तो उसके पास जो एक हाथ वाली बडी सी घंटी है वो बच जाए और उसे देखने से ऐसा लगता था कि जैसे पिछली दो शताब्दियों से वो वही पर इसी काम पर लगा हुआ था । लांस चेहरे वाला आदमी जिसने कछुओं के खोल की एक मिनट पहनी हुई थी, वो अपने आप से ही कुछ बोले जा रहा था और अच्छी तरह से बोल रहा था तेजी से बोलने की बस ही उसकी आदत थी पर वो भी भारी आवाज में लेकिन अच्छी तरह से रहता था । अच्छा हमारे पास इधर उधर देखने के लिए तमाम समय था पर एक ऐसे सज्जन पुरुष थे जिन्हें देखकर हमें बहुत मजा आया । ये सज्जन कोर्ट के केंद्र में आग के सामने पैर फैलाकर बैठे थे जैसे कि वो खोला सच हूँ और उसे अन्य लोगों की कोई खबर नहीं थी । उसने अपनी लाल पोछा पीछे से ऐसे समेट रखी थी जैसे कि कोई देहाती औरत काम करते समय अपना पेटीकोट को सामान लेती हो । उसकी भी बडे डेढ ही मेरे ढंग से उसके सिर के ऊपर रखी हुई थी और उसकी पूछ गाली पर बिखरी हुई थी । वह पूरी तरह से आपकी गरमाई का अनुभव करना चाहता था । उसने पतली से स्लेटी रंग के पांच और छोटे काले राॅयटर्स सबसे बुरे इस्टाइल में पहने हुए थे । कुल मिलाकर उसका सारा शरीर और गेट उसका बडा भी ढंग का था । काम एक चेहरे पडने वाले के रूप में ज्यादा कुछ नहीं बता सकते थे वह यही दिखने में वह बहुत मूर्ख साथ दिख रहा था । पर तभी हमारे कान में चांदी का डंडा पकडे आदमी ने बताया कि वह कानून का डॉक्टर था और भी ना जाने क्या कुछ था । आता था हम लोगों का उसके बारे में खयाल बिल्कुल गलत था और वह बहुत ही प्रतिभावान आदमी था और उसने इस तथ्य को ऐसे छिपा रखा था जिससे के साधन लोग इससे भय ना खाएँ और वह दिखने में एक बहुत ही बेवकूफ सब गधा लग रहा था जैसे कि आपने कभी ना देखा हो । चश्मा पहने वाले सज्जन यानी जज ने अपना फैसला सुनाने के बाद आपस में फुसफुसाहट हो रही थी । उन्होंने उसको शांत होने दिया । उसके बाद उसने अगले के इसके लिए आवाज लगाने को कहा । अगला केस था दे ऑफिस ऑफ डज प्रोमोटेड फॅमिली कचहरी के अंदर कुछ हलचल से हुई और उस चाली के डालने वाले आदमी ने हमें बताया कि आप कुछ मजा आएगा क्योंकि ये एक आपसी झगडे फसाद वाला मामला था । इस सूचना से हम कुछ और ज्यादा ज्ञानी तो नहीं हुए लेकिन जब तक कि हमें बादी के वकील द्वारा ये नहीं बताया गया की वो एक आंशिक रूप से प्रचलित किसी एडवर्ट के समय के कानून के अनुसार यदि किसी आदमी को चर्च के अंदर या उसकी हिस्ट्री में झगडा, मारपीट करने का अपराधी पाया गया तो उसे चर्च से बाहर निकाला जा सकता था । अब वकील के अनुसार एक राहत को जैसा कि अट्ठाईस शपथपत्रों में लिखा था फॅमिली ने मिस्टर ब्लेयर को यूट्यूब लो यह नहीं तुम्हें उडा दिया जाएगा, ऐसा बोल दिया था । इस पर मिस्टर माइकल ब्लेयर लें और उनके साथियों ने उसे फटकार लगाई और उसे बताया की उसका ये बढता सही नहीं था । उस लेट बरी ने फिर भी अपना वही वाक के दोहराया तुझे उडा दिया जाएगा और उसके साथ ही उन्होंने ये जोडा कि मिस्टर माइकल और यह थी उसे अपने लिए कुछ भी चाहिए तो वो माॅब बडी वो आदमी थी जो उसे ये सब कुछ दे सकते थे और ये कहते समय उसके चेहरे पर घृणा और पात के भाव साफ नजर आ रहे थे । मिस्टर बम पालने निवेदन किया था कि ये सब उस आप के तहत आता था । पता है उनकी आत्मा की शांति के लिए और स्लेट बरी को सुधारने के लिए ये जरूरी था कि उसे चर्च से बाहर निकाल दिया जाए । इन सब तथ्यों के सामने आने के बाद दोनों पक्षों की ओर से लंबी लंबी दलीलें पेश की गई । कुछ उसे सही ठहराते हुए कुछ गलत बताते हुए उसकी खूबियों और खामियों को भी पेश किया गया । सभी तरह के लंबी लंबी दलीलों को सुनने के बाद कचरे के खोल का चश्मा पहने जज ने सारे केस के फिर से आधे घंटे तक समीक्षा की और फिर उस आदमी को यानी कॉमर्स लड बरी अपराधी घोषित किया गया और उसे दो हफ्ते की चर्च से बाहर रहने की सजा दी गई तथा मुकदमे के खर्च की भरपाई भी करने को कहा । इसपर स्लेट दही जो एक छोटा और लाल चेहरे वाला जिंजर बियर क्या विक्रेता था । उसने अदालत से कहा कि कोर्ट उसे जुर्माना भरने से बडी कर दें तो अभी कृपा होगी और चाहे तो उसे जिंदगी भर के लिए चर्च से निष्कासित कर दिया जाए क्योंकि वह कभी चर्च गया ही नहीं था । इस पर दर्ज ने उसकी ओर तीखी निगाहों से देखा पर कुछ कहा नहीं । तत्पश्चात गोवा दीप्रवा दी दोनों कोर्ट से विदा हो गए । चांदी का डंडा लिए हुए एक आदमी ने हमें सूचित किया कि कोर्ट अब उठने वाला था अतः हमारा भी वहाँ से निकल जाना ही बेहतर रहेगा तथा इस प्रकार पुराने कानूनों पर विचार करने लगे जिसमें धार्मिक संस्थाओं यानी चर्चों से इतना प्रगाढ संबंध था और जो इस तरह की भावनाओं को तीस पहुंचाने के लिए काफी था । ये सब सोचते सोचते हम चलते चलते एक दरवाजे से टकरा गए और जब सिर उठाकर देखा तो उस पर बडे बडे अक्षरों में प्रोग्रेसिव ऑफिस लिखा था क्योंकि हम ऐसे ही घूमने फिरने के मूड से निकले थे ये सोचकर कि ये एक पब्लिक ऑफिस है, हम उसमें घुस गए । विशेष अधिकार कार्यालय जिस कमरे में हम ने प्रवेश किया था वो बहुत व्यस्त जगह लग रही थी । उस कमरे में दोनों तरफ तरह तरह के केवल बने थे जिनमें कुछ क्लर्क कुछ नकल करने में लगे थे या कुछ लिपिक कुछ दस्तावेजों को बडी बारीकी से देख रहे थे और उनकी जांच कर रहे थे । इसी कमरे के केंद्र में कई डेस के थे जिस पर खडे तीन चार लोग बडे बडे रेसिस्टर्स में कुछ देखने की कोशिश कर रहे थे । जैसा कि हमें पता चला वो लोग वसीयतों को खोज रहे थे । इससे हमारा ध्यान उनकी ओर गया । जिस एटर्नी कार्यालय के लोग काम कर रहे थे और जितनी उत्सुकता और बेचैनी से जनता के लोग उन्हें देख रहे थे वो देखते ही बन की थी । रजिस्टर देखने वाला आदमी बीच बीच में जवानी लेता था और फिर उसी उदासीनता से ट्रेन मिस्टर देखने लगता था और नामों की सूची पडता जाता था । एक गन्दी चेहरे वाला आदमी जो नीला एप्रिन पहले था और पचास साल पुरानी वसीहत सुबह से ढूंढ रहा था । उसे वो वसीहत मिल गई थी और एक सरकारी आगे उसे जल्दी जल्दी एक चमडे के जल्दी वाले रजिस्टर से बढकर सुना रहा था । साफ जाहिर था कि जितना ही वो क्लर्क पडता जाता था उस लिए ऍम वाले आदमी को उतना ही कम समझ में आ रहा था । जब उस भारी भरकम रेजिस्टर को उसने नीचे उतारा तब उसने अपना हाथ उतार दिया और फिर मुस्कुराया पहली दो तीन लाइन है तो उस आदमी को समझ में आएं । पर जैसे जैसे तकनीकी बढती गई, बोझ छोटा सा आदमी जरा संदीप से देखने लगा और वहाँ हर बार इस तरह से उस की ओर देखने लगता जैसे कि उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था । जैसे जैसे वो क्लर्क आगे पडता गया, उसे समझ में आ गया कि वो एक ना उम्मीदी का केस है । उस छोटे से आदमी काम हूँ, खुला का खुला ही रह गया और वह बहुत चक्का होकर दुविधा से उसकी ओर देखने लगा । लेकिन उसको समझ में कुछ भी नहीं आया । थोडी दूर आगे जाकर हमने देखा कि एक बुजुर्ग का आगे जिसकी मुखाकृति कठोर थी और चेहरे पर झुर्रियां पडी हुई थी । सिंह के फ्रेम वाले चश्मे की सहायता से एक लंबी वसीहत को ध्यानपूर्वक पड रहा था । बीच बीच में वो रुककर उसमें से वो कुछ नोट करने लगता था ताकि उसकी खास जानकारियां इकट्ठा कर सके । उसकी पोपले मुंह के चारों ओर पडी झुर्रियां और उसके तेज निगाहें उसकी लालच और चालाकी बयान कर रही थी । उसके कपडे सब तार तार हो रहे थे । पर ये भी साफ जाहिर था पर ही भी साल जाहिर था कि ये कपडे उसने अपनी मर्जी से पहने हुए थे बल्कि ना कि किसी मजबूरी या किसी जरूरत से उसके हाव भाव से उसके धन दौलत, गरीबी और लालच का पता चलता था । उसने बहुत आराम से रिजिस्टर बाल क्या दशमी को रखा और जो कुछ भी उसमें लिखा था उसे चमडे की एक पॉकेट डायरी में रख कर उसे अपने ओवरकोट के जेब में रख लिया । हम ने सोचा कि वह एक बडे सौदे पर हाथ मारने वाला था । मेरे विचार से कोई गरीबी का मारा बारिश, अपने हिस्से की संपत्ति को उसके असली बाजार भाव के बारे में हिस्से पर बेचने को मजबूर था । उसके लिए ये बहुत सुरक्षित और अच्छा सौदा था । डायरी जेब में रखने के बाद वो विजय भाव और लोग भी मुद्रा में वहाँ से चल पडा । अपनी जांच पडताल शुरू करने के बाद हम लोग एक दर्जन और लोगों की गतिविधियों को देखना चाहते थे । पर तभी हमने देखा कि क्लर्क लोग जल्दी जल्दी अपने रेड इस तरह को बंद करके घर जाने की तैयारी में थे । पता हमने भी वहाँ से निकल जाना ही बेहतर समझा । घर जाते समय हम ये सोचने लगे कि इन पुराने रिकॉर्डों में कितने ही लोगों की पसंद की और न पसंदगी दर्ज है । ईशा और बदले की भावनाएँ और किसी व्यक्ति विशेष के प्रति इसलिए जो मृत्यु की शक्ति को भी परास्त कर रही थी । जिसमें कुछ अच्छे आदमी, खराब आदमी, उदास आदमी, उधर मान आदमी इन सब की वसीयत थे । जहाँ पंजीकृत होती थी दो जगह कोई और नहीं, डॉक्टर्स कॉमर्स ही थी ।

20 जनता वक्ता

जनता वक्ता हम एक शाम को ऑक्सफोर्ड, स्वाॅट आदि जगहों पर यू ही घूम घाम रहे थे और सोचा की पेंट मिले और न्यूरोड होते हुए पश्चिम को लौट जाएंगे । फिर तभी हमें अचानक प्यास लगने लगी और हमने सोचा कि पांच दस मिनट कहीं रूककर आराम कर लिया जाए । पता हम पीछे मुडकर एक पुराने मदिरालय यह कभी ओर मुड गए जिसके पास से हम अभी थोडी देर पहले ही गुजरे थे वो सिटी रोड से ज्यादा दूर नहीं था और सोचा की एक गिलास कुछ ठंडा पी कर अपना गला तर कर लिया जाए । इस घर को फ्रेंच घर की तरह पॉलिस किया गया था और ये कोई अच्छी तरह से रोशन पब नहीं था । ये बस एक मामूली सब पुराना पुराना घर था जिसमें एक साधारण सब बार था और एक छोटा सब बुजुर्ग मालिक और उसी तरह की उसकी पत्नी और लडकी भी आरामदेह छोटा सा काम रहा जिसमें आग चल रही थी उसी में सब लोग बैठे थे । एक पडने के बीच में से एक नवनियुक्ति निकली तथा हमने उससे एक ब्लाॅक कि फरमाइश की सर क्या आप पार्लर में नहीं आएंगे? उस नवनियुक्ति ने बडे मनमोहक स्वर में कहा ऍम आप कृपया अंदर आना चाहिए पडने के पीछे से नहीं करते हुए एक बुजुर्ग मालिक ने का हमने चारों ओर अपनी नजरे घुमाई और देखना चाहते कि वो हमें कहाँ बैठने के लिए कह रहा था । छोटे से मालिक ने हमारी परेशानी को समझा और जल्दी से बार के दरवाजे से बाहर निकलकर हमें स्वयं पार्लर में ले गया । वो एक पुराना सब कमरा था जिसमें दीवारों पर लकडी की तानन लगी हुई थी और साढे फर्स्ट था तथा एक ऊंचा मेंटल पीस था । दीवारों पर तीन या चार पुराने रंगीन चित्र चिपके थे जिसमें समुद्री योद्धाओं के दृश्य दर्शाए हुए थे और उस तस्वीर में कुछ आदमी घमासान लडाई करते हुए दिखाई दे रहे थे जब की उसी के पास एक दो जहाज चल रहे थे । अगले भाग के कुछ टूटे फूटे मस्तूल पडे थे और कुछ मृत सैनिकों के पैर नीले होकर इधर उधर पानी में लटक रहे थे । छत से एक गैस लाइट लटक रही थी और एक रस्सी खींचने के लिए बिलपुर लटक रही थी । दीवार के चारों ओर लम्बी लम्बी मीजी लगी थी और उनके साथ साथ मोटी चमकीली लकडी की कुर्सियां रखी थी । ऐसी साफ सुथरी बैठने की जगह के आस पास कहीं कहीं पीकदान रखे हुए थे । जैसा की इस तरह की जगहों में होते हैं और कोनों में एक त्रिभुज कार मेजों पर कुछ उपयोगी वस्तुएं रखी थी । सबसे दूर एक मिनट पर आग के नजदीक अपना मूड दीवार की ओर की एक गठीला सा आदमी लगभग चालीस साल की उम्र का रहा होगा । उसके छोटे काले कडे और कांग्रेस बाल उसके माथे पर आ रहे थे । उसका मुंह में पानी और कसरत के अलावा किसी अन्य कारण से सूजा हुआ था और एक सिगार पी रहा था और उसकी आंखें छत की ओर टिकी हुई थी तथा एक भाषण देने वाला तथा एक भाषण देने वाले का विश्वास उसके अंदर से झलक रहा था जैसे कि वो कोई बहुत बडा राजनेता हूँ या सामान्य अधिकारी और एक दंत कथाओं का बयान करने वाला लगता है । अभी अभी उसने कोई भारी भरकम भाषण दिया था क्योंकि अन्य लोग भी धूम्रपान करते हुए शांत बैठे थे । उसकी दाईं और सफेद सिर्फ वाला एक बुजुर्ग का आज नहीं जिसने चौडे किनारे का एक पूरे रंग का है पहना हुआ था वो बैठा था । उसके बाद ओर एक अन्य आदमी जिसकी नाक तीखी थी और उसने एक भूरे रंग का सर्ट आउट पहना हुआ था जो लगभग उसके पांवों तक पहुंच रहा था और वो एक बार प्रशंसा की दृष्टि से उस लाल रंग के मोह वाले आगे की ओर देखता था । वो बहुत ही असाधारण हल्के रंग के बालों वाले आदमी ने पांच मिनट बाद कहा, सारे साथियों ने हाँ कहकर अपने सिर हिलाये । बिल्कुल भी आसाधारण नहीं, बिलकुल नहीं । लाल रंग के मोह वाले आदमी ने आपने तंत्र से जाते हुए और उस आदमी को देखते हुए कहा ये क्यों असाधारण है? सिद्ध करिए, ये असाधारण है । अभी सिद्धि करिए इसी समय की ये असाधारण है । वो यदि आप इस बात पर आते हैं तो हल्के रंग के बालों वाले आदमी ने कुछ डरते डरते कहा । उस बात पर आना लाल रंग के मुंह वाले आदमी ने एक दम से कहा, पर हमें उस बात पर आना ही होगा । हम आज अपनी बौद्धिक उपलब्धियों के शांत ऊंचे स्तर पर है ना कि मानसिक अंधेरे की गहराइयों में । प्रत्येक आदमी जो मुझे जानना चाहता है, मेरी विचारधाराओं और उसके प्रभाव से अवगत है । जब वो स्ट्रीट सबर्बन डॅडी सोसाइटी के लिए कार नेवल की जगह किसी आदमी का नाम सुझाना था । मैं उसका नाम भूल रहा हूँ । बॅाबी मिस्टर विल्स नहीं कहा एक फिर और उपयुक्त आदमी है । उस क्षेत्र का पार्लियामेंट में प्रतिनिधित्व करने के लिए इसको सिद्धि करूँ । मैंने कहा वो सुधर के पक्षधर में हैं साबित करो । मैंने कहा सबित करो अभी करो राष्ट्रीय ऋण को खत्म करने की बातें । पेंशन के घोर विरोधी निग्रो के भी खिलाफ । जो लोग बिना काम के वेतन ले रहे हैं उनको काम करने वाले पार्लियामेंट की अवधि भी काम करने के पक्ष में लोगों की परेशानी बढाने के अलावा और कुछ नहीं । मिस्टर बिल । इसने कहा सिद्ध करिए मैंने कहाँ सिर्फ करिए उसका काम ही इन्हीं बातों का सबूत है, साबित करिए । मैंने कहा अभी साबित करिए और वो उनको साबित नहीं कर पाया । लालमोहन वाले आदमी ने विजय भाव से चारों ओर देखते हुए कहा, और उस जिले ने उस को नहीं चुना और यदि आप उसके सिद्धांतों पर पूरी तरह अमल करते तो आपके पास कोई ऋण नहीं होता, किसी की पेंशन नहीं मिलती और फिर बौद्धिक उपलब्धियों की ऊंचाई पर बैठकर और लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचकर आप सम्भवता सारे राष्ट्र में विद्रोह में खडे हो जाते हैं । अपने को बुद्धिमान और अन्य लोगों से बहुत ही बेहतर जो मेरी दलील है और यही हमेशा हमारी दलील रहेगी और यदि में हाउस ऑफ कॉमन्स का सदस्य होता तो मैं वहाँ पर सबको हिलाकर रख देता । यानी कि संसद भवन का सदस्य । ऐसा कहते हुए लालमोहन वाले आदमी ने टेबल पर जोर से घूस हमारा जिससे उसका भाषण और जोरदार बनाने के लिए तथा मुझसे सारा धुआ निकाला जैसे कोई चिमनी हो ऍम तीखी नाक वाले आदमी ने मुलायम आवाज में कहा कि मैं हमेशा यही कहता हूँ कि मैं जिन लोगों से इस कमरे में मिला हूँ उसमें बातचीत करने में मिस्टर रायगढ जैसा कोई नहीं है । मैं उनको सुनना बहुत पसंद करता हूँ और उनका साथ भी बहुत बढिया है । आपके कल को बेहतर बनाने वाला साथ मिस्टर राइडर्स ने कहा, शायद लाल वाला आदमी का नाम यही था । आप कह सकते हैं कि मैं बेहतर कंपनी हूँ क्योंकि मैंने आप सभी लोगों को किसी ना किसी तरह से बेहतर ही बनाया है । यद्यपि मेरी वार्ता जैसा कि मिस्टर रनिंग सन ने कहा है, आप लोग बेहतर समझ सकते हैं । मैं स्वयं उसके बारे में क्या कह सकता हूँ? एक बात मैं अवश्य कहूंगा कि जब मैं इस जिले में दस साल पहले पहली बार बालर में आया था, मुझे ऐसा नहीं लगता । यहाँ पर कोई ऐसा आदमी था जिसे इस बात का ज्ञान था की वह गुलाम था और अब आप सबको इस बात का पता है और इस बात से छटपटा रहे हैं ये आप मेरी कमर पर लिख दें और मुझे संतोष होगा । क्या आप की खबर पर ऐसा क्यों लिख दिया जाए? एक छोटे से फूले फूले घायलों वाले सब्जी वाले ने कहा बैठाकर आप अपनी कवर पर कुछ भी लिखाना हो, आपने ही उसका दाम अदा करना है और जहाँ तक आपसे और आपके कार्य कलापों सकता, लुक रखता है । पर जब आम गुलामों के बारे में बात करते हैं तो बेहतर है ये बात आप अपने परिवार तक ही सीमित रखें । क्यों कि कम से कम मैं नहीं पसंद करता कि आप उन्हें तरह तरह के नामों से बुलाएं । रात डर रात तुम एक गुलाम हो । लालमोहन वाले आदमी ने कहा और तुम पर मुझे सबसे ज्यादा दया आती है । बहुत कठिन यदि मैं हूँ सबसे वाला बीच में ही बोल पडा क्योंकि दो करोड पाउंड उन को मुक्त कराने के लिए दिए गए । उसमें से मुझे कुछ नहीं मिला । एक सवच्छ गुलाम लालमोहन वाला आदमी एकदम से बोल पडा । उसका मुंह विरोध से तथा जोर से बोलने से और ज्यादा लाल हो गया था । अपने बच्चों के जन्मसिद्ध अधिकार को छोडते हुए स्वतंत्र होने के बुलावे को ठुकराते हुए तो आपके सामने खडे आपको स्वतंत्र होने के लिए कानून विनय कर रही है । आपके हृदय की सबसे ज्यादा गर्म और जोशीली भावनाओं को अपील कर रहा है और तुम्हारा ने सहायक बच्चों की ओर इशारा कर रही है पर सब व्यर्थ में सिद्ध करो, इसको सिद्ध करो । सब्जी वाले ने कहा सारे करो लाल मूड वाले आदमी ने कहा क्या तुम इस डीट अलगाववादी कुल तंत्र के जो एक नीचे पीठ झुकाए हुए नहीं हो? क्या तुम कठोर निर्णय कानून के नीचे दबे हुए नहीं हूँ? साबित करो लालमोहन वाला आदमी अति नाटकीय रूप से एकदम से ठोक गया और अपना सिर्फ अपने पोर्ट के गिलास में झुका लिया तो विश्व वाॅयस एक स्कूल का ब्रोकर नहीं जो एक बडी से बेस कोट पहने हुए था और बीस प्रकट विद्यान की बात बडे ध्यान से सुन रहा था तो विश्व और यही मुद्दा है । बेशक बेशक और समूह के भिन्न भिन्न सदस्य एक स्वर में बोले जिन्हें इस मामले की उतनी ही समझ थी जितने की ब्रोकर को बेहतर होगा कि तुम से अकेला ही छोड लौटानी ब्रो करने उस छोटे से सब्जी वाले को राय देते हुए कहा, और घडी और बिना देखे हैं इस समय बता देता है वो कर सकता है तो एक बार आजमाकर देखो उसके साथ ये सब नहीं चलेगा । टमी ऐसा आदमी है । लालमोहन वाले आदमी ने कहना जारी रखा एक झटके से अपना हाथ दीवार पर लगी खोटी से हटाते हुए बोला ऍम क्या है? क्या वो हर एक अत्याचारी शासक द्वारा दबाये जाने के लिए है? क्या वो किसी के भी कहने से कूडा पीता जा सकता है? आजादी क्या है? ये कोई स्थाई सेना नहीं है । स्थाई सेना क्या है? आजादी नहीं है, आम आदमी की खुशी है । ये आम आदमी का दुख नहीं है । स्वतंत्रता कोई विंडो टैक्स नहीं है, ऐसा है क्या फॅस नहीं है । ऐसा है क्या? लालमोहन वाले आदमी का चेहरा धीरे धीरे इस प्रकार शानदार बाकियों को बोलने से चमक रहा था । उसके हर माह के मैं कायरतापूर्ण, अत्याचारी, हिंसक और रक्तरंजित शब्दों का प्रयोग इस तरह से किया गया था की सब लोग उसे नोटिस कर सके । उसने गुस्से से अपना हाथ उठाया और अपने सिर पर आंखों को ढालते हुए रखा तथा कमरे से बाहर निकल गया और तरफ से को भी जोर से बंद कर दिया । बडा जीव आदमी है उसने देखी । नाक वाले के लिए कहा बहुत ही बढिया वक्ता है । ग्रुप करने का बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली । हर आदमी ने कहा केवल सब्जी वाले को छोडकर । और जब उन्होंने ऐसा कहा तो सभी लोगों ने अपने सिर रहस्यपूर्ण ढंग से ही लाए और एक एक करके वहां से विदा हो गए । हम उस कमरे यह पार्लर में अकेले रह गए । यदि हमने स्थापित तरिकों का अनुसार क्या होता है तो हम एकदम से उसकी कहीं हुई बातों पर विचार करने लगते हैं । पुराना सब देखने वाला ये कमरा दीवारों पर पुरानी लकडी की फॅमिली समय के साथ धुएं से काली पड गई थी । समय के साथ धोनी से काली पडी हुई चिम नहीं ये सब मिलकर कम से कम सौ साल पीछे ले जाती थी । और हम तब तक ये स्वप्न देखते जाते हैं जब तक की टेबल पर रखा क्यूटर पॉट या आग पर रखा हुआ बेचलर में जानना आ जाती है और हमें बीते हुए जमाने की कहानी सुनाती पर हम किसी वजह से हंसी मजाक के मूड में जरा भी नहीं थे । और यद्यपि हमने चाह की जिस कुर्सी पर बैठे हैं उसे किसका आकर निकला जाए? पर वो किसकी ही नहीं बिल्कुल ढेड और उदासीन वाला पता हमारे विचार उस लालमोहन वाले आदमी और उसके भाषण देने की कला पर चले गए । इस तरह के लाल वाले आदमियों की एक बडी प्रजाति है । ऐसा कोई पार्लर या क्लब रूम नहीं है । यह कोई लाभकारी संस्था आदि । जहाँ पर ये आपको अपना भाषण झाडते हुए नजर आ जाए तो इस प्रकार से वो अपने ही है, आपको नुकसान पहुंचाते हैं चाहे वो कितना ही अच्छा क्यों ना हो ।

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