Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

Transcript

Part 1: अध्याय 5

आप सुन रहे हैं फॅार मोहन मौर्य द्वारा लिखी किताब चक्र भी हो और मैं आपके साथ आरजे नितिन ऍम सुनी जो मन चाहे अध्याय पांच माहिम पुलिस स्टेशन राजनगर यही बोर्ड लगा हुआ था पुलिस स्टेशन की उस इमारत के ऊपर बीचोंबीच जिसके सामने तीनों दोस्त अनिल अजित और अगर खडे हुए थे तीनों ने इस समय हल्का हल्का मेकप करके अपना हो लिया । थोडा सा चेंज किया हुआ था उन्होंने एक नजर पुलिस स्टेशन की मुख्य दीवार के आगे लगे हुए तो साइन बोर्ड पर दौडायें जिसपर राजनगर पुलिस स्टेशन की टैगलाइन लिखी हुई थी । राजनगर पुलिस सदैव आपके साथ आम जन में विश्वास अपराधियों में खौफ चलो दोस्त हो आज देखे लेते हैं कितना साथ देती है राजनगर पुलिस आम जन का अनिल ने धीरे से कहा और फिर वो तीनों पुलिस स्टेशन के मेन गेट के अंदर घुस गए । अंदर घुसते ही उन्होंने पाया हूँ चारदीवारी के अंदर बिल्डिंग के लेफ्ट साइड में खाली जमीन पर पुलिस द्वारा जब्त की गई बहुत ही गाडियाँ दुपहिया वाहन से लेकर चार तैयार गाडियाँ वहाँ ऐसे ही लावारिस सी पडी थी जो जाने कब से वहाँ पर पडे पडे धूल खा रही थी उनको देखने मात्र से ऐसे लग रहा था । जैसे जिन लोगों की वह गाडियाँ थी या तो वह शायद उन्हें ले जाना भूल गए थे या फिर पुलिस द्वारा उन्हें लौटाई नहीं गई थी । शायद पुलिस की उनकी बहुमत जांच पडताल अभी तक खत्म नहीं हुई थी । हूँ । इमारत के मुख्यद्वार पर डंडा लिए हुए एक संतरी खडा था जो मुझ में रखे हुए गुटके को अपने दांतों के नीचे रखकर चलाई जा रहा था । वो हर आने जाने वालों को अपनी पैनी निगाहों से घूम घूमकर ऐसे देख रहा था मानो उनका एक सेट ले लेना चाहता हूँ । वो तीनों जैसे ही उसके पास से गुजरे वह संतरी ने पुच्छ करते हुए मुझसे गुटका बाहर फेंका जिसके कुछ छीटें उछलकर उन तीनों की जूतों पर आकर लग गए । उसकी इस हरकत पर तीनों ने एक पल के लिए उसे देखा छोरी मेरा मतलब साडी अपनी गलती पर शर्मिंदा होने का दिखावा करते हुए उस मंत्री ने अपने पीले दार दिखाते हुए ऐसे कहा जैसे ये कहकर वह उन पर कोई एहसान कर रहा हूँ । उसका सौरी सुनकर अगर नहीं उसे एक पल के लिए घूम कर देगा । मैं ऐसे घोलकर क्या देख रहा है? एक बार कह तो दिया सौरी आप क्या जान लेगा? संतरी ने फिर से अपने दांत निकालते हुए कहा और एक बार फिर से पिच करके उनके पैरों के पास हो गया हूँ । चल यार छोड ऍम अपना वो काम कर देते हैं जिसके लिए हम लोग यहाँ पर आए हुए हैं । अजीत ना उसकी वहाँ पकडते हुए उसे धीरे से कहा और उसे इमारत के अंदर लेकर आ गया । अगर को सिपाही की इस हरकत पर गुस्सा तो बहुत आ रहा था । पर्व मन मसोसकर रह गया । इमारत के अंदर घुसते ही उन्हें पूर्ण रूप से पुलिसिया वातावरण का एहसास हुआ । अंदर एक गैलरी थी जिसमें बाई तरफ कुछ कुर्सियां लगी हुई थी जो इस समय खाली नहीं चला रही थी । दाई तरफ एक छोटा सा स्वागत कक्ष बना हुआ था । कक्ष में एक दरवाजा था जो इस समय बंद था । दरवाजे से थोडा सा हटकर साइड में ही खिडकी लगी हुई थी जो इस समय आधी बंद और आधी खुली हुई थी । खिडकी के ऊपर पूछताछ लिखा हुआ था । वो तीनों उस पूछताछ लिखी हुई खेल की के सामने गए । आधी खुली खिडकी से उन्होंने अंदर झांक कर देखा तो पाया कि खेल की के पास ये केबल थी । उसके पीछे कुर्सी लगी हुई थी । जिस पर इस समय एक सिपाही बैठा हुआ ऐसे अखबार पढ रहा था जैसे कि वह सारे जगत की जानकारी पा लेना चाहता हूँ । आॅफिसर अनिल ने उस अखबार में पूर्ण रूप से डूबे हुए सिपाही से धीरे से कहा उस सिपाही में कोई भी रिएक्शन नहीं दिया जैसे उस ने उसकी आवाज सुनी ही नहीं थी । ये देखकर अनिल ने अबकी बार अपनी बात दोबारा से थोडी तेज आवाज में हो रही है । सिपाही ने अबकी बार उसकी आवाज सुनी और अपना सिर हिलाकर पूछा क्या है और फिर बिना किसी जवाब की प्रतीक्षा किए वापस से अपनी नजरें अखबार में गणादि सर वह हम लोग एक रिपोर्ट लिखाने के लिए आए हैं । अनिल ने जवाब दिया । अनिल की बात सुनकर उसने अबकी बार अपने हाथ में पकडे हुए अखबार को सामने टेबल पर इस तरह से फेंका जैसे ये करके उसने उन पर कोई एहसान किया हूँ । फिर अपने सिर को हल किसी जुंबिश देकर थोडी कर का शव आज में पूछा किस चीज की रिपोर्ट लिखवानी है तो मैं वो जो आज सुबह अजीत अभी कुछ कहने ही जा रहा था कि उसके बीच में ही अनिल बोल उठा जी अभी बस में आते समय किसी पॉकेटमार नहीं मेरा पर्स चोरी कर दिया था । बस उसी की रिपोर्ट लिखवानी थी । पर ये तो शायद कुछ और कहने जा रहा था । तो सिपाही ने अजीत की तरफ इशारा करते हुए संशय से पूछा जी सर, मैं भी यही कहने जा रहा था । वो जब आज सुबह बस में सफर कर रहे थे तो किसी ने इसका पर्स मार लिया । अजित अनिल की बात सुनकर समझ गया था इसलिए उसने अपनी बात को सुधार कर कहा वो जस्ट आगे वाले हॉल में जाओ । वहाँ पर जाकर लिखवा दो । अपनीरिपोर्ट उस सिपाही ने जवाब दिया । उसकी बात सुनकर वो तीनो खिडकी से नीचे हट गए और उसके बताए हुए हाल की तरफ चल पडे । उनके जाते ही वो सिपाही ने फिर से अखबार उठाया और उसमें हो गया तो उन दोनों चुप रहना और बीच में मत बोला । जो भी कहना होगा वो मैं कहूंगा समझ गए । अनिल ने धीरे से उन दोनों को कहा । उसकी बात सुनकर उन दोनों ने हमें से मिले । हॉल के अंदर घुसते ही उन्होंने पूरे हॉल का नजारा हॉल में चार पांच कुर्सियां लगी हुई थी । हाल कुर्सी के आगे एक मेज थी जिनपर फाइलों का ढेर लगा हुआ था । फाइलों का ढेर लगा हुआ होने के बावजूद उन कुर्सियों पर बैठे हुए पुलिस वाले काम करने के बजाय आपस में गप्पें हांक रहे थे । वो तीनों जाकर उसमें इसके सामने खडे हो गए जिसके आगे छोटी सी प्लेट लगी हुई थी । जिस पर शिकायत पंजीयन लिखा हुआ था । उसमें इसके पीछे लगी हुई कुर्सी पर एक हवलदार बैठा हुआ था, जो किसी फिल्म मैग्जीन में डूबा हुआ था । वो उस पर छपी हुई फिल्मी हीरोइन की अर्धनग्न तस्वीरों को बडे ही ध्यान से देख रहा था । यहाँ पर क्या कर रहे हो? उन तीनों को अपने पास खडे देख उस पुलिस वाले नहीं अपनी अग्नि नेत्रों से घूमते हुए कर कर स्वर्ग में पूछा सर हम लोग एक रिपोर्ट लिखवाने के लिए आए । अनिल ने उसकी बात सुनकर बडे ही धैर्य से जवाब दे तो सालो मेरे सिर पर खडे हो कर रिपोर्ट लिखवा हुए क्या जाओ वहाँ जाकर उस बेंच पर लोगों के साथ बैठ जाओ । जब तुम्हारा नंबर आएगा मैं तो मैं बुला लूंगा पर अभी तो आपके पास कोई रिपोर्ट नहीं लिखवा रहा । आप तो फ्री बैठे हुए हो, अजीत के मुंह से निकला साले में तेरे को फ्री बैठा हुआ लगता हूँ । क्या तो ये पता भी है कि मैं कितना जरूरी काम कर रहा हूँ आप चुप चाप वहाँ जाकर बैठ जा ना अभी आई पर में रिपोर्ट लिख भी दूंगा और तुझे उसमें अंदर भी कर दूंगा । उस हवलदार की बात सुनकर अजीत को बहुत गुस्सा । वहाँ भी उसे कुछ और कहने जा रहा था कि अगर नहीं धीरे से उसके हाथ को तब कर पाया । उसका इशारा समझकर अजित चुप हो गया । उसने उसे कुछ कहा तो नहीं पर वो अभी भी बहुत गुस्से में लग रहा था । फिर वो तीनों वहाँ से हटकर उस बेंच पर जा बैठे जहाँ पर उन लोग जहाँ पर उन जैसे कई लोग बैठे हुए थे । वो लोग पुलिस में अपनी अपनी रिपोर्ट लिखवाने आए हुए थे और इस बात का इंतजार कर रहे थे कि कब वह पुलिस वाला अपनी जरूरी में ग्रीन से फ्री हो और उन लोगों को रिपोर्ट लिखवाने के लिए अपने पास बुलाये ऍफ पर बैठ कर वो लोग पुलिस स्टेशन का इधर उधर का नजारा देखने लग गए । तभी थाना इंचार्ज कमरे से बाहर ने की आवाजाही वहाँ हॉल में वो वहाँ हॉल में बाहर तक वो जुटी क्या काम है? दिखता नहीं, मैं जरूरी बात कर रहा हूँ । उन्होंने नजरें उठाकर देखा तो पाया कि एक बाईस तेईस साल का नौजवान सा लडका थाना इंचार्ज के कमरे से बाहर निकल रहा था । उसकी आंखों से आंसुओं की धारा बह रही थी । साथ ही साथ उसके चेहरे पर अपमान से चलने के भाव नजर आ रहे थे । वह युवक धीरे धीरे कदमों से हॉल से बाहर की तरफ जाने लगा । वो उन्हीं बैंच के आगे से गुजर रहा था । तभी अचानक से वह लडखडाया और नीचे गिरने को हुआ । इससे पहले की वह नीचे गिरता अनिल तुरंत अपनी सीट से उठा और उसे गिरने से पहले थाम लिया । तुम ठीक हो? हाँ सर, ठीक हूँ थैंक यू जो आपने मुझे गिरने से बचा गया वो तो ठीक है भाई! पर ये तो बताओ तो मैं इस तरह से रो क्यों ना हो । उसने उसके साथ चलते हुए पूछा । उसने अजीत और अजगर को वहीं पर बैठे रहने का इशारा किया ताकि वह रिपोर्ट लिखवाने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर सकते हैं । क्या बताऊ सर? लगता है आज यहाँ पुलिस स्टेशन आना ही मेरी जिंदगी का सबसे बडा गुनाह हो गया । वो युवक रुआंसे स्वर में बोले क्यों भाई, ऐसा क्या हो गया? अनिल उसके साथ साथ चलता हुआ धीरे धीरे पुलिस स्टेशन की इमारत से बाहर आ गया था । अब क्या बताऊं सक मेरा नाम आनंद है । लोगों के दिलों में पुलिस की इमेज बहुत अच्छी नहीं होती । मैं ये बात अच्छी तरह से जानता था । इसके बावजूद आज से पहले अन्य लोगों से विपरीत मेरे दिल में इन लोगों के प्रति सहानुभूति की भावना ही थी । शायद फिल्मों का और अखबारों में छपी उन खबरों का मुझ पर कुछ ज्यादा ही असर था जिसमें ये बताया जाता था कैसे ये लोग बारह बारह घंटों से ज्यादा की ड्यूटी करते हैं । होली हो या दीवाली या रक्षा बंधन या फिर कोई भी तीस त्यौहार हो, ये लोग कभी भी अपने परिवार वालों के साथ उसे नहीं मना पाते । हमेशा एक दिन देर से ही मनाते हैं । ये बेचारी बडी मेहनत करके मुजरिमों को गिरफ्तार करते हैं । पर कोई भी आम आदमी उनके खिलाफ गवाही देने के लिए आगे नहीं आता । मुझे बडा वकील करके बडी आसानी से अपने आप को अदालत में निर्दोष साबित कर देते हैं और फिर बाइज्जत बरी हो जाते हैं । सडक पर किसी दुर्घटना में अगर कोई आदमी घायल हो जाता है तो भी उसे कोई इस डर से अस्पताल नहीं ले जाता कि कहीं पुलिस उसी को थाने में बुलाकर कुछ पूछताछ नहीं कर लेंगे । पुलिस की इमेज फालतू में ही खराब हो रखी है । दरअसल हम आम नागरिक ही पडने दर्जे के स्वार्थी होते हैं । किसी भी अपराध है गलती के लिए अपनी कमी नहीं देखते बल्कि सारा का सारा दोष पुलिस पर डाल कर इतिश्री कर लेते हैं । जब की देखा जाए तो बिना पब्लिक की सहायता के पुलिस कुछ भी नहीं कर सकते । फिर आज तक इनके बारे में मेरी यही सोच सोचता था । जीवन में कैसा भी कोई भी मौका आएगा तो मैं उस समय पुलिस को अपना पूरा पूरा सहयोग करूंगा, चाहे उसके लिए मुझे कितनी भी कठिनाइयों का सामना क्यों न करना पडेगा । पर अफसोस कितनी गलत थी मेरी ये सोच, इस बात का एहसास आज यहाँ पुलिस स्टेशन में आकर हुआ है और अब उसी सोच की सजा मैं यहाँ आकर भुगत रहा हूँ । क्यों? ऐसा क्या हो गया भाई सर, मैंने अभी ऐसे सीकर लिखित एग्जाम पास किया है और इंटरव्यू के लिए फॉर्म भरना है जिसमें एक फॉर्म पुलिस वेरिफिकेशन का भी है जिसे भरकर जमा करना है । मैं भी हॉस्टल में रहता हूँ और पुलिस वेरिफिकेशन के लिए फॉर्म भरकर मैंने पहले ही जमा करवा दिया था । कल शाम को हॉस्टल में पुलिस का एक सिपाही आया था उसे वैरीफाई करने के लिए और उस समय में हॉस्टल में नहीं था । इसलिए वो सिपाही आज दोबारा से मुझ से मिलने के लिए हॉस्टल में आने वाला था । ये जानकर मेरे दिल में उस सिपाही के प्रति करुणा का सैलाब उमड पडा है । बिचारा मुझसे मिलने के लिए स्थानीय से भी दूर आया था और मेरी ही गलती की वजह से दोबारा से हॉस्टल का एक और चक्कर लगाना पडेगा । ये तो सरासर गलत बात है । इसलिए जिम्मेदार नागरिक होने के नाते अब मेरा फर्ज बनता है कि मैं खुद पुलिस स्टेशन जाएंगे । वहाँ जाकर अपनी हाजिरी बजाओ और उसके तमाम के तमाम सवालों का जवाब दे ताकि उसका काम आसान हो सके । बस इसी भावना के वशीभूत होकर में आज सुबह सुबह ही अपनी सब काम छोडकर इस पुलिसथाने चलाया । पर यहाँ पर ऐसे लगा जैसे मैंने अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाडी मार ली हो । अंदर आकर मैंने रजिस्टर खोले हुए उस हवलदार को नमस्ते किया और अपने आने का मकसद बयान किया था । उसने मेरी तरफ देखा और बिना कुछ कहे वापस से अपने काम में लग गया । पाँच सात मिनट बाद मैंने फिर से उसको अपनी बात दोहराई । पर शायद वो जरूर किसी बेहद जरूरी काम में बिजी होगा । इसलिए उसने फिर से मेरी बात को सुन कर अनसुना कर दिया । ऐसी बीस पच्चीस मिनट गुजर गए । जब उसने मेरी बात नहीं सुनी तो मैं फिर दूसरे हवलदार से मुखातिब और उसे अपने आने का मकसद बयान किए । उसने काम करने के लिए हमें से नहीं लाया । पर हाउस में कुछ भी नहीं और वो भी अपने ही किसी और का हो गया । मुझे आए आधे घंटे से ज्यादा हो चुका था, पर किसी ने भी मेरी बात नहीं है । पर किसी ने भी मेरी बात सुनी, जरूरी नहीं समझे । अभी गेट पर खडे हुए संतरी ने मुझे इशारे से अपने पास बुलाया । मैं उसके पास गया । मुझे लगा शायद वो मेरी परेशानी देखकर मेरी बात सुनेगा और उस समय मेरी आश्चर्य की कोई सीमा नहीं नहीं जब उसने मुझसे एक हजार रुपये की रिश्वत की मांग की । रिश्वत के साथ उस ने मुझे आश्वासन दिया कि दस मिनट के अन्दर वो वेरिफिकेशन की रिपोर्ट मेरे हाथ मिलाकर रख देगा । उसकी बात सुनकर मैंने उसे तुरंत बनाकर नया और उससे कहा, मेरा चरित्र बिलकुल बेदाग है । जिंदगी में आज तक मैंने ऐसा कोई भी काम नहीं किया जिसकी वजह से पुलिस में मेरे खिलाफ कोई रिपोर्ट लिखवाई गई हूँ । मैं तो यहाँ पुलिस स्टेशन आप लोगों की सहूलियत के ही लिए आया हूँ ताकि आपको मेरे हॉस्टल दोबारा ना आना पडेगा । मेरी बात सुनकर ओखी करके हसने लगा था जैसे मैंने उसे कोई जोक सुनाया हूँ । वो जगह ऐसी थी जहां से हर कोई हमें देख सकता था । हमारी वो बातचीत ऐसी थी जिसका एक एक शब्द बडे आराम से हर कोई सुन सकता था पर किसी ने कुछ भी नहीं किया । एक पुलिस वाले को खुलेआम ऐसे रिश्वत मांगता हुआ देकर मैं सकते की हालत में आ गया था । मेरा आज से पहले कभी भी पुलिस से कोई वास्ता ही नहीं पडा था । किसी जगह पुलिस रिपोर्ट में नाम होने का कोई सवाल ही नहीं था । यदि मेरे चरित्र में कोई कमी होती, कहीं कोई दाग होता तो उसकी भरपाई के लिए शायद रिश्वत फिर भी एक जस्टिफिकेशन होता है । पर मैं तो खुद को शरीफ से बढकर शरीफ निहायती सज्जन किस्म का आदमी मानता था जोकि एक असहाय और लाचार पुलिस वाले की मदद करने के लिए उसके दरवाजे पर आया था । इतने सालों से मेरे दिल में पुलिस के प्रति जो सहानुभूति की छवि बनी हुई थी वहाँ आज एक पल में एकदम से चकनाचूर हो गई सर । इतना कुछ सुनने के बावजूद मैंने फिर भी सोचा था हो सकता है कि नीचे के लेवल पर ऐसा होता हूँ और शायद थाना इंचार्ज मेरी बात को सुन और समझ सके । इसलिए हिम्मत करके मैं उसके दरवाजे पर गया था । वो अंदर किसी से फोन पर बात कर रहा था । पांच सात मिनट तक मैं वहाँ दरवाजे पर खडा रहा और फिर किसी तरह से हिम्मत करके अंदर आने के लिए पूछ लिया था । मैं आई कम इन सर और उसके बाद तो शायद आपने भी उसके चिल्लाने की आवाज सुनी होगी । मेरी बात सुन कर कैसे वो थाना इंचार्ज भडक गया था और मुझे कार्ड खाने को दौड पडा हो । मेरी बात सुन कर कैसे वो थाना इंचार्ज बढ गया था जैसे मुझे कार्ड खाने को दौड पडा हूँ । हाँ सुनी थी उसके चिल्ला नहीं किया यहाँ बाहर तक गुंजीत सर आप तो मुझे बहुत डर लगने लगा है । मैंने इनकी रिश्वत की पेशकश नहीं मानी । अब कहीं लोग मुझे ही किसी उलटे सीधे इल्जाम में ना पसंद नहीं है । अब तो ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे मैं वो शिकार हूँ जो खुद ब खुद शिकारी के बिछाया हुए जाल में आकर फंस गया है तो ऐसा लग रहा है अगर नौकरी करनी है तो फिर रिश्वत देकर रीवेरिफिकेशन पूरा करवाना होगा । पर आप सोचिए जब मुझे खुद को इतना सा काम रिश्वत देकर करवाना पड रहा है तो फिर में क्यों भविष्य में दूसरों से रिश्वत की डिमांड नहीं करूँगा? शायद इस देश में रिश्वत का सिलसिला जारी ही इसलिए है क्योंकि जब नौकरी पाने के लिए आदमी को रिश्वत देनी पडती है तो फिर वो रिश्वत देने वाला व्यक्ति भी यही सीखेगा और खुद रिश्वत जरूर लेगा । लगता है इस रिपोर्ट से ये सिस्टम कभी भी खत्म नहीं होने वाला है । नहीं अनिल के मुझे इतना ही निकला सर, बुरा ना माने तो आपसे बात करूँ । हाँ! बोलो, मैंने देखा था आप अपने दोस्तों के साथ उस रजिस्टर वाले हवलदार के पास अपनी रिपोर्ट लिखवाने के लिए गए थे । मेरी बात माननीय कुछ हासिल नहीं होने वाला । यहाँ रिपोर्ट लिखवाने से ये पुलिस वाले वह रहते हैं जो शिकार फंसाने के लिए इंसानी रूप में नजर आ रहे हैं । शायद तुम सही कह रहे हो दोस्त पर फिर भी हम लोग कोशिश तो कर ही सकते हैं । अनिल ने कुछ सोचते हुए का ठीक है सर, आप अपनी कोशिश जारी रखिए । मैं तो अब हॉस्टल के लिए निकलता हूँ । कुछ लोगों की हेल्प करने के चक्कर में सुबह नाश्ता भी नहीं किया था और अब तो इनके बर्ताव से लंच भी करने की इच्छा नहीं हो रही । ठीक है दोस्त जा रहे हो जाओ पर जाते जाते मेरी एक बात जरूर सुनते जाओ उसे मानना क्या ना मानना तुम्हारे ऊपर है । कहिये सर क्या कहना चाहते हैं? देखो दो हो सकता है कि अभी अपना सर्टिफिकेट बनवाने के लिए तुम्हें रिश्वत देनी पड रही है । पर सरकारी नौकरी मिलने के बाद तुम भी कहीं ये सोचकर रिश्वत लेना शुरू मत कर देना कि जब नौकरी पाने के लिए तुमने रिश्वत दी है तो रिश्वत लेने का तो मैं हाँ क्यों नहीं । जिंदगी के सिर्फ एक मोड पर रिश्वत देने से ही हर बार तो में रिश्वत लेने का लाइसेंस नहीं मिल जाता है । कैसे हो सकता है कि तुम्हें मेरी ये बात एक लेक्चर लग रही हूँ पर ध्यान रखना जिस प्रकार इनके रिश्वत मांगने से तुम इतना दुखी और परेशान हो रहे हो, उसी प्रकार तुम्हारे रिश्वत मांगने से दूसरे भी तुम्हारे जितने ही दुखी और परेशान होंगे । अभी तुम ने खुद कहा कि रिश्वत का ये सिलसिला इसलिए चल रहा है जब किसी को नौकरी पर लगने के लिए रिश्वत देनी पड रही है, वो भी रिश्वत लेगा पर ठंडे दिमाग से तुम ये भी सोचो अगर तुम किसी से रिश्वत नहीं लोगे तो ये भी हो सकता है कि वो सामने वाला भी किसी से रिश्वत नाले और रिश्वत देने लेने का इस सिलसिला तुम्हारे साथ ही खत्म हो जाए और इस तरह से देश से रिश्वत का नामोनिशान मिट जायेगी । तुम खुद रिश्वतखोरी के ताबूत की पहली खेल बनने में कामयाब हो जाओ । ये बात तो आप सही कह रहे सर, आप की बात सुनकर मुझे इस बात का एहसास हो रहा है । मैं आपसे ये वादा करता हूँ चाहे मुझे भी रिश्वत देनी पड जाए पर मैं कभी भी अपनी नौकरी में किसी से रिश्वत नहीं लूंगा और ना ही कभी मेरी वजह से कोई इस तरह से परेशान होगा । डाॅ । तुम्हारी नौकरी के लिए अग्रिम शुभकामनाएं । दोस्त ऐसे अपने अंदर चलता हूँ । हो सकता है आखिर हवलदार अब रिपोर्ट लिखने के लिए तैयार हो गया । ठीक है सर चाहिए आप के साथ मेरी भी शुभकामनाएं बाय कहते हुए आनंद के होठों पर एक मुस्कान उसने साइकिल स्टैंड पर लगी हुई अपनी साइकिल उठाई और वहाँ से चला गया । अनिल उसे तब तक जाते हुए देखता रहा जब तक वह नजरों से ओझल नहीं हो गया था । उसके जाने तक वो न जाने क्या क्या सोच रहा था । फिर वो भी इमारत के अंदर चला गया । क्या हुआ? अनिल तो उस युवक के पीछे पीछे हो गए थे । उसके आते ही अजित ने पूछा, बस ऐसे ही यार तुम बताओ अपना नंबर आया गया, इतनी जल्दी कहाँ से आएगा या बीस पच्चीस मिनट हो गए और अभी तक उस हवलदार में सिर्फ एक जाने की रिपोर्ट लिखवाने के बीस पच्चीस मिनट हो गए और अभी तक उस हवलदार ने सिर्फ एक जने को रिपोर्ट लिखवाने के लिए बुलाया है । वो बेचारा रिपोर्ट लिखवाने के बाद भी बडा दुखी नजर आ रहा था, जैसे उसका सब कुछ छिन गया । अगर ऐसा ही चलता रहा तो मुझे नहीं लगता कि शाम तक भी अपना नंबर आ पाएगा । एक बात और कहूं यार, यहाँ के हालत देखकर तो ऐसा लगता है कि यहाँ पर रिपोर्ट लिखवाने का कोई फायदा ही नहीं है । अजीत ने जवाब दे शायद तुम सही कह रहे हैं पैसे अब चलो । यहाँ हम लोग रिपोर्ट नहीं लिखवा रहे हैं पर क्यों? अगर ने आश्चर्य से पीछे वो मैं तो मैं बाद में बताऊँ । वैसे भी अभी अजीत ने कहा है कि शाम तक भी अपना नंबर आने से रहा और शाम तक अपना वक्त बर्बाद करने से अच्छा है । फिलहाल हम लोग अभी यहाँ से बाहर निकल जाएगा । कहते हुए अनिल बाहर की ओर चल पडा । ये देख वो दोनों भी जल्दी से अपनी सीट से उठे और उसके पीछे पीछे इमारत से बाहर की ओर आ गया । आखिर तुम्हें हुआ क्या है यार, कुछ तो बताओ आके हम लोग बिना कुछ किये यहाँ से क्यों जा रहे हैं? अगर नहीं चलते चलते पूछा यार सब बताऊंगा पहले इस पुलिस स्टेशन से बाहर तो चलो कहते हुए अनिल पुलिस स्टेशन के मुख्य गेट से बाहर आ गया जहाँ पर उनकी कार खडी थी । अनिल ने कहा कि ड्राइविंग सीट का दरवाजा खोला और अंदर जाकर बैठ गया । अगर उसकी बगल की सीट पर आकर बैठ गया और अजीत पीछे का दरवाजा खोलकर वहां बैठ के उन के बैठते ही अनिल निकाल स्टार्ट की और वो लोग वहां से रवाना हो गए । अबुल पहले तो तुम्हें रिपोर्ट लिखवाना चाहते थे और जब हम रिपोर्ट लिखवाने के लिए पुलिस स्टेशन तक आ गए । फिर तुमने रिपोर्ट लिखवाने का अपना फैसला क्यों बदल दिया और बिना रिपोर्ट लिखवाए हुए बाहर के बाद यह वैसे तो अंदर के हालत देखकर तुम समझ ही गए हो गए । फिर भी जानना चाहते हो मैंने रिपोर्ट लगवाने का फैसला क्यों बदला तो सुनो हमारे सामने निकले उस लडके के साथ क्या हुआ था? उस पुलिस स्टेशन गाडी चलाते हुए अनिल ने उस युवक के साथ हुआ अपना सारा वार्ता लाभ सुना डाला और अंत में का वैसे अब तुम ही बताओ । ऐसे पुलिस स्टेशन में अपनी बात किससे और कैसे कहते हैं जहाँ पर ऊपर से लेकर नीचे तक हर कोई भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है । वहाँ पर तो जैसे ही वो लोग ये सुनते कि हम वहाँ पर किसलिए आए हैं, हमको अलाल करने की तैयारी करने लग जाते हैं । उनको तो यही लगता था कि बैठे बिठाए उनके जाल में बहुत बडे बडे मुर्गे फस गए । फिर शायद बिना मोटी रकम अदा किए हम लोग वहाँ से आजाद होने की भी सोच नहीं सकते थे और हो सकता है वो लोग हमें उस नेता के आपको भेज देते है । तो तुम सही रहे हो यार, वो लोग वास्तव में लोगों को मुर्गी और बकरी की तरह ही हलाल कर रहे हैं और ऐसा तो हमने भी अपनी आंखों से देख लिया था । जब तुम उस लडके के साथ बाहर गए थे वहाँ एक बंदे को सिर्फ अपनी गाडी के एनओसी प्रमाणपत्र पर एक छोटा सा साइन कराने के लिए वो लोग इधर से उधर दौडा रहे थे । अगर ने कहा पर अब हम लोग क्या कर रहे हैं किसको? ये खबर दें कि देवराज ठाकुर के घर पर हुए हमले के पीछे जुबैद अंसारी का हाथ है । अजीत ने पूछा क्यों ना हम लोग किसी और पुलिस स्टेशन में चले? अगर में पीछे और वहाँ पर भी हमें ऐसे ही काट कर खाने वाले कसाई पुलिस वाले मिले तो जितने का तो क्या हूँ । मुझे तो वैसे ही खाने का बडा शौक है । उनके साथ मिलकर खा लेना । अबे साले वो लोग हमें साथ में खिलाएंगे । थोडी ना वो तो हम लोगों को ये लाल करेंगे । वो ऐसा क्या चल फिर तो एक खाने का प्लान कैंसिल करते हैं पर फिर करना क्या है? हाँ मिल क्या सोचा है तुम्हें कुछ नहीं । अभी तो यहाँ से सीधा घर चलते हैं और ठंडे दिमाग से सोचते हैं कि क्या कब और कैसे करना है । अनिल गहरी सांस लेकर का

Part 2: पूर्वाभास

था पूर्व बाद राजनगर नगर निगम का भ्रष्ट कर्मचारी आशीष खन्ना बैंक ऑफ राजनगर की सिविल लाइन शाखा में आपने रिश्वत का पैसा जमा कराकर बाहर आता है । वो जैसे ही अपनी कार में बैठने वाला होता है तभी एक विकारी से नजर आने वाला शख्स उससे आकर टकराकर आगे बढ जाता है । आशीष से रोकता है और उस पर अपनी पॉकेट काटकर फर्स्ट उडाने का इल्जाम लगता है । उन दोनों का झगडा सुनकर वहाँ भीड जमा हो जाती है । भीड को जब पता चलता है कि उस भिखारी ने आशीष खन्ना की जेब काटी है तो वो लोग उसे मारने लग जाते हैं । तभी वहां राजनगर पुलिस का हवलदार अनिल आता है । वो अधिकारी की अच्छी तरह से तलाशी लेता है और उसके पास कोई पर्स नहीं निकलता है । उसके बाद हवलदार अनिल आशीष खन्ना की भी तलाशी लेता है । परसों उसकी पैंट की जेब में ही निकलता है । ये देखकर सब लोग हैरान हो जाते हैं तभी वह विकारी चोट लगने की वजह से बेहोश हो जाता है । अनिल भीड में मौजूद शख्स अजीत जो भिखारी को मारने में शामिल होता है की सहायता से बेहोश भिकारी को आशीष खन्ना की कार में डालता है और उसे लेकर वह तीनों हॉस्पिटल की तरफ रवाना होते हैं । अभी वह थोडी दूर नहीं जा पाते हैं तभी वह विकारी रास्ते में ही अपना दम तोड देता है । ये देखकर हवलदार अनिल के मन में लालच जाग जाता है और वह आशीष और अजित दोनों से मिलकर पच्चीस लाख रुपए की डिमांड करता है । अजीत एक साधारण सा सेल्समैन होता है और वो आधे पैसे देने से मना कर देता है । आशीष उसे किसी तरह से पांच लाख रुपये के लिए राजी कर लेता है और बाकी बीस लाख वो खुद देने के लिए तैयार हो जाता है । फिर वो तीनों ऍफ बनाने की तैयारी करते हैं । अनिल उन दोनों को एक हार्डवेयर शॉप से खुदाई का सामान लाने के लिए बोल कर किसी जरूरी काम से वहाँ से चला जाता है । पर जाते जाते वो उन दोनों की लाश के साथ तस्वीर खींच लेता है । उसके जाने के बाद आशीष और अजित दोनों अनिल से छुटकारा पाने का कोई प्लान बनाने लग जाते हैं । लगभग आधी रात के समय वो स्वीकारी की लाश को दफनाने के लिए तीनों कार के द्वारा राजनगर की सीमा से बाहर बने हुए कब्रिस्तान में जाते हैं । वहाँ अनिल उन दोनों से गड्डा खोदकर लाश को ताबूत में रखकर दफनाने के लिए बोलता है । वो दोनों गड्डा खोदकर लाश को ताबूत में रख साबूत को गड्ढे में फेंकने के साथ ही वह दोनों अनिल पर हमला कर देते हैं । अनिल पहले तो उन के हमले से बच जाता है पर अजीत उसे धोखे से पकड लेता है । तब अनिल उनको बताता है कि उसने पहले ही उनकी लाश के साथ गड्ढे होते हुए फोटो खींच ली थी । ऑटोमोबाइल में मेल के द्वारा अपने दोस्त को भेज चुका है और अब अगर उसे कुछ भी हुआ तो उन्हें फांसी के फंदे से झूलने से कोई नहीं बचा पाएगा । ये सुनकर वो दोनों घबरा जाते हैं । लाश को दफनाने के बाद अनिल उनसे अगले दिन पैसे लेकर आने के लिए बोलता है । साथ ही उन्हें एक साथ मिलकर उससे बचने का प्लान बनाने के लिए चैलेन्ज करता है । अगले दिन वो दोनों शाम को उसी कब्रिस्तान में पैसे लेकर आते हैं । अनिल उन्हें अपने साथ दारू पीकर अपनी सफलता सेलिब्रेट करने के लिए बोलता है और नहीं रोकने पर उन्हें धमकी देता है । उसकी धमकी से घबराकर आशीष अजीतकुमार मिल के साथ पार्टी करने के लिए मना लेता है और खुद वहाँ से चला जाता है । उसके जाने के बाद अनिल और अजित पार्टी शुरू कर ही रहे होते हैं कि तभी वहाँ पर कल वाले विकारी का मुद्दा जाता है । तब पता चलता है कि वह भिकारी भी उनका ही दोस्त था । घर होता है और उन तीनों ने प्लान बनाकर आशीष को लूटा था । अजित आशीष का दोस्त बनकर उनके घर गया था जहां पर प्लान के मुताबिक आशीष की बीवी से उसका संबंध होता है । अजीत आशीष की बीवी से उसके हाथों के जेवर भी ले आता है । ये सब वो आशीष को सबक सिखाने के लिए करते हैं जो उनकी बस्ती के आदमी का काम कराने के बदले रिश्वत की मांग करता है । अनिल, अजित और अगर तीनों अनाथ होते हैं जो अपने बचपन में के दौरान हुए दंगों में अपने परिवारों को खो चुके हैं । उस समय वो तीनों मिलते हैं और एक दूसरे के दोस्त बन जाते हैं । कब्रिस्तान से शहर वापस लौटते समय उन्हें सडक पर जाम लगा हुआ मिलता है । थोडी पूछताछ करने पर उन्हें पता चलता है कि आगे इंस्पेक्टर धीरज अपनी टीम के साथ शहर की तरफ आने वाली हर गाडी की चैकिंग कर रहा होता है । उसे सूचना मिली होती है कि किसी पॉलिटिकल पार्टी का करोड रुपया शहर में लाया जा रहा होता है । ये देखकर वह तीनों घबरा जाते हैं क्योंकि उनके पास भी आशीष से लूटा हुआ पैसा और जेवर होते हैं । वो अपने आप को भगवान के सहारे छोड देते हैं । तभी उनके पीछे से गाडी वापस जाने लगती है । इंस्पेक्टर धीरज तुरंत उस गाडी को अपनी गोली का निशाना बनाता है । गाडी की तलाशी लेने पर धीरज को उसमें करोड रुपया बरामद होता है । वो उन मुजरिमों को गिरफ्तार कर लेता है । अनिल धीरज को नमस्ते बोलता है और रास्ता खोलने का अनुरोध करता है । धीरज अपनी टीम को रास्ता खोलने के लिए बोलता है तो तीनों अपनी पुरानी कार से राजनगर की स्लम गांधी बस्ती में अपने मकान में आती हैं जहाँ पर उन का संरक्षक सरदार करतारसिंह उनका भूखा प्यासा खाने के लिए इंतजार कर रहा होता है । अनिल उन्हें खाना खाने के लिए बोलता है पर वो मना कर देता है क्योंकि वह उनके इस प्रकार अपराध करने के खिलाफ था । तब अनिल कहता है कि अपराध की दुनिया में उनका पहला परिचय उन्होंने ही करवाया था और कहा था अगर ये दुनिया उनका हक नहीं देती तो वह हक छीन लोग करतारसिंह जवाब देता है कि उस समय वो मजबूर था और उसके पास उनकी मदद करने के लिए कुछ नहीं था और अब वह बहुत पैसे कमा चुके हैं । अनिल कहता है कि वह काम नहीं छोड सकते क्योंकि उन्होंने अनाथ बच्चों के लिए एक स्कूल खोला हुआ होता है और वो नहीं चाहते कि फिर कोई अनाथ बच्चा उन जैसा कानून को तोडने वाला मुझे मान जाए । फिर वो तीनों अपनी पुरानी यादों में खो जाते हैं । दिसंबर उन्नीस सौ बयान का वह महीना जब पूरे देश के साथ साथ राजनगर भी दंगों की आग में झुलस रहा था । रात का वक्त था जब राजनगर की सडकों पर एक टैक्सी दौड रही थी । टैक्सी में उस समय ड्राइवर के अलावा पति पत्नी और उनका एक बच्चा तीन हमारे यहाँ थे जो उस महिला के मायके से लौट रहे थे और उन्हें शहर में हुए दंगों के बारे में कुछ भी नहीं पता था । टैक्सी वाला ये कहकर के आगे कर्फ्यू लगा हुआ है । उन्हें उनके घर से एक दो किलोमीटर पहले ही उतार देता है । वो उन्हें भी किसी होटल में जाने की सलाह देता है । करू आदमी मना कर देता है । वो तीनों पैदल ही अपने घर की तरफ रवाना हो जाते हैं । वो कर्फ्यू में किसी पुलिस वाले को तलाश करते हैं पर उस समय उन्हें कोई भी नजर नहीं आता हूँ । तभी सामने से उन्हें दंगाइयों की भीड नजर आती है । भीड उनके पीछे पड जाती है तो तीनों ने देखकर भागते हैं । बाद में अपनी बीवी को बच्चे को लेकर भागने को कहता है । बीवी बच्चे को लेकर भागती है तभी वो ठोकर खाकर नीचे गिर जाती है । वो अपने बच्चे को पास ही के कचरे के डिब्बे में छुटने के लिए कहती है । दंगाइयों ने उन्हें एक जाना पहचाना चेहरा दंगाइयों में उन्हें एक जाना पहचाना चेहरा नजर आता है जिसे वो भारत बरसों से राखी बांधती आ रही होती है । उन्हें थोडी उम्मीद की किरण नजर आती है । पर भीड की वजह से वो आदमी भी उनकी कोई मदद नहीं कर पाता । पर भीड के हाथों दुर्गती होने से पहले ही वो उनको मारकर इस महिला की इज्जत जरूर बचा लेता है । पर भीड के हाथों दुर्गती होने से पहले ही वो उनको मार कर उस महिला की इज्जत जरूर बचा लेता है । ये सब वो नंदा बच्चा अनिल अपनी आंखों से देख रहा होता है पर डर के मारे वह बिल्कुल चुप रहता है । सुबह का जब थोडा उजाला फैलने लगता है तब वो हिम्मत करके अपने माँ बाप की लाशों के पास आता है । तभी वहां पर कुछ पुलिस वाले आते हैं जो उसकी माँ के मृत शरीर से उसके गहने नोच लेते हैं और उसके पिता के सारे पैसे निकाल लेते हैं । उसके मासूम मन में उनके प्रति नफरत आती हैं पर वह कुछ कर नहीं सकता था । फिर वहाँ से चल देता है और भूखा प्यासा कुछ खाने के लिए तलाश करता है । उसे कूडे के ढेर में एक ब्रेड का पैकेट नजर आता है । जैसे ही वो उसे उठाने वाला होता है उसे एक जोर का धक्का लगता है । वो धक्का देने वाले को देखता है जो की उसी की उम्र का लडका अगर होता है तो दोनों ब्रेड के लिए लडाई करने लगते हैं । दोनों ब्रेड के लिए लडाई करने लग जाते हैं । बाद में दोनों ब्रेड को शेयर करने के लिए राजी हो जाते हैं । जब वो एक दूसरे का नाम पूछते हैं और वापस से एक दूसरे से लडने लग जाते हैं तभी वहां पर उनकी उम्र का तीसरा लडका अजीत आता है और उन्हें लडका हुआ देखकर हसने लग जाता है । ये देख उन दोनों को अपनी गलती का एहसास होता है उसके बाद वो तीनों दोस्त बन जाते हैं । उनकी ये दोस्ती वहाँ से गुजर रहा करतारसिंह देखता है और उन्हें अपना आशीर्वाद देता है । यहाँ पर यादव का ये झरोखा खत्म होता है । दूसरे दिन शाम को तीनों अपनी सफलता का जश्न मनाने राजनगर नाइट क्लब जाते हैं । राजनगर नाइट क्लब शहर का फेमस और महंगा कलम होता है । उसमें विदेशी कृतिकाओं का लगभग नग्न नृत्य होता है । जिस देखने के लिए शहर के अभी जाते वर्ग के लोग आया करते थे । क्लब के दौरान उन्हें घटना देखने को मिलती है । जिसमें एक विधायक का बेटा रॉकी एक लडकी जिसका नाम पूजा था तो थप्पड मारकर क्लब से बाहर निकाल देता है । पूजा उसके बच्चे की माँ बनने वाली होती है । बारटेन्डर विशाल पूजा को जानता था और उससे प्यार भी करता था । पर पूजा रॉकी के झूठे प्यार में पडी हुई थी । वो तीनों क्योंकि को सबक सिखाने का निश्चय करते हैं । वो तीनों विशाल से रॉकी के बारे में पूरी जानकारी मालूम करते हैं और उसे सबक सिखाने के लिए एक प्लान तैयार करते हैं । विशाल की मदद से अनिल इस बार में बारटेन्डर की अस्थाई नौकरी ज्वाइन कर लेता है । ऑनलाइन के मुताबिक असगर को अजित की गर्लफ्रेंड का रूप देकर क्लब में आना होता है और फिर लडकी रूपी अगल रॉकी को अपने होस्टल के जाल में फंसाना होता है । पर जिस दिन लडकी बनकर अजगर को क्लब में जाना होता है और उस दिन अनिल को ना जाने क्यों ये एहसास होता है कि प्लैन में कुछ न कुछ गडबड है । बच्चों की प्लान बन चुका होता है इसलिए वह अजित और अजगर को क्लब आने के लिए बोल कर खुद निकल जाता है । उसके जाने के बाद पीछे से अजित और अजगर को भी प्लान में जो कमी होती है उस बात का एहसास होता है और वो उसे दूर करने की तैयारी करते हैं । अनिल उन दोनों के क्लब में आने का इंतजार कर रहा होता है । वही देख कर चौंक जाता है की अजित के साथ लडकी के रूप में अगर नहीं बल्कि एक लडकी ही प्रवेश कर रही होती है । वो लडकी ऐश्वर्या होती है जो अनिल से प्यार करती थी । अनिल भी उसे प्यार करता था पर वह इसे मन में ही दबाकर रखता था । वह ऐश्वर्या को देखकर अजित और अजगर पर गुस्सा होता है पर प्लान की वजह से चुप रहता है । उधर ऐश्वर्या को देखते ही रॉकी उसकी खूबसूरती देख कर उसे अपने बिस्तर पर लाने की सोच लेता है । रॉकी एक लडकी को अजित के साथ डांस करने के लिए भेजता है और खुद ऐश्वर्या के साथ डांस करने लग जाता है । उडान के दौरान एश्वर्या और फिर निशा को प्रपोज करता है पर ऐश्वर्या उसे पर ऐश्वर्या सिर्फ उससे दोस्ती के लिए हामी भरती है । दो तीन रोज वो क्लब में जाते हैं और फिर वो दिन आता है जब वो अपने प्लान के तहत रॉकी को फंसाने वाले होते हैं । पर उस दिन क्लब में इंस्पेक्टर भेजा जाता है । धीरज अनिल के पास जाकर अपने लिए कोल्ड ड्रिंक मानता है । हाँ तो वही बातों में अनिल के मुँह से पुलिस वाले के लिए नफरत भरी बातें निकलती है जिन्हें सुनकर धीरे जिससे वादा करता है कि जीवन में कभी भी उसे पुलिस की सहायता की जरूरत पड जाए तो उसके पास चले हैं ताकि उसके दिल में जो पुलिस के प्रति नफरत है वो दूर हो सके । धीरज की वजह से उस दिन उन का प्लान जो अधूरा रह गया था वो उसे अगले दिन पूरा करते हैं । अजीत नशे में होने का दिखावा करके ऐश्वर्या को गाली देता है और कहता है कि रॉकी के डांस किलो कि के साथ डांस करते करते हुए उसे भूल गई है । लॉ की इस मौके को कैश करता है और अजित को मारकर क्लब से बाहर में करवा देता है । फिर वो ऐश्वर्या को शराब पिलाता है और उसे नशे में समझकर क्लब में अपने प्राइवेट रूम में ले जाता है । वहाँ ऐश्वर्या होश में आती है । लॉ की उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करता है । ऐश्वर्या अपने हैंड बैग से अपना चाकू निकालती है । रॉकी उससे वह चाकू छीनने की कोशिश करता है और इस कोशिश में वह चाकू ऐश्वर्या के पेट में लग जाता है और वहीं काम तोड देती है । ये देखकर रॉकी घबरा जाता है और वह अपने विधायक बाप पप्पू मीना को फोन करता है । पप्पू मीना अपने आदमी वहाँ भेजने के लिए कहता है और उसे तुरंत वहाँ से निकलने के लिए बोलता है । रॉकी के जाते हैं । ऐश्वर्या के शरीर में हरकत होती है । दूसरे दिन पप्पू मीणा के बंगले पर वो अपने बेटे रॉकी को बोल रहा होता है कि वहाँ पर कोई बिलाश नहीं मिली थी । तभी अनिल कुरियर बॉय के भेज में एक पैकेट डिलीवर करता है । पप्पू मीना उस पैकेट को खोलता है तो उसमें एक चिट्ठी, एक लिफाफा और एक सीडी निकलती है । टी में उन्हें पहले सीडी देखने और फिर लिफाफा खोलने के लिए लिखा होता है तो दोनों सीडी देखते हैं तो पाते हैं कि उसमें रॉकी के क्लब वाले रूम में घुसने से लेकर ऐश्वर्या को मारने तक का सीन होता है । फिर वो लिफाफे को खोलते हैं जिसमें उनसे साठ लाख रुपये की डिमांड की गई होती है । रॉकी ब्लैकमेलर को सबक सिखाने की बात करता है पर तब तो मिला पर पप्पू मीना उसे इस बात के लिए रोक देता है और साठ लाख रुपये ब्लैकमेलर को देने के लिए बोलता है । अनिल उनमें से पचास लाख रुपये पूजा और विशाल को देता है और उन्हें पैसों से एक नई जिंदगी शुरू करने के लिए बोलता है । उन का अगला शिकार अहमद होता है । वो राष्ट्रीय आवाम पार्टी का एक कार्यकर्ता होता है । पार्टी का अध्यक्ष जुबैर अंसारी चुनावों में पैसा बांटने के लिए शहर के कोने कोने से हर सप्ताह आपने आदमियों के द्वारा एक ब्रीफकेस भिजवाया करता था । अहमद भी उसका पैसा लेकर जाया करता था । अहमद अपने नियत समय पर ब्रीफकेस लेकर निकलता है और आपने हमेशा के रूटीन के हिसाब से रास्ते में अपनी गाडी पार करके होटल शान में लंच करने के लिए जाता है । जैसे वो लंच करते होटल से बाहर जैसे वो लंच करके होटल से बाहर निकलता है और अपनी गाडी में बैठने वाला होता है । उसी समय अजित उसके गले से उसकी चेन तोडकर भाग निकलता है । अहमद बिना कुछ सोचे समझे अजित के पीछे भागने लगता है । आगे एक मोड पर वो एक अंधे आदमी से टकराता है जो कि अनिल होता है । वो जब तक खडा होता है तब तक अजित वहाँ से गायब हो चुका होता है । हताश होकर अहमद जब अपनी गाडी के पास आता है तो पाता है कि गाडी से उसका ब्रीफकेस गायब हो चुका होता है । ये देखकर उसे जुबैर अंसारी के हाथों अपनी मौत साफ नजर आती है । उधर वो तीनों जब दीप के इसको देखते हैं तो पाते हैं कि उसका वजन बहुत हल्का । वो उसका ताला तोडकर देखते हैं तो पाते हैं । वह बिल्कुल खाली होता है । उसमें सिर्फ एक आधा पांच सौ रुपये का फटा हुआ नोट होता है । उन्हें उसका कोई मतलब समझ नहीं आता । अनिल जब ध्यान से उस ब्रीफकेस को देखता है तो उसकी निगाहों से गुप्त जेब नहीं बच पाती । वो उसको प्रोजेक्ट को चाकू की सहायता से खोलता है तो पाता है उसमें एक छोटी सी चिट्टी होती है जिसमें लिखा होता है कार्लोज देवराज ठाकुर को खत्म कर दो एक करोड रुपया तुम्हारे स्विस बैंक में जमा कर दिया गया है । बाकी का एक करोड काम खत्म होने के बाद ये पढते हैं । वो तीनों चौंक जाते हैं और उन्हें राजनगर फिर से दंगों की आग में सुलग ता हुआ नजर आने लगता है । जुबैर अंसारी उस राष्ट्रीय आवाम पार्टी का अध्यक्ष था जो मुस्लिमों की पार्टी मानी जाती थी । वो और उसका खास आदमी रज्जाक अहमद से ब्रीफकेस लूटने के बारे में पूछताछ कर रहे थे । अहमद आपने लुटेरों के बारे में कुछ भी नहीं बता पाया तो जुबेर के इशारे पर रजाक उसे खत्म कर देता है । सुबह रज्जाक को उसी समय देवराज ठाकुर को मारने के लिए सुपारी की दूसरी चिट्ठी लेकर कॉन्ट्रैक्ट किलर कार्लोस के अड्डे पर भेजता है । देवराज ठाकुर इंडियन राष्ट्रीय पार्टी का अध्यक्ष था जो हिंदूवादी पार्टी थी । कुछ दिनों पहले दूसरे समुदाय पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के कारण उस समुदाय के धर्मगुरु ने उसे मारने वाले को दो करोड का इनाम देने की घोषणा की थी जिसकी वजह से उसकी सिक्योरिटी बढा दी गई थी । वो अपनी पत्नी रीमा ठाकुर के साथ अपने गार्डन में बैठा हुआ होता है । तभी कार दो सौ से सामने की बिल्डिंग से अपने निशाने पर लेता है । पर इस हमले में देवराज के बजाय उसकी पत्नी मानी जाती है । रीमा ठाकुर पर हमले की खबर पूरे शहर में फैल जाती है । टीवी पर ये न्यूज देखते ही अनिल और उसके दोस्त पुलिस स्टेशन चलकर इस बात का सबूत देने जाते हैं कि हमला कॉन्ट्रैक्ट किलर कार्लोस ने किया था और उसके पीछे नेता जुबैर अंसारी कहा था ।

Part 3: अध्याय 6 - A

हैं । अध्याय छह मिया जी माचिस है क्या आपके पास आवाज सुनकर जूस के झूठे गिलास होते हुए अब्दुलकादिर नहीं अपनी नजरेें ऊपर करके देखा । एक तीस साल का हट्टा कट्टा युवक अपने होठों पर लकी स्ट्राइक कि सिगरेट लगाए अपने हाथों का इशारा करते हुए उससे माचिस मांग रहा था । युवक ने हाउस बाजू की हल्के पीले रंग की शर्ट और गहरे नीले रंग की डेनिम जींस पहन रखी थी । पैरों में उसने एक्शन के रनिंग शूज पहन रखे थे । उसकी शायद के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे, जिसमें से उसके गले में पहना हुआ उन का लॉकेट बाहर लटका हुआ साफ दिखाई दे रहा था । नहीं बूढे का दिल नहीं धीरे से जवाब दिया और वापस से अपने काम में लग गया । कादिर लगभग साठ साल का एक पक्का नमाजी मुस्लिम बुजुर्ग था, जो अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए पिछले तीस पैंतीस सालों से सुभाष चौक पर निम्बू पानी की दुकान लगातार रहा था । दुकान क्या वो एक छोटा सा ठेला लगता था जहाँ पर वह पंद्रह बीस कांच के गिलास और एक दो किलो नीबू लेकर बैठता था, जिससे दिन भर में उसका सब खर्चा निकालने के बाद चार सौ पांच सौ रुपये की कमाई हो जाती थी । उसने इस वक्त एक सफेद रंग का कुर्ता पजामा पहना हुआ था । उसकी थोडी से नीचे कढाई से तराशी हुई लंबी डाली लटक लम्बी गाडी लटक रही थी । उसके सफेद बाल सीधे करीने से खडे हुए थे । पैरों में बडी ही साधारण सी हवाई चप्पल पहनी हुई थी । उसके साधारण से व्यक्ति तुम्हें अगर कोई गौर करने वाली बात थी तो वो थी उसके चेहरे से टपकता हुआ लू, जो केवल किसी ईमानदार और खुदा के सच्चे बंदे के चेहरे पर ही नजर आ सकता था । क्या न्यायिक माचिस नहीं है तुम्हारे पास? क्यों खाली पीली एक माचिस के लिए इतना भाव खा रहे हैं? उस युवक ने दैनिक व्यग्र भरे स्वर में का शायद उसे सिगरेट पीने की बहुत जल्दी हो रही थी । ये नींबू पानी की दुकान है बेटा । यहाँ पर माचिस कहाँ से मिलेगी? यहाँ से पचास साठ मीटर यहाँ से पचास साठ मीटर दूर वहाँ देखो वहाँ पानी की धडी है तो वहाँ जाकर एक माचिस खरीद सकते । कादिर ने अपने हाथ से एक तरफ इशारा करते हुए कहा, क्या मिया एक सिगरेट पीने के लिए भी तुम मुझे माचिस खरीदने के लिए इतनी दूर जाने की सलाह दे रहे हो तो मैं तो बीडी सिगरेट पीते होगे ना, अपने पास से ही दे दो माचिस मुझे ना बेटा ना हमारे मजहब में कोई भी नशा करना आराम है । मैं बीडी सिगरेट को आज भी नहीं लगता हूँ । वाहनियां तुम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे कोई भी मुस्लिम सिगरेट दारू नहीं पीता है । हजारों ऐसे मुस्लिम है जो दारू और सिगरेट का नशा करते हैं । मेरे साथ में असलम खान काम करता है वो तो जब तक शाम को आधी बोतल शराब नहीं पी लेता, उसके गले से खाना तक नीचे नहीं उतरता और तुम सिगरेट बीडी की बात कर रहे हो । बेटा सबको जमाने की हवा लग गई है जो ऐसे बुरे शॉप करना पर अगर कोई जना एक ही रहा है तो उसका मतलब ये तो नहीं कि मैं भी पी रहा हूँ मैं शकल से तो तो मैं एक नंबर के बेवडे लग रहे हैं और फिर मुझसे झूठ बोल रहे हो । अगर माचिस नहीं देनी तो वैसे ही मना कर दूँ पर ऐसे सफेद झूठ तो मैं हूँ । अल्लाह कसम बेटा मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ । बडा आया कसम खाने वाला सच का पुतला साला हरामी की हालत साले इसमें तेरी कोई गलती नहीं है । ऍम ऊपर से कुछ देखती है और अंदर से कुछ और ही होती है । बेटा इतनी छोटी सी बात को तुम कहाँ तक ले जा रहे हैं? कुछ तो आपने भगवान से डर वो उसके गले में लटकते हुए उनके लॉकेट को देखता हूँ । साले हरामी एक तो झूठ बोल रहा है और मुझे भगवान का डर दिखा रहा है । वो आदमी गुस्से से अपने दांत पीसता हुआ कादिर की तरफ लपक नहीं क्या हुआ चर्चा याद में आपको परेशान तो नहीं कर रहा । अभी वहाँ एक दूसरे नौजवान नहीं अपने कदम रखे वो भी लगभग तीस साल का हट्टा कट्टा जवान था जो शक्ल और शरीर से कोई बॉडी बिल्डर लग रहा था । कहने पर उसने मुल्ला काट डाली रखी हुई थी और उसके बाल सीधे और लम्बी थी । उसके गाल पर एक बडा सा काला मस्त जो उसके चेहरे को डरावना बना रहा था । उसने एक गहरे रंग की चीज और उसी रंग का कुर्ता पहना हुआ था । उसकी बाहों को उसने अपनी कोहनी होता है बेहतर बी से मोल कर रखा हूँ । पैरों में उसने विभाग के रनिंग शूज पहने । उस पहले वाले नौजवान और इस नौजवान में जो एक चीज कॉमन थी वो थी उसके कुर्ते के गले से बाहर जाते ऍम उन में अंतर था तो बस इतना ही यहाँ पहले वाले नौजवान के लॉकेट पर हिंदी में होम लिखा हुआ था । वहीं इस नौजवान के लॉकेट पर उर्दू में सात सौ छियासी नहीं बेटा ऐसी तो कोई बात नहीं । कादिर में उसकी बात सुनकर धीरे से जवाब आप कैसे नहीं है? चर्चा मैंने खुद सुना था । ये कैसे आपसे बडे बदतमीजी से बात कर रहा था और कैसे हमारे मतलब के लिए बना बुरा कहना था नहीं बेटा, मैं जरूर कोई गलत पहनी हुई है । ऐसा कुछ भी नहीं । नहीं । चर्चा मुझे कोई गलत फहमी नहीं हुई । आप लोगों की इसी कहा था की वजह से ही ये लोग हम पर आप भी होते जा रहे हैं । आए दिन हमारे मतलब के लोगों को निशाना बनाते जा रहे हैं । जब देखो ये लोग हमारे मतलब को लेकर कुछ ना कुछ टिप्पणी करते रहते हैं और आप लोग चुपचाप खडे रहकर सुनते रहते अवैध साले अगर हम ऐसा करते हैं तो क्या करने का इस पहले वाले युवक ने उसका मजाक उडाते साले मैं तेरे को छोडूंगा नहीं । जब तुम्हारे उसने अनुमान नेता साले देवराज कोई नहीं छोडा तो फिर तेजी तो काफी किया है । उस गाडी वाले युवक ने कहा देख लो भैया ये हरामी की औलाद क्या क्या है इन लोगों ने ही हमारे भगवान स्वरूप नेताजी देवराज ठाकुर के घर पर हमला किया था और उसमें हमारी पूजनीय मैडम शहीद हो गए और आप लोग चुपचाप खडे खडे इस की ये बात सुन लें अगर ऐसे ही बात हमारे किसी आदमी ने बोली होती आप ताकि इनके मतलब के लोग हम लोगों को जिंदा जला चुके हो । उसने भीड में खडे उन लोगों को ललकारते हुए कहा जो उन्हें आपस में जगता हुआ देखकर जमा हो गई । हाँ तो क्या गलत कर दिया उस हरामी नेता के घर पर हमला करके कितना कुछ नहीं कहा था उसने हमारे मतलब को लेकर तो क्या है जिलों की तरह चुपचाप सुनते रहते । सालो आप अगर हमारे मजहब पर किसी ने अपनी उंगली भी उठाई ना तो हम लोग उसका हाथ काट कर रख देंगे और आप लोग क्या खडे खडे तमाशा देख रहे हैं । ये हमारे लिए इतना कुछ बोल रहा है और आप लोगों ने चूडियां पहले क्या मार डालो इन काफिरों उस युवक ने भी भीड में खडे अपने समुदाय के लोगों को ललकारते हुए ये तुम लोग क्या कर रहे हो । मेरे बच्चों इतनी छोटी सी बात को इतना क्यों बढा चढा रहे । खुदा के लिए शांत हो जाओ । गुंडे का आदिल नहीं । उन दोनों के सामने अपने हाथ जोडते हुए उनसे कहा नहीं चला अब हम लोग शांत नहीं होंगे । अब तो यहाँ पर इनका फिर ओके खून की नदियां बहेंगी । उस गाडी वाले युवक ने बुड्ढे का आदिल को पीछे की ओर धक्का देते हुए तो हम लोगों ने कौन से चूडियाँ पहन रखी है हम तुम लोगों की बोटी बहुत हीरो चलेंगे । आओ भाइयों मारो ना राम के जन्म दूसरे युवक ने भी भीड की तरफ देखते हुए कहा । उन दोनों की आवाज सुनकर भी भीड में से अभी तक किसी ने भी अपना एक कदम भी आगे नहीं बढाया । ये देख कर पहले नौजवान नहीं क्या बात है । ये हमारे धर्म हमारे नेता जी के लिए इतना कुछ कह रहा है और आप लोग चुपचाप शान्त करें । ये काफी हम लोगों की बोटी बोटी काटने की बात कर रहा है । वो भी आप लोग इतने खामोश करें । आप लोगों का खून पानी हो गया । क्या आओ हम इन लोगों को सबक सिखाते हैं । दूसरे युवक ने भी भीड की तरफ देखते हैं का क्या बात है । दोस्तों बडी बडी बातें हो रहे हैं एक दूसरे से मरने मारने के लिए । अगर लडने का इतना ही शौक है तो ये बीच बाजार में शोर मचाने के बजाय तुम दोनों सेना में जाकर भर्ती हो जाए और सरहद बजाओ लडने के लिए तुम्हारी दोनों इच्छाएं वहाँ पर पूरी हो जाएंगे । दुश्मन को मारने की भी और खुद मर जाने की भी । उसी भीड में से कभी किसीकी आवाज वहाँ पर आएगा । अबे कौन बोल रहा है मेरा सामने आकर बात कर साले, पहले युवक ने उसे विकास अबे साले भेड में छुपकर क्यों लेक्चर दे रहा? मैं तो सामने आकर मर्ज की तरह बात कर साले । दूसरे युवक ने भी जोर से कहा लो भाई, आ गया तुम्हारे सामने बोलो, अब क्या करोगे तो मेरा तुम दोनों मिलकर करोगे या फिर अलग अलग करोगे । कहते हुए भीड में से एक लगभग छह फुट के हैंडसम नौजवान ने बाहर कदम लगा । उसने डाल ब्लू कलर की जींस और सफेद कलर की टी शर्ट पहन रखी थी । आंखों पर लेवॅल लगा रखे थे । उसके बाल छोटे छोटे थे और उसके व्यक्तित्व पर खूब फब रहे थे । पैरों में उसने चमडे के जूते पहन रखे थे । उसके होठों पर इस समय हल्की हल्की मुस्कुराहट थी, जिसे देखकर उन दोनों का खून जल उठा था । साले कौन है? तू तो हिन्दू है या मुसलमान? नाम क्या है? तेरा जो भाई क्या करोगे? मेरा नाम जानकर अगर मैं हिंदू हुआ तो दो मुझे मार हो गए या फिर मुसलमान हुआ तो तो मुझे मारो । उसने उन दोनों की तरफ बारी बारी से देखते हुए मुस्कुराते हुए कहा, और अगर मैं हिंदू हुआ तो तुझे मार डालू या फिर मुसलमान हुआ तो तुझे मार डालूँ । साले तो हमें मारेगा फिर इतनी हिम्मत मुझे तो हम यही मसल कर रख देंगे चींटी की तरह उन दोनों ने उस नौजवान से एक स्वर्ण का ये तो कमाल हो गया । दोस्तो, अभी थोडी देर पहले एक तो तुम लोग आपस में जगह रहे थे और अब दोनों आपस में मिलकर मुझे धमकी दे रहे । आखिर ये चक्कर क्या है? उस नौजवान ने अपने वोटों की मुस्कान को और गहरा करते हुए उस की ये बात सुनते ही वह दोनों युवक एकदम से हर बडा गए । उन दोनों ने एक पल के लिए एक दूसरे की तरफ देखा और आंखों ही आंखों में कोई ज्यादा हुआ । पर उनका वो इशारा उस नौजवान की नजरों से नहीं बच सका था और उसके होठों पर पुना एक मुस्कान उभरी और गायब हो गई साले तेरे चक्कर में इसको तो मैं भूल ही गया था । हाँ तो बता क्या बोल रहा था तो मेरे मजहब के बारे में साले तेरे और पहले मतलब के लोगों को चीज कर रख दूँ एंड ये हमारे धर्म के लोगों को चीखने की मुझे खुलेआम धमकी दे रहा है । आप लोग खडे खडे तमाशा देख रहे हैं । अगर आज इसको सबक नहीं सिखाया तो ये फिर हमेशा हम लोगों को ऐसे दबाते रहेंगे । आओ आज मिलकर इसके टुकडे टुकडे कर देते हैं । हाँ जैसे तो मेरे भाई ऐसा होता हुआ देखते रहेंगे क्योंकि हो ये हमें मारेगा और हम चुपचाप मार चलेंगे । दूसरे नौजवान ने भी भीड में खडे कुछ लोगों की तरफ देखते हुए कहा अरे दोस्त तो इन लोगों को क्यों पुकार रहे हो तुम दोनों क्या एक दूसरे को मारने के लिए भी इन लोगों की जरूरत पडेगी । तुम दोनों कितने कटे कटे हो । खुद आपस में लड कर भी तो तुम दोनों अपना फैसला कर सकते हो । यहाँ पर ये बॉडी सिर्फ दिखावे के लिए ही बुला रखी है । बेड में से उस नौजवान ने फिर से मुस्कुराते हुए उन दोनों से कहा साले दूर ऍम जो हमारे बीच में इतना बढ चढकर बोल रहा है नाम क्या है तेरा क्या करोगे मेरा नाम जानकर तुम लोग कर तो कुछ पाओगे नहीं मेरा फिर भी चलो मैं अपना नाम बताई देता हूँ । बंदे को धीरज कहते हैं और में राजनगर पुलिस डिपार्टमेंट में एक अदना सा इंस्पेक्टर हूँ और मैं राजनगर पुलिस डिपार्टमेंट में इतना सा इंस्पेक्टर होता हूँ उस नौजवान ने जो कि धीरे जीत है । मुस्कुराते हुए इंस्पेक्टर धीरज उन दोनों के मुंह से धीरे से एक साथ निकला और बौखलाते हुए एक दूसरे की तरफ नजर दौडाई जे सही कहा इंस्पेक्टर धीरा जीना मैं मेरा, अब बोलो क्या करोगे लो मसलों मुझे अब जीती की तरह । धीरज ने उनकी बुदबुदाहट सुनकर मुस्कुराते हुए अपने सर को हल्के से झुकाते हुए जवाब दिया फॅार साहब, इंस्पेक्टर साहब मुझे माफ कर दीजिए हैं । मेरा इस से लडने का बिल्कुल भी इरादा नहीं था । वो तो ये बुजुर्ग चाचा से बदतमीजी से बात कर रहा था इसलिए मुझे गुस्सा आ गया था । अचानक से उस नौजवान जिसने अपने गले में सात सौ छियासी वाला ताबीज पहना हुआ था, ने अपने सुर बदलते हुए दूसरे युवक की तरफ इशारा करते हुए कहा अरे नहीं इंस्पेक्टर साहब इसको जरूर कोई गलतफहमी हुई है । मैं तो बस इंडिया जी से माचिस मांग रहा था और कुछ भी नहीं । आप मुझे भी माफ कर दीजिए । अपने गले में उनके लॉकेट पहने हुए नौजवान ने भी हाथ जोडते हुए कहा एक माचिस मानने की साधारण सी बात को तुम लोगों ने धर्म मजहब से जोड दिया? नहीं दोस्त हो अब तो तुम लोगों को इतनी आसानी से तो माफी नहीं मिलने वाली है । आप तो तुम दोनों को आपस में लडना ही पडेगा, तभी तो लोग मुझे बच पाओगे नहीं । इंस्पेक्टर साहब अब हम लडना नहीं चाहते हैं । हम से गलती हो गई । हमें माफ कर दीजिए वो तो मैं जानता हूँ । यार ओह की तुम लोग आपस में लडना नहीं चाहते थे तो हमारा उद्देश्य तो इन लोगों को आपस में लडाना था । क्यों सही कहा ना मैंने? इसलिए दोस्तों अब तो तो मैं आपस में लडना ही पडेगा । अगर तुम्हारे धर्म और मजहब की इज्जत का सवाल है, अब अगर तुम नहीं लड हो गए तो फिर तो मैं अपने धर्म को, अपने मतलब के लोगों को क्या मोदी खाओ गए? क्यों बायो लोगों को अब आपस में लडना चाहिए या नहीं । धीरज ने भीड की तरफ देखते हुए पूछा फॅार साहब इनको अब तो आपस में लड नहीं चाहिए । इन को ऐसे नहीं जाने देना चाहिए । भीड में से आवाज आई क्या जा अब आप ही बताइए क्या इनको नहीं लडना चाहिए । धीरज ने नींबू पानी वाले अब्दुलकादिर से पूछा ना बेटा ये लोग गुमराह हो गए हैं । इन से गलती हुई है इन्हें माफ कर दो । कादिर ने उनकी तरफ देखते हुए कहा नहीं चाचा ना तो ये गुमराह हुए लोग है और ना ही इनसे कोई गलती हुई है । ये आप जैसे नहीं है जो ईमानदारी से मेहनत करके दो वक्त की रोटी का जुगाड करने में ही हँसी खुसी गुजर कर लेते हैं । ये दोनों तो आपस में मिले हुए हैं और चंद पैसों के लालच में जान बूझ कर अपने झगडे की आड में इस शहर में दंगा फैला ना चाहते हैं जिसमें न जाने कितने मासूम और ऍम जिसमें ना जाने कितने मासूम और बेगुनाह लोग मारे जाते हैं । इसलिए मैं माफी नहीं मिलनी चाहिए बल्कि इन्हें इनके की है की कडी से कडी सजा मिलनी चाहिए ताकि इनके साथ इन जैसे दूसरे लोगों को भी सबक मिल सके । फिर कभी कोई नफरत की आग फैलाने की कोशिश न कर सकें । धीरज ने कहा देर से का फिर उन दोनों की तरफ पडता और अपनी बात को आगे बढाते हुए कमाल है तो हम लोग अभी तक शुरू नहीं हुए । अब अगर एक मिनट के अंदर तुम दोनों ने लडना शुरू नहीं किया तो ध्यान रखना मैं तुम दोनों को इस भीड के हवाले कर दूंगा जिसे तो आपस में लडाना चाहते थे । फिर तुम खुद ही सोच लो ये भीड तुम लोगों का क्या हाल करेंगे? और एक बात और सुन लो तुम दोनों में से जो भी बंदा इस लडाई में हार गया मैं उसे भी इस भीड के हवाले कर दूंगा । इसलिए अपने अपनी जान बचाने के लिए जल्दी से लडना शुरू करूँ और जी जान से लडो । धीरज ने उनको धमकाते हुए कहा । उसकी बात सुनकर वो दोनों नौजवान कम गए । उन्होंने एक दूसरे की तरफ देखा और वहाँ से भागने के लिए मुझे पर तब तक भीड ने उनके चारों तरफ से गोला सा बना लिया था और उनके भागने के लिए जरा भी जगह बाकी नहीं । बच्चे हमारे पास बचने का और कोई तरीका नहीं है । प्यार हो समझ गए इसलिए शुरू हो जाओ । आप जल्दी से कहते हुए धीरज के वोटों पर एक मुस्कान उभरेंगे । वो दोनों भी उसकी बात और अपने चारों और के गुस्से से देखते हुए भीड को देखकर समझ गए थे हूँ कि अब उनका बचना मुश्किल है । तो मजबूरी में अगले ही पल दोनों आपस में लडने लग गए । लडते लडते थोडी देर में ही दोनों बुरी तरह से लहूलुहान हो गए और ठक्कर नहीं किए जाते रहे बस बहुत हो गया है । लोग जाओ तुम लोग अब बाकी की लडाई पुलिस स्टेशन चलके कर लेना । धीरज ने उन दोनों को नीचे गिरता हुआ देखकर कहा और फिर जोर से आवाज लगाई हवलदार इन दोनों को आप कडियाँ लगाओ, डाल दो । जीत में अब थाने में ले जाकर बाकी की सेवा करनी है । इन दोनों के भीड में से निकलकर हवलदार की यूनिफॉर्म पहने हुए दो आदमी आए और उन दोनों के हाथों में हथकडियां लगाकर पुलिस की जीत में बैठा मिले गए । काश सब लोगों की सोच आपकी तरह चाचा तो इस देश की शांति को भंग करने की कोशिश करने वाले इन जैसे अमन के दुश्मन कभी भी कामयाब नहीं हो पाएंगे और हमेशा मैंने अपने मुंह की खानी पडेगी । धीरज ने हाथ जोडकर कादिर से कहा । फिर वहां जमा भीड को संबोधित करते हुए अपनी बात आगे बढाये और आप लोगों का भी दिल से शुक्रिया जो आप इन लोगों की बातों में आकर आपस में लडने नहीं लग गए और एक बहुत बडा अनर्थ होने से बचा लिया । इंस्पेक्टर साहब हम लोगों ने इन दोनों को पहली बार ही इस इलाके में देखा था और जब इन्होंने जबरदस्ती का अधिक चाचा से छोटी सी बात को लेकर कहासुनी शुरू कर दी थी तभी हमें इन पर शक हो गया था । भीड में से किसी ने कहा किसी अनजान शख्स की बातों में आकर अपने बरसों पुराने दोस्तों और पडोसियों के साथ संबंध बिगाडना तो सरासर बेवकूफी कहलाते है । इंस्पेक्टर साहब किसी दूसरे शख्स ने का वैसे भी हम लोगों ने ये देख लिया था कि ये दोनों आपस में लडने के बजाय सिर्फ हम लोगों को ही लडने के लिए उकसा रहे थे । इतने सालों से हम लोग यहाँ पर आपस में प्यार मोहब्बत से रहते हुआ हैं । हम लोग इतने पागल नहीं है जो किसी अनजान शख्स की धर्म मजहब की बातों में आकर अपने बरसों के रिश्ते को खराब करते हैं । सबसे बडा धर्म इंसानियत होता है । सबसे बडा धर्म इंसानियत होता है सर और इतना तो हम जानते हैं कि इस धर्म को कभी कोई खतरा नहीं आना चाहिए । आप लोग वाकई समझदार हो और आप लोगों ने इस बात को समझा और इनकी बातों में नहीं आएगा । काश इस देश के सब लोग आपकी जैसे ही सोच रखते हैं तो दंगे जैसे आज से कभी इस देश में जन्म नहीं ले पाते । नमस्ते इंस्पेक्टर धीरज ने उनसे हाथ जोडकर कहा और फिर जीत में बैठ कर उन दोनों नौजवानों को साथ लिए आपने पुलिसथाने की तरफ रवाना हो गया ।

अध्याय 6 - B

हूँ उसी वक्त शहर के दूसरे हिस्से में है चमिया चलती है क्या नौ से बारह तू चीज बडी है मस्त मस्त एक जो माधु मुझ गोदार दे दें वो पच्चीस छब्बीस साल के दो नौजवान थे जो पालिका बाजार में खडे खडे आती जाती । लडकियों पर अश्लील कमेंट कर रहे थे और उन्हें छेड रहे थे । एक लडके ने ब्लैक कलर की जींस पहन रखी थी जो आज के फैशन के हिसाब से जगह जगह से फटी हुई थी । उसने ब्लैक कलर की ही खाओ बाजू की टी शर्ट पहन रखी थी । बाल उसने तेरे नाम मूवी के सलमान खान की तरह बना रखे थे । बना क्या रखे थे अपने आंखों पर काला चश्मा लगाए वो खुद को पूरा सलमान खान ही समझ रहा था । दूसरे लडके ने वरुण धवन की तरह पीले रंग की पेंट और लाल रंग की शर्ट पहन रखी थी जिसकी बाजुओं को उसने गौनियों तक फोन किया हुआ था । आंख पर उसने भी काला चश्मा लगा रखा था । काले चश्मे के अलावा अगर उनमें कोई और चीज कॉमन थी तो वो थे उनके गले से बाहर लौटते हुए लॉकेट जिस पर उर्दू में सात सौ छियासी लिखा हुआ था । पालिका बाजार राजनगर का साधारण दया एक शांति लगा था जहाँ से कभी कोई लडाई मारपीटकी या किसी दंगे फसाद की खबरें ना के बराबर ही आती थी । कौन है ये लोग जो इस तरह से इन बेचारी लडकियों को परेशान कर रहे हैं । पहले तो कभी नहीं देखा है लोगों को यहाँ इस एरिया में, पर भाइयों ये लोग इस तरह से लडकियों को कैसे परेशान कर सकते हैं । आओ हम लोग मिलकर इनको सबक सिखाया नहीं यहाँ रहने दो वो तो शकल से ही सडक क्या आप गुंडे नजर आ रहे हैं । देखो कपडे भी गुंडों जैसे ही पहन रखें आज में लडाई करने से क्या फायदा होगा? थोडी देर बाद ये लोग वैसे ही अपने आप यहाँ से चले जाएंगे । तो हम सही कह रहे हो भाई अगर आज हम इन गुंडों के मूल लगेंगे तो कल को ये हम तो तुम सही कह रहे हो भाई । अगर आज हम इन गुंडों के मूल लगेंगे तो कल को ये हम लोगों कोई परेशान करेंगे । दूसरों की वजह से हम अपने आप को खतरे में क्यों डालें? अपन लोगों को इनसे क्या है? लडकियों की प्रॉब्लम है वो जाने वहाँ के दो आजू बाजू के दुकानदार आपस में बात कर रहे थे । शायद ये बात बोलते हुए वो लोग इस बात को भूल गए कि कल को उनकी बहन बेटी को कोई गुंडा छोडेगा तो उन्हें बचाने भी कोई आगे नहीं आएगा क्योंकि वो लोग भी तो यही सोच रखते होंगे । उन लडकियों की प्रॉब्लम है हमें क्या? इधर ये दोनों जवान अपने ही रंग में आती जाती हुई लडकियों को छेडते मजे लिए जा रहे थे । आसमान बहुत है क्या माल जा रही है तभी एक नौजवान जोर से चिल्लाकर अभय कहाँ पर है जावे अबे साले डर डर क्या देख रहा है वो सामने की तरफ देख क्या कयामत आ रही है? ऐसा लगता है जैसे सीधे जन्नत से उतरकर कोई हूर चली आ रही है । जावेद ने सामने की तरफ अपने हाथ की उंगली से इशारा करते हुए उस्मान ने जावेद की उंगलियों का पीछा किया और उस तरफ देखते ही उसके मुंह से एक सिसकारी से निकली वहाँ हूँ और ब्यूटी एक बीस बाईस साल की निहायती खूबसूरत लडकी अपने ही हम उस लडके के साथ वहां से पैदल गुजर रहे थे । लडकी ने नीले रंग का सूट पहना हुआ था जिस पर उसने लाल रंग का दुपट्टा ओल्ड रखा था । उसके साथ वाले लडके ने जींस टीशर्ट पहनी हुई थी और वो दोनों हंस हंस कर बातें करते हुए जा रहे हैं चलाया उधर चलकर मजे करते हैं । जावेद ने उस्मान को आंख मारते हुए कहा और वो दोनों अपने वोटों से हल्की हल्की सी टी बजाते हुए उस तरफ को जल्दी जिधर से वह दोनों लडका लडकी आ रहे थे । दोनों ने अपने हाथ अपने जेन्स की पॉकेट में डाले हुए थे और ऐसा लग रहा था जैसे वह पूरी तरह से लापरवाह । जैसे ही वो लडका लडकी के नजदीक पहुंचे जावेद में अपने कंधे से उस लडकी के सीने पर जोर से टक्कर मार दी और साथ ही साथ टक्कर लगते ही वो जानबूझ कर उस लडकी को अपने साथ लेकर नीचे गिर पडे और उसकी कमर में अपनी उंगलियों से चिकोटी काट नहीं । इधर चुटकी काटता ही लडकी के मुंह से दर्द की वजह से हल्की सी आने के लिए उधर जावेद के मुँह से गुस्से में निकला । अब फॅमिली दिखाई नहीं देता । जावेद के मुझे गाली सुनते ही वो लडकी सकपका गए । एक तो वैसे ही गिरने की वजह से उसके हाथ में थोडी चोट लग गई थी । दूसरे खुद जावेद में उस की कमर पर चिकोटी काटी थी इसके बावजूद वो उसी पर इल्जाम लगा रहा था कि वह से आकर टकराई सुमन खडी हो जाएगा तो मेरा हाथ पकडा तो उसके साथ वाले लडके ने अपना हाथ उसकी तरफ बढाये । लडकी ने उसका हाथ पकडा और खडी हो खडे होकर उसमें जावेद की तरफ देखा जो पहले ही खडा हो चुका था और आपने दात निकाल कर उसकी तरफ गुस्से में देख रहा था । सौरी उसके चेहरे के भाव देखकर सुमन ने जावेद से धीरे से का ये सुनकर उसके साथ वाले लडके ने जवाब दिया तुम क्यों सॉरी बोल रही हूँ? सुमन गलती सरासर इस लडके किए ये तुम से जानबूझ कर आकर टकराया था । बहस साले अभी लडकी सौरी बोल रही है तो तेरे को क्या मिर्ची लग रही है । जब हो मान रही है कि वही भाई जाकर टकराई थी तो तेरे को इसमें क्या प्रॉब्लम है । साले लगता है तो इस को कुछ नहीं कर पाता इसलिए ये दूसरे लोगों के साथ टकराकर और अपने शरीर को उनके साथ रगडकर मजे लेती है । उस्मान ने हसते हुए उस लडकी का उसकी बात सुनकर जावेद भी इस पर पर ये सुनते हैं । उस लडके को एकदम से गुस्सा आ गया था और गुस्से में ही बहुत समान कि तरफ लपका और अपने दोनों हाथों से उसकी कमीज का कॉलर पकडते हुए अपने दांतों पर जोर देते हो । साले तमीज से बात कर यह मेरी बहन है । अब बहन है तो जल्दी से कोई अच्छा सा लडका देख कर उससे उसकी शादी करवाते हैं । कहीं ऐसा ना हो जाए अगर इसके शरीर की गर्मी सहन नहीं हुई तो किसी दिन ये घर छोडकर किसी लडके के साथ भाग जाए और तेरे माँ बाप की बदनामी हो जाए । और हाँ अगर शादी के लिए कोई लडका नहीं मिल रहा है तो बंदा उस हम दो बंदे आते हैं । इसके शरीर की गर्मी को हो जाने के लिए । उस्मान ने अपने पीले दांत बाहर निकालकर उस लडके से कम पर ये कहते हुए वो भूल गया कि उस लडके के हाथ अभी तक उस की कमी की कॉल को पकडा है । उस की बात सुनते ही गुस्से में आकर उस लडके ने उसकी कॉलेज को छोडकर अपने दोनों हाथों से उसका गला था दिया और उसके गले पर अपने हाथों का दबाव बना उसकी इस हरकत को पहले तो उस मानने हवा में उडा दिया पर जैसे जैसे उसके गले पर उस लडके के हाथों का दबाव बढने लगा तो उसकी आंखें उखड में लगे हैं । उसके मुंह से खो खो की आवाजें आने लगी थी और आखिर लालू कर बाहर को आने को तत्पर थे । ये देखकर जावेद जैसे एकदम से बहुत बन गया था एक पल के लिए । उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें । अबे साले खडा खडा क्या सोच रहा है बच्चा मुझे आराम से किसी तरह से उस मानने गले से लडखडाते हुई आवाज निकाली । उस की बात सुनते ही जैसे जावेद को एकदम से होश आया हूँ । वो तुरंत उनकी तरफ बढा और आगे बढकर उस लडके के हाथों को उसमान की गले से हटाने, अपने थोडे ही प्रयास से वो अपने काम में सफल गला आजाद होते ही उस्मान के जैसे जान में जान वापस आ गई हूँ । वो लम्बी सांसे लेने लगा और जब उसकी सांसे थोडी दूरस्त हुईं वो तुरंत आगे बढा । उस लडके के चेहरे पर एक जोरदार घूंसा मार दिया । वो लडका लडखडाया और नीचे सडक पर जाकर हो । तब तक उन लोगों का झगडा देखकर वहाँ पर भीड जमा हो गई थी । सौडियाल तो मैं जोर से लग गई । मेरी कोई गलती नहीं थी । मैं जानबूझकर आपकी बहन से नहीं तक लाया था । भीड को देखते ही जावेद के व्यवहार में एकदम से परिवर्तन आ गया था । वह शक्ल और अपने व्यवहार से अब कोई गुंडा बदमाश नहीं बल्कि शराफत की जीती जाती तस्वीर नजर आ रहा था । नहीं, तुम जान बूझ कर मेरी बहन से टकराए थे और आप मुझे ही मार रहे हो । वो लडका गुस्से से उठता हुआ बोला और आप लोग बस तमाशा देखिए ये गुंडे बदमाश यूपी दूसरों की बहन बेटियों को छेडते रहते हैं और आप लोग सिर्फ तमाशा देखते रहते हैं । अगर आज इनको सबक नहीं सिखाया गया तो कल को ये आप लोगों की भी बहन बेटी की यूरी सडक पर बेज्जती करेंगे । तब भी क्या आप लोग यहीं खडे खडे तमाशा देखते रहेंगे । वह भीड से मुखातिब होता हुआ पूरा यार ये तुम क्या बोल रहे हो भाई, जान बूझकर तुम्हारी बहन से नहीं टकराए थे और फिर इन्होंने तुमसे और तुम्हारी बहन से माफी भी मांग ली है । अब अगर फिर भी तुम्हारा गुस्सा शांत नहीं हो रहा है तो मैं भी तुम से हाथ जोडकर माफी मांगता हूं लोग । इस पर उस्मान ने भी हाथ जोडकर उस लडके से कहा ये सब इन की चाल है ताकि आप लोग ऐसे ही इन लोगों को छोड दो । और यहाँ से बचकर निकल जाए साले, ये मुसल्ले होते ही ऐसे झूठे और मक्कार वो लडका उनके गले में लटकते हुए सात सौ छियासी के ताबीज की ओर इशारा करता हुआ भीड से बोल ये बात तो सही कह रहे हो तो ये लोग ऐसे ही हम लोगों की बहन बेटियों को बहला फुसलाकर अपने प्यार के जाल में फंसा लेते हैं और फिर उन्हें घर से भगाकर ले जाते हैं । आज ऐसे बहुत से किस्से अखबारों में पडने और सुनने को मिलते हैं । भीड में से किसी ने कहा क्या सही कह रहा है मैं जरा सी बात का बतंगड बना रहा है । इन दोनों ने माफी मांग ली है और दोनों की इस बात को कहाँ से कहा ले जा रहे हो भीड में से किसी दूसरे निकाह साले तुम तो बोलोगे ही ऐसे तुम भी तो इनके ही मतलब के हो साले खाते हिंदुस्तान की ओर गाते कहीं और कइयों देर राज ठाकुरजी सही बोलते हैं इन लोगों के लिए इन लोगों को तो पाकिस्तान भेज देना चाहिए । ये लोग किसी के काबिल है । भीड में से पहले वाले ने कहा तो मैं बात को कहाँ से कहा ले जा रहे हो । इस देश की आजादी में जितनी कुर्बानियां हिंदुओं ने दी है, उतनी है मुसलमानों ने भी दी है । पर तुम्हारे देवराज जैसे टटपूंजिये नेता हर बार हमारी देशभक्ति पर शक करते हैं और हम लोगों के मजहब के लिए काफी भला बुरा कहते हैं और हम लोग हर बार चुप रह जाते हैं । पर अब ऐसा नहीं होगा । हम तो मैं इस बात का करारा जवाब देंगे । क्या कर लोगे में तो साले बढ गए साले तुम लोगों के नेता की जो रूको तो अल्लाह के पास पहुंचाई दिया है और अब तुम लोगों का भी यही हाल करेंगे । ये ले कहते हुए उसने सामने वाले के चेहरे पर एक जोरदार हो सामान साले देवराज जी के घर पर छुपकर हमला करने को तुम अपनी बहादुरी कहते हैं । हम हैं तो सामने से वार करो । वैसे उसने भी उसे पलट कर उसके ऊपर एक घुसा मारते हुए जवाब दे रहे हमारे मतलब के आदमी को मार दिया रहे ये हमारी बहन बेटियों को छेड रहे । बारह इंसानों को ये वही लोग हैं जो दिन रात हमारे मतलब पर उंगली उठाते रहते हैं । मारो ना राम के चलो । उन्होंने हमारे प्यारे नेता जी के घर पर हमला किया है । मारो सालों और फिर थोडी देर में ही उनके बीच बिना किसी मतलब के मारा मारी शुरू हो गए । यह देखकर किसी समझदार व्यक्ति ने अपनी जेब से मोबाइल फोन निकाला और पास के पुलिस स्टेशन में फोन मिलाया । फोन की घंटी बजती रही और फिर बजकर बंद हो पर किसी ने भी फोन नहीं उठाया । उसने डायल करने के लिए मोबाइल का बटन दबाया था । तभी कहीं से उडता हुआ । एक पत्थर आया और उसके सिर पर जोर से अलग है । पत्थर लगाते ही वह नीचे सडक पर गिर पडा और उसका मोबाइल भी उसके साथ ही गलत है । मोबाइल फोन से पुलिस स्टेशन रिंग जाती रही पर किसी ने फोन तो नहीं उठाया । इधर मोबाइल बजना बंद हुआ । उधर उस आदमी की आंखे बंद हो गई और वह बेहोशी की नींद में चला गया । हाथों से शुरू हुई ये लडाई जल्दी ही हथियारों में तब्दील हूँ । लोग लाठियां, तलवारें लेकर एक दूसरे पर टूट पडे । थोडी देर में वो इलाका युद्ध का मैदान बन गया । अब तक और मार्क आज शुरू हो गई । दंगाई दुकानें चलाने लग गए और जब काफी जानमाल का नुकसान हो गया तो हमेशा की तरह सरकार द्वारा उस एरिया में करती लगा दिया गया । जिन लोगों की वजह से ये सब शुरू हुआ था वो वहाँ से कई किलोमीटर दूर अपने सफलता ऍम मजा आ गया । सही बोल रहा गया आज तो वाकई मजाक का बहुत कोई होंगे वो तो ठीक है साले पर कोई फिल्मी जोर से कमर में चिकोटी काटता है क्या? वो लडकी जिसका नाम संबंधाें नकली क्या करूँ यार मेरी कमर है क्योंकि कितना भी अपने आप को समझाओ पर ये है कि मेरी बात सुन भी नहीं बस बस चल जाते हैं कहते हुए ऍम काले अपने आप को इस्तेमाल कर रहे हैं हम अगर उन्होंने मेरी बहन को छूने की कोशिश की तो हाथ तोड कर अलग कर दूंगा । वो लडका जो उसका भाई था उसे ऍम तो मन में जो मेरे हाथ में बंदा था उसे फॅमिली नहीं उस्मान हसते हुए बोला उस की इस हसी में जावेद सुमन और अमर ने क्या किया? आज सुबह इंडियन राष्ट्रवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री देवराज ठाकुर की पत्नी रीमा ठाकुर की उनके घर पर हुई सनसनीखेज हत्या के बाद उनके समर्थक उग्र होते हैं और उन्होंने शहर में तो बहुत शुरू कर दी है । जवाब में विरोधी पक्ष के लोगों ने भी हथियारों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है जिससे शहर में कई जगह हिंसा भडक होती है और काफी जानमाल का नुकसान पहुंचा है । हालांकि सुबह सुबह ही नेता देवराज ठाकुर में अपने समर्थकों को शांत रहने की अपील की तैयारी की थी और प्रशासन और पुलिस ने शहर में कडा पहरा भी लगा दिया था । शहर के संवेदनशील इलाकों में हर स्थिति से निपटने के लिए पुलिस की गश्त भी लगाई जा रही है पर शायद ना तो देवराज की अपील का उनके समर्थकों पर कोई असर पड रहा है और ना ही पुलिस के इंतजाम कुछ कर पाएंगे । वैसे ये हिंसा उन इलाकों में भर्ती है जो आम तौर पर काफी शांत माने जाते हैं और शायद इसलिए प्रशासन ने उन इलाकों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और जिनका फायदा इन दंगाइयों ने उठा लिया । शहर में हुई इस हिंसा में अपना कुल तीन लोगों की मौत हुई है और करीब पचास लोगों को गंभीर रूप और गरीब पचास लोगों को गंभीर घायल अवस्था में शहर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है । एहतियात के तौर पर पुलिस की गश्त बढा दी गई है और कल दोपहर तक शहर के दंगाग्रस्त इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है । हम नेता देवराज द्वारा की गई अपील को आपसे फिर दोहराना चाहते हैं और आप से शांति बनाए रखने की उम्मीद करते हैं । टाइम टाइम की रिपोर्ट के साथ मैं आपका साथ ही सुनील उपाध्याय अब आपसे विदा लेता हूँ । अभी आप देख रहे थे सुनील उपाध्याय कि देवराज ठाकुर के घर पर हुए हमले की पत्नी रीमा ठाकुर के सनसनीखेज हत्याकांड की स्पेशल रिपोर्ट । अब हम आपको सीधा पुलिस मुख्यालय ले चलते हैं । यहाँ पर शहर के पुलिस कमिश्नर श्री बीएस खन्ना जी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं । टीवी पर लाइव टेलीकास् संभाले एन करने दीवार पर लगी हुई बिग स्क्रीन की तरफ इशारा करते हुए कहा यहाँ पर पुलिस मुख्यालय का दृश्य दिखाया जा रहा था । वो छोटा सा हॉल था जहाँ ऊपर की तरफ एक स्टेट सा बना हुआ था । वहाँ कुर्सियों पर राजनगर पुलिस कमिश्नर खंड आपने तीन चार सीनियर पुलिस अधिकारियों के साथ बैठे हुए थे । नीचे की तरफ लाइन से कुर्सियां लगी हुई थी जिसपर टीवी और प्रिंट मीडिया के पत्रकार जमा हुए थे जो कि कमिश्नर खंड द्वारा बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस को कवर करने के लिए वहाँ पर एकत्र हुए थे । सर शाम को इस समय ये पुलिस कॉन्फ्रेंस बुलाने का क्या औचित्य है? सर क्या देवराज ठाकुर की पत्नी रीमा ठाकुर के हत्यारे का कुछ पता चला या पुलिस अभी तक सिर्फ हवा में ही हाथ पैर मार रही है । जब इस बात की पहले से ही आशंका थी कि रीमा ठाकुर की हत्या के बाद शहर में दंगा फसाद फैल सकता है तो फिर पुलिस प्रशासन ने इसे रोकने के लिए पूरे इंतजाम क्यों नहीं किए । जो शहर में कई जगह दंगा फसाद फैलने की खबरें आ रही हैं जिसमें कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पडा है और सार्वजनिक संपत्ति का भी नुकसान हुआ है । साथ ही उन इलाकों में कर्फ्यू भी लगाना पड रहा है । आखिर प्रशासन की कुंभकर्णी नींद कब खुलेगी? जब सारा शहर इस आग में जल जाएगा तब आकर क्या आप ही आप बुझाएंगे? इधर पत्रकार कमिश्नर मिश्रा के ऊपर एक के बाद एक सवालों की बौछार किए जा रहे थे । उधर कमिश्नर चुपचाप उनके सवालों को सुन रहा था । आखिरकार जब उसके सब्र का पैमाना छलक पडा तो उसने अपना एक हाथ ऊपर क्या और पत्रकारों की टोली को शांत रहने का इशारा करते हुए देखिए आप लोग इस तरह से शोर मत ना चाहिए । आप एक एक कर गए । अपने सवाल पूछे आपको आपके आर सवाल का जवाब मिलेगा । आप के सबसे पहले सवाल का जवाब ही यही है कि हमने ये प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई ही इसलिए है ताकि मिसेज देवराज ठाकुर हत्याकांड की वजह से जनता के मन में जो सवालात उठ रहे हैं उनका जवाब आप लोगों के माध्यम से उन तक पहुंचाया जा सके । कहते हुए उसने अपनी वाणी को विश्राम दिया और फिर आगे कहा, और जो गुस्से की आग में लोग भडक रहे हैं, उन्हें शांत करने का काम किया जा सके । कमिश्नर की बात सुनते ही सारे पत्रकार एकदम से शांत हो गए । अब आप लोग एक एक करके अपने सवाल फिर से पूछ सकते हैं । कमिश्नर ने उन्हें शांत होता देखकर कहा, सर हेमा ठाकुर के हत्यारे के बारे में कुछ पता चला गया । एक पत्रकार में पूछा, हमारी तलाश जारी है और मैं आप लोगों को यकीन दिलाता हूँ कि हम जल्द ही हत्यारे को गिरफ्तार कर लेंगे । ये तो पुलिस का हमेशा का डायलॉग असर चाहे हत्यारे को पुलिस कई महीने तक गिरफ्तार मैं कर पाए पर हमेशा डाटा बताया । एक ही जवाब आता है कि हम हत्यारे को जल्दी गिरफ्तार कर लेंगे । कहते हुए दूसरा पत्रकार हंस पडा । ये देखकर बाकी के पत्रकार बीएस पडेगी । यस ने की बात नहीं है । पत्रकार महोदय, हम या एक सीरियस मैटर को लेकर ये प्रेस वार्ता आयोजित कर रहे हैं और आप लोगों को अधिसूचना है शर्म आनी चाहिए आप लोगों को शहर में लोग जल मर रहे हैं और आप उस पर भद्दे मजाक बना रहे पुलिस कमिश्नर थोडे से गुस्से में बोला उस को गुस्से में देखकर एक पत्रकार ने कहा सॉरी सर, हम इस मेटर पर नहीं रहे बल्कि पुलिस का वही रटा रटाया जवाब सुनकर हम लोगों को हसी आ गई । अच्छा आप ये बताइए कि आप लोगों को कातिल का कुछ सुराग मिला है या फिर यू ही हवा में जवाब दे रहे हैं । देखिए हम यही हवा में जवाब नहीं दे रहे हैं बल्कि हमें कातिल के कुछ सीसीटीवी फुटेज मिले जिसके बेस पर एम कातिल को तलाश कर रहे हैं । ऐसे क्या फुटेज मिले सर हमें बताइए हम अपने चैनल के माध्यम से जनता को जागरूक करेंगे जिनसे आपको कातिल को जल्दी से जल्दी गिरफ्तार करने में मदद मिल सके । देखिए आपकी बात सही है पर इस तरह से अगर हम इन फुटेज को वितरित कर देंगे तो उससे कातिल भी सावधान हो सकता है और वो पुलिस की गिरफ्त में आने से बचकर निकल सकता है । इसलिए फिलहाल अभी के लिए ये फुटेज हम आपको नहीं दे सकते हैं । इन फुटेज की सहायता से पुलिस टीम अपनी तलाश करेगी । पर फिर भी हम आपके चैनल के माध्यम से लोगों से ये अपील जरूर करना चाहते हैं कि रीमा ठाकुर हत्याकांड के बारे में अगर कोई भी कुछ भी कैसा भी जानता है तो उसे पुलिस को जरूर बताएगा । इसके लिए पुलिस ने एक विशेष हेल्पलाइन जारी की है । जो ऍम खोली है उस पर आने वाली हर कॉल की डिटेल सीधे मुझ तक पहुंचाई जाएंगे । जरूरत महसूस हुई तो मैं कमिश्नर खोज कॉल करने वाली से बात करूंगा । आप लोग इस नंबर पर अपनी बात पहुंचा सकते कहते हुए कमिश्नर एक नंबर बता देंगे सर ये तो वही कातिल की बात है । अब आप ये बताइए कि बीमा ठाकुर की हत्या के बाद शहर की कानून व्यवस्था इतनी बिगड हो गई । जब इस बात का पहले से ही अंदेशा था कि शहर में दंगा फसाद हो सकते हैं तो उसे रोकने के लिए पुलिस ने पूरे इंतजाम क्यों नहीं किए । शहर के कई इलाकों में दंगा फैलाने की खबरें आ रही है और जगह जगह नहीं हो रही है । इन सब को रोकने और दंगाइयों को पकडने के बजाय प्रशासन द्वारा अंत में सिर्फ कर्फ्यू लगाकर इतिश्री कर ली जाती है । ऐसी बात नहीं है । हम नहीं शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर के लिए पुलिस का पूरा इंतजाम किया हुआ है । फॅमिली पोलिसी काफी नहीं है । शहर में शांति बनाए रखने के लिए इसके लिए जनता को भी जागरूक होना पडेगा और उन्हें आ गया ना होगा । आप खुद देख लीजिए । कई इलाकों में दंगा फैलाने की कोशिश को जनता की सहायता से पुलिस ने नाकाम नहीं किया है और कई मुझे दोनों को गिरफ्तार भी किया है । पुलिस कमिश्नर मिश्रा ने जवाब पर फिर भी क्या पुलिस को और ज्यादा मुस्तैद नहीं रहना चाहिए । चिंता मत कीजिए । पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद है और हर परिस्थिति के लिए तैयार है । याद कीजिए पिछले साल जब पडोसी राज्य में दंगे हुये थे तो वहाँ के प्रशासन को स्थिति संभालने में सात दिन से ज्यादा समय लग गए थे । जबकि हमने तो एक ही घंटे में परिस्थितियों को कंट्रोल कर लिया है । बस जनता को धैर्य बनाए रखना चाहिए । बास इससे ज्यादा हम और कुछ नहीं कहना चाहते हैं । रहने वाले हैं हूँ

अध्याय 6 - C

उस जिस बात का हम लोगों को डर था, आखिरकार वह बात हो ही गई है । ये शहर भेड दंगों के आग में झुलस में लग गया है । टीवी पर न्यूज देखते हुए अजीत नहीं गहरी सांस लेते हुए कहा धूम सही कह रहे हो या वो तो खुदा का शुक्र है किए तो केंद्र सरकार का पहले से ही दबाव था जिसकी वजह से राज्य सरकार और पुलिस को इस बात पर तत्पर एक्शन लेना पडा है । दूसरा इस आपको ज्यादा भडकाने से पहले ही दंगे फैलाने वाले जगहों पर कर्फ्यू लगाकर बुझा दिया है । वरना तो खुदा जाने के हाल होता है शहर का और इस शहर में रहने वालों का । अगर में जवाब पर यार इतना कुछ होने के बाद भी क्या हम लोग यही हाथ पर हाथ धरे खामोश बैठे रहेंगे? तो क्या कर रहे हैं? तुम ही बताओ, सुबह से शाम हो गई और यानी को जवाब ही नहीं दे रहे । याद अनिल कितना कुछ हो गया? और फिर भी तो ऐसे खामोश बैठा । कुछ बोलता क्यों नहीं है? टीवी में ही हो गया क्या अ जितने अनिल से पूछा जो टीवी पर न्यूज देख कर मैं जाने कहाँ हो गया था । यहाँ कुछ समझ नहीं आ रहा है । आखिर हम लोग करें तो क्या कर रहे हैं और क्या नहीं करें जिंदगी में पहली बार आज ऐसी स्थिति में पहुंचा साहब चुंदर जैसी हालत हो गयी है सब वैसे भी हम पुलिस स्टेशन तो जाकर देख ही चुके हैं । सुबह सुबह वहाँ के जैसे हालात है । हम जानी चुके हैं और कोई दूसरा रास्ता भी दिखाई नहीं दे रहे । हम पुलिस को कुछ बता नहीं सकते और हम लोग ऐसे भी नहीं रह सकते वरना अभी तो सिर्फ खुद जगह ही हालत बिगडने । अब अगर ये पूरा शहर दंगों की आग में झुलस गया तो उसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ हम लोग होंगे जो सब कुछ जानते हुए भी ऐसे चुपचाप बैठे हुए हैं । वैसे चलो मान भी लोग अगर प्रशासन के कंट्रोल की वजह से दंगा आप भी बढ के तो भी हमारा जमीन इस बात की इजाजत नहीं देता । देर राज ठाकुर के घर पर हुए हमले के पीछे कौन है ये बात हम लोगों को मालूम होते हुए भी हम लोग यूँ चुप चाप घर पर बैठे रह जाएगा । यार हम लोग एक काम नहीं कर सकते क्या अगर नहीं क्या? अनिल ने पूछा हम ये सबूत ले जाकर सीधे सीधे देवराज ठाकुर तक पहुंचा सकते हैं वो अपनी पावर का इस्तेमाल करके जो वैद अंसारी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है । अगर में अपनी बात आगे बढेंगे तेरे में देने पर की भी अकल नहीं अगर कुछ बोलने से पहले थोडा सोच तो लिया कर क्या कहने जा रहा है? अनिल के कुछ कह पाने से पहले ही अजित पीछे क्यों क्या हुआ मेरी अब कल को अगर राज चली गई है तो क्या कर और क्या अब मेरी अकल अपनी जगह ठिकाने पर ये तो अपनी कल की फिक्स है जब देखो सिर्फ खाने के बारे में ही सोचती हूँ अवैध साले सिर्फ खाने के बारे में ही तो सोचता हूँ मेरी तरह ऐसे ऊटपटांग की बातें तो नहीं सोचता अब ऐसा क्या ऊट पटांग कह दिया मैंने अबे साले तू ये तो सोच जरा अगर राम ने ये बात अगर देवराज ठाकुर तक पहुंचा दी तो ये बात पुलिस तक पहुंचाएगा भी या फिर खुद ही जुबैद अंसारी से इसका बदला लेने लग जाएगी । अजीत ने जवाब दे अजीत सही कह रहा है अगर हमे बात देवराज ठाकुर तक तो भूल कर भी नहीं पहुंचा सकते और उसके घर पर हुए हमले और उसकी पत्नी की हत्या के पीछे जो वैद अंसारी कहा था और मैं जिस बात के लिए हम लोग इतने चिंतित हैं, शहर में उससे भी बडा तूफान खडा हो जाएगी । देवराज ठाकुर इस शहर में वो आग लगाएगा जिससे इस शहर को शमशान में बदलने से कोई नहीं रोक पाएगा । अच्छा फिर हम लोग मीडिया को तो समझ सकते हैं । सबूत मीडिया का भी कोई भरोसा कहाँ पर यार ये भी तो नेताओं से मिले हुए होते हैं और उनके हिसाब से अपनी खबरें प्रसारित करते । कितनी बार तो पेड न्यूज की खबरें आती रहती है । साले, पुलिस और मीडिया सब नेताओं के चौखट पर दलाली करते तो फिर क्या सोचा है तो हम एक काम कर सकते हैं । हम लोग किसी भी पुलिस स्टेशन नहीं चलेंगे बल्कि अभी कमिश्नर ने जो फोन नंबर बताया है उस नंबर पर कॉल करके कमिश्नर से अपनी बात करेंगे । क्या कहूँ तो हम उनसे ये कहेंगे कि हमारे पास कोई ऐसा सबूत है जिनसे ये साबित होता है कि मैं ठाकुर की हत्या के पीछे किसका है । हमको सबूत आपको सौंपने के लिए तैयार हैं पर इन सब में हमारा नाम नहीं आना चाहिए तो तुम सबूत देने पुलिस हेडक्वार्टर जाओ नहीं । हम वहाँ पर जाना बिलकुल भी अफोर्ड नहीं कर सकते हैं । इस पुलिस का कुछ भी भरोसा नहीं हो सकता है कि वो लोग हमारी बातों पर यकीन ना करें और हमें अहमद के कत्ल के नाम नहीं गिरफ्तार करते । तो फिर कहाँ पर सौंपो के तुम पुलिस को सबूत? हम कमिश्नर को ऐसी जगह बुलाएंगे जहाँ पर हमें कोई भी खतरा नहीं । उन्होंने वहाँ पर बुलाकर ये सबूत सौंप देंगे और फिर वो जाने और उनका काम जान है । पर अगर कमिश्नर हमारी बताई हुई जगह पर आने के लिए राजी नहीं होगा तो फिर क्या करेंगे? तो देखेंगे फिर क्या कर सकते हैं पर सिर्फ इस वजह से तो हम आप पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकते ना पैसे भी गीता में भगवान कृष्ण ने कहा है कि दूसरे सपना कर्मकर कल की चिंता मत कर तो बस हम तो अपना कर्म करते जा रहे हैं । बाकी उसका फल तो ऊपर वाले के आते हैं । कुछ अनिल ने साथ लेकर ऍम तो फिर काम करने जा रहे हो तुम फोन अभी तो रात होने जा रहे । हम उसे कल सुबह फोन करेंगे । वैसे भी अभी फोन करेंगे तो भी वो अभी तो मिलने से आने से रहा । सही है या पैसे भी । इतनी रात को फोन करने से कोई फायदा नहीं । जरूरी नहीं फोन पर वो अभी बात भी करने के लिए फ्री पर ये बाबा कहाँ रह गए इतनी देर से इन सब चक्करों में खाना तो रही गया । बहुत भूख लग रही है । अजित ने अपने पेट पर हाथ रखते हुए कहा तुझे अभी भी खाने की सोच रही अगले साल कुछ तो शर्म गए । अगर नहीं उसे क्यों यार शर्म करने से क्या पेट की आग हो जाएगी । अगर ऐसा होता है तो शायद हम तू करने मुझे तो खाना खाने दे । अजीत ने जब आप शर्म दवाई करता है, जिसे कुछ लिहाज मेरे जैसे पेट को तो किसी का लिहाज ही नहीं तेरे को तेरे आ देना तो चुप हो जा । भगवान ऐसे कब तक इनकी महाबाद चलेगी? बाबा जल्दी करो और खाना लाओ नहीं । ऐसा ना हो कि इन की बातें सुन सुनकर में पागल हो जाऊँ । अनिल ने जोर से आवाज ला रहा हूँ बस एक दो घंटे और इंतजार कर ले अंदर से करतारसिंह की आवाज आएगी नहीं । अगले दिन सुबह ग्यारह बजे ॅ हाँ कौन बोल रहा है, मैं कौन बोल रहा हूँ इस बात को छोडिये । ये पूछे मैंने फोन किस लिए क्या? ना तो हम समझ सकते हैं कि आपने फोन किसने किया । पुलिस क्वार्टर गाय स्टेशन नंबर जारी इसलिए किया गया जिसपर जनता को इस बात के लिए आग्रह किया गया है कि वो अगर रीमा ठाकुर हत्याकांड के बारे में कुछ भी जानकारी रखते हैं तो उसे तो उसे पुलिस के साथ शेयर करेंगे । जी थे कि समझा आपने? मैंने भी ये फोन इसीलिए ही क्या हमारे पास को जैसे सबूत है जिससे यह साबित होता है कि इस हत्याकांड को किसने अंजाम लिया और इसके पीछे किसका हाथ है और इसके लिए मैं सिर्फ कमिश्नर साहब से ही बात करना पसंद करेंगे । देखिए कमिश्नर साहब, अभी तो इस समय बहुत बिजी है । आपके पास जो भी सबूत है वो हमें अभी फोन पर बता दीजिए या फिर उन्हें लेकर किसी नजदीकी पुलिस स्टेशन चले जाए या फिर यहाँ पुलिस हेड क्वार्टर में आ जाएगा । मैं इस बारे में सिर्फ और सिर्फ पुलिस कमिश्नर साहब से बात करूँ । वैसे भी कल शाम को कमिश्नर आपने खुद ही कहा था कि वो इस नंबर पर आने वाली ऍम कॉल को खुदा टाइम करेंगे । देखिए आपकी बात सही है पर कमिश्नर साहब बाहर किसी से बात नहीं कर सकते । कल शाम से लेकर अब तक इस तरह के बहुत से फोन यहाँ पर आ चुके हैं और आज बाल जानकारी देने वाला कमिश्नर साहब के फोन पर आते ही अपने निजी टुकडे सुनाने लग जाता है । इसलिए कमिश्नर साहब का सकता देश है की आने वाली आई कॉल की पहले हम अपने लेवल पर अच्छी तरह जांच करने, इसके बाद ही उन्हें कॉल कर बुलाया । इसलिए आपको जो भी कुछ कहना है मुझे चाहिए । मुझे जरूरी लगेगा तो आपकी कॉल कमिश्नर को जरूर फॅमिली जाएगी और मैं साॅस कमिश्नर से ही बात करूँ । इसलिए मेरी ये बात आप आगे कमिश्नर तक पहुंचा दीजिएगा । वैसे अभी ग्यारह बज कर पांच मिनट हो रहे हैं । मैं आपसे ठीके घंटे बाद यानी बारह बजकर पांच मिनट पर फिर से इस नंबर पर फोन करेंगे । और हाँ याद रखना । तब मैं सिर्फ और सिर्फ पुलिस कमिश्नर से ही बात करना पसंद करूंगा और किसी से नहीं । वैसे अगर तब भी उनके पास मेरी बात सुनने के लिए टाइम नहीं हुआ और वह लाइन पर नहीं आए तो फिर ये सबूत लेकर सीधे मीडिया के पास जाऊंगा और उन्हें बताऊंगा की पुलिस और पुलिस कमिश्नर दोनों कितने निकम्मे उन्हें में से ठाकुर के हत्यारे को पकडने में कोई दिलचस्पी नहीं । नमस्ते कहते हुए सिख बहुरूप धारण किए हुए अनिल ने फोन काट दिया और पीसीओ बूथ से बाहर आया । उसने बूथ वाले को फोन के पैसे दिए और फिर अपने लंबे कदम बढाता हुआ एक तरफ चल वहाँ से पैदल ही चलता हुआ वो पास में ही स्टेटिक पब्लिक स्नान करने जिसके गेट के बाहर पहले से ही अजीत एक बैंक के साथ मौजूद था । उसने आयोजित के हाथ से बैग लिया और दस मिनट के अंदर ही वो अपना सिख वाला बहुत शुरू याद कर एक नया रूप धारण करके वहाँ से बाहर आ गया । खेले पर गाडी उसने अभी भी बडी ही रखी हूँ लेकिन सर पर पगडी के बजाय एक जीना बना था जिसके ऊपर उसने एक दो फॅमिली वही समय हिप्पी लग रहा था । वहाँ से निकलकर वह फिर से अजित से मिला और वह दोनों धीरे धीरे टहलते हुए वापस से उस टेलीफोन उसकी तरफ चलने लगी । वो उस से थोडी दूर पहले ही हो गए और उन्होंने वहाँ का नजारा क्या घुस टेलीफोन बूथ को चार पांच पुलिस वालों ने घेरा हुआ उन्होंने एक नजर उनकी तरफ दौडाई और एक दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा । फिर वो दोनों वहीं पास में स्थितियाॅ । यहाँ पर अगर पहले से ही एक सीट पर मौजूद वो दोनों जाकर वहाँ पर बैठ गए । उनके बॅाय उनके लिए चाहे और समूह से रखे हैं । अगर ने उनके लिए पहले से ही चाय नाश्ते का ऑर्डर किया हुआ है । क्या बात है । सुनने तो हमारे लिए पहले थी चाय नाश्ते का इंतजाम किया हुआ है अजीत ने मुस्कुराते हुए मुझे मालूम था ना पहले जैसा भुक्कड कोई भी काम करने से पहले कुछ खाने के लिए पूछेगा तो बस यही सोचकर मैंने ऑर्डर कर दिया था अगर ने उसे मुस्कुराते हुए जवाब अबे साले जब देखो मेरे खाने के पीछे पडा रहता है । तेरी प्रॉब्लम के आए अजीत में नकली गुस्सा दिखाते हैं समय तुम लोग अभी भी शुरू मत हो जाना हमारे पास वैसे भी टाइम बहुत कम है । अनिल ने कहा फिर उसने अपनी बात आगे बढ सकें । अगर कितनी देर में पुलिस आ गई थी ऍम तुमने सही सोचा था । नाॅट के अंदर ही पुलिस वालों ने उस भूत को घेर लिया था और आसपास पूछताछ करने लग गए थे । आज करने का मतलब अब हमें जब भी फोन करना होगा पांच सात मिनट के अन्दर पूरी बात खत्म करनी होगी । अनिल ने कहा तो तुम सही कह रहे हो और ये पुलिस बिना साले जिसको पकडने के लिए मेहनत करनी चाहिए उसके लिए तो करते नहीं और बाकी फालतू के कामों के लिए इनसे चाहे जितनी दौड धूप करवा लो । अजीत ने कहा पुलिस वाले तीन जल्दी थोडी किसी पर आसानी से विश्वास कर लेते हैं । वैसे भी हम को पुलिस को सिर्फ सबूतों अपनाया और कुछ नहीं । पर इन लोगों को इस बात से कि हमले के पीछे किसका हाथ है । ये जाने से ज्यादा जरूरी ये बात जानना लग रहा है कि उनका नाम कौन सामने ला रहा है । अनिल ने कहा कि वैसे बहुत सही फोन करना जरूरी है, क्या हम लोग मोबाइल फोन से क्यों नहीं कर सकते? अनिल ने कहा ऍम इसलिए बोला था थोडा कम खाया कर और दिमाग का इस्तेमाल किया कर बस करने का । अब मैंने ऐसा क्या गलत बोल दिया? नहीं अजित हम अपना मोबाइल इस्तेमाल नहीं कर सकते है । मोबाइल के प्रयोग से पुलिस वाले हमारे बारे में आसानी से पता लगा लेंगे । दूसरा हमारे पास अभी इतना समय भी नहीं है कि एम चोरी का मोबाइल इस्तेमाल करें इसलिए हम पब्लिक बहुत सही इस्तेमाल करेंगे । माना आज मोबाइल का योग है । पर अभी भी राजनगर में दो सौ ढाई सौ पब्लिक तो है ही और पुलिस सिर्फ हमारी जानकारी के लिए इतने पब्लिक बूत पर अपने आदमी बैठा भी नहीं सकती । वैसे भी शहर का माहौल अभी खराब और पुलिस फोर्स की वैसे ही कमी अभी हमारे पास से चालीस मिनट है । अनिल ने अपनी घडी में टाइम देखते हुए कहा अजीत और अगर तुम दोनों अपनी घडियां मेरी गाडी से मिला लो, एक सेकंड का भी फर्क नहीं होना चाहिए । तुम दोनों माटुंगा वाले पीसी ऊपर जाओ । ठीक बारह बजकर आठ मिनट पर पुलिस हेड क्वार्टर के इस नंबर पर फोन लगा । अगर फोन बिजी मिले तो समझ लेना मेरी बात पुलिस कमिश्नर से हो रही है वरना फिर आगे की बात पुलिस से तुम लोग ही करोगे । हाँ वो तो ठीक है पर हम लोग इन शोर कैसे करेंगे कि हम पुलिस कमिश्नर से बात कर रहे हैं किसी और से नहीं । अजित ने पूछा फेल कर दी ना छोटी वाली बात । अबे साले इसलिए कहता हूँ खाने के बजाय कुछ काम पर भी ध्यान दे दिया । कर पुलिस कमिश्नर की आवाज इतनी बात तो सुन रखी हमने पहचानने में । आखिर क्या प्रॉब्लम है अगर नहीं हसते हुए अभी साले वो फोन पर सुनी आवाज थोडी अलग सुनाई देती है ना अ जितने झेंपकर जवाब दे अब कहाँ अलग होती है क्या करीना कपूर की आवाज सैफ अली खान की बन जाएगी तू ना अपने दिमाग के साथ साथ अपने कानों का अभी इलाज करवा ले अब अगर ने उसका मजाक उडाते हुए कहा प्लीज मैंने बात हो तुम टाइम और जगह तो देख लिया करो कब कहा की आवाज कर रहा हूँ । वैसे भी अब हमारे पास बत्तीस मिनट ही बचे इसलिए जल्दी से बुधवार काम पर शुरू हो जाओ । कहते हुए अनिल अपनी जगह से वोट गया और ऍम से बाहर जाने उसके पीछे पीछे आजीत और अगर भी अपनी सीट से खडे हो अजित देने से एक बात कहनी थी यार राम मत मानना अगर नहीं आप उन क्या बात है क्या और समोसे के पैसे दे दिए हो कहते हुआ अगर जल्दी से रेस्टोरेंट का गेट खोलकर बाहर आगे अभी साले अगर तू कहते हुए उसमें पीछे आने होगा अजित कहते हुए इसके पीछे आने को हुआ ऍम के एक वेटर ने उसकी कमीज का कॉलर पकडकर हो जाता है । तीन चाय और समोसे के पैसे पीछे कहते हैं बात देगा हूँ मैं पैसे नहीं दूंगा मेरे बाप पहले मेरा कॉलर तो चोर गीत ने कहा और अपनी पैंट की जेब से पर्स निकालते हुए बढता है साला घर फिर कुछ छोडूंगा तो नहीं मैं ये पैसे अगर सूद सहित तेरे से वसूल नहीं की है । मेरा नाम भी अजीत नहीं उधर आगे जाता हुआ अनिल उनकी हरकत देखकर मुस्कुरा उठा । बारह बज कर पांच मिनट कमिश्नर साहब से बात करवाई । कमिश्नर तो नहीं है आपको जो कहना हो यहाँ हम से कह दीजिए हो लगता है तुम्हें पहचाना नहीं मैं ही हूँ जिसमें एक घंटे पहले भी फोन करके कहा था मुझे साॅस कमिश्नर सही बात करने अन्य किसी से नहीं हो तुम बोल रहे हो । ठीक है एक मिनट होल्ड कर लूँ कुछ सेकेंड बार हाँ बोलो क्या कहना चाहते हो मैं कमिश्नर बोल रहा हूँ दो मॅन वक्त बर्बाद कर रहे हो मेरा भी और खुद अपना भी मैंने पहले ही कह दिया था की मुझे कमिश्नर से बात करनी है तो सिर्फ और सिर्फ कमिश्नर से ही बात कर रही है पर लगता है आप लोग बिल्कुल भी सीरियस नहीं और हेमा ठाकुर के कातिल को पकडने के लिए जो किसी को भी फोन पकडा अब चुप चाप कमिश्नर को फोन दे रहे हो या फिर मैं इधर से फोन का तो वैसे अगर फोन पर मुझे ज्यादा देर तक उलझाए रख कर पहले की तरह मेरी लोकेशन पता करना चाहते हो और वहाँ पर आपने पुलिस के आदमी भेजने का इरादा रखते हो तो कोई फायदा नहीं है ना आज मोबाइल का जमाना है और हर आदमी एक नहीं दो दो मोबाइल रखता है और फिर भी राजनगर में पीसीओ की कमी नहीं है । अब अगले साल में तुमने कमिशन को फोन नहीं दिया तो मैं फोन कर दूंगा । फिर मेरा आदमी दूसरे किसी पीसीओ से फोन में लाएगा । वैसे भी मैं तुम लोगों से सिर्फ पांच मिनट बात करूंगा जिसमें से दो मिनट तुम लोग बर्बाद भी कर चुके हो । इसलिए समझदारी से कम लोग और असली पुलिस कमिश्नर को फोन दे दो वरना मजबूरन मुझे सबूत लेकर मीडिया के पास जाना पडेगा । तब तुम लोगों की जो फजीहत होगी तब जाकर जाए तो मैं मेरी बात समझ में आ जाएगा । कुछ पलों की चुप्पी के पश्चात अनिल को फोन पर एक नई आवाज सुनाई चलो हम राजनगर पुलिस कमिश्नर मिश्रा बोल रहे हैं । गांव क्या कहना चाहता हूँ ये हुई ना बात । अब मैं सही कमिश्नर से बात कर रहा हूँ । अब बातों में टाइम हम नहीं बल्कि तो मैं कर रहा हूँ । वैसे भी तुम ने कहा था कि तुम्हारे पास बस सिर्फ तीन मिनट बचे तो सॉरी सर देखिए मेरे पास कुछ ऐसे सबूत हैं जिनसे ये साफ पता चलता है कि देवराज ठाकुर के घर पर हमला किसने किया था और साथ ही साथ ये जानकारी भी है कि वह हमला करवाने के पीछे किसका हाथ है । तो तुम ये जानकारी तो किसी भी पुलिस स्टेशन में लेकर जा सकते हो । मुझसे बात करने की क्या जरूरत है? जी बिल्कुल लेकर जा सकता हूँ और वह सबूत लेकर गया भी था । एक पुलिस स्टेशन पर वहाँ जाकर मैंने जो पुलिस के आला देखें तो बात तो अगले ही पल बिना कुछ कहे उल्टे पैर वापस आना पडा । साले बिना रिश्वत दिए कुछ सुनने के लिए तैयारी नहीं होते और फिर उसके बाद किसी और पुलिस स्टेशन जाने की हिम्मत नहीं हुई । वैसे ये बात आप भी अच्छी तरह से जानते हैं कि आपके सभी पुलिस स्टेशन के यही हाल है और वहाँ पर बैठे हुए तमाम के तमाम पुलिस वाले सिर्फ राजनेताओं और मुजरिमों के तलवे जाते । आम आदमियों को नाली के कीडे समझते हैं । इसलिए मैं नहीं चाहता कि वह सबूत किसी ऐसे पुलिस वाले के आप मेरे दू जो मुजरिमों को पकडने के बजाय उल्टा सबूत उन्हें मुजरिमों के हवाले कर देंगे । तुमने हमें पुलिस स्टेशन की बुराई करने के लिए फोन किया है या फिर रीमा ठाकुर हत्याकांड पर कुछ प्रकाश डालने के लिए फोन किया है जी वही मैंने रीमा ठाकुर हत्याकांड के सबूत ही आपको बताने के लिए फोन किया है । तो फिर बेकार की बातों में समय खराब करने के बजाय तो ये बताओ क्या सबूत है तुम्हारे पास? मेरे पास एक ऐसी चिट्ठी है जो कि कातिल के नाम लिखी गई है जिसमें उसने ये मेंशन किया हुआ है कि देवराज ठाकुर को खत्म कर दो । मेरा मतलब है केलर के नाम देवराज ठाकुर की सुपारी वाली चिट्ठी है । कातिल का निशाना देवराज ही था । वैसे ये अलग बात है कि कातिल की चलाई हुई गोली से देवराज ठाकुर के बजाय उसकी बीवी की हत्या हो गई । जिस आदमी ने वह चिट्ठी तैयार की है और जिसके द्वारा वो चिट्ठी भेजी गई थी मैं उनके नाम आपको बता सकता हूँ । पर चिट्ठी के जरिए बाकी के सबूत आप लोगों को ही तलाश करने होंगे और चिट्ठी उधर से कमिश्नर मिश्रा के बढ बढाने की आवाज आएगी । ठीक है तो वो चिट्ठी लेकर यहाँ पुलिस हेडक्वार्टर आजाओ हमारे पास कमिश्नर नहीं अनिल से का सॉरी सर मैं वहाँ पुलिस हेड क्वार्टर भी नहीं आ सकता । क्यों नहीं आ सकते अगर तुम कानून की मदद करोगे तो कानून तुम्हारा एहसानमंद रहेगा । नहीं नहीं आ सकता है बस इतना समझ लीजिए । मेरी ऐसी कुछ मजबूरी है कि मैं वहाँ पर नहीं आ सकता है तो हम किसी पुलिस स्टेशन में नहीं जाना चाहते हो और ना ही यहाँ मेरे पास आना चाहते हो तो फिर बात कैसे बनेगी? सबूत लेकर मैं आपके पास नहीं आऊंगा बल्कि सबूत लेने के लिए आपको मेरे पास आना होगा । मैं आपको वो सबूत कहीं ऐसी जगह पर दूंगा जहाँ पुलिस की परछाई भी ना पडती हो । कहाँ पर कहीं पर भी? वैसे आप मेरा टाइम खत्म हो रहा है । मैं दोपहर के ठीक दो बजे आपको वापस से फोन करूंगा । हो सके तो आप मुझे अपना मोबाइल नंबर दे दीजिए ताकि आपसे बात करने के लिए मेरा फिर से टाइम खराब नहीं हो । उधर से नंबर बताया गया जिसे अनिल ने अपने पास मौजूद मोबाइल में सेव कर ऍम मैं आपको ठीक दो बजे फोन करुँ । वैसे अभी के लिए नमस्ते कहते हुए अनिल ने फोन काट दिया और एसटीडी बूथ से बाहर आ गया । वहाँ से वो पैदल एक तरफ चलने लगा और थोडी दूर जाने के बाद अपनी जेब से मोबाइल निकाला और अजीत को फोन मिलाया । कम हो गया । मैं यहाँ से निकल रहा हूँ तुम दोनों । मुझे माटुंगा में वह पीजा पार्लर है । वहीं पर मिलना हम वही पर इस बात के लिए डिस्कशन करेंगे कि कमिश्नर को केस जगह बुलाकर वो चिट्ठी सौंपनी और फिर वही बूत से कमिश्नर को फोन लगाएंगे । कहकर उसने मोबाइल काट दिया और एक टैक्सी ऍम आपका अंदाजा बिल्कुल सही था । नेताजी अभी थोडी देर पहले पुलिस हेड क्वार्टर में एक फोन कॉल आया था जिसमें ये कहा गया था कि वह जानता है कि देवराज ठाकुर के घर पर हुए हमले में किसका है और वह हमला किसके इशारे पर हुआ है । पुलिस कमिश्नर अपने कैबिन में बैठा हुआ फोन पर जो वैद अंसारी से बात कर रहा था तो मैं कैसे पता कि ये वही इंसान है जिसकी हमें तलाश है नेताजी वैसे तो पुलिस हेड क्वार्टर के हेल्प लाइन पर कई फोन आए थे जिसमें देवराज ठाकुर के घर पर हुए हमले की जानकारी देने की बात कही गई थी । पर जैसा क्या आपने कहा था चिट्ठी का जिक्र सिर्फ वही करेगा जिसके पास वो होगी और वो जिक्र उसी एक आदमी ने किया था । तुमने उन्हें किसी पुलिस स्टेशन जाने आॅफ पुलिस हेड क्वार्टर में आने के लिए नहीं कहा । कहा था नेताजी कहना भी थक आखिर डिपार्टमेंट में किसी को इस बात को लेकर थोडा सा भी शक नहीं होना चाहिए था । किए कमिश्नर अपना पर्सनल मोबाइल नंबर कैसे डायरेक्ट एक आम आदमी को दे रहा है और जैसा क्या आपने पहले ही बता दिया था उन्होंने आने के लिए मना कर दिया । उन्हें इस बात का अंदेशा सता रहा होगा कि कहीं हम उन लोगों को ही अहमद की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार नगर में अच्छा । फिर उसने बताया कि वहाँ पर सबूत सौंपे का अभी तो नहीं । नेताजी पर उसका दो बजे फिर से फोन आएगा और वह जगह बताएगा जहाँ पर वह पुलिस को सबूत देने वाला अच्छा ठीक है । जब वो जगह बता दें तो उसकी खबर तुरंत मुझे करना है । बाकी का काम मैं देख लूंगा । वो तो ठीक है नेताजी पर आप इतनी तकलीफ क्यों कर रहे हो? आपका हो तो उन लोगों को अहमद के कत्ल में ही गिरफ्तार कर लेते हैं । उन्हें फांसी की सजा दिलवाने की जिम्मेदारी मेरी खिलाफ अपनी परेशानी से आजाद हो जाएंगे । एक नंबर के बेवकूफ हूँ । अगर उन्हें पुलिस द्वारा गिरफ्तारी करवाना होता तो मैं इतना परेशानी के होता । मना तो उन्होंने अहमद के कत्ल के इल्जाम में गिरफ्तार कर लेंगे और कत्ल की सजा दिलवाने के लिए तो तो मैं उन्हें कोर्ट में पेश करना ही पडेगा जहाँ पर हो सकता है कि तुम उन्हें सजा दिलवाने में कामयाब भी हो जाओ । पर इस तरह से गिरफ्तार होने और अदालत में अहमद के कत्ल के मुकदमे के दौरान वो अदालत में ये बता सकते हैं कि देवराज ठाकुर के घर पर हुए हमले में मेरा हाथ है । इसलिए पुलिस उन्हें फंसाने की कोशिश कर रही है जो मैं बिल्कुल भी अवॉर्ड नहीं कर सकता हूँ । चलो ये मान भी लिया कि जज को उनकी बात पर यकीन नहीं भी आए और वो उसे केस से भटकाने की कोई कोशिश ही समझे और दूसरा कोई और व्यक्ति भी उनकी बात पर यकीन नहीं कर रहे हैं । पर ये बात अगर देवराज ठाकुर तक पहुंच गए तो उसे जरूर यकीन हो जाएगा कि वो लोग सच बोल रहे हैं और उसे ज्यादा अभिषक हुआ कि उसके घर पर हुए हमले के पीछे मेरा है तो उसका काम तमाम होने के बजाय ये भी हो सकता है कि उससे पहले ही वो मेरा ही काम तमाम करवा देंगे । आगे वो भी कोई काम शक्तिशाली नहीं है । राजनीति में जितना मुकाम मैं रखता हूँ उतना ही मुकाम भी रखता है । आप ये बात कह तो ठीक रहे नेताजी पर हम उन लोगों को गिरफ्तार करने के बजाय उनका एनकाउंटर भी तो कर सकते हैं और उन्हें मार गिरा सकते हैं, जरूर कर सकते हो । और यहाँ पर भी अभी एक पेट फसा हुआ है । हम नहीं जानते की वो लोग कितने एक हैं, दो या उससे भी ज्यादा है । अब अगर तुम्हारे एनकाउंटर में से उन लोगों में एक भी बच गया तब भी उन्हें इस बात का भी यकीन हो जाएगा कि तुम भी मुझ से मिले हुए तो फिर वो बचा हुआ आदमी सीधे दे राज ठाकुर के पास जा सकता है और उसे सारी बात बता सकता है । इसलिए मुझे पुलिस की कोई हेल्प नहीं चाहिए । इस मामले को मेरे आदमी देख लेंगे तो तो सिर्फ वो टाइम और जगह बताओ जहाँ पर जब वो लोग सबूत लेकर आने वाले पर अगर वो देवराज ठाकुर को ही सबूत दे दे तो उन्हें अगर देवराज को सबूत देने होते तो कब के दे चुके होते हैं । पर पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार करने, एनकाउंटर करने की कोशिश में वो जरूर उसके पास जा सकते हैं । इसलिए अपना दिमाग लगाने के बजाय अभी भी तो मैं जितना कहा है सिर्फ उतना ही करो । ठीक है नेता जी आप जैसा कहते हैं वैसा ही करूंगा । पर कहते हुए कमिश्नर ने अपनी बात अधूरी छोड दे बताया बताया है तो मैं तो मारा इनाम मिल जाएगा । कहते हुए उधर से जुबैर अंसारी ने फोन काट दिया । तो अब कमिश्नर को कहाँ बुलाने का इरादा है? यार अगर ने अनिल से पूछा इस समय वो तीनों दोस्त माटुंगा में स्थित पिज्जा पार्लर पर बैठे हुए पिज्जा खा रहे थे । दोपहर का समय होने के कारण पिज्जा पार्लर में इस समय ज्यादा भीड नहीं थी । आधे से ज्यादा हवाले समय खाली था । वो तीनों पिज्जा पार्लर के एक कॉर्नर में ऐसी जगह बैठे हुए थे जहाँ आस पास की सभी सीटें खाली थी और उनकी बातों पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है । फिर भी सावधानी के तौर पर वो इतनी आवाज में बातचीत कर रहे थे कि उनकी बातें किसी अन्य को सुनाई नहीं दे । इस समय उन्होंने कोई भी मेकप नहीं कर रखा था । उन्हें ऐसी जगह बुलाना होगा जहाँ पर पुलिस चाहकर भी कोई शदाकत नहीं कर सके और अगर वह ऐसा कुछ करना भी जाए तो हम ने पहले ही रोक सकें । तुम्हें लगता है कमिश्नर का ऐसा कोई ज्यादा होगा, लगता तो नहीं है । पर यार वो पुलिस का कोई भरोसा भी तो नहीं है । क्या पता वो हमें ही बलि का बकरा बना दे और अहमद के कत्ल के इल्जाम में गिरफ्तार कर लें । अनिल ने चिंतित स्वर में कहा, ये बात तो तुम सही कह रहे हैं अजित हम दोनों ये सबूत लेकर पुलिस को सौंपेंगे और अगर तुम दूर रहकर हम पर नजर रखी होगी, हम दो होंगे तो हम पुलिस कमिश्नर को बोल देंगे की पुलिस के बीच सिर्फ दो लोग हमसे आकर मिले । अब अगर तो में पुलिस का कैसा भी खतरा महसूस हो जैसे अगर उन दो लोगों के अलावा कोई तीसरा पुलिस वाला या कोई और आदमी भी हमारी तरफ आता हुआ दिखे या फिर दूर से पुलिस वाले हमारी घेराबंदी करने की कोशिश करें तो मेरे मोबाइल पर दो दो रिंग की तीन कॉल करोगे । वैसे मैं अपना मोबाइल वाइब्रेशन मोड पर ही रखूंगा ताकि सिर्फ मुझे ही तुम्हारी कॉल का पता चल सके । तुम्हारी कौन आने पर हम पुलिस के उन आदमियों को किसी भी बहाने में उलझाए रखेंगे । बरतो में दो मिनट के अन्दर अपनी गाडी वहाँ पर नहीं कराना होगा । वहाँ आकर तुम स्मोक वाले बम फोड रहे और उसके धुएँ में तो मा में वहाँ से निकाल कर लेकर जाओ । वो तो ठीक गया पर तुमने अभी तक नहीं बताया कि पुलिस से आखिर में लोग का जब कि हमारे पास ज्यादा टाइम भी नहीं बचा है अगर नहीं गाडी में टाइम देखते हुए हम उन्हें शास्त्री फुटबॉल स्टेडियम के दक्षिण दिशा वाले गेट की तरह बुलाएंगे जो यहाँ से दस किलोमीटर दूर है । वैसे भी वो स्टेडियम सिर्फ गर्मियों में ही आबाद रहता है । आजकल तो वह सुनसान पडा हुआ है और उसमें अभी तो सिर्फ कबूतर ही फुटबॉल खेला करते हैं । दक्षिण दिशा वाले गेट की तरफ सामने से जो रोड जाती है उसके किनारे से तो हम पर और दूसरी दिशा से किसी आने वाले पुलिस वाले पर आराम से नजर भी रख सकते हैं । जगह तो तुमने ठीक बताइए हैं वहाँ से निकलने में हमें ज्यादा प्रॉब्लम भी नहीं होगी । पढाई खतरा फिर भी हम पर बना रहेगा । अगर निकाल क्या वहाँ आने के लिए दो तरफ से सडक है । अगर तुम दोनों एक साथ रहोगे तो मैं सिर्फ एक जगह से ही आने वाले पर नजर रख सकता हूँ । और अगर पुलिस दूसरे रास्ते से आई तो बडी प्रॉब्लम हो जाएगा । ये तुमने अच्छा पॉइंट उठाया । मेरा तो इस तरह ध्यान ही नहीं गया था । ठीक है, ऐसा करते हैं । मैं अकेला जाकर उन पुलिस वालों से मिलूँ । अजीत सडक के एक तरफ से तुम पुलिस के आने पर नजर हो गए और दूसरी तरफ से अगर तुम पुलिस के आने पर नजर अनिल ने जवाब यही ठीक लाएगा । पर तो उन्होंने अकेले हैंडल कर तो लोगे ना तो मैं भी चिंता मत करो । मैं उन लोगों को आराम से हैंडल करते हैं । पुलिस को सबूत देने के लिए मैं अकेला ही काफी तो मैं इस बात का खयाल रखना । कहीं वो तुम लोगों से बचकर मुझे अपने जाल में, ना फसल उस की । तुम बिल्कुल भी चिंता मत कर । हम लोग अच्छी तरह से ध्यान रखेंगे । स्वागत अजीत ने अगर से मुस्कुराते पूछा भाई मैं तो अपनी तरफ से पूरा ध्यान रखोगे तो तेरह पता नहीं मुझे कब तो ये भूख लग जाए और निगरानी छोडकर खाने पर बैठकर अगर ने हस्ते जवान दिखेगी । अब साले इतना भी बुक कर नहीं दोस्तों के लिए सारे जन्म भूखा रह सकता हूँ । समझे अजीत ने उत्तेजित होते हुए बिना मुस्कुराए ही जानता हूँ यार अच्छा बातें बहुत हो गई । अभी हम निकलते हैं । वैसे भी डेढ बज चुका है और दो बजे हमें कमिश्नर को फोन करके काफी तैयारियाँ भी करनी है । अनिल ने अपनी गाडी में टाइम देखते हुए यार अभी तो पूरा आधा घंटा बडा कमिश्नर को फोन तो हम सामने वाले बहुत सही करने वाले हैं । तब तक क्यों ना एक पिज्जा हो जाएगी जितने का भुगतान अभी अभी एक बडे पिज्जा में से तो आधा तो तू नहीं खाया और कितना खायेगा साले आधा कम खाया है फिर बराबर तीन भी ठीक है और दो अनिल लिखा है फॅालो बना रहा है । हम दोनों ने दो दो लिए और उन्हें चार खाएँ । समझा तो मुझ पर ऐसा झूटा इल्जाम मत लगा । मैंने सिर्फ तीन ही सीखा है चार तीन चार उनकी ये लोग जो देखकर अनिल मुस्कुरा था । फिर उसने मुस्कुराते अरे तुम दोनों लडाई हमारी इन दोनों ही चाहिए । मतलब दोनों ने चौक करेगा । मतलब ये ऍम तीन का है और अगर तुम्हें दो खाएँ । मतलब मतलब ये घायल कि तुम्हारे जैसे का तीसरा पीस अजीत ने नहीं बल्कि मैंने खाया । हर बार तो तीन तीन खाओ और मैं तो ठीक हूँ ये कोई जरूरी तो नहीं है ना? ऐसे हाँ क्या तो आदेश ऍम अनिल ने अपने होता हूँ बाद अपनी जीत जाते हैं । अब इस साल तो तेरी अदालत थी और मैं खाली पीली अजित पर इन राम लगाने लग गया था यहाँ रजत स्वाॅट तो ऐसा तो एक पिज्जा और लिया उसके पैसे मैं दे दूंगा अगर नया जिससे पकाना नहीं बाद में मुकदमा जाना अपनी बात से पक्का यार चाय तो कसम उठा ले ऍम चलो कसम खाई है तो ठीक है कहते हुए आयोजित अपनी सीट के उठा और पे जा लेने काउंटर की तरफ चल पर अनिल अजगर की जगह नहीं है, मुझे हूँ ।

अध्याय 6 - D

था नेताजी उसका ठीक दो बजे फोन आ गया था । उसने सबूत देने के लिए तीन बजे शास्त्री फुटबॉल स्टेडियम के दक्षिणी दिशा वाले गेट की तरफ बुलाया है । गॉड नेताजी अगर आप चाहो तो मैं अभी भी उन लोगों को गिरफ्तार करवा सकता हूँ या उनका एनकाउंटर करवा सकता हूँ । नहीं तुम से एक बार कह दिया ना तो उनको कुछ नहीं करोगे तो हमारा काम अभी यहीं पर खत्म होगा । अब आगे जो भी करना है वो मेरे आदमी कर लेंगे । ठीक है नेताजी जैसी आपकी मर्जी कहते हुए पुलिस कमिश्नर ने फोन रख दिया, पर वह यह नहीं जानता था कि उसकी नेता जुबैर अंसारी से हो । ये तमाम की तमाम बातें उसके ऑफिस में लगे हुए गुप्त ट्रांसमीटर से किसी और ने भी सुन ली है । दोपहर के पौने तीन बजे शास्त्री फुटबॉल स्टेडियम के दक्षिणी दिशा वाले गेट के बाहर एक चाय की खडी थी, जो गर्मियों और शहर के स्कूल कॉलेज के मध्य होने वाले फुटबॉल टूर्नामेंट के समय खूब चलती थी । पर इस समय धनी पर सिर्फ दो ही ग्राहक थे जिसमें एक अनिल था, जो कि वहाँ एक बेंच पर बैठा हुआ चाय पी रहा था । इस समय उसके चेहरे पर हल्की हल्की दाडी थी । होटल के ऊपर एक पतली सी रेखा वाली लंबी मुझे थे । सर पर भूरे रंग बालों कि वेट पहन रखी थी । उसने ब्लैक कलर के हाथ, बाजू की टी शर्ट और ब्लैक कलर की ही किसी हुई जींस पहन रखी थी । उसके दाय बाजों पर शेर का टैटू बना हुआ था । धडी पर दूसरी बेंच पर बैठा हुआ जो दूसरा व्यक्ति था वो एक साधारण शक्लोसूरत का आदमी था जिसने इस समय सफेद शर्ट और ब्लैक पैंट पहनी हुई थी । सफेद शर्ट के गले पर उसने काले रंग की टाई पहन रखी थी । बेंच पर उसने अपनी साइड में एक ब्रीफकेस रखा हुआ था जिससे देखने में वो किसी कंपनी का एक सेल्स में नजर आ रहा था । वो इस समय सिगरेट पी रहा था और धीरे धीरे चाहेगी जिसकी हम आ रहा था । स्टेडियम के सामने की तरफ एक रोड बनी हुई थी । स्टेडियम की दीवारों के साथ पैदल चलती हुई वह रोड दोनों तरफ भी जहाँ पर खत्म हो रही थी वहाँ पर तिराहों वाली रोड मिल रही थी । मतलब रोड के दोनों तरफ आगे सीधे जाने के बजाय दाये बायें जाने के लिए रोटी स्टेडियम की वह दीवार लगभग चार सौ पाँच सौ मीटर लंबी थी और उसके दोनों सीटों पर भी चाय की थडियां बनी हुई थी । दोनों तरफ के बिल्कुल बीच में स्टेडियम कमेंट गया था जहाँ दो ही धनियाँ हो जिसमें एक तो वह चाय की थी जिसपर अनिल चाय पी रहा था और दूसरी तली अभी बंद थे । उसके दायें किनारे पर बनी हुई है थडी पराजित खडा खडा सिगरेट पी रहा था । वहीं दूसरे किनारे पर बनी हुई धडी पर अगर चाय पी रहा था एक नजर देखने में तो वह दोनों बडे लापरवाह नजर आ रहे थे पर उनकी नजर अपने सामने तिराहे वाली सडक पर ही थे जहाँ से गुजरकर किसी भी समय पुलिस का कोई वाहन अनिल की तरफ जाने वाला था । शास्त्री स्टेडियम कभी राज्य ही नहीं बल्कि देश का सबसे बेहतरीन फुटबॉल स्टेडियम हुआ करता था । वहाँ पर कभी भारत और फ्रांस का एक मैत्री फुटबॉल मैच का आयोजन किया गया था जिसको देखने के लिए भारत के प्रधानमंत्री खुद आये थे । तब ये लगा था राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से आने वाले दिनों में भारत भी अन्य देशों की तरह फुटबॉल की एक शक्ति बंकरों मिलेगा परंतु वक्त के साथ साथ सब कुछ बदल गया । कुछ तो राजनीति की वजह से और कुछ देश के युवाओं में क्रिकेट का ज्यादा ही बढता हुआ नशा धीरे धीरे फुटबॉल को सपने भुला दिया और वह स्टेडियम सिर्फ स्कूली बच्चों के खेलने का ही साधन बन कर रह गया था, जो सिर्फ या तो उनकी स्कूल की छुट्टियों में आबाद होता था या फिर उन सभी या फिर जब कभी स्कूल या कॉलेज के टूर्नामेंट होते थे तब आबाद होता था तो वहाँ तो हमारा गुजारा कैसे चल रहा है? अनिल ने समय काटने के उद्देश्य से चाय की धनी वाले से पूछा है क्या मतलब सब्जी मतलब ये प्यारे की तुम्हारी थोडी पर सिर्फ दो जन है और कोई तो है नहीं चाय पीने वाला फिर तुम्हारा गुजारा कैसे चलता है? बस साहब जी चली जाता है किसी तरह से सुबह सुबह यहाँ पर घूमने के लिए कुछ लोग आते जाते हैं, वो पी लेते हैं कभी कभी दिन के समय में स्कूल कॉलेज के लौंडे लौंडिया आते हैं एकांत तलाश करने के लिए वह भी चाय सिगरेट पीते हैं और फिर आप जैसे लोग तो है ही पीने वाले पर यार फिर भी कितना कमा लेते हो, दिन भर है बस खर्चे निकालकर यही कोई एक सौ पचास दो सौ रुपये साहब जी पर इतनी महंगाई में इतने कम पैसों में कैसे काम चलता है? तो अब साहब जी चली जाता है किसी तरह वैसे भी ये जगह छोडकर अब कहीं और तो जा नहीं सकते ना? क्यों भाई ऐसा क्यों? अब साहब जी माना अभी यहाँ लोग काम आते हैं पर गर्मियों के मौसम में और स्कूल कॉलेज के खेलों के टूर्नामेंट के टाइम यहाँ पर बहुत ज्यादा भीड जमा हो जाती है । तब साहब जी रोज की हजार पंद्रह सौ की कमाई हो जाती है । अब अगर अभी ये जगह छोड कर चले गए तो कल कोई दूसरा यहाँ आकर इस जगह पर कब्जा करने का । फिर तो उस कमाई से भी हाथ धोना पड जाएगा ही । बात तो ठीक कह रहे यार कहते हुए अनिल एकदम से चौंक पडा । उसकी दायीं जेब में रखा हुआ मोबाइल वाइब्रेट करने लग गया था । उसने जेब से मोबाइल निकाला । उसमें अजगर का ऐसे मैं आया हुआ था । एक पुलिस जीत इधर ही आ रही है । संदेश पढते हैं । वो खडी से उठा और अपनी जेब से सिगरेट का पैकेट निकाला और धडी पर एक डोर के सहारे बंदे हुए लाइटर की सहायता से वो सिगरेट सुलगाई और थोडी से थोडा दूर जाकर सिगरेट पीते पीते टहलने लगा । उसने देखा उसके दायां तरफ से एक पुलिस जीप उस की तरफ ही चली आ रही है । वो उसके अपने पास आने का इंतजार करने लगे । पुलिस की जीत वहाँ चाय की थडी पर आकर रुक गई । उसमें से राजनगर पुलिस की वर्दी में एक इंस्पेक्टर और एक हवलदार बाहर निकला । इंस्पेक्टर ने आकर चाय वाले से पूछा है । उससे बात करने के बाद इंस्पेक्टर ने फिर वहीं बेंच पर बैठे हुए सेल्स मेन टाइप के बंदे से कुछ बातें करने लग गया । आखिरकार उसने फिर सिगरेट पीते हुए अनिल की तरफ नजर दौडाई । इंस्पेक्टर से नजरें मिलते ही अनिल फॉरेन दूसरी तरफ देखने लगा । इंस्पेक्टर में कुछ सोचा और वह अनिल की तरफ चलना है । उसके पीछे पीछे उसका हवलदार भी आने लगा । ऍम मैं अनिल ने अपने सीने पर अंगूठे से ज्यादा करते हो । हाँ तो जीत कहीं तो मैं कमिश्नर साहब को फोन किया था । इंस्पेक्टर ने पूछा मैंने फोन और वो भी पुलिस कमिश्नर को नहीं नहीं । मैंने तो कोई फोन नहीं किया । आपको जरूर कोई गलत फहमी हुई है । मैं तो यहाँ सिर्फ चाय पीने के लिए आया था । आप प्लीज अनिल घबराने का शानदार अभिनय करते हुए अपनी गर्दन इंकार में हिलाते हुए लगातार बोलता है । बस बस जो हूँ कितना बोलो । इंस्पेक्टर ने उसे डांटते हुए कहा । फिर अपनी बात आगे बढाई । किसी ने भी फोन नहीं किया । लगता है फिर से कोई से कॉल करके पुलिस वाले को परेशान कर रहा था । आजकल ऐसी कॉल बहुत आने लग गई है । बट बढाते हुए इंस्पेक्टर ने अपना सर्व निराशा में लाया और फिर इधर उधर देखना उसे उन दोनों के अलावा दूसरी ओर कोई भी नजर नहीं आए । उसने अपनी कलाई घडी में टाइम देखा और वापस से अपनी जीत की तरफ जाने लगा । तभी पीछे से अनिल ने आवाज लगाई इंस्पेक्टर साहब फॅमिली सुनी । इंस्पेक्टर ने पीछे मुडकर देखा और वापस मिल के पास अगर पूछेगा हाँ बोलो मैं नहीं कमिश्नर साहब को फोन मिलाया था । पर जब थोडी देर पहले मैंने तुमसे पूछा था इस बारे में तब तो तुमने साफ मना कर दिया था । ऐसा क्यों किया तुमने? वो सर मैं सिर्फ ये देखना चाहता था कि कहीं पुलिस ने मेरे लिए कोई जानता नहीं बिछाया । अरे तो तुम्हारे लिए जाल क्यों बचाएंगे? मेरे भाई तुम कोई मुजरिम थोडी ना हो तो इस राज्य और देश की सेवा कर रही हूँ जो पुलिस को किसी वारदात का कोई सबूत देने जा रहा हूँ । क्या आपको नहीं पता है आपको किस चीज के सबूत चौपडा हूँ? कमिश्नर साहब ने आपको कुछ भी नहीं बताया गया था । नहीं भाई कमिश्नर नहीं तो हमें सिर्फ यही कहा था कि किसी अहम केस के लिए इस जगह पर पुलिस का कोई मुखबिर सबूत देने वाला है । अब कमिश्नर साहब से ये पूछने की हिम्मत केस में कि सबूत के इसके से रिलेटेड है और पुलिस का मुखबिर कौन है? जो सीधे सीधे पुलिस कमिश्नर से ही बात करता हूँ, वो तो है दो भाई क्या सोच रहा हूँ, जल्दी से सबूत निकालकर हमें दे दो ताकि तुम भी फिट हो जाओ और हम लोग भी जल्दी से सबूत लेकर कमिश्नर के पास चले जाएगा, देता हूँ । एक मिनट रुकिए कहते हुए उसने अपनी जीन्स के पीछे की पॉकेट में हार डाला । तभी उसे अपनी जीन्स की दायीं वाली पॉकेट में कम्पन होता हुआ महसूस हुआ जो कि दो दो की रिंग में तीन बार हुआ । अनिल तुरंत समझ गया कि अजीत यादगर किसी भी तरफ से पुलिस का एक और वाहन उसकी तरफ बढा चला । अनिल तुरंत समझ गया की अजित या अगर किसी भी तरह से पुलिस का एक और वाहन उसकी तरफ बढा चला रहा है । उसने एक नजर पहले दाई तरफ और फिर वही तरफ दौडाई । फिर कुछ समय गुजारने के मकसद से उसने पुलिस इंस्पेक्टर से पूछा अच्छा कमिश्नर साहब खुद क्यों नहीं है सबूत लेने के लिए? अरे भाई कमिश्नर साहब तो बहुत बडे ऑफिसर है । अब हर छोटे मोटे काम के लिए वह सब जगह जाने लग जाए तो फिर तो लिया कोई भी काम पर ये छोटा मोटा काम नहीं है सर, ये गहरी साजिश से वास्ता रखता हुआ सबूत हैं और साजिश के कर्ताधर्ता का नाम है । वो तो हमें पता है । अब तुम टाइम वेस्ट करने के बजाय जल्दी से ये सबूत हमारे हवाले करो । बस इस बार वो इंस्पेक्टर थोडा कडक स्वर में बोला क्या आपको पहले से पता है कि मैं किस साजिश की बात कर रहा हूँ । अरे भाई वो तो नहीं पता पर जिस हिसाब से खुद कमिश्नर साहब ने हम लोगों को यहाँ पर भेजा है कि तुम्हारे पास कोई सबूत हैं उस से हम लोगों को इतना तो अंदाजा हो ही गया है की जरूर किसी गहरी साजिश के सबूत तो हमें देने वाले हो । अब ज्यादा बातें ना बनाओ और जल्दी से सबूत निकालो कहते हुए वह झुंझला उठा था । वो अनिल ने गहरी सांस लेकर का उसने दायां तरफ अपनी नजर घुमाई तो उसे अपनी तरफ एक पुलिस जीप आती हुई दिखाई दे तो साला ये पुलिस जी पहले आ रही है और ये अजगर का बच्चा अभी तक वहीं पर खडा है क्या बात है । जबकि पुलिस जी को तो उसने पहले ही देख लिया था और मुझे रिंग भी कर दी थी । अनिल ने मन ही मन सोचा उधर इंस्पेक्टर नहीं । अनिल की नजरों का पीछा किया तो वो अपनी तरफ दूसरी पुलिस जी आते देखकर मुस्कुरा, पढाई और अनिल से बोला अरे भाई जल्दी से सबूत देवी दो इतनी देर से क्या सोच रहे हो हमें और भी बहुत से काम करने नेताओं देता हूँ । कहते हुए उसने अपनी जेब से लिफाफा निकाल लिया । तब तक वो पुलिस जी उनके काफी नजदीक आ चुके थे । अनिल ने अपना लिफाफे वाला हाथ इंस्पेक्टर की तरफ बढाया ही था कि तभी उस जीत की ड्राइविंग वाली सीट के पास बैठा हुआ पुलिस वाला आदमी जोर से चल रहा है । रुक जाओ उन्हें कुछ भी मत देना । वो असली पुलिस वाले नहीं है बल्कि पुलिस के बीच में कोई बहरूपिया है जैसे ही अनिल ने उसकी ये बात सुनिये उसके दिमाग को एक जोरदार झटका लगा । उसने तो सोचा था कि पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए अपना जाल बिछा सकती है । पर यहाँ तो कहानी कुछ और ही निकल कर सामने आ रहे थे । आने वाली पुलिस जीप उसे पकडने के लिए नहीं बल्कि बचाने के लिए आ रही थी । उसने तुरंत इंस्पेक्टर की तरफ बढता हुआ अपना हाथ रोक लिया और लिफाफे को वापस से अपनी जीन्स की दायीं जेब में रख लिया । इंस्पेक्टर ने ये देखकर अनिल से गुस्से से कहा बेवकूफ उसकी बातों में मत आओ । जल्दी से वो सबूत वाला लिफाफा पेश करूँ । जरूर उन लोगों को इस बारे में पता चल गया होगा कि तुम पुलिस को उनके खिलाफ सबूत देने वाले हो । इसलिए या तो उसने इन लोगों को भेजा है । आप फिर ये खुद शाजिश करता है । अभी अनिल कुछ और डिसाइड कर पाता उससे पहले ही वह जीत उनके बिलकुल पास आकर रुक चुकी थी । जीत के रूप में ही आगे की सीट पर बैठा हुआ इंस्पेक्टर बैंक का आदमी कूदते हुए नीचे उतारा और अपनी जेब से रिवाल्वर निकालकर उस पहले वाले इंस्पेक्टर की तरफ तानते हुए अनिल ये सबूत इधर दो असली पुलिस वाले हम है नहीं, झूठ बोल रहा है । इस की बातों में आकर इसे वह सबूत मत दे देना । असली पुलिस वाले हमें पहले वाला इंस्पेक्टर चलना हो तो मैं अपनी जुबान बंद रखो, नहीं तो अभी यहीं पर शूट कर दूंगा । उसने अपनी रिवॉल्वर उसकी तरफ लहराई, फिर अनिल से बुला और तुम डरो मत । असली पुलिस । हमें पुलिस डिपार्टमेंट में जरूर किसी ने रिश्वत खाई है, जिसने ये बात बार लिखी है और कोई बहुत खतरनाक साजिश के खिलाफ पुलिस को सबूत देने वाला है कि कोई बहुत ही खतरनाक साजिश के खिलाफ पुलिस को सबूत देने वाला बहुत शुक्र है कि हम लोग सही समय पर पहुंच गए । वरना तुम तो अभी तक इनको वह सबूत देने भी वाले थे और फिर सबूत मिलते हैं । ये लोग तो मैं भी मार देते हैं । आपके पास क्या सबूत है कि आप ही असली पुलिस वाले हो? अनिल ने उसे इंस्पेक्टर से पूछा था नहीं ये देखो मेरा डैडी का मेरा नाम । इंस्पेक्टर मनोज उसने अपनी जेब से आईडी कार्ड निकालते हुए का अनिल ने कार्ड को देखा और सहमती से अपना से मिला है । अगर तुम पहले इसका भी आईकार्ड देख लेते हैं । धूम से ये गलती नहीं होती । इंस्पेक्टर मनोज नहीं अनिल से का आप सही कह रहे इंस्पेक्टर साहब वैसे मुझे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि पुलिस कमिश्नर के ऑफिस तक में इस तरह की सेंधमारी होगी । कोई वहाँ की बातें भी बात कर सकता है । कहते हुए उस की निगाहें सडक के दोनों ओर भटके । उसने देखा की अजित अपनी बाइक पर उनके पास पहुंच नहीं वाला था और दूसरी तरफ से अगर भी लगभग वहाँ साथ ही पहुंच रहा था । इंस्पेक्टर मनोज ने उसकी निगाहों का अनुसरण किया । उधर अजीत चाय की ठंडी पर बैठा हुआ सिगरेट पी रहा था । देखने में वह बडा लापरवाह लग रहा था पर उसका सारा ध्यान सामने रोड पर ही लगा हुआ था कि वहाँ से कोई और जी पीया वाहन तो नहीं उस तरफ आ रहा है । साथ ही साथ वो बीच बीच में अनिल की दिशा में भी देख लेता था कि वहाँ सब ठीक चल रहा है नहीं । तभी उसने देखा कि उसके विपरीत दिशा से अगर की तरफ से एक पुलिस जीत अनिल की तरफ बढती चली आ रही थी । ये पुलिस जीत अजगर की तरफ से आ रहे थे । उम्मीद है उसने अनिल को सिग्नल भेज दिया होगा और वह खबरदार हो गया होगा । अभी तक आज कर वहाँ से रवाना क्यों नहीं हुआ? उसे तो तुरंत अपनी तरफ से पुलिस को आता हुआ देखकर उनसे भी पहले अनिल की तरफ रवाना हो जाना चाहिए था । लगता है वह किसी और ही प्रॉब्लम में फस गया है । अनिल खतरे में फस ले जा रहा है । मुझे तुरंत ही उसकी मदद को चल देना चाहिए । उसने सोचा और तुरंत अपनी आधी जली हुई सिगरेट को नीचे जमीन पर फेंका । उसे अपने जूतों की नोक से मसला और मोटर साइकिल स्टार्ट की और अनिल की तरफ रवाना हो गया । ये तो सामने से पुलिस जी चली आ रही है । मतलब अनेलका सोचना सही रहा कि कमिश्नर सिर्फ सबूत लेने के लिए ही अपने आदमी नहीं भेजेगा बल्कि वह सबूत देने वालों को भी गिरफ्त में लेने के लिए अपना जाल भी बिछाएगा । दूसरी तरफ चाय की थडी पर चाय पीते हुए अगर नहीं उस तरफ से आती हुई पुलिस जीत को देखते हुए सोचा उसने तुरंत सबसे पहले अपना मोबाइल निकाला और अनिल को पूर्व स्थापित विशेष अंदाज में रिंग दे और अपनी बाइक की तरफ लगता है । ऐसी स्थिति के लिए वो पहले से तैयार था । इसलिए चाय के पैसे वो पहले ही एडवांस में दे चुका था । पर इसका क्या करें कि एन वक्त पर उसकी बाइक ने उसे लगा दे दिया । उसने बाइक स्टार्ट करनी चाहिए पर वो स्टार्ट नहीं हुई और जब तक वो स्टार्ट होती तब तक पुलिस जीत उस को पीछे छोडकर अनिल की तरफ घूम चुकी थी । इस बाइक को भी अभी खराब होना था । वो मनी मन झल्लाया । उसने जल्दी से बाइक का प्लग खोला । उसमें कचरा फसा हुआ था । उसने तुरंत एक कपडे से वो कचरा साफ किया और फिर बाइक स्टार्ट करने की कोशिश करने लगा । इस बार दो तीन की एक नहीं बाइक स्टार्ट हो गयी । वो तुरंत स्टेडियम की तरफ रवाना हो गया । क्या हुआ भाई, इतनी देर से क्या सोच रही हूँ । जिस काम के लिए आये फटाफट वो काम करो । हमें और भी काम है । फॅार्म मनोज ने अनिल से कहा अनिल ने अपनी जेन्स की भाई पॉकेट में हाथ डालकर एक लिफाफा बाहर निकाला और और इंस्पेक्टर की तरफ उसे देने के लिए बढाया । जब तक अजित वहाँ पर पहुंच चुका था और अजगर भी पहुंच नहीं वाला था । दूसरी पुलिस जीप को देखकर उन्होंने ये इरादा बनाया हुआ था की वह स्मोक बम फोडकर अनिल को वहाँ से निकालने जाएंगे । पर जब उन्होंने ये पाया की दूसरी वाली पुलिस पार्टी ने पहली वाली पुलिस पार्टी को अपनी बंदूक की हद में कवर किया हुआ है तो वो असमंजस में पड गए । उनको ये बात समझ नहीं आई कि आखिर वहाँ पर चल कह रहा है वो ये भी डिसाइड नहीं कर पाया था कि स्मोक बम फोडकर अनिल को वहाँ से निकालने चले । उन दोनों को वहाँ आया हुआ देखकर अनिल ने अपने लिफाफे वाला हाथ वही रोक दिया था । सब ठीक तो आया नहीं है । जितने अनिल से पूछा, हाँ सब ठीक है । पहले आए हुए पुलिस के लोग नकली पुलिस वाले थे । ये लोग तुम्हारे साथ है । इंस्पेक्टर मनोज ने अनिल से पूछे जी आइए मेरे मित्र हो मित्र हैं, दोस्त हैं, वह क्या दोस्ती है? एक मित्र को संकट में देखा तो बाकी मित्र तुरंत उसके पीछे पीछे आ गए । यही सोच कर आए थे ना कि दोस्त मुसीबत में तो उसे बचा लेंगे । ये कहते हुए इंस्पेक्टर मनोज ने जोरदार ठाक लगा है फॅार । मनोज को इस तरह से हस्ता हुआ देखकर वह तीनों एकदम से सकपका गए । आखिर अनिल से नहीं रहा गया और उसने इंस्पेक्टर मनोज से पूछा इसमें आज नहीं की क्या बात ऍम ये लोग अब ये पूछ रहा इसमें आज नहीं की क्या बात है । कहते हुए उसने पहले वाले इंस्पेक्टर की तरफ देखकर आंख मारे है । ये देखकर वो और उसका साथी भी ढाका मारकर हसने लगा । उनको कवर किए हुए हवलदार नहीं अपनी बंदूक नीचे की और वह भी उनकी हँसी में उन का साथ देने लगे । उन सबको इस तरह से हस्ता हुआ देखकर वह तीनों जैसे सब समझ गए । अब तो तुम लोग सामाजिक हो गए कि मैं क्यों हो रहा था । ये लोग मेरे ही जाती है । हाँ सब समझ गए । वैसे मुझे ये थोडा बहुत अंदाजा तो था कि कमिश्नर साहब हम लोगों को गिरफ्तार करने की कोई कोशिश जरूर करेंगे । पर इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वह इस तरह से पुलिस की दो पार्टियां भेज कर हम लोगों के लिए जाना चाहिए । पुलिस कमिश्नर का जाल खबर हम कोई पुलिस पुलिस नहीं है । हम सब तो नेताजी के आदमी है । जो पहले इंस्पेक्टर बन कराया था ना वो रफाकत है उसके साथ वो हवलदार है । वो रफीक ये सुलेमान और मैं । मैं इंस्पेक्टर मनोज नहीं बल्कि मुश्ताक इंस्पेक्टर मुश्ताक नहीं सिर्फ और सिर्फ मुश्ताक पुलिस इंस्पेक्टर बनने मुश्ताक ने मुस्कुराते हुए हो अनिल के मुझसे गहरी साफ हाँ, नेताजी को ये पूरा यकीन था कि तुम लोग एक से ज्यादा हो सकते हो इसीलिए उन्होंने ये दो पुलिस पार्टियाँ वाला प्लान बनाया था । हमारा इरादा तुम लोगों को अपनी गिरफ्त में लेने का या फिर मार गिराने का था । पर नेताजी को मालूम था कि तुम लोग इस बात पर जरूर शक करोगे कि सबूत लेते समय पुलिस तो मैं पूछताछ के लिए अपनी हिरासत में ना ले । इसीलिए तुम लोग कभी भी पुलिस के सामने एक साथ नहीं आओगे । इसलिए उन्होंने पहले एक पार्टी को नकली पुलिस वाला बनाकर तुम्हारे पास भेजा और उसके पीछे पीछे दूसरी पार्टी को तो मैं खबरदार करने वाली असली पुलिस बनाकर भेजा ताकि वह तो मैं अपने विश्वास में ले सकें और अगर तुम्हारा कोई और साथ ही तो में बचाने के लिए कहीं छुपा हुआ भी हो तो वो भी खतरा खत्म समझकर सामने आ जाए । हे राम तुम लोगों को एक साथ अपनी गिरफ्त में ले सकें और तुम लोगों का किस्सा ही खत्म कर सकें ही काफी अच्छा प्लान बनाया है । हमारे नेता जी वो तो तुम देख रहे हो । कितना अच्छा प्लान है । तुम लोग इसमें पूरी तरह से फस चुके हो । तुम जो चार से बोले पापा मेरी तरफ बढा दो और तुम दोनों अपनी अपनी मोटर साइकिल से उतरकर चुपचाप यहाँ मेरे सामने आकर हाथ ऊपर करके खडे हो जाओ । मतलब कमिश्नर नहीं है । हम लोगों को धोखा दिया था और पूरी की पूरी पुलिसफोर्स ही तुम अपराधियों से मिली हुई है । अनिल ने गहरी सांस लेकर का तो तुम क्या समझते हो? हम लोगों को कोई सपना आया था की तुम लोग यहाँ पर पुलिस को किसी चीज का कोई सबूत सौंपने आए । ऐसे शहर की क्या इस पूरे राज्य की पुलिस हमारे नेता जी की जेब में तुम सही कह रहे हो? वैसे इस राज्य की क्या बात करें? पूरे देश में ही पुलिस किसी ना किसी नेता की जेब में ही तो पडी हुई है । अब दस साल है । बहुत हो गई तरी बकवास । अब ज्यादा लेक्चर मत दें और जल्दी सही लिफाफा इधर मेरी तरफ पडा । इंस्पेक्टर मनोज उर्फ मुश्ताक कर्कश स्वर में बोले इतने भी क्या जल्दी है पे आ रहे हैं एक बार जरा इधर भी तो अपनी नजरे दौडा कर देख लोग सभी वहाँ एक नई आवाज गूंज उठी । उन सबकी नजरे आवाज की तरफ गई तो पाया कि वह चाय की थडी वाला और वह सेल्स मेन से नजर आने वाला युवक । उन दोनों ने उनकी तरफ अपनी अपनी रिवॉल्वर तान रखी थी । तुम लोग कौन? पूछताछ के मुझसे आशा है । बडी आवाज निकाले हम है इसलिए पुलिस वाले समझे मियां मुश्ताक उस सेल्स मैंने मुश्ताक से का, फिर अनिल को संबोधित करते हुए और तुम सारे इंडिया के पुलिस वालों के बारे में कुछ ज्यादा ही बोल रहे हैं । अभी भी ऐसे बहुत से पुलिस वाले हैं जो फर्स्ट के लिए अपनी जान की बाजी लगा देते हैं । फायदा ये नेता जी कौन है और इस लिफाफे मैं ऐसा कौन सा सबूत है? तो तुम लोग पुलिस को देने वाले थे और ये लोग तुमसे लेने आ गए । अब तुम पुलिस वाले हो तो तुम्हें पता होना चाहिए कि नेताजी कौन है और इस लिफाफे में क्या है? अनिल ने एक बार अजित और अजगर की तरफ देख करो सेल्समैन से कहा, वो तीनों ही अब काफी हद तक समझ चुके थे और किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार थे । हमें सिर्फ लिफाफा लाने के लिए बोला गया है, उसके अंदर क्या है और ये नेताजी कौन है जिससे हमें कोई मतलब नहीं । हमें तुमसे भी कोई मतलब नहीं है तो मैं आप जल्दी से लिफाफा मुझे सौंप दो जल्दी करो । अनिल ने अब अपना लिफाफे वाला हाथ उसे ऍम की तरफ बढाया । उसने लिफाफे को हाथ में लिया था कि सभी ढाई से गोली चलने की आवाज आई और उस सेल्स मेन के हाथ से उसके नीचे गिर पडे । साथ ही साथ उसके हाथों से वह सबूत वाला लिफाफा भी नीचे गिर । मुश्ताक अनिल से बात करने के चक्कर में उसे इस्माइल कोई ध्यान ही नहीं रहा कि वहाँ पर उनके अलावा नकली पुलिस के तीन आदमी और भी और मौका मिलते ही उनमें से एक ने अपनी पिस्टल से उसके लिए बॉलीवुड वाले हाथ को अपना निशाना बनाना । उधर गोली लगते ही उसके हाथ से बंदूक उधर मौका बातें अगर में अपने बैग से एक मोव बम निकाला और उसे फोडते हुए चलाया । अनिल जल्दी करो अजित के साथ बैठो जल्दी अनिल अवगत की आवाज सुनते ही तुरंत अजीत की मोटर साइकिल की तरफ तो अगर के पडे हुए स्मोक बम से वहाँ तो वहाँ फैलने लगा था । अभी दो तीन गोलियां चलने की आवाजाही और साथ ही अजित की मोटर साइकिल पर बैठकर बैठते अनिल के मुंह से एक जोरदार ठीक निकल पडे । क्या हुआ अनिल तुम ठीक हो ना? अजीत के मोरसिंह आम मैं बिल्कुल ठीक हूँ । तुम जल्दी निकलो यहाँ से अनिल ने जवाब दिया, पर तुम लाए थे अजित ने अपनी मोटर साइकिल को दे देते हैं कुछ नहीं । बस वो एक गोली बाजू को रगडते हुए गुजर गई थी । वाट अजित के मुँह से निकला । साथ ही साथ बैलेंस बिगडने की वजह से उसकी मोटर साइकिल लडखडाई । अरे तुम बाइक चलाने में ध्यान दो, मुझे कुछ नहीं हुआ है । बस गोली बाजू को रगड देते हुए निकली थोडा सा जब मैं जल्दी ठीक हो जाएगा । वैसे अब ऐसा ना हो गोली से तो मेरा कुछ नहीं बिगडा पर अगर तो मैं ऐसे ही बाइक चलाओगे तो जरूर किसी एक्सीडेंट में अपना राम नाम सत्य हो जाएगा । अनिल ने मुस्कुराते हुए हैं और यूशर अब तुम चुपचाप बैठे रहो । हम अभी घर पहुंचते हैं । अब है इसी चोरी की बाइक पर घर चलो क्या मुझे क्या अजगर जैसा समझ रखा है जो ये काम करूँगा? तो तुम्हारे कहने का मतलब है अगर चोरी की बाइक से ही घर पर पहुंचेगा । अनिल ने उसे छेडते हुए यार तुम भी ना तुम भी चुप रहो तो अच्छा है वरना कहीं ऐसा ना हो कि मैं वास्तव में ही कोई एक्सीडेंट ना करवा बैठूं । अजीत ने झुंझलाते हुए करेंगे उसकी सरकार पर अनिल बरबस मुस्कुरा और अगले ही पल उसके शरीर में दर्द की एक लहर उठ के जिसे उसने बडी मुश्किल से दबा दिया था । ये क्या हुआ इससे इतना खून कैसे निकल रहा है? अनिल को देखते ही करतारसिंह के मुझसे निकला कुछ नहीं । बाबा बस थोडा सा घाव लगाए अनिल ने जवाब थोडा सा था हवाई से गोली लगी गोली अजीत ने तेज स्वर में लगभग चलाते हुए क्या कहा इसे गोली लगी । करतारसिंह घबराते हुए बोलते हैं आबामा इसके बाजू में गोली धंसी हुई है और देखो तो कमीना रस्ते भर मुझे कह रहा था कि बस गोलीबाजी को छूते हुए निकले । साला कमीना ऐसा दोस्त है जो उसको झूठ बोलता है । अजीत ने गुस्से में कहा अबे नाराज क्यों होता है? वैसे भी अगर मैं तुझे उस टाइम में बता देता है कि मुझे गोली लग गई है तो मुझे उस समय तो कुछ नहीं हुआ था पर दो जरूर बाइक का एक्सीडेंट करवा बैठ और मेरे साथ साथ फिर तेरी भी खैर नहीं थी । कहते हुए अनिल के शरीर में दर्द की जोरदार लहर उठी जिसे छुपाते हुए वह मुस्कुराओ अनिल सही कह रहा है । अजित अनिल ने उस वक्त की नजाकत को अनिल ने उस वक्त की नजाकत को समझाते हुए सही कहा था । अगर नहीं तो चुप कर साले बीच में बोलने के लिए किसने कहा बढा है? इसकी हिमायत करने वाले अजीत नाराज होते हैं । तुम लोग अपना झगडा बाद में करते हैं । पहले से किसी डॉक्टर के पास ले जाओ । करतारसिंह चिंतित सफर में नहीं, बाबा डॉक्टर के पास नहीं । हम लोग उन्हें कैसे बताएंगे कि मुझे गोली कैसे लगी है? मेरी गोली यहीं पर निकालनी होगी । अनिल दर्द से कराहते हुए बोला । अनिल ठीक कह रहा बाबा पहले रसोई में जाकर पानी गरम करें और एक साफ चाकू को गर्म करके और एक साफ चाकू को गर्म करके लेकर आएंगे । अगर तुम जल्दी से साफ सफेद पट्टी और रोटी का इंतजाम कर और अनिल तुम ज्यादा हीरो बनने की कोशिश मत करो । चुप चाप मेरे साथ चलो और अपने बिस्तर पर जाकर लेट जाओ । अजित निकले जो हुक्मों में गया होगा । अनिल ने मुस्कुराते हुए जवाब अन्य लज्जित का हाथ पकडकर अपने बिस्तर तक आया और उस पर लेट गया । थोडी देर में करतारसिंह पानी और चाकू कदम करके ले आए और अगर भी रूही और सफेद पट्टी ले आया, अजित ने गर्म चाकू को पकडा और बडी ही सावधानी से अनिल के बाजू में धंसी हुई गोली निकले । अनिल के मुझसे सिसकारी से निकले अजीत ने फिर उसके घाव को गर्म पानी और उसी से साफ किया और फिर उस पर पट्टी बांध । मैंने कहा था ना इतना खतरा मोल मत लिया करो और तुम लोग हो कि मेरी सुनता ही नहीं हूँ । अभी सोचा है कि अगर तुम लोगों को कुछ हो गया तो बुड्ढा कहाँ जाएगा? इस बुढापे में गुडा करतारसिंह गुस्से से अरे बाबा, मुझे कुछ नहीं हुआ है । अजीत ने गोली निकाल दी है और अब देखो अब तो मैं बिल्कुल ठीक हूँ । अनिल लेगा पर तो मैं ये गोली लगी कैसे? करतारसिंह जवाब में अनिल ने सारा किस्सा कहते हैं । सारी बात सुनकर करतारसिंह ने का जरूर पुलिस कमिश्नर ऑफिस में उस नेता का कोई भेज दिया है जिसने ये सारी बात उस नेता तक पहुंचाई नहीं । बाबा कमिश्नर के ऑफिस में कोई भेदिया नहीं है बल्कि वह पुलिस कमिश्नर खुद उस नेता का पालतू कुत्ता बना हुआ है । मैं पुलिस को उस जगह पर सबूत सौंपने वाला हो । ये बात उस पुलिस कमिश्नर ने खुद उस नेता को बताई थी । अनिल ने कहा, ये तुम क्या कह रहे हो? बेटा भलाई पुलिस कमिश्नर ऐसा कैसे कर सकता है? करतारसिंह के मुझे आश्चर्य से नहीं कर सकता है । बाबा जरूर कर सकता है और कोई शैतान, किसी मुर्दे के जिसमें कब तक नोट्स । जब कोई शैतान किसी मुर्दे के जिस्म से कब तक हो सकता है तो ऐसा धोखा करना तो उसके लिए बहुत ही मामूली बात है । अनिल के मौसम गुस्से से निकला तुम क्या कह रही बेटा मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा हैं । आप नहीं समझे बाबा मैं समझता हूँ मैं उस दिन टीवी पर जब कमिश्नर मैंने उस दिन टीवी पर जब कमिश्नर को पहली बार देखा था तो मैंने कहा था ना मैंने इसे कहीं पर देखा हुआ है । हाँ तुमने कहा तो था उस दिन तो मुझे याद नहीं आया । मैंने उसे कब और कहाँ देखा था । आखिर बरसों पुरानी बात हो गई थी और वह शक्ल भी मुझे धुंधली धुंधली से याद थी और उस की आज के हरकत से मुझे सब याद आ गया है कि वह कमिश्नर कौन है और मैंने उसे कब और कहाँ देखा था । कब देखा था अजित के मुंह से निकला है । कहाँ देखा था अगर ने पूछा ये कमिश्नर वही होता है जिसमें मेरी माँ के इलाज से उसके गहने होते थे । ये वही कमीना है जिसने मेरे मरे हुए बाप का बटुआ चोट आया था और उनके आपसे घडी और उंगली से सोने की अंगूठी उतारी थी । क्या अजित, अजगर और करतारसिंह तीनों के मुँह से एक साथ हाँ समय ये शायद इंस्पेक्टर था और आज नेताओं के चौखट चार चार राजनगर का पुलिस कमिश्नर बन बैठा है । उस समय मुरता जिसमें से कब तक चुरा लेता था और आज पैसों के लालच में इस शहर को शमशान बनाने पर तुला हुआ? हाँ मिलने नफरत से का हम सच कह रहे हो? क्या ये वही पुलिस वाला है? ऐसा तो नहीं कि तुम से कोई गलतफहमी हुई हूँ? नहीं हार मुझे कोई गलत फहमी नहीं हुई है, हवाई होता है । वैसे भी मेरी आंखें वो सूरत कभी नहीं भूल सकती जिसने इनके सामने मेरे माँ बाप की लाश को नोचा था । अनिल ने गुस्से से कहा अनिल अगर तुम सच कह रहे हो तो फिर हमें पुलिस में अनिल अगर तुम सच कह रहे हो तो फिर आ मैं पुलिस से मदद की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए तो उल्टा टांकों को खजाने की पहरेदारी सौंपने वाली बात हो गई । तुम साइट तो मसाई कह रहे यार, हकीम के कंधों पर शहर और राज्य की रखवाली की जिम्मेदारी हो, अगर वो खुद ही शहर को लूटने लग जाए, फिर उसका लाये मालिक है । अगर हम तो से सबूत सौंपने गए थे पर वो तो हमारी जान का सौदा उस नेता की हालत से कर बैठा था । तो हमारी किस्मत अच्छी थी । जो पता नहीं कहाँ से वह पुलिस की एक और पार्टी आ गई और हमारी जान बच गई । पढना उन कमीनों ने तो हमें जहन्नम पहुंचाने में तो कोई कसर बाकी नहीं छोडी थी । अगर में पुलिस की तरफ देखते हैं जहाँ तो बच गई है आप और हम वो चिट्ठी । वह सबूत वहीं पर गवा बैठेंगे । अब हम उस नेता के खिलाफ कुछ भी नहीं कर सकते हैं । अनिल ने कह रही साफ नहीं करेगा, सबूत थे तब भी तो हम लोगों ने क्या कर दिया या ज्यादा टेंशन मत लोग करने का पर्व सबूत कौन सी पार्टी के हाथ में लगे होंगे और वह सबूत कौन सी पार्टी के हाथ में लगे होंगे । हमें अपने जाल में फंसाने वाली पुलिस पार्टी के या फिर चाय वाले के भेद में हम को बचाने वाली पुलिस पार्टी अजित ने पूछा अरे कौन हो सकते हैं वो लोग जो अपने आप को असली पुलिस वाले बता रहे थे और हमको आॅफर बचाने के लिए वहाँ पर आ गए । आखिर उन्होंने कैसे पता चला होगा कि हमें फंसाने के लिए वहाँ पर कोई जाल बिछाया जा रहा है । अजीत ने भी पूछा ।

अध्याय 6 - E

यार ये तो मैं भी नहीं बता सकता है कि वह सबूत किसके हाथ में लगे हैं और वह पुलिस वाले कौन थे । पर वैसे इस घटना से मैं इतना अंदाजा जरूर लगा सकता हूँ कि कमिश्नर के ऑफिस में भी जरूर कोई उसकी जासूसी कर रहा है । जिसकी वजह से इस बात का पता चला होगा कि कमिश्नर ने हमें फंसाने के लिए कोई जाल बिछाया है और उसी ने इस बात का इंतजाम किया होगा कि हम लोग उस नेता के आदमियों की गिरफ्त में नहीं है इसलिए तो वो लोग हमसे भी पहले वहाँ पर पहुंच गए थे । फिर बोलो कौन हैं और उन्होंने ऐसा क्यों किया इस बारे में कुछ भी कहना मोहाल वैसे भी वो लोग अगर पुलिस वाले ही है तो कमिश्नर के खिलाफ हो गए और अगर वह पुलिस वाले नहीं है तो उन्होंने इस काम को अंजाम कैसे दिया ये भी नहीं पता । अनिल ने जवाब दिया और फिर आगे निराशा भरे स्वर में बोला, पर्व जो भी हूँ हम उस नेता के खिलाफ सबूत नहीं बचा पाए ना । अब हम किसी को भी इस बात का यकीन नहीं दिला सकते कि देवराज के घर पर हुए हमले के पीछे उसका हाथ है । वैसे अगर वह चिट्टी पास में रहती तो शायद हम मीडिया के पास जाने की कोशिश तो कर नहीं सकते थे, पर अब तो वह भी नहीं कर सकते । पर पहले तो तो मैं ऐसा नहीं चाहते थे । फिर अचानक ऐसा इरादा कैसे? क्या अजगर ने पूछा पहले मुझे मालूम नहीं था कि कमिश्नर हमें इस तरह से धोखा देगा । बस अब मीडिया को ही आजमाना बाकी रह गया है । अनिल ने जवाब मतलब अगर चिट्ठी हो तो तुम सबूत मीडिया के बाद ले जाना चाहते हो इस बार जीतने का । हाँ अपनी आखिरी कोशिश करना चाहता हूँ तो फिर ये हम लोग जरूर करेंगे । पर कैसे मेरे पास चिट्ठी है क्या? पर वो चिट्टी तो वहाँ स्टेडियम के बाहर ही गिर गई थी जो उन लोगों ने उठा ली होगी । अनिल ने चौक कर पूजा मेरे पास वो नहीं पर उल्टी की हूबहू कॉपी है बहुत कॉपी पर वो तेरे पास कहाँ से आई तो सिर्फ एक ही कॉपी थी । अगर ने कहा तो वो अपना ज्यादा दिमाग मत लगा । दिमाग है तभी लगा रहा हूँ तो तुम फिर से मैं शुरू हो ना । आज इस बोलो क्या कहना चाहते हो? अनिल ने पूछा मैंने उस चिट्ठी की रंगीन फोटोकॉपी की थी जो हूबहू उस जैसी ही है । हम वो चिट्ठी मीडिया के पास ले जा सकते हैं । हालांकि उम्मीद कमी है कि कोई हमारी हेल्प करेगा पर अगर कोई चैनल उसे अपने यहाँ टेलीकास्ट कर दें तो फिर शायद सरकार जो वैद अंसारी के खिलाफ एक्शन ले सकती है, ये सही कह रहे हैं तो मैं काम करो तो अभी के अभी वह चिट्ठी किसी चैनल के पास ले जाओ । क्या डायरेक्ट थी किसी भी चैनल के पास चला जाऊं तो न्यू न्यू हाउस के लोकल ऑफिस जाओ । उस की खबरें थोडा बहुत विश्वास करने लायक होती हैं । अनिल ने कुछ सोचते हुए कहा और वहाँ पर किसी तरह से उनके किसी सीनियर रिपोर्टर के पास वो चिट्ठी पहुंचा हूँ पर ध्यान रखना उनके डायरेक्ट सामने नहीं आना । मैं नहीं चाहता किसी को हमारे बारे में थोडी सी भी खबर उनके चैनल पर रात को नौ बजे खबर धमाकेदार शो आता है जो इस समय न्यूज टीआरपी में नंबर वन पर बना हुआ है । अगर ये खबर उस समय टीवी पर प्रकाशित हो गई तो फिर जो वैद अंसारी का बचना मुश्किल होगा ये तो तुम ठीक कह रहे हैं पर मान लो उस खबर के टेलीकास्ट होने के बाद देर रात ठाकुर ने दंगे फैलाने की कोशिश की तो इस की संभावना फिलहाल कम है । वैसे ही आज दिन में कई जगह दंगा फैलाने की कोशिश तो वैसे भी हुई थी जिसकी वजह से संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लगाया हुआ है । दूसरा खबर प्रकाशित होने के बाद सरकार और प्रशासन को भी इस बात का एहसास होगा कि माहौल बिगड सकता है इसलिए वो अतिरिक्त सावधानी बरतेंगे । ये तुम ऍम ठीक है फिर मैं निकलता हूँ पहले वर्क शॉप से चिट्ठी की फोटोकॉपी निकालनी होंगी । उसके बाद न्यू मीडिया उस जाऊंगा । उम्मीद है छह बजे तक मैं अपना काम खत्म कर लूंगा । आज की सबसे बडी ब्रेकिंग न्यूज रीमा ठाकुर हत्याकांड के बारे में हमारे हाथ में एक अहम सुराग लगा है । जी हाँ ठीक ही सुना आपने हमें इस बात की जानकारी मिली है जिससे ये पता चलता है कि देवराज ठाकुर के घर पर हमला किसने किया था और उस हमले के पीछे किसका हाथ है । आज रात को नौ बजे न्यूज न्यूज पर ये धमाकेदार शो में देखना ना भूलिये जिसमें हम रीमा ठाकुर हत्याकांड का पर्दा जिसमें हम रीमा ठाकुर हत्याकांड का पर्दाफाश करने जा रहे हैं । न्यूज न्यूज चैनल पर ब्रेकिंग न्यूज फ्लाइट हो रही थी तो हमारे यार ने अपना काम कर दिया । उम्मीद से बहुत जल्दी कर दिया । अभी तो छह भी नहीं बजे बिस्तर पर लेटे लेटे टीवी देखते हुए अनिल ने कहा आखिर दोस्त किसका है? अजीत ने कहा पर अभी तक आया नहीं, वो कहाँ गया आ जाएगा या बच्चा थोडी ना है । जो हो जाएगा वैसे भी उसे आने में आधा घंटा तो लगेगा ही । न्यूज ऑफिस से यहाँ तक आने में हूँ । फिर भी क्या फिर भी अभी तो न्यू जा रही है और तुम बोल रहे हो की बहुत जल्दी काम कर दिया उसने । आप उसे आने का थोडा टाइम तो दे दो । दे दिया मेरे बाप तो वो अपनी एनर्जी अजीत के लिए बचाकर रखो । अनिल ने मुस्कुराते हुए कहा । फिर वो दोनों टीवी देखना होगा । रात के नौ बजने वाले थे । तीनों दोस्त हॉल में बैठे हुए न्यूज न्यूज पर धमाकेदार शो का इंतजार कर रहे थे । तीनों की नजरें टीवी स्क्रीन पर चिपकी हुई थी । साला ये शो कब शुरू होगा? अजीत ने बडी ही बेसब्री से का जब शो का टाइम होगा अभी नौ बजने में पांच मिनट बाकी है । अगर नहीं जवाब ठीक है तब तक मैं कुछ खा लेता हूँ । कहते हुए अजीत उठ गया और रसोई की तरफ रवाना हो गया । मुझे मालूम था भुक्कड तो यही करेगा । अभी आधे घंटे में बाबा खाना तैयार कर लेंगे । तब तक का भी सब्र नहीं साले तब तक काबिज सब नहीं है साले को पीछे से अगर ने कहा अजीत उसकी बात सुनकर जाते जाते होंगे । उसने मुडकर अजगर को उसने मुडकर अजगर को घूरकर देखा, पर फिर बिना बोले रसोई में चला गया । ये देखकर अनिल मुस्कुरा होता है । दो तीन मिनट के बाद अजीत रसोई से एक प्लेट में बिस्किट और नमकीन लेकर बाहर आ गया । आ गया बुक कर अगर नहीं अबे साले अजीत ने कहा अजीत ने कहना चाहता भी अनिल बीच में बोल अभी चुप शो चालू हो रहा हैं । उस की बात सुनते ही दोनों कि न्यूजीलैंड टीवी स्क्रीन की तरफ गए, जहाँ पर एक बडे से गोल घेरे में लिखा हुआ आ रहा था । धमाकेदार शुरू वो गोला धीरे धीरे बंद हो । अब स्क्रीन पर रैंकर स्टेज बना रहा था । तेज के बीच में आकर उसने कहना शुरू किया नमस्कार ज्यादा सक्रिय का गुड इवनिंग । मैं आपका होस्टिंग के दूबे पेश करने जा रहा हूँ । आज का धमाकेदार शो जिसका आप सभी को रोज बडी बेसब्री से इंतजार जिसका आप सभी रोज बडी बेसब्री से इंतजार करते हैं । और आज के शो का तो आप सबसे बडी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं । जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हम आप लोगों के सामने एक बहुत बडे रहस्य का पर्दाफाश करने जा रहे हैं । श्री देवराज ठाकुर इंडियन राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष के घर हुए हमले जिसमें देव राज्य की धर्मपत्नी श्रीमती में ठाकुर की मौत हो गई थी । हम उस हमले के पीछे किसका हाथ है ये बताने जा रहे हैं पर अब कहते हुए इनका थोडी देर के लिए चुप हुआ । पर अब क्या ये जानने के लिए हम मिलते हैं एक छोटे से ब्रेक के बाद । पर आप क्या अजगर के मुंह से निकला साला जबरदस्ती का सस्पेंस क्रिएट करना तो इन लोगों की आदत है अब बीच में ब्रेक दे दिया है जितने का कहीं ऐसा तो नहीं ये कुछ और कहने जा रहा हूँ । साला शाम से ब्रेकिंग न्यूज चला रहा था । चैनल का जरूर जुबेद अंसारी से पैसा खाने का इरादा था । इसीलिए उसने पहले ब्रेकिंग न्यूज के नाम पर जुबेद अंसारी तक अपना संदेश पहुंचा दिया और पैसा खाकर कुछ स्टोरी सुनाएगा क्यों नहीं तो मैं क्या लगता है । अगर ने पूछा था मुझे नहीं लगता ऐसा हूँ पर साला आज की दुनिया में किसी का क्या भरोसा । लोग थोडे से पैसों के लिए अपना ईमान बेच देते हैं । इससे तो उसे करोडों का फायदा होगा । वैसे खैर देखो क्या बोलता है ये ब्रेक के बाद अनिल ने गहरी सांस लेते हुए कहा तो ब्रेक के बाद आप सभी का इस शो में फिर से स्वागत है । हाँ, तो मैं आज रीमा ठाकुर हत्याकांड के ऊपर प्रकाश डालने वाला था । हमें शाम को करीब छह बजे छुट्टी मिली थी जिसमें हत्यारे का नाम लिखा हुआ था । पर कहते हुए उसने फिर से अपनी बात अधूरी छोड दे फिर से पर उसके ऊपर की तो मैं अजीत के मुझे गाली निकलने को ठंड रात ठंड थोडी ऐसा करे गिलास ठंडा जूस पीले को भूख भी लगाई होगी । अगर निकल तेजी अजीत ने कहा तभी अनिल ने उसे इशारे से मना किया । तीनों का ध्यान फिर से टीवी स्क्रीन पर उस चिट्ठी के मिलने के दस मिनट के बाद ही हमें उसी प्रकार की सेम एक और जेटली मिली जिसमें भी यही दावा किया गया था कि रीमा ठाकुर हत्याकांड के पीछे किसका हाथ है । फिर हर दो चार मिनट में हमें इस प्रकार की चिट्ठी मिलती गए । किसी जीटी में किसी राजनेता का नाम लिखा था तो किसी की टीमें किसी खिलाडी का, किसी अभिनेता का । और तो और एक सिटी में तो अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप का नाम लिखा हुआ था । तब हमारी समझ में आया कि कोई हमारे साथ मजाक कर रहा है । ये मजाक हमसे और सिर्फ हम सही नहीं, हमारे दर्शकों से किसने और क्यों? क्या यही पता लगाने के लिए हमने सभी राजनीति, सिनेमा, खेल वर्गों के अलग अलग विशेषज्ञ बुलाए हैं? आई स्वागत करते हैं । कहते हुए उसने कुछ नाम पुकारे । ये तो अलग ही कहानी सुना । असगर ने कहा कोई कहानी नहीं, साले ने पैसे खाएँ इसलिए नाटक कर रहा है । अजीबो हो सकता है पर मेरी नजर में ऐसा नहीं है । टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज जुबैर अंसारी ने भी देखी होगी और उसी ने फिर ये बार बार चिट्ठी भेजने वाला कार्यक्रम बचा होगा । वैसे अब तो साला सब गडबड हो गया । हर तरफ से फसे पडे अब किसी और चैनल पर भी नहीं जा सकते हैं । पुलिस से तो पहले ही हार मान चुके हैं । अब समझ नहीं आ रहा करें तो क्या करें? अनिल ने हताश सफर में कहा, कुछ ना कुछ तो हम फिर भी करेंगे । आज तो चिंता मत कर हमें से हार नहीं मान सकते हैं । हम जरूर कोई ना कोई रास्ता निकाल लेंगे तो फालतू में परेशान मत हो । हो सकता है वो चिट्ठियों लोगों के हाथ में लगी हो जिनकी वजह से हमारी जान बची है और वह खुद उस नेता के खिलाफ कोई एक्शन नहीं । अजीत ने उसे दिलासा देते हुए कहा हाँ जी सही कह रहा है की धूम बिल्कुल भी चिंता मत करूँ । हम कुछ ना कुछ जरूर करेंगे और उसका पर्दाफाश करके रहेंगे । अगर ने उसकी हम यहाँ मिल नहीं कोई जरूरत नहीं है कुछ करने की जो चाप घर में बैठे रहो । अनिल कुछ कहता उसे पहले बीच में ही रसोई से आते हुए करतारसिंह बोल बाबा ये आप क्या कह रहे हैं? नहीं हम चुपचाप घर में नहीं बैठ सकते । आखिर जिस शहर समाज के प्रति हमारा भी कुछ करता है, वैसे भी सब कुछ जानते हुए घर बैठना चाहता है और हम लोग आया नहीं है । अनिल ने कहा मैं जानता हूँ कि तुम लोग बहुत बहादुर हो पर इस शहर और समाज के लिए कुछ करने का सारा ठेका तुम लोगों ने नहीं ले रखा है । पर इस शहर और समाज के लिए कुछ करने का सारा ठेका तुम लोगों ने ही ले रखा है । क्या शहर में रहने वाले और भी लोग हैं, जो करना है वो लोग करें । हाँ बाबा मानता हूँ शहर में और भी लोग हैं पर वो लोग इस सच्चाई को तो नहीं जानते हैं । ऐसे शहर को अगर दंगों के आग में जलने से बचाना है तो ये कदम हम लोगों को ही उठाना पडेगा । पर अब इस काम में बहुत खतरा बढ गया है । बेटा, नासिरपुर, नेता और उसके गुंडे बल्कि खुद पुलिस कमिश्नर तक तुम लोगों के पीछे पड गया है । इसके अलावा भी न जाने कितने लोग अब तुम्हारे पीछे पड चुके हैं । मैं ये सब कुछ जानते हुए भी तुम लोगों को अपनी जान अब और ज्यादा खतरे में नहीं डालने दे सकता है । नहीं नहीं तुम लोग ये काम आप बिल्कुल नहीं करोगे । बाबा ये बताओ खतरा इस दुनिया में कहाँ पर नहीं? वैसे भी अगर जान नहीं जानी है तो वो तो घर बैठे इस कमरे में भी जा सकती है । जब हमने अपराध्कि इस दुनिया में कदम रखा था तो हमें ये बात अच्छी तरह से जानते थे । कि अपराध की इस दुनिया में कदम कदम पर खतरा है और उस खतरे को समय आप भी तो पहचानते थे । उसके बावजूद अपने ताबा में अपराध की दुनिया में कदम रखने दिया । तो फिर अब इस मोड पर आकर हमें खतरों से डरकर कैसे चुपचाप बैठने के लिए कह सकते हैं । मैं जानता हूँ मेरे बच्चों पर आज तक तुमने जो भी काम किए थे वो इस दुनिया से छुपकर किए थे । तो तुम्हारे कामों के बारे में तुम्हारे सेवाएं, किसी और को कानोकान भी खबर नहीं होती थी । उन कामों में न के बराबर खतरा था । पर अब तुम लोग जो करने जा रहे हो, उसमें चारों तरफ खतरों के सिवाय कुछ भी नहीं है । वो भी उस समय जब सिर्फ वो नेता ही नहीं बल्कि पुलिस भी तुम लोगों के पीछे पडी हुई है । वो लोग तुम्हारे बारे में जानने के लिए और तुम्हें खत्म करने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे जिसमें तुम्हारी जान भी जा सकती है । बाबा बिल्कुल भी चिंता मत करो, हमें कुछ भी नहीं होगा । वैसे भी अगर जान जाने ही लिखी है, दो से भगवान भी नहीं बचा सकता । पर इस मोड पर आकर अब हम लोग पीछे नहीं हट सकते । वैसे भी जान तो मेरी उस दिन भी जा सकती थी जब हमने इस अपराध की दुनिया में पहला कदम रखा था । आपको याद है ना वो दिन कहते हुए अनिल पुरानी यादों में हो गया ।

Part 4: अध्याय 7 - A

अध्याय साथ दंगे खत्म हुए चार पांच दिन भी चुके थे । देश के बाकी हिस्सों की तरह राजनगर भी धीरे धीरे वापस से अपनी पटरी पर लौटने लगा था । कुछ संवेदनशील इलाकों को छोडकर शहर में कर्फ्यू पूरी तरह से हटा लिया गया था । पर दंगों के दिए हुए जख्मों के निशान शहर के सीने पर अभी तक मौजूद थे, जो शारीरिक तौर पर हो सकता है । कुछ दिनों में मीट जाने थे पर लोगों के दिलों से वह कब मिटने वाले थे ये कहना फिलहाल मुश्किल था । दुकानें पूरी तरह से खुल चुकी थी । बाजार में चहल पहल पहले जैसे होने लगी थी । परसों तक जो लोग आपस में प्यार से रह रहे थे और कल तक एक दूसरे के जानी दुश्मन बन चुके थे, वो लोग आज फिर से एक दूसरे से हासिल कर बातें कर रहे थे । एक दूसरे के गले मिल रहे थे । हालांकि सिर्फ गले मिलने से ही उनके दिलों में जमी हुई धूल पूरी तरह से साफ हो या नहीं ये पता नहीं चला था । पर वो कहते हैं ना जिंदगी कभी भी अपने अकेले के दम पर नहीं दी जा सकती है । जिंदगी जीने और चलाने के लिए सभी धर्म जातियों के लोगों के साथ की जरूरत पडती है । बस ऐसी सोच को आगे बढाकर लोग फिर से जीने की कोशिश में लगे थे और उनमें शामिल थी ट्रिप पालेगी तिक्री ट्रिप पहले यानी अनिल अजित और अगर की जोडी जो इन दंगों से अपना घर, परिवार सब कुछ हो चुके थे । वो तीनों इत्तफाकन एक दूसरे से मिले थे और फिर जैसे तीन जिस्म और एक जान हो गए थे । उन्होंने एक दूसरे के हमेशा साथ रहने और मरते दम तक दोस्ती निभाने का वादा किया था । इन चार पांच दिनों में उन तीनों दोस्तों के पास जो थोडे बहुत पैसे थे वो सारे उनके खाने पीने में खर्च हो चुके थे । कपडे भी उनके पास सिर्फ वही थे जो उनके बदन पर थे जिन्हें वह रोज रात को सार्वजनिक नल के पानी से अलग अलग हिस्सों में धो कर अपना काम चला रहे थे । दिन में वो लोग कोई काम धंधा तलाशते थे और रात होते ही सडक किनारे किसी फुटपाथ पर अपना आशियाना बना लेते थे । उन्होंने ढाबों में चाय जांच की थडियों पर और भी कई जगह पर काम मांगने की कोशिश की थी और उन लोगों का हुलिया देखकर सबने उन्हें चोर और बेकारी समझ करन का दिया लोगों ने उन्हें भी तो देनी चाहिए और काम नहीं दिया । हर जगह से उन्हें सिर्फ और सिर्फ नफरत और दुत्कार ही मिली । उस कल रात से कुछ नहीं खाया और जेब में पडे हुए सारे पैसे भी खत्म हो गए । अब क्या कर रही है? आज? अनिल ने कहा तुम सही कह रहे हो ये आज भूख के मारे यहाँ जान निकली जा रही है और हमें कोई काम भी देने को तैयार नहीं । साले कैसे लोग हैं? बी तो देने के लिए तैयार हैं पर काम नहीं । क्या अब हमें पेट भरने के लिए भीख मांगनी पडेगी? अगर ने गुस्से से कहा नहीं, आज ये कभी नहीं हो सकता है । हम लोग ठीक नहीं मांगेंगे । अनिल ने ब्रेड स्वर्ण देगा तो फिर क्या करें या हमें कोई काम नहीं दे रहा । अब भीख मांग कर पेट नहीं बडे । तो फिर क्या पेट भरने के लिए हम लोग चोरी करना शुरू करते हैं । दूसरों को लूटना शुरू कर देंगे? अजीत ने हताशा भरे स्वर में कहा मेरे बच्चों का तुम लोगों को ऐसे ही करना होगा । अभी वहाँ एक नई आवाज थी । उन्होंने मुड कर देखा तो पाया सरदार करतार से उनकी तरफ बढा चला था । सरदार करतार से उनकी तरह से बढा चला रहा था । आप क्या कह रहे बाबा आप हम लोगों को चोरी करने के लिए कह रहे हैं । अनिल ने आश्चर्य से पूछा था इसके अलावा और कोई रास्ता भी तो नहीं है । मेरे बच्चों ढंगों में मेरी किराये की टैक्सी जल गई । उसका पैसा लौटाने में मेरे घर का बचा कुचा सामान बिक गया । मैंने कहीं जगह का मारने की कोशिश की । हर मेरी कोई भी कोशिश सफल नहीं हुई । रिप्लाई नहीं मेरे खुद के रिश्तेदारों ने मेरी इस हालत पर मुझे सहारा देने के बजाय उल्टा मुझसे मोर लिया । जब तक मेरे पास पैसे थे तब तक वो मेरे अपने थे । पर दंगों में जब मेरा सब कुछ लुट गया वो लोग अब मेरी शकल भी पहचानने से इंकार करते हैं । अब मेरे पास भी और कोई रास्ता नहीं बचा । ऐसे भाई चोरी करने पर बाबा चोरी ये तो गलत बात है नहीं इसमें कुछ भी गलत नहीं । मेरे बच्चो, ये दुनिया बडी इस वाले में यहाँ मांगने से सिर्फ और सिर्फ दुत्कार मिलती है । उतना ही और अगर ये दुनिया तो मैं तुम्हारा नहीं देती है तो फिर उसे हासिल करने के लिए झेलना ही पडता है । अब तुम खुद अपने आप को ही देख लो । कल तक तुम लोगों का भी अपना अपना एक घर था, अपना परिवार था जिनके साथ तुम लोग बडी हंसी खुशी के साथ रहा करते थे । पर क्या हुआ है? वक्त के साथ जमाने ने तुमसे तुम्हारा सबको छीन लिया । जो जमाने नहीं तुम्हारे साथ क्या है? वही या तुम लोगों को जमाने के साथ करना होगा? नहीं बाबा, हम लोग नहीं तो अभी ऐसा कर सकते हैं और न ही कभी आगे ऐसा करेंगे । अगर हम भी उन लोगों की तरह करने लग गए तो उनमें और हमें क्या फर्क रह जायेगा? अजित ने कहा हाँ बाबा अजीत सही कह रहे हैं । वैसे अभी तो हम लोगों की अब मजबूरी है जिसकी वजह से हम लोग स्कूल नहीं जा पा रहे पर बाबा में स्कूल गए और वहाँ पर यही पढाई सीखा है कि हम बच्चे इस देश का भविष्य है । अगर हम लोग ही गलत रास्ते पर चल पडे तो देश का भविष्य भी गलत हाथों में ही जाएगा । अनिल ने अजित की बात को आगे बढाते हुए कहा हाँ बाबा चाहे जो भी हो जाए पर हम गलत राह पर कभी नहीं चल सकते हैं । अगर ने दोनों का साथ दिया तो फिर क्या करोगे तो लोग पेट भरने के लिए जब कोई तो मैं काम नहीं मिल रहा है तो जिंदा रहने के लिए फिर लोगों से भीख मांग होगे । करतारसिंह ने पूछा नहीं बाबा बेशक हमें कोई काम नहीं मिल रहा है पेट भरने के लिए हम भी कभी नहीं मांगेंगे । एक मांगने से अच्छा है हम लोग अभी मर जाए । वैसे भी अगर हमें कोई काम नहीं दे रहा है तो काम करने के मेहनत करके पैसे कमाने के और भी कई रास्ते हम चौराहे पर रुकने वाले लोगों की गाडियां साहब क्या करेंगे? कहीं सडक किनारे पर बैठकर लोगों के जूते पॉलिश क्या करेंगे? पर भी कभी नहीं मांगेंगे और नहीं कभी चोरी करेंगे । अनिल ने जवाब दिया हाँ बाबा, हम लोग अनिल के साथ है और ऐसा ही करेंगे । अजीत और अजगर ने अनिल की हाँ में हाँ मिलाते हुए का शाहबाज मेरे बच्चों मुझे इस बात की दिल से खुशी हो रही है कि इस मुश्किल घडी में भी तुम लोगों ने सच्चाई और ईमानदारी का दामन नहीं छोडा है । मैं वाहेगुरु से यही प्रार्थना करूंगा कि वह तो मैं सदाय सच्चाई के रास्ते पर चलाए रखें । मेरे बच्चों आज से तुम लोग फुटपाथ पर नहीं रहोगे । बल्कि मेरे साथ चलकर मेरे टूटे फूटे मकान में रहोगे । वो जैसा भी है पर तुम्हारे सर पर छत रहेगी और तुम लोगों को इस तरह से मेहनत करने की भी कोई जरूरत नहीं है । तुम लोगों के लिए मैं मेहनत करूंगा । बस तुम लोगों को स्कूल में भर्ती होकर चाय सरकारी स्कूल में ही सही पर अपनी पढाई पर ध्यान देना होगा । मुझे पूरी उम्मीद ना । एक दिन बडे होकर तुम लोग जरूर कामयाबी की मंजिल को पाल हो गए और अपने मृत माता पिता के साथ साथ मेरा नाम भी रोशन करूँ । नहीं बाबा, हम लोग बहुत बनकर आपके साथ नहीं रहना चाहते । जीतने का इसमें बहुत की कोई बात नहीं है । मेरे बच्चों नहीं बाबा आप कमाओ और हम लोग बैठ कर खाएँ । इस बात के लिए हमारा जमीन गवाना नहीं करता । अगर निकले बच्चों तो मुझे कुछ समझो या ना समझो पर तो उनमें पर तुम लोग मेरे बच्चों की तरह हूँ । बाबा हम भी आपको बाबा बोलते हैं तो वह दिल से बोलते सिर्फ जबान से नहीं पर फिर भी हम लोग आपका ये ऐसा नहीं ले सकते । हम लोग खुद मेहनत करके अपना पेट पालेंगे । कहते हुए अनिल थोडी देर के लिए रुका फिर उसने अजीत और रोजगार की तरफ देखा और अपनी बात को आगे बढाते हुए कहा वैसे आप अगर चाहे तो हम लोग आपके साथ आप के घर में रह सकते हैं । हम लोग अपना खर्च खुद उठाएंगे । दोस्त हाँ बाबा मिल सही कह रहा है हम लोग आपके साथ रह सकते हैं । इस बहाने से हमारे सर पर छत दिया जाएगी और हमें भी अपने बडे का प्यार नसीब हो जाएगा । अगर नहीं अनिल की बात का जवाब दिया हाँ बाबा ये दोनों सही कह रहे हैं इस प्रकार से आपकी बात भी रह जाएगी और हम लोग आप पर बहुत भी नहीं बनेगी जीतने का तुम लोग मुझ पर कभी भी बोझ नहीं रहोगे मेरे बच्चों पर जैसे तुम लोगों की इच्छा कम से कम । इसी बहाने से तुम लोग मेरे साथ तो रहोगे और मुझे भी एक परिवार का सुख मिल जाएगा । कहते हुए करतारसिंह आँखे छल चलाओ थे । उस दिन के बाद वो तीनों दोस्त करतार सिंह के साथ उसके घर में रहने लग गए । वो तीनों अन्य गरीब और अनाथ बच्चों की तरह राजनगर के चौराहों पर रुकने वाली गाडियों के शीशों को साफ करने के काम में लग गए । एक गाडी साफ करने के कोई पच्चीस देता । एक गाडी साफ करने के कोई पच्चीस पैसे देता तो कोई पचास पैसे दे देता हूँ । अगर कोई कोई दिलदार कार्य वाला होता तो कभी कभी उन्हें इसका एक रुपया भी मिल जाया करता था । दिन में वह फुटपाथ पर काम करते थे और साथ ही साथ रात में अपनी पढाई भी क्या करते हैं । हालांकि इस तरह काम करके उनकी ज्यादा कमाई नहीं होती थी । पर फिर भी वो इस काम से इतना तो कमा ही लेते थे कि उन्हें खाने पीने के मामले में करतारसिंह पर निर्भर नहीं होना पडता था और उनका काम चल जाता था । धीरे धीरे दिन यु ही गुजरते चले गए । राजनगर में हुए दंगों को चार पांच महीने से ज्यादा बीत चुका था और मई का महीना चल रहा था । राजनगर उन दंगों की कडवी यादों को बुलाकर अब कहीं आगे बढ चुका था । बेशक वक्त ने राजनगर से दंगों के निशान मिटा दिए थे, फिर भी ये वक्त उन तीन मासूमों के दिलों से ये दर्द पूरी तरह से नहीं मिटा पाया था । उन के दिल में कहीं ना कहीं अपने परिवार से बिछडने की एक कसक बाकी रह गई थी । ऐसे एक दिन दोपहर के करीब तीन बज रहे थे और सूरज आसमान में विराज होकर आग बरसा रहा था । गर्मी के मारे सबका बुरा हाल था । ऐसे मौसम में जब लोग अपने घरों और कार्यालयों में बैठकर कूलर और एसी की ठंडी ठंडी हवा खा रहे थे तब वो तीनों दोस्त राज नगर के चौराहों पर रोज की तरह अपना काम कर रहे थे । फर्क सिर्फ इतना सा था कि जहाँ अनिल और अजित चौराहे पर रुकने वाली गाडियों के शीशे साफ किया करते थे वहीं पर आजकल अगल चौराहे के पास सडक के किनारे फुटपाथ पर जूते पॉलिश करने लग गया था । तभी चौराहे की लालबत्ती पर एक लाल रंग की ही जमजम आती हुई कार आकर रुकी । कार के सारे शीशे बंद थे । कार की ड्राइवर सीट पर एक पचास पचपन साल का अधेड आयु का आदमी बैठा हुआ था । जिसके चेहरे से काइयां पंजाब तब पता हुआ महसूस हो रहा था । उसके बगल की सीट पर उसकी उम्र से आधी से भी कम उम्र की एक बीस बाईस साल की बहुत ही सुंदर युवती बैठी हुई थी । तभी ड्राइवर सीट की तरफ से उस बंद शीशे के आगे अनिल अपने एक हाथ से कार साफ करने का कपडा लिये आया और शीशे को ठक तक आने लगा । क्या उस आदमी ने हाथ के इशारे से अनिल से पूछा साहब, मैं आपकी गाडी के शीर्ष साफ कर दूँ क्या? सिर्फ पचास पैसे में अनिल ने अपने हाथ में पकडे हुए कपडे की तरफ इशारा करते हुए कहा ठीक कर दो । पर जल्दी कहते हुए उस आदमी ने अपना सर हमें हिलाया । ये सुनते ही अनिल ने फटाफट हाथ चलाते हुए गाडी के शीशों पर अपने हाथ में पकडा हुआ कपडा फैलाने लगा । थोडी देर बाद उसने ड्राइवर साइड का शीर्षक टक टक आते हुए अपना काम खत्म करने का इशारा किया । आदमी ने पहले सामने रेट व्यक्ति पर नजर दौडाई जिसमें उसकी तरफ के ग्रीन बत्ती होने में कुछ सेकेंड का समय था । फिर उसने अपनी तरफ का शीशा नीचे गिराया । कार के सामने ड्रॉर में से एक सिगरेट का पैकेट निकाला और लाइटर बरामद किया । उसने बडे इत्मीनान से सिगरेट के पैकेट में से एक सिगरेट निकाला और लाइटर से उसे सुलगाया तो आप प्लीज जल्दी करिए ना । इस तरफ की हरी बत्ती होने वाली है । अनिल चौराहे की सिग्नल की तरफ देखता हुआ बडे व्यग्र भाव से बोला अभी देता हूँ इतनी भी क्या जल्दी कहते हुए उस आदमी ने सिगरेट का एक गहरा काट लिया और फिर ढेर सारा दुआ निकालकर अनिल के ऊपर देखिए । मोहम्मद हुआ जाते ही अलेल समझ नहीं पाया और वो जोर जोर से खाते लगे । ये देखकर वहाँ आदमी और उसके साथ में बैठी हुई युवती जोर से हंसने नहीं । पूरा फॅमिली लडकी के मुंह से निकला । उस आदमी ने वो सीक्रेट अपने होटल से निकालकर नियुक्ति को थमा दिया और फिर अपना पर्स खोला पर सौ सौ के नोटों से खचाखच भरा हुआ नहीं । उसने पर्स में से एक सौ का नोट निकाला और अनिल की तरफ बढाये साहब पचास पैसे छूटता दीजिए या फिर पांच दस का कोई छोटा नोट दे दीजिए मेरे पास और में कि छोटे नहीं । अनिल ने सौ किलो को देखते हुए कहा यार छूटता तो नहीं है मेरे पास क्या हो तो तुम मेरा पर देख लो मैं यही लेना पडेगा । उस आदमी ने कहा साहब में गरीब आदमी हो सौ का छोटा कहाँ से दूर आपको? अनिल ने फिर का घर तुम्हारे पास तो का छोटा नहीं तो फिर ठीक है धूम आपने पचास पैसे अगली बार ले लेना । अभी वो देखो बत्ती भी हो गई है हूँ । उस आदमी ने सामने की तरफ देखते हुए हसते हुए अनिल से कहा और अपनी कार को स्टार्ट और अपनी कार को स्टार्ट कर दिया । साहब साहब अनिल कांच में देखते हुए उस आदमी ने अनिल की बात को अनसुना करके अपनी कार का शीशा ऊपर क्या और कार को रेल थी । साथ साथ मैंने पैसे कहते हुए आने उसकी कार के पीछे पीछे दौड पडा । उस आदमी ने रेयर शीशे में अपनी कार के पीछे भागते हुए अनिल को देखकर एक जोरदार था का लगाए पीछे अनिल छोटा समूह बनाए उदास खडा था बेच जा रहा है कार में बैठी हुई युवती के मुँह से निकला है ।

अध्याय 7 - B

अच्छा तीन चार दिन गुजर गए । लालबत्ती होने पर चौराहे पर उस दिन वाली ही चमचमाती हुई लाल कार आकर रुकी । अनिल ने उसका आपको देखा और उस की तरफ जाने को हुआ । पर कुछ सोच कर वो वहीं रुक गया । तभी कार की ड्राइविंग सीट का शीशा नीचे हुआ और ड्राइविंग सीट पर बैठे हुए उस दिन वाले आदमी ने अनिल को अपने हाथ का इशारा करते हुए अपने पास बुलाया । अनिल उसके पास गया था तो उस आदमी ने कहा क्या बात है? मैं आज कार साफ नहीं करेगा क्या जल जल्दी से कार साहब कल अनिल उसकी बात सुनकर चुपचाप उसकी कार साफ करने लग गया । जब कार साफ हो गई तो अनिल उसकी ड्राइविंग फीट के पास वाली खिडकी पर खडा हो गया । उस आदमी ने वापस से अपने पर से सौ का नोट निकाला और अनिल की तरफ लहराने लगा । नोट लहराते हुए ही वो ड्राइविंग सीट की बगल की सीट पर बैठी हुई । उस दिन वाली युवती को देखकर मुस्कुराया साहब, चिंता मत करिए, आज मेरे पास छूटता है । आपके सौ की नोट का सौ का नोट देखते ही अनिल ने मुस्कुराते हुए कहा । अनिल के इतना कहते ही उस आदमी के पास बैठी हुई युवती जोर से हंस पडेगी । एक तो अनेलका इस तरह से मुस्कुराते हुए बोलना और दूसरा अपने साथ बैठी हुई उस युवती का हसना । उस आदमी को वह सब अपने गाल पर एक तमाचा सा लगा । शर्म और अपमान के मारे वो उससे मैं चिल्लाते हुए अनिल से बोला साले हराम, भिखारी की औलाद तो आपने गंदे कपडे से मेरी कार का शीशा खराब कर दिया और ऊपर से सफाई के पैसे भी मांग आएगी क्या नहीं देता था मैं आपसे कोई भीख नहीं मांग रहा हूँ बल्कि अपनी मेहनत का पैसा मांग रहा हूँ । वैसे भी आज मैं आपकी कार का शीशा साफ करने नहीं आया था बल्कि खोदा आपने बुलाया था अपनी कार का शीशा साफ करने के लिए । अनिल ने उसे जवाब दिया साले तो गाडी को गंदा करता है और ऊपर से मुझसे जुबान भी लगा रहा है । साला हरामी की औलाद । उस आदमी ने गुस्से से कहा साहब गाली मत दो । अनिल ने गुस्से से का एक बार नहीं सौ बार दूंगा तो मेरा क्या कर लेगा? अबे साले गंदी नाली के कीडे साहब अनिल ने गुस्से में इधर उधर देखा । उस की नजर सडक के एक किनारे पडे हुए पत्थर पर पडी । उसने तुरंत उस पत्थर को उठाया और उस आदमी की कार पर मार नहीं वाला था । तभी पीछे से उसे अजित ने पकड लिया । नई आज ऐसे गुस्सा मत करो ये बडी बडी गाडियों में चलने वाले लोगों का दिल बहुत ही छोटा होता है । ये हम जैसे गरीबों का खून चूस चूस कर रही तीन में बैठने लायक बने रइसों से अमीर है पर दिल के बहुत गरीब जो गरीब का हक मारकर खा रहे हैं । अजीत अनिल को समझाते हुए बोले क्या बोला मैं साले? तो वो आदमी अभी गुस्से में और कुछ बोलने जा रहा था कि तभी उसके पास कार में बैठी हुई युवती ने उस आदमी से कहा फॅालो यहाँ से क्यों इनके मूल लगते हूँ हम लोग लेट हो रहे हैं तो मैं कह रही हो डार्लिंग इसीलिए से छोड रहा हूँ आज वरना तो साले को अपनी बात अधूरी छोडते हुए उस आदमी ने अपनी कार्य स्टार्ट की, गैर में डाला और वहाँ से चला गया । पीछे से अनिल को बहुत गुस्सा आ रहा था और अजीत उसे समझाने में लगा हुआ था । इसी तरह से कुछ दिन और गुजर करें । अब जब भी उसकी गाडी उस चौराहे पर रोकती, कोई भी लडका उसकी गाडी को साफ करने नहीं जाता था । अनिल और अजीत ने सब कोई बात समझा दी थी कि कोई भी उस गाडी को साफ नहीं करें । एक दिन वही कार फिर से उस चौराहे पर आकर रुकी स्टार्मिंग अब कोई फायदा नहीं है । यहाँ सब लोग तो मैं जान गए अब कोई भी नहीं आएगा तुम्हारे झांसे में और तुम्हारी कार को साफ करने के लिए । कार में बैठे हुए लडकी ने मुस्कुराते हुए उससे कहा स्वाॅट कोई कार साफ करने नहीं आएगा । इसका मतलब ये तो नहीं किया मजे भी नहीं ले सकते । तुम बस देखते जाओ । मुझे कहते हुए उसने कार को लालबत्ती के पार करके आगे की ओर ले गया और सडक के किनारे ले जाकर गाडी खडी कर दी । फिर ड्राइविंग सीट से नीचे उतारा और उस तरफ चल पडा जहाँ छांव में दो चार लोगों ने जूते पॉलिश करने के आपने ठीक लगा रखे थे । तो उन तीनो में से क्या मासूम असगर का भी था । उस आदमी ने पहले एक नजर सब जूते पॉलिश करने वालों पर दौडाई और फिर सबसे छोटे देखने वाले अजगर की थी ये बन गया । उसने अपने दाये पैर को आगे बढाकर अजगर के जूते साफ करने वाले बॉक्स पर रखा और उसे अपने जूते पॉलिश करने के लिए बोला । थोडी देर में अगर नहीं है उसके दोनों जूते पॉलिश करने । उस आदमी ने अपनी पैंट की जेब से अपना पर्स निकाला और एक बार पीछे अपनी गाडी की तरफ मुड कर देखा और उसमें बैठे हुए लडकी को देख कर मुस्कुरा । वो लडकी भी उसे देख कर मुस्कुरा दिए । फिर उस आदमी ने अपने पर से सौ का चमचमाता हुआ नोट निकले साहब छुट्टा दो रुपये दीजिए ना अगर ने उसके हाथ में सौ का नोट देख कर का वो बच्चे छोटे तो नहीं है मेरे पास । उस ने मुस्कुराते हुए कहा साहब ऐसा मत कहिए, आप ऐसा करिए अगर आपके पास दस बीस का लोड हो, वो दे दीजिए, मैं उसके छुट्टी दे दूंगा । अगर ने का और देखो मेरे पास दस बीस का कोई भी नोट नहीं । उसने अपना सौ के नोटों से खचाखच भरा हुआ पाँच दिखाते हुए ठीक है साहब आफिॅस दे दीजिए, मैं भी पडोस से कहीं इसके छोटे करा के ले आता हूँ । अरे वाह! मैं तुझे चौकन् और देखो और अगर तू कहीं नोट लेकर भाग गया तो उसने मजाक उडाते हुए कहा साहब आप मुझ पर भरोसा कीजिए, मैं अभी थोडी देर में कहीं से छोटे वैसे करा कर ले आऊंगा नहीं मुझे तो सरकारी पर कोई भरोसा नहीं है । ऐसा करो अभी तो मेरे पास छोटे नहीं है की तोर पे तो माँ अगली बार ले लेंगे साहब ऐसा मत करिए आपके खुलने पैसे मैं भी ले आता हूँ । हाँ बेटा ये मुझ पर पहले दौर पे का भरोसा नहीं है और तो चाहता है कि मैं तुझ पर सौ रुपए का भरोसा कर नहीं ऐसा नहीं होगा समझा ये दौर पे फिर कभी ले लेना । कहता हुआ वो आदमी पालक कर अपनी कार में जाकर लाइट और वहाँ से चला गया । पीछे से अपना पिटा हुआ मूल्य हुए अगर से देखता रहेंगे । उधर जब अनिल ने देखा कि उस कार्य वाले ने चौराहे से आगे जाकर अपनी गाडी रोकी है तो उसका दिमाग जोर से घंटे दे दिया । उसने देखा की वो आदमी गाडी से नीचे उतरकर उस तरफ जा रहा है जहाँ पर अगर में जूते कॉलेज कर दिया लगा रखा था तो जैसे वो सब कुछ समझ वो समझ गया था कि जब उस कार्य वाले का उन पर लोड नहीं चल पा रहा है तो वो अपने मनोरंजन के लिए अगर को अपना निशाना बनाने वाला है वो तुरंत उसकी तरफ जाना हैं । तभी चौराहे पर उसी समय आकर रुकी गाडी वाले ने उसे आवाज लगाई । मजबूरन उसे अपने बढते हुए कदम रोकने पडे और वो उसकी गाडी साफ करने लगे । पर बीच बीच में उसकी नजरें अगर की तरफ की जा रहे थे उसने कहा साफ करने वाले सभी लडकों को समझा दिया था कोई उसके कार को साफ नहीं करेगा । पर उसके न ने से दिमाग में ये बात नहीं आई थी कि वो आदमी अब इस तरह की घटिया हरकत जूते पॉलिश करने वालों के साथ भी कर सकता है । इसीलिए उसने उन घटनाओं का जिक्र आज घर से या घर पर करतारसिंह से नहीं किया था । पर अब उसे अपनी गलती पर पछतावा होने लगा । उसने दूर से देखा कि अगर रोज आदमी के साथ कुछ बहस कर रहा है वो इतनी दूर से कुछ सुनते नहीं पा रहा था । पानी इतना तो वो समझ चुका था कि वो आदमी जरूर उस की तरह ही अजगर को सौ का नोट देकर उसके खुलने मांग रहा हूँ । और खोलने पैसे नहीं होने पर अगर का मजाक उडाकर पैसे नहीं दे रहा है उसे जल्दी जल्दी से वो गाडी साहब वो गाडी वाला कोई भला उसने उसे एक रुपये का सिक्का । अनिल ने उसे थैंक्स बोला और चौराहे पर चल रही लालबत्ती की तरफ निराशा भरी नजर दौडाई और उसके सेकंड राउंड करने जैसे ही काउंट जीरों पर पहुंचा और उसकी तरफ की बत्ती हरी हुई । वो तुरंत तेजी से आज घर की तरफ भागने और जब तक वो अजगर के पास पहुंचता तब तक वो आदमी अपनी कार में बैठकर वहां से जा चुका था और उसके पीछे अगर चुपचाप उदास का उस आदमी ने तो मैं पैसे नहीं भी अनागत जूते पॉलिश कराने के बाद ऍम कर सकते हैं । था तो मैं कैसे पता अगर ने आॅल उसने तो मैं जरूर सौ का बडा नोट दिया होगा । हाँ उसने सौ का ही नोट दिया था और दूर काटकर बाकी पैसे मांगे थे तो मैं कैसे बताया । वैसे तुम उसे सौ के खुलने पैसे दे पाए क्या क्या यार तुम भी मजाक कर रहे हैं । जूते पॉलिश कर के दिन भर में मैं मुश्किल से तीस चालीस रुपए कमा पाता हूँ और तुम सौ रुपए के खुलने पैसे की बात कर रहे हो पर तुमने अभी तक नहीं बताया कि तुम्हें ये सब कैसे पता चला । नहीं मेरे भाई मैं तुमसे कोई मजाक नहीं कर रहा हूँ । मुझे सब इसलिए बताया क्योंकि दो बार उसने भी चौराहे पर मुझ से अपनी कार साफ करवाई थी और पचास पैसा एक रुपया देने के बदले मुझे यूरी सौ का नोट दिखाया था और खुलने पैसे ना होने की वजह से उसने मेरे वो पैसे भी नहीं दिए थे । वैसे सुना है ये कई जगह ट्राई करता है । ऐसा करके उसे हमारी गरीबी और बेबसी का मजाक उडाने में शायद खुशी मिलती है । क्या कहा वो ऐसा तुम्हारे साथ दो बार कर चुका है तो मैं मुझे पहले क्यों नहीं बताया? अगर ने शिकायत ऍम यार मुझे लगा वो यहाँ नहीं आएगा । वहाँ चौराहे पर तो गाडी साफ करने वाले सभी लडकों को पता है उसके बारे में आप कोई भी उसकी गाडी साफ नहीं करता है । वैसे अब तुम नहीं कभी वो आए तो उसके जूते साफ मत कर । ऐसे लोगों के मूल अपना ठीक नहीं है । ऐसे ऐसे कैसे छोड दिया । हमारे अलावा न जाने ये कितनों के साथ ऐसा कर चुका है । और अगर इसे सबका नहीं दिखाया गया तो न जाने आगे ऐसा और लोगों के साथ कितनी बार करेगा । फिर अपने मजे के लिए ऐसा करने वाले को हम ऐसे कैसे माफ कर दें । अगर नहीं उससे मिका जाने दे । आज ऐसे लोग दुनिया में भरे पडे हम किस किस से लडेंगे । वैसे भी हम अभी छोटे बच्चे ही तो है । आखिर हम कर ही कह सकते हैं अनिल ने निराशा भरे स्वर्ण का राम आगे ऐसे लोगों से सावधान तो नहीं सकते हैं तो हम सही कह रहे हो । अनिल अगर नहीं उसकी हमें हामिद लगभग बीस पच्चीस दिन गुजर गए । फुटपाथ पर काम करने वाले सब बच्चे उस आदमी की चाल समझ चुके थे । वो आदमी फिर मजे लेने के लिए उनसे काम करवाता था । अनिल अजगर में भी अपने साथ काम करने वाले बच्चों को उसके बारे में खबर दाद कर दिया था । देने से ही गुजर गए और फिर कुछ दिनों के बाद एक राजू क्या बात है । आज सोनू कहीं नजर नहीं आ रहा हैं । क्या वो भी बीमार चल रहा है? अनिल ने चौराहे पर उसके साथ गाडी साफ करने वाले एक लडकी से पूछा । सोनू भी उसी की उम्र का लडका जिसके बाद शराब के नशे में गाडी के नीचे आकर मर चुका था और वो अपनी विधवा मां और दो छोटे छोटे दो तीन साल आएगी । उसके भाई बहनों के साथ एक कच्ची झोपडी में रहते हैं । गरीबी और मानसिक सदमे की वजह से उसकी माँ ज्यादातर बीमार रहने लगी थी और कुछ भी काम कर पाने में असमर्थ थे जिसके कारण वो भी अन्य बच्चों के साथ फुटपाथ पर गाडियों के कान साफ क्या करने का काम करता था और वही की फुटपाथ पर काम करने वाले ज्यादातर बच्चों की यही दास्तान नहीं जो गरीबी के दलदल में रहते हुए, भीक मांगने का, गाडियाँ साफ करने का, जूते पॉलिश करने का जैसे छोटे मोटे काम करके अपना और अपने परिवार का पेट भर रहे थे । उसका तो एक्सीडेंट हो गया है यार । राजू ने जवाब दिया क्या कैसे? अनिल ने चौकर पूछा क्या बताऊं आज बस इतना जान लो किए उसी गाने वाले की वजह से हुआ है जो मजे लेने के लिए गाडी के शीशे साफ करवाता था । अपने पर से सौ का नोट लहराता था पर वैसे कभी नहीं देता था । राजू ने कहा अरे पर हुआ कैसे? आज मुझे तो कुछ नहीं पता होगा । तुम लोग तो डेंगू की वजह से तीन चार दिन तक घर से बाहर ही नहीं निकले थे । अभी इतने दिनों के बाद कल फिर से वो गाडी वाला चौराहे पर आया था और गाडी साफ करने के लिए बोला था पर हम में से कोई भी उसकी गाडी साफ करने नहीं गया । कहते हुए वह रोका फिर अपनी बात पूरी की । सेवाएं सोनू के पर क्यों तुम लोगों ने सोनू को उसकी कार साफ करने से मना नहीं किया था क्या हम लोगों ने उसे खूब मना किया था । वही नहीं माना । कहने लगा उसकी माँ बहुत बीमार है उसके लिए दवाई लेकर जानी है । फिर वो कार्य वाले नहीं । इस बार दस का नोट ही दिखाया था तो सोनू समझा कि दस के खुलने पैसे तो वह लौटा देगा इसलिए वो उसकी गाडी साफ करने चला गया । पर जैसा कि हमेशा होता था गाडी साहब गाडी साहब हो चुकने के बाद उसने जो दस का नोट दूर से दिखलाया था वो नकली वो नकली निकला । उस आदमी ने फिर सोनू को सौ का नोट देख लाया तो बहुत रोया गिडगिडाया उसकी माँ की बीमारी का वास्ता दिया और उस आदमी का दिल बिल्कुल भी नहीं पिघला । सोनू को पता नहीं फिर अचानक से क्या हुआ । उसने एकदम से जब पट्टा मारकर उस आदमी के हाथ से वह सौ का नोट खेल लिया । वह गाडी वाला गुस्से से अपनी गाडी से नीचे उतारा और पहले तो उसने गाल पर एक जोरदार थप्पड मारा और फिर उससे और फिर उसे तेज धक्का दे दिया । उसके धक्के से वह सडक किनारे लगे हुए खम्बे से जा टकराया जिसकी वजह से उसका सिर फट गया और हाथ में फ्रैक्चर आ गया था । ये भगवान और ठीक तो है ना । अनिल ने पूछा हाँ तो वो ठीक है । किसी तरह से हम लोगों ने उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया था और डॉक्टर ने उसके सर पर चार पांच ताकि लगाए थे और हाथ में कच्चा प्लास्टर बांदिया था । अभी कहाँ पर हूँ? अस्पताल नहीं हम फुटपाथ वालों को इतने दिन तक अस्पताल में कौन रखता है । हम उसे तो उसी समय अस्पताल से लेकर आ गए थे । अभी तो वो अपनी झोपडी में ही है । बिचारा बार बार तो मैं याद कर रहा था । कह रहा था अगर अनिल भैया इस समय साथ में होते तो मेरे साथ कभी भी ऐसा नहीं होता । शायद पर होनी को कौन टाल सकता है । अनिल ने दुख भरे स्वर में कहा वैसे मैं भी उसके घर उसे मिलने जा रहा हूँ । आवाज इत सोनू के घर चलते हैं । अनिल ने अजित से कहा और वह दोनों वहां से रवाना हो गए । चलते चलते उन्होंने अजगर को भी अपने साथ ले लिया था । भैया देखो उस कार वाले ने मेरा क्या हाल कर दिया है । सोनू ने अनिल अजित और अजगर को अपने घर में देखकर होते हुए कहा घर क्या वो छोटे से कमरे की एक छोटी सी झोपडी थी जो राजनगर कि रेलवे लाइन के सहारे बसी हुई कच्ची बस्ती में बनी हुई थी । वहाँ तक पहुंचते हुए उन्हें न जाने कितनी गंदी नालियों को पार करना पडा था । पूरे रास्ते गरीब घरों के आधे नंगे बच्चे उन्हें देखने को मिलेंगे जिनको देखकर यही लगता था कि शायद ही जिंदगी में कभी उन्हें पूरे कपडे नसीब हुए होंगे और शायद ही कभी उन लोगों ने पेट भर कर खाना खाया होगा । उस रास्ते पर चलते हुए नन्ने अनिल के निर्णय से मस्तिष्क में विचारों की एक बाढ सी आई हुई थी । सारे रास्ते भर वो एक शब्द भी नहीं बोला था जबकि इस दौरान आयोजित और अगर न जाने कितने सवाल उससे कर चुके थे । सोनू का घर इस समय खुला हुआ ही था । ऐसे भी उस झोपडी में ऐसा कुछ था नहीं जिसे चुराया जा सके । घर में प्रवेश करके उन्होंने देखा सामान के नाम पर ले देकर वहाँ पर एक टूटी हुई घट थीं । जिस पर इस वक्त सोनू अपने टूटे हुए हाथ को लेकर लेटा हुआ था । उसके माथे पर गंदी सी पट्टी बंधी हुई थी । खाट के सहारे ही नीचे एक फटा गद्दा बिछा हुआ था जिस पर उसके दोनों छोटे भाई बहन हो रहे थे । उसकी माँ थोडा बहुत ठीक हो चुकी थी और शायद काम पर गए । मैं जानता हूँ तुम्हारे साथ क्या हुआ है । पर मेरे इतना मना करने के बाद भी तुम उसकी कार साफ करने के हो गए थे । बोलो नहीं या फिर क्या करता हूँ । मैं बहुत ज्यादा बीमार थी और घर में खाने को कुछ भी नहीं था इसलिए मुझे ये गलती हो गई । मुझे माफ कर दो भैया पर अगर आप उस समय होते तो मैं कभी भी उसकी कार साफ करने नहीं जाता है । आप क्यों नहीं आए थे? थोडे दिन तक बोलिए भैया सोनू हम तीनों को भी बुखार हो रखा था जो संक्रामक था और बाकी बच्चों में भी फैल सकता था । इसलिए हम लोग दवाई लेकर घर पर ही आराम कर रहे थे । कल जाकर हमारा बुखार उतरा था तो हम लोग आज काम पर आ गए । वहाँ जाकर ही पता चला कि तुम्हारे साथ ये हादसा हो गया है । वैसे आप तो बिलकुल भी चिंता मत करो, तुम जल्दी ठीक हो जा हुए भैया अब आप आ गए हो तो मुझे चिंता करने की क्या जरूरत है? और भैया एक बात बताइए क्या हमेशा ऐसा चलता रहेगा? ये पैसे वाले क्या ऐसे ही हमेशा हम लोगों की गरीबी का मजाक उडाते रहेंगे और हमारे बार यूनि चोट खाकर अपने पैर तो अगर घर पर चुपचाप बाजार बैठे रह जाएंगे क्या हम लोग कुछ भी नहीं कर सकते? तो उन्होंने मुझे हुए स्वर में कहा है नहीं तो तुम उदास मत हो । ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा । आप कभी कोई आमिर किसी गरीब का ऐसे मजाक नहीं उडा पाएगा । आज के बाद कोई गरीब बच्चा यू चौराहे पर गालियाँ साफ नहीं करेगा । नहीं कोई बच्चा जूते पॉलिश क्या करेगा? धूम सब लोग भी अच्छे स्कूल में पढाई कर हो गए और एक दिन उनसे भी बडे आदमी बनो । अनिल ने अपनी नन्ने नन्ने हाथों की मुठ्ठियां भेजते हुए कहा सच भैया क्या ऐसा संभव है? क्या मैं भी स्कूल जा पाऊंगा और मेरे छोटे भाई बहन भी पढ पाएंगे । बिलकुल सच पैसे सोनू पहले तो मेरी एक बात का जवाब दो । क्या भैया बडा आदमी बन कर कहीं तुम्हें बदल तो नहीं जाओगे । उस गाडी वाले की तरह दूसरे घडी बच्चों को परेशान तो नहीं करने लग । अनिल ने पूछा ही नहीं है क्या मुझे देखकर आपको ऐसा लगता है? मैं ऐसा कर सकता हूँ । सोनू ने कहा अरे तू तो जवाब देने के बजाय उल्टा सवाल करने लग गया । अनिल ने हसते हुए हो तो वो तो यार अभी से बडा आदमी बन गया पैसे मुझे तुम पर पूरा यकीन है मेरे भाई तो हमेशा ऐसे ही प्यारे से सोनू रहोगे । अच्छा अभी दम चलते हैं तो बिल्कुल भी चिंता मत करना और आराम करना । आंटी को भी बोलना । अभी जब तक वह पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाती तब तक वो काम पर ना जाए । घर पर रहकर यह आराम कर रहे हैं । हूँ नाना अभी तुम कुछ मत बोलो तो मुझे भैया बोलते हो ना । ये थोडी बहुत मेरी जिम्मेदारी है कि अपने छोटे भाई और माँ का खयाल लघु वैसे ये थोडा सा सामान लाए तो मैं डेली इसे बिना कुछ कहे चुपचाप रख लिया । उसने अगर और अजीत को इशारा किया उन दोनों ने अपने साथ लाया हुआ सामान रख दिया । फिर अनिल ने अपनी जेब से पचास रुपए निकले और सोनू को देते हुए बोलते हैं, ये कुछ पैसे भी रख लो, काम आएंगे अच्छा । अभी तो हम चलते हैं । बहुत सारा काम करना है तो बिल्कुल भी चिंता मत करना है । अपना और अपने परिवार का ख्याल रखना है । भाई कहता हुआ अनिल वहाँ से जाने को होगा । जाते हुए उसकी आंखों से आंसू बहने हैं । उसकी आंखों से इस तरह से आंसू बहता हुआ देखकर अजीत और अगर दोनों बहुत चकित उन्होंने कई दिनों के बाद अनिल को इस तरह से होता हुआ देखा नहीं । उन्होंने कुछ कहना चाहा पर उसने इशारे से उन दोनों को चुप कर दिया । उधर पीछे सोनू के होठों पर एक मुस्कान होगी । साथ ही साथ आंखों में आंसू झिलमिला उठे । क्या बाद है राज? कई दिनों के बाद इस तरह से तुम्हारी आंखों से आंसू बहते हुए देखें । रास्ते में चलते चलते हैं आज कल मगर सोनू की वजह से दुखी हो तो चिंता मत कर वो कुछ ही दिनों में ठीक हो जाएगा । अजीत ने कहा, मैं सोनू की वजह से दुखी नहीं या सोनू ठीक हो ही जाएगा । मैं कुछ और सोच रहा हूँ । अनिल ने जवाब दिया, ऐसा क्या सोच रहे हो? हमें भी तो बताओ जरा दोनों ने एक साथ पूजा पहले घर तो चल रहा है वहीं बताऊंगा मैं क्या सोचता हूँ वैसे भी घर पर बाबा से भी बात कर रहे हैं । अनिल ने जवाब दिया और फिर वो खामोश हो गया । सारे रास्ते वो कुछ सोचता जा रहा था । बाबा अपने सच ही कहा था ये दुनिया बडी ही थाली में यहाँ पर मांगने से हक नहीं मिलता है बल्कि अपना हक दुनिया से खेल कर लेना पडता है । घर पर पहुंचते ही अनिल ने करतारसिंह से कहा मेरे बच्चे आज ऐसा क्या हो गया तो मैं ऐसा बोल रहे हूँ । करतारसिंह ने आश्चर्य से पूछा बाबा वो स्कार वाले आदमी ने सोनू के साथ कहते हुए अनिल ने उन्हें सारी घटना बताइए । साथ में उससे पहले अपने साथ और अजगर के साथ जो कुछ हुआ नहीं । उस घटना का भी जिक्र कर उसकी बात सुनकर करतारसिंह सोच में डूब गया । आखिर थोडी देर बाद उसने अपनी चुप्पी तोडकर अनिल से पहुंचा तो तुम क्या करना चाहते हो आप मैं उस कार वाले से सोलह को उसका हक दिलाना चाहता हूँ । अपना और अजगर का हक चाहता हूँ पर सीधी राह पर चलकर तो तो मैं ऐसा नहीं करता हूँ । तो क्या तुम गलत राह अपना हूँ? बाबा मैं भी जानता हूँ कि सीधे रास्ते पर चलकर हमें ऐसा नहीं कर पाएंगे और मुझे सीधी रापर अब चलना भी नहीं । मैं समझ चुका हूँ के अपना पाने के लिए कुछ गलत करना भी गलत नहीं है । वैसे भी वो कहावत तो आपने सुनी होगी ये अगर सहयोगी से नहीं निकलता तो उंगली को थोडा ढेडा करना पडता है । बस अब मैं भी अपनी उंगली को थोडा करूंगा और उससे अपना हक नहीं कर रहा हूँ । तो मैं अकेले ये सब कैसे करता हूँ ये सब करने के लिए । अभी वैसे ही तुम बहुत छोटे अब मैं अकेला कहाँ हूँ मेरे साथ मेरे दो दोस्ती क्यों ये सही कह रहा है करतार सिंह ने । अजीत ऍम हाँ बाबा, हम दोनों सादा इसके साथ ही नहीं बल्कि है क्या जो करेंगे साथ करेंगे पर तुम दोनों भी तो बच्चे ही हो । आखिर तुम लोग क्या कर सकती हूँ । बाबा हम सब कर देंगे । बारह । मैं आपकी मदद की जरूरत पडेगी । अनिल ने कहा वो तो लगता है तुम पहले से ही सब कुछ सोच कर बैठे हुए हैं । बोलो तुम क्या करने जा रहे हैं और उसमें मेरी क्या मदद चाहिए तो मैं बाबा मेरा ये प्लान है कहते हुए मैंने अनिल ने अपना बनाया हुआ बहन करतारसिंह को सुनाया । नहीं मेरे बच्चे मैं तो मैं ये बिल्कुल नहीं करने दे सकता हूँ । इसमें तो तो मैं घातक चोट भी लग सकती है । तुम्हारी ज्ञान भी जा सकते नहीं । बाबा मुझे कुछ नहीं होगा । मेरा विश्वास करूँ पर ऍम काफी अच्छा पर इसकी जगह नए वो काम करूँ अगर नहीं तो बेटा तुम दोनों ही मैं क्यों नहीं कर सकता है काम जीतने का बाबा ये कहा मैं करूंगा नहीं । आरोप मैं तुम्हारे जज्बात समझता हूँ पर ये काम मैं ही करूंगा । वैसे भी अब हम दुनिया के अमीरों से अभी इस तरह से हम अपने हिस्से का आज चीन कर गरीबों को लौटा रहे । आगे बहुत से मौके आएंगे तो मैं ऐसा काम करने के लिए । अनिल ने कहा अबे साले तो सारे रास्ते तो यही सोचता रहा था । क्यों सारा प्लान अकेले अकेले बना लिया? क्या हमें अपना दोस्त नहीं समझता गया? बिहार फिर कभी ऐसा बोल कर भी मत कहना तो दोनों ही तो जिसके लिए मैं जिंदा हूँ वरना मैं तो कब का मर गया होता । एक साल ऐसा क्यों बोल रहा है? मारे अपने दुश्मन कहता हुआ अजित उसके गले ही बन गया । आज तो ये बात बोल दी है आज के बाद फिर मत बोलना वरना हम दोनों मिलकर तो ये तब तक छोडेंगे आवाजे अगर ने उन दोनों को अपनी बाहों में लेने की कोशिश करते हुए सही बोल रहा यार तो अगर सकता है आज अनिल मार खाने के मूड में है यार वो जितना चाहे मार लेना पर मेरा ये साथ कभी भी मत छोडना नहीं कभी नहीं मरते दम तक नहीं तीनों की आंखें चल चला उन्हें उन्हें इस तरह से देखकर करतारसिंह की आंखे भी आंसू से भी गई । दान के मुताबिक हम को सबसे पहले वह जगह फाइनल करनी है जहाँ पर हमें इस घटना को अंजाम देना है । उसके लिए हमें उस कार्य वाले का पीछा करना पडेगा, वो कहाँ से आता है और कहाँ पर जाता है और उसी हिसाब से जगह की पहचान करनी पडेगी । अनिल ने कहा पर हम उस कार वाले का पीछा कैसे करेंगे आप हमारे पास तो पीछा करने का कोई साधन ही नहीं और ना ही था मारता है । अगर ने का ये काम हम नहीं करेंगे ये काम बाबा को करना पडेगा उस चढाए से जहाँ पर हम काम करते हैं उससे पहले जिधर से वो आता है यहाँ पर उसके आगे यहाँ पर वो जाता है बाबा आपको अपने रिक्शे से उसका पीछा करके ये काम करना पडेगा । वैसे मैं जानता हूँ कि रिक्शे से काम करना बहुत ज्यादा मुश्किल है पर बाबा ये काम आपको करना ही पडेगा चाहे इस काम में थोडा सा समय लग जाए पर वो जगह उस चौराहे से चार पांच किलोमीटर के अंदर के दायरे में तो पर वो जगह चौराहे के चार पांच किलोमीटर के अंदर के दायरे में हो तो हमारे लिए बहुत ही अच्छा रहेगा । जगह ऐसी होनी चाहिए जहाँ पर लोगों की भीड कम से कम हो और अगर वहाँ पर कोई पुलिस को बुलाना भी चाहे तो पुलिस को आने में थोडा सा समय लग जाएगा । वैसे तो मैं जानता हूँ कि किसी को भी पुलिस को बुलाने की कोई जरूरत नहीं पडने वाली क्योंकि वहाँ पर पुलिस का एक हवलदार पहले से ही मौजूद होगा । क्यों बाबा अनिल ने करतारसिंह की तरफ देखते हुए कहा चिंता मत करो, दोनों काम हो जाएंगे । तुम्हारी पसंद की जगह भी उसका पीछा करके मैं किसी तरह से ढूंढ लूंगा । पुलिस का एक सिपाही भी घटनास्थल पर मौजूद रहेगा पर कहते हुए करतारसिंह दूकान पर क्या बाबा आपको मेरी आप लाइन में कुछ डाउट लग रहा गया? अनिल ने पूछा नहीं मुझे तुम्हारे प्लैन पर कोई डाउट नहीं । मैं तो ये कह रहा हूँ कि तुम्हारे छोटे से दिमाग में अभी इतना बडा आइडी आ रहा है तो बडे होने पर तो तुम ॅ होगे । करतारसिंह ने जवाब है बाबा, एक दिन वो भी आएगा । अब से हमारा यही काम होगा कि कोई आमिर किसी गरीब का हटना छीन पाए । वैसे ये तब तो बहुत ही बात की बात है । अभी तो हमें इस प्लैन पर ही ध्यान देना है । अनिल ने कहा फिर अजीत और अजगर को संबोधित करते हुए आगे का आगे का प्लान तो तुम दोनों को पता ही है । क्या करना है? वैसे भी तो मैं सिर्फ सपोर्ट देना, असली काम तो उस समय बाबा ही अंजान देंगे । फिलहाल जब तक बाबा पहले अपना ये काम पूरा कर नहीं लेते हैं तब तक मैं भी इस बात की प्रैक्टिस कर लेता हूँ कि इस काम के दौरान मुझे चोट ना लगे यार मुझे बडा डर लगता है कहीं तो मैं कुछ हो ना जाए । अ जितने चिंतित भरे स्वर में कहते हैं तो हम चिंता मत करो, मुझे कुछ नहीं होगा । वैसे भी जब तक तुम लोग मेरे साथ हो, मुझे कुछ हो ही नहीं सकता । अभी तो कमीने से अपनी मेहनत का एक एक पैसा वसूल करना है । मुझे कहते हुए अनिल की नहीं नहीं बुझाएं, बडा कोठी हूँ ।

अध्याय 7 - C

आखिर वो दिन आ गया जिसका वह तीनों तीनों नहीं चारों बडी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे । अनिल के प्लैन के हिसाब से करतारसिंह ने जो जगह चुनी थी वो चौराहे से आगे लगभग तीन किलोमीटर दूर थी । जहाँ पर एक अंदाजा टर्न था वो आदमी जिसका नाम विकास अहीरवाल था, एक प्रॉपर्टी डीलर था जो रोज दोपहर लंच करने के लिए अपनी सैकेट्री के साथ अपनी आलीशान कार में जाता था और लंच करने के बाद अक्सर उस चौराहे से गुजरता था । वो अक्सर किसी ना किसी चौराहे पर ऐसे ही गाडी रोककर गरीब काम करने वालों के मजे लेता था । खास तौर पर उन गरीब मासूम बच्चों को चुनता था जो उसका कुछ भी बिगाड पाने में सक्षम नहीं थे । अपनी सैकेट्री के सामने ऐसे काम को करने में न जाने उसे किस आनंद की प्राप्ति होती थी । ऐसे ही मजा लेने के उसकी वजह से मासूम सोनू को घायल होना पडा था । नियत समय पर वो तीनों अपनी पोजिशन ले चुके थे । वो तीनों दोस्त थी । इस समय अधिकारी के बीच में थे और आने जाने वालों से भीख मांग रहे थे । हालांकि वह भीक मांगने के सख्त खिलाफ थे पर अपनी योजना को अमल में लाने के लिए उन्हें ऐसा करना पड रहा था अगर बिस्तर में सडक के मोड के दूसरे किनारे पर खडा था जहां से वह विकास अहीरवाल की गाडी को आते समय आसानी से देख सकता था । अनिल और अजित मोड के पास ही खडे थे अगर का एक काम था जैसे ही उसे विकास अहीरवाल की गाडी नजर आती उसे अनिल को एक खास इशारा कर के इस बारे में बता देना था । करतारसिंह इस समय कहीं पर नजर नहीं आ रहा था पर वो इन लोगों से ज्यादा दूर नहीं था और एक पेड के नीचे चाय की थडी पर हवलदार आज की ड्रेस पहने हुए खडा खडा चाय की चुस्कियां ले रहा था । उसने इस बात का भी पता लगा लिया था कि अमूमन उस समय वहां पर पुलिस का कोई सिपाही नहीं रहता था । पर फिर भी न जाने उसे इस बात का डर जरूर बता रहा था कि कहीं वहाँ पर एकदम से असली पुलिस का सिपाही ना आ जाए । वाहेगुरू खैर कर रहे हैं मैं नहीं मन अपने वाहेगुरु को याद करता हुआ । वह पुलिस के असली सिपाही की तरह ही व्यवहार कर रहा था । मतलब वो बिना पैसे दिए ही चाय की चुस्कियां लगा रहा था । गाडी आ रही है । सडक के दूसरे किनारे खडे अजगर ने पहले से निर्धारित खास अंदाज से अनिल को इच्छा रखी है । असगर का इशारा पाकर अनिल एकदम से चौकन्ना हो गया और एक मानते मांगते मोड की तरफ जाने लगा । गाडी बिलकुल पास आ चुकी थी अगर ने फिर एक दूसरा इशारा किया । दूसरा इशारा पाते ही अनिल एकदम से मोड पर आकर सडक पार करने लगा । जैसे ही वो सडक के मध्य पहुंचा विकाश अहीरवाल की कार से उसे जोरदार टक्कर लगी और वह चीख मारता हुआ उछल कर दूर जा गिरा । अनिल अजित जोर से चिल्लाया विकास अहीरवाल अपनी शानदार लाल कलर की ऐसी कार को बगल में बैठी हुई अपनी सेक्रेटरी के साथ मस्ती करता हुआ बडी लापरवाही से ड्राइव कर रहा था । वहाँ आज भी गुब्बारे बेचने वाले लडके को बेवकूफ बनाकर उसे एक बार ले आया था । गुब्बारे को लडकी ने पकडा हुआ था और कार की खिडकी खोलकर उसे हवा में उडा रही थी । विकास को इस बात की कोई परवाह नहीं थी की खुली खिडकी में ऐसी नहीं चलाना चाहिए । वह तो गाडी चलाते चलाते बीच बीच में उस लडकी की कमर पर कभी चिकोटी काट रहा था । कभी उसे गुदगुदी कर रहा था जिस पर वह खिलखिलाकर हंस पडती थी । तभी हसते हुए एकदम से उस लडकी को सामने रोड पर अनिल सडक को पार करता हुआ नजर आया । उसे देखकर वह घबराकर जोर से चिल्लाई डॅाल कर वो सामने देखो । उसकी आवाज सुनकर जैसे ही विकास ने सामने देखा उसने पाया कि एक लडका रोड क्रॉस कर रहा है । उसने तेजी से अपनी गाडी को ब्रेक मारे पर ब्रेक मारते मारते भी गाडी उस लडके से टकरा गई थी । वो लडका गाडी की टक्कर पढते ही उछलकर दूर जा गिरा था और गिरते ही उसके मुँह से दर्द भरी चीजे निकली । जैसे ही अनिल के मुझसे की की आवाज आई अजीत भी उसके साथ जोर से चिल्लाया । अनिल चक्कर लगाते ही विकास एक बाल के लिए हक्का बक्का रह गया था । तभी उसके पास बैठी हुई लडकी ने उसे जिन जोडा और उसे होश आया और उसे वहां से भागने में ही अपनी भलाई नजर आई । उसने अपनी कार को बैक लेकर उसे बगाना चाहा पर तभी प्लैन के मुताबिक उसकी कार के आ गया । जीत आ गया और जोर जोर से चिल्लाने लगा था । हाँ इस आदमी ने मेरे भाई को मार डाला । कोई तो आकर बचाओ मेरे भाई को उधर चाय पीते हुए करतारसिंह की नजरें भी बार बार उधर ही जा रही थी । उसने जैसे ही अनिल को कार से टकराते हुए देखा और अनिल अजित के चिल्लाने की आवाज सुनी । तुरंत उसने अपनी चाय का कप नीचे फेंका और उस की तरफ दौड पडा । लगता है भयंकर एक्सीडेंट हुआ है । चाय की थडी पर चाय पीते हुए लोग बोले और वह भी पुलिस सिपाही की वर्दी पहने हुए करतारसिंह के पीछे पीछे दौड पडे । वहां पहुंचकर जब करतारसिंह ने अनिल को देखा तो एक पल के लिए उसके दिल में एक होक सी उठी । रूसी पाल एक पल के लिए उसकी अनिल से नजरे मिलीं । अनिल ने उस पल में ही यहाँ के इशारे से उसे आश्वस्त किया कि वो बिलकुल ठीक है । ये देख कर उसकी जान में जान वापस आई । अनिल का वो इशारा अजीत ने भी देख लिया था और अजगर ने भी देख लिया था जो अभी अभी वहां पहुंचा था । तब तक विकास की कार को चारों तरफ से कुछ लोगों ने घेर लिया था और उसे कार से बाहर निकालने के लिए बोल रहे थे । कार से बाहर निकल साले जल्दी सिपाही की ड्रेस पहने हुए करतारसिंह ने पुलिसी अंदाज में कार का गेट आपने डंडे से खटखटाते हुए कहा । विकास उसकी आवाज सुनकर अंदर तक का आप उठा था साहब देखिए इसमें मेरे भाई को टक्कर मार दी । इससे जल्दी अस्पताल ने चलिए नहीं तो ये मर जाएगा । मेरे भाई को बचा लीजिए । प्लीज अजीत करतारसिंह के पैरों से लिपटकर रोते रोते कहने लगा एक मासूम बच्चे को इस तरह से रोता हुआ सुनकर वहाँ जमा हुए लोगों का दिल पिघल ने लगा था साहब इस आदमी को पकडकर इसे कडी से कडी सजा दिलवाई है । किसी आदमी ने कहा पहले आपने बात की सडक समझ कर कार्य कैसे दौडाते हैं जैसे हवाई जहाज चला रहा हूँ, किसी दूसरे आदमी नहीं है । हाँ साहब, मेरे भाई को बचा लीजिए । इस कार्य वाले को पकड लीजिए जिसने मेरे भाई को टक्कर मारी है । असगर भी उनकी देखा देखी बोलने लग गया था । अगले साल बाहर निकल जल्दी है वरना अभी तेरी गाडी को इस डंडे से तोड ता हूँ । करतारसिंह ने इस बार उसकी कार के शीशे पर आपने पुलिसिया डंडा लहराते हुए कहा निकलता हूँ विकास के मुझसे बडी मुश्किल से आवाज निकल रही थी । बाहर निकलकर उसने जब अनिल अजित और अजगर को देखा तो उसके मुंह से निकल पडा ये तो वही बच्चे चौराहे वाले तो जानता है इसको । करतार सिंह ने कर्कश स्वर में पूछा सब ये वो आदमी है जो गांधी सर्कल पर हम से अपनी गाडी साफ करवाता था और उसके पैसे भी नहीं देता था । आज हम यहाँ भीक मांगने आ गए तो यहाँ तो मेरे भाई की जान ही ले ली । उसके कुछ कहने से पहले ही अजित नहीं होते हुए जवाब दिया सब मेरे भाई को इसकी गाडी में बैठाकर जल्दी से हॉस्पिटल ले चलिए । कहीं देर हो गई तो मेरा भाई असगर की आंखों से आंसू की धार बहने के लिए चालीस से उधार अपनी गाडी में बैठाकर अस्पताल में ले । जल्दी । करतारसिंह ने गुस्से से कहा साहब वो कुछ ले देकर विकास ने कहना चाहा पर करतारसिंह की गुस्से भरी आंखों को देखकर चुप हो गया । फिर कुछ लोगों की सहायता से करदार सिंह और विकास ने घायल और अर्धमूर्छित अनिल को सडक से उठाया और बडी सावधानी से पीछे की सीट पर लिटा दिया । करतारसिंह भी अनिल को लिटाकर पीछे की सीट पर बैठे हैं साहब, हम भी अपने भाई के साथ चलेंगे । अजीत ने कहा हाँ साहब, हमें भी गाडी में बैठा लीजिए । हमारे भाई के साथ अगर ने भी उसकी हाँ में हाँ मिलाई । मेरे को कार में इतनी जगह नहीं है कि तुम दोनों भी इसमें बैठ सको । ऐसा करो तुम अपना नाम पता मुझे लिखवा तो मैं तुम्हारे भाई को अस्पताल में भर्ती करवाकर तुम लोगों को इसकी खबर भिजवा दूंगा । ठीक है ना । करतारसिंह ने उन दोनों से कहा ठीक है साहब पर हॉस्पिटल पहुंचते हैं । हमें खबर जरूर भिजवा दीजिए । गा । कहते हुए आज इतने करतारसिंह कोई काल्पनिक पता लिखवाया फॅर लेकर चलो । करतार सिंह ने कहा । उसकी बात सुनकर विकास में कार को स्टार्ट किया और वहाँ से रवाना हो उसकी बगल की सीट पर बैठे हुए युवती को जैसे साफ हो गया था । इस दौरान उसके मुंह से एक शब्द नहीं निकला था । हाँ, तो वो क्या कह रहे थे तो वहाँ पर कुछ ले देकर गाडी को चलते हुए अभी मुश्किल से कुछ सेकंड हुए होंगे कि करतार सिंह ने रास्ते में विकास से पूछा वो मैं विकास ने कहना चाहते हो मत, यहाँ पर तुम्हारे और मेरे अलावा और कोई भी नहीं सुनने वाला । इसलिए तो मैंने उसके भाइयों को भी साथ में नहीं बिठाया था । बोलो क्या कह रहे थे तो हवलदार साहब वो इसे यही रास्ते में कहीं पटक देते हैं । अगर अस्पताल पहुंचते पहुंचते मर गया तो मुझे बहुत बडी प्रॉब्लम हो जाएगी । इसके बदले आप जो भी मांग हो गई मैं देने को तैयार हूँ । कह तो तुम ठीक रहेगा । अगर ये कहीं मर गया तो फिर तुम पर गैरइरादतन हत्या का केस चलेगा और तुम्हें जेल की सजा भी होगी । तुम बताओ तुम जेल से बचने के लिए क्या देने के लिए तैयार हूँ सब मेरे पास । अभी लगभग दस हजार रुपये मैं तो सारे आपको दे दी अगर आप और मांगों के तो वह भी मैं आपको बाद में लाकर दे दूंगा और मुझे इस मुसीबत से बचा लो । ठीक है पहले तुम गाडी को साइड मेरो को फिर अपना पर्स मेरे हवाले कर ये सुनते ही विकास नहीं गाडी । एक तरफ लोगों की जहाँ पर ट्रैफिक थोडा काम था फिर अपनी जेब से अपना पर्स निकाला जो नोटों से खचाखच भरा हुआ था । उसने वह सारे नोट निकालकर करतारसिंह के हवाले करती । सिर्फ छोटे नहीं बल्कि नोटों के साथ साथ साथ जैसे कभी मेरे हवाले करूँ करतारसिंह लेकर साहब, इतने नोट लेने के बाद भी आप चिल्लर का क्या करोगी? विकास ने आश्चर्य पूछा है । पहले को जितना कहा है तो सिर्फ उतना कर साले ज्यादा सवाल मत कर । कहते हुए करतारसिंह बुलाया । विकास ने पर से सारे सिक्के भी निकालकर करतारसिंह के हवाले कर दिए । तेरी बेटी के गले में जो सोने का हार नजर आ रहा है तो बढाई खूबसूरत लगता है । उसे भी निकाल कर मेरे हवाले कर देंगे । करतारसिंह ने उसकी सैकेट्री की तरफ देखते हुए कहा ये मेरी बेटी नहीं है । विकास ने कहा वो बेटी नहीं है, लगता है बीवी है । करतार सिंह ने पूछा फिर अपने आप ही उसका सिर ना में हिलने लग गया ना शक्ल से तो ये बीवी तो नहीं लग रही है । इसको देखकर तो ऐसा लग रहा है जैसे कोई ऍम सही कहा ना मैंने ऍम इतनी देर से खामोश बैठी हुई वो लडकी अपने लिए रखेल शब्द सुनते ही गुस्से में आ गई थी । ये देखकर करतारसिंह बोलता हूँ । वो लगता है सच्चाई सुनकर मैडम को गुस्सा आ गया । एक शादीशुदा मर्द वो भी उम्र में दोगुना उसके साथ अगर कोई दूसरी औरत इस तरह से रहती है जिस तरह से तुम रह रही हो तो उसे रख ली बोलते हैं कोई सती सावित्री नहीं बोलता । खैर चलो तुम जो भी हो मुझे उससे क्या मतलब मुझे तो तुम्हारे सोने के हार से मतलब जल्दी से बाहर निकालकर । मुझे तो वैसे भी इसे पहनने की तुम्हारी औकात नहीं लगती है । डार्लिंग देख कोई क्या बोल रहे हैं उस युवती ने विकास का वो जो भी कह रहा है तुम सिर्फ वो कर आर तो मैं तो मैं और दिलवा दूंगा । पहले इस मुसीबत से तो बाहर निकले विकास के मुझसे ये सुनकर उस युवती ने अपने गले से बाहर निकाला और करतारसिंह होती है । पर ऐसा करते हुए ऐसा लग रहा था जैसे उसकी जान ही जा रही है । पैसे और हार को करतारसिंह ने बडी ही सावधानी से अपनी जेब में रख लिया । फिर वो बोला आप गाडी को ऐसी जगह ले चलो जहाँ पर हम लोग इसे बाहर फेंक सके । अगर ये वहाँ से बच गया तो इसकी किस्मत होगी वरना मरने दो साले को कचरे में, पर बाद में अगर इसके भाइयों ने इसके बारे में पूछा तो क्या करोगे? विकास ने पूछा तो उसकी चिंता मत कर आप तुम से पैसे लिए है तो तुम्हारी मुसीबत मेरी है और मैं इसे आराम से हैंडल कर दूंगा । करतारसिंह ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया । उसकी बात सुनकर विकास ने गाडी को आगे बढाया और ऐसी जगह पर ले जाकर गाडी रोकी जहाँ पर कचरे का ढेर लगा हुआ था और आसपास देखने वाला कोई नहीं था । करतारसिंह ने बडी सावधानी से अनिल के शरीर को कार से निकालकर उस कचरे के ढेर में फेंक दिया । अनिल के बाहर गिरते ही विकास ने अपनी गाडी स्टार्ट की और वहाँ से रवाना हो गया । जैसे ही उसकी गाडी थोडी दूर पर पहुंची होगी अनिल झट से अपनी आँख खोली और उठ खडा हो और अपने कपडे घाट नहीं लगा । उसको ज्यादा चोट नहीं आई थी थोडा बहुत हथेलियों पर रगड के निशान बन गए थे और थोडा बहुत उसके घुटने चल गए थे । विकास की गाडी जैसे ही उसे टकराई थी उसके साथ ही वह दूर जा गिरा था । उसके दूर गिरने में गाडी से टक्कर का काम बल्कि उस उछल का ज्यादा हाथ था जिसकी वो कई दिनों से प्रैक्टिस कर रहा था । नीचे गिरते समय उसने अपने शरीर का सारा भार अपने दोनों हाथों की हथेलियों पर ले लिया था जिससे वो गहरी चोट खाने से बच गया था । इतनी देर से वो सिर्फ बेहोश होने का नाटक कर रहा था । वहाँ से वो सीधा अपने घर की तरफ रवाना हो गया । यहाँ पराजित अजगर और करतारसिंह तीनों उस का बडी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे । हेलो बेटा तुम्हारे इस मिशन की सारी कमाएँ कहते हुए करतारसिंह ने विकास से हासिल करें हुए दस हजार रुपए दस बारह रुपये के चैनल और सोने का हार निकाल कर रख दिया । पर मुझे एक बात समझ नहीं आई तो मुझे ये क्यों कहा था कि उसके पास अगर खुल्ले पैसे भी हूँ वो भी ले लेना । करतारसिंह ने आशा जैसे पूछा हो क्योंकि बाबा ये मेरी एक गनर सोनू की मेहनत की कमाई थी । हमने उसकी गाडी साफ करके उसके जूते कॉलेज करके कमाई थी और उस पर उधार छोड कर रखी हुई थी । और ये क्यों बोला था कि उस लडकी के गले में पहना हुआ हार भी ले लेना क्योंकि वह भी उस आदमी के साथ हमारी गरीबी का मजाक उडाने में शामिल थी । उसे भी हमारी बेबसी को देख कर बहुत मजा आता था, सोचता था और अब के दिल में दया होती है पर उसके दिल में तो तुम कह रहे हो बेटा इस जमाने में ऐसे बहुत से लोग हैं जो दूसरों को दुख पहुंचा करे । अपना सुखचैन तलाश करते हैं । साले लोग अपने सुख में सुखी नहीं होते । दूसरों के दुख में अपनी खुशी तलाश करते हैं । करतारसिंह ने गहरी सांस लेकर का अब हम इतने पैसे का क्या करेंगे आप? अजीत और अजगर ने एक साथ पूछा हम इससे कुछ पैसे सोनू को देंगे ताकि वो अपना और अपनी मम्मी का किसी अच्छे अस्पताल में इलाज करवा सके । ऐसे बाबा बाकी पैसे आप अपने पास रखे हैं क्योंकि आप हमारा मकसद है ऐसा स्कूल खोलना जहाँ पर सोनू जैसे बच्चे स्कूल जा सके और पडने कल अच्छे नागरिक बनकर देश की सेवा कर सकें और उसके लिए तो बहुत बडी रकम होनी चाहिए । तो बाबा हम लाएंगे ना वो रकम आज के बाद हम उस गाडी वाले आदमी जैसे लोगों से आपने आपका पैसा लेकर इस काम को आगे बढाएंगे । क्यों दोस्तो धो गे ना इसमें कम में मेरे साथ मिलने अजीत और अजगर से पूछता हूँ क्यों नहीं दोस्त आज से हम लोगों का यही मिशन है और इस मिशन को पूरा करने के लिए हम से जो बन पडेगा वो हम करेंगे । ये हुई ना बाद दोस्तों वाले कहते हुए अनिल उन दोनों के गले लग गया । पर यार तुम भी एक वादा करूँ क्या आगे से ऐसे खतरे वाले काम तो मैं अकेले नहीं करोगे जैसे ही वह कार तुम से टकराई थी मेरे होश उड गए थे । अजित सही कह रहा है वहां सडक पर नीचे तुम गिरे पडे थे, चोट तो नहीं लगी थी और दर्द हमें हो रहा था । अरे यहाँ पर यहाँ ये बताओ तुम्हारी चोट कैसी है? बेटा करतार सिंह ने चिंतित स्वर में पहुंॅच देखो मैं बिल्कुल फिट आपके सामने खडा हूँ, खडा हूँ कि नहीं । वैसे छोटी मोटी खरोंच आई है तो एक दो दिन में ठीक हो जाएगी । अगले हफ्ते हुए का उसकी बात सुनकर करतारसिंह को थोडा चयन आया । फिर उसने दस हजार रुपए में से एक हजार रुपये निकले और अनिल की तरफ बढाते हुए बोला ये पैसे तुम लोग रख लो बाबा ये पैसे किस लिए? अभी आपको कहा तो था कि इन पैसों से हमें एक स्कूल खोलना है, इतनी जल्दी भूल गए । मैं कुछ नहीं बोला हूँ । स्कूल जब खोलना होगा खुल जाएगा ऍम ये पैसे फिलहाल तुम लोग रखूँ । इन पैसों से नए कपडे खरीद लेना और किसी अच्छे से होटल में जाकर खाना खा लेना । काफी दिन हो गए तो उन को कुछ अच्छा पहने और घायल हुए करतार सिंह ने कहा ये सुनकर वो तीनों कुछ जवाब देने हैं ये सुनकर वो तीनों को जवाब देने जा रहे थे । उस से पहले ही करतारसिंह बहुत बडा ध्यान आना । मैं तुम लोगों की कुछ भी नहीं सुनूंगा । हम लोगों को मेरी इतनी सी बात तो माननी पडेगी । आखिर इतना तो मैं तुम लोगों पर रखता हूँ क्यों रखता हूँ कि नहीं बाबा आपका हम पर पूरा हक है । आप तो हमारी माँ हमारे बात हो और माँ बाप को अपने बच्चों पर पूरा पूरा होता है । तो ये थी कहानी तीनों के बचपन की

Part 5: अध्याय 8 -A

हूँ । अध्याय आठ और वर्तमान की कहानी अब बाबा भी बताओ अगर पहले ही देने उस कार से मेरी जोरदार टक्कर हो जाती तो फिर आज ये दिन देखने के लिए मैं जिंदा थोडे रहता है । अनिल यादव के गहरे संबंध घर से बाहर आते हुए बोला वैसे भी ये बात तो आप भी जानते हैं । जिसको राम रखें उसे फिर कौन चक है । अब तो इतना बडा हो गया है कि मुझे ज्ञान देने लग गया क्यों करदार सिंह गुस्से में बढ बडा है । अरे बाबा भी ना मैं आपको ज्ञान देने की हिम्मत कर सकता हूँ वाला वैसे भी हम चाहे कितने भी बडे हो जाए पर रहेंगे तो सजा आपके बच्चे ही क्यों? अनिल ने मुस्कुराने की कोशिश करते हुए कहा तो कितना भी कोशिश कर ले परेस मुस्कुराये के पीछे अपने दर्द को मुझसे नहीं छुपा पाएगा । अब ज्यादा बकवास मत कर और थोडा सा आराम कर ले । तब तक मैं कुछ खाने के लिए लेकर आता हूँ । करतारसिंह ने कहा वहाँ बाबा ये कहीं ना आपने दिल की बात बहुत देर से भूख लग रही थी । फॅमिली के बच्चे की वजह से आपको कह नहीं पाया । अजीत नहीं कहा अवैध साले अभी थोडी देर पहले ही तो तूने नाश्ता खाया था और फिर से भूख लग गई । तेरा पेट है वही हुआ अगर ने उसे चढाते हुए कहा अब तो जैसे क्या प्रॉब्लम है जब देखो मैंने पीछे पडा रहता है । जब भी खाने के लिए हो जाता है तो क्या मैं अकेला ही खाता हूँ? अलग खाते सब है और सुनने को मुझे मिलता है बाबा । इस बार ऐसा करना आप सिर्फ अनिल और मेरे लिए ही खाने को लेकर आना देखता हूँ । तब ये क्या करता है? अजीत ने कहा रह रहे ये क्या बात हुई अगर बौखलाकर बोलते हैं इसे कहते हैं न्यायालय पर दहला । वैसे मानना पडेगा आखिरकार पहली बार अजित ने अपने दिमाग का इस्तेमाल करके अगर तुझे जवाब दे ही दिया । फॅमिली मुस्कुराते हुए आजगढ से कहा, और नहीं तो क्या मुझे कोई लल्लू पंजू समझ रखा है क्या जीतने का? उसकी इस बात को सुनकर अनिल और अगर दोनों एक दूसरे की तरफ देख देख कर जोर जोर से हंसने लगे । धूम दोनों इस तरह से काॅफी अजित ने उन दोनों को हसते हुए देखकर पूछा और अगले ही पल जैसे उसको अनिल के बाद समझ में आ गई थी । मिल के बच्चे तेरे कहने का क्या मतलब है । क्या आज से पहले मैंने कभी भी अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया । साले तेरी तो कहते हुए अजीत ने एनएल के पेट में धीरे से मारते हुए कहा अरे बस बस यार, दर्द हो रहा है । मैं तो मजाक कर रहा था । बडा आया मजाक करने वाला । उन तीनों की ये मस्ती तब तक चलती रही जब तक करतारसिंह उनके लिए खाने के लिए लेकर नहीं आया तो वो लोग बच गए क्यों? जुबेद अंसारी ने पूछा वो अभी अपनी आवाम पार्टी के गांधीनगर कच्चीबस्ती ऑफिस में उसी गोदाम में अपने सबसे विश्वासपात्र साथी रजाक के साथ मौजूद था । उनके साथ ही थे उसके वो चार आदमी जो पुलिस वालों के दो ग्रुप में उसके खिलाफ सबूत सौंपने वाले को पकडने के लिए गए थे । कमिश्नर मिश्रा से ये जानकारी मिलने पर की कोई उमा ठाकुर हत्याकांड के हत्यारों के खिलाफ पुलिस को सबूत सौंपने वाला है । उसने एक प्लान बनाया था ऍन सारी तेज दिमाग वाला आदमी था । उसे पूरा पूरा यकीन था कि अहमद को मूर्ख बनाकर उसका ब्रीफकेस उडाने वाले एक से ज्यादा लोग हैं और उसके खिलाफ सबूत देने के लिए वो एक साथ पुलिस के सामने कभी नहीं आएंगे । उन में से कोई एक पुलिस के सामने आएगा और बाकी लोग कहीं आसपास ही छुपे हुए रहेंगे ताकि अगर पुलिस उसे गिरफ्तार करना चाहे या फिर कोई और दूसरा खतरा सामने आ जाए तो वो छुपे हुए लोग उसे उस खतरे से बचा सके । होनी छुपे हुए लोगों को भी सामने लाने और पकडने के लिए उसने ये प्लान बनाया । वो अपने आदमियों को दो ग्रुप में उन्हें पकडने के लिए भेजा । पहला ग्रुप पुलिस के बीच में सबूत देने वालों के सामने पहले जाएगा और जैसे ही वो सबूत देने वाला होगा दूसरा ग्रुप पुलिस के बीच में ही वहाँ पहुंचेगा । दूसरा ग्रुप पहले ग्रुप को नकली पुलिस वाला साबित करके खुद को असली पुलिस वाला बताएगा ताकि उसे इस बात का विश्वास हो जाए कि ये पुलिस डिपार्टमेंट में किसी गद्दार की वजह से कमिश्नर के साथ ही लोगों की बात बाहर आई है ताकि उसे इस बात का विश्वास हो जाए कि ये पुलिस डिपार्टमेंट में किसी गद्दार की वजह से कमिश्नर के साथ हुई । उन लोगों की बात बाहर उन लोगों की बात बाहर गई । उसकी वजह से कोई और मैं इटली पुलिस वाला बनकर उसके सामने पहले आया है । उसकी वजह से कोई और नकली पुलिस वाला बनकर उसके सामने पहले आया है । बाद में आने वाले पुलिस के आदमी असली और ईमानदार पुलिस वाले क्योंकि वास्तव मैं सबूतों की सहायता से उमा ठाकुर हत्याकांड के असली हत्यारों पर जो कि वास्तव में सबूतों की सहायता से उमा ठाकुर हत्याकांड के असली हत्यारों तक पहुंचेंगे और उसके छुपे हुए साथ ही इस बात पर विश्वास करके की कमिश्नर ने अपना वादा निभाया है और उन्हें अपनी गिरफ्त में लेने के बजाय वो पहले वास्तव में उमा ठाकुर के हत्यारों तक पहुंचने के लिए प्रयासरत है, उनके सामने आ जाएंगे और जैसे ही उसके छुपे हुए वह साथ ही बाहर आएंगे । उसके आदमी उन सब को पकडकर उसके सामने ले आएंगे या फिर उन्हें वहीं पर खत्म कर देंगे और उसके खिलाफ कोई भी सबूत बाकी नहीं रहेगा । उसके हाथ में समय उसके आदमियों द्वारा वो लिफाफा था जो सुभाष स्टेडियम में हुई फायरिंग के दौरान अनिल के हाथों से गिर गया था । लोग लिफाफा लाने वालों को नहीं पढ सके । ऐसा हो भी जाता अगर वहाँ तीसरी पार्टी नहीं आ जाते हैं नेताजी हमने उन लोगों को लगभग पकडे लिया था वरना जाने कहाँ से हैं वहाँ पर वहाँ पर असली पुलिस वाले पहुंच गए और उनकी वजह से वो लोग हमसे बच निकले । हम लोग उनसे आपसे कहे अनुसार लिफाफा लाने में सफल रहे हैं । उस मानने का कॅाल रहे हो तुम लोग आखिर कितने पुलिस वाले थे वहाँ पर तुम लोगों को यू दुम दबाकर वहाँ से भागना पडा । दो लोग थे नेता जी, वो दोनों ही हथियारबंद वहाँ उसे दो पुलिस वाले थे और तुम तो चार लोग थे और हथियार दो । तुम चारों के पास भी थे । क्या ये हथियार सिर्फ दिखाने के लिए रख रखे हैं तुम लोगों ने जो उन्होंने उन लोगों को तुमसे बचा लिया? जुबैर अंसारी ने व्यंग से का वह नेता जी आपने कहा था कि वहाँ पर उन लोगों के अलावा और कोई पुलिस वाला नहीं पहुंचेगा इसलिए ये गडबड हो गए । मैंने कहा था कोई और नहीं आएगा इसका ये मतलब तो नहीं तुम लोग बिल्कुल ही लापरवाह हो जाओ । अभी तो थोडा बहुत अपना भी दिमाग इस्तेमाल कर लिया करो पर नहीं अपने अधूरे काम के लिए अपनी लापरवाही पर शर्मिंदा होने के बजाय तुम लोग तो मुझे दोष देने लग गए । उसने उन लोगों से कहा । फिर रजाक से बोला रजाक लगता है या तो अपने सारे आदमी अपने काम में हो गए हैं या फिर मेरी तकदीर ही खराब चल रही है । पहले तो अहमद ने इतनी बडी लापरवाही की की उसकी वजह से मेरा सादा प्लेन बार आ गया था और फेलोज बेवकूफ । कार्लोस ने भी देवराज के बजाय उसकी पत्नी को निशाना बना दिया और वो साला बच्चे निकला और अब इन लोगों ने इतनी बडी लापरवाही की जिसकी वजह से वो लोग मेरे आप से बचने के लिए था । जाने मेरा क्या होगा? नेताजी आप चिंता मत करिए, सबूत तो आपके पास आई चुका है । वो लोग भी जल्दी ही पकडे जाएंगे और वह नेता का बच्चा भी जल्दी जैन उनको रसीद होगा तो मैं ये बताओ रजाक में चिंता कैसे नहीं करूँगा? साला एक के बाद एक हर काम बिगडता जा रहा है । चलो कार्लोस तो फिर भी देर सवेर अपना काम कर लेगा इस बात का तो मुझे पूरा यकीन और उन लोगों का क्या अगर वो लोग मेरी पकड में नहीं आए । मेरे सर पर इतना खतरा तो हमेशा बनाये रहेगा । नेता जी आप ना की चिंता कर रहे हैं । सबूत वाला लिफाफा तो वैसे भी आप के पास आ गया है हम अगर वह पकडे भी नहीं गए तो बिना सबूत के आपका क्या बिगाड सकते हैं? ही तुम शायद ठीक किया गया तो फिर मैं निश्चिंत हो जाओ । इस तरफ से बिल्कुल नेता जी और फिर भी अगर कुछ गडबड होती है तो आपका ये गुलाम किस दिन काम आएगा? हो गया और रेलवे मुझे उस कमिश्नर के बच्चे को इसके बारे में बताना पडेगा कि उसके यहाँ पर जरूर उसकी कोई जासूसी कर रहा है । उसकी वजह से ही बात बाहर गई है । कहीं ऐसा ना हो कि उसकी इस बेवकूफी की वजह से आगे मुझे कुछ और नुकसान उठाना पड जाए । ये तो आप सही बोल रहे हैं । है तुम लोग जाओ यहाँ से अभी मजाक में उन चारों को बाहर जाने का इशारा करते हुए कहा वो लोग जैसे इसी बात का इंतजार कर रहे थे । उन लोगों ने जाते ही जुबैर अंसारी ने । उन लोगों के जाते ही जुबैर अंसारी ने अपना मोबाइल निकाला और कमिश्नर खन्ना को फोन लगाया । कमिश्नर के फोन उठाते ही उसने उसे सारी बात बताई । वहाँ पर असली पुलिस वाले पहुंच गए । पर ऐसा कैसे हो सकता है? सारी बात सुनकर उधर से कमिश्नर खन्ना की आश्चर्य भरी आवाज आएगी । वही तो मैं तुम से पूछ रहा हूँ । वहाँ पर असली पुलिस वाले कैसे पहुंच गए? नहीं नहीं आपको जरूर कोई गलत फहमी हुई है । नेताजी लोग असली पुलिस वाले नहीं हो सकते हैं । हो सकता है वो लोग असली पुलिस वाले नहीं हूँ और उनकी वजह से तो मेरा बना बनाया काम बिगड गया ना ये सब तुम्हारी लापरवाही का नतीजा तुम्हारे ऑफिस से ये खबर नहीं हुई है । जरूर तुम्हारे ऑफिस में कोई बिता हुआ है जिसकी वजह से खबर बाहर तक गई है । नहीं नेताजी ऐसा नहीं हो सकता । यहाँ पुलिस हेड क्वार्टर में ये बात सिर्फ मेरे तक ही सीमित है और मुझसे कोई बात बाद नहीं जा सकती है । ये जरूर आपके ही किसी आदमी का काम है । मेरे आदमी तुम्हारी पुलिस की तरह बिकाऊ होते नहीं है । वो किसी की भेजी हुई रेड्डी के लिए बिक जाएंगे तो तुम्हारे यहाँ पर ही कोई जरूर लोग बोल है जिसकी वजह से ये खबर बाद आई है । उसे तलाश करो, जल्दी तलाश करो वरना प्रदेश के लिए मुझे कोई नया कमिश्नर देखना पडेगा । जुबैर अंसारी गुस्से में मैं देखता हूँ नेताजी अगर ये खबर मेरे यहाँ से ली हुई है तो वो जो कोई भी मुझसे बच नहीं पाएगा । कमिश्नर खन्ना ने कहा यही तुम्हारे लिए और हमारे लिए भी अच्छा होगा । वो ना जाने तुम्हारे और क्या क्या राज जानता होगा । कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हारी वजह से मैं भी एक मुसीबत से निकलकर किसी दूसरी मुसीबत में फंस जाए । अगर ऐसा हो गया तो तुम बचोगे नहीं । कमिश्नर कहते हुए जो वैद अंसारी ने फोन रख दिया और तुमने अखबार से बात किया नहीं अभी तक उसने राजनाथ से पूछा हाँ नेताजी मैंने उसे बुलावा तो भेजा था अपने पास आने के लिए । पर वो आया नहीं । आपने नौजवान समर्थकों के बल पर कुछ ज्यादा ही चल रहा है । पर आप उस की बिल्कुल भी चिंता मत करिए । उसे एक बार फिर बुलावा भेजूंगा और अगर तब भी नहीं आया तो मैं खुद उसके घर पर जाकर उससे मिलूंगा । उसे प्यार से समझाऊंगा । अगर वह फिर भी नहीं समझा तो उसे सीधा जहन्नुम पहुंचा दूंगा । कहते हुए उसने ऊपर की तरफ इशारा किया जो भी करना है सोच समझकर करना । कहीं ऐसा ना हो ये मामला भी उल्टा हो जाये । साला नसीब भी कुछ ज्यादा खराब चल रहा है जो बैल में चिंतित स्वर में का आप बिल्कुल भी चिंता मत कीजिए । आप निश्चिंत होकर देवराज की पार्टी के विधायकों को देखिए । बस एक बार कार्लोस अपना काम पूरा कर लें । फिर वो काम भी हो जाएगा जो मैंने कहा और कमरे में चहलकदमी करने लगा ।

अध्याय 8 - B

हूँ । आखिर कौन है वह पुलिस वाले जो वहाँ पर अचानक से पहुंच गए और उन लोगों को नेताजी के आदमियों से बचा के ले गए । वो असली पुलिस वाले हो तो नहीं सकते क्योंकि मैंने तो ये बात या पुलिस मुख्यालय में किसी के साथ भी शेयर नहीं की थी । सिर्फ नेताजी को ही फोन कर के उनके बारे में जानकारी दी थी । जरूर ये बात नेताजी के यहाँ से ही लीक हुई होगी । नेताजी जाए कितना भी दावा करें कि उनके सारे आदमी उसके प्रति वफादार है, पर कोई अगर गद्दार निकल जाए तो उसके बारे में कैसे कहा जा सकता है । और ये भी तो हो सकता है कि वह लोग पुलिस वाले नहीं हूँ बल्कि उन्हें लोगों ने अपने बैकअप के तौर पर पहले से ही वहाँ पर उनको बैठा रखा बल्कि उन्हें लोगों ने ये आपने बैकअप के तौर पर पहले से ही वहाँ पर उनको बिठाकर रखा हूँ कि अगर उन पर कोई मुसीबत आए तो वो लोग अगर उनको बचा ले । पर बैकअप के तौर पर तो उन्होंने अपने आदमियों को पहले तैयार कर दिया था तो तीसरा ग्लो बनाने की क्या जरूरत थी? नहीं वो तीसरा ग्रुप नहीं बना सकते । फिर वो लोग कौन थे? किसी ने उनकी मदद की । अगर नेताजी की बात में थोडी बहुत भी सच्चाई हुई और वो असली पुलिस वाले हुए तो फिर ये तो बहुत खतरनाक बात हो सकती है । तो फिर ये तो बहुत खतरनाक बात हो सकती है । मेरे लिए ऐसा कैसे हो सकता है? यहाँ मेरे खिलाफ कौन जा सकता है? नहीं वो पुलिस के आदमी नहीं हो सकते हैं, वो पुलिस के देश में कोई और ही होंगे । पर अगर वह पुलिस के बीच में चाय जो भी हो, उन्हें इस बात की खबर लगी तो लगी कैसे? अपने ऑफिस में चहलकदमी करते हुए कमिश्नर खन्ना यही सब सोच रहा था । ये हो सकता है । ऐसा एक ही तरीके से हो सकता है । कोई यहाँ पर मेरी जासूसी कर रहा है और उसका भी एक ही तरीका हो सकता है ट्रांसमीटर जरूर । किसी ने मेरे इस कमरे में कहीं पर कोई डांस मीटर छुपा रखा है और उसके जरिए ये वो मेरी बातें सुन रहा है । मुझे इस कमरे की तलाशी लेनी पडेगी । सोचते सोचते हैं वो अपने कमरे की तलाशी लेने लग गया । उसको ट्रांसमीटर तलाश करने में ज्यादा समय नहीं लगता । थोडी देर में ही उसने अपने कमरे में लगी हुई गांधी जी की तस्वीर के पीछे एक वायरलेस ट्रांसमीटर बरामद कर लिया हो तो इसके जरिए मेरी बातें सुनी जा रही है । पर एक पुलिस कमिश्नर के कमरे में इसे लगाने की हिम्मत किसने की होगी? वो जो भी कोई है जरूर मेरी अनुपस्थिति में यहाँ पर आया हूँ । मुझे उसका पता लगाना ही होगा । वरना वो मेरे लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है । सोचते हुए उसने अपने कमरे में नहीं हुई । घंटे बजाए घंटे की आवाज सुनते ही बाहर कुर्सी पर बैठा हुआ और दलित दौड कर वहाँ पर आया और आते ही एक जोरदार साॅस जी साहब राजू मेरी गैरहाजिरी में कोई मेरे ऑफिस में आया था की जी साहब मैं समझा नहीं । लाॅट इसमें ना समझने वाली कौन सी बात है? मैं पूछ रहा हूँ जब मैं ऑफिस में नहीं था तो कोई मेरे पीछे से ऑफिस में आया था क्या? नहीं तो साहब आज तो कोई नहीं आया । हमें अगर रहे मैं आज की बात नहीं कर रहा है । आज से पहले कल परसों में या उससे भी पहले कोई आया था या नहीं । अब साहब वैसे तो याद नहीं कई बार जब आप ऑफिस में नहीं होते तो आपसे मिलने तो बहुत लोग आते हैं । उनकी रजिस्टर में एंट्री करने के बाद आपके आदेशानुसार मैं उन्हें आपका ऑफिस में बैठा देता हूँ । ऍम खुलने काम में हो तो कमिश्नर जोर से दहाडकर बोला । उसकी आवाज सुनकर वह बेचारा अर्दली सहन गया । थोडी देर तक कमिश्नर सोचता रहा । फिर अपनी आवाज को अपेक्षाकृत लेकर अच्छा अपने दिमाग पर थोडा सा लो और ये याद करके बताओ कोई एक से ज्यादा बाद आया था क्या मेरी अनुपस्थिति में हासा आए तो थे अरदली कुछ सोच कर कौन कमिश्नर लेती थी सब वो एसीपी जब आए थे दो तीन बार ऍम कौन? किसी भी विपुल कमिश्नर ने पूछा हाँ, वही अर्दली खुशी से उछलते हुए बोला तो इसमें खुश होने की क्या बात है? जाओ, बाहर जाकर अपना काम करो । कमिश्नर ने उसे डांटते हुए कहा । विचार दलीय अपना समूह लेकर बाहर आएंगे तो फुल कर रहा है ये सब पर वो ये सब क्यों कर रहा है? कमिश्नर सोचते हुए अपने कमरे में चहलकदमी करने लगा यार दो दिन हो गए घर में रहते हुए ऐसे तो जान निकल जाएगी । अनिल ने बिस्तर में पडे पडेगा । बाबा ने कहा है जब तक तुम्हारी बाजू का गांव पूरी तरह से भर नहीं जाता तब तक काम यहाँ से हिल भी नहीं सकते । अगर नहीं जवाब दिया और तू क्यों टेंशन ले रहा है । टेंशन तो हमें लेनी चाहिए । तेरी वजह से हम लोग यहाँ घर में कबसे कैद बैठे हुए हैं । अजीत ने कहा वही तो मैं बोल रहा हूँ यार आजम बाहर जाएंगे और बाहर के हालात का जायजा लेंगे । वैसे भी मैं पूरी तरह से ठीक हो चुका हूँ और शहर से कर्फ्यू भी और चुका है । अनिल ने का ऍम बाबा क्या हमें बाहर जाने की इजाजत देंगे और सबसे बडी बात आखिर बाहर जाकर हम करेंगे क्या? अपना तो हमारे पास कोई सबूत है और ना ही आगे बढने का कोई जरिया । और वैसे भी मामला तो अब धीरे धीरे ठंडा होता जा रहा है । सबूत नहीं रही हमें ये तो बताया है कि इन सब के पीछे कौन है और हमारे आगे बढने के लिए यही जरिया बहुत है । और रही बात मामला ठंडा होने की तो ये एक दबी हुई चिंगारी है जो ना जाने कब शोला बनकर बना जो ना जाने कब शोला बनकर भडक उठे और ऐसा हो तो उस से पहले ही हमें इसे रोकना होगा । हराम अकेले क्या इस काम को कर पाएंगे हम अकेले कहाँ है । आज हम तीन लोग हैं और हम तीनों सौ पर भारी है । वैसे तुम चिंता मत करो । मैंने सोच लिया है कि ये काम हम अकेले करेंगे भी नहीं । मतलब मतलब ये कि हम इस काम ने इस बार किसी कि मदद लेने जा रहे हैं । फिर किसी कि मदद पर किसकी उसी की जो पुलिस डिपार्टमेंट के भ्रष्ट तंत्र में रहते हुए भी जिसका दामन एकदम सफेद है । जो खीचड में रहकर भी कमाल जैसे खेलकर महक रहा है, जिसे बेईमानी छोड कर भी नहीं गुजरी है तो रिश्वत के नाम से ही ऐसे भी लगता है जैसे लाल रंग देखकर कोइ सांड भी लगता है जो इस शहर से क्राइम का नामोनिशान मिटाने को प्रतिबद्ध है । आखिर तुम किसकी बात कर रहे यार लगता है तुम लोगों ने आज का अखबार नहीं पडा वरना तुम लोग मुझसे सवाल नहीं करते । अखबार पडने का टाइम ही नहीं मिला पादा बाजार रहे । एक बार और तूने कोई पहली बुझाई और सीधे सीधे उसका नाम नहीं बताया तो अनिल के बच्चे तुझे मुझे कोई नहीं बचा पाएगा । अजीत ने जलाकर का अरे आर खली पीली नाराज के हो रहा है बताता रहा हूँ थोडा सा धीरज तो रखो ऍम धीरज रखो, बिस्तर में पढा है फिर भी पहेलियां हो जाने के बाद नहीं था । ठीक है तो धीरज मत रख । पर हम तो धीरज रख सकते हैं ना । हम धीरज रख सकते हैं । देने कहने का क्या मतलब है? मतलब ये प्यार है कि हमें इस मामले में इंस्पेक्टर धीरज की मदद हासिल करेंगे । वो तो मैं इंस्पेक्टर धीरज की बात कर रहे हो । आ गई बात समझ में अब ये बात तो तुम सही कह रहे हो । तुम ने सही कहा था कि धीरज एक ईमानदार पुलिस वाला आया और शहर के पुलिस डिपार्टमेन्ट रूबी की जड में वह कमाल की तरह ही खेल रहा है । साला हमने पुलिस कमिश्नर ताकि हेल्प मांगी । सलाह हमने पुलिस कमिश्नर तक से हेल्प मांगी । पर आज से पहले धीरज का खयाल तक नहीं आया । पर यार तो मैं अचानक से उसका खयाल अब कैसे आ गया? अचानक से तो ये खयाल नहीं आया यार पिछले दो दिन से बिस्तर में पडे पडे मैं यही सोच रहा था कि शहर में जो इस समय हालत हो रहे है उसके पीछे किस शख्स कहा है जो सब कुछ जानते हुए भी हम लोग चुप रह जाए क्या क्या उसे रोकने के लिए हम कुछ नहीं कर सकते जो इन सब का जिम्मेदार है । क्या हम उसे सजा नहीं दिला सकते? पर आखिर बिना किसी सबूत के हम भला कर भी कह सकते हैं । यही सोच सोच कर दिमाग का दही हो रहा था । वैसे अगर तुम्हें याद हो तो जब परसों जहाँ कई इलाकों में पुलिस स्टेशन पास होने के बावजूद दंगे बडा गुटे थे । टीवी में बताया गया था कि पुलिस स्टेशन में फोन करने के बावजूद पुलिस किसी भी जगह समय पर नहीं पहुंची थी । वहीं टीवी पर ये भी बताया गया था कि किस तरह से धीरज ने उसके एरिया में खुद अपने साथियों के साथ ट्वेंटी फोर इंटरनॅशनल लगाई थी और इस बात का इंतजाम किया था कि कहीं पर कोई अप्रिय घटना ना हो जाए । उसका ही नतीजा था कि उसके एरिया में दंगा भडकाने की कोशिश करते हुए उसने दो लोगों को गिरफ्तार किया था । वो अखबार तो हमने भी देखी थी । उस की सूझबूझ से ही वहाँ पर बडी घटना घटित होने से बच गई थी । देखो तब भी मुझे उसका खयाल नहीं आया था । राज के अखबार में सुबह सुबह खबर पडी थी । उसने एक जगह पुलिस की दबिश मारकर भारी मात्रा में नकदी और शराब के साथ साथ कुछ हथियार बरामद किए हैं और बडी साजिश को नाकाम भी किया तो इसी से तो मैं इस नतीजे पर पहुंचे होगी । धीरे हमारी मदद कर सकता है । हूँ पर यार क्या वो आपने पुलिस डिपार्टमेंट के उच्चाधिकारी, पुलिस कमिश्नर और उस नेता के खिलाफ कोई एक्शन ले पाएगा? अगर ने संदेह की दृष्टि से पीछे वेल ये बात तो मेरे दिमाग में उठी थी पर जब सीमा मर्डर केस को याद किया तो साला डाउन दूर वैसे भी तो याद ही होगा कि उसके इसमें भी बडे बडे लोग इक्वल खुद सीमा के डैडी केंद्रीय मंत्री भी शक के दायरे में थे । साठ हजार भूतपूर्व पुलिस कमिश्नर भी उसके इसमें इन बॉल था पर धीरज में उनके फादर रुपये की परवाह न करते हुए उसके इसको साल किया था और असली अपराधी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया था । कह तो तुम ठीक रायो अगर में गहरी सांस नहीं करता, वैसे भी सुना है कि वो इस्तीफा हर समय अपनी जेब में रखता है । पुलिस की नौकरी भी वो सिर्फ अपने जुनून की वजह से ही कर रहा है । पढना तो वो किसी रजवाडे के खानदान से ताल्लुक रखता है, अगर नहीं अब हमें उसके रजवाडे खानदान से कोई मतलब अजीत नहीं जानता हूँ । मैं फिर से ही मतलब । मैंने सिर्फ ये बताया कि वो किसी से भी नहीं डरता है और अपना फर्ज निभाने के लिए हमेशा तैयार रहता है । तो ऐसे बोलना चाहिए था ना पर यार क्या वो हमारी मदद करेगा भी? अजीत नया दिल से पूछा कहानी ये शंका तो मुझे भी हमारे पास अपनी बात रखने का कोई सबूत भी नहीं है । फिर हमारी बातों में आकर क्या इंस्पेक्टर धीरज ऍन सारी पुलिस कमिश्नर के खिलाफ कुछ एक्शन ले पाएगा । अगर ने भी अनिल से पूछा यार ये बात तो मैं भी नहीं कह सकता हूँ की वो उनके खिलाफ कुछ एक्शन ले पाएगा या नहीं पर मुझे इस बात का पूरा पूरा यकीन है कि वह हमारी बात जरूर सुनेगा । अनिल ने जवाब कैसे? तो मैं इस बात से इतना के शोर हो वेल तो मैं ध्यान होगा राजनगर नाइट क्लब में । हमने जब पूजा के लिए उस रॉकी के बच्चे को फंसाने का प्लान बनाया था । पहली बार जिस दिन हम अपने प्लैन को एक्जिक्यूट करने वाले थे उस दिन न जाने कैसे धीरज वहाँ पर आ गया था और हमें अपना प्लैन ड्रॉप करना पड गया था । हाँ याद है और शायद उसने वहीं तुम्हारे पास आकर ही ड्रिंक ली थी और उस बात का इससे क्या सम्बन्ध । उस दौरान मेरी उसके साथ कुछ देर तक वार्ता लाभ हुई थी और बातों ही बातों में मेरे मुंह से पुलिस के लिए कुछ गलत बातें निकल गई थी वो फिर तो वो जरूर कलबा होगा । तुम पर भडक गया होगा क्यों नहीं आज उल्टा उसने तो मेरी बात बडे आराम से सुनी थी और साथ में ये भी वादा किया था कि अगर कभी जिंदगी में मुझे उसकी जरूरत पड जाए तो भेज उसके पास चले । शायद पुलिस के प्रति जो मेरे दिल में नफरत है वो उसे दूर करने की कोशिश कर सके । और अब तो वैसे भी शायद वो समय आ चुका है जब हमें उसकी मदद की जरूरत है तो मैं लगता है उसे अब तक अपना वो वादा याद होगा जबकि उस समय तो वह नशे में भी था । उम्मीद तो पूरी यार बाकी तो भगवान जाने । वैसे भी हमारे पास सिर्फ अब यही एक अंतिम सहारा है । अगर उसने हमारी बात नहीं सुनी तो मैं भी जो क्या बैठ जाऊँ पर यार एक बात और बताऊँ क्या तो मुझे अपने हकीकत भी बयान करोगे, क्या उसे बताओगे की हम लोग कॉनमैन हैं और हमने अपनी सारी जिंदगी जुर्म के दलदल में ही गुजारी । अगर बताना पडा तो जरूर बतायेंगे । इसके अलावा हमारे पास और कोई रास्ता भी तो नहीं है वो हमारे हकीकत जानकर उसने हमें गिरफ्तार कर लिया तो तब की तब देखी जाएगी तो हम तो अपने आखिरी कोशिश करते हैं । ये तुम सही कह रह गया । चलो आजमाते हैं उसे । पर क्या बाबा बेहद पुलिस के पास जाने की इजाजत देंगे? वो भी जब खुद पुलिस कमिश्नर नहीं हमें धोखा दिया था । अगर कोई और पुलिस वाला होता तो मैं तो मैं कभी भी उसके पास जाने की इजाजत नहीं देता । पर जब तुम धीरज की हेल्प मांग रहे हो तो मैं तो मैं मना नहीं करूंगा । पर तुम लोग उसे कुछ भी बताते हुए एक बात का ख्याल जरूर रखना । कहीं ऐसा ना हो कि वह तुम लोगों को भी एक मुस्लिम की तरह गिरफ्तार न कर लें । करतारसिंह अचानक उन के कमरे में आ धमका था । बाबा कोई बात नहीं । अगर वो हमारी बात समझ जाता है और उस पर विश्वास करके जुबैद अंसारी के खिलाफ कोई एक्शन ले पाता है तो हम गिरफ्तार होने के लिए भी तैयार है । अनिल ने कहा, वैसे भी गिरफ्तार तो हम लोगों को होना ही है । उसके हाथों से बिना उसके हमारा काम भी नहीं चलने वाला । क्या मतलब? ऍर अजीत दोनों एक साथ चौकर बोले, मतलब तो मैं तुम लोगों को रास्ते में समझाऊंगा यारो । अभी तो फटाफट यहाँ से चलने की तैयारी करूँ । बाबा जब तक हम तैयार होते हैं तब तक आप भी जल्दी से नाश्ता तैयार कर दीजिए । बहुत भूख लग रही है । कहाँ जाने की तैयारी हो रही है हमारे जानू की । अभी बाहर से ऐश्वर्या ने कदम रखते हुए कहा तो तुम यहाँ क्या कर रहे हो? मिलने चौंकते हुए पूछा तो मैं नहीं आ सकती गया । मुझे आने के लिए तुम्हारी इजाजत लेनी पडेगी । ऐश्वर्या ने नकली गुस्सा करते हुए कहा अरे नहीं बेटी, ये तुम्हारा ही घर है तो जब चाहे आ सकती हूँ । करतारसिंह ने मुस्कुराते हुए कहा बाबा आप? अनिल ने कुछ कहना चाहा पर उससे पहले ही ऐश्वर्या ने मुस्कुराते हुए अनिल को चिढाते हुए कहा देखा अब तो बाबा ने भी कह दिया है ये मेरा घर है समझे हाँ भाभी जी आपका ही तो कर रहे हैं यहाँ आने के लिए आपको किसी भी गहने से पूछने की कोई जरूरत नहीं है । फॅार ने कहा और नहीं तो क्या? आखिर हमारी भावी जी हैं भाभी जी को नहीं उल्टा हम लोगों को इस कमरे में आने के लिए इन की इजाजत लेनी पडेगी । अजीत ने मुस्कुराते हुए उस की हाँ में हाँ मिलाई तो उन दोनों को बीच में बोलने के लिए किसने कहा? अनिल गुस्से से चढकर पर फिर अपनी बात को आगे बढाते हुए ऐश्वर्या से कहा पर तुम आए हैं यहाँ अखिलेश खडूस तो में देखने के लिए आई हूँ दिखाई नहीं देता हूँ मैं कोई ताजमहल उ तो मुझे देखने के लिए आई हो । जैन खूबसूरत तो तुम ताजमहल से भी ज्यादा हूँ जी करता है हर पल तुम ही देखती रहती हूँ तो मैं अपनी है बकवास करना बंद कर होगी । शुरू किसने की थी? ऍम अस बस ज्यादा मत बोलो । मैं समझ गई तो मैं मेरा आना बिलकुल अच्छा नहीं लगा । क्या करूँ काम बाॅल के हाथों मजबूर हो गई हूँ । कल शाम को बाबा से मार्केट में पता चला की तो मैं गोली लगी है । देखने चली आई पर तुम तो कहते हुए ऐश्वर्या के आंखों से आंसू अच्छा लगता है । देख लिया ना अब ज्यादा दुखी होने की कोई जरूरत नहीं है । बिल्कुल ठीक तुम जाॅन । अनिल ने रूसवाई से कहा तो वहाँ भी जी को जाने के लिए कह रहा हूँ । थोडी देर तो बैठ लेने दो इन्हें तुम्हारे पास दस करने का और नहीं तो क्या? इतनी दूर से सिर्फ तुमसे मिलने के लिए आई जितने का कोई जरूरत नहीं है । वैसे भी अभी हम लोग काम से बाहर जा रहे हैं । पालतू में लेट होने से कोई मतलब नहीं है । अनिल ने जवाब दिया, ठीक है जा रही हूँ मैं गो टू है अब गरवा आराम से जो भी काम करना है तो मैं ऐश्वर्या ने गुस्से में कहा और अपने पांव पटकते हुए वहाँ से रवाना हूँ बेटा वह तुम से इतना प्यार करती है फिर भी तुम उस पर बाहर स्वाद पर गुस्सा करते हूँ । ये कोई अच्छी बात तो नहीं । करतारसिंह ने अनिल से का बडा प्यार तो अपना अनिल भी उससे बहुत करता है । बस कहता नहीं है क्यों अगर मुस्कुराते हुए कहा तो हम चुप फॅार को कहाँ फील करता हूँ । आप जानते हो हम जिस राह पर चल रहे अंत में उसका एक ही अंजाम होना है । या तो एक दिन हम लोगों को जेल की सलाखों के पीछे जाना है या फिर किसी मुजरिम की गोली का शिकार हो जाना है । और ये सब जानते हुए भी अपने बिहार के लिए किसी मासूम की जिंदगी खराब नहीं कर सकता । मैं तो तुम लोगों को कितनी बार कह चुका हूँ । छोड दो ये सब कुछ शादी करके अपना घर बताओ चैन की जिंदगी गुजार होगा । नहीं बाबा है वो तो मैं पहले ही बता चुका हूँ । अब हम उस मुकाम पर बढ चुके हैं जहाँ से पीछे लौटना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है । बस अपने प्यार को इसी तरह से दिल में दबाकर एक देने दुनिया से फना हो जाना है । मुझे कहते हुए अनिल की आंखों से आंसू झिलमिला उठे । उधर उसकी बात सुनकर दरवाजे के बाहर खडी ऐश्वर्या की आंखों से भी आंसू कीधारा बहन निकली थी । मैं जानती हूँ तो मुझसे प्यार करते हो हूँ ।

अध्याय 8 -C

तो तुम लोग नहीं बताओगे की ये सारा सामान किसका है । इंस्पेक्टर धीरज आपने मालवीय नगर पुलिस स्टेशन के लॉकअप में उन मुजरिमों से मुखातिब था जिसको उसने उन लोगों की सूचना पर गिरफ्तार किया था जिनको उसने दंगा भडकाने की कोशिश करते हुए पकडा था । उन लोगों की मुखबिर से पूरे चौबीस घंटे की नाकाबंदी करते हुए उसने अपने विश्वासपात्र साथियों के साथ एक मकान पर रेड डाली थी जहाँ से दस आदमी की रफ्तार हुए थे । साथ ही साथ पांच करोड रुपया नगद, शराब के दर्जनों कार्टून्स और बंदूक और गोलियां बरामद की थी । वो दस लोग एक लाइन में अपने घुटनों के बल बैठे हुए थे और धीरज लॉकप के एक कोने से दूसरे कोने तक चहलकदमी करते हुए उनसे अपने सवाल पूछ रहा था । साहब आपको कितनी बार बताए ये ज्यादा सामान हम लोगों का है ही ये ज्यादा सामान हम लोगों का ही है । एक पतला सा मरियल सा गंजा आदमी बोला अवैध साले शक्ल तो ऐसी बना रखी है जैसे चौराहे पर भीख मांग कर गुजारा करता है और पांच करोड को खुद का पैसा बता रहा है । जानता भी है पांच करोड में कितने जीरो होते हैं । इंस्पेक्टर साहब आप कुछ भी कह लो हमसे कितनी भी पूछ ताछ कर लो पर हम अपनी आखिरी सांस था की यही कहेंगे कि ये सारा सामान हमारा है । उसी तरह दुबले पतले आदमी ने कहा, देखते हैं यार तुम लोग कितने देर तक अपनी जुबान बंद रख पाते हो । तुम से पहले तुम्हारे वह दो मित्र भी आई जुबान बोल रहे थे पर देख लो मैंने उनकी जुबान खुलवाई या नहीं और फिर जब उनकी जुबान खुली तो मैं तुम लोगों के पास पहुंचाया नहीं । अब एक ऐसे ही तुम लोग भी अपनी जुबान खोल हो गए और गा गाकर अपने मालिक का नाम बताओगे साहब, आप आखिर कितनी देर तक हम लोगों को टॉर्चर कर पाओगे । आपने हम लोगों को गिरफ्तार किया है, ये बात मीडिया को भी पता है और आज के अखबारों में छपी भी होगी आपको आज नहीं तो कल हमें अदालत में भी पेश करना पडेगा । इसलिए अगर आपने हमें आदमी लगाने की कोशिश की तो हम लोग वहीं जज के सामने आपको नंगा कर देंगे । ये बोल कर कि आपने हमें कितना टॉर्चर किया है और दंगा फैलाने के झूठे इल्जाम में फंसाने की धमकी दे रहे हैं । बेटे लाल तो मुझे जज के सामने नंगा करूँ । चलो ठीक है । तुम लोग ये कोशिश भी करके देख लेना और उसमें अभी काफी टाइम और उससे पहले दो तो मैं बहुत कुछ भुगतना पडेगा । मैं यार तुम्हारा मालिक कितना कमीना है तुम लोग यहाँ हवालात में सड रहे हो और उसने अभी तक तुम को छुटाने की कोशिश भी नहीं की । जब हम कह चुके हैं कि ये सारा सामान हमारा है तो फिर कोई और क्यों हमारी जमानत देने लगा? साहब और मैं भी कितनी बार कह चुका हूँ सडक चाधिकारी लग रहे हो तुम लोग पर तुम लोगों की मान ही नहीं रहे । लगता है अब मुझे अपने रंग में आना ही पडेगा । इंस्पेक्टर तो कितनी बार कहना पडेगा । अगर हमें टॉर्चर करने की थोडी सी भी कोशिश की तो अंजाम अच्छा नहीं होगा । एक पहलवान छाप बदमाश ने एग्रेसिव होते हुए कहा अरे यार तेरे को किसने कहा की मैं तुम लोगों को टॉर्चर कर दूंगा । तुम लोगों को मारूंगा पीटूंगा तो मैं बताओ । कल रात से तुम लोग इस लॉकअप में बंद हो और मैंने तुम लोगों को छूने की भी कोशिश की । क्या तुम लोगों में से किसी को भी एक उंगली से भी टच किया गया? नहीं नहीं नहीं ऐसा क्यों सोचने लग गए कि मैं आज तुम लोगों को टॉर्चर करने जा रहा हूँ और टीचर तो मैंने तुम्हारे दोस्तों को भी नहीं किया था । मेरी बात पर यकीन नहीं है तो पूछ लो उनसे उन्हें चौबीस घंटे तक इनको आए, लो भी नहीं किया । पूरे चौबीस घंटे तक इनको आए । लो भी नहीं । कहा उसकी दो टाइम का खाना चाय नाश्ता देकर अच्छी तरह से खातिरदारी की थी । फिर भी देख लो तो उन लोगों ने तुम्हारे बारे में बताया नहीं बताया ना सोचो क्यों क्या होगा ऐसा? उन्होंने चलो ज्यादा दिमाग पर जोर में डालो । उन दोनों को मैं यही बोला देता हूँ आराम से बैठ कर और आपस में गले मिलकर पूछ ताछ कर लेना । तब तक मैं भी थोडी सी बार की आवाज का कराया जाता हूँ । इतनी देर से तुम लोगों के गंदे वजन की खुशबू मेरा मतलब है । बदबू को बर्दाश्त कर रहा हूँ क्या अंदर मेरा उन दोनों को इस लॉकप में तो लेकर आना जगह? नीरज ने अपने अव्वल दार को आवाज लगाते हुए कहा । थोडी देर बाद ही पडोस के लॉकप से दो मुजरिमों को लेकर उसका हवलदार हासिल हुआ । वो दोनों वही थे जो कादिर की शिकंजी की दुकान के पास दंगा फैलाने की कोशिश कर रहे थे, वहाँ पे उन लोगों को अपने सामने देखकर दोनों के चेहरे डर के मारे पीले पड गए । लो भाई आ गए ये दोनों अब आराम से पूछताछ करना । इनसे तरह कोई मारा पीटी मत करना समझे मुझे मार पिटाई से सख्त नफरत है और तुम दोनों इतना डर क्यों रहे हो वो भी अपने दोस्तों से । अरे ऐसे लोगों से दोस्ती रखते ही वो दिन से बाद में मिलने पर तो मैं डरना भी बडे । फिर चिंता मत करो तुम लोगों का ये कुछ भी नहीं बिगाड सकते । तुम्हारी सुरक्षा का वादा किया था मैंने । और वह मैं निभाऊंगा । तुम लोगों को एक खरोंच भी नहीं आ सकती है । बस इन लोगों को ये बता दो कि मैंने तुमसे कैसे पूछताछ करनी थी जो तुमने इनका पता बता दिया था तुम्हारे पास है घंटे का टाइम । तब तक मैं विवाद गायक राउंड मार कर आता हूँ कहते हुए धीरज लॉकप से बाहर आ गया । याद आ गया हम लोग कितनी देर तक धीरज का यहाँ पर इंतजार कर रही । घंटा तो हो गया इंतजार करते करते आखिर हम डायरेक्टर से जाकर क्यों नहीं मिलने? अब तो ये रेस्टोरेंट वाला भी हमे शक भरी निगाहों से देखने लगाए जीतने का अबे साले तेरे को क्या तकलीफ हो रही है । तकलीफ तो मुझे होनी चाहिए जब देखो हर बार मुझे लडकी बना देते हैं । अगर ने कहा था अब हर बार का बनाया पहली बार ही तो बन रहा है । वो याद आया तुम पिछले हफ्ते की बात कर रहे हैं । हर साल तक भावी ने नहीं बचा लिया था मुझे । वैसे एक बात है लडकी बंद कर तो तेरह रूपये और भी निखर कर सामने आता है । इसीलिए तो चांस हमेशा तुझे मिलता है अब अनिल की तरह मुझे चलाने वाली तो कोई है नहीं । इसीलिए मेरा तो दिल कर रहा है । तो यही अपनी गर्लफ्रेंड बनाऊँगा । साले क्या बोल रहा है? तीन सौ सतहत्तर खत्म हो गई है तो कुछ भी बकवास है । अब तो तारीफ करो ऊपर से उल्टा सीधा सुना चल अब ज्यादा रोमन ठाकुर के में ही तो है तो कौन सा तेरे रूप के दर्शन और लोग कर पा रहे हैं ये लोग तो हम दोनों ही उठा रहे । अजीत ने हंसते हुए कहा मैं आरोप प्लीज धीरे बोला करो थोडा अगर किसी ने सुन लिया तो सारा का सारा प्लान चौपट हो जाएगा । वैसे भी जब देखो तुम लोग कुत्ते बिल्लियों की तरह मेरा झगडा ही करते रहे । हाँ, तो तुम लोग जगह देखते और नहीं टाइम । अनिल ने उन दोनों से नाराज होते हुए कहा ये बात तो सही बोली यार तुमने हम दोनों कुत्ते बिल्लियों की तरह ही तो झगडा कर रहे हैं । अब देख ले अगर बिल्ली ही बना हुआ है कहते हुए आज इतने जोर से ठहाका । उसकी ऐसी की आवाज सुनकर आसपास की सीट पर बैठे हुए नौ दिन की नजरें उनकी तरफ हूँ । ये देखा मिलने उसे घूम कर देगा तो उसने तुरंत अपने होठों पर उन लेगा । ये देखकर अनिल को फंसी आने को ऊपर से वो सीरियस बना रहा । वो तीनो इस समय ऍम बैठी हूँ क्योंकि मालवीय नगर पुलिस स्टेशन के सामने लगभग पचास मीटर दूर बना । इस समय इन तीनों ने हल्का में कब क्या हुआ था । अनिल ने अपने चेहरे पर मुस्लिम जैसे दाढी लगा रखी थी । सर पर गोल टोपी पहन रखी थी, बदन पर पठानी स्वीट डाला हुआ था । वहीं पर अजीत जो है वह क्लीनशेव बाल तेरे नाम वाले सलमान की तरह निकाल रखे थे । और जैसा की आप समझ गए होंगे अगर में हिस्सा में एक मुस्लिम महिलाओं की तरह पारंपरिक दुर्गा पहन रखा था जिसका नकाब उसने इस समय हटाया । अपने आंखों में उसने गहरा काजल लगा रखा था और होठों पर हल्की सी लिप्स्टिक लगाई थी जिससे उसके वोट हल्के गुलाबी देंगे । अच्छा इस बार भी ऐश्वर्या भाभी को ही क्यों नहीं बुलाया मुझे लडकी बनाकर पेश कर रहे हैं । अब पहचानने का खतरा नहीं है क्या अगर मुस्कुराते हुए मिल सकती है उसकी दो बज जायेगा । पहली बार ये कि इस बार तो मैं सिर्फ दूर से ये अभी नहीं । इसीलिए किसी के द्वारा छूकर पहचान पाने का कोई सवाल ही नहीं । और दूसरा मैं नहीं चाहता है कि वो बार बार हमारे काम के बीच में वैसे तो में कितनी बार बोला है । उसे भावी मत बोला कर । अनिल ने घूमते हुए का तो वो समझ गया उसके सामने आने से हमारे दोस्त की दिल की धडकन जो बढ जाती है इसलिए उसके नाम से भी दूर रहते हैं । जो सही का हालत अगर देखा एक बार बोला ना चुप रहो तो अच्छा अच्छा चुप हो जाते हैं । पर ये तो बताओ आखिर कब तक उसका इंतजार करना पडेगा । हमें बहुत देर हो चुकी है उसका इंतजार करते हैं । अरे आर, कब तक धीरज पुलिस स्टेशन के अंदर रहेगा । वैसे कभी ना कभी तो बाहर निकलेगा ही, अब तक हमें उसका इंतजार करना ही होगा । अनिल लिखा, पर यार ऐसे तो वो शाम तक भी नहीं निकला तो क्या करोगी? यहाँ तो नहीं बैठ सकते । इतनी देर तक अजीत लिए संदेह जताया वो मुझे बताया । इसलिए अगर धीरज दस मिनट में पुलिस स्टेशन से बाहर नहीं निकला तो फिर हम लोग यहाँ से चल रहे हैं । वैसे भी हमने उस पुलिस सफाई से जो जानकारी ली थी उसके हिसाब से धीरज हर एक घंटे में खाने से बाहर निकल कर आसपास अपने एरिया का पंद्रह बीस मिनट का पैदल ही एक राहुल लगता है और अभी तो उसे घंटे से ज्यादा समय हो गया । नहीं । चलो कर लेते हैं इंतजार दस मिनट और इसके अलावा हमारे पास और कोई चारा भी नहीं है । अनिल ने कहा अगले ही पल उसकी निगाहें पुलिस स्टेशन के बाहर में करते हुए धीरज करते हैं । जानती हूँ वो देखो पुलिस स्टेशन के बाहर में करना । अब हमें अपने पहन कर काम करना शुरू कर देना चाहिए । कहते हुए अनिल ने जोर से आवाज मीटर मिल गया हूँ । अच्छा सलमान चलता हूँ । अब तो तुमसे निकाह वाले दिन ही मिलना हो पाएगा । अनिल ने थोडा उदास होने का अभिनय करते हुए आसपास बैठे हुए लोगों और वेटर को सुनने को का । उसकी बात सुनकर अजगर ने अपनी पाल के इस तरह से निकली जैसे उसको अनिल की बात सुनकर शर्मा वो फिर तुरंत अपने चेहरे तो लगाते लगाते हैं । अरे जीजाजी दे नहीं कितने बच्चे हैं आप लोगों के निकाह के बस कुछ दिन और सब करेंगे । फिर तो आपको आपके गरिया कर रहना है । अच्छा है इस बहाने से मुझे भी आप से छुटकारा मिल जाएगा । हसते हुए हैं जितने का उसकी बात सुनकर अगर में बिल्कुल के पीछे से ही अपनी गोल गोल आंखों से उसे होता जैसे उसे कच्चा चबा जाएगी । नफीक के बच्चे तो घर चल आज तेरी खैर नहीं अगर ने बना दी गौर का वो मुझे धमका रही हो । अगर आपने मुझे अपनी फॅमिली ना तो मैं अब मम्मी को बता दूंगा कि आपने कहा से पहले आदिल जीजू से मिलने के लिए आती रहती है । अजीत ने उसी मजाकिया लहजे में कहा अभी तो खडा खडा क्या हम लोगों की बातें सुनना क्या बिल दे? पैसे ले और निकल गया । अनिल ने उस वेटर को डांटते हुए कहा जो बिल देने की बजह है उनकी लोग झोक से नहीं लगा ऍम गया और तुरंत उसके सामने ट्रे कर दी जिसपर सौ और दिल की रसीद रखें । अनिल ने बिल देखा और अपनी जेब से पर्स निकालकर बिलकते मैं बीस रूपये टेस्ट के साथ और फिर वो तीन रेस्टोरेंट से निकल गए । याद है ना तो लोगों को क्या करना है ध्यान से करना उसे बिल्कुल भी खबर नहीं होनी चाहिए । बाहर निकलते ही अनिल ने आयोजित और अजगर से धीरे से कहा बता यार अगर उसे हमारे काम की कानून गांधी खबर हुई, लानत है हमारे होना और इतने सालों की भी लेंगे अजित में जवाब पर ध्यान से ये शिकार अपने पुराने शिकारों में से सबसे तेज और होशियार है । तुम चिंता मत करो हमारे काम करने के बाद तो मैं भी अपना काम कुछ मिंटो में पूरा करना है और वह भी बडी फुर्ती से । वरना अगर उसे जरूरत महसूस हुई तो तुम अपना काम नहीं कर पाओगे । डोंट वरी कहते हुए अनिल पुलिस स्टेशन से विपरीत दिशा में चल दिया । उसके जाते ही अजीत और अजगर उस तरफ चल पडे जिस तरह पुलिस स्टेशन था और इंस्पेक्टर धीरज उससे थोडी दूर एक पान की थडी पर खडा खडा सिगरेट पी रहा था । लॉकप में उन गुंडों से पूछताछ करने के बाद उन्हें थोडी देर के लिए अकेला छोडकर धीरे पुलिस स्टेशन के लिए लॉकप में उन गुंडों से पूछताछ करने के बाद उन्हें थोडी देर के लिए अकेला छोडकर धीरज पुलिस स्टेशन से बाहर आ गया था । उसका इरादा अपने आस पास के इलाके का एक राउंड मार कर वापस पुलिस स्टेशन जाकर उन से वापस पूछताछ करने का था । वाह पुलिस स्टेशन से निकलकर सीधा रोड के उस तरफ गया । यहाँ पर चाय और पान की धनियाँ नहीं । उसने पानकी धडी से एक सिगरेट खरीदी और उसके धीरे धीरे कश लेने लगा । सिगरेट खत्म होने के बाद उसने उसका टोटा नीचे फेंका । उसे अपने जूते से कुछ और फिर अपनी कलाई पर बंधी हुई घडी पर नजर दौडाई अभी तो दस मिनट ही हुए हैं काफी टाइम बचा है चलो थोडा सा टहल कराता हूँ सोचते हुए वहाँ से पैदल ही चल रही है सोचते हुए वहाँ से पैदल ही चलने लगा हर लगता है जीजा जी से ज्यादा जल्दी तो आपको है उनसे मिलने की सडक पर चलते चलते ही है जितने लडकी बने अगर से कहा हम अगर तूने अपने बकवास बंद नहीं की तो तो मार खायेगा मेरे से । अगर नहीं उसे मुक्का दिखाते हुए कहा, हाँ पता है गुस्सा होने का दिखावा कर रही हो । वरना मन में तो इस समय लड्डू फूटने होंगे । क्यों अजित ने उसे चढाते हुए कहा तेरी तो रफीक कहते हुए वो अजीत को मारने के लिए आगे बढा । उसके बढते अजीत उससे बचने के लिए उल्टा दौडने लगा । अजगर भी उसे मारने के लिए उसके पीछे भागा । पर पैरों में ऊंची एडी की सैंडल पहने हुए होने के कारण वह ज्यादा भाग नहीं पाया । भागते बात एकदम से उसके पैर आपस में अटक पडे और सीधे सामने से आते हुए इंस्पेक्टर धीरज से जा टकराया और वह दोनों ही नीचे जाते हैं । अरे मोहतरमा, ज्यादा संभलकर धीरज उठते हुए बोला और उसने नीचे गिरे हुए बुरखे में मौजूद अजगर को उठाने के लिए अपने हाथ बढाया । अगर ने वहाँ सामने की कोई कोशिश नहीं की और अपने आप ही खडा होंगे । सॉरी इंस्पेक्टर साहब, मेरा भाई थोडा सा शरारती है और उसके पीछे भागते हुए मैं आपको नहीं देख पाई । आपसे टकरा नहीं खडे होते ही है । इस करने का कोई बात नहीं हो जाता है । साक्षर इसमें माफी मांगने की कोई बात नहीं । धीरज नहीं जवाब दे आपको चोट तो नहीं आई । तभी अजीत ने धीरज के पीछे से आते हुए इस घर से पूछा तो तेरी वजह से एक तो में नीचे गिर गई और तू पूछ रहा है कि चोट तो नहीं आई आज तो खर्चा अगर अमीर है तुझे डाटना पढवाई मेरा नाम भी सलमान नहीं रहे आप सौरी अब देखो कितने बच्चे हैं आप के साथ शरारत करने के । अब तो कुछ दिन बाद आप हमें छोडकर वैसे ही चली जाएगी हमेशा हमेशा के लिए । अ जितने थोडा इमोशनल होते हुए कहा वो तो मेरा राजा भैया इसी शहर में तो रहूंगी जब दिल करे मुझसे मिलने चले आना कहते हुए अगर ने धीरज की नजरों से बचते हुए बुरखे से आंखों ही आंखों में ज्यादा करते हुए अजित से कुछ पूछा । इसके जवाब में उसने भी उसी तरह से जवाब दिया ये देख कर्ज करने का अच्छा इंस्पेक्टर साहब आपको बहुत बहुत धन्यवाद लगता है आपकी शादी होने वाली है जल्दी । धीरज ने उनकी बातों से अंदाजा लगाते हुए अगर से पूछा जी अगले जो मेरे को मेरा ने कहा है, अगर ने शर्माते होगा आपको शादी के एडवांस में बहुत बहुत बधाई हो । धीरज ने कहा धन्यवाद इंस्पेक्टर साहब, अल्लाह को खूब तरक्की दे । खुदा हाफिज कहते हुए वहाँ से रवाना हो गई और उसके पीछे पीछे अजीत भी चल पडा । धीरज उन भाई बहनों की मस्ती और प्यार देखकर मुस्कुरा उठा था । अगले ही पल उसकी आंखों में उदासी की एक लहर दौड गए । उसे अपने छोटे भाई राज की याद आ गई थी जिसे उसने सीमा हत्याकांड के बाद कुछ दिन पहले स्कूल के हॉस्टल में ही भर्ती करवा दिया था । उसने अपने सर को हल्का सा झटका दिया और यादव के भवन से बाहर आया । फिर वो भी वहाँ से भागे फिर वो भी वहाँ से आगे की ओर चल पडा । अभी उसे चले दो तीन मिनट ही हुए होंगे । तभी अचानक उसके पीछे से एक आदमी थोडा तेज कदमों से चलता हुआ आया और साइड से उसको टक्कर दे मारे है । कौन है इसे? एक पुलिस वाले से टकराते हुए भी डर नहीं लगा । टक्कर लगे ही उसके मुंह से निकला और अगले ही पल चौंकते हुए उसने अपना दायां हाथ पीछे लिया और तुरंत उस आपने एक दूसरे हाथ को अपनी गिरफ्त में ले लिया । आप ऍम तो फिर इतनी ज्यादा हिम्मत एक पुलिस वाले की जेब में हाथ डालकर उसका पर्स निकाल रहे हो और वो भी पुलिस स्टेशन से कुछ ही मीटर दूर इतनी हिम्मत कहाँ से आई । धीरज ने उसे अपने सामने लेते हुए कहा, अरे इंस्पेक्टर साहब, आप गलत समझ गए । मैंने आपकी जेब में कोई हाथ नहीं डाला । उस आदमी ने जवाब दिया, जो क्या मिल था, मैं गलत समझ रहा हूँ । धीरज ने उसे प्रश्न किया, हाँ सर देखिए आपका पर तो आपकी पैंट की पॉकेट में है । अनिल ने धीरज को उसकी जेब की तरफ इशारा करते हुए कहा, शायद तो सही कोई गलत हो गयी । धीरज ने अपने पर्स को देखते हुए अपना सर हिलाते हुए कहा, शायद नहीं सर, आपको गलत फहमी ही हुई है । अनिल ने मुस्कुराते हुए कहा, ऐसे मेरी क्या किसी की भी मजाल नहीं हो सकती है । एक पुलिस वाले कीजिए, पढा डाल सकें । अब मक्खन मत लगाओ अगर तुम जाओ । यहाँ से धीरज ने भी मुस्कुराते हुए कहा । बाईस कहकर अनिल वहाँ से रवाना हुआ । उसके चेहरे पर आपने कामयाबी कि मुस्कान झलक रही थे । अभी तो कुछ कदम ही दूर जा पाया था कि तभी पीछे से सोचते हुए धीरज ने उसे आवाज दी । ऍम को उसकी आवाज सुनकर एक पल के लिए अनिल का दिल जोर से धडक उठा । फिर भी वह थोडा और उसी प्रकार मुस्कुराते हुए पूछा अब क्या हुआ साॅफ्ट के लिए यहाँ नजारा? धीरज ने उसे अपने पास बुलाया । जी कही मिस्टर एक बात बताओ जो बस मेरा इस जेब में था तो दूसरी जेब में कैसे पहुंच गया? धीरज ने उससे पूछा । उसका सवाल सुनकर अनिल एक बाल को सकपका गया । फिर भी उस ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया अब साडी आपका पर्स है और या आपकी जेब में? फिर भला मैं आपके सवाल का जवाब कैसे दे सकता हूँ? ये बात तो आप अपने पर्स और अपनी जेब से पूछे वो बातें तो बडी जोरदार करते हुए हैं । सर ऐसी तो कोई बात नहीं तो है प्यार है । अब ये बताओ कि मेरे पर्स की पोजिशन कैसे चेंज हो गई? अब सर इस बात का मैं क्या जवाब दूर आईडीएस अगर तुम्हारे पास मेरे सवाल का कोई जवाब नहीं तो चिंता मत करो । इसका जवाब मैं दे देता हूँ तुम्हें पर मेरी जेब से निकाला नहीं था बल्कि इसे मेरी जेब में वापस रखा था । अरे सर आप भी ये क्या बहकी बहकी बातें कर रहे हैं क्या दिन नहीं पीने लग गए आप क्या मतलब? मतलब सर, मैं बोला ऐसा क्यों करूंगा? तुमने ये क्यों किया? ये तो मैं नहीं जानता । अरे बात जरूर जानता हूँ कि ये पर सुनने इस जेब में रखा है । आप भी कमाल की बातें करते हुए इंस्पेक्टर साहब आप क्या बोल रहे हैं? मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आ रहा है । वैसे पर साहब का ही है ना यहाँ पर तो मेरा ही है । तो बताइए भला आपका पर्स में आपकी एक जेब से निकालकर दूसरी जेब में कैसे डाल सकता हूँ? ऐसे मेरी शकल देख कर आप एक बात और बताइए क्या मैं आपको पागल दिखता हूँ जो ये पागलों जैसी हरकत करूंगा? क्यों कम अगर कुछ भी बोले जा रहा हूँ ना? पागल तो तुमने योर पर्स भी तुमने नहीं निकाला तो मैं तो वापस जेब में रखा है । तो हमारे पास इतना समय नहीं था की तुम पहले एक जेब से पर्स निकालो और फिर दूसरी जेब में उसे वापस भी रख सकता हूँ । पर जरूर किसी और ने निकाला और वो भी थोडी देर पहले । धीरज ने सोचते होंगे कहा मुझे लगता है कि पुलिस स्टेशन में रहते रहते मुझे वहाँ से पूछताछ करते करते आप खुद कंफ्यूज हो रहे मैंने पर रखा और उससे पहले ये पर्स किसी और ने निकाला जहाँ दूर जैसी बात कर रहा हूँ नहीं मैं जादू जैसी बात नहीं कर रहा हूँ और हाँ मैं समझ सकता हूँ की मेरा पर्स किसमें निकाला हो सकता है थोडी देर पहले एक मोहतरमा और उसका छोटा भाई यहाँ से गुजरे थे । वो बेहतर महा मुझसे आतंकवा आई थी । इसी दौरान किसी तरह से उन्होंने वो पर मेरी जेब से निकाला होगा और तुमने पर्स उनसे लेकर ही वापस मेरी जेब में लग गया । वो लोग भी जरूर तुम्हारे साथ ही होंगे । और तुम लोगों ने ऐसा ड्रामा क्यों किया? बस मैं ये समझ नहीं पा रहा हूँ । आपको जरूर कोई गलत फहमी हो रही है । इंस्पेक्टर साहब मेरा कोई साथ ही नहीं है और न ही मैंने ये पर्स वापस रखा है । नहीं मुझे कोई गलत फहमी नहीं हो रही है । वैसे मुझे लगता है तो मैं इस तरह से मेरी बात कबूल नहीं करोगे । मुझे कुछ और ही करना पडेगा और उसके लिए तुम इसी वक्त मेरे साथ पुलिस स्टेशन चल रहे हैं । धीरज ने इस बार कठोर शब्दों में कहा ये आप क्या कह रहे हैं? अनिल ने चौकर पूछा वही जो तुम सुन रहे हो? धीरज ने जवाब दिया पर मेरा जुड गया । तुमने एक पुलिस इंस्पेक्टर की जेब काटने की कोशिश की है । पर मैंने आपकी जेब नहीं काटी । काटी नहीं । बाल काटते हुए मैंने तो मैं रंगेहाथों गिरफ्तार किया और तो मैं इस बात से इनकार नहीं कर सकते । आप ऐसा नहीं कर सकते । मैं साई कर रहा हूँ तो मैं इस बात से बच नहीं सकते । हाँ, मैं ऐसा नहीं भी कर सकता है । पहले मुझे तुम एक बात बताओ । पहले तो तुम लोगों ने मेरी जेब से मेरा पर्स पार किया फिर वापस से रख दे दिया । तुम लोगों ने ऐसा क्यों किया? हमने ऐसा कुछ नहीं किया तो मेरा वाला चलने के लिए तैयार रहो । अजीब जबरदस्ती है बिना किसी बात कही ऐसे आप खुद ही सोचिए हम इतना जिसके लेके ये काम करेंगे तो पहले तो आपका पर्स निकालेंगे और फिर उसे वापस भी रखेंगे । वही सब समझने के लिए दो तो मैं मेरे साथ चलना पडेगा हो वो समझ गया जरूर तुमने मेरे पर उसको निकाल कर उसमें कुछ रखा होगा और इसलिए पर उसको वापस से मेरी जेब में रख दिया हूँ । ऐसा तो नहीं ने इस पर जहाँ का लेप लगाया हो ताकि जब ये पर्सनल बाहर निकालो तो जायर मेरे हाथों में लग जाए और फिर सिगरेट या किसी और चीज के साथ वो जहर मेरे शरीर के अंदर चला जाए जरूर तुम्हे उन मुजरिमों को बचाने के लिए क्या होगा जिनको मैंने कल गिरफ्तार किया है । तुम तो खतरनाक आदमी लगते हो, अब तो तुम्हें पकडना और भी जरूरी है । कहते हुए इंस्पेक्टर धीरज ने अपने रिवॉल्वर बाहर निकाला और अनिल की तरफ तानते हुए चलाया डाॅॅ फॅार साहब, ये आप क्या कर रहे हैं? अगर परस्पर जहर होता मैं अपने हाथ खुले रखता क्या? अनिल ब्लॅक मैं जरूर अपने बचाव के लिए कुछ किया होगा । धीरज ने का ये तो मामला अभी से उल्टा पड गया लगता है इस नाटक को बंद करके इसे अभी सब कुछ बताना पडेगा । कहीं ऐसा ना हो ये मुझे पुलिस स्टेशन ले जाए और अंदर लॉकअप में बंद कर दिया । अनिल मन ही मन सोचना क्या सोच रहे हो, अपने आप ऊपर करो और मैंने साथ ऐसे ही पुलिस स्टेशन चलो । धीरज ने उसे धमकाते हुए का सर सिर्फ दो मिनट के लिए वहाँ कोने में चलकर मेरी बात सुन लीजिए । फिर चाहे मुझे पुलिस स्टेशन ले चलना । अनिल ने कहा जरूर तुम्हारी कोई नहीं चाहता है तो मुझ से बचने का कोई प्लान बना रहे हैं । इंस्पेक्टर साहब आप इतने समझदार और बहादुर हैं वाला मैं आप से बचने के लिए क्या प्लान बना सकता हूँ । ऐसे सुना है आप अकेले ही बिना हथियार के चार पांच को तो ही सकते हो तो वैसे भी अकेला यूँ और आपके पास रिवाल्वर भी ठीक है । चलो सुन लेते हैं तुम क्या कहना चाहता है कहते हुए धीरे जिसके साथ कोने में आ गया अब बोलो क्या कहना चाहते हैं सबसे पहले तो आप ये बंदूक अपनी जेब में रखनी है । पैसे भी मुझे ऐसे देख कर डर लगता है वो धीरज ने मुस्कुराते हुए कहा और रिवॉल्वर को आप इस रखते हैं । अब बोलो सर ये सच है आपका पर्स मेरे दोस्तों ने ही बनाया था और फिर मैं नहीं इसे वापस आपकी जेब में लगा था । वैसे अगर मैंने गलती से पर उसको गलत जेब में नहीं रखा होता तो आप मुझे कभी पकडा नहीं पाते । ऐसा है तो नहीं आ रहे हैं तो मैं बडी सावधानी बरती थी । रखने और जेब में तुम्हारा हाथ लगते ही मुझे ऐसा हो गया था सर वह ऐसा साहब को तब नहीं हुआ । जवाब की जेब से पर्स गायब कर दिया था । अनिल ने मुस्कुराते हुए रहे धीरज थोडा हडबडाया फिर बोला चलो मान लिया भाई जान माल्या भाई मैं तो में पकडा नहीं पाता अगर तुम से गलती से जेब चेंज नहीं हुई होती है और आगे से मैं इस बात का ध्यान रखूंगा और फिलहाल तुम लोग ये बताओ तुम्हें ऐसा क्यों किया? या पुलिस के साथ आंख मिचौली खेलनी थी क्या? खरे नहीं सर हमारे इतनी मजाल नहीं ये तो हमने किसी और काम के लिए किया था । अरे भाई, पहली बजाना बंद करो और जल्दी से बताओ किस काम के लिए तुम ने ऐसा किया था । पहले आपने पर उसको जेब से बाहर निकाल के फिर से पहेली अगर सर आप एक बार अपना पैरिस तो बाहर निकालिए । आपको इस पहेली का हल मिल जायेगा । जैसे अगर आपको अभी भी ये लगता है कि आपके परस्पर हमने किसी तरह का जहर लगाया है या फिर आपको किसी और चीज का डर सता रहा है तो बता दीजिए आपकी जेब से पर्स को मैं बाहर निकालेगा । आपकी जेब से पर्स को मैं बाहर निकाल देता हूँ । मैंने ले मुस्कुराते का नहीं, मैं निकाल लेता हूँ यार कहते हुए धीरज ने अपना पर्स अपने पैंट की पॉकेट से बाहर निकाला और पूछा अब अब इस पर उसको खोली है । इसमें आपको एक लेटर मिलेगा पैसे । इसमें आपको आपने कुछ नोट गंभीर मिलेंगे । क्या करें जब आपका पर्स काफी भारी था । लेटर रखने की जगह बनाने के लिए कुछ नोट निकले लगता है खूब रिश्वत के पैसे जमा कर के रखते हैं । फॅमिली तो ये मजाक कर रहा हूँ । आपके बारे में अच्छी तरह से जानता हूँ । इसलिए तो ये ज्यादा नाटक आपके साथ ही लैटर पहुंचाने के लिए रखा है । इसे निकली और पडी । धीरज ने अपना पर्स में कहा । उसमें वास्तव में एक लेटर रखा था । उसमें लेटर निकाला और उसे खोलकर पढना शुरू । दोस्त अगर तो मैं अपनी जिंदगी में कभी भी ऐसी भी जरूरत पड जाएगा । पुलिस की सहायता की जरूरत महसूस तो इतना चीज को याद करते हैं । हाजिर हो जाऊंगा । ये मेरा तुमसे वादा है । शायद मैं तुम्हारे कुछ काम आ सके और पुलिस वालों के प्रति तुम्हारे दिल में जो नफरत है उसे थोडा सा काम कर सकते हैं । आपको याद है ये वादा जो आपने किसी इंसान से किया था । अगर आपको अपना वादा याद है तो आज उसे संभालेगा । वक्त आ गया है । आज मुझे आपकी मदद की सख्त जरूरत है और आप के कहे अनुसार में आपको याद दिला रहा हूँ । निभाइये आप अपना वादा और करिए मेरे दिल से पुलिस के प्रति नफरत की ज्वाला को कम वरना मैं समझूंगा । सारे पुलिस वाले एक जैसे होते हैं सिर्फ और सिर्फ पैसों की पुजारी । मंदिर से चप्पल भी इसलिए चोरी हो जाने देते हैं क्योंकि उसमें उन का हिस्सा बना हुआ रहता है । वैसे भी जवाब मेरी बात सुनेंगे, जान जाएंगे की जरूरत मेरी कम और इस शहर की इस राज्य की ज्यादा है आप मेरी मदद कर के मेरी नहीं बल्कि इस राज्य की जनता की मदद करो । आपकी मदद का विनाश आपका एक अनजान में ये ये तो शायद मैंने क्लब में काम करने वाले बारटेंडर को कहे थे । राजनगर नाइट क्लब नाम था । उसका आपका धीरज याद करने की कोशिश करते हुए थे । था मैं वही बात ऍम ये यार तो तुम आदमी हो और उस समय तो तुम्हारा कुछ हमारी रूम था । बाहर में काम करने के बावजूद तुम बडे शरीफ नजर आ रहे थे और आज ये तुम्हारा जेबकतरे वाला रूप कुछ समझ में नहीं आ रहा है । और हाँ तो सीधे सीधे भी तो मेरे पास आ सकते थे । फॅमिली का इस्तेमाल करने की क्या जरूरत थी, हो सकता था । फिर इसकी कुछ वजह थे तो मैं आपसे पुलिस स्टेशन में नहीं मिलना चाहता था । मैं नहीं चाहता था कि जो बातें आपसे करना चाहता हूँ उसकी किसी और को कानोकान भी खबर दूसरा अगर में सीधे सीधे आपके पास आता, जिस काम के लिए मैं आपसे मदद मांगने जा रहा हूँ, शायद मेरी बातों पर बिल्कुल भी यकीन नहीं करते । ऐसे तीसरी बार सबसे ज्यादा ले लीजिए और वो क्या है अब ज्यादा अगर मैं सीधे सीधे आपको बता देता हूँ आपको हमारे घर के बारे में कैसे पता चलेगा? अनिल ने मुस्कुराते हैं उनका ऍम सिर्फ जेबकतरी नहीं और भी बहुत कुछ । ऐसा वैसे रही बात शरीफ होने को । वैसे मैं अभी भी शरीफी ये तो सिर्फ वक्त की मेहरबानी है जो आज इस रूप में आपके सामने मौजूद अच्छा ठीक है । बोलो तो मैं क्या मदद चाहिए सर, अभी नहीं । बात बहुत लम्बी है और समय आप के पास भी अभी नहीं होगा । इसके बारे में मैं आपको विस्तार से बताऊंगा । वैसे अगर आप आज शाम को समय निकालकर कहीं बाहर मिल सके तो बहुत ही बढिया रहेगा । मैं अपने दोस्तों के साथ आपको मिलूंगा और वहीं पर सारी बातें होंगी तो ठीक है । शाम को छह बजे मेरी ड्यूटी होती है । मैं तो मैं सात बजे यहाँ से दो किलोमीटर दूर ऍम वहीं पर मिलता है । क्या किसी बार में नहीं मिल हो गए क्या? अनिल ने मुस्कुराते हुए पूछा अबे यार, मैं रोज नहीं पीता, कभी कभी ले लेता हूँ और उस दिन तो मैं वहाँ पीने के अलावा वहाँ पर किसी और काम से गया था । फिर चलो छोडो जाने दो शाम को मिलते हैं साथ ठीक है सर, मैं अपने दोस्तों के साथ वहाँ टाइम से पहुंच जाऊंगा । वैसे थैंक्स आपने मेरी बात सुनी और मुझ पर विश्वास किया । उसके लिए अनिल ने हाथ जोडते हुए कहा और वहाँ से रवाना हो गया । उधर उसके जाते है इंस्पेक्टर धीरज भी आपने पुलिस स्टेशन में चला गया तो भाई लोगों किसी निर्णय पर पहुंचे या नहीं तुम लोग? धीरज ने लॉकप का गेट खोलकर उन मुजरिमों से मुस्कुराते हुए पूछा जी ने वो कुछ देर पहले हवालात में छोडकर गया था । हम आपको सब कुछ बताने के लिए तैयार है । सर दुबले पतले गंजे इंसान ने कहा क्या फिर से यही कहने जा रहे हो कि वह ज्यादा सामान तुम लोगों का ही है? धीरज ने मुस्कुराते हुए कहा नहीं सर, ये सामान हमारा नहीं । दूसरे पतले से नजर आने वाले आदमी ने कहा कमाल है यार थोडी देर पहले तो तुम कह रहे थे कि मरते दम तक तुम लोग यही का हो गई कि ये ज्यादा सामान तुम लोगों का ही है, चाहे मैं कुछ भी कर लूँ, अब क्या मरने का समय आ गया है तुम लोगों का अरे इंस्पेक्टर साहब ज्यादा शुभ शुभ बोली क्यों मरने मारने की बात कर रहे हैं मोटे तगडे पहलवान झाब आदमी ने कहा कमाल है पहलवान तो मीटर गए वो भी बिना मेरे टॉर्चर के धीरज ने । व्यंग साहब, आप चाहें हमारा कितना भी मजाक उडा लीजिए । इन लोगों ने हमें सब समझा दिया । हमने पहले अखबार ध्यान से नहीं देखा था कि उसमें सिर्फ पांच लोगों को ही गिरफ्तारी की खबर छपी है । अगर ध्यान दिया होता तो समझ जाते हैं कि आखिर पेपर में पूरे दस लोगों की गिरफ्तारी की खबर क्यों नहीं छपी है । सिर्फ पांच की क्यों छपी है ताकि अगर तुम सच्चाई बयान ना करो तो तुम सब को ठोक दो और फिर बाद में यही बयान दूंगा की पांच लोगों ने पुलिस स्टेशन पर हमला करके गिरफ्तार किए गए आदमियों को छुडाने की कोशिश की थी और इस गोलीबारी में सभी मुझे मार गिराए गए । खुशकिस्मती से पुलिस का सिर्फ एक जवान घायल हुआ । क्या करूँ पहला यही स्टाइल मुजरिमों से बात करने का । धीरज ने उसकी बात पूरी करते हुए कहा हाँ इंस्पेक्टर साहब हम समझ गए हैं आप जो चाहे हम वो बयान देने के लिए तैयार है जो चाहे नहीं सिर्फ ये बताओ ये जब माल किसका है ।

Part 6: अध्याय 9 - A

अध्याय नौ नेता जी अभी आप दुख की घडी से गुजर रहे हैं । ये बैठक आपसे इतनी इमरजेंसी में क्यों बुलाई है? हाँ नेताजी वो भी उस समय जब पार्टी के उपाध्यक्ष और आपके बेटे आपकी पत्नी की अस्थियों को गंगा बहाने के लिए हरिद्वार गए हुए हैं । आप लोग सही कह रहे हैं मैं ना अभी मैं अपने पर्सनल दुख से गुजरना मेरे खुद के रूप से ज्यादा जरूरी मेरे लिए इस प्रदेश की जनता की सेवा करना है और इसलिए मैंने आज पार्टी की ये खास मीटिंग अर्जेंट बुलाई । मेरा बेटा यहाँ पर नहीं तो क्या हुआ । पार्टी के बाकी सभी सीनियर मेंबर तो यहाँ पर मौजूद नहीं । मुझे जरूरी निर्णय लेने के लिए आप सब सीनियर लोगों की राय जाएंगे । जी कहिये नेताजी आप क्या कहना चाहते हैं? मैं जो भी बात कहना चाहता हूँ । बात शायद आपने से कुछ लोगों को पसंद ना आए । एलवी एक बार आप लोग मेरी बात ध्यान से सुनेंगे । मैं आप लोगों से इतनी गुजारिश करना चाहता हूँ नेताजी आपको जो भी कहना है खाली साफ साफ कही । इस तरह से पहेली आना भी चाहिए । तो सुनिए मैं ये कहना चाहता हूँ कि आने वाला एसेंबली लेकिन हमें राष्ट्रीय आवाम पार्टी के साथ मिलकर लडना चाहिए क्या? उस की बात सुनते ही वहाँ हॉल में उपस् थित पार्टी के सभी सदस्यों ने एक साथ चौकर का मुझे मालूम था मेरी इस बात को सुनकर आप सब लोगों को ऐसा ही आश्चर्य होगा । पर मैं यही चाहता हूँ कि आने वाले इस असेंबली इलेक्शन में हम लोगों को राष्ट्रीय आवाम पार्टी के साथ गठबंधन कर लेना चाहिए । देवराज ठाकुर ने धीरे धीरे अपने शब्दों पर जोर देकर का या आप क्या कह रहे देवराजी हम लोग उनके साथ कभी नहीं जा सकते । पार्टी के एक सीनियर नेता ने एग्रेसिव होकर का अशोक जी बिल्कुल ठीक कह रहे हैं । अगर हमारी पार्टी ने उनके साथ इस इलेक्शन में गठजोड किया तो हमारे समुदाय के वो लोग जो हमारे अनुयायी हैं, हमारी पार्टी को अपना आदर्श मानते हैं । लोग हमें बिल्कुल भी वोट नहीं करेंगे और ध्यान रखिए इस बात का सारा फायदा नेशनल पार्टी उठा ले जाएंगे । हमें इस इलेक्शन में एक भी सीट जीतने में मुश्किल हो जाएगी । और तो और ये भी हो सकता है कि इस तरह से इस इलेक्शन में हमारा नामोनिशान ही मिट जाए । एक दूसरे नेता ने अशोक की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहीं निर्णय आप इसलिए तो नहीं ले रहे हैं क्योंकि आपके घर पर आपके दुश्मनों ने जानलेवा हमला किया था और उसमें आपकी पत्नी की मौत हो गई है । और अब आपको शायद ये डर सता रहा है कि आप पर या आपके परिवार पर फिर से कोई हमला ना हो जाए और उसमें आप भी मारे जाए । मुझे तो ऐसा लगता है कि आपकी पत्नी की मौत में आप को पूरी तरह से तोड कर रख दिया है जो आप इस प्रकार का बेवकूफी भरा निर्णय ले रहे हैं । आप ऐसा करने की सोच भी कैसे सकते हैं? नहीं मित्रो, आप जैसा सोच रहे हैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं है । ना तो मैं मरने से डरता हो और ना ही अपने परिवार का बलिदान करने से घटता हूँ था अपनी पत्नी की मौत से थोडा दुखी जरूर और परिवार से भी ज्यादा जरूरी मेरे लिए अपनी पार्टी है ये पार्टी, मेरी माँ, मेरा परिवार सब कुछ । मैंने इस पार्टी को अपने खून पसीने से सींचा और मैं मरते दम तक अपनी पार्टी के लिए ही काम करता रहूंगा । तो फिर आप इस तरह से आवाम पार्टी के साथ गठबंधन करने के लिए कैसे बोल रहे हैं? पहले आप लोग मेरी पूरी बात ध्यान से सुनी है और उसके बाद ही कोई निर्णय करिए आपको शायद पता ना हूँ । रोज दिन मेरे घर पर होने वाले हमले में मरने से पहले मेरी पत्नी से मेरी यही बातें हो रही थी । इतने सालों से हम और आवाम पार्टी एक दूसरे के खिलाफ लडते हुआ हैं । वो मुस्लिम के लिए बोलते हैं और हिंदुओं के लिए बोलते हैं और आज तक इस बात से हम दोनों में से किसी भी पार्टी का कोई फायदा नहीं हुआ तो हम चालीस बजा सीट से कभी आगे बढ पाए और ना ही वो लोग कभी से आगे बढ पाए हैं । उल्टा हमारी इसी अदावत का फायदा केंद्र की दोनों मुख्य पार्टियां उठाती आ रही है । हर चुनाव के बाद जब किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता उन में से कोई एक पार्टी हमें सब बात दिखाती है और हम लोग उसके जाल में फंस जाते हैं । कभी अकेले तो कभी साथ में । कभी इस पार्टी को तो कभी उस पार्टी को समर्थन देते रहते हैं और हर बार सरकार में उन्हें केंद्र की दो पार्टियों में से किसी पार्टी का मुख्यमंत्री बन जाता है और हम लोग छोटे मोटे विभागों से समझौते करके रह जाते हैं और फिर इस बात का खामियाजा हमारे प्रदेश को भी भुगतना पडता है । देख लो आज हमारा प्रदेश देश के अन्य भागों की अपेक्षा कितना ज्यादा पिछडा हुआ है । शिक्षा के क्षेत्र में जहाँ देश में सबसे ज्यादा फिसड्डी राज्य हमारा है, वहीं रोजगार और स्वास्थ्य के मामले में भी हालत ज्यादा अच्छी नहीं है । ऊपर से हम लोग भी ना तो जनता के लिए ज्यादा कुछ कर पाते हैं और न ही अपने लिए कुछ कर पाते हैं । आप लोग एक बार ठंडे दिमाग से सोच अगर राम और आवाम पार्टी आपस में एक साथ मिल जाते हैं तो दोनों मिलकर राज्य में अपनी सरकार आसानी से बना सकते हैं । मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी हमारा ही पार्टियों का होगा और बाकी विभाग भी हमारे पास रहेंगे और इस तरह से सरकार में रहकर हम अपने प्रदेश की सेवा ज्यादा अच्छी तरह से कर पाएंगे । आखिर हमारा मुख्य उद्देश्य प्रदेश की उन्नति और विकास ही तो है । कहते हुए देवराज ठाकुर ने गहरी सांस ली और मेज पर रखे हुए पानी के गिलास से पानी पीने लगा । बात तो आपने ठीक नहीं है, पर है तो यह दूर की कौडी नेताजी बाद दूर की कौडी सही पर आप जरा ध्यान से सोची है और बताइए हमारी बात में थोडा बहुत भी वजन है नहीं क्या ऐसा हो सकता है? नहीं । देर राज ने पानी का ग्लास नीचे रखते हुए कहा नहीं नेता जी, बात तो आपकी बिलकुल सही है पर इसमें बहुत बडा खतरा भी है । वो क्या कहीं ऐसा तो नहीं उनके साथ गठबंधन करने से जो हमारा पारंपरिक वोटबैंक है वो हम से दूर हो जाए और उनका वोट केंद्रीय पार्टियों को शिफ्ट हो जाए । आप लोगों को क्या लगता है इस बारे में हमने नहीं सोचा होगा । इस बारे में हमने भी हमारी पत्नी की मौत के बाद दो दिन तक काफी सोच विचार क्या है? कहते हुए देवराज ठाकुर थोडी देर के लिए तो शायद अपनी पत्नी को याद करते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए थे । फिर थोडी देर बाद था तो मैं कह रहा था कि काफी सोच विचार करने के बाद मैं किसी नतीजे पर पहुंचा हूँ कि ऐसा नहीं होना चाहिए । उल्टा इससे हमें फायदा ही ज्यादा होगा । हमें हमारे समुदाय के वह दलित वोट भी आसानी से मिल जाएंगे जो अभी तक जुबैर अंसारी की पार्टी को मिलते जा रहे हैं और अगर उनका वोट हमें मिलता है तो उससे हमारा वोट प्रतिशत बढ जाएगा । ये बात तो आप सही कह रहे हैं देवराजी पर क्या जुबैर हमजाद मिलने के लिए तैयार है? वो जरूर तैयार होगा क्योंकि इसमें उसका भी उतना ही फायदा है जितना कि हम लोगों का । वैसे भी अगर वो हम ज्यादा नहीं मिलाता है, धोबिया में कोई नुकसान नहीं है । उल्टा हम उनके समुदाय में ये बात फैला सकते हैं कि हम तो उसके साथ मिलकर हिंदुओं के साथ साथ मुस्लिम की भी उन्नति चाहते हैं । दोनों को साथ मिलाकर हम प्रदेश का विकास करना चाहते हैं पर वो उनका नेता ऐसा नहीं चाहता । वो सिर्फ सत्ता में बने रहने और अपने दौलत के महल खडे करने के लिए उनका सिर्फ यूज कर रहा है । वैसे भी हमने पहले ही उसके खिलाफ इकबाल को तो खडा किया ही है हम उसे भी अपने इस बात को आगे बढाने के लिए शहर देंगे । युवा लोग वैसे भी उसके प्रशंसक हैं और जब वह भी हमारी बात दोहराएगा तो अपने मीडिया के द्वारा हमें से ज्यादा से ज्यादा प्रचार करेंगे जिससे लोगों पर हमारी बात का ज्यादा से ज्यादा असर पडे । किए बात तो आप सही कह रहे हैं तो इस तरह से हमें दोनों तरफ से फायदा ही फायदा है । आप बोलिए आप लोग मेरे इस निर्णय में मेरे साथ हैं या नहीं । हम सब आपके साथ ही है । नेताजी अगर अभी भी किसी को कोई शंका है या जिसको लगता है कि हमारा प्रस्ताव गलत है तो वो अपने विचार हमारे सामने रख सकता है । कहते हुए उसने अपने सामने बैठे हुए पार्टी के सभी लोगों पर अपनी नजर दौडाई पर किसी ने भी कुछ नहीं कहा । ये देखकर देवराज ठाकुर में अपनी बात को आगे बढाते हुए कहा ठीक है । फिर हम जुबैर अंसारी की पार्टी के साथ गठबंधन करने के लिए अपने प्रस्ताव पर मुहर लगाते हैं । ठीक है नेता जी हम का लिए अपना एक दल उनके पास इस बात का प्रस्ताव लेकर भेजते हैं । नहीं ये बात उससे हम खुद ही करेंगे और उनके पास जाकर नहीं बल्कि टीवी के माध्यम से आज ही रहेंगे । ऐसा करने पर उस पर ज्यादा प्रभाव पडेगा । तुम जल्दी से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का इंतजाम करूँ और उसमें सभी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वालों को बुला जी नेता जी जैसा आप कहें । जुबैद अंसारी अगर आप टीवी पर ये प्रसारण देख रहे हैं तो कृपया मेरी बात जरा ध्यान से सुनी । हो सकता है आपको मेरी बात जरा अजीब लगे और मैं जो कुछ भी कहने जा रहा हूँ पूरा सोच समझकर और इस प्रदेश की भलाई के मद्देनजर कहने जा रहा हूँ । इसलिए मैं आपसे इतना सा निवेदन करता हूँ की आप पिछली सब बातों को भूलकर मेरी कही हुई बातों पर थोडा सा गौर फरमाइए । ऐसा कि आपको पता ही है पिछले दिनों मेरे घर पर मेरे किसी दुश्मन ने जानलेवा हमला किया था जिसमें मेरी पत्नी की मौत हो गई । नहीं तो नहीं जानता कि वो हमला किसने करवाया । मैं इतना तो समझ सकता हूँ कि मुझ पर ये हमला किया हुआ है । शायद मेरे द्वारा दिए गए उन बयानों की वजह से मैंने पिछले दिनों कहे थे और जिसके कारण कुछ मुस्लिम मौलवियों ने मुझे अपने समुदाय का दुश्मन समझ लिया था और यकीन मानी मैंने कभी भी मुसलमानों के खिलाफ कुछ नहीं बोला और ना ही उनके प्रति मेरे दिल में कोई दुर्विचार । जिस प्रकार आप अपने समुदाय के हित के लिए सोचते हैं, मैं भी उसी प्रकार अपने समुदाय के हित के बारे में सोचता हूँ । और इसी मद्देनजर मैंने भी सिर्फ अपने विचार व्यक्त किए थे जिनको मीडिया ने अपने हिसाब से प्रसारित कर दिया और आप लोगों ने मुझे अपना दुश्मन समझ लिया और एक बात बताइए जब आप अपने समुदाय के हित के लिए सोचते हैं और गलत नहीं है तो बताइए मैं अगर अपने समुदाय के लिए ऐसी सोच रखता हूँ तो फिर क्यों गलत हो गया । चलिए फिर भी मेरी कही हुई बातों से आपको या आपके समुदाय को ऐसा लगता है कि मैंने कुछ गलत कहा है तो उसके लिए आपसे हाथ जोडकर क्षमा चाहता हूँ और आप से भी उम्मीद करता हूँ की अब तक जो भी कुछ हुआ है उसे बुला दीजिए । आपका भी उद्देश्य अपने समुदाय का भला करना है और मेरा भी उद्देश्य अपने समुदाय का भला करना है और इसलिए मैं आज अपना एक प्रस्ताव आपके सामने रखने जा रहा है । क्यों ना हम दोनों पिछली सब बातों को अपने दिल से मिटाकर आपस में मिल जाएगा । हम अपने अपने समुदाय का भला सोचने करने के साथ साथ पूरे राज्य का भला करने के बारे में सोच । इसलिए मैं आज आपको अपने साथ आने का निमंत्रण देता हूँ और चाहता हूँ की इस बार कम चुनाव हम दोनों की पार्टियां मिलकर लडेंगे । आधी सीटों पर आपकी राष्ट्रीय आवाम पार्टी बाकी आधी सीटों पर हमारी इंडियन राष्ट्रवादी पार्टी अपने अपने उम्मीदवार उतार आपको शायद मेरा ये निर्णय अभी बेवकूफाना लग रहा हूँ और सोच रहे होंगे भला में ऐसी बातें क्यों कर रहा हूँ? राजनीति के दो विपरीत ध्रुव आपस में कैसे मिल सकते हैं और जुबैर अंसारी मैं कोई नई बात नहीं कह रहा हूँ । आप राष्ट्रीय राजनीति को ही देख लीजिए । कल तक जो एक दूसरे की विचारधाराओं का विरोध करती थी वो पार्टी आज गठबंधन बनाने का विचार कर रहे हैं, बात कर रही हैं । कल तक जो पार्टियां साथ साथ चुनाव लडती थी वहाँ आज एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लडने की बात कर रही है । जब वो ऐसा कर सकते हैं तो अपने प्रदेश की भलाई के लिए हम लोग क्यों नहीं? और जुबैर अंसारी जी वैसे भी हम कोई दुश्मन तो है नहीं जो ऐसा ना कर सकें । मेरी बात का यकीन मानिये अगर हम लोग ऐसा कर पाते हैं तो फिर हमें इन चुनावों में जीतने से और राज्य की सत्ता में आने से कोई भी राष्ट्रीय पार्टी नहीं रोक सकती है । आप ये मत सोचिए कि मैं सत्ता और कुर्सी पाने के लालच में ऐसा कह रहा हूँ । मेरा उद्देश्य सत्ता प्राप्ति बिलकुल भी नहीं । अगर इस तरह से हम लोग सत्ता में आ जाते हैं तो हम दोनों ही अपने अपने समुदाय के लोगों का ज्यादा अच्छी तरह से भला कर पाएंगे और साथ में इस प्रदेश का । वैसे सिर्फ मेरी ही नहीं बल्कि मेरी स्वर्गवासी धर्म पत्नी की भी इच्छा थी और उस दिन हम आपस में यही डिस्कस कर रहे थे । पर कहते हुए देवराज ठाकुर ने अपनी वाणी को विराम दिया और फिर अपनी बात आगे बढाई । अगर आपको मेरा ये प्रस्ताव स्वीकार है तो मेरी पत्नी के बारे में वाले दिन यानी के आने वाले शुक्रवार दस तारीख को हम लोग रामलीला मैदान में मिलकर एक रैली को संबोधित भी करेंगे और जनता के सामने इस गठबंधन की घोषणा भी करेंगे । यही मेरी घर में पत्नी के भी आखिरी इच्छा थी । आशा है आप मेरे इस प्रस्ताव पर जरूर विचार करेंगे और इन्कार नहीं करेंगे । जय अभी इसमें ये क्या नया नाटक चालू कर दिया आपने । पार्टी ऑफिस के हॉल में दीवार पर लगे हुए बडे स्क्रीन वाले टीवी को देखते हुए जुबैर अंसारी ने रजाक से पूछा पता नहीं नेताजी पर ऐसा लगता है कि बीवी के मरने से इसका दिमाग मिल गया । यहाँ फिर बीवी के खत ले के बाद इसको ये डर सता रहा है कि एक बार तो बीवी ने इस की तरफ बढती हुई मौत को अपने स्तर पर ले लिया था पर आप कहीं वो खुद इस मौत का शिकार ना बन जाए । रज्जाक ने जवाब दिया, नहीं मजाक मुझे नहीं लगता । ऐसा कुछ भी है जहाँ तक मैं समझता हूँ ना तो इसका दिमाग मिला हुआ है और नई ये आपने आने वाली बहुत से डाल रहा है । अगर ऐसा होता तो चुपचाप भी हमारे पास इस प्रस्ताव को भिजवा सकता था । जिस तरह से ये टीवी पर लाइव प्रसारण से प्रस्ताव भेज रहा है उसके साथ नहीं होता है । किसके दिमाग में कुछ और ही चलना है । शायद ऐसा जो हमारी सोच से भी बहुत पहले जुबैर अंसारी ने कहा ही शायद आप सही कह रहे हैं पर अब आप क्या करेंगे? उसने तो बॉल आपके पाले में डाल दी है । अब अगर रात मना करते हैं । जनता में यह संदेश जाएगा कि आप अपनी आवाम को सिर्फ राजनीति की वजह से यूज कर रहे हैं । और अगर हाँ बोलते हैं तो भी फसते हैं । ये तो सही बोला तुमने तो नहीं बताओ हम क्या करें चलो फिलहाल के लिए हम उसकी इस बॉल को अपने पाले में रख लेते हैं । तुम का लिए अपनी पार्टी की मीटिंग बुलाओ । वही सब से पूछ कर ते करेंगे कि हमें आगे क्या करना है । जो हुकुम नेता जी सर हम तीनों कॉनमैन है । अनिल ने कहा हो धीरज की मुझे इतना ही नहीं किया वो तीनों दोस्त और इंस्पेक्टर धीरज इस समय मालवीय नगर इलाके में स्थित एक कॉफी शॉप के केबिन में बैठे हुए थे । धीरज इस समय सिविल ड्रेस में था । सर आपको हमारी बात सुनकर आश्चर्य नहीं हुआ । अजीत ने पूछा अरे भाई, जब तुम लोगों ने मिलकर एक पुलिस वाले को ही अपना शिकार बना दिया तो फिर आश्चर्य किस बात का? हम लोगों को ठगना तो शायद तुम्हारे लिए बाएं हाथ का खेल होगा । वैसे तुम दोनों में से वो लडकी कौन बना हुआ था? धीरज ने पूछा हूँ सर पहचानी अजीत ने कहा तुम तो नहीं हो सकते । नीरज ने अजीत को देखकर का फिर अगर की ओर इशारा करते हुए कहा यही था वो बुर्के में आपने ठीक पहचाना । साल आपकी नजरे वाकई में काफी तेज है करने का । अगर तुम मुर्गे में नहीं होते तो शायद मैं तो मैं पहले ही पहचान लेता है और तुम लोग मुझे यू बेवकूफ नहीं बना पाते हैं । धीरज ने मुस्कुराते हुए कहा, अरे इधर रहने दीजिए, आप तो इसे तब भी नहीं पहचान पाते । कम से कम बिना छुए तो पहचानने से रहते है । जितने हसते हुए हो सकता है और हो भी नहीं सकता । वैसे बिना छुए पहचानने का चांस तो आपको मिल सकता था । राजनगर नाइट क्लब में जवाब बार काउंटर पर अनिल से मिले थे, पर किसी वजह से वह चांस मिस हो गया । आप से क्या मतलब मैं बताता हूँ । अनिल ने कहा और क्लब वाली सारी घटना कहना ली । साथ में ये भी बताया कि कैसे उन्होंने अपने प्लैन से रॉकी से पैसे ठगे थे और एक लडकी की हेल्प की थी । ऍम तो वो तुम लोग थे जिसकी वजह से मेरा सादा बना बनाया काम बिगड गया । धीरज ने गहरी सांस लेकर का आपका सारा काम बिगड गया । हम कुछ समझा नहीं सर । मतलब ये कि मैं उस दिन आपने इनफॉर्मर से मिलने के लिए वहाँ क्लब में गया था जिससे मुझे जो जानकारी हासिल हुई थी उससे ये पता चलता था ऍफ का कारोबार होता है और जब दो तीन दिन के बाद मैंने अपनी टीम के साथ क्लब में रेड की थी तो वहाँ पर ऐसा कुछ भी नहीं मिला था । लगता है तुम्हारे उस कारनामे की वजह से ही उन लोगों ने वो सामान कहीं और शिफ्ट कर दिया था । और सॉरी सर, हम लोगों को बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि हमारी वजह से आप का इतना बडा काम बिगड जाएगा । कोई बात नहीं होना था तो हो गया अब छोडो इन बातों को मुझे तुम लोग ये बताओ आखिर मुझे तुम लोगों ने यहाँ पर किसलिए बुलाया है सर, हम आपको एक जरूरी इन्फॉर्मेशन बताने के लिए यहाँ पर आए हैं । हम लोग जानते हैं देवराज ठाकुर के घर पर हुआ हमला किसने किया था और उसका मास्टरमाइंड कौन है? ऍम जानते हैं उसके बारे में धीरज नहीं चौकर पहुँचा हूँ ये सर ये हम अच्छी तरह से जानते हैं । ऐसे इस बारे में हमें क्या शहर के पुलिस कमिश्नर भी इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं । अनिल ने जवाब दिया, वॉट मैं बिल्कुल भी नहीं समझा । आखिर तो क्या कह रहे हो? रुकिए सर, मैं आपको शुरू से बताता हूँ । अनिल ने कहा और फिर वो इंस्पेक्टर धीरज को सारी बात बताने लग गया और इस तरह से वह सबूत वाला कागज हमारे हाथ से निकल गया । अनिल ने ये कहते हुए अपनी बात खत्म की । सबूत तो हाथ से निकला ही निकला । साथ ही ये भी तो बताओ कि तुम मरते मरते भी बच्चे थे । दिखाओगे ने गोली का निशान फॅलस्वरूप में कहा कोई जरूरत नहीं । दोस्त तो मुझे तुम्हारी बात पर पूरा यकीन है, धीरज नहीं । वैसे सबूत की कॉपी अजीत ने रखना की थी और उसको हम न्यूज न्यूज के पास भी लेकर गए थे । पर सीधा सबूत न दिखाकर उन्होंने खबर को सनसनीखेज बनाने के चक्कर में, लेकिन नहीं उस चलाने लग गए और बाद में खबर चली तो देखा उनके पास ऐसी सौ से भी ज्यादा चिट्ठियां थी । इसलिए उन्होंने क्षमा मांगकर वह प्रसारित नहीं । अनिल ने अपनी बात आगे बढाई । वह कार्यक्रम मैंने भी देखा था । पर इसलिए हम अपने आखिरी उम्मीद लेकर आपसे हेल्प मांगने आए थे । बताइए, आपको हमारी बात पर यकीन है या नहीं और हमारी हेल्प करने के लिए तैयार है या नहीं । अनिल ने पूछा था उसमें मुझे तुम्हारे द्वारा कहे गए एक एक शब्द पर यकीन है और मैं तुम्हारी हेल्थ भी करूंगा । तो वैसे सच पूछो तो तुम सच कहने जा रहे हो । ये मुझे उसी वक्त यकीन हो गया था जब तुम ने अपनी बात शुरू की थी या तुम ने शुरू में ही कहा कि तुम लोग कौन बैंक था तो लोगों को अपना शिकार बनाकर रखते हो । आखिर कौन चोर अपनी इसलिये पुलिस के सामने दायर करता है । हालांकि मुझे मुझे मौत से सख्त नफरत है, चाहे वो आपने जब उनको कितना भी जस्टिफाई करें कि वो खुद जमाने के सताए हुए हैं और ये सब का मजबूरी में करते हैं । या फिर वो सिर्फ उन्हीं लोगों को शिकार बनाते हैं जो खुद गरीबों का खून चूस चूसकर अमीर बनने नाना बीच में कुछ भी कहने से पहले मुझे मेरी बात खत्म कर लेना । इस देश की जनसंख्या लगभग सवा सौ करोड है और उनमें से नब्बे प्रतिशत लोग किसी ना किसी द्वारा सताए जाते रहते हैं । पर अगर वह नब्बे प्रतिशत लोग भी वही जब करना शुरू करते हैं जो तुम लोग कर रहे हो तो फिर इस देश में एक भी इंसान ऐसा नहीं बचेगा तो जरूर का शिकार ना हुआ या शिकारी ना बन गया । सब एक दूसरे को मारना काटना लूटना शुरू कर रहे हैं । अब अगर ऐसा होता है तो फिर इंसानों की बस्ती और जानवरों की बस्ती में कोई अंतर नहीं रह जाएगा और ये सारा देश एक शमशान बन जाएगा । सर हम यहाँ पर आपका लेक्चर सुनने नहीं आए हैं । आप से मदद मांगने के लिए आए हैं अ जितने चढकर का और नहीं तो क्या? अगर आपको मदद करनी है तो करो वरना हम लोग जा रहे हैं । हमारे पास और भी रास्ते हैं अपनी प्रॉब्लम को सॉल्व करने के । वैसे भी ये कोई हमारी पर्सनल प्रॉब्लम नहीं है, जो हमें मारे मारे फिरते रहे । अगर में भी अजीत के सुर में सुर मिलाते हुए तुम लोग गुस्सा मत हो गया, मैं बात कर रहा हूँ ना अनिल ने उन दोनों को चुप कराते हो जाएगा । फिर धीरे से बोल रहा हूँ सर, मैं अपने दोस्तों की तरफ से आपसे माफी मांगता हूँ तो उस की कोई जरूरत नहीं है । धीरज ने मुस्कुराते हुए गा । मैंने तुम लोगों की मदद से इनकार नहीं किया । दोस्त हूँ, बस मुजरिमों के प्रति अपने विचार व्यक्त की है । और तो मैं इस बात से इनकार नहीं कर सकते की तुम लोग भी एक मुझे नहीं हो । वैसे चिंता मत कर जब मैंने अनिल से उसकी मदद का वादा किया था तब मैं ये बात बिल्कुल भी नहीं जानता था कि ये खुद भी एक मुझे में अगर जानता भी होता है तो भी कोई बात नहीं थी । मुसीबत में फंसा हुआ इंसान चाहे वो कोई भी हो, अगर मुझ से मदद मांगता है तो भी मैं उसकी मदद जरूर करता हूँ । मैं तुम लोगों की मदद जरूर करूंगा । वैसे भी तुम्हारे शब्दों में ये बात सिर्फ तुम्हारी मदद की नहीं बल्कि ये बात मेरे शहर की सुरक्षा से भी जुडे हुए हैं । तो क्या आप इतनी हिम्मत रखते हैं कि इस प्रदेश की सरकार में शामिल सत्ताधारी पार्टी के अध्यक्ष और पुलिस कमिश्नर के खिलाफ आपको इस आॅक्शन ले सकते हैं? देखो भाई तो मैं बताइए घर मेरे बाद सबूत हो तो मैं क्या कमिश्नर क्या कोई नेता खुद मुख्यमंत्री के खिलाफ एक्शन ले सकता हूँ? फिर मैं यहाँ पर थोडा सा मजबूत, बिना किसी सबूत के मैं कोई भी नहीं लेता हूँ । तो फिर आप से मिलने का क्या फायदा हुआ अगर में फिर उससे सका यार ये सही बात तो कह रहे हैं बिना किसी सबूत के ये पुलिस कमिश्नर या उस जुबैद अंसारी के खिलाफ कोई कदम कैसे उठा सकते हैं? वैसे भी उन्होंने ऐसी कोई कोशिश भी की तो नौकरी और जन दोनों से हाथ धोना पड सकता है । फॅसे कहा तो मैं और तुम्हारे दोस्तों को लगता है कि कमिश्नर है । नेता के खिलाफ एक्शन लेना बहुत ही आसान काम होता है । मेरे दोस्त किसी बॉलीवुड फिल्म की स्टोरी नहीं है । इसमें कोई भी इंस्पेक्टर सिंघम बनकर किसी भी नेता के घर में बडे आराम से घुस जाये और उसे गिरफ्तार कर बिना किसी सबूत के ऐसा करना सरासर बेवकूफी होती है । आधुनिक नहीं । अगर कोई छोटा सा भी सबूत हो तो कार्रवाई करने में कोई प्रॉब्लम नहीं । धीरज ने मुस्कुराते तो फिर आप बताइए आप हमारी मदद कैसे करेंगे? भाई ये तो तुम बताओ मेरी मदद कैसे चाहते हैं? अगर तुम सबूत इलाज करने में मेरी कोई मना चाहते हो तो उसके लिए मैं तैयार हूँ । क्या आप कमिश्नर के ऑफिस या घर में कुछ ऐसा जुगाड नहीं कर सकते? हम लोग उनकी बातों को रिकॉर्ड कर सके और उनके खिलाफ कुछ सबूत इकट्ठा कर सके । नहीं तो ऐसा बिल्कुल भी पॉसिबल नहीं है । बिना किसी जरूरी करन की कमिश्नर के ऑफिस में या घर में ज्यादा मेरे लिए बिल्कुल भी पॉसिबल नहीं । ऐसे इंतजाम करना तो और दूर की बात है । दूसरी बात, पुलिस मुख्यालय में किसी और को इस बारे में बताना या मदद मांगना अभी ठीक नहीं होगा । आप सही गया अच्छा आप एक काम तो कर सकते हैं ना अनिल ने कुछ सोचकर का क्या? उस दिन पुलिस कमिश्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ये कहा था कि उन्हें देवराज ठाकुर के घर पर हमला करने वाले कातिल के कुछ सीसीटीवी फुटेज मिले और वो फुटेज है पुलिस स्टेशन में भेजेंगे ताकि कातिल को तलाश करने में आसानी होगी । आपके पुलिस स्टेशन में भी वो फुटेज तो आए होंगे आप वो फट तो आसानी से ला सकते हैं । क्या उनके मदद से आप कार्लोस तक नहीं पहुंच सकते हैं जिसमें देर राज ठाकुर की पत्नी की हत्या की थी? हाँ, पुलिस कमिश्नर ने ऐसा कहा तो था वो फुटेज अभी तक तो मेरे थाने में नहीं पहुंचे । धीरज ने अपने दिमाग पर जोर डालते हैं ऐसा कैसे हो सकता है । ऐसे जहाँ तक मुझे आधा उस दिन कमिश्नर ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वह फुटेज मीडिया में प्रसारित करवाने से मना कर दिया था कि उससे काॅल हो जाएगा । उस ने ये भी कहा था कि वो इंटरनली अपनी पुलिसफोर्स के द्वारा उन्हें तलाश करवाने की कोशिश करेंगे और अभी क्या बोल रहे हैं कि आप के पास वो फुटेज ही नहीं फॅसे आबाई नहीं पहुंचे । अब क्या बात लिख कर देनी पडेगी नीरज ने का इसका मतलब तो यह हुआ ना सर कि कमिश्नर ने कातिलों तक पहुंचने के लिए कोई भी स्टेप नहीं उठाया है । पैसे उसने ऐसा क्यों किया होगा अब आप खुद ही सोच सकते हैं । इस बात से साफ साफ जाहिर होता है कि कमिश्नर की कातिल को पकडवाने की शुरू से कोई मनचाही नहीं थी । वो खुद ही इस हमले में जुबैद अंसारी से मिला हुआ । इतना ही नहीं उसे हमला होने से पहले ही सारी जानकारी थी । काम सही कह रहे हैं । इस बात से यही पता चलता है कि खुद कमिश्नर भी षड्यंत्र में शामिल क्या किस्मत पाई है । इस शहर में पहले वाला कमिश्नर कातिल निकला और दूसरा उससे भी बडा देश द्रोही निकला जो अपने स्वार्थ के लिए इस शहर और राज्य को दंगों की आग में झोंक देना चाहता हूँ । सर कमिश्नर ने ऐसा किया है । ये कोई आश्चर्य की बात नहीं है । उसका बैकग्राउंड शुरू से ऐसा ही रहा है । अनिल ने कहा क्या मतलब मतलब ये ऍम अनिल ने संक्षेप में अपने बचपन की घटना का, धीरज के मुँह से इतना ही अब आप ही बताइए सिचुएशन में आप किस तरह से हमारी सहायता कर सकते हैं । वैसे वो फुटेज तो अभी पुलिस हेड क्वार्टर में ही होगी । आप वहाँ से वो फुटेज हासिल कर के खुद का अंतिम तक नहीं पहुंच सकते । नहीं, मैं ये काम नहीं कर सकता इसलिए नहीं कि मैं वहाँ से फुटेज नहीं सकता । मैं तो आराम से ला सकता । पर अगर मैंने ऐसी कोशिश की तो ये बात पुलिस कमिश्नर की नजरों से बच्ची नहीं रह सकते । और अगर ऐसा हो गया तुम लोगों का सारा काम खटाई में पड सकता है । फिर कैसे पार्ट पडेगी सर, गोल गोल सब जगह घूम कर हम तो वहीं के वहीं वापस आ गए । अनिल ने निराशा से ऐसे हिम्मत नहीं आती । दोस्त हम लोग एक काम अभी भी कर सकते । धीरज ने का क्या? मेरे पास तो फुटेज नहीं और ना ही वो मैं पुलिस हेडक्वार्टर से ला सकता है और वो फुटेज अभी भी वहाँ पर हूँ । यहाँ से पुलिस ने बरामद किए हैं आेवेन देवराज ठाकुर के बंगले के सामने स्थित किसी इमारत से । पुलिस को फुटेज में मैं किसी भी तरह से वो फुटेज वहाँ से निकलवाने हैं और जब वो तो में मिल जाए तो उन्हें मेरे पास लेकर आना है । मैं उन फुटेज गया । आपने पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरों से मैच करूंगा । गुप्त रूप से तुम लोगों के साथ उसका तेल की तलाश करूंगा । ठीक है सर, हम लोग खुद को फोटो तलाश करेंगे और उसके बेस पर हम कातिल की फोटो निकाल कर आपको भेज देंगे । उम्मीद है उसके बाद आप का तंत्र का आराम से पहुंच सकते । कोशिश तो भाई में पूरी करूंगा । जैसे ही तो मैं कोई भी इन्फॉर्मेशन मिले तो मुझे मेरे इस मोबाइल नंबर पर अपडेट करते । वो फुटेज में मुझे इसी नंबर पर व्हाट्सप्प कर देंगे । ठीक है फिर वो मीटिंग बर्खास्त हो गई ।

अध्याय 9 - B

अगले दिन अनिल ने अपने दोस्तों के साथ नकली सीबीआई ऑफिसर बनकर देवराज ठाकुर के बंगले के सामने बनी इमारत में पूछताछ शुरू की । जल्दी ही उन्हें अपने काम में सफलता हासिल हो गए । उन्हें राजनगर हाइट के सीसीटीवी कैमराज से वो फोटेज मिल गए । वो फुटेज उन्होंने एक पेन ड्राइव में कॉपी किए और इस वक्त वो अपनी वर्क शॉप में बैठे हुए इन फुटेज के फ्रेंड्स एक कंप्यूटर में इस कैन कर रहे थे । अजित साफ लग रहा है कि फुटेज में नजर आने वाले मौलाना की गाडी नकली है । इसलिए सबसे पहले इस मौलाना की गाडी हटाओ और इसका बिल्कुल क्लीन शेव चेहरा लेकर आओ । अनिल ने कहा, अनिल के बाद सुनते ही अजित के हाथ कंप्यूटर पर तेजी से चलने लगे और टूल के द्वारा उसकी गाडी को हटाने लगा । थोडी देर बाद एक नया ही चेहरा कंप्यूटर स्क्रीन पर नजर आने लगा था । वैसे इसकी नाक भी जरूरत से ज्यादा फूली हुई लग रही है । इसको भी ठीक कर अजीत के हाथ फिरसे कंप्यूटर के की बोर्ड पर चलने लगे । कंप्यूटर स्क्रीन पर एक पचास साल के आदमी का चेहरा नजर आने लगा । इस फोटो को सेव कर लो और कुछ फोटो अलग अलग गाडी में मूर्तियों में भी निकालो । सिर्फ मोमोज और सिर्फ गाडी में भी फोटो निकाल । अनिल जैसे जैसे बताता गया अजीत वैसे वैसे करता गया । थोडी देर बाद उनके सामने कंप्यूटर स्क्रीन पर पांच सात स्कैच नजर आ रहे थे । आपको ठीक है? अनिल ने उन्नीस कैच को देखकर संतुष्टि भरे स्वर में कहा यार ये तो ठीक है पर हमें से राजनगर की इतनी बडी भीड में कहाँ से तलाश करेंगे? ये तो भूसे में से सोलह ढूंढने जैसा काम हो गया । असगर ने पूछा हूँ अभी से हम नहीं बल्कि इंस्पेक्टर धीरज तलाश करेगा तो भूल गए । अनिल ने कहा था ना वो ये काम करेगा फॅस में हर मुझे उन की जानकारी फीड रहती है । उम्मीद है हमें इसके बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी । तुम ठीक कह रहे हो । वैसे भी अगर ये सारे काम हमें ही करना है । वैसे भी अगर ये सारा काम नहीं करना है तो फिर वो इंस्पेक्टर का बच्चा क्या खाक मदद कर रहा है हमारी अगर नहीं झल्लाकर का अजित अब तुम ये फोटो जल्दी से ब्लूटूथ के द्वारा मेरे मोबाइल में ट्रांसफर कर हो ताकि मैं ये इंस्पेक्टर धीरज को व्हाट्सप्प कर सकूँ जो मेरे काका अजित मिनट के अंदाज में अपने सर को झुकाते हुए गा जीता रहे मेरे बच्चे अगर ने उसके सिर पर हाथ रखते हुए गा तो तू कहाँ से आ गया है जितने वो बनाते हुए का जहाँ तो आया है बालक अगर ने भी उसी टोन में जवाब दिया मैं तो पागल खाने से आया हूँ तो मैं भी तो वहीं से आया हूँ । मतलब तो भी बादल छा गया । बच्चे पागल तो तू था हम तो अलावा इलाज करने के लिए गए थे । क्या बोला घर के बच्चे मैं पागल और तू मेरा इलाज करने वाले डॉक्टर चलेगा अभी स्कूल भी गया बढ्ने बढाया पागलो डॉक्टर भगवन तुमलोग फिर शुरू हो गए तो हम लोगों से तो भगवान बचाएं । जब देखो शुरू हो जाता है ऐसे अजीत के बच्चे तो उन्हें अभी तक फोटोज नहीं भेजे मुझे । अनिल ने गुस्सा करते हुए अजीत के बच्चे मैंने कहाँ किधर है अगर नहीं इधर डर अपने सिर को हिलाते हुए पूछा साले अभी बताता हूँ इधर रहे । पहले मेरी शादी हो जाने दो बच्चों के लिए भी पूछ लेना । अजित नहीं उससे मैं कहा अजीत ये लडाई बाद में कर लेना । पहले जो कहा है वह काम करूँ, वैसे ही हमारे पास वक्त बहुत कम देता हूँ यार दो मिनट का तो टाइम तो तुम तो बस हर वक्त हवाई जहाज की सवारी करते रहते । कहते हुए है जीतने । कंप्यूटर में बनाए गए वह स्कैच फ्लोटर से अनिल के मोबाइल में ट्रांसफर कर दिए हैं । अनिल ने वो फोटो धीरज को व्हाट्सप्प किए और फिर मोबाइल से धीरज का नंबर में लाने रहेगा । आपके वॉट्सऐप पर मैंने अभी कुछ फोटोज भेजे । देवराज ठाकुर के बंगले के सामने बनी हुई मल्टीस्टोरी बिल्डिंग राजनगर हाइट के सीसीटीवी कैमरे से जो फुटेज मिले हैं, उसे हमने फोटो बनाए हैं । आपने आपने पुलिस हेड क्वार्टर में भेजकर इनके बारे में पता करके बता दीजिए । कार्लोस कहाँ पाया जाता है? ठीक है तो मुझे घंटे का टाइम दो । तब तक मैं मालूम करने की कोशिश करता हूँ । ठीक है मैं आपको एक घंटे बाद कॉल करता हूँ । अनिल ने कहा नहीं तुम रहने दो । खबर मिलता है मैं तो मैं कॉल बैक करता कहकर धीरज ने उधर से फोन काट दिया । वो तीनों धीरज के फोन का इंतजार करने लगे । यार एक घंटा तो हो गया उसे इंस्पेक्टर के बच्चे का अभी तक फोन नहीं आया । अजीत ने बेचैन सफर में पूछा थोडा सा तो धीरज रखा करो यार थोडा टाइम ऊपर नीचे हो जाता है । अनिल ने कहा साला आज तक तो हमेशा टाइम ऊपर ही हुआ, नीचे तो कभी नहीं हुआ । साला इंडिया में एक यही प्रॉब्लम है । किसी को टाइम की कोई कदर ही नहीं है । मुझे याद है अनिल अभी चार पांच महीने पहले हम लोग एक शादी में गए थे । उसमें टाइम लिखा हुआ था । डिनर सात बजे और हम बेवकूफ ठीक सात बजे उस शादी में पहुंच गए थे । पहला वहाँ जाकर पता चला । वहाँ पर या तो सामान बनाने वाले मजदूर थे या फिर हम लोग । डिनर नौ बजे से पहले शुरू ही नहीं हुआ था । साला भूख के मारे जाने निकल गई थी । अजीत ने अपने पेट पर हाथ रखते हुए कहा तो भुक्कड तेरे को किसने कहा था दिनभर भूका रहने के लिए । जब तेरे को लंच के लिए बोला था तो यहाँ रहना तूने क्या कहा था शाम को एक साथ शादी के महाल का लुत्फ उठाएंगे तो उठा लिया तूने लो फिर आप क्या हो रहा है? अगर नहीं चलाते हुए कहा अब तो फिर से मेरे खाने के लिए बोल रहा है यार तुम दोनों चुप नहीं रह सकते है । जब देखो लगना शुरू हूँ तो उनसे तो अनिल अभी और कुछ कहने ही जा रहा था । तभी उसके मोबाइल की रिंग बजने लगे । लोग आ गया फोन उसका, अब तुम लोग जो फॅार अनिल ने फोन उठाया । ऍफ का कोई भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं । ये फोटोज किसी भी मुझे उनके चेहरे से मैच नहीं करते हैं । दूसरा पुलिस वायल में कार्लोस का जो रिकॉर्ड है उसमें उसकी ना तो कोई फोटो है और ना ही कोई और दूसरी जानकारी । वो कहाँ पर पाया जाता है तो उसका फैमिली बैकग्राउंड क्या है? कुछ भी फाइल में नहीं । शहर फिर आपकी मदद का क्या फायदा हुआ? अनिल ने हताश होते हुए कहा तुम चिंता मत करो । मैं फोटोज अपने खास इनफॉर्मर उसको दे देता हूँ । जो अंडरवर्ल्ड में ही काम करते हैं, उन्हें फोटो की शक्ल वाले व्यक्ति को तलाश करने के लिए बोलता हूँ । साथ ही साथ कार्ड लो उसके बारे में दूसरी जो भी जानकारी हो उन्हें मालूम करने के लिए बोलता हूँ । कहीं ना कहीं से कुछ न कुछ इन्फॉर्मेशन तो जरूर मिलेगी । ठीक ऍम तो आपका ही आखिरी सहारा है । निराशा से कहते हुए अनिल ने फोन काट दिया । क्या रहा उसके फोन रखते ही दोनों ने एक साथ पूछा कुछ नहीं आॅर लो उसका कोई भी रिकॉर्ड नहीं है और न ही वोटो किसी मुझे उनके चेहरे से मिलती हुई पाई गई हैं । फिर हम क्या करें? अजीत तो मैं फोटो से कुछ और इसका अच्छा नहीं बना सकते । गया अनिल नहीं कंप्यूटर स्क्रीन में मौलाना की फोटो की ओर इशारा करते हुए कहा, नहीं यार, इस फोटो में जितने भी ऍफ बन सकते थे वो सारे मैंने बना दिए । अब यही हो सकता है कि उसने इस चेहरे के पीछे भी कोई और चेहरा छुपा रखा हूँ । यानी की जो चेहरा हमें नजर आ रहा है वो सिर्फ एक मास्को हो सकता है । फॅमिली गहरी सोच में डूब गया । फिर वो कंप्यूटर स्क्रीन की तरफ देखता हुआ बोला । इसके साथ एक महिला का भी तो फुटेज मिला था ना? हाँ यार पर वो हमारे किसी काम का नहीं है । वह महिला बुर्के में और उसका चेहरा तो आने से रहा । तो तुमने देखा हूँ फुटेज नहीं । आप बुर्के में थी तो मैंने देखने की जरूरत नहीं समझे यार एक बार फोटो दिखाओ तो सही शायद कुछ पता चल सके । अनिल ने कहा जीतने कीबोर्ड पर अपनी उंगलियां चलाई और अब उनके सामने एक महिला की तस्वीर थी जिसमें बुर्का पहना हुआ था । ये देखो सर से लेकर पांव तक बुरखे के नीचे रखा हुआ है । इस से तो कुछ भी किलो मिलना मुश्किल है । तो एक मिनट इसका चेहरा जूम कर ऐसा लग रहा है इसने अपने चेहरे से नकाब को ऊपर कर रखा है और उसके पीछे कोई झीना सा पर्दा जिससे चेहरा नजर आ रहा है । अनिल ने उसकी फोटो को ध्यान से देखते हुए का तुम सही कह रहे हैं पर उस से भी कोई फायदा नहीं होने वाला है । चेहरा साफ नजर नहीं आ रहा है । सिर्फ आ गयी । आपके नजर आ रही है तो मैं ऐसे जून तो करो यार । अजीत ने उस फोटो के चेहरे को जोन क्या अब नकाब के जीने से पर्दे के पीछे से हल्की हल्की सूरत नजर आ रही थी । यार सूरत साफ नहीं है, कुछ पता नहीं चल रहा है । अजीत ने कहा एक मिनट ये तो सब में तब इतनी देर से शांत बैठा हुआ अगर फोटो को देखते बोला ऍम । अनिल और अजीत दोनों ने एक साथ पूछा अरे भूल गए क्या ये वही ऍफ की डांसर शबनम अगर में जवाब दिया अच्छा वो शबनम जिसके पीछे तुम पागल हो गए थे । अजीत ने कहा मैं उसके पीछे कोई बादल बादल नहीं हुआ था बस वो मेरी फेवरेट डांसर थी जैसे कि तेरी चोली । अगर में का फरयाल जब इस फोटो में इसका चेहरा ही साफ नजर नहीं आ रहा तो तुम कैसे कह सकते हो कि ये वही शबनम अनिल ने पूछा मैंने इसको चेहरे से नहीं बल्कि आंखों से पहचाना है । देखो कितनी बडी बडी झील सी गहरी आंखें फोटो में देखकर ऐसा लग रहा है कि इनमें अभी डूब के मर जाऊं अगर ने का पर सिर्फ आंखे देखकर ही तुमने इसे पहचान लिया तुमसे कोई गलती भी हो सकती है । अजीत ने कहा नहीं आज मैं लाखों को कभी नहीं भूल सकता । पक्का कह रहे हो अगर ने इसे सही पहचाना है जी इससे कोई गलती नहीं हुई है । ये शब्द नाम ही है । वैसे तो मैं देख कर लग रहा है की तो मैं इस पर या कि नहीं कर पा रहे हैं तो मैं समझाता हूँ । ये बात तो तुम भी जानते हो की बहुत सी फिल्मी मैगजीन्स में अक्सर ऐसी पहेलियां दी गई होती हैं जिसमें सिर्फ हीरो या हीरोइन क्या क्या वोट दिखाए जाते हैं और उन्हें पहचानने के लिए कहा जाता है और हम लोग बिना कोई गलती किए हुए उन्हें आराम से पहचान लेते हैं । अजमेर के बजाय अनिल ने जवाब दिया, वो इसलिए क्योंकि उन्हें हीरो हीरोइन को हम बहुत बार देखे हुए होते हैं । पर फिर भी उसमें भी किसी तस्वीर को कुछ लोग जल्दी पहचान लेते हैं और किसी तस्वीर को पहचानने में थोडा टाइम लगता है । बताओ किसी जल्दी पहचान लेते हैं और किसी पहचानने में समय लगता है । जो हीरो या हीरोइन लोगों को ज्यादा पसंद होता है उसे बहुत ज्यादा गौर से देखते हैं और उन्हें जल्दी पहचान लेते हैं बिल्कुल ठीक । अब ये तो तुम जानते ही हो । असगर की नजरें जब देखती है तो सबसे पहले किसी लडकी की आंखें देखती है और शबनम तो इसकी सबसे ज्यादा फेवरेट थी । मिलने का यार ये बात तो तुम की कह रहे हो । अजीत ने जवाब दिया साले ठर्की देखा आखिर मेरा यूजर का मायाना अगर ने अजित को चढाते हुए वक्त वक्त की बात कर रहे हैं, अभी मेरा तेज नहीं जाने पर लगता है और कभी कभी देना तो कभी चल निकलता है । अजीत ने उसे जवाब दिया क्या बोला वैसा ले तेरा हुनर तीस और मेरा तुक्का और नहीं तो क्या, वो तो शबनम को तो ले देखा हुआ था इसलिए उसे पहचान लिया । वरना तू तो क्या तेरे फरिश्ते भी उसे पहचान नहीं पाते? अबे साले देखा तो तूने विधा शबनम को कई बार और तू तो उसे नहीं पहचान पाया ना । अब तो मैंने उसका नशीला बदल देखा था । आंखों पर कौन बेवकूफ ध्यान देता है । अगर इस फोटो में उसकी आंखों के बजाय उसका नशीला वजन नजर आ रहा होता, फिर बाद ही क्या थी? फिर तो मैं उसे बडे आराम से पहचान लेता । अजित ने उसे आंख मारते हुए का वो साले ठंड की आ गया ना अपनी औकात पर । अनिल अपनी इन हरकतों का मजा लेते । मुस्कुरा उठाऊँ अच्छा बंद करो तुम दोनों अपनी ये वक्त मैं धीरज को इसके बारे में बता देता हूँ । कहते हुए अनिल ने धीरज के मोबाइल पर कौन लगाएगा? उधर से फोन उठाने पैदा मिलेगा । सर हमारे हाथ एक बहुत बडा सबूत लगा । क्या सरकार लो उसके साथ दुखी में जो महिला देवराज ठाकुर के बदले के सामने बनी इमारत में फ्लैट देखने गई थी । हमने उसका पता लगा लिया । वहाँ वैरी गुड पर कैसे सर ये मत पूछिए कैसे बस ये किसी के ठर्की पर मेरा मतलब हुनर का कमाल है । अनिल ने अगर की तरफ देखते हुए मुस्कुराते हुए कहा, ये देखकर अजगर में अपनी आंखें उसकी तरफ गुस्से में तरेरीं क्या मतलब? उधर से धीरज ने पूछा हूँ अरे सर मतलब मतलब कुछ नहीं । आप तो आज रात को ठीक नौ बजे पाॅड नाइट क्लब में मिलेगा क्योंकि जीवी रोड परिस्थिति हम वही पर आपको सारी बात बताएंगे । ऍम ठीक है । नौ बजे तुमसे वहाँ मिलता हूँ । रात को नौ बजने में थोडा ही समय बाकी था । ऍम नाइट क्लब नाम के अनुसार ही वह किसी पैराडाइज यानी जन्नत से कम नहीं था । वित्त वहाँ पर मिलने वाली शराब शहर के अन्य क्लबों के मुकाबले थोडी सस्ती थी और दूसरा वहाँ पर उसी स्टैंडर्ड का डांस आयोजित होता था, जैसा राजनगर नाइट क्लब जैसे क्लबों में उच्च वर्ग के लोगों की नहीं आयोजित होता था । फर्क सिर्फ इतना ही था जहाँ पर दूसरे क्लबों में ये सब ज्यादातर विदेशी कलाकार करते थे । वहीं वहीं पर पैराडाइज क्लब में शबनम जैसी लोकल कलाकार परफॉर्म किया करते थे । यही बजाती की पैराडाइज क्लब उच्च वर्ग के अलावा मध्यम वर्ग के उन लोगों की तहरीर के लिए भी पसंदीदा जगह थी जो राॅय तो आराम के साथ साथ फूहडपन जैसी चीज में उच्च वर्ग की नकल करना पसंद करते हैं । और और अपने आप को आधुनिकता की अंधीदौड में बराबर शामिल करते थे । इस समय तीनों दोस्त उसी पैराडाइज क्लब में कॉर्नर की एक मेज बाल चारों तरफ लगी हुई तीन कुर्सियों पर बैठे हुए थे । चौथी कुर्सी पर बैठने के लिए उन्हें इंस्पेक्टर धीरज का इंतजार करो । स्टेज पर अभी तक डांस का प्रोग्राम शुरू नहीं हुआ था तो तीनों भी अभी सिर्फ जूस पी रहे थे हूँ यार नौ बजने वाले हैं वो इंस्पेक्टर का बच्चा अभी तक नहीं आया । अजीत ने अपनी कलाई घडी में समय देखते हुए तेरे को और चीज में हमेशा यदि रहती है अभी नौ बजने तो दे । पहले अगर में जवाब दिया मैंने तुझे नहीं अनिल को बोला है । जब देखो बीच में बोलने की आदत है बिलकुल लडकियों की तरह कहीं तुझ पर भी गुलाना तो शुरू नहीं हो गए । निशार सलमा की कहते हुए उसे अजीत ने आंख मारे । तुम दोनों थोडा सा धीरे धीरे बोला करो या जब देखो कान बता देते हो । पैसे भी इस बात का तो ध्यान रखा करो । आस पास और भी लोग हैं और अपना काम बिगड भी सकता है । सॉरी शक्तिमान । दोनों ने अपने कान पकडते हुए इस अंदाज में कहा कि अनिल को हंसी आ गई । लोग अब तो भी बच गए हैं जीतने का । नौ बज गए तो वो उधर देखो । नीरज भी आ गया । अनिल ने क्लब के दरवाजे की तरफ देखते हुए कहा, जहाँ से धीरज क्लब के अंदर प्रवेश कर रहा था, क्लब में प्रवेश करते हुए धीरज ने अपनी नजरें चारों तरफ घुमाई । उसकी निगाहें कॉर्नर की टेबल पर बैठे हुए अनिल और उसके दोस्तों पर पडे । वहाँ आसपास का नजारा करता हुआ उनके टेबल पर आकर बैठ गया । कुछ लेंगे सर अनिल ने उससे पूछा, नहीं तुम जो दिखाने वाले थे, सबसे पहले वह दिखाओ । धीरज ने जवाब दिया । उसकी बात सुनकर अनिल ने अपनी शर्ट की ऊपरी पॉकेट से एक तस्वीर निकले । उस तस्वीर में एक तीस बत्तीस साल की युवती आधुनिक कपडों में बडे ही स्टाइलिश अंदाज में खडी थी । उसने इस तरह के कपडे पहने हुए थे, पहन के रखे थे, उसके बदन पर डाल रखे थे । जिसमें से उसके अधोवस्त्र साफ नजर आ रहे थे । ये तस्वीर देखिए सर, हमने बडी मुश्किल से प्राप्त की है । क्लब के किसी कर्मचारी को पकडकर इसके मेकप लोम से चोरी करके मंगवाई । पूरे दस हजार की पडी है । वैसे कैसी लगी आपको? अनिल ने मुस्कुराते हुए पूछे ॅ से भी गई गुजरी वो लडकी सिर्फ पैसों के लिए अपने बदन की नुमाइश करती पडती है । इससे बेहतर तो वैसा होती है जो काम मजबूरी में करती हैं और इन जैसी लडकियाँ जो की लडकी नाम परी कलंक है जैसे दौलत के लिए अपने जिसमें की नुमाइश करते करते हैं । धीरज ऍम फिर अपनी बात को आगे बढाई । लडकी तो वह होती है जो धीरज को एकाएक पल्लवी की याद आ गए । ॅ जोड अगर मैंने आगे कुछ कहा तो लोग समझोगे मैं सत्रहवीं शताब्दी में जी रहा हूँ इसलिए ये बताओ धूम आगे क्या कहने जा रहे थे सारी सर सौं लगता है मैंने कुछ गलत कह दिया । उसकी बात सुनकर अनिल ने खेद जताया छोडे आप कोई बात नहीं तो ये बताओ । इसके अलावा तो मौत क्या बताने जा रहे हो? कहना नहीं कुछ और दिखाना है । कहते हुए अनिल ने एक दूसरी तस्वीर पेश की जिसमें सिर्फ आंखें ही नजर आ रही थी । अब सर ये देखिए धीरज ने ध्यान से उस तस्वीर को देखा । ये तो किसी के आंखों की तस्वीर हाँ, अब जरा इसे देखिए । कहते हुए अनिल ने एक और तस्वीर पेश की जिसमें भी सिर्फ आगे ही नजर आ रही थी । धीरज ने उस तस्वीर की तरफ भी नजर दौडाई और बोला फिर से आंखों की तस्वीर क्या मतलब है इसका सर? एक बार इन दोनों आंखों वाली तस्वीर को जरा ध्यान से देखिए भी । रज ने इस बार दोनों तस्वीरों को बारी बारी से बडे ही ध्यान से देखा । फिर बोला दोनों आखिर बिलकुल सेम टू सेम है । यहाँ तक कि काजल और लाइनर भी से मैं यानी ये एक ही फोटो की दो कॉपीज अरे नहीं दिखाकर तुम क्या कहना चाह रहे हुए आज मैं अभी तक नहीं समझा रहा हूँ । सारे इस तस्वीर में जो आता है वो इस फैशनेवल अत्याधुनिक वेशभूषा पहनी हुई लडकी की है । ऐसे कपडे तो इसलिए ना होने के जैसे ही पहने हुए हैं । अनिल ने मुस्कुराकर कहा फिर अपनी बात आगे बढाई । पुलिस तस्वीर में जो आप है आपको नजर आ रही है वो इस फोटो से नहीं बल्कि इस फोटो से ली गई कहते हुए धीरज को इस बार सर से पाओ तक बुर्खा पहने हुए महिला की वो तस्वीर दिखाई जो राजनगर हाइट के सीसीटीवी कैमरा के फुटेज से प्राप्त हुई थी । तस्वीर के जीने ने कहा चाहिए चेहरा तो स्पष्ट नहीं नजर आ रहा था और उसकी बडी बडी आंखें साफ साफ देखी जा सकती थी । नीरज ने बोला कहा वाली तस्वीर आपने हाथों में ले ली और थोडी देर तक उसे ध्यान से देखता रहा तो तुम सही कह रहे हैं यहाँ के इसी लडकी है । यानी बुर्के में जो लडकी है ये वही लडकी है । वो इस तस्वीर में नजर आ रही है । मैं अभी तक नहीं संख्या तुम ये दोनों तस्वीरें दिखाकर कहना क्या जा रहे हो? सारी ये जो बुर्के वाली महिला उसी तथाकथित कार्लोस के साथ थी जिसके फोटोज गाल हमने आपको भेजे थे जो हमने देवराज ठाकुर के बंगले के सामने बने हुए मल्टीस्टोरी बिल्डिंग राजनगर राइट्स के सीसीटीवी फुटेज से प्राप्त की थी । कुछ समझे सर यानी ये महिला उस हत्यारे की साथ ही है और उसके बारे में सब कुछ जानती है । काम हालत हो तो तुम लोगों ने तो तीन एकदम निशाने पर लगाया है । ये तो बहुत अहम सुराग है । हमें इसके बेस पर असली कातिल तक पहुंच सकते जी जरूर । और ये मेरा नहीं बल्कि मेरे अनजान से प्यारे दोस्तों के हूनर का कमाल है । अनिल ने आयोजित और अजगर की तरफ से ज्यादा करते हुए कहा सर मेरा नहीं, मैंने तो सिर्फ कंप्यूटर पर थोडी कलाकारी की है । ये फोटो से आंखों के स्नेप लिए और दोनों पर एक जैसा काजल लगाया । एक जैसे ये आउट लाइनर का इस्तेमाल किया था बाकी तो ये सब इस का ही कमाल है । कमाल के पार की नजर है इसकी जो इसमें सिर्फ आंखों से लडकी को पहचान लिया वरना तो हम बैठ सकते रहते । अजीत ने आज घर की तरफ इशारा करते हुए कहा अगर ये बात सुनकर बिल्कुल लडकियों की तरह शर्मा गया । देखिए सर अपनी तारीफ सुनकर कैसे लडकियों की तरह शर्म आ रहा है । बिल्कुल शरीफ बन्दा है किसी भी लडकी की तरफ बुरी नजर से नहीं देखता । खास तौर पर उसके बदन की तरफ तो नजर बिल्कुल नहीं दौडा था सिर्फ आंखों में ही डूबता है । पता नहीं इसके अंदर कोई फीलिंग भी होती है या नहीं । अजीत ने अपनी बात आगे बढाएगी और तो लडकियों की एक्टिंग भी करता है । लडकियों जैसे एक्टिंग करते करते बिलकुल कैरेक्टर में उतर जाता है कभी कभी तो मुझे डर लगता है कि कहीं किसी देने इसमें एक दिन लडकी के ही सारे के सारे कोड ना जाए । अजीत ने हसते हुए कहा ये सुन का रख करने उसकी तरफ गुस्से से देखा तो तुरंत उसकी आजी पर ब्रेक लग गया । ये देखकर धीरज उसको रह जाएगा । ये बताओ ये लडकी कहाँ मिलेगी? धीरज ने पूछा थोडा सा सब्र रखिए सर, ये लडकी यही इसी जगह आपको मिलेगी इसलिए आपको यहाँ पर बुलाया है । वैसे तब तक ये बताइए क्या लेंगे? वाई ब्लैंडर्स प्राइड मीडियम वेब सोडा ॅ ऍम फिर कुछ और । अनिल ने धीरे से पूछा तो मैं याद है अभी तक मेरे उस दिन का ऑर्डर का धीरज ने मुस्कुराते हुए पूजा जी सर, भगवान की दया से इतनी तो मेरी याददाश्त अच्छी है । अनिल ने जवाब दिया, ये गुड जो अच्छा लगे वो ऑर्डर कर सकते । धीरज ने का पर एक शर्त है सर, क्या इस बार मिल के पैसे मैं दूंगा? आप नहीं यार जब तुम ने मुझे बुलाया है तो मिल के पैसे तो तुम्हें तो होगे । धीरज कहते हुए मुस्कुरा उठा । उसकी बात सुनकर अनिल भी मुस्कुरा उठा और वेटर को भुलाकर अपना ऑर्डर दिया । थोडी देर बाद बेटर उनका ऑर्डर सर्व करके चला गया । उन्होंने अपना अपना गिलास उठाया, एक दूसरे के खिलाफ से टकराकर चेयर्स बोला और और फिर धीरे धीरे सिर्फ कर रहे हैं । ऍम टाॅल अपना दिल थामकर बैठ जायेंगे । जिस पल का आप लोगों को बडी बेसब्री से इंतजार था । भोपाल । अब आ गया है अपने उसमें का जलवा । बिखेर में खराब सभी के दिलों में आग लगाने आ रही हैं मैं । शबनम अनाउंस्मेंट खत्म होते ही ड्रमर ने ड्रम पर जोरदार था आप भी और म्यूजिक गूंज उठा । म्यूजिक के साथ ही रोशनी का गोल गोल दायरा एक तरफ बढा और अगले ही पल रोशनी के उस दायरे में एक युवती को अपने आगोश में ले लिया । फिर रोशनी का वो गोल गोल दायरा उस युवती को अपने साथ में लिए स्टेज की तरफ जाने लगा और स्टेज के बीचोंबीच जागरूक गया । उन चारों की निगाहों ने भी रोशनी के उस दायरे का पीछा किया । डीजीएसई इस का बडी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे । वहाँ गई है वैसे देख लीजिए ऍम मिलने का इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं है । तो ये वैश्य वही है । नीरज ने उसकी तरफ नफरत भरी निगाहों से देखते हुए गा । उस युवती ने खुलेगा लेगा गाउन पहन रखा था उसने नीचे जो कर उपस् थित क्लब में सभी लोगों का अभिवादन किया । कईयों की मुझे आ निकल गई वो लोग भी ये बात अच्छी तरह से जानते थे कि अभिवादन तो सिर्फ एक बहाना मात्र का असली मकसद तो उसमें आपने बदल का वह बाहर दिखाना था । जो गांव उनके पीछे छुपा हुआ था । फिर उसने म्यूजिक की तल के साथ डाल करना शुरू किया । धीरे धीरे उसके बदन के कपडे गायब होने लगे और क्लब शोर बढता गया । इसी बीच अनिल ने शराब का अपना ऑर्डर रिपीट किया । शराब के साथ साथ वो तीनों मित्र फ्रांस का भी मजा ले रहे थे । पर धीरज को उससे जैसे कोई मतलब नहीं था । शराब के साथ साथ वो अपनी यादों में कोई हुआ था । शबनम ने दो तीन गानों पर डांस किया फिर उसकी जगह दूसरी डांसर ले ले ली । सर चलें अब उस से मिलने के लिए कॅरियर कोई मिल सकता है क्या सर पैसा पास में हो तो इससे तो क्या किसी से भी मिला जा सकता है । वैसे क्या आप अभी मिलना चाहेंगे? इससे अनिल ने पूछा, नहीं, हम इस से जो बातचीत करना चाहते हैं तो यहाँ पर संभव नहीं है । या तो क्लब से निकलते वक्त हम इससे मिलेंगे या फिर इसके घर पर जाकर मिलेंगे तो मैं उसके घर का पता मालूम करेंगे । हम लोग इससे वहीं जाकर मिलेंगे और इससे कार्लो उसका पता निकलवाएंगे । धीरज ने जवाब दिया सर, ये पूछताछ अगर आप भी करें तो सही रहेगा, नहीं तो हो सकता है यहाँ पर कोई मुझे पहचानता हूँ और अगर मैंने यहाँ पर पूछताछ शुरू की तो हो सकता है कि ये खबर किसी तरह से कार्लोस तक पहुँच जाए और फिर वो गायब हो जाए । अगर ऐसा हो गया तो फिर हमें उसकी परछाई भी नहीं मिलेगी । आप ठीक कह रहे, मैं इसके बारे में मालूम करके आता हूँ । कहकर अनिल वहाँ से गायब हो गया । लगभग दस पंद्रह मिनट के बाद वो वापस मालूम चला । कुछ धीरज ने पूछा ऍफ का पता मालूम चल गया । वैसे शायद चिराग तले अंधेरा कहावत इसी के लिए ही बनी है । क्या मतलब? धीरज ने चौकर पूछा आपके थाने के एरिया मालवीय नगर में अपोलो व्हाइट बिल्डिंग में रहती है । वो धीरज के मुँह से निकला । फिर उसने पूछा कौन कौन रहता है उसके साथ ये भी मालूम किया गया आंसर मालूम किया वहाँ के लिए रहती है । अकेले क्यों माता पिता या आॅन ऍफ होता तो क्या वो इसे ऐसा काम करने देता जैसे माता पिता दोनों है । इसके पर साथ में नहीं रहते । किसी गांव में रहते हैं नहीं । जब बेटी ऐसा काम करती है तो माँ बाप अगर साथ रहेंगे, वैसे ही शर्म के बारे मर जाएंगे । नीरज में गहरी सांस लेकर का अभी चल रहे हैं, उसके घर पर नहीं । नहीं तो मैं पूरा पक्का यकीन है । यहाँ से सीधा अपने घर पर ही जाएगी और कहाँ जाएगी । अजीत के मुझसे नहीं जाने को तो बहुत जगह जा सकती । हो सकता है यहाँ से वो अपने किसी दोस्त के यहां चली जाएगी । इतनी रात को रात के बारह एक बजे के बाद जो रात के बारा एक बजे तक बार में डाल कर सकती है, लोगों के लिए अपने कपडे उतार सकती है, उसके लिए कहीं पर जाने के लिए । रात के बारा एक बजे कौनसी बडी बात है । ये भी हो सकता है कि वह सीधा कार्लोस के पास चली जाएगी । हाँ हो सकता है । वैसे भी मैंने मालूम क्या ये कई बार अपने घर नहीं जाती बल्कि तफरी ही करने निकल जाती है । वही तो मैं बोल रहा हूँ सर हमें काम कर सकते हैं । अनिल ने का क्या? धीरज ने पूछा हम दो ग्रुप बनाकर चलते आप पुलिस वाले हो इसके घर में सीधा आप जा सकते हो तो आप वहीं पर जाकर इसका इंतजार करे और हम तीनो यहीं पर रुकते और जब ये क्लब से निकलेगी तो हम इसके पीछे जाएंगे । वैसे अगर ये सीधा अपने घर जाती है तो आप इससे पूछताछ कर ही लेंगे । पर अगर ये कहीं हो जाती है तो हम आपको कॉल करके बता देंगे और फिर आप वहाँ आकर इससे पहुंॅच कर सकते हैं । गुड आईडिया हम लोग ऐसा ही करते हैं । मैं निकलता हूँ । वैसे भी मुझे अपने पुलिस स्टेशन में एक जरूरी काम निपटा जिसमें बारह दो बजे जाने हो गया । भाई कहते हुए धीरज ने क्लब के एग्जिट गेट की तरफ अपने कदम बढाए । चलो भाई हम लोग भी टाइम पास करते हैं जब तक ये मोहतरमा फ्री नहीं हो जाती । यू मेम दारू अजगर ने का अब चिन्दी चोर ये बारह ठेका नहीं तो यहाँ पर दारू मिलेगी । यह शराब मिलती है शराब जीतने का । दोनों में कोई अंतर रह गया नहीं, ज्यादा नहीं बस उतना ये अंतर है जितना ताश के एस और जानवर वाले इसमें होता है फिर हो गया और तू भी तो ऐसी है क्या मतलब? तेरह अगर में आंखे तरेर घर पूछा अरे भाई तू ताज का एक का एक का कहकर वो अनिल की तरफ देख कर मुस्कुरा पडा । प्राॅपर्टी गए एक बात मैं भी गांव अजित हाँ बोल तो भी एक नंबर का एस है मैं विकास का एक अजीत ने खुश होते हुए अभी नहीं पैसा ले तो एस बोले तो गधा है जो सामने वाले को ऐ समझता अगर मैं उसे चलाते हुए का अभी आजकल के बच्चे तेरी तो या तो नहले पर दहला पड गया तो उस पर अजीत आज कहते हुए अनिल मुस्कुराये बेटा अगर तो उस शहर है तो मैं सवा शेर हूँ, समझा अगर नहीं उसे कहा और मैं हमसे कहते हुए अनिल हस पडा और उसकी इस हसी में इस बार अजित और घर दोनों ने साथ दिया । फिर इसी प्रकार वो दोनों हसी मजाक करते हुए शराब का दौर चलाते हुए और बार डांसर के डांस का मजा लेते हुए शबनम के वहाँ बार से फ्री होने का इंतजार करना । रात के लगभग साढे बारह बजे वो क्लब से बाहर की तरफ निकली और सीधा पार्किंग की तरफ गए । पार्किंग से अपनी गाडी में बैठकर वो वहाँ से रवाना हो गई । उसके पीछे पीछे वो तीनों भी अपनी कार से निकल गए । ये तो मालवीय नगर की तरफ जा रही है, गाडी चलाते हुए है । जितने का मैं धीरज को फोन करके बताता कहते हुए अनिल ने अपने मोबाइल से धीरज का नंबर मिलाया । उधर से फोन उठाने पर कहा पंची अपने पिंजरे की तरफ ज्यादा है । ऍम अपने काम से ही हुआ । दस मिनट के अन्दर पहुंचाऊंगा कहकर उसने फोन काट दिया । थोडी देर तक वो शबनम की कार का पीछा करते रहे । तभी अचानक अगर बोलूँगा यहाँ ये रास्ता तो मालवीय नगर की तरफ नहीं जाता । ऐसे तो पिछले चौराहे से राइट ले लेना चाहिए था पर इसमें तो लाइफ लिया है यू आर राइट ये कहीं और ही जा रही है । कहीं से इस बात का पता तो नहीं चल गया की हम लोग इसका पीछा कर रहे हैं । अनिल ने का नहीं हार बोला तो नहीं चाहिए उसका पीछा करते समय बहुत ध्यान रख रहा था में हर बार उसकी गाडी और अपनी गाडी के बीच में तीन चार गाडियों का फैसला रख रहा हूँ । तो फिर ये कहाँ जा रही है तुम तो बास इसका पीछा करते रहो थोडी देर में अपने आप पता चल जाएगा ये कहाँ जा रही है तो के अजित ने कहा और अपनी गाडी से शबनम की गाडी का पीछा करता रहा । थोडी देर तक की सिलसिला यूं ही चलता रहा । अभी अचानक अजगर एक्साइटमेंट में चलाया ये तो राजनगर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी की तरफ जा रही है । यू ऍम रास्ता तो राजनगर हाउसिंग खोलने की तरफ जाता है, पर रात के इस व्यक्ति है अपने घर जाने के बजाय उस तरफ क्यों जा रही है? अजित ने पूछा ये तो इसी से पूछना पडेगा । वैसे में धीरज को अपडेट कर देता हूँ । इसके बारे में कहते हुए उसने धीरज को फिर से फोन लगाया । सरपंची ने बीच रास्ते में अपना रास्ता बदल दिया है । अब तो आपने पिंजरे के बजाय किसी और के दडबे में जा रही है कहाँ? अनिल ने बताया सुनकर धीरे चौक गया वॉट ऊधर किस लिए जा रही हैं, उसका पीछा करते रहो और मुझे पल पल की रिपोर्ट देते रहो जी सर फॅमिली की तरफ जा रहे हैं वो माई गॉड उस तरफ ही तो उस नेता देवराज ठाकुर का बंगला है । ऍफ जैसे कि आप जानते हैं वो इस समय कहाँ जा रही जानता हूँ । अब देवराज ठाकुर के बंगले के सामने वाली मल्टीस्टोरी बिल्डिंग राजनगर हाइट नहीं जा रही होगी । आपने बिल्कुल ठीक का असर उसकी कार राजनगर राइट के अंदर ही चली गई है और जहाँ तक मैं सोच रहा हूँ कार्लोज भी हमें वहीं पर राजनगर राइड्स के अंदर ही मिलेगा । यहाँ क्या कह रहे हो सही कह रहा हूँ उसके रहने के लिए । इससे अच्छी जगह तो कोई और हो ही नहीं सकती हैं । वैसे तो कमिश्नर ने उसका इसका जारी नहीं किया है और पुलिस उसकी तलाश नहीं कर रही । पर अगर पुलिस यानी हम उसकी तलाश करते भी तो मेरा दावा है हम लोग कार्लोस की तलाश, उस बिल्डिंग के अलावा बाकी सारे राजनगर में करते करते सब शायद इसलिए कहावत बनी है चिराग तले देना यू आर राइट ये बताओ तुम लोग कहाँ पर हो? हम लोग उसी रोड पर सीधे ही निकले । वहाँ से लगभग सौ मीटर आगे जो राय हम लोग वहाँ पर जा कर चुके हैं । राज अगर राइट के आसपास रुकना खतरे से खाली नहीं था तो पहले वहाँ पर देवराज चौहान के बंगले पर हुए हमले की वजह से पुलिस का तगडा पहला दूसरा बिल्डिंग के मेन गेट के बाहर सिक्योरिटी के दो आदमी खडे जो सेल्स ज्ञान पहचान वालों के लिए गेट खोल रहे हैं । वैसे जहाँ तक मैं समझता हूँ, किसी अनजान को अंदर जाने के लिए फ्लैट नम्बर बताना पडेगा । सही किया तुम्हें मैं बस दस मिनट में पहुंचना वहाँ पर आज इसका लो उसको पकडना ही है । आप अकेले आ रहे हैं था इस समय पुलिसबल को लाने का सही टाइम नहीं इतनी पुलिस एक साथ आएगी तो कार्लोस खबरदार हो सकता है । दूसरा जहाँ तक मेरा अंदाजा है कार्लोस अकेला ही होगा । वैसे भी अगर मुझे मदद की जरूरत पडेगी तो तुम लोग हुई । ठीक है सर हम लोग आपका एवर इंतजार करते हैं । कहते हुए अनिल ने फोन काट दिया । फिर वो तीनों इंस्पेक्टर धीरज का इंतजार करने लगी । लगभग दस मिनट के बाद धीरज अपनी बाइक से उस मोड पर पहुंचा जहाँ पर वो तीनों उसका इंतजार कर रहे थे तो राजनगर राइट्स में गई है । हाँ सर आप को बताया तो था कहीं मेरे आने से पहले ही वो वापस रवाना तो नहीं हो गई । साल अगर उसे जाना ही होता तो आती क्यों? पैसे भी हमारी नजरें । उसी तरफ हमें कोई गाडी वहाँ से बाहर निकलते हुए दिखाई नहीं दी ही कह रहा हूँ । ठीक है चलो मेरे पीछे पीछे अपनी गाडी लिया हूँ । कहते हुए इंस्पेक्टर धीरज ने अपनी माइक स्टार्ट की और राजनगर राइट की तरफ चल दिया । उसके पीछे पीछे जीतने भी अपनी कार लगा दी है । पुलिस धीरज ने अपना आईकार्ड लाॅर्ड्स के मेन गेट पर मौजूद सिक्योरिटी स्टाफ को शोक है । गार्ड नेगेटिव धीरज ने अपने भाई के अंदर ली । उसके पीछे बी जे अजित बेहन्दर आएंगे । मेरे पास ज्यादा समय नहीं है इसलिए मुझे सिर्फ इतना बताओ पिछले एक सप्ताह में कौन कौन से फ्लैट में रहने के लिए लोग आया । धीरज ने अंदर पहुंचते सिक्योरिटी गार्ड से पूछा । चल एक मिनट कहते हुए गार्ड ने दराज से एक रजिस्टर निकाला और उसे खोलकर चेक कर रहे हो सर । पिछले एक सप्ताह से यहाँ पर सिर्फ दो फ्लैट में ही लोग किराये पर रहने के लिए आएगा । एक ब्लॉक में फ्लैट नंबर तीन सौ चार है जिसमें एक फैमिली रहने के लिए आई है । पति पत्नी और दो बच्चे और दूसरा बी ब्लॉक में फ्लैट नंबर पांच सौ तीस है जिसमें सिर्फ पति पत्नी है । बच्चा कोई नहीं । जो फ्लैट पांच सौ तीन में जो पति पत्नी बोला है वो क्या करते हैं सर इतना तो इस रजिस्टर में नहीं लिखा हुआ दिन में क्लब ऑफिस खुलेगा यहाँ वहाँ से पता कर सकते हैं । हाँ ये जरूर मालूम है की पत्नी शायद किसी कॉल सेंटर में जॉब करते हैं क्योंकि वो अक्सर लेट आइडी घर लौटते हैं । आज भी वो भी बीस तीस में पहले कर रहे हैं अच्छा पांच सौ तीन कहाँ पर पडेगा सर वो बी ब्लॉक है उसकी पांचवी मंजिल पर बडे से तीसरे नंबर काॅल और ये बी ब्लॉक कहाँ पर पडेगा सर वो आगे से दायें मुड ने पर एक सौ पचास मीटर आगे जो तीसरी मिलेंगे वहीं पर हो गया हो गया सर कुछ गडबड हो गया जो आप इतनी रात को पूछताछ करने के लिए आए । गार्ड ने संचय के स्वर में पूछा ऐसी कोई खास बात नहीं है, फॅमिली थी उसी की तलाश में हम लोग यहाँ पर आए और उसी की वजह से अभी हम वहीं उसके फ्लैट में जा रहे हो तो चलेंगे । धीरज ने उन तीनों को इशारा किया और अपनी बाइक पर सवार होकर बी ब्लॉक की तरफ चल पर वो तीनों भी अपनी कार से उसके पीछे चले । कुछ देर बाद वह चारों में ब्लॉक भी की ग्राउंड फ्लोर पर स्थित पार्किंग के पास खडे थे तो उन तीनो यही पर लोगों मैं अगर दस मिनट के अन्दर वापस नहीं आया तो समझ लेना मेरे साथ कुछ गडबड हो चुकी है । तुम लोग पुलिस कन्फर्म कर देना ये मेरे स्टेशन का नंबर है । कहते हुए धीरज ने उन्हें सोल नंबर बताया

अध्याय 9 - C

सर, हम लोग आपके साथ ही चलेंगे । अनिल ने पूछा नहीं हम नहीं जानते अंदर उस लडकी के अलावा और कितने लोग हैं । वहाँ पर कार्लोस का कोई और साथ ही भी हो सकता है और वो लोग हथियारबंद भी हो सकते हैं । मैं तुम लोगों की जान खतरे में नहीं डाल सकता है और ये भी हो सकता है हमारा शक बिल्कुल गलत हो । धीरज ने जवाब दिया, सर हम लोग किसी भी खतरे से नहीं डरते । वैसे भी आप यहाँ पर सिर्फ हमारी वजह से ही आए हूँ और आप खुद अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं । भाई मैं तो पुलिस में ही हो ये तो मेरी ड्यूटी है । मुझे तो हर वक्त अपनी जान का खतरा उठाना ही पडता है । अगर हम लोग ही खतरों से डर गए तो फिर आम लोगों का क्या होगा? सरकार शहर पुलिस वाला, आपकी तरह की सोच रखें तो कोई भी मुस्लिम जुलू करने से पहले सौ बार सोचेगा । पर सर हम भी आप के साथ चलेंगे नहीं तुम लोग यहीं पर मेरा इंतजार करो । अगर कुछ भी गडबड हुई तो उसे पीछे से संभालने वाला भी कोई तो होना चाहिए । ठीक है सर जैसे आपकी मर्जी अनिल ने धीरे से कहा । उन को वहीं पर छोडकर धीरज लिफ्ट की तरफ बढ गया । कमरा नंबर पांच सौ तीन के सामने पहुंचकर धीरज ने दरवाजे के बाहर लगी हुई बैल बजाई । अंदर से कहीं बैल बजने की मध्यम से आवाज आई । धीरज ने अपने काम दरवाजे के पास लगा दिए । अंदर से कदमों के चलने की आहट आ रही थी । दरवाजे के पास आकर कदमों की वह अट खत्म हो गई । कौन आया है इतनी रात को? सिक्योरिटी ने रोका नहीं क्या अंदर से एक महिला का स्वर आया मैडम पुलिस दरवाजा खोला है । धीरज ने का कैसा बहुत है तो पुलिस वाले हो । अंदर से दरवाजे में लगी हुई आई । मैजिक से जाते हुए महिला ने पूछा ये देखिये मैडम मेरा इकार्ड? धीरज ने अपना आईकार्ड निकालकर मैजिक आई की तरफ लहराया । पुलिस पर इतनी रात को किस लिए महिला ने दरवाजा खोले बिना ही फिर पूजा शबनम जी आपके खिलाफ पैराडाइज में कुछ वारदात हो गई है । उसी के सिलसिले में आपसे पूछताछ करनी है । आप दरवाजा तो खोलिए । आप दरवाजा तो खोलिए क्या सारी बातें बंद दरवाजे से ही करेंगे । एक मिनट रुकी खोलती हूँ कहते हुए महिला ने दरवाजा खोल दिया । दरवाजा खोलते ही उसके मुँह से निकला । मगर क्लब में तो मैं नहीं एड्रेस किसी को दिया ही नहीं है । फिर तो में यहाँ का पता किसने दिया? कार्लोस का दरवाजे से कदम रखते धीरज ने पूछा जैसे उसने शबनम की बात सुनी नहीं थी । उधर कार्लोस का नाम सुनते ही शबनम में दरवाजा बंद करना चाहा पर उससे पहले ही दे रहे दरवाजे के अन्दर की तरफ कदम रख चुका था । कौन? काॅलम ने हफ्ते हुए पूछा अब ये सवाल पूछना बेवकूफी है में शबनम तुम्हारी हरकत नहीं है । पहले ही साबित कर दिया कि तुम कार्ड उसको अच्छी तरह से जानती हो और वह यही फ्लैट में मौजूद हैं रहेगा वो कहीं पर नजर नहीं आ रहा है । मैं रूम में गया सो रहा है नहीं तो जाग रही हो तो वहाँ हो रहा होगा । कहते हुए धीरज उस कमरे की तरफ जाने लगा जो उसके हिसाब से बैडरूम होना चाहिए था । इंस्पेक्टर साहब इस तरह से आधी रात को किसी के घर में घुसकर उसके बैड रूम के अंदर तक जहाँ चला कहाँ तक सही है या फिर मुझे तो लगता है कि तुम पुलिस नहीं हो बल्कि पुलिस के देश में कोई चोर जहाँ यहाँ से निकल जाओ वरना में शोर मचाकर सबको बुला लूँ जरूर शोर मचा और सबको बुलाओ । फिलहाल मैंने रास्ते से हट जाओ कहते हुए वह आगे बढ गया है वो बिना किसी वारंट के तुम यू मेरे घर की तलाशी नहीं ले सकते । कहते हुए वो कमरे के दरवाजे के सामने आ गई और अपने दोनों हाथ फैला ले चलूँ तुम ने यह तो माना कि मैं पुलिस वाला हूँ चुपचाप से सामने से । और मुझे अंदर जाने दो कहते हुए धीरज ने अपने यहाँ से अपनी पिस्टल पकड ली और दूसरे आज से शबनम को दरवाजे से दूर किया । उसने हाथ बढाकर दरवाजा अभी आधा ही खोला था भी उसकी छठी इंद्री ने कुछ खतरा महसूस किया । वो दरवाजा खोलते खोलते एकदम से उसने साइड में छलांग लगाई और शबनम को साथ लेकर नीचे गिर पडा । छलांग लगाना जैसे उसके लिए वरदान साबित हुआ । सामने की तरफ से बिना आवाज किए गोली जो उस को निशाना बनाने वाली थी आई और सीधा जाकर सामने की दीवार पर जा लगे । उसे पालने धीरज की जान बचा ली थी । साला आजकल किस्मत ही खराब चल रही है । एक साया बैडरूम का गेट खोलकर जल्दी से बाहर की ओर लगकर कारणवस तुम भागो यहां से जल्दी उसको देखते ही धीरज के साथ नीचे पडे पडे ही शबनम चिल्लाकर बोलेंगे बहुत तो मैं ऍम महत्व में है । इसके साथ जिंदा छोडकर जाने का रिस्क नहीं ले सकता । कहते हुए उसने अपनी साइलेंसर लगी पिस्टल से दोबारा गोली चलाई जो इस बार सीधा शबनम के सीने में जा लगी । नहीं गोली लगते ही शबनम के मुंह से चीख निकल गए । उसके यहाँ के आश्चर्य से फैल गई । आखिर कार्लोस उसे गोली कैसे मार सकता था । तभी कार्लोस ने धीरज का निशाना लगाकर दूसरी गोली चलाई पर तब तक धीरे छलांग मार कर अपनी जगह छोड चुका था और इस बार उसकी गोली ने वर्ष को अपना निशाना बनाया । छलांग मारते धीरज सीधा हुआ और उसने भी कार्लोस को अपनी रिवाल्वर का निशाना बनाना चाहा । पर जब तक वो गोली चला पाता तब तक कार्लोस दरवाजे से बाहर निकल चुका था । सावधानी के तौर पर धीरज कुछ पलों तक वहीं छिपा बैठा रहा हूँ । फिर उठकर दरवाजे की तरफ भागा और बाहर निकल कर इधर उधर देखकर । तब तक वहाँ से कार्ड ना उसकी परछाई भी गायब हो चुकी थी । वो शायद लिफ्ट में सवार हो चुका था । धीरज ने तुरंत अपना मोबाइल निकाला और अनुल धीरज ने तुरंत अपना मोबाइल निकाला । और अनिल को फोन मिलने लगा । अभी अभी कारणों शबनम को गोली मारकर बाहर की तरफ भागा । जल्दी से उसका पीछा करो । आज वह बचना नहीं चाहिए । पर ध्यान रखना उसके पास । अभी भी पिस्टल कहते हुए उसने फोन बंद कर दिया और वापस अंदर कमरे में आ गया । जहाँ शबनम गोली लगी थी वो तुरंत उसके पास पहुंचा हूँ । उसके यहाँ के ऊपर नीचे हो रही थी शबनम शब्द मुझे बताओ, कार्लोस कहाँ मिलेगा? देखों से बचाने से कोई फायदा नहीं है । जिसने तो मैं मौत के पास पहुंचाने का सामान क्या बोलू शब्द बोलो वो शबनम ने कुछ कहा और फिर उसकी गर्दन एक तरफ लग गई । इतिहास इतनी देर हो गयी वो इंस्पेक्टर का बच्चा अभी तक वापस नहीं आया । नहीं वो किसी मोदी कहीं वो किसी मुसीबत में तो नहीं फंस गया खर्च करने का अब कितनी बार कहना पडेगा । अभी तक उसकी शादी नहीं हुई है । आप खुद इंस्पेक्टर है । किसी इंस्पेक्टर का बच्चा नहीं जीतने । जवाब दिया तुम दोनों चुप रहा हूँ कोई वक्ता इन सब बातों का वैसे आज घर का कहना सही है । हो सकता है वो किसी मुसीबत में फंस गया हूँ । चलो ऊपर चलकर देखते कहते हुए अनिल लिफ्ट की तरफ जाने लगा । पर उसने तो कहा था अगर ऐसी कोई परिस्थिति पेश आए तो उसके पुलिस स्टेशन में फोन करना पीछे से करने का हाँ कहा तो था पर वहाँ से मदद ना जाने कितनी देर में आएगा तब तक उसे कुछ होना चाहिए । हम इसका रिस्क नहीं ले सकते हैं । ऐसे भी पुलिस डिपार्टमेंट में अच्छे आदमी बच्चे कितने हैं, हमें ही उसकी हेल्प के लिए कुछ करना होगा । अनिल ने कहा अभी अनिल ये सब कह रहा था । तभी लिफ्ट का दरवाजा खुला और उसमें सहित साया भागता हुआ बाहर निकला और लेफ्ट के बाहर खडे अनिल से टकरा गया । अवैध समझकर साले मरने का इरादा है क्या? टक्कर लगते ही मिलके मुझ से निकला है? उधर वो साइड नहीं जैसे उसकी बात सुनी हूँ । वो तो टक्कर लगते ही है । तुरंत एक तरफ भाग गया था । कौन है जो इतनी जल्दी में था? ऍम कहीं कार्लोस तो नहीं अगर ने जवाब दिया क्या? दोनों ने चौक कर एक साथ का । तभी अनिल के मोबाइल की घंटी बज उठी । उसने स्क्रीन की तरफ नजर दौडाई धीरज का फोन था ॅ अभी अभी कारणों शबनम को गोली मारकर बाहर की तरफ भागा है । जल्दी से उसका पीछा करो आज वो बचना नहीं चाहिए पर ध्यान रखना उसके पास अभी भी पिस्टल है । उधर से धीरज की आवाज आई और फोन काॅल, फटाफट गाडी बाहर निकालो ये कारण होती है । फोन बंद होते ही अनिल ने कहा और बाहर की तरफ दौड पडा । जिधर कार्लोज गया था तब तक कार्लोस अपनी बाइक स्टार्ट कर चुका था और वह सोसायटी के मेन गेट की तरफ जा रहा था । अनिल पैदल ही उसके पीछे दौडने लगे । उधर धान दिल की बात सुनते ही अजीत तुरंत पार्किंग की तरफ गया जहां उसने अपनी कार खडी की थी । अजित ने कहा स्टार्ट कर के आगे बढाई अगर उसके साथ क्या बैठा था । अजित ने अपनी कार गेट की तरफ दौडा नहीं गेट के नजदीकी उन्हें अनिल मिला । अनिल तुरंत आगे की सीट पर बैठा और बोला गाडी को राइट में लेना करना । उसकी बाइक उस तरह की गई है । जल्दी करो वो अभी दूर नहीं जा पाया होगा । अजित ने कहा उसी तरफ मोड दी और उसे कार्लोस की भाई कहीं पर भी नजर नहीं आई । अजीत थोडी दूर आगे तक अपनी कार नहीं कर गया और आगे चौराहे पर जाकर लोगे । अब अजित ने पूछा कोई फायदा नहीं है पीछा करने का हमें नहीं पता वो यहाँ से किस तरफ गया । वैसे भी दूर दूर तक उसकी परछाई भी नजर नहीं आ रही । अनिल ने कहा, तभी उसका मोबाइल बज उठा । उसने फोन उठाया क्या रहा? इधर से धीरज ने पूछा सॉरी सर, वो हम से बचकर निकल गया । अनिल ने अफसोस जताते हुए चौरी की कोई बात नहीं । इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है तो उनसे ज्यादा इसमें मेरी गलती है जो मैं बिल्कुल लापरवाह हो गया था । मेरी लापरवाही की वजह से बेचारी शबनम को गोली लग गई और उसे अपनी जान से हाथ धोना पडा । ऍम को गोली लग गयी । अनिल के मुझसे नहीं हाँ तो अभी निकलो । यहाँ से मैं पुलिस को इन्फॉर्म करने जा रहा हूँ तो मैं उनके सामने नहीं आना है । मैं तुमसे आज शाम को सात बजे उसी कॉफी शॉप पर में लूंगा । कहते हुए धीरज ने फोन काट दिया । क्या शबनम को गोली लग गयी? वो जिंदा तो है ना? फोन कट रही है । अगर ने व्यंग्य स्वर में अनिल से पूछा नहीं शीर्ष डेड अनिल ने कहा तो उम्मीद की आखिरी किरण भी चली गई । अजीत के मुँह से निकला मरने से पहले शबनम ने इंस्पेक्टर धीरज को कुछ बताया था । अगर ने पूछा क्या पता यार इतना पूछने का टाइम भी कहा दिया धीरज नहीं पैसे उसने बोला है । वह शामको कॉफी अपने मिलेगा । उसने हमें यहाँ से निकलने के लिए बुलाया भी । अनिल ने कहा यार एक बात करूँ । अजित ने अपनी कार को आगे बढाते हुए का आप बोल क्या कहना चाहता है? कहीं इंस्पेक्टर धीरज भी बिकाऊ तो नहीं है? मतलब मतलब ये कि कहीं वो भी जुबैर अंसारी कमिश्नर से मिला हुआ तो नहीं है । तो मैं ऐसा क्यों बोल रहे हो? वो तो हरपाल हमारी मदद भी कर रहे हैं । अरे आरोपर सोच कर दें उसने हमारी मदद की । वहाँ पर तो पहले तो उसने कहा था कि उसके पास देवराज ठाकुर के घर पर हमला करने वालों की सीसीटीवी फुटेज नहीं है । हाँ, तो कमिश्नर ने आगे डिस्ट्रीब्यूटरी नहीं किए होंगे तो उसके पास कहाँ से आएंगे? चलो मान लिया कि उसके पास फुटेज नहीं थे पर वाॅटर से भी तो मंगा सकता था । पर उसके लिए उसने बाना बनाया कि अगर वो ऐसा करने की कोशिश करेगा तो कमिश्नर को पता चल सकता है । उसके बाद जब हमने अपनी कोशिशों से वह फुटेज निकलवाए और उसको चेक करने के लिए दिए तो उसने जवाब दिया कि हेड क्वार्टर में उनका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है । हो सकता है कि वास्तव में उनका कोई रिकॉर्ड नहीं हूँ । अरे मेरी बात आगे तो सुनो । उसके बाद जब हमने अपनी मेहनत से शबनम का पता लगाया और उसका पीछा करते करते कार्लोस तक पहुंचे तो उस ने बडी चालाकी से कार्लो उसको निकाल भागने का मौका दिया और हमारे आखिरी गवाह शबनम को भी रास्ते से हटवा दिया । तुम इस बात पर भी ध्यान दो कि वो हमारे साथ शबनम के पीछे आने के बजाय कहीं और गया था । और फिर ये जानते हुए यहाँ कार्लोस हो सकता है वह पुलिस वोट लाने के बजाय अकेला ये आया था तुम्हारी बात में दम तो है जी । वैसे तुम क्या कहते हैं? अगर इस बारे में अनिल ने अगर से पूछा था क्या खाता में इस की बातों में तुम भी बिना सोचे समझे बोल रहे हो? अगर नहीं जवाब क्या मतलब? मतलब ये कि जुबैर अंसारी के प्लान के बीच अगर कोई सबसे बडा खतरा है तो वो शबनम नहीं बल्कि हम थे । अब अगर धीरज उसके साथ मिला हुआ होता है । ये बात अभी तक जुबैर अंसारी तक भी पहुंच चुकी होती है और फिर हम अभी तक क्या जिंदा होते जो वैद अंसारी कभी कहा मैं ऊपर पहुंचा चुका होता है और ज्यादा भी नहीं तो हम इतने समय तक धीरज के साथ रहे । धीरे जी हमें इनकाउंटर के बहाने मार सकता था । इस पर कोई शक भी नहीं करता क्योंकि हमारी हकीकत जानने के बाद तो वो बडी आसानी से हमारे अपराधी होने का सबूत ला सकता था । युवा राइडस घर चला इतनी परेशानियों से गिरे होने के कारण मैं ये बात तो सोच ही नहीं पाया था । अजीत लेगा साले खाने के अलावा कभी कहीं और अपना दिमाग इस्तेमाल भी करता है तो ब्रेक अब तो मैंने खाने के लिए कुछ और मत कही हूँ । खाने के लिए नहीं बोल रहा तेरे दिमाग के लिए बोल रहा हूँ थोडा सा और जगह भी इस्तेमाल किया कर घर पहुंचने दे । फिर बताता हूँ तो ये तो वहाँ क्या बताएगा जो बताना है अभी बता दें कहीं फिर भूल जाए । वैसे भी दिमाग तो इतना ही है, देगा हमें साले मेरी कोई बहन नहीं है । मैं जो मुझे साला बोल रहा है, लाभ लाभ ला । उनकी बातें सुनकर अनिल सिर्फ मुस्कुरा दिया उसके दिमाग में अजीत और अगर दोनों की बातें पूछ रही थी और वो सोच रहा था कि धीरज के बारे में अजित सही है या फिर अगर है तो शाम को पता चली जाएगा । उसने अपने दिमाग को झटका दिया और अजीत अनिल की नोक झोंक का मजा लेने लगा । शाम को सात बजे उसी कॉफी शॉप पर इंस्पेक्टर धीरज उन तीनों मित्रों के साथ अपनी मीटिंग कर रहा था जहाँ पर वह पहली बार साथ में बैठे थे । सर बुरा ना माने तो आपसे बात पूछूं । अनिल ने कहा आप बोलो क्या कहना चाहते हो सर, कल रात को आपसे शबनम ने मरने से पहले कुछ बताया था । इसमें बुरा मानने वाले क्या बात है आप? मैंने इसलिए तो ये मीटिंग बुलाई है । कहीं ऐसा तो नहीं की तो मुझ पर शक कर रहे हो? धीरज ने मुस्कुराते हुए कहा शक नहीं तो अनिल उसकी बात सुनकर हडबडाया मुझे तुम्हारी मनोस्थिति बता है । डीएस और तुम गलत भी नहीं तो मैं यही लग रहा है ना कि मैं तुम्हारी कोई हेल्प नहीं कर पाता । सीसीटीवी फुटेज जुटाने में तुम्हारे साथ नहीं गया । शबनम का पीछा भी मैंने तुम लोगों को अकेले को करने के लिए कहा और दोस्त तुमने बताया कि कमिश्नर खोद इसमें इन बहुत है । मैं अगर फुटेज लेने जाता है तो उसकी सूचना कमिश्नर तक जा सकती थी । फिर शायद तुम शबनम का भी पता नहीं लगा पाते और शबनम का पीछा महीने तुम्हारे साथ इसलिए नहीं किया क्योंकि मैं खुद ऐसे गैस पर काम कर रहा हूँ जिसके तार तो महाने वाले के से भी जुडे हुए हो सकते हैं । कहते हुए धीरज ने जिन अपराधियों को दंगा फैलाने की कोशिश में और उनकी सूचना पर दूसरे अपराधियों को गिरफ्तार किया था, उन के बारे में बताइए । नहीं सर, ऐसी कोई बात नहीं, हम आप पर कोई शक नहीं कर रहे हैं । अनिल शर्मिंदा होते हैं । ऐसे आपसे शबनम ने मरने से पहले क्या कहा था इसके बारे में कुछ बताने वाले थे । क्या बताया उसमें ज्यादा तो नहीं पर जितना भी बताया उस से ये पता चला था कि बहुत बडी साजिश हो रही है और किसी को भी इसकी कानोकान खबर नहीं । धीरज नहीं था क्या सर में बताया देवराज चौहान और जुबैर अंसारी दोनों आपस में मिलकर कब जनसभा को संबोधित करने वाले साथ में चुनाव लडने की घोषणा करने वाले हैं । सर वो आने वाले शुक्रवार को करना है । अनिल ने कहा था उनकी जनसभा राजनगर रामलीला ग्राउंड में शुक्रवार को शाम चार बजे और वहाँ पर राजनीति के दो विपरीत ध्रुव आपस में मिलने का दावा कर रहे हैं । राइट और वहीं पर कार्लोस अपना शिकार करने जा रहा है । भरी सभा में सोचो ऐसा हो गया तो क्या होगा वो रिकॉर्ड फिर तो भीड में भगदड मचने के पूरे जाउं । लोकसभा में लगभग ये आप लोगों के जुटने की उम्मीद है । इनमें दोनों ही समुदाय के लोग मौजूद रहेंगे और अगर उनमें भगदड मच गई, कई लोग मारे जाएंगे और उसके बाद तो शहर में दंगा भडकने से कोई नहीं रोक सकता । अनिल के मुँह से निकला हमें किसी भी तरह से कार्लोस को अपना काम करने से रोकना होगा । अगर नहीं हैं सर हम पुलिस कमिश्नर को इन्फॉर्म अजित ने कहना चाहा पर तक काली अपनी बात कर शिट, हम लोग उस कमिश्नर से क्या उम्मीद कर सकते हो तो खुद उस जो बाहर का पालतू कुत्ता अरे तुम ज्यादा मत सोचो । माना वापर कार्लोस अपना शिकार करने वाला है पर कम से कम मैदान में दंगा नहीं बढ के थोडी बहुत भगदड जरूर मचेगी । ज्यादा नुकसान नहीं होगा । ये आप कैसे कह सकते हैं? कीसाजिश कुछ और है । मेरी पूरी बात से कहते हुए धीरज नहीं उनसे कुछ का वो ॅ, इतनी बडी साजिश और हम लोग और हम लोग कुछ और ही सोचे बैठे थे तो चकरियों में बुरी तरह से फस गए और ऍम को तोडना होगा । हमें कार्लोस के हमले को नाकाम करना होगा धीरज नहीं । पर सरे सामने को रोकने के लिए हम लोग क्या कर सकते हैं? हमें ये तो बताया है कि ये हमला कौन करें तो कब और कैसे करेगा? बिना ये जाने इस हमले को कैसे रोकेंगे । वैसे भी वहाँ लाखों की भीड में किसी एक इंसान को पहचानना कैसे संभव होगा? पहली बात तो ये है कि वह लाखों की भीड में होगा भी नहीं । मैदान में एंट्री लेने के लिए तीन गेट और एंट्री लेने वाले हर शख्स की पहले अच्छे से तलाशी होगी उसके बाद ही उसे प्रवेश दिया जाएगा । इस हालत में कार्लोस के लिए अपने साथ हथियार लेकर प्रवेश का नाम उनके नहीं होगा । पर सर जब वो कमिश्नर खुद जुबैर से मिला हुआ है तो कार्लोस को अंदर हथियार लाने में क्या प्रॉब्लम हो सकती है? और अगर वो अंदर हथियार नहीं लाया तो कमिश्नर उसे अंदर भी हथियार उपलब्ध करवा सकता है । अगर ने सवाल किया नहीं, तुम जितना सोचते हो उतना आसान नहीं है इसमें दो पंगे है ना जहाँ तक मैं समझता हूँ कमिश्नर कार्लोस को नहीं पहचानता हूँ । दूसरा मना कमिश्नर जो बाहर से मिला हुआ है और मैदान की पूरी सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी और वो खुद किसी अंदर आने वाले की तलाशी नहीं लेगा । और आपने प्लैन में वो किसी और पुलिस वाले को शामिल नहीं करने से ना क्योंकि इसके लिए उसे एक दो नहीं बल्कि लगभग हर सुरक्षा करने को शामिल करना होगा । खुद उसके लिए भी बहुत बडा खतरा हूँ । इसलिए कार्लोस अपना निशाना पहले की तरह ही दूर किसी बिल्डिंग से लेगा तो यहाँ में मैदान के चारों ओर की हर बिल्डिंग की तलाशी लेनी होगी । वो हमारे लिए बहुत ही बाल नहीं, आस पास की बिल्डिंग की तलाशी, बाकी पुलिस मिलेगी और हम उनके सामने आ सकते हैं । वैसे भी हम क्या कहकर हर फ्लाइट की तलाशी ले सकते हो । आप सही कह रहे हैं इंडिया में कोशिश तो करेंगे सर । हम गुमनाम फोन करके देवराज ठाकुर को सभा में आने से मना नहीं कर सकते हैं । अजीत ने कहा अखबारों से कैसे मना कर सकते हैं जबकि तुम सब जानते हो ये देवराज ठाकुर के लिए सत्ता प्राप्ति का एक रास्ता है । सर ये तो पागल है । आप इसकी बात पर ध्यान मत दीजिए । इसका दिमाग से खाने में चलता है । अगर ने बीच में का ये सुन का राज इतने उसे घुट कर देंगे, इंस्पेक्टर नहीं है जो उनकी नोक झोंक पर मुस्कुरा दिया । इतने टाइम में वो उनके आपस की खींचतान को अच्छी तरह से पहचान चुका था । ठीक है, पर हमें कुछ दिन बहुत सावधान रहना होगा । मैदान के चारों तरफ अपनी नजर रखनी होगी । मेरी ड्यूटी तो मेरे थाने में ही है । अगर मुझे मैदान की सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी दी गई । अगर मुझे मैदान की सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी दी गई होती तो शायद में वहाँ पर कुछ छानबीन कर सकता था और उस दिन मैं ऑफिस चली वहाँ पर नहीं दे पाऊंगा । इसलिए मैं वहाँ पर सिविल ड्रेस नहीं जाऊंगा । ठीक है सर, हमारे पास अभी चार दिन है । तब तक तुम लोग रामलीला मैदान के आसपास की छानबीन कर कोई भी संदिग्ध व्यक्ति नजर आए । मुझे खबर करना मैं भी समय निकालकर तुम लोगों की जान बेन में मदद करूंगा । भगवान ने जहाँ हम उस नेता और कार्ल उसके मकसद को कभी पूरा नहीं होने चाहिए । धीरज ने कहा, ठीक है सर, हम लोग अपनी पूरी कोशिश करेंगे मिलेगा । उसके बाद वो मीटिंग बर्खास्त हो गई । उन लोगों ने तीन दिनों तक अपनी खोजबीन जारी रखी पर जैसे कार्लोस की तो छाया ही गायब हो गई थी और आखिरकार वह दिन भी आ गया । राजनगर पर कायामत लाने वाला था ।

Part 7: अध्याय 10 - A

अध्याय, टाॅस, भाइयों और बहनों आज राजनगर के इतिहास में होने जा रहा है, जो आज से पहले इस राज्य इस देश में तो क्या दुनिया के किसी भी देश में नहीं हुआ । ऐसा होना तो बहुत दूर के बाद ये बात तो वो है जो कभी किसी के ख्वाब में भी सोची नहीं गई थी । आज वो बात सच होने जा रही है । दो पार्टियां जिनकी विचारधारा एकदम विपरीत मानी जाती रही है । उनके नेता जिसमें एक अगर उत्तरी ध्रुव है तो दूसरा दक्षिण ग्रुप है और जो आज तक जितने भी चुनाव आये हुए हैं उनमें एक दूसरे के खिलाफ लडते हुए आए हैं । वो पार्टियाँ आज अपने सारे मतभेद भुलाकर और आपस में मिलकर इस राज्य की उन्नति के लिए इस राज्य की राजनीति की धारा को बदलने जा रही है कि हाँ मैं बात कर रहा हूँ इंडियन राष्ट्रवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री देवराज ठाकुर जी और राष्ट्रीय आवाम पार्टी के अध्यक्ष श्री जुबैर अंसारी जी के । जब आपने पिछले सारे मतभेद भुलाकर आज यहाँ दोनों पार्टियों के गठबंधन की औपचारिक घोषणा करने के लिए एकत्रित हुए हैं । अब मैं सबसे पहले मंच पर श्री देवराज ठाकुर जी को आमंत्रित करना चाहता हूँ, जिन्होंने इस क्षण के लिए अपना पहला कदम उठाया था जो आप लोगों को इस बारे में मंच से कुछ शब्द कहेंगे । मंच को संचालित करने वाले वक्ता ने माइक पर बोलते हुए ऊपर मंच पर बैठे हुए देवराज ठाकुर की हो इशारा करते हुए कहा ये था राजनगर का आदर्श नगर स्थित प्रसिद्ध रामलीला मैदान जो वहाँ पर हर साल दशहरे के समय होने वाली रामलीला के लिए प्रसिद्ध था । मैदान इस समय वहाँ एकत्रित भीड से पूरी तरह खचाखच भरा हुआ था । वो भीड जो इस बे मिलाप मिलन को देखने और सुनने के लिए वहाँ पर एकत्रित थी जिसमें हर समुदाय के लोग शामिल थे । भीड को संभालने और सुरक्षा के लिए वहाँ मैदान के हार एक कदम पर पुलिस का तगडा पहना था जिसके मुख्य कमान खुद राजनगर के पुलिस कमिश्नर खंड ने संभाली हुई थी । मैदान में प्रवेश करने से पहले हर व्यक्ति को बडी ही बारीकी से चेक किया जा रहा था और उसके बाद ही उसे मैदान में प्रवेश करने दिया जा रहा था । इस रैली को मीडिया द्वारा पूरा कवरेज दिया जा रहा था । राष्ट्रीय पार्टियों की निगाहें बीस रैली पर लगी हुई थी । मैदान के जिस हिस्से में दशहरे के दौरान रावण के पुतले का दहन किया जाता था । वहाँ पर इस समय बहुत बडा मंच बना हुआ था । मंच पर दोनों पार्टियों के बडे नेता बैठे हुए थे जिसमें शामिल थे देवराज ठाकुर और ऍम । अपने नाम सुनते ही देर राज ठाकुर अपनी सीट से उठ खडा होगा । अपने साथ ही लगी हुई सीट पर बैठे हुए जुबैर अंसारी की तरफ मुस्कुराते हुए देखा और फिर चलता हुआ उस तरफ आया जिस तरफ माइक लगा हुआ था । उसने अपने सामने एकत्रित भारी जनसमुदाय की तरफ नजर दौडायी । पहली बार उसके जवाब में इस तरह की भीड उमडी थी । भीड को देखते हैं । उसके चेहरे पर एक पल के लिए मुस्कान उभरी और गायब हो गई । भाई के सामने उसने अपना गलत कार्य और कहा मेरे प्रिय मित्र जुबैर अंसारी जी दोनों पार्टी के सभी अधिकारीगण और इस सभा को सफल बनाने के लिए उपास्थित । आप सभी दोस्तों को मेरा प्यार भरा नमस्कार । आधार मैं जानता हूँ । आज आप सभी लोगों के दिल में एक सवाल जरूर पढ रहा हूँ । अभी कुछ दिनों पहले ही मेरी धर्मपत्नी की मौत हुई है और मैं उसके दुःख को भूलकर राज्यसभा क्यों कर रहा हूँ । शायद विपक्षी पार्टियां इसे ये मानकर चल रही है और मुझ पर ये आरोप लगा रही है कि मैं अपनी पत्नी की हत्या को लेकर राजनीति कर रहा हूँ और उसकी मौत का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए ये सभा कर रहा हूँ । पहले मैं उनको पहले में उनको इस बात का जवाब देने वाला था खराब मुझे उन्हें जवाब देने की कोई जरूरत नहीं है । आप लोगों ने यहाँ एकत्रित होकर उन लोगों को जवाब दे दिया है कि मुझे अपने परिवार से भी ज्यादा इस प्रदेश की चिंता है और इस प्रदेश को केंद्रीय पार्टियों के चंगुल से छुडाने और प्रदेश को उन्नति के पथ पर अग्रसर करने के लिए मैंने राष्ट्रीय आवाम पार्टी की तरफ से दोस्ती का हाथ आगे बढाया है । इसके लिए मैं श्री जुबैर अंसारी जी का भी हृदय से आभारी हूँ । उन्होंने ना सिर्फ मेरे इस बडे हुए हाथ को थामा बल्कि मुझे यकीन दिलाया है कि उन्होंने भी हमारी पार्टी के प्रति अपने पुराने पूर्वाग्रह छोड दिए हैं और ये आश्वासन दिया है कि अब हमारी दोनों को मिलकर बराबर कदम बढाकर इस प्रदेश को उन्नति के पथ पर आगे की ओर ले जाएंगे । आप लोग शायद नहीं जानते की मेरी धर्म पत्नी की भी यही । अंतिम में छाती मरने से पहले वो मुझे यही सब समझा नहीं थी । भगवान को फिर कुछ और ही मंजूर था और वो अपनी इच्छा को पूरा होते देखे बिना ही मुझे हम सबको छोड कर चली गई । फिर मुझे आज आप लोगों से एक वादा चाहिए क्या आप सब लोग भी हमें अपना पूरा सहयोग प्रदान करेंगे और इस प्रदेश को आगे बढाने में बराबर का कदम उठाएंगे तो जो भी लोग मेरे साथ हैं अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर बोली । हाँ हाँ हम आपके साथ है । मंच के सामने जमा लाखों की तादाद में जमा भीड ने अपने दोनों हाथ उठाकर जोर से का आपकी आवाज नहीं आई । एक बार फिर से मेरे साथ इतना जोर से बोलिए राष्ट्रीय पार्टियों की आँखें खुली की खुली रह जाए । देवराज ठाकुर जोर से कहा हम आपके साथ है इस बार भीडने दोगुने उत्साह से अपने दोनों हाथ उठाकर का भाई । आपके इसी उत्साह की हमें जरूरत है । मेरी धर्म पत्नी की आत्मा को शांति मिल गई । मुझे और कुछ नहीं चाहिए । मैं राष्ट्रीय आराम पार्टी के अध्यक्ष श्री जुबैर अंसारी से निवेदन करता हूँ कि वह मंच पर आए और दो शब्द कहे । देवराज ठाकुर ने मंच के बीचोंबीच विराजमान जुबैर अंसारी की तरफ इशारा करते हुए कहा जाॅन सारी अपनी सीट से उठा और धीरे धीरे चलता हुआ मंच के बीचोंबीच आया । देवराज ठाकुर ने झुककर अभिनंदन किया तो अंसारी ने भी उसी तरह जोकर उसके अभिवादन का जवाब दिया । उनके पास खडे एक साथ ही नहीं एक थाल आगे बढाया जिसमें गुलाब के फूलों की माला रखे हुए थे । देवराज ठाकुर ने थाल में से वो माला उठाई और जुबैर अंसारी के गले में डालते हैं । साला मैदान तालियों से गूंज था आप काॅन् सारी देवराज ठाकुर ने मुस्कुराकर जो मैं हंसाजी से करेंगे । धन्यवाद जनाब देवराजी ऍम सारी ने भी उसी प्रकार से मुस्कुराकर जवाब दे । फिर देवराज चौहान ने अपने एक हाथ से जुबैर अंसारी का हाथ पकडा और फिर दोनों ने आपने वो हाथ पकडे पकडे हवा में उठा दिए और अपने अपने दूसरे आपको हवा में लहराकर जनता का अभिवादन करने लगे । जनता की तरफ से एक जोरदार आवाज हुए देख रहे हैं ये जनता का अपार समर्थन । दोपहर साहेब देवराज ठाकुर धीरे से का जितना मैंने ख्वाब में भी नहीं सोचा था । जनता इस गठबंधन को इतना ज्यादा समर्थन देगी । इस सैलाब को देखकर लग रहा है क्या आप हमें इन चुनावों में जीतने और राज्य में सरकार बनाने से कोई ताकत नहीं रोक सकती । जुबैर अंसारी ने भीड को देखकर उसी उत्साह में अपने हाथ लहराकर धीरे से जवाब दिया । ये बात तो ठीक कह रहे हो तो क्या अभी चुनाव जीतने से और राज्य में सरकार बनाने से कोई ताकत नहीं रोक सकती । बस एक छोटी सी गलती कर गए कहने में कहते हुए देवराज ठाकुर मुस्कुराया कौन सी गलती मैं आपका मतलब नहीं समझा देवराजी ऍम मतलब ये कि आपने ये नहीं कहा कि ये चुनाव भी जीता जाएगा और राज्य में सरकार भी बनेगी और उसके लिए हमें केंद्रीय पार्टियों पर निर्भर नहीं रहना पडेगा । कहते हुए देवराज ठाक उठा का मार्कर ॅ । उसकी बात सुनकर एक पल के लिए जुबैद अंसारी को कुछ समझ नहीं आया । अगले ही पल वह भी उसके साथ ठहाका मारकर हंस पडा । आइए जनता आपको सुनने के लिए बेकरार हो रहे हैं । देवराज ठाकुर ने कहा । ये सुनकर जुबैद अंसारी मंच के उस तरफ गया जहाँ पर माइक लगे हुए थे । माई के सामने खडा हुआ और पहले अपने गले को कहा था । फिर बोलने लगा दो तो मैं क्या करूं? कुछ समझ नहीं आ रहा है । आप लोगों का प्यार देखकर मैं बिल्कुल लेनी शब्दो । इसके लिए मैं श्री देवराज ठाकुर जी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ जिन्होंने अपने पिछले सारे मतभेद भुलाकर हमारी तरफ दोस्ती का पैगाम भिजवाया । साथ ही साथ मुझे ये अहसास दिलाया कि जब तक हम अलग अलग है तब तक मैं और तुम मैं और जब हम हिंदू और मुसलमान मिल जाते हैं तो वहाँ पर हम बन जाता है । और मैं ऐसे जहाँ नफरत का सैलाब रहता है वहीं पर हम से मोहब्बत की खुशबू का ऐसा ऐसा होता है । तो आइए आज हम ये वादा करते हैं कि नफरत के सैलाब को तोडकर चारों तरफ मोहब्बत की खुशबू फैलाएंगे । बस इसी वादे और इरादे के साथ मैं अपनी बात यही पर खत्म करता हूँ । कहते हुए जुबैर अंसारी ने अपना भाषण समाप्त किया । भीड ने तालियां बजाकर जुबैर अंसारी का स्वागत किया । अपना भाषण समाप्त कर जो बेल अंसारी मंच के उस तरफ गया जहाँ पर देवराज ठाकुर बैठा हुआ था । देवराज ठाकुर में उठकर उससे हाथ मिलाते हुए मुस्कुराते हुए कहा बहुत सही कहा आपने जनता को ला जवाब कर दिया आपने आज अपने भाषण से अभी कहाँ जनाब ये सब तो आपकी मेहरवानी जुबैर अंसारी ने भी उसी प्रकार से हसते हुए आइए बैठे । देवराज ठाकुर ने उसका एक हाथ पकडकर कुर्सी पर बैठाते हुए अभी तो दोनों अपनी अपनी कुर्सियों पर बैठ भी नहीं पाए थे कि तभी ले जाने कहाँ से निशब्द गोली आई बढाकर सीधा जुबैर अंसारी के सीने में घुस गई । गोली लगते ही वह लडखडाते हुए कुर्सी पर एक पल में ढेर हो गया । एक पल के लिए मंच पर जैसे सन्नाटा छा गया और अगले ही पल देवराज ठाकुर और वहाँ कुर्सियों पर बैठे हुए उनकी पार्टियों के दूसरे नेता जुबैद अंसारी की तरफ लपक पडे । मंच के पीछे खडे सिक्योरिटी गार्ड ने तुरंत मंच को चारों तरफ से घेर । उधर देवराज ठाकुर ऍम सारी को अपनी तरफ की है । अपनी आंखों से जीवन की ज्योति बुझने से पहले जुबैर अंसारी ने एक नजर अपने नजदीक खडे देवराज ठाकुर पर डाली और उसकी यहाँ के आश्चर्य से फैल गई । जिस गोली को देवराज को निशाना बनाना था वो उसे लगने के बजाय उसके खुद के कैसे लग गए । अगले ही पल उसकी गर्दन एक तरफ भडक गई करें तो एंबुलेंस बुलाओ । जल्दी अंसारी साहब को आठ अटैक आया है । देवराज ठाकुर में जोर से आवाज लगाई और उसकी आवाज लगाने से पहले ही कुछ मेडिकल कर्मी उनकी तरह लगभग चुके थे जिसमें इमरजेंसी के लिए बुलाए गए डॉक्टर भी शामिल थे । एक डॉक्टर ने जब जुबैद अंसारी को देखा तो सब पकाकर बोला ही नहीं तो गोली लगी है । फॅमिली मुझे भी पता है और अगर ये बात पब्लिक को पता चल गयी तो उनमें बहुत डर नहीं बच जाएगी । इसलिए जितना कहा जाए उतना ही सुनो और अपना काम करो । जल्दी से हॉस्पिटल ले जाओ । देवराज ठाकुर की बात सुनकर लोगों ने तुरंत जुबैद अंसारी के शरीर को उठाया और वहीं मंच के साइड में खडी एंबुलेंस में डालकर हॉस्पिटल के ही चलता है । पुलिस कमिश्नर मंच के नीचे घूमता हुआ मंच की सुरक्षा व्यवस्था देख रहा था । उसने जब देखा कि मैं से कोई नीचे गिर रहा है और कमांडोज ने मंच को चारों तरफ से घेर लिया है तो उसके वोटों पर एक मुस्कुराहट ऊपरी लगता है । देवराज का काम तमाम हो गया है कर लो उसने अपना काम खत्म कर दिया । सोचते हुए वह फटाक से मंच के ऊपर की तरफ भाग ठीक है पर जब उसने मंच से देवराज की आवाज की सुनी ऍम बुलाओ । कोई जल्दी अंसारी साहब को आॅल आया है । वो एक पल के लिए सकते में आ गया और उसके होटों से उसकी मुस्कान गायब हो गई थी ।

अध्याय 10- B

ये जो बहन अंसारी को हार्ड है, कैसे आ गया? मुझे लगता है शायद उसे गोली लगी है । पर भीड में सुनकर भगदड ना मजा । इसलिए देवराज ऐसा कह रहा है पर गोली देवराज को लगने के बजाये जुबैर अंसारी को कैसे लग गए? दूसरी बार भी कार्लोस का निशाना कैसे छूट गया? लगता है सालन नशा करने लग गया । यहाँ पर साले का दिमाग खराब हो रखा है । जिसने उसे सुपारी दी उसी को थोडा दिया या फिर लगता है साले देवराज की किस्मत ही बहुत ज्यादा तेज है । इतनी तेज जो दूसरी बार भी बच गया । पर साला मेरी किस्मत पर तो जैसे ग्रहण लग गया गया मेरा करोड रुपया पानी में पता नहीं जुबैर अस्पताल पहुंचने से पहले जिंदा बचेगा भी या नहीं? बडबडाते हुए उसने ये देखने के लिए इधर उधर नजर दौडाई कि कार्लोस में निशाना कहाँ से लगाया था । तो पाया एसीपी विपुल एक तरफ तेजी से दौड रहा है । शायद उसे शक हो गया था कि जुबैद अंसारी को हार्ट अटैक आने के बजाय गोली लगी थी । उसकी नजरें वैसे भी शुरू से विपुल के पीछे ही थी जब से उसे विपुल पर शक हुआ था । उसने उसको अपने साथ ही ड्यूटी पर लगा रखा था और हमेशा अपनी नजरों के सामने ही रखने की कोशिश की थी । ये ऐसी भी कहाँ जा रहा है सोचते हुए वह भी उधर जाने को हुआ । जिस तरफ से एनसीपी विपुल जा रहा था तभी उसे देवराज ठाकुर के चिल्लाने की आवाज आई है । कमिश्नर के बच्चे उस तरह के डर जा रहा है यहाँ पर भीड में भगदड मचने के आसार है और तुझे तफरी की सूचना है । जल्दी से स्थिति को संभाल और लोगों को शांत करने की कोशिश करते हैं । भरना मैंने अगर एक भी वोटर को जरा सा भी नुकसान पहुंचा तो तेरी वर्दी उतार दूंगा समझे अगर देवराज ठाकुर उस तरह चल पडा जिस तरफ से जुबैद अंसारी को एम्बुलेंस में डालकर हॉस्पिटल ले जाया जा रहा था । देवराज ठाकुर की बात सुनकर उसे मन ही मन गाली देते हुए एसीबी विपुल की तरफ बढता हुआ कमिश्नर मिश्रा वहीं पर रुक गया और इस और स्टेज पर लगे हुए माइक से बोलने लगा आप लोग शांति बनाए रखिए । अंसारी साहब को आॅल आया है पर यहाँ इमरजेंसी में लगे डॉक्टर ने कहा है कि उनकी जान खतरे से बाहर है । उन्हें अभी अभी हॉस्पिटल लेकर गए । आप लोग ऐसे भगदड मच मच चाहिए और अपने स्थान पर बने रही है । माइक पर अपील करने के बाद उसने अपना वायरलेस फोन बाहर निकाला और डेप्युटी कमिश्नर और पुलिस के अन्य बडे अधिकारियों को फोन मिलाकर उन्हें स्थिति को संभालने का आदेश दिया । उसके माइक से आते ही मंच संचालक करता ने मंच को संभाला और कहा देखिए नेताजी बिलकुल ठीक है । उन्हें छोटा सा हार्ट अटैक आया है और हॉस्पिटल लेकर गए । आप लोग अल्लाह से उनकी सलामती की दुआ कीजिए । अब आप राष्ट्रीय आवाम पार्टी के नेता श्री अरमान मलिक साहब को सुनी है । उधर जुबैर अंसारी के मंच से नीचे गिरते ही भीड में हलचल सी मच गई थी । उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर जुबैर अंसारी एकदम से नीचे कैसे गिर पडे । उनके मन में अनेक शंकाओं ने जन्म ले लिया था और भगदड सी मच ने को हुई थी जब उन्होंने मंच पर लगे हुए माइक से कमिश्नर मिश्रा की बात सुनी की जुबैर अंसारी को एक छोटा सा हार्ट अटैक आया है और उन्हें हॉस्पिटल लेकर गए हैं । तब उनके पैरों की अल चल बंद हुई । भीड में लोग अपनी जगह पर वापस से बैठ गए थे पर फिर भी उनके मन आशंकित तो थे ही मंच संचालक करता की बात खत्म होने के बाद दूसरे नेता का भाषण सुनने लग गए थे । थोडी देर बाद वह तेज मई भाषण सुनने के बाद वो लोग भूल भी चुके थे कि कुछ देर पहले जुबैर अंसारी को हार्ट अटैक आया था और उन्हें हॉस्पिटल भी लेकर गए हुए थे । उधर कार्लोस गोली चलाने के बाद आपने इसलिए पर राइफल के पार्ट्स को बडे आराम से अलग अलग करने लगा जैसे उसे कहीं जाने की बिल्कुल भी जल्दी नहीं हो । फिर उन पार्ट्स को वो अपने साथ लाए हुए ब्रीफकेस में रखने लगा । वो इस समय दिशा अपार्टमेंट नामक बिल्डिंग के नौवीं मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में मौजूद था जो एक रिटायर्ड कॉलेज प्रोफेसर रामना मूर्ति का था । हालांकि कुछ दिन पहले देवराज ठाकुर के घर पर हुए हमले की वजह से पुलिस ने रामलीला मैदान इलाके के आसपास की सभी ऊंची ऊंची इमारतों की तलाशी ली थी और अच्छी तरह से जांच पडताल की थी । पर उनकी वह जांच पडताल सिर्फ उन्हीं फ्लैट तक सीमित रही थी, महत्वपूर्ण रूप से खाली थे । आप फिर पिछले आठ दस दिन में किराए पर लिए गए थे । उन लोगों को इस बात का सपने में भी खयाल नहीं आया था । क्या प्यारा ऐसे फ्लैट में भी हो सकता है जहाँ पर ऑलरेडी कोई परिवार बरसों से रह रहा हूँ । वैसे ही राजनगर के पुलिस कमिश्नर खंड ने अपनी पुलिसफोर्स को यही हिदायत दी थी की तलाशी के दौरान आम नागरिकों को डिस्टर्ब किया जाए । पर हर खाली फ्लैट या नये नये लिए गए फ्लैट्स की अच्छी तरह से तलाशी की जाए । आखिर वो खुद भी जुबैद अंसारी के साथ देवराज ठाकुर के ऊपर किए गए हमले के षड्यंत्र में शामिल था । इसी बात का फायदा उठाया था कार्लोस नहीं । उसने पहले प्रोफेसर रामना मूर्ति की जवान बेटी को किडनैप किया था और फिर उसके बलात्कार और हत्या की धमकी देकर उसका रिश्तेदार बनकर उसके घर पर बडे आराम से कब्जा जमाया हुआ था । अब वो अपना काम खत्म करके बडे आराम से अपना सामान समेटकर वहाँ से ऐसे रवाना हो रहा था जैसे कुछ हुआ ही न हो । फ्लाइट से निकलते निकलते उसने प्रोफेसर राम णमूर्ति को जरूर आश्वस्त किया था कि जैसे ही वो अपने ठिकाने पर पहुंच जाएगा उसके एक घंटे के अंदर उसकी बेटी भी बिल्कुल सही सलामत उसके पास आ जाएगी । फिर वो लिफ्ट में सवार होकर बेसमेंट में बने हुए पार्किंग एरिया में पहुंचा जहां पर उसकी इसको र्थियों खडी हुई थी । उसने स्कॉर्पियो का पिछला गेट खोलकर आपने राइफल वाला सूटकेस वहाँ पर रखा और फिर ड्राइविंग सीट पर आ कर बैठ गया और गाडी स्टार्ट की । फिर वो अपने गंतव्य की तरफ रवाना होने लगा । जैसे ही उसकी गाडी उस बिल्डिंग से बाहर निकली दूसरी तरफ से भागता हुआ इसी भी विपुल वहाँ पर पहुंच चुका था । उसने जैसे कारणों उसको पहचान लिया था । उसने अपना रिवॉल्वर निकालकर कार्लोस की गाडी का निशाना बनाना चाहा पर तब तक उसकी गाडी इसके रिवॉल्वर की रेंज से बाहर हो चुकी थी । उसने तुरंत अपना मोबाइल निकाला और एक फोन नंबर में लाकर कुछ निर्देश देने लगा । थोडी देर बाद फिर से वो वापस मैदान में आ गया जहाँ पर पहले जैसा ही माहौल था । डेड को इस बात का बिल्कुल भी एहसास नहीं था कि एक बहुत बडी घटना हो चुकी है । सवा शुरू होने से काफी देर पहले ही अनिल अजित और अजगर रामलीला मैदान में आ गए । उनके साथ ही सिविल ड्रेस में इंस्पेक्टर धीरज भी था । अनिल, अजीत और इंस्पेक्टर धीरज मैदान के ज्यादा अंदर जाने के बजाय तीनों प्रवेश द्वारों के नजदीकी खडे थे । एक तो मैदान में कहीं और जाने पर उन्हें बैठना पडता है जिससे वो आसपास नजर नहीं रख सकते थे । दूसरा उन्हें मालूम था कि हमला मैदान से नहीं बल्कि बाहर से होने वाला था । यही वजह थी कि वो तीनों अलग अलग थे और वो लोग मैदान में प्रवेश करने के मैदान के आस पास घडी इमारतों पर नजर डाल रहे थे और उस जगह का अंदाजा लगाने की कोशिश कर रहे थे जहां से कार्लोस देवराज ठाकुर को निशाना बनाने वाला था । वहीं पर अगर सबसे पहले पहुंचा था और सभा की आगे की पंक्तियों में बैठा हुआ था । उसका काम था जो वैद अंसारी, देवराज ठाकुर कमिश्नर सिन्हा की एक्टिविटीज पर नजर रखना । साथ ही मंच के पास कोई दूसरा संदिग्ध व्यक्ति हो तो उसकी भी पहचान करनी थी । वैसे तो हजारों लाखों की भीड में से एक इंसान को पहचानना बहुत ज्यादा मुश्किल मुश्किल गया, बिल्कुल असंभव था । फिर भी वो लोग उस असंभव काम को संभव करने की कोशिश में लगे हुए थे । रवि तक उन में से कोई भी अपनी इस कोशिश में कामयाब नहीं हो पाया था । वैसे कोशिश तो वो लोग पिछले तीन दिनों से लगातार कर रहे थे पर उनकी वह कोशिश भी सफल नहीं हो पाई थी । आखिर उन्होंने भूसे के ढेर से एक छोटी सी सुई तलाश करनी थी । वो भी बिना किसी चुंबक की सहायता कर । अंत में वही हुआ जिसका डर था । कार्लोस ने आखिरकार अपना निशाना बना लिया था । ये अलग बात थी कि उसका निशाना देवराज ठाकुर के बजाय जुबैद अंसारी बन गया था । गोली लगने के बाद उन्होंने कार्लोस की स्थिति जानने के लिए इधर उधर नजरें दौडाई नहीं थी पर उन्हें वो बिल्डिंग नजर नहीं आई थी जहां से कार्ड तो उसने अपना निशाना बनाया था । उधर अजगर की नजरें शुरू से मंच पर मौजूद नेताओं और उसके आसपास घूमते हुए कमिश्नर पर ही थी । जब जुबैर अंसारी नीचे गिर पडा था तो वो समझ गया था कि कार्लोस की गोली नहीं उसे अपना निशाना बना दिया । उसकी नजरों ने कमिश्नर मिश्रा का पीछा किया तो पाया कमिश्नर मिश्रा एक तरफ देखकर जाने की कोशिश कर रहा है । उसने देखा एसीपी विपुल एक तरफ तेजी से वीआईपी गेट की तरफ बढा जा रहा है तो तुरंत समझ गया । उसने अपना मोबाइल निकाला और अपने दोस्तों और इंस्पेक्टर धीरज को इस बारे में मैसेज किया और साथ ही वह भी साउथगेट की तरफ चलते हैं जो वीआईपी गेट के सबसे नजदीक वाला आमगे था । जब तक वो गेट से बाहर निकल जब तक वो गेट से बाहर निकलता तब तक विपुल की परछाई भी गायब हो चुकी थी और उस गेट पर मौजूद इंस्पेक्टर धीरज भी वहाँ नहीं था । थोडी देर बाद उसे निराज भाव से धीरज लौटते हुए नहीं लगाया । उसके बाद उसने अनिल और अजीत को मैसेज किया और फिर वो लोग घर की तरफ रवाना हो गया । एक घंटे बाद सभा भी समाप्त हो गई । सभा समाप्त होने के लगभग आधे घंटे बाद बुलेटिन जारी हुई कि जुबैर अंसारी की गोली लगने की वजह से मृत्यु हो गई है । तब जाकर शहर के लोगों को पता चला कि जुबैर अंसारी को सभा में आज अटैक नहीं आया था बल्कि उन्हें गोली लगी थी । पूरे शहर में खबर सुनते ही जहां लोगों ने पुलिस और प्रशासन की तारीफ की उन्होंने स्थिति को बडे अच्छे तरीके से संभाला वरना लाखों लोगों की भीड में अगर इस बात का पता चलता तो भगदड मचने के पूरे चांसेज थे जिससे मैं जाने कितना जानमाल का नुकसान होता । पर इसके बावजूद ये खबर बाहर आते ही जुबैर अंसारी के समर्थक भडक उठे थे और उन्होंने शहर को जलाने की कोशिश शुरू कर दी पर पुलिस और प्रशासन को क्योंकि इसके बारे में पहले से ही अनुमान था इसलिए उन्होंने ऐसी किसी भी परिस्थिति को रोकने के लिए तगडा इंतजाम किया हुआ था जिसकी वजह से फिलहाल तो शहर जल जाने से बच गया था । शाम के लगभग सात बज रहे थे । कार्लोस अपनी माशूक शबनम के मालवीय नगर वाले अपार्टमेंट में अपना लेपटॉप खोलकर बैठा हुआ था और अपना स्विस अकाउंट चेक कर रहा था । अपने अकाउंट को देखकर उसके चेहरे पर झुंझलाहट के भाव आ रहे थे । साला अभी तक पैसा जमा नहीं हुआ लगता है उसे फोन करना ही पडेगा । कहीं उसके मन में कोई बेईमानी तो नहीं आ गयी । वो मन ही मन बडबडाते हुए बोला । उसने अपना मोबाइल फोन निकाला और एक नंबर डायल करने लगा । घंटे की आवाज जाने लगी और फिर घंटी बजकर बंद हो गए । हो सकता है वहाँ भी कहीं पर बिजी हो । थोडी देर बाद कॉल फिर करता हूँ । सोचते हुए उसने अपना मोबाइल फोन रख दिया और फिर वो रसोई में जाकर एक गिलास फ्रिज से आइस निकालकर सेंटर टेबल पर लाकर रख दिया । फिर वही टेबल के साइड में लगी हुई मेज की दराज को खोला और उसमें से विस्की की बॉटल को अपने कब्जे में क्या दो तल को खोलकर विस्की ग्लास में डालकर एक लार्ज पैक बनाया और फिर धीरे धीरे से मारता हुआ वो विस्की का अंदर नहीं नहीं लगा । अभी शराब पीते हुए उसे पांच सात मिनट ही हुए थे कि तभी उसके फ्लाइट की घंटी बज गए । साला इस वक्त कौन आ गया? बडबडाते हुए वो उठा और जाकर बडे ही लापरवाही से गेट खोल गेट खोलते ही आगंतुक पर नजर पडते ही उसके होश उड गए । आगंतुक ऐसी भी विपुल था जिसने अपना सर्विस रिवॉल्वर उसकी तरफ तानकर रखा हुआ था । कारणों से जल्दी से फ्लाइट का गेट बंद करना चाहता पर एसीपी विपुल ने तुरंत अपना एक पैर गेट के आगे लगाया और एक हादसे कार्लोस को एक जोरदार धक्का । कार्लोस सीधा अंदर फर्ज पर बचे हुए कारपेट पर जा गिरा तो लंदन आया एट को अपने पैर से धक्का मारकर भिडाकर बंद किया और कमरे में चारों तरफ अपनी नजर दौडाएं हो तो कत्ल करने के बाद पार्टी हो रही जश्न मनाया जा रहा है । टेबल पर रखी हुई खुली शराब की बोतल और गिलास में आदि भरी हुई विस्की को देखकर उसने व्यंग से कहा हम जगत किसका? कार्लोस ने उठने की कोशिश करते हुए पूछा, वहाँ मेरे भोले बलम कुछ तो ऐसे राय जैसे कुछ पता ही नहीं है । विपुल ने व्यंग से कहा, सर, मुझे वास्तव में नहीं बताया । आप किस का दिल की बात कर रहे हैं? कारणों से जवाब दिया, जब तूने कोई दिक्कत नहीं किया तो फिर बेटे मुझे देखकर दरवाजा बंद कर रहा था । साल में वह तो आपको देखकर में एकदम से डर गया था । कार्लोस ने हकलाते हुए ब्लॅक नहीं तो मैं कोई दाल, आने वाली चीज और ना ही तू कोई इतनी आसानी से डरने वाली चीज है । विपुल ने मुस्कुराते हुए कहा । उसकी बात सुनकर काॅल तुमने मुझे कैसे पहचाना और तुम यहाँ तक कैसे पहुंचे? अरे वाह! अभी तो बडे बोले, वल्गर पूछ रहे थे और अपना नाम लेते हो गए । मैंने तो मैं कैसे पहचाना? यहाँ तक? कैसे पहुंचा ये बहुत । अब ऊपर जाकर सोचना कहते हुए विपुल ने अपनी रिवाल्वर का घोडा खींचा । पर इससे पहले की वह ट्रिगर दबा पाता । तभी गेट खोलने की आवाज आई । विपुल ने पीछे मुडकर देखा तो पाया राजनगर पुलिस कमिश्नर मिश्रा सिविल ड्रेस ले अंदर प्रवेश कर रहा था । सर आप यहाँ विपुल ने कमिश्नर मिश्रा को देखते ही कहा हाँ मैं तुम यहाँ क्या कर रहे हो? कमिश्नर ने पूछा सर मैं तो यहाँ पर कार्लो उसको गिरफ्तार करने आया था । ये वही है जिसने देवराज ठाकुर की पत्नी की हत्या की थी और और आज दोपहर रामलीला मैदान में जुबैर अंसारी की गोली मारकर हत्या भी किसी ने की थी । विपुल ने जवाब दिया तो फिर से गिरफ्तार क्या कर रहे हो? इतने बडे हत्यारे को तो यही पर खत्म कर देना चाहिए । कहते हुए कमिश्नर मिश्रा ने अपना सर्विस रिवॉल्वर निकालकर कार्लोस को निशाना बनाना चाहा पर अगले ही पल चौक गया । उधर एसीबी विपुल कमिश्नर मिश्रा से बात कर रहा था । इधर अपनी तरफ से उनका ध्यान हटता हुआ पाकर कार्ड तो उसने एक तरफ छलांग लगाई और साइड टेबल में रखे हुए अपनी रिवॉल्वर को अपने कब्जे में नहीं । और इससे पहले कि कमिश्नर उसे अपनी गोली का निशाना बना पाता, कार्लोस के लिए सॉल्वर से निकली हुई गोली सीधा उसके सीने में आ कर आए । उसके हाथ से रिवॉल्वर निकल कर नीचे फर्श पर जा गिरा और अगले ही पल वह भी नीचे ढेर पडा था । मरते वक्त उसकी आंखों में कार दो उसके निशाने को लेकर राष्ट्रीय विभाग थे और अंतिम समय में उसके मन में यही खाया ला रहा था कि आखिर इसका निशाना पिछले दो बार से कैसे चूक गया । शायद उसके निशाने से भी ज्यादा उस देवराज की किस्मत थीं । कमिश्नर को अपनी गोली का निशाना बनाने के बाद कार्लो उसने एसीपी विपुल को अपने निशाना बनाना चाहते हैं और तभी फ्लाइट के मुख्य दरवाजे से फिर से कोई आहट आई । इधर कारणों उसका ध्यान एक पल के लिए विपुल से भटका । उधर विपुल ने अपनी सर्विस रिवाल्वर से कार्लोस को निशाना बनाया । गोली सीधे उसके सीने में जाना चाहिए । वो नीचे फर्श पर ढेर हो गया और उसके हाथ से उसका रिवाल्वर छिटक कर दूर जा गिरा । विपुल की नजरें कार्लोस से फिर कर वापस से दरवाजे की तरफ आई । वहाँ से कोई प्रवेश कर रहा था । उसने सावधानी से अपनी रिवाल्वर पर पकट बना ली । दरवाजे से धीरज और वह तीनों दोस्त सावधानी से प्रवेश कर रहे हैं । धीरज के हाथों में उसकी सर्विस रिवाल्वर थी । विपुल धीरज को देखते ही बुरी तरह से चौकिया तो तो शायद इंस्पेक्टर भेजा, जो पीपुल ने कहा हासिल में धीरे जी हूँ । धीरज ने जवाब दिया, पर सर ये आपने क्या किया और कमिश्नर साहब को क्या हुआ? नीरज ने कमरे का न ज्यादा करते हुए आगे पहुँचा हूँ । अच्छा हुआ मर गया कमिश्नर साला कुत्ते की हालत अनिल नाॅन कमिश्नर के इलाज को देखते हुए नफरत सिखा ये कार्लोस है । विपुल ने कहा तो उसकी तरफ निशाना करते हुए कहा इस नहीं कमिश्नर साहब की हत्या की है और दिन में जुबैर अंसारी की गोली मारकर हत्या करने वाला भी यही है । इतना ही नहीं कुछ दिनों पहले देवराज ठाकुर के घर पर हमला करके उनकी धर्म पत्नी की हत्या करने वाला भी यही है । वो सब हम जानते हैं । घर पर आपको इसे जिंदा गिरफ्तार करना चाहिए था । हमने इसे जिंदा ही गिरफ्तार करने की कोशिश की थी । अर्जुन देखी रहे, इसमें कमिश्नर साहब गोली मार दी और अगर मैं ऐसे नहीं मारता तो इसकी जगह कमिश्नर साहब के बगल में मैं भी यहीं पर मारा हुआ है । परिवार तुम कैसे जानते हैं? ये कार दोस्त है और यही मुँह ठाकुर ॅ सर, हम ये इसलिए जानते हैं क्योंकि ये चक्रव्यू जिसने रचा है हम उसे अच्छी तरह से जानते हैं । आप भी उसके चक्रव्यू का एक हिस्सा है और होने वाला शिकार हो । उसके खिलाफ पुख्ता सबूत के लिए ही हमें इसे जिंदा गिरफ्तार करना था । पर आपने इसे मारकर सब खत्म कर दिया । कैसा चक्कर भी हो तुम केस चकरियों की बात कर रहे हैं और ये बताओ तुम्हारे साथ ही लोगों ने । एसीपी विपुल ने उसके साथ उन तीनों दोस्तों को देखकर पूछा, सारी इसका नाम अनिल है । ये अजीत और ये अगर है और इन तीनों की वजह से ही मैं स्टाॅल का पता लगा पाया हूँ और कार्लोस के मरने से सब गडबड हो । धीरज ने जवाब दिया, पर आखिर तुम किस चकरियों की बात कर रहा हूँ । मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है । विपुल ने फिर से पूछे सुनी ऐसा कहते हुए धीरज ने उसे सारी की सारी बात बतानी शुरू की । जैसे जैसे धीरज बोलता गया, वैसे वैसे एनसीपी विपुल के चेहरे का रंग उडता गया । उसको ऐसा लग रहा था जैसे उसकी पोल खुल रही हूँ । धीरज की बात खत्म होने के कुछ पलों तक उसके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला । आखिरकार किसी तरह उसने पूछा तो तुम सही कह रहे हो । ऐसा सारा घटनाक्रम जोड कर तो अब तक आपको भी विश्वास हो जाना चाहिए था । फॅस हम कुछ भी नहीं कर सकते, कर लो । उसके इलाज पर नजर डालते हुए धीरज ने अफसोस भरे स्वर में कहा नहीं सर, हम अभी भी ये काम कर सकते हैं । इतनी देर से शांत खडे हैं मिलने का क्या? धीरज ने पूछा सर कहते हुए ऍन बताया तो तुम्हारा काफी अच्छा । धीरज ने कहा नहीं ये बिल्कुल नहीं चलेगा । विपुल ने कहा सर मैं जानता हूँ । ऍम अल करते हैं तो आपकी नौकरी पर भी आ जा सकते हैं । पर सर यकीन मानी फिर आप अभी भी हम पर विश्वास नहीं कर रहे हैं और ऐसा नहीं करेंगे तो आपकी जान जानी जानी है क्योंकि अब एक आप ही हो जो उसके राजदार हो धीरज ने का । पर रिपुल ने कहना चाहा पर उससे पहले ही धीरज बोल रहा हूँ तो सर इसके अलावा आपके पास और कोई रास्ता नहीं है । हाँ, अगर आपको जान देने का शौक है तो कोई बात नहीं । हम लोग तो कोई दूसरा रास्ता निकाल लेंगे उससे निपटने के लिए । अगर आप हमारा साथ देते हैं तो आपके आज तक के सब गुना माफ हो जाएंगे । हम से कम । हाँ बगल इस तरह से आप मरते भी हो, दिल में एक स्कूल तो रहेगा । आपके ठीक है जैसे तुम का हो । मेरे लिए तो एक तरफ हुआ और मेरे लिए तो एक तरफ हुआ और दूसरी तरफ खाई है । रिपुल ने गहरी सांस लेकर कहा सर मुझे बीच में बोलना तो नहीं चाहिए पर फिर भी बोलने की हिम्मत कर रहा हूँ । ऐसे छोटा मोहर बडी बात समझ करी माफ कर दी जाएगी । गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि तू जैसा कर्म करेगा वैसा फल मिलेगा । फिर आप इतना डर किस बात से रहे हैं । वैसे भी ये बात तो आपको समय सोचनी चाहिए थी जब आपने स् वर्दी से गद्दारी करने की सोची थी और एक कदम उठाया था । अब आप चाहे महीने या ना माने आपके पास इसके अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं है और अगर आप इस प्लैन पर चलते हो हो सकता है इस से शायद भगवान के साथ साथ आपको कानून भी माफ कर दे और दूसरे रास्ते पर चलने से तो आपको भगवान भी नहीं बचा पाएगा । अनिल ने बीच में बोलते हुए कहा तुम शायद सही कह रहे हैं । बेशुमार दौलत कमाने की चाहत और उच्च पद पाने की लालसा ने हमें गलत रास्ते पर चलने के लिए मजबूर कर दिया । अब और नहीं हम तुम्हारे बताए ऑनलाइन के अनुसार ही काम करेंगे । भले ही कानून हमें माफ करें या नहीं करें । हो सकता है इस तरह से हमारे पास कुछ काम हो जाए और वहाँ ऊपर जाकर ईश्वर का सामना कर सकें । एसीपी विपुल ने गहरी सांस लेते हुए कहा, ये बात तुम लोगों पर भी लागू होती है । धीरज ने मुस्कुराते हुए उन तीनों से कहा, क्या मतलब तुलने चौंकते हुए गा, कुछ नहीं आॅल्टर को फोन करके यहाँ के बारे में बताता हूँ और तुम तीनों अब यहाँ से निकलो । अब तुम्हारा यहाँ कोई काम नहीं है । धीरज ने उन तीनों से कहा, सही ॅ, सारी मेहनत हम लोगों ने की । ॅ आप लोग लेकर जाऊंगा । अजीत ने कहा और नहीं तो क्या ही? हम लोगों ने बताई और आप लोग गए । अगर ने भी अजीत के सुर में सुर मिलाया थी गया तो ऐसा करो । ये खीर तुमलोग खा लो । मैं पुलिस हेड क्वार्टर के साथ साथ मीडिया को भी फोन करके ही बुला लेता हूँ और उनसे कह दूँ, कीश्री देवराज ठाकुर के घर पर हमला करके उनकी पत्नी की हत्या करने वाला और राष्ट्रीय आवाम पार्टी के अध्यक्ष श्री जुबैर अंसारी की हत्या करने वाला शख्स कार्लोस है, जिसे तुम लोगों की वजह से पुलिस ने मार गिराया । धीरज ने मुस्कुराते था कर रहे थे और आॅफ हो गए । अजीत बौखलाकर और नहीं तो क्या? एक ही रात कोई दोबारा को बंदे तो चले अपने रास्ते । अजगर ने भी कहा उनकी इन हरकत पर धीरज ठहाका मारकर फस पडा है । एक मिनट तबियत मिलने का क्या हुआ? सब ने अनिल से पूछा पर उसने कोई जवाब नहीं दिया तो सीधा उस तरफ गया जिस तरफ कार्लोस की लाश पडी हुई थी । उसने लाश के पास गिरे हुए कार्लोस की रिवॉल्वर को एक रुमाल की सहायता से इस तरह से बडी ही सावधानी से उठाया जाए । उसके निशान नाम इंटरने पा रहें और फिर कमिश्नर मिश्रा की लाश के सीने पर दो गोलियां और धागे । उसके बाद उस रिवाल्वर को उसने जहाँ से उठाया था वहीं पर वापस रखते हैं । ये क्या क्या तुमने ऍम अनिल ने जवाब देने की कोई कोशिश नहीं सर जाने दीजिए, आपको सब बताता हूँ । धीरज ने कहा और उन तीनों को वहाँ से जाने का इशारा किया । तीनों दोस्त वहां से रवाना हो गए । उनके जाने के बाद धीरज ने पुलिस हैड क्वाटर्स फोन करके पुलिस टीम को बुला लिया । थोडी देर बाद ही मीडिया के द्वारा पूरे शहर और देश में ये बात फैल गई कि देवराज ठाकुर की पत्नी और जुबैर अंसारी के हत्यारे को पुलिस में मार गिराया है । अगले दिन देवराज ठाकुर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और अपना बयान दिया । देश पर राज करने वाले कुछ पार्टियां नहीं चाहती । इस प्रदेश के हिंदू और मुस्लिम मिल कर रहे हैं । साथ में मिलकर विकाश करें इसलिए उन्होंने साजिश रचकर हम लोगों पर मंच पर हमला करवाया । जिससे मैं तो किसी तरह बच गया । पर दुर्भाग्य से राष्ट्रीय आवाम पार्टी के महान नेता छिडी जुबैद अंसारी की हत्या हो गए । लोगों ने इसका भी इंतजाम किया था । हमारी हत्या होते ही मैदान में दंगा भडक उठे । पुलिस और प्रशासन की सजगता से ये हादसा होने से बच गए । आज मैं उन विघटनकारी ताकतों को बता देना चाहता हूँ की उनके इस प्रकार से विनाश कार्य कृत्य से मैं डर कर चुप नहीं बैठने वाला । ऍन सारी जन्नत सुधर गए तो क्या हुआ उन का मेरे साथ देखा हुआ सपना जरूर पूरा होगा । मेरी पार्टी और आवाम पार्टी का गठबंधन इसी प्रकार से जारी रहेगा । आने वाले चुनावों में हम दोनों पार्टियां बराबर बराबर सीट पर चुनाव लडेंगे । मुझे पूरी पूरी उम्मीद है इस प्रदेश की जनता हिंदी एक जानकारी तत्वों से लडने में हमारा साथ जरूर देगी और हमारी पार्टियों को भारी बहुमत से विजयी बनाएगी और हम मिलकर सरकार बनाएंगे । इस तरह से हम श्री जुबैर अंसारी के उन सपनों को पूरा कर पाएंगे जो हम लोगों ने मिलकर देखे थे । यही हमारी श्री जुबैर अंसारी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी । जय हिंद कहकर उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म

Part 8: अध्याय 11

अध्याय ग्यारह उसी शाम को आठ बजे देवराज ठाकुर के राजनगर हाउसिंग बोर्ड वाले घर पर देवराज ठाकुर और जुबैर अंसारी का दायां हाथ रजाक एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे । उनके सामने विदेशी शराब की बोतल रखी हुई थी । दोनों ने अपने हाथों में उसका एक्जाम पकडा हुआ था । उनके सामने हाथ बांधे हुए एसीपी विपुल अपनी वर्दी में खडा था । चेयर्स उन दोनों में अपने अपने गिलास एक दूसरे के गिलास से टकराता । उन दोनों ने अपने अपने गिलास एक दूसरे के खिलाफ से टकराते हुए कहा आबाई बैठे हमारे साथ ऐसे हाथ बांधे क्यों खडा है? देवराज ठाकुर में बडे ही प्यार से विपुल से कहा नहीं सर, मैं ऐसे ही थी को विपुल ने जवाब दिया । इस समय उसके चेहरे पर गंभीरता छाई हुई थी और का पुलिस वाला है । ड्यूटी के टाइम पर नहीं पीता होगा । क्यों सही कहा ना मैंने? रजाक ने पूछा । विपुल ने उसके सवाल का कोई जवाब देने की कोशिश नहीं की । नहीं उसके चेहरे पर कोई भाव आ रहे थे । कोई न हम दोनों ही बहुत अपनी सक्सेस मनाने के लिए । वैसे भी कुत्तों को कभी भी अपनी बगल में नहीं बैठाना चाहिए । कई पेशाब नगर दें । देवराज ने हंसते हुए कहा हूँ ये सही कहा आपने पहले अपनी इस सफलता में आज तो इस कुत्ते का भी है । अगर ये कुत्ता नहीं होता तो हम अपनी अगर ये कुत्ता नहीं होता तो हम इतनी आसानी से सफल नहीं हो पाते । रजाक ने फंसी में उसका साथ दिया यू आर राइट । कोई ना कुत्ते को उसके हिस्से की हड्डी मिल जाएगी और मेरा मुख्यमंत्री बनने का सपना भी पूरा हो जाएगा । देवराज ठाकुर ने कहा, आपके सपने को पूरा करने में मेरे योगदान को भूल में जाना देवराजी मैंने भी बहुत साथ दिया है आपका । रज्जाक ने कहा, जब तुम ने ये बात मुझे बताया कि कार्लोस मुझ पर हमला करने वाला है, ये बात कुछ और लोगों को भी पता चल गई हो सकती है । तो ये सुनकर एक पल के लिए तो मैं भी घबरा गया था । मुझे लगा कहीं ऐसा ना हो कि उन लोगों की वजह से कार दो, उसका मेरे घर पर हमला करने का प्लान अधूरा रह जाए । आखिर बिना किसी कॉन्ट्रैक्ट के कार्लोज हमला कैसे करता और दूसरा गई उन लोगों की वजह से उन लोगों का हमला नाकाम ना हो जाए । पर शुक्र है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । कार्लोस मैंने घर पर हमला करने में सफल रहा जिसमें मेरी धर्मपत्नी को कुर्बान होना पडा । देवराज ठाकुर नहीं उसकी बात आगे बढाई और जब टीवी पर जो मैंने ये खबर सुनी की आपके घर पर जानलेवा हमला हुआ है तो उसकी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा । पाॅलिस की खुशी काफूर हो गई । जब उसे पता चला कि उस हमले में आप के बजाय आपकी पत्नी की मौत हुई है, उस साले को बहुत अफसोस हो रहा था । आपकी बच निकलेगा ऊपर से उसी समय जब कमिश्नर मिश्रा का फोन आया कि आप के घर पर हमला करने वाले हमलावर का स्कैच सामने आ गया है तो और भी ज्यादा परेशान हो गया था । उधर मैं नहीं मन मैं उसकी परेशानी का आनंद ले रहा था और ऊपर से उसे दिलासा दे रहा था कि जब भी हो जाएगा कमिश्नर ने इस कैच मीडिया में देने के बजाय अपने पास ही रखा था । जिसकी वजह से उसके चेहरे से परेशानी के निशान रहते थे । अब उसके लिए परेशानी वाली बात सिर्फ एक ही थी कि कहीं वो लोग आपको खत्म करने से पहले ही कार्लोस का पर्दाफाश न कर दें जिन्होंने अहमद को लूटकर ब्रीफकेस सुनाया था । इसके लिए उसने कमिश्नर को इस बात का इंतजाम करने के लिए पाबंद किया कि वह कुछ ऐसा इंतजाम कर रहे जिससे देवराज ठाकुर के घर पर हमला करने वाले का अगर किसी के पास कुछ भी सबूत हैं तो वो कहीं किसी पुलिस स्टेशन में जाने के बजाय सीधा पुलिस कमिश्नर के पास ही है । और फिर यही हुआ । अभी कमिश्नर ने लोगों से पुलिस हेडक्वार्टर फोन करने की अपील की जिस पर हो पुलिस कमिश्नर उनकी बात सुनी अब वाला पुलिस कमिश्नर अगर खुद किसी की बात करेगा उस पर कौन विश्वास नहीं करेगा । इसीलिए उन लोगों ने पुलिस कमिश्नर से संपर्क और जुबैर के पहन के हिसाब से उन लोगों को ऐसी जगह पर बुलाया है जहाँ पर उसके आदमी उनको खत्म कर सके । पर अचानक वहाँ पर कुछ दूसरे लोग पहुंच गए । उन्होंने उन लोगों को जो बहन के आदमियों से बचा लिया । मजाक नहीं और वो सब हुआ मेरे जाबाज ऑफिसर की वजह से । देवराज ठाकुर में विपुल की तरह बिचारा करते थे मजाक फॅमिली हालांकि तुम्हारी वजह से मुझे जो वैद अंसारी की हर मोमेंट के खबर मिलती नहीं थी भी कहीं कमिश्नर कोई अलग ऍम ये जानने के लिए मुझे इसका ज्यादा लेना पडा । जब इसमें पहली बार कमिश्नर की बात सुनकर मुझे फोन करके बताया कि मेरे घर पर हुए हमले और मेरी पत्नी की हत्या के विमॅन सारी कहा और कमिश्नर भी उससे मिला हुआ है तो एक पल के लिए तो मैं क्लास आ गया था । मुझे लगा कहीं मेरा प्लाॅन फेल हो जाए । पर इस की बातों से मुझे लग गया था कि ये कमिश्नर और जो बगैर के खिलाफ को एक्शन लेने से पहले मेरी कृपा पाना चाहता है । वरना ये बात मुझे बताने के बजाय मुख्यमंत्री को बता कर उनके खिलाफ एक्शन लेता हूँ । बस मैंने उसी समय जैसे आपने प्लैन में शामिल करने का फैसला कर और कमिश्नर पर नजर रखने का काम । इसमें ही मुझे पता चला है कि जो ऍम को खत्म करने की प्लानिंग कर रहा है । देवराज ठाकुर में मुस्कुराते हाँ मैं उसके बारे में आपको इसलिए इन्फॉर्म नहीं कर पाया था क्योंकि उस वक्त में हर समय जुबैर के साथ ही था और मुझे आपको फोन करने का बिल्कुल भी टाइम नहीं मिल पाया था । डाॅन यही सोच कर तो मैंने इसे अपने साथ मिलाया था । इसके इन्फॉर्मेशन से जब मुझे पता चला कि जुबैर उन चोरों को खत्म करने की प्लानिंग कर रहा था तो मैंने उन को बचाने के निश्चय किया । इसलिए नहीं कि मुझे उन्हें बचाने में कोई इंट्रेस्ट था या उन पर कोई दया रही थी । उनको बजाने का उद्देश्य से यही था की बाद में अगर कभी जरूरत पडे लोग मेरे पक्ष में खडे हो सके । इसलिए जब जो बैठे रहे उन्हें खत्म करने के लिए अपने आदमी भेजे थे । मैंने लोगों को बचाने के लिए अपने आदमी भेज दिए । मैं चाहता था वो सुपारी वाली चिट्ठी दोपहर के आदमी के हाथ ना लगे हो नहीं पाया । फिर मुख्य उद्देश्य तो उन लोगों को बचाना था जिसमें मेरे आदमी सफल रहे । देवराज नहीं इसकी बात आगे हाँ, उस साले अंसारी को बहुत अफसोस हुआ था उन लोगों के बच जाने का अपनी किस्मत को कोस रहा था । पहले आपकी जानवर गए फिर वो लोग भी बच गए । उसके बाद मेरा मुख्य प्लैन शुरू हुआ आपने प्लैन के अंतर्गत मैंने अपनी पार्टी की मीटिंग बुलाई जिसमें अपनी पत्नी की हत्या के बारें जुबैर अंसारी की पार्टी से गठबंधन की बात कही । पहले तो मेरे वो लोग मेरी बात सुनकर चौंक गए और जब मैंने इमोशनल होकर का इस तरह हम लोग ज्यादा कामयाब हो सकता । ज्यादा सीट पास तो मान गए और आखिर मानते कहते नहीं । सत्ता की मलाई आखिर की जगह अच्छी नहीं लगती । फॅस करके मैंने जुबैर को अपनी पार्टी के साथ और हाथ मिलाने के लिए कहा । मुझे मालूम था हालत ऐसे बंद पडे हैं वो बिल्कुल मना नहीं कर पाएगा । हाँ, जब उसने आपकी प्रेस कॉन्फ्रेंस टीवी पर आपकी पार्टी के साथ अपनी पार्टी के गठबंधन की अपील करते हुए सुना तो बेचारा कंफ्यूज हो गया कि आखिर आप चाहते क्या हो? ज्यादा बडी दुविधा में फस गया था कि क्या करें अगर वहाँ आप से गठबंधन करने से मना करता । जनता में यह संदेश जाना था कि वो सिर्फ हिंदू मुस्लिम की राजनीति करता है । दूसरी तरफ बोलने पर उसको लग रहा था जैसे आप उसके लिए कोई जाल बिछाया । जाल फिर भी उस ने सोचा कि हाँ बोल देता हूँ । वैसे भी उसकी नजरों में आपको कौन सा ज्यादा जीना था । आखिरकार तो उसको उस ने आपके नाम की सुपारी दे जो रखी थी कहते हुए लद्दाख । लोग से वो ये नहीं जानता था कि ये सारा जाले उसकी हत्या के लिए बिछाया गया, फॅमिली नहीं उसकी जान लेने वाला था । इसलिए उसके साथ एक मंच साझा किया ताकि उनसे गोली नहीं, लोग यही समझे ताकि उसे गोली लगे । लोग यही समझे कि हत्यारा तो मुझे जाना बनाने वाला था, पर पहले की तरह उसका निशाना कोई और बन गया और हुआ भी आई । फॅसने जुबैर को अपनी गोली का निशाना बना ली । विचार अंतिम समय में उसे सोचने का मौका भी नहीं मिला होगा कि जो कार्लोस अंडरवर्ड में अर्जुन के नाम से मशहूर था, उसके बारे में ये कहावत मशहूर थी वहाँ बंद करके भी वृत्ति चिडिया को ले जाना बना सकता है । उसका निशाना आज तक नहीं चूका । मेरा निशाना लेने में आखिर कैसे छूट गया? लोगों ने भी आॅखो गोली मेरे लिए गलती से जो वैद अंसारी निशाना बाल कहते हुए देवराज ठाकुर ने होटल ऍम और आपका प्लान सफल हो गया । खत्म हो गया साला कुत्ता सुगर क्या जब गुंडा बोल रहा है हूँ? बोल रहा था कि मैं राजनीति में आकर क्या करूँ? अब दो लाख में बैठकर देखकर दहाडे मार मार कर रो रहा होगा । मैं उसकी पार्टी का चीज बन गया । इस प्रदेश का अगला उपमुख्यमंत्री उसकी बात सुनकर देवराज खाते हैं उसको और तुम भी चिंता मत करो । तुम राजनगर के अगले पुलिस कमिश्नर बंद हो गया । अगर तुमने नेताजी की इतनी मदद की है । इस साजिश को सफल बनाने में बिल्कुल की तरफ देखते हुए रज्जाक ने अपनी बात आगे बढाते । उसकी बात सुनकर भी विपुल के चेहरे पर कोई भाव नहीं आ रहे हैं और तुमने कार्लोस को क्यों खत्म किया और तुम्हें कैसे पता चला कि कार्लोस कहाँ पर मिलेगा? लाॅट ये बात उस से नहीं बल्कि मुझसे पूछे विपुल के बजाय देवराज ठाकुर आप से लाॅज हाँ, मुझसे पहले से बताया था कि कार्लो उसके ॅ जाना बनाने वाला । आखिर वो जगह मैं नहीं उसे बताएं और उसमें कहानी में रहने वाले ऑफिसर की स्थिति को मेरे आदमी ने अपने कब्जे में ले लिया । आखिर वो जगह मैंने उसे बताइए और उसमें कान में रहने वाले प्रोफेसर की पोती को मेरे आदमियों ने अपने कब्जे में लिया हुआ था । जबकि जुबैर को बोली लगाते ही उस तरफ भाग लेते हैं तो उसी समय कार्लोस को खत्म कर दिया । इसलिए जुबैर को गोली लगते ही है । उस तरफ भारतीय तो उसी समय कार्लोस को खत्म कर देता पर इसके वहाँ पर पहुंचने से पहले ही कार्लोज वहाँ से निकलता है । ऐसे ही किसी परिस्थिति के लिए मैंने अपने आदमियों को तैयार किया हुआ था । उसने तुरंत मेरे आदमी को फोन मिलाया और कार्लोस का पीछा करने के लिए कहा चाहता तो मैं अपने आदमी और सही कारणों उसको खत्म करवा देता था । पर मैं उसे पुलिस के हाथों ही खत्म करवाना चाहता था ताकि यही समझा जाए कि मेरी बीवी का हत्यारा और जुबैर अंसारी के कातिल को पुलिस ने मार गिराया है । मैंने इसलिए कार्लोस को अपने सामने वाली बिल्डिंग में फ्लैट लेने के लिए बोला था ताकि उसकी फोटो वहां के सीसीटीवी कैमरे में आ जाए ताकि बाद में उसे पहचानने में कोई प्रॉब्लम ना हो । पर उस समय एक तो कार्लोस मेकप में था और दूसरा कमिश्नर ने भी फोटो अपने पास ही रखे रखे । खैर उससे क्या फर्क पडता है वो कार्लोस की पहचान तो वैसे भी हो ही गई । हाँ तो मैं क्या कह रहा था? मेरे आदमियों ने गार्डो उसका पीछा करके उसका पता मालूम किया और उसको बता दिया । फिर उसी रात को इस ने उस जगह जाकर कार्लोस का एनकाउंटर किया और फिर पुलिस और मीडिया में हीरो बनकर उभरा इतनी जल्दी इसलिए जुबैर अंसारी की हत्या रहेगा । पता लगा लिया है जब सही कहा ना मैंने । देवराज ने विपुल की तरफ देखते हुए मुस्कुराकर कहा । उसकी बात सुनकर इस बार भी विपुल खामोशी रहा । पर वहाँ तो कमिश्नर की विलाज पाई गई थी । वो वहाँ पर कैसे पहुंच गया? जाॅन जैसे पूछा हूँ । अब कमिश्नर का बच्चा वहाँ पर कैसे पहुंचा, ये बात तो ये बताएगा क्यों? मैं कैसे पहुंच गया वहाँ पर देवराज ने भी पुल से पहुंचा । उसे मुझ पर शक हो गया था । मैंने उसके कैबिन में ट्रांसमीटर लगाया था जो उसने न जाने कैसे खोज लिया था । और फिर शायद जब उस दिन में कार्लोस को पकडने के लिए उस बिल्डिंग की तरफ भागा तो उसने मुझे देख लिया था । और जब मैं कार्लोस के ठिकाने पर जा रहा था तो उस ने मेरा पीछा किया होगा । इतनी देर से खामोश खडे विपुल ने जवाब दिया । फिर जो भी हो अखिलेश बहाने से मेरा एक और दुश्मन खाते हो गया । देवराज निकाल पर आपने आखिरकार लो उसको खत्म तो करवाया वो तो आपके कितने कम का आदमी था । आपके आगे और भी काम आ सकता था । ऍम रज्जाक ने पूछा हो सकता था पर उसने जुबैर अंसारी को मारकर मेरा सबसे बडा काम तो कर ही दिया था । फिर वो मेरा इस काम में राजदार था । उसे तो खत्म होना ही था और अब इस की बारी है कहते हुए देवराज ठाकुर ने बिना देर की है अपनी पॉकेट से पिस्टल निकाली और सीधा एसीपी विपुल को निशाना बनाते हुए दो गोलियाँ चला देंगे । गोलियां सीधे उसके सीने में लगी और वह नीचे गिर पडा । उसे गोली मारकर देवराज धीमे कदमों से उसकी तरफ जाने लगे । ये क्या किया अपने फॅमिली से पूछता हूँ वही जो मुझे करना चाहिए था । मैं नहीं चाहता कोई भविष्य में मुझे इस बात को लेकर ब्लैक मेल करता था । कहते हुए वो एसीपी विपुल के नजदीक पहुंचा । विपुल का शरीर बुरी तरह से घायल था और वो अपने सर्विस रिवॉल्वर को निकालने की कोशिश कर रहा था । देवराज ठाकुर ने उसका सर्विस रिवाल्वर उसके हाथ से चीनी और रजाक की तरफ उसका निशाना बनाते हुए बोला होगा, मेरा बंद में तुम्हारी बारी हमारे साथ ही मेरे सारे राजदार खत्म हो जाएंगे और मैं हर चिंता से मुक्त हो जाऊंगा । अपने आपको रिवॉल्वर का निशाना बना पाकर रजाक बौखला गया और घबराए स्वर में बोला नहीं देव राज्य मुझे मत मारी । मैंने आपकी इतनी मदद की है मदद और तुमने वो साले जो इंसान तो इस पर आप बोलकर विश्वास करता था तो उसका सगा नहीं हुआ तो अपने धर्म का सगा नहीं हुआ तो फिर बता मेरा कहाँ से होगा? देवराज कुटिल स्वर्ण बोला ये मेरे प्लैन का आखरी बार था । मैं तुझे इसके सर्विस रिवॉल्वर से गोली मारूंगा और जिस रिवॉल्वर से मैंने इसे गोली मारी है उस पर तेरी उंगलियों के निशान ले लूंगा । फिर बाद में पुलिस और मीडिया के सामने मैं ये बोलूंगा कि मुझे खत्म करने की सुपारी तुम नहीं कार्लोस को नहीं थी । उसके द्वारा किए गए पहले हमले में मेरी भी बीमारी गए और दूसरी बार भी उसका निशाना मेरी बजाय जुबैर अंसारी बन गया और तुमने मेरे नाम की सुपारी कारणों उसको इसलिए दी थी ये सब इसलिए किया था क्योंकि तुम मेरे द्वारा किए गए अपने धर्म के तथाकथित अपमान का बदला मुझसे लेना चाहते थे । कार्लोस के असफल होने पर अब तुम खुद मुझे खत्म करने के उद्देश्य से यहाँ आए थे और उससे पहले की तो मुझे निशाना बना पाते । मुझे बचाने के लिए ये बीच में आ गया और तुम्हारी चलाई गोलियों का निशाना बन गया और मरते मरते भी । इसलिए तो मैं खत्म कर दिया था । और फिर मैं देवराज ठाकुर धार्मिक सद्भाव के नाम दोनों पार्टियों का समर्थन आराम से हासिल कर के इस प्रदेश का मुख्यमंत्री बन जाऊंगा । अब मैं रखने जाकर आराम से दोपहर के साथ करते हैं क्या? कहते हुए उसने रज्जाक किसी ने पर गोलियां दाग दी । अपनी आंखों में आज जाने के भाग लिया । रज्जाक वही पर ढेर हो गया । फिर उसने वो सर्विस रिवाल्वर विपुल के शरीर के पास गिरा दिया और जिस पिस्टल से उसने विपुल को निशाना बनाया था उसको अपने हाथ में ले लिया । उसे रजाक के हाथ में देने जा रहा था कि तभी उसके आश्चर्य की कोई सीमा नहीं गई । उसके घर का गेट खोलकर आदमी कमांडोज की टीम उसके घर में प्रवेश कर रही थी जिनके साथ इंस्पेक्टर धीरज भी था । हमारा खेल खत्म हुआ देर राज्य इंस्पेक्टर धीरज ने चिल्लाकर का । इस सारे घटनाक्रम के दौरान विपुल अपने फेसबुक अकाउंट पर लाइव था, जहाँ पर देवराज ठाकुर अपना गुनाह कबूल कर रहा था की किस प्रकार उसने रजाक के साथ मिलकर सारी साजिश रची थी । अनिल ने उसे यही प्लान बताया था जिससे देवराज ठाकुर का पर्दाफाश हो सकता था । अनिल और धीरज ने सारे घटनाक्रम से ये अंदाजा लगा लिया था कि इस चक्रव्यू का मुख्य जीता देवराज ठाकुर रही है । अनिल ने इसी पी विपुल को देवराज ठाकुर के मकान में जाने से पहले बुलेट प्रूफ जैकेट पहन कर जाने के लिए कहा था । पंचायत उसे अपनी करने पर बहुत ज्यादा ही पछतावा हुआ था । उसने दुनिया को देवराज की सच्चाई बताने के साथ ही आत्मग्लानि की वजह से अपने आप को भी खत्म करने का फैसला कर दिया था । अपना फेसबुक अकाउंट उसने धीरज के साथ शेयर करते हुए कहा था, जहाँ से उसने लाइव टेलिकास्ट चला रखा था उसके बेस पर ही मुख्यमंत्री ने तुरंत एक्शन लेकर फोर्स भेजी थी और देवराज ठाकुर को गिरफ्तार किया था । देवराज ठाकुर ने अपने प्लैन के दौरान जिन चोरों का जिक्र किया था पुलिस ने उन्हें तलाश करने की बहुत कोशिश की पर उसकी वह कोशिश कामयाब नहीं हुई थी । इतने बडे घटनाक्रम को सुलझाने पर अखबारों के पहले पन्ने की सुर्खियों पर इंस्पेक्टर धीरज का ही नाम था और वो जानता था कि सफलता के असली हकदार वो तीन चोर ही थे । इंडियन राष्ट्रवादी पार्टी की कमान देवराज ठाकुर के बेटे ने संभाल ली थी और उसने राष्ट्रीय आवाम पार्टी के साथ गठबंधन जारी रखने का ही फैसला किया था । अरब देवराज की उसने सामने आने के बाद राष्ट्रीय आवाम पार्टी के सीनियर नेताओं ने उसके साथ जाने से मना कर दिया और अलग चुनाव लडने का फैसला किया था । अब तो भगवान ही बता सकता था और न ही खुदा यह हिंदू मुस्लिम की राजनीति आखिरकार कब तक इस प्रदेश में देश में चलने वाली थी । इंस्पेक्टर धीरज अपने इलाके का चक्कर लगा रहा था । उसकी नजर बस स्टॉप पर खडी एक बहुत ही खूबसूरत लडकी पडे । लडकी ने सफेद रंग का सलवार कुर्ता पहना हुआ था और ऐसा लग रहा था जैसे सफेद कपडों में कोई परी खडी । उसने सीने पर अच्छी तरह से सफेद रंग का ही दुपट्टा लगा रखा था । चेहरे पर मेकअप ना के बराबर था और फिर भी वो बहुत खूबसूरत लग रही थी । उसकी निगाहें नीचे की तरफ होती है । बस कभी कभी वो अपनी नजरें ऊपर करके आने वाली बस को देख लेते हैं । उसके हाथों में दो तीन बुक्स थी जिसे उसने कसकर पकड रखा था । इलाज कुछ मिनट तक एक्टर उसे देखता रह गया । तभी अचानक न जाने कहां से तीस बत्तीस साल का एक बदमाश वहाँ पर आया और लडकी के पास सिगरेट पीने लगा । उसने सिगरेट का एक जोरदार कश्मीर फिर उसका धुआ निकालकर उस लडकी के मौके तरफ फेंका । लडकी को हल्की सी खांसी हुई और वह से दूर रहते हैं । बदमाश वापस उसके नजदीक आ गया । फिर हुआ निकालकर उसकी तरफ फेंका । वो लडकी, दर्द और अपमान के मारे का समस्याएँ बिना कुछ बोले उससे थोडा और दूर के सकें । यह देखकर धीरज तुरंत उसकी तरफ इस तरह से रवाना हुआ था कि बदमाश को बताना चाहता हूँ । शायद उस बदमाश को यह एहसास हो गया था कि कोई पुलिस वाला उसकी तरफ आ रहा है । इसलिए वो तुरंत वहां से भागने को देखकर धीरज ने उसकी तरफ दौड लगा ही । पर इससे पहले की वहाँ पहुंच पाता हूँ बदमाश भाग निकला था आप ऍम धीरज ने पास जाकर उससे पूछा जी मैं ठीक हूँ, आप का धन्यवाद । उस लडकी ने नजरें नीचे रखते हुए जवाब हम लोगों को तो कुछ भी कहना बेकार है । किसी लडकी को कोई बदमाश छेडता है और तुम लोग से तमाचा ही देखते रहते हैं । जिस दिन तुम्हारी बहन बेटी को कोई बदमाश छेडे, अभी हुई तमाशा देखते रहना पुलिस और सरकार को कोसते रहना कि शहर में अपराध बहुत बढ गए । धीरज नहीं, बस स्टॉप पर खडे बाकी लोगों की तरफ देखते हुए आप कहो तो मैं आपको कहीं छोड तो फिर वो लडकी की तरह वो करके जी नहीं मैं चली जाऊँ तो देखिए मेरी बस आ गए हैं । उस लडकी ने उस तरह विचार रखे हैं । यहाँ से एक बस उस तरफ आ रही थी । इस चक्कर में उसके हाथ से किताबें नीचे गिर गए । उत्तर किताबें उठाने के लिए नीचे झुकी धीरज भी उसकी मदद करने के लिए नीचे उसने लडकी की किताबें उठाई और उस लडकी के हाथों में देते हुए अपना ध्यान रखें ये आपका धन्यवाद । उसने कहा । और फिर वो बस में चढ गए । नीरज उसके जाने के बाद खडा खडा कुछ सोच रहा है । फिर वो वापस अपने पुलिस स्टेशन है । लगभग आधे घंटे बाद उसका मोबाइल बजट था । उसने फोन फॅार साहब आपका बहुत बहुत धन्यवाद । उधर सहवाग कौन बोल रहा है और धन्यवाद किसलिए? नीरज ने पूछा मैं उस लडकी का भाई बोल रहा हूँ जिसकी आपने आज मदद की थी । बहुत तुम उसके भाई बोल रहे हैं तो ये तो मेरा फर्स्ट था । ऐसे जब से मैंने तुम्हारी बहन को देखा है मुझे उस से हो गया । लाॅस बीच में कुछ मत करो । कुछ भी कहने से पहले मेरी पूरी बात सुन मैंने तुम्हारी बहन की किताब में एक लवलेटर रखा । लीजो से कहूँ से पढकर मुझे उसका जवाब जरूर दें । धीरज ने मुस्कुराते हुए कहाँ फोन करते हैं? उधर पोल करने वाला जो अनिल था चौके उसने अपने सामने बैठे हुए अगर को किताब खोलने के लिए बोल किताब में एक लेटर रखा हुआ था । ये क्या है? अगर ने आश्चर्य से पूछा धीरज ने तुम्हारे लिए लव लेटर भेजा है । पढकर सुनाओ अनिल नाम उसको आते हुए अगर में लेटर खोला और उसे पढना शुरू किया मुझे मालूम था तुम लोग मेरे साथ ऐसी हल्का जरूर करुंगा इसलिए ये लेटर पहले लिख कर रख दिया था । अजीत तुम्हारा क्या हुआ? मैं वाकई में बहुत अच्छा है और अजगर भी लडकी के रूप में बहुत सुन्दर लगता है पर मुझे उल्लू बनाने के लिए अभी तुम लोगों को बहुत मेहनत करने की जरूरत है । आगे के लिए मेरी तरफ से बेस्ट ऑफ लक थकते नहीं कि अजीत ने सुन कर अपने माथे पर हाथ मारकर का साला बहुत दे रहे हैं । अगर नहीं कहा भाई वो पुलिस इंस्पेक्टर है, कोई कसियारा थोडी ना है, अजीत नहीं लगेगा । तो क्या हम कैसे आ रहे हैं मैंने नहीं प्यार है हमें और मेहनत करने की जरूरत है साले तथा मैं कभी घटिया था । अभी तेरी एक्टिंग घटिया दी जब मेरी एक्टिंग के जलवे तो कई जगह देख चुका है तो इसमें मेरे किए हुए मेकअप का भी तो कमाल होता है । पर अब तू चूकने लगता है । मैं तो ओवर एक्टिंग करने लगा । बाबा बाबा, बचाव मुझे इनसे । अनिल ने जोर से चिल्लाकर कहा । उसकी बात सुनकर करतारसिंह मुस्कुरा दिया ।

share-icon

00:00
00:00