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01 - ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका एक समसामयिक अध्ययन

आप सुन रहे हैं तो वो ऐसा किताब का नाम है । ग्रामीण समाज और संचार बदलते आया । इसमें लिखा है डॉक्टर निर्मला सिंह ऋषि गौतम ने आरजे मनीष की आवाज में आपको अगर सुने जो मंच आए । ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका एक्सबॅाक्स प्रस्ताव हूँ । भारत को गांव का देश कहा जाता है क्योंकि भारत देश की सत्तर प्रतिशत आबादी गांवों में निवास करती है । ग्रामीण समाज में संचार की लंबी प्रक्रिया रही है क्योंकि मानव जब आपने विकास अवस्था में था तथा गंद मूल्यों द्वारा अपनी उधर पूर्ति करता था, तभी से बहस संचार के माध्यम से ही अपनी भावनाओं को प्रकट करना था । इस प्रकार पर अपना विकास कर आधुनिक समय तक पहुंचा है । संचार कोई नवीन उघाडना नहीं है । वह प्राचीन काल से ही चली आ रही है, जिससे प्राचीन साहित्य में हमें विभिन्न प्रकार के संचार माध्यमों की जानकारी प्राप्त होती है । प्राचीन किवदंतियां है कि प्राचीन समय में संदेश को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए कबूतर माध्यम हुआ करता था । उसी प्रकार संचार के माध्यम के परिणामस्वरूप प्राचीन काल में राजा महाराजा राजदूतों के माध्यम से अपना संदेश लेकिन वो मौखिक रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर बेचते थे । इसके बाद पत्रव्यवहार के माध्यम से संचार होता था । लेकिन अंग्रेजी शासनकाल के समय सन अठारह सौ तिरेपन में एक पृथक से डाक विभाग का गठन किया गया । संचार के विकास के काम में इसके स्वरूप में तेजी से बदलाव आया है । पिछले कुछ दशकों में संचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है । संचार अब लिखित मौखिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में पहुंच चुका है । भले ही इसके उत्पत्ति शहरों में मानी जाती है पर इसके प्रभाव से ग्रामीण समाज भी अछूता नहीं रह पाया है । आज ग्रामीण समाज में संचार माध्यमों द्वारा आमूलचूल परिवर्तन हुआ है तो ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका । ग्रामीण समाज में संचार के माध्यम से सामाजिक संरचना व्यवस्था स्वरूप में परिवर्तन हुआ है । क्या और सामाजिक क्षेत्र में भूमिका परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है? ग्रामीण सामाजिक संरचना आपने आदिकाल से लेकर वर्तमानकाल तक पहुंची है तो सामाजिक संरचना में बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुई संचार क्रांति रहे । जो परिवर्तन किए उससे सामाजिक ग्रामीण संरचना का स्वरूप ही बदल गया । जिसमें रेडियो, टीवी, दूरदर्शन आदि ने ग्रामीण समाज को जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है । जिसमें विभिन्न प्रकार की बीमारियों से सुरक्षित रहने है । ज्योति को की जानकारी समाज से जुडे विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन लुक कर्नाटक के प्रसारण से जागरूक करने के प्रयास किए, जिसका परिणाम यह हुआ कि पोलियो जैसी खतरनाक बीमारी का भारत से उन्मूलन ही हो गया । साथ ही एच, डिप्थीरिया, स्वाइनफ्लू अधिक के बारे में भी जानकारी तथा उपचार के बारे में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई जाती है । बहुत आर्थिक क्षेत्र में भूमिका आर्थिक क्षेत्र में भी संचार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं जिसमें हरित क्रांति के परिणामस्वरूप भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता की प्राप्ति की ओर अग्रसर कर दिया है । जिस का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण समाज पर पडा तथा जो कृषि को लाभ के धंधे में बदलने के लिए संचार के साधनों का उपयोग कर वैज्ञानिक पद्धति को अपनाकर अधिक लाभ अर्जित कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण विकास तथा देश के सकल घरेलू उत्पादन में कृषि उत्पादकों का योगदान बडा है । भारत सरकार ने ग्रामीण समाज तथा कृषि को आधुनिक पद्धति तथा उच्च फसलों की जानकारी के लिए किसान कॉल सेंटरों की स्थापना कि जो किसानों को निशुल्क अपनी सेवा दे रही है । सब राजनीतिक क्षेत्र में भूमिका ग्रामीण समाज के साथ ही संचार क्रांति से राजनीति क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा है, जिससे राजनीतिक गलियारों की हर एक सोचना है तथा होने वाले परिवर्तनों की जानकारी मुहैया हो जाती है । संचार क्रांति से वोट डालने की लंबी प्रक्रिया को इलेक्ट्रॉनिक मशीन से वोट डालने में काफी आसान बना दिया है । संचार के माध्यम से ग्रामीण समाज में भारत सरकार ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया में पंचायती राज की स्थापना कर देश की राजनीति में ग्रामीण समाज की भागीदारी को सुनिश्चित किया है । तीन ग्रामीण समाज पर संचार के प्रभाव और परिवार पर प्रभाव औद्योगिकीकरण के परिणामस्वरूप ग्रामीण परिवार का विघटन हुआ है । संयुक्त परिवार के सदस्य रोजगार हेतु अलग अलग स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं । इन सदस्यों के मध्य भौतिक दूरी के बावजूद भी संचार के साधनों ने इन मानसिक दूरियों को मिटा दिया है । विकटन तो हुआ है किन्तु दूरियों को नजदीक लाने में संचार के साथ उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । महिलाओं पर प्रभाव प्राचीनकाल के समाज में पुरुषों की तुलना में स्त्रियों को निम्न समझा जाता था तथा उन्हें कई अधिकारों से वंचित रखा जाता था तथा परिवार के पितृसत्तात्मक स्वरूप के कारण भी सत्ता संरचना में कोई अधिकार नहीं था । किन्तु संचार क्रांति के बाद ग्रामीण समाज में स्त्रियों की स्थिति में सुधार आया जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य तथा महिला सशक्तिकरण के प्रयास किए जा रहे हैं । टीवी पर प्रसारित महिलाओं से संबंधित कार्यक्रम तथा रेडियो विषेशकर विविध भारती पर प्रसारित कार्यक्रम सखी सहेली महिलाओं के लिए हैं तथा उन्हीं पर आधारित है जिसमें ग्रामीण महिलाओं को प्राथमिकता दी जाती है । इस कार्यक्रम में उनके मनोरंजन के साथ साथ स्वास्थ्य, शिक्षा की भी जानकारी दी जाती है तथा उन को जागरूक भी किया जाता है । सब शिक्षा पर प्रभाव ग्रामीण शिक्षा में संचार का योगदान कंप्यूटर क्रांति की भूमिका के तहत स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं जिसके अंतर्गत प्रत्येक स्कूल में कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य कर दिया गया है । कंप्यूटर शिक्षा तथा इंटरनेट के माध्यम से देश विदेश की जानकारी प्रदान की जा रही है जो उनके पाठ्यक्रम को रोचक बना रही है । वर्तमान में उसकी प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया के तहत प्रत्येक ग्राम को इंटरनेट से जोडा जा रहा है तथा गांव में इंटरनेट की सुविधा के लिए मुफ्त वाईफाई की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है । दस । कृषि पर प्रभाव कृषि पर संचार क्रांति के प्रभाव ने कृषि पद्धति में आमूलचूल परिवर्तन कर दिया है । परंपरागत कृषि पद्धति में जैविक खाद का उपयोग करते थे, जिसमें काय पहले एक ओवर को एकत्रित किया जाता था । हम उन का उपयोग फसलों के लिए करते थे । गोबर के कंडे बनाकर भोजन पकाने के लिए उपयोग किया जाता था किन्तु संचार क्रांति ने जैविक खाद के स्थान पर रासायनिक खाद के महत्व को बढा दिया है । प्रौद्योगिकी ने कृषि पद्धति को बदल दिया है तथा खेतों के सभी कार्यों में ब्लॅक हल्का स्थान ट्रैक्टरों पर मशीनों ने ले लिया है । सेवन फसल बुवाई से लेकर फसल कटाई तक का सभी कार्य वर्तमान समय में मशीनों से किया जा रहा है । प्रौद्योगिकी का अभाव ग्रामीण समाज में प्रौद्योगिकी पद्धति को अपनाया जा रहा है जिसमें मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, टीवी, इंटरनेट आॅखो अपनाया जा रहा है तथा अपने उत्पादनों की खरीदी बिक्री ऑनलाइन कर रहा है । भारतीय बाजारों में सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से अस्सी प्रतिशत कारोबार किया जाता है । कई शहरों का विकास प्रौद्योगिकी साधनों के कारण हुआ है जिसमें बंगलौर, हैदराबाद, पुणे आधी शहर है । इनके अतिरिक्त मध्यप्रदेश के इंदौर में भी एक आईटीपार्क को स्थापित किया गया है जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित कार्य किया जा रहा है । इन सब का प्रत्यक्ष प्रभाव ग्रामीण समाज पर पडा है । चार उपसंहार ग्रामीण समाज के विकासात्मक प्रक्रम में संचार के साधनों ने आमूलचूल परिवर्तन किया है । संचार क्रांति ने इस तरी शिक्षा को नए आयाम प्रदान किए हैं जिससे बहुत घर से ही अपनी शिक्षा को पूर्ण कर आत्मनिर्भर बन सकती है । ऐसी संदर्भ में स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि एक स्त्री के शिक्षित होने से पूरा परिवार शिक्षित होता है तथा पूरा परिवार शिक्षित होने से पूरा राष्ट्र शिक्षित होता है । संचार क्रांति ने ग्रामीण समाज के हर क्षेत्र पर अपना प्रभाव दिखाया है जिससे समाज के नियम तथा व्यवस्था में परिवर्तन हुआ है और वहाँ परिवार, नातेदारी, रामक संस्था में परिवर्तन हुआ है । जातिगत बंधन ढीले हुए हैं । संचार के माध्यम से समाज की भागीदारी भी बडी है । ग्रामीण समाज में संचार साधनों को एक ही पहलू पर दृष्टि बात कर उसका आकलन किया जाना उचित नहीं होगा । संचार का दूसरा पहलू ग्रामीण समाज को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है जिससे ग्रामीण समाज द्वारा तीव्र गति से पश्चिमी सभ्यता का अंधानुकरण किया जा रहा है जिससे कहीं ना कहीं ग्रामीण संस्कृति भी प्रभावित हुई है । कहीं ना कहीं पाश्चात्य जीवन शैली ग्रामीण परिवार के विघटन का कारण भी बनी है । हाल ही के दिनों में अश्लील साइट्स राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनी जिसमें प्रबुद्धवर्ग बस सरकार के सामने एक प्रश्न खडा दिखा कि यह संचार प्रणाली बालकों के मानसिक विकास को कहाँ तक प्रभावित करेगी । इन सभी के होते हुए भी संचार के साधनों ने ग्रामीण समाज को विकास के पथ पर अग्रसर किया है । कह सकते हैं कि ग्रामीण समाज पर संचार का बहुआयामी प्रभाव पडा है ।

02 - संचार के संसाधनो का विकास, प्रकार एवं प्रभाव

संचार के संसाधनों का विकास प्रकार एवं प्रभाव परिचय संचार एक और मनुष्य की मूलभूत प्रवृत्ति है । व्यक्ति और समाज तभी अस्तित्वमान है । शरीर उनके पास संचार का साथ में है । एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्तियों के बीच हूँ । अपने भावों विचारों अच्छा हूँ, कल्पना हूँ और पांच ने की प्रक्रिया ही संचार हैं । व्यापक दृष्टि से देखने पर संचार एक व्यवहारिक विज्ञान के तौर पर परिलक्षित होता है । वैश्वीकरण के इस युग में संचार एक आवश्यकता बन चुका है । लॉबिस् और बेंगल्स मानते हैं । संचार पहन व्यवस्था है जो मानव संबंधों में दूरी का कार्य करती है । संचार मानवीय संबंधों, प्रक्रिया कलापों की एक ऐसी जीवन प्रणाली है जिसके बिना देश, काल और समाज की कल्पना भी संभव नहीं । संचार का संबंध मानव के आदिमकाल से ही हो रहा है । आदि मानव भी किसी ना किसी रूप में संचार से जुडे थे । भाषा रुपये कोई सशक्त माध्यम न होने के कारण उनके लिए संचार केवल भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम था । विज्ञान एवं तकनीकी के साथ संचार साधन भी विकसित होते गए । मिट्टी, लकडी, पत्थरों के बाद भोजपत्र भी संचार का माध्यम बनेंगे । पशु पक्षी में संचार का माध्यम बने छपाई मशीन का आविष्कार, संचार प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन था । मुद्रित संदेशों, अभिलेखों एवं समाचारपत्रों का आगमन अभूतपूर्व संचार साधन बनेगा । रेडियो टेलीफोन पर अब टेलीविजन का आविष्कार संचार के उच्चतम आविष्कार है । संचार के विभिन्न संसाधन, संदेशों, सूचनाओं को संप्रेषित करने की विभिन्न विधाओं अथवा तकनीकी उपकरणों को संचार संसाधन कहते हैं । संचार के ये साधन निम्नलिखित हैं एक संकेतिक क्या शाब्दिक संचार यानी नॉन वर्बल कम्यूनिकेशन तो अंतर व्यक्तिक संचार यानी ऍम तीन । जम्मू संचार यानी ग्रुप कम्युनिकेशन, जहाँ जनसंचार यानी मास कम्युनिकेशन उपयुक्त साधनों का विस्तृत वर्णन हमारे शोध का विषय नहीं है । अतः संक्षेप में कहा जा सकता है कि ये सभी संचार के माध्यम से अपने अपने स्थान पर महत्वपूर्ण रहे हैं । अब जनसंचार संसाधन के पूर्व ये संचार के महत्वपूर्ण माध्यम थे । जनसंचार वर्तमान में सबसे शक्तिशाली हम समसामयिक संसाधन है तथा इसमें संचार प्रक्रिया के उपयुक्त सभी तत्व शामिल होते हैं । जनसंचार संसाधन अकेले नहीं अभी तो कई व्यक्तियों के योगदान से ही संभव होता है । यह संसाधन में सूचनाएं एक विशाल जनसमूह के लिए प्रेषित की जाती हैं । धूम मंडलीकरण एवं नव उदारवाद में संचार संसाधन अथवा मीडिया ने एक विशाल उद्योग का रूप धारण कर लिया है । रेडियो, टीवी, निमंत्रित मीडिया ने बाजार में बर्चस्व स्थापित कर लिया है । समाचार पत्र अब समाचारपत्र बन गए हैं । टीवी में न केवल नई नई राष्ट्रीय चैनल अभी तो अंतरराष्ट्रीय चैनलों की भरमार है । रेडियो प्राइवेट एफएम चैनलों के माध्यम से अपनी एक अलग पहचान बनाई है । इन सभी संचार संसाधनों को पछाडते हुए इंटरनेट ने खुद को शक्तिशाली सिद्ध किया है । संचार का प्रभाव संचार के भाषिक स्वरूप के फलस्वरूप ही विश्व में विभिन्न संस्कृतियों तथा सफलताओं का जन्म हुआ । संचार ने मुख्य रूप से सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक एवं आर्थिक विकास पर प्रभाव डाला । जनसंचार संसाधन के संप्रेषित समूह की रूचियों मान्यताओं को बदलने, बढाने अथवा घटाने में अग्रनी भूमिका होती है । भूमंडलीकरण के फलस्वरूप वर्तमान संचार प्रणाली ने बाजारवाद अथवा उपभोक्तावाद को संरक्षण दिया है । इसके फलस्वरूप मानवीय सामाजिक मूल्य संकट में है । मानव विज्ञान और तकनीकी के सहारे ग्रहनक्षत्र तक पहुंच चुका है, लेकिन अपने पडोसी के दुःख दर्द से अनभिज्ञ है । कम श्रम, कम लागत एवं कम निवेश के जरिए वह आसमान को छू लेने की इच्छा रखता है, पर जमीनी हकीकतों से कोई वास्ता रखना नहीं चाहता । पति धनार्जन की तमन्ना, परस्पर प्रतिस्पर्धा, एक दूसरे को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति समाज के हर भाग पर तीव्र हो गई है । नए दौर में जनसंचार के समस्त संसाधन उच्च मूल्य उच्च आदर्शों को समाज में प्रचारित प्रसारित करने में सहायक होते हैं, लेकिन जनसंचार के कई सकारात्मक गुड भी हैं । इन साधनों ने जिस तरह व्यक्ति समाज को प्रभावित किया है, मैं अद्भुत है । नई संचार तकनीक के अंतर्गत अंतरिक्ष, संचार, दूर संचार, टेलिकाॅम, टेलिप्रिंटर, ऍम, कॅालिंग, वॉकीटॉकी, टेलीफोन, मोबाइल फोन आदि संवाद संप्रेषण के नई संसाधनों से दुनिया सिकुड गई है । बेशन का कोई ऐसा देश नहीं जिसके बारे में हम नहीं जानते हैं या न जान सके ऍम टूट चुकी हैं । अब ज्ञान का स्रोत केवल शास्त्र या पुस्तकें ना रहकर इंटरनेट हो गया है । साहित्य, संस्कृति एवं मानविकी के क्षेत्र में नई परिभाषाएं कडी जाने लगी हैं । धरती और आकाश का भेद मिट गया है । प्रकृति और पर्यावरण के क्षेत्र में संचार संसाधनों ने काफी उन्नति की है । कृषि क्षेत्र की उन्नति नवीन तकनीकी का परिणाम है । मीडिया अथवा संचार के कारण सामाजिक आचार व्यवहार में बडे परिवर्तन आए हैं । समाज का परंपरागत स्वरूप बदल गया है परिवार वहाँ, यहाँ तक कि धर्म ने भी नवीन रूप धारण कर लिया है । विचारधाराओं, सिद्धांतों का समय बीत चुका है । जनसंचार माध्यमों ने एक नए किस्म की जीवन शैली विकसित कर दी है, जिसमें वर्ग, जाति, भाषा, धर्म के आधार पर समाज का विविधीकरण नहीं रह गया है । इसका उद्देश्य स्पष्ट है कि विश्व का हर व्यक्ति सूचना पाने का अधिकारी है । संचार का यह सकारात्मक पक्ष निःसंदेह सामाजिक एवं मान लिया है से जुडा है । निष्कर्ष संचार संसाधन ठीक डायनामाइट की तरह है । यह हमारे ही हाथ में है कि इन का सकारात्मक उपयोग करें या नकारात्मक आवश्यकता इस बात की है कि मीडिया या जनसंचार के बाद क्या कोई ऐसा विकल्प है जो समाज में भाईचारा ला सके । मानव को सर्वशक्तिमान बनाने की सोच से बचा सके । ग्रीन हाउस प्रभाव तथा धारा के निरंतर बढते आपको नियंत्रित कर सके । जनसंचार की रणनीति ऐसी हो कि नई विधायक तो आएँ जिनसे मूल्यों का उत्कर्ष हो, जनसंचार से सामूहिक हित का प्रचार प्रसार हो तथा प्रतिस्पर्धा की गला काट भावना को दूर करने में सक्षम हो । विचारों की अभिव्यक्ति भाई हो, आज साहित्य नहीं, दूरदर्शन को समाज का दर्शन कह सकते हैं । तथ्यों की जानकारी, ज्ञान, मनोरंजन, शिक्षा ऐसा कुछ नहीं जो दूरदर्शन से ना मिलता हूँ । अन्य देशों की धर्म, संस्कृति, यूजीसी के कार्यक्रम, उत्पादों के विज्ञापन, खेलकूद, प्रसारण, कृषि जगह, संसद, कार्यवाही ऐसी समस्त जानकारियों का स्रोत, दूरदर्शन, इंटरनेट, वैश्वीकरण के इस दौर में ग्लोबल विलेज बनाने का कार्य इन्हीं संचार माध्यमों से ही संभव हो पाया है । कहा जा सकता है कि संचार के ये समस्त संसाधन युगदृष्टा और समाज कृष्णा है ।

03 - भारत समाज में डिजिटल क्रांति की भूमिका

हूँ । भारत समाज में डिजिटल क्रांति की भूमिका शोध सारा डिजिटल इंडिया कार्यक्रम निश्चित तौर पर वर्तमान समय की जरूरत है और दूरगामी सोच को ध्यान में रखते हुए प्रशांत स्तर पर तैयार किया गया है । संतुलित कार्यक्रम है जो दीर्घावधि में सकारात्मक सामाजिक बदलाव की दिशा में उन्मुख होगा । यह कार्यक्रम नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक प्रयास है जहाँ सरकार और उसकी सेवाएं नागरिकों के दरवाजे पर उपलब्ध हूँ और लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव की दिशा में योगदान करेंगे । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य सूचना प्रौद्योगिकी क्षमता को इस्तेमाल कर भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है । साथ ही डिजिटल इंडिया की राह में भी कुछ चुनौतियां हैं । सबसे बडी चुनौती मानव संसाधन की कमी की है । देश में जितना मानवश्रम सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नियोजित है, उससे कई गुना बढाए जाने की आवश्यकता है । इसके अलावा वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था भी देश के सामने किसी चुनौती से कम नहीं है । नैसकॉम के मुख्य और चंद्रशेखर का कहना है कि देश की सभी ढाई लाख पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोडने के लिए बीस हजार करोड से ज्यादा का खर्च आ सकता है जिससे देश की अर्थव्यवस्था व्यापक रूप से प्रभावित हो सकती है । तीसरी चुनौती विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय की है । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को लागू करने के लिए पहले कुछ बुनियादी ढांचा बनाना होगा यानि इसकी पृष्ठभूमि तैयार करनी पडेगी । साथ ही इसके लिए कुशल श्रमशक्ति की भी जरूरत पडेगी, जिसे तैयार करना होगा । इस कार्यक्रम को सफलता के शिखर पर पहुंचाना होगा । यह कार्य मुश्किल अवश्य है लेकिन नामुमकिन नहीं । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य सूचना प्रौद्योगिकी की क्षमता का इस्तेमाल कर भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है । शब्द कुछ डिजिटल इंडिया, सूचना प्रौद्योगिकी, ज्ञान, अर्थव्यवस्था, संतुलित कार्यक्रम, प्रस्ताव पारदर्शी, सरल और सुलभ प्रशासन किसी भी समाज, प्रदेश या राष्ट्र के बुनियादी विकास को नए स्तर पर ले जा सकता है । भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में यदि प्रशासन की पहुंच हूँ, हर नागरिक तक समान रूप से हो जाए और अंतिम छोर पर मौजूद व्यक्ति भी सामाजिक सुविधाओं का लाभ सुगमता के साथ उठा सके तो सामाजिक बदलाव की एक सकारात्मक तस्वीर सामने आ सकती है । वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी इतनी समझ है यह नागरिकों को घर बैठे तमाम सूचनाएं उपलब्ध करवा सकती है और उन्हें उनका अधिकार दिलवा सकती है । यही वजह है कि केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी की इस ताकत से समाज के जीवन स्तर को उन्नत और राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की है । इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार ने संपूर्ण भारत को डिजिटल करने वाली नई क्रांति का सूत्रपात्र किया है । समाज के डिजिटल सशक्तीकरण के माध्यम से तैयार होने वाली ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के फलस्वरूप देश का विकास इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से यह उम्मीद की जा रही है कि नागरिकों को सभी सरकारी सेवाओं की उपलब्धता मोबाइल वह कंप्यूटर के माध्यम से रियल टाइम में सुनिश्चित की जा सके । इस कार्यक्रम के मुख्य फोकस सरकारी गतिविधियों से आम जन के जुडाव का सशक्तिकरण करना और पारदर्शी तथा सहभागिता वाले प्रशासन को नया आयाम देना है । इंटरनेट युग का आरंभ और अवस्था लोकतंत्रात्मक भारत में इंटरनेट आम जन को अब जागरूक करने की दिशा में एक सेतु का काम कर रहा है । नब्बे के दशक में भारत में अपनी दस्तक देने वाली वैश्विक इंटरनेट क्रांति को डिजिटल इंडिया की पूर्वपीठिका कहा जा सकता है । पंद्रह अगस्त उन्नीस सौ को विदेश संचार निगम लिमिटेड बीएसएनएल के माध्यम से पहली बार इंटरनेट सुविधा प्रदान की गई और इसकी सफलता यह रही कि अगले छह महीने में ही दस हजार से अधिक लोग इस माध्यम से जुड गए । अगले एक दशक में यह अपने पंख इसलिए नहीं पसार सका क्योंकि उस वक्त ऍम के जरिए डायल अब से इंटरनेट सुविधाएं मिलती थी वो और इसकी गति कम थी । वर्ष दो हजार में देश में ब्रॉडबैंड नीति अपनाई गई जिसके तहत एक न्यूनतम डाउनलोड गति का निर्धारण किया गया । इसके पश्चात किलोबाइट प्रतिसेकंड की न्यूनतम गति से चलने वाला इंटरनेट दो सौ छप्पन किलोबाइट प्रति सेकेंड की न्यूनतम गति से दौडने लगा । इस बदलाव से देश में इंटरनेट सेवाओं का विस्तार हुआ और वर्ष दो हजार दस में थी जी तथा उसके पश्चात फोर जी सेवाओं ने देश के आम जनता इंटरनेट सेवाओं की आसान पहुंच को सुनिश्चित किया । इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार वर्ष दो हजार चौदह के अंत तक देश में तीस करोड से ज्यादा लोगों तक इंटरनेट की पहुंच है और उपभोक्ताओं की संख्या के मामले में भारत दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर हैं । वायरलेस इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क का विस्तार कभी तारों के सहारे अंतिम छोड तक पहुंचने वाला इंटरनेट कनेक्शन आज उपभोक्ताओं को बेतार माध्यम से मिल रहा है । स्मार्टफोन की पहुंच अब ग्रामीण उपभोक्ताओं तक होने लगी है और वे भी आसानी से इंटरनेट सुविधाओं के साथ जुड गए हैं । बीस फरवरी दो हजार पंद्रह तक के आंकडों को देखा जाए तो देश में कुल मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की जनसंख्या करोड से अधिक हैं । कुल जनसंख्या के हिसाब से यह आंकडा दशमलव पचास प्रतिशत है और इस आधार पर भारत चीन के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर हैं । यदि स्मार्ट फोन की बात की जाए तो वर्ष दो हजार में गूगल के आवर मोबाइल प्लानेट ने स्मार्ट फोन की पहुंच को लेकर विभिन्न देशों की एक सूची जारी की थी जिसमें भारत सोलह दशमलव आठ प्रतिशत के साथ पैंतालीस स्थान पर था । इसके बाद देश में स्मार्टफोन क्रांति ने नया स्वरूप ले लिया । सही मायने में डिजिटल इंडिया के उद्देश्यों की पूर्ति इसी क्रांति के माध्यम से हो सकती है । डिजिटल इंडिया और नागरिकों की विशिष्ट पहचान डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं । इसके तहत प्रत्येक नागरिक के लिए उपयोगी सेवा मुहैया कराने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का सृजन किया जाएगा । ऐसी बुनियादी सेवाओं के बूते देश ज्ञान के एक ऐसे भविष्य की ओर उन्मुख होगा जहाँ प्रशासन और सेवा हर मांग पर उपलब्ध होगी । ऐसे में प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता का सवाल काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि भ्रष्टाचार को मिटाना भी अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम मुद्दा है । इसी सोच के साथ बहुत उद्देश्य राष्ट्रीय पहचान पत्र यानी आधार कार्ड को भी डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के साथ जोडा गया है । आधार कार्ड प्रत्येक नागरिक को बारह अंकों की एक विशिष्ट संख्या उपलब्ध करवाता है । यह संख्या भारत में कहीं भी व्यक्ति की पहचान और पते को निर्धारित करती है । आधार संख्या प्रत्येक व्यक्ति की जीवन भर की पहचान है । वो आधार संख्या से उन्हें बैंकिंग, मोबाइल फोन कनेक्शन और सरकारी व गैर सरकारी सेवाओं की सुविधाएं प्राप्त करने में सुविधा मिलती है । यह सरल ऑनलाइन विधि से सत्यापन योग किया है । वर्तमान सरकार के कार्यक्रम में पहल योजना के अंतर्गत गैस सब्सिडी जैसे अनुदान सीधे ही उपभोक्ता के बैंक खाते तक पहुंच रहे हैं । आधार संख्या की इसमें बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत िलाकर एवं अन्य सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए भी आधार संख्या का होना आवश्यक है । ऐसे में आधार संख्या डिजिटल इंडिया की संकल्पना को आगे बढाने में मील का पत्थर साबित हो रही है । वो डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशी योजना गत वर्ष अगस्त में लागू की गई प्रधानमंत्री जनधन योजना का उद्देश्य भारत के नागरिकों को बुनियादी वित्तीय सेवाएं जैसे बैंक खाते और डेबिट कार्ड मुहैया कराना है । वित्तीय समावेशन के राष्ट्रीय मिशन को आगे बढाने के लिए यह योजना शुरू की गई हूँ । योजना आर्थिक निरन्तरता बढाने और जनता को वित्तीय सेवाएं जैसे बैंक जमा खाते हैं । कर्ज और बीमा प्रदान करने के लिए एक साधन के तौर पर तैयार की गई है । यदि इसकी मूल भावना को देखा जाए तो यह डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों को पूरा करती दिखाई देती है । मेरा खाता भाग्य विधाता के आदर्श वाक्य के साथ शुरू की गई इस योजना में भारतीय समाज में गरीब वर्ग के लिए सब्सिडी सुरक्षित करना, ओवर ड्रॉफ्ट सुविधा और उद्देश्य सन दो हजार दस तक साढे सात करोड परिवारों तक पहुंच बनाना है । यह योजना सरकारी कार्यालयों में किसी भी रूप में मौजूद भ्रष्टाचार से लडने के एक हथियार के तौर पर उपयोग के लिए बनी है । भारत की अधिकतर जनता के बैंक खाते होने पर सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की राशि सीधे उनके खाते में ट्रांसफर की जा सकेगी जिससे रिश्वत के मामलों में काबू पाया जा सकेगा । इस प्रकार देखा जाए तो यहाँ योजना डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने में सहयोगी है । इस तरह की योजनाओं के पीछे केंद्र सरकार की सोच है कि व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं का सीधा फायदा आम जनता तक पहुंचे और साथ ही तकनीक के इस्तेमाल से ऐसा वातावरण तैयार हो सके जो आम जन तक प्रशासन की पहुंच को सुनिश्चित करेंगे । मेक इन इंडिया कार्यक्रम को मजबूत बनाने में इस तरह की योजनाओं का अच्छा योगदान साबित होगा । डिजिटल इंडिया नौ प्रमुखतम डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के नौ प्रमुख स्तंभों की बात की जाए तो इनमें ब्रॉडबैंड हाइवेज सबसे प्रमुख है । सामान्य तौर पर ब्रॉडबैंड का मतलब दूर संचार से है जिसमें सूचना के संसार के लिए आप जातियों के व्यापक बैंड उपलब्ध होते हैं । इस कारण सूचना को कई गुना तक बढाया जा सकता है और जुडे हुए सभी बैंको विभिन्न आवृत्तियों या चैनलों के माध्यम से भेजा जा सकता है । इसके माध्यम से एक निर्दिष्ट समयसीमा में बेहतर सूचनाओं को प्रेषित किया जा सकता है । ब्रॉडबैंड हाईवे निर्माण से अगले तीन वर्षों के भीतर देशभर की ढाई लाख पंचायतों को इससे जोडा जाएगा और लोगों को सार्वजनिक सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी । डिजिटल इंडिया ॅ तकनीकी मदद से सरकारी तंत्र सुधार इलेक्ट्रॉनिक निर्माण में शून्य आयात सबकी फोन तक पहुंच एक क्रांति सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी नौकरियों के लिए सार्वजनिक ऍम सबको सोचना ऍम डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की सफलता इस तथ्य में निहित है कि भारतीय ग्रामीण आबादी इस तरह की सेवाओं का मूल लाभ ले सके । इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए देश के पचपन हजार गांवों में अगले पांच वर्षों के भीतर मोबाइल संपर्क के सुविधाएँ सुनिश्चित करने के लिए बीस हजार करोड के यूनिवर्सल साॅस का गठन किया गया है । इससे ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के इस्तेमाल में आसानी होगी । प्रौद्योगिकी के जरिए प्रशासन को जवाब दे हैं और संवेदनशील बनाने की दिशा में सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए बिग बॅास री इंजीनियरिंग ऍम में सुधार किया जाएगा । विभिन्न विभागों के बीच आपसी सहयोग और आवेदनों को ऑनलाइन ट्राई किया जाएगा । इसके अलावा स्कूल प्रमाण पत्रों, वोटर आइडी का आज का जरूरत के अनुसार ऑनलाइन इस्तेमाल किया जा सकेगा । डिजिटल इंडिया राह में चुनौतियां जब भी किसी क्रांति का सूत्रपात होता है तो इस की सफलता की राह में कई चुनौतियां भी होती है । डिजिटल इंडिया की राह में कुछ चुनौतियां होंगी । सबसे बडी चुनौती मानव संसाधन की कमी की होगी । देश में जितना मानव श्रम सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नियोजित है, उससे कई गुना पढाए जाने की आवश्यकता है । इसके अलावा वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था भी देश के सामने किसी चुनौती से कम नहीं है । ऍम के मुखिया और चंद्रशेखर का कहना है कि देश की सभी ढाई लाख पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोडने के लिए बीस हजार करोड से ज्यादा का खर्च आ सकता है जिससे देश की अर्थव्यवस्था व्यापक रूप से प्रभावित हो सकती है । तीसरी बडी चुनौती विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय की है । केंद्र सरकार का दावा है कि इतने व्यापक पैमाने पर इससे विशाल कार्यक्रम पहले कभी नहीं चलाया गया । इसमें केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभाग एक दूसरे के सहयोगी और सहभागी है और उन्हें आपसी समन्वय का इस कार्यक्रम को सफलता के शिखर पर पहुंचाना होगा । यह मुश्किल आवश्यक है लेकिन नामुमकिन नहीं । निष्कर्ष किसी भी राष्ट्र के समावेशी विकास के लिए आवश्यक है कि ऐसी कोई भी सामाजिक उत्थान की योजना समाज के निर्मल और अपवर्जित लोगों की आशाओं को उडान देखती । ज्ञानवर्धन और प्रतिभा कौशल के विकास के अवसर थे जिससे वे अपने जीवन स्तर को बेहतर करने में सक्षम बने और देश की तरक्की का हिस्सा बनेंगे । यदि सभी बच्चों को शिक्षा मिले सभी को स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हूँ और पात्रता अनुसार एक लाभ बिना किसी भेदभाव, भ्रष्टाचार या मनमानी के प्राप्त हो तो आदर्श राष्ट्र दिखाई देगा । सरकारी तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता भी बढेगी । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम निश्चित तौर पर वर्तमान समय की जरूरतों और दूरगामी सोच को ध्यान में रखते हुए विशाल स्तर पर तैयार किया गया संतुलित कार्यक्रम है, जो तीर गांधी में सकारात्मक सामाजिक बदलाव की दिशा में उन्मुख होगा । यह कार्यक्रम नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक प्रयास होगा जहाँ सरकार और उसकी सेवाएं नागरिकों के दरवाजे पर उपलब्ध हो और लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव की दिशा में योगदान करें । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य सूचना प्रौद्योगिकी की क्षमता को इस्तेमाल कर भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है । वो

04 - ग्रामीण समाज और संचार : बदलते आयाम

ग्रामीण समाज और संचार बदलते आया प्रस्ताव नाम ग्रामीण समाज पे जनसंचार माध्यमों का काफी महत्व है । जन संचार के साधनों में समाचार पत्र, पिल, रेडियो, दूरदर्शन और वीडियो पत्रिकाओं ने हमारे ज्ञान का विस्तार किया है और ये विश्व को एक सूत्र में बांधने का प्रयास कर रहे हैं । भारत जैसे विकासशील देश में भी जनसंचार के विभिन्न माध्यमों ने जीवन के हर क्षेत्र होता प्रभावित किया है । ग्रामीण, सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में संचार माध्यमों का प्रभाव तीनों दिन पडता जा रहा है । ग्रामीण समाज विभिन्न प्रकार की विषमताओं से भरा है । एक और हमारे देश में निरक्षता हिट, गरीबी है तो दूसरी ओर धर्म, चांदी, भाषा, अंधविश्वास और रूढियों ने अज्ञानता के कारण हमारे विकास कार्यों को अवरुद्ध किया है । ऐसी स्थिति में जनसंचार के साथ हमारे जो रिश्ता बना है वो रिश्ता तभी सार्थक हो सकता है, जबकि समाज में नई चेतना का विकास हो, ज्ञान का प्रचार प्रसार हो, किसी लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही हमारे देश में संचार माध्यमों का आगमन हुआ । सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनमत जागृत कर हमारी जनता को नवीनतम जानकारी देकर विकास की गति को बढाएगा । मनुष्य सृष्टि के प्राणियों में श्रेष्ठ समझा जाता है, उसके श्रेष्ठ होने का मुख्य कारण ये तो है ही कि वह विवेकशील एवं विचारवान है, बल्कि यह भी है कि वह अपने विचारों का दूसरे तक संप्रेषण भी कर सकता है । यह संप्रेषण ही आधुनिक भाषा में संचार की संज्ञा पाता है । संचार एक व्यापक शब्द है । मनुष्य की श्रेष्ठता एवं उच्च कोटि का होने के आपसी अंतर्संबंधों को नई और विकासशील दुनिया में परिचित कराया । अंतर्संबंधों ने विचारों को स्थायित्व दिया, जिससे विचारों का इतिहास बन पाया और संस्कृति का निर्माण हुआ । सूचना का आदान प्रदान व्यक्तिगत हो या समूह में भाषण के द्वारा हो या आधुनिक युग के जान माध्यम द्वारा, संचार किसी भी समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण है । मनुष्य अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समाज पर निर्भर रहता है, क्योंकि वह उस समाज में रहता है, इसलिए बहुत पारस्परिक संचार द्वारा अन्य व्यक्तियों के साथ संबंध स्थापित करता है । इन संबंधों के द्वारा ही दूसरे व्यक्तियों के जीवन को भी प्रभावित करता है और स्वयं भी प्रभावित होता है । मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और बहुत एक आवश्यकताओं के अतिरिक्त भी । उसकी कुछ मूलभूत आवश्यकताएं हैं । अपने साथियों से संपर्क साधा अपने मन की बात उन तक पहुंचाना उसी प्रकार की एक मूलभूत आवश्यकता है, जो मनुष्यत्व प्रदान करने में सहायता देती है इसलिए मनुष्य संचार का सहारा लेता है । संचार का अर्थ है अपने विचारों, भावनाओं, उद्देश्यों एवं विश्वासों आदि को दूसरों तक पहुंचाना । मानव समाज में प्रतीकात्मक संचार होता है क्योंकि वह मानव संस्कृति के साथ जुडा है और भाषा और संकेतों के रूप में उसने अपने प्रतीक बना रखे हैं । आधुनिक जगत में मनुष्य मशीन और संगठन एक दूसरे से जुडे हुए हैं । शिक्षा के प्रसार और प्रजातंत्र के राजनीतिक प्रक्रिया ने बृहद संचार की अवधारणा को अधिक विस्तृत क्या है? ग्रामीण समाज में जहाँ प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है, इन संचार माध्यमों के प्रभावों को विभिन्न पहलुओं जैसे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, शैक्षिक, धार्मिक एवं संस्कृति पर देखा जा रहा है । संचार के साधन एवं उसके प्रभाव एक टेलीविजन यह एक बहुत प्रभावशाली माध्यम है जो व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावित करता है । इसमें कई चैनल होते हैं । इसका लक्ष्य मनोरंजन, सूचना देना, जानकारी के माध्यम से अधिक से अधिक प्रचार प्रसार करना है । ग्रामीण समाज पे टेलीविजन मनोरंजन के प्रयोग का ही नहीं बल्कि प्रतिष्ठा का एक प्रतीक है । सूचना बच जानकारी प्राप्त करना, शैक्षणिक कार्यक्रम, विश्वविद्यालयों के कार्यक्रमों, विविध खेलों का आयोजन, विभिन्न सीरियल के द्वारा प्रभावित होकर सामाजिक एवं राजनैतिक जागरूकता लाकर अपने जीवन शैली को परिवर्तित कर रहे हैं और राष्ट्र की प्रगति में अपना योगदान दे रहे हैं । टेलीविजन ने समाचार को वैश्वीकरण से जुडा है । बुरी खबर जैसे आतंकवाद, नक्सलवाद व्यक्तित्व को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर दी है । नकारात्मक समाजीकरण, भयावह प्रतिक्रिया, हिंसा, अलका, अपराध विध्वंस घटनाएं विकृत मानसिक प्रवृत्तियों के विकास को बढावा देती है । अपराधों जैसे अपहरण, हत्या, बलात्कार की घटनाएं, बच्चों और महिलाओं के प्रति हिंसा, शहरी क्षेत्रों में ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका प्रतिशत बढ रहा है । टेलीविजन में धारावाहिक, संगीत, खेल, फिल्म, समाचार, कॉमेडी आदि से स्वस्थ मनोरंजन प्राप्त कर तनावमुक्त महसूस करते हैं । स् वास् थ्य एवं पौष्टिक आहार से संबंधित कार्यक्रम विज्ञापन से प्रभावित होकर खानपान एवं जीवन शैली में परिवर्तन के प्रति आश्वस्ति की लहर बढ रही है । टेलीविजन में सरकार की आर्थिक विकास की योजनाएं जो आर्थिक प्रगति, आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है जिससे परिवार की आय के स्रोत में वृद्धि हो रही है । अतः ग्रामीण समाज में टेलीविजन का प्रभाव बच्चे, महिलाओं और हर उम्र के लोगों पर हो रहा है । आज ग्रामीण समाज के लोगों में सोच आदत, व्यवहार में बदलाव के कारण शहरी समाज के संपर्क में आने के कारण सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, शैक्षणिक क्षेत्रों में परिवर्तन देखने को मिल रहा है । यह अच्छी सोच है कि सामाजिक परिवर्तन एवं राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में इसका अमूल्य योगदान है । दो । रेडियो ग्रामीण समाज पे रेडियो का प्रयोग मनोरंजन प्राप्त करने, शिक्षा प्राप्त करने के लिए करते हैं । आकाशवाणी द्वारा हर घंटे समाचार प्रसारित होते हैं, जिससे ग्रामीण जान हर पल घटित हो रही स्थानीय एवं विश्वस्तरीय समाचार एवं जानकारियाँ प्राप्त करते रहते हैं । हर व्यक्ति की रुचि को ध्यान में रखकर मनोरंजन में संगीत नाटक संस्मरण का प्रसारण होता है । इसी तारतम्य में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश की जनता से सीधे बात करने एवं वस्तुस्थिति जानने समझने है तो मन की बात की शुरुआत की है । जैसे जनता अपने मन में आने वाले विचारों को सीधे उच्च स्तर पर रख सके । तीन ऍम जनसंचार का अत्यंत शक्तिशाली एवं प्रभावशाली माध्यम है । भारत में फिल्मों की शुरुआत अठारह सौ छियानवे में यूनियन कर्ज द्वारा मुंबई में छह लघु फिल्मों के प्रदर्शन के साथ हुई फिल्म लोगों की मनो प्रति और विचारधारा को बदलने में सहायक सिद्ध होती है । ग्रामीण चलता उनकी रूचि के अनुसार फिल्में देखना पसंद करती है । चार समाचार पत्र इनके अनेक रूप है जैसे दैनिक साप्ताहिक ऍम समाचारपत्र किसी भी घटित घटना का ब्यौरा यहाँ वर्णन है । विषय की दृष्टि से समाचार पत्र के अनेक रूप साहित्य, धार्मिक, राजनीतिक, आलोचनात्मक, दार्शनिक, व्यापार से संबंधित, खेल संबंधी, चलचित्र संबंधी इत्यादि वर्तमान समय में अंग्रेजी, हिंदी एवं अनेक प्रांतीय भाषाओं के पत्र प्रकाशित होते हैं । ग्रामीण समाज में समाचारपत्रों का महत्व, शिक्षा के प्रति सोच बदलने, देश विदेश की खबरें, जानकार ज्ञान में वृद्धि करने, व्यापार व्यवसाय की गतिविधियों को जानकार आर्थिक विकास की दर को समझने का प्रयास करते हैं । समाचार पत्र के माध्यम से देश के आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं शैक्षणिक परिवर्तन की जानकारी प्राप्त होती है । पांच । मोबाइल यह संचार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली ज्यादा नहीं है । पहले एक अवधारणा थी कि एक दिन दुनिया लोगों कि मुट्ठी में होगी । यह इस बात का सत्य प्रमाण है, क्योंकि आज मोबाइल में जमाने की समस्त सुविधाएं समाहित है, जैसे कैलकुलेटर, कैलेंडर, वर्ल्ड का लक्ष्य, इंटरनेट घडी, कंप्यूटर की समस्त सुविधाएं इत्यादि । ग्रामीण जनता जब इन चीजों के संपर्क में आती है तो वह भी आज के युग की तकनीकी जानकारी को जानने समझने के लिए अग्रसर होती है । वह भी चाहता है कि आखिर नईदुनिया और नई तकनीकी किया है और इसका महत्व क्या है? फॅमिली ऍसे उपयोग करना कई प्रकार की सेवाओं का लाभ उठा सकता है । जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक मेल मल्टीमीडिया ऍम में से कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं इस प्रकार है एक । चैटिंग यह वृहद स्तर पर शब्दों पर आधारित संचारण है जिससे इंटरनेट पर आपस में बातचीत कर सकते हैं । जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता चित्र वीडियोकाॅॅॅन एक दूसरे के साथ प्रसारित कर सकते हैं तो यह भी संचार का एक जबरदस्त एवं प्रभावशाली माध्यम है । व्यक्ति इसके माध्यम से अपने बडे से बडे डॉक्यूमेंट संदेश आदि कुछ सेकेंड्स में प्रेषित कर सकते हैं । तीन । वीडियोकाॅॅॅन इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति क्या व्यक्तियों का समूह, किसी व्यक्ति या समूह के साथ दूर रहते हुए भी हमने सामने रहते हुए महसूस करके बातचीत कर सकते हैं? चार । ई लर्निंग इसके अंतर्गत कंप्यूटर आधारित प्रशिक्षण, इंटरनेट आधारित प्रशिक्षण, ऑनलाइन शिक्षा इत्यादि सम्मिलित है । इसमें उपयोगकर्ता को किसी विषय पर आधारित जानकारी को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रदान किया जाता है । यह कंप्यूटर या इंटरनेट से ज्ञान को प्राप्त करने का एक माध्यम है । पांच बैंकिंग इसके माध्यम से उपयोगकर्ता विश्व स्तर पर कहीं से भी आपने बैंक अकाउंट को मैनेज कर सकता है, जिसमें उपयोगकर्ता पूंजी निकालने, ट्रांसफर करने, मोबाइल रिचार्ज करने हाल ही के लिए ई बैंकिंग सेवा को प्राप्त करता है । छह ई शॉपिंग जैसे ऑनलाइन शॉपिंग भी कहते हैं जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता कोई भी सामान जैसे किताबें, कपडे, घरेलू सामान, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर इत्यादि को खरीद सकता है और खरीदे गए सामान की कीमत के लिए कैश ऑन डिलीवरी बैंकिंग कंप्यूटर पर ही वेबसाइट्स से भुगतान करता है । साथ ही रिजर्वेशन या किसी भी वेब साइट पर किसी भी वस्तु या सेवा के लिए स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को आरक्षित करने के लिए प्रयुक्त होती है । जैसे रेलवे ऍम बुकिंग में होटल रूम्स की बुकिंग विद्यालय में आठ सोशल नेटवर्किंग आती है । इंटरनेट के माध्यम से बना हुआ सोशल नेटवर्क कुछ विशेष व्यक्ति या अन्य संबंधित व्यक्तियों का समूह होता है । इसके माध्यम से उस सोशल नेटवर्क के अंतर्गत आने वाला कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क साध सकता है, चाहे तो कहीं भी हूँ । नौ ईकॉमर्स इसके अंतर्गत सामानों का लेन देन, व्यापारिक संबंधों को बनाए रखना, व्यापारिक जानकारियों को शेयर करना इत्यादि आता है, जिसमें धनराशि का लेन देन इत्यादि भी सम्मिलित है । दस ऍप्स यह किसी भी वस्तु या सामान इत्यादि को फाॅर्स कम्युनिकेशन के माध्यम से खरीदने तथा बेचने के लिए प्रयोग होता है । इसमें वायरलैस करना जैसे मोबाइल, टैबलेट इत्यादि का प्रयोग होता है । ग्यारह । गोजलिंग गूगल इंटरनेट के लिए आज के समय का सबसे ज्यादा सफल पावरफुल सर्च इंजन है । गूगल सर्च इंजन पर किसी जानकारी को ढूंढना क्या सर्च करना गूसलिंग कहलाती है? बारह विज्ञापन विज्ञापन आज से ही नहीं बल्कि काफी समय से संचार का एक सशक्त, प्रभावशाली माध्यम रहा है । समझ प्रकार के संचार माध्यमों से विज्ञापन का संचालन होता है । जैसे समाचारपत्र टीवी, इंटरनेट समस्या, पत्रिकाएं, मोबाइल, होर्डिंग इत्यादि । आम जनता एवं सभी वर्ग के लोगों पर विज्ञापन का प्रभाव बडे बगैर नहीं रहता है । आज बडी से बडी कंपनियाँ, छोटे बडे उद्योग सभी विज्ञापन के दम पर ही दम भर रहे हैं । अर्थात विज्ञापन, व्यापार एवं कारोबार कि रीड की हड्डी है । विज्ञापन की पहुंच दूर दराज के गांव गलियारों तक है । आज अधिकतर ग्रामीण व्यक्ति शाम को क्या होता है? जानता है इंटरनेट क्या होता है से परिचित है । सही कहे तो विज्ञापन और विकास एक दूसरे के पर्याय है । आज इंटरनेट के माध्यम से लोग लेकर और ऍफ साइट पर कोई भी नहीं किया । पुरानी वस्तु की खरीद फरोख्त बडी आसानी से कर सकता है । उसे केवल अपनी आवश्यकता को इन वेबसाइटों पर अपलोड करना होता है और उसके सामान की खरीद या बिक्री आसानी से हो जाती है क्योंकि आज का व्यक्ति इंटरनेट के द्वारा इन वेबसाइटों का उपयोग कर अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति पूरी मदद के साथ कर रहा है । ऍम

05 - डिजिटल क्रांति की दुनिया में ग्रामीण समाज का बदलता स्वरुप

ऍम डिजिटल क्रांति की दुनिया में ग्रामीण समाज का बदलता स्वरूप प्रस्तुत लेख संचार प्रौद्योगिकी वॅाटर इंडिया से ग्रामीण समाजों के बदलते स्वरूप के अध्यन से संबंधित है । भारत को कामों का देश कहा जाता है । भारत में अधिकांश आबादी ग्रामीण होगी है हम इस संख्यिकी अनुकूलता कल आप तभी उठा सकते हैं जब हमारे सभी ग्रामीण शिक्षक प्रशिक्षण तथा प्रेरित हूँ । भारत ने संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बहुत तरक्की की है । सूचना प्रौद्योगिकी देश के विकास की सीढी ही नहीं लेफ्ट हैं । देश को विकास की धारा से जोडने का एक सशक्त माध्यम है । भारत के बदलते सामाजिक परिवेश में डिजिटल इंडिया एक क्रांति के रूप में अग्रसित होगा । डिजिटल इंडिया के माध्यम से गांवों के लोगों में संचार क्रांति, वित्तीय समावेश आदि क्षेत्रों में दूरगामी बदलाव आने की भी संभावना है । यदि सभी बच्चों को शिक्षा मिलेगी, सभी को सेवाएँ उपलब्ध हो और लाभ बिना किसी भेदभाव से प्राप्त हो । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम निश्चित तौर पर वर्तमान समय की जरूरतों और दूरगामी सोच को ग्रामीण सामाजिक बदलाव की दिशा में अग्रसर होगा । आप डिजिटल इंडिया समग्र ग्रामीण विकास का अग्रदूत बन सकता है । प्रस्तावना भूमंडलीकरण और इंटरनेट की बदौलत हूँ । आज जब पूरी दुनिया वसुधैवकुटुम्बकम की ओर तेजी से बढ रही है तो ऐसे में भारतीय गांवों को सिर्फ दो रोटी पर केंद्रित नहीं रखा जा सकता । डिजिटल इंडिया भारत सरकार की नई पहल है जिसका उद्देश्य भारत को डिजिटल लिहाज से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलना है । इसके तहत जिस लक्ष्य को पाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, यह बेहतर है कि आॅफ विचारों को एकता एवं व्यापक विजन में समाहित करता है ताकि इनमें से हर विचार एक बडे लक्ष्य का हिस्सा नजर आएगा । भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में यदि प्रशासन की पहुंच हर नागरिक तक समान रूप से हो जाए और अंतिम छोर पर मौजूद व्यक्ति भी सामाजिक सुविधाओं का लाभ सुगमता के साथ उठा सके तो सामाजिक बदलाव की एक सकारात्मक तस्वीर सामने आ सकती है । आज के दौर में सूचना प्रौद्योगिकी इतनी समर्थ है की गहन नागरिकों को घर बैठे ही तमाम सूचनाएं उपलब्ध करवा सकती है और उन्हें उनका अधिकार दिलवा सकती है कि ये है । वजह है कि सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी की इस ताकत को समाज के जीवन स्तर को उन्नत और राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की है । इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार ने संपूर्ण भारत को डिजिटल करने वाली नई क्रांति का सूत्र बात किया है । समाज के डिजिटल सशक्तीकरण के माध्यम से तैयार होने वाली ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के फलस्वरूप हो देश का विकास इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है । कार्यक्रम से यह उम्मीद की जा रही है के नागरिकों को सभी सरकारी सेवाओं की उपलब्धता मोबाइल कंप्यूटर के माध्यम से सुनिश्चित की जा सके । डिजिटल इंडिया का वजन है हर नागरिक के लिए उपयोगिता के तौर पर डिजिटल संरचना मांग पर संचालन एवं सेवाएं नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण हूँ । हर नागरिक के लिए उपयोगिता के तौर पर डिजिटल संरचना में ये उपलब्ध है नागरिकों को सेवाएं मुहैया कराने के लिए एक प्रमुख उपयोग के रूप में हाई स्पीड इंटरनेट डिजिटल पहचान अंकित करने का । ऐसा उद्गम स्थल जो अनोखा, ऑनलाइन और हर नागरिक के लिए प्रमाणित करने योग्य है । मोबाइल फोन बैंक खाते की ऐसी सुविधा जिसमें डिजिटल वापिस मामलों में नागरिकों की भागीदारी हो सके । साझा सेवा केंद्र तक आसान पहुंच पब्लिक पर साझा करने योग्य ने जस्थान और सुरक्षित साइबर नागरिकों को डिजिटल सशक्त बनाने के साथ में सार्वभौमिक डिजिटल साक्षरता, सर्वत्र सुगम डिजिटल संसाधनों अथवा सेवाओं की भारतीय भाषाओं में उपलब्धता, सुशासन के लिए डिजिटल प्लाॅट पोर्टेबलिटी के सभी अधिकारों को सहयोगपूर्ण बनाना, शासकीय दस्तावेज या प्रमाणपत्रों आदि को उनकी मौजूदगी के बिना भी भरा जा सकेगा । डिजिटल इंडिया और नागरिकों की पहचान डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण विषय शामिल है । इसके तहत प्रत्येक नागरिक के लिए उपयोगी सेवाएं मुहैया कराने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का सृजन किया जाएगा । ऐसी बुनियादी सेवाओं के माध्यम से देश ज्ञान के एक ऐसे भविष्य की ओर उन्मुख होगा, जहाँ प्रशासन और सेवा हर मांग पर उपलब्ध होगी । ऐसे में प्रशासन की जवाबदेही काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि भ्रष्टाचार को मिटाना भी अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम होता है । इसी सोच के साथ बहुत उद्देश्य राष्ट्रीय पहचान पत्र यानी आधार कार्ड को भी डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के साथ जोडा गया है । आधार कार्ड की संख्या भारत में कहीं भी व्यक्ति की पहचान और पते को निर्धारित कर दी है । आधार संख्या प्रत्येक व्यक्ति की जीवन भर की पहचान है । आधार संख्या से उन्हें बैंकिंग, मोबाइल फोन कनेक्शन और सरकारी व गैर सरकारी सेवाओं की सुविधाएं प्राप्त करने में सुविधा मिलती है । यह सरल ऑनलाइन ही में सत्यापन योग्य है । डिजिटल इंडिया तकनीक आधारित गांधी क्षेत्र में बढोतरी हुई है । डिजिटल इंडिया और योजना प्रधानमंत्री जनधन योजना का उद्देश्य भारत के नागरिकों को बुनियादी वित्तीय सेवाएं जैसे बैंक खाते और डेबिट कार्ड मुहैया कराना है । वित्तीय समावेश के राष्ट्रीय मिशन को आगे बढाने के लिए यहाँ योजना शुरू की गई । योजना आर्थिक निरन्तरता बढाने और जनता को वित्तीय सेवाएं जैसे बैंक जमा खाते, कर्ज और बीमा प्रदान करने के लिए एक साधन के तौर पर तैयार की गई । यदि इसकी मूल भावना को देखा जाए तो यह भी डिजिटल इंडिया के लक्ष्यों को पूरा करती दिखाई देती है । इसका उद्देश्य सन दो हजार अठारह तक साढे सात करोड परिवारों तक पहुंच बनाना है । यह योजना सरकारी कार्यालयों में किसी भी रूप में मौजूद भ्रष्टाचार से लडने के एक हथियार के तौर पर उपयोग के लिए बनी है । भारत की अधिकतर जनता के बैंक खाते होने पर सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की जा सकेगी । इस प्रकार देखा जाए तो यह योजना डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने में सहयोगी है । इस तरह की योजनाओं के पीछे केंद्र सरकार की सोच ये है कि व्यक्तिगत लाभ की योजनाओं का सीधा लाभ आम जनता तक पहुंचे और साथ ही तकनीक के इस्तेमाल से वातावरण तैयार हो सके । जो ग्रामीण आम जन तक की पहुंच को सुनिश्चित करेंगे । मेक इन इंडिया कार्यक्रम को मजबूत बनाने में इस तरह की योजनाओं का अच्छा योगदान साबित होगा । डिजिटल इंडिया से विकास के अवसर डिजिटल इंडिया कार्यक्रम से सामाजिक बदलाव आएंगे । यह बात निश्चित रूप से कहीं जा सकती है कि इसके परिणाम ग्रामीण समाज भारतीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करेंगे । इस कार्यक्रम के तीन पहलू हैं प्रत्येक नागरिक के लिए सुविधा के रूप में बुनियादी ढांचा जैसे पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोडना, मोबाइल सेवाओं का विस्तार और मोबाइल से वित्तीय समावेशन, दूसरा प्रशासन एवं इसकी सेवाओं को आम नागरिक तक पहुंचाना, जिससे उन्हें लंबी कतारों, भ्रष्टाचार और मजदूरी के नुकसान से छुटकारा मिल सके और तीसरा प्रौद्योगिकी के माध्यम से ग्रामीण नागरिकों का सशक्तीकरण जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल का विकास । साथ ही कंप्यूटर और मोबाइल पर भारतीय भाषाओं में काम करने को और आसान बनाना । इस कार्यक्रम के तहत दो हजार सत्रह तक ढाई लाख पंचायतों सहित छह लाख गांवों को ब्रॉडबैंड से जोडने का सरकार का लक्ष्य है । अब तक इस योजना के तहत पचपन हजार पंचायतें जोडी भी जा चुकी हैं । प्रधानमंत्री की सोच यह भी है कि भारतीय किसानों को आईटी क्षेत्र सहित लाभ मिलना चाहिए । डिजिटल इंडिया के तहत भारत के सरकारी कर्मचारियों के तकनीकी रूप से उन्नयन का मार्ग भी प्रशस्त होगा । इस कार्यक्रम के गति पकडने से सभी विद्यार्थियों में सेंट्रल सर्वर की राह भी खुलेगी जो सभी प्रकार की ही प्रशिक्षण सामग्री से परिपूर्ण सेंट्रल क्लाउड से जुडा होगा । इसके अतिरिक्त समाज का हर क्षेत्र इस क्रांति से सकारात्मक रूप से प्रभावित होगा और समाज में व्यापक बदलाव आएगा । डिजिटल इंडिया के आधार डिजिटल इंडिया के नौ संभाल ब्रॉडबैंक हाइवेज, सबकी बोल तक पहुंच सार्वजनिक इंटरनेट ऍम तकनीकी मदद से सरकारी तंत्र सुधार एक क्रांति सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी सभी को सोचना इलेक्ट्रॉनिक निर्माण में शून्य आयात नौकरियों के लिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की सफलता इस तथ्य में निहित है कि भारतीय ग्रामीण आबादी इस तरह की सेवाओं का मूल लाभ ले सके । इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए देश के पचपन हजार गांवों में अगले पांच वर्षों के भीतर मोबाइल संपर्क की सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए बीस हजार करोड के यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड ऍफ का गठन किया गया है । इससे ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के इस्तेमाल में आसानी होगी । कार्यक्रम का देख लक्ष्य यह है कि भविष्य में सभी सरकारी विभागों तक आम आदमी की पहुंच बडा ही जाएगी । पोस्ट ऑफिस के लिए यह दीर्घावधि विजन पाला कार्यक्रम हो सकता है । इस कार्यक्रम के तहत पोस्ट ऑफिस को मल्टी सर्विस सेंटर के रूप में तब्दील किया जाएगा । नागरिकों तक सेवाएं मुहैया कराने के लिए यहाँ अनेक तरह की गतिविधियों को चलाया जाएगा । यह कार्यक्रम सेवाओं और मंचों के एक करंट आधार संख्या पेमेंट के आदि में मददगार साबित होगा । साथ ही सभी प्रकार के डेटाबेस और सूचनाओं को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मुहैया कराया जाएगा । इसके अतिरिक्त एजुकेशन के तहत सभी स्कूलों को ब्रॉडबैंड से जोडने ढाई लाख स्कूलों को मुफ्त वाईफाई की सुविधा मुहैया कराने और डिजिटल लिटरेसी कार्यक्रम की योजना है । किसानों के लिए रियल टाइम कीमत की सूचना, नकदी कर राहत, मोबाइल बैंकिंग आदि की ऑनलाइन सेवा प्रदान करना भी इस कार्यक्रम के उद्देश्य में शामिल है । इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऑनलाइन मेडिकल सलाह, रिकॉर्ड और संबंधित दवाओं की आपूर्ति समेत मरीजों की सूचना के जुडे एक्सचेंज की स्थापना करते हुए लोगों को ई हेल्थकेयर की सुविधा देना भी इस कार्यक्रम का एक आधार है । इस कार्यक्रम के तहत सूचना और दस्तावेज तक ऑनलाइन पहुंच भी कायम की जाएगी । इसके लिए ओपन ऍम मुहैया कराया जाएगा, जिसके माध्यम से नागरिक सूचना तक आसानी से पहुंच सकेंगे । नागरिकों तक सूचनाएं मुहैया कराने के लिए सरकार सोशल मीडिया और ऐप आधारित मंचों पर सक्रिय रहेगी । देशभर में सूचना प्रौद्योगिकी के प्रसार में रोजगार के अधिकांश प्रारूपों में इसका इस्तेमाल पड रहा है । इसलिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रमों को इस प्रौद्योगिकी से जोडा जाएगा । साथ ही संचार सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनियां ग्रामीण कार्यबल को उनकी अपनी जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करेंगे । गांवों वह छोटे शहरों में लोगों को आईटी से जुडे रोजगार के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा । आईटी सेवाओं से जुडे कारोबार के लिए लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत कई मौजूदा योजनाओं के साथ मिलकर कार्य करना है जिसके दायरों को पुनर्गठित और पुनर् केंद्रित किया गया है । इंटरनेट, मोबाइल इत्यादि तकनीकी को बढावा देना, परिवर्तनकारी प्रक्रिया पन रचना और प्रक्रिया में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना, डिजिटल इंडिया के माध्यम से मेक इन इंडिया इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हूँ । उत्पादकों और सेवाओं को भी बढावा देना और देश में युवाओं के लिए रोजगार की संभावना को बढावा देना शामिल हैं । बुनियादी सुविधाओं के अलावा गांवों की अपनी सामाजिक समस्याएँ भी है जो पूरे ग्रामीण अर्थतंत्र को भी प्रभावित करती हैं । डिजिटल इंडिया के तहत ढाई लाख गांवों में तेजी से इंटरनेट कनेक्शन पहुंचाने की पहले की जा चुकी है । केरल के इडुक्की जिले से इसकी शुरुआत की जा चुकी है जबकि पहला जिला है जिसे नेशनल ऍसे जोडा गया है । इस पहल से काम से सभी मोबाइल फोन को इंटरनेट से जोड दिया गया है । निष्कर्ष ग्रामीण समाज को सशक्त बनाने में संचार प्रौद्योगिकी या डिजिटल क्रांति अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं । देश आगे बढ रहा है । इसका मतलब यह है कि हमारे गांव आगे बढ रहे हैं । आप समय आ गया है कि प्रत्येक भारतवासी बदलाव के सुनहरे एहसास को कायम रखते हुए इसमें अपनी भूमिका सुनिश्चित करेगी । आज पूरी दुनिया सूचना के सुपर हाइवे पर दौड रही है और स्मार्ट फोन से लेकर स्मार्ट पालित, स्माॅल फोन की अवधारणा अस्तित्व में आ चुके हैं तो गांवों को स्मार्ट से दूर रखने का कोई औचित्य नहीं बनता है । गांवों में इंटरनेट की पहुंच और उसके सर्वसुलभ होने से भारत को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था करने में मदद मिल रही है । ग्रामीण छात्रों को इंटरनेट के जरिए दुनियाभर की तमाम जानकारियां मिल रही हैं और उनके विकास के रास्ते खुल रहे हैं । ग्रामीणों का डिजिटल सशक्तिकरण उन्हें भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने में काफी हद तक कारगर हो सकता है । गवर्नेंस और ऍम की ऑनलाइन पहुंच गांवों तक होने से इस समस्या को काफी हद तक दूर किया जा सकता है । ग्रामीण मोबाइल इंटरनेट और एटीएम का उपयोग करने के आदी हो रहे हैं । इंटरनेट की पहुंच होने से गांवों में बीपीओ तेजी से खोले जा सकते हैं, जहाँ महिलाओं को रोजगार मिल सकता है । कुल मिलाकर देखें तो डिजिटल इंडिया समग्र ग्रामीण विकास का अग्रदूत बन सकता है ।

06 - ग्रामीण युवाओं में मोबाइल संचार की अभिरुचि एवं उपयोगिता का अध्ययन

ग्रामीण युवाओं में मोबाइल संचार की अभिरुचि एवं उपयोगिता का अध्ययन । जनसंचार क्षेत्र में विगत कुछ दशकों में अभूतपूर्व प्रगति देखने को मिली है । जनसंचार की रखने की नहीं । संपूर्ण विश्व को समेटकर इतना छोटा कर दिया है कि हम एक घर के एक कोने में बैठ कर संपूर्ण विश्व की चार अपनी इंद्रियों के माध्यम से कर सकते हैं । वर्तमान की भागदौड भरी जिंदगी में युवा पीढी के पास इतना समय नहीं है कि अखबार, टेलीविजन, रेडियो के लिए अलग से समय निकाल सके । ऐसे में मोबाइल की एक माध्यम है जो हमें हर पल नवीन सूचनाएं देता है । इंटरनेट के माध्यम से मोबाइल पर ईपेपर पढ सकते हैं, रेडियो सुन सकते हैं और टीवी चैनल देख सकते हैं । जब टेलीफोन का अविष्कार हुआ था तो उसका इस्तेमाल केवल बात करके किया जाता था । आविष्कार से अब तक टेलीफोन ने स्मार्ट मोबाइल फोन यानी मल्टीमीडिया, मोबाइल फोन, स्मार्ट फोन और टैबलेट फोन तक का सफर तय कर लिया है । मोबाइल पर हम संदेश लिखकर भेज सकते हैं । ऑडियो वीडियो देख मैं सुन सकते हैं, डेटा संग्रह कर सकते हैं । इसके अलावा मोबाइल पर इंटरनेट के माध्यम से ईपेपर पढ सकते हैं । टीवी चैनल देख सकते हैं क्योंकि जनसंचार के क्षेत्र में मोबाइल तकनीकी का अभूतपूर्व योगदान है । इस योगदान के कारण इसे जनसंचार का सातवाँ चित्रपट या स्तंभ या स्क्रीन कहा जाता है । कुछ लोग इसे तीसरा चौथा स्तंभ भी कहते हैं और मोबाइल संचार नाम दिया उद्देश्य मोबाइल फोन ग्रामीण युवाओं के लिए किस स्तर तक संचार का माध्यम है? ग्रामीण युवा मोबाइल फोन का उपयोग किस कार्य के लिए करते हैं? ग्रामीण युवाओं के लिए मोबाइल फोन माध्यम है या उपकरण इसका अध्ययन करना । स्मार्ट फोन के लिए युवाओं की बढती अभिरुचि के विविध कारणों का पता लगाना । मोबाइल फोन के प्रति युवाओं में रचे स्माॅल के कारण युवा मोबाइल की तरफ आकर्षित होते हैं क्योंकि ये फीचर्स युवाओं की जरूरतों का पूरा ध्यान रखते हैं । स्मार्टफोन मेरे सभी जरूरी एप्लिकेशंस उपलब्ध है जो एक कंप्यूटर में होती है । इंटरनेट के माध्यम से दुनिया की किसी भी लाइब्रेरी में रखी हुई बुक को ई लाइब्रेरी के माध्यम से पढ सकते हैं । मोबाइल पर माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस का सारा काम किया जा सकता है । ईमेल भेज दिया प्राप्त कर सकते हैं जो पहले केवल कंप्यूटर पर ही संभव था । हमें अक्सर देखने को मिलता है कि युवा हर पल अपने परिचित समाज और दुनिया को जानने को तत्पर रहते हैं । चाहे वह अच्छी खबर हो या पूरी दोस्तों के साथ अपने काम के स्थान के साथ और देश दुनिया के समाचार के साथ जुडे रहने की चाहत इसका एक बडा कारण है । ऐसे ही सोशल मीडिया में खुद को एक्टिव रखने और स्टेटस अपडेट करने के फिक्र, दूसरों के कमेंट्स, वो लाइक या अनलाइक करने या उन्हें जवाब देने, बाॅल रिलेशनशिप बनाने के लिहाज से मोबाइल फोन सेवाओं का पसंदीदा यंत्र बन चुका है । मोबाइल फोन के प्रति युवाओं की रुचि इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि मोबाइल कंप्यूटर की अपेक्षा काफी सस्ता उपलब्ध हो जाता है तथा आसानी से जेब में रखकर कहीं भी जा सकते हैं । मोबाइल फोन के जरिए इंटरनेट इस्तेमाल करना आसान होता है । यदि हम मोबाइल फोन को वर्तमान युवापीढी का गहना कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि जहाँ पहले युवाओं में लडके गहने के तौर पर चेन, अंगूठी, प्राइस, लाइट, घडी और लडकियों में चूडियां, पायल, नथ, बालिया अन्य पसंद किये जाते थे । अब लडके लडकियों की पसंद सामान हो गई है और वे लेटेस्ट मॉर्डल का मोबाइल फोन खरीदना पसंद करते हैं । तथ्य संकलन, प्रस्तुति एवं विश्लेषण एक । आप संचार के लिए किस प्रकार का मोबाइल इस्तेमाल करते हैं? विकल्प सधारण बेसिक विकल्प मल्टीमीडिया विकल्प सा स्मार्टफोन विकल्प अगर कोई नहीं चौदह प्रतिशत युवा साधारण अथवा बेसिक मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हैं तरीक प्रतिशत युवा मल्टीमीडिया मोबाइल इस्तेमाल करते हैं तेईस प्रतिशत युवा लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं दो । आप मोबाइल का उपयोग क्यों करते हैं? विकल्प सूचना के लिए विकल्प शिक्षा के लिए विकल्प सा मनोरंजन के लिए क्या विकल्प? सभी के लिए बारह प्रतिशत युवा मोबाइल फोन का इस्तेमाल सूचना प्राप्ति के लिए करते हैं प्रतिशत युवा मोबाइल फोन का इस्तेमाल सूचना, शिक्षा एवं मनोरंजन के लिए करते हैं टीम मोबाइल संचार किस रूप में इस्तेमाल करते हैं? निकल काॅल चालीस प्रतिशत युवा मोबाइल पर कॉल करके अपने विचार या संदेश साझा करते हैं । बीस प्रतिशत एसएमएस के माध्यम से अपने विचार या संदेश साझा करते हैं । चार प्रतिशत युवा कॉल कॉन्फ्रेंस का इस्तेमाल करते हैं । छत्तीस प्रतिशत युवा मोबाइल फोन पर विडियो कॉल का इस्तेमाल करते हैं । सौ प्रतिशत युवा कॉल और एसएमएस के माध्यम से विचार क्या संदेश साझा करते हैं? चार । प्रमोशनल कॉल या एसएमएस को आप क्या मानते हैं? विकल्प सूचना निकल बात विज्ञापन विकल्प सा दोनों निकल डर ध्यान नहीं देते अठारह प्रतिशत युवा सूचना के रूप में मानते हैं । तीस प्रतिशत युवा विज्ञापन का रूप मानते हैं । पचास प्रतिशत युवा सूचना और विज्ञापन दोनों मानते हैं दो प्रतिशत युवा प्रमोशनल काॅल्स पर ध्यान ही नहीं देते हैं । पांच । आप मोबाइल फोन पर सोशल साइट का इस्तेमाल किस उद्देश्य से करते हैं? विकल्प सूचना के लिए विकल्प शिक्षा के लिए विकल्प सा मनोरंजन के लिए विकल्प दोस्त बनाने के लिए या विकल्प सभी के लिए छब्बीस प्रतिशत युवा सोशल साइट का इस्तेमाल सूचना के लिए करते हैं दो प्रतिशत युवा शिक्षा के उद्देश्य से सोशल साइट इस्तेमाल करते हैं । बीस प्रतिशत युवा केवल मनोरंजन के लिए इस्तेमाल करते हैं । तीन प्रतिशत युवा दोस्त बनाने के लिए सोशल साइट का इस्तेमाल करते हैं । छियालीस प्रतिशत युवा सूचना, शिक्षा, मनोरंजन एवं दोस्त बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं । छह । क्या आप कौन कॉन्फ्रेंस का इस्तेमाल करते हैं? हाँ तो कभी कभी सब नहीं । बत्तीस प्रतिशत युवा अक्सर कॉल कॉन्फ्रेंस का इस्तेमाल करते हैं । अडतालीस प्रतिशत युवा कभी कभी इस्तेमाल करते हैं । बीस प्रतिशत युवा कॉल कॉन्फ्रेंस का इस्तेमाल नहीं करते हैं । साथ में क्या आप मोबाइल पर तीन न्यूज पेपर पढते हैं? हाँ, बहुत कभी कभी सब नहीं । बत्तीस प्रतिशत युवा अक्सर मोबाइल पर ईपेपर पडते हैं । चौवालीस प्रतिशत युवा कभी कभी मोबाइल पर पडते हैं । चौबीस प्रतिशत युवा ईपेपर का इस्तेमाल नहीं करते हैं । आठ । क्या आप अपने मोबाइल पर अलग से कोई न्यूज एप्लीकेशन का उपयोग करते हैं? हाँ बस नहीं सर, अन्य एप्लीकेशन अडतीस प्रतिशत युवा अपने मोबाइल फोन पर न्यूज एप्लीकेशन का उपयोग करते हैं । जब प्रतिशत युवा अलग से कोई एप्लीकेशन न्यूज के लिए इस्तेमाल नहीं करते हैं । आठ प्रतिशत युवा अन्य एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हैं । नौ । मोबाइल पर एफएम रेडियो का उपयोग किस रूप में करते हैं? सूचना के लिए बहुत शिक्षा के लिए साथ मनोरंजन के लिए सभी के लिए नहीं करते हैं । छह प्रतिशत युवा सोचना के लिए एफएम रेडियों का उपयोग करते हैं । छह प्रतिशत युवा शिक्षा के लिए एफएम रेडियो का उपयोग करते हैं । अट्ठाईस प्रतिशत युवा केवल मनोरंजन के लिए एफएम रेडियो का उपयोग करते हैं । प्रतिशत युवा सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के लिए एफएम रेडियो का इस्तेमाल करते हैं । प्रतिशत युवा मोबाइल फोन पर एफएम रेडियो का इस्तेमाल नहीं करते हैं । दस । आप मोबाइल पर कोई न्यूज चैनल देखते हैं? हाँ, बस कभी कभी सब नहीं । अठारह प्रतिशत युवा मोबाइल पर अक्सर न्यूज चैनल देखते हैं । बाईस प्रतिशत युवा कभी कभी न्यूज चैनल देखते हैं । साठ प्रतिशत युवा मोबाइल के द्वारा न्यूज चैनल नहीं देखते हैं । निष्कर्म मोबाइल फोन एक जन संचार माध्यम की भूमिका अदा करता है क्योंकि इसमें जनसंचार के सभी छह माध्यमों प्रिंट रिकॉर्डिंग, सिनेमा, रेडियो, टीवी और इंटरनेट का समावेश है । व्यक्ति को इन जनसंचार माध्यमों का इस्तेमाल करने के लिए अलग से प्रयास नहीं करना पडता है । इसके अलावा व्यक्ति कॉल ग्राॅस के द्वारा किसी समूह विशेष को संप्रेषित करता है क्योंकि एक साधारण मोबाइल बगैर इंटरनेट द्वारा किया जा सकता है । इससे मोबाइल फोन को संचार का सातवाँ आयाम कहना बिल्कुल सही है । शोध से पता चलता है कि अभी ज्यादातर युवा मोबाइल फोन के जनसंचार माध्यम के रूप से पूरी तरह परिचित नहीं है । बे मोबाइल फोन में उपलब्ध सेवाएं एफएम रेडियो, न्यूज एप्लिकेशन, न्यूज चैनल आदि का पचास प्रतिशत से भी कम इस्तेमाल करते हैं । युवा कॉल ग्राॅस सोशल साइट एप्लीकेशन का इस्तेमाल ज्यादातर सूचना के लिए करते हैं । उसके बाद मनोरंजन के लिए और फिर कहीं शिक्षा के लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं ।

07 - ग्रामीण समाज तक संचार माध्यमों की पहुँच

ग्रामीण समाज तक संचार माध्यमों की पहुंच । माना जाता है कि जब समाज में संचार माध्यमों का जितना अधिक उपयोग होता है, बहुत समाज बौद्धिक रूप से उतना श्रेष्ठ माना जाता है । नगरीय और ग्रामीण समाज को संचार माध्यम पूरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं । संचार माध्यम समाज के सापेक्ष अपने को रखने के लिए उन्हीं के अनुकूल अपने को डालते हैं । किसी से नगरीय और ग्रामीण समाज के संचार माध्यमों का प्रकाशन और प्रसारण तय होता है । भारत में ग्रामीण समाज के संचार माध्यम बहुत कम समय में अपने परिष्कार की ओर अग्रसर हैं । उन्हें अभी अमेरिका, रूस, फ्रांस और प्रतिन जैसे देशों के स्तर को प्राप्त करने के लिए आवश्यक ही कुछ और समय लगेगा । लेकिन जिस गति से वो आगे बढ रहे हैं, उसे संभावनाएं यही है कि वह यथाशीघ्र स्तर को प्राप्त करेगा । यह केवल हमारी अवधारणा नहीं है बल्कि वैश्विक संचार माध्यमों के प्रबंधकों की भी अवधारणा है । यही कारण है कि विश्व मीडिया का रुझान भी भारत के ग्रामीण समाज के और पडता जा रहा है और मैं अपने प्रकाशन और प्रसारण यहाँ से प्रारंभ करने की तैयारी में जुटा है । समय और मांग के अनुरूप संचार माध्यमों के स्वरूप में भी सुधार होता जा रहा है । किसी से पता चलता है कि संचार माध्यम ग्रामीण समाज को जागरूक करने में महती भूमिका निभा रहे हैं । ग्रामीण समाज में भरता प्रभाव कुछ दशक पूर्व तक ग्रामीण समाज में संचार माध्यमों की उपस्तिथि बहुत कम थे । वर्ष दो हजार आते आते उसने गति पकडने प्रारंभ करती हैं और वहाँ से लेकर आज तक का विकास क्रम अपने आप में विशेष उल्लेखनीय है । इस समयावधि में हमें गांवों, कस्बों के घरों और दुकानों पर दैनिक समाचारपत्रों से लेकर मानसिक समाचारपत्रों तक की उपलब्धता दिखाई थी । पत्र पत्रिकाओं का प्रसार भी निरंतर व्यापक होता चला गया । यह जाग्रति, संचार से जुडी संचेतना, सामाजिक को में अन्य क्षेत्र की जानकारी के लिए आग्रह, अन्य समस्त व्यवस्थाओं को समझने की मनोवृत्ति, अपने को दूसरों के साथ जोडकर देखने का भाव एवं अपने कार्य और व्यवसाय के संबंध में तत्संबंधी जानकारियों तक पहुंचने की इच्छा ऐसे ही पक्ष है जो इस क्षेत्र के लोगों को संचार माध्यम के साथ जोडते हैं । लोग इन से जुडाव के बाद अपने को अद्यतन कर पाने में सफल हो रहे हैं । इसका लाभ भी उन्हें मिल रहा है । पूर्व में जहाँ क्षेत्र विशेष तक सीमित थे, आज व्यापक क्षेत्रों के साथ अपने को रख कर देख रहे हैं । प्रतिस्पर्धात्मक का विकास हो रहा है, मूल्यों का विकास हो रहा है, सामाजिक स्तरों के विकास की संभावनाएं बढ रही हैं । तारीकरण में परिवर्तन आ रहा है । सामाजिक सोच में विकास की प्रक्रिया आई है । अभिवृत्ति के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है । लोगों में संचार माध्यमों के द्वारा एक नवीन उत्साह की उद्भावना दिखने लगी है । समाचार पत्र पत्र का उनके बीच इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यम के सभी प्रारूप भी ग्रामीण समाज में सफलतापूर्वक अपना विकास करने में समर्थ है । जैसे दूरदर्शन के चल आकाशवाणी के प्रसारण केंद्र, इंटरनेट मोबाइल आदि का प्रयोग अब होता जा रहा है । इससे विदित होता है कि शहरों और कस्बों में दिनों दिन संचार माध्यमों की भूमिका प्रभावी हो चुकी हैं । लोग इन संचार माध्यमों के द्वारा सीधे आधुनिक जनसंचार प्रौद्योगिकी के साथ अपने साक्षात्कार पा रहे हैं । आने वाले समय में इसके और अधिक विकास के सभी मार्ग प्रशस्त देखते हैं । इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों का सबसे प्रभावी माध्यम विभिन्न टीवी न्यूज चैनल है । चौबीस घंटे के न्यूज चैनलों का प्रसारण वर्ष दो हजार के बाद ही शुरू हुआ । इनमें नेत्रालय परिवर्तन उन्हें सशक्त बनाने का प्रयास कर रहे हैं । ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पन्न होती जागरूकता हिंदी भाषा, संचार माध्यमों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भारी उत्साह देखा गया है । आज लगभग पचास प्रतिशत घरों में बहुत सारे दैनिक समाचारपत्र पहुंच रहे हैं । साथ ही पत्रिकाएं भी पहुंच रही हैं । इससे ग्रामीण क्षेत्रों में उपजी जागरूकता का पता चल रहा है । आज मजदूर और कृषक सभी दैनिक अखबारों को रुचिपूर्वक पडते हैं और उस पर होने वाले खर्च को सहज भाव से स्वीकार करते हैं । कई घर तो ऐसे हैं जहां एक अधिक अखबारों के संस्करण खरीदे जाते हैं जो जिस संदर्भ को देखना चाहता है मैं उसको खरीदता है । यदि कोई संदर्भ दैनिक जागरण में है और पाठक की रुचि के अनुरूप है तो मैं उसको खरीदता है । ऐसा ही अमर उजाला हिंदुस्तान नवभारत टाइम्स के साथ भी है । कई बार देखने में आता है कि ग्रामीण व्यक्ति किसी एक अखबार से संतुष्ट नहीं होता तो वह अपनी संतुष्टि के लिए एक अधिक अखबारों को हरिता यहाँ पडता है । मैं अपने अखबार का संस्करण पडने के बाद पडोसी के पास उपलब्ध दूसरे संस्करण को पडता है और अपने अखबार के संस्करण को पडोसी के लिए उपलब्ध करा देता है । ऐसे में परस्पर सहयोग से दो तीन घर मिलकर कई संस्करणों का पठन पाठन करते हैं । इससे उनकी बौद्धिक मांग का संज्ञान हमें होता है । आज काम भी इतने ही स्तरीय विचारक है जितने की महानगरों में रहने वाले अभी जाते भर के लोग । इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यम की भी यही स्थिति है । ग्रामीण क्षेत्र का निवासी अपने लिए, परिवार के लिए और भविष्य को ध्यान में रखते हुए इन माध्यमों का यथा सम्भव उपयोग करने में लगा है । जो सुविधा हम शहरों और कस्बों में ले रहे हैं, बेस अब यहाँ भी अपना विस्तार प्राप्त कर रहे हैं । इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों में दूरदर्शन चैनल, रेडियो प्रसारण, इंटरनेट, मोबाइल आदि उपयोग हो रहे हैं । शायद ही कोई ऐसा घर मिलेगा जहाँ पर टीवी नहीं देखा जाता है और रेडियो नहीं सुना जाता । ये दोनों माध्यम तो ग्रामीणों की मूलभूत आवश्यकताओं में आ चुके हैं । कई बार तो देखा गया है कि एक घर में कई कई टीवी ऍम मिलते हैं । इसका अभिप्राय क्या है कि पारिवारिक इकाई से उठते हुए इन प्रसारणों का महत्व व्यक्तिगत स्तर तक पडा है । आने वाले समय में यह गतिविधि निश्चित रूप से बढेगी । ग्रामीण क्षेत्रों में भी एक अभी जाते वार का निर्माण हुआ है । जो बडे जमींदार और उच्च नौकरीपेशा वर्ग के लोग हैं । उनके ग्रामीण निवास पर समस्त प्रकार की चल संचार माध्यम की उपलब्ध है । यह भी देखने में आता है कि केवल एक ही व्यक्ति संचार माध्यम के कई कई प्रारूपों का उपयोग करता है, जैसे दूरदर्शन चैनल के विभिन्न चैनल आधुनिक मोबाइल उपकरण पर आकाशवाणी की सर्विस लेना । ऍफ के माध्यम से इंटरनेट की सर्विस लेना । कई बार यह भी सामने आता है कि एक ही व्यक्ति के पास कई प्रकार के मोबाइल, टेबलेट आदि उपलब्ध रहते हैं और वह एक साथ कई का उपयोग करता है । एक आधुनिक जनसंचार माध्यमिक ई के अधिकतम उप्भोक्ता स्वरूप है जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग भी उपयोग में ला रहे हैं । ठीक महानगरीय संस्कृति की तरह है इसके विश्वनाथ कुछ इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों का वर्णन यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है । एक फॅमिली इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों में सबसे प्रभावशाली टेलीविजन को माना जाता है । टेलीविजन पर आने वाले चैनलों के जरिए लोगों को दृश्य और श्रव्य दोनों ही प्रकार के प्रसारण देखने को मिल जाते हैं । इसी कारण टीवी चैनलों की लोकप्रियता किसी भी दूसरे माध्यमों से कहीं ज्यादा है । पहले केवल दूरदर्शन के कार्यक्रम ही लोगों के लिए सुलभ हो पाते थे । केबल चैनल के प्रसारण के साथ ही नए नए टीवी चैनलों का प्रसारण शुरू हुआ । इनमें बडी संख्या समाचार चैनलों की भी रही । अब डायरेक्ट हूँ यानी दी तो एच के जरिए तो टीवी चैनलों के प्रसारण की गति बहुत ही तीव्र हो गई है । तो रेडियो इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों में टीवी चैनल के साथ ही रेडियो भी बहुत लोकप्रिय है । लोकप्रियता के मायने में किसी भी तरह से रेडियो का ग्राफ निरंतर बढोतरी की ओर अग्रसर है । लोगों को टीवी चैनलों के साथ ही रेडियो भी आसानी से सुलभ है । एक ही समय में लोगों के पास टेलीविजन के साथ साथ रेडियो भी मिलेगा । काम करते समय लोग रेडियो पर आने वाले कार्यक्रमों से आसानी से रूबरू हो सकते हैं । किसी कारण टेलीविजन की लोकप्रियता बढने के बाद भी रेडियो के आगे बढते कदम रुके नहीं बल्कि रेडियो के विस्तार में तेजी आदि जा रही है । नई नई एफएम चैनलों और कम्युनिटी रेडियो के प्रसारण से रेडियो संचार का तेजी से विस्तार करने वाला माध्यम बन गया है । तीन ऍम एक शताब्दी के संचार माध्यमों में इंटरनेट की भूमिका सबसे अधिक हो गई है । इंटरनेट की एक क्लिक के जरिए पलक झपकते ही संचार माध्यमों के सारे प्रकार कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देने लगते हैं । लोगों को संचार माध्यमों का यह प्रकार सबसे आसान दिखाई दे रहा है । किसी कारण इसकी लोकप्रियता सबसे तीव्र गति से बढती जा रही है । अब तो लोगों को इंटरनेट पर ही समाचार पत्र और पत्रिकाओं के ई संस्करण पडने को मिल रहे हैं । साथ ही टीवी चैनलों के लाइव प्रसारण भी इंटरनेट पर लोग देख और सुन रहे हैं इंटरनेट के जरिये क्योंकि विभिन्न एफएम चैनलों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम सुनी जा सकते हैं । चार मोबाइल मोबाइल नहीं, इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों की दुनिया को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है । एक छोटी से आधुनिक यंत्र ने संचार माध्यमों की पूरी दुनिया को अपनी मुट्ठी में कर लिया है । इंटरनेट की बदौलत मोबाइल पर ही समाचारपत्रों के ई संस्करण, टीवी चैनलों के लाइफ कार्यक्रम, रेडियो के एफ । एम चैनलों के प्रसारण देखे और सुने जा सकते हैं । इसी कारण मोबाइल तेजी से युवाओं के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है । मोबाइल के साथ फॅमिली इंटरनेट की सहायता से पूरी दुनिया को छोटा कर दिया है । संचार माध्यमों का बढता सर्वहारा वर्ग हिंदीभाषी संचार माध्यमों का सर्वहारा वर्ग में विस्तार हो रहा है । ऐसा कोई फर्क नहीं है जो इन माध्यमों की पकड से दूर हो । उच्च आय वर्ग से लेकर गरीबी रेखा तक सभी स्तर पर संचार माध्यमों ने बहुत भारी सफलता अर्जित की है, जो शिक्षित है । बहन मुद्रित संचार माध्यम के साथ निश्चित रूप से किसी ना किसी रूप में जुड जाता है । जो अशिक्षित है वह मुद्र संचार माध्यमों से तो नहीं जुडे पाता, लेकिन अन्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों के साथ उसका सीधा संबंध रहता है । इसमें हम उच्च नौकरीपेशा वर्ग को ले सकते हैं । बहस संपूर्ण संचार माध्यमों का अधिकतम उप्भोक्ता है और इस माध्यम पर बडी मात्रा में प्यार करने की स्थिति में रहता है । उसके लिए संचार माध्यमों के सभी स्वरूप रही है । वह उन का निरंतर उपयोग करता है । इसके बाद उच्च मध्यवर्ग भी इन संपूर्ण संचार माध्यमों का उप्भोक्ता है । पारिवारिक इकाई से लेकर व्यैक्तिक इकाई तक महत्वपूर्ण माध्यमों के संपूर्ण प्रारूपों को उपयोग दिलाता है । मुझे भी और इलेक्ट्रॉनिक भी । उसके पास इस तंत्र को उपयोग करने का संपूर्ण अवकाश और तर्क उपस् थित होता है । जितनी आवश्यकताओं के संदर्भ इनसे ग्रहण करता है और अन्य वर्ग उससे प्रेरित होते हैं । मध्य मध्यमवर्ग भी ठीक उच्च मध्यवर्ग की तरह संपूर्ण संचार माध्यमों का उप्भोक्ता रहा है ।

08 - आधुनिक संचार माध्यम 'रेडियो' और भारतीय ग्राम

आधुनिक संचार माध्यम रेडियो और भारतीय ग्राम आधुनिक युग में जनसंचार के अनेक माध्यम उपलब्ध है । जैसे जैसे विकासशील देश भारत ने प्रगति की है वैसे वैसे संचार माध्यमों के क्रियाकलापों में भी बदलाव आया है । लेकिन इनमें समानता आज भी यही नजर आती है कि संचार माध्यमों का उपयोग करते समय ग्रामीणों का खास ध्यान रखा जाता है । फिर चाहे वो रेडियो के कार्यक्रम हूँ या फिर ऍम । टेलीफोन के बाद रेडियो के आविष्कार ने संचार की प्रक्रिया को दूरस्थ स्थानों तक संभव बनाकर शहरी और ग्रामीण समाजों को आपस में जोडने का काम किया । जब पत्रकारिता रेडियो के साथ जुडी तो इसने समाज में एक विश्वसनीय मित्र के रूप में अपना स्थान बना लिया । वास्तव में रेडियो एक ऐसा संचार माध्यम है जिसके द्वारा कोई संदेश व्यापक जनसमुदाय तक एक साथ पहुंचाया जा सकता है । रेडियो ध्वनि तरंगों को विद्युत ऊर्जा द्वारा काफी दूर तक भेजता है । इन फ्री तरंगों को भेजने में इतना कम समय लगता है की काल पोत की दृष्टि से इसे शून्य कहा जा सकता है । रेडियो का विधिवत विस्तार इटली के एक प्रसिद्ध विज्ञानी मार्कोनी ने हज नामक एक जर्मन वैज्ञानिक की खोज के आधार पर बिना तार की सहायता से समाचार भेजने में सफलता प्राप्त की । खर्च ने ये खोज की थी कि शब्द कंपनी को पिछली की तरह में परिणित कर इधर द्वारा बिना तार लगाए समाचार एक स्थान से दूसरे स्थान तक अति तीव्र गति से भेजे जा सकते हैं । मार्कोनी ने इस खोज को सत्य सिद्ध किया । उन्होंने जिसके अंदर से समाचार भेजा था उसका नाम तो मीटर रखा और जिस यंत्र द्वारा उन्होंने फिर चलते हैं कम्पन को पुनः मनी में बदल दिया, उसका नाम हो रखा है । यही रेडियो आज के वैज्ञानिक युग का एक चमत्कार है । भारत में तेईस जुलाई उन्नीस सौ सत्ताईस को प्रायोगिक तौर पर प्रसारण शुरू किया गया था और समय की भारत सरकार एवं इंडियन ब्रॉडकास्टिंग लिमिटेड के बीच समझौते के तहत रेडियो प्रसारण प्रारंभ हुआ । यह कंपनी उन्नीस सौ तीस में निस्तारण में चली गई तो इसका राष्ट्रीयकरण का इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन नाम रखा गया है । आजादी के बाद उन्नीस सौ छप्पन सत्तावन में इसका नाम ऑल इंडिया रेडियो या आकाशवाणी रखा गया । जहाँ तक आकाशवाणी का सवाल है, आजादी के समय उन्नीस सौ सैंतालीस में इसका केवल छह केंद्रों एवं अठारह ट्रांसमीटर्स का केंद्र तथा उसकी पहुंच केवल ग्यारह प्रतिशत लोगों तक थी । लेकिन आज इसकी पहुंच प्रतिशत लोगों तक है । आकाशवाणी ऍम के माध्यम से प्रसारण सेवा प्रदान करती है । रेडियो की नीति स्पष्ट है । दो भागों में विभक्त की गई संपूर्ण देश को छोडने वाला प्रसारण, क्षेत्रीय प्रसारण भारत में रेडियो सरकारी नियंत्रण में रहा है । हम आदमी को रेडियो चलाने की अनुमति है तो अनेक क्षेत्रों से दबाव आया । सन में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि रेडियो तरंगों पर सरकार का एकाधिकार नहीं है । सन दो हजार में एनडीए सरकार ने शिक्षण संस्थानों को कैंपस रेडियो स्टेशन खोलने की अनुमति दी । उसके बाद दो हजार छह में शासन ने स्वयंसेवी संस्थाओं को रेडियो स्टेशन चलाने की अनुमति दी परन्तु रेडियो स्टेशन से समाचार या समसामयिक विषयों पर चर्चा के प्रसारण पर पाबंदी है । सामुदायिक रेडियो दो हजार चाय में शासन से मिली स्वयंसेवी संस्थाओं को रेडियो स्टेशन चलाने की अनुमति का प्रभाव हम सामुदायिक रेडियो के रूप में देखते हैं । सामुदायिक रेडियो एक ऐसा माध्यम है जो किसी एक समुदाय का है, उसी समुदाय में स्थापित है और उसी समुदाय से चलाया जा रहा है । इंटरनेट के आने के बाद समुदाय की परिभाषा में थोडा बदलाव आया है । सामुदायिक रेडियो से मीडिया में भी विभिन्नता पैदा होती है । इसका सबसे बडा लाभ यह है कि जो लोग समुदाय से हमेशा जानकारी ग्रहण करते आ रहे हैं । अब वही लोग जानकारी का उत्पादन भी कर सकते हैं । आज के दौर में सामुदायिक रेडियो का प्रभाव बडा है । देश में जुलाई दो हजार चौदह तक कुल एक सौ सत्तर कम्युनिटी रेडियो स्टेशन की शुरुआत हुई है । ग्रामवासियों में भी इसका तेजी से विस्तार हुआ है । ग्राम पंचायतों से जुडी योजना हो या अन्य जागरूकता संबंधी जानकारी सभी सामुदायिक रेडियो के माध्यम से ग्रामीणों में पहुंच रही है । रेडियो का उपयोग मुख्यतः तीन रूप में क्या जाता है प्रचार के साधन के रूप में शिक्षण कार्य के साधन के रूप में, मनोरंजन के साधन के रूप में गांव और रेडियो । ये सभी जानते हैं कि देश की सत्तर प्रतिशत जनता गांव में निवास करती है । ऐसे में ग्रामीणों तक पहुंच बनाने के लिए हर क्षेत्र में उन्हीं के स्तर के माध्यम का चयन किया गया । अब भले ही ग्रामीणों में विकास के बाद तकनीकी सक्षमता आई हो लेकिन यहाँ रेडियो हमेशा से ऐसा सशक्त माध्यम माना गया है जिसके द्वारा सूचनाओं का आदान प्रदान आसानी से होता है । ग्रामीण श्रोताओं के लिए रेडियो स्टेशन पर भी नियमित रूप से कार्यक्रम प्रसारित होते हैं । इन कार्यक्रमों में लक्षित छोटा हूँ की भाषा बोली को ध्यान में रखकर उन्हें शैक्षणिक कृषि संबंधी विकासात्मक सूचनाएं प्रसारित की जाती है । ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रतीक एआईआर स्टेशन से विशेष कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं । ये कार्यक्रम रहेगा और कामकाजी दोनों ही ग्रामीण महिलाओं को ध्यान में रखकर उनकी जरूरतों के हिसाब से प्रसारित किए जाते हैं । इन कार्यक्रमों द्वारा शिक्षाप्रद सूचनाएं देने के अतिरिक्त मनोरंजन भी किया जाता है । इन कार्यक्रमों में स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, गृहस्ती की बातें, पोषण, कामकाजी महिलाओं की समस्याएं आदि महत्वपूर्ण होती है । ग्रामीण बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम दे दियो के माध्यम से प्रसारित किए जाते हैं, ताकि ग्रामीण बच्चों को रोचक तथ्यों के साथ सारगर्भित बातों का ज्ञान हो सके । ग्रामीण बच्चों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन आदि की जानकारी रेडियो द्वारा उपलब्ध कराई जाती है । इसका प्रभाव हमें आज के दौर में भी देखने को मिलता है । शैक्षणिक प्रसारण के अंतर्गत प्राथमिक, माध्यमिक और विश्वविद्यालय स्तर के शैक्षणिक कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है । साथ ही अध्यापकों के लिए विशेष कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं । गांव में रेडियो के खेल प्रसारण अत्यंत लोकप्रिय है । अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय, क्षेत्रीय, स्थानीय सभी स्तरों पर आयोजित किए जाने वाले खेलों को समाचार रिपोर्टों तथा कमेंट्री द्वारा पर्याप्त कवरेज दी जाती है । ताकि गांव तक जागरूकता का संचार किया जा सके । युववाणी कार्यक्रम पंद्रह से तीस वर्ष आयु वर्ग के लिए प्रसारित किया जाता है । इन कार्यक्रमों में विविध विधाओं का प्रयोग किया जाता है जैसे भेंटवार्ता, चर्चा, इंटरव्यू फॅार संगीत, वरिष्ठ नागरिकों और कारखानों में काम करने वाले लोगों के लिए क्षेत्रीय भाषा में कार्यक्रम कर प्रसारण किया जाता है । इस क्षेत्र में औद्योगिक समिति भी स्थापित की गई है जिसमें स्वास्थ्य, चिकित्सा, श्रम कानून, आधी के विशेषज्ञ सम्मिलित है जो समय समय पर इन गांव में कार्यरत मजदूरों को मूल्यवान सुझाव देते रहते हैं । फोन इन कार्यक्रम ट्रॅवेल जैसे कई इंटरेक्टिव कार्यक्रम भी रेडियो पर प्रसारित होते हैं जिनपर ग्रामीण जनता अपने सवाल पूछ सकती है और जानकारी प्राप्त कर सकती है । खेती गृहस्ती और खेती की बातें कार्यक्रम खास तौर पर किसानों के लिए प्रसारित किया जाता है । निष्कर्ष एक समय था जब कहाँ शहरवासियों के लिए वीडियो ही संचार का प्रमुख साधन था लेकिन आज जमाना बदल गया है । धरती के एक छोर से दूसरे छोर तक बैठा व्यक्ति सतत एक दूसरे के संपर्क में रहता है । दुनिया के किसी भी कोने में कोई भी घटना हो पलभर में सभी जगह प्रसारित हो जाती है । तेज गति से चल रहे इस कालखंड में रेडियो की बात बडी असहज लगती होगी । लेकिन यह सच है कि किसी जमाने में रेडियो की अपनी अलग ही शांति, रेडियो रखना, रेडियो सुनना और रेडियो के कार्यक्रमों में भाग लेना गौरव की बात होती थी । टेलीविजन के आने के बाद रेडियो श्रोताओं में कमी आई है लेकिन एफएम के आने के बाद अब उन्हें रेडियो के दिन लौट रहे हैं । देश के दूरदराज के क्षेत्रों खासतौर पर गांव के निवासियों से संपर्क साधने के प्रयास के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो के माध्यम से लोगों को संबोधित किया और उनसे निराशा त्यागने तथा अपने सामर्थ्य, क्षमता और कौशल का उपयोग देश की समृद्धि के लिए करने की अपील भी की । खुद प्रधानमंत्री ने ग्राम शहर सहित हर कोने तक अपने मन की बात पहुंचाने के लिए आकाशवाणी पर मन की बात की और देश के सवा सौ करोड लोगों से अपने अंदर मौजूद असीम कौशल को पहचानने की अपील की । हमारी केन्द्रीय और प्रादेशिक सरकारें रेडियो से अपने विभिन्न प्रकार की योजनाएं प्रसारित करती है । विश्व में प्रतिदिन घटने वाली महत्वपूर्ण घटना रेडियो से उसी दिन प्राप्त हो जाती है । सोना, चांदी, अनाज आदि के भावों के उतार चढाव के समाचार के साथ साथ फसलों पर वर्ष के समाचार रेडियो द्वारा प्रसारित किए जाते हैं । सरकार अपनी शासन नीति का प्रचार भी वीडियो द्वारा करती है जिसका सबसे ज्यादा लाभ आज भी ग्राम वासियों को मिल रहा है । रेडियो का उपयोग ग्रामीण शिक्षण कार्य के लिए भी किया जाता है । कविता कहानी, एकांकी, विविध विषयों पर निबंध, आलोचनाएं, रेखाचित्र, कवियों की काव्यगत, विशेषताएँ, यात्रा वर्णन, प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थानों का परिचायक, साहित्यकारों की जीवनियां तथा उनके साहित्यिक सेवाओं आदि के संबंध में जो ज्ञान विद्यार्थियों को पंद्रह बीस मिनट की अवधि में रेडियो द्वारा करा दिया जाता है और बहस भाई रूप से मस्तिष्क का अंग बन जाता है । अपराध से संध्या ता जीविकोपार्जन के संघर्ष में व्यस्त मना जब परेशान होकर घर आता है तब रेडियो का मधुर संगीत कुछ ही क्षणों में उसे नवस्फूर्ति से भर देता है और हसन कवि सम्मेलन, मुशायरे, बिना शहनाई वादन आदि मनोरंजन के विविध साधन हमें घर बैठे हैं, रेडियो द्वारा उपलब्ध हो जाते हैं । रेडियो से हमारा मात्र मनोरंजन ही नहीं होता बल्कि ज्ञान में वृद्धि भी होती है । यह अशिक्षितों के लिए सबसे बडा संचार का साधन माना गया है । आज भारत में रेडियो ने अपनी पहुंच पढाई है पर यह बेहद शानदार स्तर पर है । जहाँ एक तरफ सरकारी रेडियो स्टेशन द्वारा जनता तक ज्ञान का भंडार पहुंचाया जाता है, वहीं प्राइवेट रेडियो स्टेशन भी भारत में मनोरंजन को एक अन्य स्तर तक ही जा रहे हैं । हालांकि आज भी गैरसरकारी रेडियो में समाचार या समसामयिक विषयों की चर्चा पर पाबंदी है ।

09 - सामुदायिक रेडियो का आदिवासियों पर प्रभाव

सामुदायिक रेडियो का आदिवासियों पर प्रभाव सामुदायिक रेडियो का अर्थ है कि एक समुदाय विशेष की आवश्यकताओं के मुताबिक छोटे भूभाग पर रेडियो प्रसारण और इस प्रकार प्रसारित होने वाले कार्यक्रम तैयार करने में उस समुदाय की भूमिका होनी चाहिए । दूसरे शब्दों में अगर कहें तो समुदाय द्वारा समुदाय की जरूरतों को पूरा करने के लिए समुदाय का प्रसारण । वैसे तो आजादी से पहले भी देश में सामुदायिक रेडियो ने अपनी भूमिका निभाई थी । में सर्वोच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी थी कि वायु तरंगित जनता की संपत्ति है और सार्वजनिक हित के कार्यों के लिए उनका इस्तेमाल अवश्य किया जाना चाहिए । बाद में दो हजार तीन चार में पहली बार सामुदायिक रेडियो नीति निर्देश जारी किए गए । आज के समय में सामुदायिक रेडियो का महत्व बढ गया है क्योंकि हर समुदाय अपने आस पास के बारे में जानने की कोशिश करता है तथा अपनी ही बोली वह भाषा में सब कुछ सुनना पसंद कर रहा है । आज के समय में सरकार अपनी नीतियों को जनता तक पहुंचाने के लिए उनकी बोली, वहाँ भाषा में कार्यक्रमों का प्रसारण करके उन्हें शिक्षक वह जागरूक करने में लगी है । साथ ही मनोरंजन का सस्ता व सुलभ साधन बन चुका है । सामुदायिक रेडियो भारत में रेडियो प्रसारण की शुरूआत उन्नीस सौ तेईस में बम्बई में रेडियो क्लब की स्थापना के साथ हुई । ऑल इंडिया रेडियो की स्थापना उन्नीस सौ छत्तीस में हुई थी । इन्हीं के बाद सामुदायिक रेडियो का विकास हुआ है । सामुदायिक रेडियो के माध्यम से हम किसी भी वर्ग या चाहती के लोगों की समस्याओं को सुन निराकरण भी कर सकते हैं । आज के समय में सामुदायिक रेडियो आदिवासियों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है । आज के समय में सामुदायिक रेडियो आदिवासियों के लिए एक शिक्षक के रूप में अपना कार्य कर रहा है । जिसके कारण आज गांवों या कस्बों में रहने वाले आदिवासियों का विकास तेजी से हो रहा है । बहत कुरीतियों को त्यागकर एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कार्य करने लगे । सामुदायिक रेडियो ने आज के समय में अपना महत्वपूर्ण टाइप निभाया है । भविष्य में क्या है और लाभकारी साबित होगा तथा और लोगों को जागरूक भी करेगा । जगह जगह सामुदायिक रेडियो खोले जा रहे हैं जिसके कारण आदिवासियों का विकास हो सके । कम्युनिटी या सामुदायिक रेडियो का आदिवासियों पर प्रभाव पड रहा है । उनके रहन सहन, खान पान का भी पता कम्युनिटी रेडियो से मालूम हो रहा है । बात करें मध्य प्रदेश के धार चले गए नालछा में दशमलव आठ सामुदायिक रेडियो केंद्र नालछा खोला गया है और यह भी बोली कार्य जो है जो आदिवासियों के विकास उन्नति के लिए खोला गया है । इसकी गूंज मांडू के महलों में भी गूंजती है । हर दिन वहाँ के आदिवासी लोग सामुदायिक रेडियो पर खेती किसानी बालसभा गीत, संगीत, नाटक, वार्ताएं सुनते हैं जिसके कारण वहाँ के लोगों का मनोरंजन भी हो रहा है और साथ ही विकास भी । इस रेडियो केंद्र की गूंज पच्चीस किलोमीटर है । नाश्ता के आदिवासी हर दिन अलग अलग गीत संगीत हुआ । आदिवासी संगीत अपनी बोली में सुनते हैं । आज के समय में आदिवासियों के लिए मीडिया का सबसे अच्छा माध्यम कम्युनिटी या सामुदायिक रेडियो ही है । इस रेडियो केंद्र का संचालन आदिमजाति कल्याण विभाग बनना मध्यप्रदेश द्वारा किया जा रहा है । यह हर दिन अलग अलग ज्ञानवर्धक कार्यक्रम बनाकर उनका प्रसारण आदिवासियों में कर रहा है । वैसे तो वहाँ पर कई समाचारपत्र समाचार चैनल मत निजी समाचार चैनल का प्रसारण होता है, लेकिन वहाँ के आदिवासी अपनी ही बोली में किसी भी बात को आसानी से समझ सकते हैं । इसके लिए वहन करेगी तो उनके लिए एक शिक्षक के रूप में भी कार्य कर रहा है । मध्यप्रदेश का किराया मांडू को कहा जाता है । यहाँ पर कई विदेशी पर्यटक घूमने के लिए हर रोज आते हैं । इसी मांडू नगरी के आस पास कई आदिवासी जनजाति के लोग निवास करते हैं । उन की उन्नति विकास के लिए मध्य प्रदेश के आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा यह आदिवासी रेडियो केंद्र खोला गया है । भारत में वैसे तो हर क्षेत्र में सामुदायिक रेडियो केंद्र खोले जा रहे हैं जिसके कारण सूचना प्रसारण मंत्रालय अपनी सभी नीतियों को आदिवासियों तक आसानी से पहुंचा सके इसके लिए अलग प्रकार के सामुदायिक रेडियो केंद्र खोल कर कर रहे हैं । अध्ययन के उद्देश्य प्रस्तुत शोधपत्र का प्रमुख उद्देश्य सामुदायिक रेडियो का आदिवासियों पर प्रभाव पर अध्ययन करना है । इसके मुख्य उद्देश्य की पूर्ति कर रहे तो कुछ सहायक उद्देश्य नहीं है । एक वर्तमान में आदिवासी रेडियो पर चलाए जा रहे कार्यक्रमों का अध्ययन करना । दो सामुदायिक रेडियो का आदिवासियों पर क्या प्रभाव पड रहा है इसका अध्ययन करना । सामुदायिक रेडियो की वर्तमान स्थिति वह समस्या सामुदायिक रेडियो स्थापित करने में सबसे बडी समस्या जागरूकता की है । अधिकांश पिछडे समुदायों में अपने अधिकारों के प्रति जानकारी का अभाव है । निरक्षरता और करीबी इस हालत के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार हैं । अभी तक अधिकांश सामुदायिक करेगी हो किसी ना किसी समय सेवी संगठन की पहल से चलाए गए हैं । बडे पैमाने पर सामुदायिक रेडियो के विस्तार के लिए चाहिए कि इस बारे में सही जानकारी का प्रचार प्रसार किया जाए । उदाहरण स्वरूप सरकार ने घोषणा कर दी है कि ग्रामीण पंचायतें और संगठन अपनी आवश्यकतानुरूप रेडियो स्टेशन चला सकते हैं, लेकिन देहात में लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं है । ग्रामीणों की सबसे बडी समस्या है कि सामुदायिक रेडियो कैसे स्थापित किया और चलाया जाए । प्रसार भारती के इंजीनियरों ने मिलकर बेसिल नामक एक संगठन बनाया है । ये संगठन रेडियो स्टेशन स्थापित करने में शुरू से अंत तक मदद करता है । स्टेशन के लिए आवेदन से लेकर स्थापना और रेडियो प्रशिक्षण तक का काम बेसिल कन्सल्टेंसी पीस लेकर करता है । इसके अलावा साउथ एशिया वन नामक संगठन भी रेडियो के जरिए विकास गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के काम में जुटा है । छोटे पैमाने पर अनेक दूसरे संगठन और समूह भी इस समय सक्रिय हैं, जो बहुत कम खर्चा यानी दो से तीन लाख रुपये में भी सामुदायिक रेडियो स्थापित करने में मदद करते हैं । दूसरी बडी समस्या आर्थिक है । अमूमन एक सामुदायिक रेडियो स्थापित करने में पांच से दस लाख रुपए तक का खर्चा आता है । इसके अलावा कार्यक्रम निर्माण में आने वाला खर्च अलग है । अनेक स्वयंसेवी संगठनों के पास कितनी धनराशि नहीं है कि वे अपना स्टेशन चला सके । आर्थिक संसाधनों को जुटाने के लिए इच्छुक संगठन यूनेस्को समेत अनेक अंतरराष्ट्रीय संगठनों की मदद ले सकते हैं । इन दिनों शोर शोर से रेडियो स्टेशन यूनेस्को की मदद से ही चल रहे हैं । तीसरी समस्या मानव संसाधन की है । रेडियो स्टेशन चलाने के लिए प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता जरूरत पडती है लेकिन की उतनी बडी समस्या नहीं है क्योंकि रेडियो चैनल चलाना इतना सरल है कि थोडे से प्रशिक्षण के बाद कम पढे लिखे ग्रामीण युवा भी इस काम को आसानी से कर लेते हैं । आवश्यकता है उत्साह और लगन की । अंतिम समस्या रेडियो कार्यक्रम के निर्माण की है जिसके लिए एक सोची समझी योजना आवश्यक है क्योंकि रेडियो चैनल आरंभ करना तो आसान है लेकिन उसे निरंतर चलाना और आम लोगों की पसंद और रुचि के मुताबिक कार्यक्रमों का निर्माण करना एक दुर्ग होगा रहे हैं जिसके लिए निरंतर लोगों से संपर्क रखना और उनकी रायशुमारी करनी होती है । लेकिन ग्रामीण श्रोताओं को एक बार रेडियो में शामिल कर लिया जाएगा तो ये काम भी आसान हो जाता है । इसके लिए उनके इंटरव्यू आधारित कार्यक्रम बनाए जा सकते हैं । उन्हीं से सलाह ली जा सकती है कि उन्हें क्या पसंद है । अनेक सामुदायिक रेडियो चैनलों को अनुभव बताता है कि एक बार श्रोताओं को रेडियो अभियान में छोड दिया जाए तो फिर वे उससे अपने आप जुडते चले जाते हैं । सामुदायिक रेडियो है तो प्रमुख सुझाव बिंदु एक सामुदायिक रेडियो पर हर दिन अलग अलग विषय को लेकर कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाना चाहिए ताकि उनको ज्ञानवर्धक जानकारी मिल सके । दो । स्वास्थ्य से संबंधित विषय पर रूस एक कार्यक्रम का प्रसारण किया जाना चाहिए ताकि आदिवासी समुदाय के लोगों को स्वास्थ्य के बारे में जानकारी मिल सके । तीन । महिलाओं बच्चों के विकास के लिए भी अच्छे नाटक वार्ताएं प्रसारित करनी चाहिए जहां सामुदायिक रेडियो की पहुंच को बढाना चाहिए । पांच । आदिवासियों को शिक्षा प्रदान करने वाले नाटक का प्रसारण किया जाना चाहिए । छह । आदिवासी समुदाय के लोगों को समस्याओं को हल करना चाहिए रेडियो के माध्यम से जिससे कि उनको कोई परेशानी नहीं आएगी । साथ उन्हीं की बोली में विशेष प्रकार के कार्यक्रमों का प्रसारण करना चाहिए । सामुदायिक रेडियो का बजट बढाना चाहिए ताकि सामुदायिक रेडियो का संचालन करने वाले कर्मचारियों को राहत मिल सके । कम सैलरी होने के कारण काम सही रूप में नहीं हो पाते । हैं नहीं, हर क्षेत्र में सामुदायिक रेडियो केंद्र खोलना चाहिए । निष्कर्ष सामुदायिक रेडियो को स्थापित करने के लिए लोगों में जागरूकता लाना जरूरी है । आज के समय में सामुदायिक रेडियो के महत्व को समझना जरूरी है । इसके फायदे भी अनेक हैं जैसे आदिवासियों को उन्हीं की बोली में कार्यक्रम बनाकर प्रसारण करना जिससे वे सरकार की हर योजना को आसानी से समझ सकें । सामुदायिक रेडियो को स्थापित बस संचालन करने में सामाजिक व आर्थिक रूप से कई समस्याएं हैं । सामुदायिक रेडियो के लिए सरकार द्वारा तरह तरह की योजनाएं बनाकर इसको आगे बढाने का प्रयास किया जाएगा । सैद्धांतिक रूप में सामुदायिक रेडियो की उपयोगिता को अब स्वीकार किया जाने लगा है । भारत में अनेक स्वयंसेवी संगठन तेजी से अपने रेडियो चैनल चलाने की या तो योजना बना रहे हैं, अनेक संगठनों ने इसके लिए सरकार के पास आवेदन भी कर दिया है । निसंदेह विविधता भरे भारतीय माहौल में सामुदायिक रेडियो का भविष्य काफी सुनहरा होने की उम्मीद की जा सकती है ।

10 - ग्रामीण संचार के सरोकार और प्रासंगिकता

क्या ग्रामीण संचार के सरोकार और प्रासंगिकता, विशेष संदर्भ लोक संचार माध्यम, पारंपरिक लोक माध्यम या ग्रामीण लोग संचार के जन्म की तिथि सुनिश्चित नहीं है । मनुष्य अपने प्रारंभिक दिनों से ही अपनी इच्छाओ संवेगों भावना हूँ एवं आवश्यकताओं को मूर्तरूप प्रदान करने के लिए हाँ भाव, संकेतो आदि का प्रयोग करता रहा है, जिसने कालांतर में भाषा का रोक लिया । भाषा नहीं, मानव के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन को संभव बनाया । यह सर्वविदित है कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है । हर संचार के बिना बहस जीवित नहीं रह सकता । संचार के उद्देश्य असीमित है । परिवार, समाज एवं समूह में स्थिति अनुसार संचार करते हैं । विचारों, सूचनाओं, भावनाओं के निरंतर अभिव्यक्ति से ही हमारे समग्र जीवन मूल्यों और संस्कृति की संरचना होती है । सूचना की भूख एवम संचार से जनसंचार के असीमित संदेश प्रवाह के कारण दूसरों तक संदेश पहुंचाने के अनेक आधुनिक साधनों का विकास मानव ने कर लिया है । लेकिन आज भी संचार का लोग माध्यम ग्रामीण संचार सबसे प्रभावी माध्यम है । इन माध्यमों के जरिए पडे लिखे अनपढ सभी तक सार्थक एवं प्रभावी ढंग से संदेश पहुंचाया जा सकता है । इन माध्यमों में प्रमुख हैं नाटक, कठपुतली तथा भरता संगीत, लोक संगीत, पर्यटन यात्रा प्रदान नाटक आते हैं । शोध प्रविधि अब लोकन अंतर्वस्तु विश्लेषण लोक संचार की खासियत लोक संचार की खासियत है कि वह सामूहिकता का बोध कराता है । इसमें समूहों की संस्कृति, भाषा, परिवेश और बच्ची के अनुसार ही संदेशों का ऑपरेशन किया जाता है । हालांकि पहले यह दायरा छोटा था, लेकिन समय के साथ इसका विस्तार होता गया । आधुनिक संचार प्रणाली ने इसे काफी व्यापक पालक प्रदान किया है, लेकिन लोग संचार माध्यम हमेशा से महत्वपूर्ण रहे । बदलते परिवेश में भी लोग संचार माध्यमों मसलन लोक नृत्य, लोककला, लोकगीत आदि ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है । आज भी खासकर गांवों में जागरूकता फैलाने के लिए इन्हीं का प्रयोग किया जाता है । प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स ऍम आधुनिक तकनीकी माध्यमों का विस्तार हुआ है । हर गांव और लगभग हर व्यक्ति तक संचार के माध्यमों की पहुंच बन गई है तो उनकी जिम्मेदारी भी बढ गई है । इनका काम मनोरंजन करने के साथ साथ गांवों की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति और समस्याओं को दूर करना भी है । लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बदलाव तो परन्तु गांव की खुशबू, उसकी संस्कृति परंपरा बनी रहे । भारतीय लोग संस्कृति में कृषि, अर्थशास्त्र, साहित्य, काला मृत्य, संगीत सब शामिल हैं । ग्रामीण लोग संचार के माध्यम का उपयोग ग्रामीण लोग संचार के माध्यमों में मूर्तिकला, श्रीलाल, एक भजन कीर्तन, रामलीला, रासलीला नाटक, नाटक के काट पतले आदि शामिल हैं । ये सदियों से हमारी संस्कृति में रचे बसे हैं । इसी कारण सरकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार, जागरूकता अभियानों आदि में इनकी मदद ली जाती है । ग्रामीण लोग संचार की सबसे बडी खासियत होती है कि यह माध्यम ग्रामीणों की जीवन शैली से मेल खाते हैं और कोई व्याकरण या साहित्य होने के बावजूद इनका विकास मौके की अक्रिय आगत स्रोतों के माध्यम से होता रहता है । आज आधुनिक तकनीकी माध्यमों का विकास हुआ है, लेकिन इसके बावजूद लोक संचार के माध्यमों का प्रभाव कम नहीं हुआ है । लोकगीत जैसे कचरे रहा जाती निर्गुण आदि लोकनृत्य जैसे भाग रहा भर्थना जब घर बार लोकवाद्य जैसे शहनाई, सितार, तबला आदि लोक सम्मेलन जैसे मिला हाटबाजार, उत्सव आदि लोककलाएं जैसे चित्रकारी, दस सिलाकारी आदि एवं लोक नाते जैसे रामलीला, रासलीला आदि सभी लोग संचार के माध्यम है और ग्रामीणों के करीब होने के कारण इन्हें ग्रामीण लोग संचार माध्यम भी कहा जाता है । शिलालेख ग्रामीण लोग संचार के माध्यमों में शिलालेख बहुत ही सशक्त माध्यम के रूप में उभरकर सामने आया । शिलालेख का निर्माण भाषा के विकास से हुआ, लेकिन इससे अभिव्यक्ति को स्थायित्व मिला । ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो कई राजाओं ने यहाँ तक कि सम्राट अशोक ने अपनी प्रजा को सूचनाएं एवं दिशानिर्देश के लिए शिलालेखों का प्रयोग किया था । सम्राट अशोक ने तो भारत के विभिन्न स्थानों पर प्रचलित विभिन्न भाषाओं में शिलालेख खुलवाए थे । चित्रकारी चित्रकला मानव की अभिव्यक्ति की प्राचीन कला है । भाषा के विकास से पहले मनुष्य अपनी भावनाओं को चित्रों के माध्यम से खेलता था । सूचनाओं को संरक्षित करने की पहली कोशिश इसी माध्यम ने की थी । पाषाणकालीन युग की गुफाओं में अंकित को फाड चित्र इसके प्रमाण है । भारतीय चित्रकला का इतिहास शिलाह चित्रों से शुरू होकर आधुनिक युग में कंप्यूटर चित्रों तक का है । मोहनजोदडो, हडप्पा आदि स्थानों पर खुदाई में प्राप्त हुई वस्तुओं पर अंकित चित्रों से भारतीय चित्रकला की प्राचीनता का बोर्ड होता है । लोक लगते हैं । लोक नृत्य मानव जीवन के प्रारंभिक समय से जुडा हुआ है । लोगों के मनोरंजन के सशक्त माध्यमों में लोक नृत्य का पहला स्थान है । लोक नृत्य मनुष्य और प्रकृति की अभिव्यक्ति का माध्यम है । लोक नृत्य उल्लासपूर्ण भावाभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है । मानव के जीवन में जब खुशी केशन आते हैं तो अकेले अथवा समूह में प्राकृतिक रूप से पैर थिरकने लगते हैं । आज पेपर इन अवसरों पर नृत्यों का आयोजन होता है । लोक नृत्य में अलग अलग जातियों, समुदाय आदि की सांस्कृतिक झलक मिलती है । मूर्तिकला, मूर्तिकला में संवेदनाओं को चित्रित किया जाता है । मूर्तिकला का विस्तार समय और तकनीक के साथ साथ बढता गया । हिन्दू धर्म में मूर्ति पूजा ने मूर्तिकला को भारत में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । मूर्ति निर्माण, मिट्टी, पत्थर, धातु ये लकडी द्वारा किया जाता है । भारतीय मूर्तिकला को पूरे विश्व में प्रसिद्धि प्राप्त हैं । विभिन्न कालखंडों में अलग अलग शैलियों का विकास हुआ । शब्द ग्रामीण लोग, संचार के माध्यम, चुनाव में ग्रामीण लोग, संचार के माध्यमों में लोग की लोग तथा कहानी आदि शामिल है । लोक संचार में परंपरागत श्रम संचार माध्यम की भूमिका महत्वपूर्ण रही है । ज्ञान का संचार भी इसी माध्यम की देन है । लोग की लोग एक लोग के गीत होते हैं । ये किसी एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समाज का होता है । यह लोग में प्रचलित लोग द्वारा रचित होता है । इसका रचनाकार अपने व्यक्तित्व को लोक में ही समर्पित कर देता है । लोग जीत मानव विधायकी पहन नैसर्गिक अभिव्यक्ति है, जिसमें भाव, भाषा, अच्छा लडकी, नियमितता से मुक्त होकर स्वच्छंद रूप से निस्तरण होने लगते हैं । हमारे समाज में लोग गीतों की लंबी परंपरा है । कुछ लोग कि बार बार प्रयोग में होने के कारण आज भी विद्यमान है और कुछ हो गए । सामाजिक चेतना व्यवहार के परिवर्तन के साथ लोग की तो में समय समय पर परिवर्तन हुआ है । लोकगीत हमारी सांस्कृतिक धरोहर है लोकगीतों में क जबकि मिठास होती है गांवों में लोग की हर शंकाएं और कुछ बुलाए जाते रहे हैं । गांव में खासकर श्रमिकों से लोकगीतों का गहरा संबंध है । ये हाल चलाते, बीज बोते समय, फसल की बुवाई, कटाई आदि के समय भी गीत गाते हैं जिससे उनका मनोरंजन भी होता है और और ज्यादा संचार भी । जन्म संस्कार के समय सोहरका आने की परंपरा बहुत ही पुरानी है । लोकगीतों का लोगों पर गहरा प्रभाव पडता है । यह लोग गीत जादू सा असर डालते हैं । लोग खेतों की आवाज कानों में पूछते ही नई शक्ति मिल जाती है तो पागल माह के प्रारंभ होते ही हुआ चाहता और चैत्र माह में चाहता का गायन धो लक के साथ खाने की परंपरा है । बादल बातें यंत्रों से मन की बात अभिव्यक्त करने की परंपरा वैदिक काल से ही है । मृत्यु हो या की सभी वाद्ययंत्रों के बिना पूर्ण नहीं होते । भारतीय यंत्र, गीत एवं नृत्य को जीवंत कर देते हैं । लोक संगीत में मुख्य रूप से ढोल नगाडा तो रही एक तरह आदि महत्वपूर्ण है । भारतीय संगीत में कुल पांच सौ प्रकार के पाते जान रहे हैं । प्राचीन समय में युद्ध के प्रारंभ होने से पूर्व रणभेरी, दुन्दुभी, शंख एवं तो वही जैसे बातें यंत्रों का प्रयोग किया जाता था । सबसे प्राचीन वाद्ययंत्र डमरू को माना गया है । यह भगवान शिव का बात किया है । संसार की समस्त भाषाओं का जन्म इसी से माना जाता है । लोग का था लोककथाएं लोग जीवन का अभिन्न अंग मानी जाती है । इन लोककथाओं में बनाने का प्रसंगों से लेकर उद्देश्य फरक तथा मनोरंजन तथा ना होता है । लोककथाओं में क्षेत्र के नैतिक तत्वत समाहित होते हैं । लोककथाएं प्राचीन काल से मनोरंजन का माध्यम रही है । लोग कथाकार इसका प्रस्तुतीकरण पडे मनोरंजक ढंग से करते हैं । समाज के प्रबुद्ध वर्ग जैसे धर्मपिता, समाजसुधारक, पथ प्रदर्शक और साहित्यकारों के लिए भी रोचक होता था । लोककथाएं शादी विवाह तथा कीर्तन एवं तीर्थयात्रियों के माध्यम से स्वीकार होती रही एवं उस पर स्थानीयता का आवरण चढ गया । लोग का था लोकगाथाएं मनुष्य के आदिम साहित्य का रूप है लोककथाओं का उदायि सामूहिक मृत्यु की तो उनके साथ पौराणिक घटनाओं के अच्छा मत कारों के कारण हुआ है । इनके रचनाकार अज्ञात है । इसमें संगीत एवं नृत्य का सहचर रहे होता है । लोकगाथाएं मौखिक परंपरा के कारण एक पीढी से दूसरी पीढी में पहुंचती रही हैं । यह मुख्य रूप से खता पदक जीत होते हैं । इसमें कहानी गीत के माध्यम से आगे बढ गई है । दृश्य रुपया ग्रामीण संचार माध्यम है । बे माध्यम जिनसे संदेश प्राप्त करने के लिए दर्शक को अपने आंखों के बंद मकान दोनों का प्रयोग करना पडता है । इसे दृश्य शुरू है । माध्यम कहते हैं यह माध्यम अन्य माध्यमों की तुलना में ज्यादा प्रभावी होते हैं । नुक्कड नाटक, नौटंकी, रामलीला, कृष्णलीला, कठपुतली आदि इसके प्रकार है नाटक नाटक का चल नृत्य से हुआ है । नृत्य का भाव का विचार का विस्तार होने के पश्चात पहनाते रूप में परिवर्तित हो गया । नाटक आमजनमानस के लिए परंपरागत रूप से मनोरंजन इदम जागरूक करने का माध्यम रहा है । हिंदी प्रदेशों में लोक नाते का विकास पंद्रह शताब्दी के बाद हुआ है । अलग अलग प्रदेशों में अपनी संस्कृति की झलक लिए हुए अलग अलग लोग नाटक है । उत्तर प्रदेश में नौटंकी, बंगाल में चला, मध्यप्रदेश में मंच, कर्नाटक में यक्षीकरण, तमिलनाडु में फेरो को महाराष्ट्र में तमाशा, गुजरात में हवाई मुख्य रूप से परंपरागत नाटक है । नाटक का समाज में बहुत महत्व रहा है । यह मनोरंजन के साथ में शायद विशेष के संबंध में जागरूकता उत्पन्न करता है । नुक्कड नाटक नुक्कड नाटक एक ऐसा नाटक है जो नुक्कड पर प्रदर्शित किया जाता है । यानी आम जन के बीच में जाकर संदेश पहुँचाने का महत्व । नुक्कड नाटक प्राय आम बोल चाल की भाषा में होते हैं । यह महज मनोरंजन ना होकर जीवन की वास्तविकता को प्रदर्शित करते हैं जिसके कारण दर्शकों में आत्मसम्मान पैदा होता है । इसमें नाटक का आम जनता को पानी रहता है और प्रभावी ढंग से अपनी बात दर्शक तक पहुंचाता है । शहरों में लोगों को जागरूक करने के लिए नुक्कड नाटकों के प्रयोग का प्रचलन बढाए । रामलीला एवं कृष्णलीला लीला आमजनमानस में खता आख्यानों की प्रदर्शन धर्मी कला है जिसके साथ मनोरंजन मैं शिक्षण का संप्रेषण किया जाता है । रामलीला हूँ में जिस प्रकार भगवान उनके कर्मों का कुछ कांड किया जाता है उसी प्रकार कृष्णलीला में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन का चित्रण किया जाता है । ग्रामीण क्षेत्रों में बडे भक्ति व श्रद्धा के भाव से लोग इसको देखते हैं । कठपुतली लेंगे भारत के राजस्थान प्रदेश की कठपुतली कला बहुत ही पुरानी और समृद्ध मानी जाती है । इसका निर्माण वा प्रदर्शन भाग जाति के लोग करते आ रहे हैं । भारत जाती नेट बाजी तथा नाटक के लिए भी प्रसिद्ध है । यह माना जाता है कि ब्रह्म से मिनट की उत्पत्ति हुई और उन्होंने कार्ड से नाटक नाम से काष्ठ पतली आधारित ना । क्योंकि शुरुआत की कठपुतलियां होती तो निर्जीव है लेकिन उनका प्रदर्शन ऐसा होता है जैसे कोई सजीव कलाकार प्रस्तुत कर रहा हूँ । विभिन्न मसलों मसलन कम उम्र में वहाँ नशा को ही स्त्री बालिका शिक्षा के निम्नस्तर को दूर करने के लिए आजकल इसका उपयोग सरकार भी कर रही है । ऐतिहासिक कहानियों गाथाओं को बताने और जागरूकता फैलाने के लिए इसका उपयोग किया जाता रहा है । ग्रामीण लोग संचार माध्यम का महत्व ग्रामीण लोग संचार माध्यम सरल, सहज, अधिक बहुत काम में होते हैं । यह वातावरण के नहीं रफ्तार एक रस्ता खूब और भारीपन को दूर कर सरस समरस, उमंग और उत्साह ही बना देता है । यह माहौल को रोचक और ऊर्जावान बना देते हैं । यह माध्यम पूरा समुचे बात नहीं है । इसमें पार्टी की महत्व है, लोग की गमक है और सामाजिकता वह का कलरव है । ये समकालीन संस्कृति की धडकन है । समाज और राष्ट्र के अमूल्य धरोहर है । ग्रामीण लोग संचार माध्यम में अगर भौगोलिक सीमाएं, नदी, तालाब परिवार, घाटी, जंगल, कोहरा, जाडा, गर्मी, वर्षा, पवन फूल और पशु पक्षी प्राण मान होते हैं तो इतिहास भी अपने पात्रों, पुरा प्रस्तर हजारों मुहरों, मुद्राओं, संधिपत्रों युद्ध हूँ और हार जीत के साथ प्रत्यक्ष होने को लालायित होता है । इतना ही नहीं इनमें उनकी चीजे विशाल पहचान, अस्मिता, गौरवबोध और सांस्कृतिक प्रभाव समझाया है । निष्कर्ष निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि वर्तमान समय में ग्रामीण लोग संचार माध्यमों की एक बडी संभावना दिख रही है । ये ऍम सिटी के पढने का दौर है । जातीय और क्षेत्रीय अस्मिता का सवाल नई नई रूपों में सामने आ रहा है । तमाम मानवीय समुदाय अपनी अस्मिता की लडाई लड रहे हैं । अपनी पहचान की रेखा बताने के लिए अतीत के अध्यायों को खोला जा रहा है । ऐसे में स्वाभाविक तौर पर लोकमानस में अपनी जडों की ओर लौटने की छटपटाहट दिख रही है । इसलिए जरूरी है कि सरकार नए तकनीकी माध्यमों की ओर तो देखे ही, ग्रामीण लोग संचार के माध्यमों की ओर भी ध्यान दे । तभी ग्रामीण लोग संचार माध्यम आधुनिक तकनीकी माध्यम के साथ कदम ताल कर सकेगा । अंत में एक थी ले मशाले चल पडे हैं अब लोग मेरे काम के आप अंधेरा चीज लेंगे । लोग मेरे गांव के तो

11 - ग्रामीण समाज में पत्रकारिता के योगदान का प्रभाव

ग्रामीण समाज में पत्रकारिता के योगदान का प्रभाव भारत गांव का देश है । इन गांवों में देश की कुल आबादी की दशमलव फीसदी जनसंख्या देश के विभिन्न हिस्सों में निवास कर ली है और बाकी जनसंख्या शहरों में निवास करती है । गांव में रहने वाले लोगों का रहन सहन, खानपान, पोली व्यवहार, कपडे पहनने का ढंग तथा उन के समाज और संस्कृति के अलग नियम और तौर तरीके होते हैं । गांव में रहने वाली जनसंख्या का अधिकतर हिस्सा खेती पर निर्भर होता है और बाकी शहरों गांवों में रहकर मजदूरी कर अपना पेट पालते हैं । हालांकि अब गांवों में रहने वाली कुल आबादी का केवल साठ फीसदी जनसंख्या ही खेती करती है और पच्चीस फीसदी हिस्सा शिक्षा पर ध्यान दे रही है और पंद्रह फीसदी हिस्सा मजदूरी कर अपना पेट पाल रही है । भारत के कुल छत्तीस राज्यों के छह सौ चालीस शहरों में छह सौ चालीस से आठ सौ सडसठ गांवों में लगभग एक मिलियन लोग रहते हैं । इन सभी लोगों का संचार अपने क्षेत्र के हिसाब से बदलता रहा है और इन की भाषा भी एक दूसरे से अलग होती है । इन क्षेत्रों का शिक्षा स्तर अलग अलग होता है । सबसे ज्यादा साक्षर राज्य केरल है जहाँ का साक्षरता का स्तर दशमलव पचास है । जब की सबसे कम साक्षर राज्य बिहार है जिसका साक्षरता स्तर केवल दशमलव अस्सी फीसदी है वहीं मध्यप्रदेश का साक्षरता स्तर उनहत्तर दशमलव बत्तीस फीसदी है । यहाँ बताए गए आंकडे वर्ष दो हजार तेरह में तैयार किए गए आंकडों पर आधारित है । भारत में वर्ष दो हजार एक रिपोर्ट के अनुसार कुल एक सौ बाईस मुख्य भाषाएँ हैं । जब की पंद्रह सौ निन्यानवे क्षेत्रीय भाषाएं हैं । स्थानीय लोग अपने क्षेत्र के हिसाब से अपनी भाषाओं का प्रयोग कर संचार करते हैं । गांवों की बात की जाए तो वहाँ संचार करने का तरीका शहरों से बिल्कुल अलग होता है । जिस तरह से मध्यप्रदेश के मुख्य भाषा हिंदी है जबकि यहाँ अलग अलग क्षेत्र में पराठे, माल पी बीमारी, बुंदेली बघेली के साथ तेलगु खिलाडी गोंडी कोर्स को कल तो और निहाले खासकर आदिवासी क्षेत्रों में बोली जाती है । ये भाषाएं अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी करती है । इसी तरह देश के सभी क्षेत्रों की अपनी एक भाषा है जिसमें हो संचार करते हैं जो उनकी पहचान है । हालांकि कुछ मेट्रो शहरों की कोई भी अपनी भाषा नहीं होती है । वहाँ कई क्षेत्रों के लोग रहते हैं और वहाँ अपनी भाषा में संचार करते हैं । उदाहरण के लिए दिल्ली, दिल्ली जैसे बडे शहर के कोई भी अपनी भाषा नहीं है । यहाँ सबसे ज्यादा जनसंख्या बिहार, उत्तर प्रदेश तथा पंजाब के लोगों की है । हालांकि दिल्ली की कुल जनसंख्या के केवल चार फीसदी आबादी हैं । अंग्रेजी में संचार करती है । वहीं पर फीसदी हिंदी, पंजाबी, हिंदी, भोजपुरी, मगही, मैं चली हरयाणवी तथा अन्य भाषा बोलती है । दिल्ली में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी है जिसके बाद पंजाबी और हरियाणवी भाषा बोली जाती है । भारत में आरंभ से ही पत्रकारिता का गेंद जन सेवा रहा है । आजादी के संघर्ष में पत्रकारिता की भूमिका महत्वपूर्ण रही है । स्वतंत्रता आन्दोलन में पत्रकारिता ने आंदोलन को आगे बढाने, लोगों को उससे जोडने और प्रेरित करने का काम किया । आजादी के बाद इसमें राष्ट्रीय विकास से खुद को छोडकर विकास के एजेंडा को आगे बढाने का काम किया । पत्रकारिता ने जनाकांक्षाओं को हमेशा स्वर्ग क्या है? क्षेत्रीय विकास की जरूरतों को रेखांकित करने के साथ साथ जनता की बुनियादी जरूरतों के लिए भी इस ने आवाज उठाई है । भारतीय पत्रकारिता ने अनेक महत्वपूर्ण बदलावों को दिशा देकर सामाजिक परिवर्तन तथा समाजसुधार में अपने योगदान दिया है । सार्वजनिक जीवन में व्याप्त भ्रष्टाचार को इस ने निशाना बनाया है । विशेष रूप से जनप्रतिनिधियों एवं नौकरशाहों के काले कारनामें इधर जनता में खूब आए हैं । कितने ही मंत्री, अधिकारी, सांसद, विधायक, अन्य पदाधिकारी अपने भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग, लूट तथा भाई भतीजावाद के चलते अपने पद से हटाए गए हैं । लोकतंत्र के शुद्धिकरण की दिशा में भारतीय पत्रकारिता का यह महत्वपूर्ण योगदान है । अब प्रश्न यह उठता है कि क्या हमारी समाज और संचार की जो भाषा है, वो धीरे धीरे बदल रही है कि हमारी संचार प्रणाली या व्यवस्था पारंपरिक से बदलकर आधुनिक हो गई है? क्या हमारी कोई अपनी भाषा नहीं रह गई है? इसी विषय को जानने तथा पर रखने के लिए हमने समय शायद ग्रामीण समाज में पत्रकारिता का योगदान पर शोध करने का निर्णय लिया है । शोध का साहित्य सर्वेक्षण, ग्रामीण समाज पे पत्रकारिता के योगदान का प्रभाव विषय पर शोध के दौरान हमने इस विषय से संबंधित बहुत सारे शोधपत्र आलेख पिचर तथा समाचारों को पढा । हालांकि सभी आलेख वार शोधपत्र ग्रामीण समाज पर पत्रकारिता से संबंधित थे, जिसका विवरण इस प्रकार है दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे मिस्टर चंदन कुमार द्वारा विशाल ग्रामीण समाज और पत्रकारिता पर किए गए शोध के अनुसार आज अस्सी फीसदी ग्रामीण समाज तक केवल समाचार पत्र और रेडियो की पहुंच है । टेलीविजन और इंटरनेट की पहुंच का अनुभव पांच अनुपात दो है । दिल्ली के आई । पी । विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग से ग्रामीण समाज में समाचार पत्रों को लेकर उत्साह विषय पर एंटल कर रही अर्चना के अनुसार तेरह अमीन समाज में पत्रकारिता को लेकर ज्यादा उत्साह नहीं देखा जाता है । लोगों को समाचार पत्र पडने का समय केवल सुबह ही मिलता है और इस दौरान भी मुख्य बाल प्रमुख स्थानीय खबरों को ही पडते हैं । हालांकि इस विषय पर अभी साला शोक नहीं हुआ है मगर बहुत सारे लोगों ने इस विषय पर आलेख लिखे हैं । शोध का उद्देश्य ग्रामीण समाज में पत्रकारिता के योगदान का पता लगाना । ग्रामीण समाज में संचार के विभिन्न माध्यमों की पहुंच का पता लगाना । ग्रामीण जनता का संचार के विभिन्न माध्यमों पर विश्वास का पता लगाना । शोध की उप कल्पना यह परिकल्पना ग्रामीण क्षेत्रों में पत्रकारिता का योगदान बहुत कम है । ग्रामीण क्षेत्रों में समाचार पत्र और रेडियो की पहुंच सबसे ज्यादा और विश्वसनीयता ज्यादा है । ग्रामीण क्षेत्रों की जनता आधुनिक संचार माध्यमों का काम और पारंपरिक माध्यमों का प्रयोग ज्यादा करती है । शोध का क्षेत्र शोध के निर्देशन के अनुसार उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से तथा ग्रामीण इलाका बागपत शोध के आंकडे ग्रामीण समाज में पत्रकारिता के योगदान का प्रभाव विषय पर शोध के लिए हमने शोध के सर्वे विधि के प्रयोग के आंकडों को एकत्र किया है । इस विषय पर शोध के लिए हमने मेरठ से सटे इलाके बात पद के क्षेत्रों में जाकर लोगों से दस प्रश्नों की एक प्रश्नावली भरवाई और इस विषय पर उनके विचार जाने शोध विधि वक्त प्राविधि ग्रामीण समाज पे पत्रकारिता के योगदान का प्रभाव विषय पर शोध के लिए हमने एक शोध के सर्वे विधि का प्रयोग किया है तथा उसमें सैंपलिंग के अनुसार मीडिया के विभिन्न संचार साधनों में से केवल प्रिंट मीडिया और रेडियो को चुना है । परिणाम इस विषय पर शोध के लिए एकत्र किए गए जिसमें से कुछ प्रमुख आंकडों के परिणाम इस प्रकार रहे एक शोध के लिए तैयार प्रश्नावली से जब ग्रामीणों से पूछा गया कि आप संचार के कौन से माध्यम का अधिकतम प्रयोग करते हैं तो उनका जवाब था रेडियो । हालांकि उनका कहना था की समाचार पत्र भी केवल चाय की दुकान पर ही दूसरों द्वारा पडे जाते हैं और हम सब उसे सुनते हैं । दो । जब उनसे पूछा गया कि आप रेडियो कब सुनते हैं तो उनका कहना था की हम सब रेडियो हर समय यानी अपने काम पर जाते समय में भी रेडियो को अपने साथ लेकर जाते हैं । तीन । शोध के लिए तैयार किए गए प्रश्न फ्री में एक प्रश्न उनकी योग्यता को लेकर था । कुल पचास लोगों में से केवल बारह लोग ही दसवीं यानी मैट्रिक पास और बाकी सभी अनपढ जान । जब उनसे पूछा गया कि आप रेडियो पर किस तरह की प्रोग्राम सुनते हैं तो उनका कहना था की वह ज्यादातर कृषि आधारित कार्यक्रम सुनना पसंद करते हैं और कभी कभी समाचार लिया करते हैं । पांच शोध के दौरान जब हमने उनसे पूछा कि आप दिनभर में कितना समय रेडियो और समाचार पत्रों पर देते हैं और कितना समय अपने कार्यों पर देते हैं तो उनका कहना था की हम सब दिन भर में से केवल तीन या चार घंटे ही रेडियो सुनते हैं और केवल सुबह के समय ही जब हम बाहर चाय पीने या अपने कार्यों पर जा रहे होते हैं तभी कुछ समय रुककर समाचार पत्र पढ लेते हैं । निष्कर्ष ग्रामीण क्षेत्रों में पत्रकारिता के योगदान का प्रभाव एक अध्ययन इस विषय पर शोध के लिए प्राप्त परिणाम काफी आश्चर्य भरे रहे हैं । हमें शोध से पूर्व इस क्षेत्र के बारे में कोई ज्यादा जानकारी नहीं थी । इस परिणाम ने बाकी में हमें चौंका दिया । शोध से प्राप्त परिणामों के अनुसार मेरठ का बागपत क्षेत्र शिक्षा बच्चा रुकना के क्षेत्र में काफी पिछडा हुआ था । इस क्षेत्र में आज की शिक्षा न के बराबर है । शोध के अनुसार केवल पांच फीसदी लोग ही पढे लिखे है यानी दसवीं पास है तो वहीं बाकी फीसदी लोग अनपढ है । शोध के परिणाम के अनुसार लगभग सत्तर फीसदी लोग रेडियो के माध्यम से संचार करते हैं और दस फीसदी लोग समाचारपत्र पडते हैं और उससे अपना संचार करते हैं । बाकी बीस फीसदी लोग दूसरों से केवल सुन कर अपना संचार करते हैं । सबसे अहम बात यह है कि इस इलाके में केवल एक सरकारी स्कूल है जहां केवल दो शिक्षक है । छूट के अनुसार मेरा क्षेत्र के बागपत इलाके के साठ फीसदी ग्रामीण सबसे ज्यादा समय यानी दिन भर में चार से छह घंटा समय रेडियो सुनते हैं तथा अस्सी फीसदी ग्रामीण रेडियो पर समाचार पत्रों के माध्यम से कृषि आधारित कार्यक्रम सुनते और समझते हैं । सुझाव ग्रामीण क्षेत्रों में पत्रकारिता के योगदान का प्रभाव एक अध्ययन विषय पर शोध के दौरान प्राप्त परिणाम मनीष कर काफी चौंकाने वाले रहे । शोध से पूर्व जो हमने उत कल्पना की थी । पूरी तरह से सफल यदि पूर्ण हुई तो हमें इस क्षेत्र में संचार तथा शिक्षा को बढावा देने के लिए काफी आगे बढकर सहयोग करना होगा । इस विषय पर शोध से प्राप्त परिणामों के बाद कुछ महत्वपूर्ण सुझाव इस प्रकार रहे थे । ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे पहले शिक्षा को बढावा देने के लिए इन इलाकों में स्कूल खोलकर लोगों को जागरूक करना होगा तो इन इलाकों के विकास के लिए हमें केवल सरकार पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए । हमें भी आगे आकर इसमें पूर्ण सहयोग देना चाहिए । तीन । समय समय पर मीडिया संस्थानों द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए । क्या ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए हमें विशेष अभियान चलाकर सरकार की सभी योजनाओं और ग्रामीणों के अधिकारों के बारे में पूर्ण जानकारी देनी होगी? पांच समाचारपत्रों को अपनी भाषा में बदलाव कर ग्रामीणों की सहजता को ध्यान में रखकर ज्यादा से ज्यादा सरल शब्दों का प्रयोग करना चाहिए ।

12 - ग्रामीण अंचलो में स्वास्थ्य जागरुकता का जनमाध्यम

क्या ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य जागरूकता और जनमाध्यम खंडवा के विशेष संदर्भ में विकसित भारत की जब हम कल्पना करते हैं तो चंद्रयान मंगल अभियान, तकनीकी, कौशल विकास, शहरी अवसंरचना विश्व में हमारी सस्ती स्वास्थ्य सेवा की स्थिति हमें क्या प्रतिपल आभास कराने को विवश करती है कि हमारा एक एक कदम हमें विकसित देश की तरफ अग्रसर कर रहा है? भारत के शहरी इलाकों पर जब हम नजर डालते हैं तो हम अपने सर फख्र से और ऊपर उठाकर अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं । हालांकि विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आने के लिए अभी हमें हजारों में चलना पडेगा । हम तब तक अपने आप को विकसित नहीं कह सकते हैं, जब तक हम हर क्षेत्र में एक आदर्श स्थिति में नहीं पहुंच जा रहे हैं । इन क्षेत्रों में से एक अति महत्वपूर्ण क्षेत्र स्वास्थ्य, स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत ने विश्व के सामने एक आदर्श स्थिति प्रस्तुत की है । हमारे देश के कुछ शहरों में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध है, मगर दुर्भाग्य यह है कि यह सुविधा एक निश्चित दायरे तक ही सीमित है । ये सुविधाएं जहाँ देश के दुर्गम पूर्वोत्तर राज्यों तटीय क्षेत्रों तक नहीं पहुंची है, वहीं देश का दिल कहा जाने वाला मध्यप्रदेश का सर्वाधिक ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्र भी तमाम बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से कोसों दूर है । प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण इस मध्यप्रदेश में देश की सर्वाधिक सैंतालीस जनजातियां निवासरत है । नर्मदा के किनारे सब थोडा मस्जिद है की पहाडियों में निवासरत जनजातियों को देखने से अब भी प्रतीत होता है कि ये आज भी प्रागैतिहासिक काल में ही जी रहे हैं । विकास का प्रथम पायदान भी इनसे कोसों दूर है । ग्रामीण भारत के ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन नामक स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत की गई है । यह कार्यक्रम बारह अप्रैल दो हजार पांच को सात साल के लिए शुरू किया गया है । क्या है योजना फिनिस पर चल रही लोक स्वास्थ्य तो पर उनकी प्रणाली को मजबूत बनाने के साथ साथ प्रजनन, बाल स्वास्थ्य परियोजना, एकीकृत रोक, निगरानी, मलेरिया, कालाजार, तपेदिक तथा कुछ रोक के लिए सभी सुविधाएं एक ही जगह मुहैया कराने के लिए शुरू की गई है । इसके तहत बाल मृत्युदर में कमी करना मात्र मृत्युदर को नियंत्रित करना है । शुरुआत में ऐसे देश के अठारह बच्चों में विशेष तौर से शुरू किया गया यहाँ पे राज्य हैं, जहां स्वास्थ्य संकेतक एक दम नहीं है । इस योजना के क्रियान्वयन में ग्रामीण स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं को लगाया गया है । शोध का उद्देश्य शोधार्थी ने उपरोक्त विषय ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य जागरूकता और जनमाध्यम खंडवा के विशेष संदर्भ में लेने का मुख्य कारण इसका आदिवासीबहुल ग्रामीण क्षेत्र होना है । मध्य प्रदेश की सरकार यहाँ के जनजातियों के विकास के लिए बहुत कार्य कर रही है । उनके लिए कई योजनाएँ भी चला रही है । उनके प्रचार प्रसार में जनमाध्यमों की क्या भूमिका है इसका पता लगाने के लिए यह शोध किया गया है जिसकी मदद से यह कार्य और तेजी और प्रभावपूर्ण तरीके से अग्रसर किया जा सके । शोध के परिणाम आशानुरूप एकदम नहीं है । संरचनात्मक विकास का बिलकुल ये अर्थ नहीं होता कि इससे सर्वांगीण विकास होगा । इस शोध को करने का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य विकास को सही दिशा के साथ साथ बहुत अलिक्स । पति के अनुसार इसके साथ थकता का पता लगाना था । आंकडों का विवेचन निर्धारित शोभावती द्वारा जो आंकडे प्राप्त हुए उनकी विवेचना से यह स्पष्ट होता है कि अभी भी खंडवा जिले के लोग स्वास्थ्य जागरूकता से कोसो दूर हैं । शोध का उद्देश्य ऍम के प्रचार प्रसार में जनमाध्यमों की भूमिका का पता लगाना था । इन को ध्यान में रखकर लोगों से निम्न प्रश्न किया गया स्वास्थ्य योजनाओं के लोगों की जानकारी ममता अभियान खंडवा हाँ तेईस नहीं तिहत्तर पुनासा था बचपन नहीं पैंतालीस । खालवा हाँ बीस नहीं अस्सी जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम खंडवा हाँ चौवन नहीं छियालीस । पुनासा उन्यासी नहीं खालवा हाँ छिहत्तर नहीं चौबीस कुपोषण अभियान खंडवा हाँ चौवन नहीं छियालीस पुनासा था उन्यासी नहीं एक केस खालवा हाँ छिहत्तर नहीं चौबीस । पंडित दीनदयाल अंत्योदय योजना खंडवा था । इकतालीस नहीं उनसठ । पुनासा हाँ ऍम नहीं पैंतीस खालवा था बावन नहीं अडतालीस कहने को आधुनिक युग में रहने वाले ये लोग अभी भी पुरातन जमाने में ही जी रहे हैं । जनमाध्यमों के द्वारा सरकार के सबसे ज्यादा जो योजना प्रचारित की जाती है उनका भी लोग नाम नहीं जानते हैं । खंडवा के ग्रामीण इलाकों के तिहत्तर प्रतिशत लोग ममता अभियान का नाम नहीं जानते हैं । अपुन सके पैंतालीस प्रतिशत खालवा के अस्सी प्रतिशत लोगों का ममता अभियान का नाम नहीं पता है । जबकि सरकारी आंकडों पर गौर करें तो इस योजना का बहुत जोर शोर से विगत तीन माह में प्रचार प्रसार किया गया । इस दौरान सरकार ने इसके प्रचार प्रसार पर चार लाख रुपये भी खर्च किए । जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के बारे में खंडवा में पैंतालीस प्रतिशत लोग नहीं जानते हैं प्रतिशत लोग पंधाना मत चौबीस प्रतिशत लोग खालसा में नहीं जानते हैं । कुपोषण अभियान के बारे में क्रमशः है अठहत्तर प्रतिशत पचपन प्रतिशत पचास प्रतिशत लोगों को जानकारी नहीं है । वहीं पंडित दीनदयाल अंत्योदय योजना के बारे में खंडवा के प्रतिशत पुनासा के पैंतीस प्रतिशत खालवा के प्रतिशत लोगों को इस योजना के बारे में कुछ पता नहीं है । जनमाध्यमों की जानकारी आपके पास स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां किस माध्यम से पहुंची रेडियो खंडवा तीस नहीं सत्तर । पुणे ऍम चौंतीस नहीं छह हो खालवा पैंतालीस नहीं पचपन । टीवी खंडवा का इक्यावन नहीं उनचास पुनासा था इकत्तर नहीं उन तेज खालवा हाँ पचास नहीं पचास । नुक्कड नाटक खंडवा । हाँ एक नहीं नींद आ रही पुनासा था पंद्रह नहीं खाल बाद हाँ । अठारह । नहीं बयासी पोस्टरों से खंडवा हाँ ग्यारह नहीं नवासी । पुनासा हाँ अट्ठाईस नहीं बन सकते खालवा हाँ! तेईस नहीं सतहत्तर । आशा या आंगनबाडी कार्यकर्ता खंडवा हाँ बचपन नहीं पैंतालीस पुनासा था चौहत्तर नहीं छब्बीस । खालवा हाँ मैं तक नहीं । अट्ठाईस । जब जनसंचार माध्यमों के लोगों तक पहुंच के बारे में उनसे पूछा गया तो खंडवा में मात्र तीस प्रतिशत लोगों के बाद रेडियो, इक्यावन प्रतिशत लोगों के पास टीवी, ग्यारह प्रतिशत लोगों के पास पोस्टर, एक प्रतिशत के पास नुक्कड नाटक, पचपन प्रतिशत लोगों के पास आशा व आंगनवाडी कार्यकर्ताओं की पहुंच है । इससे यह पता चलता है कि खंडवा जिले में इंटरनॅशनल कम्युनिकेशन सिस्टम सबसे अच्छा है । इसके बाद सबसे अधिक लोगों के पास पीवी की पहुंच है । वहीं पुनासा ब्लॉक में चौंतीस प्रतिशत लोगों तक रेडियो प्रतिशत लोगों तक टीवी, पंद्रह प्रतिशत लोगों तक नुक्कड नाटक, अट्ठाईस प्रतिशत लोगों तक फॅार पोस्टर, चौहत्तर प्रतिशत लोगों तक आशा कार्यकर्ता की पहुंच है । वहीं खालवा ब्लॉक में रेडियो की पहुंच पैंतालीस प्रतिशत लोगों तक टीवी की पहुंच पचास प्रतिशत लोगों तक जबकि नुक्कड नाटक अठारह प्रतिशत पोस्टर होर्डिंग की प्रतिशत वहाँ आशा की बेहतर प्रतिशत लोगों तक पहुंच है । स्वास्थ्य जागरूकता अभियान में लोग हुए शामिल स्वास्थ्य जागरूकता अभियान में कभी आपने भाग लिया है? खंडवा हाँ नॉन नहीं एक रन पुनासा हाँ इक्कीस नहीं उन्यासी खालवा हूँ । हाँ दस नहीं नाॅक सरकार लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रही है । इन अभियानों में क्या लोगों की सहभागिता होती है इसको जानने के लिए जब उनसे सम्मिलित होने के बारे में पूछा गया तो खंडवा के नौ प्रतिशत, पुनासा के एक प्रतिशत और खालवा के मात्र दस प्रतिशत लोग ही इन अभियानों में शामिल होते हैं । जब तक इन अभियानों से लोग नहीं छोडेंगे तब तक प्रचार प्रसार में स्थायित्व नहीं आएगा । स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के बाद योजना का लाभ लेना, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लेने के बाद योजना का लाभ आप लेते हैं तो खंडवा हाँ तीस चालीस नहीं सत्तावन पुनासा हाँ सैंतीस नहीं तरह खालवा हाँ तैंतीस नहीं सर सकते सरकार जिन योजनाओं पर करोडों खर्च कर लोगों को स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में बता दी है । लोगों से जब पूछा गया की योजनाओं की जानकारी के बाद जो आपको समझाया जाता है क्या आप अपने निजी जीवन में उसका अनुसरण करते हैं? इसके जवाब में खंडवा के सैंतालीस प्रतिशत लोग उन जानकारियों का अनुसरण करते हैं जबकि पुनासा के सैंतीस और खालवा की मांग तैंतीस प्रतिशत लोग ही है । बताई गई जानकारियों को समझते हैं प्रसव संबंधी योजनाओं की जानकारी प्रसव संबंधी सरकारी योजनाओं के बारे में आपको जानकारी है । खंडवा ऍम नहीं चौतीस पुनासा रियासी नहीं सत्रह खालवा हाँ छियासी नहीं चौदह प्रसव संबंधी योजनाओं के बारे में जब लोगों से पूछा गया तो खंडवा के प्रतिशत लोगों ने पुनासा के तो प्रतिशत लोगों ने खालवा के प्रतिशत लोगों ने बताया कि सरकार द्वारा प्रसव संबंधी दी जा रही सुविधाओं की जानकारी उन्हें हैं । कुपोषण योजना की जानकारी क्या कुपोषण को खत्म करने की निम्न योजना आपके इलाके में चल रही है । खंडवा सत्ताईस नहीं तहत ऍम छप्पन नहीं जॅान चौंसठ नहीं छत्तीस सत्ताईस प्रतिशत लोगों को खंडवा में यह जानकारी है कि उनके यहाँ कुपोषण के लिए भी सरकार योजना चला रही है । वहीं पुनासा के छप्पन प्रतिशत लोगों को इसकी जानकारी है । जबकि खालवा के चौंसठ प्रतिशत लोगों को इसके बारे में पता है । बच्चों का टीकाकरण अपने बच्चों का टीकाकरण करवाया है । खंडवा । आप सब ध्यान नहीं तीन । पुनासा हाँ अध्यासी नहीं पारा खालवा था इक्यानवे नहीं नौ खंडवा के प्रतिशत लोगों ने अपने बच्चों का टीका लगवाया है । वहीं पुनासा के अट्ठासी वह खालवा के प्रतिशत लोगों ने टीकाकरण के बारे में पूछने पर ये कहा की वो अपने बच्चों को टीका लगाते हैं । ममता रात की जानकारी बनता रत की लोगों को जानकारी है खंडवा हाँ उनतीस नहीं हूँ । पुनासा हूँ था बावन नहीं अडतालीस खालवा हूँ । हाँ तैंतीस नहीं सडसठ लोगों के बीच अपनी बात रखने मैं जागरूक करने के लिए सरकार तीन महत्व कॅश हर गांव में ममता रात लेकर गई थी कि लोगों के बीच प्राथमिक स्वास्थ्य जानकारियाँ हूँ । खंडवा के लोगों से जब इसके बारे में पूछा गया तो मात्र उनतीस प्रतिशत ग्रामीणों वहीं पुनासा के बावन खालसा के तैंतीस प्रतिशत लोगों को जानकारी थी । ग्राम आरोग्य केंद्र की जानकारी क्या आप अपने ग्राम आरोग्य केन्द्र के बारे में जानती है? खंडवा था पैंतीस नहीं पैसा पुनासा हाँ तीस नहीं सत्तर खालवा हाँ बचपन नहीं पैंतालीस लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए सरकार ने आशा आंगनवाडी कार्यकर्ताओं के घरों को ग्राम आरोग्य केंद्र बना दिया है, जिससे लोग जागरूक होकर लाभ ले सकें । इसके अंतर्गत एक समिति है जिसका अध्यक्ष सरपंच होता है । बाकी गांव के लोग और आशा आंगनवाडी कार्यकर्ता इसके सदस्य होते हैं । सरकार सालाना दस हजार रुपये इसके लिए अलग से देती है । इसके बारे में जब लोगों से पूछा गया तो खंडवा के पैंतीस प्रतिशत, उंसके तीस और खालवा के प्रतिशत लोगों को इसके बारे में जानकारी थी कि उनके काम में आरोग्य केंद्र भी है । आंगनबाडी तक लोगों की पहुंच क्या आपके यहाँ आंगनवाडी की पहुंच है या आपके परिवार का बच्चा वहाँ जाता है या कभी गया है? खंडवा हाँ चालीस नहीं अट्ठाईस कभी गया है । बत्तीस । पुनासा हाँ बात नहीं बाईस कभी गया है । सोलह । खालवा हाँ नहीं सात कभी गया है पंद्रह । खंडवा के चालीस प्रतिशत बच्चे आंगनबाडी जाते हैं, जबकि बत्तीस प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनके बच्चे पूर्व में आंगनवाडी गए हैं । वहीं पुनासा की प्रतिशत बच्चे जाते हैं जबकि खालवा के प्रतिशत बच्चे आंगनबाडी में जाते हैं । पोषाहार का लाभ क्या आपको पोषाहार का लाभ मिलता है? खंडवा छियासठ नहीं चौंतीस । पुनासा हाँ सतहत्तर नहीं तेज खालवा हाँ सत्याजीत नहीं तेरह । खंडवा के छियासठ प्रतिशत लोग पुनासा के सत्तर प्रतिशत मत खालवा के सत्य से प्रतिशत लोग पोषाहार का लाभ उठाते हैं । ये पोषाहार तो ले रहे हैं मगर उनको क्या नहीं पता कि यह कुपोषण मिटाने के लिए दिया जा रहा है । मुफ्त दवाइयों की जानकारी सरकार द्वारा दी जा रही मुफ्त दवाइयों की योजना की जानकारी है । आप को खंडवा ऍम नहीं सैंतीस । पुनासा हाँ तिहत्तर नहीं सत्ताईस खालवा हाँ पिचासी नहीं पंद्रह सरकार राज्य के प्रत्येक अस्पताल में आने वाले मरीजों को मुफ्त दवाइयों का वितरण कर रही है । जब इसकी जानकारी के बारे में लोगों से पूछा गया तो खंडवा के तरह प्रतिशत लोगों को हिंसा के तहत वह खालवा के प्रतिशत लोगों ने बताया की उन्हें जानकारी है अस्पतालों में मुफ्त दवाइयाँ मिल रही है । नुक्कड नाटक प्रदर्शनी का आयोजन आपके गांव में स्वास्थ्य की जानकारी देने हुई तो गत वर्ष नुक्कड नाटक प्रदर्शनी आयोजित हुई है खंडवा था उनतीस नहीं इकत्तर पुनासा था सत्ताईस नहीं तिहत्तर खालवा हाँ पैंतीस नहीं पैसा खंडवा के उनतीस प्रतिशत पुनासा के सत्ताईस प्रतिशत मत खालवा के पैंतीस प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनको नुक्कड नाटक प्रदर्शनी के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है । नुक्कड नाटक प्रदर्शनी में दिए गए संदेशों की समझ यदि हाँ तो इसके द्वारा आपको जो जानकारी दी जाती है बहुत आसानी से समझ में आती है । खंडवा हाँ तीस नहीं सत्तर पुनासा हाँ छब्बीस नहीं चौहत्तर खालवा हाँ उनतीस नहीं इकट्ठा हो । इसके बारे में जब लोगों से पूछा गया तो खंडवा के तीस प्रतिशत उंसके छब्बीस प्रतिशत खालवा के प्रतिशत लोगों को ही नुक्कड नाटक प्रदर्शनी में कहीं कई बातें समझ में आती है अखबारों में स्वास्थ्य संबंधी विज्ञापन अखबार के स्वास्थ्य संबंधी । विज्ञापन क्या आप देखते हैं? खंडवा हाँ तैंतीस नहीं सर सर पुनासा हाँ बावन नहीं अडतालीस खालवा हाँ चालीस नहीं साठ जो लोग अखबार पढ लेते हैं उनसे जब इसमें छपनेवाले स्वास्थ्य विज्ञापनों के बारे में पूछा गया तो खंडवा के तैंतीस प्रतिशत, पुनासा के बावन प्रतिशत वह खालवा के चालीस प्रतिशत लोगों ने सहमती जताई कि वे अखबारों में स्वास्थ्य विज्ञापन देखते हैं । वॉल पेंटिंग की पठनीयता सडकों पर लगे होर्डिंग, पोस्टर बैनरों पर लिखे या दिखाए गए सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी कभी आपने पडी है? खंडवा छत्तीस नहीं चौंसठ । पुनासा हाँ उनतालीस नहीं खाली । हाँ छप्पन नहीं ॅ खंडवा के छत्तीस प्रतिशत पुनासा के प्रतिशत तक खालवा के प्रतिशत लोग दीवारों पर लेकिन स्वास्थ्य पेंटिंग्स पडते हैं । स्वास्थ्य विभाग की रैली क्या आपने कभी स्वास्थ्य विभाग की झांकी या प्रदर्शनी देखी है? खंडवा हाँ तैंतीस नहीं सत्य सी पुनासा हाँ सत्ताईस नहीं बेहतर खालवा हाँ अठारह नहीं बयासी । जब इसके बारे में लोगों से पूछा गया तो खंडवा के तेरह प्रतिशत, पुनासा के सत्तर प्रतिशत, खालवा के अठारह प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें स्वास्थ्य विभाग की रैली मार्च देखा है । स्वास्थ्य मिले मशीन फिर में उपस्तिथि किसी स्वास्थ्य शिविर अथवा मेले में आप शामिल हुए हैं? खंडवा हाँ इक्कीस नहीं उन्यासी पुनासा हाँ बीस नहीं अस्सी खालवा हाँ सत्रह नहीं रियासी स्वास्थ्य विभाग के मेले या शिविर में शामिल होने के बाबत जब लोगों से पूछा गया तो खंडवा के इक्कीस प्रतिशत उंसके बीस प्रतिशत खालसा के सत्रह प्रतिशत लोग ही स्वास्थ्य विभाग के लगने वाले शिविरों में शामिल हुए हैं । निष्कर्ष संचार माध्यम जनमानस को सूचित शिक्षक और संचार में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते हैं । यह शोध इस बात को समझने का प्रयास है कि फॅमिली राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन जैसी बहुआयामी और वृहत योजनाओं के क्रियान्वयन में जनसंचार माध्यमों की भूमिका क्या है । रेडियो, अखबारों और टेलीविजन तथा परंपरागत माध्यमों के अतिरिक्त भी कोई और माध्यम प्रभावशाली है । लोक सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए किन संचार माध्यमों का उपयोग करते हैं? इन सब पहलुओं की पडताल जरूरी हो जाती है । जनमाध्यमों का स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता, शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए । जब तक लोग शिक्षित नहीं होंगे, तब तक बहस वास्ते जागरूक नहीं हो पाएंगे । लोगों से अंतर्वैयक्तिक संचार सर्वाधिक क्या जाना चाहिए? सर्वाधिक लोगों ने आशा कार्यकर्ताओं से स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं को प्राप्त किया । यदि आशा आंगनबाडी कार्यकर्ताएं पढी लिखी बच जागरूक हो, तभी भी ग्रामीणों को बेहतर तरीके से जागरूक कर पाएंगे । इन इलाकों में शिविर लगाकर लोगों को जागरूक किया जाए तो बहुत ज्यादा प्रभावी होगा । खंडवा चलेगी इन तहसीलों में पी । वी । की पहुंच बहुत ज्यादा है । हालांकि तुलना पाकिस्तान पर देखा जाए तो यहाँ जागरूकता कार्यक्रम बढाई जानी चाहिए । हाँ,

13 - Concept Of Green Advertising And Public Attitude Towards Environment : Linkadge Examined

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14 - Rural India and Communication : Changeing Perspective

rural India and communication changing perspective. India is a nation off diversity where we find ample rural societies on tribes sustaining in several different regions. Agriculture is important sector of rural India with more than 70% off these populations on their livelihood by crops and allied means off income. The sector faces major challenges off enhancing production in our situation off Findling natural resources necessary for production. In past decades, there have been numerous essential transitions in rural societies off India. With the advent off new technology and new media right from the early community development years, there has been several successful experiments in these rural localities. Late President Colom's division off the you are a providing urban facilities in rural areas is one off such transformative step. The technological standard has played as one off the most essential step in this process. Off transformation. There was an experiment by promising where he was able to switch on on off the tube wells using the cellular phones in an easy budget, he was able to provide value added services to the farmers. There are large numbers off other steps we can easily count to transform the opportunities in the rural societies. I cities information and communication technologies can play a significant role in combating rural and urban poverty on fostering sustainable development through creating information rich societies on supporting livelihoods, rural development forms on important agent off government, The roll off media in the sport Specter can be counted from the early days off radio experiments in India. It was 18 nineties when first time transmitters were installed in two villages off the south to educate people about agricultural growth. Later, few more transmitters were installed in different states on various programs were broadcasted toe educate the rural Mars. With the advancement off time, there was conducted a site experiment to study the effect off television in agricultural areas. With the success off this experiment, India was able to establish television network all across the country. In the present scenario, the new millennium has forecasted the growth off cellular phones throughout the nation. Even the rural societies are utilizing these gadgets to stay connected with their friends, relative and neighbors. In fact, it is the dream project off our Prime Minister, Mr Narendra Modi, to establish a strong collectivity between the cities on Villagers by promoting the idea off digital izing India. This initiative will support the Villagers to connect with the rest part off the vault and develop in various technical, educational and agricultural fields. An example off This is in 2012, when one off the farmer off Maharashtra Sang Lee District used Facebook to connect toe other turmeric farmers across the country. Online social networking WAAS used to discuss the crash off turmeric prices due to oversupply in the market, we find that the developing nations are seen as a sink off resources, skill, knowledge, ideas, institutions. Likewise, the rural sectors are also conceptualized as sink off similar pattern. The National Rural Employment Program seems to be promoting developmental education criteria to uplift that rural societies. But language barrier literacy on poor infrastructure for electricity, telephone e and connectivity, in addition to high cost off instruments on telecommunication services have widened the digital divides for decades. In the new millennium, The penetration off social media in rural India has doubled in the past years compared to the urban states. As per the report off I am RB International and Internet and Industry Body Mobile Association off India. I am a I off the 1 43 million social media users in the country, 33% increase in the number off Internet users. Our report sees that out off to 57 million Internet users, 1 80 millions are from urban India. Various 77 million's belongs toa rural India. But the growth and involvement off media in rural India also has some disadvantages which affect the life off these rural population. Overall, we can see that are smart Village can be defined as a bundle of services which are delivered to its population in an effective manner here. Communication on information technologies plays a major role in designing, delivering on monitoring these services with the support of the huge mobile revolution. Indian broadcasting and social media play an efficient role to promote livelihood in rural sectors off our country.

15 - Folk Media : A Pervailing Instrument For Rural Improvement

pork media A prevailing instrument off rural improvement in today's dynamic world communication and its full has become very specialised and significant in India. Modern mass media alone cannot reach to the millions off people in the rural areas who have no regular access to TV newspapers. Internet etcetera Due to poverty and illiteracy, the modern medias beach is largely restricted toe open areas. Information education and entertainment do not reach toe a large majority off the people in rural and remote areas. The mass media has proved to be clamorous, impersonal and unbelievable. Does the modern media is not suitable for preserving cultural heritage and commotion off poor performing traditions and art? The media has remarkable impact on brutal society because off the acceptable idioms functional significance, anti cultural burials, book media can overcome the difficulties off the language speech. What on other barriers off communication like interest, understanding, interpretation, attitude and perception, book media spun off the most important vehicles off social change and nation building. Vile. A lot ofthe modification may be needed to convince social messengers. Pork media will easily carry social issues, primitive rural development. Every human society has developed its indigenous on traditional modes on channel off communication which characterise its existence, organisation and development. These communication modes and channels formed the basis upon which the communities, especially that rural community policymakers, planners and administrators desire US tow effect. Functional economic and social changes must first identify such community communication modes and channels and utilise them to provide the people with maximum information about such changes. Communication that transmission ofthe information from a point called origin our source toe another called destination. Our receiver our audience is the bloodstream off every society. Our society may be explained as a group of people who have lived together long enough to evolve common culture, nods and values. Cultural distinguishes one society from another cultural gives form and meaning to our people's existence. Culture has defined by Ono and eligible 1981 as the the complex whole off men's acquisitions off knowledge Morals believes arts, customs technology which are shared on transmitted from generation to generation. In this definition, culture includes those things which man has invented and produced on which we can see feel on Hill as well as those suspects off man's behaviour, which we cannot see namely knowledge, believes or morals, language, philosophy attitude, etcetera Communication, which is an act, a process off interaction is carried out primarily. Every human society has developed It's MP genius on traditional modes and channels off communication which characterise its existence, organisation and development. These communication modes and channels form the basis upon which the communities, especially that rural community policymakers, planners and administrators desire gusto effect functional economic and social changes, must first identify such community communication moats and channels and utilise them to provide the people with maximum information about such changes. Media as a nation builder through the use ofthe science are symbols. Such signs or symbols must arouse the same meaning in other person, individual on group or people as it does in front. Self communication is an aspect ofthe culture and non material culture into genius and traditional communication. Moz on channels, therefore, have a sort of culture diversity. Such moods on channels are identified, assessed and understood in the context off the particular culture. On its value system, the communication process is initiated than the source, our centre, but as symbolic sounds, which herefor two experiences and rooted in the environment after receiving our audience has had similar experiences rooted in the environment and has been conditioned toe associate that, given sounds that those experiences and attached a common meaning the DNC that communication has been possible. The communication would be effective if they decide. Response follows community communication patterns in India that indie genius on traditional community communication modes on channel stand to have variations from fun cultural region or ethnic group to another. The moods and channels reflect the social structure off each community. Such social structure is similarly data mined by the totality off the historical and economic experiences off the people. Some ofthe thes Moz include mass actually running festivals, JAMA music, songs, dancer styles and steps. Bush or bush. Fire smoke, ashes, colour off clothing sales and proverbs, gunshots, animals but and insects, glass notes, fresh leaves, nods have looks, tribal Mark's body language talking Trump's better poetry and boot, Garvin's legends and myths and so on. All these are the creation ofthe human interactions, contentious and conflicts. They are made Nam's given values and mystified by the indie genius and traditional channels off impersonal on DH group communication, mostly based on age, kinship, gender inheritance and marital status. On with authority patterns embedded in the social structure and organisation of the society faced off its interpersonal and group communication channels function with vertically and horizontally and our natural riel and inevitable in a community's plant and unplanned and pants went to be effective months. Communication systems require complex formal organisations which need hi it's kills 48 operations. Their technology and messages are urban directed. Because of the heavy capital outlay. International methods of finance are used to finance modern mass media projects. Are system pictures out off the reach off the rural poor? Inevitably, therefore, the modern most media and information systems tend to stabilise a stethoscope which is based on structural dependency off peripheries on centres. Because off the focus on the individual and not as a member in a social network, the mass media may not be said to fight themselves, be responsible for the occurrence off mass phenomenon. No can be safely argue that they are sufficient tools, buddy cause and effect ofthe mass mobilisation programmes rather through the existing structure of society and the prevailing expectations, motivation and social institutions in Virginia's on traditional community communication channels and the content and symbols which they disseminate me do that trick conceptualisation off for media. There are very few countries in the vault which processes the rich treasure off lively folk performances. India is fun off them. The traditional heritage off four performances in India ranges from regional folk songs to street plays, folk performances, especially folk tater in India, Harrell's From the early development off the so called Civilised Society. There are nothing but conjectures about the beginning on origin off these poor cards, it may be said that the development are folk arts in India corresponds to the development ofthe human beings. Fork out off any country has developed with the society and so they become a part off the culture of that region that cannot develop in isolation because the other manifestations off the culture and society itself. Toe which dip Ellen Johnson 2005 as Raymond Williams, 1985 has defined that dumb folk as a gentle meaning ofthe people in arranged from particular social permission, including nations to people in general. W. Chipcom has defined folk as the same cultural tendency rather than popular form ofthe culture. Off late, the town has been defined as a communal production off a society off its core region folk art and performances are in a self reflection off the culture after society, as culture reflects itself through art, jewellery, folk plays, songs and rituals, its relations with the society and the community to fetch it belongs is somewhat different as they are apart off the daily life through four card and performances that society expresses its sorrows. Happiness, celebration, achievements, etcetera, a notable American social, are just Valium. Summer 1906 has defined the culture as spoke Raise his concept. Art for Craze is a more comprehensive Tom, which differ from culture in a distinctive bay port, please, according to summer on products off natural forces, which become a part off the unconscious. They are instinctive in nature and travelled from generation to generation as a part ofthe collective behaviour. Later, they become the appropriated from off behaviour, which functions automatically for summer. Folkways is a matter ofthe action. Perez Landberg defines it as a part ofthe collective unconscious, which society inherits from generation to generation. To put it differently for fees are not culture, but they are the foundation ofthe culture. It may be said that culture is formal. Vera's folk pacer informal the folk arts are the products off default face on culture off the society. They are inseparable as they form a part off the society that they belonged to. People lived and died with folk arts. Hence they become easy to decode and understand. They are easy to understand by the common masses because of their nature ofthe origin. For God is the most effective way off communication. They are apart off the mass media, the spinal Mennen off mass media is exploited by several government and nongovernment organisations for their individual and common purpose is traditional. Fourth media includes folk dance for drama, folk songs and puppetry, and so on and so forth. Traditional folk media is stumped as the performance ofthe Dimas is. They are in fact, the cultural symbols off the community. They are lively in nature and correspond with changing time pattern. They have been acting as a mass media for a long time. For media has a distinctive quality which sets it apart from the rest. It breaks through every barrier and reaches through the audience. In the simplest off bombs, they are fluid in nature. On borrow elements from every bill without any prejudice, eyes the best part off the fork media is it's personal nature ofthe communication. They communicate on the terms and conditions off the community by communicating folk media. Tab loves an interpersonal relationship which is contextual and work according to the needs ofthe the individual. It's interpersonal. Nature ofthe communication makes it persuasive, and so it gets instant feedback. Sham Parmar on HKD 1980 I have studied the very nature ofthe media, which gives it an edge over other forms off communication. They are off the view that the's folk media bombs are local and intimate and hence established. The grapple with the masses easily irrespective of their regional differences, for media appeal to the emotion rather than the intellect. So they easily render the encoded message and easily get that design feedback. The best part of the folk media is that it has not institutionalised and organised, and so individual authority controls its pointed and quality. This nature ofthe force media makes it adaptive. Tow any region in every age, the gator to the individual meat, but they belong to the community as far as its teams are concerned, take over a very vital range from Metz to the current issues for media doesn't use any language, but it interacts two mediums and symbols off the masses. This phenomenon makes it participatory as people identify fed it and it gives an opportunity tow everyone to take an active part. No special skill is required in its operation and even an ordinary person can learn and contribute in its functioning. It's participatory nature on a spontaneity gives it an edge over the rest. Off the mass media about from audio visual quality. Pork media's effectiveness rests heavily on its unique matter off communication with the appeal to the collective unconsciousness rather than the individual consciousness for media in nation building, Dr Suresh Kumar 2006 has brilliantly demonstrated the rule ofthe folk media in rural development. He writes that as most ofthe depopulation in India still lives in village is, there is no denying off the fact that building a nation spell stupid building. The rural India, the Steph Elopement should be carried out in the form off the development off the rural people and rural areas, a long fit their total environment through concert in action, the very false change that is visible towards development off the rural people is the development ofthe modern communication devices and network in India. There's Gunson above reaching people, communicating with them and equipping them. But new skills has been emphasised, or and again in successive five year plans, which provide the blueprint off the country's plant development. As a result, the communication infrastructure has been enormously expended, which was taking country forward in terms. John L. Ent, 1978 discusses the Jews off folk media, either in their traditional rural settings or an adapted to mass media to bring about social novenas off national development plans. It also looks at the role ofthe interpersonal communications networks. The most important question that he considers in traditional media carry modern messages. And if they can, should they? If they cannot, should they be modified so that they can? I will not be satisfactorily answered until more research is completed on fourth, the rural people themselves think about this. Those who have studied for potentialities have varying answers. What needs to be recognised image? This development is the role ofthe mass media in the holistic development ofthe nation. The first such stem was introduced in 1972 then International Planned Parenthood Federation on UNESCO organised cities off meetings in London. This was done in the light off the importance off for media in family planning communication programmes. As every village in India has a relevant music dance off theatre or accustomed to it, they have access to the functional and a spontaneous aspect ofthe folk media. And how does structure continuously has help them adapt to the changing situation? We are living for them toe just in the society Since the traditional media is closer to the heart on minds off the rural people at appeal is more personal and intimate. The folk media appears to be the main media off communication for rural people. Storytellers, singers, minstrels on other kinds off folk entertainers have acted for centuries as sources for the transmission on dissemination, off news on information, two face to face life communication, family's social groups and community gatherings solved as the main floor off communication and sources for feedback. For the folk performers, the values, attitudes, believes and culture off the people are propagated, re enforced and perpetuated through these folks forms. The issues in a society are depicted in the film office attire by the folk, others for curing societal evals in court in 2006. The folk art preserves on disseminate in a lively manner the tradition and culture off our forefathers, since they are deeply rooted in the social mainstream. Poke Media comes in different forms and has known by different names in different regions off the country. For instance, in Andhra Pradesh, Jump Adam indicates our village on Jen Pablo means Villagers. The folk art forms off Villagers on the whole art known as chin pad cholera. Similarly, look nata or look. It means people stands or people's song get. Our many other forms are folk odds in other states off India. These are used as John Madam's E. People's Media. These forms represent the people concerned by giving a glimpse ofthe there's time speech music, Dad's dressed behaviour, etcetera. The Elevens are pork. Media has been official ised by Calvin Car keys, he said. The folk media re presents the people in their natural habitat with all their contradictions on multifarious activities. It gives a glimpse ofthe their style off speech, music, dad's dress and ve ism. It contains a rich store off mycological heroes, medical romances, she athletic tails, Social Customs believes on legends in orderto understand the colourful diversity and unity off India. It is important to see the folk theatre in its natural settings for media are relatively expensive and easily accessible, which adds to the popularity off the fork media in rural areas. They're highly spontaneous, participatory on involving quality makes them the media par excellence for any powerful and effective change intended. Dorcas Mukhopadhyay I summarised that 11 off folk media for performing arts have changed structure continuously over centuries, mortifying to the needs ofthe changing situations yet continuing to be functionally relevant to society. Tradition suggests a process off the transformation off each old values and the contextual manifestation on interpretation off the universal tradition is not only our capitated behavioural pattern are some persistent symbol or motive in community culture. It is also an assertion, often identity, a revival and regeneration off the life force off the community. Traditional media rely on this cultural support and contacts in India. Mass media has been limited toe urban areas largely unable to trespass in the rural areas because off its orientation towards urban population, traditional media forms being functional in its thought and approach, interpersonal in its attitude would be better to carry out the messages off change development and growth. But hear Bergdahl's Mukhopadhyay bonds that not all four forms can be used for development off communication purposes. Thus they should be carefully studied from the points off your off content and characterisation for the possible adoption for development purposes. For media productions should be consistent with the needs ofthe the social contacts and related to the customs on believes off the local communities. Since folk media have sociological routes, their utilisation should be related to local events and their function in the local communication strategy should be properly assigned. We have various four bombs in our country which are still alive even today. This is quite evident in our cultural heritage. Are few categories off folk media are traditional dance, drama, painting, sculpture, song music, motives and symbols for media has greatest appeal to the masses on has qualities off touching the deepest emotions off the illiterate millions. Peter, from like Marcia nor Donkey accused in a hurry gotta attract the rural audiences most so people can be educated, tow the mediums to bring about desirable changes in their behaviour. Street Lee is not like theatre, but it attracts a large number of people. The Villagers have a great fascination for their war dances on folk songs. Mila's Our Country fears are synonymous with joy and kitty. In the rural areas there, life follows a harder routine. Nothing is more welcome to the people than the prospect off our festival. And Mila storytelling has Bean one of the best and the most commonly used to map out ofthe instruction in informal education, religious propagation, rural development, et cetera, no donkey. And for Peter, the use ofthe media as a means of development and awareness is not a recent phenomenon in India. Ever since the end off the 19th century, folk media has been exploited as a matter off raising the political and social consciousness off the people. Aw, fairness, along with entertainment as thie, aim off for Media, which is based upon an ancient Indian perceptions off the roll off in society engine for Peter is a composite bomb off containing songs, music, dance and trauma that seeks to fulfil at the intellectual, emotional and aesthetic needs off its Spectators. It is more than entertainment, a complete emotional experience and creates a state off receptivity in which messages can be most effectively transmitted. Folk Theatre has functioned as an instrument off social OVI, arrests, protests and change Traditional rural trauma performance has known to be dependable on pass away, so change agents acting as a bridge between different rural areas on between rural and urban areas. Folk songs are great. Deal off. What has been said off Folk Theatre is true to folk songs as well, in fact, the folk songs but often composed for some theatrical performances, but later they developed an identity off their own. They have been used specifically and effectively by nationalists, communists, political parties and by other government and private agencies to promote their causes. Major folk songs are Allah from Punjab, when the money from the British and WADA from Maharashtra Bagua, Chetta Bar, Marcia Chatty, Frumpy, Our Country from Hubie. Among the book forms in our country, folk songs have played a major role in conveying developmental and social element messages most frequently and most effectively. They also have further potential in communicating the developmental awareness among rural people. If used properly and wisely, they may come to prove to be a one off the most relevant, easy and effective media prove its government and private agencies may produce responsible appear on advanced citizens in our country, which in turn may help in building a strong nation. The boards off each key, but one cannot. They have successfully played decisive roles in a tuning the rural mind to the importance off a social or political team like national unity, social welfare on even family planning. They have thus become the most persuasive communicators on any given team in the effort off making them lovable communicators. The original content is a squeezed out on a new message is integrated to suit the needs ofthe times and plays. This process has given them a sense ofthe contemporary Lee on functional relevance. Folk dances India is a land of diverse cultures and traditions. Each region off the country have a unique culture, which is also prominently visible in its various art forms. Almost alter regents off the country have their specific folk music and dance, which proves to be a wonderful way off expression off their community and its traditions. Though these four dances are not as complex as the classical towns farms, they are very beautiful because off the essence off bonus in them. The folk dances off any community are performed on almost every special occasion on festival, Toe express, Elation and George. These dances are also considered to be our species by marrying off those tribal communities in the country. Mattie folk dances are dedicated to the presiding deity off a specific community. The most interesting part off a folk dance is thie attire required for its performance. Every folk dance has its own specific costume on jewellery, which differs from dance to dance. They are, in general, very polite and colourful, that traditional jewelries that give a folk touch to the performance. These dances are not only the exclusive art off a particular community, but also an exit off India's cultural heritage. During the performances off such four tenses, people come from different sections ofthe society together, which may provide a chance TTO address them collectively. Using the message, Pruthi spoke dances to improve their status, for example, by carrying benefited by governmental and schemes off their felt being on development. Traditional paintings, wall paintings and inscriptions are an effective on economical medium for advertising. Such practises are not new on innovative as a tradition ofthe paintings on a wall for different occasions in rural India is prevalent from the time immemorial. Wall paintings are an effective on economical medium for advertising in a rural areas there silent. Unlike traditional theatre, our speech or film comes to an end, but ball painting stays as long as the feather allows. Better retailer normally welcomes paintings off their shops, balls and name boards. Since it makes the shop look cleaner and better, the shop looks alluring and stand out among other outlets. Besides rural household shopkeepers on punch, Iet's do not accept any payment for their ball to be painted with protect messages to get once Paul painted with the product messages is seemed as a status symbol. The greatest advantage off the medium is the power off the picture, completed with its local touch. The images used have a strong emotional association, but the surrounding our step impossible for even a moving facial medium like television, which must use general image to cater to the greatest number off viewers. This form for advertising would easily be accepted by that rural people as they're accustomed to such practises, fears and festivals. During these colourful events, people are all sex cost and religions come together and join in the merrymaking. Processions are held, prayers are offered, gifts are exchanged and people dance and sing during these multicoloured events, bringing out the true colours off their rich Indian culture. The fears and festivals off India play an important role in attracting tourists to the country. These past devils are an integral part ofthe the life of the people of the country. One of example is teach ofthe righteous town, which marks the onset off demands. On. On the other hand, onem in Kerala and be who in Assam are celebrated to mark the harvesting season are the festivals like Conan Town's festival promoting culture off India? Religious festivals are innumerable over here. Don Capoccia, authority Gen. Managed to make Christmas wasn't bunch of it and others are some off the popular religious festivals off India. These fears and festivals can add their best be utilised as folk media spreading of Vienna's among people regarding the developmental process on how to participate in such process, along with a new developments in technology in order to make their lives better and the nation strong, The humble festival off Nagle is unique in character as it promotes social integrity, social a panic values on cultural diversity ofthe whole, not Eastern states off India Cheque Pooja cheque Pooja is deep rooted in fork and culture and it sustains the basic concept off worship. With a combination ofthe biodiversity conservation, social integrity on local livelihood development, it has now emerged as a national festival. The charter's find out how important festivals off a hard job. It has also observed in some parts ofthe West Bengal, Orissa, Assam border, British model British and Nepal. The people off these areas also celebrate the festival with strength and enthusiasm. In states like Maharashtra Deli and in several large cities off India, Chuck needs varieties off clean fruits specials and many local products. Some of the species are in existence only due to the requirements off cheque POOJA. Another aspect ofthe biodiversity conservation. There's relative 50 for the body cheque. Buda takes place on the edge ofthe gathering porter bodies Egypt River Lake Point and a stream the local people starts to clean on the border bodies before the Pooja that changing and maintenance off the border bodies on other embankment are done for celebrations off the poacher. Please contribute widely in biodiversity conservation, especially for the badlands. Chad Pooja also promotes social integrity through creating employment opportunities. During the celebrations, the lower communities off the society get good income through supplying soil pots, bamboo materials, banana sugar cane, etcetera, charters celebrated mainly by Hindus. However, Muslims also participate in this holy festival. In certain places. Dr Ben Dishware pattern is after view. That cheque is the festival ofthe truth known violence, forgiveness and compassion. Dr. Patrick has been trying for more than four decades to bring it scavenges into the mainstream society on chirping one off the very important festivals to mix together and just feel accepted. Scavengers are being delighted to be part off the festival. Past Cech, Pooja has become a national symbol ofthe social integrity, biodiversity conservation and nation building. Conclusion. The book media in India seems to be used as a supplement to the mass media rather than as the centre ofthe communication efforts to reach majority off India's population who live in the villages in India. Mass media continue Toby limited largely to the urban population. Traditional arts bombs have survived for centuries, and David survive in future for their flexibility. They could be the media for the social change in rural India, traditional performing are being functional. Interpersonal on having a contextual pace would be able to carry the message of change, development and growth. Apart from thes life programmes that face to face communication that traditional four bombs have been used in programmes over the electronic media Indians role in identifying for media for communication purposes has been quite positive. Unlike infested theatre, folk performance is our composite art in India. It is a total art with fusion elements from music, dance, pantomime of ossification, epic ballad, reside, Ishan, religion and festival piece entry. It imbibes ceremonials rituals, believes and social system. It has deep religious and ritualistic overtones and be again, it can surely project social life, secular teams and universal values. In India, the traditional folk media has been used as a dressing. The Mosses on has been very effective on powerful in communicating the latest development off the country along fifth, bringing about it aside, changes, protests and awareness among the people, the traditional folk performing arts, traditions and customs have long lasting impact on society and culture. The globalisation, economic liberalizations on modern forces off change have widely impacted for media and for performing arts, traditions and cultural heritage, ANA Media has a still contributing significantly in social integrity, promotion, off cultural diversity and nation building.

16 - ग्रामीण परिवेश में स्वच्छता मिशन एवं संचार

ग्रामीण परिवेश में स्वच्छता मिशन एवम संचार, स्वच्छता व अच्छे स्वास्थ्य की हर व्यक्ति के जीवन में घर देशभर समाज में अहम भूमिका होती है । स्वच्छता की कमी अनेक रोगों को आमंत्रित करती है तथा रोगन और कमजोर जनशक्ति देश की प्रगति को बाधित करने में सहायक बन जाती है । भारत में अस्वच्छता की एक गंभीर समस्या है । शहर हो या गांव, रेलवे स्टेशन हो या बस स्टॉप सर के हो या पब्लिक बार हर जगह अस्वच्छता दिखाई देती है । डब्ल्यूएचओ का कहना है कि गंदगी के कारण हर वर्ष भारत के प्रत्येक नागरिक को गरीबन छह हजार पांच सौ रुपयों का अतिरिक्त नुकसान झेलना पडता है । महात्मा गांधी ने अपने आस पास के लोगों को स्वच्छता बनाए रखने संबंधी शिक्षा प्रदान कर राष्ट्र को एक उत्कृष्ट संदेश दिया था । किसी संदेश को कार्यरूप दे रहे तो माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने दो अक्टूबर दो हजार चौदह से स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की है तथा दो अक्टूबर दो हजार उन्नीस में महात्मा गांधी की डेढ सौवीं जयंती तक उनके स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करने की बात कही है । इस लक्ष्य को प्राप्त करने में जान संचार माध्यम महत्ती भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि आज के युग में संचार प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं एवम संचार के लगभग सभी प्रकार के साधन जैसे प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच बना चुके हैं । स्वच्छ भारत अभियान के मुख्य उद्देश्य स्वच्छ भारत योजना का मुख्य लक्ष्य सन दो हजार उन्नीस तक हर शहर हर गांव को स्वच्छ बनाना, पीने के साफ पानी की व्यवस्था करना, पक्के शौचालयों का निर्माण करना और कचरा निपटाने की ठोस व्यवस्था करना है । इस योजना पर कुल एक दशमलव लाख करोड रुपये का अनुमान है । इसमें एक दशमलव चौंतीस करोड गांवों में ग्यारह करोड ग्यारह लाख पक्के शौचालय बनाने में खर्च होंगे तथा हजार करोड शहर में पांच दशमलव एक लाख पब्लिक शौचालय बनाने में खर्च होंगे । स्वच्छ भारत अभियान महत्व यह अभियान भारत सरकार द्वारा चार हजार जिलों में एक साथ चलाया जा रहा है । इस मिशन का कुल खर्च बासठ हजार नौ करोड रूपए है जिसमें से चौदह हजार छह सौ तेईस करोड रुपये केंद्र सरकार द्वारा दिया जा रहा है । दो अक्टूबर दो हजार उन्नीस तक हर गली मोहल्ले, सडक को स्वच्छ बनाना, भारत में सभी जगह पक्के शौचालय बनाना, स्वच्छ पीने के पानी की व्यवस्था तथा ठोस कचरे का पूर्ण निदान करना है । ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वच्छ भारत मिशन भारत ग्राम प्रधान देश है । वर्ष दो हजार ग्यारह की जनगणना के आधार पर कुल एक सौ इक्कीस दशमलव पांच करोड जनसंख्या में दशमलव आठ प्रतिशत भाग यानी तो रियासी दशमलव पैंतीस करोड ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है । ग्रामीण जनसंख्या का अधिकांश भाग कृषि कार्यों में लगा हुआ है एवं गरीबी के अभिशाप से पीडित है । पीने के साफ पानी स्वच्छता से संबंधित जो सुविधाएँ शहरी क्षेत्रों में विद्यमान हैं वह ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं है । गांवों में साठ प्रतिशत से भी ज्यादा लोग आज भी खुले में शौचालय के लिए जा रहे हैं । ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए लोगों की स्वच्छता संबंधी आदतों को बेहतर बनाने, सुबह सुविधाओं की मांग उत्पन्न करने के और स्वच्छता सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए निर्मल भारत अभियान कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा है । अभियान का उद्देश्य पांच वर्षो में भारत को खुला शौच से मुक्त देश बनाना है । अभियान के तहत देश में लगभग ग्यारह करोड ग्यारह लाख शौचालयों के निर्माण के लिए एक लाख चौंतीस हजार करोड रुपए खर्च किए जाएंगे । बडे पैमाने पर प्रौद्योगिकी का उपयोग कर ग्रामीण भारत में कचरे का इस्तेमाल उसे पूंजी का रूप देते हुए जैन और वरक और ऊर्जा के विभिन्न रूपों में परिवर्तित करने के लिए किया जाएगा । अभियान को युद्ध स्तर पर प्रारंभ कर ग्रामीण आबादी और स्कूल शिक्षकों और छात्रों के बडे वर्गों के अलावा प्रत्येक स्तर पर इस प्रयास में देशभर की ग्रामीण पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद को भी इससे जोडना है । अभियान के एक भाग के रूप में प्रत्येक पारिवारिक दिखाई के अंतर्गत व्यक्तिगत घरेलू शौचालय की इकाई लागत को दस हजार से बढाकर बारह हजार रुपये कर दिया गया है और इसमें हाथ धोने, शौचालय की सफाई को शामिल किया गया है । इस तरह के शौचालय के लिए केंद्र सरकार की तरफ से मिलने वाली सहायता नौ हजार रुपए और राज्य सरकार का योगदान तीन हजार रुपये होगा । मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन भी स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय अभियान आयोजित किया जा रहा है । इसके अंतर्गत कक्षा प्रयोगशाला, पुस्तकालय, पीने के पानी का क्षेत्र, शौचालयों, रसोई पर सामान, गृह, खेल के मैदान, बगीचों, भावनाओं की सफाई, रखरखाव के साथ साथ निबंध, वाद विवाद, चित्रकला, सफाई और स्वच्छता पर प्रतियोगिताओं का आयोजन करना सम्मिलित है । इसके अलावा फिल्म शो, स्वच्छता पर निबंध, पेंटिंग और अन्य प्रतियोगिताएं, नाटकों आदि के आयोजन द्वारा स्वच्छता एवं अच्छे स्वास्थ्य का संदेश प्रसारित करना है । संचार की भूमिका जल संचार वर्तमान समय में सबसे ताकतवर समकालीन संचार संसाधन है । इसमें संचार प्रक्रिया के सभी तत्व शामिल हैं । इस संसाधन में सोचना आएँ एक विशाल जनसमूह के लिए संप्रेषित की जाती है । जन संचार माध्यम के अंतर्गत प्रिंट श्रव्य दृश्य श्रव्य संसाधन सम्मिलित हैं । जन संचार साधनों, मुख्य रूप से रेडियो, दूरदर्शन, समाचारपत्रों, सकारात्मक रूप से प्रयोग करके लोगों को स्वच्छता संबंधी आचरन में परिवर्तन किया जा सकता है । निष्कर्ष इस मिशन की सफलता के लिए रेडियो दूरदर्शन का समाचार पत्रों में विज्ञापन दिए जा रहे हैं, किंतु उनकी संख्या कम है । इस से संबंधित विज्ञापनों की संख्या या टम रेडियो पर पर दूरदर्शन के निजी चैनलों पर बढाई जानी चाहिए । दूरदर्शन पर छोटी छोटी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को देखा कर भी ग्रामीण लोगों को जागरूक किया जा सकता है । यह कामों में इंटरनेट की पहुंच हो जैसे ज्यादा से ज्यादा लोग सोशल मीडिया का उपयोग कर सकें ।

17 - गांधी पत्रकारिता के प्रतिमान एवं ग्रामोत्थान

गांधी पत्रकारिता के प्रतिमान ऍम उद्धार गांधी जी बीस फीसदी के संभव था । पहले भारतीय थे, जिन्होंने समाचारपत्रों की उपयोगिता एवं ताकत को पहचाना और अपने उद्देश्य को पाने के लिए उन का समुचित उपयोग किया । गांधी जी ने ऍम कई दशकों तक पत्रकार के रूप में कहा रह गया तथा अनेक समाचारपत्रों का संपादन भी किया और अपनी एक मौलिकता एवं नैतिकता से संपृक्त पत्रकारिता को जन्म दिया । उन्होंने पत्रकारिता को एक आदर्श रूप दिया तथा उसे व्यवहारिक बनाया । गांधी जी के लिए पत्रकारिता आत्माभिव्यक्ति का साधन थी । उनकी पत्रकारिता उनके जीवन का तर्पण थी । उन्होंने लोकसेवा और लोक जागृति का कार्य पत्रकारिता के द्वारा क्या उनकी देखरेख तथा संपादन में अनेक समाचारपत्र यंग इंडिया, सत्याग्रही, नवजीवन और हरिजन आदि निकले थे, जिनमें उनके ग्रामोत्थान के लिए किए गए महत्वपूर्ण रचनात्मक कार्यों तथा विचार प्राप्त होते हैं, जो स्वयं उनके सपनों का भारत की आधारशिला थे । दक्षिण अफ्रीका से भारत आने के पश्चात शुरुआती दौर में वे राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए सदैव प्रयासरत रहे । कालांतर में लगभग उन्नीस सौ चौंतीस के पश्चात उनके लिए हरिजन उद्धार तथा ग्रामोत्थान का प्रश्न सर्वप्रमुख बन गया । ये इनके जीवन के श्रेष्ठतम् का रहे थे । अब गांवों के आर्थिक, नैतिक एवं सामाजिक पुनरोद्धार के लिए तीव्रता से उनमें हुए । गांधी का विश्वास था कि भारत अपने चंद्र शहरों में नहीं बल्कि सात लाख गांवों में फसा हुआ है । उनके अनुसार गांवों की सेवा करने से ही सच्चे स्वराज्य की स्थापना होगी । अन्य सब कहत मैं मेरा थक सिद्ध होंगे । अगर काम नष्ट हो जाए तो हिंदुस्तान भी नष्ट हो जाएगा । दुनिया में उसका अपना मिशन ही खत्म हो जाएगा । गांधी जी के अनुसार अगर हिंदुस्तान को सच्ची आजादी पाने है तो उसे देहातों में जाकर झोपडियों में रहना होगा, महलों में नहीं । महात्मा गांधी चाहते थे कि ग्रामों का विकास हो । ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार और संपन्नता लाने के लिए चहुमुखी प्रयासों पर बल दिया । विक्रम मीन भारत की समस्याओं से पूरी तरह पाकिस् थे । उनके ग्राम स्वराज की कल्पना इस प्रकार की थी कि वह एक पूर्ण प्रजातंत्र होगा जो अपनी जरूरतों के लिए पडोसी पर भी निर्भर नहीं करेगा । यद्यपि वह परस्पर सहयोग से कम लेगा, उनके पास आवश्यक समिति हो, खेल मैदान हो, उपयोगी फसलों को उगाने हेतु आवश्यक समीर ने हो अपनी एक नाटक शाला पाठशाला और सभा भगवान हो जहाँ शुद्ध पीने के पानी का इंतजाम होगा । बुनियादी तालीम के आखिरी दर्जे तक शिक्षा सबके लिए लाजमी होगी । जात पात और क्रमागत अस्पृश्यता जैसे भेद इस ग्राम समाज में बिल्कुल ना रहेंगे । अहिंसा की सत्ता ही ग्रामीण समाज का शासन बाल होगी । गांव का शासन चलाने के लिए हर गांव में एक पंचायत चुनी जाएगी । एक नैतिक एवं सामाजिक उत्थान गांधी ने यंग इंडिया तीस मार्च में कहा था कि हमें अपना ध्यान गांव की ओर लगना चाहिए । उन्हें संकुचित दृष्टि उनके पूर्वाग्रह हूँ और बहनों आदि से मुक्त कराना है और इसके लिए आवश्यक है कि हम उनके साथ उनके बीच में रहे, उनके सुख दुख में हिस्सा ले और शिक्षा तथा उपयोगी ज्ञान का प्रचार करें । उन्हें समय स्वास्थ्य और पैसे की बचत करना सिखा सकते हैं । उनके अनुसार ग्राम उधार में अगर सफाई ना आए तो हमारे गांव कचरे के घोरे जैसे ही रहेंगे । ग्राम सफाई का प्रश्न जीवन का अविभाज्य अंग है । दीर्घकाल से जस्ट स्वच्छता की आदत हमें पड गई है । उसे दूर करने के लिए महान परक्रम की आवश्यकता है । लियोनल कटर्स ने हमारे गांवों को घोडे का ढेर कहा है । हमें उन्हें आदर्श बस्तियों में बदलना है । हमें उन्हें स्वच्छ पानी, शुद्ध हवा और ताजा अन्य की जानकारी देनी है । इसके लिए हमें उनके पास जाना होगा । उनकी सेवा को की तरह दृढ निष्ठा से उनकी सेवा करें । हम उनके भंगी बन जाए और उनके स्वास्थ्य की रक्षा करने वाले परिचारक बनेगा । गांधी के अनुसार सुधर के छोटे कार्य में लग जाना चाहिए, जो आज भी जरूरी है और तब भी जरूरी रहेगा जब हम अपना उद्देश्य प्राप्त कर चुकेंगे । सच तो यह है कि ग्राम कार्य की यह सफलता हमें अपने उद्देश्य के निकट ले जाएगी । दो । आर्थिक पुनरुत्थान भारत जैसे कृषि प्रधान देश की अर्थव्यवस्था के नवीनीकरण की समस्याओं से जूझते भारतीय मजदूर किसान के लिए गांधी ने विकेंद्रित अर्थनीति की बात कही थी । देश में खेती की महत्ता और पूंजी की कमी को ध्यान में रखकर ही गांधी जी ने खेती और कुटिर उद्योगों के माध्यम से ग्रामीण आर्थिक व्यवस्था पर जोर दिया था । उनका कहना था कि हमारी आबादी का प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा कृषि जी भी है, लेकिन यदि हम उनकी मेहनत का सहारा फल खुद ही छीन ले या दूसरों को छीन लेने दें तो इसका आशय है कि हमें स्वराज्य की भावना नहीं है । उनका विचार था कि कठिन परिश्रम करने वाले ग्रामवासियों से एकता साथ नहीं होगी और तभी हम उस जनता का ठीक प्रतिनिधित्व कर सकेंगे । गांधी जी गांवों को स्वाबलंबी बनाए रखने के हिमायती थे । उनकी सोच थी कि यदि आवश्यक हो तो बडी पूंजी वाली योजनाएं बनाए लेकिन उन का निर्माण और संचालन स्थायी साधनों से ही होना चाहिए हूँ ।

18 - भारतीय ग्रामीण समाज और संचार माध्यमों की पहुँच

भारतीय ग्रामीण समाज और संचार माध्यमों की पहुंच वहाँ ग्राम में जीवन भी किया है । क्यों ना जैसे सब का पानी चाहे थोडे में निर्वाह यहाँ ऐसी सुविधा गौर कहा है । भारत गांवों का देश है । यहाँ की पचहत्तर फीसदी आबादी गांव में निवास करती है । शहर का अध्ययन करने के लिए अगर यहाँ के गांव का अध्ययन किया जाए तो गलत नहीं होगा । गांव का नाम आते ही मस्तिष्क में कच्ची पक्की पगडंडियां, कोई स्वास्थ्य समस्याएं, शिक्षा का अभाव जैसी समस्याएं घूमने लगती हैं । हमारे देश में आज भी कई गांव है जो इन समस्याओं से जूझ रहे हैं । लेकिन कुछ गांव ने अपनी तस्वीर बदलती है जिनका पूरा ढेर संचार माध्यमों को ज्यादा है परन्तु ऐसे गांवों की संख्या आज पे का मैं गांव में आज भी संचार के माध्यमों की कमी के कारण लोगों में जन जागरूकता की कमी है । लोग अपने अधिकारों से रूबरू वह जागरूक नहीं है । गांव में संचार क्रांति का अभाव होने से लोकसूचना का उपभोग पूर्ण रूप से नहीं कर पाते हैं । संचार माध्यमों की कमी के कारण ग्रामीणों की शिकायतों समस्याओं का उचित निराकरण नहीं हो पाता है । आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां साइबर कैंप एक और एमपीऑनलाइन जैसे सुविधाओं का अभाव है । विद्यार्थियों और युवाओं को प्रतियोगिता परीक्षाओं के आवेदन फॉर्म भरने के लिए शहरों की ओर रुख करना पडता है । समाचार पत्र में यह तो गांव में समय पर पहुंचता नहीं है और अगर पहुंच पे गए तो उनमें गांवों की खबरों का अभाव होता है । संचार माध्यम और ग्राम संचार के क्षेत्र में गत कुछ वर्षों में संचार के लाइनर माध्यमों का तेजी से विकास हुआ । नए माध्यमों के और भी विस्तार की संभावनाएं नवीन माध्यमों के साथ परंपरागत माध्यम भी अपना अस्तित्व बनाए हुए हैं । जन संचार के आधुनिक माध्यमों के प्रभाव की सीमाओं को देखकर यह कहना अनुचित नहीं होगा कि गांव के विकास में उनकी उपयोगिता शंकास्पद है । इसके बावजूद आज के आधुनिकीकरन के दौर में संचार माध्यम जैसा सामाजिक माध्यम व्यवसाय की चपेट में आ गया है । यह कहना होगा कि विज्ञापन के दौर में भागते संचार माध्यम कब अपने विषय से भटक गए, पता ही नहीं चला । नगरीकरण जैसी समस्या ने गांव की बात को भी शहर में लाकर दबा दिया । आज काम का विकास तो हो रहा है, लेकिन उतना तेज गति से नहीं जितना हो सकता है । आज के परिदृश्य में ग्रामीण समाज की मांग को देखते हुए जनसंचार के भिन्न भिन्न माध्यमों का उपयोग कब, कब एवं कहाँ कहाँ किया जाए, यह निर्णय लेना आज की सबसे बडी समस्या बन गई है । ग्रामीण समाज में संचार माध्यमों का सकारात्मक प्रभाव हमें देखना है तो विभिन्न माध्यमों के प्रभावों का आकलन करते हुए विभिन्न स्तरों पर भिन्न भिन्न माध्यमों का उपयोग करने की रणनीति अपनानी होगी । संचार माध्यमों ने भले ही ग्रामीण समाज के विकास की काया पलट करके रख दी हो, परंतु आज भी संचार माध्यम ग्रामीण विकास के लक्ष्य को पूर्ण रूप से प्राप्त करने में अभी भी कोसों दूर है । इसीलिए यह सच है कि संचार के किसी भी माध्यम चाहे बहत परंपरागत माध्यम हो या विद्युत संचालित माध्यम हो या फिर मुद्रित माध्यम ही क्यों ना हो के विघटनकारी प्रभाव से आज माध्यम का हर विशेषज्ञ दिशाविहीन हो भ्रम की स्थिति में है । बहस संचार माध्यमों से अपेक्षित परिणाम नहीं ले पा रहा । बेहद दिशाहीन हो पद की खोज में ऐसे चौराहे पर खडा है जहां भूल भुलैया हूँ के अलावा उसे स्पष्ट कुछ दिखाई नहीं दे रहा । बहन स्थिति में तब तक बना रहेगा जब तक उसे विभिन्न माध्यमों के संतुलित उपयोग, उचित निर्णय लेने की क्षमता प्राप्त न हो । उसके लिए सही दिशा में शोध मूल्यांकन एवं अद्यतन परिवर्तन की कोई सुनिश्चित व्यवस्था सहज उपलब्ध होना अनिवार्य है । ग्रामीण संचार माध्यम और बाजारवाद की चुनौती, गांव के खेत खलिहान, विकास के लिए चलाई जा रही योजनाएं, ग्रामीण संस्कृति और रहन सहन, ऐसी कई चीजें संचार माध्यमों के जरिए आम जनता तक पहुंच रही हैं । इन सबके बावजूद संचार माध्यम ग्रामीण समाज और उससे जुडी खबरों को कितना महत्व दे रहे हैं, ये किसी से छुपा नहीं है । भूत प्रेत और अंधविश्वास की खबरें आधुनिक संचार माध्यमों जैसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा विशेष कार्यक्रमों के जरिए ताकि इज बनाकर दिखाई जा रही हैं । दो वक्त की रोटी और ठंड रखने के लिए कपडों के मोहताज लोगों की आवाज को संचार माध्यम अनदेखा करने में लगे हैं । संचार माध्यम पास आसपास की मोहमाया में फंसकर अपना दायित्व भूलते जा रहे हैं । ऐसे में संचार माध्यमों अर्थात मीडिया में गांवों में कुपोषण से मरने वाले टीवी स्क्रीन में अपनी जगह है । शायद ही बना पाते हैं क्योंकि इनसे उनकी टीआरपी नहीं पडती और न रईस एयर कंडीशनर में बैठकर ऐसी खबरें देखना पसंद करते हैं । हमारा देश गांवों का देश है और कहाँ की हालत जाने बन गया है । हम नहीं जान सकते कि देश की स्थिति कैसी है । इन सब के बाद एक और गंभीर पहलू है कि आज अखबारों के इतने संस्करण हो गए हैं कि वहाँ खबर जिले तक ही समझ जाती है । कभी कबार राजधानी के संस्करणों के किसी स्थान पर मुश्किल से गांव की खबरें अपनी जगह बना पाती है । हालांकि गांव की खबरों को राजधानी से निकलने वाले संस्करणों में स्थान मिल रहा है लेकिन बहुत कम है । जवाब स्पष्ट है । संचार माध्यम बाजारवाद की चपेट में पूरी तरह से आ चुके हैं । उसी खबर को अपनी संस्करण में शामिल करते हैं जिससे ज्यादा लोग देखना यह पढना चाहेंगे । ऐसे में राजधानी स्तर पर जहाँ सरकार के मंत्री और जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी बैठते हैं, उन तक खबरों के माध्यम से गांवों की तस्वीर नहीं पहुंच पाती । इसके लिए संचार माध्यम के सामने एक बडी चुनौती यह है कि वह गांवों का असली रोक नीति निर्धारकों तक पहुंचा सके ।

19 - संचार के पारंपरिक माध्यमों का हमारे जीवन पर प्रभाव

संचार के पारंपरिक माध्यमों का हमारे जीवन पर प्रभाव स्वतंत्र जनसंचार माध्यम लोकतंत्र की आधारशिला है । जनसंचार का अर्थ जनता के बीच विभिन्न माध्यमों से क्या जाने वाला संचार है? जनसंचार का वर्तमान समय इसके परिपक्व समाज की मनोदशा, विचार, संस्कृति, आम जीवन दशाओं को नियंत्रित निर्देशित कर रहा है । इसका प्रवाह अति व्यापक एवं अस्सी में भर जनसंचार माध्यमों द्वारा समाज में प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक अभिव्यक्ति का अवसर प्राप्त हो रहा है । स्वतंत्र जन संचार माध्यम लोकतंत्र की आधारशिला है । अर्थात जिस देश में जनसंचार के माध्यम स्वतंत्र नहीं है, वहाँ एक स्वस्थ लोकतंत्र का निर्माण होना संभव नहीं है । जनसंचार माध्यमों का जात इतना व्यापक है कि इसके बिना एक सभ्य समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है । जनमाध्यमों में कांति के साथ साथ सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी क्रांति आई है, जिसने मार्शल मैक्लुहान के वक्तव्य को पूर्णतः सत्य कर दिया है कि संपूर्ण दुनिया एक गांव में तब्दील हो जाएगी । मनुष्य के बोलने का अंदाज बदल जाएगा और क्रियाकलाप भी ऐसा ही हुआ है । खाजूवाला रेडियो सुन रहा है । टेलीविजन देख रहा है, मोबाइल से बात कर रहा है । हाँ, गाडियों से कंप्यूटर चला रहा है । कहने का मतलब क्या है? कि युवा एक साथ कई तकनीकों से संचार कर रहा है । संचार का विस्तृत रूप जनसंचार है । जनसंचार माध्यमों के युवा पर पर पडने वाले प्रभावों के संदर्भ में बातें करें तो हर एक विषय की तरह इसके भी दो रूप दिखाई पडते हैं सकारात्मक और नकारात्मक । इस प्रकार इंटरनेट की दुनिया में मर संचार के पारंपरिक माध्यमों का हमारे जीवन पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही प्रभाव पडा है । समाज में ये कहना गलत नहीं होगा कि दूसरी ओर युवा वर्ग जनसंचार के चमक के माया जाल में सस्ता जा रहा है । ये साल अच्छे में कहा जाए तो युवाओं में तेजी से पनप रहे मनोविकारों, दिशाहीनता और कर्तव्य विमुखता को संचार माध्यमों के दुष्परिणामों से जोडकर देखा जा सकता है । पश्चिम का अंधा अनुसरण करने की प्रवृति उन्हें आधुनिकता का पर्याय लगने लगी है । इनसे युवाओं की पूरी जीवन शैली प्रभावित दिखलाई पड रही है जिसमें रहन सहन, खानपान, वेशभूषा और बोल चार सभी समग्र रूप से शामिल है । मद्यपान और धूम्रपान उन्हें एक फैशन का ढंग लगने लगा है । नैतिक मूल्यों के हनन में ये कारण मुख्य रूप से उत्तरदायी है । आपसी रिश्ते नातों में बढती दूरियां और परिवारों में बिखराव की स्थिति इसके दुखदाई परिणाम है । वास्तव में जनसंचार माध्यमों ने भी वो बाल कॉलेज की अवधारणा को जन्म दिया है । जनसंचार के अंतर्गत आने वाले माध्यम है पत्र पत्र का टीवी, रेडियो, मोबाइल, इंटरनेट, युवा वर्ग पर इन सभी जन संचार माध्यमों ने अपना व्यापक प्रभाव छोडा है । इनका प्रभाव इतना शक्तिशाली है कि आज के युवा इंजन संचार माध्यमों के बिना अपने दिन की शुरूआत ही नहीं कर सकते । वर्तमान में मोबाइल और इंटरनेट अत्याधुनिक तकनीकों के उदाहरण हैं जिनका निसंकोच उपयोग अधिकांश युवाओं द्वारा किया जा रहा है । मोबाइल एक ऐसा माध्यम है जिससे दूर बैठे व्यक्ति के साथ बातें की जा सकती है तथा अपने हसीन पलों को चलचित्रों के रूप में कैद किया जा सकता है । यह तो इसका सदुपयोग है परन्तु आज युवा इस माध्यम का गलत प्रयोग कर एमएमएस जैसे दुर्व्यसनों में फंस जाती हैं । किसी प्रकार इंटरनेट जनसंचार माध्यमों में सबसे प्रभावशाली है जिसमें दूरियों को कम कर दिया है । इसका अधिकतर उपभोग युवा वर्ग द्वारा किया जाता है जहाँ इसके द्वारा युवाओं को सभी जानकारियां उपलब्ध होती हैं । ये ज्ञानवर्धन में तो सहायक है परन्तु आज वर्तमान समय में युवा द्वारा इसका दुरुपयोग अधिक होता जा रहा है । हालांकि संस्कारी व्यक्तियों द्वारा इस मीडिया का सही उपयोग किया जा रहा है वहीं लगभग सौ में से प्रतिशत लोग कौन साइटों का प्रयोग करते हैं और हैरत अंगेज करने वाली बात है, यह है की सर्वाधिक विजिटर भी इन कौन साइटों के ही हैं । इन अश्लील साइटों पर जाकर पे अपनी उत्कंठा को शांत करते हैं परन्तु मैं ये नहीं जानते कि इससे उनका और समाज का दोनों का नैतिक पतन होता है । साथ ही इंटरनेट के अधिक उपयोग ने साइबर क्राइम जैसे अपराधों को जन्म देकर युवाओं में अपराध करने की नई विधा उत्पन्न कर दी है । जिससे आज का युवा वर्ग मानसिक, शारीरिक और आर्थिक पतन की ओर अग्रसर हो रहा है जो हमारे समाज के लिए चिंता का विषय है । जनसंचार माध्यमों ने जहाँ कॅलेज, शिक्षा, मनोरंजन और जनमत निर्माण, समाज को गतिशील बनाने तथा सूचना का बाजार बनाने में सहयोग किया वहीं अश्लीलता, हिंसा, मनोविकार, उपभोक्तावादी प्रवृति तथा समाज को नैतिक और सांस्कृतिक पतन की ओर अग्रसर किया है । अब हमारे युवाओं को स्वयं की इसका चयन करना होगा कि वे किसको ओर जाना चाहते हैं ।

20 - ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका

क्या ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका मानव सभ्यता के इतिहास में ग्रामीण समाज का इतिहास सबसे अधिक प्राचीन है । ग्राम या ग्रामीण समुदाय बहन क्षेत्र है जहां कृषि की प्रधानता, प्रकृति से निकलता, प्राथमिक संबंधों की बहुलता, जनसंख्या की कमी, सामाजिक एकरूपता, गतिशीलता का आभाव, दृष्टिकोण एवं किताब बहारों में सामान्य सहमती आदि विशेषताएं पाई जाती है । ग्राम भारतीय संस्कृति के मूल स्रोत है ग्रामीण समाज का परिवेश । पर्यावरण शहरी समाज से भिन्न है । ग्रामीण समाज में हम यह स्पष्ट राह देखते हैं कि वहाँ का जीवन यापन प्रकृति पर निर्भर अधिक रहता है । कृषि यहाँ का मुख्य व्यवसाय है । उसकी अपनी पहचान के कुछ आधार ऐसे हैं जो शहरी वातावरण से उसे अलग करते हैं । बोलते हैं कहाँ हूँ एक इकाई है । हमारे देश की पहचान गांवों से हैं, क्योंकि भारत कृषि प्रधान देश था, आज भी है और आगे भी रहेगा । मानव जीवन के सामाजिक जीवन की यात्रा में अनेक परिवर्तन, समय, परिस्थिति जन्म हुआ किन्तु भारत में परिवर्तन की गति तीसरे रही । स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात समाज की संरचना और संस्कृति में सामाजिक परिवर्तन का प्रारंभ आंतरिक और बाह्य स्रोतों द्वारा होता रहा है । वैसे भी संरचना में स्थिरता नहीं रहती । वहाँ बदलाव ही सामाजिक परिवर्तन है । अब यह भी देखते हैं की परंपरा पुरातनता और निरन्तरता का समानांतर अस्तित्व भी मिलता रहा है । आधुनिकीकरन की प्रक्रिया किसी एक ही दिशा या क्षेत्र में होने वाले परिवर्तन को प्रकट नहीं करती । हमारा ये है बहुत शब्द बहुआयामी होती है । नगरीकरण की प्रक्रिया में ग्रामीण लोग गांव से शहर की ओर पलायन करने लगे लेकिन सामरिक दौर में यह भी की ग्रामीण समाज में जीवन के हर पहलू में परिवर्तन की बयार में पुरातन आयामों को बदला है । उसका हर क्षेत्र ग्रामीण परंपराओं से भी प्रभावित है, परंतु साथ ही आधुनिकता के लाभ भी से उठाना चाहते हैं । वैसे भी मानव में से ही रहमान ओ प्रति है की एक और अतीत का आकर्षण और दूसरी और प्रगति की अनिवार्यता । आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विस्मयकारी गति से विकास जीवन के हर पहलू में दृष्टिगोचर हो रहे हैं । आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी से आज कोई भी अछूता नहीं रहा है । चाहे शहरी क्षेत्र हूँ या ग्रामीण क्षेत्र, वैश्विक चेतना, संचार संसाधन, संपर्क के नाॅलेज, रेडियो समाचारपत्र, दूरदर्शन, सिनेमा, कंप्यूटर, मोबाइल, ॅ आदि ने समूचे विश्व पालक को नित नवीन सौगात दी है । संचार एक प्रक्रिया है तथा एक प्रयास है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति दूसरे के विचारों को समझता है, सहभागी होता है तथा आपसी समझदारी को बढाता है । यह संदेश देने प्राप्त करने वाले को एक मंच पर उपस् थित करता है । संचार माध्यम मानव जीवन के ज्ञान में वृद्धि करने के साथ साथ जागरूक बनाकर विकास की गति को गति देता है । जब किसी यांत्रिक प्रणाली के प्रयोग से संदेश को कई गुना बढा दिया जाता है तो बहस संदेश बडी संख्या में लोगों तक प्रेषित हो जाता है तो उसे जनसंचार नाम दिया जाता है । जन संचार के आधुनिक माध्यम विधायक, जनसंचार के भारत प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल दिया है । प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए सूचना प्रौद्योगिकी ने विश्व को एक प्रकार की क्रांति से प्रभावित किया है जिससे वैश्विक चेतना की महत्वपूर्ण कडी कहा जाएगा तो कोई अत्युक्ति नहीं । वास्तव में संचार क्रांति ने दुनिया को एक सामान्य धरातल पर प्रतिष्ठित कर दिया है । जब विश्वग्राम में बदल दिया है भारत विश्व पालक को प्राचीन काल से ही संस्कृति की उदात्तता के फलस्वरूप विश्वगुरु के रूप में आपने आलोक से आलोकित करता रहा । आज भले ही वैश्वीकरण शब्द का उपयोग कर जैसे पांच चाहते है, दिन अधिकांश राष्ट्र मान रहे हैं, लेकिन यहाँ भेजा जाएगा कि भारतीय संस्कृति की वसुधैवकुटुम्बकम के उदास भावना ने धरती ही हमारा परिवार है का जीवंत संदेश दिया । वर्तमान दौर की बदलती संस्कृति में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वितरित नई इजाद में संचार के विविध माध्यमों के रूप में ऊंचाइयों का संस्पर्श क्या है? हालांकि विकासशील देशों, महानगरीय शहरों के छोटे से छोटे क्षेत्र भी ऐसे वंचित नहीं रहेगा । संचार के कारण सामाजिक व्यवहार में आर्थिक और राजनीतिक कारणों से बडे परिवर्तन आए हैं । समाज का परंपरागत स्वरूप बदलकर नई जीवन शैली में ढल रहा है जहाँ सामाजिक एवं मानव हेल्थ का पक्ष भी जुडा है क्योंकि कोई भी संचार माध्यम सामाजिक सरोकार से अलग नहीं हो सकता । संचार संसाधन माध्यमों का उद्देश्य असंख्य श्रोता एवं दर्शक वर्ग तक पहुंचना होता है । इसमें शिक्षित, अशिक्षित, बाल, वृद्ध, बालिकाएं, महिलाएं, ग्रामीण, शहरी सभी लोग । हालांकि सभी का स्तर ना तो एक सा होता है नहीं सोच सभी की प्रकृति में भिन्नता मिलती है और इन्हीं भिन्न प्रकृति के लोगों की आवश्यकता की पूर्ति संचार संसाधन के विभिन्न माध्यमों से होती है । भाषा पर यदि हम दृष्टिपात करते हैं तो निश्चित ही है पाते हैं की भाषा अभिव्यक्ति का सब बाल सुलभ सशक्त माध्यम है । जनसंचार के लिए जस्ट भाषा का उपयोग किया जाता है । बहुत जनजीवन की जान भाषा होती है, जो सामान्य व्यवहार की भाषा है । भाषा भी संचरण है, जिन माध्यम का संचार एक सहज और मनुष्य की मूलभूत प्रवृत्ति है । मानव का आदिम अवस्था से ही संचार का संबंध रहा है । गुफाओं और कंदराओं में जीवन यापन करने वाले आदिम युग के मानव भी किसी किसी रोकने, संचार प्रक्रिया से संबद्ध रहे हैं । श नेशन है । वैज्ञानिक चेतना एवं तकनीकी ज्ञान के विकास से आज उसका परिवर्तन एवं विकसित करो । स्पष्ट होता गया जनसंचार माध्यम एक सारगर्भित तो असीमित व्यापक तक रहन क्या हुआ शब्द युग्म हैं । जन का अर्थ आम जनता या जनसाधारण से तथा संचार का अर्थ तालाब, प्रसारण जब पहुंच आदि के रूप में है । मानव जनसमूह में आज के भूमंडलीकरण के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभावों के फलस्वरूप वर्तमान संचार प्रणाली ने बाजारवादी या उपभोक्तावादी बना वृद्धि को संरक्षण दिया है, जिसके कारण मानवीय एवं सामाजिक जीवन मूल्यों, नैतिक मूल्यों, मानवीय मूल्यों का संकट दिनों दिन गहराता जा रहा है । आज आदमी की पहुंच नक्षत्रों तक हो गई है, लेकिन बहन अपने पडोसी के दुःख दर्द से अनुभव किया है । हालांकि नई तकनीक और संचार क्रांति नेचर स्तर है । हमारे समय को प्रभावित किया है । वह अद्भुत है । हमारे आचार विचार, व्यवहार, सपनी की चीजें देखी जा सकती है । यहाँ तक कि वर्तमान संचार संसाधन ने धरती और आकाश का भेद मिटा दिया है । ग्रामीण परिवेश के वर्तमान आधुनिक वस्तुस्थिति को संवाद में लाने से पूर्व हम पांच में झांककर पूर्व के वास्तविक ग्रामीण परिदृश्य की कल्पना करें तो खास स्पोर्ट्स की झोपडियां कपडे लोगों से पढाई मिट्टी के मकान गोवा से लेते घर आंगन में बंदे पशु अंधेरे में जलती लालटेन आगे पहले गांव में कोई भी नई वस्तु आती तो उसका लाभ पूरा काम लेना चाहता था या था ॅ, रेडियो, टीवी आदि शाम होते ही पूरा गांव चौपाल पर एकत्रित हो जाता है, जिसकी यहाँ ये नई साधन होते थे । सभी मिलकर उसका आनंद लेते रहे । बहन भी प्रेम, सौहार्द, समन्वय के साथ आज परिस्थितियां बदल गई हैं । ग्रामीणों का रहन सहन का स्तर किसी नगरीय नागरिकता से कम नहीं है । के दौर था जब गांव शहर की ओर पलायन करता था आज भी कर रहा है परन्तु अब शहर गांव की ओर भी आ रहे हैं क्योंकि आज गांव में सभी प्रकार के साधन उपलब्ध हो गए हैं या हो रहे हैं । संचार माध्यमों की बढती गति में ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिकता की झलक दिखाई दे रही है । शहरी नगरों की बढती महंगाई, आवासीय समस्या आदि के कारण नगरवासी ग्रामों में अपना ठिकाना बना रहे हैं । आज ग्राम वासियों के व्यवहार में परिवर्तन दिखाई दे रहा है । आधुनिकता से प्रभावित अधिकांशतः ग्रामीण भी टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल आदि के प्रयोग में प्रवीन हो गए हैं । अपना नाम शुद्ध रूप से हिंदी में नहीं लग सकते, लेकिन तो मोबाइल के मैसेज पढ लेते हैं, इतनी कुशलता उनमें आ गई है । टीवी पर प्रसारित सभी चैनलों की जानकारी, कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप आदि का उपभोग एवं उपयोग बहुत वाईफाई, फेसबुक आदि पर वहाँ अपने से दूर बैठे लोगों के संपर्क में है । इन संसाधनों ने ग्रामीण परिवेश को परिष्कृत एवं समृद्ध संपन्न किया है । आज के वैश्विक दौर में मैं कहीं भी अनभिज्ञ नहीं है । संचार माध्यमों ने एक और सामाजिक सरोकारों को एक लगभग समाप्त ऐसा कर दिया है । तथापि यह तो निश्चित है कि संचार संसाधनों ने ग्रामीण समाज को एक नई दिशा दी है । आज आवश्यकता तो इस बात की है कि संचार जगत में विकास के क्षेत्र में हमें उन्नति के आयाम स्थापित करने के साथ ही मानव जीवन की सुरक्षा एवं प्रकृति के संरक्षण के प्रति सजगता रखना भी खुद नहीं अहम होगा । हमें सकारात्मक दिशा की ओर उन्मुख होना होगा,

21 - ग्रामीण लोगों की समाजिक, राजनेतिक, आर्थिक जागरुकता में संचार की भूमिका

ग्रामीण लोगों की सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक जागरूकता में संचार की भूमिका, भारत में ग्रामीण समाज की अवधारणा स्वतंत्रता के कई सालों पश्चात सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में अति पिछडेपन की पर्यायवाची मानी जाती थी परन्तु वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ग्रामीण समाज की संरचना में संचार माध्यमों एवं सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग क्यों से क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहे हैं । वर्तमान में ग्रामीण समाज का प्रतिशत देश में दशमलव तो है । ग्रामों में विकास के कार्यों के प्रति जागरूकता बढ रही है । भारत की विकास दर को मुख्य रूप से उत्पादन चलता विज्ञान, तकनीकी आपूर्ति, दूर संचार एवं मीडिया के संदर्भ में देख सकते हैं । पूर्व में ग्रामीण लोगों के लिए सोचना का मुख्य माध्यम पत्र पत्रिकाएं अखबार होता था जिससे देश देश की जानकारियां प्राप्त करते थे परंतु इस कार्य से जानकारियां बहुत समय निकल जाने के पश्चात होती थी । साथ ही ग्रामों की संचार दुनिया बहुत छोटी होती थी जिसमें मुख्यता ग्राम हट मेले, दूरदराज से आने वाले दुकानदार तथा साधु संत क्या फकीर ग्रामीण होता खबरें पहुंचाने के माध्यम होते थे । ग्राम चौपाल एवं पानी के तो कोई पनघट इत्यादि सूचना के आदान प्रदान का वर्षों तक केंद्र रहे । आज के आधुनिक भारत में न केवल शहरी अपितु ग्रामीण भारत में सोचना एक बडी ताकत बनकर उभरी है तथा सूचनाओं को ग्रामीण लोगों तक पहुंचाने में संचार के माध्यमों की महत्वपूर्ण भूमिका है । विकासात्मक संचार ऐसे विकास के लिए कार्य करता है जिसके माध्यम से ग्रामीण लोगों के लिए नीति निर्माण किया जाना सहायक सिद्ध हो रहा है । संचार माध्यमों को जिस क्षेत्र में भी अपनाया गया है, बहुत क्षेत्र लगातार उन्नति कर रहा है । फिर चाहे बहन क्षेत्र स्वास्थ्य का हो या सामाजिक, आर्थिक या सांस्कृतिक क्षेत्र हो । सभी क्षेत्रों में संचार के साधनों की उपयोगिता बढ रही है । सामाजिक ढांचे में विकास के सबसे निचले पायदान पर बैठे लोगों में संचार माध्यमों की पहुंच आजादी के वर्ष उपरांत भी अपर्याप्त है और कई लोग ऐसा भी मानते हैं कि संचार साधन केवल मनोरंजन का एक माध्यम है । ऐसे लोगों को संचार क्रांति की उपयोगिता समझाना एक बडा दायित्व है । आज के डिजिटल युग में संचार के ऐसे माध्यम है जिसमें ग्रामीण लोग सीधे विकास की राह से जुडते हैं । जब हम गांव में घर बैठे ही किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त कर सकते हैं । वर्तमान में ग्रामीण नागरिकों को सूचना के प्राप्त करने के लिए संचार के विभिन्न माध्यमों का प्रयोग कर सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनैतिक तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में पांच कार्य को अंजाम देने तथा प्रगति में सहायक सिद्ध हो रहे हैं । इन कार्यों को हम यदि विभिन्न क्षेत्रों में संचार क्रांति की विवेचना निम्नानुसार की जा सकती है । एक सामाजिक, दो । आर्थिक, तीन सांस्कृतिक, चौथा स्वास्थ्य पांच । राजनीतिक सामाजिक क्षेत्र में जागरूकता हेतु संचार की भूमिका । इसमें कोई संदेह नहीं है कि सूचना प्रौद्योगिकी के प्रसार से आम जन की महत्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंच आसान हुई है । ग्रामीण जीवन में गति आई है, उसके विकास के रास्ते खोले हैं और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आ रही है । संचार के विभिन्न माध्यमों की मदद से भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में भी मदद मिल रही है । एक भारत अभियान ग्रामीण विकास को बढावा देने वाली प्रौद्योगिकियों के विकास के तो केंद्र सरकार ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तत्वावधान में उन्नत भारत अभियान ग्यारह नवंबर दो हजार चौदह को भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा प्रारम्भ किया । इस अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र में त्वरित विकास जिसमें देश के प्रत्येक जैविकीय उपजे ग्रामीण ऊर्जा, ग्रामीण औद्योगिकीकरण, उद्यम विकास, आईआईटी संस्थानों के माध्यम से दस दस ग्रामों का चयन कर किया जाएगा । साथ ही पेयजल, स्वच्छता संबंधी कार्यप्रणालियों का विकास करना शामिल है । कार्यों की निगरानी नई दिल्ली द्वारा की जाएगी । दो । डिजिटल इंडिया मिशन यह कार्यक्रम भारत सरकार का ऐसा समग्र कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों को देश की ग्रामीण एवं शहरी जनता को सेवाएं मांग पर ही इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक पहुंचाना है । आधार प्रमाणकिता इसका उपयोग करते हुए ऑनलाइन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर डिजिटल रूप से किया जा सकेंगे । बात भारत सरकार ने भारत में नाम से एक पहल शुरू की । यह देश की ढाई लाख ग्राम पंचायतों को जोडने के लिए उच्च गति का डिजिटल हाइवे है तथा इसके चलते दो हजार उन्नीस तक देश में सभी ग्राम पंचायतों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से लेकर स्कूलों कॉलेजों में बाईस बाईस सुविधा पर सार्वजनिक रूप से मुँह उपलब्ध हो सकेंगे । तीन किसान कॉलसेंटर केंद्रीय कृषि मंत्रालय भारत सरकार द्वारा इक्कीस जनवरी दो हजार चार को इस योजना की शुरुआत की । जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती से जुडी किसी भी समस्या का हल बताना है । अब किसान भारत के किसी भी क्षेत्र से किसान कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर पंद्रह सौ इक्यावन डायल कर अपनी समस्या का हल पा सकता है । साथ ही यही नंबर सभी भाषाओं में उपलब्ध रहता है । किसी के साथ सरकार ने डीडी किसान टीवी चैनल सिर्फ किसानों को केंद्रित करके शुरू किया है । चार ई चौपाल यह केंद्र, राज्य सरकार तथा निजी कंपनियों का ऐसा नेटवर्क है, जो इंटरनेट के माध्यम से गांवों में ही किसानों को कृषि की जानकारी, बाजार की मांग, विपणन एवं कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराता है । साथ ही ई चौपाल केंद्रों पर उन्नतशील किस्म के बीच उर्वरकों, कीटनाशक दवाओं की जानकारी, फसलों के रोग एवं बीमारियों के निदान के उपाय संबंधी जानकारी प्रदान की जाती है । राजनीतिक क्षेत्र में जागरूकता है तो संचार की भूमिका ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतों के माध्यम से संचार माध्यमों का उपयोग कर जनपद एवं जिला पंचायतों की जानकारी आज पंचायत सचिव गांव में बैठ कर ही प्राप्त कर रहे हैं । गौरतलब है कि भारत के संविधान में भाग चार के तहत नीति निर्देशक इसके तत्वों में अनुच्छेद चालीस में पंचायतों का गठन किया जाना शामिल है तथा इसके क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार ने संविधान संशोधन अधिनियम उन्नीस सौ के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं की स्थापना कि और आज ग्रामीण क्षेत्र में संचार के माध्यमों का उपयोग कर ग्रामीण जनप्रतिनिधि विकेंद्रीकरण नियोजन प्रणाली के माध्यम से योजनाओं को आधार बनाकर तथा क्रियान्वयन के द्वारा लक्ष्य को साकार कर रहे हैं । आर्थिक क्षेत्र में जागरूकता है तो संचार की भूमिका ग्रामीण लोगों में । इस क्षेत्र के प्रति जागरूकता के लिए संचार माध्यमों का उपयोग आज के वर्तमान युग में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके लिए भारत सरकार ने मनरेगा, प्रधानमंत्री जनधन योजना, गैस सब्सिडी योजना, नेट बैंकिंग, बालिका समृद्धि योजना बनाकर उनके कामकाज आदि आज के समय में पूर्ण ताया ऑनलाइन किया गया है । जैसे कि मनरेगा में ग्रामीण लोगों के जॉब कार्ड खाते की जानकारी, मोबाइल पर मिल रहा गैस बुकिंग का कार्य मोबाइल से ग्राम में बैठकर करना, जन धन योजना में खाता खोलना आदि । समस्त कार्यों में सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार माध्यमों का स्थान अत्यंत ही महत्वपूर्ण है जिनके बिना आधुनिक जीवन के विकास की कल्पना संभव नहीं है । निष्कर्ष आज पूरी तरह से साबित हो चुका है कि दूरदराज का किसान किस प्रकार अपनी चौपाल पर बैठकर सारी दुनिया की जानकारी संचार माध्यमों से प्राप्त कर रहा है । सुदूर गांव में बैठा व्यक्ति भी पलक छपकते ही सारी दुनिया से संपर्क स्थापित कर रहा है । वर्तमान में संचार माध्यम मानव जीवन का अहम हिस्सा बन गए हैं, जिसके बिना हम किसी भी प्रकार के विकास की कल्पना नहीं कर सकते हैं । आज के समय में सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक आर्थिक तथा स्वास्थ्य इत्यादि क्षेत्र के विकास और उन्नयन में सूचना प्रौद्योगिकी तथा संचार माध्यमों की अहम भूमिका है । संचार माध्यम और समाज एक सिक्के के दो पहलु बन चुके हैं, जिसको अलग अलग करके नहीं देखा जा सकता । आज संचार माध्यमों से ग्रामीण समाज की संरचना पूरी तरह बदल गई है । साथ ही प्रत्येक क्षेत्र के विकास का मुख्य साधन भी बन गए हैं ।

22 - संचार के परम्परागत माध्यमों का जीवन पर प्रभाव

संचार के परंपरागत माध्यमों का जीवन पर प्रभाव पारंपरिक माध्यम संचार प्रणाली के प्रभावी महत्वपूर्ण भाग है । जिस प्रकार से ये है हमारे जीवन में खुलते मिलते जा रहे हैं, उस अनुसार कि अपने आप में अद्वितीय प्रकृति के हैं । हमारे देश के लगभग सडसठ प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है । इन ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ समाचारपत्रों, टेलीविजन, रेडियो ट्रांसमीटर्स की सुविधा उपलब्ध नहीं है, ऐसे में एक बडे ग्रामीण जनसमुदाय को संप्रेषित करने हेतु प्रभावी तरीका है परंपरागत रूप से संप्रेषण करना, संचार के पारंपरिक माध्यमों द्वारा संप्रेषण करना अर्थात मानव संप्रेषण का एक अंतर्वैयक्तिक रोग का प्रयोग करना है । पारंपरिक माध्यमों द्वारा संचार सदैव विभिन्न समुदायों में आदर व सम्मान का साधन माना जाता है, क्योंकि यह प्रदेश के अपनी संस्कृति व परंपराओं से जुडा हुआ है । प्रत्येक धर्म संस्कृति में उत्सवों पर त्योहारों को मनाने के लिए विभिन्न प्रकार के नृत्य, संगीत, खेल, विधाएं अपनाई जाती है । इन सभी में एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को परंपरागत माध्यमों द्वारा सूचनाओं का संचार किया जाता है । हमारा देश लोकनृत्य, लोकसंगीत, लोककला, लोग कहानियों तथा लोकगाथाओं से समृद्ध सभ्यता वाला देश है, जिनका की उपयोग प्रगतिशील कार्यों के लिए किया जाता है । आजादी की जद्दोजहद के दौरान जब जनसमुदाय ब्रिटिश शासन के नियंत्रण में था, तब स्वतंत्रता सेनानियों के द्वारा अंग्रेजों के कार्यों पर अट्टाहास करने हेतु तमाशा हवाई नौटंकी का उपयोग किया जाता था । आजादी के पश्चात भी भारत सरकार द्वारा जनसमुदाय के मध्य स्वास्थ्य, पर्यावरण तथा अन्य सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने हेतु संचार के परंपरागत माध्यमों का प्रयोग किया जाता रहा है । रंगनाथन के अनुसार भारत सरकार तथा प्रदेश सरकार ने जनसमुदाय को परिवार नियोजन, विकास, शील प्रक्रियाओं, प्रजातांत्रिक मूल्यों तथा राष्ट्रीय एकीकरण पर शिक्षा देने है तो राष्ट्रीय हरिकथा का प्रयोग किया था । कुमार लवल जे के अनुसार ग्रामीण संचार संस्था ने उदयपुर में साक्षरता है तो पर्यावरण इमारत के प्रचार के लिए लोककला का सफलतापूर्वक प्रयोग किया था और पालीवाल पील के अनुसार सामाजिक कार्यकर्ताओं, सुधारकों तथा राजनेताओं द्वारा ग्रामीण जनसमुदाय को शिक्षित करने तथा नई सूचनाओं को करने के लिए विभिन्न लोककला जैसे थोल की बारिश, लोकनाट्य, जत्रा, कीर्तन तथा कठपुतलियों के खेल का प्रयोग किया । इस प्रकार जनसंचार के परंपरागत माध्यम स्थानीय स्तर पर स्थानीय लोगों से संबंध रखते हैं । संबंधित समाज के संस्कृति का एक भाग होते हैं । अतः ये चांदन जनसमुदाय पर सामान्य लोगों की समझ वा भाषा अनुरूप ही होते हैं तथा उनके द्वारा सम्माननीय होते हैं । संचार के विभिन्न पारंपरिक माध्यम संचार के पारंपरिक माध्यमों के कई उदाहरण हैं, जिन्हें हम अपने जीवन में उपयोग करते आए हैं तथा जिनके माध्यम से हम ने अपनी बात दूसरों तक पहुंचाने या दूसरों की बातों को समझने का प्रयास किया है । जैसे नुक्कड नाटक, कठपुतलियों का खेल, गली में थियेटर निष्पादन, कहानी कथन, लोककला त्यौहार पर होने वाले परंपरागत खेल, धार्मिक गीत गाथाएं, पौराणिक कथाओं पर आधारित खेल, विधिविधान आधारित नृत्य, स्थानीय नृत्य आदि भारत में विकासशील सूचना देने का एक उत्तम माध्यम है । परंपरागत संचार के ये माध्यम लोककलाएं, लोक नृत्य तथा स्थानीय संगीत इत्यादि लोकगाथाएं लोकगाथाएं एक तरह की कविता या संगीत के रूप में कहानी सुनाने का तरीका है । संचार करने है तो लोग गाथाएं अत्यंत शक्तिशाली प्रभावी तरीके से संप्रेषण करने का माध्यम है । पर्यावरण, दहेज तथा ऊर्जा संरक्षण से संबंधित कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें लोककथाओं द्वारा सरल तथा व्यक्तियों के मध्य प्रचारित करना संभव हो पाया है । जनसमुदाय हेतु संचार के परंपरागत माध्यमों का प्रयोग, मनोरंजन का साधन, संचार के इन परंपरागत साधनों द्वारा जनसमुदाय का मनोरंजन भी होता है । वृद्ध, श्रोता, बच्चे, महिलाएं सभी इन साधनों का आनंद लेते हैं तथा इनमें अपनी भागीदारी भी दर्शाते हैं । श्रोताओं को शिक्षा इन साधनों का प्रयोग जनसमुदाय को जागरूक करने तथा शिक्षित करने के लिए भी किया जाता है । इन समस्याओं पर जनसमुदाय को सार्वजनिक रूप से संचार के परंपरागत साधनों द्वारा सूचित किया जाता है । प्रत्येक द्वारा प्रयोग के दायरे में संचार के परंपरागत साधनों में सहायक साधनों की आवश्यकता नहीं होती । तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती है । जनसमुदाय के प्रत्येक व्यक्ति द्वारा इसका प्रयोग करना आसान है । भाषा अवरोध से पर संचार के ये साधन स्थानीय लोगों से संबंधित है तथा अक्सर संप्रेषण के दृश्य प्रकार का प्रयोग करते हुए सूचना को संप्रेषित करते हैं । अजय इन माध्यमों से संप्रेषण करने में भाषा रुकावट नहीं बनती है । समिति आई समाचार पत्रों, टेलीविजन के प्रयोग, धन खर्च की समस्या होती है तथा समय भी अधिक व्यतीत होता है, जबकि जनसमुदाय के किसी भी आर्थिक वर्ग, बारा इन माध्यमों का प्रयोग किया जाता है । इन माध्यमों से संचार है तो समय बैठन दोनों का प्यार नहीं होता है । संचार के परंपरागत माध्यमों की सीमा दूर दराज तक सम्प्रेषण संभव नहीं । संचार के परंपरागत माध्यमों द्वारा कहीं दूर बैठे व्यक्ति को सोचना संप्रेषित नहीं की जा सकती है । शीघ्रता कम खर्च जहाँ इसके लाभ के रूप में है, वहीं स्थान इसकी सीमा के रूप में अत्यधिक विशाल जनसमुदाय है तो अनुपयोगी विशाल जनसमुदाय को इन माध्यमों द्वारा सूचना संप्रेषित नहीं किए जा सकती है । उपसंहार परिवर्तन नवाचार नहीं है तथा विज्ञान द्वारा प्रगति भी संभावना संचार के इन परंपरागत माध्यमों का प्रयोग विचारों को समझने है तो ग्रहण करने है तो प्रत्येक जान द्वारा किया जाता है, किन्तु करती हुई वैज्ञानिक तकनीकियां संचार के परंपरागत माध्यमों हेतु भाई बनते जा रहे हैं । फिर संचार के परंपरागत माध्यम हमारी जिंदगी हेतु सरल तथा मानवीय संबंध के लिए अत्यंत उपयोगी है ।

23 - सूचना एवं संचार के साधनो से गाँवों का विकास

सूचना एवं संचार के साधनों से गांवों का विकास आज गांव विकास की ओर अग्रसर है और ग्रामीणों में जागरूकता बढी है । भारत के विकास दरों को हम मुख्य रूप से उत्पादन, क्षमता विज्ञान, तकनीकी आपूर्ति क्षमता, परिवहन दूर संचार पीडिया के संदर्भ में देख सकते हैं । प्रारंभिक समय में ग्रामीण नागरिक सूचना के रूप में पत्र पत्रिकाओं अखबारों के माध्यम से अपने को देश दुनिया से जोडकर सूचनाएं प्राप्त करते थे, लेकिन सूचनाएं बहुत देर से पहुंचती थी । गांव की संचार दुनिया बहुत छोटी थी, जिसमें मुख्य रूप से हाथ मेले, दूरदराज से आने वाले दुकानदार तथा साधु संत, सन्यासी या पकिर ग्रामीणों तक खबरें पहुंचाने के माध्यम से सूचना ही भक्ति है तथा संचार लोगों को सूचनाओं से सुसज्जित करने में अहम भूमिका निभाता है । विकासात्मक संचार ऐसे विकास के लिए कार्य करता है, जो सहभागिता और केंद्रीकरण पर आधारित है । यह सहभागिता और विकेंद्रीकरण, नियोजन नीतियों के निर्माण में भी सहायक सिद्ध हो रहा है । आज ग्रामीण और किसानों को संचार के माध्यम से सूचनाएं प्राप्त कराने के विभिन्न कार्यक्रम है, जो ग्रामीणों को उनके कार्यों में सुगमता लाने एवं उन्नति में सहायक सिद्ध हो रहे हैं । जो निम्नलिखित हैं किसान कॉल सेंटर, ई चौपाल, ग्राम ज्ञान केंद्र कल्याणी कृषि दर्शन, किसान कॉल सेंटर केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा इसकी शुरुआत जनवरी दो हजार चार को की गई । इसका मूल उद्देश्य कृषि से जुडी किसी भी समस्या का हल किसानों को बता रहा है । भारत के किसी भी कोने का किसान एक पांच पांच एक नंबर डायल कर अपनी समस्या का हल पा सकता है । यह टोल फ्री नंबर होता है और सभी भाषाओं में उपलब्ध है । चौपाल गांव में चौपाल केंद्रों की स्थापना गांव में सरकार द्वारा तथा निजी कंपनियों द्वारा भी की जा रही है । ई चौपाल केंद्र सरकार निजी कंपनियों, विकास संस्था एवं राज्य सरकारों का ऐसा नेटवर्क है जो इंटरनेट के माध्यम से गांव में ही किसानों को कृषि की जानकारी, बाजार की मांग, विपणन एवं कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध करवाता है । साथ ही पी चौपाल केंद्रों पर किसानों को कृषि की नई प्रौद्योगिकी अपनाने की जानकारी, फसलों के उत्पादन बढाने की जानकारी, नए उन्नतशील किस्म के बीज और बारह कों कीटनाशक दवाओं की जानकारी, फसलों के रोग एवं बीमारियों के निदान के उपाय की जानकारी, बाजार मूल्य, बाजार मांग आदि की जानकारी प्रदान करवाता है, जिससे किसानों को एक ही जगह से उनकी जरूरत की बहुत सारी जानकारियाँ हो जाती है । इसके अतिरिक्त ये चौपाल केंद्र ग्रामीण विकास में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं । पशुधन संबंधी जानकारी नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन बढाने, जलसंरक्षण, स्वयं सहायता समूह के विकास के लिए भी कार्य कर रहे हैं । ग्राम ज्ञान केंद्र भारत सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में ज्ञान केंद्र स्थापित किए हैं, जो गांवों और शहरों के बीच सूचना प्राप्त करने के लिए एक पुल का कार्य कर रहे हैं । इन सूचना केंद्रों पर ग्रामीण तथा किसानों को कृषि संबंधी नई जानकारी, बाजार भाव, कृषि उपज के विपणन की जानकारी, बाजार की मांग, शिक्षा, सूचना एवं संचार आदि मूलभूत जानकारियां सुलभ हो रही हैं । जैसे ग्रामीण क्षेत्र की संरचना बदल रही है । कल्याणी कल्याणी कार्यक्रम मुख्य रूप से महिलाओं के लिए प्रसारित किया जाता है जिससे स्वास्थ है । शिक्षा जब जागरूकता के विषय में विद्वानों के द्वारा जानकारियाँ दी जाती हैं । उपयुक्त कार्यक्रम के अलावा भी बहुत सारे कार्यक्रम दूरदर्शन के माध्यम से प्रसारित होते रहते हैं । इन सभी कार्यक्रमों को देखने से ग्रामीण, महिलाएं एवं पुरुष जागरूक हो रहे हैं । उन्हें पूरी तरह से आभास होने लगा है कि यह साधन केवल मनोरंजन के लिए नहीं है बल्कि इनका उद्देश्य रचनात्मक के वक्त ज्ञानवर्धक जानकारी देना भी है । इसके प्रभाव से ग्रामीणों की मानसिकता में परिवर्तन आया है । टीवी से प्रसारित होने वाले कल्याणी कार्यक्रम से महिलाएं काफी जागरूक हुई है । सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से ग्रामीण व्यक्तियों की मान सकता में क्रांतिकारी परिवर्तन आ रहे हैं जहाँ पे ये चाय भी एज, तपेदिक, पोलियो आदि जघन्य बीमारियों के विषय में अनभिग्य थे । आज भी पूरी तरह से इस के विषय में जागरूक हो चुके हैं । मोबाइल, टेलीफोन, मोबाइल टेलीफोन उद्योग में अनवरत विकास, भारतीय दूर संचार क्षेत्र कि अत्यंत सफल खानी है । वर्ष उन्नीस सौ में इसके केबल तीस लाख ग्राहक थे जो सितंबर दो हजार ग्यारह के अंत में बढकर न बाजी करोड अडतीस लाख हो गए । आज भारत के पास चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बडा विशाल वायरलेस ग्राहक आधार है । भारत के मोबाइल बाजार में तेजी के साथ वृद्धि होने के अनेक कारण हो सकते हैं लेकिन तो निजी क्षेत्र के ऑपरेटर कंपनियों के लिए बाजार को खोलने है तो कानूनी कार्यवाही करना सबसे महत्वपूर्ण कारण है । ऑप्रेटरों और आकर्षक मूल्यों पर उपलब्ध हैंडसेटों के माध्यम से इस क्षेत्र के तीव्र विकास में योगदान दिया । मोबाइल टेलीफोन क्षेत्र में भारत की तीव्र वृद्धि के बारे में महत्वपूर्ण बात यह है कि जब विश्व में प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व बिल्कुल कम है । ऐसी परिस्थिति में बाजार में विकास देखने को मिला है । पिछले कुछ समय से भारत का मोबाइल बाजार पूरी मजबूती के साथ आगे बढ रहा है । ग्रामीण क्षेत्र में संभावना अधिकतर महानगरों में मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या वहाँ के कुल निवासियों की अस्सी प्रतिशत से अधिक है । इस क्षेत्र के भावी वृद्धि की संभावना भारत के ग्रामीण बाजारों में ही नजर आती है । भविष्य में मोबाइल के ग्राहकों की संख्या में बढोतरी को लेकर अनेक भविष्यवाणियां की जा रही हैं । आर्थिक सुधारों के प्रभाव और सरकार की क्रियाशील नीतियों के कारण ही यह संभव हुआ है । इस क्षेत्र में भारत विश्व का तीसरा सबसे बडा देश है । भारतीय दूर संचार में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है । अमेरिका को पीछे छोडकर भारत विश्व का दूसरा बडा बेतार नेटवर्क बन गया है । इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक माहौल के निर्माण के लिए सरकार ने निजी क्षेत्र की भागीदारी बढाने के वास्ते अधिक कदम उठाए हैं । निष्कर्ष सूचना प्रौद्योगिकी ने हाल ही में काफी बुलंदियों को छुआ है । इस क्रांति की रफ्तार असल मुख्य रूप से शहरों के आसपास केंद्र थी लेकिन आज इसका विस्तार दूर दूर तक गांव में होता जा रहा है । कामों में संचार सुविधाएं विकसित हो रही हैं और गांव बदल रहे हैं । सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में अभूतपूर्व भूमिका निभा रही है । मुख्य रूप से उपग्रहों के माध्यम ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के अंतर को कम किया है तथा ग्रामीण क्षेत्र से पलायन भी रुका है । ऍफ जैसे संचार उपग्रह डिजिटल डिवाइस को काम करने हेतु साधन प्रदान करते हैं । आज कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, इंजीनियरिंग, चिकित्सा प्रशासन, सुरक्षा, यातायात, शहरी और ग्रामीण विकास इत्यादि क्षेत्र के विकास और उन्नयन में सूचना प्रौद्योगिकी अहम भूमिका है । सूचना प्रौद्योगिकी और समाज एक सिक्के के दो पहलु बन चुके हैं जिससे अलग अलग करके नहीं देखा जा सकता । आज सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से समाज की संरचना पूरी तरह बदल चुकी है तथा प्रत्येक क्षेत्र के विकास का हथियार बन चुकी है । सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग का विश्लेषण यह दर्शाता है कि जहाँ से लोकतांत्रिक नेतृत्व का उदय हो रहा है, बहुत भ्रष्टाचार की प्रवृति पर भी रोक लगाना जरूरी है । सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग से एक और जहाँ कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आ रही है, उससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी ओर महत्वपूर्ण सूचनाओं तक पहुंचना आसान होगा ।

24 - ग्रामीण क्रषक समाज में संचार की भूमिका

ऍम ग्रामीण कृषक समाज में संचार की भूमिका भारत देश की सबसे बडी इकाई गांव है । हमारा देश प्राचीन काल रही । कृषि प्रधान देश है । भारत में जनसंख्या कम से कम एक सौ पंद्रह करोड लोगों का परिवार है । किसानों के लिए खेती उन्नीस सौ पैंसठ छियासठ में आई हरित क्रांति की देन है । पहली जैविक खेती दूसरी हरित क्रांति भरपूर सच्चाई पर आधारित है । अस्थिर मौसम, बढता तापमान, बेताहाशा बारिश, जलसंसाधन में गिरावट फसल सूखने के कारण अमेरिका, भारत सहित विश्व के सभी देशों में खेती के लिए खतरा पैदा हो गया है । आज भारतीय कृषक भयावह आर्थिक संकट से गुजर रहा है । किसान प्रेरित समस्याओं से ग्रस्त है । भारत में कृषि के पिछडे होने की समस्या महत्वपूर्ण मानी जाती है । इसके पीछे प्राकृतिक कारण, जनसंख्या विस्फोट, परंपरागत अनुपयोगी कृषि तंत्र, आर्थिक सात नौ की कमी, ग्रामीण ट्रेन ग्रस्तता, ग्रामीण बेरोजगारी, अतिवृष्टि तथा प्राकृतिक प्रकोप, आधुनिक खेती, तकनीकी ज्ञान का अभाव । इन कारणों से किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है तथा भी आत्महत्या की ओर पढ रहे हैं । इसका कारण किसानों को उसकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलना है । जल संरक्षण एवं सच्चाई नियोजन का होना है । इन खतरों ने किसानों को सब्जियों पुरानी पद्धति को छोडकर लाखों लोगों का पेट रखने के लिए स्मार्ट तकनीक अपनाने पर मजबूर कर दिया है । वर्तमान में खाद्य सुरक्षा बढाने के लिए ऐसी कृषि उत्पादन विधियों को अपनाने की जरूरत है जिससे ज्यादा उत्पादक होने के साथ साथ आदानों का अधिक कुशलतापूर्वक उपयोग कर पैदाबार में अधिक स्थिरता प्राप्त कर सकें । ही चुनौतियों से निपटने के लिए खाद्य एवं कृषि संगठन ने किसानों के लिए वाइट स्मार्ट एग्रीकल्चर दृष्टिकोण का विकास किया है । एक सम्मेलन दो हजार दस में फॅमिली कल्चर से सतत विकास के तीन आयामों आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरण के द्वारा खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करता है या तीन मुख्य आधारों से मिलकर बना है सत्य, कृषि, उत्पादकता और आय में वृद्धि, जलवायु परिवर्तन के लिए अनुकूलन, अखिला चीज अपन का निर्माण, ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को काम करना । वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के कृषि पर पडते प्रभावों के कारण नीतिगत उपायों को देश के राष्ट्रीय कृषि योजना, निवेश तथा कार्यक्रमों में समाहित करने की जरूरत है तो आॅर्चर, कृषि उत्पाद प्रौद्योगिकी तथा इस के अनुरूप व्यवहार को अपनाया जाता है । इस प्रकार क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर द्वारा लाए गए परिवर्तन, कृषि तथा खाद्य प्रणाली को पेश आ रही चुनौतियों का समेकित रूप से समाधान प्रदान करता है तथा प्रतिकूल नीतियों, कानूनों तथा वित्तपोषण से बचाने में मदद करता है । निष्कर्ष भारत कृषि प्रधान देश है, बावजूद किसानों की स्थिति अच्छी नहीं है । जंगलों का नाश किया जा रहा है । ओला तूफान, अतिवर्षा, चक्रवात, सूखा बार, आधी जलवायु परिवर्तन के कारण प्रतिकूल मौसम के बाहर से कृषि गुजर रही है । खेती में काम करने के लिए मजदूर नहीं । आर्थिक विकास के साथ साथ मानव की आवश्यकता है । अनंत होती है, उसमें रोटी, कपडा, मकान महत्वपूर्ण है । पूंजीपति से किसानों का शोषण और साहूकारों के दमन से मुक्त करने के लिए सरकार नियमन कानून बनाए । करीब कृषकों को बैंक के माध्यम से लाभदायी योजना का वित्तपोषण जरूरी है । कृषि योजना, लघु बचत योजनाओं से संदर्भित पत्तियों का चल संचार माध्यम से बृहद रूप में प्रचारित कर ग्राम विकास एवं कृषकों का कल्याण किया जा सकता है ।

25 - ग्रामीण समाज और आधुनिक संचार व्यवस्था में रेडियो की भूमिका

ग्रामीण समाज और आधुनिक संचार व्यवस्था में रेडियो की भूमिका प्राचीन काल से ही भारत गांवों का देश रहा है । भारत की जनसंख्या का लगभग दो तिहाई भाग गांव में रहता है । भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था ही ग्रामीणों की मनोवैज्ञानिक तथा भावनात्मक जीवन का निर्माण करती है । ग्राम को परिभाषित करते हुए डॉक्टर अगल ने लिखा है ग्राम एक रहवासी समुदाय है जिसके सदस्यों का जीवन परस्पर संबंधित है जहाँ जीवन के विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति आत्मनिर्भरता के आधार पर होती है । अपनी इस विशेषता के कारण यह अन्य समुदाय से भिन्न है । ग्रामीण समाज का अपना स्वयं का विशिष्ट परिवेश होता है जिसके अंतर्गत बहन अपने रे तेरे हूँ, परंपराओं और संस्कृति की रक्षा करते हुए जीवन यापन करते हैं । आजादी के बाद विज्ञान के विकास और आधुनिकता ने भी ग्रामीण परिवेश को प्रभावित किया है । संचार के साधन हो जैसे समाचार पत्र, रेडियो, टेलीविजन, टेलीफोन, मोबाइल, इंटरनेट इत्यादि ने और यातायात के संसाधनों ने ग्रामीण परिवेश के जीवन शैली, वैचारिक क्षमता, शिक्षा, मूल्य, स्वास्थ्य, व्यक्ति, चेतना, सामाजिक दृष्टिकोण को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है । अध्ययन के विशिष्ट क्षेत्र के अंतर्गत रेडियो की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है । रेडियो ने ग्रामीण समाज में क्रांतिकारी परिवर्तन उत्पन्न कर दिया है । वास्तव में रेडियो संचार का ऐसा साधन है, जिसके माध्यम से व्यापक जनसमुदाय तक एक साथ संदेश पहुंचाया जा सकता है । डॉक्टर पारिख ने लिखा है कि रेडियो निरक्षरों के लिए भी एक मतदान है, जिसके द्वारा सिर्फ संकर अधिक से अधिक सोचना, ज्ञान और मनोरंजन हासिल कर लेते हैं । रेडियो और ट्रांजिस्टर की कीमत ही बहुत अधिक नहीं होती । इस कारण बहत जनसामान्य के लिए भी कमोबेश सुलभ है । यही कारण है कि टेलीविजन के व्यापक प्रसार के बावजूद तीसरी दुनिया के देशों में रेडियो का अपना महत्व आज भी कायम है । इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों में रेडियो सर्वाधिक प्रभावशाली माध्यम है । ध्वनि तरंगों का माध्यम होने से दूरी कोई महत्व नहीं रखती है । यह दृश्य रहित माध्यम है । सन अठारह सौ पंचानवे में मार्कोनी ने इसका प्रथम प्रयोग किया था । श्री मधुकर गंगाधर ने रेडियो के संदर्भ में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा है ट्रेडियो आज जनसंचार का प्रमुख साधन बन गया है । जनसंचार अपने विभिन्न रूपों प्रभावों द्वारा सामूहिक विवेक उत्पन्न करता है । यह सामूहिक विवेक व्यापक सहमती को जन्म देता है । व्यापक सहमती सामूहिक प्रयास की जन्मी होती है जिससे आज के समाज के सत्ता एवं जीवन प्रणालिया निर्धारित विकसित हम परिचालित होती है । रेडियो संचार का एक सशक्त जनमाध्यम है । यह मध्यम लोगों को आपसी अनुभवों के जरिए परस्पर जोडकर संदास करता है । रेडियो जन जीवन का एक आवश्यक कार्य बन चुका है । रेडियो के माध्यम से ग्रामीण समाज में जागृति का प्रयास किया जा रहा है । मनोरंजन स्वास्थ्य और कृषि संबंधित मारता है । जनचेतना, समाचार इत्यादि ग्रामीण विकास का आधार है । ग्रामीण जान अपनी कई समस्याओं का समाधान तो चक जानकारियाँ, कृषि विकास, स्वास्थ्य, रसोई शिक्षा, समाचार जैसे कई लोकप्रिय कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्ति समाज से विश्व समाज तक जुड जाते हैं । इसका एक दूसरा पक्ष यह भी है कि विकास और प्रगति के नाम पर है । संस्कृति, कला और संगीत सबको जीवित इकाई से जुडे प्रतीक में बदल रहे हैं । जिस प्रकार संचार माध्यम संपूर्ण मानवीय चेतना को एक रिसीवर की तरह उपयोग करते हैं, जब मानवीय चेतना रिसीवर बन जाए तो उसके सामने नैतिक और अनैतिक मानवीय और सामान दिया मूल्य और मूल्यहीनता का कुछ प्रश्न ही नहीं रहता । इस तरह जीवन की वास्तविक सच्चाइयों से नाता छोडने में सूचना प्रौद्योगिकी से भी इनकार नहीं किया जा सकता है । आर्थिक दृष्टि से भी देखें तो अत्यधिक कम लागत में आप जानकारियों का पिटारा अपने घर ला सकते हैं । रेडियो की सफलता ने ही ग्रामीणों के मध्य परस्पर सौहार्द का वातावरण निर्मित किया है ।

26 - संचार के संसाधनो का विकास, प्रकार एवं प्रभाव

संचार के संसाधनों का विकास प्रकार प्रभाव, संचार एक सहज और मनुष्य की बोल को प्रवृत्ति हैं व्यक्ति और समाज । तभी अस्तित्व पान है यदि उनके पास संचार का साधन है । एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्तियों के बीच अपने भावों, विचारों, इच्छाओं, कल्पनाओं को बांटने की प्रक्रिया है । संचार है । व्यापक दृष्टि से देखने पर संचार एक व्यावहारिक विज्ञान के तौर पर परिलक्षित होता है । वैश्वीकरण के इस योग में संचार एक आवश्यकता बन चुका है । लाॅस मानते हैं, संचार व्यवस्था है जो मानव संबंधों में धुरी का कार्य करती है । संचार मानवीय संबंधों पर क्रियाकलापों की एक ऐसी जीवन प्रणाली है जिसके बिना देश, काल और समाज की कल्पना भी संभव नहीं है । संचार का संबंध मानव के आदिमकाल से ही हो रहा है । आदि मानव भी किसी न किसी रूप में संचार से जुडे थे । भाषा रुपये कोई सशक्त माध्यम न होने के कारण उनके लिए संचार केवल भावों की अभिव्यक्ति का माध्यम था । विज्ञान एवं तकनीकी के विकास के साथ संचार साधन भी विकसित होते गए । मिट्टी, लकडी, पत्थरों के बाद भोजपत्र भी संचार का माध्यम बने । पशुपक्षी फिर संचार का माध्यम बने । छपाई मशीन का आविष्कार संचार प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन था । मुद्रित संदेशों, अभिलेखों एवं समाचारपत्रों का आगमन अभूतपूर्व संचार साधन भरेंगे । रेडियो टेलीफोन और अब टेलीविजन का आविष्कार संचार के उच्चतम आविष्कार है । संचार का प्रभाव, संचार के भाषिक स्वरूप केबल जरूर ही फॅस कृतियों तथा सभ्यताओं का जन्म हुआ । संचार में मुख्य रूप से सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक विकास पर प्रभाव डाला । जनसंचार संसाधन के संप्रेषित समूह की रूचियों मान्यताओं को बदलने, बढाने अथवा घटाने में अग्रणी भूमिका होती है । भूमंडलीकरण के फलस्वरूप वर्तमान संचार प्रणाली ने बाजारवाद उपभोक्तावाद को संरक्षण दिया है । इसके फलस्वरूप मानवीय सामाजिक मूल्य संकट में है । मानव विज्ञान और तकनीकी के सहारे ग्रहनक्षत्र तक पहुंच चुका है, लेकिन अपने पडोसी के दुःख दर्द से अनभिज्ञ है । कम श्रम कम लागत एवं कम निवेश के जरिए आसमान को छू लेने की इच्छा रखता है, पर तकनीकी हकीकतों से बहुत कोई वास्ता नहीं रखना चाहता । अति धनार्जन की तमन्ना, परस्पर प्रतिस्पर्धा, एक दूसरे को नीचा दिखाने की प्रवृत्ति समाज के हर भाग में तीव्र हो गई है । नई तौर पर जनसंचार के समस्त संसाधन, उच्च मूल्य, उच्च आदर्शों को समाज में प्रचारित प्रसारित करने में सहायक होते हैं, लेकिन जनसंचार के कई सकारात्मक गुण भी है । इन साधनों ने जिस तरह व्यक्ति समाज को प्रभावित किया है, वह बहुत है निष्कर्ष संचार संसाधन ठीक डाइनामाइट की तरह है । ये है हमारे ही हाथ में है कि इन का सकारात्मक उपयोग करें । यह नकारात्मक आवश्यकता इस बात की है कि मीडिया या जनसंचार के पास क्या कोई ऐसा विकल्प है जो समाज में भाईचारा ला सकें । मानव को सर्वशक्तिमान बनाने की सोच से बचा सके । ग्रीन हाउस प्रभाव तथा धारा के निरंतर पडते थे । आप को नियंत्रित कर सके । जनसंचार की रणनीति ऐसी होगी । नई सुविधाएं तो आएँ जिनसे बोलियों का उत्कर्ष हो, जनसंचार से सामूहिक इसका प्रचार प्रसार हो तथा प्रतिस्पर्धा की कला कार्ड भावना को दूर करने में सक्षम हो । विचारों की अभिव्यक्ति भाई हो ।

27 - सूचना तंत्र एवं ग्रामीण समाजिक परिवर्तन

सूचनातंत्र एवं ग्रामीण सामाजिक परिवर्तन आज संपूर्ण विश्व में सूचना क्रांति दिखाई दे रही है । विकास की दौड में सूचना अंदर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । मानव जीवन को अधिक सुखी एवं सरल बनाने में सूचनातंत्र सहायक रहा है । सूचनातंत्र से हमारे ज्ञान में वृद्धि होती है । साथ ही हम व्यापक परिवर्तन की दिशा में भी अपनी मनःस्थिति बना पाते हैं । जन संचार माध्यम से प्रचार प्रसार से नगरीय जीवन तो तेजी से परिवर्तन हो रहा है, किंतु ग्रामीण क्षेत्र में परिवर्तन की गति धीमी है । ग्रामीण क्षेत्र में सूचनातंत्र का सशक्त माध्यम मात्र रेडियो एवं टेलीविजन ही है । वहाँ प्रिंट मीडिया की भूमिका नगण्य क्योंकि शिक्षा का प्रचार प्रसार होने के पश्चात शिक्षा का स्तर न्यू नहीं है । टेलीविजन पर बहुत से कार्यक्रम सामाजिक समस्याओं एवं महिला सशक्तिकरण, महिला उत्पीडन इत्यादि से संबंधित होते हैं । विशेष कर ग्रामीण समस्याओं पर प्रेरक कार्यक्रम, परिचर्चा एवं विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित कर चर्चा की जाती हैं । इन्हीं के माध्यम से ग्रामीण महिला एवं पुरुषों की सोच में परिवर्तन दिखाई दे रहा है । ग्रामीण क्षेत्रों में सूचनातंत्र के द्वारा इस प्रकार परिवर्तन लाए जा रहे हैं । एक ग्राम पंचायतें केंद्रीय प्रशासन से इंटरनेट के माध्यम से जोडने के बाद शासकीय योजनाओं की जानकारी एवं सुविधाएँ प्राप्त कर रहे हैं । ई गवर्नेंस से जुडने के कारण ग्रामपंचायतों के सभी कार्य एवं जानकारियाँ ऑनलाइन हो गई हैं । ग्रामपंचायतों में इंटरनेट की सुविधा होने से ग्रामीणों को रोजगार संबंधी जानकारियां ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है । विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के कार्य गांव से ही इंटरनेट के माध्यम से ही किए जा रहे हैं । होने शहर की ओर भागना नहीं पडता है । दो सरकारी सुविधाओं का विस्तार ग्राम पंचायतें, संचार सुविधाओं के विकास के साथ ही सरकारी सुविधाओं का भी विकास हुआ है । अब ग्राम पंचायतों में किसी भी प्रकार की समस्या हो तो तुरंत इंटरनेट के माध्यम से इसकी सूचना जिला प्रशासन एवं सचिवालय तक पहुंचा दी जाती है । कागजी कार्यवाही में महीनों समय लग जाता था गांवों की समस्या की जानकारी पंचायतों में ग्रामीणों की समस्या पहुंचाना हम उनका समाधान अब आसान हो गया है । मोबाइल सूचनातंत्र का सशक्त माध्यम बन गया है । अब छोटी से छोटी समस्या जैसे बिजली का ना होना, ऍम खराब होना, पानी नहीं आना इत्यादि की जानकारी मोबाइल के माध्यम से शिक्षित ग्रामीण युवा पंचायतों तक पहुंचा देते हैं । जिससे घंटों का काम मिनटों में हो रहा है । जहाँ भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, टीवी, रेडियो इत्यादि पर भ्रष्टाचार संबंधी जानकारियां निरंतर प्रसारित हो रही हैं । जिससे ग्रामीणों में जागरूकता बढी है । वे अपनी सुविधाओं के विषय में सजग हो गए हैं । चाहे वह आपके राशन हो या पानी पिछली जैसी जरूरत क्या बैंक से लोन प्राप्त करना ही क्यों ना हो । किसी भी शासकीय योजना में कटौती होने पर सूचनातंत्र का सहारा लेते हैं । फिर प्रकार पंचायतों को ईमानदारी से कार्य करने पड रहे हैं । पांच । स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपयोगी प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों पर डॉक्टर्स मरीजों का उपचार करने में इंटरनेट के माध्यम से आधुनिक चिकित्सा पद्धति एवं दवाइयों की जानकारियां प्राप्त कर गांव में ही इलाज कर सकते हैं । बहुत सी बीमारियों के चिकित्सा गांव स्तर पर ही संभव है । छह शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों में किताबी ज्ञान के अतिरिक्त विश्वस्तर की जानकारियों का था । संसार इंटरनेट पर उपलब्ध है । विद्यार्थी कंप्यूटर का ज्ञान प्राप्त कर ज्ञान का विस्तार कर सकते हैं । जब दैनिक जीवन में उपयोग कर रहे हैं साथ कृषि के क्षेत्र में ग्रामीण किसान परंपरागत कृषि के साथ में आधुनिक तकनीकी खाद एवं बीज का इस्तेमाल इंटरनेट के द्वारा प्राप्त ज्ञान से कर सकता है । मौसम संबंधी जानकारी क्षेत्र विशेष की भौगोलिक विशेषताओं के आधार पर कृषि करके ज्यादा अर्थोपार्जन कर सकता है हूँ बाजार उपलब्ध हो ना इंटरनेट एक ऐसा माध्यम है जो व्यापक दुनिया को सीमित कर सकता है तो ग्रामीण अपने कौशल से निर्मित मस्त करेगा की वस्तुओं को इंटरनेट के माध्यम से बाजार में पहचान दिलवा सकते हैं । उनकी धर्मत वस्तुओं का सही मूल्य हो सकता है । अभी मैंने खबर पडी थी कि उपले ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध है । यह सूचनातंत्र के द्वारा ही संभव है । नौ । महिलाओं का संरक्षण महिलाओं के हिसाब अनेक कानून बनाए गए किन्तु फिर भी महिला उत्पीडन एवं शोषण दिखाई देता है । इंटरनेट महिला संरक्षण संबंधी जानकारी उपलब्ध करवाकर महिला सुरक्षा में उपयोगी कार्य कर रहा है । दस सामाजिक अंधविश्वास समाप्ति सूचनातंत्र द्वारा पुरानी धारणाओं को तर्क सहित साफ करने में मदद हो रही है । बहुत सी जानकारियां मनोरंजन के माध्यम से दिखाई जा रही हैं तो सामाजिक कुरीतियों, अंधविश्वास एवं सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने में मदद दे रही है । ग्यारह शासकीय दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध किसानों को भूमि संबंधी दस्तावेज, ऋण की जानकारियां, किसान क्रेडिट कार्ड इत्यादि सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध होने से उन्हें चला मुख्यालय नहीं जाना पडता है । बारह था वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा शासकीय अधिकारी प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री द्वारा वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से ग्रामीणों से सीधी बातचीत हो जाती है, जिससे वह अपनी समस्याएं सीधे पहुंच जा सकते हैं अर्थात उच्च स्तर के अधिकारियों से प्रत्यक्ष संपर्क सूचनातंत्र के माध्यम से ही संभव हो पा रहा है हूँ ।

28 - ग्रामीण समाज तक आधुनिक संचार माध्यमों की पहुँच, उनका प्रभाव एवं उनके लिए उपयोगिता

ग्रामीण समाज तक आधुनिक संचार माध्यमों की पहुंच, उनका प्रभाव हम उनके लिए उपयोगिता भारत में प्राचीन काल से ही संचार माध्यमों का अस्तित्व रहा है । वे संचार के माध्यम आपसी प्रेम एवं सहयोग सहभागिता के साथ हुआ करते थे । वर्तमान में संचार माध्यमों का विकास बडी तेजी से हुआ है । संचार समाज के आराम से लेकर अब तक के विकास से जुडा हुआ है । संचार सामाजिक उपकरण का सामंजस्य संचार का लक्ष्य ही होता है । सूचनात्मक, प्रेरणात्मक, शिक्षात्मक, मनोरंजनात्मक परन्तु निवर्तमान शताब्दी में भारत के संचार माध्यमों की प्रकृति बच्चा क्षेत्र में बदलाव हुए हैं । यह तकनीकी विकास जिसकी वजह से ग्रामीणों तक इन संचार माध्यमों की पहुंच उपलब्ध हुई है । इनका उपयोग सही तरीके से सही चीजों के लिए हो, इसको भी सुनिश्चित करना अति आवश्यक है । तकनीकी विकास से संचार के माध्यम भी विकसित हुए हैं तथा इस संचार अब ग्लोबल घटना बन गई है । संचार माध्यमों की ग्रामीण समाज तक पहुंच या उपलब्धता एक अदृश्य सूचना क्रांति हमारे आस पास घट रही है । तकनीकी के विकास से समाज को जो फायदा होना चाहिए था वो नहीं हुआ है परंतु उपलब्ध हो रहे साधनों जैसे टीवी, मोबाइल, कम्प्यूटर, इंटरनेट, ग्रामीण समाज में साधा उपयोग हो रहे हैं । आज देश के बहुत से गांवों, हम जिलों के ग्रामीण लोग सूचना माध्यमों से लाभ ले रहे हैं । बहुत से हिस्सों में इंटरनेट, स्थानीय नेटवर्क आदि के सहारे कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं । देश के ग्रामीण बाजारों में इंटरनेट के माध्यम से तारा हट परियोजना के अंतर्गत अभिनीत सूचना एवं सेवाओं की जानकारी दी जा रही है । चेन्नई स्थित एम एस स्वामीनाथन फाउंडेशन की सूचना ग्राम शोध परियोजना के जरिए प्रायोगिक तौर पर गरीबों में इलेक्ट्रॉनिक ज्ञान का विस्तार किया जा रहा है । दक्षिण भारत के दस गांवों को हाइड्रेट नेटवर्क से जोड दिया गया है ताकि ग्रामवासी कृषि लागत वहाँ उत्पादन के मूल्य से संबंधित आवश्यक सूचना प्राप्त कर सके । ग्रामीण समाज पर संचार माध्यमों का प्रभाव संचार माध्यमों का ग्रामीण समाज पर दोनों तरह से प्रभाव पडा है । भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के विकास, संचार, माध्यमो से कई क्षेत्रों जैसे शिक्षा के क्षेत्र, सूचना तकनीकी के विभिन्न साधनों, दूरदर्शन, ऑनलाइन शिक्षा, इंटरनेट आदि के जरिए जहाँ दूरस्थ शिक्षा और प्रौढ शिक्षा का विस्तार देश में तेजी से हुआ है, किसी के साथ कुछ बुराइयाँ भी हैं जिसमें संचार माध्यमों के प्रभाव में सूचना महत्वहीन होती जा रही है । हम ग्रामीण समाज पर संचार माध्यमों के प्रभाव को देखें तो कहीं ना कहीं नुकसान ही पहुंचाया है । मैं समाज जो पहले से ही अंधकार था, इन चीजों को बिना सोचे समझे ले रहे हैं । शहरी लोगों के देखा देखी ग्रामीण भी इंटरनेट का उपयोग करने लगे हैं । उन्हें सही जानकारी लेने के जागरूक करना भी जरूरी है, जिससे वह अपने परिवार का विकास कर सके । इसके प्रयास करने होंगे । इसलिए जागरूक करने की आवश्यकता है । ग्रामीण भारत में मीडिया के विकास और दस बार का प्रभाव भारतीय मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन की दृष्टि से कार्य कर सकते नहीं हुआ है, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों का शरण ही हो रहा है । बिना आवश्यकता जाने की कौन सी जानकारी उपयोगी है, कौन सी लेनी है, बिना समझे ले लेता है । हमें सूचना एवं शिक्षा की खाई को पाटना होगा । एक वर्क जो सूचनाओं से लैस समाज है, दूसरा सोचना भी हिंदू समाज है । इनको बराबर लाना होगा । जागरूकता, शिक्षा, व्यवहार परिवर्तन, अभिप्रेरणा आती द्वारा ग्रामीण समाज के लिए आधुनिक संचार माध्यमों की उपयोगिता, ग्रामीण समाज में सोचना एवम संचार माध्यमों की उपयोगिता भी बहुत अधिक, क्योंकि शहरों में विकास है, जागरूकता है, परंतु ग्रामीण समाज में विभिन्न साथ न तुम्हारा कृषि क्षेत्रों की संभावनाओं का पूर्ण विकास ये वन प्रस्तार करके आम किसान तक कृषि पशुपालन संबंधी, ग्रामीण विकास संबंधी एवं सरकारी नीतियों, कार्यक्रमों का क्रियान्वयन आज ऍफ जैसी सूचना संस्थाओं के द्वारा ही वृद्धावस्था पेंशन, भूमि रिकॉर्ड, प्रबंध, शिक्षा, सांख्यिकी तथा अन्य सामाजिक आर्थिक कार्यक्रम की जानकारी ग्रामीण लोगों को उपलब्ध हो रही है । किसी के साथ किसान चैनल से किसानों को जानकारी प्रसारित की जाती है । फसल मौसम विज्ञान संबंधी प्रतिदिन की मंडी के सबसे फल पाके भाव क्या है पता लगा सकते हैं । खेती में फसल के अनुसार नई तकनीक का उपयोग करने, स्वास्थ्य, मनोरंजन, पृष्ठ की जानकारी के लिए इनकी उपयोगिता है । निष्कर्ष निष्कर्ष जहाँ हम कह सकते हैं कि ग्रामीण समाज में संचार के आयाम में बदलाव आया है । यह बदलाव विकास भी हुआ है जिससे संचार एवम संचार माध्यमों की पहुंच सुलभ हुई है । उपयोग बडा अब ऐसे आचरण में उतारना होगा जिससे शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक पक्षों पर ज्ञान में वृद्धि हुई है तो देश में सूचना प्रौद्योगिकी की धार निरंतर प्रखर बनाए रखने के लिए मीडिया लैब एशिया परियोजना को शुरू किया गया था । इन सब को अद्यतन रखना होगा । इससे समग्र में देखना होगा तभी हमारा ग्रामीण समाचार प्रगति कर सकेगा ।

29 - ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका

ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका ग्रामीण भारत अपने आप में एक अनूठी संस्कृति है । यहाँ हरे भरे खेत खलिहान और शांत वातावरण का एक मिला जुला संगम देखने को मिलता है । एक ऐसा समाज जहां हर कोई एक है और हर किसी के अंदर कुछ कर दिखाने की ललक है । लेकिन इस समाज में पाल रहे इन अनगिनत सपनों का साकार होना कोई आजकल की प्रक्रिया नहीं हो सकती कि हजारे सपने तभी पूरे हो सकते हैं जब ग्रामीण क्षेत्र का हर कोना सूचना और संचार के द्वारा जागरूक हो और ये काम बिना किसी क्रांति की नहीं हो सकता है । लेकिन पिछले कुछ दशक से एक बदलाव आया है जिसने कहती ही क्रांति को लाने का वादा किया है । इस बदलाव का कारण है संचार । जनसंचार के युग में आई नई तकनीकी वृद्धि ने सूचना पाने के कई ऐसे संसाधनों को जन्म दिया है, जिन्होंने ग्रामीण समाज के विकास में अहम भूमिका निभाई, संचार में इंटरनेट और पहुंच कास जैसी तकनीक शामिल है, जिसने की संचार की दुनिया को एक अभूतपूर्व स्वतंत्रता खुलापन प्रदान किया । संचार जनसंचार के क्षेत्र कि ऐसी उपज है जिसमें ज्ञान का प्रवाह दोनों दिशाओं में होता है । मतलब कि हम किसी को ज्ञान दे सकते हैं । ठीक उसी समय उस व्यक्ति से ज्ञान ले ले सकते हैं । इसलिए से जनसंचार के योग का इंटरएक्टिव माध्यम भी कहा जाता है । इंटरनेट संचार कि रीड की हड्डी है और इसके आने के बाद जनसंचार जगत में कई ऐसे आविष्कार हुए जिसकी वजह से संचार दुनिया भर में हावी हो गया और आज काम भी हाथ के विकास में अपनी भूमिका निभा रहा है । वहीं दूसरी ओर पहुंच कास्ट जैसी तकनीक के द्वारा दूर दराज के लोग किसी सभी विषय के ऊपर ऑॅल सकते हैं । ये ज्ञान के क्षेत्र में क्रांति ही तो है कि ग्रामीण क्षेत्र में बसे नागरिक अब देश विदेश के विद्यालयों में हो रहे लेक्चर को अपने घर पर पॉडकास्ट की मदद से सुन सकते हैं । बस जरूरत है कि इंटरनेट कनेक्शन की, जिसकी उपलब्धि के लिए सरकार सोच और से काम कर रही है और लगभग हाॅकी टावर पहुंच गए हैं । इसी संचार के कारण कई देशों के क्रेन समाज में विकास की नहीं लहराता थी । भारत के ग्रामीण विकास को चार भागों में बांटा जाए तो हम देखेंगे कि संचार लगभग हर भाग में अपना अमूल्य योगदान दिया है । विकास के चार भाग नहीं है एक मानसिक विकास, दो दार्शनिक विकास तीन । आर्थिक विकास, चौथा राजनैतिक विकास ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, ऑनलाइन लेक्चर, मोबाइल और पॉडकास्ट जैसी तकनीकों के आने के बाद सबसे पहले मानसिक विकास ने । अपनी जगह हम देखते हैं कि क्योंकि इस तरह संचार के माध्यम एक स्वतंत्र मुक्त विचारधारा को प्रेरित करते हैं, इसलिए इनके पास आने पर ग्रामीण विकास में भी एक ऐसी ही विचारधारा का प्रवाह होना शुरू हो गया । किसी मानसिक विकास ने ग्रामीण इलाकों में दार्शनिक विकास को जन्म दिया । देखा गया है कि जिन ग्रामीण इलाकों में संचार का प्रयोग होने लगा है, वहाँ के लोगों में चीजों को देखने और समझने का नजरिया ही बदल गया है । ग्रामीण समझने संचार कि भारत से खेती और उस से ताल्लुक रखने वाले और सभी कामों में अभूतपूर्व उन्नति दिखाई है । ठीक इसी तरह पर भारत में भी किसान और आदि ग्रामीण अब संचार के सहारे उन्नति और विकास के पथ पर अग्रसर होता है । मौसम की स्थिति और कृषि से सम्बंधित सभी जानकारी भी घर बैठे अपने ऍम मोबाइल पर पा लेते हैं । इससे उनके धन और समय दोनों की बचत होती है, जिससे भी किसी और उत्पादक काम पर खर्च कर सकते हैं । नहीं सारी चीजों से उनकी आर्थिक स्थिति में भी बदलाव आता है । कई लाते ने अमेरिकी और उत्तर अमरीकी देशों के किसान और ग्रामीण जनता ने किसी संचार की बदौलत खेती और हॉर्टिकल्चर में अपार उन्नति की है जिससे उन की ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त हुई है । भारत में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है । अब किसान और उसका बेटा दोनों ही इस जनसंचार के माध्यम से जुडकर अपना अपना विकास कर रहे हैं जो आगे जाकर उनके आर्थिक विकास को जन्म देता है । चीन और उसमें भी संचार ने जो योगदान दिया है, खुसी का मॉडल आज भारत अपनाना चाह रहा है और इस बात में कोई संदेह नहीं कि स्कोर हम बडी तेजी से अग्रसर हैं । आज किसी इंटरनेट के द्वारा कहाँ पर पडने वाला विद्यार्थी कम्प्यूटर के एक क्लिक से पता लगा सकता है कि अमेरिका या सीरिया में क्या चल रहा है । अगले क्लिक से वो अपने विषय संबंधित किसी ऑॅटो डाउनलोड करके अपने पांच को समझ सकता है । दूसरी ओर किसान अपने मोबाइल के द्वारा भी इंटरनेट तक पहुंच सकता है और वहाँ से अपनी खेती बाडी संबन्धित सूचनाएं प्राप्त कर सकता है । जो काम पहले ग्रामीण समाज के लिए कठिन एवं दुर्गम हुआ करते थे । आज भी सारे काम संचार की बदौलत आसान और काफी मजेदार हो गए हैं । इंटरनेट बैंकिंग और रेलवे टिकेट की सुविधा को देखकर भी कुछ ऐसा ही लगता है । संचार ने आगे आकर सोशल संचार को भी सशक्त किया है जिसके द्वारा ग्रामीण विकास के राजनीतिक पहलू को काफी जोर मिला है । सोशल संचार जैसे कि ट्विटर या फेसबुक के जरिए गांव का नागरिक ना केवल जानकारी पा सकता है बल्कि अपने आप को देश से जुडा हुआ भी महसूस कर सकता है । इंटरनेट और तकनीक का विस्तार प्रस्तावित सभी दिशाओं में तेजी से हुआ है । आधुनिक तकनीक और टेडा प्रबंधन ने सरकार और नागरिकों के बीच के अंतर को पाटा है । इसका सीधा असर नागरिक सहभागिता और जनजागरूकता पर पडा है जैसे लोकतंत्र दृढ होता है । इससे ग्रामीण जीवन शैली के सभी क्षेत्रों, विशेष रूप से सामाजिक रहन सहन, स्थानीय व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, ई गवर्नेंस आधी में बडे बदलाव देखने को मिलेंगे । इसके अलावा रोजमर्रा की जरूरतों जैसे जमीनों के लक्ष्य और उसके स्वामित्व या टैक्स संबंधी सोचना, रेलवे टिकट बुकिंग, अस्पतालों की ओपीडी सुविधाओं तक पहुंचने जैसी कई सुविधाएं सरल और सहज रूप में उपलब्ध होने लगी हैं । संचार के राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है । सूचनाओं का आदान प्रदान करने में जान संचार माध्यम सजग प्रहरी का कार्य करते हैं । विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है । समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन को विकास की संज्ञा दी जाती है । विकास और संचार एक ही सिक्के के दो पहलू हैं । भारत एक कृषि प्रधान राष्ट्र है और लगभग अस्सी प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्र में निवास करते हैं । ग्रामीण क्षेत्रों की सूचना संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति केवल आधुनिक संचार पर निर्भर रहकर नहीं की जा सकती । उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामीण समुदाय को विकास में भागीदार नहीं बनाया जाएगा तब तक राष्ट्र का सही मायनों में विकास संभव नहीं है हूँ ।

30 - भारतीय समाज में डिजिटल क्रांति की भूमिका

भारतीय समाज में डिजिटल क्रांति की भूमिका पारदर्शी, सरल और सोलह प्रशासन किसी भी समाज, प्रदेश या राष्ट्र के बुनियादी विकास को नए स्तर पर ले जा सकता है । भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में यदि प्रशासन की पहुंच हर नागरिक तक समान रूप से हो जाए और अंतिम छोर पर मौजूद व्यक्ति भी सामाजिक सुविधाओं का लाभ सुगमता के साथ उठा सके, तो सामाजिक बदलाव की एक सकारात्मक तस्वीर सामने आ सकती है । वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी इतनी समर्थ है कि क्या है नागरिकों को घर बैठे तमाम सूचनाएं उपलब्ध करवा सकती है और उन्हें उनका अधिकार दिलवा सकती है । यही वजह है कि केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी की इस ताकत से समाज के जीवन स्तर को उन्नत और राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की है । इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार ने संपूर्ण भारत को डिजिटल करने वाली नई क्रांति का सूत्रपात किया है । समाज के डिजिटल सशक्तिकरण के माध्यम से तैयार होने वाली ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के फलस्वरूप देश का विकास इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है इंटरनेट युग का आरंभ और विस्तार लोकतंत्रात्मक भारत में इंटरनेट आम जन को जागरूक करने की दिशा में एक सेतु का काम कर रहा है । नब्बे के दशक में भारत में अपनी दस्तक देने वाली वैश्विक इंटरनेट क्रांति को डिजिटल इंडिया की पूर्वपीठिका कहा जा सकता है । पंद्रह अगस्त उन्नीस सौ पचास को विदेश संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल के माध्यम से पहली बार इंटरनेट सुविधाएँ प्रदान की गई और इसकी सफलता यह रही कि अगले छह महीने में दस हजार से अधिक लोग इस माध्यम से जुड गए । अगले एक दशक में ये है आपने पाँच इसलिए नहीं पसार सका क्योंकि उस वक्त नाॅट कनेक्शन के जरिए डायल अब से इंटरनेट सब ही मिलते थे और इसकी गति कम थी । वर्ष दो हजार चार में देश में ब्रॉडबैंड नीति अपनाई गई । इसके तहत एक न्यूनतम था उन लोग गति का निर्धारण किया गया ऍम कभी दारों के सहारे अंतिम छोड तक पहुंचने वाला इंटरनेट कनेक्शन आज उपभोक्ताओं को बेहतर माध्यम से मिल रहा है । स्मार्टफोन की पहुंच ग्रामीण उपभोक्ताओं तक होने लगी है और भी आसानी से इंटरनेट सुविधाओं के साथ जुड गए हैं । बीस फरवरी दो हजार पंद्रह तक आंकडों को देखा जाए तो देश में कुल मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या चाँद एक करोड से अधिक हैं । कुल जनसंख्या के हिसाब से यह आंकडा सतहत्तर दशमलव पचास प्रतिशत है और इस आधार पर भारत चीन के बाद दुनिया में दूसरे स्थान पर है । यदि स्मार्ट फोन की बात की जाए तो वर्ष दो हजार तेरह में गूगल के आवा मोबाइल प्लानेट ने स्मार्टफोन की पहुंच को लेकर विभिन्न देशों की एक सूची जारी की थी, जिसमें भारत सोलह दशमलव आठ प्रतिशत के साथ पैंतालीसवें स्थान पर था । इसके बाद देश में स्मार्टफोन क्रांति ने मैं स्वरूप ले लिया । सही मायने में डिजिटल इंडिया के उद्देश्यों की पूर्ति किसी कांति के माध्यम से हो सकती है । डिजिटल इंडिया और नागरिकों की विशिष्ट पहचान डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण विषय शामिल है । इसके तहत प्रत्येक नागरिक के लिए उपयोगी सेवा मुहैया कराने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का सृजन किया जाएगा । ऐसी बुनियादी सेवाओं के बूते देश ज्ञान के एक ऐसे भविष्य की ओर उन्मुख होगा, जहाँ प्रशासन और सेवा हर मांग पर उपलब्ध होगी । ऐसे में प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता का सवाल काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि भ्रष्टाचार को मिटाना भी अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम मुद्दा है । किसी सोच के साथ बहुत उद्देश्य राष्ट्रीय पहचान पत्र यानी आधार कार्ड को भी डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के साथ जोडा गया है । आधार कार्ड प्रत्येक नागरिक को बारह अंकों की एक विशिष्ट संख्या उपलब्ध करवाता है । यह संख्या भारत में कहीं भी व्यक्ति की पहचान और पते को निर्धारित करती है । आधार संख्या प्रत्येक व्यक्ति के जीवन भर की पहचान है । आधार संख्या से उन्हें बैंकिंग, मोबाइल फोन कनेक्शन और सरकारी व गैर सरकारी सेवाओं की सुविधाएं प्राप्त करने में सुविधा मिलती है । डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशी योजना गत वर्ष अगस्त में लागू की गई प्रधानमंत्री जनधन योजना का उद्देश्य भारत के नागरिकों को बुनियादी वित्तीय सेवाएं जैसे बैंक खाते और डेबिट कार्ड मुहैया कराना है । वित्तीय समावेशन के राष्ट्रीय मिशन को आगे बढाने के लिए यहाँ योजना शुरू की गई । योजना आर्थिक निरन्तरता बढाने और जनता को वित्तीय सेवाएं जैसे बैंक जवान खाते, कर्ज और बीमा प्रदान करने के लिए एक साधन के तौर पर तैयार की गई है । यदि इसकी मूल भावना को देखा जाए तो यह डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को पूरा करती दिखाई देती है । मेरा खाता भाग्य विधाता के आदर्श बाकी के साथ शुरू की गई । इस योजना में भारतीय समाज में करीब पर के लिए सब्सिडी सुरक्षित करना, ओवर ड्रॉफ्ट सुविधा और उद्देश्य संतो हजार दस तक साढे सात करोड परिवारों तक पहुंच बनाना है । डिजिटल इंडिया प्रमुख स्तंभ डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के नौ प्रमुख संभव की बात की जाए तो ब्रॉडबैंड हाइवेज सबसे प्रमुख है । सामान्य तौर पर ब्रॉडबैंड का मतलब दूर संचार से है जिसमें सूचना संचार के लिए आवृत्तियों की व्यापक बैंड उपलब्ध होते हैं । इस कारण सूचना को कई गुना तक बढाया जा सकता है और जुडे हुए सभी बैंकों विभिन्न आकृतियों चैनलों के माध्यम से भेजा जा सकता है । इसके माध्यम से एक निर्दिष्ट समय सीमा में बृहत्तर सूचनाओं को प्रेषित किया जा सकता है । ब्रॉडबैंड हाईवे निर्माण से अगले तीन वर्षों के भीतर देशभर की ढाई लाख पंचायतों को इससे जोडा जाएगा । लोगों को सार्वजनिक सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी । डिजिटल इंडिया राह में चुनौतियां जब भी किसी क्रांति का सूत्रपात होता है तो इस की सफलता की राह में कई चुनौतियां भी होती हैं । डिजिटल इंडिया की राह में कुछ चुनौतियां होंगे । सबसे बडी चुनौती मानव संसाधन की कमी की होगी । देश में जितना मानव श्रम सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नियोजित है, उसे कई गुना बढाए जाने की आवश्यकता है । इसके अलावा वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था भी देश के सामने किसी चुनौती से कम नहीं । ऍम के मुखिया और चंद्रशेखर का कहना है कि देश के सभी ढाई लाख पंचायतों को ब्रॉडबैंड से जोडने के लिए बीस हजार करोड से ज्यादा का खर्च आ सकता है जिससे देश की अर्थव्यवस्था व्यापक रूप से प्रभावित हो सकती है । तीसरी बडी चुनौती विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय की है । निष्कर्ष है किसी भी राष्ट्र के समावेशी विकास के लिए आवश्यक है कि ऐसी कोई भी सामाजिक उत्थान की योजना समाज के निर्मल और अपवर्जित लोगों की आशाओं को उडान दे । ज्ञानवर्धन और प्रतिभा कौशल के विकास के अवसर दे जिससे पे अपने जीवन स्तर को बेहतर करने में सक्षम बने और देश की तरक्की का हिस्सा बनेंगे । यदि सभी बच्चों को शिक्षा मिलेगी, सभी को स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हूँ और पात्रता अनुसार एक लाभ बिना किसी भेदभाव, भ्रष्टाचार या मनमानी के प्राप्त हो तो आदर्श राष्ट्र की झलक दिखाई देगी ।

31 - संचार माध्यमों का ग्रामीण जीवन पर प्रभाव

संचार माध्यमों का ग्रामीण जीवन पर प्रभाव आज सारे विश्व में संचार माध्यमों यथा मोबाइल एवं इंटरनेट के बढते कदम ने मानव जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन कर दिए हैं । भविष्य में यह क्रांतिकारी परिवर्तन विश्व को कहाँ से कहा ले जाएगा ये कहना कठिन है । समाज की सबसे छोटी इकाई व्यक्ति है । एक व्यक्ति उन्नति करता है तो समाज और समाज उन्नति करता है तो गांव और नगर होते हैं । हम सभी जानते हैं की आज समाचार माध्यमों के प्रभाव ने सारे विश्व को चमत्कृत कर दिया है । व्यक्ति की जिज्ञासा और मौद्रिता का परिणाम क्या है कि आज उसने विश्व को छोटी परिधि में बांध लिया है । यदि हम कामों में इस विकास यात्रा को देखें तो पता चलता है कि इन संचार माध्यमों के अंतर चालने, विश्वास और उम्मीदों से बढकर तरक्की की है । कहाँ तो हमारे ग्रामीण क्षेत्र जो एक समय आंध्र का में डूबे रहते थे, आज जीवन के हर क्षेत्र में प्रगति के मार्ग पर अग्रसर हैं । ग्रामीण क्षेत्रों ने लघु उद्योग, कुटीर उद्योग से निकलकर बडे पैमाने पर उद्योग स्थापित कर लिए हैं । सडक निर्माण यातायात साधनों को गति दी है जिससे ग्रामीण जनमानस लंबी दूरी तय कर अपनी रोजगार सफल रूप से कर रहे हैं । ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाडी उचित ढंग से कार्य करने के कारण ग्रामीण महिलाएं अपनी रुचि के अनुसार अपना व्यवसाय चल कर ग्रामीण बैंकों से ऋण लेकर स्वतंत्र रूप से अपना व्यवसाय चला रही हैं । परिणामस्वरूप गृहस्ती के कार्य, आवास, बच्चों की पढाई लिखाई सुविधाजनक हो गई है । ग्राम पंचायत में आपने विकास के कार्य उन्हें ढंग से कर लिए हैं । ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को ऋण उपलब्ध हो रहे हैं, उन्हें उन्नत किस्म की तकनीक बताई जा रही है । ग्रामीण क्षेत्रों में दूरदर्शन के माध्यम से कृषि दर्शन नामक कार्यक्रम संचालित किया जाता है, जिसमें किसानों को कृषि संबंधी जानकारी दी जाती है । उनके महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर दिए जाते हैं । ग्रामीण महिलाओं के मनोरंजन हेतु लोकगीतों का प्रसारण किया जाता है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में सांस्कृतिक जागरूकता बनी रहे । ग्रामीण विकास में ग्राम वासियों को यही जानकारियाँ देने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है । ग्रामीण जीवन में सूचना एवं संचार के उन्नत साधनों को जुटाने में ग्रामपंचायतों का योगदान सफल रहा । गांव में ज्ञान केंद्र, इंटरनेट सुविधाओं से सुसज्जित सूचना केंद्र खुल गए हैं, जिससे कृषक एवं छोटे व्यवसायियों को कामों की आवश्यक जानकारियां मिलती हैं । निष्कर्ष सफलताओं के साथ साथ सर्वत्र अब संस्कृति के फैलाव के कारण चिंताजनक स्तर ही बन गई है । दूरदर्शन पर मौजूदा ऐसे कार्यक्रम प्रसारित हो रही हैं जिससे हमारी संस्कृति पर प्रहार हो रहा है । जब दूरदर्शन का फैलाव काम था तब हिंसा के समाचार पढकर यह सुनकर चौंक उठते थे । लेकिन आज हिंसा एवं दुर्घटनाओं के समाचार सुनकर यह देखकर अमानवीय और संवेदनहीन हो गए हैं । आज व्यक्ति सामाजिक समरसता और शांति जैसे बोल मानवीय सरोकारों से दूर होता जा रहा है हैं ।

32 - संचार के साधनो द्वारा ग्रामीण प्रगति

संचार के साथ ना हमारा ग्रामीण प्रगति भारत में तीव्र गति से सामाजिक परिवर्तन हो रहा है । हमारा ग्रामीण समाज, परिवार विवाह, आधुनिक प्रणाली, जाति तथा धर्म से युक्त एक परंपरागत समाज । पिछले दो सौ वर्षों में तीव्र गति से सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक परिवर्तन हुए हैं जिनका कारण संचार के साधन है । यह तकनीकी दृष्टिकोण आधुनिक समाज में संस्कृति में हलचल पैदा कर देने वाला महत्वपूर्ण घटक बन गया है । आज का युग अविष्कारों का युग है । रूस नए नए अविष्कार हो रहे हैं । इन सब आविष्कारों का समाज पर अत्यधिक प्रभाव पड रहा है । इन आविष्कारों का अन्य के अंतरों तथा समाजों के भिन्न भिन्न पहलुओं पर भारी प्रभाव पडा है । समझ का कोई भी क्षेत्र चाहे ग्रामीण हो या शहरी क्षेत्र हो इसके प्रभाव से अछूता नहीं बचा है । रेडियो के बाॅन का चौमुखी प्रभाव पड रहा है । यह जनजीवन को अत्यंत प्रभावित कर रहा है । सच तो यह है कि आधुनिक युग में संचार के साधन सामाजिक परिवर्तन कीजिए बन गए हैं । शिक्षा पर प्रभाव, गांवों की समस्याओं के कारणों का विश्लेषण करने से क्या होता है कि उनके मूल में सबसे बडा कारण अशिक्षा है । शिक्षा के कारण गांव को नए नए अविष्कारों का पता नहीं होता । इससे खेती एवं कोटर उद्योगों में समुचित विकास नहीं हो पाता है । शिक्षा के कारण ग्रामीण स्वास्थ्य के मूल सिद्धांतों को समझ नहीं पाते, लोगों का शिकार हो जाते हैं । शिक्षा के कारण तो संस्कृत नहीं हो पाते । अशिक्षा, अंधविश्वास और अज्ञान का मूल आधार है शिक्षा की कमी । उनकी अर्थोपार्जन की योग्यता कम रहती है और बहुत गरीब रहते हैं । मोबाइल बैंकिंग ऍम मोबाइल पत्नी के निरंतर विकास आदान प्रदान के एक लोकप्रिय माध्यम के रूप में मोबाइल के उभरने से हैं और उसके द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं का लाभ उठाने के लिए क्या है? जरूरी है कि दी गई मोबाइल एप्स की सुविधा के लिए आपका मोबाइल सक्षम हो । इसके लिए विकसित किए जा रहे मोबाइल एप्स न केवल एंड्रॉइड सॉफ्टवेयर आधारित बल्कि आइफोन्स ॅरियर पर आधारित थी हैं, जिसे अपने मोबाइल से जुडी तकनीक के अनुसार डाउनलोड कर इंस्टॉल किया जा सकता है । हालांकि ॅ ओपनसोर्स होने की वजह और एप्लीकेशन विकास के लिए आसान उपलब्धता होने से मोबाइल एप्स मुख्य था । इसी पर आधारित है मीडिया एवं मनोरंजन । सूचना और प्रसारण मंत्रालय मीडिया और मनोरंजन उद्योग के साझेदारों को वर्तमान में चल रहे स्वच्छ भारत को मल्टीमीडिया अभियान में शामिल करेगा । सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज स्वच्छ भारत मिशन के बारे में मीडिया और मनोरंजन उद्योग के साझेदारों के साथ बैठक की । उद्योग के साझेदारों में न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन, एफएम रेडियों के प्रतिनिधि, कम्युनिटी रेडियो, डिजिटल पीडिया, मनोरंजन चैनल, पब्लिक ब्रॉडकास्टर सहित नेशनल ब्रॉडकास्टर शामिल है । इस अवसर पर सूचना और प्रसारण सचिव श्री विमल जुल्का ने कहा की मीडिया और मनोरंजन उद्योग को स्वच्छ भारत मिशन में व्यापक योगदान देना चाहिए । उद्योग सही विषय और प्रभावकारी संदेश के साथ कई लोगों तक पहुंच सकता है जिससे स्वच्छ भारत अभियान में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होगी । श्री जलका ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन को जन आंदोलन बनाने के लिए इस उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है । प्रधानमंत्री कि स्वच्छता के प्रति समर्पित होने की अपील को दोहराते हुए श्री छिलका ने कहा कि सभी साझेदारों के लिए क्या आवश्यक है कि वे इस अभियान का हिस्सा बनेंगे । केवल टीवी के डिजिटलीकरण के उदाहरण का हवाला देते हुए श्री जुल्का ने कहा कि मनोरंजन उद्योग टीवी के जरिए घर घर तक स्वच्छ भारत का संदेश पहुंचाने के लिए प्रमुख सितारों को एकजुट कर सकता है । एफएम रेडियो और कम्युनिटी रेडियो स्टेशनों के लिए श्री जुल्का ने अपील की कि स्वच्छ भारत मिशन पर क्षेत्र आधारित मत घटना आधारित कार्यक्रम बनाए जाए । रेडियो तथा टेलीविजन, सूचना और प्रसारण मंत्रालय मीडिया और मनोरंजन उद्योग के साझेदारों को स्वच्छ भारत पर मल्टीमीडिया अभियान में शामिल करेगा । सूचना और प्रसारण मंत्रालय आज स्वच्छ भारत मिशन के बारे में मीडिया और मनोरंजन उद्योग के साझेदारों के साथ बैठक की । विटी ने टेलीविजन के दुष्प्रभावों को इंगित करते हुए कहा है कि बालक के स्कूल के काम में पिछाडने का सबसे बडा कारण क्या होता है कि वह अध्यापकों द्वारा दिए का एक ग्राहक आ रहे पर गंभीरता से समय ना देकर अपना अधिकांश समय टेलीविजन देखने में लगता है जिससे एक तो वह अपने विषय में पिछड जाता है साथ ही साथ टेलीविजन देखने से आंख में दर्द, तंत्रिका तनाव, थकान, बसाम, वेकिक, उत्तेजना जैसी अनेक स्वास्थ्य समस्याएं बालक विकसित कर लेता है । निष्कर्ष निष्कर्ष के रूप में यह कहा जा सकता है कि संचार के साधनों के विकास द्वारा सूचनाओं का आदान प्रदान करने है तो कोई क्षेत्रीय बाध्यता नहीं रहेगी । प्रत्येक वर्ग समुदाय जाती क्या क्षेत्र के व्यक्ति तक वर्तमान की प्रायोगिक तकनीक के द्वारा सूचना तदर्थ की जा सकती है ।

33 -भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में संचार की भूमिका

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में संचार की भूमिका इक्कीसवीं शताब्दी में संचार की भूमिका अहम हो गए हैं । कुछ वर्ष पहले तक हमारे देश में जो कुछ सोचा भी नहीं जा सकता था, मैं सब कुछ अब संभव हो गया है । मोबाइल क्रांति के आगमन से विश्व का दायरा संकुचित हो गया है । आज हमारे देश के नागरिक अपनी जेब में मोबाइल के रूप में चलता फिरता एसटीडी तथा आईएसटी लेकर घूमते हैं और जब चाहे अपने मित्रों, परिजनों से संपर्क स्थापित कर सकते हैं । इधर पिछले कुछ वर्षों में वो मोबाइल सेवा की दरों में भी बहुत कमी आई है और इसकी उपलब्धता में आशातीत विस्तार हुआ है । आजीवन प्रीपेड सेवा, स्थानीय तथा एसटीडी के लिए एक पैसा, सकेंड प्रति कॉल और यहाँ तक कि आधा पैसा सेकेंड प्रति कॉल्टर होने मोबाइल सेवा को बहुत उपयोगी और लोकप्रिय बना दिया है । कहीं भी आप हूँ आपकी स्थिति आपके परिवार वाले जान सकते हैं । इतिहास में ऐसी अवधारणाएं कम ही सामने आई हैं, जो इतनी तेजी से फैली हूँ, जितनी तेजी से सूचना के अभाव यानी डिजिटल डिवाइड की धारणा को विस्तार मिला है । इसके साथ ही यह धारणा भी बलवती हुई है कि उपेक्षित क्षेत्रों में विकास को बढावा देने के लिए आधुनिक सूचना संचार प्रौद्योगिकी का अच्छा उपयोग हो सकती है । सरकारें इस उम्मीद से अरबों रुपए खर्च कर रही है कि विकासशील देशों में जो देश सबसे निर्धन है, उनकी निर्धनता, निरक्षरता, कुपोषण, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे पारंपरिक समस्याओं के निराकरण में आईसीटी मददगार साबित हो सकती है । टू जी टू जी द्वितीय पीढी फाॅर्स टेलीफोन प्रौद्योगिकी का संक्षिप्त रूप है वित्तीय पीढी मोबाइल दूर संचार नेटवर्कों का व्यवसायिक स्तर पर प्रयोग पहली बार बर्ष उन्नीस सौ सत्तर में इंग्लैंड की रेडियो निंजा कंपनी ने जीएसएम मानक पर किया था । पिछले नेटवर्कों की तुलना में टू जी के निम्नलिखित तीन सौ स्पष्ट लाभ है उन संवादों की अंक की है, कोडिंग की जाती है और रिकॉर्डर के बिना नहीं समझा नहीं जा सकता है । अंकित अकोर्डिंग से उतनी ही बैन चौडाई में अमित कॉल को पकडा जा सकता है । स्पेक्ट्रम पर तू जी तंत्र कहीं अधिक दक्ष होते हैं, उनसे अधिक मोबाइल पहुंच स्तर प्राप्त किया जा सकता है । ऐसे मेस संदेशों से प्रारंभ कर तू जी द्वारा मोबाइल में डेटा सेवा का समावेश किया गया है । थे । जी अंतरराष्ट्रीय मोबाइल तो संचार दो हजार आईएमटी दो हजार को थ्री जी अथवा तीसरी पीढी के मोबाइल फोन तथा मोबाइल दूर संचार सेवाओं का नाम दिया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय दूर संचार संघ के निर्देशों के अनुरूप है । अनुषंगी उपकरणों की अधिक लागत तथा लाइसेंस शुल्क अधिक होने के कारण थ्री जी सेवाएं महंगी है । थ्री जी उपकरणों में उपलब्ध बैंड चौडाई और स्थान की जानकारी उपलब्ध होने से ऐसे कई सेवाएँ उपलब्ध हो गई हैं, जो मोबाइल उपभोक्ताओं को पहले उपलब्ध नहीं थी । कुछ अनुप्रयोग इस प्रकार हैं मोबाइल टीवी अर्थात किसी भी टीवी चैनल को उप्भोक्ता के फोन से संयोजित करके उस चैनल का कार्यक्रम देखा जा सकता है । वीडियोकाॅॅॅन आधार सेवादाता किसी चलचित्र को प्रयोक्ता के फोन पर भेज सकता है । विडियो कॉन्फ्रेंसिंग अर्था प्रयोक्ता परस्पर देख और बात कर सकते हैं । टेलीमेडिसिन था चिकित्सा प्रयोक्ता के दूरस्थ होने पर सौ से चिकित्सकीय मॉनिटर उपलब्ध करवाकर अन्यथा अन्यत्र चिकित्सीय परामर्श उपलब्ध करवाया जा सकता है । स्थान निर्धारक सेवा अर्थात सेवादाता किसी स्थान से संबंधित मौसम तथा यातायात की जानकारी फोन पर भेज सकता है तो उनके द्वारा प्रयोक्ता निकटस्थ व्यवसाय तथा अपने मित्र का भी पता लगा सकता है । पुराने टू जी अथवा टू पॉइंट फाइव जी मानकों की तुलना तीन जी के द्वारा कम से कम दो सौ के पर सेकेंड की दर से शीर्ष आंकडा डर उपलब्ध करवाई जाती है । थ्री जी के कारण आज मोबाइल परिवेश में विस्तृत क्षेत्र ऍन, मोबाइल ऍम तथा वीडियो कॉल्स आते उपलब्ध है । ये चौहान इसकी स्थापना जून दो हजार में आईटीसी के कृषि व्यवसाय प्रभाग देखी थी । इसकी रूपरेखा छोटे छोटे खेतों, कमजोर बुनियादी ढांचों और बिचौलियों की भागीदारी के लक्षणों से युक्त भारतीय कृषि की अनूठी विशेषताओं से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई थी । परियोजना से आठ राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में फैली अपनी छह हजार पांच सौ गुमटियों के माध्यम से चालीस हजार से भी अधिक गांवों के चालीस लाख से अधिक किसानों ने सुझाव उठाया है की चौपाल को अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं जैसे अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिल चुकी है । ज्ञान, दूध, ज्ञान, दूध की शुरुआत जनवरी दो हजार में मध्यप्रदेश के धार जिले में की गई थी । यह सरकार द्वारा नागरिकों को दी जाने वाली सेवा जीटूसी इंटरनेट आधारित पोर्टल है । ज्ञान दूध का उद्देश्य सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को ग्रामीण लोगों तक पहुंचाने के लिए एक किफायती प्रतिकृति तैयार कर रहे हो गया । आर्थिक रूप से निर्भर और वित्तीय रूप से व्यावहारिक प्रादर्श तैयार करना है । उनके आंदोलन नागरिकों के अपनी विवरण भी रखता है और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की सूची जैसी सेवाएं भी प्रदान करता है । यह उपभोक्ताओं को हिंदी भाषा में ऑनलाइन शिक्षा भी प्रदान करता है । लोग पानी लोग पानी की परिकल्पना सितंबर दो हजार चार में सीतापुर के जिला कलक्टर ने की थी । यह सरकारी और निजी क्षेत्र की भागीदारी में शुरू किया गया कार्यक्रम है और इसको उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में अट्ठासी प्रतिशत ग्रामीण जनसंख्या और उनतालीस प्रतिशत साक्षरता दर चलाया जा रहा है । ऍम शिकायत निवारण सेवा अब तक की सबसे लोकप्रिय सेवा रही है । जून दो हजार आठ तक इसे एक लाख सत्रह हजार एक सौ उन्यासी शिकायतें मिली हैं जिनमें से एक लाख तेरह हजार सात सौ तिरानवे यानी सत्यानी प्रतिशत शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है । जनमत जनमित्र की शुरुआत मार्च दो हजार में की गई थी । यह एक समेकित ऍम है जिसको राजस्थान के झालावाड जिले में क्रियान्वित किया जा रहा है । उत्तराखंड में भी इसकी प्रतिकृति अपना ही गई है । कलेक्टर रेट के सभी विभागों और अनुभागों को लोकल एरिया नेटवर्क के जरिए जोडा गया है । जनमित्र का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए लोगों को एकल खिडकी सुविधा प्रदान करना है । स्वास्थ्य संकट एवं अन्य दुष्परिणाम मोबाइल सेवाओं की सहज सोलह डाल और बेहद सुनते हो जाने के कारण मोबाइल का प्रयोग अनावश्यक भी होने लगा है जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पडने की पूरी पूरी संभावना है तो न प्रौद्योगिकी उपलब्ध होने से साइबर अपराधों में वृद्धि हुई है । मोबाइल के प्रयोग से क्या सामाजिक तत्वों को अपराधों को अंजाम देने में सहायता मिलती है? यह ठीक है कि मोबाइल के पकडे जाने पर पुलिस मोबाइल रिकॉर्डों के माध्यम से अपराधियों को पकडने लेती है । मोबाइल टॉवरों से निकलने वाले विकिरण स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट है । वर्तमान में आईसीटी का उपयोग स्थानीय स्तर पर विशेष कहा स्थानीय निकायों और नगर पालिकाओं में खुला बंद पारदर्शिता और प्रभाविता लाने वाले साधन के रूप में किया जा रहा है । सिर्फ यदि राज्य और केंद्रीय सरकारें घाटी, जिले और विकासखंडों में इसे लागू करने पर जोर दें तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए आईसीटी का पूरा लाभ उठाया जा सकता है ।

34 - ग्रामीण युवाओं के बदलते हुये समाजिक व सांस्क्रतिक प्रतिमानो में संचार माध्यमों की भूमिका

ग्रामीण युवाओं के बदलते हुए सामाजिक व सांस्कृतिक प्रतिमानों में संचार माध्यमों की भूमिका । वैश्वीकरण के पश्चात विकास की निरंतर बदलती दशा, निशाने ग्रामीण पर नगर ये समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है । इससे ग्रामीण मान अगर ये दोनों क्षेत्रों में विभिन्न जनमाध्यमों ने एक नवीन सूचना समाज का निर्माण किया है । हमारे प्राचीन काल में तंत्रमंत्र और अध्ययन मनन के बल पर संचार प्रक्रिया प्रारंभ हुई था । ऋषि महर्षि आपने मंत्र बाल पर जिससे चाहते उसे आसानी से संपर्क कर लेते थे । तब संचार का साधन देव ऋषि मुनि नारद वह आकाशवाणी थे । ठीक इसके उत्तरोतर संचार के विभिन्न प्रसाधन वर्तमान आधुनिक संदर्भ में ही उपलब्ध है । समस्त अमानवीय व्यवहार का आधार संचार ही है । इन माध्यमों से परस्पर व्यक्तियों या समूहों में विचारों, सूचनाओं, भावनाओं, संदेशों, मत तर्कों का आदान प्रदान हुआ । विचार संप्रेषण के माध्यमों की सर्वसुलभ था । बस संपर्क ने विभिन्न सामाजिक माॅक समूहों के पूर्ववत मानकों को प्रतिस्थापित भी किया है, जिसका प्रभाव वर्तमान आधुनिक ग्रामीण समाज में स्पष्टता हाथ दिखाई देता है । अध्ययन से प्राप्त निष्कर्ष एक शोध अध्ययन में सम्मिलित उत्तरदाता ग्रामीण युवाओं दशमलव तैंतीस प्रतिशत का परिवार नियोजन के प्रति दृष्टिकोण सकारात्मक था, जबकि अठारह दशमलव । सडसठ प्रतिशत उत्तरदाता ग्रामीण युवाओं का परिवार नियोजन के प्रति दृष्टिकोण नकारात्मक था । हूँ क्या तथ्य अध्ययन शोध उत कल्पना प्रथम प्रमाणित होने की पुष्टि करता है । आधुनिक संचार माध्यमों से जुडे ग्रामीण युवाओं की संख्या अधिक होने पर परिवार नियोजन के प्रति उनका दृष्टिकोण भी सकारात्मक होता है । टेस्ट सकारात्मकता को आधुनिक संचार क्रांति माध्यमों के प्रभाव संपर्क से वैचारिक सामाजिक प्रतिमान में हुआ मुख्य परिवर्तन माना जा सकता है । दो । शोध अध्ययन में सम्मिलित नवासी दशमलव तैंतीस प्रतिशत ग्रामीण युवाओं का महिला शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण सकारात्मक तथा दस दशमलव सडसठ प्रतिशत ग्रामीण युवाओं का महिला शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण इतने कार आत्मकथा शोध अध्ययन के आधार पर स्पष्टता, वृत्तीय शोध परिकल्पना प्रमाणित होती है । युवा ग्रामीणों का इंटरनेट व अन्य आधुनिक संचार माध्यमों से संपर्क स्तर बढने से वे वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शिक्षा की मेहता को समझाते हुए महिला शिक्षा को सामाजिक विकास का मुख्य घटक मानते हैं । यह ग्रामीण युवाओं में बदलते बहुत एक सामाजिक प्रतिमान का उदाहरण हैं । तीन । शोध अध्ययन में सम्मिलित चौंसठ दशमलव छियासठ प्रतिशत ग्रामीण युवाओं में संयुक्त परिवार की उपयुक्तता को वर्तमान संदर्भ में उचित नहीं माना जाता है जबकि पैंतीस दशमलव चौंतीस प्रतिशत ग्रामीण युवाओं ने संयुक्त परिवार को महत्व दिया है । शोध अध्ययन से स्पष्ट होता है कि आधुनिक संचार साधनों के संपर्क प्रभाव के कारण युवाओं में भोगविलास बहुत एक बाद हावी हो रहा है जिसके कारण पे अपने भावी दाम्पत्य जीवन में एकाकी परिवार व्यक्ति को उचित मानते हैं जो बदलते सामाजिक प्रतिमान को अभिव्यक्त करता है । चार शोध अध्ययन में सम्मिलित दशमलव छह प्रतिशत ग्रामीण चुनाव ने जीवन साथी का चयन परिवार की सहमती से आयोजित विवाह करने का मत अभिव्यक्त किया है जबकि इकतालीस दशमलव चौंतीस प्रतिशत ग्रामीण युवाओं ने जीवन साथी के चयन में परिवार की सलाह को महत्व ना देने और प्रेम विवाह करने का मत दिया है । यहाँ नृत्य परिकल्पना स्पष्टतः प्रमाणित हो रही है । युवा ग्रामीणों में आधुनिक संचार साधनों के संपर्क प्रभाव उससे उपजे बहुत बाद वैश्वीकरण अवधारणा के प्रभाव से प्रेम से वहाँ की नियुक्ति भी सुदृढ हो रही है तो बदलते सांस्कृतिक प्रतिमान का उदाहरण है । पांच शोध अध्ययन में सम्मिलित अधिकांश चौरानवे दशमलव छीन सकता प्रशाद ग्रामीण युवाओं ने आधुनिक पाश्चात्य पहनावे को परंपरागत ग्रामीण पहनावे को छोडकर वरीयता दी है । ग्रामीण युवा इंटरनेट जैसी संचार युक्ति को अपनाकर विश्वव्यापी युवा समुदायों के समकक्ष संपर्क में रहना चाहता है । इसलिए उसने पश्चात्य पहनावे को परंपरागत ग्रामीण पहनावे से बेहतर माना । यह तथ्य शोध अध्ययन की तृतीय परिकल्पना को प्रमाणित करता है । संचार साधनों के द्वारा ग्रामीण युवाओं पर पडने वाले प्रभावों में स्पष्टतः दृष्टिगोचर होने वाला है । एक प्रमुख बदलते हुए सांस्कृतिक प्रतिमान का उदाहरण हैं अध्ययन का महत्व । आधुनिक संचार, मैं सूचना प्रौद्योगिकी के कहाँ दुर्भाव के साथ ही विभिन्न सामाजिक मत, सांस्कृतिक प्रतिमानों के स्वरूप में परिवर्तन आया है । समाज के विभिन्न आयु समूहों को भी भिन्न भिन्न प्रकार से संचार साधनों के संपर्क ने प्रभावित किया है । युवाओं में परिवर्तनों को आत्मसात करने की क्षमता तो बडों की तुलना में अधिक होती है, क्योंकि उनमें पूर्वाग्रह कम होते हैं । युवा आधुनिकता को स्वीकारने में सबसे आगे होते हैं । युवावस्था का साहस युवा को नए जीवन शैली स्वीकारने के हिचकिचाहट से बचा लेता है । परिवर्तन इन्हें आकर्षित करते हैं । इसलिए आज बाजार का मुख्य लक्ष्य यही युवा वर्ग है, जिसकी बदौलत भारत में वैश्विक रन की परिस्थितियों से उत्पन्न संचार, सूचना प्रौद्योगिकी, बाजार फल फूल रहा है । यही बाजार इन परिवर्तनों के मूल में है, जिसने भारतीय सामाजिक व संस्कृति की धारा को बिल्कुल मोड दिया है । क्या भारत के लिए सबसे आवश्यक विषय है, पर दुर्भाग्य की बात है? इस पर सबसे कम ध्यान दिया जा रहा है । ग्रामीण भारत के परिप्रेक्ष्य में विभिन्न सामाजिक सांस्कृतिक प्रतिमानों का प्रचार आवश्यक है । हाँ,

35 - ग्रामीण समाज को बदलने में विज्ञान संचार का योगदान

ग्रामीण समाज को बदलने में विज्ञान संचार का योगदान संचार प्रेषक का प्राप्तकर्ता को सूचना भेजने की प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत ऐसे माध्यम या तंत्र का उपयोग किया जाता है जिसे सूचना प्रदाता एवं सूचना प्राप्त करता दोनों ही समझ सकते हैं । आज ग्रामीण समाज भी संचार की प्रक्रिया में अछूता नहीं है । इसका प्रभाव संपूर्ण ग्रामीण मानव जगत मकरानी पर गहन रूप से पडा है । एक । रेडियो दो । टेलीफोन एवा मोबाइल तीन । दूरदर्शन चार कंप्यूटर एवं इंटरनेट रेडियो आजादी के बाद से ही ग्रामीण अंचल में रेडियो का महत्वपूर्ण योगदान रहा है । सामाजिक तानेबाने को सशक्त बनाने में रेडियो के प्रसारण ओं ने एक अभूतपूर्व भूमिका का निर्वाहन किया है । फिर चाहे जहर उपक या एकल नाटक हो, खेत कल्याण पंचायतीराज हो या को बाॅध कम्पोस्ट खाद बनाने का तरीका । मौसम फसलों से लेकर मौसमी बीमारियों के बचाव में एक सशक्त माध्यम रेडियो ही रहा । भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का भाषण आजादी का पर सभी ने रेडियो प्रसारण पर ऑल इंडिया रेडियो पर ही सुना था और सभी को एक छोर से दूसरे छोर तक अंग्रेजी राज्य के समापन और स्वतंत्र भारत की बात पता चली थी । गांव गांव में क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी वीडियो को ही जाता है । संचार का एक सशक्त माध्यम आज भी रेडियो है । लोकप्रियता इतनी की किसान आज भी खेत पर खलिहान पर रेडियो के साथ ही अपना काम करता है और तीन व्यतीत करता है । टेलीफोन एवं मोबाइल ग्रामीण क्षेत्र में आज भी टेलीफोन को एक विश्वसनीय एवं आधारभूत संचार स्रोत मना किया है । यही कारण है कि ग्रामीण जगत में हर एक पंचायत में सार्वजनिक टेलीफोन की व्यवस्था है, जिससे कि ग्राम अन्य ग्रामों एवं शहरों के सतत संपर्क में रहे एवं सरकारी प्रशासनतंत्र से भी अपना लगातार संपर्क बनाए रख सके । इनमें पुलिस थाना, राजस्व विभाग, महिला एवं बाल विकास, जिला पंचायत, स्वास्थ्य एवं समुदाय सेवा प्रभाग से इनका निरन्तर सतत एवं जीवन सहयोग बना रहता है । इस प्रकार दूर संचार एक सशक्त एवं अनिवार्य संसाधन के रूप में ग्रामीण जगत में उन्नति के लिए कार्य कर रहा है एवं आगे भी रहेगा । आज सुशासन के लिए दूर संचार एक अति आवश्यक संचार सेवा है, जिसकी ग्रामीण विकास में सक्रिय एवं जीवंत भागीदारी है । भारत एकमात्र देश है जिसने चीन को भी संचार के मामले में पीछे छोड दिया है । मोबाइल यह बात भले ही सचिन की आज भी मोबाइल की दुनिया से ज्यादातर ग्रामीण समाज वंचित है । कहीं टावर की समस्या तो कहीं नेटवर्क मिलने की और मोबाइल में भी ग्रामीण जगत को एक नई दिशा एवं रोजगार का अवसर प्रदान किया है । ई गवर्नेंस और अन्य विकासात्मक कार्यक्रम ग्रामीण समाज को उन्नति का अलग आयाम दे रहे हैं । देश के स्मार्टफोन ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूसी ब्राउसर जैसे एप्स ग्रामीण जगत को भी शहरी संसार से नया विकास का अवसर दिया है । छब्बीस प्रतिशत ग्रामीण जनता ही बत्तीस पर है कि आपको मोबाइल पर उपयोग कर रही है । एशिया में भारत सबसे उच्च स्थिति में है क्योंकि ग्रामीण जगत के साथ ही शहरी जगत सम्मिलित है । दूरदर्शन आज देश के लाखों का और ग्रामीण अंचलों के दूर दराज के इलाकों में दूरदर्शन की पहुंच होने लगी है । ग्रामीण जनता के लिए दूरदर्शन शिक्षा, ज्ञान और मनोरंजन का सशक्त माध्यम बन गया है । किसी कारण दूरदर्शन की दिनों दिन लोकप्रियता बढती जा रही है एवं दूरदर्शन ग्रामीण जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग बन गया है । जैसे कृषि चौपाल ग्रामीण छलक की एक पहल, गुजरात के रन से असम के चाँद आदिवासी ग्राम तक लेह से लेकर लक्ष्यद्वीप तक की संस्कृति एवं सामाजिक सांस्कृतिक जीवन से दूरदर्शन में हम सभी को जोडा है । खाना खजाना में पूरे भारत के फैन जनों का स्वाद निर्माण विधि से एक दूसरे को परिचय दिया है । चाहे वह बाटी चूरमा हो, सत्तू की लिट्टी मालपूए हो या रस हुआ वहाँ हो या भाग करवाडी, इनकी ग्रामीण जगह तक पहुंच बनाने का काम दूरदर्शन नहीं किया है । महिला सशक्तिकरण, महिला शिक्षा, महिला व्यवसायी, महिला पुरुष के भेद मिटाने में भी दूरदर्शन की अग्रणी भूमिका रही है । कंप्यूटर एवं इंटरनेट ग्रामों को कंप्यूटर एवं इंटरनेट की त्वरित सुविधा से जोडा गया है । पंद्रह अगस्त दो हजार चार से खाता खतौनी का संधारण कंप्यूटर से किया जाना सुनिश्चित किया गया । देश की जनता को यह सुविधा गुजरात से आरंभ होकर संपूर्ण देश को मिल रही है । ग्रामीण जगत में कंप्यूटर ऍम इंटरनेट के माध्यम से देश के दूर ग्राम से जोडा गया है । ग्राम के चैन, मृत्यु प्रमाणपत्र, आवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, विभिन्न योजनाओं के कार्य एवं आवेदन प्राप्त करने एवं भरने की सुविधा दी गई है । ई शासन व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण सुशासन सशक्त हुआ है । ग्राम पंचायत प्रशासन जहाँ अपनी सफलता का प्रमाण देकर जनविश्वास जीत रहा है, वहीं अविश्वास की स्थिति में जनता अगर चाहे तो जानकारी भी प्राप्त कर सकती है । ग्रामीण शासन एवं सुशासन को बल मिला है । तीस सूत्रीय कार्यक्रम की सफलता का श्रेय भी कंप्यूटर इंटरनेट को ही जाता है, जिन्होंने ग्रामीण समाज को चेतना प्रदान की है । इस सेवा के चलते ग्राम पंचायतें सरकार की महत्वपूर्ण सामाजिक योजनाएं लागू करने वाली नोडल एजेंसी बन गई है हूँ ।

36 - वर्तमान परिद्रश्य : ग्रामीण विकास में ई -प्रशासन की स्थिति

वर्तमान परिदृश्य ग्रामीण विकास में ही प्रशासन की स्थिति हमारे देश में ये प्रशासन का वास्तविक आरंभ में राष्ट्रीय सूचना केंद्र की स्थापना के समय से ही हो गया था । यह केंद्र संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की सहायता से इलेक्ट्रॉनिकी आयोगने आरंभ किया था और इसने अपने आरंभिक दिनों में ही सबसे पहले देश के सभी जिलों को आपस में जोडने का महत्वपूर्ण कार्य अपने जिम में लिया और उसे कुछ ही वर्षों में बखूबी अंजाम दिया । वर्ष दो हजार पांच में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यू । एन । टी । पी । रहे प्रशासन को परिभाषित किया था, की भी प्रशासन ऐसी सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों का नाम है जिनका उद्देश्य सूचना और सेवा वितरण में सुधार लाना, निर्णय करने की प्रक्रिया में नागरिक भागीदारी को बढावा देना और सरकार को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और सक्षम बनाना है । भारत गांवों का देश है । देश में ग्रामीण जनसमुदाय भारतीय समाज का केंद्र बिंदु है और मैं वास्तविक भारत का प्रतिनिधित्व भी करता है । दो हजार ग्यारह की जनगणना आंकडों के अनुसार भारत में छह लाख अडतीस हजार तीन सौ सत्तासी गांव है जो कुल जनसंख्या के बहत्तर प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं । ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना संचार टेक्नोलॉजी के रणनीति बनाते समय, स्थानीय भाषा, संस्कृति, सामाजिक आर्थिक स्थिति, आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता जैसे तत्वों पर भी विचार किया जाए । गांव के विशालता, भौगोलिक दूरी विभिन्नताओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रशासन की व्यवस्था को साकार करने में सक्षम होना स्वाभाविक है । किंतु इस अवधारणा के मूड होने पर प्रशासन में पारदर्शिता, संवेदनशीलता, जवाबदेही, शीघ्रता, बस जमता जैसे पांचवीं तत्वों का समावेश होने पर ग्रामीण विकास का लक्ष्य दूर नहीं रहेगा । ज्ञातव्य है कि आज संपूर्ण विश्व में वैश्वीकरण उदारीकरण पंजीकरण की लहर दौड रही है । इस युग में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी का महत्व दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ रहा है । राष्ट्रीय ही प्रशासन योजना के क्रियान्वयन रणनीति राष्ट्रीय ही प्रशासन योजना के लिए एक सुगम सोच विकसित की गई है जो राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लागू किए गए प्रशासन अनुप्रयोगों के अनुभवों पर आधारित है । राष्ट्रीय ही प्रशासन योजना के लिए अपनाए जा रहे तरीके तथा पद्धति में निम्नलिखित तत्व शामिल हैं सामूहिक ढांचा राष्ट्रीय प्रशासन योजना के क्रियान्वयन में सामूहिक तथा सहायक सूचना प्रौद्योगिकी ढांचा तैयार करना शामिल थे जैसे कि राज्यव्यापी एरिया नेटवर्क, राज्य आंकडा केंद्र, सामूहिक सेवा केंद्र तथा इलेक्ट्रॉनिक सेवा वितरण के पे जो धीरे धीरे विकसित किए जा रहे हैं । सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉर्डल किसे वहाँ अपनाया जा रहा है जहाँ भी सुरक्षा पहलुओं की अनदेखी किए बगैर संसाधनों में वृद्धि संभव हो । संपूर्ण आत्मतत्व एकीकरण को सुचारू बनाने तथा विरोधाभास से बचने के लिए नागरिकों, व्यवसाइयों तथा संपत्ति के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन कोर्ट को अपनाकर बढावा दिया जा रहा है । राष्ट्रीय ही प्रशासन योजना के क्रियान्वयन की रूपरेखा राष्ट्रीय प्रशासन योजना के लागू करण में शामिल कई एजेंसियों को देखते हुए तथा राष्ट्रीय स्तर पर उसे जोडने की आवश्यकता के चलते राष्ट्रीय ही प्रशासन योजना को एक कार्यक्रम के रूप में लागू करना तय किया गया है जिसमें सभी एजेंसी की स्पष्ट रूप से परिभाषित भूमिका तथा जवाबदेही है और कार्यक्रम के उचित प्रबंधन की संरचना भी इसे सरकार द्वारा पहले ही अनुमोदित किया जा चुका है और लागू किया जा रहा है । सेवा वितरण के लिए रणनीति आम आदमी को निर्बाध तथा एक अलकेंद्र के माध्यम से सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रत्येक राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश में एक समान डिजिटल सेवा वितरण ढांचा तैयार किया जा रहा है जिसमें स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क स्टाॅफ, नेशनल पस्थित सर्विस डिलीवरी गेटवे, स्ट्रीट पोर्टल ऍम शामिल है । इनमें से कुछ संरचनाएं तैयार हैं, अपनी सेवाएं भी प्रदान कर रही हैं । राष्ट्रीय ही प्रशासन, मंडल लाइन मंत्रालयों, राज्य सरकारों द्वारा क्रियान्वित की जाने वाली मिशन मोड परियोजनाओं में सहायता प्रदान करना, केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य के संबंधित विभागों को तकनीकी सहायता प्रदान करना, सभी राष्ट्रीय ही प्रशासन योजनाओं, परियोजनाओं की शीर्ष समिति द्वारा फटने की समीक्षा के लिए सच्ची वाले के रूप में कार्य करना । राष्ट्रीय ही प्रशासन योजना के क्रियान्वयन में राज्यों की मदद के लिए बच्चे की प्रशासन मिशन टीम प्रदान करना, क्षमता निर्माण कार्यक्रम राष्ट्रीय ई प्रशासन योजना एक विशाल तथा जटिल प्रयास है जिसमें बीस केंद्रीय विभाग, पैंतीस राज्य व केंद्रशासित प्रदेश तथा इन राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के तीन सौ साठ विभाग, लगभग पांच सौ क्रियान्वयन एजेंसियां शामिल हैं । राष्ट्रीय ही प्रशासन योजना के लिए अपने उद्देश्य को हासिल करने के लिए जिन क्षमता की कमियों को दूर किया जाना है, उनमें शामिल है विशेषज्ञों की नियुक्ति, कौशल का विकास तथा प्रशिक्षण देना । क्षमता निर्माण तैयार करने की योजना का लक्ष्य है उपयुक्त चुनौती का समग्र रूप से सामना करना, जिसमें शामिल है राज्य प्रशासन मिशन, टीम प्रोजेक्ट, ई गवर्नेंस मिशन टीम तथा मानव संसाधन का प्रबंधन । यह योजना विभिन्न गतिविधियों जैसे विशेषज्ञों का पैनल तैयार करना, भर्ती में राज्यों की सहायता करना तथा प्रशासन परियोजना के क्रियान्वयन में शामिल विभिन्न स्तरों के नेताओं व अधिकारियों का अभिविन्यास, ओरियेंटेशन तथा सुग्राही क्रं । सेंसिटाइजेशन, राज्य प्रशासन मिशन टीम का अभिविन्यास और कार्यक्रम तथा परियोजना स्तरीय अन्य अधिकारियों के विभिन्न स्तरों के लिए केंद्रीय पाठ्यक्रम सामग्री विकास के साथ विशेषीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना मिशन मोड परियोजना मिशन मोड परियोजना एमएमपी राष्ट्रीय ही प्रशासन योजना के अंतर्गत एक स्वतंत्र परियोजना के तौर पर शुरू की गई है । यह परियोजना इलेक्ट्रॉनिक शासन के विभिन्न पहलुओं जैसे कि बैंकिंग, भूमि रिकॉर्ड या व्यवसायिक कर आदि पर आधारित सेवाओं का ध्यान रखकर बनाई गई है । राष्ट्रीय ही प्रशासन योजना की मिशन मोड परियोजना स्पष्ट रूप से उद्देश्य, व्यापक ता और कार्यान्वयन की समय सीमा और उपलब्धियों के साथ साथ मूल्यांकन या परिणामों और सेवा स्तरों को परिभाषित करती है । राष्ट्रीय ही प्रशासन परियोजना, इकत्तीस मिशन मोड परियोजनाओं, एमएमपी पहले सत्ताईस चुकी राज्य केंद्र या एकीकृत परियोजनाओं के रूप में वर्गीकृत की जा सकती है । राज्य सरकारों को भी अपनी सुविधा अनुसार अपनी जरूरतों को देखते हुए पांच मिशन मोड परियोजनाओं को चुनने के लिए कहा गया था । देशकर वर्तमान स्थिति को दृष्टिगत करते हुए यह निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि आज के लोकतांत्रिक सरकारों पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुशल एवं पारदर्शी प्रशासन देने के दबाव बडे हैं । सूचना का अधिकार इसी कडी का एक अंग है । नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार भी प्रशासन न्यूनतम मूल्य पर नागरिक केंद्रित सेवा प्रदान करने के प्रावधान के द्वारा इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद कर रहा है और इसके फलस्वरूप सेवाओं की मांग तथा इन्हें प्राप्त करने में कम समय लगने से काफी सुविधाजनक साबित हो रहा है । इसलिए इस दृष्टि का उद्देश्य सुशासन को मजबूती प्रदान करने के लिए प्रशासन का उपयोग करना है । ये प्रशासन की विभिन्न पहल के जरिए लोगों को दी जा रही सेवाएं केंद्र राज्य सरकारों को अब तक वंचित समाज तक पहुंचाने में मदद कर रही है । इसके प्रभाव से नौकरशाही के स्वरूप का अधिक लोकतांत्रिक रन हुआ है । इसके साथ ही संगठन में कार्मिकों की संख्या में कमी आई है हूँ ।

37 - ग्रामीण विकास की प्रव्रतियाँ एवं समाजिक परिवर्तन

ग्रामीण विकास की प्रवृत्तियाँ एवं सामाजिक परिवार बन भारत की कुल आबादी दो हजार ग्यारह की जनगणना के अनुसार एक अरब पच्चीस करोड के आस पास है जो पूरे विश्व की आबादी का सत्रह दशमलव पांच प्रतिशत है । इसमें से प्रतिशत जनसंख्या गांवों में निवास करती है । वर्तमान में दो हजार ग्यारह की जनगणना के अनुसार पूरे भारत में छह दशमलव लाख गांव है । शायद इसलिए ही यह कहा गया है कि भारत गांवों का देश है अर्थात गांवों की तरक्की के बिना भारत की उन्नति संभव नहीं है । आज विकास के कई पहलू हैं और प्रत्येक पहलू के मायने अलग अलग व्यक्तियों के लिए अलग अलग होते हैं । विकास मनुष्य के झाओ एवं आकांक्षाओं से जुडा होता है । किसी भी विकास से प्रगति स्पष्ट दिखती है जो लोगों के जीवन एवं उसकी सोच पर वास्तविक प्रभाव डालती है । बात अगर हम भारत के ग्रामीण क्षेत्रों की करें । आज के एस बीसवीं शताब्दी में ग्रामीण सामाजिक संरचना में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं । ग्रामीण विकास के बाद अगर हम करते हैं तो इस विकास को हम तीन अहम मुद्दों से जोडकर देख सकते हैं । एक । शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली तथा आवाज आदि जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास दो व्याप्त गरीबी को दूर करने है तो रोजगार का समुचित अवसर प्रदान करना । तीन । देश के शासन क्या गवर्नेंस में ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने है तो उनमें जागरूकता एवं चेतना का संचार करना । इन तीन अहम मुद्दों को विकसित करके ही ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास किया जा सकता है । आज सरकार कामों की बुनियादी सुविधाओं और आधारभूत संरचनाओं के निर्माण एवं विकास के द्वारा ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने का प्रयास लगातार कर रही है । ग्रामीण समाज के उपेक्षित और दलित वर्गों के विकास के लिए विशेष अवसर उपलब्ध करवा रही है । साथ ही बचत की राशि देश के विकास में योगदान देती है । प्रधानमंत्री की एक और योजना स्वच्छ भारत अभियान ने भी लोगों को समानता के साथ साथ अपने कर्तव्यों और दायित्वों का बोध कराया है । आज ग्रामीण विकास के प्रवृतियां ग्रामीण सामाजिक दर्शन एवं संरचना में अमूल परिवर्तन लाई है, लेकिन देखा जाए तो अभी और भी परिवर्तन की आवश्यकता है और यह परिवर्तन अन्य कारणों से भी आ सकता है । जैसा कि एस । श्रीनिवासन कहते हैं, जब निचले वर्ग के लोग उच्च वर्ग के संस्कृति, भाषा, रहन सहन और रीति रिवाज इत्यादि का अनुसरण करते हैं तो समाज में सामाजिक परिवार बन आते हैं । आज सामाजिक परिवर्तन के लिए आवश्यक पैमाने या तत्व के रूप में हम कुछ अहम मुद्दों को ले सकते हैं जो मानव विकास के साथ साथ उनके कल्याण में भी सहायक होते हैं । जैसे शिक्षा का विकास, राजनीति में युवा वर्ग की भूमिका का विस्तार, सामाजिक मूल्य स्तर में वृद्धि, आधारभूत सुविधाओं तक सबकी पहुंच, प्राकृतिक संसाधनों का उपयुक्त प्रयोग, नवीन तकनीकी और प्रौद्योगिकी का स्थानांतरण । ये कुछ ऐसे तत्वों या पैमाने हैं जिनके द्वारा विकास, सामाजिक गरीबी सूचकांक, मानवाधिकार और प्राकृतिक संसाधनों, हत्यारी से विकास एवं सामाजिक परिवर्तन को देखा है । वह माता जा सकता है । साथ ही इन पैमानों को लागू कर इनमें सुधार भी किया जा सकता है । सरपंचों को कई न्यायिक अधिकार सरकार द्वारा दिए जा रहे हैं । पुलिस स्टेशन पर अंकुश बनने करानी रखने के लिए जनता की एक टीम कई गांवों में गठित की गई है । नई संचार व्यवस्था आने के कारण गांवों के लोग भी आज अपने मौलिक अधिकारों को समझने लगे हैं, जिस कारण लोगों में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता आई है । गांवों से शहरों की ओर पलायन की प्रवृत्ति हो रही है । इससे जहाँ नुकसान हो रहा है, वहीं गांवों को इसके फायदे भी मिल रहे हैं । पलायनवादी लोग शहरों से पैसे कमाकर गांव में अपने परिवार को उन्नत तरीके से रखना चाहते हैं । एक आदमी का शहरीकरण होने से एक नई संस्कृति का जन्म होता है । औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, परिवहन के साधनों में वृद्धि, अंग्रेजी शिक्षा की लोकप्रियता, राजनीतिक एवं सामाजिक जागरूकता तथा छुआछूत को दूर करने वाले कानून इत्यादि ने जातिवाद के कुप्रभावों को आज गांवों में भी काम कर दिया है । हर वर्ग द्वारा भेदभाव का तारीख खेलने के कारण गांव का कमजोर एवं दलित वर्ग आज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो गया है । सूचना के अधिकार दो हजार पांच नहीं ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेहिता और शीघ्रता लगा दी है, जिसमें ग्रामीण लोगों को उन्हें मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी एवं उनके सर्वांगीण विकास के लिए चल रही योजनाओं को जानने में काफी मदद की है । किसने ग्रामीणों के बीच चेतना एवं जागरूकता भी बढाने का कार्य किया है? निष्कर्ष ग्रामीण सामाजिक परिवर्तन तेजी से न होने का कारण क्या भी है कि ग्रामीण चिंता को केवल संख्या में या फिर उदाहरण की चीज समझी जाती है, लेकिन अगर वहीं उन्हें मानव संसाधन में परिणत कर दिया जाए तो वह एक स्थायी परिसम्पत्ति बन जाता है । ऐसा होने पर ही एक समतामूलक समाज का निर्माण होगा और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के सफल क्रियान्वयन को भी समझा जाएगा । पूर्व से अब तक चली आ रही ग्रामीण विकास की योजनाओं के मूल्यांकन भी किए जाने चाहिए ताकि यह पता चल सके की बहन योजना कितने प्रतिशत लागू हो पाई है और ग्रामीण विकास एवं सामाजिक परिवर्तन में कितना योगदान दे पाई । विकास का मतलब हमेशा केवल नई योजना लागू करना ही नहीं होता है बल्कि पहले से चली आ रही योजनाओं की समीक्षा भी इसमें शामिल होती है । साथ ही लोगों की सोच भी इसमें मायने रखती है क्योंकि जब तक लोगों की मानसिकता में परिवर्तन नहीं आएगा, हम या सरकार चाहे कितना भी प्रयास क्यों ना कर ले, विकास संभव ही नहीं है । अतः ग्रामीण जनता को योजनाओं एवं कार्यक्रमों के माध्यम से मान के विकास के पहलुओं, नीति निर्माण एवं क्रियान्वयन कार्यों में सफलता, खुलापन, संवेदनषीलता एवं उत्तरदायित्व प्रतिबद्धता का होना नितांत आवश्यक है ।

38 - ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका विकास साधन के रूप में

ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका, विकास साधन के रूप में समाज निरंतर परिवर्तनशील है । परिवर्तन पहले की अवस्था या स्थिति में अंतर आ जाने का सूचक है । इस दृष्टि से आदिकाल से अब तक समाज की अवस्थाओं में अनेक परिवर्तन हुए जो निरंतर जारी है । दरअसल समाज में दो तरह की प्रक्रिया सदैव चलती रहती है । एक तो समाज को बनाये रखने के लिए सामाजिक रन, सामाजिक नियंत्रन जैसी प्रक्रियाएं काम करती हैं, वहीं दूसरी ओर परिवर्तन की प्रक्रियाएं साथ साथ चलती रहती है । परिवर्तन के कारण और परिस्थितियां समाज के परिवर्तन की दिशा को तय करते हैं । विज्ञान के आविष्कारों ने परिवर्तन को और अधिक बढाया और समूची दुनिया में विज्ञान और प्रौद्योगिकी तीव्र सामाजिक परिवर्तन के लिए उत्तरदायी कारक के रूप में उभर रही है । प्रस्तुत शोधपत्र में ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका विकास साधन के रूप में का अध्ययन किया गया है । ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका विकास के साधन के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता होती है, किंतु अकुशल मानवीय संसाधन आर्थिक विकास के लक्ष्य को पूरा नहीं कर सकता है । यदि प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों का समुचित दोहन हो तो विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है । सामाजिक परिवर्तन के नवीनतम स्रोतों में संचार की नई तकनीक महत्वपूर्ण कारक है । संचार क्रांति कृषि क्रांति की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है । संचार के क्षेत्र में ते प्रयोग इस प्रकार हैं एक । किसान कॉलसेंटर सरकार की ओर से किसान कॉल सेंटर खोले गए हैं, जहाँ फोन करके किसान अपनी समस्या का समाधान पा सकते है । किसान कॉल सेंटरों की शुरुआत वर्ष दो हजार चार में हुई थी । आज भारत में करीब एक सौ पैंतालीस किसान कॉल सेंटर कार्य कर रहे हैं । पहले इनका संचालन सिर्फ आठ महानगरों में किया गया था, लेकिन बाद में इसकी उपयोगिता को देखते हुए इसका विस्तार कर दिया गया । दो ई चौपाल भारत के किसानों के लिए जून दो हजार से चौपाल का भी आयोजन किया जा रहा है । इस परियोजना का संचालन उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, हरियाणा एवं उत्तराखंड में क्या जा रहा है । देश में करीब चालीस हजार से अधिक काम की उस से जुड चुके हैं । किसान इनकी उसको के जरिए अपनी समस्या का समाधान पा रहे हैं । इसके अलावा जाग्रति की सेवा, जनमित्र, ग्राम दूध, ज्ञान, दूध, लोकवाणी, लोकमित्र, आकाशगंगा आदि योजनाएं अलग अलग राज्यों में ई सेवाएं प्रदान कर रही है । तीन शैक्षणिक संचार माध्यम सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में महिलाओं, विकलांगों और करीब पिछडे हुए बच्चों के लिए दूरदर्शन के माध्यम से शैक्षणिक का प्रसारण किया जाता है । ज्ञानदर्शन चैनल, एफएम रेडियो से ज्ञान पाने के माध्यम से विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं । चार ऍम संपर्क में सहायक आज प्रत्येक व्यवसायिक संगठन के लिए गया । आवश्यक है कि वह ग्रामीण समाज में अपना स्थान बनाए । निगम, अर्थशास्त्री, संस्थान या उपक्रम उद्योग में जनसंपर्क के महत्व को समझा जा रहा है । आज जनसंपर्क कार्यकर्ता प्रत्येक विभागों में देखे जा सकते हैं । स्पष्ट है कि संचार साधन इसके तो महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । पांच । ग्रामीण कन्या युवक वैवाहिक वेबसाइट्स ग्रामीण समाज पर संचार साधन का केवल आर्थिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य सुविधा की दृष्टि से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है बल्कि ग्रामीण जान के मनोवैज्ञानिक सामाजिक पक्षों को भी संभाल रहा है । ग्रामीण युवक युवती के विवाह के लिए विभिन्न वेबसाइट्स हैं जो उनके बायोडेटा उपलब्ध करवा दी है । इससे शिक्षित ग्रामीण कन्याओं को भी सामाजिक जीवन में आगे बढने का अवसर प्राप्त हो रहा है ।

39 - संचार व शिक्षा से आया ग्रामीण भारत में समाजिक बदलाव

संचार शिक्षा से आया ग्रामीण भारत में सामाजिक बदलाव आजादी के कई सालों बाद भी भारत वर्ष के कुछ आबादी क्षेत्र ऐसे हैं, जिन्हें शिक्षा के समान अधिकार से वंचित रखा गया । समाज के कई निचले तबकों तक शिक्षा की रोशनी को नहीं पहुंचने दिया गया ताकि वे अज्ञान के अंधेरे में रहे तथा उन पर आधिपत्य जताना आसान है । अपने वैश्विक शासन के दौरान भी खासतौर से दलितों और महिलाओं में शिक्षा की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया, जिसके फलस्वरूप देश आजाद होने के बाद भी हमारे नेताओं के सामने विशाल निरक्षर आबादी को शिक्षित कर उसके आर्थिक और सामाजिक विकास की बडी चुनौती थी । तब से अबतक साक्षरता और शिक्षा के प्रसार की विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की बदौलत स्थिति में काफी बदलाव आया है । शिक्षा के प्रसार ने महिलाओं को पुरुषों, वंचित तबकों को सवालों और ग्रामीणों को शहरियों से बराबरी करने का हौसला, आत्मविश्वास और अवसर दिया है । इस तरह क्या है लिंग धर्म, जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर भेदभाव को मिटाकर समाज में समानता लाने में बेहद मददगार साबित हुआ है । किसने खास तौर से महिलाओं को घर की दीवारों के बंधन से आजाद कर परिवार, समाज और देश के विकास में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने का अवसर मुहैया कराया है । इससे लोग खुदरा खरीदारी कर रहे हैं । बैंक का बिना पैसों की निकासी की सुविधा मिलने से समय की बचत के साथ साथ बिचौलियों के पंजे से भी ग्रामीणों को छुटकारा मिला है । आज की कॉमर्स की सुविधा का उपयोग करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में लोग घर बैठे मनचाहा उत्पाद खरीद रहे हैं । जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है और सस्ती दर पर विविध उत्पाद उपलब्ध हो पा रहे हैं । सूचना और प्रौद्योगिकी से ग्रामीण युवाओं को फायदा आज सूचना और प्रौद्योगिकी ने शिक्षा की प्रक्रिया को सरल बना दिया है जिससे लोगों का जीवन आसान हो गया है । नए जमाने की शिक्षा का एक अहम हिस्सा मोबाइल कंप्यूटर लैपटाॅप है जिसमें पुरानी शिक्षा पद्धति की परिभाषा को बदल दिया है । आज बैंक से पैसा निकालने के लिए ना तो किसी को बैंक खुलने का इंतजार करना पडता है और न ही लंबी लाइन में लगने की जरूरत होती है । आज की आधुनिक शिक्षा भी सीमा से परे हो गई है । इसकी उपलब्धता चौबीस घंटे और तीन सौ पैंसठ दिन हो गई है । आधुनिक संचार शिक्षा प्रणाली ग्रामीण युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है । ग्रामीण मोबाइल, इंटरनेट और एटीएम का धीरे धीरे उपयोग करने के आदी हो रहे हैं । सच कहा जाए तो अद्यतन संचार तकनीक ने विश्व को एक गांव बना दिया है । चाहिए ग्रामीण क्षेत्र का समावेशी विकास भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के बाद ही आ सकती है । सरकार इस तथ्य से भलीभांति अवगत है । लिहाजा वह बैंकों की मदद से गांव में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना चाहती है । इस्काॅन दूसरी सरकारी योजनाओं के माध्यम से कृषि, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं । दरअसल सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए आधुनिक सुविधाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाना चाहती है ताकि ग्रामीण क्षेत्र का समग्र विकास हो सके । जाहिर है जिससे ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार का सृजन होगा और ग्रामीण रोजगार की तलाश में शहर के अब परदेश पलायन करने के लिए मजबूर नहीं होंगे । गांव का पैसा कम ही रहने से वहाँ का बेहतर विकास हो सकेगा तो गांव में वहाँ के लोगों की हर समय उपस् थिति से सामाजिक स्तर में भी आमूलचूल परिवर्तन आएगा । संचार शिक्षा से बदलेगी ग्रामीण भारत की सूरत भारत एक विकासशील देश है । यानी विकास के बहुत सारे मानक अभी भी यहाँ अधूरे हैं । समस्या गरीबी, स्वास्थ्य एवं शिक्षा को लेकर सबसे ज्यादा है क्योंकि इनकी वजह से आबादी का एक बडा तबका मुफलिसी मैं जीवन जी रहा है, जब की लोकतांत्रिक एवं कल्याणकारी देश होने के नाते सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इन समस्याओं से हम जनता को निजात दिलाएगा । निष्कर्ष कहा जा सकता है कि ग्रामीण भारत में सामाजिक सुरक्षा एवं बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना सामाजिक बदलाव और देश में समावेशी विकास नहीं किया जा सकता है और ऐसा करने के लिए हर घर को संचार के माध्यमों से जोडना जरूरी है । इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में भी हमारे देश में करोडों लोगों को दो वक्त की रोटी नसीब में नहीं है । साफ है, गरीबों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाये बिना भारत को सामाजिक रूप से सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता है । समस्या बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करने की भी है । इस संदर्भ में संचार व शिक्षा में व्यापक सुधार करने की जरूरत है । पुरानी शिक्षा पद्धति मैं संरचना में परिवर्तन भी आवश्यक है ।

40 - ग्रामीण विकास में ई-प्रशासन और टेक्नोलोजी की भूमिका - एक अध्ययन

ग्रामीण विकास में प्रशासन और सूचना टेक्नोलॉजी की भूमिका एक अध्ययन भारत गांवों में बसता है, जहाँ देश की सत्तर प्रतिशत जनता निवास करती है । महात्मा गांधी का विचार ताकि जब तक गांव में शहरों जैसी सुविधाएं विकसित नहीं की जाएंगे, तब तक समग्र भारत का विकास नहीं होगा । इसी बात को ध्यान में रखकर ग्रामीण भारत के विकास के लिए सूचना तकनीक का प्रयोग कर कई नए प्रयोग किए जा रहे हैं । भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम का भी मानना था कि गांव में शहरी सुविधाएं जुटाना ग्रामीण विकास की कुंजी है, जो कि वास्तव में गांवों की दशा सुधारकर ग्रामीण शहरी असंतुलन को भी दूर किया जा सकता है । इस कार्य में सूचना टेक्नोलॉजी की भूमिका महत्वपूर्ण है । प्रशासन के लाभ दो प्रकार से प्राप्त किये जा सकते हैं । ग्रामीण युवाओं को रोजगार, किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य और ग्रामीण अधोसंरचना में सुधार कर आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है । वहीं सामाजिक क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, हम सरकारी नीतियों का लाभ जनता तक पहुंचाकर सामाजिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है । सूचना प्रौद्योगिकी से कुछ प्रशासनिक कार्य किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण विकास में सरकार मत परिवर्तन हो रहे हैं । कृषि किसानों को सूचनाओं, आवश्यक उपकरण एवं सेवाओं के माध्यम से उत्पादन पढाने का कार्य किया जा रहा है जिससे एक और किसानों की आय बडी है वही उनका रहने का स्तर भी बडा है । इस तकनीक के जरिए टेलीफोन, कंप्यूटर, ऍम टीवी के माध्यम से किसानों तक आवश्यक जानकारी तत्काल पहुंच जाती है । जिससे नई कृषि यंत्रों की जानकारी देकर कृषि कार्यों में मशीनों के उपयोग को बढावा दिया जाता है । साथ ही कॉल सेंटर हेल्पलाइन और विशेषज्ञों की सलाह भी ले सकते हैं । जैसे उत्पादन पढने के साथ साथ उपज की बिक्री की जानकारी भी आसानी से एक कृषि से प्राप्त कर रहे हैं कि प्रशासन कृषि के साथ साथ पंचायत के कामकाज को कारगर और सुचारू बनाने के लिए प्रशासन को ग्रामीण विकास का हथियार बनाया गया है । इसके अंतर्गत भूमि रिकॉर्ड का कम्प्यूटरीकरण, राशन कार्ड, जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र एवं रोज की कार्य ही प्रशासन के द्वारा किए जा रहे हैं । ग्रामीण विकास की योजनाओं को भी प्रशासन से जोडा गया है । सब दो हजार एक कोई प्रशासन वर्ष के रूप में मनाया गया । मोबाइल फोन बाॅन्ड के बढते प्रयोग से बडे पैमाने पर रोजगार और बुनियादी ढांचे में सुधार कर ग्रामीण विकास शीघ्र कर शहरों के समान सुविधाएँ प्रदान करने का प्रयास सरकार द्वारा किया जा रहा है । ई चौपाल गांवों की समस्याओं का हल करने के लिए जून दो हजार में ई चौपाल योजना बनाई गई । सेवा का उद्देश्य किसानों को दलालों और बिचौलियों से मुक्त करवाकर कृषि यंत्र, मौसम, फसल तथा कृषि संबंधी अन्य जानकारियां उपलब्ध करवाना है । ये चौपाल के सेवा केंद्रों में किसानों को उपयोगी जानकारी दी जाती है । वहीं दूसरी और उनकी समस्याओं के समाधान का प्रयास भी किया जाता है । छह हजार पांच सौ सेवा केंद्रों के माध्यम से चालीस हजार गांवों में चालीस लाख से भी अधिक किसान सुविधा का लाभ उठा रहे हैं । इस योजना को कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं । जागृती की सेवा इस योजना के द्वारा जनसाधारण तक सूचना तकनीक पहुंचाना है । यह सेवा ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि प्रशासन यात्रा संबंधी सुविधाएं एवं वित्तीय प्रबंधन की जानकारी देती है । इसे किसी भी भाषा में परिवर्तित किया जा सकता है । की सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में वित्त प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाते हैं । इस योजना का मुख्य उद्देश्य करीब एक हजार ग्रामीण युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करना है । ज्ञान दो या इंटरनेट आधारित पोर्टल है, जिसका उद्देश्य सूचना तकनीक के प्रयोग से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीण और वंचितों को प्राप्त हो सके । यह सेवा गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों से जुडी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाती है । यह सेवा केंद्र ग्राम ऑनलाइन हिंदी भी सिखाती है । इन परियोजनाओं की सफलता बताती है कि सूचना तकनीक के प्रयोग से ग्रामीण भारत में विकास हो रहा है जिससे उनके उत्पादक तब बढ रही है । स्थानीय समस्याओं का समाधान और व्यवहारिक सुझाव ग्रामीण परिदृश्य बदल रही है जिससे ग्रामीण समाज में खुलापन, पारदर्शिता, जनभागीदारी जब सस्ती कार्यकुशल सेवा प्रदान कर विकास की ओर अग्रसर हो सकते हैं ।

41 - ग्रामीण के विकास में आधुनिक संचार माध्यमों की भूमिका

ग्रामीण भारत के विकास में आधुनिक संचार माध्यमों की भूमिका भारत गांवों का देश है । भारत की लगभग साठ प्रतिशत जनसंख्या गांव में निवास करती है । इसलिए ग्रामीण विकास के बिना भारत का विकास अधूरा है । ग्रामीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है कि भारत के सभी गांवों तक आधुनिक सूचना एवं संचार के माध्यम पहुंचे । यह कार्य बिना किसी क्रांति के संभव नहीं हो सकता । पिछले कुछ दशक से एक बदलाव आया है, जिससे एक ऐसी ही क्रांति होने की आशा जागृत हुई है । इस बदलाव का कारण आधुनिक सूचना एवं संचार के माध्यमों का तीव्र गति से विकास होना है । ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, ऑनलाइन लेक्चर, मोबाइल आदि तकनीकों के आने के बाद ग्रामीण जनता की मानसिकता में परिवर्तन आ रहा है । जिन ग्रामीण क्षेत्रों में इन संचार साधनों का प्रयोग होने लगा है, वहाँ के लोगों में चीजों को देखने और समझने का दृष्टिकोण बदल रहा है । विश्व के कई विकासशील देशों में इन संचार सुविधाओं का उपयोग कृषि में तथा अन्य छोटे बडे कामों में करने के कारण खेती एवं उससे संबंधित सभी उद्योग धंधों में अभूतपूर्व प्रगति दिखाई दी है । लेकिन अमेरिका और उत्तर अमेरिका देशों के किसान एवं ग्रामीण जनता ने आधुनिक संचार के माध्यमों से खेती जब हार्टिकल्चर में तीव्र गति से प्रगति की है तथा अपने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त किया है । भारत में भी आप किसान और ग्रामीण जन संचार के साधनों से जुडकर आर्थिक विकास की ओर अग्रसर हो रहे हैं । कुल मिलाकर यदि देखें तो आधुनिक संचार माध्यमों के विकास से गांव में बदलाव की लहर देखी जा सकती है परंतु अभी भी कई गांव पे चली एवम संचार साधनों की सुविधा से वंचित है । वही ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त करने के लिए सरकार को इस दिशा में बहुत अधिक कार्य करने की आवश्यकता है, जिससे ग्रामीण भारत में आधुनिक संचार का विकास हो सके ।

42 - ग्रामीण सम्प्रेषण : व्यावहारिकता एवं व्यावसायिकता का आधार

ग्रामीण संप्रेषण, व्यवहारिकता एवं व्यवसायिकता का आधार संप्रेषण ने व्यावसायिक जगत को अत्यधिक गतिशील बना दिया है । सम्प्रेषण ही साधन है, जिसके द्वारा प्रबंध किए एवं प्रबंध की अस्तर के कार्यों को क्रियान्वित एवं अनिष्पादित किया जाता है । व्यावसायिक संप्रेषण प्रबंधकों के लिए एक कडी का कार्य करता है, जिसे निर्णायक, रिया, प्रबंधकीय कार्य नियोजन से नियंत्रण तक के लिए क्या है? आधार प्रदान करता है । संप्रेषण का माध्यम पत्राचार, वार्तालाप, रेडियो, टेलीविजन, दूरभाष अधिक कुछ भी हो सकते हैं । कंप्रेशन एक व्यक्ति से दूसरे को संदेश दे रहे एवं पारस्परिक समझ उत्पन्न करने की प्रक्रिया है । इसके अंतर्गत लक्ष्य को प्राप्त करने के भरसक प्रयास किए जाते हैं । संप्रेषण की प्रकृति सूचना एवं अंतर्संबंधों के आदान प्रदान करने की होती है । सम्प्रेषण स्वाभाविक रूप से एक जन्मजात प्राकृतिक गुण है । इसके अंदर का जन्म, मृत्यु आदि सभी सम्मिलित है, लेकिन बिना वैज्ञानिक आधार के यह पूर्ण नहीं हो सकता । संप्रेषण के सिद्धांत अथवा विचारधारा सार्वभौमिक प्रकृति की होती है । संप्रेषण की सर क्या पता का सिद्धांत संप्रेषण की महत्वपूर्ण विशेषता है । सम्प्रेषण समाज के प्रत्येक व्यक्ति में समाहित है । अतएव समाज के प्रत्येक व्यक्ति की अनिवार्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संप्रेषण रूपी तंत्र की आवश्यकता होती है । संप्रेषण प्रक्रिया में सदैव दोनों तत्व पाए जाते हैं । कलाई कैसा कौशल है, जैसे अभ्यास हमारा किया जा सकता है और विज्ञान किसी विषय विशेष से संबंधित कम पद ज्ञान को सैद्धांतिक दृष्टिकोण के आधार पर अध्ययन किया जा सकता है । ऍम प्रेशन एक मानवीय प्रक्रिया है, क्योंकि इसके दोनों पक्ष प्रेषक एवं प्राप्त करता सामाजिक प्राणी होते हैं । इसमें किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न नहीं होता है, जिससे आवश्यक प्रतिपल प्राप्त किया जा सकता है । संप्रेषण का उद्देश्य आदेशों को उन व्यक्तियों तक पहुंचाना होता है, जिससे मैं संबंधित होता है । जिन व्यक्तियों से कोई संबंध नहीं होता है, उन व्यक्तियों को संप्रेषण करना आवश्यक नहीं होता है । संप्रेषण का उद्देश्य उपक्रम के विभिन्न विभागों में समन्वय स्थापित करना होता है तथा कर्मचारियों के साथ सीधा संपर्क स्थापित करना ही इसका दिए होता है, जैसे उनके मनोबल में वृद्धि होती है । संप्रेषण के द्वारा कर्मचारियों का विकास किया जाता है, क्योंकि उन्हें उत्तम से संबंधित विभिन्न जानकारियां दी जाती है, जिससे उनके ज्ञान में वृद्धि होती है । संप्रेषण का मुख्य उद्देश्य पूर्व निर्धारित नीतियों एवं निर्देशों को क्रियान्वित करना होता है या विचारों को कार्यों में परिवर्तित करता है । संप्रेषण कि विधेयक मौखिक अथवा लिखित संप्रेषण अभिव्यक्ति के आधार पर संप्रेषण लिखित अथवा मौखिक हो सकता है । सूचना की प्रकृति के आधार पर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यह सूचना लिखित अथवा मौखिक संप्रेषित की जा सकती है । मौखिक संप्रेषण से समय धन की बचत होती है तथा या अधिक प्रभावपूर्ण होता है, क्योंकि इसमें संदेश स्पष्ट, सरल, प्रभावपूर्ण फिर से दिया जाता है, जिससे उत्तम में उत्पादकता बढती है परन्तु मौखिक संप्रेषण का यहाँ दोष भी है कि इसमें अस्पष्टता हो सकती है तथा ऐसी सूचना की विश्वसनीयता या प्रमाण ता को साबित नहीं किया जा सकता है । यह व्यवस्था भविष्य के संदर्भ के लिए अनुपयुक्त रहती है । अधोमुखी एवं उधर मुख्य संप्रेषण अधोमुखी संप्रेषण पद्धति से संप्रेषण उच्च प्रबंध से कर्मचारियों की ओर जाता है । इसमें सूचना का संप्रेषण लेकिन तथा मौखिक हो सकता है, परंतु स्केलर श्रृंखला के कारण बीच के प्रबंध के अनेक स्तर होते हैं, जिनमें सावधानी बरतनी चाहिए की सूचना सही रूप में कर्मचारी वर्ग तक पहुंचे । उधर, मुख्य संप्रेषण पद्धति में सूचना नीचे से ऊपर की ओर जाती है । इसमें कर्मचारी वर्ग अपनी प्रार्थना, शिकायत, सुझाव आदि उच्च प्रबंध तक भेजते हैं । इसमें संदेश लिखित या मौखिक हो सकता है । कुछ परिस्थितियों में शक्ति जे संप्रेषण की पद्धति भी अपना ही जाती है जहाँ एक ही स्तर के प्रबंधकों के बीच सूचना का संप्रेषण किया जाता है । संप्रेषण विश्लेषण से प्राप्त निष्कर्ष यह दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मध्य विचारों के आदान प्रदान की एक प्रक्रिया है । यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को विचारों अथवा सूचना पहुंचाने का साथ होता है । संप्रेषण में संदेश प्रेशन के सभी साधनों का प्रयोग किया जा सकता है । यह स्थिति पर निर्भर करता है कि कौन से साधन का प्रयोग किया जाएगा । इसमें सोचना एवं समझ दोनों को सम्मिलित किया जाता है । एक व्यापक शब्द हैं इसके क्षेत्र में केवल सूचना नहीं, मरन विचार, आदेश, निर्देश, सुझाव, शिकायत, परामर्श, हत्यादि पे सम्मलित किए जाते हैं । संप्रेषणीय कैसी प्रक्रिया है जो निरंतर चलती रहती है । इसमें सूचना देने वाला पक्ष सूचना देता है तथा इसका प्राप्त करता अपनी प्रतिक्रिया सूचना देने वाले तक पहुंचाता है । संप्रेषण की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि संदेश कितने कौशल रूप से भेजा गया है तथा संप्रेषण ग्रहण करने वाले ने इस कितने सही रूप में ग्रहण किया है । एक ऐसा व्यक्ति होता है जो सूचना परिषद करने का इच्छुक होता है । एक दूसरा व्यक्ति होता है जिसे सूचना प्रेषित की जाती है, प्राप्त करता जैसे की सूचना प्रेषित की गई है । आंशिक या पूर्ण रूप से संदेश को समझ गया है । प्राप्त करता सूचना को महत्व देता है । सूचना देने वाले हम सूचना प्राप्त करने वाले दोनों व्यक्ति एक दूसरे की भाषा समझते हो अथवा उनके पास एक दूसरे की भाषा समझने का साधन उपलब्ध हो । यदि संघ के द्वारा संप्रेषण क्या जाना है तो सूचना देने वाला एवं प्राप्त करने वाला दोनों ही व्यक्ति एक दूसरे के संकेतों को समझते हैं ।

43 - ग्रामीण समाज के विकास में विज्ञान संचार का योगदान

ग्रामीण समाज के विकास में विज्ञान, संचार का योगदान, संचार जिसमें सोचना या जानकारी को कम से कम समय में बस सही अर्थों में सूचना प्राप्त करता के पास पहुंचाने का प्रयास किया जाता है, उसे एक अच्छे संचार की श्रेणी में रखा जाता है । सूचना को तीव्र गति से पहुंचाने की तकनीक के आविष्कार को ही विज्ञान संचार कहा जा सकता है अर्थात सूचना को तीव्र गति से पहुंचाने की प्रतिस्पर्धा आवश्यकता नहीं है । विज्ञान संचार का विकास किया है और रेडियो, टेलीफोन, टेलीग्राम, टेलीविजन, कंप्यूटर, इंटरनेट, मोबाइल बहुत से पर सोशल मीडिया जैसी संचार की नवीन तकनीकों का आविष्कार किया है । इस विज्ञान संचार ने मानव जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है । छुआछूत, ऊंच नीच की भावना का स्थान समरूपता समरस्ता की संस्कृति ने ले लिया है । पिछडेपन वह धीमी गति के पर्याय बन चुके ग्रामीणों का जीवन विज्ञान संचार के कारण संचार की गति की ही भांति आधुनिक बत्तीस हुआ है । विज्ञान संचार से ग्रामीण समाज में आया परिवर्तन पिछले दिनों अप्रैल में जारी की गई भारत के इंटरनेट और मोबाइल संघ और भारतीय बाजार शोध कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल ग्रामीण भारत में सोशल मीडिया का प्रयोग शत प्रतिशत बढा और सवा करोड उपभोक्ताओं से पढकर गांव में इंटरनेट और सोशल मीडिया के उप्भोक्ता ढाई करोड हो गए । इंटरनेट और सोशल मीडिया में गांवों की इस भागीदारी का असली श्रेय भारत में फैलते हुए मोबाइल उद्योग को जाता है जिसकी वजह से आज भारत में कुल मोबाइल उपभोक्ताओं की संख्या सत्तर करोड से अधिक हो चली है और ग्रामीण क्षेत्रों की हिस्सेदारी बयालीस करोड से कुछ ज्यादा है । मोबाइल संप्रेषण का सबसे अधिक फायदा ग्रामीण समाज के लोगों को हुआ है क्योंकि इस साधन के लिए उन्हें कम तक टेलीफोन के तार पहुंचाने का इंतजार नहीं करना पडता है और कम लागत कम किराये पर आसपास के गांवों और शहरों के लोगों से संपर्क करने की सुविधा उन्हें मिली है । एफएम और सामुदायिक रेडियो के प्रसार ने भी गांव के विकास में बहुत मदद की है । पिछले बार जब पूरे भारत को टेलीविजन से जोडने के लिए प्रयास किए गए थे तब लोगों तक सरकार और विकास से जुडी सूचनाएं गांव गांव तक पहुंचाने के लिए न जाने कितने हाइपावर और लो पावर ट्रांसमीटर लगाए गए थे और इनके लगने के कुछ वर्ष बाद ही उपग्रह और केबल टीवी का जिस तरह से विस्तार हुआ उसने भारत के शहरों और गांवों में सूचना, शिक्षा और मनोरंजन का माहौल ही बदल दिया है । संचार की पडती तकनीक का ही परिणाम है कि आज ग्रामीण क्षेत्र का बच्चा टीवी पर टांस गायन अभिनय की प्रतिस्पर्धा में आज अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने में सक्षम हुआ है । आज विज्ञान संचार ने बैंकिंग की प्रक्रिया को सरल बना दिया है जिससे ग्रामीणों का काम आसान हो गया है । नए जमाने की बैंकिंग का एक अहम हिस्सा मोबाइल, एटीएम एवं इंटरनेट बैंकिंग है जिसने पुरानी बैंकिंग की परिभाषा को बदल दिया है । आज बैंक से पैसा निकालने के लिए ना तो किसी को बैंक खुलने का इंतजार करना पडता है और न ही लंबी लाइन में लगने की जरूरत होती है । आज के बैंकिंग देशकाल की सीमा से परे हो गई है । ग्रामीण मोबाइल इंटरनेट और एटीएम का धीरे धीरे उपयोग करने के आदी हो रहे हैं अर्थात ग्रामीण ग्राहक किसी भी समय विश्व के किसी भी कोने से अपने बैंकिंग जरूरतों को पूरा कर सकता है । जिससे ग्रामीणों का बहुमूल्य समय बच रहा है । जिसका उपयोग ग्रामीण जरूरी कार्यों को निपटाने अपने परिवार पर दोस्तों के लिए कर रहे हैं । विज्ञान संचार के माध्यम से ग्रामीण समाज की यह तस्वीर बदलने के लिए केंद्र सरकार भी वचनबद्ध है । यही वजह है कि केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी की इस ताकत को समाज के जीवन स्तर को उन्नत और राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की है । ग्रामीण भारत के बदलते सामाजिक परिवेश में डिजिटल इंडिया एक क्रांति के रूप में अग्रसित होने की संभावना है । डिजिटल इंडिया के माध्यम से गांवों के लोगों में संचार क्रांति, वित्तीय समावेश आदि क्षेत्रों में दूरगामी बदलाव आने की भी संभावनाएं हैं । निष्कर्ष विज्ञान संचार के कारण मोबाइल इंटरनेट के भारतीय गांवों में प्रसार की वजह से ग्रामीण समाज का आधुनिकीकरण हुआ है और पिछली तथा अन्य फ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के साथ मिलकर जनसंचार माध्यमों ने वहाँ के सामाजिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । भारत सरकार ने भी इन परिवर्तनों का पूरा लाभ उठाते हुए भी प्रशासन पारदर्शिता और सुशासन को ध्यान में रखते हुए ऐसी अनेक योजनाएं व कार्यक्रम चलाए हैं, जिनकी मदद से ग्रामीणों की सरकार तक सीधी पहुंच हो सके और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वयं के जीवन स्तर में सामाजिक स्तर में सुधार कर विकास की ओर अग्रसर हो

44 - ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका

ग्रामीण समाज में संचार की भूमिका वर्तमान समय में भारत और इंडिया के बीच विभिन्न स्तरों पर विषमता की गहरी खाई गया बन चुकी है । ग्रामीण भारत का एक बडा हिस्सा अभी भी उन्नीसवी सदी में घूम रहा है । वहाँ पे दिमाग, बाते, योगी मूल्य एवं संस्कार आधुनिक चेतना को चिढा रहे हैं । ग्रामीण समाज में लोकतांत्रिक संस्थाएं एवं संवैधानिक नियम स्टोरी हुई अवस्था में मौजूद हैं । ऐसी स्थिति में ग्रामीण परिवेश में मीडिया की भूमिका चुनौतीपूर्ण हो जाती है । मीडिया जो प्रारंभ में एक मिशन हुआ करता था आज एक व्यवसाय का रूप ले चुका है । जहाँ तक मीडिया की भूमिका का प्रश्न है तो इसका कोई सीमांकन नहीं किया जा सकता । यह शीर्ष सत्ताधीश मैं सामान्य नागरिक, समृद्धतम, व्यक्ति, मान, निर्धनतम व्यक्ति, मालिक, मजदूर तथा विद्वान बने रक्षा के बीच एक ही समय पर एक साथ सीटों की भूमिका निभाता है क्योंकि मीडिया समय समय पर समाज बनाते व्यवस्था का पोस्टमार्टम करता रहता है इसलिए इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तथा लोकतंत्र का पहरुआ कहकर पुकारा गया है । निसंदेह मीडिया ने ग्रामीण समाज के जनता झिझक, संकोच, इलाज एवं भाई की दीवारों को तोडने में काफी हद तक प्रभावशाली भूमिका का निर्वाहन किया है । इसने ग्रामीण समाज में अंधविश्वास, अस्पृश्यता, निरक्षरता, जातिवाद, ढूंढ, हत्या, दहेज प्रथा, लैंगिक गैरबराबरी जैसी मानवता विरोधी प्रवृत्तियों के विरोध जनजागृति विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है । इसके अलावा इसमें पर्यावरण प्रदर्शन, स्वच्छ पेयजल, आवाज व्यवस्था, शिक्षा के अधिकार, बाल अधिकार जैसे मुद्दों को स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक फोकस में ला दिया है । इसी परिप्रेक्ष्य में ग्रामीण पत्रकारिता याॅर्क ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे किसानों में जागरूकता का संचार करने का उत्तम माध्यम साबित हुई है । अतीत में आकाशवाणी से प्रसारित नंदाजी महाराजे कार्यक्रम तथा दूरदर्शन से प्रसारित कृषि दर्शन जैसे कार्यक्रम होने ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे किसानों को कृषि करने की आधुनिक वहाँ उन्हें तकनीक से परिचित कराया है । वर्तमान समय में प्रत्येक प्रदेश में खेती बारी से संबंधित पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन और प्रसार संख्या बढ रही है । इनमें से प्रमुख है एक शेतकरी पुणे, महाराष्ट्र से दो शरण बेटा, तीन विश्व कृषि संचार कोटा जहाँ कृषि सका, मुंबई पांच कृषि बाजार समाचार पुणे छह कृषि परिदृश्य मुंबई आदि । इसके अलावा दक्षिण भारत के अनेक दैनिक पत्रों के उदाहरण हमारे सामने हैं, जिसमें कृषि और कृषकों से संबंधित उपयोगी समाचारों का विवरण छपा रहता है । इसी तरह मध्यप्रदेश में चले नर्मदा बचाओ आंदोलन पंचायतीराज आंदोलन स्वच्छता अभियान तथा ग्राम सरकार अभियान को भी मीडिया ने पर आप स्पेस क्या कवरेज दिया है । अब तो अखबार चला स्तरीय अस्पतालों का स्तरीय संस्करण भी निकाल रहे हैं, जिसमें स्थानीय स्तर की खबरों को यथेष्ट महत्व दिया जाता है । इस प्रकार हम देखते हैं कि मीडिया ने ग्रामीण व्यक्ति को जागरूक, सूचना संपन्न तथा गतिशीलता से लैस करने का कार्य किया है । सराज तहत मीडिया वर्तमान समय में प्रभावों का जनक प्रभावों का पोशाक तथा प्रभावों का प्रतिनिधि बनकर एक साथ उड रहा है । इसमें ग्रामीण समाज, कस्बाई समाज, शहरी समाज के महानगरीय समाज के मध्य ज्ञान पर सूचना दूरियों को घटाने के साथ साथ नए पोषित जो को विकसित करने जैसा महत्वपूर्ण कारण क्या है । आज संपूर्ण विश्व आधुनिक संचार साधनों के कारण ग्लोबल विलेज का रूप धारण कर चुका है, जहाँ पर सब परस्पर संबंधित हैं और सभी का उत्थान पता नहीं एक दूसरे पर आश्रित है ।

45 - ग्रामीण समाज और संचार बदलते आयाम

ग्रामीण समाज और संचार बदलते आयाम भारत गांव का देश है तथा देश की आत्मा गांवों में निवास करती है । अतः देश को प्रगतिशील बनाने के लिए गांवों का विकास करना अत्यंत आवश्यक है । गांवों के विकास के इस सोपान में संचार क्रांति का विशेष महत्व है जिसके माध्यम से आज कोई भी व्यक्ति ब्रह्मांड की किसी भी जानकारी को कभी भी प्राप्त कर सकता है । इस नवीन तकनीक ने विश्व समुदाय को विचार विमर्श का एक एकीकृत मंच प्रदान किया है । संचार के क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धति ने इस युग को सूचना क्रांति युग के रूप में परिभाषित किया है । अनेक क्षेत्रों जैसे व्यवसाय, उद्योग, वाणिज्य के विकास तथा संचार प्रगति में इसका गहरा संबंध है क्योंकि व्यवसायिक विकास के अनुरूप ही संचार माध्यमों के नवीन स्वरूपों की खोज उनका विस्तार होता है । जैसे शताब्दी के अंत तक प्रत्यक्ष वार्ता अथवा हस्तलिखित पत्र ही संचार के पर्याय माने जाते थे । उन्नीसवीं शताब्दी में रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्रों, पत्र पत्रिकाओं आदि साधनों का प्रयोग होने लगा तथा उन्नीसवी शताब्दी के उत्तरार्ध में इलेक्ट्रॉनिक टाइपराइटर, वाॅ पाए कंप्यूटर आदि तकनीकों ने संचार की प्रणाली को काफी शक्तिशाली, तीव्र महत्वपूर्ण बनाया है । ई चौपाल एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें निजी कंपनियों, औद्योगिक विकास की संस्थाओं व राज्य सरकार का एक ऐसा नेटवर्क है जो इंटरनेट के माध्यम से गांवों में ही किसानों को बाजार की मांग, कृषि से संबंधित विभिन्न तकनीकों, मत्स्यपालन, मुर्गी पालन, रेशम के कीडों के उत्पादन, विपणन, पशुपालन आदि से संबंधित जानकारी प्रदान कर रहा है । इंटरनेट के माध्यम से इस तरह के समस्त क्रियाकलापों की जानकारी ग्रामीण लोगों को तहसील स्तर पर ब्लॉक स्तर पर उपलब्ध कराई जाती है ताकि उनका सार्थक अव्यवहारिक उपयोग हो सके, जिससे कृषि कार्यों में आवश्यक सहायता मिलती है । आज ॅ, बीमार के जैसी सुविधाओं से ग्रामीण कृषकों को अच्छा लाभ प्राप्त हो रहा है तो हम इसके द्वारा कृषि उत्पादकता को बढाया जा सकता है, क्योंकि आज ग्रामीण जनता मुख्यतः कृषि पर ही निर्भर हैं । वह कृषि के विकास के फलस्वरूप ग्रामीण विकास संभव है । कृषि के क्षेत्र में विभिन्न अनुसंधान कार्यों पर तकनीकों को ग्रामीण जनता तक पहुंचाने में संचार सुविधा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । ई कॉमर्स आज विश्व भर में व्यापार वाणिज्य के विकास की एक कुशल प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से किसान एवं ग्रामीण व्यवसाई घर बैठे ही कुशलतापूर्वक लेन देन व्यवसाय शीघ्रता में सफलता से कर रहे हैं । भविष्य में ई कॉमर्स के फलने फूलने की संभावनाएं भी अधिक हैं । प्रशासन आज शासन की विभिन्न कार्ययोजनाओं व नीतियों को जनसामान्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । इसके द्वारा आर्थिक विकास को गति मिल रही है । प्रशासन के द्वारा प्राप्त लाभों को दो रुपए में देखा जा सकता है । सामाजिक एवं आर्थिक लाभ प्रशासन के द्वारा प्राप्त सामाजिक लाभ के अंतर्गत कृषि, स्वास्थ्य, मौसम, वित्त, शिक्षा, बीमा, अनुसंधान क्षेत्र कि नवीन जानकारियों, प तकनीको आदि से संबंधित संपूर्ण जानकारियां सामान्य नागरिक तक पहुंचाई जाती है । प्रशासन के द्वारा आर्थिक लाभ में मुख्यतः रोजगार, कृषि, उपज आदि से संबंधित संपूर्ण जानकारियां शीघ्रता से प्रदान की जाती है, जिससे जनता का आर्थिक विकास हो सके । प्रशासन के तहत ग्रामीण लोगों को भूल संबंधित दस्तावेज, प्रमाणपत्र, पंजीकरण जैसी सुविधाएं कम लागत में शीघ्रता से प्रदान की जाती है । प्रशासन पर आज सरकार अरबों रुपए खर्च कर रही है, जिससे प्रशासन को जवाबदेही, पारदर्शी, विश्वसनीय बनाया जा सके । आजादी के पश्चात संचार क्रांति आज ग्रामीण क्षेत्र में विकास, जागरूकता तथा शिक्षा का लाभ पहुंचाने वाली एक सर्वसुलभ सबसे सस्ते सर्वग्राही प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुकी है । ग्रामीण समाज का कोई भी क्षेत्र जैसे शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य आदि सभी क्षेत्रों के विकास में संचार का एक विशेष महत्व है । आज सर्वांगीण विकास के कार्य है तो सार्वजनिक व निजी क्षेत्र में परस्पर सहयोग है तो संचार के साधनों का विशेष महत्व है क्योंकि संचार के साधनों के द्वारा ही इनमें सरलता से समायोजन का कार्य किया जा सकता है । अतः संचार क्रांति में अपार सूचनाएं बहुत संभावनाएं शामिल हैं परन्तु अभी भी गरीबी, निरक्षरता, निर्धनता व बेरोजगारी, अशिक्षा, कुपोषण, जनसंख्या वृद्धि जैसी अनेक समस्याओं से ग्रामीण जनता का एक बहुत बडा भाग प्रभावित है एवं शासन की विभिन्न सेवाओं से अनुभव किया है । आज आवश्यकता है जनता को जागरूक किया जाए तो इन सेवाओं को गांवों के दूरदराज क्षेत्रों तक इन सूचनाओं को शीघ्रता से पहुंचाया जा सके । वजह से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास का कार्य सरलता से पूर्ण किया जा सके ।

46 - सूचना प्रोधोगिकी : स्मार्ट गाँव योजना ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की संभावना

सूचना प्रौद्योगिकी, स्मार्ट गांव योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की संभावना भारत सरकार ने देर से ही सही लेकिन गांव की सुध ली है । स्मार्ट सिटी की तर्ज पर स्मार्ट गांव विकसित करने का केंद्र सरकार का निर्णय सराहनीय है । श्यामा प्रसाद मुखर्जी ग्रामीण मिशन के तहत गांवों के उत्थान के लिए पांच हजार एक सौ बयालीस करोड रुपए खर्च किए जाएंगे । सरकार के इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की संभावना जान लेना भी जरूरी है । लंबे समय से ग्राम विकास के लिए अपने स्तर पर समाज के सहयोग से प्रयास कर रहा है । सरकार का स्पष्ट मत है कि केवल शहरों को स्मार्ट बनाकर भारत का विकास संभव नहीं है । ग्राम विकास की भी चिंता सरकार को करनी चाहिए । महात्मा गांधी ने भी लगभग यही कहा था कि गांव की अनदेखी करके देश को विकास के पथ पर आगे नहीं बढाया जा सकता । भारत के संदर्भ में जब विकास की अवधारणा पर विचार करते हैं तो यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इसमें गांव और ग्रामीण जीवन प्राथमिक हो । अब तक भारत को विकास के जस्ट बात पर आगे बढाया जा रहा था । उस पद पर कहीं भी गांव नहीं आते थे । सिर्फ शहरों को चमकाकर भारत की उजली तस्वीर नहीं बनाई जा सकती । गांवों की अनदेखी से शहर भी आशानुरूप व्यवस्था नहीं हो सकते । हम जितनी आबादी को ध्यान में रखकर शहर की सुविधाओं का विस्तार करते हैं, वे तब काम पर जाती हैं, जब आस पास के ग्राम बाजी, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की खोज में शहर आ जाते हैं । कृषि क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण महत्वपूर्ण है और इस क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है । सूचना प्रौद्योगिकी न केवल प्रौद्योगिकी के तेजी से विस्तार के लिए आवश्यक है, बल्कि इसके उपयोग से विभिन्न कृषि कार्यों को जल्दी से पर आसान तरीके से किया जा सकता है । विश्व बैंक और अन्य शोध संस्थानों के अनुसंधानों ने क्या जिद्द कर दिया है कि ऑनलाइन शिक्षा, रेडियो उपग्रह और दूरदर्शन जैसे आधुनिक संचार माध्यमों द्वारा कृषि प्रौद्योगिकी का विस्तार करके किसानों की जागरूकता, दक्षता तथा उत्पादकता में कई गुना वृद्धि की जा सकती है । आज सूचना प्रौद्योगिकी ने कृषि के हर काम को आसान बना दिया है । किसान अपने घर बैठे किसान कॉल सेंटर में एक पांच, पांच एक या एक एक पांच पांच पर निशुल्क फोन करके अपनी कृषि समस्या का समाधान पा सकता है । हमारे देश के अधिकतर कृषि व बागवानी विश्वविद्यालयों ने अपने क्षेत्र विशेष के फलों व अन्य फसलों के उत्पादन से संबंधित सभी जानकारियां आपने वेब साइट पर डाल रखी हैं जिन्हें किसान इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे अपने कंप्यूटर पर प्राप्त कर सकते हैं । इन विश्वविद्यालयों के इन वेबसाइटों पर भविष्य में कृषि कार्यों की जानकारी तथा मौसम की जानकारी भी समय समय पर किसानों को नियमित रूप से दी जाती है । सूचना प्रौद्योगिकी का सबसे बडा उपयोग किसान अपने विभिन्न कृषि कार्यों को करने में कर सकते हैं । आज कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित मशीनों द्वारा बडे बडे खेतों की जुताई उन्हें समतल करना, बोवाई करना, निराई गुडाई करना, खाद देना, सिंचाई करना, कीटनाशियों रोक राशि, रसायनों के छिडकाव जैसे कार्य सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं । इसके साथ कंप्यूटर कृषि उत्पादों को डिब्बाबंद करने, बेचने के लिए उपयुक्त मंडियों का चयन करने और मूल्यों का निर्धारण करने में भी सहायता करते हैं । कंप्यूटर नियंत्रित मशीनों का सब्जियों, फूलों, फलों की पॉलीहाउस के अंदर होने वाली संरक्षित खेती में महत्वपूर्ण योगदान है । संरक्षित खेती में जहाँ फसलों को पानी, खाद और नमी इत्यादि की मात्रा और समय कंप्यूटर ही निर्धारित करता है, इस दिशा में स्पेन, हॅाल, तुर्की, फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों में उल्लेखनीय कार्य हुआ है । इन देशों में कंप्यूटर द्वारा नियंत्रित मशीनों से किए गए कार्य से संरक्षित खेती में फसलों से तीन से चार गुना अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा रहा है । इस तरह के स्वचालित यंत्रों की मदद से कोई भी किसान तीन सौ पचास एकड भूमि की आसानी से सिंचाई कर सकता है । कंप्यूटर नियंत्रित मशीनों का उपयोग फसल उत्पाद के सही ढंग से डिब्बा बंदी में भी किया जाता है । वालों पर सब्जियों के डिब पाबन्दी करते समय कंप्यूटर की सहायता से फलों को कैसे और कितनी संख्या में रखने संबंधी जानकारी प्राप्त होती है । इस तरह फल सब्जियाँ रगड लगने से बच जाते हैं जिससे ढुलाई वाइॅन् के समय कम नुकसान होता है । इस तरह के कंप्यूटर नियंत्रित कार्यों से सिंचाई में पानी, खाद पर दूसरे जीव राशि तथा अन्य रसायनों की कम खपत होती है और इनके सही समय पर निर्धारित उपयोग से अधिक उत्पादन भी मिलता है । यद्यपि भारत सरकार का ग्रामीण विकास मंत्रालय देश के प्रत्येक गांव में ऐसे सार्वजनिक व सामुदायिक सूचना केंद्र स्थापित कर रहा है जहाँ कंप्यूटर में इंटरनेट जैसी सुविधाएं मौजूद होंगी लेकिन फिर भी यह कार्य तेजी से होना चाहिए । इन सूचना केंद्रों को कृषि विश्वविद्यालयों तथा जिला की सूचना केंद्रों से भी जोडा जाना चाहिए जिससे प्रौद्योगिकी और सूचनाओं का प्रसार तेजी से हो । देश के कृषि व बागवानी विश्वविद्यालयों को सूचना प्रौद्योगिकी का अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए विशेष आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए । सूचना और संचार क्रांति का कृषि में अधिक से अधिक उपयोग करके हम कृषि को नई दिशा दे सकते हैं जिससे देश में अन्य और दूसरे कृषि पशुधन से प्राप्त उत्पादनों का उत्पादन बढेगा और किसानों की वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी ।

47 - ग्रामीण भारत में संचार क्रांति का असर

ग्रामीण भारत में संचार क्रांति का असर आजादी मिलने के साल भारत में लगे कुल करीब तीस हजार टेलीफोन में ज्यादातर सरकारी दफ्तरों या राजा महाराज, सेठ, साहूकारों आदि के यहाँ लगे थे । उस दौरान भारत में लगे कुल फोनों से ज्यादा संख्या अकेले सिडनी शहर में थी । पहले स्तर फोनों का ही जमाना था और आजादी के बाद सरकार के चौंतीस साल के नियोजित प्रयासों के बाद ही हमारे फोनों की कुल संख्या बीस दशमलव शून्य पांच तक हो गई थी । लेकिन हाल के वर्षों में हम नया अध्याय लिख रहे हैं और दुनिया के कई महत्वपूर्ण देशों के समकक्ष खडे हो गए हैं । परन्तु यहाँ ध्यान रखने की बात है । बीते दशकों में संचार क्रांति ने खास तौर पर शहरी इलाकों पर विशेष ध्यान दिया । ग्रामीण इलाकों में भी दूर संचार क्रांति की दस तक हाल के सालों में हुई और ग्रामीण टेलीकाॅम बढकर अडतीस से ज्यादा हो गया । जबकि शहरी एक सौ के करीब शहरों की तुलना में गांवों में काम टेलिकाॅम की कई वजह है । जैसे कम प्रति व्यक्ति आय, बिजली, सडक की दिक्कत, कम साक्षरता दर और ग्रामीण आबादी के सामाजिक आर्थिक स्तर में कमी को इसका कारण माना जाता है । लेकिन एक बडा कारण गांव में निजी कंपनियों का जाने से कतराना भी रहा है । देश के प्रस्तावित राष्ट्रीय दूर संचार नीति दो हजार बारह में मौजूदा ग्रामीण टेलीफोन करे तो सन दो हजार तक बढाकर सत्तर और दो हजार दो तक सौ करने की परिकल्पना की गई है । यह लक्ष्य भी रखा गया है कि सन दो हजार तक सभी गांवों तक सार्वजनिक फोन पहुंच जाएंगे और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी हो जाएगी । ताजा आंकडों के मुताबिक भारत के सत्याग्रह दशमलव आठ फीसदी गांवों तक सुविधाएँ पहुंच गई हैं । गांवों में मोबाइल और स्थिर फोनों के विकास में सरकार की पहल पर पर ये सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि का खास योगदान रहा है । इसी निधि से अब तक बीएसएनएल ने हजार नौ सौ अट्ठावन ग्रामीण टेलीफोन और रिलायंस ने अठारह हजार सात सौ छत्तीस फोन लगवाए हैं । अभी इस निधि में करीब बाईस हजार करोड रुपये उपलब्ध है जिनमें गांवों में संचार क्रांति के इंतजाम करने हैं । दरअसल सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि की स्थापना दुर्गम देहाती इलाकों में सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए एक अप्रैल दो हजार से लागू की गई थी । इसकी परिधि में मोबाइल और ब्रॉडबैंड सेवा को शामिल करने के लिए नियमावली में हाल ही में संशोधन किया गया है । किसी तरह भारत के उन सात हजार तीन सौ तिरेपन जगहों पर जहाँ मोबाइल फोन या लैंडलाइन कवरेज नहीं है, वहाँ टावर लगाने के लिए नई स्किम शुरू की गई है और जल्दी ही यहाँ पे फोन पहुंच जाएंगे जिनमें अधिकतम इलाके उग्रवाद प्रभावित है । नियोजित विकास का असर आजादी मिलने के बाद ही हमारी संचार सुविधाओं के विकास का नियोजित प्रयास शुरू हुआ । पंडित जवाहरलाल नेहरू के निर्देशन में पहली पंचवर्षीय योजना में हर तालुका थाना मुख्यालय तक पहुंचाने के साथ पांच हजार से अधिक की आबादी पर टेलीफोन एक्सचेंज लगाने की योजना बनाई । आजादी के पहले आठ सालों में पंद्रह हजार नए फोन लगे । पचास में पटना, आगरा, फिरोजपुर, लखनऊ आपन और बडौदा में लोकल फोन सेवा शुरू हुई तो बडी खबर बनी । इसके पश्चात विकास की गति निरंतर जारी रही । यहाँ दिल्ली में उन्नीस सौ उन्यासी में टेलीफोन उपभोक्ताओं पर किए गए एक सर्वेक्षण में पाया गया की अठारह दशमलव छियासी फीसदी उपभोक्ताओं को छोड कर बाकी फोन प्रशासन, उद्योग और व्यवसाय के क्षेत्र में काम कर रहे थे । अन्य उभोक्ताओं में भी कई टेलीफोन रखने वाले सरकारी विभागों के अवसर और व्यवसायिक संस्थाओं के कर्मचारी थे । इनको वास्तव में घरों पर सरकारी फोन मिले हुए थे । इस तरह फोनों से आम आदमी के रिश्तों को आसानी से समझा जा सकता है । निष्कर्ष भारत में उदारीकृत व्यवस्था के बीच में संचार क्रांति का असली श्री गणेश हुआ । पहले माना जाता था कि मोबाइल से संपन्न हो कि दुनिया का संचार होगा, पर इसके विपरीत दिशा स्थिर लाइनें यानी लैंडलाइन को कटवाकर लोग मोबाइल ले रहे हैं और जिस गति से यह काम हो रहा है, वह दिन दूर रही । टेबल ऑनलाइन सरकारी दफ्तरों तक ही विराजमान रहे । वहाँ भी ई प्रशासन का जोर दिख रहा है ।

48 - आदिवासियों जीवन एवं पत्रकारिता

आदिवासी जीवन एवं पत्रकारिता जंगलिया पहाडी क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी लंबे समय से एकाकी जीवन जी रहे हैं । जहाँ तक आदिवासियों का सवाल है तो इस सामाजिक प्रणाली का अंगना होकर अलग थलग रहते आए समुदाय है । वर्ल्ड वार जाति आधारित समाज से अलग देखना होगा । रोजगार के आधार पर बनने वाले श्रेणियों की दृष्टि से भी आदिवासी समुदायों का वर्ल्ड सांस्कृतिक होगा लेकिन या वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण ही माना जाता रहा है । उनके पास परंपरागत रूप से अर्जित ज्ञान है जिसके आधार पर उन्होंने कई तरह के कौशल विकसित किए हैं । बहुत सारी सामाजिक आर्थिक गतिविधियों जैसे पेंटिंग, पत्थरों एवं लकडी पर कार्यकरी वर्मा का उपयोग, कुल्हाडी चलाना, बंशी काटा से मछली, पकडना, कपडा, खटिया आदि बनना, जंगली औषधि का उपयोग आदि हैं । अब समय है कि इस परंपरागत ज्ञान के साथ कुछ प्रयोग किया जाए और नवाचार के माध्यम से स्केल को बढाया जाए । जैसे किसी आदिवासी क्षेत्र में अगर तेंदूपत्ते का काम होता है तो उसके परिष्करण का काम भी वहीं आस पास किया जा सकता है । भारत सरकार की वर्तमान योजना का जोर समावेशी विकास पर है । कृषि और शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला और बाल कल्याण सहित महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई है । व्यापक और समावेशी विकास के समर्थन के लिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास में सरकार को एक बडी भूमिका अदा करनी होगी । निर्धन और कमजोर वर्गों का पैसा कमाने की क्षमता में सीधे तौर पर वृद्धि और संपूर्ण विकास प्रक्रिया को मुख्यधारा में सम्मिलित करने के लिए उनकी आजीविका का प्रबंध करने है, तो सरकार को विशेष कार्यक्रम चलाने होंगे । सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता का स्वीकार्य गुणवत्ता वाली अनिवार्य लोक सेवाएं आसानी से सुलभ हो सकेंगे । इन सेवाओं के बगैर प्रभावी समावेश असंभव है । तीन कारणों के अलावा विकास पर समावेशी निष्पादन का मूल्यांकन करना मुश्किल है । पहला तो यह कि समावेश विकास एक बहुकोणीय धारणा है और इसका प्रगति के अनेक पक्षों के मूल्यांकन की जरूरत है । दूसरे, सर्व समावेशी विकास के विभिन्न पक्षों से संबंधित आंकडे तभी उपलब्ध हो पाते हैं, जब काफी समय बीत जाता है और ग्यारहवीं योजनावधि के बारे में सूचना अभी तक नहीं मिली । तीसरे, सर्वसमावेशी लक्ष्य को लेकर बनाई गई नीतियों का प्रभाव सिर्फ लंबी अवधि के बाद दिखाई देता है । समावेशी विकास की परिभाषा पर ध्यान दे और इन समूहों को बाकी आबादी के बराबर लाने की बात करें तो इस मुद्दे पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है और कुल आय वितरण में इन समूहों का भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए । आदिवासी शब्द के प्रयोग पर विरोध रहा है । जब संविधान के हिंदी अनुवाद के समय ट्राइब शब्द के लिए अनुवाद समिति ने आदिवासी शब्द का प्रयोग किया तो आदिवासी लोगों ने इसका विरोध किया जिसपर उसे बदलकर जनजाति करना पडा । भारतीय समाज में आदिवासियों का एक विशाल समुदाय निवास करता है । इसकी अनेक जातियां तथा उपजा दिया है जिनका अध्ययन काला धर्म, संस्कृति तथा भाषा की विविध क्रिश टियों से विशेष महत्व शाली है । मानवशास्त्र के मूलरूप तथा विकास के ज्ञान के लिए यह अध्ययन विशेष लाभप्रद है । भारत में आदिवासियों की संख्या प्राय ढाई करोड है । जातीय तत्व, भाषा, संस्कृति, संपर्क के प्रभाव, धर्म आधी के आधार पर नेतृत्व नेताओं ने विभिन्न भिन्न प्रकार से उन का वर्गीकरण किया है । भौगोलिक दृष्टि से आदिवासी भारत को तीन प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है । एक पूर्व और उत्तर पूर्व का आदिवासी क्षेत्र दो । मध्यप्रदेश का आदिवासी क्षेत्र भारत के दक्षिण भूभाग का आदिवासी समाज वर्तमान संदर्भ में खासकर विशाल जनजातीय समुदाय के बीच शैक्षिक परिवर्तन और सुधार धीरे धीरे लाए जा सकते हैं । कभी कभी अलक्षित रूप में जबकि जनमत त्वरित और ठोस परिणामों के लिए अधीर है । मध्य प्रदेश के आदिवासियों में संख्या तथा सांस्कृतिक विविधता की दृष्टि से गोंड सबसे अधिक महत्वपूर्ण है । यह भारत का विशालतम आदिवासी समाज है । इस जाति के अनेक स्वतंत्र उपविभाग है जो अन्य उप भागों में वहाँ संबंधन नहीं करते और जिनकी अपनी विशिष्ट संस्कृतियाँ हैं । गोल्ड वाले के राजकीय उत्थान पतन में इतिहास को महत्वपूर्ण ढंग से प्रभावित करने वाले मंडला के गोल्ड और छत्तीसगढ के संपन्न राजवंशों से संबंधित अमात गोल्ड है । उसी क्षेत्र के अपेक्षाकृत तो संगठित तथा घोटुल नामक यथा ग्रह की विशिष्ट संस्था आज फिर बनाए रखने वाले मुखिया सब मूल रूप से एक ही विशाल परिवार, कोई तुर के सदस्य हैं । उनका मूल एक ही है किंतु सामाजिक विकास की परिस्थितियां भिन्न भिन्न होने के कारण आज उनकी संस्कृतियों में अनेक भेज दिखाई पडते हैं । आदिवासी और किसान संघर्षों की साक्षी रही महाश्वेता देवी का मानना है कि भारत वर्ष में आदिवासी और कृषक वर्ग के असंतोष और विद्रोह का इतिहास समकालीन घटना मात्र नहीं है । आधुनिक इतिहास के हर पर्व में विद्रोह का प्रयास उनके प्रति दूसरे वर्ग के शोषण के चरित्र को प्रकट करता है । कालांतर में भी अब तक महापरायण अपरिवर्तनीय बना है । देश के आदिवासी आज भी संघर्षरत है । वे लगातार अपने क्षेत्रों से विस्थापित किए जा चुके हैं । उचित मुआवजे व कारखानों में नौकरी के सभी वायदे झूठे साबित हो चुके हैं । देशी विदेशी कंपनियों के बडे महाजन इन का सब कुछ लूट रहे हैं और हमारी सरकारें इन शोषकों के साथ खडी है । विरोध करने पर नक्सलवादी साबित कर आदिवासियों को कपडे आम किया जा रहा है । आदिवासी महिलाएं आज भी शहरों, खदानों, जंगलों अन्य कार्यस्थलों पर शोषण का शिकार हो रही हैं । उन्हें सरयाम खरीदा बेचा जा रहा है । आदिवासी बडी साजिशों के शिकार हो रहे हैं । आदिवासियों ने हमेशा शोषण का विरोध किया । कहीं विभाग के कर्मचारियों, ठेकेदारों के खिलाफ कहीं महाजनों, जमींदारों की लूट, अत्याचार के खिलाफ, कहीं स्कूल मास्टरों पुलिस के खिलाफ तो कहीं सीधे फिरंगियों के खिलाफ । इस तरह उन्होंने छोटी बडी करीब चार सौ लडाइयां अब तक लडी है । इनमें कई तो मुख्यधारा के भारतीय समाज की लडकियों से बडी जनक्रांति आधे इनके संघर्ष की शुरूआत सत्रह सौ सडसठ ईस्वी के भूमिज आदिवासियों के विद्रोह से होती है । सरकार संविधान के अनुसार इनका हक देने क्या दिलाने में असफल हो रही है । आज भारत में जैसे अन्य समुदाय अपना हक ले रहे हैं, उसी प्रकार उन्हें भी आम नागरिकों की तरह सुरक्षित सर्वसुलभ साधन क्यों नहीं उपलब्ध करवाए जा रहे हैं । भारतीय संविधान में जितने अधिकार इन्हें प्रदान किए गए हैं, सिर्फ उन्हें ही सही तरीके से लागू कर दिया जाए तो शायद ऐसे विद्रोहों की स्थिति ही न बनें । संचार माध्यमों का दायित्व है कि उनके अधिकारों के प्रति उन्हें आगाह करें और उनका हक दिलाने में मदद करें । जबकि सही सूचना ना देकर उल्टे उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया जाता है । यदि कोई गरीब आदिवासी अपनी शिकायत लेकर किसी अधिकारी के पास पहुंच जाये तो अधिकारी उसे पहले ही चोर, दुराचारी आदि कराते देते हैं । गाली गलोच कर भागने की कोशिश करते हैं । यदि सफल रहे तो ठीक वरना किसी अन्य मामले में बदनाम कर फसा देते हैं । नतीजा विद्रोहों में बदल जाता है और नाबालिग लडकियां तक बंदूक उठाने को मजबूर हो जाती है । जब दुख दर्द का अहसास पशुओं में होता है तो वो अपने बच्चे यहाँ के लिए लडते हैं तो फिर ये तो इंसान है । यदि इनके बच्चे माँ के साथ दुराचार हो और कोई सुनने वाला न हो तो निश्चित रूप से वो अपना बदला लेने के लिए किसी भी हद तक उतर जायेंगे ।

49 - सामुदायिक रेडियो और आदिवासियों क्षेत्रों में संचार

सामुदायिक रेडियो और आदिवासी क्षेत्रों में संचार खंडवा जिले के खालवा तहसील के विशेष संदर्भ में संचार मानव समाज के विकास के लिए बुनियादी आवश्यकताओं में से एक है नहीं । दो अथवा अधिक व्यक्तियों के मध्य संचार के प्रक्रिया के जरिए समानता का विकास भी होता है । यह समानता उन्हें किसी एक विषय मुद्दे को समझने और किसी वांछित दिशा में अग्रगामी होने के लिए अभिप्रेरण का कार्य भी करती है । पहली होली थे तत्काल में ट्रोमैग् नान मानव द्वारा कोई चालीस हजार साल से भी अधिक पुरानी कुवारों पर उकेरी गई पेंटिंग हूँ । दूसरी सदी ईसा पूर्व से चार सौ अस्सी छह सौ पचास वर्ष पूर्व बनी अजन्ता गुफाओं की चित्रकारी हो हडप्पाकालीन अगर निर्माण हो या मैसोपोटामिया के अवशेषों से मिलते संकेत सभी अवशेषों से एक स्पष्ट बात तय होती है कि मनुष्य उस समय आधुनिक माध्यमों की अनुपस्तिथि में भी दृश्यों की पत्थरों, चट्टानों पर उकेरकर अथवा धातुओं को पिघलाकर अपने तत्कालीन जीवन और समाज के बारे में आने वाली पीढियों को संदेश देना चाहता था । पत्थर, चट्टानें और था तो उस आदिम व्यक्ति के माध्यम थे और चित्र तथा आकृतियाँ उसके शब्दों का कार्य करते रहे होंगे । आज आधुनिक माध्यमों का युग है लेकिन रेडियो अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में संचार का एक प्रमुख माध्यम है । रेडियो की बहुत सी विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए सामुदायिक रेडियो की अवधारणा को भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा देश में सामुदायिक रेडियो नीति बनाई गई तथा सामुदायिक रेडियो केंद्र खोले गए । मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भी राज्य की सामाजिक विकास की योजनाओं के लोकव्यापीकरण के उद्देश्य से आदिवासी अंचलों में बनने रेडियो केंद्र खोले गए । उपलब्ध साहित्य का अध्ययन वर्तमान समय आधुनिक संचार माध्यमों का युग है । अब भाषाओं का उन्नत विकास हो चुका है । सूचना और तकनीक के विस्तार ने भाषाओं की बहुत सी सीमाओं को समाप्त कर दिया है । इंटरनेट के जरिए किसी भी भाषा का लगभग सटीक अनुवाद क्षण भर में ही मशीन कर देती है । जनमाध्यम समाज में संचार और संवाद की प्रक्रिया को संपूर्ण करते हैं । संचार की प्रक्रिया समाज में सहमतियों के निर्माण के लिए भी जमीन तैयार करती है । सभी माध्यम समाज में सूचनाओं के ऑपरेशन की प्रक्रिया द्वारा समाज के विभिन्न स्तरों पर जनमत निर्माण का कार्य भी करते हैं । यह सामाजिक विकास की प्रक्रिया को सतत जारी रखने के लिए अत्यावश्यक है । लोगों को सूचित करने और शिक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य भी माध्यमों के जरिए संचार प्रक्रिया से ही होता है । रेडियो जनमाध्यमों के विकास क्रम की श्रृंखला में परंपरागत माध्यमों मुद्रा माध्यमों के बाद तीसरा स्थान रखता है । भारत में रेडियो के आपने बाढ में वर्षों के इतिहास में इस लोकप्रिय माध्यम ने कई उतार चढाव देखे हैं । टेलीविजन के चरम विकास के बाद और इंटरनेट तथा मोबाइल और अब स्मार्टफोन ऐप के दौर में रेडियो नए अवतारों में उपलब्ध है । वन्या रेडियो खालवा द्वारा सप्ताह में प्रातः छह बजे से ग्यारह बजे तक और साढे पांच बजे से दस बजे तक विभिन्न कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है । इसके कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों से बातचीत, स्वास्थ्य चर्चा, खेती किसानी, विभिन्न विभागों और उनकी योजनाओं की जानकारी, जनजातीय संगीत, स्थानीय प्रतिभाओं से भेंट, गम्मत कार्यक्रम यानी स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार मनोरंजन कार्यक्रम, बालसभा तथा कहानी, फिल्मी संगीत, भजन चिंतन जैसे कार्यक्रम शामिल हैं । मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के सभी क्षेत्रों में सामाजिक विकास की प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से उन्नीस फ्लैगशिप योजनाओं को लागू किया गया है । बनया रेडियो इन योजनाओं के आदिवासी इलाकों में प्रचार प्रसार के उद्देश्य से ही आरंभ किया गया है । अतः योजनाओं के लोग व्यापक रन में इस सामुदायिक रेडियो की भूमिका अहम हो जाती है । वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन द्वारा संचालित सामाजिक विकास के प्रमुख विकास योजनाएं निम्नवत है । गांव की बेटी योजना योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभावान बालिकाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने की ओर प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है । प्रत्येक गांव से प्रतिवर्ष बारवीं कक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं को हर वर्ष पांच सौ रुपये प्रतिमाह की दर से दस महा तक छात्रवत्ति दी जाती है । करेंगे लाडली लक्ष्मी योजना वर्ष दो हजार छह से लागू की गई इस योजना का उद्देश्य बालिकाओं के शैक्षिक और आर्थिक स्तर में सुधार लागत उनके अच्छे भविष्य की आधारशिला रखने के साथ साथ कन्या जन्म के प्रति समाज के दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाना है । योजना के तहत बालिका के जन्म के बाद उसके पक्ष में प्रतिवर्ष छह हजार रुपये के राष्ट्रीय विकास पत्र पांच वर्ष तक शासन द्वारा क्रय किए जाते हैं । बालिका के इक्कीस वर्ष की आयु पूर्ण होने पर एवं अठारह वर्ष के पूर्व निभाना करने तथा बारहवीं कक्षा की परीक्षा में सम्मिलित होने पर एकमुश्त राशि का भुगतान किया जाएगा । यह राशि एक लाख रुपये होती है । योजना के तहत एक जनवरी दो हजार छह के पश्चात जन्म लेने वाली बालिकाओं को जिनके माता पिता ने दो जीवित बच्चों के रहते हुए परिवार नियोजन अपना लिया हो तथा जो आंगनवाडी केंद्रों में पंजीकृत हो तथा आयकरदाता न हो उन्हें इसका लाभ मिलता है । मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना युवाओं को स्वयं के उद्योग व्यवसाय शुरू करने में मदद के लिए विकेट एक अप्रैल से मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना लागू की गई है । योजना का क्रियान्वयन ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा शहरी क्षेत्रों में पानी चेंज उद्योग और रोजगार विभाग के माध्यम से किया जाएगा । इसका उद्देश्य सभी वर्ग के युवाओं को स्वयं का उद्योग सेवा व्यवसाय स्थापित करने के लिए बैंकों के माध्यम से रेल उपलब्ध करवाना है । हितग्राहियों को मार्जिनमनी सहायता तथा ब्याज अनुदान की सुविधा दी जाएगी । योजना में आयसीमा का कोई बंधन नहीं है । मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना प्रदेश के साठ वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को उनके जीवनकाल में एक बार प्रदेश के बाहर के निर्धारित तीर्थ स्थानों में से किसी एक स्थान की यात्रा के लिए राज्य सरकार सहायता देती है । प्रथम ता है आईआरसीटीसी रेलवे के पैकेज के अनुसार यात्रियों को भेजा जाएगा योजना तीन सितंबर दो हजार पारा को रामेश्वरम की यात्रा के साथ प्रारंभ हुई है । तीर्थदर्शन योजना में राज्य शासन ने देश के प्रमुख तीर्थ स्थानों को शामिल किया है । मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना इस योजना का उद्देश्य खेतीहर मजदूरों तथा उनके परिवारों का जीवन स्तर सुधारने के साथ ही उन्हें जरूरत अथवा मुसीबत के वक्त सुरक्षा प्रदान करना है । योजना के तहत राज्य के अठारह से साठ वर्ष आयु के खेतिहर मजदूरों के परिवार के इस तरी को प्रसूति, वहाँ और छह सप्ताह की मजदूरी का भुगतान, पति को पितृत्व अवकाश के साथ दो सप्ताह की मजदूरी का भुगतान, बच्चों को पहली कक्षा से स्नातकोत्तर की पढाई के लिए छात्रवृत्ति, पांचवीं कक्षा तथा उसके आगे तक प्रथम श्रेणी में पास करने वाले विद्यार्थियों को नगद पुरस्कार मिलते हैं । योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को निर्धारित प्रारूप में ग्राम पंचायत के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करना होता है । मुख्यमंत्री खेत तालाब योजना इस योजना का उद्देश्य कृषि के समग्र विकास के लिए सादा ही तथा भूमिगत जल की उपलब्धता को बढावा देना है । सभी वर्गों के किसानों को इसका लाभ दिया जाता है । किसान स्वेच्छा से तालाब के तीन मॉडलों में से किसी एक का चयन कर सकता है । सभी वर्गों के किसानों को लागत का पचास प्रतिशत अनुदान दिया जाता है जिसकी अधिकतम सीमा सोलह हजार तीन सौ पचास रुपए है । मुख्यमंत्री कन्यादान योजना प्रदेश सरकार की इस योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित, निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या अथवा विधायक अथवा परित्यक्ता के विवाह के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा है । यह सहायता सामूहिक विवाह में ही दी जाती है । इसकी शर्त ये है की कन्या ने विवाह के निर्धारित आयु पूरी कर ली हो । इस की एक विशेषता यह भी है कि इसका लाभ सभी समुदायों को मिलता है । ऐसे आयोजनों में हिन्दू और मुसलमान दोनों समुदायों के विवाह एक ही परिसर में होते हैं, जिससे सांप्रदायिक सद्भाव की भावना का विकास होता है । सरदार वल्लभ भाई पटेल निशुल्क औषधि वितरण योजना मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के पंद्रह सौ पंचानवे स्वास्थ्य केंद्रों पर नवंबर दो हजार बारह से सरदार वल्लभ भाई पटेल निशुल्क पहुंचते वितरण योजना की शुरुआत की गई । स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है । योजना के तहत रोगियों को आवश्यक दवाएं निशुल्क प्राप्त होंगे । दवा या अौषधि के उपलब्ध होने पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा दवा क्रैकर उपलब्ध करवाई जा रही है । मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना मध्यप्रदेश के गरीब परिवारों को महंगाई की मार से राहत देने के उद्देश्य से अप्रैल दो हजार आठ से शुरू की गई मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना को नया स्वरूप दिया गया है । जून दो हजार तेरह से लागू नए स्वरूप में गेहूँ और चावल की रियायती दर को और कम कर दिया गया है तथा आयोडीनयुक्त नमक और शक्कर को इसमें शामिल किया गया है । इसके अलावा सरकार ने इन परिवारों को रियायती दर पर साढे तेरह किलो के हिसाब से दी जाने वाली शक्कर की आपूर्ति को जारी रखने का निर्णय लिया है । अटल ज्योति अभियान प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में चौबीस घंटे तथा खेती के लिए कम से कम दस घंटे बिजली देने के लिए अटल ज्योति अभियान लागू किया गया । अभियान मध्यप्रदेश के सभी इक्यावन जिलों में लागू कर दिया गया है । प्रस्तुत शोध का मुख्य उद्देश्य आदिमजाति कल्याण विभाग मध्यप्रदेश के वन्या प्रकल्प के माध्यम से संचालित रेडियो वन्या की सरकार के उपरोक्त सभी प्रमुख योजनाओं के प्रचार प्रसार में भूमिका का पता लगाना था । शोध के दौरान लोगों से पूछा गया कि क्या वे उपरोक्त संबंधित योजनाओं को जानते हैं अथवा नहीं । यदि उत्तरदाता का उत्तर हमें होता था तो उनसे यह भी पूछा गया कि उन्हें उस योजना की जानकारी कहाँ से अथवा किस माध्यम से प्राप्त हुई प्राप्त आंकडों का विश्लेषण तालिका एक विभिन्न संचार माध्यमों की उपलब्धता हाँ अठारह प्रतिशत नहीं दो प्रतिशत रेडियो प्रतिशत टीवी प्रतिशत समाचार पत्र उनतीस प्रतिशत पत्रिका शून्य प्रतिशत मोबाइल चालीस प्रतिशत इंटरनेट बारह प्रतिशत शोध के दौरान लोगों से सबसे पहले पूछा गया कि वे संचार के किन माध्यमों का उपयोग करते हैं । आधुनिक संचार के माध्यम जैसे मोबाइल तथा इंटरनेट का प्रसार भी इन ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों तक हो चुका है । हालांकि यह भी देखने में आया की कई लोगों के पास रेडियो टेलीविजन की भी उपलब्धता है तथा कुछ लोग समाचारपत्रों का उपयोग भी सूचनाओं की प्राप्ति के लिए करते हैं । मोबाइल तकनीक भले ही कम लागत वाली हो गई हो लेकिन केवल चालीस प्रतिशत लोग ही ऐसे मिले क्योंकि मोबाइल का उपयोग करते हैं । ये उपयोगकर्ता इंटरनेट सेवाओं के नाम पर मोबाइल से ही डाउनलोडिंग इत्यादि कार्य करते हैं तथा मोबाइल का ही रेडियो के बता और उपयोग भी कर लेते हैं । इस शोध क्षेत्र में सर्वाधिक प्रतिशत लोग सूचनाओं के माध्यम के बतौर रेडियो का उपयोग करते हैं । कुल तीस प्रतिशत लोग समाचारपत्रों का उपयोग भी करते हैं । पत्रिकाओं का उपयोग करने वाला कोई भी उत्तर ज्यादा नहीं मिला बनने रेडियो की शव लिया था । तालिका दो वन्या रेडियो सुनते हैं हाँ! सत्तर प्रतिशत नहीं तीस प्रतिशत । जब उत्तरदाताओं से वन्या रेडियो के बारे में पूछा गया तो अधिकतर लोगों का कहना था कि वे बनिया रेडियो के कार्यक्रमों को सुनते हैं । बनया रेडियो, क्योंकि कोर को बहुल इलाके में संचालित हो रहा है, इसलिए इसके कार्यक्रमों की भाषा में कोर को की प्रधानता होती है । लेकिन इसके साथ ही निवाडी तथा हिंदी भाषाओं में भी कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं । शोध के दौरान तीस फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि वे पन्या रेडियो नहीं सुनते हैं । जिन सत्तर फीसदी लोगों ने कहा कि वे रेडियो सुनते हैं, उनमें से एक व्यक्ति ने बताया कि उनके पास स्वयं का रेडियो नहीं है, किंतु वह कभी कभी अन्य लोगों के यहाँ जाकर रेडियो सुन लेता है । हालांकि इस उत्तर राधा के घर में टेलीविजन मौजूद था । इन माध्यमों के अतिरिक्त बहक किसी अन्य प्रकार के संचार माध्यमों का उपयोग नहीं कर रहा था । तालिका तीन गांव की बेटी योजना के बारे में जानकारी है । हाँ, अट्ठासी प्रतिशत नहीं बारह प्रतिशत गांव की बेटी योजना के बारे में अट्ठासी फीसदी उत्तरदाताओं को जानकारी थी । जिन बारह लोगों ने इस योजना के बारे में जानकारी से अनभिज्ञता जताई । वे भी संचार माध्यमों का उपयोग करते हैं, बल्कि किसी किसी के पास तो दो या अधिक संचार के माध्यम बित है तो फिर भी इस योजना के बारे में जानकारी का अभाव था । जूनापानी कुमार खेडा तथा कोठा ग्रामपंचायतों में ही इस प्रकार के उत्तरदाता थे । लाडली लक्ष्मी योजना के बारे में उत्तरदाताओं से पूछा गया तो प्रतिशत लोगों को इस लोकप्रिय योजना के बारे में जानकारी थी । कुल छह उत्तरदाताओं ने इस योजना का लाभ लिया था । एक बात यह भी थी कि इस योजना का लाभ लेने वाले सभी उत्तरदाता साक्षर थे । इन छह लाख लेने वाले उत्तरदाताओं ने अन्य योजनाओं का भी लाभ लिया है । मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का उद्देश्य गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित, निर्धन परिवारों की विवाह योग्य कन्या या विद्वान अथवा परित्यक्ता के विवाह के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है । यह सहायता सामूहिक नवाह में ही दी जाती है । इसकी शर्त यह है कि कल जाने पर वहाँ की निर्धारित आयोग पूरी कर ली हो । पूर्व में इसके तहत छह हजार पांच सौ रुपये की सहायता कन्या की गृहस्ती की व्यवस्था के लिए तथा एक हजार रुपए सामूहिक विवाह आयोजन के खर्चे की पूर्ति के लिए दी जाती थी । अब इस राशि को बढाकर दस हजार रुपए कर दिया गया है । प्रदेशभर में जनमानस के बीच यह एक बेहद लोकप्रिय कार्यक्रम रहा है । खालवा में भी उत्तरदाताओं ने इसकी पुष्टि की । सत्य से प्रतिशत लोगों को इस योजना की जानकारी थी तथा इनमें से सोलह प्रतिशत ने इसका लाभ भी लिया था । हालांकि कन्याधन योजना जैसा सीधा नाम पूछने के बजाय सामूहिक विवाह के लिए सहायता क्या मदद के बारे में पूछने पर ही अधिकांश उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी है । यहां गौर करने योग्य बात किया है भी है कि गांव के सचिव, सरपंच और परिजन एवं रिश्तेदारों द्वारा ही इस योजना का प्रचार अधिक हुआ है । स्वास्थ्य किसी भी समाज में विकास प्रक्रिया का एक प्रमुख सूचक है । ग्रामीण भारत में नेशनल रूरल हेल्थ मिशन ऍम जैसी बहुत परियोजना सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मुहैया करवाने के लिए क्रियान्वित की जा रही है । मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सरदार वल्लभ भाई पटेल निशुल्क पहुंचते वितरण योजना प्रदेश के पंद्रह सौ पंचानवे स्वास्थ्य केंद्रों पर नवंबर दो हजार बारह से शुरू की गई है । स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है । योजना के तहत रोगियों को आवश्यक दवाएं निशुल्क प्राप्त होती है और दवाइयाँ नहीं होने पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा दवा क्राय कर उपलब्ध करवाए जाने का प्रावधान इसके अंतर्गत है । शोध क्षेत्र में इस योजना के बारे में जानकारी का बहुत अभाव है । केवल अठारह प्रतिशत उत्तरदाताओं ने ही इस प्रकार के किसी भी योजना के बारे में जानकारी होना बताया है । बाकी बयासी प्रतिशत लोगों को इस प्रकार की किसी भी योजना के बारे में कोई जानकारी नहीं है । यह बात भी है कि यदि इस प्रकार की योजनाओं के बारे में लोगों को जानकारी होगी तो निश्चित ही वैसा ही स्वास्थ्य लाभ ले पाएंगे । मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में चौबीस घंटे तथा खेती के लिए कम से कम दस घंटे बिजली देने के लिए अटल ज्योति अभियान लागू किया गया है । ग्रामीण क्षेत्रों में यह एक बडी कारगर योजना है क्योंकि सिंचाई के लिए बिजली की आवश्यकता होती है । शोध क्षेत्र में लोगों को योजना का सही नाम तो नहीं पता था कि तू शत प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें इसका लाभ मिल रहा है । योजना को नाम से पहचानने वाले उत्तरदाताओं का प्रतिशत महज इक्यावन फीसदी था । तालिका पांच बनना रेडियो पर रोजगार की जानकारियां मिलती हैं । हाँ, शून्य प्रतिशत नहीं सौ प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी भी एक बडी समस्या है । बनने रेडियो द्वारा विभिन्न विषयों पर रेडियो कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं । विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के बारे में जानकारी का एक बढिया स्रोत रेडियो हो सकता है । किंतु इस शोध के दरमयान एक भी उत्तरदाता ऐसा नहीं मिला जिससे विभिन्न रोजगारों की जानकारी पन्या रेडियो के कार्यक्रमों से प्राप्त हुई हो । तालिका छह बनना रेडियो पर कृषि संबंधी जानकारियां मिलती है । हाँ, प्रतिशत नहीं बत्तीस प्रतिशत बनने रेडियो पर खेती किसानी नाम से एक नियमित कार्यक्रम प्रसारित होता है । इसका प्रसारण सप्ताह में सातों दिन होता है । अधिकतर उत्तरदाता जोकि रेडियो सुनते हैं, उन्हें पन्नियां रेडियो के जरिए कृषि संबंधी कई जानकारियां भी रेडियो से मिलती है । प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वन्या रेडियो पर कृषि कार्यक्रमों का प्रसारण होता है । बत्तीस फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें इस संदर्भ में जानकारी नहीं है । तालिका साथ बनने, रेडियो के कार्यक्रम संबंधी सुझाव, सुझाव दिए सैंतीस प्रतिशत नहीं दिए, बेहतर प्रतिशत बनया । रेडियो के विभिन्न कार्यक्रमों के संबंध में रेडियो सुनने वाले लोगों से सुझाव या टिप्पणियां भी पूछे गए । अधिकतर श्रोताओं ने टिप्पणी नहीं की । तिहत्तर प्रतिशत लोगों ने टिप्पणी नहीं कि जिन तैंतीस प्रतिशत लोगों ने अपने सुझाव दिए उनमें से अधिकतर का कहना था कि रोजगार तथा मनोरंजन के कार्यक्रम बढानी चाहिए । खेती किसानी का कार्यक्रम बनिया पर पूरे सप्ताह प्रसारित होता है बावजूद इसके लोगों की मांग थी कि खेती संबंधी जानकारियां बडा ही जाए । उनका यह भी कहना था की मौसम के अनुसार खेती आधारित कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाए । खालवा में कोर को बहुल आबादी तो है लेकिन लोग निमाडी, गम्मत जैसे कार्यक्रमों की अवधि भी बढवाना चाहते हैं और गोंडी कार्यक्रमों को भी सुनना चाहते हैं । कई उत्तरदाताओं ने प्रादेशिक समाचारों के प्रसारण की भी मांग की और कहा कि कोरकू बोली में ही खबरें भी सुनाई जाए । परिणाम निष्कर्ष और सुझाव बनने रेडियो मध्यप्रदेश शासन द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में सरकार द्वारा चलाई जा रही लोक कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार के उद्देश्य से संचालित किए जा रहे हैं । इन योजनाओं के प्रचार प्रसार के अतिरिक्त वन्या रेडियो द्वारा मनोरंजन, स्वास्थ्य, कृषि आदि विभिन्न विषयों पर सप्ताह भर अनेक कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं । खालवा क्षेत्र में बनना रेडियो के श्रोता खासी संख्या में है है हूँ

50 - ग्रामीण समाज का नवीन रूप और संचार माध्यम

ग्रामीण समाज का नवीन रूप और संचार माध्यम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मानना था कि गांव भारतीय समाज का आइना है । गांव का तात्पर्य किसी विशेष स्थानीय क्षेत्र से नहीं होता है बल्कि गांव तो जीवन की एक में भी है । जिस जगह पर भी लोग दृढ सामुदायिक भावना से बने रहकर परंपरागत ढंग से व्यवहार करते हैं उस स्थान को गांव कहा जाता है । भारत वर्ष प्रधानतः गांवों का देश है इसलिए गांवों के विकास के बिना देश का विकास नहीं किया जा सकता ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता । वर्तमान समय में भारतीय गांवों का जो स्वरूप है वो आज से कुछ वर्ष पूर्व ऐसा नहीं था । आज गांव में पक्की सडकें, पीने के लिए साफ पानी, पक्के घर, पंचायत, भवन, विद्यालय जैसी समस्या सुविधाओं का श्रेय संचार के माध्यमों को दिया जाता है । जिन्होंने ना सिर्फ गांव को एक नई पहचान दिलाई है बल्कि गांव के लोगों को भी समाज के मुख्यधारा में लाकर खडा कर दिया है । संचार माध्यम और भारतीय ग्रांड मानव जीवन के लिए संचार के महत्व को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है । मानव की मूलभूत आवश्यकताओं में संचार भी शामिल है । आज के युग को संचार का योग कहा जाता है । क्योंकि शताब्दी का प्रारंभ सूचना तकनीकी अभूतपूर्व क्रांति के साथ हुआ है । माइक्रो, इलेक्ट्रॉनिक तथा कंप्यूटर तकनीक ने दूर संचार के साथ मिलकर जिस तकनीक को विकसित किया, उसे ही सूचना तकनीक कहा जाता है । सूचना सुविधाओं के कारण ग्रामीण समाज में संचार का कांतिकारी महत्व है । संचार माध्यम की ग्रामीण समाज तक पहुंच देश की महत्वपूर्ण सफलताओं में से एक है । संचार माध्यमों का कार्य भी यही है कि गांवों के प्रत्येक व्यक्ति की आवाज को उठाया जाए और उनकी समस्याओं को प्रमुखता दी जाएगी । संचार माध्यमों के उपयोग के द्वारा गांव में प्रबंधन एवं प्रशासन की कार्यकुशलता में प्रभावी वृद्धि संभव है । सामुदायिक रेडियो और इंटरनेट गांव की कार्यप्रणाली को सुविधाजनक और सरल बनाने का कार्य किया है । संचार माध्यम ने गांव के विकास को नए आयाम प्रदान किए हैं । संचार माध्यमों का उद्देश्य ग्रामीण जीवन के विभिन्न पहलुओं को इंगित कर ग्राम के विकास में सहायता प्रदान करना है । परिवार एवं जनकल्याण साक्षरता, कृषि की उन्नत विधियां, महिला एवं बाल विकास की स्थितियों का आकलन, नवीन योजनाओं की जानकारी, गांव को विकास की मुख्यधारा से जोडना इसमें शामिल है । पत्रकार एक कडी के रूप में भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांव की आत्मा किसानों में संचार माध्यम किसानों की जरूरत है । संचार माध्यम किसानों की समस्याओं को हल करने और उन्हें जानकारी उपलब्ध कराने में मददगार है । लेकिन संचार माध्यम तभी उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं जब इसका मुख्य रूप से उपयोग करने वाले पत्रकार इसके महत्व को समझे और गांव के हित में संचार माध्यमों का प्रयोग पूर्ण ईमानदारी के साथ करें । पत्रकार संचार माध्यमों की मदद से वैज्ञानिक जानकारी और किसानों के मध्य एक गाडी के रूप में कार्य करते हैं । किसानों को कृषि कि जानकारियाँ देने के साथ इनकी आवाज और उनकी समस्याओं को समाज के सामने लाने का प्रयास करते हैं । इन सब कार्य में संचार माध्यम ही है जो पत्रकार की सहायता करते हैं । नवीन संचार माध्यम और ग्रामीण विकास हमारे देश में साक्षरता का स्तर अत्यंत कम है । इस बात को ध्यान में रखते हुए संचार के माध्यम का चुनाव करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है । संचार माध्यम का चुनाव इस बात को भी ध्यान में रखकर किया जाता है कि साक्षर निरक्षर ग्रामीणों तक समान रूप से जानकारी पहुंच सके । आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के रूप में संचार के नवीन माध्यमों में से एक टेलीविजन और रेडियो महत्वपूर्ण है । इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जैसे रेडियो टीवी के विविध चैनल्स और दूरदर्शन अब गांवों की ओर मुडे हैं । ग्रामीण आवश्यकताओं की पूर्ति है तो प्रदर्शित नियमित कार्यक्रमों के मुख्य दो उद्देश्य ग्रामीण कृषकों को आधुनिक तकनीक और कृषि जगत से संबंधित जानकारी देना है । जैसे उन्नत कृषि पद्धति, उर्वरक, बीज, नए उपकरण, कुटिर, उद्योग धंधों, ग्रामीण विकास, कृषि समाचार, मौसम संबंधी जानकारी दूसरा उद्देश्य है । शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई, परिवार कल्याण, पर्यावरण आदि आते हैं । ग्रामीण कार्यक्रमों के विस्तार के लिए उन्नीस सौ पचहत्तर ईसवी में उपग्रह से संचालित साइट परियोजना शुरू हुई, जिसके अंतर्गत छह राज्यों के चौबीस सौ गांव लाभान्वित हुए । कृषि दर्शन, चौपाल, मेरा फ्रेंड आमची मार्टी जैसे कार्यक्रम कृषि जगह से ही संबद्ध है । स्वास्थ्य, शिक्षा, गरीबी उन्मूलन, पंचायतीराज, सहकारिता शामिल, कल्याण, युवा जगह, उद्योग, विकास, आवास, विधिविधान आदि सामयिक विषयों पर दूरदर्शन कार्यक्रम प्रसारित करता रहता है । संचार माध्यमों के उपयोग द्वारा सरकार एवं ग्रामीण जनता के मध्य संवाद स्थापित हुआ है एवं नई संचार तकनीक जैसे ऑडियो एॅफ रिकॉर्डिंग के द्वारा संदेशों एवं सूचनाओं के आदान दौरान से सभी वर्गों के मध्य आपसी समझ में वृद्धि हुई है । आज मल्टीमीडिया सीडी, रोम तथा इंटरनेट और मोबाइल फोन जैसे उच्च तकनीकी साधनों के द्वारा सूचनाएं तीव्र गति से संचालित की जा सकती है । आज भौगोलिक सीमाओं का कोई अस्तित्व नहीं रह गया है । शहर और गांवों का भेद समाप्त हो गया है । इंटरनेट के द्वारा सूचनाओं का आदान प्रदान कम लागत में व्यापक क्षेत्र में संभव है । निष्कर्ष गांव में सही सूचना का नितांत अभाव है । आज रोटी से भी अधिक करीबी सोचना की है । सूचना संचार परिवर्तन का आधार है । संचार साधनों ने विकास को गति दी है । टेलीफोन से शहर का संपर्क गांव से हुआ । व्यापारियों ने गांव की गतिविधियों की प्रतिदिन की जानकारी को महत्वपूर्ण मारा । ग्रामीणों ने शहर और बाजार के भाव की जानकारी ली । टेलीफोन के चलते गांव की प्रगति हुई । वहाँ के निवासियों की आय बडी संचार माध्यमों से गांव का कायाकल्प हुआ । हमें यह बात नहीं भूलनी चाहिए कि गांवों के विकास पर ही देश का विकास निर्भर है । यहाँ तक कि बडे उद्योगों का माल भी तभी बिकेगा जब किसान के पास पैसा होगा । थोडी से सफाई या कुछ सुविधाएँ प्रदान कर देने मात्र से गांवों का उधार नहीं हो सकेगा । गांवों की समस्याओं पर संचार माध्यमो द्वारा पूरा ध्यान किये जाने की आवश्यकता है ।

51 - इंटेरनेट के जाल में उलझता ग्रामीण युवा

इंटरनेट के जाल में उलझता ग्रामीण युवा संचार का अर्थ जनता के बीच विभिन्न माध्यमों से क्या जाने वाला आपसी संवाद है संचार का वर्तमान समय ग्रामीण समाज की मनोदशा, विचार, संस्कृति, आम जीवन की दशाओं को नियंत्र पर निर्देशित कर रहा है । संचार माध्यमों से एक क्रांति आई है जिसे संचार क्रांति कहते हैं, जिसमें मार्शल मैक्लुहान के कथन को पूर्णतः सत्य कर दिया की संपूर्ण दुनिया एक गांव में तब्दील हो जाएगी । मनुष्य के बोलने का अंदाज बदल जाएगा और क्रियाकलाप भी । आज का ग्रामीण युवा रेडियो सुन रहा है, टेलीविजन देख रहा है, मोबाइल से बातें कर रहा है, इंटरनेट का प्रयोग कर रहा है और अंगुलियों से कंप्यूटर चला रहा है । हाल तक भारत में फेसबुक व सोशल साइटों का उपयोग करने वालों की संख्या लगभग साढे छह करोड है जो दो हजार दस की तुलना में से प्रतिशत अधिक है । इनमें से पांच करोड युवा है । इंडिया बिजनेस न्यूज ॅ द्वारा बारह सौ लोगों का सर्वे किया गया जिसमें अठारह से पैंतीस साल की उम्र के युवा शामिल थे । प्रतिशत युवाओं ने माना कि सोशल मीडिया उनकी दुनिया में परिवर्तन लाने के लिए समर्थ है । चौबीस फीसदी जवानों ने अपनी सूचना का स्रोत सोशल मीडिया को ही बताया । जर्मनी के प्रख्यात समाज शास्त्री हर्बल कुमार कोच का कहना है कि संचार मीडिया के प्रचार के परिणामस्वरूप आने वाला भोग मनुष्य में एक द्वितीय प्रवृत्ति उत्पन्न करता है और पहले से अधिक समाज में प्रचलित हित साधने के वातावरण पर निर्भर करता है । मैकिंसे द्वारा किए गए अध्ययन में बताया गया है, के विकसित देशों के सकल घरेलू उत्पाद में अंतिम पंद्रह वर्षों में इंटरनेट आधारित बाजार का योगदान दस प्रतिशत था जबकि अंतिम पांच वर्षो में यह आंकडा प्रतिशत हो गया । इसकी पूरी संभावना युवा भारत में इसलिए भी है कि देश के छियासी प्रतिशत से अधिक आबादी के पास मोबाइल फोन है जो तेजी से स्मार्ट फोन में परिवर्तित हो रहा है जहाँ इंटरनेट सहज उपलब्ध हो जाएगा । नई अर्थनीति के बाहर बहुराष्ट्रीय कंपनियों की एक और लीला इंफोटेनमेंट एक्सप्लोजन यानी सूचना रंजन विस्फोट के रूप में हुई और देखते ही देखते वह शहरों के साथ साथ गांवों में भी पसंद आयी । इसमें बडा भारी योगदान निशुल्क डी । टी । एच सिस्टम का रहा जिसने सही अर्थों में घरों से सीडी प्लेयर ऑफ रेडियो की जरूरतों को ही खत्म कर दिया । बिजली रहने पर चौबीस घंटे के देवी कार्यक्रम निःशुल्क अश्लील से अश्लील और अर्ध अश्लील कार्यक्रम मन में घर जाने वाले व्यावसायिक विज्ञापनों की लहर पर सवार होकर आने लगे । पिछडे ग्रामीण इलाके के हर दूसरे युवा के हाथ में मोबाइल फोन इंटरनेट सुविधा है । बहन नई फिल्म से लेकर ब्लू फिल्म के रहस्य जानता है । इसी के साथ पहले टेस्ट फैशन से परिचित है । शिक्षा और व्यवसाय के फैलते दायरे का पता उन्हें चल रहा है । यही कारण है कि आज एक धुलते हती जवाबी शहर जाकर दो दशक पहले के देहाती युवा की तरह अचंभित नहीं होता । लेकिन इन जानकारियों ने इसके अंदर एक लालसा भी पैदा कर दी है जिसकी पूर्ति गांव में संभव नहीं । आज काम युवाओं के लिए बंद स्थल बन गए हैं । वहाँ उच्च और व्यवसायिक शिक्षा नहीं है, नौकरी नहीं है और पूर्ण या अंशकालिक रोजगार भी नहीं है । इंटरनेट एक माध्यम मात्र है । इस पर उपलब्ध कोई भी ऐसी वेबसाइट्स ग्रामीण समाज की भूख रोग और अशिक्षा को दूर नहीं कर सकता । ग्रामीण समाज का डिजिटलीकरण समय के साथ धीरे धीरे देश की आंतरिक अवस्थाओं की शर्त पर होना चाहिए । निष्कर्ष इंटरनेट के प्रयोग ने युवाओं की जीवन शैली परिवर्तित की है । इसमें खानपान, वेशभूषा, बोल चल शामिल है । मद्यपान, धूम्रपान उन्हें फैशन का अंग लगता है । मोबाइल के द्वारा दूरस्त व्यक्ति से संपर्क हो सकता है तथा स्मृतियों को कैमरे में कैद भी किया जा सकता है परन्तु कई बार एमएमएस का गलत प्रयोग भी किया जाता है । इंटरनेट के द्वारा अश्लील साइट का प्रयोग भी किया जा रहा है । इंटरनेट के अधिक उपयोग साइबर क्राइम को भी जन्म दे रहे हैं । इंटरनेट ने एक मुकम्मल बाजार के उभार की पृष्ठभूमि तैयार की है । कई अर्थों में एक व्यापक जनसमूह का इंटरनेट से जुडाव इस बाजार के उत्पादों के आकर्षण सही संभव हुआ है । इंटरनेट आपसी संपर्क के साथ साथ व्यापक जनसंचार की आकांक्षाओं को पूरा करने के उद्देश्य पर केंद्रित होता चला गया । यहाँ इस पक्ष पर विचार करना चाहिए कि देश के व्यापक समाज की स्थिति सुधारने के लिए किसी डिजिटल उत्पाद की कितनी आवश्यकता है? क्या अभी देश में शैक्षिक और मानसिक परिपक्वता के अभाव में इसका दुरुपयोग नहीं हो रहा है? असल में इंटरनेट की स्थिति उस गंगा के सामान हो सकती है, जिसका उपयोग ग्रामीण युवाओं के व्यापक हित में किया जा सकता है है ।

52 - ई - चोपाल : ग्रामीण भारत के उत्थान के लिए एक विचार

चौपाल ग्रामीण भारत के उत्थान के लिए एक विचार, संचार और व्यवसाय के इस युग में संपूर्ण विश्व एक लाॅ हम यानी विश्वग्राम के रूप में बदल रहा है और हम मजबूतीकरण ने देश में परिवर्तन की एक नई लहर उत्पन्न की है और इस बदलाव से ग्राम में अर्थव्यवस्था और कृषि विपणन उत्पादन में एक नई संभावना चाहती है । करी भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सूचना तकनीकी को और बडे पैमाने पर अपनाया जाता है तो भारतीय कृषि में क्रांतिकारी बदलाव परिरक्षित होगा । भारत दुनिया का दूसरा सबसे बडा आबादी वाला देश है और कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ है । देश के जीडीपी में इसका योगदान छब्बीस प्रतिशत है । भारत के छह लाख में से प्रतिशत लोग कृषि से संबंधित व्यवसाय और सेवाओं में कार्यरत है । भारत के किसानों के पास प्रतिशत खेत खंडित किस्म के हैं जिन पर आधुनिक उपकरणों का प्रयोग बहुत महंगा साबित होता है । इस कारण लागत अधिक कम उत्पादकता, कम निवेश, गुणवत्ता में कमी, कमजोर बाजार उन्मुखीकरण, कम मूल्य प्राप्ति, कम मार्जिन, कम जोखिम उठाने की क्षमता आदि समस्याओं से भारत कृषि कसित है । लेकिन चौपाल का प्रयोग भारतीय कृषि क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात है । की वर्ड ग्रामीण बाजार साझा स्वामित्व स्थानीय नेतृत्व बडाबाजार अध्ययन के उद्देश्य एक चौपाल कि देश में क्यों आवश्यकता है? दो ही चौपाल से कृषक कैसे लाभान्वित होंगे? तीन । चौपाल की क्या चुनौतियां ई चौपाल का अभिप्राय चौपाल का अर्थ है जहाँ गांव के लोग बैठ कर सामूहिक चर्चा करते हैं । चौपाल गांव की बैठक की जगह इंटरनेट के माध्यम से एक नई पहल शुरू करने का एक मंच प्रदान करता है । भारतीय किसानों को मौसम, आधुनिक वैज्ञानिक, कृषि के तरीके, बीज, खाद, उर्वरक, फुटकर, मैं थोक विक्रेताओं की जानकारी, बिक्री निर्माताओं से संपर्क, फसल के बाद किसानों को मंडियों की जानकारी, क्षेत्रीय बाजार की जानकारी नीलाम विधि बीमा, उचित मूल्य की खोज की सुविधा, बाजार की दूरी, कीटनाशक किस्म, तोलना, परिवहन आदि की जानकारी श्रृंखला के रूप में एक साथ प्रमुख रूप से प्रस्तुत करता है । चौपाल का सबसे महत्वपूर्ण करने पिचौलिया का आंदोलन करें, किसानों को सक्षम बनाना है और किसानों को मुनाफे के रूप में बडा है । पैसा कमाने में सक्षम बनाना है । यह मूल्य श्रृंखला के निचले हिस्से तक पहुंचता है । यह बडे छोटे उत्पादक विक्रेताओं को सूचना तकनीकी के माध्यम से आपस में जोडता है । इस प्रकार आईटी के माध्यम से रचनात्मक उपयोग की बुनियाद को मजबूत किया है । आपूर्ति श्रृंखला में लागत में कमी तथा वितरण कृषि सेवाओं को बेहतर कर एक अनूठा मापदंड निर्माण करने का मंच तैयार करता है तथा स्थानीय नेतृत्व को उभारने और उन्हें इंटरनेट का उपयोग प्रदान करता है । यह आईटीसी लिमिटेड द्वारा भारत आधारित व्यापार है । भारतीय कृषि की समस्या परंपरागत रूप से कृषि विपणन में बिचौलियों द्वारा निर्धारित मूल्य से किसानों को कम मूल्य दिलवाया जाता है । मंडी संबंधित नापतौल मूल्यनिर्धारण की अनियमितता, अच्छी घटिया वस्तु के मूल्य में अंतर ना करना, किसानों का शोषण से मुक्ति, खेतों का उपविभाजन एवं उपखण्ड फसल की अधिक लागत, नई तकनीकी व शोध संबंधी जानकारी का अभाव, मौसम की सटीक जानकारी का अभाव, बीज, खाद, कीटनाशक की अपर्याप्त जानकारी आदि से भारतीय क्रशिंग ग्रस्त है, जबकि चौपाल में ये सारी जानकारी एक स्थान पर उपलब्ध रहती है । ई चौपाल से जानकारी सोयाबीन, कॉफी, गेहूँ भी के कपास जलिया कृषि आधी उपज की खरीदी ग्रामीण किसान के साथ लिंक करने के लिए आईटीसी लिमिटेड की एक पहल है । इसमें अनेक फसलों, अनेक कृषि संबंधी जानकारी तत्काल उपलब्ध करवाई जाती है तथा कृषि सेवा व्यापार संबंधी जानकारी भी किसानों को दी जाती है । चौपाल से किसानों को लाभ एक बिचौलियों से मुक्ति दो कम समय में प्रभावित तीन किसानों का सशक्तिकरण कम लागत उचित मूल्य अधिक लाभ । चार । मौसम कीमतों की जानकारी किसानों तक पहुंचाता है । पांच । यह कृषि प्रबंधन जोखिम प्रबंधन के ज्ञान को हस्तांतरण करता है । अच्छा यह कृषि पदार्थों की गुणवत्ता को जांचने के आधार प्रदान करता है । साथ यह किसानों के विपणन उत्पादन के लिए एक विकल्प चैनल प्रदान करता है । आप यह सूचना, ज्ञान और जानकारी देने का इंटरलॉकिंग नेटवर्क आईटीसी डाॅट विश्वविद्यालयों डॉॅ एजेंट है, नौ । स्थानीय प्रतिभा और स्थानीय लोगों का उपयोग करता है और स्थानीय नेतृत्व को विकसित करता है । दस । स्थानीय के साथ साथ वैश्वीकरण को भी बढावा देता है । निष्कर्ष निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि कृषि में केवल तकनीकी बदलाव लाने या सुविधाएँ सूचना उपलब्ध करवा देने से कुछ नहीं होगा बल्कि आवश्यकता है किसानों में गुणात्मक बदलाव लाने की । उनकी शिक्षा, विचार, ज्ञान, वह आत्मविश्वास को बढाने की उनकी रूढिवादी सामाजिक सोच को बदलना होगा । भारतीय कृषि को पारदर्शिता प्रदान करनी होगी और इन सब के लिए आवश्यकता है स्थानीय भाषा और स्थानीय नेतृत्व की

53 - ग्रामीण क्षेत्रों में संचार माध्यमों की भूमिका : एक सर्वेक्षण

ग्रामीण क्षेत्रों में संचार माध्यमों की भूमिका, एक सर्वेक्षण, तकनीकी विकास के परिणामस्वरूप संचार माध्यमों का विकास एवं उनका उपयोग राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक क्षेत्र में विकास के लिए अपनी भूमिका निभा रहा है । संचार माध्यमों का क्षेत्र दिन प्रतिदिन बढता जा रहा है । प्राचीन काल से लेकर आज तक संचार माध्यमों में अनेक परिवर्तन हुए हैं । वह इन बदलावों की कहानियां आप टेलीविजन, समाचार पत्र, रेडियो इंटरनेट के माध्यम से प्राप्त करते हैं । टेलीविजन इन सभी माध्यमों में सर्वाधिक प्रचलित माल लोगों की पहुंच में हैं, अगर टेलीविजन के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता है । टेलीविजन अपने आविष्कार के लगभग पच्चीस वर्ष बाद भारत पहुंचा टेलीविजन जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है । उसके परिणामस्वरूप सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं स्वास्थ्य संबंधी पक्षों पर इसके प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रभाव को देखा जा सकता है । टेलीविजन पर प्रसारित कई कार्यक्रम हमें वास्तविकता से अवगत कराते हैं, कई समस्याओं के समाधान सुझाते हैं । बाहर ही दुनिया में हो रहे विकास से अवगत कराने के साथ साथ हमारी संस्कृति परंपराओं को भी सही रखने का प्रयास करता है । कई बार टेलीविजन दर्शकों को उनके अधिकार व कर्तव्य के प्रति भी सजग करता है । कहा जा सकता है कि टेलीविजन ग्रामीण क्षेत्र में जागरूकता लाने का एक सशक्त माध्यम है परिणामों का विश्लेषण एवं व्याख्या प्रस्तुत शोध में ग्रामीण क्षेत्र के टेलीविजन दर्शकों का साक्षात्कार लिया गया जिसमें सम्मिलित प्रश्नों का प्रतिशत अंक के आधार पर विश्लेषण अग्रलिखित हैं । प्रश्न क्रमांक एक उम्र के लिए पणन निम्नानुसार है ग्रामीण क्षेत्रीय दर्शकों से प्राप्त आंकडों के अनुसार बीस से चालीस वर्ष आयु वर्ग में बयालीस प्रतिशत चालीस वर्ष से अधिक उनतीस प्रतिशत बीस वर्ष से कम उनतीस प्रतिशत लोग सम्मिलित है । टेलीविजन दर्शकों में सभी आयु वर्ग के लोग सम्मिलित है । प्रश्न क्रमांक तो लिंग के लिए वर्णन निम्नानुसार है ग्रामीण क्षेत्रीय दर्शकों से प्राप्त आंकडों के अनुसार दशमलव पांच प्रतिशत महिलाएं पर सैंतीस दशमलव पांच प्रतिशत पुरुष सम्मिलित है अजय कुल दर्शकों में महिला दर्शकों की संख्या अधिक है । प्रश्न क्रमांक टीम टेलीविजन देखना पसंद है के लिए वर्णन निम्नानुसार हैं ग्रामीण क्षेत्रीय दर्शकों से प्राप्त आंकडों के अनुसार प्रतिशत दर्शक टेलीविजन देखना अधिक पसंद करते हैं वह चार प्रतिशत दर्शक टेलीविजन देखना अपेक्षाकृत कम पसंद करते हैं अतः है कहा जा सकता है की ग्रामीण क्षेत्र में भी टेलीविजन के दर्शकों की संख्या अधिक है । प्रश्न क्रमांक चार टेलीविजन । आप क्यों देखते हैं के लिए वर्णन निम्नानुसार है ग्रामीण क्षेत्रीय दर्शकों से प्राप्त आंकडों के अनुसार पचास प्रतिशत दर्शक टेलीविजन का उपयोग मनोरंजन हेतु करते हैं । इक्कीस प्रतिशत दर्शक समाचार सत्रह प्रतिशत दर्शक ज्ञान प्राप्ति के लिए एवं बारह प्रतिशत दर्शक खेलकूद से जुडी जानकारी वाह कार्यक्रमों के लिए टेलीविजन देखना पसंद करते हैं । निष्कर्ष स्वरूप यहाँ कहा जा सकता है की ग्रामीण क्षेत्र में टेलीविजन का उपयोग मनोरंजन के लिए अधिक मात्रा में क्या जाता है । प्रश्न क्रमांक पांच प्रतिदिन टेलीविजन देखने के लिए कितने घंटे देते हैं के लिए वर्णन निम्नानुसार है ग्रामीण क्षेत्रीय दर्शकों से प्राप्त आंकडों के अनुसार प्रतिदिन पचास प्रतिशत दो से चार घंटे बयालीस प्रतिशत शून्य से दो घंटे वह आठ प्रतिशत चार से छह घंटे टेलीविजन के कार्यक्रम देखते हुए व्यतीत करते हैं । किसी भी ग्रामीण दर्शक के पारा छह घंटे से अधिक टेलीविजन कार्यक्रम का अवलोकन नहीं किया जाता है । अधिकांश दर्शक दो से चार घंटे टेलीविजन कार्यक्रमों का अवलोकन करते हैं । प्रश्न क्रमांक छह टेलीविजन किस समय देखना पसंद करते हैं के लिए वर्णन निम्नानुसार है ग्रामीण क्षेत्रीय दर्शकों से प्राप्त आंकडों के अनुसार अडतीस प्रतिशत दर्शक दोपहर के समय उनतीस प्रतिशत दर्शक रात के समय पच्चीस प्रतिशत शाम आठ प्रतिशत दर्शक टेलीविजन कार्यक्रमों को देखना पसंद करते हैं । इसमें अधिकांश दर्शक टेलीविजन पर कार्यक्रमों को देखने के लिए दोपहर एवं रात का समय अधिक पसंद करते हैं । प्रश्न क्रमांक सात टेलीविजन देखते समय आप और कोई काम करना पसंद करते हैं के लिए वर्णन निम्नानुसार है ग्रामीण क्षेत्रीय दर्शकों से प्राप्त आंकडों के अनुसार तरह प्रतिशत दर्शक टेलीविजन देखते समय अन्य कार्य करना पसंद नहीं करते हैं एवं विशेष प्रतिशत दर्शक अन्य कार्य करते हुए टेलीविजन कार्यक्रम देखना पसंद करते हैं । अधिकांश दर्शक टेलीविजन कार्यक्रमों को ध्यानपूर्वक देखते हैं । प्रश्न क्रमांक आठ क्या आप टेलीविजन परिवार के साथ देखते हैं के लिए वर्णन निम्नानुसार है ग्रामीण क्षेत्रीय दर्शकों से प्राप्त आंकडों के अनुसार सडसठ प्रतिशत दर्शक अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ जब प्रतिशत दर्शक अकेले ही टेलीविजन कार्यक्रम देखना पसंद करते हैं । ग्रामीण दर्शकों की संख्या में महिला दर्शक अधिकांश दया परिवार के साथ समय बिताना पसंद करती है इसलिए परिवार के साथ टेलीविजन देखने वालों की संख्या अधिक है । प्रश्न क्रमांक ऍन पर आप कितने चैनल देखते हैं के लिए वर्णन निम्नानुसार है ग्रामीण क्षेत्रीय दर्शकों से प्राप्त आंकडों के अनुसार दो से पांच टेलीविजन चैनल देखने वालों का प्रतिशत अडतालीस है जो की सबसे अधिक हैं । इसके बाद प्रतिशत दर्शक पांच से दस चैनलों के कार्यक्रम देखते हैं । ग्यारह प्रतिशत वश्यकता से ज्यादा एवं केवल आठ प्रतिशत दर्शक ही दो या उससे कम चैनलों का उपयोग करते हैं । ग्रामीण क्षेत्र में भी डिश टीवी का उपयोग अधिक किया जाता है और दर्शक अधिक मात्रा में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । प्रश्न क्रमांक दस हिंदी भाषा में उपलब्ध चैनल को छोड अन्य किसी भाषा से संबंधित चैनल देखते हैं । के लिए वर्णन निम्नानुसार है ग्रामीण क्षेत्रीय दर्शकों से प्राप्त आंकडों के अनुसार प्रतिशत दर्शक हिंदी भाषा में उपलब्ध चैनलों को देखना पसंद करते हैं । वह केवल दस प्रतिशत दर्शक ही हिंदी भाषा में उपलब्ध चैनल को छोड अन्य किसी भाषा से संबंधित चैनल देखना पसंद करते हैं । अन्य भाषा के कार्यक्रम वे हिंदी भाषा में ही देखना पसंद करते हैं । अन्य भाषा के रूप में दर्शक मराठी चैनल का उपयोग अधिक करते हैं हूँ ।

54 - ग्रामीण विकास में ई - शासन की उपयोगिता

ग्रामीण विकास में ई शासन की उपयोगिता ग्रामदेवता नमस्कार तुम जान मान के अधिनायक हो तो जो कि फूली पहले देश आओ सिंघासन पर बैठ हूँ ये राज्य तुम्हारा है अक्षय उर्वरा भूमि के नई खेत के नई थान्या से सजे देश तो भू पर रहकर भूमि बाहर धारण करते हो मनुष्य अपनी कविता से आज तुम्हारी बिमल आरती लू उतार ग्रामदेवता नमस्कार कभी बदनाम कुमार वर्मा द्वारा उन्नीस सौ अडतालीस लिखी गयी ये पंक्तियां हमारी कहाँ के किसानों पर हैं जो अन्नदाता हैं समाज का जिन्हें शत शत नमन भारत का उनका देश है । देश की ग्रामीण जनता ही भारतीय समाज का मूल हिस्सा है और वास्तविक भारत का प्रतिनिधित्व करती है । वर्ष दो हजार एक की जनगणना के मुताबिक देश में छह लाख अडतीस हजार तीन सौ सत्तासी गांव है जहाँ भारत की कुल आबादी का बहत्तर फीसदी हिस्सा है । नीतियां बनाते समय सरकार को इन ग्रामीण जनों के विकास को ध्यान में रखना अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है । ग्रामीण विकास जिसका सीधा संबंध आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय से हैं और इस लिहाज से न्यूनतम बुनियादी जरूरतों को उपलब्ध कराना जीवन स्तर में सुधार लाना आवश्यक हो जाता है । ग्रामीण विकास के वर्तमान रणनीति, वेतन, स्वरोजगार आदि नए कार्यक्रमों के माध्यम से गरीबी उन्मूलन, आजीविका के बेहतर अवसर, मूलभूत ढांचा, सुख सुविधाएं प्रदान करने के प्रावधान पर केंद्र है । ग्रामीण विकास की आवश्यकता अनादिकाल से भारत ग्रामीण समुदायों की भूमि रहा है, वर्तमान में भी है एवं भविष्य में भी रहेगा । भारत की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में ग्रामीण चरित्र के प्रमुखता यहाँ के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली जनसंख्या के प्रतिशत से प्रतिबिंबित होती रही है । ग्रामों के बारे में विनोबाभावे जी का कहना था कि गांवों की स्वयंभू जनता महादेव है । वह ग्रामों में ही रहेगी हैं । हमें गांवों में ही जाना होगा, लेकिन गांवों में जाते समय हमारे मन में कोई हीनता का भाव नहीं आना चाहिए । ग्रामीण भारत के विकास पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सदैव जोर देते थे । उन्होंने लिखा था कि भारत की पहचान इसके कुछ शहरों में ना होते हुए इसके साथ लाख दावों में है, लेकिन कुछ शहरी लोग यह मानते हैं कि भारत शहरों में रहता है तथा गांवों को हमारी आवश्यकता के लिए बनाया गया है । उनका मानना था कि यदि काम समाप्त होते हैं तो भारत की समाप्त हो जाएगा । अतेफ ग्रामीण विकास भारत की एक निरपेक्ष त्वरित आवश्यकता है । जब हम यहाँ आने वाले समय में भी बनी रहेगी । भारत के विकास के लिए यह नितान्त आवश्यक है ग्रामीण विकास की चुनाव दिया ग्रामीण भारत के विकास में । वर्तमान में निम्नलिखित चुनौतियां हैं जिनका सामना आज ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को करना पड रहा है । भाषा भारत में हर कदम में बोली बदल जाती है । पता है भाषा ग्रामीण भारत के विकास के सामने सबसे बडी समस्या है क्योंकि विकास संबंधी किसी भी जानकारी को ग्रामीण जनता के सामने प्रेषित करने के लिए हमें उन्हीं की भाषा में जानकारी देना होगा जिससे कि जनता को विकास संबंधी सभी महत्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त हो । ग्रामीण भारत का विकास हो । निरक्षरता की समस्या साक्षरता का प्रतिशत गांवों में कम होने के कारण ग्रामीण चिंता, अज्ञानता, वर्ष पुरानी पद्धति एवं रोडियो में लेफ्ट एवं प्रसिद्ध रहती है तथा अपने कार्यों में भी वह इन रूढिवादी प्रवृत्तियों का उपयोग करती हैं । उनकी इस अज्ञानता को दूर करना तथा उन्हें स्थिति एवं विकास संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना भी एक समस्या ग्रामीण विकास में बाधा करेंगे । ग्रामीण निर्धनता का विराट होगा ग्रामीण विकास की मुख्य समस्या ग्रामीण निर्धनता का विराट रूप में विद्यमान होना है । देश में आज करोडों की जनसंख्या में जनता गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है । बडी संख्या में निर्धनता प्राप्त होने से ग्रामीण विकास कार्यक्रम का सब तक पहुंच पाना भी अपने आप में एक बडी समस्या है । एक गरीब की भूल आवश्यकता रोटी, कपडा और आवास है इन से परे वह विकास की ओर नहीं पडता था । कृषिगत विकास की समस्या ग्रामीण विकास की समस्याओं में कृषिगत विकास या प्राथमिक क्षेत्र के विकास की समस्या प्रमुख है । ग्रामीण भारत में आज भी ग्रामीणों का प्रमुख कार्य कृषि तथा ग्रामीण जनता वर्तमान में प्रयुक्त कृषि से संबंधित नवीन तकनीकों से अनभिज्ञ है । अजय इन से रूबरू करवाने के लिए पारंपरिक माध्यमों का प्रयोग में लाया जा सकता है । औद्योगिक विकास की समस्या है । ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि क्षेत्र के विकास के साथ साथ उद्योग का भी विकास करना आवश्यक है, जिससे कृषि क्षेत्र कि अदृश्य बेरोजगारी को दूर किया जा सके । ग्रामीण क्षेत्र में चुकी अब संरचनात्मक सेवाओं यथा सडक, शिक्षा, परिवहन, स्वास्थ्य आदि का विकास नहीं हुआ रहता है । इन इलाकों में लघु उद्योग व कुटिर उद्योग की स्थापना से पूर्व उत्तर सेवाओं का विकास जरूरी है अन्यथा औद्योगिक विकास भलीभांति नहीं हो सकता है । इन उद्योगों में पूंजी कम लगती है । पता है एक किसान भी इन उद्योगों की स्थापना आसानी से कर सकता है, जिससे कि वह कृषि के साथ साथ यह कार्य भी आसानी से कर सकता है । अतः सरकार को भी इन क्षेत्रों में अधिक ध्यान देने की जरूरत है । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुए मंत्रिमंडल की बैठक में बीस अगस्त दो हजार चौदह को केंद्र सरकार ने करीब एक लाख करोड के विभिन्न परियोजनाओं वाले कार्यक्रम डिजिटल इंडिया को मंजूरी दी । ऐसे न्यू इंडिया को फल मिलेगा इस योजना के तहत रखेगा उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को सुविधा के रूप में बुनियादी ढांचा प्रदान करना, प्रत्येक गांव में हाईस्पीड इंटरनेट पहुंचाना, देश में सुरक्षित साइबरस्पेस, मोबाइल फोन और बैंक अकाउंट के स्तर पर समझ अनोखी, आजीवन, ऑनलाइन और प्रमाणन योग्य डिजिटल पहचान है । सरकार द्वारा एक गवर्मेंट की पहल की गई है । प्रमाणों के लिए भी ऑनलाइन सर्विस तैयार की गई है । यह नहीं मीडिया के अंतर्गत आती हैं । केंद्र सरकार द्वारा सत्ताईस अगस्त दो हजार चौदह को डॉट भारत डोमेन की शुरूआत इस दिशा में सकारात्मक कदम है । इंटरनेट यूजर्स मार्च दो हजार चौदह भारतीय टेलीकॉम रेगुलेटर की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में दस इंटरनेट यूजर्स में से नौ मोबाइल फोन के माध्यम से इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं । यानी पच्चीस दशमलव दो करोड इंटरनेट सब्स्क्राइबर में बानबे फीसदी मोबाइल यूजर्स है । भारत में पच्चीस करोड लोग अंग्रेजी में इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं लेकिन अभी तक एक दशमलव दो अरब की आबादी में दस में से एक व्यक्ति अंग्रेजी बोलने में सक्षम हैं । विक्की के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में गूगल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर राजन आनंदन ने कहा कि दो हजार अठारह तक भारत में पचास करोड इंटरनेट उपभोक्ता होंगे । यानी चार साल में दोगुने यूजर्स होंगे । जब सबके पास इंटरनेट की पहुंच होगी तो न्यू मीडिया का विस्तार स्वतः होगा । इसके लिए बाजार में आ रहे दो से तीन हजार के सस्ते स्मार्टफोन ने भी माहौल तैयार किया है । विश्व बहन की दो हजार तेरह की रिपोर्ट के अनुसार चौरासी दशमलव फीसदी अमेरिकी यानी सत्ताईस करोड लोग ऑनलाइन है जो भारत की आबादी के पंद्रह प्रतिशत है । मतलब हम अगले कुछ सालों में इंटरनेट के उपयोग में अमेरिका को भी पछाड देंगे । ग्रामीण विकास में ए शासन से संबंधित सूचना, राष्ट्रीय ई शासन योजना, ऑनलाइन भूअभिलेख शासन में कृषि ई पंचायतें योजना निगरानी प्रणाली, सरकारी और पंचायती कार्यों के लिए ई शासन, सूचना का अधिकार, लोग शिकायत दर्ज एवं निगरानी, राज्य सरकार की एशियसन परियोजना, राष्ट्रीय ई शासन योजना भारत सरकार की राष्ट्रीय अनुशासन योजना का उद्देश्य देश के भीतर ही ए शासन की नींव रखना तथा इसकी तेलगांव टिक अभिवृद्धि के लिए प्रेरणा उपलब्ध कराना है । योजना का उद्देश्य सही शासन एवं सांस्थानिक प्रक्रम ओं का सृजन करना, केंद्रीय अब संरचना एवं नीतियों को स्थापित करना तथा केंद्र, राज्य तथा एकीकृत सेवा स्तरों पर अनेक मिशन मोड परियोजनाओं को क्रियान्वित करना है ताकि अभिशासन के लिए एक नागरिक संकेंद्रित ऍम केंद्रित माहौल का सृजन किया जाए । राष्ट्रीय अनुशासन योजना के विषय में अधिक जानकारी पाने के लिए राष्ट्रीय ई शासन की योजना केंद्रीय ऍम राज्य ऍम समेकित एमपी कार्यान्वयन कार्यनीति घटक अन्य घटक राष्ट्रीय ई शासन योजना कार्यक्रम प्रबंधन इकाई संपर्क के विवरण राष्ट्रीय ई शासन योजना के अंतर्गत ऑनलाइन सेवायें, आयकर, पासपोर्ट, वीजा, कंपनी मामले, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, पेंशन, भूअभिलेख, सडक परिवहन, संपत्ति पंजीकरण, कृषि नगर पालिकाएं, ग्राम पंचायतें, ग्रामीण पुलिस, रोजगार कार्यालय, न्यायालय ऑनलाइन हुआ मिलेगा । भू अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण भारत में ई शासन के लिए जमीनी स्तर पर सबसे पहले की गई पहल थी । इस पूरी सामरिक गतिविधि में राज्य ने अपना ध्यान कलह, सूचना प्रौद्योगिक के लिए प्रेरित करने और वर्तमान भू अभिलेख प्रणाली को बदलने पर दिया । इस वेब सेवा का उद्देश्य होगा । स्वामित्व में कुशल, एकदम सही, पारदर्शी वितरण तंत्र और संघर्ष समाधान सुनिश्चित करना है । भूमि मालिकों को मामूली दरों पर अधिकारों का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रदान करना । भूमालिकों को सूचना सशक्तीकरण कम लागत पर आसानी से पुनरुत्पादन ईयर टेटा प्रतिलिपी प्रस्तुत करना जो विश्वसनीय और टिकाऊ हो । मूल्यवर्धन और भूमि प्रशासन में आधुनिकीकरन अन्य डेटा के साथ एकीकरण की दिशा में व्यापक एलआईएस व्यवस्थित करना । ऑनलाइन भूअभिलेख प्रणाली आरंभ करने में राज्यों की पहल राजस्थान अपना खादान छत्तीसगढ भुइयां हरियाणा जमाबंदी हिमाचल प्रदेश हिम भूमि कर्नाटक भूमि केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा भूलेगा उत्तर प्रदेश उत्तराखंड देवभूमि पश्चिम बंगाल बंगला भूमि भी शासन में कृषि राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा देश में कृषि के क्षेत्र में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए विभिन्न पहले की गई है । कृषि के क्षेत्र में एमपी को एंड ई जीपी में पूर्व में हुए अनुभवों के आधार पर समाहित कर मजबूत बनाने का प्रयास किया गया है । वर्तमान में विविध प्रकार के पृथक प्रयास जारी है और ये प्रयास पूरे देश में किए जा रहे हैं । पंचायत स्तर तक ऑनलाइन सेवायें व्यापते हैं । कृषि क्षेत्र में ए शासन की प्रमुख पहले राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, आरकेवीवाई, सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के किसानों के लिए जानकारी कृषि विपणन, सूचना नेटवर्क, कृषि ऋण, कृषि विपणन, सूखा प्रबंधन, बृहत प्रबंधन इकाई निदेशालयों और फील्ड यूनिट कि नेटवर्किंग बीच किसान कॉल सेंटर, कृषि जनगणना, कीटनाशकों का पंजीकरण, एकीकृत पोषक तत्वों, प्रबंधन, वर्षा आधारित कृषि प्रणाली, सहभागिता, बागवानी विकास पंचायतें, पंचायतें, सरकार और भारतीय आबादी के साठ प्रतिशत लोगों के बीच संपर्क के प्रथम स्तर का प्रतिनिधित्व करती है और पूरे देश में ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों नागरिकों को बडी संख्या में बुनियादी सेवाएं मुहैया कराती है । इसकी पृष्ठभूमि को देखते हुए पंचायत एमपी को एंड बीजेपी में शामिल किया गया है । ऍम पी का उद्देश्य गांवों में बुनियादी चुनौतियों जैसे विश्वसनीय संचार प्रणाली की कमी, नागरिकों तक सुविधा वितरण में होने वाली तेरी ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाओं को लागू कराने के लिए कम राजस्व संग्रहण और योजनाओं के लिए निगरानी तंत्र की कमी आदि का सामना कर उन्हें दूर करना है । एमपी ग्राम पंचायत स्तर पर सेवाएं और प्रबंधन के क्रियान्वयन के लिए विभिन्न मापदंडों पर भी विचार करती है जो इस प्रकार है व्यापार लाइसेंस और एनओसी जारी करना, घर से संबंधित सेवाएं, जन्म और मृत्यु आये और ऋण चुकाने की क्षमता संबंधी प्रमाणपत्र जारी करना, पंचायत एजेंडा, मतदान और संकल्प की आंतरिक प्रक्रिया का प्रसार करना । ग्राम सभा की कार्यवाही और कार्यकलापों की रिपोर्ट की प्रतिलिपि एटीआर निधि की प्राप्ति, रसीद या प्रगति रिपोर्ट बीपीएल टेडा का प्रसाद पंचायत में शामिल किये गए प्रतिरोध आंध्र प्रदेश वेबसाइट्, छत्तीसगढ, ओडिशा राज्यवार पंचायत रिपोर्ट योजना निगरानी प्रणाली । केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर इस योजना में ई शासन के विभिन्न पहलुओं को भी जोड दिया है । मनरेगा में शामिल प्रमुख ऑनलाइन प्रतिरोध पंचायत स्तर पर आपके प्रश्न, सुझाव, शिकायत, प्रतिक्रिया, शिकायत निवारण तंत्र श्रमिकों की सूचना और विवरण जिला या ब्लॉक प्रशासन राज्य के विशेष जानकारी सामाजिक अंकेषण इंदिरा आवास योजना में ई शासन गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे गरीब ग्रामीणों को आवास मुहैया कराने के लिए मई उन्नीस सौ पचास में जवाहर रोजगार योजना के अंतर्गत एक उपयोजना के तौर पर इंदिरा आवास योजना आई एएवाय बाहरी वेबसाइट्स चुकी एक नई विंडो में खुलती है को आरंभ किया गया ही शासन में एक प्रमुख पहल के माध्यम से कुछ नई प्रणालियों को योजना में शामिल किया गया है । वे इस प्रकार है आवाज सॉफ्ट लोक शिकायत की व्यवस्था, वेबसाइट्, शिकायत की जांच निवारण वेबसाइट्, शिकायत कर पंजीका, वेब साइट कपाट कबाड बाहरी वेबसाइट्स जो एक नई विंडो में खुलती है की स्थापना दो एजेंसियों को मिलाकर हुई है । काउंसिल फॅस तथा पीपुल्स एक्शन फॉर डेवलपमेंट इंडिया पीएडी आए कपाट अठारह सौ साठ के संस्था पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था मानी गई । यह ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशों के अंतर्गत कार्य करता है जो भारत सरकार द्वारा मान्यता है । आज यह संस्था भारत में ग्रामीण विकास को फैलाने में बडा योगदान करती है । समस्त देश में बारह हजार स्वयंसेवी संगठनों द्वारा बडे पैमाने पर विकास कार्यक्रमों को आरंभ किया गया है । राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम एन । एस । ए । पी । राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम एनएसएपी भारी वेबसाइट्स जो की एक नई विंडो में खुलती है पंद्रह अगस्त उन्नीस सौ से प्रभाव में लाया गया यह संविधान के अनुच्छेद इकतालीस में दिए निर्देशक तत्वों की पूर्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम का प्रतिनिधित्व करता है । इस कार्यक्रम का लक्ष्य गरीबों के लिए सामाजिक सहायता की एक राष्ट्रीय नीति बनाना और राज्यों द्वारा वर्तमान क्या भविष्य में प्रदान किए जाने वाले लाभों के अतिरिक्त समाज सहायता के लिए न्यूनतम राष्ट्रीय मानक सुनिश्चित करना है । शासन में एनसीपी में शामिल योजनाएं इस प्रकार हैं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, आई । जी । एनओएए पि । ऍफ साइट, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना आॅफ साइट, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना आईजीएमडीपी ऍफ साइट लाभार्थी सारा मासिक प्रगति रिपोर्ट की तरह अन्य ऑनलाइन जानकारी, डेटा गेप रिपोर्ट, पीडीए परबनी रिपोर्ट, लाभार्थी पीडीएल लिंकिंग रिपोर्ट, वार्षिक प्रगति रिपोर्ट, क्षेत्रवार वितरण की रिपोर्ट, महावार वितरण की रिपोर्ट, पेंशन राशि रिपोर्ट जारी करना संशोधन, पेंशनभोगियों के लिए पासपोर्ट लाभार्थियों की खोज, श्रेणीवार वितरण रिपोर्ट निधि प्राप्ति और रुपया निधि का उपयोग और वितरण भी उपलब्ध है । प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना, प्रधानमंत्री सडक योजना, पीएमजीएसवाय बाहरी वेबसाइट्स जो एक नई विंडो खुलती है, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई योजना है । यह गरीबी उन्मूलन रणनीति के तहत उन ग्रामीण बसाहटों को नए सडक संपर्क प्रदान करती है जो पहले सडकों से नहीं जुडी थी । भारत सरकार उच्च और एक समान तकनीकी और प्रबंधन मान को और सुविधाजनक नीति के माध्यम से राज्य स्तर पर विकास की योजना निर्धारित करने के लिए ग्रामीण सडक तंत्र का सतत प्रबंधन सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है । एक नागरिक भी इस योजना के प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट देख सकता है । प्रशासन की इस पहल में शामिल हैं बसावट, क्षेत्र यानी वेबसाइट्, स्वीकृत योजनाएं, वेबसाइट्, लंबित प्रस्ताव, वेबसाइट् पैकेज की संपूर्णता, वेबसाइट् परियोजना का बहुत एवं वित्तीय सहारा, वेबसाइट् कार्यों की भौतिक प्रगति, वेबसाइट्स, कार्यों की वित्तीय प्रगति, वेबसाइट्स, खातों के अनुसार वित्तीय प्रगति वेबसाइट्, राज्य की रूपरेखा, वेबसाइट्, राष्ट्रीय परियोजनाओं का सारांश, वेबसाइट्स प्रति किलोमीटर लागत वेबसाइट्स, स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना, स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना, ॅ बाहरी वेबसाइट्स जो एक नई विंडो में खुलती है, गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन करने वाले परिवारों की मदद कर एक निश्चित समय के भीतर उन परिवारों की आय को एक सतत और सुनिश्चित स्तर पर लाना है । इस उद्देश्य के लिए ग्रामीण गरीबों में सामाजिक एकजुटता लाने के साथ साथ उन्हें प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और आमदनी देने वाली परिसंपत्तियों की व्यवस्था के जरिए स्वयं सहायता समूहों के रूप में संगठित करना है । स्वयं सहायता समूह गरीबों के पास जाकर सामुदायिक रिया के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास का निर्माण करते हैं । समूह बैठकों और सामूहिक निर्णयों के माध्यम से उनकी जरूरतों को पहचानने और संसाधनों की प्राथमिकता तय करना बताया जाता है । इस प्रक्रिया का मूल ग्रामीण गरीबों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के साथ उनमें सामूहिक सौ अदाकारी की क्षमता का निर्माण करना है । इस योजना के तहत ब्लॉक स्तर की विस्तृत रिपोर्ट बाहरी वेबसाइट्स, जो एक नई विंडो खुलती है, उपलब्ध है । ग्रामीण व्यवसाय केंद्र आरॅन, ग्रामीण व्यवसाय केंद्रों जानी आर । बी । एच । का उद्देश्य ग्रामीण गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण भारत में रोजगार के अवसर पैदा करना है । पंचायती राज मंत्रालय ने ग्रामीण व्यवसाय केंद्रों के व्यापक उद्देश्य ग्रामीण समृद्धि को बढावा देने के लिए आजीविका समर्थन बढाने के उद्देश्य की पहल के रूप में ग्रामीण गैरकृषि आय में वृद्धि और ग्रामीण रोजगार पढाने के लिए शहद से हाइपरमार्केट के लक्ष्य को अपनाया है । आर । बी । एच । के दिशा निर्देश हम निगरानी साइट पिछडा क्षेत्र अनुदान को भी आर्ची पिछडा क्षेत्र अनुदान कोष यानी पीआरसी क्षेत्रीय विकास में व्याप्त असंतुलन को दूर करने के लिए बनाया गया है । यह कोष वर्तमान चुनिंदा ढाई सौ जिलों को विकास संबंधी निवेश के लिए पूरक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएगा जैसे कि स्थानीय निकायों को योजना बनाने का कार्यान्वयन और उसकी निगरानी के लिए पेशेवर समर्थन प्रदान करना । बीआरजीएफ के लिए दिशानिर्देश एवं निगरानी प्रारूप बाहरी वेबसाइट्स जो एक नई विंडो में खुलती है कि शासन में शामिल अन्य ग्रामीण विकास योजनाएं, दीक्षा परियोजना, बाहरी वेबसाइट्स जो एक नई विंडो खुलती है, पंचायत महिला एवं युवा शक्ति अभियान, राज्य सरकार की ई शासन परियोजना मध्यप्रदेश में क्या दूध परियोजना ज्ञान दूध एक इंटरनेट आधारित सरकार द्वारा नागरिकों जीटूसी को सेवा प्रदान करने की पहल है । यह मध्यप्रदेश के धार जिले में जनवरी दो हजार में ग्रामीण आबादी के लिए प्रासंगिक जानकारी प्रदान करने और जिला प्रशासन बाल लोगों के बीच एक अंतर पालक स्थापित करने के दोहरे उद्देश्य के साथ शुरू की गई थी । ज्ञान दूत नेटवर्क के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं दैनिक कृषि पन्ने वस्तु दरें, मंडी भाव, आय प्रमाणपत्र, अधिवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, लोक शिकायत निवारण, ग्रामीण हिंदी, ईमेल, बीपीएल परिवार सूची ग्रामीण हिंदी समाचार हूँ ।

55 - ग्रामीण समाज एवं आधुनिक संचार माध्यम

ग्रामीण समाज केवल आधुनिक संचार माध्यम एक विश्लेषणात्मक अध्ययन वर्तमान योग सूचना प्रौद्योगिकी का क्योंकि है समय परिवर्तन के साथ तेजी से न केवल शहरी क्षेत्रों में परण ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक संचार माध्यम ने अपनी अमिट छाप छोडी है । संचार से तात्पर्य ज्ञान, प्रचार, सूचनाओं और भावों का ऐसा आदान प्रदान जो व्यक्तियों के मध्य संपन्न होता है । वर्तमान में संचार का जितना महत्व है पहले कभी नहीं रहा । इसका प्रमुख कारण है पहले कभी इतनी अधिक व्यक्तियों को इतनी अधिक बातों को इतने कम समय में जानने को आवश्यकता महसूस नहीं हुई । आज प्रत्येक क्षेत्र में व्यक्ति नई बातों, विचारों, अनुसंधानों, देश दुनिया की खबरें क्षण भर में जानने को तो रहता है । संचार के आधुनिक देने ग्रामीण जीवन को भी चाक जोर दिया है । इन साधनों के माध्यम से ग्रामीण जीवन में पहुंचने का फासला बहुत कम होता जा रहा है । आधुनिक संचार माध्यम ग्रामीण जीवन के विकास में अभूतपूर्व भूमिका निभा रहे हैं । भारत की संख्या छह सौ सत्ताईस मिलियन है जो की कुल जनसंख्या की लगभग प्रतिशत है । वर्ष दो हजार ग्यारह में बढकर छह लाख चालीस हजार आठ सौ सडसठ हो गई । भारत की ग्रामीण आबादी विश्व की जनसंख्या का बारह प्रतिशत है । वर्तमान में ग्रामीण समाज का स्वरूप तेज रफ्तार से बदल रहा है । भारत के प्रतिशत गांव सडकों से जुड चुके हैं एवं साठ प्रतिशत बिजली का उपयोग करने लगे हैं । आधुनिक संचार माध्यम से दुनिया मुट्ठी में आ गई है । प्रस्तुत शोधपत्र में अध्ययन का उद्देश्य यह याद करना है की उद्देश्य एक ग्रामीण समाज पर आधुनिक संचार माध्यमों का क्या प्रभाव पड रहा है । दो । ग्रामीण जनता में संचार माध्यमों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना । तीन । संचार के माध्यमों का सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव का अध्ययन करना । चार । ग्रामीण समाज के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में क्या परिवर्तन घटित हो रहा है । उत् कल्पना एक । ग्रामीण समाज के जीवन पर आधुनिक संचार माध्यमों का क्या प्रभाव पड रहा है । दो । क्या ग्रामीण जनता के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को संचार माध्यम प्रभावित कर रहे हैं? इस तथ्य को ज्ञात करना अध्ययन पद्धति, अध्ययन पद्धति के रूप में सर्वेक्षण, साक्षात्कार एवं अवलोकन पद्धति का उपयोग किया गया । वैद्यक स्रोत के रूप में पत्र पत्रिकाएं, सरकारी अभिलेखों, आंकडों का प्रयोग किया गया । निर्देशन पद्धति के आधार पर चालीस ग्रामीण परिवारों का चुनाव किया गया एवं विभिन्न तथ्य एकत्रित किए गए । प्रस्तुत शोधपत्र में अध्यन है तो कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं का चुनाव किया गया । जीवन शैली पर प्रभाव आधुनिक संचार क्रांति ने ग्रामीण जनता की जीवनशैली उप्भोक्ता व्रती पर अत्यधिक प्रभाव डाला है । अध्ययन के दौरान पाया गया की सत्तर प्रतिशत ग्रामीण परिवार मोबाइल का उपयोग करते हैं । मिट्टी के घरों में भी मोबाइल की घंटे में दस्तक दी है । इन परिवारों में रेडियो की जगह अब टीवी नहीं मिली है । प्रतिशत ग्रामीण परिवार में टीवी है जिसमें घर बैठे मनोरंजन के साथ साथ ज्ञान वे प्राप्त कर रहे हैं । टीवी के विज्ञापनों का प्रभाव बच्चे से लेकर बूढे तक पर पड रहा है । दैनिक जीवन के उपयोग की वस्तु प्रतिशत व्यक्ति वे विज्ञापन देखकर खरीदते हैं । ये आधुनिक संचार साधनों का ही करिश्मा है की ग्रामीण जनता भी ब्रांडेड वस्तुओं का उपभोग करने पर आमादा है । पिछले दशक में संचार सुविधाओं ने छब्बीस गुना प्रगति की है । दो हजार ग्यारह में दो सौ मिलियन ग्रामीण उप्भोक्ता दूर संचार सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं । शिक्षा के क्षेत्र पर प्रभाव ग्रामीण जनता को जागरूक करने में संचार सुविधाओं ने सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन परिलक्षित होता है । सर्वप्रथम संचार में पत्रकारिता के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में पत्रकारिता का आगमन हुआ । प्राइस साठ प्रतिशत ग्रामीण जनता विभिन्न प्रकार के समाचार पत्रों का वाचन करती है । दैनिक भास्कर उनका प्रिय समाचारपत्र है । संचार के आधुनिक साधनों ने ग्रामीण जनता के मान सकता को भी प्रभावित किया है । उनका रुझान शिक्षा के प्रति बडा है । दूरदर्शन, कंप्यूटर और फिल्म आदि संचार माध्यम के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान कर रहे हैं । इंटरनेट की दुनिया से घर बैठे विश्व के किसी भी कोने की जानकारी प्राप्त की जा सकती है । प्रतिशत ग्रामीणों की यहाँ कंप्यूटर एवं पंद्रह प्रतिशत के यहाँ नेट कनेक्शन है । दस प्रतिशत विद्यार्थी कंप्यूटर इंजीनियर बनकर विदेश में नौकरी करने का सपना बुन रहे हैं । अधिकांश महिला पुरुष बच्चे इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के आधारभूत साधनों से परिचित है । सामाजिक जीवन पर प्रभाव संचार माध्यमों का ग्रामीण समाज पर भी प्रभाव पडा है । ग्रामीण जनता अब बहुत जागरूक हो रही है । प्रजातंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचार व्यक्त करने की पूर्ण स्वतंत्रता है । चालीस प्रतिशत ग्रामीण समाज के युवा सोशल नेटवर्किंग साइट के माध्यम से अपने विचार व भावनाएं प्रेषित करते हैं । संचार साधनों ने जहाँ ग्रामीण समाज के युवाओं में सकारात्मकता ये वन चेतना उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, वहाँ दूसरी और इसका भयावह स्वरूप भी सामने उभरकर आया । उदाहरण स्वरूप मोबाइल कर रहा हूँ । एमएमएस बनाना और भेजना, पासवर्ड हैक करना, अश्लील एमएमएस बनाकर प्लेट मेल करना ये गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो रही है । कृषि के क्षेत्र पर प्रभाव आधुनिक युग की दिन सूचना प्रौद्योगिकी का सर्वाधिक लाख ग्रामीण जनता को कृषि क्षेत्र में हुआ । अब किसान परंपरागत लीक से हटकर आधुनिक साधनों का प्रयोग कर नित नए प्रयोग अपनाकर समृद्धि के पथ पर अग्रसर हैं । प्रतिशत परिवार विज्ञापन देख कर उन तरीके की खेती है तो बीच विभिन्न कृषि उत् कर रहा हूँ । खाद्य का उपयोग करते हैं । संचार सुविधाएं एवं सूचना प्रौद्योगिकी का क्षेत्र व्यापक होने के कारण किसान अब अपनी समस्याओं का समाधान तुरंत कर लेते हैं । नैतिक मूल्य एवं आचरन पर प्रभाव वर्तमान में संचार क्रांति योग ने संपूर्ण विश्व को चाहे वह शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है । नेटवर्क प्रिंट मीडिया, कंप्यूटर, फिल्म आदि ने मानव के मानस पटल एवम नैतिकता पर गहरा प्रभाव डाला है । युवा पीढी पर इसका प्रभाव अधिक दिखाई देता है । अश्लील चित्र, वीडियोकाॅॅॅन आदि का नकारात्मक प्रभाव ग्रामीण युवाओं पर भी स्पष्ट परिलक्षित होता है । युवा पीढी के नैतिक मूल्यों का तीव्रता से पतन हो रहा है एवं उनके चरित्र आचरन पर दुष्प्रभाव देखा जा रहा है । चरित्रवान एवं संस्कारवान युवाओं का प्रतिशत बहुत कम हो रहा है । निष्कर्ष ली सर्वेक्षण के माध्यम से किए गए अध्ययन यह प्रमाणित करते हैं कि ग्रामीण समाज पर भी आधुनिक संचार साधनों का गहरा प्रभाव पड रहा है । परिकल्पना के अनुसार यह पाया गया है कि संचार क्रांति का ग्रामीण के विभिन्न क्षेत्र किया था । सामाजिक न्याय तक शैक्षिक, कृषि एवं जीवन शैली पर प्रभाव पडा है । संचार माध्यमों का ग्रामीणों के मन मस्तिष्क पर सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है । इस नवीन क्रांति से ग्रामीण युवाओं के भी नैतिक मूल्य एवं आचरन का पतन हुआ है । सूचना प्रौद्योगिकी से कृषि के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन हुआ है । ग्रामीण युवा परंपरागत व्यवसाय कृषि को छोडकर शिक्षा के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं । संचार माध्यमों का सर्वाधिक दुष्प्रभाव युवा पीढी पर देखा जा रहा है ।

56 - ग्रामीण लोगों की समाजिक, राजनैतिक, सांस्क्रतिक, आर्थिक, स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता में संचार की भूमिका

ग्रामीण लोगों की सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता में संचार की भूमिका । भारतीय अर्थव्यवस्था ग्रामीण है । भारत का हृदय गांवों में बसता है । यहाँ छह दशमलव लाख कम है तथा दशमलव चौरासी प्रतिशत जनसंख्या गांवों में निवास करती है । पिछले वर्षों में देश में संचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं । सूचना प्रौद्योगिकी के विकास से आज आउटसोर्सिंग के लिए भारत बेहतर स्थिति में है । अब देश वस्तु अर्थव्यवस्था के क्षेत्र से निकलकर ज्ञान अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से अग्रसर हैं । अब डेटाबैंक कंप्यूटर इंटरनेट सुविधाएं महत्वपूर्ण हो गई है । इन सुविधाओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में नई कार्य, नई दायित्व चुनौतियों एवं अवसरों को जन्म दिया है । संचार साधन जो माध्यम है जिसके द्वारा सत्यों, सूचनाओं, विचारों, विकल्पों एवं निर्णयों का विभिन्न व्यक्तियों के मध्य आदान प्रदान होता है । संदेशों का आदान प्रदान लिखित, मौखिक एवं सांकेतिक हो सकता है । संचार के माध्यम बातचीत, विज्ञापन, रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र, ईमेल, पत्राचार आदि है । उद्देश्य एक । ग्रामीण जनता में जागरूकता बढाना, उनका विकास करना दो । ग्रामीण जनता पर संचार माध्यमों के प्रभावों का अध्ययन करना, तीन ग्रामीण क्षेत्रों में संचार माध्यमों की कमियों का अध्ययन कर दूर करने के उपाय बताना, सामाजिक क्षेत्र, संचार सूचना, ग्रामीण समाज का एक हिस्सा है । यह ग्रामीण समूहों को भी गहराई से प्रभावित करती है । ग्रामीण जनता की सोच में भी काफी हद तक सकारात्मक परिवर्तन आया है । परंपराओं रूढिवादिता में कमी आई है । बाल विवाह, मृत्युभोज, अंधविश्वास आदि में कमी हुई है । इसका प्रमुख कारण शिक्षा का विस्तार हैं । अधिकांश ग्रामीण छात्र छात्राएं शहरों में पढाई के लिए आने लगे हैं । उनमें न केवल परंपरागत शिक्षा बल्कि करियर के लिए भी जागरूकता पडी है । वे भी एमफिल, पीएचडी कर रहे हैं । पीएसी बैंकिंग की परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं तथा सफलता प्राप्त कर रहे हैं । ग्रामीणों की जीवनशैली, मानदंड, मूल्यों आदि में मात्रात्मक एवं गुणात्मक दोनों रूपों में परिवर्तन आया है । जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में संचार साधनों की अहम भूमिका है । नए उत्पादों के बारे में जानकारी भी संचार साधनों के माध्यम से प्राप्त होती है । राजनीतिक क्षेत्र राजनैतिक क्षेत्र में भी ग्रामीणों का वर्चस्व बढा है । राजनैतिक क्षेत्र में भी संचार सुविधाओं के कारण उनकी सक्रिय भागीदारी बडी है । ग्रामीण जनता भी रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल फोन, समाचार पत्र आदि के माध्यम से देश विदेश की जानकारियों से अवगत रहती है । उदाहरण के लिए रेडियो पर प्रसारित प्रधानमंत्री कि मन की बात ही क्यों ना हो । टेलीविजन पर आने वाले समाचार, मोबाइल फोन पर मैसेज, वो अच्छा पर आने वाले संदेश, जानकारी आदि ग्रामीणों को काफी हद तक प्रभावित कर रही है । इन संचार माध्यमों के द्वारा ग्रामीण अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हुआ है । सांस्कृतिक शेत्र समाचार राष्ट्र की सामूहिक चेतना ही संस्कृति है । किसी राष्ट्रीय समाज विशेष के सामूहिक विश्वासों, मान्यताओं, परंपराओं एवं दृष्टिकोणों का स्वरूप ही संस्कृति है । ग्रामीण अंचल की अपनी विशिष्ट संस्कृति है । उनकी अपनी मान्यताएं भाषा में पेश पूछा है । खुशी व दुख व्यक्त करने का तरीका हो । यहाँ रीति रिवाज, संचार साधनों के माध्यम से उनकी संस्कृति में भी सरकारात्मक परिवर्तन आया है । संचार साधनों से विभिन्न संस्कृतियां एक दूसरे के करीब आती है तथा प्रभावित करती हैं । आर्थिक क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों का प्रमुख व्यवसाय कृषि है । संचार साधनों के माध्यम से कृषि में नई तकनीकी का विस्तार हुआ । सरकार के द्वारा कृषकों को दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल फोन, समाचार पत्रों के माध्यम से प्राप्त होती है । पशुधन रोजगार कार्यक्रम की भी जानकारी दी जाती है । लघु एवं कुटीर उद्योगों के लिए सरकारों द्वारा दी जाने वाली ऋण सुविधाएं एवं सहायता की जानकारी भी संचार माध्यमों से प्राप्त होती है । सरकार के द्वारा चलाई जा रही महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कार्यक्रम अन्य रोजगार से जुडी जानकारी भी संचार माध्यमों से प्राप्त होती है तथा इसका लाभ ग्रामीण जनता को प्राप्त होता है । स्वास्थ्य के क्षेत्र में वर्तमान में न केवल शहरी क्षेत्रों में बल्कि गांवों में भी विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ तेजी से बढ रही हैं । संचार साधनों के माध्यम से इन बीमारियों के कारणों को जाना जा सकता है । साथ ही उनसे बचने के तरीकों को भी समझा जा सकता है । इसमें मुख्य भूमिका रेडियो टेलीविजन समाचार पत्र पत्रिकाओं की है । इसमें संदेशों को बहुत सरल स्थानीय भाषा में समझाया जाता है क्योंकि ग्रामीणों को अच्छे से समझ में आ जाता है । संचार माध्यमों से ग्रामीणों में जागरूकता पडी है । ग्रामीण क्षेत्रों में संचार साधनों की कमियाँ यद्यपि ग्रामीण क्षेत्रों में संचार सुविधाओं का विस्तार हुआ है लेकिन अभी भी कुछ कमियाँ व्याप्त है । ग्रामीण लोगों में साक्षरता कम है । अतः है इन संचार साधनों का पूरा उपयोग नहीं कर पाते हैं । दो ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की अभी भी कमी है । विद्युत की कमी के कारण ग्रामीण जनता संचार साधनों, टेलीविजन आदि नहीं देख पाते हैं । तीन संचार साधनों में यांत्रिकी खराबी के कारण भी रूकावटें आती हैं तो ये सुविधाएं अर्थहीन हो जाती हैं । चार संदेश देने वाले तथा संदेश प्राप्तकर्ता के बीच की दूरी भी समस्याएं उत्पन्न करती है । पांच । ग्रामीण जनता की अनभिज्ञता के कारण भी वे संचार साधनों से लाभ नहीं उठा पाते हैं । निष्कर्ष गांवों के विकास पर देश का विकास निर्भर है । यदि ग्रामीण जनता के सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन आता है, वो मैं रूढिवादिता और अंधविश्वास के प्रति अपना नजरिया बदलते हैं । भाग्य के भरोसे नहीं बैठते हैं तो निश्चित रूप से गांवों की स्थिति में मूलभूत परिवर्तन आएगा । इससे ना केवल सामाजिक प्रगति होगी बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी पे आगे बढेंगे और इसमें संचार साधनों और उनके द्वारा दिए गए संदेशों एवं जानकारियों की सक्रिय भूमिका रहेगी । उनमें राजनीतिक जागरूकता भी बढेगी । वे अपने मताधिकार का सही उपयोग करेंगे तथा अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहेंगे । रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से ग्रामीणों को अच्छे स्वास्थ्य के बारे में जानकारी प्राप्त होती है । पता ही अनिश्चितता पूर्वक कहा जा सकता है कि संचार माध्यमों का ग्रामीणों पर सकारात्मक प्रभाव पडा है तो

57 - ग्रामीण समाज में संचार की उपयोगिता

ग्रामीण समाज में संचार के उपयोगिता आज ग्रामीण समाज की युगीन हलचल में देखें तो लगता है ग्रामीण के जीवन में संचार के माध्यमों ने एक हलचल पैदा कर दी है । जो ग्रामीण अपने परिवार के प्रति उदासीन थे वो आज जीवन की उधेडबुन के साथ ही साथ अपने बच्चों पर भी ध्यान देने लगे हैं । विभिन्न विज्ञापनों से सोते हुए से जग रहे हैं लाडली बेटी योजना प्रतिभा करण गांव की बेटी टीकाकरण जैसी योजनाओं के द्वारा बच्चों को पोलियो ड्रॉप, दो बूंद जिंदगी की खत्म बम जैसे विज्ञापन से स्वास्थ्य के प्रति सजक कर रहे हैं । परिवार नियोजन, शौचालय जैसी समस्याओं से अवगत करा रहे हैं । ग्राम और नगर मानव जीवन के दो पहलू हैं । गांवों का प्रकृति से प्रत्यक्ष और निकट का संपर्क है । ग्रामीण समाज को दो भागों में बांटा जा सकता है जनजातीय समाज और कृषक समाज । युग हलचल समय परिवर्तन के साथ ग्रामीण के जीवन में हलचल पैदा हुई । पुरातन को भुलाकर वर्तमान में जीने की लालसा पैदा हुई भारतीय समाज में नगर ये जब ग्रामीण समाज के विविध पहलू हमारे सामने आते हैं कि तो कृषक से हमारा भारतीय समाज पूरी तरह जुडा है क्योंकि कृषक भूमि से जुडा होता है । वह न केवल भूमि पर रहता है बल्कि अपने श्रम से उपयोगी बनता है तथा श्रम द्वारा अपनी आजीविका कमाता है । कृषकों को मजदूरों का पूरक माना जाता है । कृषकों और मजदूरों को एक ही श्रेणी का माना जाता है प्रमुख जनसंचार साधन । जनसंचार का प्रवाह अति व्यापक एवं असीमित है । इसका क्षेत्र व्यापक है । उसे किसी परिधि में नहीं बांधा जा सकता है । जनसंचार तकनीकी आधार पर विशाल तथा व्यापक रूप में जनसमाज तथा ग्रामीण अंचल में अपना प्रभाव व्यक्त करता है । जनसंचार माध्यम, समाचार पत्र, पत्रिकाएं, रेडियो, टेलीविजन एवं फिल्म द्वारा संचार प्रभाव पडा एक ही साथ करोडों लोगों तक संदेश को प्रेषित करना, जनसंचार माध्यमों के द्वारा संभव हुआ रेडियो आज का ग्राम्य जीवन चल संचार के माध्यम से सीढी दर सीढी आगे बढता जा रहा है । उसे रेडियो के द्वारा खेती की नई नई जानकारियां प्राप्त हो रही हैं । जनसंचार के माध्यमों में रेडियो एक क्रांतिकारी आविष्कार है । रेडियो को बिना कागज और बिना दूरी का समाचार पत्र कहाँ गया है? धोनी के संप्रेषक रेडियो से मस्त होता है । पानी का बहुत विकास हुआ है । साक्षरों के साथ ही आज निर्धन और नेत्रहीन जनता के लिए आकाशवाणी वरदान सिद्ध हुई है । आकाशवाणी ने देश में अपने प्रसारण के माध्यम से नागरिकों को अपने राष्ट्र संस्कृति, गौरव, मैं अतीत, महान बोलियों तथा परंपराओं के प्रति जागृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं । दूरदर्शन दूरदर्शन स्टूडियो तथा ट्रांसमीटर की दृष्टि से विश्व की सबसे बडी इकाइयों में से एक है । इसके कार्यक्रमों को तीस करोड से अधिक लोग देख सकते हैं । इसकी सेवाएं हैं राष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा स्थानीय राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय संस्कृति, समाचार, समसामायिक गतिविधियां, सांस्कृतिक पत्रका, विज्ञान पत्रिका, नृत्य, नाटक, धारावाहिक प्रसारित होते हैं । आधुनिक संचार क्रांति में दूरदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका है । दूरदर्शन तो किसी राष्ट्र की प्रगति का प्रमाणिक व्याख्याता है । यह राष्ट्र के स्वरूप का दर्पण है । समस्या संचार माध्यमों में दूरदर्शन ही शक्तिशाली परिवर्तनकारी तत्व है । विगत दस वर्षों में अपने देश का संपूर्ण परिदृश्य ही बदल गया है । वस्तुतः दैनिक जीवन में दूरदर्शन की घुसपैठ ने जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है । क्या गांव, क्या नगर, क्या शहर सर्वत्र दूरदर्शन का प्रभाव दिखाई देता है? इसके माध्यम से हमारे जीवन में सूचनाओं का विस्फोट हो रहा है । सही मायने में दूरदर्शन, पत्रकार, शिक्षक और विकास अभी करता है । विडियो विडियो ने दृश्य श्रव्य संसाधनों में शिक्षा के क्षेत्र में अपनी उपयोगिता और महत्ता को स्थापित किया है । इस समय देश में जितने भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान हैं, उनमें से अधिकांश के पास वीडियो की सुविधा उपलब्ध है । भारत में कई वीडियो पत्रकार निकलती है । इनसाइट न्यूट्रल कालचक्र । ऐसी ही पत्रिकाएँ यह श्राॅफ तथा पठनीय है । इन त्रि आयामी गुणों के कारण विडियो काफी लोकप्रिय माध्यम है । आज ग्रामीण विद्यार्थी अपने भविष्य के लिए चिंतित हैं और कुछ कर गुजरने के लिए मौसम नहीं, मन चाहिए की भावना को अपने मन में रखे हैं । आज विज्ञान ने मानव जीवन के संकटों को बहुत दूर कर दिया है । इंटरनेट कंप्यूटर के क्षेत्र में लगातार नए नए आयाम तकनीकी प्रगति के साथ जुडने जा रहे हैं । तकनीकी प्रगति के साथ साथ दूरस्थ स्थित कम्प्यूटरों को जोडकर नेटवर्क का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है । इंटरनेट को विज्ञान की प्रगति की सर्वोत्तम मिसाल माना जा रहा है । इंटरनेट को कुछ इस तरह से परिभाषित किया जा सकता है इंटरनेट एक विश्वव्यापी प्रसारण क्षमतायुक्त कंप्यूटर पर संग्रहित सूचना वितरित करने तथा विभिन्न कंप्यूटर उपयोगकर्ताओं के मध्य सहयोग असम पर का माध्यम है, जिसमें के बिना किसी धर्म देश के भेदभाव की सूचना आदान प्रदान करना संभव है । आज कई ग्रामीण परिवार के बच्चे इंटरनेट के द्वारा नई नई जानकारी प्राप्त कर उसका लाभ उठा रहे हैं । पहले ग्रामवासी शौच आदि के लिए घर के बाहर खेतों में जाया करते थे । अब उनके बच्चे नगरीय संस्कृति से प्रभावित होने के कारण अपने घरों में शौचालय बनाने लगे हैं । इस प्रकार गांवों का परंपरागत स्वरूप पूर्ण दया फिलिंग हो गया है ।

58 - सम्प्रेषण के आधुनिक साधनो से ग्रामीण जीवन के बदलते आयाम

संप्रेषण के आधुनिक साधनों से ग्रामीण जीवन के बदलते आया संप्रेषण के क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रगति ने वर्तमान समय को सूचना क्रांति के योग के रूप में परिभाषित किया है । जैसे जैसे व्यावसायिक जगत का विकास होता है, लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप संप्रेषण माध्यमों के नवीन स्वरूपों की खोज एवं उनका प्रस्तार होता है । वर्तमान में व्यावसायिक विकास एवं संप्रेषण विकास एक दूसरे के पूरक है । अठारह शताब्दी के अंत तक प्रत्यक्ष वार्ता ही संप्रेषण के पर्याय माने जाते थे । उन्नीसवी शताब्दी के प्रारंभ में बहुत प्रतिलिप, इकरन, फोटोकॉपी, रेडियो, टेलीविजन आदि संप्रेषण साधनों का प्रयोग होने लगा, किंतु उन्नीसवी शताब्दी के उत्तरार्ध में संप्रेषण के क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल एवं अन्य तकनीकों ने एक नवीन युग का सूत्रपात किया । इलेक्ट्रॉनिक टाइपराइटर, ॅ आदि ने संप्रेषण को काफी शक्तिशाली, तीव्र एवं महत्वपूर्ण बना दिया है । कंप्यूटर, इंटरनेट, उपग्रह कम्प्रेशन आदि ने संप्रेषण को प्रभावी, लोकप्रिय एवं दैनिक जीवन की अनिवार्यता बना दिया है । फॅसने संप्रेषण के ऐतिहासिक प्रगति क्रम को तीन चरणों में वर्णित किया है । प्रथम तरन छोटे छोटे समूह में आमने सामने मौखिक संप्रेषण, वित्तीय तरंग, मौखिक के साथ साथ लिखित संप्रेषण डाट टेलीग्राम, टेलीफोन जनसंप्रेषण, समाचारपत्र पत्रकार, चलचित्र, रेडियो टेलीविजन का प्रयोग, तृतीय तरंगा, कंप्यूटर युग का प्रारंभ इंटरनेट, ईमेल, उपग्रह कम्प्रेशन, सीडी, काॅपी आदि से तार रहे तथा कागज रहित संप्रेषण युग का सूत्रपात हुआ है जिसमें संपूर्ण विश्व को विश्वग्राम की संज्ञा दी है । ग्रामीण क्षेत्र में संप्रेषण में नवीन तकनीकों के जन्मने प्रबंध की सूचना प्रणाली का प्रतिपादन व्यवसायिक क्षेत्र में क्या है जिसने पीहू प्रबंधन सेवन उपभोगताओं का हित के उद्देश्य से निरंतर सूचनाओं के संग्रह, पारेषण प्रवाह एवं विवेचना द्वारा संप्रेषण पद्धति को और अधिक प्रभावी एवं उपयोगी बनाया है । संप्रेषण के आधुनिक साधन जिनका ग्रामीण जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड रहा है, आधुनिक तकनीकी पर आधारित संप्रेषण के प्रमुख साधन निम्नलिखित हैं सेल्यूलर फोन बॅाक्स वीडियोकांफ्रेंसिंग । ईमेल एक सेल्यूलर फोन परंपरागत टेलीफोन कनेक्शन तार से जुडे होते हैं । हम एक निश्चित स्थान पर ही स्थिर होते हैं किंतु सेल्यूलर फोन आसानी से चेक में आ जाने वाला एक छोटा सा टेलीफोन नियंत्र हैं । इसको मोबाइल फोन भी कहते हैं जिसको प्रयोगकर्ता कहीं भी ले जा सकता है । भारत में विभिन्न निजी क्षेत्र की तथा सरकारी क्षेत्र की कंपनियां सुविधा को प्रदान कर रही है । लाभ एक यात्रा करते समय अथवा दूरदराज के क्षेत्रों में भी मोबाइल फोन का धारक मौखिक संदेश प्राप्त कर एवं भेज सकता है । दो सेल्यूलर फोन से दूसरे सेल्यूलर फोन पर अथवा परंपरागत टेलीफोन पर वार्ता की जा सकती है । सीमाएँ एक । कभी कभी मोबाइल फोन खो जाने का भय रहता है । दो । सेल्यूलर फोन का नंबर भारत में कम से कम दस अंकों का होता है । तीन । फॅस फोन से संदेश प्राप्त करने तथा भेजने वाले दोनों को ही शुल्क देना पडता है जिससे यह महंगा होता है । दो । फॅस सम्प्रेषण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पैक्स एक लोकप्रिय प्रणाली है । टैक्स का उपयोग मुख्य रूप से दस्तावेजों को भेजने में क्या जाता है? इस उपकरण की सहायता से टेलीफोन नेटवर्क के द्वारा किसी दस्तावेज को दूरवर्ती स्थान पर भेजा जाता है । टैक्स मशीन में टेलीफोन भी होता है । इस टेलीफोन के द्वारा जहाँ बैग्स करना है, वहाँ का नंबर डायल करने पर वहाँ की घंटे बचती है और टैक्स मशीन पर रखे कागज की कॉपी वहाँ दूसरे फिक्स पर निकल जाती है । टैक्स का आविष्कार विश्व की प्रथम टैक्स मशीन पैदल ईगराह का आविष्कार इटली के बहुत फॅमिली ने अठारह सौ छियासठ में किया था । लेकिन जनसाधारण द्वारा प्रयोग करने लायक इलेक्ट्रॉनिक फिक्स मशीन लगभग एक साडी बात ही बाजार में आ सकी । टैक्स का महत्व यह एक परित हम सस्ती प्रणाली है जिसके द्वारा हम अपने दस्तावेजों की फोटोकॉपी इच्छुक व्यक्ति तक अभिलंब पहुंचा सकते हैं । दैं निक कार्यप्रणाली से लेकर स्वास्थ्य, चिकित्सा, शिक्षा, व्यापार, कृषि, बैंकिंग तथा बीमा आदि के क्षेत्र में पैक्स व्यापक परिवर्तन का एक मुख्य आधार बन गया है । तीन । वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सचित्र संप्रेषण का महत्वपूर्ण साधन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग है । इसके द्वारा विभिन्न अलग अलग स्थानों पर उपस् थित लोग वास्तविक सभा की भांति संप्रेषण करते हैं । इसमें ना केवल संदेशों को संप्रेषित करते हैं बल्कि एक दूसरे से संजीव वार्ता भी कर सकते हैं जिससे उनके हावभाव मुखा भी व्यक्ति भावभंगिमा का भी संप्रेषण हो जाता है । काॅन्फ्रेंसिंग दो प्रकार से हो सकती है । एक कंप्यूटर के द्वारा इसको कंप्यूटर काॅन्फ्रेंसिंग भी कहते हैं जिसके लिए कंप्यूटर अथवा पीसी, वेब कैमरा, टेलीफोन कनेक्शन, इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत होती है । दो बिना कंप्यूटर के द्वारा डिजिटल पैड, कैमरा, वीडियो कान्फ्रेंसिंग मशीन, टेलीफोन, सेटेलाइट कनेक्शन, प्रोजेक्टर इंटरनेट इसमें अनेक कंप्यूटर एक साथ कौन के जरिए एक दूसरे से जुडे रहते हैं । सूचना प्रसारण के इस पढते हुए युग में इंटरनेट का महत्व बढता जा रहा है । ग्रामीण क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति देश अथवा समाज सूचना प्रौद्योगिकी के इस अद्भुत अंग से अछूता नहीं रह गया है । इंटरनेट की शुरुआत उन्नीस सौ छियासी में हुई थी । तब अमेरिका के प्रतिरक्षा विभाग ने अपने आंकडों को विभिन्न विभागों जो दूर दूर के राज्यों में स्थित थे, भेजने मत प्राप्त करने के लिए उपग्रहों और केबल नेटवर्कों का उपयोग किया था । फॅसने इंटरनेट के जाल को फैलाने में काफी सहायता की और उसके अनुसंधान निरंतर जारी है । प्रमुख भाग इंटरनेट के मुख्य भाग है । मुख्य सूचना कंप्यूटर टेलीफोन, मोडम, क्षेत्रीय नेटवर्क या बृहत क्षेत्रीय नेटवर्क, उपग्रह कम्प्रेशन तथा केबल नेटवर्क इंटरनेट देखने और उसे सूचना एकत्रित करने के कार्य को सर्फिंग कहते हैं । इंटरनेट पर संबद्धता के स्तर इंटरनेट पर संबद्धता के तीन स्तर है । प्रथम स्तर पर उप्भोक्ता केवल इंटरनेट पर सूचनाएं यह जानकारी देख सकता है । द्वितीय स्तर पर वह इन्टरनेट का एक भाग बन जाता है जिससे वह इन्टरनेट पर सूचनाएं देखने के साथ साथ अपनी वेबसाइट्स बनाकर सूचना एकत्रित कर सकता है । तृतीय स्तर पर वह इन्टरनेट प्रणाली का मुख्य हिस्सा बन जाता है । उसका अपना मुख्य सूचना कंप्यूटर होता है जिसके अंतर्गत द्वितीय स्तर के प्रयोगकर्ता अपनी वेब साइट बना सकते हैं । इंटरनेट सेवा देने वाला इंटरनेट सेवा का प्रारंभ उन्नीस सौ अस्सी के लगभग ही हो गया था तो उन्नीस सौ नब्बे के बाद इंटरनेट में हुए भारी विस्तार से कंप्यूटर जगत में तहलका मच गया । प्रारम्भ में भारत में एक ही आईएसपी था जिसे हम पीएसएल के नाम से जानते हैं । बीएसएनल का प्रारंभ उन्नीस सौ छियासी के आरंभ में किया गया था । वर्तमान में कई निजी कंपनियां इंटरनेट सेवाएं प्रदान कर रही हैं । इसके अलावा सरकारी उपक्रम तथा महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड भी इंटरनेट सेवाएं प्रदान कर रहे हैं । इसके अतिरिक्त केबल ऑपरेटर भी यह सुविधा प्रदान कर रहे हैं । देश के सभी जिलों में डाले जा चुके हैं इंटरनेट के प्रयोग सूचना क्रांति के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इंटरनेट का प्रयोग धीरे धीरे बढता जा रहा है । ग्रामीण क्षेत्र में व्यवसायिक जगत के सूचना संप्रेषण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है । आज चाहे व्यवसाय का आकार लघु, मध्यम हो या देर इंटरनेट की आवश्यकता महसूस की जा रही है । ग्रामीण क्षेत्र में इंटरनेट के विभिन्न प्रयोग निम्न प्रकार है एक । ईकॉमर्स इंटरनेट के माध्यम से ई कॉमर्स का विशाल कारोबार लगातार बढ रहा है । इंटरनेट के द्वारा अब ग्रामीण एवं शहरी लोग अपने घरों में ही काम कर सकेंगे । इसका आशय है कि सोहा की तकनीक अब घर घर में स्थान बना लेगी । दो ही बैंकिंग इंटरनेट ने ग्रामीण बैंकिंग क्षेत्र में भी नए युग का सूत्रपात किया है । बैंकिंग कार्यप्रणाली में ई बैंकिंग, पीसी बैंकिंग तथा मोबाइल बैंकिंग का प्रयोग लगातार पडता जा रहा है । तीन । ग्रामीण क्षेत्र में सूचनाओं का आदान प्रदान इंटरनेट से किसी भी विषय से संबंधित सूचना प्राप्त की जा सकती है । इंटरनेट द्वारा चिकित्सा, जनसंप्रेषण, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, शोध कार्य आदि की सूचनाएं जब आंकडे सहजता से उपलब्ध हो जाते हैं । चार । वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र में इंटरनेट द्वारा खरीद फरोख्त एक फैशन बन गया है । बहुत कंपनियाँ, विभाग, गया, स्टोर आदि क्रेडिट कार्ड द्वारा इंटरनेट के माध्यम से बिक्री करते हैं । ईमेल ईमेल इंटरनेट के प्रयोग का महत्वपूर्ण आयाम है । संप्रेषण के बढते हुए युग में संप्रेषण करता अपने संदेश को शीघ्रता के साथ संप्रेषित करना चाहता है । ईमेल सुविधा संप्रेषण के अन्य साधनों की अपेक्षा संदेश को तीव्रता के साथ एक व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह को संप्रेषित करती है । इस प्रणाली में उपग्रह के द्वारा संदेश एक स्थान से दूसरे स्थान पर संप्रेषित होता है । प्रमुख भाग ईमेल द्वारा संप्रेषण करने के लिए इंटरनेट में आवश्यक के अंतरों के साथ ईमेल पते की आवश्यकता होती है । इसके अतिरिक्त आवश्यक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है । ईमेल सुविधा को प्राप्त करने के लिए जब संदेश ईमेल पते के साथ इंटरनेट आधारित कंप्यूटर पर डाला जाता है तो कंप्यूटर के साथ जुडा मॉडम कंप्यूटर में भंडारित संदेश को डिजिटल रूप से एनॉलॉग रूप में परिवर्तित कर के दिए गए पते पर संप्रेषित कर देता है । बाहर कंप्यूटर जिस पर संदेश भेजा गया है, से जुडा मॉडम उसे दोबारा एनालॉग रूप से डिजिटल रुपये बदलकर सूचना संग्रहित कर लेता है । उपयुक्त विश्लेषण के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि बगैर संप्रेषण कौशल ज्ञान के व्यक्ति ना तो व्यावहारिक रह सकता है और ना ही किसी क्षेत्र में आगे बढ सकता है । अपने परिवार, समाज एवं देश को प्रगति की राह पर ले जाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को संप्रेषण के आधुनिक साधनों का भरपूर प्रयोग करना चाहिए । आने वाले समय में संप्रेषण के आधुनिक साधनों की उपयोगिता एवं उपलब्धता असीमित एवं अन्य वार्य होगी, इसमें कोई दो मत नहीं है ।

59 - ग्रामीण समाज और संचार में हिंदी भाषा

ग्रामीण समाज और संचार में हिंदी भाषा भारत गांवों का देश है । देश की लगभग बेहतर दशमलव दो प्रतिशत जनसंख्या गांवों में निवास करती है । गांव में निवास करने वाला सामाजिक ग्रामीण समाज से अभिहित किया जाता है । कृषि प्रदान भारतीय समाज में भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ मूल्य जीवंत रूप में मिलते हैं । गांवों की हरी भरी प्रकृति, आपसी सौहार्द, कोलाहल और भीड से दो शांति और सुकून, सामाजिक वैचारिक एकरूपता आदि विशेषताएं सहज ही आकर्षित करते हैं, जिनके कारण विश्व फलक पर देश की विशिष्ट छवि बनी हुई है । ग्रामीण समुदाय के अंतर्गत संस्थाओं और ऐसे व्यक्तियों का संकलन होता है जो छोटे से केन्द्र के चारों ओर संगठित होते हैं तथा सामान्य प्राकृतिक खेतों में भाग लेते हैं । मॉरिस और ऍम संचार प्रक्रिया मनुष्य के जन्म के साथ ही आरंभ हो जाती है जो मृत्यु तक अद्यतन चलती है । संचरित संदेशों, सूचनाओं की विभिन्न विधाओं अथवा तकनीकी उपकरणों को संचार संसाधन कहते हैं । संचार क्रांति के इस युग में अनेक संचार माध्यमों ने ग्रामीण जीवन को प्रभावित किया है । गांवों की वर्तमान सामाजिक संरचना तथा ग्रामीणों के पारस्परिक सम्बन्धों को ग्रामीण संचार के वर्तमान रूप के आधार पर ही समझा जा सकता है । इसके लिए ग्रामीण समाज में उन व्यक्तियों संगठनों के अध्यन को महत्व दिया जाता है जो गांव में कुछ नई विशेषताओं या नए विचारों का संचार करते हैं । दूसरा अध्यन विषय संचार के नए माध्यम से उत्पन्न होने वाले प्रभाव है । टेलीविजन, रेडियो, अखबार, ग्रामसेवक, विकास योजना से संबंधित अधिकारी तथा गांव के मंत्रणा नेता आदि गांवों में संचार के प्रमुख साधन है । इसके प्रभाव को समझे बिना ग्रामीण परिवर्तन का सही मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है । ग्रामीण समाज में उन व्यक्तियों और समूहों का भी अध्ययन किया जाता है जो ग्रामीण संचार के विभिन्न साधनों से प्रभावित होते हैं । वास्तव में ग्रामीण संचार पहन महत्वपूर्ण आधार है जिसने ग्रामीण जीवन को एक नई दिशा दी है । जी । के अग्रवाल संचार माध्यम समाज में जागरूकता लाते हैं । रेडियो दूरदर्शन के अनेक कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं । क्षेत्रीय भाषाओं से जुडे अनेक कार्यक्रम लोग की तो आदि का भी प्रसारण किया जाता है । समाचार पत्र भी ग्रामीण क्षेत्र विशेष की खबरों के साथ क्षेत्रीय भाषाओं की रचनाओं को स्थान देते हैं पर यह पर्याप्त नहीं है । संचार माध्यमों द्वारा ग्रामीण समाज को ध्यान में रखकर विभिन्न विषयों से जुडी डॉक्यूमेंट्री फिल्में शॉर्ट फिल्म में और अधिक बनाई जानी चाहिए । ग्राम में जनजीवन में समझता लाने वाले कार्यक्रमों में और वृद्धि होनी चाहिए । लोक संस्कृति को सहेजे जाने की दिशा में भी यह कदम प्रभावी सिद्ध होगा । दूरदर्शन के अधिक प्रचार प्रसार के बावजूद आज भी नंदाजी मेरा जी द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम को श्रोता भूले नहीं है । इसी तरह महिलाओं के लिए प्रसारित कार्यक्रम में बचने वाले लोग की ठंडा जिम्मेदारी छाया जैसी माता पिता री माया माया छोडनी पड से कितना असर चारों पर से जैसे गीतों की मधुर झनकार आज भी श्रोताओं के जहन में रची बसी है । प्रिंट मीडिया या समाचार पत्र के संदर्भ में भी छोटे स्तर या स्थानीय स्तर पर छपनेवाले समाचार पत्रों की संख्या में वृद्धि होनी चाहिए क्योंकि ग्रामीण अंचलों की उभरती हुई प्रतिभाओं और वहाँ की समस्याओं को स्थानीय समाचारपत्र अधिक स्थान दे सकते हैं । इस प्रकार संचार माध्यमो द्वारा ग्रामीण संस्कृति को सहेजने और उनमें जागरूकता सजगता लाने की दिशा में बताए गए कार्यक्रम निश्चित ही ग्रामोत्थान में सहायक होंगे । ग्रामीण जीवन की सफलता परंपरा, प्राकृतिक सौन्दर्य के कारण गांव आज भी शहरी लोगों के लिए शांति और सुकून का केंद्र बने हुए हैं । यांत्रिक जीवन की आपाधापी से दूर ग्राम में संस्कृति के पोषण की और भी बुद्धिजीवियों का ध्यान गया है और संचार माध्यम के अच्छे कार्यक्रम इस उद्देश्य में सहायक हो सकते हैं । सूचना प्रौद्योगिकी में हो रहे नित नई प्रयोगों को जन जन तक पहुंचाने में हिंदी भाषा का माध्यम ही अधिक सफल और सार्थक परिणाम दे सकता है हूँ ।

60 - ग्रामीण भारत पर संचार, सूचना व प्रौद्योगिकी का प्रभाव

ग्रामीण भारत पर संचार, सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभाव, ज्ञान, सूचनाएं प्राप्त करने, शिक्षा व जागरूकता प्राप्त करने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण साधन या माध्यम है । यह किसी भी क्षेत्र में निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । दैनिक जीवन में व्यक्ति को कई निर्णय ऐसे लेने पडते हैं जिनके लिए पर्याप्त ज्ञान का होना आवश्यक है । ज्ञान के अभाव में व्यक्ति गलत निर्णय भी ले सकता है एवं इसका दुष्परिणाम उसे आर्थिक खानी या स्वास्थ्य पर बुरे प्रभाव के रूप में झेलना पडता है । अजय आधुनिक समय में हर व्यक्ति को बैंकिंग संबंधी स्वास्थ्य संबन्धित सूचना एवं संचार माध्यमों से संबंधी ज्ञान होना आवश्यक है । सूचना, संचार एवं प्रौद्योगिकी संबंधी ज्ञान के सहयोग से हर व्यक्ति हर क्षेत्र में सही निर्णय लेने में समर्थ होता है एक । भारतीय अर्थव्यवस्था में ज्ञान क्या शिक्षा का बढता हुआ दो भारतीय अर्थव्यवस्था में सूचना प्रौद्योगिकी का बढता हुआ तीन । भारतीय अर्थव्यवस्था में चिकित्सा की सुविधाएं चार । भारतीय अर्थव्यवस्था में बैंकिंग क्षेत्र में नवीनतम तकनीक का बढता हुआ प्रयोग ऍम पांच भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र में नवीनतम ज्ञान प तकनीक का बढता प्रयोग बस दिखता है । शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों कॉलेजों की वास्तविक स्थिति दो शैक्षणिक परिसरों में नैतिक मूल्यों का गिरता स्तर तीन सूचना प्रौद्योगिकी के साधनों का बढता हुआ दुरुपयोग । चार । भारतीय अर्थव्यवस्था में बैंकिंग के नवीनतम सुविधाओं का बढता हुआ दुरुपयोग । पांच । भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र में नवीनतम तकनीक के प्रयोग में बाधाएं । ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ज्ञान या शिक्षा का बढता हुआ स्तर । किसी भी देश के आर्थिक विकास के लिए वहाँ की जनसंख्या का अधिक शिक्षक प्रशिक्षण एवं तकनीकी ज्ञान से युक्त होना आवश्यक होता है । किसी देश के पास बौद्धिक संपदा के रूप में इंजीनियर तकनीकी प्रशिक्षण प्रबंध किया और प्रशासक वैसे भी वर्ग वैज्ञानिक, चिकित्सक, कृषि विशेषज्ञ होने पर उस देश का तीव्र गति से आर्थिक विकास संभाव होता है । भारत की पंचवर्षीय योजनाओं में शिक्षा के विस्तार पर बहुत ध्यान दिया गया है । देश में स्कूल, कॉलेज तथा विश्वविद्यालयों की संख्या उसमें पढने वाले विद्यार्थियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है । भारत में में प्राइमरी स्कूल चार सौ आठ दशमलव चालीस हजार थे जिनकी संख्या बढकर दो हजार एक में छह दशमलव चौंसठ लाख हो गई । से में देश के विश्वविद्यालयों की संख्या बयासी थी जो बढकर दो हजार एक में दो सौ इकसठ हो गई । सूचना संचार प्रौद्योगिकी के जीवन में गुणवत्ता में सुधार लाते हैं । भारत में संचार क्रांति आई है । संचार के साधन ग्रामीण क्षेत्रों तक अधिक मात्रा में पहुंच रहे हैं । देश में टेलीफोन सेवा मोबाइलधारकों की संख्या लगातार बढ रही है । बडे उद्योगपति, व्यापारी से लेकर एक चाहे बेचने वाले एवं सब्जी का ठेला लगाने वाले व्यक्ति के पास में मोबाइल देखा जा सकता है । इसी प्रकार संचार का साधन टेलीविजन देश के कोने कोने तक पहुंच गया है । देश के ग्रामीण लोगों को भी पूरे विश्व भर की जानकारियां टेलीविजन से मिल रही है । इन सूचना एवं संचार के साधनों, नागरिकों की अनेक कठिनाइयों को दूर कर दिया है । भारतीय अर्थव्यवस्था में चिकित्सा सुविधाएं भारत में सन दो हजार तक सबके लिए स्वास्थ्य का लक्ष्य रखा गया । इस लक्ष्य की प्राप्ति है तो आवश्यक सुझाव देने का दायित्व भारतीय सामाजिक विज्ञान शोध परिषद एवं भारतीय चिकित्सा शोध परिषद को सौंपा गया । यह भी स्वीकार किया गया कि देश की जनता को प्रशिक्षक, चिकित्सकों, विशेषज्ञों एवं सुपर विशेषज्ञों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के जो प्रयास किए गए हैं, उन के कारण केवल साधन संपन्न व्यक्तियों तक ही इन की पहुंच सीमित हो गई है । ग्रामीण भारतीय अर्थव्यवस्था में बैंकिंग क्षेत्र में नवीनतम तकनीक का बढता हुआ प्रयोग बैंकिंग बैंकिंग का प्रचलित शॅपिंग है । सामान्यतः बैंकों में कंप्यूटरों का प्रयोग या बैंकिंग संव्यवहार ओके कंप्यूटरीकरण का अर्थव्यवथा बैंकिंग का द्योतक है । आधुनिक समय में इलेक्ट्रॉनिक इंटरनेट, मोबाइल, कंप्यूटरीकृत बैंकिंग सब एक दूसरे से इस प्रकार संबद्ध हो गए हैं कि जिन्हें प्रायः अलग करके देखा मैं समझा नहीं जा सकता । भारतीय अर्थव्यवस्था में बैंकिंग की नवीनतम सुविधाओं का बढता हुआ दुरुपयोग भारतीय अर्थव्यवस्था में जहाँ बैंकिंग क्षेत्र में नवीनतम तकनीक का प्रयोग अधिक मात्रा में हो रहा है, उसके साथ ही इन सेवाओं का दुरुपयोग भी बडा है । बडी संख्या में जालसाजी, धोखाधडी की घटनाएं हो रही हैं । कई ग्राहक ठगे जा रहे हैं । निरंतर बढती प्रतिस्पर्धा के अंतर्गत बैंकों को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए भारतीय बैंकिंग के बाजार में लाइक ग्राहक वर्ग को तो गलत त्रुटिहीन सेवा प्रदान करने के लिए अग्रसर होना होगा । ग्रामीण भारतीय अर्थव्यवस्थाओं में कृषि क्षेत्र में नवीनतम ज्ञान व तकनीक का बढता हुआ प्रयोग कृषि औद्योगिकीकरण का आधार तथा आर्थिक विकास की कुंजी है । यदि विकसित देशों के इतिहास पर दृष्टि डाली जाए तो या ज्ञात होता है कि कृषि विकास के सोपान पर चढकर ही यह देश औद्योगिक विकास के शिखर पर पहुंचे हैं । भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि प्रमुख क्षेत्र रहा है । प्रधान व्यवसाय होने के कारण कृषि भारत जैसे विकासशील देश के राष्ट्रीय आएगा । सबसे बडा स्रोत रोजगार एवं जीवन यापन का प्रमुख साधन औद्योगिक विकास, वाणिज्य एवं विदेशी व्यापार का प्रमुख आधार है । यह भारतीय अर्थव्यवस्था के रीड तथा विकास की कुंजी है । निष्कर्ष एक । शिक्षा के क्षेत्र में स्कूलों में कॉलेजों की वास्तविक स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था में शिक्षा के और अधिक प्रसार की आवश्यकता है । इसके लिए स्कूलों में कॉलेजों की संख्या बढाने तथा इनमें आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने की आवश्यकता है । आज भी कई स्कूल कॉलेज ऐसे हैं जिनमें मूलभूत सुविधाओं का अभाव है । शैक्षणिक परिसरों में नैतिक मूल्यों का पतन भारत में जितनी अधिक शैक्षणिक संस्थाओं का विस्तार हुआ है उसके साथ ही शैक्षणिक परिसरों में नैतिक मूल्यों के गिरते हुए स्तर को देखा जा सकता है । विद्यार्थियों में सहनशीलता, धैर्य, विनम्रता जैसे गुड कम होते जा रहे हैं । छोटी छोटी बात पर विद्यार्थी उग्र रूप धारण कर लेते हैं । आए दिन किसी ना किसी विद्यार्थी द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबरें पढने एवं सुनने में आती है । तीन सूचना एवं प्रौद्योगिकी एवं बैंकिंग के साधनों का बढता हुआ दुरुपयोग भारत में सूचना प्रौद्योगिकी का तेजी से विस्तार हुआ है । इसके साथ ही इसका दुरुपयोग भी पढा है । अनेक मोबाइल धारक असामाजिक तत्व पुलिस को परेशान करते रहते हैं । उन नंबरों पर कुछ शरारती तत्व बिना वजह से बार बार फोन लगाते हैं । वह अधिकारियों को झूठी दुर्घटना की जानकारी देकर परेशान करते हैं ।

61 - Community Education Using Mass Media : Encountering Issue In emerging Indian Society

community education, using mass media and countering issue in emerging Indian society, Changes are taking place in almost all walks off individual societal, national and international life at a fast pace. To cope with this change, one needs a system which provides stable state are restrains equilibrium in the society, which is none other than education, education to community. Please buy votes roll in liberation ofthe individuals from ignorance, exploitation and poverty. As constitution off India made for the people and its preamble relates education that justice, liberty, equality, fraternity education is providing equal opportunity off enlistment development and progress to the members ofthe community for the greater glory off the individual and the community. Both dignity off the individual and unity off the nation aren't necessary. It can be made available to all true community education that can be defined as the education provided toe. All age groups in the betterment ofthe society tto find dissolution ofthe societal problems in an easy to implement way with affordable time and prides. Constitution has made several provisions for education like Article 3 51 State's official language off the union Article 3 54 states place off mother tongue for better participation from community members. Article 15 for Women's education Article 29 30 speaks about education. 40 minorities according to 1000 for community education is working for prominent issue faced by Indian society such as poverty, deprivation, gender bias and many more had made several steps right from the beginning. At this juncture off global bombing, environmental issues have become serious threats to the human life. Education as an instrument off change to the masses as the only way out to fight with our or come from thes developmental changes on issues. It is time for action. All are aware about the widespread population off India, so formal system off education is not enough for providing them a Venice about all the issues and they're Maddie's father. Same education must seek to modify community patterns off behaviour through clothes and constant interaction with community through technology available for communication. Education is a social process in which child shares the community consciousness better. 1962 as community life is the sum total off many agencies, individuals and institutions, it can be enriched by increasing the interaction on organisation invested. The technology plays a vital role in this technological driven era through mass media's clothes and constant interaction with a total culture off, the community can be established to modify it's patterns off behaviour. All Vienna's off media should be mobilised and properly utilised to create an appropriate climate for launching a variety off continues educational activities so as to counter attack the issues intervening in the development part off the nation like India problems and issues in emerging Indian society India has begin to be considered as developing country on on the part of obtaining the status ofthe developed country. But in order to achieve that status, one still needs to deal with a certain prominent problems and issues prevalent in the Indian society. These problems on issues proved to be the major hindrances in the progress or development off the country. Some of these problems on issues are mentioned below. Poverty is the greatest problem persisting since the time ofthe independence. Although recent positive economic developments have helped the Indian middle class A great Il, India still suffers from substantial poverty that national samples off organisation SSO estimated that 22.15% off the population Wass living below the poverty line in 2000 for 2005, down from 51.3% in 1977 1978 and twenties explosion in 2000. The criterion used wass monthly conception ofthe goods. Billa rupees ₹211.30 pasa for rural areas and repeats ₹454. 11 pesa for urban areas, 75% of the poor car intruder areas, with most of them comprising daily facials, self employed households and landless labourers. Parable 750.7% off India's poorest population still lives on less than $1 a day and 79.9% live one two U. S. Dollars per day. One of the critical problems facing Intel's economy is the shop on going Regional variations among India's different states and territories in terms ofthe per capital income, poverty availability, off infrastructure. On social economic development, for instance, the difference in growth rate being up forward and backward state soars 0.3% 5.2% for poverty on 4.9% for backward states during 1980 81 to 1990 91 but had grown to 3.3%. Port Forward States 6.3 person on for backward states. It was 3.0% during 1990 91 1997 and 98 4.1 person fall forward states 7.1 person and poor backward states 3.0% during 1997 98. Tow 6 2007 es eso deprivation The failure to provide the people off India with adequate food, clothing, shelter and the basic means off self fulfilment constitutes undoubtedly the most serious failure ofthe public policy in independent India. When India became independent in 1947 the most conspicuous feature off the Indian economy was that hundreds off millions off India's people lived in conditions off. Appalling deprivation on conditions, off hunger, ill health and avoidable disease. Illiteracy on homelessness on subject to different forms, off class cars and gender operation. 60 years later, despite the substantial progress meet in many fields, that fact remains unchanged. According to Call Sarah at l 2000 bomb, a recent measure off economic on social deprivation on one that has received much international attention is the Human Development Index HD I proposed by the United Nations Development Programme you and DP. This's a composite index. It seeks combined data on three features off the quality ofthe life addict, great levels, off income, good health and education into a single index. Operationally, income levels are measured by their friends to an international income poverty norm. Economically deprived access to health is measured in terms ofthe average long activity are the expectation off life at but multi attrition on access to education and learning is measured by means off a composite index that uses data on average levels off literacy in a society on the average number off years off, a schooling that that society provides its citizen educationally deprived by all these measures, India fares badly indeed, by international standards on more important in dumps off the actual levels off living off its people. Public expenditure in India on health, education and social services has bean low by international standards. Problem off educational deprivation in India is critical. India faces the prospect off entering the 21st century, with nearly half its population on more than 60% of its women illiterate. The number of Children in India off primary school age that is between six and 11 years who were not in the school was estimated to be 78 million in 1995. India is also home to the world's largest child labour force. Environmental issues in the global warming situation at present Conference going on in Copenhagen coalition is the big threat to the environment around as the carbon measure is causing 300 units, says the Times off India 7 December 1009 All left in society provided supportive environment is developed. Community members always try toe just with the environment. But now scenario has changed. All people for their selfish motives, polluted the different competent ofthe environment such as water, soil, air, forests, et cetera, and create their own likely environment do toe in placing air pollution on DeForest ing. The situation like global warming on Isis, all feel more temperature than people. Nowadays, it is all due to pollution on it creates problem everywhere and concept. Global farming on Isis need ofsome concrete steps toward protection. Off environment is must and the list is endless. Community education is the best example ofthe educational determinism against these developmental issues and problems. Waters family believe that education to the community will deter mined the development ofthe emerging society like India. Community education is a sustainable tool as far as the contemporary issues are cancer. But what actually is community education? How does it differ from education in the community or education for community community education? Education is for the community by the community on off the community. This idea was originated from euro and later having its spread all over the globe. In England and many other countries, community education has tended to be wrapped up with the idea ofthe communities cooling on, especially the pioneering book off Henry Morris around village colleges. However, one can think about the storey and practise off community education as education for community within a community. In other words, something called community as not just a place in which education occurs. Posturing community is also a central concern. The process of becoming part off an existing social network in orderto encourage learning is sometimes labelled as informal education. In UK, discussions are as community education, our community learning and Scottish debates about Storey and practise community education, also known as community based education. Our community learning and development is defined by the Scottish government as learning on social development, work with individuals groups and their communities using a range or formal and informal methods. A common defining feature is that programmes on activities are developed in dialogue with communities and participant dead. L 2006. The purpose ofthe committee Learning and development is to develop the capacity off individuals and groups off all ages. Truth here actions the capacity off communities to improve their quality oflife central toe. This is their ability to participate in the democratic process. Scotland institutes have defined community education as our process. Design toe energy, the lives ofthe individuals and groups by engaging with people living within a geographical area or sharing a common interest to develop voluntarily on age off. Learning action on reflection, opportunities later mind by their personal social economic on political deeds they retrieved from http semi column slash slash en dot Wikipedia dot org slash wiki slash community underscored education categories. Semi column Educational stages At the same time, community education is a vital concept which many people pay lips Office on, which has acknowledged as having a meaningful role to play in our educational system over the next generation community education. Concerned with education for communities veg, it is of at meetings off what communities themselves to the mine to beat their needs on with education for community that is, development through association in learning situation, formal and informal on through communication better 1962 education need to be flexible toe continually re adjust its programme in the light off the changing needs on services off the community in same day. Community has its responsibility to shape the curricular on co curricular activities according to changing demands ofthe time, the major cools off community education that l 2006 are to increase the productivity from the limited resources on more income, seeking by their security off the member look for opportunity to them to improve social and financial status. Also, the Scottish government, in their community education and development, has introduced the falling set off principles ofthe which community learning on development related activities should be based on one in Parliament. Increasing the ability off individuals and groups toe influence issues that affected them and their communities to participation. Supporting people to take part in decision making. Three. Inclusion, equality, off opportunity on anti discrimination. Recognising that same people may need additional support toe overcome the barriers. Deface boat self determination supporting the light off people to make their own choices on DH 50 partnership. Recognising that money agencies can contribute to see Ellie to ensure resources are used effectively, Ah, philosophical base for developing community education programmes has provided through the five components off the Wisconsin model ofthe community education. The model provides a process Plame bug for local school district's to implement our strength and community education. Ah set off committee education Principles was developed by Larry Hatch and Larry D. 1991 for the National Coalition for Community Education. These include who want self determination. Local people are in the best position. Tau identify community needs and wants parents As Children's first and most important teachers. I have bought a right and a responsibility to be involved in their Children's education. Do self help? People are best solved. Venter Capacity to help themselves is encouraged and enhanced when people assume ever increasing responsibility for their own felt. Being the acquired independence rather than dependence. Three. Leadership development, the identification, development and who's off the leadership capacities off local citizens are prerequisites for ongoing self help on community improvement efforts, boat localisation services, programmes, events and other community involvement. Opportunities that are broad cruises to fear people live have the greatest potential for the high level off public participation. Whenever possible, these activities should be decentralised two locations off easy public exits, integrated delivery off services organisation and agencies that operate for the public good can use their limited resources, meet their own goals on better solve the public by establishing close working relationships with other organisations and agencies with related purposes. Six. Maximum use ofthe resources the physical, financial and human resources off every community should be interconnected and use to their fullest if the divers needs and interests off the committee are to be met. Seven. Inclusiveness. The segregation or isolation ofthe people by age, income, sex, race, ethnicity, religion or other factors inhibits the full development off the community. Community programmes, activities and services should involve the broadcast possible cross section ofthe community residents. Eight. Responsiveness. Public institutions have a responsibility to develop programmes and services that respond to the continually changing needs and interests off their constituents. Night Lifelong learning learning begins is bought on continues until death. Formal and informal learning opportunities should be available to residents off all ages in a wide variety ofthe community settings. So these principles are parallel to the principal off cooperation and coordination, lifelong learning and interdependence with responsible and accountable factors. Issues concerning community education accumulating, the force said there are some issues back him 2008 with Community education, which are listed as follows. Who One community comprises off different type off individuals different in terms ofthe their age, knowledge level environment in which they grow and pursue values and so on. It is difficult to provide education individually, too difficult to give education to mass, consisting different backgrounds and interest. Three to bring them at one place. Our tom is also the great task. After bringing together, there is also a difficulty in finding common interest such that we can track them from their interest toe educational awareness programmes. Five. Providing support and Conducive Environmental Book Ted L 6 2006. To find the locus ofthe community to target seven. Finding physical and manpower resources for providing education. These issues may be handled better with Hughes off technology on which form of technology can help, and this is the important question to be answered. Mass media and community education impact off mass media is felt on every aspect ofthe the mortal life. Social, economic, political and so on. A man in the society is a man in communication with others. Get Duncan, his friends and fellows. Sharma 2005 Man is always exposed to the lifestyles ofthe others ideas, opinions off others news and views conveyed through all kinds off media, newspaper, radio, television, burns, Internet, etcetera. He is influenced by them and cannot keep himself aloof from the effects ofthe mass media. The entire community and the whole mankind are shaped According to the mass media that are available at that time. Chatterjee, 1979 has rightly the mark. The activities off the mass media fellow are closely related to the development in various fields. In farming community people reacting to policies and creating the social climate and veg development on nation building programme can take place. They cannot operate and social and political vacuum, nor do they deal with outdated philosophies. Mass media are every day dealing with problems that affect the destiny off the nation on in divider context, humanity as a whole, president scenario ofthe community education to mass media on the basis ofthe studies on development and communication at mass level tone in India, UNESCO and various developing countries as also on the basis ofthe field experience on communication and promotional research studies and surveys. A new professional thinking on the concept, role and process off mass communication has much broadly speaking, the purpose ofthe mass media in present context can be defected as one politically A to create, inform and enlightened public opinion. Be the faces off a democratic development society to create awareness among individuals and applications to promote scientific temper on national cohesion in society. See toe inculcated cooperative partnership among all section ofthe people on D to foster the establishment of feedback loops on research matter lodges, toe SS public opinion and interpreted to economically a toe act as an activist in the extension ofthe technology transfer among various section ofthe farmers, workers and other members ofthe working force to provide a supporting pat, efforts at modernisation and economic growth afford market and beat it to stimulate advertising and promotional campaigns on awareness about threats to society, culturally toe foster individual and community expression, discovery and Richmond creativity and enlightened reaction towards different system off society in the same V in the government has initiated many programmes like Theron CWC, huge Izzy adult education programmes, Edu said. National press emission programmes etcetera There are programmes and advertisements on the fundamental issues ofthe cult's education, literacy, AIDS awareness, family planning, removing untouchability, polio, immunisation, learning, traffic rules, roll place dramas, et cetera. Campaign programmes are also timeto time highlighted true print and electronic media, the private and non governmental organisation. Like pro TEM times off Intergroup Reliance as Implement foundation. She showed me her love so they're Sha Nalanda and many more are joining their hands with the technological gadgets on tries to handle issues through the education as an instrument off change and educational satellite is working for community education called and you said the education satellite was launched by Indian Space Research Organisation Israel with a purpose to provide education toe all people, primarily Children from remote areas off the country who cannot go to schools or colleges. The classes would be connected by various a state education ports and C arti c b SC journalist cities etcetera in a studio environment using PowerPoint presentations as well as the common black bolt there could be interactive as well as non interactive sessions offered. Now the different technologies involved in community education through mass media are one print media through newspapers, books, mexes pamphlets, awareness can be brought and information regarding other programmes can be spread. Newspapers are regular communication media books on Maxine's at Special Purpose Media to communicate, idea or awareness, and others are purpose. If media such that as and then necessarily educational parts can be distributed to electronic media, it has widespread coverage. Overpopulation. It does not need even reading, writing ability to lunch. Among all electronic devices, radio and TV are the most popular on easily available media Conclusion. Our famous African proverb lightly states it takes a village to raise a child, optimises the importance of that whole off the wider community and raising Children and young people, which in turn helped to make a progressively better nation and society for healthy living. Thomason and Wise, 1999 to push for diversity is igniting bitter conflict and education without education in science and humanities, technology is blind and can lead only to individual and social disaster. If technology is an accelerator, the knowledge is its fuel and the engine off technology is being fed richer on Richard Fuel every day to create a Vieira's would be required to generate successive alternative images ofthe future assumptions which deduce the nature ofthe cognitive and effective abilities. Sherman 2005 Society sometimes fails to recognise a really issues hampering the development ofthe individual in particular on nation as a whole. Mass media in community education will help in creating a fairness about these issues ofthe culture, economical, social and environmental to a certain level. The otters discussed the benefits off mass media programmes as a tool toe advocate for community education and more specifically to promote a Venice off, and the results are four said issues. The authors emphasised clubbing with mass media campaign strategies using television radio etcetera may only be successful to the degree that they are backed by community education and direct support programmes.

62 - ICT : life Changer For Indian Rural Women

E city life changer for Indian rural woman I City is presented as a resource which specifically targets underprivileged women for gender equality in developing and underdeveloped countries. To know the further sections, we must know what is my city. What is I. C. D. Information and communication technology is a set off tools and resources to store and manage information. I C D Sector consists off several telecommunications computer hardware on software on Elektronik Media, Internet like email, etcetera Hi city Environment, empowerment, Empowerment off women means building up the capabilities and skills to fight for their concern. It has being the most effective tool for gender equality in developing and under developing countries, understanding the meaning off women empowerment women Empowerment is not a process to gain power over meant but to make it possible for women to make their decisions making powerful on enable toe making their own choices. I. C. T and women's social empowerment Rural women is considered socially week because off her isolation from information which she requires, this also includes her ability to communicate in her own language here, two main areas for social empowerment off rural form in our health and education There have been major development in both areas with the aid off. Internet. Www dot wiki books dot com I, C T and Women's Economical Empowerment. By the aid off Elektronik and Digital Media, women can study at home through the learning and established herself economically. Hence, her dependence on others will be reduced substantially. I, C. T and women's political empowerment People around the globe are actively politically participating in all the issues because off the boom in social networking technologies, I cities have been applied as a catalyst for helping women to participate in politics and civics issues. Challenges in accessing I C T tools There be many problems in the utilization off i c t. Some key challenges are defined under technical challenges. Lack off Internet connectivity on electricity, inadequate infrastructure, inadequate information in local language, lack off or limited duration off vocational training, inadequate technical and management skills. Inadequate involvement off other. I see the resources social challenges while examining the issues for successful implementation off I C. T tools and resources for rural women empowerment, it is important to radios, social challenges, some off. The key social problems are traditional and Orthodox outlook inadequate awareness male dominated society. Inadequate education, Economically deprived, enclosed in huge domestic and agriculture work. Strategies for successful use off i. C. T. For rural women empowerment Enabling the atmosphere There is a need to make an information friendly atmosphere which assist in promoting women's opportunity. Get benefited from ICBC usage, arranging vocational training and bookshop. The effectiveness off I c t into learning largely depends on the trainers visible ization and skills in the execution off all the above actions, it will be vital to focus on the use off face to face training on Also to employ i C. T. To ease the workshops on discussion forums providing technical infrastructure in order to enrich the I. C D model, it is necessary to steadily upgrade the current technical policies to meet the needs off a 21st century. All information systems and technologies are either directly or indirectly depended on a rapid on stable Internet network. I C T technology have increasingly greater worth if they are focused on renewal and transformation. Conclusion. It is apparent that I cities offer opportunities which were not available beforehand to rural women using tools such as email, the Internet, audio video, computer conferencing off very effective learning environment can be made that allows rural women to dictate their pace place on the company off learning by learning In coming years, there will be a positive change in a rural Indian women in social, political and economical areas by proper usage on implementation, off icy retools and system.

63 - The Importance of Information & Communication Technologies in Rural Development

the importance ofthe information and communication technologies in a rural development, information and communications technology. I City refers to all the technology used to handle telecommunications, broadcast media, intelligent building management systems, audio visual processing on transmission systems on network based control and monitoring functions. Although Isis is often considered an extended synonymous for information technology, its scope is more broad. I City has more recently being used to describe the convergence off several technologies on the Hughes ofthe common transmission lines, carrying very devastating and communication types and vomits. It deals with the hues off electronic computers and computer software to convert, store, protect, process, transmit and securely retrieve information. Recently, it has become popular to broaden the term toe explicitly include the feed off electronic communication so that people tend to use the deprivation, ICICI information and communications technology. Basically, it is a valuable set off tools because it benefits you immediately and directly roll off. I'd be in a rural development information technology, or it has become the buzzword in India these days. One hears about it everywhere from stock markets to government. Carlitos across the country, everybody wants to do something connected with it, beat a school student or a politician they're looking at I d. As the ultimate panacea. The ever growing media attention on successes. Toadies are fuelling this appetite for it, and within this craze, for I t. The focus is on the Internet or the bald white. Generally, there is an I. D friendly atmosphere in the country. But does this craze for I t have any meaning for the silent majority off the country for those living in rural areas? How can computers be off any use for the people who do not know how to read and write? And even if they can read and write, they can't read and write English, which is the predominant language in the arena today. Moreover, how many people in this country can afford to have a personal computer or PC in such a scenario? It may be rather difficult Task toe answer a question like what can be the role ofthe ity in villages or in rural development? The critics off, I'd have often said the computers can only provide information transmitted from one place to another and, with the advent of the Internet, make communication instant, but it can not provide people drinking water. It can cure their disease and it can not give them employment. True, a computer is not a magic one that can solve all problems in rural areas, even if we take computer merely as an information to it is a great facilitator. The critics pocket that villages also have their own information needs. They need to know about their village. They're district's natural resources around them, about seasons and monsoons, about market rates, off different communities and about government schemes. They also need to know how much money is being allocated for rural development in their area and how much is being spent. And all these so called pets off information are related intensely to their lives and livelihood are connected pieces and effective to to do all this and much more. It is also a Met that people in rural areas like toe have three delivery off information. Experience has shown that if the information has direct relevance toe people and has a potential to result in commercial, Kane's people are willing to pay for such services. In light ofthe this, the Eye T task force has recommended a scheme which would enable the process off large skill, self employed youngsters across the country to set up and tablet contents for information kiosk, particularly for rural areas. It has to be in charge that such schemes have large scale private participation and are not dependent on government finding alone. However, the government can and show that anyone who wants to set up information kiosk at any place in the country is not only freed from all regulations and licences, but also is encouraged true, simple and attractive. Financing. Skins Health Care is yet another area where I can play a major role in rural areas, doctor order, paramedic stuff at a local P etc. Are. Some Ph see can access latest information about healthy schemes and seek advice from specialists about disease or ailments they cannot diagnose. Treat. The village PC can be used as a civilian system for disease on ultimately as note for telemedicine. Currently, a number of experiments are being attempted to take the PC and the Internet to Fletcher's. There has been a great amount of enthusiasm among people development, offer 11 content in local languages, availability off computers that can't run on low power and sensitisation off local government officials towards it can go a long way in using ICTY for rural development in near future impact off fighting in the rural people life. The present study is an attempt to know how information technology is playing a significant role in the development of the rural society. We are living in it. Even if we see have lab donations, then we come to know that we are lagging so behind. Making all the government departments it enabled is a demand off. Today, every citizen wants transparency and fast and timely services from government departments. This can be achieved only by using Internet and other items as vino. Development is a process which takes a couple of years to change the rural life because information technology will definitely be in a position to change the scenario ofthe rural life and create a better part poor rural development conclusion and teed off improvement. That's technological advancement as necessary for every nook and corner of India. Communications through emails should be entertained in every office as this is the only transparent and efficient mode of communication all over the world. The government departments should address public queries about problems in implementing different government policies through websites etcetera in rural school, there should be provisioned off digital teaching systems or digital classroom. All departments should be connected with the website right from that state headquarters to punch at level and trained computer operators should be put on services with good pay scales on a regular basis. All offices off public dealing should be connected with computer and Internet facilities, therefore public and receive all information regarding their works or grievances without filling application. In Artie, I sell if the rural areas are to take full advantage off these technologies to enhance their social economic development.

64 - Traditional and Modern Means for Development Communication

traditional and modern means or development. Communication development Communication is communication with a social consigns. It is primarily associated with rural problems but has also concerned with urban problems. Development communication seeks to create an atmosphere for change as well as providing innovations. Prove it. Society may change. Nora Cabral, 1975 Defined development, communication as the art and science off human communication applied to the speedy transformation off a country from poverty to a dynamic state off economic growth and makes possible greater economic and social equality and the larger fulfilment off human potential. Wilbur Sham, 1964 was the first to recognise that the communication could play an important role in the national development off the Third World countries. He believed that mass media could better the lives ofthe people by supplementing the information resources and exposing people for learning opportunities. Sham's conceptualisation off the interaction between mass communication and development became the focus off many development programmes. He conceptualised a relationship between development communication on economic goat, which has bean, the main fighting tool for development programmes. Trish tells me he's off communication for developmental. 90% off the vault's population lives in developing countries on DH, 70% off them live in rural areas. Mass media such as newspapers, televisions and the Internet do not effectively teach. These people are thieves. Media do not have the required impact in terms ofthe motivating change and development as shown by many research studies. The high rate off illiteracy added soda in ad equator reach off mass media impede almost 80% off India's population who reside in the rural areas, folk arts and traditional media are the aesthetics components, an integral part ofthe the process ofthe living in the community for social change and development. What is required is a change in their beliefs and the value system off individuals, thus making them more adaptive and responsive to the changing scenario. The roll off the development communicator is to find communicative vase toe influence. These beliefs and values systems. Traditional media is the tool off communication, having special characteristics to express social culture, religious, moral and emotional needs off the people ofthe society to which they belong broadly that traditional media bombs, which are extensively used for communicating social messages, can be classified as drama, dance, song, mime, storytelling, puppetry, street theatre and fork media. Traditional media was discovered several years ago in India as a means off development and educational communication, it has remained a significant tool in the process off motivating people in there decide direction. It helps to convey educational messages through entertainment, colour, costumes, music and dance. As these elements constitute an integral part ofthe their culture, the audience will be able to identify easily that the experience provided by traditional media that's it is the most appropriate educational medium for bringing about changes in attitude as it is informal and unscripted in nature. This intern helps the rural masses toe except social changes. Let us consider an example off traditional media used in rural areas. Traditional media plays an important role in sustaining agriculture. Traditional media helps farmer to make efficient, productive and sustainable use off their land and other agricultural resources by providing information, training and education. Certain traditional media forms are identified toe assist farmers to improve farming methods and techniques to increase production efficiency and income. It is hoped that it will ultimately improve their standard off living and lift the social and educational standards off rural life. Modern means off communication or development. Modern media may refer specifically to present times as well as the present. It forms off communication that involved computer, Internet and Mobil's as the latest mass communications medium. Modern forms off communication related to the intermediaries that are based on the technological advancements in India. Mass communication channels like newspaper Maxine, Radio Television fell, and the Internet and Mobile known as new media, are best suited for dissemination off information to a large number of people at a greater speed with a lesser cost per unit without media are single. Day is not possible for a man in this cyber era, it is like David out Media is a David state development. Off electronic media may have transformed the globe into our village integration off traditional media with modern media. Over the years, traditional media has been increasingly recognised as workable tools toe empire development messages both through life performances and also uniform integrated with Elektronik. Mass media. Electronic media like radio and television have extended the area off coverage off traditional performance, while traditional media of it they're inspiring colour and costumes, dance and music have encouraged the content off the electronic media channels. Many scholars have suggested that integration off traditional media with electronic media for quicker transmission ofthe information as it can motivate the rural audience. Traditional media should be an integral part ofthe any communication programme for rural development wherever possible. These should be integrated with electronic media as the local people, our family, our But these forms, which may have been used earlier only to provide entertainment collaboration between the folk artists and the producers is absolutely essential for the successful use off folk media and electronic media together for development purposes. However, under the impact off the more glamorous and more powerful electronic media that traditional media and folk art forms are being influenced and even transformed at the same time, it is promising to see how skillfully the electronic media uses the traditional are for forms to convey contemporary messages on radio and television, particularly in programmes for farmers. It is this integrated approach which will strengthen the efficiency off both technology based and folk media. Ah, healthy combination off the modern and traditional makes for a practical approach, but care must be taken to retain that originality ofthe traditional media. It is, however unlikely that the electronic media will completely replace the traditional media just like television viewing has not affected newspaper leading traditional media needs to retain its social authenticity hands. It should be used with understanding and sensitivity. Not all traditional media can be used for development communication purposes. Care must be taken to choose the most suitable form to communicate their 11 messages. Traditional media productions should be in tune with the needs ofthe society and related to the customs and believe off the local communities. For example, the Marcia, which is a farm off Irma in Maharashtra, cannot be used effectively to spread social message