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लाल जोड़े वाली दुल्हन - 01

आप सुन रहे है तो फॅमिली किताब का नाम है खौफ कदमों की आहट और खानी है लाल जोडे वाली तुम्हरा जिससे लिखा है देवेंद्र प्रसाद ने आर्चे मनीष की आवाज में तो कॅश सुने जो मनचाहे लाल जोडे वाली दुल्हन भाग एक भूत प्रेत, साया डायर आदि पर आप चाहे विश्वास करते हूँ या नहीं करते हो लेकिन उनके अस्तित्व को आप पूरी तरह नकार भी नहीं सकते हैं कि एक ऐसा विषय है जिस पर काफी बातचीत होती है । लेकिन इसका सच के बाद ही इंसान जानता है जिनके साथ घटना घटित हो चुके हैं । अन्यथा बाकियों के लिए बस ये मनोरंजन के लिए कहानी मार रह जाता है । मेरा नाम आशीष मंगाई है हम मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ । मैंने बचपन से ही अपने दादा से भूत प्रेतों के बहुत किसको सुनाए । मुझे बचपन से ही रोचक विषय लगता था और मैं इसके बारे में और अधिक से अधिक जानना चाहता हूँ । एक बार मेरे डिप्लोमा की तृतीय वर्ष में ऍम हुआ और बीस दिन के लिए कॉलेज बंद हुआ । मैंने निश्चय किया कि चंपावत में भाई के पास जाऊँ मेरा बडा भाई ऍम था । मैंने घरवालों को किसी तरह वहाँ जाने के लिए राजी किया उसके बाद कुछ जरूरी सामान आपको एक छोटे से बैग में रखकर सुबह पांच बजे के बस कश्मीरी के । इससे फॅमिली बडे भाई से बात हो गई थी । उन्होंने बताया था कि शाम ठीक चार बजे बस चंपावत बस अड्डे पर पहुंच जाती है और कुछ नहीं मिलने वाले थे । मैं पहली बार दिल्ली से कितनी दूर जा रहा था, बहुत उत्साहित था क्योंकि मेरी इच्छा थी कि मैं भी लेकिन पहाडों के हसीनवादियों में घूम कर रहा हूँ । टी । वी । आर । फिल्मों में देखा करता था कि पहाडों का मौसम बडा हीरो मानी होता है और यह जगह घूमने के लिए बहुत ही सुंदर होती है कि मेरा पहला अवसर भी था तो मैं इस मौके को अच्छी तरह से बनाना चाहता था । मैं बस मैं चाहकर भी नहीं हो पाया क्योंकि मेरे मन में के चल रहा था कि कहीं मुझे नहीं लग गयी तो मैं अपने गंतव्य से आगे नहीं निकल जाऊँ । बैठे चार बजे चंपावत के बस पर पहुंचा जैसे बस से बाहर निकला मुझे मेरे बडे भाई जिनका नाम सुदर्शन मंहगाई था तो देखते हैं उनके साथ तीन लडके होते हैं । शायद उनके दोस्त होंगे । उन्होंने मुझे देखा और मेरी तरफ बढ जाएगा । यात्रा में किसी तरह की तकलीफ तो नहीं हुई । मेरे भाई ने मेरी तरफ देखते हुए पूछा, नहीं नहीं, किसी भी तरह की नहीं । लेकिन मानना पडेगा अब जैसा कहा था की ये बस ठीक चार बजे यहाँ पहुंचाएगी । ठीक वैसा ही हुआ । मैंने उनके पास होते हुए आशीर्वाद लेते हुए कहा जो ये तो कोई भी बता देगा क्योंकि इस बस का यहाँ पर पहुंचने का वक्त ही चार बजे का है । नहीं, मेरे घर का नाम है, मेरे परिवार के सदस्य हैं और मेरे करीबी मित्र या रिश्तेदार इसी नाम से मुझे बुलाना पसंद करते थे । भैया के साथ जो तीन बंदे आए हुए थे उनमें से देखने मेरे हाथ से बैठ ले लिया । भैया ने मेरी तरफ देखते हुए कहा जहाँ से डेढ किलोमीटर पर ही काम रहा है, जहाँ हम लोग रहते हैं, ये लोग मेरे साथ भी मेरे विभाग में काम करते हैं । भैया ने ये कहते हुए सबसे बारी बारी परिचय करवाया । उन्होंने बताया कि दिनेश, राजेश और सुरेश उनके नाम है । बातों का सिलसिला जो शुरू हुआ तो कमरे तक पहुंचने पर ही खत्म हुआ । ऐसा करूँ मैं अंदर वाले कमरे में रखता हूँ और जल्दी से हाथ होकर फ्रेश हो जाओ तो तक चाय बन जाएगी तो उन्होंने आदेश देते हुए मुझे इशारे से अंदर जाने को कहा हूँ । मैं अपना बाहर लेकर अन्दर की तरफ चल पडा हूँ । यहाँ ऍम मतलब रेल के डिब्बे के तहत लम्बाई में थे लेकिन पढाई में कम थे । तीनो कपडे एक लाइन में पढते थे जिनसे बाहर निकलने का बाद एक रास्ता था । तीनों कमरों में ठंड के आप बडी बडी थी । मैंने अंदर वाले कमरे में जाकर बैठ रख दिया । आपके आज बज रहे थे । चारों और घुप अंधेरा बदला हुआ था और आपकी आवाज बहुत तेज सुनाई पड रही हूँ । मैंने भाई से टॉयलेट जाने को पूछा तो उसने बताया यहाँ पहाडों में कम जगह होने की वजह से इस तरह एक ही दिशा में लंबे बाल घर बनाते हैं । यहाँ हर किसी के घर में टॉयलेट घर के बाहर ही बना होता है । उन्होंने बच्चे तौर से लेकर बता दिया की मुझे कहाँ जाना है । मैंने जैसे ही टॉयलेट का दरवाजा खुला मैं घंटे खडे हो गए । पायलट के अंदर एक जोडी जब के लिए आके देखिए जो कि मेरी तरफ से लगातार खुले जा रही है । मैं इससे पहले के तौर चलाकर हालात का मुआयना करता हूँ । वो चीज अपनी जगह से मेरी तरफ से मैटर कर पीछे हटा सकते पर नीचे ऍम ऍम प्रकाश डाली तो देखा कि वो कांदी बिल्ली थी जो पहाड ठंड होने की वजह से वहाँ जाने कब से तुपकी पडते हैं । मेरे इस कदर अचानक दरवाजा खोलने से तो भी सहन गई थी और उछल कर बाहर की तरफ भाग पडे मैंने । मैं नहीं मांॅग लगा तो सुबह जाऊंगा ना बार बार रात को कौन बाहर आएगा । मैं जैसे ही लेकर के अंदर आया तो देखता हूँ कि पहले वाले कमरे का माहौल रंगीन हो चला था । मेरा भाई सुदर्शन और साथ के तीनों तो वहां बैठ कर शराब का आनंद ले रहे थे । ऍम कल रविवार का दिन है इसलिए शनिवार की रात अपनी होती है । मुझे डर आता देख दिनेश ने कहा और बोलते बोलते एक सांस में पूरा गिलास करने से नहीं होता है क्या नहीं मैं ये सब नहीं रहता हूँ । मुझे ये सब पसंद नहीं । मैं नहीं चलते हुए उस से होते हुए हो हो । लेकिन हमारे साथ बैठकर फॅसने ये बात कहते हुए मुझे वहाँ सब के साथ बैठने किसी करने लगा । अरे नहीं तो क्या होगा जब अंदर आराम कर रहे हैं । फिर कल नहीं जगह घूमने भी चल रहा हूँ । मेरे बडे भाई ने बीच बचाव करते हुए कहा उनकी बातों को सुनकर ऍम वाले कमरे में तीन बिस्तर एकसाथ चिपका कर लगे हुए थे । अंतिम वाले स्तर के साथ ही खिडकी थी । मैं वहीं खिडकी के पास वाले बिस्तर पर हो गया । बिस्तर पर पड रही, मुझे नहीं आ गई । मुझे इतनी लंबी यात्रा की थकान हावी थी । रात को किसी वक्त मुझे ऐसा लगा जैसे किसी चीज के चलने की बदबू आ रही है तो जैसे किसी जानवर के चलने की गंदा हूँ । चाॅस के बाहर हो गई तो मैं अपनी जगह से उठकर क्या? मैंने देखा कि बाकी के चारों उसी जगह बराबर में हो रहे हैं । कडी पत्ता नजर पडी तो देखा कि ठीक डेढ बज रहे थे । मैं उठकर रसोई घर से पानी पीकर आ गया । वहाँ रहते हैं । मुझे आपको कंधे नहीं आ रही थी । मैंने सोचा कि चलो अब तीन तो ठीक जाएगी । टाॅपर गहरी नींद हो गया । कितना सही कहा और जब और जल्दी से चाहे खत्म करके तैयार भी हो जाएगा । अगले एक घंटे में हम लोग पातालभुवनेश्वर जा रहे हैं । भाई की आवाज थी । मुझे उठाते हुए वो आगे की तरफ राम का संक्षिप्त विवरण दे रहे थे । ऍम ऍम सोने नहीं दिया और ऊपर से ये सुबह भी जल्दी हो गई है । मैंने बनाया लेते हुए भाई को कहा ऍम मेरे भाई है सकते । कोई पूछा पि ऍफ को ऐसा लग रहा था जैसे किसी जानवर के चलने की गंद हो । दुर्गन ने पूरी रात सोने नहीं दिया । मैंने मुह बनाते हुए कहा जैसे बहुत वो आने के वही जिम्मेदार हूँ तो तुम कभी वो गंदगी । दिनेश कुछ बोलने वाला था कि भैया ने उसके बातों को बीच में ही काटते हुए कहा । और एक यहाँ स्थानीय पहाडी लोग बकरियां मुर्गे की बलि देते हैं और उसके बाद प्रसाद के रूप से घर ले जाते हैं । प्रक्रिया मुर्गे की चमडी उतारे बिना पहले उसको हल्का सा चलाते हुए फूलने की कोशिश करते हैं । उसके चलने से ही अजीब सी का नाती है और ये वही होगी हाँ सही कहा आपने कुछ ऐसी ही बदबू लगी थी । मानना पडेगा लोगों का जवाब नहीं । अच्छे से बात के लिए कितने जतन करते हैं । तो ये कहकर हसने लगा और मेरी आजी में वो भी शामिल हो गए । अच्छा चलो जल्दी से नहीं कर रहा हूँ । हम लोगों को दस बजे एक पौराणिक जगह घूमने चल रहा है । ठीक है अगर वो बाहर की तरफ चले गए । भैया के साथ सारे दोस्त बाहर धूप में खडे होकर इंतजार कर रहे थे । बाहर निकलने पर जब तो मेरे जिस्म पर पडी तो मान लो जैसे तुम रूम में बिजली से काम करें । शरीर में एक असीमित ऊर्जा का एहसास हुआ । उस धूप को छोडकर कहीं जाने का मन नहीं हो रहा था । लग रहा था कि कुछ और रखकर इसका दत्त लिया जाए, चलना है या बस यहीं खडे खडे तो देखते रहना चलो हम लोगों को देर हो रही है, ऍम जल्दी हो जाता है । भैया ने मेरे धूप का आनंद लेने में अलग डालते हुए कहा । उनके साथ नीचे सडक पर आ गया । नीचे सडक के किनारे एक सफेद रंग की जीत करेगी । उस जीत के आगे की तरफ भारत सरकार लाल कार्य रंग में लिखा हुआ था । भैया आपको लिमिटेड जोकि एक मिनीरत्न कंपनी थी । उसमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के पद पर पिछले तीन साल से कार्यरत थे । उन्हें उसके ऍम पर जाने के लिए ये सरकारी गाडी मिली हुई नहीं हूँ । आज मैं कुमार का दिन था इसलिए मेरे लिए ये फायदे का सौदा हुआ और ये चीज आज हमारे लिए ऍम और उनके बाकी सारे तो पीछे बैठ करेंगे । चंपावत से पातालभुवनेश्वर जो उत्तराखंड के पिथौरागढ चले गए गंगोलीहाट नामक जगह पर हूँ । ये चंपावत से एक सौ किलोमीटर की दूरी बना हूँ हमारे साथ नीचे नदी भी ताल से ताल मिला फॅसने बताया हूँ किस नदी का नाम काली नदी है । नेपाल से आ रही है । लगभग डेढ बजे हमलोग गंगोलीहाट के पास पहुंच करें । ऍम करने लगा है और मैं भैया के साथ सामने दुकान की तरफ बढ चला हूँ । पातालभुवनेश्वर जाने के लिए किधर से जाना होगा? ऍम एक दुकान वाले से पूछता हूँ दुकान वाले ने कोई भी जवाब नहीं दिया । मुझे बडा अजीब लगता है अभी आस पास कहीं से एक व्यक्ति नहीं शायद हमारी बात सुन ली थी । वो बोला बाबू जी ये जरा ऊंचा सुनता है । बचपन में पटाखे फोड रहा था और आग लगने के बाद फिसलकर वहीँ पास ही में गिर पडा है की तेज आवाज से आपने सुनने की शक्ति को कहाँ बैठा है । ऐसा कीजिए आप सामने मुख्य सडक से भाइयों एक पतली पगडंडी जारी है ना वहाँ से सीधे चले जाइएगा । थोडी दूर चलेंगे वहाँ एक बडा सा गेट बना होगा । बस उसी गेट से अंदर जाने पर थोडी दूरी पर आपको वह जगह मिल जाएगी मैंने दुकान वाले की घटना बना सोचता हूँ और हाथ छोडकर पंजाब होते हुए हैं । उस जगह की तरफ बढ चला पगडंडियाँ बहुत कम चौडी थी ऍसे यहाँ के मौसम का सामना करने के लिए सक्षम ऍम पेड पर लाल रंग के फूल शोभायमान तो कहीं कहीं और चीन के पेड भी अपनी अपनी मौजूदगी ठंड का अहसास करवा रहे थे ।

लाल जोड़े वाली दुल्हन -02

फॅमिली दुल्हन भाग तो चारों तरफ बिल्कुल सन्नाटा पसरा हुआ था । लोग भी बहुत कम ही दिख रहे थे । थोडी दूर चलने पर ही हम एडवोकेट मिला, जिसके ऊपर लिखा हुआ था ताल । भुवनेश्वर में आपका स्वागत है । हम वहाँ से चहलकदमी करते हुए उस जगह पहुंच चुके थे तो पाती जो अन्दर की तरफ जाती थी उसको बाहर ही एक पुजारी बैठा था, जिसमें हमें अंदर जाने से रोक दिया । मैं अंदर जान से क्यों रोक रहे हो तो नेशनल पुजारी पर प्रश्नों की झडी लगा दी । किसन कर पुजारी विनम्र स्वभाव में बोला । आप सभी को इस पवित्र गुफा में चमडे के सामान से निर्मित वस्तुएं जैसे ॅ आदि ले जाने की मनाही और मोबाइल कैमरा ले जाने पर भी प्रतिबंध है । इसे लेकर नहीं रहेंगे तो फिर रखेंगे किधर ऍम जलाकर उस पुजारी से कहा । इस बार भी पुजारी ने मुँह में हाथ से दूसरी तरफ निशाना करते हुए जवाब दिया हमने लॉकर है, आप वहाँ सामान जमा करके तो कर लेकर जा सकते हैं । ब्रिटिश सबसे पहले मोबाइल और बटोही को इकट्ठे करने के बाद लाकर की तरफ जमा करने के लिए चला गया । थोडी देर में ही हमारे सामने था और अपने साथ एक टाइप को लेकर आया था । हम लोग गुफा के अंदर प्रवेश करने लगे । कुफा प्रवेश करते ही शुरुआत में पत्थर से डर मैं टैक्सी दी थी । छुट्टी चाहिए लगभग पचास मीटर तक थी । नीचे उतर दही संदल जगह थी । नीचे आते ही गाइड हम लोगों के सामने आ गया और बोलने लगा मेरा नाम नहीं चौधरी हैं यहाँ से थोडी दूर पर ही लोहाघाट नामक कांस्य । मैं आपको इसको पैसे थोडी सारी आवश्यक जानकारी दूंगा । पातालभुवनेश्वर मंदिर पिथौरागढ जनपद उत्तराखंड राज्य का प्रमुख पर्यटक केंद्र है । यह गुफा प्रवेश द्वार से एक सौ साठ मीटर लंबी ऍम फुट गहरी है । पातालभुवनेश्वर देवदार के घने जंगलों के बीच अनेक भूमिगत कपडा उन का संग्रह है । ये संपूर्ण परिसर दो हजार सात से भारतीय पुरातत्व विभाग पा रहा अपने कब्जे में ले लिया गया है । हिन्दू धर्म के अनुसार यहाँ तैंतीस कोटि के देखता फिर विमान है जैसे कुछ लोग तैंतीस कोटि को तैंतीस करोड भी समझने की भूल कर देते हैं और ये साथ साथ बताना चाहूंगा की तैंतीस कोटि का अभिप्राय तीस करोड नहीं, तैंतीस प्रकार के देवी देवता से वाधानी तथा और लोकगीतों में इस भूमिगत वहाँ के बारे में कहा जाता है कि यहाँ भगवान शिव और तैंतीस कोटि के देवता फिर विमान है । यहाँ छूने के पत्थरों से कई तरह की आकृतियां बनी हुई हैं । इस गुफा में बिजली की व्यवस्था भी है । पानी के प्रवाह से बनी है तो केवल एक गुफा नहीं बल्कि कुमाऊं की एक श्रृंखला है । पुराणों के मुताबिक पातालभुवनेश्वर के अलावा कोई स्थान ऐसा नहीं जहाँ एक साथ चारों धाम के दर्शन होते हूँ । ये पवित्र बाॅस अपने आप में सदियों का इतिहास समेटे हुए हैं । पुराणों में लिखा है कि त्रेता युग में सबसे पहले इस गुफा की खोज राजा मत्वपूर्ण ने की थी । चुप देता युग में अयोध्या पर शासन करते थे तो आप अपने पांडवों ने क्या क्योंकि भगवान के साथ चौपड खेला था और कलयुग में जगद्गुरु शंकराचार्य का सात सौ बाईस किसी के आस पास इस गुफा से साक्षात्कार हुआ तब उन्होंने ये ताम्बे का एक शिवलिंग स्थापित किया । इसके बाद जाकर कही चंदन आ जाओ ने इसको पास हो जाएगा । स्कंदपुराण के मानस खंड में वर्णित किया गया है कि आदि शंकराचार्य ने ग्यारह सौ इक्यानवे ईसवी में इसको फाका पुनः द्वारा किया था । यही पातालभुवनेश्वर में आधुनिक तीर्थ इतिहास की शुरुआत हुई थी । आज के समय में पातालभुवनेश्वर को सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है । देश विदेश से कई सलानी इसको पा के दर्शन करने के लिए आते जाते रहते हैं । इसके साथ ही एक शिवलिंग है जो लगातार ऊपर की ओर बढ रहा है । कहा जाता है कि जब ये शिवलिंग को भाग्य छत को छू लेगा तब कलयुग का अंत हो जाएगा और ये दुनिया खत्म हो जाएगी । माना जाता है कि एक गुफा कैलाश पर्वत पर जाकर खुलती है । ये भी माना जाता है की युद्ध के बाद पांडवों ने अंतिम यात्रा से पहले इसी गुफा में तब क्या था क्या बात करते हो । मैं उस शिवलिंग को अवश्य देखना चाहूंगा कि आप उस जमाने के होते हुए इन बातों पर विश्वास करते हैं । मैंने कहा की बात को बीच में काटते हुए कहा मैं जानता हूँ शुरू में विश्वास करना इतना आसान नहीं होगा फॅार देख सकते हैं । यहाँ सब अपने अपने हूँ, कहीं भी किसी तरह का कोई छोड मौजूद नहीं । मैं अभी आपको बहुत शिवलिंग के दर्शन भी करवाऊंगा रहा था । इतने मेरी बातों का धीरज से जवाब दिया । मैं इससे जुडी भी पाते जानना चाहता हूँ क्रिकेट बताते रही है । मैंने मुस्कुराकर का इस की तरफ देखा और काइट फिर हमें वहाँ की और जानकारी देने में लग गया । हिन्दू धर्म में भगवान का इस चीज को प्रथम पूछे माना गया । गणेश जी के जन्म के बारे में कई कथाएं प्रचलित है । कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव ने क्रोध ऍम सर धड से अलग कर दिया था । बात में माता पार्वती जी के कहने पर भगवान का नहीं इसको हाथी का मस्तक लगाया गया था । लेकिन जो मस्तक शरीर से अलग किया गया माना जाता है तो बस तक भगवान शिव जी ने पाताल भुवनेश्वर गुफा में रखा है । पातालभुवनेश्वर की गुफा में भगवान गणेश के सर कटे शिलारूपी मूर्ति के ठीक ऊपर एक सौ आठ पंखुडियों वाला समाज तक दल प्रमुख कमाल के रूप की एक चट्टान है । इस प्रमुख कमाल से पानी भगवान का देश के शिलारूपी, मस्तक, फॅमिली है । मुख्य बंद आदि गणेश के मुख्य में करती हुई दिखाई देती है । मान लेता है कि ये प्रमुख कमल भगवान शिव नहीं यहाँ स्थापित किया था । ये बताते बताते वो काइट हमें थोडा आगे की तरफ ले गया तो फायदा करी होने की वजह से हम लोग चक्कर आगे बढ रहे हैं । लगभग पंद्रह फुट की दूरी पर चलने पर हमें एक जगह पर उसने रोक दिया । ऊपर की तरफ इशारा करते हुए बोला ये देखिए ये ब्रह्म कमल का रूपए ध्यान से देखने पर आपको एहसास होगा क्यों? प्रमुख कमाल से पानी की बूंदे टपक रही है जो सीधे नीचे बडे शिवलिंग पर पडती है । मुझे अपनी आंखों पर विश्वास करना मुश्किल लग रहा था क्योंकि वाकई प्रमुख कमल जैसा दिखने वाला पुष्प गुफा के ऊपरी भाग में ही बना हुआ है । क्योंकि पत्थर का होने के बावजूद भी पुष्प की आकृति का दिख रहा था । स्थिति कर साफ लग रहा था, लेकिन नवनिर्मित नहीं है तो इसमें किसी भी तरह का जोड नहीं रहा । वास्तव में उसी पत्थर रुपये ब्रहमकमल से पानी की बूंदें शहर है । कल नीचे शिवलिंग पर चल से अभिषेक का नहीं, बिलकुल सटीक शिवलिंग के बिल्कुल मध्य में पढना ही नहीं ये देखिए । यही वो पत्थर है जिसका जिक्र मैंने थोडी देर पहले आप लोगों से किया था । इन गुफाओं में चारों युगों के प्रतीक रूप में चार पत्थर स्थापित है । लेकिन ये वाला पत्थर जैसे कलियुग का प्रतीक । माना जाता है कि साल दस साल धीरे धीरे ऊपर उठ रहा है । माना जाता है कि चस्तरीय कलियुग का प्रतीक पत्थर दीवार से टकरा जाएगा । उस दिन कलियुग का अंत हो जाएगा । उस चले सच में पत्थर दिख रहा था क्योंकि नीचे धरातल से ऊपर की तरफ पडता हुआ तो हो रहा था । उसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि धीरे धीरे ऍम बढ रहा होगा । इस जगह मन को अजीब सा सकून महसूस हो रहा था । मन में कोई इच्छा ही नहीं रही हो दिल को ये बाल बहुत ही भाग रहे हैं । मैं उन विचारों में खोया हुआ था तो फिर से गाइड ने अपने ज्ञान के पिटारे को खोलना शुरू किया । इसको पा के अंदर केदारनाथ, बद्रीनाथ और अमरनाथ के दर्शन होते हैं । बद्रीनाथ ने बद्री पंचायत के खिला रहे मूर्तियां जिनमें हम को भी वरन लक्ष्मी, गणेश तथा करोड शामिल है । दक्षिण नाग की आकृति भी गुफा में बनी चट्टान में नजर आती है । इस पंचायत के ऊपर बाबा अमरनाथ की गुफा तथा पत्थर की बडी बडी चट्टानें पहली हुई है । किसी को फाॅर्स की जीत के दर्शन होते हैं । इसके बारे में मान्यता है कि मनुष्य कालभैरव के मुझसे दर्द हुई प्रवेश कर पूछ तक पहुंच जाएगा तो उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है । ये कहते हुए उसने अपने हाथ से ज्यादा करते हुए एक विचित्र को पार की तरफ इशारा किया क्योंकि हाल किसी के ऊपर चढने पर दिखाई दे रहे थे । सही में उसको फायदा दूसरा छोड तो था जिसका मार्ग कहीं न कहीं जाना हो रहा था । उसको वहाँ की तरफ रुकना करते हुए वापस हम उसी जगह आ गए और का इतने सामने की तरफ इशारा करते हुए कहा ये देखिए विशेष ना के पन्नों की तरह हो गयी संरचना पत्थरों पर नजर आ रही है । मान्यता है कि धरती इसी पर टिकी है । गुफाओं के अंदर बढते हुए तोफा की छत से गाय के एक धन की आकृति नजर आती है । यह भागवती कामधेनु का एक बहन है । कहा जाता था कि देवताओं के समय में स्तन में से दुग्धधारा बहती थी । कलयुग में दूध के बदले इससे पानी टपक रहा है । उसके ऐसा कहते ही मेरी नजरें उस बोर गई । ये सारा नजारा वास्तव में मेरी सारी अफवाहों को सच करता हुआ प्रतीत हो रहा था । इस जगह की पुरानी कहानियाँ इस गुफा में मौजूद साक्ष्य की वजह से मुझे अब वास्तविकता का अहसास करवा रही थी । इस जगह को देखने के बाद कोई भी व्यक्ति विश्वास कर सकता था । इस बात को मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि बिना इस जगह को प्रत्यक्ष रूप से देखें । यहाँ किसी भी कहानी पर विश्वास करना असंभव था । हम लोगों ने उस जगह का सूक्ष्म निरीक्षण किया और गायक भी हमारा बखूबी साथ दिया । खडी हूँ चार बजे का हो चला था । हम लोग वहाँ से वापसी के लिए चल पडे । करीब ढाई घंटे में हम लोग लोहाघाट पहुंचे और वहीं रात्रि का खाना खाने का निश्चय किया । होटल में वहाँ सभी ने भरपूर खाने का मजा लिया और तकरीबन साढे आठ बजे तक हम लोग चंपावत पहुंच गए । लोहाघाट चम्पावत मात्र तेरह किलोमीटर की ही दूरी पर था । कमरे में आते ही सभी स्तर पर फेर हो गए । मैं और भैया बीच वाले कमरे में हो गए हैं । वहाँ एक डबल बैठ लगा हुआ था । खिडकी से ताजी हवा रही थी । बिस्तर पर पढते ही नींद के आगोश में समा गए । अचानक रात को चंद्र चल पायल की आवाज से मेरी नींद टूटी । आंख बंद किए ही प्रस्तर पर इस आवाज को महसूस कर रहा था । ध्यान देने से पता लगा कि धीरे धीरे की आवाज तेज होती जा रही थी जिसका यही प्रतीक था की पायल पहले कोई समीर भी आ रही है । यह बात सुनते ही मेरे पूरे शरीर में जैसे करंट के साथ हो गया । मैंने अपनी एक आंख को खोलकर अपने हाथों की तरफ देखा । ऍम खडा हो चुका था । मैंने हिम्मत की अच्छा ऍम कि तभी वो पायल की आवाज अचानक बंद हो गए । वहाँ की मेज पर रखे बोतल से पानी पिया । अब वापस अपने बिस्तर में घुस गया और चादर ठान ली । फिर ज्यादा जानते हैं पायल के चाँद चाँद आवाज से ही शुरू हो गई । अब तो इस आवास में मेरी दिन तो दूर भागने नहीं मैं फिर से अपनी जगह पर खडा हुआ हूँ । लेकिन इस बार आवाज आनी बंद नहीं हुई । मैंने सोचा की बगल में लेते हाईकोर्ट हूँ की सोच कर जैसे मैंने भाई की तरफ हाथ बढाया तभी वह आवाज आनी बंद हो गए । थोडी थी वही मूरत बना बैठा रहा । ऐसा नहीं था कि आवाज आनी बंद हो गए तो आवाज थोडी थोडी देर में चार से पांच सेकंड के लिए आती है और तीन चार मिनट के बाद वहीं झनझन किसको औरत भारी फायर जिसमें गुरु की मात्रा ज्यादा होगा वो पहन कर चली आ रही है । अब मेरा दिल सोंग्स ओर से धडक में लगा एक तो मुझ पर इतना भी हुआ की हाँ ऐसा लगा कि दल छाती से निकलकर मेरे मुँह में आ जाएगा । मेरे तो बिल्कुल ही समझ में नहीं आता था कि क्या करूँ । मैंने सोचा कि क्यों ना मैं खुद दरवाजे को खोलकर देखो । ये आवास कैसे आ रही है? नहीं कोई अदालत नहीं कर रहा । मैं अपनी जगह से उठा और सबसे पहले अंदर वाले कमरे की तरफ । वहाँ बाकी के तीनों लोग तो थोडे भेजकर सो रहे थे । मैंने फिर बाहर का रुख किया और दरवाजे को खोलकर बाहर जाने का निश्चय किया । घटना आपसे दरवाजे की कुंडी को खोलते ही झटके के साथ दरवाजा खोल दिया और बाहर आ गया और दरवाजे को खोलकर जैसे बाहर निकला वहाॅं इस बार आवाज बिलकुल मेरे सामने चाहती हूँ । मैं तो मानो कोई नई नवेली दुल्हन इस तरफ चली आ रही हूँ । लेकिन मुझे चुप हुआ कि ये आवाज केवल सुनाई दे रही थीं तो कुछ भी नहीं रहा था । ये कैसे संभव हो सकता था? मैंने तो पीछे घर के पीछे जैसे ही आया ऍम वजह से मरने को हुआ तो मुझे ऐसा हुआ कि किसी ने पीछे से मेरा कंधा पकडा हुआ है । मेरे माथे से बहता पसीना कान के रास्ते होता हुआ करतन से नीचे की तरफ रहते हुए जहाँ चली पैदा कर रहा था ऍम खडा मेरे अंदर पलट कर देखने का भी साहस नहीं हुआ । अच्छा अंशु तो फॅमिली के कर रहे हैं । यहाँ पास जानी पहचानी से लग रही थी मैं मन ही मन बजरंगबली को याद करते हुए पीछे की तरफ फायदा और पीछे पलटने के बाद आके खोली तो हवा से रह गया तो यहाँ पे रात को तो भी घर के पीछे की तरफ इस जगह पर क्या कर रहा है । भाई वहाँ खडा था और आश्चर्य से मुझे तार देखो पूछ रहा था । मुझे काफी देर से पायल की आवाज आ रही थी । मैं उसकी आवाज को सुनते हुए तूने ठेका ले रखा हुआ है हर चीज का इतनी रात को बाहर अकेले और बिना पूछे मजा अगर यहाँ जंगली जानवर भी होते हैं ये कहते हुए मेरा हाथ पकडकर कमरे के अंदर जाकर दरवाजा बंद कर लिया हो गए ।

लाल जोड़े वाली दुल्हन - 03

लाल जोडे वाली तुलन भारत तीन अब बिस्तर पर लेटा तो था लेकिन नींद कोसो दूर थी । मेरे जहन में कई सवाल घर कर गए थे । आखिर कौन थी वो इतनी रात को कहाँ भटक रही थी? क्या वो कुछ दुल्हन थी? आपस ऍम नहीं नहीं नहीं पहन नहीं था क्योंकि ये चाहती आंखों से देखा था मैंने और उस आवाज को मैंने काफी करीब से महसूस भी किया था । ये सोचते सोचते कब सो रहे हो गया इसका ऐसा ही नहीं हुआ । मुझे किस्मत तीन आई इस्काॅन खुलता ही खडी पर नजर पडने से हुआ है । खडी में ठीक दस बज रहे थे तो मैं तीन दिन तक होता रहेगा यहाँ पक्का बिल्कुल पता नहीं लगता । ये पड बढाते हुए ना अपनी जगह होता है । ये देखकर मैं आश्चर्यचकित रह गया की कितनी देर तक सोने वालों में मैं अकेला नहीं था । जब खोले भेजकर सोने में लगे होते हैं । बनने से कुछ करना है तो क्या आवाज तो साफ साफ तो नहीं पढ रही थी । मैं कमरे के बाहर आया तो देखा के राजेश बाहर कुर्सी पर बैठा हुआ था और धूप का आनंद ले रहा था । मुझे अपनी तरफ आता देखकर और बोला शुभ प्रभात हो ऍम क्या बात है । ऑफिस नहीं जा रहा हूँ । सब अभी तक हो रहे हैं । मैंने उस से जानना चाहा कि आप कर सकते हैं अभी तक सोए हुए क्योंकि इतना निश्चित रूप से आज बकरीद की छुट्टी है । हम लोगों को छुट्टियों के दिन देर तक सोने की आदत है । मुझे सुबह उठने की आदत है इसलिए मैं नहीं होगा तो देख रहा हूँ । इसका मजा लेना भी एक सुखद अहसास होता है । ये कहकर वो मुस्कुराने लगा । हाँ, मेरी तरफ से किस खाते हुए बैठने को कहा । मैंने थोडी ही बैठकर इधर उधर की बातें की । फिर वहाँ से उठकर होने चला गया । नहाकर में अंदर भरे कमरे में आकर कपडे पहनने के लिए गया । अंदर आते ही मुझे ठंड का एहसास हुआ जबकि खडी में दिन के साढे ग्यारह का भक्तों चला था । धूप भी आजकल हुई थी तो मैंने सोचा कि शायद वहाँ पर अचानक कमरे में आने से ऐसा होगा । अगले ही पल मुझे एहसास हुआ के कमरे में मेरे सवा किसी के पुत्र उडाने की आवाज आ रही है । ऍफ का ध्यान हटाते हुए आतंकी को आहिस्ता से ऊपर पैर पर रखते हुए ध्यान से सुनने की कोशिश करने लगा । ध्यान से सुनने से पता लगा कि वह फुसफुसाहट तो उस कमरे में स्तर के नीचे से ही आ रही है । ऍम सहमते हुए तेज आवाज में कहा, मेरा ऐसा कहते हैं कि वो आवाज यानि बिल्कुल बंद हो गए । मैं सोचता हूँ आवाज बाहर से आ रही होगी । फिर मैं कंघी से बाल हमारे में लग गया । मुश्किल से अभी कुछ ही हो रहा हूँ कि मुझे किसी छोटे बच्चे के हंसने की आवाजाही तो आवाज उसी बस करके भी चल रही थी । कॅश अपना बिस्तर की ओर । क्या मैंने झुककर देखा तो अगले ही पल पछाड खाकर गिर पडा । पलंग के नीचे छोटा सा बच्चा होने में बैठा हुआ था और नजदीक से बातें कर रहा था । बात करने के दौरान जो कभी क्यों हस्ता जैसे किसी ने उसे खुद को देखिए । बीच बीच में खुद को उसको दी से बचाने का प्रयास कर रहा था तो वहीं जमीन पर लेटे लेटे ये सब नजारा देख रहा था । फिर इस समझ में नहीं आ रहा था कि ये पच्चीस है कौन? और यहाँ पलंग के नीचे कहाँ से आ गया । आपके गया तो वहाँ किसके साथ खेल रहा है तो उसे तो दिख रहा था लेकिन मुझे थी एक पल को मुझे लगा कि ये पहले लेकिन जब तो फायदा मैंने अपनी आंखों को भेजकर देखा तो वही दृश्य था खेलते खेलते उस बच्चे की नजर मेरी तरफ । और तो मुझे बहुत गुस्से से देखने लगा । जैसे मैंने उसके किसी कार्य मैं देखने डाल दिया हूँ । अच्छा रहा गुस्से से लाल हो गया जब तक वो दो से ढाई साल का लग रहा था । लेकिन इतने छोटे से बच्चे को अखिल इतना खतरनाक गुस्सा कैसे आ सकता है । इससे पहले कि मैं कुछ और समझ पाता उस बच्चे ने अपनी ताहिनी हाथ को उठाते हुए मुद्दे को बंद करने जैसे हरकत की और ऐसा करने के बाद उसने अपनी दोनों आंखों को बंद करते हुए पानी तरफ ॅ खोपडी को लटका दिया । जैसे किसी को फांसी दे दियो मैं हडबडाकर उस जगह से उठकर चीखते हुए बाहर की तरफ भाग खडा हुआ तो वो तो फॅमिली पर क्या क्या पहन अपने दोस्तों के साथ कैरम खेल रहे थे । फिर किस तरह तेज सुंदर भागने की वजह से मैं टकरा गया था मुझे और उनके तो उसको बहुत तेज चोट लगी थी । अरे पागल हो गया क्या हुआ कहाँ? तो सभी ने एक साथ प्रश्नों की झडी लगा दी । मैंने कमरे की तरफ इशारा करते हुए कहा फॅसा हुआ है । फिर इतना कहते ही सभी अन्दर की तरफ भाग खडे हुए । सभी अंदर गए और सब अपना पेट पकडते हुए हसते हुए बाहर आए । अचानक इस त्योहार से मुझे बडा अजीब लगा । मुझे लगा कि ये सब इन्हीं में से किसी एक का खेल है । कुछ बहुत तेज गुस्सा आ रहा था तभी एक मैं हूँ उसी को बडी मुश्किल से रोकते हुए गा भाई वो तो लेते आओ उसका इतना कहना ही और सब के सब हंसने लगे हैं । मेरी उलझनें और बढती जा रही थी । तभी मैंने देखा केप्रदेश उस बच्चे को गोदी में उठाता हुआ बाहर लाया और बोला ये कोई मतलब नहीं है । इस बच्चे का नाम हुआ और जो पडोस में ही रहने वाली भाभी का बच्चा है क्योंकि अक्सर खेलते खेलते हमारे कमरे में घुस जाता है । उनके ऐसा कहते ही मेरी जान में जान आई । अभी उन लोगों के साथ छोटी हाथ में शामिल हो गया जब स्थिति सामान्य हो गई । तब मेरे मन में यह प्रश्न था की अगर वो बच्चा जाने में पलंग के नीचे आ गया था तो फिर वो इस तरह गुस्से से लाल कैसे हो गया था तो वहाँ आपको बढाते हुए अजीब से हरकत करना छोटे बच्चे के बस की बात नहीं । आखिर बहुत पता भी तो रहा था कुछ जैसे किसी से सच में बात कर रहा हूँ । इतने दिनों से कुछ कोई भी हो रही थी । गिरा दल ही विश्वास करने को तैयार नहीं था कि ये कोई सामान्य घटना मुझे सब किसी को भी बताना जल्द लग रहा था । क्योंकि इस बात का विश्वास तो दूर की बात है । किसी ने सुननी भी नहीं । पायल वाली घटना भी तो कथित हुई थी । ना हो ना हो कोई तो बात है जो किसी होने की तरफ इशारा कर रही है । इन्हें ख्यालों में खोए हुए जाने कब शादी हो गई । आभासी नहीं हुआ हम लोग खाना खाने के बाद सोने चले गए । मेरा बडा भाई और दिनेश पहाड वाले कमरे में हो गए । मैं राजेश और स्वदेश के साथ अंदर वाले कमरे में हो गया । आज मुझे भी नहीं लग रहे थे । पांच । इस पायल के आवाज और उस अजीब सी चले हुए दुर्घंध का फिर से अहसास करने का इंतजार कर रहा था । मैं मोबाइल में साउथ इंडियन मूवी देखने में लग गया । राजेश के साथ में वो भी देखने लगा । लगभग आधी मूवी देखने के बाद मेरी नजर राजेश पर गई हो चुका था । मोबाइल के प्रकाश से मेरी आंखों में चुभन का एहसास हुआ । मैंने मोबाइल को साइट में रखकर सोने का नेशनल क्या? जैसे ही मैंने मोबाइल को साइड में रखा । कुछ खिडकी के बाहर किसी जाने का एहसास हुआ । उस शख्स ने लाल रंग के कपडे पहने थे । बस इतना ही देख पाया था । थोडी देर में ही चाँद क्यानन पायल की आवास फिरसे आनी शुरु हो गई । ऍम खिडकी से बाहर की तरफ नजर घुमाई । खिडकी से चांद की रोशनी अंदर आ रहे थे । मैंने इस बार हिम्मत करके पास में लेते । राजेश को उठाया तो काफी गहरी नींद में था । मैंने जब अपने दोनों हाथों से बलपूर्वक लाकर उठाया तो वो बोला क्या हुआ उनकी उठा रहे इतनी रात को अपनी आंखों को मिलते हुए उस ने ये बात कही । मैंने उसे बाहर खिडकी की तरफ इशारा क्या मेरी बात नहीं समझ पाया । उसके नजर में दिमाग पर पसीने की बूंदों पर पडी तो चौंककर बोला क्या बात है? कोई बुरा सपना देख लिया गया । ऐसे ठंड में तुम्हारे माथे पर पसीना कुछ लग रहा है तो वो भारत बाहर घूम रही है । आज मैंने उसको देख कौन आ रहा तो किस औरत की बात कर रहे हो । राजेश चौंकते हुए मुझसे पूछा आज जब हम लोग मेरी बातों पर हस रहे थे तो मैंने पूरी बात नहीं बताई । मुझे लगा कि क्या पता तुम लोग मेरी बातों पर विश्वास नहीं करेंगे । कौन सी बात है । अगर हम कहना चाह रहे हो तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है । सुबह छपना छोटे से बच्चे जिसका नाम तो था उसे देखकर योग ही नहीं भरा हुआ था । तो बच्चा बैठ के नीचे किसी से बात कर रहा था । बात करते करते मुझे महसूस हुआ । बहुत कोई न कोई औरत थी जो रह रहकर उसे कुछ भी कर के हटाने का प्रयास कर रही थी । उसने हस्ते हस्ते अचानक मेरी तरफ देखा और हाथ उठाकर मुझे बंद करने की कोशिश की । जैसे मुंबई वाले को दबाना चाहता हूँ खूबसूरत उसकी आंखें खाके सुर्ख सुर्ख लाल थी । एक एक साधारण तीन साल का बच्चा इस तरह नहीं कर सकता हूँ । मुझे लगा उसके साथ वही औरत थी जैसे मैंने अभी थोडी देर पहले फिर से बाहर उस तरह वहाँ जाते हुए देखा है । मेरी बात अब शायद राजेश के कुछ पालने पड रही है तो ध्यान से मेरी हर बात को सुन रहा था कितना सुनते ही पोपोल पडा तो मैं ये बात सुबह बतानी चाहिए थी । घर छोडा लेकिन अपने बाहर के सौरभ को देखा हूँ । ऍम चाहूँ तो खुद पता चल जाएगा । अगर मैंने उसे करके की तरफ नजर टिकाए रखने को कहा लेकिन उसने मेरी बातों की ओर ध्यान ना देते हुए प्रश्न कर डाला तो मतलब आप के साथ कैसे कह सकते हो कि वो औरत वही है जैसे तुमने खिडकी से बाहर देखा था । चलो मान लिया कि ये वही औरत है तो तुम तवे के साथ कैसे कह सकते हो कि वह फिर इस आवाज के साथ ही उसके बाद बीच में ही अधूरी रह गई । उसे शायद काफी हद तक जवाब मिल गया था । बाकी बचे सवालों का जवाब उसे बहुत चलते मिलने वाला था । वो आवाज संकर मेरी ठीक के बन गई थी । राजेश अभी भी वास्तविक और आभासी तथ्यों के बीच खुल जा पढा था । उसे अभी मेरी बातों पर पूर्णतयः विश्वास नहीं हो रहा था । मेरे अंदर साहस नहीं था कि मैं उस तरीके को दोबारा देख सकूँ । मैंने ऍम करने लगा तो थोडी देर में पायल की आवाज आनी बंद हो गई । उसमें मुझे हिलाकर उठाने का प्रयास किया । लेकिन मैंने बिना कोई हलचल किए । लेटे रहने में ही करनी मत समझे । मुश्किल से दो मिनट भी नहीं हुए थे कि उस पायल के आवाज देर से आने लगी है । अब ऐसा लग रहा था कि मानव को आवाज बिलकुल हमारे ही करीब से आ रही हूँ । उसने मुझे सोर्सेज गोटी काटी और आपने बाजू को मिलता हुआ वोट बैठा और जैसे ही मैं उठ कर बैठा तो मैंने देखा कि उसके सत्रह पायल के आवाज का पीछा कर रही थी और वो लडकी की तरफ टकटकी लगाकर देखे जा रहा था । अब उस पायल के जान जान आवाज का जैसे जैसे करीब आने का पता लग रहा था, इसी तरह एकमत खुश करने वाली खुश होते हैं तो होती चली जा रहे हैं । अचानक खिडकी की तरफ देखकर हम दोनों एक साथ चीख पडे ऍम । इतना कहते ही हम दोनों वहाँ बैठे बैठे हो गए ।

लाल जोड़े वाली दुल्हन - 04

लाल जोडे बाली दुल्हन भाग चार जवान खुली तो देखा कि मेरे आस पास भैया और उनके बाकी साथी मौजूद थे । मेरे बगल में राजेश लेटा हुआ था । शायद उसे अभी तक होश नहीं आया था । क्या हुआ तो मैं रात को लोगों को ऐसा क्या हुआ की चीख मारकर पर खुश हो गए थे । राजेश को तो अभी तक भी होश नहीं आया है । बताओ फिर हुआ क्या था? मेरे होश में आते ही सभी ने सवालों की झडी लगानी शुरू कर दी थी । मैंने घडी में वक्त देखा तो सुबह के करीब आठ बज कर बीस मिनट हो रहे हैं । कुछ भी नहीं है । ऐसा कुछ भी नहीं देखा । ऍसे जवाब देने की कोशिश की । यदि ऐसा कुछ भी नहीं था तो रात के दो बजे जीतने के बाद बेहोश हुए । मैंने सोचा की क्या पता इन लोगों को मेरी बात पर विश्वास होगा की नहीं । ये लोग कहीं फिर मेरा मजाक ना बना गए । राजेश को तो मैं सबूत कल रात ही दे चुका था लेकिन इन लोगों को मैं विश्वास में नहीं ला सकता था । मैं भी यही सोच रहा था कि राजेश के शरीर में कुछ हलचल कि वोट कर बैठ गया । उसके आगे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे वो पिछले कुछ दिनों से सोया ही नहीं था । क्या कोई भयानक सपना देख कर अचानक उठ गया । उसमें ही मेरी तरफ देखा और मुझे देखते उसके क्या आश्चर्य से फैलती ही चली गई । उसे मेरी मौजूदगी से ज्यादा अपने होश में आने पर ताजुब था, जिसने राजेश के जस्ट उनको पकडकर उसके कमर के पीछे तकिये को लगाकर बैठाने का प्रयास किया । उसको छोटे ही उसने अपने हाथों को पीछे कर लिया । राजेश के दल आठ पर हाथ रखते हुए बोला, इसका तो आपकी भट्टी की तरह तप रहा है । शायद इस बुखार है । सुरेश दौड कर रसोई घर की तरफ गया और कटोरे में ठंडा पानी लाकर रुमाल से ललाट पर रखने लगा । वहां मौजूद सभी हमें अचरज भरी निगाहों से देख रहे हैं । दोपहर तक राजेश का बुखार भी कुछ काम को चला था । भैया और उनके बाकी के दोस्तों ने पूछा बताओ आखिर कल रात तो मैं क्या चीज है? ऐसा क्या हुआ जिसके कारण तुम दोनों ही भयभीत हो गए? मैंने उन्हें बेहद धीमी आवाज में कहा मेरी बातों को आप लोग यकीन नहीं मानी लेकिन कल हम दोनों ने एक भटकती आत्मा को देखा जबकि दुल्हन के पास भी नहीं बच्चों जैसी बातें कर रहे हैं । ये सब बंद का बयान होता है । वो तो कुछ नहीं होता है । तो पढे लिखे हो कर लो जैसे बातें कैसे कर सकते हो । मुझे तुमसे या उम्मीद नहीं । कभी कभी आंखों को धोखा भी होता है जिससे हम सच्चाई मान बैठते हैं । बिल्कुल से ही कहाँ । वही आप की कभी कभी आंखों को धोखा हो सकता है । लेकिन मैं पिछले दो तीन रातों से उस अदृश्य शक्ति का अहसास कर रहा था । मैंने इस बार एक ही सांस में ये सब कह दिया मैं क्या बोल रहे हैं? क्या था पिछले दो तीन दिनों से तुम्हें आत्मा की मौजूदगी का अहसास? क्या इस बार बारी राजेश की थी । वो इतना सुनते ही तपाक से बोल पडा, ये बिल्कुल सच कह रहा है । पहले मैंने भी इस की बातों का विश्वास नहीं किया लेकिन जब कल साक्षात मैंने उस लाल जोडे वाली दुल्हन की आत्मा को देखा तो छोटे वाले दुल्हन कहाँ देखा? तुमने उसे ऍसे सवाल किया । ज्यादा मैं परसों रात को लगभग दो बजे के करीब इस घर के पीछे मिला था । मैं तो स्वास्थ्य पायल की आवाज का पीछा कर रहा था । वो लगातार इधर से उधर तो कभी उधर से इधर जा रहे थे जिसके वजह से मेरी नींद में खलल आ गई थी । मैंने उसी वक्त निश्चय कर लिया था कि मैं अब देखकर होंगा बनाकर है क्या? लेकिन जैसे ही मैं उस के करीब पहुंचने वाला था आप एन वक्त पटना जाने कहाँ से घूमते हुए आएगा उस तरह और मेरे तो उस तक पहुंचने से पहले आप कुछ कर लेगा । हम मिले तो गया था लेकिन मैंने हाथ को अपने पास में पाकर खोजने निकल पडा था । ऐसे ही बाहर आया तो मेरे घर के पिछवाडे में जाते हुए देखा तो मैं भी तुम्हारे पीछे चला था । भैया की इन बातों से मेरी बातों को बल मिल गया था । शायद आज मुझे ठीक से समझने को तैयार थे । मैंने मौके का फायदा उठाते हुए कहा यादव कल सुबह भी आप लोगों ने मेरा उस छोटे से बच्चे से डर जाने को मजाक में ले लिया था मगर वास्तविकता पर आप में से किसी ने भी ध्यान नहीं थी । बात दरअसल ये थी कि इस बच्चे के साथ बिस्तर के नीचे वही लाल जोडे वाली तो थी जो बच्चे से खेलने का प्रयास कर रहे थे । चलो मान लिया कि तुम्हारी बात में सच्चाई लेकिन तुम इतने दावे के साथ कैसे कह सकते हैं कि वो लाल जोडे वाली दुल्हन, वहाँ उसके साथ क्योंकि हम लोगों ने तो वहाँ उस बच्चे लोगों के सेवा किसी और को देखा ही नहीं था । भैया मेरी बातों में अब रुचि ले चुके थे । गौर से मेरी बातों को समझ रहे हैं । देखा तो मैंने भी नहीं था उस औरत को वहाँ । लेकिन मैंने ध्यान से देखा तो ये पता लगा कि उस बच्चे को रह रहकर गुदगुदी करके फंसाने की कोशिश कर रहा था । जब उसे गुदगुदी होती है । वो अपने हाथों से किसी को रोकने का प्रयास कर रहा था, जैसे सामने उसके बाद भी कोई हो । उन्होंने एक ही सांस में ये सारी बात कहती जैसे मुझे ये ऍम बातों को सुनने के बाद दिनेशपुर लेकिन तुम्हें कैसे पता कि वो जो भी बंदा या बंदी लोगों के साथ थी तो लाल जोडे वाली कोई दुलहन ही थी । उसकी बातों को सुनते ही जैसे ही मैंने जवाब देना चाहा तभी राजेश बोल पडा, मैं और अंशु आपको मोबाइल पर साउथ इंडियन मूवी देख रहे थे । देखते देखते मुझे इसका एहसास नहीं हुआ कि मुझे अपनी नाटक जब मेरी नींद टूटी तो उस वक्त घडी में दो बजे का वक्त हो रहा था और मुझे अंशुल ने उठाया । उठते ही जब मेरी नजर पाँच ऊपर बडी तो उसके चेहरे गए तो थोडे हुए थे कि किसी घायल किशोर की बात कर रहा था और खिडकी से किसी लाल जोडे वाली भारत को जाते हुए देखा है । ऐसा का हूँ शुरू शुरू में तो मुझे उसकी बातों पर कोई विश्वास नहीं हुआ लेकिन थोडी देर में मैंने उस पायल की चाँद चलने की आवाज फिर से आनी शुरु हो गई तो मैंने सुनी आवाज थोडी देर बाद तो बंद हो गयी । लगभग कुछ सेकंड के इंतजार के बाद पायल की आवाज आनी से शुरू हो गई थी । इस बार पायल की आवाज से ऐसा लग रहा था मानव बिल्कुल ही नहीं पाँच से आ रही हूँ । मैं अंशुल टकटकी लगाकर खिडकी की तरफ देख रहे हैं । पायल की चाँद चाँद की आवाज जैसे जैसे करीब सुनाई देती जा रही थी वैसे ही हमारे दिलों की धडकनों तेज होते हुए आसानी से महसूस किया जा सकता है जाना क्योंकि पर एक लाल जोडे में सजी हुई और अनदेखी किसे देखकर ऐसा लगा जैसे उसने आज सोलह श्रृंगार किया हूँ । उसके इस तरह से अचानक सामने आने से मन में खौफ था । लेकिन उसके पलाह की खूबसूरती को देखते ही वोटर कपूर हो गया । उसके बाल कर चुकी हुई थी । उसका गुलाब की पंखुडी जैसे होता । न जाने कितने छिपाए बैठे थे । इसके नाक में सोने के बुलाते, उसकी सुंदरता को और पवन को निखार रहा था । उसके माथे और कुमकुम के निशान चांद सितारों की तरह छेद में ला रहे थे । उसकी सुंदरता ने हमारा मन मोह लिया था । हम अपनी सारी सुधबुध खोकर बस उसकी सुंदरता में डूब गए थे । अचानक उसने अपनी खोपडी उठाई और हमारी तरफ देखा । उसमें जैसे अपना चेहरा उठाया तो फिर इंतजार उसके होठों पर गई । उन फोटो से खून हो रहा था । आंखों की पुतलियां बिलकुल ही हो गई थी । जैसे ना जाने कितने वक्त से खुली की खुली रह गई । उसका मोहिनी रूप देखते ही देखते बदलने लगा था । उसकी आंखें सौ हलाल हो चुकी थी और उन आंखों से हमें ही निहारे जा रही थी । जैसे उसके उस रूप के हम भी कुछ सोच बाहर हूँ । उसने अपना हाथ सामने हम लोगों की तरफ उठाया और अपनी बडी पडी ना होने वाली उन को इकट्ठा करके पंजाब को बंद करने की कोशिश की । माॅस् हाथ से हमारी कर्नल को पकडना चाहती हूँ । अगले पल देखते देखते उसकी खूब पीछे हो गए । लेकिन उसका धडका अगला हिस्सा उसी जगह पर जस का तस था । ये देखते हैं हमारी एक साथ ठीक है निकल पडी है । उसके बाद जब होश आया खुद को आप लोगों के बीच पाया है । उन सभी को विश्वास नहीं हो रहा था कि जो पाते मैंने उन्हें बताएँ । किस हद तक सच लेकिन जब राजेश ने भी मेरा इसका दर्जा दिया । इस इस घटना के पीछे चश्मदीद गवाह होती है तो सभी उस बात को मानने को छोड के । हालांकि गुड ब्रेड के किस्सों में अक्सर विश्वास नहीं होता हैं । जिनके साथ कोई घटना घटित हुए बाकियों के लिए तो वो मात्र कहानी के सवाल कुछ नहीं रहता । हम सभी ने मिलकर ये नहीं क्या क्या है ये कमरा छोडकर कहीं दूसरी जगह चले जायेंगे । हम सभी शाम को कमरा ढूंढने चले गए । शाम को उसी गांव में शिव मंदिर के पास ही एक खाली कमरा मिल गया था । हम लोगों ने एडवांस देकर कल सुबह ही शिफ्ट करने की बात करके वापस अपने कमरे में आ गए थे । खाना खाकर हम लोगों ने ये निर्णय लिया कि आज रात आगे वाले कमरे में सभी एक साथ हुई है और आज पूरी बिजली का बाल चलाकर ही होंगे । फटाफट अंदर वाला बिस्तर भी वही लगा दिया । तभी एक साथ पहली बार सुन रहे थे । हालांकि ये है अवसर पहला जरूर था लेकिन डर को दूर करने का ये सबसे कारगर तरीका था । अचानक रात को मैंने फिलहाल जोडे वाली दुल्हन को अपने पास देखा था तो वहाँ खडी हुई मुझे ही नहीं कर रही थी । हडबडाकर खडा हुआ । मैंने किसी तरह हिम्मत बटोरते हुए कहा कौन है तो और ऍम अंदर क्या कर रही है? इतना बोल रही तेज आवाज आई हो । थप्पड इतना सोच से लगा कि उस कमरे में जितने भी सोचे थे, सभी उठ कर बैठ गए । उसने चाटा मारने के बाद कहा अजय पत्ती क्यों चलाई? मुझे यहाँ पढने में दिक्कत होती है क्या? कहते ही वो कमरे से बाहर चली गई । सभी ने दातों तले उंगली दबा ली । ये देख कर के बलाल छोटे वाली दुल्हन को बाहर जाने के लिए दरवाजा खोलने की जरूरत नहीं पडेगी । बहुत दरवाजे के आरपार निकल गई थी । उसके बाहर जाते हैं । कमरे में बिजली कपल हो गया हितशत्रु पे हम सभी की नींद उड चुकी थी । मेरे गाल पर पांच उंगलियों के निशान को साफ देखा जा सकता था । सभी ने कैसे पैसे सुबह होने का इंतजार किया । सूर्य रहे होते ही हम सभी सबसे पहले पडोस में ही लोगों के घर गए । हमें एक साथ देखकर वो लोग बिल्कुल भी नहीं कर रहा है । उन्हें देख कर ऐसा लगा कि जैसे उन्हें सब मालूम हो । लोगों के बाबा जिनका नाम पंकज बोले था था उन्होंने हमें बैठाया और शांति से हमारी प्रथा सुनी । सुनने के बाद उन्होंने कहा देखिए आप लोग खुशकिस्मत है कि किसी के साथ कुछ भी नहीं हुआ । वो तो तुम लोग हो जो पिछले चार महीने से इस कमरे में रह रहे हो । थाने था इस कमरे में । पिछले सात सालों से कोई भी व्यक्ति तो महीने से ज्यादा नहीं टिक पाया है जिसकी आप क्या कह रहे हैं परेठा जी फिर इस करना होने वाली घटनाओं के पीछे माजरा क्या है भैया ने उनसे घर के छुपे राज को जाना चाहिए । ये बात सात साल पहले की है । इस घर में पडा ही खुशहाल परिवार रहता था । उनके बेटी थी जिनका नाम शांति चौहान था । वो लडकी पलाह खूबसूरत होने के साथ पढाई लिखाई में भी असफल । जब उसकी उम्र शादी की हुई तो उसके लिए एक से एक बडे घर से रिश्ते आने लगे । उसके शादी ऋषिकेश में एक आदमी होते सबसे तय हुई है । शादी वाले दिन उस एक दुखद समाचार ने पूरे परिवार की जिंदगी उजाडकर रखते हैं । ऋषिकेश से पारा चंदावत के लिए आ रही थी । चंपावत है । उनतीस किलोमीटर पहले एक तीव्र मोड पर दूल्हे की गाडी खाई में गिर गए । उन्हें की मौत हो गई । उसकी लाश आज तक किसी को नहीं मिले क्योंकि वो नदी में बहती हुई पता नहीं कितनी दूर चली गई थी । जब ये बात दुल्हन को पता चली तो ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकते और उसने कमरे को बंद करके अपने ऊपर मिट्टी के तेल को छिडककर आग लगा ली । उसका परिवार इस तक में से ऊपर नहीं बारह इसलिए उन लोगों ने यहाँ कर सस्ते दामों में बेचकर जहाँ से कहीं दूर चले गए । उनके जाने के बाद यहाँ उस अभागन को देखना आम बात हो गई थी । यहाँ जितने भी लोग किराये पर आए उन को हमेशा रात को एक बजे के बाद इस तरह क्या अजीब घटनाएं दिखाई देने लगी । यहाँ कोई भी दो महीने से ज्यादा नहीं टिक पाया और पिछले सात सालों से अधिकतर इस घर में ताला ही लटका मिलता था । क्या उस लडकी जिसका नाम शांति है उसके आत्मा की शांति के लिए कुछ किया नहीं जा सकता जिससे उस को मुक्ति मिल रहे हैं । ऍम बडी गंभीर मुद्रा बनाते हुए ये प्रश्न पूछा था बिल्कुल किया जा सकता है । लेकिन बात ये है कि करेगा कौन? उसके माँ बाप ही नहीं और लोगों में इतनी हिम्मत नहीं तो उस काम को करने के लिए सामने आए पैसे भी कहते हैं कि इंसान के भाग्य में जितनी उम्र लिखी है उसे काट कर के जाना पडता है । कभी किसी के असामयिक मौत हो भी जाए तो सक्रिय होने में बैठकर उतने साल पूरे करने पडते हैं । हम लोगों ने पुनेठा जी को धन्यवाद किया और उनसे विदाई लेंगे । शाम डालने से पहले हम लोगों ने कमाना शिफ्ट कर दिया । उस दिन के बाद कभी उस पुराने बहुत हाथ घर की तरफ खुलकर भी रुख नहीं किया । मैं भी तो दिन और रखने के बाद वापस दिल्ली आ गया । मुझे घर अगर इस बात का एहसास हुआ के अपना घर अपना ही होता है जहाँ सुकून पहुंॅची जा सकती है । बिना किसी शिकायत

घुड़सवार शैतान -01

घुडसवारों शैतान भाग एक बात उस समय की है जब शहर से दूर गांव में मनोरंजन के साधन ज्यादा नहीं हुआ करते थे । तब गांव में हर किसी के यहाँ टेलीविजन या कंप्यूटर जैसे आधुनिक उपकरण नहीं होते थे । ऍम छुपाई घंटे, कबड्डी, खोखो, छुआछूत इससे अधिक खेलों का वर्चस्व हुआ होता था । ग्रामीण लोगों को उस वक्त रेडियो पर क्रिकेट मैच का ज्यादा लग पाता था । तब लोगों के पास एक दूसरे से बात करने के लिए वक्त भी होता था और हर जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए फिल्में जरूरी भाव भी होता था । उस वक्त दूर दूर तक लोग अधिकतर पहल गाडियों से सफलतापूर्वक यात्रा करने के लिए मेरा नाम प्रदान भगत है । तब मेरी उम्र महज सत्रह वर्ष के लिए और मेरे काम का नाम कालिका पडता हूँ क्योंकि बंगाल में सिलीगुडी से किलोमीटर की दूरी पर था । सिलीगुडी में ही हमारा एक और कर था जहाँ मेरे चाचा चतर्भुज भगत अपने छोटे से परिवार के साथ रहते थे । उनका एक बेटा भी था जिसका नाम हर्षद था । हालांकि हर्षित मच्छी एक वर्ष छोटा था लेकिन फॅमिली स्कूल में मेरे साथ ही कक्षा ग्यारह में पडता था । मेरा काम शहर से इतनी दूर होने के कारण वहाँ की चकाचौंध दुनिया से अलग थे । बंदे नौगांव में हर किस्म के पेड पाए जाते थे और सडक के दोनों तरफ शीशम के पेड कदम से कदम मिलाकर सडक के साथ रहने की भांति खडे रहते थे । उस समय असम और बंगाल आपने काले जादू के लिए मशहूर हुआ करते थे । लगभग हर गांव में भूत प्रेत और डालों के किस्से प्रचलित रहते थे । स्थानीय ओझा भी मुर्गे या बकरे की बलि देकर या लोगों को झांसे में डालकर मोटी कमाई वसूल करने में पीछे नहीं रहते थे । मेरा काम कालिकापुर बंगाल के ही सिलीगुडी चले के अंतर्गत आता था । हमारे विद्यालय में गर्मियों का लगभग एक महीने का काश हुआ मेरे चाचा हम सभी को लेकर अपने पुश्तैनी गांव कालिकापुराण हैं । इस वक्त आम के लिए तो चल रही थी । हम लोग पके हुए आम का मजा ले रहे थे । मैंने आम खाते हुए का हम बहुत ही स्वादिष्ट मजा आ गया । खाकर ऐसे हम शहर में क्यों नहीं मिलते? चाचा पीडित स्वादिष्ट इसलिए है क्योंकि ये पेड के पके हुए हैं । शहर के लोग बहुत कम मूल्यों में गांव से कच्चे आम ले जाकर इनमें रासायनिक पदार्थों को साथ मिलाकर उन्हें पकने के लिए छोड देते हैं । फिर इन्हें ऊंचे मूल्य में भेजकर अच्छा मुनाफा पा लेते हैं । चाचा ने सहजभाव से मेरे प्रश्न का उत्तर दिया था क्या का हाथ में रासायनिक पदार्थ उनको क्यों करते हैं? फिर से उस पल को खाने वाले का नुकसान भी होता होगा । मैंने उनके जवाब देते ही तो प्रदर्शन कर दिया था । बिल्कुल सही । उन रासायनिक पदार्थों के प्रयोग से बताए हुए फल खाने से हमारे शरीर पर इसका बडा ही प्रतिकूल असर पडता है । चाचा ने इसी तरह मेरे उत्सकता से पूछे गए सारे प्रश्नों का सही जवाब दिया । शाम को छह बजे हो रहा था । मैं हर्षद के साथ सडक की तरफ चला गया । वहाँ जाने का मुख्य कारण समोसे कलारा अच्छा पडोस के गांव घरवालों से एक समोसा बनाने वाला अपना ठेला लेकर आता था तो एक एक दिन के अंतराल पर आता था । उसके समझ से बेहद ही लजीज होते थे । वो समोसे की चटनी में पुदीना और धनिया के साथ कुछ जादूगर खोलकर बनाता था जिससे समूह के साथ खाने से समूह लेकिन सहायता को और स्वाद मिल जाता था । सबसे बडी बात कि एक तो उसके समय से लजीज होते थे और दूसरी ये कि वह पैसे भी कम ही लेता था । एक रुपए में एक समझा देता था । सिलीगुडी में तो एक समूह पांच रुपये का मिलता था और ऊपर से चटनी भी तभी मिलती थी जब समूह से एक से अधिक लें । कुछ और हर्षित को दादा जी से एक एक रुपए मिले थे । हम तुम समोसे का आनंद ले रहे थे तभी आदित्य भी वहाँ गया । अदित्या हमारे गांव के मुखिया विमल किशोर जी का बेटा है जो कि हमारे काम से पांच किलोमीटर की दूरी पर नासरीगंज में एक स्कूल में पढता था तो कक्षा दस में था । मैं और हर्षित हर साल गर्मियों की छुट्टियों में अपने गांव जाते और हम तीनों मिलकर पूरे गांव में धमाचौकडी मचाते थे । बाद जब तो उसकी तक हो तब तो सही है । लेकिन मेरे और हर्षित के दिमाग में ये चल रहा था की आपने समोसे की बलिदानी कौन दे रहे हैं क्योंकि हम घर से पर तो ही रुपए लेकर आए थे जिससे केवल दो समोसे ही मिले थे । शायद आदित्य मेरे मन में चल रहे हैं । समोसे के बंटवारे की बात को समझ गया तो समूचे वाले भैया से बोला भैया मुझे एक समोसा देना । उसके इस बात को सुनकर हम तीनों एक साथ पढे । हम लोगों ने समूचे का आनंद लिया और घर की तरफ जाने लगे । अभी कुछ ही दूर चले थे कि हर्षित बोला अरे मैं तो पूछना भूल गया । आज रामलीला देखा चलोगे ना । इस वर्ष गांव में रामलीला नहीं हो रही । आदित्य उदास होकर का मैं बोला क्या बात कर रहे हो? प्रत्येक वर्ष तो इसका आयोजन होता था । बना ऐसी क्या बात हो गई जो मेरी बात को बीच में काटते हुए आदित्य बोला हमारे गांव में कुछ दिन पहले दो गुटों में झगडा हो गया था । बात इतनी बढ गई कि गोलियाँ चल गई । गोली चलने से जो व्यक्ति बीच बचाव करने आए थे उनकी दाहिनी भुजा में लग गई । जिनकी वजह में गोली लगी वही प्रत्येक वर्ष हमारे गांव में रामलीला आयोजन करते थे । आदित्य की बात सुनकर लोग उदास हो गए । तभी आदित्य की आंखों में चमक ऍम पडोस के गांव घरवाले भी में जाकर रामलीला देखा । आदित्य की बातें सुनकर हर्षित बोला तो दूर है वहाँ । उतनी दूर अरशिद की बात पूरी करने से पहले ही आदित्य फिर बीच में बोल पडा क्या बात करते हूँ हमारे गांव से मात्र ढाई किलोमीटर की दूरी पर ही तो और अब हम बच्चे नहीं रह गए । उसके इस बात में हम लोगों में जोश भर दिया और हम तीनों ने राहत को खाना खाने के बाद आठ बजे घरवाले दिए जाने की योजना बनाई । हम तीनों खाना खाने के बाद घर में बताकर घरवालों से रामलीला देखने निकल पडे । हम लोगों को रात में बाहर जाता देखकर हमारे साथ हमारा कुत्ता गया की भी चल दिया । आज चांदी रात में गांव बडा ही प्यारा लग रहा था । हवाओं के चलने से पेड के पत्तों की आवाज रोमांचित कर रही थी । हम तीनों एक साथ कदम से कदम मिलाकर आंखों में रामलीला देखने की ललक लिए चले जा रहे थे । थोडी देर बाद रात करीब पौने नौ बजे तक हम लोग घरवाले भी पहुंच गए । कहाँ हूँ प्रभु कछुओं अगम नहीं था पर तुम अनुकूल तत्व प्रभाव हम बढवाना नहीं जा रही । सकल घरेलू तूर क्षेत्र हूँ । आप जिस पर प्रसन्न हूँ उसके लिए कुछ भी कठिन नहीं है । आपके प्रभाव से हुई जो स्वयं पहुंच चलती चल जाने वाली वस्तु है । भगवान वाले को निश्चित ही चला सकती है । था असंभव को भी संभव कर सकते हैं । मंच पर ये तथा संवाद चल रहा था । हम लोग पे शांति से बैठकर रामलीला का आनंद लेने लगे । करीब डेढ घंटे के बाद पांच दिन का अध्याय समाप्त हुआ । जैसे ही आज का अध्याय समाप्त हुआ, मैंने कहा वहाँ हो गया । अभी तो नौ दिन का अध्याय और बाकी है । अब हम लोग प्रतिदिन आएंगे । मेरा ऐसा कहने पर सभी ने हामी भर दी । हम लोग फिर ग्यारह बजे के करीब घर आकर हो गए । अगले दिन मैंने घरवालों को कल के भाग के बारे में बताया कि कितना मजा आया और शाम होने का इंतजार करने लगा । शाम होते ही मैंने और हर्ष आपने खाना जल्दी निपटाया । हमारे खाना खाते ही आदित्य भी पहुंच चुका था और मेरे कुत्ते जहकि के साथ रामलीला देखने जाने का इंतजार कर रहा था । हम तीनों अपनी मंजिल की तरफ निकल पडे । हमारे साथ क्या की भी चलते चलते कभी आगे तो कभी पीछे होता हुआ चला जा रहा था । रोज अमावस की काली रात चांद आसमान से नदारद था । वातावरण में नहीं रहता और अंधेरे का आधे पत्ते था । महीना होने के कारण हवाई सर्दी थी । दिन का वेट तो उधर नहीं था की तो उग्रता की सीमा से अधिक परेड भी नहीं था । चारों तरफ गहन अंधेरा छाया हुआ था । इसी वजह से सडक पर चलने में दिक्कत हो रही थी और अशोक था कि आदित्य अपने साथ तो लेकर आया था । हम लोग एक साथ हाथ पकडकर चल रहे थे । पश्चिम दिशा में दृष्टि के आखिरी छोर कुछ हल्के से रोशनी का आधार हो रहा था । आदित्य टॉर्च को अपनी छुट्टियों में झगडे हुए सबसे आगे चल रहा था । मैं और हर्षित उसके ठीक पीछे पीछे चल रहे थे । सुनसान सडक पर आसानी से हमारे पदचापों को सुना जा सकता था । काफी देर तक हमारे बीच किसी भी किस्म की कोई बात नहीं हुई । केवल हमारे पदचापों की ध्वनि ही थी जो अभी तक हमारे साथ चल रही थी । अन्यथा आज रात तो छीन गाडियाँ । बंगले पशु वहाॅ खाकर खामोश है । हम तीनों लोग बेखौफ होकर आगे बढ रहे थे कि तभी अचानक हर्षित बोला क्या अमित आज नहीं आना चाहिए था । आज मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है । उसकी बातों को सुनकर आदित्य बोला सच कहूँ तो मेरा भी मन नहीं था । ऍम अस की कालीरात है और ऊपर से इतना घना सन्नाटा । मैं काफी देर से उन्होंने की बातें सुन रहा था । मुझे ना रहा गया तो बोला कैसे बच्चों जैसी बातें कर रहे हो । उतरे कुछ नहीं होता । ये सब मन का वहम होता है । अभी मैं ये सब कही रहता कि मुझे कुछ दूर पर कोई इंसान देखा क्योंकि कुछ दूरी पर रास्ते के किनारे खडा था । उसे दिक्कत लग रहा था जिस लोगों का ही इंतजार कर रहा है । मैंने जैसे ही हर्षित का करने पर हाथ रखकर उस तरफ इशारा किया तो अपनी ही जगह पर खडे हो गए । हम तीनों में से कोई कुछ नहीं बोल पा रहा था । हमारा कुत्ता चाहते जो काफी देर से हम लोगों के साथ चल रहा था । नहीं नहीं देखा था । जहकि के आसपास ना देखने से हम लोग और भी सहन करे । किसी तरह हम लोग हिम्मत जुटाकर एक साथ आगे बडने लगे । उस व्यक्ति के नजदीक पहुंचे ही है कि वो शख्स बिलकुल हमारे सामने खडा हो गया । उस शख्स ने सफेद साडी पहनी हुई थी और उसने अपना चेहरा ऍम हफ्ते पालों से ढक रखा था । उसके जिसमसे मनमोहक खुशबू आ रहे थे । उस खुशबू के सामने सोचने समझने की शक्ति पर काबू हो रही थी । उसके व्यक्तित्व को देख कर ही तो पता लग गया कि जैसे हम अनजान शख्स समझ रहे थे तो कोई रहस्यमय भारत है । उसे अचानक सामने खडे होते देख आदित्य पूछ पडा, आप इतनी राहत यहाँ सुनसान जगह पर अकेले क्या कर रही हो ये सवाल तो मैं भी तुम लोग उनसे कर सकती हूँ । उस रहस्यमय भारत ने सपा पत्रकार आदित्य उसके लिए तैयार नहीं था और सकपका कर रह गया । नहीं नहीं आपको परेशान करने का मेरा कोई मतलब नहीं था । वो तो मैं यहाँ आदित्य निकलते रहते हुए कहा चले जाओ यहाँ से है । तुम चेस कान के लिए जा रहे हो, उसका अनजान सही नहीं होगा । इस फॅमिली भारत ने अच्छे आवास में कहा था, लेकिन हम तो रामलीला देखने जा रहे हैं । भला उससे किसी को क्या तकलीफ हो सकती है? इस बार पर नहीं हिम्मत जुटाकर ऍसे सवाल किया था क्या तो काली अमावस की रात नजर नहीं आ रही । मतलब मान मेरी बात मेरा काम समझाना था सुबह की अनजान के लिए तैयार रहना, जिसके साथ तुम लोग ही सिम होगे तो टाॅप ये कहते ही वो औरत सोर्स जोर से हंसने लगे । तभी हर्षित बोला हम रामलीला देखकर रहेंगे । हम चाहे कुछ भी कह लो हम तुम्हारी बात नहीं मानेंगे हूँ । थप्पड की आवाज से बात का आस पास का वातावरण को छोटा वो थप्पड उस औरत ने हर्षित के काल पर लगाया था । उसके गाल पर पांचों उंगलियों के लाल निशान उभर आए थे । बचाना कैसे? बर्ताव को देखकर हम तीनों घबरा गए और वहाँ से पडोस के काम की तरफ था । खडे हुए मुश्किल से उस जगह से लगभग बीस तीस कर्म ही भागे थे कि हमारा कुत्ता क्या कि वो भी हमें मिल गया क्योंकि की मिलता ही जैसे मैंने टॉर्च का प्रकाश उस दिशा की तरफ क्या जहाँ फॅमिली थी हमारी आंखें फटी की फटी रह गई । वहाँ कोई शख्स दिखाई नहीं दे रहा था । अब हम लोगों ने ना आप देखा बताओ सिर पर रखकर भागे । पांच मिनट में ही हम लोग सामने वाले स्थल पर पहुंच गए । तबाही रामप्रिय चाहिए । विधि मोही प्रभु अस्सी सचिन पत्थरी, सरोही मित्र सहित परिवार को सुनाई कर रही हूँ । ऐसा पर और ही नहीं आएगी । सभी को श्रीरामचंद्र पैसे ही प्रिया है । वैसे तो मुझको है उन के रूप में आपका आशीर्वाद ही मना । आपका शरीर धारण करके शोभित हो रहा है । येस मामी सारे ब्राह्मण परिवार सहित आपके ही सामान उन पर इस नहीं करते हैं । राम लीला स्थल पर आते ही हम लोगों के जहन से सारे डर और खौफ काफूर हो गए । हम तीनों ने सारा ध्यान मंच पर केंद्रित कर दिया । हम तीनों एक साथ ही बैठे थे । बाहर से तो बिल्कुल ऐसे देख रहे थे जैसे मानो कुछ हुआ ही ना हो । लेकिन रह रहे कर हम लोगों का ध्यान उस घटना पर जहाँ जरूर रहा था । वो औरत अपनी संस्थान जगह पर इतनी रात को क्या कर रहे हैं? ऍम कह रही थी तो हम लोगों को वापस जाने के लिए मजबूर क्यों कर रहे थे? आपकी समझा उनको बहुत ने के लिए कह रही थी वो आखिर ऐसी क्या बात थी जो हर्षित अकाल पर समाचार रसीद करना पड गया? किस तरह के सवालों ने मेरे जहन में उठा पटक कर रखी थी हम सभी की आंखे तब मंच पर थी लेकिन दिमाग अभी भी वही सडक के किनारे सफेद साडी वाली उस तरह से नहीं है और अब पर ही था ।

घुड़सवार शैतान -02

बहुत सवाल शैतान बहुत तो कुछ तो हम प्रदान होगा की आवाज जानी पहचानी से लगे थोडी देर में आवाजाही उठेगा भी । हम लोग जायेंगे क्या बजा देते की थी और मुझे पूरी ताकत हिलाते हुए बोल रहा था । जब मैंने आके खोली तो चारों तरफ घनघोर अंधेरा था । हम तीनों के अलावा वहाँ कोई भी मौजूद नहीं था । हर्षित अपने आंखों को मिल रहा था और जम्हाई ले रहा था । मैं झटके से उठ गया । मैंने कहा था क्या हुआ यहाँ के सभी लोग किधर गए देते । अपने हाथ की घडी की तरफ इशारा करते हुए बताया भाई तो उस वक्त रात के साढे बारह बज रहे हैं और रामलीला का आज का अंक खत्म हुए लगभग दो घंटे हो चले हैं । हम तीन हो गए थे वो तो भला मानो की मेरी आठ अभी खुल रही । इतना सुनते ही हर्षद की नींद पूरी तरह क्यों मंदिर हो गई । उसने भी अपनी आंखों की पुतलियां । चारों तरफ कुमारी और बोला क्या कहा हम लोगों को सोते हुए दो घंटे से भी अधिक समय हो गया तो यहाँ के लोगों ने हमें उठाया क्यों नहीं । उसके बातें सुनकर मैं बोला भाई हम लोग रामलीला अपने गांव में नहीं देखा है । पता है हम लोग दूसरे गांव हैं । यहाँ के गांव वाले हमें नहीं पहचानते । उन्होंने देखा भी होगा तो किसी गांव के हैं । जब उठेंगे तब चले जाएंगे । ऐसा सोच कर हमें छोड दिया होगा । दोनों मेरी इस बात से सहमत हो गए । उनके चेहरे पर आप घबराहट के बादल देख रहे थे । बोला इससे पहले की हमारे घर वाले हम लोगों को ढूंढते ढूंढते यहाँ जाए । हमें यहाँ से निकल जाना चाहिए । ये सुनकर तो उन्होंने अपने अपने मंडे हिलाकर हामी भरी । मेरा कुत्ता जाके भी वही बैठक हम लोगों के घर वापस जाने का कब से इंतजार कर रहा था । हम तीनों एक झटके से बढ चलेगा । सभी के दिल में घबराहट और बेचैनी थी । क्या की इस बार आगे आगे चल रहा था जैसे उसे घर पहुंचने के जल्दी हम लोगों से ज्यादा होगा । अभी कुछ दे रही डाले थे कि मेरे दिमाग में एक योजना को नहीं ना बोला । अरे सुना लेकिन हम खेलते होते हुए चले । वहाँ से हम मात्र दस पंद्रह मिनट नहीं पहुंच जाएंगे । मैं रास्ते में एक पुल भारी को पार करना होगा लेकिन ये सही रहेगा । कुछ भी करो बस मुझे घर चलती पहुंचना । हर्षित चिंता के बारे में बोला लेकिन मैंने सुना है कि वहाँ एक बिना खोपडी का शैतान रहता है । किसको रात के वक्त उधर से निकलने नहीं देता है । आदित्य ने चेतावनी देते हुए कहा था कि आप बेकार की बातें करते हो भला इतनी रात को कोई वहाँ क्या करेगा तो फुलवारी का चौकीदार भी नहीं लगता है । मैं तो कहता हूँ कुछ आम आम खाते डाल लेंगे । मैंने बुलंद आवाज में कहा ये सही रहेगा प्रदान । उधर से जल्दी पहुंच जाएंगे आम के आम और गुठलियों के दाम । हर्षित के इतना कहते ही सभी एक साथ हंस पडे और खेत की पगडंडियों से होते हुए आगे बढ चलेगा । पांच मिनट चलते ही हम पनवारी के पिछले वाले हिस्से पर जा पहुंचे । फुलवारी एक फुटबॉल के मैदान जितनी बडी थी । फुलवारी के चारों तरफ विशालकाय पेड था और चारों तरफ उनकी उनकी कटीली झाडियों से घिरा हुआ था । हमें अंदर घुसने का रास्ता नहीं मिल रहा था । हम सभी के चेहरे उतर गए थे । थोडी देर तक और मशक्कत करने के बाद अंदर जाने के लिए एक रास्ता देखा । उस रास्ते को देखकर लगा कि जंगली जानवर अंदर घुसने के लिए इसका प्रयोग करते होंगे और उनके अक्सर आने जाने से एक छोटा सा रास्ता बन गया था जिससे बैठकर आसानी से खर्चा जा सकता था । आदित्य टॉर्च से प्रकाश दिखा रहा था । सबसे पहले मैं होता मेरे कुछ नही दिया की भी घुस गया । फिर भारी बारिश से हर्षित और आदित्य भी घुस गए । हम लोग फुलवारी के अंदर । अब हम लोगों के चेहरे पर कुछ सुकून था । अंदर चारों तरफ आ नहीं रहा । कुछ भी साफ साफ नहीं दिख रहा था । चाहो तो पूछे थे । लगभग हर तरह के फलों और बहुत पुष्पों की खोज तो हवा के संगठन कह रही थी । वहीं भाजपा से ही हारसिंगार पेड की मनमोहक खुशबू आ रहे थे, जिसे सुनने पर ऐसा लग रहा था कि कुछ देर रोककर उसका आनंद लें । अभी तेज चल रही थी जिससे पेड की पत्तियों से भी अजीब अजीब तरह की आप से आ रहे हैं । देते फुलवारी के दूसरी तरफ जाने के लिए तौर से रास्ता तलाश करते हुए आगे बढा हम तो कभी उसके साथ हो जा रहे । चलते चलते हम लोग कोई के पास पहुंचे को आप फुलवारी के ठीक पीछे पीछे कोई के पास पहुंचते ही अचानक हमें तापमान में गिरावट मैं सोच रही हूँ । अब पहले के मुकाबले ठंड का ज्यादा ऐसा हो रहा था । तभी अचानक होंगे की तरफ होकर के वो तो उससे बहुत में लगा ऍम डाल दिया । इससे पहले मैं कुछ बोलता है देखते बोल पढा तो वो बोल रहा बाहर निकालने का । इस बार करते हैं फॅमिली में हम अपने काम में आते फॅस इतनी कर्कश थे कि हम तीनों ने एक दूसरे को बिलकुल जोर से पकड लिया । ऍम की तरफ सभी के समय चार कर का आपने लगे और सामने शैतान थोडे परसवार था जिसके हाथ में तुम्हारा कैसा कोई हजार का अच्छा जी पाँच थे कि उसका सर तो होता ही नहीं । ऍम सिर का नामोनिशान नहीं हूँ । तीनों एक दूसरे के चेहरे को देखने लगे हैं । ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे हम उन्होंने अपनी सोचने समझने की क्षमता ही हो बैठी हूँ । हालांकि बिना सर के कैसे हो सकता है? सामने का फाॅर इश्यू देखकर हमारे हाथ हूँ । आपने लगे थे समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या करें । हम लोग पूरी तरह फस चुके थे । बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता था जहाँ वो शैतान खोडे के ऊपर खुद तलवार नवाज हजार लेकर बैठा था और जोर जोर से दहाडे मार मार के हंस रहा था ये । आदित्य ने कहा देखा मैंने तुम लोगों को यहाँ घुसने से पहले ही आगाह कर दिया था । लेकिन तुम लोगों ने मेरी बात को मजाक में ले लिया था । मुझे इतनी जल्दी नहीं मतलब लोग अंजाम भुगतने को तैयार रहो । ऐसा कहकर उसने अपना हाथ छोडा है और बाहर जाने वाले द्वार की तरफ भाग चला । अचानक उसके साथ आपने हमें और संशय में डाल दिया । आप मुझे लगने, लगातार खेल सबकी मौत का से मैं बाहर मैं होगा । मुझे जल्दी कोई तरके निकालकर इन सभी को सही सलामत बाहर निकालना होगा । वैसे उधेडबुन में लग रहा था कि क्या किया जाए । तभी हर्षित बोला और ऐसे नहीं होता क्या देना । उसने में पहले ही चेतावनी दी थी कि वापस चले जाओ नहीं तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना । इतना कहते ही वो फफक फफककर रो पडा था । जी जी समझ में भी नहीं आ रहा था के मैं आदित्य को समझाने के लिए चाहूंगा । हर्षद को चुप करूँ क्योंकि हर्षित मेरे पास में था आपका । इसलिए मैंने हर्षित के कंधे पर हाथ रखा और उस को समझाते हुए बोला था देखो मुझे समय होने होने का नहीं है । इस मैं समझदारी से काम लेना होगा । मेरा यकीन करूँ मैं तुम सभी को यहाँ से सुरक्षित बाहर निकाल लूँगा फॅार कुछ नहीं हुआ । मैंने अपने ईष्टदेव है तो पापा को मन ही मन याद किया और उनसे मदद मांगी । आगे से फुलवारी से बाहर जाने वाले थे । बाहर से बस कुछ कदम के फासले पर ही था कि अचानक ऍम उसके सामने प्रकट हो गया तो बिना सिर वाला शैतान बिल्कुल । हम लोगों के सामने अपने खोडे के ऊपर को तलवार तमाम और साथ लेकर बैठा था । कुछ हजार से कुछ वक्त की बहुत थक पक रही थी तो संसार को उठाकर । जैसे उसने आदित्य के ऊपर प्रहार करने के लिए अपना हाथ घुमाया ही था कि तभी अचानक क्या की उस पर चलता हूँ ऍम हम लोगों को ही देख कर बडी खुशी हुई लेकिन हमारे ये खुशी ज्यादा देर तक देखना सके । चलती से हर्षित का हाथ पकडा और उसको लेकर आदित्य की तरफ पहुंच गए । मैंने फिर आते थे का हाथ पकडा और उनको लेकर फुलवानी से बाहर निकलने वाले तो हर की तरफ चल पडा हूँ । तभी कुछ बताना चाहता हूँ पर फिर से हम लोगों के सामने खडा हूँ । कुछ शैतानी अपने सौ हजार को उठाया और जैसे ही हैं फिर से प्रहार करने को तैयार था की तभी ऍम मैं ना देखते सब समझाया कि मुझे अब आगे क्या करना है । मैंने हर्षित और आदित्य से कहा कि अब कोई भी किसी का हाथ छोडे और मैं चाहती के पीछे रहते हुए ही आगे बढते जाना है । हम तीनों ने ऐसा ही किया और एक दूसरे का हाथ इतनी मजबूती से पकड लिया । ऍम हो हम जैसे जैसे आगे बढते हो जाता है कि बिहार पाने वालों में से नहीं था तो भी बार बार उच्चतम पर चल पडता है । काफी मशक्कत करने के बाद हम लोग पनवारी से बाहर निकलने वाले द्वार से सडक पर आ चुके थे । हमारे बाहर निकलते हैं । वो घटना भी बंद हो गई । खाने में ही मान अपनी ईष्ट देव को हाथ जोडकर टाॅल से उनका शुक्रिया अदा किया । हम तीनों चैट पर अचानक झपट पडे और उस पर भी शुभ आर तुम्हार लुटाने लगे । हम तीनों को आज उस पर बहुत प्यारा रहा था । थोडी देर तुलार करने के बाद हम लोग घर पहुंच गए आते थे । उस रात हम लोगों के साथ मेरे घर पर ही रुक गया था । अगले शाम आदित्य हमारे घर आया और उसने कहा कि उसे कुछ जरूरी बात करनी है । ऐसा कहकर वामदलों का समूह से खिलाने के बाद घर पर बोल कर सडक की तरफ ले गया तो वहां पहुंचकर चप्पल बारी की तरफ नजर गई । तब दिन में भी फुलवारी बहुत ही अपनी लग रही थी । तो इतनी ज्यादा घंटे की सूरज का प्रकाश भी अंदर जाने में सक्षम नहीं । समोसे की थैली पर जाते आदित्य ने बताया जानती हूँ कल रात दिन खोपडी वाला शैतान मिला था तो कौन था? मैंने कहा हूँ नहीं तो लेकिन तुझे कैसे पता कि कौन था? वो बोला ये बात डेढ सौ साल पहले किया । तब राजा देवेंद्र प्रताप का बोल पाला था । बहुत बढिया प्रताप फिर आ जाते हो । इस गांव को मिलाकर पूरे एक सौ पच्चीस गांव उनके आधीन थे । जिस फुलवारी में हम लोग कल गए थे, एक जमाने में बहुत पडी और खनी हुआ करती थी । वो उसकी रक्षा राजा का एक खास सेवक करता था जिसका नाम था जंग बहादुर सिंह बहुत बलशाली और पराक्रमी होता था वो दूर दूर तक उसकी ख्याति फैली हुई थी । उसने पूरी जिंदगी इस फुलवारी की रक्षा करने का प्रण लिया था तो राजा के सभी कामों को अपना दायित्व मानकर करता हूँ ऍम उनके किसी ऍम पीछे से आकर उनके सर को धड से अलग कर दिया जंगबहादुर सिंह अचानक हुए उस हमले के लिए तैयार नहीं है । कहते हैं कि सर तो वही धरती पर गिर गया लेकिन सिर धड से अलग होने के बावजूद उसने उस व्यक्ति को मार गिराया था जिसमें जंगबहादुर पर पीछे से हमला किया था । लडते लडते हैं वो इसे फुलवारी के उसे कोई लेकर पडा था । कहते हैं वो आज के इस पल पारी की रक्षा करना अपना दायित्व मानता है । इसलिए रात के दूसरे पर हर मैं तो इस गांव के काफी लोगों को देखता है । इसके बारे में यहाँ गांव में लगभग हर किसी को पता है बल्कि गांव में तो साफ साफ हिदायती हुई है कि रात के आठ बजे के बाद उस तरफ जा रहा सख्त मना है । यहाँ तक कि वहाँ के चौकीदार शिवमंगल लाल भी महारात आठ बजे के बाद रुकता नहीं है । हाँ कई अप्रिय घटनाएं हो चुकी है । कहते हैं वह फुलवारी आज भी शापित है । ऍम थी तो कल हमें रामलीला देखने जाने से रोक रही थी । इन सब घटनाओं के बाद तो ऐसा लग रहा है जैसे होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान था । खाते थे, बोला बिल्कुल सही कहा तुम ने भारत सच में हमारा भला करना चाहती थी । गांव की कुल देवी है, जो पाँच से हमारे काम के लोगों की रक्षा करती आ रही है । बहुत से लोगों से बंदे भी के नाम से भी बुलाते हैं हर्षित होना । लेकिन तो मैं तो कल तक कुछ भी नहीं पता था । आज अचानक कहाँ से सभी आता गया? आदित्य बोला मैं कल रात वाली घटना मेरे यहाँ काम करने वाले माली रामू काका को बताई । तब उन्होंने मुझे सारी बात विस्तार से समझाइए । इतना ही नहीं चौकीदार शिवमंगल मालिक आपका का बेटा है । मालिका करने । मेरी मुलाकात उस चौकीदार शुभमंगल से करवाई और उन्होंने बताया कि आठ बजे के बाद वहाँ अनहोनी घटनाएं होती रहती है । तरह तरह की आवाजें आती रहती है । इसलिए कोई भी आठ बजे के बाद न तो फुलवारी में जाता है नहीं, कोई उसकी देखभाल के लिए रोकता है । आदित्य के बताते है, हम लोगों की आंखों से वो तुम हट गई थी तो कल बात से हम लोगों के लिए पहेली बनी हुई थी । कल चौपना सिर्फ वाला शैतान हमें मारने के लिए पीछे पडा था । आज उस जगह बहत्तर सिंह के लिए मेरे मन में श्रद्धा उमड रही थी । ऍफ किसी के सहन में आज भी ताजा इतिहास अपने करता मैं न जाने कितनी ही पहेलियां रहस्यों को समझते हो रहे हैं । आज भी जब हम तीनों काम जाते हैं तो उस घटना का जिक्र करते हैं तो राउंड खडे हो जाते हैं । दिन में भी कभी उस पल पारी की तरफ रख नहीं करते हैं ।

चुड़ैलों का पहाड़ -01

चुडैलों का बाहर भाग एक मेरा मोबाइल काफी देर से घनघना रहा था । मैंने तपाक से फोन उठाया और जवाब दिया, चलो बहुत है दे भाई, तुम ऐसा ही करते हो । हमेशा एक तो ब्लॅक भी बनाओ और बिना बताए खुद कैंसिल भी करता हूँ । यदि प्लाॅन है तो बताइए तो कम से कम इतना कब से फोन कर रहा हूँ । उठा क्यों नहीं रहे? उस से मैं एकदम शताब्दी एक्सप्रेस की तरह फोन पर दूसरी तरफ से विकास की आवाज आई । अरे यार किसने कहा की प्लान कैंसिल हो गया? ऍसे प्रत्युत्तर में कहा जब फोन नहीं उठा रहे थे, उसको मैं क्या समझो? विकास ने फिर ताने मारते हुए कहा भाई जब तुमने फोन किया था तब मैं बाइक चला रहा था । पर घर आते ही मैं वाशरूम चला गया था । मैंने उसको शांत करवाने की कोशिश की तो चलो ठीक ऍम चलना है ना । विकास में उत्सुकता से मुझ से पूछा था बिलकुल भाई, मैंने हामी भरी । मैंने तो सब तैयारी कर लिया । बाकी तुम्हारे ऊपर है । विकास ने इस बार खुश होकर का तो पर बताऊँ । कल कब और कहां मिल हो गए । मैंने विकास से कल के प्लान को अमलीजामा पहनाने के लिए पूछा । देखो मैं आज रात साढे ग्यारह बजे गुरुग्राम से बस से निकलूंगा जो मुझे देहरादून आईएसबीटी सुबह साढे पांच बजे पहुंचा देगी । फिर मैं वहाँ से रेलवे स्टेशन पहुंच जाऊंगा तो कितने बजे तक आ जाओगे । मैं छह बजे तक आ जाऊंगा । तब तक तो मसूरी जाने के लिए टिकट ले लेना । मैंने जवाब दिया ठीक है हमेशा कहता देने मत करना । समय से आ जाना नहीं तो मैं वहाँ बैठे बैठे बोर हो जाऊंगा । विकास ने कहा तो मैंने उसको फोन पर ही दिलासा दिया और उम्मीद बनाए रखने को कहा । इतना देव देहरादून में शास्त्रीनगर अपने घर आया हुआ था । विकास गुरुग्राम में पिछले चार साल से किसी कंपनी में नौकरी करता था । हम दोनों ने शुक्रवार और शनिवार तो दोनों की ट्रैकिंग पर जाने की योजना बनाई थी । ट्रैकिंग के लिए तीन तरह की तैयारियाँ करनी पडती हैं, जिन्हें शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तैयारियाँ कह सकते हैं । किसी भी यात्रा के लिए पूरा जोर मानसिक तैयारी पर ज्यादा रहता है । उसमें उस इलाके की अधिक से अधिक जानकारी हासिल करना शामिल होता है । कहने का मतलब ये हुआ कि वहाँ का मौसम था । कल एक परिस्थिति और उस जगह का इतिहास आपको जितनी ज्यादा जानकारी होगी, मुश्किल हालातों में ये उतनी ही काम आएगी । मानसिक पटल पर वैकल्पिक मार्ग पे तैयार होना चाहिए । बहरहाल, इसके लिए सबसे पहले हमें शुक्रवार की सुबह देहरादून में इकट्ठे होकर वहाँ से मसूरी निकलना था । देहरादून से मंजूरी लगभग पैंतीस किलोमीटर की दूरी और छह हजार एक सौ सत्तर फुट की ऊंचाई पर स्थित है या पहाडों की रानी के नाम से विख्यात है । मसूरी । हमलोग घर से ही जाने वाले थे तो देहरादून रेलवे स्टेशन के बाहर से ही मिलती थी । हम दोनों शुक्रवार को पर्यटन बात जैसे चुडैलों की पहाडी के नाम से भी जाना जाता था । वहाँ जाने का प्रोग्राम बना रहे थे, जो कि मसूरी से बारह किलोमीटर की पैदल ट्रैकिंग थी । फिर उसी दिन शाम डालने से पहले तक ट्रैकिंग खत्म करने के बाद पर्यटक बस से वापस मसूदी तक आना था । वहाँ से अगले दिन सात किलोमीटर दूर जॉॅब भी जाना था और उसके बाद मैं रात नहीं जॉॅब रिवर स्टोन कॉटेज में ही रुकना था । अगले दिन शनिवार को दोपहर तक जॉर्ज एवरेस्ट में वहाँ की वादियों का आनंद लेना था और फिर शाम को कंपनी गार्डन घूमकर जॉर्ज एवरेस्ट के पास एवरस्टोन कॉटेज में ही पिछले काम कर रहा था । अगली सुबह रविवार को देहरादून के लिए वापस आना था । वहाँ से शाम से पहले विकास को गुरुग्राम के लिए निकाला था और मुझे दोपहर के ट्रेन से लखनऊ फॅस । अभी घर से निकले नहीं किया । सुबह साढे पांच बजे विकास मुझे फोन पर कहता है अरे बस निकल ही रहा हूँ । मैं सवा छह बजे तक आ जाऊंगा । ऐसा करो तब तक काम मसूरी जाने के लिए दो टिकट ले लूँगा । विकास को ये कहकर तैयार होने लगा क्योंकि मैं उसके कॉल आने पर ही उठाता । रेलवे स्टेशन मेरे घर से मात्र चार किलोमीटर के अल्प दूरी पर ही था । मुझे वहाँ पहुंचने में केवल पंद्रह से बीस मिनट ही लगते हैं । आधे घंटे में ही मैं ना होकर फ्लैश हो गया और पिट्ठू बैग उठाकर चल नहीं वाला था कि मेरा फोन एक बार फिर से काम कराया । हर एक के घर पहुंचे । मैं टिकट लेने वाली पंक्ति में खडा हूँ और मेरी बारी आ गई है । यही तो मैं और वक्त लगेगा तो बोलो मैं थोडी देर बाद टिकट लूंगा । विकास ने काफी देश भर में बोला क्योंकि वहाँ भीड ज्यादा होने की वजह से शोरगुल में उसके आवाज दबती रही थी । अरे भाई में पहुंच गया हूँ । बस अभी विक्रम से उतर रहा हूँ । ऐसा करो दो टिकट ले लो । विकास को कहा । अभी फोन रखे । कुछ हुए थे कि फिर से विकास का फोन आ गया । अरे मसूरी में किधर जाना है? यह टिकट काटने वाले भाई साहब कह रहे कि मसूरी में दो स्टॉप से और केवल उन्हीं दो जगह बस रख दिया । पहला लाइब्रेरी और दूसरा पिक्चर पैलेस बोल रहे हैं । विकास ने मायूस होकर पूछा था लाइब्रेरी तक ले लो, हमें उधर से निकलना है । पिक्चर वाले तो दूसरे छोर पर है । वहाँ से बहुत दूर पडेगा । एक अगर मैंने फोन को काट दिया और विकास की तरफ बढ चला । देहरादून उसके लिए नया शहर नहीं था । उसने देहरादून से उन्नीस किलोमीटर दूर शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग है । मेरे साथ ही अपनी इंजीनियरिंग पूरी की थी । तो जानता हूँ ये दिल्ली के जैसे भीडभाड वाली जगह से अलग होने के साथ सुकून भरी जिंदगी के लिए बेहतरीन जगह, भारी शहरों से प्राय यहाँ लडके और लडकियां, अच्छी शिक्षा व्यवस्था और रोमानी मौसम के कारण ये जगह सबको मंत्रमुक्त करती है । शहर की भाषा, लहजा, दफ्तार, आत्मविश्वास इत्यादि सभी में एक दीक्षित तेजी के साथ साथ एक जादुई अहसास था जो हर किसी को अपना घर का एहसास करवाता है । छोटे बडे शहरों से आने वाले लोगों को यहाँ खुद के अनुकूल ढालने में ज्यादा वक्त नहीं लगता था । इस शहर ने कभी किसी को बाहर ही होने का एहसास नहीं कराया और ये बात बाहर से आए लोगों को भी अच्छी तरह पता थी । लोग खुद को जरूरत के हिसाब से ढाल लेते थे और किसी बदलाव को लेकर सशंकित नहीं । अगले ही क्षण में विकास के सामने था और वो टिकट लेकर मुस्कुराते हुए मेरी तरफ पड रहा था । हम तो उन्होंने एक दूसरे से गर्मजोशी से अभिवादन किया । विकास ने मुझे घर से आने के लिए दोषी ठहराया । उन्होंने भी कुछ छोटे मोटे बहाने बना है । अपना बचाव करते हुए बोला, भाई मैं योजनाएं बनाने में विश्वास नहीं रखता, योजना बनाने का है क्या को प्रस्थान का एक दिन निर्धारित करना पडेगा । एक बजट निर्धारित करना पडेगा । जैसे जैसे दिन पास आता है, दबाव के साथ साथ तनाव हावी हो जाता है । पकाती करने में तो तुमने पीएचडी कर रहे क्या एक्सॅन से बस में जगह में लिया क्योंकि सामने मसूरी जाने के लिए दो बस खडिया । मैंने राहुल झाडते हुए कहा यूके जॅाइन वन थ्री फोर । ये बस का नंबर है और सीट नंबर सात और आठ है । इतना कहने के बाद विकास दोनों बस के नंबर प्लेट को देखकर मिलन करने लगा । हम तो उन्होंने देखा कि जस्ट बस की टिकट हमें मिली थी तो हम लोगों के दाई तरफ भी खरीदी विकास नॅान रखें और हम मसूरी जाने वाली बस में अपनी सीट पर बैठ गए । इस बात की भी खुशी हुई कि हमें जो सहित मिली थी उसमें एक सीट खिडकी वाली थी, जिससे हम देहरादून से मसूरी जाने तक इस नैसर्गिक सुंदरता का भरपूर नजारा ले सकते थे । हम दोनों आज बहुत रोमांचक है । उसके पीछे की वजह यह थी कि हम लोग ट्रैकिंग पर पहली बार एक साथ जा रहे हैं । रजत को विकास मेरे कॉलेज के बच्चे ही मित्र है और हम लोग काफी जगह एक साथ घूमे थे । तो ये पहला अवसर था जो कई महीनों से ट्रैकिंग का प्लान टालते टालते आज पूरा होने वाला था । हम दोनों की जो बातों का सिलसिला शुरू हुआ वह मसूरी जाकर ही दूसरा वो अपनी व्यथा सुना रहा था कि उसके परिवार वाले इस पर शादी का दबाव बना रहे हैं लेकिन वो अपने कॉलेज के दिनों से ही हमारे कॉलेज की है कि लडकी को पसंद करता है और उसी से शादी करने का विचार भी । मैंने उसे सुझाव भी दिया कि अगर वह कहे तो मैं उसके बाद आगे बढा सकता हूँ क्योंकि वो उस लडकी के प्रेम में गिरफ्तार था तो मेरे ही साथ मेरी कंपनी में जॉब कर रहे हैं । विकास ने कहा कि अपने दिल की बात खुद ही बताना बेहतर समझता है पर साफ शब्दों में मुझे उसे कुछ भी कहने से मना कर दिया । विकास के अंदर राजीव से जॅानी थी कि यदि उसने मना कर दिया तो शायद उसकी बच्चे कुछ भी उम्मीद भी चली जाएगी । विकास ने ये भी बताया कि उसे देख कर उसमें पहुंॅची आती है तो किसी भी तरह का काम को करने में असफल प्रदान करती है । उसकी बातों का सुनने के बाद मैंने उसे समझाते हुए कहा प्रेम के कारण नहीं होता । परिणाम होते हैं, मित्र हैं पर प्रेम में परिणाम की चिंता तब तक नहीं होती जब तक देर हो जाएगा । पंछी घर की छतों, मेट्रो की सीढियों, कॉलेज के खुले मैदानों में या फिर पार्क के पेडों के अर्तगत अपनी जिंदगी के नीड बताने के सपनों में खोए रहते हैं और परिणाम अपनी परिनीति की ओर बंद गति से चला जाता है । ये परिणिति सुखद हो गया तो खत्म या फिर दुखद । परिनीति का सुखद परिणाम या फिर इसका उल्टा होगा कि महज इस बात पर निर्भर करता है कि प्रेम का परिमाणों कितना है ही या नहीं । मेरी बातों का उसपर आसान होता देख मैंने भी उसे उसके हाल पर छोड दिया । बात और किस्सा से पता ही नहीं लगा कि डेढ घंटे की यात्रा इतनी सरलता से कैसे गुजर गए । हम ठीक आठ बजकर बारह मिनट पर मसूरी में खडे थे । मसूरी का इतिहास अठारह सौ पच्चास में एक साहसिक प्रदर्शन मिलिट्री अधिकारी और श्री शोर जो देहरादून के निवासी और अधीक्षक द्वारा वर्तमान मसूरी स्थल की फौज से आरंभ होता है । मसूरी भारत के उत्तराखंड राज्य का एक पर्वतीय नगर हैं जिससे पर्वतों की रानी भी कहा जाता है । देहरादून से पैंतीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । मसूरी उन स्थानों में से एक है जहां लोग बार बार घूमने जाते हैं । यह पर्वतीय पर्यटन स्थल हिमालय पर्वतमाला के शिवालिक श्रेणी में पडता है । इसकी औसत ऊंचाई समुद्रतल से दो हजार पांच मीटर यानी छह हजार छह सौ फुट है । जिसमें हरी पर्वत विभिन्न पादप रानियों समेत पडते हैं । उत्तर पूर्व में है मंडल शिखर सर उठाए दृष्टिगोचर होते हैं तो दक्षिण में दूनघाटी और शिवालिक श्रेणी दिखती है । इसी कारण ये शहर पर्यटकों के लिए परिमहल जैसा प्रतीत होता है । मसूरी गंगोत्री का प्रवेश द्वार भी है । देहरादून में पाई जाने वाली वनस्पति और इसके जीव जंतु उसके आकर्षण को और फिर पढा देते हैं । दिल्ली और उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए ये लोकप्रिय कृष्ण कालीन पर्यटन स्थल जब विकास और मैं मसूरी पहुंचे । चारों तरफ से बादलों ने अपने सफेद आंचल से मसूरी कोटा कर रखा था । ऐसा लग रहा था कि मानव मजबूरी ने बादलों की सफेद चादर ओड रखे हैं । गर्मी के मौसम में भी मसूरी में सैलानियों की काफी भीड थी । इसकी वजह मसूरी का ठंडा वातावरण था क्योंकि नीचे मैदानी क्षेत्रों में इस वक्त काफी गर्मी थी । मसूरी पहुंच गए सबसे पहले हम लोग बस स्टैंड से ऊपर की तरफ बडने लगे । लगभग डेढ सौ मीटर की दूरी तय करने के बाद हम लाइब्रेरी चौक पहुंच गए । वहाँ से मॉल रोड की तरफ चाहिए रहे थे कि तभी वहीं पांच की दुकान से गरमा गरम इलाइची और अदरक की चाय के हो स्कूल है । हमें उस मकान के अंदर जाने पर विवश कर दिया । हर एक कदम उस मनमोहक सुगंध की ओर अकस्मात ही चल पडे । वैसे भी हमें भूख तो लगी थी इसलिए वहां बैठ कर गर्मागर्म अदरक वाली चाय के साथ हाल ऊॅं लिया । चाय के साथ आलू के पराठे बहुत ही लजीज लग रहे थे । स्वादिष्ट पराठे होने के बावजूद भी हम लोगों ने एक एक पराठे ही है क्योंकि हमें बारह किलोमीटर की पैदल ट्रेकिंग करनी थी । विकास ने गूगल में आपने देखा और बताया कि हमें मॉल रोड से होते हुए वुडस्टॉक स्कूल तक जा रहा है । फिर वहाँ से दक्षिण की तरफ जाने पर नीचे की तरफ ढल मिलेगी । सीधे धोबीघाट पर जाएगी तो भी घट से मात्र साठ किलोमीटर की दूरी पर ही पर्यटन है । हम दोनों अपने लक्ष्य की तरह पढ चले थे । सफर में हमारा मौसम भी बखूबी साथ दे रहा था । धूपकर कही भी नामो निशान नहीं था और ठंडी ठंडी हवाएं हमारे हौसले को और बढा रही थी । थोडी देर में हम लोग वो स्टॉक स्कूल पहुंच गए नहीं । पास में हरे रंग की लकडी की तख्ती देखिए जिसमें सुंदरता के साथ एक तीर के निशान नीचे की तरफ धोबीघाट जाने का चंद्र को लेता हुआ था । हम लोग भी उसे निशान की तरफ पडेगा । चलते चलते पौन घंटा हो चला था । रास्ता लगातार ढलान वाला था । मेरे मन में भी ये चल रहा था कि जितना हम नीचे जा रहे हैं आते वक्त अपनी पढाई भी करनी होगी । चलते चलते दिमाग भी एक यात्रा पर निकल पडता है । वो यात्रा जब थकान के अहसास को कहीं पार्षद में डाल देती है । हमारे जहन के कई सारे खयालों के जवाब की तलाश में उलझाए रखता है । कई छोटे बडे खयाल सहन में यात्रा करने लगते हैं । ऐसी यात्राएं जिनकी कोई मंजिल नहीं होती जिनका कोई ठीक ठाक रास्ता भी नहीं होता । ऐसे कई खयाल इस वक्त दिमाग की दुनिया में अपनी अपनी यात्राओं में व्यस्त हैं । उन्हीं में से एक ये भी की इतनी लम्बी थकान भरी लगातार ट्रैकिंग पहली बार की जा रही है । इसे पहली बार किसने तय किया होगा और कौन होकर जैसे समझते को मापने का खयाल आया होगा । मिलके वो पत्थर रखने वाला और उन्हें मापी जा सकने वाले दूरियों में डालने वाला कोई तो रहा होगा जो सामान की को जीता होगा ।

चुड़ैलों का पहाड़ -02

डालूंगा पहाड भाग तो थोडी देर में ही हम लोग तो फ्री कार्ड पहुंच गए थे । वहाँ से तो रास्ते देख रहे थे । एक नीचे की तरफ जा रहा था तो दूसरा ऊपर की तरफ । विकास ने मोबाइल निकालकर पर्यटक बात जाने का रास्ता दिखाना चाहिए लेकिन मोबाइल में नेटवर्क ना होने की वजह से मोबाइल से हमें कोई मदद नहीं मिलेगी । पर आसपास कोई भी व्यक्ति नहीं दिख रहा था । थोडी देर इंतजार करने के बाद मैंने नीचे जाने वाले रास्ते पर जाने की सलाह दी और विकास के हामी भरते हुए चल पडा । रास्ता काफी चलेगा था क्योंकि ढलान होने की वजह से पानी के पहले से रास्ता बन गया था और लगातार बहते रहने के कारण हरे रंग की का इसी जम गयी थी । अभी मुश्किल से पंद्रह मिनट चल रही थी कि रास्ते के अंदर में घर देखा तो क्रिकेट पर लगाना ऍम अनुष्का शर्मा तो नाम देखकर हम लोग तो चौंका हमें ये तो पता था कि मसूरी में सचिन तेंदुलकर अक्सर गर्मियों में परिवार के साथ आते रहते थे । लेकिन कहीं ना कहीं इस बात को जानकर भी खुशी हुई कि अब अनुष्का शर्मा का भी इस जगह से नाम जुड गया था । आगे वो अनुष्का शर्मा की निजी संपत्ति होने की वजह से रास्ता वहाँ से बंद था । हम लोग गलत रास्ते पर आ गए थे । दोनों मन मारकर और हिम्मत जुटाकर वापस धोबीघाट की तरफ बढ चले । थोडी देर में हम लोग वापस धोबीघाट पहुंच चुके थे । वहाँ मोड से थोडा ऊपर चलकर रास्ते के किनारे बैठने के लिए स्थान बनाया हुआ था । वहाँ हम लोग थोडा सुस्ताने के लिए बैठे । सामने का नजारा अद्भुत और समय कार्य मुझे ऊंचे हरे चीड के पेड थे । आसमान बिल्कुल नीला देख रहा था । बादल हवाओं के साथ हमारे पास से अटखेलियां करते हुए गुजर रहे थे । विकास मेरी और अपनी इन हसीनवादियों की तस्वीर, रैलियां और धर्म जंगल के रास्ते से पर्यटक पाकिस्तान पर चले । जिस पैदल रस्ते से हम परिचित पा की तरफ पढ रहे थे तो कच्चे और पैदल रास्ता होने की वजह से बहुत ही पथरी ली थी । एक तरफ लगातार चीड के वृक्ष मिल रहे थे और कहीं कहीं बुरांस के पेड के लाल पुष्प मन को बहुत ले रहे थे वहीं दूसरी तरफ गहरी खाई थी जो मन में ये डर भी पैदा कर रही थी कि जहाँ पे हल्की सी चूक हुई तो चूक सिंदगी की आखिरी जो भी हो सकती थी । कदमों को संभालते हुए हम आगे बढ रहे थे । अब तो भी घट से चलते हुए हमें लगभग दो घंटे होने वाले थे । हमारी हालत खराब हो रहे थे । काफी ज्यादा थकान होने लगी थी । रास्ते में हमें कोई इंसान तो दूर की बात थे । कुछ जानवर भी नहीं देख रहा था । चारों और एकदम वीराना पसरा हुआ । कोई इधर कभी आता ही नहीं होगा । और आता भी होगा तो किसी मजबूरी में ही । चारों और घने जंगल होने की वजह से धूप जमीन तक नहीं पहुंच पा रही थी । उसकी हमें थोडी बहुत ठंड का एहसास हुआ । आगे चलकर दोमुहा सडक देखी जिसमें एक तरफ बोर्ड लगा था कि बीवी कांदा हम के लिए इस तरफ से जाएगा । हम लोगों ने मोबाइल में देखा तो नेटवर्क कभी भी नहीं था । विकास ने बताया कि उसने मैच में पहले देख लिया था की जिस तरफ नीलकंठ कम मिलेगा उसे रास्ते में वहीं से एक किलोमीटर के आस पास में ही पर्यटक बाय घडी में एक बजे का वक्त हो चला था । विकास अपने साथ कुछ काॅल और बोतल में ग्लूकोज खोलकर लाया था । उसने कहा हम लगभग पहुंची चुके हैं कि आप कुछ देर सस्ता लेते हैं और बिस्किट खाकर पानी पीकर आगे बढते हैं । मैं चाहता था कि पर्यटन पहुंच कर ही दम लेंगे लेकिन उसकी बातों को मकान नहीं पाया और उसके साथ सुस्ताने लगा । विकास ने बातों ही बातों में कहा यहाँ कोई भी इंसान दिन में पे जाने से डरता है । यहाँ तो डालों की काफी कहानियाँ हैं जो प्रचलित है । इसे ऍम भी कहते हैं । इसका मतलब होता है की छुट्टियों का बाहर कहते हैं कि यहां दिन के उजाले में भी लोगों को जो डाल दी जाती है कि ये जो डालों की मन मुताबिक जगह उस की ये बात सुनते । मैंने कहा भाई मुझे तो उन्हें क्या समझते हैं मैं क्या किसी बहुत से काम हो? रात को मुझे नहीं नहीं आती है । भूत की तरह जाता रहता हूँ । मेन का इंतजार करते करते जब थक जाता हूँ तब जाकर सुबह चार बजे तक नहीं लाती है । मेरा ऐसा कहते ही वह सुनसान फिराना हम दोनों के ठहाकों से गूंज उठा । थोडी देर में जैसे ही हम उठकर अपनी मंजिल की तरफ पडने ही वाले थे कि बहुत तेज दुर्गंध का एहसास हुआ । अनुच्छे ऐसे आस पास किसी जानवर की सडी हुई लाश एक औरत देखी जिसने पीठ पर हरी पत्तियों को लाड रखा था और सिर पर सूखे हुई लकडिया लात कर हम लोगों की तरफ आ रही थी । उसके नजदीक अभी वह दुर्घंध बहुत तेज हुए । हमें समझाते ये देर नहीं लगी कि वह गन्दा उसी औरत से ही आ रही थी । पूरा बचपन उत्तराखंड के टिहरी जिले में ही बीता था । मैंने अक्सर पहाडों में देखा था । वहाँ के लोग बहुत ज्यादा मेहनती होते हैं । बारिश का मौसम हो, कडी धूप, ठीक रन भरी ठंड हो, वहाँ किस तरह नियमित रूप से जंगल में जाकर कहा । डांगरों के खाने के लिए अधिक खास मिट्टी के चूल्हे जलाने के लिए लकडियां काटकर जंगल चलाते हैं । बारिश के दौरान भी एक इन कामों को भेजते हुए भी अंजाम दे दिया क्योंकि ये कार्य उनके दैनिक दिनचर्या में शामिल है । पिछले हो ना हो ये गंद उसी की वजह से ही आ रही होगी । मैं मन ही मन अपने आप को ये सब सोचकर तिरासी दिला रहा था । तभी मेरी नजर उस औरत पर पडी क्योंकि शरीर से बिल्कुल ही नाजुक दिखा रहे थे । लेकिन उसका उसने भारी वजन, कोई संविधान और खडी चढाई वाली जगह में लेकर चलना, उसके मजबूत इरादों और बुलंद हौसले को कहीं ना कहीं बयान भी कर रहा था । उसके चेहरे पर अजीब सा तेज था । उसके आगे बहुत ही खूबसूरत थी । वो बिल्कुल सफल लाल थे । उसके बाद खुद डाले थे और उसकी लडाई एक तरफ से उसके चेहरे पर हवा के झोंके के साथ मंडरा रही थी । इतनी खूबसूरत लडकी मैंने आज तक नहीं देखी थी । कुछ विश्वास नहीं होता था कि कोई भला इतना खूबसूरत कैसे हो सकता है । बिल कुल पडी की तरह लग रही थी । उस लडकी को देखकर अजीत आदर्शन महसूस ऍन तो मन कर रहा था की उसको लगता बाहर देखता हूँ । उसके खूबसूरत चेहरे को देखने के बाद सारी थकान छूमंतर हो गई थी । कॅश लगाए देखने की वजह से उसने अपने आप को असहज महसूस किया और बोल पडी, ऍफ जाना था तुम लोग । महिला स्थानीय भाषा में हम लोगों को पूछ रही थी कि हम लोग किधर जा रहे हैं । विकास को वहां के स्थानीय भाषा की कुछ हद तक समझ थी इसलिए उसने उनसे बात की । उन्होंने बताया कि हम लोग पर एक बार ट्रेकिंग के लिए आए हैं बस और आपने कहा की वो भी पर्यटक बाकी तरफ से रहती है और उधर ही जारी है । उसमें हम दोनों को साथ चलने को कह दिया । एक से भले दो और दो से भले तीन सोच कर हम दोनों भी उस औरत को इकाई मानकर कदम से कदम मिलाकर उसके पीछे चल दिया । आप गलत जा रहे हो बजाने का रास्ता तो इस तरफ से विकास नहीं । भारत को दोनों है । रास्ते से नीलकंठ हम वाले रास्ते से न जाकर दूसरी तरफ से जाता हुआ देखा तो पूछे नहीं । वो रास्ता आगे जाकर खराब है । बारिश की वजह से टूट गया । अब हम लोग पर्यटक इधर से जाते हैं । उसमें हमें नहीं जानकारी देते हुए कहा । लोगों ने इस बात को सुनकर उसका धन्यवाद किया और उसके पीछे पीछे हो गया । अभी हमें चलते हुए लगभग दस मिनट ही हुए थे कि हमारे आस पास चमका । फॅमिली अजीब सी कर्कश आवाज करते हुए हमारे साथ आगे बढना लगेगा । मैंने विकास को उस नवनियुक्ति से तो लम्बी लम्बी लकडियाँ मांगने को कहा । विकास ने उस लडकी से बात की और उसने तो लम्बी लकडिया थी जिसको पाने के बाद उसका इस्तेमाल करते हुए पथरीली चढाई में सहारा बनाकर चलने में आसानी हुई और हमारे मन से कुछ उपाय भी कम हुआ । हवा भी तेज हो चुकी थी । हल्की हल्की बारिश के आसार नजर आने लगे थे तभी अचानक हल्की हल्की बारिश नहीं परेशानी और बढा दी है । बारिश थोडी तेज हो गई थी । पेड की पत्तियों पर बारिश के मोटी बूंदे पडने से जंगल में अजीब सा शोर हो रहा था । बारिश हो ना अभी हमारे हक में बिल्कुल नहीं था । हमने एक बडी गलती की थी कि हमारे पास फ्रेंड ग्रुप कपडे बिल्कुल भी नहीं है । हम अपने फॅमिली छाता लेकर आए थे पर यहाँ जिस तरह तेज हवा चल रही थी छाते का टिक पाना और बारिश से बचाव कर पाना बेहद ही मुश्किल का काम था । बारिश के आसार कुछ देर में ही जाते रहे और कुछ देर में ही बारिश भी खत्म हो जाएगी दी है । हालांकि हवा के नाम हो जाने से ठंडा कुछ बढ गई थी । मैंने राहत की सांस ली जब देखा के बारिश आने के बाद थोडी देर में बंद हो जाने की वजह से चमकदार अब नहीं देखा है । हमारे आस पास की वनस्पतियां अब हमें बताने लगी थी कि हम ऊंचाई वाले इलाके में आ चुके हैं । आस पास के जंगलों में पेडों को देख कर ऐसा लगता था ना जाने कौन उन्हें जलाकर और उजाडकर चला गया हूँ । विकास ने बताया की कुछ तो भूस्खलन और बच बर्फ्बारी ने इनका ये हाल क्या होगा हूँ । बर्फ की ठंड से भी पेड इस तरह चल सकते हैं ये मैंने पहली बार देखा सुना था थोडी देर चलते ही एक छोटा सा तालाब देखा तो रास्ते के बिल्कुल ही बात था इतनी ऊंचाई पर तालाब कैसे हो सकता है ये सोचकर मैं उस तालाब को देखने लगा । उस साल आपको देखा जी साहब दर्शन महसूस हुआ हूँ । ऐसा लग रहा था जैसे कि वो अपनी तरफ बुला रहा हूँ । मेरे कहने से पहले ही वो लडकी, उस तालाब की तरफ मुड बडी फॅमिली दिल में बजरंगबली को धन्यवाद दिया है और मैं भी उस तालाब की तरफ बढ चला है । उस लडकी थी आपके सर का बोझ हटाने के लिए जैसे ही हाथ को पर किया, मैंने लगभग कर उसके सिर के बोझ को पकड लिया और उस पोज को नीचे उतार उसकी मदद करने लगा । जैसे ही बोझ उतार कर नीचे रखा उसने मेरी तरफ से अच्छी नजर से देखा और अपनी तरफ लाल फोटो अपने हाथों से कहते हुए मुस्कान छोडी । अचानक इस प्रस्ताव के कारण फॅमिली में न जाने कितनी उमंगे हिलोरे बाहर में लगी थी । मेरे दिल में विचार आया कि यही एक मौका है जो मैं इसकी मर्जी जाने में ना उसको अपनी दिल की बात कहते हो और अपने साथ शहर ले जाकर इसका ख्वाबों को साकार करने के लिए इसको किसी तरह सहमत करवा लूँ । सोच कर मैं छोटे से था आप के पास पहुंचा हूँ वो लडकी उस हालत में झुककर अपने दोनों हाथों से अपने चेहरे पर तालाब के पानी से छोटे मार नहीं नहीं बताना बहुत ही चमकीला प्रतीत हो रहा था की बात मेरी समझ से परे थी । वहाँ बहुत घना जंगल था जिसकी वजह से धूप की रोशनी नीचे तक पहुंचना नामुमकिन था । ऐसे मस्तान आपने धूप नहीं पढ रहे थे तो फिर कैसे उसका जल्दी इतना चमकीला हो सकता था । उस साल आपको देखकर उसके चल को छूने के लगता मन में उमड रही थी । दिखने में मुतालब ॅ लग रहा था जिसका चल में न जाने कितने अनसुलझे रहे शायद उसे छोडने के बाद ही उजागर हो सकते थे । मैंने अपना ध्यान तालाब से हटाकर उस लडकी की तरफ केंद्रित किया । उसके हाथ को पकडकर अपने दिल की सारी बात कहते का फैसला कर लिया था । अंजाम चाहे जो भी हो, मैं अपने चेहरे पर मुस्कुराहट लेकर जैसे ही अपने कदमों को आगे बढाकर उसके नर्म हाथों को पकडा । उसका हाथ बिल्कुल बर्फ की सिल्लियों की तरह सुनना पडा था । इससे पहले की मेरी समझ में कुछ आए मेरी नजर अचानक कल आप के चल पर पडेगी तालाब में जहाँ मेरा प्रतिबिंब तो नजर आ रहा था लेकिन उस लडकी का प्रतिबिंब नदारत था । मैंने उस झटके से उसका हाथ पकडा था उससे कहीं दुगने झटके सोचा हाथ को अपने से मुक्त करवाया बाल में जैसे डर के मारे मेरी सांसे फूलने लगे । प्रयासा करते ही अचानक अपनी जगह पर खडी हो गई । देखते देखते उसकी पीठ में से तो सुनहरे ऍम कुमार आए उन पंद्रह को पढाते हुए मेरे सामने से पडती हुई मुझ से कुछ दूरी पर सर से ऊपर लगभग आठ फुट की दूरी पर उडते हुए सोच जोर से हंसने लगे । उसके ऍम उसके कर्कश हंसी से सारा जंगल का पूरा जंगल से तरह तरह की आवाजें आने लगी तो चमकदार थोडी देर पहले हमारे आस पास कदम से कदम मिलाकर ऊपर मंडरा रहे थे तो बारिश के बाद हो गए तो पता नहीं अचानक फिर कहाँ से वापस आकर फिर से हम लोगों के चारों तरफ ऍफ लडाते हुए उडने लगे थे । ये घटना मेरे लिए फिर बिल्कुल ही अजीब थी । हूँ मुझे और विकास को यह समझते देर नहीं लगी है कि हम लोग उसके चक्रव्यूह पूरी तरह पहुंॅच । उनकी हालत ऐसी थी मॅन नहीं हूँ । स्वागत है तुम्हारा ऍम इसमें कि कहते हो और ऍम ।

चुड़ैलों का पहाड़ -03

चुडैलों का बाहर भाग तीन हवा में झूमती जो डाल के सौरभ हजार आंखें हम दोनों को बाकी बीमारी से खून आने लगे । विकास बहुत ही ज्यादा घबरा गया था । उसकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि वो अपनी जगह पर ही फॉर्म जमा कर खडा था । पूरे सपने की तरह यहाँ जैसे सब कुछ हकीकत नहीं । सिर्फ एक्टर अपना सपना था लेकिन अभी सत्य सामने नजर आ रहा था । मैं घर रहते हुए तेज आवाज में चलाया ऍम और मेरी इतना जोर से कहते ही उनके विचारों की श्रृंखला टूटी और उसमें साहस आया और वह दौडने लगा । विकास को भागता देखकर वह ऍम थोडी देर पहले काम से जवान लडकी थी । उसकी तरफ अपने पंखों को पढाते हुए उडते हुए जाने लगे । विकास दौडते दौडते तालाब के दूसरी तरफ पहुंच जाता । भागते भागते वो बार बार ट्रायल को भी पीछे देखता जा रहा था कि अचानक उसका पांव वहाँ पडे किसी पत्थर से टकराया । विकास अपना संतुलन खो देने की वजह से खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाया और तालाब के दूसरी तरफ प्लान से नीचे गिरने लगा । थोडी देर करते करते वो तो पैरों के पीछे झाडियों में पहुँच चुका हूँ । मैं उसे अकेला नहीं छोड सकता था । मुझे पता था कि अगर हमने एक दूसरे को अकेला छोड दिया तो हम दोनों कमजोर पड जाएंगे और उस मोबाइल को हमें अपना शिकार बनाने में बहुत आसानी हो जाएगी । निर्णय किया कि इस परिस्थिति को हम दोनों को समझना था और हर चुनौती को डटकर सामना करना था । मैं भी उस तरफ भाग पडा जहाँ विकास कराना । वहाँ पहुंचने ही मैंने विकास को झाडियों से मुक्त कराया । मैंने जैसी विकास को मुक्त कराने के बाद उसको सहारा देकर उठाने की कोशिश की तो मैं हैरान हो गया । उसके चेहरे पर खरोचों के निशान थे और उसकी आंखे बंद थी । मैंने उसको हिला डुलाकर उसको सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश की लेकिन मेरी हर कोशिश बेकार हो रहे थे । मैं बिलकुल ही परेशान हो गया । समझे कुछ अभी नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ । उसकी की हालत देखकर सिर्फ तक आने लग गया था मेरा मुझे लगा कि अब हमारा अंत निकट है । उसके दस तक बोलने के बाद अपने हाथों को मैं उसकी नाक के पास ले गया । कुछ इस बात को जानकर बहुत खुशी हुई कि उसकी सबसे चल रही थी । अभी तक उत्तर के कारण बेहोश हो गया था से कुछ अंदरूनी चोटें भी आई थी । उसको पंखों वाली चुडैल अब तालाब से थोडी दूरी पर ही थी और वहाँ से हमारी लाचारी को देखकर ठाकरे लगाकर हम कर रहे हैं । आज तक कोई भी यहाँ से बचकर नहीं गया है और ना ही जाएगा । अब तुम लोग अपनी बर्बादी का मंजर देखने को तैयार हो जाओ । कहते हैं वो और सोच सोच से हंसने लगे जैसे चुडैलों की पहाडी क्यों कहा जाता है । आज साफ नजर आ रहा था जिसकी कल्पना तक कोरी लग रही थी अब उसका वास्तविक दृश्य हमारी आंखों के समक्ष था । मेरा हौसला हो रहा था । मैं विकास को ऐसी हालत में छोडकर स्थलों की तरह तो नहीं जा सकता था । खा के कारण दोस्त तो उन्होंने साथ में मिलकर के आने का फैसला लिया था तो मैं अकेले उसे छोडकर अपनी जान कैसे बचा सकता था । तभी मेरे दिमाग में क्या क्या है का विकास को वहीं छोडकर आप की तरफ अपने दोनों हथेलियों फैलाकर तालाब के जल को उसमें संचय क्या और जल लेकर जाने लगा । लेकिन जैसे वचन लेकर मैं थोडा पानी उँगलियों के बीच के तरह से नीचे करने लगा । अभी मुझे खयाल आया कि मेरे पेट तो भर के एक तरफ खाली पानी की बोतल है फॅार भरने लगा जैसे बोतल एक चौथाई भरी माॅस्को लेकर विकास की रफ्तार बडा हॉस्पिटल से पानी के कुछ छींटे मैंने उसके चेहरे पर मारे । होटल में बचा हुआ चलते मैं उसके भूमि खोलकर डाल देना का चल उसके अंदर जाते । उसको खोज आया हूँ और वो एक झटके में ही अपनी जगह पर उठकर खडा हो गया । फॅस बीच हमारे ऊपर तेजी से मंडराती रहेगी । हम दोनों ने फैसला किया कि दोनों दूसरी तरफ भागेंगे । जिस तरह नीलकंठ काम था तो मैं साथ साथ भाग रहे थे । साथ ही टोटल भी कभी स्पीड से कभी उस पेड पर रखते हुए हमारा पीछा करने लगे । कहीं भी कितनी भी तेज भाग लोग लेकिन तुम मेरी इस जगह से नहीं भाग पाओगे । तुम्हारा यहाँ से निकलना संभव है । भाग लो जितना भाग जाएँ हो । उसके ऐसा कहते ही फॅमिली जंगल में पहुंचने लगे । वो अचानक से हमारे बिलकुल पास पूर्ति हुई आई और उसने विकास को दबोच करों पर उठाना शुरू कर दिया । बिना एक पल गवाये में विकास की कमर को पकडकर झूल गया ऍम और हम तो तीन फुट की ऊंचाई से ढंग से जमीन पर आखिर हमें अपनी बहुत निश्चित लगने लगी थी । यहाँ आने वाले कुछ सैलानियों के खो जाने के किस्से भी हमारे दिमाग में खुलने लगे थे । अचानक पैरों में जैसे राधिका इंजन लगाते हुए हम भागते भागते नीलकंठ धाम के मंदिर क्रिकेट के सामने पहुंच गए थे । ॅ ही हमारी जहाँ में जाना है सामने खोले बाबा की सफेद सनबर्ड पर की मूर्ति पडी थी । ऍम रोक के साथ राज मानते हैं शिव जी के गले में कालान आज लगता हुआ था । ये देखकर हम दोनों चकित रह गए थे । तो साहब बिलकुल ही असली था । हमें देखकर बहुत करने लगा । शिव जी की मूर्ति देखते ही ऐसा लगा जैसे हमारे अंदर धनात्मक उर्जा गई हो । हम तो फटाफट मंदिर के परिसर के अंदर आ गए । टोटल बंदर के गेट के बाहर ही खडी दहाडे मार रहे थे । जब काफी वक्त हो गया तो हम लोगों को समझ में आया कि वो मंदिर के पहले इसको लाल कर अंदर आने में सक्षम नहीं । मुझे देखकर हमारी चिंता की लकीरें कुछ कम हुई थी तो मंदिर क्रिकेट के बाहरी पंखों को फैलाते होते टाइम सभाएं चक्कर काट रही थी । उसकी शक्ल बहुत ही भयावह दिख रही है । उसके तो टन उनसे बाहर निकले हुए थे जिससे खून की कुछ बूंदें धरती पर तब तब करते पक कर रहे थे तो रह रहेगा । हम लोगों की तरफ अपनी फॅमिली का एक एक रखी देख रही थी । उसके इस तरह देखने से हमारे जिसमें हम तक हो रहे थे हमें मजबूर देखकर ॅ कब तक है बनाएगी मैं भी देखती हूँ, कब तक तुम यहाँ पडे रहते हो तो हार तो में आना ही पडेगा ही फॅसने लगेगा । मैंने अपने आते थे कोई क्या और शिव जी से यहाँ से निकलने के लिए को हार गए और चित्त को शांत करके आंखों को बंद करके यहाँ से बाहर निकलने का उपाय तलाशने लगा । थोडी देर बाद पर्यात करने के बाद मैंने जैसे ही अपनी आंखें खोली थोडी दूरी पर ही शिव जी का एक और त्रिशूल देखा था । किस का कुछ अंश अपनी बच्ची मिट्टी में ऐसा हुआ था उस पर यहाँ के स्थानीय लोगों ने कुछ रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की थी क्योंकि उस कृषि के ऊपर नंबरों के साथ रखे हुए थे । तब फटाफट विकास के पास गया और उसे अपने आगे की तरकीब समझे । विकास है जैसी मेरी योजना सुनी, उसके आंखों में एक विशेष चलता रहेगा तो मेरी तरकीब समझे और गेट की तरफ पढते हुए बोलने लगा । ऍम हमने तेरा क्या बिगाडा है हमें छोड दें । हम आज के बाद कभी भी इधर का रुख नहीं करेंगे क्या की बातें मत कर रहे हैं ऍम तुझे मरने से कोई नहीं बचा सकता । ऐसा कहते ही वह अभिमान के साथ हंसने लगे । अच्छा ठीक है, मुझे मार रहे तो मार देंगे लेकिन मेरे दोस्त देव को छोड देते हैं । मैं इस को यहाँ लेकर आया था । इसमें उस की कोई गलती नहीं है । विकास की कहकर दहाडे मारकर रोने लगा । आप कुछ नहीं हो सकता है । अब तुम दोनों मरने के लिए तैयार की आवाज के साथ अगले ही पल टाॅल के सीने के आर पार था । मैंने विकास को स्टाइल को बातों में उलझाए रखने को कहा था । वही पास के जमीन में आंशिक रूप से किसी दूसरे त्रिशूल के ऊपर पडे रुद्राक्ष को हटाकर त्रिशूल को उखाड दिया था और उस डाल के सीने पर बात किया था । इतनी आसानी से एक ही बार में ऐसा हो जाएगा इसकी उम्मीद नहीं थी । पर शायद मेरा राते देवकी कोई धनात्मक ऊर्जा मेरा साथ दे रही थी जिसके बिना ये मुंबई नहीं नहीं था, ठोका होगा मेरे साथ धोखा हुआ है ये तुमने सही नहीं किया । फॅमिली पर करेगा आप दे रही है मैंने त्रिशूल पर चढाए हुए कुछ होता के महिलाओं में से दो मालाएं निकली और एक विकास को दे दी । दूसरे अपने गले में डालते हुए शक्ति का रोटी को भी धन्यवाद करते हुए हम लोग डाल को वही तरफ से कोई छोड धोबीघाट की तरह बात करे हुए हम दोनों की हालत बहुत ज्यादा खराब थी । गिरते पडते हुए बेताहाशा हम दोनों भागे जा रहे थे जैसे कुछ पहला साल हमारे पीछे पडा । हम तेज भागने के चक्कर से जैसे ही उस कच्ची सडक पर करते तो अगले पल उससे भी जल्दी ही उठ जाते थे लेकिन पीछे मुड कर एक बार भी नहीं देखा है । तब तक सवा घंटे में ये हम धोबीघाट पहुंच चुके थे । वहां पहुंचने ही एक यूटिलिटी नहीं जन उपयोगी सेवा गाडी देखी । उस गाडी में पीछे मसूरी के पडे पडे होटल्स के पैकेट तकियों के कवर पर डे वगैरा जरूरी सामान लादा जा रहा था । धोबीघाट में अक्सर बडे बडे होटलों से इस तरह के कपडे हो जाते थे और सुबह डालने का काम यहाँ होता था । अब दोपहर के बाद यहाँ से वापस जाते थे तो भी गार्ड से मंजूरी मात्र पांच किलोमीटर की दूरी पर ही था । यहाँ का खुला मैदान इस काम को अंजाम देने के लिए बिलकुल उपयुक्त जगह थी । इसलिए यहाँ कपडों होने के काम को कुछ स्थानीय लोगों ने पेशे के तौर पर भी चला था । गाडी में सारा सामान लादा जा चुका था और गाडी अब चलने को तैयार थे । हम फटाफट भागते हुए उस ड्राइवर के पास पहुंचा अपनी सारी व्यथा सुना दिया । ड्राइवर ने हम दोनों का आश्चर्यचकित होकर देखा और फटाफट गाडी में आगे बैठने को कहा । हमारे आगे बैठते ही उसने अपनी गाडी खोल दी और आगे बढाते हुए बोला बहुत सौभाग्यशाली हो तुम लोग हाँ, ये सच है कि वहाँ से आज तक कोई भी व्यक्ति जिंदा बचकर नहीं आया और जो आया भी होगा उसके बारे में कोई कुछ खास नहीं बता पाया । कुछ उडानों का पहाड नाम से याद जगह किसी को भी नहीं छोडती है वो नीलकंठ हमसे पहले जो तो नहाना पडता है वहाँ पर एक कोर्ट भी लगा हुआ था । वक्त और मौसम के थपेडों को सही नहीं पाया और कहीं गायब हो गया । उस पर साथ लिखा था यहाँ से आगे जाना सख्त बनाएगा । यहाँ से आगे का इलाका डालों के पहाड के नाम से कुख्यात है । जो व्यक्ति सीमा से आगे बढता है अपनी तबाही का खुद जिम्मेदार होगा हमें ड्राइवर अपनी बहुमूल्य जानकारियां दही राहता के तभी विकास बोल पडा । यहाँ इस तरह की घटनाओं के पीछे जरूर कोई ना कोई इतिहास या कोई कहानी रही होगी । यहाँ होने वाली अलौकिक घटनाओं के लिए भी ये जगह प्रसिद्ध है । कई सारे बडे रहे थे । बीच पे तो आ जाता है कि वहां अजीत से असाधारण सकती है क्योंकि वहाँ जाने वाले हर इंसान को पानी में डाल देते हैं । बजट है पिछली करने की वजह से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है । कुछ लोगों का मानना है कि यह का करते घटनाओं की वजह से हुआ है । लेकिन कुछ स्थानीय निवासियों का मत है कि ये अदृश्य पत्तियों का खेल है । क्या आप अक्सर आधे जले हुए काले और भूरे रंग के पेड देखेंगे? इस बारे में यहाँ पर रहने वाले पुराने लोगों का कहना है कि प्रेमी जोडा वहाँ भाग कर आ गया था और अतिरिक्त व्यक्ति यहाँ खंडर में आश्रय दिया था । रात को अचानक बहुत तेज तूफान आया और इस जगह बिजली गिर गए जिसकी वजह से दोनों मारे गए तो उनकी मौत के बहुत दिनों बाद उनकी अब चली लाश वहाँ से बरामद की गई । आज भी इस इलाके में ऐसी घटनाएं होने कि वजह है कि वहाँ आत्माएं आज के उस जगह पर मौजूद है । कितना सच है और कितना झूठ ये कोई नहीं कह सकता । ये जरूर है कि उस जगह के मशहूर होने के पीछे की वजह कहानियाँ और भौगोलिक स्थिति है । जिस वजह से ये जगह आकर्षण का केंद्र पड चुकी है । हो सकता है कि अचीव वातावरण् और उन अब चले पेडों के पीछे क्या कारण है कि आज के अपने आप में बहुत बडा सवाल है । यह भी सत्य है कि वे चूडा ले लोगों को हकीकत में देखती है या कोई पहन हो जाता है, ये भी कोई नहीं बता सकता है । ड्राइवर की बातों ने हमें और भी संख्या में डाल दिया था । पर हम जानते थे कि हमारा बहन तो हर किस नहीं था । विकास और मैंने एक दूसरे को खोदा । मन ही मन भगवान को लाख शुक्रिया अदा कर रहे थे कि चान बच्ची लाखों करीब सवा घंटे में उस यूटिलिटी वाली गाडी ने बाॅक्स कूल तक छोड दिया । हम दोनों ने उस वाहन जला का शुक्रिया अदा किया । फिर वहाँ से शिक्षा कर लिया है, जिसमें बीस मिनट में ही मसूरी है । दूसरे छोर लाइब्रेरी के पास छोड चुकी थी । उस घटना के बाद से अभी तक हम संभाल नहीं पाएंगे तो कहीं ना कहीं उस हकीकत को काफी करीब से महसूस कर चुका था । तो वहीं दूसरी तरफ ये सब होने के बावजूद भी दिमाग ये सब पालने को तैयार नहीं हो रहा था । अब भी बहन तो हमें नहीं लग रहा था क्योंकि एक साल दो लोगों को एक ही बहन चाय नहीं लग रहा था । शहर की भीड में अपने आप को हम काफी हद तक सुरक्षित महसूस करने लगे थे । खडी मैं इस समय छह बज रहे थे । इस घटना के बाद अब हमसे वापस अपने घर जाना चाहते थे । सत्य और पहन के बीच अब भी दिमाग घूम रहा था जिससे हम अभी उबर नहीं पाए कि कोई किताबी कहानी लग रही है पर उसे इस बना महसूस करना सपना तो हर किस नहीं था ।

पहलवान भूत का खौफ़ -01

ओ पहलवान भूत का खौफ भाग एक इंसानों की भीड भरी दुनिया में बस्ती है । कुछ ऐसी खौफनाक हकीकतें जिनका सामना होने पर जिंदगी के मायने बता चाहते हैं । अमूमन जब तक इंसान इन पारलौकिक शक्तियों से रूबरू नहीं होता तब तक कोई नहीं नहीं मानता हूँ । जिन लोगों को इस प्रकार के डरावने अनुभव से कुछ करना पडता है उनकी जिंदगी खौफ से भर जाती है । ये हौसला कहानी आज से लगभग बाईस वर्ष पहले की है जब इंसान सिंदगी से तेज दौड सकते थे और मोमबत्तियां बिजली का काम किया करती थी । कुछ दिन होटल पहुंचने तक मेरी टांगे जवाब दे चुकी थी क्योंकि हाथों से ऋषिकेश के तीन सौ पचहत्तर किलोमीटर लंबी यात्रा बस बारह लगातार चलना मामूली नहीं देंगे । सूरज ढलते ही ठंड पड चुकी थी । गंगा जी का पानी ठीक हो रहा था । गर्म पानी मंगाकर पैरों की सिकाई की गई और तय किया कि भोजन करके कुछ देर सोया जायेगा । रात के तीसरे पहर में उठकर स्नान ध्यान करने के बाद सुबह चार बजे वाली सबसे पहली बात से आगे की यात्रा की जाए । मैं भोजन करके जल्दी ही हो गया । सुबह जल्दी उठना है के चक्कर में रात बेचैनी से कटेगा । रात ढाई बजे मेरी नींद खुली । मैंने टाॅस को जगाया और उससे एक बाल्टी गर्म पानी मांगी तो बोला साहब गर्म पानी का आपको अलग से पांच रुपये देने होंगे । मैं झुलाकर बोला जब शाम को कमरा लेने आया था तब सौ रुपए में सारी सुविधाएं उपलब्ध है । ऐसा क्यों कहा था बाबू जी उन का तो काम ही है कहना लेकिन यहाँ सारी व्यवस्था तो मुझे ही करनी पडती है । ये भी तो देखो इतनी सुबह आपके लिए मुझे भी तो जागना पड रहा है । उसने तपाक से उत्तर दिया जैसे उसके दम पर मैंने अपने पास रखती हूँ । ठीक है ले लेना भाई पर जब तक मैं फ्रेश होकर आता हूँ तब तक मुझे गर्म पानी तो मिल ही जाना चाहिए । मैंने रात जमाते हुए कहा बडी मुश्किल से थोडी देर में कम पानी मिला क्योंकि गर्म पानी के नाम पर बस गुनगुना ही था । शायद मुझे ऐसी ठंड में अत्यधिक गर्म पानी चाहिए था । मुझे देर हो रही थी इसलिए मैंने फटाफट गर्म पानी की बाल्टी को उठाया और नहाने चला गया । थोडी देर में ही नहीं करना बाहर आ गया । सरसों के तेल से मालिश कर के आपने बदल कर दुरुस्त किया । बचपन में मार्च से सुना था के सरसों का तेल की । अभी आपने जस्ट नंबर लगा लिया जाए तो ठंड का अहसास कम होता है । सारे बिखरे सामान को आपने ट्रेवलिंग बैग में डालकर अच्छी तरह से पैक किया गया । प्रशिक्षण पर पहुंचा तो देखा कि जनाब हो रहे हैं । मैंने उनको जैसे ही लाया तो बोल पडा रहे । ये क्या तरीका है किसी को उठाने का । आप मुझसे भी तो बोल कर उठा सकते हो । देख महाराज जी मेरे पास इतना वक्त नहीं है । मुझे यहाँ होटल से दो किलोमीटर पैदल चलकर बस अड्डे से चंबा होते हुए उत्तरकाशी जाने वाली बस पकडनी है होटल दूर होने की वजह से और सुबह होने की वजह से यहाँ से बस अड्डे तक की यात्रा मुझे पैदल ही तय करनी है । मैं जल्दबाजी में उसे बोलता ही चला गया । देखिए साथ ये आपको देर हो रही है । तो बोली मैं आपको अपनी लोना पटपटिया से पहुंचवा देता हूँ लेकिन जनाब उसके लिए आपको दस रुपए देने होंगे । रिसेप्शन पर बैठे शख्स ने आंखों में चमक लिए हुए कहा खाद्य है पैसा ही तुम लोगों के लिए सब कुछ है क्या? इंसानियत नाम की भी कोई चीज है या नहीं । समझ नहीं आता कि चंद कागज के टुकडों के लिए मिट्टी के बने इंसान इतने लोग भी कैसे हो जाते हैं? नहीं भाषा है आपका बहुत बहुत शुक्रिया । मेरे पास अभी काफी वक्त है । मैं पैदल ही चला जाऊंगा । ये कहते हुए मैंने होटल के बिल का भुगतान किया और अपना बैग उठाकर पैदल ही अपनी मंजिल की तरफ निकल पडा । वैसे यहाँ गंगोत्री लॉज रुकने के लिए उत्तम था और यहाँ के रसोई ने उम्र खाना भी खिलाया था । रेट कुछ ज्यादा था लेकिन उनका खाने ने कसर पूरी कर दी । होटल से बस अड्डे के रास्ते में गंगा नदी की अविरल धारा अलग ही छटा बिखेर रही थी । बडा ही मनोरम दृश्य था । आसपास दूर के घरों के चलते हुए बिजली के बल्ब के प्रतिबिंब गंगा नदी की धारा पर पड रही थी । कॅश खेल रही थी । माना जैसे अपनी और आकर्षित कर रही हो । हम है की कमी की वजह से मुझे अपनी इच्छाओं पर काबू करना पडा । अगली बार गंगा आसमान का मन में संकल्प दिए हैं । मैं बस अड्डे पर पहुंच गया । घडी में वक्त देखा तो तीन बजकर पचास मिनट हो रहे हैं । उत्तराखंड रोडवेज की बस मुझे अंदर घुसते के साथ सामने दिख गई, जिसपर ऋषिकेश से उत्तरकाशी वायर चंबा का बोर्ड लगा हुआ था । कंडेक्टर से उत्तरकाशी तक जाने के टिकट लेकर मैं बस में चढ गया मैंने बस मैं खडके वाली सीट पकडेंगे पहाडी इलाकों में चलने वाली पैसे सुभाई रवाना हो जाती है । पहला गा रही की रास्ता पहाडों को काटकर बनाया गया है जो अत्यधिक सकता है । दूसरा ये कि रास्ते में आने वहाँ दरबोड भी आते हैं । गाडी हर हर महादेव के उद्घोष के साथ अपने गंतव्य के और चल पडी । थोडी देर में मेरे बगल वाले यात्री के खर्रांटे शुरू हो गए । जैसे जनाब पूरी रात नहीं हूँ । सुबह के साढे नौ हो चले थे और गाडी में हीटर चल रहा था । थोडी देर चाहे और लघुशंका के काम से बस बीस मिनट के लिए चंबा नामक चला गया । बाहर निकलते ही ठंड का पता चल गया । कडाके की ठंड पड रही थी । चारों तरफ सर्द हवाओं की हल्के हल्के झोंके बह रहे थे । ठंड से दोनों हाथ सुनने पड गए थे और नाक सुर्ख लाल हो गया था तो उन्हें मुट्ठियों को सिकोडकर उसमें फूंक मारकर कर्म करने की नाकाम कोशिश कर रहा था । बस से निकलकर चाहे बनने तक ठीक हो चुका था । होटल के घंटे की आज भी गर्माहट नहीं दे रही थी । बस के एक सहयात्री ने बताया कि दो दिनों से यहाँ पाला पड रहा है । लगता है ऊपर चोटियों में इस वर्ष जल्दी ही बर्फ पड गई । इस तरफ पानी भी जमने लगता है । जल्दी से चाहे कूट लेकर मैं बस की तरफ पढ लिया चल रही है । बस में घुसकर मैंने सोने का यात्रा किया लेकिन नहीं नहीं आ रही थी । थोडी देर के बाद नहीं आई तो सपने में भयानक डाल का चेहरा दिखाई दिया । मैं उसे पहचानने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसका चेहरा लगातार बदलता जा रहा था । उसके रूप बदलते जा रहे थे तो वो मुझे कह रही थी कब तुम्हारा समय पूरा हो गया है तो मैं मेरे साथ ही चलना पडेगा । फिर उसके चेहरे का रंग बदलने लगा । मैंने उसे गाली दी और काम की और हाथ पढा रहा था । गन में हाथ से दूर छिटक दी जा रही थी । अभी मेरी आंख खुली तो देखा कि बस जंगल में खडे हैं । वहाँ आस पास ना तो कंडक्टर नहीं कोई यात्री बस में नजर आ रहा है । कितने कर मेरी हालत नाजुक हो गए । गली क्रिकेट परिस्थिति हो चली थी । समझने की कोशिश कर रहा था कि आखिर स्पोर्ट्स के सारे यात्री किधर नहीं । इसका उस सपने से कोई लेना देना तो नहीं नहीं । मुझे लगा उसको अपने किसी घटना का ही सूचित नहीं हैं । मैं तब तक की लगाएँ । बस में बैठे बैठे चारों और अन्य आ रहा था । उसको सौंपने के कारण मन में नकारात्मक विचार हावी हो रहे थे । दिमाग में ही मंथन चल रहा था कि कहीं उसका कथन वास्तविकता का रूप नहीं लेने वाला है । मैं अपनी सीट से एक आए । कोर्ट खडा हुआ और फॅसने खामोशी को चीरता हुआ अपने आपसे बात बताया नहीं । वो मातृक स्पोर्ट था । मुझे बस से नीचे उतर कर देना चाहिए मैं ये विचार है बस से जैसे नहीं चलता प्राॅक्टर वही नीचे खडा था । उसे देखते ही है । मैंने राहत की सांस ली और कंडेक्टर से बस रुकने का कारण पूछा । बोला, चाहत गाडी का पिछला टायर पंचर हो गया और उसे बदला जा रहा है । आप कह रही नहीं हो रहे थे तो मैंने आपको जगाना बनाते नहीं समझा । आपकी थकान को देखकर लगता है आप काफी दूर से आ रहे हैं । हाँ सही कहा आपने मैं हाथ से आ रहा हूँ और मुझे उत्तरकाशी जाना है । मैंने उसको जवाब दिया । ये सुनते ही कंडक्टर ने एक प्रश्न कर दिया । आपकी बोलचाल से तो ये पता लग रहा है कि अब यहाँ के नहीं । पहले कभी उत्तरकाशी आए हो या किसी काम से जा रहे हैं । बिल्कुल सही अंदाजा लगाया आपने हाथरस का रहने वाला हूँ क्योंकि उत्तरकाशी से लगभग तो पच्चीस किलोमीटर पडता है । उत्तरकाशी के गंगोरी गांव के इंटर कॉलेज में सहायक अध्यापक के पद पर चयन हुआ है । मैं आज वहाँ जॉइन करने जा रहा हूँ । वहाँ गुरुजी अच्छी बात है । आपको वहाँ किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी । मेरा मानना है जो यहाँ आया है वो यहीं का होकर रह जाता है । मनोहरन बाता बनाना है दर्गा कंडक्टर अपने ज्ञान का विस्तार मेरे समक्ष करने में लगा हुआ था । इतना कहने के बाद वो बस के पीछे की तरफ चला गया । मैंने इधर उधर नजर दौडाई तो देखा कि बाकी सारे यात्री धूप से कर भी चलाने में व्यस्त हैं । मैंने दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए अंगडाई ली तो देखा कि बाकी सभी यात्री बारी बारी बस में चढना लगेगा । बस का टायर बदला जा चुका था । अभी वापस अपनी सीट पर आ कर बैठ गया । यात्रियों के बैठ नहीं । बस एक बार फिर से चलता पकडी तो मील का पत्थर बता रहा था कि उत्तरकाशी मात्र उनतालीस किलोमीटर ही दूर है । टिहरी के धरासू बैंड के बाद ही उत्तरकाशी जिला का प्रारंभ हो जाता है । फॅमिली किलोमीटर की दूरी पर पडता है । जंगल के बीच घुमावदार पहाडी रास्ते पर इतने मोड हैं की गिनती ही नहीं हो सकते हैं । सर पीला रास्ता गाडी की स्पीड पढा नहीं नहीं दे रहा था । लगभग और सवा घंटे में ही बस उत्तरकाशी पहुंच चुकी थी । घडी मैं दो बजे का हो चला था । स्थानीय लोगों को अपना परिचय दिया तो उन्होंने बताया कि काम कोई गांव वहीं पास में ही था तो वहाँ मुख्य सडक से गंगोली गांव लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर था जहाँ जाने के लिए खडी चढाई थी । काफी मशक्कत करने के बाद ठीक साढे तीन बजे तक कोई इंटर कॉलेज में मैंने अपना पदभार ग्रहण कर दिया । सामान ज्यादा होने की वजह से चढाई में कुछ ज्यादा वक्त लग गया था । स्थानीय लोगों की मदद से गंगोली गांव के पोस्ट ऑफिस के सामने ही किराए पर घर भी मिल गया । अगले दिन से मैं निरंतर समय से विद्यालय आ रहे जाने लगा । हालांकि मेरे मूलस्थान हाथ से ये जगह काफी दूर पडती थी लेकिन ये जगह वाकई अब धीरे धीरे मुझे पसंद आने लगी थी । इसकी एक बडी वजह यहाँ के मृदभाषी लोग भी थे । लोग करूँ की बहुत इज्जत करते थे । खाली काॅलर ले जाकर उसे भरमाकर लाना हो या किसी भी तरह का काम हो सभी इसे अपनी जिम्मेदारी मानकर पूरा कर दिया करते । वक्त के साथ साथ स्थानीय लोगों पर अपनी पकड मजबूत हो चली थी जिसके फलस्वरूप कुछ सबसे कम ही खरीदनी पडती थी । स्थानीय निवासी ताजी सब्जियाँ भेंट कर जाते थे और ताजी सब्जियाँ खाने का मजा अलग ही होता था । चाहे वो पहाडी पालक हो या तो मारियालो इनको बनाते वक्त भी इनसे आने वाली खुशबू मंत्रमुक्त कर देती थी । इसे खाते वक्त तो मैं अपनी उंगलियों को छांटने पर मजबूर हो जाता था ।

पहलवान भूत का खौफ़ -02

पहलवान भूत का हाँ भाई तो बहुत एक शाम की है । मैं पैदल घूमते कोई टिकट के काम जा पहुंचा । मुझे वहाँ रहने वाले कितने बाजी ने कहा कुँजी शेर और गुलदार जैसे जानवर यहाँ वहाँ घूमते हुए आसानी से दिखाई दे जाते हैं । आपको अभी यहाँ की स्थिति का अनुमान नहीं होगा । मेरी माननीय बस मेरा भी बहुत हो जाता है । आपको वापस हो जाना चाहिए क्या? क्या क्या कहा शेयर और गुलदार शायद आप सही कह रहे हैं । मुझे पता ही नहीं लगा कि मैं घूमते घूमते इतनी दूर चलाया हूँ की बात सुनते मेरी खेल की बन गई । मैं सरपट अपने कमरे की तरफ दौड पडा । हमारे मन भगवान से प्रार्थना कर रहा था की हे भगवान तो उस वजह सही सलामत अपने कमरे तक पहुंचा तो कल से मैं रात को कभी भी पाल तो इधर उधर घूमना तो दूर की बात है । हमारे सब बाहर तक नहीं निकलूंगा । तकरीबन आधे घंटे में ही अपने कमरे में पहुंच गया । फॅमिली लडाई और भगवान का शुक्रियादा किया । मैं तकरीबन आठ बजे का वक्त हो चला था । सारा काम सुम जानता लग रहा था । और भी राणा बदला हुआ था । गांव में लोग जल्दी ही खाते हो जाते हैं । मैंने भी जल्दी पहाडी, राई और पालक बनाया और जल्दी से खा पीकर बिस्तर में घुस गया । करीब रात के दस पर जा रहे होंगे । फॅमिली तेज देखने मेरीलिन को तोड दिया । बहुत कर रहा गया । मैं भी बच्चे पटियाला रहे थे कि आखिर कौन हो सकती है । पहला इतनी रात को ऐसे ठीक ने का क्या मतलब? नहीं तो किसी मुसीबत तक नहीं ऍसे उठा और टॉर्च लेकर उस घटना स्थल की तरफ दौड पडा । जिस तरह से मुझे आवाज आई थी तब तक तो सौ मीटर की दूरी पर ऊपर की तरफ चढाई चढने पर मैं देखता हूँ । एक और भी पर पडी हुई थी उसके सिर के चारों तरफ रखते हो रहा था । उसकी खोपडी खून से सनी हुई थी । कॅश करीब जाकर देखा तो उत्तर चक्कर रहा रही थी और मुझे बचाने की तुम्हारी दे रही है । बाॅधकर गांव के कुछ स्थानीय लोगों को ले आया की वजह से उस महिला को उठाकर मैंने अपने ही कमरे के बैठ कर दिया क्योंकि वहाँ आस पास के इलाके में मेरा ही कमरा पास पडता था । थोडी ही देर में ये पता लगा कि उस भारत का पगडंडियों पर चलते हुए संतुलन बिगड गया था और वो नीचे गिर पडी थी । गिरते वक्त उसका सर किसी बडे पत्थर से टकरा गया था । उस चक्कर से उस औरत की खोपडी का एक ऐसा खुल गया था उसे इस हाल में देख पाना बहुत बडी हम मत का काम था मुझे ही नहीं करनी थी मैंने एक नवयुवक को का चलो भाई चलती किसी डॉक्टर को लेता हूँ नहीं तो ज्यादा देर हो गई तो इसके लिए मुसीबत हो सकती है । ये सुनकर को ना हो तो मुझे क्या? आस पास के गांव में कोई भी डॉक्टर नहीं है । यदि कोई डॉक्टर है भी तो चम्बा में मिलेंगे क्योंकि यहाँ से एक सौ तीस किलोमीटर की दूरी पर है । ये सुनकर अवाक रह गया । किस गांव में कोई डॉक्टर नहीं है रानी से बोल यहाँ इस तरह से पडे रहना भी तो कोई उपाय नहीं है ऐसे तो ये बेचारी मर जाएगी । क्यों नहीं ऐसे ही ले चलेंगे ये ऍम चंबा जाना भी इतना आसान नहीं है । गुरु जी क्योंकि यहाँ गांव में सबसे पहली बस चंबा की तरफ जाती है तो ठीक सुबह छह बजे ये सुनकर इस गांव की दुर्दशा पर बढता चुप हुआ । मुझे एहसास हुआ कि यहाँ गांव के लोगों का जीवन भी किसी तपस्या से कम नहीं है । तभी पास खडे व्यक्ति ने कहा, मेरे पास ही के गांव में एक बंगाली बैठी हैं । चुना उन्हीं को बुला लिया जाए । कम से कम उन्हें इतना तो पता ही होगा कि किसी तरह सुबह तक इसके दर्द को काम कर सके । तभी दूसरे ग्रामीण ने कहा यहाँ सही बात भला हम उन्हें कैसे भूल गए । क्या हुआ अगर वह रजिस्टर डॉक्टर नहीं लेकिन उन्हें भी गांव गांव जाकर इलाज कर के काफी अनुभव हो गया है । सुनते ही मैंने तपाक से फॅमिली को समझाते हुए कहा तो भाई देर क्यों कर रही हूँ ऍम और उन्हें लेकर ही लौटना । सही बात सुनते ही उसके साथ एक और व्यक्ति चला गया तो लगभग बीस से तीस मिनट में वो बच्ची के साथ हाजिर हो गया । ओ बस सर से काफी सारा खून बह गया है । वो तो भला हो आप लोगों का जिन्होंने समझदारी दिखाते हुए तो गलत असर दुपट्टे से बाल दिया है । लेकिन चिंता की कोई बात नहीं इस की जान बच जाएगी की बात बंगाली रहते हैं । उस औरत की खोपडी का मुआयना करते हुए कहा । उन्होंने वही मौजूद एक व्यक्ति से फटाफट गर्म पानी लाने को कहा और मेरी तरफ देखते हुए बोले है मुझे कम से कम दस से बारह लोग ऐसे चाहिए तो शारीरिक रूप से बल्कि हूँ । तभी इस की जान बचाई जा सकती है । पहले की बातें सुनकर आसपास मौजूद लोगों की आज कर रहे थे । उनकी पत्नियां फैलने लगे उनमें से फॅमिली आप होश में तो आप इस औरत के साथ करने वाले हो । देखो के वक्त बहस करने का नहीं । वैसे भी हम लोग काफी वक्त जाया कर चुके हैं । इसकी सलामती चाहते हो तो जैसा मैं कहूँ ठीक पैसा ही करो । ॅ क्या ना करता है । थोडी देर में गांव से लगभग दस बारह परिष्ठ पुरुष कमरे में मौजूद हैं । उस औरत की एक नजर हमारी ओर ही थी । ये भाग कर बैठी सभी बलिष्ठ मर्दों को दूसरे कमरे में ले गए । अभी उन्हीं के साथ होता है । उस कमरे में पहुंचने पर बहुत चीजें तो कहा तो सुनना ही । मेरे लिए बहुत बडी बात थी । तो बोले तो और आपको बचाने का एकमात्र उपाय क्या है कि मुझे उसकी कंपनी को सोई मजबूत थके सेसिल नहीं होगा? दे दिया था । नहीं किया तो सुबह तक अत्यधिक रक्तस्त्राव से इसकी पेशक जान चली जाएगी । मैं चाहता हूँ कि जब मैं इसको टाँके लगा हूँ तो आप सभी लोग इस महिला को बेहद ही मजबूत के साथ पकडे । कहीं से भी ये पकड ढीली नहीं होनी चाहिए ताकि मैं अपना काम सोया उठाके से कर दूंगा । इस बात को सुनकर वहां मौजूद सभी मतलब वहाँ चलते रहेंगे । लेकिन बच्चे की बातें सुनने के बाद कुछ राहत मिलेगी । कम से कम हमला की जानता बच्चा आएगी सभी उसका कौन जान देने के लिए सहमत हो गए । सभी कमरे में उस पीडित महिला के चारों तरफ फैल जाते हैं और सभी उसको ऊपर से नीचे तक कसकर अपनी पकड मजबूत कर ले गया । ये देख कर उस महिला के मन में अजीब अजीब से खयाल आने लगे हैं । कुछ आए दिन सभी की अनियत को गलत भाग गई थी तो अच्छे पढे प्रेशर मत तो मैं तनिक भी लज्जा नहीं आते हैं । क्या एक औरत जिंदगी और मौत के बीच झूल रही और तो मैं अपनी हवस की पडी है । आज जिसमें भूत इंसानियत से भी बडी हो गई है, एकदम जैसा समझ रही है ऐसा कुछ भी नहीं है । हम तेरह इलाज करने में मदद कर रहे हैं ना कि उस फिर में से एक ग्रामीण ठीक कर बोल पडा तो इस तरह से पकडने का मतलब क्या समझे? अब उस औरत ने अपने दर्द को बुलाकर ध्यान इस तरह की हरकतों पर दिखा दिया था और तुम बस शांति से लेटे रहो तो मैं धीरे धीरे सब पता लग जाएगा । इस बार मैंने उस औरत को तेज आवाज में नसीहते डाली भी । ये सब बाते चलती रही थी कि एक व्यक्ति गर्म पानी पतीले में लेकर वहाँ आ गया । बच्चे ने फटाफट एक सूती कपडा उस कंपनी में डाला और उस पीडित महिला के सर से बने हुए तो पत्ते को धीरे धीरे निकाला तो सूती कपडे को बार बार पति रे में डालकर पीडित महिला की खोपडी के उपरी भाग को साफ करने लगे । जून जून कर्म कपडे से खोपडी पर जमे हुए रक्त को साफ किया जाता । महिला तोड जोर से तरफ से चीज पर बडी मुश्किल से दस से पंद्रह मिनट में फॅमिली लगभग खोपडी के ऊपर चल रहा है तो गर्म पानी की मदद से हटा दिया । उन्होंने एक सोई निकली और उसमें धागे को डालने लगे हैं । ये देखकर को अपलब्ध प्रचलित होती हैं और बोली मेरे नहीं ये क्या करने जा रहा हूँ मैं ये गलत है । मैं ये डर नहीं खेलता हूँ । अब तो मैं धागे को डालते ही बैठी ने कहा इसके आंखों पर कोई तौलिया कपडा रख तो खुद का इलाज होते हुए देखने से स्वयं को दर्द की अनुभूति कुछ ज्यादा होती है । जैसे ही बैची ने सिर पर टांके लगाने के लिए खोपडी के ऊपरी परत की कंपनी में सुई चुभोकर समझने का प्रयास किया तो फॅमिली होती है । थोडी देर में ही पाँच सौ सोर से दहाडे मारकर होने लगी । अभी फॅमिली उसकी आवाज से ध्यान ना बट गए । इलाज करने में किसी भी तरह की कोई दिक्कत ना काफी मशक्कत करना ऍम लगती हैं । फॅसे फॅमिली लगती रहेगी ताकि लगाने के पास ऍम तो भी कुछ देर तक ऐसे पकडे रहेगा । मैं जल्दी से एक लगा देता हूँ तो सुबह ऍम कह देगी । उन्होंने लेप को ऑफिसर के चारों तरफ हम से लगा दिया और उस औरत के मुझे करते हैं धूमल को भी निकाल लिया । सभी ग्रामीणों ने मेरा पर बैठी का आधार व्यक्त किया और उस अगला को सहारा देते हुए उसके घर तक छोड दिया । मैंने भी बिस्तर की चादर बद्री और बिस्तर पर लेट गया । आंखों से नींद कोसो दूर थे । नजर के सामने वही खौफनाक मंदिर गुजर रहा था कि कैसे वह खून से अलग थी और डॉक्टर के अभाव में किस तरह उसका इलाज किया गया । बहरहाल असंतुष्ट तथा कि अंत भला तो सब भला । मैंने इस बात आज जिंदगी में देखी और उसी की हॉफ वाले माहौल में भी पहाडी लोग बहुत ही ज्यादा हिम्मती और रिटर्न इस टाइप वाले होते हैं । यही स्वभाव यहाँ उन्हें धीरे के नाइट ढंग से खिला दिया है । सूर्योदय हो रहा था सामने सूरज की कितनी सीढी चेहरे पर बढ रहे थे । आज काफी बार का दिन था । इस वजह से मैं देर से उठाता हूँ । दूसरी वजह क्या भी हो सकती है कि कल रात की घटना की वजह से दिमाग में देर रात तक गुत्थमगुत्थी चल रहे थे । फिर मुझे भी बहुत देर रात से आई हूँ । दो बजे के लगभग खाना खाने के बाद मैंने सोचा कि यहाँ पास के गांव में पुरानी हवेली है क्योंकि उसे देख कर आया जाए । मन में ये विचार दिए मैं उस पुरानी हवेली में जा पहुंचा । पिछले हफ्ते ही गांव के एक व्यक्ति ने बताया था उस हवेली के बारे में कि ये तकरीबन ढाई सौ वर्ष पुरानी जो राजा महाराजाओं की क्या क्यों कि बखान करती है । यहाँ हिंदी सिनेमा के कई हॉरर फिल्मों को भी फिल्माया गया है । उसके साथ साथ ये भी हिदायत दी थी कि इस हवेली में कभी भी सूरज चलने के बाद रखना मना है क्योंकि यहाँ किसी प्रेत का साया है जिसमें काफी समय से लोगों की नाक में दम किया हुआ है । शाम के पांच बजे का वक्त हो चला था । मुझे बडा अचरज हुआ हूँ की वहाँ मेरे अलावा कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था । मेरे मन में भी यह ख्याल आया कि यहाँ के स्थानीय लोग तो जब होगा तब आकर देख कर चले जाते होंगे । क्या इस पुरानी हवेली को देखने का प्लान तो उन्हें बनाना पडता है, चुप नहीं बाहर से आते हैं ।

पहलवान भूत का खौफ़ -03

पहलवान भूत का ऑफ धाक टीम हवेली आज भी मजबूती के साथ सुदृढ खडी थी । किस जगह के सबसे आलीशान हवेली होने के साथ इस बात की भी कल चाहती है कि पीते हुए दौर में भी क्या हवेली एक संपन्न रजवाडा हुआ करती थी जिसके हुक्मरान राजमहल जैसी भरते हवेली में कहाँ कर देते हैं । कई एकड में फैली यह हवेली पांच भी ढाई सौ साल पुरानी वास्तुकला की भव्यता से लोगों को दातों तले उंगली दबाने को विवश कर रहे थे । मैं दीदी की सुंदरता का सूक्ष्म निरीक्षण करने लगा । दीवारों पर बहुत मेहनत चल कलाकृतियां बनाई हुई थी जो वक्त और मौसम के थपेडों के आगे धूमिल होने को फिर थी । हवेली की ऊंची ऊंची दीवार हवेली की शोभा बढा रहे हैं । हवेली के प्रांगण के ठीक मध्य में लगभग पंद्रह मीटर की त्रिज्या के सत्ता कार खेरे में फॅमिली और मुलायम खास बताई गई थी । उस परिधि पर केंदा गुलाब, कुमुद नहीं इत्यादि फॅमिली के पौधे बगैर किसी अंतराल के लगाए गए थे जिनमें उठने वाले फॅमिली और अलग अलग प्रजाति के फूल शोभायमान थे । उस वक्त आकार खेले के बीच में कमर पर खडा दिखाए हुए एक युवती की संगमरमर की मूर्ति थी । उस खडे से निकलने वाली पानी की पतली धारा को इस प्रकार समायोजित किया गया था की थोडी ऊंचाई से उठने के बाद धारा सीधे मैदान की परिधि पर लगाए गए फूलों के पौधों पर ही करती थी । मैं देखते देखते हवेली के तहखाने में जा पहुंचा हूँ । वहाँ पक्षियों के आवाज और अजीब से बदबू ने ना कदम कर दिया । यहाँ चारों तरफ अंधेरा होने के साथ साथ एक्टर आपना सन्नाटा पसरा हुआ था । ऐसी भयानक खामोशी जिसमें मैं अपनी सांसद की आवाजों की प्रतिध्वनि में आसानी से सुन पा रहा था । मैं अपने साथ बैग लेकर आया था जिसमें बहुत हमेशा लगता था आज से बाईस साल पहले ब्लॅक छतरी की अहमियत है । ज्यादा हुआ कर दीजिए, ऍसे निकाला और सामने की तरफ चलाया था । क्यों उडता हुआ चमगादडों का झंडा मेरे सर के ऊपर करके साॅस उठाना को इस घटना से मैं भी हो गया था । मुझे लगा कि कहीं देर ना हो जाए इसलिए मुझे यहाँ से निकलना चाहिए । घडी में वक्त देखा तो सात बज चुके थे । वो तो पूरा हुआ । पचहत्तर रहते यहाँ से निकल जाना चाहिए था आप मुझे पैदल ही साढे तीन किलोमीटर की दूरी तय करनी पडेगी जबकि कोई पहुंचने में दस बजे जाएंगे । मैं खुद से ही बडबडाता बाहर निकलने की कोशिश करने लगा । तौर से भी प्रकाश देना हो चुका था । शायद उसकी बैटरी आखिरी चरण में देंगे । टॉर्च का प्रकाश कम होने की वजह से मुझे तहखाने से बाहर जाने का रास्ता नहीं मिल पा रहा था । तब क्या जाना हूँ मुझे हवेली के तहखाने में एक जोडी आग है, चमकती हुई दिखाई थी । मैं एकदम से सहन गया क्योंकि मुझे कुछ दिनों पहले ही ग्रामीण खातरी में गुलदार और शेर के विचरन के विषय में बताया था । अचानक तार की वजह से मेरे हाथ पैर कांपने लगे और मेरे हाथ से टॉप झटक के नीचे गिर पडा । मैंने तुरंत टॉर्च को उठाया और चलाने की कोशिश की लेकिन अब वो चलने में असमर्थ थी । मैंने दोबारा कोशिश की तो वो चल गई । उसके चलते हैं । मन में कुछ राहत महसूस हुआ । तभी मेरा ध्यान होने पर गया । ऍम चलते हुए उस तरफ क्या लेकिन उसके लिए आप कोई भी नहीं देखा था को छोटी आंखें दिख नहीं रही थी । मैं कुछ हिम्मत पति मैंने अपने कदम तेज कर दिया और थोडे मशक्कत रखने के बाद मुझे तहखाने से बाहर आने का रास्ता भी किया । पता है खाने से निकलकर हवेली के पीछे हिस्से में जा पहुंचा । मुझे वहाँ ऍम हुआ । ऐसा लगा जैसे मेरे साथ और भी कोई वहाँ मौजूद था । क्रिस कदम से कदम मिलाकर वो भी ठगने की कोशिश कर रहा था । मैं वो ही आगे बढता है तो पीछे से सूखे पत्तों के चरमराने क्या आवाज आ रही थी मुझे इसका हिस्सा हो तो खाता के मैं फॅमिली में अब अकेला नहीं हूँ । मेरे मैनेजमेंट में चाहता है फुर्ती से पीछे की तरफ ऍफ चला दिया । सामने देखते ही मेरे होश उड गए । सामने छह फुट का विशालकाय आदमी था जिसके हाथ घुटने से नीचे सकते हैं और वो मुझे देखकर हस रहा था । धीरे धीरे वो आ के पढते हुए ठीक मेरे सामने आके और बोला महान गए हमारी मत को पिछले ढाई सौ सालों से किसी की हिम्मत नहीं हुई कि वह सूर्यास्त यहाँ के और तू तो तय खाने तक भी पहुंच गया । क्या बकवास करते हैं । अब तो सालों से हम हूँ । मैं नहीं मानता तुम्हारे बातों को फाॅर्स चलाकर उसे कहा मैं मानता हूँ कि तुम बहुत को लेकिन क्या तुमने मेरी आंखें नहीं देखी थी? तो खाने में जो तुम पर ताकि लगाए देख नहीं थी उस तानों से देखने वाले इंसान ने कहा अच्छा अब तुम तो अचानक कहाँ चले गए? लेकिन इस से ये सब नहीं हो जाता कि तुम पिछले ढाई सौ से कहाँ तो उस को चुप कराते हुए हो । तो मैं तुम्हारे उस बस वाले सपने के बारे में भी बताऊँ जिस सपने में तुमने एक भयानक चुडैल देखे थे । और तो मैं तुम्हारे जीवन के काल चक्र पूरे होने की बात कर रही थी । इस बार उसने बुलंद आवाज में कहा, ऍम लेकिन मैंने उस सपने के बारे में मैं तो किसी को नहीं बताया था । फिर तुम्हें कैसे पता? मैं पार्टनर गया था और करते हुए कहा क्योंकि तो सपने के बारे में पास तब में मैंने सब किसी को नहीं पता था । ऍम बोला देखो मुझे अच्छा नहीं तो पिछले कुछ दिनों से बहुत ही बचित्र उच्चतर घटनाएं घटित हो रही है । मेरे साथ मैं बहुत परेशान हूँ । अब और मत करो हूँ । क्या कर रहा है? परेशा हूँ मुझे तो कितनी बार समझाने की कोशिश की तो यहाँ से वापस चला जाएगा । मेरे का कमजोर है लेकिन तुम्हें तुम्हारे सारे को दरकिनार कर दिया । इस बार बहुत ही बुलंद और तेज आवाज मस्त दानव रूपी मानव ने बोला मैंने उसकी बातों को ध्यान से सुनो पर पता है मुझे देर हो रही है मुझे अब यहाँ नहीं रहना मैं कल ही वापस चला जाऊंगा । हो जाएगा तो तब जब मैं तो यहाँ से जाना होगा । मेरी एक शांत माननी होगी तभी तो यहाँ से जा सकता है उस विचित्र घुटने मेरे सामने एक विचित्र शर्त रखी । वो बोलते कौन सी शर्तें तरीके हर चुनौती से निपटने को तैयार हूँ में मैंने डरते करते ही सही लेकिन सारी बच्चे को चेंज मत को एकजुट करते हुए कहा था विचित्र बहुत बोला हैं । मैं चाहता हूँ की तो मुझ से कुछ तिलाडी और जब तक तो जीत नहीं जाता तुझे लगता लडते ही रहना होगा । यही तो एक बार भी जीत गया तो पेश तो यहाँ से जा सकता है लेकिन कुश्ती को बीच में छोडकर नहीं जा सकता । क्या दी तूने ऐसा किया तो मजबूरन तुझे इस हवेली के ऊपर ले जाकर मुझे पीछे धक्का देना होगा । बोल मंजूर है तुझे । मैंने उसकी बातों को धीरज के साथ चुनाव कहा । एक शर्त मेरी भी है । यदि मैं जीत गया तो इस हवेली को हमेशा के लिए छोडकर चला जाएगा और किसी भी व्यक्ति को फिर कभी परेशान नहीं करेगा हूँ । मैं तिरा खोला नहीं जब तेरी शर्त मना तुझे जगह से निकलना है मुझे नहीं इसमें आपने नसीहत आपने कहाँ तक और कुश्ती के लिया था । मारता की आनंद करता सही में उस वक्त में हालात के आगे व्यवस्था यहाँ से निकलने के लिए । इसके अलावा कोई रास्ता नहीं था तो मैंने खामी भारती थोडी देर में ही हम दोनों में पकडम पकडाई और उठा पटक शुरू हो गए । तभी मैं उसको खुद को आगे से पकडता तो कभी उस पर पीछे समझ सकता । लेकिन बहुत वो पहलवान हो, बहुत चालाकी से मेरी टांगों के बीच अपनी तरफ डाल कर हर बार पटक नहीं दे देगा । जैसे वो कुश्ती में माहिर खिलाडी रहा हूँ तो हर बार लाई दाव और पैतरे से चकित कर देता था । हर कोशिश नाकाम होती जा रहे थे । हर बार मुझे मूंग की खानी पड रही थी ना तो मैं उसको धुल चटा पा रहा था । नहीं वो पहलवान भूत ही ठक्कर हार भाई को तैयार हो रहा था । दोनों में भीषण मल्लयुद्ध जारी था । लडते लडते वक्त का पता ही नहीं लगा कि कम सूरज की लालिमा देखने लगे । गांव में अब सभी लोग मेरे लिए चिंतित हो जाते थे । गांव के साहसी युवकों की टोली हाथ में बच्चा लेकर मेरे ही फौज में निकल पडे थे । थोडी ही देर में उन लोगों की टोली इस पुरानी हवेली के करीब पहुंचे तो सभी ये नजारा देखकर रखते हैं । फॅमिली पर पडी तो वह घबरा गया और अचानक हवेली के तहखाने की ओर भाग पर देखते ही देखते वो एकदम हो गया । इसी चक्कर की दूरी पर बडी पहचान में जाना है । फिर मैंने सारी घटना उन्हें विस्तार से बताए । उस्तोली से एक ही वक्त ने बताया कि जिस व्यक्ति को मैं बता कर आया था की पुरानी हवेली की तरफ जा रहा हूँ उसी ने मुझे तेरे से भी वापस नहीं आने पर उन सभी को सोचना नहीं जिसके फलस्वरूप ये सब क्या हो चुके हैं । गांव वालों के इस इतिहास में हैं पर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था । मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि उस स्टोरी के वक्त पर आने की खुशी बनाओ । क्या आपने हिम्मत और इच्छाशक्ति पर कर महसूस करो जिसमें मुझे सुबह तक लडने के लिए बल प्रदान किया, ऍफ उठाया और उसे अपने बात में डालते हुए तो ली के साथ गांव चलते हैं । इन सभी घटनाओं ने मुझे अंदर तक हिलाकर रख दिया था हूँ । मैंने अपनी नौकरी छोडकर अपने बॅास जाने का निश्चय कर लिया था और मेरा फैसला अटल था हूँ अपने सारे सामान को दोपहर दो बजे तक कर चुका था । कॅप्टन के अंतिम बस सवालों पर आती थी चुकी देर रात तक ऋषिकेश तक पहुंचा दे दीजिए । फिर वहाँ से अगली सुबह छै । बजे ही हाथरस के लिए बस जाती थी जो शाम तक पहुंचा देती थी । सवा दो बजे वाली बस ऋषिकेश जाने के लिए अंतिम बस्तें जिससे मुझे हर हाल में पकडने थी । मुझे अब यहाँ एक भी रात रुकना खुद पर भारी लग रहा था । अपने सामान को लेकर मुख्य सडक की तरफ भाग पढा हूँ । सामान ज्यादा होने की वजह से मुझे सडक पर बने बढाओ पर पहुंचने में बीस मिनट लगता है । मुझे लगा कि अब बस निकल गई होगी । मैं ऐसे ही बस पर पहुंचा तो देखकर अत्यंत खुशी हुई कि बस थोडी दूरी पर अभी भी खरीदी लगभग कर बस की तरफ । लेकिन जैसे ही बस के करीब पूजा बस चल चुकी थी मैंने बहुत आवाजें लगाओ लेकिन बस मेरी नजरों से ओझल हो चुकी थी । अपनी किस्मत पर बडा पछतावा महसूस हो रहा हूँ । मैं यहाँ एक थे । रात रुकने के लिए तैयार नहीं था लेकिन खात्में पूरी तरह से हताश हो चुका था । मैं वापस कमरे की तरफ जाने की सोच रहा था कि बहुत क्योंकि धोनी ने ऍम क्या पीछे से मेरी ट्रक आ रही थी जिसमें टाइगर के अलावा कोई भी नहीं था । मैं खुशी अपनी जगह पर उछल पडा और भगवान का मन हेमंत शुक्रिया अदा किया । ट्रक वाले से बात की तो पता लगा कि वह सामान लेने के लिए ऋषिकेश ही जा रहा था तो मुझे अपने साथ ले जाने को तैयार हो गया । मैं उसके साथ उसके ट्रक पर सवार हो गया । अभी मुश्किल से एक घंटे का सफर तय ही किया था कि देखा की एक मोड पर काफी लोगों की भीड है । टोमॅटो कर हालात का जायजा लेना चाहता हूँ । पता चला कि ऋषिकेश के लिए आखिरी बस अभी थोडी देर पहले ही काम कोई गांव में मुझे छूट गई थी तो गहरी खाई में नीचे गिर गई । पीछे नदी में डूब गई थी । बचाव कार्य जारी था लेकिन किसी भी यात्री के बचने की कोई भी उम्मीद नहीं थी । ये सुनते ही मेरा दिल दहल उठा । इतने लोगों की मौत की खबर आखिर किसी अच्छी लगती है । मेरा सिर्फ घूमने लगा । थोडी देर बाद जब शांत हुआ तो मैंने भगवान का लाख लाख शुक्रिया अदा किया । हर मानने के मन में अपनी किस्मत और भाग्य पर अभिमान महसूस हुआ कि मैं उसी बस के छूटने के कारण जीवित हूँ अन्यथा मेरा नामोनिशान में चुका होता हूँ और इस दुखद घटना की जानकारी मेरे घर पर किसी को भी नहीं मिल पाती है ।

भूतों का अस्पताल -01

भूतों का अस्पताल, भाग एक कानून और विज्ञान खुद प्रेत और आत्मा जैसे पारलौकिक बातों को नहीं मानता है कि दुनिया में कई लोग हैं जिन्होंने पारलौकिक घटनाओं का सामना किया और असामान्य अनुभव से कुछ रहे हैं । उनका मानना है कि दुनिया में हम मना भी अकेले नहीं है । कोई और भी हमारे आस पास मौजूद है । जीवन और मृत्यु पृथ्वी पर्ची फनकार डाल सकते है । जो चीज जान माल लेता है वो इतना एक दिन मृत्यु को प्राप्त होता ही है । एक मानव अपने जन्म सहित मरण तक के सफर में हफ्ता है होता है, अच्छा करता है, सफलता प्राप्त करता है, असफल भी होता है, होता है, भावुक होता है, क्रोधित होता है, वो होता है, कामना करता है और त्याग भी कर रहा है । ऐसा कहा जाता है कि अपने जीवनकाल में अधूरी रह जाने वाली कामनाओं की पूर्ति करने के लिए जी आत्मा मृत्यु के बाद भी बढती रहती है । फॅमिली हॉस्पिटल उन्नीस सौ बयासी में पटना रेलवे स्टेशन से पांच किलोमीटर दूर राजेंद्र नगर से दो किलोमीटर की दूरी पर कंकडबाग नामक जगह पर बने इस अस्पताल के बनने के बाद होने लगी थी कराने वाली घटनाएं । वो कहते हैं कि ये भूतों का अस्पताल है जहाँ से रात को अक्सर आती है । ऑफ नाट आवाज एक दीवारों पर पक्षी तक नहीं बैठते हैं । अजय कुमार ने अभी हाल ही में जमशेदपुर टाटा से बायो मेडिकल की पढाई पूरी की और उस की नौकरी जगदीश मेमोरियल हॉस्पिटल में बायोमेडिकल इंजीनियर के तौर पर हो गए । बहुत खुश ना तो उस अस्पताल से पारा किलोमीटर दूर इंद्रपुरी नामक मोहल्ले में शिफ्ट हो गया था । इतनी दूर कमरा लेने की वजह उसके बडे भाई पेमल के होते हैं । वो अजय को अपने छोटे पुत्र की भांति प्यार करते थे और बहुत जगह पर पिछले पांच सालों से अपनी बीवी और दो बच्चों के साथ इंद्रपुरी मोहल्ले में ही रहते थे । अजय बचपन से ही शॉर्ट टेंपर वाला शख्स था । उसे छोटी से छोटी बातों पर भी गुस्सा आ जाता था । इस वजह से उसके बहुत कम मित्र थे । शायद इसी कमी की वजह से वो जवानी में लडकियों के मामले में खुद को ठनठन गोपाल समझता था । उसको कभी आपने सुनवाई पर गुस्सा भी आता है लेकिन वो जैसा है बेस्ट है । ये खुद को समझा कर अपनी धाक चला लेता था । आज जगदीश मेमोरियल हॉस्पिटल में उसका पहला दिन था । बहुत समय से पहले ही तैयार हो गया था । जैसे ही वह बाहर जाने के लिए अपने खत्म को पढाता है तो उसे एहसास होता है कि कोई उसकी तरफ आ रहा है । उसका ध्यान बैठे बैठे उस घायल की मतलब थाने की तरफ जा चला जाता है । वो शख्स उसके सामने आ जाता हूँ । मेरे देवर जी ऐसे कैसे जा रहे हैं । आज आपका पहला दिन है । चलिए जल्दी से मैं खोली ये कहने के साथ हजार की भावी जन का नाम को समझता है तो उसके मुँह में चम्मच से दही और चीनी डाल देती है । अभी इसकी की आवश्यकता थी । मैं कोई परीक्षा देने थोडी जा रहा हूँ जो आप चुप चाप खालवा बताया ना । आपको कोई शुभ काम करने जाने से पहले नहीं खाना शुरू होता है दिया जाय की बातों को पीट सहित काटते हुए हैं । आपसे भैया नहीं जीत पाए । फिर मैं किस खेत की मोदियों दोनों खिलखिलाकर हंस पडे । अभी हँसी का ये सिलसिला चल ही रहा था की वहाँ पे माल किशोर भी आ जाते हैं । क्या उसको चल रही है देवर भाभी के बीच और कौन किस से नहीं देख पाया हमें भी तो बताऊँ अभी कुछ नहीं । मैं तो ऐसे नहीं खाने के फायदे समझा रही थी । अच्छा अच्छा बस भी करूँ बेचारे का पहला दिन क्यों परेशान कर रही हूँ इसका लंच बॉक्स तैयार किया की नहीं वो तो वो तो मैं मैं तो भूल ही गई । ऍम नहीं पडा है अभी लाती हूँ ये कहकर को समझता किचन की तरफ तौर पडती है । विमल किशोर कुछ आगे बढते हैं अपनी जेब में हाथ डालते हुए कुछ निकालते हुए अजय की सीट में रखते हैं । रिफाइन इस की क्या जरूरत है मेरे पास अभी पडा हुआ है । अजय ने अपनी जेब में देखा तो दो हजार के दो नोट पडे थे ऍम अल ने उसकी जेब में डाले थे । मुझे वैसे भी जरूरत होती तो आपसे मांग ले लेता हूँ । मुझे पता है लेकिन तेरी आज से जिम्मेदारियाँ बढ गई हैं इसलिए जिंदगी को जीना भी जी को ये कहते हुए फिर मलने अजय की पीठ थपथपाई अगर ज्यादा हो रहे हैं तो मुझे दे दो । ऍम बहुत साथ में लेकर वहीं खडी थी और ये कहकर हंस पडी अच्छा भैया मुझे देर हो रही है अब मुझे चलना चाहिए । जहाँ पढाते हुए अपनी भाभी के हाथ से लंच बॉक्स रखते हुए कहा तो मैं बाइक से पानी की तंगी तक छोड देता हूँ । वहाँ से फिर ऑटो ले लेना । ऍम करते हुए उस को बाइक पर बैठाकर पानी की टंकी तक छोड दिया । अगले पैंतालीस मिनट में ही आ जाए । पूछते कुछ आते हुए बडी सी बिल्डिंग के सामने था । बिल्डिंग के सबसे ऊपर जगदीश मेमोरियल हॉस्पिटल लाल सुर्ख रंग से अंकित था । चेहरे पर मुस्कान । ये वो उस अस्पताल के अंदर दाखिल हुआ । एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में अपनी रिपोर्टिंग शिवानी रॉय को करते हुए उसे उसके कार्यों का डिफरेंट दिया गया । दो हफ्ते में ही बहुत में काम में अब हो चुका था । जैसे मानो इस अस्पताल कोई पुराना कर्मचारी हूँ । ॅ और उसी अस्पताल की डाइटीशियन रुपानी चक्रवर्ती से अच्छी खासी दोस्ती हो गई थी । अब अजय के पास जॉब के साथ साथ कुछ महिला मित्र भी हो गई थी । इस नौकरी के साथ उसकी सकते कि का सूनापन भी कहीं कोसो दूर चला गया था । अच्छा खासा समय गुजर रहा था । एक दिन अचानक शाॅप बुलाया । कुछ नहीं बोलो मुझे क्या ऍम एक्चुली अजय कल से एक महीने तक तुम्हारी नाइट शिफ्ट होगी । शिवानी ने अजय की तरफ मासूम है । उधर इस पर में कहा उन नौशेरवानी ऍम सौरिया जाए ऍम चलो ठीक गया । पैसे भी अब एक ही महीना बचा है ट्रेनिंग वैसे टाइमिंग क्या होगा सात आठ बजे से सुबह आठ बजे की शिफ्ट होगी । शॅर्ट करते हुए कहा अजय ने उस पर अपने दस्तखत की और एक प्रतिशत पानी को और एक प्रति अपने पास रखते हुए वो लडका कर वापस चला गया । अगले शाम ठीक आठ बजे अजय तय वक्त पर अस्पताल आ गया । नमस्कार चाहता हूँ आप? अजय बाबू है क्या? लेकिन तुम कौन हो सब मैं अस्पताल का कार्ड हो लेकिन तो मैं पिछले पांच महीनों से तो देखा नहीं साहब मेरी हमेशा नाइट ड्यूटि ही होती है दिन में मैं अपनी दुकान में रहता हूँ वो तभी इतने लंबे वक्त के बाद आज मुलाकात होगी । हूँ जी साहब, लेकिन अब क्या? वो लोग कुछ नहीं सब अभी आप नहीं आए वो छोडो मस्त पर आपको खुद पता चल जाएगा क्या पता चल जाएगा खुल के बोलो तुम क्या कहना चाहती हूँ ही मिल जाए यहाँ ऍम सी अजय की बात को बीच में काटते हुए ऍम स्टेशन में आए रंजन चतुर्वेदी ने कहा अजय भागता हुआ इसी में दाखिल हुआ । वहां बैठ नंबर तीन सौ तेरह में भर्ती हुए मरीज की इसी मशीन काम नहीं कर रही थी । कॅश करने के बाद उस ने राहत की सांस ली । कुछ देर बाद ही रंजन की कॉल हो जाए हूँ । अमित आईसीओ ऍम और हम कमिंग ये कहकर अजय ग्राउंड फ्लोर पर एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में चला जाता है ऍम अवैध डाॅॅ ऍम ऍम । अजय ने संशय भरी नजर में रंजन की तरफ कहा नाॅक स्कूल इसलिए मैंने आपको यहाँ कुछ बताने के लिए बुलाया है । बताइए अप्रैल ऍम नहीं नहीं मैं बिल्कुल ठीक हूँ । ऐसा होगा तो मैं बता दूँ आप समझे नहीं । मैं ये कहना चाह रहा हूँ कि आप हॉस्पिटल की सारी मशीने ठीक है और नाइट शिफ्ट में उतना कोई काम होता नहीं है । इसलिए आपको पैसा लिया तो मिला हुआ है । तो फिर फ्लोर पर है बाहर ओम नम्बर फाइव जीरो नाइन है जहाँ प्रेस कर सकते हो । जब नाईट शिफ्ट हो गए आपके ऍम अच् फॅमिली मुझे रात में काम करने कि आदत नहीं है । चलिए अच्छा हुआ यहाँ एक रूम मेरे लिए स्पेशल ये कहकर हजाने धीमी मुस्कान के साथ अपने कदम लेफ्ट की तरफ कर दी है । साहब रात को लिख के कनेक्शन काट होते हैं इसलिए आपको सीढी से ही जाना होगा । लेफ्ट के पास खडे ऍम ऍम ये कहकर अजय सीढियों से पांचवीं मंजिल की तरफ बढ चला । जैसे ही वह चौथे मंजिल पर पहुंचा उसने देखा कि सारा फ्लोर एकदम संस्थान पडा था । चारों तरफ नीरव अंधेरा पसरा हुआ था । उसने देखा तो वहाँ से आगे का रास्ता पता नहीं लग रहा था । अजय ऍम की और पांचवी मंजिल की तरफ बढ चला । जैसे पांचवी मंजिल पर पहुंचा तो उसने राहत की सांस ली । हो रहा है कमरा नंबर पांच सौ कहते ही उसने अपनी जेब से चाबी निकाल के की होल में लगाकर दरवाजा खोल दिया । अंदर एक टेबल और उसके साथ दो आरामदायक कुर्सी थी । वहाँ से थोडी दूरी पर एक बैग भी लगा हुआ था । दरवाजे को बंद करने के बाद कुर्सी पर आकर फैल गया हूँ । दोनों हाथों को ऊपर उठाते हुए अंगडाइयां देने के बाद सारी अंगुलियों को चटकाया और जूते को खोलने के बाद पेट पर जाकर पड गया तो फॅमिली मजा तो पैक पर ही है । ये कहने के बाद बच्चा सही बैठकर लेट ने को होता है । तभी दरवाजे पर काट काट के शोर के साथ किसी की तस्वीर होती हैं । इस वक्त कौन हो सकता है? नहीं घर से कोई मशीन तो खराब नहीं हो गई । ये बडबडाते हुए अजय दरवाजा खुलता है लेकिन किसी को ना पाकर बडा अचरज करता है । कमाल है । हो सकता है ना इतनी रात का ही मजाक कर रहा है तो वहाँ पर जाकर बैठ पर जैसे बैठने को होता है इससे वही दस तक होती है । ऍसे की तरह लगता है और झट से दरवाजे को खोल राॅकी खुलता ही बोलता है सर तो शोर ना कीजिए । आपकी वजह से नीचे वाले फ्लोर पर मरीज को परेशानी हो रही है । लेकिन मैंने कब शोर किया तो चुपचाप अपनी ब्लॅक चेयर पर बैठा था । अजय खींच कर खोला और अपनी कुर्सी की तरफ इशारा किया । जब वापस पलट कर देखता है तो वहाँ कोई मौजूद नहीं था कि देख कर थोडा छीन सकता है । अगले पल खुद से ही बडबडा ऍम इतनी जल्दी कहाँ चला गया । शायद वापस जाने की चलती हूँ चल अब बैठकर आराम किया जाए । अजय अगली सुबह सात बजे उठता है तो उससे बडा अच्छा होता है । जिस कमरे में बस हो गया था उस कमरे के दरवाजे की कुंडी खोली है और दरवाजे के दोनों पहले भी बाहर की तरफ खुले हुए गए ऍम लाॅट करके जल्दबाजी में दरवाजे की कुंडी ही लगना भूल गया । हम चलने की वजह से दरवाजे के पहले भी खुल गए होंगे तो झटपट अपनी जगह से उठा और आईसीओ और अन्य जगह है कि मशीन के अपडेट्स लेते हुए आठ बजे इंद्रपुरी निकल जाता है । उस दिन भी आ जाता है । वक्त पर ठीक रात आठ बजे अस्पताल पहुंचाता है और जरूरी निरीक्षण करने के पश्चात तोर पर जाने लगता है । कुछ ऐसी फोर्थ फ्लोर पर पहुंचता फिर से वही सन्नाटा पसरा हुआ देखता है तो जैसे मोबाइल से फ्लैशलाइट ऑन करता है । अगले क्षण में मोबाइल आप हो जाता है को आज जल्दबाजी में मोबाइल जांच करना ही भूल गया । अब मुझे अंधेरे में अंदाजा लगाकर ऊपर तक जाना होगा । उस की टाइगर अजय दीवार के सहारे ही आगे बढने की कोशिश करने लगा । अभी कुछ ही देर चला था कि उसे कुछ बहुत तेज बदबू आई । ऐसी तीक्षण पदमपूर जैसे कि वो आॅथोरिटी करते हैं । मैंने खुद को संभालते हुए अपने कदम वापस मूर्ति अभी कुछ दूर चला ही था कि उसको ऐसा ऐसा हुआ जिसे उसके पीछे को चला रहा हूँ । तो जैसे जैसे अपने कदम बढाता तो दूसरे कदम को पैसे वैसे अपने करीब आता महसूस कर रहा हूँ । आप हजार कदम फोन सौ से थोडा कर रहा था । जाना का जाने, अपनी रफ्तार पढाई और भाग के वापस पीछे ठण्ड फ्लोर पर आ गया । उसमें थोडी तेज वहाँ बताने के बाद सोचा कि उसके मन का कोई बहन होगा । कुछ देर खुद को सामान्य करने के बाद ऊपर की तरफ पर चलता हूँ । वो जैसे ही फोर्थ फ्लोर पर आता है तो देखता है कि सीधी पर मध्यम होश में पता चलता है । खुश होकर आगे पडता है और अपने कमरे में आकर कुर्सी पर बैठ जाता है । कुछ देर नहीं बैठने के बाद वो फटाफट अपने जूते खोलता है । पहला जूता खोल कर वो होने की तरफ देखता है । तभी उसे कल की घटना याद आ जाती है । कल उसकी हरकत से नीचे मरीजों को परेशानी झेलनी पड गई थी । उसमें इस बार संभालकर दूसरा जूता खुला और आराम से जाकर कोने में बिना आवाज के ही रखती है । अभी मैं देखा तो ठीक दस बजे का वक्त हो रहा था तो आपने बैठ पर जाकर लेकर अचानक तरफ से पर दस तक होती है । आपकी आवाज से उसकी नींद खुल जाती है तो जल्दी से जाकर दरवाजा खोल देता है । ठीक है आज भी कोई नहीं क्या मजाक बना कर रखा हुआ है या जो भी है आज छोडना नहीं है । ये कहते हुए हो । चल चलाते हुए ताई बच्चों से पानी छोड तक सोच निरीक्षण करके आ गया लेकिन वहाँ अर्तगत कोई भी नहीं देखा था । कार कर अपने बैठ बढाकर पसर गया । जैसे ही वो बिस्तर पर लेटकर आंखे बंद करता है उस दिन अपनी दस्तक में फिर से अजय की नींद में खलल डालती है ।

भूतों का अस्पताल -02

भूतों का अस्पताल भाग दो दस बार गुस्से से तिलमिलाया हुआ हजार दरवाजे की तरफ पडता है और अगले ही पल झट से दरवाजा खोल देता है । जैसे ही वो दरवाजा खोलता है यह देखकर अब आप रह जाता है कि सामने एक मरीज अपने हाथों में बॅाबी खडा है । अजय को देखते ही पोल पडता है साहब आप जल्दी से दूसरा जूता शांति से रखिए, फॅस हो रही है बाकी के मरीजों को लंबी लेनी लेनी है । वो तो कब का मैंने कोने में रख दिया । वो देखो कोने में पडा हुआ है लेकिन तुम लोगों को मेरे छोटे से क्या प्रॉब्लम हो? कोने में पडे अपने जो तो को दिखाते हुए वो जैसे उस मरीज की तरफ फंडा उसकी सिट्टी पिट्टी गुम हो गए । वहाँ कोई था ही नहीं । आखिर ये अस्पताल है या कोई नमूना? अपनी बात बोल कर सब अचानक कहाँ पर शुक जाते हैं? पहली बार फल कौन है जो दरवाजा खटखटाकर भाग जाता है? कभी नहीं । हर पाला मेरे जूते रखने से इतनी डिस्टर्बेंस कैसे हो सकती है? हाँ, ये बंदा इतनी देर तक मेरे दूसरा जो नीचे रखने का इंतजार कर रहा था । ये कहकर अजय अपना दिमाग को जाने लगा । उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि उसे इस वक्त क्या प्रतिक्रिया देनी चाहिए । यही सब सोचता हुआ होगा । सुबह उसकी नींद खुली तो देखा की घडी में आठ बजे का वक्त हो चला है । अचानक उसकी नजर सामने की तरफ पडती है तो उथल की अपनी जगह पर बैठ जाता है । अरे बहुत है, ऐसा कैसे हो सकता है? मुझे अच्छी तरह याद है । कल रात मैंने दरवाजे में कुंडी और चेतावनी दोनों लगाई थी । फिर दरवाजा खुला रह सकते हैं । फॅमिली उसको नाम व्यक्ति की हरकत नहीं । काफी देर तक तो उस खुले डर फांसी को देखते हैं । वहीं बैठे यही सब सोचता रहा । तभी कडी पत्ता नजर पडी तो देखा की समाप्ति का वक्त हो जाता था । अच्छा देर हो गया । नहीं इतनी गहरी थी पता ही नहीं लगा । कुछ आप जल्दी से निरीक्षण करके निकलना चाहिए । ये कहकर अजय अपने काम में लग के आप साढे आठ तक वो अस्पताल से इंद्रपुरी के लिए निकल गया । ऐसा चलेगा तो कैसे काम चलेगा? आप कुछ बोलते क्यों नहीं कुसमलता तिलमिलाई हुई अंदाज से अपने पति से बोल दिया विभाग है पहले भी तो घर चल रहा था ना तो अचानक क्या हो गया है तो मैं कमल किशोर ने धीरज से कहा आप के कान पर जूं तक नहीं रेंगती । कितनी बार कहा है कि महंगाई बढ चुकी है । यहां चार लोगों का गुजारा बडी मुश्किल से चल रहा था की एक जनाब और आ गए । इस बार कर सफलता ने आक्रोश भरी निगाहों से देखते हुए बोला अरे खाद करती हूँ, कुछ तो शर्म करो कोई भला अपने छोटे भाई से भी पैसे मांगता है क्या? तो मैं नहीं जानती है यहाँ रहना तो बराबर खर्चा उठा नहीं होगा । अच्छा दरवाजे से बाहर खडा ये सब बडे ध्यान से सुन रहा था तो उछल मन से अंदर दाखिल होता है । अब तक फैलाई किनारे रखकर अपने कमरे की तरफ जाने लगता है । अरे देवर जी क्या हुआ कोई बात हो गयी के अस्पताल में अजय को जवाब नहीं देता है । आपको खामोशी रहता है । बोलिये न देवर जी कोई बात है तो बताइए आप मुझे अगले हफ्ते सैलरी मिल जाएगी तब आप ले लेना । ये कहकर अजय खामोश हो जाता है । अरे पागल हो गया कोई अपने देवर से पैसे लेता है क्या आपसे मैंने कभी मांगा है क्या? कुसुमलता अजय की तरफ तीनी और तभी मुस्कान के साथ बोली भी मैंने आप दोनों की बातें सुन ली थी । आपके भैया भी ऐसे ही है तो उनको समझा रही थी कि अजय तो अपना ही है लेकिन वही कह रहे थे कि अभी नहीं नहीं नौकरी लगी है । इतना बडा अमाउंट रखने में दिक्कत हो रही होगी तो छापे में रात तक जगह हूँ । अगर आप पुराने माने तो थोडी देर के लिए मुझे होने दीजिए । अजय को समझा था की बात को बीच में काटकर बोला हाँ क्यों नहीं आप थोडी देर आराम कर लो । तब तक मैं आपके लिए खाने का कुछ प्रबंध करते थे हूँ । कुसमलता मुझसे करते हुए वहाँ से पैर पटकते हुए बाहर निकल जाती है । अजन् शाम सात बजे अस्पताल के लिए निकल जाता है । ठीक पौने आठ बजे जब देश मेमोरियल हॉस्पिटल के अंदर जाने को होता है तो कोने में ही खडे गार्ड पर नजर पडती है । वो कार्ड अजीब से रहस्यमयी मुस्कान लिए उस की तरफ देखता है । अजय उसकी इस हरकत का कुछ अनुमान लगाए उससे पहले ही वो उसे नजरअंदाज कर के अन्दर की तरफ चला जाता है । हमेशा की तरह अस्पताल के सारे मशीनों की रिपोर्ट लेकर और कुछ मशीन को ठीक करने के बाद ऊपर कमरे में आराम करने की सोचते हैं । खडी पर नजर पडी तो देखा कि रात के ठीक एक बजे का वक्त हो रहा था । ज्यादा वर्क लोड होने की वजह से समय का बिल्कुल भी अहसास नहीं हो पाया । अब ऊपर कमरे में थोडी देर आराम कर लेना चाहिए । ये बडबडाते हुए वह ऊपर जाने लगा जैसे वो हमेशा की तरह चौथी मंजिल पर पहुंचा तो बनाया से बोल पडा फिर चौथी मंजिल का क्या माजरा है? यहाँ हमेशा नहीं रही क्यों रहता है? कल सुबह इसकी जानकारी लेता हूँ । ये बोलता हूँ अजय अपनी जेब से मोबाइल निकालकर ऍम कर लेता है । आज सावधानी से अपने जूते उतारने होंगे नहीं तो वो कहीं पिछले दिनों की तरह रहस्यमी इंसान ना आ जाए कि कहता हुआ वह मंद मंद मुस्कुराने लगा और जूतों को खोल के आराम से रखते हुए हो गया । लगभग तीन बजे अजय को प्रशाद था और वो टॉयलेट जाने की सोचता है । टॉयलेट उसके रूम नंबर पांच सौ के बिल्कुल सामने ही था तो जैसे उठने को होता है की उसे कुछ हलचल सुनाई देती है तो फटाफट दरवाजे के पास खडा हो जाता है । आज क्या होगा तो उसे छोडो नहीं आ जाए । आज उसकी खैर रहे तो एक बार कटता दरवाजा अजय मन ही मन बुदबुदाता हुआ अपने आपको हिम्मत देने की निरंतर कोशिश में लगा हुआ था । फांसी पर काट काट के दस तक होती है अगले ही पल अजय पूरे जोर से दरवाजे के कुंडे खोलने के बाद दरवाजे को पाल लगाकर खोलने का यत्न करता है । फॅमिली खोल रहा है । क्या हो गया इससे बाहर से दरवाजा बंद कर दिया है तो ऍम अल आज पता था तो जब ऍम लगा दी तो मेरा भी ऍम उससे मैं बिलबिलाया तो जोर से चीखते हुए दरवाजे पर लाख माता है लेकिन तरफ फाॅर्स नहीं होता है । थोडी देर तक पहुंच प्रयास करता है लेकिन उसे कोई कामयाबी नहीं मिलती हूँ । लगभग एक घंटे तक वो वही दरवाजे पर खडा रहता है । समय के साथ उसका प्रेशर पडता ही जाता है । अब ये दर्द असहनीय हो जाता हैं । फॅमिली है ना कहते ही ऐसा होता है की तरफ से पर कुंडी खुल चुकी है । लगभग दस दरवाजे को खोलता है और वहाँ से कोई भी मौजूद नहीं मिलेगा तो दौड करता ले करके वापस अपने कमरे में जा पहुंचता है । क्या यहाँ आ रहा है? क्या मैं आज पता करके ही रहूंगा होना हो उसका कनेक्शन चौदह लोग रहते हैं क्योंकि वो बंदा कह रहा था तो उस तरह से आवाज पाॅच हो रही थी । ऐसा करता हूँ आज जाकर मुआयना करके यादव ये कहता हुआ अजय मेजर चौथे फ्लोर पर जा पहुंचता है । यहाँ तो चारों ओर अंधेरा ही अंधेरा छाया हुआ है । मैच यहाँ की शिकायत के बिना नहीं रहूंगा । ये कहते हुए तो मोबाइल से प्रशांत को चालू कर आगे बढता है । मुश्किल से अभी कुछ कदम ही आगे पढा था जिससे किसी की मौजूदगी का ऐसा ही अपने कदम ही रोककर कोने में तो पक जाता है और अपने मोबाइल की रायॅल कर देता हैं । थोडी देर वहाँ कोने में छिपे रहने के बाद उस आवाज का पीछा करता हुआ तभी तो से आगे बढता है । आवाज का पीछा करते करते हैं तो किसी कमरे के बाहर था । उस कमरे की तरफ से के ऊपरी हिस्से में कांच लगे थे और उसके हिस्से से अंदर का प्रकार बाहर आ रहा था । वो उस दरवाजे के ऊपर वाले हिस्से से अंतर का जायजा लेने लगा । ऍम सामने का नजारा देखकर उसके होश पर जाते हैं । उसका मुंह खुला का खुला रह जाता है तो पसीने से तरबतर हो जाता है और खडे खडे अपनी जगह पर आपने लग जाता है । ऍम किस किसान के तो सिर्फ ही नहीं कितना दे रहे नहीं ये इसके सर को अलग करके उसके जिस्म को क्यों पड रहा है फॅार काफी वक्त देखते ही रह जाता है । अंदर कमरे में किसी इंसान का जिसमें लगाया हुआ था जिसका सर उसके जिस्म के बाजू में ही रखा हुआ था । ऍम को बेरहमी के साथ किसी था बिहार से चीज ने में लगा हुआ हूँ । अजय के कदम उस जगह पर चल रहे हैं जिस व्यक्ति का पोस्टमार्टम हो रहा था । अचानक मुकुट कर बैठ गया और अपने पास को उठाते हुए अजय की तरफ इशारा करता है । आप का सिलसिला यहीं नहीं थमा । जो व्यक्ति धारदार हथियारों से पोस्टमार्टम कर रहा था वो धीरे धीरे अजय की तरफ पडने लगा । यह देखकर अजय वहाँ से भागना तो दूर उसके मुँह अच्छी कभी नहीं निकल रही है । अचानक दरवाजा खुला होगा जब उसे देखते ही गिर पडा उस शख्स ने अजय की अपना पकडे और पोस्टमार्टम वाले कमरे में घसीटने कर ले जाने लगा । अजय चाहकर भी ना वो चीज पढा रहा था । अपना ही उस प्रकार से खुद को मुक्त करवा पा रहा था । किसी ने उस पर कहना चाहते कर दिया हूँ और उसकी शक्तियों को अपने नियंत्रण में कर लिया हूँ । अगले ही चला जाए । अब वहाँ लेटा हुआ था जहां कुछ देर पहले वो शख्स पढा हुआ था जिस के घर से सिर्फ अलग करके पोस्टमार्टम का काम जारी था । जिस शख्स ने अजय को एक ही हाथ से पकडकर लेकर आया था उसने दूसरे हाथ से धारदार हथियार चला हुआ था । बजाय के चेहरे पर खौफ साफ तौर पर देखा जा सकता है । उसके मजबूर होने के सबूत उसकी आंखों से पानी बहकर निकल रहे थे । अच्छा मन ही मन सुना कोटी देवी नेताओं को क्षण भर में याद कर लिया । आपको मन ही मन तय कर चुका था की ये उसका आखिरी पल है । तो उस शख्स ने पूरे तुमसे हथियारों पर उठाया था कि अजय की आंखों के सामने अंधेरा छा गया और बहुत बेहोश हो गया । कट्टा नहीं चाहिए । आप कैसा महसूस कर रहे हो? मुझे क्या हुआ है? मैं यहाँ कैसे भाॅति लेटे रहो । तुम कल फोर्थ फ्लोर पर बेहोश मिले थे । बहुत शुक्र है कि तुम्हें ढूंढते ढूंढते उस जगह पहुंच गए नहीं तो सुबह तक नहीं पडे रहते हैं । अच्छा उसे अस्पताल में भर्ती था । थोडी देर में उसके भैया और भारतीयों से वापस लेकर घर चले जाते हैं । जब घर में सोया हुआ था । ये सब तो भारी वजह से हुआ है । तुम ने उस पर ऍम में चला गया जिसकी वजह से वो बेहोश हो गया तो बहुत सारी खामियां मुझे नजर आती है मैं तो उसके दुश्मन होना ये कहते हैं कुसुमलता पालक में लखकर होने लगती है तो इस बार मैं तुम्हारे आंसुओं के आगे निकलने वाला नहीं हूँ । अच्छा तो अभी आराम करने दो । इस तरह हंगामा मत खाना करूँ । फॅमिली लाल आंखों को दिखाते हुए बोला उसकी इस हरकत से कुछ ज्यादा छत की तरफ चल पडते हैं । लालकिशोर भी उसके पीछे पीछे चल पडता है । उसके पास को पकडते हुए बोलता है हम समझते क्यों नहीं तुम्हारे सभा मेरा खयाल रखने वाला और ऍम हमारे पाल एक यही तो बोलता हूँ समझने की कोशिश तो की अगर वो कभी कि सुनते ही हमला पिघल गई और विमल के पांचों में काफी तेज तक लिखते रहे । शाम ठीक साढे छह बजे अजय तैयार होकर अस्पताल की तरफ जाते रहते हैं । अरे तो जाने भी लग गए तो भाई तभी ठीक है क्या? तो मैंने लगता कि कम से कम एक दिन का रस लेना आवश्यक है । नहीं भैया मैंने पूरे दिन आराम किया । ऍम बोर हो गया । चिंता करने की कोई बात नहीं । मैं अब ऍम अच्छा । जैसे हमें ठीक लगे लेकिन अपना ख्याल रखना । थोडी देर के अंतराल के पश्चात अजय जगदीश मेमोरियल हॉस्पिटल पहुंच जाना हैं । आज उसके नजर उसका आपको तलाश रही थी तो आस पास कहीं नजर रहे था । पूछताछ वाले काउंटर से बहुत पता करता है तो पता चलता है कि कार्ड आज आया नहीं । अजय फिर अपने कामों में लग जाता है तो उसके साथ कोई अप्रिय घटना नहीं होती है से बडा अच्छा होता है । अगली सुबह इंद्रपुरी के लिए निकल जाता है । अगले शाम तय वक्त पर फिर अस्पताल की तरफ तो करता है उसके मन में बहुत से सवाल ऍम में लगे रहते हैं । उसको खयालों से बहुत दूर तक चला जाता है तो उसके मन में बहुत से सवाल हिलोरे मार रहे हैं साहब क्या हुआ आज उतरना नहीं वो अस्पताल आ गया मुझे पता ही नहीं लगा ये लोग किराया हूँ । अजय हडबडाया हुआ ऑटो से निकलता है और अस्पताल की तरफ देश कसमों से बढ जाता है । थोडी देर में ही वो अस्पताल के गेट के सामने था । उसने नजरे कुछ वाटर गार्ड की तरफ देखा तो कार्ड उसे देख कर कर रहा रहा था । हाँ जिसको यह देखकर अजीब लगता है पंद्रह ना चाहते हुए कार्ड की तरफ पडने लगा फॅार आते हुए अस्पताल के पिछले ऍम पडने लगा अच्छा जैसे जैसे गार्ड की तरफ पड रहा था गार्ड उससे दुगुनी गति से आगे चल रहा था । ऐसा लग रहा था कि जैसे अब बस बात नहीं वाला भाई कहाँ तक भागोगे आगे दीवार बंद है बेहतर होगा की अपनी जगह पर हूँ । सुनते ही कार्ड वहाँ खडा हो गया तब मैं कुछ नहीं जानता मुझे ऍम हैं मैंने अभी कुछ पूछा ही नहीं तो मैं पूछने से पहले कैसे पता लग गया तो मैं नहीं पता । अब मेरा यकीन पुख्ता हो गया है कि जिन घटनाओं ने मेरा दिमाग घुमा के रखा हुआ है उन सब घटनाओं का तुम सभी जरूर कोई सरोकार सुनते ही कार्ड का बडा गया और बोल साहब मैं सब फॅमिली क्या किसको बताना मत नहीं तो ये हम लोग के लिए अच्छा नहीं होगा और वो सब छोडो जो सचिन हूँ उसके बाद मैं फैसला करूंगा कि मुझे क्या करना है ।

भूतों का अस्पताल -03

बोतों का अस्पताल भाग तीन साहब ये बात बडी ही पुरानी है । हाँ जी भूत प्रेत की कहानियां को बचपन से हम अक्सर अपने दादा दादी, नाना नानी सब सुनते चले आ रहे हैं । पर साहब कंकडबाग के अस्पताल वाले भूत के बारे में दावा करते हैं कि एक किस्सा नहीं बल्कि सच्चाई किसी से समझ अनुसार कि आज परेशान होने पर काम में बच्चों को अस्पताल वाले पूछ सेटल आकर चुप कराते हैं । लोग भी कहते हैं कि यहाँ से ऐसी आवाज आती है गांव के लोगों के लिए रात काटना मुश्किल हो जाता है । किसी आज तक हिम्मत नहीं हुई । अस्पताल में जाकर देखे कि करहाने की खास ना कहाँ से कहाँ से आती है से ज्यादा उसकी बात किए हैं । ऍम आवास अस्पताल की चारदीवारी के बाहर के लोगों को भी सुनाई दे दिया पर अस्पताल के अंदर के लोगों को नहीं क्या बात करता हूँ? हाँ, फिर ये कैसे संभव हो सकता है तो ये सब मनगढंत पाते बताकर सच्चाई पर पडता था, लगाते हैं । अजय खींचता हुआ बोला साहब, जब तक आप पूरी कहानी नहीं सुन लेते तब तक आपको यही लगेगा । लेकिन मेरा यही मानना है ऍम काटने इस बार अपने दोनों हाथों को जोडते हुए हैं । अजय की तरफ देखते हुए कहा ठीक है, ठीक है तो आप की कहानी पूरी कर रहा हूँ साहब, आज अस्पताल के बहुत का सच्चा मैं आपके सामने लाकर रहूंगा । मैं यहाँ तकरीबन पिछले पंद्रह सालों से गार्ड की नौकरी कर रहा हूँ । इससे पहले मेरे पिताजी ने भी यही काम किया था । एक वक्त था जब भी अस्पताल ग्रामीणों को इलाज की सुविधा के लिए बना था । भर क्या पता था किस अस्पताल में सिंधु का नहीं मुझे तो कह रहा हूँ । जब कल बात आप खुश मिले थे तब मैं अपने पिताजी से मिलने गया था क्योंकि नहीं पास के दूसरे गांव में ही रहते हैं । उन्हें मैंने कल रात वाली सारी घटना के बारे में बताया तो उन्होंने बहुत अहम जानकारी दी । जैसे सुनते ही मेरा सिर रखा गया । उन्होंने कहा पिता हूँ । बात पुश्तों की है । जब काम में रहने वाले तो पट्टीदारों के बीच आपसी लडाई हुई तो एक की मौत इलाज के अभाव में हो गए । इसके कुछ दिनों बाद गांव में उन्हें किसी स्थान पर बैठे देखे जाने की बातें कही जाने लगे । कहा जाता है कि वो किसी से कुछ बोलते नहीं बचाओ बचाओ की आवाज से जरूर आती है किसी की हिम्मत नहीं होती कि वहाँ आ जाता है । इस घटना के कुछ दिन बाद उनका पडोसी जिसने झगडा किया था वो भी काम छोड कर भाग गया हूँ और उसके परिवार का आज तक पता नहीं जाने कहाँ चले गए । उसके पास से जिनकी मौत हुई है तो कभी यहाँ याॅर्क के आसपास की दिखाई पडने लगा कि सुनते ही बोला क्या बात कर रहा हूँ जबकि सरकारी चिकित्सा केंद्र था तो फिर इसका नाम देश मेमोरियल हॉस्पिटल क्यों है? काटने धीरे से अजय की बातों को सुनने के बाद कहा आप जब उन्हें सुपर वापसी में है यह था उपकेंद्र बनकर तैयार हुआ तो कुछ दिन बाद ही टूटने फूटने की आवाजे आने लगे । कुछ दिन तो लोगों ने नजर अंदाज किया बाद में ये पडता गया हूँ । यहाँ अजीब अजीब सी घटनाएं होती चली गई । यहाँ तक बनाया गया कि जब अस्पताल के डॉक्टर चले जाते हैं तो हाथ में अस्पताल का दरवाजा अपने हाथ खुल जाता है । कुछ दिनों तक ऐसा लगा कि लापरवाही से डॉक्टर से खुला रह गया होगा । तब थोडे दिनों बाद जभी घटना सही लगने लगे तो रात के समय तेज होने की आवाज भी सुनाई पडने लगी । अस्पताल के डॉक्टर भी परेशान हो गए । हम मरीजों के साथ साथ है अजीबो गरीब घटना होने लगी है । जिस मरीज के इलाज के दौरान यहाँ हो जाती थी और आपको यहीं पटकते हुए दिखाई देने लगता था । जिससे उस जगह का नाम और पदनाम होने लगा था । गांव के कुछ बुद्धिजीवी वर्ग वाले लोगों ने इसकी शिकायत है बडे अफसरों को करती हूँ और इस अस्पताल के सूरतेहाल से अवगत कराते हुए बताया कि जब से की अस्पताल पढना है बंद ही चलता है हस्पताल देखने में नया जैसा लगता है अंदर सारे मेडिकल उपकरण बेकार पडे हैं । काम के लोगों ने अधिकारी के सामने दावा किया किन सामानों से खुद का इलाज होता है । उस अधिकारी को भी इस अस्पताल की हकीकत का पता ना इसलिए उसमें तत्काल ही जांच की ऑर्डर दे दी है । कुछ दिनों बाद ही अस्पताल की जांच करने के लिए टीम गठित की गई है । बोतल कुछ ही दिनों में संकट बाद में स्थित इस अस्पताल में जांच करने को आएगा । उस जांच दल ने काम के प्रधान से अस्पताल के बारे में हाल लेना चाहता हूँ । ग्राम प्रधान बनने बताते हैं यहाँ पर खास का आलम यह है कि वर्तमान में तैनात मेडिकल विभाग की एडवाइस यहाँ कभी नहीं आती है । प्रधान की बातें सुनने के पास जाँच पडताल की है तो अस्पताल की बिल्डिंग के आस पास । यहाँ तक कि दरवाजे के पास लोगों के मल मूत्र फैले हुए थे । वहाँ जाना भी कठिन था । गंदगी के चलते हैं उपकेंद्र पर तैनात मिडवाइफ गांव में तो आती है, अस्पताल नहीं जाती है क्योंकि लोग कहते हैं कि वहाँ बहुत रहता है । आपकी पडती लहर की वजह से सरकार ने फैसला लिया कि अस्पताल बंद कर दिया जाए । अगले दिन वो अस्पताल सीट करके बंद कर दिया गया । अंक करता, काम में बना ये सरकारी स्वास्थ्य केंद्र अस्पताल काफी वक्त तक खंडर की तरह खडा रहा । उस वक्त यहाँ का मंजर की झाडियों और खंडर के चलते डरावना लगता था । दिन में भी लोग इस रास्ते से कुछ अपने से डरते हैं । खडी गाडियों के बावजूद कितना रास्ता साफ दिखता है जैसे अभी किसी नहीं किया हूँ । जबकि बताते हैं कि वहाँ सफाई नहीं होती । कुछ चालू बाटी और में जाने माने उद्योगपति तो लिखा बात करेंगे जगह सरकारी दाम में रिलीज पर लेकर जहाँ नए तरीके से और आधुनिक उपकरण का इस्तेमाल करते हुए अपने बेटे जगदेश के नाम पर इसको जगदीश मेमोरियल हॉस्पिटल के नाम से एक प्राइवेट हॉस्पिटल खोल दिया । अस्पताल खोलने के ढाई सालों तक तो बहुत ही बढिया चल रहा था । अचानक यहाँ ऐसी गतिविधियां हुई जिसकी वजह से आज पेस्ट अस्पताल का नाम बदनाम है कि सुनते क्या जाने अपना धीरज खो दिया और पोल पडा आखिर ऐसा क्या हुआ? क्या फिर से यहाँ पर यात्राओं का वास हो गया? काटने सुनने के बाद कहा साहब, यहाँ जो मरीज अपने आखिरी चरण में होते हैं, होते थे, जिनकी मौत होने वाली होती थी, उस व्यक्ति को पोस्टमार्टम वाले कमरे में ले जाते थे और बाहर ले जाकर उस चीज के कितनी फ्लेवर को निकाल लेते थे । आपको ये जानकर ताज्जुब होगा कि वह पोस्टमार्टम रूम आज भी इस अस्पताल के चौथे मंजिल में है । सुनते ही अजय का डर उस पर हावी हो गया और लडखडाती सवाल से बोला । और इसका मतलब जो मैंने कल रात देखा तो सच था वो सच में किसी इंसान की कितने निकाल रहे थे । चंद्र कागज के टुकडों के लिए इस तरह निर्मम हत्या करना कहाँ है? लोग यहाँ अपना इलाज करवाने आते हैं भरोसे से लेकिन यहाँ तो नहीं साहब तो कब देखा वो बिल्कुल सच नहीं था तो मैं कैसे कर सकती हूँ । मैंने अपनी आंखों से देखा है । मैं जानता हूँ कि वह भयंकर मंजर आपने बहुत करीब से देखा है । लेकिन इसके पीछे की सच्चाई कुछ और है जो उस दिन आपने देखा था । वो घटना सारा साल पहले करती थी । काफी लोगों ने उसी घटना को बार बार देखा है । अजय यह सुनते ही आंखें भारतीय फाडकर देखने लगा और कहता है क्या बारह साल पहले गठित हुई थी वो घटना लेकिन कल जब देखा तो ऐसा लग रहा था कि सब कुछ इससे सच ही होगा । का बोला साहब, यहाँ आपसे पहले भी एक बायोमेडिकल इंजीनियर आया था । उसके साथ भी ऐसे ही अजीब घटनाएं घटित हुई । वो एक दिन कहीं अचानक ड्यूटी करता हुआ गायब हो गया । कुछ दिन बाद ही उसी पोस्टमार्टम वाले कमरे से उसकी लाश को बरामद किया । उसका शरीर को भी उसी तरह जीरा भाडा गया था । उसको तो पहचानना भी मुश्किल हो रहा था । तब ये फिर कैसे कह सकते हो कि वो व्यक्ति वही था कहाँ साहब उसके कुछ पहचान चेन्नई और सर ओदी जांच से पता लगा कि वही शख्स था तो आपकी किस्मत इतनी बुलंद है कि आप अच्छे हो तो माॅक बहुत ही तरफ अपनी जगह है । मैं इसे अपने मन का पहन मानने की बहुत बडी भूल कर रहा था । लेकिन जब इतने सालों से ये सब चीज घटनाएँ हो रहे हैं तो तुम उसको छोड के क्यों नहीं? हाँ साहब मैं बहुत गरीब परिवार से ताल्लुकात रखता हूँ । मेरी तो बेटियाँ है जिनकी शादी करवानी है । बजह मुझे ये सब इससे पहले क्यों नहीं बताया? हमें नहीं लगता कि है तो मुझे पहले बताया होता तो भाजपा खुद को सुरक्षित रख पाता । गार्ड ने का अच्छा ये बात मैंने आपसे पहले काम करने आई इंजीनियर को भी बताई थी, लेकिन उन्होंने मेरा मजाक बनाते हुए एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में शिकायत कर देते हैं कि मैं उन्हें डराने की कोशिश कर रहा हूँ । अस्पताल से मुझे आखिरी चेतावनी दे देते कि अगली बार अगर मैंने इस अस्पताल की कोई भी प्राइवेसी या कोई ऐसी हरकत करता पाया जाऊंगा जिससे अस्पताल का नाम खराब होगा तो मुझे नौकरी से फौरन निकाल देंगे । साथ ही मानहानि का केस भी करते हैं । मैं गरीब आदमी साहब नौकरी से निकाले जाने के लिए उतना आहत नहीं होता । लेकिन कोर्ट कचहरी में लोगों की चाय दाबिक देखिए इसीलिए मैं सहम गया । अक्षमा मांग ले लेकिन मैं क्या करूँ? मैं तो हूँ जहाँ भी नौकरी नहीं छोड सकता हूँ । बहुत मुश्किल से मुझे ये नौकरी मिल गया । वो भी ऐसी जगह जहां से भैया भाभी का घर भी नजदीक पडता है । कुछ नहीं आ रहा है तो अब मुझे क्या करना चाहिए काटने का साहब मेरी मानो तो आप कहीं और नौकरी देख लो । जिंदगी रही तलाख हो गया । अजय के हाथ में एक लाइट था और पोस्ट ने एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट आॅफ रंजन चतुर्वेदी को थमा दिया । लेटर पडने के पास रजन बोला ऍम ऍम ट्रेनिंग पीरियड ऍम आज उच्चतम नहीं ऍम । अजय की यह आखिरी बातचीत है जो उस वक्त रंजन से हुई थी । उसके बाद वो नौकरी छोडकर वापस अपने भैया भाभी के पास इंद्रपुरी के लिए निकल पडता है । चेहरे के हाव भाव से तो साफ पता चलता है कि वो नौकरी को पानी में उतना प्रफुल्लित नहीं था जितना आज उसका त्याग करने का । लेकिन दिल की दल में बहुत से परिस्थितियों का सामना करता हुआ सडक परकोटों के लिए पे धडक पडता चला जा रहा था तो इसी उधेडबुन में चला जा रहा था । उसको सारा सभी नहीं हुआ कि वो मेन रोड के बीचोंबीच चौराहे पर जा पहुंचा था । सामने से पट रखा रहा था जब तक हजार खुद को ट्रक से बचाने की कोशिश करता या तक ब्रेक मारकर अजय को बचाने की कोशिश करना तब हो जाऊँ । अगले बहुत तेज आवाज के साथ सडक के पास टकरा खर्चा करा था और उसके जस्ट और सर के आने किस से लखनऊ की धारा भूत पडी थी । अस्पताल नजदीक होने की वजह से स्थानीय लोगों ने फटाफट से अस्पताल पहुंचा दिया । अब ये कहना इतना आसान नहीं था क्या जाएगी चंद बच पाएगी या नहीं क्योंकि इतनी तेज टक्कर होने की वजह से किसी का भी पचना इतना आसान नहीं होता है । अजय कुछ हो जाता है तो अपनी फॅमिली को पाता है ऍम सोलह पूरे तीन दिन आईसीयू में रहने के बाद आपको हो जाता है फॅस होता है कि पेशेंट नहीं पता ऍम किया आपने बहुत को भी मानते थे । डॉक्टर ये कहकर बाहर चले जाते हैं । उनके पहाड जाते ही इस्तेमाल किशोर और कसम लगा की आंखों में आंसू आ जाते हैं । तुम से बातें करो में अभी डॉक्टर से फॅस के बारे में पूछ कर आता हूँ । ये कहकर कमल किशोर डॉक्टर के पीछे जा पडते हैं । थोडी देर में मायूस शकल लेकर हो जाएंगे । बात आती है उन्होंने इस हालत में देखकर को समझता बोलती है । क्या हुआ आपका मूड मिनट का हुआ है । डॉक्टर ने क्या का ऍम? डॉक्टर का कहना है ऐसे बहुत गहरी चोट आई है जिसकी वजह से बहुत सारे ऑपरेशन करने होंगे तो सफलता क्या कहा ऑपरेशन करने होंगे । आपने ठीक से पूछा ना ऍम हाँ के बाद उनका कहना है कि टक्कर इतनी तेज हुई किसे गंभीर चोट आई है । इसके दाहिने पैर के घुटने की हड्डी चकनाचूर हो गई है । इस्काॅन बाएं हाथ की कलाई से लेकर रखने तक का ऑपरेशन करके तौर डाली जाएगी । इसके लिए कम से कम इस अस्पताल में से बीस दिनों तक तो रहना ही पडेगा । पता शुक्र है कि अस्पताल रही है जिसमें अपना जाएगा काम करता है इसलिए इसको फाइनल फिल्में ऍम सुनते हैं तो सुनता क्या ऍम आज उसे अपने छोटे देवर पर बहुत ही ज्यादा तरस आ रहा था । जाने जैसी अस्पताल का नाम सुना उसके तोते उड गए । उसके अचानक हार्ट पीठ पडने लगी । उसकी हालत को देखते ही बॅाक्सर के पास भागे भागे गए । उन्होंने अजय की तबियत अचानक खराब होने की बात कही तो फटाफट कुछ गडबड आ गए और कहने लगे हैं आप कृपया यहाँ से बाहर नहीं अब पेशेंट को फोर्थ फ्लोर पर ले जा रहे हैं । वहीं बाकी का ऑपरेशन होंगे और तीस दिनों तक वही शिफ्ट कर रहे हैं या आवाज कानों में पड रही अजय की हालत और ज्यादा खराब होती चली गई । उसके साथ एक और भी ऊपर नीचे होने लगे जैसे मानो उसने खुद का पोस्टमार्टम होते हुए देख लिया हूँ । जैसे ऍम लेकर जाने लगे तो चाहते जाते अजय ने को समझता का पल्लू पकड लिया । उससे जबरदस्ती हो रहा है । ऍम छोडा तो उसके आॅफ सुबह रहते जैसे देखकर मुझे लग रहा था कि मानो अच्छा कह रहा हूँ, मुझे यहाँ से ले चलो । नहीं तो ये मुलाकात आज आखिरी मुलाकात होने वाली है तो भाग के देखो कि उसके जस्ट बातों को समझने वाला कोई भी नहीं था । ऐसी विडंबना थी कि उसके साथ अब जो भी होने वाला था, अब उसका एकमात्र कमा वो खुद ही था । उसका अतीत के पन्नों में नहीं हो जाने वाला था ।

भूतहा गेस्ट हाउस

ऍम आधुनिक समय में पति जी भी वर्ग, पुरानी भूत प्रेत, आत्मा, पुनर्जन्म जैसी धारणाओं को हत्या करार देते हुए इस पर विश्वास करने वालों को अक्सर ऍम अंधविश्वास की ठहराते हैं तो कैसा हूँ? यही बुद्धिजीवी वर्ग आत्मा जैसी चीज पर हूँ । विश्वास करें अभी तो इससे भयभीत होकर आपने घटना देखते हैं । अगर आप शिमला में है और बात भूत प्रेत आत्माओं किया जाए तो ओल्ड सर्किट हाउस के आनी जिसका पुराना नाम ऍम था, उसका जिक्र सामान पर जरूर आ जाएगा । एक समय था जब शिमला में रहने वाले लोग आपको मनाली हाइवे ऍफ जाने से डरते थे । कारण ऍम खास बात यह है कि अॅान उस रास्ते पर ॅ शिमला को मनाली से जोडता है । बाद उन्नीस का तार किया । जब शिमला में वो आप ग्रुप कॉलेज के लाल बहादुर शास्त्री हॉस्टल में पडने वाले तीन दोस्त तो राहुल, मनोज और सुभाष के बीच शरद लगेंगे । फॅमिली के बारे में सोचने राहुल अब सुभाष की और देखते हुए पूछा नहीं बताओ क्या हुआ हूँ? राहुल ने चेहरे पर विस्मयकारी भारतीय पूछा हाँ तो छोटे ही खबर सुनी तो है । मैंने भी लेकिन तो बताता हूँ । सुभाष ने जिज्ञासु की भांति पूछा फॅमिली में पूरी रात अजीब अजीब से आ जाती ऍम भूतों का बसेरा ऍम दोनों की तरफ देखते हुए कहा क्या बकवास बात कर रहा है तो भूत होता नहीं होता है । इस तरह की बातें कमजोर मानसिकता वाले लोग करते हैं । कुछ करते हुए बोला भाई ये सही बोल रहा हूँ । मैंने खुद वहां स्थानीय लोगों के मुझे अजीब अजीब सी बातें तो नहीं आॅक्सी के बारे में भाई राहुल की तरफ देखते हुए कहा हम लोग कैसे बचकानी बातें कर रही हूँ? मैं दावे के साथ कह सकता हूँ । हाँ जरूर कोई गलत काम होता होगा । इसलिए लोगों के बीच आप फैलाकर अपने मंसूबों का काम दे रहे होंगे । राहुल है इस बात को जोश से कहा था । चलो लगे तो वहाँ एक रात हजार के देखा तो जो बोलेगा वो हम करेंगे । भाषणों से उकसाते हुए कहा ठीक है अगर मैंने पूरी रात महा बता दी तो तुम लोग पूरे एक साल तक मेरे कैंटीन का खर्चा उठा हो गया । बोला मंजूर है राहुल नहीं करने की शर्त रखे हैं । सुभाष मनोज की तरफ गंभीर रूप से देखने लगता जैसे उसके इजाजत लेना चाहता हूँ । हमें मंजूर है तो उन्होंने एक स्वर में ही बोला जैसे उन दोनों ने आपको या हमें बात कर ली हूँ । लेकिन तुम दोनों को मेरे साथ ॅ तक आना होगा तो लोकल के देखेंगे ना । क्या तो मैं वहाँ गया ही नहीं था । खुलने उन दोनों के समक्ष एक प्रस्ताव रख दिया । ठीक है हम दोनों भी तरह साथ ही चलेंगे तो अंदर भेजने के कुछ देर तक बाहर ही रुकेंगे । फिर हम वहाँ चले जाएंगे । सुभाष ने एकमत होकर कहा अगर या अंदर गया ही नहीं और थोडी देर में वापस आ गया तो हमें कैसे पता लगेगा । इस बात मनोज ने पूछा । ऐसा कर दो । अपने साथ ऍम को साधने के लिए कम्बल लेकर जाएगा । रॉयल काॅफी के अंदर जाते हैं । पहली मंजिल पर जाकर तौर को बार बार तीन दफा चला करे । शांत करेगा तो ऐसा करते हैं । इस बात की पुष्टि हो जाएगी और हम लोग तरह वापसी का सुबह तक इंतजार करेंगे । सुभाष ने पलक झपकते ही उपयोगी तक दे दिया । चलो हो रहे हैं अब तुम लोग मेरे साल भर दावत का खर्चा उठाने के लिए तैयार हो जाओ । राहुल ऍम पीठ पर थपकी देते हुए कहा तीनों ने रात को टॅाक लालबहादुर शास्त्री हॉस्टल से निकल पडे । सफेद रंग के कुर्ते पजामे में तीनों तो उसका विश्वविद्यालय से निकले और स्पोर्ट कॉलेज और पक्का पुल के रास्ते से होते हुए प्रेसिडेंसी पहुंचे । सात के करीब ग्यारह बजकर चालीस मिनट हुए थे । सन्नाटा छाया हुआ था । अधिक पक्की सडक पर महज एक दो एक के जो पुराने में चलने वाले तांगे नहीं होते थे । वो नजर आ रहे थे । थोडी देर में ही एक खाली तांगेवाला दिखा । रो रो भाई हमें भी ले चलो । मनोज सडक के बीचोंबीच आकर तांगे वाले को रोकने का सफल प्रयास कर रहे लगा कहाँ जाना है साहब बहुत देर हो गई है इसलिए मैं तो अपने घर जा रहा हूँ । आगे वाले ने खोले पर लगाम खींचते हुए कहा बस थोडी दूर जाना है । हम तीनों को रॉयल रेजीडेंसी के पास ही उतारकर चले जाना । आप ऍम तो यहाँ से डेढ मील की दूरी पर मुझे तो वहाँ से आधे मिल पहले ही डलहौजी लेक के पास जाना है । अरे इसके बदले मैं तुमको हम कुछ देख कराया दे देंगे । अब तक चल रहा हूँ । राहुल ने अपनी बात में वजन देते हुए कहा ठीक ऐसा हम आप लोगों पर बैठा हूँ । तीनों तांगे पर पीछे बैठ गए । अभी धागे पर बैठे ही थे कि अचानक थोडा बेकाबू हो गया हूँ । टांगे हवा में बार बार उछल नाॅक से उस पर प्रहार करने में लगा हुआ था । लेकिन थोडा तब से होने का नाम ही नहीं ले रहा था । चल रहे हैं क्या हो गया? तुझे चलने देर हो रही है । अब नखरे मत कर रही ये कहते हुए तांगे वाले ने फिर से आप एक से जोरदार प्रहार किया । इस बार थोडा थोडा आगे पडा लेकिन फिर खडा हो गया । अचानक से सोते सोते ही नहीं आने लगा । तांगेवाला नीचे उतारा और उसके गले को सहलाते हुए बोलता है क्या हुआ ऐसा क्या देख लिया जो जाने से मना कर रहे हैं? कुछ नहीं होगा होना चाहते । ऐसा कहते हुए वो वापस तांगे पर आकर अपनी जगह पर बैठ गया । उसके बैठते ही थोडा अप करके आगे बढने लगा । क्या हुआ तो इसको ये ऐसे काम कर रहा था मैं तो उसने तांगे वाले से पूछा जिसने अपना नाम हरया बताया था, कुछ नहीं था । इन जानवरों को पूर्वाभास होता है । कोई होने पहले ही उन्हें पता चल जाती है । हर या बोला कैसे पूर्वाग्रह की बात कर रहे हो? राहुल ने जाना चाहते अरे साहब पहाडों में तो ऐसा होना आम बात है । कहीं किसी तरह की आवाज से सामना होना तो आम बात होती है । क्या पता इसने वही देख लिया हो हर या अपने वाहनों से और उलझाता ही चला गया कहीं तुम्हारा हवा से मतलब किसी खातमा से तो नहीं? मनोज ने इस बार उस बात की गहराई में जाने का प्रयास किया । छोडिए साहब मेरे रहते कुछ नहीं होने वाला । ये बताइए इतनी रात गए आप लोग उधर कहाँ जा रहे हो? हरियाणे जानने का प्रयास किया । राहुल मुस्कुराते हुए बोला क्रिया हमलोग फॅमिली जा रहे हैं । ये सुनकर हरिया बोला हाँ वो तो आपने पहले ही बता दिया था लेकिन उस जगह पर किसके यहाँ जा रहे हो? राहुल बोला मैं आपको वही राॅड और ये लोग मुझे छोड कर वापस आ जाएंगे । और फिर मैं रात बिताने के बाद सुबह जाऊंगा ऍम हरियाणा ऍम सबके मंत्री निकालने के लिए ही तो जा रहा हूँ राहुल ने इस बार हसते हुए साहब बाहर आपको जो भी गया सुबह तलाशी बाहर आया है । हर या ये कहते हुए तांगे को रोक देता है । फिर क्या है वहाँ ऐसा जो सब के सब करते हो । उस जगह से कुछ लोगों की अफवाह को लोगों ने सच्चाई मानने की भूल कर दिया । ऍम खुलने कुछ पैसे का तो उसके बाद सुनने के बाद क्या बोला ये सच है कि किसी में इतनी हिम्मत नहीं है कि जो फॅमिली के अंदर राहत बता सके तो यहाँ अकेली रात बताना हर किसी के बस के बाद में आखिर ऐसी क्या बात है जो सभी वहाँ जाने से खौफ खाते हैं । इसके पीछे जरूर कोई ना कोई बात हो रही होगी । उसने सवाल था का वहाँ पे ऍम अंग्रेजों के समाने की बनी हुई प्रशाल और ऍम वहाँ विश्व देश के शाही मेहमान लोग रहते थे । वहाँ उनकी चमके सेवा की जाती थी ताकि हमेशा दिन रात सेवा के लिए उपलब्ध होती थी । मनोरंजन और सुख सुविधा के सारे इंतजाम रहते थे । एक दिन किसी अंग्रेज मेहमान की नजर की बेटी पर पडे जिसे दासी अपने साथ उसके लिए काम मांगने के लिए लेकर आई थी । उसकी बेटी सोलह साल की हरी पतन वाली को किसी के मन को पलभर में मोहित करने की क्षमता रखने जैसी जो बनाती चाहती हूँ की कमी की वजह से उस दिन से उसे भी कान पर रख लिया गया । उस रात कुछ विशेष अतिथि देश के बाहर से आए हुए थे । सभी खाते तैयारी में लगे हुए थे । उनमें से सबसे आज मेहमान थे । उनका नाम फॅमिली था । डिनर करने के बाद सभी अपने कक्ष में जाने लगे । उन्हें लडखडाता हुआ चलता देख मौसी की बेटी है जिसका नाम होता था सहारा दिया । मैंने सहारा देते हुए उनके शयन कक्ष तक छोडने चली जाती है । कहते हैं नशे की हालत में डूबे होने की वजह से ट्रॅवेल ने घुटने की आप ड्यूटी आपका कोशिशों के बावजूद भी कुछ देख अपत्तियां ब्रो को नहीं बचा पाई । सुबह उसी फॅमिली से कुछ देने हैं, छलांग लगाकर जान दे दी । उसकी मांग के सपना बर्दाश्त नहीं करता है । अगले दिन उसके बारें रात्रि के भोजन में जहर मिला दिया जिसकी वजह फॅमिली के सारे विशेष अतिथि मारे गए और आप इतिहास में सबसे पहले अक्सर में अंकित हो गए । लगभग एक सौ उनसठ लोगों की मौत से पूरा शिमला शोक में डूब गया था । कुछ टी की आपको के बदले एक सौ उनसठ बहुतों ने सबको हिलाकर रख दिया था । पिछले तत्काल ही घुटने की मांगों पांसी परघट का दिया गया फॅार भाग कब्रिस्तान में तब्दील हो चुका है । उस रात मारेगा एक्सॅन आया गया था । सभी कपडा पर एक पत्थर पडा है और पत्थरों पर मरने वाले का नाम अंकित है । कुछ वक्त के बाद ऐसा कहा जाता है कि खासकर अमावस्या की रात को बहुत हमेशा अजीब अजीब सी आवाजें आती हैं और जो भी व्यक्ति है उस जगह पर रात्रि को गया तो सिंधा लौट कर वापस नहीं आया । मुझे की बात है सरकार की आज की अमावस्या की रात है मेरी मानो तो वापस चलो, खुद आपको ठिकाने रख छोडना और एक भी रुपया बदले में नहीं होगा । हाँ सही रहते हो क्या? राहुल छोडिया पापा चलते हैं तो लेने के देने पड गए तो मनोज भैया की बात सुनने के बाद बोला जैसे पहले के राहुल कुछ बोलता सुभाष पुलपर राहुल सब तेरे बस की बात नहीं है । चलो हमारे साथ वापस चलने हम कुछ नहीं कहेंगे । सुभाष नहीं ये कहकर जले में नमक छिडकने का काम किया । ये सुनते राहुल तो चक्कर बोला कैसी बातें करते हैं मैं तुम सब कब हम तोडकर रहूंगा । बस कल सुबह तक रुक जाओ । मैं सबूत सहित आप लोगों के मन से अंधविश्वास की पत्ती और खोल दूंगा । राहुल ने जो इस प्रकार भाई तो प्रतिष्ठा में प्रमाण कब आएगा? मेरी बात मान तो वापस आ जा । इसके बाद मध्य मनोज में राहुल के हाथ को थामते हुए कहा । इससे पहले के राहुल कुछ कह पाता तांगे वाले ने कहा लो जी आपकी मंजिला गई ताकि समझाना मेरा काम था आगे आपकी मर्जी । मनोज ने तांगे वाले को उसका किराया कमाने के बाद उसको कुछ देर वही रुकने के लिए कहा ताकि मनोज सुभाष को उनके हॉस्टल तक छोड देंगे । तीनों दोस्त आॅक्सी के अंदर पहुंचे । उन दिनों रेसिडेंसी के चारों ओर ऍम टूटी हुई थी । कोई भी आसानी से अंदर जा सकता था । राहुल ने टॉर्च जलाकर चारों तरफ प्रकाश किया । उसके जहाँ भी नजर पड रही थी, ऊंचे ऊंचे कब्रिस्तान दिखाई पढाए थे जिसे देखने से ऐसा हो रहा था कि कम से कम दो सौ ढाई सौ वर्ष पुरानी होगी । कुछ कुछ है । अब टूटी हुई से प्रतीत हो रही थी । पुरानी होने की वजह से ऐसा होगा । तभी मनोज की नजर घडी पर पडती है और एक रात के बारा बज रहे हैं । मुझे लगता है हमें अब चलना चाहिए । ठीक है दोस्त हम चलते हैं । बाहर तांगेवाला भी इंतजार कर रहा होगा । सुबह मिलेंगे । सुभाष यह कहकर अपने दोस्त राहुल को सुनसान कब्रिस्तान में अकेला छोडकर मनोज के साथ फॅमिली से बाहर चले आया । बाहर आते हैं वो दोनों अन्दर की तरफ नजरें करा है । राहुल के इशारे का इंतजार करने लगे थोडी देर में ही ऊपर के तल पर हलचल हुई और राहुल ने टॉस से प्रकाश चलाया । लेकिन दो बार प्रकाश चलाने बुझाने के बाद ऍम बंद हो गए हो तो बात ही रोशनी करने के बाद कैसे बंद कर दिया? नहीं । मेरे देखने में गलती तो नहीं हो गई नहीं था । उसने दो ही बार प्रकाश ऍम थे । शायद वो जल्दबाजी में भूल गया होगा । संभालने जवाब दिया क्या अब हमें चलना चाहिए क्या? बहुत ठंड लग रही है तो बेहतर । मनोज सुभाष के साथ तांगे पर वापसी के लिए बैठ गया । अगली सुबह मनोज और सुभाष ऍम वक्त पर सुबह छह बजे पहुंचते हैं तो वहाँ पे देख कर सकते में आ जाते हैं । करीब जाने पर उन दोनों को वहीं हाथ पालक खाने वाला मिलता है । उन्हें देखते ही मुकदमा लेता है । दोनों के कुछ समझ में नहीं आता हूँ । आस पास लोगों से पता करने पर क्या हुआ कि एक लडका है । उसकी सफल लाश मिली है । उसकी जेब से एक आईडी मिली है जिसमें उसका नाम खुल होने की पुष्टि हुई है । सुबह पुलिस ने अंदर जाकर उसके वक्त इलाज को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए हॉस्पिटल साफ मना कर दिया । इतना सुनते ही उन दोनों के होश पाख्ता हो गए । अनजाने में ही सही उनसे बहुत बडा हो गया था । उन दोनों के लिए इस बात का विश्वास करना नामुमकिन सा हो रहा था तो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में पता चला कि युवक की मौत हार्ट अटैक से हुई है । हार्ट अटैक की बजाय वोटर बताया गया जिसका सामना भूत के साये में बहुत संभाल पाकिस्तान में नहीं कर पाया । इस घटना के बाद तो उन्होंने अपनी पढाई बीच में छोड दी और अपने घर हमेशा के लिए चले गए । बताते हैं कि रात को अक्सर जब तांगे वाले को देर हो जाती है तो राहुल ॅ के पास पीढी चलाने के लिए अच्छा होता है और टॉर्च को चलाते हुए अंदर ये कहते हुए चला जाता है की हर या कल सुबह दोनों दोस्तों के साथ मुझे लेने आ जाना

ड़ायन -01

डाॅ । कहते हैं कि भूत चुडैल से तो किसी ओझा पंडित से मिलकर पीछा छुडा सकते हैं लेकिन जिसके पीछे डायन पड जाए उसका कुछ नहीं हो सकता है । ये बात आज से पच्चीस वर्ष पहले क्या मेरा नाम राकेश पंडित है? अठारह साल की उम्र में ही पहुंच में भर्ती हो गया था । इंटरमीडिएट करने के बाद ही गांव में दोस्तों के साथ समूह बनाकर सुबह प्रमुख सूरत में एक गांव से दूसरे गांव तक दौड लगाते गांव में उस वक्त सुबह सुबह लॉन जब रस्सी कूद, दंड बैठक ये सपने पैकेट के हिस्से जैसे हो गए थे । शायद यही कारण रहा कि इंटरमीडियट के बाद फौज की भर्ती में पहली बार में ही फिर अच्छा हो गया था । वो जमाने में गांव के लगभग हर लडके की फौज की नौकरी पहली पसंद होती थी । मेरा चयन गढवाल राइफल्स में सूबेदार के पद पर हुआ था । ट्रेनिंग के बाद मेरी पहली नियुक्ति जम्मू में पठानकोट नामक जगह पर हुई थी । कुछ वक्त के बाद मेरी छुट्टी की अर्जी मंजूर हो गई थी और लगभग डेढ साल बाद में आपने गांव जाने वाला था । मेरे गांव का नाम नया काम है जो देहरादून रेलवे स्टेशन से सत्रह किलोमीटर की दूरी पर ग्रामीण क्षेत्र में पडता है । उस दिन मैंने अपना सामान पडा । बट क्या और अपने काम के लिए निकल पडा । मैं पठानकोट से दिल्ली ट्रेन आया । उसके बाद उसे शाम तक ठीक छह बजे दिल्ली से देहरादून के लिए मैंने बस पकडी । मैं ठीक रात सवा बारह बजे देहरादून बस स्टैंड पर पहुंच चुका था । इतनी रात को नया गांव जाने के लिए कोई भी बस किसी तरह की गाडी नहीं थी । गांव जाने के लिए सुबह साढे सात बजे पहली बस थी । मैंने अपने गांव पैदल ही जाने का निश्चय किया । कुछ आज भी बिलकुल ठीक ठीक है तो अक्टूबर का महीना था । साल का ये एक महीना ऐसा होता है जिसमें ना तो ठंड का अनुभव होता है नहीं करने का । मैं अपने काम की तरफ बढ चला हूँ । लगभग दो घंटे पैदल चलते चलते हैं । मैं छोटी गांव पहुंच गया । बहुत सालों से प्यास लगी थी । भुट्टी गांव में ही सडक किनारे कब्रस्तान था जिसके कैसे तरह से अंदर जाते ही हैंड था । मैंने अपने पिट्ठू बैग को नीचे उतारा और पानी पीने के लिए अंदर चला गया । मेरी नजर वहाँ कब्रस्तान में दफनाए हुए हैं । एक कमरे पर पडी खबरकी ताजी मिट्टी को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता था कि आज सुबह ही यहां किसी को दफनाया गया होगा । मेरे मन में विचार आया कि ये भी क्या जगह है । इंसान को मरने के बाद उसके अगले का दिखाती है । लोग पूरी जिंदगी इसी धोके में जीते हैं कि जहाँ जो कुछ भी है सब मेरा है । किसी ने सच ही कहा है कि खाली याद आए थे, खाली हाथ ही जाएंगे । लेकिन इंसान के मरने के बाद क्या होता होगा वो सच में अपना होती है क्योंकि मृत्यु के बातचीत को छोड कर जाती है या वो आत्माएं हमारे यहाँ तक करते ही मौजूद रहते हैं । अच्छा के पहुंचने की आवाज से मेरे विचारों की श्रृंखला टूटी पटना पानी पीने के लिए हैंड की तरह पर जैसे ही मैंने हैंडपंप के हफ्ते को अपनी हथेली पढकर नीचे की तरफ क्या हुई, इतनी इनकी आवाज करते हुए पानी आने लगा । ऍम की हालत हूँ जैसे हैं । पाकिस्तान के अंदर होने की वजह से स्थानीय लोग इसका उपयोग बहुत काम करते थे । अपनी प्यास बुझाते ही मैंने अपने पिट्ठू बैग को पीछे ज्यादा और अपने गांव की तरफ चल पडा । यहाँ से नया काम डेढ किलोमीटर ही दो छुट्टी गांव और नया गांव के बीच एक बडी से पुलिया पडती थी । दुनिया के उस तरफ नया गांव की सीमा लगती थी तो इस तरह से बुड्ढी का उनका क्षेत्र आरंभ हो जाता था । घडी में ठीक ढाई बज रहे हैं पर कोई भी नहीं रखा था । चारों तरफ अंधेरा पसरा हुआ हूँ । इस वक्त काम में कोई जंगली जानवर भी नहीं देख रहा हूँ । मैं जैसे पुल पर पहुंचता हूँ आपने मुझे कुछ हलचल सुनाई दे दिया । जब मेरी नजर सामने पडती है तो मैं अपनी जगह पर ही खडे खडा रह गया था । मैंने देखा सामने पीपल के पेड के नीचे जहाँ करते हैं जिनके जिस्म पर एक भी कपडा नहीं है, उस पीपल के पेड के नीचे भी चल रही है । एक औरत हाथ में किसी जानी खोपडी का कंकाल लेकर बैठी हुई है । अब बाकी के तीन पार्ट कुछ मंत्र पुत्तुर आते हुए उस भारत के कौन खोल चक्कर काट रही है । जब मैंने ध्यान देकर उन और उनको देखा तो तीन और तुम को तो बिल्कुल ही नहीं पहचान पाया । लेकिन चौथी औरत का चेहरा देखते हैं मेरे हो गए उस औरत को मैं पहचानता था तो मेरे बचपन के मित्र कुमार की धर्मपत्नी थे । मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था । मैंने आज तक अपनी जिंदगी में इस तरह की विचित्र स्थिति का सामना नहीं किया था । पाल को लगा कि ये मेरा बहन है लेकिन जैसे ही अपनी आंखों को मीचकर तुम्हारा देखने की कोशिश के तो वही नजर मेरे सामने था हूँ । वहीं पुल के ऊपर किसी कोने में दुबक कर ये सब देखने लगा कि आखिर महाजन क्या है । थोडी देर में जो भारत बैठी हुई थी वो अपनी जगह से उठी और दोनों हाथों को ऊपर कर चंद की तरफ देखते हुए अजीब अजीब सी आवाजें निकालने लगे । कुछ देर चंद की तरफ देखने के बाद तो लोग हाथों को उठाकर पीपल के पेड के उल्टे चक्कर यानि मामा वक्त दिशा में काट रहे । लगभग तीन चक्कर लगाने के बाद उसके साथ के तीनों औरतें भी उसी तरह अपने हाथों को उठाकर पीपल के चक्कर काटने लगी । मेरी समझ में बिल्कुल नहीं होता की तरह अपना होकर कौन चीज हो रही है । उनकी की अच्छी हरकते देखकर ये समझ में इतना तो आ रहा था कि ये जरूर अंतर साधना कर रही हैं । मैं उन लोगों की अच्छी तंत्र साधना में इतना हो गया कि मुझे ही नहीं रहा कि इन लोगों ने उस पीपल के पेड के कितने चक्कर काटे । फोन आॅस्ट्रिया बहुत ही अच्छे लग रहे हैं । मैं थोडी देर के लिए ना चाहते हुए भी अपनी ही हटा ली । इस तरह की घटना मैंने पहले कभी नहीं देखी थी । जब मैंने थोडी देर में तुम्हारा देखा तो अपने अपने कपडे पहनकर गांव की तरफ जाने लगी । मेरे अंदर इतना साहस नहीं ताकि मैं उनका पीछा कर । जब मैं तीन सरकारी पर पडी तो देखा सुबह के साढे तीन हो गए । मैंने तकरीबन चार बजे तक वहीं पुल पर बैठकर इंतजार किया । उसके बाद वहाँ से अपने काम की तरफ बढ गया । ठीक चार बजकर पैंतीस मिनट पर आपने कहाँ पहुंच गया था? मैंने सोचा कि बहुत दिन हो गए । अपने बचपन के मित्र कुमार से भी नहीं मिला । ब्रेक के घर का नाम है गुड्डू था अपने घर में और सभी परिचितों के बीच में गुड्डू के नाम से ही प्रचलित था । सुबह होकर मैं सबसे पहले गुड्डू के पास जाऊंगा और सारी सच्चाई उसके सामने रखता हूँ । मन में से भरने का विचार लेकर उसके घर की तरफ चल पडा । अपने घर से कुछ दूरी पर ही चला था कि मैंने देखा कि कुछ लोग किसी की लाश कंधे पर रखकर क्या कहते हैं । वही कोने में सहन कर खडा हो गया । जब थी वहाँ से चली गई । तब मैं कुड्डू के घर की तरफ चल पडा । थोडी देर में ही मैं कुट्टू के दरवाजे पर खडा था । ऍर के दरवाजे को ठीक लगाया । देखते ही मेरी आंखें फैल गई की खुद क्यूँकि घरवाली ने दरवाजा खोला तो मुस्कुराती हुई बोली अरे वाह! बहुत दिनों बाद दर्शन हुए । आपके आई है, अंदर आ जाइए । मैं मत नहीं जुटा पा रहा था कि उनसे कुछ कह सकते हैं । मैं करते हुए उन्हें देख रहा था और कुछ भी कहने में असमर्थ था । अभी अचानक उन्होंने हफ्ते हुई मेरे दाहिने हाथ की कलाई पकडी और अन्दर की तरफ खींच लिया । अब दरवाजे में कुंडी लगती मेरा मित्र को टोकते हुए आया । बोला क्या हुआ होते होते हुए अपने आप को संभाला । बनावटी हंसी बहुत बनाता हूँ । फिर बोला नहीं नहीं हूँ मैं बिल्कुल ही सही वो लगता है । उन्होंने अभी इस गांव के मुख्य जी की शवयात्रा देखिए तो उसकी वजह से ये आहत हो गए । बडे भलेमानस से बचा रहे लेकिन नियति के आगे किसकी चली है? भाभी ये कहकर हफ्ते होंगे । शायद चाहे नाश्ते के लिए रसोई घर की तरफ चल पर जाते हैं । मैंने सोचा यहाँ इस पता बताना सही नहीं होगा । मेरी बातों पर विश्वास भी नहीं करेगा । फॅमिली घर में जाते हैं । गुड्डू से कहा ऍम मुझे तो बहुत जरूरी बात करनी है । ठीक है तो कर कुछ क्या कहना को तो पूछ कर भाई बहुत मैं यहाँ नहीं बता सकता हूँ नहीं बाहर चलते हैं । मैंने तुरंत उसे जवाब दिया ठीक है मैं थोडी देर में तेरे घर पर आ जाता हूँ । ये सही रहेगा । कुछ ये कहकर मुस्कुराने लगा नहीं पिछले बात इतनी गोपनीय है कि मैं इस बात को अपने घर पर भी नहीं बता सकता हूँ । मैंने इस बार भारी आपसे का ऍम शाम को हम अपने गांव के पाउँगा जमाने वाला पुलिस हाँ मिलते । ऍम को दो ये कहकर मेरी तरफ देख लूँगा मैं भी उसको हाँ तब यही सब बातें हो रही थी की भाभी चाहे और इसको लेकर आ गई । मैं अंदर आप इतना साधा डाल समझ गया था कि मैं अपनी जगह से झटके से उठा और गुड को ये कहते हुए चला गया । मुझे बहुत जरूरी काम याद आ गया है । यहाँ जाना किस पर आपको देखकर वो नाटक कैसे रह गए? दिन में खाना खाकर छत पर थोडी देर पहले चला गया । जैसे मेरी नजर अपनी गली में, पर एक पूरे होशोहवास छोडकर एक के पीछे एक बारी परी से पांच शवों को लेकर लोग राम नाम सत्य कहते हुए आगे पढ रहे थे ऍम चल पड गए । मुझे लगा शायद हमारा गांव किसी महामारी की चपेट में आ गया है । बहुत विचलित हो गया था मैं । मैं आज तक अपनी जिंदगी में काम में एक साथ इतने लोगों को मारते हुए नहीं देखा था । विचारों में खोया हुआ था कि अचानक बडी चाची वहाँ गई । उन्होंने मुझे इस तरह परेशान होते देखा तो मुझे नीचे साथ चलने को कहा तो मुझे अपने साथ लेकर पूजा वाले कमरे में लेकर आते हैं और होली पिटा । लोग उनको बताना नहीं चाहते थे लेकिन मुझे लगता है अब वक्त आ गया है तो मैं भी सच्चाई से वाकिफ करा दिया । पिछले एक साल से अपने गांव में ऍम ऍसे बातें कर रही है । मैंने छंद झुलाकर का

ड़ायन -02

डायन भाग दो । ब्रिटेन पहले मेरी पूरी बात सुन रहा हूँ । उधर तुम्हें विश्वास हो जाएगा हमारे गांव में चार ॅ और इस गांव के बाहर अमावस्या के रात को तंत्र साथ नहीं करती है । कोट्टायन बनने के लिए ये सब कर रही है । डायन बनने के लिए उन्हें कठोर तंत्रमंत्र पांच सात नहीं करनी पडती है । उन्हें टाइम बनने की प्रक्रिया में अंतिम दिन एक ऐसे इंसान की बलि देनी होती है जो कुमार हूँ । यही कारण है कि यहाँ काम मैं तो होने के बाद कुछ भी बच्चे हैं । हमारे लोग गांव के बाहर ना आती है ना चाहते हैं । काली शक्तियों के दम पर ये ऍम अपना गुलाम बनाकर उनसे अपनी मान चाहिए । इच्छा पूरी करवाते हैं । तंत्र साधना के वक्त पूरी आत्माएं उन्हीं के अर्थ गिरते ही अदृश्य रूप में मंडराती रहती है । तीन के साथ ना कुछ चोरी चक्कर भी देख ले तो उस काम में सात मौतें कारण ही हो जाती है और जिस व्यक्ति ने उनके साथ ना को करते हुए देखा हो तो उसके चौबीस घंटे के अंदर ही मृत्यु हो जाती है । चाहे कितने भी उपाय कर लो लेकिन उस व्यक्ति की मौत होने से कोई नहीं रोक सकता । तब तक क्या बात करते हो जाती हैं? फॅसने उसकी तंत्र साधना देखो मेरे मन में छिपे चोर नहीं संभाल कर दिया था क्योंकि मैंने आज सुबह वो साधना होते कोई चक्कर देखी थी । मैं तो ऐसे बात कर रहे हो जैसे तुम ने उसके तंत्र साधना में बिकने डाल दिया हूँ । ये कहते हुए फॅसने लगे नहीं नहीं तो मैंने तो इस तरह की घटना देखने तो दूर की बात सुनी भी नहीं है । कभी मैंने घबराते हुए लडखडाती सफाई में कहा जैसे मेरी छोडी पकडी गई हूँ क्योंकि मैंने सुबह से छह लाशों को शमशान घाट की तरफ जाते हुए देखा था । इसलिए मेरे मन में ये सवाल उठना लाजमी था कि कहीं वो सातवा शिकार नहीं तो नहीं । मैंने तो चोरी से चक्कर उन दिनों की तंत्र साधना देखे थे । हो ना हो तो मेरी वजह से वो साधना विकेट में पडा होगा । ख्यालों में खोया था की चाची ने मेरे ललाट पर्स पसीने की बूंदों को देखा । दुकान के पीछे पीछे के रास्ते से होते हुए गाल पर चल मिला रहे थे । उनको बोल पडी है हरे मैं तो मजाक कर रही हूँ मुझे बताए अगर ऐसी कोई बात होती तो मुझे अवश्य बताता हूँ यार ये सब छोड मैं तो मैं एक प्यार जरूरी बात बताती हूँ । जैसे तो मैं जान कर खो राष्ट्र होगा हमारे बचपन के तो उसको तो की पत्नी उन्ही चाहर में से एक डायन है । उससे लोग इतना खौफ खाते हैं कि यदि वह काम में किसी का सामने मिल जाए तो बिना कुछ बोले ही निकल लेते हैं । ऍम पीछे आवाज देती और तुमने पलट कर देख लिया और उसको जवाब दे दिया तो उस व्यक्ति की भी मौत सात दिन के अंदर ही हो जाती है । उस तरह लोगों का मार्कर अपनी तंत्र साधना की परीक्षा भी करती रहती है लेकिन अपनी साधना पूरी करने के लिए किसी व्यक्ति को मार कर ही पूरी करती है । मैंने चाची की तरफ संदेह भरी नजरों से देखते हुए पूछा तो क्षण रुककर कुछ सोचने के बाद तो मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए ऍम मृत्यु घटना है जिसके तहत मनुष्य की चेतना का उसके मस्तिष्क से बाहर का मन हो जाता है । ये वही होता है जैसे विज्ञान में ऊर्जा का शुद्धतम रूप कहते हैं । सर था जिस प्रकार ऊर्जा का नाश नहीं होता, उसी प्रकार क्षेत्र में खराश नहीं होता है । मतलब कि किसी व्यक्ति द्वारा मृत्यु के शाम तक अर्जित की गई समस्त चेतना उसके मृत्यु के उपरांत खुल शरीर से अलग हो जाने के बाद भी ब्रह्मांड कहीं ना कहीं आपको रहती है । यही चेतना जब किसी अन्य व्यक्ति की चेतना से अप्राकृतिक तरीके से जोडी जाती है या किसी अन्य व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करवाई जाती है तो यह अतिरिक्त चेतना किसी बाहरी शक्ति का रूप ले लेती है, जिसे हम आत्मा भी कहते हैं । डायन अपनी शक्तियों का प्रयोग करके ही उस क्षेत्र रुपया आत्मा को जब चाहे किसी व्यक्ति के शरीर में प्रवेश भी करवा सकती है और इस तरीके से टाइम अपनी काली शक्तियों से उन आत्माओं से मनचाहा काम भी करवाती है । चाचा की बातों ने फौजी को अंधविश्वास की तरफ धकेल दिया था । इस अंधविश्वास के ऊपर विश्वास इसलिए भी कायम था क्योंकि मैंने पिछली रात ही बहुत अजीब अजीब घटनाओं को अपनी आँखों से देखा था । कहीं एक हद तक मैं उन बातों को सही भी मान ने के लिए बचपन था । मैं अपने कमरे में आकर स्तर पर ले गया । मैंने ये निर्णय ले लिया था । क्या करेंगे फॅमिली बात सच है । मैं अपने तो उसके भी क्योंकि लगभग टाइम बनने की ओर अग्रसर है । उसके सारी सच्चाई सब कर करूँगा । यहाँ तथा उसे मेरी बातों पर विश्वास होगा या नहीं । वो छोटी समझे लेकिन उसको उस दलदल से निकालना मेरा कब तक है? मैं यही सोचते । सोचते शाम होने का इंतजार करना होगा । लेटे लेटे मैं अपनी क्या उसमें चला गया? पता नहीं जगह जैसे मेरी टूटी । उस वक्त घडी पांच बचने का इशारा कर रही थी । मैं जैसे ही हद हो कर अपने कमरे में जा रहा था । अभी कुछ आ गया और मैं उसे अपने साथ काम से थोडी दूर पुलिया पर । लेकिन वहां पहुंचकर मैंने खुद को कल बात वाली सारी विस्तार से बता देंगे । मेरी बातें उसने ध्यान से सुनी । अचानक सोर्स ओर से ताली मारता हुआ बस पढा वहाँ वही हुआ तो पहुँच पर जाकर बिल्कुल रंगीन में या उसका हो गया । मुँह से कोई मिला ही नहीं किया । जब मैंने उस को बताया ऍम उसकी पत्नी है तो पहले कराया तो मुझे उल्टा सीधा सुनाते हुए मुझे ना होकर वहाँ से चला गया । मैं तो हम भी डर गया था कि कहीं मुझे बहुत जाकर अपनी पत्नी को नहीं पता था । एक तक हुआ तो दूसरी तरफ खाई थी । मेरे लिए की बहुत ही विकट समस्या थी । अभी थोडी देर बाद अपने घर आ गया । दो दिनों बात कर तू मेरे कर रहा है । उसने बताया कि वो कुछ दिनों से बहुत परेशान था । उसकी परेशानी की वजह से अपनी पत्नी पूजा को बताया । उसने ये भी बताया कि कुछ दिनों से उसके घर में कुछ अजीब से हरकतें हो रही थी । उसकी पत्नी ने घर से सभी देवी देवताओं की तस्वीरें और मूर्तियों को हटा दिया था । अचानक बिना किसी कारण हुई ऐसी हरकतों को तो समझ नहीं पाया । पिछले कुछ दिनों से वो नोटिस कर रहा था कि उसकी पत्नी खाद घर का रहती है और ठीक सुबह चार बजे चुपके से कहीं से आ कर सो जाती है । मैंने उसको कहा की पूजा भाभी अॅपटाउॅन बन चुकी है तो ये मानने के लिए कतई तैयार नहीं था की उस की भी कोई पंद्रह साथ ना भी करती है । मैंने अपने मित्र कुत्ते को समझा रहा हूँ कि आज रात ही उसके सारे शकों के सब जवाब मिल जाएंगे । कुत्ते को ये भी कहा कि आज अपनी पत्नी से कहे कि उसे काम से शहर चाहिए वो अपनी पत्नी को ऐसा बताकर मेरे यहाँ आ जाए । कुछ तूने ऐसा किया वो दिन में ही मेरे घर आ गया और हम लोग राहत होने का इंतजार करने लगे हैं । जैसे घडी में ठीक बारा बजे का वक्त हुआ । हम तो ऑस्ट्रेलिया के पास पहुंचे आज ही नहीं देखा था । चारों और घनघोर कालीरात हम लोगों ने तक भर दो घंटे तक वहाँ चक्कर इंतजार किया । एक दो बजे वही चार डायल देखी और पीपल के पेड के पास आकर बैठ गई । उनमें से एक टाइम पीपल के पेड पर अलग ही चढ गई । उसके लिए हम कब देखते ही हैं । हम बना सकते में आ गए और उसके रोने की रेटिंग के सहारे चिपका । हम टाॅस पीपल के पेड की तरफ देखने लगे । उनमें से कौन अपने कुछ लडकियों को चलाया और चलती लकडी को वहाँ बने कट्टे में डाल दिया । अभी थोडी देर में उसमें कुछ और लडकियाँ डालती जा रही थी । अभी कुछ देर में पेड से अपना दूसरी और उसके नीचे उतरते ही पैसा भी और एक आपने हमको से बस तुम को निकालने लगे । थोडी देर में सभी औरतें पूरी की पूरी नग्नावस्था में थी । अभी ऍफ चलती हुई अपनी के निकट पहुंची और उससे थोडी दूरी पर बैठकर उसने अपने हाथ को आगे बढाया । पर एक आधारताल हथिहार सपने आते ही पर चलाती बाकी की तीन होते उसके चारों और अपने दोनों हाथों को ऊपर उठाकर अच्छी तरह की आवाजें करते हुए उस टाइम का क्योंकि कुछ तो की पत्नी थी उसके खोल कोल्ड चक्कर काटने लगेंगे । कार्य लाल कनका खून तब तब कर पहने लगा था उसने कुछ बहुत दुख उस चलती अपनी मच्छर का और एक कटोरी में उस वक्त को भागने लगे । तीन चक्कर लगाने के बाद तीनों औरते रुकी और उस कटोरी में भरे हुए खून को पानी बारी से पीने लगी बढा है पाया ना कॅामन था से ये देखा नहीं जा रहा था तो मैंने अपना मुख्य लिया । थोडी देर बाद देखा तो मैंने गुटुर हो रहा था । मैंने जब उससे पूछा तो उसने बताया कि उससे तो विश्वास ही नहीं होगा कि पूछा डायन है जिस और आपने बैठकर खून की आहुति दी है तो पूजा है उसकी धर्म पत्नी तो अपने दोनों हाथ जोडकर मुझे माफी मांगे । पोस्ट इनके व्यवहार के बहुत छत मिलता होगा । मैंने उस को समझाते हुए कहा कि उसकी जगह कोई भी होता है तो उसके लिए विश्वास करना तो मुश्किल ही होता है । अभी अचानक उसमें पता नहीं कहाँ से इतनी ऊर्जा जाती है कि वो अपनी जगह से उठकर कुछ ऐसे तमतमाता हुआ पीपल के पेड की तरफ चलते पढा मैंने उसके हाथ को पांच लेकिन मुझे टक्कर उस पर चलता है । उसके साथ आपको एक और मीटर क्या मैं भी उसके पीछे पीछे भागा कुत्ते को देखकर होते हैं । हाँ, पीपल के पेड के नीचे तंत्र साधना कर रही थी पर कोई असर नहीं हुआ । उचारो अभी भी तंत्र साधना में लगी हुई थी । गुड्डू ने वहाँ पडे तो हजार हथियार को उठाकर जैसे वो बार करने वाला था । मैंने उसके हाथ को पकडा गया । अभी अचानक मेरे पीछे क्या क्या बात मैं धरती पर पढा था । मेरे सिर से खून बह रहा था, हूँ । किसी ने पीछे ऍम किसी मजबूत हथियार से मुझ पर हमला किया था । धीरे धीरे मेरी आंख हैं । बंद हो रही थी । थोडी देर में मैंने देखा कि मेरा सिर से अलग था और कुछ तो मेरे घर पर पांव रखकर हूँ । चारों टाइलों के साथ कहाँ के मार रहा था । उन चारों डायनों ने मेरे शरीर को खेल रखा था और मैं निकल ऐसे बहते रक्त पी रही थी । ढाका लगाते हुए कुछ तो बोल रहा था मैं माँ काली ये बाली कबूल करो और हमें शक्ति दो । अगली हवा पूजा भाभी की थी । कुछ अगर तुमने मुझे वो सारी बातें बताई होती तो मेरे वर्षों की तपस्या मेहनत पहनी । मैं नहीं जाती वो तो शुक्र है कि हमें बलि देने के लिए कुमारा । इंसान मिल गया नहीं । हमारी तंत्र साथ नाम अधूरी ही रह जाते हैं । बिल्कुल सही कहा तुमने? पहले मुझे पता था कि यदि साथ में कोई चक्कर देख लेता है तो उसी का मैं सात मौतें लगातार होती है । मुझे तो उसी दिन हो गया था, लेकिन उसको अपने शतरंज का मोहरा बनाने में हम दोनों का जवाब नहीं । इसके पली ने आज तो मैं पूर्ण रूप से डायन बना दिया । अब हमारी हर इच्छा पूरी होगी । ऍम पूछा भी जो क्या पूर्ण रूप से डायन बन चुके थे, उन सभी शैतानों के साथ उनके हाथ में साथ दे रही थी । मैं दर्शक बनकर उस पीपल के पेड से अपने कटआॅफ होकर देख रहा था ।

जोर्ज एवरेस्ट -01

जॉॅब एक मैं यानी देव और विकास दे कर फिर मसूरी में कहते हैं जो डालों के बाहर का कैसा आज भी जहन में ताजा था पर एक यात्रा हमारी अधूरी थी । जॉॅब यात्रा का फैसला यही सोच कर लिया था कि उस पूरी को कोई अच्छी जगह अच्छी जाते ही भर सकती थी । पुराने किस्से को बुलाने की कोशिश में और एक अच्छी यात्रा जोडें हम दोनों फिर निकल पडे । एक नहीं यात्रा पर हम लोगों को अब यहाँ से चाॅस जाना था । ये सोचकर वाॅल लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर था जिसका रास्ता मसूरी के लाइब्रेरी चौक से पश्चिम दिशा वाली सडक से होकर जाता था । दूसरा रास्ता दक्षिण दिशा की तरफ नीचे देहरादून के लिए जाता था तो तीसरी सडक उत्तर दिशा की तरफ फॅमिली कार्डन की तरफ चाहती थी । तो वहीं चौथा रास्ता पूर्व दिशा की तरफ स्पोर्ट से बॉल रोड शुरू होता था और कुछ दूरी पर चलते ही उस तरफ वो स्टॉक स्कूल भी पडता था । अगले बीस मिनट में ही मैं और विकास ऍम तलहटी में थे । ऍम वहाँ से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर ही था । हम दोनों तलहटी पर कुछ देर हो गए और सूर्यास्त का आनंद क्या चारों तरफ आकाश में फैली लाल रंग की रोशनी नहीं प्यारी लग रही थी कि जैसे आसमान में कुछ आप फिर से होली कहती हूँ, खुद केसरिया हो गया हूँ हूँ उनको बडा सुकून देने वाला छंटाई । हम दोनों ने इस पल को अपने मोबाइल में कैद किया । फॅस की छोटी से देखने का अलग ही मजा होता है । लेकिन इस जगह से भी बहुत ही मनोरम दृश्य दिखाता विकास नहीं । ऑनलाइन होटल पे क्या हुआ था? उसने मोबाइल जा करके बताया कि रिवर स्टोन कॉलेज के नाम से नहीं होना चाहिए । कुछ स्थानीय लोगों से पूछने के बाद पता लगा कि यहीं से कुछ कदम की दूरी पर ही है । हम दोनों उस दशक की तरफ पड जाएगा । थोडी देर में ही हम लोगों को एक चर्चा स्थिति में एक बोट बना हुआ दिखा जिस पर लिखा था ऍम बाहर ही फॅमिली किया जो हमें अंदर के एक कमरे में ले गया तो काम रुका । ये कैसा हाउस बहुत ही पुराना लग रहा था । घडी रात के आठ बजे का इशारा कर रहे थे । विकास ने उस कॉलेज के रखवाले को बुलाया जिस से पूछने पर उसने का नाम कनक चौहान बताया । विकास नहीं उसे तो चाॅकलेट बनाने के साथ उसके जेब में दो पांच पांच सौ के हरे पत्ते डालते हुए कहा की फॅमिली होता है । आधे घंटे बाद कनक बडी प्लेट में खेरे के बारीक कटी हुई मुँह जो हरी चटनी रखी हुई थी । कर्मा, कर्मा मैगी और तीखे आमलेट के साथ हमारी आज रात के पास भी लेकर आया था तो बच्चे वो पैसे वापस करने लगा तो मैंने कहा की फॅस करेंगे नहीं । बात को सुन कर बहुत खुश हुआ और दोनों की ओर मैं बढाते हुए हमारी चाकरी करने लगा । मैंने उसको अपने लिए भी एक क्लास लाने को कहा तो पहले नानुकुर का दिखावा करने लगा हूँ । लेकिन मैंने उसकी मंशा को भागते हुए का ले आओ । कोई बात नहीं तो भी क्या याद करेगा । आज की रात को भी मजे कर लेंगे । मेरा ऐसा कहते हैं । वो छोडकर गया और अगले ही पल क्लास लेकर हम लोगों के सामने बैठा उसको भरा था । लगभग तीन चार पाँच पीने के बाद वो करंट उठकर जाने लगा । उसने कहा साहब यहाँ एक ही कॉलेज है और चार से पांच दुकानें हैं । सभी दुकानें यहाँ के पडोस के काम के लोगों की । इसलिए क्या हार आपको बहुत कम लोग ही रखते हैं । सभी अपने गांव ही चले जाते हैं तो जाते जाते खाने का इंतजाम कर के गया था । उस कॉलेज में दो कमरे थे और एक साथ दैनिक रसोई कहा था तो हम लोगों के लिए लगभग आठ रोटियाँ और वहां के स्थानीय लंगडा सबसे बनाकर गया था । हमारे पीने का सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक पूरी फॅमिली खाली नहीं हो गए । विकास में ज्यादा पीने की वजह से कुछ दिखाने से मना कर दिया था और वहीं अधेड सा लेट गया । मुझे बहुत तेज भूख लग गई थी । गाडी पर नजर पडी तो देखा कि ठीक दो बचने का इशारा कर रही थी । पर जैसे ही रसोई घर की तरफ रात मधुर ध्वनि ने ध्यान आकर्षित किया ये तो नहीं किसी लडकी की थी जब फॅार में धीरे धीरे कुछ कानून गुनगुना रही थी । मैंने अपने कदम उस तरफ थोडे जिस तरह से आवाज आ रही है आवाज का पीछा करते हुए गेस्ट हाउस के पीछे वाले मकान में गया मैं क्योंकि काफी पुराना प्रतीत हो रहा था काफी बडा मकान रहा होगा जब इसकी स्थिति ठीक रही होगी । ऊपर छत भी नहीं टूटी हुई पुरानी करके हवा के चलने से उम्मीद हुई की तरह अपनी आवाज कर रही थी । आपको सन्नाटा होने की वजह से हवा काफी दूर तक जा रहे थे । उसी घर के आखिरी कमरे में खिडकी पर अपने सर को टिका है । खोई हुई सी एक लडकी कोई तुम को बुला रही थी । उसकी पीठ मेरी तरफ थी और उसके पाल बंगाली होने के साथ सुनहरे रंग गए थे । मुझे अच्छा लगा कि यहाँ कोई और क्या सोचा कि चलो अच्छा साथ में कोई है, अपने हम उम्र की है । अब ट्रैकिंग में भी मजा आ जाएगा । मैं नशे में था जैसे मैंने अपने हाथ को बढाकर उस लडकी से उसका परिचय जानना चाहा । तभी विकास की आवाज आई देश और ऍम शायद वो अपनी तरह कुछ होश में था । अभी उस लडकी ने अपना चेहरा कमाया । मेरी तरफ देखा तो बहुत ही ज्यादा को ही थी । उसके आगे भी उसी की तरह बेहद खूबसूरत थी । मैं ना चाहते हुए भी लडकियों की सुंदरता की तरफ जाने की खर्चा चलता हूँ । अच्छा शायद यह आदत मेरी सबसे बडी कमजोरी भी रही हूँ । लडकी ने मेरी तरफ देखा बाॅल मैंने भी मुस्कराकर उसका ऍफ ना चाहते हुए भी मुझे भी मन से लौटना पडा । सुबह तैयार होकर लगभग साढे आठ बजे हम तो उन्होंने वाॅर्ड से बाहर निकले । मैं और विकास फोक से परेशान है । अभी कुछ कदम चल करें । छोटी सी तीन शेर वाली दुकान देखिए जिस पर कोर्ट ऍम हम लोगों ने चाय के साथ तो पर दिखाते हैं फिर दुकान का मालिक थोडा पूरा था । जब हम लोग पराठा और चाय के पैसे देने लगे तो कहने लगा कि जब और कोल्ड्रिंग सुन लेते जाइए दो किलोमीटर की ट्रैकिंग और उधर आप कुछ मिलेगा नहीं । विकास ने तो ले इसके पैकेट और एक आधे लीटर की हम सब की बोतलें । जैसे ही हम लोग जाने लगे तो पूरे आदमी ने एक और सवाल किया साहब आप लोग कहाँ ठहरे हुए हैं? जब हम ने बताया ऍम ठहरे हुए हैं तो यहाँ पे में बैठे दो तीन लोगों की आंखें फैल करेंगे । किसी ने कुछ कहा नहीं लेकिन आपस में कानाफूसी होने लगी थी । ये थोडा अजीब सा लगा लेकिन हम उस वक्त वहां से निकलकर आगे ॅ शिखर की तरफ पडने लगते हैं । अभी मुश्किल से सौ मीटर का फासला ही तय किया था कि इस हफ्ते में हमारी मुलाकात एक खास शख्स से हुई ना हटाकर एकदम सादा कुर्ता पायजामा चेहरे पर पेट रहती होगी । दारी सिर पर टोपी, उनकी पतली सेस्मोमीटर और चेहरे पर एकदम निर्मोही से था । उम्र लगभग पचास साल के करेंगे । उन्होंने बताया कि एक फॅसने वो भी बिल्कुल अकेले बाहर तो लगभग पूरा घूम लिया है । यह जानकारी देने के बाद तो कुछ पल रखते हैं और फिर जैसे किसी अनंत डोभी आंखों में एक चमक लिए कहते हैं । आॅल हाँ सब की जगह है । एक बार वहाँ जाकर फिर से लौटने का मन ही नहीं करता है । मन करता है वहीं बैठ रहा हूँ । हाँ सबका सम्मोहन है । उस जगह है बिना आ जाए उसे महसूस ही नहीं कर सकते । खूबसूरत जगह है । यह बात उन्होंने जिस है राव से कही थी वो टॅाप अभी का ही सहन में ठहरा हुआ है । उनके इस बात से जाॅब्स के शिखर तक जाने की ललक पड गए हमने उनसे फॅमिली और आगे की तरफ पढकर रास्ते बहुत ही सक्रिय हैं । कहीं कहीं तो पत्थरों और जमीन पर हाथ टिकाकर सहारा लेकर पढना पड रहा था । हमारे ठीक पीछे का पर्वत सूरज की पुष्टि में नहीं आया हुआ जगमगा रहा था । हल्की धूप रास्ते में चलने के लिए मदद कार साबित हो रहे हैं । चिडियों की चीजें की मधुर ध्वनि कानों में मिश्री खोल रहे थे । अभी चलते हुए लगभग बीस मिनट हुए थे । मैंने देखा कि खुद फॅालो पानी, वो लडकी जिससे कल रात को सामना हुआ था तो भी हम लोगों से कुछ पचास मीटर के फासले पर चल रही थी । पीले रंग की टीशर्ट और गहरी नीले रंग किसका पहनी हुई थी जिसमें रुपये ज्यादा कर सकते है और खुबसूरत लग रही थी मेरी सब जैसे उस पर पडी थी । उसने अपने सर को काम आते हुए कल फॅमिली मुस्कान छोड दी । मैं आगे बढकर उसके करीब जाकर बात करना चाहता था लेकिन रास्ते में नहीं करी तो कहीं खडी चढाई होने के कारण में हर बार पीछे रह जाता था । उसके चलने के तरीके से लग रहा था कि वो उस जगह पर चलने की अब व्यस्त है । मैंने थोडी देर के लिए अपना ध्यान उसपर सहायता कर रास्ते पर लगाया । चुकी एक जगह बेहद ही खतरनाक था । रास्ते के दोनों तरफ खाई थी इसलिए थोडा संभल संभाल कर चलना पड रहा था । इस तरह की ही बहुत सारे खतरनाक रास्तों को पार करते करते हम अंततः हाॅकी चोटी पर पहुंचे हूँ । वहाँ चीज पहुंॅच ऍम विकास के कौन से ये शब्द निकल पडे । वो चारों तरफ बडे ध्यान से कुदरत के नजारों को देखा था और अपने मोबाइल से उनकी तस्वीरें लेकर मोबाइल में कैद कर रहा था । तस्वीरें खींचते हुए उस है ऐसा लग रहा था यहाँ से पहले कौन वापस जाना चाहता है । ऊंचाई ज्यादा होने की वजह से यहाँ से नीचे घाटी की तरफ पूरा देहरादून शहर साफ साफ दिख रहा था । इस जगह को देखकर मन ही मन प्रफुल्लित हो रहा था । अभी मुझे खुद डाले सुनहरी पालो भरी उस लडकी का खयाल आया । मुझे कहीं दिख नहीं रही थी । उसके सहन में खयाल आया कि नहीं, वो वापस तो नहीं चली गई । लेकिन ॅ और जाने का वही एकमात्र रास्ता है जिससे हम आपकी भी आए थे । लेकिन मैंने उसे ऊपर छोटे तक चाहते हुए तो देखा था तो वापस आते हुए नहीं देखा । मैंने अपने आप को ही फिल्में तलाजा दिया । क्या हो सकता है? शायद चली गयी होगी । नहीं देख पाया हूँ उसे । हमने वहाँ लगभग आधे घंटे का वक्त गुजरा और जैसे ही वापस चलने को हुए तो एक संदर्भ ऍम मखमली हरी खास छोडे । हमें दल चाहने लगी तो इतनी खेली हुई और पहनी थी कि हम चाहकर और ढलान पर पसंद हैं । इस तरह तरह करने से पहले जो ॅ आए थे, उसको खोलकर इस नैसर्गिक सौन्दर्य का लोग को लेने लगे । ऐसा करने से मौसम खुशगवार लगने लगा । यही तो फॅमिली काफी कुछ झेला और अविश्वसनीय चीजों से पाला भी बडा था । इसके लिए ना जाने कितने जतन करके कितने किलोमीटर पैदल चलकर इस ऊंचाई पर पहुंचने एकदम हरी मखमली, खासकर स्तर और सर पर तुले हुए नहीं लिया । आसमान की चाहता ऊपर से ये बोनस के रूप में आसपास के ठंडी जैसे किसी ऐसी की हवा चल नहीं होगा । हालांकि सरसराहट की आवाज किसी दूरी से हमारे कानों में मिश्री खोल रहे हैं । हिलोरी सुनने, फालिया, दृश्य, आवाजें काश हमारे साथ हमारे निवास स्थान तक आप आती है । लेकिन इस काश के पीछे के अरमान हमें अब पीछे छोडने थे । आप बंद करके कार्य घंटे बना नहीं लेते रहे । कुछ देर बाद भी रहती है । मन मारकर थे और ऍम आ गए । खडी में ठीक दोपहर के बारह बज रहे थे । हम दोनों ने कुछ खा पी का तीन घंटे सुस्ताने की सोची थी । साढे तीन पर टैक्सी बुक की थी तो मैं यहाँ से कंपनी का दाल ले कर जाते हैं, क्योंकि ऍसे ग्यारह किलोमीटर और मसूरी से पात्र चार किलोमीटर की दूरी पर था, पर सात बजे तक वहाँ से मैं आपसे करके जहाँ आप कॉलेज में आराम कर रहा था और अगली सुबह बस से देहरादून के लिए निकल जाना था । देहरादून से विकास के बाद सुबह ग्यारह बजे थी तो उसे गुरुग्राम शाम को कुछ पांच बजे तक पहुंचा देती और उससे थकान मिटाने के लिए वक्त में जाता था कि वो अगले दिन अपने ऑफिस पूर्ति के साथ जा सकते हैं । कुछ भी देहरादून से लखनऊ जाने के लिए चाॅस पकडने थी । कॅश स्टेशन से शाम समाचार बच्चे खुलती थी ।

जोर्ज एवरेस्ट -02

जॉॅब तो मेन गेट पर ही हमें कॅश मिल गया । उसने हमें कल बताया था कि यहाँ केवल ऍम चाय और काफी मिल सकती है । उसने कहा था कि पीछे की तरफ से चल था क्या आपको जो मन चाहे तो बना सकते हो? विकास उसके साथ किचन में खाने पीने का चाहता लेने चला गया तो उस कमरे की तरफ चल दिया है जहाँ हम कल रात हो गए । कमरे की तरफ बढते ही मुझे ठंडी हवा का एहसास हुआ हूँ । अभी चाबी की हॉल में मैं लगाई रहा था की मुझे साथ के कमरे से धीमी संगीत क्या बात आई हूँ? नहीं बहुत ही मतलब लेकिन उदासी लग रहे थे मुझे अचानक कल खान वाली सुनहरे पालो वाली गोरी लडकी की याद आ गई । जैसे ही मैंने मुडकर आवाज की तरफ बडने का सोचा तब तक विकास आ गया और बोला अंदर चलो यहाँ जो खडे हो जब तक कुछ खाने को बनकर आता है ना तो तो हो जायेगा । उसके आंखों में चमक थी । एक हाथ फॅमिली की बोतल और दूसरे हाथ में खेल रहे की पत्ती लाइसेंस कुछ देर पीने के बाद लगभग एक बजे कर खाना लेकर आ गया था । हम ने खाना खाया और कनक से कहा कि हमें तीन बजे के बाद उठाते क्योंकि साढे तीन पर कंपनी गार्डन के लिए निकलना था । बाहर किस वक्त बारिश शुरू हो गए पता ही नहीं लगा । मौसम काफी ठंडा हो गया था । शरीर आना मांग रहा था तो जमकर नहीं आई । मैं जिस तरफ लेता था उस तरफ खिडकी थी और उसके पहले होने की वजह से बारिश के पूरे मेरे चेहरे पर पढ रहे हैं जिसकी वजह से मेरी नींद टूट गई थी । मैंने उठकर घडी में वक्त देखा तो सवा दो हो रहे थे तो मैं विकास को देखा तो कैसे बच्चे की तरह अपने पेट तक मोर के सो होगा था । मैंने बारिश की बूंदों का लगभग लेने के लिए खिडकी खोलते हैं और जैसे ही अपने दोनों हाथों को घर से बाहर क्या अभी बगल वाले कमरे में से एक लडकी के रोने की आवाज आई स्पष्ट नहीं कभी कभी सीधी मैंने चाॅस ओर से खुला प्रतियो साहब आज से विकास किया और बोला और एक खिडकी खोल रहे हो । बाहर बारिश हो रही है । पानी अंदर आ जाएगा तो रात को सोने में दिक्कत होगी । मैंने उससे कलॅर वाले संग्रहालय बालों वाली उस लडकी का जिक्र किया और उसने कहा कि लगता कुछ हुई थी, देश है । बगल वाले कमरे से उसी के होने की आवाज आ रही है । विकास ने मेरी बातों को मजाक उडा दिया और उन देते हुए कहा जाओ तुम्हारा इंतजार कर रही हूँ । ऍम कहते हुए वो दोबारा नींद के आगोश में समा गया । दस आवाज का पीछा करते हुए बगल वाले घर के करीब पहुंच गया था । जैसे ही मैं उस घर के होने वाले कमरे के अंदर घुसा हूँ तो आवास बिलकुल ही बंद हो गए । इस कभी भी कोई भी नहीं दिख रहा था वो । मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था । हाँ तो एक छाप था मुझे सुनने में तो का हुआ है । मैं वहाँ से बात बस अपने कमरे की तरफ आ गया । मैंने देखा की घडी में दिन के तीन बच्चे लिखा वक्त होने वाला था ऍम कमरे के अंदर काॅन् हजार कर रहे थे । कुछ देखते हैं विकास बोल पडा भाई किधर आत्माओं की तरह बैठे रहते हो । कम से कम जहाँ जाते हो बताकर तो जाया करूँगी जैसे पहले की मैं उन सभी घटनाओं के बारे में विकास को बताता । कनक बोल पडा साहत हमें भी अपने साथ अपने यहाँ ले चलो अपने पास ही रख लेना आपकी सेवा कर देंगे । विकास ने उसको समझाया कि तुम यहाँ जन्नत में रहते हो । यहाँ ॅ और सुकून भरी जिंदगी है वो वाला उसकी बातें सुनकर का मैंने कहा साहब, पिछले कुछ महीनों से आप अकेले ही गैस हो । जगली सुबह चले भी जाओगे । धार विकास एक दूसरे का मुंह देख रहे थे । विकास इसलिए आश्चर्यचकित था । यहाँ ऍम में कुछ महीनों से कोई रुका नहीं था । मेरी बजा दूसरी थी । मैंने अपने शक को दूर करने के लिए उससे पूछा । अच्छा एक लडकी साथ वाले घर में भी तो रहती है जिसके बाल सुनहरे रंग की और संग्रहालय हैं जो बेहद गोरी रंग की है तो यहाँ के लगती भी नहीं । शायद विदेशी है मतलब इस पर में बहुत ही अच्छा गाना बना दिया मुझे । आज जॉर्ज एड्रेस पर भी जाती हुई देखी थी लेकिन आते वक्त में शहरों से देख नहीं पाया । मेरी बातें सुनते ही का चेहरा सफेद पड गया । उसके आंखों की पुतलियां फैल गई नहीं लेकिन वो कुछ बोला नहीं । उसकी हरकत देकर विकास ने पूछा की है क्या हुआ तो फिर तो काला काला साफ करते हुए बोला मैं आपकी माँ की कसम खाकर कहता हूँ यहाँ क्लाॅक तो आप लोग आ गए नहीं तो मैं खुद अपने कहा बडी जाने वाला था । पुलिस उसने मेरे पास वाली लडकी कौन थे और वो कहाँ से आई थी ने बताया कि इस कॉटेज के बारे में बहुत सी कहानियां पहली हुई है । फॅमिली के किसी ऍम यहाँ कुछ सैलानियों की मौत हुई है । तब से आस पास के लोग यहाँ आवाज सुनने लगे । अभी कोई उतार सिद्धन कभी लडकी के गाने की होने की । कहते हैं की आवाज यहाँ ज्यादातर घूमने आए पर्यटकों को ही सुनाई देती है । मेरा तो ये ऍम गया था । ऍम बना देते हुए कहा साहब मैंने तो आज तक ऐसा कुछ नहीं खाना सुना । मैं तो रोज रात नौ बजे तक यही रहता हूँ । अभी ये सबसे कम ही रास्ता की तभी वहां पहुंचे थे । पानी ने हमारा ध्यान हटा दिया । बाहर जाकर देखा तो कंपनी का आर्डर ले जाने वाली टैक्सी बाहर खडी थी और हमारा इंतजार कर रहे थे । हमने कनक को कहा कि हम आज आधे वक्त मसूरी से ही खाना खाकर आ जाएंगे । अगर वह पडोस गांव में जहाँ और आप में रहता है वहाँ जल्दी जाना चाहता है तो जा सकता है आॅफ हो गए और टैक्सी कंपनी गार्डन की तरफ पडता हैं । अभी थोडी दूर ही चले थे कि ड्राइवर नहीं गाडी अचानक से तो मैंने कारण पूछा तो उसने सामने की तरफ इशारा करते हुए बताया के सामने घर में किसी स्थानीय व्यक्ति का व्यवहार होने के बाद दुल्हन के साथ सवाल आने पर कुछ रसमें हो रही है यहाँ पर सारा कुछ दूरी तक सक्रिय इसलिए कुछ देर रोककर ऍम लगता लेकर चलते हैं । मैंने देखा है कि सडक के किनारे घर था और घर के मुख्य दरवाजे के दोनों तरह हूँ । केले का पेड प्रहरी की भांति खडा था जिस पता ही तरंगी धागे और अक्षत से पूजन होती है घर के मुख्य दरवाजे के ऊपर तो स्वागत उनका पोर्ट लगा हुआ था । वहीं घर के पास में ही पारंपरिक लोकनृत्य मन को बोल रहा था जिसमें पारंपरिक रूप से बाहर के स्थानीय महिलाएं घाघरा तथा आंगडी और पुरुष चूडीदार पायजामा और कुर्ता पहने हुए सामूहिक हत्या कब आए थे । महिलाओं ने जहाँ कानों में कर्णफूल नाक में ना तो लिया और तलाक शोभा बढा रही थी तो सर में शीर्ष फुल हाथ में चांदी के पहुंची तथा पैरों में पिछडे और पांच छे उनके पेश पूछा में चार चांद लगा रही थी उमर खलास यह चांदी की पालियां हुआ करती हैं । जैसे महिलाएं कानों के ऊपरी भाग में पहनती हैं । ऍम की पहचान करने में चले वो पहनने से होती है । ऍम ढोलकी में श्रद्धा पानी के साथ वहाँ के लोग कि थानों में मिश्री खोलने का काम कर रहे थे । बहुत ही मनमोहक और मंत्रमुक्त करने वाला लोक नृत्य चल रहा था । लगभग बीस मिनट तक ये कार्यक्रम चलता रहा हूँ । फिर कहीं जाकर हमें आगे जाने के लिए रास्ता मिला । तकरीबन आधे घंटे में हम कंपनी गार्डन के मुख्य दरवाजे के बाहर खडे थे और टैक्सी वाले नहीं यहाँ से साढे छह बजे वापसी का समय बताया था । इस वक्त खडी में ठीक चार बज रहे थे । हम लोगों ने बाहर प्रवेश द्वार के पास से अंदर जाने के लिए टिकेट लिए और अन्दर की तरफ कदम बढा दी है । इसी बीच हम लगातार देखते रहे कि लडके लडकियां फैशन के मामले में किसी से पीछे नहीं । उनका एक खास पारंपरिक ॅ खास पहनावा है और खास पहनावे के हाथ रंग है जो चल रहा है शायद रंगों से दोस्ती यहाँ के लोगों को विरासत में मिली है । अंदर का नजारा बिलकुल मन को मुझे लेने वाला था । चारों तरफ छोटे छोटे बहन बने हुए थे और उन लॉन के चारों तरफ क्या रही थी जिसमें तरह तरह के रंग बिरंगे पुष्पदेव ऍम की गरिमा को पढा रहे थे । उन्हें लॉन के बीच से होती हुई एक चुनना रास्ता था जिसपर सफेद संगमर्मर बची हुई थी । उस संगमर्मर पर उन किस्म की कलाकृतियों पडी हुई थी । वही दाई तरफ कुछ दीवारों पर पारंपरिक आकृतियां बनी हुई थी क्योंकि उस तरह को खूबसूरत बनाने में चार चांद लगा रहे थे । वहाँ से थोडी दूरी पर ही एक बडी ही खूबसूरत पाॅप आनी का फव्वारा था जिससे पानी निकलकर कुछ ऊंचाई तक जा रहा था और उसके चारों तरफ से रंग बिरंगे प्रकाश लगे थे जो हमारे पर पढ रहे थे । तो बारी बारी से उस रंगबिरंगे प्रकाश के हमारे पर बडने से बहुत ही प्यारा नजर आ रहा था । उसी हमारे से चारों तरफ पतली पकड लिया जा रहे थे । हम सामने वाली पगडंडी से बढकर आगे कितना पड चले समझते में आगे चलकर कुछ होता ही खुला मैदान था । उसमें दूर दूर तक राजेंद्रन के हर तरह के फूल खिले हुए थे । एक ही फूल के कम से कम बीस से अधिक प्रजातियां धीरे क्योंकि दिखती बिल्कुल एक जैसी थी लेकिन हर किसी का रंग एक दूसरे से जुडा था । यह देखकर दिल खुश हो गया था । चारों तरफ फूलों की खुशबू फैली हुई थी । ऍफ नजारे को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो हम फूलों की घाटी में आ गया । बिलकुल ही उसी का छोटा रूप लग रहा था । लेकिन खूबसूरती में ये किसी से कम नहीं था । वहीं पास में ही ऊपर से छापना कर रहा था । लोग वहीं नीचे अपनी फोटो मोबाइल से किस जमाने में लगे हुए थे । कुछ फोटोग्राफर पर्यटकों को उलझाकर उनके फोटो निकाल माने को बनाने में लगे हुए थे । आज शनिवार का दिन था इसलिए वहाँ काफी चहल पहल भी थी । मैंने भी विकास को बहुत उसमें झरने के पास खडे होने को कहा । उसकी फोटो लेने के लिए अपना मोबाइल निकालकर आप पीछे आकर विकास पर फोकस कर ही रहा था कि अचानक कुछ कैमरे में एक लडकी देखी जो विकास के पीछे ही थोडी दूरी पर ही खरीदी है । मैंने ध्यान से देखा तो मुँह में बोल पडा । अरे तो वही लडकी है सोच से विकास के बंदे को जकडकर हिलाते हुए कहा था । उसने जैसे ही उसे देखा तो वो लडकी झगडने के बगल से जा रही सीढियों से पढते हुई ऊपर जाने लगे । विकास ने मेरा हाथ पकड लिया लेकिन मैंने उस सपने हाथ छुडाते हुए कहा कि आज मुझे सुनहरे पालो वाली लडकी का रहस्य सुलझा कर ही रहना है । एक कार्यकर्ता लडकी के पीछे हो चला तो बहुत तेजी से आगे बढ रही थी । मैं लगभग भागते हुए लडकी के सामने पहुंचा । अपने हाथ बढाते हुए बोला फॅमिली आयु लोन उसने नाम सरे लाया । उसका चेहरा कोरा और बिल्कुल खोलता हूँ । उसके बिल्कुल आपके फूल जैसे लाल थे पर उसकी आंखें नहीं ली थी । जैसे उसमें बहुत सारे राज दफन है । उसके सुनहरे घुंगराले पाल उसके गुलाबी कालों को बार बार चुन रहे थे । मैंने फिर से पूछा था बॅास में होती है भारतीय होगा । मैंने कहा हो मुझे लगा कि आप विदेशी हैं । मेरी बात सुनकर थी में से हस्ते मैंने उसे नीचे आकर चाय पीने का ऑफर किया । उसने ये कहते हुए मना कर दिया कि वह ऊपर देखने जा रही है कि इस छात्र का पानी कहाँ से बहता हुआ आ रहा है । एक अगर वो पडती और आगे बढ चली मैंने भी उसके साथ चलने की बात कही तो मुस्कुराकर अपनी स्वीकृति दे दी ।

जोर्ज एवरेस्ट -03

जॉर्ज एवरेस्ट भाग तीन थोडी देर में हम दोनों बिलकुल टॉप थे जहाँ से जाता है नीचे की तरफ कर रहा था । यहाँ ऊपर ज्यादा ऊंचाई और पाॅल से हटके होने की वजह से अर्तगत कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं होगा । मैंने इस मौके को बनाने का सोचा । सोचा के सब पूछूँ कि पिछली कुछ घटनाओं का उसमें क्या समानता है । ये सोचते मैंने जल्दी उसकी तरफ नजर की अच्छा नाॅन हाथ को ऊपर उठाते हुए मुस्कुराकर भाई कहा और झरने के ऊपर से नीचे की तरफ छलांग लगा दी । पहले की मैं कुछ कह पाता मेरे बोलने आप देखने की क्षमता बाकी ही नहीं रही थी । छक्का खाने के साथ पीछे जमीन पर गिर पडा था । मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था । बहुत ही ज्यादा इधर गया था और ऍम विकास के पास आया हूँ तो मुझे साल में देखते परेशान हो गया । इससे पहले वो कुछ कहता मैंने उसके हाथों को पकडा और कहा यहाँ से चलती हूँ विकास मुझे लेकर कंपनी गार्डन के बाहर ले आया पर हमारा इंतजार कर रहा है । हम तो सरकारी में बैठ गए । मेरी आंखें फटी की फटी सामने की तरफ दिखाई थी और विकास मुझे बोतल से पानी पिलाकर सामान्य करने की कोशिश में लगा हुआ था । पंद्रह से बीस मिनट में ही हम मसूरी बहुत चुके थे । ड्राइवर खाना खाने के लिए टैक्सी साइड में लगाने लगा । ऍम और हमें वहाँ हमारे ऍम छोड देते हैं । ट्राॅफी क्या हम अगले और पच्चीस मिनट ॅ के पास खडे विकास और मैं अपने कमरे में थे । रात के आठ बज रहे थे तो बाहर आकर देखने लगा तो कनेक्ट मिला नहीं । शायद वो चला गया था । विकास समझ से वहाँ की घटना के बारे में पूछा तो मैं उसको सारी बात बता देंगे । तो वो बताते हैं वो भी सोच में पड गया । चिंता की लकीरें उसके माथे पर सब सब देख रहे हैं । उसने अपने आप को संभालते हुए कहा खाज करती तो गुजारनी । फिर कल सुबह ही हमें देहरादून के लिए निकलता है, अपनी जगह से खडा होता है और उनसे खीर एॅफ क्यूँकि बोतल आता है जो कि अभी भी आधे बच्चे हुए थे । मेरे सामने रखते हुए कहता है आज की रात में किसी से काम चलाना होगा । किसी भी तरह की थकान चाहे वो मानसिक हो या शारीरिक तो अब इस से ही पटेगी । ये कहते हुए उसमें चलती है । दो बडे परिवार बनाए और हमने उन्हें फॅसे नहीं । जगह गालिया । विकास हरिद्वार की तो कभी कॉलेज के दिनों की घटनाओं को याद दिलाकर मेरा ध्यान भटकाने की कोशिश में लगा हुआ था । हालांकि अंदर से वो भी सहमा हुआ ही लग रहा था । हल्की बारिश भी शुरू हो गई थी । इस बारिश ने अब इस माहौल को और बोझिल बना दिया था । बातें करते करते हम कब हो गए पता ही नहीं लगा । हाथ को किसी वक्त लगा कि मेरे ऊपर कोई चुका हुआ है । मैंने जब आंखें खोली तो देखा तो समझ रहे और फॅमिली लडकी थी । मेरे कंधे को पकडकर मुझे उठा रही थी और मेरा नाम देव देव कहकर बाहर बार पुकार रही थी । उसकी आवाज सुनकर ऐसा लग रहा था जैसे किसी कोने से आते हो लग रहे थे । मैं हडबडाकर उठ बैठा तो लडकी मेरा हाथ पकडकर मुझे खींचती हुए अपने साथ ले जाने लगे । तक के बारे मेडिकल ऐसे कोई भी आवाज नहीं निकल रहे थे । मैंने पीछे मुडकर देखा तो विकास अपने स्तर पर ही हो रहा था । मुझे कॉलेज के पीछे बने घर के एक कमरे में ले गए । आज उस कमरे की शक्ल ही पतली हुई थी हॉल के कोने में । पर इसी चेयर पर एक्सॅन करे । साथ में बैठा हुआ पहले बजा रहा था । उस स्थान उसके आगे बंद थे तो लडकी उसके कदमों में बैठ गई और होने लगी । फॅस आदमी का हाथ अपने हाथों में थी । आपने बोली फॅमिली साथ में पर कोई फर्क नहीं पड रहा था । लडकी का चेहरा होते होते लाल हो गया था । अचानक बात पे खडा हो मेरी ओर पडने लगा । मैं ही खडा था जब से मेरी आंखों के सामने कुछ पिक्चर चल रही थी, अच्छा कुछ आदमी ने पहले नहीं रखा । न जाने उसके हाथ में कहाँ से बन्दों का गयी वो लडकी, बोली, स्टाॅक परन्तु बहुत में आगे पडता ही जाता था । तभी अचानक एक होगा और ऍम हुआ तब मेरे कल ऐसे पहली बात इतनी जोर से ठीक करने के लिए विकास उस चीज को सुनकर टाॅस कमरे में आया । नहीं नहीं उस कमरे में भी चढी खडा ही जा रहा था वहाँ इस कमरे पर पहले और विकास के अलावा कोई भी नहीं था । मैं जोर जोर से चीख रहा था । नहीं मुझे ऍम प्रकाश मुझे संभालते कोई लेकर जाने लगता भी मैंने उस वहाँ छोड है और बाहर की तरफ भाग खडा हुआ । ऍम मेरे पीछे पीछे भागा तो भी समझ चुका था कि जहाँ कोई अनहोनी हुई है मेरे पर आपको देखकर परिस्थिति को बहुत किया था । डाॅन थोडी दूर आ गया था । अभी मुझे बुढापा दिखा जान कल सुबह आलू के पराठे खाए थे । वो तो कान के अंदर से प्रकाश बाहर की तरफ आ रहा था । जिसका ये मतलब हुआ हो वहाँ जरूर कोई तो होगा ही । तब तक विकास विभाग से भागते मेरे पास करता है । बहुत चारों और सन्नाटे को मेरी आवाज फिर भी हुई पहुँच रही थी । तभी मैंने देखा कि उस स्थापित है । वही सुबह वाले उधर का आदमी नहीं । आपने दुकान का द्वार खोलकर हमें ध्यान से दिक्कत परिस्थिति का चाहता ले रहा था । थोडी देर नहीं हमें अपने हाथों से इशारे कर के अन्दर की तरफ खुला रहेगा । हम तो लगभग के अंदर घुस गए । हमारे अंदर घुस रही । उन्होंने दरवाजे में चटक नहीं लगती । अंदर चारपाई पडी थी । हम लोग वहां बैठ गए । विकास ने पूछा था समिति रात को वहाँ क्या करने गए थे? मैंने सारी बहुत उन दोनों को बताते । विकास उन बातों को सुनकर परेशान सा हो गया था । कभी तेरे में बहुत ही उम्र के बुजुर्ग तीन चाहे लेकर आए । उन्होंने बताया कि उनका नाम आनंद सिंह बिष्ट है । नौ साल पहले उनकी पत्नी और उनके बच्चे उनके पैतृक गांव पहुंचे । चले के सब पुलिस नाम के काम में पडता है, जहाँ जाते वक्त किसी बस दुर्घटना के शिकार हो गया । आप को अपनी बच्ची हुई जिंदगी के कुछ असर करने के लिए दुकान चलाते हैं और कहीं अकेले ही रहते हैं । उन्होंने बताया कि घोषित अंग्रेजों के ही नहीं था । एक बार घूमते घूमते ॅ यहाँ पहुँच जाते हैं । उनकी पत्नी उनके फॅमिली के जन्म के बाद ही दुनिया छोड कर चली गई थी । हमी को अपनी पत्नी की आखिरी निशानी समझकर जो उससे बहुत प्यार करते थे । अम्मी के बाल बिल्कुल उसकी मम्मी कितना ही सुनहरे और संग्रहालय है । जॉर्ज को ये जगह इतनी पसंद आई कि उन्होंने अपनी बेटी हमी एवरेस्ट के साथ यहाँ रहने का निश्चय कर लिया । यहाँ अपनी बेटी रहने के साथ खुशी खुशी रहने लगा । छोटी बेटी की हर इच्छा को समझते हुए उसके कहने से पहले ही उसके हर ख्वाहिशों को पूरा कर देता था । उन्होंने इस पथरीली जगह पर बहुत मेहनत की और इस जगह को दर्शनीय स्थल बनाया । बहुत खुशी से उनकी जिंदगी की गाडी चल रही थी । एक दिन मम्मी को यहाँ के स्थानीय व्यवसायिक राहुल भारद्वाज से प्यार हो गया । जब जमीन अपने दिल की बात आपने पहुंॅचे की तो उस की शादी के लिए तैयार नहीं होगा । ऍम करती थी उसके लिए राहुल के बिना जिंदगी गुजारना संभव नहीं हो रहा है । एक दिन मैंने राहुल से ये सोच कर कोर्ट मैरिज कर्ली की । उसके पिता चौंच उसे बहुत प्यार करते हैं । उसकी खुशी के लिए मैं कुछ दिन बाद अस्सी तो को ही जाएंगे । जब की बात उसके पिता को पता चली तो कुछ दिनों तक नाराज रहे लेकिन एक दिन उन्होंने फैसला किया है की बहुत ही बेटी के सवाल जाकर उसको मनाएंगे । अपनी गलती के लिए उसे जमा मांगेंगे । मम्मी का सवाल यहाँ पास के काम धनोल्टी नहीं था । एक फॅमिली से मिलने राहुल भारद्वाज के यहाँ पहुंचे तो देखकर तंग रह जाते हैं कि उस घर से लडने झगडने की आवाज जा रहे हो । जब उन्होंने ऍसे सुनने का प्रयास किया । पता लगा कि उसकी बेटी की होने की आवाज आ रही है क्या भाषण करते रहेंगे और उसी वक्त अंदर जाकर अपनी बेटी को ही है । यहाँ आते ही हमी ने बताया की उसका शादी का फैसला गलत था । राहुल ने सब पहले से योजना बनाकर रखी हुई थी कि कैसे उसको प्यार फसाना है और कैसे उसका इस्तेमाल उसकी दौलत हथियाने के लिए करना है । मम्मी ने ये भी बताया कि राहुल पहले से ही शादीशुदा था, उसको प्रतिदिन मारता पीटता और तरह तरह के सोलह करता हूँ ताकि हमें मजबूर होकर जाँच के पास जाकर अपनी व्यथा, समय और सारा धन और बहन के सारी प्रॉपर्टी राहुल के नाम करते हैं । जॉॅब कि अगले कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा । बस तुम कुछ दिन ऍम ऍम जनता से चौकी से हफ्ते करती जा रहे थे । हम अपने पता चौंच को इस तरह तरह का रास्ता देख नहीं पाए और अपने की कोई गलत फैसले पर बहुत बचत आने लगी । फॅस छोटी से भी चढाई की तरफ छलांग लगा नहीं चपेट में कितना कोई बात पता लगी तो उन्होंने अपनी लाइसेंसी बंदूक से खुद को उडा लिया । कहते हैं कि कुछ दिनों बाद ही राहुल अपने ही घर में रहस्यमय तरीके से बना हुआ पाया गया । जब राहुल के इलाज को देखा था उसके हम के बाहर की तरफ निकली हुई थी और उसकी चीज लटकी हुई थी । उसके शरीर से बहुत ही गंदी पत्तो आ रही थी । कहते हैं कि एमी और जॉर्ज की आत्मा आज भी यहाँ बढती रहती है और दस जगह किसी ना किसी को भी अक्सर नजर आ ही जाती है । जब के अच्छे कामों और उसके एक जिम्मेदार पिता होने की वजह से आज इस छोटी का नाम ऍम सबसे बडी उपलब्धि तो है क्योंकि नहीं का नाम उस पर्वत की चोटी को दिया गया है । पूरे विश्व में सबसे बडी है जो आज पूरे विश्व में माउंट एवरेस्ट के नाम से प्रसिद्ध है । आनंद अच्छे की बात सुनकर हम दोनों के सामने खडे हो गए । आनंद जी की बातों से मुझे पता लगा कि उस सुनहरे रंग कंगाले पालो वाली लडकी का नाम ऍम प्राथमिका । तीसरा बहस चल रहा था । घडी में देखा तो तीन बज रहे थे । आनंद जी ने बताया कि देहरादून जाने के लिए सबसे पहली बस आठ बजे सुबह आती है । उन्होंने बताया कि हमारा पिट्ठू बॅायकॅाट एज में ही पडा है । आनंद जी ने भरोसा दिलाया कि वह खुद सुबह वहाँ से बाहर ले जाएंगे । उसकी चलता नहीं हूँ । बातें के अनुसार आनन्द जी हमारा पिट्ठू बैग लेकर हम एबॅट के पास मिले थे । दोनों ने हाथ जोडकर उनको इस मदद के लिए शुक्रिया कहाँ देहरादून जाने वाली बस में फॅसे दूर जा रहे थे, मेरे शरीर में जाना रहे थे । मैं देहरादून चाहते, व्यक्ति ही सोच रहा था की है मैंने मुझे क्या था? क्या वो कुछ बताना चाहती थी? मुझे इशारा कर के कुछ समझाना चाहती थी । आखिर उसके अतृप्त आत्मा को मुक्ति कैसे मिलेंगे? यही सब सोचते सोचते कब हो गया पता ही नहीं लगा । जब बस से हम उतरे तो समय के दस बज रहे थे । सुबह हमेशा एक जैसे ही होती है ऍम एक रुपए । जीवन में बहुत कम ही सुबह ऐसी होती है जो उम्र भर याद रहेगा । मैंने विकास से कहा हम आपकी इस खतरे को खुल जाना चाहता हूँ । मंच पर पूछ जैसा है ऍम जब विचारों और दलीलों से आप लाख हम अपने प्रतिकृत बनाने में कर सच्चाई का पहुँच आप महसूस करते ही हैं । मेरी बातों को सबका विकास भी चैन विधा और परेशान भी । मैंने विकास से गले लगकर बधाई दी और आपको में बैठकर अपने घर की तरफ रवाना हो गया । विकास भी देहरादून आईएसबीटी की तरफ निकल चुका था । वो भी इस बार अपने साथ बहुत से यादे लेकर साथ जा रहा था । इन यादव को इतनी चलती दिमाग से निकाल पाना हम दोनों के लिए फिलहाल कोई आसान काम ॅ बिल्कुल नहीं होगा ।

भूत का घर -01

भूत का घर विभाग एक श्रीकांत प्रजापति जी भयाना नामक काम में किराये के मकान में स्थायी हुए पेशे से शिक्षक है । श्रीकांत स्कूल में काफी लोकप्रिय शिक्षक हैं । स्कूल में पढाने के बाद तो बच्चों को अपने घर पर ट्यूशन पढाते हैं । अभी दो साल पहले उनका तबादला हो चुका है पर जब वो भटियाना में थे तब उन्हें अपने किराये के घर में बेहद भयानक ऍम उत्तराखंड के टिहरी जिले में पडता था । शहर से काफी दूर होने के साथ साथ एक पहाडी इलाका था जहाँ उच्च शिक्षा के लिए अच्छे कॉलेज का भाव था । उनका परिवार देहरादून में ही रहता था क्योंकि बहुत शैक्षणिक सुविधा और बच्चों के पढने के लिए अच्छे कॉलेज है । ये घटना उनके तबादला होने से लगभग दो वर्ष होती है । तब पिछले चार सालों से भटियाना गांव में किराए के मकान में अकेले ही अपनी जिंदगी का पहिया चला रहे थे । उस दिन कुछ अजीब सी बाते हुई अचानक उन के मकान मालिक ने उन्हें कपडा खाली करने को कहा । इसके पीछे कारण यह था कि मकान मालिक की पुत्री का विवाह तय हो गया था और विवाह की तिथि अगले ही वहाँ को सोलह तारीख को निर्धारित हुई थी जो पास ही के गांव झाम में तय हुआ था तो वहाँ की तैयारियों को मद्देनजर और जगह के अभाव का हवाला देकर उन्हें कमरे को छोडने का निवेदन किया गया था । श्रीकांत जी भी बडे उस वाले व्यक्ति उन्होंने यहां चार वर्षों से भी ज्यादा वक्त दिया था और मकान की मंदबुद्धि वाली पुत्री को किसी तरह इंटरमीडियट तक की शिक्षा पूर्ण करवाने में और तीन करवाने में इन का बहुत बडा हाथ रहा हूँ । अचानक कमरा छोडने की बात उनके दिल पर खास करके आनंद फाइनल में श्रीकांत जी ने अगले ही दिन अपना कमरा शिफ्ट कर लिया क्योंकि बलियाना गांव के दूसरे छोर पर ही था । हालांकि वहाँ आस पडोस में दो सौ मीटर की दूरी पर भी किसी का नहीं था । मगर उनके ऐसा अकेलेपन का साथ देने के लिए घर के बगल में ही बडा ॅ और चीड के कुछ ऊंचे ऊंचे वृक्ष जरूर विराजमान है । उन्होंने अपनी शिक्षा बोर्डिंग स्कूल से की थी जिसकी वजह से नहीं अमित सब अच्छे बजे उठना और सारे कार्यों को खुद ही वक्त रहते संपन्न करते थे । यही दिनचर्या आज फिर उनकी जिंदगी का बडा हिस्सा बन चुकी थी । दूसरे शब्दों में ये भी कहेगी ये अपने कार्यों में कितना उलझे रहते आस पडोस की जिंदगी में क्या चल रहा है, इस की सलाह से भी सुपुर्द नहीं रहती है । कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी । नहीं कमरे में आए हुए हैं । उन्हें अभी चंद्र दिन हो गए थे । अभी बार की एक शाम को अपनी आराम कुर्सी पर बैठकर सुस्ता रहे थे । अचानक उनकी बीमारी का बल्ला अपने आप धाम से खुल गया । इस्लामाबाद से वो चौंक गए फॅार महसूस हुआ क्योंकि उसका हूँ कोई हवा नहीं चल रही थी और घर पर तो वो अकेले ही रहते थे । उठकर हमारी का पालना घर से बंद कर कुर्सी की ओर जाने लगे । तभी उन्हें महसूस हुआ कि किसी ने उनका नाम पुकारा और आवास हमारे के अंदर से आ रहे हैं । इस भयानक घटना से श्री कांची बुरी तरह डर का उन्हें वही खडे खडे पसीने आने लगे और पूरी तरह से आपने लगे । हालांकि वो विज्ञान विषय के शिक्षक थे और इन सब कोई चलो बातों पर विश्वास नहीं करते थे । तो ऐसे हालात का खुद सामना हो तो सारी की सारी तक विसंगत सस्ते में धरी की धरी रह जाती है । करते उन्होंने पीछे मुडकर देखा तो हमारी कर पल्ला धीरे धीरे चल रहा था । ऍफ से कोई तक का दे रहा हूँ । आपके ऍसे हुए श्रीकांत थोडी फॅमिली रहे हैं । तभी अचानक मनमानी से खडा कला हुआ बाहर आने लगा । ये सब घटनाएं देखकर श्रीकांत जी की चीजें निकल गए । श्रीकांत चित्तौड कर घर के बाहर है । उन्होंने सोचा के मकान मालिक को ये सब बाते जाकर अभी बता दें उत्तर अनिषा करके मकान मालिक के पास चाहे मकान मालिक इस वक्त अपनी दुकान पर ही रहते हैं । दुकान को उन्होंने अपने घर के दाहिने हिस्से में बना रखा था । श्रीकांत चेहरे पर भाई मन में आप ये दुकान की तरफ पड चले । अभी कुछ ही दूर चले थे कि उनके सहन में बिचारा आया क्या की सही रहेगा? मैं विज्ञान का हो फॅस पर है की बातें की तो लोग उनका मजाक बनाएंगे और वो काम हंसी के पात्र बन जाएगी । फॅमिली मन का पहन यही सोचते सोचते उनके खत्म रखकर उन्हें इस बात का टाॅस नहीं हुआ कि वह चलते चलते मकान मालिक की दुकान के सभी पहुंच चुके थे । गुरूजी प्रणाम सही है क्या परेशानी है का? मालिक ने उनके मंतव्य को दिखाते हुए पूछा । नहीं नहीं तो कुछ भी नहीं । मैं तो बस टहलने के लिए निकला था तो इस तरह से आ गया श्रीकांत ऍम सब आने की सफल कोशिश की कुछ चाहिए तो बता दीजिएगा । मैं आप के कमरे पर ही भिजवा दूंगा । कहते हुए मकान मालिक किसी दूसरे ग्राहक को सामान दिन मजबूत हो गए । श्रीकांत भी लगभग दौडते कोई कमरे की तरफ चलती है । फांसी में भी कमरे को खुल्ला ही छोड कर भाग पडे थे । उन्होंने मन ही मन में प्रचार किया की कुछ भी हो उन्हें एक बार चक्कर जरूर देखना चाहिए । क्या पता कि मन का बहन की वो अब उनकी चाल में पहले से नहीं समझा सकता है । उन्होंने अपने विचारों से खुद को मजबूत किया था । कुछ छत पर चाहती थी, कमरे के अंदर दाखिल हो गए । उन्होंने देखा कि अलमारी बिल्कुल सामान्य स्थिति में अपनी जगह खडे हैं । उन्होंने मत करते ऍम हमारी को अपने दोनों हाथों से एक ही झटके में खोल कर पीछे अखबारी में जमा धूल के और कुछ भी नहीं था कि देखकर उन्हें बेहद अच्छा हुआ लेकिन उससे कहीं ज्यादा सुकून मिलता है । अच्छा हुआ कि उन्होंने मकान मालिक को ये बात नहीं बताई तो बेकार में उनकी खेती होती है और हंसी का पात्र बनते हैं सो अलग । जब की जल्दी खाना बनाया और स्तर पर सोने चले गए । उन्होंने मन से इस घटना को मानसिक थकान का प्रभाव समझकर फलाना ठीक समझा और गहरी नींद के आगोश में समा का हमेशा की तरह सुबह सुबह उठकर दैनिक को सम्पन्न करने के बाद के समय से विद्यालय चलेगा । शाम को थके हारे घर आते हैं और रात का खाना बनाने में लग जाते हैं । चिकन के साथ अफेयर का स्वाद लेने के बाद स्तर पर जाकर पसंद है हूँ । इस घर का आवाज से अचानक शाॅ उन्होंने देखा इस धमाके के साथ पिछली कट गई थी । मोबाइल उठाकर देखा तो खडी ठीक पा रहे बचने का इशारा कर रहे थे । बिस्तर से उठने के बाद मोबाइल कपडा हवाई चालू करने के बाद वो कमरे का दरवाजा खोलकर देखते हैं । दरवाजा खोल रही तो कर रहे जाते हैं सामने ट्रांसफॉर्मर में शोर्ट सर्किट होने की वजह से भयंकर आग लग गयी थी और ऍम करके चल रहा था । पानी मारकर कमरे के भीतर उठा के लोग हैं । चलाने के लिए मोमबत्ती भी नहीं । मन ही मन बहुत को कोसने हॅूं । इतने लापरवाह कैसे हो गए कि मोमबत्ती लेने की भी खुद बना रही है । अगली सुबह जल्दी उठो और सुबह बच्चों को ट्यूशन पढाने के बाद स्कूल की तरफ रवाना हो गए तो हमेशा के तहत हारे कमरे में प्रवेश होते हैं और खाना बनाने के बाद कुछ वक्त पिछली का इंतजार करते हैं और मन मारकर मोमबत्ती के प्रकाश में अकेले कैंडल लाइट डिनर करने के बाद बिस्तर पर लुढक चाहते हैं । मध्यरात्रि को उनको एहसास होता है क्योंकि जाती पर बहुत भारी बदन रखा हुआ है तो जैसे मान लो कोई उनकी छाती पर ही बैठा हुआ हूँ । वो खुलकर देखते हैं तो कोई भी उन्हें दिखाई नहीं देता । कमरे में चारों तरफ और अंधेरा पसरा हुआ है । उन्होंने कोशिश की अपने हाथ को उठाकर छाती तक ले जाए और पता करें की ऐसा क्यों हो रहा है । लेकिन उनका यह प्रयास असफल रहता है । वो अपने हाथ तो दूर उतने पलक झपकाने के अलावा और कुछ भी करने में अपने आपको असमर्थ साबित हो रहे हैं । लगभग पंद्रह से बीस मिनट तक लगातार हाथ उठाने और उठकर बैठने की लगातार कोशिश करते रहे लेकिन हर बार उन्हें असफलता ही हाथ लग रही थी । हाँ, हमारे वहाँ पसीने से तर हो जाते हैं । उनके सोचने समझने की शक्ति खत्म होती जा रही थी । उनकी समझ में बिल्कुल नहीं आ रहा था कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है तो लाख प्रयत्न करने के बाद भी बस उंगलियाँ हिला पा रहे थे । धीरे धीरे उनकी छाती पर दबाव बढता ही जा रहा था । अपमानों लग रहा था की बस दम घुटने ही वाला है और अपने अंत का बस मुकदर्शक बनकर इंतजार कर रहे हो । इस अप्रत्याशित हरकत में उनके सोचने विचारने की शक्ति भी उनसे छीन ली थी । उन्हें एक बात तो समझ में आ गई थी कि पिछले कुछ दिनों की घटनाएं उनके लिए किसी अनहोनी होने का शराब जिसको उन्होंने हमेशा ऍम किया था । उन्हें इस चीज का भी मलाल था कि अब जब उन्हें इस बात का विश्वास हुआ है तो बहुत देर हो चुकी है । उनकी सबसे मुखर नहीं लगी थी और चेहरा बिल्कुल स्वस्थ हलाल हो चुका था । आंखों की पुतलियों बाहर आने को पेप्सी देख रही थी और कोर्ट भाई के कारण धर धर कहाँ रहे थे । श्रीकांत जी ने हार मान दिया और उनकी आंखे बंद होने लगी । उन्होंने आॅर्ट समस्या से बाहर आने की गुहार लगाने लगे । उनके शरीर में आ जाना कहीं से ऊर्जा मिली और फिर बुदबुदाते हुए पचरंग पांच पडने लगेंगे । निश्चय प्रेम प्रति जाते हैं विनायक करे सनमान तेहि के कारज सकल शुभ सिद्ध करें हनुमान ऍम प्रभु अरज हमारे क्या बाॅधते । भूत प्रेत सबका आप श्रीकांत जी जैसे ये मंत्र बोलने के बाद अपनी आंखें खोली तो देख कर चकित रहेगा । एक जो भी चमके लिए होंगे उनके और चमकती हुई प्रतीत हुई जो उस खाले साई की थी जो उनकी छाती पर लगभग आधे घंटे से सवार था । अब श्रीकांत जी को उसके हल्की हल्की आकृति दिखने लगे थे उन्होंने ये देखते ही सोलह सौ उसे बजरंगबाण का मंत्रोच्चारण करने में लगता हैं । मंत्रोच्चारण करते ही अच्छा तो असर शुरू हो गया । थोडी देर में उन्हें बाहर हिंदा का एहसास हुआ और उन्हें अगले ही बल्कि महसूस हुआ कि अब उन्हें उस भारी वजन का एहसास नहीं हो रहा था । नहीं, आपको अदृश्य दान दिख रहा था । श्रीकांत जी ने सोचा कि ये बात अपने धर्म पत्नी को बताते हैं जो देहरादून में बच्चों के साथ रहते थे । तो जब खडी पर नजर का तो अपने आप करो क्या? दीवार खडी पर नजर दौडाई तो रात्रि के ढाई बजे का हो रहा था । इस वक्त थी रात को फोन करना उन्होंने उचित नहीं समझा । उन्होंने नेशनल किया कि सुबह सूर्यास्त के बाद सारी आपबीती बता देंगे । बहरहाल इस घटना के कारण उन की नहीं तो कपूर हो गई थी तो सुबह का इंतजार करने लगे । प्रसाद करते करते उनके दिमाग में ख्याल आया कि अगर मैं फोन करके इन सारी घटनाओं को बताऊंगा तो बच्चे ही परेशान हो जाएगी । श्रीकांत जी नेटवर्क शक्ति से काम दिया और है निश्चय क्या? क्या क्षति बार का दिन है । चुनाव होते हाथ उनके लिए सुबह ही निकल जाए और खुद इन सभी घटनाओं को प्रत्यक्ष बताते यही सब सोचते सोचते कब सुबह हो गई उन्हें । इसका ऐसा ही नहीं हुआ । अचानक दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई । बेमन से वो बिस्तर से उठे और तरफ से की तरफ सावधानी तो पढ चले तो उन्होंने जैसी दरवाजा खोला तो देखते हैं कि ट्यूशन वाले कुछ बच्चे आए हैं । उन्होंने बच्चों को दो दिन का अवकाश करने को कह दिया । दरवाजा खोल करते है ना तो जाने की तैयारी में जुट गए हैं ।

भूत का घर -02

भूत का घर भाग तो देहरादून ऍसे लगभग डेढ सौ किलोमीटर की दूरी नहीं था । श्रीकांत जी ठीक एक बच्चे देहरादून वाली घर पहुंच चुके थे । उनके अचानक बिना सूचना की आने पर उनकी पत्नी ने संदेह व्यक्त किया । लेकिन उन्होंने सोचा हूँ थोडी देर में इस बात का जिक्र करेंगे और उनकी आउट आपस में लग रही है । कॅलेज गए हुए थे । नहाने होने के बाद उन्होंने बीती हाथ की आपकी थी अपनी धर्म पत्नी को सिलसिलेवार तरीके से बता दिया । शुरू में उनकी बातों का विश्वास उनकी धाम बनने को नहीं हुआ लेकिन जब उन्होंने गंभीर और हताश मुद्रा में ये बात बताई थी तो उन्हें विश्वास हो गया हूँ । उनकी पत्नी ने उनकी बातें सुनकर यह निश्चय किया कि बुधवार को वो भी उनके साथ भटियाना जाकर कुछ दिन साथ रहेंगे । अगले दिन दोपहर को पहुॅचाना के लिए निकल गए । शाम छह बजे से लोग भटियाना पहुंच गए हैं । जैसे जैसे रात होती जा रही थी वैसे ही शिवकांची के दल में भाई भी बढता जा रहा था । फिर भी कहीं ना कहीं आज उन्हें आत्मबल भी मिल रहा था । क्योंकि आज इस कमरे में अकेले नहीं थे । उनकी हिम्मत पढाने के लिए उनकी धर्म पत्नी का मिला । देवी भी उनके साथ ही थी । बिजली को गए हुए चार दिन हो चले थे और अभी भी शहर से कोई मैकेनिक नहीं आया था । उन्होंने जिंदगी में पहली बार एक साथ कैंडललाइट डॉलर किया और मोहम्मद को चलते हुए छोडकर स्तर पर विश्राम करने के लिए लेट गए । तकरीबन रात के दो बजे लघुशंका के लिए मैं मिलने श्रीकांत जी को उठाया । अंधेरा और नई जगह होने के कारण उनकी पत्नी को टॉयलेट का अंदाजा नहीं था । किस नई कमरे में टॉयलेट कमरे के बाहर पडता था क्योंकि किचन के ठीक सामने था । वहाँ जाने के लिए कमरे से बाहर निकलना पडता था । थोडी देर में ये काम सम्पन्न करने के बाद वो बिस्तर पर लेटकर अभी लेते हुए मुश्किल से चंद्र मिनट ही हुए थे कि प्रमिला जी उठकर बैठ कहीं रिकाॅॅर्ड कुछ दिक्कत है क्या? तो मैंने मैंने अंकित की आवाज सुनी । मम्मी मम्मी कहकर कुछ कहना चाह रहा था वह फॅार उनकी पत्नी ने अपने पति के हाथों को जकड लिया । एक ऐसी बातें करती हूँ आपके पहला यहाँ क्या करेगा । देहरादून में अपनी बडी बहन निकी के साथ सुरक्षित है । फॅमिली मम्मी की आवाज नहीं इन दोनों को छोड कर रख दिया । इस भारत की पडी बेटी निक्की की थी आवाज ना चाहते हुए थे । अब इस बात को मानने को विपक्ष हो गए कि बाहर कोई अनहोनी तब तक दे रही है उन्हें ऍम चलाते हुए ऍम को खोलकर चाहूँ दिशाओं में प्रकाश से कुछ घूमने का खत्म किया ऍम उनकी शाखा उन लोग की सेवाएं कुछ नहीं देखा । कुछ देर थकहार करते वापस कमरे में हम ने उन्होंने संपत्ति को प्रकाशित किया और स्तर पर पुणे लेट गए । विचार करने लगे कि आखिर के कैसे हो सकता है । किसी उदयपुर में लगे हुए थे । तमिलनाडू ॅ होने के कारण उन पर आए हावी हो और इसी के साथ की वजह से कुछ देर नहीं घबराहट ऍम उसको दूर हो गए और उन्हें नींद आ गई । सुबह उठते ही उन्होंने अपने छोटे बेटे अंकित को फोन किया और उसका खान चांदिया । किससे बात करने के पश्चात दोनों के तट को तसल्ली मिली । अंकित पीएसी के अंतिम फर्स्ट था । शाम को श्री कांची विद्यालय से आते वक्त अपने साथ लालटेन लेकर आए थे । उन्होंने अपनी पत्नी को बताया कि ट्रांसफार्मर तब तक सही कर दिया जाएगा । साठ दिन को देखकर दोनों के चेहरे पर आज काफी हद तक स्कूल आॅफ खाने के पास साल टीम को मध्यम रौशनी करके दोनों सो जाती है । रात्रि के लगभग दो बजे शुरू कांजी लघुशंका करने के बाद बिस्तर पर ले जाते हैं । उनकी पत्नी स्तर पर दूसरी तरफ करना हो रही थी । कॅश चारों तरफ फैली हुई थी । अचानक कुछ ही देर में उनके हाथ का मिला श्री कान्ति कोसोर से खिलाती हुई होती है । जी ऍम क्या हुआ? कोई बुरा सपना देख लिया क्या? अब श्रीकांत ने अर्थक्षेत्र में खींचते हुए कहा चल रखता है कि हम दोनों के बीच में कोई सोया हुआ है । कहने के साथ ही फैमिली का आपने लगती है । श्रीकांत जी पलट कर देते हैं तो उन्हें ऐसी किसी भी चीज का अनुभव नहीं होता हूँ । तो लगते चल रही है उजाले में कैसा मतलब? घटनाएं होने के आसार बहुत कम होते हैं । हम पिछली घटनाओं से परेशान हूँ । फॅमिली तुमने बुरा सपना देखा होगा । फॅमिली जी को शांत करवाकर सुनने का प्रयत्न करते हैं । लगभग आधे घंटे के बाद उनकी पत्नी को फिर से वही अहसास होता है जिसका फॅमिली रहे हैं । समझ नहीं आ रहा था कि कार्य तो क्या करें । खुद को समझाने के लिए उन्होंने सोचा कि शायद ये उनका बहन होगा । लेकिन थोडी देर बाद उन्हें फिर से वही अनुभव हुआ कि जैसे स्तर का करदाता कर रहा हूँ और ऍम कोई करवट बदल रहा हूँ । इस ऐसा सिर्फ कबीला के तौर खूंटे खडे हो गए है । वो समझ नहीं पा रहे थे कि ये सब क्या हो रहा है । बहुत हिम्मत जुटाकर बिस्तर से उठकर बैठ गई और श्रीकांत जी को पलट कर देगा । श्रीकांत जी कह रही हूँ मैं कोई हुए थे लेकिन जब उनकी नजर करते पर पडी तो प्रमिला जी का मिलता है । कत्थी चुटकियों में तबाह होता हूँ । ऐसा दिख रहा था जैसे उस पर कोई इंसान ही लेटा हुआ है । कुछ लाना चाहती थी कॅश हमारे उनके अलग से आवास तक नहीं निकले । ऍम बहुत तेज हो चली । घबराहट में काम मिला जीना का क्या उठाकर श्रीकांत जी के चेहरे पर बैठते है । अचानक इस पहुॅंची सकते में आ जाते हैं और अपनी श्रीमतीजी की तरफ कूद पडे भाव से देखते हैं । लेकिन जैसे श्री कान्ति काॅफी कोई व्यक्ति उनके पास में बीच में हो गया हुआ है जिसकी तंग उनके तंग कर रखी हुई महसूस हुई । ये ऐसा जितनी आपको लेटी महिला या पुरुष को डाला देने के लिए काफी था । इतना देखते ही उन्हें माजरा समझने में हूँ । तो करवट बदलने में असमर्थ हो रहे थे क्योंकि फॅसे साथ साथ भाई को देखा जा सकता था । उनकी श्रीमती जी के रखेगी खुली की खुली रह गई थी और अब कुछ भी बोल नहीं पा रही थी । श्रीकांत भी आपने जिसको हिलाने का लाने का भरसक निरंतर प्रयास कर रहे थे लेकिन कामयाब नहीं हो पा रहे थे । तभी अचानक लालटेन हवा में उठने लगा और कमरे के अंदर ही अंदर चारों तरफ तेज गति से चक्कर काटने लगा । देख का दोनों के प्रांत हालत में आ गए । ना की आवाज के साथ लालटेन बीमार पड जा टकराई और उसकी लगते दीवार के नीचे पडी लकडी की मैं इस पता की कुछ पुस्तकों को आगोश में ले लेती है और धूम धूम कर के चलने लगती है । कमरे में तेज धडकनों की आवाज साफ साफ सुनी जा सकती थी तो उन्होंने भाई के मारे एक दूसरे को थाम लिया था । अभिषेक कांड के दिमाग में एक युक्ति आई और उन्होंने दोबारा ऍम का पाठ पढना शुरू कर दिया । तभी एक काली से आकृति तीव्र गति से भागती हुई देखे जो खिडकी को चीरते हुए आर पार हो गया । उसके जाते ही तो उन्होंने कि जहाँ जाना है और वो उठकर बिस्तर पर बैठे हैं । श्रीकांत ने मोमबत्ती जला दिया तो उन्होंने बैठ कर रही पूरी फॅमिली है । सुबह होते ही श्रीकांत जी के पिताजी का फोन आता है । लगातार दस मिनट तक सुनने के बाद उनकी आंखों की पुतलियां फैल जाती है । फोन रखते ही प्रमिला उनको हिला दिया । पूछ दिया है कि क्या हुआ ऐसा जो चाहे के रंग उड गए । श्रीकांत बताते हैं, पिछले कुछ दिनों से जो आत्मा परेशान कर रही है, विकास पनियाल नाम के व्यक्ति क्या जिसकी पिछले साल हार्ट अटैक के कारण मात्र छप्पन वर्ष के अनुयायियों में मौत हो गई थी । उसकी कुछ इच्छाएं अधूरी रह गई थी जिसकी वजह से वो हमें परेशान करता है । लेकिन तो मैं ये सब कैसे पता और हम इतने दावे के साथ कैसे कह रहे हो । ये सब हमेशा खबर आई हुई और संशय के भारतीय कह दिया । श्रीकांत जी बोले राजी का फोन आया था । वो बता रहे थे कि अंकित किताबी पर कुल देवी आई थी और उन्होंने ही ये सब जानकारी दी है । तो सोचो इस घटना का हमारे और तुम्हारे सवाल किसी को पता नहीं था तो फिर उन्हें कैसे पता लगा । उन्होंने आज शाम से पहले ही इस कमरे को छोडने की ऐसी आती है और साफ साफ शब्दों में कहा है कि नहीं तो इसका परिणाम बहुत ही पूरा होगा । तमिल आपको श्रीकांत जी की बात सुनकर तभी राहत तो मिली लेकिन आपका मंत्रालय भी उनके चेहरे पर स्पष्ट देखा जा सकता था । इतना सुनने के बाद तो बोली सही कहते हो तुम । क्योंकि जब भी हमारे घर में किसी व्यक्ति के ऊपर विपत्ति आती है तो कुछ भी हमेशा हमें आगाह करती है । अब हमें चलते जल्दी ये कमरा खाली कर देना चाहिए । इसमें ही हम सब की बनाई है । श्रीकांत थोडी देर बाद प्रमिला जी के साथ अपने मकान मालिक ज्ञान पहुंचते हैं और साथ घटना का विस्तार से बताते थे । उनके मकान मालिक काम की बात को सुनने के बाद होते हैं । जी हमें बात कीजिएगा । बैंक के बाद आपको बताना चाहता था तो हम बदनामी की वजह से नहीं बताना चाहते थे । अगर एक बार क्या फाॅल गई तो कोई भी किराये पर ये कमरा नहीं लेता । आपको कमरा मेरे बडे भाई विकास होती हाल का था । एक दिन उनकी अकाल मृत्यु हो गए । पहले भी कुछ मेहमान वहाँ ठहरे थे तो उनके साथ भी कई बार वहाँ कोई अप्रिय घटनाएं होती रहती थी । काफी पर से वो कमरा एकांत में होने की वजह से खाली ही पडा था । बहुत मुश्किल से उस जगह रहने के लिए हमें किरायेदार के रूप में आप ले लेते हैं तो हम भला कैसे मना कर सकते हैं । हम ने सोचा कि अब काफी वक्त हो चला है । शायद ये घटना शांत होगी हूँ । मतलब आपको सब पता था । फिर भी अपने इस तरह से लालच के लिए लोगों के प्राणों को दांव पर लगा दिया । आप जैसे लोगों को लालच के सामने इंसान के सिद्दीकी भी छोटी जान पडती है । मैं आज पर अभी इस कमरे को बदलने जा रहा हूँ । कहते हैं परिषद कांजी वहाँ से कमरे की तरफ निकल पडे । उसी वक्त भटियाना गांव में ही मुख्य के यहाँ कमरा शिफ्ट कर लिया । अभी कमरा शिफ्ट किया मुश्किल से कुछ छह महीने हुए थे कि श्री कांच का तबादला टीहरी चले में रिंगाल करता मत जगह पर हो गया । भीषण कांजी उस पल को याद करते हैं तो दिल्ली से छोटी तक से हट जाते हैं । अपनी पत्नी का भी आधार जताना बिल्कुल भी नहीं भूलते, जिसने मुसीबत के वक्त उनका साथ सबसे कदम मिला कर दिया था ।

अनजानी मौत का रहस्य -01

अंजानी मौत का राॅबर्ट एक उनकी घंटे बचते हैं । मेरे ड्रीम को ले खुलते ही सबसे पहले घडी पर नजर पडी तो देखा सुबह के पांच बज रहे थे । मैंने सोचा इतनी सुबह सुबह किसने फोन किया । उनकी स्क्रीन देखे बिना ही मैंने हरा बटन दबा दिया हो । उधर से आवाजाही सीमान । आवास जानी पहचानी लगी । दूसरी तरफ चर्चा जीत है । मैंने कहा हाँ चाचाजी प्रणाम खुश रहो । दिल्ली आ सकते हो गया । उनका प् इतना कहना था कि मेरी पूरी नींद कहाँ छूमंतर हो गई । पता ही नहीं चला की सारी इंद्रियां का एक ये संकेत देने लगी कि कुछ ना कुछ तो गडबड है । वहाँ ऍम चलने लगी कि क्या हुआ? हो सकता है होती है क्या करता था तो यहाँ से दिल की बढती धडकनों को काबू करने की नाकामयाब कोशिश करते हुए मैंने पूछा जी सब ठीक तो है ना । सीमान अगर दिल्ली आ सकते हो तो फौरन आ जाऊँ । बहुत जरूरी है बेटा । इतना कहकर चाचा जी ने फोन काट दिया । चक्कर की नहीं की तरह घूम रहा था । मेरी तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि हुआ क्या? फौरन पिताजी को फोन लगाया । काफी देर तक मोबाइल में ट्रेन की घंटे सुनाई देती रही । लेकिन पिताजी ने फोन नहीं उठाया । मम्मी को फोन किया, लेकिन उन्होंने भी फोन नहीं उठाया तो महात्मा नचाने कैसे कैसे खयाल रहे थे । मैंने अपनी बडी बुआ के बेटे को फोन किया था । क्यों से आवाजाही हलो? सीमांत प्रणाम? सोनू घर में सब ठीक है ना? हाँ, वैसे तो सब ठीक है । शालिनी दीदी की तबियत थोडी से खराब है । उन्हें लेकर दिल्ली गए । दिल्ली गई ऍम नहीं नहीं उनको दौरे पढ रहे हैं । शायद दिमाग में कुछ हो गया लेने की तबियत खराब है । पहले तो कभी इस तरह उसकी तबियत खराब नहीं है । किसी तरह बहुत को फोन करके हालत समझाए और दिल्ली जाने वाली अगली ट्रेन पर चढ गया । टीटीई को कुछ पैसे देकर एक बात पर आसरा मिल गया । आगे प्रयागराज चतले की इतनी लंबी दूरी तय जो करनी चाहिए । अगले दिन सुबह करीब नौ बजे नई दिल्ली स्टेशन पर उतरा । और तो क्या और सीधे रास्ते घर पहुंचा । रास्ते भरते बहुत पहले जाने कैसे कैसे खयाल आते रहे । घर पहुंचा तो देखा शादी में अगले कमरे में ही बैठे हैं । फौरन बोले प्रिया इन तो बिल्कुल ठीक ठाक लेकिन घर में एक अजीब सा माहौल जरूर होगा । हफ्ते के बाद चाचा जी इस बात की तो सुनकर पैरों तले जमीन ही खिसक गई । आप कैसे बात कर रहे हो जाता हूँ लेने पर किसी भूत प्रेत का साया है । आपका जवाब तो ठीक है । भूत वगैरह कुछ नहीं होता हूँ । ये सब बस बहन से ज्यादा और कुछ नहीं । मुझे तो आश्चर्य होता है । क्या आप खुद एक डॉक्टर है? फिर एक ऐसी बहकी बहकी और अंधविश्वास की बातें कर रहे हैं । कहीं सीमांत जब कक्षा लेने को देखा लगा तब तक मेरे शब्द भी हूँ या या भाभी तो सारी कहानी बता देंगे क्या महान पिताजी भी यहीं पर है । आप कोई भी कल ही आएगा । शालिनी के हाथ से क्लाउन लेकर पास में ही एक फकीर के भाग गए । बस आते ही होंगे । तुम्हारी चाची भी उन्हीं के साथ गई है । चाचा जी ये मत बोलो कि ये किस भेज दिया आपको इस तरह की बातें करना सारा सभी शोभा नहीं देना । बाहर वाले कमरे में शालीनी बैठे है और वो भी एकदम । फिर मुझे वो किसी एंगल से बिल्कुल भी बीमार नजर नहीं आ रही हूँ । थोडी ऍम जब तक होंगे तब सब आईने की तरह साफ हो जाएगा और समझ जाओगे चाचा जी के मुझे ऐसी बातें सुनकर मेरा दिमाग खराब हो रहा था । मैंने कभी इन सब बातों पर यकीन नहीं किया । गोरी बकवास के समय और कुछ भी नहीं लगता था । लेकिन शायद गलत साबित होने वाला हूँ ऐसे पता था । कुछ दिन बाद मेरे जैसा विज्ञान में विश्वास करने वाला आदमी भी कुछ घंटों बाद ही यकीन करने वाला था की हाँ कोई दूसरी ऐसी भी शक्ति होती है जिसका आज भी मजबूत है । घंटे बाजी दरवाजा खोला तो देखा पिताजी के साथ माँ और चाची थी । सबके चेहरों पर एक अजीब तरह कट्टर साफ साफ नजर आ रहा हूँ । आपको प्रणाम किया । आशीर्वाद में पुरानी वाली बात नहीं लगी । उन सभी के चेहरे के हाथों देखकर ऐसा लग रहा था । अनंत सुखों का बहुत बडा पहाड टूट पडा था । चाची के हाथों में खेलती थी और उसमें पानी जैसा कुछ नजर आ रहा था । थोडी देर में ही चाची ने चाचा और पिताजी को फिर मुझे बुलाया । शालिनी तो सभी कमरे में आती थी । जैसे ही कमरे में घुसा शालिनी के हाउस हम देखकर मुझे कुछ अजीब सा लगता है । मैंने कहा शालिनी क्या हुआ? चली नहीं चुपचाप बैठे रहेंगे । थोडी देर तक पहुंचा चीफ नजरों से खुलती है । चाचा की तरफ देखा था । खडी हो गई और बोली ददास ऍम ना हमें बॅाय हमें खाने चाहो ना तो हमारे पास ऍम तो बंगला में अजीब सी बातें कर रही थी जिसका हिंदी में मतलब ये था तथा कि तुम ने ठीक नहीं किया । मैंने मना किया था ना मुझे वहाँ पर नहीं जाना है । मुझे जाने से क्यों नहीं रोका मुझे लेने को अपनी ऍसे सुनकर भी खुद पर यकीन नहीं हो रहा था क्योंकि वो तुम्हारा प्रभाग बंगला बोल रहे थे । जबकि उसका परिवार था शालिनी । क्या आवाज किसी मारते जैसी लग रही थी । एक घंटे पहले तो उसकी आवाज बिलकुल थी है कहीं किसी क्या हुआ भी? चर्चा ने कहा सीमांत ॅ के हाथों को पकडना ॅ क्या हर एक मैंने पकडा तो आप रहने दीजिए मुझे अपने पास पर यकीन था तो खाली नहीं जैसी दुबली पतली लडकी को आसानी संभाल लूंगा । लेकिन कुछ पलों बात कुछ अपनी ताकत पर शक होने लगा है । शालिनी के शरीर में पता नहीं एकाएक इतनी दिक्कत आ गई की फॅमिली नियंत्रण से बाहर होने लगे हूँ । तभी पापा ने विशाल लेने को पकड लिया । लेकिन हम दोनों की महसूस कर सकते थे कि इस वक्त अच्छा लेने की ताकत हमसे कहीं ज्यादा है । यहाँ एक बार फिर घूम रहा था कि जिन बातों पर बच्चे कभी यकीन नहीं था उस पर यकीन करना पड रहा था । लेकिन दिमाग के किसी कोने में अभी भी यही था की ये कुछ माँ की बीमारी है ना कि भूत प्रेत का साया । उस फकीर के यहाँ से लाये पानी कोछड करने के बाद शादी नहीं एकदम से शांत हो गए लेकिन चेहरे पर अभी भी वही भागते हैं । चाचा कमरे में उसके पास रह गए और हम बाहर निकल कर तो आपने बताया कि एम्स में टाइम मिल गया है, डॉक्टर को दिखा रहा है । अगले तीन दिनों तक यही होता रहा । ऍम हुई लेकिन सब की रिपोर्ट ऍम भी दिखाया गया लेकिन वहाँ भी रिपोर्ट में कुछ नहीं । ये तय हुआ कि अब वापस काम चला जाएगा । वहीं कुछ हो सकता है । अगले दिन हमने घर जाने वाली ट्रेन और सब कुछ ठीक था । कुछ भी गडबड नहीं । लेकिन जैसे ही हम घर पहुंचे शालिनी का एक बेकाबू हो गए । मैंने उसे संभालने की कोशिश की लेकिन उसके एक सौ चार थप्पड ने कुछ दिन बिताने दिखा रही है । किसी तरह चाचा ने फिर से पानी छिडका तब जाकर वो शांत हूँ । किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि करें तो क्या करें, क्या हुआ है? मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा हूँ । मुझे तो लगता शालिनी को कोई जबरदस्त मानसिक बीमारी हो गई है । नहीं अगर ऐसा होता तो हो चुका है । पानी छिडकते ही सुशांत की हो जाती है । अपने अपने आँखों से देखा वो कैसे बेकाबू हो करेंगे और उसकी आवाज भी बदल गई थी । आप ये तो है लेकिन हम क्या करेंगे ऍम उनको बनवाया है । देखो क्या होता है । आप सच में यकीन कर रहे हैं कि शालिनी पर किसी भूत प्रेत का साया है । फिलहाल तो यकीन करना पड रहा है । पापा ने कहा शाम के करीब पांच बजे वो तांत्रिक आ रहा हूँ । लेकिन जैसे ही उसने सीढियों पर पहला कदम रखा पैसे वो चौक का पीछा किया । तिवारी जी आज रहने दीजिए मैं कल फिर हूँ । इतना कहते हो तेज कदमों से चलते हुए चला गया । किसी को भी समझ नहीं आया कि आखिर तांत्रिक ने ऐसा क्यों किया । ऍसे सबको परेशान कर रखा था । किसी तरह रात काटी । सुबह कभी छह भी नहीं बचा है कि बाहर से तांत्रिक की आवाजाही तिवारी जी फौरन बाहर नहीं आई है । मीडिया ने बहुत परेशान किया । ना रातभर फिक्र मत कीजिए । आप सब ठीक हो जाएगा । लेकिन आपको कैसे पता कि उसने पहले के मुकाबले कल ज्यादा परेशान किया । बस थोडा धैर्य रखी । आपको सब धीरे धीरे हो जाएगा । ये कहते ही तांत्रिक के चेहरे पर ऍम आप तांत्रिक के साथ घर के अंदर दाखिल हुए । मैं बाहर के कमरे में ही सोफे पर बैठा था । कितना असर तांत्रिक पर पडी तो मैं सहन गया । तांत्रिक ने काले रंग का वस्त्र धारण किया हुआ था । फॅार को किसी हरे रंग के कपडे से कसकर बांध रखा था । चेहरे पर उसके लम्बी लम्बी दाढी चुका, हिं से सफेद नहीं से खाली में शिक्षित होकर उसके व्यक्तित्व को और ऍम कर रही थी । गांधी पर हरे रंग के पहले थे जिसे देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता था की अपनी पूरी तैयारी के साथ ही यहाँ पर रहता था । अंदर पहुंचने ये सबसे पहले उन्होंने मुझे लेने के बारे में पूछा । उन्होंने बताया कि वो अंदर के कमरे में तांत्रिक ने मुझे उस कमरे में जाने को कह दिया और साथ ही की अभी हिदायती की जब तक कहना चाहेंगे मैं तब तक अंदर ही रहा हो लेने का भी ध्यान भटकाए रखूँ और किसी भी कीमत पर इधर ना हो, निसंकोच वाली मथुरा में उठा और अपना रुपए लेने के कमरे की तरफ कर दिया । मैं जैसे ही खा लेने के कमरे में प्रवेश किया यदि करता हूँ क्या? शादी नहीं । उस कमरे में कहीं भी नजर नहीं आ रहे हैं । कमरे में चारों तरफ अंधेरा हो ऍम करके नजरें दौडाई तो मेरी आंख खुली की खुली रह गए । शालिनी उसी कमरे में खोने में होकर के बैठी हुई है । फॅालो से अपने चेहरे को ढका हुआ है । उसका इस तरह से पाँच पर कोने में बैठे रहना अच्छा लगता है । मैं उसको उस तरह से उठाने के लिए उसकी तरफ पडता हूँ । उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे वहाँ से उठाने की कोशिश करता हूँ । मैं ऐसा बार बार करने पर भी तो कोई प्रतिक्रिया नहीं देती है । इस बार जोर से उसका नाम लेकर उसके बाजू को पकडकर उठाने की जैसे ही कोशिश करता हूँ, अचानक वो एक झटके से मुझे धकेल देती है । मैं तीन फुट दूर जाकर करता हूँ । जब हुआ कि उसने मुझे बैठे बैठे ही काफी दूर तक खेल दिया था । मैं करने के बावजूद भी उसी की तरफ दिखाए बैठा था । वो अचानक आपने पालों को चेहरे से पीछे करते हुए झटकी से उठ खडी होती है । फॅमिली मेरे सामने पलक झपकते ही खडी हो जाती है । मुझे एक सौ सत्तर समाचार रसीद करते हुए कहती है मुझे मेरा पसंद है समझे उसके ऐसा बोलते ही उस कमरे की ट्यूबलाइट हो जाती है । मैं अपने ऊपर से आपको बैठता हूँ । सिर पर काम करना होता है । मैं भागता भागता उस कमरे में आ जाता हूँ । वहाँ से कुछ देर पहले तांत्रिक ने मुझे दायक देकर भेजा था । इस कमरे में पहुंचने ही देखा कि कमरे की स्थिति पहले से काफी अलग है । कमरे के बीचोंबीच एक लाल रंग की लकीर खींची हुई थी । सिंदूर क्या गुलाल का प्रयोग हूँ । मेरे चाचा चाची तांत्रिक के साथ लकीर की दूसरी तरफ थे । तांत्रिक आपने छोले को बाजु में रख कर बैठा हुआ था जिसके सामने साथ नहीं होते हैं । प्रत्येक नियमों में दो दो लोग है कि से ही हुई थी । किसके साथ वहाँ भी हिंदू के अन्दर डाली हुई थी । वकील के साथ त्रिभुजाकार संस्कृति बना रहे थे । नींबू के नीचे कुछ रंग बिरंगे चावल के तरह थे । एक बडा सा नारियल को लेकर चर्चा उस तांत्रिक के बगल में बैठे हुए थे । उनके चेहरे के हाव भाव को देखकर यह साफ का जा सकता था कि इस प्रावधान के बीच में ये अचानक से आने का उनको सराफ भी अनुमान नहीं था । सभी चौंक तो इतने सारे से मुझे बुलाया और अपने बगल में बैठने को कहा । उसने अपने सामने से एक नई बुक उठाकर मेरे हाथ में देते हुए चुप रहने का इशारा किया । ॅ लेबल का दृश्य तो बडा ही दल का इलाज देने वाला था ।

अनजानी मौत का रहस्य -02

अंजानी मौत का रहस्य बता दो । शालिनी अब इस कमरे में हम लोगों के सामने करेंगे तो सोलह सोलह से हंसने लगे और बोले और दादा ऍम ना आबार को थाना सुने तो भी फूल काॅल वो ज्यादा ये नहीं चलेगा तो हालत क्या है । फिर पहाड क्यों नहीं मानी? अब इसका परिणाम हितकारी नहीं होगा तो अचानक से फिर से बंगला में बोलने लगी थी । जबकि हमारे पूरे परिवार में दूर दूर तक कोई रिश्तेदारी में नहीं था जिसे बंगला आती हो या कोई बंगाली हो । इतना कहते हो आप अत्यधिक सोच से हंसने लगे और हमारी तरफ आगे की ओर बढने लगे । इससे पहले की कोई समझ पाता उसने तांत्रिक के चले को मजबूती के साथ अपने दाहिने हाथ से गिरफ्तार कर ले लिया । तंत्र का किस्मत हवा में डेढ फुट की ऊंचाई पर था । मुझे देखकर विश्वास नहीं हो रहा था कि शालिनी के पास अचानक इतनी ताकत कहाँ से आ गई की जो उसने एक ही हादसे तांत्रिको तंग लिया । सबसे अचरज की बात तो ये थी कॅश आपने पढने लिखने से लेकर लगभग सारे काम अपने पास हाथ से ही करती थी । फॅसने दाहिने हाथ से कैसे बल प्रयोग किया? बहुत बहुत हैरान करने वाली अंतर की । ये स्थिति देख मेरा कल जम्मू में आ गया था । पर पसीने की बूंदें साफ तौर पर देखी जा सकते थे । मुझे इस तरह का अनुभव आज तक नहीं हुआ था । लेकिन अब जब घटित हो रहा था ओ पी बिलकुल तेरी आंखों के सामने । इसलिए सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता था । इस वक्त ऍफ का साथ तो कुछ भी नहीं दे रहा था । आंतरिक लाख कोशिशों के बावजूद भी अपने आप को आजाद नहीं करवा पा रहा था तो हवा में से भाई तंग हिलाने के कुछ भी नहीं कर पा रहा था । उस की छोटी छोटी आवाज कल ऐसे बाहर नहीं आ पा रही थी । उसकी हालत देखकर साफ अंदाजा लगाया जा सकता था कि तांत्रिक अब बस चंद क्षणों का ही मेहमान है । उसके आंखों की पुतलियां फैल चुकी थी । ऐसा लग रहा था कि बस अब अगले ही पल तो बाहर आने वाली है । मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था कि ऐसे मौके पर मैं किस तरह से मदद करूँगा । मैंने देखा कि कोने में वही पानी पडा हुआ है तो कुछ दिन पहले ही पकिर नहीं दिया था । इससे पहले की प्रॉब्लम होता है वो अलग ही बजती की पूर्ति लिए उस चलकर पेपर छपता और छान लेने के ऊपर छिडक दिया । ऐसा करते शालिनी ने तांत्रिक को छोड दिया और तुरंत जमीन पर धडाम से गिर पडे । इससे पहले के शाली ने किसी का कुछ और नुकसान पहुंचाएगी । ऍफ चाची की मदद से शालिनी को कोने में बडी प्लास्टिक की कुर्सी पर बैठा दिया तोडकर कमरे के भीतर गया और अगले ही पल मेरे हाथों में रस्सी थी । मैंने चाचा की मदद से उसके दोनों हाथ और उसका बाकी जिसमें कुर्सी के साथ बांदिया । भगवान का शुक्र है कि शालिनी अभी भी बदहावास पडी हुई थी । तब तक तांत्रिक अपने स्थान से उठ खडे हुए और शालिनी के पास आकर खडे हो गए । ताकत रखने शालीन के माथे पर काले रंग का तिलक लगाया और उसने फटाफट में चल के साथ उन्हीं को उठाया और उसके सिर पर साहब पार्क घुमाते हुए उसे कुछ मंत्र बुदबुदाते हुए एक एक करके कमरे के चारों को नब्बे नियमों को बाहरी पानी से फेंक दिया । बाकी बचे तीन दोनों में से एक को काटने लगा । उस को काटते ही पूरा नहीं बोला । आज की लाल हो गया उससे लालकुॅआ लगा मानव जैसे किसी का होगा ये देखकर फॅमिली थोडा और मेरे मन में खाया लगने लगा कि पता नहीं अभी क्या क्या देखने को बाकी है । अभी अगले ही पल तांत्रिक बाकी बच्चे तो नहीं को लेकर मेरे सामने खडा हो गया । उसने मुझे नहीं देते हुए कहा ऍम अगर तुम इस लडकी और उस लडकी के घरवालों का भला चाहते हो तो तो नहीं वो कर लेकर जाओ और इनमें से एक को घर के बाहर मुख्य गेट के पास और दूसरे को घर के पिछवाडे में मिट्टी में फटाफट दफन कर रहा हूँ । मैंने हम देखा ऍम तरीक से लेकर सरपट बाहर के और दौड पडा । तांत्रिक के बताया अनुसार काम खत्म करके कुछ ही पलों में उन सभी के सामने था । शादी नहीं अभी भी कौनसी से बनी पडी थी और उसे अभी तक होश नहीं आया था । सबको इकट्ठा देखने से साफ पता लग रहा था कि वो कुछ जरूरी बातें कर रहे थे जो शालिनी सही संबंधित थी । जैसे के अंदर पहुंचा था उन्होंने भी कुछ अपने पास बुला लिया तो तिवारी जी आप कुछ बता रहे थे । शालिनी के स्कूल के बारे में फॅमिली भाव से पूछा देखिए मैं इस से पहले नहीं बताना चाहता था लेकिन मुझे लगता है कि अब इस बात को साधा वक्त तक छिपाए रखना भी सही नहीं होगा । लेकिन ये बात बिल्कुल सच है । बात करी बातचीत तीन साल पहले किया जब शाली ने अपने बोर्डिंग स्कूल में पढती थी । वो ॅ स्कूल था । उसके स्कूल का नाम ऍम स्कूल था और पार्टी पुरानी जिसके पास बनाती हूँ । स्कूल का बहुत बडा था जिसमें फॅसा कुछ उसी साल उस विद्यालय के प्रांगण में एक नई बिल्डिंग बन रही थी । हॉस्टल के लिए जमीन की खुदाई की जा रही थी । राय के दौरान वहाँ कई सारे नरकंकाल पाएगा । उनमें से कुछ को तो वहाँ के प्रिंसिपल शुक्ला शास्त्री ने उसी विद्यालय के बायो लैब में रखवा दिया और कुछ नहीं अपना रहने दिया क्योंकि वो टूटी फूटी हालत में थे । कुछ महीनों में ही होना ही हॉस्टल के बिल्डिंग बन के तैयार हो गए और वहाँ पर बच्चे रहने लगे । बिल्डिंग के पीछे की तरफ जो है कि सिंधिया बनी हुई थी इमरजेंसी के लिए नहीं । बिल्डिंग बनने के कुछ दिन बाद ही अजीब अजीब सी घटनाएं होने लगे । बिल्डिंग में किसी के रूम में चीजें अपने आप करने लगती है तो किसी को सोते हुए कुछ आया पकड के हिला देता हूँ । किसी को समझ में नहीं आ रहा हो गया था । स्कूल की मैनेजमेंट भी खास ध्यान नहीं दिया । ये सोच कर के बच्चे आपस में मजाक करते हैं । लेकिन धीरे धीरे मामला गंभीर होता गया । एक रात पांचवीं मंजिल पर रहने वाले बच्चे नहीं ऊपर से कूद कर खुदकुशी कर लिया । सब सकते में आ गया । पुलिस ने छानबीन शुरू की तो यही नतीजा निकला की बच्ची ने खुद छलांग लगाई थी । पेंटिंग क्योंकि भाजपा मंजिल पर कोई भी रहता ही नहीं था । सीसीटीवी फुटेज में भी पांचवी मंजिल पर वो छात्रा अकेले जाती हुई देखी थी और कोई नहीं था । अगले ही एक महीने में तीन और बच्चे बिल्कुल उसी तरह से बिल्डिंग से कूद गए और मर गए हैं । इसके पास स्कूल मैनेजमेंट के होते हैं और सपने मान लिया कि यहाँ जरूर कोई ऊपरी चक्कर है । अगले ही धन साथ पानी चर्च के बुरे अगर को बुलाया उस लोग है की सीढी के पास आते ही समझ गए कि जहाँ कुछ कर पढते हैं उन्होंने प्रिंसिपल को बोल कर उन सीढियों को बंद करवा दिया और उसका शुद्धिकरण किया । पूरे फादर ने बताया कि जहाँ ओपेनिंग बनी थी वहाँ बहुत पहले एक बडा सा पुराना कब्रिस्तान हुआ करता था । बहुतों का पूरा कबीला रहता था बिल्डिंग बनने से बहुत सारे बहुत बहुत नाराज हो गए थे । इसलिए वहाँ के सब लगाते हो रहे थे । जो बच्चे बिल्डिंग से कूद वो अपनी मर्जी से नहीं, उनको जबरदस्ती होना धक्का दिया था । बिल्डिंग है फादर वहाँ हर फ्राइडे को आते और उसको ली कोटा से उस जगह की शुद्धि करके जाते हैं । धीरे धीरे सारी अच्छी भर करें । कम होती चली गई । बिल्कुल बंद तो नहीं हुई थी क्योंकि उसके बाद भी कई बच्चों ने बताया कि उनके कमरे का सामान इधर उधर हो जाता है । लेकिन कुछ खुशी का क्यों? केस तुम्हारा नहीं हुआ हूँ । फॅमिली को वही रहने दिया क्योंकि अगले साल उसके तस्वीर रिपोर्ट ऍम थे । मैं नहीं चाहता था कि उसके पढाई में किसी तरह की दिक्कत है । उसके बाद शादी नहीं दो साल और स्कूल में ही पडे उसे कुछ समय तक कुछ ऐसा महसूस नहीं हूँ । रात में जरूर सीढियों के पास में जाने से सभी बच्चों को टर जरूर लगता था । फॅस जाने का रास्ता होता सही हो कर सकता हूँ । अभी पिछले महीने की बात है । एक रात मैं इसमें खाना खाने के बाद अपने कमरे की तरफ जा रही थी कि उसके कदम अपने आप ही पांचवी मंजिल की तरफ बनाया ही पढ चले । जैसे वह पांचवी मंजिल पर पहुंचने वाली थी कि उसके ऍम के साथ हाँ समय रहते पहुंच गई । जब शालिनी से पूछा गया तो उसके पास कोई जवाब नहीं था वो वहाँ तक कैसे आप उसे पसंद नहीं पता था कि वह डिनर करने के बाद अपने कमरे की तरफ जा रही थी । सुबह जब शादी नहीं थी तो देखकर सहम जाती है कि उसके कमरे का सारा सामान बिखरा पडा है । उसे पिछले कुछ दिनों की हॉस्टल की सारी घटनाएं ज्यादा जाते हैं कि किस तरह से इस तरीके से हॉस्टल की लडकियाँ परेशान थे । कुछ दिनों तक शालिनी और उसकी रूम मेट प्रियंका चुकी रहेंगे और किसी से इस घटना का जिक्र ही नहीं किया लेकिन आगे चलकर ये चुप्पी उन दोनों की सबसे बडी गलती की वजह बन जाएगी । बस ये किसी को नहीं पता था । एक रात का हॉस्टल में हंगामा हो गया । हॉस्टल के बाहर से काफी सारे बच्चों के रोने और चीखने क्या रहा है? शालिनी ने अपनी रूममेट प्रियंका को उठाया क्योंकि अभी कहना हो रही थी लाख कोशिशों के बावजूद भी जब अपने बिस्तर से उठने को तैयार नहीं हुई तब साले ने मत पूरा नहीं अकेले बाहर निकल पडे । उसने उस आवाज का पीछा किया और हॉस्टल के पीछे पहुंच गए जहां लोहे की सीढियां ऊपर की तरफ चाहती थी । वहां पहुंचने ही उसकी आंखें ये देखकर खुली की खुली रह जाती है कि वहाँ फसल की सारी लडकियाँ हॉस्टल के वॉर्डन एक कोने में खडी नहीं । एक पुलिस अधिकारी आपने कुछ कांस्टेबल के साथ गोल घेरा बनाकर खडे थे और कुछ फोटोग्राफर तस्वीरें ले रहे थे जैसे शालीनी करीब पहुंचे तो फॅमिली को कल ऐसे लगा लिया और काफी देर तक ऐसे ही लिपटी रहेगा जैसे कि शालिनी को ही इस वक्त सांत्वना की सबसे ज्यादा जरूरत हो । जब हॉस्टल के सारे बच्चे शालीनी की तरफ दयाभाव से देखने लगे तो शालिनी को शक हुआ की जरूर दाल में कुछ करना है । उसने अपनी बहन को दूर करने के लिए उस तरफ क्या चाॅस नहीं खेला बनाया हुआ था । शालिनी ने ध्यान से देखा तो वहाँ किसी लडकी का शरीर पडा हुआ था और उस शरीर के चारों तरफ खून पढा हुआ था । स्थिति देखते हैं वो समझ गए कि आज भी किसी ने हॉस्टल के पांचवी मंजिल से छलांग लगाई है तो ये देखने के लिए और आगे बढती है कि आखिर की लडकी है कौन? लेकिन जैसे ही उसकी नजर नीचे पडे जस्ट उनके चेहरे पर पडती है वो बहुत तेज चीख के साथ ही बेहोश हो गए । चाॅस उसी फसल की कुछ लडकियों को बनी है ये देखते हैं वो झटके के साथ बैठती और उसके आंसुओं की धारा फट पडते हैं । जब थोडी देर बाद तो नॉर्मल हुई ऍम बोली ऍम उसके बॉर्डर से समझाती रही की बातें बहुत उस दुर्घटना का शिकार हो गई है । पिछले कई महीनों से होती चली आ रही है । इतना सुनते ही वो चीज बडी और कहने लगे कि नहीं ऐसा कैसे हो सकता है तो बिल्कुल ठीक थी । वो मेरे कमरे में ही हुई थी और दिन से शांत करवाते हुए कह दिया बेटा तो तुम्हारे साथ ही हुई थी लेकिन जब तुम नींद के आगोश में थी तब को से पांचवीं मंजिल की तरफ चली गई थी । चाहिए दुर्घटना घटित हुई शादी नहीं पता है आप समझने की कोशिश क्यों नहीं कर रही हूँ मेरा यकीन करो जब मैं कल रात को आप लोगों की चीख सुनकर बाहर आ रही थी तो मेरे पास वाले बिस्तर में ही हुई थी । उठाने का भी प्रयास किया लेकिन उसने बाहर जाने से मना कर दिया इसलिए मैंने उसे अकेला छोड दे और बाहर का शोरगुल सुनकर ना की नहीं बाहर आ गई थी । फॅमिली देखो मैं समझ सकती हूँ कि इस वक्त पर क्या हो सकता है तो तुम्हारी रूममेट भी इसमें तुम्हारी करीबी भी रहे थे । चाॅस मस्त खुद को संभालना होगा । ऍसे चली गई लेकिन उस दिन के बाद शालिनी के सहन में आप कुछ ज्यादा ही घर करके आॅफ में उसे कमरे में किसी की मौजूदगी ॅ होता रहता था । उसने बॉडी इनको इस अजीब सी घटना के विषय में जानकारी दी लेकिन सभी ने उसे नकार दिया ही सोचा की उसके करीबी होने के कारण इसके दिमाग पर असर हुआ है तो कुछ दिन तक ऐसा ही चलता रहा हूँ ।

अनजानी मौत का रहस्य -03

अंजानी मौत का रहे ऐसे भाग तीन एक रात अचानक कुछ बच्चे दौडते तौर से ऑर्डेन के पास जाते हैं और उसे कुछ बताते हैं । जैसे सुनते ही बॉर्डर बच्चों के साथ दौड पडती है तो सभी लोग दौड कर उसी हॉस्टल के पीछे खडे हो जाते हैं और दूर से पांचवीं मंजिल पर नजर पडती है । जाॅन गुम हो जाते हैं । बहुत ही हो अपना मन था शालिनी हाँ तो उसके पांचवी मंजिल के ऊपर बनी बाउंड्री के ऊपर चल रहे थे । ये देखकर वहाँ उपस्थित सभी के होश गुम थे । किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि शालिनी कैसे पहुंचे और वहां पहुंची तो पोस्ट बाउंड्री के ऊपर क्यों टहल रही है । देखने वालों के मुंह खुले के खुले थे । शालिनी की इस हरकत में सभी को ताज्जुब में डाल दिया था । तभी उस हॉस्टल के कुछ सीनियर बच्चे और स्टाफ पांचवी मंजिल की तरफ दौड लगाते हैं । शालिनी के नीचे कूदने से पहले ही उन लोगों ने उसके हाथ को चतुराई से पकडकर खींच कर उसे बचा लिया । इस हरकत के बाद मुझे स्कूल वालों का कॉल आया और मुझे शालिनी की सारी हरकतों का विस्तारपूर्वक ब्यौरा दिया गया । अगले दिन अशालीन एक उसके हॉस्टल से लेने के लिए निकल पडे हैं क्या हाल आने के बाद मैंने उसका दाखिला यहाँ के पास के ही विद्यालय में करवा दिया । वहाँ एडमिशन करवाने के बाद तो महीनों तक तो बिल्कुल सामान्य ही रहेगा । लेकिन पिछले पारा दिनों से अजीब से हरकते करने लगे । चुकी बिलकुल ही ऐसा बनने लगी । कभी रात को छत पर तो कभी अंधेरा करके अपने कमरे के कोने में दीवार की तरफ मुंह करके बैठे रहने लगी । एक हफ्ते में हद कर दी । पिछले रविवार को पंजाब से मछली लेकर आया था । उस दिन एशिया कप का फाइनल मैच था । इंडिया पाकिस्तान के मध्य हो रहा है । घर में सभी ने सोचा कि मैच खत्म होने के बाद एक मछली खनन दिया जाएगा । अभी जब मैच के कि नहीं खत्म हुई तभी जीप से तुम खंडर अच्छी कच्छ की आवाज में सबका ध्यान इन हरकतों की तरफ की जाए । शालीन की मम्मी आवाज का पीछा करते हुए रसोई घर की तरफ जाती और फॅमिली के साथ भागीदारी आदि । इससे पहले की किसी के कुछ समझ में आता बनी शालिनी की मम्मी को आराम से सो पेपर बिठाया । उस चीज के पीछे का कारण जानना चाहा तो उसने रसोई घर की तरफ इशारा किया तो ऍर ये देखकर अवाक रह गया कि शालिनी रसोई घर के खिलाफ पर बैठी हुई थी तो मच्छी मार्किट चलाया था । उसे सच्चाई कुच्छ कुच्छ करके चला रहे थे । फॅमिली की कोई ऐसा फाॅर्स की तरह कैसे खा सकते हैं? मैंने उसे रोकने के लिए जैसे उसका पकडा । मुझे जोर से धक्का दिया जिसकी वजह से मैं काफी दूर पडता है । स्तर पर गंभीर चोट आई थी । थोडी देर कराने के बाद में उठा । तब तक मेरी चाची भी आ गई थी । दोनों ने शालिनी को जोर से पकडा लेकिन वो पहली बार किसी मर्दानी आवाज में बोल रही थी । ज्यादा आप गेम अच्छी बात करो । तारीख आ रहा हूँ तो उसे सामान्य स्थिति में करने की लाख कोशिश कर रहे थे लेकिन उस पर नियंत्रण करना बडा ही मुश्किल हो रहा था । लगभग आधे घंटे में वो पूरी तरह से नियंत्रण में उसकी सास वक्त में हमें पूरी तरह से ये मानने पर विवश कर दिया कि ये कुछ बाहर ही सकती है । इसका सामना करना हमारे बजकर नहीं हैं । दिन प्रतिदिन इसकी इस अजीब तरह की हरकतें बढती जा रही थी । जबकि किसी भी आम आदमी के लिए बर्दाश्त करने के बाहर अच्छा हमें समझ नहीं आ रहा था की समस्या से निजात कैसे पढना है । मैंने अपनी तो उसकी मदद से दिल्ली में फकीर बाबा की सहायता लेते । उन्होंने तब तक हमारी काफी मदद की जब तक हम लोग दिल्ली में थे । लेकिन आज तो हमें ऍसे हमेशा के लिए मुक्ति आपको निकल पानी हो गया । अभी चाचा की बात पूरी भी नहीं की थी कि शालिनी कुर्सी पर बंदी बंदी चीखने लगी । तिवारी बाबू हो ॅ पहले रखते हैं तो करवाना शौक है क्यूँ पांच में ना हैं तिवारी बात तो खूब बढिया मुझे तो कब तक कैसी मंगाना है तुम्हारा सर्वनाश होने से कोई रोक नहीं सकता हूँ । फॅमिली पडे धारदार तक उसे काले मुर्गे का सर धड से अलग किया और ऍम धारकों शालिनी की खोपडी से लगभग एक फुट की ऊंचाई से तब काॅल अचानक शाॅप खोलती हूँ के अंदर से जीते उपहार भी आपने नहीं अब उस काले मुर्गे के फॅमिली के चीज पर पढ रहा था और उसे वो उनका कट कर दिए जा रही थी । कॅश पूरा चेहरा के लाल छोटों से पैसा बहुत देख रहा था । थोडी देर में वह कुर्सी समेत अपनी जगह पर खाली हो गया । सोर्स ओर से चीज हो गई थी कॅश नहीं मुझे और कौन चाहिए मेरे प्यास अभी नहीं । मुझे को पहले से और की ताकत बडा खतरनाक होता है । उसको देखकर लग रहा था कि ये रसिया तो वो पल भर में तोड देगी । उठा के बाहर मारकर हंस रही थी और रह रहे के ठीक कर अपनी प्यास बुझाने के बात कर रहे थे । बडी फॅमिली कितने चाचा चाची कुछ लेने पर अपनी पकड तेज करने को कहा । ऍम काल की खोपडी निकली और अपनी हथेली पर रखते हुए से दूसरे हाथ से खडे हो जो उसी नरकंकाल की हाथ लग रहे हैं । उस बंदे को कंकाल कपडे के ऊपर गोल गोल घुमाते हुए कुछ मंत्र उच्चारण करता जा रहा था हूँ हूँ हूँ काम काल खोपडी के ऊपर हरकतें करता शालीन की जगह पर फिल मिलने लगते हैं और पूरी कोशिश करती कि किसी तरह हो सकती से हजार हो जाए । वैसे तो मुझे बिल्कुल डर नहीं लगता लेकिन जब इन चीजों से सामना होता है तो थोडा क्या हो जाता है । लगभग पंद्रह से बीस मिनट तक ये खेल चलता रहा हूँ । अब तांत्रिक शालनी के बिलकुल काम नहीं करता है । बहुत दुकान है क्यों इस बच्ची को परेशान कर रहा है । सत्ता आवाज के साथ तांत्रिक ने पूछा अभी कॉल बुरा किसी गोल होना । ॅ हो गए तो पांच में रहा एकदम बरतानी । आवाज में भराई आवाज में शामिल कर मैं कुछ नहीं बोलूंगा । सर्वनाश होगा तो कोई नहीं बचेगा हूँ । पता नहीं होगा तो क्या उस बेचारी को परेशान कर रहा है? फिर तो चाहता क्या है? इस बार तांत्रिक नहीं होते हुए पूछा और उस पर वहीं चल सकते हो । अभी जो आवास पर आई सी आ रही थी आपको रुआंसी आवाज में बोली फॅस उसकी तरह के अचानक रोने की आवाज में हमें तक ला दिया । अचार चाची ने उनके हाथ खोलने को कहा, लेकिन तांत्रिक ने ये कहते हुए मना कर दिया कि ऐसा करने से सारा खेल फॅमिली बेटी से भी हमेशा के लिए हाथ में बैठे हैं । हाॅल बोल तू कौन है और क्यों से परेशान कर रही है? इस बार तांत्रिक ने आदेशात्मक रूप से उससे प्रश्न किया तो ऍम ऍम होगा दिया है मुझे अब शालिनी को अपना क्या वादा निभाना होगा और हमारे साथ हमारी दुनिया में चलना ही होगा । ये कहकर शालिनी के अंदर क्या मैं फोर्स ओर से पहुंचे लगे होने की आवाज इतनी करते थे कि कमरे में आवाज इनका कराकर और ऍम कर रहे थे । कैसा होगा साला तुम्हारे साथ कैसा होगा हुआ इस बार का आंतरिक ने जिज्ञासुओं की भांति पूछा । पीछे बाद हादसे तीन वर्ष पहले है । जब ना इष्र्या और खाली नहीं । बहुत अच्छे दोस्त को करते थे हम पास में, लाइब्रेरी में । यहाँ तक कि मैं अभी तक हर जगह ऐसा ही जाते थे । ऍम साथ पढना, सोना और जागना होता था । अब तीनों एक दूसरे से कुछ भी नहीं पाते थे । लेकिन सुबह इतना कहते वो पक्का होने लगी । आखिर उस रात को क्या हुआ था हमारे साथ बताओ । अगर ऐसा क्या हुआ था जिसका बदला लेने को तुम हो? यकीन मानो मैं तुम्हारी कुत्ते सुन जाऊंगा । रखने, दिलासा दिलाते हुए अमावस्या की काली रात थे । उसको उस हमारी नौवीं कक्षा का इम्तिहान हो खत्म हो चला था । शाम से ही हम तीनों बोर हो रहे थे तो हम तीनों ने खेल खेलने का सोचा । हमें उस खेल को पूरा करने के लिए कुछ छोटी मोटी चीज चाहिए थी जो हम लोगों ने रात को डिनर करते वक्त साथ में लेकर आए थे । जब हम वापस कमरे में आई तो बिजली जा चुकी थी । आपके लगभग बारह बज रहे थे । हम लोगों ने कैंडल चलाया और ऍम खेलने लगे । इस खेल से सबसे पहले बारी आई शादी नहीं । शालीन मैंने तो मांगा तो मैंने उसे एक सत्य पूछा कि हमारी दोस्ती कितनी पक्की है और वह अपनी दोस्ती निभाने के लिए क्या कर सकती है? शादी नहीं । जवाब दिया मैं तुम दोनों अपने सबसे अच्छे दोस्त मानती । हम साथ जाएंगे और साथ ही मारेंगे क्योंकि मैं तुम दोनों के बिना नहीं रह सकती है । उसके बाद इस खेल में बारी आदेश दिया कि श्राॅफ क्या शालीन । मैंने उसे इतनी अंधेरी रात में निर्माणाधीन कल हॉस्टल के पांचवें मंजिल पर एक कैंडल चला कराने को कहा । पहले तो शरीर थोडा सहमे लेकिन इस खेल के नियम के आगे बेबस भी देंगे । स्कूल में सबके सामने अपना मजाक नहीं बनवाना था और ना ही उसे अपने नाम के साथ डरपोक शब्द भी लग वाले थे । इसलिए वह जल्दबाजी में कैंडल लेकर उस पांचवें मंदिर की तरफ निकल पडे । हम तो नस घन एक को अंधेरे में भी बाहर जाती है । वहाँ पर नजर रख रहे थे । अभी थोडी देर में प्रियंका की नजर पास के मेज पर पडती है और वो फोन पर दिया । वो जल्दबाजी के चक्कर में तो माचिस ले जाना बोली गई फॅमिली रहेंगे । यहाँ मुझे क्या लगता है उसमें हिमाचल गलती से छोड दिया उसने जानबूझ कर ये थोडी है कौनसा उसके ऊपर जा रही है वो एक नंबर की घर पहुँच है देखना थोडी देर यहीं पे रहेगी और माचिस छूट जाने के बढाने से वापस आ जाएगा । मेरे इतना कहते हैं मैं और प्रियंका सूर जोर से हंसने लगे थे । जब हम दोनों की ऐसे रोका तब प्रियंका ने में इस पता की टॉर्च को उठाया और जिस तरह शक्तियां गई उस तरफ चलाकर हालात का जायजा लेने को कहा । टॉर्च की रोशनी इस काली को अंधेरी रात में ठीक ही पढ रहे थे । कनिष्ठ भैया श्री क्या कह कर उसे पुकारने की कोशिश की लेकिन मुझे कोई जवाब नहीं मिला । उधर शरया लगभग जैसे तैसे फॉरेन से नजर बचाते हिम्मत करके हॉस्टल के पीछे बनी है कि सीडी तक पहुंचे । वहां पहुंचने पहुंॅचा सके । कुछ उसका सच में पीछा कर रहा है । उसने पहले तो ये सोचा कि मैं और प्रियंका उसका पीछा कर रहे हैं । वो कहाँ तक वापस जा कर आएगी या कहीं जाती भी है कि नहीं । जैसे जैसे वहाँ के बढती जा रही थी उसे कॅापी आने लगे । अनुक जैसे किसी साढे हुई जानवर की हो । आपको इतनी खतरनाक थी कि लगा जैसे वो उल्टी कर दी । जैसे ही उसने पहुंच अपने कदम वापस छोडने का सोचा तेज हवा का झोंका आया और उससे है । उसके बाद जब उसको होश आया तो उसने खुद को कल हॉस्टल की पांचवीं मंजिल पडता है । उसके हाथ में एक मोमबत्ती तो थी लेकिन दूसरे हाथ में फॅमिली उसे बडा अचरज हुआ कि आखिर वो छत पर कैसे पहुंची । फॅालो है की सीढी से वापस जाने को पूरी अब चिंता की लकीरें साफ साफ उसके चेहरे पर नजर आ रहे थे । उसे किसी बडी अनहोनी का आभास हो चला था । अचानक डर के मारे उसके सूखे होठों का साथ उसके तो हाथ का अपने लगे तभी उसकी नजर उसके दूसरे हाथ पर पडी और एकदम से बिहार से होते प्रतिमाह पर जोर देते हुए बुदबुदाई कि आखिर उसने हिमाचल की टिप्पणी को जानबूझकर महीने इस पर छोड दिया था । उसके हाथ में कैसे आ गई से कुछ समझ में नहीं आ रहा था की भलाई ही कैसे हो सकता है । तभी उसके वहाँ पर चलाया की जब वो इतनी ऊपर आ ही गई क्यों न कैंडल को चलाकर वापस जाकर अपनी बहादुरी का परिचय दे । उसने फॅमिली निकली और कैंडल को एक बार में ही चल रहा है । जैसे हो बढकर चलने को हुई तो ऐसा हुआ की किसी ने उसका पीछे से पहचाना पकड लिया है । जबकि वास्तविकता हैं बिल्कुल पडे थे । तेज हवा चलने की वजह से उसका फायदा ही निर्माणाधीन इमारत की छत पर किसी सरिये में कैसा पडा था । लेकिन इसके पीछे मुडकर देखने की हिम्मत नहीं हुई और डर उस पर इतना हावी हुआ कि वो अपना होश खो बैठे होकर बेहोश हो गई और पांचवी मंजिल की छत से नीचे कर पडे । सब के आखिरी ठीक के साथ वो हमेशा के लिए हम दोनों से अलग हो गए तो उन्होंने उसकी ठीक सुनी और हम घर के बारे में ही कमरे में ही एक दूसरे को पकडकर लेते रहे और पूरी साथ आपके सारे में ही गुजारती

अनजानी मौत का रहस्य -04

पंजानी मौत का रहस्य भाग चार । उसके बाद सुनकर फकीर ठीक पडा हम इतने विश्वास के साथ उस पर पीटी घटना के बारे में कैसे बता रही हूँ? ऍफ खुद उसने तो आपने बहुत किस तरह का उल्लेख किया था? शादी नहीं ये मत स्कूलों की मैं आत्मा शालिनी के जिसमें जरूर हो लेकिन मैं ही नहीं नहीं हूँ । मैं प्रियंका और शालिनी से क्या फायदा अपनी मौत के बाद पहुँच गई थी । लेकिन जब उसने भी मुझे अपने पास है तो मुझे सारी बात पता है तो यहाँ बहुत खुश है । बस ऍम, लेकिन वो कभी भी बहुत जल्द पूरी हो जाएगी । उसे अपना फायदा याद कराने की बहुत कोशिश की लेकिन वो हमारे साथ इस दुनिया में आने को बिल्कुल वही तक क्या नहीं है । ऐसे नहीं होगा ये कहते हैं शालिनी के अंदर छिपे शरिया सोर्स ओर से पहाडे बाहर के हंसने लगे । मैं मानता हूँ कि तुम्हारे साथ बहुत गलत हुआ है । लेकिन ये भी तो गलत है कि तुम किसी को बेवजह परेशान करते । तुम किसी के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकते हो । उसे खुदा के लिए तो हूँ कि बोले वो कारण अमिताव क्यों? कार्ड ऍम हमारा तीन क्यों नहीं बहुत होती है और एच इलाम जी है विश्वासघात हुई चार आ जाते हैं ऍम हैं फॅमिली के तहत प्रतिशोधपूर्ण कौन होते ऍम सारे चाहते हो रहे हैं किसका हूँ मैं किसी को बेवजह परेशान नहीं कर रहे हैं । हम तीनों ने वादा किया था कि मुझे इंडिया तो साथ करेंगे तो ऐसा लेकिन अपनी अपनी बातें कर नहीं सकते । इसे आना ही होगा हमारे साथ । ये तो अपने आप को सदस्य के बंधन से मुक्त करवाने के लिए जी तोड कोशिश करने लगे । देखते ही देखते हैं वो रस्सी तोडकर हम लोगों के सामने खडे थे । पांच हुआ तेरा मच मच तांत्रिक के बच्चे अब मजा चक्र तैयार हो जाएगा । ये कहते ही उसने अपने दोनों हाथों से तांत्रिक को तब होता हैं किसी बॉल की भांति उसको उठाकर तिवारी की तरफ फेंक दिया । हम लोग वहाँ पर देखते हैं किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि शालिनी करोगे आप धीरे धीरे लोगों की तरफ बढ रही थी किताबे अचानक तांत्रिक ने अपनी शक्ति को बताते हुए उसके फायदों को पकड लिया और ताकि वह हमारी और आगे नहीं बढ सके । तांत्रिक का ये प्रयास सफल रहा और उसका ध्यान भटकाने में कामयाब रहा है । शालिनी तांत्रिक की तरफ थोडी और उसे फिर से तांत्रिको पालक ही ऊपर उठाया । इससे पहले कि बहुत देर हो जाए मैं पापा से अपनी जगह से उठा और तांत्रिक पीछे से जाकर पकड लिया भी पकडता, हाथ भी मजबूत होगी । ऐसा सोचना भी कहा था क्योंकि अगले ही पल अब हम दोनों हवा में झूल रहे थे । शाली मैंने अपने तो उन खातों से हम दोनों को टाइम लिया था । मेरी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा था । मुझे मेरा अंत निकट देखने लगा था । तेज झटके के साथ हमें हवा में फेंक दिया और हम दोनों दीवार पर से अधिक हैं । हम जैसे पाँच पर करे उसके हंसने की आवाज फिर से एक बार कमरे में खून जुटे । उसकी इस उसी से कमरे में मौजूद सभी की हालत खराब होने लगी । तभी अचानक हम तेज हुई करके खुल रही हूँ । इस हवा के झोंके के साथ था । खुल खुल कर बंद होने लगी । पिछली ने भी अपना खेल दिखाना चाह कर दिया । वो भी खिडकी का साथ देने लगी । बार पर वो भी आने जाने रहेंगे । अब लाइट बिलकुल ही बंद हो गई और चारों तरफ घना अंधेरा हो गया । हम सबकी डर के मारे एक दूसरे का हाथ कसकर पकडा गया । मेरी चाची नगर के मारे हनुमान चालीसा का पाठ पढना शुरू कर दिया । उनके इस मंत्रोच्चारण का प्रयोग करना हमें अच्छा लगा पर हम सभी ने उनका साथ दिया । लगभग पांच मिनट बाद लाइट आई है तो थोडी राहत का एहसास हुआ । जैसे किसी डूबते को तिनके के सहारे का होता है । ऍम तशाली ने कहीं भी नजर नहीं आ रहे थे । ये देखकर हम लोगों ने राहत के साथ भी । लेकिन हमें कुछ समझा ही सुना सुना माहौल लगा ॅ अचानक से इतनी शांति कैसे हो गए? हम ने पीछे मुडकर देखा तो चौंक गए । शालिनी उसी कमरे में कोने में हमारी तरफ होकर के बैठी थी । जैसे हम लोगों की नजर उस पर पडी । किसको तेज तेज पहाडी मार मार के होने लगे । उसका इसका होना चाहती को बर्दाश्त नहीं हुआ और उसकी तक पढ चली । उसने अपना चेहरा अपने लंबे लंबे बालों से ढक रखा था । चाची ने उसके बालों में प्यार से हाथ फेरा ही था कि वो चाची से लिपटकर होने लगे । शक्ति साथ बोलने लगे । वहाँ मुझे बचालो मरना नहीं चाहती है । मुझे अपनी जिंदगी में बहुत कुछ कर ब्रहमा चाची कितना सुनते ही उनके आस उन्होंने पेशा लेने का साथ दे दिया । अभी मुश्किल से पांच मिनट भी नहीं हुए थे कि अचानक चाची की आवाज सीख में बदलने लगी । उत्तर से करा रही थी और शालिनी हसते हुए अपनी बातों पर चाची पर मजबूत करती जा रही थी । पीडा उनकी बर्दाश्त से बाहर होता देखने और चाचा चाची की तरफ देख के हम दोनों निशान लेने के तो मैं हाथों को पकडकर उसकी पकड ढीली । कार्रवाई तब तक तांत्रिक भी हमारी मदद करने पहुंच जाता हूँ । चाची अब शादी नहीं हो चुकी थी और वो अब हमारी फॅमिली उसको पकडकर हम लोगों ने स्तर पर ध्यान दिया । आपको बर्दाश्त के बाहर हो चुकी थी इसलिए ऐसा करता हूँ । तभी मुख्य दरवाजे पर खटखट की दस तक हुई चर्चा बोले अब इस वक्त कौन हो सकता है? माल करके दरवाजे की तरफ पर है और धीरे से दरवाजे के एक ही पानी को खोलते हैं । तब मजा खुल गई । उन्होंने राहत की सांस ली । आप लगा दिया था आपने इसे संभालना बहुत मुश्किल हो रहा है । अब सहा सभी देरी करते थे तो चर्चा पापा को देखते सारे मांॅ की सांस लेते हुए उनके हाथ से सामान के थैले को अपने कब्जे में कर लिया । तापा के साथ तो लोग और बेटे जो तांत्रिक के जैसे तीस दिनों से कपडे पहने हुए भी पापा के साथ कमरे के अंदर दाखिल उन्हें अंदर आता एक तांत्रिक की बातचीत मिल गई और बोला हाओ चलो हूँ किधर गए थे । आज तुम लोगों ने अपने गुरु की जान लेने की ठान ली थी । नहीं करुँगी ये कम वजन लेने गया तो बहुत वक्त लगा दिया इसमें नहीं तो मैं तो बाकी सारे सामान के साथ आने को बिल्कुल तैयारी करना था । एक चलेंगे । दूसरे चले पर आरोप लगाते हुए कहा छोडो ये सब ध्यान ही लोग चलती सारा सामान निकालकर ऍम करो । तब तक मैं इसका ध्यान भटकाने की कोशिश में लगता हूँ । शुरू किया के सुनते दोनों चले फटाफट दूसरे कमरे में छोडा लेकर भागे, पहुॅचाने के बाद प्रचलित कर दिया गया और गुरु के कान में कुछ कुछ आया । आप बताए मुझे सब अपने गुरु हो । मैं करता हूँ कि छुपाये कहते ही तांत्रिक नसीहत देने वाले को तीखी आवाज में झाड देता है । उसकी इस हरकत से पापा को संकोच होता है कि ऐसी क्या बात है जो कान में कहना पडेगा क्या हुआ तांत्रिक कोई परेशानी वाली बात तो नहीं । तो मैंने अपने आतंकी बहुत उठाते हुए पूछा नहीं घबराने वाली बात नहीं है, लेकिन इतना कहते तांत्रिक फॅमिली की तरफ इशारा किया । उसके बाद तांत्रिक के चले ने पापा के कान में कुछ कहा । जैसे सुनने के बाद पापा चीख पडेगा क्या बेवकूफ जैसी बात कर रहे हैं? ऐसा कुछ कर सकता है क्या? नहीं नहीं अपनी लाॅक काम कभी छूटा ये हैं क्या हो गया ऐसा क्या कह दिया मैंने जो आपको अजीब लग रहा है । इस बार चाचा जी ने उत्सुकतावश पूछा अरे वो कह रहे कि आपने कुछ किसी अपने के लागू की कुछ बूंदें आहुति में देनी होगी, तभी ये तंत्र मंत्र की साधना पूरी मानी जाएगी । आपने एकदम उत्तेजित होकर एक सांस में कह दिया सबसे पहले के समझना जरूरी है कि ये सब शालिनी के साथ क्या हो रहा है । क्या आप लोगों ने कभी गौर किया आपके शालीन की जिसमें उनकी दोस्त श्रेया और प्रियंका की जगह एक और आत्मा भी कभी कभी प्रवेश करती रहती है जो बंगला में बात करती हूँ । जिसका जैसा हम इंसानों की तरह नहीं रह गया, यहाँ आत्माओं के प्रवेश होने के लिए सबसे मनपसंद घर बन चुका है । यकीन मानिये मैंने जो पाया आपको बताये हैं । इससे सब भाई हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं । फॅमिली को समझाते हुए ये बातें उसने ये कुछ अलग हटकर बात गई थी जो अभी तक किसी के दिमाग में आई ही नहीं । सही बात है ये तो हम लोगों में से किसी ने सोचा भी नहीं था । अभी तक चाची ने तपाक से कहा ऍम इस उपाय को करने से शादी नहीं जिसमें और प्रियंका तुम्हारा नहीं आएंगे । इसकी गारंटी मैं देता हूँ । लेकिन खाली आता हूँ, बहुत ही ज्यादा रहता है क्योंकि वो आज भी काफी सालों से भटक रहे हैं । जहाँ शालीनी के स्कूल करना कल हॉस्टल बना है, वहाँ परसों पहले बांग्लादेश के रिफ्यूजी रहते थे । उन्हें वहाँ रहते हुए काफी साल हो गए थे और उस जगह को अपनी जगह जहाँ बैठे थे । काफी बातचीत के बाद भी पोस्टर है को छोडने के लिए बाजी नहीं । मजबूरन उस जगह के मालिक है तो सब को मरवा दिया । बीस से ज्यादा परिवार वहाँ रहते थे । उस समय मौत होने की वजह से उनकी आत्मा आज पे इंतकाम की आग में भटक रही है । जब से उस जगह पर दोबारा खुदाई होकर नई बिल्डिंग के लिए काम तैयारी हुआ है, तब से काम से लेकर हर चीज में अडचनें पैदा कर रही हैं और लोगों की जाने भी ले रही है । इसका कोई ना कोई तो फायदा होगा । तांत्रिक जी मेरे चाचा ने समस्या से निजात पाने तो प्रश्न किया फॅमिली के आस पास कोई अंदर या चर्च बनाकर उस जगह के शुद्धिकरण कर दिया जाए तो ऐसे समस्या का भविष्य में नहीं होगी । ये कहकर तांत्रिक मुस्कुरा दिया ठीक है हम तैयार हैं । आप जैसा कहेंगे हम बिल्कुल वैसा ही करेंगे । इतना सुनते तांत्रिक मैं ज्यादा देर नहीं करनी चाहिए । जल्दी इस कार्य को अंजाम देना चाहिए । ये कहकर तांत्रिक हवन कुंड के पास पहुंच गया और उसके दोनों तरफ चाहता हूँ । चाची भी बैठ गए । जिस धारदार चाकू की मदद से काले मुर्गे की बनी दी थी तो निकाल कर बोला आइए वक्त आ गया है आपके अपने कर्तव्यपालन करने का और हमेशा से समस्या से निजात पाने फॅसे भरी पारी से उन दोनों की टाॅपर अच्छी बात किया । तब तब करके लागू की बूंदें फूट पडी और आंतरिक उन दोनों की रैलियों को थामकर लागू की बूंदे हवन कुंड में डालने लगा है । उसके दोनों चल लेते इस बार में मंत्रोच्चारण कर रहे हैं । थोडी देर में तांत्रिक अपने स्थान से उठा लेकिन अभी भी चाचा चाची के हाथों को उसने काम कर रखा हुआ था । उन हाथों को ले जाकर शालिनी के पास जाकर छोड देता है और वो भी कुछ मन्त्रपूत बताता है । मंत्र खत्म करते ही कुछ आ लेने के मूड को खोलता है और भरी पारी से उन दोनों के खून की कुछ बूंदें शालिनी किलोमीटर है । उसके ऐसा करते ही उसके दोनों चले तो पान के पत्ते, पिसी हुई हल्दी और एक चनिया की तरह दिखने वाला आतंकी था लेकर वहां पहुंच जाते हैं ताकि फिर से चर्चा कहाँ था और उस पर हल्दी का लेप लगाकर पान के पत्ते को रखती हूँ । शालिनी की हथेली से जब का देता है तब तांत्रिक बाबा हल्दी करले शालीन के हवेली के पीछे लगाकर और पान के पत्ते लगाकर चाची के हाथ को भारत देता है । संगीत भागे से कौन कौन चारों तरफ अठखेलियों को पान देता है ये करने के बाद वो शादी लेकिन मस्तक पर अपनी हथेली रखकर मंत्रोच्चारण में लग जाता है कि तभी थोडी देर में शालिनी के जिसमें हलचल होती है फॅमिली नहीं अपने स्थान से उठकर बैठ जाती है और अलग संबोधन नाती हुई चाची से गले लगकर फूट फूटकर पडती है । ऍम तीनों को आजाद करवाता है और सभी को समस्या हल होने का दिलासा देकर अपने चेलों के साथ चला जाता है । कुछ दिनों बाद उसके पढाने स्कूल में बढिया सा चर्च बना दिया गया और कल हॉस्टल का विधि पूर्वक शुद्धिकरण करवाया गया हूँ । चर्च बनने के बाद से कोई भी ऐसी अनहोनी घटनाएं वहाँ नहीं होती है खाली नहीं उस स्कूल में तुम्हारा नहीं जाते हैं और बहुत ही बाकी की बची हुई पढाई पास वाले स्कूल से ही पूरी करते हैं । वो

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