Made with  in India

Buy PremiumDownload Kuku FM

Transcript

भाग - 01

आप सुन रहे हैं को को एफएम किताब का नाम है क्या मुझे प्यार है जिसे लिखा है अरविंद पाराशर दें और आवाज भी है । श्रीकांत सिन्हा नहीं कुकू एफएम सुनी जो मनचाहे क्या मुझे प्यार हैं? वर्ष दो हजार के बस्ती और छुट्टियों की तंग गलियों में तुम्हारे इंतजार नहीं मेरे दिल की हर धडकन तुम्हारा ही नाम हो पा रही है तो ऐसे गायब हो गई । हाँ तो हमारे बीच में कुछ था ही नहीं और मैं और मैं हर बार अपने मन को दिला सकते था हूँ यदि मैंने उसे दुखी किया है तो इस वक्त मेरी जान ले लो । फॅस मैं हर पल तो पुकार हूँ । जवाब तो नहीं तो मैं पागल हो जाऊंगा तो भारी । अनुपस् थिति उसका आभाव मुझे हर पल धरातल में ले जा रहा है । लौटाओ तो जहाँ कहीं भी हो रूम ऍम मेरी पत्र ॅ के तो वे देखते के लिए तरस रही है नहीं तो अच्छा है । मेरी तो अच्छा तुम्हें छूट को तरस रही है क्या मैं तो मैं इतना प्यार नहीं किया कि तुम मेरे साथ रहो क्या की इसीलिए तो मुझे छोड कर चली गई । अच्छे इसरन बेटू पैसे बचा लूँ देनी चाहिए मेरे दिल की और धडकन तो बारह ही नाम पर रुक रही है । ऍम अनंतकाल तक तुम्हारी प्रतीक्षा करेगा । तब फिर अब मैं इसके काबिल ही हूँ । वो प्रकटीकरण तो है पागल पर तो भारी परछाई बेरी पीला भरी आंखों से होकर कुछ कट रही है । मैं यहाँ पे लेटकर तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा हूँ । किसी भय और अब सात से दी फोन मैं लेकर तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा हूँ और ये चार जानता हूँ । बहुत चलता है तो में एक पर फिर धूम लूंगा मैं सिर्फ लेकर पाओ तक संथा बालों पारस जमीन पर फिर चल रहा हूँ । जैसे वो हर क्षण पिघलता और फिर चलता है । ठीक वैसे ही मेरा दर्द । कभी आरक्षण मेरे अंदर बढता जा रहा था । मैं परिस्थिति से बिल्कुल हिल गया था । एक छोटा कदम नहीं बढाने के लिए मुझे बहुत सोच लगाना पडा रहा था । मेरी दुनिया पूरी तरह बदल चुकी थी । मेरे साथ ऐसा कुछ हो जाएगा इसके मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी । वो पुणे कि मॉनसून की सुबह थी और उस वक्त सुबह के साथ बच रहे थे । मैं अपने कॉलेज से दो किलोमीटर दूँ, दूसरी मंजिल पर बने अपने घर में रहता था । गौरी मेरे साथ करती थी । मुझे दो साल छोटी थी । मैं इंजीनियरिंग की पढाई कर रहा था और वो माइक्रोबायोलॉजी की छात्रा । मगर पिछले शाम को अनहोनी हो गई । वह जन्म से वापस नहीं अपनी नई नवेली जैसी नहीं है । पुलिस आ चुकी थी । नमस्ते मेरा नाम इंस्पेक्टर विश्व है और ये बेदी । साथ ही परिषद तो महज औपचारिक थी । वो देखने से ही उग्र लग रहा था । मैं वरिष्ठ इंस्पेक्टर थान्या लाया हूँ । नमस्ते कृपया अंदर आइए । नमस्ते के अलावा उन्हें संबोधित करने का कोई बेहतर तरीका मुझे नहीं था । मेरी आवाज कम आ रही थी । मैं पूरी रात नहीं सोया था । हालांकि मैं पूरी तरह चौकन्ना था । मुझे मालूम था कि जांच प्रक्रिया की शुरुआत उससे ही होगी । मुझसे सवाल पूछे जाएंगे । मैं बिल्कुल सामान था । मेरी कब का बाहर शायद इसलिए थी क्योंकि मेरा मन थक चुका था । मैं बिल्कुल भी कपडा नहीं रहा था । बस थोडा विचलित था । मैंने उन पुलिस वालों को चाय के लिए पूछा । बारिश के मौसम में ये बिल्कुल सामान्य था । मैंने शुरू होने का पहला परिचय दे दिया था । सर नमस्ते कहते ना मुझे ठीक नहीं लगा । इसपर मैंने अपनी बातों में सर और मैडम का भी प्रयोग किया था । इस पर मानसून चल दिया गया था । दौर ही और मैंने लोना वाला जाने का कार्यक्रम बनाया था । हमारी यात्रा में कुछ ही दिन बचे थे । हालांकि ये मेरी योजना नहीं थी । ये कार्यक्रम उसी ने बनाया था । जब भी कहीं बाहर जाने या खुशी मनाने का कार्यक्रम बनता था तो सारी योजना वहीं बनाते थे । मैं उस से प्रेम करता था । हालांकि ये प्रेम अभी बहुत कहना नहीं हुआ था और जब भी हम साथ होते थे तब ये उभर कर सामने आता था । मगर फिर भी मैं उसके प्यार में कितना जा रहा था या उस दिशा में बढ रहा था जब अचानक मेरी दुनिया चुनना हो गई । उसके लापता हो जाने के बाद मुझे एहसास हुआ कि उसके लिए मेरा प्रेम कितना प्रकार था । मुझे अब घोषणा चुका था तो तुम दोनों एक मुश्किल हालात से गुजर रहे थे । फिर क्या जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकाल लें? मैंने अपनी आखिरी घुमाकर दोनों जांच अधिकारियों पर एक एक निगाटा हूँ । मैंने अपनी बात में उनसे अनुरोध किया, इन सब के बीच मुझे कई फोन आए । मेरी बात, मेरे पिता तो उस दिन वाला दूध द्वारा यूनियन वाले यहाँ तक कि पत्रकारों ने भी मुझे फोन किया । सच्चाई से अब सामना करना ही था, हर किसी नहीं । ये तय किया कि मैं अपने बन में ये बात बैठा हूँ । मैं पूरी तरह हो चुका था । इस परिस्थिति में आप शांत रहने की लाख कोशिश कर ले । मगर कुछ लोग आपको इतना झकझोर देंगे तो शांत रहना नामुमकिन हो जाएगा और ये लोग आपके करीबी ही होते हैं । जैसे माँ बाप तो और कुछ तो उस । अब तो पुलिस वालों का बर्ताव मुझे ज्यादा दोस्ताना लगने लगा था । उन्होंने कहा कि मैं जिसका भी फोन लेना चाहूँ ले सकता हूँ और यदि जादू नहीं हूँ तो अकेले में भी बात कर सकता हूँ । भगवान जाने में क्या चाह रहे थे? देखो परेशान होने की जरूरत नहीं है । नहीं ऐसी कोई बात नहीं है । अभी तक हमने तुमसे कोई भी मुश्किल सवाल पूछा ही नहीं हैं । धान्या ने अपनी बात मुस्कुराकर खाॅ कर विश्वास लगातार इधर उधर देख रहा था । हालांकि वो एक के बाद एक सवाल भी पूछना था गौरी ऐसे इंसान थे । आप का मतलब गौरी कैसी इंसान थी? हाँ, वही आकर्षक, जिंदादिल, सवाल करने वाली, किसी भी चीज की पूरी जानकारी लेने वाले उसे सिनेमा देखना बहुत पसंद था । उसके विचार बिल्कुल स्पष्ट होते हैं और बैंक उसे बस पिछले कुछ हफ्तों से ही जानता था । क्या हमे मान सकते हैं कि ये सब होने से पहले तुम्हारे और गौरी के बीच अंतरंग घनिष्ठ संबंध होता । हाँ, बस शुरुआत की और गौरी साथ रहते थे ना? हाँ, मगर हम दोनों एक दूसरे को लेकर बहुत गंभीर नहीं थे । मेरा मतलब है वो थी मगर मुझे कुछ और समय चाहिए था । मैं उसे पसंद करता था । मगर अंतरंगता तो नहीं थी । हमारे बीच कोई शारीरिक संबंध नहीं था । मुझे सच में मालूम नहीं था कि मुझे ये कहना चाहिए था या नहीं । मगर फिर भी मैंने कह दिया सवालों का सिलसिला थम गया । अचानक दरवाजे की घंटी बच्ची दो लोग आए और उन्होंने विश्व के हाथ में एक लिफाफा दिया । जिसे उसने तो क्या फिर उसके हाथ उसकी जेब में चले गए । वो एक बेहद चौकन्ना पुलिस वाला था । जो हर क्षण अपनी गति बदल सकता था । उसे समझ पाना बहुत मुश्किल था । थोडा सहज होने के लिए मैंने थान्या की होती था । मगर वो मेरी वोट नहीं देख रही थी । मैं समझ चुका था वो इस बात का कोई निशान नहीं देना चाहती थी कि वह मेरे तो उसकी मंगेतर है । दरअसल मैं और खांडिया एक साथ ही बडे हुए थे । हालांकि वह मुझ से बोली थी और पहले ही उसकी मुलाकात कौन से करवाई थी? धान्या नायर बहुत जल्द धान्या बॉल बनने वाली थी । गौरी भी उसी राह पर थी । वो गौरी बाहर को बनना चाहती थी । मैं हर पल बस उसी के बारे में सोच रहा था । क्या उसमें कभी तुमसे शादी करने के लिए कहा? सीधे तौर पर तो नहीं मगर वहाँ सब सात में बूढे होने वाली बात करती थी । जरूर इसका मतलब वही होता है जो जैसा मैं लगातार बात करता रहा हूँ । मुझे बात करने को विवश किया जाता रहा । मेरी जानकारी में आने वाली हर छोटी बडी बात मुझसे पूछे गए । पिछले चौबीस घंटों में जो कुछ भी हुआ मैंने काम पर तो खाया । सुबह से लेकर जब तक हम दोनों साथ थे, विश्व अपनी आदत के अनुसार लगातार कमरे में चक्कर लगा रहा था और हर चीज को बडे ध्यान से देख रहा था । जबकि धान्या एक जगह बैठी हुई थी और मुझे ही देख रही थी । वो अपनी हाव भाव से मुझे दिलासा देने की कोशिश कर रही थी । उसने ये मान लिया था कि मैंने तो हूँ उसके हाथ । हाँ उसे मुझे ऐसा लग रहा था । सीसीटीवी फुटेज के अनुसार वो बिल्कुल सामान्य तरीके से जिम से बाहर निकले थे । उसके हाथ में एक छाता था और कैमरे के निकाल से उछल होने से पहले उसने सडक को पार किया । छाता क्या आपको पूरा यकीन है? हाँ क्यूँ क्योंकि घर से तो वो छाता लेकर नहीं गई थी शायद उसे लगा होगी बारिश आने वाली है और उसने किसी से मांग लिया हूँ नहीं मुझे अच्छी तरह से याद है और इस मामले में वो बिल्कुल भी ढिलाई नहीं करती थी । मैं आपसे कह रहा हूँ वो घर से निकलने से पहले हमेशा मौसम की भविष्यवाणी देखती थी । उसे पता था की बारिश नहीं होगी और इसीलिए वो छाता लेकर नहीं गई थी । तो भारत मतलब है कि वह ऐसे जगह जा रही थी जहाँ उसे पता था की बारिश होने वाली है और इसीलिए और करने वाली बात के कि उसके साथ उसका कॉलेज वाला बचता था जिससे कि कोई अतिरिक्त सामान दिखाई । नाते तो ये होता है कि वो अकेले कहीं छुट्टी पर नहीं जा रही थी । एक अजीब सा सन्नाटा छा गया हूँ । इस बातचीत से पहले तो ये तय हो चुका था की ये कुछ भी इतनी आसानी से सोचने वाली नहीं । कम से कम मुझे तो ऐसा ही लग रहा था । विश्वास ही नजर फ्रीज पर चिपके कागजों पर बडे अगाथा क्रिस्टी ऍम कल बारिश होने वाली है अट्ठाईस डिग्री सेल्सियस । मैंने उन्हें समझाया कि उसे सिनेमा देखना बहुत पसंद था और वह अपराध पर आधारित उपन्यास भी खूब पडती थी । वे कागज मुझे गई याद दिलाने के लिए थे कि मुझे उसके लिए बेथल में डाउन लोग करनी थी और वो किताब खरीदनी थी । आखिरी दो मौसम की भविष्यवाणी थी । उन पुलिस वालों के चेहरे पर मुस्कान आती है । गरमा गर्म चाय पीने के बाद और जरूरी सबूत जुटाने के बाद वह पूरी तन्मयता से इस मामले को सुलझाने में लग गए । लिखने का काम धान्या कर रही थी । इसलिए विश्व के दखल देने और कुछ कहने से पहले उसने मेरे को देखा । वो अपनी मर्जी से गायब हुई है । उसने जरूर अगाथा क्रिस्टी के किसी उपन्यास की तर्ज पर ये कहानी रची होगी । इसलिए सर तुम तुम नहीं तो मैं इस गुत्थी को सुलझाने में हमारी मदद कर सकते हैं । उस सूची में फॅस भी है । इसका मतलब क्या अब वो ठंडी का काम करने भी लगी है? नहीं, तुम नहीं तो हमें गुमराह करने के लिए ये कागज के टुकडे अपने फेस पर नहीं चिपकाई । अचानक से विश्वास ने पूछा मैंने उन्हें बताया कि मैंने उसके लिए एक नया सिल फोन खरीदा था जो मैं उसे लोनावाला में देने वाला था । मेरी ऐसी कोई मंशा होती है तो मैं बोला ऐसा क्यों करता है? मैंने उन्हें वो खाती दिखाया जो मैंने लिख कर उस पॉकेट के अंदर डाला था । रहस्य धीरे धीरे और गहरा होता जा रहा था । मैं सब के घेरे में आ गया था । पुलिस वालों ने उन कागज के टुकडों के साथ मेरा लैपटॉप भी जब तक किया था । उसके बाद मेरे घर की तलाशी होने लगी । मैं हैरान था । मैंने उससे स्पष्टीकरण मांगा । मैंने उस से पूछा कि क्या उनके पास तलाशी का कोई वारंट है? परिस्थिति अचानक से बदल गई । धान्या ने परिस्थिति को संभाला और विश्व को घूर करते हैं । वो उसे कोने में ले गए और कुछ देर तक उससे बात जरूर । पुलिस वालों की कोई गुप्त भाषा रही होगी । इसके बाद से धान्या नहीं सारी बात हूँ । वो विश्व की वरिष्ठ अधिकारी थी । हालांकि मुझे उनकी भूमिका ठीक से पता नहीं थी । उसने मुझे पुणे छोडकर जाने को मना किया । अगर जाना पडे तो हमें बता कर जाना । विश्व ने मुझसे का और तुम से ऐसा बर्ताव करने के लिए मैं माफी चाहता हूँ । इन बातों ने मेरे अंदर के विश्वास को पुनर्स्थापित कर दिया । मैं फिर से खुद को नहीं तो उस मानने लगा था । मगर क्या मैं इससे खुश था? वे लोग चले गए और मैं फिर से अकेला हो गया नहीं । पर फिर उस की या तो देखो गया । जब कोई सूरज चान सेदारों की बातें करता है तो उन सब में कौन सी बात होती है एक कभी के लिए ये शब्द उसके अवसाद या हथियार होते हैं जिसका प्रयोग वो किसी के अंदर प्रेम, जुनून, प्रस् इत्यादि बातें गई निर्ममता से अपनी मर्जी से करता है । इस शिक्षा के लिए ये शोध का विषय होता है । किसी खगोलशास्त्री के लिए ये गहरे विज्ञान की समझ होता है जिसके माध्यम से वो अपना जीवन व्यापन या फिर कुछ अतिरिक्त धन प्राप्त करता है । किसी प्रेमी के लिए इसका क्या मतलब होता है? लेखक और कलाकार इसका प्रयोग कभी के मुकाबले थोडा कम ही करते हैं । मगर दोनों का मकसद एक ही होता है । ये मनुष्य के संबंध हूँ, परिस्थिति या प्रकृति की खूबसूरती से जुडा हुआ है । जहाँ तक एक प्रेमी का प्रश्न है ये एक जानलेवा मिश्रण है । प्रेम में ये प्यार, जुनून और खुशी को जाहिर करता है । खासकर चंद और सितारों की मौत होती है । सूरज को थोडा दूर ही रखा जाता है । पिछाड जाने पर ये तथाकथित कभी प्रेमी को बुलाने के लिए पर्याप्त खाद प्रदान करते हैं । अक्सर प्रेमी खुद ही लेखक बनकर चांद सितारों का भरपूर इस्तेमाल करते हैं । संबंध विच्छेद किसी शल्यचिकित्सा के बाद के हालात की तरह होते हैं । प्रेमी एक मरीज की तरह होता है । मैं इस मुश्किल वक्त से पहले भी हो चुका हूँ जब करीब दो महीने पहले मैं गया से अलग हुआ था । हालांकि मुझे इस बात का जरा भी अनुमान नहीं था कि इतने चलते हैं । मुझे फिर से उसी चीज का सामना करना पडेगा । इस बार तो ये और भी पूरा है । मुझे गौरव की कमी महसूस हो रही थी और ये एहसास मेरे अनुमान से पढे था । काश मैंने तब महसूस किया होता जब मेरे साथ थी । उसकी गैरमौजूदगी नहीं । मुझे इस बात का एहसास कराया कि मैं उसे प्यार करता था । वो सच्चा और ऍम इस बात को स्वीकार करने की जरूरत थी । मगर यही तो जिन्दगी हैं । इतनी कम उम्र में मैं कितना को झेल रहा था । मुझे लगने लगा था कि मैं वाकई बडा होने लगा था । अभी तक मैं खुद को एक घटिया विद्यार्थी समझा करता था जो अपने कॉलेज के डिग्री की पढाई कर रहा था । मैं बचकाने मजाक करता रहता था और एक के बाद एक मुसीबत हूँ और संबंध विच्छेद तो सही गुजरता रहता था । हालांकि मैं स्वाभाविक प्रगति की चाह ही रखता था । बालक से पुरुष बनने की स्वतः प्रगतियां शादी के बाद शुरू होती हैं मगर मैं तेजी से प्रगति की ओर बढ रहा था । मेरे विचार से ऐसे विकेट परिस्थितियां किसी बालक के लिए असामान्य मैं पुरुष की परिभाषा नहीं जानता था मगर मैं इतना जरूर जानता था की ये कॉलेज के विद्यार्थी को पुरुष तो नहीं कहते हैं । मैं तो हर तरह से आप परिपक्क था । एक अलग अलग अनुभवहीन इंसान । कम से कम मेरा मन तो यही मानता था । और जब आपके दिमाग में ऐसी कोई बात हूँ तब ये तो तय है कि आप अपना अस्तित्व स्वयं ही साबित करने का प्रयास कर रहे हैं तो पुरुष या बडे होने की बात पर वापस लौटते हैं । मेरे पिता अक्सर मुझसे कहते थे कि एक पुरुष वो होता है जो आगे बढकर परिस्थितियों को संभालता है, वो जिम्मेदारियों को उठाता है । वे अक्सर अपना उदाहरण देते थे और उनके उदाहरण में प्यार से ज्यादा व्यवहारिकता की भरमार होती थी । उनके मुताबिक पुरस् व्यवहारिक होते थे जबकि बालक मार होते थे । जो बस प्रेम में पढना जानते थे उनके मापदंड के अनुसार मैं भी अब तक बडा नहीं हुआ था । बिलकुल भी नहीं । इसका एकमात्र कारण था की मैं हर पल बस गौरी के बारे में सोच रहा था । मैंने कभी जानबूझकर गौरी को चोट नहीं पहुंचाई थी । कभी नहीं । मैं अभी तक अलग होने के खयाल से कुल रहा था । अभी तक मैं एक प्रेमी की तरह चांद सितारों में खोया था । हालांकि ये मेरे साथ पहली बार हो रहा था । मैं इन मामलों में बिल्कुल अच्छा था । यही वो वक्त था जब गौरी ने बेची वन में कदम रखा । वो मुझ से बहुत प्यार करती थी । मुझे तो अंदाजा भी नहीं था कि वो मुझ से कितना प्यार करती थी । वो मुझे पाना चाहती थी पूरी तरह से और बस अपने ही नहीं । वो एक साल के लडके के प्यार में पागल थी । मेरा पीछा करते करते वो कॉलेज तक आ गई थी । स्कूल में भी वो मेरी कनिष्ठ थी । अब अपना इसके बारे में सोचता हूँ तो मुझे याद आता है कि मैंने कभी उस पर ध्यान ही नहीं दिया था तो मुझे बचपन से ही पसंद करती थी । मगर उस वक्त मेरा सारा ध्यान पढाई पर होता था । मेरे पिता ने मुझे लडकियों के बारे में सोचने के लिए भी मना कर रखा था क्योंकि ऐसा करने से मेरे बोर्ड के परिणाम पर असर पड सकता था । फिर मुझे अच्छे कॉलेज में दाखिला नहीं मिलता और जिसके परिणामस्वरूप मैं किसी होटल, ज्यादा स्तरों में पिज्जा बर्गर बनाने को मजबूर हो जाता है । खाना बनाना एक ऐसी चीज है जिससे मुझे हमेशा नफरत नहीं है । मैंने लडकियों से ज्यादा ध्यान पढाई पत्तियाँ मैं अभी तक गौरी को पूरी तरह समझ नहीं पाया था । उसने कभी मुझे मौका ही नहीं दिया है । अगर वो जान बूझ कर गायब हुई है तो वो वापस आकर सबको बताएगी कि वह मजाक कर रही थी और मैं उसे माफ कर दूंगा । मगर अगर सच में उसका अपहरण हो गया तो पुणे में महिलाओं के खिलाफ अपराध बहुत ज्यादा तो नहीं है । और फिर वो जगह भीड भाड वाली थी और उसके मोबाइल का भी पता नहीं चल रहा था । मैंने देखा कि मेरा मोबाइल पूरी तरह चार्ज हो चुका था । किसी भी क्षण मेरी माँ का फोन आ सकता था और मैं उसी का इंतजार कर रहा था । उन्होंने एक बार फिर फोन किया क्योंकि पिछले दो घंटों में उनका पांचवां फोन उन्होंने मेरी चिंता हो रही थी और वे बस ये तसल्ली करना चाहती थी कि मैं ठीक ठाक खून या नहीं । उनकी आवाज से चिंता साफ झलक रही थी क्योंकि टॉम नहीं मेरे सारे चिंता भरे एसएमएस उनको भेज दिए थे तो मैंने उसे भेजे थे । भगवान ऐसा कौन करता है? हाँ, वो ऐसा कर सकता है । तो अब तुम मुझसे बातें भी छुपाने लगा है । अपने दोस्तों को बताएगा मगर अपनी माँ को रही जिस देता हूँ महीने तुझे अपनी कोख ने पाला । मुझे तो कुछ जानने का ही नहीं ऍम मेरे बच्चे मेरे बच्चे को क्या परेशानी है तो माँ वहाँ सब ठीक है । सुबह सुबह भावुक होने की जरूरत नहीं है । पापा कहाँ है? अच्छा सुन पापा ने जेठमलानी के भतीजे से बात करनी है । बहुत बडा वकील है वह जेठमलानी के परिवार में सब वकील हैं क्या? अगर वो तो में बर्फ को बना रहा हूँ तो क्या पता वह उसका भतीजा है भी या नहीं । मैंने सावधानी से अपनी बात कहती है क्योंकि मेरे माता पिता छोटे शहर में रहने वाले भोले भाले लोग थे तो भी क्या लगता है तुम्हारे पिता नहीं इन सब बातों की तहकीकात नहीं की होगी और वैसे भी उसके कमरे में राम के चित्र हर तरफ दंगे हुये थे । इसीलिए तुम घबराओ नहीं कभी ना कभी तो मैं वकील की जरूरत पडेगी । हम तुम्हारे साथ है । बेटा हूॅं और माँ माँ पापा से कहना तो उन्हें आने की जरूरत नहीं है । हस्ते हस्ते मेरा गला भर गया था । वे अकेले नहीं आएंगे । मैं भी उनके साथ होंगी । माँ तुम्हें ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है । सुनो बेटा, तुम तो आज अपने दोस्त थान्या से खतरा गए । इस मामले से अकेले कैसे हो गई तो हमने तुम्हें वो एसएमएस भी भेज दिया । अब और कुछ कहने की जरूरत नहीं है । उस स्थान में से तो मैं वहाँ पर बात करेंगे । मेरी गोद में खेलकर बडी हुई है । वह जब तो उससे ऊंची आवाज में बात कर रही थी । तब तुमने उसे ये क्यों नहीं बताया? नहीं हाँ उसने ऐसा कुछ नहीं किया । वो तो बस अपना काम कर रही थी और वैसे भी वो अपने कनिष्ठ अधिकारी को ये नहीं बताना चाह रही थी कि वह पक्षपात कर रही है । बडे हो जाओ नहीं बडे हो जाऊँ, मारता बनो । आखिर कब तुम बडे आदमी की तरह बात करोगे । मेरे पिता ने माँ से फोन ले लिया था । जी देखो मैं अभी अभी सुबह की सैर से वापस लौटा हूँ । अगर फास्ट ट्रैक अदालत के न्यायाधीश मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं । उन्होंने मुझे ऍम का नाम सुझाया है । क्या बात है पापा आप की तो बहुत जान पहचान है, हमेशा से ही थी और अब मैं उनका इस्तेमाल तुम्हारी मदद करने के लिए करूंगा और उम्मीद है की ये आखिरी बार होगा जब मैं किसी का एहसान लूंगा । अब तुम भी बडे बनो ताकि बुढापे में तुम हमारे देखभाल करूँ ना कि हम तुम्हारी एक पर फिर माँ ने पापा से फोन छीन नहीं ये लोग ऐसे ही थे जब कोई ज्यादा कडक के अव्यावहारिक होने लगता था । तब दूसरा कोमल और प्यारा बन जाता था । मुझे मानते और समझाने के लिए अपने पिता की बातों का बुरा मत मानना । बच्चा बस तेरे लिए परेशान हैं । खाना ध्यान से खा लेना और पानी पीते रहता हूँ खाएंगे आखिर ये बातचीत खत्म हुई है । मुझे नहीं मालूम कि दुनिया भर की सारी हाँ ऐसे ही होती हैं या सिर्फ हिन्दुस्तान की ही मामले ये खासियत है क्योंकि हॉलीवुड की जितनी फिल्म में मैंने देखी है उनमें ऐसी मुश्किल खडी में माँग कभी भी खाने पीने की जानकारी नहीं लेते । अंततः मैं अपने सोफे पर ले । क्या मैं दो विकल्पों के साथ अपनी काल्पनिक दुनिया में खो गया । एक लडकी की भर्ती सोचूँ या एक मत की तरह मैंने पहला विकल्प चुना । मैं गौरी के बारे में सोचने लगा । भगवान हूँ हूँ अब छुट्टी करो । मैं तो यही थी । मैं तो बस तुम्हारे प्यार की परीक्षा ले रही थी । तुम हो गई हूँ तो भारत दिमाग खराब हो गया है । नहीं बिल्कुल भी नहीं । मैं तुम से बार बार पूछती रही थी क्या तो मुझसे प्यार करते हूँ पर तुम मुझे साबित करते रहे हैं । हूँ नहीं, मैं तुमसे प्यार करता हूँ । अब कभी दोबारा ऐसा मत था तो कभी मुझे शक करने का मौका मत देना ऍम

भाग - 02

सुबह के नौ बज चुके थे । सब लोग जा चुके थे । मैं सोने का भरसक प्रयास कर रहा था । मेरे लडके आज के सबसे मुश्किल काम था । मेरी आंखें बंद हो गई थी । ऐसा नहीं था कि मैं जान बूझ कर ऐसा कर रहा था । मगर अब मेरी आंखें और खुली नहीं रह पा रही थी । पीडा और आघात के कई भयंकर घंटे को जाते के बाद और कई लोगों से मिलने के बाद आखिरकार मैं खेला था । पर मैं सच में अकेला नहीं था । मेरे साथ गौरी की आती थी । मेरे दिल में मेरे मन में मैंने अपना फोन अपने हाथ में पकडा । उसकी खूबसूरत मुस्कान अभी भी मेरे फोन का वॉलपेपर के रूप में उसकी शोभा बना रही है । मैं उसको रह था और अपने आस पास उसे घूमते लगा । आखिरकार मैं किताबों और उपहार के कागजों के बीच में बैठ गया । मेरा फोन बस एक बार बच्चे हैं, ऐसी कामना कर रहे हो । झल्लाहट और घबराहट में मुझे मेरे दिल की धडकन सुनाई दे रही थी । कहाँ चली गई? वो सारे खुश हैं जो वो अपने साथ लेकर आई थी । बोल है अपने साथ लेकर देखो कितना घायल करके वो मुझे मेरे तेल के खाओ, सापुतारा से भी कहते थे । इन सब सवालों के जवाब मैं अपने फोन से पूछ रहा था को बस एक बार मुझे अपने दिल की बात बता देती है । मैं वादा करता हूँ मैं उसे रोने का कोई मौका नहीं होगा । वापस आ क्यों? मेरी इच्छा क्योंकि मैं तुम्हारे बगैर सास भी नहीं ले पा रहा हूँ । अच्छा हॅूं मेरे लिए सब कुछ ऐसा ही था जैसे कि आंख बंद करने पर कभी आपको छोटे छोटे कण आपके मस्तिष्क में घूमते नजर आती हूँ । मानो ये करण आपको चोट पहुंचाने के अरबों की संख्या में आपके दिमाग में चक्कर काटते रहते हैं । मैं समझ गया था किस अपने दिल और दिमाग में गौरी के बारे में सोचने से बात नहीं बनेगी । उस बस में मेरे पास आना होगा तो लडकी आपकी जिंदगी में एक विशेष स्थान रखती हूँ । उसके अचानक गायब हो जाने से पूरा क्या होगा? थोडी देर पहले पुलिस वालों के साथ हुई बातचीत के बारे में सोचने पर तो यही लगता है कि उसका अपहरण हो गया था । हालांकि मुझे पिछले कुछ दिनों की गतिविधियों और उसके विसंगतियों पर ध्यान देने की जरूरत थी । फिलहाल मेरा दिमाग काम नहीं करता था । मेरे गालों पर आंसू उन की धारा बह रही थी? नहीं, मैंने उसे इतना परेशान को नहीं कर दिया कि वो खुद ही मुझसे दूर चली गई हूँ । मुझे ऐसा कुछ याद नहीं आ रहा था । मगर मुझे इस पर और ध्यान से सोचने की जरूरत थी । हर विचार में असम की संभावनाएं थी । किसी भी चीज से उनका नहीं किया जा सकता था । मैंने अपना चेहरा पूछने के लिए अपना हाथ उठाया । अचानक मेरे मन में ये ख्याल आया कि काश गौर इस वक्त मेरी बगल में बैठकर मुझे शांत कर रही होती । उसके जाने के बाद उसका एहसास मेरे लगे और वितरण हो रहा था । अब जब वो मेरे पास नहीं थी तब मुझे उस की कमी खल रही थी । वो मेरे बारे में सब कुछ जानती थी । वो पूरा घर संभाल कर रखती थी । सब सही पडता । मैं उसे प्यार करने लगा था । मैं वाकई उसे अपने दिल के बेहद करें महसूस करने लगा था । वो मेरे मन पर हाफिज हो चुकी थी । मैं जितना ज्यादा उसके बारे में सोच रहा था, उतना ही ज्यादा उसे होता जा रहा था । मुझे खुद में पूरा लग रहा था । मैं कमजोर होता जा रहा था । जबकि इस वक्त मुझे मजबूर होना चाहिए था और कुछ करना चाहिए । था । मैं अपने अलावा किसी और के प्रति जवाबदेह नहीं था । मुझे याद है कैसे जब एक बार मैं बहुत दुखी था तो मेरे पास आई थी जब आपने पिछले विच्छेद के दर्द से कराह रहा था । ये वो वक्त था जब मैं हार या के बारे में सोचकर रोता और टूटता रहता था । जब मैंने ये मान लिया था कि सब कुछ खत्म हो चुका है । मैं अकेले पन के खयाल से ही काम होता था । उस दिन गौरी ने मेरा हाथ थामा था । उसने मुझे अपने पास बिठाया । मैं सोफे पर बैठा हुआ था । उसने जो भी किया दो अनमोल था । उस वक्त मुझे उसका मूल्य समझ नहीं आया था । मुझे वो सब बेहद सामान्य लगा । मुझे लगा कि मेरी साथ ही होने के नाते मुझे बेहतर महसूस कराना उसका काम था । मगर मैं गलत था । उसके पास चुनने के लिए विकल्प थे । वो केवल दूर से ही मुझसे बात कर सकती थी पर मुझे बच्चों की तरफ बताऊ करने के लिए बना कर सकते थे । वो मुझे मुझसे ज्यादा जानती थी । वो भी बिलकुल मेरी माँ की तरह ही संवेदनशील थी । उसका चेहरा बार बार मेरे दिमाग में खून कहा था । उसके मुस्कान मुझे वास्तविकता का एहसास करा रही थी और चिढा रही थी कि अब मेरे पास नहीं थी । उसका अंतर्विषयक आकर्षण, उसका सुभाषित, संतुलन, उसके स्वर्ग से खूबसूरती ये सब मिलकर उसे ऐसी लडकी बनाते थे । अच्छे से मुझसे बेहतर लडका मिलना चाहिए था । किसी भी दिन मैंने अपनी आँखे खोल कर दीवाल घडी की ओर देखा जो बारह बजे का अलार्म बजा रहे हैं । पर सुबह के नौ बज चुके थे । सब लोग जा चुके थे । मैं सोने का भरसक प्रयास कर रहा था । मेरे लिए आज ये सबसे मुश्किल हो ना मेरी आँखे बंद हो गई थी । ऐसा नहीं था कि मैं जान बूझ कर ऐसा कर रहा था मगर अब मैं दिया थे और खुली नहीं रह पा रही थी । पीडा और आघात के कारण कई भयंकर घंटे को साथ ले के बाद और कई लोगों से मिलने के बाद आखिरकार मैं खेला था । पर मैं सच में अकेला था । मेरे साथ गौरी की आती थी । मेरे दिल में मेरे बंद में मैंने अपना फोन अपने हाथ में पकडा । उसके खूबसूरत मुस्कान अभी भी मेरे फोन के वॉलपेपर के रूप में उस की शोभा बढा रही थी । मैं पूरा उठा और अपने आस पास उसे ढूंढने लगा । आखिरकार मैं किताबों और उपहारों के कागजों के बीच में बैठ गया । मेरा फोन बस एक बार बच्चे थे । मैं ऐसी कामना कर रहा । झल्लाहट और घबराहट में मुझे मेरे दिल की धडकन सुनाई दे रही थी । कहाँ चली करुँगी तो वो अपने साथ लेकर आई थी । वो भी अपने साथ ही नहीं देखो कितना घायल कर गयी वो मुझे मेरे दिल के खाओ उस समुद्र से भी कह रहे थे इन सब सवालों के जवाब मैं अपने फोन से पूछ रहा था कहाँ है को? बस एक बार मुझे अपने दिल की बात बता दे । मैं वादा करता हूँ मैं उसे रोने का कोई मौका नहीं होगा । वापस आज हो मेरी इच्छा क्योंकि मैं तुम्हारे बगल फ्रांस भी नहीं ले पा रहा हूँ । मेरी था मेरे लिए सब कुछ ऐसा ही था जैसे की आंखे बंद करने पर कभी आपको छोटे छोटे करना, आपके मस्तिष्क अरे खून देना, सराहते मालूम करना । आपको चोट पहुंचाने के लिए अरबों की संख्या में आपके के बाद चक्कर काटते रहते हैं । मैं समझ गया था कि सिर्फ अपने दिल और दिमाग पे गौरी के बारे में सोचते से बात नहीं पता है । उसे सच में मेरे पास आना होगा । जो लडकी आपकी जिंदगी में एक विशेष स्थान रखती हूँ, उसके अचानक गायब हो जाने से पूरा होगा । थोडी देर पहले पुलिस वालों के साथ हुई बातचीत के बारे में सोचने पर को यही लगता है तो उसका हो गया था । हालांकि मुझे पिछले कुछ दिनों की गतिविधियों और उसकी विसंगतियों पर ध्यान देने की भी सब थे । फिलहाल मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था । मेरे गालों पर आपको की धारा बढ रही है । कहीं मैंने उसे इतना परेशान तो नहीं कर दिया था कि वो खुद ही मुझसे तो चली गई हूँ । मुझे ऐसा कुछ याद नहीं आ रहा था । मगर मुझे इस पर और ध्यान से सोचने की जरूरत थी । हर विचार में असम की संभावनाएं थी । किसी भी चीज से इनकार नहीं किया जा सकता था । जब मैंने अब तक चेहरा पहुंचने के लिए अपना हाथ उठाया । अचानक मेरे मन में एक खयाल आया । विकाश गौरी इस वक्त मेरी बगल में बैठकर मुझे शाम कर रही है । उसके जाने के बाद उसका एहसास मेरे दिल के और मित्र हो गया था । अब जब मेरे पास नहीं थी तब मुझे उस की कमी खल रही थी । वो मेरे बारे में सबको चाहती थी । वो पूरा घर संभाल कर रही थी, सबसे पडेगा । मैं उससे प्यार करने लगा था । मैं वाकई उसे अपने दिल के बेहद करीब महसूस करने लगा था तो मेरे पर हाफिज हो चुकी थी । मैं इतना ज्यादा उसके बारे में सोच रहा था । उतना ही ज्यादा उसे खोता जा रहा था । मुझे बहुत में पूरा हो रहा था । मैं कमजोर होता जा रहा था जबकि इस वक्त मुझे मजबूत होना चाहिए था और कुछ करना चाहिए था । मैं अपने अलावा किसी और के प्रति जवाबदेह नहीं था । मुझे आप है कैसे? जब एक बार मैं बहुत दुखी था तब मेरे पास आई थी जब मैं अपने पिछले विच्छेद के तत्व में कर आ रहा था । ये वो वक्त था जब मैं आगे के बारे में सोचकर रोता और कोर्ट का रहता था । जब मैंने ये मान लिया था कि सब कुछ खत्म हो चुका है, ऍम के खयाल से ही काम होता था । उसके गौर ही नहीं मेरा खाना खाता था । उसने मुझे अपने पास बिठाया । मैं सूखी पर बैठा हुआ था । उसने जो भी किया वो भूल था । उस वक्त मुझे उसका मूल्य समझ नहीं आया था । कुछ वो सब बेहद सामान्य । मुझे लगा कि मेरे साथ ही होने के नाते मुझे बेहतर महसूस कर रहा था । उसका काम था । मगर मैं अलग था । उसके पास चलने के लिए बहुत निकल पाते । वो केवल दूर से भी मुझसे बात कर सकती थी और मुझे बच्चों की तरह बर्ताव करने के लिए मना कर सकती थी । वो मुझे मुझसे ज्यादा चाहती थी, वो भी बिलकुल मेरी बात की ही तरह संवेदनशील थी । उसका चेहरा । बाहर बार मेरे दिमाग में खून कहा था । उसकी मुस्कान मुझे वास्तविकता का एहसास करा रही थी और चिढा रही थी कि वह मेरे पास नहीं थी । उसका अंतर, वर्ष का आकर्षण, उसका सुभाषित, संतुलन, उसके स्वर्ग से खूबसूरती । इस सब मिलकर उसे एक ऐसी लडकी बनाते थे जिससे मुझसे बेहतर लडका मिलना चाहिए । किसी भी थे मैंने अपनी आंखें खोलकर तिवाल घंटे की होती है जो बारह बजे का अलार्म बजा रही थी । अब नहाने का समय हो चला था । अब भूतकाल की आगे की यात्रा गर्म पानी के टब करने का समय हो चला था । मैं उस से राय ले के सामने खडा रहा । मेरा चेहरा बुरी तरह सोच गया था । मारो मैं आशा करता था मेरी आंखें नजर नहीं आ रही थी । मेरा लाला छुट्टियों से भर गया था । मैं वहाँ पर खडा था । मैंने लास्ट दिन से कुल्ला क्या कुछ पर बढाया और तब में घुस गया जो भाप से भरा हुआ था । किसी अन्य सामान्य दिन में मैंने उसमें थोडा ठंडा पानी मिलाया हूँ और उसे कुछ होना बनाया होता । मैंने उसे वैसे ही छोड दिया । मगर फिर भी मुझे उसका ताप या कोई जलन महसूस नहीं हो रही थी । मुझे तो बस अपनी छाती में हो रहे तक का एहसास हो रहा था । वो मुझे अंदर ही अंदर भी तो रहा था । मेरे आंसू तो पानी में खुल गए मगर मेरा घर बच्चे हैं । मुझे मालूम था कि वो इतनी चलती दूर होने वाला नहीं है । मैं वही ले गया और वापस उसी अवस्था में पहुंच गया जैसा कि दिन की शुभमान सब अचानक पूछे लगा । मैक्सिन डाली में पहला सब कुछ बालों बारिश में आपकी भाग्य गायब हो रहा था । फॅमिली फॅमिली कोई शांति नहीं थी । मेरे शरीर को मुझ से अलग होकर भी शांति नहीं आई । दे । मैं खुद को देखकर पहले सोचा कि मैं था कमजोर था । पीला हो गया हूँ टेस्ट कल्पना ठीक है की वजह से मालूम है । अचानक पडा हो गया हूँ । हमारे किस्मत ताकत दे रही थी । मेरा दिमाग बंद होना चाह रहा था । मैं किसी से बात करना चाहता था । मैं चल लाना चाह रहा था, उसे तो भारी चिंता हो रही है तो उससे प्रेम हो रहा है । गौरी मेरी चान फिर एक बार मेरा हाथ खराब लोग फिर आकर मुझे संभाल लो । में विशान मुझे तुम्हारी इतनी कमी इतनी जरूरत है । छुट्टी पहले कभी नहीं हुई । वहाँ पर साझा की । अब मैं तुम्हें कभी कहीं नहीं जाने दूंगा । मुझे अपने विचार प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पडेगी । उस गर्म पानी नहीं । मुझे थोडी राहत थी और मैं एक बार फिर खुद को समेटने मिल छुट गया । मैं बडे आराम से बाहर निकला और धीरे धीरे अपने कमरे की तरफ बढ गया । वहाँ से मैं अपने देकर में बाहर निकला हूँ और सोफे पर बैठकर दरवाजे की घंटी बजी । मुझे कुछ समझ आता उसके पहले वो घंटी कई बार पहुँच गई । मैं दरवाजा खोलने के लिए दौडा नहीं । मैं बहुत ही धीरे धीरे उसकी ओर बढा । मानव किसी ने मुझे चीज दिया । मैंने दरवाजा खोला और वापस मुडकर अपनी जगह पर बैठ गया । कुछ ये जानने में कोई दिलचस्पी नहीं देगी । दरवाजे पर कौन है देवी आखिर ये क्या हो रहा है? मैं चुप चाप बैठा रहा और ऍम मुझे खोल रहा था । मैं बिलकुल हो चुका था और सांस अंदर बाहर करने की कोशिश कर रहा था । नील मैं तुम्हारे लिए खाना लाया । हम मिलकर सब ठीक कर लेंगे । आप तो इसमें अकेले नहीं होगा । मैंने अपने जीवन में सिर्फ लोगों को खोया था । मेरा ख्याल करने वाला या बेदी चिंता करने वाला हर व्यक्ति एक एक कर उसको छोड कर जा रहा था । इसलिए मुझे समझ नहीं आया तो उनसे मैं क्या करूँ । तो मेरा सबसे अच्छा दोस्त था । मगर इस वक्त मैं बहुत कमजोर था और कोई भी मेरा फायदा उठा सकता था । उसमें और भी कुछ का हम उससे जो मैं सुन नहीं पाया । इस वक्त चिंता और देखभाल की जरूरत गौरी को उससे ज्यादा नहीं । मैं किसी और चीज के लिए अपराध पोत नहीं कर सकता था । तुमने मुझे अच्छा छोरा और मुझे को झटका महसूस हुआ । अगले ही पल उसने मुझे कसकर गले से लगा लिया । वो फूटकर रोकते जाता हूँ । मैं उसके कंधे पर सर रखकर रो रहा था । मैं बस रोज ही जा रहा था । मुझे सांत्वना देने के लिए वो बैठे शरीर पर अपना साथ भेजा था । आप कोई भी एक्शन अकेले नहीं जीत सकते । मेरे मित्र को गले लगाने से मेरा बन हल्का लगने लगा था । अब मैं पहले से बेहतर महसूस कर रहा था । मैं तुमसे एक बार फिर कहता हूँ तब खुद को अकेला मत समझो । हमने अपने अंदर जो भावनाएं तबाह कर रखी हुई थी, चाय तुम्हें उसे बाहर निकालने के ही सर प्रति हूँ । बैठे भाई कभी मुझे छोडकर बच्चा ना मैं तुम्हें इस हाल में नहीं देख सकता । तुम तो हमारे कॉलेज में सबके चान्हो अगर तुम अपने आप को मजबूत नहीं रखोगे तो बाकी बच्चों का क्या होगा? पुरच्छिंद थोडी कर सकते हैं । हाँ बिल्कुल, अब तुम खाना खाओ और सो जाओ और कंधे बहुत को सब कुछ पता है । अरे वो सब छोडो मैं सामने से मिला था और पहले उसको इस मामले की पूरी पडताल करने को कहा है ताकि हम गौरी को जल्दी से जल्दी हो सके । हाँ वो बडा ही अचीव परताप कर रही थी । मैं मानता हूँ कि वो अपने साथ ही के साथ ही मगर फिर भी मुझे मालूम है तो बचपन में आंटी की गोद में ही रहती थी और तुम दोनों एक दूसरे को बचपन से जानते हैं । आशा करता हूँ वो कुछ मदद करेंगे । मैं तो बस इतना ही चाहता हूँ जरूर करेगी । उसने मुझे बताया कि वह तो हमारे लिए बहुत परेशान है । पुणे में इस तरह की घटना एक बडी खबर है । दिल्ली में तो ये आम बात है और इस पर कोई ध्यान नहीं देता था । मगर यहाँ उसे बहुत चलती ही मीडिया और राजनैतिक दबाव महसूस होने लगेगा । तहसील के बेहतर होगा की अब तुम थोडा आराम कर लो । इसके पहले की पुलिस फिर से दरवाजे पर दस्तक उसके पहले हम उनसे जाकर मिलने हा भाई जरूर मुझे उस की बहुत याद आ रही है । मुझे तो ये सब तब से पता था जब से वो तुम्हारे साथ रहने आई थी । मैंने उसके अंदर वह बात देखी थी । बस तो भी मानने से इंकार कर रहे थे । मैं कोई भी करो पर नहीं चाहता था । बस से ही बात थी वरना वरना तो मैं तो हम ने मुझे खाना परोस कर दिया और फिर मेरा कमरा भी उसी ने साफ किया साले तेरे कमरे में कितनी तस्वीरें जिसमें तुम और गौरी एक साथ हूँ । मैंने तो आज के पहले ये कभी देखी नहीं थी । जाहिर है जब घर लौट हो, मैंने भी यही देखा । हम कहना क्या चाहते हो हम दोनों ने ये सब मिलकर नहीं किया । मैं उन तस्वीरों के बारे में सोचते लगा । इसके पहले कभी मैंने इस बात पर ऐसा नहीं सोचा उस दिन जब हम कॉलेज गए थे तब ये तस्वीरें वहाँ नहीं थी । इसका मतलब गौरी उसके कॉलेज से घर वापस आती थी और उसने कमरा ठीक किया था । ये तो अजीब था । डेविड मैं तो मैं बता रहा हूँ । किसी ने उसका अपहरण कर लिया है । हमें पुलिस को खबर करनी चाहिए । ये बहुत जरूरी है । थोडी देर चुप चाहूँ मुझे थोडा आराम कर लेने दो । हम इसके बारे में फिर बात करेंगे । हमें खुद भी कुछ सुराग होनी चाहिए । खाना खाने के बाद मैं लेट गया और कौन को अपनी अधिकता की परेशानी के बारे में बताया । मैं बिलकुल भी सोना नहीं चाह रहा था । मैंने इन को खुद से तो रख रहा था तो मुझे सुनकर आश्चर्यचकित हुआ और खुश वो जानता था कि मौका मिलने पर मैं खडे खडे हो सकता था तो बदल गया है भाई मुझे ऐसा नहीं लगता । मुझे लगता है कि इस वक्त मैं इतना परेशान हूँ कि सोने के बारे में सोच भी नहीं सकता । अच्छा और पिछली बार जब अंकल ने तुमसे कहा था की बोर्ड परीक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं तब तो तुम बिना अपनी पढाई को दोहरा इस हो गए थे । हासिल नहीं तो मैं अभी तक वो प्रकरण याद है । हमारी बातचीत बाहर वाले कमरे में चलती रही । टॉम अपने फोन के संपर्क सूची को देखता रहा । जब की मैं पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम को याद करने की कोशिश कर रहा था । अचानक तो हम ने मुझसे पूछा क्या तुमने आर्या को इसके बारे में बताया है? मुझे समझ नहीं आया कि डॉन अचानक आर्या के बारे में पूछ रहा है । वो तो शुरुआत से ही उसे ना पसंद करता था । उसे लगता था कि आर्या में इस धरती के लिए कुछ ज्यादा ही तडक भडक थी । उसमें ये विषय तो छेड दिया था? नहीं, मैंने उसे कुछ भी नहीं बताया है । मुझे इसके लिए समय नहीं मिल पाता हूँ तो मुझे लगता है हमें उस से बात करनी चाहिए । अगर ऐसा है तो हमें उन विद्यार्थियों से बात करनी चाहिए जो हम दोनों के दोस्त थे । हम दोनों को इस बात पर बेहद आश्चर्य हुआ कि कुछ लोगों को छोडकर हमारे विद्यालय के बहुत ही कम दोस्तों नहीं सुबह से फोन किया था । मगर उन्हें कोई भी शिक्षक क्या गौरी का साथ पार्टी नहीं था? गौरी के दो दोस्त थे । एक उसके सबसे अच्छी दोस्ती है । उसके बारे में कोई भी नहीं जानता । था । ऐसा हमारा मानना था । ये एक और विचित्र बात थी । पुलिस तो अपना काम करेगी । उच्च पद पर आसीन लोगों को इस प्रकरण की जानकारी मिल चुकी थी । मगर शायद ये जानकारी अभी निचले स्तर तक नहीं पहुंचे थे । आज कॉलेज बंद था और छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थी भी बाहर घूम रहे हूँ । इसीलिए पता नहीं पुलिस की कार्रवाई कैसे आगे बढेगी । हम अपने ही विचारों से दावा पेश कर रहे थे । इससे पहले की हम बाहर जाने के बारे में कुछ सोचते । आर्या ने मुझे फोन कर दिया तो हमने ये देखा और मुझे ऐसे भाव से देखा जिसका कोई आधार नहीं था । मैंने फोन उठाया । आर्या भी परेशान लग रही थी । मैंने उससे पूछा कि उसे इसके बारे में कैसे पता चला । उसने मुझे बताया कि ये तो बडी खबर बन चुकी है । सभी लोग इसके बारे में बात कर रहे हैं । मैंने उसे ठीक ठीक बताने को कहा । पहले तो वह कुछ फॅमिली फिर उसने मुझे बताया कि की खबर दिन के अखबार में भी आ चुकी है । उसने ये भी बताया कि शायद समाचार चैनलों पर भी ये खबर चल चुकी है । आर्या से अलग होने और गौरी के साथ रहने के बाद से उसमें काफी परिवर्तन आ चुका था । अब वो ज्यादा संयमित, शाम और परवाह करने वाली हो गई थी । अब वो वो आर्या नहीं थी जिसे मैं जानता था । मैंने उससे इसके बारे में पूछा भी था तो वो अक्सर उससे कहती कि वह मुझे अपना एक अच्छा तो उसका मानती थी और चुकी हम महान प्रेमी नहीं हो सकते थे । इसीलिए हम अच्छे दोस्त बन सकते थे । तो उनको ये जानकर बहुत हैरानी हुई । उसने मुझे चाहता हूँ तुमने कभी मुझे ये नहीं बताया । तुम और आर्या अभी भी एक दूसरे के संपर्क में हूँ । हाई इसमें बताने वाली कोई बात नहीं थी । कोई खास बात नहीं है । अच्छा और मैं सोचता था कि जब तू अपने जीवन में किसी दोस्ती को बढाएगा क्या घटाएगा तो सबसे पहले इसकी जानकारी मुझे हूँ । मगर इस मामले में तो तुमने मुझे अनदेखा कर दिया । तो हम तेजी मत ये बहुत हाल की घटना है हूँ । पिछले दो तीन महीनों में तुम्हारी जिंदगी काफी बदल गई है । काम का इशारा बेटे और आर्या के अल्पायु संबंध, उसका बिक शाहिद और फिर गौरी के साथ मेरे संबंध होता था तो हम वहीं नहीं रुका । वो लगातार मुझे आश्चर्यचकित और होकर होता रहा । उसका चेहरा देखकर लग रहा था बारह उसमें कोई भूत देखी होगी और उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो भूत मुझे क्यों नहीं दिख रहा था । मैंने उसे फिर समझाया और स्पष्टीकरण भेजती है । इतना तो मुझे करना था । दोस्तों को स्पष्टीकरण तो देना ही पडता है । सवाल उठने पर वे छुप तो नहीं रह सकते हैं । मेरे काफी देर तक पूरे आत्मविश्वास के साथ पास करने के बाद वो मना । वो पल ठहर गया क्योंकि आर्या ने दोबारा फोन करते हैं । वो मुझ से मिलने के लिए मेरे घर आना चाहती थी । ऐसा लग रहा था । मालूम वह बहुत चिंतित थी । उसकी आवाज से घबराहट गलत नहीं थी । ऍम की ओर देखा और उसकी सुन रही थी जान नहीं चाहिए । उसने हमें अपना सेट दिलाया और बस सब तय हो गया । हाँ, घर की छानबीन में लगा रहा । वो सुनने के अंदाज में था । उसे मालूम था कि मैं कुछ आगे भी समझने या सोचने के लिए बहुत थक चुका हूँ । इसीलिए उसने फैसला किया कि वो कुछ भी ढूंढेगा जिससे कुछ मदद मिल सके । कुछ भी उसने कुछ ऐसा ढूंढा जिसने हमें परेशानी में डाल दिया । वो बाहर या के नाम की जिम के प्रस्थान की दस सीट थी तो प्रेस भी ऊपर रखी हुई थी और मुझे लगता था कि यदि कभी मैंने खजाना खोलने वाला खेल जीतने के लिए खेला होता तो वो मुझे बहुत पहले ही मिल चुका होता है । देखो अभी हम ये बात किसी और को नहीं बताएंगे । हाँ, मगर गौरी और आ गया जिम में । साथ ही कंपनी ऐसा भी तो हो सकता है कि वे हमेशा से जिम में साथ रही हूँ । ऐसा नहीं हो सकता । गौरी ने मुझे इसके बारे में बताया होता, मगर उसने नहीं बताया । शायद वो बताना चाहती हूँ, मगर उसके पहले ही किसी ने उसका अपहरण कर लिया । तो अभी क्या सकता है और क्या होगा? सोचो आर्या से अलग होने के बाद मैं और बहुत एक दूसरे से मिल लेंगे । फिर या मेरी पूर्व प्रेमिका से? मेरी तो उसको बंद है और अब ऍम तो इसका मतलब एक तरह से तुम्हारे जिन्दगी बिल्कुल सही चल रही थी । कोई परेशानी नहीं थी । सब कुछ सामान्य था । ये दुनिया तुम्हारे रहने के लिए सर्वश्रेष्ठ बन गई थी । हाँ थे अपनी आंखें मसलते हुए मैंने जवाब दिया क्योंकि अब मैं बहुत थक चुका था तो फिर हमें ये मान लेना चाहिए कि कुछ तो गडबड है । कोई तो है । इस पूरे प्रकरण के पीछे हम किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर सकते हैं । मगर इस वक्त सबसे पहले तो मैं सोने की जरूरत है ।

भाग - 03

एक सामान्य प्रक्रिया है । जब भी आप के साथ कोई बुरी घटना होती है तब आप पहले तो अकेले होते हैं । फिर आपके आस पास कई सारे लोग होते हैं और फिर जब चले जाते हैं तब आप और पहले से भी ज्यादा अकेलापन महसूस करते हैं । ये एक प्रकार का शून्य है जिसका निर्माण होता है । फिर एक समय आता है जब आप हो जाते हैं । यही वह समय है जब आपके अंदर पागल बनाने लगता है । आपके ऊपर नकारात्मक हूँ, अति यथार्थवादी हावी हो जाता है । आप उन घटनाओं को बार बार याद करने लगते हैं जो आपके साथ घटी है । मैं आपको बच्चो करती है । मैं उस चीज को समझने लगा था जो मेरे साथ हुई थी । पिछले चौबीस घंटों की निचोड देने वाली परीक्षा ने मेरी इन्द्रियों को पूरी तरह से कपडे पहना दिया था । मेरी आंखों में खून उतर आया था । मैं उनकी जलन महसूस कर रहा था । मैं थोडा शांत होना चाहता था । मैं थोडा आराम करना चाहता हूँ । मैं तब तक आराम करना चाह रहा था जब तक मुझे दिन आ जाए तब तक नहीं हो सकता था । जब तक मैंने विचार मेरे चाकलेट अमन को डराना बंद नहीं करते । अभी लगभग एक महीना पहले ही मैं गौरी से कॉलेज के पुस्तकालय में दफनाया । ये कोई फिल्मी फंतासी नहीं थी क्योंकि फिल्मों में किताबें हाथ से छूटकर नीचे गिर जाती है । अधिकांश तक वो लडकी ही होती है जिनके हाथों में किताबे होती है । लडका नीचे झुककर उन्हें खाता है । ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था । वो मैं एक दूसरे को पहले से जानते थे । उसके बारे में मेरी जानकारी बहुत कम और थी जबकि उसके लिए ये बिल्कुल अलग था । हमारे विद्यालय के दिनों से ही वो मुझे पसंद करती थी । तो जैसे ही मैं उससे टकराया उस ने मेरा हाथ थाम लिया । मैं अभी अपनी अलगाव से ही उभर रहा था कि उसने अपनी पकडता मजबूत करें । मैं मुस्कुराया हूँ । उसने मुझे गले लगाया और मेरे कानों में थोडे से कहा जो मैं समझ नहीं पाया माफ करना ही । मगर अभी तुमने जो मेरे कानों में कहा है मुझे कुछ समझ नहीं आया । कुछ प्रेम का हानियाँ बहुत से शुरू होती हैं । अक्सर लडके किसी लडकी की वो मुहित हो जाते हैं मगर कभी कभी इसका उल्टा होता है । वे भी प्रेम का खानियां ही होती हैं तथा कथित एक था प्रेम कहानियां अक्सर इसका इजहार नहीं हो पाता । जहाँ तक प्रेम का सवाल है, वो तो बहुत ही को बस स्थिति नहीं, खाली भूत हो पाता है । ये एक जानलेवा आकर्षण भी हो सकता है या फिर इन सबके विपरीत ये एक तो तरफा प्यार भी हो सकता है । गौरी के मन में मेरे प्रति जो आकर्षण था, कॉलेज के अधिकांश कनिष्ट उससे अवगत थे । यह आकर्षण इतना कह रहा था कि गौरी ने विद्यालय से निकलने के बाद आपने खूबसूरत शहर वो गुवाहाटी को मेरे लिए छोड दिया था । वो उसने मेरे कॉलेज में दाखिला लेने का निश्चय कर लिया था । जहाँ मैं बेटे की पढाई कर रहा था, वो माइक्रोबायलोजी पढ रही थी । विश्व का विज्ञान अभी भी हम दोनों के बीच सामान था । जब मैं उससे टकराया तो मेरे दिल के एक महज संजोग था । हर ईमानदारी से देखे तो हम दोनों की प्रतिक्रिया से तो ऐसा ही लगा या फिर मैंने ध्यान नहीं दिया । शायद उसने मुझे इस पर ध्यान देने का मौका ही नहीं दिया । ये उस अति उत्साही आर्या से अलग होने के दस दिन बाद की बात थी । गौरी ने सटीक शब्दों के प्रयोग का ये मौका हाथ से जाने नहीं दिया । वो सब जिनके आगे मैं निकल गया था मैं समझ सकती हूँ । इस वक्त तुम्हारे ऊपर क्या बीत रही है? पहले तो मैं हैरान रह गया । उसे कैसे पता कि मेरे ऊपर क्या बीत रही है और उससे भी ज्यादा उसने मुझे हेलो तक नहीं हूँ । अखिल क्यों वो सीधे मेरे दिल की गहराई में छुपे खाओ को खुद देख रही थी । आखिर क्यों वो मुझे एक वरित बाल हम देना चाह रही थी । हो सकता है उसने मुझसे हेलो का और मैं सुन नहीं पाया या फिर वो बहुत ऊंची आवाज में न बोल पाई हूँ और घबराहट में उसे इस चीज का एहसास हुआ हूँ । थोडी देर बाद मैंने देखा उसके ताल गुलाबी हो रहे थे । बस ये वो क्षण था । अब वो भी थोडी सतर को हो गई और उस ने मेरा अभिवादन किया । मैंने कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दिए क्योंकि वो मेरी कनिष्ठ थी जिनके दिल में मेरे लिए एक खास स्थान था । हालांकि वह बाकी लडकियों की तरह नहीं थी । शायद ये पहली बार था जब मैंने उसे इतने नजदीक से देखा था । उसके साथ भी ऐसा ही था । ये पहली बार था जब उसकी आवाज मुझे इतनी अस्पष्ट सुनाई दे रही थी । विद्यालय में तो उसकी आवाज प्रार्थना के समूह कान में परेड में क्या फिर मध्यावकाश में मचने वाले विद्यार्थियों के शोरशराबे में ही सुनाई देती थी । पहले मुझे कभी भी उसकी आवाज अकेले सुनाई नहीं दी । अब के आवाज बहुत दिलकश प्रतीत हो रही थी । बिल्कुल शहर की तरफ भी थी । मुझे था कि इस आवाज को मैं कभी फूल हूँ । वो आवाज सीधे किसी के तरफ से निकलकर आपके दिल पर दस्तक देती हूँ । उसे बुलाया नहीं जा सकता हूँ । पुस्तकालय में हुए उस पांच मिनट के वार्ता लाभ में कुल संतुलन नहीं था क्योंकि चार मिनट तक वो बोलती रही और मुझे जो कहना था वो मैंने एक मिनट में निपटा दिया । तो ये कुछ इस तरह शुरू हुआ हे भगवान नहीं, रिजेक्ट तुम ही हो । हाँ, बिल्कुल तो मुझे पहचानती हो । बिलकुल तो ही साल तो उसमें हैं । तुम से दूर रहकर तो मेट्रो थे । एक आकर्षक आॅफ थोडा खुश हो गया । मेरी आंखों के सामने बारहवी कक्षा का पूरा साल खुल गया तो मुझे आता गई थी । मैं भी तुम्हें पहचान गया । गौरी है ना । मुझे यकीन नहीं होता कि तुम्हें मेरा नाम याद है । आखिर कक्षा दस की बेसबॉल टीम की खुबसूरत कप्तान को कौन भूल सकता है । हमारी बातचीत हमें कॉलेज की नाट्यशाला तक ले आई थी । पुस्तकालय में सहयोग पाँच शुरू हुई । छोटी से भेंटवार्ता अब लंबी बात चीत का रूप ले चुकी थी । एक और आधा घंटा जो हमने साथ में कुछ सारा छब्बीस मिनट तक वो बोलती रही और मुझे सब चार मिनट मिले । मेरे लिए वो बर्फ के पिघलने का सुखद अहसास था । इसीलिए जब मैंने उस से पूछा कि मुझ से बात करते हैं, उसे कैसा लगा तो वो तैयार नहीं बन वो इस प्रश्न की प्रतीक्षा कर रही हूँ । तो मेरे पहले आकस्मिकता हो । अरे वाह! मेरा मतलब है सचमुच हाँ और इसके पहले की तुम कुछ आ रहा हूँ, पहले लडके हो जिसके साथ मैंने इतनी देर तक और इतनी सारी बातें की हैं और इसके बावजूद तो में लगता है कि तुम मेरी पीडा को समझ सकती हूँ । उसके बाद गौरी बोलती ही रही । वो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी । वो पंद्रह मिनट तक बोलती रही । ऐसा लग रहा था मालूम वो अपने इस मुलाकात की प्रतीक्षा ही कर रही थी । तो रेल कल्पना करो की कोई है जिससे मैं प्यार करती हूँ । एक था और मैं उससे पिछले सात वर्षों से प्यार करती हूँ । सादा से एक था और मैंने उसे आज तक नहीं बताया है तो वाकई अद्भुत हूँ । है ना और तुम कितने लोगों को जानते हो तो किसी को सात वर्षों से चाहते हूँ । वो भी एक था मेरे ख्याल से । ये एकतरफा प्यार है इसलिए सात वर्षों से चला रहा है । अगर ये दोनों तरफ से होता तो शायद इसके भी नहीं थी । मेरी जैसे ही हूँ जब तक ऐसा कुछ होता नहीं, कोई नहीं जानता हूँ । मगर तुम ने उसके बारे में बताया था नहीं तो मेरी माँ ने कहा था अगर मैं किसी से प्यार करती हूँ तो उसे बताने से पहले मुझे अठारह वर्ष पूरे करने होंगे । तो उसने कहा उस लडके से मिलने से पहले मुझे बालिक होना चाहिए क्योंकि ताकि यदि मेरे माता पिता उसे अस्वीकृत करते तो कम से कम उसके साथ हाथ जाने के लिए मेरी उनका ठीक हूँ । मैं अपनी हंसी रोक नहीं पाया । गौरी के बात करने का अंदाज मुझे पसंद आ रहा था । वह सब कुछ अलग थी मगर मैं अभी तक उसको समझ नहीं पाया था । हालांकि हम काफी हद तक निजी बातचीत के दौर में बहुमत चुके थे मगर अभी तक मैंने उस से उस व्यक्ति का नाम नहीं पूछा जिससे वो प्यार करती थी । मैंने सोचा वो खुद ही बता देगी । मगर उसने ऐसा नहीं किया । इसीलिए मैंने बात को उस अंदाज में खत्म करने का निश्चय किया कि वो अंतर था । उसने मुझे बता ही दिया । मैंने सोचा कि यदि कोई लडकी मेरे साथ इतना अच्छा बर्ताव कर रही है तो मैं भी उस की थोडी सी मदद तो कर ही सकता हूँ । शायद मैं उस लडके से उसकी मुलाकात करवा सकूँ । खैर मैं इतना भी भूला नहीं था । मुझे पता था वो क्या कहना चाहती है । मगर मुझे अपना मासूम आकर्षण बनाएगा था । मैं समझ सकता हूँ तुम्हारे ऊपर क्या बीत रही है । हाँ तो बहुत होशियार होनी सब सूरत में इसके लिए धन्यवाद । मगर मैं तुम्हारे जितना होशियार भी नहीं है । शुक्रिया अगर मैं उतनी होशियार होती तो शायद उस व्यक्ति के सामने अपनी भावनाएं व्यक्त करने की हिम्मत जुटा पाती । मैं थोडी शर्मिली ही रहना पसंद करती हूँ । ये तो उस लडके के साथ नाइनसाफी होगी ना । शायद उस लडके से तो भारत जैसी आप खूबसूरत और होशियार लडकी का साथ छूट रहा हूँ । ये बात तो बिलकुल सही है । मुझे लगता है कि अब हमें चलना चाहिए । मेरे शिक्षा का समय हो रहा है । हाँ हाँ जरूर उम्मीद है हम जल्दी दोबारा मिलेंगे । तो कल रात के खाने पर आ जाऊँ क्या खास है मैं अठारह साल की हो रही हूँ आखिरकार वह जन्मदिन की पहले से बधाई हो । गौरी ने जिस प्रकार बातचीत के इस प्रकरण को आगे बढाया था उस से मैं बहुत प्रभावित था । वो बहुत दूर थी परिपक्व, संतुलित और आ रही है उन पैंतालीस मिंटो में मैं इतना तो समझ चुका था इन सब से ज्यादा वो बहुत वाकपटु हूँ और साफ लडकियों में बात करने वाली थी ।

भाग - 04

वो एक सुंदर और खुशनुमा दिन था । हवा में थोडी सी ना भी थी जो इस बात का संकेत दे रही थी कि शायद शाम में बारिश हो सकती हैं । मैंने उनसे वक्त के बारे में पता करने के लिए किया था । उसने मुझे सात बजे आने को कहा । साथ ही मुझे सावधान भी किया । शाम में बारिश हो सकती हैं जिसके ट्रैफिक जाम से बचने के लिए मैं थोडा चलती हूँ । मैंने उसकी बातों का मान रखा और ठीक सात बजे उसके घर पहुंच गया । उसने और उसकी सहेली हिस्ट्री ने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया । गौरी आई और आकर मेरे पास में बैठ नहीं । उसने मुझे आर्या के बारे में सब कुछ पूछा । मैं भी उसके साथ खुलकर बात करने लगा । मैंने उसे आर्या के साथ मेरी जिंदगी के बारे में बात करना शुरू किया । हमारे बीच में जो अल्पकालीन संबंधता उसके बारे में आर्या मेरे जीवन में आने वाली पहली लडकी थी । हम लगभग तीन महीने साथ में रहे । ये समय इतना कम था कि इससे किसी प्रकार का संबंध कहना ठीक नहीं होगा । वो तीन महीने तो शायद किसी सकते की तरह थे । उसके लिए शायद जनता से शब्द ठीक रहेगा । कुछ लोग ऐसे दिनों को यदि छोड दें जो बहुत बढिया नहीं थे । बाकी तो बस जीवन था । वो लडकी मुझसे पागलों की तरह प्यार करती थी । बडा ही मजा आ रहा था । ऐसा मजा जो आपको कॉलेज में आता है । वैसे तो मुझे हॉस्टल में रहना था मगर हमारे प्रेम ने मुझे घर किराए पर लेने के लिए विदेश करदिया ताकि हम साथ में रह सकें । मुझे आलिया के साथ हुई हमारी बातचीत बात अच्छी तरह याद है । मुझे ये जगह बहुत पसंद है । नहीं कुछ ये बात पसंद है कि तुम्हें ये जगह पसंद है । मुझे जगह इसलिए पसंद है क्यों नहीं यहाँ काम और मैं एक साथ रहेंगे और मैं अत्यंत रोमानी हो चुके थे । मैंने घर लिया । आर्या ने सजावट की । जब बता रहे हैं मैंने सामान खरीदें । उसने उनको इस्तेमाल में लगाया । बिल्कुल जीवन की तरह हमें ऐसा जीवन की रहे थे जिसकी कल्पना बडी उत्साह से हम दोनों ही करते थे । उसने मेरे जीवन को एक मतलब दिया । कॉलेज में लोग हमें विस्फोटक छोडा कहते थे आ गया । कोई सामान्य लडकी नहीं थी । वो हमेशा कहती थी कि एक साधारण स्टार के नीचे की जिंदगी जीने योग्य नहीं होती और वो हमेशा इसी का अनुसरण करती थी । एक एक सर्वोत्तम शुरुआत थी जिसका की एक दोषपूर्ण झटके से अंतर हुआ । जो शुरू तो काफी पर हुआ और खत्म वोट का । पर ये कुछ भी तुम्हारे लिए मेरे प्यार को बदल नहीं सकता और खत्म शायद यही प्यार है पर हुआ वही बहुत नाटक किए था । तीन महत्वपूर्व हम दोनों को एक साथ बारिश में भीगना बहुत पसंद था । एक बार हमारे कॉलेज के उत्सव के बाद हम दोनों ने ट्राइ पर लोना पाना जाने का कार्यक्रम बनाया । शायद ये पहली बार था जब मैंने अपने रूम रूम में प्यार की अनुभूति की थी । हम दोनों मेरी बिल्कुल नई हुंडई सेंट्रो में सवार हुए । हिस्ट्री दिया । उस मौके के लिए बिल्कुल सही करना था । मैंने उसका आने का अपना ही संस्करण करना शुरू कर दिया । मैंने ढलान पर गाडी रूकती हम बाहर नहीं काम नियर टू क्लोज आॅर ओवर टोमॅटो फ्री लिलोथिया खोल ऍम हमदिया घन क्लाॅक महीने सिंगिंग में फॅमिली मैं डाॅन युवा दुनिया और उसके गाने के मेरे संस्कारण पर कुछ भी नहीं कहा । उसने तो बस मुझे कसकर पकडा गया और उसकी पकड और मजबूत होती रही । बीस वर्ष की उम्र में ये आपको मारते होने का एहसास दिलाती है । बीस वर्ष की उम्र में सडक के ऊपर जब दिन के उजाले में बारिश भेजते हुए कोई लडकी आपको कसकर करने लगा रही होती है तो ये आपको मार तो होने का एहसास दिला रही होती है तो मुझे बोलना बनाते हो । मैं भी महसूस कर रहा हूँ तो मुझे पागल कर देते हो । मैं तुम्हारे दिल की धडकन महसूस कर रहा हूँ । काश ये इसी तरह चलता रहे नहीं । बारिश में तुम जैसे देखती हूँ मुझे बहुत प्यारा लगता है । ये हमारे अपने ही वाक्य थे । हमारे अपने अंदाज में हम क्या कह रहे थे कुछ पता नहीं चल रहा था । ये बहुत ही केंद्रित था । हम दोनों का ध्यान एक दूसरे पर ही था । पूरी तरह से वो मुझ पर केंद्रित थी और मैं उस पर हमने वापस काली में जाने का फैसला किया । अब तो स्पेस बिहार बच रहा था । अब मेरा ध्यान खाने की बोलों पर बिल्कुल भी नहीं था । मगर मेरी धूमिल हो रही छेत्र में मैं अभी भी उसके संदीप को महसूस कर रहा था । इतना की वो मुझे और तरंगित कर रहा था । फिर हमने एक दूसरे की आंखों में प्यार और आकर्षण से देखा । उसे एक बार फिर मेरे होठों को छोड दिया । ये प्रेम का एक बहुत खास लम्हा था, बिल्कुल बिल्कुल सच्चा । हम इस लम्बे को जाने नहीं देना चाहते थे । फिर कुछ पास हम बाहर निकले । बारिश में फेंकने के लिए ये किसे बेहतरीन संताजी से कम नहीं था । हमने इसे वास्तविकता में किया था । ये जोखिम से भरा और साहसिक था । यह प्रेम था संपन्न प्रेम को जिस किसी ने भी सबसे पहले ये कल्पना की होगी क्या महसूस किया होगा कि जब आप सब कुछ प्रेम में होते हैं तब आप अपना होश खो देते हैं । वो वाकई सही था । आप वाकई अपना सब कुछ भूल जाते हैं । हम दोनों एक दूसरे के लिए आ सकते हो चुके थे, अंतत था । उसने मुझसे कहा मैं तो भारत बिना अच्छी नहीं सकती । अपने प्रेम संबंध में हम दोनों बहुत तेजी से आगे बढ रहे थे । बिना एक दूसरे को ज्यादा समय दिए । हम अंतरंग हो चुके थे । ऐसा लग रहा था मालूम हमारे विपरीत व्यक्तित्व का कोई औचित्य नहीं रह गया हो । मुझे आज भी याद है कि कैसे एक बार मैंने उससे कहा था । यदि मैं इस इंडिया को भी देखो तो उसके बारे में सोच नहीं सकता हूँ । मुझे लगता है कि जब कोई लडका किसी लडकी के प्यार में पागल होता है तो यही सब कहना बहुत ही सामान्य हैं । वो किसी और के बारे में सोच ही नहीं सकता हूँ । सपने में भी नहीं । दुनियाभर की यही रहा है । मैं इससे बिल्कुल सहमत हूँ । मैंने कभी धोखा नहीं दिया और नहीं दूंगा । ये सादा एक सकते रहेगा । यदि मैं आर्या के साथ बिताए अपने जीवन के बारे में संक्षेप में कहूं तो मैं कभी भी उसे छोडना नहीं चाहता था । उसके अंदर कुछ तो बात थी जो से निर्विरोध रखती थी । वो सर्वश्रेष्ठ थी । वाकई में सबसे को नहीं लडकी थी । उसमें कुछ ज्यादा ही चमक थी । वो बाहर वहाँ की थी । वह सनकी थी । उसमें ढेर सारा साहस था । उसमें बहुत सब कुछ ढांचों मेरे अंदर नहीं था । वो पनीर में मलाई तलाश थी । मैं तो एक कच्चा माल था । मुझे कभी ये अहसास नहीं हुआ कि मुझे कम थी । उसने कभी मुझे नहीं बताया । इसका अंदाजा मुझे घटनाक्रम के बारे में मेरी समझ से हुआ था । उसने मुझे बगैर किसी चेतावनी के अचानक ही छोड दिया । उसने मुझे न सिर्फ छोड दिया बल्कि उसने मुझे फेंक दिया । अखिल कौन ऐसे अपने साथी को छोड देता है वो भी इतनी चलती ये अकल पर नहीं था । अखिल वो क्यों हो गई । क्या परेशानी थी उसे? क्या वो सामान्य नहीं थी? आखिर विलक्षण की सही परिभाषा होती है । इन सवालों ने मुझे बात में खेत दिया । अगले दिन हम दोनों एक पब में मस्ती करने गए । वहाँ का संगीत बहुत ही पसंद आया । वहाँ एक उत्सव का माहौल था, जो बिल्कुल साफ झलक रहा था । मैं नशे में था और आर्या भी कम ना हो । खेती तो बिल कम मानना ओ केस में काम किन हॅूं? हाउ ऍम ऍम टुनाइट पि ऍफ आया तो लाइट बीमो फिल्म ऍम काम मानता हूँ ऍम कम मोहन कमान खाॅ हम और कम आॅन हाॅल । हाँ ऍम लेट शेट ऍम मूड हो वो ऍम । मुझे मालूम था कि मेरे की हमेशा आर्या के भीतर छुपी अंतरंगता की कहते पटल कुछ भेज देते थे । वो संगीत और गीत के बोलों से इतनी वशीभूत हो गई थी की वो मुझे खींच कर के किनारे गई । उसके बाद हम ने वहाँ बहुत ज्यादा समय नहीं बिताया । हम वापस अपने घर में आ गए । अब बस मुझे सोने के लिए छात्र में पहुँचता ही बाकी था । नाइटलाइन पे बंद कर दिया गया । तीस गति से चलने वाली जिंदगी भी एक दिन हम चाहती है । मैं वास्तव में एक साहसी सनकी नहीं था । मैं उनमें से नहीं था जो बाहर ही घूमता फिरता रहे । ये मेरे निर्माता निर्धारित सेटिंग नहीं थी इसलिए हमारा व्यक्तित्व बिल्कुल विपरीत था । मैं अभी ढूंढ कर रहा था और करता ही जा रहा था । मैं कभी भी किसी लडकी से टकरा जाता हूँ और कोई प्रतिक्रिया नहीं देता हूँ । मैं ऐसा ही था । अच्छा आर्या के आने से मेरे अंदर जो भी साहस या चुकी भरे थे, वे सब कमोबेश क्षणिक थे । वो भी इसे जानती थीं । जैसा कि मैंने बताया सब कुछ बहुत तेजी से हो गया । पता है जब भी मैं बाहर जाने से मना करते था, उसे अच्छा नहीं लगता । अक्सर ये उसके को को निमंत्रित कर देता हूँ । अब प्रेमी छोडो के साथ तो ऐसा होना सामान्य है । विषेशकर नए जोडो के साथ जो भी शुरुआती दौर पे है उसमें आकर्षण तो होता ही है । हालांकि मैं शांत था । वो अपने अंदर बसे खानें नकारात्मक भावनाओं का दर्शन करवाती रहती थी । वही पुरुष की तरह व्यवहार करती थी । मैं आज भी एक पालक ही था । हम पाटन की ओर अग्रसर थे, प्यार थी, देती थी, गायब हो रहा था । ये बुलबुला फूटने वाला था । सबसे बुरा तो तब हुआ जब उसने मुझे आश्चर्यचकित करने के लिए एक योजना बताएंगे । सप्ताह के अंत में महाबालेश्वर जाने का कार्यक्रम मुझे बात विवाद के लिए तैयारी करनी थी । ये अंतर कॉलेज, बातें बाद और महाबालेश्वर के बीच एक बंद था । ये संस्थान बनाम प्रेम बन गया प्रतिष्ठा बनाम प्यार । मगर इन सबसे ज्यादा ये मैं बनाम वो बन चुका था । इस विवाद की शुरुआत गुरुवार शाम को पांच बजे हुए । नेल तुमने पिछले दो हफ्तों में कितनी बार सब कर बंद कर दिया है ना मेरी पसंदीदा मूवी के लिए न दिया की पार्टी के लिए । और अब जब मैं तुम्हारे लिए ये योजना बनाई तब भी तुम ऍम ये हम क्या होता है भगवान के लिए कुछ बोलो के भी देखो ऐसा है अच्छा तो तुम्हें लगता है कि तुम कुछ कहने की स्थिति में हो भी देखो । आर्या बाबू सारा समझने की कोशिश करूँ वहाँ नहीं वहाँ अब तुम इतने ढीठ हो चुके हो कि बोल भी रहे हो । और तो और तो मुझे ये बता रहे हो की समस्या मेरी समझ में है । देखो मुझे माफ करता हूँ इससे क्या होगा? काम चाहती गया तो कुछ भी नहीं हो । वो पल जब की कोई विकल्प कर देता है जा चुका था पर ये अब एक मनोवैज्ञानिक परीक्षा थी । वो तथा हाँ और उसके साथ कुछ और कह सकती थी । मगर उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया । वो पहले ही एक बात नकारी जा चुकी थी फिर भी ऐसा नहीं चाहती थी । इस परिस्थिति में यदि मैं न कह देता जैसा की उसे लग रहा था तो चीजें बिल्कुल भी ठीक नहीं रहती हूँ । खैर मैंने हाँ ही कह दिया, मगर वो ना कहती रही । परिस्थिति बदल चुकी थी । उसके बाद परिस्थितियां लगातार बदलती रही और ये सब बहुत तेजी से हो रहा था । बिलकुल हमारे प्यार की शुरुआत की तरह । और अब हम भी घर रहे थे । शायद मैं कुछ ज्यादा ही सोच रहा था, अभी नहीं । इस पडाव पर तो बिल्कुल नहीं । मुझे पूरा यकीन भी नहीं था । उसका ऍर या बहुत तेज तक रोती रही । वो इस संबंध में एक जंगली पुरुष नहीं थी । शायद वो अभी भी एक बच्ची थी और वैसा ही बर्ताव कर रही थी । मामला बिल्कुल साफ था । एक बालक कोई किशोरी को संभालना था । कोई भी किताब इसके लिए पथ प्रदर्शित नहीं करती है । सब कुछ पुरुषों और महिलाओं के लिए बना होता है । किसी ने ये नहीं बताया की लडकियाँ शुक्रग्रह से आती है । वो जब महिला बन जाती है तब जाकर इसका के अनुकूल होगा । आती हैं । जब तक ये एक लडकी होती हैं तब तक तो वे कुछ और ही होती हैं । कुल मिलाकर मेरा जीवन अस्तव्यस्त था । डरावना क्योंकि अब ये बिखर रहा था । मैं सोच में डूब रहा था । अगले सुबह गया ने सूचना दिल की उसे बुखार है । मैंने अपनी चिंता जाहिर की । उसके लिए सूप बनाया । फिर उसे चाय की पेशकश की । वो खामोश रही और जितनी बार मैंने उसके लिए कुछ किया, उस ने मेरा शुक्रिया अदा किया । मेरी लाख कोशिशों के बावजूद वो डॉक्टर के पास जाने को तैयार नहीं तक परेशान । मैं डॉक्टर से समय लेने के लिए बाहर निकल गया । मैं घंटे के बाद वापस आया । वो घर पर नहीं थी तो अच्छा चुकी थी । उसने खाने की मेज पर एक चिट्ठी छोडी थी । मेरे प्यारे नहीं । मैं तो मैं इस तरह छोड कर जाना नहीं चाहती थी । मगर मेरे बुखार नहीं, मेरे शरीर के साथ कुछ कर दिया है और मैं तुम्हें इस तरह छोडकर जाने को मजबूर हो मेरी चिंता मत करता हूँ । मुझे नहीं लगता कि अब हम वापस एक दूसरे के साथ रह सकेंगे । मैं आगे बढना चाहती हूँ । और आशा करती हूँ कि तुम्हारे आगे की जिंदगी बेहतरीन हो । ढेर सारा कॅश उसने बडे ही प्यार से मुझे छोड दिया । मैंने खुद से कहा मैंने अपने मन में उससे ढेर सारी चीजें कहीं और अजीब सा महसूस करने लगा । मनोभावों अभी भी पूरी तरह मेरे अंदर उतरा नहीं था । ये जो भी था मैं बिल्कुल ठीक नहीं था । मैं उस से मिलना चाहता था । मगर वक्त बार बार मेरी आंखों के आगे आ रहा था । मुझे चोट लगी थी । कहने चो, मैं दुखी था । तंत्र दुखी ऍम प्यार में खो चुका था । मैं अकेला था । ये भावना किसी भी प्रकार से वर्णित नहीं की जाती हूँ । मैं उस समय को कोस रहा था जब हम इस संबंध को खत्म करने की तैयारी कर रहे थे । बहुत ही कष्टकारी था । इससे निकलने और आगे बढने का एक ही तरीका था कि मैं खुद से प्यार करते । लगभग मैंने शायद ही पहले कभी ऐसा किया था । कुछ भी लगा । ऐसा करना ही सबसे अच्छी शुरूआत होगी । वस्त्रदान काल में वापस आते हुए हैं । गौरी ने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा हूँ और कहा, अच्छा, मैं तो तुमने बहुत कुछ सही लिया । अब आठ नहीं होना मैं आशा करती हूँ आगे तुम्हें बस खुशियाँ ही मिलेगी । मैंने उसकी ओर देखा और सोचा कैसे वो अचानक बहुत शोर शराबा होने लगा और सब लोग गौरी को खींचकर अंदर ले गए । एक क्रिकट ना था । मैं अपनी जगह पर बैठा रहा हूँ । मैं तो सोच रहा था मुझे कौन की आवाज सुनाई दे रही थी । वो मुझे अपनी बगल में आकर खडे होने के लिए कह रही थी । पहले वैसा ही क्या जन्मदिन की मुबारकबाद के बाद जो हुआ वो एक सुखद समर्पण था । अठारह हो चुकी हूँ । मैं तुमसे प्यार करती हूँ और मैं चाहती हूँ कि तुम भी मुझसे प्यार पर मैं एक पल में ही लाल हो गया । उसने मुझे गले लगा लिया । उसके बाद सारी पाते हैं आप ही हूँ और फिर कुछ बस को राहत ऍम

भाग - 5.1

किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके चार से नहीं बल्कि उसके कारण से होती है । आखिरकार के लोगों का कर्म वही होता है जो उन्हें एक दूसरे से प्रेम करने के लिए प्रेरित करता है । प्यार को सिर्फ समझ लेने भर से किसी व्यक्ति को प्यार नहीं हो जाता है । आप जिससे प्यार करते हैं उसके जीवन में आपका क्या बहस होगा इस बात का फैसला आपके कार्यों से होता है । आरंभ में ऐसा हो सकता है उसे आपके चेहरे से, आंखों की मुस्कुराहट से या फिर आप के बात करने के अंदाज से प्यार हो जायेगा । ज्यादातर ये आपके शारीरिक पक्ष से संबंधित होता है । फिर धीरे धीरे आप का सामना सच्चाई से होता है । कर्म अपना काम करने लगता है । यहाँ तो बस उसका ही एक घटक है । ये तो विश्वास चिंता एक दूसरे को समझने का और ऐसे ही कई अन्य चार वस्तुओं का एक मिश्रण होता है तथा इस तरह से करमल अत्यंत विशाल है । ये प्यार से कई गुना बडा होता है । गौरी का कर्म बहुत ही महान था । बहुत ही सुलझा हुआ अच्छा वह मुझ से कई गुना श्रेष्ठ थी । मैं जितनी कल्पना कर सकता था वो उससे भी कई गुना बेहतर थी । तो उसके साथ मेरी शुरुआत कुछ इसी तरह से हुई । विद्यालय की आ सकती से कॉलेज की कक्षक अगर तुम्हें कासाब्लांका का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा पसंद है, सारा का सारा हूँ । हाँ, ये कुछ ऐसा ही है कि काम मुझसे पूछो की मुझे तुम्हारे के शीर्ष पर सबसे ज्यादा प्यार नजर आता है । और तुम मुझसे प्यार करते हो मेरी । हाँ अच्छे से उसके मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा मुझे तो ऐसा ही लगता है । कभी कभी मुझे यकीन हो जाता है कि तुम्हारे शब्द इतने प्रभावशाली होते हैं कि मुझे यकीन नहीं होता कि तुम शब्दों के साथ बिल्कुल संपन्न हूँ । काश मैं ऐसे बयान करता था । मगर मेरे और तुम्हारे प्यार के सभी घटक और चार तत्व सकारात्मक से हो चुके हैं । शुक्रिया मेरे नहीं हूँ । मैं तुम्हारा आकलन हमेशा याद रखेंगे और मैं तुम्हारे कर्म और तुम्हारी शुद्धता को हमेशा याद रखूंगा । कासाब्लांका ने मुझ पर कुछ ऐसा ही चाहते प्रभाव डाल दिया था । मुझे यकीन था कि यह एक शापित प्रेम है । मगर फिर भी ये मेरे मस्तिष्क पर छा गया था । तो जानते हो तो भारी आवाज कैसी लग रही है? एक ऐसा आदमी जो खुद को उस चीज के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है जिस पर उसका तेल भरोसा नहीं कर पा रहा है । हे भगवान! तो मैं तो सारे पंक्तिया पूरी तरह से याद है । जब बात और तो की हो रही हो तो मैं एक सच्चे लोकतांत्रिक हूँ । गौरी मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम्हें सब कुछ याद है । युद्ध में एक बार फिर तुम्हारा स्वागत है । इस बार मुझे यकीन है कि जीत हमारी ही होगी । तो मैं भी याद है नहीं । एक वास्तविक खेल के बारे में क्या विचार है? मेरी पंथियों से प्रेरित होकर गौरी भी खेल खेलने के लिए लालायित हो गई थी तो खेल जिसके बारे में मैंने पहले कुछ भी नहीं सुना था । इसका नाम ओ भी का खेल था । मूलरूप से वस्तुओं और भावनाओं से उत तुम्हारे इस खेल में दस वस्तुएं होती हैं । हम दोनों इनका चुनाव एक के बाद एक करते हैं । इसके बाद आपको अपने प्रतिद्वंदी को इशारों में ये समझाना होता है कि उस वस्तु का मतलब क्या है? उसका मतलब कुछ भी हो सकता है, ये आप पर निर्भर करता है और ये तब तक करता है जब तक आप अपने प्रतिद्वंदी को ये ना समझा सके कि आखिर उसका मतलब क्या है? हाँ, आपके इशारे अर्थपूर्ण होने चाहिए और उन्हें इशारों से आपको भावना जागृत करनी होती है । ये भावना प्रेम हो सकता है । नफरत हो सकती है । भय, उदासी, हास या फिर कुछ और भी । शुरुआत में ये काफी मुश्किल लग रहा था । गौरी ने पहले आपने दस वस्तुओं का चुनाव करने का फैसला किया । मैंने ये मान लिया कि ये वस्तुएं अनियमित होंगी । वो पहले वस्तु चुनना चाहती थी ताकि मुझे खेल को समझने में मदद मिल सके । देखो जो भी मैच उन होंगी वो मेरी वस्तु होगी । चुनते वक्त मैं इस टोकरी में नहीं देख सकती है इसलिए मुझे मेरी आंखें बंद रखनी होंगी । मैं उस वस्तु को महसूस नहीं कर सकते हैं तो मैं इस टोकरी को घुमा तो और फिर जिस वस्तु पर मैं सबसे पहले हाथ होंगी वो वस्तु में हो जाएगी और फिर मैं तुमसे कुछ भी करने को कह सकूंगी और इससे धीरे धीरे तो में ये खेल समझा जाएगा । जो भी जीतेगा वो अपने प्रतिद्वंदी से कुछ भी मान सकता है । कुछ भी क्या अब तो मुझे डरा रही हूँ । रुको ना ये मजेदार है । अच्छा तो शुरू करते हैं तो तुमने घुमा लिया । हाँ गौरी अब उठाऊँ क्या मिला मुझे ये तो बहुत ज्यादा आसान है चॉकलेट की एक पट्टी उसने उसे बाहर खींचा । फिर वो रसोई में गए और उसे थोडा गर्म किया । उसने एक टुकडा खाया, अपने वोटों पर फैलाया और एक दम पीछे हट गई । फिर वो नाचने लगी और मैं दिल की एक गाना गाया । वो चॉकलेट वाला गाना कुछ खास है । हम सभी में कुछ बात है । हम सभी में बात है । कुछ खास कुछ स्वाद है क्या? साथ है जिंदगी में फिर मेरे नजदीक आई और मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया । मुझे प्रेम की अनुभूति हुए तो नहीं बना हूँ उन्हें क्या महसूस किया? मैंने प्यार नहीं देखा । मैंने कहा था ना, ये बहुत आसान है । अब तुम खाने जा रहे हैं । हमने इस खेल का पूरा आनंद लिया । अभी तक तो गौरी जीत ही रही थी क्योंकि मुझे पता तो था नहीं क्योंकि मुझे तो पता नहीं था कि चिप्स के साथ खाने के अलावा और क्या करना चाहिए । आखिरी वस्तु बिस्किट का एक पैकेट था । वो खेल को वस्तु तक खेलने लगी थी तो कहीं जाकर छुप कहीं । मैं उसे ढूंढ नहीं पा रहा था । वो तो पहले ही जीत चुकी थी । एक बहुत बडे अंतर से पांच दो से । मगर अब मैं भी हो रहा था । पंद्रह मिनट से भी ज्यादा हो चुके थे । मैं गौरी को नहीं धूम पाया । कहाँ हूँ मैं तुम्हें ढूंढ नहीं पा रहा हूँ । मुझे पता है तुम कहीं कहीं हो बस करो । गौरी मुझे और मंटा रहा हूँ । वो बिलकुल मेरे पीछे से पूछ कर मेरे सामने आ गए । मुझे यकीन नहीं हुआ कि वह मेरे इतने नजदीक थी और फिर भी मैं उसे ढूँढ नहीं पाया । पहले मुझे डर लग रहा था और आपने उससे कुछ नाराज हो गए । मैं खुद को रोकना चाह रहा था मगर मैं ऐसा नहीं कर पाया । ये आखिरी बार है तो दोबारा कभी ऐसा मत करता हूँ । बस भी करो । तुम इतना गंभीर हो रही हूँ तो बस खेल है था तुम्हारे लिए । मगर मैं दिल के नहीं क्या नाम चुनाव बातें कर रहे हो । लुका छुपी तो बहुत पुराना खेले । जो बच्चे खेलते हैं तो इतना गुस्सा क्यों कर रहे हो तो शायद मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए । ठीक है मुझे माफ कर वो छुट हो गयी । वो दूसरी ओर देख रही थी । मैं सोफे पर बैठा हुआ था । वहाँ एक दम सन्नाटा छा गया । ऐसा सन्नाटा जो अगर थोडी देर और रुक जाए तो आपकी चंद ले लें । इसीलिए मैंने पहला कदम उठाया और पीछे से आकर उसे अपनी बाहों में भर लिया । मुझे धनहीन आपको सुनाई दे रहे थे । मैंने उसे अपनी और घुमाया तो तुम छोटी हूँ हो क्यों रही हूँ की इतनी बडी कोई बात तो नहीं थी । वो चुप ही रही । फिर एक पल रुककर उसने धीरे से कुछ कहा । मुझे बस तो था उसके चेहरे कि नजदीक जाना पडा ताकि मैं उसकी बात सुनता हूँ । बहुत मस्ती मुझे माफ कर उसने हस्ते और रोते हुए कहा एक जोडी के तौर पर गई हमारे बीच की बर्फ पिघलने वाला पहला मौका था । ये खेल का हिस्सा नहीं था । मगर सभी भाव एक साथ घट पडेंगे तो वही क्या मैं ये मान लूँ कि अब हम बराबरी पर हैं इस खेल में मैंने तो मैं छुपाया, फसाया लाया, दुखी किया और फिर बाकी सब जरूरी चीजें जिनके बारे में तुमने बताया था अब छुट हो जाओ । मैं तो बहुत पहले चीज चुकी थी । ठीक है तो हम जीत गई । शुक्रिया । अब मैं तुमसे अपनी इच्छा से कुछ भी मांग होंगे मगर वक्त आने पर तुम कुछ भी मान सकती हूँ । मजेदार बात यह है कि मेरे अनुसार अभी तक के मेरे जीवन के अनुभव से प्रेम और किसी व्यक्ति के जीवन में प्रेम के दस पहलु होते हैं । इसको और भी आसानी से समझने के लिए हम इन्हें चरण कहेंगे । हालांकि ये किसी निर्धारित काम में तो नहीं है मगर ये जरूरी स्थानों पर दर्शाए गए पहला चरण, पहली नजर का प्यार, दूसरा चरण, किसी संबंध के लिए प्रस्ताव रखना यहाँ हम अस्वीकृति की बात नहीं कर रहे हैं । तीसरा चरण एक साथ जीवन का सिंह भोजन करना चौथा चाहता हूँ सिनेमा घूमना, खाना, बातें देर रात पाते सुबह सुबह बातें ट्वेंटी फोर इन टू सेवन बातें ये सर्वश्रेष्ठ चरण होता है । हालांकि ये परीक्षा भी हो सकता है । इस चरण में सभी भाव और मनोभाव सामने आ जाते हैं । आप इससे प्यार करने लगते हैं और लोग चाहते हैं कि प्रेमी जोडों की दुनिया इसी चरण पर रूप चाहे बेवकूफी भरी चीजे तो इसके बाद आती हैं प्रतिबद्धता साथ रहने या शादी करने का प्रस्ताव । पांचवां चरण अभिभावक वाले कुल छठा चरण झगडे, प्यार छकडे, प्यार मूल्य कर्नाटक सातवां चरण संबंध विच्छेद यहाँ शादी आठवां चरण है । विवाह पश्चात संबंध विच्छेद या जीवन का खुशी या दुख के साथ आगे बडता रहता है । जीवन आगे बढता रहता है । नाम आचरण है । बच्चे और भी बच्चे या फिर दोबारा शादी और पहले से सातवें चरण की पुनरावृत्ति या फिर आठ पाँच रन और दसवां चरण है । ये पहले और दूसरे चरण के बीच में कुछ भी हो सकता है या फिर पहले चरण से भी जब आप एकल होते हैं शायद ही कभी क्योंकि इंसान सीखते नहीं है और जीवन उन्हें सिखाता रहता है । इस चरण को अंत में रखने के पीछे मेरा कारण ये है कि आप इसे लचीला बना सके और इसमें अपनी सुविधानुसार कुछ भी चोट या घटा सकें । एक बार जिसके लिए मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूँ वो ये है कि आपका जीवन एक से अधिक चरणों में आपके सामने प्रकट होगा । रोमांचक है ना? बीस के उम्र में अगर ऐसे अनुमान लगा रहा हूँ तो आपको मेरी थोडी सी दाद तो देनी पडेगी । जब मैं चालीस का हो जाऊंगा तो हो सकता है कि मैं पीछे मुडकर देखो और अपने इस आकलन पर खूब हंसू । किसे पता आगे क्या होने वाला है । खैर मैं वर्तमानकाल में जीवन का आनंद ले रहा था । हाँ, मैं इन सब के योग्य हो क्योंकि तुम किसी और चीज से ज्यादा मेरे योग्य हूँ । उसके एक बडी सी मुस्कान के साथ मुझसे कहा शाम हो चुकी थी । हम ऍम और तीसरी का इंतजार कर रहे थे । सभी तैयारियां हो चुकी थी । ये मकान अब घर अधिक लग रहा था । ये घर मुस्कुरा रहा था और उन्हें इंसानों की खूबसूरती को महसूस कर रहा था क्योंकि अब इसका हिस्सा थे । ये सब बहुत खूबसूरत था । उस छोटे से झगडे और मान मनौव्वल के बाद यही और भी खूबसूरत लग रहा था जब मैंने उसे उस खेल में वापस पा लिया था । उसके बाद और भी ज्यादा खूबसूरत उससे हार जाने के बाद और भी खूबसूरत मुझे उस से किसी भी खेल में लाखों बार हार जाने का कोई भी काम नहीं था । वो प्राकृतिक था, मेरी विचारों की कडी से चल रहा था । नहीं खेल तो पूरी तरह मेरे हैं । पैसे चलता था इसलिए तो ये स्वाभाविक था । मुझे क्षमा करें । नील तो याद है । मैंने कहा था कि मैं वहाँ तक चलूंगी जहाँ तक तुम चलो की हाँ मुझे आरकाॅम थोडा सा परिवर्तन है । मैं हमेशा तो तुम्हारे साथ चलेंगे । मैंने गौरी को गले लगा लिया । मैंने उसे अपने और नजदीक खींच लिया और धीरे से उसके कानों में फुसफुसाकर कहा मैं वहाँ तक चलूंगा । गौरी जहाँ तक तुम चलो की मुझे आभास हो गया था कि वह थोडा सही नहीं क्योंकि उसने फौरन लकडी पर अपना हाथ लगाया । सचमुच प्रेम का रिसाव शुरू हो चुका था । ऐसा नहीं था कि मैंने गौरी को गले लगाने से आगे बढने के बारे में नहीं सोचा था । ऐसा मैंने कुछ पार्टियां, हर बार जब गौरी के साथ अंतरंग होने का विचार मेरे मन में आता, मैंने उस विचार को अस्वीकार कर दिया । ये अच्छी तो था मगर मैंने हर बार ऐसा ही किया । मुझे लगा कि इस समय जब हम अपने संबंध के इतने शुरुआती दौर में हैं, यदि मैंने ऐसा कोई कदम उठाया तो ये हमारे रिश्ते को चोट पहुंचा सकता है । मैंने बस ऐसा ही सोचा । अब जब कौरी मुझ पर भरोसा करने लगी थी तो मेरे लिए यह और भी जरूरी हो गया था कि मैं इस रिश्ते को फल लें और परिपक्व होने का समय मैं इसी पद पर आगे बढ रहा था । ऐसा करके मैं खुश था । मैंने ये बात गौरी को नहीं बताई । मैंने इसे अपने अंदर ही छुपाकर रख दिया ।

भाग - 5.2

किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके चार से नहीं बल्कि उसके कर्म से होती है । आखिरकार के लोगों का कर में ही होता है जो उन्हें एक दूसरे से प्रेम करने के लिए प्रेरित करता है । प्यार को सिर्फ समझ लेने भर से किसी व्यक्ति को प्यार नहीं हो जाता है । आप जिससे प्यार करते हैं उसके जीवन में आपका क्या बहस को होगा इस बात का फैसला आपके कर्मों से होता है । आरंभ में ऐसा हो सकता है उसे आपके चेहरे से, आंखों की मुस्कुराहट से या फिर आप के बात करने के अंदाज से प्यार हो जायेगा । ज्यादातर ये आपके शारीरिक पक्ष से संबंधित होता है । फिर धीरे धीरे आप का सामना सच्चाई से होता है । कर्म अपना काम करने लगता है । प्यार तो बस उसका ही एक घटक है तो विश्वास चिंता एक दूसरे को समझने का और ऐसे ही कई अन्य चार वस्तुओं का एक मिश्रण होता है तथा इस तरह से करमल अत्यंत विशाल है । ये प्यार से कई गुना बडा होता है । गौरी का कर्म बहुत ही महान था । बहुत ही सुलझा हुआ अच्छा । वह मुझ से कई गुना श्रेष्ठ थी । मैं जितनी कल्पना कर सकता था वो उससे भी कई गुना बेहतर थी । तो उसके साथ मेरी शुरुआत कुछ इसी तरह से हुई । विद्यालय की आ सकती से कॉलेज की कक्षक अगर तुम्हें कासाब्लांका का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा पसंद है । सारा का सारा हूँ था । ये कुछ वैसा ही है कि काम मुझसे पूछ होगी । मुझे तुम्हारे के शीर्ष पर सबसे ज्यादा प्यार नजर आता है और तुम मुझसे प्यार करते हो मेरी । हाँ अच्छे से उसके मुस्कुराते हुए मुझसे पूछा मुझे तो ऐसा ही लगता है । कभी कभी मुझे यकीन हो जाता है कि तुम्हारे शब्द इतने प्रभावशाली होते हैं कि मुझे यकीन नहीं होता कि तुम शब्दों के साथ बिल्कुल संपन्न हूँ । काश मैं ऐसे बयान करता था । मगर मेरे और तुम्हारे प्यार के सभी घटक और चार तत्व सकारात्मक से हो चुके हैं । शुक्रिया मेरे नहीं हूँ । मैं तुम्हारा आकलन हमेशा याद रखूंगी और मैं तुम्हारे कर्म और तुम्हारी शुद्धता को हमेशा याद रखूंगा । कासाब्लांका ने मुझ पर कुछ ऐसा ही चाहते प्रभाव डाल दिया था । मुझे यकीन था कि यह एक शापित प्रेम है । मगर फिर भी ये मेरे मस्तिष्क पर छा गया था । तो जानते हो तो भारी आवाज कैसी लग रही है? एक ऐसा आदमी जो खुद को उस चीज के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है जिस पर उसका तेल भरोसा नहीं कर पा रहा है । खेत भगवान तो वही तो सारी पंक्तियां पूरी तरह से याद है । जब बात और तो की हो रही हो तो मैं एक सच्चे लोकतांत्रिक हूँ । गौरी मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम्हें सब कुछ याद है । युद्ध में एक बार फिर तुम्हारा स्वागत है । इस बार मुझे यकीन है कि जीत हमारी ही होगी । तो मैं भी याद है नहीं, एक वास्तविक खेल के बारे में क्या विचार है? मेरी पंथियों से प्रेरित होकर गौरी भी खेल खेलने के लिए लालायित हो गई थी तो खेल जिसके बारे में मैंने पहले कुछ भी नहीं सुना था । इसका नाम वो भी का खेल था । मूलरूप से वस्तुओं और भावनाओं से उत तुम्हारे इस खेल में दस वस्तुएं होती हैं । हम दोनों इनका चुनाव एक के बाद एक करते हैं । इसके बाद आपको अपने प्रतिद्वंदी को इशारों में ये समझाना होता है कि उस वस्तु का मतलब क्या है? उसका मतलब कुछ भी हो सकता है, ये आप पर निर्भर करता है और ये तब तक करता है जब तक आप अपने प्रतिद्वंदी को ये ना समझा सके कि आखिर उसका मतलब क्या है? हाँ, आपके इशारे अर्थपूर्ण होने चाहिए और उन्हें इशारों से आपको भावना जागृत करनी होती है । ये भावना प्रेम हो सकता है । नफरत हो सकती है । भय, उदासी, हास या फिर कुछ और भी । शुरुआत में ये काफी मुश्किल लग रहा था । गौरी ने पहले आपने दस वस्तुओं का चुनाव करने का फैसला किया । मैंने ये मान लिया कि ये वस्तुएं अनियमित होंगी । वो पहले वस्तु चुनना चाहती थी ताकि मुझे खेल को समझने में मदद मिल सके । देखो जो भी मैच उन होंगी वो मेरी वस्तु होगी । चुनते वक्त मैं इस टोकरी में नहीं देख सकती है इसलिए मुझे मेरी आंखें बंद रखनी होंगी । मैं उस वस्तु को महसूस नहीं कर सकते हैं तो मैं स्टोरी को घुमा तो और फिर जिस वस्तु पर मैं सबसे पहले हाथ होंगी वो वस्तु में हो जाएगी और फिर मैं तुमसे कुछ भी करने को कह सकूंगी और इससे धीरे धीरे तो में ये खेल समझ आ जाएगा । जो भी जीतेगा वो अपने प्रतिद्वंदी से कुछ भी मान सकता है । कुछ भी क्या अब तो मुझे डरा रही हूँ । रुको ना, ये मजेदार है । अच्छा तो शुरू करते हैं तो तुमने घुमा लिया । हाँ गौरी अब उठाओ क्या? मिला मुझे ये तो बहुत ज्यादा आसान है । चॉकलेट की एक पट्टी उसने उसे बाहर खींचा । फिर वो रसोई में गए और उसे थोडा गर्म किया । उसने एक टुकडा खाया, अपने वोटों पर फैलाया और एक दम पीछे हट गई । फिर वो नाचने लगी और मैं दिल की एक गाना गाया । वो चॉकलेट वाला गाना कुछ खास है । हम सभी में कुछ बात है हम सभी में बात है । कुछ खास कुछ स्वाद है क्या? साथ है जिंदगी में फिर मेरे नजदीक आई और मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया । मुझे प्रेम की अनुभूति हुए तो नहीं बना हूँ उन्हें क्या महसूस किया? मैं नहीं यार । मैं देखा मैंने कहा था ना, ये बहुत आसान है । अब तुम खाने जा रहे हैं । हमने इस खेल का पूरा आनंद लिया । अभी तक तो गौरी जीत ही रही थी क्योंकि मुझे पता तो था नहीं क्योंकि मुझे तो पता नहीं था कि चिप्स के साथ खाने के अलावा और क्या करना चाहिए । आखिरी वस्तु बिस्किट का एक पैकेट था । वो खेल को वस्तु तक खेलने लगी थी तो कहीं जाकर छुप गई । मैं उसे ढूंढ नहीं पा रहा था । वो तो पहले ही जीत चुकी थी । एक बहुत बडे अंतर से, पांच दो से । मगर अब मैं भी हो रहा था । पंद्रह मिनट से भी ज्यादा हो चुके थे । मैं गौरी को नहीं धूम पाया । कहाँ हूँ मैं तुम्हें ढूंढ नहीं पा रहा हूँ । मुझे पता है तुम कहीं कहीं हो, बस करो । गौरी मुझे और मटर हूँ । वो बिल्कुल मेरे पीछे से पूछ कर मेरे सामने आ गए । मुझे यकीन नहीं हुआ कि वह मेरे इतने नजदीक थी और फिर भी मैं उसे ढूँढ नहीं पाया । पहले मुझे डर लग रहा था और आपने उससे कुछ नाराज हो गए । मैं खुद को रोकना चाह रहा था मगर मैं ऐसा नहीं कर पाया । ये आखिरी बार है तो दोबारा कभी ऐसा मत करता हूँ । बस भी करो । तुम इतना गंभीर हो रही हूँ तो बस खेल है था तुम्हारे लिए । मगर मैं दिल के नहीं क्या नाम चुनाव बातें कर रहे हो । लुका छुपी तो बहुत पुराना खेले । जो बच्चे खेलते हैं तो इतना गुस्सा क्यों कर रहे हो तो शायद मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए । ठीक है मुझे माफ कर वो छुट हो गयी । वो दूसरी ओर देख रही थी । मैं सोफे पर बैठा हुआ था । वहाँ एक दम सन्नाटा छा गया । ऐसा सन्नाटा जो अगर थोडी देर और रुक जाए तो आपकी चंद ले लें । इसीलिए मैंने पहला कदम उठाया और पीछे से आकर उसे अपनी बाहों में भर लिया । मुझे धनहीन आपको सुनाई दे रहे थे । मैंने उसे अपनी ओर घुमाया हो । तुम झूठ क्यूँ हूँ क्यों रही हूँ की इतनी बडी कोई बात तो नहीं थी । वो चुकी रही । फिर एक पल रुककर उसने धीरे से कुछ कहा । मुझे बस तो था उसके चेहरे के नजदीक जाना पडा ताकि मैं उसकी बात हूँ । बहुत मुझे माफ करें । उसने हस्ते और रोकते हुए कहा एक जोडी के तौर पर गई हमारे बीच की बर्फ पिघलने वाला पहला मौका था । ये खेल का हिस्सा नहीं था मगर सभी भाव एक साथ घट पडेगा तो वही क्या मैं ये मान लूँ कि अब हम बराबरी पर हैं इस खेल में मैंने तो मैं छुपाया हंसाया, लाया, दुखी किया और फिर बाकी सब जरूरी चीजें जिनके बारे में तुमने बताया था अब छुट हो जाओ । मैं तो बहुत पहले चीज चुकी थी । ठीक है तो हम जीत गई शक्तियां । अब मैं तुमसे अपनी इच्छा से कुछ भी मांग होंगे मगर वक्त आने पर तुम कुछ भी मान सकती हूँ । मजेदार बात यह है कि मेरे अनुसार अभी तक के मेरे जीवन के अनुभव से प्रेम और किसी व्यक्ति के जीवन में प्रेम के दस पहलु होते हैं । इसको और भी आसानी से समझने के लिए हम इन्हें चरण कहेंगे । हालांकि ये किसी निर्धारित काम में तो नहीं है मगर ये जरूरी स्थानों पर दर्शाए गए पहला चरण, पहली नजर का प्यार, दूसरा चरण किसी संबंध के लिए प्रस्ताव रखना यहाँ हम अस्वीकृति की बात नहीं कर रहे हैं । तीसरा चरण एक साथ जीवन का सिंह भोजन करना चौथा जा रहा हूँ । सिनेमा घूमना, खाना, बातें देर रात पाते सुबह सुबह बातें ट्वेंटी फोर इन टू सेवन बातें ये सर्वश्रेष्ठ चरण होता है । हालांकि ये परीक्षा भी हो सकता है । इस चरण में सभी भाव और मनोभाव सामने आ जाते हैं । आप इससे प्यार करने लगते हैं और लोग चाहते हैं कि प्रेमी जोडों की दुनिया इसी चरण पर रूप चाहे बेवकूफी भरी चीजे तो इसके बाद आती हैं प्रतिबद्धता साथ रहने या शादी करने का प्रस्ताव । पांचवां चरण अभिभावक वाले कुल छठा चरण झगडे प्यार छकडे प्यार मूलता नाटक सातवां चरण संबंध विच्छेद । यहाँ शादी आठवां चरण है । विवाह पश्चात संबंध विच्छेद या जीवन का खुशी या दुख के साथ आगे बडता रहता है । जीवन आगे बढता रहता है । नाम आचरण है । बच्चे और भी बच्चे या फिर दोबारा शादी और पहले से सातवें चरण की पुनरावृत्ति या फिर आठ पाँच रन और दसवां चरण है । ये पहले और दूसरे चरण के बीच में कुछ भी हो सकता है या फिर पहले चरण से भी जब आप एकल होते हैं शायद ही कभी क्योंकि इंसान सीखते नहीं है और जीवन उन्हें सिखाता रहता है । इस चरण को अंत में रखने के पीछे मेरा कारण ये है कि आप इसे लचीला बना सके और इसमें अपनी सुविधानुसार कुछ भी चोट या घटा सकें । एक बार जिसके लिए मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूँ वो ये है कि आपका जीवन एक से अधिक चरणों में आपके सामने प्रकट होगा । रोमांचक है ना? बीस के उम्र में अगर ऐसे अनुमान लगा रहा हूँ तो आपको मेरी थोडी सी दाद तो देनी पडेगी । जब मैं चालीस का हो जाऊंगा तो हो सकता है कि मैं पीछे मुडकर देखो और अपने इस आकलन पर खूब हंसू । किसे पता आगे क्या होने वाला है । खैर मैं वर्तमानकाल में जीवन का आनंद ले रहा था । हाँ, मैं इन सब के योग के हो क्योंकि तुम किसी और चीज से ज्यादा मेरे योग्य हूँ । उसे एक बडी सी मुस्कान के साथ मुझसे कहा शाम हो चुकी थी । हम ऍम और तीसरी का इंतजार कर रहे थे । सभी तैयारियां हो चुकी थी । ये मकान अब घर अधिक लग रहा था हूँ । ये घर मुस्कुरा रहा था और उन्हें इंसानों की खूबसूरती को महसूस कर रहा था जो कि अब इसका हिस्सा थी । ये सब बहुत खूबसूरत था । उस छोटे से झगडे और मान मनोव्वल के बाद यही और भी खूबसूरत लग रहा था जब मैंने उसे उस खेल में वापस पा लिया था । उसके बाद और भी ज्यादा खूबसूरत उससे हार जाने के बाद और भी खूबसूरत मुझे उस से किसी भी खेल में लाखों बार हार जाने का कोई भी काम नहीं था । वो प्राकृतिक था, मेरी विचारों की कडी से चल रहा था । नहीं तो पूरी तरह मेरे हैं । पैसे चलता था इसलिए तो ये स्वाभाविक था । मुझे क्षमा करें । नील तो याद है । मैंने कहा था कि मैं वहाँ तक चलूंगी जहाँ तक तुम चलो की हाँ मुझे आरकाॅम थोडा सा परिवर्तन है । मैं हमेशा तो हमारे साथ चलूंगी । मैंने गौरी को गले लगा लिया । मैंने उसे अपने और नजदीक खींच लिया और धीरे से उसके कानों में फुसफुसाकर कहा मैं वहाँ तक चलूंगा गौरी जहाँ तक तुम चलो की मुझे आभास हो गया था कि वह थोडा सही नहीं क्योंकि उसने फौरन लकडी पर अपना हाथ लगाया । सचमुच प्रेम का रिसाव शुरू हो चुका था । ऐसा नहीं था कि मैंने गौरी को गले लगाने से आगे बढने के बारे में नहीं सोचा था । ऐसा मैंने कुछ पार्टियां, हर बार जब गौरी के साथ अंतरंग होने का विचार मेरे मन में आता, मैंने उस विचार को अस्वीकार कर दिया । ये अच्छी तो था मगर मैंने हर बार ऐसा ही किया । मुझे लगा कि इस समय जब हम अपने संबंध के इतने शुरुआती दौर में हैं, यदि मैंने ऐसा कोई कदम उठाया तो ये हमारे रिश्ते को चोट पहुंचा सकता है । मैंने बस ऐसा ही सोचा । अब जब कौरी मुझ पर भरोसा करने लगी थी तो मेरे लिए यह और भी जरूरी हो गया था कि मैं इस रिश्ते को फल लें और परिपक्व होने का समय मैं इसी पद पर आगे बढ रहा था । ऐसा करके मैं खुश था । मैंने ये बात गौरी को नहीं बताई । मैंने इसे अपने अंदर ही छुपाकर रख दिया ।

भाग - 5.3

पांच दिन गुजर गए । हमारी बातों और कैंटीन में मिलने का सिलसिला चलता रहा अन्य कई प्रेमी चोलो के बीच । मगर मेरे लिए ये अभी तक कोई प्रेम कहानी नहीं थी ये तो तय था । हालांकि ये एक खूबसूरत रूप ले रहा था । मैं भी नई शुरुआत का छठ आते ही घंटे बच्ची ऍम के लिए अलग दिन तो लगा रहे हैं वो एयर सप्लाई का दाना लास्ट दिन लग था वास्तव में ये मेरी कॉलर ट्यून भी थी और उसके लिए लगाई गई रिंगटोन भी थी । इसका मतलब मैं और गौरी दोनों एक ही गाना सुन रहे थे । मेरे नए साथी से संपर्क स्थापित करने का ये मेरा नया तरीका था । संगीत हमें छोड था जैसे कि ये आत्माओं को जोडता था । नाटकीय कमोबेश एक तीस साल के लडके से आप और क्या उम्मीद कर सकते हैं उदास और फिर से अपनाया गया ऍम शनिवार को तुम्हें जगाने के लिए माफ करना नहीं नहीं ये काम तो सूरज बहुत पहले कर चुका है आजकल चमकदार वस्तुओं से जानना मैं देख के सामान्य बात है तो तुम्हारा मतलब है कि मैं समझता हूँ तुम उससे भी ज्यादा चाहता हूँ मुझे बचाने के लिए ईश्वर का एक करिश्मा क्या? मैंने तो अब सात और संबंध विच्छेद के पंजों से बुक करा दिया । उस से भी बहुत ज्यादा सही कहा तो आज का क्या कार्यक्रम है तो यहाँ आना चाहोगी । दरवाजा तो खोलो उसके चाहता हूँ । मैं उछल पडा और उडते हुए दरवाजे की कम देखता हूँ वो वाकई में सूरत से भी जाना चमकना लग रही थी । मुझे खुश करने के इंतजार में । अंदर खाने के दो मिनट के पास ही घर के अंदर की दुनिया बदल चुकी थी । बिखरे हुये कपडे अलमारी के अन्दर खुसी ले जा चुके थे । जूतों की दिशा पतली और वे पालन के किनारे रखी मेज के नीचे पहुंच गए जूतों की । मैं इसका इस्तेमाल शराब के खाली बोतलों और बेची रिच दुकान से लाए गए आयाति पोत्रो के लिए किया जाता था । उस से मुझे याद आया कि मेरी यात्रा सूची में मनाली गांव छोडना था । कितना सुना था उसके बारे में? भारत का ऍम मुझे दरवाजे की घंटी की हल्की आवाज सुनाई दे रही थी । मैं भी कल्पना में था । अब मैं पूरी तरह की दुनिया में वापस आ चुका था । मैंने खुद को झट छोरा और हर बढाते हुए दरवाजे की ओर पढा मालूम पहले ही बहुत तेज कर चुका था । लगता है मैं गलत वक्त भरा गई । हाँ, जैसे तुमने मुझे लगा दिया । मैंने उसकी ओर देखा और वह बिल्कुल वैसे ही देख रही थी जैसा मैं सोच रहा था । वो बहुत चमक रही थीं । तो आखिर तुम्हारे होठों पर आई गया टाॅप ये तो बात रखने की कला है । मैं तो भरा ही इंतजार कर रहा था । इसलिए दरवाजा खोलने के लिए तो मैं आधा घंटा लगता है । है ना लानत है सहमति । क्या मतलब हूँ तुम ने अपना घर तो बहुत अच्छे से सजाकर रखा हुआ है । एक का विवाहित व्यक्ति से ऐसी उम्मीद नहीं रहती है या कोई और भी रहती है । तुम्हारे साथ क्या बकवास है? ही करना व्यंग्य विमान समझे । मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कितनी जल्दी गौरी के साथ कितना सहज हो चुका था । मेरा मन जो लगता था कि बिलकुल ध्वस्त हो चुका है । एक बार फिर सामान्य होने लगा था । अच्छा तो मैं सोच रहा था । हमारे व्यंग्य और कटाक्ष के मिलन के आधार पर हमें हिमाचल की यात्रा का कार्यक्रम बनाना चाहिए । साफ साफ बताओ मनाली सुना है कि वह भारत का एम्स्टर्डम है तो मैं पता है मेरी सबसे अच्छी दोस्त के मामा वही रहते हैं । मनाली में मनाली में तो नहीं पर शिमला में इतिश्री हाँ थी । इतिश्री हाँ आई थी । जोरदार बारिश शुरू हो गई थी । इन मौकों पर बारिश होना बहुत जरूरी है वरना हमारी छोटी छोटी दुनिया का निर्माण कैसे होगा? इसके बाद मैं जिस चीज के बारे में सोच पा रहा था वो था मेरी खिडकी के बाहर निकलने वाला इंद्रधनुष, हवा को फैलाने वाली बूंदें और खिडकी पर थपकी देने वाली बारिश आपको अपने पास बुला रही थी । पत्ते हवाओं से झगड रहे थे, टहनियाँ इंद्रधनुष और बारिश के बीच में गिर रही थी । ये सब किसी क्षेत्र माला की तरह था । और जो चीज इसे और भी ज्यादा खूबसूरत बना रही थी वो ये सूरज की किरणें कांच की तरह बारिश के गुंडों के बीच में से झांक रही थी । खाॅन सब से भी ज्यादा जो चीज खूबसूरत बना रही थी वो था साथ में खाना साथ थी तो मैं पता है आज रात में तूफान के साथ तेज बारिश होने वाली है तो हमारी योजना का क्या होगा? सप्ताह तो कल घटना हो रहा है और कल बहुत ही चमकीला दिन होने वाला है । हम कल जा सकते हैं । ठीक है तो फिर मुझे शाम में कौन से बात करने तो जरूर मैं किसी को भी साथ ले आउंगी । छठे दिन हम एक साथ है और मैं इससे बहुत प्रेम कर रही हूँ । उसे सब कुछ याद था और वो बिल्कुल सटीक की थी । मेरे मन में खयाल आया हूँ । मैं अभी से बहुत पसंद कर रहा हूँ और मैंने अपने नए होने वाले प्यार को ध्यान से देखने के बाद कहा । बेहतरीन मित्रों के साथ ही खूबसूरत योजना हमारे शादी बाद का पटाक्षेप करने वाली थी । ये महीने का दूसरा शनिवार था और हमारे कॉलेज में छुट्टी थी । ये अभी तक एक हफ्ते की ही बात थी । मगर गौरी इसे जीवन भर के लिए चाहती थी । जब की मैं अभी भी उसके साथ कदम मिलाने की कोशिश कर रहा था । काश ये सब उम्र भर ऐसा ही रहे । मैंने प्यार किया । मैं तब तक ऐसे ही रहूंगी जब तक पहुंचा हो । वो मुस्कुराई । मौसम लोगों को करीब ले आता है । मैंने आप खास किया । ठीक उसी पल मुझे याद आया कि कैसे उस बारिश में आर्या के साथ भी सब कुछ बिल्कुल ठीक था । मगर उसने मुझे छोड दिया । मैं पिछली बातों के बोझ दलित अपना नहीं चाहता था । मगर अभी ये सुविधा मेरे पास नहीं थी । उसे बुलाने में मुझे कुछ वक्ता और लगेगा । मुझे मालूम था कि गौरी अपना सर्वस्व देने को तैयार थी । मगर मैं अपने अंदर के बहुत सारे है । उसके साथ बता नहीं चाहता था । खो देने का इस्तेमाल किए जाने का अनजान के साथ साथ सब कुछ करना है । मेरी परिस्थिति में होना आसान नहीं था । मैं अपने लिए चिंतित नहीं लगता है । तुम कहीं हूँ । मैं दो बार तुम्हें काफी दे चुकी हूँ । तुम ठीक तो हूँ, उसको माफ करना । हाँ हाँ, मैं ठीक हूँ । बस अपनी माँ के बारे में सोच रहा था । मुझे तो उनकी याद विद्यालय के दिनों की है । लगता है तो मेरे बारे में सब कुछ जानती हूँ । धीरे धीरे तो मैं सब पता चल जाएगा । मेरे नहीं । ये बहुत ही सुकून देने वाला वाकया था । आपने पन से भरा और किसी प्रेमपत्र जैसा उसने मुझे अपना कहा था । मेरा तेल जोर जोर से धडकने लगा था । मैं पीस बीच में उसके चेहरे के भाव पड रहा था । ये मुझे हमेशा से ही पसंद था । इससे मुझे उसे ऍम देखते रहने का मौका मिलता था । वो सोफे पर मेरी बगल में आकर बैठ नहीं । कॉफी एक बार ठंडी हो चुकी थी । मुझे तो पता नहीं चला मगर गौरी को पता चल गया करें । क्या तुम हमेशा ऐसे ही रहती हूँ? मेरा मतलब है विचारशील और मान नहीं आता । हाँ, यदि कई बार कॉफी बनाना मुझे रोमानी बनाता है तो फिर मैं इसमें बहुत निपुण हूँ । लानत है मैं मन ही मन हस रहा था । मुझे लगा मालू मैं समुद्र के किनारे पर बैठा हुआ था । वे कहाँ से लहरें और उनकी कल करूं? फनी किसी सपने की तरह थी । चंद्रमा की शांति और जमते हुए सितारें इस कल्पना में चार चांद लगा रहे थे । ये बारिश का असर नहीं ये कौन का था? मैं इतना प्रेम और एक है । एक महसूस करने लगा था कि मैंने कुछ पंक्तियां लिखीं और फौरन ही उन्हें कौरी को सुना दिया । गुलाब कांटों के बीच में रहता हूँ और उन्हें कल ही लगता है । फिर भी उसके मान और चरित्र पर कोई ताकत नहीं आता है । हम दोनों का वर्ष और तुम्हारे प्यार का वशीकरण इसमें भी उतनी ही गरिमा मानो गुलाब और कांटों का हूँ । उसकी प्रतिक्रिया अप्रत्याशित थी । मेरे खत्म करने से पहले ही उसके आंसू उसके गालों से बहने लगे थे । वो मेरे ऊपर कोतवाली और मुझे कसकर करने लगा । लग गया । इसके पहले की मैं कुछ कहता उसने अपनी उंगली मेरे होठों पर रखती है और मुझे चुप रहने का इशारा किया । अगर मैं अभी इसी पल तुम से कुछ मांगू तो तुम मना तो नहीं कर हो गई । उससे पूछा मुझसे कुछ भी मामलों मैं तुम्हारा आभारी रहूंगा । मुझे बहुत खुशी होगी अगर तुम अपने घर में मुझे थोडी सी जगह देख सकूँ । उसके झुकते हुए मुझसे कहा एक साथ रहता हूँ तुम आश्वस् तत्वों हाँ मैं सोचना चाहती हूँ की मैं ध्यान करूँ सिल्की मांगता हूँ क्या भी थोडी जल्दबाजी नहीं हो जाएगी । मैं अभी तक दिल तोड देने वाली पिछली घटना से पूरी तरह ऊपर नहीं पाया था और मुझे ये सब थोडा जल्दी लग रहा था । इसलिए मैंने पुष्टि करने के लिए पूछा सात वर्ष और छह दिन नहीं मैं तुमसे अपने जन्मदिन से प्यार करती हूँ । अब बताऊँ क्या? ये बहुत चलती है तो ये तो बहुत ज्यादा वक्त होता है । मतलब तुमने सोच लिया है तुम सोच रहे हो या हामी भर रहे हो । आंखों में चमक लिए उससे पूछा मैं तुम्हारे प्यार में पागल हो गया हूँ और इस विषय को मैं अपने विश्वास के सिवाए और कुछ नहीं देना चाहता हूँ । एक अकल्पनीय भाव से मैंने कहा वो मेरे पास आई और अपने होठों को लगभग मेरे कानों के अंदर ले जाकर मुझसे कहा शुक्रिया मैंने नहीं ये किसी भी तरह जोशना पता नहीं था । ये नहीं आती थी । जितनी बार तो कुछ कहती मेरे दिल की धडकन रूप से जाती थी । बाहर हो रही बारिश की आवाज मुझे बिलकुल भी सुनाई देखते रही थी । अब समुद्र में खामोसी थी । इस पल मैं सुरक्षित नहीं था । नहीं मेरे मन में उसे खो देने का भय था । बल्कि प्यार में भरोसा और मजबूत हो गया था । इस पर मिली यदि में मेरा भरोसा पूरी तरह कायम हो चुका था । गौरी को अपनी सहज ज्ञान पर किसी भी दूसरी चीज से ज्यादा भरोसा था । यही कारण था कि हम दोनों के विषय में वो पूरी तरह आश्वस्त थी । उसने अपना सामान पहले ही पांच रखा था । वो उसकी गाडी में था । उसे तो बस मेरे हाथ में चाबी देने की तेज थी । पहले मुझे कुछ समझ में नहीं आया । ज्यादा कुछ नहीं है । बस दो बसते हैं और एक बडा सा सुनते हैं । बाकी सब इतनी संभालने की क्या तो मेरे साथ मजाक तो नहीं कर रही है । तो मतलब नहीं भी सामान के साथ यहाँ जो हाँ, मुझे पता है कि मेरी गाडी यहाँ खाली करने में समस्या है क्योंकि तुम्हारे पास एक ही खाली खाली करने की जगह है । मगर चिंता मत करूँ इतनी मेरी काली ले जाएगी है तो हमारे पास दो रूम है तो मुझे आप रहने में कोई समस्या नहीं होगी । वो बिना रुके एक ही सांस नहीं सब बोल गई । गौरी के साथ मेरी जिंदगी ऐसा ही स्वरूप ले रही थी । ये अजीब भी था और एक सकारात्मक जोखिम से भरा हुआ नहीं । मैं हर क्रिया कलाप ने उसका साथ दे रहा था । वो मुझ से कुछ भी करने को कह नहीं रही थी । है ये सब मैं बडी सहजता से और अपनी मासी और खुशी से कर रहा था । सुनो तुम कोई खेल खेलना पसंद कर हो गई तो हमारा मतलब शतरंज का खेल हाँ नहीं साधारण चीजें मैं तो मैं समझाती हूँ । ये बहुत मजेदार है । जब तक मैं ऐसा करती हूँ कि हम थोडा सा संगीत बचा ले । नहीं पहले मुझे ये टीवी बंद करने तो जरूर मैं कोई संगीत बजाता हूँ और क्या फिर हम शाम में कोई मूवी देखने जायेंगे? मैं गौरी की बात सुन नहीं पाया क्योंकि मैं उसका सामान लाने के लिए नीचे उतर चुका था । उसके सामान का अधिकांश हिस्सा किताबों सिनेमा से भरा हुआ था बल्कि सफेद चादर में लिपटे उसके सामानों में इन्ही चीजों की भरमार थी । मुझे देखकर चौकीदार भी मुस्कुरा रहे थे । जैसे कि वे हमेशा करते थे जब उन्हें पता चलता कि किसी जवान लडके को कोई नई प्रेमिका मिल गई है और वो उसके साथ रहने आ रही है । भगवान का शुक्र है कि पुणे इन सब मामलों में खुले विचारों वाला शहर था । यदि ये सब गुवाहाटी में हो रहा होता तो सब लोग मिलकर शाही अंदाज में मेरी ठुकाई कर रहे होते हैं । अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों में शायद मैं ही एकमात्र व्यक्ति था जो ये काम दोबारा करने की हिम्मत करता हूँ । हालांकि अपने परिवार चलों के बारे में मुझे यकीन था कि बहुत सारे लोगों ने ये करने की कोशिश की होगी या छुप छुपकर ऐसा कर भी रहे होंगे । मगर किसी ने अभी तक मुझे तो नहीं बताया था । मेरे बडे भाई बहनों ने भी नहीं । जो मुझसे छोटे थे वे तो अभी तक विद्यालयों में ही पढ रहे थे । छह । वे अभी भी वी मोहन के उस दौर से गुजर रहे थे जैसा कि गौरी एक लंबे समय तक थी । मेरे जीवन में कई कहानियां बोर हो रही थी । पुणे में मेरे जीवन की कहानियाँ और बचपन से मुझ पर आ सकता व्यक्ति के साथ रहने की कहानियां आ सकता क्योंकि वह मुझ पर आ सकता है । मैं सही जा रहा था अपने घर को व्यवस्थित देखकर मुझे आश्यर्यजनक खुशी हूँ ये पहले कभी भी ऐसा नहीं था । मैंने देखा कि मेरे जुडते उतने पुराने नहीं जितना कि वे देखते थे । अब फ्री इसको भी बदलने की जरूरत नहीं थी और ये सब कुछ बस पंद्रह मिनट में हुआ था । क्या तुम कोई जादूगर हूँ? हाँ उस टीवी कार्यक्रम से बहुत ज्यादा ही प्रभावित तो मैं याद है क्या नाम था उसका धक तेरे की कैसे भूल गई? मैं अच्छा खैर जाने दो और वैसे भी मैं मैं तो ये काम तब से वो बुक कर कर रही थी जब से मैं यहाँ हूँ । लगता है तुम्हारा ध्यान अभी क्या है? बिल्कुल सही क्योंकि मैं तो तुम्हें देखने में व्यस्त था । सुनो उम्मीद है तो मेरे साथ मजाक नहीं कर रहे हो । अगर कर भी रहा हूँ तब भी मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ । इसलिए तो मैं तुमसे प्यार करते हो । नहीं अच्छा सुनो आज दोपहर में हम कासाब्लांका मोवी देखे क्या एक बेहतरीन शाम स्वस्थ विचार है । थोडी बहुत ही प्यारे हो । बातों ही बातों में उसके घर में पडी हर चीज के लिए एक स्थान सुनिश्चित कर दिया । कौन सी चीज कहाँ जाएगी सब उसके नियंत्रन में था । मेरा कमरा भी । उसने अपने कमरे के बाद मेरा कमरा ठीक किया तो अच्छा जे अ स्नानागार और किचन के साथ भी वही हुआ । कुछ ही पलों में पूरा घर व्यवस्थित हो चुका था । मैं आश्चर्यचकित था । मैं अचंभित था । मैं यही सोच कर हैरान था की उसके अंदर कितनी ऊर्जा भरी हुई है । वो कितनी शानदार इंसान थी । मैं तो सपने में भी इतना सब कुछ करने की सोच ही नहीं सकता था ।

भाग - 6.1

सूरज की आखिरी किरण भी धुंधली हो चुकी थी । वैसे भी उसमें पिछले आधे घंटे थे । उसमें वो तेज नहीं रह गया था । हवा में प्रणय के कुछ तो खोलने के बाद बारिश रुक गई थी । ताड के पेडों ने बारिश की बूंदों को अपने आलय में उसी तरह थाम रखा था जैसे बादल पानी को कम कर रखता है और फिर भी उसके हरे पत्तों से भी रहे थे । ये अद्भुत दृश्य था । सामान्य लोगों के लिए बाहर का मौसम भी सामान्य हो गया था । यह एक सुखद संबोधन था । मैंने उस मंदा तैयार का आलिंगन क्या ठहरे हुए आसमान से कितना ही पानी की छोटी छोटी बूंदों को छू मा मैनाटाड को और बारीकी से देखने लगा । मैं उससे बात कर रहा था । इस बार ताड के साथ चल रहे मेरे प्रणय कल आपको बाधित कर दिया । ये मेरे उस दिन के क्रिया कलापों में संगीत खुल जाते जैसा था । देखो तो कौन आया है तो लोग कब आई? मैं तो कितनी देर से तो मैं दरवाजा खोलने को कह रहा था, मगर लग रहा था कि तुम खोले हुए थे । मेरे विचार से मौसम में सचमुच ये मौसम तो मेरी जान लेकर ही मानेगा । मैंने टॉम और रितेश री दोनों का आलिंगन क्या? नहीं? नहीं अरे मैं तो ऑटो में आई और ऍम अपनी मोटर साइकिल लेकर आया है । हम दोनों तो बस ऊपर एक साथ है । संजोग बस श्री तुम तो बिल्कुल गौरी की तरह बात करती हूँ । अब तो हमारी दोस्ती को सोलह साल हो गए और संगत का इतना तो हो गई । ये तो मेरे और नील की दोस्ती से भी लंबा समय है । हम दोनों की दोस्ती को अब एक दर्शक हो गया है और हम दोनों तो एक प्रकार से बात नहीं करते और तुम दोनों का बताओ भी बिलकुल भिन्न है । या फिर ये बात सिर्फ लडकियों के मामलों में ही सच होता है । वैसे मुझे ये मालूम है कि जब एक लडका और एक लडकी एक साथ रहते हैं तो उन दोनों में एक दूसरे को आ जाते हैं । लडकियों ने स्वतः ही बातचीत से खुद को अलग कर लिया । वे एक दूसरे के कानों में बात कर रही थी । मैं उन्हें सुन नहीं पा रहा था । मैं एक प्रकार से बिल्कुल आश्वस्त था की इतिश्री कौर इसे मेरे बारे में ही पूछ रही होंगी । मुझे इस बात का जरा भी ऐसा ही नहीं हुआ कि अनजाने में ही सही मगर मैं उन दोनों की ओर देखता था । मालूम है उनकी बातचीत का हिस्सा बनना चाह रहा था । फिर अचानक मुझे मेरी माँ नहीं एक बार मुझे क्या समझाया था । जब तो लडकियाँ आपस में बात कर रही हूँ तब उनके बाद शुक्कर नहीं सुननी चाहिए । ये कौन है इससे कोई फर्क नहीं पडता । खैर माने मुझसे ये बात इसलिए नहीं गई थी क्योंकि वो मुझे अनुशासित या दूसरों का सम्मान करना सिखा रही थी । ऐसा बिल्कुल भी नहीं था । उनका मानना था की आपस में बातचीत कर रही दो औरतों की बातों में छिपकर सुनना एक ओछी हरकत होती है । क्योंकि यदि वो बात आप से संबंधित हो या आपको मसालेदार प्रतीत हो रही हो तो अंतर तो वो बाद आपके कानों तक पहुंच जाएगी । फिर वो बात एक राज नहीं रह जाएगी । मुझे वो बात तो याद आ गई मगर इसके बावजूद मैं उन दोनों की ओर देखता रहा । मालूम है अपने ही बारे में सब कुछ भूल गया था तो हम ने मुझे को नहीं से धक्का दिया और सावधान । क्या मैं इस प्रकार पीछे मुड गया? मालूम कुछ हुआ ही नहीं था । मैं और ऍम बालकनी में चले गए । एक बेहतर विचार था लडकियों को एकांत में रहने दो । हम बातचीत करते रहे और थोडी देर बाद दोनों लडकियाँ भी हमारे पास आ गई । अरे तो दोनों लडकी यहाँ के लिए क्या कर रहे हो? हम भी है । हाँ तो हमें बुलाया क्यों नहीं? और जहाँ पे भी तो तुम दोनों आपस में ही व्यस्त थी । हाँ और हम तो कोई उत्तर रक्षा सौदे की बात कर रहे थे तो उसमें रुकावट नहीं डाल सकते थे । वहाँ भी हमारे पास आकार बैठो । इतिश्री वहाँ खडी रही जबकि गौरी अंदर चली गई तो हम उसकी मदद करने उसके पीछे चला गया । इतिश्री और मैंने हल्के फुल्के अंदाज में बातचीत शुरू की । उससे बात करना बडा ही अच्छा अनुभव लग रहा था । गौरी के जन्मदिन पर उससे बात करने का ज्यादा मौका नहीं मिला था । तो हम तो हमारे बारे में बात कर रहे थे । भगवा मैंने मन ही मन कहा । मुझे लग रहा था तुम हम पर नजर रख रहे थे । हाँ नहीं नहीं मैं तुम दोनों के छुप होने का इंतजार कर रहा था ताकि मैं तो मैं बालकनी में बुला सकते तो आप हाँ तो इसीलिए गौर ये तुम्हारे बारे में इतनी अच्छी बातें करती है । वो कितने सालों से तुम्हारे प्यार में पागल है मगर मैंने महसूस किया है कि अभूत बहुत संयमित हो गई है । जब से तुम ने उसका प्रस्ताव स्वीकार किया है, वो इतनी संतुष्ट हो गई है । अब वो अच्छा सुनु अब मेरे बारे में इतनी अच्छी बातें भी मत करो कि मैं बचा ही ना पाऊंगा । वो वाकई एक बहुत अच्छी लडकी है । वैसे ये बताओ कि आगे क्या कार्यक्रम है? हम कहाँ जाते हैं? जहाँ तक दौरे को मैं जानती हो ना वो कुछ निराला ही करना चाहेगी । शायद तुम ये अभी तक नहीं जान सके होंगे । मगर वो बिल्कुल खिलाडी लडकों जैसी है । मैंने उसे सुना । हालांकि मैंने उसकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया । मैं तो गौरी के विचारों के भवन में खींचा चला जा रहा था । इससे पहले मैं उस खबर पूरी तरह खुश पाता । टॉम हाथ में कोसी और मेज लेकर बाहर आने लगा । उसके पीछे गौरी मुस्कुराती हुई आ रही थी । उसके हाथों में मॉकटेल काजू चिप्स का बाद और पकडे थे । गरमागर्म को भी प्याज और मृत्यु के पकौडों की बात ही कुछ और है । यह तय हो चुका था कि आज का दिन हम भरपूर तरीके से जीने वाले थे । उसके मुझे एक और बात का एहसास हुआ कि दोस्ती एक बहुत ही जरूरी चीज है और यही वह बात थी जो मेरे और आलिया के बीच गलत हो गई थी । पूरे समय बस हम दोनों ही थे और कोई भी रही । हालांकि मुझे दोनों की तुलना नहीं करनी चाहिए मगर फिर भी मुझे महसूस हो रहा था कि दोनों में विशाल अंतर है । और हाँ, आज हम सब एक साथ थे । ये बस जुनून नहीं बल्कि दोस्ती की वजह से था । यही वो कारण था कि टॉम आर्या को उन दिनों से कभी पसंद नहीं करता था और मैं ये समझ चुका था की अब मुझे और अधिक सोचने का मौका नहीं मिलेगा क्योंकि गौरी ने खुलासा करना शुरू कर दिया था कि वह क्या करना चाह रही थी । वो गाडियों की रईस लगाना चाहती थी जोडों में । असल में वह एक ऐसे दिन में करना चाहती थी जस्टिन बारिश हुई हो वही से लेकर बहुत ही उत्साहित थी । रेस और मौसम दोनों को लेकर चलो भी यही तो असली मजा देगा । टीचर से बडी सर के पानी वो तीखे मूल और वे भडकती हुई भावनाएं हाँ हाँ, मैं तो अभी से अपनी भावनाओं में रोमांच महसूस कर रहा हूँ बल्कि मैं तो रोमांचित हो चुका है । मेरे अंदर तो ट्रेन लीन दौड रहा है । मगर मैंने अपने जीवन में कभी भी ऐसी रेस नहीं लगाई है । मैं उनसे अभी कह देता हूँ तुम जीत गए भाई । ये एक अनायास यंग था क्योंकि मुझे पता था कि मेरी माशूका इन सब को लेकर कितनी गंभीर थी । हूँ । समर्पण मत करो, बिना लडे ही हार मत मानो । हाँ, जैसे मैंने आज दोपहर के खेल में कर दिया था । ये तो लडकों का खेले । तुम्हें तो इसके बारे में बहुत खुश होना चाहिए । ये तो एक अप्रत्यक्ष ललकार है । नहीं नहीं ये खुली ललकार है । चलो चलते हैं चलो ऍम विदेश श्री ऐसे डरकर चुपचाप अॅान तय करते हैं । कुछ ही समय में हम सडक पर थे । पथ मार्ग तक की सडक बिलकुल खाली ही थी । ये सप्ताहंत की छुट्टी की वजह से था । हम जितना सोच रहे थे उस से कम समय में ही वहाँ पहुंच गए थे । इसमें कुछ हाथ इस बात का भी था कि हम दौड के भाव में आ गए थे । हालांकि ये बिल्कुल अलग बात थी कि गौरी और इतिश्री हम से बहुत पहले ही वहां पहुंच गई थी । जैसा कि अनुमान था, दिन खत्म हो रहा था । वो रेस जिसमें मुझे हिस्सा लेना था । अपनी प्रेमिका के साथ वो रेस जिसके बारे में वो बहुत रोमांचित थी । वो ड्रेस जिसमें शायद उसके आत्मविश्वास को इतना ऊंचा कर दिया था कि शायद वो अगले साल होने वाली रैली में भी भाग ले लेती । वो रेस जिसे मैं निश्चित रूप से हारने वाला था । एक स्थानीय लडके ने झंडी दिखाकर रेस्को शुरू किया । मैं एक दम से खुल गया । मैंने जितनी चीजें सिनेमा देखकर देखी थी मैं उसके हिसाब से सब कुछ करना चाह रहा था । उस पल में पूरा का पूरा हॉलीवुड मेरी ट्रकों में दौड रहा था तो हम को झटका लगा और मिल गया । वो मेरे ऊपर बिल्कुल चढ गया । उसने मुझे कुछ कालिया थी मगर ये कोई बात नहीं थी । गौरी गायब हो चुकी थी । वह अदृश्य हो चुकी थी । एक दम से लगता वो वर्तमान का वो अदृश्य हो गई है । मैंने तो उनसे कहा एक बार फिर वो अदृश्य हो गई है, कोई उकसावा नहीं । फिरौती के लिए कोई फोन नहीं, कोई सुराग नहीं । एक सोच थी कि वो मेरे साथ लुका छुपी खेल रही है । बार बार बन में आना जाना कर रही थी । हालांकि मैं कुछ भी नहीं पूछना चाहता था और इसके तो संभावना ही नहीं थी कि मैं किसी अनहोनी घटना के विषय में सोचूँ । मैं ये उम्मीद लगाए बैठा था कि अभी वो मेरे दरवाजे से निकलकर सामने आ जाएगी । बाप पीछे कारण हमारे तरफ से मैं साझा में था कि वो आकर मुझसे कहेगी । यह कृष्य होने वाला खेल कुछ लंबा खींच गया । उम्मीद का इंतजार ही अब आखिरी उम्मीद थी । वो भी तुम भी होती जा रही थी । इससे मुझे असहजता हो रही थी । हाँ, चिंता के विराट अब और भी ऊंचे होने लगी थी । ये मेरे खुद के पोषित विचारों से बन रही थी । और भी आती हूँ । अब तो और भी अधिक टूटकर बिखरने लगा था । मैं घटना नहीं चाहता था । मैं बहुत ज्यादा घबरा गया था । मैं पीछे इतना भी खोले लगा था । वो जा चुकी थी । हर गुजरते घंटे में, हर घुसे हुए । लम्बे में मैं और भी ज्यादा दुखी होता जा रहा था । उस पर में मैंने तमाम नकारात्मक विचारों को अपने मन में आश्रय दे दिया । ठंडी की आवाज भी नहीं सुनाई दे रही थी । पिछले कुछ पंद्रह मिनट से वह सुनाई नहीं दे रही थी । मुझे शौचालय से टॉम का चिल्लाना सुनाई दे रहा था कि दरवाजे की घंटी बज रही है । मैं उनको सुन पा रहा था शहर अब मैं इस विचार से और असहज नहीं हो पा रहा था कि अब कोई और मुझसे आकर मुलाकात करें । एक बार फिर मैं ये सोच रहा था कि क्यों हर कोई मुझ से दूर होता जा रहा है । नहीं सकता हुआ दरवाजे तक पहुंचा सामने आर्या खडी थी, मैं कहाँ रहा था इसलिए जब उसने मुझसे हाथ मिलाया तो वह बिल्कुल ठंडा था । मैं उसके आरपार देख सकता था । मैं उसे ठीक प्रकार से नहीं देख पा रहा था । नहीं, मैं अपने मन में उसकी आकृति बनाता रहा था । मैं बात तो कर रहा था मगर वो मैं अपने आप से ही कर रहा था । मैं क्या कह रहा हूँ वो समझ नहीं पा रही थी । मेरी बातों का कोई मतलब ही नहीं था । ना तो मेरे लिए और ना ही उसके लिए मुझे पता था । मगर मैं खुद को नियंत्रित नहीं कर पा रहा था । मैं अपने अंदर एक खालीपन महसूस कर रहा था । एक ऐसा खालीपन क्योंकि एक बंद हो चुके दिमाग में वो पचता है । उसके मेरे अस्तित्व के न होने के विचार को और हवा दे रहा था । मैं मर जाना चाहता था । मुझे लग रहा था कि शायद गौरी के पास पहुंचने का अब के ही एकमात्र रास्ता है । अगर जीवन में नहीं तो शायद दूसरे चंद्र में मैं उसके साथ अपने सपनों को छह होगा । अनिश्चित्ता कुछ लंबू में बहुत ज्यादा दर्द दे देती है, ये तो तय है । यदि आप दीवानेपन की सीमा को लांघ गए तो ये आपको अपनी जान देने के लिए भी व्यवस्था कर सकती है । नहीं, मुझे उसके बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ । मेरे ख्याल से तुम्हें इस वक्त अकेले नहीं रहना चाहिए । नहीं, मैं अकेला नहीं हूँ । हाँ जरूर मैं तुम्हारे साथ हूँ । नहीं नहीं मेरा मतलब है तो हम यही मेरे साथ है । इसलिए मैं अकेला नहीं हूँ । तुम सुन रही हूँ और मेरा क्या? क्या आप तुम्हारी जिंदगी में मेरी कोई जगह नहीं बची है । मुझे लगा था दोस्त बन गए । हाँ क्यों नहीं अभी जो परिस्थिति है और जहाँ तक मुझे याद है उस समय पहले ही तो मुझे बिल्कुल अकेला छोड गई थी । अब क्या लेने आई हो या मैं फिर से कह रही हूँ क्या हमने यह तय नहीं किया था कि हम दोस्त बन कर रहेंगे और हम बात में ये मई में फिर मिले भी तो थे । तुम ऐसा जी प्रकाश खूब करते हो । मैं फिर से कह रहा हूँ, शायद ऐसे तुम्हें ये बात समझने में आसानी हो । इसीलिए दूसरे शब्दों में समझाता हूँ । आज का हर दिन हर दिन से अलग हैं । आज मैं मैं नहीं हूँ । आज तुम तुम नहीं हूँ । आप सब कुछ अजीब है । हाँ, आज है दी ही तो भारी हालत तो सच मुझे बहुत खराब है । तो मैं मेरी जरूरत है । बापू हाँ, हार या मेरे कर ही बात नहीं । उसने मुझे गले लगाया क्योंकि मैं मरणासन्न हुआ जा रहा था । मैं बिलकुल टूट चुका था । मैं रो रहा था । मैं खुद को समझने की कोशिश कर रहा था जब उसने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया । मेरी नाक बह रही थी और उसने फौरन अपना रुमाल निकालकर उसे साफ किया । मुझे खुद पता नहीं चल रहा था कि मेरे साथ आखिर हो क्या रहा है । मगर के बिलकुल राहत जैसा था । मैं कौन था? मैंने आप को पीछे धकेल दिया । मैं उस पर चिल्लाने लगा । मैं थोडी काल किया भी देने लगा था । मेरी प्रतिक्रिया और सामान्य थी । मुझे खुद को नियंत्रित करना पडा और फिर आत्मक करूंगा के भाव में जाने के लिए गई । मुझे खुद से घृणा होने लगी । पता साधारण शब्दों में कौरी के लापता होने के लिए मैं उसे जिम्मेदार ठहराने लगा था । मेरा ये नया रूप निसंदेह आर्या को पसंद नहीं आया । मगर इन परिस्थितियों में उसके वो प्रतिक्रिया नहीं थी जैसे कि उसे देनी चाहिए थी । और इसी प्रकार मैं भी आ गया के इस स्वरूप से परिषद नहीं था । वो एक बार फिर मेरी तरफ आई और मुझे गले लगा लिया । वो बार बार अपने शब्द तो हर आती रही कि मुझे अपना गुस्सा और अपनी भावनाएं बाहर निकालते नहीं चाहिए । मुझे अपना सारा गुस्सा, सारी झुंझलाहट उसपर व्यक्त करते नहीं चाहिए । उसने अपने दोनों बही खोलती हूँ और भूतकाल में मेरे साथ किए गए अपने व्यवहार के लिए माफी मांगती रही । मेरे लिए वो सच कह रही थी । टॉम के बारे में मैं नहीं जानता था । मेरे दिमाग में किसी के लिए भी कोई निर्णय लेने की क्षमता नहीं बची थी । मैं वो देख रहा था, उसी पर विश्वास कर रहा था । ऍम इस परिस्थिति में था कि वह अपनी पर्यवेक्षण और इंसानों की समझ की बदौलत कोई निर्णय ले सकता था । इससे पहले की वौइस् नहीं व्यवस्था का हिस्सा बन पाता जहाँ दो भूतपूर्व प्रेमी एक दूसरे के प्रति अच्छाई का प्रदर्शन कर रहे थे । आर्या ने आपने मुझसे कुछ ऐसे शब्द कहे जिन्हें सुनकर मेरे पूरे शरीर को एक झटका लग गया था । देखो नहीं मैं जानती हूँ की तुम गौरी से प्यार करते हो । इससे मुझे कोई समस्या नहीं है । मैं तो यहाँ भी बताने आई हूँ । मेरे बस में जो भी होगा वो मैं करूंगी । मैं तुम्हें तुम्हारी प्रेमिका से मिलने के लिए मैं कोई भी कसर बाकी नहीं रहने दो । तुम्हारे प्यार को ढूंढने के लिए मैं किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हूँ । अपने दोस्त गौरी को ढूंढने के लिए वो मेरी बहुत अच्छी दोस्त बन गई थी । मुझे उसके लिए और तुम्हारे लिए बहुत बुरा लग रहा है । मैं भी इस जांच का हिस्सा बनेंगे । जरूरत पडी तो यात्रा भी करूंगी । चाहे कोई भी समय हो दिन ज्यादा । मैं तुम्हारे बुलाने पर आज होंगी तो बस एक बार आवाज से देता हूँ मुझे इन सब से बाहर बच्चे को बस इसीलिए चुकी तो मैं ऐसा लगता है कि मैंने तो छोड दिया था । क्या तुम ने ऐसा ही नहीं किया था? इस वक्त आर्या जो भी कह रही थी मैं वो सब सुन रहा था । उसकी बातें मुझे बहुत ही शांतिदायक प्रतीत हो रही थी । हालांकि उसका आखिरी बात किए एक प्रकार से मेरे मन में घर कर गया था । इसलिए मैंने खुशी खुशी सबकुछ भुला दिया और उसे सबसे आगे रख दिया । मुझे बस ये समझ नहीं आ रहा था कि जब उसने ये कहा कि उसने मुझे नहीं छोडा था तब उसके कहने का मतलब क्या था? उसने बिल्कुल वही किया था । मुझे याद है उसका पेश ढीला था । मैं नहीं चाहती थी कि मेरी वजह से तुम्हें चोट पहुंचे । मुझे मालूम था कि मैं तुम्हारे लायक नहीं । मुझे मालूम था कि मैं तुमसे हर वक्त बस कुछ ना कुछ मांगती रहती थी । मैं ये भी जानती थी कि जीवन में कभी भी मैं खुद को जब्त में बदल नहीं हूँ । इसीलिए अच्छा यही था कि तुम खुश रहो । प्यार में कभी कभी ऐसे फैसले लेने पडते हैं जो पसंद नहीं आते हैं । मगर इलाका साफ होता है और मैंने विचार से यही प्यास है । शायद मैटर कर पीछे हट गई थी । अगर ऐसा है तो ऐसा ही सही । कम से कम आज तो मंदिर से खुश हूँ । याद रखा मैं हमेशा तुमसे प्यार करते होंगे, चाहे हमारा कोई रिश्ता हो या ना हो । ऍम लगता है तो मेरे दोस्त को अपने प्रेमजाल में फंसाने की कोशिश कर रही हूँ और फिर से उसके साथ ऐसा करने की कोशिश मत करो । तुम ने का मुझे पता था ऍम की क्या प्रतिक्रिया होगी । मगर फिर भी एक प्रकार से आर्या के बाद मुझे समझ आने लगी थी । दोस्तों के बीच किसी बात पर बता रहे तो उसी सकते हैं । मेरे हिसाब से वो सही थी । अगर वो चाहती तो मेरा भरपूर इस्तेमाल कर सकती थी । मैंने उसे कभी नहीं छोडा था पर नहीं छोडने की मंशा रखता था । ये तो जब से गौरी मेरे जीवन में आई थी तब से मुझे ऐसा लगने लगा था कि जो भी होता है वो अच्छे के लिए ही होता है । जो भी होता है उसके पीछे कोई कारण जरूर होता है । टॉम जाने दो आर्या सही कह रही है एक बात तो मैं अच्छी तरह जानता हूँ । यार यहाँ उन लडकियों जैसी नहीं है जो पैसे और ऐशोआराम के लिए लडकों को फंसाती हैं । हाँ, हम दोनों एक दूसरे से बिल्कुल विपरीत हैं और शायद उसे ये अनुमान हो गया था कि कुछ वर्षों के बाद हमारे जिंदगी कैसी होगी और इसलिए वह मुझ से दूर चली गई तो तुम उसे माफ कर देना चाहते हो

भाग - 6.2

आप क्यों नहीं? अगर वह जो भी कह रही है वो सब सच है तो माफी का तो सवाल ही नहीं होता । वैसे भी उसने मेरी नजरों में अपने इस सब बहुत बढा लीजिए । ऍम खानो चल रहा है । मैं तो ये खामोशी मैं उसके ऊपर लाख रहा था । इस बार गे खामोसी को ज्यादा देर तक ही कायम रही । उसके चेहरे के भाव को मैंने ध्यान से पढा । एक लंबी आंख नहीं की । इस बार जवाब आर्या की तरफ से आया । जाने भी दो यारो तो भारी समस्या क्या है? बताओ मुझे । आखिर मैंने ऐसा क्या क्या है कि तुम मुझसे इतनी नफरत करते हूँ? क्या मैंने कभी तुम्हे चोट पहुंचाई है क्या? मैंने तो भारत कोई नुकसान किया है तो सिवाय इसके कि मैं नील की जिंदगी से चुपचाप बाहर चली गई । बगैर कोई हंगामा किए या बगैर किसी नखरे के मेरे पास विकल्प? मैं चाहती तो तुम दोनों को कभी परेशान नहीं करने का भी फैसला कर सकती थी । मेरे पास हमेशा विकल्प था । मैं भी नील की तरह कोई लडका ढूंढ सकती थी और जीवन में आगे बढ सकती थी । मैंने कभी शिकायत नहीं है । नील ने हमारे अलग होने के कुछ ही दिन बाद दूसरी लडकी पसंद करेंगे । क्या मैंने कभी अपनी आवाज ऊंची की या पागलपन से कोई काम किया? इससे तुम्हें मेरे बारे में क्या पता चलता है? मुझसे बात करो । टॉम इधर देखो मेरी आंखों में देखो, शबाब दो मैं तुमसे जानना चाहती हूँ । अच्छे हरे पर गिरने, छू भाव रखने के अलावा भी कोई जवाब है तुम्हारे पास । मैं भी नील से उसके प्रति मेरे प्यार पर कई सवाल पूछ सकती हूँ । मैं भी कह सकती हूँ मेरा वो इस्तेमाल कर रहा हूँ । उसने कभी मुझसे प्यार नहीं किया । इसीलिए वो इतनी आसानी से आगे बढ गया का एक बार भी मैंने ऐसा कहा वो थी जिससे बडा दिल दिखाया और उसके दोस्त बने रहने के लिए कहा । और अब ये सब हो रहा है । मेरा हो तुम उस से कह रहे हो मुझे माफ करते के लिए हाँ शरबानी क्या किए तो नहीं तो मुझे बार क्यों नहीं देते क्योंकि मैं नशा करती हूँ और कभी कभी शराब पीती हूँ । इसीलिए तुमने मुझे ठप्पा लगा दिया की मैं किसी लडके के साथ रहने लायक नहीं । माहौल डालो मुझे सुना तुम नहीं मुझे ऍम डालो । हाँ क्या अस्तव्यस्त होती चली जा रही थी वो चिल्ला रही थी और अनजाने में टॉम को मार रही थी । अगले ही पल हो रही थी । फिर उसने अपना सिर्फ सोफे में छिपा लिया । मैंने और हमने बारी बारी से उसे इच्छुक कराया । उसके टाउन को दो बार अपनी कोहनी से कसकर मारा भी । वो उसे बिल्कुल नहीं संभाल पा रहा था । असल में हमें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यहाँ हो क्या रहा है । परिस्थिति कुछ ऐसी थी । मैंने टॉम के मन में उसके प्रति एक उतारता पडते हुए थे कि आंसू किसी भी इंसान को उसके असल मनोभाव में ला सकते थे । उदाहरण मेरी आंखों के सामने था तो मारिया के बगल में सोफे पर बैठ के । वो दोनों बहुत तेज तक बातें करते रहे । मैं उन दोनों को अकेला छोड एक अप्रत्याशित मेहमान के लिए दरवाजा खोलने चला गया । इतिश्री बहुत चिंतित लग रही थी । वो मुझे बालकनी में ले गई । घर अब दो हिस्सों में बढ गया था । मेरा दोस्त मेरी पूर्व प्रेमिका के साथ था और मैं अपनी प्रेमिका की दोस्त के साथ । मैं तो में कल शाम से फोन कर रही हूँ । कहाँ तुम उसने मुझसे पूछा हूँ । मगर उस से पहले मैं ये जानना चाहती हूँ की आपका यहाँ क्या कर रही हैं । उसने धीमी आवाज में मुझसे पूछा वो यहाँ मदद करने आई है तो फिर पुलिस क्या कर रही है? तुम्हें कैसे पता कि हमने पुलिस को इसी चरण में शामिल कर लिया है । इसमें कोई दिमाग लगाने वाली बात नहीं है । नहीं उसने नीचे की ओर देख कर यह बात कही । मुझे तो वो थोडी घबराई हुई सी लग रही है । मैंने उसे थोडा सा और परेशान किया । मैं बार बार उससे पूछता रहा कि आखिर के बाद उसने एक के विश्वास के साथ कैसे कहीं? फिर मैंने उसे गौरी के गायब हो जाने के बाद उसके क्रिया कलापों के बारे में पूछा । मैं आ गया देखो इतिश्री तो उस की सबसे अच्छी सहेली हो । तुम गौरी के बारे में सब कुछ शांति हूँ । मैं तुम्हें शब्द नहीं करता हूँ । मुझे गलत मत समझता हूँ । मगर फिर भी मुझे लगता है कि तुम कुछ जानती हो और मुझसे छुपा रही हूँ । पुलिस भी अब इसमें शामिल हैं हूँ वो भी तुमसे मुश्किल सवाल पूछे गई । दरअसल हम तो मैं ढूंढ रहे थे । वे लोग आज सुबह यहां आए थे । अभी तक मामला दर्ज नहीं हुआ है । शिकायत के आधार पर जांच शुरू हो चुकी है । इसलिए पुलिस की परेशानी झेलने से बेहतर होगा तब मुझे बता दो । मैं वादा करता हूँ कि तुम्हारी मदद करूंगा । अब सब कुछ सच सच पता होगा । नीतीश चुपचाप खडे रहे हैं । वो पागलों की तरह मेरी आंखों में देखती नहीं । मैं उसे अपनी मुख्या भेजते हुए देख सकता था । मुझे पक्का यकीन था कि उसके पास बताने योग की कुछ तो था । अचानक उसने बातचीत का रुख है बदल दिया जिसने मुझे अचंभित कर दिया और जिसके लिए मैं बिलकुल तैयार नहीं था । सुनो दिल्ली पहले तुम मुझे ये बताओ कि तुम्हारे और गौरी के बीच में क्या हुआ था? क्या तुम दोनों के बीच कोई बहस हुई थी? वो पिछले कुछ दिनों से थोडी परेशान लग रही थी । क्या तुम ने ऐसा महसूस किया था? ऍम तुम्हें उसके सबसे करीब थे और मुझे अब सबको जानना है बट फूलों की वो तुम्हारे साथ रहती थी । इससे पहले की पुलिस कुछ खून निकले । मुझे सब कुछ सच सच बता दो । नील मैं वादा करती हूँ मैं इसे एक राज रखेंगे और तुम्हारी हर संभव मदद करने की कोशिश करेंगे । मैं अभी भी मानती हूँ कि तुम एक अच्छे इंसान हूँ । मुझे सच पता हूँ ताकि मेरा ये भरोसा कायम रहे । ऍफ इसलिए कि मैंने ये कह दिया कि पुलिस अब भी शामिल है तो मैं मुझ पर उंगली उठाने का कोई अधिकार नहीं मिल जाता है । जब की तुम जानते हो कि मुझसे ज्यादा उंगलियां तो भारी ओर उठ सकती हैं और ये भी याद रखो और मेरी जान है तुम जितना सोच सकते हो उससे कहीं ज्यादा क्या आप बकवास कर रही हो? अब मैं बहुत ज्यादा सावधान और सतर्क हो गया था । जो भी तुम समझना चाहो नहीं ठीक है । अब जब तुम ने मुझसे सवाल पूछा है तो मैं जवाब देता हूँ । मैं और गौरी खुबसूरत जीवन जी रहे थे । मैं हमेशा उसके लिए खडा रहता था । मैं उससे प्यार करने लगा था । हाँ, पिछले कुछ दिनों से मैंने उसके बताओ में परिवर्तन देखा था और मैंने उसे इस बारे में पूछा भी था । मगर इन विषयों पर तो छुट्टी रहा करती थी और मुझे चिंता न करने को कहते थे थी । एक बार उसने कहा था आपके उसे परीक्षा की चिंता हो रही थी । दूसरी बार यही कुछ लडकियों वाली बात थी इसलिए मुझे ये सब सामान्य ही लगा हूँ और ये भी कि फिर वो ठीक हो जाएगी । उसके ऐसा कुछ करने के पीछे मुझे तो कोई कारण नहीं देखा । मेरा मतलब है मैं ये सोचना भी नहीं चाहता की उसमें कोई कठोर कदम उठाया या अपने जीवन लीला समाप्त करेंगे । कोई प्रत्यक्ष कारण तो नहीं है । यदि होता भी तो वो हम दोनों में से किसी एक को जरूर बताती हैं और अब हम यहाँ कयास लगा रहे हैं । मैं नहीं थी श्री से बाहर वाले कमरे में बैठने के लिए कहा आ गया जा चुकी थी । उसने और कौन नहीं इस बातचीत को आगे बढाया । मैं गहरी सोच में टूट गया । इतिश्री की बात में मुझे और भी अधिक सोचने को मजबूर कर दिया था । मुझे मालूम था कि मैं एक टाइम बॉम्बे के ऊपर बैठा हुआ था । हम सब पुलिस पर भरोसा नहीं कर सकते थे । अगर वह सचमुच कैसे मुसीबत में थी तो हमें कुछ करने की जरूरत थी । ऍम कानूनों को गालियां दे रहा था । मैंने अपने आप को भी कुछ कालियादेह क्योंकि मैंने घर पर बैठ कर सारा दिन बर्बाद कर दिया था । मैंने फौरन अपने पिता को फोन किया । उसके बाद कनिष्ट जेठमलानी को खून गया । उसने मुझे कुछ बेहद अहम सुझाव दिए । उसने मुझे पुलिस वालों पर भरोसा करने और उससे कभी बत्तमीजी से बात नहीं करने को कहा । उसने मुझे ये भी बताया कि अकसर पुलिस चुपचाप पृष्ठभूमि में अपना काम करती रहती है और हमारे पास तभी आती है जब उन्हें हम से कोई सूचना लेनी होती है क्योंकि वह सब कुछ बताकर किसी गलत दिशा या निष्कर्ष को निमंत्रण नहीं देना चाहती हूँ । मैं अपने और पिता के सुझाव के अनुसार काम करने लगा था । एक मतलब की तरह अब गौरी के माता पिता को बताने का समय आ गया था । कोई भी ये जोखिम नहीं लेना चाहता था । कॉलेज भी इस बात में न के बराबर दिलचस्पी ले रहा था और इस बात को ध्यान में रखते हुए की ये कांड सप्ताह के अंत में हुआ था कि अभी कोई कार्यवाई हो भी सकती थी तो वह सोमवार को ही संभव थी । ये कुल गंभीर अपराध का मामला नहीं था क्योंकि अभी तक ये साबित नहीं हो सका भीश्री क्या तुमने गौरी के माता पिता को बताया है? नहीं नहीं, बिल्कुल नहीं । चाची तो सिर्फ आघात से मर जाएंगे । इसका क्या मतलब है? ये तो बिल्कुल साफ है । वे खून पर ऐसी कोई भी बात कैसे सुन सकती है और तुम उनसे सामान्य बने रहने की उम्मीद कर रहे हो । तो अगर तुम्हारे विचार से सबसे अच्छा तरीका क्या होगा, सोच जब ये बात मीडिया में आ गई । फिर क्या होगा ये हो चुका है । ये दोपहर के समाचारों में आ चुकी है । आर्या सही कह रहे थे ऍम इस पल के सनसनीखेज खबर के साथ अंदर दाखिल हुआ भगवान ये तो मुख्य खबर है । इधर श्री ने सूफी को कसकर पकडते हुए कहा तुमने मेरी वो देखा मैं जानता था कि वह क्या कहना चाह रहा था । वो अभी विश्वास कर पाने की स्थिति में नहीं था । ये बात जाहिर थी वो हम सबके लिए चिंतित था । इन सब से भी ज्यादा उसे गौरी के माता पिता की चिंता थी । वो हमने से किसी के भीतर क्या किसी और बात के लिए प्रतीक्षा नहीं करना चाहता था । उसने परिपक्वता दिखाई और उनकी ओर बढ गया । मैंने देखा कि ये देख कर इतिश्री अपनी जगह से उठी और ऍम से इस बात पर दोबारा भी जांच करने को कहा कि आखिर वह कैसे ये खबर गौरी के माता पिता को देना चाहता था । वो बार बार गए तो रहती रही कि गौरी की मां तंत्र संवेदनशील है हूँ । मुझे उस पर कोई शक नहीं था क्योंकि मैं खुद भी गौरी के संवेदनशील पक्षता साक्षी था । शायद उसे ये अपनी माँ से ही विरासत में मिला हो । इससे पहले ऍम से कुछ कहता था वो फोन कर चुका था चाची जी नमस्ते कैसे हैं आप? मैं ठीक हूँ । बेटा क्या तुम नहीं बोल रहा हूँ । नहीं चाहते जी मैं टॉम बोल रहा हूँ । अगर आप नील को जानते हैं अरे हमारे बिल्कुल पडोस में ही रहता है । जहाँ तक मुझे याद है हाँ गौरी है । जिस दिन मुझे फोन किया था उसे एक दिन पहले उसने मुझे बताया था कि वो नील और कुछ दोस्तों के साथ साप्ताहांत में कहीं घूमने जा रही हैं । इसलिए मैं उसे फोन कर परेशान न कर । मुझे पता है कि वो उसे बचपन से ही पसंद करती थी और वो मुझ से भी कुछ ज्यादा नहीं छुपाती । मैं भी पागल हूँ कब से बस में ही बोले जा रही हूँ । आप बोलोगे था इसलिए फोन किया मुझे चाची यही बात बतानी थी । आपको ये लोग जा चुके हैं और शायद आपसे संपर्क न कर सके इसलिए आप चिंता ना करें । मेरी तबियत ठीक नहीं थी इसलिए मैं रुक गया तो बहुत अच्छे हो । मगर एक बात बताओ मुझे उम्मीद है कि वो लडकी इतनी भी उसके साथ गई है । अरे हाँ चाची वे दोनों तो दो जिसमें और एक जन हैं । काम नहीं झिझकते हुए कहा, मुझे उसके चेहरे पर बहुत साफ दिख रहा था । मैंने फोन इतिश्री को अपनी ओर खींच लिया । वो बिल्कुल नहीं शब्द थी । बडी मुश्किल से अपनी बात खत्म करने के बाद तो हम भी मेरे पास आ गया । क्या? तो मैं सच पाँच ही लगता है । आपके मैंने तुमसे बहुत ज्यादा मांग लिया है । उम्मीद है तुम्हारे पास इसका स्पष्टीकरण होगा अगर तुम मेरे पास क्यों आई हूँ । इस वक्त मैं बिल्कुल ही अलग अवस्था में हूँ । एक बात करूँ तो हमें उसे खुद ही ढूंढना चाहिए । पुलिस किसी काम की नहीं है । सच में मैं तुमसे कोई सवाल क्यों नहीं पूछूं । मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि गौरी नहीं तो मैं कुछ भी नहीं बताया । मेरा मतलब है उसने चाची जी को फोन करके साप्ताहांत की योजना के बारे में बताया था । मैं जानता हूँ कि वो मेरे साथ समय बिताना चाहती थी, थी तो किसी मुसीबत मैं । मैं और भी बहुत कुछ कहना चाहता था । पुलिस बिल्कुल समय पर अवसादित हो गई थी । मैं इसी बात पर रुक गया । ये कुछ भरोसे के साथ आए थे । इस पर थान्या अकेले ही आई थी । उस ने हमें बताया कि विश्व अपराधियों के बीच में काम करने वाले पुलिस वालों के साथ गौरी की खोज में दस था । सुनो, पहले तो मुझे थोडी कॉफी पिलाओ या हो तो तुम दिल को जानती हूँ । फॅमिली के अंदाज में पूछा हूँ हाँ हाँ हम दोनों पुराने दोस्त हैं और मैं अपने दोस्तों का प्यार और तुम्हारी सबसे अच्छी सहेली को ढूंढने में मदद कर रही हूँ । आईटीआई मैं हूँ विद्यालय में तुम्हारे सीनियर अब याद आया धत तेरी नीला हाउस गंगा डॅाल दुनिया कितनी छोटी है । मुझे बहुत खुशी है कि तुम्हें इस जांच का हिस्सा हो । अब मुझे यकीन है कि कानून हमारी मदद करेगा । मैं इसकी अगुवाई कर रही हूँ और हमने कुछ बातों को नकार भी दिया था । इसलिए मुझे लगता है कि हम सही दिशा में आगे बढ रहे हैं । तुम से मैं थोडी देर बात करेंगे । फिलहाल तो मुझे नील से बात करते हैं । बुरा मत मानना मगर क्या तुम हमें अकेला छोड सकती हूँ? शुक्रिया । धनिया की बातों में जोर भी था और विनम्रता भी । उसने इतिश्री को एक तरह से आदेश दिया और अगले ही पल इतिश्री वहाँ से गायब हो कर बालकनी में चली गई । धान्या लगता है ये मामला तुम्हारी पकड में आ गया है । क्या खबर है मुझे बहुत घबराहट हो रही है । ये उत्तर साधारण नहीं है जितना तुम और मैं समझ रहे थे । एक बार तो मैं पूरे यकीन के साथ तो मैं बता सकती हूँ । वो ये है कि इस पूरे कांड में किसी पेशेवर गिरोह का हाथ नहीं है । इसलिए उस दृष्टिकोण से देखे तो डरने की कोई बात नहीं है । हम सुबह से इसके पीछे लगे हुए हैं । हमने जिम के प्रशिक्षक से बहुत कडाई से पूछताछ की है और उस फल वाले से भी जहाँ से गौरी फल खरीदा करती थी और हर उस व्यक्ति से जो उस जगह पर था जहां गौरी को आखिरी बार देखा गया था । ऍम के भवन में हैं । सडकों पर कोई सीसीटीवी नहीं लगा है इसलिए किसी दर्ज सबूत के रूप में हमारे पास कोई सुराग नहीं है । अब गौरी बाहर आते हुए तो देख रही है गाडी की पार्किंग में उसकी गाडी नहीं है । मुझे लगता है उसकी गाडी यहाँ भी नहीं है क्या तो मुझे बता सकते हो कि उसकी गाडी कहा है । हमारे पास दो गाडियों की पार्किंग नहीं है । हालांकि मैंने आवेदन किया है इसलिए गौरी ने अपनी गाडी इतिश्री के पास छोडी हैं । ठीक हैं तो वो गाडी देश से चलाती है नहीं उसे अभी गाडी चलानी नहीं आती है इसलिए वो उसके घर पर ही खडी होगी । वो हमारी तरह हॉस्टल में नहीं रहती है तो अच्छा इस जानकारी से मदद मिलेगी । हमें तो कम से कम हम गाडी लूटे जाने की घटना को जांच से बाहर कर सकते हैं । पिछले साल हमारे सामने एक मामला आया था जहां कुछ डकैतों ने गाडी को उसके मालिक के साथ अपना कर लिया था और उसे माफ किया था । बाद में वो गाडी भारत और नेपाल की सीमा पर मिली थी । धान्या ने ये बात बस एक बात की तरफ बोलती है । ये तो बहुत डरावना है । मुझे लगता है कि ऐसा कुछ नहीं हुआ होगा । ऐसी कोई बात है । वो तो मुझे बताना चाहते हो । क्या ऐसी कोई जानकारी जो तुम मेरे साथ साझा करना चाहते हो? देखो अब क्योंकि तुम ने हमें घर से निकलने के लिए भी मना किया था, शायद तो बहुत दूर की बात है । हम सारा दिन नहीं रहे हैं, बेटी के आने से पहले आ गया । यहाँ आई थी तो मुझे जरूरत पडने पर उसे शामिल करने के लिए कह रही थी और ये की वो हर संभव मदद करने को भी तैयार है । आर्या मेरी रडार पर है । वो अक्सर दौरे के साथ ही जिम जाती है मगर कल वो नहीं गई । इसका मतलब ऐसा करने के पीछे उसके पास कोई ठोस वजह तो होगी । सुबह हमने जिम की जो रसीद हासिल की है उसके मुताबिक उस ने अपनी सदस्यता का नवीनीकरण कराया है और परसो रिकॉर्ड और आलिया स्वीट पब में गई थी जो कोरेगांव पार्क में है तो मैं इसके बारे में मालूम था । अब ये मत कहना कि तुम इसके बारे में कुछ नहीं जानते नहीं । मैं ये नहीं जानता था कि वह आलिया के साथ गई थी । मैं ये तो जानता था कि वह पब में गई हैं मगर उसने मुझे ये नहीं बताया । मैंने तो बस ये देखा कि वह थोडा नशे में थी । मैं अगले दिनों से बात करना चाहता था मगर तभी ये कांड हो गया । इसीलिए मुझे आर्या परिषद है और साथ ही साथ नाइंटी से संबंधित किसी बात को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहते हैं । मुझे शक है कि वह बहुत तो जानती है अगर खुद एक औरत होने के नाते मैं ये जानती हूँ कि इन लडकियों से कोई भी जानकारी निकलवाना आसान काम नहीं होगा ये जानते हुए कि आ गया एक विधायक की बेटी है तो उसे तोड पाना बहुत मुश्किल होगा । मगर फिर भी हम इस पर काम कर रहे हैं । और एक बात और । ये खबर पहले ही मीडिया में आ चुकी है । बहुत जल्दी से टीवी पर देखकर आश्चर्यचकित मत होना तुमको मैं बहुत ही भ्रमित अवस्था में था, ठीक वैसे ही जैसे पुलिस थी । इस मामले में मदद करने के लिए मैंने धान्या का शुक्रिया अदा किया । मैं उसकी आंखों में सहानुभूति देख सकता था । वही बैठकर कॉफी पी रही थी । टॉम और इतिश्री अभी भी बालकनी में थे । ढांडिया ने एक बार फिर मेरी ओर तीन नजरों से देखा था जिसने मेरा ध्यान आकर्षित कर लिया । नील तो मुझसे को छुपा तो नहीं होना उम्मीद है ये कुछ नहीं है । देखो मैं तुम से पूछताछ नहीं कर रही हूँ और ना ही अभी तक विश्व ने ऐसा किया है क्योंकि मैं नहीं उसे मना किया है । मगर एक बार जो मैं पूरे यकीन के साथ तो मैं बता सकती हूँ । वो ये है कि जैसे ही उसे कुछ मिलेगा वो तुम्हारे पास हो जाएगा । ये बात की वो तुम्हारे साथ रह रही थी । काफी सवाल खडे करती है हो गया तुम्हारा ये बिल्कुल सामान्य था । हाँ, किसी अन्य जोडे की तरह जब कौरी ने मुझे बताया कि उसकी परीक्षा और महावारी उसे परेशान कर रही थी तो मैंने उस की जिंदगी में कोई दखल नहीं दिया । यही तो मैं जानना चाहती हूँ क्या वो परेशान थी?

भाग - 6.3

हम मगर सामान्य रूप से परेशान तुम पागल हो जब कोई लडकी लापता हो जाती है तो सामान्य तौर से परेशान जैसी कोई चीज सिंह होती है और क्या मुझे तुम्हें ये भी बताना चाहिए था नहीं कि जब आ रहा यहाँ आई थी तब तुम्हें मुझे फोन करना चाहिए था या फिर कोई और गडबड लगी? क्या मुझे ये बताने की जरूरत है तो मैं मेरे दिमाग की हालत समझती होगी । मैं चौबीस घंटे से नहीं सोया हुआ । तुम सच में मुझसे हर काम बिल्कुल ठीक करने की उम्मीद कर रही हूँ । अच्छा माफ कर तो या मगर कृपा करके सब कुछ मुझे बताओ जिससे कि मामले को सुलझाने में हमारी मदद हो सकें । मैं नहीं चाहती कि तुम गौरी को खोदो बैठाने पर भडकना नहीं चाहता था । न ही मैं पागलों की तरह व्यवहार करना चाहता था । मैं परीक्षा की तैयारियों के लिए लगातार पच्चास घंटों तक नहीं सोया था । इसीलिए ये बहुत ही बेवकूफी वाला बहाना था । मैं इक्कीस साल का था और मुझे बहुत ही शक्ति और आत्मविश्वास था । मैं अपने जीवन में बहुत काम किए थे और बहुत कुछ हासिल भी किया था । उस वक्त गौरी को मेरी सबसे ज्यादा जरूरत थी इसलिए बेहतर यही था की मैं संयमित रहा हूँ और उसके लिए कुछ करूँ । इतना काफी नहीं था । मैंने धान्या को उसके भाषण के लिए धन्यवाद का । मैंने उसे सारी कहानी सुना दी । मैंने हर जानकारी उसके साथ साझा करती जो मैं कर सकता था । साथ ही आर्या हो रही थी के बताओ को लेकर अपना विश्लेषण भी उसे बता दिया । यही तो मैं जानना चाहती थी । हीरो ये बहुत अहम है । देखो मैंने तुमसे कहा था ना, इसमें कोई पेशेवर हाथ नहीं है । मुझे पक्का यकीन है । कुछ तो है जो आर्या और तिथि हमसे छुपा रही । हरियाणा आशा करती है गौरी के पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी है इसीलिए उसके पास हमेशा पैसे रहते थे । इतिश्री गौरी की विश्वासपात्र है और वो भी अच्छे परिवार से हैं । ऐसा क्या हो सकता है कि आर्या ने फिरौती के लिए उसका अपहरण करवाया हूँ । क्या अभी उसने कुछ नहीं किया हूँ? कोई मामला गर्म है वो पहले भी कई मामलों में रेव पार्टी के दौरान पकडी जा चुकी है । हम तो वैसे ही ये जानते ही हो गए देखो हमें इसी प्रकार सोचना पडता है । हम किसी को भी नहीं छोडते । मैं ये तुम पर छोडना हूँ । घटिया गौरी को ढूंढने में मेरी मदद करूँगा । मैं तो शादी के उपहार में यूरोप की यात्रा करवाऊंगा हूँ । मैं तुमसे कुछ साल बडी हूँ इसलिए तुम्हें जान लोग मुझे तुमसे अपने जूनियर की तरह बर्ताव करना होगा । ठीक है, मुझे जो चाहिए था वो मुझे मिल गया है । मैं बहुत चल तुम से मिल होंगे और हमारे बीच क्या बातचीत हुई है, किसी को बताना नहीं । इतना कहकर वह जल्दबाजी में निकल गई । मैंने टॉम को इशारा किया, वही थी । श्री को भी अपने साथ अंदर ले आया । वे दोनों उत्सुक हो रहे थे । मैंने कोई भी भाव क्या मुद्रा नहीं बनाई हूँ । मैं उदासीन था । अंत में मैंने इतिश्री से अपने घर जाने के लिए कहा क्योंकि पुलिस वहाँ कभी भी आ सकती थी । उसने मुझसे पूछा कि ऐसा क्यों? मैंने उसे बताया कि ये तो बस सामान्य प्रक्रिया थी । उसे डरने की जरूरत नहीं । तीसरी ने मुझे पूरी बात बताने के लिए जोर्डाना । मैं और विवाद में नहीं पडना चाहता था कि श्री अपनी जगह से नहीं । टॉम को भी ये सब अजीब लगा । उसके इतिश्री से पूछा कि वह इतना घबराई हुई है । वो पागलों की तरह अपने बाल खींचने लगी । फिर वो बाल्कनी में चली गई । हमें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह करना क्या चाह रही थी । हम बस प्रतीक्षा कर रहे थे । उससे ज्यादा समय नहीं लगाया । वो वापस अंदर आ गई । उसका एक लिए पापा निकाला और मुझे थमा दिया । अरे उस से पूछा कि क्या है वो चुप रहे? ये इस बात का संकेत था कि अब हमें पता करना था । उस लिफाफे को खोलते हुए मेरे हाथ कांप रहे थे । ये क्या नाटक है थी? श्री मुझे साफ साफ बताओ इसमें क्या है? कोई अच्छी खबर नहीं है । मुझे मेरे दरवाजे पर मिला । मैं तुम लोगों से मिलने यहाँ आ रही थी । एक घंटे से ज्यादा हो चुका है और तुम हमें अब ये दे रही हूँ । आखिरकार मैंने वो लिफाफा खोल दिया क्योंकि इतिश्री बस गोलमोल बातें कर रही थी । उसमें हाथ से लिखी हुई एक चिठ्ठी थी जिसमें हम सबको सकते में डाल दिया । उसमें इस बात की ओर इशारा था गौरी का अपहरण हो गया है और इसमें पुलिस को शामिल नहीं करता है तो ये कब मिला? आज किसी ने इसे मेरे दरवाजे के नीचे सरकार दिया था । हालत कोई तुम्हें ये क्यों भेजेगा? मुझे नहीं पता । ये रविवार को आया है । इसके लिए डाक तो नहीं हो सकता है । ऐसा नहीं है तो और ये कुरियर भी नहीं आया है । कोई आया और तुम्हारे दरवाजे के नीचे सरकार गया । कोई तो ये जानता है कि तुम कहाँ रहती हूँ । कोई जो ये जानता है कि उस वक्त तुम अपने घर पर हो । कोई जो ये जानता है कि तुम के लाकर हमें ही होगी, पुलिस को नहीं । कोई जिसके पास अंदर की खबर है वह नहीं । वह तो भारत दिमाग तो बहुत तेज है । हाँ और अब मैं इस चिट्ठी का मकसद और कारण जानना चाहती हूँ । क्या हमें ये थान्या को नहीं देना चाहिए? हाँ, मुझे धान्या को फोन करके इसके बारे में बताना ही होगा वरना वो मुझे ही सलाखों के पीछे डाल देगी । मैंने धान्या को सूचना देती और उसने मुझे इतिश्री के साथ उचित के लेकर नितेश के घर जाने को कहा । मैं देख सकता था की इतनी श्रीकांत रही थी । उसने अपने ऊपर नियंत्रण खो दिया था । वो जोर जोर से रोने लगी और उसकी आंखों से आंसुओं का सैलाब उमड पडा । वो घबराई हुई थी । वो बार बार अपने हाथ जोडकर कह रही थी कि गौरी को वापस लाने के लिए हमें अपनी सारी ताकत छूट देनी चाहिए । वो तो यहाँ तक बोल रही हूँ । अपनी सबसे अच्छी सहेली के बगैर जीवित नहीं रह सकती । नहीं अब तुम भी जानते हो और मैं तो कई सालों से ये जानती हूँ । एक और इसको इस तरह से मजाक करना बेहद पसंद है । खासकर जब किसी को परेशान करने की बात वो बिना सोचे समझे ऐसा करती रहती है । आशा करती हूँ ये उसी का बनाया हुआ कोई मजाक होगा । शांति हो । अभी तक तय यही सोच रही थी । हालांकि इस चिट्ठी के मिलने के बाद मैं पागल होती जा रही हूँ कि इंडिया आया वाली बात ऐसी है वो किसी बडी मुसीबत है । इस चिट्ठी के बाद पिछले कुछ दिनों से उसके परेशान होने वाली बात का कोई मतलब नहीं रह गया हूँ । अगर ज्यादा नहीं तो मैं भी उतना ही चिंतित हूँ । हम फौरन कुछ करेंगे और ये अच्छे थे । तुम हैं टीवी पर इस खबर के आने के बाद मिली है इसका मतलब कोई तो बहुत शातिर है । वही इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि वे रसूखदार और शक्तिशाली यही बात होगी । वरना ये चिट्ठी कल भी आ सकती थी । और क्या तुम ये जानती हूँ? एक थी हमारे घर पर क्यों नहीं आई? क्योंकि हमारे यहाँ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं । फिर इसका मतलब ये हुआ कि कोई तुम्हारे और मेरे दोनों के घर से अच्छी तरह परिचित है । हम इतिश्री के घर के जाने के लिए निकल पडे । टॉम गाडी चला रहा था । मैं चौबीस बोझिल घंटों के बाद सडक पर निकला था । मैं दाल चीनी रूप से नहीं देख रहा था । हम कुछ ही क्षण में उसके घर पहुंच गए । इसलिए नकारात्मक विचार ज्यादा देर तक नहीं थी । रविवार होने की वजह से सडकों पर भीड कम ही थी । मैं बस इतना ही महसूस कर पाया । धान ना वहाँ पार्किंग के करीब पहले से मौजूद थीं । वो हमारे साथ ही तेज स्टडी के घर के अंदर है । मैं बिल्कुल भी समय नष्ट नहीं करना चाहता था तो अभी तक इस लिफाफे को कितने लोगों ने हुआ है । मैंने नीले टॉम ने और अपहरण करने वाले नहीं । काश तुम संभाल या दस्ताने का प्रयोग करते हैं तो हम लोगों को इन कामों का प्रशिक्षण नहीं मिला है । लाओ मुझे तो धान्या ने उसे खोला और उसके अंदर क्या लिखा था ये देखने की बजाय वो लिफाफे और कागज को ध्यान से देखती रही मुख्यद्वारों को देख रही थी । जैसा कि मुझे उसकी आंखों की गतिविधि से मालूम हुआ वो मुस्कुराई । उसने अभी तक कोई खुलासा नहीं किया था । उसने मेरी ओर देखा और कहा हमारे पास एक सुराग है, इससे पहले भी मैं कुछ करूँ । स्थिति मुझे पार्किंग में ले चलूँ और गौरी की काली दिखाऊँ जरूर और चले । हमें उसकी गाडी नहीं मिली । धरना ने इतिश्री से पूछा हालांकि वो अनजान बने रहने का ढंग करती नहीं । उसने बताया कि वह कॉलेज में देर तक रुकी थी और गौरी जल्दी निकल गई थी क्योंकि उसे कुछ किताबें खरीदनी थी और जिम की फीस पे नहीं थी । ये चिंता का विषय था । हमने चौकीदार से पूछा और रजिस्टर चेक किया । उसमें लिखा था कि उसकी गाडी पिछले दिन दो पैंतालीस बजे दो भर को बाहर गई थी । रजिस्टर ने मेरे दिमाग पर भी चोट की । मेरे घर पर आकर भी रजिस्टर में कुछ दर्ज हुआ होगा क्योंकि मुझे विश्वास था कि गौरी वहाँ आई थी । मुझे याद आया कि कैसे जिस दिन वो गायब हुई थी उसे दिन कमरा सच हुआ था । अरे ये तो कल ही की बात थी । धान्या कीछानबीन पर इससे कुछ प्रकाश जरूरत पडेगा तो मान गई । मेरे घर पर उसकी गाडी की कोई प्रवष्टि नहीं थी । विश्वास पहले ही सीसीटीवी खंगाल लिया था और उसने धान्या को बताया कि वह दोपहर ढाई बजे वहाँ गया था और दरवाजे तक यानी जहाँ तक सीसीटीवी की निगाह जा सकती थी वहाँ तक गाडी का कोई नामोनिशान नहीं था । तो या तो गौरी पहले मेरे घर आई होगी और फिर उसने इतिश्री के घर से अपनी गाडी उठाई होगी या फिर कोई और उसकी गाडी ले गया होगा और गौरी को इसकी जानकारी नहीं होगी । श्री गाडी चलाना नहीं जानते हैं तो ये तो हो ही नहीं सकता कि वो उसे बाहर ले गई होगी । थान्या ने सबके विचार और कथन दर्ज की और हमें चौकन्ना रहने के लिए साफ खान क्या

भाग - 7

कमरे में खुद तो अंधेरा था पाते अच्छी तरह से बंद थे । समय का अनुमान लगाना असंभव था । प्रकाश की किरण भी इस्नर या स्वर्ग में प्रवेश नहीं कर सकती थी । कोई आवाज भी नहीं हो रही थी । बस की चीज जो वहाँ मौजूद थी वो था आत्मा की खोज करता हुआ । एक इंसानी दोनों के बीच का संपर्क तो बिल्कुल ही बता रहा था । जहाँ तक सजावट की बात थी तो पढते हैं । मुझे पुणे के किसी परिवार की याद दिला रहे थे । इसमें एक पारसी अंदाज था । वहाँ और भी चीजें थी । हालांकि ईरानी चाय ठण्डी हो चुकी थी । वो तो लोग थक चल चुकी थी । बन मस्का फिर भी ठीक लग रहा था मगर दो किसी की भूख शांत नहीं कर सकता था । ये करम ठीक लगता । गरमा गर्म चाय के साथ बगल में नींद की दो गोलियां पडी थी । ऐसा लग रहा था की पट्टी में तीन गोलियां थी जिनमें सही एक का इस्तेमाल हो चुका था । यदि आप चारों तरफ देखें । हालांकि अंधेरे में ही देखना बहुत मुश्किल था मगर गति आप वहाँ रहने वाले के मन और तन से देखते हैं तो आपको ये पता चल जाता की आधी ही कोहली का इस्तेमाल हुआ है । मैं तुमसे चलती क्यों नहीं मिल जाती हूँ हूँ मुझे अब जीवन से कोई उम्मीद नहीं । गौरी आधीन नींद भी बोल रही थी । वो मुसीबत में लग रही थी मगर वहाँ और कोई नहीं था । वहाँ क्या हो रहा है इस वक्त ये समझ पाना बहुत मुश्किल था । गौरी की मनोस्थिति का अंदाजा भी लगा पाना और उसकी इस जीर्णशीर्ण हालत का कारण समझना बहुत मुश्किल था । बस जो बात पता थी वो ये कि गौरी चीज थी और उस कमरे में अकेली थी । एक जवान खुशहाल और जिंदादिल लडकी का ऐसे हाल में होना कुछ ऐसा था जिस पर कोई यकीन नहीं कर सके । इसीलिए पुणे से एक सौ किलोमीटर दूर परिस्थिति अच्छी नहीं थी हैं क्योंकि हर कोई उस लडकी को ढूंढने की कोशिश कर रहा था तो एक ऐसे कमरे में थी जो उसी का था । वो वहाँ पता था जहाँ गौरी नील को अचंभित करना चाहती थी । वो उसके साथ वहाँ समय बिताना चाहती थी । मगर अब मामला ऐसा नहीं था । अब तो उसके होश में आने का इंतजार ही करना होगा । उसमें थोडी सी हलचल की । हालांकि उसने बात करना बिल्कुल बंद कर दिया था । फिर भी उस की हलचल तेज हो रही थी । जैसे ये पता चल रहा था कि गौरी अपनी नींद से जाग रही है । उसने इनके उस आधी गोली का असर था । थोडी देर में परिस्थिति साफ हो जाएगी । उसके हलचल से ये तो साफ हो रहा था तो उसके साथ कोई जबरदस्ती या मारपीट नहीं की गई है । उसे जबरदस्ती नशे की दवाई भी नहीं दी गई है । वो तो बस अनजान थी और अवसाद से लडती हुई प्रतीत हो रही थी । मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि यहाँ क्या हो रहा है । कर देगी वो मैं इतनी तक कैसे होती रही? बडी घोषणा कहाँ चली गई है? शायद ते बहुत ज्यादा ही सोच रही हूँ । काश मैं इस बार गलत हूँ हूँ । ये बहुत दुखद है । वो यही तो खाती रही उसका दिमाग थोडा झन्ना आया उससे पानी के गिलास के लिए हाथ बढाया । उस सब अंधेरे में भी उसने पानी के खिलाफ का बिल्कुल सही अनुमान लगा लिया था । शायद उसने पहले भी उसे उठाया हूँ तो कमरा पहले ऐसी हालत में नहीं था और इसमें कोई दिमाग लगाने वाली बात नहीं थी कि गौरी नहीं इसे ऐसा बनाया होगा । आखिरकार उसमें उठने का निर्णय लिया । उसने अपने चेहरे और थोडे स्टाॅक पर गिरे पानी को पूछा हूँ । बिल्कुल काला था । उसने निकल पहना था । उसने पलंग के ऊपर अपना हाथ भेजना शुरू किया । वो अपने कपडे धो रही । बत्ती जलाना इस वक्त प्राथमिकता लग रही थी । उसने पढते नहीं हटाया है जो की उसकी पहुंच नहीं थे और टिक भी रहे थे । वो बाहर की दुनिया को तेज का भी नहीं चाहती थी की अलग बात थी कि बाहर सब पहाड ही देख रहे थे । ये बहुत शांत अत्र गौरी के लिए ये बहुत महत्व नहीं रखता था । क्या कर सकता था उसने अपनी आंखें पडेंगे, अपना चेहरा धोया और खडी की ओर देखा हूँ । भगवान अभी तो दो घंटे और बचे हैं । उसमें कोई भी श्रृंगार नहीं किया हुआ था । आस पास कोई खाली प्लेट क्या, खाने की कोई चीज भी नहीं पडी थी । बस पानी की एक बोतल थी जो होटल नहीं दी थी । फारॅवर्ड अच्छी जगह था और वहाँ की सेवा बहुत बढिया थी । गौरी मारना नहीं चाहते थे । उसे हमेशा लगता था कि यदि वह यहाँ नहीं गई तो वह मर चाहेगी । शायद उसने जहर खा लिया होता । उसके लिए पंखे से लटकता बहुत ही तरफ ना था और किसी इमारत से कूदने में वो मजा नहीं था । असल में उसने नींद की गोली के पांच पत्ते खा लेते थे । ये तो उसने लोनावाला के रास्ते में सारे फीस थी । बस तीन गोलियों वाली पट्टी उसके पास रहते हैं । उसका मकसद आने वाली त्रासदी को झेलना था । यहाँ से चीजें किसी भी देशा पर जा सकती थी । हालांकि फिशरी उसे दिलासा दे रही थी । शांत रहने को कहती रही । उसने उसे कोई भी भयावह कदम उठाने के लिए सावधान किया था । इसी खेल में हार जाना उसे स्वीकार था । जीवन में हार जाना भी उसे स्वीकार था । मगर प्यार से हर चालू करते हैं । गौरी ने अपनी डायरी खोली । वो अपने अंदाज में नहीं, उसमें अपने मन की बात उसमें लिखना शुरू कर दिया । उस की अब हो दिया नहीं खानी बरतानी नहीं, मुझे उत्तेजना देती हैं । जिस दिन मैंने कॉलेज में उसे पहली बार देखा, मैं किसी फंतासी दुनिया में नहीं । वो पिछले दो वर्ष में बदल चुका था । ना जब से उसने विद्यालय छोडा था, मैं उसके आसपास घुमा करती थी और वह कोई ध्यान नहीं देता था । उसके कान के पास हास क्या करती थी, उसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं होती । नहीं, मैं उसे दूर से देखती थी । वो इंसान जिसने मुझे खुशी के साथ साल थी । वो इंसान जो हमेशा मेरा सब कुछ रहेगा जिसके प्यार में मैं पूरी तरह पागल हो चुकी हूँ वो इंसान जिसके बिना बैंक ही नहीं सकती हूँ वो इंसान उसने मुझे यहाँ होने का कारण क्या उस से दूर रहकर अपनी आज सुरक्षा को परखना मेरे दिल के सब कुछ है वो बात नहीं है जो सबको लगता रहता है । शायद ही कभी मैंने तुम्हें पता हूँ अपने मन की बात शायद ही कभी मैंने तो मैं बताया हूँ वो तो तीनों का खान काश तुम यहाँ आओ इसे पढो और समझूं । मेरी आत्मा के छिटकर उसकी पुकार टी आओ और मुझे चुन्नू तो मुझे तो इस राहत कटक नहीं है । डर तो है की तो भारत फिल्म मुझ से दूर हो जाए कहीं मेरे पास और कुछ भी नहीं है । हो बस तुम और है की तो गुलाब की ये माला और मेरे यहाँ हूँ पीला । शायद मैं तुम्हारे का बिल नहीं मेरी जाम नगर मेरा मन और मेरी आत्मा तो समर्पित कर चुके हैं । मैं भी अच्छा हूँ मेरा शरीर स्थित नहीं ये तो पहले ही ले पड चुका है । इसे नहीं चाहिए बस तुम्हारे प्याज को तरस रहा है । नहीं तो मैं ये अंदाजा नहीं मैं तुम से कितना प्यार करती हूँ । मेरा मतलब है वस्तुत तो नहीं मगर इस पर मैं बस यही सोच पा रही हूँ । पाकर हाँ मैंने यही मनोदशा हो गई पिछले कुछ दिनों से जब से मैंने कठिनाई का सामना किया है, मैं बिल्कुल सुरक्षित महसूस करने लगी हूँ । जिस इंसान से अपने खुद से भी ज्यादा प्यार किया है उसके साथ रहना आसान नहीं होता हूँ । आपको पानी का डर दूर करना होता है । आप जानते हैं की उन असुरक्षा की भावनाओं को दूर करना बेहद मुश्किल होता है । और ध्यान यहाँ मैं अठारह बरस के ही एक लडकी हूँ । सत्रह बरस तीन सौ चौंसठ दिन से सत्रह बरस तीन सौ पैंसठ दिन के हो जाने की खुशी में अचानक कुछ भी नहीं पता चलता हूँ । शुरुआती दौर में आप एक वयस्क ही रहते हैं । मुझे अभी भी लगता है कि मैं किसी विद्यालय में पढने वाले ही एक लडकी हूँ । मर्दों के इस दुनिया में झगडती हुई अपने दिल की गहराई में ये जानती थी कि मैं अठारह बरस की हो जाऊंगी तो मैं व्यस्त नहीं होता हूँ । मगर मेरे आदमी के साथ मेरे सदाबहार आकर्षक आदमी के साथ मैं उससे भी कहीं ज्यादा हो जाऊंगी । व्यस्क से भी जाता था मुझे तो मालूम है कि जब निर्णय लेने का समय होता है तब मैं बेवकूफ करते थे । मुझे मालूम है कि मैं अभी कुछ दिन और बच्ची रह सकती हूँ । क्या मैं समय को रोक सकती हूँ? क्या अपना डर मैं तुम्हारे साथ साझा कर सकती हूँ? इसका जवाब है हाँ क्या मैंने ऐसा क्या? इसका जवाब है नहीं, मैं हार ही नहीं थी । मैं तो बस तुम्हें खोना नहीं चाहती थी । अखिल तुम मुझे किसी के पतले लेकर रहे थे उसके बदले जिससे तुम पागलो की तरह प्यार करते थे और शायद अभी भी करते हो तो भारत कमरे की छह और तुम्हारी अलमारी से अभी भी उस की खुशबू आती है । मैं कैसे तुम्हारे सामने आती है तुम से उसे बाहर निकालने को कह सकती थी तो उस वक्त को अपने जीवन से नहीं निकाल सके । उन खुशबुओं का क्या हुआ तो तुम्हारे बिस्तर से कई दिनों तक चिपकी रही थी । हात में चुपके से तुम्हारे कंपनी में आए नहीं मैं घंटो तो मैं बिहार थी नहीं, मैं तो छोडा हूँ और महसूस करना चाहते थे । मुझे नहीं मालूम तुमने कभी मुझे खुद को छूने के लिए क्यों नहीं हूँ? मैं ये मानता चाहती थी कि अखबार करना तो भारत स्वभाव में नहीं है म करती ऍम मैं तो भारी प्रेम का मुझे छुओ । मैं सच में ये चाहती हूँ मेरा कितना बडा होता है कि तुम मेरे कब से चाय पीते हैं । मेरी थाली से उठाकर नाश्ता करो ऍम कोई लडकी इतना बडा कदम उठाकर तो भरे साथ रहने को आएगी क्यूँ? क्या तुमने कभी इसके बारे में सोचा है? मैं चाहती हूँ कि तुम मुझसे प्यार करते हो । मैं इस पर यकीन भी करना चाहती हूँ कि तुम सच में करते हो क्या? तो मैं ज्यादा सा भी अंदाजा है कि पिछले कुछ दिनों से मैं किस परिस्थिति से कुछ कर रही थी । मैं अपने सबसे तरह अपने सपने के प्रमुख हार्ड खुलती जा रही थी । क्या तुम जानते थे की मुझे तुम्हारी अलमारी में उस जगह पर शराब की बोतल मिली थी जिसके बारे में बस तुम और हाथ क्या जानते थे । अगले दिन मुझे वो बोतल वहाँ नहीं मिली । क्या तुम जानते हो कि मुझे तुम्हारे पुराने फॅमिली तो तुमने हरियाणा के लिए लिखे थे । उसके तुम्हारे पिछले चिकन से कोई तकलीफ नहीं । मकर पहले लिया अकेले उसका साफ घटना बहुत मुश्किल था । मैं बहुत होती थी । मैं टूट चुकी थी तो बाहर ही गलती नहीं थी, इस बाहर नहीं । फिर भी उन सब की पृष्ठभूमि में जो बात थी वो जहाँ खींचते मुझे खाने काले अकेलेपन के विचारों ने खेल लिया था । मैं खुद को फिसलने से रोक नहीं पाए । कुछ हमेशा डरा था, रहा हूँ । मैं उसके बारे में बात भी नहीं कर सकती थी जिससे बात और बिगड जाती है । मुझे अपने अंदर ही शांति नहीं मिल रही थी । मैं बस यही उम्मीद कर रही थी कि मेरा पूरा काम पूरा हो जाएगा । नहीं इसी में यकीन करती हूँ फॅमिली नहीं । हो सकता है कि बहुत तो मैं बहुत अच्छी हैं । जब मेरे साथ थी तब मुझे खयाल आने बंद हो गए थे । उसी दिनों में तो मैं हमेशा के लिए खो देने का एहसास होने लगता हूँ । वैसे प्रकाश नहीं कर सकती थी तो भी एक इंसान हो । तुम ने उसके कुछ कपडे अपने कमरे में पचास कर रखे थे । ऐसी जगह पर छुपाकर जहाँ मैं उसे देख नहीं सकती थी । बाॅल मुझसे जगह बदलने को कह रही थी । हर बार छत में कुछ देखती थी तो उसका गंद मेरा काम खोट नहीं लगता था । मैं मस्त चाहती थी आपको रेखाओं के उस पत में वह शाम मुझे पूरी तरह तोड गए तो भारत ही देंगे सबसे ऍम मेरे नहीं तो भारत लिए चिट्ठी दिल सबसे ज्यादा भी मेरे नहीं मेरी जिन्दगी तुम से ही शुरू होती है । मैं यहाँ साॅस मगर तुम्हारे बगैर नहीं तो मैं बनाता हूँ जो तुम्हारे साथ एक खुबसूरत जीवन का सपना संजोए बैठे हैं । मैं एक साधारण से जवान लडकी हूँ तो मानती है कि तुम्हारे साथ बिताई रोमानी शाम से जाता । विलासितापूर्ण जिंदगी होती हूँ मैंने तुम्हारा इंतजार किया है और अब तो मेरे पास हूँ । मैं नहीं चाहती है कि दुनिया की कोई भी ताकत तुम्हें और दूसरी एक होने से रोक सकते हैं, वरना मैं अच्छी नहीं हूँ । पेड अच्छी वन तुम से शुरू होता है और तुम पर ही खत्म होता है, क्योंकि मेरे लिए था । मैंने तुमसे प्यार किया है और हमेशा करती रहूंगी तो भारत आशा करती हूँ क्या रही गौरी नहीं भरता वे खत उसके आस को से भी कहते हैं । उसके सियाही फैलने लगी थी । गौरी ने जल्दी से उस पर घूम रखी ताकि पे गायब हो जाएगा । ये सब जो उसके अनुसार नहीं हो पा रहा था । इन सब के बारे में सोच कर अच्छा नहीं लग रहा था । तैयार करो मेरे भगवन मैंने तो भारत क्या निकाला है? देश मुझे इस तरफ भाग आने के लिए माफ करते हो । तुम्हारे प्यार को पर रखने के लिए मुझे माफ करता हूँ । मुझे माफ करता हूँ । मैं सजा भुगतते के लिए तैयार हूँ । उस दिन तुमने ओ पी में जीतने के लिए मुझे अपने लिए यही नाम चाहिए । आखिरकार गौरी ने पढते हटाने का मन बनाया । उसने अपना फोन चालू किया और वह बार बार कहती रही मैं यहाँ क्या कर रही हूँ? मुझे या तो यहाँ या वहाँ होना चाहिए था । मुझे अपने आप को संभालना होगा । ये पागलो वाले बेकार विचार है । उसने अपने फोन पर असंख्य संदेश देखिए और उसे पता था कि जैसे ही वो उन्हें खोले की भेजने वाले के पास प्राप्ति का संदेश चला जाएगा । फिर भी उस ने उन्हें खोला । अब तक घंटे हो चुके थे, आखिरी संदेश देते फिरता था । उसमें लिखा था, बाबू, कृप्या मुझे फोन करुँ । मुझे सच में तुम्हारे चिंता हो रही है । गौरी ने कहा, हाँ, मुझे मालूम है । मालूम है तुम से बात करने की जरूरत है । हालांकि मुझे उसके परिणाम से भी डर लग रहा है । मैं समझ नहीं पा रही हूँ कि तुम से मैं कैसे बात करूँ । मुझे खुद को संभालने ले तो उसके पांच मिनट फिर कल के बाहर देखते हुए बिताए । फिर उसने अपनी गर्म सांस फिर की के ऊपर छोडी और उस पर कुछ अक्सर बनाए और ना हो ऐसा वो कुछ देर करती रही । फिर वो आपको मिटाती रही । फिर उसने का और लाभ बनाया । उसके बाद उसने उनके बीच दिल बनाया । वो उसे और कहना करती रही और खुद में पढाती रही । पांच मिनट के बाद उसने टीवी चालू किया और चैनल घूमाती रही । वो अपने आप को ढूंढ रही थी । वह मुस्कुराई और उसे बंद कर दिया । दो मिनट के बाद दरवाजे की घंटी बजी ।

भाग - 8.1

पूरे उसी समय के आस पास मैं बेहोश होने की कगार पर था । मैंने धान्या से कह दिया था कि जब तक गौरी नहीं मिल जाएगी, मैं पुलिस वालों के साथ ही रहूंगा । पहले तो उसने मना कर दिया हूँ मगर बादमें वह मान गई । उसने ये भी कहा कि उसे जल्द से जल्द आर्या से बात करनी होगी । मगर उससे पहले वो एक बात चीत जाना चाहते थे और उसने मुझे भी साथ चलने को कहा । जब वो ये कर रही थी तब उसका मतलब था कि मैं बाहर इंतजार कर सकता था । वो मेरे लिए परिवार के सदस्य की तरह थी मगर वो अपना काम अलग रखना पसंद करती थी । मैं उसका बहुत सम्मान करता था । मुझे नहीं लगता कि इतनी जल्दी मुझे यहाँ की कानून व्यवस्था को भला बुरा कहने का कोई अधिकार था । धान्या एक उदाहरण थी जो सीधी तौर पर इस व्यवस्था से जुडी हूँ और मेरी हरसंभव मदद कर रही थी । मेरे जैसे लोग पढाई करते हैं, कमाई करते हैं, गलती करते थे, हैं फिर अपनी पूरी जिंदगी होते रहते हैं । पुलिस वालों के साथ रहने के अपने निर्णय से मैं बहुत खुश हूँ । मैंने उनसे कहा कि वह इतिश्री के साथ रहे और उसको कभी अकेला नहीं छोडे । मेरा मानना था कि इस वक्त इतिश्री की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी । इसलिए इस वक्त टॉम का उसके साथ होना ही सर्वश्रेष्ठ था । ऐसा करने से बहुत दृढता रह सकती थी । दस मिनट के बाद धान्या बाहर निकली और उत्पाद पर चलने लगी । उसने मेरे ऊपर सवालों की झडी लगा । क्या उस वाले बंदे के साथ गौरी की कोई दुश्मनी हो सकती है? हो ही नहीं सकता हूँ । ऐसा होता तो वह मुझे जरूर बताती । और गौरी अक्सर साथ जिम जाती थी । हाँ, मैं दोनों जिम में साथ ही थी और जहाँ तक मुझे मालूम है दोनों एक साथ कसरत करते थे । इस वक्त आ गया । हमें कहाँ मिलेगी? अगर तुम चाहो तो मैं इस वक्त उसे फोन कर सकता हूँ । आप जरूर कर निदेशक है कि अब वह तुमसे बात करेगी । उसे मालूम है कि हम उसे ढूंढ रहे हैं । वो तो खुद मेरे घर आई थी मदद की पेशकश लेकर । और यही कारण है कि तो माँ जिस मुसीबत में हूँ क्या मतलब है तुम्हारा कितने भोले होने? मैं शुक्ला मुझे मालूम था कि धान्या आर्या पर किसी साजिश के लिए सब कर रही है । हालांकि इस वक्त में दिल की ये सब समझ पाना बहुत मुश्किल था । उसका नंबर पहुंच से बाहर है । मुझे लगता है कि शायद नेटवर्क की कोई समस्या होगी या फिर उसकी बैटरी खत्म हो गई होगी । ठीक है तो फिर मुझे उसके घर ले चलो । दस मिनट में हम आर्या के घर पहुंच गए । तभी मेरे पिता जी का फोन आया । मुझे वकील के साथ हुई अपनी मुलाकात के बारे में बताना चाहते हैं । मैंने उनसे थोडी देर बाद फोन करने के लिए कहा । फिर उन्होंने कुछ ऐसा कहा की मैं फोन रख नहीं पाया । गौरी की खबर पहले ही हर जगह फैल चुकी थी । उसके माता पिता को भी ये बात पता चल गई थी और अब ये मेरे माता पिता के संपर्क में थे । उन्होंने मुझे बताया कि गौरी का नंबर पहुंच से बाहर था । कुछ और बिंदुओं पर बात करने के बाद मैंने उनको दिलासा दिया । फिर मैंने गौरी को भेजे अपने संदेश पर नजर डालें । वो उसे मिल चुका था । मैं उछल पडा और जीतने लगा । शुक्र है कि धान्य वहीं थी । उसने गौरी का नंबर मिलाया मगर फिर बंद था । उसने विश्व को फोन किया और ये पूछा कि क्या नंबर के आधार पर उसके बारे में कोई जानकारी मिल सकती है । विश्व फौरन का वो थोडी कोशिश करेगा, उनकी इकाई में तक थी । अभी भी एक बडा सिर्फ करता था । धान्य और मैंने पूरे घटनाक्रम पर बात की । उसने कहा कि उसके मुताबिक हो सकता है कि अपहरणकर्ताओं नहीं उसका फोन इस्तेमाल करने के बारे में सोचता हूँ और उसे चालू किया हूँ । बाद में शायद उन्होंने सिम निकालकर फेंक दिया हूँ । ये एक मत हो सकता है । ऐसे ही और भी कई मत थे जिनपर चिंतन जाती था । उसने मुझे आलिया के साथ होने वाली मुलाकात में उसके साथ रहने को कहा क्योंकि वह इस जांच पर किसी भी तरह का राजनीतिक प्रभाव नहीं चाहती थी और थान्या के साधारण कपडों में वहाँ होने के पीछे भी कारण था कि वो इस पूछताछ की प्रक्रिया को शांति से पूरा करना चाहती थी । उसने दरवाजे की घंटी बजाई । हरियाणा फौरन ही दरवाजा खोल दिया क्योंकि उसे पता था कि हम वहाँ आने वाले थे तो रेल इसे यहाँ लेकर आने का फैसला तुम्हारा था या फिर गए तो मैं यहाँ लेकर आई । अगर ये पूछताछ के बारे में है तो मैं आशा करती हूँ कि तुम मुझे अच्छी तरह से जानते हो तो मैं कैसे भूल सकती हूँ । आ गया मगर लगता है इस बार तुमने बहुत बडी गलती करती है । अगर तुम मुझे अपराधी कह रही हूँ तो मैं अभी कुछ लोगों को फोन कर सकती हूँ जिसके बाद तो मैं यहाँ से जाना पडेगा मगर मैं ऐसा नहीं करूंगी । और बस इसीलिए क्योंकि तुम नील के साथ यहाँ हूँ । जाहिर है तो मिल के काफी करीब हो । इस लडके और मेरे बीच में बहुत खुबसूरत रिश्ता रहा है । मैं इसे प्यार करती हूँ और मैं तो ये भी बता सकती हूँ ये भी मुझसे प्यार करता है । आर्या बोल दी जा रही थी । डालना ने उसे बीच में ही रोक दिया जैसा तुम ने शुरू किया है । मैं यहाँ पूछताछ के लिए नहीं आई हूँ और ये तुम्हारे ड्रग्स के साथ पकडे जाने के बारे में नहीं आ रहे । अपने तीखे स्वर से थान्या पर हावी होना चाहती थी । मैंने अपनी जिंदगी में किसी को पुलिस वाले के साथ इस तरह से बात करते हुए नहीं सुना था । मुझे समझ नहीं आया कि धान्या आर्या के साथ ऐसा साधारण बर्ताव क्यों कर रही है । धारणिया जी मैं आपको एक कहानी सुनाना चाहती हूँ । हरियाणा का बहुत वर्षों पहले नाम का एक राजा था । मैंने नाम को अक्सर इसलिए बना दिया ताकि आप मध्यकालीन इतिहास में जाने की बजाय कहानी कम । मसाले आपने क्षेत्र का अत्यंत शक्तिशाली व्यक्ति था । वो एक बहादुर बिल जो था भी था । वो कभी किसी से डरता नहीं था । उस की चार पत्नियां थीं । मेरा मतलब है रानी । वो चारों से एक समान प्रेम करता था । उन चारों के साथ एक समान समय बिताने का वह भरसक प्रयास करता था । वो प्रजा का बेहद प्रिय था । वो किसानों के कर्ज माफ कर देता था । भगवान भी उस राजा से सदैव प्रसन्न रहते हैं । इसलिए कभी भी उनके राज्य में कोई प्राकृतिक आपदा नहीं आई । उनके राज्य की जमीन भी खनिजों से भरी पडी थी । उनके राज्य की खनिज उत्पत्ति सबसे बेहतरीन थी और सोने की कोई कमी नहीं थी । खुद के अनाज भी सबसे उत्तम हुआ करते थे । अन्य राज्यों के राजा उससे बहुत अच्छा करते थे । उन्होंने उसके खिलाफ फेक होकर युद्ध में उसका राज्य जीतकर बात आपस में बांट लेने की सोची । इसी प्रकार भी उस राज्य की संपत्ति में हिस्सेदार बन सकते थे । सबके उत्तर की तैयारियों में लग गए थे । राजा युद्ध के लिए तैयार नहीं था, क्योंकि उसने कभी किसी का अहित नहीं किया था । वो एक सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा था । फिर एक दिन अचानक उसकी सेना ने ऐलान कर दिया कि पडोस के सभी राजाओं नहीं उनके राज्य पर आक्रमण कर दिया है । राजा के पास बहुत बडी सेना नहीं उसने अपने आप को भगवान के समक्ष समर्पित कर दिया । अगले ही पल उसके दुश्मन वापस लौटने लगे । भगवान ने अपने दूत भेजे थे । उन्होंने अपने दो तो और संदेशवाहकों द्वारा उनकी सेना पर आक्रमण करने की घोषणा की । उस घोषणा में कहा गया, हाँ, एक तरफ उन सभी राजाओं की सेना छह राज्य पर आक्रमण करने जा रही है, वही राजा की सेना उन सबके राज्यों की ओर कूच कर चुकी है और अब उन्हें अपना खजाना, अपनी रानियां और अपनी जमीन सब कुछ करवाना पडेगा । इसके बाद इतनी तेज बारिश होगी तो उनकी पूरी सेना उसमें बह जाएगी । नदियों में बाढ आ जाएगी । उनकी लाश को चील कौवे खायेंगे । कुछ भी अपने राजा के वफादार थे । इन सबसे डरकर उन्होंने एक लानी और शर्मा से वापस लौटने का निर्णय लिया हूँ । अब ये मानते हुए कि तुम एक प्रतिमान औरत आशा करती हूँ कि तो मैं इस कहानी का साथ समझ में आ गया होगा । यदि आप एक अच्छे इंसान है तो ऊपर एक रखवाला जरूर है, जो आपको दुश्मनों के हर अत्याचार से बचा लेगा । बेहतरीन काहानी कुमारी आ रहे हैं । अब हम कल युग में हैं । वैसे भी मैं तुमसे बस कुछ सवाल पूछ होंगे । हम इसे साधारण ही रखते हैं । पूछो क्योंकि मैं हमेशा नील की मदद करूँगी । गौरी के अपहरण की चिट्ठी तो मैं खुद भेजने की जरूरत की महसूस हूँ । अगर तुम ने उसके लिए किसी पेशेवर को रखा होता तो खुद ही करते थे । तो हमारे पास क्या सबूत हैं? सर, वो चिट्ठी तुमने भेजेंगे । उसे ज्यादा ध्यान से देखो । इसके किनारों पर न सर डालूँ । पीले हो चुके हैं । मैं छीन के मैंने जैसे बात करने वहाँ गई नहीं हूँ । हमें वहाँ इसी तरह के कागजों का एक ढेड मिला था जो उसके बेस पर रखा था । तुमने कागज का एक टुकडा भर लिया और ये बच्चों वाले खेल खेलने लगे । एक उन्नीस साल की लडकी से पहला और मैं क्या करूँ जो हर वक्त नशे में रहती है । क्या बकवास है? मुझे जरा सा भी अंदाजा नहीं मिल पा रहा है कि तुम क्या बात कर रही हूँ । उसके बारे में मैनेजर से क्यों नहीं बात कर दी और मैं नशा नहीं कर रही हूँ । ये कोई नशे की चीज नहीं है । काम मैं सबको जान चुके । हमारे यहाँ तो तुम्हारा खेल खत्म हो चुका है । थाना देता हार्ड रुपए का । इसके पहले की धान ने आगे कुछ कहते उसे एक फोन आया जिसके बाद उसे वहाँ से फॉर्म निकलना पडा । जब वो लगभग दौडते हुए घर से निकल रही थी, उसके पीछे मुडकर आ गया से कहा शायर छोडकर बिल्कुल मत ज्यादा और आप अपना फोन चार्ज कर लो और उसे ऑन रखूं । धान्या को विश्वास ने फोन किया था । उसके पास कुछ जरूरी जानकारी थी । उसके लोगों ने सीसीटीवी की पडताल करने के बाद को सुराग निकले जिसे देखकर मेरा शरीर ठंडा पड गया । ये विश्वास करने लायक नहीं । भला ऐसा वो क्यों करेगी? मुझे नहीं पता । देश इस पर एक एक करके विचार कर दी । ये वैसा तो नहीं है जैसा हम सोच रहे हैं । ये कुछ और ही है । मुझे नहीं लगता है कि इसे सुलझा पाना इतना आसान काम होगा । ऐसा बताता हूँ । थान्या अगर तो भी उम्मीद छोड होगी तो मेरा क्या होता हूँ? देखो विश्व की बताई जानकारी पर मेरे लिये इतिश्री को पकड लेना बडा ही आसान होगा । मैं उसके साथ खडा बर्ताव कर सकती हूँ । अगर मैं ऐसा करना नहीं चाहती हूँ । मैं बल प्रयोग नहीं करना चाहती हूँ ये सोचते हुए कि गौरी स्वस्थ किसी बडी मुसीबत में है । मैं उस पर खतरा और बढाना नहीं चाहती हूँ । फाॅल्ट लोनावाला रिक्तियां जारी रही । उसमें एक नहीं चिट्ठी लिखनी शुरू करती हूँ और इस बात ये उसकी डायरी में नहीं लिख नहीं हूँ । ये ए फोर साइज गई कागज पर लिखी गई चिट्ठी थी । लगता उसे मालूम था पहले से ही की उसे क्या लिखना है । प्यारे में मेरे नहीं मैं यहीं हूँ फिर से वापस मैं तुम्हारी तस्वीर से दस मिनट के लिए लगती थी । ऐसा लगा मेरी दुनिया उथल पुथल हो गई तो भारत कितनी खुबसूरत स्वीट है कि तुम से मेरा मन कभी भी नहीं भरता हूँ । फिर मैं मुझे कभी छोडकर बच्चा ना कृपया मुझे कभी आर्या के लिए छोडकर बच्चा रहा हूँ । तो भारत और उसके बीच में जो कुछ भी था अगर मुझे आकर सच सच सब बता दूँ कि तो मैच में माफ कर दूँगी । मैं तुमसे पूछूंगी नहीं तो मैं खुद आखिर मुझे बताना होगा । मैं नहीं चाहती कि तुम्हारे शरीर से उसका कंधा आए । मैं नहीं चाहती कि तुम्हारे होठों में उसका दम छुपा हूँ । मैं नहीं चाहती कि तुम्हारे दिल को ये कभी भी याद आया कि वहाँ कोई और भी था जो तुम्हारे साथ रहता था । मैं नहीं जाती हूँ । इस वक्त में बहुत ज्यादा स्वार्थी हो रही हूँ । अगर अब ऐसा ही है । मैं नहीं जानती कि यहाँ आना एक सही निर्णय था या नहीं । मगर मैंने कर लिया । मैं इस परिस्थिति में पहुंच चुकी हूँ । मैं अपने बन को समझा नहीं पाई । मैं अपने दिल को नहीं समझा पाई । मैं नहीं कर पाई । गौरी फूट फूटकर होने लगी हूँ । वो निसंदेह पूरी तरह से टूट चुकी थी । ऐसा लगता था उसका दिमाग काम नहीं कर रहा है । किसी अदृश्य शक्ति ने उसके ऊपर जादू कर दिया था तो ऐसा जिसे वह खुद नहीं समझ पा रही थी या फिर यूं कहें कि उसे समझाया नहीं जा सकता था । दी है मेरे बच्चे मुझे तुम्हारी संशोधत है । मुझे कभी छोडकर बच्चा आशा करती हूँ तो खुश होगी । मैंने तो बच्चा कह दिया है । जब बिस्तर पर लेटी हुई थी तो उसने पिछले कुछ दिनों में नील और अन्य लोगों के साथ बिताएं । अपने पलों को कागज पर लिखने की सोची । हाँ हूँ अन्य लोगों के साथ बिताए पल उसकी आज की परिस्थिति के लिए काफी महत्वपूर्ण थी । इन सब की शुरुआत सात दिन पहले उस दिन सुबह ठंडी हवाएं चल रही थी । बारिश दो दिन पहले ही रूप चुकी थी । उसके प्रभाव से हवा में थोडी ठंडक थी । सूरज ने आपके चौली खेलना शुरू किया गया । उसका भाव हालांकि चमकीला ही था । लेले मुझे कॉलेज छोडा और खुद ऍम चला गया । उसे मेरे लिए कुछ संगीत और कुछ वो बीस खरीदनी थी । मैंने उससे जाॅन ए सी डी सी एल्बम की सूची दी थी । पहले तो वो आश्चर्यचकित हो गया था । एक लडकी जिसे कैसाब्लांका और बॅास और फिल कॉलिन्स पसंद हूँ, उसे अचानक तेज आवाज वाले गाने पसंद आने लगे थे । मैंने उसे बताया कि अपने व्यस्त हो चुकी हूँ इसलिए अब मैं ये सब करूंगी हूँ । अब मैं जीवन में भारी संगीत सुन होंगी । हालांकि मैं वजन के हिसाब से भी थोडी भारी हो चुकी थी । मेरे चेहरे पर थोडे मुखा से आए थे । मेरी तो अच्छा टूट रही थी । हालांकि उन पर कोई दाग नहीं थे । ये पहली बार था जब भी तो अच्छा में मांस चढ गया था । इसलिए हो सकता है कि ये दाद बात में आती जब मैं वजन कम करती । मैं वाकई अपना वजन कम करना चाहती थी । मैं उसको लेकर खुश नहीं थी । संगीत, सिनेमा और मेरा साथी ये तीन थे जो मेरा जीवन सजा रहे थे । इस वक्त तक कभी भी मेरे मुहासे या मेरे मोटापे नहीं मुझे बहुत ज्यादा चिंतित नहीं किया था । बस थोडा सा ऐसे ही जवान लडकी के साथ होता है तो भारी भरकम संगीत के लिए अपना मन बदलना । बस रातोरात उठने वाली कोई जिज्ञासा नहीं जो व्यस्कों होने पर होती हैं । ये दबाव भी था और वो चीज भी जो एक कॉलेज जाने वाली लडकी के साथ होती है । उस दबाव का आभास भी था । मैं तो असम के गुवाहाटी से आई हुई एक लडकी थी । तब मैं मुंबई में रहती थी । ये नए जमाने के लोगों का गढ है इसलिए मुझे थोडा समायोजन भी करना पडा और मुझे मेरे साथी को मोहित भी करना था । मेरा अंदाज मेरा व्यक्तित्व, तला संस्कृति और आठ नंबर से फोड रहे नंबर तो पढाई लिखाई या परिवार से नहीं मिलता । इसमें समाज का भी उतना ही योगदान होता है और फिर मैं वो बन गई । कमजोर होते में एक खोजी आ गया । मुझे दिन के समय में मिली थी । उसके बाद जो हुआ वो थोडी देर में पता चलेगा । अब मैं जो लिख रही हूँ वो अब सीधा संबोधन तो में होगा नहीं, इसका मैं भरसक प्रयास करूंगी । वो शाम सबसे मजेदार शांति । मैं रोमांच की ओर खींचा चला जा रहा था । वास्तविक रूप से मुझे नहीं पता था कैसे करेंगे विशुद्ध और पूर्ण आनंद था शायद शुद्ध नहीं और शायद सही भी नहीं । हर वो चीज जो सही होती है, आपको जीवित होने का एहसास नहीं दिला सकती है । सही होना घर के चारदीवारियों के अंदर ठीक है । अगर जवाब बाहर होते हैं आप इन चीजों की ओर शिक्षा ले जाते हैं जो शायद सही न हो । जैसे मेरी सीरीज गाडियाँ जैसे मेरे वो मजेदार खेल ये उससे भी थोडा ही ऊपर था । मुझे तुम्हारे साथ बेताहाशा खुशी मिलती थी । मुझे गलत मजा मिलता था । तुम्हारी भूतपूर्व प्रेमिका का शुक्रिया हूँ उसने और मैंने अभी तक गांजे कि कुछ प्रश्नकाल गए और कुछ से मेरा मतलब है सचमुच कुछ शायद लगभग खाते हूँ । तुम्हारे गैरमौजूदगी में रात के किसी समय में और कभी कभी तो दिन में भी वो तुम्हारी मौजूदगी में मैं जिम के शौचालय में जाया करती थी । मेरा या तीन करूँ । इसमें मौसम की भविष्यवाणी करने से और मोवी देखने से भी ज्यादा मजा है । मैं एक अलग दुनिया में थी, सबसे ऊपर बिल्कुल नहीं ली गमेती श्री मुझे मनाना प्रीम की वो कहानियाँ सुनाया करती थी तो मुझे आश्चर्य होता था कि आखिर लोग ऐसा क्यों करते हैं । धीरे धीरे मुझे ये सोचकर आश्चर्य होने लगा कि लोग ऐसा क्यों नहीं करते हैं । इसीलिए ये जो नुकसान हुआ है ये एक रात में नहीं हुआ । दरअसल किसी तरह भरी कहानी से शुरू हुआ था ये तो खुशी से शुरू हुआ था । जवाब के जीवन में बोल लडका हूँ जिसे आप पागलो दीवानों की तरह दिल से प्यार करते हैं । तो इस बात की खुशी आपको जीवन को और भी बेहतर ढंग से समझने का अवसर देते हाँ, उसे कई बार इस बात का भी आभास हुआ कि मुझे तो मैं इसके बारे में बता देना चाहिए कि सच मैं अपनी माँ की कसम खाकर कैसी होने! मगर फिर तुम और आर्या अलग ही तो इसीलिए हुए थे तो वो भी यही सब करती थी । मैं तुम्हें खोना नहीं चाहते थे । इसीलिए ये नुकसान एक रात में नहीं हुआ और इसमें बहुत ज्यादा दिन भी नहीं लगेंगे । इसमें तो बस एक लंबी रात लगी उस रात जब मैं पूरी तरह तैयार थी

भाग - 8.2

दरअसल एक तरह से ये सब कुछ एक रात में नहीं हुआ । लगता है ये उस नशे का असर है, शुगर है इसकी लगभग मुझे नहीं लगी । नहीं । मगर हाँ मुझे खुशी की लत लग चुकी थी । मैं बीमार हो चुकी थी क्योंकि मुझे और खुशी चाहिए थी की तस्वीरें बहुत ही बढिया थी । मैंने उससे ये जानने की कोशिश की ये तस्वीरें ले कौन रहा था । वो मुस्कुराएँ तो ये भी कह सकती थी कि यहाँ टाइमर परसेंट था मगर उसने ऐसा नहीं कहा । वो मुस्कुराती रही । फिर उसके बाद वो जोर जोर से हंसने लगी और तब तक हस्ती रही जब तक हम घर नहीं आ गए । अपने पूरे जीवन में मैंने कभी ऐसा नहीं देखा था और नाम सुना था इसलिए मैंने भी वही करने का प्रयास किया । मैंने उल्टी कर दी । उसने उसे साफ किया । हम सब से लौटकर उसके घर पर थे और रात वहीं बिताने वाले थे । उस पब में अब तुम दोनों के बारे में जानते थे, नहीं ली और वहाँ भी तुम दोनों को जानता था । वहाँ पर मौजूद सबसे बढिया कपडे पहने हुए लडके भी तुम दोनों के बारे में जानते थे । मुझे बडा शरीफ हुआ नहीं । मैंने ये सब जानने की कोई कोशिश नहीं की । ये तो अपने आप सामने आता गया । मुझे याद नहीं है की कैसे मगर मेरा अंदाजा है इसकी शुरूआत मेरे कपडों से ही जो आदमी ऑर्डर के लिए हम से पूछने के लिए आया था उसे याद आया कि तुम ने ऐसे ही कपडे आर्या को उपहार में दिए थे । हाँ वो नहीं शायद मैंने वही कपडे पहले थे तो तुमने मुझे उपहार में दिए हैं । याद है तो पीछे से थोडे कह रहे थे और जिनका तंग गहरा बैग था । अच्छा अच्छा तो ही संयोग था । आर्या ने कुछ नहीं कहा हूँ । ज्यादा सोचो उस मैनेजर को ये सब याद था तो ये कुछ विशेष नहीं था । तुमने बहुत जगह किसी खास मौके के लिए सुरक्षित कराई थी । उसने अपना आश्चर्य प्रकट किया । मैंने आप की ओर थोडा शरीर से देखा । क्या ये थोडा जीत नहीं है? एक मैनेजर को तुम्हारे कपडे याद हूँ । मेरा मतलब है ऐसा कौन करता है? तुम किसी रेस्तरां के मैनेजर के साथ इतना खुलकर और मुक्त होकर कैसे बात कर सकते थे । इन सारे लोगों में वो ऍम मैंने उस पूरे विचार को त्याग दिया और आर्या की गैरमौजूदगी में उस आदमी को खूब खरी खोटी सुनाई तो मैं और भी बहुत कुछ कहना चाहती हूँ । मैंने वहाँ से आर्या से अपनी बात शुरू करती । अरे मेरी प्यारी कौरे इन सब के पीछे का ही है । इस कपडे पर मैंने अपनी शराब करती थी और ये मैं नेचर बिलकुल बगल में खडा था । मैंने खूब हो हल्ला किया था । अच्छा तो इसलिए ये सब याद है इसको हाँ और इसके अलावा इसके लिए भी यहाँ मैं काफी बार आ चुकी हूँ । हरियाणा थोडा जोर देकर कहा मुझे याद है कि मैं इस बारे में कितना सोच रही थी । मेरे पास विकल्प था या तो मैं वहाँ से उत्तर चली जाती है या उस जगह पर और हम जाती । अगर मैं चली गई होती तो मैं खुद होती रहती है इसलिए मैं वहाँ तो कहीं क्योंकि मुझे मालूम था कि अगर मैं वहां हम गई तो मुझे और भी खुशी मिल सकती है । तो हरियाणा नील ने मुझे बिल्कुल वही कपडे दिए हैं जो तुम उसके घर पर छोड आई थी । मैं इसके बारे में बहुत कुछ नहीं होंगी । चलो कुछ और बात करते हैं । मैं तो यहाँ तो मैं खुश करने आई हूँ । उस पल के बाद मेरे और नजदीक आती गई और हम दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए । शराब हमें नजदीक ले आई थी । उसके बाद होने वाले सिरदर्द और भी नजदीक ले आए और फिर उस मनाना क्रीम ने हमें एक दूसरे के बिल्कुल करीब कर दिया तो ये सब इसी प्रकाश शुरू हुआ हूँ । मैं खुशी खुशी इन सब में एक डूब रही थीं । पूरी तरह से आर्या कमेंट पिक लाइन लडकी थी मैं अमीर तो थी पर बिकराल नहीं । मेरा मतलब है अपने पैसों से तो बिलकुल नहीं है । और हर वो चीज तो मुझे बिगाड सकती थी । मुझे अभी तक उसकी लगता नहीं लगे थे । शाम के खत्म होने पर मुझे तो भारी ओर से सात संदेश मिल चुके थे । मैंने उनकी ओर ऐसे देखा मानो हुई प्यार के बोलती हूँ । मैं तुमसे उस कपडे के बारे में पूछना तो चाहती थी मगर मैं गई । तकरीबन सात बार हर संदेश मुझे उकसावा दे रहा था । मगर मेरा अंतरमन मेरे ऊपर हावी हो कर मुझे दुख रहा था और इसके अलावा मैं अपना खुशनुमा माहौल खराब नहीं करना चाहती थी । मैं उन लोगों में से नहीं हूँ जो कभी भी और कहीं भी अपना मूड खराब कर ले । मेरे अंदर धीरज है । मैं तुमसे बाद में तो पूछ सकती थी मगर स्पीच कुछ और ऐसा हो गया । इसकी वजह से मैं तुमसे ये पूछ नहीं पाई । दरअसल बाद में बहुत कुछ हुआ । पहले तो मुझे लगा के वो नशे में हैं । मगर फिर वो जोर जोर से पागलो की तरह हंसते लगे तो साफ हो गया था कि वह गंभीर नहीं थी । अगली राहत आर्या के साथ होने वाली बातचीत इतनी समझ नहीं थी । जब मुझे दोपहर में मिली तो पहले तो मैं आश्चर्यचकित हो गई । उस मुलाकात से नहीं बल्कि शाम के प्रस्ताव से मेरे मन में कई सवाल थे । मगर फिर मैंने ये सोचा कि बहुत तुम से तो बात करने लगी है । मैं तुम पर किसी छोटे शहर के उस पागल कंधी और अपना आधिपत्य जवाने वाली लडकी की तरह सीखना चाहती थी जिसे इस पूरे प्रकरण में कुछ गडबड नजर आ रही हूँ । मगर अपने अंदर के साथ हरे भाव को मैंने ठंडी लहर और मुस्कान में बदल दिया । ये देखकर तुम भी मुस्कुराये । तुम शायद गई सारा कर रहे थे कि आर्या से मेरे पास करने पर तो मैं कोई दिक्कत नहीं है । शक्ति कथित मैं तो ये चाहती थी कि तुम्हें उस बातचीत में शामिल हो क्योंकि मुझे अच्छा नहीं लग रहा था । बस वही चीज तो मुझे आगे की ओर ले जा रही थी । वही मेरी अपनी सुरक्षा को छुपा लेने की कला जैसा की मैं पिछले सात वर्षों से करती आ रही थी । उसने मुझे जोर से करे लगाया नहीं तो वक्त जब उसका कल मेरे बढ में पहुँच गया । जैसे जैसे हम बातचीत में आगे बढते गए मुझे वो बेहद सामान्य लगी । हाँ, मैं तो भी के बताना चाहती हूँ कि अगर तुम्हें कभी भी किसी चीज की जरूरत हो तो तुम्हारा दूसरा स्वरूप यहाँ मौजूद है । मुझे मालूम है वो इतनी हो रही है और मैं उसकी जगह नहीं लेना चाहती हूँ । मगर फिर भी कभी ये मत सोचना कि तुम मेरे लिए किसी भी रूप से कमतर को आज के जमाने में ऐसे शब्द सुनना काफी दुर्लभ है और मुझे दुर्लभ चीजें पसंद हैं । इसीलिए मेरे तमाम साथियों नहीं मुझे तुम सबसे ज्यादा पसंद हूँ । वो तो यहाँ के सबसे दुर्लभ लोगों में से एक हैं । मैं तो बस यही उम्मीद करती हूँ कि अंतर था तुम एक अच्छे इंसान साबित होगी, आ गया । मैं नहीं जानती कि ये सब किस किस के बारे में है । अगर मैं तुम्हारे साथ एक सामंजस्य महसूस कर सकती हूँ सर पर फिर से कहना मैं तो दोस्ती के लिए हमेशा लालायित रहते हूँ तो मैं पता है गौरी मैं यहाँ पर बहुत सारे लोगों के साथ घुल मिल नहीं पाती हूँ । मेरे कई तो उस लडके हैं क्योंकि वे मासूम है । लडकियाँ मुझ से चलती हैं । मुझे सब कुछ नहीं पता क्यों मगर फिर चलती हैं ये थोडा अच्छी बात है ना कि मैं अपने पूर्व प्रेमी की प्रेमिका के साथ इतना घुल मिल गई हूँ । मैं तो अच्छी हूँ वहाँ । बस हम दोनों ही थे । मैंने ये बात इतिश्री से भी छुपा ली थी । क्या तुम सो सकते हूँ? मैंने ये बात उससे बीच पाई । आर्या ने भी खुद को मेरा विपरीत स्वभाव कहा था । मैंने ये सब छुपा लिया । हाँ, उस वक्त ये सब बहुत कुछ उलझा हुआ महसूस हुआ । मुझे अब मुझे थोडी प्लानिंग जरूर हैं और इस मोड पर मैं ये सब लिख रही हूँ । मुझे खिलाने महसूस हुई कि मैं अपने मनोभाव छुपा रही थी । मैं भी अच्छी हूँ । उसे लगता है कि तुम बहुत हम बार और दोस्ती करने लायक हो । मैं उम्मीद करती हूँ कि तुम मुझे मिलकर इस बारे में कुछ संकेत भी दे सकती हूँ । मजाक कर रही हूँ । मेरे नजदीक आई और फिर से उसने मेरे कान में कहा आज रात को वो मेरे कानों के पास इतनी देर तक खडी रही कि मुझे अंदर से जिज्ञासा हो नहीं रखी क्या है आज रात को ये तुम्हारे लिए यादगार रहेगा तो अपने प्रेमी के बारे में इतना कुछ जान जाऊ की जितना तुम पूरे साल में नहीं जान सकती है । ये तो बडा ही उत्तेजक मालूम पडता है । तो या तो तुम उसके बारे में और जान पाऊ की या फिर तुम मेरे साथ समय कुछ करता हूँ । मैंने उसके बाद उसका डालता हूँ । इसलिए शाम में जब वो कपडे वाली घटना हुई तो ये कोई सुनियोजित खोज नहीं थी । या तो वहाँ से पूरा सहयोग था जिसका स्पष्टीकरण अभी भी बाकी था । एक ऐसा अधिकार था जिसका मैं उपयोग कर भी सकती थी और नहीं भी । मैं तुमसे पूरे दिन मिल नहीं पायेगी । मस्त तुमने दोपहर में एक बार हाथ हिलाकर मेरा अभिवादन किया । तुम अपने कॉलेज के कामों में व्यस्त थे । मैं अपनी मस्ती भरी संस्कृति में व्यस्त थी, कुछ हद तक तो नहीं मगर उससे कम भी नहीं । आर्या ने बहुत सारे चीजों की भरपाई करने की कोशिश की । उसे जरूरत नहीं थी मगर फिर मुझे लगा कि शायद वो अगले दो दिन के तुम्हारे गैरमौजूदगी की भरपाई करना चाहती थी । शायद यही उसका प्रेम था । मैं ये देख पा रही थी उसने मेरे चेहरे के लिए क्रीम कटप्पा कुछ उपहार में दिया । मुझे मालूम था कि ये हिंदुस्तान में नहीं मिलता है । मैं उसके इस कृत्य से अभिभूत थी । उसने मुझे टूटता तब दिया जब हम उसके घर की ओर निकलने वाले थे । इसकी वजह से हमें गाडी के बाहर कुछ समय साथ बिताने का मौका मिला । हम बातें करते रहे और करते रहे । हम थोडा हँसी भी हम थोडे नशे में थे । मैंने उसका हाथ पकडा और उससे पूछा हूँ कि क्या मैं तो झूम सकती हूँ । उसने मुझसे कहा जितना समझा होती है मैं इसके लिए पैसे नहीं होंगे । मैंने उसके हाथ को चूमा । मालूम है अपनी जिंदगी में आने के लिए उसका शुक्रिया अदा कर रही थी उसने मेरे गालों पर आपने हो टिक आती है । मैं उसके गालों को चूम लिया । उसने मुझे गले लगाया और एक ऐसी बात कही जिससे मैं कभी नहीं भूल पाउंगी । एक ऐसी बहुत जिसने मुझे झकझोर कर रख दिया । एक ऐसी बात चीत में बेटी आंखों से आंसू निकल ले लगे हैं । थोडी सी शराब पीने के बाद मनोभाव ऐसे ही प्रदर्शित होते हैं । इस वक्त में वो सारे बस पति और सकारात्मकता देते हैं जो इस क्रम भाड में उसके पास है तो मुझे तक रूम पसंद करती हूँ । आ रहा हूँ तो हमेशा के लिए कुछ ना कुछ करती रहती हूँ । तो मैं हमेशा मुझसे इतना अच्छा पडता हूँ करती हूँ और पतले में मैंने तो हमारे लिए कभी कुछ भी नहीं किया है क्योंकि मुझे लगता है कि तुम वो एकमात्र लडकी हूँ तो मुझे कुछ चाहती नहीं हूँ । तुमको एकमात्र लडकी हो जिसके मन में मेरे लगे ना चलन है और नहीं प्रतियोगिता की भावना और आखिर में सबसे बडा कारण के हैं कि तुम नील से इतने समय से प्यार करती रही । फिर फिर जब तुम यहाँ आई सुना तुम ने न कुछ किया और नहीं कुछ कहा मैंने तुम्हें देखा था कई बार चतम नील के बगल से गुजरती थी मगर उसके आगे कुछ भी नहीं किया तुम्हें । तुमने मुझे बहुत प्रभावित किया है कुछ और फिर जानना चाहती हूँ फॅमिली मुझे यकीन नहीं होता कि किसी लडकी के मन में कोई निर्णय लेते वक्त इतना कुछ चलता रहता है । मैं तो इतना कुछ नहीं सोच पाती । बस उस पल की धारा के साथ मैं जाती हूँ । सामान्य अवस्था में मैं तुम से इतना कुछ नहीं कर पाती । अगर अभी नशे में हो ना, इसलिए सच कह दिया । हम अपनी गाडी में बैठे और कुछ ही देर में आ गया के घर पहुंच गए । उसने मुझे इतिश्री को भी बुलाने का सुझाव दिया । मगर मैंने मना कर दिया । मैंने उसे कहा था कि आज मैं सिर्फ और सिर्फ आर्या के साथ होंगे और शायद उसके उपर स्थिति में उतना खुलना । फॅमिली को इससे कोई समस्या नहीं थी । मैं उसके घर में बाहर के कमरे में रखे सोफे पर लेट हैं । उसने मुझे सोने नहीं दिया और उससे कहा कि वह मुझे और भी खुशियों से परिचित कराना चाहती है । उसने मुझे एक सौ रुपए का नोट दिया, बिल्कुल वैसे ही जैसे उसने अपने हाथ में पकड रखा था कि मजेदार है ना । यही तो पागलपन है । जब हमारे यहाँ कई सारे लोग एक साथ इकट्ठा होते हैं तो फिर हम खा पी सकते हैं । मगर ये झेलम बस दोनों के लिए परिदृश्य में रोज थीम का संगीत हमारे लिए चाहते का काम कर रहा था । मैं घूम रही थी और नाच रही थी । मेरे जैसे किसी के लिए कोई मुश्किल काम नहीं था । ये जिसने बहुत तेज गति में क्लियर पतले हूँ और छुट्टी बजाते ही गायब हो जाती हूँ । आ रहे अचंभित हो गई थी । पहले तो उसे विश्वास ही नहीं हुआ तो हम तुम मेरी गुरु निकली यार, धक करेगी उन्हें तो भाग ली और जबकि मैं अभी तक एक ही भर पाई हूँ । अब ये मत कहना । इसे पीना भी मुझे सिखाना पडेगा । मेरा ख्याल है मैंने हॉलीवुड में लडकों को ऐसे करते हुए देखा है । वहाँ पे भी टीवी आता है और ये सब चलता है प्रशंसक ने । बहुत जल्दी हम मानता तक पहुंच गए । मैं बहुत ज्यादा नहीं लेना चाहती थी, नहीं, पागल बनना चाहती थी । अभी ऐसा नहीं चाहती थी तो तुमने खेल के बारे में क्या जानना चाहती हूँ । ईमानदारी से कहूं जो इस धरती पर सबसे खुबसूरत लडके के बारे में जो भी जरूरी हो वो सब कुछ तुम लाखों में खुद ही है तो में सात वर्षों तक उसको पाने का इंतजार किया है । जब हम अलग हुए तब ईश्वर ने भी तुम्हारे ही तरफ तारीख है । आर्या बताओ ना इमानदारी से तुमने उसे क्यों छोडा? हाँ इतने सारे कष्ट लगा लेने के बाद तो निश्चित ही सब कुछ जानना चाहूंगी तो मुझे थोडा परेशान करोगे ना आ गया । मुझे कुछ कुछ करने लगी है । उसके बाद जो उसने क्या उससे तो मेरा खून चढ गया । मैं ऐसा बिल्कुल भी नहीं हूँ जैसा दिखता हूँ हाथ शर्मिला प्रेमी हैं तो कभी भी सबके सामने तो मैं स्वीकार नहीं करेगा । वो अकेले में ही सबसे बढिया बताता हूँ, करता है भले वो ऐसा आदमी लगता हूँ जो बस एक ही औरत के साथ रह सकता है । अगर असलियत में वो ऐसा नहीं है जब मेरे साथ था उस वक्त भी वो घर पर दूसरी लडकियों को लगता था । जरूरी नहीं कि अपने ही घर पर अपने दोस्तों के घर पर यहाँ बगल के छात्रावास में मुझे यकीन नहीं हो रहा है । हो गया तुम्हें क्या कह रही हूँ । मैं फौरन वहाँ से उठ गए और कमरे में चक्कर लगाने नहीं । असल में अब मैं छोडने लगी थी । मुझे मालूम था कि मिला और खडा रही हूँ और मेरा तालमेल भी सही नहीं है । मगर मेरी समझने की शक्ति अभी भी बरकरार थी तो भारत मुक्खा है । छह से सुबह की वो हर पल बनता जाता है की ठोस तुम्हारी आते हो ना भरे दिवसों के बीच मुझे झकझोर जाती हैं रखते हुए मांस के बीच तो भारत चेहरा एक सफेद का सपना है एक चलता हुआ आसमान है गोला हो मालूम पड रहा पर्वतों का तापमान है मैंने इसकी चमक को खुद में आत्मसात कर लिया है इसके थकते स्वतंत्र इसके करवाहट को आत्मसात किया है उन ढलते हुए कानों पर मौजूद करो ना की परत शिकन जिसके आंखे सूर्य भी हो रहा है अस्त मैं तुम्हारी सुगंध हमें ही होता रहता हूँ क्योंकि तुम्हारी सुगंधा ने मेरी हर समझ को धूमिल कर दिया है जो भी अपना अच्छा था मेरे शरीर भी लुट गया है उन धारदार हरियाणा जो भी मैं कभी भी गेट सकता हूँ नहीं अकेले पलों में जी रहा हूँ मेरे अंदर भी एक क्यूब बस रहा है झरने उछल और क्रंदन टूटी हुई कोनिया अब आसमान को उजाड रही है इन अनायास कम गांव में इन प्रकट आकांक्षाओं में सोलह लाल सकते बाहर शरीर और क्षितिज मेरा शरीर अब बस से गुलाबी मांस का लोथडा है । डर से जमता हुआ और खुशी से उडता हुआ मेरे ऊपर की ओर उठ रही ठोलिया फूल रही है तो भरे ही सांसों को पा रही है उस संयुक्त होने बंधक बना लिया है हर पांच में शरीर पे हर भाग में । जब तक तुम मेरे लिए जीवन से भी हो । मुझे मेरे अंदर एक कथित खालीपन का एहसास हो रहा था । नशा छाने लगा था । मैं वहाँ पर सोफे की ओर लौट नहीं हूँ क्योंकि मैं थोडा शांत होना चाहती थी । इसलिए पागल होने की बजाय मैं शांत थी और आलिया से पूछती रही तो नीचे जमीन पर लेटी हुई थी । वो एक खतरा है । अगर मैं तुम्हें ये बताओ कि वो अभी भी मुश्किल दिलचस्पी लेता है तो ये सुनकर हैरान मत हो जाना तो भारी अनुपस् थिति में अभी भी मुझे अपने घर पर बुलाता है तो मैं धोखा देने के लिए मैं माफी चाहती हूँ । मगर अक्सर मुझे ये लगता है कि अगर मैंने उसकी जरूरतों को पूरा नहीं किया तो वो मेरा भविष्य खराब कर सकता है और यही कारण है कि मैंने उसे छोड दिया था । मगर तुम्हारे साथ मुझे पूरा यकीन है कि तुम मुझे वापस सही रास्ते पतली होती हैं । हालांकि जब हम मिलते हैं तो वो तुम्हारे बारे में कोई बात नहीं करता है । और भी कुछ है तो मैं ऐसा क्यों लगता है कि आपने एक पल भी उसके साथ रहना पसंद करूंगी? क्यूँ पास? क्या विचार की हो तो ये हो ही नहीं सकता कि मैं कोई समझौता करूँ । मुझे अभी उसके साथ कुछ दिन ही हुए हैं और मुझे ऐसा लग रहा था कि मैंने अपना स्वर्ग पांच जाए । मेरा मन हो रहा है कि मैं भी उसे पूर्ण करूँ और उसके सारी खुशियां पर बात करूँ । ऐसा हरगिज व्यक्त करना नहीं हो । गुस्से में कोई भी कदम नहीं उठाना चाहिए । नशे में कभी प्रतिक्रिया मत देना हो । वैसे भी वो कल यहाँ नहीं रहेगा तो अपनी योजना तब बनाना जब तुम देखी नहीं हूँ ।

भाग - 8.3

मेरी मना स्थिति वैसे भी ठीक नहीं थी । मैं आप से और भी बताने के लिए कहती रही । मैं रोती ही चली जा रही थी । मैं बडबडाती रही । उसने मुझे कुछ और भी बातें बताई जो मुझे समझ में नहीं आई । अब मैं भी उसके साथ जमीन पर थी और मेरे पैर उसके पैरों के ऊपर थे । मैं और वह बातें करते रहे । हे भगवान्, जाने क्या क्या हम खिलखिलाते रहे थे । उसके बाद जो कुछ भी हुआ वो मेरी यात्रा स्तर से बाहर है । कितनी अच्छी बहुत डरावनी रात थी वो नील अगर तुम मेरे आस पास कहीं भी होते, उस रात तो शायद मैं तो मैं जान से मार डालती । शायद मैं ये सब बहुत खुशी खुशी करती । किसी पिशाच की तरह है । तुम्हारा सारा लौंग पी जाती । हम शर्मीले प्रेमी हो । हाँ बैठा हूँ । इस बात नहीं तो मेरा सारा मूड खराब कर दिया । नहीं मैं तुम्हारे साथ रह गई थी और मुझे अब ये समझ में आया कि क्यों शायद ही कभी तुमने मुझे छेडा जबकि मैं तुम्हारे दिख करीब थी । आलिया और दूसरी लडकियाँ तो भारी सत्रह को पूरा कर रहे हैं । भाड में जाओ हूँ । अगले दिन का इंतजार ज्यादा लम्बा नहीं था । उन पलों को छोडकर जब मैं कश्मीर तुम्हें और आकोश में थी, मैं धीमे धीमे गाना गा रहे थे और ईमानदारी से बताऊं तो ये टाइलर के उस क्रेजी कराने की तरह थी । मुझे याद नहीं है की मैंने कितनी दफा वो गाना बरतानी आवास में खाया था । ऍम कदम आदिवासी की तरह थे । वो तो ठीक से याद नहीं है । ये कैसे मैं गिर पडी थी । क्या मेरे पैर आपस में उलझ गए थे क्योंकि मेरे कदम नहीं मिल पाए थे । हमारे और मैंने पेचकस से पैरों को अलग किया था । बाद में उन्हें छिपना करने के लिए उसने उनके ऊपर तेल भी लगाया । उसके बाद मुझे नहीं । नहीं नहीं, मैं अपने पैरों के घावों की वजह से उठी थी जो गिरने से नहीं बल्कि पेचकस के नुकीली नोक के गहरे प्रभाव की वजह से हुए थे । मुझे तो शक हो रहा था कि मैं कभी गिरी भी दी । मेरे पेट बिल्कुल सही आकार में थी और या भी झट पर जब कहीं और फिर हम लेमन ग्रास सुनने लगे हो, मेरा सिर भारी हो रहा है । तुम्हें खाने में कुछ मिलाया था । क्या मुझे ऐसा लगता है तुम्हें उसमें कुछ न कुछ तो मिलाया था । आलिया ने हंसते हुए कहा तो मैं मेरे वहाँ पर ये खरोच दिखाई नहीं दे रही है क्या गौरी इसे बुरे सकते की तरह ही देखो । मुझे माफ कर दो मुझे तो मैं ये सब नहीं बताना चाहिए था । अब तुम होगी । तुमने मुझे ये सब नहीं बताया होता तो मैं तुमसे दोस्ती तोड देती हूँ तो कितने नहीं स्वार्थ लडकी हो । इतिश्री तुम से मिलकर बहुत खुश होगी । मैंने अगले दिन का इंतजार किया था कि कुछ और राज खोल सकें ऍम हरी काले राशियों को छुटने के लिए एक जगह चाहिए थी । मैंने उन्हें अपने हाथ में छुपाया था । करवाहट के पीछे टाल का सुरक्षित कॉफी ने मुझे थोडी ताज की थी । यदि मुझे आलिया के साथ बिताई हुई पिछली रात का आकलन करना होता तो मैं उसे बारह ऍम एक सर्वोत्तम हारया के लिए दस और दो अतिरिक्त रखने के लिए । इसलिए मैं बार बार जिद करते रही । मैं बच्चे की तरह बर्ताव करती रही । उसने मुझसे वादा किया कि मेरे साथ जिम में दाखिला लेने के बाद वो मुझे और भी बहुत कुछ बताया की तो ये दोनों ही बातें सुनकर बहुत खुश हूँ हूँ । मैं इस लडके से वशीभूत हो चुकी थी । तुमने मुझे कोई संदेश नहीं भेजा । मैंने भी तो मैं कोई संदेश नहीं भेजा तो मुझे नहीं मालूम कि तुमने मुझे संदेश नहीं भेजा था । शायद उनके जानते थे कि मैं इंडिया के साथ थी फिर भी मुझे हैरानी हो रही थी की तो मैं इस बात से कोई परेशानी नहीं थी कि मैं आलिया के साथ थी जो तुम्हारी पूर्व प्रेमिका थी और मैं जो तुम्हारी वर्तमान प्रेमिका हो उसके साथ समय बिता रही थी । मुझे अपने फोन के साथ खेलते देखकर शायद हरियाणा मेरा मन पढ लिया था तो ऐसा ही है । जब इस तरह की बात होती है तो वो सबसे कम साहसी लोगों में से वो सबसे कम उत्तर ताकि लोगों में से है वो तुम्हें इतनी जगह देगा जितने तुम्हें जरूरत भी नहीं होगी और ऐसा वो इसके लिए करता है क्योंकि इस जगह में उसे अपना प्यार मिलता है । वो सब करता है जो करना चाहता है या फिर शायद कोई और लडकी भी हो सकती हैं । ठीक है तो अभी से जल्दी से भरो मुझे इसकी जरूरत है । जब मैं मेरी मदद करने के लिए शुक्रिया । मुझे इसकी बहुत जरूरत थी । अब हम एक साथ जाएंगे । अब जब भी रहो मैंने कुछ भी नहीं किया है । क्या मैं तुम्हारे लिए थोडा सा पानी गरम करती हूँ या ऐसे भी चलेगा और चाॅस या फिर ये मतलब मुझे थोडा सा जेकब उठा । हेल्प कर तो अच्छा । आप देखो माइक्रोवेव की दायर होतो तख्तियां बनी है ना तो मैं वहाँ फ्रेंच प्लास्टिक हैं । शाम में इतिश्री भी हम से मिलने वाली थी । उसकी कोई बहन आई हुई थी मुझे नाम याद नहीं आ रहा हूँ मैं मेरा ख्याल है वो उसे हवाई अड्डे पर छोड कर वापस लौटते वक्त हमारे पास होने वाली थी । ये दूसरा मौका था जब मैं उसके बगैर किसी चीज में लिप्त हो रही थी । ये सारा रोमांच मेरे लिए बहुत नया था था । मैं तुम्हारे गैरमौजूदगी में अफसर तुम्हारे घर आते हैं तो मैंने ये बात उनसे कल भी कहीं थी और आज तो कह रही हूँ मैं नहीं जाती हूँ तो जब तुम अपने घर वापस होगी और मैं वहाँ नहीं मिलेगा तो तुम्हारे पास एक विकल्प होगा हूँ कि तुम मुझसे सीधे तौर पर पूछूँ क्या फिर मैं तुम्हें कोई सबूत जिसे तुम उसे दिखा सकूँ या फिर जो भी काम करना चाहो तो भारी मार्सिन है ये मैं तुम्हारे ऊपर छोडती हूँ । मुझे अभी भी लगता है कि उसे थोडी दिशा निर्देशन की जरूरत है और तुम उसे सही कर सकती हूँ । इस मामले को बडे ही ध्यान से सुलझाना होगा । ठीक है भूल जाऊँ, सब कुछ भूल जाओ । अब मेरी बात ध्यान से सुनो । दिल ने मुझसे कहा है वो भी मुझसे प्यार करता है । अब सुनो बाबू मेरे हर शब्द को बडे ध्यान से सुनो । बताओ हूँ बस बता दो सब कुछ अभी बता दूँ । कल के लिए इंतजार पद करूँ । मुझे सबको चांदा है अभी इसी वक्त अभी मतलब । अभी मेल ने मुझसे कहा है कि वह मुझ से अभी भी प्यार करते है । मैंने उसे भूतकाल में हुई हर घटना के लिए पूछा । मैंने उससे पूछा कि उसने मेरे साथ धोखा क्यों किया हूँ? वो तुम्हारे साथ क्यों रहने लगा? उसने मुझसे कहा कि उसे वैसे भी इसमें कुछ खास दिलचस्पी नहीं है । तुम्हारे और उसके बीच कोई संबंध नहीं है । और ये भी कि भूतकाल में उसने कभी मुझे धोखा नहीं था । मैं जानती थी कि वह झूठ बोल रहा है मगर मुझे नहीं मालूम कि जब उसने मेरे कानों को चूमा तो मैंने कैसे खुद को रोका । मैंने आत्मसमर्पण कर दिया । फिर अगले दिन मैंने देखा कि वो तुम्हारे साथ कितना सामान्य बर्ताव कर रहा है । इसके लिए मुझे थोडा अचीव और मैं ये सब बंद कर देना चाहती थी । अच्छा मैंने तुम्हारी मासूमियत को देखा तो मुझे अंदाजा हुआ हूँ इन सब में कुछ ना कुछ तो गडबडी है । बच्चे ही बात है । मुझे लगा कि मेरा तो बस इस्तेमाल हो रहा है और इसके पहले किस में बहुत तेज हो जाए । मैं चाहती हूँ तो मुझे नियंत्र ना । उसके साथ किसी भी तरह के संबंध नहीं रखना चाहती हूँ । सब खत्म हो गया है मगर तुम्हारे लिए मुझे लगता है अभी भी मौका बचा है । मैं समझ नहीं मैं उस से कुछ पूछना नहीं चाहिए तो इतने सारे कारण और बहाने कि राते का की मुझे कभी सच्चाई का पता भी नहीं चलेगा । हाँ हूँ मैं उसकी छान सरूट लेना चाहती हूँ क्योंकि मैं उससे बहुत प्यार करती हूँ । उसकी जान लेने के बाद में खुद को भी खत्म कर दूंगी । ऐसी जिंदगी का क्या फायदा? आर्या चुपचाप बैठे रही । वो नीचे जमीन को देखती रही । उसने एक बार भी अपना सिर्फ ऊपर नहीं उठाया । मैं उसको गौर से देखती रही । मुझे समझ नहीं आया कि उसके साथ क्या हो रहा है । फिर उस ने मेरा हाथ अपने हाथ को मिलेगा और मुझे कहा हूँ क्या सोच रही हो तो पहले तो मैं गई थी, तुमने अच्छा बात करना बंद कर दिया । नहीं इस बात पर सवाल ने तौर पर सोच कर कोई फायदा नहीं है । इतना आसान नहीं है । अगर मैं उसे कुछ कहूँ तो वो झूठ बोल देगा और मैं हमेशा के लिए उसे खोज तुम्हें फॅमिली है । अगर मैं उसे कहता हूँ तो उसके बाद भी बहुत तुम्हारे पास नहीं आएगा । मुझे कैसे पता चलेगा कि वह मुझे सच में प्यार करता है या नहीं । मेरा मतलब है अब पता करते को कुछ बाकी ही नहीं था । भगवान सब काम है क्या वो कभी तुम्हे छोड पाएगा? आर्या चुकी रही । मेरा नशा बढता ही जा रहा था । उस वक्त ऐसा लग रहा था । मालूम हारया को भी नहीं पता कि उसे क्या चाहिए । हालांकि मुझे ये बात अच्छी तरह से मालूम थी कि मुझे तुम उस प्रकार से चाहिए थे । इस प्रकार पहले तो भी चाहा था । उसके एक पांचो मुझे तो हमारे पास इन सवालों के साथ आने से रोक रही थी । वो ये फॅमिली यदि थोडा भी हुआ तो तुम मुझे छोड हो गए । मुझे बहुत भूख कर कदम रखें । आर्या ने मुझसे वादा किया की बहुत नहीं तरीके से इसे साबित करके दिखाएगी मैंने उसके पास ऍम ये सभी प्रश्न अनुत्तरित क्योंकि तीसरी वहाँ चुकी थी । नशा करने के लिए उसने मुझे बहुत टाटा फिर कहें कि उसने मेरे साथ झगडा कर लिया । फिर आ गया और मैंने उसे शांत क्या कोई बात नहीं है और वैसे भी अभी उसका मन ठीक नहीं है । कभी कभी चलता है तो भी ले ले । अगर मैंने ऐसा किया तो इसे कौन संभालेगा और वैसे इसके मन को क्या हो गया? कल तक तो ये बिल्कुल ठीक थी । हरियाणा फौरन बातचीत को बढा दी । मैं तो मैं बताती हूँ क्योंकि गौरी नील के बारे में कुछ कडवे सच सुनकर बिल्कुल परेशान हो गयी । वो इसके साथ धोखा कर रहा है, उसके साथ रहती है मगर वो इसकी अनुपस् थिति में मुझे वहाँ बुलाता है । क्या आप पास कर रही हो? तुम तो विश्वास करने लायक नहीं है । मैं उसे अच्छी तरह जानती हूँ । वो कभी ऐसा नहीं कर सकता हूँ । गौरी उससे पागलों की तरह प्यार करती है । हाँ अगर ये सच है तो इसका मतलब के नील एक पूरा लडका है । अगर हम तो भारत भरोसा क्यों करें है? मुझे यकीन है कि तुम ने इस बारे में गौरी से बात कर ली होगी । कल जब तुम खर्चा हो गई तो रेल के अलमारी के अन्दर वाले खाने में देखता हूँ । शराब की एक ऐसी ही बोतल रखती हूँ । अगले दिन तो वो नहीं मिलेगी क्योंकि हमने उसे साथ में खत्म करने की योजना बना रखी है । क्या आप बकवास है? यार? वो अरे शायद इसीलिए मैं ये सोच रही थी कि उसने तुम्हें अलग हो जाने के बाद भी अपना दोस्त क्यों बना रखा है और वो भी इतनी जल्दी जब गौरी उसके जीवन में आ चुकी थी । उसके बाद भी थोडा तो समय देता हूँ थी । मैं उसके बिना अच्छी नहीं सकती । मैंने कहा मगर क्या ये सब को जानने के बाद भी तुम उसके साथ रह सकती हूँ? मुझे नहीं पता मगर मैं उसे खोना नहीं चाहती है । तो हम दोनों मिलकर सोचते हैं कि अब आगे क्या करना चाहिए । ध्यान देने लायक बात ये हैं के तुम मुझे खोना नहीं चाहती है । उसे आर्या को फूलना होगा और उसके बाद तुम हमेशा खुश रहती होगी । ये सब तक गडबडझाला है या सही तो प्यार है । कोई भी प्रेम कहानी इतने साधारण नहीं होती हूँ तो चुकी हूँ और अब फिर भी मुस्कुरा रही हो क्योंकि कहीं ना कहीं मुझे ये यकीन है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा । मगर हर बार जब मैं ये सोचती हूँ कि वो भी आर्या के इतने करीब है तो मेरा बंद करता है की मैं उसका स्कूल करता हूँ । मैं ये भी जानती हूँ कि मैं उससे कुछ पूछता नहीं चाहती हूँ । मैं खाली हाथ रहता हूँ । मैं सब कुछ कह दूंगी । मैं सब कर बढ कर दूंगी फिर उसे छोड दूंगी । अगर मैं उससे न पूछूँ तो कौन सा तरीका निकालूं ऍन मुझे लगता है मैं मर जाऊंगी हूँ । कभी ऐसा नहीं कह रहा हूँ बिल्कुल सही भरने की कभी मत सोचना तो मैं बहादुर लडकी हूँ । शाम इतिश्री और मैं उसके घर के लिए वहाँ पे देखिए लेकिन मेरे पास एक बच्चा योजना है और यहाँ इसके पहले की हम यहाँ से जायेंगे । इस मामले पर तुम्हारा आखिरी निर्णय है । सुनो लडकियों, एक बात मैं बिल्कुल निश्चित तौर पर जानती हूँ जैसे कि मैं दो दिनों के लिए बाहर जा रही हूँ । अगर गौर ये एक दिन के लिए भी गायब हो जाए तो ऐसा हो सकता है कि वो हमेशा के लिए मेरे पास वापस आने की कोशिश करेंगे । ये मेरे हाथ में होगा कि मैं उनसे अपनाती होंगे । या नहीं । मैं भी इंसान अगर हम लडकिया है और मुझे नहीं पता कि भगवान ने हमें ऐसा क्यों बनाया है इसलिए हम दयालु और माफ कर देने वाली होती है । हम हमेशा सम्बन्धों को तोडने की बजाय उन्हें बनाए रखने का प्रयास करते हैं । मैं ये नहीं कह रही हूँ कि इस मामले में भी ऐसा ही होगा । मगर नील की एकमात्र परीक्षा तभी होगी जब गौरी उसकी आंखों से दूर हो । हम दोनों आर्या को बडे ध्यान से सुनते रहे । हम दोनों में से किसी ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं । उस की जरूरत ही नहीं थी । इस बारे में काफी बात कर चुके थे । काफी सुन चुके थे । अंततः हम और एक छल पडेगी । मेरा मतलब मेरे पुराने स्वर्ग से सुंदर घर से जैसे मैं उसके घर में घुस रही हूँ । मेरे अंदर एक वर्ष का प्रवास होने लगा । मैं बेहद खुश थी । उसमें एक अजीब सा परिवर्तन आ चुका था । नहीं थी । श्री के ऊपर कूद पडे । मुझे मालूम था कि मैं अंदर से बहुत दुखी हूँ । मगर फिर भी उसके उपर स्थिति में अचानक से मैं ठीक महसूस करने लगेंगे । उसने मुझसे बात नहीं की । वो मुझ से बस से तक कहती रही कि पिछले चौबीस घंटों में आर्या के साथ बिताए समय नहीं मुझे बट पास कर दिया है । ज्यादा उसके बारे में सोच और अखिल भूक नश्वर क्यों करती है? अखिल कॉलेज में भी उससे कोई बात क्यों नहीं करता है? तुम समझ रही हूँ मैं क्या कहना चाहती हूँ । आखिर इस पूरी धरती में तुम उस बात चालन से ही क्यों प्रभावित हो रही हूँ । उसने एक बार फिर ऐसा कुछ नहीं कहा जिससे कि मैं प्रभावित हो सकता हूँ । वो तो बिल्कुल उदासीन थी । मैं भी उसे बार बार और भी कुछ बताने की जिद करते नहीं तो तो ये चाहती है कि मैं उसके साथ घर पर सालों उसने बडे खुले भाव से ये स्वीकार किया है । तो इस तरह उसने कुछ भी गलत नहीं किया । मैं नहीं जानती थी मुझे क्या हो रहा था । मगर मैं एक और ज्वाइंट बनाने सही खुद को रोकना सके । मैं खुद को नील के बारे में सोचने से रोक नहीं पा रही थी । मैं अभी भी उससे प्यार करते थे । जो कुछ भी मैंने सुना था उसके बावजूद थी । मुझे एक बात याद है जो हरियाणा कहीं थी । उसने मुझसे कहा था कि अगर मैं नील को एक दिन के लिए भी अकेला छोड दूँ तो वो आर्या के पास वापस चला जाएगा । मगर मगर मैं उस पर विश्वास नहीं करना चाहते हैं । मैं जीवन के बेहद निर्णायक मोड पर खडी थी । मैं एक दिन के लिए सबसे दूर चली जाना चाहती थी । मैं ये जानना चाहती थी कि क्या तुम आर्या के पास वापस जा सकते हो । मैं ये जानना चाहती थी कि मैं अपने ऊपर तो थोडा तो नहीं रही हूँ । अच्छा जानना चाहते थे कि तुम एक शर्त पीले प्रेरित हो रही । सब कुछ छानना चाहती थी । मैं चौबीस घंटे में वापस आ जाउंगी ताकि पुलिस वालों को तो एफआईआर न दर्ज करने पडे और मेरा सिर्फ थोडा कम हो तो माँ की चिंता मत करना । मैं उसे कहते हैं कि मैं नील और कुछ अपने कॉलेज के दोस्तों के साथ बाहर घूमने जा रही हूँ । मेरे मन में जो चल रहा था वो किसी क्रांतिकारी विचार से कम नहीं था । कोई अठारह वर्ष का व्यक्ति ही उस तरह से सोच सकता था जैसे कि मैं सोच रही थी । इस पर जो भी कमी थी उसे नशे ने पूरा कर दिया था । मेरे प्रस्ताव पाॅल को बहुत झटका । मैंने उसे भी नशा करने को कहा, उससे बडा कर दिया । उसका तार का अभी भी वही था कि अगर वो ऐसा करेगी तो मुझे कौन संभालेगा । हाँ,

भाग - 9

वर्तमान दिन है आ रही है । मैं तो नहीं कभी माफ नहीं करता हूँ कि नहीं । बकार कहीं की तो मतलब आपको समझते क्या होगा? मैं कुछ दिनों के लिए तो भारत जिंदगी से बाहर क्या गई तो आगे बढ गए तो भी और कोई नहीं मिला तो मेरा ही प्रेमी होना चाहिए था । अपने पिछले छह महीने के हर पल मैंने उसके साथ बिताए थे । मैं उसका काम कभी नहीं भूल पा रही थी । उसके बगैर बिताई हर बात मेरे बस रोककर काटी है । उससे मैं उससे माफी मांगने और उसे अपनी जिंदगी में वापस ला दी गई थी । मगर वही तो नहीं तो सारी योजना ही छाप पट करती है । तो तो मेरी सिंदगी चौपट करती । उस कुछ तो बहुत खून करने का कृतम् करता हूँ । मैं भी चाहती थी सही नहीं होगा क्योंकि इससे नील को पाने के रास्ते बेरिल के बंद हो जाएंगे । मैं तो भी हर खुशी की ओर धकेलना चाहिए । नहीं मगर उसी वक्त देते श्री वहाँ गयी । वो तो भारी मसीहा बनकर आ गई । हाँ मानना जानते ही नहीं है अगर नहीं मेरा ना हो सका तो वो तो भार अभी नहीं हो पाएगा । अगर मैं नहीं जीत होंगी तो तुम भी रही जी पाओगी, आशा करती हूँ और यकीन भी करती हूँ । तुम लौटकर वापस नहीं आओगी कौन? तुम जहाँ कहीं भी हो मैं उम्मीद करती हूँ कि तुम ने अपने आप को खत्म कर लिया होगा । नील की अनुपस् थिति में मैंने घर में चुपके से घुसने की कोशिश की ताकि मैं तो अच्छी हूँ ताकि मैं तुम्हें ये दिखा सकूं कि तुम हार चुकी हूँ तो थे आपने सामदेव होता हुआ तीन की ताकि मैं ये देख सकूँ कि तुम अपने को जान से मार पहले की बात कर रही हूँ । मैंने हर क्षण का बहुत मसाला लिया । ये नील की ओर से कोई उपहार था ही नहीं । हम कितनी थी बोली तुम लोगों पर कितनी आसानी से विश्वास कर लेती हूँ । तुम किसी छोटे शहर की लडकी की तरह ही हूँ । बेवकूफ पुरानी फिल्में देख कर बडी हुई हूँ । खुद को एक सीधा समझते लडकियों वो चीज है तो तो मैं कमजोर पर आते हैं । मुझे मालूम भी नहीं हूँ । मैं तो बस तुम्हारे और तुम्हारे प्रेमी के बारे में बात थी और तुम फस गए हो तो उस की तरह मैंने तुमसे तुम्हारी मासूमियत तो छीन ली तो बहुत होली थी अनजान । यही कारण था कि तुम्हें नील को फोन करके कुछ भी पूछने के मत हूँ । शांति थी । अगर तुमने उसे फोन किया और अपना सारा जहर उसके ऊपर उगल दिया तो तुम शायद उसे हमेशा के लिए होता है । मगर ये भी हो सकता था मैं भी उसे हमेशा के लिए होते थे । ठीक है इससे मुझे कोई फर्क नहीं पडता हूँ । अभी भी जब ये चिट्ठी लिख रही हूँ तो मेरा मन हो रहा है कि मैं तुम्हें पर पास करता हूँ । तो भारत तो उस टाइम को बर्बाद करता हूँ । कितनी बार तुम्हारे खलाई मगर हमने कभी तो मैं अपनी नजरों से दूर नहीं होने दिया । उस कितनी बार छूट बोलना पडा । मैं हर बार छूट बोलती नहीं । तुमने मुझे क्या बना दिया है? नहीं है । मैं कभी ऐसी नहीं थी । मैं विश्वास, ईमानदार और सच बोलने वाली थी । बस तुम्हारे प्यार दिल की तो भी मेरे प्रेमी थी । तुम्हारे आस पास फावरे की तरह मंडराती रहती थी । मैं तुम्हारे साथ हर रोमांच का मजा लेना चाहती थी तो भरी आंखे देखकर मुझे कुछ होता था । मेरे कार्यों में तो भरी मुस्कुराहट मुझे और दीवाना बना देती थी । वन से मेरा धूम धूम खिल उठता था । मैं तो अपनी आंखे बंद कर लेती थी सिर्फ ये जानने के लिए की अब तुम मेरे विचारों में ही हूँ तो यहाँ के बढाने में सारा सा भी समय नहीं लगा हुआ हूँ । नहीं इसमें कोई लडकी से इसका लगाने में जरा भी समय नहीं लगा जिसे ये मालूम ही नहीं है कि ये उच्च कोटि की जिंदगी आखिर होती क्या है ज्यादा इसके बारे में सोचा नहीं । जब तुम इसके बारे में सोचते की स्थिति में हूँ तब इस पर विचार कर जब तुमने इसके बारे में सोच लिया है और अभी भी तुम्हारे मन में हम है तो सर अपने आस पास से हो । क्या आप गौरी तुम्हारे पास है? नहीं ना । क्या मैं तुम्हारे आस पास हूँ? नहीं ना । क्या तुम्हें ये अहसास हो रहा है कि इसके लिए तुम ही जिम्मेदार हो । आज को चेस परिस्थिति में है उसके लिए तुम जिम्मेदार हो तो तुमने मुझे पहले भी खो दिया क्योंकि तुम मुझसे अलग हो जाना चाहते थे क्योंकि मैं खुद को तुम्हारे ऊपर ठोक रही थी और फिर वो बच्चे ऍम देती हूँ तो भी इससे क्या मिलेगा? तुम ने पुलिस वाली को स्थान को ये बता दिया की मैं इसमें शामिल हूँ तो जो भी करना चाहूँ करो आप उसका तबादला करा देगा । घंटे होली तुम करते हो । अगर मैं चाहती तो इसे वक्त धान्या का तबादला करा सकती थी । उसकी हिम्मत कैसे हुई मुझसे सवाल पूछने की । उसे ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है तो मंत्री हूँ । मैं स्पष्ट भारी वजह से छुप रही । मुझे नहीं मालूम कि ये क्या कर रहे हैं जिसकी वजह से मैं जिस परिस्थिति में मैं प्रमाण में इतनी जोर सही ठीक ठीक कर ये कह रही हूँ कि कोर्इ तो मैं नरक नसीब हो । भगवान करे की तो मैं दर्द िट्टी पूरी तरह मिलेगी कि तुम जीना भूल जाऊँ । मैं तुम्हारे लिए बस घर तो मानती हूँ । साधारण दृष्टि से मुझे चैन नहीं मिलेगा मेरे । श्री मैं फिर कहती हूँ तुम जब तक क्योंकि हर तिन मार होगी उसका दूसरा स्वरूप होने के लिए तुम करोगी और पश्चाताप करोगी । पूरी तरह ठंडी पड गई थी । उसने नींद की गोलियाँ खा ली थी और दो ज्वाइंट भी पी चुकी थी । उसने अपनी सारी समझ खो दी थी । काफी देर रोल लेने के बाद वो अच्छा आपको लेने कहीं और आपने न खाने के तब भी लेट कहीं ऍम आपको पानी तो पोतियां अब आने पर नहीं लिखने लगे । उसकी सियाही उसके जख्मों से आ रहे थे, जो शरीर पर बनाए नहीं । कुछ ही मिनटों के बाद वो बेहोश हो गए । नहीं है बिलकुल दो मुझे फौरन फोन कर तो बारह फोन पहुंच से बाहर है । ये संदेश महज एक संदेश नहीं था । इस बात का संकेत थके पिछले चौबीस घंटों में जो कुछ भी हुआ वो नहीं होना चाहिए था । इसमें वो सब कुछ था जिसमें लोगों की अच्छाई के बारे में सारा स्पष्टीकरण मौजूद । इस संदेश गौरी को हिलाकर रख दिया और वस्तु तक उसे कमरे से बाहर ले आया । बहुत नहीं, बिस्तर पर एक बरी हुई । मुश्किल की भर्ती पडी थी । उसमें बहुत तेज बुखार था । उसने अपने चेहरे पर मुक्का मारा । वो हिलने की स्थिति में भी नहीं थी । उसने फौरन इतिश्री को फोन किया । बहुत ही तो हमारी ये दुनिया उथल पुथल हो गई । आखिर तुमने अपना फोन क्यों बंद कर लिया था? डील की तो हालत खराब है । सबसे तो गई है । हम सो नहीं पाए हैं । मैंने बेवकूफ लडकी की तरह उस पर नजर रखी । जैसा तू दे कहा तो बस तेरे बारे में ही चिंता कर रहा था । दूसरी ओर से कोई उत्तर नहीं । मैं इतिश्री अगले एक मिनट तक लगातार बोलती रही है । बातें उसे एहसास हुआ कि दूसरी ओर से पूर्ण का क्या है । उसमें दोबारा फोन मिलाया पर किसी ने खून नहीं है मैं दूसरी तरफ गौरी ने छत पर अपना सामान बाधा । उसने पूछताछ खिडकी पर फोन करके कहा थी । उसकी गाडी दस मिनट में होटल के दरवाजे पर लगती जाएंगे । अब जब मैं तुम्हारे पास वापस आ रही हूँ । मैं चाहती हूँ कि तुम ये छान हूँ । मेरे तो बहुत परेशान किया पहचानती हूँ । मैं ये भी जानती हूँ कि जिस परिस्थिति में मुझे और ज्यादा साहस दिखाना चाहिए था उससे भाग कर मैंने तो वहाँ पे वो कोर्ट बनाया हूँ । बैठ कर गई थी । मैंने आपका पर भरोसा किया । बहुत चाहता हॅालीडे मुझे सावधान किया था । एक बार तो मैं अच्छी तरह जानती हूँ कि वो तुम्हारे बारे में बहुत ज्यादा संवेदनशील और इसीलिए उसने तो बाहर ये गलत तस्वीर बनाने की कोशिश की । मैं तो ये विराम बस इसलिए लिया क्योंकि मेरे लिए ये सब को स्वीकार कर पाना बहुत मुश्किल हो रहा था उसका । हाँ मैंने मेरा दिमाग खराब कर दिया था । मैं हमसे सूत ही नहीं पा रही थी । मैं अभी तक नशे में हूँ । जब हम मिलेंगे तब हम इस पर और बात करेंगे । हमेशा याद था मैं काम से बहुत प्यार करती हूँ और कटे मैं बडी हो चुकी हूँ । मैं चाहती हूँ कि तुम भी मुझ से उतना ही प्यार करोड जितना मैं तुमसे करती हूँ । अच्छा है तुम कितने भी व्यस्त क्यों हो, उससे बात करना बंद मत करना । पर फिर से मैं तो हूँ । मैं मुझे बहुत प्यार करती हूँ । ॅ गौरी के उत्साह की कोई सीमा नहीं । उसने मिलके पसंदीदा कपडे पर हैं । उसमें नींद की सारी गोलियां ट्रक्स, बाहर फेंक जो अपने साथ लेकर आई थी, उस से किसी को भी अपनी योजना के बारे में नहीं बताया । अगर नील उसके साथ ईमानदार नहीं होता तो उसने अपनी जान ले ली होती है । जैसे ही वह बाहर आई, उसने हवा में घूमना शुरू कर दिया । मैं आजाद महसूस कर रही हूँ । मुझे लगता है मैंने जीवन में सब कुछ हासिल कर लिया है । जैसे उसने गाडी चालू की । वो इंडस्ट्री को दोबारा पूर्ण करना चाहती थी । मगर उसके फोन की बैटरी खत्म हो चुकी थी । वो अपना बुखार फूल चुकी थी और बीमारी के हर लक्षण उसके शादी से गायब हो जाते थे । मैं भी श्री से मुलाकात का इंतजार कर रहा था । उसके मेरे सेलफोन पर क्या उसकी आवाज के घबराहट थी । मगर उसका पहला वाकया था कि उसने गौरी से बात की है । उसे बस इतना ही कहा कि मैं उसका नंबर मिला रही थी और वो मिल गया । उसने बात की मगर उसके बाद उसका वहाँ से बाहर गया था । उस ने ये भी कहा कि गौरी ने उसे बताया कि वह वापस आ रही है तो मुझे यकीन नहीं हुआ । मैंने उसे बार बार पूछा और फिर जोर जोर से चीखने लगा । मैं अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा था । कुछ इतना शांत और अच्छा लग रहा था हूँ । मैं सब कुछ भूलकर मेरे फौरन ढांडिया को उसके बारे में बताया तो मुझे देख कर मुस्कुराई थे, मेरे गौरी को भी पूर्ण करने की कोशिश की मगर उसका फोन पहुंच से बाहर था । उसने पहले ये सब कुछ क्यों नहीं बताया? अब जब हमने इस मामले को खुद ही सुलझा लिया है, सब अपना अपना मुंह खोल रहे हैं । हमारे पूर्व प्रेमिका को क्या हुआ उसने अभी तक तो मैं फोन नहीं किया हूँ । डांडिया नेचर कर पूछा नहीं आप इस समय तक हमें मालूम नहीं था कि गौरी के गायब होने के पीछे आर्या और तीसरी का कहना नाता है । जो कुछ भी था मैं खुद से एक ही सवाल पूछता रहा क्यूँ ये पहले भी बहुत देर तक अनुसूची नहीं रहेगी क्योंकि हमें देश के घर जा रहे थे । तब लगभग एक दर्जन बार मिल के घर क्यों गए थे? इतिश्री बुरी तरह रोने लगी । उसके पूरी कहानी हमें सुनाती । इस संकट मेरे शरीर में एक सीख हूँ की थी तो मेरी जासूसी कर रही थी और ये सब तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया? तो मैंने ये सब होने ही ज्योतियाँ । अब वो कैसी है तो उसके बारे में अत्यंत चिंतित हूँ । अब तो कैसी है? बताओ मुझे इतनी बताओ । मैं इतिश्री को पकडकर उसे जब छोडना रहा है मगर उसने उसके बाद कुछ भी नहीं कहा । गौरी ने उसे बस इतना ही बताया था कि वो लोनावाला के किसी होटल में हैं और अब वो वापस आने की योजना बना रही है । अब गौरी को ढूंढने के लिए तीसरे भी हमारे साथ ही आ गई थी । धन्या ने मुझे आ गया से बस एक बार मिलने को कहा । वो भी तब जब उसके पास को छह से सूचना हो जो पुलिस वालों के काम आ सकें । हम दरवाजे पर दस्तक देते रहे अगर उससे दरवाजा नहीं खोल लूँ । धान्या की निगरानी में पुलिस वालों ने दरवाजे को तोड दिया । उसका कमरा धुएं से भरा हुआ था । हम उसका स्नानागार तक भी गए जहाँ पे आप ने खून के तालाब में लेती हुई थी । हमने फौरन उसे बात निकाला । मैंने उसे तौलिये में लपेटा । थान्या ने उसकी डब सोचे की तो मालूम पडा कि वो अभी भी जीवित है । हमने कुछ भी नहीं कहा और एंबुलेंस को उसे ले जाने दिया था । मैंने उसका लैप्टॉप, कागज, कलम और दूसरी चीजें तो उसकी जांच में काम आ सकती थी । सबको अपने कब से में ले लिया । उसके उनका को बडे ध्यान से देखा और उस पर जो लिखा था उसे पढ कर सुनाया । अब तस्वीर बिल्कुल साफ हो चुकी थी । मैं रिया को गाली देता था । उसके लिए मेरे मन में अब कोई सहानुभूति नहीं थी । फॅमिली को यह एहसास हुआ । ये सब उसकी कल्पना से भी बडा हो चुका था । वो जब से में हमारा इंतजार कर रही थी, माॅस्को देखकर वो बहरा कैसे यूज ने आ गया को ले जाते हुए देखा । वो फूट फूटकर होने लगी । वो बिल्कुल हिल चुकी थी । मैंने उसे दिलासा दिया । जब की मैं खुद भी इस वक्त सही मानसिक स्थिति में नहीं था । घर भी ऐसा लग रहा था कि मैं ही वो व्यक्ति हूँ जो परिस्थितियों से प्रभावित नहीं हुआ हूँ । धान्या ने सभी औपचारिकताएं पूरी विश्वास से बात की और हम लोनावाला के लिए निकल गए । रास्ते में इतिश्री सारी जानकारी देती रही । मैं उसे सुनता और गौरी के बारे में सोचता था । मैंने अपने माता पिता को फोन की और गौरी के माता पिता से भी बात कर उन्हें परोसा । मैं गौरी के बारे में सोचता रहा । पिछले चौबीस घंटों में वो मेरे लिए क्या हो गई थी, ये सब मेरा भगवान जानता था । मैं विश्वास नहीं कर पा रहा था कि मैं उसके कितने करीब आ चुका था । तो मेरे ही नहीं इन घंटों ने मेरी हर तरह से परीक्षा ले ली थी । ये घंटे अब विस्मरण लेंगे । हो गए थे, माफ करने लायक हूँ । हाँ, उसके मुस्कान मेरे दिमाग में बार बार आती नहीं । वो पहला दिन जब मुझे पुस्तकालय में मिली थी और हमारी बातचीत कॉलेज के कॅश चलती नहीं । जो खेल जो मेरे साथ बडे चाव से खेला करती थी तो मुझे जिस तरह से देखती थी और जो हम दोनों एक दूसरे के लिए महसूस कर सकते थे और जिस प्रकार वह मुझे मेरे नील कहकर पुकारती थी । मेरे आंसू रुक नहीं रहे थे । मैं बहुत जल्दबाजी में था । मैं एक बार फिर अपनी प्रेमिका को अपनी बाबू में थक लेना चाहता था की आशा कर रहा था कि वह मुझे गलत ना समझे । मैं बस ये ही मना रहा था कि काश उस ने इस बारे में मुझसे बात की होती है । अगर कोई बात नहीं जो हो गया हो गया । मुझे पक्का यकीन था कि ये हमें और भी करीब ले आएगा । धान्या रास्ते भर एडिशनल को डाट भी रही इतिश्री चुप चाप बैठी नहीं ।

भाग - 10

हूँ । गौरी किसी को भी अपने से आगे नहीं निकल नहीं देना चाहती थी । आज उसके लिए जीवन का सबसे खुशनुमा दिन होने वाला था । उसने रोज का गाना चला दिया था । उसकी डायरी आगे वाली सीट पर ही रखी हुई थी । उसने उसे अपने बस से मैं नहीं रखा था । उसे जहाँ भी थोडी ट्रैफिक में अपनी गाडी रोकनी पडती, वो उस मौके का फायदा उठाकर उसमें लिखते लग जाती है मैं तुम से बहुत प्यार करती हो । नहीं आशा करती हूँ कि तुम बस एक बार मुझे आप कर चुके हैं । खेलते हो फॅस बिल्कुल सही समय पर आया हूँ । फॅमिली लाॅन फर्स्ट टाइम ऍम साॅस माॅ डाॅ फिलिंग लो नहीं हूँ यहाॅं आई ऍम के कुछ सो ऍम प्लाॅट में आॅर्ट फॅस पेस मार्किट में आई कान्ट स्टॉप लबीब योग टॅबलेट जो लाइक हो । फॅमिली में फ्री पढी से स्क्रू प्लेस फॉर किट में आॅफ हो ऍम प्रयासों को रोकने नहीं देना चाहती है । मैं इस प्यार को खोना नहीं चाहती हूँ । मैं इस पल को रोकने नहीं देना चाहती हूँ । मैं बस आगे ही पढना चाहती हूँ क्योंकि अब मैंने तो पा लिया है । मेरे भी मुझे मालूम था कि तुम मेरे साथ विश्वास खाते कर रहे हैं । मुझे हमेशा विश्वास था मगर मैंने फिर भी ये क्या? क्योंकि अगर इसमें जरा सी भी सच्चाई होती तो मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती थी । मैं चाहती थी कि आगे या पीछे हट जाएगा क्योंकि वो एक मजबूत लडकी थी जो भारत में मेरी संस्कृति पर बात कर सकती थी । उस से लडना आसान नहीं था । इसलिए मैंने ये जरूरी कदम उठाया जिससे पुलिस वालों को उसकी कारस्तानियों का पता चले तो दुनिया के सामने उजागर हो जाए । मुझे मालूम था कि अगर मैं वहाँ होती तो शायद मैं ये सब तक करता हूँ । मैं शांति होगी । मैंने इतिश्री से तुम पर नजर रखने को भी कहा था या अभी पत्ते इतनी आसानी से जाता नहीं है । मैं कोई फूल नहीं करना चाहती थी, एक प्रतिशत ही नहीं । इसलिए उससे प्रतिशतकी भूल के लिए मैं तुम से माफी मांगना चाहती हूँ हूँ नहीं नहीं, नहीं नहीं भगवान आखिरी स्माॅल । मैंने पूछा एक हजार पता करने के लिए नीचे उतर गया । ऐसा लगता है यहाँ से थोडी दो कोई ट्रक पलट गया है । अब क्या है जब हम किसी चीज को जल्दी पाना चाहते हैं तो कोई न कोई उसमें ऑप्शन पैदा जरूर कर देता है । मेरा धैर्य जवाब दे रहा था । मैं चलता रहा है । धीरे धीरे मैंने अपनी गति तेज ऍम या मोटर साइकिल सब एक के पीछे एक सडक के किनारे खडी थी । मैं छलांग मार मार कर कदम रखता । रास्ते में मुझे लोगों की आवाज भी सुनाई दे रही थी । लोग सडक पर निकल आए थे । लगता है कोई बडी दुर्घटना हुई है । अरे काफी लोग मर गए श्रीवास्तवा शुभाष हुआ ट्रक और तीन कारों की टक्कर हुई है । भाई एक लडकी अकेली थी । उसकी गाडी तो बिल्कुल चिपक गई है और लडकी भी मैं वही तो क्या और उन लोगों से पूछा उन्होंने मुझे बताया । वे आगे तब देख कर आये हैं और ये दुर्घटना बहुत भयानक है । सब लोग मारे गए । मैं ये सुनकर दौडने लगा । मैं खुद से बातें करता रहा । नहीं नहीं गौर ये तुम नहीं हो नहीं हो सकती । तुम नहीं नहीं कौन है ये तो नहीं हो सकती है । नहीं नहीं बिल्कुल नहीं, तुम नहीं हो सकती हो । गौरी बुरी तरह हार गया था और दुर्घटना वाली जगह से महज छह मीटर की दूरी पर था । मेरी नजर कमजोर होने लगी थी क्योंकि मेरी आंखों में आंसू भर गया था । या तो मैं पक्का यकीन है कि उस गाडी में एक लडकी थी । मैंने एक अंजान व्यक्ति से पूछा है उससे बस हाँ अपना सर लगेगा । लगभग पचास मीटर की दूरी से उसमें कौन की काफी दिख की लगी थी । मैं जमीन पर गिर गया । मैं बिलकुल दुखी हो गया । ना सूरज अपनी किरणों से सीधे मेरी आंखों में छात्रा था मगर मेरे अंदर इसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही थी । मैं अपने आस पास बस खुसफुसाहट सुन पा रहा था । लगता है उसकी पत्नी थी वो उसी गाडी की ओर तो जा रहा था वो वो लडकी वो बहुत तेज संगीत सुनते हुए गाडी चला रही थी और गाना भी गा रही थी । मैंने उसे देखा था भाई उसे तो ट्रक ने सामने से टक्कर मारी थी और वो बस भगवान और नींद चिल्लाती रही । मैं तब तक होश में नहीं आया जब तक पुलिस वालों ने मुझे उठाकर वापस जब से मैं नहीं डालती । जब मैंने अपनी आंखें खोली उस वक्त मैं अस्पताल में था । गौरी को प्रिंट घोषित कर दिया गया था । मैं भी उसके साथ मर गया था । मेरी आत्मा उसके साथ मर चुकी थी इसीलिए मैं उस की तरफ देखता था । ऍम शायद तो आंखे खोलते हैं । उसके हाथ पकडे रहा । मालूम वो थे कि और कुछ गले लगा लेंगे । मैं शून्य पे जा चुका था । बिल्कुल शान । मुझे हितेश गई । उसके माता पिता के रोने की आवाज भी नहीं सुनाई दे रही हैं । मुझे नहीं मालूम क्या हो रहा था । उसके हाथ पकडकर रोकता था । मैं वहाँ से जाना नहीं चाहता था । मैं उससे बातें करता रहा नहीं, उसे बहुत तक बात की । मैंने उससे पूछा आपको खाने में क्या पसंद करेगी? कॉलेज से आने के बाद वो काफी थक गई होगी ना मैंने उसके लिए कुछ योजनाएं बनाई थी जो खडी पहले उसके जन्मदिन के लिए उपहार स्वरूप खरीदी थी । आपको मैंने उसकी कलाई पर पांच उसके चंद्र तीन की व्यवस्था करने वाले तल को मैंने फोन करके ये मालूम क्या इस सारे तैयार हो चुकी है या नहीं । मैं जानता हूँ कि छत्तीस अठारह बरस की हुई थी । तब मैं तुम्हारे लिए बहुत कुछ नहीं कर पाया था । मकर की आशा करता हूँ की ये सर प्राइस तुम्हें पसंद आएगा । मैं बीस पेश में नाराज नहीं हो रहा था । मैंने उससे ये वादा करने को कहा कि वो कभी भी इतने समय के लिए मुझे छोड कर नहीं चाहिए । मैंने उसे ये भी शिकायत की की छह तक मेरे पास नहीं थी तो मैंने उसे फोन किया था । मगर उसका फोन पहुंच से बाहर था । इसीलिए आप मैं उसे नया हूँ । एक टाइम नेटवर्क कनेक्शन के साथ मैं बोलता ही जा रहा था । वो उसको उठाई । उसने मुझसे वादा किया है तो बता हुआ ऐसा कभी नहीं करेगी ही तो भेज । जरा भी अंदाजा नहीं है कि जब मेरे पास रही थी तो मेरे ऊपर की आपको लग रही थी वो भी बहुत ही इतना ऍम तो उससे शांति पूछे । पक्का यकीन था कि तुम वापस जरूर उससे इश्वर पर पूरा विश्वास । इसलिए मुझे ये भी अतिन कि वो तो भी कुछ नहीं होने देगा । तो मेरी अच्छी फॅालो तुम तुम जानती हूँ । अब बहुत ही गंभीर हो चुका हूँ । तब तो मुझे बताया बगैर कहीं भी बाहर इधर उधर नहीं चल सकती हो । मैं भी चाहत बत्ती तो पिछले चौबीस घंटे में मैं कितना असहाय हो चुका था । इसमें बिल्कुल बुढा हो गया था हमारे सभी तो उसको बहुत बहुत शुक्रिया । उन्होंने तो ढूंढते वे दिन रात एक करती है खानियां हूँ हो टाइटर किसको गौरी तुम्हें धन्यवाद कह रही है तिथि किसी तरह तो देखो तो दोनों लडकी उन्हें मिलकर क्या आप कर दिया तो अगर अपन को अभी इसी वक्त बंद करो । तुम दोनों हो चुकी हूँ । छपकी तो कुछ ऐसा करती हूँ, बेहद दिल कमजोर हो जाता है । अब बहस सुकून से तुम्हारी पहुँच हो सकता हूँ तो तैयार आराम से सो सकता हूँ । ऍम कुछ बहुत दुख है तो मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि क्या हो गया है । उसे किसी भी चीज का हो रही है । वो अभी भी हमारी तरह कह रहे सकते हैं । मुँह से रोते हुए अभी भी शक की नहीं होगा कि ये क्या हो गया । अभी दो दिन पहले ही तो हम सब कितने खुश थे और कितने उत्साहित थे । अपनी जिंदगी को लेकर कितनी योजनाएं बना रहे थे और अब ये सिंदगी बहुत होती है । अभी तक ये समझ में नहीं आ रहा की सबसे खुशी किसको भी अगर कहीं खुशी है भी तो इसकी कोई गारंटी नहीं होती है कि वह हमेशा बनी रहेगी । भगवान का दुनिया में संतुलन बनाए रखना बिल्कुल ठीक है मगर के विश्वास नहीं होता । घर की कितनी आसानी से वो खुशी और लाभ किताब हमारे जीवन से काट देता है । जैसे ही आप थोडी सी खुशी महसूस करते लगते आसा जीवन को बस इस बात में निकल जाता है कि न जाने कब दुखों का पहाड आपके ऊपर टूट पडेगा । हम इसे करने का फल या कुछ और कह देते हैं । मगज के भातसा बचपन नहीं आती कि छक्का ही ऐसी लडकी ऑफिस में किसी का कोई लुक्स और नहीं की उसके साथ ऐसा होता है तो ये कौन सी बात होती है । ऐसे पहलू पे तो जिंदगी चुप चाप दरवाजे से पानी निकल जाती है । बॅास हो उम्मीद रखो कभी भी कुछ पूरा होता है तो उसके साथ कुछ न कुछ अच्छाई भी जरूर आती है कि सब सुनते में चित्ता और साल लगता है । कहते हैं ये उतना ही मुश्किल है भगवान अच्छी वन आपको बगैर कोई इशारा दिए आपसे आपकी संत की छीन लेता है । जब तक जीवन साथी एक पल में आपसे दूर चला जाता है वहाँ जहाँ से कभी वो लौटकर वापस नहीं आएगा । हट भरे लम्बी आपको एक सही पी जाते जाते तो मेरी ही ओर खडा था और इतिश्री दे देता ही नहीं हूँ । लगता है वो काफी देर तक इसी अवस्था में खडे थे । इसके बाद जो कुछ भी हुआ उसमें इन्सानियत की जरूरत थी । पालक को खाली करता था, व्यावसायिक कारणों से कोई और अब उस पर अपनी जगह बनाएगा । कागजों पर हस्ताक्षर शुरू होंगे तो लोग गौरी को एक शरीर बुलाना शुरू कर देंगे । आप बस अपनी असहनीय का दिखा सकते हैं । लोग आते रहे और जाते रहे । ऐसा ही चलता रहा हूँ । गौरी को तो अंदाजा ही नहीं था कि कितने सारे लोग उस से कितना प्यार करते हैं । हजारों लोग वहाँ आए थे कॉलेज से, गुवाहाटी के उसके स्कूल से, जिनमें उनके तो उसे खाना पहुंचाने वाले उसके दोस्त, हमारी कॉलोनी में रहने वाले लोग और भी बहुत सारे लोग आए थे । गौरी के होठों की लिपिस्टिक थोडी ढीली पड गई थी और उसका बेक अब उसके चेहरे के जख्मों भी फटने लगा था । इसलिए अब उसका उस को ज्यादा बंद हो गया था । मुझे लगता है वो अब जा चुकी थी । सब कुछ जा चुका था । अब मैं वास्तव दुनिया में वापस आ चुका था । बगैर किसी खूबसूरती के जो दुनिया होती है तो हम ने मुझे कसकर पकडे जाता था । पैसो जोर से थोडे लगा । मैं रोता ही जा रहा था और फिर तेज और भी थे । मैं लगातार टॉम और गौरी से बात करता हूँ । मेरा जवाब बस स्टॉप ही थी । उसने मुझे शांत करने का हर संभव प्रयास किया । पहले जीवन का ये पहला पडा था और ये काफी दिनों तक मेरे साथ था ।

भाग - 11

हूँ । कुछ ही दिनों के बाद मैंने अपनी आंख एक लडकी के बाहर निकाली । पिछले कुछ समय से मैंने ऐसा नहीं किया था । अब मैं ताड के पेडों से बात नहीं करता था । मैंने उनसे गौरी के साथ अपने जीवन को खुशियों से भर देने के लिए कहा था । उसने मुझे निराश किया । वो पूरी तरह विफल हो चुका था । मैं कहा था कि वो ताडका बेड मुझसे आंखें नहीं मिला पा रहा था । बिल्कुल लेती श्रेणी की तरह है । उन दोनों ने मुझे किसी ना किसी रूप में निराश किया था । सुकून दोनों नहीं दिया, ईश्वर ने भी और मैं फिर से एक छेद में था । मैंने गौरी के लिए नाश्ता बनाया और उसे थाली में डाला । सिर्फ एक बार मैंने सारे पढते हटाना हैं क्योंकि मैं नहीं चाहता था कि उनकी ज्यादा सेवी परछाई मेरे खूबसूरत और इसके चेहरे पर पढें । मैंने उसे नाश्ता खत्म करने के लिए मनाया लगता है । उसे भूख ज्यादा नहीं थी । उसने मुझसे कहा कि उसकी परीक्षा चल रही है इसलिए वो थोडी चिंतित हैं । मैंने उसे गले लगाया । पहले उसे उसके जन्मदिन की पार्टी के कार्यक्रम के बारे में बताया । दरवाजे है अगर पहले तो मैं उसे सुन नहीं पाया । मैं प्यार में खोया हुआ था । अगर तुम्हें दस मिनट तो दरवाजे के बाहर ही पिटाई होंगे वो जरूर कोई मेरा बहुत ही करीबी रहा होगा । आजकल कौन आपके लिए इतनी देर प्रतीक्षा करता है कोई भी नहीं करता हूँ । लोग आपको छोड कर चले जाते हैं । लेकिन मैंने पिछले कुछ दिनों में तुम्हें परेशान नहीं किया है । हाँ, ये गौरिका को सामान है तो उसकी गाडी से मिला है । मैं तुम्हें पैसे देने आई हूँ । नियमों के अनुसार मुझे सामान उसके माता पिता को दे देना चाहिए था । मगर मैंने उनको इसके बारे में कुछ भी नहीं बताया । अब तुम ये फैसला कर लोग क्या तुम अपने पास रख हो गई या फिर उन्हें देते हो गई थान्या आखिर ये मेरे साथ ही हुआ हूँ । आखिर मैंने क्या गलती की थी । वक्त सारे जख्म आभार देता है । जिंदगी आगे बढती रहती हैं तो खुद को इस तरह से दोषी मानकर प्रताडित नहीं कर सकती हूँ क्योंकि इससे गौरी को और भी दुःख होगा । इस बात को समझो की वो हमेशा तुम्हारे साथ रहेगी । अब वह तो भारत ही एक हिस्सा बन चुकी है इसलिए अब कर रहे हो उसके डायरी शायद तुम्हारी जान फिर से ले ले । माफी चाहती हूँ मगर मुझे उसे पढना पडा क्योंकि मुझे सुराग ढूंढ रहे थे । मैं सच आर्या को पकडना चाहती थी । गौरी ने लिखा है कि उसे माफ कर देना चाहिए आखिर वो भी तो एक इंसान है । अब क्योंकि यहाँ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है इसके लिए मैं तुम्हारे ऊपर छोडती हूँ सर पहले बहुत कुछ कर लिया अब तुम सुनाओ क्या कहना है ऐसे चुपचाप खडे बताऊँ करते हैं मुझ से बात करो । डेली मैं सब समझ पा रहा हूँ । काफी बात कर रहा हूँ । मेरा मतलब है खाता हूँ । मैं पास हो गया । मुझे पागल पंडित ट्रस्ट लिया है । क्या आपने तेल की धडकन को नियंत्रित कर पाता? हमारे हाथ में होता है ना? या फिर हम सब चाहे उसे चला यार रोक सकते हैं तो मेरे साथ जो कुछ भी हो रहा है उस पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है । जहाँ प्रकार की बात है अगर गौहरी चाहती है कि उसे माफ कर देना चाहिए तो ऐसा ही होगा । जो कुछ भी कौन ही दे फैसला किया है । सबसे पहले वही होगा । और हाँ एक बात और ठंड ॅ मैं जानता हूँ कि तुम्हे अपनी शादी की तैयारियों पर ध्यान देना है । बस ख्याल रखा हूँ । सब कुछ ठीक ठाक से हो जाए । बसु आएंगे हम शादी का कार्ड लेकर थान्या के भाव से ये बिल्कुल स्पष्ट हो गया । मुझे कितना बुरा लगता है वो एक बैठा की रात थी । वो अपने लेपटॉप पर कुछ बोलो चला रही थी । उसके बचपन की सारी यादें ताजा हो गई । सब कुछ उसकी आंखों के सामने था । लम्बा थे आपने कांपते हुए हाथों से वो इस ट्रेन को छू रही थी । किसी का दिल बिलकुल टूट चुका था । वो एकांतवास में चली गई थी । वो अपने घर से बाहर भी नहीं निकलते थे । थोडा तो इसके लिए क्योंकि वो खुद को गोलाकार मानते थे और उसे लगता था आपकी जो कुछ भी हुआ है वो उसे डाल सकती थी । पिछले पांच दिनों में उसके परिस्थिति और खराब हो गई थी तो किसी से भी बात नहीं कर रही थी । वो उन सारे वीडियो को काम से देख रही थी । कभी बैक बच्चे के तौर पर कौरे के साथ खेलती हुई नजर आती थी । तो अगले वीडियो में कॉलेज में घर अचानक एक वीडियो चलने लगा हूँ जो गौरी नहीं देश के लिए बनाया था । याद आ रही थी जब हम उच्चविद्यालय में पढते थे तब हम अपने प्यार के बारे में बात किया करते थे, मेरे पास नहीं होता था और हम सलमान खान के लिए पागल थी । बिल्कुल पागल । मैंने तो मैं मैंने प्यार किया और आगे फिल्म के पोस्टर उपहार में दिए थे । एक दिन मैं तुमसे जरूर मिलवा हूँ । ये मेरा वादा है और जब मैं और नील शादी कर लेंगे तो किसी दिन हम उसे अपने घर बुलाएंगे । शायद उस दिन सल्लू की जोडी तुम्हारे साथ बन जाए और सुनो जब तुम ले वीडियो देख रही होगी तो पीछे मुडकर देखता हूँ । मैं बिल्कुल तुम्हारे पीछे खडे हो । इतिश्री फौरन पीछे मुड गई । पीछे की दीवार पर उस की बडी सी तस्वीर लगी थी । उसमें वह मुस्कुराते हुए इतिश्री को देख रही थी । इन दोनों लडकियों के बीच की दूरी न कने थे । ऐसा लगता था मानो एक दूसरे के साथ छोडी हुई हूँ । इतने इतने दिन ऐसे ही काटे थे । उसके ही यादव में उसके गौरी की तस्वीरें अपने सोने के कमरे की दीवारों पर चिपका रखी थीं । उसने उसके इतने लगाने शुरू कर दिए थे । वो उसी तरह के कपडे भी पहनने लगी थी । बहुत सारे काम करने की शिकायत कभी गौरी उससे क्या करती थी । उसे करते कि नीचे कुछ वाइन्स भी मिले थे । उसने उन्हें फौरन निकाला और गुस्से में मसल दिया । वे उन्हें उस भयानक रात याद दिलाते थे । नीति श्री ने अपना आपा खो दिया था । उसने गुस्से में आर्या का नाम चलाना शुरू कर दिया । वो गुस्सा जो उसने आज से पहले कभी प्रकट नहीं होने दिया था । तब मेरी बहन को बता तो मैंने उसके चार ले ली । पहले तुमने उसकी मासूमियत को बात की कोशिश की । फिर तुमने उसे गंदी चीज की लत लगती है । छप्पन यहाँ से चार रही थी तो उसे बिल्कुल भी होश नहीं था । इस सब तुम्हारे ही कारण हुआ है कि आज आज वो मेरे साथ नहीं है तो नहीं । जीवन को शुरू होने के पहले ही खत्म कर दिया तो उस सकते को बार डाला जो सख्त बदलने की तैयारी कर रहा था । तुमने उस लडकी को माॅस् पडने वाली थी तो तुम हमको मॉल डाला तो बुझ के बार डाला तो मेरी आत्मा को बात किया तो मैं एक समूह की हत्या हो तो वही तो कपडे में भी जगह नहीं मिलनी चाहिए । मैं भी कितनी बेवकूफी थी । किस समझते ही पाई कि गौरी के साथ क्या हो सकता है । वो तो किसी भीषण अवसाद से ग्रस्त थी और उसे लग रहा था कि मैं तुम्हारे साथ खुश हूँ । आर्या को हवा में कालिया देने के बाद देती । श्री ने दौरे की तस्वीर अपनी हाथ में ले ली और उससे बातें करने लगी । दरवाजे की घंटे से उसका ध्यान भंग हुआ । उस पार्सल में दो कपडे थे जो गौरी नहीं उन दोनों के लिए भिजवाए थे और जिस पार्टी की रात में पहनने वाली थी इतिश्री पूरी दाद उस कपडे को पहनकर बैठी गई और फिर अगले दिन भी उसने वहीं कपडे पहने रहे । वो इस अकेले पर नकारात्मकता और एकांतवास के भाव से बाहर नहीं निकल पा रहे थे तो मुझे यहाँ के नंबर देखने के लिए क्यों छोड गई? मैं तुम्हारे साथ वहाँ क्यों नहीं हो सकती हूँ? जबकि मैं गाडियों की हर रे इसमें तुम्हारे साथ रही तो भरे हर रोमांच पे तो हमारे हर साहसिक कारनामे में मैं तुम्हारे साथ थी ना और फिर तो भारी सभी तो मेरी भी तो उस पर उन्होंने मुझे इस कॉलेज में अकेला छोड दिया है क्या तो भेजता रहता भी अंदाजा है और की बेटी लीजिए कोई भी क्लाॅज क्या कॉलेज में कोई दूसरा काम कर पाना कितना मुश्किल हो गया है क्या? तो ये अंदाजा है की मुझे उस खाली बेंच पर, कैंटीन में या फिर पुस्तकालय में अकेला बैठ तक कैसा लगता है? मैं तो वो ही सब मजबूरी में ही कर रही हूँ । चाहती हूँ ताकि तो भारी आत्मा को ठेस लक्ष्य तो हमेशा कहाँ करती थी की हमें वही करना चाहिए जो हम करना चाहते हैं । जिससे करने से हमें खुशी मिलती है । मैं अभी भी वह समझने की कोशिश कर रही हूँ । फिर उनका वो एकमात्र समय जो मुझे सबसे अच्छा लगता है वो तब होता है अपने ऊपर आकाश की ओर देखकर तुमसे बात करती हूँ वहाँ पर सारे सितारों में सबसे पसंदीदा सितारा तो भी हो । मैं तो उस पर अटक ही कहीं हूँ । इसके अलावा यहाँ कुछ भी अच्छा नहीं लगता है । गौर तो वापस आ हो शहर कृपा करके वापस आ जाओ मैं यहाँ बहुत तकलीफ हो गई । गौरी मैं मैं तो डील को ढूंढती फिर रही हूँ । उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा है । मैंने उसके बारे में कॉलेज, पुलिस, उसके परिवार चलो सबसे पूछा मुझे आश्चर्य हो रहा है, कोई भी उसके बारे में कुछ नहीं बताना चाह रहा है । इसका तो एक ही मतलब निकलता है कि कोई उसके बारे में मुझे कुछ भी बताना नहीं चाह रहा है । भला ऐसा कैसे हो सकता है कि नील के माता पिता को भी नहीं मालूम कि वो कहाँ है । उसके मालूम है कि वो एक बहुत ही अच्छा लडका है और इसीलिए उसके बारे में चाहने को उत्सुक । बस तो भारी लिए । बस तुम्हारी जीवन को अपने दिल में संजोये रखने के लिए एक दुर्घटना की वजह से तुम्हारे जिंदगी खत्म नहीं हो सकती । दिल तुम्हें वापस आना ही पडेगा । बेहतर होगा कि तुम जल्दी से बाहर आ जाओ । इस तरह से कहा है हो जाना ठीक बात नहीं । तुम डरकर भाव नहीं सकते हूँ । अगर मैं इसका डटकर सामना कर रही हूँ वो भी अकेले तो तुम ऐसा क्यों नहीं कर सकते हो? कम से कम गौरी के लिए ही सही तो मैं वापस आना चाहिए । वो तो कभी माफ नहीं करेगी । दी मेल मैं तुमसे कह रही हूँ तो भरे इस रिश्ते में प्रवेश करने से पहले वो मेरी समझे दी थी । मैं उसे बेहतर चलती हूँ और ऐसा करके तुम उसे और दुखी कर रहे हो । काफी तो तेल से क्यों नहीं कहती कि वह बस एक बार सामने आए । मुझे उसे तुम्हारे बारे में कुछ बताना है । वो सब कुछ जिसके बारे में उसे नहीं मालूम वो चीजें जो तुम हमेशा करना चाहती थी । वो सबको जिससे तो मैं बेहद प्यार था कौन? मैं तुम्हें ये भी बताना चाहती हूँ कि मैं वो सब करना चाहती हूँ जो कभी तुम करना चाहती थी जो तो मुझसे भी करवाना चाहती थी । मैं भेजते अंदर पैसा लेना चाहती हूँ और ही उसे पता है तो ये सब बडी आसानी से कर लेती हूँ । वैसे भी तुम्हारा एक हिस्सा तो मेरे अंदर ही बस्ता है । नाम मुझे तुम्हारी कमी खल रही है । मेरी जान मुझे तुम्हारी कमी बहुत महसूस हो रही है । जाने मंद इतिश्री यही सब बातें अपने आपसे तब तक दोहराती रही जब तक की वो थक कर सो नहीं । उसे अस्पताल से एक दिन पहले ही छुट्टी मिल गई थी । उसके बाद अभिताभ उसकी हालत के बारे में बता दिया गया था । मुझे भी आशा था की कोई भी वहाँ नहीं आया । आर्या बिल्कुल अकेली थी । उसका शरीर पीला पड चुका था । उसका ये दुर्बल रूप जरूरत से ज्यादा नशा और उसके शरीर को जो प्रताडना झेलनी पडी थी उसकी वजह से हो गया था । उसके फिर एक प्वाइंट भरी । उसके बाद आईने के सामने बैठ गई है और उसमें खुद से बात करना शुरू कर दिया । पहले तो मैं छोड कर बहुत बडे खलते की है । नहीं मैं चाहते थे कि तुम वापस हूँ । मैं चाहते थे कि तुम मुझसे इस बात के लिए माफी मांगी की मैं तुमसे जितना समय मांग रही थी तो मुझे ना मुझे दे नहीं पा रहे थे । मैं हमेशा यही सोचती रही ऍम शायद ऐसा करो के बगल में खडे थे । मैं तो अपने जीवन में फिर से पाना चाहती हूँ बहुत पूरी तरह से । अब तो भारत यहाँ कहीं भी नहीं है । क्या तुम फिर से मेरे पास वापस सांसद हूँ । मैं ये सच में चाहती हूँ । देखो अब मेरे पास आसपास भी कोई गई है । सब लोग मुझे छोड कर चले गए नहीं है और बस नए हूॅं रोड भी तैयार करो ही । इस तुम्हारी आत्मा को शांति हम भर गई हूँ । बस खतम शांति से क्यों नहीं कर पाई तो मैं इस तरह से बढने की क्या जरूरत थी तो सबकुछ अस्त व्यस्त खाॅ तो तो बाहर रह रहा ही । बेरा हो सका और पूछे इसी बात का सबसे ज्यादा ट्रस्ट था । वो लंबे लंबे कश लगाने लगीं । वो दोबारा आईने के पास वापस लौट आई हो । तब नहीं थी कौन है? हाँ एक बहुत तेज प्रहार के साथ उसने आएंगे को चकनाचूर कर दिया । ऐसा प्रहार वो कई बार करती रही । टोमॅटो कपडों को वह तोडती रही । कांच के टुकडे जमीन पर चारों तरफ फैल गए और रोती रही । चिल्लाती रही और फिर बेहोश हो गई । किसी ने मुझे फोन किया, मैंने फोन नहीं उठाया । जैसा कि मैंने पहले बताया था मुझे उससे बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं । नहीं । ऐसा नहीं था कि मैं ये नहीं चाहता था । ऐसा नहीं था कि मैं उसे माफ नहीं करना चाहता था । मैंने क्या कर दिया था? मगर ये माफी मैं आज तक पहुंचाना नहीं चाहता था । एक तरह से बहनों से शांति देती थी । मुझे नहीं मालूम कि मैं सही था या गलत । मगर उन परिस्थितियों में मैं जिस चीज से गुजर रहा था उसके हिसाब से मैं बहुत ज्यादा सही था । मेरे जख्म बढ रहे थे । उस वक्त मैं बिल्कुल अकेला छोड दिया गया था । तो मुझे मुझे के समय दिया था तो बिल्कुल स्पष्ट था । वो मुझे बहुत अच्छी तरह से जानता था । वो जानता था कि मैं इस बात में यकीन करता हूँ कि वक्त सारे रखना मार देता है । मेरे जत्था भर रहे थे या फिर भरने शुरू हो गए थे । जो भी हो वो हर पल मेरे साथ था । मेरे या अपने विचारों में यासीन जैसे रात कैसे होती गई? मैं अपनी दैनिक क्रिया के अनुसार बालकनी में बाहर आ गया । मैंने सितारों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया और गौरी से नमस्ते करता हूँ । अब मैं ताड के पेडों से बात करने की बजाय सितारों से बात करने लगा था । वो नहीं में कहीं थी । मुझे पक्का यकीन था । मेरे लिए राहत के एकाकार हो जाने का एक ही मतलब था कि मैं उसके साथ रहना चाहता था । मेरे लिए ब्रह्मांड के साथ एकाकार हो जाने का मतलब था कि मैं उसे बहुत चाहता था । सितारों से भरे उस आसमान ने मुझ पर ढेर सारा प्यार बरसाया था । शायद बेरी उम्मीद से भेज जाना क्योंकि ये गौरी की ओर से आया था । मेरे लिए सितारों के साथ होने वाली है । उस लंबी बात चीत का कुछ तो मतलब था मेरे लगे सितारों के साथ होने वाली उस लंबी बात चीत का कुछ तो मतलब था और मेरा साथ कभी नहीं छोडने की चाय यही उसका मकसद था । शायद किसी दिन मैं भी सास मान की गहराई में जाकर उससे मेरी जाऊंगा । मेरे ले के प्रमुख खान से एकाकार होने का मतलब था कि मैं हमेशा उसे ही चाहूंगा । हम मजाक करते थे । जोर जोर से हस्ते थे । काफी समय के बाद मैं इतना खुश था । वो अपने दोस्तों के पीछे छुट रही थी और कभी कभी तो वह पार्टियों के पीछे भी छुप चाहते थे । मुझे बात लोग से नफरत है मगर फिर अचानक वो बाहर निकल आती है । कौन ही तुम शराब भी नहीं पति हूँ । लुका छुपी के खेल में तुम हमेशा जीत चाहती हूँ । मगर इस बार मैं जीत गया हूँ क्योंकि पहले तो मैं एक बार फिर से क्या है? जाने भी तो नहीं । तुम कैसे जीत सकते हूँ । मैं तो तुम्हारी बैंगलोर थी जबकि तुम अपनी दाहिनी ओर देख रहे थे । मैंने गौर इसे खाना खाने के लिए कहा क्योंकि कल का दिन काफी लंबा होने वाला था । वो बहुत सिती है । वो मेरी बात सुनना ही नहीं चाहते थे तो कुछ और शरारत करने लगे । नहीं मैंने उसे वही छोड दिया । मैंने बादलों से कहा कि वह मेरे सामने से हट जाएं क्योंकि मैं वापस लौट कराऊंगा और अपनी गौरी से बात करूंगा । ऊपर हीरो के आसमान में मैं वापस अपने कमरे में गया और खत्म पडने लगा जो उसने होटल में मैं दिल्ली गए लिखे थे । वो मेरे लिए सबसे मुश्किल रात थी और साहब मुझे सब कुछ ऐसा लगा कि मैंने चीनी का कोई कारण ही नहीं की है । या यूं करूँ कि मैं बस गौरी के साथ ही जीवित था । मेरी छाती में सचमुच एक दर्द होने लगा तो मेरे दिल में भी चुप नहीं लगा था । मेरा दिल भारी होने लगा और मेरी आंख बंद होने लगी थी और बैठ कर भी क्या सकता था सिवाय तरफ में? ठीक नहीं । मैंने कौरे की सारी तस्वीरें आपने पलंग पर भी खेलते थे । हालांकि मुझे ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी तो वो तो हमेशा मेरे पास ही रहते थे । फिर भी मैंने उन्हें इस तरह से सजा दिया था । इसका कारण था की उन तस्वीरों से बचपन से लेकर अभी तक की उसकी सारे दसवी दी थी । गौरी बेड कितना बंद हो रहा है कि मैं अभी तुम्हें अपनी बाकू में हूँ । मैंने तो मैं कभी नहीं रोका । नहीं क्रिया मैं ठान ताज की रात मैं तुम्हें अपने ऊपर उठ लेना चाहता हूँ । सरूर ऍम तो भारी आवाज मेरे ऊपर चाहतो कर देती है तो मुझे पागल बनाते थी हो और तो मुझसे प्यार करते हूँ । उस पर उसे बहुत प्यार आता है तो मुझे जो एहसास देते हूँ मेरे लिए वही सबसे ज्यादा होती है । मेरी जान हाँ इतना खास है । उस रात गौरी ने एक पल के लिए भी मेरा हाथ नहीं छोडा था । मैं ज्यादा और हर दिन की तरह उसके लिए नाश्ता बनाया । मगर आज वो मुझे दिखाई देखते रहेंगे । मैंने खिडकी खोली तो देखा कि बाहर तेज धूप चमक रही थी तो मैं उससे केवल रात को ही मिल सकता था । मैं गया हूँ और उससे बात करने लगा । मैं यह कल्पना कर रहा था की वो भी मेरे साथ नाशं कर रही है । यही मैं पिछले एक हफ्ते से कर रहा था । कुछ ही मिनटों में उसका कमरा ठीक हो चुका था । उसकी तस्वीरें साफ हो चुकी थी तो सफाई को लेकर बहुत सजग थी । यही कारण था कि हम नहीं घर को पूरी तरह साफ कर दिया था । फ्रीज पर टंगे ऍम मेरी स्याही में उसके हाथ से लिखी हुई कागजों में बदल चुके थे । मौसम की भविष्यवाणी वहाँ दर्ज हो गए । जिम की फीस भरी जा चुकी थी । इसका मतलब मैं घर से बाहर निकला ना? इसका जवाब है नहीं । मैंने पिज्जा पहुंचाने वाले लडके के हाथों से नकद पैसे भिजवा दिए थे । ऍम अच्छा हो रहा है क्योंकि साथ में पिज्जा खाना हमारे तयशुदा कार्यक्रमों में से था । उसे गौरी अच्छी तरह याद नहीं है । मुझे देखकर वह थोडा भावुक हो गया था । ग्यारह से पहले उसने बस इतना ही कहा, सर करते हैं अपना ख्याल रखूं । असर हम मैडम को बहुत याद करते हैं । टॉम आया था उसे आना पडा । कोई सूचना नहीं कोई फोन नहीं तो भरा मेरा समय खत्म हो गया है । चलो खाना खाने चलते हैं । उसके पिता देख लिया और भाई की तरह सब कुछ एक झटके में समझ गया । ठीक है गौरी, तुम और मैं गाडी में घूमने चलेंगे और ये पैसा हम अपने साथ ले चलेंगे । मैं ये सुनकर बहुत खुश था । वो गाडी चलाते हुए बातें कर रहा था तो उस दिन शायद उसने मुझसे सबसे ज्यादा बात की थी । उसने रास्ते में गाडी रोक दी । हम दोनों बाहर आ गए । मुझे तो मैं ये देना था हूँ । उसने नजर टेढी कर करें । मुझसे कहा क्या है इसमें? मैंने त्वरित प्रक्रिया थी । तब कब से इन चीजों में विश्वास करते लगते हैं । कार से शांति मिलती है इसे अपने पास सबको । मैंने उसे कोई बहस नहीं इसलिए नहीं कि भगवान के साथ मेरा गुस्सा शांत हो चुका था । मगर इसलिए क्योंकि दोस्ती में कुछ चीजें हमेशा अटल रहती हैं । भरोसा, श्रद्धा और अच्छा तो इसलिए क्योंकि आपका दोस्त आपसे कहता है । आर्या ने एक हफ्ते के अंदर गौर से इस हद तक दोस्ती कैसे करनी होगी? इतने दिनों के बाद भी हम दोनों एक दूसरे को लेकर कितने संवेदनशील रहते हैं । अगर वो ढूंढ भी कर रही थी तो भी उसने एक बार भी इसके बारे में नहीं सोचता । प्रार्थना करना शुरू हुआ है । ध्यान लगाना शुरू करूँ तो मैं सारे जवाब खुद मिल जाएंगे । अब तो मैं ज्यादा बातें ब्रम्हाण्ड के साथ करने की जरूरत है । जितना चाहे इसका इस्तेमाल कर था । ये हमेशा याद रखना । भगवान अभी भी मौजूद है और अब गौरी भी एक है । तो हमने उंगली से उस पे की ओर इशारा किया और फिर उसने अपनी उंगली आसपान की ओर उठाती । मैं जानता हूँ मैंने कल रात ही उससे बात की थी तो बहुत खुशी खुशी मेरी कमी महसूस कर रही है । मैंने अपने सबसे अच्छे दोस्त को गले लगाते हुए कहा, उसने मुझे पीछे धकेल दिया । उसने मुझसे एक वादा करने को कहा । मैं जो भी करना चाह रहा था मैं उसे जरूर पार्ट दूंगा । हम नहीं थी । श्री के बारे में कोई बात नहीं की । मुझे लग रहा था कि शायद वो कुछ कहेगा मगर उसने भी कुछ नहीं कहा । इससे एक ही निष्कर्ष निकाला जा सकता था । वो उससे मिल चुका था और इसलिए उसे पता चल गया होगा कि मैं अभी तक उससे नाराज था । अब एक जाग्रत मस्तिष्क में तो और भी ज्यादा । फिर से दोस्ती की वो छोटी सी चीज बहुमत करना जो लोगों को पसंद आए मैंने उससे ज्यादा कर दिया । मेरे ये शाम बिल्कुल पिछली शाम की तरह थी । जैसे जैसे रात कहती होती गई मैं गौरी के साथ अपनी खूबसूरत दुनिया में खो गया । पिछली रात की तरह इस लाख की हम उसी तरह रोमानी लंबू में खोये थे । मुझे नहीं मालूम क्या हुआ था । मगर मैं एक झटके से जांच चुका था । मुझे थोडा अजीब सा महसूस हो रहा था । मैंने पहले कभी ऐसा अनुभव नहीं किया था । प्यार पाने और अपनी जान से प्यार जताना तो कभी झटके को निमंत्रण नहीं देता हूँ । मैंने बत्ती चालू की उस प्रार्थना के किताब को खोला और कुछ पडने लगा । ये पहले से तय नहीं था या फिर इस की जरूरत नहीं थी या फिर ये मेरा विकल्प नहीं था कि मैं प्रार्थना करते लगा था, स्वता नहीं हुआ था । इसमें कोई दिव्यशक्ति थी । मैंने ये महसूस किया था । इसमें इतनी ताकत थी कि ये मुझे उस किताब तक खींच लाई थी । मुझे आश्चर्य हुआ क्यों? मगर धीरे धीरे ये मेरे मन में एक घर बनाने लगा था । मुझे नहीं लगता कि मैं शारीरिक रूप से गौरी की ओर आकर्षित हो रहा था या फिर मेरी वासना हूँ । मेरे प्यार पर हावी हो रही थी मगर फिर भी इस बार मुझे ऐसा लग रहा था कि जो मैं कर रहा था वो ठीक नहीं था । मैंने पर आपने कहा था शुरू करते नहीं । मेरे कॉलेज से कहा कि उसके लिए मेरा प्यार बिल्कुल पवित्रा था जिसपर वासना के लिए कोई जगह नहीं । मुझे यकीन नहीं हो रहा था की मुझे शारीरिक रूप से उसकी कमी महसूस हो रही थी । उसके बेटे जवाब मिल गए थे । मैं बिलकुल विकसित हो रहा था । मुझे मन की शांति चाहिए । इस वक्त ये सब का अलग था । मुझे यह तय करना था कि मैं अपनी जिंदगी में चाहता हूँ

भाग - 12

अच्छा मैं बस अड्डे पर बैठा हुआ था । मैं लोगों को चलते हुए, खरीददारी करते हुए, बातें करते हुए और वो सब करते हुए देख रहा था । जो भी देखा जा सकता था, जो पुणे से बिल्कुल अलग था । ये मेरे लिए किसी खोज से भी पडा था । मालूम मुझे ये एहसास ही नहीं था कि मेरा देश मुझे क्या क्या दिखा सकता है । मेरा उद्देश्य मुझे यहाँ लेकर आया था । हालांकि मैं अपनी आखिरी मंजिल मैक्लॉडगंज से अभी भी तीन किलोमीटर था । मैं धर्मशाला में था । मुझे वहाँ तक पहुंचने में पांच दिन लगे थे । ऐसा नहीं था कि उन पांच दिनों में मेरे जीवन में कोई दिन फिर परिवर्तन आ गया था और मैं हिमाचल छुट्टियाँ मनाने गया था । अपना अंदाजा तो लगा ही सकता हूँ कि मेरा उद्देश्य कुछ अलग ही था । इससे भी महत्वपूर्ण वो था जो पांच दिन पहले उस रात पुणे से निकलने से पहले मेरे साथ हुआ था । मैं पुणे से हमेशा के लिए निकल गया था । गुलमोहर और अशोका से देवघर और सहयात्री पर्वत श्रृंखला सितौला था । श्रृंखला करते ये परिवर्तन किसी के लिए भी आसान नहीं होता है । मेरे लिए और कोई विकल्प नहीं रह गया था । मेरे अंदर सहत भरता जा रहा था । मुझे कुछ हो ही नहीं रहा था । मेरा मन दूसरी हो चुका था । मैं हर वक्त उसे बस उसे ही देख रहा था । वो भी मेरे लिए किसी वस्तु की तरह होती जा रही थी । ऐसी वस्तु जिसे मैं अपने मन की मासी से इस्तेमाल कर सकता था । ऐसी वस्तु जिसे मैं सहानुभूति से देखता था और इन सब से भी अधिक ऐसी वस्तु जिससे मैं अपना क्रोध शांत क्या करता था? अच्छा मेरे लिए ये बदलाव बहुत जरूरी हो गया था । ये बदलाव करने से पहले मेरे पास एक विकल्प था समर्पण, हार मान लेना । क्या कह रहा था मैं और हाँ, ये मुझे चिढा भी रहा था । जब मैं धर्मशाला के रास्ते पर था और कुछ ही मेडल दूरी पर था तो मैंने अपने आप को साथ वाले व्यक्ति से कुछ पूछने से रोक नहीं पाया । मुझे वो एक बहुत बृक्ष हो लगा और वह वही था । जब मैंने उसे ध्यान से देखा तो एक बार जो तय हो गई कि वह एक समय था महाशय मैं हार मानना चाहता हूँ । मैं परिस्थितियों के आगे समर्पण करना चाहता हूँ । मेरे जीवन में कोई उम्मीद, कोई आकांक्षा, कोई खुशी नहीं बची है । मैंने अपना जीवन दो हफ्ते पहले खो दिया है । पहले अपनी सारी कहानी उसे पांच मिनट के अन्दर सुनाती हूँ । मैं इतने दिनों से इससे बाहर आने का इंतजार कर रहा था तो मेरी ओर देखकर मुस्कुराया । उसने मुझे आशीर्वाद दिया और कहा हार चाहूँगा और समर्पण कर रहे हैं । इन सब को दे दो । मैं परिवर्तित करो । लोगों को देना शुरू करूँ । उनके चेहरे पर खुशी को देखो । प्रकृति को देना शुरू करूँगा और प्रमाण की खुशी होती हूँ । ईश्वर तुम्हारा भला करें । हम बस स्टॉप पर उतरें । मैंने उनका पीछा किया, वो किया और उसने मुझसे पूछा तुम यहाँ पर सारे जवाब फुंडे आए हो । एक बार जब मैं तुम्हें बता दूंगा तो तुम यहाँ सब कुछ मालूम है । मुझे कल मंदिर के पास हो । उसके बाद तो चला गया और मैं बस स्टॉप पर वापस लौट आया । वो मंदिर मैक्लॉडगंज था । मैं फोन भूत की और ऍम को फोन किया । वो फूट फूटकर रोने लगा । बहुत ज्यादा ही अच्छी और चाचा जी को भी हर दिन फोन कर लेना । हम सब तुम से बहुत प्यार करते हैं और सुनाओ मैं भी श्री के संपर्क में नहीं हूँ । मुझे मालूम है इससे उससे कोई फर्क नहीं पडता । मगर वो तुम्हारे बारे में ही पूछती रहती है । उसने मुझे कौन की सारी रिकॉर्डिंग दी है? क्या कह रहा है तो हम तो मुझे बस रुला रहा है । बहुत दुख होता है । मैं गौर से आगे नहीं पढ पा रहा हूँ । काश मैं को माफ कर पाता । मैं उसके साथ इतनी बता मेसी करने के लिए खुद को गुनहगार मानता हूँ । मैं बहुत चलकर तुमसे मिलने का बस एक बार पूछे । मेरा जवाब मिल जाए । हमने थोडी देर और बात की और उसके बाद मैंने फोन रख दिया । मैं मैक्लॉडगंज के लिए आखिरी बस पतला हालापुर धौलाधार श्रृंखला के पहाडियों में बसा मैक्लॉडगंज जिसके पीछे बहुत उनकी चोट किया है । कांगडा घाटे भी खुबसूरत तिब्बती परंपरा की एक बेदारी जगह दृष्यता में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटकों की भरमार होती है । मैं इसे देखकर वशीभूत हो चुका था । मैंने पहले कुछ दिन वहाँ पे अलग अलग मठों की यात्रा की और सबको ढूंढने की कोशिश करता रहा । मैं नहीं आप का शुभ गलत हंग या दलाई लामा मंदिर में काफी समय बिताया । मेरा उद्देश्य बडा ही साधारण था । मैं अपने अंदर मौजूद हर किस्म के शैतानी ताकत से छुटकारा पाना चाहता था और मैं अध्यात्म को समझना चाहता था । यहाँ सब कुछ कितना शाम और आवेदन लग रहा था । ये जगह मुझे पूर्वोत्तर की याद दिला रही थी, जहाँ मेरा घर भी हैं । वहाँ कई दिन को जाने के बाद मुझे अपनी आवाज सुनाई थी । मैं बौद्ध पाठ्यक्रम में शामिल हो गया । मैं एक संत से मिला । उनका नाम था जिनको वो बहुत ही प्रतिभाशाली विद्वान थी और उन की हर बात का कहना मतलब होता था । हरमन भावना और कर्म के बारे में काफी तेज कर पाते करते रहे । डाॅ । मैंने दो पाठ्यक्रमों में हिस्सा लग गया था । मुझे ये एहसास हुआ कि बहुत धर्म एक धर्म से ज्यादा एक दर्शनशास्त्र हैं । ये जीवन जीने का एक तरीका है । मुझे ये पसंद आने लगा था । एक दिन जब मैं जो उनको से बात कर रहा था तब मैंने उन्हें इतिश्री के प्रति अपने गुस्से के बारे में बताया । उन्होंने मुझे गुस्से के बारे में एक सूरत कहानी सुनाई जिसे मैं कभी नहीं भूल पाता । एक औरत थी जो बहुत अमिताभ के नाम के उच्चारण का पार्ट करती थी मगर वो बहुत ही कठोर थी । वो नमो अमिताभ था के नाम का उच्चारण दिन में तीन बार करती थी । हालांकि वो ये काम पिछले दस सालों से भी ज्यादा समय से करती आ रही थी । फिर भी वह बुरी थी और लोगों पर हर वक्त चिल्लाती रहती थी । आपने प्रार्थना वो अगर बत्ती जलाकर शुरू करती थी और फिर वो एक छोटा सा घंटा बजाया करती थी । एक तो जो उसे सबक सिखाना चाहता था, उसके दरवाजे पर उसी वक्त आया जब अपनी प्रार्थना शुरू करने वाली थी और आकर चिल्लाया कुमारी यूएन कुमारी ऍम अब क्योंकि ये उसके प्रार्थना का समय था इस की वो बहुत छिड गई मगर उसने अपने आप से कहा मुझे अपने गुस्से से लडा है इसलिए मैं इसे अनसुना कर दूंगी । और फिर बोलना मूंग अमिताभ था । नमो अमिताभ था । लंबू अमिताभ था शक्ति नहीं मगर वो आदमी भी उसका राम चिल्लाता रहा । इससे वो और भी ज्यादा चिल्लाने लगी । धीरे धीरे उसके लिए की असर हो गया और उसने मन में सोचा की क्या वो अपनी प्रार्थना को थोडी देर के लिए रोक कर उस आदमी से बात करते हैं लेकिन फिर भी वो नमो अमिताभ था । नमो अमिताभ था नमो अमिताभ था जागती रही है । बाहर खडे उस व्यक्ति ने ये सुन लिया था और वो भी उसका नाम चिल्लाता रहा कुमारी नो एंड कुमारी नाॅन जब उस औरत से रहा नहीं गया तो वो उठी और मुख्य दरवाजे पर आई और उसने चिल्लाकर कहा तो मैं ऐसा बताओ करने की क्या जरूरत है? मैं आपकी प्राप्त कर रही हूँ और मेरा नाम लेकर बार बार चिल्ला रहे हो तो व्यक्ति मुस्कुराया और उसने कहा मैंने तो तुम्हारा नाम से दस पारलिया और तुम इतनी जल्दी गुस्से में आ गए । अमिताभ बुद्धा का राम तुम पिछले दस वर्षों से ले रही हो तो ज्यादा सोचो उसे तुम पर कितना गुस्सा आता होगा । ये कहानी सुन कर मैं रोमांचित हो रहा था । कितना साधारण था फिर भी उसका मतलब कितना कहना था? शिक्षण का मतलब भी तो यही था जो मैंने स्कूल में पढा था और जो मैंने कॉलेज में पढा था वो मुझे नौकरी दिला सकते थे । जो भी बहुत याद समझ रहा था, मुझे सफल बना सकते थे । मगर इन सब के बाहर की पढाई का भी अपना महत्व होता है । वे महत्व जिसे मैं आज से पहले नहीं जानता था, वहाँ के पार्ट पर ही विलक्षण थे । जो कुछ भी मुझे सिखाया गया वह बहुत ही प्रतिभाशाली था । मेरे बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी । मैं जानता था कि रास्ते में अच्छा नहीं भी आएंगे । ध्यान भंग भी होगा मगर फिर भी मैं आगे बढता रहा हूँ । यह उतना आसान नहीं था जितना लग रहा था । तो इस प्रमाण में कुछ शक्ति तो है और मैंने उन्हें मानना शुरू कर दिया था । ये शक्तियां आप को चंदा करती है मगर एक बार फिर मैं आपको बता दूँ । ऐसा नहीं होता कि आपने बात शुरू की और उसने अपना काम शुरू कर दिया । ये तभी काम करती है जब आप खुद ठीक होना चाहते हूँ । इसीलिए ये इतना आसान नहीं है जितना आसान लगता है । मजेदार बात ये है कि जब हम टूट चुके होते हैं और हम ये भूल जाते हैं की दुनिया में अभी भी ठीक करने वाली शक्तियां मौजूद हैं और यही वह समय जब संभाल अपना काम शुरू करता है । मैं उस से लगातार संपर्क में था । जैसे जैसे मैं नजदीक आता गया मुझे अन्य बौद्ध संतों से मिलने का मौका मिला । इन हरयाली में इन पर्वतों में चांद के निकट सितारों के निकट ऍम तो इसका मतलब है कि आपने ठीक हो रहा था । अगले कुछ दिनों में मैं किताबें पढने में दिलचस्पी लेने लगा । उनके पास ही का भूतपूर्व पुस्तकालय था । मैं उसे बहुत प्रभावित हुआ । उनके पास हर उस विषय की किताब थी जिसके बारे में हम बस कल्पना करते हैं, किताबें पढने से आपकी चेतना में जो शांति आती है वह अभूतपूर्व है । ऐसे आप ध्यान होते हैं । आप शांतचित्त होते हैं और भी बहुत कुछ होता है आपके साथ? यदि मैं यही कहूँ कि मैं खुद एक आध्यात्मिक गुरु बनता जा रहा था तो मेरी मूर्खता होगी । हालांकि लोगों की पहली नजर में ऐसा ही लगेगा । मगर मेरा विश्वास करेंगे । मैं उससे कोसों दूर था । बस एक बात थी कि मेरे पास एक दृढ इच्छा शक्ति थी । मैं प्रक्रिया के एक बहुत महीन स्वरूप में था । मैं इसमें ड्रम चुका था । जब मैं कोई किताब पढ लेता था तो मैं थोडा काम भी करता था । जैसे पुस्तकालय की सफाई करना, उस जगह पर झाडू पोछा लगाना इत्यादि प्रार था । वहाँ पर एक नित्यकर्म था, रात होने पर मैं सितारों को देखता रहेगा और मैं आपको पूरे विश्वास के साथ बता सकता हूँ कि गौरी अब और भेज ज्यादा खुश थी । ये मुझे जहाँ कहीं भी ले जा रहा था, इसमें कौरी का एक बहुत बडा हाथ था । उसने मुझे दोबारा सांस लेने की शक्ति दी थी । उसने मुझे डर से लडना सिखाया था तो मैं अपने आप को उस स्वरूप में डाल रहा था जिसमें वह मुझे देखना चाहती थी । मैंने उससे बात की, हाथ हिलाकर उसका अभिभादन किया और वापस अपने कमरे में लौट गया । मैंने यहाँ जो कुछ भी सीखा उससे मुझे अपने आप को इस प्रमाण से एक आध्यात्मिक स्तर पर जो ना आ गया था तो एक तरह से ये ब्रह्मांड के साथ एकाकार होने जैसा था । गौरी के साथ एकाकार होने चाहता हूँ क्योंकि वो भी संभाल थी । अब उससे बातचीत करते वक्त मैं ज्यादा सहज रहता था । यही कारण है कि पिछले तीस तीनों से मैं नहीं एक बार फिर उसके बारे में बात नहीं की थी । अब वो मुझ से जोड चुकी थी । हमारी बात अब तुमसे होती थी । वो भी बहुत खुश थी । वो भी आज सात लग रही थी । मैं ये आसपान में देख सकता था । सितारे मुझे देखकर टीम से बातें थे । मालूम अब वही वो सीतारा होगा । मेरे लिए अब उस सितारे को गिराने की कोई जरूरत नहीं थी । हो जाती थी मुझे वैसे ही पसंद थी । तीस दिन पहले मैंने उससे अपने साथ रहने को कहा था और अब वो मेरे साथ थी । हमारे बीच की दूरी कम हो चुकी थी । वो मेरे दिल में रहती थी । वो हमेशा ही मेरा प्याज रहेगी । पिछले तीस दिनों से मैं नहीं घर पर किसी से बात नहीं की थी । मगर वे सब मेरे मन में बसते थे । मेरे पास मेरे जीवन के हर व्यक्ति के लिए एक प्रार्थना थी । इसलिए मैंने सबसे एक एक करके बात करने का फैसला किया । ठीक है, संक्षेप में मैं परिस्थितियों को समझने लगा था । मैं ये समझने लगा था कि दर्द के बावजूद खुशी कैसे पाई जा सकती है और ये भी कि अच्छे कर्म करने का प्रयास कैसे किया जाता है । मैं ये नहीं कहूंगा की मैं जाकर के अस्तर पर पहुंच गया था मगर फिर भी मैंने कुछ दूरी तो तय कर ली थी । आज जब मैं सबसे बात करूंगा तो मैं और भी संयमित और अलग अलग दूंगा । मेरे पिताजी को मुझसे एक बेटे की आवाज सुनाई देगी । मेरी माँ को, एक अच्छे बेटे की, टॉम को एक अच्छे खास दोस्त की और भगवान को एक विश्वास पात्र की आवाज सुनाई देगी । मैं जैसे ही रोनबो तक पहुंचा मेरे हाथ पैर कांपने लगे हैं । मैं घबरा गया । मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है? मुझे लगा शायद मैंने जो कुछ भी सीखा है वह सब शर्ट था । अगर मैंने शांति का अनुभव कर लिया है तो ये छोटी छोटी खुशियां मुझ पर असर नहीं कर सकती है । इतना तो बिल्कुल भी नहीं की मैं भावनाओं में बह असम मैं जल्दी से भागकर मंदिर में लौट आया । मेरे संत गुरु बस मुस्कुरा रहे थे और उन्होंने मुझे कुछ भी नहीं पूछा । मैंने भी उन्हें कुछ नहीं बताया । मैं उन्हें कैसे बताता हूँ की मुझे ये लग रहा है कि मैं विफल हो गया हूँ । मैं उन्हें ये कैसे बताया था कि मैं अपने आप को सफल तभी मान पाता हूँ जब मैं उनके या उस मंदिर के आस पास होता हूँ । मैं उन्हें कैसे बताता की शायद मैंने उन्हें निराश किया है । एक ओर जहां ये सवाल मुझे भेज रहे थे वहीं दूसरी ओर मैं उनसे बेईमान भी नहीं कर सकता था । मैंने उनसे इसके बारे में अगले दिन बात करने की सोची । उस रात में सोने की बहुत कोशिश करता रहा मगर मुश्किल से मैं दो घंटे ही सूप आया था । अगले सुबह जब मैं उठा तो मैंने देखा की एक चिट्ठी मेरे पास रखी हुई है । उसने मुझे जो सिखाया वह जीवन में मैं कभी नहीं भूलूंगा । बहुत धर्म नहीं बताता है । ज्ञान का विकास प्रेम से होना चाहिए । एक छोड पर तुम एक कोमल हिरदे वाले बोर हो सकते हो तो दूसरे छोर पर तुम भावना हीन होकर ज्ञान प्राप्त कर सकते हो । बौद्ध धर्म में इन दोनों के बीच का रास्ता आपका आता है । सबसे बडा ज्ञान तो ये देख पाना है कि असलियत में हर प्रतिभाशली अधूरा है, क्षणिक है और किसी भी खास वस्तु से जुडा हुआ नहीं है । ज्ञान वो नहीं होता है जो हमें बताया जाए । हम उस पर विश्वास कर ली । बल्कि वह तो सत्य और वास्तविकता को समझने और परखने का नाम हैं । ज्ञान के लिए एक स्वतंत्र विषय मिस्टर और समावेशी मस्तिष्क की जरूरत होती है । बहुत खतरनाक की रात साहस खैर होता और नमिता मानती है इसलिए धैर्यवान बनाऊँ, सुनियोजित बनो, स्वतंत्र बनो, बाकी सब खुदबखुद तुम्हारे पास चला आएगा । और हाँ ये कभी ना भूलना की जो तुम सीख रहे हो वो तुम्हारा ही एक महान है । अपने जीवन के हर अनुभव में किसी ना किसी बोर्ड पर उसका प्रकटीकरण जरूरी होगा । बस लकी रहा हूँ । अब वापस आ जाओ जहाँ तुम्हें होना चाहिए । और हाँ, अंत में देना बंद कर तो जुनको । मैं उसे लेकर बाहर आ गया । मैंने लोगों से उनको के बारे में पूछा । किसी को कुछ भी नहीं पता था । कुछ नहीं जानता था कि मेरे अंदर और भी जिज्ञासा जकी है । इसीलिए मैं मंदिर गया और उस संत से मिला जो हमारे साथ प्रार्थना स्तर पर बैठा करते थे । उन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने हमेशा मुझे अकेला ही देखा है । उन्होंने मुझे अकेला ही प्रार्थना करते हुए देखा है । इसलिए जो उनको नाम का कोई व्यक्ति नहीं है । हाँ, कोई भी व्यक्ति रही था । मैंने ऊपर आसमान की ओर देखा और कहा गौरी, मैं तब तक हार नहीं मानूंगा जब तक तुम हार नहीं मानी । मैं हमेशा ही चलता जाऊंगा । धन्यवाद शुरू । मैं इस बात में बहुत विश्वास करता हूँ कि जब जीवन आपको दर्द देता है कम या ज्यादा तो साथ ही साथ वो आपको उसे बर्दाश्त करने की शक्ति भी देता है । विकल्प हमेशा हमारे अंदर ही होता है । या तो हम एडी चोटी का जोर लगती क्या समर्पण करते हैं? कुछ लोग समर्पण करते थे, हैं । कुछ अपने दोस्तो, परिवारजनों से ही बात करते हैं और कुछ लोग इसे अनदेखा करते थे । अगर मुझे अपने बारे में बात करनी हो तो मैं इन में से किसी भी परिस्थिति में नहीं आता । मैंने अपनी हर पीडा का बहादुरी से सामना किया । क्या ये मुझे विलक्षण बना देता है? नहीं क्योंकि वो व्यक्ति अपनी पीडा को अनदेखा कर देते हैं । उन के दो पहलु होते हैं । पहला जो पीडा को सहते रहते हैं और उसके परिणाम से भयभीत रहते हैं । किसी तरह से ऐसे लोग भी होते हैं जो उसे इसलिए अनदेखा कर देते हैं क्योंकि भी इसे इस लायक नहीं समझते हैं कि उस पर ध्यान दिया जाएगा । वे उसका सामना कर पाते हैं और उस पर विजय पाते हैं । मानो वे मानसिक और भावनात्मक रूप से बहुत मजबूत है । मेरा लक्ष्य ये नहीं था दर्द बर्दाश्त करना नहीं बल्कि और भी अधिक मजबूत होना । मानसिक और भावनात्मक तौर पर ।

भाग - 13.1

अपनी पढाई के लिए हिमाचल प्रदेश के बातों से निकले हुए हैं । मुझे लगभग दो वर्ष हो चुके थे मगर एक भी साला ऐसा नहीं था । मैंने मैक्लॉडगंज के मंदिर हम नहीं किया था । पिछले दो अवसरों पर तो मेरे साथ मेरी पूरी मंडली थी जो मेरी इस यात्रा का हिस्सा बनी थी । सबसे पहले इसमें जैदी शामिल हुआ था । इसके बाद हर क्लास में मुझे कुछ बेहतरीन दोस्त उपहार स्वरूप मिलते रहे तो हम हमेशा मेरा खास दोस्त बना रहा और छेदी ने इस तकलीफ को पूरा किया । कॉलेज में आप कई जरूर हूँ और परिकल्पनाओं के आधार पर दोस्त बनाते हैं । इनमें से कुछ हैं । जब हम एक ही शहर से आते हैं, जितना छोटा शहर, उतनी ही गहरी दोस्ती । विद्यालय में हमने सवाल अंक अर्जित किए जिसकी वजह से हमें एक ही महाविद्यालय में दाखिला मिला । हमें की कक्षा में पढते हैं और सिगरेट, शराब, लडकियाँ और पागलपन में भी हमारी दूसरी एक जैसे ही है । हमारी जिंदगी के शौक भी एक जैसे ही है । संगीत, कला, साहित्य, घूमना फिरना इत्यादि । हम सबके पास टूटा हुआ दिल, पीडा, दुख और अनंत था है । दूसरे साल से की गई मेरी सारी दोस्ती उपर्युक्त बिंदुओं से प्रेरित है । मगर एक छोटा सा समूह था जिसने मुझे अपनी ओर खींच लिया, जिसकी वजह यात्रा और मेरे दूसरे शौक थे । भारत की राजधानी में रहने की वजह से आपके पास भारत के हर कोने में भ्रमण करने के साधन मौजूद रहते हैं । इन सारी जगह में हिमालय भले ही कितना दूर प्रतीत होता हूँ, मगर तो आपके बिल्कुल पकल में है । वो कंप्यूटर प्रयोगशाला थी । आज मैं अपना दिन व्यतीत कर रहा था । ये लडकियों के छात्रावास के बगल में था । अविश्वसनीय मगर सकते कुछ लडकों ने तो इस पाठ्यक्रम में बस इसीलिए दाखिला लिया था कहाँ कि वे इत्र की खुशबू ले सकें और मौका मिलने पर थोडी सी ताकझांक भी कर सके । कॉलेज में हर चीज को संभव मान लेना चाहिए । मैं अपने विश्व में बिल्कुल तल्लीन था । परिसर में चहल पहल पडती जा रही थी । सब उस आने वाले वार्षिकोत्सव की वजह से था, जो बेस फरवरी को मनाया जाने वाला था । हमारे इंजीनियरिंग कॉलेज का सालाना चलता था, जब मेरे पास दौडता हुआ आया । बहुत तेजी से मुझे प्रयोगशाला से बाहर खींच कर ले गया । क्या हुआ, ऐसे क्यों उठा लाया तो मुझे क्या तुम्हें पता हैं? इस साल हमारे वार्षिकोत्सव में एक आकर्षण का भाग है । हो गया है । नील तुम समिति के सदस्य हैं और मैं ये सवाल इसलिए तुम से पूछ रहा हूँ ताकि तुम मुझे इसका जवाब तो आए । तुम्हें यहाँ मौजूद हर व्यक्ति से ज्यादा पता है तो तो पूरे खबरें हो । हाँ हाँ मुझे मालूम है कि इस बार अलग अलग कॉलेज से मिस इंडिया के प्रतिभागी यहाँ रैंपवॉक करेंगी । इससे हमारे डीसीई को अलग पहचान तो मिलना जरूरी है । भाई मीडिया से प्रसारित करने वाला है और क्या जानकारी चाहिए तो मैं क्या हो? काॅस्ट पार किसी को पटा लेता हूँ । गौरी बहुत खुश हो जाएगी । अगर तो ऐसा कर सकता हूँ । फॅमिली ने अपनी आखिर रहते हुए मुझे वो बहुत दिखाया जो कि वह हर तीन महीने में दिखाता रहता है और हर बार की तरह मैं वहाँ से चला है । वार्षिक उत्सव बस दो दिन दूर था । कई कलाकारों से हमारा कॉलेज परिसर भर गया था । लग रहा था मानो वेंबले स्टेडियम में ऐरोस्मिथ के कार्यक्रम की तैयारी चल रही है । अभ्यास अपने पूरे शबाब पर थे और हर जगह दिखाई दे रहे थे । मैं नाटशाला के डस्टी बने एक पेज पर बैठ गया और गौर से इस चहल पहल को देखने लगा । इतनी दूर से मैं बस के देख पा रहा था कि हर कोई कुछ ना कुछ कर रहा है । मेरे सिवाय सब बच्चे ऐसा नहीं था । मैंने बस थोडा सा विराम दिया था । मैं अपने जूनियर्स को बता रहा था कि मेहमानों का स्वागत कैसे करना है । मगर फिर मुझे लगा कि वे खुद सक्षम हैं । उन्होंने अभ्यास के दौरान ही उनसे दोस्ती कर ली थी । मैंने थोडे से निर्देशन के अलावा कुछ भी नहीं किया । सीनियर होने के नाते अच्छा इन सब मजेदार क्रियाकलापों के बीच में एक लडकी मुझे बडे गौर से देख रही थी । मैंने तीसरी नजर से उसे देख लिया था । मुझे ऐसा लगा कि उसकी टांगे जेदी की लंबाई से ज्यादा लंबी थी । फिर मैंने सीधे संपर्क के लिए अपनी आंखें उठाई । उसके बाद उसकी कमर तक आ रहे थे । वो निश्चित ही कोई कलाकार नहीं होगी । मैंने उसे पहले कभी नहीं देखा था । वो क्लाउडिया शिफर जैसी दिख रही थी, जब वो अपने मॉडलिंग के चरम पर थी । इसके पहले की मैं कुछ और देखता था । उसने एक चमकदार मुस्कान बिखेर दी और फिर गायब हो गई । डॉम किसी भी वक्त मेरे पास आ सकता था । मैं उसकी प्रतीक्षा कर रहा था । हर वर्ष महोत्सव के समय वो मुझसे मिलने जरूर आता था और मेरे सबसे प्यारे दोस्त की तरह उसने बिल्कुल सही समय पर प्रवेश किया क्योंकि मैं सोने ही वाला था । मैं अभी भी उसी बेंच पर बैठा हुआ था । सूरज अपनी फिर नहीं, सीधे मेरी आंखों में भी तरह था और दूसरी तरफ मोडने में मुझे आलस महसूस हो रहा था । फरवरी की एक ठन्डे दोपहर में दिल्ली में सूरज किसे पसंद नहीं होता? नील मुझे एक बात बताओ मैं जब भी आता हूँ तो तुम मुझे इसी बेंच पर बैठे हुए क्यों मिलते हूँ काम और मैं बहुत देर तक एक दूसरे के गले लगे रहे हैं । जब भी हम काफी दिनों के बाद मिलते तो हमारा साथ ऐसा ही होता था के सालों से चला आ रहा था । अब तीनों की ये दूरी काफी बडी हो चुकी थी । वो मुझसे हमेशा पूछता रहता था की मैं उन्हें वापस क्यों नहीं लौटा? हिमाचल से लौटने के बाद मैंने दोबारा पुणे एक बार फिर क्यों नहीं किया? मैं हर उस चीज से क्यों भाग आया तो मुझे घरे की याद दिलाते नहीं । मेरे लिए ये एक बेहद जटिल प्रश्न हूँ । ये सत्ते रही है कि इसका मेरे पास कोई जवाब नहीं था । क्या फेस मैंने इस की कोशिश नहीं की थी, खासकर टॉम के लिए जो की मेरी रग रग से वाकिफ था । मगर गए जवाब दे पाना उतना ही आसान नहीं था । याद रखें कि मैं कोई कमजोर व्यक्ति नहीं था । नहीं, मैं उन लोगों में से खा जो अपने तरफ से भाग चाहते हैं । मैं मजबूत आदमी, जो दुनिया का सामना करना सीख रहा है, मेरे लिए ये मापदंड तय हो चुका है । मगर ऐसा हमेशा से नहीं था । इस यात्रा के दौरान मैं गोला बन चुका था और बात नहीं । जब मेरा उत्थान हुआ, मेरे लिए उस जगह पर वापस जाना या उन लोगों से दोबारा मिलने के लिए बहुत देर हो चुकी थी । इसीलिए मुझे हमेशा यही लगता था कि यदि मैं पुणे वापस गया तो मैं स्वार्थीपन चाहूँगा । क्योंकि मैं उस वक्त नहीं गया जब मुझे जाना चाहिए था और अब ये सब यांत्रिक हो चुका था । जहाँ तक गौरी की बात है, वो एक सितारे की तरह हमेशा मेरे साथ रहती थी, जिसे बैठ किसी भी जगह से आसमान में देख सकता था । इसी समझ पाना इतना आसान नहीं है और ये काफी दार्शनिक है । यही कारण है कि मैं उनको ये सब समझा नहीं पाया । टॉम चेरी और मैं अगले दो दिन साथ में बिताए । मैं चेरी के साथ अपनी दोस्ती को और प्रगाढ होता हुआ महसूस कर सकता था । इस बीच मैंने उस लडकी को भी ढूंढने की कोशिश की मगर वो मुझे नहीं मिली । परिसर में बहुत ही ज्यादा लोग थे जिन्होंने उसे पूरी तरह से भर दिया था और दूसरी बात ये थी की मुझे नहीं पता था कि वो किस समूह का हिस्सा है और आखिर में ये है कि हम इन दोनों परिसर में खाना न के बराबर खाते थे । वहाँ तो हम बस मस्ती करने चाहते थे । हमें इसकी कभी खल रही थी । ईमानदारी से कहूं तो मैंने इस विषय पर ज्यादा ध्यान भी नहीं दिया था । वो मेरे मन में काफी तेज तक नहीं मगर इतना भी नहीं कि मेरी खुशी के पलों पर हावी हो सके । तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू हो चुका था । हमें पता था कि हर साल की तरह इस साल भी ये धुंआधार होने वाला है । इस समय कॉलेज के विद्यार्थी बिल्कुल पागल हो जाते हैं । हर किसी के अंदर एक प्रतिभा होती है जो इस वक्त निखर कर सामने आती है । दोनों के बीच का प्यार अलग परवान चढता है । अंतर कॉलेज संबंध स्थापित होते हैं । संबंध विच्छेद की जगह नए संबंध बनते हैं । कुछ टूटते भी हैं । आखिरी दिन थोडा शांत और सबसे ज्यादा असाधारण था । आखिरी कार्यक्रम देशभर के प्रतिष्ठित नरसंडा प्रतिभागियों द्वारा किया जाने वाला रैंप हुवा था की होश उडा देने वाला था । सभी परम सुंदर गया । एक ही मंच पर उन्होंने तापमान बढा दिया था । दर्शक बादल हो रहे थे वो मैंने अपनी लडकी को देखा आपने? लडकी मतलब वो लडकी जो दो दिन पहले मेरे दिल में थोडी देर के लिए ठहर गई थी । मैं उससे अपनी आगे नहीं हटा सका । हाँ उसने तो पता नहीं चला होगा कि मैं उसे ही नहीं आ रहा था । पर फिर मैं उस पर फिदा हो गया था । उसे कुछ भी मालूम नहीं था । वो स्टोरी मंच की ऊंचाई और फ्लाइट लाइट से पडने वाली नहीं उसकी और मेरी नसों को अलग कर रही थी । सब अपने काम में ध्यान मतलब थे । दर्शक उनका उत्साह बढा रहे थे, सीख रहे थे और नाच रहे थे । मैं बस देखता ही रहा । नए वशीभूत हो चुका था । खैर कोई गौरी की तरह कैसे दिख सकती थी ये कैसे संभव था? दोस्ती का नियम जब कोई शंका हूँ तो आपने सबसे अच्छे दोस्त से पूछूं । टॉम इधर उधर देखना बंद कर दूँ उसके बारे में तुम्हारा क्या ख्याल है । मैंने उससे पूछा और मेरी उंगलियां बयासी उस की ओर इशारा कर रही थी । वो अपनी कुर्सी में ही चला गया और थोडी देर में वहाँ से उठ और मंच के और भी नजदीक चला गया । हूॅं इसका चेहरा ऍम मिलता है मैंने इसे देखा है शायद ये उसकी कोई बहन हो जिससे तुम कभी नहीं मिली हूँ । हो सकता है हूँ मैं उस से मिलना चाहता हूँ । ये तुम्हारा कॉलेज है और वैसे भी तुम समिति के सदस्यों, तुम्हारे लिए उसके बारे में पता करना मुश्किल नहीं होगा । जरूरी थोडी देर बाद अपनी कुर्सी पर लौट वो काफी देर से गया हुआ था । उसने रहस्यमई अंदाज में मुझे अपनी और खींचा और मैंने टॉम का हाथ पकड लिया । थोडी देर में हम नाटशाला के अंदर थे । उसने मेरी ओर देखा और मुझसे पूछा क्या कर उसके पास कौरी जैसी दिखने वाली लडकी इस लडकी के बारे में जानकारी हो तो मैं क्या करुंगा? उसे उसने ये बात बहुत गंभीरता से कहीं । मानो उसके पास कोई ऐसी सूचना हो जो हमें तब तक कर देगा । फॅमिली हमें इसी के बारे में बात कर रहे थे और तुम किसी सीआईए एजेंट की तरफ तारित हो गए । अब मैं चोपा तुम्हें बताने जा रहा हूँ । वैसे तो वह बेहद होती हैं इसलिए परिसर में किसी के पास ये जानकारी नहीं होगी । जेरी अब बता दो यार उसने उसे आदेश दिया वो तीस भी है । पुणे के तंत्र चिकित्सा कॉलेज से पढाई कर रही हैं । ज्यादा सटीक कहूँ तो डी । वाई । पी डेंटल कॉलेज पुणे । उस ने हमें बताया मैं तब था तब पता नहीं मुझे झटका लगा था या फिर झटके से भी कुछ था । इसीलिए मैं खामोश हो गए कि दुनिया जो किस्मत से चलती है और इसके बारे में मैंने जो कुछ भी सीखा समझा है, उसका सबसे बेहतरीन उदाहरण था । किसी से कभी भी, कहीं भी और कुछ भी हो सकता है । जब आप न्यूनतम की उम्मीद करते हैं, उसी वक्त कुछ उम्मीद से ज्यादा हो जाता है । मैंने इतिश्री को अपनी यादों से लगभग भुला दिया था । इसके बारे में मैं बहुत था । तुमने भी मेरा ही अनुसरण । क्या मैं भी उससे दूर ही रहता था जैसा कि पहले पहले बताया कि मैं स्पीड से दूर ही रहता था । राम ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसे लगा या फिर मुझे पता चला की वो अभी भी उससे संपर्क में है तो मुझे बहुत बुरा लगेगा । एक दोस्ताना मजबूरी थी । एक बात तो तय थे कि मेरे दिल में उसके लिए कोई भी द्वेष नहीं था । खासकर फॅमिली । उनकी शिक्षाओं के बाद तो हमने हमारे फोटोग्राफर को बुलाया । उसके उसे ड्रॅाप के वीडियो और तस्वीरें निकल पाई हूँ । हम तीनों एक जगह बैठ गए और उन तस्वीरों को ध्यान से देखने लगीं । उसे ध्यान से देखने की बात के तय हो चुका था की धूम नीतीश नहीं है । जो गौरी की तरह दिख रही है, उसी की तरह बर्ताव कर रही है । एक रोमांचक का शरीर था और मेरे अंदर और भी अधिक जानने की जिज्ञासा जाग रही थी । ये बोपल था जब मैं स्वार्थी होना चाह रहा था । पहले सवालों के जवाब तीसरे के पास थे । वहीं दूसरी ओर अगर मैंने ये जवाब उससे नहीं लिए तो ये मुझे ताउम्र डराते रहेंगे क्योंकि कहीं ना कहीं मेरे ऊपर इसका गहरा प्रभाव पडा था । सामने इस मामले में अगुवाई करने का प्रस्ताव दिया । वो जानता था कि इस मामले में जल्दबाजी करने से कुछ हासिल नहीं होगा । मैं भी मान गया । मैंने निश्चय किया कि पहले हम उसे पुणे लौटने देंगे । एकता चप्पू वहाँ पर फिर से स्थापित हो जाएगी । तब टॉम जाकर उससे मिलेगा । वो पढा ही भोला लग रहा था जब उसने मुझसे कहा भाई, ऐसा लगता है कि गौरी की आत्मा इतिश्री में प्रवेश कर रही है । मुझे आज शादी नहीं हो रहा है । हमें उससे जल्दी मिलना चाहिए । मुझे मालूम है तो मेरे लिए वहाँ पर हूँ । उम्मीद है ये सब जल्दी सोलह जाएगा । मैंने गंभीर मुद्दा बनाकर उससे कहा तीन दिन ऍम । ये खबर तो भर के अखबार के पहले पन्ने पर थी । उसकी तस्वीर के नीचे लिखा था । उसने मिस इंडिया प्रतियोगिता से बाहर निकल जाने का फैसला किया । एक प्रेस सम्मेलन था । उसे पिछले शाम उस नहीं संबोधित किया था । उसने ये साफ किया कि वह मिस इंडिया प्रतियोगिता से निजी कारणों से बाहर हो रही है । मीडिया के लोग तो निश्चित ही थी । श्री से नाराज और खुश थे । उसने बस इतना ही बताया कि इसके पीछे कारण बहुत ऐसी है और उसने समिति से बात कर ली है जो अनुबंधों का मामला देखेंगे । काम सप्ताहंत की प्रतीक्षा कर रहा था ताकि वह उसके कॉलेज जाकर उससे मिल सके । अगर इस खबर में उसे अंदर तक झकझोर दिया था । अभी तो ये समझ नहीं आ रहा था कि वह इतिश्री से कैसे मिल पाएगा? आखिर पिछले तीन दिनों में ऐसा क्या हुआ? इसके पीछे जरूर कोई गंभीर कारण कहाँ होगा? उसे पता लगाना ही था । उसने पुणे की प्रतियोगिता समिति के लोगों से मुलाकात करने की सोची । इसमें सफलता हासिल नहीं हुई क्योंकि प्रेसविज्ञप्ति पहले ही जारी हो चुकी थी जिसमें सब कुछ लिखा हुआ था । इस से ज्यादा कोई भी वक्तव्य बाहर नहीं आने वाला था । इसका मतलब ये हुआ कि टाउन को किसी से जल्दी से जल्दी मिलना पडेगा । उसने उसके कॉलेज से संपर्क किया और उस से मुलाकात का समय तय किया । ये इतना आसान नहीं था क्योंकि इसके लिए उसे बहुत मेहनत करनी पडी थी । एक सच यह भी है कि ये सिर्फ ऍम ही था जो उससे बात करने का प्रयास कर रहा था । हाँ टॉल बोलूँ क्या चाहिए तो मैं इतनी कैसी हो तो ज्योतिष माफ करना ही थी । मैं समझा नहीं । नीतीश श्री मेरा नाम है, अच्छा ठीक है । मुझे माफ कर दो । इतिश्री देखो मना मत करना । मैं तुम से मिलना चाहता हूँ क्या मतलब है एक महाराज हूँ तो मुझे समझाते क्या होता हूँ मुझे फोन करने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? तुम सोचते क्या हो? अगर नील दुखी था तो तुमने पीछे कदम क्यों खींच लिए थे? मैंने खुद को बातें की भी कोशिश की थी । उस वक्त मुझे तुम लोगों की जरूरत थी । जब तुम ने मुझे छोड दिया । मुझे अपराधियों सब महसूस हो रहा था । सब कोई दिन नहीं गुस्सा था । मैं तो वो ही नहीं थी तो तुम जानते हो । मैंने उस प्रतियोगिता में हिस्सा क्यों लिया था तो भी सारा सा भी अंदाजा है । तो मुझे लगता है मैं मिस इंडिया बनना चाहती हूँ । नहीं, मैंने ये सब हम लोगों को ढूंढने के लिए किया था, क्योंकि मुझे मालूम था कि इंजीनियरिंग के सभी लोग वहाँ मौजूद होंगे । अगर सभी नहीं तो कुछ प्रतिभावान तो जरूर ही होंगे । मैं जानती थी कि तुम और नील तो वहाँ जरूर मिलेंगे । मैं उसे जानती थी इसलिए दो साल में शुरू नहीं । मगर इस बार मुझे पक्का यकीन था । मैंने नील को बेंच पर बैठे हुए देखा था । मैं इतने सालों से तुम लोगों को ढूंढ रही थी । इतना कहकर इतिश्री रोडे लकी और उसने फोन रखती है । अगले कुछ मिनट तक तो उनको उसे दोबारा फोन करने की हिम्मत नहीं हुई । थोडी देर बाद टॉम नहीं उसे फिर से फोन करने का प्रयास किया । इस बार पूछताछ वाले बन्दे ने फोन उठाया । उसने उससे प्रतीक्षा करने को कहा । फिर उसे कहा गया की इतिश्री व्यस्त है तो हमने उसे कई बार फोन किया । जब तक की रात नहीं हो गई इतिश्री दे उससे हर बार बात करने से मना कर दिया । उसके अगले दिन फिर से प्रयास किया और फिर से अगले दिन । हर बार परिणाम एक ही था तो उनको बहुत बुरा लग रहा था । तो हमने उसके बाद पिता को फोन किया । वे लोग सिलीगुडी जा चुके थे । शुक्ला था कि नए लोगों ने उनका फोन नंबर लिख कर रखा था । इतिश्री की माँ ने फोन उठाया । इससे टॉम को थोडी खुशी हुई । वो जानता था की बात का दिल मोम साफ होता है जो आसानी से पिघल जाता है तो हमने उनके साथ वही किया और इस बार ये काम कर गया तो उनसे बात करते वक्त उसके बाद थोडा भावुक हो गई थी । उन के कोई बेटा नहीं था । इसलिए जब भी तीसरी का कोई दोस्त जो लडका हो उन्हें फोन करता था तो वे उसे अपना बेटा मान लेती थी । एक पल के बाद वो बहुत चिंतित नजर आने लगी थी । उन्होंने उसे बताया कि गौरी के जाने के बाद कैसे देश में बिलकुल टूट गई थी । उन्हें ये भी डर सताने लगा था कि वह कोई गलत कदम ना उठा ले । उसने गुवाहाटी जाना भी छोड दिया था क्योंकि वो जगह उसे गौरी के बचपन की याद दिलाती थी । यही कारण था कि वे सिलीगुडी चले गए थे । उन्होंने सब कुछ पीछे छोड दिया था क्योंकि उनकी बेटी उनके लिए सबकुछ थी खरीदी श्री नहीं । वो कॉलेज भी छोड दिया और उसने टी । वाई पी के दंतचिकित्सा विभाग में दाखिला ले लिया था ।

भाग - 13.2

मेल से मिलने का प्रयास करने के बाद वो बिल्कुल अकेली हो गई थी । उसे ढूंढने के लिए उसके बहुत प्रयास किए थे । यहाँ तक कि उसने उसके माता पिता से भी बात की थी । दे उसे कैसे कुछ भी बता सकते थे जब उन्हें कुछ मालूम नहीं था । तुम गुस्से से लाल हो गए थे और तुम्हारा बन मेरे और अपने लिए प्रशाद आपसे भर गया था । उसने मुझे फोन किया और अपना सारा को सब मेरे ऊपर निकाल दिया । पाकिट कपडा तब तक मैं वो सब करता रहूँ जो तुम्हें करना चाहिए । आखिर कब तक है? तुम्हारा पीछा करता रहूँ? छपने तुम्हारे आस पास होना भी मेरे लिए ठीक नहीं है । जवाब तो नहीं है कोई जवाब तुम्हारे पास आज ही रात तुम्हारे पास आ रहा हूँ । मैं अभी नेट पर ये देखता हूँ कि आखिरी फ्लाइट में कोई सीट मिल रही है या नहीं । तो हमने फोन रख दिया । काम नहीं थी । श्री को मेरी योजना के बारे में कुछ भी नहीं बताया था । यही तर्कसंगत भी था । जब एक लडकी आपसे नाराज हो तब निम्नलिखित में से कोई एक चीज आपके लिए काम कर सकती है । अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर भगवान ही आपका मालिक है । फिर भी एक बार प्रयास कर के देखिए । जब आपसे नाराज हो या आप पर चिल्ला रही हूँ तब आप बिलकुल चुपचाप बैठे । अस्थान के अनुसार उसे बैठने के लिए कुर्सी दीजिए । अपनी को तो कभी नहीं बिल्कुल देव को बन जाएगी । मानव सब आपकी ही गलती है । मगर आपको ये अंदाजा नहीं था कि आप ये गलती कर रहे हैं । उसे यह अहसास दिलाया कि वह जीत चुकी है । उपर्युक्त सभी चीजें तभी काम करती हैं जब गुस्सा ज्यादा देर का नहीं हूँ । मगर इस मामले में बात सिर्फ उसके गुस्से की नहीं थी । उसके अंदर बहुत झुंझलाहट भरी हुई थी । बहुत सारे सवाल और चिंता जब मुझे टॉम ने बताया की इतिश्री ने अपनी जान लेने की भी कोशिश की थी, तब मैं भी एक लाने से भर गया था । मैं ईश्वर से अपने लिए क्षमादान मांगा हूँ । इस वर्ष सीधा सा जवाब था मुझे वापसी इतिश्री से बात नहीं होगी तो अब मुझे सचमुच उसे मनाना था । मुझे ये तो मालूम था कि मैं उससे झूठ नहीं बोल सकता था । उसका सामना करना आसान नहीं होगा । अगर आपने बहुत पाठ्यक्रम में मैंने सब कुछ सीखा था जिसका प्रयोग मुझे अब करना था । हर बार जब मेरे बारे में बात हो रही हूँ या मेरा जिक्र भी हो रहा हूँ तो इसका कोई कारण नहीं था कि मैं धौलाधार श्रृंखला में सीखी हुई तलहटी के बारे में बात न करूँ । मगर ये खोज हमेशा बनी रहती है । इस अवस्था में पहुंचने में समय लगता है । मेरा मानना है इसी को निर्माण कहते हैं । आप आप कितनी देर तक इंतजार करेंगे सर लगता है वो आपसे मिलना नहीं चाहती है । पूछताछ के पास खडे गार्ड ने मुझसे कहा, ये तो अपेक्षित था । मैं जानता था मुझे उसे मनाना था । मुझे मालूम था कि ये सही तरीका नहीं था । मगर मेरे पास अब और कोई तरीका बच्चा भी नहीं था । मैंने उसका आठ से कहा कि वो जाकर उसे बताए कि मुझे उससे गौरी के बारे में कुछ बात करनी थी । ये काम कर गया । इतिश्री एक दम से मेरे सामने आ गई । मालूम वो कहीं नजदीक से ही मुझ पर नजर रख रही थी । पकडेंगे मेरा मकसद नहीं था । ये तो भावनाओं के सामान्य स्तर से नीचे जाने की बात थी । इसका सीधा मतलब था कि मुझे किसी ऐसी जगह पर जाना था जहाँ भीड भाड कम हो । आप किसी अप्रत्याशित भाव आती रही । क्या आंखों के लिए कुछ ऐसे ही तैयारी करते हैं । इतिश्री कृपा करके कुछ करता हूँ मुझे अपने आप को समझने का । बस एक मौका तो अगर फिर भी तो ये लगा कि मैं गलत था तो फिर तुम मुझे जो चाहे सजा दे देता हूँ । मैं खुशी खुशी मान लो का मैंने अपने हाथ छोड रखे थे और पहले आंसू में निकाल ऊपर कहने लगे नहीं । हालांकि वे इतिश्री के मुकाबले कम भी थे । हम दोनों के अंदर कॉलेज की आत्मा बसती थी और इसी की वजह से हम एक साथ रो रहे थे । हमें वो क्षण भी याद था जब हम पिछड गए थे । अधूरी बातें सुनने अभिप्रेरण और चीनी की कोई इच्छा नहीं । मैं जानता हूँ मैं तुम से नाराज था । जब मैंने तो बाहर है और कौन से? वो तो देखें तब मैं कह रहे कट्ठे बिछा चुका था । मैं उन्हें हर दिन देख कर रोता रहता था । ऍम अपने कमरे में ही बढ गया होता । अगर वह परिस्थिति नहीं उत्पन्न खुश होती जहाँ मुझे ये एहसास हुआ कि मैं स्वार्थी हो रहा था और गौरी को एक वस्तु की तरह इस्तेमाल कर रहा था तो मैं कभी हिमालय नहीं चाहता हूँ । अगर मैं उस वक्त तुमसे आकर बिल था तो मैं कभी सामान्य नहीं हो पाता हूँ । तुमसे मिलकर क्या? बस तो देख कर ही मैं उस बोर्ड तक पहुंच चाहता हूँ जहाँ की मैं पागल हो जाता हूँ । शायद विनाशक बन जाता हूँ मैं सपना नहीं चाहता था हूँ ये सब पहले उस बहुत पाठ्यक्रम बिछाकर शाहना है तो उस वक्त स्वास्थ्य बन गए थे । सब ने एक बार तो मेरे बारे में सोचा होता । मेरे पास तो कोई और नहीं था और उसके जीवन में तुम ही थे तो मुझे कैसे अकेले छोडकर गायब हो सकते थे । उससे कोई फर्क नहीं पडता हूँ । अगर तुम एक बार उससे बिल लेते और उसी को कहते थे कि तुम मुझसे दोबारा कभी नहीं मिल हो गई । बस खतम तो बस था आपके और इन सबके ऊपर टॉम भी कई छुपके मैं कसम खाकर कह रही हूँ मुझे लगा कि मैं कोई अपराधी हूँ । क्या भी पता है कि बेहद कम बिल्कुल कौरिक की तरह ही करती हूँ । मैं उसी की तरह चलती हूँ । उस की तरह बात करती हूँ । मैं भी उससे बातें करती हूँ जैसे वहाँ पे तुम करते हूँ । मैं भी सितारों से बात करती हूँ । थोडी देर रुकने के बाद भी श्रीदेवी फिर से बोलना शुरू किया पहचानती हूँ की बहन तो एक लडकी हूँ मुझे दुनिया की सबसे कि धोनी चीजों का साहब तक करता है जो हाँ पियो ने बनाया है सभाष ने बनाया है मगर जो इस वक्त नहीं बनाया है वो तो कुछ और ही बनाना चाहता था मगर वो और पर आप था उसने उसी पर ध्यान दिया । सिल के बस्तों पर उसका ध्यान ही नहीं उसमें सभी शक्तियां और तो वही नहीं करती मगर राहत करते यहाँ भी होने की शक्ति नहीं बल्कि बर्दाश्त करने की शक्ति आत्मसात् करने की शक्ति कभी नहीं । मतलब की शक्ति हमारे लडने की शक्ति और फिर भी संवेदनशील और काम बने रहने की शक्ति दी तो भगवान ने और ऊपर उससे ही ध्यान दे दिया । वस्तुओं को उसे नियंत्रित करते की शक्ति थी नहीं तो अब वो बच्चे नहीं हो जिसे बैठ जानती हूँ तो मत मारता बन चुके हो तुम भी और उसे बिल्कुल अलग ही हो । तुमने मुझे नियंत्रन दिखा दिया है । तब यहाँ दबाए भारत बंद किया तो उन्हें हमें अकेला छोड दिया तो मैं मुझे और गौरी को अकेला छोड दिया । तब हमें छोड गए हैं भारत क्या मैं उसे सुनता रहा । उसके शब्द धोखे से मेरी चांदे रहे थे क्योंकि उनके प्रभावों के बारे में मुझे जरा सा भी अंदाजा नहीं था । मेरे लिए ये सच का सामना करने वाला क्षण था । मेरे पास और कुछ ज्यादा नहीं था, सिवाय उससे माफी मांगते रहने के और उनसे भीख लेते रहेंगे और उनसे सीख लेते रहने के हूँ । तो बता समय लोग और छत्ते में उचित लगे तब तो मुझे माफ करना । मगर एक बात बताऊँ तो मुझे कैसे पता चला कि मैं सितारों से बात करता हूँ । मेरा मतलब है और इसे हर रात क्योंकि मेरे अंदर भी उसकी आत्मा का एक ठाक है जो तुम्हारे अंदर रहता है क्योंकि मैं भी उसे तो भारी ही तरह महसूस करती हूँ । और भी बहुत कुछ तो तुमने अपना विषय बदलकर दंतचिकित्सा क्यू कर लिया । मैंने फैसला किया कि मैं वही करेंगे जो मुझे सही लगता है । मैं यही चाहती थी और फिर हम तब तक बातें करते रहे जब तक कॉलेज लगभग खत्म हो चला था । समय निकल गया । यादें ताजा हो गई थी । भूतकाल ने गहरी चोट करती थी । पहले तो ये बहुत ज्यादा धक्का देने वाला था । हर पल को बदलते हुए भाव और इतनी तेजी से वो हर पल पडता हुआ दीवार जिसने इतना वर्मा भरा हुआ था कि मैं ये सोचने पर मजबूर हो गया की सारी दुनिया के इंसान एक जैसे ही होते हैं । जब हम जैसे कोई चीज चूडी होती है तो उससे अलग होने का दुख तो होता ही है । कोई भी रातोरात संध्या निष्क्रिय नहीं बन जाना एक बहुत लंबी प्रक्रिया है जिसमें आप सब स्पोर्ट्स में वास्तविक बनकर खुद को मारो से अलग कर देते हैं । मेरा उद्देश्य खुश रहने का था, शांत रहने का था और समाज को कुछ देने का था । कुछ देर के बाद हमने कॉलेज के बगल वाले कॉफी शॉप में जाने का फैसला किया । उसने मुझे कुछ सीडी पकडाई और कहा कि वह थोडी ही देर में वापस आएगी तो कुछ कागजों की छाया प्रति लेने गई थी । और इधर मैं लैपटॉप पर गौरी और इतिश्री के पुराने वीडियो देख रहा था । उसका मुझे वीडियो मिला जो शायद रिकॉर्डिंग से पहले का था । कुछ बलबीर जाने के बाद ऐसा लगने लगा । शायद उसने किसी अवसर पर देने के लिए कि भाषण तैयार किया था । मेरे प्यारे दर्शकों, श्रोतागण और यहाँ मौजूद खूबसूरत न्यायाधीश हैं । हाँ, तो इसका मतलब वो अपने प्रतियोगिता के भाषण की तैयारी कर रही थी और ये निश्चित ही मिस इंडिया प्रतियोगिता के लिए था । उसने अपना भाषण जारी रखा, सबका धन्यवाद ज्ञापन किया और अंत में उसने कहा अगर मैं जीत गए और मैं आशा करती हूँ कि मैं जीतूंगी तो मैं सातवे आसमान से एक सितारा धरती पर ले आउंगी । वो सितारा जो वहाँ पर बस हमारी हर इच्छा को पूरी करने के लिए बैठा है । अगर आज की रात में जीत गए और मैं आशा करती हूँ कि मैं जीतूंगी ही तो मैं उस सितारे से, उस लडके को मांगों की जिसमें मेरी आत्मा का एक हाथ मुझ से छीन लिया । उसकी आत्मा ठनने वाला हूँ । इन परिस्थितियों में शायद ही कभी ऐसा होता है कि आपके पास कोई टाइम होगा, प्रतिक्रिया होती है । ये तो अप्रत्याशित था इसलिए प्रतिक्रिया भी अप्रत्याशित ही होनी थी । मैं उनके कमरे में पहुंचा हूँ और उसे पुणे घुमाने को कहा । मैंने उसे हर उस जगह ले जाने को कहा जहाँ मैं और गौरी समय बिताया करते थे । इसमें कॉलेज की कैंटीन और पुस्तकालय भी शामिल थे । कॉलेज का परिदृश्य अब काफी बदल चुका था । वहाँ की तुम की यादें मुझे लगातार परेशान कर रही थी । कैंटीन का नाम बदलकर गौर इज कैसे हो गया था? फॅसने मुझे और भी प्रभावित कर दिया था तो दिन काफी अच्छा गुजरा और मैंने अपने टिकट पर विजय पाना एक बार फिर से सीख लिया था उस टाइम पर जो कहीं मेरे अवचेतन मन में बैठा हुआ था । घर वापस आते वक्त हम एक कप में गए तो तुमने जिंदगी के बारे में क्या सोचा है? पढाई खत्म करूंगा । एक नौकरी लोग और पूरी दुनिया का भ्रमण करूंगा । हवाना और ताशकंद मेरी सूची में सबसे ऊपर है । मैं एक बार फिर तुम्हें पुराने दिल की तरह देख कर बहुत खुश हो नहीं । कितने वर्षों के बाद हम ने इतना सारा समय एक साथ बिताया है । मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ मेरे दोस्त । उसने मुझे कसकर गले से लगा लिया है और फिर हमने शराब का गिलास अभिवादन से ऊपर उठाया । जानते हो, पिछले तीन वर्षों में मुझे आज ऐसा लगा मानो मैं अपने एकांतवाद से बाहर आया हूँ । मुझे सच पूछिए एहसास हो रहा है कि अब मेरे अंदर मेरी पिछली जिंदगी और मेरी सुरक्षा की भावना के बारे में बात करने की हिम्मत आ गई । ये मुझे और फिर ब्रेड और वास्तविक बना रहा है । मुझे ऐसा लगता है कि जीवन के धर चरण में मैं कुछ ना कुछ हासिल कर रहा हूँ और उस वक्त लगता है कि शायद के आखिरी चीज है मगर फिर से हर बार कुछ नया सीखने को मिलता है । और फिर मुझे एहसास होता है कि मैंने कुछ नया हासिल कर लिया है । बिल्कुल सही मेरे भाई । आखिर जिंदगी अपने अनुभवों हूँ और दूसरी चीजों से सीखने का ही तो नाम है और ये कभी खत्म नहीं होता हूँ । अब मुझे संतोष भी होता है । उस सडक सुरक्षा के एनजीओ से जोडने के बाद मुझे काफी खुशी मिली नहीं । आशा करता हूँ की मैं मैं कुछ योगदान कर पाऊंगा ताकि हम और भी लोगों को सडक हादसे में होने से बचा सके । कितने उच्च विचार हैं मुझे तुम पर गर्व है । अब अपनी जिंदगी को ठीक करने के बारे में क्या ख्याल है तुम्हारा । वो तो पहले ही ठीक हो चुकी है । अब और क्या बचा है? क्या तुमने उसकी आंखों में कुछ दिखाई देता? वो पागलपन तो वो तो मैं दिखाना चाहती है । तो मैं देखने पर जो प्रतिक्रिया देती है तब किसकी बात कर रहे हो? और एक गधे मैं इतिश्री की बात कर रहा हूँ तो तो भारत दिमाग खराब हो गया है । क्या लगता है तुम पूरी तरह पागल हो चुके हो? नील तो मैं जरा भी अंदाजा नहीं है कि तुम क्या पाने वाले हो । जरा इसके बारे में सोच हूँ । एक लडकी जो गौरी की सबसे अच्छी सहेली है और जो तुम्हें उस की याद दिलाती है जो इतने दिनों तक तुम्हें पागलों की तरह घूमती रही, जिसने प्रतियोगिता से खुद को बाहर कर लिया । क्योंकि तीन साल के बाद मैं वहाँ देखकर वो बहुत परेशान हो गई थी । ऐसी लडकी तुम्हें कहीं नहीं मिलेगी । वो करोडों में से एक है । मगर वो काम ही नहीं है तो उसके सबसे नजदीक तो है । मैं गौर से क्या कहूँगा हूँ कि मैं उस की सबसे अच्छी सहेली को धोखा दे रहा हूँ । तुम स्वतंत्र महसूस तो करते हूँ मगर तुम अभी भी एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया में फंसे हुए हूँ । ये सच नहीं है, नहीं तो मैं वापस अपनी जिंदगी बसा दे । गौरी बहुत खुश होगी । उसे इसी बात से खुशी मिलेगी, पहचानता हूँ । बहुत अच्छी तरह जानता हूँ कि मैंने किसी के साथ अच्छा नहीं किया । मैं उस वक्त इतना स्वार्थी हो गया था और कौन तुम्हें तो अच्छी तरह से याद होगा । मैं किसी से भी बात नहीं कर रहा था कि बहुत लंबा समय था और फिर वो हिमाचल और बात वाली बात हुई । मेरे और इतिश्री के बीच की दूरी काफी बढ गई है । ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि अब वापस लौटने के लिए काफी देर हो चुकी है । मैं जानता हूँ कि मैं बहुत खुश हूँ । जब मैंने तुमसे उसे मिलने जुलने से मना किया था । वो बहुत बडी गलती थी तो हम उठकर खडा हो गया । उसने मेरी ओर देखा और उसके बारे में पूछा हूँ । मगर आप जब तुम मुझे उसके बारे में एक प्रेमी की तरह सोचने के लिए कहते हो तो मुझे ये उससे भी बडा अपराध लगता है जो आर्या ने हमारे साथ किया था । मुझे ये शब्द मेरे जिंदगी से भी ज्यादा बर्बाद लगते हैं । मैं नहीं जानता कि तुमने ये सब मुझसे खेमका मगर मुझे से होती है तो हम हार मानने को तैयार नहीं था । वो अपनी बात से ज्यादा भी पीछे नहीं हटा । उसके भावों से मुझे ये स्पष्ट हो चुका था । अक्सर जब उसे लगता है कि उससे गलती हुई है तो वो फौरन मान लेता था । मगर यहाँ वो अपनी बात को दोहराता था । एक ही वाक्य कोई परिवर्तन नहीं, कोई जोड नहीं, कोई घटाओ नहीं । उससे भारतीय की कोई कोशिश नहीं । वो सीधे सीधे मेरे मुंह पर ये सब कह रहा था मुझे कुछ साढे लगा था । मेरे लिए ये सब धोखे से कम नहीं था । मैंने उसके साथ क्या तब नहीं किया था जब मेरे साथ थी । मैं उसके साथ अब ये नहीं करूँगा । मेरा मन ना ऐसा करने की गवाही नहीं दे रहा था और मुझे किसी भी दूसरी लडकी के लिए इस तरह की अनुभूति नहीं हो रही थी । बिल्कुल नहीं । कॉलेज के पिछले तीन वर्षों में ऐसा एक भी मौका नहीं आया था जब मैंने किसी दूसरी लडकी के बारे में सोचना भी हो । हालांकि इस पर मुझे कोई आज शादी भी नहीं हुआ था । तुमको भी इन सब के बारे में पूरी जानकारी थी । उसके पहले कभी मुझे इन सब के बारे में बात नहीं तो फिर अपील की बस इसलिए क्योंकि वो तीसरी है और उस की तरह बात करती है, व्यवहार करती है । इसका मतलब ये तो नहीं कि वह गौर ही हो गई । हालांकि गौरी के बाद वो इतनी देखी थी जिसपर मैं थोडा ध्यान दिया था । मैं जानता था कि वो गौरी नहीं थी फिर भी मैंने उसे उसके प्रति रूप की तरह देखा था और ये पास कि वह नीतीश रही थी मुझे थोडा सुकून देती थी । पिछले शाम तो हमने जो भी मुझसे कहा था उसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया था कि सब कुछ अच्छी तरह समझ में तो नहीं आ रहा था मगर फिर भी मेरे दिमाग की घंटी बजा रहा था । तीसरी के मन में मेरे लिए कुछ कोमल भावना थे और वो हम दोनों के बारे में बहुत भावुक थी । सुबह मिले उसके संदेश से ये स्पष्ट भी हो चुकी थी । देर मुझे माफ कर देना ये सब मेरे अंदर भरा हुआ था । अगर मैंने तुमसे कोई बदतमीजी की हूँ या कुछ ऐसा कहाँ हो जो मुझे नहीं कहना चाहिए था तो मुझे इसके लिए मांग करते ना तो हमारे दिल्ली जाने से पहले मैं आखिरी बात तुम से मिलना चाहती हूँ । शुक्रिया थी कॅश रही । सबकुछ बिल्कुल ठीक है । आज शाम को छह बजे कॉफी के लिए मिलते हैं । मैं तुम्हारे कॉलेज आ जाऊंगा । फिर वहाँ से हम दोनों साथ चलते हैं । सच कहूँ तो मुझे अभी तक समझ नहीं आ रहा था कि आखिर ये हो क्या रहा है । मैं थी श्री से मिलने के लिए ज्यादा उत्साहित था या फिर ये सब कौरी की वजह से था । मैं बिल्कुल बेमोल था । मैंने टाउन की नेत्रा का अंदाजा लिया उसे जगह पाना संभव नहीं था । मैंने आईने के सामने खडे होकर खुद से बात करने की अपनी पूरी चाल एक बार फिर से चलने की सोची हूँ । मैं से काफी दिनों के बाद कर रहा था । आखिरी बार जब मैंने ये किया था उस वक्त मैं कॉलेज में दाखिला लेने वाला था । मैं कॉलेज में विषय चुनने को लेकर थोडा असमंजस में था अगर एक बार फिर पढाई के लिए था । अठारह वर्ष की उम्र में वह मेरे जीवन का सबसे निर्णायक क्षण था । अब तेईस वर्ष की उम्र में ये एक लडकी के बारे में था । मेरा असमंजस उसके लिए मेरी ईमानदारी को लेकर था । आई मैंने हाँ में जवाब दिया । इसके बाद मैंने रेडियो पर अपना सबसे मनपसंदीदा कार्यक्रम लगाया । इस कार्यक्रम में आरजे नावेद अपने श्रोताओं को संबंधों के बारे में कुछ बताने के लिए फोन करने के लिए आमंत्रित करता था । मैं पिछले दो प्रयासों में सफल रहा था और मैंने तीसरी बार ये प्रयास किया । नमस्कार मेरे दोस्त तो लगता है जीवन में आप किसी कठिन दौर से गुजर रहे हैं । मैं अपने कार्यक्रम में आपका स्वागत करता हूँ और आप मुझ से कुछ भी पूछ सकते हैं और मैं अपने श्रोताओं को बता दूँ । अगर आपको जानना क्या पूछना चाहते हैं तो अभी फोन मिलाकर बात करें । हलो नवेद मेरा नाम दिल है, आशा करता हूँ तो मुझे पहचान रहे होंगे । हम विद्यालय में साथ थे, गेट लडकी के बारे में है । वो शायद मुझे पसंद करते हैं । थोडा असमंजस में इसलिए हूँ क्योंकि वह मेरी प्रेमिका की सबसे अच्छी सहेली है और मेरी प्रेमिका अब इस दुनिया में नहीं है । प्याज शाम में उसे कॉफी पर मिलने वाला हूँ । मैं क्या करूँ? ॅरियर तो मुझे अच्छी तरह से याद हो । सबसे पहले तो तुम्हारी प्रेमिका के बारे में सुन कर बहुत दुःख हुआ यार मेरे विचार से उस लडकी को पहले अपना प्यार जताने दो तो तुम से आगे ले जाने की सोच ना तुम्हारे लिए सबसे जरूरी है कि तुम सच कुछ उसे पसंद करूँ न कि इसलिए कि तुम अपनी प्रेमिका को फिर से पाने की कोशिश कर रहे हो और हाथ में तो मैं यह जानकर दुख होगा । बात तो बिलकुल ही अलग है । नावेद के ये शब्द बिल्कुल वैसे ही थे, जा सकता हूँ । मुझे समझा रहा था और जैसा जवाब मुझे उस आईने में मिला था

भाग - 13.3

वो शाम बहुत खूबसूरत थी । ये मार्च की शुरुआत थी । ठंडी हवाओं ने मौसम और भी सुहाना बना दिया था । मैं बाहर खुले में आकर खडा हो गया और आसमान की ओर देखते लगा । आज मुझे कौर इसे ढेर सारी बातें करनी थी । मैं अपने सभी जवाब एक बार फिर से सुनिश्चित कर लेना चाहता था । मुझे बता हूँ हूँ आज कुछ ये क्या हो रहा है । मैं इस तरह का बर्ताव क्यों कर रहा हूँ क्या मैं तो फुल लेता हूँ क्या मैं तुम्हें धोखा दे रहा हूँ? नहीं इतिश्री के बारे में क्यों सोच रहा हूँ? जब की मुझे ये अच्छी तरह पता है कि वह मेरी कौन ही नहीं है । मेरी साथ क्या खराब ही हो गई है । फिर क्या मुझे बताऊँ? मैंने हमेशा तो भारी खुशी चाहिए । मैं जानता हूँ कि मैं उससे इतिश्री होने की वजह से प्यार नहीं कर सकता हूँ । मगर नहीं उसे देखकर तुम्हारे बारे में जरूर सोचता हूँ । बैठा हो इसके पहले की मैं कुछ और कहता था । मैंने देखा कि एक तारा आसमान से दूर कर क्या रहा है । वही तारा जिससे मैं हर दिन बातें किया करता था । वो सारा जो मेरी कौन थी आज आसमान से दूर करके दे रहा था मेरा वो टूटता हुआ था । ना तो भी हो मेरी हर ख्वाहिश मेरी हर अभिलाषा तो भी हो । मुझे मेरी जवाब मिल रहे हैं । आज तो मजा हो गई हो । गायें पहले तुम है आसान क्या बे हमेशा तुमसे प्यार करूंगा । इतनी श्री ने खुबसूरत पेंट वाले ऑस्कर और साधन की शर्ट पहनी हुई थी । उस पर फूल बने हुए थे जो उसे और भी ज्यादा आकर्षक बना रहे थे । उसका तीस पहले तो उसकी ओर आकर्षित कर रहा था । वो चमक रही थी । मैंने उसके लिए गाडी का दरवाजा खोल दिया तो हमने हाल ही में एक लंबी गाडी खरीदी थी और मुझे उसकी मक्खन जैसी ख्याल बेहद पसंद थी । डील क्या तुम चाहते हो कि मैं गाडी चला हूँ भला तो मैं चाहती हूँ । मुझे मालूम है कि जब तुम और गौरी कहीं घूमने जाते थे तो गाडी हमेशा वही चलाती थी । इसलिए मुझे भी ये लगा । मैंने गाडी में घुमाने की उसकी इच्छा के आगे समर्पण कर दिया । उसने एक झटके से एक्सलेटर दबा दिया और गाडी पूरी गति पकडने ऐसा कुछ अपनी सीट पर कूद रहा था । मैं चीखने लगा और उसे रोकने को कहा । उसने मुझे कहा कि डरने की जरूरत नहीं है । मैंने उससे कहा कि मैं पहले ही एक सडक दुर्घटना में गौरी को खो चुका हूँ और अब मैं सडक सुरक्षा से जुडे एक एनजीओ के लिए काम भी करता हूँ तो मैं किसी भी हालत में उसे तेज चलाने की अनुमति नहीं दे सकता हूँ । अरे अरे कोई बात नहीं है । नहीं मैं बिलकुल ठीक से चला रही हूँ । थोडा तेज जरूर है मगर ये मेरे नियंत्रण में है । मैं तुम्हें नहीं खोलना चाहता हूँ । मेरी आवाज में एक कह रही थी और मेरी आंखों में वो भाव थे जिसे इतिश्री चूकना नहीं चाहती थी । वो वापस मेरी सीट पर कहीं और मैं गाडी चलाने लगा । नहीं मुझे ये बताने के लिए शुक्रिया । मैं तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण हूँ । वो मेरी ओर देखती रहीं । हालांकि मैं जान रहा था कि वह मुझे ही नहीं हठ रही है । अगर मैंने ऐसा जताया कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है । इस खास परिस्थिति में इतिश्री भी नहीं जानना चाहती थी कि मेरे मन में उसके लिए थोडी सी जगह बन चुकी थी । अभी कुछ ही समय की बात थी जब हम इसे और आगे ले जाने वाले थे । मैं ये भी जानता था कि ये कॉफी के ऊपर बहुत कुछ हो सकता है और मैंने अपने आपसे सोचता हूँ कि मैं कितना बडा बोला था की मैं आई नहीं से बात कर रहा था और नावेद से पुष्टि करने को कह रहा था । अच्छा कोई ऐसी चीज होती है जो इंसानी संबंधों को बांध कर रखती हैं, खासकर तब जब बात एक लडका और एक लडकी की हो तो हमेशा अपने दिल की सुनी और मेरा दिल मुझसे कह रहा था कि आज मैं रुकने वाला नहीं था । नहीं तुम सचमुच बिल्कुल कौरिक की तरह दिखने लगी हो । याद है तो हमेशा मुझसे कहा करते थे कि हम दोनों बिलकुल एक समान बात करते हैं और दो सबसे अच्छी सहेलियाँ एक जैसा बर्ताव भी करने लगती है । तो इस लिहाज से इसमें कुछ भी नया नहीं है । नहीं, साथ में बडे होते हुए हमने बहुत सारे काम बार बार एक साथ किए हैं । आदत है भी सामान हो जाती हैं जो हमने उसे खो दिया था । उसके बाद मैं बहुत ज्यादा सडक हो गई थी । वही वक्त था जब मैंने अपने बाल हो उसकी तरह बनाने शुरू कर दिए थे । उसकी तरह थोडा मेकअप कर लेने से भी कोई नुकसान नहीं था । यही वह चीज थी जिसने मुझे जीवित रखा तो उन्हें भी बहुत खेला है । मुझे माफ कर तो मैं तुम्हारे साथ नहीं रह पाया था । हम दोनों ने बहुत कुछ झेला है । नहीं फर्स्ट कर सकता है कि जो स्थान और वस्तुएं तुम्हें उस की याद दिलाते थे तो उन सब को छोडकर आगे निकल गए । जबकि मैं नहीं सारी चीजों के साथ अपना हर दिन अपनी हर रात को साथ ही रहे । पहले उसकी आंखों में देखा और उसके होठों को बडे ध्यान से निहारता रहा हूँ और वो बोलती रही कुछ मिनटों के बाद उसने अचानक मेरा हाथ था क्या? और उससे मेरे भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछने लगी । मैं पढाई पूरी करूंगा, एक नौकरी लूंगा और बस और मेरे बारे में क्या ख्याल है? क्या तो मुझे अकेला छोड हो कि फिर से एक बार उसके इस वाक्य में मेरे दिल को गहराई में जाकर छू लिया । उस कथन ने मेरा रूम रूम चाकरी कर दिया क्योंकि आजकल कुछ ऐसे प्रेम की आदत नहीं रह गई थी । वो मेरी देखेंगे । उसी ने मुझे ये कहा था । उस वक्त मैं बिलकुल पे बोर्ड होकर वहां बैठा रहा हूँ । मेरा मतलब है मैं ये सोच रहा था कि क्या कहना चाहिए और कैसे कहना चाहिए ताकि मैं दोबारा उसके सामने कोई बेवकूफ ही न करता हूँ । मैंने अपने पिछले जीवन में बहुत सारी गलतियाँ भी की है । मैं उसके और नजदीक गया और उससे मुस्कुराने को कहा को शर्म आ रही थी । नहीं मुझे बताओ तुम क्या चाहती हूँ? मुझे सब कुछ बना हूँ । ठीक है, बेहतर होगा । मैं तुमसे सुनो नहीं । मैंने काफी कुछ कह दिया है और काफी कुछ कर लिया है । अभी से अगले स्तर तक ले जाना तो भारी जिम्मेदारी है । उसके बाद ऐसे भाव से कहीं जैसे ये स्पष्ट हो चुका था की अब मेरी बारी है । ठीक है नहीं तो मैं अपने जीवन में पाकर मुझे बहुत खुशी होगी । मगर मैं ऐसा कुछ करूँ । उस से पहले मैं तुम से कुछ पूछना चाहता हूँ ताकी यह अस्पष्ट हो जाए । मेरे दिल में अब और कुछ भी नहीं है । मैं तुम से कुछ भी छुपाना नहीं चाहता हूँ । मैं शुरू करता हूँ पहले कब तुम्हें कुछ भी मांगने के लिए मना किया है । चलो शुरू हो जाऊँ । उसने चुलबुले अंदाज में कहा तो मेरे बारे में सबको जानती हूँ सब कुछ । अगर मैं तुम्हें ये पता हूँ कि मैं गौरी से कितना प्यार करता था या फिर मैं बताऊँ कि मैं हर वक्त उसके बारे में सोचता रहता था या फिर जो कि वो मेरे लिए सब कुछ थी तो शायद मैं वो ही कह रहा हूँ । मैं कभी उसे भूल नहीं पाया, अपने सपने में भी नहीं । जब टॉम नहीं मुझसे मेरे भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछा उस बीच बिलकुल ऐसी ही बात हुई थी । अच्छा ठीक है, अब मैं और गोल गोल नहीं घुमा हूँ । मैं तो मैं ये बताना चाहता हूँ कि तुमने मुझे मेरे गौरी देखते हैं । यही कारण है कि मैं अपनी जिन्दगी तुम्हारे साथ आगे ले जाना चाहता हूँ । मुझे बता हूँ इसमें कुछ गलत है क्या? बिल्कुल नहीं । अम् इंसानों में अपनी परछाई तलाशते हैं और इसी की वजह से उनसे संपर्क में रह गए । क्या ऐसा करने से हम स्वार्थी बन जाते हैं? इसका जवाब है नहीं । जब तो इंसान प्रेम में होते हैं तो उन का प्रेम सफल इसलिए हो पाता है क्योंकि वो प्रेम आत्माओं के बीच होता है, शरीर के बीच नहीं । यही कारण है कि अब जब गौरी हमारे बीच नहीं है तब भी तुम मुझसे बेहद प्रेम करती हूँ क्योंकि तुम्हें उसकी आत्मा से प्रेम हो गया है और हाल मिल मैं तुम्हें कुछ और बताना चाहती हूँ । क्या तुम मेरे साथ होगी? इतिश्री मुझे उस कॉफी की दुकान की छत पर ले गई । वहाँ बीसवीं मंजिल पर खडे होकर सारा पुणे शहर दिखाई देता था । वह किनारे पर खडी हो गई और मेरी आंखों में देखने लगी । उसके पास बताने के लिए कुछ था और उसके दिमाग में चल रही बातों को पड रहा था । मैं उसके साथ वो संपर्क स्थापित करने लगा था । हमारे बीच की तरंगे सकारात्मक हो रही थी । तुम क्या चाहती हूँ मैं तुमसे क्या करूँ? ऍम मतलब तो मुझे कहाँ की पुरा? उनका कहना क्या चाहती हूँ? मैंने अपना नाम बदलने के लिए आवेदन दे दिया है । बाकी की जिंदगी मैं तुम्हारी गौरी बनकर को जानना चाहती हूँ । उस एक पल में मेरी पूरी दुनिया ठहर गई । उसमें जो कहा था उससे मैं मिल गया था । बिल्कुल आश्चर्यचकित था । एक लडकी जिसने अपनी सबसे अच्छी सहेली को खो दिया था तो शायद उसके लिए उसकी बहन से भी बढकर थी । उसने अपने उन दोस्त को खो दिया था जिनके बारे में वह सोचती थी कि उसका साथ देंगे जिसने इतने वर्षों तक मुझे हर जगह ढूंढा था । जिसके गौरी को अपने ऊपर बहुत ही आसान और अब उसने अपना नाम भी कॉमेडी डाल दिया था । वो मेरे सामने खडी थी । उसने तो पहले ही अपना स्तर बहुत ऊंचा कर लिया था और मुझे ये दिखा दिया था की एक ने स्वार्थ प्रेम किसे कहते हैं, मैं कौन हूँ? मेरे कॅरियर है, कुछ एहसास हुआ कि मैं कुछ भी नहीं हूँ । कुछ बात होती थी मैं अपनी संस्कृति में बस कल पर ही की है । अब जब मैं तुम्हारी और देखता हूँ तो मुझे लगता है कि पिछले जन्म में मैंने जरूर कुछ अच्छे कर्म होंगे कि इस जन्म में तुम मुझे मिली हूँ और बहत उनसे वहाँ था । करती हूँ कि आपके आने वाले पूरे जीवन में मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगी । हम कभी भी अपने भूतकाल की चर्चा नहीं करेंगे । मैं कभी ऐसे सवाल नहीं पूछ होंगी जिससे तुम्हें ऐसा हो तो मुझे ही हूँ और कोई नहीं । मैं तुमसे यही एक वादा चाहती हूँ । मैं बात करता हूँ । मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ ही बहुत प्यार करता हूँ । उत् संधान गौरी और मैं चार वर्षों के बाहर वैवाहिक सूत्र में बन गए । हम दिल्ली आ गए जहां गौरी दंतचिकित्सक के तौर पर काम करते हैं और मैं एक अमेरिकन बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करता हूँ । आर्या की कोई खबर नहीं है । मूर्ति उडती खबर मिली थी कि वो हिंदुस्तान छोड चुकी हैं । फॅमिली भी दिल्ली ही आकर बस गए हैं । सब अपनी जिंदगी में खुशी खुशी बसर कर रहे हैं । धान्या और बॉल शादी के एक साल के बाद ही एक दूसरे से अलग हो गए । थाने और मैं काफी सालों तक एक दूसरे के संपर्क में नहीं रहे । मगर जब मैं उससे मिला तो कुछ चीजों के बारे में जानकर हैरान हो गया । लेकिन मेरे घर एक चिट्ठी आई तो खून से लिखी हुई थी । बहुत डरावना था, हूँ । उसके हस्ताक्षर थी प्रेम ऍम ।

share-icon

00:00
00:00