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Transcript

PART 1

आप सुन रहे हैं क्योंकि वो एफ एम इस किताब का नाम है उडान एक परिंदे की जिससे लिखा है सोमिल जैन ने मैं भी पारिक आपके साथ कुकू एफ एम सुनी जो मन चाहे पहला चैप्टर पांच फरवरी दो हजार पे मैं दुबई के लिए उडान भर चुका था । मुझे टिक ऑफ करने के लिए मेरा पूरा परिवार एयरपोर्ट पर मौजूद था । अपनी आंखों से देखे हुए मेरे कुछ सपनों में से एक सपना पूरा हो रहा था । सपना सिंपल था । विदेश सिर्फ घूमना है, वहाँ रहना नहीं है । मैं बहुत खुश था मगर थोडा नर्वस आ रहा था क्योंकि पहली बार एरोप्लेन में बैठा था । कभी जमीन को इतनी ऊंचाई से नहीं देखा था । मजा इसलिए आ रहा था क्योंकि विंडो वाली सीट मिली थी । हेडफोन मेरे पास में पहले से थे । पहले दुबई नहीं जा रहा था मगर लाइब्रेरी के काम से जाना पड रहा था और खुशकिस्मती यह रही कि मेरे मूव बोले भैया भावी ही दुबई में सालों से अपना डेरा जमाए है तो हमेशा मुझसे कहते थे यहाँ सुकून है, शांति है, धर्म है, धन है । बोला अब लाभ ला । मैंने भी वही किया जो टिपिकल इंडियंस करते हैं और आजकल का ट्रेन भी है तो कुछ भी । अगर फेसबुक पर डाल की नीति अपनाते हुए पॉकेट से अपना बैचलर जीवन साथी निकाला । बहुत सेल्फी मोड में विभिन्न प्रकार के एंगल से फोटो क्लिक की । फिर उसके बाद भी वही किया जो सब करते हैं । फेसबुक अकाउंट पर अपनी को टाइप करते हुए कैप्शन में प्रथम हवाई जहाज यात्रा टाइप करके पोस्ट कर दी । फॅसने पर्सनली मेरे पास आकर कहा हूँ । मैंने भी एक हल्के से स्माइल पास करते हुए फोन से जॉब किया । मैंने सुबह सुबह ही जयपुर से दुबई के लिए उडान भरी थी । वीजा मिलना मुश्किल नहीं था । मेरे बगल में विराजमान फिरंगी टाइप आंटी से मैंने बात करनी चाहिए । फॅालो मैंने शुरुआत की हेलो । उन्होंने मारी से आवाज में कहा रोहित असाटी टाइमर राइटर मैंने इम्प्रेशन जमाने के लिए इंग्लिश झाडी ऍम वो और ये गोइंग ही दुबई वाय उन्होंने मुझे घूरकर देखा । ज्यादा जयपुर मत । उनका क्लियर जवाब था मैंने नजरे झुका ली । मैं इन तीन घंटों कोरा बर्बाद भी करना चाहता था । इसीलिए अपनी डायरी निकाली और लिखना शुरू किया । तीन घंटे तक मेरे हाथ बस लिखे जा रहे थे, जो मेरे मन में आ रहा था । सुबह लिखे जा रहा था तभी अनाउंस हुआ । फ्लाइट दो मिनट में दुबई लैंड करने वाली थी । कौन से बुक लिखी है? फ्लाइट लैंड होने के बाद आंटी ने जाते जाते मुझसे पूछा लिख रहा हूँ । अभी पब्लिश नहीं हुई । मैंने कहा वो मुस्कुराई । उन्होंने अपनी ऍसे एक बुक निकालकर मेरे हाथ में थमा दी । मैं कुछ बोल का उससे पहले हो जा चुकी थी । कमला ऍन वाला यही राम था । उस किताब की राइटर का बुक के पीछे बनी उनकी तस्वीर देखकर मेरे मुंह से निकला । अब ही तो इंडियन है । मैं चाहता तो भैया भाभी के घर भी रोक सकता था । मगर जब फ्री फोकट में दुबई की नामचीन होटल का न्यौता मिला है तो कहा है छोडा जाए मुफ्त का चंदन घिस फेरे । नंदन वाली कहावत को याद करते हुए अपना लगेज लिए एयरपोर्ट से बाहर आ गया । मिस्टर रोहित असाटी मेरे नाम का प्लेस गार्ड लिए एक महानुभाव को मैंने अपनी तरफ आते देखा । मुझे अपने करीब आते थे । उन महानुभाव ने अपनी जुबान खोली । दुबई में तमारो स्वागत है । धन्यवाद । मैंने मुस्कुराकर कहा महानुभाव टैक्सी ड्राइवर थे । उन्होंने मेरे लगेज को टैक्सी की डिग्री में डाला और टैक्सी तेज रफ्तार से एटलांटिस होटल को रवाना हुई । व्यस्त दिन व्यतीत हुआ । मैं भैया भाभी से मिल चुका था । बहुत जरूरी मीटिंग भी अटेंड हो गई थी । होटल के रूम में पहुंचने ही मेरे बेस्ट पर कमलादास की बुक पडी थी । मैंने अपनी डायरी को हर जगह खोजा मगर डायरी कहीं नजर ही नहीं आई । मैंने मोबाइल का दे डाउन क्या? फेसबुक के इनबॉक्स में अवनी के मैसेज पडे थे मुझे सिर्फ एक मैसेज सुकून दे रहा था । तुम्हारी डायरी मेरे पास है तो तुम्हारे पास कैसे आई? मेरी डायरी मैंने मैसेज टाइप किया । मिलकर बताउंगी कब कल बॉम्बे चौपाटी पर ये कहा है लोकेशन भेज रही हूँ । मैं अपनी मुझे लोकेशन सेंड की । मुझे नींद आ रही थी । मैं ऑफलाइन हो गया । अवनी के पास मेरी डायरी थी, पब्लिशर की बेटी है । डायरी पढे बिना नहीं रहेगी । इसी उधेडबुन में मेरी नींद लग गई ।

PART 2

दूसरा भाग कैसी जिन्दगी शायद शायद और शायद ग्यारह दिसम्बर जाडे का समय कडाके की ठंड लालिमायुक्त अनंत आकाश में सूर्यास्त के कुछ समय पहले की लालिमा शहर के चारों और बिक्री थी । लोग मेहनत मजदूरी करके अपने अपने आखिरी को पधार रहे थे । ट्रैफिक का घमासान शोर जो ये अहसास दिला रहा था कि ये शहर है किसी ना किसी के इंतजार में कोई न कोई बेचैनी से अपनों की राह देख रहा था । रोडवेज की बसे अपनी रफ्तार पकड चुकी थी । शाम का वही सूरज जो सुबह आग की तरह जल रहा था अब हो चला था । सडक के एक तरफ शादी के नगाडे बज रहे थे तो दूसरी तरफ मातम छाया था । कहीं गाजेबाजे की आवाज इतनी तेज थी कि कान फटे जा रहे थे तो कहीं माताओं बहनों के रोने से आकाश भी डरा हुआ था । बात अजीब जरूर है मगर असंभव नहीं । किसी की जिंदगी में खुशी है तो किसी की जिंदगी में गम की कमी नहीं । किसी की लाइफ मजे में कट रही है तो कोई जैसे तैसे करके काट रहा है । किसी की लाइफ बन पडी है तो किसी की लगी पडी है । किसी की लाइफ में वो सब है जिसके होने पर लोग अमीर कहलाते हैं । मकर रहे किसी गरीब आदमी के आज शाम के खाने के बाद पता नहीं कल का सूरज उसके लिए लगेगा या नहीं । मगर ताजुब के बाद ये है कि ये सोचकर भी हमारे देश का सारा भिखारी मंडल रात में फुटपाथ पर चैन की नींद ले रहा है । है । सूरज तो लगेगा मगर ये तो ऊपर वाला ही जानता है कि फुटपाथ पर बडे लोगों का सूरज होगे गा या नहीं । सब अपने अपने लाइफ में फिट है, खुश है । इस बीच बाहक दुनिया के लाचारी भरे नाटक में अपना किरदार बखूबी निभा रहे हैं जिसमें हर किसी के पास एक मंच है और हर कोई उस मंच का राजा हीरो । शायद बचपन में हम सरकारी स्कूल की दीवार पर एक बात पडे थे जो मार सामने हमें बेशर्म की लाठी से कूटते कूटते याद कराई थी । वो बात हम को आज भी याद है और जिसे हजारों लोगों ने लाखों बार दौर आया है । सुख दुख दुनिया की ऐसी चीजें हैं जो अनिवार्य रूप से व्यक्ति के साथ रहती है चाहे वो गरीब हो या अमीर । उस दिन उनकी बात पर गुस्सा आया था मगर अब असलियत सामने हैं । अब ऐसा लग रहा है कि जैसे उनकी कहीं हर एक बात सही हो रही हो । हम तो सुकन् से पूछे थे कि तेरे पिताश्री ज्योतिषी थे गया कि जो हम जैसे अबूद बालको को दूर से ही देखकर हमारा भविष्य बता देते थे । अब इस बात का मतलब भी पता है वो हर मायने भी और कहते हुई है । जिंदगी के मायने जवाब कुछ समझ में आने लगे तब समझना आप बडे हो गए हैं । शिकायतें हमेशा हर किसी के पास होती है । उस वक्त हमें भी थी, अभी भी है समस्याएँ हर किसी के पास थोक में मिल जाएगी । उनसे पीछा छुडाना नामुमकिन रहा ये नहीं हो रहा है । वो नहीं हो रहा । ऐसा होना चाहिए, वैसा नहीं हो रहा । ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला ब्ला चिंता से याद आया । चिंता के भी अनंत प्रकार है । अगर हमने फेसबुकिया इंस्टाग्राम पर अपनी फोटो अपलोड की और उसमें हमें दस या पंद्रह लाइक्स मिले तो भी चिंता बढती है । हमारे अभिन्न मित्र जिससे हमारे साथ ही फोटो अपलोड की थी उसकी फोटो पर अगर हम से ज्यादा लाइक साइट तो फिर और भी चिंता बढती है की ये आज कल की चिंता है । इत्ते पाक से अगर किसी ने हमारी फोटो पर दिलवाला रिएक्ट कर दिया फिर तो बल्ले बल्ले और तब तो और जब वह ॅ किसी लडकी ने किया हूँ । इस तरह पागलपंथी के अंधाधुन गेम में हम लोल बन जाते हैं और हमें पता भी नहीं चलता । कल तो एक आदमी को कहते सुना कि ये ताजमहल अगर लाल पत्थर का होता है तो माँ कसम मजा आ जाता है बिल्कुल उसने हूबहू बात कही । मैंने कुछ नहीं कहा बस होट ऊपर किए हर बंदे से दिखा दी । हम तो बचपन से ही एक डायलॉग काट लिए थे कि जब तक हम ना चाहे किसी के बाप की औकात नहीं है जो हमें दुखी कर सके । इसका मंतर हम आज भी दिन रात रखते रहते हैं । सत्ताईस की उम्र तक आते आते हैं । हमने दुनिया में दो कैटेगरी के लोगों को देखा है । एक वो जो सच में दुखी है और दूसरे वो जो बेवजह वजह ढूंढते हैं दुखी होने की पहली वाली की डिग्री तो ठीक ठाक है । उनकी लाइफ की लगी पडी है तो दुखी हो रहे हैं इसमें कोई बडी बात नहीं मगर दूसरी वाली केटिगरी वाले बहुत बडे वाले होते हैं और उसी से बिलोंग करते हैं । मेरे परम मित्र छोटू भैया मिडिल क्लास में पला बडा छोटू अपने छोटे छोटे सपनों को आंखों में सजाए उदासी भरा चेहरा लिए खुद से ही बे खबर अपनी सारे महीनों और सालों में किए कोर्सों के सर्टिफिकेट हाथ में लिए अपने घर की ओर जा रहा था । ठंड धीरे धीरे बढ रही थी, लगी थी घर नजदीक आ गया मगर छोटों के कदम डगमगा रहे थे । मन में कई सवाल भरे पडे थे क्या जवाब दूंगा घर जाकर आज फिर वापस आ गया । नहीं मिली नौकरी सवालों के जवाब में सबसे बडा सवाल यह था कि क्या पैसा कमाना ही सब कुछ है? अगर पैसे कमाना ही सब कुछ है तो कैसे कमाएँ? कैसे बने अपने भी परफेक्ट लाइफ जो किसी की नहीं होती । बस परफेक्ट होने का भ्रम होता है । छोटू अपनी जिंदगी से थक गया था । उसके पास कोई ऑप्शन नहीं था । कोशिश करने के अलावा वही हालता छोटों का जो एक मिडिल क्लास फैमिली के लडकी का होता है । जिसके पास एक ही ऑप्शन होता है बस स्टार्ट अप करना है । कुछ बडा सा करना है । इस उम्र तक तजुर्बा तों का पहाड लिए हमने दुनिया में दो ही तरह से कम होते देखे हैं । एक तो इंटरेस्ट से काम किये जाओ या फिर दूसरा झक मार के काम करना पडेगा । जो इंटरस्ट करते हैं उन्हें कम में मजा आता है क्योंकि झक मार के काम करने में किसको मजा आता है । बदकिस्मती से जो पहला ऑप्शन नहीं चुनते उनको दूसरा ऑप्शन चुनना ही पडता है । लाइफ किस खेल में कुछ नाम का कोई ऑप्शन नहीं होता? क्या है उसके पास? क्या करे वो बस एक जिम्मेदारियों का बोझ है । उसके पास तो वो भी नहीं है जो हर किसी की लाइफ में सबसे जरूरी होते हैं । हताश निराश छोटू अपने से ही परेशान । यहाँ वहाँ नौकरी की तलाश में दिन रात भटकता रहता । उदासी भरी जिंदगी की हद हो गई थी । कभी सोचता मैं किस के लिए जी रहा हूँ । क्या रखा है जिंदगी में हालत वो चीज है जो किसी भी इंसान को तहस नहस करके रख देती है । फिर इंसान वो बन जाता है जब खुद को सपने में भी देखना पसंद नहीं करता । कुछ यही चल रहा था । मेरे परम मित्र की लाइफ में ठंड बढ रही थी । कोहरा उसकी आंखों को धुंधला कर रहा था । उसे हर तरफ सिर्फ अंधकार ही अंधकार नजर आ रहा था । सिर्फ अंदर का अंधकार । यही तो हमारी लाइफ होती हैं । कभी कभी हम मंजिल के बहुत करीब होते हैं मगर सामने कोहरा आ जाता है और हम पीछे हट जाते हैं । शायद हमें हिम्मत ही नहीं होती आगे बढने की फिर बाद में पछताते हुए कहते हैं कि बस एक कदम और बढा लेने की उस वक्त हिम्मत की होती है । मगर उस वक्त शायद हम डर रहे होते हैं कि अगर कोहरे के आगे खाई निकली तो शायद

PART 3

तीसरा भाग सब धुआ धुआ सबकी जिंदगी न जाने कितने सियापुर से भरी है । अगर उनसे आपका कलेक्शन करें तो एक मूवी की स्क्रिप्ट लिखी जा सकती है । ऐसा हमेशा मेरे साथ ही क्यों होता है कि ये हादसा शायद हर किसी के साथ होता है और ये बात शायद हर कोई कहता है । इसी हादसे का शिकार मेरा यार छोटू था । किस किस ने नहीं समझाया उसे हर किसी के ताने बाने तो सुने थे कोई भी, कहीं भी, कभी भी उससे मिलता तो बोले बिना नहीं चूकता, चाहे वो रिश्तेदार हो । क्या पडोसी देखो ऐसा होता है बिना अब आपका लडका कितनी दूरी लाइफ एसकी हर कोई अपनी तरफ से पूरी सहानुभूति दिखा था । मगर जब सहयोग की बात आती है तो सब की चुप्पी सब जाती । पता नहीं सहयोग के वक्त लोगों की सहानुभूति कहाँ मर जाती है । सहानूभूति तो हर कोई रखता है मगर उन्हें पता नहीं कि गूंगा व्यक्ति सलाह या सहानुभूति नहीं मांगता । वो सहयोग जाता है क्योंकि सलाह तो ना मांगने पर भी मिल जाती है । नहीं तो मैं ऐसा करना चाहिए तो ही ट्राई क्यों नहीं करते । मगर जब सहयोग की बात दादी तो दूर दूर तक लोग दिखाई नहीं देते हैं छोटू सलाह नहीं सहयोग जाता था भाई आज तक उसे किसी ने ये नहीं कहा कि आओ मैं तुम्हें नौकरी दिलाता हूँ । इससे व्यक्ति जले पर नमक तो नहीं छोडता, मगर उसका इंटेंशन भी समझ नहीं आता । मगर मैं अपने दोस्त को अच्छे से जानता था । उसकी खुद्दारी उसे सबसे अच्छी लगती थी क्योंकि उसे मांगने से अच्छा कमाना पसंद है । वो जिम्मेदार है और मजबूत भी । और कहते हैं जो जिम्मेदार होते हैं, कंधे उन्हें के मजबूत होते हैं । छोटू की हर मांग को हर जरूरत को उसकी आवश्यकताओं को पता नहीं क्यों परेशानी बना लिया जाता? राहत चलते लोग कहते मिल जाते हैं, जितनी चादर हो उतने पैर पसार हो तुम कहीं के लाटसाहब नहीं हो, ज्यादा रंगदारी मत बताओ । तुम कहीं की रंगदार नहीं हूँ । जाने अनजाने में क्या क्या बातें वो अपने बारे में सुनता रहता था और अंत में वह शांत होकर सीमित रह जाता हूँ कि ये किसी एक दिन की बात नहीं थी । लोगों की ताने दिनों दिन बढते जा रहे थे तो कुछ नहीं कर सकते । तो जी क्यों रहे हो? लोगों की वादियों से काटने को दौडती थी । वो चाहता था कि दुनिया छोड कर कहीं और चला जाए । एक पल उसे खयाल आता कि वह खुद को खत्म कर ले । मगर वही गलती दोबारा नहीं दोहराना चाहता था । जो उसके सबसे गरीबी लोगों ने की थी वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त था क्योंकि हम लोगो टीआईआर थे । हम बचपन से ही दूसरे को समझाते थे और मुझे मालूम था कि उसने ऐसा गलत कदम आज तक क्यों नहीं उठाया । असल बात ये थी कि वो अपने दादा दादी और बहन से बहुत प्यार करता था । उनकी आखिरी उम्मीद था मेरा भाई । जब कोई आदमी लोगों के ताने सुन सुन के थक गया हो तो उसे लोगों का समझाना भी ताना लगने लगा था । उसके अंदर गुस्सा भर गया था । बाद बात पर गुस्सा हो जाता । मगर उसके हालत, जज्बात और मजबूरियाँ सिर्फ मैं समझता था वो ऐसा क्यों हैं? उसकी बेरूखी का क्या कारण है? सिर्फ मैं जानता था छोटू जरा जरा सी बात पर जल्दी हैरान परेशान हो जाता है । शायद इसलिए भी क्योंकि उसके पास जिम्मेदारियाँ बहुत थी, मगर उन्हें संभालने की हिम्मत नहीं थी । कोई उसे हौसला देने वाला भी नहीं था । बस इन्हीं जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा छोटू अपनी बहन के सपनों को पूरा करने और बूढे दादा दादी की बुढापे की लाठी किंकर्तव्यविमूढ होकर बैठा नहीं रहना चाहता था । क्या? मूल लेकर दादी के सामने जाऊँ? फिर बिना नौकरी के वापस आ गया । ऐसे पता नहीं कितने उलटे सीधे विचार उसने अपने सहन में पाल रखे थे । उसकी आंखों में आंसू थे मगर वो नासिक को अपनी आंखों में ही समेट कर रखना चाहता था । खुद को बेनकाब होने से डरता था । उसके घर में घुसते ही जूते उतारे और किसी से बिना कुछ कहे अटारी पर पडे पलंग पर गिर गया । उसके परिवार की उम्मीद फिर से टूट गई । घडी की टिक टिक करती आवाज भी उसे ऐसी लग रही थी जैसे वो भी उसकी बदकिस्मती पर वहाँ के लगाकर हस रही हो । सुबह का सूरज अपने नए पडाव पड था । सूर्य की किरणे चारों और फैली थी हर जगह चमक धमक सुस्ती आ रही थी सडक के अगल बगल की ना लिया भरी पडी थी अम् मर्जी । दूधवाला दूध वाले ने छोटू के घर की घंटी बजाकर कहा भैया जी! कल से दो दादा लेटर ही चाहिए । छोटों की दादी ने तरफ बाजी को खोलकर पतीली आगे की क्यों माईबाप कुछ गलती हो गई का? हम से दूध वाले ने दूध देते हुए कहा । नहीं बस ऐसे ही दादी ने उससे नजरे बचाई । ठीक अम्बाजी दूध वाला दूध देकर वहाँ से चल दिया । दादी दूध लेकर किचन में गए । थोडी देर बाद दादी चाय का ग्लास लिए ऊपर अटारी में पहुंची । उठो बेटा दादी बोली नौकरी के लिए नहीं जाना गया । श्रीगांधी पलंग पर बैठ गई । ज्यादा बीमा नौकरी हो तो जाए । छोटू में ही बोला आप किस नौकरी की बात कर रही है? यहाँ जिसके पास पैसा होता है उसी को नौकरी मिलती है । फिर जमाना भी उसी का है । इन बातों से लग नहीं रहा था कि वह नींद में है । थानों पूरे होश में ये बातें बोल रहा हूँ । छोटों ने अपनी सारी भडास निकालते हैं । मुझे तो विरासत में दुआएं ही मिली है । जिससे एक चड्डी भी खरीदी नहीं जा सकती । कोशिश तो करनी चाहिए । दादी माने उस को समझाते हुए कहा कोशिश कोशिश कोशिश जब से कोशिश तो कर रहा हूँ । छोटों का गुस्सा बढ रहा था । दादी ने हालत को समझाते हुए बात बदले । लोग चाय पीओ । हमें अपनी तरफ से पूरी कोशिश करनी चाहिए । उम्मीद नहीं छोडनी चाहिए । सब का समय आता है, अपना भी आएगा । श्री दादी मुस्कुराई थी । गए दादी छोटों ने अनमने ढंग से कहा ये एक ऐसा सच था जो उस दिन उसकी दादी ने छोटों को बताया था । मगर वह भी खबर था इस बात से की ये सच कुछ सालों बाद सच में सच साबित होगा और साबित भी हुआ ।

PART 4

चौथा भाग उस से मुलाकात नहा धोकर खाली पेट छोटू फिर नौकरी की तलाश में भटकता शहरों के बीचों बीच पहुंच गया । उसके हाथ में बैग और न्यूज पेपर के क्लासिफाइड वाले दो पेज थे । कंपनी के सामने खडा होकर सोचने लगा यही कंपनी है शायद यहाँ काम बन जायेगा । आजमाकर देखते हैं । इंतजार करते करते चार घंटे बीत गए । घडी में दोपहर के ही दो बज रहे थे । इंतजार खत्म हुआ । अगला नंबर उसका था । अगर उसी समय उसके मोबाइल की स्क्रीन पर एक मैसेज का नोटिफिकेशन चमका । भैया सरकारी हॉस्पिटल आ जाओ । दादा की तबियत बिगड रही है तो वही रूको हम आते हैं । छोटू ने रिप्लाई किया । छोटू फौरन वहाँ से काट लिया । टैक्सी पकडी और हॉस्पिटल के लिए रवाना हो गया । टैक्सी से उतरकर बिना ट्रैफिक देखे रोड क्रॉस करने लगा । तभी एक लाल रंग की कार ने उसे टक्कर मार किंचित कर दिया । छोटू सर्कल के पास बेहोश हो गया कि ये एक हादसा था, मगर इसी हादसे से उसकी कहानी पलटने वाली थी । कहते हैं कुछ हादसे जिंदगी लेते ही नहीं, जिंदगी बना भी देते हैं । उसकी मुलाकात ही कैसे इंसान से होने वाली थी । जो कभी उसे अपना सब कुछ मानती थी, उस एक्सीडेंट के बाद क्या हुआ उसे कुछ याद नहीं । जब छोटे को होश आया तो उसने देखा कि वह हॉस्पिटल के बैठ कर लेता है । उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था । वो बार बार सिर में लगी पत्ती को खींच रहा था । रात के करीब डेढ बज रहे थे । छोटू की नींद खुली क्या हो गया यार कहाँ फस गए हम पलंग पर लेटे लेटे उसने सोचा । कुछ देर बाद हल्के से रूम का गेट खुलने की आवाज आई ऍम मैं घर जा रही हूँ की पारी के आवास थी कल सुबह जल्दी आ जाउंगी । बरी जाने लगी । मैडम इतनी रात को अब घर जा रही है और फिर सुबह जल्दी भी आ जाएगी । नर्स बोली दिल के करीब है क्या? ये पेसेंट नहीं ऐसी कोई बात नहीं है । रोहित जी करी मुस्कुराई तो कहते हैं कुछ लोग हमें बिना बताए छोड कर चले जाते हैं । मगर हम भी उनके साथ वही करे जो उसने किया । तो फिर हमें और उनमें क्या फर्क रहेगा? बरीकी आंखे चमक रही थी । समझ गई मैं क्या रिश्ता है आपका । इनसे नर्स गौर से पारी को देख रही थी । समझ से परे है ये रिश्ता । इस इस का नाम तो होगा कुछ पता नहीं और वो ही मैडम कुछ रिश्तों के नाम न हो तो अच्छा रहता है । मेरी वजह बेनाम से रिश्ते मुझे समझ नहीं आया । कोई बडी बात नहीं । मैंने पहले कहा था कि समझ से परे हैं ये रिश्ता मुझे भी आज तक समझने आया । कहते हुए पारी रूम से बाहर चली गई । नर्स ने भी कमरे की लाइट बंद की और गेट को जोर से लगाकर चली गई । छोटू जाग रहा था । उसने सब कुछ सुन लिया था । उनकी दरमियां अभी भी कुछ अधूरा सा था । कुछ बाकी था जो आज पारी के मुझसे जाने अनजाने में निकल गया । ये बात और है कि नर्स नर्स समझे हो मगर जिसको समझना था वो समझ गया । कुछ बातें जो हमें अभी समझ नहीं आई वो बातें ये समझ के समझ लेनी चाहिए कि ये बहुत बडी बातें थी । बातें याद रखे । मतलब बाद में समझ आ ही जाता है । छोटू की आंखे खुल गई । उसके चेहरे पर सुबह की सूरज की तेज गिरने पड रही थी । चका चौंध को छेडते हुए उसकी आंखों ने सबसे पहला चेहरा परी का देखा । वो खिडकी से पडता हटा रही थी । छोटू उठकर बैठ गया । परी अभी भी काम में लगी थी । उस से छोटों को नजरंदाज किया तो छोटू ने बात शुरू की । हाँ मैं यहाँ कैसे क्यों ताजुब हुआ कि गोल गई मुझे या में? याद नहीं बडी खतरनाक तरीके से मुस्कुराई । अब तबियत कैसी है? पहले से बेहतर छोटू बोला फिर पलंग खाली करों और भी मरीज है । जिनके दुःख दर्द हम से ज्यादा है, वह भी इंतजार में बैठे हैं । पारी ने अपना डॉक्टर वाला एटिट्यूड दिखाया में अभी तक यादव में भोली नहीं मुझे कोशिश बहुत की भूलने की । मगर फिर जिंदगी से ये हिदायत मिली की धोके भूले थोडी जाते हैं । वो मिलते ही है याद रखने के लिए अभी तक नाराज मुझसे छोटे बोला उस बात को कई साल गुजर गए । घाव कितने भी पुराने हो । निशांत हो रही जाते हैं । परी रुक गई । खैर छोडो इस बात को माफ कर सकती हूँ मुझे माफ तो उसी दिन कर दिया था जिस दिन तो मुझे छोड कर गए थे भक्तों में तो मैं जानती तक नहीं । परिंदे अनजान बनने का नाटक किया । बैठ खली करो और भी पेशेंट है जिनका ट्रीटमेंट बाकी है । छोटू चुक रहा । धीरे धीरे पलंग से उठा और जाने लगा तुम्हारे पास मेरे लिए बिल्कुल भी टाइम नहीं गया । बिल्कुल नहीं पर ये अपने मोबाइल में बिजी हो गए । जिनके पास मेरे लिए टाइम नहीं था उनके लिए मेरे पास टाइम नहीं जैसे को तैसा और वैसे भी मुझे बहुत कम है बेरोजगार नहीं हूँ । मैं छोटू रूम से बाहर चला गया । नरसी फाइल डॉक्टर अरोडा को दे देना और कहना इसे अच्छे से देख ले । कोई कमी हो तो जरूर बताये । परिवेश देखकर भी छोटों को अनदेखा कर दिया । छोटू नीचे वाले फ्लोर पर आया मगर वहाँ उसके दादा दादी नहीं थे । और दौड कर काउंटर पर खडी नर्से पूछता है यहाँ पर बूढे दादा दादी बैठे थे । आपको पता है वह कहाँ गए जी सर, उनका ट्रीटमेंट तो कल ही हो चुका है । नर्स बोली उनका ट्रीटमेंट आएगा । मैम ने किया था । मुझे लगा जैसे वो लोग उनकी कोई रिलेटिव हो । बिल बिल पहले ही पे हो चुका है । किसने किया? शायद मैंने उन्हीं के नाम से बिल बना है । नर्स ने कंप्यूटर में चेक किया । छोटू जाने लगा तभी वो नर्स बोली अब मैडम के रिलेटिव हो गया । नहीं क्यों? छोटों ने कुछ सोचा कल मुझे ऐसा लग रहा था जैसे महम का कोई सपना हो क्योंकि वो इतनी टेंशन में थी । छोटू मन ही मन मुस्कराया । उसके दिल में मेरे लिए अभी भी कुछ बाकी है । वो अभी भी मुझे चाहती है । छोटों ने मन ही मन सोचा मुझे सब सच बताना होगा उसे । आखिर उस दिन हुआ क्या था? कहते हैं की नाराजगी वाला प्यार सच्चा प्यार करने वाले ही समझ पाते हैं । जिसमें एक दूसरे की गया तो होती है मगर बात नहीं होती । जवान कुछ कहती है वहाँ नजरे कुछ कहती है कि दिल कुछ कहता है सिनेमा कुछ शायद वही प्यार पारी के दिल में अभी भी जिंदा है । छोटों ने घर के अंदर पैर ही रखा था कि सवालों की तूफान ने उसे घेर लिया । किस से बढ कर आए हो मेरी दादी ने पूछा कुछ नहीं छोटा सा एक्सीडेंट हो गया था । बस छोटू बैंच पर बैठ गया तो भी कभी सुधर नहीं सकता । एक न एक सियापा खडा करता रहता है । श्री दादी ने पानी का ग्लास छोटों की तरफ बढाया । अच्छा सुन कल परी मिली थी तो बडे डॉक्टर बन गई है । बिटिया कौन तेरे कॉलेज के दोस्त हाँ मिली होगी । छोटू फॅसा था जैसे वो कुछ जानता ही ना हो । उसके वन में कुछ तो पकडा था । एक्सीडेंट की वजह से ही से ही कम से कम बिछडे दोस्त से मुलाकात हुई । सही नाम था उसका डॉक्टर आएगा । छोटू कहकर अटारी पर जाने लगा और दादा की तबियत कैसी है? पहले से अच्छी है । कल परिधि ने ही दादा का ट्रीटमेंट किया था । संस्कृति ने बताया अभी भी उसकी हमदर्दी मुझसे और मेरे परिवार से जुडी हैं । छोटू ने एक बाल के लिए सोचा और अटारी चढ गया । उस से बात करो या नहीं । छोटू पलंग पर लेटा सोचने लगा शायद वो मेरी मजबूरी समझ पाए । शायद वो समझ जाए कि मैं उसे छोड कर नहीं आया था इस शहर में शायद वो मेरे हालात, समस्याएँ शायद सोचते सोचते छोटों की कब नींद लग गई उसे पता भी नहीं चला । गजब की मजबूरी है ये मजबूरी आदमी को कितना मजबूर बना देती है । यह मजबूरी एक मजबूरी न समझने से कितनी गलत फहमी खडी कर देती है की ये मजबूरी छोटू कई सालों से किराये के घर में रहता था तो पूरा घर ज्यादा की पेंशन से चलता था जिससे सिर्फ जरूरत के सामान ही आप आते थे । सब लोग बस इसी उम्मीद के सहारे बैठे थे की छोटों की नौकरी लग जाए । मगर पता नहीं कब लगेगी छोटों की नौकरी । ऐसा नहीं था कि छोटों के कुछ सपने नहीं थी । उसने सपने तो बहुत बडे बडे देखे थे, मगर उन्हें पूरा करने की उसमें हिम्मत नहीं थी । बहुत कुछ सोच रखा था उसने दिन बीते हैं । बीते गए शामिल । गलती है कि दाल दी गई । रातें गुजरती है, गुजरती गई । धीरे धीरे जिंदगी की उम्र बढती गई । अभी तक छोटों की लाइफ में ऐसा अवसर नहीं आया था, जिससे वह अपनी काबिलियत को सिद्ध कर सकें । अपनी काबिलियत सिद्ध करने के लिए दिनभर छोटू भटकता रहता था । इधर उधर न जाने के धर किधर खाना बदोश की तरह घूमता रहता । खैर छोटू का एक और मुश्किल दिन कट गया । दिन तो कट जाते, भटकते भटकते, मगर रात की बेचैनी उसे साफ की तरह सस्ती थी । उसी एक बात समझ में नहीं आती थी कि असाटी इतना खुश क्यों रहता है । मेरा ही क्लासमेट है । उसी भी मिडिल क्लास फैमिली का टैग लगा था । नौकरी का भी अता पता नहीं, मगर फिर भी हमेशा बिजी रहता है और इस्माइल वाले इमोजी की तरह हमेशा बेफिक्र खुशमिजाज रहता है । उसकी तो खुश रहने की वजह भी समझ नहीं आती । पता नहीं क्यों

PART 5

पांचवा भाग बाकी टपरी शाम के करीब सात बज रहे थे । छोटों अपने घर से निकल पडा कहाँ जा रहा था इसका पता उसे भी पता नहीं था क्योंकि आज वो उस गली से गुजर रहा था जो आज तक उसकी रहगुजर भी नहीं रही थी । पता नहीं आज उसे क्या हुआ । गाली को चेंज हुआ, मंदिर के सामने खडा हो गया । अपने जूते खोले और मंदिर के अंदर चला गया । कुछ देर बाद वह मंदिर से बाहर आया और थोडी दूर पर बनी चाय की टपरी है जिसका नाम बाकी टपरी था । वहां बैठ गया । चर्चा एक कटिंग बना दो । बहुत जोर से तलब आई है चाहिए कि अभी लो बेटा चाय का एक घोटी उसके गले से उतरा था की उस की नजर मंदिर के सामने रुकी कार पर पडी । उसे धुंधला धुंधला सा कुछ याद आने लगा । लाल रंग की गाडी ये तो वहीं खा रहे है जिससे मेरा एक्सीडेंट हुआ था । छोटू ने अपने चारों तरफ नजर घुमाई । हात में कटिंग चाय का ग्लास ले छोटू कार के पास पहुंचा । अच्छा तो ये वो गार है जिसने मुझे ऊपर पहुंचाने का पूरा प्रोग्राम फिक्स किया था । छोटू ने जोर के लाख कार के टायर में दे मारी । अरे क्या कर रहे हो करनी क्या बिगाडा है तुम्हारा छोटू पीछे मुडा तो से एक जाना पहचाना चेहरा दिखा तो खाना में ये पडी थी अच्छा तो वो जना तुम हो जो मुझे ऊपर पहुंचाना चाहती थी । छोटू ने जायेगा ग्लास कार के बोनट पर रख दिया तुम क्या कह रहे हो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा हूँ । मुंबई जो भी आएगा वह बढते जाओगे क्या पारी का गुस्सा जायज था क्योंकि मैं भी किसके मूल लग रही हूँ । परिणय कार का गेट खोला । अरे ऐसे कैसे जा रही हूँ तुम्हारी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैं तुम पर केस भी कर सकता हूँ । बडी छोटू कार के सामने खडा हो गया । तुम्हारी मन में जो आए वो करो । मगर मुझे जाने दो पर इन का स्टार्ट की और तेजी से निकल गई । छोटू हाथ में चाय का क्लास पकडे वहीं खडा रहा । बस जाती जाती उसकी कार को देखा जिसके पीछे रेड कलर में प्लस का निशान बना था । एक सच्चाई है जो से बताना बहुत जरूरी है । छोटू डबरी पर बैठा सोचने लगा उसे बताना चाहता हूँ । उस रात की बात छोटू की बात को अनसुना कर के परिवहन से चली गई । मगर छोटू के मन में एक हलचल से होने लगी थी । मुझे नाराजगी का कारण तो समझ आता है मगर बाद नहीं करेगी तो बात कैसे बनेगी? नाराजगी कैसे दूर होगी, वो क्या करेगा, उसे नहीं पता है । बस यही सोचकर की उसकी दिल्ली अभी दूर है । अपने घर को जारी लगा अपने बारे में किसी की सोच को कैसे बदला जाए? छोटू ने टपरी वाले चाचा से जाते जाते पूछा जोलन मुद्दा है भैया ये दूसरों की सोच बदलने के चक्कर में कई घनचक्कर हो गए । चाचा ने ज्ञान दिया तो इतना हिंदी जाडों चर्चा ज्ञान दे रहे बेटा रख लोग पंडित मानो तो मौका मिला नहीं कि ज्ञान देने लगे । मतलब ज्ञान मोदी जी की वजह से इज्जत करते हैं । तुम्हारी क्या बता कब तक प्रधानमंत्री बन जाओ और सुनो ये ज्ञान घर जाके चाची को देना । क्या पता उन की सोच बदल जाए । आपके बारे में कहकर छोटू ने गर्दन घुमाई । वो उस गले में गुम हो गया जहाँ उसका आना जाना कम था । एक सवाल के साथ गली के अंधेरे ने उसे कैद कर लिया । सवाल था कि चांस बनाना है या फिर चांस का इंतजार करना है?

PART 6

छठा भाग बस चलना है । छोटू ये सोचने में लगा था कि उसे विरासत में कुछ नहीं मिला । दूसरों के सुखों को देखकर उसे दुख होने लगा था । उनके पास सब कुछ है । मेरे पास कुछ भी नहीं । छोटों के मन में कई दिनों से यही चल रहा था । ऐसे मौके पर सिर्फ एक ही था जो उसके साथ था । उसका पक्का दोस्त रोहित मतलब मैं मतलब असाटी । चलते चलते मेरे घर के सामने पहुंचकर छोटू ने जोर से आवाज लगाई । अभी तो पार्टी कहाँ हो गये? मेरे घर से कोई आवाज नहीं आई तो थोडा और चलाने के बाद भैया घर पर नहीं है । रक्षा ने खिडकी खोलते हुए कहा दुकान पर होगा छोटों को समझने में देने लगी । ये असाटी भी बडी आपत्ति है । छोटों अपने घर की तरफ मुड गया भैया मेरा रिजल्ट आ गया । छोटों के घर में घुसते ही संस्कृति ने अपनी रिजल्ट शीट उसे थमाती एम ए टॉप की आये बढिया और शिक्षा मंत्री के द्वारा गोल्ड मैडल भी मिलना है । सच्ची पहुंची छोटू खुशी के मारे पागल हो गया । बार बार उस मार्किट को निहार रहा था । उसने मिंटो में घंटों का काम ये किया की ये बात पूरे मोहल्ले भर में आपकी तरफ फैला दी । बडे दिनों बाद छोटो इतना खुश हुआ था । जा जा दो, डब्बे मिठाई के दे दो । और हाँ, आज उधार नहीं की ये लोग पैसे छोटू दौडते दौडते हासिल चाचा के पास पहुंचा । कहते हैं खुशी सबके लिए एक जैसी होती है । बस उसे जाहिर करने का तरीका अपनी अपनी औकात देखकर होता है । आसिफ चाचा जो छोटों के परिवार के बहुत करीब थे । चाचा वो शख्स थे जो छोटों के परिवार के साथ ही शहर में रहने को आए थे । उसके दादा के अच्छे दोस्त थी । यहाँ शहर में आकर उन्होंने मिठाई की दुकान कर ली । उनका गुजारा इसी दुकान की देख रेख में होने लगा । वो आसिफ कम गुलजार ज्यादा थे । हर एक बात पर दो लतीफ चेक देते हैं । अगर हर बुरे वक्त में छोटू के परिवार का हमेशा साथ दिया और अभी तक दे रही है । क्योंकि आया आज ऐसा क्या हो गया? बडी उछल कूद कर रहे हो । हासिल चाचा बोले अरे उछल कूद क्यों ना करो चाचा अपनी छोटी ने एम ए टॉप किया है कि गोल्ड मेडल भी मिलना है । छोटू बोला अच्छा जय तो बडी खुशी की बात है हमने । गुडिया ने तो कमाल कर दिया । मैं दिल्ली आई जहाँ डब्बे लेकर जाओ और सारे मोहल्ले को जे बाद पता चलना चाहिए । आसिफ चर्चा ने आदेश और चार मिठाई के डब्बे छोटों के हाथ में थमा दिए । अक्सर हमारे साथ भी यही होता है । जब हम कोई चीज पाना चाहते हैं लेकिन जहाँ पर भी उसे हम हासिल नहीं कर पाते लेकिन जब वही चीज कोई अपना बडी शौक से पाल लेता है तो हमें भी बहुत खुशी होती है । छोटू का वर्षों पुराना सपना जो हमने साथ में देखा था आज उसकी बहन पूरा कर लाये । छोटू मिठाई के डब्बे लेकर घर वापस आ गया । पूरे मोहल्ले को उसने मिठाई खिलाई । चाची को जांचा को लाला को, ताई को, उनके पति परमेश्वर को लाभ लाभ ला सबका यही कॉमन सा सवाल था पढाई तो हो गई है अब बहन की शादी का सोचते हैं कुछ आखिर में घर पहुंचकर छोटों ने संस्कृति को गले लगा लिया । अपने भाई को बहुत दिनों के बाद इतना खुश देखा था, संस्कृति दें । सारे मोहल्ले भर को तूने मिठाई खिला दी और हम को पूछा तक नहीं । क्योंकि छोटू मैंने घर में घुसते कहा नहीं यार तुझे कैसे बोल सकता हूँ पार्टी छोटू मेरे मुँह में मिठाई होती तो मेरे घर आया था । रक्षा ने बताया हाँ आया था तो उस से कुछ बात करनी थी । बोल क्या बात है । मैंने मिठाई खाते हुए कहा बैठ कर बात करें तो बोला अभी नहीं । मेरे पास बिल्कुल टाइम नहीं है । बाद में बात करूंगा तो तुझे तो पता है । दुकान नहीं पहुंचा तो पापा दुनिया भर की सुनाएंगे । मैं दुकान चला गया । सुन बेटा छोटेलाल प्रॉब्लम तेरी लाइफ में भी हैं । मेरी लाइफ में भी है प्रॉब्लम्स की कमी तेरी लाइफ में भी नहीं और कमी मेरी लाइफ में भी नहीं । मैं रास्ते में चलते चलते छोटू को पंडितों वाला ज्ञान दे रहा था बस उनको देखने का । हम दोनों का नजरिया बिल्कुल अलग है । तो डर डर के मुश्किलों को देखता है । उन से डरता है और मैं उन का खुलकर सामना करता हूँ । मतलब मतलब ये कि राई को पहाड बना लेने की तुम्हारी पुरानी आदत है । तुम्हारे सामने खडे महान आदमी ने मतलब मैंने एक महान काम करने के बाद एक महान बात कही थी । मुश्किलों से डरकर भागों के तो कायर कहेगी दुनिया और उनका डटकर सामना करोगे तो शेर पहला होगी । मैंने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा बात तो समझ आई तेरी मगर मगर क्या मेरे ढोकले डर लगता है यार ये दिन जन्मों की तरह गुजर रहे हैं । साला अभी तक मैं कुछ नहीं कर पाया । दर दर की ठोकरे खाते फिर रहा हूँ । समझ नहीं आ रहा कि अब मैं क्या करूँ । मेरे साथ वाले कितने आगे निकल गए और वे वही खडा हूँ । बेबस लाचार बनकर छोटू तुझे पता है तो खुद में ही बहुत बडी प्रॉब्लम है । ये नहीं कर पाया वो नहीं कर पाया । मेरी लाइफ झंड हो गयी है और पता नहीं क्या क्या सोचता रहता है तो क्या करो में सोचना तो पडेगा ना यार घंटा सोचना पडेगा दूसरों से अपना कम्पेरिजन करना छोड क्योंकि जो तो है वह सिर्फ दूर है । जो तू कर सकता है वो सिर्फ तो ही कर सकता है और कोई नहीं कब तक खुद को कोसते रहोगे । छोटू चुप था उसके पास बोलने के लिए कुछ नहीं था । रोहित ने समंदर की तरफ देखा । सबके मन में क्वाई से लबालब भरी है । उन ख्वाहिशों का किनारा किसी को नहीं पता मगर कितनी ख्वाइशें कितनी फीसदी लोगों के मुकम्मल होती है ये भी किसी को नहीं पता । छोटे बच्चे से लेकर अगले आदमी तक सब सपने देखते हैं मगर दोनों के सपनों में फर्क है भाई किसी चीज के बारे में सोचना और चिंता करना दोनों में बहुत फर्क होता है । छोटू शांति से एक समझदार बालक की तरह एकचित होकर के सब चल रहा था । इससे पहले छोटू कुछ करें मैंने पाँच हमारा चेस लेकिन चिंता मत कर इतना सब कहाँ से सीखे हो तो मसाला टी ब्रह्मज्ञान है । ये याद कर लो बेटा तो क्या करना चाहता है । अपनी लाइफ में छोटों ने समझदारी बडा सवाल दाग दिया । मुझे किसी से भी खुद को कम्पैरिजन करने की जरूरत नहीं है । मैं कभी भी किसी भी रेस का हिस्सा नहीं बना चाहे वो जिंदगी की हो ये किसी भी चीज को पाने की मुझे नहीं भागना यार । किसी भी रेस में अपना खुद अकेले कुछ करना है और जिस दिन मुझे लगने लगेगा कि मैं किसी दौड का हिस्सा हूँ, मैं वो रेस छोड दूंगा । मतलब गिव अप कर देगा । फर्क है गिव अप करने और भागने से इनकार करने में । क्या भाई चलने और दौडने में फर्क होता है? समझाओ गया साटी दोस्त गिवअप नहीं करूंगा मगर दौडना भी नहीं है, आराम से चलना है मुझे दौडने में ना वो सब छूट जाता है जिसे हम छूट जाने के बाद याद करते हैं । जिंदगी के सफर में आराम से चलना है । आराम से चलने पर भी बीती चीजों की या तो आती होगी ना याद आती है । अगर याद आने पर हम यही कहते हैं कि काश उस पल खुलकर जी लिए होते तो आज कोई अब सोच रहे था । सच बताऊँ तो आराम से चलने में बीते लम्हों का अफसोस नहीं रहता । फिलॉस्फर बन गया तो पार्टी गुडमैन जैसी बातें कर रहे हैं । यही तो हम लोग बन जाते हैं । छोटू हमेशा हर चीज ग्रेट लोगों से ही नहीं सीखी जाती । उनका कहा थोडी है और थ्योरी चाहते से कुछ नहीं होता तो सीखने को आसिफ चाचा से भी सीख सकते हो तो मैं अपने दादा दादी से भी सीख सकते हो और तुम से असाटी दोस्ती करना शायद मगर इतना पर कई की जमाने में चलना है तो जमाने के साथ चलना होगा । चलेंगे ना जमाने के साथ विवाद और फसादों का हिस्सा रहा असाटी आज शांति और संतोष की बात कर रहा है । छोटू मेरे मजे लेने लगा फिर भी तू करना चाहता है दौडना नहीं चाहता हूँ, बस चलते रहना चाहता हूँ जिससे पहरों में जंग भी ना लगे और गिरोह भी नहीं । क्या थिंकिंग गुरु तुमारी छोटू मुस्कराया राइटर बनना है । रोहित ने छोटों से नजरे मिलाएं । राइटर हाँ क्या लिखेगा फिर तेरी लाइफ पर क्योंकि तेरी लाइफ ये सबसे बडा सियापा है । उस दिन मैंने ये बात कह दी थी मगर सच साबित होगी ये मुझे नहीं पता था । सही है भाई सिंह छोटू उस कराया । वैसे हम जाता रहे हैं । थोडी देर चल खुद पता चल जाएगा सरप्राइस नहीं तो सामने देख छोटू ने नजरे कुमाई, अपना कैंप पे कैसी का नाम था कैसी एकदम नया था । उसके सामने पहुंचकर रोहित अपने हाथ में बनी घडी देखने लगा । उसकी नजरें कहीं दूर देख रही थी । चलो कहाँ काॅफी ट्रीट दे रहे गया? साडी सवाल बहुत पूछता है तो दोनों कैसे में गए? कुछ देर बाद छोटों के कंधे पर किसी ने हाथ रखा । अनिकेत तो यहाँ क्यों? मेरे कैसे में मैंने रहूंगा? क्या अब भी ये तेरह कैसे हैं? बडी क्रिकेट निकले तो नहीं ये ये अपना कैसे हैं? कैसे हो भाई? लोग हमारे अभिन्न मित्र सत्तू महाराज उर्फ सत्यानाश मिश्रा थे तो उनका भाई सत्तू सारा रोहित का प्लान था अभी एक और बाकी है । मैंने कहा सुनील छोटू बोला नेताजी आपने तो कैसे खोल लिया । नेता गिरी छोड दी गया । मल्टी टैलेंटेड लोग है दुनिया में मैं बोला मतलब मतलब जे है सब तुम राज नेता गिरी और कैसे दोनों साथ साथ सुलझाएंगे । एक और वित्र पधार चुके हैं । मैंने अपनी आवाज तेज की जुहार नमस्ते मिस्टर परफेक्ट छोटू बोला सुनील चेयर पर अपनी तस्वीर रख चुके थे भी अब पर्फेक्ट तो कोई नहीं है दुनिया में हमको मालूम में साहब अगर बहुत पहले गाली फरमाए थे हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल को खुश रखने के लिए गालिब ये ख्याल अच्छा है । मैंने कहा इन्हीं बातों के कारण हमें नहीं मिस्टर परफेक्ट कहते हैं । सारे सवालों के जवाब मौजूद है इनके पास छोटू बोला भाई लोग क्या लोगे चाय या कॉफी? चाहे छोटू बोला काफी सुनील का एकलौता हाथ उठा । पुरानी यार मिले थे । बहुत बातें हुई । एक घण्टा कब निकल गया बताई नहीं चला कुछ का ये नेता जी । सत्यराज ने मजाक करने का अपना प्रसिद्ध पुराना पैंतरा अपनाया । क्या सुनाई? मिश्रा जी वही जो आजकल आप व्हाट्सएप स्टेटस पर डालते हैं । सत्तू वराज किसी आए क्या हमारी नजर अनिकेत पर थी । ऐसा का डालते हो गए । नेता जी आजकल शायद भी बन गए हैं । सत्यराज तपाक से बोले, अच्छा तो आपने चंद्र नगमें हमारी खिदमत में भी पेश कर दी थी । सुनील शायरों की स्टाइल अपनाई हाँ भाई सब ने साथ दिया सुनने भाई, अब तो कैसे भी तेरह सरकार भी देरी अब काहे गाडर? छोटू ने कहा अच्छा ठीक है । बहने कितनी कुर्सी हो पाई तो क्या है? ए श्राद सबने साथ दिया । अरे क्या है कि सबको जो आती है हमें वो चीज नहीं आती । सबको जो आती है हमें वो चीज नहीं आती । बहुत सोचा हूँ । मगर कम्बख्त हमें गंभीर नहीं आती । क्या बात है । तमिल नहीं आती । बहुत बत्तमीजी या सब मराठी पॉइंट पकडा कोई बातें भाई तमिल जभी से आ गई तो बुढापे तक के आएगी । सुनील ने निष्कर्ष निकाला सब कहाँ की लगाकर हंसने लगे । चलता हूँ दोस्त हो मैं चेयर से उठ गया । दुकान जाना है वहां हम को भी दुकान नहीं घर जा रहा है । मिश्रा जी चल रही है । जाते जाते हम भी कुछ सलाह दे जरूर मिश्राजी । छोटू बोला कहते हैं राहत तुम चुनना सही भीड में खोना नहीं क्या बात किया बाद राहत तुम चुनना सही भीड में खोना नहीं जिंदगी तो झंड है हारकर रोना नहीं अद्धभूत मेरी हिंदी बाहर आई अब मेरी बारी । छोटू बोला तो क्या है कि सुना है मोहब्बत में लोग शायर हो जाते हैं । सही सुना है आगे तो सन सुना है मोहब्बत में लोग शायर हो जाते हैं । मोहब्बत अगर टाइम पास हो तो लोग लायक हो जाते हैं । सही बात है लायर मतलब पत्र झूठे, बेईमान अच्छा है । बात खत्म हुई । सब के सब शायर बन गए हैं । उस मुलाकात की अंतिम लाइन थी दिसंबर दो हजार पंद्रह । आज छोटू की सुबह जल्दी हो गई । उसके मन में खुशी की लहर दौड रही थी । उसे अपने दोस्तों की वह सारी बातें याद आ रही थी जो कल चाय की चुस्की लेते हुए कैसे में हुई थी । छोटू और रोहित समंदर के किनारे खडे दूर से ही उसकी गहराई का अंदाजा लगा रहे थे । छोटू बे वजह मुस्कुरा रहा था । क्यों हज बडा लहरा रहे हो? मैंने छोटों को देखकर कहा हाँ । छोटू बोला कल की बाते याद आ रही है । अचानक मेरा मोबाइल बज उठा जी सर, ओके तैयार होगा । मैंने मोबाइल पर कहा कल सुबह नौ बजे तैयार रहना मैं जाने लगा क्यों? सवाल बहुत करते हो तो कह दिए तैयार रहना । बस में वहाँ से चला गया । छोटू सरप्राइज की उम्मीद में वहीं खडा रहा । शाम के करीब सात बज रहे थे । छोटे बीच पर टहल रहा था उसे सोचा कॉफी पी जाए । छोटू के कदम बीच पर बने कैफिटेरिया की तरफ बढने लगे । कैसे पहुंचा ही था कि सामने से एक कार आई छोटू के सामने आकर रुक गई । इत्तेफाक हो या किस्मत ये पडी थी कार का गेट खुला मैडम जी बाहर आई और झूठों पर बरस पडी है । क्या आज भी मरने का इरादा है मरने के लिए मेरी गाडी गलती हमेशा तो में सौर छोटू के मुझसे ये शब्द सुनकर पारी को अजीब सा लगा । ॅ पार्किंग में घुसी जा रही हूँ । वहाँ खडी गार्ड ने पारी की अच्छी खबर ली । नये आये हो गया मैं यही पाक करती हूँ कर अरे नहीं गार्ड की छोटू बोला मैं ही गलत जगह पर खडा हूँ और गाडी के सामने भी जानबूझ कर आया हूँ । गलती मेरी है हर आदमी की तरह छोटों ने निष्कर्ष स्वरूप अपनी गलती मान ली । सोस और परिणाम गाडी बैठे कैसे में आएगा और रिजॉर्ट जगह पर जाकर बैठ गई । छोटू हसने लगा कि ये तो पहले से ही बुक है । परिणय उसे घूरकर देखा ही जैसे उससे बडा पेड को इस पूरी दुनिया में न हो । मेरे लिए ही बुक है परीक्षा । जवाब था मैं हर संडे को यहाँ आती हूँ । छोटू भी सामने की चेयर पर आकर बैठ गया । छोटों की बेवकूफी पर चुप था तो मेरा पीछा क्यों कर रहे हो? परिणाम फिर सवाल किया कुछ समझाना है क्या? उस दिन रियल में क्या हुआ था? मुझे जानना इतनी नाराज की भी अच्छी नहीं । मजबूरी भी समझो । बातें मत बनाओ । परिणय उसे घूरकर देखा । अब तुम ये मत कहना कि इसके पीछे भी खानी है । हाँ वो तो है मगर झूठ छुप हो गया । मगर क्या तुम समझोगी नहीं । यही ना परीक्षा गुस्सा बढता जा रहा था । चलो चीज टॉपिक छोटों ने बात बदली । मम्मी पापा कैसे हैं? तुम्हारे बडी चुप रहे । उसके मुँह में ताला लग गया । दोनों के बीच एक सन्नाटा छा गया । खामोशी का एक नया दोनों के बीच देखने को मिला । बस समंदर का पानी के नारों से टकरा रहा था । लहरों की आवाज तेज थी । छोटों से रहा नहीं गया । उसने चुप्पी तोडते हुए कहा हो गई कुछ तो बोलो कुछ नहीं । कुछ तो छोटू ने फिर पूछा क्या हुआ? कुछ तो बताओ कुछ पर विश्वास कर सकती हूँ । विश्वास किसी का भी हो, चाहे बडे से बडे आदमी का हो या फिर तो अच्छे से टुच्ची आदमी का बडी मुश्किल से मिलता है एक चांस दे सकती हूँ । पारी हसी जो मुझे उस समय छोड कर जा सकता है जिस समय मुझे उसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी उस पर विश्वास कैसे करूँ? मुझे माफ कर दो यार मैं मजबूर था कल तुम मजबूर थे आज मैं मजबूर हूं पर इन्हें नजरे फिर ली । उस दिन तुम तो चले गए थे मगर जब मुझे होश आया तो देखा मेरी लाइफ बिल्कुल बदल गई थी भाई मामा क्या चला गया मेरी बेस्ट फ्रेंड आयशा के पापा का ट्रांस्फर दूसरे शहर में हो गया में बिल्कुल अकेली हो गई । मैं आपकी कॉफी वेटर कॉफी लेकर आया सर आप क्या लेंगे? फिर कुछ नहीं लेंगे । पारी बोली फॅार सात बजे के बाद पानी के अलावा कुछ नहीं लेते । बरी मुस्कुरायेगी सिर्फ कैसे के बाहर वाटर कूलर लगा है । वहाँ से पानी पी सकते हैं । पीटर ने बडी शांतिपूर्वक कहा खरीद जोर जोर से हंसने लगे ऍम छोटी सी स्माइल देकर वेटर वहाँ से चला गया तो मैं गुस्सा नहीं आया । बिल्कुल नहीं कम से कम तो हँसी तो फायदा ने काफी खत्म की ही थी । उसका फोन बजट था जी बस घर आने वाली हो । पारी उठकर बाहर चली गई । कहाँ जा रही हूँ कहीं भी जाओ तो मेरी कबसे भरवा होने लगी । करवानी होती तो सारी बोलता, मुझे भी जाना पडेगा । परी तेजी से चली गई । छोटू भी कैसे से निकलकर सडक पर आ गया ही जेब में हाथ डाले गाना गाते हुए घर जाने लगा । गलियों से कुत्तों के बहुत ही की आवासियों से डरा रहे थे फिर भी चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान दिए । छोटू धीरे धीरे आगे बढ रहा था । वो सिर्फ अपने घर की तरफ नहीं बढ रहा था बल्कि अपनी मंजिल की और कदम बढा रहा था उस मंजिल की और जिसका न तो निशान दिख रहा था ना ही कोई रोशनी की किरण । बस दूर तक अंधेरा ही नजर आ रहा था सिर्फ अंधेरा, एक गहरा काला अंधेरा सिर्फ अंधेरा

PART 7

सातवाँ भाग सेक्स इसका गाजर बीस दिसंबर सुबह का सूरज अपनी मंजिल की और बढ रहा था । उसकी कितने पर्दे चीरती हुई छोटू के चेहरे पर पड रही थी प्राथमिक काल की बेला अपूर्वा लावण्या को बिखेरे दुनिया के कोने कोने में प्रस्थान कर रही थी । चिडियों की चहचहाहट भी सुबह होने का आगाज कर रही थी । छोटू बिस्तर पर पडा पडा । कल शाम को पर इसी हुई बातों के बारे में सोच रहा था । छोटू पलंग से उठा और सामने के पर्दे खोल दिए । उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी कि जैसे अब से सब कुछ सही होने वाला है । बातों में बैठे बैठे फिर से कहीं किसी की यादों में खो गया था । यही वो जगह है जहां खुले विचार आते हैं क्योंकि उस समय आदमी भी खुला रहता है । वहाँ कोई दूसरा ऑप्शन भी नहीं रहता । वहाँ से बाहर जा भी नहीं सकते और वहाँ कोई आप ही नहीं सकता । इसलिए तो उसका नाम संडास रखा है । सुख शांति का वास । उसे कहा संडास खेल बहुत देर हो गई । छोटू अभी तक बाथरूम से बाहर नहीं निकला । दादी का सबर टूट गया । नींद लग गई क्या दादी की नीचे से आवाज आई नहीं, दादी बस दो मिनट छोटू दस मिनट में तैयार हो गया । एकदम जेंटलमैन बनकर नीचे आया और जूते पहनने लगा । भैया को बैठा देख संस्कृति चाय बनाने चली गयी । दादा अखबार पढ रहे थे । उनका ध्यान चोट ऊपर नहीं गया । बस इतना पूछा कहीं जा रहे हो गया आज थोडा कम है । रोहित के साथ जा रहा हूँ । अच्छा चलो दादा ने अपनी जेब से कुछ पैसे निकले । लौटरी से मैं घर का राशन भी आना जी । छोटू ने पैसे लिए और घर के बाहर चला गया । मैं सामने से ही आ रहा था । जल्दी जल हम लेट हो रहे हैं । मैंने बाइक होगी कहाँ जा रहे हो तुम दादी की आवाज आई, मुझे जाना ही आकर बताऊंगा । मैंने बाइक तेजी से आगे बढा ली । कहाँ गए भैया? संस्कृति चाहे लेकर आई वो तो चला गया रोहित के साथ हिन् दादी बोली आपने बताया नहीं आज मुझे गोल्ड मेडल मिलना है । उसने कहा बताती मगर सुनता । तबला जल्दी जाने की पडी थी । दादी अपने काम में लग गई । संस्कृति ने चाहे वही रखी और छत पर कपडे सुखाने चली गई । आज कुछ खास बात है गया । छोटू ने पूछा क्यों आज तेरे बाप ने तुझे बाइक दे दी इसलिए पूछा नहीं आज ये तो मम्मी की कृपा है । पापा तो बुआ को लेने गए हैं । उनके शहर मैं मुस्कराया । कुछ देर बाद हम दोनों एक बडी से ऑडिटोरियम में पहुंचे । वहाँ लोगों की बडी सी भीड किसी का इंतजार कर रही थी । कुछ मिनट गुजारे, स्टेज की लाइट जल उठी । ऑडिटोरियम में जोरों से हूटिंग होने लगी । कोई सीटी बजा रहा था तो कोई तालियाँ । छोटू ने नजरिये घुमाई तो देखा एक सूट बूट पहने आदमी उसी भीड से निकलकर सामने आया और भीड को संबोधित करने लगा । अब आपके सामने आ रहे हैं मोटिवेशनल स्पीकर ऍर मिस्टर जीत सक्सेना । जोरों से अनाउंसमेंट हुई ये सुनने के लिए तो मुझे यहाँ लाया है छोटे ने टोन कैसी भाव बकवास क्यों ऍम चीजें बोलते हैं तेरे हिसाब से लोगों को क्या इंस्पायर करता है जो दिल से निकले अंदर से निकले । दिल से निकली बातें ही लोगों को इंस्पायर करती है और वह तभी निकलेगी जब उस चीज का अनुभव होगा । मैंने उसे घूरकर देखा । ये हुई ना ज्ञानियों वाली बात हमें सक्सेसफुल बनना है । हमें सक्सेसफुल बनना है । हमें सक्सेसफुल बनना है, हमें सक्सेसफुल बनना है । स्टेट से ये बातें बार बार दोहराई जा रही थी । सबसे इसका गाजर दिखा दिखा के इन लोगों ने आम जनता को घाटा बना दिया है । तुम क्या मानते हो सकते इसको? रोहित ने पूछ लिया । दो लाना बकवास बैठे बैठे चालीस मिनट दूसरे थे । रोहित का मोबाइल बज उठा । वहाँ रक्षा बोलो आपके साथ छोटू भैया है क्या? हाँ संस्कृति को बात करनी है । उनसे एक मिनट रुको । मैंने छोटों को मोबाइल दिया । हाँ या मैंने आपसे कहा था ना आपको मेरे साथ कॉलेज चलना है । मुझे गोल्ड मेडल मिलना है, लेकिन बिना बताए चले गए संस्कृति ने डांट लगाई और क्षेत्र मैं तो भूल ही गया । अब तो याद आ गया ना । वहाँ तो कॉलेज पहुंच में आता हूँ । छोटू ने मोबाइल रोहित को वापस दे दिया । अरे सुनो भैया संस्कृति कुछ बोलने वाली थी मगर कॉल डिस्कनेक्ट हो गया । सुना पार्टी चलेगा मेरे साथ । छोटू बोला कहा कहीं भी तो बस बता चलेगा या नहीं देख पैसे लगाकर यहाँ आए हैं । पैसे वसूल हो जाने थे । फिर चलते हैं तो यहाँ पैसे वसूल कर मैं चला । छोटू भीड को चीरते हुए ऑडिटोरियम से बाहर निकला । बस स्टॉप पर बस का इंतजार करते करते बहुत देर हो गई । तभी सामने से एक बाइक आकर रुकी । चल बैठ ये मैं था छोटू मुस्कराया । आॅडी पहले इतना फुटेज के उठा रहा था तो कहते है अर्जेंट और इंपॉर्टेंट चीजों में से अर्जेंट चुनना चाहिए । मैं फुसफुसाया मतलब में अर्जेंट हुआ साटी । हम दोनों हंस पडे । उस दिन में उसे नहीं बता पाया था कि जब मेरे साथ बिना सोचे बिना समझे कहीं भी साथ चल सकता है तो मैं उसके लिए इतना भी नहीं कर सकता हूँ । उस दिन जब हम लोग पहुंचे तो पूरा कार्यक्रम खत्म होने की कगार पर था । हम दोनों पीछे ही कुर्सियों पर बैठ गई । अब अंतिम अध्यक्षीय भाषण के लिए आदरणीय शिक्षा मंत्री जी से निवेदन करता हूँ कि वह आई और हमें मार्गदर्शित करें । सभा के एंटनी घोषणा की सम्मानीय मंच और प्यारी बच्चों समय बहुत हो चुका है । मैं ज्यादा नहीं बोल होगा । पहले तो उन बच्चों को बधाई जी ने आज गोल्ड मेडल प्राप्त हुआ । आप लोग हमारे देश का भविष्य है । आप हमारे देश की आन बान और शान है । अगर आप पढेंगे तभी तो देश बढेगा । छोटों को नींद आने लगी । दो मिनट कहकर दो घंटे लेंगे । वहीं घिसापिटा भाषण मैंने उनका साथ दिया । मैं थोडे से समय में छोटी सी कहानी सुनाना चाहता हूँ कि जो वास्तविकता पर आधारित है । एक बार में ट्रेन में सफर कर रहा था । एक सज्जन व्यक्ति सूट बूट पहनकर बैठे थे । एक बच्चा चाहे लेकर आया और इत्तेफाक से उन भाई साहब से टकरा गया । चाय से उन सज्जन के कपडे खराब हो गए । वो भाई साहब आप बबूला होते और फिर उस बच्चे को जोर से लात मार दी । सारी सभा टकटकी लगाकर शिक्षा मंत्री महोदय को देख रहे थे तो मैं पता है कितना कीमती सूट है वो चिल्लाएगा उस बच्चे के वो उसे खून आ गया । मेरे पास में बैठ एक सज्जन व्यक्ति सब देख रहे थे । उनके साथ उनका बच्चा भी था । करीब बारह साल का । उन्होंने इस बच्चे को उठाया । कुछ पैसे दिए और जाने के लिए कहा । उस समय सज्जन व्यक्ति ने एक बात कही थी, वो मैं आपको बताना चाहता हूँ । उन्होंने कहा था कि अगर शिक्षित लोग ऐसे होते हैं तो इससे भले हम अनपढ ही सही सोचा था अपने बेटे को पढाऊंगा । मगर अब तो उसका अनपढ होना ही अच्छा लग रहा है । इसके बाद वो अगले स्टेशन पर उतर गए ही दोस्तों के साथ ही हूँ । उस दिन मेरे मन में ये विचार आया था कि हम कितने शिक्षित है । अगर हमारी शिक्षा उन सूट बूट पहने सर्जन की तरह है तो ये शिक्षा किस काम की? आप अपनी जिंदगी के इस मुकाम पर है जहां आप ही निर्णय करेंगे कि आपको क्या करना है । आप भविष्य हो देश का । सभा ने तालियों से उनका स्वागत किया । सभा समाप्त हुई । दो मिनिट लिए थे । सभा के अध्यक्ष ने सबको घर जाने की जल्दी पड रही थी । छोटू ने देखा सामने से संस्कृति आ रही थी । उसकी आंखों में गुस्सा था । मगर छोटों की नजर मगर छोटों की नजर उसके साथ आ रही आयरा पर थी । मुझे कोई आश्चर्य नहीं था भैया आप लेट हो गए थे । संस्कृति ने गुस्सा निकाला, कोई मजबूरी होगी । फायदा बोली वहाँ नहीं नहीं छोटों के बचने के प्रयास व्यर्थ थे क्योंकि अब संस्कृति का साथ देने के लिए उसकी होने वाली भावी जो साथ थी ।

PART 8

आठवां भाग सब सफर में है । भयानक रात का । तीसरा पहले हिन् दादा के खर्राटों से छोटू सोनी बारह था । गले में कुत्तों के भौंकने के असहनीय आवासी उसे गुस्सा दिला रही थी । वो कर भी जा सकता था । कुत्ते के सामने हम भी तो बहुत ना शुरू नहीं कर सकते, ना रात हुई है तो सुबह भी होगी । ये सोचकर छोटों अपने कानों पर हाथ रखकर सोने की कोशिश करने लगा । धीरे धीरे रात रात को अपने में ओढते सुबह की ओर बढने लगी । इक्कीस दिसम्बर दो हजार पंद्रह सुबह का सुंदर नजारा उत्साहित सूरज बादलों को चीरकर अपना तेज दुनिया के कोने कोने में फैलाने के लिए बेताब था । समंदर का मिजाज आज खुशमिजाज था । तेज लहरों के कारण समंदर का पानी अपने किनारों से टकराकर फिर उसी में समा जाता । हवाई सनएडिसन करके छोटों के कानों के पास से गुजर रही थी । मंदिर मंदिर हवा के झोंके वहाँ बैठे कई जोडों को राहत दे रहे थे । काफी हरियाली वहाँ पर नजर आ रही थी । छोटू मन ही मन कुछ बातों को दवाई तेजी से रास्ते में आसिफ चाचा को सलाम ठोकते हुए एक आलीशान मकान के बाहर खडा हो गया । कहाँ घुसे जा रहे उठाया एक मोटा सा हष्ट पुष्ट पहलवान टाइप सिक्योरिटी गार्ड ने ब्रेक लगाकर पूछा । छोटू नजरे घुमाई । शेखर अंकल से मिलना है । छोटों ने बडी विनम्रता से पूछा बच्चे तुमने आने में देर कर दी । गार्ड ने बोला क्यों लुढक गए क्या? लिंगार्ड छोटू के पास आकर उसे घुटने लगा क्या? बोले तो छोटों की कॉलर गार्ड के हाथों में थी क्या? बोला तो आने में देर कर दी ये आप किसी से भी बोलोगे तो कोई भी यही समझेगा की कुछ बुरा हुआ देर कर दी । मतलब विदेश गए हैं । वह फैमिली के साथ जानते हो । विदेश क्या कहलाता है? क्या कहलाता है जहाँ देश नहीं है वह विदेश कहलाता है । समझे बुडबक समझे पीटर जो है निकल लोग यहाँ से नहीं तो घुमा के ऐसा गाल पर खींचेंगे की अतरंगी बूट हो गए । अच्छा छोटों चुपचाप वहां से जाने लगा । शेखर साहब उसके पापा के दोस्त थी । उसके पापा ने अपने दोस्त के साथ कंपनी खडी की थी । दोनों ने आधार का पैसा भी लगाया था । मगर उसके पापा के जाने के बाद शेखर अंकल ने भी छोटू और उसके परिवार से किनारा कर लिया । छोटों तो इसी विश्वास के साथ वहाँ गया था कि उनसे कुछ मदद मिल जाएगी । मगर हुआ उल्टा छोटू के कदम डगमगाने लगेंगे । चलते चलते वह बहुत दूर निकल आया था । रास्ते में उसे कब्रिस्तान दिखा । वहाँ कब्रिस्तान के बाहर छोटू बैठ गया । कब्रिस्तान के बाहर बडे अक्षरों में एक ज्ञान की बात लिखी थी । आप किसी के सहारे मत रहो । जिसके जा रही के बाद आप बेसहारा हो जाओ का देख रहे बेटा एक अंकल उसके पास आकर बैठ गए । आपका भगवान का दोस्त । उन अंकल ने जवाब दिया, मतलब मरे लोगों की राष्ट्र को यहाँ कब्रिस्तान में खाक करता हूँ । उन अंकल के चेहरे पर एक स्माइल थी, अच्छा मजाक है । छोटा गोला मजाक नहीं काम है । छोटू वहाँ से जाने लगा । कहाँ जा रहे हो अंकल लेटो का आप से मतलब मतलब तो नहीं है मुझ से लेकिन मंजिल यही है । सब की बात ऊपर से गए । मेरे मतलब जो लोग देख रहे हो, ये सब सफर में है तो और इनकी मंजिल पर मैं और तुम बैठे हैं । कैसे ये सब आएंगे मार के इस कब्रिस्तान में खाक होने अंकल के चेहरे पर एक बूढी हंसी थी । आंखों में आंसुओं का समंदर लिए भटकता भटकता । फिर उसे समंदर की तरफ छोटू मुड गया । रविवार का दिन किनारे पर लोगों का जमावडा धीरे धीरे बढ रहा था शायद आज उस से मुलाकात हो जाएगी । छोटों ने मन ही मन सोचा समंदर के किनारे बैठा छोटो कई घंटों से किसी का इंतजार कर रहा था । शाम का समय ठंड के कारण उसकी नाक जम गयी थी । उसकी आंखें बडी बेसब्री से दूर दूर किसी को देखने की कोशिश में लगी थी । इंतजार खत्म हुआ । सामने से एक कार आकर रुकी । कार का गेट खुला । डॉक्टर आएगा । बाहर निकली जो वो कैसे के अंदर पहुंची तो उसने देखा चोट उसकी रिजर्व स्थान पर बैठा था । बेटे ने उसे बताया कि बार बार मना करने पर भी छोटू वहाँ से नहीं उठा । तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? यहाँ मुझ से बिना पूछे बैठने की पारी में अपना ॅ टेबल पर पटका । तुम से मिलना था इसलिए बैठा हूँ । एक घंटे से छोटों ने बडी मासूमियत से कहा किसने इजाजत दी तो सौरी मेरी गलती है तो फेमस डॉक्टर बन गए हो तो मुझे तुमसे पहले प्वाइंट लेना चाहिए था । हाँ दोनों चुप हो गई । एक बात करुँ बुरा तो नहीं मानोगी । छोटू बोला बोलो रहने दो । बुरा मान जा होगी । नहीं मान होंगे । अब बोलो भी रहने दो फिर कभी बता दूंगा । छोटू ने बत्तीस दिखाई बताना हो तो बताओ नहीं तो भाड में जाओ गुस्से से पारी की आंखे बडी दिखने लगी । चलो मैं बता देता हूँ । छोटू फिर बोला मुझे नहीं सुना । पर इन फिर कहा मैं बता रहा हूँ ना, तो सुनु अगर तो अगर मैं अगर तुम ऐसे एक स्टेशन मरीजों को भी देती होगी तो मरीज बिना इलाज के ही मर जाते होंगे । छोटों हस पडा वर्ट मैं एक डॉक्टर हूँ और मुझे पता है कि इस से कैसे बात करनी है । फॅस बुरा मत मानना । छोटू बोला मैं पूरा बाहर हूँ । अच्छा एक और बात होगी छोटों ने फिर बात छेडी, बिल्कुल भी नहीं, पर इन्हें दाद ने पूरे अगर तुम्हारी बकवास हो गई हो तो काफी ऑर्डर करूँ जी जरा पर इन से घूरकर देखा । आवारापन छोडो और कुछ काम धाम करूँ । परी कॉफी खत्म करके जाने लगी, मैं वाला नहीं हूँ । माना नौकरी नहीं है मेरे पास । मगर मुझे विश्वास है कि मुझे नौकरी जरूर मिलेगी । पारी को जिसका इंतजार था, वही हुआ । हाँ, बस आने वाली हूँ । घर पर इन्हें फोन कट किया और तेजी से कैसे से बाहर चली गई । छोटू फिर उसे ये नहीं बता पाया कि उस रात क्या हुआ था । फिर छोटों की हालत समुद्री जहाज के ऊपर बैठे कौवे की तरह हो गई थी । कोई पता बता दे हमें कहा जाना है कितनी भी दूर चले जाए वापस उसे उसी जहाज बनाना है । उसने भी अपने कदम बढाई । कैसी बाहर निकला और घर के लिए चल बडा बे परवाह बेगानी सडक पर आवारा लोगों की तरह वो भी आवारा बन गया ।

PART 9

नवा भाग जिंदगी में स्ट्रगल, दिसंबर स्ट्रगल बिना जिंदगी जिंदगी नहीं और किसी की नहीं । सच हम नहीं सच तुम नहीं सच है, सतत संघर्ष रही । कुछ सालों पहले ये पंक्तियां पढी थी क्योंकि वो हमारे नवी क्लास के कोर्स में थी । उस वक्त कविता बस पढ डाली थी अगर उसका मतलब अब समझ आ रहा है । शायद कभी ने इन पंक्तियों में अपने पूरे जीवन का सार भर दिया है । आज का सच भी यही है । खराब भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कही ना कही संघर्ष करता है । चाहे वो अमीर हो या गरीब सब अपने स्टाइल स्ट्रगल करते हैं । आमिर आमिर बने रहने के लिए स्ट्रगल करता है । हर गरीब अमीर बनने के लिए स्ट्रगल करता है । मेरे दोस्त की जिंदगी भी इन्हीं संघर्षों से होकर गुजर रही थी । जज्बातों से भरा उसका मन चेहरे पर रोखा पर खुद से खफा अपनी मंजिल से बे खबर खुली आंखों से उडान भरने के सपने देख रहा था । छोटों की नींद खुले, उदासी भरा चेहरा लिए लापता । पता नहीं वो किस तरफ अपने कदम बढा रहा था, भागता जा रहा था । बस भागता भागता वो उन सपनों में खो गया जो उसने खुली आंखों से देखे थे । बंदरों की आवाज से अचानक उसकी नींद टूट गयी । सपना सपना ही रहा । हकीकत सामने थी । कुछ देर बाद छोटू बातों से बाहर निकला । मोबाइल पर रोहित के कई सारे मिस कॉल पडे थे । छोटे ऍप्स पर ध्यान नहीं देते हुए फटाफट तैयार हो गया । अभी मुझे काम से बाहर जाना है । थोडी देर बाद वापस आकर नेशनल करूंगा । छोटू ने शूज पहनते पहनते दादी को आवाज लगाई । घर से बाहर निकलते ही छोटों ने रोहित को कॉल करने के लिए अपना जेब टटोला । अगर उसमें मोबाइल नहीं था । मोबाइल तो ऊपर अटारी पर ही छूट गया । ये सोचकर छोटू आगे बढ गया । छोटे मेरे घर के सामने खडा था और गौर से मेरे घर के दरवाजे पर लगे ताले को देखने लगा । छोटू ने तेज दौड लगाई और भागता भागता अपने घर पहुंचा । अटारी पर पहुंचने ही मोबाइल उठाया और देखा । सोलह मिनट कॉल क्षेत्र छोटू ने कॉल बैक किया । उसे चिंता होने लगी । पहले कभी मैंने उसे इतनी कॉल्स नहीं किए थे । कब से तुझे कॉल कर रहा हूँ तो जवाब ही नहीं दे रहे । में भी रो रहा था यार । मैंने मोबाइल देखा नहीं था । अच्छा बता क्यों कॉल किया । कॉल क्यों किया था, ये तुझे मिलने पर बताऊंगा । तेरे घर गया था, वहां ताला लटका है । यही बताने के लिए कॉल किया था तो बस हॉस्पिटल आ जा भी मैं भी यही होप हॉस्पिटल में क्यों कुछ सीरियस है? हाँ यार, इधर आएगा तो खुद समझ जाएगा । मैंने कॉल डिस्कनेक्ट किया । छोटू तेजी से हॉस्पिटल की सीढियाँ चढते हुए दूसरी मंजिल पर पहुंचा । छोटों ने आसपास अपने नजर दौडाई । कुछ दूरी पर बहुत से लोग खडे थे । उसे पारी कि भुआ देखी । फिर मैं नजर आया । छोटू दौडते दौडते मेरे पास पहुंचा । मेरा सारा परिवार वहाँ मौजूद था । पास आते ही मैं छोटों की गाली लग गया । मेरी आंखें आज भरी थी, आज भी रो रहा था । छोटों को लगा कुछ तो गडबड है । अगर अनुमान यकीन में तब बदला जब उसने मुझसे बात की । हम दोनों बैंच पर बैठ गए । हमारे सामने आईसीओ रूम का दरवाजा था । पापा का आये तेरे यहाँ इतने सारे लोग क्यों घटा हुए हैं? छोटू का पहला सवाल था सामने आई । सी यू में मैंने आंसू पहुंचे । क्या हुआ उन्हें पापा का एक्सीडेंट हो गया यार अंकल का एक्सीडेंट ही तो हुआ है । इतनी सी बात पर तो इतना रो रहा है कि इतनी सी बात है । मैंने से घूरकर देखा हॅूं तो हुआ है, मारे तो नहीं तो कहना क्या चाहता है । तब वो जब वो मर जाते हैं नहीं, आप मजाक कर रहा हूँ तो मुझे अभी भी मजाक सूचना है । मैंने छोटों को गुस्से से देखा । मेरे पापा आईसीयू में है और तुझे मजाक सूचना है, इतना सीरियस हो रहा है तो तो क्या करूँ? हसु नाजू कॉमेडी सीरियल देखो वो बात नहीं है । वो गेट छोटों ने मेरे कंधे पर हाथ रखा । पहले तो ही तो कहता था मेरा बाप ऐसा है । मेरा बाप ऐसा है, मर जाए तो अच्छा है । साला खडूस और पता नहीं क्या क्या । तो वो बात अलग थी । छोटू तो तुझे उनसे मुक्ति मिल जाएगी । फिर क्यों हो रहा है? ऐसी बात नहीं है । छोटे हूँ मैंने एक दफा छोटू के मानसून से चेहरे को देखा तो फिर क्या बातें? रोहित बताओ मुझे तेरी भाषा जो बदल गई । कल तक अपने बाप को बात कहने वाला आज पापा बोल रहा है मैं उन्हें कुछ भी बोलूँ मगर है तो वह मेरे पापा मैं चुप हो गया । मुझे छोटों की इन बातों पर बहुत गुस्सा आ रहा था । गजब दिया । इस वक्त मेरी दोस्त को तेरी शक्ति जरूरत है और ऐसी बातें कर रहा है । मैं मानता हूँ कि उनको मैंने बहुत बुरा कहा । मुझे डाटते हैं, मारते हैं । बस इसलिए क्योंकि वो मेरा बुरानी चाहते हैं । आज मैं इतना काबिल बन पाया हूँ तो बस उन की वजह से मैं फिर से चुप हो गया । दूर दूर तक कोई आदमी दिखाई नहीं दे रहा था । वो भी मुझसे बिहार करते हैं । मेरी पर वहाँ करते हैं । रोहित ने फिर बोलना शुरू किया । बस कुछ लोग वोटों से बता देते हैं और कुछ नहीं बता पाते । तो मैं उनको मुझे डाटते हुए देखा है । उनका बागबान रूप नहीं देखा । बाहर से कठोर देख रहे आदमी को देखकर हम ये नहीं बता सकते हैं कि वो कितना अच्छा है या कितना बुरा है । कुछ मजबूरियाँ कुछ जिम्मेदारियाँ आदमी को कठोर बना देती है मगर वो कमजोर नहीं होता । गु्स्सैल दिखता है मगर मजबूत रहता है । अपने वादों पर मैं आगे कुछ बोल नहीं पाया । मेरा गला रुंध गया । छोटों ने मेरे कंधे पर हाथ रखा मगर मैंने उसका हाथ अपने कंधे से हटा दिया । मैं भी किस पागल को समझा रहा हूँ जिससे बात का प्यार ही नहीं मिला हूँ । झूकी नजरे चुके हैं । आंसू तो उसकी आंखों में भी आ गए । एक काम कर मैंने गुस्से में कहा बेहतर होगा की तो यहाँ से चला चाहूँ सौरिया जो यहाँ से छोटे हूँ । एक बात करूँ फिर मैं चला जाऊंगा । छोटू बैंक से उठ गया तेरे पापा का एक्सीडेंट हो गया और दो इतना रो रहा है फिर मेरी तो पूरी दुनिया उस आधी उम्र में उजड गई थी तो मुझे कितना होना चाहिए । छोटू जाने लगा चलता हूँ दोस्त देखिए छोटू दूसरी मंजिल से नीचे आ रहा था तभी उसे पडी मिली पारी सुनो बोलो समंदर का नजारा पानी पर चमक हूँ किनारे पर लोगों का जमावडा लडके लडकियों के जोडे वहाँ की सुंदरता बता रहे थे । छोटू भी वही किनारे रेत पर बैठक किनारे का पानी बार बार आकर उसके पहले को गीला कर रहा था । वहाँ के गिली रेट में उसने बैठे बैठे लकीरों का टेर खडा करती धूप बढती जा रही थी । सुबह से उस से कुछ नहीं खाया था । धूप भी लग रही थी । यहाँ समंदर के किनारे बैठा छोटू आसपास बडे छोटे छोटे पत्रों को पानी में फेंक रहा था । तभी अचानक पीछे से किसी का हाथ उसके कंधे पर पडा । उसने पीछे मुडकर देखा तो एक लंबे बालों वाला बुजुर्ग सफेद गाडी, पुरानी सी टोपी, मैला कुचैला कोर्ट बहने उसके सामने खडा था । हालत देखकर पता चल रहा था जैसे कई दिनों से नहाया ना हो और खाने को कुछ मिला ना हो । आगे बिल्कुल छोटी सी चेहरे पर झुर्रियां ही झुर्रियां की जो ये बता रही थी कि समय की मार से ये भी अछूते नहीं रहे हैं आप कौन? छोटू ने उन्हें इग्नोर करते हुए पूछा, पत्थर फेंक रहे उस समुद्र में उसे भी दर्द होता है? अच्छा मुझे तो पता ही नहीं था । छोटों को हंसी आ गई । मैंने सोचा लोगों को दूसरों के दुख से ज्यादा खुशी मिलती है तो हम भी समंदर में पत्थर फेंक कर खुश हो रहे हैं । अच्छा ऐसा भी होता है क्या? कहते हुए वो अंकल उसके पास बैठ गए और छोटे छोटे पत्थरों को पानी में फेंकने लगे । ये वही अंकल के जो उस दिन कब्रिस्तान के बाहर मिले थे । अब है कौन? हमदर्द बनने का ज्यादा शौक है क्या नहीं । उन अंकल का सीधा जवाब आया छोटों ने उनसे नजरे कुमारी और फिर से संबंध निहारने लगा । धूप बढ रही थी इसलिए उसने घर जाने की सोची । मैं वहीं हो बेटा जिसकी कीमत इस उम्र तक आते आते सीरो हो जाती है । अंकल बोले मतलब भगवान का हेल्पर अंकल थोडा मुस्कुराएं । छोटू चुक रहा । उसके पास बोलने के लिए कुछ नहीं था तो तुम्हारा नाम क्या है? अंकल ने पूछा हूँ कुछ नहीं छोटू जाने लगा कुछ नहीं । ये कैसा नाम है । नाम तो हमारे जमाने में हुआ करते थे । राजा दीनदयाल लगता है इसी लगभग से आप अकेले रह गए । छोटू बीच में ही बोल पडा । अंकल कुछ नहीं बोले । उन्हें बुरा लगा । चुप चाप नजरे फेमली छोडो समझ गया । उन्हें हर्ट हुआ है होने के पास बैठ गया । सौर्य छोटू बोला कोई बात नहीं, आदत है इसकी । अंकल मुस्कुराती क्या करते होता हूँ? कुछ नहीं । कुछ नहीं । मतलब बेकार हो । बेकार मतलब हमारी भाषा में बेकार मतलब बेरोजगार निठल्ला अंकल ने बेकार शब्द की विस्तृत व्याख्या की । आपको कैसे पता चला? सिंपल है यहाँ दो ही लोग बैठते हैं । पहले वो कुछ काम नहीं । ऐसे तो और जिन्हें काम से आराम नहीं, काम में मजा नहीं, वो यहाँ आराम करते हैं । काफी अच्छा ज्ञान रखते हैं । हाँ वो तो है । आखिर कंपनी का सी । ई । ओ रहा हूँ । मतलब मतलब मजाक कर रहा हूँ । अच्छा मजाक है । दोनों हंसने लगे । सुनो चाय पिलाओ के अंकल ने बेसब्री भरी आंखों से छोटों को देखा । पीला रेता अंकल जी मगर क्या करें? इधर बने कैफे में एक चाय के रुपये लगते हैं और आप समझ सकते हैं एक बेरोजगार आदमी की हालत समझ सकता हूँ । तभी तो चाहिए यहाँ नहीं । पास में डबरी है । वहाँ पांच रुपए में कटिंग चाय मिलते हैं । अंकल के चेहरे पर एक अजीब मुस्कान थी । ठीक है फिर चलो छोडो खडा हो गया और उनके साथ हो लिया । शाम के सात बज रहे थे मैं और मेरा पूरा परिवार आईसीयू रूम में बैठा था । डॉक्टर आएगा । रूम के अंदर आई । अब कैसी तबियत है । अंकल जी थी के बेठा तापा ने बैठना चाहा मगर कोशिश बेकार रही । आप आराम करिये इस की जरूरत है । आपको आएगा ने मुस्कुराकर कहा आएगा जाने लगी रोहित कुछ फॉर्मलटीज बाकी है तो मेरे कैबिन में आ जाओ । वहाँ बात करते हैं कहकर वो चली गई । मैं भी उससे बात करना चाहता था । उसे थैंक्यू कहना चाहता था क्योंकि उसने जो हेल्प की है वो कोई अपना ही कर सकता है । कुछ देर बाद मैंने आयरा के कैबिन के पास पहुंचकर दरवाजे को नौ क्या एस कमेंट अंदर से आवाज आई आई ने मुझे देखा और रोहित बैठो आयलानी चेयर की तरफ इशारा कर के कहा थैंक्यू वैरी मच पडे वेलकम वैसे परी बोलो या डॉक्टर आएगा । परी बोलो इसमें अपनापन लगता है और अच्छा भी पारी मुस्कुराई । मतलब अपने बाल में अच्छा लगता है । वह नाइस पाँच धन्यवाद हाँ, क्योंकि मुझे भी और लगता है जब अपना क्लासमेट मुझे पारी की बजाय आएगा, बुलाता है । हम दोनों हंसने लगे और कैसा क्या चल रहा है सब मजे में है । करीब फाइल उठाते हुए कहा ऐसी क्या मजबूरी थी जो कॉलेज छोडकर भाग गए थे? कहानी छोटी है मगर मैं बात पूरी नहीं कर पाया । मगर क्या रोहित एग्जाम के कुछ दिन पहले हम दोनों बात कर रहे थे मेरे पापाजी शहर में बनी दादा की दुकान पर जिस पर तीन साल से केस चल रहा था उसका निर्णय हमारे पक्ष में हुआ था । वो बहुत खुश थे और उन्होंने ये जगह छोडकर शहर जाने की तैयारी भी शुरू कर दी । वहीं दुकान का काम चलेगा । ये सब पहले छोटों को बताया । फ्लैश बैक इक्कीस मार्च दो हजार ग्यारह मतलब तू यहाँ से जा रहा है । उसने कहा जाना तो पडेगा या तो जाना । छोटू ने अनमने ढंग में कहा बुरा मत मान यार, मैं बुरा क्यों मान होगा? उस की आवाज में चिडचिडापन था तो मैं हूँ । हाँ निकल और तुम लोग भूल मत जाना मैं उस दिन छोटों ने कह तो दिया कि चला था मगर क्यों मुझे लग रहा था कि उसे मेरी जरूरत है क्योंकि उस वक्त जिस दौर से वो गुजर रहा था उसके पास मेरे अलावा कोई नहीं था । दिसंबर रोहित चुप हो गया । फिर क्या हुआ तुम छोड आए उसे करी बोली हाँ लेकिन फिर वो शहर कैसे आया? यही तो बात है हमारी दोस्ती की । रोहित को अब सारी बातें याद आ रही थी । अपने घर पहुंचती ही छोटों ने दादा दादी से कहा की हम शहर चलते हैं । वहाँ दादा का छह से इलाज हो जाएगा । शहर में जो बुआ का घर खाली पडा है वहाँ रह लेंगे । बुआ फूफा जी विदेश में रहने लगे थे इसलिए उनका शहर वाला घर खाली पडा था । उसके दादा दादी तुरंत नहीं माने । मगर जिस रात दादा की तबियत बहुत ज्यादा खराब हो चली थी तो छोटू ने शहर आने का डिसीजन खुद लिया और सब को विश्वास दिलाया कि वहाँ पर अच्छी जॉब ढूंढ लेगा तो सब यहाँ करती । यहाँ पर उसने कुछ बिजनेस की कोर्स कर लिए । फिर फिर क्या वहाँ मेरा साथ छोडने वाला था वहाँ गए हम साथ इस शहर में मैं मुस्कुरा रहा था । मुझे बताना जरा भी जरूरी नहीं समझा तुम लोगों ने परिंदे सहमे हुए कहा है छोडो मगर फिर तुमने उसका साथ छोड दिया । मैं नहीं मैंने कहाँ छोडा उसका साथ पता है । रोहित तुम कॉलेज से ही राइटर बनना चाहते थे तो तुमने मुझे अपने शॉर्ट स्टोरी पढाई थी । यादे तो में हाँ उस स्टोरी की वो लाइने तुम्हें याद है कौनसी उस आदमी का साथ कभी मत छोडो जिससे तुम्हारा साथ तब दिया जब तुम्हारे साथ कोई नहीं था । फायदा चुप हो गई यादे मगर उस ने मेरा साथ कहाँ दिया? अभी जब जरूरत थी तब अकेला छोडकर चला गया । रोहित तुम्हारे पापा को ब्लड डोनेट उसी ने किया है, छोडकर वो नहीं । उस दिन तुम जा रहे थे । आज तुमने उसकी फीलिंग समझे बिना ही उसको जाने के लिए कह दिया । तुम से अपनी फीलिंग नहीं करेगा तो किससे कहेगा? मैं चुप था । मुझे समझ नहीं आ रहा था कि अब मैं क्या करूँ । बस लग रहा था मैंने कुछ गलत किया है । शेट्टी या मेरे मुंह से निकला अभी देर नहीं हुई है । पर इन इशारा किया शायद मैं उसकी तरफ दारी नहीं कर रही हूँ । बस एक दोस्त के नाते कह रहे हैं गलत फैमी मत पालों क्योंकि मैं उसका अंजाम देख चुकी हूँ । अभी कहा होगा वो कॉल करके पूछ लोग हाँ, तुमसे मिलने के बाद छोटू मुझसे मिला था उसका और तुम्हारे पापा का ब्लड ग्रुप सेम था । इसलिए उसको मैंने ही ब्लड डोनेट करने को बोला था । मुझे उसके पास जाना होगा । रोहित बोला तुम जाओ फिर देर मत करो पर ये आवास पहुंची की मैं उसे पसंद करती हूँ । इसीलिए तुम से कह रहा हूँ उसे तुम्हारे जैसे दोस्त की जरूरत है, उसे मना लेना । आज पहली बार मेरी आंखों में छोटों के लिए आंसू थे । मुझे वही बात याद आ रही थी । चोपर इन्हें मुझे याद दिलाई थी । मैं इतना सेल्फिश कैसे हो गया? मैं अपने पापा के पास बैठा था । मेरी आंखों में आंसू थे । पापा की आंखें क्या रो रहे नालायक कारूर ऐसी आंसू निकल आए । कैसे आंसू निकल आए । बेवकूफ अपने बच्चे को बनाना अपने बात को नहीं । बहुत दिन से आपकी डाटने घाई उसी मिस कर रहा था । अच्छा मुझे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने दे फिर बताता हूँ उस दिन मैं और आप वहाँ से । उस दिन मुझे पापा के मुंह से निकला नालायक शब्द थी । अच्छा लगा था

PART 10

दसवा भाग विद्या की कसम एक जनवरी दो हजार सोलह न्यू इयर का दिन । सबको अच्छी लाइफ की शुभकामनाएं देने का दिन । अखबारों और सोशल मीडिया पर नए वर्ष की बधाइयों वाला दिन । व्हाट्सएप रोगियों को आपको और आपके परिवार को नए वर्ष की हार्दिक बधाइयां वाला मैसेज फॉर्वर्ड करने का दिन । पिछले दिन हुई पार्टी इसकी खबर से अखबारों को सजाने का दिन । खैर सुबह के करीब बारह बज रहे थे । कई इंटरव्यूज में से ये पहला इंटरव्यू था जो देर तक चला । छोटू चौराहे से मोडा और गले में घुसते ही गली क्रिकेट का नजारा उसे नजर आया । बीच में रास्ता रोककर बच्चे क्रिकेट का आनंद ले रहे थे । छोटू भी बच्चों के खेल को देखने लगा । अभी यार कर मार सीधी विकेट कीपिंग करने वाला बच्चा चलाया तो कहीं भी फेक साले जे बॉल तो रम्मू अंकल के घर में गिरेगी मैं स्ट्राइक के लिए मोटू ने भरोसे के साथ कहा बहाने देंगे मेरे घर में तेरे बाप को लेने आना पडेगा । ये आवाज रम्मू अंकल की थी जो अपने घर की बालकनी में खडे इंतजार कर रहे थे कि कब बॉल उनके घर में गिरे और कब वो अपना चोंगा चालू करें । छोटू क्रिकेट देखने में मगन था । मैंने पीछे से आकर उसके कंधे पर हाथ रखा । मैं उसके गले लगाया और बैग्राउंड में राहुल जैन की आवाज में गाना शुरू हो गया । ये दोस्ती हम नहीं तोडेंगे सौरी भाई माफ कर दे खाना का तुझे बुरा भला कह दिया भला कहाँ कहाँ पे बुराई बुराई तो कहा साटी माफी हो मुझे भी माफ करना । छोटों के चेहरे पर एक चमक देखी अच्छा ये सब छोड ये बता पापा कैसे दे रहे हैं । अब ठीक है । बरी कह रही थी एक हफ्ता लग सकता है हॉस्पिटल से डिस्चार्ज हो रहे में अच्छी बात है फिर वापस क्यों नहीं आया था? इंटरव्यू की तैयारी करनी थी फॅस किस लिए तेरी वजह से आज मेरे पापा जिंदा है । थोडी दोस्ती हम भी दिखा सकते हैं साडी पार्टी हो जाए आज कहाँ पे चले पार्टी वही होगी अपना कैसे में मगर ट्रीट मेरी तरफ से ट्रेन तो हम ही देंगे । तो मैं विद्या की कसम है अगर हमने पार्टी भी विद्या चली जाएगी क्या? विद्या की कसम हाँ यार याद है तुझे स्कूल में तूने जब मेरी हंसी रोक नहीं रही थी यहाँ है मगर उस दिन मेरी गलती रही थी । मुझे क्या पता था कि उस लडकी की मम्मी का विद्या नाम है । मैंने तो विद्या कसम खाई थी मगर उसने मगर उसने तुम्हारी निर्माण से अच्छी खासी धुलाई कर दी । क्या बोल रहा था वो? मेरी मम्मी को खायेगा, मर गई तो हूँ रोहित हस्ते लगा हानियाँ बहुत मारा था साले ने चलिए फिर अपना कहते कसम तो में मानता नहीं हूँ । लेकिन अपनी बात मनवाने का ये अच्छा तरीका है । उस दिन के बाद से कसम खाना छोड दिया । कितना मजा आता था गली में क्रिकेट खेलने का । छोटू ने चलते चलते धीरे से कहा हाँ यार मैं बोला गली में बनी ना लिया जिनमें कि चढ लबालब भरा रहता था । फिर उसमें बॉल जाने का डर उडाओ की दुकान जिसमें दुकान का सामान दुकानें में नहीं बनता था । एक दो हमें छोडने वाले अंकल आंटी जी लीटर रहता था की उन्हें बॉल लग जाएगी । फिर गलती से रहा । चलते आदमी को बॉल लग गई तो फिर उन अंकल आंटी का लाउड स्पीकर चालू मर जा ठंडी के बंदे यही खेलने को मिलता है । तुम दोनों को लुगर के लगे । ऐसी मीठी बातों से हमारा स्वागत होता था हाँ और वो तेरे घर के सामने वाली आंटी नजरे गडाए बैठी रहती थी कि कब गेंद उनके घर में घुसे और कब बात का बतंगड बनाएंगे । गजब का खेल है, क्रिकेट थी तेरी मेरी दोस्ती बताता है । जब हम जीत जाते तो तो कहता छोटू तूने मैच जीता दिया और जब हार जाते तो तो कहता था की और आज किस्मत खराब थी । कहते कहते छोटू रुक गया । कोशिश तो हट के लोगों ने हमारा खेल बंद करने की, मगर हमारा खेलना जारी रहा । कोशिश ही कर सकते थे वो । हम तो सरकारी जगह पर खेलते थे और सरकारी जगह किसी की बात की तो होती नहीं है । यही तो उस वक्त अपना टाइम था । वहाँ हमें बंद करने की फिराक में कई बंद हो गए । मगर अब तो हम बडे हो गए हैं । मच्छी और भी मैंने एम पर जोर देते हुए कहा शायद और समझदार भी । हम दोनों के चेहरे खेलाए लगता था जैसे पुराने दोस्त बडे दिनों बाद मिले हो, पुराने दोस्त तो नहीं मगर बीता बचपन जरूर बहुत दिनों बाद मिल रहा था । बहुत दिनों बाद हम बचपन से बातें कर रहे थे । एक बार की बात याद है तुझे क्या मैं आज कुछ भी करने को तैयार था । जब हम तुझे खेलने के लिए बुलाने आए थे तो तेरे पापा क्या बोले थे सब्जी लाने के तेरा बाप जाएगा । उसने याद दिलाया वहाँ मैंने हामी भरी बहुत तूने क्या जवाब दिया तो चले जाओ ना बाप हमारे इतना भी नहीं कर सकते क्या? तो हफ्ते लेगा । फिर फिर क्या उसके बाद अच्छी धुनाई हुई थी । तुम्हारी असाटी जो जो हाथ में आ रहा था सब से स्वागत हुआ था । एक बात बोलूँ रोहित बोला बोल, बुरा मत मानना अच्छी बात करेगा तो बोला होगा तो यहाँ पे जब हम पांच पांच रुपए की डीवीडी लेकर फिल्म देखते थे । हाँ, बिलकुल याद है उन्हें फिल्म में एक डायलॉग सुना था क्या? यही कि हीरो बोलता है मेरी रगों में मेरे असली बात का खून दौड रहा है । बोलते थे तो तो आज से मैं यह कहूंगा कि मेरे बाप की रगो में तेरा खून दौड रहा है क्या अगर मैंने उसके हसने का इंतजार किया? छोटू ने मुझे कौन से देखा? मैंने बता दिया तुझे । हाँ मैं चुप हो गया । मेरा घर आ गया । कई अरसे बाद हम दोनों के चेहरे चमक रहे थे । खून का कर्ज चुकाने के लिए एक घंटे बाद चलेंगे कैसे मैंने डायलोग मारा । ठीके असाटी सब को कॉल कर लेना । मैं अन्य को बोल दूंगा । मैं चलाया । ऍन बाई

PART 11

ग्यारह भाग बिजली विभाग दो जनवरी दो हजार सोलह छोटू ज्यादा देर तक सोता रहा क्योंकि कल रात घर वापिस आने में देर हो गयी थी । आगे दो कर छत पर धूप लेने पहुंचा तो उसके आसमान में पतंगों का बाजार लगा देखा सक्रांति आने वाली थी घर उसके सारे दोस्तों से मुलाकात भी हो गई थी । उस छत की मुंडेरों से दूर दूर तक उन पतंगों को देख रहा था चाय लाओ छोटू ने छत से तेज आवाज लगाएंगे । थोडी देर में संस्कृति छत पर आई ये लोग फटाफट नहीं चाहता हूँ कि ये क्या है । छोटा गोला मेरे चाहे मांगी थी मंजन ब्रश नहीं, ज्यादा सवाल नहीं, चाय पीना है तो ब्रश करना पडेगा । ऑडर देकर संस्कृति नीचे चली गई । हमेशा जब देखो जब ऑर्डर चलाती है मम्मी बनती है । मेरी छोटों ने कहा छोटू सबसे नीचे आया । सिंगर्स मुंह में दबाए । जब उसने मोबाइल देखा तो दस बारह झूठी कॉल डाली थी । कोई नया नंबर था । छोटू ने दोबारा कॉल करने के लिए मोबाइल का लॉक खोला ही । धा के नीचे से आवाजाही लाटसाहब न वाले ही उसकी दादी थी जी बस नहा रहा हूँ । छोटू ने मोबाइल पलंग पर पटका और डॉक्टर लेकर नहाने चला गया । मोबाइल फिर से रिंग करने लगा । मगर किसी को पता नहीं है । नहा धो कर वह घर से निकला और मंदिर चला गया । उसके हाथ में बिजली का बिल भी था जो जाते जाते दादा ने उसे पकडा दिया था । सर्किल बार ही किया था कि उसका फोन फिलिंग करने लगा । नए नंबर से कॉल था कौन इतना याद कर रहे हैं, कहाँ जा रहे हो तो उस तरफ से आवाजाही कौन? छोटू बोला कौन बोल रहा है? पहले तो बोल नहीं रहा है, बोल रही हूँ । अब तो ये बताओ कहाँ जा रहे हो? प्रथम में प्रथम आप ये बताने का कष्ट करेगी कि आप कौन बोल रही है । छोटू समझ हो गया था मगर मजा भी तो लेना था । पारी थोडी देर बाद आवाज आई । आज हम जैसे लोगों की याद कैसे आ गई कहकर के छोटों ने अपना आॅउट दिखाया । क्या करें डॉक्टर्स को मरीजों की याद नहीं आएगी तो किसकी याद आएगी? अच्छा ऐसा क्या? छोटों अपनी बात पूरी नहीं कर पाया कि पीछे से तेज रफ्तार में कार आकर रुकी । कार का शीशा खुला, परिणय कार में बैठने का इशारा किया । छोटों ने गेट खोला और बिना सवाल जवाब के चुपचाप बैठ गया । थोडी दूर चलने के बाद बडी ने गारसाइड में रोकी कहाँ चलना है यही बिजली विभाग तक छोटों हकलाते हुए बोला परिणी गाडी स्टार्ट की और बिजली विभाग की तरफ मोडी आजकल सारे काम ऑनलाइन होते हैं । परी बोले हाँ, मगर फिर दादू को कौन समझाए? ये तो कॉमन सेंस की बात है । ऐसे लगा जैसे छोटू की बेज्जती हो गयी हो । छोटे को परीक्षा दांत निकालना अच्छा नहीं लगा तो बोला कॉमनसेंस मुझे तुमसे ज्यादा है हूँ । वो तो देखे रहा है पर इन्हें व्यंग बाण छोडा । छोटों के पास बोलने के लिए शब्द नहीं थे इससे सवाल जवाब करना मेरे बस की बात नहीं है । इसके पास बहस का मेला लगा रहता है । शांत रहने में भलाई है । खडूस छोटू ने मन ही मन सोचा । उसने अपना ध्यान समंदर की और कर लिया । वो कार का शीशा खोलकर बेहती हवा का आनंद लेने लगा । परी बोली सर जी मुझे तो उनसे अब कोई बहस नहीं करनी । छोटों ने पारी की बात काट दी । मैंने कहा कि मुझसे बहस करूँ, मुझे पता है जितना मुझे ही है । मैं तो कह रही थी कि हम बिजली विभाग के बाहर खडे हैं । वो मुझे पता है तो मैं बताने की जरूरत नहीं । छोटू ने गेट खोले और कार से बाहर निकला । कब तक आओगे? करी ने पूछा टाइम लग जाएगा छोटे वाला क्यों बाहर निकलो? छोटे वाला अब सामने देखो सामने एक बडी लाइन लगी थी । दोनों का अनुमान यही कह रहा था कि टाइम ज्यादा लग सकता है । एक बार में देख कर आता हूँ । छोटों दौड कर भीड में चला गया । छोटू पंद्रह मिनट बाद बाहर आया । उसने देखा कार दो वही घडी लेकिन पर ही नहीं आई । चारों तरफ नजर डाली तो सडक के उस पार वो कॉफी शॉप के बाहर खडी थी । कॉफी शॉप के बगल से एक बस्ती लगी थी । कार पाकर दो परिवेश सडक के उस बार से चलाकर कहा नौकरों तुम्हारा जो तुम्हारी गाडी पाक करों छोटों ने एक पल के लिए मन में सोचा कर देता हूँ नहीं तो बहस होने लगेगी कि तुम गाडी चलानी ही नहीं आती । छूटने शांति से गाडी बात कर दी और चाबी परी के हाथ में थमाई, काफी हो जाये परी मुस्कुराई । छोटू ने बिना सोचे हाँ कर दी । उसके पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं था । आजकल ज्यादा भाव दे रही हूँ । सौरे आखिरी बार पर एक कॉफी पीते हुए कहा किस बात के लिए मैंने रोहित को सब बता दिया । जिम लड तुमने डोनेट किया था कोई बातें इट्स ओके नाराज नहीं हुए तो नहीं । मतलब नाराज हो इसमें नाराज होने वाली क्या बात है? मैंने ये भी बोला कि वो बेरोजगार है, कोई बात नहीं । छोटू ने कॉफी की चुस्की लेते हो गई । कोई बात नहीं, दुनिया का ब्रह्मज्ञान है । बहस बदतमीजी से बचने का तरीका है । सुख शांति का सर्वोत्तम उपाय है ये कह देना कोई बात नहीं । छोटों को बुरा लगा हम । अगर आपने इस बीजेपी को कॉफी का आखिरी घूट समझकर पी गया । मेरे बेरोजगार होने से तुम्हें क्या प्रॉब्लम है? कुछ नहीं सच बताना सच्ची तो ठीक है । क्यों तुमने क्या सोचा? कुछ नहीं कुछ तो यही कि तुम्हारा शादी का मूड तो नहीं है । पर इच्चुक रही कहाँ? परिणय मन में सोचा आज उसे छोटू बहुत समझता लग रहा था । कहा हो गई शादी के ख्यालों में करी ने फिर वन में सोचा कहीं नहीं परिणाम भी अपनी कॉफी की । लास्ट सिबली जेब में पैसे नहीं है, आ जाते हैं । चाय पीने कैसी का मालिक किसी बूढे आदमी पर भडक रहा था । बरी की नजर वहाँ गयी । वो उठकर उनके पास पहुंचीं । क्यों इतना चला रहे हो आप? इन पर पारी कैफे के मालिक पर भडकी मैं एक दिन की बात नहीं है । रोज जरा वो ठाकर चलता है । कैफे के मालिक ने सफाई दी । आपने किसी से बात करने की तमीज नहीं हैं । पर्रिकर गुस्सा पडता जा रहा था । छोटों ने मामला संभाला । उसे दोनों को शांत किया । छोटों ने अंकल को देखा । ये वही अंकल थे जो उसे समंदर के किनारे मिले थे और कब्रिस्तान के पास भी मिले नहीं । छोटू ने चाय के पैसे दिए और एक चाय ली । छोटू का मोबाइल रिंग करने लगा । अभी आता हूँ । छोटू ने मोबाइल पर कहा कहाँ परिणय पूछा मुझे भी जाना होगा । बाद में मिल के बताऊंगा । ठीक है थैंक्स फॉर नाइस कॉपी । छोटू बाय करते हुए कॉफी शॉप से बाहर चला गया । बारह जनवरी दो हजार सोलह छोटू मंगल के साथ बांगड अपनी पर बैठा चाय की चुस्की ले रहा था । चाय खत्म अंकलेश् । सारा क्या एक और जाएगा छोडो अभी भी हाथ में चाय का क्लास लिए उसकी गर्माहट को महसूस कर रहा था । ठंड आपने फ्लो में थी छोटू और अंकल की । अब रोजाना मुलाकात होने लगी थी । छोटू को उनका साथ अच्छा लगने लगा था । उस दिन का नाम भी सोच लिया था । इंजन अंकल हर कुछ जा सकता हूँ । आप के बारे में अंकल का कोई जवाब नहीं आया । वो चाय में मग्न थे । कुछ तो बताइए अपने बारे में छोटों के बार बार पूछने पर अंकल बोले तो मैं जानना है कि मैं कौन हूँ, मैं क्या करता हूँ । ऐसे ही छोटों ने क्लास नीचे रखा । एक दोस्त समझकर पूछ लिया । अंकल की चाय खत्म हुई । ऍम कल जाने लगे । छोटू कुछ नहीं बोला । उसने चाय के पैसे दिए और अपने घर चल दिया । घर जा रहा उसे मुनासिब लगा ।

PART 12

बारवा भाग तुम्हारी सपने होंगे । नौ मार्च बाहर हल्की हल्की बारिश हो रही थी । आंधी भी थमने का नाम नहीं ले रही थी । बिजली के चमकने से सारी खिडकियां चमक उठती थी । डर भी लग रहा था सडक पर पीछे गहरे सन्नाटे में बारिश के बोलती जोरों से तब तब कर रही थी या तो बस जा या फिर रुक जा फ्री फोकट परेशान कर रही होती हूँ दादी की गोद में अपना सिर रखे छोटू बोला किस से बोल रहे हो बेटा दादी ने उसके सर पर हाथ फेरा बारिश से छोटू कहकर खामोश हो गया । आप हमेशा मेरे साथ रहोगी, लगा दी उसकी आवाज में दर्द था मुझे नहीं पता मगर तुम तो रहोगे तुम्हारे सपने होंगे हम सबकी दो आई होंगी ऐसे सपनों का क्या करूंगा मैं जिसमें अपने ही शामिल हो बेटा हम कब तक मेरे साथ रहेंगे कभी ना कभी तो सभी को जाना है तो इतना याद रखना, सपनों को पूरा करने की चाहत में अपनों को मत खो देना । जो तुमसे प्यार करते हैं, तुम्हारा भला चाहते हैं । उनका साथ कभी मत छोडना क्योंकि याद रखना उन्हें तुम्हारा साथ तब दिया है जब तुम्हारे साथ कोई नहीं था । फिर दादी मुस्कराई हाँ, छोटू बोला मेरे सपने मेरी आंखों के सामने खडे हैं, जीने में रोज जीता हूँ । कभी गम में तो कभी खुशी में, कभी सुकून में तो कभी संघर्ष में । हाँ बेटा दादी की आंखे चमकने लगी । दादी पता नहीं कभी कभी मुझे लगता है जैसे मैं थक गया हूँ । भागना चाहता हूँ कहीं तो बहुत दूर यहाँ की दमघोटू हवा में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है तो क्या रहना नहीं जाता हूँ । मगर मैं भगोडा नहीं हो । हर इंसान कभी ना कभी अपनी जिम्मेदारी से थक जाता है । जब वह दौडना तो दूर चलने से भी मना कर देता है उसका दिल ऐसे जहाँ में बस्ते का होता है । जहाँ भाग दौड हो, भीडभाड हो बस्ता उम्र सुकून हो स्ट्रगल तो जिंदगी का अनिवार्य चैप्टर है, मुँह नहीं कर सकते हैं । कोई इससे डर जाता है और कोई इस्टर को हराकर कुछ कर जाता है । छोटू भाग नहीं सकते हैं । धीरे धीरे चल सकते हो ही । दादी बोली फैसला तुम्हारे हाथ में है तो मैं क्या करना है? डटकर सामना करना है या फिर मैदान छोडकर भागना है । छोटू कुछ नहीं बोला बारिश और तेज हो गई आसमान बिजली से भरा लग रहा था चांद बादलों में आज नजर नहीं आ रहा था । क्या पता वो बारिश को अपनी मजबूरी बता रहा हूँ । दादी है लाइट बंद कर दी अब सोचो छोडो कल दुबारा इंटरव्यू है वहाँ छोटों की धुंधली सी आवाज आई ।

PART 13

तेरे भाग बिल गेट्स हो गया । तेरह मार्च दो हजार सोलह बैडमिंटन प्लेयर स्टेट लेवल चैंपियन आवाज बच्चन साहब की तरह भारी था । यस सर छोटू का आत्मविश्वास से भरा जवाब आया कंपनी को क्या दे सकते हो? सामने बैठे अधिकारी कम कर्मचारी लग रहे महानुभाव ने पूछा छोटू ने रूमाल से अपने चेहरे का पसीना पोछा सर मैं आप की कंपनी को अपना टाइम और आपने मेहनत दे सकता हूँ । मतलब मैं मुझे एक चांस देकर देखिए सर मैं अपनी जान लगा दूंगा । इस कंपनी को आगे बढाने के लिए छोटू के वोट कब का पा रहे थे । वो हकला रहा था जो पाँच जावेद के उसने रखा था । बोल दिया तो कॉलेज ड्रॉपआउट हूँ । फिर ये काम कहाँ से सीखा? मोटी अंकल बोले जिनकी चंद निकली थी उन्होंने अपनी खोपडी खुजाते हुए पूछा सर कोर्स किया था कोचिंग भी कॉलेज ड्रॉपआउट करना तो खेल समझ लिया है तुम लोगों ने मोटे अंकल झल्लाए बिलगेट्स बनना चाहते हैं । सब भाज के चपट गंजू माइक्रोसॉफ्ट खडा करेंगे सर, मौका देकर देखिए दुनिया में नहीं । मगर अपने देश में तो हमारी कंपनी शाइनिंग मार सकती है । छोटों की बात में दम था । आखिर माइक्रोसॉफ्ट भी पहले अपने देश में नंबर वन हुई होगी । फिर उसे दुनिया पर राज किया और कुछ यह है मैं मानता हूँ कि मैं कॉलेज ड्रॉपआउट हो । अगर आप की कंपनी के लिए जो क्वॉलिफिकेशन चाहिए, वह सारी मुझे हैं और मुझे खुद पर पूरा विश्वास है कि मैं इस कंपनी को उडान दे सकता हूँ क्योंकि मुझे काम करने में मजा आता है । छोटों की वही बात है जो कई इंटरव्यूज उससे दोहराई है । यहाँ भी कह डाले तो शराब पीते हो । बडी तोंद वाला व्यक्ति बोला जी नहीं, मैंने आज तक शराब हुई तक नहीं । छोटू घबराया, उसे याद आया जब मैंने उसे थप्पड लगाया था । तब जब छोटों ने शराब पीने की बात कही थी कि आप जा सकते हैं सिलेक्शन की जानकारी आप को एम । एल । से मिल जाएगी । छोटू कुर्सी से उठा सिर मुझे काम किसी भी हालत में चाहिए । छोटों मुस्कुराकर चला गया । बाहर के तेल लोग बैठे हैं अंदर से आवाजाही साहब इनको मिलाकर तीन है । चपरासी ने कहा नैक्स्ट अंदर से भारी आवाजाई । छोटू कंपनी से बाहर निकल आया । बाहर लगे बोर्ड पर उसने बढा सेक्स इसका कोई शॉर्टकट नहीं होता । पढकर छोटू मुस्कुराया फिर उसके फोन करवाया और मेरे मोबाइल पर उसका नाम चमकने लगा ।

PART 14

चौदह भाग असल तरक्की मार्च दो हजार सोलह महीना गुजरने वाला था । रविवार का दिन था । सुबह के सात बज रहे थे । ठंड अब छू हो गई थी । इन दिनों लोगों का जमावडा चाय की टपरी क्यों से कम हो गया? छोटू भी जूते पहने । कान में ईयर प्लग घुसेड ए ही दौडता हुआ पार्क से वापस आ रहा था । नजारा नजर को बेहद सुहावना लग रहा था । कॉलोनी में बने पाक से बच्चों की आवाज मौसम को मुस्कुराने की वजह दे रही थी । कई अधेड महिला पुरुष भी वहाँ भरे पडे थे क्यों भाई इतने सुबह सुबह कहाँ हुआ है? मेरे घर के बाहर खडे छोटों से मैंने पूछा क्या बोलते हैं उसे हिंदी में भ्रमण को गए थे । सुबह सुबह छोटू ने कांस्य ईयरप्लग निकले क्यों भाई इतना भ्रमण जो तो रोज रोज करते हो वो कम है क्या? मैंने टोन कैसी मतलब तो कहना क्या चाहता है? साटी अच्छा कर रहा हूँ । मैं दिया वैसे रोज दौडना चाहिए । शरीर स्वस्थ रहता है । हाँ, अब ध्यान मद्दे । उसने कहा चिंता मिलते हैं शाम को आज वसूली का दिन है । पैसे उगाने जा रहा हूँ फिर होगी थी मोदी चढाये आठ संडे कम से कम आज तो अपने जन्मदाता से मुक्ति लेले । उसने मुझे आगे दिखाई । हाँ फिर कभी मैं मुस्कुराया, अच्छा फिर चाय पीएगा जरूर असाटी । ये सौभाग्य बहुत कम लोगों को मिलता है । छोटू ने न्यूज पेपर उठाया और पढे लगा आठ महीने की बच्ची के साथ दुष्कर्म । छोटों ने न्यूज पेपर की हैडिंग पडी क्या करें अपना देश इसी में तरक्की कर रहा है । मैंने कहा कि घंटा तरक्की कर रहा है । छूने न्यूज पेपर साइड में रखा । एक बात पूछनी तुमसे साटी । बेशक तो कहता है ना, पूरी दुनिया को उसके ऊपर वाले ने बनाया है । हाँ तो तो इन बलात्कारियों को भी उसी ऊपर वाले ने बनाया है क्योंकि ये बलात्कारी भी इसी दुनिया में बसते हैं । इसी देश में बसते हैं । उसके सवाल में एक मासूमियत थी । उसकी आंखों में भोला बंद था । ऐसा नहीं है । जब जब धर्म की हानि होगी तब तब मैं अवतार होगा । यही लिखा है ना था अब तो आपने इज्जत पे आई है । उसके चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आ रहा था । हमारे देश में हर दिन रेप के नब्बे के से जाते हैं । हर बाईस मिनट में एक लडकी का रेप होता है और दस के सिर्फ एक केस की रिपोर्ट होती है । इतना काफी नहीं है । अवतार लेने के लिए छोटू चुप हो गया । इससे पहले की उसका गुस्सा और बढता रक्षा चाहे लेकर आ गई । जवाब आया कि इंटरव्यू का मैंने सिचुएशन कंट्रोल की अभी तक तो नहीं आया । कह रहे थे ईमेल कर देंगे आ जाएगा । जवाब ऊंचाई भी मैंने कल योजनाएं । हम दोनों ने स्कूल से चाय का घोट भरा । जवाब आए तो मुझे जरूर बताना । मैंने जाते हुए छोटों से बोला सबसे पहले बता होगा । एक बनावटी मुस्कान के साथ छोटों ने मुझे बाय कहा ।

PART 15

पंद्रह भाग मजा या मजबूरी । एक अप्रैल दो हजार सोलह बेल बजी । एक उम्रदराज महिला ने गेट खोले । उम्र के लिहाज से उनके कुछ बाल सफेद हो चले थे । चेहरे पर झुर्रियाँ साफ दिखाई दे रही थी । नमस्ते यान्ति छोटों ने आंटी के पैर हुए हरी तो चोट ऊॅचे याद करते हुए कहा कि जी मैं कितने बदल गए हो तो यहाँ यहाँ कैसे? आंटी की खुशी उनके चेहरे से टपक रही थी । बस हात की याद आई और चले आए । इतने दिनों में यहाँ याद आई तुम्हें आंटी समझ गयी याद तो बहाना है । बात कुछ और है । अंदर आॅफ कॉफी क्या लोगे तो छोटू अंदर आ गया । घर में कोई नजर नहीं आ रहा था । छोटू की नजरें किसी और को देख रही थी । पर इसे मिलने आए हूँ टीवी की जैसे कहा नहीं । छोटू ने झूठ कहा । वो सोफे पर बैठ गया । दीवार पर कई पेंटिंग सब्जी थी । उन पेंटिंग्स के नीचे बडे अक्सर में ए लिखा था । ये लोग कॉफी आंटी ने काफी कब छोटों को पकडा । आया तो मैं यही बैठो । मैं पारी को बुलाकर लाती हूँ । मेरे दिल का कहा आंटी अच्छे से सुन रही थी । पेंटिंग अद्भुत है । पेंटिंग या प्रिंटिंग बनाने वाली हल्दी की बात में पॉइंट था । दोनों छोटू की वहाँ से निकलने ही वाला था । मगर वो मुस्कुरा दिया छोटू ने काफी की । एक्स इटली महारानी ऊपर अपने कमरे में है कहकर आरडी ने पारी को आवाज लगाई । खैर अब अंकल की तबियत कैसी है? छोटू ने काफी कप नीचे रखा । रोहित ने मुझे सब बता दिया था । वैसी ही बनी है जैसे पहले थी । अंतिम दे सहमे । मन से कहा कोई सुधार नहीं हुआ । छोटों ने पूछा नहीं अभी तक तो कुछ नहीं आंटी की आगे भराई छोडो इस बात को मैं घर के काम करती हूँ । तब तक तो पर इसे मिला । आंटी रसोई में चली गई । छोटों की खडा हो गया । सीढियों से धीरे धीरे ऊपर जाने लगा । कुछ जाने पहचाने तस्वीरें उसके सामने सचिव थी । उसने देखा परी बालकनी में खडी थी हाई छोटू ने नजदीक आकर कहा क्या देख रही हूँ हाई तुम कब आई? परिणय जानबूझ कर अनजान बनने का नाटक किया । अनजान मत बनो । मैंने नीचे से देख लिया था क्या? जब तो मुझे बालकनी से देख रही थी पर ये कुछ नहीं बोली । तुम्हारा बगीचा कितना संदर है । छोटे बोला वहाँ पर इन्हें हामी भरी यही सोच रही थी । मैं कुछ साल पहले हमारा साथ भी इसी वजह से की तरह महक रहा था । अगर एक तूफान ने सारे बाघ को बेजार कर दिया । मजबूरी थी सहमे हुए छोटों की आवाज आई हाँ परी बोली मर्जी को मजबूरी नाम नहीं देना चाहिए । कोई मजे नहीं किए मैंने । छोटू उदास हो गया । जब यहाँ आया हो तब से बता तो रहा हूँ कभी यहाँ तो कभी वहाँ पता नहीं कहा । कहा ऍम चुके सो आज यहाँ का रास्ता कैसे भूल गए? नहीं आज संडे था तो सोचा तुम्हारे साथ टाइम स्पेंड कर लो तो तुम्हारे लिए कौन सा संडे? करीब टोन कैसी? तो मैं ये सोच कैसे लिया कि मैं तुम्हारे साथ टाइम स्पेंड कर होंगी । क्यों मुझ में क्या खराबी है? खराबी तुम्हें नहीं, मुझे हैं । आएगा ने गुस्से से देखा और वैसे भी चाचा चाची हॉलिडे पर गए हैं इसलिए मुझे बहुत कम है तो चल रही हो या नहीं । छोडो जाने लगा नहीं परिणय साफ साफ मना कर दिया मैं नीचे तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ तुम रेडी होकर आज छोटों बोला दस मिनट गुजर गए । पारी नीचे आई तो देखा छोटू जा चुका था । कभी कब के नीचे छोटो एक मैसेज छोड गया ना इसका अभियान थी पर इ मुस्कराई

PART 16

सोलवा भाग दिल में सही करना । वही दो अप्रैल दो हजार सोलह गली में चमचमाती कार आकर छोटों के घर के सामने रुकी । कई घरों की बालकनी से कई चेहरे मूह में ब्रश दवाई खार को ताग रहे थे । कार का हाँ तब तक बचता रहा जब तक छोटों ने खिडकी से नहीं झांका । छोटू दौड कर नीचे आया, पर एक कार का शीशा खुला । दस मिनट बाद मिलते हैं । कॉफी शॉप में कार के अंदर से आवाज आई नहीं । छोटों का जवाब था मतलब मतलब अगला कैसे चलते हैं? छोटों ने विनती की । दस मिनट में पहुंच जाना कहकर गाडी तेज रफ्तार से दौड के छोडो संस्कार को देखता रहा । जब तक वह कार उसकी आंखों से ओझल नहीं हो गई । घर पर कोई नहीं था । सब मंदिर गए थे । छोटू भी घर के अंदर चला गया । दस मिनट लेट परिंदे उसे फटकारा तो याद अत कब से बन गई? कौन सी लेट आने की सौरी छोटों ने मासूमियत से कहा मेरी तरफ से भी सौरी कल के लिए उनकी सौरी बोल रही हूँ । यह डिपार्टमेंट तो वर्षों से हमारा है । कौनसा सौरी वाला । चाहे गलती हो या नहीं हूँ, ऐसा कुछ नहीं है । कोई बात नहीं । छोटा कुर्सी खिसकाई और बैठ गया । छोटों की बेसब्र आंखे चमक रही थी । उसे अपने सारे सपने पारी की आंखों में साफ दिख रहे थे । ऍम हजका दिन यादे तो में पारी के अंदाज में लचीलापन था । हाँ आज मंडी है । छोटू ने दिन याद दिलाया । वेटर दो कॉफी कप टेबल पर रखकर चला गया । छोटू कॉफी के कपडों को घोडे जा रहा था और पारी उसको आज कुछ स्पेशल है । पर इन फिर उसी बात को दोहराया नहीं । छोटू अपनी तरफ से पूरा शौक था । अरे पागल, जब कोई लडकी इतनी घुमा फिरा के बाद कहे तो क्या समझना चाहिए? बुद्धू पर इन हिंदी तो मैं कुछ याद नहीं । नहीं तो छोटू बेफिक्र होकर बोला लडकियों को ऐसी बातें बहुत चुभती है, खासकर तब जब उनका जन्मदिन होता है । बरी क्या चाहती थी? छोटू जनाब इससे बेखबर थे । पर इन्हें बोलने से कोडी वह कुर्सी से उठी और जाने लगीं । छोटू ने कॉफी की बडी से प्ले तो मैं सच में नहीं पता नहीं । बाबा रियली विद्या कसम पारी जाने लगी । उससे अपना हैंडबैग उठाया । अच्छा मैं चलती हूँ कि जन्मदिन मुबारक हो । सामने से आते निकेट ने कहा बरी का चेहरा खेलो था इतनी देर से वो यही तो सुनना चाहती थी तो मैं पता था उससे अनिकेत से पूछा छोटू भैया बताए थे? जन्मदिन है तुम्हारा क्रिकेट सूट । वोट पहले दोनों के पास आया । अब कोई इतना सोचने पर मजबूर करेगा तो जन्मदिन के अलावा क्या हो सकता था । अब मेरी एंट्री हुई । फॅमिली उसके चेहरे का ग्लो एक दम फ्लो में था । मुझे काम था इसलिए मैं उनको बाय कहकर चला गया तो क्या है? मेरा बहुत ही गिफ्ट परी बोली छोटों की नजरे जुड गई । शॉपिंग मॉल, मूवी का प्लान या फिर कही फाइव स्टार होटल में खाता हूँ । मैं तो मजाक कर रही थी पर इन्हें समझदारी दिखाई कोई बात नही । मजाक में ही से ही अपनी और का तो पता चली । छोटों ने काफी खत्म की । अच्छा छोडो कोई और बात करें । परिणय बात पतली । छोटू अपनी नजरे उसे मिलने पा रहा था । उसके अंदर ही अंदर बुरा लग रहा था । ऍम परिणय उसका ध्यान बताया । कल में स्कूल का एल्बम देख रही थी उसमें तुम्हारी भी फोटो थी अच्छा परी छोटू का ध्यान खींचने में सफल हुई । हाँ वो वाली जिसमें तो मैं बेस्ट स्टूडेंट का अवार्ड मिला था । अच्छा फर्स्ट इयर वाले । वहाँ वही मुझे दिखाना, छोटों की उदासी फुर हो गई आना कभी घर पर कल तो आया था । छोटों ने घूरकर उसे देखा । जब आया था तो कर नहीं कि अब सामने से इनवाइट कर रही हूँ । उसके लिए मैंने माफी मांगेगा । कब मांगी? सबसे पहले ही मांगी थी तो भूल रहे हो? नहीं मांगी मुझे अच्छे से याद है अच्छा सॉरी यार पर इन्हें हाथ जोडे और कुछ कुछ नहीं । छोटों हस दिया । दो मिनट कोई कुछ नहीं बोला । गैस पे में भीड बढ गई थी । वो भी क्या दिन थे । पारी ख्यालों से बाहर आई जब दिन कुछ लंबे खूबसूरत होते थे जब हम दुनियादारी के कामों से अंजान थे । पढना लिखना । एक तरफ बस खाना बाहर खेला । वहाँ कोई टेंशन ही नहीं थी । उस वक्त छोटों ने हामी भरी । सपना महम से मिले हो तो परिणाम छोटों की तरफ देखा ही नहीं कि जब स्कूल छोड कर गई थी, उस दिन के बाद मैंने उन्हें कभी नहीं देखा । वो इसी शहर में है । सालों से तरीके आंखों में एक खुशी दिखी । उस दिन गलती मेरी थी । छोटू बोला कुछ पल के लिए दोनों के बीच खामोशी छा गई । एक बाल के लिए कॉफी शॉप एकदम शांत था । वक्त अपनी जगह पर ठहर गया । आसपास लोगों के चेहरे, मुस्कुराहट से भरे थे । सिर्फ उस तेरे को छोडकर जहाँ बरी और छोटू बैठे थे । मिलने चले उनसे एक दिन कल ही चलो । छोटू बोला एक बात पूछे हम तुम से पूछो तुम्हारा आगे क्या प्लान है? तरीका सीधा सवाल था । तरीका पूछना जायज था । आज करियर नहीं चुरा तो बाद में करियर हमें चुन लेता है । छोटू खामोश रहा । पारी बेसब्री से उसके अंदर के इंतजार में थी । कुछ रहें पारी को छोटों से ऐसी उम्मीद नहीं थी । मतलब पर इन से घोलकर देखा । कोई सपना तो होगा । तुम्हारी जिंदगी का अभी तक तो रही । छोटू ने सहजता से कहा । इस बारे में मैंने अभी तक नहीं सोचा । बस इतना है कि मैं कुछ बनने की बजाय कुछ करने पर ज्यादा विश्वास रखता हूँ । मुझे पता है कि मुझे क्या करना है । फिर जब करूंगा तो बंद तो अपने आप जाऊंगा । फिर भी कुछ तो होगा तुम्हारे दिमाग में छोटे में नजरे घुमाई मैं उडान भरना जाता हूँ । करी कैसी उडान एक लंबी ऊंची उडान मेरे सपनों की ने फेम सब कुछ मिले जिसमें दौलत हो, शोहरत हो, इज्जत हो आपने भी नाम का सिक्का चले जमाने में इतना काबिल बनना चाहता हूँ जिससे किसी का नौकर अनबनों उस मुकाम को पाने के लिए मुझे कुछ भी काम करना पडे । मैं इसके लिए तैयार हूँ । अगर उस उडान में तुम्हारे आपने नहीं हो तो क्यों नहीं होंगे जरूर होंगी । छोटों ने बडे आत्मविश्वास से कहा तो कब भरोगे उडान पता नहीं परिणय अपना हाथ छोटों के हाथ पर रख दिया । उसे छोटों का हाथ कसके पकड लिया । शायद वो ये कहना चाहती थी कि मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ । चले आॅनर्स का हाथ छोडा । दोनों अपने रास्ते निकल गए । दो मिनट बाद छोटों के मोबाइल पर एक मैसेज आया । ये पारी का मैसेज था डरना नहीं है, फिसलना नहीं है ही । दिल में सही है करना वही है । तुम्हारी उडान का इंतजार रहेगा । छोटों ने मैसेज पढा धीरे धीरे अपना कैसे आंखों से ओझल हो गया । तुम्हारी दादी बढ गई है उसे क्लीन कर लेना ऐसे लगता है जैसे की हिमालय से तपस्या कर के आई हूँ । छोटों को पारी की बातें याद आ रही थी । छोटों ने अपने चेहरे पर हाथ फेरा हर मुस्कुरा दिया

PART 17

भाग सत्रह दुबई छह फरवरी दो हजार बीस ऍम नाइस बुक रोहित अग्नि ने आंखों से चश्मा उतारकर टेबल पर रख दिया । डायरी में पेंसिल फंसाकर बैठ पर लेट गई । तुम पहले भी ऐसा ही लिखते थे । हमने एक झपकी फायदा तुमने मेरा नहीं उठाया । सिंगल दी मैंने करती एक हल्की सी आवाज है । मेरी इजाजत के बिना मेरी लिखी डायरी उसने पढ ली । एक अच्छे पाठक की तरह पडने में कोई कसर भी नहीं छोडी थी । रात के एक बज रहे थे कि दुबई का मौसम ठंडी का जोर सडके संसाधन दूर दूर तक कोई आवाज नहीं ऐसे लग रहा था जैसे ये सडकें सालों से संस्थान पडी हो । यही तो खासियत है इस अतरंगी देश की फॅालोइंग अवनी ने जोर से आवाज लगाई जी मैं आती हूँ किचन से आवाज आई लो मैडम जी आपकी एक और स्पेशल कॉफी । एक उम्रदराज महिला जो हमवतन थी उसने अवनी के रूप में दस्तक दी । ऍम अपनी की आंखें नींद से भरी थी । मेरा काम हुआ कल तक हो जाएगा । महिला ने विश्वास दिलाया अभी मैं आप सो चाहिए । आपकी आंखे बता रही है कि आपको नीट की सख्त जरूरत है । हाँ डालिन बस थोडी देर और जल्दी सो जाना बडे साथ गुस्सा करते हैं और ये आपका कॉफी का सातवाँ कब है? एंजेला ने उसे घोर कर देखा । थोडी देर प्लीज ऐसा भी क्या पढ रही होती हूँ । उन्होंने पूछा तो नहीं समझो की मुझे समझना भी नहीं है । फॅर की जल्दी सो जाओ । अच्छा बताती हूँ अपनी बोली मैं एक डायरी पढ रही हूँ । अपने दोस्त की कोई कहानी है । हाँ, वो भी रियल वाली फॅमिली झाडी गुड नाइट एंजेला रूम से बाहर चली गयी । अपनी ने एक सिर्फ कॉफी का लिया उसने फिर वह डायरी खोली और आगे बढने लगी । जुलाई दो हजार सोलह बरसात का समय जगह जगह की जड की भरमार छोटू और पारी मंदिर से बाहर निकले । आज बाल हल्का हो गया । छोटों रुक गया क्यों? परिणय पूछा आज सपना मैम से बहुत दिनों बाद मुलाकात हुई थी ना, वहाँ उन्हें भी अच्छा लगा था । हर टीचर को अच्छा लगता है जब उनका कोई भूला बिसरा स्टूडेंट उनसे मिलने आता है । स्टूडेंट भले ही अपने समय में ढप ओर चंद्र रहा हूँ, मगर खुशी तो होती है । छोटू चलते चलते रुक गया । क्या हुआ परिणाम? फिर पूछा गाली को छोडकर हम मेन रोड से चले । छोटों की आंखों में डर दिखा क्यों पारी तेवर में बोली यहाँ से जल्दी पहुंच सकते हैं । नहीं मेरा मतलब है थोडी बहुत बात हो जाएगी । परिवहन कराई मेन रोड पर । दोनों एक साथ हो गए । सच बताना उस गली से क्यों नहीं गए तो पता है मुझे कुत्तों से डर लगता है और उस गली में इस टाइम कुत्तों का प्रकोप ज्यादा रहता है । छोटू ने मजबूरी बना जवाब दिया फट्टू तुम खुद तो से डरते हो । बरेली छोटों का हाथ थाम लिया । हाँ मैडम फट्टू तो कभी अब तो जुड वाले के देखो इसका छोटे छोटे मासूम सा चेहरा बनाया । पारी हसने लगी, मासूम हो मगर डरपोक भी छोटू के चेहरे पर भी हल्की सी मुस्कान थी । छोटू का घर नजदीक आ गया जहाँ पारी की कार बात थी साथ दोगी मेरा । हाँ बिना कंडीशन जाने अगर तुम सही हो तो हमेशा तुम्हारा साथ होगी और अगर तुम गलत हो तो तुम्हारी गलती सुधारकर तुझे सही बनाकर फिर सात दूंगी । मतलब सात नहीं छोड होगी ना पारी बोली क्योंकि चलती हूँ मुंबाई दोनों ने एक साथ कहा अगले दिन पूरी सडक वाहनों से खचाखच भरी पडी थी । दूर दूर तक का बाइक रोडवेज की बसों के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा था । छोटू बैग कंधे पर टांगे जिसके उसके सारे डॉक्यूमेंट थे, लेकर पैदल ही घर की तरफ बढ रहा था और रोड क्रॉस करने ही वाला था कि तभी उसका फोन बच्चा कैसा रहा? इंटर्व्यू उस तरफ से लडकी की आवाज आई । ठीक ठाक रहा छोटू सडक के बगल में खडा हो गया । आज तुम्हारा मूड ठीक ठाक हो दो मिले कैसे में गरीबो ली या फिर समंदर के पास वाले कैसे में नहीं छोटों ने वासी ली क्यों आज मूड नहीं है । थक गया हूँ बहुत बस एक इंटरव्यू में सीधा सीधा बोलो भाव खा रहे हो । चवालीस नंबर का इंटरव्यू था । छोटे थोडा रुका रही बात भाव खाने की तो सीधे सीधे बोल रहा हूँ । मैं भाव खा रहा हूँ और भाव किसके कब तक बढ जाए कुछ कह नहीं सकते अपना कैसे? शाम को छोटू पिघल गया तो वैसे तो मैं कैसे पता चला की आज मेरा इंटरव्यू था । पता चल गया बस तुम्हारी दादी आई थी । आज हॉस्पिटल चेकअप के लिए होने से पता चला । अच्छा घर पहुंचकर बात करता हूँ । छोटू ने फोन जेब में डाला । रोड क्रॉस करके छोटों अपनी गली में पहुंच गया । उसका मोबाइल वाइब्रेट हुआ । तरी के नाम से मैसेज आया पर कभी गिवअप मतगणना छोटू मैदान में डटे रहना, हार मत मानना । आखिर तो में अपनी उडान भरती है । फॅमिली छोटू मुस्कराया फिर उसे अप्लाई किया हमें अपनी जिंदगी में मिली छोटी से छोटी सिक्स । इसमें कई हाथ ऐसे होते हैं जो होते तो हैं मगर हमें देखते नहीं है । वह कहीं न कहीं से हमें सपोर्ट कर रहे होते हैं । हमारे कामयाब होने की दो आई करते हैं । ऐसा ही कुछ परी और छोटों के बीच चल रहा था । कभी कभी पर आया भी खुशी का कारण बन जाता है और कभी कभी आंखों का काजल भी हमारे आंसुओं का कारण बन जाता है ।

PART 18

भाग शरद चौरासिया घडी में सुबह के साथ बच रहे थे । छोटू बहुत देर से समंदर के किनारे घडा एंजेल अंकल का इंतजार कर रहा था । सूचना साथ में चाय का मजा लेंगे । छोटू वही बैठ गया । समंदर का पानी उसके पैरों को छु कर वापस समंदर में समर था । कुछ देर बाद एक हाथ छोटों के कंधे पर आया । वो पचपन साठ साल का बूढा आदमी था । जी छोटों की नजरों ने उन्हें देखा, तुम ही छोटे हो । आठ महीने हाफ हुए पूछा कहाँ? छोटू ने उठकर कहा मगर आप कौन हो? इसका जवाब रास्ते में चलते चलते देता हूँ । अंकल जल्दी में थे । अभी तो मेरे साथ चलो जल्दी मैं कहा मैं आपको जानता तक नहीं तो कैसे चलो आप के साथ शरद चौरसिया को जानते हो जो यहाँ तुमसे मिलने आते थे । हाँ छोटू कंफ्यूज था । कहाँ जाना है मेरे साथ? चलो छोटू अंकल के साथ हो लिया । चलते चलते दोनों के पैर समंदर से बहुत दूर निकल आए । तुम्हारे दोस्त जीने तुम एंजल अंकल बुलाते हैं । वो बहुत बीमार है । उन्होंने बताया शायद अब वो क्या वो उन्हें हुआ? क्या बिजली के खंबे पर चढे थे । एक शॉर्ट सर्किट ने उनकी हालत खराब कर दि शिट मैं उनकी कंपनी का एमडी था । अंकल बोले उनकी हालत कई दिनों से बहुत सीरियस है । खाना पीना सब बंद है । बस ग्लूकोस की बोतलें ही अभी तक उन्हें जिंदा रखे हैं । जब भी हो जाता है तो छोटू छोटू छोटों की रट लगाए रहते हैं । मैं समंदर के किनारे कई बार आकर गया । अगर तो मिले ही नहीं । कहाँ अभी हो एक बाद बोलो अंकल ने फिर छोटों के कंधे पर हाथ रखा तो उनके कौन लगते हो जो अपने बेटे से ज्यादा वो तुम्हारा नाम बार बार ले रहे थे । एक दोस्त एक हम डर से ज्यादा कुछ नहीं । छोटों ने सहमे हुए कहा ये दिल का रिश्ता है । दुनिया नहीं समझ पाती क्योंकि आपने पैदा नहीं होते हैं । अपने अपनाने से बनते हैं । उन्होंने सिखाया था थोडी दूर से खाना बदोश क्योँकि झोंपडपट्टी शुरू हो गयी । मस्ती में अंकल और छोटू घुसते ही जा रहे थे । थोडी ही दूर एक बिजली के खंबे के नीचे बनी झोपडी में घुस गए । छोटू ने देखा एंजल अंकल एक टूटी सी खाट पर लेते थे अंकल यहाँ जरूरत थी बिजली के खंबे पर चढने की । छोटू दौड कर उनके पास आया कुछ रुपयों की जरूरत । चंदू अंकल बोले उनका नाम चंदू था, जो छोटों को अपने साथ लेकर आए थे । छोटों ने पारी का नंबर मिलाया । लाइन बिजी आ रही थी । उसने कई बार ट्राई किया, मगर कुछ फायदा नहीं हुआ । उसके एक मैसेज टाइप किया और पर ईकोस् पति के साथ भेज दिया । छोटू खडा खडा टेंशन में मार रहा था, लेकिन उसके पास कोई चारा भी नहीं था । बस नंबर घुमाया जा रहा था । चंदू अंकल उसे घूरे जा रहे थे । आपको किस नाम से बुलाओ में छोटू ने पूछा चंद्रशेखर उर्फ चंदू । उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट थी । चंद्रोल कल ये कब की बात है? छोटों ने पूछा । यही कोई दस से बारह दिन पहले की छोटू वही उस खटिया के पास बैठ गया । एंजेल अंकल की आंख खुलने का इंतजार करने लगा । जब अंकल की आगे खुले तो सामने छोटू बैठा था । छोटू हाँ, अंकल में आ गया । छोटों ने उन का हाथ थामा देख चंदू सुनते ही मेरा सामान आ गया । मेरा श्यामा गया अंकल उसके हाथों को छोड लिया । उनकी मूसी बस यही निकल रहा था । मेरा शाम गया, मेरा बेटा आ गया । छोटू झोपडी से निकलकर बाहर आ गया क्योंकि अंकल की नींद लग गई थी । चाय पी ओके । चंदू अंकल ने पूछा कहाँ दोनों झोपडी के पीछे बनी टपरी पर चाय पीने लगे । क्या सोच रहे हो? चंदू अंकल बोले यही कि शाम कौन है? अंकल नहीं तो कभी नहीं बताया । अंकल लेते तो मैं ये भी नहीं बताया होगा की वो कौन है? नहीं बताया । छोटू ने हामी भरी । उनका एकलौता होता छोटू ने जायेगा ग्लास बेंच पर रखा कुछ हुआ था क्या उन के बीच तुम्हारे अंकल चौरसिया प्रदर्श कंपनी के सीईओ कम बेवडे ज्यादा थे । शराब की लगते हैं । जिंदा होते हुए भी मार डाला था । उनके बेटे और बहू की हत्या की गई थी । मगर सिमंस एंड संस कंपनी के वकील ने कानूनी तौर पर ये साबित कर दिया था कि ये हत्या नहीं सुसाइड है । धोखे से सिमंस कंपनी ने चौरसिया कंपनी के सारे शेयर्स हडप लिए । उन का पोता शाम अपने दादा से नफरत करने लगा था । कई सालों से उसने अपने दादा से बात तो दूर, उनकी शकल भी नहीं देखी । कभी कभी दादी से मिलने आता था । मगर दादी के जाने के बाद उसके एड्रेस के अलावा उसका कुछ नहीं पता । सुनने में आया था कि उसने शादी कर ली । उसके बच्चे भी है । छोटू खुली आंखों से सब सुन रहा था । सच्चाई उसके सामने थी । चंदू चाचा चलने लगे । छोटों को भी अपने साथ चलने का इशारा क्या आंटी को क्या हुआ था? छोटू ने पूछा हो वो इतना सब से ही नहीं सकी । बीमारी उन का दूसरा नाम था । हम सब रोड पर आ गई थी । जेब में फूटी कौडी नहीं थी । उनका इलाज हो पाना मुमकिन नहीं था । कुछ दिनों लडती रही बीमारी से आखिर में मौत जीत गई और वह हार गई । किसी ने अंकल की हेल्प ले की । छोटू रुका । अगर उनके साथ धोखा हुआ था तो उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए थी । कैसे आवाज उठाते हम । सिमंस कंपनी ने सबको खरीद लिया था । हमारे पास वकील को देने के लिए भी एक पैसा नहीं था । छोटू चुप रहा । उसके पास बोलने के लिए कुछ नहीं था । सारी कहानी उसे साफ साफ नजर आ रही थी ।

PART 19

भाग गलत फैमी कब आएगी आपकी डॉक्टर हमेशा बिजी रहती हैं । सरकारी हॉस्पिटल में चोट वोट नर्स पर बरस रहा था । सर वो सुबह से ही नहीं आई । हॉस्पिटल नर्स बोले जा रही थी आज वो अपने घर से ही कहीं किसी मरीज को देखने जाने वाली थी तो फोन के बंदे उनका छोटू का गुस्सा बढ रहा था । वो किसी का गुस्सा किसी बढ निकाल रहा था । कॉल करो तो फोन बंद है, हॉस्पिटल में मिलती नहीं है फिर जाती कहाँ है तुम्हारी मैडम? छोटों की आवाज तेज थी । ये बातें सुनकर वहां खडे लोग उसके करीब आने लगे । जिसकी जितनी भडास थी सब बसते लगे । सबकी नजरें छोटों पर थी । जैसे सबको अपनी बात कहने के लिए एक मसीहा मिल गया हूँ । लोग हॉस्पिटल से नाराज थी ही और फिर आवाज उठाने वाला भी मिल गया तो सोने पे सुहागा हो गया । सही कह रहे भैया से अलग एक लडकी की आवाज सही छोटू का हौसला बढने लगा । लोगों को बेवकूफ बनाने में माहिर है डॉक्टर लोग एक कदकाठी से छोटे मगर उम्र में पिता सामान । आदमी ने कहा हाँ हाँ, ऐसे ही करते हैं ये लोग । सरकार से तनख्वाह टाइम पर चाहिए मगर हमारे इलाज करने के लिए इनके पास टाइम ही नहीं है । एक बूढे मगर समझदार अंकल बोले सौ टका सकते बातें भैया यहाँ जैसे की कोई नहीं सुनता । चार दिन से यही जमीन पर पडे हैं हम कोई सुनने वाला भी नहीं है हमारी जमीन पर लिटा आदमी फूट फूटकर रोने लगा । छोटों के चारों था लोग ही लोग थे उसका उत्साह दूना बढने लगा तब इसके फोन पर किसी ने दस्तक दी कहाँ हूँ ये बरीकी आवाज थी । डॉक्टर आयरा को बुलाओ । भेड से आवाज आने लगी । छोटू भीड से दूर आकर बोला ये सवाल मुझे तुमसे करना चाहिए तो कहाँ हूँ क्या पकडे हो तो परिणाम गुस्से से कहा ये आदि काल तुमने मैसेज करके जो एड्रेस दिया था मैं नहीं हूँ क्या? छोटू बीच में बोल पडा मैं वहीं आ रहा हूँ । ये इतनी आवाज क्यों आ रही है? कोई लडाई झगडा हो गया क्या? नहीं कुछ नहीं मिल कर बताता हूँ । छोटों ने त्योरियां चढाई यहाँ से निकल लेने में ही भलाई है । ये सोच कर के भेज से बच के हॉस्पिटल के पीछे वाले रास्ते से निकल गया । कहाँ फस गई और उसके मन में सोचती हूँ मैं भी लोगों के बारे में कितना गलत सोचता हूँ । मजबूरी समझे बिना राई का पहाड बना देता हूँ । गलत फहमी भी बडा सी आता है । करी तो मेरे कहने पर ही एंजेल अंकल के ट्रीटमेंट के लिए गई थी तो बहुत दिमाग गाय । छोटू उसने अपने आप से कहा मैं भी कितना बडा वाला बेवकूफ हो तो यहाँ आई कितनी देर हो गई? छोटू ने झोपडी के बाहर खडी आयरा से पूछा करीब एक घंटा हो गया है परिणय गुस्से भरी निगाहों से देखा था । मुझे कॉल तो कर सकती थी । छोटू के बचाव में कहा कब से तो मैं कॉल कर रही हूँ, कल भी किया था । आयकर का गुस्सा बढ रहा था ये क्या हो लिया बनाया है । किसी से फिट कर आए हो । नहीं छोटों की नजरें नीचे थी झूट हाँ कैसे लगी झूट छोटी चुप रहा । मैं कुछ पूछ रही हूँ ये चोट कैसे लगी? कहाँ कहाँ लगी चोट सिर पर बैंडेज शौक के लिए लगाई है टू टू के पास अब कोई चारा नहीं था बिचारी छोटों ने कल से अभी तक का सारा किस्सा कह सुनाया । हॉस्पिटल में जो पहाड छोटू खडा करके आया है वह अभी बताना बाकी था । क्या जरूरत थी हीरो बनने की तो मैं जरा भी बताया है वो कितने ताकतवर लोग हैं उनका सामना तो अकेले नहीं कर सकते हैं । एक दिन अकेला ही उन्हें धूल जुटाऊंगा । छोटू फुसफुसाया कुछ कहा तुम ने नहीं तो मैंने दवाइयाँ लिख दी है । पास में मेडिकल स्टोर से ले आना । आयरन पर्चों से थमाया ध्यान से समय समय पर उन्हें ये दवाइयाँ दे देना आॅल और तेजी से इस बस्ती से बाहर निकल गई । अगले दिन छोडो ने बहुत देर बाद अपना मोबाइल ऑन किया । तेज माॅल ये पडी थी जो कल रात से ही छोटे को कॉल कर रही थी । उसने कॉल बैक किया आप कौन सी दुनिया में जीते हो? सारा तरीका पहला तीन निशाने पर लगा था । मैं कब से तो मैं कॉल कर रही हूँ । सौरी मोबाइल बंद था क्या? सौरी ये तो ठीक है मगर जो बखेडा तुम हॉस्पिटल में खडा करके गए हो उसका क्या? उसका भी सौरी पर मैंने सोचा कि तुमने क्या सोचा तरीका गुस्सा बढ रहा था । डॉक्टर आएगा । दूसरे कामों में बहुत बिजी रहती है उन्होंने हॉस्पिटल आने का तो टाइम ही नहीं है । एक तो किसी कि मदद करो फिर वही आदमी आकर मुझे चार सुना कर चला जाए । अच्छा नतीजा मिला मुझे मेरी नहीं देगा । परी ऐसा नहीं ये मुझे पता नहीं था तो पता नहीं होना भी तो गलती है । छोटू कुछ नहीं बोल पाया । उस तरफ से भी कोई आवाज नहीं आई । उसने देखा तो मोबाइल की बैटरी डाउन हो गई । उससे अपना माथा होगा । हमारे साथ भी कई बार ऐसा होता है जब सामने वाले को अच्छे से सुन रहे होते हैं । मगर कुछ टेक्निकल प्रॉब्लम के कारण हम दोषी हो जाते हैं और सामने वाला गलतफहमी पाल लेता है । छोटू देसी का उदाहरण हैं । बात तो करना चाहता था, अगर बैठे खत्म हो गई और उधर आये । रानी मन में सोचा की छोटों ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया । आज वो हो गया जिसका अंदाजा छोटे को बिल्कुल नहीं था । हैलो डॉक्टर आॅन आॅफ फोन उठाया । मैं गुडिया बोल रही हूँ । उस तरफ से आवाजाही वहाँ बोलो । गुडिया क्या हुआ पर ये आपके साथ छोटू भैया है । क्या उनका फोन नहीं लग रहा? गुडिया की आवाज से लग रहा था जैसे हो घबराई हुई है । नहीं अभी थोडी देर पहले उसी से बात कर रही थी । मगर अपने कोई डिस्कनेक्ट हो गया । संस्कृति रोने लगी । उसके रोने की आवास पारी को साथ सुनाई दे रही थी । गुडिया तो जो क्यों रही हो? क्या हुआ मुझे तो बताऊँ करी नहीं जोर लगाया फॅसा की तबियत बिगड रही है । उसे हकलाते हुए कहाँ भी अभी कल से घर पर नहीं आए और उनका फोन भी नहीं लग रहा हूँ । होने लगी भैया भी कल से घर पर नहीं आए और उनका फोन भी नहीं लग रहा । वो रोने लगी । वो की तुम रोना बंद करो में पांच मिनट में तुम्हारे घर पहुंचती हूँ । ठीक है परी तुरंत अपने कैबिन से बाहर आई । ऍम तो कहना में उनसे आकर मिलती हूँ । वो तो जाने वाले हैं मैं तो कैसे भी करके उन्हें रोककर रखना कहकर पडी । तेजी से हॉस्पिटल से बाहर निकल गई । बॅाल के पास बैठा उनसे बातें कर रहा था । धीरे धीरे उनकी तबियत में सुधार नजर आ रहा था मगर छोटू आने वाली असली मुसीबत से अनजान था । अंकल एक चम्मच और खाएंगे नहीं तो एनर्जी कहाँ से आएगी? छोटू ने सूप दिला रहा था । डॉक्टर ने कहा है आपको खून की कमी है कौन से? डॉक्टर ने कहा अंकल खासे उनसे कहना मैंने हस हस के इतना खून बढा लिया है कि मेरे मरने तक खून की कमी नहीं हो सकती है । छोटू मुस्कुराने लगा । बता है जहाज में क्या महसूस कर रहा हूँ । क्या दुनिया का सबसे बडा हूँ क्यों कैसे? क्योंकि मेरा लीवर खराब हो चुका है फिर भी जिंदा रहने की उम्मीद कर रहा हूँ । कम लोगों को नसीब होती है ऐसी खुशी एंजेल अंकल कहते कहते रुक गए । अब मैं मरने वाला हूं । करुँगी लगे ऐसा क्यों बोल रहे हैं आप तो क्या कर रुपये थे उन्होंने छोटू का हाथ था एक काम करो कि मेरा दोनों अंकल मेरे शाम को वापिस ले आना । उन की आगे बढ रहे हैं । हाँ आंकल छोटू इतना ही कह पाया बाहर कोई तुमसे मिलने आया है । चंदों का अंतर है । मुझ से छोटी झोपडी के बाहर आया । सामने मेरी बाइक खडी थी टू तो यहाँ से कर रहे हो साटी छोटू बोला यही सवाल में तुमसे करूँ । मैंने उसे घूरकर देखा । वहाँ तुम्हारे दादा की तबियत खराब हो रही है तो मैंने छोड कर यहाँ बैठे हो । तुम्हारा मोबाइल भी बंद आ रहा है । वो तो अच्छा हुआ । जो परिणय मुझे यहाँ का एड्रेस दिया नहीं तो कहाँ ढूंढा मैं तो मैं मुझे चलना चाहिए । इसीलिए तो मैं आया हूँ । चलो दोनों बाइक पर बैठे और हॉस्पिटल की तरफ निकल गए । एक बार एंजल अंकल से मिल नेता उन्हें बता देता कि अभी मैं जा रहा हूँ । छोटों ने मन में सोचा

PART 20

बीस का भाग एक नया बोर्ड शनिवार का दिन था । हॉस्पिटल मरीजों से भरा पडा था । शहर के पास वाली नदी में बाढ आ जाने से बाढ में घायल लोगों का इलाज वहाँ चल रहा था । तीसरे फ्लोर पर मैंने मोबाइल में देख कर कहा, तीसरे फ्लोर पर हम दोनों पहुंचे । बाहर गुडिया और रक्षा दादी के साथ खडी थी भैया । गुडिया ने भैया को देखा और उसके से ने से जलाती क्या हुआ दादा को? छोटू ने पूछा । पता नहीं गुडिया और जोर से रोने लगीं । सामने से आसिफ चाचा दवाई लिए दौडे चले आ रहे थे । छोटों ने रूम के बाहर लगे कहाँ से देखा? दादा पलंग पर अच्छे पढे थे । ऑक्सीजन नली उनके मूड को घेरे थी । मैं फोन पर बिजी था । रक्षा से संभालो । छोटू बोला रक्षा गुडिया को दूर ले गई । छोटू रूम के सामने बैंच पर बैठ गया । उसने अपना मोबाइल चालू किया । मगर बैटरी बिलकुल भी नहीं बची थी । नर्स आईसीओ से बाहर आई । सिस्टर या चार्जर की व्यवस्था हो सकती है । गया नहीं । मेरे कैबिन में चले जाओ । परी रूम से बाहर आए । घबराओ नहीं तुम्हारे दादा को कुछ नहीं होगा । पर छोटों के पास आकर बैठ गई । छोटू हाथ बांधी बैंच पर बैठा था । उसने नजरे उठाकर पारी को देखा । इस तरह से पारी की बहुत जरूरत थी । आसिफ चर्चा मैंने जो दवाई लिखी थी वो ले आया । आप हाँ बेटियाँ नर्स को दे दी है । आसिफ चर्चा बोले छोटू बैंच पर बैठा नीचे फर्श को घूमे जा रहा था । ऑपरेशन करना होगा झूट हूँ पर इन नजदीक आकर कहा कब करना है जल्द से जल्द सुबह दस बजे के आसपास क्यों आज नहीं हो सकता? गया? नहीं क्यों? डॉक्टर नैनो कल हॉस्पिटल आएंगे । अरे यार क्यों क्या हुआ परिणाम उसका हाथ थामा । खर्चे की चिंता मत करो, वो सब एडजस्ट हो जाएगा? नहीं वो बात नहीं है । तो फिर जब मैंने मोबाइल ऑन किया तब एक नए नंबर से कुछ मिस कॉल पडी थी । मैंने जब कॉल बैक किया तो पता चला कि ये सिमंस कंपनी से कॉल था । मैनेजर ने मुझे कल नौ बजे कंपनी आने के लिए कहा है तो मुझे समझ नहीं आया कि उन्होंने मुझे ही क्यों चुना है । मैंने अपना ईमेल चेक किया । कारण पता चला कि जिसका सिलेक्शन पहले हुआ था उसे अब जॉब नहीं करना । इसलिए वह जगह मुझे मिली है तो इसमें होने वाली क्या बात है । पर इन्हें छोटू की आगे देख कर कहा, अगर कल में वहाँ चला गया तो यहाँ कौन रहेगा? उसकी चिंता तो मत करो । छोटू यहाँ रोहित है, दादी है, गुडिया है, रक्षा है । आसिफ चर्चा है और मैं हूँ । छोटू ने जाने कहाँ हो गया उसे अपने सामने कुछ तस्वीरें स्पष्ट दिख रही थी । क्या सोच रही हूँ? आॅर्डिनेंस के कंधे पर हाथ रखा तो यहाँ की चिंता छोडो कल तो में हर हाल में कंपनी जाना है । छोटू बहुत दिन बाद ही मौका मिला है । इसे खोना मत भडी की आवाज में एक विनती थी मगर दादा को छोडकर कैसे जाऊँ? छोटू फिर बोला उन का खयाल रखने के लिए हम सब है ना । पर इन्हें विश्वास जताया तो मैं याद है तुम्हें अपने आपसे क्या वादा किया था कि तुम्हें उडान भरनी है । बहुत ऊंची उडान परिणय छोटू की आंखों से आंसू पहुंचे मगर मुझ पर विश्वास है । दोनों की आखेटक रहे पहुंचा था । छोटों आगे कुछ नहीं बोल पाया । गहरे सन्नाटे के बाद तुम्हारा एहसान में जिंदगी भर नहीं भूलूंगा । पडी एहसान बताकर पढाया कर दिया एक बात कुछ हूँ, कुछ हूँ साथ रहोगी मेरे यहाँ तरीका जवाब बिना किसी फिल्टर के था । हमेशा जिंदगी भर परी खडी हुई । हमेशा जिंदगी भर उसने जाते जाते छोटू के आंसू पहुंचती हुएकहा मैं उस वक्त भी तुम्हारे साथ रहोगी जब सारी दुनिया तुम्हारे साथ होगी और मैं तब भी तुम्हारे साथ रहेंगे जब तुम्हारे साथ कोई नहीं होगा । रात का समय था, ठंड बढने लगी थी । छोटू खिडकी के पास खडा चांद को निहार रहा था । उसके मन में विचारों का टकराव चल रहा था । एक तरफ एंजल अंकल जी ने में ऐसी हालत में छोडकर आ गया । एक धर्म ज्यादा जिन्हें मैं एक बाल भी छोड कर जाना नहीं चाहता हूँ । एक तरफ नौकरी चुप बडी मुश्किल से मिली हैं । तमाम सवाल भीड में खडे अपने अपने जवाब के इंतजार में थी । तीनों सवाल में से करने के लिए कोई एक चुनना था । धीरे धीरे समय बीत रहा था । उसे नींद के झटके भी आने लगे थे । चंद दिखना बंद हो गया । चारों तरफ अंधेरा छा गया । नीचे देखने पर रास्ते में बनी स्ट्रीट लाइट ही चमक रही थी । कुछ ओस की बूंदे किनारे पर लगे पेडों पर जमा हो गई थी । कुछ बूंदे छोटू की आंखों को भी सहला रही थी । मगर अफसोस यह कि ओस की बूंद नहीं थी कि उसके आंसू थे । अंधेरा बढ रहा था । छोटू की आगे कुछ नहीं देख पा रही थी । अंधेरा सिर्फ ही रहा । घना अंधेरा कुत्तों के भौंकने के आवास आज दूर दूर तक दिखाई सुनाई नहीं दे रही थी अंधेरा अंधेरे का कालाकर एजेंडे अपनी डायरी के पन्नों को पलटा नगर आगे कोरे पन्नों के अलावा कुछ नहीं था । रात के चार बच गए थे । उसने डायरी बंद कर दी । उसके कमरे में उजाला अभी भी फैला था । उसने मुझे मैसेज किया । छोटू ने फिर क्या चुना?

PART 21

किस का हक? गलती फिर क्या हुआ? रोहित छोटों ने क्या चुना? दुबई की एटलांटिस होटल के कॉफी शॉप में बैठी अवनी ने मुझसे पूछा मेरी इजाजत के बिना तो मेरी डायरी कैसे पढ सकती हूँ? मुझे गुस्सा आ रहा था । मैंने डायरीज के हाथों से छीन ली । सौरे वोट सौरी गलती हो गई । अपनी गलती तुमसे आज नहीं बहुत पहले हो गई थी । मैंने गुस्सा कण्ट्रोल किया शायद ऍम सौरी हमने की आगे बता रही थी की उसने बहुत बडी गलती कर दी । एक फेमस पब्लिकेशन की एडिटर होते हुए भी उसने गलती कर दी । मुझे दुबई दर्शन तो करा दूँ मैंने बात बदलने चाहिए और मैं कामयाब रहा । हाँ क्यों नहीं अपनी बोली अच्छा लिखते होता हूँ । उसके इस बात ने मेरा दिल छू लिया । कॉलेज टाइम में भी बहुत अच्छा लगता था अगर तुम्हें लगा कि मैं तुम्हारा इस्तेमाल अपनी बुक पब्लिश कराने के लिए कर रहा हूँ क्योंकि तुम्हारी पापा बडे पब्लिशर थे । मैंने बीती बातें अपनी को गौर कराई । आज तो नहीं बोल रही होगी में अच्छा लगता हूँ उस टाइम मुझे जो लगा मैंने किया और मानती हूँ । मैं गलत थी । सिंह गलत लगने और गलत होने में फर्क होता है । मैडम छह साल पहले वाली अपनी को ये बात पता नहीं थी । रोहित शुरू से ही तो मैं ये अहसास हुआ कि मैं गलत नहीं था । तुम्हारी गलतफहमी का शिकार पडा था । अगली कुछ नहीं बोली कुछ सेकेंडों में उसका मन छह साल पहले वाले जमाने में घुमाया तो बताओ कुछ अपने बारे में फॅमिली किताब पढने का शौक है तो में वहाँ बहुत ज्यादा अच्छी बात है ये मैंने माहौल बदलने की कोशिश की । तुम यहाँ कितने साल से हो यही कोई चार साल से पढाई के लिए वहाँ कुछ दिनों में पढाई कम्प्लीट होने वाली है । अच्छा फिर उसके बाद उसकी बात किया अपनी ने बोलै सिकोडी भारत वापस जाओ क्या यहीं दुबई में सेटल होने का इरादा है? भारत वापस ज्यादा नामुमकिन है । यही रहूंगी । जॉब भी मिल रही है, सेट है सब अच्छी बात है और तुम्हारा फुल टाइम राइटिंग करूंगा । वेरी गुड । हम नहीं मुस्कुराई । अभी क्या करते हो? लाइब्रेरी संभालता हूँ कि गाद सच बताऊँ तो इस डायरी की कहानी बहुत अच्छी है । थैंक्स लेकिन अपनी कहानी कहानी होती है उसे अच्छा बुरा तो हम कहते हैं कि जैसे जैसे तुम उस कहानी के हीरो छोटों से कनेक्ट हो गई हो, आखिर तुम्हारा भी दोस्त था । छोटा हूँ । दोस्त नहीं विपक्षी दल का नेता हाँ बहुत बेसबरी कराई थी उसकी तुमने । मैंने याद करते हुए कहा मिलाया भी तो मैंने ही था । दोनों को ऐसा भी क्या मिलाना अपनी मैं थोडा रोका तो मैं तरीके हारने के लिए । पापा जो असल में लवलेटर था ये कहकर उसे कॉलेज के प्रिंसिपल को भेजा था कि सरकारी आदेश वाला लेटर है । वो लव लेटर मैंने ही लिखा था । छोटों के नाम से बिचारा कॉलेज प्रेसिडेंट भी नहीं बन पाया था । उस लवलेटर की वजह से प्रेसिडेंट तो नहीं बना लेकिन पर ये और छोटू भैया की तो जान गई । हम नहीं हंसने लगी । वेटर वन, कोल्ड कॉफी और तुम्हें अपनी कोल्ड कॉफी डिस्टर्ब वेटर को इशारा किया । राइटर तो हम पहले से थे । अच्छे फिलॉसफर भी बन सकते हो तो आऊँगी जरूर । मैंने हामी भरी मेरी नजरें अब उस कॉफी कैफे में आते जाते कपडों से रईस लग रहे लोगों पर थी । हमारी गोल्ड कॉफी हमारी टेबल पर थी । मैंने कोल्ड कॉफी के एक बडी सी सिबली थोडा कब करोगे? कहानी अपनी नहीं कॉफी का मजा लेते हुए पूछा कुछ दिनों में पूरा करूंगा मैंने जवाब दिया कितने दिन में एक हफ्ता यही दुबई में पूरा करोगे कहानी नहीं अपने देश में है । मेरा सीधा जवाब था मैं यहाँ सिर्फ एक इवेंट अटेंड करने सिर्फ तीन दिन के लिए आया हूँ । कब जा रहे हो? इंडिया उस पे मुस्कराहट के साथ पूछा कल इतनी जल्दी? हाँ मैंने कहा जितना घूमना है दुबई दो दिन में घूम लेंगे । अच्छा एक सवाल पूछ तो उसे उसने अपने चेहरे पर बिक्री लड्डू को एक तरफ क्या कुछ हूँ? मैं पिघल गया । मगर बस एक ही सवाल मुझे देर हो रही है । फिर क्या हुआ? छोटू का उसकी उडान का भरी उसने उडान अपनी का एक और सवाल मासूमियत से भरा था । हाँ मैंने कहा उडान भरना उसका सपना था । मगर वो इस बात से बेखबर था कि इस उडान में उसका सब कुछ दांव पर लग जाएगा । उसका सबको चला जाएगा । फिर वो होगा जिसकी उम्मीद ना मुझे थी ना उसे । मगर इस बात का उसी कोई काम नहीं था । वो खेला हो गया वहाँ अकेला हूँ मेरी आवाज थम सी गई सब कुछ मतलब अपनी की आंखों में मैंने उत्सुकता का सैलाब देखा । शायद सब कुछ शायद क्या पक्का सब कुछ । फिर एक और सवाल उससे पूछ लिया अभी नहीं । अवनी मैं खडा हो गया । मैं लेट हो रहा हूँ । वीरे का कॉल भी आ रहा है । फिर काम मिले । शाम को मैंने अपना ब्लेजर पहना । कल मेरे एक्साम्स खत्म हो रहे हैं तो कल मिल सकते हैं । उससे पूछा और बेसब्री से मेरे जवाब का इंतजार करने लगी ही देखते हैं कॉल करूंगी । मैं उसको भी शौक से निकल गया । बाहर मेरा दोस्त मेरा इंतजार कर रहा था ।

PART 22

भाग अधूरी कहानी कॉलगेट पर नौ करने पर मैंने पूछा सिर्फ आपकी हॉट कॉफी उस तरफ से आवाज आई । मैं खुश हो गया । यहाँ की ठंड में हॉट कॉफी कहने का काम करती है । मैंने गेट खोला । वेटर मुस्कराया अंदर आके उसने टेबल पर काफी रखी । गाॅव उसके चेहरे पर इस्माइल वाला एक्सप्रेशन देकर कहा गुड नाइट! सेम एक्सप्रेशन के साथ मैंने उसे विदा किया । मुझे सोचते सोचते एक घंटा हो गया था । कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या लिखूँ । बस एक कहानी दिमाग में घूम रही थी, जिसे मैं अपनी डायरी के कोरे पन्नों पर उतार देना चाहता था । मैंने कॉफी की पहली सिप ले और फिर सोचने लगा मैंने फिर कब को होटल से लगाया और एक लंबा घूट भर लिया । मेरे दिमाग की नसों ने काम करना शुरू किया । धीरे धीरे कागज मेरे पैन की सियाही को सोच रहे थे । ये एक घटना एक अध्याय था जो समाप्त हो गया । विरासत में रह गई थी तो बस उसकी यादें यादि यादें तीन साल बाद एक अधूरा सा जो था एक फरवरी दो हजार उन्नीस । इन तीन सालों में सब कुछ बदल गया । अच्छे दिनों का तूफान अब खत्म हो गया था । मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ में नई सरकार आई थी । लोगों ने एक बार फिर नई सरकार पर भरोसा किया था । प्रधानमंत्री के चुनाव का साल भी यही था । देश की कोनों में भी काफी हद तक बढ चुकी थी । इस साल आईपीएल क्रिकेट भी चुनावी दौर के कारण भारत में ना होकर के दक्षिण अफ्रीका या दुबई में होने की संभावना थी । पिछले साल फ्लू की तरह फैला मीटू कैंपेन के तहत बॉलीवुड इंडस्ट्री के कई नामचीन लोग इसके शिकार हुए । जनवरी में आई दिव्यप्रकाश दूबे के नोबेल ने लाखों लोगों का दिल छू लिया था । अखबारों में चुनाव के मुद्दे को छोडकर साहिल सोने के चर्चों ने इन दिनों दिन आग पकड ली थी । हर अखबार उसकी सफलता की स्टोरी बताने के लिए उसके करीबी लोगों से बातचीत कर रहे थे । मीडिया में भी साहिल सोने का नाम सुर्खियों में था जिसको अब तक कोई नहीं जानता था । आज उसके नाम पर फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि तमाम सोशल नेटवर्क साइट्स पर साहिल सोने के नाम से फेक अकाउंट बन चुके थे । हर कोई जानना चाहता था आखिर ये साहिल सोनी है कौन जो इंडिया के टॉपमोस्ट कंपनी सिमंस एंड सन्स को टक्कर दे गया । टक्कर ही नहीं देता बल्कि इंडिया की टॉप टेन कंपनी में भी टॉप पर खडा है । मीडिया ने यह जानकारी भी अपने दर्शकों तक पहुंचाई की साहिल सोनी ने छह महीने पहले ही सिमंस कंपनी छोडी थी । आज सिमस की शेयर दिनों दिन गिरती जा रही है । आखिर क्या वजह है जो साहिल सोनी ने अपनी कंपनी उडान को मार्केट में लॉन्च कर दिया । खबरों का सिलसिला जारी रहेगा । बडी खबरों के लिए देखते रहिए हमारे चैनल खबर दिनभर छोटू उर्फ साहिल सोनी साहिल अपनी कंपनी के टॉप फ्लोर की खिडकी से उन रास्तों को देखा था जो अब उसके रहे गुजरा थी । जिस दुनिया को देखते के लिए वो वर्षों तरसा आज वही सब की दुनिया बन चुका था । कंपनी का सी । ई । ओ । होना कोई छोटी बात नहीं है । इस साल के कॅरियर वार्ड में भी उसका नाम नोमिनेटिड है । हमारी लाइफ दो तरह की है । एक वो जो दुनिया देख रही है और दूसरी वह जो हम देख रहे हैं या महसूस कर रहे हैं । दोनों की अहमियत अपनी अपनी जगह सही है मगर जरूरी वह है जो लाइफ हम जी रहे हैं । क्या देख रहे हो सर कुछ नहीं अंकल सौरी मैं बिना गेट नौ किये अंदर आ गया । ये चंद्रशेखर उर्फ चंदू अंकल थी । कंपनी के एमडी और साहिल के पोस्टल एडवाइजर पहले तो मुझे सर बुलाना बंद करो क्योंकि जिनके लिए दिल के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं उन्हें नौ करने की जरूरत नहीं रहती । टेनिस कंपनी के सीईओ हो और हमारे बॉस भी रिस्पेक्ट देना हमारा फर्ज है । चंदू अंकल मुस्कुराएँ ठीक है छोटे बोला आपसे बातों में जीत पाना मुश्किल है । अंकल ऍम आखिरी तुम हमारे बेटे की उम्र के हो चंदू अंकल जाने लगे ही दस मिनट याद है । मुझे मीटिंग हैं । चन्द्र मंगल कैबिन से चले गए । छोटू कुर्सी पर बैठ गया । मीटिंग के दौरान क्या बात करनी है वो सोचने लगा वेल्डन साथियों आज हमारे लिए इंजॉय का दिन है । पहली मीटिंग रूम में बैठी कंपनी के सभी सदस्यों से कहा कुछ महीनों में हमारी कंपनी ने दुनिया भर में पहचान बना ली है । हमारी उडान को एक नई ऊंचाई मिली है । केंद्रीय सडक को सस्ते दामों में बेचकर भी हमारा अपना मार्केट टॉप पर है । इससे हमने लोगों का भरोसा भी जीता है । हमने जो विजन बनाया था, जो सपना देखा था वो हम पूरा कर चुके हैं । जिस समय कंपनी ने हमसे कहा था कि हमारी कोई ग्रोथ नहीं है, आज उसे भी चक्कर आ रहे हैं । मेहनत और किस्मत दोनों ने हमारा साथ दिया । एक बार जोरदर क्लैपिंग आप अपने लिए कर सकते हैं । सबके चेहरे खिल गए थे । सब खुश थे । सब की आंखों में कंपनी के सपने उसका विजन लिया था । बधाई हो सर । मिश्राजी स्माइल देते हुए बोले, थैंक्स मिश्रा जी, हम अपने कस्टमर को वैसे बेस्ट क्या दे सकते हैं । इसके लिए आईडिया सोचने होंगे । अपने सपनों को हमें पूरा करना ही है । सालों की मेहनत के बाद कंपनी ने जो ये मुकाम पाया है, उसे और ऊंचाई देनी है । मोबाइल बार बार साहिल का ध्यान खींच रहा था । स्क्रीन पर मेरा नाम चमक रहा था । सर हम सब आपको एक सरप्राइज देना चाहते है । तोहफा कुबूल करें । मैसेज चंचलानी कुर्सी से उठी कैसा सरप्राइस मीटिंग हॉल में बैठे कंपनी के सभी सदस्य एम डी से लेकर स्वीपर सब खडे हो गए । कंपनी के सीईओ हमार एबॅट के लिए जिनका नाम नॉमिनेट हुआ है ऐसे मिस्टर साहिल सोने को हम सबकी तरफ से छोटा सा तोहफा तालियों की गडगडाहट से रूम गूंज उठा । ये मेरे लिए सबसे बडा तोहफा है क्योंकि ये मेरे अपने लोगों ने मुझे दिया है । मैं इसका बहुत शुक्रगुजार हूँ । सर आप से मिलने के लिए रोहित सराय हैं । पियोने साहिल के करीब आकर कहा एक काम करो उन्हें मेरे कैबिन में ले जाओ । मैं मीटिंग खत्म करके आता हूँ । ऍम जाने लगा । बोल रही थी । बहुत जरूरी बात करनी है । उससे जाते जाते कहा । एक घंटे बाद मीटिंग खत्म हुई । पांच मिनट के चालीस मिनट हो गए मगर उसे अभी भी कुछ याद नहीं आया । कैबिन के बाहर खडे कौनसे साहिल ने पूछा रोहित सर कहाँ गए? वो तो चले गए । साहब बहुत देर से बैठे थे तो की छोटों अपने कैबिन में आ गया । थोडा भी नहीं सकता । साटी खुद को मेरा भाई कहता है और जब भाई बनने का मौका मिलता है तो भाग जाता है । छोटू ने रोहित का नंबर मिलाया । थोडा रुकने सकता था । साटी साहिल बोला बहुत देर हो गई । छोटू मेरे रुकने से कुछ नहीं होने वाला है । जो बचा था वो भी बिगड गया । मेरी उदासी मेरी बातों में साफ देखी क्या बोल रहे हो साठे तो चेयर पर बैठते हुए साहिल ने कहा क्या देर हो गयी क्या भी घर गया तो कहना क्या चाहता है? साटी परी वहाँ पर तो बडी गई मतलब असाटी तो है कहाँ? जहाँ भी है समंदर के पास वाले कैफिटेरिया में मिल जल्दी आना मेरे फोन रख दिया हूँ ।

PART 23

तेईस भाग तेरी उडाने दम तोड दिया । उस रोज उसने नौकरी पर जाना पसंद किया था । उस रोज उसने पारी की बात मानी थी । फिर कभी वो एंजेल अंकल से नहीं मिला । खबर आई थी कि वह दुनिया में नहीं रहे । उस रोज वो अपने दादा को भी नहीं बचा पाया । उस रोज छोटों ने दादा की डेथ का सारा इल्जाम परी और गुडिया पर ठोक दिया तो बहुत कुछ घट गया । इतना उदास क्यों? साडी? साहिल ने मेरी कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कुछ नहीं मेरे हाथ समंदर के किनारे पडी गीली रेत से समय है । चलो कॉफी शॉप में चलकर बात करते हैं । उसने मुझसे कहा कुछ लोग भूल जाते हैं कि वह इसी मिट्टी पर बैठकर ही अपने सपने पूरे कर पाए हैं । मैंने कठोरता से कहा मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा । साटी तो क्या कह रहा है, कैसे समझ आएगा तुझे? तू तो अब समझाने वाला बन गया है । अच्छा मुझे शुरू से बताया हुआ क्या है तुझे? असाटी एक घंटे से तुम्हारा इंतजार ही कर रहा था । मैंने गुस्से से कहा मैं ही सबसे बडा पागल हो मैं क्या करूँ तुम्हारा इंतजार । हर कोई तुम्हारा ही इंतजार करता रहे । और तो मुझे इंतजार करती रहूँ । ऐसा बन गयी वो छोटू तुम जो तो मैं इतना गुरुर आ गया है । खुलकर बताएगा साटी कुछ और भी लोग थे जो तुम्हारा इंतजार सालों से कर रहे थे मगर अब वो भी गए कौन लोग करी मैंने अपने आंसू पहुंचे । बहुत देर कर दी तुमने । छोटू कहाँ गई? बरी चली गई वो हमेशा के लिए । रोहित पहले तुम से पहले ही कहा है कि मेरे सामने उसका नाम मत लिया करो । उसने विश्वास तोडा था । उसने मेरे दादा को मुझसे छोडा था । कौन सा विश्वास? छोटू यही कि उसने तो उसे ये वादा किया था कि वह हमारे दादा को बचा लेगी मगर वो नहीं नहीं बचा पाई । इसी वजह से तो उस से विकसित हो गए । कितना काफी नहीं था । उसने कहा अच्छा माला वो तुम्हारे दादा को नहीं बचा पाई । ये उसकी गलती थी मगर मान लो उस जगह पर अगर तुम होते तो उन्हें बचा सकते थे बोलो छोटू इसका जवाब है तुम्हारे पास शायद शायद क्या होता है या तो बचा सकते थे या नहीं । मेरा गुस्सा बढ रहा था । होनी को कौन टाल सकता है और उसने तो पूरी कोशिश की थी दादा को बचाने की । मगर किस्मत को कुछ और मंजूर था, उसकी क्या गलती थी? उस वक्त मैं भी तो वहाँ मौजूद था । मैं भी कुछ नहीं कर पाया तो क्या तो मुझ से भी दूरियां बना ली होगी । बोलो छोटू जवाब दो सॉरी ग्रेड ऍम मिस्टर साहिल सोनी तो उससे जुडा होने की मैं सोच भी नहीं सकता । साटी उसकी आंखें चमकने लगी थी । सबके पास सीमित समय होता है और सब का समय कीमती होता है । माफ कर दिया साटी उसने रो दिया । अगर मेरे करने से कुछ होता तो मैं एंजल अंकल को भी बचा सकता था । अब रोने से क्या होगा? छोटू तो हमेशा देर कर देता है । पारी जितने केयर तेरे परिवार की करते थे । जितना प्यार वो तेरे परिवार से करती थी उतना शायद वो अपने परिवार से भी प्यार नहीं करती होगी । हर वक्त उसे तेरह साथ दिया । चाहे वो तेरे अंकल हो या फिर दादा । मगर तूने उसे क्या दिया? तीन साल का इंतजार और अभी तुझे नहीं लग रहा कि इसमें तेरी कोई गलती है । मैं उस पर भडक रहा था । छोटू नीचे पडी रेत को गौर से देखना था । उसके आंसू भी उसमें घुल रहे थे तो बहुत खुश होंगे ना तो टॉप बिजनेसमैन बन कर मिस्टर साहिल सोनी ॅरियर जो कहता था मुझे सब मिल गया वो आज या समंदर के किनारे बैठा हो रहा है । मोस्ट बिजनिस मैं मेरा गुस्सा मारता जा रहा था । कब तक छोटे इस बनावटी मुस्कान से दूसरों को बेवकूफ बनाता रहेगा । वो बेवकूफ बन भी जाए मगर मुझे कैसे छुपाएंगे अपने आंसू अपना दर्द जो तेरी उसी हसी के पीछे छुपा है जो हँसी तो लोगों को दिखाता करता है । बुलंदी ने तुम्हारे कान बंद कर दिए हैं तो उन्हें भी भूल गए जो उस वक्त तुम्हारे साथ थे । जब तो कुछ भी नहीं थे वो जो सिर्फ तुम्हारा बना चाहते थे तो मैं कामयाब बंदे देखना उनका सपना था । कब तक खुद से कहता रहेगा की तो सब के बिना खुश है । कब तक तू खुद को धोखा देता रहेगा? कब तक छोडू मैच फुल फॉर्म में था । उसके पास कोई जवाब नहीं था । वो उन बातों को याद कर रहा था जो शोहरत के शोर में उसे सुनाई नहीं थी । बोलो छोटू मैंने जोर लगाया, हाँ खुश हूँ, उसकी आंखें लाल थी । चेहरे पर गुस्सा था । मैं बहुत खुश हूँ । सबके बीना इतनी ऊंचाई पाने के बाद हमें लगता है कि मैं खुश नहीं रहूंगा । मेरा सपना यही था और अब वह पूरा भी हो गया, सही है । मगर एक सपना ये भी था की तो हर सपने को अपनों के साथ एन्जॉय करेगा । आज तो खुश है अपने सपनों के साथ अपनों से जुडा होकर तो बहुत ऊंचाई पर पहुंच गया है । मेरे दोस्त मगर अंदर से खोखला हो गया है । ऊंचाई पर तेरी उडान में दम तोड दिया तो खुद पता नहीं चला कि अपनों की कदर करने वाला अब क्या बन गया है । उन सपनों की क्या कीमत छोटू चौकियों से दूर करती उससे मेरा हाथ पकडा हूँ । इस वक्त मुझे कुछ समझ में नहीं हरा साटी मैं क्या करूँ मेरे भाई तो बता मैं क्या करूँ? वो मेरे गले लग गए और बच्चे की तरह फूट फूटकर रोने लगा । थोडी देर तक हम दोनों कुछ नहीं बोले । बताएँ आज मैं तेरे पास किसी लेकर आया था, किसी उस से आंसू पहुंचे । वहीं तो तुझे तेरी उडान भरने के लिए कहती थी हर वक्त तेरे साथ खडी रहती थी । बडी उसका जवाब था तीन साल में तो एक भी बार उसे बात देगी, जो चला गया । जो बीत गया वो लौटकर वापस नहीं आएगा । मगर जो पास है उसे क्यों हो रहे हो? इतना एक को किस काम का छोटू क्या चाहती थी वो उसने आंसू भरी आंखों से मुझे देखा । जैसे वो मुझसे अभी पूछेगा कि कहा है । वह बताना चाहती थी कि उस दिन उस की कोई गलती नहीं थी बल्कि वो उस दिन ऑपरेशन रूम में थी ही नहीं । वो एक बार मुझे बता नहीं सकती थी । ये बात बताना चाहती थी अगर तुमने उसे मौका कर दिया, उसकी मजबूरी समझेंगे ना । अपना गुस्सा उस मासूम पर थोपते गए तो भारी मजबूरी तो समाचार दी है कि दूसरों की मजबूरी तो मैं नजर भी नहीं आती । मुझे बहुत बडी गलती हो गई । उसने कहा इसी वजह से गुडिया भी तुम से दूर चली गई । उसे भी तुमने खो दिया । अपने दादा की मौत का जिम्मेदार भी तुमने गुडिया को ठहराया था । असल बात ये थी कि उस समय गुडिया वहाँ थी ही नहीं और तुमने बिना सुने बिना समझे उसे अपने से दूर कर दिया कि जल्दबाजी में उस की शादी भी करती है । मैं यहाँ करता । उस वक्त मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था । अब समझ में आ रही है जब तुझे नींद लाने के लिए नींद की गोली खानी पड रही है । किस काम की ऐसी उडान एक बार खुद से पूछते तो कि ये सही है या गलत सोचते । अगर में उस जगह होता तो क्या उन्हें बचा हुआ था? क्या अवश्यंभावी चीज को रोक पाता? इसमें उन दो मासूमों का क्या दोष था? मैंने अपनी पूरी भडास निकले । बस सीआरआरटी अब तो मुझे भी भूल जा रहे अपने सपनों के साथ उन सपनों की क्या कीमत जूतों में अपनों से दूर करते मैं जाने लगा अकेलापन ही तेरी किस्मत है तो मुझे छोडकर कहाँ जा रहै? साठी उस ने मेरा हाथ कस की पकड लिया । मुझे पता है अब मैं क्या करूँ । पहले आपने मेरे पास थे मगर मैं सपनों के पीछे भाग रहा था । अब सपने पूरे हो गए मगर अपनों के लिए तरस रहा हूँ । अब समझ जा रहा है कि वहीं तो खडा हूँ । जहाँ से शुरू किया था मैंने उसे गले लगा लिया । मेरी भी आंखे भराई दो मिनट तक हम दोनों शान्त रहे । तेरी उडान के लिए आसमान छोटा पड गया यार अभी वो कहाँ है? उसने कहा अब तो शायद वो चली गई होगी कहाँ ये उसने नहीं बताया । छोटू ने मोबाइल पर नंबर मिलाया जो तीन साल से मोबाइल में सिर्फ पढा था । कॉल क्यों नहीं अटेंड कर रही है? ये उसने कहा, अच्छा बहुत चलता हूँ । पापा की तबियत खराब है । भुआ को लेने मुझे ही जाना पडेगा । मैंने जाने की इजाजत मांगी । ये बातें मुझे समझ नहीं आई एस । आर टी कोई बातें छोटू ही दिल की बातें हैं । दिमाग से समझ नहीं आती फिर काम मिलेगा । साटी कॉल करके बताऊंगा हूँ । मैंने कहा छोटू जाते जाते यही कहना चाहता हूँ अगर गलती तो नहीं की थी तो सुधारेगा भी तुम्हें उडान अभी बाकी है मेरे दोस्त सपनों की तो भली उडान मगर अपनों के साथ उडान अभी बाकी है । उसे वापस ले आना । खुद में बहुत चाहती थी । मैं वहाँ से चला गया । मैंने उसकी नजरों से दूर पहुंचकर मोबाइल पर एक मैसेज टाइप किया और छोटों को भेज दिया । मतलब बुलाओ उन्हें जो तुमसे प्यार करते हैं टूट के चाहने वाले अब बडी मुश्किल से मिलते हैं । छोटू हाथ में मोबाइल पकडे रो रहा था सब मेरी ही गलती है उसके मन में चल रहे युद्ध से आवाज नहीं क्या किया तो नहीं । कुछ हफ्तों ने तेरे साथ छोडा कुछ खत्म होने साथ छोड दिया । हो गई तसल्ली भरली उडान वो अंदर ये अंदर खुद को गालियां दिए जा रहा था तो तो पारी को भी भूल गया । छोटू उस से अपने आप से फिर कहा तेरी हर जरूरत में तेरे साथ थी और जब तेरी बारी आई तो तो उसे किसके भरोसे छोड आया । अब तो तुझे तेरे साइड से भी घिन आने लगी होगी । आज छोटों की सारी गलत फैमी दूर हो रही थी । मर गई तेरी सारे सपने उसकी आंखें भीग गई । वो तेरे सपने नहीं लालच थी जिन्होंने आज दम तोड दिया । घरे सपने तो वह होते हैं जो पूरे होने के बाद संतुष्टि दे । दुख नहीं, डर नहीं, आंसू नहीं इसलिए शायद तो अकेला रह गया तो अकेला ही ठीक है । अकेला उसके कान ऊपर हाथ रख लीजिए । जोर जोर से चीखने लगा । नहीं नहीं । छोटे पूरी तरह से टूट चुका था और जा छोटू उसके अंदर से का आवाज सही, अभी भी समय ज्यादा कुछ नहीं बिगडा हूँ घुटने टेक देना । अपनों के सामने अपने घर ले आना । क्या कर रहे छोटो उठ खडा हो उसे रोक ले । पारी को रोक ले । उसने मोबाइल निकाला । गुडिया का नंबर मिलाया हेलो भैया गुडिया के आवास में खुशी थी, कैसी है तो छोटों की जापान लडखडा रही थी । उसने तो पहुंचे अच्छी हूँ मस्त भूल तो नहीं गए अपने भाई को कैसी बातें क्यों कर रहे हैं? भैया हाथ को क्यों बोल होंगी? उसने स्पष्ट जवाब दिया जो क्यों नहीं हुआ था? माफ कर दे । अपने भाई को धाबीः के लेकर बैठ गए । गुडिया ने समझदारी दिखाई आपकी मजबूरी में समझ सकती हूँ । आप तो कहते थे कि जब मजबूरियों को समझने लगेंगे तो गलतफहमियां खडी ही नहीं होगी । मेरी गुडिया अपने भैया से भी समझदार हो गयी है । उसके अपने आंसू पहुंचे ये क्या भैया कहाँ चुक नहीं हो रहे हो, उससे डाटा शुरू किया । देखो पर ही आपके मामा होते हैं । पडी कौन आपकी भांजी भैया पारी बोली अच्छा मिलना सकती अपने भाई से क्यों नहीं? करीबी बहुत परेशान करती है । थोडा अपने मामा को परेशान कर लेगी । तो आज मैं तैयार परेशान होने के लिए भैया बडी से बात की । उससे धीरे से कहा नहीं कभी दिल से नाराज हो । नहीं गलती मेरी थी उसे समझने में मैंने बहुत करती है उसे मना लेना । भैया तो सबसे ज्यादा आपकी क्या करती थी? हाँ गुडिया चल अभी रखता हूँ । बाते बात करता हूँ । छोटू ने कॉल डिस्कनेक्ट किया । उसका सिर हल्का हो गया । अगर आप साथ होते तो आपका बच्चा खुद को अकेला महसूस नहीं करता । खाली खाली सा लग रहा है । छोटू ने एंजेल अंकल को याद किया एंड लंकर उसके आखिरी शब्द थी

PART 24

चौबीस भाग रूठे लोगों को मना लेंगे । पौडी कार का दरवाजा खुला । छोटो का से बाहर आया । सामने मिठाई की दुकान पर मिठाइयाँ सजी हुई थी । दो बूढी आंखों ने उसे देखा और उसकी और बढने लगी । सलामा सिर्फ चाचा छोटू पैर छूने के लिए नीचे झुका । आज फुर्सत मिली है साहबजादे को हमारे हाल चाल पूछने की । चर्चा छोटों के कंधे पर हाथ रखा और उसे दुकान में ले गए । चाचा बस आज रुक जाओ । कुछ अपने रूट गए हैं । उन्हें भी बनाने जाना है । चाचा ने कंधे से हाथ हटा लिया । शायद वो जानते थे उस दिन क्या हुआ था । पारी को वापस ले आना । उन्हें समझने में देर नहीं लगी । गांधीचौक छोटू ने फोन रखा, कार घुमाई और गांधी चौक की तरफ मोड ली । उसके मन में क्या चल रहा था, किसी को कुछ नहीं पता था । बस कॉल पर आसिफ चाचा के अंतिम शब्द उसे वापस ले आना । उसके कानों में गूंज रहे थे । बीस मिनट बात कार गांधी चौक पर रुकी । छोटू कार से उतरा । अरे भैया, ये शाम कंप्यूटर्स कहा है । छोटों ने दुकानदार से पूछा भैया, इस गली से जाकर राइट ले लीजिए । सामने शाम कंप्यूटर उसका बोर्ड दिख जाएगा । छोटू ने गाडी गली में लेंगे । श्याम कंप्यूटर नाम तो बडा सा लग रहा था, मगर उसमें कंप्यूटर ही दिखाई दे रहा था । अरे भइया, शाम भैया कब तक आएंगे? छोटू ने इस कंप्यूटर चला रहे साठ साल के बुजुर्ग से पूछा, उसे कोई जवाब नहीं दिया । छोटू के दोबारा पूछने पर उसका जवाब आया, बाहर नंबर लडका है, कॉल कर लो । छोटों ने यहाँ वहाँ देखा आपको पापा चाहिए । छोटों ने पीछे मुडकर देखा तो एक तीन साल की बच्ची स्कूल ड्रेस पहने, हाथ में पानी की बॉटल लिए । चेहरे पर बच्चों वाली स्माइल पहले खडे थे । शाम आपके पापा है । बेटा छोटू नीचे झुक गया । हाँ, उस छोटी सी बच्ची ने कहा आपका नाम क्या है? अंशी वो मुस्कुराई आपको प्यास लगी होगी । फिर से आये हो ना? लो पानी पी लो । उसने अपनी छोटी सी बॉटल छोटों को देती । छोटू ने दो घुट से गला गीला क्या अच्छा पापा कहा है । आपके अंशी छोटों ने से गोद में ले लिया । पहले आइसक्रीम उस बच्ची की आंखें खरगोश की तरह छोटी सी थी । ट्रॉफी या आइसक्रीम खाने चले छोटे बच्चों जैसी हरकतें करने लगा आपका नाम छोटू चाहूँ मोटू चाचू होने लगे । वो बच्ची छोटों को देखी जा रही थी । चाचू पापा उसने आइसक्रीम खाते हुए कहा, सामने से करीब पैंतीस साल का आदमी उनकी और बढ रहा था । आप कौन है नाम और ये मेरी बेटी है, आपकी बेटी होगी मगर मैं इसका चाहता हूँ । छोटों ने मुस्कुराते हुए कहा मैं समझा नहीं । श्याम ने शक बडी ने कहाँ से देखा? समझता हूँ । छोटू ने ऐसी को गोद से उतारा । बेटा भी तुम खेलो अच्छा जो आपके वापस से बात कर ले । अंशी खेलने चली गई हम साहिल सोने सीऑफ उडान कंपनी अच्छा वही जिसकी चर्चों से अखबार मैग्जिन भरे पडे हैं । हाँ सही सुना मुझे क्या काम मेरे साथ काम करोगे? मेरे वो सब काम छोड दिया है । ये ऑर्डर नहीं ऑफर है । छोटू बोला सोच कर बताना कुछ जिम्मेदारी और भरोसे तुम पर टिके हैं । मैं न कहो तो फॅमिली मरते वक्त मुझसे कहा था कि मैं उसके पोते को वापस लिया हूँ । उनकी वजह से तुम्हें दर दर की ठोकरे खानी पडी । जिसने सिमंस कंपनी के लिए अपनी चौरसिया कंपनी को बेच दिया । मैं उनका बेटा नहीं हूँ मगर उन्होंने मुझे जीना सिखाया था । छोटू ने एक बार में सब कह डाला हूँ । शाम सोच में पड गया । दादा जी कहा है तीन साल पहले तुम्हें याद करते करते ही दुनिया छोड गए । मेरी हालत देखकर मुझ पर तरस खा रहे । हो ही नहीं । कुछ अपने रूट गए थे, उन्हें मना रहा हूँ । किसी को वादा किया था उसी वादे को निभा रहा हूँ । मैं वापस नहीं आ पाऊंगा । अच्छे से सोच कर बताना । पापा स्कूल बस का टाइम हो गया है । छोटों ने अंशी को बाहों में उठा लिया । सूचना आप अपने लिए नहीं तो उस मासूम के लिए श्याम ने अंशी को देखा । श्याम असमंजस में पड गया । अप्लाई को देख लिया । फिर अंशिका भविष्य । उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था । आठ चाचू की कार से स्कूल चलों की अच्छी खुश हो गई । उसके पापा की तरफ देखा । शाम का जवाब था अंशी बहुत खुश हो गई । ॅ हूँ वो छोटू की गले लग गई । चाचू के घर चलो की छोटों ने से पूछा । अंश मेरे फिर पापा की तरह देखा । हाँ, पहले स्कूल । उसके बाद वो मुस्कुराई क्योंकि आज पहली बार कार में बैठ रही थी, जहाँ तू जल्दी चलो । टीचर डांटेगी डॅाल बदल लेंगे । छोटू ने कार का गेट खोला । अंशित कार में बैठ गई । छोटू ने गाडी दौडा शाम चुपचाप वहीं खडा था ।

PART 25

पच्चीसवां भाग चलो आज चलते हैं हम किसी को उसको छोड छोटों ने गाडी घुमाई गाडी की स्पीड बहुत तेज थी । बडी बडी इमारतों को पीछे छोड कार बेकाबू सी हो रही थी । छोटू का ध्यान कहीं और था उसने फिर गेयर बदला । मेरी गलती की सजा वो क्यों भुगते? काश उस दिन मेरा गुस्सा काबू में रहा होता है । आप का शुभ दिन मैं समझ पाता कि वह सही है । मैं गलत हूँ । सोचते सोचते वो दूसरे ही ख्यालों में हो गया । फ्लैश बैक का सील चलने लगा । ऍम कल भी मुझे छोड कर चले गए । वहाँ तो मेरे दादा को भी नहीं बचा पाई । हाथ में लिए फाइल मैंने वर्ष परदे वाली मेरी बात तो सुन छोटू ऐसा कुछ नहीं हुआ । मैं तो क्या सुनाऊँ मेरा गुस्सा बढता जा रहा था । मैं कुछ कर बैठू उससे पहले तो यहाँ से चले जाओ । गेटआउट इन माई लाइफ । मैं लाया था वो कुछ नहीं बोली । शायद वो मुझे अब समझता ही नहीं जाते थे क्योंकि वह समझ गई थी कि मैं कुछ और समझ गया हूँ । उस दिन मुझे ये बात समझ नहीं आई । मगर आठ समझ में आती है कि या तो किसी के बारे में कुछ मत समझो और अगर समझो तो सही समझो । गलत मत समझो क्योंकि ये गलत फहमियां दूरियां बढा देती है । फ्लैशबैक खत्म हुआ । छोटों की गाडी स्लो हो गई । छोटू ने गाडी मोडी और एक कॉलोनी में ले ली । जानी पहचानी कॉलोनी और जहाँ वह कार्ड हूँ की वो घर भी जाना पहचाना था । छोटों ने पारी को फिर कॉल किया । मैं गए आउट ऑफ कवरेज । छोटू ने मोबाइल कार के अंदर डाल दिया । छोटू परी के घर की तरफ बढा । पास पहुंचकर बैल बजाई कौन हो तो क्या चाहिए? एक मोटी लेडी ने पूछा अंटी पर इसे मिलना है । छोटों ने शांति से कहा लोग थे एक और आ गए पारी को ढूंढते हुए कहकर आंटी अंदर चली गई । छोटू तुम्ही हो उनके मिस्टर सामने आए वहाँ उसने बताया था किसने परिणय कहाँ है वो अंकल प्लीज एक बार उससे मिला दूँ । प्लीज उसी सौरी बोल कर चला जाऊंगा । बहुत देर कर दी तुमने आने में । अंकल बोले क्यों वो तो चले गए यहाँ से बहुत दूर कहा बैंकॉक अंकल बोले हैं उससे पहले तो ऐसा लगा जैसे वो झूठ बोल रहे हो । उनकी नजरे झुक गई । जॉब बैंकॉक ढूंढ लो से अंदर से आंटी की आवाज सही ढूंढूंगा कहकर छोटू वहाँ से जाने लगा । आज की फ्लाइट थी शायद अभी उसने उडान नहीं भरी होगी । हो सके तो लोग लोगों से कहकर अंकल ने दरवाजे बंद कर लिए । उसे घर से मोबाइल निकाला । छोटों ने हॉस्पिटल कॉल किया मगर कुछ पता नहीं चला । उसने चंदू अंकल को कॉल किया । उस टाइम पर बैंकॉक जाने के लिए कोई भी फ्लाइट नहीं हैं । चन्द्र अंकल ने कहा मगर शाम पांच बजे थी । चंदू अंकल ने फिर से चेक कर के बताया ओके छोटे फोन काट दिया । फेसबुक इनबॉक्स में परी का मैसेज पडा था जिसे भेजने के बाद परी ने अपनी आईडी डीएक्टिवेट कर दी थी । हाई साहिल सौरभ हर इस गलती के लिए जो मैंने कि मैंने तुम्हारा बहुत दिल दुखाया है तो तुम्हारा इंतजार बहुत किया मगर दम नहीं आएगा इसलिए तुम से दूर जा रही हूँ । तेरे मेरे साथ का सफर यहीं तक था । मैंने बहुत कोशिश की तुम्हारी उडान में साथ रहूँ अगर किस्मत कुछ और चाहती थी तुम्हारी मजबूरी तुमारी खामोशी में मुझे प्यार नहीं दिखा इसलिए तुम से दूर जा रही हूँ । तुम्हारी अपने मंजिल थी तुम्हारा खुला रास्ता था तो महारा साथ छोड रही हूँ क्योंकि तो अपनी ऊंची उडान के साथ जीना चाहती थी और मैं तुम्हारे साथ देना चाहती थी तो भारी मंजिल ही मेरी मंजिल थी । तुम्हारी उडान ही मेरी उडान थी । एक लगाव सा हो गया था तो उसे तो मैं बोला भी नहीं पा रही थी । हर दम से दूर भी नहीं जा पा रही थी । मैं तुम्हारा इंतजार करती रही और तमाम राहों पर जो कभी तुम्हारी रहे गुजर रही है, अभी तुम्हारा इंतजार रहेगा । बस देर बंद करना तुम्हें तुम्हारी उडान मुबारक । छोटों ने कार के गेट खोले की गाडी घुमाई और निकल बडा एक ऐसी ड्राइव पर जिसमें उसका हम सफर उसके साथ था । उस ने मेरा तीन साल इंतजार किया और मैंने खुद को अकेला, बेबस और लाचार महसूस कर रहा था । आंखों में भरे आंसू और जुबान पर एक ही ना ऍम ।

PART 26

छब्बीस भाग सस्पेंस सात फरवरी दो हजार बीस बैंकॉक अवनी ने डायरी के पन्ने पर दे मगर आगे कुछ नहीं लिखा था । यहाँ कमी रह जाती है । इन लेखों में अपनी ने डायरी बंद की । सस्पेंस तो उनका जिगरी या लगता है । हमने कॉफी शॉप में बैठे रोहित का इंतजार कर रही थी हाई मैंने आकर कहा भाई । उस ने कहा अच्छी स्टोरी लिखते होता हूँ । शुक्रिया कहाँ से लाते हुए स्टोरीज । आस पास से मतलब एक स्टोरी हर किसी के पास होती है । जो कह देते हैं वो हिस्ट्री बन जाती है और जो नहीं कह पाते उनकी यही हिस्ट्री होती है । मैंने राइटर पाँच मारा । इस स्टोरी का अहम क्या है? कुछ कहानियों का अधूरा होना ही उनका एंड होता है । मैं डायलॉग डालो चेहरा था अच्छा लेकिन मुझे भी जाना होगा । मुझे भी आज शाम की फ्लाइट से इंडिया वापस जा रहा हूँ । सीऑफ कहने आओगी, एयरपोर्ट पर मुश्किल है कोई बात नहीं । किस्मत में होगा तो हम फिर मिलेंगे । मैं कॉफी शॉप से जाने लगा । किस में तो हम खुद लेते हैं ना । बचपन से सुने थे कि हम अपनी किस्मत खुद लिखते हैं । फिर पिताश्री ने हमें समझाते हुए कहा था कि सबकी किस्मत ऊपर वाला लगता है । मगर तजुर्बे से हमें पता चला की ये किस्मत दो पहले से लिखी है । हम तो बस उसे फॉलो करते हैं । मैंने लम्बा चौडा प्रवचन दिया । मैं नहीं मानती आजमा लेना । मैंने कहा हम एक दूसरे से मिलना भी नहीं चाहते थे । मगर मिल गए ना ये सब अचानक हुआ है तो अचानक होने वाली चीजें निश्चित नहीं होती । क्या उसे कुछ नहीं कहा? मैंने जाना उचित समझा । सात फरवरी दो हजार ऍम सुनो । वे बिहारी में समझा रहे हैं । वो तो बोलियों ना भाई में ज्यादा अपनापन लगता है । मैंने उसे कोहनी मारी हो । ब्रो बुजुर्ग के सुधरोगे नहीं सुधारने का ठेका लीजियेगा । उसने भी ठीक था । बिहारी बजाई । मैंने उसके साथ याद की । प्यारी सी छपेली टेंशन में था । तेरी नजर बार बार किसी को देखने की कोशिश कर रही थी । फ्लाइट का अनाउंसमेंट हो चुका था । क्या हुआ तुझे? मैंने पूछा मेरी डायरी अपनी के पास रह गई है । मेरा जवाब स्पष्ट था । आपने मुझे देखी, मेरे ही पास अपना लगे इसलिए आ रही थी । उसके साथ वही आती थी । कमला दास झुनझुनवाला वे ने मुझे बाय कहा । मैं समझ गया ये उसी की चाल थी तो विश्वास नहीं हो रहा होगा । उससे हस्कर कहा, असंभव कुछ भी नहीं । मैंने कहा तुम तो बिजी थी, आज इसे इत्तेफाक हूँ या पहले से प्लान क्या हुआ कि मेरी और अपनी की सीट अगल बगल में थी । हाँ तो आपने बताया नहीं मेरी डायरी तुम्हारे पास कैसे आई? सस्पेंस पसंद है ना तो मैं तो मेरे साथ हो । मेरे बगल में मुझे लग रहा था जैसे मैं कोई सपना देख रहा हूँ क्योंकि कभी अपने देश का नाम नहीं लेने वाली छोरी आज मेरी वजह से अपने घर वापस जा रही है । शायद वो मेरी वजह से मैंने मन में सोचा । कुछ कहा तो मैं उससे अपनी जुलते सवारी नहीं । मैं कंफ्यूज था क्या बोलो मुझे पता है क्या तो क्या सोच रहे हो क्या यही की मैं तुम्हारे साथ हो ये मान भी पढ लेती है क्या? मैंने फिर मन में सोचा ऐसा कुछ नहीं है । मैं शर्माया मेरी डायरी मुझे वापस देता हूँ । मेरे हाथ आगे बढाया दे दूंगी उससे नजरे फेमली पता तब जब तो मुझे इसका एंड बताओगे । छोटू और बरी मिले क्या जबरदस्ती है? क्या मैंने उसे घोरा । परी और छोटों मिले या नहीं? उसने फिर वही सवाल किया बैंकॉक गया था छोटू क्या उसे पडी मिली? मुझे नहीं पता । मैंने मुझे लिया मेरी बात का जवाब दो । उसने आवाज ऊंची की ये केबीसी चल रहा है क्या? मैंने उसे गुस्से से देखा मत दो फिर मूल जो डायरी घर घोर बेज्जती हो गयी । अवनी मैं भडका आसपास बैठे लोगों की नजर मुझ पर थी । एक नहीं तो चुप रहने का इशारा भी किया । पति पत्नी के झगडे सुलझाए मिंटो में जगत बाबा पीछे से आवाज है अभी जो खुद के घर में आग लगी है, दूसरों की भुजा रहा है । गुस्सा नहीं तो निकलना था । निकाल दिया । उसकी बात उपर से बुरी लगी मगर अंदर से तो लड्डू फूटने लगे । अच्छा इसलिए लगी क्योंकि न मुझे जगत बाबा समझ आया और नहीं झगडा । उसी बस पति पत्नी अच्छा लगा । अपनी अपनी हंसी रोकने का पूरा प्रयास कर रही थी तो तुम नहीं बोलोगी डायरी । मैंने फिर कहा अपनी चुप थी । वो कुछ नहीं बोली । कभी कभी सब कहानियाँ किताबों में नहीं मिलती । उनको असलियत में भी खोजना चाहिए । उनका रियलिटी से भी बडा कनेक्शन होता है । थोडा सब्र करूँ । मैंने उसके कान में कहा । हम दोनों के बीच सन्नाटा छा गया । उसने इंग्लिश नोबेल निकाला और पडने लगी । हवाई जहाज में उडान भरी और आसमान में कहीं हो गई ।

PART 27

भाग मेरा देश फ्लाइट लैंड हो चुकी थी । हम दोनों एयरपोर्ट से बाहर आए । कौन आया है तो में लेने माइंडेड उसके साथ कहा और तुम्हें? साहिल सोनी मैंने इशारा कर के बताया । उसके बगल में परी खडी है, समझदार हूँ । मैंने कहा आखिरकार मिल गए वो उसके चेहरे पर मुस्कराहट थी । मतलब छोटू बैंकॉक गया था । हो गई कहानी की हाँ ऍम मुस्कराया । हम दोनों छोटों के करीब आ गए कि ये कोने में असाटी । छोटू ने मुझसे पूछा अपनी पब्लिशर की बेटी अच्छा मेरी बहुत कुछ सोच लिया था । इतना मत सोचा कर तो तुम्हारे पापा ने आई । मैंने अपने से पूछा बतानी कॉल भी नहीं लग रहा उनका अवनी ने फिर मोबाइल देखा । हरी तो हमारे साथ चलो पापा को वहीं बुला लेना । छोटू बोला मगर भुआ झुनझुनवाला जी इनकी बुआ हमको । अभी मालूम चला अगर मगर कुछ नहीं । छोटू ने शक्ति से कहा हुआ क्या एरोप्लेन है हमारी गाडी में नहीं आएगी । हमें सारा सामान लिया और गाडी में बैठ गए । हम लोग हलो कान । मैंने नींद में कहा मुझे एक बात पूछनी थी ये अवनी की आवाज थी । रात के दो बज रहे हैं । मैंने घडी देखी, ये कौन सा समय है? सवाल पूछने का सारी । मगर तो मैंने तो कहा था अगर दिल में कोई बात हो तो कह देना चाहिए । समय नहीं देखते हैं कह देते हैं मैंने कब कहा । मैं उसे कहना चाहता था । मगर नहीं कहा । हाँ पूछो मुझे भी नहीं पता । ये बात मैंने कब कही थी मगर अच्छी लगी । इस कहानी का हीरो कौन है? उसने पूछा मैं कुछ नहीं बोला क्योंकि मेरे लिए भी ये सवाल तन जाना था । अपनी अपनी लाइफ में हर कोई हीरो होता है । सब अपनी लाइफ में हीरो है । अब इसका कौन हीरो है । अब इसका कौन हीरो है? ये सब के पोस्टल जवाब होंगे कुछ कहानियाँ । कुछ लोग पर्दे पर नहीं आ पाते, मगर वो रियल हीरो होते हैं । मैंने नींद ही उसे ज्ञान दिया । मैं भी हूँ हाँ, मगर मैं तो हिरोइन हूँ, एक काम करो, कॉल डिसकनेक्ट करो और सो जाओ । मैंने फोन काट दिया । बाई उससे चिल्लाकर कहा मेरे पास तुरंत उसका वॉट्सऐप मैसेज आया । कल मिलते हैं । मैं बिजी हूँ । फिर मैं तो इंडिया आई हूँ । उसे रोता हुआ इमोजी बनाकर मैसेज भेजा । कल सुबह अपना कैसे में मिलते हैं । मैं पिघल गया मुझे इस वक्त जाकिर खान नहीं शाहरुख खान याद आ रहा था । बाई चंद हस्ती हुई इमोजी के साथ

PART 28

भाग अट्ठाईस फिर उडान आठ फरवरी दो हजार बीस में अपना कैसे मेरे दोस्त का कैसे किसी रेस में दौडना तो हमें पसंद नहीं था । इसलिए कैसे के सेकंड फ्लोर पर हम ने अपना फुल टाइम आसरा जमाया । मेरा सपना मई लाइब्रेरी लोग मेरे आसरे में आने लगी । कुछ लोग किताबे सिर्फ पढते, कुछ किताबें, पढकर किताबें लिखते का अपना साहस करती नई इसे पुराने लेखकों की किताबों का एक लंबा कलेक्शन मैंने जोड लिया । मैंने अपने लाइब्रेरी के बाहर संतोष आनंद की लिखी फेमस सोंग की कुछ लाइन्स लिखवाई थी एक प्यार का नगमा है मौजूदगी रवानी है जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है छोटू और पर कैसे मिले कैसे में आते ही अपनी का पहला सवाल मेरे सामने आया । कैसे में रोशनी बिखरी पडी थी । वहाँ बैठे लोग अपनों को अपनी आपबीती सुना रहे थे । इसके लिए मिलना था मुझसे नहीं तो मिले हो तो पूछ लिया हूँ मेरी डायरी कहा है मेरे पापा के पास ऍम मिल जाएगी । ठंड रखो मैं चुप रहा । मेरे नजरिए फॅमिली स्टोरी के तुम्हें हीरो हो नहीं मैं साइड एक्टर हो जो हीरो नहीं होता । साइड एक्टर के बिना हीरो भी कुछ नहीं होता । उसने तपाक से कहा इस सस्पेंस कब खत्म होगा । भरेंगे ना फिर उडान दैनिक हल्की सी हंसी के साथ कहा, हम दोनों मेरे लाइब्रेरी की किताबें देख रहे थे । वो बार बार मुझे देख घर मुस्कुरा रही थी । हम दोनों का इंट्रेस्ट सेम है । उसने कहा, असंभव हो ही नहीं सकता । क्यों उसने मुझे घूरकर देखा तो इंग्लिश मीडियम टाइप हो और मैं मेरा हिंदी । बहुत तो क्या हुआ । उसने बडे आत्मविश्वास से कहा, आजकल हिंग्लिश ज्यादा चल रही है । ये उसका आखिरी जवाब था । वो चुप रही । बिना कहे हमारी कुछ बातें कुछ ही लोग समझ पाते हैं और इन कुछ लोगों में कुछ ही लोग आते हैं । हम दोनों के बीच गहरा सन्नाटा बिच गया । लोग कैसे में आ रहे थे? जा रहे थे । हम दोनों कहीं और खोये थे । शायद किसी दूसरी कहानी में जिसमें सिर्फ हम दोनों हो ।

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