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आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -01

आप सुन रहे हैं तो वो एफ एम किताब का नाम है । आखिरी फाइल जिसे लिखा है अजय कुमार पांडेय ने आरजे आशीष चैन की आवाज में कुकू ऍम सोने जो मन चाहे इस दुनिया में तीन प्रकार के शिक्षक है, वे जो वहीं पढाते हैं । जो भी शिक्षक की तरह महसूस करते हैं वे जो वहीं बढाते हैं जो विद्यार्थी पढना चाहते हैं और वे जो पढाना तो चाहते हैं लेकिन वास्तव में कभी नहीं पडा । मैं तीसरी श्रेणी में आता हूँ । मेरी सैलरी स्लिप ने मेरा पद सहायक प्रोफेसर के रूप में बताया लेकिन पूरे साल में परीक्षाओं के निरीक्षण, नियुक्तियों, सांस्कृतिक और तकनीकी त्यौहारों में हाथ बटाने छात्रों को परामर्श देने, सूचना के अधिकार के नोटिसों का उत्तर देने, कॉलेज की वार्षिक पत्रिका में प्रकाशित होने के लिए फर्जी कहानियाँ देखने और छात्रों के लिए एक पेशेवर दौरे की व्यवस्था करने में व्यस्त रहा । अगर मेरे पास कुछ समय बच्चे तो में पढाओ मैं वास्तव में तदर्थ संकाय हूँ । मेरी आवश्यकता केवल छुट्टी पर गए संकायों का स्थान भरने के लिए पडती है । मेरे ज्यादातर छात्र मुझसे तो हत्यार करते हैं शायद क्योंकि मैं हरफनमौला हूँ लेकिन अनिवार्य रूप से हरफन अधूरा मंगलवार जून दो हजार दस मैं दिल्ली में हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर गोवा एक्सप्रेस से बत्तीस घंटे की लंबी यात्रा के बाद उतरा । यद्यपि मैं आधा भी धक्का नहीं लग रहा था । साल के इस वक्त दिल्ली उबल रही थी जैसे कि सूरज दिल्ली वालों से बदला ले रहा था । हवा में आद्रता पैदा कर बादल बारिश होने की झूठी तसल्ली दे रहे थे । सडके आने जाने वालों से कम थी । मैंने मालवीय नगर के लिए ऑटो किराये पर लिया और अगले तीस मिनट के बाद जब मैं ब्लॉक के फ्लैट नंबर की घंटी बजाने वाला ही था, मेरे जीवन की सबसे अद्भुत महिला ने दरवाजा खोल दिया । गुड मॉर्निंग । इससे पहले की मैं अभिवादन पूरा कर पाता हूँ । वो आगे बडी और मुझे चूम लिया । मैं आश्चर्यचकित नहीं था क्योंकि मुझे पता है वो अपनी भावनाओं को प्रदर्शित करने के लिए एक कुतुब मीनार तक पर चढ सकती है । मैं प्रत्युत्तर नहीं दे सका । सोसाइटी के बगीचे में योग कर रहे बुजुर्गों के लिए ये एक मुफ्त सोना बन जाए । इस पर अधिक ध्यान था तो मैं घर के अंदर प्रवेश हुआ । उसे आलिंगन में लेकर और बताने की जरूरत नहीं कि हमने चुम्बन लिया । इस बार मैंने गहराई से और जुनूनी होकर प्रत्युत्तर दिया था । मैंने ये खोज की थी कि दो चुम्बनों में एक लंबा अंतराल इसके महत्व को कई गुना बढा देता है । मैंने तो नोटिस किया डालेंगे । वो नाक से फुसफुसाई । छह से ठंड लग रही थी । मैं उसकी और देखकर मुस्कराया और कुछ मिनट के खामोश आलिंगन और तुम मान के बाद धीरे से कुछ कुछ आया तो नहीं । रिमिक्स किया बहुत तेज थी क्योंकि अन्यथा मैं भावनात्मक रूप से बहुत वाचाल नहीं । हम थोडी देर के लिए खामोशी से चिपके रहे । कभी कभी खामोशी बहुत कुछ कह देती है और ये मुझे क्या आप सबसे अच्छी भाषा थी । मैं शादी के बाद पहली बार बीस से अधिक दिनों के लिए घर से दूर रहा था । यात्रा किसी थी । उसने मेरे चेहरे को दुलारते हुए पूछा, मैं ड्यूटी पर था, ठीक है? मुझे पता है कि इसका मतलब क्या है । ये विद्यार्थियों के लिए एक यात्रा थी और मेरे लिए नहीं । मेरे कहने का मतलब वो हमेशा समझ लेती थी और उसमें मेरे लिए बोलने का अद्भुत साहस था । मैं मुस्कराया लेकिन कुछ नहीं बोला । वो चक्कर खडी हुई और बोली चुनाव फ्रिज में सॉसपैन में पोहा और जूस रखा है तो रहकर अपना नाश्ता कर लूँ । तुम कहाँ जा रही हो । मैंने संस्था से पूछा यही तो भूल गए हो तो मैं एक्सिस बैंक में काम करती हूँ । क्यों नहीं छोटी लेती हूँ? चाहे मन तो अभी तक ठंड से बुरी तरह पीडित हो । अगर मैं अपने दिल की बात बोलने में कामयाब रहा हूँ उसे घर पर ही रुकने के लिए कहने के पीछे सच ये था कि पिछले बीस दिनों में मैंने उसे शिद्दत से याद किया था । उसके साथ ही ये प्रज्ञा भी था कि जब मैंने दिल्ली छोडा था तब भी उसे इसी तरह के लक्षण थे और अभी तक ठीक नहीं हुई थी । लेकिन आस्था ने मेरे अनुरोध को ठुकरा दिया । नहीं । उसने अपने वालों को कंघी करते हुए उत्तर दिया, मेरी परिविक्षा अगले सप्ताह होने वाली है और मैं प्रबंधक को मुझे नकारने का कोई मौका नहीं देना चाहते । चिंता मत करो इस सिर्फ एक कॉमन कोर्ट है । आस्था एक करियर उन्मुख महिला थी और नौकरी में बढा बनना चाहती थी । उसका बॉस एक कठोर व्यक्ति था लेकिन हमारी वित्तीय हालत के चलते हैं । नौकरी बने रहना उस की मजबूरी थी । मैं श्री राम कॉलेज ऑफ ऍम कॉमर्स में मात्र एक तदर्थ संकाय हूँ । मैं उसे छोडने पार्किंग का गया और एक्टिवा निकालने में उसकी मदद की । वो जब निकलने को थी तब मैंने कहा, कार्यालय छोडने से पहले मुझे कॉल करना । शायद मैं पापा को देखना । चाहूँ आप आम तौर पर शनिवार को वापस से मिलते हैं, लेकिन आज मंगलवार है । मैं लगभग एक महीने के लिए बाहर था । जानती हूँ मैं जानती हूँ आप एक बेटे भी हैं । उसने ताना मारा और मैं उस करा दिया । मैं घर पहुंचकर आनंद था । ये मायने नहीं रखता कि हम पांच सितारा होटल में रुके हैं या फिर अवकाश यात्रा पर हैं । घर के आराम से किसी चीज की तुलना नहीं कर सकते । मैंने अपना सुबह का काम निपटाया । ऑफ थोडी सी झपकी लेने की योजना बना रहा था । इस बात से अंजान कि अगला ही पल मेरी जिंदगी का रास्ता बदल देगा । मेरे लिए सच्चाई का अच्छा था । काश मैं समय रहते लौट गया होता और वो कॉल कभी नहीं मिलती । वो एक अज्ञात लैंडलाइन नंबर था । वो मैंने कहा चलो हम राॅड बैंक से फोन कर रहे हैं । मैं श्रीमती आस्था से बात कर सकती हूँ । जी आस्था तो कम पड गई है । मैं उनका पति हूँ । आप अपना संदेश मेरे पास छोड सकती हैं । क्या मैं आप का नाम जान सकती हूँ सर । दूसरी तरफ मौजूद महिला ने गंभीर स्वर में पूछा, विजय शर्मा क्या मामला है? जबकि तोहरा एक अजीब से पीछा गई । मुझे कुछ बुरी खबर का आभास देते हुए कॉल पर मौजूद महिला ने वहाँ भरे सब जाएगा । अंततः उसने कहा, क्योंकि आप उनके पति हैं और हमारे रिकॉर्ड उनके परिवार के सदस्य के रूप में आपके नाम की पुष्टि कर रहा है । क्या समझे याद? कोई सूचित करना हमारा कर्तव्य नहीं है और हो सकता है कि हमारे समझने में गलती हुई हो । फिर एक लंबी खामोशी । आखिर मामला क्या है? प्लीज बात तो बताइए । मैं बेचैन हो रहा था । आपकी पत्नी ने अपने कार्यालय में रक्तदान शिविर के दौरान प्रदान किया था और अपनी मानक प्रक्रिया के अनुसार हमने एच । आई । वी । पी, ट्वेंटी फोर एंटीजन तथा त्वरित परीक्षण जैसे कुछ बुनियादी परीक्षण किए थे । मुझे आपको बताते हुए बहुत खेद है । पिछले हफ्ते आस्था शर्मा का रद्द एचआईवी पॉजिटिव है क्या? क्या उसने वस्तुओं में अच्छाई भी कहा था? मैंने कुछ सुना था । उसे समझने में मुझे कुछ समय लगा । मैंने अपने मेरे को संभाला और कहा, यदि ये किसी प्रकार की शरारती कॉल है तो प्लीज इसे अभी बंद कर दीजिए । जब मैं कॉल काटने ही वाला था । तब तक वो बोली ये एक शरारती कॉल नहीं ऍम सर, आपने निदान के प्रति हम शत प्रतिशत निश्चिंत नहीं है और ये सुझाव देंगे कि आपकी पत्नी वेस्टर्न ब्लॉक टेस्ट कराए पसंद रह गया । मेरी डिग्री बन गई । जल्दी मुझे एहसास हुआ । ये वास्तविकता थी मेरे मस्तिष्क में एचआईवी शाम बार बार प्रतिध्वनित हो रहा था । विश्वविजय की आप सुन रहे हैं । उसकी आवाज चल रही थी जब मैं अपनी जनता ना मेसन में था और एक्शन भी नहीं बोल पाया था । सच्चाई भी फॅस । मैं बहुत मुश्किल से बोला था ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -02

दो । मैंने जो सुना वह अप्रत्याशित था । ऐसा कुछ था जिसके बारे में मैंने केवल दूरदर्शन के विज्ञापनों में ही सुना था । क्या ऐसी खबर थी जो मेरा प्रारब्ध बदल सकती है? है? ये केवल एकमात्र संघर्ष नहीं था जिससे मुझे गुजरना था । मैं अपनी सारी जिंदगी होता ही तो रहा था । लोग आम तौर पर कहते हैं कि बदलाव ही केवल स्थिर है परन्तु मेरे लिए नहीं । मेरे जीवन में केवल स्थिरता की बात थी तो खोने की स्कूल में मेरा ट्रेन चालीस और पचास प्रतिशत के बीच लगातार स्तर रहता था । किसी भी तरह पचास प्रतिशत की दहलीज मेरे जीवन ने कभी भी बाहर नहीं की थी । मैंने पांच साल तक आईएएस पीसीएस की तैयारी की थी । आश्चर्यजनक रूप से मैंने पांच साल इन परीक्षाओं के लिए दिए । मेरे पिता को हमेशा उम्मीद रहती थी । उनका बेटा किसी दिन आईएएस अधिकारी बनेगा । मुझसे इस तरह की उम्मीद पालना उन की सनक थी । मैं अपने माता पिता की इकलौती संतान हूँ और ये मेरा नैतिक कर्तव्य है कि उनके सपने पूरे करूं । इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातक होने के बाद मैंने मास्टर डिग्री में प्रवेश के लिए आवेदन किया था । उन दिनों में आईएएस परीक्षा की तैयारी भी कर रहा था । मुझे यकीन नहीं था कि क्या उसे तैयारी कहा जाना चाहिए । मुझे तब यकीन था कि मुझे आज भी यकीन है कि आईएस मेरी क्षमता से परे हैं । हालांकि मेरे पिताजी को मेरे पांच प्रयासों के बाद इस बात का एहसास हुआ तो भी मैच के लिए उन्हें क्यों? दोस्तो, क्योंकि ये गलती से हुआ था और मुझे अभी भी आश्चर्य है कि मैंने कैसे एक बार पीसीएस की प्रोब्लेम्स और मुख्य परीक्षा पास कर ली थी, जिसने मेरे पिताजी की उम्मीदों में दो अतिरिक्त वर्ष छोर दिए थे । मैंने कई सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन किया था और सफलतापूर्वक कुछ लेकिन परीक्षाओं को भी पास करने में कामयाब रहा था । मेरे जीवन का सबसे अधिक भयानक था । एक साक्षात्कार का सामना कर रहा था । पांच व्यक्तियों की आंखें एक व्यक्ति को घूरती हैं, जैसे कि वे किसी का पोस्टमार्टम करने वाले हो तो व्यक्ति के लिए वो खोलना बेहद कठिन हो जाता है । तीस वर्ष की उम्र में मुझे एहसास हुआ कि मैं किसी भी सरकारी नौकरी के लिए अब और पात्र नहीं रहा । बिछा करने के लिए मेरा अपना कोई सपना कभी नहीं था, लेकिन मेरे पिताजी के लिए एक सरकारी अधिकारी के रूप में मुझे देखने का उनका सपना अंत में मर गया । भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने के लिए कुछ कोई हिम्मत नहीं थी । एक माँ अपने बच्चे की भावनाओं को कैसे महसूस नहीं कर सकती थी । उन्होंने ये घोषणा करते हुए मेरे उद्धारकर्ता की भूमिका अदा की । उनका बेटा किसी मूर्खतापूर्ण परीक्षा की तैयारी नहीं करेगा । बॅाल हमेशा उसके बेटे के लिए धडकता है, चाहे वो बेटा कितना भी निकम्मा क्यों ना हो । मेरी पत्रकार माने श्रीराम कॉलेज आॅफ कॉमर्स में मुझे एक सहायक प्रोफेसर की नौकरी पाने में मदद की । ये मेरे लिए वास्तव में शर्मनाक था की तीस साल की उम्र में भी मुझे अपनी माँ के संदर्भ का उपयोग करना पडा और वो भी एक कदर नौकरी के लिए लेकिन मेरे पास कोई अन्य विकल्प नहीं था । आम तौर पर माता पिता को सुकून मिल जाता है जब एक बार उनके बच्चे अपने व्यावसायिक जीवन में व्यवस्थित हो जाते हैं । लेकिन मेरे माता पिता मेरी नियुक्ति के बाद और अधिक जन थे । अगला सवाल जो था होने से हर हुई से शादी करेगा । मुझे स्पष्ट रूप से वो दिन याद है जब पापा ने मुझसे पूछा था कि किस तरह की लडकी तुम्हें पसंद है । वास्तव में कठिन प्रश्न था । मैंने अपना दिमाग लगाया और अंत में निर्णय लेना उन्ही पर छोड दिया । अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला मैं कैसे ले सकता था जब अन्य सभी फैसले उनके द्वारा लिए गए थे । मुझे तो ये भी आश्चर्य है कि उन्होंने मुझसे पूछा ही क्यों था? मुझे जल्दी उत्तर मिल गया क्या? मेरी माँ ने मच्छर पूछा क्या मेरी कोई गर्लफ्रेंड थी? मैं शायद ही कभी हस्ता था और वह उन दुर्लभ झडों में से एक था । मेरी बात भी मेरी हंसी में शामिल हो गई थी । हालांकि हमारे कारण काफी अलग थे, पहुँच रही थी । अपने सवाल पर कौन मेरे जैसे व्यक्ति के साथ प्यार करना चाहेगा? मैंने सोचा देखने में अच्छा लगता हूँ लेकिन वो भी मेरी माँ के अनुसार । सच्चा ये है कि मैं उबाऊ व्यक्ति हो । कभी कभी कुछ लोग बोलने के लिए अच्छे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं और मुझे शर्मिला बना देते हैं । मेरे माता पिता हर बात पर हमेशा विपरीत दिशाओं में सोचते थे लेकिन दो कारणों से उनकी एक सोच हो जाती थी । एक दोनों मुझे प्यार करते हैं और दो दोनों चाहते थे कि मैं व्यवस्थित हो जाओ और एक अच्छी लडकी से मेरी शादी हो जाए । मैं उनकी उम्मीदों के लिए उन्हें दोषी नहीं ठहराऊंगा । अंतर रहा हर माता पिता को एक सुंदर बहु का सपना देखने का अधिकार है । ऑनलाइन जोडियां बनाने वाले मंचों पर फैन्सी विवरण के साथ एक असाधारण प्रोफाइल बनाया गया था । पांच फीट आठ इंच ऊंचाई, साफ रन, स्मार्ट उम्र उनतीस बारें श्री राम कॉलेज में पूर्णकालिक प्रोफेसर भ्रमण लडका पिता, पुलिस विभाग में कार्यरत माइक, प्रसिद्ध अखबार की वरिष्ठ संपादक खुद का घर इत्यादि । मुझे उपयुक्त विवरणों में से अधिकतर से नफरत हुई क्योंकि मुझे इन सबकी सच्चाई पता थी । लेकिन आखिरी पंक्ति पसंद आई । बोल रही थी कोई जहीर नहीं । शादी डॉट कॉम पर इस विज्ञापन को पढने के बाद मैंने अपनी माँ से प्रतिवाद क्या माँ की विज्ञापन झूठ बोल रहा है क्या झूठ है? उन्होंने पूछा सबकुछ मेरी ऊंचाई पांच फीट सात इंच है । मेरी उम्र तीस साल है । मैं सिर्फ एक सहायक प्रोफेसर हूँ और किसके घर को आप अपना घर के रूप में बता रही हैं? मुझे क्या ये तुम्हारा घर भी नहीं । इससे पता चलता है कि मैं अलग घर का मालिक हो तो इन सब चीजों के बारे में चिंता मत हो । ये सब मुझ पर छोड दो । ये था मेरे माता पिता का जव्हार जब भी चीजें जटिल होती थी, घोषित करते थे । मैं उन पर सबको छोड दो । आपने बताया कि मेरा रंग साफ है, मेरी तस्वीर अन्यथा साबित करेगी । झूठ नहीं है । उन्होंने गंभीर स्वर में विरोध किया । उनकी ऊंची आवाज में मुझे चुप कर दिया । एक साल बीत गया लेकिन विभाग वाली साइड पर मेरी उम्र उन्होंने वर्षी रही । जैसे कि मेरी माँ कसम खाई थी कि मेरी शादी होने के बाद ही मेरी उम्र को तीस वर्ष तक पहुंचने देंगे । मैं लगभग एक दर्जन लडकियों से मिला । कुछ मुझे थोडी दिलचस्पी दिखाई लेकिन बाद में प्रस्ताव से इंकार कर दिया । कुछ मुझे पास के मॉल में मिलने के लिए बोलती थी । कुछ फोन पर मुझे बात करती थी और हम भी कुछ एक के घर गए । लेकिन उनमें से हर एक ने अंत में इंकार कर दिया था जिनसे मैं व्यक्तिगत रूप से मिला । उन्हें मैंने बता दिया कि मैं एक अमीर व्यक्ति नहीं था और मैं सिर्फ एक सदर सहायक प्रोफेसर था । प्रोफेसर इससे उन्हें अपना निर्णय लेने में मदद मिलेगी लेकिन बाद मेरे परिवार की मदद नहीं कर रही थी । हर लडकी की खुद की पसंद थी । कुछ मेरे माता पिता के साथ नहीं रहना चाहती थी । जबकि कुछ एक सरकारी अधिकारी की तलाश में नहीं । लेकिन इस सब मुझे अस्वीकार करने के लिए वास्तविक कारण नहीं थे । मुझे कारण पता था लेकिन मेरे माता पिता इंकार करते रहे जब तक कि वे सोनाली से नहीं मिले । सोनाली गुडगांव में टीसीएस में एक जावा डेवलपर के रूप में कम कर दी थी । उसकी प्रोफाइल तस्वीर से ही उसकी सुंदरता और आप विश्वास के बारे में पता चल रहा था । वो महत्वाकांक्षी थी और शादी के बाद ही नौकरी जारी रखना चाहती थी । उसके शौक में टीवी पर रियलिटी शो देखना तथा उन लोगों के साथ खेलना शामिल था । इतना की तो शादी के बाद एक बिल्ली पालना चाहती थी । वो तब तक इस बात से अनजान थी कि अगर वह मुझ से शादी करेगी तो उसे दो फिल्में मिलेंगे । एक अच्छे रविवार को हम उसे मिलने के लिए उसके घर गए । हमेशा की तरह कुछ उबाऊ और प्रासंगिक विषय पर चर्चा हुई । उसके माता पिता नहीं, बहुत चतुर होने के कारण मुझे दो बार कुरेदा था ताकि मैं कुछ बोलू लेकिन मैंने केवल उतना ही से रहना है जितना उन्होंने पूछा । आधे घंटे की सामान्य बातचीत के बाद सोनाली और मुझे कुछ देर के लिए अकेला छोड दिया गया । मेरी असली जद्दोजहद तब शुरू हुई इस खूबसूरत लडकी कातिल देखती है जब मेक अप कर लेती है । वो रानी की तरह दिख रही थी और मैं एक गरीब व्यक्ति की तरह मैं अवाक रह गया । उसकी सुंदरता की वजह से नहीं बल्कि अलग थलग महसूस करने की वजह से । लगभग पांच मिनट तक मुस्कराने के बाद सोनाली ने पूछा विजय उससे कोई प्रश्न नहीं, मैंने हिचकिचाते हुए कर दिया लेकिन आपको कुछ पूछना है तो बेशक पूछे और अगले ही क्षण उसने टेपरिकॉर्डर की तरह बात करना शुरू कर दिया । मुझे ऐसा हुआ कि मैंने बहुत बडी गलती कर दी थी । भविष्य के लिए आपकी क्या योजनाएं हैं? आपने कहाँ पढाई की? क्या किराये परफेक्ट रहते हैं तो आपका काम कैसा है? आप अपने पिता के करीब हैं । ये अपनी माँ के क्या आपकी कोई गर्लफ्रेंड है? क्या आपको कोई मनोवैज्ञानिक समस्या है? आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है? आपका वेतन क्या है? क्या आप को कोई बुरी आदत है? मैंने कुछ सवालों का सीधा उत्तर दिया तो बहुत मुझे कुछ रह गया । मैं आभारी हूँ कि उसने मेरे को ब्रांड का आकार नहीं पूछा । क्या मेरी प्रोफाइल नहीं? देखिए । इन सभी के उत्तर का पहले से ही उल्लेख किया गया है । मैंने कहा कमरे में चिरपरिचत सन्नाटा था । उसने छात्र मुस्कान के साथ उत्तर दिया, मुझे लगता है कि हम एक अच्छे दोस्त हो सकते हैं । गैर इससे मुझे बिल्कुल आश्चर्य ही हुआ । लेकिन इसमें तो सोनालीका उत्तर भी छुपा हुआ था । उसी शाह सोनाली की माँ ने फोन किया और अपना खेद व्यक्त किया । विजय बहुत ही अच्छा लडका है लेकिन सोनाली को वास्तव में एक सरकारी कर्मचारी चाहिए । हमें वास्तव में बहुत खेद है कि सुनते ही नहीं । माँ का खून खौल उठा और फोन पर जोर से चिल्लाई एक घंटे बाद है । उसका प्रोफाइल वेब साइट पर साझा किया गया था । यदि आपकी बेटी की अलग ही मांगी थी तो हमें आमंत्रित ही नहीं किया जाना चाहिए था । मैं अपनी माँ के बहुत करीब बैठा हुआ था और आसानी से सुन सकता था । सोनाली की माँ के साथ उनकी बातचीत को आसानी से समझ सकता । मेरी माँ ने कहा, मेरे बेटे के पास सोने का दिल है । मैं शर्ट लगाती हूँ । आप अपनी बेटी के लिए इससे बेहतर कोई नहीं पा सकती हैं । मैंने खुद को आईने में देखा और आश्चर्य सोचने लगा कि क्या मेरी माँ वास्तव में मेरे बारे में बात कर रही थी । मेरी माँ के बाद उनका सोनाली खुद को देर तक नहीं हो पाई । हाई आंटी उसने फोन अपनी माँ से लिया और बडबडाने लगी । मेरी माँ खामोश रही लेकिन इससे सोनाली हतोत्साहित नहीं हुई । उसने आगे कहा, चलिए मुझे अपनी अस्वीकृति का वास्तविक कारण बता दीजिए । जहाँ तक बात है मैं पूरी तरह से एक शिक्षक या यहाँ तक की एक सहायक प्रोफेसर से विभाग करने को राजी हूँ । लेकिन आपका बेटा शायद ही को शब्द बोलता है । वो एक अंतर्मुखी और उबाऊ व्यक्ति है तो देखने में और सबसे नीचे है और उसमें आप विश्वास का अभाव है । यदि इन तथ्यों को बचाना आपके लिए मुश्किल है तो कृपया उसे नकारने के लिए मेरे पहले कारण पर विचार करें । आशा है कि अब आपके उत्तर मिल गए होंगे गुड बाय और आपके महान बेटे के भविष्य के लिए शुभकामनाएं की सभी की सांस । मैं कहता सोनाली ने फोन काट दिया । मेरी माँ शायद उस अपमान को सहन नहीं कर सकते । उन्होंने क्रोध से तमतमाते हुए कहा, उसकी उन काटने की हिम्मत कैसे हुई? फिर उसका नंबर डायल क्या? इस बार हालांकि मैंने उन्हें संभाला और विनम्रता से कहा, वहाँ बहुत हो गया । वास्तविकता से दूर भागना । अचानक छुपी हुई और मेरी माँ की आंखों से आंसू लडना लगे तो ऐसी महिला नहीं है । जो आसानी सहन मत हट जाती है वो अहंकारी है । तो मेरे पिताजी पर चलाई संजय इस सब के लिए तुम दोषी हो, वहाँ तब की थी । अब दो पुराने दुश्मन मेरे जीवन की शेष खुशी चौपट करने के लिए तैयार थे । मैंने क्या किया? पिताजी ने उत्तर दिया, तुमने हमेशा उस पर अपने सपनों को थोपा तो मैं कभी उसे उसकी इच्छाओं और सपनों के बारे में नहीं पूछा । इस सब ने उसका सारा आप विश्वास चूस लिया । मैं सोनाली जैसी बेवकूफ की बात बर्दाश्त नहीं कर सकती तो मेरे बेटे को अंतर्मुखी बता रही है । अरे मुझ पर ठीकरा फोडना बंद करो । मैं तो मैं याद दिलाना चाहता हूँ कि मैं पुलिस बल के लिए काम करता हूँ और अधिकतर समय बाहर रहता हूँ । तुमने अपने बेटे के साथ जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण क्षण बताये हैं । उनके बीच प्रेम विभाग के बावजूद मुझे उन दोनों के बीच अभी प्रेम का एक ठंडा भी नहीं दिख रहा था । शायद ही कभी एक दूसरे से बात करते थे और जब भी उन्होंने किया तो बातचीत तेज आवाज में एक झगडे से समाप्त होती थी । हमारे छोटे दो बीएचके अपार्टमेंट के लिए भगवान का शुक्र है जिसके कारण हम एक दूसरे का सामना करने को बाध्य थे । अन्यथा हम में से कोई भी एक दूसरे का चेहरा देखने के लिए तैयार नहीं था । मुझे प्लीज तैयार हो जाओ । हम दोपहर के भोजन के लिए बाहर जा रहे हैं । मेरी माँ ने मुझे एक खुशनुमा सुबह निर्देश दिया जब मैं शांति से सुस्त पडा हुआ था, मेरे कुशाग्र मस्तिष् करें । लंच के पीछे की मंशा को तुरंत भाग लिया । एक और लडकी को देखने का कार्यक्रम मेरे पुराने दोस्तों में शहीद की बेटी है और तुम्हारे बारे में सबको जानती है । मैं सोच रहा था कि इन सब चीजों में क्या क्या शामिल था । वो जानती है कि मैं एक नाउम्मीद इंसान है । मैं पूछना चाहता था जैसे यह मुखर्जी नगर की और बडे । मुझे नहीं मालूम कि मेरी माँ है, समाज में क्या बात है लेकिन वो हमेशा की तरह अपने निर्देश सुनने लगी । विजय फ्री समझो मेरे पुत्र मुझे पता है कि एक व्यक्ति के रूप में तुम बेहतरीन इंसान हो लेकिन हर लडकी एक आप विश्वास युक्त व्यक्ति से शादी करना चाहती है । ठीक है फॅालो बेटा अपने आप को व्यक्त करूँ । एकमुख व्यक्ति बस एक बंद बॉक्स की तरह है । लोग उसके भीतर छिपी सामग्री से अनजान होते हैं । जबकि एक मुखर व्यक्ति एक खुली किताब की तरह है । कितना भी कोई कोशिश करें ये सामग्री को नहीं बदल सकते हैं । वो एक और यहाँ तक कि लाखों लोगों द्वारा पडा जा सकता है । किताब की तरह बना हूँ । मेरी एक नई परिभाषा नहीं । एक बंद बॉक्स बॅाल आया और कोई बात नहीं कि कि मैं कितना कहना चाहता था । मैं समझ गया मैंने मौन रखा लेकिन माँ ने मेरी भावनाएं समझ ले । ये कोई पहली बार नहीं था जब मैं माँ का प्रेरणात्मक भाषण सुन रहा था और मुझे अच्छी तरह से मालूम था कि इस से बचने का तरीका मौन था । हम पूर्व निर्धारित स्थान पर पहुंचे और मेरे माता पिता का स्वागत किया गया । मैं सोफे के कोने में बैठा और कमरे को जिज्ञासु ढंग से परख । मेरी माँ तुरंत बॉलीवुड के सबसे प्रसिद्ध नायक की शान में कसीदे पढते हुए एक्शन में आ गई थी । मेरा बेटा बहुत आज्ञाकारी और मेधावी है । उसने अपनी पीसीएस प्रवेश परीक्षा पास कर दी है और एक दिन एक आईपीएस अधिकारी होगा जैसे कि उसके पिता हालांकि उसके अपनी वर्तमान नौकरी में कोई दिलचस्पी नहीं है । उसने सरकारी नौकरी की तैयारी करते वक्त खुद के लिए केवल एक ठिकाना बना रखा है । मेरे पिता ने मेरी तरफ देखा तो खुश तक रहे थे कि मेरी कम से कम माँ दूसरों की उपस्थिति में उनकी प्रशंसा कर रही थी । विजय ने कभी भी शराब नहीं हुई है । एक गर्लफ्रेंड होना तो कोसों दूर की बात है । क्या इसीलिए हम यहाँ आये थे? अगर मेरी कोई गर्लफ्रेंड होती तो हमें लोगों से क्यों मिलते? मेरी गर्लफ्रेंड नहीं बना पाने की कमजोरी भी ताकत के रूप में प्रदर्शित हो रही थी । कुछ घंटों के बाद मेरी माँ का अगला लक्ष्य महिला का कमरे में प्रवेश हुआ । उस सिर्फ एक महिला के रूप में बोलना पर्याप्त नहीं होगा । वो अपने चमकदार वालों के साथ काले और सफेद पंजाबी सूट में सजी ऊंची एडी वाले सैंडल में पांच फीट छह इंच लंबी एक मॉर्डल की तरह दिख रही थी । उसके कानों में छोटे हीरो की फुलिया चमक रही थी । उचित स्थानों पर सभी घुमावों के साथ उसकी देहयष्टि सुंदर थे । उसके कपोल की हड्डियाँ उसे जीरो साइज वाली करीना कपूर की तरह दर्शा रही थी । उस सेकंड के बाद मुझे पता चला कि इस मॉर्डल नहीं, हाल ही में एक्सिस बैंक में नौकरी ज्वाइन की है । खूबसूरत लडकी का सुन्दर नाम आस्था था । विजय दूसरी अस्वीकृति के लिए तैयार हो । मैंने सोचा मैंने खुद को सबसे बुरे दौर के लिए तैयार किया था कि जानना बहुत दिलचस्प है । एक बार जब आप सबसे बुरे के लिए तैयार होते हैं तो आपका विश्वास आकाश को छोटा है क्योंकि आपके पास होने के लिए कुछ नहीं होता हूँ । मैंने आस्था पर नजर डाली और हमारी आंखें पहली बार मिली मुस्कराई । लेकिन मैं उसकी सुंदरता में इतना होया हुआ था कि प्रत्युत्तर में मुस्कुराना भूल गया । हालांकि मैं घबराया हुआ नहीं था क्योंकि मैं सबसे बुरे दौर के लिए पहले से ही तैयार था । आसान तुमसे पास काॅप में क्यों नहीं ले जा रही? उसके माने सुझाव दिया, लगभग एक दर्जन दुल्हन खोज आई के बाद मैं इन औपचारिकताओं से परिचय था । मेरे लिए ये एक मॉर्डल के साथ बात करने का अवसर था । हम निकलने वाले ही थे तो मेरी माँ ने कहा विजय जल्दी लौट आ रहा । उनकी याचक दृष्टि आस्था के साथ खुलकर बात करने के लिए मुझ से गुहार कर रही थी । मैंने सर हिलाया । पास के आइसक्रीम पार्लर तक पैदल चलने में लगे पांच मिंटो में आस्था ने बातचीत शुरू करने की पहल की । क्या आपको आॅन है कभी ना कभी हम पार्लर तक पहुंचे और एकदम होने वाली में इस पर बैठ गए । रविवार की दोपहर होने के कारण बहुत भीड नहीं थी । न्यूजीलैंड के आइसक्रीम वंडरलैंड में आपका स्वागत है । हम प्राकृतिक स्पिन के स्वादों में अग्रदूत हैं । ट्विटर ने कहा, और आस्था से उसके पसंद के बारे में पूछा । अधिकतर मुझे हैरानी हुई कि ये वेटर महिलाओं से ऑर्डर लेने में कितने कुशल है । मैं उनसे अधिकतम सौजन्य से पेश आते हैं और इस सत्य की आराम चंद देखी करते हैं कि बिल का भुगतान पुरुष द्वारा भी किया जा सकता है । आज था । मेरी पसंद के बारे में पूछते हुए मैन्यू में व्यस्त हैं, कुछ खास नहीं है । मैंने कहा, ऍम के पसंद मेरे दिमाग से लाखों मील दूर थी । मैं उसे देखने में व्यस्त था । जिस तरह से उसने वेटर से बात भी उसके केशविन्यास, जिस तरह से उसके हाथ चले, सबने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया । और जैसी की उम्मीद थी कि मैं अपने स्वभाव के अनुरूप खामोश था और बुद्धिमता भरी उस सुंदरता को पड रहा था, हो जाए तो मैं चुप क्यों हो? उसमें आपका पहला सवाल किया, मैंने जैसा बताया कि मैं तो ऐसे ही हूँ । नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं है । क्या आप का कोई बॉयफ्रेंड हैं? मैंने ऐसा कुछ जोर से बोला, जिसकी मैं सपने में कभी भी कल्पना नहीं कर सकता था । ऐसा होता है । जब आप किसी को बोलने पर मजबूर करते हैं तो आप एक अक्षत क्यों नहीं चाहते हैं? उसने तुरंत निष्कर्ष निकाला, मैं किस्सागोई से चक्कर था, जिस तरह नहीं कहा था, नहीं, नहीं तो मुझे पूरी तरह से गलत समझा । मैंने अपनी गलती को ढकने की कोशिश की । न केवल सोच रहा था कि आपके जैसी लडकी का कोई ब्वॉयफ्रेंड कैसे नहीं है । और जैसे आपने एक नियोजित में वहाँ को चुनाव बस तो मुस्कराएंगे तो कोई उत्तर नहीं दिया । इस बीच हमारी आइस्क्रीम आ गई थी । आपका इस टीम के स्वास्थ के लिए कोई विशेष बुखार नहीं लगता । क्या सही है? उसने पूछा, मैंने कभी नहीं सोचा था कि कृषि राष्ट्री मेरा बचाव करेगी । मैंने अपना सिर हिला दिया और आस्था ने एक और सवाल दाग दिया, क्या आप आईपीएस के लिए गंभीरता से तैयारी कर रहे हैं? नहीं, मेरा पहला सीधा उत्तर था तो भविष्य के लिए क्या योजना है? विजय कुछ भी बडा नहीं । क्या आपके पास कोई अब ठीक है? ये प्रश्न उस व्यक्ति के लिए अजीब था जो आपने वर्तमान के बारे में भी स्पष्ट नहीं था । मुझे लगता है कि मामूली है वो वो मुस्कुराई और पूछा क्या आप मांसाहारी हैं? जी रहे हैं? मैं एक रूढिवादी ब्राह्मण परिवार से हो । क्या आप शराब पीना पसंद करते हैं? मैंने कभी भी शराब नहीं हुई है । अलग से नीचे जाने की तो बात ही नहीं । मैंने अपने प्रोफाइल में पहले से ही इसका उल्लेख किया है । मैं थोडा झल्लाते हुए बोला मेरे स्वर में अचानक परिवर्तन के साथ ही वह ठिठक सी गई लेकिन क्या होगा? फिर याद की होने वाली पत्नी शराब पसंद करती है । मेरी झल्लाहट उस पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं था । मैं व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सराहना करता हूँ लेकिन ये भी मानता हूँ की हर चीज की एक सीमा होनी चाहिए । मुझे लगता है कि पहली बार ऐसा हुआ था जब मैंने ऐसी परिपक्कता के साथ किसी को उत्तर दिया था । आप क्या करने की इच्छा रखते हैं? मुझे अचानक महसूस हुआ कि आईएस के लिए मेरा साक्षात्कार लिया जा रहा हूँ । मैं केवल एक अच्छा इंसान बनना चाहता हूँ । इससे बेहतर कोई उत्तर मेरे दिमाग में नहीं आया जिससे उसका चेहरा खिल गया था । विजय हमारे पास मेरे लिए कोई विशिष्ट प्रश्न हैं । नहीं, ज्यादा कुछ नहीं । मुझे इस बात का पूरा यकीन था कि ये मॉर्डल मुझे अस्वीकार करने वाली थी क्योंकि मैंने बोलने में ऊर्जा खर्च करने के बारे में भी नहीं सोचा । जब मुझे यकीन था कि कोई लाभ नहीं होगा, उसी झंड मुझे अपनी माँ की कॉल मिली तो चिंतित थी क्योंकि वह चाहती थी कि मैं आस्था के साथ बातचीत शीघ्र समाप्त करूँ । वो जानती थी कि अधिक बातचीत का मतलब अस्वीकृति की अधिक संभावना मुझे मैं तो अपने अतीत के बारे में कुछ बताना चाहती हूँ । उसने गंभीर स्वर में कहा, मुझे शत प्रतिशत यकीन था कि वह कुछ ऐसा कहने जा रही थी । इसे मैं सुनना नहीं चाहता था । विजय मेरी माँ के रूप में आपके सामने आई महिला मेरी सौतेली माँ है । मेरे पिता का मेरी माँ के साथ प्रेम संबंध था । जब दिल का दौरा पडने के कारण उनका निधन हुआ तो मैं इस परिवार का हिस्सा हो गई । उसने कठिनाई के साथ कहा, मैं एक नाजायज संतान है की कहकर वह चुप हो गई । मुझे लगा कि वह होने वाली थी । अपने पूरे जीवनकाल में मेरा मानना था मेरे भयानक माता पिता मेरी परेशानी का कारण थे लेकिन इसकी कहानी में अधिक दर्द था । आस्था कोई संतान नाजायज नहीं होती । ऐसा कभी मत कहना । अगर कोई नाजायज है तो वह माता पिता हैं न कि उनके बच्चे । किस सुनकर से राहत की सांस नहीं खाते । एक अच्छे व्यक्ति हैं । उसने कहा, नीचा महसूस कर रही थी और मैंने उसे बेहतर महसूस कराने के लिए खुद के बारे में कुछ साझा करने के बारे में सोचा । राजस्थान मैंने कहा मैं प्रोफेसर नहीं हूँ बल्कि एक सहायक प्रोफेसर तो केवल एक तदर्थ संकाय, मेरे पिता एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी हैं । हमारे धनी परिवार नहीं है । पढाई में कभी अच्छा नहीं था और आपको कुछ दिलचस्प बात बताऊँ आप चौधरी लडकी हैं । जिस समय मिल रहा हूँ आस्था ने मुझे देखा । जिस तरह से तेरह लडकियों ने देखा था वो शांत हो गयी थी । कुछ सेकंड के बाद मैंने सुझाव दिया कि हमें अब चलना चाहिए । उसका सिर हिलाया और हम लौटने लगे । खामोशी अभी भी बरकरार थी । मुझे लगता है कि मेरी बातों ने उसे अपना निर्णय लेने में मदद की । अपने घर में प्रवेश करने से पहले आस्था ने कुछ ऐसा कहा जो मैंने पहले सुना था । मुझे मुझे लगता है कि हम अच्छे दोस्त होंगे । आस्था कैसी है? जैसे हम घर के लिए चले । मेरी माँ ने पूछताछ शुरू कर दी । उसके सवाल से मुझे हंसी आ रही थी लेकिन शर्मिला व्यक्ति होने के कारण मेरे लिए अपनी झेंप मिटाना आसान था । मुझे यकीन था कि मैं ही टॉपर होता । अगर ये सवाल आईएएस परीक्षा में पूछा गया होता लेकिन मेरी माँ से मैं बस कहने में कामयाब रहा कि वह अच्छी थी । मैं उनकी उम्मीद नहीं बढाना चाहता था क्योंकि मैं से मुलाकात के नकारात्मक नतीजे की उम्मीद कर रहा था । मैंने सत्य को भी साझा नहीं किया की वो एक नाजायज संतान थी । आस्था की माँ से कोई भी कॉल प्राप्त किए बिना कुछ दिन और बीत गए । उत्तर स्पष्ट था लेकिन मेरी माँ के लिए अस्वीकार की तुलना में कॉल नहीं मिलना ज्यादा हताश करने वाला था क्योंकि आस्था की माँ उनकी सहकर्मी भी थी । मेरी माँ ने फिर से मेरे लिए अपना अंतहीन प्रेरणादायक भाषण शुरू कर दिया । मैं आश्वस्त था एक लडकी से एक और अस्वीकृति का परिणाम मेरे लिए भाषण चिकित्सा सत्रों वाला बनेगा । कुछ दिनों बाद हमें खबर मिली । व्यवस्था के पिता की मृत्यु मस्तिष्क में रक्तस्राव के कारण हो गई थी । मुझे आस्था पर तरस आया । उसने बचपन अपनी माँ होती थी और अब उसने अपने पिता को भी खोदी । आधार उत्तर किस्मत था की एक ऐसी लडकी तो बहुत करिश्माई और आत्मविश्वास से भरपूर देखती है तो जीवन ऐसा दर्दनाक हो सकता है । कुछ उसे फोन करने की इच्छा हुई । लेकिन मैं विजय शर्मा एक बार फिर उसी तरह चुप रहा । लगभग दो हफ्ते बीतने के बाद मेरी माँ के चेहरे पर मुस्कुराहट खिली हुई थी । आस्था हमारे गठबंधन के लिए सहमत हो गई थी । मेरा परिवार बेहद पसंद था । मुझे उसके उत्तर पर गंभीर समझे था और इसलिए मैंने अपने पिता से पूछा उनसे शादी क्यों कर रही है? मेरे पिता मुस्कराए और कहा ये वही सवाल है जो मैंने खुद से पूछा था । जब तुम्हारी माँ ने यहाँ कहा था लेकिन आपका एक प्रेम देखा था । मैंने उसे प्रतिवाद किया । प्रेम शादी के बाद भी हो सकता है । उनका उत्तर मुझे संतुष्ट करने में विफल रहा है और अब तक वही सवाल मुझे चुकता रहता है । उसने मुझे शादी क्योंकि वैसे भी मेरी न तो प्यार में दिलचस्पी थी । नहीं हवास, मेरे लिए मैंने अपनी आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी । वास्ता ने मुझे अपना जीवन साथी चुन लिया था । हमारी शादी की तारीख तय होने वाली थी । प्रवास था ना । एक दिन मुझे कॉल की वजह से कृपया अपने माता पिता को मेरे अतीत के बारे में बता दूँ । मैं कुछ भी छिपाना नहीं चाहती हूँ । उसके संकेत को समझाते हुए मैंने पिताजी को बता दिया कि वह एक नाजायज संबंध से पैदा समता भी अपने पिता की प्रतिक्रिया से मुझे उन पर गर्व हुआ । उन्होंने कहा, ये वादे मायने नहीं रखती है । अस्थायी अच्छी लडकी है तो भी भूल कर भी अपनी माँ से इस पर चर्चा मत करना फॅस विजय शादी के दिन बोर्ड लगा हुआ था लेकिन मेरे लिए ये था ऍम वॅार ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -03

तीन अंततोगत्वा मैं विवाहित पुरुष था । वास्तव में लंबे समय के बाद मुझे थोडी से खुशी मिली थी । आस्था और मैं दो बहुत अलग व्यक्तित्व थे । मुझे सुंदर और प्यारी पत्नी मिली थी जिसमें एक विख्यात व्यक्ति की पत्नी होने के सभी को थे । लेकिन मेरे जीवन में उसके होने की कीमत के रूप में मैंने अपना घर खो दिया । आस्था मांसाहारी भोजन और पीने की शौकीन थी । उस पार्टी में जाना पसंद था और मुझे नाॅन दोनों समान कारणों से लोग और उनका इकट्ठा होना मुझे अकेले जीना पसंद था । जब तक वो मुझ पर अपने साथ पीने के लिए दबाव डालती थी । लेकिन मैं किसी तरह बजाता हूँ । मैंने उसे कुछ भी करने से कभी नहीं होगा । मैं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के पक्ष में था और हम चलाना मेरी शैली नहीं थी । वो भ्रमण परिवार में मांसाहारी भोजन खा रही थी तो उसकी थोडी सी गंध से भी नफरत करता था । अपनी शादी के एक महीने बाद मेरी खुशी के बारे में पहली बार छेद हुआ तो मेरी माँ को पता चला की आस्था नाजायज संतान है । मेरी माँ ने उसके साथ ऐसे व्यवहार किया जैसे की वो एक वेश्या भी आज था । हालांकि ऐसी नहीं थी तो सारा जहर पीकर चुप रहती । उसने कहा मैंने अपने व्यवहार के पूर्व अपने पति को सबको साफ साफ बता दिया था । साथ में मेरी माँ पहले से चल रही थी । उस से खुद को जलने से बचाने के लिए मैंने उसकी लगते ये कहते हुए पापा की और कुमारी हाँ मैंने इस बारे में पापा को बता दिया था और उन्होंने ही राय दी थी कि मैं से आपसे छपा लूँ । अब टाउन लडने वाले दुश्मनों को लडने का एक और कारण मिल गया था । आस्था के बारे में रहस्योदघाटन के बाद मेरी माँ ने सब कुछ के लिए उसे जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया । हमारा घर युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया था जब तब मेरी माँ और आस्था मामूली बातों पर लडती रहती नहीं । लगभग चार महीने की रस्साकशी के बाद रस्सी अंत में टूट गई । मेरी माँ ब्रीजर की बोतल का ढक्कन पर पाऊँ पडने से लडखडाई हूँ और हम सभी से सीधा सवाल किया मेरे घर में कौन भी रहा था किसी भी उत्तर नहीं दिया लेकिन हर कोई जानता था कि वो आस्था थी । ताबूत में आखिरी कील तब होगी जब मेरी पाने सोंग लिया की आस्था ने उनकी अनुपस्थिति में घर पर ऍम हूँ एक ग्रामीण परिवार में जहाँ किसी ने भी कभी मांस का स्वाद नहीं चखा था । एक व्यक्ति तो मांसाहारी भोजन खा रहा था और शराब पी रहा था । आप भी कहा जाता है आस पास इस तरह कैसे व्यवहार कर सकती हैं? मैं आपसे सवाल करता हूँ जबकि ये सब मेरी नाक के नीचे हो रहा था । हमेशा की तरह मैं चुप रहा था । कई बार मेरी माँ ने मुझे जोरू का गुलाम घोषित किया । मैं समझ नहीं सका किसका मतलब किया था । लेकिन चीज तो मुझे पता थी कि जब मेरी माँ कहती कि मैं जोरू का गुलाम हूँ, उसका एक ही मतलब था की सास और बहू की महान लडाई नहीं । उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था । पांच महीनों की लडाई के बाद आस्था ही अंतर भेजी थी । नतीजतन ये निर्णय लिया गया कि हम उनके ऑफिस के करें । मालवीय नगर में एक अलग किराये के फ्लैट में रहेंगे । ये हमारे घर बदलने का आधिकारिक कारण रहा अलवत्ता बहुत से अनौपचारिक कारण भी थे । मैंने धीरे धीरे हर शनिवार को अपने माता पिता से मिलने जाने की आतंक बनाई तो शनिवार मेरे लिए छुट्टी का और मावा आस्था के लिए ऑफिस का दिन हुआ करता था । माँ रास्ता के अलग होने से मुझे कुछ दिनों तक शांति जरूर मिली थी । ना तो मेरी पत्नी ने मेरी माँ के बारे में शिकायत की । नहीं । उन्होंने आस्था कि अंततः हूँ । मैं सभी तरह के मुद्रा अन्वेषण की शिक्षा दूर था । सब कुछ एक दम सही लग रहा था । एक सुंदर पत्नी दोनों कामकाजी घर पर कोई छिद्रान्वेषण नहीं । जीवन फिर से साबित करने में कामयाब हो रहा था कि मिस्टर विजय को अंत तक भरना पडेगा । ऍम कारण मेरी पत्नी एचआईवी ट्रस्ट पाई गई थी । मैं पर विश्वास नहीं कर सकता हूँ । मुझे आश्चर्य हुआ कि क्या मैं फिल्म देख रहा था । क्या ऐसा मेरे साथ हो रहा था? किस से संक्रमित हो गई तो कुछ चक्कर चल रहा था । मैं भी एचआईवी से संक्रमित था । ऍफ जाएगी सब सवाल मेरे दिमाग फॅमिली कमरे में पूर्ण खामोशी थी । ये मेरे जीवन का सबसे गहरा और अंधेरा मौन था । बीमारी के बारे में जो कुछ भी जानकारी मुझे थी, उसमें ॅ लाइलाज बीमारी थी और मेरी पत्नी निश्चित तौर पर मरने वाली थी । उन दृश्यों की कल्पना करते हैं जो मैंने केवल फिल्मों में देखा था । आपने मुझे वर्ष की तरह चला दिया था । मानव मस्तिष्क सबसे सुंदर हूँ, लेकिन सबसे खतरनाक रचना है जो हमें वास्तविकता का एहसास कराती है । मशीन हमने अलमारी के और घूमा । इसका एक हिस्सा मंदिर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था और जहाँ एक दर्जन मूर्तियां रखी हुई नहीं । मैंने अपने हाथ जोड दिए और कहा मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता हूँ । नहीं हमेशा जो निशाने पर रहता हूँ कि आप की सूची देंगे । किसी और को यात्रा देना नहीं है । मुझे ही हर बार क्यूँ क्यों भगवान ऍफ मौजूद हैं तो क्या मेरी मदद करें?

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -04

चार मैंने अपना ऍम क्या अगले कुछ घंटों के लिए सर्च इंजन में मेरे संकेत शब्द नहीं? हम एड्स कैसे होता है एचआईवी के लिए उपलब्ध इलाज मालवीय नगर नई दिल्ली के निकट विशेषज्ञ चिकित्सा ॅ प्रश्न ऍसे संक्रमित होता है तो क्या उसका मतलब है कि उसे ऍम नहीं? एचआईवी एक असामान्य वायरस है । एक व्यक्ति से कई वर्षों तक संक्रमण हो सकता है और फिर भी वो पूरी तरह स्वस्थ्य प्रतीत होता है । लेकिन वायरस धीरे धीरे शरीर के अंदर गलत होता है । हम तो मैं बीमारी से लडने की शरीर की क्षमता नष्ट कर देता है । अभी भी निश्चित नहीं है कि एचआईवी संक्रमण वाला हर व्यक्ति एड्स पीडित होगा । ऐसा प्रतीत होता है कि एचआईवी संक्रमित अधिकांश लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पडेगा लेकिन इसमें कई साल लग सकते हैं । ऍसे पीडित व्यक्ति को पता नहीं हो सकता है कि वह संक्रमित है लेकिन वो वायरस को अन्य लोगों तक पहुंचा सकता है । प्रश्न ॅ पीडित होने में कितना समय लगता है? सन उन्नीस सौ बाढ में से वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है क्या चाहिए संक्रमित होने के दस सालों के भीतर लगभग आधे लोग एड्स से पीडित हो जाते हैं । की अवधि काफी हद तक व्यक्ति से व्यक्ति तक बहुत होती है और एक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति तथा उसके स्वास्थ्य संबंधी व्यवहारों सहित कई कारकों पर निर्भर कर सकती है । आज ऐसे चिकित्सा उपचार हैं जो एचआईवी द्वारा प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करने की दर को धीमा कर सकते हैं । प्रारंभिक पहचान उपचार और स्वास्थ्य देखभाल की रोकथाम के लिए अधिक विकल्प प्रदान करती है । प्रश्न ऍम संक्रमण लोग हम तो कहाँ मर क्यों जाते हैं? जब लोग एचआईवी संक्रमित होते हैं तो वे एचआईवी या एड्स से नहीं मारते । वे एचआईवी के शरीर पर प्रभाव के कारण बढ जाते हैं । प्रतिरक्षा प्रणाली के कमजोर पडने के साथ शरीर कई संक्रमणों के प्रति संवेदनशील बन जाता है । सामान्य सर्दी से लेकर कैंसर जैसे घातक रोगों के लिए वास्तव में विशेष संक्रमण और उनसे लडने में शरीर की क्षमता है की मृत्यु का कारण बनती है । प्रश्न एचआईवी और एड्स के लिए पर एक्शन ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस यानी ऍम इसका कारण बनता है । उसका निदान करने के लिए रक्त परीक्षण सबसे आम तरीका है । वायरस को प्रतिरक्षित शुभ करने नहीं, छह सप्ताह से छह महीने तक लग सकते हैं और अनुमति परीक्षणों की आवश्यकता हो सकती है । आप डॉक्टर आपके लक्षणों, चिकित्सा के इतिहास एवं जोखिम कारकों के बारे में पूछेगा और शारीरिक जांच करेगा । एचआईवी और एड्स के अनुदान के लिए प्राप्त में परीक्षण में शामिल है एलिसा परीक्षा ऍम से जुडी ऍम जांच एचआईवी संक्रमण का पता लगाने के लिए प्रयोग किया जाता है । यदि एक ऍम परीक्षण सकारात्मक है तो पश्चिमी ब्लॉक टेस्ट है जो आमतौर पर मैदान की पुष्टि करने के लिए किया जाता है । अगर एक ऐसा परीक्षण नकारात्मक है लेकिन आपको लगता है की आपको फॅमिली हो सकता है । आपका एक से तीन महीने में फिर से परीक्षण करना चाहिए । ऍम एक पुराने एचआईवी संक्रमण में काफी संवेदनशील है, लेकिन क्योंकि संक्रमण के तुरंत बाद प्रतिरक्षी नहीं बनते हैं । आपके संक्रमित होने के बाद पहले कुछ महीनों में परीक्षण नकारात्मक हो सकते हैं । भले ही इस दौरान आपके परीक्षण के नतीजे नकारात्मक हो सकते हैं । हो सकता है क्या आपके भीतर वायरस का उच्च स्तर हूँ और संक्रमण के फैलने का खतरा हो? पश्चिमी ब्लॅक एक बहुत ही संवेदनशील रक्त परीक्षण है जिसका उपयोग सकारात्मक एलिसा परीक्षण के परिणाम की पुष्टि करने के लिए किया जाता है । मैं सब शोध कर ही रहा था कि मेरा मूल की घंटी बनने लगी । आज शर्मा जी क्या हुआ नहीं, कुछ नहीं । बस मुझे पत्नी की याद आ रही है । सचमुच बिल्कुल आपकी पत्नी घर जा रही हैं । क्या आप कुछ गर्म समोसा लेना चाहेंगे या कोई फॅमिली संकेत दिया? नहीं? नहीं मैं पता है मैं नहीं । पिता बस घर आओ मेरे पास हमारे में कुछ विशेष है । छटाई ठीक है । मैं पंद्रह मिनट में निकल रहा हूँ । मैंने बातचीत के बाद डॉक्टर लाल पैथलैब्स को कॉल किया और नमूना संग्रह के लिए अगले समय का समय निर्धारित किया । जो महिला दूसरी तरफ से बात कर रही थी उसने जांच के बारे में पूछताछ की जो मैं कराना चाहता था । ऍम और पश्चिमी ब्लॉक दो व्यस्कों के लिए फॅसा करें । उसने कहा, और मुझे होल्ड पर रख दिया । एक बल्कि चुप्पी के बाद उसने एक अनिश्चय की आवाज में पूछा ये एचआईवी के लिए ऐसा दरवाजे की घंटी बजी और मेरे जीवन की सबसे खूबसूरत महिला नहीं प्रवेश किया । फुटबाॅलर आज तक रहते हुए बोली घर में उसके प्रवेश के साथ हमेशा जीवंतता भर जाती थी । मैं उसके संक्रमण के प्रभाव के बारे में चिंतित था । अगर सब कुछ वैसा ही था, गुड इवनिंग डालेंगे । हम से परस्पर आलिंगन किया और चुमार मुझे भूख लगी है । उसने कहा और सीधे किचन की और चली गई । कोई असली पेटू थी और छह महीने की छोटी अवधि में मुझे अहसास हो गया था कि घर पहुंचने के तुरंत बाद उसे कुछ खाने की भूख होती थी । उसने कभी भी अपने कपडे नहीं बदले या हाथ पैर हुए । जब वो भूखी होती थी तब भोजन और पेट के बीच कुछ भी नहीं आ सकता था । ब्लॅक मैंने कहा उसके आगे चला गया । उसकी त्यौरियां चढी, मैं किचन में गया और मैंने जो बनाया था वो लाया । उसका पसंदीदा खाना नहीं था लेकिन उसके खाने के लिए उस समय इसके अतिरिक्त और कुछ नहीं था । ऍफ बनाया हूँ क्या मैं सपना देख रही हूँ? उसने एक और बता आप से कभी नहीं पसंद करते हैं । आपके तो उसकी करने से भी नफरत थी । बहुत हैरान हूँ । एक पक्की शाकाहारी नहीं कैसे? क्या आपकी माँ को दिल का दौरा पड जाएगा । यदि उन्हें पता चल गया तो हमेशा सवाल पूछती थी और खुद ही उत्तर भी देती थी । दरअसल वो थोडी बात होनी थी लेकिन मैं ये बोलना नहीं चाहता था । तो मैं हर समय समझौता करने की क्या जरूरत है? रहने में कामयाब हुआ । जब मैं भावनाओं से भरा हुआ था । क्या ये मालवीय नगर वाला विजय है या अग्नीपथ का? विजय दीनानाथ चौहान अमिताभ बच्चन की आवाज की नकल करते हुए उसने बेहद मजाक भरे स्वर में कहा, मैं मुस्करा दिया । विजय मुझे अपनी पसंदीदा चीजों में से एक और की अनुमति दो । उसने कहा और किचन में घुस गई । मैं आपका के लिए उसकी चाहत जानता था तो दो ग्लास कुछ आपका और ऍम बजे अध्ययन बनाते हैं । जानने के बावजूद कि मैं नहीं पीता । उसने दो गिलास बनाए । अक्सर अजीब व्यवहार किया करती थी । ऍम का कारण क्या है? मैं बीस दिनों बाद अपने पति से मिल रही हूँ । जश्न मनाने का पर्याप्त कारण नहीं है । तुम पीने के लिए बहाना चाहती हूँ । मैंने कहा वाह, शैतानी समझ कराई । चलो किया । उसने अपना ग्लास उठा लिया । उसका उत्साह लंबे समय तक के लिए नहीं था । मैं पता है मैं नहीं । पिता मुझे आश्चर्य हैं क्यों कि रंगहीन और जो उसके साथ मिश्रत है । मुझे लगा कि तुम्हें शायद गोवा में कुछ कोशिश की हो । उससे निराशा में कहा, लेकिन आप चिंता मत करो । जश्न जारी रहेगा । मैं तुम्हारे साथ फ्रूट जूस ले लूंगा । विजय कम से कम कोशिश करो, उनको होना कर रहे हैं । मुझे पता है कि मैं किसी और दिन कोशिश करूंगा । आज मैं कुछ भी कोशिश करने के मूड में नहीं हूँ । उसका मुंह भूल गया और चेहरे पर उदासी छा गई । जैसे ही मैंने कहा अच्छा एक दिन में तो बीजेपी होंगा लेकिन आज नहीं । मैं रूढिवादी नहीं था और निश्चित रूप से उनमें से नहीं जो विश्वास करता हूँ कि पीना पाप है । मैं सिर्फ इसलिए डरा हुआ था क्योंकि मैंने कभी पी नहीं । यदि मैंने एक बार भी ली तो मुझे आगे भी लेने के लिए बाध्य करती है और मुझे यकीन नहीं था कि मैं क्या बक बक कर दो । तो मेरी निर्णय तक सफाई पर ध्यान दिए बगैर ऑमलेट पर टूट पडे । उसकी सडक हुई, जीत जमाने की आवाज और बस आंखें उसके शब्दों से ज्यादा कह रही नहीं । मुझे खुशी थी कि मैं उसे खुशी के ये पल देख रहा था । इस तरह घबराओ मत वो करीब आ गई और फुसफुसाई देखो शर्मा जी मैं जीत कही ना कैसे देवर जो तुमने घर पर ऑमलेट खाने से मुझे रोका था और याद करो मैंने क्या कहा था एक दिन तुम मेरे लिए ऑमलेट बनाओगे । देखा हमने बनाया, मैं मुस्करा दिया । उसने अपना क्लास खाली कर दिया और मैं जूस के घूम पर घूट लिये जा रहा था । मुझे यकीन है एक दिन तो मुझे रिंग भी पेश करोगे तो मुस्कुराई और बोली मैं आवाज था लेकिन उसकी खुशी मुझे चुभ रही थी । मैंने फैसला किया कि मैं उसे एचआईवी के बारे में तब तक नहीं बताऊंगा जब तक इसकी पुष्टि ना हो जाए । शायद उसके बाद भी मैं असहाय पति था । चाहता था कि वो अपना वक्त खुशी खुशी बिताएं । मैंने बेहद प्यार से कहा काम हमेशा हमेशा विजेता होगी ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -05

हैं । पांच रात के खाने के बाद हम क्योंकि पुल की बातें करते हुए बिस्तर में एक दूसरे के निकट गए जीरो वॉट का लाल बल सही माहौल पैदा कर रहा था । मेरे भीतर की अशांति के बावजूद कमरे में हालत की आबादी ये मेरे जीवन के प्रियतम छणों में से एक था । इसलिए नहीं ये पहली बार था कि हम पांच सौ नहीं बल्कि इसलिए कि चीजों के प्रति मेरी धारणा बदलने शुरू हो गई थी । तीन सप्ताह के विषय के बाद मेरे बहुत एक आग्रह उच्चता बढते ना उसकी फुसफुसाहट की भी व्याख्या कर सकता था । लेकिन विडंबना ये थी कि मैं एचआईवी रोगी से प्यार नहीं कर सका । तुमने पूरे दिन क्या किया? उसने मेरे करीब हो सकते हुए मुझसे पूछा, हमारी नाक इतनी नजदीक थी कि हम आसानी से दूसरे के सांस को भी कर लेते हैं । मैं डॉक्टर के पास गया । ऐसे पहले की मैं अपनी बात पूरी कर सकूँ । उसने मेरे पास कार्ड भी हूँ । अभी तो ठीक है, पेशाब करने के दौरान दर्द होता है । मैंने इसकी चाहत से कहा होता है कहाँ हो कॅालिंग में था । मैंने दर्ज मिश्रित उदास भाव से कहा क्या गडबड है? गोवा की यात्रा के बाद मेरे पति के लिंग में दर्द है तो समझे करते हुए भडकी और मेरी और देखा है । मुझे आशा है कि तुम किसी के साथ सोई नहीं हो गई । हाँ मोनी, जब हम सच बोलते हैं, प्रतिवाद में हमारी आवाज हल्की हो जाती है । यहाँ तक की कोमलता से बोला गया खामोश पर्याप्त होता है । हो सकता है कि तुम्हारे बारे में सोच के समय मैंने हस्तमैथुन कर लिया हूँ । हालांकि तुमने कभी सोचा की मैं तुम्हें कितना याद करता रहा । क्यों तुम हमेशा नकारात्मक सोचने लगती हो? मैंने तीखा उत्तर दिया जब वह खीसे निपोरते लगी, माफ करो, मैं सिर्फ मजाक कर रही थी । डॉक्टर ने क्या कहा? लेडी डॉक्टर ने कहा कि मेरे मूत्रमार्ग में संक्रमण है । इसके कारण मुझे कुछ दिनों तक यौन संबंध बनाने से बचना होगा । मैंने चढाने के लिए सावधानी से डॉक्टर को एक महिला बताया तो अपनी जांच कराने के लिए महिला के पास गए । भगवान मेरा पति और एक डॉक्टर नहीं । वो दक्षिण भारतीय फिल्म की ये घटिया अभिनेत्री की तरह अपनी अभिव्यक्तियों को नाटकीय रूप से व्यक्त करने लगी । फिर वो थोडा कठोर हुई जैसे कि कुछ याद कर रही हूँ । अभी तुम ने क्या कहा? कुछ दिनों के लिए कोई यौन संबंध नहीं कुछ दोहराया । स्पष्ट रूप से उसके आवास में निराशा वो कुछ कहने जा रही थी जब मैंने उसे चूमा और रहा । मुझे बात पूरी करने दो । आज मैंने दस लाख रुपए की बीमा पॉलिसी कराई है जिसके लिए हम दोनों का चिकित्सा परीक्षण होना है तो कल डॉक्टर लाल पैथलैब्स का एक सहायक नमूना इकट्ठा करने के लिए आएगा । मैंने हमारी उसके सिर हिलाया और मैंने एक और हिदायत दी रक्त का नमूना जो लगभग सुबह आठ बजे तक लिया जाएगा । तब तक तो खाली पेट रहना पडेगा । कुछ चुप हो गई विषय को बदलने के लिए । मैंने पूछा तुम्हारी नौकरी की पुष्टि कब होनी है? सोमवार हमारा प्रबंधक कैसा है? मैंने उससे बात में उलझाए रखने की कोशिश की ताकि संक्रमित लिंग से उसका ध्यान हटाया जा सके । वो मूड मुकुल माथुर तो लगभग चिल्लाई । क्या उसने कुछ किया जिससे मेरी प्रिया को परेशानी हुई । बैंक बंद होने का आधिकारिक समय पांच बजे हैं और मैं साढे पांच में निकलती हूँ । फिर भी उसने मुझपर कार्यालय जल्दी छोडने का आरोप लगाया । उसने इस उम्मीद से मुझे देखा कि मैं उसका समर्थन करूंगा । एक पति को अपनी पत्नी की पीठ थपथपानी होती है इसलिए मैंने अपना सिर हिलाया और अपनी जीत को समर्थन में चटकाया । उसने मेरे साथ अपनी जिंदगी की तुलना क्योंकि बोलती रही वो आठ बजे तक अपनी मेज पर दफन रहता है तो मेरी की गलती है । कोई तरफ बोलती जा रही थी । वो लाखों कमाता है, कार्यालय में चौबीस घंटे बैठ सकता है । लेकिन तो मालूम है वो सबसे खराब पहुँच गया बिल्कुल । मैंने मुस्कुराकर कहा तो छोड तो नहीं देती । तुम सही कह रहे हो मुझे अपनी नौकरी बदल नहीं चाहिए । नहीं मैं उनसे बदलने के लिए नहीं कह रहा हूँ । मेरा सुझाव है कि तुम सुबह बैंकर की नौकरी छोड दो और अपना सपना पूरा करो । ठीक है मैं तो मैं घटना के बारे में बताऊंगी । इस सब हसी आ जाएगी । सरगम और मैं हमेशा अपने जीवन की महत्वाकांक्षाओं के बारे में बातचीत कर दी और सहयोग से हम दोनों अभिनेत्री बनना चाहती थी तो में तो मैं एक अभिनेत्री बनना चाहती थी । मुस्कराया और जिज्ञासा से पूछता हूँ पुलिस उसी मथुरा हूँ । मैं आम तौर पर हर बात पर मुस्कुराता हूँ और शायद ही कभी हस्ता हूँ जब की वो पूरी तरह विपरीत है । यही कारण है कि उसने मेरी मुस्कराहट वो उसी के रूप में माना । एक बार मुझे लगा कि मैं लेखक बनना चाहती थी क्या तो मैं पास करोगे? आस्था पथ एक लेखिका मैंने उसे अपनी बाहों से मुक्त कर दिया और अपनी दिलचस्पी दिखाने के लिए गौर से देखा तो नहीं । मुझे यकीन है कि तुमने कुछ पन्ने भी जरूरत क्या होंगे? हाँ मैंने कुछ पढे लिखे थे वो मैंने कहाँ है? तो उन्होंने कभी मुझे नहीं दिखाया । पढा मुझे पूरा यकीन है कि तुम अपनी नौकरी छोडनी चाहिए और लेखन पर जोर देना चाहिए । प्रोफेसर शर्मा जी पंद्रह हजार घर का कराया साथी प्रतिमाह अन्य खर्च के लिए दस हजार प्राप्त आवेदन पच्चीस हजार हम एक नई कार या कुछ और खरीदना चाहे तो क्या होगा? हम इसके लिए पैसे की व्यवस्था कैसे करेंगे? अंत में हमारे पास कुछ भी नहीं बचेगा । बस वो जो एक बार जब तुम एक लेखक बन गई, तुम्हारी हर किताब के लिए लाखों प्रतियां देखेंगे । फिर मैं तुमसे ही प्रश्न पूछ होगा तब तुम्हारा तक बदल जाएगा । लेकिन तो मैं कैसे सुनिश्चित कर सकते हूँ । मेरी प्रत्येक पुस्तक की एक लाख प्रतियां बिक जाएगी । मैं इस बारे में बहुत सकारात्मक हो । बस मुझे बनने दिखाओ जो तुमने लिखे थे । मैं भेजना के साथ बैठ गया और बोला मुझे अपनी पांडुलिपि दिखाओ नहीं चाहता था कि मेरी पत्नी एचआईवी से संघर्ष करते समय काम करें । हालांकि रोग की पहचान के पहले पुष्टि करनी होगी । मुझे कुछ गडबड की बुआ रही है । हम कहना चाहते हो जो कुछ भी तुम ने कहा मैं इस्तीफा देने नहीं जा रही हूँ । था अपने आप को देखो । तुम घर निराश हो, हमारी हताशा स्थाई बन जाए । इसके पहले ये केवल वक्त की बात है इसके बजाय अपने सपने को पूरा करने की कोशिश करो । मैंने पहली बार उसे समझाने की कोशिश की । मैं नहीं छोड रही हूँ और बहस हो गयी । उस ने आधिकारिक तौर पर हमारी बातचीत का समर्थन कर दिया । कम से कम मुझे बताओ कि तुमने लिखा क्या है? ऐसा मैंने लिखा था । मुझे एहसास हुआ कि मैं एक लेखक नहीं हो सकती हैं, ऊपर नहीं होगी । नहीं तुम क्या सोचती हूँ ये महत्वपूर्ण नहीं तो मुझे सिर्फ अपने पडने दिखाओ । मैंने कहा लेकिन वो एक इंच भी नहीं ठीक है मुझे सभी पन्ने मत दिखाओ । तुम कितने पढे लिखे थे ये बताऊँ । मैं उसे मजबूर कर दिया । उसने भरी आंखों से मुझे देखा और एक कहने से पहले गहरी सांस ली ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -06

हूँ । अगली सुबह डॉक्टर लाॅस का एक सा हैं । हमारे नाम भी लेने आ पहुंचा । आस्था ने अपने रक्त के नमूने बिना किसी संधि के दे दिए । मैंने उसे एक अपवाद के रूप में प्राथमिकता के आधार पर रिपोर्ट देने का अनुरोध किया । जाने से पहले उसने मुझसे पैम्पलेट सौंपते हुए सबसे महत्वपूर्ण निर्देश साझा किया । यदि कोई बडी बात निकलती है तो आपको लैब से कॉल आएगी । अच्छा कार्यालय जाने के लिए तैयार हो रही थी । मैंने उसके सेलफोन से कुछ नंबर कॉपी कर लिए थे । वो नहाने गई थी । उस दिन मैंने उसे कार्यालय छोडा । मैंने फैसला कर लिया था कि उसे और नौकरी नहीं करने दूंगा । लेकिन मैं उसे ठीक से समझा नहीं सका । मुझे उसे समझाने के लिए कुछ अच्छे कारण बताने चाहिए थे क्योंकि मेरा कॉलेज अगले एक महीने के लिए बंद हो चुका था । मेरी प्राथमिकता में केवल एक चीज थी । कॉलेज शुरू होने से पहले सब कुछ ठीक करना दोपहर एक बजे के लगभग में आराम कर रहा था । मुझे ऐसा हुआ कि इससे पहले की कुछ और हो । मेरे लिए पुष्टि करना आवश्यक था । कहीं मैं भी एचआईवी पॉजिटिव तो नहीं था । अभी मुझे एक अज्ञात लैंडलाइन नंबर से फोन आया । मैंने कौन बहुत है और प्रत्याशा से ली हो । रुपलाल पे क्लब से बोल रहे हैं क्या? मेरी बात मैंने उसके बाद बीच में ही कर दी और वहाँ से पूछा मैं विजय हूँ । रिपोर्ट तैयार हैं । परिणाम क्या है? मैंने ये सब बिजली की गति से कहा था । हर सेकंड के साथ मेरे दिल की धडकन तेज होती जा रही थी । आपकी अच्छाई की रिपोर्ट नेगेटिव है और दूसरी तरफ से महिला नहीं कर दिया । और शर्मा के बारे में क्या? मैंने पूछा उसने आहा भरी और खिडकी कुछ हनुमान हो गया कि उसके पास बताने के लिए अच्छी खबर नहीं थी । बताई अच्छा अभी एक घंटे में हमारी वेबसाइट्स रिपोर्ट डाउनलोड कर सकते हैं । रिपोर्ट में सभी विवरणों का उल्लेख किया गया है । बीस उत्तर देंगे उसके रिपोर्ट पॉजिटिव है । क्या नहीं हूँ उसको? उत्तरमें धीरे मुझे मार रही थी । श्रीमती आस्था शर्मा को एचआईवी के लिए बहुत ही पाया गया है । उनकी सीडी चार गिनती लगभग तीन सौ बीस सेंटीमीटर प्रति मिलीमीटर तीन है । मैंने कॉल करने वाली के साथ औपचारिकता निभाये । बिना फॅमिली ये जटिल स्थिति थी । मैंने अपनी आंखे बंद कर रही और आंसुओं के धारा निकालों से होकर बहने लगे । अपने जीवन में पहली बार मैं बहुत असहाय महसूस कर रहा था । मेरी पूरी जिंदगी मेरे सामने कौन गई, न कमरे के कोने में बैठ गया । उससे जितने लगा मैंने अपने लैपटॉप को बूत किया और अच्छे संबंध जानकारी खोज की शुरू कर दी । एक प्रतिवर्ती क्रिया के रूप में इन शब्दावलियों में मेरी उंगलियां दिखती है । दिल्ली में एनआईवीएच के लिए सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा मुझे ऍफ के पास अपने घर से लगभग एक किलोमीटर दूर डॉक्टर रजा, विभागाध्यक्ष आंतरिक टिकट साहब मैक्स हॉस्पिटल की जानकारी मिली । बीस मिनट बाद में उनसे मिलने के इंतजार मान के पक्ष के बाहर खडा रहा है । मैंने सबसे आखिर में मिलने के लिए उनकी सहायता से अनुरोध किया और इस तरह का असमान्य अनुरोध करने पर मुझे संदिग्ध निगाहों से देखने लगी । उसने कहा, हम इस तरह से काम नहीं करते सर । यदि आप अंत में उनसे परामर्श करना चाहते हैं तो आप हम तक इंतजार कर सकते हैं । वो यहाँ चार बजे तक ही रहेंगे । मैं उनसे परामर्श करने के लिए आखिरी वक्त चाहता था ताकि उन से बात करने का मुझे पूरा वक्त मिल सकेंगे । अनेक कम थे जिन्हें पूरा करना था । सबसे पहले मुझे रोक के बारे में अपने परिवार को अवगत कराना था । फिर मुझे उपयुक्त अस्पताल चुनना, उसके करियर को ठीक करना और सबसे महत्वपूर्ण उसे सब से अवगत कराना था । वो कैसी प्रतिक्रिया करेगी? मेरे माता पिता की कैसी प्रतिक्रिया होगी? विचारों के जाल से मेरी नसे चोट खा रही थी । मैंने पहले कभी किसी चीज के लिए इस तरह विस्तार से अपना दिमाग नहीं छोडा था । दो घंटे तक इंतजार करने के बाद आखिरकार मुझे डॉक्टर से मिलने का मौका मिला । थोडा फिल्म सर कमरे में घुसते ही मैंने उनका अभिवादन किया । कमरे के भीतर मैंने मन में एक विश्वास के साथ एक मध्यम आयु वर्ग के चश्मा हर व्यक्ति को पाया । थोडा गंजे उनका सफेद कूट संकेत दे रहा था कि वे वास्तव में वरिष्ठ डॉक्टर थे । वो अपनी डेस्क सहित रहे थे और मैं निश्चित रूप सामते मरीज था । जी रोगी का नाम आस्था है । उन्होंने मिल तरफ संधि से देखा और सही अनुमान लगाया कि मैं रोगी नहीं था वो यहाँ नहीं है । मैं उसका पति विजय है । वो ठीक है, मुझे बताओ । उन्होंने जल्दी ने कहा जैसे वो जितनी जल्दी हो सके आज का काम खत्म करना चाहते हो सर ये उसकी रिपोर्ट है । मैंने उनकी में इस पर रिपोर्ट रखते हुए कहा । उसकी रिपोर्ट के साथ मैंने उन्हें अपनी भी दिखाई । अच्छी बात है की रिपोर्ट देखने के दौरान डॉक्टर रोगी से बात नहीं करते हैं । मेरी बातों पर कोई भी ध्यान दिए बिना उन्होंने रिपोर्ट के कुछ पृष्ठों कोलिडा उनका ध्यान सी डी चार काउंट पर केंद्र था । रोक के बारे में आश्वस्त है । शांत रहे संकेत दे रहा है कि वो ऐसी रिपोर्ट पहली बार नहीं देख रहे थे । सर मैंने भावुक होते हुए कहा आज ही मुझे उसके बारे में पता चला । कंपनी हम उसका कोई कहीं इलाज उपलब्ध है । मुझे खेद है । उन्होंने संवेदनशीलता के साथ कहा मैं आपकी चिंता समझ सकता हूँ लेकिन अब तक चिकित्सा विज्ञान इसका इलाज नहीं हो पाया है । कई सालों के शोध के दौरान डॉक्टरों ने कई चीजें समझे हैं । उदाहरण के लिए हम एचआईवी की अवधि को एच में बदलने पर नियंत्रण कर सकते हैं । हम कुछ अतिरिक्त वर्षों की आशा और जीवन प्राप्त कर सकते हैं बशर्ते सभी आवश्यक दवाएं जल्द से जल्द शुरू कर दी जाए । क्या कहना चाहते हैं कि ये ठीक हो सकता है, पूरी तरह से नहीं । यदि सभी आवश्यक देखभाल के साथ मरीज की दवा उचित रूप से की जाती है तब होगी । कई वर्षों तक जीवित रह सकता है । ऍम हम इस की तय सीमा नहीं बता सकते हैं । समझे यादव एज होगी, इसके कारण नहीं मारते हैं । ये केवल उनकी प्रतिरक्षा को काम करता है । अन्य लोगों के लिए घर बनाता है जो घातक सिद्ध होते हैं । मामूली सर्दी से भी लड नहीं सकते लेकिन हम उस दर को नियंत्रित कर सकते हैं । इस पर एचआईवी एच में बदल जाता है डॉक्टर मुझे आपसे एक निजी अनुग्रह की आवश्यकता है । आशा है आप मेरी बात समझ रहे होंगे । उन्होंने सहमती में सहलाया । मेरी पत्नी को पता नहीं है कि वह एचआईवी पॉजिटिव है और मुझे उसे इसके बारे में बताने का साहस नहीं है । इस बारे में जिस क्षण उसे पता चलेगा उसके लिए दुनिया बदल जाएगी । उसका मुस्कुराता हुआ चेहरा तब और नहीं उस करायेगा । कमरे के होते हैं और मुझे डांटते हुए मैं चाहता हूँ की वो अपना शीर्ष समय उस करते हुए गुजारेंगे । मैं समझ सकता हूँ आपके लिए क्या कर सकता हूँ ऍम क्या मैं उसे रोक की जानकारी दिए बिना सभी सहायता, देखभाल और दवा की उम्मीद कर सकता हूँ । जी कैसे संभव हो सकता है? उन्होंने मुझे देख कर रहा है । बीमारी के लिए बहुत सावधानी और सतर्कता बरतने की आवश्यकता है । और केवल वही व्यक्ति स्वयं की बेहतर देखभाल कर सकता है जिसे जानकारी हो और जब यहाँ है तो उसे बताने की उम्मीद मुझसे की जानी चाहिए । मुझे उसका दूर से इलाज करने के लिए मस्त हूँ । मैं रोगी से मिले बिना उसका इलाज नहीं कर सकता हूँ । मैं उसे यहाँ नाम डॉक्टर लेकिन आपको केवल ये कहना होगा कि वो किसी और बीमारी से पीडित है जिसके लिए सभी आवश्यक देखभाल की जरूरत है । डॉक्टर थोडी देर के लिए सोचा कहा मेरा पेशा मुझे रोगियों को गुमराह करने की अनुमति नहीं देता । मैं जानकारी छिपा सकता हूँ लेकिन झूठ नहीं बोल सकता हूँ । वास्तव में मैं सुझाव दूंगा कि आप भी उनसे झूठ बोलने से बचे हैं । मैंने उनके शब्दों को आत्मसात कर लिया और मेरी आंखों के सामने उसका डबडबाई चेहरा कौन गया? एक पति अपनी पत्नी को बताना नहीं चाहता था कि उसका जीवन सीमित समय के विशेष था, बहादुर बनाओ । डॉक्टर मुझे समझाया और मुझे एक गिलास पानी की पेशकश की है । मैंने पानी को नजरंदाज किया और पूछा के दर्शन कहाँ था? उन्होंने मुझे रास्ता दिखाया । मौसम के अंदर में छुप चाहते हो गया क्योंकि पहली बार मैं डॉक्टर से कटु वास्तविकता का सामना कर रहा था तो मेरी मदद करने के लिए तैयार नहीं था । मैंने अपना चेहरा धोया, गला साफ किया, ऍम चेहरे को देखा और उसका सामना करने का फैसला किया । डॉक्टर जो कुछ घंटों पहले जल्दबाजी में था वो चिंतित और समायुक्त दिख रहा था । सुना विजय हमें काम कर सकते हैं । उन्होंने कहा, उसे बस बताऊँ कि वह ऍसे पीडित है और से संपूर्ण देखभाल की आवश्यकता है । कल मैं एक सम्मेलन के लिए रवाना हो जाऊंगा । तीन दिनों बाद होगा । मैं तीन दिनों के लिए विराट दवा लिखूंगा । उसे खिलाना और चौथे दिन से यहाँ गया । मैं अपनी देख रेख में यहाँ सभी आवश्यक परीक्षण करूंगा । तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि मैं उसे नहीं बताऊंगा कि वह एचआईवी से पीडित है । मैं स्टेशन पर एचआईवी से संबंधित कुछ भी लिखने से बच्चों का उनकी शब्दों ने मुझे अभिभूत कर दिया । बहुत बहुत धन्यवाद । डॉक्टर क्या प्रेस्क्रिप्शन में तीन महीने के बैड रेस्ट का सुझाव भी दे सकते हैं? मैं करूंगा । उन्होंने प्रसिद्ध हराया, उससे ज्यादा पानी पीने के लिए कहूँ । अगर वो कहीं काम कर रही है तो उस की नौकरी की प्रकृति तनावपूर्ण नहीं होनी चाहिए । किसी भी ऐसी चीज से बच्चे जिससे उसे किसी प्रकार का संक्रमण हो सकता है । आप समझ स्टार है तो उसके आने जाने के लिए इसका उपयोग शुरू करें । उसे भाई के सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से बचाएं । आपको उसके देखभाल एक बच्चे की तरह करनी है । बहुत बहुत धन्यवाद सर । उन्होंने बदले, मैं सर हराया और चलने के लिए उठ रहे शिक्षा करूँ । उन्होंने कहा, जब द्वार खोलने वाला ही था, उन्होंने गिलास पानी थी और ऐसा लगा कि जा रहे हैं । मुझे लगा कि वो भावुक थे । मैं एक दशक से अच्छाई भी रोगियों का इलाज कर रहा हूँ । लेकिन प्रभारी जैसी स्थिति में कोई भी मुझे नहीं मिला । फॅमिली संक्रमणरोधी मुझसे एक निश्चित पूर्वग्रह के साथ मिला है । वाम तौर पर संक्रमण के स्रोत के बारे में पूछते हैं । उनमें से कुछ है तो उससे पूछा कि हमारी सेक्स गतिविधियों में लगता था तो हमेशा लोगी के चरित्र के बारे में समझे करते हैं । वो नहीं जानते हैं कि सेक्स के अलावा इस संक्रमण के कई अन्य स्रोत हैं । लेकिन पहली बार मैंने तुम्हारे जैसे व्यक्ति से मुलाकात की । इस की चिंताएं पूरी तरह से अलग हैं । मैं आपकी बात की सराहना करता हूँ । डॉक्टर लेकिन केवल उत्सुकता वर्ष का संक्रमण के स्रोत की पहचान करने का मौका है, नहीं जाएगा । हम संभावित कारणों को जानते हैं जो संक्रमण का कारण बन सकते हैं लेकिन कोई भी सोच ही पहचान नहीं कर सकता है । मैंने सर हिलाया, चुप रहा । वो बदले में मुझे कुछ बोलने की उम्मीद कर रहे थे । लेकिन अपने वर्तमान स्थिति में मैं केवल मुस्कराने में सफल हो पाया था । उन्होंने अपना अंतिम आधिकारिक निर्देश दिया अपने पति का ख्याल रखना, उन्हें अच्छे पति हाँ, विजय और खानदान का इस्तेमाल करो । मैं शाम को लगभग पांच बजे घर लौटा और मेरे पास शांति सोचने के लिए एक घंटे से भी ज्यादा का समय था । मैं सोच रहा था कि डॉक्टर ने चलते चलते तो मुझे अच्छा पति कहा था । मैं स्वयं के बारे में इस तरह के शब्दों को सुनने का आदमी नहीं था । शायद मुझे सिद्ध करना है कि मैं वाकई एक अच्छा पति था । मुझे नहीं पता था की मैं क्या था । पिछले छह महीनों से आस्था को जानता था । छह महीने मेरे लिए एक व्यक्ति के रूप में उसे समझने के लिए पर्याप्त थे और यकीन था कि एक चौबीस वर्षीय महिला की निश्चित रूप से कुछ छुपी हुई इच्छाएं होनी चाहिए तो उसने अपने पति के साथ कभी साझा नहीं की थी । अपने पति के बाद इसके बहुत गरीब थी । उस से कह सकती थी तो जाहिर है केवल एक ही व्यक्ति का नाम मेरे मन में था । आस्था अक्सर उसके बारे में बात करती थी और मुझे उसका नंबर भी मालूम था । लेकिन क्या व्यवस्था को मेरी कॉल के बारे में नहीं बता देगी? क्या नाम से सच्ची पाऊंगा अगर उस की क्या प्रतिक्रिया होगी?

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -07

साल सरगम का कथन नमस्ते दोस्त हूँ । हालांकि मैं लेखक नहीं हूँ । मैं भी सबसे अच्छी दोस्त आस्था के लिए यहाँ हूँ । मुझे याद है तो उस दिन विजय ने मुझे फोन किया था । मेरे मोबाइल स्क्रीन पर उसका नाम चमकना अजीत था क्योंकि उसने मुझे पहले कभी कौन नहीं किया था । ऍसे उसके बारे में लगभग सब कुछ जानती थी लेकिन हमने कभी सीधे बातचीत नहीं की थी । उसकी स्कॉल का मतलब था कि कुछ गंभीर जरूर हुआ है और जिस तरह से उसने बात की थी मैं डर गई थी । उसने मुझे कुछ बहुत ही विचित्र सवाल पूछे । उसका मुझे आस्था की जहाँ और इच्छाओं के बारे में पूछा । मैं आश्चर्यचकित थी और उसका सवाल दाग दिया । विजय की खराब आदत है कि वह सब से बातें छुपाता है और मेरे जोर देने पर उसने मुझे सबसे बुरी खबर बताई । तेरे दोस्त एक दुर्लभ प्रकार के रख संक्रमण से पीडित थी और उसका जीवन सीमित समय के लिए शेष था । उसने मुझे रोक का नाम नहीं बताया था लेकिन ये सुनिश्चित था की वह बहुत गंभीर था । मैं उसके प्रश्नों की गंभीरता के बारे में पहले नहीं समझ सकी लेकिन इस सत्य को जानने के बाद में उनका उत्तर देने में असमर्थ थी और आस्था के बारे में सोचते हुए फोन काट दिया । हमें पांचवी कक्षा के बाद एक साथ अध्ययन किया था । आस्था का एक दारुण बचपन था जब सभी बच्चे अपने स्वादिष्ट पाँच का आनंद ले रहे होते थे । लंच के लिए उसका मैंने तय होता था । वो हमेशा या तो जैन के साथ ब्लॅक होते थे । उसमें अद्भुत क्षमता थी तो हमेशा स्कूल में दूसरे या तीसरे स्थान पर आती थी । मैंने उसे अपने टिफिन की पेशकश करके उससे दोस्ती करने का चाहौन पूछ कर प्रयास किया था । समय के साथ हम अच्छे दोस्त बने जो एक दूसरे के साथ सब कुछ साझा करते थे । हमारी कहानी फ्लॉप फिल्म की तरह थी । मैंने कार दुर्घटना में अपने माता पिता को खो दिया था और अपने मामा को एक उद्धारकर्ता के रूप में पाया और ये मुझे ले गए और मेरी देखभाल इस तरह की जैसे मैं उनकी अपनी बेटी थी । लेकिन परिवार ने एक अतिरिक्त सदस्य का मतलब उनके ऊपर अतिरिक्त भार था । जब आस्था से मिली, मुझे एहसास हुआ कि मेरी तुलना में उसका जीवन अधिक दारू था । सामान तरह की कहानियां वाले दो लोग हमेशा अच्छे दोस्त बनते हैं । उसने अपने लंच के निश्चित मैंने उसके बारे में मुझे अपनी कहानी बताई थी । उसकी एक सौ पहली माँ थी । उस की जैविक मां अकेली रहती थी और कभी कभी उसके पिता वहाँ आते थे । जब तक की आस्था पांचवी कक्षा में थी । इसके बाद माँ की मृत्यु हो गई । उसके पिता उसे एक नहीं जगह ले गए जहाँ से आपने नई माँ से अवांछनीय मुलाकात करने का मौका मिला । आठवीं कक्षा तक उसे पिता का प्यार मिला । एक दिनों से पता चला कि उसकी जैविक माँ का विवाह तो आगंतुक पिता से हुआ ही नहीं था और उसने महसूस किया कि वो एक नाजायज संतान है । आस्था प्रतिशोधी लडकी थी । अगर कोई सब होगा दे तो वो उस व्यक्ति को कभी भी माफ नहीं करेगी तो हमेशा अपने दुश्मन को पराजित करना चाहती थी और कभी नहीं चाहती थी कि कोई उसके साथ सहानुभूति दिखाएगा । हर साल उसकी छोटी बहन का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जाता है जबकि उसका जन्मदिन केवल हमारे बीच मनाया जाता था । उसने खुद से वादा किया कि वह दुनिया की सबसे अच्छी मां बनेगी । उस युग में इसके बारे में सोचना भी सपना था । लेकिन कभी कभी हमारा अहम हमारे आत्मविश्वास को बढावा देता है । हमारे कॉलेज के टॉपर डेनियल से प्रेम होने के बाद उसका जीवन इतना बुरा नहीं था । आस्था का एक समृद्ध और प्रसिद्ध व्यक्ति होने का सपना डेनियल के साथ से अच्छी तरह पूरा होने जा रहा था क्योंकि वो हमेशा आस्था को महंगे तोहफे देता था । यहाँ तक कि उसने उसके अंतिम वर्ष की कॉलेज फीस भी प्रायोजित की थी । उन दोनों ने सेंट स्टीफेंस कॉलेज से एक साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की । हालांकि मैं हमारी स्नातक स्तर की पढाई के दौरान उसके साथ नहीं थी फिर भी मैं करीब रही । हमारे घरों के आस पास होने के कारण हम हमेशा एक दूसरे के यहाँ आया जाया करती थी, पार्टी करती, मांसाहारी भोजन करती और शराब भी पीते हैं । आस्था थोडी मुद्दा दी तो हमेशा एक सेलिब्रिटी बनना चाहती थी और यहाँ तक कि एक सुपरस्टार से शादी करना चाहती थी । सलमान खान से विशेष रूप से वो पागलपन की हद तक उसकी प्रशंसक थे । हमेशा किसी पत्रिका के कवर पेज पर सलमान खान के साथ अपनी तस्वीर की कल्पना करते हैं । स्वीकार करने में अजीब है लेकिन मैंने भी ऐसा ही सपना देखा । पर शाहरुख खान के साथ सलमान और शाहरुख में श्रेष्ठ कौन? इस बात पर हमेशा हमारी लडाई होती है । वो एक मॉडल बनना चाहती थी और चाहती थी उसकी जिंदगी पर एक फिल्म बनाई जाए । वो एक मर्सिडीज के मालिक बनना चाहती थी । हमने हमेशा बडा सपना देखा । उसकी सौतेली माँ हमेशा पैसे को लेकर कंजूसी बरती थी । शायद उसके लिए अमीर बनने के सपने देखने का । यही कारण था होने के बाद जब आस्था ने एक बार अपने पिता से पैसे मांगे, उसकी माँ ने विरोध किया । आप ये समझने की कोशिश करेंगे कि हमारे ऊपर दो तरदायित् हैं और आप रिटायर होने जा रहे हैं । उसी दिन से आस्था ने फैसला किया कि अब वो अपने परिवार से एक भी पैसा नहीं मांगेगी । मेरी सबसे अच्छी दोस्त होने के बावजूद मैं हमेशा उसे एक घमंडी होने के कारण नफरत करती थी । ऐसी लडकी थी तो मदद मांगने की बजाय मारना पसंद करती थी । उसकी दंभपूर्ण प्रकृति को और उसका प्रेमी डेनियल नियंत्रित कर सकता था जो एक और आत्ममुग्ध आत्मा थी । स्नातक के बाद डेनियल आगे पढना चाहता था । उसने प्रवेश परीक्षा पास की और अच्छे नंबरों के चलते उसे सीमित संसाधनों के साथ अमेरिका में दो साल का कोर्स करने के लिए छात्रवृत्ति मिली हैं । अपने निर्धारित उडान से एक दिन पहले वो आस्था के साथ मेरे घर पहुंचा था तो कई बार हो गए और मुझे यकीन था उन्होंने हमेशा एक साथ रहने के लिए एक दूसरे से कसम खाई होगी । वास्तव में देखी थी कि वो अगले दिन जा रहा था । एक लडकी इसे घर में प्यार नहीं मिला, एक दोस्त के महत्व को समझती है और जब आपके पास केवल एक अकेला सबसे अच्छा दोस्त है, आपका बॉयफ्रेंड आपके जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण करती है । डेनियल ने अमेरिका के लिए उडान भरेगी और उसी बीच आस्था ने एक्सिस बैंक की पीओ परीक्षा पास कर ली । उसने अपनी सफलता का जश्न मनाया । जैसा की इसका मकसद था अपनी सौतेली माँ और सौतेली बहन को चढाना लेकिन खुशी और आस्था लंबे समय तक एक साथ नहीं रह सकते थे । एक दिन डेनियल ने आस्था से अपने पिता को व्यक्तिगत ऋण दिलाने के लिए अपनी मदद करने का अनुरोध किया जिसके माँ के इलाज के लिए दो लाख रुपए की राशि थी । क्योंकि डेनियल के पता आपने बीमार पत्नी के इलाज के साथ साथ विदेशी शिक्षा के खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन नहीं कमा रहे थे । उसी दिन डेनियल और आस्था के लिए जीवन बदल गया । मैं निश्चिंत नहीं हूँ कि डेनियल के साथ क्या गडबड हुई लेकिन डेनियल के पिता ने आस्था से मुलाकात की और डेनियल के साथ सभी रिश्ते तोडने का अनुरोध किया । उनके परिवार की कैथोलिक मान्यताएं और हिन्दू विरोधी मानसिकता उनके मेलन में सबसे बडी बाधा थी । उसके जीवन में खिला एकमात्र फूल उसकी आंखों के सामने से फिसल गया और वो इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते । अच्छा मेरे घर आई और अपना दुर्भाग्य पर पीने लगी । वोद्का के दो घूंट लेने के बाद अत्यधिक निराशा के क्षणों में आस्था ने डेनियल के साथ रिश्ता तोडने का मन बना लिया । उसके बाद मैंने आस्था से अपनी सारी इच्छाओं की एक सूची बनाने के लिए कहा था । वो दुनिया को छोडने से पहले पूरा करना चाहती थी । मैंने से सामने ठीक यही किया ऍफ चलते हैं । उस ने अपनी सूची को मुझे क्यों छुपाया? आस्था द्वारा मुझसे चीजों को छुपाना मेरे लिए अप्रत्याशित था । उसका केवल एक मतलब था की उस की सूची में कुछ तो गंभीर था । फिर विजय के परिवार से शादी का प्रस्ताव आया । आस्था की सौतेली माँ ने विजय की माँ के साथ काम किया था और वो अच्छी दोस्त थी । सबसे पहले आस्था ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया क्योंकि उसने लडके को बहुत सत और अंतर्मुखी पाया । कुछ दिनों के बाद आस्था के एकमात्र जीवित ऍम उसके पिता की मृत्यु मस्तिष्क के रक्तस्त्राव से हो गई । आस्था ने हर वो चीज खोदी जिसे उसने अपना मना उसे महसूस किया की विजय एक अच्छा इंसान था । एक पत्रकार, माँ और एक इंस्पेक्टर पिता ने उसे एक अच्छा इंसान बनाया तो एक उभरता हुआ पीसीएस उम्मीदवार भी था और डेनियल को सूचित किए बिना ही विवाह के लिए सहमत हो गई । इस बीच ऍम आस्था तक पहुंचने की लगातार कोशिश कर रहा था । आसाने अपना संपर्क नंबर बदल दिया था और अपने अतीत को भुला दिया था । शादी के बाद आस्था ने महसूस किया कि विजय एक विफल इंसान था तो श्रीराम काॅमर्स में अंग्रेजी का सहायक प्रोफेसर था तो केवल एक शिक्षक से शादी कर चुकी थी । एक गरीब शिक्षा उसने अपनी माँ के खिलाफ कभी भी एक शब्द नहीं बोला था जिन्हें आस्था से संबंधित हर चीज के साथ समस्याएं थी । व्यवस्था की स्वतंत्रता को छीनने की कोशिश कर रही थी और ऐसा कुछ था जो आस्था बर्दाश्त नहीं कर सकेंगे । अपनी शादी के पांच महीने बाद दोनों ने अंततः घर छोडने का फैसला किया । आस्था मेरे साथ जश्न मनाना चाहती थी और उसके लिए हर उत्सव वोडका का एक पर्याय था । हालांकि विजय पानी कमियाँ थी । उसके बारे में सबसे अच्छी बात ये थी कि वह आस्था को अपने दिल की गहराई से प्यार करता था तो छोटी चीजों के बारे में चिल्लाती थी और वास्तविकता के साथ समायोजन करना शुरू कर दिया था । ऐसा कुछ तो मेरी आस्था की तरह नहीं था । विवाह हमेशा लोगों को बदलता है और आस्था बदलने लगी थी ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -08

मैं ऍम जब मैंने सरगम से बात कर ली तो मैं अपनी प्रिया को उसके दफ्तर से लेने के लिए चल पडा । मेरे लिए यह एक असामान्य बात भी क्योंकि हमारे कार्यालय का समय लगभग हमेशा भेड जाता था । इसी कारण मैंने उसे कभी नहीं लिया था । लेकिन जैसा कि डॉक्टर ने सुझाव दिया मैं उसे आराम देना चाहता था । घर लौटते वक्त मैंने उसके बहुत के बारे में पूछताछ के तो कॅाल माथुर अभी भी कार्यालय में है । कब माथुर बैंक में मान जाएगा, उसमें हताशा में उत्तर दिया । उसके पास जीवन में करने के लिए कुछ भी नहीं है । मैं उसे घर पर छोड दिया और झूठ बोला । मैं एक घंटे में रहता हूँ । मुझे बीमा कार्यालय जाना है । उन्होंने मुझे अपनी पॉलिसी और स्वास्थ्य रिपोर्टों के बारे में चर्चा करने के लिए कहा है कि आज की रिपोर्टों के लिए जिसके लिए हमने आज आपने नमूने दिए थे । उसने पूछा मैंने सिर्फ खिलाया और चला गया । मैं बैंक के ठीक सामने फॅस था । मैं एक भीड भरे बाजार के बीचोंबीच था और दिल्ली में शाम को सात बजे का समय जब पार्किंग स्थल की तुलना में एटीएम का पता लगाना आसान होता है । एटीएम गार्ड ने ये कहते हुए मेरा रास्ता रोका । सर बैंक बंद है और आप अंदर नहीं जा सकते हैं । मैं मिश्र मुकुल से मिलने के लिए आया है । कृपया उन्हें सूचित करों की आस्था शर्मा के पति उनसे बात करना चाहते हैं तो अब साफ के रिश्तेदार हैं । मुझे लगा कि आप ग्राहक हैं । आपको रोकने के लिए जमा करें । आप अंदर जा सकते हैं । मुझे यकीन था की आस्था के सामने व्यक्तित्व को कोई भी नजर अंदाज नहीं कर सकता था । कार्ड भी नहीं । बैंक में सन्नाटा था । मैंने दालान के कोने पर केबिन को खोजने के लिए अपनी गर्दन घुमाया । यही शैतान को होना चाहिए । मैंने सोचा मैं नौकरी के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से प्रभावित था । उसके केबिन के दरवाजे खुले थे और मैंने के दिन के अंदर झांका । हमारी आंखें एक पल के लिए मिली और उसमें अरुचिकर तरीके से प्रतिक्रिया व्यक्त की । वो जल्दी से मेज के नीचे को छुपाने लगा । क्या मैं अंदर सकता हूँ सर । मैंने अनुरोध किया बैंक बंद हो चुका है । अब अंदर कैसे आए सर मैं विजय शर्मा । आस्था का पति मैंने केबिन के दरवाजे से उत्तर दिया । वो पीस आई । उन्होंने राहत की सांस लेते हुए कहा बहुत अच्छा साहब, आज आपने रोज के समय के मुताबिक ऑफिस से जा चुकी है । क्या वो अभी तक नहीं पहुंची है? सर मैं मैं आपसे ही मिलने आया हूँ । आस्था घर पर है हो, ठीक है, क्या लेना चाहिए चाहे या फिर कॉफी, उसके शब्द आस्था द्वारा उन्हें अमानवीय बताने का खानदान कर रहे थे । आपको मेरे साथ इतना औपचारिक नहीं होना चाहिए सर फिर मुझे मुकुल पुकारेंगे क्या पीते हैं? उन्होंने मजाकिया ढंग से पूछा जी नहीं, मैंने उत्तर दिया अच्छा टेबल पर एक ग्लास और कुछ स्नैक्स । और अंत में रॉयल स्टैग की आधी भरी बोतल रखकर उन्होंने कहा, मुझे पारदर्शी चार इंच गिलास की पेशकश की गई । सर, मैं नहीं पीता । मैंने अपनी बात दोहराई क्योंकि स्पष्ट था कि वो मेरे मना करने को समझ नहीं पाए थे । किसी भी चलते है । उन्होंने पेप्सी जैसा डालते हुए कहा, मैं अकेले पीने से तंग आ चुका हूँ । धन्यवाद सर, मैं आप की प्रतिबद्धता को सलाम करता हूँ क्योंकि आप ऑफिस के समय के बाद भी काम कर रहे हैं । हर पेशेवर को आप से सीखना चाहिए । मैं अपने हाथ उस काला में आजमा रहा था तो मेरी दुश्मन थी । मक्खनबाजी की खिलाफ मुझे मुकुल बोलिये । प्लीज उन्होंने सेकंड में अपना क्लास खाली करते हुए कहा, दरअसल में रुकने का कारण व्यक्तिगत है । मैं यहाँ इसलिए रुकता हूँ क्योंकि मुझे घर पर रहने से खुशी नहीं मिलती है । मेरी एक दारुण जिंदगी है । लोग सोचते हैं कि मैं बहुत कम करता हूँ, जबकि वास्तव में मैं केवल अपने दैनिक झमेलों से भाग रहा हूँ । ये मेरे लिए अविश्वसनीय था कि एक व्यक्ति मुझे अपने परिवार के मुद्दों के बारे में इतना मुखर बोल रहा था । मैं भ्रमित था । क्या वही व्यवस्था जिसमें मेरी प्रिया का जीवन हर दिन दूभर बना दिया था? या क्या रॉयल स्टैग के प्रभाव में उसके इन्द्रियाँ उसके नियंत्रण में नहीं थी? मैं आसानी से उसकी झपक यहाँ के और छठ खुशी देख सकता था । मैंने अनुमान लगाया कि उन्हें आंतरिक शांति मिल गई थी । ये जानकर दुख हुआ । मैंने अपने पे का एक घूंट लेते हुए कहा, ठीक है, मुझे हमेशा आश्चर्य होता है कि हमारे जैसे लोग शादी क्यों करते हैं । उन्होंने कहा, इसका सबसे अच्छा ऐसा ही है कि हम अपने पूरे जीवन को साझा करने के लिए प्यार करने वाला व्यक्ति प्राप्त करते हैं । मैंने कहा और उस कराया प्रेम और व्यवहार कभी हाथो नहीं हो सकते हैं और मुझे बहुत खेद है । मुख्य विषय से बहस रहा हूँ । अब यहाँ किस लिए आएगा । समझा की मदद की जरूरत है और मुझे यकीन है कि आप सत्य, समझदार, अच्छे हैं । आप निश्चित रूप से मेरी मदद करेंगे । मैंने मुद्दे पर आने से पहले थोडी और मक्खनबाजी की मेरी बातों से उनकी भृकुटी तनी । लेकिन उन्होंने एक और पैट बनाते हुए कहा, आराम से कहीं सर आस्था की प्रोन्नति सोमवार को होने हैं । उस बारे में चिंता मत कीजिए । मैंने पहले ही उसकी फाइल को स्वीकृति दे दी है और वो जल्दी ही इस बैंक की स्थायी कर्मचारी हो जाएगी । वो बेकाबू लग रहे थे । अगर मैंने सौ करोड रुपए के ऋण के लिए कहा तो मुझे यकीन है कि वह बिना विचार किए उसे स्वीकृत कर देंगे । ऍफ की खूबसूरती थी । कौन सी शाही व्यवहार करा रही थी? सर, मेरी चिंता का कारण बिल्कुल यही है । हमारे डॉक्टर सुझाव दिया है कि उसे पूरी तरह बैड रेस्ट की जरूरत है क्योंकि वह घातक बीमारी से पीडित है । जो आपकी कहने से पहले मैंने विलाप किया । मेरे लिए बोलना बेहद मुश्किल था । किसी तरह कहाँ पाया, उसके पास जीने के लिए कुछ महीने ही बचे हैं । क्या क्या गंभीर हैं । उन्होंने एक और पैक बनाते हुए कौतुहल के साथ पूछा । कमरे में छुट्टी थी, समय तोड दिया । साथ रोग की गंभीरता से अवगत नहीं है । अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति में मैं उसे नौकरी छोडने के लिए मना नहीं कर सकता । मैं उसे देखभाल करना चाहता हूँ और से किसी भी अनावश्यक संक्रमण का शिकार होने से बचाना चाहता हूँ । मैं चाहता हूँ कि आप उसकी परीक्षा के बाद उस की सेवाएं समाप्त कर रहे हैं क्योंकि आपको किसी को भी इसका औचित्य नहीं बताना पडेगा । कुछ सेकंड के लिए सोचते हुए उन्होंने खून लिया । गुजरे बोले, अगर मैं बिना वैध कारण बताया उस की सेवाएं समाप्त कर देता हूँ तो उसका आत्मविश्वास टूट जाएगा । इसके अतिरिक्त ये एच आर नीति के खिलाफ भी है । मुझे डर है कि मैं ये नहीं कर सकता । मेरे पास निश्चित रूप से ऐसा करने का एक वैध कारण होना चाहिए । इसके अतिरिक्त आपके कथन के पक्ष में सबूत क्या है? अच्छा सर उसे हर हाल में अपना काम छोडना पडेगा । यदि आप मेरी मदद नहीं करते तो मैं उसे सच बताने को बाद देखूंगा की नौकरी समाप्त होने की तुलना में उसके लिए अधिक पीडादायी होगा । ये कहकर मैंने उन्हें डॉक्टर का पर्चा दिखाया जिस पर उन्होंने अर्द्धचेतन स्थिति में एक नजर डाली तो तीन महीने के बैड रेस्ट वाली बात को समझने में कामयाब रहे । मैंने बीमा पॉलिसी और मेडिकल टेस्ट की अपनी फर्जी कहानी सुनाई । इसके अंत में मैंने अंततः हूँ सच्चाई को छोडा । मुकुल सर मैंने कहा जब हो जाने की की वह गंभीर बीमारी से पीडित है तो वह एक खुशमिजाज अलर्ट आस्था नहीं रह जाएगी । आप सब कुछ छुपाना चाहते हैं और उसके शेष समय के लिए खुश रखना चाहते हैं ना मैंने सर हिलाया, किस तरह से प्रत्येक पैक के साथ उनका मस्तिष्क तेजी से काम कर रहा था । मैं उस से बेहद प्रभावित था । विजय मैं आपको आस्था के बारे में कुछ बताता है । आपको पिछले दो सालों से यहाँ काम कर रही है । वो अपने समय के साथ नियमित रही है । लेकिन अपने विवाह के बाद वो लगभग पांच बजे चली जाती थी और उससे अक्सर मुझे परेशानी होती थी । लेकिन पिछले कुछ दिनों से वह फिर रुक रही थी । मैंने उसकी सहयोगी उसके कार्यक्रम के इस बदलाव के बारे में पूछताछ की की पता चला की वो कार्यालय में रुकना चाहती है क्योंकि आप अपने कॉलेज टूर के लिए बाहर गए हुए थे । मैंने हमेशा शाम को नहीं रोकने के लिए उसे दोषी ठहराया और महसूस किया कि वह एक विनाशकारी पेशेवर थी । हालांकि मेरा मानना है कि जहाँ तक उसके व्यक्तिगत जीवन की बात है वो बहुत भाग्यशाली महिला है । आपके उदार विचारों के लिए धन्यवाद सर, मैंने विलाप किया था तो क्या मैं आश्वस्त हो जाऊँ की आप से हटा देंगे । पहले मैं चार से बात कर लूँ । अब बहुत अच्छे व्यक्ति हैं । आप एक साथ बहुत हो सकते हैं लेकिन मुझे पता है कि आप दिल से एक अच्छा इंसान है । मेरा मानना है कि आप ऑफिस में समय बिताने और अलग थलग पीने के बजाय अपने परिवार के साथ कुछ अधिक समय बिताना चाहिए । इस तरह आप अपनी शराब के सेवन को नियंत्रित करने में सक्षम होंगे । मुझे नहीं पता कि मैं कैसे या क्यों दर्शन ज्ञान दे रहा था । अच्छा मेरे दिल से सीधे आ रहे थे, आने वाला है । उन्होंने कहा, किराया लेकिन आप किसी जानते हैं कि मैं दिल से एक अच्छा इंसान हूँ । आपने उदासी से मुस्कुरा बिहार कहा क्योंकि आप उसे सेवामुक्त करने जा रहे हैं ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -09

है ना? उसके कार्यालय से लौटने के बाद मैंने राहत की उच्छवास ली । उस रात बिस्तर पर मैं सोच रहा था कि नवविवाहित जोडे ने अक्सर सोने से पहले गुणवत्तापूर्ण समय बिता, दो कारणों में से एक के लिए अधिकतर समय कडा, परेशान, क्या बात करना, दुर्भाग्य सहित मैं अपनी पत्नी के साथ खडा परिश्रम नहीं कर सकता । इसके बाद करना मजबूरी थी । अभ्यास था । मैंने उसे लंदन में लेते हुए कहा मैं तुम्हारे साथ कुछ चर्चा करना चाहता हूँ । उसका सिर्फ मेरे बाएं हाथ पैर टिका हुआ था । बाल ऍम द्वारा बंधे हुए थे और एक नाइट पाल रात के शो की प्रतीक्षा में था । चर्चा और तुम? क्या तुम ठीक हो? डियर उत्तर देने के बजाय उसे घुटने लगा । उस बात की गंभीरता महसूस कर ली थी । हम इतना परेशान कर देखते हो । मैं उसके बालों को सहलाया । कहा क्या तुम्हें याद है हमें आज सुबह अपने रख की पूरी जांच के लिए नमूने दिए थे । बेशक मैं कैसे भूल सकती हूँ कि कुछ कम वक्त नहीं । आज सुबह मेरा खून चूसा तो क्या हुआ की चिंता करने वाली कोई बात है? अपना अनुमान लगाने लगी । मैं चुका पांच की मैच सकते पर उठाया डेयर मैंने भरी दिल से कहा, बीमा कंपनी ने तो बडी बीमारी के आधार पर तुम्हारा बीमा करने से इंकार कर दिया है । ये कहकर मैंने डॉक्टर के पर्चे के साथ वो कागज उसे सौंप दिया । में बातचीत बढाना नहीं चाहता था क्योंकि मुझे पता था कि लंबे समय तक बातचीत में सच्चाई बाहर आने की संभावना ज्यादा थी । क्या बीमारी है? उसने प्रशिक्षण पडा और तीन महीने पूरी तरह ऍम हूँ । मेरे साथ मजाक कर रही हूँ । कैसी कारण? तुम शाम को देर से घर लौटे । उसने स्तंभित होकर पूछा, कुछ भी नहीं दिया । तुम्हारा लीवर संक्रमित हो गया है और तुम तीन महीने की कम्पलीट बेडरेस्ट की जरूरत है । डॉक्टर के अनुसार की सिर्फ एक सामान्य सूजन है । मेरी परिविक्षा सोमवार को होने वाली है । मेरा मैनेजर मेडिकल के आधार पर भी तीन महीने की लंबी छुट्टी को मंजूर नहीं करेगा । हम ने मेरे लिए इंतजार क्यों नहीं किया है तो अपने आप डॉक्टर के पास क्यों चले गए? मैं डॉक्टर के पास अपनी दवा के बारे में परामर्श करने के लिए गया था । जब मैं वहाँ से निकलने वाला था तब मुझे अपनी रिपोर्ट के बारे में लैब से फोन आया और मैं डॉक्टर से तुम्हारी रिपोर्ट के बारे में भी पूछने से रोक नहीं पाया । चिंता मत कर दिया । अब आ चुका है तो अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दो और आराम करने तक जो कुछ भी तुम हमेशा करना चाहती थी, उसके बारे में सोचो । इसके अतिरिक्त डॉक्टर ने तुम्हारे लिए कहा है कि तुम परिश्रम मत करो । फॅमिली । पिछले कुछ दिनों से मैं हर समय उल्टी जैसा महसूस कर रही हूँ । उसने तर्क दिया, उसने फिर से अपने ही प्रश्न का उत्तर दिया । इसलिए मैं चुप रहा और वह बोलती गई ऐसे क्या तुम्हारी रिपोर्ट सामान्य है हूँ? मेरी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण कुछ नहीं आया है । सिर्फ एक मूत्र संक्रमण है और डॉक्टर ने सुझाव दिया है कि मैं एक से बच्चों और ऐसा करते समय सुरक्षा का ध्यान रख हूँ वरना तो हारे संक्रमित होने की भी संभावना है । मेरी डरावने स्पष्टीकरण से वास्तव में दुखी लग रही थी । उसकी मनोदशा को हल्का करने की कोशिश में मैंने कहा कि बहुत अच्छा हुआ कि समय से सब पता चल गया । लेकिन हमें इस बात का ध्यान रखना होगा । पीसदी इलाज या देखभाल अच्छी तरह से नहीं की गई तो स्थिति खराब हो सकती है । डॉक्टर तीन दिनों के बाद परीक्षणों की एक श्रृंखला आयोजित करेंगे । सब कोई बाहरी भोजन नहीं, कोई शराब नहीं, कोई कार्यालय नहीं और बहुत सारा आ रहा हूँ । उसके गाल को दवा और पूछा हो गया है, वास्तव में जीत है क्या बकवास हो रहा है? लगभग चिल्लाई, मेरा लीवर संक्रमित है, मेरी नौकरी दांव पर है और इस धरती पर हम कैसे अपने अस्तित्व और सारे उपचार के लिए पैसे का प्रबंधन करेंगे और उसने हमारी है और क्या हम बाहर भी नहीं जा सकते हैं? क्या तुम्हारी गोवा यात्रा से इसका कुछ लेना देना है? तो निराशा में तेज आवाज में बोली मैं सबको संभालूंगा नहीं, बस मुझ पर विश्वास करूँ अपनी जिंदगी ने पहली बार मैंने किसी को बेहद आत्मविश्वास से समझाने की कोशिश की । अब इसका मतलब क्या है? उस निराशा उत्तर दिया । मैं जोर से बोला मैं ऍम का इस्तेमाल कर सकता हूँ । अगले दिन रविवार था । मैं पापा के साथ बात करना चाहता था । मैं घर से बाहर निकला और सीधे अपनी सोसाइटी के उद्यान में चला गया । कुछ लोग पांच द्वारा घिरे छोटे से क्षेत्र को पांच कहते हैं । अच्छा अगर लोग इससे पार कहते हैं तो मैं अपने फ्रेंड को हवेली कह सकता हूँ । नेपाल के कोने में बैठ गया । अपनी आंखें बंद कर ली और कुछ किया तो केवल एक असहाय बेटा कर सकता था । रोना मैंने तो अपने परिवार की मदद कर सकता था । नहीं, अपनी पत्नी को बचा सकता था । मैं अगले कुछ मिनट तक सुबह का रहा । मैंने डेट को फोन किया और सामान्य औपचारिक बातचीत के बाद उन्होंने पूछा, अच्छा कैसी है? उठी है मतलब घर आएगी । मैंने जो बोला उन्हें यहाँ अगले महीने होना चाहिए । ऍम रही हूँ, पापा हूँ । मैंने भरी आंखों से कहा है मैं एक कार खरीदना चाहता हूँ । कितने की बेटा? एक संघर्षरत शिक्षक होने के नाते कार खरीदना मेरी वित्तीय क्षमताओं से बाहर था । मैंने अपने आंसुओं का औचित्य अच्छी तरह से किया था । एक पुत्र की कार खरीदने में असमर्थता और बत्तीस वर्ष की उम्र में अपने पिता से पैसे मांगना । तुम इतने हताश कहो । विजय एक बेटे का अपने पिता से पैसे मांगने के लिए बिल्कुल ठीक अवसर है । पापा इस उम्र में आदर्श रूप से बेटे को अपने माता पिता हो । ऐसी चीजों को उपहार देना चाहिए । लेकिन मैंने सिसकियां लेते हुए आप करेंगे । मैं वास्तव में असामान्य व्यक्ति है । मेरा गला रुंध गया था । जय इससे बहुत सोचो । आज के समय में कहा कोई विलासिता नहीं है । एक आवश्यकता है दिल्ली की सडकें बाइकर्स के लिए सुरक्षित नहीं है । बस मुझे बताओ में कितनी राशि ट्रांसफर कर दूँ । कम से कम ढाई लाख कल तक ही तुम्हारे खाते में होगा । आप आप कभी भी जांच नहीं करते हैं कि मैं आपके लिए पैसे कैसे खर्च करता हूँ । मैंने आंशिक रूप से राहत और आंशिक रूप से आश्चर्यचकित महसूस करते हुए कहा, बेटा, इस उम्र में अधिकांश प्रकाश सोचते हैं कि उनके बेटे का कोई चक्कर होगा । शराबी डिस्कोथैक में पैसा उडाता होगा ना । इन सब से बहुत दूर हूँ क्योंकि मेरी ऐसी पूछ चिंता नहीं है । मैं अपने बेटे पर भरोसा करता हूँ और विश्वास करता हूँ कि तुम शुद्र कारणों से पैसे नहीं मामलों गई । हाँ, वास्तव में एक असामान्य बेटे हो । उन्होंने भावुक होते हुए कहा, हाँ मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ । अभी तुम से बहुत प्यार करता हूँ । ऍम अपने पिता से कभी कुछ मत छुपाना । आप किसी जानते हैं कि नाक से कुछ आ रहा हूँ । मैं आश्चर्यचकित था । मैं तुम्हारा पैसा हो जाएगा । जब तक तुम्हें लगता है कि ये सही काम है तब तक मैं तो मैं कुछ प्रकट करने के लिए मजबूर नहीं करूँगा । हमेशा याद रखना किसी के साथ रोना अकेले रूनी से बेहतर है । हम आपकी बात समझता हूँ लेकिन लेकिन क्या आप के पास इतना पैसा है? मैंने झिझकते पूछा तो मेरे पिता ने मेरे साथ वित्तीय मामलों पर कभी चर्चा नहीं की थी । तुम जानते हो ना हो की सेवानिवृत्ति का सबसे अच्छा अच्छा क्या है? क्या भविष्यनिधि

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -10

डाॅ । मैं घर जाने वाला ही था कि जब मुझे कॉल मिली और इससे मुझे जीवन में उद्देश्य दिया तो मैंने कहा विजय सरगम आस्था कैसी है? ऍम वो अच्छी है मुझे क्या? वो आस पास है नहीं तो क्या बेज्जत बात करुँ । विजय तो तुमने मुझे उसकी इच्छाओं के बारे में पूछा था तो मैं ज्यादा बोलने में असमर्थ थी । लेकिन मुझे घटना याद आ रही है जब मैं बैंगलौर स्थानांतरित होने की योजना बना रही थी । मैंने उससे उचित सवाल पूछा था आपने मरने से पहले तुम जो दस चीजें करना चाहोगी तो क्या थीं? हमें कौन? तो उनसे पूछा असल मुझे कुछ लिखा था लेकिन मुझे दिखाया नहीं था । मैं निश्चिंत रहीं हूँ । उसने क्या लिखा था? लेकिन मुझे यकीन है कि वह कुछ बहुत गंभीर और अर्थपूर्ण था नहीं तो वह उसे मुझे दिखाती । आस्था की लिख कर रखने की आदत नहीं है । मैं सोच रहा था कि कहाँ वो चाय लिखी हो सकती हैं । ठीक है, हो सकता है उसके पास कोई डायरी हो, कौन जा रहे हैं आखिरकार हमारे रिश्ते केवल छह महीने ही तो पूरा नहीं थे । मैं तुरंत अपने वापस घर लौटा । जानते हुए कि मैं भी डायरी नहीं खोज सकता था । क्योंकि आस्था घर पर थी । जैसे ही मैंने कदम रखा आस्था ने अपना सवाल दादा उनकी उतने कोई कोई से हो तुम रोहिंग्या मैं ऐसे खरीदने के लिए नहीं जा रही हूँ क्योंकि तुमने आंखों को भी संक्रमित कर लिया है । मेरे दिमाग में भी उसकी डायरी की बात ही घूम रही थी और मैं भूल गया था । मेरी आंखें लाल थी और आंसुओं से भरी हुई थी । मैंने उसके कपोलों को दोनों हाथों से लिया और कहा अनुमान लगाना बंद करो मेरी अभूत पत्नी मेरी आंखें खुजला रही थी पिछले मैंने उन्हें जोर से मुस्लिम दिया था । ऍम सच बोल रही हूँ, देश मैं करूंगा । वो कुछ कहने वाली थी लेकिन मैं उसके पास कार्ड मेरे पास अच्छी खबर है और आखिर ता जल्दी से बताओ मैं खराब खबरे सुनकर थक गयी हूँ । मुझे सहायक प्रोफेसर से एसोशिएट प्रोफेसर पदोन्नत किया गया है । मैंने झूठ बोला । सच उसने कहा और मुझे चूमा । बधाई मास्टर जी । मैंने ईश्वर को धन्यवाद दिया कि उसे शक नहीं हुआ कि मुझे कैसे रविवार को पदोन्नति की कौन आ गई और तुम्हारे लिए और अच्छी खबर आने वाली है । एकाउंट्स वाह वो क्या है? कोई जोरदार प्रस्ताव? उसने कहा और हंसने लगे । उसने मुझे आलिंगन में लिया और कहा मुझे लगता हैं खास दिन है । अब से हर दिन खास होगा तो आप विश्वास ठीक है । मुझे अच्छी खबर बताओ हम एक कार खरीद रहे हैं । एक हाँ तो ढेर सारा प्यार उच्च लाये क्योंकि इसमें मुझ पर चुंबनों की बौछार कर दी थी । मैंने चुंबनों की बारिश की तरह महसूस किया । खुश थी । उसके मुस्कुराते चेहरे ने मुझे भावुक कर दिया था । उसे देख कर मैं संतुष्ट था । जीवन के प्रति मेरा दृष्टिकोण बदल गया था । क्या हो जाएगा? मेरी उदासी महसूस करते हुए उसने पूछा तो मैं हमेशा एक बडी कार खरीदना चाहता था लेकिन हम शायद छोटी खरीद सकें । हम कुछ पैसे बचा सकते हैं और बाद में एक बडी कार खरीद सकते हैं । उससे सुझाव दिया तो हम निश्चित रूप से ऐसा कर सकते हैं । लेकिन डॉक्टर के निर्देश के अनुसार तो तुम्हारे लिए सार्वजनिक परिवहन या दो पहिया से यात्रा करना सुरक्षित है । इसलिए हमें अभी फैसला करना है । मैं पूरी तरह से नैनो के साथ ठीक हूँ, वास्तव नहीं । हाँ, तुम्हें पता है मैंने हमेशा अपने पास मर्सिडीज होने का सपना देखा । केवल ये महसूस करने के लिए की हर कार लग्जरी कार की तरह है । अगर आपके बगल में आपकी जिंदगी का सबसे अच्छा इंसान बैठा हो । उसने मेरी थोडी हाथ में ली और बोलना चाहिए रखा । विजय मैंने हमेशा मर्सिडीज में अकेले बैठने की तुलना में नैनो में अपने पति के साथ बैठने बचना है । हमें क्रीम रन की एक टाटा नैनो बुक की और उसकी डिलीवरी अगले दो दिनों में निर्धारित की गई थी । तो सोमवार था शायद काम पर उसका आखिरी दिन मैंने आस्था को बैंक छोडा । चलने को थी । मैंने कहा पास्ता कॅश नीरज नौकरी को छोड दो बाॅलिंग उसने ऐसे देखते हुए कहा जैसे कह रही हूँ कि दफा हो जाओ ॅ और बैंक के भीतर चली गई । मैं घर वापस लौटा, उसकी डायरी ढूँढने लगा । आधे घंटे तक उसके सभी समानों को खंगालने के बाद अंतत था एक लाइन डायरी मेरे हाथ लगी । एक सेकंड भी बर्बाद किए बिना मैंने से खोला । एक पेज पर डेनियल के पता की खाते का विवरण था कुछ लेनदेन के ब्यौरे, कुछ मोबाइल नंबर, उसके सारे सोशल नेटवर्किंग अकाउंट्स के लिए सभी पासवर्ड आदि । उनमें से एक उसके दोस्तों में से डेनियल के लिए था । डेनियल मुझे खेद है कि मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती । पर यकीन है कि एक दिन तो मुझे समझने की मन स्थिति में हो गए तो अवश्य सोच रहे हो गई कि मैं एक औरत तुम्हारा पीछा कर रही हूँ । ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वहाँ के पूरा करने से पहले ही वो टूट गई थी । क्या लिखते समय वो अवश्य नशे में रही होगी? वैसे भी उपयुक्त पंक्तियों के ठीक नीचे वो महत्वपूर्ण भाग था । इस की मुझे शुरू से तलाश हैं । मरने से पहले साठ इच्छाएं एक । एक अच्छी मां बोलों तो डेनियल से माफी मांगों तीन । या तो एक हीरो या एक सेलिब्रिटी से शादी करूँगा । चार । दो हजार से अधिक मेहमानों के साथ एक भव्य जन्मदिन पार्टी की मेजबानी करूँ । पांच । पचास लाख या फिर एक करोड का बैंक बैलेंस हूँ । जो भी संभव हो । छह । कौशिक पत्रिका के आवरण पृष्ठ पर छपे साहब बेबी ये क्रूर मजाक की तरह महसूस हुआ । मुझे आश्चर्य था कि क्या स्टेशन की थी या वास्तव में उस लडकी की चाय थी । ये समय प्यार करता था । एक विकट स्थिति थी । मैं खुद से बात कर रहा था । लोग करते हैं । जब तनावग्रस्त होते हैं डेनियल कौन है और आस्था क्यों से क्षमा मांगना चाहती है । मैं धरती पर उसके सपनों को कैसा पूरा करने जा रहा था? हम तो फॅमिली नहीं कर सके आपको कभी माँ कैसे बनेगी? एक हीरो से शादी दोस्तों में अपने हीरो हूँ ये तो पता नहीं लेकिन आस्था ने निश्चित रूप से शुरू से शादी की है । हो जाती है कि दो हजार लोग उसके जन्मदिन पर उसे बधाई दें तो किससे झूठ बोल रही है । कैसे एक व्यक्ति अपनी पत्नी की देखभाल करने में असमर्थ है तो दो हजार मेहमानों के लिए एक भव्य पार्टी की मेजबानी करेगा । करोडपति बनना । आस्था ने निश्चित रूप से हालत व्यक्ति से शादी कर ली । एक पत्रिका का कवर पृष्ठ होना तो एक मॉर्डल है नहीं । एक सेलिब्रिटी पत्रिका उसकी तस्वीर टू प्रकाशित करेगी और इस धरती पर भी नहीं किया है । क्या उसका मतलब ब्लॉकबस्टर बॉलीवुड फिल्म है या ब्लैकबेरी? मैंने अपने विकल्पों पर गौर किया और हाथ खडे कर दिए तो फर्श पर बैठ गया और मेरी आंखों से आंसू बहने लगे । मैं एक बार फिर असहाय महसूस कर रहा था । फिर मैंने उसपे इसको उसकी डायरी से भाग लिया । सात और अच्छाई के बीच मैंने लिखा और संभाव अब ये पढा जा रहा था । मरने से पहले साठ असंभव इच्छाएं

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -11

जा रहा हूँ । मैंने अपने घर से बाहर कदम रखा । सब कुछ ऐसा ही लग रहा था । सबको जल्दी पडी थी । मौसम हमेशा की तरह गर्म और आर्द्र था । आवांछित आत्माओं के साथ सडकों पर भीड थी । कुछ भी नहीं बदला था । लेकिन मुझे लगा कि दुनिया अब मेरे लिए अलग थी । मैंने अपनी बाइक स्टार्ट की और अपना पिता से मिलने नोएडा की तरफ चल दिया । मुझे नहीं पता था कि मेरे पिता मेरी मदद कैसे कर पाएंगे और मैं उनके साथ क्या चर्चा करूंगा । लेकिन मेरी स्थिति में सबसे अच्छे व्यक्ति थे जिनसे मैं सलाह दे सकता था । मेरे दिमाग में लाखों नकारात्मक भावनाएं और विचार पहले से ही उमडने घुमडने शुरू हो गए थे । क्या मुझे पापा को सच बता देना चाहिए? वो कैसी प्रतिक्रिया करेंगे? व्यवस्था के बारे में क्या सोचेंगे? कुछ वास्तव में उनसे क्या कहना चाहिए? क्या वास्तव के चरित्र पर शक करेंगे? मैंने अपने विचारों के साथ क्या वो एक वृद्ध व्यक्ति हैं और सच्चाई बनाने से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिलेगा । उसके बाप रे उनके लिए एक अनचाहे तनाव का कारण बन सकता है । पूरे जीवन में मैंने हमेशा उन्हें परेशान किया है । हमने मुस्कराने का कोई कारण नहीं दिया है । ऐसा क्यों सोच रहा था? मुझे आश्चर्य हुआ । अच्छा इसलिए, क्योंकि हमारे जीवन में सबसे खराब परिस्थितियां हमारे लिए कुछ अनूठे बदलाव लाती है । मुझे नहीं पता चला कि मैंने अपने घर से माता पिता के घर की दूरी कब पूरी कर ली । और कुछ ही मिनटों में मैं घर के दरवाजे पर था । हाँ, दक्षिण अफ्रीका में होने वाली आगामी प्रसिद्ध फिफा वर्ल्ड कप के लिए व्यक्तिगत रूप से स्पोर्ट्स व्यक्तित्वों का सक्षम पैर करने के लिए दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पडती है । मेरे पिता एक सौभाग्यशाली सेवानिवृत्त व्यक्ति थे । मेरी मां जो पिता से पांच साल छोटी थी, के लिए सेवानिवृत्ति की कोई उम्र नहीं थी । एक पत्रकार अपने पूरे जीवन में एक सिर्फ पत्रकार रहता है । जैसा की उम्मीद थी, मेरे पिता ने दरवाजा खोला हूँ । पूछा मेरे बेटे क्या हो गया? आज तो सोमवार है, नहीं भी शब्द नहीं बोल सका और बदले नाम से निपट गया । विजय मामला क्या है? मेरे पिता ने फिर से पूछा । मैं बस आपको याद कर रहा था बाबा आखिरी बार जब तुम ने कहा था कि तुम मुझे याद कर रहे थे, तब हम तीसरी बार आईएएस परीक्षा को पास करने में नाकाम रहे थे । मुझे उम्मीद है सब कुछ ठीक है क्या सर ठीक है? उन्होंने जाना पूछा आम सब कुछ ठीक है । विजय तो आप बोले तुम्हें इतनी लम्बी जाता हूँ से बचना चाहिए । आस्था के लिए ऊंट जाएगी प्रेशर हमारी गोवा यात्रा कैसी थी? वैसे भी मैं अपने विचारों में तक हुआ हुआ था कि मैं पूरी तरह से भूल गया कि गोवा में मिली स्मारिका उनके लिए लेता हूँ । अच्छा मैंने उत्तर दिया । अपने सामान्य मृदभाषी तरीके से पुलिस लेने के लिए रसोई की तरफ चले गए । मैं बैठा रहा और सोचता रहा कि मैंने इस घर में अपने जीवन कैसे बताया था । हर कोने में चारों और पूछते हुए कमरे के हर हिस्से से मेरी भावनाएं जुडी हुई थी । मैंने मन ही मन भगवान का शुक्रिया अदा किया । मैं घर में अब नहीं रह रहा था क्योंकि स्टार्ट होता कि मुझे यहीं मरना होगा । मैंने ये महसूस करना शुरू किया की हर भौतिक चीज मेरे लिए सारहीन थी क्योंकि मेरे जीवन का सबसे प्रासंगिक व्यक्ति एक जन जन में था, हो जाएगा । गोवा कॉलेज और मेरी माँ के बारे में तीस मिनट की रुकी चर्चा के बाद हम बिस्तर पर लेट गए । मैं अभी भी आस्था के बारे में बातचीत करने के तरीके के बारे में सोच रहा था क्या हुआ? विजय पिताजी ने मुझे बुलाते हुए पूछा, तुम कुछ चिंतित देख रहे हो? मैं उसी क्षण उनसे लिपट जाना चाहता था और मेरी भावनाएं बहने लगी । बहुत कुछ नहीं पापा । मैं छदम मुस्कराहट के साथ बोला । मेरी दोस्त को जांच में कैंसर पाया गया है और अंतिम चरण में है और उन्होंने कहा उधर ही स्पष्ट रूप से उनकी आवाज से झलक रही थी । मैंने अपना पूरा साहस बटोरा और आस्था का विषय अलग तरीके से उठाने की कोशिश की । अब आप मान लीजिए एक दिन आपको पता चले कि माँ कुछ दिनों में मरने वाली है तब क्या करेंगे? मेरे सवाल ने उन्हें संबित कर दिया । मैं कह सकता हूँ कि निश्चित रूप से मुझे ऐसे शब्दों की उम्मीद नहीं कर रहे थे । मेरे पिता एक स्पष्ट व्यक्ति हैं । दरअसल वो एक अव्यवहारिक व्यक्ति हैं लेकिन मैं इस पर जोर देकर कहने से बचता चाहता हूँ । उन्होंने अपनी मुद्रा बदली और मेरी तरफ घूमें । पेडा हर कोई जो पैदा हुए है उसे एक दिन मरना है । जिस ठंड मुझे पता चलेगा कि तुम्हारी माँ हमें छोडकर जाने वाली है, मेरे पास उन से बात करने के लिए सीमित समय है । मैं अपनी हर गलती के लिए उनसे माफी मांगने शुरु करूंगा और उनके शीर्ष जीवन तक जितना संभव हो सके उन्हें खुश रखने की कोशिश करूंगा । उनकी मृत्यु से पहले उनकी सारी इच्छाओं को पूरा करने की भरसक कोशिश करूंगा तो मौत की प्रतीक्षा क्यों करने? पापा हमेशा तभी कर सकते हैं जब हम जीवित है । है ना नहीं । ऐसा नहीं कहा । कुछ सेकंड चुप रहे । पास में यही बात है । अगर तुम्हारी माँ मरने वाली होगी, वो कभी भी उन चीजों की कामना नहीं करेगी या यहाँ तक कि मुझे अपनी चाय भी नहीं बताएगी । तब उन की इच्छाओं को पूरा करने की क्या जरूरत है? मैंने कौन कौन से पूछा? किसी व्यक्ति को मरने वाले व्यक्ति की सभी इच्छाओं को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि वह उनके लिए है । बाद में भी सोचेंगे कि बैठने और कमरे के कोने में रोने की बजाय उसने कम से कम उसके लिए कुछ करने की कोशिश तो की । क्या स्वार्थी बना नहीं है? कौन कहता है कि स्वार्थी होना गलत है? उन्होंने वहाँ भरी और बोलना जारी रखा सुनाओ । हमारा दोस्त मार रहा है, बर्फबारी पसंद करता है और किसी तरह तो उसकी इच्छा पूरी करने में सक्षम हो तो ऐसा करके संतुष्टि नहीं मिलेगी । मैंने सर हिलाया तब मैं आपसे एक और बात पूछना चाहता था । तुम वास्तव में कुछ अजीब व्यवहार कर रहे हो । उन्होंने कहा, मैंने उनकी टिप्पणी की उपेक्षा कर दी । आपको जबरदस्त कैसे बदल गए? अपने पूरे जीवन में आप एक बहुत ही महत्वाकांक्षी पिता थे । लेकिन मेरी शादी के बाद मैंने आदमी अचानक परिवर्तन देखा । इन सभी वर्षों में आपने मुझे सरकारी नौकरियों के लिए तैयार करने के लिए मजबूर किया । कुछ अब भी याद है । मैंने अपना साक्षात्कार गडबड कर दिया था तो किस तरह से आप ने प्रतिक्रिया व्यक्त की थी । कभी कभी मुझे भी लगा कि आप बता सकते हैं शादी के बाद भी बदल गए हो बेटा । मैंने उन्हें अपना एक भ्रमित रूप प्रस्तुत किया । मेरी दशा को समझ गए और कहा, बजाये ये तुम्हारी शादी के बारे में बिल्कुल नहीं है । ये मेरी सेवानिवृत्ति के बारे में है । जब मैं काम करता था, अपने व्यस्त काम के घंटों को लेकर कुंठित रहता था । एक पुलिस वाले का जीवन तिरस्कार, यातना और अपमान से भरा होता है । हर बार जब मुझे एक नई जगह स्थानांतरित कर दिया जाता था, मैंने अपनी नियति को शादी किया । सेवानिवृत्ति के बाद मुझे अन्ततः अपने लिए कुछ समय मिला और तब मैंने जीवन का विश्लेषण किया । सेवानिवृत्ति के बारे में सबसे अच्छी बात आंतरिक शांति है । उन्होंने कहा, आखिरकार आपको अपनी आंतरिक शांति मिली । मैंने पूछा कैसे मिल सकती है? मेरे बेटे ने अपनी खो दी हैं । अब मुझे स्पष्ट बताओ मामला क्या है? ऍम लगा सकते हैं क्योंकि पहली बार तुम बहुत से प्रश्न पूछ रहे हूँ और मेरा विश्वास करो । तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर देना बहुत मुश्किल है । न कुछ छुपा नहीं रहा हूँ । बाबा मेरे सबसे अच्छा दोस्त परेशानी में है । मैंने झूठी जब हाइली और सोने का नाटक करते हुए दूसरी तरफ हो गया । मुझे पता है कि तुम झूठ बोल रहे हो । मुझे आश्चर्य हुआ कि वह कितने यकीन से कह रहे थे । मैं एक भी शब्द नहीं बोल सकता और बदले में उनके गले से लिपट गया । ये एक बत्तीस साल के व्यक्ति द्वारा आलिंगन था, जीवन को लेकर डरा हुआ था, महलका महसूस कर रहा था और मैं ऐसे अनंतकाल तक महसूस करना चाहता था । उनको कुछ सेकंडों के लिए मुझे लगा, जिससे मुझे चिंता करने की कोई बात नहीं थी । पेडा क्या मामला है? मेरी पीठ पर दुलारते हुए पिताजी ने पूछा, यही वह समय था, मैं टूट गया प्यास था । ठीक है हम मनुष्य आधा जीवन यह योजना बनाने में व्यतीत कर देते हैं कि बचे हुए आधे को कैसे बताएंगे । लेकिन हम कितने आ रहा है? हाँ, लाखों चीजें हैं जिन्हें हम चाहते हैं और जिनकी कामना करते हैं । लेकिन यह आश्चर्यजनक है कि हम सब कुछ हासिल नहीं कर सकते हैं । हम इस दुनिया में कितने शुद्र और भाग्य तथा भगवान की योजना के आगे असहाय हैं? अरे वो चीजें हैं जो मनुष्य कर भी सकते हैं । सब कुछ सांत्वना देने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ निशान लगाने की कोशिश कर रहे थे । तब मैंने आईएएस बनने के लिए सालों तैयारी की । पागलपन की इस हद तक की आपको कुछ खुशी दे सकूं । मैंने केवल कुछ प्रयासों में महसूस कर लिया कि मैं बेकार बेटा हूँ । ये माँ थी । उन्होंने मुझे प्रोफेसर की नौकरी दिलाने के लिए जैसे तैसे कोशिश की, वो भी एक एक प्रदर्शनी । मेरे जीवन में कभी कोई दोस्त नहीं रहा है । मुझे आश्चर्य है कि कैसे मेरे जीवन में आस्थाएं मेरी अकेली दोस्त है । मेरी खुशियों की पोटली मिल पत्नी लेकिन रूप से कब कब आ रहा था और मिली बात करने में मुश्किल होने लगी । लेकिन लेकिन विजय हुआ क्या? तो मुझे डरा रहे हो । उनसे दूर चल रही है । क्या हुआ उसे कोई कोई कॅश है? मैंने अपने पिताजी को पूरी स्थिति बताइए तो बिल्कुल चुप हो गए । मैं कह सकता हूँ कि वह बहन सोच में थे । मुझे सकारात्मक महसूस करने के लिए कोई रास्ता तलाश कर रहे थे हूँ । मैंने कहा जिस दिन मुझे उसकी बीमारी के बारे में पता चला, मैंने उसकी सारी इच्छाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी स्वयं ले ली । पर ये स्पष्ट हो गया कि मैं मैं कुछ नहीं कर सकता । चाय मेरी क्षमता से पढे हैं । हालांकि मैं उन्हें सब सिद्ध करने के लिए उन सभी के लिए लडने जा रहा हूँ । चाहेंगे, प्राप्त करने योग्य हो या नहीं तो ऐसी कोशिश करने की हो जा रहे हो जब तुम्हें मालूम है कि उन्हें पूरा करना असंभव है क्योंकि मुझे बेहद संतुष्टि होगी अगर मैं उसके सपनों में से एक भी पूरा करने में सक्षम होता हूँ । ये स्वार्थी दृष्टिकोण है । किसने कहा कि स्वार्थी होना गलत है? मैं अपने ही शब्दों पर संभव हो गया । मुझे एक जवाब चाहिए बाबा ऐसा क्यों है कि हर बार केवल में भगवान द्वारा दंडित किया जाता हूँ । मैं चाहता हूँ उसे बचाने के लिए कोई चमत्कार हो जाए । भगवान भगवान की छत मानना बंद करो । पिताजी मुझ पर चलाया और किसी चमत्कार की भी मांगना बंद करो । मैंने देखा ऍम ऐसा लगता था जैसे कोई पुजारी कह रहा हूँ कि कोई भगवान नहीं है । उनकी आवाज गूंजी, हर किसी को किसी दिन भरना पडता है, कितनी सुबह में नहीं पता । अठारह साल की एक लडकी की शादी को केवल छह महीने हुए हैं और एक माँ बनना चाहती है । एक घर और एक कार खरीदने किसकी योजना है? अपने परिवार के साथ एक सुखी जीवन जीना चाहती है तो मार नहीं सकती है । उसकी मृत्यु कैसे न्यायसंगत हो सकती है? मैं किसी चीज का उचित नहीं सिद्ध कर रहा हूँ तो पूरी तरह सही हो तो मुझे बताओ । तुमने अपने माँ के साथ कितनी बार मुझे कुछ देखा है? मेरे पिता की तरफ से आया ये एक अजीब सा सवाल था । फिर भी मैंने जवाब दिया बहुत ही कम यही बात है । बैठेंगे । एक ही छत के नीचे तीस से अधिक सालों तक रहने के बाद भी हम चाय भी कभी दूसरे से बात करते हैं और जब भी हम करते हैं झगडे से खत्म करते हैं तो भी समय आस्था के जीवन में शेष है । उसे वो सारी खुशी दो जिसकी उसने हमेशा से कम ना की किससे बाबा कैसे उसके जाने से पहले उसकी इच्छाओं को पूरा करो । उसकी इच्छाओं को पूरा करना असंभव है । बाबा मुझे बताओ, उस की चाय क्या है? मैं उस कागज के टुकडे को उनके साथ साझा करने में संकोच कर रहा था । फिर भी मैंने उन्हें सौंप दिया । मेरे पिता तो चकत् थे । कागज का टुकडा उनके हाथों से गिर गया और वो इतना ही कह पाए डेनियल कौन है? उन्होंने एक शब्द नहीं कहा । हमने लंच खामोशी से क्या? पहली बार मुझे अपने घर में असहज महसूस हो रहा था? तब मुझे जाना चाहिए । आस्था को उसके कार्यालय से लेने का वक्त हो गया है । मैंने कुर्सी से उठते हुए कहा आज से उसकी सेवा समाप्त होने जा रही है । इसलिए उस का साथ देने के लिए उसे मेरी आवश्यकता हो सकती है । प्लीज एक ठहरो पापा अपने कमरे में गए और कुछ मिनटों में वापस आ गए । विजय उन्होंने वहाँ भरी तुम अच्छी तरह जानते होगे । मैं इंस्पेक्टर के रूप में पुलिस बल में शामिल हुआ था और एक इंस्पेक्टर के रूप में ही सेवानिवृत्त हुआ । मैंने पुलिस अधिकारी के रूप में अपना सर्वश्रेष्ठ दिया सब अच्छी चीजों के बाद भी जो मैंने की, मेरे विभाग ने मुझे चार माह के लिए निलंबित कर दिया था । उन्होंने एक गिलास पानी अटका, आप क्या कहना चाहते हैं? बाबा एक व्यक्ति भगवान में विश्वास करता है, हमेशा चमत्कार की तलाश करता है तो सभी विपत्तियों को हल करने । इस आशा में वो अपनी क्षमता का प्रदर्शन पूरी तरह नहीं कर पाता है । हम तो कहाँ उसका अंतिक पराजित की तरह होता है और उसकी सुंदरता यह है कि वह इसके लिए भगवान को दोषी ठहराता है । चमत्कार और भगवान पर ज्यादा विश्वास मत करो । यदि कोई चमत्कार होना होगा तो वह होकर रहेगा तो जो ज्यादा से ज्यादा कर सकते हो वो करो । मैंने प्रतिक्रिया न करने का फैसला किया । उन्होंने आगे कहा, पेड पर आराम कर रहा एक पक्षी तभी डाल टूटने से नहीं डरता है क्योंकि उसे अपने पंखों पर भरोसा होता है । प्लीज समझने की कोशिश करो । विजय तो मैं खुद पर भरोसा करने की जरूरत है । अपनी सबसे अच्छी कोशिश करो मेरे बेटे मैं रहता हूँ । जैसे ही मैं घर से बाहर निकले लगा उन्होंने आस्था की इच्छा वाला पेज वापस कर दिया । मैंने उसे खुला पडा । मरने से पहले साथ असंभव इच्छाएं

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -12

बारह विजय के पिता द्वारा मैं संजय विजय का पता और मैं अपने बेटे के लिए लिख रहा हूँ । मैं टुकडों और हिस्सों में कहानी का अपना पाठ भरूंगा और मुझे स्पष्ट करने नहीं की । मैं पिता के रूप में लिख रहा हूँ । मैं मानता हूँ मैं पिता हूँ जिसने अपने बेटे के आत्मविश्वास की हत्या की । ये प्रकृति का नियम है कि निर्माता ही विध्वंसक भी है । मैंने अपने बेटे का जीवन बनाया और नष्ट किया । जैसे कितना पर्याप्त नहीं था । भाग्य ने उसे और भी नष्ट करने की कोशिश की है । मेरा जीवन विजय का जीवन शुरू होने के साथ समाप्त हुआ । मैंने लव मैरिज की थी । तभी शादी के बाद मेरा प्यार मर गया । उत्तर प्रदेश में एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मेरी मुलाकात एक उत्साही और बहुत कैरियर उन्मुख पत्रकार से हुई और मेरे जीवन में प्यार का पहला आवे पल्लवित हुआ विजय की माँ की मुझे उसका आत्मविश्वास और जुनून पसंद आया । कहने की जरूरत नहीं । एक ईमानदार पुलिस अधिकारी एक पत्रकार पर मर मिटा था । खुशी और शादी पूरी तरह से दो अलग बात थी । वो सुंदरता और दिमाग का एक जटिल मिश्रण थी । मेरी ईमानदारी को उसने सौदेबाजी के लिए ब्रेक मिल करने और कुछ पैसे कमाने के अवसर के रूप में माना था । ईमानदारी उसके लिए सिर्फ एक सिद्धांत था । इसके वास्तव में कोई प्रासंगिकता नहीं थी । जब भी मैं किसी को गिरफ्तार करता तो वो मुझे अपना आत्मसम्मान, किराने और अपनी अंतरात्मा बेचने के लिए मजबूर कर देती है और उसके स्टार पर मैंने ऐसा कई बार क्या मैं ईमानदार पुलिस अधिकारी नहीं रह गया था जिस व्यक्ति को मैं दर्पण में देखता हूँ । दो बार मर चुका था रिश्वत लेने के लिए मुझे उकसाने की उसके तीसरे प्रयास के दौरान मैं रंगेहाथ पकडा गया था और चार महीने के लिए निलंबित कर दिया गया था । मेरे अस्थायी रूप से निलंबन ने हमारे जीवन की खुशी स्थायी रूप से खत्म कर दी थी । मैंने काम फिर से शुरू किया लेकिन हमारा संबंध फिर से शुरू नहीं हो सका । अब हम हर छोटी चीज के लिए लडते हैं, चाहे वो मेरा वेतन हूँ या तैनाती का मसला । मुझे याद नहीं कि हमारे बीच में गर्म बहस के बिना कोई हफ्ता गुजरा हूँ । हमारी शादी के पहले कुछ महीनों के बाद मैं सत्य को मान चुका था की हम दो बहुत अलग अलग प्राणी थे । हम निश्चिंत हो चुका था की हम एक दूसरे के लिए नहीं बने थे । मेरा मानना है किसी के साथ रहकर दुखी रहने की तुलना में अकेले और खुश रहना हमेशा बेहतर होता है । मैंने विवाह के बंधन से बाहर निकलने का अपना मन लगभग बना लिया था और अपने जीवन की भारत फिर से लिखने की कगार पर था । जब हमारे जीवन के उद्धारकर्ता का आगमन हुआ, मेरी पत्नी गर्भवती हो गई । विजय का अर्थ मेरे लिए दुनिया थी और हम दोनों से बहुत प्यार करते थे । हमारे पास अभी भी लडने के लिए कारण थे लेकिन ये भी कारण था उन झगडों से बचने का । अपनी नौकरी की प्रकृति के चलते मुझे अलग अलग शहरों की यात्रा करना अपेक्षित था । विजय की माँ ने एक खेल पत्रिका के संपादक के रूप में ज्वाइन किया और खिलाडियों के सक्षात्कार के लिए विभिन्न स्थानों की यात्रा करना उस की आवश्यकता थी । इसमें विजय के अध्ययन में बाधा डाली । अपनी प्रासंगिक वर्षों के दौरान दोनों अभिभावकों की अनुपस्थिति के परिणाम शुरू । उसका अकादमिक आधार कमजोर पडने लगा । उसने ग्रेड होने शुरू किए और कुछ साल बाद दिन में ग्रेड ही आदर्श बन गया । वो उतने ही नंबर लाता जो अगली कक्षा में प्रोन्नत होने के लिए पर्याप्त हो । मेरा जीवन अब पूरी तरह बिखर चुका था । मेरी नौकरी में कोई प्रोन्नति और उत्साह नहीं बचा था तो क्योंकि अब मेरा नाम भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की सूची में पंजीकृत हो चुका था । आगे बढने में असमर्थ होने की भेजी निराशा का असर विजय पडा । मैंने अपने सपने उस पर थोप दिए । विजय की माँ मेरे बीच विजय के करियर को लेकर गरमा गरम बहस हो जाती थी । वो चाहती थी कि वह इंजीनियरिंग का चुनाव करें लेकिन मेरी निराशा नहीं । मुझ पर जीत हासिल की । मैंने दोनों से घोषित किया की विजय केवल एक आईएएस अधिकारी बनेगा और कुछ नहीं रहनी की बात है । विजय ने कभी कुछ और बनने की इच्छा व्यक्त नहीं की । शुरू में मुझे लगा कि वह एक अत्यंत आज्ञाकारी बेटा था । बाद में मुझे एहसास हुआ कि उसकी किसी भी विषय में कोई दिलचस्पी नहीं थी । वह अंतर्मुखी और बहुत शर्मिला निकला । वो शायद ही कभी बोलता होगा । उसका कोई दोस्त नहीं था । प्रेमिका होने का तो कोई प्रश्न ही नहीं था । तो शायद ही किसी चीज के लिए लडता होगा । संघर्ष, प्रेरणा, कुछ हासिल करने के लिए जुनून सब उसके लिए शत्रु थे । तो अपने सभी प्रयासों में आईएएस परीक्षा को तीन करने में असफल रहा । सिर्फ एक बार उसने यूपी पीसीएस की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा उपरी की । मुझे अभी भी वो दिन याद है जब विजय ने घोषणा की । उसने यूपी पीसीएस का दूसरा पेपर उत्तरी कर लिया और साक्षात्कार के दौर में शामिल होने के लिए तैयारी कर रहा था । रोमांचित था क्योंकि पहली बार मुझे उम्मीद की किरण देखी थी । मैं तब मेरठ में तैनात था । मैंने अपने बेटे के पास जाने के लिए छुट्टी विजय मेरे बेटे तो अपने पिता का सपना पूरा करने के बहुत करीब हो । मुझे वास्तव में तुम्हारे ऊपर बहुत गर्व है । मैंने कहा जब से गले लगा रहा था, धन्यवाद बाबा । लेकिन इससे पहले कि वो कुछ और कह सके मैंने उसके बाद कार्ड नहीं । क्या तुम्हें याद है कि तुम ने क्या कहा था जब तुम आई । एस के तीसरे प्रयास में विफल रही थी । उन्होंने कहा था कि तुम अब और प्रयास नहीं कर सकते हैं और देखो हमारी कडी मेहनत नहीं, आज मूल्य चुकाया है । बाबा आप मुझे आईपीएस अधिकारी के रूप में देखना चाहते थे । नहीं मैं तो मैं पीसीएस अधिकारी के रूप में देखना चाहता था । पीसीएस अधिकारी पुलिस बल में शामिल होते हैं । मैंने से झूठ बोला था कि उसका आदमी वास कमजोर ना पडेंगे । आपने मुझे आईएएस परीक्षा तीन करने के लिए क्यों मजबूर किया? उसने पूछा क्योंकि आईएएस की तैयारी यूपीसीए से ज्यादा मुश्किल है । तुम्हारी पीसीएस तीन करने की राह आसान बनाई । मैं अपने स्पष्टीकरण से आश्चर्यचकित था । मुझे नहीं पता कि मैंने अपने बच्चे के साथ क्या किया क्योंकि उसने वही वाक्य रहा था जिसमें मुझे सबसे ज्यादा ट्रस्ट किया था । आप साक्षत्कार अभी होना है मैं नहीं जानता हूँ । मुझे विश्वास है कि मेरा बेटा ऐसे शानदार ढंग से तीन करेगा । फिर मैंने उसे आश्वासन दिया लेकिन मैं वास्तव में डर रहा हूँ । अब आप इस बात का डर सुरक्षा कॅश नहीं । बाबा बाबा, बिल्कुल विश्वास इसकी मुझे कमी है । बजाये हमारे पडोसी के बेटे मोहन को देंगे । अपनी दसवीं की परीक्षा में दो बार असफल रहा था लेकिन फिर भी पीसीएस तीन करने में कामयाब रहा । वो ऐसी श्रेणी से संबंधित है । कुछ आरक्षण का फायदा मिला । यादव चाचा के बेटे को देखो वो एक ओबीसी है । उसके उत्तरों ने मुझे हताश कर दिया । दूसरों के साथ खुद की तुलना मत करो । बस स्वयं को देखो । मैं एक सामान्य श्रेणी का उम्मीदवार लेकिन तुम बहुत खास हो किसी भी मोहन या सोहन के साथ मेरे बेटे की तुलना करना बंद करो । मुझे की माँ लाइट और हमारी वार्तालाप में बाधा डाली तो हमेशा ऐसा करेगी । पांच डालेगी जब मैं अपने बेटे से बात करूंगा । मैं किसी के साथ उसकी तुलना नहीं कर रहा हूँ और मेरा भी बेटा है । मैंने प्रत्युत्तर दिया । विजय उन की बात मत सुनना । उसकी माँ ने कहा क्या मैं शांति से अपने बेटे से बात कर सकता हूँ? मैंने तिलमिलाकर उससे कहा संजय याद रखो ये हमारा एकलौता बेटा है । कमरा छोडने से पहले उसने कहा मैंने सोचा कि मेरे जीवन में वह कैसे आ गई थी । उसकी उपस्थिति ने माहौल पूरी तरह बदल दिया था । कुछ मिनट पहले हम कृष्ण और अर्जुन की तरह व्यवहार कर रहे थे । ऍम महसूस हुआ जैसे हम किसी मुर्दाघर में बैठे थे । हमारे घर में ये बहुत ही आंध्र वजह अपनी माँ की बात मत चलो । मैंने गुस्से में कहा माँ कहती है कि मैं आपकी बात नहीं शुरू और आप उनके बारे में यही कहते हैं । मैं उसके शब्दों से आश्चर्यचकित नहीं था क्योंकि ये पहली बार नहीं था की विजय स्थिति का सामना कर रहा था तो हम दो विजय मैं किसी से तुम्हारी तुलना नहीं कर रहा हूँ । मुझे शत प्रतिशत यकीन है कि तुम ही कर सकते हो तो वहाँ तक शक्कर कब सुनिश्चित है । अब ध्यान से सुनो साक्षात्कार की तैयारी करने में मदद के लिए सबसे अच्छे कोचिंग संस्थान में प्रवेश हो । मैं व्यक्तिगत रूप से लूंगा तो भारत पत्र सक्षम का ठीक है । सामान जैसा आप कहें की मेरे बेटे के साथ समस्या तो हमेशा दूसरों की इच्छाओं का ख्याल रखता था । उस की सबसे बडी समस्या ये थी कि वह एक समय में दो से अधिक लोगों का सामना नहीं कर पाता था । मैं स्वयं इस बारे में चिंता था की कैसे मेरा बेटा सिविल सेवा सक्षात्कार का सामना करेगा । तब एक दर्जन आखें उसे एक साथ खुल रही होंगी तो कह नहीं सकता कि मेरा बेटा धारा हुआ है क्योंकि आखिरकार मेरा बेटा है और प्रत्येक पिता की तरह मुझे अपने बेटे के लिए आशा करने का अधिकार था । उसका अंतिम सक्षम का इलाहाबाद में था । इलाहाबाद जाने के एक दिन पहले मैं नोएडा पहुंच गया । मैंने वहाँ जाने से पहले ठहरे से अपनी पत्नी के वो जगह छोडने का इंतजार किया । विजय चलो ऍम सक्षात्कार के साथ अभ्यास करते हैं । मैं उसकी तैयारी को मापने की इच्छा रखते हुए कहा, मैं एक पंक्ति में पांच कुर्सियां लगा दी । एक कुर्सी उसके सामने थी । वो काॅस्ट की कुर्सियां थी और उसके सामने वाली उम्मीदवार की कुर्सी थी । मुझे सिर्फ इतना सोचो कि तुम पूरा रूम में वास्तविक सक्षम हो और पांच पैनलिस्ट तुम्हारा सक्षम तार कर रहे हैं । वो पांच लूँ । विजय ने आश्चर्य मैं कहा ध्यान दो विजय मेरी आंखों में देखो, वहाँ पांच पैनल से अधिक हो सकते हैं । उससे क्या फर्क पडता है? ऍम कोई बात नहीं, हम कर सकते हो । आराम से रहो सहज रहा हूँ । अब तुम्हारा साक्षरता शुरू करें । तुम कमरे के बाहर इंतजार करूँ तब प्रवेश होना । जब मैं तुमसे कहूं ठीक ऍम । दरवाजा खोलते समय उसने पूछा सर मैं कर सकता हूँ । विजय भी जाइए और बैठ जायेंगे । मैंने टेलीफोन निर्देशिका के पृष्ठों को पढते हुए कहा तो मैं समझ जाए आप कहाँ से हैं? मैं भारत से हूं । वर्तमान में नोएडा में रह रहा है । उसने तेज और छठी तक उत्तर दिया अच्छा मैं प्रभावित हूँ । मुझे अपने बारे में कुछ बताएं । मुझे जवाब पता है । तब आप कोचिंग संस्थान में पहले से ही मुझे खुद के बारे में पूछने पर सबसे अच्छी पंक्तियां बता दी गई हैं मुझे मैंने पूछा मुझे जवाब दो । बोर्ड रूम में हो । मैं विजय हूँ । मैंने गवर्नमेंट स्कूल में पूरी पढाई की । मैं बहुत सम्मानजनक परिवार से हूँ । मेरे पिता उत्तर प्रदेश पुलिस के एक पुलिस अधिकारी के रूप में काम कर रहे हैं । मेरी माँ एक प्रमुख पत्रकार है । अपने देश के लिए प्रेम और लोग मेरी नसों में रहते हैं । मैं जीवन भर एक सफल व्यक्ति रहा हूँ । मैंने जो भी सपना देखा उसे हमेशा हासिल किया है । अपने कॉलेज क्रिकेट टूर्नामेंट में मुझे हमेशा एम्पायर के रूप में नियुक्त किया गया क्योंकि शिक्षक मेरी ईमानदारी और निर्णय लेने के कौशल से प्रभावित थे । मैं सोशल का उपयोग करूंगा और अपने देश की सेवा करने के लिए किसी भी हद तक जाऊंगा । ऍम था और सोच रहा था कि क्या ये पंक्तियां वास्तव में मेरे बेटे के लिए थी या किसी और के लिए शानदार? जवाब मेरे बेटे हमारे हम बोल रूम में है । मुझे बहुत खेद है । हमें समझे आप पुलिस बल में शामिल होना चाहते हैं । जब भी मैं यूपी पुलिस के बारे में सभी गलत कारणों से कोई खबर देखता हूँ, सुनता हूँ । पटना करता हूँ कि लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं । मुझे दुख होता है । आखिरकार मैंने अपने पिताजी को एक जगह से दूसरी जगह बस रांची की सेवा करने के लिए दौडते हुए देखा है और उसके बाद भी स्थिति अभी भी जस की तस है । मुझे हमेशा इसमें होता है कि कभी प्रणाली बदलेगी । उसके बाद मुझे एहसास हुआ । सपने देखने से कुछ भी नहीं बदलेगा । लेकिन व्यवस्था का एक हिस्सा बनने से निश्चित रूप से किसान के रूप में अपराधियों को दंडित और लोगों को सुरक्षित महसूस करने में मदद करना सबसे अच्छी भावना होगी । मैंने ताली बजाना शुरू कर दिया क्योंकि मेरे लिए ये विश्वास करना था कि वही विजय था । मेरा बेटा वो जो अन्य लोगों के सामने अपना भी खोलने से डरता था । हमने वास्तव में सबसे अच्छी कोचिंग ऍम की । मैंने उसे बुला रहा हमने वार्ता इस भी मानक प्रश्न है जिसके लिए मैं पूरी तरह से तैयार हूँ । परन्तु इसके बाद कोई किन्तु परन्तु नहीं विजय अब मैं आश्वस्त हूं कि तुम अपने पिता के सपने को जरूर पूरा करोगे । साक्षात्कार के दिन में उनसे ज्यादा परेशान था तो वो मेरे मूढतापूर्ण सपने का पीछा कर रहे थे । ये विचार की वो अज्ञात लोगों के सामने चढ हो जाएगा । कुछ चिंतित कर रहा था । मैं सुबह से प्रार्थना कर रहा था और जैसे ही विजय ने मुझे सब सरकार के बाद पुकारा, मैं अपने जीवन की सबसे खुशी वाली खबर सुनने की आशा में अपनी कुर्सी से उछल गया । शक्कर कैसा रहा? मैं सीधे मुद्दे पर आ गया । अच्छा वस्तुओं में कितनी देर तक चला? लगभग पांच मिनट । क्या अब वहाँ कितने पैनलिस्ट थे? दस मैं कुछ सेकंड के लिए चुप था क्योंकि मुझे नकारात्मक अनुभूति हो रही थी । उन्होंने तुमसे क्या पूछा? उन्होंने केवल तीन प्रश्न पूछे । तीन मुझे लेकिन है कि तुम मैं आप विश्वास से उन्हें जवाब दिया होगा । ऍफ प्रयास किया । पहला सवाल किया था, मुझे अपने बारे में कुछ बताइए गए । हमने कल की तरह ही कहा होगा है ना । मैंने कोशिश की दूसरे सवाल के बारे में क्या मुझे अपने बारे में कुछ और बताऊँ? क्या मैं चौंक गया था और तीसरा कुछ और जो आप हमें और अपने बारे में बताना चाहते हैं? मुझे स्पष्ट याद है जिस दिन विजय मेरे पास आया था, अपने बेटे द्वारा आपको गले लगाया जाना सर्वोत्तम कैसा है? लेकिन सबसे खराब एहसास में बदल जाता है तो उसकी आंखों में आंसू होते हैं । वो निराश निरूत्साहित और था ताकि वो स्वयं को दोष दे सकता था । हाँ, जिस स्थिति में विजय था मैं उसके लिए जिम्मेदार था । अगर किसी बच्चे का आत्मसम्मान गिरा हुआ है । ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें प्रोत्साहित करने से अधिक आप सलाह देते हैं । अगर किसी बच्चे में आत्मविश्वास की कमी है, इसका मतलब है कि आपने उसे कोई भी निर्णय लेने की कभी अनुमति नहीं दी है । विजय स्थिति में खराब अभिभावक ता के कारण था । जब आईएएस और पीसीएस क्लीन करने के अपने सभी प्रयासों में विफल रहा तो मेरे पास आया और फूट फूटकर रोया था तो भगवान से अभिशप्त था । लेकिन एक दिल के भीतर से पूरी तरह जानता था की मुझे अपशब्द होना था । मैं वो एक था जिसमें उस से अप्रत्याशित की प्रत्याशा की थी । उसकी माँ ने सहायक प्रोफेसर के पद पर सिफारिश करके बाधाओं को मानते और विजय को नौकरी दिलाई । फिर हमने उसकी शादी का फैसला किया । यहाँ तक कि डेढ साल के अंधाधुंध खोज के बाद भी हम अपने सभी प्रयासों में विफल रहे । लेकिन हर बादल के साथ एक उम्मीद की किरण होती है । मुझे अक्सर आश्चर्य होता है की आस्था जैसी लडकी ने कैसे विजय जैसे लडके के साथ हम भी भर दी । वो एक अपून मैच तब थे जब वो एक अपूर्ण मैच अब हैं, भाजपा बोर्ड है और विजय शर्मीला है । आस्था आत्मविश्वासी हसमुख महत्वाकांक्षी और आधुनिक है लेकिन वो उसे ईमानदारी से प्यार करती है । माता पिता के लिए देखना हमेशा एक आशीर्वाद की तरह होता है कि उनके बच्चे को अपने जीवन साथी कब प्यार दुलार और देखभाल मिल रहे हैं । विजय के जीवन में खुशी लंबे समय तक नहीं करती है और उस नहीं एक और विजय को जन्म दिया तो अपनी पकती के लिए लडा और अब जब कि वो एचआईवी पीडित मैदान की गई है उसने किसी तरह उसकी अजीब लगभग असंभव इच्छाओं का पीछा करने का साहस जुटाया है । केवल बिहार करने वाला एक व्यक्ति इतना मूढतापूर्ण प्रयास कैसे कर सकता है लेकिन एक पिता के लिए की शायद ही मायने रखता है कि उसका बेटा जीतता है या हारता है । मैं सत्य से संतुष्ट था कि वो किसी चीज के लिए हम तो पहन लड रहा था मैंने स्वयं से फायदा क्या की हर कदम उसके साथ चल रहा हूँ । मैं बैडरूम में अलमारी वाले हिस्से में गया जहां पर मूर्तियों में देख पांच राजमा थे जिनका स्थित मेरे लिए अभी भी संदिग्ध था और मैंने कहा तो मैं उसे उसकी सभी चाय पूरा करने में मदद करें । मेरे बेटे के व्यवहार को पागलपन के रूप में माना जा सकता है, लेकिन कम से कम से साहस और आत्मविश्वास प्रदान कीजिए । फॅमिली बेटे की मदद कीजिए, मेरी मदद कीजिए ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -13

फॅमिली हूँ । जब मैं वापस आया तो आस्था पहले ही घर पहुंच चुकी थी । हम जल्दी घर कैसे आ गई? मैंने तुमसे मना किया था । सार्वजनिक परिवहन द्वारा यात्रा । इससे पहले कि मैं अपनी बात पूरी कर पाता था, उसने मुझे कसकर गले लगा लिया और एक बच्चे की तरह रोना शुरू कर दिया । ये पिताजी के साथ मैंने जो किया था, उसकी पुनरावृत्ति इस समय केवल मुझे आत्मविश्वास दिखाना था । मुझे उसकी चट्टान बनना था । मैं कमजोर होने का जोखिम नहीं उठा सका । अरे मैं तो सांसदों देते हुए कहा क्या हुआ उसे चुप रहने का फैसला किया । उसके लिए असामान्य था । मैंने फिर से पूछा जल्दी घर कैसे आगे दिया? वो अभी भी मेरी बाहों में दफन थी । मैंने अपनी पकड को ढीला कर दिया । उसके दोनों का पोलों को हाथ में लेकर उसकी भूरी आंखों में देखा और धीरे से पूछा क्या हुआ था? नहीं खराब अभिनेता था लेकिन वो इतनी दुखी जी की मेरी निराशा पर ध्यान नहीं दे पाई है । विजय मेरी नौकरी चली गई वो मैंने सहानुभूतिपूर्वक कहा लेकिन जल्दी से जुडा । ठीक है क्या तुम इसे इस रूप में नहीं देखती हूँ । मुझे कुछ अच्छी खबर ये अच्छे के लिए हुआ है । ये किस्मत द्वारा तो मैं बताने का तरीका है कि तुम्हारे लिए यही समय है अपने सपनों का पीछा करने का तो समझ नहीं पा रही हूँ । फिर चारों और क्या चल रहा है । कुछ सिखने लगी । मैंने की टिप्पणी को अनसुना कर दिया और अपनी कॉलेज पत्रिका उठा ली, जो वहीं पांच पडी थी । मैंने उसे दिखाया और कहा तो एक लेखिका बन सकती हूँ । लेखक कम पैसे पाते हैं । विजय था । मैं चाहता हूँ कि तुम एक लेखिका बनाओ, क्योंकि एक समय पर तुम भी यही चाहती थी । याद रखो, सब कुछ पैसे के लिए नहीं होता है । जब तुम्हें एक नौकरी मिलती है तो लाखों अन्य लोग ऐसा ही करते हैं, जैसा कि आप अपने रहन सहन के लिए करते हैं, लेकिन अपनी जिंदगी की एकमात्र मालिक खुद हैं । मैंने अपना दर्शन दिया । विजय क्या वाकई तुम हो तो वही देखती नहीं हूँ । मैं अंधी उसका रहा था और जब था जब उसका बोलना जारी था । लेकिन हमारे खर्चों का क्या होगा तो नहीं । चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है । मुझे पदोन्नत किया गया है । याद है ना मिस्टर विजय शर्मा तो मैं ऐसा व्यवहार कर रहे हो जैसे तुम रातोंरात करोडपति बन गए हैं । कितनी वेतन वृद्धि की पेशकश की गई है । उसने व्यंग्यात्मक टिप्पणी तो सभी के बारे में तुम भूल जाओ तुम्हारे मूड बॉस ने क्या कहा? जानते हो ऍम बैंक में अब तक की कार्यावधि में पहली बार मैंने अपने बॉस को कोई फैसला करने पर अफसोस करते देखा । जब उन्होंने मुझे परीक्षा के परिणाम के बारे में बताया तो मैं आसानी से उनकी आवाज में दर्द और उनके चेहरे की उदासी को महसूस कर रही थी । तो मेरे संधि की पुष्टि कर रहा था । कर्मचारी को निकालना हमेशा पीडादायी होता है है । हाँ, मुझे ऐसा लगता है । उसने कहा उससे खिलाया । अब ध्यान से सुनो । मैंने कहा सार्वजनिक परिवहन से फिर यात्रा मत करता हूँ । मैं इसके बारे में बहुत गंभीर हूँ । मैंने सार्वजनिक परिवहन से यात्रा नहीं की थी । विजय एक सहयोगी ने मुझे घर छोड दिया था । वो ऍम मेरे बॉस मुकुल माथुर अगले दिन मैंने डेनियल के बारे में पूछने के लिए सरगम को कॉल की । वो हमारे एक साधारण सा मित्र था । सरगम झूठ बोला मैं जानता था क्योंकि आस्था की डायरी का विवरण सरगम के जवाब से मेल नहीं खा रहा था । मेरे लिए सरगम से अनजाने में भेद खुलवाना मुश्किल था । सरगम सुनो, मैंने अत्यधिक धैर्य के साथ कहा, मुझे उम्मीद है तो मुझे अपने सबसे अच्छे दोस्त के पति के रूप में नहीं मान रही हो । मैं भी तुम्हारा दोस्त हूँ और तो मुझे सच बता सकती हूँ क्योंकि मुझे पता है कि डेनियल सिर्फ एक दोस्त नहीं हो सकता है । वास्तव में उसने संकोच से कहा, डेनियल उसका पूर्व प्रेमी है, फॅमिली नहीं था क्योंकि आस्था के जैसी लडकी का कोई प्रेमी नहीं होना मुझे आश्चर्यचकित करता । मैंने फिर पूछा वो असल कहाँ है? वो वर्तमान में गुडगांव में एक निवेश बैंकर के रूप में बार्कलेज बैंक के साथ काम कर रहा है । मैं निश्चित नहीं था कि मैं क्या पूछने वाला था लेकिन मैंने तब भी उसका सामना करने की कोशिश की । क्या कारण हो सकता है की आज आप उससे माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उसने उसे बिना कोई सूचना दिए तुमसे शादी करने का फैसला किया । डेनियल तब कैलिफोरनिया स्टेट यूनिवर्सिटी में पढ रहा था । उसने आस्था से अनुरोध किया था उसके वापस लौटने तक वो उसके लिए प्रतीक्षा करें । लेकिन आस्था ने अपना निर्णय ले लिया था । डेनियल एक रोमन कैथोलिक है और उसका परिवार हिन्दू बहु को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था । मुझे कुछ महसूस नहीं हुआ । कोई निराशा नहीं । कोई उदासी नहीं है । मुझे पता नहीं था कि कैसे प्रतिक्रिया करूँ । मैं शांति से खडा रहा है और संगम से अगला प्रश्न दागने का साहस बटोरा । सबसे मुश्किलें क्या वो भी संपर्क में हैं? मैं निश्चिंत नहीं हो जाये । डेनियल उसी दिन भारत लौट आया था जिस दिन तुम्हें आस्था से शादी की । क्या तुम्हारे पास कैसे भी उसका फोन नंबर या फिर कोई ड्रेस हैं है लेकिन मैं उसे केवल एक पर बताउंगी । मैं कुछ भी करने के लिए तैयार पास्ता के साथ वास्तव में क्या गडबड है? नहीं तो नहीं बता दूंगा लेकिन अगर तुम से केवल अपने तक रखने का फायदा करूँ, मुझे लगता है की तो मुझे आस्था की सबसे अच्छी दोस्त की तरह नहीं मान रहे । मैं भी तुम्हारी दोस्त हूँ ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -14

चौदह है । आस्था की साथ इच्छाओं ने मुझे रोज याद दिलाना शुरू कर दिया था । छह महीने हुए थे, जब से मैं उसे जानता था । लेकिन अचानक मुझे ऐसा लगा जैसे मैं उसे बिल्कुल नहीं जानता था । उसके जैसी आधुनिक और महत्वाकांक्षी लडकी कैसे माँ बनना चाहती है, कोई कारण होना चाहिए । एक भव्य रात्रिभोज के बाद हम टेलीविजन के सामने आराम कर रहे थे । एक समाचार चैनल पर खबर आई । सुष्मिता सेन एक प्रसिद्ध अभिनेत्री एक और कन्या संतान को अपनाने की योजना बना रही थी । उस की शादी भी नहीं हुई थी । एक अकेली मां होने के नाते कितना मुश्किल होता होगा? मैंने सोचा । उसकी हिम्मत ने मुझे खतरनाक सवाल पूछने के लिए उकसाया । इसके बारे में सोचने तक से अधिकतर पुरुष भयभीत होते हैं । आज था । मैंने इसके चाहते हुए कहा, मुझे लगता है कि ये हमारे लिए समय है । अपने परिवार के विस्तार का ऍन विजय, तमिल, बढिया मिस्टर विजय अंततः पिता बनने के लिए तैयार हैं । उसकी आवाज में उत्साह उसके आंखों की चमक के साथ मिल गया था । मैं बच्चा अपनाने की सोच रहा हूँ, खोद लेना । उसने कहा, जब हम जान दे सकते हैं तो खुद के लेना था । हमारे देश में कई अनाथ हैं तो पहले से बढती आबादी को और बढाने की बजाय हम एक बच्चे को अपनाना चाहिए । मैं कोई संत नहीं हूँ लेकिन मैंने बच्चा गोद लेने के लिए जो कारण दिया । उम्मीद पत्नी के लिए कम से कम निश्चय ही मुझे वोट व्यक्ति के रूप में वर्गीकृत कर रहा था । मेरे शब्दों की प्रतिवर्ती क्रिया के रूप में उपग्रह हुई । कुछ बडबडाई और अंतिम किसने कहा नहीं, मैं बच्चा गोद नहीं होंगे जो मैंने प्रतिवाद किया । एक बच्चा गोद लेने में क्या सौदेबाजी? कुछ नहीं । मैं बस ये सब नहीं चाहती क्या तो मुझे कुछ छुपा रही हो । मुझे अच्छी तरह से मालूम था की आस्था बात होनी थी । वो निश्चित रूप से बताएगी कि उसके दिमाग में आखिर किया था । मैं अपने पिता की दूसरी पत्नी के लिए एक सौतेली पुत्री थी और जब उन्हें बच्चे हो गए तो हर किसी का ध्यान मुझ से हटकर उस पर हो गया । जब भी मेरी माँ कुछ खरीदने के लिए बाहर गई तो केवल देरी सौतेली बहन के लिए सामान खरीद थी । हर साल उसका जन्मदिन उत्सव की तरह मनाया जाता था । यहाँ तक कि मेरी जन्मदिन पर कोई मुझे बधाई तक नहीं देता था । केवल मेरे पिता कभी कबार उपहार में कुछ कपडे देते मैंने विरोध किया केवल बाद में महसूस करने के लिए कि मैं हमेशा एक आवांछित बच्ची थी । एक अवांछित अवैध बच्ची । आस्था ने आंखों में आंसू के साथ कहा, मैंने उसे कसकर अपने आलिंगन में लिया । कहा जैसा कि मैंने तुमको बताया था, जब हम पहली बार मिले थे, वो बच्चा नहीं होता जो नाजायज होता है बल्कि माता पिता नाजायज होते हैं । उसे मुस्कुराता हुआ चेहरा रखने में कितनी मुश्किल आती होगी । उसके खुशमिजाज भाग्यशाली स्वभाव से कौन अनुमान लगा सकता था कि वह किस मनस्थिति से गुजरी थी और गुजर रही थी । मुझे पता है उसने स्वयं को शांत करते हुए कहा, बिल्कुल, मेरे माता पिता ने जो किया उसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं होगा । लेकिन मुझे अपने पूरे जीवन में मैं अपने आप तक ही सीमित नहीं हूँ । मेरे पास कोई नहीं था जो मुझे गले लगातार तो कभी भी माँ, बहिन बच्चे की दुर्दशा की कल्पना नहीं कर सकते हैं । मैं हमेशा अपने मूर्खों जैसी माँ को दिखाना चाहती थी । वो चुप हो गई । क्या था मैंने उसकी छुट्टी पकडकर कहा, एक दिन मैं दुनिया की सबसे अच्छी मामलों में उसके बाद से मुझे छोटा दिल का दौरा पडा और पहली बार मैंने उसके सामने झूठ बोलने का फैसला किया तो ठीक होगी । क्या होगा अगर हम एक बच्चे को गोद लेने के बाद एक को जन्म देते हैं । हो सकता है कि हम दोनों के बीच भेदभाव न करेंगे । उसका डर अब बाहर आ रहा था । मुझे यकीन है कि हम दोनों को समान रूप से प्यार करेंगे । मान लो हमारे पास अपना बच्चा नहीं है तो गोद लेना सबसे व्यावहारिक विकल्प है । मुझे खुद से घटना हुई जब मेरे भूसे फिसल गए । नहीं सही है । अभी तो हर बार इस कम्बख्त कंडोम का इस्तेमाल करते रहो गई तो अंत में हम केवल को भी ले सकेंगे । उस निराशा में कहा मैं मुस्कराया तो उनके मुस्कुरा रहे हो और फिर उसने विचार किया कि मेरी मुस्कान एक हसी थी, कुछ भी नहीं । मैं एक बात को लेकर निश्चित हूँ । झूठ बोलकर किसी को खुश करना सबसे किसी को चोट पहुंचाने से हमेशा बेहतर होता है तो सबसे अच्छी माँ होगी ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -15

पंद्रह हालांकि मुझे कोई संदेह नहीं था कि मेरे लिए आस्था का प्यार शुद्ध और मिलावट रहे था, पर नहीं इंसान था जो कभी कभी कमजोर हो सकता था । मेरे पास डेनियल का नंबर था और मैं उस से बात करना चाहता था । लेकिन मैं सोच रहा था की उससे क्या कहूँगा । मैं उस से मिलना भी चाहता था लेकिन किसी भी वजह से इस बारे में खराब महसूस कर रहा था । सुरक्षा नहीं था । मैं डेनियल से मिलने के लिए रविवार का दिन तय करूँ । मैंने खुद को सरगम के दोस्त के रूप में पेश किया तो किसी खास चीज के बारे में बात करना चाहता था तो अपने कार्यालय में मिलने पर जोर दे रहा था । लेकिन लगातार कई अनुरोधों के बाद उसने अपने घर पर मिलने के लिए सहमती दे दी । मैंने अपने आप में एक अद्भुत मनोवैज्ञानिक परिवर्तन देखा । मैं अचानक बहिर्मुखी हो गया था । मैं जो भी कर सकता था मैंने बिना किसी भैया बाधाओं के क्या शायद क्योंकि मेरे पास होने के लिए कुछ भी नहीं था । मैंने उस पेज खोला जिस पर उसके साथ अच्छा लिखी हुई थी । मैं डांटने पूरा और खुद से कहा मेरी तैयारी विलक्षण । पत्नी तुम और अधिक सामान्य इच्छाएं क्यों नहीं कर सके? अच्छा है लिखते समय तुम नशे में थी या तुम पर पागलपन सवार था । मैं सब कुछ करना चाहता था, इसको खुशी दे सकें । मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैं क्यों हिम्मत नहीं हार रहा था क्योंकि मेरे साथ हमेशा हुआ था । मैंने अगले असंभव कार्य पर काम करने के लिए अपना मन बना लिया था । मैंने हाॅट पत्रिका की संपादक एम प्रमुख सुधार आंटी को फोन किया और उनके कार्यालय पहुंच गया । पत्रकार का बेटा होने के कारण सुधार आंटी का संपर्क विवरण खोज निकालना मेरे लिए बहुत आसान था । तो मेरी माँ की करीबी दोस्त थी, लेकिन मेरी माँ की स्टोरी एक बार छीन ली थी और अब उन के करीब नहीं रह गई थी । रानी की बात है, उम्मीद शादी के दौरान आई थीं, जैसे की उन्होंने अपने मतभेद सुलझा लिए हूँ । फॅस दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में अग्रणी गपशप पत्रिका थी । जब वितरण के लिए आई तो शीर्ष पहुंचने से थी उनका कार्यालय छोटा लेकिन व्यवस्था था । कुछ सीटें प्रतीक्षा क्षेत्र में रखी हुई थी । मैं कुर्सी पर बैठा और समय बिताने के लिए पास में रखी ने इस पर पडी । एक मैग्जीन के पृष्ठों को पलक नहीं लगा । कुछ मिनटों के बाद मैं फॅस पर पहुंचा । पूछा क्या मैं पत्रिका के पिछले अंकों पर एक नजर डाल सकता हूँ? सर, हमारे पास आगंतुकों के लिए छोटा स्टोर है । आप वहाँ आराम से जा सकते हैं । उसमें कौन सी मशीन की और इशारा किया जिस से सटा हुआ पत्रिका भंडारगृह नामक एक कमरा था । मुझे हर महीने के हाई पेंटर्स की कई प्रतियाँ मिल गई । उसी कवर पृष्ठों की एक झलक लेना ये मेरा एकमात्र लक्ष्य था । आज साल एक दिन तो भारत फोटोस पत्रिका के कवर पेज पर होगा । मैंने उसे मन ही मन में वायदा किया । अधिकांश कवर पेज ऊपर आम व्यक्ति के चित्र थे । उनके दुर्लभ, दोनों को भरने वाले एक उभरता लेखक, अपनी पुस्तक के साथ कुछ संघर्षरत मॉर्डल, एक युवा, सफल उद्यमी, कुछ अग्रणी ब्रांड, रचनात्मक कलाकार, एक प्रसिद्ध समाजसेवी, एक रेस्ट रामालय, अगडी अधिवक्ता और बहुत कुछ पत्रिका के कुछ अंकों में सेक्सी महिलाओं की तस्वीरें थी, जो घर पर शराब बनाने के लिए आपको पांच तरीके से खाती हैं । एक अन्य स्टोरी में एक ग्रहणी हैं, जो रोटियां बनानी सिखाती है, जो तीन दिनों तक नरम रहे । पूर्ण अंधेरे में क्लिक की गई एक जोडे की तस्वीर से विवाहिक जीवन में सेक्स के महत्व पर एक लेख प्रकाशित किया गया था । मेरी आंखें अगले लेख पर टिक गई थी । एड बिहार को मार नहीं सकता । हर बार जब मैंने कोई अंक उठाया तो मेरा विश्वास केवल बडा । मुझे यकीन था कि केवल सुधार आंटी आस्था की कम से कम एक इच्छा पूरी करने में मदद कर सकती थी । एक घंटे की प्रतीक्षा के बाद मुझे सुधार आंटी के केविन के अंदर बुलाया गया । एक दीवार पर प्रसिद्ध मोनालिसा पेंटिंग बनी हुई थी । निश्चित रूप से एक प्रतिकृति, दूसरी दीवार को एक काली महिला के प्राचीन शो पीस डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम, शाहरुख खान और सलमान खान जैसी कुछ मशहूर हस्तियों की तस्वीरों से सजाया गया था । तीसरी दीवार पर हॅाट को सराहना में मेरे पुरस्कार और प्रशंसा पत्र लगे हुए थे । ये था बडे पैमाने पर हूँ हाँ के साथ एक कमरा समृद्धि का एक प्रदर्शन और उसके गुलाम के रूप में पैसा तुम्हारा स्वागत है । विजय बहुत समय से मिले नहीं । आॅल तुम कैसे हो और उसमें कैसी है ऍम फुटबॉल विश्वकप कॉलेज के लिए अभी भी दक्षिण अफ्रीका में है । कृपया मुझे सुधार बुलाओ । क्या मैं तुम्हें एक बडी लगती हूँ तो मुझे आंटी कह रहे हो । मैंने अनुमान लगाया कि वह बुढापे की सच्चाई को स्वीकार करने में सक्षम नहीं होने के दुर्लभ मनोवैज्ञानिक विकार से संक्रमित थी । मैं मुस्कराया, अच्छा किसी है । खैर इतना जरूर कहूंगी तुम्हारे पास से खूबसूरत पत्नी है । उन्होंने हफ्ते में कहा, इससे पहले की वह मेरे यौनजीवन से संबंधित कुछ भी कहे । मैंने सीधे मुद्दे बनाना ही बुद्धिमानी मना ठगबाजी मुझे आपकी सहायता की जरूरत है । कृपया कुछ भी पूछने के लिए स्वतंत्र महसूस करो । मुझे तुम्हारी सहायता करना अच्छा लगेगा । मेरी करीबी महिला मित्रों में से एक आपकी पत्रिका के कवर पेज पर प्रदर्शित होना चाहती है । तुम चाहते हो कि आॅटो उसके बारे में की स्टोरी छापे बिल्कुल सिर हिलाते हुए मैंने कहा मुझे अपने दोस्तों के बारे में और बताओ क्या करती है? क्या वो एक मॉर्डल या निर्देशक हैं? जी नहीं, वो तो हम महिला है । ठीक है, मुझे लगता है एक साधारण महिला है जो अपने व्यापार को बढावा देने या करियर बनाने के लिए खुद को प्रचारित करना चाहती है । मैं उनके अनुमान से आश्चर्यचकित था । वो एक उभरती हुई लेखिका है । मैंने झूठ बोला पांच लाख । उन्होंने कहा, जैसे कि वह एक मैंने काट रहे थे, आप उसके लिए पैसे ली थी । मैंने भाई चक्का होकर कहा उन्होंने से नहलाया । मैंने आगे कहा, इसलिए व्यापारियों और आम व्यक्ति के बारे में वे सभी स्टोरीज तो असाधारण थी । पेड स्टोरी थी । पीठ के रूप में से मत सोचो । ये पीआर है । आखिरकार ये उनके व्यापार को बढावा देने में मदद करता है । उन्होंने मेरे दिमाग में एक और तूफान खडा कर दिया । उन्होंने कितनी किताबे लिखी हैं । सुधार आंटी ने पूछा, अपनी पहली किताब पर काम कर रही है । मैंने फिर से जूझ बोला । पहली पर प्रदार्पण करने वालों के लिए चार्ज आठ लाख रुपए हैं । यहाँ रास्ता वहाँ होती है । मुझे यकीन है उस गारंटी के ऊपर बोलती पास जब उन्होंने बोलना जारी रखा तो मेरे मन में भी ऐसे ही विचार आए । पहली बार प्रदार्पण करने वालों को स्थान देना हमेशा जोखिम भरा होता है । तुम्हारे अतिरिक्त किसी अन्य ने मुझसे संपर्क किया होता तो मैंने उसके प्रस्ताव पर विचार भी नहीं किया होता । लेकिन मैं अपने दोस्त के बेटे को निराश नहीं करना चाहती हूँ । उनकी उदारता बचाने के लिए बहुत अधिक थी । सबसे पहले उन्होंने मुझे एक घंटे से अधिक समय तक इंतजार कराया और बाद में लाखों की छूट की पेशकश की । आपको सुना था, मैंने जी को उनके नाम से हटा दिया क्योंकि वह मुझसे ये अधिकार खो चुकी थी । इन सभी लेखकों जिनकी तस्वीरें कवर पेज पर दर्शाई गई हैं ना । इसके लिए तो मैं भुगतान किया है । था फिर हमें नहीं । लगभग हर दूसरी पत्रिका में यही व्यवस्था है । एक कवर फोटो और चार पेस्ट की स्टोरी के लिए कम से कम दस लाख रुपए का फीस लिया जाता है । तो मैं अवगत होना चाहिए कि शहर में हमारी करीब दस लाख प्रतियों का प्रसार है । लेकिन मेरा दोस्त ऐसा नहीं नहीं है । आपको सच बताऊँ, मैं एक अनुरोध के साथ यहाँ आया हूँ । उसे एचआईवी से पीडित बताया गया है और वो हमेशा चाहती थी की एक पत्रिका के कवर पेज पर कुछ नहीं । हम निश्चित रूप से उसी कहानी प्रकाशित कर सकते हैं । वास्तव में मैं शहर में था । हाँ, हम उसके ऊपर एक कवर पेज स्टोरी देंगे । इस प्रचार बाकी के साथ आपसे नफरत करें, पार्टियों से नहीं । उसकी प्रासंगिकता क्या है? आने की स्टोरी रहेंगे जिसमें हम तुम्हारी दोस्त के बारे में बताएंगे । कैसे वो कुछ पुरुषों या पुरुष वेश्याओं के साथ होती थी और असुरक्षित यौन संबंध बनाने से वो संक्रमित हो गई । अब एक पत्रिका के कवर पेज पर खुद को देखने की उसकी आखिरी इच्छा पूरी हो जाएगी । आॅल उसकी मदद करेगी । मैं अपनी तस्वीर उसके साथ प्रकाशित करूंगी लेकिन इस नहीं है । मैंने उस की टिप्पणी से विचलित होकर कहा, ऐसे कई माध्यम है जो किसी को एचआईवी से संक्रमित कर सकते हैं । जैसे की एक संक्रमित सीरिंज, चंद्र में तरफ संक्रमण, स्तनपान, एक साझा सिर, इनसे नशे की लत, एक ही बेड, शेविंग, एक संक्रमित चाहूँगा । बेड से कोई छोटा सा खाओ, मैं जारी रख सकता था लेकिन मेरी बात कार्ड भी । लेकिन इन सभी कारणों से स्टोरी पढाई नहीं जा सकती है । ये नहीं लगेगी । लेकिन ये किसी की जीवन का मामला है । मेरे लिए एक व्यवसाय है । मैंने वहाँ पे अपना बहुमूल्य समय और बर्बाद नहीं कर सकता था । तो मुझे लगता है कि उन्होंने मेरे धन्यवाद का निहतार्थ नहीं समझा । बिजी सुनो । उन्होंने कहा की कहानी चमत्कार कर सकती है । मैं कौन निर्माता द्वारा अपनी पत्रिका को प्रायोजित करा सकती है? मेरा प्रस्ताव पूरी तरह से फ्री है । फिर से सोचो उनके उत्साह से लबरेज फैली आंखें लालच के शुद्धतम रूप को प्रतिबंधित कर रही थी । अपना समय देने के लिए धन्यवाद । मुझे कुछ कहने दो । सुश्री सुधा हमारी पत्रिका का नाम सही है । धन्यवाद मैंने से बनाया है । मैंने वहाँ भरी कि केवल प्रचार और धूल है ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -16

हूँ सो हैं । हम डॉक्टर रजा के केबिन के बाहर अपनी बारी के इंतजार में बैठे थे था । इस बार मैं प्रसाद अस्थिर को ले आया था । आखिरकार वही तो बीमार थी । विजय डॉक्टर राजा एक बहुत ही वर्ष डॉक्टर हैं । उनकी परामर्श फीस क्या है? आसानी चिंता से पूछा । केवल एक निम्न मध्यमवर्गीय व्यक्ति अस्पताल में बीमारी की बजाय पैसे के बारे में सोच सकता है । नौ सौ रुपए तो बहुत महंगा है । उसने कहा और मेरी प्रतिक्रिया का इंतजार किया । एक पति का कर्तव्य निभाते हुए उसे उपकृत करना मेरी मजबूरी थी क्योंकि अगर हम यहाँ अपना बहुमूल्य धन पर बात कर रहे हैं, मैं पूरी तरह से ठीक हूँ । उसमें थोडा यही बार डॉक्टर को कहने दो तो मैं आश्वस्त हो जाऊंगा । उसके ॅ मैं घर पर तुम्हारी पूर्णकालिक देखभाल करने वाला नियुक्त करने की योजना बना रहा हूँ । किसी भी प्रकार के खर्च के लिए आस्था को मनाना वास्तव में बेहद मुश्किल था । ऐसा नहीं है कि वह बहुत अस्वस्थ रोगी थी लेकिन उसे दोष नहीं दिया जा सकता । इस बीमारी के लक्षण शायद ही कभी दिखाई दिए । मुझे केवल एक साधारण सर्दी है और तब तक उसका नाम पुकारे जाने के कारण उसकी बात अधूरी रह गई । डॉक्टर रजा जल्दबाजी में प्रतीत नहीं हुए थे । हम अंतिम रोगी नहीं थे या फिर उनके कुछ भी कहने से पहले मैंने उनकी थाली सर मैं विजय हूँ । आशा है आपको मेरी याद होगी और ये है मेरी पत्नी । मैंने आस्था की ओर इशारा करते हुए इनकी रिपोर्ट देखने के बाद अब के निर्देशानुसार मैरी ने बता दिया है इन का लीवर संक्रमित है । आस्था ने मुझे विचित्र दृष्टि से देखा था । पेशा नहीं मैं कैसे भूल सकता हूँ । मुझे याद है सब कुछ डॉक्टर हजार जवाब दिया मैंने राहत की सांस नहीं । डॉक्टर मैं पूरी तरह से ठीक हूँ । मेरे पति बे मतलब मेरे बारे में अनावश्यक चिंता कर रहे हैं । आस्था तुम्हारे पति अनावश्यक जानता नहीं कर रहे हैं । ये अच्छा है कि वर्तमान में आपके संक्रमण में कोई जटिलता नहीं है । आपका बहुत समय से निदान किया गया है । लेकिन ये बिगडेगा यदि तुम स्वयं की देखभाल नहीं करती हो । अब बताओ क्या को नींद आती हैं? कुछ भी होती है । सामान्य सर्दी पेट में लीवर के पास वाले हिस्से में दर्द होता है । हाँ, डॉक्टर पिछले कुछ हफ्तों से मैं बहुत तीन महसूस कर रही हूँ और पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द हो कर रही हूँ तो मुझे लगा कि ये दवा के कारण था । उन्होंने मुझ पर एक नजर डाली और कहा मुझे ऐसा लगा । मैंने उनकी और मुस्कुराते हुए देखा और कहा उन्हें पिछले पच्चीस दिनों से ठंड लगी है । अस्तर पुष्टि में सर हिला । पिछले कुछ दिनों के बारे में क्या ट्रक? रजा ने पूछा, मेरे मुंह में धातु की जैसा स्वाद रहता है । मैं अक्सर उल्टी जैसा महसूस कर दी है । इंगित करता है कि मैंने जो दवाएं दी है उनका असर हो रहा है । ये कहकर डॉक्टर रजा कुछ दवाओं के नाम बडबडाए । डॉक्टर और ज्योतिषी हमेशा लोगों की और मुश्किल शब्द उछाल देते हैं । आस्था उन्होंने आगे कहा, मुझे आपका पूर्ण शरीर परीक्षण करना है ताकि मैं संक्रमण की गंभीरता का आकलन कर सकूँ । उन्होंने कुछ लिखना शुरू किया जो हमारे लिए हिब्रू जैसा था । मैंने अनुमान लगाया कि उसमें पूर्व प्रोफाइल परीक्षण शामिल है । इसमें शामिल हैं फॅार भावस्थ था फॅमिली, सीडी, थ्री और सीडी फोर ऍम, यूरिन कल्चर ऍम एक्स रे गुर्दा पर एक्शन और है । पैसे की समस्या हो तो सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड को समझ छोड सकते हैं लेकिन बाकी सब जरूरी है । आज शुक्रवार हैं पहन सभी परीक्षणों को पूरा कराएंगे । और मुझसे सोमवार को रिपोर्ट के साथ मिलेंगे । डॉक्टर जब हम चिंतित है तो मैंने बताया कि ये बिल्कुल जरूरी नहीं है । हम उस पर चर्चा करेंगे । जब रिपोर्ट हमारे हाथ में होगी तो ऐसा बोले ठीक है, रहने वाले हैं । मुझे तो उनके आहार की निगरानी करनी होगी तो कोई संसाधन भोजन नहीं । कोई गेहूँ का आटा, चावल, पास्ता, आलू, टमाटर, बीस मक्का, थालियां, बेंगन या फिर डेरी उत्पाद नहीं । इसके बजाय में बहुत सारा प्रोटीन, सब्जियां, फल, बादाम और दालें । तुम इनसे बच्चे की तरह व्यवहार करना होगा । आस्था ने पूछा एक बच्चा क्यों? हम बच्चे के लिए खाद्य पदार्थ लेकर उसके सोने का समय सब कुछ तय करते हैं । सब कुछ की बारीकी से निगरानी की जरूरत है । हमारे ऊपर भी यही लागू होता है । एक लापरवाह रवैया हमारी किस्मत बदल सकता है । तब तक अपने समय का आनंद लो । डॉक्टर को बहुत देख रही थी । बजह ऍम कैसा है तो कुछ महीनों के लिए स्टाक से बचें क्योंकि ये उसके लीवर को प्रभावित कर सकता है । तो ऐसा हो लेंगे और मुस्कराएंगे हालांकि आप ऍम का समझ कर सकते हैं । डॉक्टर जम्मू से शब्द आस्था को नरक से निकालने के लिए डराने को पर्याप्त थे । उसी रात मैं अपने शयन कक्ष में बैठा हुआ । कॉलेज की पत्रिका दस बार पड रहा था । ये विडंबनापूर्ण था की कोई स्पार्क मुझे नहीं बचा था । उस की इच्छाओं को पूरा करने के लिए मेरे पास पैसा नहीं था । उसके जन्मदिन का जश्न मनाने के लिए पैसा नहीं था । मुझे ये भी पता नहीं था कि वह तब तक जीवित रहेगी या नहीं । अभी उपचार का खर्च मेरे दिमाग में एकमात्र प्रमुख बात थी । हालांकि मैं डेनियल से मिलने पडा हुआ था । पीछे क्या कर रहे हो? मेरे विचारों की श्रृंखला में बाधा डाली । क्या हुआ? हम पिछले पंद्रह मिनट से कॉलेज पत्रिका लिए बैठी हूँ लेकिन मुझे यकीन है कि तुम से पढ नहीं रहे हो । वो अब कैसा है । खैर मैं सोच रहा था मैं झूठ मुस्कराया । कोई आश्चर्य नहीं । इन दिनों तक बहुत सोचते हो तो जानती व्यवस्था अतीत में मैं कई बार आईएएस परीक्षा में शामिल हुआ । ज्यादातर बार में परिणाम भी नहीं देखता था । लेकिन अगली बार फिर परीक्षा दूंगा क्योंकि पापा मुझे ऐसा करने के लिए धक्का देंगे । उन का अपना इरादा था ऐसा करने का अच्छा तो मेरी आवाज में दर्द का अहसास होगा तो मेरे करीब आ गई और मुझे चूमा दे मैं जानती हूँ लेकिन तुम ये सब अचानक इसलिए सोच रहे हूँ । हर बार जब मैं परीक्षा को पास करने में असफल रहता तो मैं निराश हो जाता था । रोता था । माँ मेरे पास आती और पिता जी की तरफ से मैं माफी मांगती है तो कहती पापा मुझे बहुत प्यार करते हैं और उन्होंने अपने बेटे की उपलब्धियों के माध्यम से अपना सपना पूरा करने की कामना की । हाँ, तो ऐसा हो गया था कि मेरे लिए आईएएस की परीक्षा को तीन करना और संभव है । हमारी माँ को पता है कि छमा मांगना क्या है । करवाना था उन्होंने निश्चित रूप से क्या मुझे लगता है कि पापा की तुलना नहीं । मेरी भावनाओं के प्रति वह अधिक संवेदनशील थी । वास्तव में उसने उपहार से कहा किसी दिन तो महसूस करोगे । मैंने दृढ विश्वास के साथ कहा मुझे ऐसा नहीं लगता । अच्छा बहुत जोर देकर कहा परंतु क्यों तो इन सब के बारे में सोच रहे हो रहे हैं तो मैं सोच रहा हूँ की पत्नी के लिए क्या यह नैतिक क्या न्यायोचित रूप से सही है कि वो अपने पति की ओर से जमा मांगे । उसने इसके बारे में एक सेकंड के लिए सोचा और कहा ये पति और पत्नी के बारे में नहीं है । उनके द्वारा साझा किए जाने वाले बिहार के बारे में है । मुझे एहसास हुआ कि एक बहिर्मुखी से सलाह मांगना खतरनाक था लेकिन मैंने जोखिम लिया । मैं समझाओ । कोई भी तो दूसरे व्यक्ति से प्यार करता है । वो उसकी तरफ से माफी मांग सकता है । उदाहरण के लिए तो मुझसे प्यार करते हो और तुम भी मेरी और से माफी मांग सकते हो । उसने तीर निशाने पर साधा था । यही वो बात भी जो सुनना चाहता था । मैंने अपनी किसी पीती मुस्कराहट है । अब अब क्यों हंस रहे हो? सवाल फिरसे जस का तस था लेकिन तब तक प्रति प्रश्न करके मैंने इस प्रश्न की उपेक्षा करने की कला का प्रयोग कर दिया था । क्या होगा यदि कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को माफ नहीं करता हूँ? विजेता हमेशा माफ करते हैं जबकि हारने वाले हमेशा प्रतिशोध लेते हैं तो व्यक्ति माफी मांगता है । उतना सारा बोझ दूसरे व्यक्ति के सिर पर डाल देता है । वो जैसे समझता है हमेशा छमा कर देता है । जबकि वे लोग तो बदला लेने की तलाश में होते हैं । सारा बोझ होते हुए केवल खुद को जलाते हैं और इस तरह के अनुसार नीरव पति एक विजेता है । वो ठीक है । मैंने सराहना करते हुए एक अंगूठा दिखाया और पूछा मैं विजेता कैसे हूँ? क्योंकि तुमने अपने पिता को छमा कर दिया है ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -17

सत्रह हैं । मैं डेनियल के पते पर पहुंचा । मैंने पार्किंग स्थल में दो कार्य पाएं । एक मारूति जिसके पिता इस्तेमाल करते होंगे और एक डीजल आई ट्वेंटी । मैंने माना कि मेरी पत्नी के पूर्व प्रेमी की होगी । मैंने घंटी बजाई । एक लंबा स्मार्ट आकर्षक हुआ । व्यक्ति ने इसके चेहरे पर एक परिपक्वता की झलक थी । प्रेम रहे, चश्मा, शॉर्ट्स और अलग यू एस ए लिखा । टीशर्ट पहने मेरा स्वागत किया । उस सब आत्मविश्वास जो मेरे पास कभी नहीं हुआ, उसके हर जैसे प्रकट हो रहा था । मैं अचंभित हुआ । क्या अभी वही व्यक्ति था जिससे मिलने में आया था । मेरा संधि समाप्त हो गया । मैंने भरी अमेरिका चांस सुना है मैं डेनियल हूँ आॅयल मैं विजय हूँ । राजीव महसूस कर रहा था । फिर भी सामान्य सवाल मेरे मस्तिष्क में कौन गया? आसानी कैसे मुझे शादी कर ली है? विजय तो अंदर और बैठो । वो स्पष्ट रूप से बहुत ही परिष्कृत और शिष्ट व्यक्ति था । घर जैसा महसूस करूँ । उसने कहा तो हम क्या लेना चाहोगे? चाहे कॉफी या फिर जूस जो कुछ भी तुम्हारे लिए सुविधाजनक है । मैंने कहा भीतर घुसा उसका घर बडा नहीं था लेकिन साथ ही साथ ऐसा लगता था कि एक अमीर व्यक्ति इसका मालिक था । सोफा नया था और लिविंग रूम अच्छी तरह से व्यवस्था था । यीशु की तस्वीरें और सुनहरे क्रॉस डेनियल के मजबूत विश्वास का संकेत दे रहे थे । डेनियल एक मिनट में पिसी पर वापस आ गया था । था विजय हम ने मुझे बताया कि तुम कुछ निजी चर्चा करना चाहती हूँ । लेकिन इससे पहले क्या मैं पूछ सकता हूँ कि सरगम कैसी है? काफी समय हुआ जब मैंने उससे बात की थी, वो काफी अच्छी है । मैंने कहा मैं सोच रहा था कि कैसे आस्था के बारे में बातचीत शुरू करूँ । क्या तुम शादीशुदा हॅूं? मुझे नहीं पता था कि मैंने क्यों ये प्रश्न पूछा । नहीं अभी तक नहीं । उसने जवाब दिया, इस बीच को किसके साथ जूस के दो ग्लास नौकरानी रख गई थी । मैंने निर्णय लिया कि तेजी से खुल लूंगा अन्यथा निवेश बैंकर की रुचि मुझे खत्म हो जाएगी । मैंने कहानी सुनाई शुरू की जो मैंने बनाई थी । डेनियल मैंने भयानक गलती पिछले हफ्ते में एक दुर्घटना का शिकार हुआ । सडक पर एक बच्चे को बचाने के लिए मैं चर्च के सामने एक पैदल व्यक्ति पर गाडी चढा बैठा और से चोट लगी । किसी ने भी नहीं देखा क्योंकि रात में बहुत देर हो चुकी थी । हालांकि दुर्घटना के लिए मैं पूरी तरह जिम्मेदार नहीं था तो मुझे किसी का डर नहीं था और मैंने घायल को लेने के लिए एंबुलेंस पढाई । मैं अस्पताल भी गया जहाँ वो भारती था । उसका एक पैर टूट गया था और ठीक होने में लगभग छह महीने लग सकते हैं । हालांकि मैं निश्चिंत नहीं हूँ कि वह पहले जैसा फिट हो गया या नहीं । वो उतना कुशाग्र बुद्धि का था जितना कि मैंने उसे होने की उम्मीद की थी और मैं वास्तव में उम्मीद कर रहा था उसने वही कहा । इसमें मैं तुम्हारी कैसे मदद कर सकता हूँ? नहीं । सरगम ने मुझे बताया था कि आप के परिवार का बाइबल में बहुत मजबूत विश्वास है । जिस व्यक्ति को चोट लगी वह किस आई है । पहली बार मैंने उससे नजरे मिलाई और कहा, मैं घटना के लिए माफी मांगना चाहता हूँ । क्या पिछली सहयोग से मेरे लिए बादल से एक सबका बता सकते हैं ताकि मैं उस व्यक्ति से वैध कारण के साथ हम मांग सकूँ । मेरा सुस्त चेहरा मेरे वर्णन के साथ पूरे तालमेल में था । ठीक है, इस मामले में मेरे पिता हैं जिनसे तुम को बात करनी चाहिए । उसने जूस पीते हुए कहा, मैं उन्हें यहाँ बुला लेता हूँ ही नहीं । मैं उनसे बात कर अनुपयुक्त महसूस करूंगा । मुझे यकीन है कि एक धार्मिक व्यक्ति होने के नाते तो निश्चित रूप से मेरी मदद कर पाओगे । देखो तो मुझे जो चाह रहे हैं मुझे उसकी कम जानकारी है और मैं एक धार्मिक व्यक्ति कतई नहीं हूँ । हालांकि मुझे पता है कि ईसाई धर्म का आधार छमा है । जिन लोगों ने यीशु को मार डाला था इसमें उन्हें छमा कर दिया था । यहाँ तक कि जब हम चर्च चाहते हैं लोग पादरी से स्वीकारोक्ति करते हैं । मेरा सुझाव है कि एक चर्च में जाओ और अपने अपराध की स्वीकारोक्ति करो । इसके अतिरिक्त ये बेहतर होगा । अगर तुम चोट लगने वाले व्यक्ति को कुछ पैसे दे सकते या छतीस ही कर सकती हूँ तो भारी क्षमता हूँ की पर्याप्त होना चाहिए । लेकिन क्या होगा यदि वह प्रतिकार करता है । विजय वो हारने वाले होते हैं जो प्रतिकार करते हैं । विजेता हमेशा छमा करते हैं । मुझे यकीन है कि वो तुमको माफ कर देगा । ऍम था कि कैसे उसने उसी दर्शन को साझा किया जो आस्था ने किया था । लेकिन ऍम मुझे संदेह से देखते हुए कहा मैं समझ सकता हूँ तो मुझे कुछ छुपा रहे हो । ऍम सही हो हमारे हिन्दू धर्म में पति और पत्नी को एक दूसरे का आंशिक स्वत्व अधिकारी माना जाता है, जैसे संपत्ति दोनों की होती है । इसी तरह जिम्मेदारियाँ भी तुम रहस्यमय लगते हो । मामला क्या है? विजय मैंने गहरी सांस ली और कहा तुमको आस्था याद है । मैं उस अवसरवादी को बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ । मैं परेशान था अब सर्वादि हाँ, कुछ महीने पहले तक मेरी प्रेमिका थी । तब उसने एक प्रोफेसर से विभाग क्या? लेकिन इस दुनिया में तुमने उसका नाम कर लिया तो मुझे जो कुछ कहना से पूरा करने की अनुमति दो, बॅाल आसानी पारिवारिक दबाव में प्रोफेसर से शादी करने की स्वीकृति दी की देखते हुए की तो मैं अलग धर्म से संबंधित हो । उसके लिए अपने माता पिता को मनाना बेहद मुश्किल था । मैं उस पर विश्वास नहीं कर सकता । टेनिल उत्तेजित होकर बोला, आज तक कभी अपने परिवार की नहीं सुनेगी । वैसे भी अगर ऐसा है तो मेरे भारत लौटने तक इंतजार कर सकती थी । जब मुझसे बात कर दी अपनी सभी गलतियों के लिए वो क्लास नहीं महसूस कर रही है । मुझे शक है उसने कमी, व्यक्ति से शादी का अवसर, बातें ही लगभग लिया । वही भावना रहित लडकी है जिसने कभी किसी को प्यार नहीं किया ऍफ हो रहा था हम कैसे जानते हो कि उसका पति एक अमीर व्यक्ति है वो तो है ही व्यवस्था को बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ । मैंने सुना है उसके ससुर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थे और उसकी सांसे पत्रकार है तो तुम उन्हें नहीं जानते हैं तो उसके बारे में क्यों बात कर रहे हो? क्या तुम को लगता है कि नहीं कभी रखती हूँ हूँ उसमें आवाज ऊंची करते हुए पूछा मैंने यहाँ ही भाषा का पति हूँ । उसने मुझे पहुंचता होकर देखा, उसका मुंह खुला रह गया । उसकी समाधि को सेकंड की चुप्पी के बाद टूटी तो मैं यहाँ भेजने किसने मत कैसे की? उसने कहा उसकी आवाज अभी भी ऊंची थी । हम यहाँ मेरा मजाक उडाने के लिए आये हो ना नहीं । डेनियल प्रथम को ये बताने के लिए यहाँ आया हूँ कि मेरी पत्नी को तुम दोनों के लिए नहीं लडने की अपनी गलती के लिए खेद है । संक्षेप में परिस्थिति से दूर भागने के लिए उसे खेद है । मैं तुम पर विश्वास क्यों करना? तो यही एक मात्र कारण है कि मैं यहाँ आया हूँ । वास्तव में उसे खेद होता तो वो मेरे सामने खडी होती । मैं चुप रह गया क्योंकि मैं उसे आस्था की बीमारी के बारे में कुछ नहीं बताना चाहता था । वो यहाँ क्यों नहीं आई? वो लगभग चलाया क्योंकि मैं चुप रहा हूँ जाए । आगे कहा, जिस दिन उस ने मेरा परित्याग किया उस दिन मैंने उससे मिलने का वायदा किया था और साबित करता है कि उसने एक बडी गलती की थी । बैंक में मेरे अधीन पीओ हैं तो मुझे रिपोर्ट करते हैं । मेरे पास गुडगांव में एक अपार्टमेंट है । बहुत जल्दी मैं आईएएस अधिकारी की बेटी से शादी करने जा रहा हूँ । आस्था छलावा है । इसमें तुम्हारे लिए मुझे छोड दिया । मैं उससे बहस करने के बजाय चुप रहना बेहतर समझा क्योंकि उसे ये सब कहने का अधिकार था । ऍम जो कुछ हुआ उसके लिए वास्तव में क्षमाप्रार्थी हैं तो यहाँ क्यों नहीं आई? उसने फिर से दोहराया क्योंकि वह अस्वस्थ है । फॅमिली मैं मानता हूँ कि तुम स्टोरी बनाने में अब खुद हो लेकिन मैं तुम्हारा छात्र नहीं हूँ । पेश यहाँ से चले जाओ खडा हो गया ऍम इंदुवर भाषणा चाहता था ऍम मैंने कहा हम अतीत को नहीं बदल सकते हैं । वर्तमान में ऐसा कोई रास्ता नहीं है जिससे हम अपने क्रोध को शांत कर सकूँ । तूने उन लोगों को भी माफ कर दिया था जिन्होंने उन्हें मार डाला था । मैं उम्मीद करता हूँ कि तुम उसे समझने की कोशिश करोगे और से मांस करोगे । मुझे तुमसे या उस महास्वार्थ जी से बात करने में कोई दिलचस्पी नहीं है । वो भेजना था उसके दरवाजे और उसकी निराशा को सहने के लिए खडा था । तीस कहाँ हो जाओ यहाँ से जोर से चलाया । जैसे ही मैं उसके घर से बाहर निकला, मैंने कहा उसे स्वार्थी मत कहो । डेनियल उसने मुझे हल्के से बता दिया । मैं घर से बाहर निकल आया और उसने मेरे पीछे दरवाजा बंद कर दिया । मैंने फिर कहा, एक पराजित व्यक्ति हमेशा प्रतिकार करता है । दिल्ली में एक बार नीले चंद्रमा में बारिश होती है । बारिश हो रही थी । कुछ बारिश का मौसम बेहद पसंद है और आज मैंने भी बारिश में योगदान दिया । बारिश में होने के बारे में सबसे अच्छी बात ये है कि कोई भी आप के आंसू नहीं देख सकता है । मैं मूर्खों की तरह कुछ भी नहीं का पीछा करते हुए पराजित महसूस कर रहा था । नहीं सब क्यों कर रहा हूँ तो बहुत हो । मुझे जाना चाहिए जैसे मैं इन सभी वर्षों में रहा हूँ । मैंने खुद को शाम दिया । मुझे लगा दर्द मुझे डेनियल के शब्दों की वजह से बिल्कुल नहीं था लेकिन मेरी निरंतर विफलता के कारण था । मैं पेड के नीचे खडा हूँ जबकि नहीं आंखों से निरंतर आंसू बह रहे थे । मैंने आसमान की और देखा और बडबडा मैंने क्या गलत किया मेरी पत्नी के साथ ये सब आखिर क्यों हो रहा है? मैंने अपनी जेब से उसकी इच्छा वाला वो कागज निकाला और से दूर है । एक दिया इस सब बकवास है । अब से मैं इस में से किसी को पूरा करने का कोई प्रयास नहीं करूंगा । सुचेत में मैंने मैदान छोड दिया था और ये पहला मौका नहीं था । मेरा साल फोन बजा । हालांकि मैं किसी भी कॉल का जवाब देने के मूड में नहीं था । पर मैंने जवाब दिया जब फिर ऍम मैं तो पैसा डॉक्टर से कुछ भी सुनने की स्थिति में नहीं था । लेकिन मुझे अपनी पत्नी के लिए बात तो कर नहीं थी । मैंने मृतक स्थिति में जवाब दिया जी सर, मुझे एक रुपया आस्था को सभी दवाएं तुरंत रोकने के लिए हो । उसकी सभी टेस्ट रिपोर्ट मेरे पास आ गई हैं । कल मेरे पास आना और रुपया अकेले आना कुछ गंभीर ऍम नहीं । चिंता करने की कोई बात नहीं है । विजय मैं मैं भी सुनिश्चित नहीं कर पा रहा हूँ कि एक अच्छी खबर है या नहीं । हमारी पत्नी होती है वो । मैं बिना किसी औपचारिक बधाई के समय था । महसूस हो गया, सब की स्थिति में था । ये मेरी जिंदगी के अजीब से झडों में से एक था । डॉक्टर नहीं ऊँची सूचित करने के लिए बनाया था । मैं जल्द ही पिता बनने वाला था और उसने मुझे बधाई भी नहीं । नहीं कुछ नहीं पता था कि कैसे प्रतिक्रिया करूँ । मुझे खुश होना चाहिए या दुखी । मुझे कुछ याद नहीं था । मेरे चारों और सब कुछ चल रहा था । जबकि मैं अभी भी खडा था । धुंधला सा सवाल मेरे जहन में था । क्या होगा अगर बच्चा चाहे बी से संक्रमित हो जाता है । मैंने पेपर के मुझे थोडे टुकडे को देखा जो मैंने फेंक दिया था । पहले से फिर से उठाया, खोला और पढा मुस्कराया जबकि आंसू अभी भी मेरे कपोलों से होकर बह रहे थे । पाकिस्तान का एक स्पष्ट कारण था । मेरी पत्नी की इच्छाओं में से पूरी होने वाली थी । मेरा स्कूल ईद बता साथ था ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -18

अठारह डॉक्टर मैं बच्चा नहीं चाहता हूँ इस निर्णय को लेने के लिए मेरे पास तो कारण थे । पैदा होने के बाद जल्दी ही बच्चा शेष जीवन के लिए महत्वहीन हो जाएगा या वो भी अच्छे से संक्रमित हो सकता है । मैं समझ सकता हूँ । मुझे पता है कि उनके लिए रोज मारना की स्थिति नहीं थी इसलिए उन्हें समझाना चाहा । मैं नहीं चाहता की मेरा बच्चा दुनिया में एक अंतिम रोक के साथ आ जाए और बदले में उसकी पूरी जिंदगी पीडित रहे । विजय में आपकी जनता को समझ सकता हूँ । लेकिन आस्था की गर्भावस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि वो तीन महीने से अधिक गर्भवती है । अब हम घर पात नहीं कर सकते हैं । हम अगर ऐसा करेंगे तो हम अवस्था के जीवन को केवल खतरे में डालेंगे । क्योंकि आस्था की सीडी चार राउंड चार सौ से कम है और समय के साथ ही केवल कम ही होगी । वहाँ से बच्चे के संक्रमित होने की संभावना क्या है? ईमानदारी से पचास प्रतिशत संभावना है । मैं फिर हो गया । आपने जारी रखा है । कुछ मामले में देखा गया है कि मरीजों ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है । उनके शब्दों ने स्पष्ट संकेत दिया । उन्होंने इससे पहले ऐसा कोई मामला नहीं संभाला था । डॉक्टर नहीं ये बच्चा नहीं चाहता हूँ क्या मुझे स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए? मेरे पास अपने सामने मेरे एक और सपने को मारते देखने की ताकत नहीं है । विजय तुम केवल नकारात्मक यूज हो रहे हो । इसमें पचास प्रतिशत संभावना भी है कि बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है । चेंज पचास प्रतिशत के बारे में क्या डॉक्टर ठीक है कि एक डॉक्टर को सकारात्मक देखना चाहिए लेकिन होने वाले पिता के लिए सब कुछ भी असंभव है हूँ । उन्होंने विनम्रता से कहा, मेरा सुझाव है कि तुम एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क कर लूँ । क्या आप पीछे से व्यक्ति को जानते हैं जिसने इस तरह का मामला पहले संभाला है और जो मेरी मदद करने के लिए तैयार होगा? हाँ मैं डॉक्टर को जानता हूँ । वैसे मैंने पहले ही आस्था की रिपोर्ट पर उसके साथ चर्चा की है । किसी तुम चाहो तो तुम भी डॉक्टर रचना से परामर्श कर सकते हो तो उनके पिछले मामले में क्या सब सफल रहा है तो सुनिश्चित होना था नहीं । वेट सफल जान नहीं था । बच्चा मर गया था लेकिन वो एक अच्छे डॉक्टर है । मैं सोचना शुरू कर दिया । डॉक्टर रचना गुप्त रखेगी तुम चिंता मत करो तो प्रजा के शब्दों ने मुझे अपनी चिंता से मुक्त कर दिया । कौनसा व्यवस्था को बीमारी के बारे में नहीं बताएगी । मैं ऐसी कोई बात भूल गया था । कैसे यकीन कर रहे हैं कि वो मेरी मदद करेंगे? मैंने पूछा उन्होंने गहरी सांस क्लियर कहा क्योंकि वो मेरी पत्नी है । आस्था ने अपनी गर्भावस्था की खबर मुझसे पूछ छुपाई, क्या उसे पता नहीं था । लेकिन किसलिए कैसे अपनी गर्भावस्था के बारे में अंतिम की हो सकती है ही? बच्चा नहीं रहा है । एक अदृश्य खलनायक वाली फिल्म की तरह रहा था । मैंने इसके तीन घंटे की फिल्म होने के लिए कामना कि यहाँ खेतों से बाहर निकलने के बाद सब कुछ सामान्य होगा । तथा पे मेरी सबसे बडी चिंता । इस फिल्म का चरमोत्कर्ष एक समस्या जो अभी खत्म नहीं हुई थी और दूसरी पैदा हो गई थी । जब भी मैं उलझन में होता हूँ, एक दरवाजा है जिसपर में दस्तक देता हूँ । ऍम पडा खबर मेरे पास आपके लिए कुछ खबर है । वो क्या है? अच्छा या बुरा? जब भी कोई सवाल पूछता है, सुनिश्चित रहें कि वह पत्थर के लिए तैयार है । मुझे यकीन नहीं है । मैं अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा हूँ । ठीक है । मुझे बताओ, मैं किसी भी बात के लिए तैयार हूँ । हमारे अच्छा घर पति है वो । मैं सुनिश्चित नहीं था कि उसका उनका विस्मयादिबोधक खुशी का था या फिर सब का । उन्हें क्यों कहा की आस्था गर्भवती हैं । वो नहीं जिससे बच्चा होने वाला है तो भी पैदा होने जा रही हूँ । ॅ के साथ हुई एक एक बात उन्हें विस्तार से बताई आप ऍम मैंने उनकी टिप्पणी की अनदेखी करते हुए कहा, मैं सत्य को बचाने के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं था । उन्होंने मुझे अभी तक बधाई नहीं दी थी । नहीं मैं खुश नहीं हो और मुझे आशंका है । उन्होंने कहा, उन्होंने मुझे प्यार से देखा और कहा मुझे गलत मत समझो लेकिन क्या तुम्हें यकीन है की बातें ये बच्चा तुम्हारा है । ये देखते हुए वो एक एचआईवी रोगी हैं और हम अतीत में बहुत यात्रा कर रहे थे । क्या होगा अगर ये पता चला कि तुम उसे पूरी तरह से नहीं जानते हैं । यही सब मेरे मेरे दिमाग में कुछ घंटों पहले आया था । लेकिन मैं स्वीकार नहीं कर सकता कि कोई भी मेरे पीछे के चरित्र पर संदेह करें । मैंने कहाँ भरी और कहा था आज का लगभग तीन महीने से गर्भवती है । हमारी शादी को छह महीने हो गए हैं । उन्होंने मुझे बहुत देखा । मैंने अपने आंसू भरी आंखों के साथ कहा, दुर्भाग्य से वाले ही आप जो भी कह रहे हैं वो सच है । कोई बच्चा है तो मेरी पत्नी की गर्व में बढ रहा है । मेरे लिए पर्याप्त है । उसे अपना कहने के लिए कमरे में खामोशी के बीच पापा ने मुझे गले लगा लिया । हम दोनों को इस आनंदन की जरूरत है । पहली बार मुझे लगा जैसे सब के बावजूद खेला नहीं था । मुझे लगा कि वो भी टूटने के प्रकार पढते । हमें खुद को आलिंगन मुक्त कर दिया । मैंने लंबे समय के बाद वास्तव में उनकी आंखों में सम्मान भाव देखा । महत्वपूर्ण समय है कि तुम आस्था को उसकी स्थिति के बारे में बता दूँ । उसे पूरी तरह से देखभाल की जरूरत है । पैसे भी डॉक्टर के यहाँ अक्सर जाने और इलाज के दौरान से सबका पता चलना ही है । पास्ता में तुम जितनी अधिक देरी उसे बताने नहीं करोगे, जिसके लिए केवल और केवल खतरनाक होगा और अब बच्चे के लिए भी । अब अगर मैं स्वाभाविक रूप से बताऊंगा तो ठीक रहूंगा । मैं स्वयं उससे किसी भी विवाद से बताना चाहता हूँ । क्या होता है दी जाएगी कुछ दिन से बताने का साहस नहीं है । आपने पहले ही सबसे बुरे का सामना कर चुका हूँ और मुझे यकीन है पापा की मैं इस का भी सामना कर सकता हूँ । मुझे लगा चुके थे । उन्होंने बोलने के पहले कुछ सेकंड सोचा । हम सबसे खराब दौर से गुजर रहे हो । मैंने पास की मिठाई की दुकान से आधा किलो रसगुल्ले खरीदें और अपने घर के बाहर खडा हो गया । दरवाजा मुझसे केवल एक मीटर था लेकिन मेरे लिए वहाँ तक चलना हम मुश्किल था । मैं आंखों में आंसू लिए उसे अच्छी खबर नहीं बताना चाहता था । मैंने अपना धूप का चश्मा निकाला और उन्हें अलग कारण से पहना । भारी मन से मैंने दरवाजे की घंटी बजाई । चश्मा के पहले हूँ । उसने चिंतित होकर पूछा, जैसे ही मैं घर में बचा है और मेरी आपको कुछ चला गया है, कुछ चुप हो जा रहा है, कोई बात नहीं । मेरे पास तुम्हारे लिए बहुत अच्छी खबर है । मैं मुस्कुराते हुए कहा, वास्तव में अच्छी खबर उत्साहित और खुश मिजाज नहीं लगती थी जिससे वह कोई खुशखबरी सुनने की संभावना पर हो जाती हूँ । उसने मिठाई के पैकेट पर भी ध्यान नहीं दिया । यहाँ इसे लोग मैंने ऍसे सौंपने मैं कहा मुझे कुमारी मनपसंद मिठाई नहीं उसने पैकेट मुझसे ले लिया और सीधे रसोई घर क्या चली गई । क्या मुझे बताना चाहिए की जांच में उस नहीं अच्छाई भी पाया है । ऍम से अच्छी खबर बताऊँ तो कैसे? प्रतिक्रिया करेगी तो अच्छी नहीं रह जाएगी । जब एक बार उसे अपनी हालत की जानकारी होगी नहीं, मैंने नहीं कर पा रहा था । कुछ घंटों के बाद आस्था रसोई घर से बाहर निकली और पूरा रसगुल्ला मेरे मुंह में ठूंस दिया । अरे वाह, मैं तुमको पहले अच्छी खबर सुनाता हूँ । पहले चश्मे को हटाओ । उसने मेरे आँखों से चश्मा हटा दिया । गर्भवती हो सही नहीं है । उनको कैसे पता चला? यहाँ प्रतिक्रिया है । मैंने उसके उत्साहित होने की उम्मीद की थी लेकिन ये विपरीत था तो भरी रिपोर्ट आज मिलने की ऍम मुझे फोन किया और मुझे बडी खबर के बारे में बताया । मेरे प्रिय पति देव मैं इसे पिछले तीस दिन से जानती हूँ तो गोवा में थे तो मुझे इसके बारे में जानकारी हुई । मैंने तो मैं चकित करने की योजना बनाई थी और सही समय की तलाश में थी । ये कहते हुए हम जब भावुक होकर गले लगा लिया ऍम मैं भी होने वाला था लेकिन उसके उपर स्थिति में कमजोर होने का जोखिम नहीं उठा सका । हालांकि उसके आंसूओं के कारण को मैं समझ नहीं आता है । मैं तुमसे प्यार करता हूँ । मेरे प्रिय जल्द ही बनने वाली हो । मैं उसे करीब कसकर आलिंगन बंद कर दिया । मैं हमेशा एक अच्छी मां बनना चाहती थी । उन कल्पना नहीं कर सकते । कितनी होगी । उसे सपने लगी और मेरी बाहों में पडी रही तो क्या आंसू मेरे चेहरे से झड रहे थे । मैंने तय किया कि मैं सच्चाई नहीं बताऊंगा नहीं ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -19

ऍम मेरी कॉलेज की छुट्टियाँ लगभग समाप्त हो गयी थी । मेरी माँ दक्षिण अफ्रीका से लौट रही थीं । उन्हें आस्था की गर्भवस्था की खबर मिले लेकिन उन्होंने उसे फोन करने की परवाह नहीं की । आस्था को हर एक दिन छोडकर अस्पताल जाना पडता था । छेडी चार और सी डी थ्री परीक्षण उसके लिए अनिवार्य सप्ताह में दो बार । इस बीच प्रगति अच्छी थी । उसकी हालत स्थिर थी और उसमें चिंता का कोई संकेत नहीं दिखाया । वो जरूर ही करती, कमजोर महसूस करती । और मैंने उसे जितना संभव था उतना खाना पकाने, सफाई, कपडे धोने और किराने की खरीदारी में मदद की । डॉक्टर रचना ने हमारी बहुत मदद की और कोई भी भेदभाव नहीं कर रहा था । मुझे खुशी है कि कि हर कोई उससे सामान्य इंसान की तरह व्यवहार कर रहा था । मुझे विशेष रूप से वे सभी चिकित्सा नुस्खे और रिपोर्ट छपाने थे जिनमें बीमारी का नाम लिखा था । उस ने बहुत ज्यादा नहीं पूछा । वो घर पर शांति से रह रही थी । जिस तरह की लडकी वो थी, उसे पूरे समय घर पर रहने भी मुश्किल होती थी । हालांकि उस नहीं कोई भी अंशकालिक नौकरी करने का कोई अनुरोध नहीं किया तो भी उसकी मुख्य चिंता पारिवारिक खर्च थे । नियमित उपचार के दो सप्ताह बाद भी उसके सीडी फोर अकाउंट में कोई सुधार नहीं था और बहुत कम था । इससे डॉक्टर चिंतित थे और उन्होंने सख्त आहार के साथ टीकाकरण, उसके रक्तचाप की निगरानी और हर दूसरे दिन उसके रक्त का नमूना लेने की सिफारिश की । फॅमिली खुलने वाला था और आस्था के लिए ये सभी चीजें अकेले संभालना बहुत मुश्किल था । मैंने डॉक्टर वजह से इस मामले पर चर्चा की और उन्होंने उसके लिए पूर्णकालिक नर्स की नियुक्ति का सुझाव दिया । आस्था अपने स्वास्थ्य से अधिक खाॅन डॉक्टर की सिफारिश से अच्छा भी नहीं क्योंकि हम एक पूर्णकालिक नर्स रखने का जोखिम नहीं उठा सकते थे । लेकिन मेरा फॅमिली चुनौती के लिए तैयार था । इस बार ये भी ऍम मैं एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भागना नहीं चाहता था और ना ही हताश होना । मैं डॉक्टर वजह से कोई एजेंसी बताने को कहा जो घर पर नजर उपलब्ध करवाती हूँ । अगले दिन में फॅमिली के अंदर बैठा था । इसका प्रचार वाक्य कर रहा था, हम आपकी देखभाल करते हैं, उससे छोटा सा कार्यालय था । इसमें छोटा के दिन और एक खुला वेटिंग एरिया शामिल था । चालीस वर्षीय व्यक्ति अंदर बैठा था । ऍम पर इंतजार कर रही थी, नौकरी की तलाश में भी हो सकती हैं । मैंने सोचा ऍम फोन पर बात करने में व्यस्त नहीं और कुछ ही मिनटों के बाद मुझ पर उसका ध्यान आ गया । सर, मैं कैसा आपकी मदद कर सकती हूँ? क्या घर पर योग्य नर्स उपलब्ध कराने की सेवा देते हैं? जहाँ हम सेवा में अग्रणी हम यहाँ सबसे बडे नर्सिंग परामर्शदाता है । उसने मुझे भरने के लिए कौन दिया? इसमें रोगी का नाम, लिंग, आयु, बीमारी, परामर्श, डॉक्टर बीमारी की प्रकृति संक्रामक क्या नहीं? और यदि ये एक अंक के रोक था जैसे कुछ जरूरी विवरण देने थे । इसमें ऐसे प्रश्न भी शामिल थे जैसे के रोगी को कोई मानसिक बीमारी हैं । घर पर कोई अन्य व्यक्ति उपलब्ध होगा । करोगी स्वयं पेशाब और शौच कर सकता है । वो पीछे छोटा सा नोट था । पुनश्च चाहा कि सब जानकारी गोपनीय रखी जाएगी । ऍम को भरने से पहले मैं यहाँ किसी वरिष्ठ व्यक्ति के साथ बातचीत करना चाहता हूँ । सर कुछ दिन प्रतीक्षा करें । हमारे परामर्श चाहता, आपसे बात करेंगे । परामर्शदाता कौन है? वो डॉक्टर ऍम उस व्यक्ति की तरफ इशारा किया जो क्या दिन के अंदर पारदर्शी दीवार के पीछे बैठा? ना मैं सोच रहा था क्या मुझे उन्हें आस्था की बीमारी के बारे में बताना चाहिए तो कैसे प्रतिक्रिया करेंगे । कुछ दस मिनट के बाद बुलाया गया था ऍम डॉक्टर की तरह से फिर स्पोर्ट पहन रखा था । मैं समझने में सफल रहा कि वह डॉक्टर की तरह कपडे क्यों पहने हुए थे । ऍफ नहीं था नहीं कोई मरीज थे । नमस्कार बीस बैठे उन्होंने सामने रखी कुर्सियों की और औपचारिक रूप से संकेत क्या नमस्कार मैं विजय हूँ ऍम उन्होंने जवाब दिया जैसे कि वह जेम्स बॉन्ड हैं । फॅमिली में मैं अपनी पत्नी के लिए पार्ट टाइम नर्स लेना है । हम दिल्ली एनसीआर में नहीं नर्सिंग में सबसे बडे हैं और हमारी एजेंसी के माध्यम से लगभग एक हजार नर्सें पहले ही सेवा पर हैं । हमारी सभी नर्सें अच्छी तरह से हो गए हैं और उनके पास इंडियन नर्सिंग काउंसिल यानी आईएनसी द्वारा प्रमाणित डिग्री है । बीस प्रतिशत नर्सिंग में डॉक्टर की डिग्री ले रही है । उन्होंने एक सुर में कहा, जैसे उन्होंने इसका दस लाख बार अभ्यास किया हूँ । वाकी बहुत अच्छी बात है । मैं छदम मुस्कराया, हम बहुत किफायती हैं । आप सबसे अच्छे आए हैं तो बढ चढकर बोले जा रहे थे । जैसे को देश में सबसे बडी आउटसोर्सिंग फर्म के मालिक थे । ठीक है मेरा मरीज हम के रोग से पीडित है । उन्होंने बंद कर दी गहरी सांस ली और कहा आप चिंता न करें । हमारी नर्स रोगी के मल मूत्र स्थान से लेकर टीकाकरण और फोर हंड्रेड में भी मदद करेंगे । मरीजों का रिश्तेदारों की तरह मानती है । जी नहीं, मुझे ऐसी चीजों की जरूरत नहीं है । मुझे क्लास की जरूरत है । जो उसे इंजेक्शन और रोजमर्रा की दिनचर्या में मदद करें । उसे उसके रक्तचाप की निगरानी कर रही है । इससे ज्यादा कुछ नहीं आवश्यक है । वर्षों में जा सकती है और अपनी दैनिक गतिविधियों स्वयं कर सकती है । ठीक है, मैं कुछ नर्सों की व्यवस्था कर सकता हूँ जिनसे अभी सेवा के लिए आप बातचीत कर सकते हैं । बीमारी का नाम क्या है? ये ऍम उन्होंने कुछ सेकंड के लिए सोचा । विश्वास करना मुश्किल था कि ये वहीं व्यक्ति था तो कुछ दिन पहले बक बक किये जा रहा था । कुछ महसूस हुआ कि वह मेरी मदद करने नहीं जा रहा था । देखिए, मैं समझा । मैं आपको बताना भूल गया कि हम संक्रामक बीमारियों वाले रोगी का प्रबंध नहीं करते हैं । चाहे भी एक संक्रामक बीमारी नहीं है, छूने छेडछाड करना ही है । यहाँ तक कि चुंबन से भी नहीं फैलती है । विश्वविजय मुझे खेद है कि मैं आपकी मदद नहीं कर सकता हूँ । आॅखो खतरे में नहीं डाल सकते हैं लेकिन कोई खतरा नहीं है । मैं खुद उसके साथ रह रहा हूँ, उसके साथ हो रहा हूँ और ऍम नहीं है । ये हमारी जानता नहीं है की आपकी आपकी पत्नी किसके साथ होते हैं । उसमे ऍम कहा अपनी जबान पर नियंत्रण हो । हम उससे सर बात नहीं कर सकते हैं । ऍम पहली बार था जब मैं इतनी जोर से चलाया था । एक घंटे के बाद में अगले नर्स परामर्श केन्द्र के सामने खडा था । उसके बोर्ड पर ऍर एट होम लिखा हुआ था कि जगह सोलह के डिस्ट्रिक्ट सेंटर मिस्टर थी । अपोलो इंद्रप्रस्थ अस्पताल सिर्फ एक किलोमीटर दूर था । भीतर गया पिछले की तुलना में बडा और यहाँ भीड थी । मैं योग्य नर्स की तलाश में हूँ । मैंने संक्षेप मेरे सेक्शन पर बैठी महिला को बताया बीस बैठी हूँ बुलाएंगे मुझे उम्मीद थी मुझे फॉर्म भरने के लिए दिया जाएगा । लेकिन ये देखभाल केंद्र थोडा अलग लग रहा था । एक सिल्वर बोर्ड पर अंकित था । हम पैसे के लिए यहाँ नहीं है । हम एक गैर लाभकारी संगठन है । उसके आगे यीशु का पोस्टर था । मैंने अगला बडा पॅन जिन्होंने दुर्भाग्य है कि नहीं आये लोगों की पीडा और बीमारी ये संबंधित है । लेकिन मानव जाति के प्रति मेरा कर्तव्य पूरा करने के लिए कुछ व्यक्ति नहीं । मैं कई बहुत प्रभावित था । सर आप जा सकते हैं । फॅसने कहा मैंने भीतरी केबिन में प्रवेश किया । ऍम थी हम उस परेरा जेम्स के बाद लगातार एक और साइन । ये उद्योग उनसे भरा हुआ था और मैं समझने में असफल रहा । आखिर क्यों? ऍम पर्यटन मैं विजय हूँ । स्वागत ऍसे पहले किया था आपने आवश्यकता समझाएँ आपको कुछ चीजें बताता हूँ । यहाँ पैसे के लिए नहीं है कि वास्तव में बडी बात है । हमारा इरादा पूरी तरह से मानवता की सेवा करना है । हम एक गैर लाभकारी संगठन है और हमारे पास केवल योग्य वह प्रमाणित नर्से हैं । उन्होंने वही गीत गाया जो मैंने थोडी देर पहले रहा था । कहीं गहराई से मुझे लगा कि यहाँ फिर से वही कहानी दोहराई जानी है । मुझे पता है कि आपका बहुत ही कुछ संगठन है । फॅमिली आवश्यकता को पहले नहीं । मैंने बात करते हुए कहा कि मैं समय बर्बाद करना नहीं चाहता हूँ । मुझे माफ करें, स्वतंत्र महसूस करेंगे । हम सभी जानकारी गोपनीय रखेंगे । उन्होंने कहा, मैंने अपनी आवश्यकताओं को समझाया और उन्हें बिना नाम प्रकट किए रोग की गंभीरता के बारे में सूचित किया तथा अंत में जोडा कि एक किफायती बेहतर होगा । इसकी चिंता मत करिए । आप से कम से कम चार्ज करेंगे । मैंने आपको बताया ना कि हम पैसे के लिए नहीं है । अब बताइए बीमारी का नाम क्या है? सर नहीं पत्नी ॅ के बीच एक अंदर है, ऍम सकते हैं । ब्रेक मिनट के लिए मौन हो गए । बिल्ली ये कोई अप्रत्याशित प्रतिक्रिया नहीं नहीं विश्वविजय । कुछ महीने पहले इसी प्रकार का एक मामला आया था । उन्होंने कुछ नर्सों का साक्षात्कार किया लेकिन कोई नहीं सुन के लिए काम करने को तैयार नहीं हुई थी । समझे कुछ आपकी मदद की जरूरत है । कृपया अपनी और से कोशिश कीजिए ही रहता है । मैं उसे बीमारी को छिपाने की जरूरत हुई जी कैसे हैं? नहीं डॉक्टर के पर्चे के लिए पूछ रही हूँ । विजय जी, आपके पास पैसा है तो सब को संभव है । डॉक्टर के पर्चे के बारे में ही करूँगा । उससे तुम्हारे लिए प्रबंधन करूँ । एक नकली डॉक्टर का बच्चा लेने के लिए आपको केवल मुझे थोडी अतिरिक्त राशि देने पडेंगे । इतनी डॉक्टर ऍम एक डॉक्टर के पैड पर केवल कुछ बीमारी लिखने के लिए दस हजार रुपए । मैं डॉक्टर के बच्चे के लिए चार नहीं ले रहा हूँ । बीमारी को छिपाने और आपको नर्स उपलब्ध कराने के लिए चार्ज कर रहा हूँ । ये बहुत महंगा है । आपकी इच्छा है विजय मुझे पता है कि अगर आप किसी को बताते हैं कि आपका होगी ऍफ है तो कोई भी स्पष्ट नहीं करेगा । उसकी देखभाल की तो बात बहुत दूर है । मुझे तो बहुत शुरुआत से ही पसंद नहीं आया था । लेकिन आखिरी जगह से खाली हाथ बाहर निकलने के बाद मुझे यकीन हो गया । कम से कम वही था जो समझदार था और मुझे एक नर्स दिला सकता था । मैं अपने अगले कदम के बारे में सोच रहा था जब वो रहस्यमय ढंग से मुस्कराया और बोला, ऍम, मेरा इरादा तुम्हारी मदद करना है । हम यहाँ पैसे के लिए नहीं है । ठीक है लेकिन मैं क्या चार्ज करेंगे? मैंने केवल छह घंटे चाहता हूँ । आपके द्वारा चुनी गई नर्स पर निर्भर करता है । अधिक योग्य और अनुभवी पीस लेगी । लेकिन ये बीस हजार से पचास हजार होता है तो बीस भी काम की प्रकृति पर निर्भर करती है । मान लीजिए कि अगर कोई खून बह रहा है या बाहरी चोट भी है, पीछे नहीं है । अगर रोगी के कपडे धोने और सफाई भी शामिल है आप सत्रह फीसदी जाएगी । ॅ सभी हाथ के दस्ताने, ॅ और सिरिंज आपके द्वारा खरीदे जाने हैं । उस ने जो भी कहा उसके साथ मैं सहज नहीं था तो मेरी स्थिति को समझ गया । अपनी सीट से उठ गया और मेरा काम होता है । विजय चिंता मत कर रहे हैं । यदि आप करोगी, धुलाई और सफाई को प्रबंधित कर सकता है तो ये बीस हजार से अधिक नहीं होना चाहिए । ठीक है, हाँ ठीक है । हम आज तक शक्कर कर सकते हैं । मालवीय नगर जो सोलह से बहुत दूर है वो मुझे देखने दो तो बाहर चला गया और दस मिनट बाद वापस आ गया । वो हाथ में कुछ कागजात के साथ लौटा था । मुझे तुम भाग्यशाली हो दो । नर्सें अभी उपलब्ध हैं । ये उनके सीवी हैं । मैं कागजात देखी, राहत और पडने की कोशिश कर रहा था कि कौन उसके लिए अधिक उपयोग था । तब मुँह होगा जरूर से पहले बात करते हैं । मैंने से मिलाया और उसने पहले एक फोन कर रहा हूँ । राधा गुप्ता अपनी अधेडावस्था में एक लडकी की तरह लग रहे हैं तो बहुत दुबली थी और मुझे विश्वास नहीं था । कोई वो किसी और की देखभाल कर सकती हैं । रखा कि उसे खुद एक नर्स की जरूरत ही हम दोनों था उसके सामने खडे थे । ऐसा लगता था कि थॉमस द्वारा मेरा साक्षात्कार लिया जा रहा था । मुझे अपने बारे में कुछ बताओ । उसने पूछा इस सवाल ने मुझे जमा दिया । मैंने प्रतिप्रश्न किया और एक अन्य सवाल पूछा तो मुझे लगा उस सवाल की जरूरत नहीं । नहीं राजा, आपके पास कितने साल का अनुभव है? मैंने एक और सवाल पूछा कोई अनुभव नहीं, मेरा पहला होगा । मुझे आपको भाडे पर क्यों लेना चाहिए? मुझे दूसरे सवाल ऍम प्रभावित हुआ लेकिन मैं कोई अन्य सवाल नहीं सोच रहा था । मैं सभी जरूरी टीकाकरण और नर्सिंग जिम्मेदारियों को जानती हूँ । अपनी पढाई के दौरान मैंने एक अस्पताल में काम किया था । राजा प्रत्युत्पन्न से जवाब दे रही थी । मैंने अनुमान लगाया कि ये उसका पहला साक्षात्कार भी हो सकता है । वजह क्या तुम कुछ पूछना चाहते हो? ऍम मुझे लगता है कि उनके लिए ये ठीक रहेगी । ठीक है तो क्या? तो कुछ पूछना चाह रहा हूँ । मेरे कुछ पूर्वक रहे हैं राजधानी कहा मैं ऐसी जगह काम करना नहीं पसंद करूंगी । चार रोगी को तपेदिक, वायरल बुखार, ऍम या फिर एंड जैसी कोई संक्रामक बीमारी हो । राजधानी कहा लेकिन एट संक्रामक नहीं है । मैं विरोध किया उसे पता है । लेकिन मैं जो भी के लिए काम करना नहीं चाहती, राजधानी जवाब दिया । वो ही कह रहा था वो होगी पीलिया ऍम बेटी है । हम उसके आदेश दिया तो भारत हजार कर सकती हूँ । बाहर गई लेकिन मैं से नियुक्त करने की मनोदशा में नहीं था । आॅनर्स को नहीं चाहता हूँ । तुमको एचआईवी रोगी के लिए कोई नर्स नहीं मिलेगी । हम उसने मुझे मनाने के लिए रहा । मेरे एक सवाल है । एक नर्स देखभाल कैसे कर सकती है जब उसे रोगी की बीमारी पता ही नहीं । मान लीजिए कि एक पीलिया रोगी को अंगूर के रस पीने का सुझाव दिया जाता है । क्या होगा अगर वो अंगूर का रस मेरी पत्नी के लिए हानिकारक है? उसका जीवन खतरे में पडा है तो क्या होगा? फॅमिली नहीं है । कोई फर्क नहीं पडता । कुछ घंटों के बाद रोजी होम्स ने प्रवेश किया । रोज एक मध्यम आयुवर्ग की आत्मविश्वास से भरी महिला थी रोजी आपके पास नर्सिंग का कितने साल का अनुभव है? दस से अधिक बस आपका ज्ञान जांचने के लिए पूछ रहा हूँ क्या ऍप्स के बीच मैंने पूछा फॅमिली वाहक है ऍम घातक बीमारी है । एक अच्छा हीरो की ठीक से देखभाल करने पर सामान्य जीवन जी सकता है लेकिन फॅमिली लंबे समय तक नहीं सकता है । अच्छा प्रभावित था तो मैंने सवाल पूछा जो निर्णायक होना था क्या? चाहे भी संक्रामक है? नहीं । ये केवल तभी संक्रमित करता है जब हम संपर्क और असुरक्षित यौन संपर्क होता है । वो सूत्रों से मैं थोडा सहज ऍम रोजी देखिए मैं कुछ भी छुपाना नहीं चाहता । और जैसे कि आपको पता है कि एड्स कोई संक्रामक बीमारी नहीं है । मेरी पत्नी एक सच्चाई होगी है और वो गर्भवती हैं । क्या उसकी देखभाल कर सकती हैं? पीस ऍम उस समय फॅमिली को क्रॉस कर लिया था । नहीं उसने बिना एक्सॅन जो कुछ भी नहीं करना चाहती थी उसके बारे में स्पष्ट जो क्या हुआ इसमें कोई नहीं है । लगभग ॅ होगी की देखभाल की थी और जब सभी को पता चला की वो एक सच्चाई होगी थी तो उन्होंने मुझसे अस्पष्ट की तरह व्यवहार करना शुरू कर दिया । वैसा प्रदर्शन करते थे जैसे मुझे कुछ संक्रमण हूँ फॅसा किया की मैं ऐसे किसी भी उपचार का हिस्सा नहीं बनूंगी । धन्यवाद आप जा सकती हैं । मैंने ऍम था । उसके जाने के बाद थॉमस थोडा चिंतित था और सुझाव दिया देखो जाए पहले वाली को बडे पहले वो अभी भी इस बीमारी अगर नहीं हूँ लेकिन रोक को छुपाना रोगी के साथ साथ नर्स के लिए भी जोखिम भरा होगा । आप अधिक भुगतान कर सकते हैं । जोखिम लेने से अच्छा है फॅमिली हुई हूँ । ऐसा कैसे जोखिम को समाप्त कर सकता ऍम अस ऍम सबकुछ है । पैसे के लिए लोग जोखिम लेने के लिए तैयार रहते हैं । मान लीजिए कि मैं आपको एक करोड रुपए देता हूँ कि आप मेरी पत्नी के जीवन से सभी जोखिमों को हटा सकते हैं । विजय मुझे गलत समझ रहे हो । मेरा इरादा तुम्हारी मदद कर रहा है । हम यहाँ पैसे के लिए नहीं है, नहीं था । बस मुझे लगता है कि तुम यहाँ सिर्फ और सिर्फ पैसे के लिए हूँ ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -20

बीस अगले दिन में एक और समस्या के साथ डॉक्टर राजा से मिलने गया और अब सिर्फ डॉक्टर नहीं थे । वो मेरे परामर्शदाता थे और का एक भी । उन्होंने कहा, मुझे तो मैं एक नर्स के रूप में काम कर सकते हो । मैं एक नर्स के रूप में कैसे काम कर सकता हूँ? ऐसा विचार तो मेरे मन में कभी आया नहीं । बहुत सरल है । अंदर से क्या उम्मीद कर रहे हैं? कुछ देखभाल और सहयोग के साथ उसे दो बार ऍम, उसके रक्तचाप की निगरानी करना और हर दूसरे दिन उसका ब्राॅन लेना, देखभाल और प्यार तो परिवार का एक सदस्य कर सकता है । उसकी तुलना किसी भी भाडे की नर्स के साथ नहीं की जा सकती है । का इतना आसान हैं । हम पैथोलॉजी विभाग में जाऊं । वहाँ प्रयोगशाला अधीक्षक श्री रविकांत गौतम मिलेंगे । बताना कि मैंने तो मैं भेजा है तो हमारा मार्गदर्शन करेंगे कि कैसे इंजन करें और बीपी मॉनिटर करें तो मुझे अधिकतर एक या दो दिन में सीख लोगे, आपकी चुकी हूँ लेकिन उसे निरंतर निगरानी की आवश्यकता है । तो किस तरह के साथ अपना काम संभालने जा रहे हो? आप विश्वास प्रदर्शित करना मेरे लिए तो था लेकिन मैं जानता था कि मेरे पास और कोई विकल्प नहीं था । हम दोनों समझ गए थे कि बच्चे को हरसंभव देखभाल की जरूरत होगी और उसकी गर्भावस्था कोई आसान नहीं होगी । बच्चे के स्वास्थ्य के लिए आस्था को खुद का ख्याल रखना था । उसे हर पांच दिनों में डॉक्टर रचना से मिलने की सलाह दी गई थी । कुछ परीक्षण नियमित आधार पर होने जरूरी थे । उसके सीढी चार की निगरानी हर दूसरे दिन की जानी चाहिए थी । आस्था ने उनके सभी निर्देशों को स्वीकार कर लिया था और उसकी हालत स्थिर हो गई । लेकिन के साथ गर्भवती महिला होना एक दुर्लभ और खतरनाक संयोजन है । मैंने आस्था को समझाया कि न थोडी महंगी थी इसलिए मैं उसका नया व्यवस्था तो मुस्कराई । मैं चाहता था कि वो अपने पूरे जीवन में मुस्कराती रहे । आस्था ने कभी भी कोई सवाल नहीं पूछा । उसने एक और नौकरी के लिए कोशिश नहीं की । वो लडकी जो शराब पीना और मांसाहारी खाना पसंद करती थी, पूरी तरह बदल गई थी । वो हर दिन सादा भोजन के बिना बनाई ठीक थी । पहले वो खिलखिलाने की आदि थी । अब मुझे करती थी । मेरी पत्नी में बदलाव आना शुरू हो गए थे । वो कमजोर हो गई थी और अक्सर नींद महसूस करती थी जिसकी गर्भावस्था का छठा महीना था । एक नर्स के रूप में मेरे नए काम ने मेरा अधिकांश समय ले लिया । मेरे पास नौकरी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कम समय था और मुझे प्राचार्य से बात करने की जरूरत थी । क्या प्राचारी हैं मैं उनसे कुछ मिनिस्ट्री मिलना चाहता हूँ । मैंने प्रचार के सेकेट्री से पूछा प्रतीक्षा करें मैं पता कर लेता हूँ । एक सचिव हमेशा जानता है कि बॉस कहाँ है । वो शायद जानना चाहती थी कि वो मुझसे मिलना चाहते थे या नहीं । थोडी देर बाद मैंने प्राचार्य के कक्ष में प्रवेश किया । आपका स्वागत है मिस्टर विजय । आपको देखकर खुशी हुई । प्रचार्य ने क्या चुना करे सर, मैं वास्तव में फसा हुआ हूँ और मेरी पत्नी स्वस्थ है । लेकिन मैंने एडमिनिस्टर्ड को सूचित किया था । आपकी पत्नी को क्या हुआ? उन्होंने चिंता जताने की जगह औपचारिकता जताते हुए रूखाई से पूछा वो कर प्रति हैं? मैंने केवल इतना ही बताया था वो ये बहुत बडी समस्या है । उन्होंने फिर क्या सर? वो गणपति है । उसके लीवर में संक्रमण है जो घातक हो सकता है । अगर उसकी अच्छी तरह से देखभाल नहीं की जाती तो मैं हो सकता हूँ वो पे शुभकामनाएं के साथ है । तो क्या वो अब ठीक है । उन्होंने बिना कोई दिलचस्पी दिखाई हो नहीं, वो ठीक नहीं है । इसी बारे में मैं आप से बात करना चाहता था । मुझे आपके अनुग्रह की जरूरत है । उन्होंने सिर हिलाया और मैंने उनसे कहा सर, उसे घर पर हर समय देखभाल और निगरानी की जरूरत होती है क्योंकि वो बेहद कमजोर हो गई है । सहायता के लिए कोई भी नहीं है इसीलिए मैं कॉलेज में केवल सीमित समय दे पाऊंगा । उन्होंने मुझे बताया और सीधे पूछा, आप की अधिकतम उपलब्धता क्या होगी? मैं दिन में केवल तीन घंटे के लिए उपलब्ध रहूंगा और पंद्रह दिनों में एक दिन मुझे छुट्टी की आवश्यकता होगी । मुझे उसे हर पंद्रह दिनों में पूरी जांच के लिए अस्पताल ले जाना है । उन्होंने कुछ सेकंड के लिए सोचा । मुझे इस मामले में हम आपको केवल आधा वेतन दे सकते हैं क्योंकि आप केवल आधा दिन आ रहे हैं । धन्यवाद नाम उसका आया । कुछ ज्यादा उम्मीद भी नहीं थी और पैसा मेरे दिमाग में आखिरी बात थी । केवल आस्था और मेरा बच्चा मेरे लिए प्राथमिकताएं थी । विजय तुम शायद ही कभी कुछ पढाते हो । मुझे नहीं पता कि मैं कैसे इस बार उपयोग करने जा रहा हूँ । तो आठ नवंबर को हमारे कॉलेज का ऍम है । मैं चाहता हूँ कि आप तैयारी का प्रभार लें । इस बारिश का लाइव प्रसारण होगा और यदि सब कुछ ठीक रहा तो हमारे मुख्य अतिथि के रूप में मानव संसाधन विकास मंत्री होंगे । सर, मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगा । आठ नवंबर आस्था का चन्दन था । जिम्मेदारी को नकारना चाहता था, लेकिन चुप रहा । मैं अपनी पत्नी की देखभाल करने में व्यस्त था । मैंने शनिवार को घर जाने का अपना कार्यक्रम टाल दिया । पापा और मां मुझे अलग अलग समय पर रोजाना कॉल करते थे । उनके लिए साथ बैठना और बातें करना दुर्लभ था । पिताजी आस्था को देखने के लिए दो बार घर आए । बाहर जाने में मेरी व्यवस्था और मेरे घर में प्रवेश करने के लिए मेरी मांग के अहंकार ने हमें लंबे समय तक दूर रखा था । मुझे यकीन था अगर माँ को आस्था के संक्रमण के बारे में पता चला तो उन्हें उससे नफरत करने का एक और कारण मिलेगा । आस्था और मैं हर राहत, अपने अतीत और अपने भविष्य के बारे में बातें करते । अब भविष्य के बारे में बातें करना मुझे अजीब लगता था तो हम अपनी काल्पनिक दुनिया में खुश थे । कभी कभी वास्तविकता उदास करती हैं । सितंबर के दूसरे सप्ताह में पापा हमारे घर आए और मुझे जन्मदिन की शुभकामनाएं नहीं । मुझे बधाई देने के लिए शाम को मालवीय नगर पहुंची । हमारा एक सनकी परिवार है । उन दोनों के एक ही स्थान से आना था लेकिन वो अलग अलग आए थे । महाराष्ट्र से नफरत करती है । आज सामान से प्यार करती है । मैं उन दोनों से प्यार करता हूँ । मुझे लगता है भारतीय परिवारों में आम है । मैंने मुझे पिज्जा हट पर घर से आधा किलोमीटर दूर बढाया । जिस दिन मैंने उन्हें देखा मैं उनसे गले लगकर होना चाहता था और मैंने खुद को रोक लिया क्योंकि उन्हें लगता है की कुछ गडबड है । पनामा मैंने उनके पैरों को छुआ । आप की बहुत याद आती है । अपने आंसू गिरने से रोकना वास्तव में बेहद मुश्किल था । उनकी उपस्थिति मुझे कमजोर कर रही थी । कैसे हो विजय मैंने कुछ नहीं कहा । उन्होंने छोटे बच्चे की तरह गले लगा लिया । मेरी छठी की मैं कभी बडा नहीं हुआ था । उनकी बाहों में से पढना चाहता था और वहाँ दम तोडना चाहता था । आखिरकार पांच टूट गया और आंसू मेरी आंखों से बहने लगे । मेरी मान इस पर गौर किया की पहली बार नहीं था जब उनके सामने रोया था । मुझे ठीक हो धाम आॅखो ठीक हूँ । आप की बहुत याद आई आप मुझे यहाँ के बुलाया अब घर आ सकती थी तो अंतर रहा । तुम झूठ बोलना सीख गए । क्या सर ठीक है? क्या आप उसके बारे में चिंतित हैं? नहीं, अपने पोते के बारे में चिंतित हो । क्या वो अभी भी तुम पर हावी है या तुमने अपने मस्तिष्क का उपयोग करना शुरू कर दिया है । मान उसकी आलोचना करना बंद करो हो अभी भी वही जोरू का गुलाम पति भगवान का शुक्र है । मैंने तुमसे बाहर मिलने का फैसला लिया । अच्छा तुमने मुझे चाय भी नहीं पूछे होती वहाँ फ्रीज को केवल आस्था का अगर नहीं है तो मेरा भी है । आस्था ने अपना काम के छोडा है । आपको गर्भवती है जानती हैं और सब कुछ ठीक है तो तुम नियमित रूप से कॉलेज क्यों नहीं जा रही हूँ? तुम्हारे प्राचार्य ने मुझे कॉल की थी, मास्टर चाहिए है क्या सब बीमार है । उसकी गर्भावस्था सामान्य नहीं है । बहुत सावधानी बरती है । वो पूरी तरह बैड रस पर है । हर छोटी चीज सब्जियों से लेकर दवाइयाँ खरीदने तक का मुझे खयाल रखना है । इसके अतिरिक्त डॉक्टर के हाँ जाना ऍम हिलाया और विषय बदलने का फैसला किया । पूछ रहा हूँ आप मेरे लिए दक्षिण अफ्रीका से क्या नहीं हैं? ये तुम्हारे जन्मदिन का उपहार है । उन्होंने मुझे पैकेट देते हुए कहा, मैंने उसे खोल दिया और एक जोडी कलाई घडियां पाई । कलाई घडियों की एक जोडी आस्था के लिए मैंने शरारत से पूछा । उन्होंने मुझे घूमते हुए देखा और हम पिज्जा खाने लगे । उन्होंने मुझे मशहूर हस्तियों के साथ बातचीत करने और उनके बारे में मजेदार चीजों का अपना अनुभव साझा किया । मैंने उन्हें आस्था के बारे में कुछ मजेदार चीजें बताई और उन्होंने मुझे पापा के बारे में बताया । मैं तीन महीने बाद मुस्कराया था । जैसे कि मेरे जीवन में कोई चिंता नहीं थी । उपल मेरे मरुस्थल में एक मृगतृष्णा थी । मुझे हम इस दुनिया में मेरा एकमात्र प्यार हो । बच्चे के साथ सब कुछ ठीक है । मैं मानती हूँ अगर कुछ भी है या किसी मदद की जरूरत है तो प्लीज पीस मुझे बता हूँ । हम दोनों को खुश देखना चाहती हूँ । हूँ अच्छा में मैंने जानबूझ कर पूछा । मैंने उसे अपना एकमात्र बच्चा लेने के लिए छमा नहीं किया है । उन्होंने विलाप करते हुए गहरी हमारी और उनकी आखिर हम थी लेकिन मुझे पता है कि वे कठोर महिला भी । उन्होंने भावुक होकर कहा, ये बेहतर है कि तुम दूर रह रहे हो, खुशी से रह रहे हो बजाय इसके कि मेरे साथ रहते और हर दिन लडते । मुझे नहीं पता था की उसमें कहाँ से साहस आया लेकिन मैंने कहा लेकिन हाँ आप संभाल कर देंगे ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -21

चलते हैं । आज बाहर खाना खाते हैं । आज शाम को एक साल आनंद लेने और मेरा जनधन बनाने का प्रस्ताव रखा । आस्था डॉक्टर तुम को बाहर जाने से मना किया है । याद है ना? मैंने बोला विजय में टेलीविजन देखकर संगीत सुनकर समाचारपत्र बढकर और फोन पर बात करके अपना समय बिताती है । क्या तो मुझे मरने के लिए बोल करना चाहते हैं । अस्पताल ही एकमात्र जगह है । जाना जाती हूँ और डॉक्टर एकमात्र व्यक्ति है जिससे मैं देखती हूँ । जब मैं बाहर जाती हूँ देख सकता था की वो नाराज थी । ठीक है चल बाहर चलते हैं । लेकिन हम सडक के किनारे कुछ नहीं खाओगे । ठीक है ठीक है, मैं ऐसा कर सकती हूँ । मुझे कुछ ताजा हवा चाहिए । मुझे लगता है जैसे मैं पिंजरे में बंद हो गई हैं और ये बहुत बहुत घुटन वाली है । मैं नहीं चाहती कि तुम घर के अंदर अपना जन्मदिन बनाओ । हमने हौज खास में पंजाबी व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध पिंड बलूची जाने का फैसला किया । ऍम होने की एक टेबल मिल गई और मैंने दो ग्लास बटरमिल्क ऑर्डर लिया है । खाने के लिए हमने एक वेजिटेबल बिरयानी बना लीजिए, मेरा बाहर कहा है मैं चला मुझे खेद है । विजय तुमने मुझे बाहर जाने की इजाजत नहीं दी इसलिए मैं तुम्हारे लिए कुछ नहीं ला सके । उसने तो हल्की सबसे अच्छा जन्मदिन बाहर आपके जीवन में किसी का होना है जो आपको बहुत अच्छी तरह से जानता है । जब मैं छोटा था, अपने माता पिता से अपने जन्मदिन का बाहर रहने के लिए बोलता था । जब भी वो मेरे पास आते थे तो हमारे बारे में क्या? तुम अपना जन्मदिन कैसे मनाती थी? उसने एक व्यंग्यात्मक मुस्कराहट दिए और अपनी पहुँचता नहीं । मेरी सौतेली बहन के जन्मदिन पर एक बडी पार्टी थी लेकिन मेरा कभी नहीं बनाया गया । उसी तरह का जन्मदिन चाहती थी । मैं चाहती थी कि वह बडा हूँ । शानदार बहुत मूर्ति थी, बोलती हो मैं और जानना चाहता हूँ । मैंने कहा जैसे ही उसने बिरयानी का स्वाद लिया, अपने पूरे जीवन में मैं बडी जनधन पार्टी चाहती । क्या हजारों लोग मुझे बधाई देते? मेरे लिए जनधन गीतकार नहीं, दिल्ली चीज कर नहीं मेरे साथ नृत्य करते और मैं आकर्षण का केंद्र रहती लेकिन था लेकिन लेकिन मुझे लगता है कि अपने करीबी लोगों के साथ चंदन का जश्न मनाना सबसे अच्छा तरीका है । एक हजार अज्ञात की तुलना में कुछ घनिष्ठ हार्दिक इच्छाओं का होना बेहतर है । परिवर्तन के हूँ? छह । क्योंकि मुझे तुम्हारे जैसा ग्यारह व्यक्ति मिल गया है, उसका भावुक होकर कहा और मुझे भी अपनी वाणी अवरुद्ध होती महसूस हुई । मेरे पास तुम्हारे लिए एक सवाल है । मैंने विषय बदलने की कोशिश की अगर तुमको किसी से माफी मांगनी हो तो व्यक्ति कौन होगा और इजी तुमको किसी को माफ करना है तो वह कौन होगा? मैं उसे कठिनाई में नहीं डालना चाहता था लेकिन लेकिन मुझे जवाब चाहिए था हमारी माँ । उसने कहा जैसे उसके लिए कितने युगों से तैयार थी । मैं भी माँ को माफ करना चाहती हूँ और मैं तुम्हारी माँ से माफी मांगना चाहती है । ये एक दोहरा सदमा था । सबसे पहले मैं अपनी माँ के नाम की उम्मीद नहीं कर रहा था । दूसरा मैं डेनियल के नाम की उम्मीद कर रहा था । मैं आपको माफ करूंगी क्योंकि मैं खुश हूँ । अभी तक ठीक है और मैं कोई भी नाराजगी नहीं होना चाहती हैं । किसी दिन हम दर्द को भूल जाएंगे । इस कारण हम रोई और किसने हमें डर दिया । आखिरकार क्या मायने रखता है । वो पहला नहीं बल्कि हमारे जीवन का आखिरी अध्याय है तो दर्शाता है कि हम दौड में कितनी अच्छी तरह दौड चुके हैं । उसका हूँ हूँ माफ करो, विश्वास करो और फिर से प्यार करूँ । क्या तुम राष्ट्रिक नहीं हो? ये गलत स्थिति थी । मुझे नहीं पता था कि उसे किस चीज में बदल दिया था । बच्चा या फिर बीमारी । मैंने विश्वास से पूछा, लेकिन तुम ही फांसी माफी क्यों मांगना चाहती हूँ? तुम जानते हो, मैंने कभी किसी से माफी नहीं मांगी है । मैं ऐसा एक आदत के रूप में कभी नहीं करती । पहले ये मुझे ऐसा हो कि गलती पूरी तरह से मेरी है, लेकिन अपने घर पति हुई । मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने बच्चे के बिना एक दिन भी नहीं जी सकती । उसने अपनी डबडबाई आंखों के साथ कहा, दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जो हमारे बच्चे से ज्यादा महत्वपूर्ण हो कि मेरा जन्मदिन है । ब्लॅक पहुंचे और उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया । मैं तुम्हारी माँ से माफी मांगना चाहती हूँ क्योंकि मैंने उनका बेटा उन से ले लिया । इससे बिरयानी की वजह से हैं । मैंने तुमको बाहर जाने से मना किया था । आपने प्रलोभनों पर नियंत्रण रखना तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल है । फ्रीज तैयार हो जाऊँ । हम तुरंत अस्पताल जा रहे हैं । मैं गुस्से में था और साथ ही डरा हुआ भी आसान है । पेट के निचले हिस्से में दर्द की शिकायत की थी पर जल्दी सरकार तक पहुंचा और उसके बाहर आने की प्रतीक्षा करने लगा । मैंने इंजन स्टार्ट किया लेकिन स्थिति के बारे में सोचना बंद नहीं कर सकता हूँ । मैं जडवा था क्योंकि ये घातक बीमारी थी और कोई भी नया परिवर्तन वास्तव में बेहद बुरा हो सकता था । अस्पताल के रास्ते भर चुप रहा । डॉक्टर के सामने खडा था आस्था बिस्तर पर लेटी हुई थी । डॉक्टर रचना ने अल्ट्रासाउंड का सुझाव दिया । जब नर्स आस्था को अल्ट्रासाउंड के लिए ले गई तो मैंने तो प्रदर्शन से बात करना शुरू कर दिया । डॉक्टर आप कैसी हो हूँ? ठीक है । अरे चिंता से पूछा । वहाँ स्थिति नियंत्रण में है तो सात महीनों से अधिक कर पति है तो ये और खराब हो सकता है । उसे प्रसव तक यहाँ रहने की आवश्यकता हो सकती है । मैं राहत की सांस कुछ सेकंड के बाद डॉक्टर ने जोडा । मेरे पास खुशखबरी है, कुछ नहीं । मैं विश्वास ऍम डॉक्टरों की टीम के साथ दिल्ली में एड सेमिनार में आस्था के मामले पर चर्चा की थी और उसकी मदद करने में रुचि रखते हैं तो उसका अध्ययन करना चाहती हैं और इलाज का प्रयास करना चाहते हैं । उसकी किसका अध्ययन करना चाहते हैं या तो उसके ऊपर प्रयोग करने जा रहे हैं । ये बुरी बात नहीं है । डॉक्टर हमारी करते हैं और इस तरह के मामलों में उन्हें अनुभव है । उनके पास भारत ने कुछ शोध निर्धारित हैं और मैंने आस्था के मामले पर चर्चा की भी उसकी मदद करने के लिए सहमत हो गए हैं । क्या फॅमिली का उपचार कर सकते हैं? नहीं भी जाए । डॉक्टर उसके रोग की स्थिति का अध्ययन करेंगे । उसके बाद उसे स्वस्थ बच्चे को जन्म देने में मदद करेंगे । डॉक्टर ने कहा, आस्था के लिए इसमें कुछ भी अच्छा नहीं था । समझा डॉक्टर में उसके स्वास्थ्य के बारे में अधिक जानता हूँ । मेरी प्राथमिकता है । उन्होंने सहानुभूति में सर हिलाया तो बाहर प्रतीक्षा करें । मैं आपको कॉल करूंगी । जब मुझे रिपोर्ट में जाएगी, मैं सोच रहा था कि डॉक्टर ने क्या कहा था । मैं केबिन के बाहर इंतजार कर रहा था । आस्था कमरे में आराम कर रही थी । डॉक्टर रजत और डॉक्टर रचना ने स्थिति के बारे में चर्चा करने के लिए मुझे अपने केबिन के भीतर वाला रिपोर्ट तैयार थी । स्वयं एक युगल होने के नाते समझ सकते थे कि मैं किस मनःस्थिति से गुजर रहा था । सुनो विजय डॉक्टर ने कहा, उसके पेट में संक्रमण विकसित हो गया है और हमें उसे एडमिट करने की जरूरत है । मैं तुमको यहाँ अपने बच्चे के जन्म तक रखने की सलाह होगी । क्या ये तुम्हारे लिए ठीक रहेगा? मैं उनकी आंखों में चिंता देख सकता था । ठीक है पर क्यों? क्योंकि कोई भी छोटा बदलाव उसे नुकसान पहुंचा सकता है । हम कुछ जांचें करेंगे और इस टाइप के माध्यम से विशेषज्ञों के साथ रिपोर्ट साझा करेंगे । ये सुनिश्चित करने के लिए की हम सब कुछ वैसे करते हैं जैसा कि निर्देशक है । मैं तुमको फिलहाल के लिए अस्पताल में भर्ती करने की सलाह हूँ । मुझे तुम्हारे द्वारा हस्ताक्षरित आधिकारिक पत्र की भी जरूरत होगी । मुझे किसी आधिकारिक पत्र पर हस्ताक्षर करने में कोई समस्या नहीं है तो मुझे लगता है कि ये महंगा इलाज होगा । हाँ, लेकिन खर्चों के अतिरिक्त एक और समस्या होगी । वो क्या है? अब तक मैं समस्या सबसे परिचित हो चुका था । मैं चाहती हूँ कि आप मजबूत रहें । अगर वह सी सेक्शन के जरिए बच्चे को जन्म देती है तो एक संभावना है कि वह इस से ठीक नहीं हो पाएगी । इसका क्या मतलब समझा जाना चाहिए? बिजी हो उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली हर दिन बिगड रही है । प्रदेश सिजेरियन के लिए जाने की आवश्यकता पडती है तो ये उसके लिए ठीक हो पाना बेहद मुश्किल होगा । उसका सीडी, फोर सीडी अनुपात और श्वेत रक्त कणिकाओं की गिनती बहुत कम है और यदि उसमें सुधार नहीं होता है तो रक्तस्त्राव रोकना हमारे लिए संभव नहीं होगा । ऐसा हो सकता है कि वह ऑपरेशन के दौरान बच नहीं पाए । उनके शब्दों ने मुझे चूर चूर कर दिया । मैं हो गया । मैं जानता था कि एक दिन वो मुझे हमेशा के लिए छोड देंगे । लेकिन मुझे नहीं पता था कि वो दिन चल दिया जाएगा । हम तुम्हारी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे । अगर सबको सही हो जाता है तो हम एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने में सक्षम हो सकते हैं । ठीक है डॉक्टर लेकिन आपने अगले दो महीनों के लिए अस्पताल में भर्ती की सिफारिश की है । एक बहुत खर्चीला होगा । मैं कोई परामर्श भी नहीं होगी । अभी तुम्हारे लिए सबसे बेहतर यही कर सकता हूँ । धन्यवाद । आपको पता है कि इसमें कितना खर्चा आएगा । उन्होंने थोडी देर के लिए सोचा और कहा इस बारे में निश्चित नहीं बता सकते । कृपया लेखा विभाग में जाए और उनके साथ चम्मच करें । अनुमानत खर्च लगभग बीस से तीस लाख रुपए तीस लाख मैं पूछता था । अगर तुम चाहो तो तुम कमरे को दूसरे मरीजों के साथ साझा कर सकते हो कि तुम्हारे कुछ पैसे जरूर बचाएगा । लेकिन मैं अनुशंसा नहीं करेंगे । लोग उसे भेद भाव करेंगे क्योंकि वही एचआईवी संक्रमित है । उन्होंने आगे कहा, मैं समझ सकती हूँ कि खर्च एक समस्या है और यही तुम चाहो तो मैं सरकारी अस्पताल में भेज सकती हूँ कि सरकारी अस्पताल में उसका इलाज करना संभव है । ये फैसला तो नहीं करना है । विजय मैं उसे मरने नहीं दूंगा । मैं लडूंगा । मैंने मनी मन कहा है । मैंने आधिकारिक पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए । इसमें कहा गया था कि अगर उसके साथ कोई दुर्घटना होती है तो अस्पताल, डॉक्टर और कर्मचारी उत्तरदायी नहीं होंगे । मैंने आस्था को बताया जो उसे अपने प्रसव तक वहाँ रहने की जरूरत है तो बिल्कुल चिंतित नहीं थी । हालांकि बहनों से खर्चों के बारे में कुछ नहीं बताया लेकिन वो आसानी से अनुमान लगा सकती थी । ये हमें बहुत खर्चीला पडेगा । मैंने उससे चिंता न करने के लिए कहा और नर्स को उसकी उचित देखभाल करने का निर्देश दिया । मैंने उसे कहा कि मैं अगले कुछ घंटों में वापस लौट हुआ या जीता था लेकिन उसने मुझसे नहीं पूछा की मैं कहाँ जा रहा था ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -22

बाइस इलाहाबाद में स्नातक की पढाई के दौरान एक बार मैं स्वरूपरानी सरकारी अस्पताल गया था । एक दोस्त के साथ दुर्घटना घटती थी और हमने आपात स्थिति में उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया । खुशी घायल पांव का अगले दिन ऑपरेशन किया गया था । शुरू में डॉक्टर ने कहा था कि केवल कुछ ही टांके लगेंगे लेकिन सरकार उसे अपना बायां पैर खोना पडा था । किसी भी सरकारी अस्पताल के साथ मेरी आखिरी मुठभेड थी । हालांकि ये दस साल पहले हुआ था और ये इलाहाबाद नहीं था । ये दिल्ली था । दिल्ली में कई स्थापित सरकारी अस्पताल है । इनमें से कुछ तो अंतरराष्ट्रीय मांगते हैं । सामर्थ्य और एक महीने से अधिक समय तक मेरे मरीज को अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं । मुझे सरकारी अस्पताल में जाने को विवश कर दिया । इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए की बहुत सारे रोगी सरकारी अस्पताल में आते हैं । मुझे पूरा विश्वास था दूसरी बार मेरा सामना एक अनुभवी हाथ से होगा । मैंने मूल्यांकन करने का फैसला किया कि क्या वे इलाज के लिए एक विकल्प के रूप में पर्याप्त थे । अंतर रहा । मैंने बिना किसी देरी के दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ सरकारी अस्पताल की कंप्यूटर पर खोज की । मुझे एक मिला । पहले वहाँ सीधे जाने की जगह मैंने उन्हें फोन करने का विचार किया और डॉक्टरों के बारे में कुछ बुनियादी ज्ञान तथा उनके परामर्श समय की जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की । अस्पताल की वेब साइट के संपर्क खंड पर गया और मेरे लिए आश्चर्य था । ये अलग खंड था । एड्स पूछताछ तीन लैंडलाइन नंबर दिए गए थे । मैंने एचआईवी एड्स रोगियों के लिए पर्याप्त संवेदनशील होने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद दिया । मैंने पहला नंबर डायल किया, इसीलिए जवाब नहीं दिया । मैंने फिर से डायल क्या? दूसरी बार और फिर व्यर्थ में तीसरा । इससे मुझे झुंझलाहट हुई । कोई भी नंबर साझा करने का उपयोग किया । बॉल लेने के लिए वहाँ कोई भी नहीं होता है । मैं निराशा में चलाया । शायद मुझे कुछ समय तक इंतजार करना चाहिए और फिर से प्रयास करना चाहिए । मैंने खुद से कहा, मैंने कुछ समय बाद पुनः डायल किया । आखिरकार चौथे प्रयास में उनका जवाब एक महिला ने दिया था । तीन आवाज आई । उसने स्वयं का परिचय देने की औपचारिकता नहीं दिखाई । पिछले ही घंटे से फोन कर रहा हूँ । आप कौन हैं? आप क्या पूछना है? उसने मेरी टिप्पणी नजरअंदाज कर दी । वो जल्दबाजी में लग रही थी । जैसे कि लेने उसे प्राकृतिक क्रिया कलाप के दौरान कॉल कर दी होगी । मैं एक रोगियों के इलाज के बारे में जानकारी चाहता हूँ । अस्पताल की ओपीडी में आई होगी की पर्ची बनवाई और आपको डॉक्टर के बारे में जानकारी मिल जाएगी । इस सब कुछ हो था जो असंवेदनशील महिला ने मेरा फोन काट लेंगे । पहले कहा था उसने कॉल को डिस्कनेक्ट कर दिया था । एक घंटा पहले में भारत सरकार को धन्यवाद दे रहा था और अब मैं पूरी शाहब दे रहा था । इस इस ट्रेलर था कोई फिल्म अभी देखने बाकी थी । निश्चित रूप से दुसरे होने जा रहा था । मुझे अभी भी कोशिश करनी है । मैंने खुद को आश्वस्त किया । मैं अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर पहुंचा जहां रोगियों को कतार संख्याएं आवंटित की गई थी । लोगों का एक विशाल समुद्र था, डाॅक्टर थे और प्रत्येक पर कतार में लगभग सौ लोग थे । एक सुरक्षाकर्मी व्यवस्था में व्यस्त था और लोगों की निगरानी कर रहा था तो बात ये छडी लिए हुए था और से नहीं जा रहा था जिससे वो अस्पताल का मालिक हो तो पीढी की लाइन है ये मैंने उससे पूछा लाइन पर वापस जाओ तो लगभग एक कुत्ते की तरफ होगा । वास्तव में पागल कुत्ते की तरह व्यवहार कर रहा था । इधर गया था । अगर मैं वहाँ कुछ और घंटों के लिए खडा रहा तो मुझे कहीं रेबीज के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पडे । मुझे भी एक ही नहीं था कि क्या ऐसा होने से पहले मैं टोकन नंबर प्राप्त कर सकूंगा । मैं आगे पीछे घूमते हुए अनुग्रह संख्या में लोगों को ध्यान से देख रहा था । बहुत डरे हुए चेहरे थे और एक चेहरा ऑफलाइन में एक समस्या के लिए था । लेकिन उन शहरों में से एक फेस की तरह पांचवा रहा था । डर गया था । मेरी पहली मुठभेड कुत्ते के साथ हुई थी और अभी ध्यान से मुझे घूम रही थी । उसकी आंखों में एक अजीब उम्मीद थी । इससे मैं समझ नहीं पाया एक व्यक्ति मेरे जैसे निराशाजनक व्यक्ति में आशा कैसे देख सकता है । मैं लंबित हुआ तो मेरे पास आया । आप एक ओपीडी नंबर चाहते हैं? नहीं, मैं यहाँ फिल्म देखने के लिए आया था । चंचला हो मत भाई, अभी घंटा अस्पताल में है । उसने पांच से भरा मुॅह घंटा अस्पताल मैंने दोहराया । इसे स्पष्टीकरण मांग रहा था कि वो वास्तव में क्या कहना चाहता था । उसने पानकी पीठू की और कहा सरकारी अस्पताल अगर आप चाहे तो मैं अभी एक ओपीडी नंबर के साथ आपकी मदद कर सकता हूँ । किस तरह तो बाहर चाय पीते हैं । अगर तुम चाहो तो रुपया यहाँ बताओ । मैं चाय पीने के मूड में नहीं हूँ । मुझे उसके व्यवहार पर्सन था नहीं है तो मेरे साथ कोने में आइए । उसने स्टाफ पार्किंग क्षेत्र की ओर इशारा करते हुए कहा, हम गए और दो कारों के बीच में खडे हो गए । मुझे उसके बारे में बुरा नहीं हो रहा था । लेकिन टोकन नंबर मिलने की गारंटी के बिना मुझें कतार में खडे होने का साहस नहीं था तो मेरी सहायता कैसे कर सकते हो? ओपीडी नंबर के लिए एक हजार रुपये लगेंगे । एक हजार और सरकारी फॅमिली पहुंच रुपए पाँच रुपए में आपको यहाँ बोर्ड से पहले तीन बजे से लगना होगा और एक टोकन पाने के लिए नौ या दस बजे तक प्रतीक्षा करनी होगी । क्या ऍसे कहा सभी लोग यहाँ इतने लंबे समय तक खडे रहेंगे या विश्वास नहीं था, हो गया लगता है कि वह फिल्म देखने के लिए यहां खडे हैं । उसने मुस्कराते हुए कहा, आपको भाग्यशाली महसूस करना चाहिए कि आपके पास पैसा है, कुछ शरारत से मुस्कराया, एक हजार बच सकते हैं । लानत की कतार में खडे होने से आप कैसे जानते हो कि मेरे पास पैसा है । दस साल से एक ही काम कर रहा हूँ । आप बाहर से आए और वीआईपी पार्किंग में वाहन पार्क क्या पहली बार कोई मुझे सम्मान दे रहा था? लेकिन हालत कारणों से चार ऍम चाहते हैं तो मुझे हाथो हाथ बताइए वरना मेरा समय बर्बाद मत कीजिए । ठीक है लेकिन मुझे कैसे यकीन होगा कि बिना मेरी बात सुनिए । उसका हाथ अपनी जेब में पहुंचा । उसने ऍम फोन निकाला और किसी को कॉल लगाए । उन्होंने कुछ इस तरह बात की जो एक सामान्य व्यक्ति कभी समझ नहीं सकता है । आपका नाम और उम्र क्या है? अच्छे से पाँच देखते हुए उसने मुझसे पूछा मैं विजय और उन पतीसा, डॉक्टर या विभाग का नाम एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलना है । स्त्री रोग विशेषज्ञ उसपे कॉल पर दूसरी और बात कर रहे उस व्यक्ति से दोहराया हो गया, मुझे पैसे दीजिए, ओपीडी पर्ची के साथ घूमना नहीं । पहले मुझे पर्ची लिखाओ, बस ये पांच सौ दीजिए । मुझे इसका हिस्सा हाथों हाथ देना बाकी बाद में भुगतान किया जा सकता है । कम होने की उम्मीद में मैंने से पहले ही था पैसा कैसे हमारे संघर्ष को काम कर सकता है । आपके पास पैसा है तो स्थिति एक पूर्ण यू टर्न ले लेती है । लेकिन उसके रोगी का नाम क्यों नहीं पूछा था? क्या वो खाली पडती के साथ आ रहा है? उस व्यक्ति का नाम? संपर्क, जानकारी आखिर क्या है? क्या मुझे मूड बना रहा था? लाल हो के साथ हिंसा पंद्रह मिनट के बाद दिखाई दिया । आप विश्वास के साथ उसका सिर ऊँचा था । मेरे पास आकर उसने मुझे कागज का एक टुकडा दिखाया । पेपर में विवरणों को क्रॉस कर रहा था । उसने उसे छीन लिया । पहले मुझे शेष पांच सौ रुपए का भुगतान करें, भुगतान किया और पेपर को देखते हुए मैंने पढकर सुना । रोगी का नाम विजय और बत्तीस कम से कम मुझे धन्यवाद दें । पांच । विश्वास चाह रहा था जैसे उसने अभी अभी दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी । लेकिन रोगी का नाम आस्था है । मैं मरीज नहीं हूँ । आपने विजय कहा, हमने रोगी का नाम नहीं पूछा था । तुमने मेरा पूछा था तो मैं आपकी मदद नहीं कर सकते । हम को मेरा पैसा वापस करना होगा । नहीं, मैं नहीं कर सकता । अब एक काम कर सकते हैं । विजय को विज्ञान में बदलने और इससे उद्देश्य पूरा हो जाएगा । लिंग के बारे में क्या पुरुष होगी? किसी रोग विशेषज्ञ को कैसे संदर्भित हो सकता है । मेरा हथियार भी काटने का सुझाव मत देना । मैंने गुस्से में कहा । उसने अपनी कलम, गोली हमको काटा और ऍम चार कोई नहीं देखने जा रहा है क्योंकि आपने लाल फोटो से मुस्कराया और कहा ये सरकारी अस्पताल है ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -23

तेज मैं ओपीडी पर्ची पड रहा था । रोगी का नाम विजया आयु इकतीस ऍम स्त्री रोग विशेषज्ञ के आगे छोटी सी देखा नहीं । छोटा परिवार, सुखी परिवार, फॅमिली फॅमिली जी मुझे पागल बना रहा था । इस आगामी मसले को कैसे संभाल मैंने मनी मंतर दिया है तो यहाँ आस्था के इलाज की व्यवहार्यता का मूल्यांकन करने आए हूँ तो मैं आगे बढना चाहिए और सुविधाओं को परखना चाहिए । रोगी के बिना स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाना लगभग पागल था । केवल पागल पति प्यार में ऐसा कर सकता है । मैंने सफेद कोट पहने हुए एक महिला को डॉक्टर मानते हुए उससे पूछा यहाँ सबसे अच्छा स्त्री रोग विशेषज्ञ कौन है? ट्रॅाली कालिया कमरे नंबर बत्तीस रहने वाला लेकिन वो उपलब्ध नहीं है । वो छुट्टी पर हैं नहीं । वो केवल मंत्रियों, विधायकों, न्यायाधीश हो या वीआईपी मामलों को हाथ में लेती है । वो आप के मामले पर विचार नहीं करेंगे । मुझे विश्वास नहीं हुआ था तो मैंने भी सुना था । वो लोग थे जो आसानी से किसी भी बडे निजी अस्पताल में इलाज कराने में सक्षम थे । मैंने अपने सवाल बदल दिया । सबसे अच्छे डॉक्टर उपलब्ध कौन है? समझना मंत्री पर में जाए । कुछ घंटों के बाद में कमरे के बाहर बैठा था । जब मैं बाहर इंतजार कर रहा था तब मैंने सहायक को अपने कागजात दिए । मैंने चारों तरफ देखा । अपने रिश्तेदारों के सहारे कुछ गर्भवती महिलाएं मौजूद थी । उनमें से कुछ के साथ उनकी मई थी । कुछ अपने पतियों के साथ थी । गर्भावस्था के दौरान ली जाने वाली आवश्यक सावधानियों के बारे में विज्ञापनों वाले पोस्टर लगे हुए थे । एक विज्ञापन में थैलेसीमिया परीक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला गया था । एक और विज्ञापन आयरन के सेवन कम है तो बता रहा था वो एक लाल रंग की दवा प्रदर्शित कर रहा था । चारों और ऐसे कई पोस्टर लगे हुए थे । कुछ थे तो डर से करा रहे थे । कुछ प्रतीक्षा लॉबी में फर्श पर पडे हुए थे जो अपनी बीमारी के कारण बैठ पाने में असमर्थ थे । वे गरीब ग्रामीणों की तरह लग रहे थे । अगर कोई असली गरीब और असहाय भारत देखना चाहता था । अस्पताल उनकी एक झलक पाने के लिए सबसे बेहतरीन जगह थी । मैंने फर्श पर बैठी महिला को देखा । मैंने देखा जब टिफिन बॉक्स खोल रही थी, चार बच्चे उसके पास घूम रहे थे । मेरे बगल में बैठा एक व्यक्ति उन्हें अच्छी तरह से व्यवहार करने के लिए लगातार धमकी और निर्देश दे रहा था । अपनी बारी का इंतजार करते हुए मैंने शक्ति से पूछा अपन बच्चों से कैसे संबंधित हैं? मेरे बच्चे हैं । अपने घर से कहा, आप के कितने बच्चे हैं? चाहे डिवीजन में था की मुझे खुश होना चाहिए या उदास? डॉक्टर कैसी है? पहले भी यहाँ आए होंगे । ऍम बहुत अच्छी है । मेरे प्रत्येक बच्चे का जन्म वहाँ हुआ था । उसने पुष्टि में कहा, आखिर क्यों आये? असल में मेरी पत्नी गणपति है । फिर से कुछ सेकंड के लिए खामोशी छा गई और वो कब दू की तरह लाल हो रहा था । तो फिर ताकत के साथ मैंने कहा बधाई हो । अंत में मेरा नंबर दो घंटे के बाद आया । डॉक्टर के सामने बैठा था । एक महिला भी अपने तीसरे साल में मेरे सामने बैठी हुई थी तो एक मरीज थी । मैं इंतजार कर रहा था कि दूसरा होगी बाहर जाए ताकि मैं डॉक्टर से अकेले में बात कर सकते हैं । लेकिन ऐसा नहीं था क्योंकि कई मरीज डॉक्टर की सीट के आसपास घूम रहे थे । चाहे प्रति उनके प्रश्नों के अनुरूप निर्देश दे रहा था । उनमें से ज्यादातर के प्रश्न एक जैसे थे कहाँ से दवा लेनी है? परीक्षण के लिए किस कमरे में जाना है? रिपोर्ट किस कमरे में मिलेगी और उन्हें फिर से कब आना होगा । कागज जमते वक्त डॉक्टर ने पूछा विजय कहाँ है? मैंने वो आने की स्थिति में नहीं है । आस्था की रिपोर्ट दिखाने के लिए मैं लाया था । क्या समस्या है? उन्होंने अभी भी दूसरा होगी । देखते हुए पूछा मुझे बताओ मैं सुन रही हूँ । मुझे ऐसा हुआ कि वो वास्तव में उस से कह रही थी, दूसरे लोगों को देख रही थी और उससे बात कर रही थी । होता है । वो एक सौ दो रोगियों से परामर्श कर रही थी । मैडम मैं अकेले में बात करना चाहता था । बस अभी जो महिला मेरे सामने बैठी थी, उसने अपना ब्लाउज खोला और अपनी छाती दिखाना शुरू कर दिया कि वास्तव में अजीब था । मैंने कमरे के दूसरे छोर को देखना शुरू कर दिया । जैसे कि मैं वहाँ चंद्रग्रहण देखने के लिए आया था । डॉक्टर ने निर्देश के साथ उसके लिए कुछ दवाई लिखी । उन्होंने उसे लगभग धमकाते हुए हो देने वाले अंदाज को निर्देश दिया । उसके बाद मेरी और मुड गई । हाँ, मुझे बताइए समस्या क्या है? मेरी पत्नी एक अच्छी होगी और अगर पति है, मैं जानना चाहता हूँ कि आपने पहले से मामलों को संभाला है या नहीं । मुझे सुने बिना ही उसने ग्रीक में कुछ लिखा । यहाँ तक किए का शिक्षित व्यक्ति भी उससे बेहतर लग सकता है । अगले मरीज चिल्लाई रिकॉर्ड और लगभग कमरे के भीतर थी । सामने की सीट पर आकर बैठ गई मैडम कुछ अपनी बात का स्पष्टीकरण नहीं मिला । पर्चा कैसी दिखती हैं? ये परीक्षण है । सी । डी थ्री और सीडी फोर बस नहीं कराया । रिपोर्ट प्राप्त करें अगली बार रोगी के साथ आइए, अब आप जा सकते हैं अगले मरीज बच्ची थी । मैंने निराशा में बाहर चला गया । अस्पताल केवल बहादुर और वीवीआईपी के लिए था । मैंने अन्य सुविधाओं को देखने के बारे में सोचा । सीडी फोर और सीडी थ्री गन्ना विशेष रूप से एड्स रोगियों के लिए उपयोग की जाती थी । मैंने कुछ अन्य मरीजों जो मेरा किसी अन्य स्थान के लिए मार्ग दर्शन कर सकते थे, से मिलने की उम्मीद में प्रयोगशाला पर एक नजर डालने का फैसला किया । प्रयोगशाला तक पहुंचने के बाद मैंने प्रेस सितारों का धन्यवाद किया की कोई भी नहीं थी । करीब जाकर मैंने पाया की प्रयोगशाला बंद थी । बंद दरवाजे पर एक सुबह चार चिपकाया गया था जिसमें बताया गया था चार से पांच बजे शाम के बीच सभी रिपोर्ट एकत्रकर आइंस्टाइन एक से दो बजे मैंने अपनी घडी देखी । उसमें ढाई बज रहे थे । मुझे व्रत बीमार व्यक्ति बुरी हालत में बैठा लगा । मैंने उससे उसके बारे में पूछने की सोची चाहिए । बंद क्यों हैं? लंच का समय तो खत्म हो चुका है । एक भी शब्द बोले बिना उसने अपनी फॅमिली से एक व्यक्ति की ओर इशारा किया कि आपने सेल फोन पर बात कर रहा था । मैंने सोचा कि वो अस्पताल का कर्मचारी हो सकता है । मैं भी कॉल खत्म होने का इंतजार कर रहा था । सर, ये प्रयोगशाला बंद ही मैंने उस नवयुवक से पूछा है । वास्तव में वे दोपहर के भोजन के लिए चले गए हैं । अभी लगभग तीन बज रहे हैं । सर, मैं यहाँ अपने मरीज के साथ हूँ । उसने उसी वृद्ध व्यक्ति की ओर इशारा क्या कहा । आप एक सरकारी अस्पताल में हैं । इस कथन ने सहारा जवाब दे दिया । लोगों को यह बहाना लेकर समायोजित करना पडता है । सरकार से हर किसी को बहुत कम अपेक्षाएँ थी । मुझे अभी भी यकीन नहीं था की क्या उम्मीद करने हैं और क्या नहीं । आपका क्या रिश्ता है? ये मेरे पिता जी हैं । आपके पिता ॅ पीडित है । फॅमिली और सीडी फोर प्रयोगशाला के बाहर बैठे थे तो ये सब मत कहीं मेरे पिता पिछले एक साल से ही पीडित है । वो बताया तो समझने में नाकाम रहा कि वह क्यों नहीं चाहता की मैच बीमारी का नाम बोल आप कहाँ से हैं । मुजफ्फरनगर मुजफ्फरनगर से क्यों आये? मुजफ्फरनगर में कोई अस्पताल नहीं है । मैं आश्चर्यचकित होकर पूछा ऍम हमारे गांव वालों को पता चला कि मेरे पिता से पीडित है । उन्होंने बाहर निकाल दिया । लोगों ने उनसे बात करना बंद कर दिया । हमें गरीब किसान है । हम उनके लिए अस्पष्ट बन गए हैं और हमें इस जगह को छोडने के लिए मजबूर होना पडा । तुरंत उसके फुसफुसाने का कारण समझ गया । अभी तक मैं चिकित्सा समस्या से लड रहा था लेकिन अब मैं सामाजिक मुद्दे से दो चार था । आप कब से हैं? एक महीने से डॉक्टरों ने सब चिकित्सा योजना रोजाना देखभाल की सलाह दी है तो आपको छुट्टी दे दी जाती है नहीं तो कभी अस्पताल में भर्ती नहीं हुए थे । उन्होंने कहा कि हमें भर्ती रहने के लिए उनके पास पर्याप्त बिस्तर नहीं है । हम मोहम्मदपुर में एक लॉस के पास रह रहे हैं और हम उपचार परीक्षण । हम दवा के लिए हर तीसरे दिन यहाँ आते हैं । यहाँ सुविधाएँ खराब है लेकिन डॉक्टर बहुत अच्छे हैं । उन्होंने कहा, मैंने पूछा, सुविधाएँ कैसे खराब है? ऍम हुए बिना बोला बहुत है । आज हम सीडी चार और सीडी तीन रिपोर्ट के लिए दूसरी बार आए हैं । कल प्रयोगशाला केवल आधे दिन के लिए खोली गई है क्योंकि लैब स्टाफ छुट्टी पर था । जी कैसे संभव है? वोट देने के लिए एक ही कर्मचारी नहीं था । नहीं राज्य व्यक्ति । अभी तक आपने लंच ब्रेक से वापस नहीं लौटा है । अचानक उसने देखा कि कोई आ रहा है और वो अपनी जगह छूट गया । पैथोलॉजिस्ट आ गया है । मैं भी बैठा था और सोच रहा था कि क्या मुझे आस्था के इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में प्रयास करना चाहिए । पास के वॉर्ड में चला गया । मैंने पाया कि रोगियों का इलाज करने से ज्यादा दुर्व्यवहार किया जा रहा था । कई रोगी फर्श पर पडे हुए थे । जैसे ध्यान देने की लालसा में उपेक्षित बीमार गायें हैं । उनमें से कुछ अपने एक हाथ में खुद की सलाइन की बोतलें पकडे हुए थे जबकि उनके दूसरे हाथ में इंजेक्शन बिसु लगी हुई थी । कल्पना करना मुश्किल था कि मेरी पत्नी उनमें से एक है । मैं पैथोलॉजिस्ट पूछताछ करने के लिए वापस ऍम पड रहा था । जिस व्यक्ति से मैं बाहर मिला था वो जानता बाहर निकला और निकास द्वार के और बढने लगा । क्या हुआ मैं उसके साथ हो लिया है तो मुझे कुछ चीजें लाने के लिए कहा गया है क्या मैं उसके साथ चलते हुए कहा उनके पास पैथोलॉजी, दस्ताने और सिरिंज नहीं है । उन्होंने मुझे बाहर से खरीदने का निर्देश दिया है तो मैं भी तुम्हारे साथ जा रहा हूँ की ये हर बार होता है । मैं भी चिंतित होकर पूछा जी सर, यहाँ तक कि यदि आपके मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया है तो भी आपको दवाएं से रेंज, उपभोग्य, सामग्रियां, दास्ताने, रुई सभी आवश्यक चीजे बाहर से खरीदने होंगे । किस तरह की व्यवस्था है आप एक उसने शुरू किया लेकिन हमने एकजुट होकर कहा, सरकारी अस्पताल है । हमने दस्ताने खरीदें और प्रयोगशाला की और बढना शुरू कर दिया । मैंने एक और सवाल पूछा, क्या पिछले अच्छाई भी विशेषज्ञ और किफायती डॉक्टर को जानते हैं तो बाहर प्रैक्टिस कर रहा हूँ । खासकर एक स्त्री रोग विशेषज्ञ ऐसे कई डाक्टर है । आप बाहर पा सकते हैं । हम दस्ताने के साथ प्रयोगशाला पहुंचे लेकिन पैथोलॉजिस्ट बाहर आया और वहाँ जमा करें । अब देर चाहे अब साढे चार बच गए लेकिन आप अपने मन से देर से वापस ॅ किया । उसने मेरी और देखा नियम नियम है । हम सरकारी कर्मचारी हैं । उसने गलियारे की बढना शुरू कर दिया और कहा, कलर कल कभी नहीं आएगा । मैं चला है कि दूसरी बार था जब मैं किसी पर चलाया था । गलियारे में हर व्यक्ति मुझे देखने लगा था । डॉक्टर ने मुझे नजरअंदाज कर दिया और जल्दी में निकल लिया । मैंने उस युवक और उसके बीमार पिता से सहानुभूति जताई । एक छोटे से परीक्षण के लिए पिछले दो दिनों से वह घेरों में कैसे चल रहे थे? अगर ये प्रसिद्ध मेट्रो अस्पताल की स्थिति थी तो अन्य छोटे सरकारी अस्पतालों की स्थिति क्या होगी? केवल भगवान ही जानता है । उस व्यक्ति ने चुप्पी तोडी । सर, मैं जा रहा हूँ तो आपका रोगी कैसा है? आप किस डॉक्टर से परामर्श कर रहे हैं? हाँ, उसकी चिंता से पूछा था । इस बीच मैंने उसके पिता की आंखें देखिए । अच्छाई रोगी जो मुजफ्फरनगर से दिल्ली में दौड करा रहा था, वो फर्श पर बैठा था और आपने असम में मौत की प्रतीक्षा कर रहा था । उसकी आंखों में कोई जिंदगी नहीं थी । उसका पतला तंगकार, काला शरीर और दयनीय स्थिति असहनीय थी । जी ने और वापस लडने की उसकी इच्छा को हमारे चिकित्सा तंत्र द्वारा दबा दिया गया था? नहीं, मेरी पत्नी कभी इस अस्पताल में प्रति नहीं होगी । मैंने स्पष्ट रूप से कहा क्यों? मैंने पुष्टि में कहा क्योंकि ये एक सरकारी अस्पताल है ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -24

चौबीस मैं बडा तूफान सफलता देख सकता था । वो एक मुश्किलों के समंदर की तरह महसूस हुआ और मैं उसमें डूब नहीं जा रहा था । मैं निराश था । मैं जल्दी पिता बनने वाला था लेकिन खुश होने के बजाय में उदास था । मैं अपने बच्चे के भविष्य के बारे में चिंतित था । इस स्थिति में केवल एक व्यक्ति था जो मेरी मदद कर सकता था । मेरे पिताजी सौभाग्य से आस्था की हालत अब स्थिर थी । हमने एक साथ लंच किया और जब दोपहर के नींद के लिए लेती तो मैंने जाने और अपने पिताजी से मिलने का फैसला किया । मैं गाडी चला रहा था । मुझे हर बात याद आई । मेरे साथ क्या क्या हुआ था? मुझे एक समस्याग्रस्त बच्चे से ज्यादा कुछ नहीं लगा । मेरी उम्र में हर कोई अपने माता पिता को गर्व करने के लिए कुछ कर रहा था । पर मैं मैं यहाँ एक था । एक बोझ मैंने स्वयं को बेकार महसूस किया । जब मैं उनके पास पहुंचा तो पहले मैंने उनसे डॉक्टर के साथ हुई चर्चा के बारे में बताया । मैं अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की कोशिश करते वक्त बहुत करने में सक्षम नहीं था । लेकिन मेरे पता है चप्पल व्यक्ति थे । मुझे किताब की तरह पढ सकते हैं । मुझे नकारात्मक चीजों के बारे में मत सोचो और उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करो जो तुम कर सकते हैं । उन्होंने कहा, राशि क्या होगी मेरे पता चलता है तो मुझे लगा तो उसके लिए शायद पर्याप्त लगभग तीस लाख वो चौंकते हुए नहीं लग रहे थे । चिंता मत करो । बता हम उस पैसे की व्यवस्था करेंगे । प्याज विश्वास से भरपूर देखें । उनका आत्मविश्वास मुझे आशा के किरण जगाने के लिए पर्याप्त था । हमें कैसे करने जा रहे हैं? पापा एक समस्या नहीं होगी । हमारे पास से भर है । विशाल बीस साल पुराना होगा लेकिन ये बीस लाख से अधिक मूल्य का है । बातचीत के दौरान वो बहुत शाम तक रहे थे तो मैं देख सकता था । उनकी आंखों में प्यार था और रत्तीभर भी अफसोस नहीं था । उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, घर को भेजने के बाद हमें छोटे से अपार्टमेंट में जा सकते हैं । पर तो पापा ये घर आप दोनों का है । मेरे विचार से से बेचने से पहले आपको माँ से पूछना चाहिए । मुझे नहीं लगता कि वह सहमत होंगी, सबसे कम आस्था के लिए नहीं । क्या तुम को लगता है कि ये केवल तुम्हारी पत्नी के बारे में है? उसी के लिए नहीं तुम्हारे लिए भी है और वो तुमसे ज्यादा किसी से भी प्यार नहीं करती है तो सहमत होगी । असहायता और अपराधबोध मुझ पर फिर से हारी होने लगे । मुझे खेद मत । जवाब मुझे पता है कि तुम मेरे स्थान पर होते तो हम ने भी वही क्या होता है । उस पर मुझे एहसास हुआ कि मैं उन्हें पाकर कितना भाग्यशाली था । मेरे हर अच्छे बुरे में मेरे साथ खडे थे । कितना नालायक हो, क्या आप मुझे निराश नहीं हुए? मैं निराश होंगा । विजय इसके विपरीत तुम्हारे जैसा बेटा पर मुझे गर्व से भर देता है । बनावटी मुस्कुराहट के साथ उन्होंने कहा, अब मैं आपकी जैसे पिता के लायक नहीं है । मैंने रुंधे गले से कहा, हम जानते हो हमारी मात्र समस्या स्वयं को कम करके आंकना है तो मैं कर्तव्यनिष्ठ बेटे हो । पिता जी मुझे सच पता है । मैंने कहा जब उन्होंने मुझे चुप चाप देखा । मैं सौभाग्यशाली था कि मुझे उनके जैसा साथ देने वाला और समझदार पिता मिला । मेरे पिता है, बहुत बुद्धिमान व्यक्ति थे । उनकी चुप्पी का मतलब था उनके अगले शब्द मेरी निराशा को हाल करेंगे । वजह से तुम्हारे जन्म से पहले लगभग हर दिन तुम्हारी माँ से मेरी लडाई होती थी । हमने अलग रहने का फैसला कर लिया था और फिर एक दिन तुम्हारी माँ ने मुझे अपने जीवन क्या सबसे अच्छा उपहार दिया । उन्होंने मुझे बच्चा देकर धन्य कर दिया था । मैं कभी भी खुश व्यक्ति नहीं था । मैं तो नौकरी के साथ नहीं अपनी पत्नी के साथ । मेरे पूरे जीवन में अगर मुझे सुखद पल याद है तो ये हमेशा उन से संबंधित है । इसलिए गलत कारणों से दुःख या अवसाद महसूस मत करो । उन्होंने मुझे सब कुछ दिया है मेरे बेटे मैंने कोई जवाब नहीं दिया । सिर्फ मुस्कराकर रह गया । आंसुओं के बीच संघर्ष करती है न कि उस पर । मुझे नहीं पता था की मैं अच्छा बेटा था या नहीं । लेकिन मेरे पास निश्चित रूप से सर्वश्रेष्ठ किताब है भूल जाओ । उन्होंने विषय बदलते हुए कहा, सात अच्छा को पूरा करने के बारे में क्या कोशिश कर रहे हैं । वर्तमान में मैं उसके इलाज पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूँ । मुझे नहीं लगता कि मैं उसकी सडक इच्छाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त साहस बटोर सकता हूँ लेकिन तुमको से आजमाना चाहिए । मैंने से मिला मैं जाने के लिए तैयार था क्योंकि आस्था के ली थी । पापा मुझे छोडने के लिए बाहर आए । मैंने अपनी कार स्टार्ट करने से पहले अपना आखिरी सवाल छोडा, अपन आप खर्चों का प्रबंधन कैसे करेंगे? आप किसी किराये के फ्लैट में स्थानांतरित हो सकते हैं लेकिन तब आपकी खर्चे बढ जाएंगे । मुझे किसी भी समय कॉलेज की नौकरी से निकाला जा सकता है । मुझे क्या तुम सेवानिवृत्ति का सबसे अच्छा हिस्सा जानते हो? क्या उन्होंने एक अजीब सी मुस्कान दी पेंशन?

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -25

पच्चीस मैंने सरगम को कॉल की और उसे आस्था की प्रगति के बारे में बताया है । मेरे लिए आश्चर्य की बात थी । आस्थानों से कुछ नहीं बताया था कि अजीब था क्योंकि उसकी एकमात्र दोस्त के रूप में सरगम थी । उसने मुझे बताया कि वह अपने जन्मदिन पर आस्था से मिलने आएगी । इस बीच आस्था के लिए इलाज का एक अलग सेट शुरू हुआ । शुरुआत में वो ट्रिप पर नहीं थी, लेकिन कुछ दिनों के बाद आईवी के माध्यम से उसे कई दवाई दी गई । अस्पताल स्टिक, कपडों की धुलाई, सफाई और उसके सारे भोजन का ऐसा लग रहा था । मैं कुर्सी पर बैठा समाचार पत्र पर रखा था, जबकि आस्था हो रही थी । एक नर्स वॉर्ड में आई । नर्स पूरी तरह से ढकी हुई थी, जैसे कि उसने गैस कक्षा में प्रवेश किया हूँ । पर यहाँ तक कि एक मामूली एक्सपोजर भी उसे नुकसान पहुंचाएगा । उसने नीले रंग का एक्पोर्ट, हाथ में दस्ताने और एक मांस पहन रखा था । वो अजीब था क्योंकि वो केवल अपने आईवी ड्रिप बोतलों की जांच करने आई थी । मैंने देखा की आस्था के फ्लैट टाइप में खून था कि पारदर्शी पाइप में प्रवेश कर रहा था । ऍम टाइप में खून है हो तो बाहर गए और अपनी जूनियर को देखभाल करने के लिए बोला था । उन्होंने ठीक हिंदी और केरल को चारन में बातचीत शुरू । प्राइवेट वॉर्ड नंबर साथ में एक रोगी की मृत्यु हो गई । वो वाकई दुख की बात है । उसने वहाँ भरी उसने आस्था को देखकर कहा, हर व्यक्ति को इस दुनिया में अपनी करने का मूल्य चुकाना पडता है । आस्था अब तक उठ गई थी । उसमें ध्यान दिया कि वो उसे इस तरह देख रही है । मैंने सोचा कि वह प्रतिक्रिया करेगी । वैसी लडकी नहीं थी जो उन सभी मूर्खतापूर्ण बातों को सुने और बचा ले । लेकिन ये आस्था कुछ अलग थी । उसने उन्हें नजरअंदाज कर दिया । कुछ घंटों के बाद डॉक्टर नियमित जांच के लिए आए थे । मैंने उसके सामने कोई भी विस्तृत चर्चा नहीं की । हम बाहर जाकर इस मामले पर विस्तार से चर्चा करेंगे । हमेशा की तरह आस्था ने थोडा बच्चे अपने स्वास्थ्य लाख के बारे में पूछा था का क्या हाल है? मैंने पूछा अभी तक ठीक चल रही है लेकिन हर गुजरने वाले दिन के साथ उसकी प्रतिरक्षा कम हो रही है । किसी भी तरह से हमारी दवाएं अब तक प्रभावी रही है । लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि आगे क्या होगा । डॉक्टर क्या ये एक सामान्य प्रसव या सीजेरियन होगा । सवाल मुझे अपनी नींद में भी परेशान करता था । मैं कुछ भी नहीं कह सकता हूँ । लेकिन आस्था सामान्य रूप से बच्चे को जन्म देने की स्थिति में नहीं है । उन्होंने कहाँ बढेंगे तो पहले से ही जानते हो कि सबसे बुरा क्या हो सकता है । उन्होंने मेरे कंधे पर अपना हाथ रखा और कहा विजय सर्वश्रेष्ठ के लिए आशा करूँगा । डॉक्टरों की टीम आस्था के मामले के लिए भारत कब आएगी? वो पंद्रह दिनों में पहुंचेंगे । दैनिक आधार पर उसकी रिपोर्ट का आंकलन कर रहे हैं । मैं उनके साथ नियमित संपर्क में हैं । पापा एक मात्र थे जो अस्पताल में उसके पास आए थे । हमेशा की तरह मान उसे देखने आने से इंकार कर दिया । मैंने जानबूझ कर अपने सहकर्मियों को सूचित नहीं किया । मुझे उसकी बीमारी छुपा नहीं । आखिरकार मैं भी एक सामाजिक समस्या से जूझ रहा था । कुछ और दिन बीत गए । आस्था के प्रसव के किसी केवल कुछ हफ्ते दूर थी । मेरे अंदर मिश्रित भावनाएं हिलोरे ले रही थी । मैं आश्चर्यचकित था की मैं सफलतापूर्वक उसके बीमारी को सिर छिपाने में कामयाब रहा, लेकिन इसके साथ ही चिंतित था । मैं उसे कैसे बताऊंगा? उसका जन्मदिन भी आने वाला था । इसका उसका हो सकता है । उसे मुझे भव्य कर रहा था । मैंने सोचा हूँ तुम अपने जन्मदिन पर कोई बाहर चाहती हूँ । मैं उससे पूछने के लिए स्वयं को रोक नहीं सकता । नहीं, मेरे पास पहले से ही सब से अच्छा बाहर है । एक ग्यारह पति और मेरा बच्चा उसे संतुष्टि के साथ कहा और अपने बच्चे के उपहार हुआ । मैं बच्चे के साथ अगले साल एक शानदार जन्मदिन बनाऊंगी । उसकी आंखों में जिन्दगी थी । मैं उसे किसी भी कीमत पर नहीं हो । चाहे जो उसके प्रभावी सपनों नहीं मुझे लडने का कारण दिया था । तो अगले साल एक शानदार जन्मदिन मनाने के लिए तो इंतजार करना चाहती है । मुझे कोई उपहार नहीं चाहिए । कोई औपचारिकता नहीं है । किसने कहा कि मैं तो भव्य बाहर दे रहा हूँ । मैं चला विजय तो नियमित रूप से कॉलेज क्यों नहीं जा रहे हो । ठीक हूँ और अपने आप सब कुछ देखभाल कर सकती हूँ तो मैं इसके बारे में जानता हूँ । मैं उसके माँ को समझाते हुए कहा मुझे प्लीज समझो । मैं एक सामान्य रोगी हूँ । डॉक्टर और नर्स मेरी देखभाल करने के लिए यहाँ है तो उनको नियमित रूप से कॉलेज जाना चाहिए । एक बार हम तो ठीक हो जाओगे तो मैं चला जाऊँगा । नहीं विजय । हमारे प्राचार्य ने उनको कॉलेज कार्यक्रम के लिए बुलाया था । उनको उसकी सहायता करनी होगी । मुझे पता है कि कार्यक्रम मेरे जन्मदिन वाले दिन है लेकिन फिर भी तुम को वहाँ रहना होगा । एक वादा है बच्चा हो जाने के बाद मैं इस कार्यक्रम को नहीं भूलूंगा । बच्चे के बाद सब कुछ बदल जाएगा । परसों में किस तरह बच्चे के बाद हमारी गजब की दिख रही होगी । मेरे पास बात करने के लिए एक और व्यक्ति होगा तो शायद ही कभी बात करते हो । उसमें विषय बन गया । उन केवल बात करूँ नहीं । पार्टी करेंगे तो उनको प्रोफेसर पदोन्नत किया गया है । मुझे यकीन है कि कुछ समय बाद तुमको विभागध्यक्ष पदोन्नत किया जाएगा और हम एक समृद्ध परिवार होंगे । जब भी तुम अपने कॉलेज आउटिंग पर जाओगे, ऍम पड जाएंगे । अपनी कार में शहर में घूमेंगे । लेकिन एक विभागध्यक्ष कभी आउटिंग के लिए नहीं जाता है । मैंने कुछ भी बेहतर कहने लायक होने पर कहा ये बेहतरीन है । तब हम सभी एक साथ बाहर जा सकते हैं । उसने कहा प्रत्येक शब्द मेरे दिल को भेज रहा था तो क्योंकि मैं बोल था जो जानता था कि सच्चाई क्या थी ऍम चाहती हूँ । इस तरह का मछली मैं जानती हूँ कि एक इंसान के रूप में तुम सबसे अच्छे व्यक्ति हो, लेकिन मैं तुम्हें एक आत्मविश्वासी व्यक्ति देखना चाहती हूँ । मैं चाहती हूँ कि तुम एक निर्भीक व्यक्ति बनाओ । मैं ऐसे कैसे शुद्ध कर सकता हूँ? तुम उन चीजों का सामना करोगे जो तुम को सबसे ज्यादा करती हैं । अपने डर को मार डालो, मिल जाएगा, उन्हें मार डालो और एक आत्मविश्वासी व्यक्ति बनाओ । ठीक है, मैं कोशिश करूंगा । अपने करियर में आगे बढ रहे पति को देखना और आत्मविश्वासी व्यक्ति बनना मेरे जीवन का सबसे अच्छा तोहफा है । मैंने खुद से वादा किया कि मैं उसे सही साबित करूंगा । मैं से जीवन का सबसे बेहतरीन बाहर दूंगा ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -26

छब्बी आस्था की हालत बिगड गई थी । उसे अक्सर उल्टी हो रही थी और लगभग हर काम करने के लिए सहायता की जरूरत होती थी । उसके पैर ओवर पीठ में पीडा होती थी और उसका वजन उस तरह से नहीं बढ रहा था जैसी की उम्मीद थी की आश्चर्यजनक नहीं था । लेकिन स्वीकार करना बेहद मुश्किल था । आज उसका जन्मदिन था और कॉलेज का सालाना जलसा । मैं उसे शुभकामना देने वाला पहला व्यक्ति था । शायद उसके आखिरी जनधन पर सरगम वहाँ मौजूद थी और आस्था खुश थी कि उसके पास कोई आया था । इसके साथ को बात कर सकती थी और खुशी के कुछ को साझा कर सकती थी । सरगम की मौजूदगी ने बॉन्ड का माहौल बदल दिया था । सरगम ने मुझे अपनी आस्था वापस दे दी थी । बहुत दिनों के बाद पहुँच रही थी । हाँ पर आए हम बातचीत के लिए बाहर है । इस बार सरगम भी साथ आई । चुनावी जाए बच्चा हमारी प्रत्याशा का मुकाबले थोडा तेज विकसित हो रहा है । हमें प्रशस्ति से पहले आस्था का ऑपरेशन करना पड सकता है तो एक सामान्य डिलीवरी एक विकल्प नहीं होगा । डॉक्टर रचना के साथ इस मामले पर चर्चा कर सकते हो । लेकिन मुझे लगता है कि शायद एक सिजीरियन बच्चा होगा । सामान्य प्रसव के लिए आस्था में पर्याप्त ताकत नहीं है । मैंने जवाब नहीं दिया । मेरी आंखें कह रही थी । सरगम ने कुछ सवाल पूछे । वही प्रश्न थे जिन्हें मैंने पहले कई बार पूछा था । डॉक्टर ने कहा विजय अपना ख्याल रखो और बहादुर बनाओ । जैसे ही डॉक्टर गए सरगम और मैंने आस्था के जन्मदिन के सरप्राइज के लिए कुछ चीजों की योजना बनाई । हमने कमरे में प्रवेश किया हूँ । बैठो और बात करुँ । मुझे समारोह के लिए कॉलेज जाना है । क्या तुम वाकई कौन जा रही हूँ? आस्था ने पूछा क्योंकि हमारे प्राचार्य ने आपको तैयारी के लिए बुलाया । हम कभी नहीं गयी और हम सीधे समारोह में जा रही हूँ । प्राचार्य तो में मार डालेगा । किसे परवाह है मैंने आप विश्वास से कहा ये श्री राम कॉलेज ऑफ ऍम इसके लिए उत्सव का दिन था । इस दिन के लिए समूचे कॉलेज ने पूरे साल काम किया था । लगभग पांच हजार छात्र अपनी प्रतिभा दिखाने की प्रतीक्षा कर रहे थे । लडकियां अपना दुर्लभ फैशन कौशल प्रदर्शित कर रही थी और जैसा की होता है लडके! गर्म लडकियों की लाल समय थे लेकिन हम शिक्षकों को सरकार की तरह व्यवहार करना पडता है । सब कुछ हमारे सामने होता है लेकिन हम केवल तब कार्रवाई कर सकते हैं जब ये आधिकारिक होता है । आमतौर पर छोटे कार्यक्रम हमारे सभागार में होते थे लेकिन क्योंकि ये वार्षिक जलसा था इसलिए बहुत से मेहमानों को बाहर से आमंत्रित किया गया था । अनेक अचार, पेशेवर, वरिष्ठ, कॉर्पोरेट दिग्गज, कुछ पूर्व छात्र और कॉलेज के साथ जुडे प्रत्येक व्यक्ति को आमंत्रित किया गया था । मानते हुए की काफी भीड होगी । सभागार के लिए पांच हजार मेहमानों को समायोजित करना संभव नहीं था । इस अवसर के लिए बडा पांडाल लगाया गया था । कई प्रायोजकों की व्यवस्था की गई और मीडिया के लोगों को आमंत्रित किया गया था । कैंपस चैनल पर लाइव प्रसारण निर्धारित किया गया था । दस पार्क पत्रिका पिछले कुछ महीनों से केवल समारोह के बारे में प्रकाशित कर रही थी । मैंने होने किसी ये मेरा दुर्भाग्य था कि प्राचार्य ने मुझे देख लिया । उन्होंने मुझे फोन पर बुलाने के लिए अपना हाथ हिला गुड आफ्टरनून सर । मैंने उनके पास पहुंचते हुए कहा, गुड आफ्टरनून, मेरे प्रिय मुख्य अतिथि तो ऐसी व्यवस्था आशा है । आप इसका हर मजा ले रहे हैं । उन्हें मजाक उडाया ये अच्छा है । बस तो में आपके इन शब्दों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद । तब मुझे खेद है कि मैं आपकी सहायता नहीं कर सकता है । मेरी पत्नी वास्तव में अस्वस्थ है वो मुझे पता है हम एक बच्चे की उम्मीद कर रहे हो । मैंने जवाब नहीं दिया । मैं चाहता था कि वो अपनी सारी निराशाओं गलते । अपने कॉलेज में तो एक संकाय के रूप में नियुक्त करना ही सबसे बडी गलती थी । जमा करे हो जाओ अपने शीट पर जाने से पहले उन्होंने कहा, उद्घाटन समारोह के बाद अन्ततः पहली प्रतियोगिता से कार्यक्रम शुरू हुआ । कुछ कैमरे विभिन्न कोणों से कार्यक्रम को शूट कर रहे थे । मैं अपनी यंत्रणा में बैठा सोच रहा था कि मेरे पिता कॉलेज में ज्वाइनिंग को लेकर कितने खुश थे । मैंने कभी ये नहीं बताया कि मैं सिर्फ एक सहायक प्रोफेसर था । इसमें शायद ही कभी छात्रों को पढाया था । जबकि दुल्हन ढूंढने के दौरान मेरे परिवार में मुझे वरिष्ठ प्रोफेसर के रूप में पेश किया था । पिछले कुछ घंटों से मैं सोच रहा था एक व्यक्ति के लिए कितना मुश्किल है तो वहां मौजूद है और पांच हजार की भीड का सामना कर रहा है । आधे घंटे के लिए लंच ब्रेक की घोषणा की गई । शेष कार्यक्रम ढाई बजे फिर से शुरू होना था । मैंने पन्ना खोला जिसमें आस्था ने अपनी अजीब इच्छाओं को लिखा था । लिखा था मरने से पहले साठ असंभव इच्छाएं ढाई बजे के आस पास प्राचार्य मुख्य अतिथि के साथ वापस आ गए थे । प्रदर्शन पहले से ही बैठ चुके थे लेकिन कैमरा बंद था जो शुरू होने वाला था । मैंने सरगम को एक संदेश भेजा और फिर मैं उस लडकी के पास गया जो कार्यक्रम का संचालन कर रही थी । सुनो डियर! मुझे घोषणा करनी है घोषण अगर आप कोई घोषणा नहीं कर सकते हैं, मैं चालू होने वाला है और प्रसारण शुरू कर देगा । हमारे मुख्य अतिथि यहाँ मौजूद है । एक महत्वपूर्ण घोषणा है । मेरे पास प्राचार्य की अनुमति है क्योंकि मेरा नाम अभी भी कुछ पेपर्स में प्रभारी के रूप में दर्ज था इसलिए उसने विरोध नहीं किया । उसने कैमरे वाले व्यक्ति को थोडी देर के लिए रिकॉर्डिंग बंद करने के लिए संकेत दिया । मैं सीधे बाइक पर गया और अपने जीवन में पहली बार पांच हजार लोगों का सामना किया । एक आंख चमक रही थी । स्पष्ट रूप से कार्यक्रम में देरी से झल्लाई हुई लग रहा था कि प्राचार्य मुझे अगले कुछ सेकंड में खा जाएंगे । मैं प्रभावित था । मुझे पता था कि मुझे क्या कहना है । व्यक्ति जो पांच पैनलिस्टों के सामने हकला गया था तो पांच हजार की भीड कर सामना कर रहा था । प्रिय मित्रों गोडे किसी ने भी जवाब नहीं दिया । ऍम मैं यहाँ अंग्रेजी के सहायक प्रोफेसर के रूप में काम कर रहा हूँ । आप जैसे ज्यादातर मुझे जानते हैं । मैं बोल पाने में कठिनाई महसूस कर रहा था । मुझे सपोर्ट कपकपी हो रही थी । मुख्य अतिथि की उपस्थिति ने प्राचार्य को अच्छी तरह से व्यवहार करने के लिए मजबूर कर दिया । लेकिन ऐसा लगता था कि वो आप बबूला होकर फट नहीं वाले थे । अपनी चीज चलते हुए और कैमरे को बंद करने का निर्देश दिया हूँ । मैं समारोह के लिए यहाँ नहीं आया हूँ । मैं यहाँ एक पति के रूप में आया हूँ । भीड में हल्की सी मशीन होगी । मेरी शादी ग्यारह महीने पहले हुई थी और आज मेरी पत्नी अस्पताल में भर्ती है । वो गर्भवती है और अगर भगवान हमें आशीर्वाद देता है तो हमारे पास स्वस्थ बच्चा हो सकता है । लेकिन लेकिन मुझे नहीं पता कि वो उस दिन को देखने के लिए जीवित रहेगी या नहीं । मेरे गले में गांठ थी । दर्शक पूरी तरह एकजुट हो गए । मुझे पता था कि अब उनका ध्यान दे दी और आकर्षित हो चुका था । वो एक घातक बीमारी से पीडित है है और डॉक्टरों ने पुष्टि की है । कीमृत्यु बहुत दूर नहीं है । अगले साल है जब आप सभी ये वार्षिक समारोह मना रहे होंगे । आस्था यानी मेरी पत्नी की देखने के लिए जीवित नहीं रहेगी, भले अपना रोमांच निकाल लिया और अपनी आंखों बाॅस अच्छा गया । अब सभी को इन सब में खींचने के लिए खेद है लेकिन आज मैं उसका अट्ठाईसवां जन्मदिन बना रहा हूँ । पिछले कुछ हफ्तों से अस्पताल में भर्ती है और उसका डॉक्टरों के अनुसार उसके पास जीने के लिए बहुत सीमित दिन बचे हैं । मैं एक साधारण व्यक्ति हूँ । मेरी पत्नी की हमेशा एक भव्य जन्मदिन की पार्टी की इच्छा थी । मैंने उससे पूछा था एक भव्य जान जान का क्या था? उसके अनुसार हजारों लोग उसे उसके जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हैं और उसके लिए गीत गाते हूँ । पहले प्रचार पर नजर डाली अपनी चुभती हुई आंखों समझे खूब रहे थे और कैमरे वाले लडके को पकडे हुए थे । मैं एक हरी व्यक्ति हूँ और इतने सारे लोगों के लिए पार्टी की मेजबानी करने की स्थिति में नहीं हूँ । इतिहास उसे जन्मदिन की मुबारकबाद दे सकते हैं तो मैं आभारी रहूंगा । मुझे यकीन है कि वह दूर से से देख रही होगी । फॅमिली मैं यहाँ खडा हो रहे और इस मंच का उपयोग करने का अवसर देने के लिए अपने प्राचार्य का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ । तब भी नहीं मिले दोस्तों क्या उसकी भवजल दिन की इच्छा पूरी करने में मेरी मदद कर सकते हैं? मेरी आंखियां तकलीफ हो चुकी थी भी मैं एक महिला खडी हुई और ताली बजाने लगी विश्व वैरी हथियारबद्ध आस्था कुछ लडकियों ने भी दोहराया और कुछ सेकंड के बाद पांच हजार आवाजें लाइने जनधन गीत गाने लगा प्राचार्य को देखा । उन्हें समझ नहीं आया कि वह क्या करेंगे । कैमरा वाले व्यक्ति ने के अंदर चालू कर दिया और खडे प्रथा जन्मदिन का गीत गाते हुए सभी लोगों का लाइव वीडियो रिकॉर्ड किया ऍम यू पी बहुत दे दिया । राजस्था ऍम यूपी में यूपी ॅ टू यू और इस से कुछ किलोमीटर दूर अस्पताल के वार्ड में सरगम और आस्था नहीं ये लाइन देखा । कार्यक्रम के बाद मैक्सन कि व्यक्ति की तरह और हूँ अच्छा । मेरे स्कूल किसान में थे तो है

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -27

सत्ताईस अगर मैं एक मिनट के लिए और वहाँ रह गया होता तो प्राचार्य ने मुझे मार ही डाला होता । मैंने उनका कॉलेज समारोह खराब कर दिया था और वो निश्चित रूप से उस पर आंध्र बुला थे । मैं बाहर आया और सीधे नोएडा की ओर चल पडा । आस्था के साथ सरगम की उपस्थिति ने मुझे कुछ चीजों की व्यवस्था करने के लिए अतिरिक्त समय दे दिया था । मैं भी सबसे अच्छे दोस्त या नहीं अपने पिता जी से मिलने गया । उन्होंने जैसे ही दरवाजा खोला उनके सीने से लिपट गया । उन्हें कसकर गले लगा लिया जाए । कोई गडबडी उन्होंने कसकर चिपटने से उपजी भावनाओं को महसूस किया था । ऍम अच्छी खबर है । मैंने खिलखिलाते हुए कहा, नहीं, इसके खिलाफ हट का राज क्या है? आज कल मुझे तुम्हारी खुशी से भी डर लगता है । उनके कटाक्ष ने हम दोनों को हटा दिया । मैंने एक और अच्छा पूरी की है । मैंने कहा और सारी घटना का वर्णन कर दिया । वो एक ही समय में चकित और ऍम अपने बच्चों की उपलब्धियों की कहानियों को सुनते वक्त पिता का दल कैसे नहीं घर से भर उठेगा । वास्तव में ऐसा क्या अनुष्का जन्मदिन हमेशा से बेहतर बढाना चाहिए? मैं उसकी आवाज में एक अजीब सी खुशी महसूस की । वो किचन में गए और नारियल बर्फी के डब्बे के साथ वापस आएंगे । उन्होंने पडा थोडा निकाला और मेरे मुंह में ठूंस दिया । मेरे लिए एक बहुत बडा पल था । ऐसा बहुत समय बाद हुआ जब उन्होंने ऐसा किया था । आखिरी बार उन्होंने मुझे मिठाई खिलाई थी । जब मैंने पी सी एस के लिए लिखित परीक्षा पास की थी । मेरा लडका है वो एक ही समय खुशी और गर्व से उम्मीद थी । पर मुझे लगता है कि वक्त आ गया है । मैं उसे रोक के बारे में बता देंगे क्योंकि अभी क्यों उसका ऑपरेशन में केवल अठारह दिन बचे हैं और अब जानते हैं इसका क्या मतलब है । पता नहीं तुम के अच्छा होने की उम्मीद करते हो हूँ । पास्ता भविष्य के बारे में बेहद आश्वस्त है । बच्चा होने के बाद हमारे जीवन के बारे में बताती है । एक नया घर खरीदना, मार, बच्चे को स्कूल भेजना और और बहुत सारी बातें । मैं नहीं चाहता की उसके सपने बिखर जाएगा । कोई सभी चीजों को देखने के लिए जीवित नहीं रहेगी । मुझे नहीं पता पापा कैसे प्रतिक्रिया करेगी । विजय आस्था एक परिपक् को लडकी है तो समझ चाहेंगी पापा अगर अचानक उसे पता चल जाए कि अगले कुछ दिनों में जिंदा नहीं रहेगी और उसके सारी सपने पूरे नहीं होने जा रहे हैं । उससे परिपक्व होने की उम्मीद करना छह बचपना होगा । मैंने पहली बार अपने पिता से इस तरह बात की थी । तब मैं झूठ बोल कर बनना गया । मैंने होते हुए कहा, आपने ऐसा व्यक्ति बन गया था जो अक्सर होता था । अब हर दिन जब मैं उसकी प्रेरणादायक आंखे देखता हूँ तो मुझे लगता है कि वो अपने बच्चे को बडा होता देखना चाहती है । विजय तो तुम इतना सब इतनी बहादुरी से लडे हो । तुम कमजोर नहीं पढ सकते हैं । आपने उसे सच कैसे बताऊँ? ऍम मेरे लिए कर सकते हैं । दुनिया में कोई ऐसा नहीं है तो उसे समझ सकता है निश्चित मौत को स्वीकार करना और उसके साथ शांत रहना । ऐसा कुछ है तो सबसे प्रबुद्ध संत नहीं कर सकते हैं । मुझे ये नहीं समझ आता कि वह क्या कह रहे थे । मुझे समझने की कोशिश कर रहा हूँ तो मैं उसे कुछ भी बताने की जरूरत नहीं है । मैं नूडल्स बनाने की स्थिति में नहीं था लेकिन हमें आगे जो कहा उसने मुझे हिलाकर रख दिया तो पहले से ही सब कुछ जानती है । क्या हो विश्वास नहीं कर सकता है । वो जानती थी कि वह मर रही थी, लेकिन वह इतने लंबे समय से अभी भी खेल रही थी । मेरे साथ कुछ होती है कि वह भी पीडित है तो तो अपने से बताया, उसी कलर मत समझो मेरी बेटी इस बारे में उसे कब से पता है? पिछले पांच महीने से अपनी फॅमिली इसके बारे में मुझे क्यों नहीं बताया? मैंने फिर पिताजी से जवाब मांगा । विजय आसानी खुद ये समझ लिया था और पुष्टि करने के लिए मुझे कॉल की थी । एक गर्भवती वहाँ जो एचआईवी पॉजिटिव है, उसे सभी देखभाल की जरूरत होती है । तो हर समय उपलब्ध नहीं रह सकते हो सौ पिछले कुछ महीनों से मैं इस धारणा में जी रहा था कि मैं उससे सत्य को छुपा रहा था, लेकिन वैसी थी कि ये गुडिया की तरह मुस्कुरा रही थी । अच्छा सबको समझना नहीं लगा । अस्थाना अलग तरीके से व्यवहार क्यों शुरू किया और क्यों उसने सवाल नहीं पूछे । कैसे मेरी अहमदाबादी पत्नी ने सब कुछ पीछे छोड दिया और एक सब की तरह बातें करना शुरू कर दिया । लेकिन हाँ तो मुझे इस बारे में बता सकते थे । मैं वेदना से कहा, उसकी छाती बैठा हूँ । पापा ने मुझे उपचार की पहली किस्त जमा करने के लिए दस लाख रुपए का चेक दिया । अपराधबोध से ग्रस्त था जब अस्पताल की तरफ बडा तुम कहाँ थी तेजी के लिए खेद है । मैं वापस से मिलने गया था । सरगम कब गई तो सभी गई और तुम ऐसा क्यों किया? तुम बर्खास्त किए जा सकते हो? मैंने उस की टिप्पणी को नजरअंदाज कर दिया है । ठीक हूँ, बच्चे के बारे में सोच रहा हूँ । बच्चे के जन्म के बाद हम हम मेरी माता पिता की पाँच बॉर्डर चले जाएंगे । फॅमिली से परहेज किया । उसका सामना करना बेहद मुश्किल था । तुम जानते हो मैं भी वही बात सोच रही थी । उस लोगों की उपस्थिति एक बच्चे को पालने में मदद कर दी हैं । एक तरफ तो भरे पिता ब्रांड से संबंधित अपनी कहानियां सुनाएंगी और दूसरी तरफ तुम्हारी पत्रकार, माँ, हस्तियों की कहानियों को स्पेन करेंगे तो उसे अंग्रेजी पढा होगी क्योंकि तुमने कॉलेज में कुछ भी नहीं पढाया था । कम से कम बच्चे को अपने कौशल से मान सकते हो तो ऐसी स्थिति में कैसे मिस कर सकती है । उसके शब्दों ने आंसुओं के बाल तोड दिए जिससे मैं कितने मिनट रुकी हुई था । ऍम देखिए तुम क्यों तो पानी अभी सब कुछ बता दूँ । उसको सही अनुमान लगाया है तो बाकी ही उत्कृष्ट अभिनेता हूँ । फॅार लेती हूँ किसी मैंने कहा उससे गले से लगा लिया और एक बच्चे की तरह रोना शुरू कर दिया । पहले बहुत बताया तो उनको संक्रमित हुई हूँ तो मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकती । मैं उसे गले लगाना चाहता था । पिछले पांच महीनों से रोना चाहता था । हमारी आंखों में आंसू के बावजूद मुझे राहत मिली । यहाँ तक कि उस स्थिति में उसने जवाब दिया हमेशा अपने आप को खुश दिखाने का प्रयास करें तो एक दिन ये आपका वित्त तो बन जाता है ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -28

पढाई विजय स्थिति एक जबरदस्त गति से बदल रही है । ऐसा लगता है कि हमें दस दिनों के भीतर ऑपरेशन करना होगा । डॉक्टर रजा ने मेरे जीवन के सबसे बडे सवाल का जवाब दिया । डॉक्टर को पता था की आस्था को आधिकारिक तौर पर उसकी बीमारी और एक सिजेरियन डिलीवरी के परिणामों के बारे में सूचित किया गया था । महीनों तक आस्था के मामले को संभालने के बाद डॉक्टर रजा और डॉक्टर रचना व्यक्तिगत रूप से मेरे कई निर्णयों में शामिल थे । अस्पताल मुझे बकाया राशि के बारे में सूचित किया । मैंने पहले से ही अपना बैंक खाता खाली कर दिया था लेकिन अस्पतालों किसकी परवाह कहाँ मरीज को आसानी से मिलो को तुमने में सबसे अच्छे हैं । हरतेज डॉक्टर रजा आते और हम प्रगति एवं अगली कार्रवाई पर चर्चा करते हैं । रोगी इस त्रासदी से बचा हुआ था क्योंकि उसने से निजी रूप से पूरा करने पर जोर दिया था । आने वाले डॉक्टरों के बारे में क्या उन्हें अभियान होना चाहिए था से पहले ही उडान भर चुके हैं । कल तक यहाँ होंगे । मुझे न केवल डॉक्टर है बल्कि वैज्ञानिक डाॅ का इलाज घूमने के लिए समर्पित है । वो अच्छा लेकिन क्या आप निश्चिंत हैं की आस्था का सामान्य प्रसव नहीं हो सकता है । विजय मैं चाहता हूँ कि आप बहुत स्पष्ट रूप से समझे की आस्था बहुत अच्छी नहीं है । उसका ॅ स्तर और सीडी फोर काउंट और काम हो रहे हैं । कुछ यकीन है कि उसे एक सिजेरियन ऑपरेशन की आवश्यकता होगी । ईश्वर से प्रार्थना करते हैं और और सर्वश्रेष्ठ के लिए उम्मीद करते हैं जबकि नहीं उम्मीद खो देता था । अंधेरे में कुछ हमेशा प्रकाश के रूप में आता था । इस बार ये संयुक्त राज्य अमेरिका के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के रूप में था । आस्था का वजन कुछ किलो बडा था लेकिन वह कमजोर हो गई थी । उसे सांस लेने में भी मुश्किल हो रही थी । उसके पैरों शरीर फेफडो और दोनों को नुकसान पहुंचना शुरू हो गया था । ऐसा राष्ट्र में कहे तो पूरी तरह से तकलीफ में डूबी हुई थी । मैं अक्सर उसके बगल में बैठता था और उसके पहले जब आता था और अपने हाथों से उसके सिर को सहन आता था । आस्था की कमजोरी चिंता का एक बडा कारण थी । लेकिन ये मेरी एकमात्र समस्या नहीं थी क्योंकि मेरा प्यार उसके जीवन के लिए संघर्ष कर रहा था । इसलिए बाकी की समस्याएं मेरी चिंता का कारण कम थी । अगले ही दिन तीन डॉक्टरों की टीम हमारे घर से पहुंच गई । भारतीय डॉक्टरों सहित उसके मामले में कुल आधा दर्जन लोग काम कर रहे थे । मुझे अभी भी वो दिन बहुत स्पष्ट रूप से याद है जब मैं इलाज कराने के लिए नर्सों का पीछा कर रहा था और अब डॉक्टरों के पूर्व समूह के साथ उसे जिंदा रखने के लिए सबसे अच्छी रणनीति खोजने की कोशिश कर रहा था । डॉक्टर वार्ड में आधे घंटे विधायक उन्होंने उसकी पूरी तरह से जांच की और टूडू सूची में कुछ परीक्षण जोडे । मैं उनके निष्कर्ष और आगे बढने का सबसे अच्छा तरीका जानना चाहता था । हालांकि उन्होंने परीक्षणों के परिणाम आने के बाद बात करने पर छोड दिया । कुछ अगले दिन बनाया गया था डॉक्टर रचना सहित दर्जनभर डॉक्टरों के साथ । वही टीम वहाँ मेरी प्रतीक्षा कर रही थी । ऍम और सभी का बोले ऍम, आपके सभी प्रयासों के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आ रही । अनौपचारिक मत बनो । डॉक्टर में से एक में निर्दोष अमेरिकी उच्चारण में कहा, अच्छा कैसी है, वो क्या अच्छा कर रही है? उसकी प्रशस्ति के बारे में क्या ऍम के आसान हैं? कुछ बहुत सारे जवाब चाहिए थे तो हम कुछ भी गारंटी नहीं दे सकते हैं । सामान्य प्रसव के लिए हमारे पास अभी भी लगभग तस्वीर हैं । जब तक की वजह चलता का संकेत देने वाले किसी भी गंभीर दर्द को विकसित ना करेंगे । अगर वो सीजेरियन प्रसव के लिए जाती है तो उसके बचने की संभावना क्या है? उनसे अपने प्रश्न का उत्तर सुनना बेहद मुश्किल था लेकिन मुझे पूछना था ऑपरेशन करने के बाद ठीक करना बहुत मुश्किल होगा । दूसरे अमेरिकी डॉक्टर ने कहा क्योंकि कमजोर हो गई है और इस चरण में बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल है । लेकिन डॉक्टर के मुताबिक तो बुरा नहीं कर रही है । मैं डॉक्टर को देखकर कहा मैं समझ जाएंगे जिस तरह से उसके परीक्षण के परिणामों में उतार चढाव हो रहा है, हम आपको कुछ भी आश्वस्त नहीं कर सकते हैं । दोनों बाते हो सकती हैं । डॉक्टर मैं बहुत स्पष्ट रूप से बताना चाहता हूँ । मेरी मुख्य जनता आस्था है और उम्मीद करता हूँ की आप से वापस लाएंगे किसी भी तरह । भले ही इसका मतलब है कि हम अपने बच्चे को खो देते हैं । यही एक बात थी जिसपर मैं निश्चित था । उन्होंने सहला, विश्वविजय हमारा मुख्य ध्यान इस मामले पर है और उसमें मांगा बच्चा तो में शामिल हैं । हाल ही में ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक नहीं ऐसी दवा विकसित की है जो गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी है । कुछ मामलों में ये पाया गया है कि ये दवा एक सक्रिय माँ से भी ऍफ बच्चे को देने में बहुत प्रभावी है । तो तो उसी की दवाई देना शुरू करें, उसका क्या है और दवाओं के कुछ साइड इफेक्ट्स हैं । हम उसके शरीर की प्रतिक्रिया जांचने के लिए उसे छोटी खुराक के दे रहे हैं । ये एंटीबायोटिक दवाएं बीमारी से तुम्हारे बच्चे की रक्षा करने में मदद कर सकती हैं और आस्था को भी शक्ति दे सकती हैं । बस ऍम अभी तक वाणिज्यिक नहीं है और बहुत नहीं है । कितनी तो ढाई हजार डॉलर । डॉक्टर ने उत्तर दिया, मैं ठीक रूपांतरण के बारे में निश्चिंत नहीं था लेकिन मैंने अनुमान लगाने के लिए उक्त राशि को भारतीय सत्तर रुपए के साथ थोडा गया । इतनी दूर होता था मैं से प्रबंधित कर सकता था । तीस अभिलाष करें मैंने आशा की कुछ बडों के साथ कहा विजय जी प्रतिदिन की राशि है । क्या कमरे में सन्नाटा छा गया था । मेरे मस्तिष्क, कुछ मानसिक, गन्ना अगले नौ दिनों या ऐसे ही सौ चार सौ कुछ करना होगा । मुझे एक और अठारह लाख रुपए का प्रबंधन करना पडेगा । क्या मैं ऍम वापस आया और आस्था के साथ सरगम को पाया । एक तरफ कोई भी उसे छोडने की हिम्मत नहीं करता तो सरगम उसके स्तर पर बैठी थी और बिना किसी हिचकिचाहट क्या डर के उससे थडोली कर रही थी । आ गई सरगम एक सच्ची तो जब मैं उनके साथ बैठा तो उन्होंने मेरा मजाक उडा है और अपनी शराब पीने की कहानी को सुना है । जैसे कि वो इसके लिए नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य थी । ये बातें कर रही थी और जी से निकालकर हस रही थी । इसलिए मैं अस्पताल के कैफेटेरिया में चला गया और ऑफिस का ऑर्डर दिया । मेरे लिए ये पूरी तरह से जरूरी था । खर्च में अचानक वृद्धि का प्रबंधन असंभव हो गया था । मुझे आश्चर्य हुआ कि मैंने कभी स्वास्थ्य बीमा लेने की परवाह क्यों नहीं की? मुझे इसके लिए खुद से नफरत हुई । मैंने आखिरी कोने की सीट मैं अपनी पीडा में हो गया था और धन की व्यवस्था करने के तरीके के बारे में सोच रहा था । अभी मैंने एक महिला कोई ऑटो से बाहर निकलते देखा । मैं उन्हें बहुत अच्छी तरह से जानता था । उन्होंने रिसेप्शन पर कुछ पूछताछ की और लिफ्ट की तरफ चली गई । ना उनसे मिलने के लिए भागा उन दोनों ने एक साथ में प्रवेश किया । मांग आप यहाँ मैंने चौंककर पूछा, लेकिन मेरी माँ ने कोई जवाब नहीं दिया । लेफ्ट में दो अज्ञात लोगों की उपस्थिति ने हमें बातचीत शुरू करने की इजाजत नहीं दी । हम पांचवीं मंजिल पर पहुंचे । क्या आप यहाँ आस्था से मिलना ही हैं? फॅमिली बाहर पूछा हूँ नहीं, मैं भी बहुत से मिलने आई हूँ । वहाँ जमा घर कैसे हुआ? एक लडका जिसमें कभी भी किसी व्यक्ति के सामने बात करने का साहस नहीं किया था, उसे नौकरी की परवाह किए बिना पांच हजार लोगों के सामने बात करने की हिम्मत की । क्या तुम को नहीं लगता कि एक चमत्कार है तो प्राचार्य ने शिकायत है कुछ लगता है । मैंने उदासीनता से कहा क्या से देख सकती हूँ? हाँ, आप से मिल नहीं सकते । क्यों वो किसी से मिलना नहीं चाहती । जिस पर तरस चिंता मत करो विजय उसे तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं है मुस्कराएंगे तुमको याद है आखिरी बार जब तुमने किसी चीज के लिए मुझे नहीं हूँ मैं समझा नहीं । विजय मैं तुम्हारी माँ और तुमने कभी बचपन से मुझसे प्रतिवाद नहीं किया तो कभी निर्णय लेने वाले नहीं । नहीं । उन्होंने एक अजीब मुस्कान छोडी और कहा बेटर सबकुछ बदल गया है ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -29

उनत्तीस विजय की माँ से मैं विजय की मांग मुझे लगता है की कहानी के मेरे पक्ष कोई बेहतर परिप्रेक्ष्य के लिए साझा करना बेहतर है अन्यथा ये पिता और पुत्र दोनों कुछ भी देखेंगे । मैं विजय के पिता से उनकी सेवा के प्रारंभिक दिनों के दौरान मिली । कोई बहुत सम्मानित पुलिसअधिकारी थे । हम हर पहलू से अलग ग्रुप थे लेकिन उनकी बंगारी ने मुझे आकर्षित किया । कुछ हमेशा पता था कि ये मुश्किल होगा । लेकिन फिर मैंने खुद से पूछा कि कौन सुंदर सही है । हमने अपनी संभावनाएं टटोली और शादी करेंगे । लेकिन जैसे ही समय बीतने लगा विजय एकमात्र संपर्क था जो हमारे रिश्ते को अटूट बनाए हुए था । विजय को प्यार करना और उसकी देखभाल एकमात्र चीज है जो हमारे बीच सामान थी । मैं चाहती थी कि वह इंजीनियर बनेंगे लेकिन उसके पिता चाहते थे कि वो एक आईएएस अधिकारी मुझे अच्छा बच्चा था । उसने कभी भी कोई विरोध नहीं किया । आम तौर पर उसके पिता घर पर नहीं होते थे इसलिए मैं उसके साथ थोडा सख्त रहती थी । विजय मेरी एकमात्र जिम्मेदारी थी तो हमेशा एक माँ का लडका था । उसके पिता कभी कभी घर आते थे लेकिन वो हमेशा उसके लिए उसके लिए करते थे । और कभी भी उन्होंने उसे पढाई करने के लिए मजबूर नहीं किया । मैं धीरे धीरे उसके शब्दकोश में हम ना पड रही है और समय बीतने के साथ विजय अपने पिता के करीब होता चला गया । उन्होंने एक दूसरे के साथ अधिक से अधिक समय बिताना शुरू कर दिया । बहन सबसे कभी भी सहन नहीं थी लेकिन कहीं मुझे ऐसा था की मैं मैं जिम्मेदार थी । मेरी अत्यधिक उम्मीदों ने विजय को खराब कर दिया । कोई आपदा में बदल गया और उसका आत्मविश्वास स्वस्थ हो गया । इससे वो स्वयं को बेकार महसूस करने लगा था । एक दिन मुझे अपने कमरे के अंदर बैठ कर रो रहा था । मुझे रो रहा था क्योंकि वो लगातार पांचवीं बार आई । एस । के लिए लिखित परीक्षा को पास करने में असफल रहा था । मैंने उसकी मदद करने का फैसला लिया । एक पत्रकार होने के नाते कॉलेज के प्राचार्य के साथ मेरे संबंध गई और श्री राम कॉलेज में विजय के लिए एक जगह खोजने का मैंने अनुरोध किया । अंत में विजय को नौकरी मिल गई लेकिन वो उसके लिए नहीं बना था और ये भी आपदा उसके प्राचार्य ने हमेशा शिकायत की की विजय शायद ही कभी कक्षाओं में पढाता है । मैंने पैरवी की और प्रमुख ने उसे कॉलेज में शिक्षणेतर काम दे दिया । हमने उसके लिए पत्नी खोजने का फैसला किया । एक वहाँ के लिए कठिन कार्य इसका बच्चा अपना मूड बन रखता हूँ । वो एक और सबसे ऊपर देखने वाला लडका था । हम एक दर्जन से अधिक लडकियों से मिले लेकिन उनमें से प्रत्येक ने नकार दिया । कोई भी लडकी अपना जीवन एक अंतर्मुखी माँ के लडके के साथ नहीं बताना चाहती थी । मैंने झूठ बोला की विजय चमकता हुआ बुद्धिमान पीसीएस आकांक्षी था । सरकार एक माँ अपने पति या बच्चों के लिए समझौता करने से पहले दो बार कभी नहीं सोचती । अंतर रहा हम आस्था से मिलेंगे । मैं कभी समझ नहीं पाई कि क्यों आस्था जैसी लडकी विजय से शादी करने के लिए सहमत हो गई थी । लेकिन हम पुश्ते, आस्था विजय के लिए एकदम सही मैच नहीं थी । स्पष्ट हूँ तो वो किसी भी तरह से मैच नहीं थी । वो एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत थे । विजय अंतर्मुखी था और आस्था बहिर्मुखी थी । उसके पसंदीदा व्यंजन मांसाहारी थे और वो कभी कभी शराब भी पीछे नहीं । आपको लगता है कि मैं यह सब सहन करूंगी । मैं कर सकती थी लेकिन बाद में ये खुलासा हुआ की आस्था एक अवैध संतान थी । एक सडक का कचरा, जिससे मेरे एकमात्र बेटे का विवाह हुआ नहीं, उस से ही नहीं हो रहा था । मैंने उसे बाहर फेंकने का फैसला कर लिया । एक खूबसूरत दिन घर में फैली ऑमलेट की गंध निर्णय को अमल में लाने के लिए अवसर के रूप में काम कर गई । चालाक किस तरी थी । उसने विजय के दिमाग को खेला । उसने जादुई रूप से रातोरात विजय को सम्मोहित कर लिया । कोई जोरू का गुलाम पति ने बदल गया । विजय ने कभी भी आस्था के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला । उसने अपने कार्यालय के पास किराए के एक अपार्टमेंट में जाने का फैसला किया । अंत में आस्था और विजय हमारे घर से बाहर चले गए । मेरा खुशहाल परिवार टूट गया । मेरे पास घर पर रहने का कोई कारण नहीं बचा और मैंने आउट डोर कार्यक्रमों के लिए असाइनमेंट लेना शुरू कर दिया । मेरा बच्चा मेरा एकमात्र प्यार मालवीय नगर में स्थानांतरित हो गया था । मैंने अपनी आत्मा की गहराई से आस्था से घृणा की, लेकिन जब मैं दक्षिण अफ्रीका से लौटी तो सब कुछ बदल गया था । आस्था अगर पति थी ना उत्साह में थी । लेकिन विडंबना ये थी की आस्था के लिए मिल एशिया ने मुझे बधाई देने की इजाजत नहीं नहीं मैंने विजय के जन्मदिन पर उस से मुलाकात की । विजय वो व्यक्ति नहीं था, वो अलग था । स्पष्ट बोली तो मुझे उसमें इस बदलाव से नफरत हुई । लेकिन शायद इस बात से इनकार नहीं करूंगी कि ये परिवर्तन वृहद खुबसूरत था । मुझे पता हमारा फ्लैट बंधक रखने के लिए कागजात के साथ मेरे पास आए । मैंने पाया की आस्था एचआईवी से पीडित थी । मैंने पता लगता है कि उसे संक्रमण कैसे हुआ लेकिन तकनीकी और चिकित्सा की है । कोई भी कारण का निदान नहीं कर सकता था । मेरा दिल बैठ गया । अपने साथ विजय को भी ले डूबेंगे । विश्वास करना मुश्किल है । लेकिन जब मैंने पाया कि विजय सुरक्षित था तो मुझे राहत मिली । उसके पिता ने मुझे बताया कि कैसे विजय उसकी मूढतापूर्ण इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश कर रहा था । मुझे उस किशन की इच्छा से नफरत थी, लेकिन मुझे खुशी है कि विजय ने स्टैंड लिया और किसी चीज के लिए लडने का फैसला लिया था । विजय के प्राचार्य ने कॉलेज समारोह उसकी घोषणा के बारे में जब मुझे बताया उन्होंने कभी विजय के बारे में कुछ भी सकारात्मक नहीं कहा था । उन्होंने उसकी सराहना की । मेरा दिल मेरे बेटे के लिए आतुर हो गया । मेरी आंखों में आंसू थे । एक व्यक्ति जो किसी लडकी के सामने अपना मूवी नहीं खोल सका, लाइव कैमरे के सामने पांच हजार लोगों के सामने बोलने में कामयाब रहा हूँ । मैंने अवस्था को माफ कर दिया । कृष्णा मुझे कुछ दिया था क्योंकि वो एक माँ कर सकती थी । लडकी ने मेरे बेटे को बदल दिया था । मैंने उसकी सभी गुप्ता इच्छाओं को पूरा करने का प्रयास करने का फैसला किया । मैंने अपनी बहुत से मिलने का फैसला लिया । आकर काम उसने मुझे आत्मविश्वासी पीता दिया था ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -30

वो विजय की माँ से मैं वार्ड में गए और उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया । सरगम आस्था के बगल में बैठी थी । उसने मुझे बधाई दी और मैंने तुरंत उसे अपने घर में पीने की घटना से पहचान लिया । छह । हमने फोन आने का नाटक किया और कमरे से बाहर निकल गई । कुछ लगता है कि वो मेरे साथ शहद नहीं थी । कमरे के भीतर हम दोनों ही रह गए थे । आस्था सुस्त हो गई थी कि विश्वास करना मुश्किल था कि वो वही लडकी थी जो हमेशा चाहती रहती नहीं । उसके चेहरे का आकर्षण खो गया था । मैंने उसे कभी भी पसंद नहीं किया । लेकिन उसे इस तरह देखकर मुझे खुद से लगी हुई हैं । ऍम ऍम मैंने पूछा नहीं ऍम मैंने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा है । उन कैसा महसूस कर रही हूँ? इतने वर्षों से उससे नफरत करने के बाद मैं अपराधबोध से ग्रस्त थी । ऍम मैं खुश हूँ और आपको यहाँ देख कर थोडा आश्चर्यचकित हो । मैं अपनी बेटी से मिलने आॅल मेरा दिल भारी था । उसने नकली मुस्कान की कोशिश नहीं । जब मुस्कराई तो अच्छी लग रही नहीं । मैं देख रही हूँ । सब कुछ बदल गया है । उसने कहा पर चलती दादी बनने जा रही हूँ । पिछले मैंने तुमसे मिलने का फैसला किया । ऐसा लगा कि उसने मेरे शब्दों को अन्यथा लिया गया मैं मुझे किसी भी सहानुभूति की आवश्यकता नहीं है । मैं समझती हूँ कि मेरे दिन गिने चुने रहे गए हैं लेकिन मैं अभी भी खुश हूँ । उसने कहा किसने कहा की मैं सहानुभूति प्रकट करना चाहती हूँ । मैं तो बस मैं धन्यवाद देना चाहती हूँ । मैं कठिन स्थिति में थी । मैं कारण हूँ की आपका बेटा के साथ नहीं रहना । मैं कारण हूँ कि आपको अपना घर बेचना पडा । उसके बिना किसी भावना, मुझे आपकी मदद के लिए आपका आभारी होना चाहिए । आपके और आपके परिवार के प्रति कुछ की जिम्मेदारी है ऍम इस बच्चे हम परिवार हैं । हमारे बीच अतीत में मतभेद थे लेकिन तुम ने ऐसा किया है जो मैं कभी नहीं कर सकते हैं । तुमने मेरे बेटे को जिम्मेदार बना दिया है । वो पहले से ज्यादा आत्मविश्वासी का परिपक् हुआ है । वह एक असहाय व्यक्ति नहीं है । उसमें कुछ भी नहीं कहा । इसीलिए मैंने आगे कहा, अच्छा देर से ही सही जन्मदिन मुबारक हो । मैं तुम्हारे लिए कुछ बुखार लाई । मैंने उसे गुलाबी शौल दिया और उसके लिए लाया गया टेक्निकल चाहिए । ऍफ है तो उसने मजाक में पूछा मैं हंसी हमें एक घंटे तक बात की । मैं देख सकती थी कि उसके लिए बात करना कुछ मुश्किल था लेकिन फिर भी वो एक मिनट भी नहीं रोकना चाहती थी । उसने मुझे पिछले कुछ दिनों के बारे में सब कुछ पता है । मैंने इस बार उसके साथ अलग महसूस किया । कुछ पता था की मैं बच्चे को पालने वाली एक व्यक्ति होंगे कि लंबे समय बाद हुआ की हम लडे नहीं थे और सामान्य व्यस्कों की बात की । मैंने देखभाल करने वाली एक माँ की तरह व्यवहार किया था । इस की बेटी कुछ दिनों में बच्चे को जन्म देने जा रही थी । उसकी अच्छी तरह देखभाल करो । बेटा मैं चलूंगी । मैं अपनी सीट छोड गई । हाँ, मेरा एक अनुरोध है पीस कुछ गलत मत समझिए, बिल्कुल बेटी हो गया है और जानती हैं कि मुझे ठीक नहीं किया जा सकता है और मैं बहुत जल्दी चली जाऊंगी तो इस तरह की बातें मत करो । हाँ, सब को स्वीकार करेंगे । मैं अपने प्रियजनों को आंसू भरी आंखों के साथ खडा नहीं देखना चाहिए । हम सभी लोगों को नहीं चाहती । जिनकी उपस्थिति मुझे कमजोर कर देगी उसकी ना गुलाबी हो गई । उसकी आंखें आंसुओं से भरी हुई थी । तुम एक बहादुर लडकी हाँ, बेटा तो उम्मीद नहीं हो सकती । मैं वहाँ पर सहारे खडी थी । मैं उसकी मदद करने के लिए कुछ भी नहीं कर सकते हैं और केवल झूठ बोल सकती थी । हाँ, मेरे पास ज्यादा समय नहीं है और मैं नहीं चाहती कि किसी को भी आहत होता । देखो ये मुझे कमजोर बनाता है तो क्या मुझे फिर से देखने के लिए बताइएगा? को मजबूत लडकी थी जिसे मैं जानती थी और मैंने हमेशा इसके लिए उसका सम्मान किया था । मैं तुम्हारी इच्छा का सम्मान करेंगे । मैंने अपना बैग उठाया और ऐसा लगा ये मेरा बहु के साथ आखिरी मिलना था । इसे मैंने अभी हो जाता हूँ । मैं कुछ और कहना चाहती थी लेकिन इससे पहले कि मैं कुछ भी कह सकता हूँ । आस्था ने कहा, रहने वाला मुझे उनके जैसा पति देने के लिए । मेरे कारण आपको हुई सभी परेशानियों के लिए मुझे वाकई बहुत फिर है । हम दोनों आंसू बहा रहे थे । मैंने उसकी माफी अनदेखा करने की कोशिश की और से बताने की कोशिश की कि मुझे वास्तव में क्या लगा था । मैंने हमेशा तुम्हारी आलोचना की है और उनको अपमानित किया है तो तो मैं अवैध संतान थी लेकिन अब मुझे ऐसा हो रहा है । कि कोई भी बच्चा अवैध नहीं होता है । इसके लिए जिम्मेदार नहीं है । मैंने गहरी सांस नहीं । मुझे पता है कि ये थोडा अजीब होगा लेकिन मैंने तो भी कभी करले नहीं लगाया । मैं भी करना चाहती हूँ क्या? मैं तो नहीं लगा सकती हूँ । आंखों में आंसू के साथ उसके पैसे लगा । मैंने उसे गले लगा लिया और मेरे पास उसके लिए और कुछ नहीं केवल प्यार था । उन सभी सालों में उसके साथ मेरी सबसे अच्छी यादाश्त थी । मैंने अपनी आस्था अपनी बेटी को अपनी पहली और आखिरी बार गले लगा लिया और मोहन में हुई थी । मुझे खेद है बेटा मैं हूँ । मैं ये बताना चाहती थी कि मैं कितना शर्मिंदा थी और न केवल इतना चाहती थी कि वह खुश रहे । मुझे कभी नहीं पता था की मांग करो ना ऐसा होता है मेरी सौतेली माँ ने । मुझे कभी गाली नहीं लगा है । उसके परवाह नहीं । मेरा क्या मेरी एकमात्र थी लेकिन ऍम मेरे जाने के पहले मुझे होने का एहसास कैसा होता है ये महसूस करने के लिए आप का ऍम बहुत प्यार करती हूँ । मैं तो बहुत प्यार करते हैं । मैंने भरी आंखों से जवाब दिया कमरे में एक निर्दलीय चुप्पी नहीं । मैंने दरवाजे की और पढना शुरू कर दिया । उसके हाथ मिलाया और मुस्कुराने की कोशिश । मैं देख सकती थी कि वो कितना दुखी महसूस कर रही थी लेकिन वो एक भयानक लडाई लग रही थी । मुझे अकेला नहीं है तो बदल गया है । तुम भी बदल गई हो ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -31

ऍम आस्था की हालत को समझने के लिए माने डॉक्टर राजा के साथ चर्चा की थी । वो उसके बारे में चिंतित थी । उन्होंने सब कुछ पूछा । उसकी बीमारी, उसकी हालत और आगे उसके इलाज की लागत के बारे में मुझे पता था । इस कठिन दौर से पार पाने में मेरे पास एक और था । सरगम वहाँ आस्था की देखभाल के लिए थी । इसलिए मैंने माँ को घर छोडने का फैसला किया । मेरे पास कोई पैसा नहीं बचा था और समस्या पर तुरंत ध्यान देना बेहद जरूरी था । हम घर के लिए चले गए । कार्य के अंदर सन्नाटा था । मैं अपनी माँ को अच्छी तरह से जानता था । उनके दिमाग में कुछ चल रहा था और मैंने चुप रहना ठीक समझा । मैं उनके व्यवहार के कारण का अनुमान लगा सकता था । कतार हम घर पहुंचे । बाहर से ताला लगा था । पिताजी कहा है । मैंने वहाँ से पूछा, मेरे पिता एक सेवानिवृत्त व्यक्ति थे और वे उनमें से नहीं थे तो बिना किसी कारण घर से बाहर निकल जाते हैं । उन्होंने एक शब्द नहीं कहा और आपने पाँच से चाबियां बाहर निकाली तो नहीं जानते हैं यह जी बात है । उन्होंने कहा, मैंने सोचा कि वह केवल मुझसे ही कुछ नहीं बताते । हैं । वैसे भी भी कुछ मिनट पर यहाँ होंगे तो उनसे पूछ सकते हूँ । उनके बारे में कोई चर्चा हमेशा इसी तरह समाप्त होती थी । हम चाय पी रहे थे । मुझे लगा की मुझे इस दिन से पहले कोई जानकारी नहीं थी । ये किस तरी अपने जीवन में कितने बलिदान देना है । मैं किस तरी को देख रहा था जो भावनात्मक रूप से हाल ही होने के बावजूद अपनी नौकरी कर रहे हैं । हर दिन अपनी बर्बाद शादी को संभाला । आपने बेकार बेटे का ख्याल किया और फिर भी चुप रहने का फैसला किया । मैं पति के साथ साथ एक बेटा होने के नाते चीजों को और अधिक स्पष्ट रूप से देख रहा था । जब पिताजी पंद्रह मिनट बाद पहुंचे, मेरे विचार बाधित हुए । उनके पास एक बैग था । मैंने उनसे पूछा कहाँ चले गए थे लेकिन उन्होंने मुझे नजर अंदाज कर दिया । आस्था के साथ कौन है? उन्होंने पूछा सरगम मैंने जवाब दिया । मैंने उनसे माँ के अस्पताल जाने और डॉक्टर राजा के साथ उनकी बातचीत के बारे में बताया । अंत में मैंने उसे पैसे की आवश्यकताओं के बारे में बताऊँ । प्रतिदिन अतिरिक्त दो लाख उन्होंने ऍम उनको कुछ जानते है तो शाम थे लेकिन मैं समझ गया कि कुछ गडबड नहीं । मैंने इस घर की लागत का अनुमान खडक लगाया । ये पच्चीस साल पुरानी संपत्ति है और मुझे बीस लाख रुपए से अधिक देने वाला कोई खरीददार नहीं मिल रहा है । मैं तुम को पहले ही दस लाख दिए हैं और एक और दस हैं । इसे तुम जब चाहो ले सकता हूँ । उन्होंने माँ द्वारा दी गई चाहे की जिसके लिए संजय चिकित्सक की लागत का कुल खर्च लगभग पैंतालीस लाख रुपए होगा । इसमें सब कुछ शामिल है । फॅसा यहाँ एक निजी अस्पताल में उपचार बहुत महंगा है कि हम अपने रिश्तेदारों से बात कर सकते हैं । मुझे ऐसा कोई व्यक्ति नहीं समझा जा रहा है जो हमें इतनी बडी राशि दे सकता हूँ । पापा ने कहा तोहरे आभूषण के बारे में क्या? उन्होंने पूछा था? हाँ सही है वो व्यंग्यात्मक हंसी हंसी । अगर आपको याद है, हमारा प्रेम दे रहा था और मुझे आशा है कि आपको उन परिस्थितियों की याद होगी जिनमें हमने शादी है ना खुद के लिए आभूषण के नाम पर कभी कुछ भी नहीं खरीद सकते हैं । मानी जवाब दिया, ये पहली बार था जब उन्होंने मेरे सामने अपनी शादी के बारे में बात नहीं । आखिरी बार उन्होंने कुछ चर्चा की थी । वो भी तब जब दसवीं लडकी ने मेरे विभाग प्रस्ताव को खारिज कर दिया था । ये देखने के लिए आश्चर्यजनक था की कोई समस्या कैसे एक परिवार को एकजुट कर सकती है । विजय क्या तुम किसी को भी जानते हो जो ऋण पाने में हमारी मदद कर सकता है? बाबा ने पूछा, नास्ता के दोस्तों में से डेनियल को जानता हूँ । यही एकमात्र नाम था जो मेरे दिमाग में आया था । विजय बैंक किसी ऐसे व्यक्ति को ऋण नहीं देता है जिसके पास देने के लिए कोई सुरक्षा नहीं है । विकल्प को खारिज करते हुए मैंने कहा तो तुम्हारे कॉलेज के प्राचार्य के बारे में क्या ऍम मांग सकती हूँ? मेरे पिता ने सुझाव दिया, मुझे ऐसा नहीं लगता । मुझे ये भी है कि नहीं है कि क्या वह मुझे नौकरी जारी रखने देंगे । मैंने कहा अचानक मेरी माउंट गई और कहा माफ कीजिए । मुझे एक लेख जमा कर रहा है । कभी कभी मुझे आश्चर्य होता है कि नहीं । हाँ, हमेशा अपने काम को इतना महत्व क्यों देती है? ऐसा मसला सामने होते हुए कि मेरे लिए अजीब तरह था । क्या ये वही व्यक्ति थी तो कुछ घंटे पहले आस्था के लिए हुई थी?

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -32

बत्ती अस्पताल में पांच लाख रुपये जमा किए गए थे और कुछ और लाख की इमरजेंसी के लिए आरक्षित रखा गया था । इस किसने मुझे अगली भारी राशि की व्यवस्था करने के लिए कुछ दिन दिए । कोई अहंकार नहीं था । कोई हिचकिचाहट नहीं और आश्चर्यजनक रूप से कोई डर नहीं था । मैं किसी से भी विनती करने के लिए तैयार था तो पैसे से मेरी मदद कर सकता था । कॉलेज में मेरी घोषणा के बाद मेरे कई सहयोगियों और रिश्तेदारों को आस्था की बीमारी के बारे में पता चला । हालांकि ये अभी भी एचआईवी की स्थिति से अंजाम थे । आस्था ने किसी से मिलने से इंकार कर दिया था । उसके कारण थे और मैंने उसका सम्मान किया । सरगम ही एकमात्र व्यक्ति थी जिसे उससे मिलने की जा सकती है । सरगम हर दिन शाम को अस्पताल आती थी और राहत होने तक रहती थी । एक साथ में अलग लगती थी । मैं था शायद इसलिए क्योंकि मुझे अपने जीवन में कभी कोई सच्चा दोस्त नहीं मिला । एक दोस्त सब के बीच साथ देने के लिए बहुत अच्छा रहता है । कुछ दिनों के बाद आस्था को सांस लेने में समस्या होने लगी । मैंने डॉक्टरों के साथ चर्चा की और उन्होंने ॅ आधार पर ऑक्सीजन मास्क का उपयोग करने का सुझाव दिया । उनके अनुसार ये बडी चिंता नहीं थी । स्थिति स्थिर थी । न तो वो अच्छी हो रही थी और नहीं और खराब हो रही थी । मेरे पास सोचने के लिए बहुत कुछ था । लेकिन आस्था की अंतिम बीमारी ने हर दूसरी समस्या को तुच्छ बना दिया था । मेरे फोन की जोरदार रिंगटोन मुझे वर्तमान दुनिया में वापस लाये । आय पापा आप कैसे हैं? अच्छा कैसी है? अब मैंने पूछा इन दिनों जो कोई कॉल करता था, ये आम सवाल था और दोहराने के लिए मेरे पास एक ही जवाब था संघर्ष जारी है और स्थिति नियंत्रण में है । विजय स्कोर किया है । स्कूल मैं समझा नहीं, क्या बात है । याद करो उसकी साथ? इच्छाएं हाँ, मुझे उसके साथ संकेत चाय याद हैं । लेकिन आप पूछ रहे हैं उसकी इच्छाओं के बारे में बिल्कुल चिंतित नहीं था । खर्चों का प्रबंधन कैसे करें? ये मेरे लिए सबसे बडी चुनौती थी । क्या तुमने कॉलेज पत्रिका का नवीनतम प्रकाशन पडा? उनकी आवाज में उत्साह था तो दुर्लभ था? नहीं पापा, मैंने नहीं पडा क्योंकि क्या हुआ । सबसे पहले उस पर एक नजर डालो और याद रखूं । अगर हमारा विश्वास है तो सबको संभव है । उन्होंने रहस्यमय तरीके से कॉल काट दी । एक असामान्य कौन थी सर्वप्रथम? उनकी कभी कुछ पढने की आदत नहीं थी । दूसरे उन्होंने कहाँ से पत्रिका की सदस्यता प्रति प्रबंधित की । तीसरा उसकी सनक इच्छाओं का उस से कैसे संबंध हो सकता है? मुझे ये पता लगाना था । मैंने छः दिनों के बाद अपना गंदा बडा घर खोला । मेरे लिए उस स्थिति में मेरे घर को देखना बहुत भयानक था । केवल एक महिला घर को घर में बदल सकती है । व्यवस्था यहाँ थी । ये पूरी तरह से एक अलग जगह थी । मैंने अखबारों और पत्रिकाओं को जमीन पर उपेक्षित पडे पाया । दो पत्रिकाएं कोरियर वाले लडके ने दरवाजे के नीचे से भी डर सरकारी थी । मैंने दोनों को उठाया । एक नियमित स्वास्थ्य पत्रिका थी और दूसरा कॉलेज का वार्षिक प्रकाशन था । नहीं संभव नहीं है मैं भी खाता हूँ । मैंने अपने कॉलेज पत्रिका को देखना शुरू किया तो मैं सुनने रह गया और ये मेरे लिए अविश्वसनीय था । मेरी कॉलेज पत्रिका के मुखपृष्ठ पर मेरी पत्नी की पूरी तस्वीर थी । वो युवाओं सुन्दर लग रही थी एक पल के लिए । उसके वर्तमान रूप पर मुझे सहानुभूति हुई । उसने अपनी सुंदरता खो दी थी । मेरे मस्तिष्क के अंदर सवालों की झडी थी । कॉलेज में क्यों नहीं अपने हालिया कार्यक्रम की तस्वीर प्रदर्शित की । उन्हें उसकी तस्वीर कैसे मिलेगा? उसकी कहानी खुल्लम खुल्ला बताने की अनुमति किसने दी थी? मेरे कॉलेज में मुझे इस बारे में सूचित क्यों नहीं किया? कई प्राचार्य की कोई चाल थी । पापा को पहले इस बारे में कैसे पता चला? उसके पीछे क्या उद्देश्य हो सकता है? आस्था जब ये जाने की तो कैसे प्रतिक्रिया करेगी? की आस्था पहले ही इस बारे में जानती थी । आस्था की तस्वीर के नीचे बोल्ड फोन्स में बनती थी । इसमें लिखा गया था, एक गर्भवती, एचआईवी पॉजिटिव महिला की सच्ची प्रेरणा दायक और आप खोलने वाली कहानी पेज छह आए नहीं हूँ । मैं एचआईवी रोगी हूँ । मैंने सोचा कि मुझे लोगों को अपनी कहानी बतानी चाहिए । बस कल्पना कीजिए आपके दिमाग में क्या होता है जब आप किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में पूछते हैं जो एचआईवी से संक्रमित है । मैं हर किसी को सामान्यीकृत नहीं कर रही हूँ । लेकिन लोग सोचते हैं कि एड्स रोगी सेक्सवर्कर या अनैतिक व्यक्ति है । कुछ और कहने से पहले या एक राय बनाने से पहले मैं जानती हूँ की आप इसे पढना है । गोवा के एक स्कूल में तेरह अनाथ एड्स से पीडित है । उन छात्रों को निष्कासित कर दिया गया तो अन्य माता पिता उन्हें स्कूल अधिकारियों से शिकायत की थी । माता पिताओं ने स्कूल से अन्य अनाथों को भी निष्कासित करने के लिए कहा । हालांकि वे एचआईवी पॉजिटिव नहीं थे कि सिर्फ यही स्कूल नहीं था जिसने उन्हें बाहर का दरवाजा दिखाया । उनके निष्कासन के बाद इन छात्रों को जवानों से बारह किलोमीटर दूर फुल करना में सेल्सियन पुजारियों द्वारा संचालित बोर्डिंग स्कूल में ले जाया गया । लेकिन छः दिनों के बाद उस स्कूल ने भी अनाथालय से बच्चों को वापस लेने के लिए ये कहते हुए कहा कि वे कुछ माता पिताओं से समस्याओं का सामना कर रहे थे । अंत में उन तेरह छात्रों को उत्तरी गोवा में एक स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया । विभिन्न संगठनों की तीखी आलोचना का सामना करने के बाद स्कूलें अन्य तेईस अनाथों को अपने स्कूल से निष्कासित नहीं करने का फैसला किया । बच्चे छह से पंद्रह साल के बीच है । आपको लगता है ये सभी बच्चे सेक्सवर्कर हैं? क्या हम एक ऐसे समाज में रह रहे हैं जहाँ गांधी जी ने हमें आपसे नफरत करने के लिए सिखाया न की पार्टी से? क्या कोई कह सकता है कि ये बच्चे अनैतिक हैं? दुनिया भर में अनुमान तीन करोड चौंतीस लाख लोग एचआईवी के साथ रह रहे थे । पंद्रह वर्ष के लगभग बीस लाख दस हजार बच्चे एचआईवी के साथ रह रहे थे । जिस दिन मुझे एचआईवी पॉजिटिव मैदान किया गया था, मैंने सोचा कि मुझे कैसे बीमारी मिली । मेरे पति पहले व्यक्ति थे जिन्हें मेरे संक्रमण के बारे में पता चला था । मेरा लीवर संक्रमित हो गया और डॉक्टर ने घर पर एक पूर्णकालिक नर्स रखने का सुझाव दिया । मेरे लिए काम करने के लिए कोई नस तैयार नहीं थी । और भी आश्चर्य की बात ये थी कि कई डॉक्टर मेरा इलाज करने के लिए तैयार नहीं थे । अस्पताल में मैंने पाया कि नर्सों ने मुझे छोडने से इंकार कर दिया । उस जब मेरे आस पास होती हर समय चेहरे पर मुखौटे और दस्तानें पहनती थी तो हमेशा अतिरिक्त सुरक्षा से लैस होती थी । खासकर मेरे कमरे में प्रवेश करती थी । कभी कभी मुझे अस्पृश्य की तरह लगा । पिछले छह महीनों से जो कुछ हमने सामना किया है वो संक्रमित होने से भी बत्तर है । एस को अक्सर किसी और की समस्या के रूप में देखा जाता है । यहाँ तक की ये सामान्य आबादी में चलता है । फिर भी एचआईवी महामारी को भारतीयों द्वारा गलत समझा जाता है । एचआईवी से पीडित लोगों को हिंसक हमलों का सामना करना पडा है । परिवारों, जीवन साथी और समुदायों द्वारा खारिज कर दिया गया है । चिकित्सा उपचार से इंकार कर दिया गया है और यहाँ तक कि कुछ मामलों में तो मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया गया । मैं डॉक्टर नहीं है और मेरे पास किसी को भी कुछ भी सिखाने का कोई अधिकार नहीं है । लेकिन जिस दिन मुझे संक्रमण के बारे में पता चला मैंने अनेक जर्नल्स देखें । आखिरकार मैं एक पीडित हूँ । मेरी नैतिक जिम्मेदारी है कि उन सभी अन्य लोगों को साहस देना बीमारी के खिलाफ अच्छा रहेगा । मानसिक रूप से लड रहे हैं जिसमें उनकी गलती भी नहीं है । ये है एचआईवी के कुछ काम क्या कारण एक संक्रमित माँ से पैदा होना गर्भावस्था, जन्म या स्तनपान के दौरान जाएगी? माँ से बच्चे में जा सकता है एक एचआईवी दूषित सोया धारदार वस्तु का धंसना, फॅमिली से दूसरी तरफ चलाना रक्त उत्पाद या अंग उतर प्रत्यारोपण एचआईवी संक्रमित व्यक्ति द्वारा चलाए गए भोजन को खाना संदूषण तब होता है जब एक मरीज के मुंह से संक्रमित रख जवाने के दौरान भोजन के साथ मिश्रण होता है । एचआईवी वाले व्यक्ति द्वारा काट लिया जाना अगर बच्चा फटी नहीं है तो संक्रमण का कोई खतरा नहीं होता है । फटी हुई त्वचा खाओ या श्रेष् मछलियों और एचआईवी संक्रमित रख दिया संक्रमित रख हमारे शरीर के बीच संपर्क गहरा खुले में चुम्बन अगर एचआईवी वाले व्यक्ति के मुंह में घाव या मसूडों से खून रिस रहा है और रक्त का आदान प्रदान होता है । एचआईवी इनसे नहीं फैलता है । वायु या पानी पी दे मच्छर या खत्म सहित लार, आंसू या पसीना, अनौपचारिक संपर्क, किससे हाथ मिलाना, आलिंगन, व्यंजन, पेय पदार्थों को साझा करना एक एक रोगी दोहरे आघात से गुजरता है । सबसे पहले उन्हें खुद को निर्दोष साबित करना होता है । ये कुछ ऐसा है जो वो अपने जीवनकाल में करने में असमर्थ होते हैं । दूसरा उन्हें बीमारी से लडना होता है । मैं आपको बताती हूँ कि मेरे पति ने मेरे संक्रमण का स्रोत कभी नहीं पूछा । मुझे बिहार करते हैं तो सबसे बेहतरीन उपचार प्रदान करने में असमर्थ थे । लेकिन उन्होंने कोई कसर नहीं छोडी और इसे संभव बना दिया । मैं आपको अपनी कहानी इसलिए नहीं बता रही हूँ कि मुझे सहानुभूति चाहिए । मुझे अपने पति और परिवार से प्राप्त बिहार की वजह से सचमुच सकते को साझा करने का आत्मविश्वास है । इससे कोई फर्क नहीं पडता कि बीमारी कितनी घातक है । फिर याद के पास ऐसे लोग हैं जो आपको बिहार करते हैं । आप में विश्वास करते हैं कि पूरी तरह से लडाई को बदलता है । एक ऐसे समाज की कल्पना करें जहाँ कार्यालयों से एड्स रोगियों को बर्खास्त नहीं किया जाता है । उन्हें किराये के घर से बहार ठीक नहीं दिया जाता है । उन्हें स्कूल या किसी भी सामाजिक समुदाय से खारिज नहीं किया गया । लोगों को उनके गले लगाने के हाथ मिलाने में कोई समस्या नहीं है । डॉक्टर और नर्स उनके इलाज में मदद करने के लिए उत्सुक है । डॉक्टरों का कहना है कि एक स्थिर एड्सरोगी सामान्य व्यक्ति की तरह दस से पंद्रह वर्ष तक जीवित रह सकता है अगर उस की ठीक से देखभाल होती है । प्यार से भरे दस साल के जीवन की तुलना इस दुनिया में किसी भी चीज से नहीं की जा सकती है । यहाँ तक की एक सौ साल का जीवन भी नहीं । हम इलाज ढूंढ कर और अतुलनीय बिहार देकर हर बीमारी को पराजित कर सकते हैं । आज मैं गर्भवती हूँ और मुझे नहीं पता की मेरा बच्चा इस वायरस से प्रभावित होगा या नहीं । पिक होने के नाते मेरा एक विनम्र अनुरोध है । अगर वो एचआईवी मरीज बन जाता या जाती है तो क्या उसे अस्पृश्य के रूप में न माने? मेरा बच्चा बीमारी के लिए जिम्मेदार नहीं होगा । मेरा बच्चा आपकी सहानुभूति नहीं चाहता है । वो केवल आपके बिहार के लायक है, कोई बात नहीं है और मैं पार्टी नहीं हूँ । ऍम होगी सिर्फ एक मरीज है । सुषमा शर्मा द्वारा लिखित और संपादित

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -33

तेंतीस लेख प्रकाशित होने के बाद लोग आस्था से मिलने के लिए लाइन लगा रहे थे । मेरे कई सहयोगी और दोस्त उससे बात करने के लिए उत्सुक थे । कुछ महीने पहले मैं अकेले संघर्ष कर रहा था और अब बहुत से लोग उसका ख्याल रखने के लिए उत्सुक थे । उनमें से कुछ ने वित्तीय सहायता की पेशकश है, लेकिन पैंतालीस लाख रुपए अभी भी बहुत अधिक थे । कुछ दिनों के बाद मुझे लेखा विभाग से कॉल मिली की अस्पताल की मेरी क्रेडिट सीमा समाप्त होने वाली थी । मैं लेखा विभाग में गया और उनसे अनुरोध किया पैसे की व्यवस्था करने के लिए मुझे कुछ अतिरिक्त दिन दे । मुझे एक विस्तार देने के लिए सहमत हो गए । ऍम मेरे लिए एकमात्र उम्मीद की किरण थे । अगली सुबह में उनके राउंड पर आने का उत्सुकता से इंतजार कर रहा था । डॉक्टर की हम आस्था कोई जनरल वार्ड में रख सकते हैं । मैंने पूछा क्यों? क्या हुआ? डॉक्टर आप हमारी स्थिति अच्छी तरह से जानते हैं । हम कंगाल हो गए हैं और प्रत्येक गुजरने वाले दिन के साथ ही महंगा होता जा रहा है । विजय मुझे पता है कि तुम क्या कहने की कोशिश कर रहे हो, लेकिन समझने की कोशिश करो । पत्रिका के लेख के बाद लोग उसी जानने लगे हैं । वो जनरल वार्डों में शहद नहीं रहेगी । यहाँ तक कि मुझे उसके मान ले के बारे में ऑफिस भी आ रही हैं । डॉक्टर रजा ने कहा हो क्या? मैंने पूछा कि हर कोई जानता है कि कोई भी प्रचार अच्छा प्रचार है । उन्होंने वहाँ भरी । उन्होंने आगे कहा, और एक और बात है । उसे जनरल वार्ड में स्थानांतरित करने से तुम को बहुत मदद नहीं मिलेगी क्योंकि मुख्य उपचार की लागत का कारण एंटीबायोटिक हैं तो जारी रहेंगी । पापा हर दूसरे दिन अस्पताल में मुझे देखने आते नहीं, ऍम में बैठते थे और अपनी समस्याओं पर चर्चा करते थे । पैसा अब एक बडा मुद्दा था । शिक्षा पापा अस्पताल है । दूर से ऐसा लगा कि वह पुलिस की वर्दी पहने हुए थे । लेकिन जब वो करीब आए, मुझे एहसास हुआ कि वह रंग थोडा कह रहा था और उसकी टोपी में दो तलवारें बनी हुई थी । उन्होंने काले रंग की एक बैंड लगा रखी थी और रिवॉल्वर का एक खाली केस कमर से लटक रहा था । उनके पहुंॅच था । इस पर ऍम सिक्योरिटी अंक था की हजम करना मुश्किल था लेकिन स्पष्ट था कि वो एक सिक्योरिटी कंपनी में शामिल हो गए थे । मेरी नई वर्दी कैसी है? सारी पीडा के बावजूद मुस्कुराते हुए मेरे पिताजी ने कहा बात अब एक सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम कर रहे हैं । नहीं, मैं सिक्योरिटी का मुखिया हम जानते हो । चालीस लोग मुझे रिपोर्ट करते हैं अपने पुलिस करियर में । कभी भी मैं इतने सारे लोगों का प्रभारी नहीं था । लेकिन देखो मैं बॉस और उन्होंने गर्व भरे चेहरे से कहा । और ये पोशाक मुझ पर जमती है । उनको नहीं लगता थोडा सा युवा देख रहा हूँ । उन्होंने माहौल को हल्का करने की कोशिश की । मेरा हृदय अपराधबोध से भरा था । देख सकता था की मैं बेटे के रूप में कितनी पूरी तरह सफल रहा था और विजय हम जानते हैं । मुझे इंस्पेक्टर से अधिक पैसा मिलता है । लेकिन अब अब मैंने कुछ कहने की कोशिश की । मैं अपने बेटे के साथ एक तरफ चाहे देना चाहता हूँ । उन्होंने मेरी आपत्ति को अनदेखा करते हुए कहा, मैं कैसे दे दिया गया और दो कप चाय ऑर्डर दिया । उन्होंने कहा, मुझे तुम जानते हैं । कल कुछ अनूठा हुआ । हमारी माने मुझसे माफी मांगी । पास में माने आपसे खेद व्यक्त किया । मैं लगभग हस्तियां था तो मेरी माँ के लिए माफी मांगना बहुत दुर्लभ था । आधी रात को उन्होंने मुझे उठाया और कहा वो कुछ कहना चाहती हैं । उन्होंने कहा कि उन्हें मेरे साथ तुम्हारे और अच्छा के साथ होने वाले सभी झगडों के लिए खेद है । मैं देख सकता था कि वो उस पल में खुश व्यक्ति थे । हमारे पूरे जीवन में हम बेकार चीजों के बीच भागते रहे और जीवन की खुशी से वंचित रहे । मेरे पिता ने कहा, पापा, हम समस्या से एक साथ लडेंगे । मैंने अगले चौबीस घंटों में धन की व्यवस्था करने के हरसंभव विकल्प की खोज की । ऍम रहा और दिन समाप्त होते मैंने कोशिश छोड दी थी । मैंने हर उस व्यक्ति को मदद के लिए कॉल किया जिसको मैं जानता था । लेकिन कोई भी मेरी मदद करने के लिए तैयार या फिर इतना समृद्ध नहीं था । मैंने कर्ज देने वाले महाजनों और बैंकों को कुछ कॉल किए लेकिन हर किसी ने एक सहायक प्रोफेसर को ऋण जारी करने से इंकार कर दिया । मैंने सीधे रोगी के साथ इस मामले पर चर्चा करने का फैसला किया । ना उसके बैठ के किनारे पर बैठ गया ऍम मैं तुम से कुछ बात करना चाहता हूँ । मैंने कहा क्या मुझे बताओ? उसने यही पूछा । मुझे लगता है कि अस्पताल तुम्हारा उपचार करने लायक पर्याप्त नहीं है । अच्छा मुझे एम्स में किसी से परामर्श लेना चाहिए । उनके पास देश के शीर्ष चिकित्सक है । उनका कहती हूँ, मैंने उसे वास्ते कारण छुपाते हुए कहा, मुझे भलीभांति समझ गई थी कि मैं उसे मूर्ति बना रहा था । अगर आपको लगता है कि ये मेरे लिए सबसे अच्छा होगा तो मुझे यकीन है कि ये होगा । लेकिन विजय मुझे कुछ हाँ प्यास मुद्दा पैसा है नहीं, ऐसा नहीं है ये है । मैंने कुछ और कहने की कोशिश की लेकिन कुछ भी नहीं बोलेगा । विजय नहीं मुझे ईमानदारी से बताऊं । उसने दृढता से पूछा हाँ हम सही होगा । विजय मुझे पता है मेरे लिए तुम्हारा प्यार मापा नहीं जा सकता तो मेरे लिए कुछ भी कर हो गई । लेकिन फ्री इस तथ्य को स्वीकार करो कि अगर सब कुछ ठीक रहता है तो भी मेरे लिए ज्यादा समय नहीं बचा है । इसलिए अपने लिए खुद बहुत कठोर मत बनाओ । उसने कहा और मेरे चेहरे को अपने हाथों में समय क्या कभी कभी ऐसा लगा? मैं पीडित था और वो मेरे बात जीवन जी रही होगी । ऐसी मूवी त्वपूर्ण बात मत हो । हमारे परिवार होगा और हम हमेशा के लिए खुशी से रहेंगे । ठीक है जो भी कहोगे वो करेंगे लेकिन तुमको मुझे कुछ ज्यादा करना होगा । उसने कहा हो गया जबकि मैं मर जाऊं । मैं नहीं चाहती कि तो मेरे सामने रोक मेरे प्रस्थान के समय काम को मुस्कुराते हुए खडा रहना होगा । बनेगी वो दिखावटी हो । मैंने उसे आहिस्ता से गले लगा लिया । हम चुप थे कि वह हमारी आंखें आपस में बात कर रही थी । तभी मेरा फोन बजाओ । मैंने कॉल रिसीव की अनुसर मैं तुरंत जवाब दिया कॉलेज के प्राचार्य थे ऍम कैसे हो और आस्था कैसी हैं? उन्होंने पूछा ठीक है सर हम कहाँ हूँ कदम से मिलना चाहता हूँ । सर मैं अस्पताल में है नहीं, कार्यालय नहीं आ सकता है क्या बात है । मैंने पूछा और आश्चर्य से सोचने लगा कि मेरे प्राचार्य मुझे क्यों मिलना चाहते थे? विजय मैं अस्पताल के रिसेप्शन से फोन कर रहा हूँ । घर में अब ठीक है । आप वही रुकिए । मैं एक मिनट में आता हूँ । मैंने कहा ऍम पूछा की जब प्राचार्य से मिलना चाहती है नहीं चाहती थी मैंने सिर्फ खिलाया और हमने से बढा निकल गया । मेरे मस्तिष्क में आशंकाओं की बाढ आ गयी थी । प्रचारी हमको आए हैं क्या वहाँ से मिलना है? क्या हूँ मुझे बर्खास्त करने की योजना बना रहे थे । मुझे बर्खास्त करने के लिए नहीं । यहाँ आने की क्या जरूरत है । मेरा मस्तिष्क विचारों से बन बना रहा था । ऍम के पास एक कुर्सी पर बैठे मेरा इंतजार करते हुए देखा । अरे सर मैंने कहा ऍम व्यवस्था को देखने के लिए आया हूँ वो एक नहीं असर तरह से । पत्रिका में स्टोरी आने के बाद आगंतुकों का तांता लग गया । डॉक्टर ने इसके खिलाफ सलाह दी है । मैंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना दिमाग थोडा देंगे । कहा कोई समस्या नहीं मैं समझ सकता हूँ । उन्होंने कहा मुझे मैंने तुम्हें जन्मदिन की बधाई तक नहीं नहीं मेरे पास उसके लिए उपहार है और मैं तुमको उपहार देने के लिए आया हूँ हूँ । वही समझ नहीं आया । मैंने कहा हाँ जन्मदिन का उपहार उन्होंने कहा ये पहली बार था जब मैंने अपनी प्राचार्य कि मानवता के पक्ष को देखा था तो हमेशा अच्छी हुई रहती थी । इससे पता चला कि कोई भी पूरी तरह से बुरा नहीं होता है । ये लोग हम सभी की तरफ से एक छोटा सा उपहार । उन्होंने मेरे हाथ में एक लिफाफा पकडा दिया । मैंने उसे बोला वास्ता शर्मा के नाम पर जारी पचास लाख रुपए का था मैं मैं क्या नहीं लगा? क्या मैं सपना देख रहा था । विजय तुम्हारी माँ मेरी एक अच्छी दोस्त है । मुझे तुम्हारी स्थिति पता है जो अच्छा लेकिन ही राशि प्राचार्य के लिए बहुत बडी है । था की राशि केवल एक प्राचार्य के लिए असंभव है । लेकिन पांच हजार छात्रों के लिए पहुंच हो अपनी टीचर के लिए उनके प्यार के सामने बहुत छोटी है । अच्छा बहुत बहुत धन्यवाद जैसा हुआ कि एक सपना नहीं था । मेरी आंखों में अचानक आंसुओं की बहुत सी आ गई थी । मैंने विजय कुछ भी नहीं किया । जिस दिन तुमने उसके जन्मदिन की घोषणा की थी मुझे तुम्हारी सहायता करने के लिए स्टाफ के अन्य सदस्यों ने दबाव डाला । उनके दवा और तुम्हारी माँ के अनुरोध पर मैंने उनकी स्टोरी प्रकाशित करने का फैसला किया । तो जानते हो व्यवस्था की कहानी प्रकाशित होते ही हर दिन मुझे अपने कार्यालय के सामने नारा लगाने वाले छात्रों का एक समूह मिला । उन सभी का केवल एक ही अनुरोध था रुपया विजय सर की मदद करें । उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई कि वाकई जिसमें कहानी है मैं क्या कहता हूँ । यही कारण है कि ये राशि प्रेम का उपहार है । धन्यवाद सर भी हूँ । बच्चे हुए थे तो मेरी आंखें कह रही थी केवल मैं समझ सकता था कि वो पैसा मेरे लिए क्या था? अच्छा आप ही सब जो मेरे लिए क्या उसके लिए मेरे पास धन्यवाद के अलावा कोई शक नहीं है । मैंने अभिभूत होकर कहा हो जाने के लिए अपनी कुर्सी छोड गए । जिस दिन मैंने तुमसे दो बार किया था उसके लिए जब खेत है मुझे तुम्हारी समस्याओं के बारे में कोई जानकारी नहीं थी । उन्होंने कहा, अगर मैंने कुछ कहने की कोशिश की लेकिन वो निकल चुके थे । मैं तब तक उनकी पीठ को घूमता रहा जब तक कि वो दृष्टि से सोशल नहीं हो गए । प्राचार्य तुम्हारे जन्मदिन का उपहार सौंपने आए थे । तुम जानती हुई मेरे पांच हजार छात्रों की ओर से को बाहर है । उसने एक संदिग्ध अभिव्यक्ति के साथ लिफाफा खोला । नहीं संभव नहीं है, उस पर विश्वास नहीं कर सके । ऍम से पचास लाख रुपए एक असली चर्च है । अपनी ही वह कह देना की तुम दान नहीं चाहती हूँ । जानती हूँ मैं जानती हूँ लेकिन विश्वास करो या नहीं । ये वही है जो हुआ । मैंने कंधा उसकाया पर तुम जानते हो मेरा एक सपना था ये मेरे पास आधा करोड रुपए होंगे । उसको मुस्कराते हुए कहा कितना जीत है । ऍम के बारे में सोचा और बाहर चला गया । मैंने अपने पिताजी को लिखा मेरा स्कूल साथ में थी, चार है हूँ ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -34

चौतीस कई नींद रहित रातों और अंतहीन दिनों के बाद मैंने एक रात छुट्टी कर ली । मैं आराम से था । ऐसा नहीं कि मेरी समस्या हल हो गई थी लेकिन लोगों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने मुझे कुछ शांति दी थी । नरक जैसे हालात से गुजरने के बाद मुझे पता चला कि दुनिया में अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग थे । मुझे अवसर देने के लिए मैंने जीवन को धन्यवाद दिया । मैं इस तरह की गंभीर स्थिति में भी खुश था और एक शांतिपूर्ण मुस्कान मेरे चेहरे पर नहीं । जब आप सबसे खराब स्थिति से गुजरते हैं तो छोटी समस्याएं आपको परेशान करने के लिए बहुत छोटी लगती हैं । लेकिन खुशी और मैं दुश्मन थे । मैं लंबे समय तक कैसे खुश रह सकता हूँ? डॉक्टरों की एक टीम उसकी नियमित जांच के लिए आई थी । आस्था अच्छा महसूस नहीं कर रही थी तो पीढी पड गई थी । उसकी सांस लेने की समस्या प्रकट चुकी थी । उसकी प्रसव पीडा तेजी से बढ रही थी । वो भी और सामान्य तरीके से । डॉक्टरों की टीम को देखकर में कठोर हो गया क्योंकि मुझे नहीं पता था की मैं क्या सुन रहा हूँ । उनके पास उसकी रिपोर्ट और प्रगति की एक मोटी फाइल डॉक्टर बात कर रहे थे और सिर हिला रहे थे लेकिन वो खुश नहीं लग रहे थे । डॉक्टर में से एक में पूछा तो ऐसी व्यवस्था मेरे पैर, छाती और पीठ में कुछ दर्द है । कमजोर और नींद महसूस कर रही है । उसमें बहुत प्रयास के साथ कहा कि सांस लेने में समस्या की वजह से है । आपको ऑक्सीजन मास्क का अधिक बार उपयोग करने की आवश्यकता होगी । आपकी छाती के चारों और तलाक को काम करेगा । कुछ दवाई दे रहे हैं जिससे आपको और अधिक नहीं लाएगी । उस से सहमती में सिर हिलाया । उतना शेष समय सोकर बिताने के लिए संतुष्ट की । जबकि मुझे अनंत मित्रा की जानकारी थी जो कि सब कुछ दिन दूर थी । कुछ नहीं पता था कि क्या करना है या क्या कहना है । डॉक्टर रजा के चेहरे की गंभीरता मुझे मार रही थी । उन्होंने जांच पडताल के बाद मुझे के दिन के भीतर बुलाया । मैंने अनुमान लगाया है कि कोई बुरी खबर थी और सभी पांच डॉक्टरों की उपस्थिति ने मेरी धारणा की पुष्टि की । अगर बडे डॉक्टर मैं घर गया था, बीजेपी है, समझने की कोशिश करूँ । डॉक्टर ने कहा, हमने उपलब्ध सर्वोत्तम सुविधाओं और डॉक्टरों के साथ उसकी हरसंभव देखभाल की । उठ गए मुझे यकीन था की ये पहली बार नहीं था जब उसके सामने ऐसी स्थिति आई थी लेकिन उनका खेदजनक चेहरा इस मामले से उनका लगाव बता रहा था । डॉक्टर में किसी भी चीज के लिए तैयार हूँ मुझे आस्था कोई चीज ग्रीन के लिए जाना होगा । डॉक्टर रचना ने कहा, ऑपरेशन के बाद उसके ठीक होने की संभावना क्या है? मैंने सीधे सवाल पूछा जो सबसे ज्यादा मायने रखता था । व्यवस्था की हालत अच्छी नहीं है । उसकी प्रतिरोधक क्षमता कम है और उसका सीडी बोरगांव दिन प्रतिदिन कम हो रहा है । हमें पूरा यकीन है कि ऑपरेशन के बाद उसके शरीर में ठीक होने की पर्याप्त ताकत नहीं है । ऑपरेशन करने के लिए उसे बेहोशी की दवा देंगे । लेकिन में यकीन नहीं है कि क्या उसकी चेतना वापस लौटेगी । ऍम ऑपरेशन के बाद होश आ जाता है । मुझे ऑपरेशन के दौरान उसका बहुत सारा खून निकल जाएगा । ठीक होने और होश में आने के लिए उसका शरीर ताकत की मांग करेगा । ऑपरेशन के दौरान या उसके बाद वो कॉमा में जा सकती है । क्या? यहाँ तक कि ऍम यहाँ कोई संभावना है? मैं कोई फायदा नहीं कह सकता हूँ । मैंने संघर्ष के मेरे कारण खो दिए । मेरी आंखों में आंसू नहीं थे । मैं इसके लिए कुछ हद तक तैयार हो चुका था । मैंने कमरे में मौजूद हर आंख में झांका लेकिन मेरे लिए कोई उम्मीद नहीं थी तो बेहतर मुझे मिल सकता था । वो थी सहानुभूति और मैं उस से बेहद नफरत करता था । धन्यवाद डॉक्टर क्योंकि मैं उन्हें दफा होने के लिए नहीं कह सकता था । इसलिए सबसे अच्छा तरीका था जिसे मैं उन्हें कह सकता था और फिर भी उन्होंने इसका अर्थ लगा लिया । विजय टोमॅटो का अपने स्थान पर बैठा रहा और एक नजर उन पर डाली तो कह रही थी कोई अन्य पूरी खबर । हमने अपने बच्चे के बारे में कुछ नहीं पूछा । आस्था ही एकमात्र चीज थी जिसके मैंने पर भागी नहीं । मुझे पता है कि समझना मुश्किल है लेकिन यही सच है । तब प्रजा मुझे वापस व्यवहार बनाए । उनके टोकने ने मुझे अहसास दिलाया कि मेरे सुनने के लिए एक और बुरी खबर दी । वो मुझे एक बार में बताइए । डॉक्टर भी जिस परेशान था । हम यह भी सुनिश्चित नहीं है की आस्था एक सौ बच्चा देने जा रही है या नहीं की पता लगाने का कोई तरीका नहीं है कि बच्चा एचआईवी संक्रमित है या फिर नहीं । कभी कभी बच्चे में एचआईवी संक्रमण जाने में सालों लगते हैं । बच्चे के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है । ऑपरेशन का भरना है । प्रसव के लिए उसकी देती थी । तीन दिनों के बाद है । लेकिन अगर से जल्दी प्रसव पीडा होती है तो हमें ऑपरेशन तुरंत करना होगा । मैं कमरे से दूर चला जाना चाहता था तो रहने में कामयाब रहा । धन्यवाद और बाकी को समझ गए । मैंने खुद को अस्पताल के हॉस्टल में बंद कर लिया । मैंने सभी टोटियां खोल दी और दहाडे मारकर होने लगा । कुछ लगा जैसे मैं अपनी लडाई हार गया था । मेरी आंखें दबदबा रही थी और नाक भर गई थी । मैं क्रोध और निराशा में उबल रहा था । जब आंसू सूख गए, मैंने अपनी पत्नी का सामना करने का फैसला किया । मौसम के दर्पण ने मुझे उस चेहरे में उसके सामने जाने से इंकार कर दिया । मेरे लाल आके सब कुछ कह देंगे और मैं नहीं चाहता था कि वो जान जाए कि मुझे क्या पता था । मौसम से बाहर आया और आपने भी डर के क्रोध को शांत करने के लिए कुछ और मिनट इंतजार करने लगा । मैंने ग्लास पानी पिया और अपनी प्यारी पत्नी का सामना करने के लिए चला गया । मैंने दरवाजा खोला तो ऑक्सीजन मास्क की मदद से सोच ले रही थी । जैसे ही उसने मुझे देखा अपना ऑक्सीजन मास्क हटा दिया और मुझे मुस्कुराते हुए बधाई दी । अगर सबका शांत करने के बाद आस्था मुस्करा सकती है तो आप कैसे नहीं? मैंने खुद से तब क्या मैंने बनावटी मुस्कान मुस्कुराने की कोशिश की । लेकिन अगर आप के पास एक प्रिय पत्नी है तो कुछ भी छुपाना मुश्किल है । खासकर पीडा यहाँ विजय हमारी आंखें तुम्हारी मुस्कराहट के खिलाफ है । नहीं, मैं ठीक हूँ । बस तेरी आंखों में कुछ निषद बढ गया है । मैंने कहा और एक रोमान के साथ उसे साफ करने का नाटक किया । अरे आस्था मुझे लगता है हमें अपने बच्चे का नाम देना चाहिए । अपराजिता कैसा रहेगा? उसमें तुरंत कहा जैसे कोई सवाल का इंतजार ही कर रही थी । इसका क्या है? अपराजिता का मतलब है एक विजेता वो जो हार नहीं सकता है । मैं मुस्कराया क्या होगा? यदि हमें एक लडका हुआ क्योंकि जल मरने वाली हूँ । यहाँ मूर्खतापूर्ण प्रश्न है । अगर हमें बेटा हुआ तो मैं प्रसव के बाद उसका नाम तय कर होंगे । लेकिन मैं अपराजिता के बारे में निश्चिंत हूँ । मेरे मस्तिष्क में कहा अपराजिता का मतलब एक विजेता है । आस्था एक विजेता के रूप में ही जाएगी । कुछ असामान्य लगा मुझे मुझे नहीं पता था कि क्या ये करना था । लेकिन मैंने उसके साथ जाने का फैसला किया । मैंने खुद को जमा किया और उसकी आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए डॉक्टर हजार से मिलने उनका आखिरी अनुग्रह लेने गया । ऍम मुझे आपके एक अनुग्रह की जरूरत है । मुझे बताओ हम तुम्हारे लिए क्या कर सकते हैं? उन्होंने विनम्रता से कहा, डॉक्टर आपके लिए कुछ भी नहीं अच्छा कर सकता तो वो विनम्र व्यवहार करता है । क्या बनाने जानते हैं उन्हें एक डॉक्टर है ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -35

पैंतीस वो जल्दी ही मरने जा रही हूँ और मुझे नहीं पता था कि मैं कैसे सबकुछ प्रबंधित कर पाऊंगा । मैं अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा था और प्रत्येक गुजरने वाला दिन पिछले वाले दिन से बेहद कठिन था । उसके साथ मैंने जो भी छह बताए थे, मेरी आंखों के सामने चल रहे थे तो खूबसूरत यादें बोला, नहीं जो हमने एक साथ दिखाई नहीं, मैंने रात सोचते हुए हो जा रही हूँ । आज तो हमेशा कैसे हसमुख रहती थी और घर को रहने लायक तो मुझे बता दे दीजिए । किस तरह उसके हर सप्ताहांत नहीं कुछ नया खाना बनाने की कोशिश की । वो कैसे रसोई में खाना पकाने के दौरान नृत्य कर लेती हूँ । कैसे वो आपने बहुत सुंदर जी नहीं नहीं कैसे उसमें मुझे अंडा खाने के लिए मजबूर किया । एक ऐसी खुश लडकी जो घर में जीवन लाई । मैं मध्यरात्रि नोट गया और उसकी और देखा फॅस के साथ हो रही थी । उस से सोता देख मुझे थोडी फॅमिली मैंने नींद की गोली और एक लाश की तरह हो गया । अच्छा ये थी कि मैं तो कभी उतना ही नहीं जाता था । अगली सुबह जब मैं उठा वो हो रही नहीं । डॉक्टर की दवा के लिए आभारी था । केवल मेरे माता पिता और सरगम को सच बता था । ॅ अपनी टीम के साथ नियमित चेकअप के लिए आ गए । समझा नहीं मैं जानना चाहता था कि डॉक्टर रजा कुछ बताते हैं या फिर नहीं । कुछ घंटों के बाद डॉक्टर रजा ने एक दूसरे डॉक्टर के आंखों में देखा और इशारे में सर हिलाया डॉॅ । देखिए उसकी हालत में आश्चर्यजनक सुधार है । फॅमिली की शानदार खबर है । उनकी टीम के डॉक्टर ने जवाब दिया, हाँ और उसके हीमोग्लोबिन में भी सुधार हुआ और सीडी फोर अकाउंट में भी सीडी फोर काउंट पांच सौ प्रति मिलीमीटर से अधिक हैं । फॅमिली मैं मेडिकल बैकग्राउंड से संबंधित नहीं था इसलिए मैं उन चीजों को समझने में सक्षम नहीं था जो कह रहे नहीं । मैं अपने जीवन के प्यार को मुस्कुराते वृद्धि कर पे हम खुश था हूँ । एक जाॅब अपने जीवन में पहली बार देख रहा हूँ हूँ । बसंत दिख रहे थे या कोई अच्छी काॅफी आगे बढेंगे । बाद मैं आप से मिलता हूँ नहीं लगती है कि हमारे इलाज का अच्छी तरह से प्रतिक्रिया दे रही है । पर रात और आज की रिपोर्ट विश्वस्तीय हैं । ये परिणाम इतने अच्छे हैं कि मैं चमत्कार की उम्मीद कर रहा हूँ । ऍफ का मतलब है कि आपसे ठीक कर सकते हैं । मुझे पता था कि ये ठीक होने योगी नहीं था लेकिन थी मुझे लगता है कि वो एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सकती है और बाद में ठीक हो सकती है । मुझे नहीं पता कि उसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकेगा या नहीं । आॅक्शन होगा यहाँ सामान्य प्रसाद उससे पैसे के लिए बहुत कमजोर है । लेकिन इन परिणामों को देखते हुए मुझे यकीन है ऑपरेशन के बाद कोई जटिलता नहीं होगी । विजय तुमको ओ पॉजिटिव रक्त समूह के दो दाताओं की व्यवस्था कर रही होगी । सर्जरी के समय हमें इस की जरूरत पड सकती है । मैंने आस्था को देखा, उसके चेहरे पर मुस्कराहट नहीं बता नहीं सकता कि मैं कितना खुश हूँ । मैंने डॉक्टर को धन्यवाद दिया । ऍम कमरे से चले गए । मैं उन्हें धन्यवाद देने के लिए बाहर आया था । मुझे लोग आशा के साथ हमारे पास आते हैं । कई बार हम रोगियों की मदद करने में विफल रहते हैं । यहाँ तक कि एक भी विफलता हमें तो पहुंचाती है । जी मेरे जीवन में पहली बार हुआ है कि मैंने पीछे झूठ बोलने के बाद इतना ठीक महसूस किया है । उन्होंने गहरी सांस ली । और पहली बार मैंने डॉक्टर रजा की आंखों में आंसू देंगे । मैं थोडी ताजा हवा के लिए बाहर चला गया । शायद कुछ ही कदम चला था । जब मैं परीक्षा कर रहे एक परिचित सुंदर निवेश बैंकर को देखकर हैरान रह गया था तो मैं व्यक्ति को जानता था और से कई कारणों से उसे अपने दिल से नफरत करता था । हूँ सरकार मैं पढती हूँ तब से एक बार मिला लेकिन उसके बारे में सबको चाहता था । मुझे नहीं पता था कि वहाँ जो था उसकी उपस्थिति से मैंने अच्छा महसूस किया । उसके पास गया और कहा हम यहाँ कैसे आॅल

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -36

छत्तीस डेनियल का खता है । इसके पूर्व की ये पति पत्नी की जोडी मुझ पर एक खलनायक कट्टप्पा लगाएंगे । मुझे खुद को पेश करने और कहानी के मेरे हिस्से का वर्णन करने की अनुमति दें । मैं पहली बार पांचवीं कक्षा में आस्था से मिला था तो बहुत पढाकू थी और एक बेहद महत्वाकांक्षी लडकी थी । परीक्षाओं के दौरान वो हमेशा मेरे साथ प्रतिस्पर्धा करती थी लेकिन कभी सफल नहीं हुई तो हमेशा कक्षा की टॉपर बनना चाहती थी लेकिन दूसरे या तीसरे स्थान पर आती थी । मैं एक आधुनिक रूढीवादी परिवार से संबंधित बाहरी दुनिया के लिए आधुनिक और परिवार के लिए रूढिवादी रविवार को चढ जाना मेरे परिवार के लिए एक अनुष्ठान है । आंधी हो या तूफान जाना नहीं रुकेगा । सुबह और शाम की प्रार्थनाएं हमारी दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा है । मेरी माँ एक गृहस्थी मेरे को इंडिया ने बढिया स्तरीय रहन सहन के साथ हमारे लिए एक समृद्ध परिवार के रूप में वर्गीकृत होने के लिए पर्याप्त भुगतान किया । एक लडके को उसके जैसी लडकी के चक्कर में पडने का कोई कारण नहीं है । वो बहुत ही मांग करने वाली प्रेमिका नहीं । आज तक की महंगी खरीदारी और कपडे मुझे परेशान करते थे तो की मुझे उनके लिए भुगतान करना पडता था । उसे खुश करने का एकमात्र तरीका था उसके लिए महंगे उपहार खरीदता । शुरुआत में मैंने किए जाने वाले भुगतान को इस तरह की ये खूबसूरत प्रेमिका के लिए उसका मूल्य मना । आस्था के अच्छे रूप में उसके विवेक को और खराब कर दिया । वो एक मॉर्डल बनना चाहती थी । मेरे अनुसार मॉर्डल बनने का उसका ये सपना मुझ तक था । इस तरह के परिवार की उसकी पृष्ठभूमि थी कि मेरी अजीत आस्था भी आस्था को सलमान खान से प्यार था और उससे शादी करना चाहती थी । इससे मुझे उससे बहुत इच्छा होती थी । मैं हमेशा कामना करता था जिसकी शादी चलती हो जायेगा । सलमान की कथानक विहीन फिल्मों के प्रति सारी घटना के बावजूद हूँ । मेरे पास उन सभी को देखने के अलावा कोई विकल्प नहीं था । पहला देखो, पहला शो आस्था का एक रुखा व्यक्ति का जीवन था । अपने सारे संघर्षों के कारण वो एक दम भी बन गई थी । माफी शब्द का उसके लिए कोई मतलब नहीं था । उसने एक बार अपनी सौतेली माँ से पॉकेट मनी की मांग की थी और इन्कार किए जाने पर वो उनके साथ लडी । उसी दिन खुद से मैंने प्रतिज्ञा की थी कि उसके खर्चे उठाऊंगा । मेरे जैसा एक गरीब व्यक्ति स्कूल के दिनों में उसके प्यार में फस गया था । निश्चित रूप से उसके साथ हर दिन प्यार बढता जा रहा था । मैंने अपने लिए बडा सपना देखा हूँ । मैं अमेरिका से एनडीए करना चाहता था । एनडीए करने के लिए डॉलर में भारी राशि की आवश्यकता का समाचार जानने के समय मैंने महसूस किया कि मेरे पिता की नौकरी छूट गई है । किसी तरह से मैं धन की व्यवस्था करने में कामयाब रहा । जब ड्रीम गाल की पीओ की नौकरी ऍम बैंक में लगी अंततः था । उस ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर कुछ समझदारी दिखाई थी । मेरा वास्तविक संघर्ष संयुक्त राज्य अमेरिका में एक साल पांच शुरू हुआ जब मुझे पता चला कि नहीं माँ को दिल का दौरा पडा है । इसके परिणामस्वरूप एक बाईपास सर्जरी हुई जिसके लिए कुछ लाख रुपए की जरूरत थी । मैंने आस्था से अपने पिता के नाम पर एक व्यक्तिगत ऋण जारी करने का अनुरोध किया । ऍम बैंक में पीओ होने के नाते ये उसके लिए एक मामूली कम था । उसने खुशी से मेरे अनुरोध को स्वीकार कर लिया और मेरे पिता द्वारा हस्ताक्षरित कुछ कागजात लेने के लिए मेरे घर का दौरा किया । का ऍम अनुग्रह के लिए पहले नहीं होता तो मुझे पता नहीं था कि मेरे पिता उससे क्या कहेंगे । ऍम तुम्हारा परिवार बहुत रूढिवादी है । मुझे लगता है कि ये बेहतर है कि हम अपने रिश्ते को भूल जाए । उसने मुझे कॉल की और मेरे घर से लौटने के बाद कहा, मैंने से समझाने की कोशिश की लेकिन महंगी आईएसडी कॉल दरों के कारण फोन पर लम्बे समय तक बात नहीं कर सका । अप्रत्याशित रूप से उसका नंबर अनिश्चितकाल के लिए बंद हो गया था । आस्था के पिता का स्वर्गवास हो चुका था । मैंने निष्कर्ष निकाला कि वह आवश्यक अप्रत्याशित घटना के कारण दुखी होगी । मुझे दैनिक भी नहीं पता था कि वो एक मानसिक रोगी थी । जब मैं दिल्ली वापस आया तो मुझे पता चला के आस्था का विवाह एक समृद्ध प्रोफेसर से हुआ था । दिल क्रीमिका तो वर्षों से मेरी रही । अब मेरी नहीं थी । मेरे पास उसे अपना कहने का कोई अधिकार नहीं था । मैं रोज से पुकार रहा था । मैं चाहता था केवल बदला लेना । अपने पति के बाहों में सोती हुई आस्था का विचार मेरे लिए असहनीय था । मैंने उसे कभी माफ नहीं करने की कसम खाई । मुझे अभी भी वो दिन याद है जब मैंने विजय को अपने घर से लगभग बाहर निकाल दिया था । मुझे उसे एशिया हो गई थी और उस समय बाद मेरी एशिया ओ घना में बदल गयी । मैं काल्पनिक दुनिया में जी रहा था वास्तविकता से तू एक दुनिया । मुझे पता चला कि विजय एक साधारण प्रोफेसर के अलावा कुछ भी नहीं था तो मुझे आश्चर्य हुआ है । अपने दुश्मन को पीडित देखना सबसे सुखद चीजों में से एक होता है । ये सोचकर की आस्था के पास कोई विलासिता नहीं नहीं । घावों को भरने में मुझे मदद नहीं हूँ । मेरा बदला पूरा हुआ था । में हमेशा ये समझने में असफल रहा कि अगर विजय ऐसी आपदा था तो उसने मुझसे शादी करने से इनकार क्यों? क्या क्या ये मेरे धर्म की वजह से था? मैंने पता लगाने की कोशिश की कि जब मेरे घर गई तो मेरे पिता ने वास्तव में क्या कहा हूँ । मेरे पिता ने जवाब नहीं दिया था लेकिन मुझे मेरा जवाब मिल गया । मेरे परिवार में मुझ पर शादी करने के लिए दबाव डाला । मैं कुछ लडकियों से मिला । एक सफल बैंकर जो देखने में अच्छा है । निश्चित रूप से कई बेकार लडकियों के लिए एक प्रलोभन था । मेरे परिवार ने मेरी कई लडकियों से मुलाकात कराई तो मेरी जैसी आजीवन गारंटी चलती नहीं । मुझे पता नहीं क्यों लेकिन मैं उन में से किसी से शादी करने के लिए खुद को शकीन नहीं दिला सका । एक रविवार अकेले बैठा था और सोच रहा था कि मैं जो उनमें से किसी से शादी नहीं करना चाहता हूँ । मेरे मन में जवाब था अभी भी आस्था से प्यार करता था क्या? मैं चाहता था कि कोई उससे बेहतर मिले? वास्तव में अपने दिल की गहराइयों से मैं उसे दिखाना चाहता था कि मैं उससे बेहतर बहुत बेहतर के योग्य हूँ । मुझे से शादी करने का उसका फैसला मेरे लिए उसे जमा करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं था । लेकिन मैं जो समझने में असफल रहा, मुझे की जब उसने मुझसे शादी नहीं करने का फैसला किया तो वो मुझे बता सकती थी । हम दस से ज्यादा वर्षों से एक साथ थे तो भीतर चल रहा एक आंतरिक संघर्ष था । दिल और दिमाग के बीच युद्ध में मेरा दिमाग जीता । आखिरकार मैं एक निवेश बैंकर हूँ । वो मेरी छमा के लायक नहीं थी । अगर वास्तव में माफी मांगना चाहती है तो उसे कम से कम एक बार मुझे कॉल करनी चाहिए थी । आपने पराजित पति को नहीं भेजती । अधिक बेवकूफ उसका पति था । वो अपनी पत्नी के पूर्व प्रेमी से मिलने कैसे चले आया? एक सामान्य इंसान ऐसा नहीं करेगा क्या तो बहुत दूर था की आस्था बहुत खाती थी तो एक दिन में किताबों की दुकान में गया और पत्रिका उठाई जो मैं चाहता था और अचानक एक और पत्रिका के कवर पर नजर पडी । मैंने कवर पर एक परिचित चेहरा देखा वहीं चेहरा जिसने मेरी नहीं उडा देते हैं । मार डालने वाली मुस्कान कवर पर लिखा हुआ था एक गर्भवती, एचआईवी पॉजिटिव, महिला की सच्ची, प्रेरणादायक और खोलने वाली कहानी । प्रश्न सोल है । मैंने कहानी पढना शुरू कर दिया । उस महिला के बारे में भी इसे मैंने किसी भी चीज से ज्यादा नफरत की थी लेकिन तू उसे पढने के बाद मेरी आंखों में आंसू थे, हो नहीं सका है । मुझे ऐसा हुआ कि विजय सही था, वो ठीक नहीं थी । उस पर मुझे ऐसा हुआ कि वो व्यक्ति कितना प्यार करने वाला व्यक्ति था । अगले दिन रविवार था । मैंने चढ जाने और दो स्वीकृति का फैसला किया हूँ । मैंने किसी से अपना बदला लिया । इससे मुझे बहुत नफरत क्या मैंने सही काम किया? दो स्वीकृति शौक से मेरा ये सवाल था हम क्या सोचते हो? क्या काम खुश हूँ? ऍम खुश हूँ । मैंने जवाब दिया, अगर तुम खुश हो तो तुम यहाँ हो । मुझे ऐसा हुआ कि मेरे पास खुद को सही साबित करने के लिए सिमित समय था । मुझे अपने हालत को सही करना था, बाहर गया था क्योंकि मैं वो था । इसने प्रतिशोध लिया है और केवल एक पराजित प्रतिशोध ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -37

ऍम डेनियल का गठन दो । अब मैं आस्था के बारे में सब कुछ जानता था और मुझे उसके लिए वास्तव में खेल हुआ । कहीं गहराई से मेरे दिल में तेजी से पीडा बढ गई । मैं अगले दिन अस्पताल पहुंचा लेकिन उसे देखने के लिए हिम्मत नहीं जुटा सका । फिर से अपने दिल में प्यार का ज्वार महसूस कर सकता था । मेरे लिए कमरे में जाना असंभव था । मैंने विजय को बाहर आते देखा । उसने मुझे पहचाना और मेरी तरफ चलना शुरू कर दिया । ऍम आप किस लिए यहाँ आए हैं? उस नाम से विनम्रता से पूछा ऍम आस्था कैसी है? ठीक है उसकी आंखों में पीडा लेकिन उसने अन्य रहा माफ करो । विजय मुझे अपने व्यवहार के लिए बहुत खेलते हैं । मैं गुस्से में था और नहीं जानता था लेकिन इस वाकी को पूरा करना बेहद मुश्किल था । लेकिन वो व्यक्ति दुख और आशा के महासागर में झूल रहा था । ऍम मैं समझता हूँ विजय ऍम देख सकता हूँ । आस्था किसी को भी देखना नहीं चाहती हूँ । विजय नौ से दस सालों से अधिक समय से जानता हूँ । उससे मिलना मेरे लिए महत्वपूर्ण है । ये कुछ व्यक्तिगत है, इस सहानुभूति प्रकट करने के लिए नहीं है । मुझे कुछ मिनट के लिए कुछ नहीं बोला । यदि दूसरी तरह सोचे तो ये बहुत अजीब था की मैं आस्था से मिलने के लिए किसी की अनुमति मांग रहा था । मुझे अभी भी याद है कि मैंने कभी उसके घर जाने के लिए किसी से नहीं पूछा था । मेरा उसके घर पर कभी स्वागत नहीं किया गया । लेकिन मैंने कभी परवाह नहीं की नहीं हूँ । यजीव था कि मैं अपनी पूर्व प्रेमिका से मिलने उसके पति के साथ जा रहा था । इससे अजीब बात और क्या हो सकती थी । अस्पताल के बाहर स्कूलों की एक दुकान थी । विजय ने कुछ लिली और सूरजमुखी के साथ साथ फूलों का एक छोटा गुलदस्ता खरीदा । टेन इयर्स इसीलिए लोग माँ बनने के लिए उसे बधाई देना हमारे बेटिंग के बारे में उसे कुछ मत बता रहा हूँ और नहीं उसकी बीमारी से संबंधित कुछ भी उससे उल्लेख करना । उसने मुझे समझाया । मैंने सर हिलाया तुम्हारे बारे में क्या मुझे कुछ चीजें निपटानी है? मैं एक घंटे बाद लड्डूमार । मैं विजय की आस्था को देखने के लिए आगे बढ गया । उसकी ओर बढते हर कदम के साथ मेरे भीतर उसके प्रति नहीं नहीं भावनाएं हिलोरे ले रही थी । मैं उसके दरवाजे पर हैं । एक मिनट के लिए रुक गया । मैं उस लडकी को देखने जा रहा था जिसे मैं एक ही समय में सबसे ज्यादा प्यार और सबसे ज्यादा नफरत करता था । मेरे दिल के हर कोने से उसके नफरत के बावजूद उसे मिलने के लिए अजीब उत्साह था । मैं उसे देखने के लिए अभी भी देता था । हम मनुष्य बगुला भगत है । यहाँ तक कि मैं उन भावनाओं को भी समझ सकता हूँ । लेकिन मैं उन का यहां उल्लेख नहीं करना चाहता हूँ । आखिरकार ये विजय की किताब जबरदस्त उलझन में मैंने उसकी कमरे में प्रवेश करना और से बात करने का फैसला किया । मैं उसे ऑक्सीजन मास्क के साथ होते देखा । पता हो एक आंसू मेरे गानों से लडका विश्वास करना बेहद मुश्किल था । ये वही लडकी थी, इतनी सुन्दर थी । वही लडकी थी जिसके लिए मैं हजारों बाढ चुका था । फॅमिली लगाने के लिए बेसब्र था । लेकिन लेकिन मैं किससे कर सकता था हूँ खाया था । मेरी आवाज से मुझे गई । मैंने उसके सुंदर चेहरे की और देखा नहीं नहीं क्या वह सपना देख रही हूँ उसने ऍम तुमको इस तरह देखना बहुत अजीब है । मुझे ऐसा हुआ कि मैं सहानुभूति जताने लायक नहीं । बधाई हो तो मैं बेहतरीन माँ बनने जा रही हो । मैं फूल तुम्हारे लिए लाया हूँ । मैंने जितना संभव था उतनी खुशी से कहा क्या सरगम में तुम को बताया कि मैं अस्पताल में भर्ती हूँ या किसी और? उसने खुद ही अनुमान लगाया । मुझे प्रसन्नता हुई कि जिस लडकी को मैंने प्यार किया था तो थोडा सा भी नहीं बदली थी । उसने मुझसे अपने बिस्तर को सवारी करने के लिए कहा । मुझे ठीक से बात करना चाहती थी । बिल्कुल नहीं बदली हो तो अभी भी सवाल पूछती है और फिर अपने आप उनके जवाब दे देती हूँ । तुम अपनी शादी से खुश हूँ । मैंने चढाते हुए पूछा मैं बहुत खुश हूँ । तुम जानते हो मैं एक बडे व्यक्ति से विवाहित हूँ । मेरे पति एक अमीर आदमी है । वो श्री राम कॉलेज में छोडी है तो बहुत कम आते हैं । बच्चे पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपना काम छोडने के बारे में सोच रही हूँ । हाँ वो वहाँ पे चूडी हैं । कुछ समय के लिए कुछ भी नहीं बोली तो तुम अब एक चीज आदमी ऍम नहीं । मैं वहीं पराजित व्यक्ति हूँ । मैंने जवाब दिया हम कभी पराजित नहीं ऍम । तुम्हारे पिता ने तुमसे शादी नहीं करने के लिए उससे बात की । उनके अपने कारण थे जब मैं तुम्हारे घर पर गई थी तो तुम्हारे पिता ने मुझसे अनुरोध किया था । मैं तब अपने जीवन में संघर्ष कर रही थी । मैं और अधिक संघर्ष करना नहीं चाहती थी । यही वजह है कि मैंने विजय से इतनी जल्दी शादी करने का फैसला किया । मैं अपने मुस्तापुर जीवन संघर्ष को खत्म करना चाहती थी । हम पराजित नहीं हॅाल तो एक अद्भुत इंसान हो । मुझे पता है कि तुम मुझसे कोई बहुत बेहतर पाओगे । ऍम था तुमसे बेहतर लडकी की जो गेहूँ और और ऍम मुझे बहुत खेद है । वो तक की सबसे कठिन कौन थी जो अपने जीवन में मैंने की थी । उसने कहा फिर मत करो । मुझे पता है कि वो तुम्हारे लिए मुश्किल था । अतीत के लिए पर्याप्त है । मुझे अपने नए जीवन के बारे में बताओ । क्या तुम्हारा बैंक में अच्छा वेतन देता है? मुझे पता है कि ये हर महीने कुछ लाख होना चाहिए । अपने आप को देखो अभी भी सवाल पूछना । उनका जवाब देना जारी है । मैं इसका जवाब नहीं दे रहा हूँ । अपने पति के बारे में बताऊँ वो कहाँ है वो वो कॉलेज नहीं बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने गए हैं । वेस्ट प्रवेश सत्र चालू है । कॉलेज प्रबंधन कोटा में हर प्रवेश के लिए पांच लाख कमीशन प्रदान करता है । मेरे प्रति हर साल एक प्रविष्टि लाते हैं क्या होगा ये भी? एक दिन वो पकडे गए, कुछ भी तो नहीं । कई कॉलेजों ने रखना चाहते हैं । उन की हर जगह पूछ है उनमें से किसी से जुड जाएंगे तो वो थोडा सा भी नहीं बदली थी । वही लडकी थी । जिस समय पागलपन की हद तक प्यार करता था । ठीक है मुझे पता है तुम्हारा पति वास्तव में एक अद्भुत आदमी है । कोई शक नहीं है । उन्होंने कैसे जानते हो बिजली एक बार मेरे घर आया था तो तो तुम्हारे घर क्यों गए थे? विजय तुम्हारी और से माफी मांगने आया था । उस ने कहा है कि आज था उससे शादी करने के फैसले को लेकर छमा प्रार्थी है । वो सदमे की स्थिति में भी और उसका मुंह खुला का खुला रह गया । क्या अर्थव्यवस्था जिस दिन मुझे पता चला कि तुमने विजय से शादी कर ली, मैं तुमसे नफरत करने लगा था । हो सकता है अगर मैं उनको देखता तो मुझे धोखा देने के लिए तो मैं मार डालता हूँ । उस दिन से मैं केवल तुम्हें दर्द में देखना चाहता था । जब मैं तुम्हारे प्रोफेसर पति से मिला तो मुझे खुशी हुई कि वह तुम्हारा पति था, मैंने उसे भूल गया । आपदा मना तो इस तरह उन के बारे में बात करने की हिम्मत मत करो । उसमें तीखे स्वर में कहा था तो मुझे तुम्हारी हालत के बारे में पता चला तो मेरा दिल उस पति के प्रति सम्मान से भरा हुआ था जो अपनी पत्नी की तरफ से माफी मांगने के लिए मेरे पास गया था । मेरा गला रुंध गया था । मैंने गिलास पानी दिया और आज आज । मुझे पता है कि माफी मांगने का ये सिर्फ उसका निर्णय था । मुझे खुद पर दया रही है । मैंने कहाँ नहीं था उनको किसी भी चीज के लिए माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है । तो मैं उसकी जैसे व्यक्ति से विवाह किया है कि शायद ही मायने रखता है कि वह प्रोफेसर है या फिर छोटी है । फॅमिली जितना नहीं कमाता होगा लेकिन एक इंसान के रूप में वो एक रतन है ऍम अस था । हमारे स्कूल के दिनों के दौरान तो हमेशा शीर्ष पर होना चाहती थी लेकिन मैंने तुमको हर परीक्षा में हराया । जीवन परीक्षा है तो इस बार तुमने मुझे हराया है । तुम विजेता आस्था हो और हमेशा होगी । मेरे पास पैसे, नौकरी का फ्लैट सब कुछ है लेकिन मैं मैं अभी भी पराजित व्यक्ति हूँ क्योंकि मेरे साथ सबसे अच्छा इंसान नहीं है । हो चुकी थी अश्रुपूरित एक सुंदर गर्भवती माँ को देखना मुश्किल था । मैंने उस बातचीत को समाप्त करने का फैसला किया । बाहर निकलने वाला था लेकिन अचानक मुझे ऐसा हुआ कि ये आखिरी बार होगा जब से देख रहा था मेरे लिए स्वीकार करना मुश्किल था । लेकिन एक अजीब उत्सुकता ने मुझे वापस खींच लिया । मुझे नहीं पता की क्या ऐसा करने की मुझे अनुमति थी । लेकिन मैंने किया एक झपक से मैं उसके करीब गया । उसे काली से लगा लिया । अंदरून हो रहे थे । मैंने कहा बीस माफ कर रहा हूँ इस मुझे माफ कर दूँ ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -38

अडतीस मैं समझ सकता हूँ कि वो अभी भी आस्था से प्यार करता था । मास्टर से मिलने के उसके अनुरोध पर हिचकिचाया था । लेकिन मैं चाहता था उनका मिलना हो । एक उसके जीवन का पहला प्यार था और दूसरा उसकी इच्छा । सूची में डेनियल के नाम का उल्लेख किया गया था । मैं आस्था की इच्छाओं को पूरा करने के लिए कुछ भी करूंगा । पहले ही इसका मतलब उसका उसके पूर्व प्रेमी से मिलना था । उसे उसके साथ छोडने के बाद मैं कमरे से निकला लेकिन दूर नहीं जा चुका । मैंने दरवाजे के सबसे नजदीकी सीट पर कब्जा कर लिया और वार्तालाप को सुनने की कोशिश की । मैंने थोडी सी बातचीत सुनी थी तो बिहार में डूबा एक ओझा पति समझ सकता है । मुझे पता है कि मैं एक स्वार्थी व्यक्ति हूँ लेकिन स्वार्थी व्यक्ति होने में कुछ भी गलत नहीं है और ये आस्था के बारे में कुछ और जानने का मौका हो सकता है । डेनियल कुछ समय बाद कमरे से बाहर आया वैसा ही नहीं दिख रहा था । मैंने आस्था को देखने भीतर जाने से पहले कुछ समय इंतजार किया । मैं उसकी आंखों में आंसू नहीं देखना चाहता था । आस्था लगभग हो रही हैं । मैं उसे परेशान नहीं किया मैंने सीट ली और पास उसे देखने लगा । उसे शांति से सोते देखना संतोषजनक था । मैं सोच रहा था जाने के बाद तो मुझ पर चिल्लाएगी और जवाब मांगेगी की मैं डेनियल से मिलने के लिए क्यों गया था । मेरे दिमाग में सभी प्रकार के विचार चलने लगे थे जब उसने अपनी आंखें होनी मुझे ऐसे देख रहे हो । मैंने पूछा नहीं तो हो रही थी । मैंने सोचा नहीं । मैं लगी हुई थी तो मुझे घूर रहे थे और कुछ सोच रहे थे । वो क्या था? अपने बच्चे और मेरी तरफ से तुम्हारे साथ सुंदर भविष्य के बारे में सोच रहा हूँ । वो मुस्कराई और मुझे गले लगाने के लिए भी बहुत बढा दी ऍम में ले लिया । कुछ पलों में मैंने खुद को उसे तब तक चुंबन लेते पाया जब तक मुझे अपने हाथ पर कुछ गर्म भूतों का एहसास हुआ । उसके आखिर पूरी तरह नाम थी । इससे पहले की मैं उसे सांत्वना देना शुरू करता । उसने मांग की, मैं संगम से मिलना चाहती हूँ । उसने सत्य को जानने के बावजूद डेनियल या उसके आने का जिक्र नहीं किया । मुझे अस्पताल में उनके मिलने के बारे में पता था । एक असमान्य कौन थी लेकिन मैं उससे बहस नहीं करना चाहता था । एक आश्चर्य की बात थी । वो सरगम से इस समय मिलना चाहती थी । लेकिन मैंने कुछ भी नहीं कहा । उसे बुलाया । मुझे उसके आस पास किसी और का होना अच्छा लगा । सरगम एक घंटे में वहाँ भी मैंने उसे स्थिति की अपडेट भी । उसे किसी भी समय ऑपरेशन के लिए बुलाया जा सकता था । सरकार ने से हिलाया । मैं कुछ ताजा हवा के लिए बाहर चला गया । ऍम मॉल पास में ही था और मैंने भीड में कहीं खो जाने का फैसला किया । एक दुकान के बाहर बहुत फिर भारती और मैं पे की शक्ति से चकत् था तो सरकारी शराब की दुकान के बाहर एक सार्वजनिक जगह दिया । महान अमृत के कई दैनिक उपासक बाहर खडे थे । मैं समझने में नाकाम रहा कि वहाँ इतनी बडी भीड क्यों थी? मेरे करीबी अवलोकर ने मुझे जवाब दिया । उम्मीद आधे वहाँ पी भी रहे थे । सरकार ने नियम बनाया लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर शराब की खपत को नियंत्रित करने में नाकाम रहे हैं । इसके विपरीत सरकार वितरण का प्रभार लेकर इसमें शामिल है । भाई पुरुष कर्मचारी था उसकी उपस्थिति व्यस्त तो खुद अमृत के नीचे तरह था । सिग्नेचर की एक बोतल मैंने कहा लम्बा मित्रता ने पूछा, नहीं बंदा मैंने कहा मैं तीन सौ रुपए का भुगतान किया और मालवीय नगर घर चला गया । मैंने केवल एक बार पहले शराब ली थी और मुझे स्वास्थ्य पसंद नहीं आया था । लेकिन आज मुझे हल्का होने के लिए कुछ चाहिए था तो कि ये दर्द था मेरे सिर में, दिल में मेरे जीवन में जी असहनीय हो रहा था । घर पहुंचा और सोफे में घुस गया । मैंने एक अतिरिक्त पढा ड्रिंक लिया और उसमें रेफ्रिजरेटर में आधा जमा हुआ को मिला । रिंग बनाने में मैं एक नौ से किया था । मैं एक बार में ही आधा भी गया । उसका स्वाद बेहद भयानक था । मैंने कुछ घंटों के बाद एक और क्लास खाली कर दिया । मेरे दिमाग में थोडा हिलोरे लेना शुरू कर दिया था । इसके लिए मैंने तीन सौ रुपए खर्च किए थे । शराब भी डर जाते ही मैंने बेहतर महसूस किया । मैं आश्चर्यचकित था । पीने से कैसे लोगों का सामना करने की ताकत मिल जाती है । आस्था क्यों हमेशा इसके लिए लडाई रहती थी । नहीं माने तो विरोध किया तो उसने घर पर आपको पीते पाया । इस बीच मैंने एक और बैक समाप्त कर लिया था । मुझे लग रहा था जैसे मैं बगीचे में था । मैंने अपनी आंखे बंद कर ली और अपने मस्तिष्क में विचारों की ट्रेन दौडने की जा सकती है । आगे क्या? आस्था के बाद क्या क्या होगा अगर बच्चे को भी रोक के साथ पॉजिटिव निदान क्या गया? कमरा उसके मुस्कान के साथ कितना जीवन था? मैंने उसकी सनकी इच्छाओं के बारे में सोचा । आस्था एक हीरो से शादी क्यों करना चाहती थी? मैंने दर्पण में देखा क्या मैं हीरो की तरह दिखता हूँ? नहीं ऍफ जीरो का है, हूँ नहीं जीरो को जानता हूँ । मुझे लगता है की अल्कोहल ने अपना काम पूरा करना शुरू कर दिया था । मैंने दर्पण में अपना प्रतिदिन देखा और एक व्यक्ति को देखा चुके युद्ध हूँ तो सुना । बाद में सोफे पर पसर गया । मेरे मोबाइल फोन की रिंगटोन ने संघर्ष के एक नए दिन का स्वागत किया । सरगम थी अनुसंधान । क्या हुआ मुझे मुझे जाना है । कुछ महत्वपूर्ण काम आ गया है उनको । यहां पहुंचने में कितना समय लगेगा । तुम जा सकते हो अगर मैं दस मिनट में वहाँ पहुंचाऊंगा । मैंने कॉल काटी और जल्दबाजी में कपडे पहने, पता मु में माउथफ्रेशनर डाला और एक डीओडरेंट में खुद को भी रो दिया । जब अस्पताल के लिए निकलने ही वाला था मेरी नजर बोतल पर पडे तो बोतल जैसे मुझे वहाँ छोड कर नहीं जाने के लिए कह रही थी और तो और उसकी पसंदीदा भी थी । मैंने उस आधा भरी बोतल को पैदा किया और अपने दिमाग का शुक्रिया अदा किया । वो अभी भी पूरी तरह से काम कर रहा था । मैंने विकास स्टार्ट की और अस्पताल की और बढ गया । जब तक मैं वहां पहुंचा तब तक सरगम जा चुकी थी तो मैं आस्था के कमरे में पहुंचा तो वो मुझे दर्द से कराहती मिली । अच्छा क्या हुआ? तुम ठीक हो । मुझे लगता है कि समय आ चुका है । मैंने सिर हिलाया, कुछ नहीं हो रहा था । मुझे नहीं पता था कि उसके बाद पर प्रतिक्रिया कैसे करूँ । लेकिन लेकिन इसमें एक और सवाल पूछा क्या तुम नशे में हो? हाँ मैंने कुछ उस क्या लेने की कोशिश की? उसके साथ भयानक है, कैसे पसंद करती हो? अचानक दर्द बढने से मेरी बात अधूरी रह गई थी । पीछे डॉक्टर का भी बडा हो । डॉक्टर को बुलाने भागा एक जूनियर डॉक्टर शिव पडता था । उसने आस्था की जांच की । उस ने हमें बताया कि एक घंटे के भीतर ऑपरेशन करना जरूरी होगा । कुछ चिकित्सा प्रक्रियाओं को क्रियान्वित करने के बाद वो कमरे से चला गया । एक नाॅट के साथ आई और कहा, किशन को ये पहनना है । ठीक है मैंने से मिला हूँ । दस मिनट के बाद नर्स बाहर आई और मुझे बताया की आस्था को कुछ भी खाने की इजाजत नहीं थी । उसने ऑपरेशन चैनल इससे महत्वपूर्ण प्रश्न जैसे रख व्यवस्था दी के बारे में पूछा जाने से पहले नर्स ने कहा, आपके पास आधा घंटा है । जब नर्स ने ये कहा तब कुछ कुछ महसूस नहीं कर सकता है । उसका मतलब था कि आधे घंटे के बाद में अपने प्यार अपनी जिंदगी को खुद होगा । सोचते ही मुझे कपकपाने शुरू हो गई तो बाहर चला गया और काफी देर तक वहाँ खडा रहा । मुझे लगा कि मैं कुछ भी नहीं देख सकता था कि मेरी आखिर होने से स्कूल गई थी । मैंने शांत होने की कोशिश की और अपने चेहरे पर वॅार से ठंडे पानी के छींटे मारे । मैं भी आधे घंटे रुकने में बर्बाद नहीं कर सकता था । फिर जीवन के सबसे मूल्यवान तीस मिनट अंदर पन में देखा और जबरदस्ती मुस्कराया । आस्था हरे रंग की ड्रेस में तैयार थी और उसके बालों की लगी हुई थी । मैंने दरवाजा अंदर से बंद कर दिया । जी खतम बच्चे को महसूस कर सकती हो । मैं उसका हाथ पकडते हुए कहा का उधर से हो रही थी । तुम जानती हूँ कुछ ही घंटों में हमारे जीवन की सबसे अच्छी खबर होगी । उसने एक शब्द नहीं कहा और बस मुस्कराई । मैंने स्वचालित उठाने वाले यंत्र की सहायता से उसके बैठ के ऊपर उठाया । वो देख कोन पर बैठी थी, चलो पार्टी करते हैं । मैंने अस्पताल का गिलास मेज पर रखा और अपने बैंक से शराब की बोतल निकाली । मैंने अपने लिए बडा पैक बनाया और उसके लिए आधा गिलास पानी । हम इसकी भी सकते हो । मैं बस पानी पी लूँ, यहाँ हो सब कुछ बदल गया है लेकिन तुम विजय की तरह अभिनय नहीं करोगी । मैंने कहा मैं उसे गिलास में दृष्टि की पांच बूंदे डाल नहीं । मैं अपने जीवन के आखिरी पार्टी के लिए तैयार था । मेरे क्लास में इतनी कम रिस्की क्यों? तुमने केवल पांच होने डाली । उसने धीरे से पूछा मैंने सिर्फ पांच बूढों को जोडा था क्योंकि मेरे स्कोर पांच था और जश्न बनाने का ये एक मात्र कारण था । उनको पीने की अनुमति नहीं है । पांच । मुझे तो तुम्हारे पैट को रन देने के लिए है । कोई और बहस नहीं क्या उसने? पीडा ने कहा नहीं पी दो बन्दे ऑॅफिस के साथ कोई बहस नहीं करना चाहता था और बिना झगडे की दो बूंदे और नहीं । मैं उसके लिए आखिरी बैंक बनाया और कहा तुम विजेता हुआ था? नहीं, हम विजेता हैं । विजेताओं की जाएगा फॅस । मैंने विस्की का क्लास खाली कर दिया । उसने रंगीन तरल के अंतिम पैसे की वजह रखा से करीब आ गया और आॅफिस के गानों पर एक सौ में चुम्बन क्या किसने दरवाजे प्रदर्शन दी । दो मिनट मैं चलाया के साथ मैंने एक नर्स का जवाब चुनाव मैंने उसकी आंखों में गया, वही से झांका । उसके चेहरे पर विजेता वाली मुस्कराहट थी और इसके विपरीत मेरी आंखों में आंसू थे । उन कैसा महसूस कर रही हो? अंततः मुझे आंतरिक शांति मिली है । खुश हूँ लेकिन लेकिन विजय मुझे को आना चाहिए । उसके आंसूओं ने मुझे बताया है कि वह छूट हो रही है । ठीक है मुझे बताओ । ये आखिरी बार है जब हम पी रहे हैं । हम इस दिन के बाद नहीं मिलेंगे । किसी भी तरह अच्छा नहीं है । एक वायदा है । मैं पूछना चाहता था क्यूँ, लेकिन मैंने नहीं पूछा हूँ । मैं उसके और अधिक जीने की जहाँ को समझता था तो जीवन का आनंद लेना चाहती थी लेकिन हम असहाय थे । किसी के साथ सबसे बुरी चीज हो सकती है कि जानना क्या प्रिय व्यक्ति प्रति गुजरनेवाले सेकंड के साथ मार रहा है और आप इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते हैं । आप उसकी नियति नहीं बदल सकते हैं । आप सच नहीं बदल सकते हैं । उसकी प्रसव पीडा असहनीय स्तर तक पड गई थी । मैंने दरवाजा खोलने से पहले शराब की बोतल को जल्दी से छुपा उसके पास गया, उसके माथे को चुना और तो चुपचाप रोने लगा । मैं भावनाओं से भरा हुआ था और हजारों बातें कहना चाहता था लेकिन सिर्फ इतना कहा कि मैं मैं तुमसे प्यार करता हूँ । तुम सबसे बेहतरीन पत्नी हो । उसने अपने हिम्मत को उठाया और कहा मैं भी उनको प्यार करती हूँ और तुम सबसे बेहतरीन पति हो ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -39

हूँ । उनतालीस आॅपरेशन थिएटर में ले जाया गया था । मैं वापस आया और उसके कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया । मेरे दिमाग में काम करना बंद कर दिया और मुझे लगा जैसे मैंने सब कुछ खो दिया था तो अभी इस दुनिया में भेजा था । मुझे ऐसा हुआ । सिग्नेचर की बोतल में अभी भी कुछ बचा हुआ था लेकिन मैंने उसे कटक में से इंकार कर दिया । मैंने पर साहस जुटाया । पता आपको फोन मिला ऍम ऍम बोलना चाहता था । लेकिन एक शब्द निकालना मुश्किल था । क्या हुआ? फॅमिली चली गई है । अब आप की बहुत याद आ रही है । केवल एक ही सब चीज थी जो कॉल काटने से पहले मेरे मुंह से बाहर निकली थी और मेरे शरीर में कपकपी शुरू हो गई । मैंने दरवाजा खोल दिया और स्तर पर गिर गया । जहाँ आस्था लेटी हुई नहीं । आशु मेरे गालों से होकर तेजी से बढ रहे थे । हर गुजरनेवाले सेकंड के साथ शराब मुझ पर खानी होती जा रही थी । आधा मोटर पर्याप्त नहीं थी लेकिन मेरी जैसे व्यक्ति के लिए तो कभी नहीं पीता । पडे आपसे बहुत ज्यादा था । लगातार खाते हुए हैं । बार बार दोहरा रहा था । मैं तुमसे प्यार करता हूँ । राजस्थान में तुमसे प्यार करता हूँ । मुझे नहीं पता कि मैं कब कब तक बेहोशी की हालत में चला गया था । मैं तो कमरे में तीन लोगों को खडा पाया हूँ । क्या सर ठीक है? उत्तर जानने के बावजूद मैंने लगभग वो तो पूछ सवाल पूछ रहा हूँ तो मैं बेटियाँ के पिता बनकर पहने हुए हो । मेरे पिता ने चेहरे पर बिना कोई भावना प्रकट किए कहा तभी केवल आस्था ही मेरे दिमाग में थी । पापा पीछे आस्था हमारे दिलों में हमेशा जिंदा रहेगी । अचानक सच मेरे सामने ही पिछले छह महीने से मैं सच्चाई के बीच भाग रहा था और अंततः फिर जीवन की कडवी सच्चाई वहाँ सामने नहीं मेरे चेहरे को भूल रही थी और मैं इसके लिए तैयार था । मेरे पिता बात करते रहे लेकिन मैं उनके शब्दों से परे था जैसे उनका चेहरा भावनाओं से पडे था । मेरा पूरा जीवन मेरे सामने अतीत के पन्नों में चमक रहा था । मैं तो नहीं रहा था । मैं इतना था कि मैं नहीं जानता कि वह कौनसी स्थिति थी । एक ऐसी स्थिति इसमें आप केंद्रीय आपको संज्ञाशून्य कर देती हैं और यहाँ तक कि ये गंभीर खतरे पर प्रतिक्रिया करना मुश्किल होता है । मेरे पिताजी ने सरगम की तरफ देखा हूँ कि तुम्हारे लिए आस्था का आखिरी पत्र हैं । मुझे कर रहा था क्या उसका पता नहीं देख सकती थी । वो सरगम द्वारा लिखा गया था कब मैं समझ गया कि क्यों सरगम को उस समय बचा नहीं बुलाया गया था जाएगा । मैं तुमसे लाखों बातें कहना चाहती थी लेकिन तुम जानते हो बात करना संभव नहीं था तो मैं आसमान में डूबी हुई नहीं जाना चाहती थी । मैं यहाँ जो लिखने जा रही हूँ मेरा आशय है अपने दिल की गहराइयों से है । एक मरने जा रहा व्यक्ति कभी जूते ही बोलता है । इन डॉक्टरों ने कभी मेरे सामने कुछ भी नहीं बोलता हूँ । पहचाना एक दिन उन्होंने ऐसे व्यवहार किया जैसे उन्होंने सबसे बडी सफलता देखी थी । मैं उनके अभिनय को समझ सकती नहीं तो पता नहीं था । एक दिन डॉक्टर राजा आए थे और मुझे बताया मैं एक बेटी को जन्म देने जा रही हूँ । डॉक्टर ऐसा केवल तभी करता है कि जब गर्भावस्था खतरे में हूँ । इस तरह मुझे एहसास हुआ कि मेरा जीवन खत्म होने जा रहा था । मैंने हमेशा सच्चाई जानी है । जिस दिन तुमने पहली बार कंडोम का इस्तेमाल किया था, मुझे समझे हुआ था कि कुछ ठीक नहीं था । कार्यालय में मेरे आखिरी दिन गार्ड ने मुझे बताया कि तुम कार्यालय गए थे तुम्हारे पिता के घर तुम्हारे लगातार जाने ने आग में घी डाला लेकिन मैंने तुम्हारे पिता से कुछ और झूठ नहीं बोल सके । उन्होंने मुझे बीमारी के बारे में बताया । पूरी रात में सोचती रही थी कि एक घर पति एचआईवी रोगी कैसे कार्य करेगी । मजबूत नहीं पा रही थी कि मैं संक्रमित कैसे हो गई । एक मात्र कारण मैं सोच सकती हूँ कि कुछ साल पहले मुझे रख चढाया गया था जब मुझे गंभीर एलर्जी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था और मुझे आश्चर्य हुआ कि तुमने तभी पता लगाने की कोशिश नहीं । आप ये जानकर कि तुम मुझसे कितना प्यार करते हैं और मुझ पर भरोसा करते हूँ, शांति से जा सकती हूँ । मुझे अपने पूरे जीवन में मैं बदले और रोज में जी रही थी । प्यार और छमा मेरे लिए अपरिचित थे । मेरे पास एक भयानक परिवार था । मेरी भयानक सौतेली माँ और एक कायर पिता हूँ । दोनों ने मुझे कभी भी बहुत प्यार नहीं दिया इसलिए मैंने खुद को प्यार किया । जब भी किसी ने अपनी माँ के शब्दों और प्यार को साझा किया तो उसे टूट पहुंचती थी । जब भी किसी ने अपने खुशहाल परिवार की बात की तो मैं किनारे बैठ जाती और होती मेरी बात सहारे के लिए कोई कंधा नहीं था । इससे मैंने अकेले रोते हुए नहीं जाते बताई हैं । यद्यपि उसने मुझे कमजोर स्थिति में रखा । किसी के साथ रोना हमेशा से घाव भरने वाला होता था । अंत में मुझे डेनियल कर साथ मिला । डेनियल का मेरे जीवन में एक विशेष स्थान था । हालांकि परिवार वाली मेरी जरूरत कभी पूरी नहीं हुई थी । मैंने हमेशा अपने बारे में बहुत ऊंचा सोचा इसलिए मैंने फैसला किया कि एक दिन में सबसे अच्छी माँ बनेंगे । क्या वो क्रोध और बदले का एक विकल्प है? मुझे नहीं हूँ । मैं हमेशा एक माँ के लिए तर्जी मेरे पास है । मेरे पास कुछ है । मैंने अपनी माँ और जमा कर दिया है तो उसका मुझे तुमसे शादी करने के लिए मजबूर किया तो उसे क्षमा कर रही हूँ । मुझे जब मुझे पता चला कि मैं एचआईवी रोगी हूँ तो मैं इस पर विश्वास नहीं कर सके और सोच रही थी कि कैसे संभव था । संक्रमण का स्रोत क्या था? जो भी भी मुझे याद नहीं है । मुझे जानकर आश्चर्य हुआ था कि तुम्हें कभी कारण नहीं पूछा । उन्हें उन्मादी पति हो । मेरी विचित्र इच्छाओं को पूरा करने का फैसला किया तो मैंने तब लिखी थी जब मैंने वोडका के पांच बैठ चढा लिए थे । मैंने इस धरती पर अट्ठाईस साल तक जीवन किया लेकिन पिछले सात महीनों में मैंने जो आनंद लिया वो अच्छा था । जीवन का सबसे बेहतरीन हिस्सा छोटे नाम होते हैं जो आप किसी के साथ मुस्कुराते हुए व्यतीत करते हैं जो आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है । मेरे लिए एक दुर्लभ अहसास था । जिस तरह से हम ने मेरी देखभाल की मुझे ध्यान किया । मैंने हमेशा सोचा था कि मैंने डेनियल के साथ खडा किया है तो उसने मुझे जमा कर दिया । मेरा हर सपना मेरी हर अच्छे पूरी हो गई है । प्रशांत कल यहाँ नहीं रहूंगी लेकिन कोई भी क्रोध है, शिकायतें यहाँ तक कि पछतावा लेकर नहीं जा रही हूँ । मैंने एक विजेता का जीवन क्या है और मैं अपने पति को भी विजेता के रूप में देखना चाहती थी । विजय दिखने में औसत हो सकते हैं, बहुत ही कम बोलते हो लेकिन तो उम्मीद साबित कर दिया है कि कोई भी अच्छा देखने वाला व्यक्ति उतरा सुंदर नहीं हो सकता है । लेकिन सुनहरे दिल वाला व्यक्ति हमेशा सुन्दर होता है । विजय उन को फिर से शादी करनी है और विजेता की तरह जीना है तो उन को न केवल मेरे लिए बल्कि हमारे बच्चे के लिए भी शादी करनी है । मैं नहीं चाहती कि मेरे बच्चे को अपनी माँ की तरह माँ के लिए संघर्ष करना पडेगा । अगर मेरे बच्चे को एचआईवी पॉजिटिव निदान क्या जाता है तो तुम को भी इस वायरस को हराने के लिए वैज्ञानिकों के इलाज करने तक लडना और इंतजार करना होगा । मुझे विश्वास है कि एक दिन मानवता और प्यार की जीत होगी । मुझे तुम्हारे भीतर एक आत्मविश्वास भरी व्यक्ति को देखना वास्तव में एक बहुत बडी राहत है । लेकिन पीस मेरे बाद मस्त था । हमारी बच्ची तुम को इस बारे में याद दिलाना जारी रखेंगे । जब मैं स्कूल में थी तो मुझे सलमान के लिए आ सकती थी । दसवीं कक्षा में मैंने उन्हें पत्र लिखा था और सलमान ने मुझे संदेश के साथ एक फोटो भेजा था । आज था को प्यार सहित सलमान खान समय बीतने के साथ दुनिया में सबसे खूबसूरत देखने वाले लोगों में से एक के रूप में खुद को साबित करने के लिए मेरा चुनाव बढ गया । मुझे विश्वास हो गया कि एक दिन में एक हीरो से शादी करेंगे । तब मैंने तो हमारे जैसे साधारण व्यक्ति से विभाग क्या मुझे नहीं पता था कि तुम एक उन्मादी व्यक्ति थे तो मुझे खुश रखने के लिए किसी भी हद तक जा हो गई । ये वही बात थी जो हीरो फिल्मों में काम करता है तो खलनायक को हर आता है, पाॅप आता है । मेरे पास कराने के लिए कोई नहीं है और मेरे पास बहुत से लोगों का प्यार है । विजय तो एक साधारण व्यक्ति नहीं हो तो मेरे जीवन की सुपर हीरो होऊं लडते रहा हूँ । मेरे प्रिय हीरो हमेशा अपने आप को खुश रखने का प्रयास करूँगा क्योंकि शुरुआत में ये आपकी छवि बन जाता है । धीरे धीरे याद की आदत बन जाता है और एक दिन इतनी आपका हो तो बन जाता है प्यार पास था ।

आख़िरी ख़्वाहिश अध्याय -40

चालीस मैं कुछ दिनों के बाद अपने माता पिता के साथ नोएडा वापस चला गया । जीवन वैसा नहीं था । सब कुछ बदल गया था । केवल एक व्यक्ति ने हमें जीवन बना दिया । अपराजिता मेरी माँ का खयाल रख रही थी । हम अक्सर एक साथ लंच करते थे । भाषा चली गई थी लेकिन मेरे परिवार को एकजुट कर दिया था । आवास था ने अपने हिस्से का काम कर दिया था । अगला अपराजिता थी । मेरे पिता ने अस्थाई सिक्योरिटी की नौकरी से इस्तीफा दे दिया । उन्हें अपनी सेवानिवृत्ति वापस मिल गई । लेकिन आंतरिक शांति हायक एक शाम में सोफे पर बैठा था । विजय उन्होंने मेरे कंधे को छूते हुए कहा तुम एक के बाद क्यों नहीं लगते? मैं किस बारे में लिखूंगा? अपने आस्था के बारे में लिखो? मैंने कभी कविता भी नहीं लिखी है । नहीं किताब कैसे लिख सकता और एक हारने वाले की कहानी कौन पडेगा? हम पराजित नहीं । मुझे उन इच्छाओं का क्या हुआ जो तो पूरा करने की कोशिश कर रहे थे । ज्यादा कुछ नहीं । मुझे खुशी है कि मैंने कोशिश की । मैंने राहत की एक वहाँ भरी कागज निकला और पडा । मेरे मरने से पहले साठ असंभव इच्छाएं, एक अच्छी मामनून ऍम एक हीरो ऍसे शादी करना बहुत शानदार चंदन मेरे खाते में आधा करोड रुपये होना । एक पत्रिका के कवर पेज पर फोटो मुझ पर हाँ दीदी पढाई कर पाते हैं । आपकी बेटी का स्कूल साथ में से पहुंचे । तुम्हारे को छः पांच नहीं मेरी फॅमिली व्यवस्था का आखिरी पत्र लगाएंगे । उन्होंने पंक्ति को घेर और मुझे वापस दे दिया । ऐसे कई बार पडा है । बस इस पंक्ति को पढाओ ही बनती है । तुम मेरे जीवन के हीरो हो तो मैं जी था । मैंने कागज रखा और मेरे मस्तिष्क में उस परिस्थिति का अनुमान लगाया जिसमें उसने पत्र लिखा होगा । मैंने आस्था और सरगम के बीच वार्तालाप का अनुमान लगाना शुरू किया । आस्था ने विशेष रूप से इस पंक्ति का उल्लेख किया था । मेरे पिताजी ने उठाया । विजय उन का सोच रहा हूँ । भाजपा को पता था कि मैं उनकी इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश कर रहा था । आस्था नहीं । अतिरिक्त स्कोर देने के लिए इस पत्र को लिखा है । तो ऐसा कैसे कर सकते हैं? इस पंक्ति को पडेंगे । एक मरने जा रहा व्यक्ति कभी झूठ नहीं बोलता । इसमें इतना खास किया है । तब आस्था कोई समझाने की जरूरत नहीं है कि बहुत से झूठ नहीं बोल रही है । इसका मतलब है कि उसने जान पहुंचकर ये लिखा था वो झूठ बोल रही थी । मेरे पिता मेरे अनुमान पार हो गए थे क्योंकि मैं सही था । एक सही अनुमान हमेशा गलत को बेवकूफ बनाता है । फिर भी अगर उसने जानबूझ कर लिखा था तो उनको चाहिए अपने लिए उसके प्यार को समझा । ये सही था तो विश्वास करना मुश्किल था । वास्तव में दुर्लभ व्यक्तित्व थी । विजय चाहती थी कि तुम विजेता बनना चाहती थी कि तुम उस की इच्छाओं को पूरा करो । पैसे भी तुम अपने बूते पर उस इच्छाओं का पीछा कर रहे थे । लेकिन उसके आखिरी इच्छा पी वी के बारे में क्या तो ये है कि वो भी आखिरी इच्छा के बारे में भी जानती थी । सरगम के पास जाने और उसको कॉल करने के लिए खडा हो गया । मेरे पिता ने मेरा हाथ पकड लिया तो मुझे पता है कि उसकी आखिरी इच्छा क्या अचानक सबकुछ समझ गया । कैसे आस्था को सब के बारे में पता था और नई पीठ के पीछे ये सब किसने रचा था । मुझे तो का महसूस हुआ लेकिन वो पिता था तो ये पिता बस तो आप वो है जिसमें चीजों को सिर्फ किया हूँ कि आपने है । उन्होंने मेरे प्रश्न का नजरअंदाज कर दिया । और कहा अब ऍम के लिए सोचा और अंतर्मन में अपनी आस्था से बात वास्तव में एक विचित्र पत्नी होगी । बजह क्या हुआ? समिति चुका बहुत मैंने पहले कभी भी कुछ नहीं लिखा है । हम तुम्हारा साथ देंगे । विजय जो भी आस्था से प्यार करता है वो कहानी के लिए अपना कथन देगा । कोशिश करते हैं, शायद ही मायने रखता है कि ये बेस्ट सेलर होगी या नहीं । बस मेरी बेटी आगे बढे और साथ में से सात प्राप्त करूँगा । मैं ये प्रथा के प्रयासों पर मुस्कराया । बीच मिलमान मुझे सबसे सुंदर उपहार साथ दिया । तीन दिन की बच्ची दिए हुए था । ये अनुमान लगाने की स्थिति में नहीं था कि वो मेरे लिए या फिर आस्था के जैसी दिखती है । बच्ची आस्था के तैयारी उपहार की तरह लग रही थी तो शांतिपूर्वक हो रही थी और मुझे वैसे ही शांति दे रही थी जो उसके माने भी थी । मैं उसे उसकी आंखों के साथ देखना चाहता था । मैंने अपनी उंगली से उसका चेहरा दबाया । वास्तव में अच्छा होता था । अपनी बच्ची को संभालने के लिए समझे कुछ ज्यादा है । मैंने एक विचित्र मुस्कान पारित की । हम इतना मुश्किल हो रहे हैं । मेरे पिताजी ने कहा मैं सीखने की कोशिश कर रहा हूँ कि खुश कैसे रहना चाहिए । मेरे पिता जी आश्चर्यचकित हुए इस संदर्भ से बाहर था । उसके आखिरी इच्छा के बारे में कुछ सुनना चाहते थे । एक अजीब मुस्कुराहट के साथ मैंने कहा हाँ, चिंता मत कीजिए, मैं नहीं किताब लिखूँ । उसकी आखिरी इच्छा जम्मू पूरी करूंगा हूँ ।

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